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उस रौशनी ने गिरते hi चारो तरफ धुआँ और धूल उदा दी थी. कुछ भी साफ़ नहीं दिख रहा था. धीरे धीरे सारा धुआँ साफ़ हुआ और धूल भी. तब जेक कुछ समाज में आया. उस गहरे गड्ढे में बही रौशनी अभी भी चमक रही थी. तभी ऊपर से आसमन कड़का और वो रौशनी थोड़ी दर गयी और एक पेड़ पे पीछे छिप गयी. और ऊपर की तरफ देखने लगी सायद. तभी उसे कुछ नजर आया और वो देखकर वो और दर गयी और जंगल में बिजली की गति से भागने लगी. और उसने आसमान में देखा था की कुछ लोग उस रौशनी का पीछा करते हुए पृथ्वी पैर आरहे थे. जिस बजह से वो दर के मरे भाग रही थी. यहाँ बहा. वो लोग देखने से hi बेकार लग रहे थे. किसी दानवो की तरह. बैसे दिखने में तो ठीक hi थे लेकिन उनका मन अच्छा नहीं था. और वो रौशनी ये जानती थी जिस बजह से वो इनसे छिप रही thi.yaha बहा भाग रही थी और वो लोग जो कुल 4 थे वो भी जंगल में चारो तरफ फ़ैल गए थे और उसे ढूंढ रहे थे. तभी एक ने अपने हाथो को गोल गोल घुमाया और उसके हाथ में एक हंटर जैसी चीज़ आगयी और उसने उस हंटर को एक दिशा में फेक दिया जिस ओरे वो रौशनी छिपी हुई थी. ये देखकर वो और दर गयी और बहा से भागने लगी और वो हंटर उसके पीछे पीछे जहा वो रौशनी जाती बहा वो हंटर भी. रौशनी उस हंटर से पीछा नहीं छुड़ा प् रही थी और जितनी तेज़ गति से भगति उतनी hi तेज़ गति से वो हंटर भागता और उस हंटर के पीछे वो चारो लोग. तभी अचानक से आसमान से एक तेज़ बिजली सीढ़ी जमीन पैर गिरी उस रौशनी और हंटर के बीचे. और बिजली का प्रवाह काफी तेज़ था. आजु बाजु के कई पेड़ो पैर आग तक लग गयी थी. वो हंटर अब रुक चूका था और वो रौशनी एक पेड़ के पीछे से झक कर देख रही थी की आखिर ये हो क्या रहा है. उसे दर भी लग रहा था. और साथ में थोड़ी उम्मीद भी थी की सायद कोई उसकी मदद करने आया है.
तभी उस बिजली मेसे एक तेज़ प्रबाह निकला और उनचारो में से तीन को देखते hi देखते रख में बदल दिया. लेकिन आखिरी बाला अपनी शक्तियों से बच गया. उसने अपने हाथो को आगे करके कुछ किया जिस बजह से उसके हाथो से तेज़ ऊर्जा निकली जिसमे वो बिजली बही रुक गयी. वो आगे hi नहीं बाद पाई. और उसके बाद उस आदमी ने अपने हाथो को तेज़ी से पीछे की तरफ धकेल दिया. और ऐसा करते hi वो बिजली बापिस लौट गयी. और उसी तेज़ बिजली में जा मिली. ये सीन देखकर बिजली भी हैरान थी की ये कैसे संभव हुआ. उसकी बिजली को बापिस भेज दिया इस इंसान ने. आखिर ये है कोण. और उसके पास इतनी शक्ति आई कहा से. ये सभी सोच रही थी. लेकिन वो हार नहीं मैंने वाली थी. और फिर या इंसान ने अपने हाथो को फिर ाव घुमाया और वो हंटर उसके हाथो में आज्ञा. उसके बाद उसने उस हंटर को जोर से हवा में गोल गोल घुमाया और उस बिजली की तरफ फेक दिया और उसका एक छोर उसने अपने हाथो में hi पकड़ लिया. और वो हंटर अपनी लम्बाई को बढ़ाता हुआ उस बिजली के पास बढ़ने लगा. और देखते hi देखते उस हंटर ने उस बिजली के चारो तरफ घेरा बना लिया और उसे एक तरह से खुद में बांध दिया. और ये देखकर सामने