दिव्यास्त्र.[The power of five elements] - Page 7 - SexBaba
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दिव्यास्त्र.[The power of five elements]

अपडेट 49



उस रौशनी ने गिरते hi चारो तरफ धुआँ और धूल उदा दी थी. कुछ भी साफ़ नहीं दिख रहा था. धीरे धीरे सारा धुआँ साफ़ हुआ और धूल भी. तब जेक कुछ समाज में आया. उस गहरे गड्ढे में बही रौशनी अभी भी चमक रही थी. तभी ऊपर से आसमन कड़का और वो रौशनी थोड़ी दर गयी और एक पेड़ पे पीछे छिप गयी. और ऊपर की तरफ देखने लगी सायद. तभी उसे कुछ नजर आया और वो देखकर वो और दर गयी और जंगल में बिजली की गति से भागने लगी. और उसने आसमान में देखा था की कुछ लोग उस रौशनी का पीछा करते हुए पृथ्वी पैर आरहे थे. जिस बजह से वो दर के मरे भाग रही थी. यहाँ बहा. वो लोग देखने से hi बेकार लग रहे थे. किसी दानवो की तरह. बैसे दिखने में तो ठीक hi थे लेकिन उनका मन अच्छा नहीं था. और वो रौशनी ये जानती थी जिस बजह से वो इनसे छिप रही thi.yaha बहा भाग रही थी और वो लोग जो कुल 4 थे वो भी जंगल में चारो तरफ फ़ैल गए थे और उसे ढूंढ रहे थे. तभी एक ने अपने हाथो को गोल गोल घुमाया और उसके हाथ में एक हंटर जैसी चीज़ आगयी और उसने उस हंटर को एक दिशा में फेक दिया जिस ओरे वो रौशनी छिपी हुई थी. ये देखकर वो और दर गयी और बहा से भागने लगी और वो हंटर उसके पीछे पीछे जहा वो रौशनी जाती बहा वो हंटर भी. रौशनी उस हंटर से पीछा नहीं छुड़ा प् रही थी और जितनी तेज़ गति से भगति उतनी hi तेज़ गति से वो हंटर भागता और उस हंटर के पीछे वो चारो लोग. तभी अचानक से आसमान से एक तेज़ बिजली सीढ़ी जमीन पैर गिरी उस रौशनी और हंटर के बीचे. और बिजली का प्रवाह काफी तेज़ था. आजु बाजु के कई पेड़ो पैर आग तक लग गयी थी. वो हंटर अब रुक चूका था और वो रौशनी एक पेड़ के पीछे से झक कर देख रही थी की आखिर ये हो क्या रहा है. उसे दर भी लग रहा था. और साथ में थोड़ी उम्मीद भी थी की सायद कोई उसकी मदद करने आया है.

तभी उस बिजली मेसे एक तेज़ प्रबाह निकला और उनचारो में से तीन को देखते hi देखते रख में बदल दिया. लेकिन आखिरी बाला अपनी शक्तियों से बच गया. उसने अपने हाथो को आगे करके कुछ किया जिस बजह से उसके हाथो से तेज़ ऊर्जा निकली जिसमे वो बिजली बही रुक गयी. वो आगे hi नहीं बाद पाई. और उसके बाद उस आदमी ने अपने हाथो को तेज़ी से पीछे की तरफ धकेल दिया. और ऐसा करते hi वो बिजली बापिस लौट गयी. और उसी तेज़ बिजली में जा मिली. ये सीन देखकर बिजली भी हैरान थी की ये कैसे संभव हुआ. उसकी बिजली को बापिस भेज दिया इस इंसान ने. आखिर ये है कोण. और उसके पास इतनी शक्ति आई कहा से. ये सभी सोच रही थी. लेकिन वो हार नहीं मैंने वाली थी. और फिर या इंसान ने अपने हाथो को फिर ाव घुमाया और वो हंटर उसके हाथो में आज्ञा. उसके बाद उसने उस हंटर को जोर से हवा में गोल गोल घुमाया और उस बिजली की तरफ फेक दिया और उसका एक छोर उसने अपने हाथो में hi पकड़ लिया. और वो हंटर अपनी लम्बाई को बढ़ाता हुआ उस बिजली के पास बढ़ने लगा. और देखते hi देखते उस हंटर ने उस बिजली के चारो तरफ घेरा बना लिया और उसे एक तरह से खुद में बांध दिया. और ये देखकर सामने वाला इंसान हसने लगा. और साथ में इस बिजली में से भी हसी की आवाज आने लगी. जिसे सुनकर वो इंसान थोड़ा हैरान हुआ. उसने सोचा की ये आखिर है कोण जिसे मैंने बांध रखा है फिर भी ये है रहा है. और वो कुछ आगे सोचता उससे पहले hi साडी बिजली उसकी आँखों के सामने से गायब हो गयी. जिसे देखकर वो हैरान हो गया. क्युकी उसका ये हंटर कोई मामूली नहीं था. जिसको भी येव्हण्टर खुद में बांध ले उसकी साडी शक्तियों को ये चूस लेता है. और जो इसका छोर पकडे होता है उस इंसान के अंदर वो साडी शक्तिया चली जाती है. लेकिन इस बार उसका हंटर ने कुछ उल्टा कर दिया. जिसे वो इंसान भी नहीं समाज पाया. और वो आगे कुछ सोचता उससे पहले hi उसके ऊपर फिर से बिजली गिरी. और इस बार फिर उसने उसे रोकने की कोसिस की लेकिन वो नहीं रोक पाया. ऐसा लग रहा था जैसे वो हवा में hi हाथ हिला रहा है. जिसका कोई भी फर्क नहीं पद रहा था उस बिजली पैर. और देखते hi देखते वो इंसान पूरा उस बिजली की चपेट में आज्ञा. और रख में बदल गया. और उसका वो हंटर बहा से गायब हो गया. सायद वो अपने असली मालिक के पास चला गया. ये सब दूर से वो रौशनी भी देख रही थी. और उसे यकीन hi नहीं हो रहा था की ये कैसे संभव हुआ. वो काफी हैरान और परेशान थी की ये बिजली आखिर है कोण. जिसने इतनी आसानी से उन चारो को ख़त्म कर दिया.

वो अभी सोच hi रही थी की उसके पीछे से आवाज आई.

हवा- कोण हो तुम और तुम्हारा यहाँ आने का क्या कारण है.

ये सुनकर रौशनी पीछे मुड़ी और देखने लगी लेकिन उसे कुछ नहीं दिखाई दिया. तो वो चारो तरफ देखने लगी.

हवा- तुम मुझे नहीं देख पाओगी जब तक में खुद नहीं चाहता. इसलिए प्रयास छोड़ दो. और मेरे सवालो के जवाब दो. और सबसे पहले अपने असली रूप में आओ.

रौशनी- में भी ऐसे hi किसी के सामने नहीं आती हु. और रही बात यहाँ आने की तो में केवल इनसे अपने प्राणो की रक्षा के लिए भाग रही थी और यहाँ आगयी.

हवा- कोण थे ये लोग. और तुम्हारे पीछे क्यों पड़े हुए थे.

रौशनी- ये लोग काली शक्तियों के सिपाही थे. जो मुझे पकड़ना चाहते थे. और जो सबसे आखिर में मारा वो बहा का सेनापति था.

हवा- ये कहा से आये थे. और वो कहा का सेनापति था. और ये तुम्हे क्यों पकड़ना चाहते थे.

रौशनी- ताकि मेरी शक्तियों को अपने बस में कर सके. और मुझे अपना गुलाम बना sake.Or ये कही से नहीं आये थे. ये लोग सौरमंडल में किसी जगह रहते है. कहा मुझे पता नहीं. लेकिन इनका काम एक hi है दुसरो की शक्तिया छीन कर उन्हें अपना गुलाम बनाना. और इसी तरह इनकी नजर मुझ पैर पद गयी और फिर मुझ पैर हमला करने आगये ये log.Lekin अभी तक मैंने इनका मजबूती से सामना किया है. लेकिन इनकी तादात कुछ ज्यादा थी और मैं इनके सामने नहीं टिक पायी और आखिर कार मुझे बहा से अपनी जान बचा कर भागना pada.Lekin उनके ये लोग मेरे पीछे पीछे यहाँ तक आगये.

हवा- तुम हो कोण. और कहा रहती हो.

रौशनी- मेरा नाम आलिआ है. और में भुवर्लोक की निवासी हु. में ब्रह्माण्ड में विचरण कर रही थी की इन दोस्तो की मुझपर नजर पद गयी और ये मेरे पीछे लग गए.

हवा- ये भुवर लोक तो हमारे सौरमंडल से ऊपर है न.

रौशनी- है बही है. हमें कही भी आने जाने पैर कोई मनाही नहीं है. हम देवताओ के सहायक है. उनकी हर प्रकार से मदद करते है. और इन्ही कर्मो के हिसाब से हमें देवता या फिर मनुस्य का जीवन मिलता है. उसी भुवर्लोक के एक छोटे से तारामंडल में मैं रहती हु. अपने परिवार के साथ. इस तारामंडल में मेरे पिता महाराज है. और में बहा की राजकुमारी. और उसे अगर सरल भासा में कहा जाये तो उसे परीलोक कहते है.

हवा- मतलब तुम एक पारी हो.

रौशनी- है में एक पारी हु. अब मैंने तो साडी जानकारी दे दी. अब आप बताओ की कोण हो आप.

हवा- जी में एक साधारण सा मनुष्य हु. मेरा नाम है देवज. भगवन की कृपा से मेरे अंदर कुछ शक्तिया है जिनकी मदद से में पृथ्वी पैर हर बुराई से लड़ता हु. फिर चाहे वो कोई असुर की हो या आम मनुष्य की.

तभी ये सुनकर उस रौशनी ने अपना असली रूप सामने किया और सफ़ेद रौशनी के आगे एक बाला की खूबसूरत पारी कड़ी थी जिसके दो पंख एक खूबसूरत सफ़ेद लिवास. जिसमे वो बहुत hi खूबसूरत लग रही थी. चेहरे पैर एक अलग सा तेज़. और हाथो में एक छड़ी. मतलब की जैसा हमने अभी तक देखा है फिल्मो में या सेरिएल में. ठीक बैसि hi छबि थी उस पारी की. और जिसमे बो बकै में बहुत hi खूबसूरत लग रही थी.

आलिआ- अब आप अपना रूप दिखाए देवज.

मैं- मुझे केवल देव कहिये

ये कहकर मैंने अपना रूप दिखाया. जो कुछ खास नहीं था. क्युकी में लोवर और टी शर्ट में hi यहाँ आज्ञा था. और बाल बिखरे hue.nange पेअर. किसी बिखरी की तरह लग रहा था में तो. और हुआ क्या की जब में सो रहा था तब अचानक से मेरी नींद खुल गयी. मैंने ध्यान से पता किया तो मैंने देखा की कुछ बुरे लोग अभी अभी पृथ्वी पैर दाखिल हुए है. तो बस जैसी हालत में था बैसे hi aagya.mujhe क्या पता था यहाँ एक पारी से मुलाकात होगी. वर्ण थोड़ा सज सबर कर आता. खैर मेरा फर्स्ट इम्प्रैशन कुछ खास नहीं रहा. और इसका साबुत ये था की वो मुझे देखकर है रही थी.

मैं- अब इसमें हसने की क्या बात है. पता है में सो रहा था. लेकिन जैसी hi पता चला की किसी की जान खतरे में है में बैसा hi उठ कर आज्ञा.

आलिआ- हमें माफ़ करना लेकिन आपका पहनावा थोड़ा अजीब सा लग रहा है हमें. जिस बजह से हमें हसी आरही है. और आपका हुलिए भी बिगड़ा हुआ है.

मैं- है मुझे पता है.

आलिआ- माफ़ करना हमें. हम आपका मजाक नहीं उदा रहे है. आप कृपा कर के बुरा न मने. आपने हमारी जान बचाई है. और उसके लिए हम आपके तहे डिल से शुक्रगुजार है.

मैं- कोई बात नहीं ये तो मेरा काम था. बैसे अब आप एक डैम आज़ाद है. आप चाहे तो बापिस जा सकती है.

आलिआ- हमें इतनी जल्दी बापिस भेजना चाहते है आप. क्यों?

मैं- क्युकी मुझे नींद आरही है और मुझे सोने जाना है.

आलिआ- तो आप जाइये सोने इसमें मेरा क्या काम. में तो अभी यही रुकूंगी और घूमूंगी

मैं- जैसी आपकी मर्ज़ी. लेकिन इस भेष में मत घूमिएगा. वर्ण लोग आप पर हसेंगे.

आलिआ- क्यों इस भेष में क्या खराबी है.

मैं- खराबी कोई नहीं है. ये पहनावा यहाँ के लिए थोड़ा अजीब है. या तो आप अदृश्य हो कर घूमिये या फिर यहाँ पैर लड़किया जैसा पहनावा पहनती है उसे पहन कर जहा चाहे बहा घूमिये.

आलिआ- जानकारी के लिए धन्यवाद देव. हम इसका ध्यान रखेंगे.

मैं- ठीक है में चलता हु. शुभ रात्रि.

ये कहके में जाने hi वाला था की वो बोली

आलिआ- अगर हमें आपसे मिलने का मन हुआ तो आप हमें कहा मिलेंगे देव.

मैं- आप मुह्हे याद कर लीजियेगा में खुद आपके पास आजाऊंगा.

आलिआ- ठीक है. अब आप जाइये और अपनी नींद पूरी कीजिये. शुभ रात्रि

उसने ये कहा और मैं बहा से गायब होक सीधा पाने कमरे में पंहुचा और सो गया चद्दर तान कर…

नेक्स्ट डे अपने रूटीन से उठा ध्यान लगाकर फ्री हुआ और नास्ता करने नीचे चला गया. सब बढ़िया था. नास्ता करने के बाद चला गया सलग.

नहीं दूसरी तरफ वो पांचों असुर अब अपनी अगली चल की तैयारी करने लगे थे. और उनके साथ मयासुर भी था.

डी1- उसके पास हर एक चल का जवाब है. इसलिए हमें कुछ अलग करना चाहिए.

मयासुर- बोलो क्या करना चाहिए हमें.

डी1- हमारी शक्तिया इंसानो के दर से बढ़ती है. तो हमें उसी दर को बढ़ाना होगा. हमारी शक्तिया बढ़ेंगी और उससे लड़ने में हमें मदद मिलेगी. मयासुर तुम जाओ और कोई ऐसी मायाफैलाओ जिससे लोग बहुत hi ज्यादा डरने लगे. खुद को भी आईने में देखने से उन्हें दर लग्न चाहिए. दुसरो की तो बात hi छोड़ दो. इंसान डरना सुरु करेंगे. तो सबको ठीक करने की कोसिस करेगा. लेकिन हम उसको कामयाब नहीं होने देंगे. उसको हर समय टोकते रहेंगे.

मयासुर- ठीक है शुम्भ्कासुर. में सब करूँगा. लेकिन वो समाज जायेगा की ये मेरा काम है. और फिर वो मुझे ढूंढ़ना सुरु कर देगा. तब मेरी रक्षा कोण करेगा.

डी1- हम करेंगे. तुम तक उसे कभी नहीं पहुंचने देंगे.

मयासुर- ठीक है तुम पैर विस्वास कर रहा हु में. मुझे निराश मत करना.

डी2- विस्वास रखो. तुम्हे एक खर्च भी नहीं आने देंगे. अब जाओ और अपना जाल फैलाओ. और हाँ उसका इंतजाम करते है.

उसके बाद मयासुर चला गया देहरादून की सड़कों पैर अपना मायाजाल फ़ैलाने के लिए.

बही आलिआ सभी जगह घूम रही थी और देख रही thi.bacho का मनोरंजन कर रही थी छिप छिप कर. वो इस वक़्त एक आम लड़की बन कर सभी जगह घूम रही थी. उसे बार बार देव का ख्याल आरहा था. जिसे सोचकर hi वो शर्माने लगी जाती. लेकिन फिर सोचती की वो एक इंसान है. और ये सब सायद मुमकिन नहीं हो पायेगा. इसलिए वो अपने मन को मन लेती. लेकिन वो कहते है न की डिल है की मंटा नहीं. वो न चाहते हुए भी देव की तरफ आकर्षित हो रही थी. सायद देव की शक्तियों के प्रभाव से. या फिर कुछ और. और सिर्फ एक छोटी सी hi मुलाकात हुई थी अभी. जब उससे सेहन नहीं हुआ. तो उसने अपनी शक्तियों से पता लगा लिया की देव किस जगह से आया था और कहा गया था. और ये सब जानने के बाद वो नहीं चली गयी यानि की देहरादून.

जहा मयासुर अपनी माया फैला रहा tha…..or वो असुर घाट लगा रहे थे देव के ऊपर.



तो बे कॉन्टिनुए……………….
 
अपडेट 50.



शाम का वक़्त था देव सलग से आके अपने घर पैर था. एंड बाकि के दोस्त बगेरा भी घर पैर थे. और बाकि आम ट्रैफिक भी काम hi था सड़क पैर.

तभी मयासुर ने अपनी माया का प्रभाव दिखाना सुरु किया और एक मयाबी ऊर्जा को घर घर में भेजने लगा. वो ऊर्जा इंसानो के सीधे दिमाग में घुस रही थी. और धीरे धीरे अपना असर दिख रही thi.sabhi देहरादून के इंसानो के दिमाग में फोबिअ होता जा रहा था. उनके दिमाग से दर बहार निकलने लगा था. उन्हें बही सब दिख रहा था जिससे उन्हें सबसे ज्यादा दर लगता है. लोग चिल्ला रहे थे शोर मचा रहे थे. और सामान फेक रहे थे. कुछ एक दूसरे पैर तो कुछ खाकी दीवार पैर. इस सब में केवल 7 लोग थे जिन्हे इसका कोई फर्क नहीं पड़ा था. जिनमे देव उसके दादू उसकी माँ प्राची चिराग और लकी शामिल थे और लास्ट थी आलिआ

जिसे समाज में नहीं आरहा था की ये आखिर हो क्या रहा है. लोग यु पागलो की तरह बेहवे क्यों कर रहे है. उसके सामने लोग दूसरी को और खुद को नुकसान पंहुचा रहे थे. जब उसे लगा की सिचुएशन अब आगे बाद रही है तो उसने अपने आस पास मौजूद इंसानो को अपनी शक्तियों से सुला दिया. ताकि काम से काम वो किसी को नुकसान न पहुचाये. और उसने सोचा ये सिर्फ यही है. लेकिन जब उसने ऊपर हवा में जेक देखा तो उसे हर जगह यही मंजर देखने को मिला. तो उसने फ़ौरन अपनी छड़ी घुमाई और चारो तरफ जितने भी इंसान थे उन्हें सुला दिया जिसमे केवल देव और प्राची नहीं थे. बाकि पूरा देहरादून इस वक़्त सो गया था. और कुछ घर के अंदर थे तो कुछ सड़को पैर. लेकिन परेशानी की बात ये थी की मयासुर की माया का असर अभी ख़त्म नहीं हुआ था. आलिआ ने केवल सभी को सुला दिया था. जब भी बो जागेंगे वो फिर से वैसा hi बर्ताव करने lagenge.jis बजह से वो परेशान थी….

बही हॉस्टल में सबको अजीब बेहवे करते देख प्राची भी परेशान थी. उसे कुछ भी समाज में नहीं आरहा था की क्या हो रहा है वो कुछ करती उससे पहले hi सभी जहा थे बही पैर नीचे गिर गए और बेहोश हो गए. जो की आलिआ के जादू से हुए थे वो. ये देखकर उसे और चिंता होने लगी. तो उसने देव को कॉल किया.

