दिव्यास्त्र.[The power of five elements] - Page 3 - SexBaba
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दिव्यास्त्र.[The power of five elements]

अपडेट-12



जब नाहा धोकर नीचे गया तो माहौल बिलकुल नार्मल tha.na दादा और न hi माँ ने कुछ ऐसा पूछा जिससे मुझे कुछ डाउट हो. और ये मेरे लिए एक बहुत बड़ी रिलीफ थी.

दादा- क्या हुआ जनाब आज तो सूरज दादा पहले जाग गए आपसे.

मैं- है बही तो. कुछ समाज में hi नहीं आया दादू. आज मेरी नींद hi नहीं खुली.

माँ- कोई बात नहीं. थक गया होगा इसलिए नहीं खुली. और बैसे भी संडे के दिन तुझे आराम से उठना चाहिए लेकिन तू उस दिन भी जल्दी उठ जाता है. जिस बजह से तेरी बॉडी को कम्पलीट रेस्ट सायद नहीं मिला होगा. अब छोड़ ये सब. और आजा नास्ता करले.

मैंने भी यही ठीक समझा और बैठ गया नास्ता करने.

माँ- बैसे रेनू को कॉल किया तूने वो कब आरही है. कह रही थी की एक हफ्ते बाद आरही हु. आज तो एक हफ्ता हो भी गया

मैं- है माँ मैंने उठते hi उसे कॉल किया. तो उसने बताया की वो सायद शाम तक यहाँ पहुंच जाएगी.

माँ- तू उनको लेने चले जाना. बैसे भी आजकल माहौल कुछ ख़राब सा चल रहा है यहाँ का.

मैं- मैंने उन्हें बोल दिया है की मुझे डिटेल्स मश्ग कर दे. और आज बैसे भी सलग तो जा नहीं पाया. तो अब उनको लेने hi चला जाऊँगा आराम से.

दादू- में भी साथ चलूँगा. थोड़ी सेर हो जाएगी.

मैं- है क्यों nahi.sath में चलेंगे दोनों. और उनको सरप्राइज देंगे.

दादा- है मजा आएगा.

उसके बाद दिन भर में बस सोचता hi रहा. न hi मेरे अंतर्मन से कोई आवाज आई न कही और से. जिससे मुझे सब सपने जैसा hi लगने लगा था. और इसको चेक करने का अब एक hi तरीका था. जो में कल सुबह आजमाने वाला था. बाकि देखते है क्या होता है…….

रेनू का मश्ग आचुका था. उसकी फ्लाइट ठीक 5 बजे एयरपोर्ट पैर लैंड करने वाली थी. और हमारे घर से एयरपोर्ट करीब 30 मं. की दुरी पैर था. तो हमने 4:30 पैर निकलने का फैसला किया.

मैंने दादू को भी टाइम बता दिया ताकि वो रेडी रहे ..

जब जाने का टाइम हुआ तो हम दादा पोता निकल गए दोनों को लेने के liye….or हम उस जंगल से होक hi गुजरे. जहा अभी भी शांति छै हुई थी. हम टाइम पैर एयरपोर्ट पहुंच गए .

हमने कार को पार्किंग में लगाया एंड अंदर चले गए जहा पैर हम उनका वेट करने लगे. तभी दूर से वो मुझे दिख गयी तो मैंने दादू को छिपा दिया और उनको कार में जाने को कहा. जिसे सुनकर वो फ़ौरन hi कार की तरफ चले गए. एंड मैंने अपना हाथ दिखाकर उनको मेरे पास बुला लिया.

और अब सच कहु तो दोनों को देखकर ऐसा लग रहा था की जैसे कोई फिल्मस्टार आई हो. क्या बॉडी को मेन्टेन रखा था दोनों ने. और मुझे कहना तो नहीं चाहिए लेकिन इनको देखकर hi लग रहा था की सलग में इनके कितने दीवाने होंगे. में इक्दुम खो सा गया था दोनों की खूबसूरती में. जिसे रेनू ने चुकती बजा कर ढूंढ liya.or में अपनी चेतना से बहार आज्ञा.

मैं- जी आप कोण.

रेनू- क्या छछूंदर नहीं पहचाना.

मैं- देखो ये वर्ड से मुझे केवल एक चुहिया hi बुलाती है. और वो आप नहीं हो. इसलिए अपना रास्ता नाप लो. जल्दी से.

रेनू- देख तू ज्यादा नाटक मत कर. वर्ण यही से मरते हुए घर ले जाउंगी तुझे.

मैं- चल हैट हवा ाँ दे. बड़ी आई मुझे मारने वाली.

सुरभि- लगता है इसने हमें पहचाना नहीं है. देव में सुरभि तेरे मां की लड़की. और ये रेनू है. सच्ची.

मैं- सुरभि दी. आपको तो में एक hi नजर में पहचान गया था. लेकिन इसको नहीं. ये रेनू हो hi नहीं सकती है.

सुरभि- और तुम ऐसा किस आधार पैर कह रहे हो.

मैं- दी याद करो. हमने रेनू को गोलमटोल करके पहुंचाया था. ये तो सुकड़ी हो के आयी है. अब इस हिसाब से तो मां पैर शक होता है की इसको खाने को दिया भी है या नहीं. और ये सवाल में अपने मां से कर नहीं सकता क्युकी वो हमें अपनी जान से ज्यादा प्यार करते है. और इसको भूका तो रहने hi नहीं दिया होगा. बल्कि जबरदस्ती खाना खिलाया होगा. और उस हिसाब से इसको दोगुना होजाना चाहिए था. लेकिन ये तो आधी होकर आयी है. इसलिए मुझे डाउट आरहा है. अब जल्दी से उस चुहिया को बुलाओ. मुझे उससे गले मिलना है.

सुरभि- और मुझसे नहीं मिलेगा.

मैं- दोनों से साथ में मिलूंगा.

सुरभि- अब नाटक बंद कर. क्युकी में अच्छे से समाज गयी हु की तू बस नाटक कर रहा है.

ये कहके दोनों hi मुझसे कास के गले लग गयी. और मैंने भी अपनी पूरी बहे खोल कर उनका स्वागत किया.

रेनू- कैसा है तू.

मैं- एक दम फिट न फाइन. तुम लोग बताओ. बैसे बताने की जरुरत नहीं है. जिस हिसाब का फिगर मेन्टेन रखा है. उस हिसाब से तो लगता है फुल ों ऐश चल रही है दिल्ली में.

रेनू- झापड़ खायेगा बड़ा आया ऐश करवाने बाला. अब चल जल्दी मुझे माँ और दादू से मिलना है.

मैं- है तो चलो.

हम कार तक जा रहे थे तब मैंने एक बार और उसे छेड़ा.

मैं- सुरभि दी. आप बताओ और सच बताना. सलग में क्या करती है ये.

रेनू- तू फिर सुरु होगया. और सुरभि तूने अगर मेरी एक भी बात इसको बताई तो तेरी खैर नहीं समझी.

मैं- मतलब मेरा शक सही है. दाल में कुछ तो कला जरूर है. बैसे अगर मामला सीरियस हो तो मुझे बता सकती हो. माँ और दादू को पटाने की जिम्मेदारी मेरी.

रेनू- शट उप यार. अब कुछ घर के लिए भी बचा ले.

यही सब में हम कार तक पहुंच गए. और जैसे hi दोनों कार के अंदर बैठी. दोनों hi चिल्ला पड़ी. क्युकी अंदर दादू एक हॉरर मास्क लगाकर बैठे थे. जिसे देखकर दोनों में होश उड़ गए. और दोनों चिल्लाती हुई बहार निकल आई. और उनके पीछे हस्ते हुए दादू. और में भी.

और जब उन्होंने दादू को देखा तो दोनों की जान में जान आई.

रेनू- ये जरूर इस छछूंदर का hi आईडिया होगा. सेल में तुझे छोड़ने नहीं वाली.

दादा- वो सब बाद में करलेना. फ़िलहाल मुझसे मिल तो लो.

रेनू- नहीं मिलना है मुझे. कोई ऐसे डरता है क्या

दादा- अरे ये तो कह रहा था की तू करते बगेरा सीख कर आई है. और बड़ी बहादुर बन गयी है. और तेरी इतनी बड़ाई सुनकर मैंने इससे शर्त लगा ली की तुम दोनों नहीं दरोगी मुझसे. लेकिन सब बेकार गया. क्या फायदा हुआ करते सीखने का. खामखा मुझे 2000 का चुना लगवा दिया.

सुरभि- क्या दादू ऐसे में कोई कितना भी बहादुर क्यों न हो दर hi जायेगा न.

दादा- वो सब छोडो अब काम से काम इस बूढ़े से मिल तो लो.

रेनू- दादू बूढ़ा होगा कोई और. अभी तो आप जवान हो.

ये कहके दोनों दादू से गले मिल गयी. और दादू ने दोनों को भर भर कर आसीर्बाद दिए.

उसके बाद हम चारो कार में बैठे और सीधे घर की तरफ निकल गए. रस्ते में दोनों ने देहरादून के हाल के बारे में पूछ लिया की ये न्यूज़ में क्या दिखा रहे थे. तो दादू ने उन्हें सब समझा दिया और ये भी कह दिया की शाम तक घर पहुंच जाओ.

और में मन में सोच रहा था की अगर कल जो हुआ वो सच है तो अब चिंता की कोई बात नहीं है. लेकिन वो सब सपना है तो चिंता की बात है.

यही सब में हम घर पहुंच गए. जहा माँ ने दोनों की आरती उतरी और फिर उन्हें घर में घुसने दिया. और दोनों की खूब बलए ली. और उसके. बाद mom's का एक फेमस डाइलोगे बोलै. जो सभी जानते hi होंगे….

और अगर नहीं जानते तो में बता देतेहु.

माँ- कितनी दुबली हो गयी है तू. ठीक से कहती नहीं थी क्या. देख तो सुख कर कटा हो गयी है. रुको में भैया से बोलूंगी की मेरी लड़कियों को क्या खाना नहीं देते थे.

सुरभि- बुआ ऐसा कुछ नहीं है. दरअशल बहुत म्हणत की है हमने तब जेक अपना बजन घटा पाए है.

माँ- क्या जरुरत है बजन घटने की. इतनी प्यारी लगाती थी दोनों. लेकिन अब खम्भे की तरह दिखलने लगी हो.

ये सब सुनके मुझे हसी आने लगी. और में जोर से है पड़ा.

माँ- तुझे क्या हुआ.

मैं- माँ आप यकीन नहीं करोगी. एयरपोर्ट पैर मैंने सबसे पहले यही कहा था इनदोनो को की सायद मां ने ठीक से खाने को नहीं दिया है. देखो तो कैसे सुख गयी है dono.lekin ये दोनों बही पैर चढ़ गयी मुझपर. आप जरा समझाओ इनको

माँ- सही तो कहा मेरे बचे ने.

रेनू- माँ आप नहीं समझोगी. अगर में मोती दिखती तो सभी सलग में मेरा मजाक उड़ाते. इसलिए हमने डिटिंग करके अपना बजन काम कर लिया.

माँ- बड़ी आई मुझे समझने वाली. भूल मत में तेरी माँ हु. तुझसे ज्यादा दुनिआ देखि है मैंने. खैर अब कर लिया तो कर लिया. अब में यहाँ से दोनों को फिर से गोलमटोल करके hi बापिस भेजूंगी.

मैं- ये हुई न बात.

रेनू- माँ बहुत म्हणत लगी है सब बेकार चली जाएगी. आप प्लस ऐसा न करना.

माँ- में ऐसा नहीं करुँगी बल्कि तुम दोनों खुद ऐसा करोगी. क्युकी जब रोज तुम दोनों का मनपसंद खाना में बनाउंगी तब तुम्हारी डिटिंग सब धरी रह jayegi.or उसकी शुरुवात आज से hi होगी.

ये सुनके दोनों को कुछ समाज नहीं आया. दोनों क्या कहे उन्हें सूझ hi नहीं रहा था.

आखिर थक हार कर रेनू और सुरभि ने है कह दिया.

उसके बाद दोनों अपने अपने कमरे में गयी. और बढ़िया से फ्रेश हुई. और कपडे चेंज करके आगयी नीचे. जहा माँ ने दोनों का मनपसंद खाना बनाया था. जिसे देखकर hi दोनों के मुँह में सैलाब आज्ञा था.

उसके बाद सबने मिलकर खाना खाया. और फिर बही पैर बैठ गए और गप्पो का दौर सुरु हो गया. माँ और दादू ने सबकी जानकारी जब तक ठीक तरह से नहीं ले ली. तब तक दोनों को हिलने भी नहीं दिया. और में तो आराम से खिसक कर अपने कमरे में आज्ञा. क्युकी में बोर होने लगा था. लेकिन जब कमरे में भी टाइम नहीं कटा तो मैंने मोबाइल पैर मूवी लगा ली और देखने लगा. और देखते देखते कब नींद लग गयी पता भी नहीं चला

सुबह में रोज की तरह 4 बजे उठा. फ्रेश हुआ. और गयम में पहुंच गया. लेकिन मैंने सोचा शुरुवात ध्यान से hi की जाये. जिससे सब कन्फर्म हो जाये….

और में बही एक चटाई बिछाकर बैठ गया.

और ॐ का उच्चारण करने लगा मन में. और तिरदये पैर कंसन्ट्रेट करने लगा. और करीब 20 मं. के धयान में hi मुझे एहसास हो गया की जो भी जंगल में हुआ था वो कोई सपना नहीं था. क्युकी मेरी थर्ड ऑय खुल गयी थी. और मेरे अंदर में असीमित ऊर्जा को महसूस कर रहा था. चारो ओरे इतना सुखमयी उजाला था की बहा से जाने का किसी का मन hi नहीं करे.

में पता नहीं कब तक बैसा hi बैठा ध्यान करता रहा. और आखिर कार मेरा ध्यान टूट गया. क्युकी मुझे कुछ आवाज आने लगी थी. और जब मैंने अपनी आँखों को खोल कर देखा तो दोनों चुहिया एक्सरसाइज कर रही थी. और साथ में बाटे भी. और मैंने जब अपनी घडी में टाइम देखा तो 7 बज गए थे. मतलब में 3 घंटो तक ध्यान में बैठा था.

और अब ये जानकार मुझे बहुत खुसी हो रही थी की जंगल का प्रॉब्लम अब सोल्वे हो चूका है. और अब इस सिटी पैर कोई खतरा नहीं है…… और साथ में ये भी की मेरे अंदर कुछ शक्ति तो है………. और इसी सब के साथ एक सवाल भी की ये शक्तिया मेरे अंदर आई कैसे. और रही बात तिरदये की तो मैंने ऐसा सुना है की इसको तो बड़े बड़े ऋषिमुनि नहीं खोल पते है. तो फिर में इसे इतनी आसानी से कैसे कण्ट्रोल कर लेता हु. ये सब बातो ने मुझे घेर लिया था. और अब मुझे इतना पक्का हो गया था की मेरी जिज्ञासा बढ़ने वाली थी इन शक्तियों को लेकर.

देव की ये सोच तो सही hi थी. लेकिन उसका ये मन्ना बिलकुल गलत था की अब इस सिटी पैर कोई और खतरा नहीं है. क्युकी इन पिशाचो को मारने के बाद उसने बहुत hi बड़े बड़े खतरों को बुलावा भेज दिया था.

अब देखना ये था की जब देत्यो को इन सब के बारे में पता चलेगा तब वो क्या करेंगे.



तो बे कॉन्टिनुए…………….
 
अपडेट-13



bahi dusri taraf jo detya dut bankar prithvi per ghum rahe the. Unhe jungle ki ghatna ki jaankari mili. Jo unhone turant hi adhira ko batane ka faisla kiya.

Adhira- ye tum log kya bakwas kar rahe ho. Aisa kaise ho sakta hai.

S1- ye Satya hai maharaj. Hamare Jo dut jungle me reh rahe the. Jinhe aapne us astra ke liye baha per pahuchaya tha. Unki hatya ho gyi hai.

Adhira- kis kis ki hatya Hui hai

D1- maharaj keval 4 ki. Jo the शूल,चाड़ौर,गुंटक और चंड

Ye Charo Bhai the. Jo pishacho ke raajkumar the.

Adhira- lekin ye Charo to maha shaktishali the. Inhe kisne Mara hai.

D1- iske bare hame koi bhi jaankari nahi mil pai hai. Hamne baha pata karne ki kosis ki thi. Lekin baha to logo ko abhi tak ye bhi pata nahi hai ki jungle me hai kya jo logo ko gayab kar raha hai. Or na hi unhe ab is baat ka pata hai ki jungle me jo bhi samasya thi vo ab nahi hai.

Adhira- ye sab kab hua hai.

D1- kal brahm muhurat me.

Adhira- ye kaise sambhav hua hai. Ab iski jaankari to gurudev hi de sakte hai. Or lagta hai jisne unhe mara hai bahi hai in devtao ka raaj. Sayad koi shakti hai. Jiska janm hua ho prithvi per. Devtao ke dwara. Ha ye jarur un devtao ki hi chal hai koi. Mujhe gurudev se jald hi milna hoga.

Ye kehke adhira foran apne raj mahel se bahar chala gya seedha gurudev ke aasram me. Jaha gurudev apne dhayn me baithe hue the.

Adhira ne unhe pranam Kiya

Adhira- hey gurudev aankhe kholiye yaha bahut badi samasya aagyi hai. Jiska Hal aap hi hame Bata sakte hai. Gurudev aankhe kholiye.

Aise hi baar baar nivedan karne per detyaguru shukracharya ne apni aankhe khol li.

Shukracharya- kya hua adhira. Aisi kya samasya aagyi hai jiske liye tumhe yaha tak aana pada.

Adhira- gurudev aapke dhyan ko bhang karne ke liye me mafi mangta hu. Lekin ye mamla hi aisa tha ki ab kya batau aapko.

Shukracharya- bekhof ho kar bolo adhira

Adhira- guruvar lagta hai hame devtao dwara rachit shadyantra ka koi surag mila hai.

Ye sunkar shukracharya turant hi khade ho gye.

Shukracharya- aisa kya bataya hai tumhare dut ne.

Adhira- gurudev hamare kuch guptcharo ki hatya ho gyi hai prithvi per. Jinhe hamne us astra ki khoj me bheja tha.

Shukracharya- kon the vo.

Adhira- gurudev bahi pishacho ke 4 raajkumar. Jinhe aapne kuch vishes shaktiya bhi pradan ki thi.

Shukracharya- ha hame gyat hai. Lekin unki hatya kaise hui.

Adhira- is bare me duto ko koi jaankari nahi mili hai. Or na hi un charo ki deh hame mili hai.

Shukracharya- un charo ki deh milegi bhi nahi. Unko brahma ka vardan tha ki unki mrityu is vanaspati ke kado se hi hogi. Or Marne ke baad vo isi me samahit ho jayenge.

Adhira- mujhe lagata hai kisi shakti ka janm hua hai sayad prithvi per. Jisne un charo ko mara ho. Kyuki aam insan ke bas ki baat ye hai nahi. Or koi bhi devta prithvi per nahi gye hai. Iski jaankari hamare dusre guptchar ne di hai.

Shukracharya- tum uchit keh rahe ho adhira. Ab hame apna har kadam soch samaj kar uthana hoga. Or vo jo bhi shakti hai. Use hame apne jaal me fasa kar nast karna hoga. Isse pehle ki vo hamse us astra ko cheen le. Or in charo ka balidan bhi byarth nahi jayega. Inlogo ne marte hue bhi hame ek bahut badi gupt suchna pradan ki hai. Or hame uska fayeda uthana hoga.

Adhira- parantu gurudev hame to abhi us shakti ke bare me koi bhi jaankari Tak prapt nahi hui hai to ham uska pata kaise lagaye.

Shukracharya- me dhyan me baithkar is shakti ke bare me pata karne ki kosis karunga. Tab tum jis jagah per inki mrityu Hui hai. Baha per Apne sabse shaktishali duto ko us jagah per bhej do. Or unse kaho ki baha per moujood kisi na kisi insan ka roop le le. Taki unka vajood bana rahe. Or fir usi roop me gupt tarike se us shakti ka pata lagaye. Or ek baar agar hame uski jaankari mil gyi to fir ham use aasani se fasa sakte hai. Or unse ye bhi kehna ki apni shaktiyo ka bharpur prayog kare. Lekin kisi ki najro me nahi aana hai. Ye sab chhip kar karna hai unhe. Apni shaktiyo se sabhi insano ki janch Kare. Or jisme bhi divya gud mile uski pori janch Kare. Baki jaise hi mujhe is shakti ke bare me koi suchana milti hai me tumhe khud batane aajaounga. Samaj gye.