वाला इंसान हसने लगा. और साथ में इस बिजली में से भी हसी की आवाज आने लगी. जिसे सुनकर वो इंसान थोड़ा हैरान हुआ. उसने सोचा की ये आखिर है कोण जिसे मैंने बांध रखा है फिर भी ये है रहा है. और वो कुछ आगे सोचता उससे पहले hi साडी बिजली उसकी आँखों के सामने से गायब हो गयी. जिसे देखकर वो हैरान हो गया. क्युकी उसका ये हंटर कोई मामूली नहीं था. जिसको भी येव्हण्टर खुद में बांध ले उसकी साडी शक्तियों को ये चूस लेता है. और जो इसका छोर पकडे होता है उस इंसान के अंदर वो साडी शक्तिया चली जाती है. लेकिन इस बार उसका हंटर ने कुछ उल्टा कर दिया. जिसे वो इंसान भी नहीं समाज पाया. और वो आगे कुछ सोचता उससे पहले hi उसके ऊपर फिर से बिजली गिरी. और इस बार फिर उसने उसे रोकने की कोसिस की लेकिन वो नहीं रोक पाया. ऐसा लग रहा था जैसे वो हवा में hi हाथ हिला रहा है. जिसका कोई भी फर्क नहीं पद रहा था उस बिजली पैर. और देखते hi देखते वो इंसान पूरा उस बिजली की चपेट में आज्ञा. और रख में बदल गया. और उसका वो हंटर बहा से गायब हो गया. सायद वो अपने असली मालिक के पास चला गया. ये सब दूर से वो रौशनी भी देख रही थी. और उसे यकीन hi नहीं हो रहा था की ये कैसे संभव हुआ. वो काफी हैरान और परेशान थी की ये बिजली आखिर है कोण. जिसने इतनी आसानी से उन चारो को ख़त्म कर दिया.
वो अभी सोच hi रही थी की उसके पीछे से आवाज आई.
हवा- कोण हो तुम और तुम्हारा यहाँ आने का क्या कारण है.
ये सुनकर रौशनी पीछे मुड़ी और देखने लगी लेकिन उसे कुछ नहीं दिखाई दिया. तो वो चारो तरफ देखने लगी.
हवा- तुम मुझे नहीं देख पाओगी जब तक में खुद नहीं चाहता. इसलिए प्रयास छोड़ दो. और मेरे सवालो के जवाब दो. और सबसे पहले अपने असली रूप में आओ.
रौशनी- में भी ऐसे hi किसी के सामने नहीं आती हु. और रही बात यहाँ आने की तो में केवल इनसे अपने प्राणो की रक्षा के लिए भाग रही थी और यहाँ आगयी.
हवा- कोण थे ये लोग. और तुम्हारे पीछे क्यों पड़े हुए थे.
रौशनी- ये लोग काली शक्तियों के सिपाही थे. जो मुझे पकड़ना चाहते थे. और जो सबसे आखिर में मारा वो बहा का सेनापति था.
हवा- ये कहा से आये थे. और वो कहा का सेनापति था. और ये तुम्हे क्यों पकड़ना चाहते थे.
रौशनी- ताकि मेरी शक्तियों को अपने बस में कर सके. और मुझे अपना गुलाम बना sake.Or ये कही से नहीं आये थे. ये लोग सौरमंडल में किसी जगह रहते है. कहा मुझे पता नहीं. लेकिन इनका काम एक hi है दुसरो की शक्तिया छीन कर उन्हें अपना गुलाम बनाना. और इसी तरह इनकी नजर मुझ पैर पद गयी और फिर मुझ पैर हमला करने आगये ये log.Lekin अभी तक मैंने इनका मजबूती से सामना किया है. लेकिन इनकी तादात कुछ ज्यादा थी और मैं इनके सामने नहीं टिक पायी और आखिर कार मुझे बहा से अपनी जान बचा कर भागना pada.Lekin उनके ये लोग मेरे पीछे पीछे यहाँ तक आगये.
हवा- तुम हो कोण. और कहा रहती हो.
रौशनी- मेरा नाम आलिआ है. और में भुवर्लोक की निवासी हु. में ब्रह्माण्ड में विचरण कर रही थी की इन दोस्तो की मुझपर नजर पद गयी और ये मेरे पीछे लग गए.