बही देव अपने घर में था उसे बहार के हालत के बारे कुछ भी पता नहीं था. क्युकी उसका घर सुरक्षित था. उसके घर के बहार एक अवैध सुरक्षा कवच बना हुआ था जिसे कोई भी शक्ति पार नहीं कर सकती थी. जिस बजह से वो शक्ति अंदर hi नहीं आ पाई. लेकिन वो कवच केवल बुरे जादू को अंदर आने से रोकता है. पॉजिटिव एनर्जी को वो आने देता है अंदर. इसलिए आलिआ का जादू उस कवच को पार कर गया उसके घर में और बहार जितने भी लोग थे वो सरे सो चुके थे. उसके दादू और माँ bhi.lekin देव को इस बात की खबर नहीं थी. लेकिन उसे कुछ एहसास जरूर हुआ था. लेकिन वो इतना स्टोरंग नहीं था. और उसने जब इस एहसास के जरिये बहार की हालत जानने की कोसिस की तो उसे सब नार्मल दिखा. जिस बजह से वो निश्चिंत हो गया. उसे घर के अंदर के भी हालत नहीं पता चले क्युकी उसने जानने की कोसिस hi नहीं की. वो बढ़िया पड़े कर रहा था की उसका मोबाइल बजा. उसने स्क्रीन देखि तो प्राची का no. था. तो उसने उठा लिया.

प्राची- तुम कहा hi देव. और ये सब क्या हो रहा है यहाँ हॉस्टल में.

मैं- में तो घर पैर हु. तुम बताओ क्या हो रहा है बहा पैर

प्राची- क्या तुम्हे कुछ पता नहीं

. मैं- नहीं. क्या हुआ. कुछ सीरियस है क्या.

प्राची- बहुत hi सीरियस है. यहाँ पैर साडी लड़किया बहुत hi अजीब बेहवे कर रही थी. जैसे किसी से बच कर भाग रही हो. कोई जो उन्हें मारने वाला हो. और वो एक दूसरे पैर हमला कर रही है कभी दीवार पैर तो कभी किसी और पैर. कभी खुद को नुकसान पंहुचा रही है. में ये सब देखकर बहुत दर गयी हु. लेकिन अचानक से सभी बेहोश हो गए है. कोई भी हिल नहीं रहा है. हलाकि सब जिन्दा है. मैंने उनके ऊपर पानी भी डाला लेकिन कोई भी नहीं उठा. पता नहीं ये क्या हो रहा है. और सायद ये सभी जगह हो रहा है. में कुछ पक्का नहीं कह सकती.

मैं- लेकिन मुझे उसका एहसास क्यों नहीं हुआ. और मैंने जानने की कोसिस की तो मुझे तो सब नार्मल hi दिख रहा है.

प्राची- तुम एक बार यहाँ आजाओ फिर तय करना की ये नार्मल है या नहीं.

मैं- ठीक है में अभी आता हु. Don't वोर्री सब ठीक हो जायेगा.

ये कहके मैंने फ़ोन रखा और नीचे जेक देखा तो में हैरान था क्युकी बहा पैर राजू बेहोश पड़ा हुआ था. और साथ में दादू भी जो सोफे पैर hi लुढ़क गए थे. और मैं किचन में गया तो माँ बहा पैर गिरी हुई थी. मैंने तुरंत hi उन्हें उठाया और कमरे में ले गया. और उसके बाद दादू को और फिर राजू को. उसके बाद मैंने उनके सर पैर हाथ रखा और देखा की ये किस बजह से बेहोश हुए है तो मुझे कोई पॉजिटिव एनर्जी दिखी जिस बजह से मैं निश्चिंत हो गया. मैंने सोचा पहले बहार की हालत देख ली जाये उसके बाद उनकी होश में लाऊंगा. वर्ण 100 सवाल पूछेंगे ये. में घर से बहार निकला और अपनी शक्तियों से बहार देखने की कोसिस करने लगा. लेकिन में हैरान था की मुझे बहार कुछ भी नहीं दिख रहा था. ऐसा कैसे संभव हो सकता है. मेरी शक्तिया काम नहीं कर रही है या फिर कुछ और बात hai.ye पता लगाने के लिए में ऊपर आसमान में जाने लगा लेकिन अभी मैंने अपने घर से थोड़ा hi ऊपर गया था और मैंने अपना कवच पार hi किया था की मुझे एक बहुत hi जोर का झटका लगा. ये बहुत hi पावरफुल झटका था. ये लगते hi मेरा बैलेंस बिगड़ गया और में नीचे की और गिरने लगा और में कुछ करता उससे पहले hi में नीचे जमीन पैर गिर पड़ा. एक दम से अंजार पंजर ढीले पद गए थे. मैं थोड़ा लुढ़क कर सीधा हुआ और अपनी आँखों को बड़ा करके खोलने की कोसिस करने लगा. जब आँखे ठीक से खुली तो में धीरे से खड़ा होने लगा जैसे तैसे खड़ा हुआ तो खुद की हालत देखकर में खुद चौक गया. मैंने अपने कपडे साफ़ किये.

मैं- इसमें बकै में बहुत दर्द होता है. पता नहीं असुर इसे कैसे झेल जाते थे. जब में उन्हें ऐसे झटके देता था. आआह्ह्ह्ह. मर गया.

ये आखिर था क्या. और मुझे झटका दिया उसने. ऐसा कैसे संभव हो पाया. जरूर कुछ बड़ी गड़बड़ चल रही है यहाँ पैर. और उसे पता लगाने का एक hi तरीका था. तिरदये.

इसलिए में बही जमीन पैर बैठ गया. और अपनी दोनों आँखों को बंद कर लिया. और ध्यान लगाने hi वाला था की मेरे कानो में आवाज आई.

डी1- कैसे हो बचे. झटका कैसा लगा.

ये आवाज सुनकर hi में पहचान गया. और इसके अचानक बोलने से भी में समाज गया की ये क्यों अभी बोलै है.

खैर मैंने उसे अनसुना किया और अपना ध्यान कॉन्टिनुए किया. वो कोई भी शक्ति का प्रयोग करे लेकिन मेरे कवच को भेद कर मुझे पैर हमला नहीं कर सकता था. इसलिए मुझे बातो में उलझने की कोसिस कर रहा था. लेकिन मैंने उसकी नहीं सुनी. और ध्यान लगाने लगा तब फिर आवाज आई.

डी1- लगता है तुम्हे इस सेहर के लोगो की बिलकुल भी पैर वह नहीं है. वर्ण मेरी बातो को अनसुना नहीं करते. अगर मेरी आवाज सुन रहे हो तो सुनो. अगर तुमने इसीवक़्त अपना ध्यान नहीं तोडा तो में इस पोरे नगर में मौजूद हर एक इंसान को करदूंगा. फिर करते रहना रखवाली. सुन रहे हो मेरी बात.

ये आवाज मैंने सुनी. तो मैंने सोचा की क्या किया जाये. में बहार नहीं जा सकता. और ये ध्यान मुझे लगाने नहीं दे रहा है.

डी1- ज्यादा सोचो मत और तुरंत hi अपना ध्यान तोड़ दो. तुम चाहे कितनी hi कोसिस करलो मेरे इस कवच से बहार नहीं निकल पाओगे.

मैंने सोचा ये करना क्या चाहता है. ये ध्यान लगाने से मुझे रोक रहा है तो ये जनता होगा की में ध्यान से कुछ भी कर सकता हु. फिर ये मुझे कोरी धमकी क्यों दे रहा है. मैंने सोचा अब जो होगा देखा जायेगा. और मैंने अपनी आँखों को बंद hi रखा और मंत्र का उच्चारण करने लगा. ऐसा करते hi थोड़ी hi देर में तिरदये खुल गयी. और फिर मुझे सब दिखा की एक्चुअली में हुआ क्या है इस सेहर में. और ये भी की ये किसने किया है. मयासुर ने. और ये भी दिखा की ये सभी अचानक से बेहोश क्यों होगये. क्युकी आलिआ ने सभी को सुला दिया ताकि वो किसी को नुकसान न पंहुचा पाए. ये सब देखने के बाद मैंने सोचा मुझे बहार जाना hi होगा. और उसके लिए मुझे वो कवच तोडना होगा. लेकिन प्रॉब्लम अब सुरु हुई. क्युकी उनका कवच ठीक मेरे बनाये कवचह के ऊपर था. अब अगर में उस कवच को तोड़ता हु तो उसका असर सायद मेरे बनाये कवचह पैर भी पड़े. और वो कमजोर हो जाये. और ऐसे कमजोर कवच को ये आसानी से तोड़ सकते थे. और मुझे नया कवच बनाने का सायद hi ये समय दे. और में देखता हु की इनलोगो ने एक के ऊपर एक कवच बना कर एक मोती परत बना ली है. जिसे तोडणे में बहुत शक्तियों का इस्तेमाल होगा. और उसके प्रभाव से मेरा बनाया हुआ कवच तुरंत hi टूट जायेगा और ये मेरे घर में घुस आएंगे. और ये कुछ भी कर सकते है. लिखे पोरे घर को उदा देना. हलाकि ये घरवालों को नहीं छू सकते थे. लेकिन घर को तो छू hi सकते थे. पूरा का पूरा घर hi अगर उन्होंने गायब कर दिया तो क्या होगा. और सबसे बुरी बात ये थी की में इन्हे मार नहीं सकता. अब केवल एक hi रास्ता था की यही से सब काम किया जाये. सायद कोई रास्ता निकल आये. लेकिन लगता नहीं था की ये आईडिया भी काम करेगा. क्युकी इस कवच की बजह से मुझे बहार के हालत के बारे में पता नहीं चला. एक तरह से मेरा सभी से कांटेक्ट टूट सा गया था. मेरी ऊर्जा उस कवच को पार नहीं कर प् रही थी. जिस ऊर्जा से में सभी को ठीक कर सकता था. फिर भी मैंने कोसिस करने की सोची. जैसे मुझे तिरदये ओपन होते hi सब दिखने लगा. सायद मेरी ऊर्जा भी कवच को पार कर जाये. इसलिए मैंने अपनी ऊर्जा को छोड़ना सुरु किया. जो एक एक करके सभी के दिमाग से उस फोबिअ को मार देती. मेरी ऊर्जा निकल कर फैलने लगी. लेकिन नहीं हुआ जिसका मुझे अंदाजा था. वो ऊर्जा उस कवच को पार नहीं कर प् रही थी. मैंने ऊर्जा का प्रवाह ज्यादा नहीं बढ़ाया क्युकी फिर वो टूट जाता और साथ में मेरा बनाया हुआ कवच भी. इसलिए अब मुझे कुछ और hi सोचना था. लेकिन क्या. तभी मुझे एक आईडिया आया. की प्राची सायद सभी को ठीक कर सकती है. अगर वो कोसिस करे तो. इसलिए मैंने उससे कांटेक्ट करने की कोसिस की. लेकिन अगेन फ़ैल. इसलिए मैंने अपना ध्यान तोड़ दिया. और फ़ौरन hi अंदर आज्ञा. मैंने अपने फ़ोन से तुरंत hi प्राची को कॉल किया.

प्राची- कहा रह गए तुम अभी तक आये क्यों नहीं.

मैं- सॉरी में नहीं आ पाउँगा.

प्राची- लेकिन क्यों.

मैं- वो दरअशल ये असुरो का काम है. और उन्होंने सभी के अंदर एक फोबिअ बना दिया है अपनी माया से. जिस बजह से सभी लोग इस तरह से बेहवे कर रहे थे. और उन्होंने मेरे घर के ऊपर एक सॉलिड कवच बना दिया है. जिसके पार में नहीं जा प् रहा हु. और अगर जाने की कोसिस की तो मेरा बनाया हुआ कवच टूट जायेगा और जो असुर घर में घुस जायेंगे और लोगो को नुकसान पहुँचाने की कोसिस करेंगे. इसलिए में जब तक इससे निपटने का रास्ता ढूंढ रहा हु. तब तक तुम्हे इसको ठीक करने की कोसिस करनी होगी

प्राची- क्या में. लेकिन में कैसे कर सकती हु ये.

मैं- तुम कर सकती हो. याद है मैंने तुम्हे बताया था की मेरी शक्तियों का छोटा सा ाँस तुम्हारे अंदर चला गया है. तुम्हे उसी की मदद से ये सब ठीक करना होगा

प्राची- लेकिन कैसे.

मैं- तुम ध्यान लगाओ चाहे कितना भी मन करे आँखे खोलने का लेकिन आँखे नहीं खोलना. मन में ॐ का जाप करो. और महादेव का स्मरण करो. तुम्हे जरूर सफलता मिलेगी.

प्राची- ठीक है में कोसिस करती हु.

मैं- अपने आप पैर यकीन रखना. सब ठीक होगा. अब जल्दी से स्टार्ट करो. में जब तक देखता हु कुछ अलग करने की.

प्राची- ok. Bye..

मैं- bye आल थे बेस्ट.

ये कहके उसने फ़ोन रख diya.or में यहाँ सोचने लगा की में आखिर करू क्या. में इस पारी से भी कांटेक्ट नहीं कर प् रहा था. सायद वो मेरी कोई मदद कर सकती. लेकिन लगता नहीं. वो भी मुझसे बात करने की कोसिस कर रही होगी. लेकिन इस कवच के कारण कुछ नहीं हो प् रहा है. और अब मुझे कुछ करना hi होगा. वर्ण बहुत देर भी हो सकती है. तभी मुझे एक आईडिया आया. मैंने सोचा की मेरा कवच घर से 50 मीटर की ऊंचाई पैर है. और उनका कवच लगभग 70 मीटर की. तो क्यों न एक और कवच बनाया जाये ठीक मेरे कवच के नीचे. जिससे अगर ऊपर वाला कवच कमजोर भी पड़ता है तो नीचे वाला संभल लेगा. है ये आईडिया मुझे अच्छा लगा.

इसलिए मैंने अंदर hi अपनी आँखों को बंद किया और तीसरी आँख को खोला और उससे किरणे निकाल कर एक और अवैध कवच बनाने लगा पहले से ज्यादा मोटा और ताकतवर इतना की कोई भी आसुरी शक्ति उसके पास भी न आपये…..

करीब 10 मं. में कवच बन कर रेडी हो गया. और अब समय था इस कवच को तोड़ने का. इसलिए में बहार आया बैसि hi इस्थिति में. मैंने अपनी तिरदये को खोले रखा. अब मुझे उनका वो कवच साफ़ दिख रहा था. मैंने अपनी शक्तियों को इकसठ किया. और फुल प्रेशर से उनको तिरदये के थ्रू छोड़ दिया उनके कवच पैर. और जैसे hi मेरा शक्तिया इस कवच से टकराई. आसमान में भयंकर और तेज़ रौशनी उत्पन्न होने लगी शाम का वक़्त था लेकिन इस रौशनी से ऐसा लग रहा था जैसे सुबह हो रही हो. और सूरज उग रहा हो. इसका प्रभाव काफी तेज़ था. उनका कवच धीरे धीरे कमजोर पड़ने लगा था. और साथ में मेरा पहले वाला कवच भी. लेकिन अभी बने उस कवच को कुछ भी नुकसान नहीं हो रहा था. मतलब मेरा आईडिया काम कर गया था. और थोड़ी hi देर में एक विस्फोट हुआ हवा में. और उनका कवच टूट गया. और इससे पहले की वो कुछ और हरकत करते मैंने बहा से उड़द गया और अपने घर की सीमा से बहार निकल आज्ञा. अब अगर वो चाहे तो इसके ऊपर फिर से कवच बना कर मुझे अंदर जाने से रोक सकते थे. लेकिन अब में उनकी बंद बजने वाला था. खासकर मयासुर की. क्युकी वो असुर ऐसे मेरे सामने नहीं आने वाले थे. लेकिन सायद मयासुर को बचने के लिए जरूर मेरे सामने आएंगे.



तो बे कॉन्टिनुए……………...
 
अपडेट 51



में उनके कवच से बहार निकल चूका था. और प्राची ध्यान लगाने की कोसिस कर रही थी. लेकिन ये इतना आसान नहीं था उसके लिए. फिर भी वो पूरी कोसिस कर रही थी. और तभी पीछे से मुझे आवाज आई.

आलिआ- तुम कहा थे अभी तक. न मेरी आवाज का कोई जवाब दे रहे थे.

मैं- में थोड़ा बिजी था. बैसे तुमने अच्छा काम किया सभी को सुला कर. काम से काम अब बो खुद से लड़ेंगे तो नहीं.

आलिआ- ओह्ह थैंक्स. बस मुझे जो सही लगा मैंने वो किया.

मैं- मेरी एक मदद और करोगी.

आलिआ- क्या.

मैं- आओ मेरे साथ.

मैंने उसका हाथ पकड़ा और हम तुरंत hi प्राची के हॉस्टल में पहुंच गए.

जहा हमने देखा की प्राची अपने कमरे में आँख बंद करके बैठी हुई है.

मैं- तुम्हे यही पैर रहना है और ये देखना है यहाँ पैर कोई भी बुरी शक्ति न आपये. इसका ध्यान में बैठना जरुरी है.

आलिआ- लेकिन क्यों. तुम भी तो ये सब ठीक कर सकते हो.

मैं- है कर सकता हु. लेकिन में चाहता हु की ये सब ये ठीक करे. ताकि इसी बहाने इसकी शक्तिया जाग जाये और ये ऐसी सिचुएशन में सबकी मदद कर सके.

आलिआ- बैसे ये कोण है.

मैं- ये मेरी गफ है. बाकि इंट्रो बाद में करवा दूंगा. फिलहाल नजर रखो. में जरा इनकी खबर लेके आता हु

आलिआ- ok में ध्यान रखूंगी इसका. तुम आराम से जाओ.

उसके बाद में बहा से बापिस हवा में आज्ञा. अब मुझे पता था की वो असुर आस पास hi है. लेकिन में उनको देख नहीं प् रहा था. पता नहीं कोनसी शक्ति का प्रयोग करते है ये. खैर मुझे ढूंढ़ना तो था hi. इसलिए मैंने अपनी आँखों को बंद किया. और मयासुर की तलाश सुरु की. और मुझे ज्यादा म्हणत नहीं करनी पड़ी. वो मुझे आसानी से मिल गया और में इस तरफ तेज़ी से निकल गया. और तेज़ी से जाते हुए मैंने खुद को एक डैम से गायब कर लिया. ताकि वो भी मुझे न देख सके. मयासुर इस वक़्त जमीन के नीचे एक बहुत बड़ी गुफा में छिपा हुआ था. और वो जगह देहरादून से ज्यादा दूर नहीं थी. इसलिए में जल्दी hi बहा पहुंच गया. लेकिन वो जमीन के नीचे था. और में आसमान में. इसलिए में तेज़ी से नीचे की तरफ बाद गया. और जैसे hi जमीन से टकराने वाला था. उससे पहले hi पृथ्वी के ाँस की शक्ति से जमीन अपने आप मुझे रास्ता देने लगी. और मेरे पीछे से सारा रास्ता बापिस से जुड़ने लगा और मेरे आगे रास्ता बनने लगा. में जमीन के नीचे करीब 1000 फट. नीचे गया. उसके बाद में पैरेलल होक सीधा जाने लगा. और आगे चलके केवल एक जगह रास्ता बनाना पड़ा उसके आगे रास्ता पहले से hi बना हुआ था. क्युकी इसी गुफा मायासुर छिपा हुआ था. जैसे hi में उस गुफा के रस्ते में पंहुचा. मयासुर को इसकी भनक लग गयी. और में समाज गया की इसका प्लान क्या है. लेकिन बकवास प्लान था उसका. वो गायब होक ऊपर जाता उससे पहले hi मैंने उसको पकड़ लिया. और जमीन को फाड़ते हुए में ऊपर जाने laga.or साडी जमीन में मयासुर को ऊपर करके तोड़ रहा था. जिस बजह से उसे बहुत hi ज्यादा छोटे आरही थी. उसकी हालत ख़राब होने लगी thi.or उसपर से में उसे बीच बीच में एक दो घुसे भी करता हुआ जा रहा था. जिस बजह से उसका दर्द और बाद रहा था. उसे में बिलकुल भी नहीं दिख रहा था. न hi उसे एहसास हो रहा था मेरे स्पर्श का. बस उसे जोर जोर से छोटे लग रही थी. जिस बजह से उसे समाज में आरहा था की में उसे मार रहा हु. थोड़ी hi देर में उसकी थोड़ी तकलीफ काम हो गयी. क्युकी हम जमीन को फाड़ कर बहार निकल चुके थे. और आसमान की तरफ उड़ते हुए जा रहे थे. में उसे सीधे स्पेस में ले जा रहा था. ताकि वो असुर इसे बचा न पाए. क्युकी उनकी शक्तिया भी पृथ्वी से hi थी. और आकाश में उनकी ज्यादा ओकात नहीं थी मेरा मुकाबला करने की. और ये जो कुछ भी हो रहा था. सायद उनका प्लान ऐसा नहीं था. या फिर हो भी सकता था.