Adhira- samaj gya gurudev. Aisa hi hoga.

..

Uske baad adhira bapis se apne mahel chala gya. Or gurudev apne dhyan me baith gye. Mahel jakar adhira ne baisa hi Kiya jaisa use shukracharya ne kaha tha. Usne apne sabse shaktishali danavo ko prithvi ke liye Ravana kar diya. Or unhe sari hidayate bhi de di.

Bahi brahma ji ye sab dekh rahe the. Or unhe bhi ab dev ki chinta hone lagi thi. Isliye unhone turant hi devraj indra ko apne pass aane ka sandesh bheja.

Sandesh milte hi indra turant baha per pahuch gye.

Indradev- pranam Brahm Dev.

Is per brahmadev ne unhen aasirbaad de diya.

Indradev- kahiye prabhu mujhe kis liye aapne sandesh de kar bulbaya hai

Brahma- indra ab or bhi bikat samasya aane wali hai jinki shuruwat bhi ho chuki hai

Indradev- kaise samasya

Brahma- Indra adhira ko iski suchna mil chuki hai ki uske dut mare ja chuke hai. Jis bajah se unke man me sandeh paida ho gya hai. Ki prithvi per kisi shakti ka janm hua hai. Or usi sandeh ka pata lagane ke liye usne Arnav ki janmbhumi per apne sabse shaktishali detyo ko bhej diya hai.

Indradev- ye to bakai me gambhir samasya hai prabhu. Parantu arnav ki shaktiya bhi jagrit hone lagi hai. Or use unhen jagrit karne ka marg bhi mil chuka hai. Or maine uski shaktiyo ko khud dekha hai. Kaise usne dhyan me baithe baithe hi un charo ko nast kiya tha.

Brahma- ham bhi arnav ki shaktiyo se parichit hai. Lekin samasya ye hai ki un detyo ke pass mayavi shaktiya hai jinke aadhar per vo arnav ko turant hi pehchan lenge ki yahi hai vo jiska janm hua hai. Or fir vo use hani pahunchane ka prayas karne lagenge. Or abhi arnav ki sari shaktiya jagrit nahi hui hai.or sabse jaruri Baat ye ki arnav ko abhi un shaktiyo ka sahi se istemaal karna nahi aata hai. Vo jyada der tak in danavo ka mukabala nahi kar payega.

Indradev- to ab ham kya kare

Brahma- indra jald hi vo samay aane wala hai jab arnav ki uske guru se mulakaat hogi. Or mujhe ye batane ki jarurat nahi hai ki Arnav ke guru akhir kon banenge.

Indradev- ha brahma dev mujhe gyat hai ki ye bhumika kisko di jane wali hai.

Brahma- to bas indra Aapko jald hi is sabki byabastha karni hogi.

Indradev- mujhe gyat hai brhma dev ki mujhe kya karna hai. Parantu un asuro ka kya kiya jaye.

Brahma- un asuro ko jo kuch bhi karna hai karne deejiye. Vo kisi bhi manusya ko filhal hani nahi pahuchayenge. Parantu apko Arnav ki urja ko chhipana hoga. Taki vo use pehchan na paye. Or jab uchit samay aayega tab arnav khud unke samne aajayega.

Indradev- samaj gya brahmadev. Aapki aagya ka palan hoga.

Brahma- or sath me hi ye bhi aap sun leejiye ki aapke swarg me is waqt ek detyo ka dut ghoom raha hai. To Aapko is Baat ka pora dhyan rakhna hai ki usko is ware me koi bhi jaankari na ho. Aapko use bhramit karna hai.

Ye sab sunne ke baad indradev samaj gye ki unhe kya karna hai.

Indradev- me samaj gya brahmadev. Aapane jaisa kaha hai baisa hi hoga…

Uske baad indradev brahmadev ji ko pranam karke baha se chale gye

Or lag gye apni tayyariyo me.

Bahi prithvi per abhi tak sab theek chal raha tha. Dev apni baheno ke sath badiya time spend kar raha tha. Or apni clg life ko injoy Kar raha tha.use koi fikr nahi thi aane wale sankato ki. Bas kabhi kabhi is ware me jarur sochta tha ki ye shaktiya usme kaise or kyu hai. Aise hi vo ek din clg se bapis aa raha tha ki use raste me ek mandir dikhai diya. Halaki vo roj hi baha per pranam karta tha. Lekin jaldbazi me kabhi andar nahi gya. Lekin aaj use mike me SHRI MAD BHAGWAT GEETA ka path hota hua sunai diya. To usne apni bike ko roka or khud hi mandir me chala gya. Jaha per pehle se hi kai log baithe hue the or is path ka aanand le rahe the. Ab unme arnav bhi shamil ho gyaor dhyan laga kar unki sari bate sunne laga. Isme BRAHMAND ki utpatti ke bare me abhi bataya ja raha tha. Karib 2 ghanto Tak arnav sari bate sunta raha. Or unhe samajne ki kosis karta raha. Use sab samaj me aaya lekin uske prasno ke Uttar nahi mile. To jab path ko aaj ke liye viraam diya gya. To sabhi baha se uthkar chale gye. Or dev baha se uthkar un Panditji. ke pass chala gya.

Main- pranam pandit ji.

Pandit- tumhara kalyan ho putra. Maine aaj tumhe pehli baar yaha dekha hai.

Main- ha me aaj hi yaha sunne aaya hu.

Pandit- achha hai. Tumhari genration ko ye sab bate sunna chahiye. Isse tumhe aage margdarshan milega.

Main- ha pandit ji me bate janta bhi hu or manta bhi hu.

Pandit- bahut badiya. Tumhara chehra dekhkar lagta hai kuch puchhna chahte ho mujhse.

Main- aapne sahi kaha. Mere man me kuch sawal hai jinka jawab me dhund raha hu. Aap agar mera margdarshan kar sake to badi meharbani hogi aapki.

Pandit- isme meharbani kaisi. Tum jo chaho vo puchh sakte ho. Jitna mujhe gyat hoga me is aadhar per apne uttar de dunga tumhe.

Main- dhanyabaad pandit ji. Vaise me ye bate Aapko kahunga to kahi aap ise mera pagalpan na samaj le. Lekin pichhale kuch dino me mere sath kuch ghatit hua hai. Jisse me pori tarah se hairan hu.

Pandit- ham sun rahe hai. Aage bolo kya ghatit hua hai tumhare sath.

Main- Aapko yaad hai isi raste per jungle me log gayab ho rahe the.

Pandit- ha

Main- to baat ye hai ki.

Uske baad maine unhe sari ghatna sabistaar Bata di. Ki kya hua or kaise hua or jaisa Maine socha tha pandit ji ka muh khula ka khula reh gya ye sab bate jaankar

Pandit- kya sach me aisa hi hua tha

Main- jaha tak mujhe yaad hai bilkul aisa hi hua tha. To ab mere man me kai sawal uth gye hai ki aisa kaise sambhav hua. Or mere sath hi kyu. Or sabse bada sawal ki jis thirdeye ko shivji ke aalwa keval 1 ya 2 log hi khol paye hai. Use me itni aasani se kaise khol leta hu. Yahi sab sawal mujhe paresan Kar rahe hai. Kya aap is sab me mera margdarshan kar sakte hai.

Meri bato ko gour se pandit ji ne suna or samjha or uske baad vo bole.

Pandit- beta is sawal ka jawab tumhe bahar kahi nahi milega. Kyuki is prithvi per aisa koi nahi jo tumhare in sawalo ka jawab de sake. Sivay bhagwan ke. Or tumne kaha ki tumhare man se aawaj aai tab tumne dhyan lagaya tha. To tumhe apne in sare sawalo ke jawab apne man me hi talash karne honge. Apni thirdeye ka istemal Karo or apne sawalo ke jawab prapt karne ki kosis Karo. Or agar tumhe ye karne se safalta nahi milti hai. To jaha tak me janta hu jald hi tumhare jeevan me kisi ka aagman hoga. Jo tumhare sare sawalo ke jawab dega. Or tumhare is jeevan ka kya lakshya hai vo tumhe batayega. Ab jab tak aisa koi tumhare jeevan me nahi aata hai tab tak tum swayam hi apne sawalo ke jawab dhundne ki kosis Karo. Mujhe lagta hai ki tumhara janm jarur hi kisi mahan uddesya ko pora karne ke liye hua hai.

Ye sab sunne ke baad mere man ko thodi shanti to mil hi gyi thi ki mujhe mere sawalo ke jawab jald hi Milne lagenge.

Main- aapki bate sunkar mujhe ye aabhas ho raha hai ki jald hi ye samay bhi aane wala hai. Or me us samay ki besabri se pratiksha karunga. Or aapse ek vinti bhi karna chahunga ki aap ye bate kisi ko bhi na bataye. Kyuki ek to koi inper Yakeen nahi karega. Or dusra kisi ko agar is Baat per Yakeen ho gya to meri samasya bad sakti hai.

Pandit- beta tum bilkul bhi chinta mat karo. Ye baat mere seene me marte dum tak dafn rahegi. Or me bhagwan se prarthna karunga ki jald hi tumhare sare sawalo ke jawab tumhe mil jaye. Or tumhare jeevan ka lakshya bhi tumhe prapt ho jaye .

..

Ye sab sunkar Maine pandit ji ka aasirbaad liya. Or baha se ghar nikal gya.



तो बे कॉन्टिनुए……………..
 
अपडेट-14



शाम को जब घर पंहुचा तो सबने पूछ लिया की आज लेट कैसे हो gya.to मैंने बता दिया की मंदिर में कथा हो रही थी बही सुन रहा था. उसके बाद किसी ने कुछ नहीं कहा.

रात में मैं अपने मोबाइल में मूवी देख रहा था तभी मुझे प्राची का मश्ग आज्ञा. तो मैंने उसे रिप्लाई कर दिया. और उसके बाद हमारी चैटिंग सुरु हो गयी. जिसमे बस यही फालतू की बाटे hi चल रही थी. की क्या कर रहे हो खाना खा लिया की नहीं अब क्या कर रहा हो. घर में सब कैसे है. बगेरा बगेरा. मुझे मन hi मन लग रहा था की सायद ये कुछ और कहना चाहती है लेकिन कह नहीं प् रही है. और में उसे फाॅर्स भी नहीं कर सकता था कहने के लिए. इसलिए मैंने बैसि hi नार्मल बाटे जारी राखी. करीब 10 मं. बाद रेनू मेरे कमरे में आगयी. और मुझे ऐसे चाट करते देख पता नहीं उसे क्या सुझा उसने झट से मेरा फ़ोन मुझसे छीन लिया और बहार की तरफ भाग गयी. अब मैंने सोचा इसके पीछे भागने से क्या फायदा हमारी कोई प्राइवेट बात तो हुई नहीं है. ये खुद hi मोबाइल दे जाएगी थोड़ी देर में. और में उसका पचका भी कर दूंगा. यही सब सोचकर में पलंग से हिला भी नहीं. और जब काफी देर तक में बहार नहीं गया तो जैसा मैंने कहा था रेनू खुद hi मेरा मोबाइल लेके अंदर आगयी.

मैं- हो गयी मन की.

रेनू- क्या यार तू पीछे क्यों नहीं भगा

मैं- में क्यों भागने लगा वो भी तेरे पीछे

रेनू- अच्छा तो फिर किसके पीछे भागता है जरा मुझे भी तो बता.

मैं- और वो भला क्यों.

रेनू- तेरी बड़ी बहन हु. इस नाते मेरा पूरा हक़ है ये जानने का की तू आज कल किसके पीछे भाग रहा है.

मैं- अच्छा तो इस नाते मेरा भी पूरा हक़ है ये जानने का की सलग में तुम किसके पीछे भाग रही हु.

रेनू- है लेकिन पहले सवाल मैंने किया है इसलिए पहला जवाब तू hi देगा.

मैं- सॉरी में ये नहीं बताने वाला तुझे.

रेनू- ऐसा क्या करता है. बता न. मेरा प्यारा भाई है न. मेरा शोना भाई है न.

मैं- ये मस्का अपने बर्फ या पति को लगाना. मुझे नहीं

रेनू- ठीक है तो अब में तेरे से बात hi नहीं करुँगी. जब तुझे मेरी कोई परवाह hi नहीं है तो में भला क्यों करू. तू मुझे बिलकुल भी इम्पोर्टेंस नहीं देता है आजकल इसलिए अब में भी तुझे बिलकुल भी भाव नहीं दूंगी.

मैं- थैंक गॉड. पीछा छूटा.

और मेरा ये कहना था की रेनू की आँखे नहीं पैर भर आई और उसने मेरे फ़ोन को बही पैर फेक दिया और अपनी आँखों को दबाते हुए बहार जाने लगी.

जैसे hi दरवाजे के पास पहुंची. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. और सीधा उसे अपने सीने से लगा लिया.

मैं- बस कर अब ये आसुओ का नाटक. देख में पिघल गया

ये सुनते hi उसने मेरे सीने में जोर से मुक्का मार.

मैं- अरे बाप रे इतना जोर से मार रही हो. मुझे लग गया है पता है

में अपने सीने को मलने लगा. जिससे उसे लगा की मुझे बकै में लग गयी है. और उसने तुरंत hi मेरे सीने पैर अपना हाथ फेर दिया.

रेनू- सॉरी वो गलती से लग गया.

मैं- कोई न. चलो आओ बैठो यहाँ पैर.

रेनू मेरे साथ बैठ गयी.

मैं- तुझे क्या हो गया hai.aajkal तू बहुत जल्दी इमोशनल होने लगी है. पहले तो ऐसा नहीं था

रेनू- ऐसा कुछ नहीं है.

मैं- अच्छा मुझसे छिपाएगी. बता जल्दी तुझे कसम है मेरी.

और ये अस्त्र कभी बिफल नहीं जाता है. खासकर रेनू के मामले में.

रेनू- अरे सच में कुछ खास नहीं है. वो दरअशल अब तू मुझे उतना भाव नहीं देता है जिस बजह से मुझे बुरा लगता है. की तू अब मुझसे प्यार नहीं करता है. मेरी हमेशा बुराई करता रहता है. इसलिए मुझे बहुत बुरा लगता है. की मेरा एक hi भाई है और वो भी मुझसे ठीक से बात भी नहीं करता है.

मैं- अच्छा तो ये बात है. लेकिन इसमें गलती तुम्हारी है.

रेनू- मेरी क्या गलती है इसमें.

मैं- तुम मुझे यहाँ अकेले छोड़ कर देखि चली गयी. और मेरे बारे में तुमने सोचा भी नहीं की में यहाँ अकेले क्या करूँगा में किसके साथ खेलूंगा किस्से बाटे करूँगा. और मुझे भी तुम्हारा ये फैसला बहुत बुरा लगा था. जिस बजह से में तुमसे नाराज था.

रेनू- अरे तो मुझे जाने से रोका क्यों नहीं था.

मैं- मैंने कोसिस की थी लेकिन न तो तुमने कोई विरोध किया और न hi किसी और ने. तो मैंने सोचा जब तुम hi यहाँ से जाना चाहती हो तो तुम्हे रोकने वाला में कोण हु. इसलिए फिर मैंने किसी से कुछ नहीं कहा.

ये सब बाटे एकदम सच थी. मुझे बहुत बुरा लगा था जब रेनू दिल्ली चली गयी थी. क्युकी में अकेला पद गया था पूरी तरह से. चिराग से में केवल स्कूल में hi मिलता था जहा वो सारा दिन मेरा मूड ठीक करने में hi लगा रहता था. और घर पैर आते hi सारा बना बनाया मूड फिर से बिगड़ जाता था.

रेनू- ओह्ह्ह्हह सॉरी यार मुझे सच में इस बात का कोई भी अंदाजा नहीं था. वर्ण में सच में नहीं जाती. फिर चाहे कुछ भी क्यों नहीं होता.

मैं- रेहान दो ये सब बाटे. सच तो ये है की तुम मुझे पूरी तरह से भूल गयी थी बहा जेक. और इसका सबसे बड़ा सबूत ये है की तुमने मुझे आज तक एक भी इनकमिंग कॉल नहीं किया है. जब भी कॉल किया गया है मैंने hi किया है. या फिर घर से माँ या दादू ने. लेकिन तुमने आज तक मुझे खुद से कभी कॉल नहीं किया है. की चलो आज भाई का हालचाल पूछ लू. की कैसा है क्या कर रहा है.

और ये सब सुनके रेनू को एहसास हो गया था की बकै में उसने इन 2 सालो में एक बार भी मुझे खुद से कॉल नहीं किया था. है कभी खभर ममी कॉल कर लेती थी. लेकिन रेनू ने कॉल कभी नहीं किया था. और ये सब रीलीज़ होते hi रेनू की आँखे फिर से नाम होने लगी.

रेनू- तूने सच कहा मैंने सच में तुझे कॉल नहीं किया है. और इसलिए में सजा की हक़दार भी हु. तू जो चाहे मुझे सजा दे सकता है. में हस्ते हस्ते उसे स्वीकार कर लुंगी. लेकिन प्लस मुझसे तो बात करना बंद मत करना.

मैं- क्यों. इन दो सालो में हम्मे न के बराबर बात हुई है. तो तुम्हे और मुझे तो अब आदत पद चुकी है. इसलिए अब अगर बात न भी करे तो क्या फर्क पड़ता है.

रेनू- तू अब मुझे जलील करने लगा है. प्लस भाई मत कर. में खुद की नजरो में hi गिर जाऊँगी.

और रेनू का रोना अब बढ़ने लगा था.

जो में नहीं देख सकता था इसलिए मैंने उसे फिर से अपनी बहो में भर लिया

मैं- बस करो और अब रोना बंद करो. वर्ण में अब सच में बात नहीं करूँगा. और अगर माफ़ी चाहिए hi है तो यहाँ से जाने के बाद हफ्ते में काम से काम 4 दिन मुझे कॉल करोगी. वर्ण अबकी बार में बही दिल्ली में आके पता नहीं क्या करूँगा.

रेनू- पक्का भाई में चार दिन नहीं रोज तुझे कॉल करुँगी. प्लस मुझे माफ़ करदे. में नए सेहर में जेक उसमे खो गयी थी. जिसमे मुझे तेरा बिलकुल भी ख्याल नहीं आया. जो मेरी सबसे बड़ी गलती थी. और इस बात माँ एहसास मुझे हो गया है.

मैं- बस तो फिर अब बात यही पैर ख़त्म होती है. अब ये बताओ की सलग कैसा चल रहा है. और कोई बर्फ बगेरा बनाया या नहीं.

रेनू- कैसी बाटे करता है तू. सच में बिगड़ने लगा है तू

मैं- है लेकिन आपसे काम hi बिगड़ा हुआ हु.

रेनू- तो क्या में बिगड़ी हुई लगती हु तुझे.

मैं- खुद hi सोचो. जब यहाँ आई हो और इतना कातिल फिगर बना कर रखा है. तो कोई तो होगा hi चाहने वाला. जिसे तुम भी पसंद करती हो.

रेनू- ऐसा कुछ नहीं है. और कोई भी नहीं है. हलाकि ओने साइडेड बहुत है. लेकिन ऐसा अभी तक कोई नहीं मिला है जिसे मैंने पसंद किया हो.

मैं- ओह्ह्ह तो ये बात है. बैसे मुझे यकीन तो नहीं हो रहा है. लेकिन अब तुम कह रही हो तो मान लेता हु

रेनू- थैंक्स. अब तू बता किस्से चाट कर रहा था.

मैं- है एक फ्रेंड सलग की. बही थी. हालचाल पूछ रही thi.bas और कुछ नहीं है हमारे बीच फ़िलहाल फ्रेंडशिप में आल्वा.

रेनू- बैसे तुझे वो पसंद है क्या

मैं- मैंने अभी इस बारे कोई भी फैसला नहीं लिया है. हलाकि वो खूबसूरत है. काफी खूबसूरत है. लेकिन फ़िलहाल में कंफ्यूज हु.

रेनू- ओह्ह तो मामला फसा हुआ है. लिखे और लव के बीच में.

मैं- है ऐसा कह सकती हो. और दूसरी बात ये भी है की. वो बहुत hi ज्यादा गुस्से वाली है. आपको सायद पता नहीं होगा. दूसरे hi दिन उसने मेरी नई कार का कबाड़ा कर दिया था. बेसबॉल बात से.