हवा- ये भुवर लोक तो हमारे सौरमंडल से ऊपर है न.
रौशनी- है बही है. हमें कही भी आने जाने पैर कोई मनाही नहीं है. हम देवताओ के सहायक है. उनकी हर प्रकार से मदद करते है. और इन्ही कर्मो के हिसाब से हमें देवता या फिर मनुस्य का जीवन मिलता है. उसी भुवर्लोक के एक छोटे से तारामंडल में मैं रहती हु. अपने परिवार के साथ. इस तारामंडल में मेरे पिता महाराज है. और में बहा की राजकुमारी. और उसे अगर सरल भासा में कहा जाये तो उसे परीलोक कहते है.
हवा- मतलब तुम एक पारी हो.
रौशनी- है में एक पारी हु. अब मैंने तो साडी जानकारी दे दी. अब आप बताओ की कोण हो आप.
हवा- जी में एक साधारण सा मनुष्य हु. मेरा नाम है देवज. भगवन की कृपा से मेरे अंदर कुछ शक्तिया है जिनकी मदद से में पृथ्वी पैर हर बुराई से लड़ता हु. फिर चाहे वो कोई असुर की हो या आम मनुष्य की.
तभी ये सुनकर उस रौशनी ने अपना असली रूप सामने किया और सफ़ेद रौशनी के आगे एक बाला की खूबसूरत पारी कड़ी थी जिसके दो पंख एक खूबसूरत सफ़ेद लिवास. जिसमे वो बहुत hi खूबसूरत लग रही थी. चेहरे पैर एक अलग सा तेज़. और हाथो में एक छड़ी. मतलब की जैसा हमने अभी तक देखा है फिल्मो में या सेरिएल में. ठीक बैसि hi छबि थी उस पारी की. और जिसमे बो बकै में बहुत hi खूबसूरत लग रही थी.
आलिआ- अब आप अपना रूप दिखाए देवज.
मैं- मुझे केवल देव कहिये
ये कहकर मैंने अपना रूप दिखाया. जो कुछ खास नहीं था. क्युकी में लोवर और टी शर्ट में hi यहाँ आज्ञा था. और बाल बिखरे hue.nange पेअर. किसी बिखरी की तरह लग रहा था में तो. और हुआ क्या की जब में सो रहा था तब अचानक से मेरी नींद खुल गयी. मैंने ध्यान से पता किया तो मैंने देखा की कुछ बुरे लोग अभी अभी पृथ्वी पैर दाखिल हुए है. तो बस जैसी हालत में था बैसे hi aagya.mujhe क्या पता था यहाँ एक पारी से मुलाकात होगी. वर्ण थोड़ा सज सबर कर आता. खैर मेरा फर्स्ट इम्प्रैशन कुछ खास नहीं रहा. और इसका साबुत ये था की वो मुझे देखकर है रही थी.
मैं- अब इसमें हसने की क्या बात है. पता है में सो रहा था. लेकिन जैसी hi पता चला की किसी की जान खतरे में है में बैसा hi उठ कर आज्ञा.
आलिआ- हमें माफ़ करना लेकिन आपका पहनावा थोड़ा अजीब सा लग रहा है हमें. जिस बजह से हमें हसी आरही है. और आपका हुलिए भी बिगड़ा हुआ है.
मैं- है मुझे पता है.
आलिआ- माफ़ करना हमें. हम आपका मजाक नहीं उदा रहे है. आप कृपा कर के बुरा न मने. आपने हमारी जान बचाई है. और उसके लिए हम आपके तहे डिल से शुक्रगुजार है.
मैं- कोई बात नहीं ये तो मेरा काम था. बैसे अब आप एक डैम आज़ाद है. आप चाहे तो बापिस जा सकती है.
आलिआ- हमें इतनी जल्दी बापिस भेजना चाहते है आप. क्यों?
मैं- क्युकी मुझे नींद आरही है और मुझे सोने जाना है.
आलिआ- तो आप जाइये सोने इसमें मेरा क्या काम. में तो अभी यही रुकूंगी और घूमूंगी
मैं- जैसी आपकी मर्ज़ी. लेकिन इस भेष में मत घूमिएगा. वर्ण लोग आप पर हसेंगे.
आलिआ- क्यों इस भेष में क्या खराबी है.