खैर में उसे सीधा तारो के बीचे ले गया. और उसे पकड़ कर रक बड़े से उल्का पिंड से दे मारा. वो पिंड पल भर में टुकड़े टुकड़े हो गया. और ये बिना किसी सहारे के स्पेस में तैरने लगा. सायद बेहोश हो गया था. हलाकि मायावी था इसलिए लगता नहीं की यहाँ स्पेस में ये मरेगा. जब तक में खुद इसे नहीं मरता हु. में उसके पास गया. और उसके चेहरे पैर एक जोरदार पंच जड़ दिया. और ये पांच कहते hi साला होश में आज्ञा. और मुझे देखा कर दूर को भागने लगा

मैं- कहा भागेगा मयासुर.

मयासुर- तुझसे बहुत दूर.

में ठीक उसके सामने आजा रहा था हर बार. वो जहा भी जाने की कोसिस करता में उसके सामने आजाता.

मैं- जहा भी जायेगा मुझे बहा पहले पायेगा. आज तेरा अंत आज्ञा है मयासुर. और जितना भागेगा उतना ज्यादा तड़पेगा. इसलिए मर्द बन और मुकाबला कर मेरा. ये कायरो की तरह भागना बंद कार्डो.

मेरी बाते उसके दिमाग में घुस गयी.

मयासुर- सही कहा तुमने. अगर मरना hi है तो लड़ कर मरना पसंद करूँगा में. यु कायरो की तरह भाग कर नहीं. आजा बचे…

ये कहके उसने मुझे अपनी तरफ आने का इशारा किया. और में उड़ता हुआ उसकी तरफ गया. और वो इस बार मेरे लिए रेडी था. जैसे hi में उसे मरने वाला था वो झुक गया. और मेरा निशाना चूक गया. और इसका फायदा उठा कर उसने मेरे सीने में एक पंच दे मारा जो बकै में काफी पॉवरफुल था. और उसके फाॅर्स से में ऊपर की तरफ उड़ता हुआ जा रहा tha.or इतने से उसका मन नहीं भरा तो स्पीड से आके उसने मुझे एक और बार मारा. जिससे में और ऊपर चला गया और एक बड़े से पत्थर से टकरा गया. जिससे बो बही टुकड़े टुकड़े हो गया. और वो फिर से मुझे मरने आया लेकिन इस बार मैंने उसका हाथ पकड़ा और जोर से दबा कर मोड़ दिया. और उसकी हड्डी टूट gyi.or उसके बाद एक पॉवरफुल पंच उसके चेहरे पैर. जिसके फाॅर्स से अब वो नीचे की तरफ तेज़ी से जा रहा था. लेकिन जल्दी hi संभल गया. और उसने पता नहीं क्या किया उसका हाथ ठीक हो गया. और उसके बाद उसने अपने कई प्रतिरूप बना लिए देखते देखते hi. और उसके बाद अपने सभी रूपों से एक साथ उसने अपनी शक्तियों को बहार निकला जो सीधे मुझसे टकराई. और उसके फाॅर्स से मुझे थोड़ा सा घाव आज्ञा हाथो पैर. लेकिन वो नहीं रुका और तुरंत hi उसने फुल फाॅर्स के साथ फिर से हमला किया और मैंने फिर से अपना हाथ आगे कर liya.mera हाथ उसके सरे तेज़ को रोकने की कोसिस कर रहा था लेकिन ज्यादा कामयाब नहीं रहा था. तभी मैंने अपनी आँखों को बंद किया. और अपना तीसरा नेत्र खोला और उससे एक जबरदस्त तेज़ बहार निकला जिसने उसकी शक्तियों को तुरंत hi काट दिया और उसकी आँखे फटी की फटी की रह गयी मेरी तीसरी आँख देख कर. खैर थोड़े देर बाद उसने फिर से बही सब किया और अपनी शक्तियों को और ज्यादा ताकत के साथ मेरी तरफ फेका लेकिन इस बार मेरे आँख से भी फाॅर्स के साथ दधाक्ति हुई ज्वाला निकली. और इस बार उसे कोई मौका नहीं मिला. और उस ज्वाला में उसके सरे रूप जल कर भस्म हो गए. और वो देखता hi रह गया और वो कुछ आगे करता उससे पहले hi में उसको तरफ तेज़ी से गया और उसके सरीर को फाड़ कर दूसरी तरफ निकल गया. उसके सरीर के टुकड़े स्पेस में चारो तरफ फ़ैल गए. जो लगभग जल चुके थे. लेकिन में कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था. इसलिए मेरी आँख से फिर से ज्वाला निकली और उसके सरे ाँस को जला कर रख में बदल दिया. मयासुर का chapter यहाँ पैर ख़त्म हो गया. उसकी माया की एक न चली यहाँ पैर. एंड उसके बाद में नीचे गया सीधा अपने सेहर में. लेकिन रस्ते में hi रुकावट आगयी. वो भी 2-2 मेरे सामने दो लोग खड़े हुए थे. और उनको देखते hi में समाज गया की यही है वो असुर.

डी3- मान गए कितनी वीरता से तुमने मयासुर का अंत किया. देखकर मजा आज्ञा. लेकिन अब टी फास चुके हो.

ये कहके वो दोनों हसने lage.or में टोटली कंफ्यूज की ये क्या कह रहे है. में कैसे फास गया.

मैं- साफ़ साफ़ कहो क्या कहना चाहते हो तुम.

डी5- इसे जानने की बहुत जल्दी है.

डी3- है वो तो रहेगी hi. लेकिन में बता दू की इतनी आसानी से नहीं बताने वाला में. तुम्हे हमें मजबूर करना होगा बताने के लिए.

मैं- तुम फिलहाल अमर हो इसका ये मतलब नहीं की तुम्हारा मुकाबला में नहीं कर सकता. तुम्हे इतना दर्द दूंगा की तुम्हारी आत्मा भी कम्प जाएगी. इसलिए अगर ये सब नहीं चाहते तो साफ़ साफ़ बताओ. वर्ण में जाता हु यहाँ से

डी5- ठीक है जाओ. लेकिन जाओगे कहा.

मैं- मतलब.

डी3- मैंने कहा न. हम नहीं बताएँगे.

अभी में इनकी बाटे समाज hi रहा था की पता नहीं कहा से एक चमकती हुई रस्सी आई जो रस्सी तो बिलकुल नहीं थी. किसी शक्ति का प्रहार था. और उसने मुझे कसके जकड लिया. और में हैरान था की ये कैसे संभव हुआ. में हिल भी नहीं प् रहा था. मेरी शक्तिया भी काम करना बंद कर चुकी थी.

मैं- ये क्या है.

डी2- ये है. मयाबी पाश. जिसके बंधन से स्वयं इंद्रा भी नहीं बच सकता. ये धीरे धीरे सामने वाले की साडी शक्तियों को चूस लेता है और फिर उसकी जान बही निकल जाती है. तुम चाहे कितना hi प्रयास करो. इससे नहीं छूट पाओगे क्युकी ये तुम्हे अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने hi नहीं देगा. और सुनो इसे मैंने स्वयं महादेव की तपस्या करके उनसे प्राप्त किया था वरदान स्वरुप.

मैं- फिर तो तुमने इसे मुझपर चला कर गलती कर दी है.

डी3- वो कैसे.

मैं- बताता हु.

ये कहके मैंने अपनी आँखों को बंद किया और ऐसा करते hi मेरा तीसरा नेत्र खुल gya.or जैसे hi वो खुला. सरीर में एक ऊर्जा का प्रबाह हुआ. और मेरा सरीर किसी ज्वालामुखी की तरह तपने लगा. और मेरे सरीर के साथ साथ वो पाश भी गर्म होने लगा उसमे से धुआँ निकलने लगा. और वो तीनो देखकर दांग थे की ये कैसे संभव हो रहा है. और थोड़ी hi देर में वो पाश पूरा कमजोर हो गया. और उसके बाद मैंने अपने दोनों हाथो को जोर से झटका बहार की तरफ. और ऐसा करते hi वो पाश चार टुकड़ो में बात गया. और उसका असर बही ख़त्म हो गया. और ऐसा होते hi चारो तरफ एक तेज़ हवा चली जिसमे वो तीनो भी आगये और नीचे गिर गए बही आकाश में hi. और इससे पहले की वो सँभालते मैंने अपनी हाथो को जोड़ा और अपने चारो तरफ एक भयंकर कवच बनाने लगा काफी बड़ा जिसके अंदर वो तीनो भी आने लगे. और में धीरे धीरे उस कवच से बहार आज्ञा और वो कवच बन कर रेडी हो गया. और मैंने अपने हाथो को अलग कर लिया.

मैं- अब दिखाओ अपनी शक्तिया.

ये कहके मैंने अपने दोनों हाथो को पहले दूर दूर किया और उसके बाद मैंने दोनों हाथो को एक दूसरे के पास लेन लगा. जिससे वो कवच भी छोटा होने कागा. और जैसे hi वो तीनो कवच की दीवार से टकराये उन्हें इतना तगड़ा झटका लगा की उनका सारा खून hi सुख गया. और उन्हें काफी दर्द भी हुआ लेकिन वो मरे नहीं. और जैसे जैसे कवच छोटा हो रहा था उनके दर्द की सीमा बढ़ती जा रही थी. उनका सारा सरीर इस वक़्त तेज़ अग्नि में जल रहा था. और अंदर से उनके चिल्लाने की आवाजे आरही थी

मैं- अब बताना चाहोगे की और दर्द दू.

डी3- बस करो में बताता हु. हम्मे तुम्हारा सारा सेहर गायब कर दिया है. और साथ में उसमे बेस इंसानो को भी. अब तुम कितनी hi कोसिस करो लेकिन उसे ढूंढ नहीं पाओगे. जाओ और जाकर कोसिस करके देख लो.

ये सुनते hi में फ़ौरन hi नीचे गया तो देखकर हैरान था. क्युकी जहा पैर देहरा दूँ था. बहा पैर अब केवल खली मैदान था. न कोई घर और न hi कोई इंसान. मेरा घर भी नहीं. और न hi प्राची का हॉस्टल और न hi आलिआ. मेरा पूरा भेजा फ्राई हो गया की ये कैसे किया इनलोगो ने और प्राची और आलिआ भी गायब हो गयी. ये कैसे संभव है मैंने अपनी आँखों को बंद किया और प्राची और आलिआ को ढूंढ़ने की कोसिस करने लगा लेकिन नहीं में उन्हें ढूंढ प् रहा था और न hi उनसे बात हो प् रही थी. मुझे लगा सायद इन्होने कोई और मायाजाल फैलाया है. वर्ण वो कही भी जाती मुझे दिख जाती. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. इसलिए ये कोई तगड़ा मायाजाल है. जिसे जल्दी hi तोडना पड़ेगा वर्ण पता नहीं ये क्या करेंगे. पहले इन्ही से पूछता हु की ये सब आखिर है क्या उसके बाद hi कुछ करूँगा..…………



तो बे कॉन्टिनुए………………..
 
अपडेट 52



मैं- हैरान था ये सब देखकर. लेकिन अब कुछ तो करना था hi. मैंने सोचा पहले इनसे जानकारी लेने की कोसिस करता हु. अगर मिल गयी तो बढ़िया वर्ण फिर पूरा जोर लगाना hi पड़ेगा. ये सोचकर में उनके पास गया फिर से.

और मुझे यु आता देख वो तीनो हसने लगे फिर से.

डी2- क्यों बंधू उड़द गए होश.

डी3- उड़ hi जायेंगे. बिचारा बच्चा इस उम्र में क्या क्या देखना पद रहा है उसे.

डी5- बैसे मुझे लगता है ये हमसे जानने आया है की ये सब क्या हुआ है

डी3- बिलकुल सही अंदाजा लगाया है तुमने. इसकी समझ से भी परे है ये सब. इसलिए जानने आया है की ये सब क्या हुआ है. लेकिन अफ़सोस की हम इसकी कोई मदद नहीं कर सकते.

मैं- ये तो वक़्त hi बताएगा.

ये कहके मैंने फिर से उस कवच को छोटा करना स्टार्ट किया. और फिर से उनकी दर्द की सीमा बढ़ने लगी वो चिल्ला रहे थे जानवरो की तरह. लेकिन अपना मुँह नहीं खोल रहे थे बताने के लिए. मैंने उन्हें बहुत देर तक टॉर्चर किया लेकिन मजाल है जो उन्होंने मुझे एक सिंगल क्लू भी दिया हो. आखिर कार दर्द की बजह से वो तीनो बही पैर बेहोश हो गए. अब में समाज गया था की सायद hi ये कुछ बताएँगे. इसलिए सबसे पहले इनको कही ठिकाने लगाना होगा. ये सोचकर मैंने उन सभी को कवच सहित अदृश्य कर दिया. और उन्हें जमीन के नीचे ले गया. लिखे बहुत नीचे. और उन्हें बही पैर छोड़ दिया. और बाकि की जमीन को फिर से जोड़ दिया. अब केवल उस कवच जितनी hi गुफा में वो बेहोश पड़े हुए थे. जहा पैर हवा भी नहीं जा सकती. लेकिन अगेन अभी वो अमर थे इसलिए मरेंगे नहीं लेकिन मरने की दुआ जरूर करेंगे.

उन्हें बहा छोड़ा और मैं हवा में बापिस आया. लेकिन सोचा पहले नीचे सेहर में जेक देखना चाहिए सायद कुछ पता चल जाये. इसलिए में सीधा बहा गया जहा मेरा घर था. इस वक़्त में जमीन पैर खड़ा हुआ था. और सबकुछ समझने की और उसे महसूस करने की कोसिस कर रहा था. लेकिन कुछ हाथ नहीं लग रहा था. मैंने सोचा कही ये कोई कवच बाला मायाजाल तो नहीं. जिसमे उनलोगो ने सभी को छिपा लिया हो. मैंने सोचा ऐसा हो सकता है. ये सब एक नजर का धोका हो. या फिर बकै में उन्होंने कही छिपा दिया हो. सभी को. लेकिन कहा. कहा.

है याद आया काफी उस जंगल में तो नहीं. जहा मुझे पहला ाँस मिला था. या हो सकता है बैसे और भी जगह हो. वो रहती तो पृथ्वी पैर hi है. लेकिन उन तक पहुंचना आसान नहीं होता है. और प्राची को भी बही छिपाया था उनलोगो ने. है नहीं हो सकता है. लेकिन पहले में एक बार कन्फर्म कर लू.

ये सोचकर में बही नीचे बैठ गया. और अपनी आँखों को बंद करके अपना मंत्र जाप करने लगा. थोड़ी hi देर में सब कुछ दिखने लगा. तब मैंने सेहर की खोज जारी की और साथ में प्राची आलिआ और बाकि सभी की. कोई तो मिलेगा. काफी देर तक सबको ढूंढ़ता रहा लेकिन हर बार मुझे सेहर और बाकि सभी लोग दिख रहे थे और वो सब सही सलामत थे ये भी दिख रहा था. प्राची ने अपने ध्यान पैर काबू प् लिया था और सभी को ठीक कर दिया था. और फिलहाल आलिआ और प्राची दोनों गप्पे लड़ा रही थी. और बाकि सेहर नार्मल बेहवे कर रहा था. मैंने बाकि सभी को देखा तो वो भी ठीक थे. मेरे घर वाले भी सभी ठीक थे. बस मुझे फ़ोन तरय कर रहे थे. लेकिन वो तो घर पैर hi था. में टोटली कंफ्यूज था की ये चक्कर क्या है. मुझे कुछ समाज में नहीं आरहा था की ये आखिर किस प्रकार की माया है.

और जब कुछ समाज में नहीं आया तो सोचा अब गुरुदेव hi कोई रास्ता दिखाएंगे. इसलिए मैंने उनका आवाहन किया

मैं- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- कैसे हो देव. लगता है फास गए हो कही.

मैं- कुछ ऐसा hi है गुरुदेव कुछ समाज में नहीं आरहा है. पूरा का पूरा सेहर गायब हो गया है. और साथ में लोग भी. लेकिन जब मैंने उन्हें देखा तो सब ठीक है और यही है पृथ्वी पैर. लेकिन मुझे उन तक जाने का रास्ता नहीं मिल रहा है. ये किस प्रकार का माया जाल है गुरुदेव. कृपा कर मेरा मार्गदर्शन करे.

गुरुदेव- अवस्य देव. तो सुनो. उन पांचो ने मिलकर hi इस माया को बनाया है. और मुझे कहते हुए दुःख हो रहा है की तुम उस माया में फास गए हो. और सेहर और बाकि के लोग कही नहीं गायब हुए है. सब बही है जहा उन्हें होना चाहिए था. लेकिन तुम गायब हो चुके हो. तुम इस समय पृथ्वी पैर नहीं हो.

ये सुनके में सॉलिड चुका की ये कब हुआ और कैसे.

मैं- में पृथ्वी पैर नहीं तो कहा हु गुरुदेव.

गुरुदेव- देव तुम इस वक़्त एक मायाजाल के अंदर हो जिसका निर्माण मयासुर में किया था इन पांचो के साथ मिलकर. अब चुकी मयासुर नहीं रहा तो इसको तोडना अब उतना hi मुश्किल हो जायेगा. उन पांचो ने इस मायाजाल के अंदर की रचना की है और मयासुर ने बाहिरि रचना. जिससे तुम बहार निकल सकते थे. लेकिन अब उस माया को तड़पना बहुत मुश्किल होगा. है अगर मयासुर जीवित होता तो बात कुछ अलग होती. उन असुरो ने पहले इस मायाजाल का निर्माण किया और फिर तुम्हारे सामने चारे की तरह मयासुर को रख दिया. ताकि तुम किसी बजी तरह उससे लड़ो और वो तुम्हे पृथ्वी से बहार ले जाये. ताकि ये असुर इस मायाजाल को बहा पैर पंहुचा सके. जिसमे तुम पृथ्वी समाज के घुस गए. और उनके जाल में आसानी से फास गए.

ये सब सुनके मुझे समाज में आया की में कितना बड़ा दफर था. जो इतनी बात नहीं समझा. हलाकि मुझे अंदाजा था लेकिन मैंने सोचा हैंडल कर लूंगा. लेकिन ये तो एक नै मुसीबत hi सामने आगयी.