रेनू- व्हाट? लेकिन क्यों

फिर मैंने रेनू को साडी स्टोरी बताई की क्या हुआ था तब. और कैसे मैंने उसे सबक सिखाया और उसके बाद क्या हुआ

रेनू- ओह्ह ये तो बकै में काफी गुजसेल है. लेकिन लगता है तेरी बातो को इसने काफी सीरियस्ली ले लिया है. वर्ण वो तुमसे फ़्रिएनशिप कभी नहीं करती

मैं- है हो सकता है. या फिर ये भी हो सकता है की वो कोई प्लान बना रही हो मुझसे बदला लेने का. जिसमे वो पहले मेरा भरोसा जीते और बाद में पथ पैर वॉर करे.

रेनू- सच कहु तो ये पॉसिबिलिटी भी है. ऐसा कर सकती है वो.

मैं- तो अस ा गर्ल तुम hi बताओ की अब में क्या करू जिससे मुझे ये जानने को मिले की उसके मन में आखिर क्या चल रहा है.

रेनू- ये जानने का कोई तरीका नहीं है. क्युकी लड़कियों के दिमाग को कोई नहीं पद सकता. हमारे मन में कब क्या विचार आजाये ये खुद हमें भी पता नहीं होता तो तुम्हे कैसे पता चलेगा. है अगर तुम्हारे पास कोई दिव्यशक्ति हो जिससे तुम हमारा दिमाग पद सको तो अलग बात है. हलाकि ये भी पॉसिबल नहीं है. इसलिए भूल जाओ. है लेकिन एक काम कर सकते हो.

मैं- क्या.

रेनू- उसका दिल जीतो. उसे इतना प्यार इतनी इज्जत दो की अगर उसके मन में ऐसी कोई खुराफात चल भी रही हो तो तुम्हारा अपना पैन देख कर वो आईडिया hi ख़त्म हो जाये उसके मन से. और ये आईडिया हमेशा वर्क करता है. खासकर लड़कियों के मामले में.

मैं- हम्म्म्म वैसे आईडिया अच्छा है. और आपको तो पता hi है. मेरा स्वाभाव hi ऐसा है. में सभी के साथ प्यार और अपने पैन से hi रहता हु.

रेनू- है ये तो में जानती हु. इसलिए मुझे पूरा यकीन है की वो लड़की अब सच में सुधर चुकी है और तुम्हारी एक सच्ची फ्रेंड भी बन चुकी है. और अब अगर तुम दोनों एक दूसरे को पसंद करते हो तो देर न करो. और प्रपोज़ कार्डो.

मैं- इतनी जल्दी क्या है जब इस सबका टाइम आएगा तब देखेंगे. फ़िलहाल हमारे इंजॉय करने के दिन है और हम यही करेंगे.

रेनू- ये भी ठीक है. अच्छा अब में चलती हु.

मैं- ok. गण.

रेनू- गण.

ये बोलके वो अपने कमरे में चली गयी. और में बही बैठा सोचता रहा की क्या बकै में मैं उसे पसंद करता हु ता नहीं. लेकिन इस सवाल का जवाब मुझे भी बड़ा कन्फुसिंग सा मिला इसलिए मैंने उसे वक़्त पैर छोड़ दिया और में भी लाइट ऑफ करके सो गया.

बही जिन देत्यो को अधीरा ने भेजा था. अर्णव का पता लगाने के लिए वो भी अब देहरादून में पहुंच चुके थे. और अब उन्हें उन लोगो की तलाश थी जिनका भेस वो ले सकते है और मेरे बारे में जानकारी ले सकते है. ये टोटल 4 लोग थे. जिन्हे अपने अपने शिकार की तलाश थी.

डी1- हम किसका रूप ले.

डी2- हमें अभी कोई भी आईडिया नहीं है की वो शक्ति का अवतार कितने वर्ष का है. और वो दीखता कैसा है. इसलिए हम चारो को अलग अलग रूप लेने होंगे. एक काम करते है. एक किसी ऐसे का रूप लेगा जो किसी पाठशाला में पड़ता हो. दूसरा यहाँ के जो सैनिक होते है उनमे से किसी का रूप लेगा. ताकि उसे ये खबर मिलती रहे की इस सेहर में कहा क्या हो रहा है. और क्या कही ऐसे किसी की कोई खबर है भी या नहीं. और में जाऊंगा बड़ी पाठशाला. जहा थोड़े बड़े बचे पड़ते है. और आखिरी बचे तुम. तो तुम उसी बड़ी पाठशाला में पड़ने वाले किसी विद्यार्थी का रूप लोगे ताकि बचो में अच्छे से घुल मिल सको. और उनके. बारे में जान सको. सब समाज गए.

डी1- है में तो समाज गया. में जाऊंगा सैनिक बांके.

डी3- ठीक है में जाऊँगा छोटी पाठशाला में.

डी4- लेकिन अगर हमें इन चारो hi जगह पैर ऐसा कोई भी नहीं मिला तब हम क्या करेंगे

डी2- ऐसा होना संभव नहीं है. मुझे पूरी उम्मीद है की हमें कही न कही सफलता तो जरूर मिलेगी. और एक बार हमें थोड़ा सा भी शक किसी पैर हो गया तो उसकी जानकारी निकलने में हमें ज्यादा समय नहीं लगेगा. और हम ऐसा करते है. जिसका भी हम रूप लेंगे उसको बेहोश करके रखेंगे. उनको मरना नहीं है.

डी3- लेकिन क्यों

डी2- वो इसलिए की अगर हमें किसी एक जगह पैर उसका कोई सुराग मिला तो हम चारो अपने रूप बापिस से बदल लेंगे उसी जगह के अनुरूप जिस जगह हमें सबूत मिलेगा. और जब हम अपना पुराण रूप छोड़ेंगे तो बही पुराने लोगो की हमें जरुरत पड़ेगी. क्युकी अगर वो लोग ऐसे hi अचानक से गायब हो गए तो देवताओ और उस शक्ति को हैंपर शक हो सकता है. और वो खुद hi हमारी खोज में निकल पड़े.

डी1- ये तो और अच्छी बात होगी हमारे लिए.

डी2- है अच्छी बात तो होगी लेकिन खतरनाक भी होगी. क्युकी जब उसने उन चारो भाइयो को इतनी आसानी से मार गिराया है तो जरूर उसके पास बहुत सी शक्तिया होगी. जिसमे बल पैर वो हैंपर भरी भी पद सकता है. और देवता तो है hi हमारे शत्रु. उनको भी हमारी भनक लग जाएगी. और फिर वो कोई न कोई षड़यंत्र रचेंगे हमारे खिलाफ.

डी4- ये बात बिलकुल सही कही है तुमने. लेकिन एक सवाल और है. और वो ये है की इस पोरे सेहर में कई छोटी और बड़ी पाठशालाये है तो हम किस में जाये ये कैसे तय करे. क्युकी वो अगर पड़ता है तो कही पैर भी पद सकता है.

डी2- तुम्हारा सवाल बकै में बहुत hi अच्छा है. तो हमें करना ये है की अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके हमें ये पता करना है की किस किस पाठशाला में सबसे ज्यादा पॉजिटिव एनर्जी फैली हुई है. हम उसी में जायेंगे.

डी4- है ये ठीक रहेगा. और रही बात उन इंसानो को जीवट रखने के बारे में तो. में इससे पूरी तरह सहमत हु. क्युकी महाराज का आदेश था की हमें ये काम ऐसे करना है की किसी को भी कानो कान भनक न हो की हमने किसका रूप किया है और हम क्या कर रहे है. इसलिए हमें उन इंसानो को जीवित रखना hi होगा

डी2- ठीक है तो अपनी शक्तियो का इस्तेमाल करो.

उसके बाद उन चारो ने अपनी अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया और पोरे सेहर में पॉजिटिव एनर्जी को ढूंढ़ने lage.khas कर स्कूल और सलग में. और उन्हें ऐसे 3 ठिकाने मिल भी गए. जहा सबसे ज्यादा पॉजिटिव एनर्जी थी. और मुझे अब ये बताने की जरुरत नहीं है की इनमे से एक सलग बही था जिसमे देव पड़ता है. इसलिए अब देव पैर खतरा बकै में बाद गया था.

डी1- ठीक है तो अब हम चलते है अपने अपने शिकारों पैर.

ये कहके चारो पोरे देहरादून में फ़ैल गए. और पहले ने एक ैप का रूप ले लिया जिसका अभी अभी यहाँ पैर ट्रांसफर हुआ tha.or उसके परिवार में भी यहाँ पैर कोई नहीं था.

बही दूसरे ने एक सलग के टीचर का रूप ले लिया.

बही तीसरे ने एक स्कूल टीचर का रूप ले लिया.

और आखिरी वाले ने. एक स्टूडेंट का रूप ले लिया. और जिन चारो का इन्होने रूप लिया था उन चारो इंसानो को इन्होने एक मयाबी गुफा में कैद कर दिया. जहा पैर कोई भी नहीं पहुंच सकता था. और इन चारो पैर कुछ ऐसे मन्त्र इन्होने फूक दिए की ये जाग तो रहे थे लेकिन उन्हें कुछ भी होश नहीं था की ये कहा है कोण है और क्या कर रहे है. इन्हे अब न भूक लगने वाली थी और न hi प्यास. ये चारो बस शुन्य को hi निहार रहे थे.

इनको ऐसी हालत देख कर तो लग रहा था की काश इन्हे मार hi दिया होता तो बढ़िया होता.

बाकि अब आगे देखते है की क्या होता hai….Inka…………

तो बे कॉन्टिनुए ………………...

 
अपडेट 15



इसके बाद रात में कुछ भी खास नहीं हुआ. वो चारो दैत्य अपनी अपनी जगह पैर पहुंच चुके थे. अब उन्हें बस कल का इन्तजार था. लेकिन 2 no. के दिमाग में एक शंका आई. तो उसने बाकि तीनो को तुरंत hi उस जंगल में बुला लिया.

चारो आधे घंटे में जंगल में पहुंच गए

डी1- क्या हुआ यहाँ क्यों बुलाया है हमें.

डी2- वो क्या मुझे लगा की एक बार हमें इस जंगल में भी देख लेना chahiye.kya पता हमें उस शक्ति का कोई सबूत मिल जाये. अब उसने उन चारो को मारा है तो वो जंगल में तो जरूर गया होगा. और हो सकता है बहा पैर हमें उसका कोई सबूत मिल जाये.

डी3- बैसे आईडिया तो अच्छा है. लेकिन मुझे नहीं लगता जंगल में कुछ मिलेगा. और बैसे भी जंगल काफी बड़ा है. और हमें तो फ़िलहाल ये भी नहीं पता की उन चारो की मौत आखिर किस जगह पैर हुई थी.

डी1- लेकिन मुझे उस जगह का पता चल गया है जहा से लोग गायब हुए थे. मैं पुलिस वाला बना हु तो मैंने बहा की थोड़ी जानकारी निकली है. तो मुझे उस जगह के बारे में पता चला है. हम उसी जगह से शुरुवात करते है. और मुझे एक और खबर मिली है की किसी लड़के ने hi पहली वार बहा की शिकायत की थी की बहा से लोग गायब हुए है. हम उससे भी जानकारी ले सकते है. या ये हो सकता है की बही हमारा शिकार हो.

डी4- तुम्हारी बात में बकै दम है. लेकिन मुझे नहीं लगता है की वो लड़के में कोई शक्ति होगी. क्युकी अगर ऐसा होता तो वो खुद शिकायत नहीं करता बल्कि उस इंसान को खुद hi बचने के लिए निकल जाता.

डी1- है ऐसा भी हो सकता है. लेकिन एक बार उससे पूछताछ करने में क्या हर्ज़ है. कल में उससे पूछताछ कर लूंगा. बाकि अभी हम उस जगह पैर चलते है. जहा पैर पहला इंसान गायब हुआ था.

डी2- ठीक है तो फिर चलते है बहा पैर.

उसके बाद उन चारो ने उस पुलिस वाले का हाथ पकड़ा और चारो एकदम से गायब होगये. और सीधे उस जगह पैर पहुंच गए. जहा पैर देव ने उस कार को देखा था. जहा उसका एक्सीडेंट हुआ था. उन्होंने ने बहा रोड पैर थोड़ा बहुत देखा जब उन्हें बहा कुछ नहीं मिला तो वो लोग तुरंत hi जंगल के अंदर चले गए. और अपनी मायावी शक्तियों से चारो तरफ देखने लगे और ढूंढ़ने लगे की आखिर कहा पैर उन चारो की हत्या हुई होगी.

वो आगे बढ़ते हुए जा रहे थे. अब इतने बड़े जंगल में सुराग ढूंढ़ना किसी घास के ढेर में सुई ढूंढ़ने के बराबर था. लेकिन ये चारो कोई आम इंसान तो थे नहीं. चारो के पास बहुत साडी मयाबी शक्तिया थी और साथ में खूब तेज़ दिमाग भी. वो आगे बड़े तो उन्हें एक जगह पैर सूखे पत्तो पैर कुछ खून की बुँदे दिख गयी. ये खून किसी आम इंसान को ढूंढ़ना लगभग न मुमकिन था. लेकिन इन्होने अपनी शक्तियों से उन खून को देख लिया.

डी2- ये देखो यहाँ पैर किसी इंसान का रक्त गिरा है. और ये सुख गया है. और मेरी शक्तियों के हिसाब से ये ज्यादा पुअरना नहीं है. लगभग 2 दिन पुराण है.

डी4- तो क्या ये उस शक्ति का हो सकता है.

डी1- बैसे लगता तो नहीं है. क्युकी वो जब इतना शक्तिशाली है तो अपना रक्त ऐसे क्यों बहने देगा.

डी3- सही कहा तुमने. हो सकता है ये किसी और इंसान का हो. जो उन चारो का शिकार बना हो.

डी2- हो सकता है लेकिन इस रक्त की हमें जाँच करनी चाहिए. सायद इससे हमें कुछ पता चल जाये.

डी1- ठीक है इस रक्त को रक्तासुर के पास भेज देते है. वो एक महाशक्तिशाली पिशाच है. इस रक्त को सूंघकर hi वो पता लगाएगा की ये किसका है. और उसमे कुछ शक्ति बगेरा है या नहीं.

डी2- ठीक कहा तुमने.

उसके बाद उन्होंने अपनी माया से रक्तासुर को बहा पैर बुला लिया.

वो थोड़ी hi देर में बहा पैर पहुंच गया.

रक्तासुर- प्रणाम सेनापति. कहिये मुझे किस बजह से यहाँ बुलाया है आपने.

डी2- रक्तासुर. ये बही जगह है जहा पैर उन चारो पिसाच भाइयो की हत्या हुई है. और हमें यहाँ पैर ये कुछ रक्त की बुँदे मिली है. तुम जरा इन्हे सूंघ कर बताओ हमें की ये किसकी hai.koi साधारण इंसान की या फिर किसी देवीए शक्ति की.

रक्तासुर- लाइए में पता लगता हु.

उन्होंने वो सूखे पत्ते रक्तासुर को दिए. उसने उन्हें गौर से देखा और फिर सूंघना सुरु किया.

और जैसे hi उसने उन्हें सुंघा. वो रक्त की बुँदे उस पत्ते पैर से गायब हो गयी. और रक्तासुर बस इतना hi जानपाया की ये रक्त किसी मामूली इंसान का नहीं है. और आगे वो कुछ पता करता उससे पहले hi रक्त गायब होगया. और उसकी साडी योजना धरी की धरी रह गयी.

रक्तासुर- मुझे माफ़ करे सेनापति. लेकिन में इसके बारे में ज्यादा नहीं जान पाया. है लेकिन इतना जरूर पता चल गया है की ये जिसका भी रक्त था. वो कोई साधारण इंसान नहीं है. उसमे जरूर कोई देवीए शक्ति है. और ये रक्त का अचानक से गायब हो जाना इस बात का पुख्ता प्रमाण है.

डी2- ओह्ह तो हमारा शक सही निकला. ये जरूर किसी देवता का काम होगा. उसी ने उस रक्त को गायब किया होगा.

डी1- सही कहा तुमने. लेकिन अब हम क्या करे. वो रक्त के द्वारा हम उस तक आसानी से पहुंच सकते थे. लेकिन वो तो गायब हो गया.

डी2- अब यहाँ कुछ भी नहीं मिलेगा हमें. जितना में जनता हु. ये रक्त जिसने भी गायब किया है. उसने अभी तक इस पोरे जंगल में से सरे सबूतों को ऐसे hi गायब कर दिया होगा. इसलिए अब यहाँ हमें कुछ नहीं मिलने वाला. अब हम बही करेंगे जिसकी हमने तैयारी की है

डी4- तुमने सही कहा. और अब हमें यहाँ से जल्दी hi चलना chahiye.kya पता कोई देवता या कोई और हमें देख रहा हो. और उसे हमारी योजना के वेयर में अगर पता चल गया तो सब गड़बड़ हो जाएगी

डी2- ठीक कहा तुमने. चलो हम निकलते है यहाँ से. और रक्तासुर अब तुम भी जा सकते हो. अगर हमें आगे तुम्हारी जरुरत पड़ी तो हम तुम्हे फिर से बुला लेंगे.

रक्तासुर- ये मेरा सौभाग्य होगा.

ये कहकर उसने उन चारो को प्रणाम किया और बहा से बापिस अपने गृह पहुंच गया. और ये चारो भी बहा से गायब होक बापिस अपनी अपनी जगह पैर पहुंच गए. अपने नकली रूप में. इनके जाने के बाद बहा पैर स्वयं देवराज इंद्रा आगये.

इंद्रदेव- जाओ देत्यो. तुम चाहे कितनी hi योजना क्यों न बना लो. लेकिन तुम सबका अंत निश्चित है. उसे तुम्हारी कोई भी योजना विद्या या शक्ति न ताल सकती. बस अपने समय का इन्तजार करो. और मेरे होते हुए तुम मेसे कोई भी अर्णव की छाया को भी नहीं ढूंढ पायेगा.

.ये कहकर देवराज इंद्रा भी बहा से गायब होगये.

बही देव अपने रूम में सो रहा था. तब इंद्रदेव इसमें कमरे में प्रगट हुए. उन्होंने अर्णव को देखा और उसके माथे पैर अपना हाथ रखा. और कुछ मंत्र पड़ने लगे. जिससे अर्णव के चारो तरफ एक अदृश्य घेरा बन गया. और ये घेरा इंद्रदेव ने इसलिए बनाया था ताकि अर्णव की देवीए ऊर्जा इस घेरे में छिपी रहे और उसे कोई भी दैत्य पकड़ न पाए. ये सब करने के बाद इंद्रा देव बहा से बापिस स्वर्ग चले गए. और देव के सरीर से निकलने वाली देवीए ऊर्जा उस घेरे की बजह से अदृश्य हो गयी. अब कोई दैत्य देव के बगल में भी खड़ा हो जाये. तब भी उन्हें इस बात का बिलकुल पता नहीं चलेगा की देव कोई साधारण इंसान नहीं है.

बही नेक्स्ट डे में अपने रूटीन से उठा. और नाहा धोकर सीधा पंहुचा छत पैर. खुली हवा में. और बहा पैर मैंने चटाई को विचाया और ध्यान लगाने बैठ गया.

आज भी शामे बैसा hi हुआ. मैंने जल्द hi अपनी तिरदये को खोल लिया. अब मैंने ऐसा सुना था की ये जो ऑय होती है ये ज्ञान का भंडार होती है. इसलिए मैंने सोचा की अब ज्ञान को अर्जित करने का समय आज्ञा है. और मैंने तिरदये से अपने सवालो के जवाब ढूंढ़ना आरम्भ किया.

चारो तरफ फैली रौशनी में मैं अकेला घूम रहा था. बहा पैर कोई भी नहीं था.

इसलिए मैंने अपनी तिरदये से प्रार्थना की.

मैं- हे त्रिनेत्र. कृपा कर मुझे सरे सत्य से अवगत करिये. में विनती करता हु आपसे.