मैं- खराबी कोई नहीं है. ये पहनावा यहाँ के लिए थोड़ा अजीब है. या तो आप अदृश्य हो कर घूमिये या फिर यहाँ पैर लड़किया जैसा पहनावा पहनती है उसे पहन कर जहा चाहे बहा घूमिये.
आलिआ- जानकारी के लिए धन्यवाद देव. हम इसका ध्यान रखेंगे.
मैं- ठीक है में चलता हु. शुभ रात्रि.
ये कहके में जाने hi वाला था की वो बोली
आलिआ- अगर हमें आपसे मिलने का मन हुआ तो आप हमें कहा मिलेंगे देव.
मैं- आप मुह्हे याद कर लीजियेगा में खुद आपके पास आजाऊंगा.
आलिआ- ठीक है. अब आप जाइये और अपनी नींद पूरी कीजिये. शुभ रात्रि
उसने ये कहा और मैं बहा से गायब होक सीधा पाने कमरे में पंहुचा और सो गया चद्दर तान कर…
नेक्स्ट डे अपने रूटीन से उठा ध्यान लगाकर फ्री हुआ और नास्ता करने नीचे चला गया. सब बढ़िया था. नास्ता करने के बाद चला गया सलग.
नहीं दूसरी तरफ वो पांचों असुर अब अपनी अगली चल की तैयारी करने लगे थे. और उनके साथ मयासुर भी था.
डी1- उसके पास हर एक चल का जवाब है. इसलिए हमें कुछ अलग करना चाहिए.
मयासुर- बोलो क्या करना चाहिए हमें.
डी1- हमारी शक्तिया इंसानो के दर से बढ़ती है. तो हमें उसी दर को बढ़ाना होगा. हमारी शक्तिया बढ़ेंगी और उससे लड़ने में हमें मदद मिलेगी. मयासुर तुम जाओ और कोई ऐसी मायाफैलाओ जिससे लोग बहुत hi ज्यादा डरने लगे. खुद को भी आईने में देखने से उन्हें दर लग्न चाहिए. दुसरो की तो बात hi छोड़ दो. इंसान डरना सुरु करेंगे. तो सबको ठीक करने की कोसिस करेगा. लेकिन हम उसको कामयाब नहीं होने देंगे. उसको हर समय टोकते रहेंगे.
मयासुर- ठीक है शुम्भ्कासुर. में सब करूँगा. लेकिन वो समाज जायेगा की ये मेरा काम है. और फिर वो मुझे ढूंढ़ना सुरु कर देगा. तब मेरी रक्षा कोण करेगा.
डी1- हम करेंगे. तुम तक उसे कभी नहीं पहुंचने देंगे.
मयासुर- ठीक है तुम पैर विस्वास कर रहा हु में. मुझे निराश मत करना.
डी2- विस्वास रखो. तुम्हे एक खर्च भी नहीं आने देंगे. अब जाओ और अपना जाल फैलाओ. और हाँ उसका इंतजाम करते है.
उसके बाद मयासुर चला गया देहरादून की सड़कों पैर अपना मायाजाल फ़ैलाने के लिए.
बही आलिआ सभी जगह घूम रही थी और देख रही thi.bacho का मनोरंजन कर रही थी छिप छिप कर. वो इस वक़्त एक आम लड़की बन कर सभी जगह घूम रही थी. उसे बार बार देव का ख्याल आरहा था. जिसे सोचकर hi वो शर्माने लगी जाती. लेकिन फिर सोचती की वो एक इंसान है. और ये सब सायद मुमकिन नहीं हो पायेगा. इसलिए वो अपने मन को मन लेती. लेकिन वो कहते है न की डिल है की मंटा नहीं. वो न चाहते हुए भी देव की तरफ आकर्षित हो रही थी. सायद देव की शक्तियों के प्रभाव से. या फिर कुछ और. और सिर्फ एक छोटी सी hi मुलाकात हुई थी अभी. जब उससे सेहन नहीं हुआ. तो उसने अपनी शक्तियों से पता लगा लिया की देव किस जगह से आया था और कहा गया था. और ये सब जानने के बाद वो नहीं चली गयी यानि की देहरादून.
जहा मयासुर अपनी माया फैला रहा tha…..or वो असुर घाट लगा रहे थे देव के ऊपर.
तो बे कॉन्टिनुए……………….