मैं- तो क्या गुरुदेव इस मायाजाल को तोडा नहीं जा सकता. क्या मेरी शक्तिया इसे तोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं है

गुरुदेव- कोसिस कर सकते हो. तुम्हे अगर इस मायाजाल से बहार निकलना है तो तुम्हे पृथ्वी ाँस को अपने से अलग करना होगा. और फिर कोसिस करनी होगी. क्युकी अगर तुमने ऐसा नहीं किया तो तुम्हारी शक्तिया तुम्हारा hi सर्वनाश कर देंगी.

मैं- में कुछ समझा नहीं गुरुदेव.

गुरुदेव- देव. तुम्हे सबसे पहले अपने अंदर से पृथ्वी ाँस को बहार निकलना होगा. और उसके बाद तुम्हे अपनी शक्तियों से उस कवच को तोड़ने की कोसिस करनी होगी. कामयाब हो गए तो उस ाँस को बापिस से अपने अंदर समाहित कर सकते हो.

मैं- परन्तु गुरुदेव इसमें तो खतरा है. पहला तो ये की ये मायाजाल उन असुरो ने बनाया है इसलिए यहाँ की हर एक चीज़ उनकी है. और ऐसे में अगर में इस एंड को बहार निकलता हु तो वो उसे आसानी से छीन लेंगे. और दूसरी बात ये की मुझे ऐसा क्यों करना है.

गुरुदेव- देव. तुम्हारा दर सही है. उन्होंने ये मायाजाल उसी प्रकार बनाया है ताकि ये नौबत आये और वो इस ाँस को हथिया सके. और दूसरी बात ये की अगर तुमने उस ाँस को बहार नहीं निकला तो तुम जीतनी भी कोसिस करोगे इस मायाजाल को तोड़ने की वो सभी नाकाम हो जाएँगी. क्युकी पृथ्वी ाँस से उस मायाजाल को शक्तिया प्रदान होती है. और तुम जब शक्तियों का इस्तेमाल करोगे तो उसमे पृथ्वी ाँस की शक्तिया भी समाहित रहेंगी और जिससे ये मायाजाल और भी ताकतवर होता जायेगा और फिर तुम इसे तोड़ नहीं पाओगे. इसलिए तुम्हे ये करना hi होगा. जनता हु इसमें ाँस के जाने का खतरा बना रहेगा. लेकिन तुम्हे इस ाँस को भी बापिस लाना होगा और साथ में इस मायाजाल को भी तोडना होगा.

मैं- ठीक है गुरुदेव में करता हु जैसा आपने कहा है.

गुरुदेव- विजय भाव देव.

इसके बाद मैंने अपना ध्यान तोड़ दिया. और आँखे खोल कर चारो तरफ देखने लगा. और सोचने लगा की वाकई में क्या खूब कलाकारी दिखाई है इन लोगो ने. लेकिन अब कुछ तो करना hi होगा. एक कोसिस करके देखता हु. सायद कुछ काम बन जाये.

उसके बाद मैंने अपनी आँखों को बंद किया और अपनी ऊर्जा को चारो तरफ फ़ैलाने लगा बिना उस ाँस को बहार निकले. मेरी पॉजिटिव एनर्जी चारो तरफ फैलने लगी और उसका असर ये हुआ की चारो तरफ जो भी चीज़े थे वो काळा धुए में बदल कर गायब होने लगी जिस भी चीज़ से मेरी ऊर्जा टकराती उसे उसी पल मिटा देती. मेरे चारो तरफ इस वक़्त एक सूर्य के सामान बड़ा से गोला बना हुआ था जो सूर्य देवता के सामान hi रौशनी फैला रहा था चारो तरफ. उस गोले की रौशनी पालक झपकते hi चारो तरफ फ़ैल गयी. और जैसे जैसे ऊर्जा फ़ैल रही थी बैसे hi बैसे मेरा आकार बाद रहा था. पहले 20 फिर 40 और फिर 100 फट. मेरा आकार बढ़ता जा रहा था और रौशनी चारो तरफ फैलती जा रही थी. और हैरानी की बात ये थी की मेरे साथ साथ वो मायाजाल भी बदतर जा रहा था. लेकिन उतनी तेज़ी से नहीं जितने से में बाद रहा था. जैसे जैसे उस मायाजाल की लम्बाई बाद रही थी मेरे साथ वैसे वैसे hi वो कमजोर पड़ने लगा था. और मेरी ऊर्जा बाकि का काम कर रही थी. जो उस जाल को अंदर से पूरा खोकला करती हुई जा रही थी. उस जाल में अब ज्यादा शक्ति नहीं बची थी. न hi वो मेरी शक्तियों को संभल प् रहा था और न hi मेरे आकर को जो फिलहाल कितना ऊँचा था ये मुझे भी नहीं पता. लेकिन इतना जरूर तय था की अगर ये मायाजाल न होता तो इस वक़्त साडी दुनिया मुझे देख रही होती की ये आखिर है क्या. सभी गृह इस समय मेरे सामने एक छोटे से कंकड़ में बदल चुके थे. और ये जानकर धीरे धीरे सूक्ष्म होते जा रहे थे. मतलब दिखना पूरी तरह से बंद. लेकिन हैरानी की बात ये थी की कवच अभी भी टिका हुआ tha.merr सर से आसमान गायब नहीं हो रहा था. लेकिन कही न कही ये आईडिया काम कर रहा था.

और कुछ hi देर में एक जोरदार धमाका हुआ आकाश गंगा में. और वो मायाजाल टूट गया और मुझे वो ाँस भी बहार नहीं निकलना पड़ा लेकिन अब सौरमंडल में 2-2 सूर्य चमक रहे थे. और अब सभी इंसान ये देखकर हैरान हो रहे थे की ये आखिर क्या चक्कर है. इसलिए मैंने अपनी ऊर्जा का प्रवाह रोक diya.or सोना आकर भी काम करने लगा और कुछ hi सेक्. में मैं जितना था उतना hi हो गया. और अब मेरे सामने मेरी प्यारी पृथ्वी थी. और जिसके ऊपर वो कवच मुझे साफ़ दिख रहा था जिसे मैंने बनाया था इन असुरो का पता लगाने के लिए. और में समाज गया की अब में सही जगह पैर हु. इसलिए में जल्दी से अपने सेहर की तरफ चला gya.or खुद को अदृश्य कर लिया ताकि कोई मुझे उड़ते हुए न देख पाए. क्युकी एक तो आज कल इतनी सेटटेलिते है स्पेस में की कोई छिप भी नहीं सकता. और उनको अगर में उड़ता हुआ और लड़ता दिख गया तो हो गया कल्याण. में थोड़ी hi देर में सोने सेहर पहुंच gya.jaha सब कुछ नार्मल था. में सीधा गया पहले प्राची के पास जहा वो दोनों अभी तक गप्पे लड़ा रही थी. और जैसे hi मुझे देखा प्राची दौड़ कर मेरे गले लग गयी.

प्राची- मैंने कर दिखाया तुम यकीन नहीं करोगे. मैंने कर दिखाया और सरे लोगो को ठीक भी कर दिया.

मैं- मुझे क्यों यकीन नहीं होगा. मैंने hi तो तुम्हे ये सब करने को कहा था. और मुझे पूरा विस्वास था की तुम ये कर लोगी. और देखो तुमने ये कर दिखाया.

प्राची- थैंक्स मुझे स्पेशल बनाने के लिए.

मैं- है वो तो ठीक है लेकिन याद है न. इनका इस्तेमाल केवल बुराई के खिलाफ hi करना है. कही किसी आम इंसान पैर मत करदेना.

प्राची- में सब जानती हु. और मुझे पता है ताकत अपने साथ जिम्मेदारी लेके आती है. और में इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए रेडी हु पूरी तरह से.

मैं- that's लिखे माय गर्ल.

तभी मेरी नजर आलिआ पैर गयी हो हमें hi देख रही थी.

मैं- तुम आलिआ से तो मिल hi चुकी हो. और आलिआ ये है प्राची. तुमदोनो का इंट्रो हो hi गया होगा अभी तक.

आलिआ- है हमारा इंट्रो हो गया है. बकै में तुम्हारी पसंद कमाल की है.

मैं- थैंक्स आलिआ.

अब एक काम करो. तुम दोनों यही रहो साथ में. में चलता हु. माँ और दादू मेरा वेट कर रहे है.

आलिआ- में यहाँ नहीं रह सकती. प्राची को तकलीफ होगी. और बैसे भी मुझे अब अपने घर जाना होगा. काफी दिन से बहा नहीं गयी हु. बहा पैर मेरे माँ पिता मेरे लिए परेशान हो रहे होंगे.

प्राची- ऐसे कैसे जाओगी. अभी तो आई हो. बाद में चली जाना कुछ दिन तो रुक जाओ मेरे पास.

आलिआ- में आती जाती रहूंगी. लेकिन फिलहाल मुझे जाना होगा. हमें माफ़ करदेना प्राची.

उसने काफी कहा तो फिर हमने उसे नहीं रोका. और उसे अलविदा कह दिया. और वो बही से चली गयी सीढ़ी ऊपर.

और में बहा से सीधा घर आज्ञा. और बही आलिआ जा रही थी मयूष सी होकर. उसके मन में कुछ चल रहा था जिसे इस वक़्त कोई नहीं समाज प् रहा था. लेकिन ये क्या है ये आने वाला समय जरूर बताएगा. और सामने भी लाएगा. अब बस सही समय का इन्तजार करना है.

और बही वो तीनो असुर अब आज़ाद हो चुके थे जिन्हे मैंने कैद किया था. क्युकी जब वो मायाजाल टुटा तो मेरा कवच भी टूट गया उसके साथ और वो बहा से गायब हो गए. एंड बाकि के दोनों कहा थे मुझे नहीं पता.

लेकिन एक सवाल है जो इस वक़्त सभी के मन में चल रहा होगा की मैंने गुरुदेव की बात क्यों नहीं मणि. तो में बतादेता हु. वो गुरुदेव नहीं थे. बल्कि वो उन्ही असुरो के द्वारा बनाई गयी एक और माया थी. जिसमे वो गुरुदेव के द्वारा मुझे वो ाँस बहार निकलने को कहते और में बैसा hi करता और जो उसे हथिया लेते. लेकिन जैसे hi मेरी गुरुदेव से बात सुरु हुई में उसी वक़्त समाज गया की ये गुरुदेव नहीं है. क्युकी जब भी वो मुझसे बात करते है तब एक अलग hi अनुभूति होती है मुझे जिसमे कई गुना हर्ष और उल्लास भरा होता है. और में परमानंद को प्राप्त करता हु. जो मुझे उस वक़्त महसूस बिलकुल भी नहीं हुआ. और दूसरी बात ये की गुरुदेव मुझे हमेशा वत्स कहते है. न की मेरा नाम लेते है. और देव तो बिलकुल नहीं कहते मुझे वो कभी. अगर उन्हें मुझे नाम से hi पुकारना होता है तो वो मुझे अर्णव कहके पुकारते है. जो इस बार नहीं हुआ तो में समाज गया की ये कोई और चल है उनकी. इसलिए मैंने उनकी बात नहीं मणि और अपने मन की की. और इस मायाजाल को तोड़ दिया. और अब वो सभी असुर अपना सर पीट रहे होंगे की ये सब कैसे हो गया…………………

तो बे कॉन्टिनुए………………...
 
अपडेट 53



जैसे तैसे रात निकल गयी. एंड नेक्स्ट डे अपने रूटीन से उठा नाहा धोकर ध्यान में बैठ गया. और थोड़ी hi देर में गुरुदेव आगये

मैं- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- विजयी bhav.vats.

मैं- अच्छा हुआ आप आगये गुरुदेव में आपसे बात करने hi बाला था.

गुरुदेव- इसीलिए तो आया हु. और उससे पहले तुम्हे बहुत बहुत शाबासी की तुमने मयासुर जैसे शक्तिशाली असुर का अंत कर दिया.

मैं- ये सब आपके आसीर्बाद के कारण hi संभव हुआ है गुरुवार. लेकिन मुझे एक संदेह है की क्या वो असली मयासुर था या उसी का कोई अलग रूप. क्युकी उन असुरो की योजना के हिसाब से मुझे नहीं लगता की वो मयासुर को इतनी जल्दी मरने देंगे.

गुरुदेव- बहुत सही प्रश्न किया है वत्स. परन्तु उनकी योजना थोड़ी उलटी पद गयी. क्युकी जो मारा था वो सच में मयासुर hi था. उनकी योजना तो यही थी जैसी तुमने अभी बताई है. लेकिन उससे पहले hi तुमने मयासुर को धुंदलिया. बल्कि उनकी योजना के अनुसार मयासुर खुद तुम्हारे सामने आने वाला था. जो की एक नकली मयासुर होता. लेकिन वो नकली मयासुर आपता उससे पहले hi तुमने उनकी योजना पैर पानी फेर diya.unko थोड़ा समय चाहिए था. इन सब के लिए. लेकिन तुमने उन्हें बही नहीं दिया. सबसे पहले तुमने जल्दी hi उनके कवच को तोड़ दिया. जिससे उनकी साडी योजना धरी की धरी रह गयी. और फिर मयासुर का पकड़ा जाना उनकी दूसरी नाकामयाबी थी. लेकिन आखिरी डाव में तुमने उन्हें चारो खाने चित्त कर दिया. उनके मायाजाल को भी तोडा और उनके साथियो को भी बंदी बनाया जो बाद में छूट गए. लेकिन उसका कोई अफ़सोस नहीं. और तुमने अपनी बूढी का बकुफ़ी प्रयोग किया जो तुमने उनके मायाजाल में अपने ाँस को बहार नहीं निकला. वर्ण सब गड़बड़ हो जाती.

मैं- गुरुदेव उन्हें इस बात की जानकारी कैसे मिली की आप मेरे गुरु है और में आपसे किस तरह बाते करता हु. और उन्होंने मेरे अंदर इसे कैसे किया.

गुरुदेव- वत्स. ये सब उन्हें कभी पता नहीं चलता. लेकिन जब तुम उनके मायाजाल में फसे तो सब कुछ उनके हिसाब से होने लगा. वो जो चाहते थे वो कर रहे थे. तुमने जब मेरा आवाहन किया तब उन्हें पता चल गया. और उन्होंने फिर आगे की योजना पैर कार्य किया. और मेरी आवाज में तुमसे बात की. लेकिन तुम उनकी चाल को समाज gye.us मायाजाल में जो भी तुमने देखा और सुना वो सब उनकी माया का hi प्रबाह था. उस जाल में तुम जो भी सोच रहे थे वो सब उन्हें पता था. और इस बजह से उन्हें आलिआ और प्राची दोनों के बारे में जानकारी मिल गयी है.

मैं- परन्तु गुरुदेव मुझे इस बात का पता क्यों नहीं चला की ये सब मुझे सुन और समाज रहे है.

गुरुदेव- क्युकी बहा की नकारात्मक ऊर्जा तुम्हे ऐसा सोचने पैर मजबूर कर रही थी की तुम जो भी कर रहे हो इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है. और उसी ऊर्जा की बजह से तुम एक पल को अपना ाँस बहार निकलने के लिए मान भी गए थे. लेकिन तुम्हारी तीसरी आँख में तुम्हे जल्दी hi सचेत कर दिया और फिर वो हुआ जिसकी उम्मीद उन असुरो को भी नहीं थी.

मैं- आपने सही कहा गुरुदेव. अब वो असुर काफी कुछ जान गए है. तो इससे हमें कोई खतरा तो नहीं है न.

गुरुदेव- नहीं वत्स. वो भले hi जान गए है लेकिन कर कुछ नहीं सकते. हलाकि कोसिस जरूर करेंगे. परन्तु उन्हें हर बार हार hi मिलेंगी. मेरी तरफ तो वो सभी आएंगे नहीं. बाकि बचे तुम और वो दो प्राची और आलिआ. तो बो होनी रक्षा करना जानती है.

मैं- अब मुझे आगे क्या करना चाहिए गुरुदेव.

गुरुदेव- जल्द hi तुम्हे एक सफर पैर निकलना होगा. जिसकी मंजिल होगी वो दूसरा ाँस. बस उसके लिए तुम तैयार रहो.

मैं- कहा जाना होगा मुझे गुरुवार.

गुरुदेव- पता चल जायेगा. थोड़ा धीरज रखो. अब अपना ध्यान पूरा करो. और है प्राची को भी बोल दो की सुबह सुबह ध्यान लगाए. जिससे उसकी शक्तिया और बढ़ेगी. और भविष्य में वो शक्तिया तुम्हारे काम आएगी. उसी तरह जिस तरह कल आई थी.

मैं- जो आज्ञा गुरुवार. में उसे कह दूंगा.

गुरुदेव- आयुष्मान भाव वत्स.

उसके बाद वो चले गए. और में ध्यान में बैठा रहा. बाकि 2-3 घंटे बाद उठा और फ्रेश होक रेडी होगया सलग के लिए. जल्दी से नास्ता किया और निकल गया सलग. रस्ते से चिराग को पिक किया. और हम निकल गए सलग के लिए.

चिराग- अबे कल पता है क्या हुआ था

मैं- क्या हुआ था

चिराग- पता नहीं यार मेरी माँ बहुत hi अजीब बेहवे कर रही थी. मुझे और खुद को नुकसान पंहुचा रही थी. मुझे सामान फेक फेक कर मार रही थी. मुझे तो कुछ समाज में hi नहीं आरहा था. मैंने तुझे फ़ोन किया तो किसी ने पिक hi नहीं किया. बाद में जब में घर से बहार निकला तो चारो तरफ यही महिला था. लोग एक दूसरे को मार रहे खुद को नोच रहे थे. ऐसा लग रहा था जैसे उनके सरीर पैर कुछ रेंग रहा हो और वो उसे दूर भगा रहे हो. और खुद भी उससे दूर भाग रहे हो. लेकिन बहा ऐसा कुछ भी नहीं था.

ये सब सुनके मेरा दिमाग फैट गया की प्राची ने सभी याददास्त नहीं मिटै.

मैं- क्या तेरी माँ को यद् है उन्होंने क्या किया था.

चिराग- यही तो सबसे हैरानी की बात है. वो ये सब करके बेहोश हो गयी और जब जगी तो उन्हें कुछ भी याद नहीं था की उन्होंने अभी क्या किया है. और यही हाल सबका था. किसी को भी कुछ भी याद नहीं था. में भी बेहोश हुआ था लेकिन मैंने सब अपनी आँखों से देखा था इसलिए मुझे सब याद भी है. लेकिन ये सब में बताऊ किसे यही समाज में नहीं आरहा है. बैसे तू क्या कहता है. माँ को किसी डॉक्टर के पास ले जाऊ क्या. सायद उन्हें कोई फोबिअ हो गया हो.

मैं- अबे ऐसा कुछ करने की जरुरत नहीं. और जरा सोच की पूरा सेहर अगर ऐसा कर रहा था तो उसमे तेरी माँ की क्या galti.sayad कोई गैस बगेरा लीक हो गयी है. जिसका ये सब साइड इफेक्ट्स हो. और जब उसका असर काम हुआ तो सब ठीक हो गया हो. मेरे घर पैर ऐसा hi हाल था. लेकिन बाद में सब नार्मल हो गया. और किसी को कुछ याद hi नहीं था. इसलिए मैंने फिर उनसे कुछ भी नहीं कहा.

चिराग- लेकिन न्यूज़ में तो कुछ नहीं आया ऐसा

मैं- सायद लोग दर न जाये इसकिये न्यूज़ नहीं दिखाई होगी. बाकि लगता है अब सब ठीक है.