ये बोलते hi मेरी थ्रीडीए मुझे एक लुम्बी यात्रा पैर ले जाने लगी. ये यात्रा इतनी तेजी से हो रही थी की मेरा संतुलन बिगड़ने लगा था. मेरा दिमाग दर्द करने लगा था. और बार बार मुझे मेरी आँखे खोलकर ध्यान को भांग करने की इक्छा होने लगी थी. लेकिन मुझे सच जानना था. और इसी के बल पैर मैंने अपनी आँखों को खुलने की आज्ञा नहीं दी. अब चाहे मेरे इस दर्द से फैट hi क्यों न जाये. लेकिन में अपनी आँखे नहीं खोलने वाला था. और में उस सफर में लगातार आगे बाद रहा था और साथ में मेरा सर का दर्द इतना बाद गया की अब मुझसे सेहन भी नहीं हो रहा था. की तभी मेरे ऊपर अचानक पता नहीं कहा से और कैसे. बहुत सारा पानी गिर गया. और उस पानी के अचानक गिरने से में एकदम हड़बड़ा कर उठा गया. मेरी आँखे अब खुल चुकी थी. और मेरा दर्द अब काम होने लगा था. और जब कुछ सामान्य हुआ तो मैंने सामने देखा. तो सामने रेनू कड़ी थी हाथ में पानी की बाल्टी लिए हुए. और उसके चेहरे पैर इतनी परेशानी दिख रही थी की में क्या बताऊ. और उसकी आँखों में देखते देखते hi. अचानक से मुझे कुछ सुनाई देने लगा.

ये देव को क्या हो गया. ये कुछ बोल क्यों नहीं रहा है. हे भगवन ये ठीक तो है न.

मैंने इस आवाज पैर जरा गौर किया तो में इसे पहचान गया. ये किसी और की नहीं बल्कि खुद रेनू की आवाज थी. लेकिन उसने अपने मुँह से तो कुछ बोलै hi नहीं. तो ये आवाज कहा से आई.

मैं- तुमने कुछ कहा क्या अभी.

मेरी आवाज सुनते hi रेनू थोड़ी होश में आई.

रेनू- में कबसे तुझे बुला रही हु. कब से आवाज दे रही हु. लेकिन. तू सुन hi नहीं रहा है. क्या हो गया था तुझे.

मैं- मुझे क्या होगा. में ध्यान में बैठा था. और तुमने मेरा ध्यान तोड़ दिया. भला ऐसा कोई करता है.

रेनू- एक बहन करती है जब उसका भाई उसे कोई जवाब नहीं देता है. में पिछले 1 घंटे से तुझे आवाज दे रही हु. लेकिन तू सुन hi नहीं रहा है. ऐसा क्या ध्यान कर रहा था तू. जो तुझे कुछ आवाज hi नहीं आई मेरी.

मैं- अरे अगर में नहीं उठरहा था तो इसमें कोनसी बड़ी बात हो गयी. और इसमें मेरे ऊपर पानी डालने की क्या जरुरत थी. ये तो शुक्र मनाओ की में था. अगर मेरी जगह कोई साधु या ऋषिमुनि होते तो तुझे अभी के अभी भस्म कर देते. समझी. और आगे से कभी भी मुझे ध्यान से मत उठाना प्लस. It's ा रिक्वेस्ट.

में खुद उठजाऊंगा. जब टाइम होगा.

रेनू- अच्छा जरा मुझे बताओ की क्या टाइम हुआ है.

मैंने अपनी घडी में देखा तो में हैरान रह गया.

मैं- क्या 8 बज गए.

रेनू- है इसीलिए तुझे उठाने आई थी में. क्युकी तेरे सलग का टाइम हो गया है. और मुझसे कहता है की में उठजाता हु टाइम से. बीटा अगर में न उठती तो आज का तेरा सलग तो मिस हो hi गया था. समझा. तुझे तो मुझे थैंक्स बोलना चाहिए. ऊपर से मुझे दन्त रहा है. और भस्म करने की धमकी दे रहा है.

मैं- सॉरी यार वो ध्यान में टाइम का पता hi नहीं चला. एंड सॉरी फॉर माय वर्ड्स एंड थैंक्स जो तुमने मुझे टाइम लेर उठा दिया.

उसके बाद में जल्दी से बहा से उठा और नीचे अपने कमरे की तरफ भगा. नाहा तो मैंने लिया था. और मुँह रेनू ने धुला दिया था. इसलिए जल्दी से मैंने कपडे चेंज किये और अपना बेग लिया और नीचे की तरफ दौड़ लगा दी. जहा माँ और दादू दोनों hi बैठे हुए थे. मैंने जेक दोनों के पेअर छू कर आसीर्बाद लिया.

मैं- माँ एंड दादू में निकलता हु सलग के लिए.

माँ- कुछ नास्ता तो करले.

मैं- माँ में पहले hi आज लेट हो गया हु. नास्ता में और लेट हो जायेगा. में बही सलग में कुछ खा लूंगा. ये कहते कहते में घर से बहार निकल गया. और गैराज में जेक अपनी बाइक को लिया और निकल गया सीधा सलग की तरफ. रस्ते में चिराग के घर पैर रुका उसे बुलाने के लिए. तो उसकी माँ ने कहा की वो चला गया है. उसे लगा की में सायद आज नहीं आरहा हु इसलिए.

तो मैंने आंटी को bye बोलै और सलग के लिए बाइक को दौड़ा दिया.

जैसे तैसे 8:30 तक में सलग पहुंच गया. जल्दी से बाइक को पार्क किया. और क्लास की तरफ दौड़ लगा दी. क्युकी क्लास 15 मं. पहले hi स्टार्ट हो गयी थी. मैंने क्लास के गेट पैर पंहुचा. तो देखा एक सर क्लास में पड़ा रहे है.

मैं- मई ी के इन सर.

इस बात से सभी की नजर मेरी तरफ गयी.

सर- देव तुम आज इतना लेट कैसे हो गए.

मैं- सॉरी सर आज थोड़ा लेट नींद खुली उसी में लेट हो गया. और जैसे तैसे भाग कर आज्ञा सलग.

सर- कोई नहीं. ये पहली बार हुआ है इसलिए आने देता हु. लेकिन आगे से ध्यान रखना. में लेट आने पैर क्लास में घुसने भी नहीं दूंगा तुम्हे या किसी और को भी. सभी इस बात का ध्यान रखेंगे.

मैं- बिलकुल सर आइंदा से लेट नहीं होऊंगा में.

सर- ok के इन.

उन्होंने ये बोलै और में जल्दी से अंदर घुस गया. और चिराग के बाजु जेक बैठ गया. एंड सर ने क्लास फिर से स्टार्ट कर दी.

बीच क्लास में चिराग बार बार मुझसे पूछना छह रहा था की लेट कैसे हो गया. लेकिन मैंने उसे कह दिया की बाद में बताता हु. फ़िलहाल सर ने देख लिया तो फिर से बहार कर देंगे वो. और ये बात चिराग भी समाज गया इसलिए उसने फिर मुझसे कुछ नहीं पूछा.

जैसे तैसे लंच तक का टाइम गुजर गया. मुझे बहुत तेज़ भूक लगी थी. इसलिए मैं जल्दी से कैंटीन की तरफ चला गया. और मेरे पीछे से लकी चिराग और प्राची तीनो हो मुझे बुला रहे था. में कैंटीन में जेक एक टेबल पैर बैठा. और मेरे बगल में वो तीनो भी आगये

मैंने जल्दी से सभी के लिए आर्डर दे दिया. और वो लेने चला गया.

चिराग- क्या हुआ तुझे. कैसे बेहवे कर रहा है तू.

मैं- अरे यार सुबह बिना नास्ते के आया था बहुत भूक लगी है. ईसीए भाग कर यहाँ आया हु.

चिराग- और जरा ये बताओ की जो बाँदा रोज उगते सूरज को देखता है वो आज इतना लेट कैसे हो गया.

मैं- लेट नहीं उठा में. सुबह 4 बजे hi उठ गया था. वो आज कल में थोड़ा मैडिटेशन करता हु. ध्यान में बैठ ता हु. तो उसी में मुझे पता hi नहीं चला की कब 8 बज गए. वो तो अच्छा हुआ की रेनू ने मेरे ऊपर पूरी बाल्टी पानी दाल दिया और मेरा ध्यान टूट गया. वर्ण आज मेरा दिन भर सायद ध्यान में hi निकल जाता.

लकी- क्या बकै. लेकिन इतना गहरे ध्यान में कैसे चला गया तू.

मैं- बस मन को शांत किया और ॐ का उच्चारण किया. और टाइम कब निकल गया मुझे पता hi नहीं चला. और तुम लोग मानोगे नहीं. मुझे ध्यान में ऐसा लग रहा था जैसे अभी बस 15-20 मं. Hi हुए है. लेकिन पोरे 4 घंटे में ध्यान में बैठा रहा.

प्राची- क्या बकै.

मैं- है बही तो.

इतने में हमारा आर्डर आज्ञा. और में तो टूट पड़ा और मेरे साथ बाकि तीनो भी.

जैसे तैसे पूरा खाना फिनिश किया.

तब जेक थोड़ी रहत मिली.

मैं- अब ठीक लग रहा है.

प्राची- तुम कोई अलार्म बगैर लगा लिया करो. जिससे टाइम पैर ध्यान से उठ सको.

मैं- में भी यही सोच रहा था. लेकिन लगता नहीं ये आईडिया काम करेगा. क्युकी. आज hi रेनू ने मुझे कितनी आवाजे दी. लेकिन में नहीं उठा. और आखिर कार उसे मेरे ऊपर पानी डालना पड़ा.

चिराग- लेकिन ऐसी क्या मज़बूरी आगयी जो तुझे ध्यान लगाना पड़ा.

मैं- ऐसे hi मन किया तो लगा लिया. अब इसमें मज़बूरी कैसी.

प्राची- बैसे ये अच्छी बात है. ध्यान लगाने से मन shan't रहता है और डबल स्पीड से काम करता hai.sabhi को ये करना चाहिए.

लकी- फ़िलहाल मुझे तो कोई जरुरत नहीं है. तुम दोनों तरय कर सकते हो.

चिराग- मुझे भी जरुरत नहीं. बैसे मैंने एक बार तरय किया था. तो मुश्किल से 10 मं. तक टिक पाया था. ये टाइम ऐसा लग रहा था जैसे कई घंटे निकल गए हो. और ये कह रहा है की इसे लग रहा था की केवल कुछ मं. Hi गुजरे है जबकि 4 घंटे तक बैठा रहा ये.

हमारी ऐसे hi बाटे चलती रही. सलग के बाद हम सभी घर निकल गए. रस्ते में मैंने चिराग को उसके घर छोड़ा और अपने घर की तरफ निकल गया. अभी थोड़ी hi दूर गया था की मुझे रस्ते में एक पुलिस जीप दिखाई दी. और उसके बाजु में खड़ा एक पुलिस वाला. उसकी यूनिफार्म से hi लग रहा था की ये कोई सीनियर रैंक का अफसर है. उसने मेरी बाइक को हाथ दिखाया तो मैंने उसके बाजु में अपनी बाइक को रोक लिया..

वो मेरे पास आया.

मैं- hello सर.

ैप- hello देव

मैं- आप मेरा नाम जानते है.

ैप- सिर्फ नाम hi नहीं सब जनता हु.

मैं- तो कहिये में क्या मदद कर सकता हु आपकी.

ैप- दरअशल में उस रात के बारे में जानना चाहता हु. जिस दिन इस रोड पैर वो एक्सीडेंट हुआ था और तुमने पुलिस को बुलाया था. और उसी रात में हमारे 5 अफसर गायब हो गए थे.

मैं- मुझे जो पता था वो में आलरेडी बता चूका हु. अब और क्या बताऊ.

ैप- बही बताओ दोबारा से. वो क्या है मेरी यहाँ नई पोस्टिंग हुई है. और मुझे यही केस मिला hai.to में फिर से सब तहकीकात कर रहा हु.

मैं- ओह्ह तो ये बात है. अच्छा है. तो उस रात ये हुआ था की.

मैंने उन्हें साडी घटना बिगतबार बता दी. की क्या हुआ था.

जिसे सुनने के बाद वो कुछ सोचने लगे और में उनकी तरफ एकटक देख रहा था. करीब 2 मं. बाद अचानक से मुझे फिर से कुछ आवाज आने लगी.

ये लड़का सच बोल रहा है. लेकिन मुझे कुछ और भी आभास हो रहा है. जिसे में पहचान नहीं प् रहा हु. क्या है ये. मुझे सब से बात करनी होगी.

ैप- mr.dev.

उन्होंने थोड़ा जोर से बोलै तो मेरा ध्यान टूटा.

मैं- है सर.

ैप- कहा खो गए थे. आप.

मैं- कही नहीं बस इसी जंगल के बारे में सोच रहा हु. की आखिर ऐसा क्या है इसमें जो इतने लोग गायब हो गए यहाँ से.

ैप- don't वोर्री मर. देव. हम जल्द hi पता लगा लेंगे. आप बिलकुल भी टेंशन न ले.

मैं- है मुझे आपकी बात पैर यकीन है. अच्छा अब में चलता हु.

ैप- ok मुझे भी कुछ काम याद आया है. मुझे भी जाना होगा.

मैं- ok bye. एंड टेक केयर.

ैप- शामे हेरे.

ये कहके में बहा से अपनी बाइक को स्टार्ट करके आगे बाद गया. और रस्ते में मैं सोचने लगा की ये किसकी आवाज मुझे सुनाई देने लगी है. सुबह की आवाज रेनू की थी. और अभी की आवाज वो ैप की. ये सब क्या हो रहा है कुछ समाज में नहीं आरहा है. यही सब सोचते सोचते में घर पहुंच गया. आज मंदिर में कोई पथ नहीं हो रहा था. वर्ण में जरूर जाता बहा पैर. अब पता नहीं क्या हुआ है.

कीप सपोर्टिंग……………...

 
थैंक्स एवरीवन......

अपना साथ बनाये रखे ताकि आप सभी को टाइम तो टाइम अपडेट मिलता रहे. .....

एंड रही बात असुरो की प्लानिंग की और देव के उसमे फसने की तो. देखते है की आगे क्या होता है. बाकि इतना तय है की जो भी होगा धमाकेदार hi होगा.. आप लोग बस साथ बने रहे.....

.कीप सपोर्टिंग..............
 
बीआरओ आपकी बात से में भी सहमत हु. मैंने भी ऐसी कई स्टोरी देखि है. इसीलिए थोड़ा अलग लिखने की कोसिस कर रहा हु. ताकि कुछ नयापन आये स्टोरी में. बाकि देखते है आगे क्या होता है. और इन्सेस्ट तो ऐड नहीं होने वाला. और रही बता हीरोइन की तो उसका फैसला अभी नहीं हो पाया है. जल्द hi उसके बारे में सबको अपडेट के जरिये. बता दूंगा.........

.कीप सपोर्टिंग.............
 
अपडेट 16



में घर पैर पंहुचा फ्रेश हुआ और नीचे आज्ञा. जहा बढ़िया कॉफ़ी मेरा इन्तजार कर रही थी.

मैं- और दादू क्या बात है आज कल आपके पास मेरे लिए टाइम hi नहीं है.

दादू- है ये डाइलोगे मेरा है. समझा क्या. बहु जरा इसे बताओ ये बात.

माँ- पिताजी सही कह रहे है. तू आजकल बहुत अलग बेहवे कर रहा है. आखिर बात क्या है.

मैं- ये आपलोग क्या बात कर रहे है. मैंने कब अलग बेहवे किया. जो ऐसा कह रहे हो.

दादू- क्यों आज कल तेरा रूटीन बदल गया है. ध्यान में बैठने लगा है. और मेरे से तो बात करना hi बंद कर दिया है.

माँ- और मुझसे भी.

मैं- ये सवाल आप अपने आप से पूछो. जब से आपकी दोनों बेतिया आई है. आप दोनों उन्ही में लगे रहते हो. अब इसमें मेरी क्या गलती. ये दोनों तो फ्री है. लेकिन मुझे तो सलग जाना पड़ता है न. और दादू आप ये कैसी शिकायत लेके बैठ गए है. कितने दिन हो गए आपने मुझे एक जोड़ी कपडे तक ला के नहीं दिए. न hi मेरे लिए कोई गिफ्ट लेके आये. नाराज़ तो मुझे होना चाहिए. उल्टा आप हो रहे हो.

मेरी इस बात से दादू एक दम shan't पद गए. और माँ एक तक मेरा चेहरा देखने लगी. और रेनू और सुरभि का तो मुँह hi खुला रह गया.

रेनू- दादू ये क्या कह रहा है. इसकी शॉपिंग आप करते हो.

मैं- शॉपिंग नहीं. गिफ्ट्स.

रेनू- है बही. आपने मुझे तो कभी कोई गिफ्ट नहीं दिया.

दादू ने मेरी तरफ देखा और मैंने उन्हें आँख मार दी.

दादू- बीटा तुम दोनों यहाँ रहती hi नहीं हो. तो में गिफ्ट्स कहा दू तुम्हे. ये यही रहता है तो कभी कभार इसको कुछ का कर दे देता हु. अब जबसे तुम दोनों आई हो. सारा दिन घर में hi घुसी रहती हो. न तो खुद कही बहार जाती हो न hi मुझे साथ ले जाती हो. तो में गिफ्ट्स कब लेकर दू तुम लोगो को.

रेनू- दादू आप अकेले भी तो जा सकते है न.

दादू- अकेले जाने में क्या मजा बीटा जी. जब सब साथ में होते है तब ज्यादा मजा आता है. एक काम करते है. अभी चलते है सभी. बडिय बहार hi खाना खाएंगे कुछ शॉपिंग करेंगे.

माँ- आज नहीं कल चलेंगे. आज मैंने खाना बना लिया है. वो सारा वास्ते हो जायेगा.

मैं- है ये सही रहेगा. बैसे भी इनकी शॉपिंग में रात के 12 बज जायेंगे. और में इतनी देर तक भूका नहीं घूम sakta.or न hi दादू. क्यों सही कहा न मैंने डा दू.

दादू- है बिलकुल ठीक. कल चलेंगे

सुरभि- मजा आएगा. चल रेनू हम लिस्ट बना लेते है हमें क्या क्या चाहिए है. ताकि कल ज्यादा टाइम बर्बाद न हो.

रेनू- ठीक है. लेकिन दादू कल कोई बहाना नहीं चलेगा.

दादू- बीटा में तुम लोगो से ज्यादा एक्सीटेंड hu.kal के लिए.

रेनू- ok

उसके बाद दोनों जल्दी से अपने कमरे में घुस गयी कल की लिस्ट बनाने के लिए. एंड दादू ने मेरी तरफ देखा और मैंने अब बहा से खिसकने में hi भलाई समझी.

दादू- ऐ रुक. कहा भाग रहा है.

माँ- बीटा ये सब क्यों कहा तूने.

मैं- माँ में तो बस दादू की तंग खींच रहा था. और साथ में ये भी इशारा कर रहा था की काफी दिन से कोई भी कही घूमने नहीं गया है. ये दोनों यहाँ घूमने आई है दोनों दिन भर घर में hi घुसी रहती है. न तो आपलोग उन्हें बहार जाने देते हो. जंगल के दर की बजह से. इसलिए मैंने सोचा की सब साथ में चलेंगे तो मस्ती और घूमना सब साथ में हो जायेगा.

दादू- लेकिन गिफ्ट्स की बात क्यों कही तूने उनको. वो क्या सोचेंगी मेरे बारे में की मैंने अपने पोते को खूब गिफ्ट्स दिए है और अपनी पोती को कुछ नहीं दिया.

मैं- दादू आप कुछ ज्यादा hi सोच रहे है. रेनू समझदार लड़की है. और रही बात गिफ्ट्स की तो एक तरह से ये सच भी है. वो जबसे दिल्ली गयी है आपने उसे कोई भी गिफ्ट नहीं भेजा है.

दादू- में जनता हु ये बात. इसीलिए मैंने एक सरप्राइज गिफ्ट आलरेडी माँगा लिया था. और उसे में बाद में देने वाला था.

मैं- तो कल hi दे देना. डबल खुश हो जाएगी वो.

दादू- अब कोई रास्ता भी नहीं बचा है. में सोच रहा था जिस दिन वो दोनों जाएँगी तब दूंगा उनको लेकिन अब कल hi देना पड़ेगा. चलो कोई न. लेकिन आगे से ध्यान रखना समझा.

मैं- ok. बैसे बात क्या है आप आज कुछ सीरियस मूड में लग रहे है. कुछ ऑफिस का टेंशन है क्या.

दादू- है छोटा सा टेंशन है. लेकिन तू फ़िक्र मत कर में हैंडल कर लूंगा.

मैं- कैसी बात करते हो दादू. मेरे होते हुए आपको कोई और टेंशन दे ये मुझे तो बिलकुल भी मंजूर नहीं है. ये सिर्फ मेरा काम है. जरा बताओ मुझे की किसने आपको टेंशन दी है.