उस रौशनी ने गिरते hi चारो तरफ धुआँ और धूल उदा दी थी. कुछ भी साफ़ नहीं दिख रहा था. धीरे धीरे सारा धुआँ साफ़ हुआ और धूल भी. तब जेक कुछ समाज में आया. उस गहरे गड्ढे में बही रौशनी अभी भी चमक रही थी. तभी ऊपर से आसमन कड़का और वो रौशनी थोड़ी दर गयी और एक पेड़ पे पीछे छिप गयी. और ऊपर की तरफ देखने लगी सायद. तभी उसे कुछ नजर आया और वो देखकर वो और दर गयी और जंगल में बिजली की गति से भागने लगी. और उसने आसमान में देखा था की कुछ लोग उस रौशनी का पीछा करते हुए पृथ्वी पैर आरहे थे. जिस बजह से वो दर के मरे भाग रही थी. यहाँ बहा. वो लोग देखने से hi बेकार लग रहे थे. किसी दानवो की तरह. बैसे दिखने में तो ठीक hi थे लेकिन उनका मन अच्छा नहीं था. और वो रौशनी ये जानती थी जिस बजह से वो इनसे छिप रही thi.yaha बहा भाग रही थी और वो लोग जो कुल 4 थे वो भी जंगल में चारो तरफ फ़ैल गए थे और उसे ढूंढ रहे थे. तभी एक ने अपने हाथो को गोल गोल घुमाया और उसके हाथ में एक हंटर जैसी चीज़ आगयी और उसने उस हंटर को एक दिशा में फेक दिया जिस ओरे वो रौशनी छिपी हुई थी. ये देखकर वो और दर गयी और बहा से भागने लगी और वो हंटर उसके पीछे पीछे जहा वो रौशनी जाती बहा वो हंटर भी. रौशनी उस हंटर से पीछा नहीं छुड़ा प् रही थी और जितनी तेज़ गति से भगति उतनी hi तेज़ गति से वो हंटर भागता और उस हंटर के पीछे वो चारो लोग. तभी अचानक से आसमान से एक तेज़ बिजली सीढ़ी जमीन पैर गिरी उस रौशनी और हंटर के बीचे. और बिजली का प्रवाह काफी तेज़ था. आजु बाजु के कई पेड़ो पैर आग तक लग गयी थी. वो हंटर अब रुक चूका था और वो रौशनी एक पेड़ के पीछे से झक कर देख रही थी की आखिर ये हो क्या रहा है. उसे दर भी लग रहा था. और साथ में थोड़ी उम्मीद भी थी की सायद कोई उसकी मदद करने आया है.
तभी उस बिजली मेसे एक तेज़ प्रबाह निकला और उनचारो में से तीन को देखते hi देखते रख में बदल दिया. लेकिन आखिरी बाला अपनी शक्तियों से बच गया. उसने अपने हाथो को आगे करके कुछ किया जिस बजह से उसके हाथो से तेज़ ऊर्जा निकली जिसमे वो बिजली बही रुक गयी. वो आगे hi नहीं बाद पाई. और उसके बाद उस आदमी ने अपने हाथो को तेज़ी से पीछे की तरफ धकेल दिया. और ऐसा करते hi वो बिजली बापिस लौट गयी. और उसी तेज़ बिजली में जा मिली. ये सीन देखकर बिजली भी हैरान थी की ये कैसे संभव हुआ. उसकी बिजली को बापिस भेज दिया इस इंसान ने. आखिर ये है कोण. और उसके पास इतनी शक्ति आई कहा से. ये सभी सोच रही थी. लेकिन वो हार नहीं मैंने वाली थी. और फिर या इंसान ने अपने हाथो को फिर ाव घुमाया और वो हंटर उसके हाथो में आज्ञा. उसके बाद उसने उस हंटर को जोर से हवा में गोल गोल घुमाया और उस बिजली की तरफ फेक दिया और उसका एक छोर उसने अपने हाथो में hi पकड़ लिया. और वो हंटर अपनी लम्बाई को बढ़ाता हुआ उस बिजली के पास बढ़ने लगा. और देखते hi देखते उस हंटर ने उस बिजली के चारो तरफ घेरा बना लिया और उसे एक तरह से खुद में बांध दिया. और ये देखकर सामने वाला इंसान हसने लगा. और