चिराग- सायद तू ठीक कह रहा है. ऐसा hi कुछ हुआ होगा.

मैं- है और अब ये बात किसी से मत कहना. वर्ण लोग तुझे पागल समझेंगे. क्युकी उन्हें तो कुछ याद भी नहीं है.

चिराग- आलरेडी समाज चुके hai.meri माँ और मेरे पडोसी.

मैं- इसीलिए चुप रहना. जल्दी hi इसका पता चल जायेगा की आखिर ये सब क्या था. और न भी चले तो भी कोई चिंता की बात नहीं है

चिराग- है बैसे सभी ठीक है तो कोई चिंता की बात नहीं है. लेकिन अगर ऐसा फिर हुआ तो क्या करेंगे.

मैं- अगर ऐसा फिर हुआ तो में खुद कम को कुर्सी से उठा कर यहाँ लाऊंगा और उनसे hi ये सब पूछूंगा की ये सब क्या मटर है. तब तक के लिए भूल जाओ सब. ठीक है.

चिराग- ok बॉस

हमारी इन्ही बातो में सलग आज्ञा. और में सोच रहा था की जिस कवच को मैंने चिराग के ऊपर बनाया था उसी के असर के बजह से प्राची की शक्तियों ने चिराग पैर काम नहीं किया होगा. इसका मतलब ये था की लकी को भी सब याद होगा. और मुझे उसकी याद को भी पलटना होगा. इसलिए मैंने कार में बैठे बैठे hi उसकी यादो को चिराग से मिला दिया. मतलब की जैसा इस वक़्त चिराग सोच रहा था ठीक यही सब वो सोच रहा था. यानि की ये कोई गैस लीक की बजह से हुआ था और किसी को इसके बारे में नहीं बताना है कुछ भी. खैर हम सलग पहुंचे तो हमें दोनों मिल गए. और लकी की बातो से hi में समाज गया की ये बात को समाज गया है. इसके बाद हम कैंटीन में गए.

बहा पैर नास्ता करते हुए गप्पे लड़ा रहे थे. तभी मेरी नजर एक लड़के पैर गयी जो काफी चुपचाप बैठा हुआ था. सायद कुछ सोच रहा था. काफी परेशान भी था. ये लड़का हमारी क्लास से नहीं था. लेकिन परेशान तो था. इसलिए मैंने उसकी बातो को सुनने का फैसला किया और अपनी आँखों को बंद करके उसके दिमाग से जुड़ गया. और उसकी सोच को पड़ने लगा.

लड़का- ये सब क्या हो रहा hai.un लोगो ने मुझे देखा तो नहीं होगा न. न hi देखा हो तो बढ़िया है. वर्ण वो मुझे नहीं छोड़ने वाले. लेकिन में क्या करू. क्या पुलिस को बता दू. सायद वो मेरी मदद कर सके. है यही सही रहेगा. मुझे पुलिस को सब बताना hi होगा. अब बही मेरी मदद करेंगे. वर्ण अगर उन गुंडों को मेरे बारे में पता चला तो सब बिगड़ जायेगा. लेकिन अभी उन्हें नहीं पता है और अगर पुलिस में खबर की तो जरूर उन्हें पता चल जायेगा मेरे बारे में. और फिर बो मुझे नहीं छोड़ेंगे. है भगवन क्या करू में. कुछ समाज में नहीं आरहा है.

ये सब सुनने के बाद मुझे मामला समाज में नहीं आया की ये आखिर किसकी बात कर रहा है. इसलिए मैंने उसकी यादो में पीछे गया. और सब देखने लगा की ये आखिर क्यों दर रहा है.

तो मैंने देखा की सुबह के वक़्त ये जॉगिंग करने जा रहा है. तभी इसे किसी के चिल्लाने की आवाज आती है. तो ये उस तरफ जाता है. लेकिन छिपकर. तो थोड़ा आगे जाने के बाद ये देखता है की 3 लोगो बहा खड़े हुए है. और उनमे से एक ने चाकू को एक आदमी के सीने में घुसेड़ रखा है. और वो इंसान दर्द से तड़प रहा है. और ये सब देखकर ये दर गया और फ़ौरन hi बहा से भाग आया. लेकिन उसकी आहात उन लोगो ने सुन ली. और वो बहा से बहार निकले इसे देखने के लिए लेकिन उन्हें उसकी सिर्फ पीठ दिखी. और उसके बाद उन्होंने एक को इसके पीछे भेज दिया. और बाकि के दोनों ने उस बॉडी को बही जंगल में एक जगह पैर फेक दिया. और बहार निकल आये.

और अब ये सोच रहा है उन्हें इसके बारे में कुछ पता नहीं है. लेकिन उन्हें इसकी साडी जानकारी मिल चुकी है और फिलहाल वो सलग के बहार इसके लिए सेटिंग बिछा रहे है. ताकि लौट ते समय इसका भी गेम बजा सके…

ये में कैसी लैंग्वेज का इस्तेमाल कर रहा हु ..

ये सब बोलके मैंने उसकी बातो को सुन्ना बंद किया और सोचा इसके सामने hi उनकी बंद बजानी पड़ेगी ताकि उसके अंदर का दर दूर हो सके. इसलिए मैंने भी छुट्टी होने का वेट किया. वो लोग अंदर नहीं आने वाले थे सलग में. क्युकी उन्हें पता था की अंदर स्टूडेंट है टीचर्स है और उनका डाव उन्ही पैर भरी पद सकता है. वो जो भी करेंगे वो बहार hi करेंगे.

उसके बाद हम क्लास में गए और बही बोरिंग सा दिन निकलने लगा. बही बोरिंग से लैक्टुरे और बाकि सब. लेकिन निकलना तो था hi.

बही दूसरी तरफ आलिआ जब अपने घर पहुंची तो बहा का माहौल देख कर वो बिलकुल हैरान थी. उसे समाज में नहीं आरहा था की ये सब क्या है. खूबसूरत सा दिखने वाला पारी लोक पूरा बिखरा हुआ था. चारो तरफ हाहाकार मचा हुआ था. लोग भाग रहे थे. और कुछ अजीब से दिखने वाले जानवर बहा पैर विचरण कर रहे थे. और लोगो पैर हमला कर रहे थे. ये सब देखकर आलिआ बहुत घबरा गयी. लेकिन अब घबराने का समय नहीं था बल्कि हिम्मत दिखने का समय था इसलिए उसने अपनी छड़ी को घुमाया और उसके छड़ी से तेज़ रौशनी निकलने लगी. और वो रौशनी जैसे hi एक जीव से टकराई वो बही पैर जल कर खाक में बदल गया. ये सीन देखकर बाकि लोगो ने ऊपर आसमान की तरफ देखा तो उन्होंने आलिआ को बहा पाया. जिससे सबमे एक नया उत्साह सा आज्ञा और सभी आलिआ की जय जय कार करने लगे. लेकिन उसे ये कुछ भी समाज में नहीं आरहा था. इसलिए वो जल्द जल्द से अपने माँ पिता से मिलना चाहती थी. इसलिए वो बहा सभी को छोड़ कर अपने महल की तरफ चली गयी. जहा पैर दरवाजे पैर hi वो जीव खड़े हुए थे. लेकिन वो उस वक़्त केवल 2 हो थे. इसलिए आलिआ ने उनपर भी बही रौशनी फेकि और वो भी जल कर रख में बदल गए. उसके बाद वो अंदर गयी. जहा की हालत ख़राब थी. सभी लोग उसे ठीक करने में लगे हुए थे. वो सीढ़ी की दरवार में जहा अभी दरवार लगा हुआ था और बहा के मंत्री बगेरा सब सोच विचार कर रहे थे की ये सब क्या है क्यों. तभी आलिआ ने अपने पिता को आवाज lagai.jise सुनकर उसके पिता अपने सिंघासन से उठ गए. और उनके चेहरे पैर कृषि और हैरानी दोनों के भाव थे.

वो उठकर दौड़ कर अपनी बेटी के पास आये

आलिआ- पिता जी ये सब क्या है. किसने हमला किया है हैंपर. और हमें बचने देवता क्यों नहीं आये. देवराज indra.kaha थे.

राजाजी- पुत्री ये कालनेमि की सेना है. उसने हैंपर हमला किया था. लेकिन अब बो जा चूका है. लेकिन उसकी सेना यही पैर है. और देवता हमारी मदद नहीं कर सकते. क्युकी कालनेमि को कोई वरदान प्राप्त है. जिस बजह से वो देवताओ से ज्यादा शक्तिशाली है. और अगर देवता उससे लड़ेंगे तो सब हार जायेंगे. इसी लिए हम परेशान है की क्या करे और क्या नहीं.

आलिआ- लेकिन ये हमला हुआ क्यों था. और अब बो कहा गया है. और उसके ये सेना यहाँ पैर क्यों है.

राजाजी- पुत्री उसे पता नहीं किस ने. ये खबर दे दी है की हमारे पास कोई बहुत hi शक्तिशाली वास्तु है. और उसने ये हमला उसी वास्तु को हथियाने के लिए किया था. लेकिन जब उसे यहाँ कुछ नहीं मिला तब वो यहाँ की साडी औरतों को अपने साथ ले गया है उनका अपहरण करके और उसने हमसे कहा है की 2 दिन में अगर उसकी वो वास्तु हमने नहीं दी तो वो एक एक करके सबको मार देगा. और उसमे तुम्हारी माँ भी शामिल है.

ये सब सुनके आलिआ के पैरो टेल जमीन hi खिसक गयी. उसे समाज में नहीं आया की वो क्या कहे. वो एक दम से पत्थर बन गयी थी. उसकी माँ के बारे में सुनकर. तब उसके पिता ने उसे जोर से हिलाया तो उसे होश आया

आलिआ- लेकिन आप कुछ कर क्यों नहीं रहे है. उसपर हमला करिये. हम उसे परास्त करके सभी को बापिस ला सकते है.

राजाजी- नहीं पुत्री हाँ उसका मुकाबला नहीं कर सकते है. क्युकी उसने अचानक हमला करके हमारी साडी सेना को समाप्त कर दिया है. और अब जो भी बचे है वो आम प्रजा है हमारी. और हमने उससे मुकाबला करने की कोसिस की थी लेकिन उसकी शक्तियों के आगे हमारी शक्तियों की एक न चली और उसने हमें परास्त कर दिया है. बैसे पुत्री तुम कहा पैर थी इतने समय से.

आलिआ- पिताजी में पृथ्वी पैर थी. बहा पैर विचरण कर रही थी में. अभी बापिस आई हु. और ये सब देखा मैंने. लेकिन वो कोनसी शक्ति की बात कर रहा था. और हमारे पास है वो शक्ति ऐसी खबर उसे किसने दी. और आपने उसे समझाया क्यों नहीं

राजाजी- हमने उसे बहुत समझने की कोसिस की लेकिन उसे लगा की हम उससे झूट बोल रहे है ताकि वो शक्ति उसके हाथ न लगे. और रही बात उस शक्ति की तो पता नहीं वो कोनसी शक्ति की बात कर रहा था. बस मैंने इतना hi सुना था जो उसने कहा था की उसमे इस समस्त आकशगंगा और तारामंडल की शक्ति भरी पड़ी है. और हाँ ऐसी किसी भी शक्ति को नहीं जानते है. तो हाँ उसे वो दे कैसे. और इस मामले में देवता भी हमारी मदद नहीं कर प् रहे है. लेकिन उन्होंने हमें एक इशारा किया है. की कोई इंसान है जो इस बारे में जनता है वही हमारी मदद कर सकता है. लेकिन वो कोण है ये जाने नहीं पता है. हम बहुत लचर है. अब तुम hi हमारी मदद कर सकती हो पुत्री. क्या तुम ऐसे किसी इंसान को जानती हो जिसको उसके बारे में कोई जानकारी हो. तुम पृथ्वी पैर गहि थी क्या बहा पैर तुम्हे ऐसा कोई मिला था.

ये सुनते hi आलिआ को तुरंत hi देव की याद आगयी. और उसे लगा की शायद वो इंसान देव hi हो. और उसे एक बही एक मात्रा उम्मीद दिखी उसकी माँ और बाकि सभी को बचने की.

आलिआ- है पिताजी शायद में ऐसे एक इंसान को जानती हु. और में उससे मिलकर भी आई हु. सायद बही है जिसकी तरह देवता इशारा कर रहे हो. परन्तु हमें ये नहीं पता है की उसे इस बारे में कुछ पता है या नहीं.

राजाजी- क्या तुम जानती हो. फिर तो बही होगा. और हमें यकीन है की उसे जरूर इस शक्ति के बारे में कुछ न कुछ जानकारी तो जरूर होगी. तुम उसे ले आओ यहाँ पैर. अब बही हमारी आखिरी उम्मीद है.

आलिआ- ठीक है पिताजी हम जाते है उसके पास और उससे पूछते है इस बारे में. अगर उसे इस बारे में कुछ पता होगा तो हम उसे यहाँ ले आएंगे.

राजाजी- विजयी भाव पुत्री. तब तक हम कुछ और योजना बनाते है उससे निपटने के लिए. ताकि अगर हमारे पास कोई विकल्प न बचा तो हमें किसी भी तरह उससे सभी को मुक्त करना होगा.

आलिआ- ठीक है पिताजी.

उसके बाद आलिआ बहा से बापिस पृथ्वी के लिए निकल गयी.

तो बे कॉन्टिनुए………………..
 
अपडेट 54



जैसे तैसे दिन निकला और सलग की छूती हो गयी. हम सब अभी बहार खड़े थे. धीरे धीरे सभी स्टूडेंट अपने घर को जाने लगे थे. भीड़ के बीच मेरी नजर उस लड़के पैर गयी वो अपनी मुंडी नीचे करके बहार की तरफ जा रहा था. पैदल hi. मैंने प्राची और लकी को bye बोलै और में और चिराग जल्दी से मेरी कार में बैठ गए. और में कार को धीरे धीरे ड्राइव करने लगा. और बहार निकल कर मैंने कार को उस लड़के के तरफ मोड़ लिया. जिसे देखकर चिराग हैरान था की में कहा जा रहा हु.

चिराग- सायद तू भूल गया हमारा घर दूसरी तरफ है

मैं- नहीं भुला हु. बस ऐसे hi थोड़ी सेर करले फिर चलते है. बैसे भी घर जेक कोई काम तो है नहीं

चिराग- है ये बात तो ठीक है. चलो तो फिर. में कार को बहुत स्लो चला रहा था और वेट कर रहा था की कब वो लोग उस लड़के पैर अटैक करे. जो इसी रोड पैर होने वाला था. इसलिए मैंने कार को एक साइड पैर खड़ा कर लिया. और वेट करने लगा. वो लड़का अपने घर की तरफ जा रहा था जल्दी जल्दी चलके. सायद उसे दर लग रहा था. वो बार बार अजु बाजु देख रहा था. की कही कोई उसे देख तो नहीं रहा है. बही वो तीनो एक वैन में उसका इन्तजार कर रहे थे. रास्ता धीरे धीरे सुनसान होता जा रहा था. और जब रस्ते पैर ज्यादा लोग नहीं बचे तब उन तीनो ने वैन को जल्दी से आगे बढ़ाया. और एकदम से उस लड़के के साइड में रोक ली. और ओल्ड फिल्मी स्टाइल में उस लड़के को वैन के अंदर दाल कर वैन को आगे भगा दिया. और ज्यादा लोगो की नजर इस पैर गयी hi नहीं. क्युकी इस काम में मुश्किल से 5 सेक्. लगे होंगे. उन्होंने इतनी देर में उस लड़को वैन में डाला और निकल गए. ये सीन मैंने देख लिया था. और कार को तुरंत hi फुल स्पीड में उसी तरफ भगा दिया. ये देखकर चिराग फिर हैरान हुआ की ये सब क्या है.

मैं- अबे एक लड़के का किडनैप हो गया है. अभी अभी.

ये सुनके वो सॉलिड चुका.

चिराग- कहा हुआ. और तुझे कैसे पता चला.

मैं- अबे इसी रोड पैर हुआ है. वो लड़का हमारे hi सलग का है. थोड़ी दुरी पैर था इसलिए ठीक से नहीं दिखा लेकिन उस लड़के को कुछ लोगो ने अपनी वैन में डाला और ले गए.

चिराग- क्या इतना सब हुआ और मुझे पता hi नहीं चला.

मैं- है तेरा ध्यान कही और था सायद इसलिए तूने ध्यान नहीं दिया होगा.

चिराग- एक मं. मुझे कुछ डाउट आरहा है.

मैं- कैसा डाउट.

चिराग- यही की तुझे पता था की यहाँ कोई किडनैपिंग होने वाली है. इसीलिए हम सीधे घर नहीं गए. और तूने दूसरी साइड कार को मोड़ा और बही वेट करने लगा की कब किडनेपिंग हो. बोल में सही कह रहा हु न.

मैं- है सही कह रहे हो तुम. मुझे पता था. लेकिन फिलहाल तू पुलिस को फ़ोन कर और उन्हें डिटेल भेज दे. वो देख वो रही वैन. उसका no. उन्हें बता de.jaldi कर.

चिराग- ठीक है बीआरओ.

उसके बाद चिराग ने तुरंत hi पुलिस की फ़ोन कर दिया और उन्हें साडी डिटेल भेज di.or पुलिस भी आने के लिए निकल गयी. बही में उस वैन को थोड़ा खली इलाके में पहुंचना के वेट कर रहा था. ताकि किसी को कुछ नुकसान न पहुंचे. और ऐसा मौका जल्दी hi आज्ञा. आगे जेक रोड सुनसान हो गया. और मैंने इसी मौके का फायदा उठाया और कार को स्पीड देके उनके आगे ले लिए. और एक दम से ब्रेक लगा दिए. और कार कही थूक न जाये इसलिए उन्होंने भी ब्रेक लगा दिए. जैसे hi हमारी कार की टक्कर होने वाली थी मैंने कार को थोड़ा आगे बड़ा लिया. और मेरी कार थूकने से बच गयी. लेकिन आईडिया काम कर गया. उनकी कार रुक चुकी थी. और उन सभी की ससे छड़ी हुई थी. और साथ में चिराग की भी. मैं- जल्दी से कार से बहार निकला और वैन के ड्राइवर के पास गया. और उसे जोरदार एक पंच जड़ दिया. और साला वो एक hi पंच में अपने होश खो बैठा. अब कार के आगे बढ़ने का कोई चांस नहीं था. उसके बाद मैंने जल्दी से उसका दरवाजा खोला और उसे बहार निकाल कर रोड पैर गिरा दिया. इतने में अंदर से एक बाँदा बहार को जाका और कुछ करने से पहले hi उसने मेरे ऊपर फायर कर दिया. हलाकि मुझे कुछ नहीं होने वाला था गोलियों से. लेकिन उनकी नजरो से बचने के लिए मैंने अपने आप को बुलेट से बचने की एक्टिंग करने laga.lekin वो मान नहीं रहा था. इसलिए में जल्दी से वैन की छत पैर चढ़ गया. और वो छत पैर गोली चलने लगा. और मैंने इसी का फायदा उठा कर उसको दूसरी साइड से पकड़ लिया. और वो कुछ समझता उससे पहले hi उसे ऊपर खींच लिया. और एक पंच दिया रखकर. और इसका भी काम लग गया. अब बचा केवल एक. और मुझे पता था ये क्या करेगा. और हुआ भी बैसा hi. वो उस लड़के को अपनी ढल बनाकर वैन से बहार निकला. उसके गले पैर चाकू लगा कर.