दादू- देख रही हो बहु क्या कह रहा है ये.

माँ- मेरे हिसाब से तो सच hi कह रहा है. एक यही तो है जो आपको सच में टेंशन में दाल सकता है. बाकि किस्मे इतनी हिम्मत है.

दादू- सच कहा तुमने.

मैं- तो अब बता भी दीजिये.

दादू- अरे बीटा ऐसी कोई बड़ी बात नहीं है. दरअशल कोई बिजनेसमैन है जो जबरदस्ती हमारी कंपनी के शेयर्स खरीदना चाहता है. मैंने उसे सीधे न कह दिया. जब हमें बेचना hi नहीं है तो कोई खरीदेगा कैसे. तो वो मुझे धमकी देने लगा. बस तो मैंने उसे अच्छे से समझा दिया है. अब वो कभी हमारे रस्ते में नहीं आएगा.

मैं- बैसे कोण है वो. जरा नाम तो बताइये.

दादू- उसका नाम है. सुरेंद्र राणा. कुछ बड़े नेताओ का सपोर्ट है इसलिए इतना उछाल रहा है. जब मैंने अपनी पहुंच उसे दिखाई तो रह गया वो.

मैं- बढ़िया किया दादू.

मैंने ये कहके दादू की आँखों की तरफ देखा. जो मुझसे छिपा रहे थे. थोड़ी hi देर में मुझे दादू की आवाज सुनाई दी.

अब कैसे कहु इसको की उसने मुझे सबको जान से मरने की धमकी दी है. और अब मेरे में इतनी हिम्मत नहीं की में इस आगे में अपने बचो की लाशो को देख सकू. इसलिए अब मुझे उसकी बात माननी hi पड़ेगी.

ये आवाज सुनते hi में समाज गया की मामला काफी आगे बाद गया है. अब मुझे इसे कुछ अलग तरीके से सोल्वे करना पड़ेगा.

मैं- दादू एक काम करते है. कल वैसे भी सलग तो जा नहीं पाउँगा. तो सोच रहा हु. कल ऑफिस चला जाये. थोड़ा सबसे जान पहचान भी कर लूंगा. आखिर सबको पता तो चले की में हु कोण. क्या ख्याल है आपका.

दादू- बैसे आईडिया अच्छा है. लेकिन तू पहले अपनी पड़े तो पूरी करले. ये बिज़नेस तो फिर तुझे hi संभालना है.

मैं- दादू मन आपकी बात सही है. लेकिन ऑफिस में सबके चेहरे तो मुझे पता चले की कोण क्या करता है. क्या नहीं. कोण अपना है कोण paraya.kyu माँ मैंने कुछ गलत कहा क्या.

माँ- पिताजी मेरा मन्ना है की देव को जाना चाहिए. वो अभी से सीखेगा जब तो आगे चलकर संभल पायेगा बिज़नेस. और लोगो की परख करना आपसे बेहतर कोई नहीं सीखा सकता देव को. इसलिए कल आप इसको ले जाना अपने साथ.

मैं- और दादू में कहा रोज आने वाला हु. कल hi की तो बात है.

मेरे और माँ के जोर देने पैर दादू मान गए. और में अब कल का बेसब्री से इन्तजार करने लगा.

बही दूसरी तरफ वो दैत्य ैप ने मंद तो मंद अपने सरे साथियो को रात में मिलने के लिए बुलाया. उसी जंगल में.

चारो बही पैर आगये टाइम पैर.

डी2- ऐसी क्या बात थी जो हमें ऐसे अचानक बुलाया.

डी1- बैसे बात कितनी खास है या नहीं ये में दावे के साथ नहीं कह सकता हु. लेकिन बात में थोड़ा hi सही दम तो जरूर है.

डी3- अब बता भी दो.

डी1- एक लड़का है जिसपर मुझे शक हुआ है.

डी2- कैसा शक.

डी1- यही शक की उस लड़के में कुछ खास बात तो है. में जब उसके पास में था तो मुझे बहुत अजीब सा एहसास हो रहा था. लेकिन कुछ कन्फर्म नहीं हो रहा tha.ki वो एहसास आखिर किस बात का है.

डी4- बैसे कोण है ये लड़का.

डी1- याद है कल मैंने कहा था की एक लड़के ने पुलिस में शिकायत की थी की इस जंगल से लोग गायब हो रहे है.

डी2- है याद है. और तुमने ये भी कहा था की सायद बही शक्ति हो. लेकिन हमने बाद में उसे नकार दिया था.

डी1- है में उसी लड़के की बात कर रहा हु. में आज उससे मिला था. इसी जंगल के बारे में पूछताछ करने के लिए. उसने शामे बही बताया जो उस रिपोर्ट में लिखा था. लेकिन उसके पास आते hi मेरा डिल बेचैन सा होने लगा था. मुझे पता नहीं क्यों थोड़ी घबराहट सी हो रही थी. मुझे कुछ अजीब सा एहसास हो रहा था. मैंने अपनी शक्ति से उसके बारे में जानने की कोसिस की. उसका मंद रीड करने की कोसिस की. लेकिन में उसे नहीं पद पाया. जिस बजह से मुझे उस पैर डाउट हुआ है.

ये सब सुनने के बाद उन चारो का भी दिमाग हिल गया की कही जिसकी तलाश में वो लोग आये है. वो इंसान देव hi तो नहीं.

डी2- तुम्हे यकीन है की तुम्हे कुछ अजीब सा एहसास उसी की मौजूदगी में हो रहा था. किसी और की नहीं.

डी1- मुझे पूरा 100% यकीन है अपनी बात पैर.

डी4- फिर तो उस लड़के से एक बार मिलना hi पड़ेगा. बैसे वो पड़ता कहा है.

डी1- मैंने पता किया है. वो उसी के दादा के द्वारा बनाये गए एक सलग में पड़ता है. उसका नाम है.*****************.

डी2- में इसी सलग में तो पड़ता हु.

डी4- फिर तो अच्छी बात है. बैसे भी हम अभी जिस जगह पैर जानकारी जूता रहे है. बहा पैर हमें कोई भी ऐसा इंसान नहीं मिला है. एक काम करते है में भी उसी सलग में पड़ना सुरु कर देता हु.

डी2- है तुम एक काम करो. उस सलग के किसी स्टूडेंट का रूप ले लो. और तुम भी उसी सलग में पड़ने वाले किसी मास्टर का रूप ले लो. और जिनका रूप तुम दोनों ने ले रखा है उसको बापिस उनके घर भेज दो. और उनकी जगह पैर उस सलग में पड़ने वाले और पड़ने वाले को भेज दो.

डी3- ठीक है. लेकिन ये सब करने से पहले हमें एक बार और पक्का कर लेना चाहिए की ये बकै में कोई खास है भी या नहीं.

डी2- ये भी ठीक है. एक काम करता हु. में कल उससे सलग में hi मिलता हु. अगर मुझे भी कुछ एहसास हुआ तो पक्का ये बही है. और बहा से में उसकी जानकारी भी निकल लूंगा. अगर शक थोड़ा भी पक्का निकला तो. उसके बाद तुम दोनों अपने रूप बदल लेना.

डी4- है यही ठीक रहेगा.

डी1- में पुलिस बनकर hi उसके वेयर में और जानकारी जुटाने की कोसिस करूँगा. और अगर ये वो नहीं हुआ तो किसी और का पता लगाने में भी आसानी होगी.

डी2- है ये ठीक है.

अब हमें चलना चाहिए.

उसके बाद ये चारो बहा से बापिस अपने अपने घर पहुंच गए. मतलब उसके जिनका इन्होने रूप लिया है.

और इनके जाने के बाद बहा पैर देवराज प्रगट हुए.

इंद्रदेव- बिलकुल सही रस्ते पैर जा रहे हो तुम लोग. बिलकुल अपनी मौत के करीब. जाओ जाओ.

ये कहके वो भी अंतर्ध्यान हो गए.



तो बे कॉन्टिनुए………………….
 
अपडेट 17



Next day. Me bahi apne routine se utha thodi exercise ki or uske baad dhyan me baith gya.

Maine aaj fir bahi sab kaha thirdeye se or vo mujhe fir se kisi lambe safar per le jane lagi. Or mera sir fir se dukhne laga. Lekin kal ki jagah aaj thoda kam dard ho raha tha. Me lagatar safar kar raha tha. Or ye safar Kyu ho raha tha isake bare me mujhe koi bhi idea nahi tha. Aakhir aisa Kyu ho raha hai. Isme bare me bhi mujhe abhi tak koi bhi idea nahi aaya tha. Na hi mujhe koi drishya dikh rahe tha. Na koi aawaj sunai de rahi thi. Or is process ko karne me dimaag ki band baj rahi thi vo alag. Ab mera man is dhyan ko yahi per todne ka karne laga tha. Kyuki mujhe abhi tak kuch bhi prapt nahi hua tha. Isliye maine is dhyan ko yahi per todne ka faisla kiya or jaise hi maine aakhe kholne ki kosis ki tabhi mujhe mere andar se ek aawaj aai.

Man- tehro vats.

Main-(man me) kon hai aap.

Man- vats mujhe apna guru samjho.

Main- kya aap mere samne hai.

Man- nahi me tumhare samne nahi hu. Me tumhare man me hu. Or usi ke karan me tumse baat kar pa raha hu.

Main- mujhe aapko dekhna hai. Aapse bate karni hai.

Man- baat to tum mujhse har waqt kar sakte ho. Lekin hamara milna abhi nahi ho sakta. Usme abhi samay hai.

Main- kitna samay hai.

Man- abhi bahut samay sesh hai.

Main- kya aap mere sare sawalo ke Uttar denge.

Man- isiliye to me aaya hu. Tumhe tumhare sawalo ke jawab dene or sath me tumhare is jeevan ke lakshya ko batane ke liye.

Main- to kripa kar ke mera margdarshan kare gurudev.

Gurudev- puchho vats kya Janna chahte ho tum.

Main- sabse pehle to ye ki me hu kon. Or mere andar ye shaktiya kyu hai. Or sabse jaruri ye ki jis TRINETRA ko bade bade sadhu or sant or Devta nahi khol paye hai. Me use itni aasani se kaise khol leta hu?

Gurudev- vats.tumhara janm ek mahan uddesya ko pora karne ke liye hua hai. Is sansar ke sangharak yani ki. Swayam MAHADEV. JO akele aise hai jinse TRINETRA ki rachana hui hai. Unhi ki teesri aankh se tumhara janm hua hai. Or yahi karan hai ki tum apni teesri aankh ko itni aasani se khol lete ho.

Ye sab sunne ke baad to jaise mera dimaag fatne ko ho gya. Ki ye kya keh rahe hai.

Main- ye aap kya keh rahe hai gurudev. Jaha tak hamare grantho ki baat hai to usme bhabisya ki sari yojnaye likhi hui hai. Lekin unme se kisi me bhi is prakar ke kisi bhi yojna ka jikr bhi nahi hai. To fir ye sab kaise sambhav hua.

Gurudev- bahut hi uttam prasn puchha hai tumne vats. Lekin me tumse kehna chahunga ki is ka jikr SHIV PURAAN me hai. Lekin usko spast roop se nahi likha gya hai jis bajah se kisi ne bhi is per jyada vichar nahi kiya hai. Na hi ise samjha hai. Tum SHIV PURAAN ka poora aadhyan karo. Or usme likhe har ek shabd ke matlab ko pora samajhne ki kosis karna tumhe tumhare is sawal ka jawab mil jayega.

Main- jaisi aapki aagya gurudev. Parantu ek prashn or hai man me.

Gurudev- puchho vats.

Main- prabhu Mera mata ek sadharan stree hai. To unhone itni shaktiyo ko apne garv me kaise rakha. Jaha tak me janta hu kisi aam insan ko agar koi chhoti si bhi shakti di jati hai to use bahut peeda hoti hai. Fir yaha to swayam MAHADEV ki shaktiya samahit thi. Ye chamatkar kaise hua gurudev.

Gurudev- vats sayad tumne dhyan nahi diya. Tumhara janm hona saakshat ishwar ki iksha thi. To fir vo kaise tumhari mata ko kuch hone dete. Swayam ishwar ne tumhari mata ko itni shakti pradan ki thi ki vo tumhe bina kisi kasht ke dharan kar sake. Or usi ke falswaroop tumhara janm hua hai.

Main- gurudev aapne mere janm ki guthi to suljha di. Ab kripa kar ke ye bhi bataye ki me hi kyu. Or aisa kon sa karya karna hai mujhe. Jiske liye mujhe itni shaktiya pradan ki gayi hai.

Gurudev- vats ham tumhare har sawal ka jawab dene hi aaye hai. Lekin ye sab ek din me nahi ho sakta hai. Isliye apne in prashnon ko kal ke liye chhod do. Or aaj ki shiksha ko aage badhne do.

Main- jaisi aapki aagya gurudev. Aadesh kare.

Gurudev- vats tumhare andar punchmahabhuto ki shaktiya hai. Or yahi kaaran hai ki tumne us din keval sochne matra se un danavo ka ant kar diya tha. Parantu tumhari shaktiya abhi seemit hai. Or Tum aadhe Devta or aadhe insan ho. Jis bajah se tumhare andar bahut sari khubiya bhi hai. Or tumhe apni harek khubi ko pehchanna hoga.

Main- aapne kaha ki meri shaktiya seemit hai. Iska kya arth hai gurudev.

Gurudev- vats iska jawab me tumhe samay aane per dunga.filhaal tumhe apni sari seemit shaktiyo ko jaagrit karna hoga. Baise tumhe ye to gyat hai na ki ye punchmahabhut kya hote hai.

Main- guruvar mujhe keval itna pata hai ki ye kisko kehte hai. Lekin inko ye Kyu kehte hai ye mujhe nahi pata hai. Kripa karke mujhe bataye. Ki ye punchmahabhut kya hai. Or unhe aisa kyu kehte hai.

Gurudev- vats to suno. JAB BRAHMADEV KO IS SANSAR KI RACHNA KARNI THI. TO UNKE MAN SE SABSE PEHLE "AKASH" (SPACE) KA NIRMAN HUA. AAKASH SE "BAYU" (AIR)

BAYU SE "AGNI" (FIRE)

AGNI SE "JAL" (WATER)

OR

JAL SE "PRITHVI" (EARTH)

KA EK KE BAAD EK NIRAMAN HOTA CHALA GYA. OR EK EK GUNO KI BRIDDHI SE PANCHO PUNCHMAHABHUT KEHLAYE.

Aakash me gun- SHABD

BAYU ME GUN- SHABD+SPARS

AGNI ME GUN- SHABD+SPARS + RUP

JAL ME GUN- SHABD+SPARS

+RUP+RUS

PRITHVI ME GUN- SHABD +SPARS+RUP+RUS+GANNDH

yahi inki visheshta hai. aakash me kami thi. Jis bajah se aakash se Bayu ka nirmaan hua. Jisme aakash se jyada gun the. Parantu vo bhi paryapt nahi the. Isliye BAYU se agni ka nirmaan hua jisme BAYU se jyada gun the. Parantu vo bhi paryapt nahi the. Isliye Agni se jal ka nirmaan hua jisme agni se jyada gun the parantu vo bhi paryapt nahi the isaliye ant me jal se is prithvi ka nirmaan hua. Jisme in panchon ke gun the. Matlab ki inke bina ye prithvi kisi kaam ki nahi or prithvi ke bina ye charo kisi kaam ke nahi. Or fir uske baad inhi tatvo se samast praniyo ka nirman hua hai. Lekin inse Jo bhi banta hai vo nirjeev hota hai. Jaise ki ped podhe,pathar aadi. Inme aatma ki kami hoti hai. Jise swayam parmatma ne sabhi ke andar apni ikchha shakti se dala or sabhi nirjeev jeevit ho gye.

Main- to kya in sansar me moujood har kisi ke andar aatma hoti hai.

Gurudev- ha vats fir chahe vo koi pathar ho ya pahad koi chhota sa keeda ho ya fir koi hathi jaisa bada jaanvar vo insan ho ya fir koi danav vo koi podha ho ya fir koi Vishal ped. Har kisi ke andar aatma hoti hai. Jo inhe jeevit rakhta hai. Or ye aatma sabhi me ek seemit samay ke liye hoti hai. Or jab uski samayabdhi samapt ho jati hai to vo swayam us ishawar ke pass bapis chali jati hai. Yahi hai is shristi ka niyam or yahi hai in punchmahabhuto ka kaam. Inme nirmaan or vinash dono ki shaktiya hoti hai. Jab swayam ishwar inhe aadesh dete hai tab ye apne vikraal roop me aati hai. Or sabhi ka ant kar deti hai. Taki ek nayi shuruwat ki ja sake.

Main- gurudev jab ye swayam ishwar ke adhin hai to fir inki shaktiya mere andar Kyu hai.

Gurudev- vats Kyuki yahi niyati hai. Tumhara janm MAHADEV ki teesri aankh se hua hai. Or MAHADEV ki teesri aankh inhi punchtatvo ka prateek kahi jati hai. Isliye jo ans MAHADEV ki teesri aankh se nikal kar tumhari ma ke garbh me pahucha usme na chahte hue bhi in punchtatvo ki shaktiya aagyi. Ye shaktiya tumhare pass aayi hai to iske peeche bhi koi na koi Karan jarur hoga. Kyuki ishwar agar apni palak bhi jhapakte hai to usme bhi is sansar ka koi na koi bhala chhipa hota hai. Fir yaha to ek santaan ki utpatti Hui hai. To socho kitan mahan karya hoga. Isliye tumhe ab in sari shaktiyo ko swikaar karna hoga. Unhe pehchanna hoga.

Main- me samaj gya gurudev. Kripa kar mujhe bataye ki me ye kaise karu.

gurudev- vats tum roj dhyan lagate ho. Jisse tumhari shaktiya jaagrit hoti hai. Parantu tum apni kisi bhi shakti ko pehchante nahi ho. Uska kaise upyog karna hai ye bhi nahi jante ho. Isliye sabse pehle tumhe khud ko janna prarambh karna hoga. Uske liye tum ab jab bhi dhyan lagao tab apne andar ki shaktiyo ko pehchanna ki kosis karo. Or un shaktiyo ka parikshan karo. Taki samay aane per tum unka istemaal kar sako.

Main- me samaj gya gurudev. Parantu mere parikshan karne se kisi ko koi nuksan to nahi hoga na.

Gurudev- vats nuksan to avashya hoga. Kintu tum chinta Kyu karte ho. Abhi maine tumhe bataya ki ye samast sansaar inhi punchtatv se nirmit hua hai. Or inhi se Inka vinash bhi hota hai. Isliye tum Bina koi dar ke apni shaktiyo ka parikshan kar sakte ho. Kintu Bina bajah nahi. Abhi tumhari shuruwat hai isliye tum Inka parikshan kar sakte ho. Or jab tumhara prikshan pora ho jaye. Uske baad tumhe apni sari shaktiyo ka istemaal keval or keval is sansaar ki bhalai ke liye hi karna hoga.

Main- me samaj gya gurudev. to AAP bataiye gurudev ki main apni shaktiyo ko kaise jaagrit karu or Inka parikshan kaise karu.

Gurudev- vats tumhe keval dhyan lagana hai. Or dhyan me

ॐ नमः शिवाय

Ka jaap karna hai.tumhari teesriaankh tumhe khud tumhari shaktiyo se prichit karati rahegi.or jab tum apni shkatiyo se parichit ho jao tab tum kisi ekant jagah jakar inka parikshan kar sakte ho.

Main- me samaj gya gurudev aapne mera margdarshan kiya uske liye aapka aabhar. Ab maine vaisa hi karunga jaisa aapne kaha hai.

Gurudev- ati uttam vats. Ab hamare jane ka samay ho gya hai. Ham kal punah tumse bate karne aayenge.

Main- jaisi aapki ikchha guruvar.

Pranaam.

Gurudev- tumhara kalyan ho vats.

Iske baad gurudev ki koi bhi aawaj nahi aai.

Or main baise hi dhyan me baithe baithe hi gurudev ke diye gaye mantra ka jaap karne laga.