साथ में इस बिजली में से भी हसी की आवाज आने लगी. जिसे सुनकर वो इंसान थोड़ा हैरान हुआ. उसने सोचा की ये आखिर है कोण जिसे मैंने बांध रखा है फिर भी ये है रहा है. और वो कुछ आगे सोचता उससे पहले hi साडी बिजली उसकी आँखों के सामने से गायब हो गयी. जिसे देखकर वो हैरान हो गया. क्युकी उसका ये हंटर कोई मामूली नहीं था. जिसको भी येव्हण्टर खुद में बांध ले उसकी साडी शक्तियों को ये चूस लेता है. और जो इसका छोर पकडे होता है उस इंसान के अंदर वो साडी शक्तिया चली जाती है. लेकिन इस बार उसका हंटर ने कुछ उल्टा कर दिया. जिसे वो इंसान भी नहीं समाज पाया. और वो आगे कुछ सोचता उससे पहले hi उसके ऊपर फिर से बिजली गिरी. और इस बार फिर उसने उसे रोकने की कोसिस की लेकिन वो नहीं रोक पाया. ऐसा लग रहा था जैसे वो हवा में hi हाथ हिला रहा है. जिसका कोई भी फर्क नहीं पद रहा था उस बिजली पैर. और देखते hi देखते वो इंसान पूरा उस बिजली की चपेट में आज्ञा. और रख में बदल गया. और उसका वो हंटर बहा से गायब हो गया. सायद वो अपने असली मालिक के पास चला गया. ये सब दूर से वो रौशनी भी देख रही थी. और उसे यकीन hi नहीं हो रहा था की ये कैसे संभव हुआ. वो काफी हैरान और परेशान थी की ये बिजली आखिर है कोण. जिसने इतनी आसानी से उन चारो को ख़त्म कर दिया.
वो अभी सोच hi रही थी की उसके पीछे से आवाज आई.
हवा- कोण हो तुम और तुम्हारा यहाँ आने का क्या कारण है.
ये सुनकर रौशनी पीछे मुड़ी और देखने लगी लेकिन उसे कुछ नहीं दिखाई दिया. तो वो चारो तरफ देखने लगी.
हवा- तुम मुझे नहीं देख पाओगी जब तक में खुद नहीं चाहता. इसलिए प्रयास छोड़ दो. और मेरे सवालो के जवाब दो. और सबसे पहले अपने असली रूप में आओ.
रौशनी- में भी ऐसे hi किसी के सामने नहीं आती हु. और रही बात यहाँ आने की तो में केवल इनसे अपने प्राणो की रक्षा के लिए भाग रही थी और यहाँ आगयी.
हवा- कोण थे ये लोग. और तुम्हारे पीछे क्यों पड़े हुए थे.
रौशनी- ये लोग काली शक्तियों के सिपाही थे. जो मुझे पकड़ना चाहते थे. और जो सबसे आखिर में मारा वो बहा का सेनापति था.
हवा- ये कहा से आये थे. और वो कहा का सेनापति था. और ये तुम्हे क्यों पकड़ना चाहते थे.
रौशनी- ताकि मेरी शक्तियों को अपने बस में कर सके. और मुझे अपना गुलाम बना sake.Or ये कही से नहीं आये थे. ये लोग सौरमंडल में किसी जगह रहते है. कहा मुझे पता नहीं. लेकिन इनका काम एक hi है दुसरो की शक्तिया छीन कर उन्हें अपना गुलाम बनाना. और इसी तरह इनकी नजर मुझ पैर पद गयी और फिर मुझ पैर हमला करने आगये ये log.Lekin अभी तक मैंने इनका मजबूती से सामना किया है. लेकिन इनकी तादात कुछ ज्यादा थी और मैं इनके सामने नहीं टिक पायी और आखिर कार मुझे बहा से अपनी जान बचा कर भागना pada.Lekin उनके ये लोग मेरे पीछे पीछे यहाँ तक आगये.
हवा- तुम हो कोण. और कहा रहती हो.
रौशनी- मेरा नाम आलिआ है. और में भुवर्लोक की निवासी हु. में ब्रह्माण्ड में विचरण कर रही थी की इन दोस्तो की मुझपर नजर पद गयी और ये मेरे पीछे लग गए.