मैं- देख ये हरकत करेगा तो सीधा एनकाउंटर करवाऊंगा तेरा. और अगर सीधे से सरेंडर करेगा तो बच जायेगा.

ग1- अबे जा और मेरे रस्ते से हैट जा वर्ण इसकी जान तो गयी समाज तू. और मेरा क्या एनकाउंटर करवाएगा तू. में खुद अभी तेरा खेल ख़त्म कर दूंगा अगर रस्ते से नहीं हटा तो.

मैं- अच्छा जरा मार के दिखा में भी तो देखु की तू इसको मार्के यहाँ से बचके कैसे निकलता है. मार इसे.

मैंने ये कहा और अपनी शक्तियों से उसके हाथ को फ्रेज़े कर दिया. वो अब अपना हाथ हिला नहीं सकता था. और मैंने इसी का फायदा उठाया और उसकी तरफ आगे बाद गया. वो बार बार मुझे रोकने की कोसिस कर रहा था. लेकिन वो भी ये बात जनता था की उसका हाथ फ्रेज़े है. और वो हिल क्यों नहीं रहा है. इस बात से वो भी परेशान था. और वो कुछ ज्यादा सोचता उससे पहले hi में उस तक पहुंच गया. और उसका बही हाथ मैंने पकड़ लिया. और उसे उस लड़के की गर्दन से अलग किया. और ऐसा करते hi वो लड़का थोड़ा दूर हटा और मैंने दिया एक पंच उसकी नाक पैर. जिससे तुरंत hi उसके नाक और मुँह से खून निकलने लगा. और वो ढीला पड़ता हुआ नीचे गिर गया. और इस तरह तीनो का काम हो गया. और ऐसा होते hi पुलिस भी आगयी बहा पैर. और आते hi मुझे हाथ ऊपर करने को कहने लगी. उन्हें लगा की सायद मैं किडनैपर हु.

मैं- रिलेक्स इंस्पेक्टर में किडनैपर नहीं हु. बल्कि मैंने hi आपको कॉल करवाया था. मेरे दोस्त से. वो देखिये वो बैठा है बहा पैर.

मैंने चिराग की तरफ इशारा किया तो उसने हाथ खड़ा करके उन्हें है कहा.

मैं- ये तीनो है किडनैपर जो इस लड़के को पकड़ कर ले जा रहे थे. मैंने उन्हें ऐसा करते हुए देख लिया तो आज्ञा इनके peeche.or आपको फ़ोन करवा दिया. लेकिन आपलोग बहुत लेट हो. अगर में इन्हे नहीं रोकता तो ये बॉर्डर क्रॉस कर जाते अभी तक. और फिर आप कहते की अब हम कुछ नहीं कर सकते है.

मेरी बाटे सुनने के बाद वो इंस्पेक्टर थोड़ा चीड़ सा गया मुझसे. क्युकी मैंने उसकी असलियत जो बता दो थी. लेकिन आखिर मैंने उसकी मदद hi की थी. इसलिए उसने मुझे थैंक्स कहा और फिर उस लड़का का स्टेटमेंट लिया. जिसमे मैंने उसे थोड़ी हिम्मत दी. तो उसने बता दिया की उसने सुबह एक मर्डर होते देखा था. जो इन्ही लोगो ने किया था. और सायद इसी लिए ये मुझे किडनैप करने आये थे. ये सुनके पुलिस सॉलिड चौकी. और फिर वो लड़का पुलिस को उस जगह पैर ले गया. जहा उसने वो मर्डर देखा था. और उनके जाने के बाद मैं और चिराग भी अपने घर को निकल गए. और राते में चिराग ने मेरी जान खली. की मुझे इसके बारे में कैसे पता चला. तो मैंने उसे झूट कह दिया की सलग के अंदर उन तीनो में से एक आया था. लंच टाइम में. और कोइंसिडेन्स से मैंने उसकी बाटे सुनली थी. इसलिए में उस लड़के पैर नजर रखे हुए था. ताकि उसकी मदद कर सकू. और देखो काम बन गया. और अगर उस टाइम में पुलिस को सब बताता तो पुलिस भी यही करती उन्हें पकड़ने के लिए ये किडनैपिंग होने देती. और फिर उनका पीछा करके उन्हें पकड़ लेती. और मैंने भी बैसा hi किया. लेकिन मुझे ये नहीं पता था की उसने कोई मर्डर भी देखा है होते हुए. अब पता नहीं किसका मर्डर किया है उनलोगो ने.

चिराग- है यार ये तो बकै साद न्यूज़ है. अब उम्मीद है की पुलिस ये पता लागले. और इसके पीछे का कारण भी. और अब उस लड़के पैर कोई और मुसीबत न आये तो बढ़िया है. और अब मैं कहना चाहूंगा की तूने बकै में अच्छा काम किया है. ी म प्राउड ऑफ़ यू बीआरओ.

मैं- क्या बात है. तूने ऐसा बोलै. यार आज तो में धन्य हो गया. क्या बात है. खैर. थैंक्स फॉर एप्रोप्रियेट में.

उसके बाद मैंने उसे घर छोड़ा और में निकल गया अपने घर की तरफ. बही वो लड़का जब पुलिस को बहा पैर लेके गया तो उन्हें बहा कुछ नहीं मिला. लेकिन उन्हें बहा पैर कुछ खून की बुँदे जरूर दिख गयी. जिस बजह से उन्हें पक्का यकीन हो गया की खून तो हुआ hai.isliye उन्होंने जंगल में सर्च ऑपरेशन चला diya.vo उस लाश को ढूंढ़ने लगे. और उन तीनो को पुलिस अपने साथ hi लिए हुए थी. और उनकी जब 2-3 डंडे मरे तो उन्होंने सब बक दिया. और उन्होंने बता दिया की लाश कहा पैर है. और ये भी की उसे क्यों मारा है. ये लोग कॉन्ट्रैक्ट किलर थे. इन्हे कॉन्ट्रैक्ट मिला और उन्होंने उस आदमी का मर्डर कर दिया. बाकि काम अब पुलिस कर लेगी उस इंसान का पता जिसने इन्हे कॉन्ट्रैक्ट दिया था.

इसलिए मैंने ये सब टेंशन छोड़ दी.

और घर जेक बढ़िया फ्रेश होक कॉफ़ी पीने बैठ गया. रात में दिनीर किया थोड़ी स्टडी की और प्राची से बाते की और सो गया.

बही पृथ्वी से कोसो दूर तारामंडल में एक तारा बहुत चालक रहा था. जिसकी चमक hi उसे टारे को दिव्या बना रही थी. इस टारे का आकर बड़ा था लेकिन ज्यादा छोटा भी नहीं और बड़ा भी नहीं. इस टारे के आसपास बहुत से टारे थे. एक तरह से कहा जाये तो बहा तारो का कुम्भ मेला लगा हुआ था. और अगर इस टारे ने अपनी चमक छोड़ दी तो इसे ढूंढ़ना लगभग न मुमकिन हो जायेगा ये कन्फर्म था. और अभी ये सब सोच hi रहा था की अचानक से इस टारे ने अपनी साडी चमक को बंद कर दिया. और वो तारा इस मेले में कही खो गया. बहुत देखने के बाद भी वो नहीं मिला. और जैसे hi वो तारा बुझा. ठीक उसके बाद अचानक से सूर्य पूरा कला पद गया. चारो तरफ अन्धकार छ गया. पोरे सौरमंडल में कुछ भी नहीं दिख रहा था. दूसरी चीज़ दिखना तो ढाती बात है खुद का हाथ भी न दिखे इतना अन्धकार छ गया था. और इसी के साथ मेरी नींद खुल गयी. और में जोर जोर से सांसे लेने लगा. मेरे माथे पैर पसीना बैठ गया था. एक फुल इन था. फिर भी. हलाकि देहरादून में पसीना आना अच्छी बात है. क्युकी यहाँ तो ठण्ड ज्यादा रहती है और गर्मी काम. लेकिन इस वक़्त ये आना ठीक नहीं था. मैं बिस्टेर से खड़ा हुआ और पास hi राखी पानी की बोतल को उठा कर उससे पानी पीने लगा. और इतनी प्यास लगी थी की देखते hi देखते में पूरी बोतल को ख़त्म कर गया. जब पानी पिया तब जेक थोड़ा नार्मल हुआ. उसके बाद मेरी नजर गयी टाइम पैर तो सुबह के 4 बजने hi वाले थे. इसलिए मैंने फिर से सोने का प्लान बदल दिया और बाथरूम में घुस गया. बढ़िया से नहाया और रेडी होम छत पैर चला गया.

ध्यान में बैठा और मंत्र का जाप कर hi रहा था की गुरुदेव की आवाज आगयी.

मैं- प्रणाम गुरुदेव..

गुरुदेव- आयुष्मान भाव वत्स.

मैं- गुरुदेव लगता है दूसरा ाँस भी जागृत हो गया है.

गुरुदेव- हमें भी उसका आभाष हो गया था वत्स इसीलिए हाँ खुद hi तुमसे मिलने आगये.

मैं- धन्यबाद गुरुदेव जो आप आये. अब मुझे क्या करना होगा गुरुदेव.

गुरुदेव- तुमने क्या क्या देखा ये बताओ मुझे.

फिर मैंने सब कुछ गुरुदेव को बता दिया. जिसे सुनने के बाद उन्होंने बोलना सुरु किया.

गुरुदेव- में समाज गया वत्स. जो अन्धकार छाया था वो असल में सूर्यग्रहण था. और ये ग्रहण 7 दिनों में आने वाला है. मतलब की तुम्हारे पास केवल 7 दिन है. उस ाँस तक पहुंचने के लिए.

मैं- परन्तु गुरुदेव इतने बड़े आकाशगंगा में मैं उस ाँस को कहा ढूंढूंगा. वो ाँस एक छोटे से उल्कापिंड में है. और आकाश में तो अनगिनत उल्कापिंड है.

गुरुदेव- इसका जवाब तुम्हे खुद hi ढूंढ़ना होगा वत्स. लेकिन तुम ज्यादा चिंतित न हो. कोई है जो इसमें तुम्हारी मदद करेगा

मैं- कोण करेगा मेरी मदद गुरुवार

गुरुदेव- जल्द hi पता चल जायेगा तुम्हे वत्स. और वत्स जब उस सफर पैर जाओ तो मेरा फरसा अपने साथ ले जाना. उसकी जरुरत तुम्हे पड़ेगी बहा पैर.

मैं- ठीक है गुरुदेव. में ध्यान रखूँगा.

गुरुदेव- ठीक है वत्स. अब अपना ध्यान संपूर्ण करो.

मैं- जो आज्ञा गुरुदेव.

उसके बाद वो चले गए. और में ध्यान में hi बैठा रहा.

ध्यान के बाद में रेडी हुआ सलग के लिए और नास्ता करके निकल गया सलग के लिए. अभी थोड़ा hi दूर गया था की रस्ते में एक लड़की ने लिफ्ट के अपना हाथ दे दिया. और में इस लड़की को देखते hi पहचान गया. वो और कोई नहीं आलिआ hi थी. और मैंने उसे देखकर अपनी कार को ब्रेक लगा दी.

मैं- क्या बात है तुम बापिस कब आई.

आलिआ- अभी आयी हु. मुझे तुमसे कुछ पूछना है.

मैं- है पूछो. और उससे पहले अंदर आजाओ.

आलिआ कार के अंदर बैठ गयी और फिर उसने बोलना सुरु किया.

आलिआ- एक मुसीबत आगयी है मेरे ऊपर.

मैं- कैसी मुसीबत.

आलिआ- क्या तुम्हे किसी ऐसी शक्ति के बारे में जानकारी है जिसमे समस्त आकाशगंगा की शक्ति विराजमान हो.

ये सुनके में थोड़ा हैरान हुआ.

मैं- है मुझे उसके बारे में जानकारी है. लेकिन तुम ये सब क्यों पूछ रही हो. और क्या मुसीबत आई है तुमपर.

आलिआ- वो जब में यहाँ से अपने घर गयी थी तब बहा पैर किसी असुर ने हमला कर दिया था. और वो हमारे यहाँ की साडी महिलाओ का अपहरण करके ले गया है. और उसने जाने 2 दिनों का टाइम दिया है और ये कहा है की अगर हमने उसे वो शक्ति नहीं सोपि तो वो सबको एक एक करके मार देगा. और उन महिलाओ में मेरी माँ भी शामिल है. में बहा पैर नहीं थी इसलिए बच गयी वर्ण वो मुझे भी ले जाता. क्या तुम्हे पता है की वो शक्ति कहा पैर है. ताकि हम उसे वो दे सके और अपनी साडी प्रजा को उससे बापिस ले सके.

ये सब सुनके मुझे बहुत बुरा लगा और गुस्सा भी आया.

मैं- लेकिन जब तुम्हे उस शक्ति के बारे में कुछ पता hi नहीं है तो उस असुर ने तुम्हारे यहाँ पैर हमला क्यों किया.

आलिआ- पता नहीं उसे किसी ने ये जानकारी दी है की वो शक्ति परीलोक में hi है. लेकिन हमारे यहाँ पैर ऐसी कोई भी शक्ति नहीं है.

मैं- आलिआ में तुमसे झूठ नहीं बोलूंगा. मुझे इस शक्ति की जानकारी है परन्तु मुझे ये नहीं पता है की वो कहा पैर है. बस इतना पता है की वो आकाश गंगा में hi है. सायद किसी उल्कापिंड में. और मुझे भी उसकी तलाश है. और में तुम्हे बता दू की आज के बाद बहुत सरे असुर इस शक्ति की खोज में निकलने वाले है. जो हमारे रस्ते में रोड़ा बनेंगे.

आलिआ- आज से hi क्यों.

फिर मैंने आलिआ को साडी सच्चाई बताई मेरी जन्म से और इस दिव्यास्त्र की साडी कहानी सुनाई. जिसे सुनाने के बाद उसका पूरा भेजा फ्राई होगया…………

.तो बे कॉन्टिनुए ……………...

 
अपडेट 55



मेरी साडी बाटे सुनकर आलिआ कुछ देर के लिए बिलकुल शांत हो गयी थी. और कुछ सोचने लगी थी वो. और में उसे देख रहा था.

आलिआ- तो मतलब की वो ाँस तुम इस असुर को नहीं डोज.

मैं- नहीं में ऐसा नहीं होने दे सकता.

आलिआ- फिर मेरी माँ और बाकिओ का क्या होगा. वो उन सभी को मार देगा.

मैं- वेल उसके लिए में मदद कर सकता हु. उन्हें छुड़ाने के लिए. लेकिन अलग तरह से

आलिआ- क्या उनसे जाकर युद्ध करोगे. तुम्हे सायद पता नहीं. इसलिए में बता देती हु. उसके पास अजीव से जानवरो की एक बहुत बड़ी सेना है. और दूसरी बात ये की वो सभी को कहा लेके गया है ये किसी को नहीं पता है. और अगर तुम उसके सेना से लड़ते भी हो तो सबको मरने में पता नहीं कितना समय लग जायेगा और उतनी देर में वो सभी को मार देगा. और ये खतरा में नहीं उठा सकती.

मैं- तुम सायद मेरी बात की गंभीरता को समाज नहीं रही हो. अगर वो ाँस किसी भी असुर के हाथ लग गया तो तुम सोच भी नहीं सकती वो उस शक्ति से क्या क्या कर सकता है. सारा ब्रह्माण्ड उसके अधीन हो जायेगा. और जिसमे तुम्हारा परीलोक भी आता है. वो जब चाहे अंतरिक्ष में तबाही मचा सकता है. वो चाहे तो सूर्य देव पैर हमेशा के लिए ग्रहण लगा सकता है. चारो तरफ अन्धकार फैला सकता है. सरे ग्रहों की दिशा और गति को बदल सकता है. और तुम सोच सकती हो अगर ऐसा हुआ तो क्या हो सकता है. सारा ब्रह्माण्ड में पल भर में प्रलय आजायेगा और कोई नहीं बचेगा. फिर चाहे वो कोई आम इंसान हो या फिर कोई देवता. इन पांचों ाँस को मिलकर जो दिव्यास्त्र बनता है उसे में किसी भी हाल में किसी भी गलत हाथो में नहीं जाने दे सकता हु. फिर चाहे मेरी जान hi क्यों न चली जाये. बाकि अब तुम्हे फैसला करना है.

ये सब सुनने के बाद उसका और दिमाग ख़राब होने लगा था जिसे में महसूस कर रहा था. लेकिन उसकी प्रॉब्लम भी बड़ी थी. जिसका मुझे कोई न कोई समाधान तो निकलना hi था.

आलिआ- तो फिर हम क्या करे.

मैं- सबसे पहले हमें उस ाँस को ढूंढ़ना होगा. हमारे पास केवल 7 दिन है. आने वाले सूर्यग्रहण से पहले वो फिर से अदृश्य हो जायेगा. बाकि बाद में सोचेंगे.

आलिआ- जब समय काम हज तो तुम अभी तक गए क्यों नहीं उसकी खोज में

मैं- पहली बात तो ये की मुझे आज hi उस ाँस का आभाष हुआ है. और दूसरी बात ये की में इन्तजार कर रहा था.

आलिआ- किस का

मैं- तुम्हारा.

आलिआ- क्या? मेरा. लेकिन क्यों. क्या तुम्हे पता था में आने वाली हु.

मैं- नहीं मुझे नहीं पता था की तुम आने वाली हो. मुझे बस इन्तजार करने को कहा था और तुम आगयी.

आलिआ- किसने कहा था.

मैं- मेरे गुरुदेव ने. उन्होंने कहा था की कोई आएगा जो मेरी मदद करेगा. और देखो सुबह hi तुम आगयी.

आलिआ- बढ़िया. बैसे तुम्हारे गुरुदेव के बारे में तुमने मुझे बताया नहीं.

मैं- ये मेरे शिव किसी को नहीं पता है. लेकिन में तुम्हे बता सकता हु. वो परसुधरु भगवन परसुराम.

आलिआ- क्या बकै.

मैं- है बिलकुल. में उन्ही के दिखाए मार्ग पैर चलता हु. खैर अब ये सब छोडो और अब हमें चलने की तैयारी करनी होगी.

आलिआ- लेकिन तुम अपने दोस्तों प्राची और घरवालों को क्या कहोगे.

मैं- मैंने उसके बारे में सोच लिया है. हमें किसी सुनसान जगह जाना होगा

उसके बाद मैंने कार को जंगल की तरफ मोड़ दिया. जो की ज्यादा दूर नहीं था. और एक जगह जेक मैंने कार को रोक दिया और में और आलिआ कार से बहार निकल आये और जंगल के अंदर चले गए. थोड़ा अंदर जाने के बाद एक जगह मुझे ठीक लगी. तो में बही पैर बैठ गया. और अपनी आँखों को बंद करके ध्यान में बैठ गया. थोड़ी hi देर में जब त्रिनेत्र खुला तो मैंने पृथ्वी की शक्तियों से अपना एक ाँस बनाना स्टार्ट किया. जो बिलकुल मेरी फोटोकॉपी होगा. मेरे जैसा hi हाव भाव मेरे जैसे hi दिखना और मेरे जैसा hi बोलचाल. और उसे सब पता होगा की किस्से कैसे और क्या बात करनी है ताकि किसी को शक न हो. ये प्रोसेस ज्यादा लम्बी नहीं चली. और आखिर कार मेरा एक क्लोन रेडी हो गया. इसके अंदर भी शक्तिया थी. जिससे ये मेरे जाने के बाद यहाँ की देखभाल कर सकता था. ये सब होने के बाद मैंने अपनी आँखे खोली और मेरे सामने मेरा क्लोन बैठा हुआ था. और शामे कड़ी आलिआ ये सब देखकर एक डैम हैरान थी. फिर में अपनी जगह पैर खड़ा हुआ. और मेरे साथ वो भी हुआ.