Or jaise jaise Mera jaap aage bad raha tha. Mere andar aseemit urja ka aabhas mujhe ho raha tha. Meri kuch kuch shaktiya jaagrit hone lagi thi jaise. Kisi ka dimaag padna is sansar ke har ek jeev ki bhasa ko samajna or unhe unhi ki bhasa me samjhana. Kisi insan ke dimaag ko kabu karna. Ye to keval mansik shaktiya thi. Ab sharirik shaktiyo ki baat ki jaye to aag or pani ko control karna. Is pore sansar me jo bhi vastu hai jiska nirman inhi punchtatvo se hua hai me in sabhi ko control kar sakta hu. Bijli,pani,agni,Bayu aadi. Ye sabhi shaktiya jaagrit hona prarambh hone lagi thi. Or me in sabhi ko mehsus kar raha tha puri tarah se.

Ab me pata nahi kab tak dhyan me baitha raha. Or akhir kaar mujhe gurudev ki aawaj aai ki

Gurudev- vats aaj ke liye bahut ho gya. Baki ab kal kar lena.

Ye aawaj sunte hi maine unhe pranam Kiya or apne dhyan ko sampurn kar diya. Or apni aankho ko khol diya. Or jab maine samne ka najara dekha to kitna khushhal mahol tha. Charo taraf chidiya chehak rahi thi. Ped podhe hawa me yaha baha jhoom rahe the. Me un sabko mehsus kar pa raha tha. Har ek ko. Maine time dekha to abhi subah ke 7 baje the. To maine socha aaj clg to Jana hai nahi to ab kya kiya jaye. Tabhi mujhe yaad aaya ki gurudev ne SHIVPURAAN padne ko kaha tha. Lekin ghar me to ye hai hi nahi. To maine socha kyuna ek baar or dhyan lagaya jaye or apni thirdeye ko hi bolu ki mujhe SHIVPURAAN KA SARA GYAN DO. Usse Ye kaam jaldi ho jayega.

Isliye maine ye tay kiya or fir se dhyan me baith gya. Or jab thirdeye open Hui to Maine man me SHIVPURAAN ko padne ka vichar Kiya. Or ye vichar karte hi. SHIVPURAAN ka sampurna gya usme likhi ek ek baat mere dimaag me fit hone lagi.

dheere mere dimaag me Puraan me likhi har ek baat or uska matlab fit hone laga. Or usi ke dwara aaj mujhe pata chala ki hamare Dharm me kitne ved puran shastra hai.

4 VED, 4 UPVED, 12 UPNISHAD

6 VEDANG, 6 SHASTRA,

18 PURAAN or 2 MAHAKAVYA.

TOTAL 52 GRANTH likhe gaye hai. Un sabhi me itna gyan tha or itne rehasya likhe hue hai jinke bare me aajke scientist sodh karte rehte hai. Sara gyan in grantho me moujood tha. Halaki isper scientist yakeen nahi karte hai jo alag baat hai. Baki mujhe to in sabhi bato per yakeen ho gya tha ye bhi ek fact tha.

Jab Sara gyan arjit ho gaya tab maine sabhi ko ek sath kiya or jaisa gurudev ne kaha tha ki sabhi jagah aaj ho rahi ghatnaon ka varnan hai to me unhe dhundne laga. To kai jagah mujhe halke halke prof mile aaj ho rahi sari ghatnaon ke.

Lekin saaf tour per kuch bhi nahi likha gya tha. Sayad isi bajah se jyada logo ne is baat per dhyan nahi Diya.

Or in sab bato ko padkar

Ab me samaj gya tha ki mera janm jarur kisi achhe uddeshya ke liye hi hua hoga. Or vo jo bhi hoga uske liye me tayyar hu.

Bahi dopehar me dadu ne mujhe office chalne ke ko kaha. To mujhe yaad aaya ki ha aaj to us surandra rana se milna hai. Chalo dekhte hai akhir aisi kya chull hai isko jo itna bawla ho raha hai company kharidne me.

Maine badiya ek Three peice suit pehana or ready hoke neeche aagya. Jaha dadu already jane ko tayyar baithe the. Or jab unhone or unke sath mom or renu or shurbhi ne mujhe suit me dekha to vo sabhi ek dum chakit reh gye. Kyuki me lag hi itna handsome raha tha.

Mom jaldi se mere pass aai or meri sari balaye leli. Or mujhe ek kala teeka laga diya peeche garden per.

Mom- najar na lage mere bete ko.

Shurbhi- bakai Bhai kya handsome lag rahe ho. Kash ki tum mere bhai na hote. To me sabse lad jati lekin shadi tumse hi karti.

Main- shurbhi man ki Khoobsurati Mayne rakhti hai na ki tan ki. Agar insan ka man khubsurat hai. To vo insan swayam bhagwan ka roop hota hai. Isliye bahiri sundarta ke bajaye antrik sundarta per jyada dhyan do samjhi.

Shurbhi- to tera man or tan dono hi sundar hai. Or aisa insan Milna bahut hi muskil hai. Bahut hi naseeb wali hogi meri bhabhi. Jiski shadi tumse hogi.

Main- ha ye baat to hai. Achha ye sab chhodo ready rehna ham 4 baje chalenge bahar ghumne.

Shurbhi- me pori tarah se ready hu. Lekin late mat karna

Main- bilkul nahi.

Maine dekha ki renu kuch bol nahi rahi hai.

Main- tujhe kya hua chuhiya.kya mujhe dekhkar tere sare hosh udd gye.

Renu- itna bhi handsome nahi dikhta hai tu. Isliye ye sare bhram apne man se nikal do. Or rahi baat tujhe ghurne ki to me ye soch rahi hu. Ki ab tu dhyan lagana band karde to badiya hai.

Main- or ye bhala Kyu.

Renu- vo isliye kyuki aajkal tu bahut hi aadhyatmik bate karne laga hai. Mujhe dar hai kahi log tujhe koi sadhu samaj kar teri puja na karne lage.

Is baat per mom ne renu ko rok diya.

Mom- ye kya keh rahi hai tu.

Renu- sahi keh rahi hu mom. Aapko to pata hi hai. Aaj kal logo ko koi do gyan ki bate Bata de to use pujne lagte hai. Or ye iski gyan ki bate sunkar kahi log ise bhi na pujne lage.

Halaki renu ki ye baat sahi bhi thi. To mom ne mujhe turant kaha.

Mom- beta renu ki baat sahi hai. Tu logo ko jyada gyan dene ki kosis na hi karna to behtar hai.

Main- mom aap bilkul tension na lo. Mera filhal koi bhi sadhu banne ka koi mood nahi hai.

Dadu- ha is ware me kisi ko bhi tension lene ki koi jarurat nahi hai. Ye mera pota hai. Ye aisa kuch nahi karega.

Main- thanks dadu. Ab hame chalna chahiye.

Dadu- ha chalo.

Iske baad ham chale gye office. Or ab mujhe keval surendra ka intjaar tha ki vo kab tak aata hai. Itna to tay tha ki vo aayega to jarur aaj. Ab dekhte hai kya hota hai………

To be countinue………………...
 
अपडेट 18



मैं और दादू दोनों hi ऑफिस के लिए निकल चुके the.raste मैंने देखा दादू कुछ परेशान से दिख रहे थे. जो उनके चेहरे से साफ़ झलक रहा था.

मैं- दादू आपको परेशान होने की कोई जरुरत नहीं है.

मेरी इस बात से दादू थोड़े चौके.

दादू- क्या?

मैं- दादू आपको परेशान हो ने की जरुरत नहीं.

दादू- भला मैं क्यों परेशान होने लगा.

मैं- दादू में आपका पोता हु. और आप चाहे पूरी दुनिआ को घुमा दे लेकिन मुझे नहीं घुमा सकते. में जनता हु आप उस सुरेंद्र को लेके परेशान है. और ये भी जनता हु की आपने मुझे पूरी बात नहीं बताई है. जिस बजह से में आपसे थोड़ा नाराज़ भी हु.

दादू- ये तुम क्या कह रहे हो. में भला तुमसे क्या छिपाऊँगा.

मैं- अच्छा जरा मेरी कसम खा कर बोलो की आपने जो घर पैर कहा था वो पूरा सच था और उसके अलावा उस सुरेंद्र के साथ और कोई पन्गा नहीं हुआ है आपका.

मेरी ये बात सुनते hi दादू एक डैम से हड़बड़ा गए.

मैं- खाइये मेरी कसम.

दादू- में ऐसे छोटे मोती बातो के लिए कसम नहीं खता हु. और बैसे भी आज मैंने भरपेट नास्ता किया है जिस बजह से अब कुछ भी खाने का मेरा मन नहीं है.

मैं- बहुत बढ़िया जोके था.

दादू- है न.

मैं- बात मत घुमाओ. और सच बताओ आपको मेरी कसम है.

दादू- तू क्यों इसमें पद रहा है. में संभल लूंगा उसे.

मैं- में ये बात जनता हु. लेकिन आपका पोते होने के नाते मेरी भी कुछ जिम्मेदारी है. जिनसे में पीछे नहीं हैट सकता. मेरे होते हुए कोई आपको परेशान करे और में चुपचाप बैठा राहु. ऐसा कभी नहीं हो सकता.

दादू- सच कहु तो आज तेरी बाटे सुनकर तेरे डैड की याद आगयी. वो भी शामे ऐसे hi बाटे करता था. लेकिन एक एक्सीडेंट ने मेरा सब कुछ चीन लिया. और अब सिर्फ कुछ hi लोग बचे है कैसे तुम बहु और रेनू. जिन्हे में नहीं खो सकता. इसी लिए मैंने किसी को इसके बारे में नहीं बताया है.

मैं- दादू हम आपकी कमजोरी नहीं है. बल्कि आपकी ताकत है. और मुश्किल वक़्त में अपनी ताकत दिखने से कभी नहीं चिकना चाहिए. और इस वक़्त आपको अपनी ताकत दिखानी hi होगी. इसलिए कह रहा हु. मुझे बताइये क्या बात है. सायद में आपकी कोई मदद कर saku.pls दादू.

दादू- ठीक है अब तुम इतना फाॅर्स कर रहे हो तो बता देता हु. लेकिन घर पैर इसका जिक्र न करना. खामखा सब परेशान हो जायेंगे.

मैं- प्रॉमिस

दादू- दरअशल ये सुरेंद्र हमारा पुराण दुश्मन है. पहले ये हमारी hi कंपनी में काम करता tha.bada hi होसियार बाँदा है ये. काम भी लगन से करता था. लेकिन एक दिन तुम्हारे पिता ने अक्स. चेक किये तो उसमे पोरे 100 कर. का घपला सामने आया. हम सब शॉक में थे की ये कैसे हुआ और किसने किया. 100 कर. कोई मामूली रकम नहीं थी जिसे हम भूल जाते. हमने पुलिस की मदद ली. उन्होंने अपने तरीके से छानबीन की तो सबसे पहला नाम सामने आया सुरेंद्र का. ये हमारे लिए दूसरा शॉक था. हलाकि हमें इस बात पैर बिलकुल यकीन नहीं था. लेकिन उसके खिलाफ हमें कुछ मामूली से एविडेंस मिले थे. लेकिन वो काफी नहीं थे उसे जेल पहुंचने के लिए. इसलिए पुलिस ने चुपके से उसके घर की तलाशी ली. जिसमे उन्हें एक हार्डड्रिवे मिली. और उस ड्राइव में सुरेंद्र के खिलाफ पुख्ता सबूत थे. उसके बेनामी अक्स. में पोरे रूपए डेल हुए थे. अब सबूत हमारे हाथ लग चूका था. इसलिए पुलिस ने उसे फ़ौरन अरेस्ट करने के लिए वररेंट जारी कर दिया. लेकिन उस दिन सुरेंद्र नहीं मिला पुलिस को.

मैं- क्या वो भाग गया था.

दादू- नहीं उसकी लाश मिली थी. उसी के घर में. दरअशल जब पुलिस उसके घर पहुंची तो पोरे घर में भयंकर आग लगी थी. जिसे कई घंटों की म्हणत के बाद काबू किया गया. और जब पुलिस अंदर गयी तो बहा उन्हें किसी भुने हुए मुर्गे की तरह सुरेंद्र की लाश mili.police को पहला लगा की शायद ये कोई और है इसलिए उसका बढ़िया पोस्टमार्टम किया गया. और उसके पास से सुरेंद्र की ईद बगेरा भी मिली थी. और पोस्टमार्टम में भी ये साबित हो गया की यही सुरेंद्र था. हलाकि बॉडी को पहचाना नहीं जा सकता था. लेकिन उसके खून के सैंपल से पुलिस कन्फर्म हो गयी की ये जो मारा है यही सुरेंद्र है.

मैं- लेकिन दादू पुलिस के पास सुरेंद्र के खून का सैंपल आया कहा से. जिसे उन्होंने मैच करके देखा.

दादू- दरअशल जिस होशपीटाल में उसका पोस्टमार्टम हुआ था. बही कुछ महीने पहले एक ब्लड डोनेट कैंप लगाया गया था. जिसमे हमारे ऑफिस के पोरे स्टाफ ने ब्लड डोनेट किया tha.jisme सुरेंद्र भी शामिल था. और उसी ब्लड को सुरेंद्र की बॉडी से मैच किया गया था. जो 100% मैच था.

मैं- हम्म्म तो अगर सुरेंद्र मर चूका है तो ये कोण है जिसकी बात कल आपने की थी.

दादू- ये एक बिजनेसमैन है जिसका नाम है. परेश पाश्वन. ये कई महीनो से मुझसे बात कर रहा था कंपनी के शेयर को लेके. लेकिन मैंने उसे हर बार मन कर दिया. तो 2 दिन पहले ये मेरे ऑफिस में मिलने आया और उसने बहा कुछ ऐसा बोलै जिसे सुनके में पूरा हक्का बक्का रह गया.

मैं- ऐसा क्या बोलै उसने.

दादू- उसने बताया की बही सुरेंद्र है जिसने पहले अपनी कंपनी में 100कर. का घोटाला किया था. ये बात मेरे लिए काफी शॉकिंग थी. और यकीन करने लायक तो बिलकुल नहीं थी. तो मैंने उससे कहा की वो तो मर चूका है. सायद तुमने पूरी तरह से जाँच नहीं की है. तो इसके जवाब में उसने बताया की. जिसकी लाश बहा पैर मिली थी. वो एक दूसरा बाँदा था. जिसका ब्लड ग्रुप सुरेंद्र से मिलता जुलता था. तो सुरेंद्र में उसे बेहोश करके बही छोड़ दिया और घर में आग लगा दी. जिसमे वो पूरी तरह से जल गया. ताकि उसकी पहचान न हो पाए. और रही सही कसार उस होशपीटाल के डॉक्टर ने पूरी कर दी. जिसे पैसे खिलाकर ये रिपोर्ट बनाने को कहा गया की ये सुरेंद्र की hi बॉडी hai.taki ये केस बंद हो जाये. और हुआ भी ऐसा hi. उसके बाद वो यहाँ से बहार चला गया. उसने जो 100 कर. का घोटाला किया था उसमे से उसने थोड़े पैसे किसी अलग अक्स. में छिपा रखे थे. जिसकी जानकारी उस ड्राइव में नहीं thi.or उन्ही पैसो से उसने अपना चेहरा पूरी तरह से बदलवा liya.or एक अमीर लड़की फसा कर उससे शादी कर ली. और उसकी जायदाद को टेकओवर कर लिया. और अब वो यहाँ हमारी कंपनी को खरीद कर हांसे बदला लेने चाहता है की हमारी बजह से उसे ये सब करना पड़ा. और उसके बाद वो हमारी कंपनी को बर्बाद करके बंद करना चाहता है. और ये सब सुनने के बाद भी मुझे लगा की ये कोई कहानी बना रहा है सायद. तो उसने मुझे सुरेंद्र की कुछ पुराणी आदते कुछ बाटे जो केवल में hi जनता था वो सब भी बताई. और भी उसने कई सबूत दिए इन सबके. और जब में कन्फर्म हो गया की यही सुरेंद्र है तो मैंने उसे पुलिस के हवाले करने की धमकी दी. तो उसके बदले उसने मुझे भी धमकी दी. और साथ में कुछ और बाटे भी बताई जिसे सुनने के बाद में टूट गया. और समाज गया की इससे पन्गा लेना मेरे बस की बात नहीं है. और न hi मुझमे अब इतनी हिम्मत है.

मैं- दादू कैसी धमकी और बाटे बताई उसने.

दादू- उसने कहा की तुम्हारे पिता का एक्सीडेंट उसने hi कराया tha.jaanbhuj kar.kyuki उन्ही ने उस फाइल को देखा था सबसे पहले जिसमे उस घोटाले का जिक्र था. और साथ में उसने ये धमकी दी की जैसा उसने मेरे बेटे को मारा था बैसे hi वो और भी एक्सीडेंट करवा सकता है जिसमे तुम रेनू और बहु की जाने भी जा सकती है. और सभी को लगेगा की ये तो बस एक एक्सीडेंट hi था. वो इंसान पूरी तरह से पागल है. एक साइको है. वो कुछ भी कर सकता है. और उसने मुझे एक वीडियो दिखाया जिसमे मेरा बीटा अपनी आखिरी ससे गईं रहा था. लेकिन बहा पैर कोई ऐसा नहीं था जो उसे बचा सकता. क्युकी बहा वो सुरेंद्र मौजूद tha.or उसी ने ये वीडियो बनाया और मेरे बेटे को जान से मार डाला. और ये सब बाटे उसने मुझे केवल डरने के लिए hi बताई है ताकि में टूट जाओ और सब कुछ उसके नाम कर दू. और बाद में वो हम सबको आसानी से मार दे. और किसी को इस बात की कानो कान खबर भी नहीं हो. उसके जाने के बाद मैंने इस बारे में बहुत सोचा. और आखिर में फैसला लिया की में उसे सब कुछ दे दूंगा और हम यहाँ से कही दूर चले जायेंगे जहा वो हम तक कभी नहीं पहुंच पाए. में पुलिस की मदद भी ले सकता हु. लेकिन उसके खिलाफ मेरे पास एक भी सबूत नहीं है. वो जब मुझे ये सब बता रहा था. तब मैंने उसकी साडी बातो को अपने केबिन में कक्तव में रिकॉर्ड किया tha.lekin जैसे hi उसकी बाटे ख़त्म हुई वो रिकॉर्डिंग अपने आप डिलीट होगयी. और उसने मुझे बताया की उसके एक आदमी ने इस ऑफिस के कक्तव को हैक किया और सब कुछ डिलीट कर दिया. और दूसरी बात ये की वो जो नकली नाम इस्तेमाल कर रहा है. ये नाम आजकी डेट में इंडिया का एक बहुत बड़ा बिज़नेस मन है. जिसे कई पोलिटिकल पार्टीज सपोर्ट करती है. जिनकी बजह से इसे पुलिस भी हाथ नहीं लगाती है.

ये सब सुनने के नाद मैंने कार को एक साइड में रोक लिया.

मैं- दादू इतना सब हुआ और आपने मुझे कुछ भी नहीं बतया. क्यों?

दादू- बीटा में तुम्हे खोना नहीं चाहता हु इसलिए. मुझे पता है की ये सब जानने के बाद तुम उसके पीछे जरूर जाओगे. और इस लड़ाई में अगर तुम्हे कुछ हो गया तो में तो जीते जी मर hi जाऊंगा.

मैं- दादू आपकी इस वक़्त क्या सिचुएशन है में समाज प् रहा हु. लेकिन दादू प्लस आप कमजोर मत पदों उसके सामने. वो यही तो चाहता है की हम उसके सामने झुक जाये. और मैं ऐसा कभी नहीं होने दे सकता. आपको हिम्मत दिखानी होगी. बाकि आप मुझपर छोड़ डीईजीए. में सब संभल लूंगा.

दादू- कैसे सम्भालिये तुम

मैं- वो आप मुझपर छोड़ दीजिये. में आपको बाद में बताऊँगा. फ़िलहाल मुझे बताइये वो आज आने वाला है.

दादू- है 2 बजे आएगा वो.

मैं- ठीक है तो उससे में मिलूंगा. आप नहीं. में hi उससे डील करूँगा.

दादू- लेकिन बीटा.

मैं- प्लस दादू मुझपर यकीन रखिये.

दादू- ठीक है तुझे जो करना है कर. लेकिन एक बात का मुझे बिस्वास दे की तुझे या हमारे परिवार के किसी भी मेंबर को उससे कोई नुकसान नहीं होगा.

तो hi में तुझे आगे करूँगा. वर्ण नहीं

. मैं- दादू आपको में वादा करता हु. आज के बाद ये सुरेंद्र नाम का कटा हमारी जिंदगी से हमेशा के लिए निकल jayega.or उसके द्वारा हमारे परिवार को कोई भी खतरा नहीं होगा.