हवा- ये भुवर लोक तो हमारे सौरमंडल से ऊपर है न.
रौशनी- है बही है. हमें कही भी आने जाने पैर कोई मनाही नहीं है. हम देवताओ के सहायक है. उनकी हर प्रकार से मदद करते है. और इन्ही कर्मो के हिसाब से हमें देवता या फिर मनुस्य का जीवन मिलता है. उसी भुवर्लोक के एक छोटे से तारामंडल में मैं रहती हु. अपने परिवार के साथ. इस तारामंडल में मेरे पिता महाराज है. और में बहा की राजकुमारी. और उसे अगर सरल भासा में कहा जाये तो उसे परीलोक कहते है.
हवा- मतलब तुम एक पारी हो.
रौशनी- है में एक पारी हु. अब मैंने तो साडी जानकारी दे दी. अब आप बताओ की कोण हो आप.
हवा- जी में एक साधारण सा मनुष्य हु. मेरा नाम है देवज. भगवन की कृपा से मेरे अंदर कुछ शक्तिया है जिनकी मदद से में पृथ्वी पैर हर बुराई से लड़ता हु. फिर चाहे वो कोई असुर की हो या आम मनुष्य की.
तभी ये सुनकर उस रौशनी ने अपना असली रूप सामने किया और सफ़ेद रौशनी के आगे एक बाला की खूबसूरत पारी कड़ी थी जिसके दो पंख एक खूबसूरत सफ़ेद लिवास. जिसमे वो बहुत hi खूबसूरत लग रही थी. चेहरे पैर एक अलग सा तेज़. और हाथो में एक छड़ी. मतलब की जैसा हमने अभी तक देखा है फिल्मो में या सेरिएल में. ठीक बैसि hi छबि थी उस पारी की. और जिसमे बो बकै में बहुत hi खूबसूरत लग रही थी.
आलिआ- अब आप अपना रूप दिखाए देवज.
मैं- मुझे केवल देव कहिये
ये कहकर मैंने अपना रूप दिखाया. जो कुछ खास नहीं था. क्युकी में लोवर और टी शर्ट में hi यहाँ आज्ञा था. और बाल बिखरे hue.nange पेअर. किसी बिखरी की तरह लग रहा था में तो. और हुआ क्या की जब में सो रहा था तब अचानक से मेरी नींद खुल गयी. मैंने ध्यान से पता किया तो मैंने देखा की कुछ बुरे लोग अभी अभी पृथ्वी पैर दाखिल हुए है. तो बस जैसी हालत में था बैसे hi aagya.mujhe क्या पता था यहाँ एक पारी से मुलाकात होगी. वर्ण थोड़ा सज सबर कर आता. खैर मेरा फर्स्ट इम्प्रैशन कुछ खास नहीं रहा. और इसका साबुत ये था की वो मुझे देखकर है रही थी.
मैं- अब इसमें हसने की क्या बात है. पता है में सो रहा था. लेकिन जैसी hi पता चला की किसी की जान खतरे में है में बैसा hi उठ कर आज्ञा.
आलिआ- हमें माफ़ करना लेकिन आपका पहनावा थोड़ा अजीब सा लग रहा है हमें. जिस बजह से हमें हसी आरही है. और आपका हुलिए भी बिगड़ा हुआ है.
मैं- है मुझे पता है.
आलिआ- माफ़ करना हमें. हम आपका मजाक नहीं उदा रहे है. आप कृपा कर के बुरा न मने. आपने हमारी जान बचाई है. और उसके लिए हम आपके तहे डिल से शुक्रगुजार है.
मैं- कोई बात नहीं ये तो मेरा काम था. बैसे अब आप एक डैम आज़ाद है. आप चाहे तो बापिस जा सकती है.
आलिआ- हमें इतनी जल्दी बापिस भेजना चाहते है आप. क्यों?
मैं- क्युकी मुझे नींद आरही है और मुझे सोने जाना है.
आलिआ- तो आप जाइये सोने इसमें मेरा क्या काम. में तो अभी यही रुकूंगी और घूमूंगी
मैं- जैसी आपकी मर्ज़ी. लेकिन इस भेष में मत घूमिएगा. वर्ण लोग आप पर हसेंगे.
आलिआ- क्यों इस भेष में क्या खराबी है.