मैं- तो देव अबसे तुम देव हो जब तक में लौट कर बापिस नहीं आजाता. और साडी बातो को अच्छे से ध्यान रखना और कोई गड़बड़ मत करना. और है मुझे निराश मत करना. समाज गए

मैं2- है समाज गया देव. में हु देव. बैसे एक सवाल है.

मैं- है पूछो.

मैं2- क्या प्राची के नजदीक जाने की आज्ञा है मुझे.

मैं- नहीं. जैसे में उसके साथ रहता हु बैसा hi तुम्हे रहना है. उससे दुरी बनाकर रखनी है. उससे नॉर्मली बेहवे करना है और किसी को भी शक नहीं होने देना है की तुम देव नहीं हो. जैसे में प्राची से बात करता हु बैसे hi तुम्हे करनी है. बाटे hi करना है सिर्फ. बाकि ुस्सर शारीरिक दुरी बना कर रखनी है. वर्ण अगर मुझे उस बारे में पता चला तो तुम्हारी खैर नहीं समाज गए

मैं2- अच्छे से समाज गया हु में. आओ बिलकुल चिंता न करे. किसी को भनक तक नहीं लगेगी की में आपका एक रूप हु.

मैं- बहुत अच्छे. और है असुरो से साबधान रहना और लोगो से छिपकर रहना. तुम सब जानते hi हो जैसे में असुरो से निपटता हु.

मैं2- मैं ध्यान रखूँगा.

मैं- ठीक है अब तुम ये मेरा मोबाइल और पेरसे रखो और ये कार की के. और जाओ सलग और रस्ते से चिराग को पिक कर लेना. और उससे नॉर्मली बेहवे करना. उसे कुछ ज्यादा hi शक होता है मुझपर.

मैं2- ठीक है

उसके बाद वो बहा से कार लेके चला गया. एंड मैंने और आलिआ हुए गायब और उसके पीछे पीछे. मुझे देखना था की सब सही जा रहा है या नहीं. क्युकी ये प्रयोग में पहली बार कर रहा था.

खैर हम उसके पीछे पीछे गए. उसने ठीक उसी तरह सब संभाला जैसे में करता हु. आखिर था तो मेरी hi कॉपी और ये सब देखकर में अब चिंतामुक्त था.

आलिआ- अब हाँ उस ाँस को कहा ढूंढे. तुम्हे पता है वो हमें कहा मिल सकता है.

मैं- वेल मुझे थोड़ा सा अंदेशा है की वो जाने सायद सुरु के नजदीक hi कही मिलेगा. ईसीए हमें सूर्य की दिशा में hi जाना होगा. और हमें रस्ते में आने वाले सभी उल्कापिंडो को ध्यान से देखते हुए चलना है

आलिआ- लेकिन इसमें तो बहुत समय लग जायेगा. क्युकी

मैं- है में जनता हु. लेकिन और कोई रास्ता नहीं है.

आलिआ- क्या तुम उसे शक्तियों से नहीं ढुंडसाकते.

मैं- नहीं. अब चले

आलिआ- ठीक है चलो.

उसके बाद हम बिजली की तेज़ी से पालक झपकते hi पृथ्वी के बहार पहुंच गए.

मैं- ठीक है तो चलो. हम थोड़े थोड़े डिस्टेंस पैर रहेंगे. ठीक है.

आलिआ- ok.

और हम फिर उड़द गए. में अच्छी खासी रफ़्तार से जा रहा था. और राते में आने वाले हर उल्कापिंड को अपने अंदर महसूस करने की कोसिस कर रहा था. लेकिन किसी से भी कनेक्शन नहीं जुड़ रहा था. और उसकी पहचान का एक hi तरीका था की जिससे मेरा कनेक्शन जुड़ जाये वही है वो पिंड. बही दूसरी तरफ आलिआ मुझसे थोड़ी स्लो चल रही थी. वो अपनी शक्तियों से किसी खास उल्कापिंड को देखने की कोसिस कर रही थी. हम काफी दूर आगये थे और काफी देर से सफर कर रहे थे. लेकिन हमारे हाथ कुछ नहीं लगा था. और में जनता था की ये आईडिया बहुत hi बकवास है लेकिन हमें ये करना hi होगा. बही दूसरी तरफ मुझे आसपास बहुत सी नकारात्मक ऊर्जा महसूस हो रही थी. जिससे में समाज गया की असुर भी निकल चुके है सायद हमारा आमना सामना hi हो जाये कही पैर. देखते है. में और आलिआ सूर्य की ओरे बढ़ते हुए जा रहे थे. चुकी वो बहुत दूर है. लेकिन हमारी स्पीड का तो जवाब hi नहीं था. जिस स्पीड से में जा रहा था और सभी पिंडो को देख रहा था. अगर उसका हिसाब लगाने बैठु तो पता नहीं कितना समय जायेगा. इसलिए मैंने ये नहीं किया. और अपने काम पैर फोकस करता रहा. रस्ते में बहुत सी मुसीबते आरही थी. जैसे उल्कापिंडो का समूह जो अपने निर्धारित कार्य कर रहे थे. हमें उसने टकराने से भी बचना था. स्पेस में कई शक्तिया रहती है. लेकिन वो सभी छिपी हुई रहती है. और समय आने पैर hi अपना असर दिखती है. लेकिन हमें फिलहाल कोई नहीं रोक सकता था. तभी मुझे आलिआ की आवाज आई. तो मर रुका. और उसके पास गया.

मैं- क्या hua.kuch मिला क्या तुम्हे.

आलिआ- अभी तक नहीं. तुम्हे मिला कुछ.

मैं- नहीं. फिर रुकी क्यों हो.

आलिआ- क्युकी में यहाँ से आगे नहीं जा सकती हु. अगर यहाँ से थोड़ी आगे भी गयी तो जल कर रख हो जाउंगी. में सूर्य के ताप को सेहन नहीं कर सकती हु.

मैं- ऐसा तुम्हे किसने कहा है.

आलिआ- मैंने खुद महसूस किया है. हम बुधग्रह को पार कर चुके है. और अब सूर्य का ताप बढ़ने लगा है. आम इंसान तो यहाँ तक भी नहीं पहुंच सकते.

मैं- लेकिन तुम्हारे बिना काम नहीं बनेगा.

आलिआ- लेकिन में अब क्या कर सकती हु. मुझे तो लग रहा है हम सायद भटक गए है. और अगर नहीं भी भटके है तो भी हम उस पिंड को ऐसे कब तक ढूंढ़ते रहेंगे.

मैं- ये बात तो है लेकिन हम हार नहीं मान सकते. क्युकी ये ाँस हमारी हर तरह से परीक्षा लेते है. और अगर हम इस परीक्षा में कही भी खरे नहीं उतारते है तो ये हमारे सामने कभी नहीं आते है. इसलिए सबसे पहली बात अपने दिमाग में बैठा लो की हमें हार नहीं मन्ना है. फिर चाहे हमें इस पुरे अंतरिक्ष के सरे उल्कापिंडो को hi क्यों न देखना पड़े. और चाहे इसमें कितना hi समय क्यों न लग जाये. लेकिन हम हार नहीं मानेंगे. तुम समाज रही हो न में क्या कह रहा हु.

आलिआ- है में समाज रही हु. लेकिन उसके आगे में कैसे जाऊ. इसका कोई उपाय तुम्हे hi सोचना होगा.



तो बे कॉन्टिनुए……………...
 
अपडेट 56



मैं- ठीक है में कोसिस करके देखता हु

मैंने अपने हाथो को फैलाया और अपनी आँखों को बंद किया. और थोड़ी hi देर बाद हाथो से एक रौशनी निकलने लगी. और वो रौशनी आलिआ के चारो तरफ एक घेरा बनाने लगी. थोड़ी hi देर में घेरा बन कर रेडी होगया. वो घेरा एक सुरक्षा कवच था जिससे वो सूर्य के नजदीक जा सकती है और उसको कोई जलन भी महसूस नहीं होगी.

मैं- अब तरय करके देखो.

आलिआ ने मेरा कहा मन और आगे बाद गयी. और जैसे जैसे वो आगे बाद रही थी. उसे महसूस हो रहा था की सूर्य के तेज़ का उसपर कोई असर नहीं हो रहा है

आलिआ- है ये कवच काम कर रहा है. मुझे अब सूर्य की तपन महसूस नहीं हो रही है. अब में आगे चल सकती हु.

मैं- गुड तो चलो अब

उसके बाद हम आगे बाद gye.jaise जैसे सूर्य के निकट पहुंच रहे थे हमें आग से लबालब पिंड दिख रहे थे. मतलब ये की लगभग हर पिंड में चमक थी और सभी में आग लगी हुई थी. इसलिए अब हमें और मुश्किल होने वाली थी.

मैं- आलिआ कोई ऐसा पिंड देखो जिसमे आग न हो. और वो बैसे hi चमक रहा हो. उसे यही कही होना चाहिए

आलिआ- ठीक है.

हम दोनों चारो तरफ देख रहे थे और आगे बढ़ते हुए जा रहे थे उल्कापिंड बहुत hi तेज़- अग्नि उगल रहे थे और उससे भी तेज़ थे सुरु देव. जो अग्नि का भण्डार थे. हम सूर्य के बहुत hi निकट थे. अगर मैथ्स के आकड़ो के हिसाब से देखा जाये तो करीब 100कम दूर होंगे बस. लेकिन इस दुरी पैर भी सूर्य इतने बड़े और विशाल लग रहे थे की क्या बताऊ और जरा सोचो उनके एक डैम पास पहुंच गए तब उनका आकार कितना बड़ा होगा. अभी हम थोड़े hi आगे बड़े थे की मुझे एक उल्कापिंडो का ग्रुप दिखा. उन पिंडो का साइज बहुत बड़ा था और वो पुरे झुण्ड में थे. लेकिन उनके झुण्ड का एक आकार भी था. वो सौरमंडल की तरह आकृति बनाये हुए थे. मतलब गोल गोल. जैसे नवग्रह और सूर्य चारो तरफ चक्कर काटते है वैसे hi वो भी उसी जगह पैर निर्धारित थे और गोल गोल घूम रहे थे. तभी मैंने अपने सपने को याद करने की कोसिस की. आखिर वो ाँस जिस जगह पैर था वो कैसे थी. तब मुझे याद आया की है वो जगह कुछ ऐसी hi thi.lekin अब प्रॉब्लम ये थी की इस ाँस तक पंहुचा कैसे जाये. क्युकी ये पिंड हमें उस तक सायद hi पहुंचने de.bahut बड़े थे. या तो इनको तोड़ कर आगे बड़ो या फिर कोई और रास्ता ढूंढ़ना था हमें.

तब मुझे एक आईडिया आया. और मैंने आलिआ को अपने पास बुलाया.

आलिआ- क्या हुआ.

मैं- वो मिल गया.

आलिआ- कहा है.

मैं- ये देख रही हो. ये सर्किल. इसी के बीचो बीच.

आलिआ- क्या बात. लेकिन हम उस तक पहुंचे कैसे.

मैं- हमें अपना आकर छोटा करना होगा. क्या तुम कर सकती हो

आलिआ- है में कर सकती हु आपने आकर छोटा या बड़ा.

मैं- बढ़िया. तो फिर करो

उसके बाद आलिआ और मैंने अपना आकर बहुत छोटा कर लिया.

बिलकुल एक अंत जितना. उसके बाद मैंने उसका हाथ पकड़ा और हम स्पीड से आगे बाद गए. थोड़ी hi आगे जाने के बाद वो उल्कापिंड हमारे रस्ते में आने लगे. तो में उनसे बच कर आगे बढ़ने लगा. कभी आजु तो कभी बाजु. कभी ऊपर तो कभी नीचे. हम छोटे हो गए थे इसलिए हमारा सफर काफी लम्बा हो गया था. लेकिन उसमे भी स्पीड से जाने की बजह से हमें ज्यादा देर नहीं लगी और हम उस सर्किल के बीचो बीच पहुंच गए. जहा हमने देखा की. जितनी हमारी अभी की साइज है. उससे कई गुना बड़ा एक सफ़ेद उल्का पिंड है. जो अपनी एक अलग hi रौशनी बिखेर रहा है. उसकी रौशनी जब सरीर को छूती तो एक अलग hi आनंद मिल रहा था हमें.

आलिआ- कितना सुन्दर है ये. और इसकी रौशनी कितना सुकून देने वाली है

मैं- बकै में तुमने सच कहा.

आलिआ- लेकिन अब आगे क्या करना है हमें.

मैं- इसको छू कर देखते है. सायद कुछ हो.

आलिआ- ok.

मैं उसे छूने hi वाला था की आलिआ ने मुझे रोका.

मैं- क्या हुआ.

आलिआ- मेरा हाथ पकड़ कर छुओ. क्या पता क्या हो जाये. हमें अभी कुछ पता नहीं है

मैं- लेकिन इसमें खतरा हो सकता है.

आलिआ- तो होने दो. हम जब तक साथ है हर खतरे का सामना कर सकते है

मैं- ऐसा है क्या

आलिआ- बिलकुल ऐसा hi है. अब पकड़ो मेरा हाथ

मैं- ठीक है

उसके बाद मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसके बाद मैंने अपने दूसरे हाथ को आगे बढ़ाया उस पिंड को छूने के लिए. मेरा हाथ धीरे धीरे आगे बाद रहा था. की तभी मुझे एक बात याद आई. गुरुदेव की बात.

आलिआ- क्या हुआ

मैं- गुरुदेव ने कहा था की यहाँ आने से पहले में उनका फरसा अपने साथ ले जाऊ. उसकी जरुरत पद सकती है. और यहाँ आने के चक्कर में मैं भूल hi गया.

आलिआ- तो अब.

मैं- इसे छूने से क्या होगा हमें नहीं पता. इसलिए मुझे फरसे का आवाहन करना hi होगा. अगर गुरुदेव ने कहा है तो जरूर उसकी मदद की जरुरत हमें पड़ेगी.

आलिआ- बैसे तुमने सही कहा है. ठीक है आवाहन करो

मैंने आलिआ से हाथ छुड़ाया और अपने दोनों हाथो को जोड़ कर गुरुदेव के फरसे का आवाहन किया. और अपना दाहिना हाथ हवा में खुला कर liya.or अपनी आँखों को बंद hi रखा. और ाबहन जारी रखा. और करीब 10 मं. में hi अचानक से कोई चीज़ मेरे दाहिने हाथ में आगयी. जैसे hi ये एहसास हुआ. मैंने अपनी आँखों को खोल और देखा तो मेरे हाथ में एक चमकदार फरसा था. जो अपनी अलग hi चमक बिखेर रहा था. जैसे hi वो मेरे हाथो में आया ठीक बैसे hi एक नै ऊर्जा जैसे मेरे अंदर समां गयी हो. मुझे एक नया एहसास होने लगा था. और ये सब देखकर आलिआ भी कुश थी.

उसके बाद मैंने और आलिआ ने फरसे को प्रणाम किया और ऐसा करते hi फरसे में और चमक आगयी जैसे वो हमें आसीर्बाद दे रहे हो. और थोड़ी hi देर में वो चमक चली गयी और फरसा फिर से नार्मल हो गया.

में एक बात तो बताना hi भूल गया की हमारा साइज अभी भी छोटा hi था. और हैरानी की बात ये थी की फरसे का साइज भी उतना hi था जितने हम थे. यानि की ये फरसा भी आकार बदल लेता है. और दूसरी बात ये की. हम सूर्य के इतने निकट थे इस बजह से मेरा सरीर तो नहीं पैर कपडे जरूर जलने लगे थे. इसलिए मैंने शुरुवात में hi अपने ऊपर भी एक कवच बना लिया था. जिससे मेरे कपडे सही सलामत रहे. वर्ण एक लड़की के सामने अगर कपडे जल गए तो इज़्ज़त का फालूदा होना पक्का था. और रही बात आलिआ की तो उसके कपडे ठीक थे मेरे कवच की बजह से. और अब मेरे कपडे भी ठीक थे. इसलिए मैंने अब देर न करते हुए अपने हाथ में फरसा पकड़ा और आलिआ ने मेरा हाथ पकड़ लिया. और मैंने देर न करते हुए उस पिंड को छू लिया. और ऐसा करते hi चारो तरफ बही सफ़ेद रौशनी फ़ैल गयी. हमें कुछ भी नहीं दिख रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे हम किसी अलग hi दुनिआ में जा रहे है. चारो तरफ सफेदी की चमकार फैली हुई थी. और आलिआ मेरा नाम पुकार रही थी और में उसका हलाकि हमने हाथ पकड़े हुए थे.

करीब 5 मं. बाद रौशनी थोड़ी काम होने लगी और जाने कुछ कुछ दिखने लगा. और थोड़ी hi देर में साडी रौशनी गायब हो गयी. और जब साफ़ साफ़ दिखना सुरु हुआ तो हमने देखा की हम सच में एक अलग hi जगह पैर पहुंच गए थे. और हमारा साइज क्या था ये हम कॅल्क्युलेट नहीं कर प् रहे थे क्युकी बहा के हिसाब से हमारा आकर ठीक था बहा पैर जो भी पेड़ पौधे बगेरा थे. उन्हें देखकर हमें समाज में आज्ञा की हमारा साइज ठीक है. लेकिन हमें ये नहीं पता था की हम अभी भी उतने hi छोटे है या अपने आप बड़े हो गए है.

आलिआ- ये कोनसी जगह है

मैं- पता नहीं. लेकिन इतना पक्का है की हमें यही पैर वो ाँस मिलेगा.

आलिआ- लेकिन इतनी बड़ी जगह है हम कहा और कब काट ढूंढेंगे.

मैं- कमाल करती हो तुम भी.

हमने लगभग 100 योजन का सफर किया और उस पिंड को ढूंढ लिया. तो अब इतनी सी जगह में हम वो ाँस नहीं ढूंढ सकते क्या. और तुम पहला नियम भूल रही हो. याद हैना क्या है वो.

आलिआ- है याद है. कभी हार मत मनो. माफ़ करना. तुमने सही कहा पोरे अंतरिक्ष के मुकाबले ये तो बहुत छोटी सी जगह है. हम जरूर ढूंढ लेंगे उस ाँस को

मैं- ये हुई न बात. अब सुनो जरा संभल कर रहना. हो सकता है ये जंगल मयाबी हो. और एक बात याद रखना की मेरे आलावा कुछ भी दिखे उस पैर बिलकुल भी यकीन मत करना. चाहे कुछ भी क्यों न हो जाये. समाज रही हो न.

आलिआ- में ध्यान रखूंगी.

अब में बता दू की ये जगह आखिर थी कैसी.

दरअशल ये जगह ठीक उसी जंगल की कॉपी लग रही थी जैसा वो जंगल था जहा मुझे पहला ाँस मिला था.

हम आगे बढ़ते हुए जा रहे the.or चारो तरफ देख रहे थे.

आलिआ- आखिर हमें कैसे पता चलेगा की किस जगह पैर वो ाँस है.

मैं- कुछ ऐसी आकृति या चीज़ देखो जिसका सम्बंद आकाश से ho.ya सौरमंडल से.

आलिआ- लेकिन ऐसी कोनसी चीज़ हो सकती है

मैं- कुछ भी हो सकती है. बस देखती जाओ. कुछ भी अजीब दिखे तो मुझे बताना.

आलिआ- ठीक है.

हम सभी जगह देखते हुए आगे बढ़ने लगे. सब कुछ नार्मल hi था. न तो ये जंगल हमें मयाबी दिख रहा था न कुछ और.