दादू- ठीक है. तो फिर चलो.

मैं- अब आप कैसा फील कर रहे है.

दादू- मुझमे एक अलग सी एनर्जी आगयी है. जिसने मेरे अंदर इतना जोश भर दिया है जिसकी कोई कल्पना नहीं है. थैंक्स बीटा.

. मैं- ये थैंक्स की जरुरत नहीं है. आपका पूरा हु. इतना तो कर hi शक्ति हु आपके लिए.

दादू- ठीक है तो चलो अब.

उसके बाद हम दोनों ऑफिस निकल गए जो अब ज्यादा दूर नहीं था. और 2 बजने में भी सिर्फ आधा घंटा hi बचा हुआ था. मैंने कार को पार्क किया और हम ऑफिस के अंदर कहले गए. जहा पैर सभी ने दादू को विश किया. हलाकि मुझे यहाँ काम hi लोग जानते थे. कुछ खास लोग hi जानते थे मुझे बाकिओ के लिए में अनजान था.

में दादू के पीछे चलता हुआ जा रहा था. और रस्ते में जितने भी लोग मिलते वो दादू को विश करते जा रहे थे. हम लिफ्ट से ऊपर गए और सीधे दादू के केबिन में पहुंच गए.

दादू- बैठो

मैं- दादू आपने मुझे किसी से मिलवाया क्यों नहीं.

दादू- पहले ये मामला सुझाव फिर सबसे एक साथ इंट्रो करवा दूंगा.

मैं- तो ये बात है. ठीक है दादू. आपका चलेंगे एक्सेप्ट किया.

दादू- गुड.

मैं- अच्छा दादू में डैड के केबिन में बैठता हु. जब वो आये तब मुझे बुला लेना.

दादू- ok केबिन आगे से लेफ्ट में है.

मैं- ठीक है.

मैं केबिन से बहार निकला और लेफ्ट में चला गया. जहा थोड़ा आगे जेक डैड का केबिन मुझे दिख गया जिसपर उनका नाम भी लिखा हुआ था. तो में उस केबिन में अंदर घुस गया. और बहा राखी सभी चीज़ो को देखने लगा. बहा पैर एक फोटो भी लगी हुई थी. जिसमे में नहीं था. क्युकी तब मेरा जन्म नहीं हुआ था. हलाकि दादू के केबिन में जो फोटो लगी हुई है उसमे में था. में आगे बड़ा और डैड की चेयर पैर बैठ गया. और चारो तरफ देखने लगा. और सोचा की ये परेश ोर्फ सुरेंद्र के बारे में जानकारी लेनी चाहिए. साला बहुत पंहुचा हुआ खिलाडी लग रहा है. सेल ने मेरे डैड को मारा और अगर ये सच है तो बकै में ये मेरे परिवार के किसी भी व्यक्ति को हानि पंहुचा सकता है. लेकिन ये मेरे रहते तो पॉसिबल नहीं होने वाला. आज इसका काम ख़त्म करना hi होगा. इसको जेल तो भेज नहीं सकता. साला किसी भी तरह बच जायेगा. इसको आज स्वयं भगवन के पास hi पहुंचना पड़ेगा.

ये सोचकर मैंने अपने जुटे उतरे और बही नीचे बैठ गया. और ध्यान लगाने लगा.

थोड़ी hi देर में मेरी तिरदये खुल गयी. और मैंने उससे इस सुरेंद्र की साडी जानकारी बताने को कहा.

और ये कहते hi मेरे सामने उसकी जिंदगी की रील चलने लगी. उसने अभी तक क्या क्या किया है. सब कुछ और जैसा दादू ने बताया था सब कुछ बैसा hi था. मतलब की ये जो आज की तारीख में परेश बना घूम रहा है यही है सुरेंद्र राणा. ये कन्फर्म होते hi. मैंने उसकी कमजोरियों को जानना सुरु किया. और कुछ बाटे मेरे सामने आई जिनमे इसकी जानबस्ती hai.ye एक no. का कमीना इंसान है ये तो में अभी तक जान गया था. इसे किसी की परवाह नहीं न hi अपनी बीवी की न hi इसकी औलाद की. जो की एक बेटी hai.ise बस मतलब है तो खुद के पैसो से. और यही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है. और ये कहा पैर है और इस तक कैसे पंहुचा जा सकता है ये में जनता हु.

ये सब जानने के बाद मैंने अपना ध्यान समाप्त किया. और अपनी जगह से उठ कर बापिस से चेयर पैर बैठ गया. अब मुझे एक ऐसी आदमी की तलाश थी जो कंप्यूटर में एक्सपर्ट हो. और ये में जनता था की ऐसा कोई न कोई इस ऑफिस में जरूर होगा. इसलिए मैंने दादू को कॉल किया.

मैं- दादू क्या अपने ऑफिस में कोई कंप्यूटर तकनीशियन है.

दादू- है है न.

मैं- उसको मेरे पास भेजना जरा. मुझे काम है उससे.

दादू- तुम्हे उससे क्या काम.

मैं- दादू आप उसे भेजो तो में बाद में बताता हु आपको सब.

दादू- ठीक है भेजता हु.

मैंने कॉल रख दिया और करीब 10 मं. बाद एक बन्दे ने गेट पैर नॉक किया

मैं- के इन.

ये कहते hi एक बाँदा अंदर आया. ये कोई 26-27 साल का लड़का था.

मैं- यस.

लड़का- वो सर ने भेजा है आपको कुछ काम है कहके.

मैं- है मैंने hi बुलाया है. बैसे तुम्हारा नाम क्या है.

. लड़का- सर मेरा नाम सिद्धार्त है. सभी मुझे सीड कहते है.

मैं- तो सीड तुम हैकिंग कर लेते हो क्या.

सीड- सर.

मैं- घबराओ नहीं तुमसे कोई भी गैरकानूनी काम नहीं करवाऊंगा.

सीड- है सर कर लेता हु.

मैं- बैसे मुझे जो काम है उसमे हैकिंग की ज्यादा जरुरत नहीं है. बस थोड़ा सा hi काम है. करोगे.

सीड- करूँगा लेकिन ये तो बताइये की आप है कोण.

मैं- ओह्ह सॉरी मैंने अपना इंट्रो नहीं दिया. मेरा नाम देवज सिन्हा है. वो जो उस केबिन में तुम्हारे सर बैठते है वो मेरे दादाजी है. और ये केबिन जिनका था वो मेरे डैड थे.

सीड- ओह्ह्ह सॉरी सर

मैं- कोई बात नहीं तो तुम रेडी हो काम करने के लिए.

सीड- पूरी तरह से. आप बताइये की क्या करना है.

मैं- वो भी बताऊंगा लेकिन पहले एक बात जानलो. ये जो काम में दे रहा हु तुम्हे ये बात इस केबिन से बहार नहीं जनि चाहिए.

सीड- ok सर.

मैं- गुड. तो सुनो तुम्हे क्या करना है.

उसके बाद मैंने उसे अपनी पूरी योजना batai.jise सुनने के बाद उसके होश उड़द गए. लेकिन ज्यादा नहीं.

मैं- समाज गए तुम.

सीड- है सर समाज गया. एंड don't वोर्री काम हो जायेगा.

मैं- गुड तो यही पैर मेरे सामने काम सुरु करो.

सीड- ok सर.

सीड ने अपना लप्पी निकला और सेटअप करने laga.or जब सेट करने के बाद जैसा मैंने कहा बैसा किया. मुझे जो इम्प चीज़े होती है उनकी जानकारी मिल गयी थी. जो मैंने सीड को दे दी. जिसकी बजह से उसका काम आसान हो गया. और जब काम पूरा हुआ तो वो और में दोनों hi हैरान हो गए.

सीड- सर ये क्या है.

मैं- साला बहुत बड़ा हरामी है. तुम अब रेडी रहना जब में कहु तब तुम अपना नेक्स्ट स्टेप लेना. और है ध्यान से क्युकी उसके पास भी कोई हैकर है.

सीड- सर don't वोर्री में संभल लूंगा.

मैं- बढ़िया तुम इसी रूम में रहना.

उसके बाद में इन्तजार करने लगा उस सेल सुरेंद्र का. और थोड़ी hi देर में मुझे दादू का कॉल आज्ञा तो में सीड को हिदायत देके चला gya.unke केबिन में. जहा वो बैठे हुए थे. मैंने उन्हें डैड के केबिन में जाने को कह दिया. तो वो बहा से चले gye.or में दादू की चेयर पैर बैठ गया. थोड़ी hi देर में दरवाजा खुला और एक लम्बा चायदा आदमी अंदर आज्ञा बिना नॉक किये. और में उसे पहचान गया की यही है परेश ोर्फ सुरेंद्र.

वो अंदर आया और मुझे बहा देखकर थोड़ा हैरान हो गया

सुरेंद्र- तुम कोण हो.

मैं- कमाल है मेरे पोरे खंडन को अच्छे से जानते हो और मुझे नहीं जानते.

सुरेंद्र- ओह्ह पहचान गया. तुम देव हो हैना जगदीश के पोते.

मैं- सबसे पहली बात की उन्हें जगदीश जी कहो. और दूसरी बात है में उन्ही का पोता हु.

सुरेंद्र- बड़ी अकड़ है तुममे बिलकुल अपने बाप की तरह.

मैं- उन्ही का बीटा हु तो उनके गन तो आएंगे hi मुझमे. और तुम्हारी हरकते देख कर लगता है जरूर तू किसी हरामी की hi औलाद रहा होगा.

ये सुनते hi उसका पारा एक दम से चढ़ गया.

सुरेंद्र- जवान संभल कर बचे. कही ये तुम्हे भरी न पद जाये.

मैं- में अच्छे से जनता हु की क्या मुझे भरी पद सकता है और क्या nahi.mujhe तुमसे जानने की जरुरत नहीं है. अब बताओ क्या काम है.

. सुरेंद्र- क्या उन्होंने तुम्हे बताया नहीं की मैं कोण हु.

मैं- बताया न. लेकिन यकीन नहीं हुआ. इसलिए दोबारा पूछ रहा हु. कोण हो तुम और क्या चाहते हो.

सुरेंद्र- ठीक है

ये कहके वो बैठने लगा.

मैं- मैंने अभी तुम्हे बैठने को नहीं कहा है. इसलिए चुपचाप खड़े रहो.

सुरेंद्र- मुझे बैठने के लिए किसी की आज्ञा का वेट नहीं करना पड़ता

.और ये कहके वो बैठ गया. और जैसे hi बैठा वो चेयर टूट गयी. और उसके साथ सुरेंद्र भी नीचे गिर गया.

मैं- यहाँ मेरा हुक्म चलता है. यहाँ की चेयर भी मेरा हुक्म मानती है. और मेरी आज्ञा लिए बिना तुम बैठे इसलिए उन्होंने खुद को तोड़ लिया और तुम्हे गिरा दिया. इसलिए अब चुपचाप खड़े रहो. या अगर और चुल्ल मची हो तो दोबारा बैठ जाओ ये दूसरी चेयर पैर.

उसे यकीन होगया की सायद मैंने दूसरी चेयर भी तोड़ कर राखी होगी और वो फिर गिर जायेगा. इसलिए इस बार वो नहीं बैठा.

मैं- गुड. अब बताओ की क्या चाहते हो तुम.

सुरेंद्र- ये कमपनी

मैं- क्यों

सुरेंद्र- क्यों क्या होता है. मुझे चाहिए बस.

मैं- लेकिन तुम्हारा कोई तो प्लान होगा न की इस कंपनी को लेने के बाद तुम क्या करोगे.

सुरेंद्र- तुम सबका खत्म.

मैं- हम्म्म तो हमें मरना चाहते हो तुम. बढ़िया है. लेकिन क्या तुम्हारे अंदर इतना डैम है.

सुरेंद्र- बहुत डैम है. और इसका एक्साम्प्ले भी में आलरेडी तुम्हारे दादा को दे चूका हु. कैसे मैंने तेरे बाप को मारा था वो दिखा कर.

मैं- है उन्होंने मुझे बताया था. लेकिन वो तो बहुत पुराणी बात है. क्या आज तुम्हारी इन वाजुओ में इतना दम है की मुझे इस कुर्सी से नीचे गिरा सको.

सुरेंद्र- है है

मैं- दो आईटी.

सुरेंद्र- व्हाट.

मैं- सही सुना तुमने. तुम मुझे इस कुर्सी से उठा कर नीचे गिरा दो में इस सरे पेपर्स लेर सिग्न कर dunga.turant.

सुरेंद्र- सोचले बचे कही ये डिसिशन भरी न पद जाये तुम्हे.

मैं- सोच liya.ab करके दिखाओ.

सुरेंद्र- ok जैसी तुम्हारी मर्ज़ी.

वो आया मेरे पास और मेरे हाथ को पकड़ कर मुझे ऊपर खींचने लगा. लेकिन में हिला भी नहीं. ये देखकर उसने अपने दोनों हाथो का बल लगाया और मुझे खींचने लगा ऊपर. लेकिन अगेन मुझे वो हिला भी नहीं प् रहा था. जिस बजह से वो परेशान होने लगा

मैं- क्या हुआ पहलवान डैम नहीं बचा क्या.

सुरेंद्र- ये कैसे संभव है. जरूर तुमने खुद को चिपका लिया है चेयर से

मैं- क्या कुछ भी बक रहे हो. ये देखो.

मैंने उसे खड़े होक दिखाया और चेयर को हिला कर भी और बापिस से में बैठ गया चेयर पैर.

मैं- अब यकीन हुआ. चलो आओ फिर से लग जाओ काम पैर.

ये सुनते hi वो फिर से मुझे उठाने laga.usne चेयर को पलटने की कोसिस की लेकिन न hi चेयर को और न hi मुझे वो हिला तक नहीं पाया.

मैं- यार तुम तो पोरे वास्ते ऑफ़ टाइम हो.

सुरेंद्र- रुक तू यही अभी तुझे इस ऑफिस के बहार फिकवाता हु

मैं- ok में इन्तजार कर रहा हु इस पल का.

उसने तुरंत hi एक कॉल किया और किसी को अंदर आने को कहा.

तो थोड़ी hi देर में 10 हट्टे काटते बन्दे अंदर आगये. जो दिखने में hi किसी सैंड से काम नहीं लग रहे थे.

सुरेंद्र- बीटा अब ये फेकेंगे तुझे यहाँ से बहार.

मैं- ok इनसे कहो कर के दिखाए.

सुरेंद्र- इस लड़के को उठा कर इस बिल्डिंग से नीचे फेल दो.

ये सुनते hi उनमें से एक बाँदा आगे आया और उसने मुझे उठाने की कोसिस की. लेकिन अगेन वो मुझे हिला तक नहीं पाया. तो उसने भी अपने दोनों हाथो का बल लगा लिया. लेकिन शामे रिजल्ट.

ा1- अरे आओ रे सब आओ. ये तो हिल hi नहीं रहा है.

.ये सुनते hi बाकि के लोग एक साथ आगये और मुझे कुर्सी से उठाने लगे. और काफी म्हणत के बाद भी वो सभी मिलकर मुझे हिला भी नहीं पाए. तो उन्होंने चेयर को उठाने की कोसिस की. लेकिन उसका भी शामे रिजल्ट निकला.

आखिर कार सभी थक हार कर बही जमीन पैर लेट गए.

मैं- क्या हुआ सुरेंद्र न तो तुझमे और नहीं तेरे इन आदमियों में इतना दम है की मुझे हिला भी सके. और आया है मेरे ऑफिस को hadapne.kya बात है

सुरेंद्र- तू ये सबकैसे कर रहा है. में जनता हु ये करना किसी भी इंसान के लिए मुश्किल है

मैं- अच्छा जरा बताओ तो मैंने क्या किया है ऐसा

सुरेंद्र- तुम दिखने में 60-80 किलो के लगते हो. तो तुमने ऐसा क्या किया जिसकी बजह से तुम्हे हम हिला भी नहीं प् रहे है. जरूर तू किसी गैजेट का इस्तेमाल कर रहा है जिसकी बजह से ये चेयर इस जमीन पैर चिपक गयी है. अब बता क्या है वो.

मैं- अरे तुमने तो मेरी चोरी पकड़ ली. लेकिन इससे तुम कर क्या लोगे. और सच कहु तो ऐसा कुछ भी मैंने इस्तेमाल नहीं किया है. ये तो तुम लोगो की ताकत hi काम हो गयी है. पता नहीं कैसे.

खैर अब तुम्हारा टाइम हुआ ख़त्म अब मेरी वरि है.

सुरेंद्र- अच्छा तो अब तुम क्या करोगे

मैं- मैंने तुम्हारी पूरी कुंडली निकली है सुरेंद्र. और उससे मुझे ये पता चला है की तेरी सबसे बड़ी कमजोरी और ताकत केवल पैसा hi है. तो वो सारा पैसा में तुझसे छीन लूंगा.

सुरेंद्र- बात तो तुमने ठीक कही. लेकिन ये करोगे कैसे

मैं- अभी बताता हूँ.

ये कहके मैंने सीड को कॉल किया और वो इसका मतलब समाज गया. और उसके बाद जो मश्ग आना सुरु हुए सुरेंद्र को वो पूरा हक्का बक्का रह गया.

मैं- तुम्हारे पास पूरा 5000 कर. रूपए है. और अब वो पूरा पैसा रबी के अक्स में जा चूका है. और इसमें तुम्हारी वाइट की कमाई भी शामिल है. और अब तुम्हारी इतनी भी औकात नहीं है की मेरे सामने खड़े हो सको. लेकिन इसके आल्वा. तुम्हारे कई पोलिटिकल पार्टीज से भी सम्बन्ध है जिनको तुम फण्ड देते हो. और उन्ही के दम पैर तुम इतना उछालते भी हो. तो अब उनका no. है. और मैंने एक और कॉल किया.

और उसके बाद सीड ने बाकिओ का काम भी कर दिया.

पोरे 1000000 कर. रूपए आज की डेट में रबी के अक्स. में जा चुके है. तुमने मुझसे पुंगा लिया और इसका खामियाजा सिर्फ तुम्हे hi नहीं तुम्हारे सरे साथियो को भी चुकाना पड़ा.

और मेरे ये कहते hi राणा का कॉल बजने लगा. और उसने उसे उठाया तो उसमे जो भी कहा गया वो सुनकर उसकी बही पैर फैट कर हाथ में आगयी.

मैं- तो कैसा लगा मेरा सरप्राइज मर. सुरेंद्र राणा ोर्फ परेश पासवान.

सुरेंद्र की बोलती अब बंद हो चुकी थी. लेकिन फिर भी वो हिम्मत करके vol hi पड़ा.

सुरेंद्र- हाउ कैसे किया तुमने ये.

मैं- यकीन मनो अगर मैंने तुम्हे बता भी दिया तब भी तुम्हे इस पैर यकीन नहीं होगा. इसलिए न hi जानो तो बेहतर है. और अब में तुम्हे 2 ऑप्शन देता हु. पहला में तुम्हे यही पैर जिन्दा जला देता हु. और तुम्हारी जीवन लीला यही समाप्त. और दूसरा मेरे दादाजी के पैरो में गिरकर माफ़ी मानगो और अभी अपने आप को पुलिस के हवाले कर do.or अपने सरे गुनाह कबूल करो. और जो सजा मिले उसे स्वीकार करो.

में जनता था की ये क्या चूसे करेगा.

सुरेंद्र- में जेल जाऊंगा.

मैं- गुड.

मैंने कम. अंकल को कॉल किया और उन्हें तुरंत hi कुछ ऑफिसर्स के साथ ऑफिस बुला लिया.

करीब आधे घंटे में वो ऑफिस आगये. और मेरे केबिन में भी आगये. जहा पैर दादू सुरेंद्र और उसके वो 10 पहलवान और साथ में मैं भी मौजूद था.

कम- क्या हुआ देव अन्य प्रॉब्लम.

मैं- सर प्रॉब्लम नहीं सोलूशन्स मिला है. इनसे मिलिए ये है परेशा पासवान आपने नाम तो सुना hi होगा इनका.

कम- है इन्हे कोण नहीं जनता.

मैं- है लेकिन ये कोई नहीं जनता की इनका असली नाम सुरेंद्र राणा है. और इन्होने 23 साल पहले इसी कमपनी में करीब 100कर. का घपला किया था. और साथ में मेरे पिता का खून भी. और इसमें आल्वा इन्होने एक और इंसान की जान ली है. जिसको इन्होने अपनी मौत के नाटक के लिए उसे किया था. और ये अपने सरे गुनाह आज काबुल करना चाहते है. और में चाहता हु की आप इनको इतनी कड़ी सजा दिलवाये की ये कभी भी उगते हुए सूर्य को भी न देख पाए. और अगर आपसे ये नहीं हो सकता तो आप मुझे कह सकते है.