मैं- खराबी कोई नहीं है. ये पहनावा यहाँ के लिए थोड़ा अजीब है. या तो आप अदृश्य हो कर घूमिये या फिर यहाँ पैर लड़किया जैसा पहनावा पहनती है उसे पहन कर जहा चाहे बहा घूमिये.
आलिआ- जानकारी के लिए धन्यवाद देव. हम इसका ध्यान रखेंगे.
मैं- ठीक है में चलता हु. शुभ रात्रि.
ये कहके में जाने hi वाला था की वो बोली
आलिआ- अगर हमें आपसे मिलने का मन हुआ तो आप हमें कहा मिलेंगे देव.
मैं- आप मुह्हे याद कर लीजियेगा में खुद आपके पास आजाऊंगा.
आलिआ- ठीक है. अब आप जाइये और अपनी नींद पूरी कीजिये. शुभ रात्रि
उसने ये कहा और मैं बहा से गायब होक सीधा पाने कमरे में पंहुचा और सो गया चद्दर तान कर…
नेक्स्ट डे अपने रूटीन से उठा ध्यान लगाकर फ्री हुआ और नास्ता करने नीचे चला गया. सब बढ़िया था. नास्ता करने के बाद चला गया सलग.
नहीं दूसरी तरफ वो पांचों असुर अब अपनी अगली चल की तैयारी करने लगे थे. और उनके साथ मयासुर भी था.
डी1- उसके पास हर एक चल का जवाब है. इसलिए हमें कुछ अलग करना चाहिए.
मयासुर- बोलो क्या करना चाहिए हमें.
डी1- हमारी शक्तिया इंसानो के दर से बढ़ती है. तो हमें उसी दर को बढ़ाना होगा. हमारी शक्तिया बढ़ेंगी और उससे लड़ने में हमें मदद मिलेगी. मयासुर तुम जाओ और कोई ऐसी मायाफैलाओ जिससे लोग बहुत hi ज्यादा डरने लगे. खुद को भी आईने में देखने से उन्हें दर लग्न चाहिए. दुसरो की तो बात hi छोड़ दो. इंसान डरना सुरु करेंगे. तो सबको ठीक करने की कोसिस करेगा. लेकिन हम उसको कामयाब नहीं होने देंगे. उसको हर समय टोकते रहेंगे.
मयासुर- ठीक है शुम्भ्कासुर. में सब करूँगा. लेकिन वो समाज जायेगा की ये मेरा काम है. और फिर वो मुझे ढूंढ़ना सुरु कर देगा. तब मेरी रक्षा कोण करेगा.
डी1- हम करेंगे. तुम तक उसे कभी नहीं पहुंचने देंगे.
मयासुर- ठीक है तुम पैर विस्वास कर रहा हु में. मुझे निराश मत करना.
डी2- विस्वास रखो. तुम्हे एक खर्च भी नहीं आने देंगे. अब जाओ और अपना जाल फैलाओ. और हाँ उसका इंतजाम करते है.
उसके बाद मयासुर चला गया देहरादून की सड़कों पैर अपना मायाजाल फ़ैलाने के लिए.
बही आलिआ सभी जगह घूम रही थी और देख रही thi.bacho का मनोरंजन कर रही थी छिप छिप कर. वो इस वक़्त एक आम लड़की बन कर सभी जगह घूम रही थी. उसे बार बार देव का ख्याल आरहा था. जिसे सोचकर hi वो शर्माने लगी जाती. लेकिन फिर सोचती की वो एक इंसान है. और ये सब सायद मुमकिन नहीं हो पायेगा. इसलिए वो अपने मन को मन लेती. लेकिन वो कहते है न की डिल है की मंटा नहीं. वो न चाहते हुए भी देव की तरफ आकर्षित हो रही थी. सायद देव की शक्तियों के प्रभाव से. या फिर कुछ और. और सिर्फ एक छोटी सी hi मुलाकात हुई थी अभी. जब उससे सेहन नहीं हुआ. तो उसने अपनी शक्तियों से पता लगा लिया की देव किस जगह से आया था और कहा गया था. और ये सब जानने के बाद वो नहीं चली गयी यानि की देहरादून.
जहा मयासुर अपनी माया फैला रहा tha…..or वो असुर घाट लगा रहे थे देव के ऊपर.
तो बे कॉन्टिनुए……………….