ये सब सुनने के बाद कम और उसके साथ मौजूद पुलिस वालो के होश hi उड़द गए.

कम- क्या ये सच है.

मैं- बोलिये सुरेंद्र जी. वर्ण दूसरा ऑप्शन भी रेडी hi है.

सुरेंद्र- नहीं में बोलता हु. जी है कम ये सब सच है.

उसके बाद उसने अपने हर एक गुनाह को काबुल किया और पुलिस वालो ने उसका पूरा बयां रिकॉर्ड कर लिया.

कम- बहुत लम्बा जाओगे मर. सुरेंद्र. लेकिन देव कही ये कोर्ट में पलट गया तो.

मैं- बैसे चान्सेस काम है. और अगर ये पलट गया अपने बयां से तो कुत्ते की मौत मरेगा. और ये बात ये भी अच्छे से जनता है. बाकि समझदार को इशारा काफी hai.kyu मर. राणा.

सुरेंद्र- नहीं कम में नहीं पलटूँगा अपने बयां से. बस मुझे इससे बचा leejiye.mujhe पूरा भरोसा है की ये मुझे मरने का इक भी मौका नहीं छोड़ेगा. और इसने मुझे एक मौका दिया है अपने पापो का प्रायश्चित करने का. ये बहुत बड़ी बात है. और में देव के इस फैसले का सम्मान करता हु पूरी तरह से. और अगर कभी आपको लगे की में अपनी बात से पलट रहा हु. तो उसी वक़्त मेरा एनकाउंटर कर देना में कुछ नहीं कहूंगा आपको.

ये सब सुनने के बहा मौजूद हर इंसान हैरान था की ये चमत्कार हुआ कैसे

कम- आपने क्या जादू कर दिया इसपर देव.

मैं- कुछ नहीं सर इसको आइना दिखाया है आज. और जिस ताकत के बल पैर ये उछलता था वो उससे मैंने छीन ली. बस अब इसे में मार भी देता तो मुझपर एक मरे हुए को मरने का कलंक लग जाता जो में नहीं चाहता हु. इसीलिए मैंने इसे एक मौका दिया है. और अगर ये इस मौके का अच्छा इस्तेमाल करे तो जिन्दा रहेगा वर्ण में तो बहार बैठा hi हु इसे मरने के लिए.

कम- तुमने आज साबित कर दिया देव की माफ़ करने वाला बड़ा होता है. बकै में तुमने आज हम सबकी सोच को बदल कर रख दिया है. और इसके लिए में तुम्हारा शुक्रगुजार हु.

मैं- ये कहकर आप मुझे शर्मिंदा कर रहे है अंकल. मैंने उस दिन hi कहा था की हम जो भी करते है उसे हमें सोच समाज कर करना चाहिए. की इसका हैंपर बाद में क्या प्रभाव पड़ेगा और सामने वाले पैर क्या प्रभाव पड़ेगा. हलाकि इसका काम माफ़ी के काबिल नहीं था. लेकिन में इसे मारकर अपने हाथ फ़िलहाल तो गंदे नहीं करना चाहता था. इसीलिए मैंने उसे एक मौका diya.or इसने उसका भरपूर फायदा उठा लिया. अब इसकी एक नै जिंदगी शुरू होगी. जिसे ये चाहे तो अच्छी राह पैर चलकर अच्छा बना सकता है. या फिर से इसी रस्ते पैर चलकर उसे फिरसे नरक बना सकता है. फैसला इसका है.

ये सब बाटे सुनकर लग रहा था की सायद सच में इसका मंद चेंज हो गया है. और इसको कन्फर्म करने के लिए मैंने राणा के मंद को रीड किया. और उसके अंदर जो विचार फिलहाल चल रहे थे. उन्हें सुनने के बाद में कन्फर्म हो गया की अब ये सायद कभी भी गलत काम नहीं करेगा. और अगर कभी इसका मन बदला और ये फिर से गलत राह पैर चला गया तो अबकी बार इसको में जीवित तो नहीं छोड़ने वाला किसी भी सूरत में. और इसके साथ hi मैंने इसके और इसके आदमियों के दिमाग से ये बात भी निकल दी की ये लोग मुझे हिला नहीं प् रहे थे. ताकि बाद में इनके मन में मेरे लिए कोई शक पैदा न हो. और इसकी जगह मैंने उनके दिमाग में ये बात दाल दी की मैंने इनकी थोड़ी सी सुताई की है. और निशानी के टूर पैर इनकी बॉडी पैर कपड़ो के अंदर छोटे छोटे घाव भी बना दिया. ताकि इनको इस बात का यकीन हो जाये की इनकी बकै में पिटाई हुई है. और ये सब मैंने केवल सोचने के साथ hi कर दिया. और बहा खड़े लोगो को इसके वेयर में कोई भनक तक नहीं लगी. अब देखना ये था की ये बकै में सुधर जाता है या नहीं. बाकि देखते है आगे क्या होता है………..



तो बे कॉन्टिनुए………………...
 
अपडेट 19



उसके बाद कम अंकल उन सभी को बहा से ले गए. एंड ऑफिस में केवल में और दादू hi बचे

दादू- ये कैसे किया तूने.

मैं- कुछ नहीं दादू बस इसके अंदर जो अहंकार था उसे मैंने ख़त्म कर दिया. और काम आसान हो गया. अब ये सब छोड़िये और मेरा इंट्रो कराइये सब से. आपकी प्रॉब्लम मैंने सोल्वे कर दी.

दादू- वो तो कराऊंगा hi तूने आज बहुत बड़ा काम करके दिखाया है. लेकिन मुझे तो लग रहा था की उसकी सच्चाई सुनने के बाद तू उसे यही जान से मार देगा. लेकिन तूने जिन्दा छोड़ दिया. ये कैसे किया तुमने. तुम्हे गुस्सा नहीं आया उसपर. उसे जान से मरने की इक्छा नहीं हुई तुम्हे.

मैं- हुई थी दादू. लेकिन जब उसका एहम ख़त्म हो गया. तो मैंने सोचा की ये तो अब वैसे भी मर चूका है. अब इसको दोबारा मार कर अपने हाथ गंदे क्यों करना. और ये भी की मैंने सोच सायद ये अब सुधर जाये. इसलिए मैंने उसको इक मौका और दे दिया. अब इस मौके का ये सही इस्तेमाल उठा ले तो बढ़िया वर्ण में तो रेडी hi हु उसे मरने को.

दादू- बहुत hi बढ़िया देसिसिओं लिया तुमने. ी म प्राउड ऑफ़ यू.

मैं- आखिर आपका hi पोता हु.

दादू- वो तो तू है.

ये कहके उन्होंने मुझे गले लगा लिया. उसके बाद उन्होंने एक कॉल किया और सभी को मीटिंग हॉल में आने को कह diya.foran.

बस फिर क्या था. आर्डर पते hi ऑफिस के सभी खास लोग. फ़ौरन hi हॉल में पहुंच गए. और सबसे लास्ट में हम पहुंचे बहा.

फिर दादू ने सभी को कुछ बाटे कही. और उसके बाद सभी को मेरा इंट्रो दिया. जिसे सुनने के बाद काफी लोगो के होश उड़द गए. क्युकी जब सुबह में यहाँ आया था तब किसी को भी इस के बारे में ज्यादा नॉलेज नहीं था की में आखिर हु कोण. जो कुछ लोग मुझे

जानते थे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा.

इसके बाद सभी ने तालियों के साथ मेरा स्वागत किया. और फिर मुझे दादू ने कुछ बोलने को कहा.

मैं- hello एवरीवन. मेरा नाम तो आप सब जान hi गए है. ये सब तो बस एक फॉर्मलिटीज के तहत hi किया गया है. में कोई ऑफिस ज्वाइन नहीं कर रहा हु अभी. मेरी स्टडी चालू है. उसके बाद देखंगे ये सब. फिलहाल मुझे आप सब से मिलना था तो आज्ञा में दादू के साथ. और घर पैर दादू के द्वारा आप सबकी टैरिफ में सुनता रहता हु. आप लोगो ने जो इतने सालो से म्हणत और ईमानदारी से इस कंपनी में काम किया है और इसे आज इस मुकाम पैर पहुंचाया है ये वाकई में कबीले टैरिफ है. और इसके लिए में डिल से आप सभी को थैंक्स कहना चाहता हु. और में उम्मीद करूँगा की ये प्रोसेस ु hi चलती rahegi.dhanyabaad.

इतना कहने के बाद में चुप हो गया और सभी ने फिर से ताली बजा दी. एंड इसके बाद दादू ने ये मीटिंग ओवर कर दी और सभी बहा से अपने अपने कामो पैर लौट गए.

मैं- दादू अब हमें चलना चाहिए. वो दोनों हमारा वेट कर रही होंगी. बैसे भी 3:30 होने को है. और मैंने उन्हें 4 बजे का टाइम दिया था.

दादू- है ठीक है हम चलते है.

उसके बाद दादू ने मैनेजर से उनके जाने की बात कही. और कुछ अर्जेंट काम पैर hi फ़ोन करने को कह दिया. और हम दोनों ऑफिस से बहार निकल गए. और इस बार जितने भी लोग मिले सभी ने हम दोनों को hi विश किया. मैंने कार निकली और हम सीधे घर की तरफ निकल गए. मैंने कार काफी तेज़ चलाई ताकि हम जल्दी घर पहुंच सके. और हुआ भी बैसा hi. हम ठीक 4 बजे घर पहुंच गए. जहा वो दोनों एक दम रेडी बैठी थी. और हमें देखते hi चढ़ गयी हम पैर.

सुरभि- मैंने कहा था न लेट मत होना.

मैं- तो कहा हुआ लेट. ठीक 4 बजे आ तो गए हम लोग.

रेनू- अभी आये हो फ्रेश होंगे रेडी होंगे इतने में तो कितना टाइम निकल जायेगा.

मैं- हमें तुम लड़कियों जितना टाइम नहीं लगता है. बस 5 मं. दो हम आते है. Let's जो दादू.

दादू- ok बीटा.

हम दोनों hi अपने अपने कमरों में घुस गए. और मैंने जल्दी से फ्रेश हुआ. कपडे चेंज किये. और ठीक 5 मं. में बहार. बही दादू भी ों टाइम बहार आगये.

मैं- लो आगये हम अब बताओ कहा चलना है.

माँ- ी थिंक किसी मॉल में चलते है सब एक hi जगह पैर मिल जायेगा. टाइम भी बचेगा.

मैं- है ये बढ़िया रहेगा

रेनू- और दादू हमें गिफ्ट में क्या दे रहे हो आप

दादू- क्या चाहिए बताओ.

सुरभि- हम्म्म मुझे तो एक बढ़िया सा नेकलेस चाहिए डैमोंड का.

रेनू- और मुझे तो एक कार चाहिए जो में दिल्ली ले जाउंगी.

माँ- कार का क्या करोगी दिल्ली में. और यहाँ से चला कर में तुम्हे जाने नहीं दूंगी. कुछ और मांग लो.

रेनू- अगर यहाँ से चला कर नहीं जाने डौगी तो दिल्ली से hi दिलवा दो. लेकिन चाहिए तो मुझे कार hi.

दादू- ठीक है दे दिए तुमको गिफ्ट. अब खुश हो.

सुरभि- है बहुत कुश.

रेनू- और में तब होउंगी कुश जब मेरे हाथ में कार की चाबी होगी.

ये सुन्ना था की दादू ने एक चाबी रेनू को दे दी. जिसे देखकर रेनू तो उछाल पड़ी.

रेनू- क्या सच में.

दादू- मेरी बची कुछ सोचे और में उसे न दू तो में दादू किस काम का. ये तो मैंने पहले hi खरीद ली थी तुमदोनो को देने के लिए. बस किसी मौके का इन्तजार कर रहा था. लेकिन इस गधे ने कल hi ये मटर उठा दिया तो आज hi देना पड़ा.

रेनू- ओह्ह्ह थैंक्स मेरे भाई. जो तूने ये मटर उठाया और मुझे कार मिल गयी.

माँ- पिताजी इसकी क्या जरुरत थी. इसको बही दिल्ली में दिलवा देते. अब ये यहाँ से कार ड्राइव करके hi जाएगी.

मैं- माँ मेरे होते हुए नहीं. में भी चला जाऊँगा इनको छोड़ने के लिए. और बापिस फ्लाइट से आजाऊंगा. आप टेंशन न लो.

ये सुनते hi माँ का टेंशन काम हो गया.

माँ- तू जायेगा तो फिर कोई टेंशन नहीं है.

सुरभि- दादू और मेरा गिफ्ट कहा है.

दादू- बीटा मैंने ये कार hi ली थी तुम दोनों के लिए. अब तुम्हे डायमंड नेकलेस चाहिए तो अभी हम मॉल जा रहे है बही पैर ले लेना जो भी पसंद आये. ठीक है.

सुरभि- ok दादू. एंड थैंक्स

दादू- बीटा थैंक्स कहने की कोई जरुरत नहीं hai.ye तो तुम दोनों का हक़ है. जो तुम्हे मिल रहा है.

मैं- अब चलो भी लेट नहीं हो रहे अब.

रेनू- है चलो में अपनी कार से hi आऊँगी. चल सुरभि हम दोनों चलते है.

सुरभि- है चलो.

हम सभी बहार आये जहा और में और रेनू गेराज में चले गए. जहा एक से बढ़कर एक कार्स राखी हुई thi.halaki इनमे से केवल एक या दो hi बहार निकलती थी बाकि तो राखी hi रहती थी. तो रेनू ने अपनक के के बटन को प्रेस किया. तो एक कार के अनलॉक होने की आवाज आई. हमें उस तरफ देखा तो वो कार पूरी ढकी हुई थी. रेनू- जल्दी से बहा गयी और उस कवर को हटा दिया. और नीचे से निकली एक चमचमाती मिनी कूपर की कॉउंटरिमान कार कड़ी थी. इन वाइट कलर.

में तो उसे देखकर hi फ़िदा हो गया. क्या मॉडल था और कितनी खूबसूरत कार थी.

मैं- यार ये कार मुझे देदो.

रेनू- क्यों.

मैं- मुझे ये पसंद आगयी है. तू कोई दूसरी कार ले लेना.

रेनू- मुझे भी ये पसंद आगयी. इसलिए no चांस. है अगर तुझे चाहिए तो तू दूसरी शामे मॉडल की कार ले लेना. लेकिन ये तो में नहीं देने वाली तुझे. चल इसमें हम पांचो आराम से चले जायेंगे. इसी में चलते है.

मैं- तो काम से काम मुझे चलने तो दे.

रेनू- आज नहीं. चाहिए तो कल सलग ले जाना लेकिन आज इसे में hi चलाऊंगी. अब जल्दी बैठा.

अब कुछ कर भी नहीं सकता था इसलिए में साइड में बैठ गया. और रेनू ड्राइविंग सीट पैर. उसने कार स्टार्ट की और आगे बड़ा di.maine म्यूजिक सिस्टम ों किया और सांग लगा दिए. क्या बेहतरीन सिस्टम था. मजा आरहा था. जब हम बहार पहुंचे तो शामे हाल सुरभि का था. उसे भी ये काफी पसंद आयी थी. और यही इस कमपनी की खासियत भी है. इतनी स्लीक डिज़ाइन देती है ये कमपनी की एक बार देखलो तो पसंद aajaye.baki इसमें कुछ हो या न हो. उसके बाद हम सभी कार में बैठे और चले गए मॉल.

मैं- दादू मेरी कार कब तक आएगी रेडी होक

दादू- बीटा उसमे टाइम लग रहा है. बैसे महीने के अंदर आजायेगी.

रेनू- क्यों क्या हुआ तेरी कार को. कही थोक दी क्या.

दादू- नहीं बीटा. सलग में एक लड़की ने इसका गुस्सा उसपर निकल दिया था. पूरी कार को फोड़ कर.

रेनू- है याद आया इसने बताया था mujhe.or बकै में सुनकर बहुत दुःख हुआ था मुझे. बेचारा 2 दिन भी नहीं चला पाया अपनी कार को. लेकिन दादू ये जो कार आपने दी है. मान गए. आपकी पसंद एकदम झक्कास है. ी लव यू दादू.

दादू- में तू बीटा.

उस दिन शाम को हम ऐसे hi घूमते रहे शॉपिंग की सभी ने. हमने बहार hi खाना खाया और खूब इंजॉय किया.

और रात में 10 बजे तक बापिस भी आगये. और काफी थक गए थे तो जल्दी हो सभी सी गए.

बही सुबह वो सलग में जो दैत्य प्रोफेसर बांके घूम रहा था. वो देव का इन्तजार hi करता रहा. लेकिन देव आज गया hi नहीं सलग. जिस बजह से उसे बहा से केवल डिसअप्पोइन्त्मेन्त मिली. अब उसे कल का इन्तजार था की सायद कल देव सलग आये. शाम को उसके साथियो ने उससे इस वेयर में पूछा तो उसने बता दिया की वो आज सलग नहीं आया था. सायद कल आएगा. अब एक दिन और रुक जाओ. उन्हें भी ये बात ठीक लगी.

और इस बात से इनके सरे प्लान धरे के धरे रह गए.

नेक्स्ट डे में अपने रूटीन से उठा थोड़ी एक्सरसाइज की उसके बाद नहाया और छत पैर जेक ध्यान में बैठ गया. और शामे बही थोड़ी देर में थर्ड ऑय खुल गयी. और मैंने मंत्र का जाप करना स्टार्ट कर दिया. धीरे धीरे ऊर्जा का घेरा मेरे चारो तरफ बनने लगा. लेकिन ये घेरा किसी को भी दिखाई नहीं दे सकता था. सिर्फ दिव्या या मयाबी लोग hi इसे देख सकते थे. मेरी बाकि की पावर्स भी जागृत होने लगी थी. और त्रिनेत्र मुझे उनकी साडी जानकारी देने लगी थी. पता नहीं कितनी देर तक में मंत्र का जाप करता रहा. और आखिर कार फिर से गुरुदेव की आवाज आगये मेरे कानो में. और उनका आदेश पाकर मैंने मंत्र का जाप बंद कर दिया. और उनको मैंने प्रणाम किया.

मैं- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- तुम्हारा कल्याण हो वत्स.

मैं- गुरुदेव जैसा आपने कहा था मैंने बैसा hi किया. ध्यान केंद्रित किया. मंत्र का जाप किया. और मैंने अपनी शक्तियों को पहचानना प्राम्भ भी कर दिया है. और आपने मुझे शिव पुराण पढ़ने को कहा था वो भी मैंने पद लिया. और उसमे लिखी सभी बातो को गहराई से समझने की कोसिस भी की. अब मुझे आगे क्या करना है गुरुवार.

गुरुदेव- वत्स हम तुम्हारे साथ हर पल थे. और हमने स्वयं देखा तुमने कैसे और क्या किया. और जो तुमने उस मनुस्य को दंड दिया उससे भी हम बहुत खुश हुए. हमें तुम्हारे निर्णय पैर गर्व महसूस हुआ.

मैं- ये सब आपके बिना संभव नहीं हो पता guruvar.aapke hi दिखाए गए मार्ग पैर चलकर मैंने उसके लिए उचित दंड दिया है. और मुझे इस बात की बहुत ख़ुशी है की मेरे इस कार्य से आपको ख़ुशी मिली.

गुरुदेव- वत्स ये तो अभी शुरुवात hi हुई है. ऐसे कई लोग तुम्हारे जीवन में आने अभी शेष है. और तुम्हे उन सभी को इसीप्रकार उचित दंड देना है. और जरुरत पड़ने पैर उनका विनाश भी करना hai.kya तुम उसके किये तैयार हो.

मैं- है गुरुदेव में तैयार हु. कृपा कर मुझे बताये की मेरे जीवन का लक्ष्य क्या है. मुझे इतनी शक्तिया क्यों प्राप्त हुई है. ऐसा कोनसा कार्य करना है मुझे जिसकले लिए मेरा जन्म लिया गया है.

गुरुदेव- ठीक है वत्स में तुम्हे तुम्हारे लक्ष्य के वारे में साडी बाटे बताता हु. सुनो.

तो बे कॉन्टिनुए……………...

 
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