हम काफी देर तक जंगल का चक्कर लगते रहे लेकिन हमें कुछ भी नहीं दिखा ऐसा जिस पैर शक किया जा सके. हमारा सरीर थकने लगा था. और हमें कोई भी उम्मीद नजर नहीं आरही थी. ऐसा लग रहा था जैसे हम कई दिनों से इस जंगल में भूके और प्यासे भटक रहे है. जबकि हमें मुश्किल से 1 दिन hi हुआ होगा. लेकिन सरीर की ये हालत कुछ और hi इशारा कर रही थी. लेकिन हमारा सरीर चाहे कितना hi क्यों न थक जाये हमें हार नहीं माननी थी. यही हमारा मोटो tha.agar पेअर काम नहीं करते तो हम रेंग कर जायेंगे. लेकिन फटेंगे जरूर. इस दौरान आलिआ ने भरपूर हिम्मत का नजारा दिखाया. उसकी हालत मुझसे भी ज्यादा ख़राब थी. लेकिन वो मेरा साथ नहीं छोड़ रही थी और उम्मीद भी नहीं. वो मेरे कदम से कदम मिला कर चल रही थी.

मुझे समाज नहीं आरहा था की हमसे क्या चूक गया है. मुझे कुछ समाज में नहीं आरहा था की में क्या करू. इसलिए मैंने उम्मीद की नजर से आसमान की तरफ देखा. तो मैं हैरान था ये देखकर की ये मैंने देखा क्यों नहीं अभी तक. इसपर मेरी नजर क्यों नहीं गयी. में अपने आप को कोष रहा था. और अचानक hi मेरर चेहरे पैर स्माइल आगयी. जिसे देखकर आलिआ थोड़ी हैरान हो गयी. उसे लगा की में सायद पागल हो गया हु.

आलिआ- क्या हुआ देव. तुम ठीक हो न. यु है क्यों रहे हो. देव जवाब दो.

वो काफी परेशान दिख रही थी. और में हसे जा रहा था. लेकिन आलिआ की हालत देखकर मैंने खुद को संभाला और उससे बोलै.

मैं- आलिआ तुम ये बताओ की जब से हम इस जगह पैर आये है. तुमने कितनी बार आकाश की तरफ देखा है.

आलिआ सोचने लगी. और काफी देर सोचने के बाद वो बोली

आलिआ- सायद एक बार भी नहीं. लेकिन क्यों.

मैं- अब देखो.

मेरे कहने पैर उसने आकाश की तरफ देखा तो उसका भी भेजा फ्राई हो गया. और उसने भी मेरी hi तरह अपने सर को पीट लिया और वो भी हसने लगी.

आलिआ- हम सच में पागल है.

मैं- सही कहा. चलो चलते है.

जैसे hi हमने जाने के लिए रेडी हुए तभी अचानक से हमारे चारो तरफ तेवर ाग्नि प्रगट हो गयी. जिसका ताप बकै में तेज़ था. और हैरानी की बात ये थी की मुझे भी उसकी जलन महसूस हो रही थी…………



तो बे कॉन्टिनुए………………….
 
अपडेट 57



आलिआ- ये क्या हो रहा है. मुझे जलन महसूस हो रही है.

मैं- में कहना तो नहीं चाहता लेकिन मुझे भी.

आलिआ- तुम्हे लेकिन ये कैसे संभव है. जरूर ये कोई मयाबी शक्ति है. रुको में कुछ करके देखती हु.

उसके बाद ने अपनी छड़ी को घुमाया और खुद भी गोल गोल घूम गयी. और ऐसा करते hi उसकी छड़ी से एक शक्ति निकली और गोल गोल घूमने से वो चारो तरफ फ़ैल गयी. और ऐसा होते hi हमारे चारो तरफ जो आग लगी हुई थी वो तुरंत hi भुज गयी. लेकिन इसके जस्ट बाद मौसम अचानक से बदल गया. चारो तरफ घने बदल छ गए और आसमान में जो एक लौटा तारा चमक रहा था दिन में भी जो की बही ाँस था वो अब धक् गया था. पुरे जंगल में अँधेरा छ गया था. और ऐसा होते hi हमारे कानो में कुछ अजीब सी आवाजे आने लगी. और ये आवाजे कुछ अजीब hi थी.

आलिआ- ये आवाजे कैसे है.

मैं- लगता है असुर हमारा पीछा करते हुए यहाँ आगये है. और उन्होंने भी उस ाँस को देख लिया hai.isiliye हैंपर हमला करदिया तुरंत hi ताकि हम उस तक न पहुंच पाए.

आलिआ- अब क्या करे हम.

मैं- इनका ध्यान भटकने की जरुरत है ताकि में ऊपर जा सकू. एक बार एंड मेरे हाथ लग गया फिर इनकी बंद में खुद बजाऊंगा.

आलिआ- में समाज गयी तुम जाओ. में यही रुकूंगी.

मैं- पक्का

आलिआ- और कोई रास्ता भी नहीं है.

मैं- ये भी सही है. ठीक है. तो रेडी हो जाओ.

उसके बाद मैंने अपने दोनों हाथो को क्रॉस किया जिससे हाथो में एक अलग hi प्रकार की शक्ति आगयी. और उसके बाद मैंने अपने दोनों हाथो को झटके से छोड़ diya.or ऐसा करते hi वो ऊर्जा जंगल में चारो तरफ फ़ैल गयी. और इसका असर ये हुआ की जितने भी असुर इस जंगल में थे जो छिपे हुए थे. वो सभी अब न चाहते हुए भी हमें दिखने लगे थे. और हम दोनों hi देखकर हैरान थे क्युकी उनकी गिनती हजारो में थी. इतने छोटे जंगल में इतने सरे असुर कब और कैसे आगये ये सोचने का भी टाइम नहीं था. मैंने आसमान की तरफ देखा तो मेरी नजर किसी पैर पड़ी. वो ऊपर hi जा रहा था बदलो को चीरता हुआ. ाँस के नजदीक. और मेरी हालत ख़राब होने लगी. क्युकी ये बदल मयाबी थे. और ये मुझे आसानी से ऊपर जाने नहीं देंगे. फिर भी कोसिस तो करनी hi थी. और नीचे के सरे असुरो ने हमें चारो तरफ से घेर लिया था

आलिआ- तुम जाओ जल्दी. में तब तक संभल लुंगी.

मैं- में ऐसे अकेला छोड़ कर नहीं जा सकता तुम्हे. तुम्हारी जान को खतरा हो सकता है.

आलिआ- नहीं मुझे कोई खतरा नहीं होगा में संभल लुंगी.

मैं- रुको में कुछ करता हु.

मैंने फरसे से निबेदन किया की आलिआ की रक्षा करे और इन असुरो का विनाश करे. और ये कह के मैंने फरसे को हवा में छोड़ दिया. और ऐसा करते hi आलिआ के चारो तरफ एक भयंकर कवच बन गया जो फरसे से निकलने वाली रौशनी से बना था. अब आलम ये था की असुर आलिआ को छू नहीं पाएंगे. और दोनों मिलकर इन असुरो की बंद बजायेंगे.

और में बिजली की तेज़ी से उड़द गया आसमान में. रस्ते में मैंने खुद को गायब कर लिया बिलकुल हवा में बदल लिया खुद को. जो तेज़ी से ऊपर जा रही थी. लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब में बदलो के अंदर घुसा. जैसे hi में बदलो में घुसा. अचानक से मुझे तेज़ बिजली के झटके लगने लगे जो चारो तरफ से आरहे थे. और में अदृश्य था लेकिन फिर भी मुझे झटके लग रहे थे. में छह कर भी ऊपर नहीं जा प् रहा था. मेरी हालत ख़राब हो रही थी. तभी मुझे हसने की आवाज आई.

असुर- हाहाहाहा देव तुम इस बदल को पार नहीं कर पाओगे. चाहे कुछ कर लो. और न hi उस ाँस तक पहुंच पाओगे. तुम्हारी हार तय है.

मैं- बैसे लग तो रहा है की तुम्हारी बात में दम है लेकिन यकीन नहीं हो रहा है. बैसे तुम हो कोण. जरा अपना नाम तो बताओ.

असुर- मेरा नाम जानकार क्या करोगे बचे. तुम मेरा नाम बिना जाने hi मारो .. हाहाहाहा.

वो हस्ते हुए गायब हो गया. और मैंने सोचा की यार हद hi हो गयी. मेरे hi पैतरे मुझपर आजमा रहा है ये तो. मैंने कोसिस करते हुए अपने हाथो को जोड़ा और अपनी आँखों को बंद किया. और मंत्र का जाप किया. और जैसे hi मेरी तीस्रीआँख ओपन हुई. उसके अंदर से एक तेज़ प्रकाश निकला. और उस प्रकाश ने देखते hi देखते सरे मयाबी बदलो को हटा दिया. और अब आसमान बिलकुल साफ़ हो गया था. और मैंने देर न करते हुए सीधा ऊपर को जाने लगा.

बही वो असुर ये देख कर थोड़ा हैरान था. लेकिन उसे इस बात का अंदाजा था इसलिए उसने तुरंत hi ाओंक दूसरी चाल चली.

बही नीचे आलिआ अपनी छड़ी को घुमा घुमा कर असुरो की बंद बजा रही थी. और फरसा अपना अलग hi रूप असुरो को दिख रहा था. जैसे hi कोई असुर आलिआ के नजदीक आने की कोसिस करता फरसे से निकले तेज़ से वो नहीं जल कर रख में बदल जाता. अब ये अच्छा हुआ की आलिआ उन असुरो का ध्यान खींचे हुई थी और लेकिन ऊपर भी काम परेशानी नहीं thi.in असुरो का बॉस मेरी जान खा रहा था. वो भी पुराने तरीको से. आपको विस्वास नहीं होगा वो तीर कमान चला रहा था.

और मेरे ऊपर लगातार तीरो की बौछार कर रहा घ जिनसे में बचता फिर रहा था. और उसको बिना देखे hi में समाज गया था की इसके पास दिव्यास्त्र काफी है. और इनका इस्तेमाल करना भी ये अच्छी तरह से जनता है. और आज मुझे ये एक एक्सपेरिमेंटल लैब में बदलने बाला है. मेरे ऊपर सरे दिव्यास्त्रों का इस्तेमाल करेगा अगर जल्दी hi मैंने उसे नहीं रोका तो. इसलिए मैंने अपने हाथो को जोड़ा और उसके बाद मेरी आँख से निकली भयंकर ज्वाला जो उसके तीरो को चबा रही थी. उसके सरे तीर उस जवाला में भस्म होते जा रहे थे. और इतना hi नहीं वो ज्वाला उसकी और तेज़ी से बाद रही thi.jisse वो सस्माज गया की अब उसका बचना संभव नहीं होगा अगर वो जल्दी hi भगा नहीं थी. और हुआ भी बैसे hi वो तुरंत hi गायब हो गया. हलाकि गायब वो पहले से hi था. लेकिन दिव्यादृस्ति से मुझे दिख रहा था. लेकिन अब वो दिखना भी बंद हो गया tha.matlab वो छिप गया कही पैर. इसलिए मैंने खुद को नार्मल किया और अपनी स्पीड को बड़ा दिया उस टारे की taraf.lekin वो फिर आज्ञा. और इस बार पीछे से हमला. उसने पता नहीं क्या किया. एक तरह से मुझे क़ैद कर लिया. में बिलकुल भी हिल नहीं प् रहा था. न मेरी आँखे बंद हो रही था न हाथ चल रहे थे. न hi कुछ और. न में बोल प् रहा था. मेरी हालत पूरी तरह से टाइट थी. तभी वो मेरे सामने प्रगट हुआ.

असुर- कैसा लग रहा है बचे. तुम मेरा नाम जानना छह रहे थे न. तो सुनो मेरा नाम है मयासुर.

ये नाम सुनकर में चौका. ये कैसे संभव है मैंने खुद उसे मारा था.

असुर- में जनता हु तू क्या सोच रहा है. तूने तो मयासुर को मार्डिया था तो फिर में जिन्दा कैसे हु. तो में तुझे बतादेना चाहता हु. जिसे तूने मारा था वो मेरा छोटा भाई था. उसकी शक्तियों का सामना तो में भी नहीं कर सकता था. लेकिन पता नहीं तूने कैसे उसे मार दिया. और यहाँ मैंने तुझे क़ैद कर लिया. और ये मुझे समाज में नहीं आरहा है की कैसे. मेरा भाई मारा गया तेरे हाथो. जबकि वो चाहता तो तुझे आसानी से मसल सकता था. और में यहाँ खास इसी लिए आया हु. ताकि तेरा अंत कर सकू और इस ाँस को अपने गुरुदेव के चरणों में समर्पित कर सकू.

मैं उसकी साडी बाटे सुन प् रहा था लेकिन कोई जवाब नहीं दे प् रहा था. में बेबस सा होता जा रहा था.

असुर- में भी किस्से पूछ रहा हु. तू तो बोल भी नहीं सकता बेचारा देखो कितना तड़प रहा है ये. लेकिन तू घबरा मत. एक बार वो ाँस में ले लू. उसके बाद में तुझे तसल्ली के साथ मरूंगा. और उस पारी को भी जो तेरे साथ आई है.

और यहाँ हुआ चमत्कार.

उसने जैसे hi ये बोलै पीछे से आवाज आई कुछ.

आलिआ- जरा आजमा कर देखलो. की इस पारी को मारना इतना आसान नहीं है जितना तुम सोच रहे हो

असुर- ओह्ह बेचारी पारी अपने साथी को बचने आई है देखो तो

उसने अभी इतना hi बोलै था की आलिआ ने अपनक छड़ी को घुमाया और एक तेज़ रौशनी वाली रस्सी को छोड़ दिया. और वो कुछ समाज पता या करता उससे पहले hi वो उस रस्सी में बांध गया.

आलिआ- अरे देखो तो यहाँ तो एक और है जो फास गया है. हमें मारने चला था.

असुर- तुम मुझे इसमें ज्यादा देर तक नहीं बाँध पाओगी लड़की. और याद रखना जैसे hi में इससे बहार निकला तेरी मौत तय है

आलिआ- पहले निकल कर बताओ. फिर आगे बोलना.

ये सुनकर असुर पूरा जोर लगाने लगा था उस रस्सी को तोड़ने के लिए. और वो कुछ हद तक कामयाब भी होने लगा था. बही मेरी परेशानी अब बढ़ने लगी थी क्युकी आलिआ की जान को खतरा था. इसलिए मुझे अब कुछ करना hi पड़ेगा.

मेरा दिमाग काम कर रहा tha.isliye मैंने तुरंत hi फरसे का आवाहन किया मुझे उम्मीद थी की वो इस माया को तोड़ सकता है.

और मेरा ऐसा सोचते hi नीचे से तेज़ स्पीड में फरसा उड़ता हुआ आया वो भी गोल गोल घूमता hua.speed बहुत ज्यादा लग रही थी. हलाकि मुझे दिख नहीं रहा था लेकिन में इमेजिन कर सकता था. साडी माया को चीरता हुआ फरसा मेरे से टकराई गया. और ऐसा होते hi एक भयंकर विस्फोट हुआ. और इसमें अच्छी बात ये हुई के उसकी माया टूट गयी और में आज़ाद हो गया. और अब फरसा मेरे हाथ में था. बही बुरी बात ये हुई की इस विस्फोट में आलिआ की रस्सी भी टूट गयी और वो असुर भी आज़ाद हो गया.

असुर- क्या बात है. ये फरसा मुझे कुछ जाना पहचाना लग रहा है.

मैं- है ये तेरी मौत जो है.

ये कहके में एकदम से उसकी तरफ उड़द गया और उसके मुँह पैर एक जोर दार पंच जड़ दिया. ज्यादा कुछ नहीं लेकिन एकड़ दन्त तो जरूर टुटा होगा इसका.

असुर- काफी जबरदस्त हाथ है तुम्हारा.

लेकिन अब इससे कैसे बचोगे.

ये कहके वो मेरी तरफ आया उड़ता हुआ. लेकिन जैसे hi मुझे मारने की कोसिस की मैं झुका और फरसे को चलाया उसके हाथ के ऊपर. और ऐसा करते hi उसका हाथ काट गया और सीधा नीचे चला गया.

ये देखकर तो उसके होश hi उड़द गए.

असुर- ये क्या था. मुझे लगा हम हाथो से लड़ रहे है.

मैं- मुझे भी लेकिन वो क्या है की मेरे पास ज्यादा समय नहीं है. इसलिए में इसको थोड़ा जल्दी ख़त्म करना चाहता हु. और ये कहके मैंने उसको बिना मौका दिया फरसा सीधा उसकी गार्डन पैर चला दिया. और एक hi झटके में उसकी गार्डन उसके धड़ से अलग हो गयी. और बची खुची कसार मैंने अपनी तीसरी आँख से पूरी कर दी. इतनी भयंकर ज्वाला निकली की उसका सरीर और उसकी गर्दन दोनों hi पल भर में भस्म हो गए.

और ये सीन देखकर आलिआ ने अपनी आँखों को बंद कर लिया.

मैं- अब समाज में आया की मैंने कैसे तेरे भाई को मारा था. बड़ा आया mayasur.mujhe मरेगा.

अभी में बोल कर बंद hi हुआ था की मुझे फिर से उसकी आवाज आई.

असुर- है में समाज गया तूने उसे कैसे मारा होगा. लेकिन मुझे मारना इतना आसान नहीं है बचे.

और इतना कहते hi ऊपर से एक भयानक ज्वाला सीढ़ी मेरी तरफ hi आई. और वो मुझसे टकराती उससे पहले hi मैंने फरसे को उसी ज्वाला की तरफ फेल दिया थोड़ा फाॅर्स लगा कर. और इसका असर ये हुआ की फरसा उसकी ज्वाला को काटता हुआ आगे बढ़ने लगा. मुझे अंदाजा था की ये ज्वाला मुझे नुकसान पंहुचा सकती है. क्युकी नीचे इसकी जलन को मैंने महसूस किया था. लेकिन ये फरसा तो कमाल का है. और इसे चलते समय मुझे एहसास हुआ की गुरुदेव को कितना मजा आता होगा जब वो इससे असुरो का विनाश करते होंगे.

वो फरसा उस आग का पीछा करते हुए सीधा एक जगह पैर रुक गया. और आग का निकलना भी बंद हो गया. ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी चीज़ से टकरा गया हो लेकिन बहा हमें कुछ नहीं दिख रहा था. लेकिन जल्दी hi दिखने लगा. और सामने हमें दिखा की वो फरसा सीधा उस मयासुर के सर में पूरी तरह से धस गया था. ये बही था. जो अदृश्य होक हमला कर रहा था. जैसे hi उसके सर में फरसा धसा उसकी माया समाप्त हो गयी और वो हमें दिखने लगा. वो धीरे धीरे नीचे गिरने लगा tha.or इसकी कसार को मैंने पूरा किया. अपनी आँख से उसके ऊपर बही ज्वाला को छोड़ दिया. और ऐसा करते hi ये भी रख में बदल गया. और फरसा हवा में hi झुकता रह गया. उसके बाद में उड़द मर फरसे के पास गया और उसे प्रणाम किया. और फिर से उसमे से सुनहरी रौशनी चमकने लगी जैसे आसीर्बाद दे रहे हो वो हमें. और फिर मैंने उसे अपने हाथ में पकड़ लिया.

आलिआ- अब चले

मैं- है चलो.

और फिर हम तेज़ी से उस टारे के समीप उड़ते हुए पहुंच गए. इस टारे का आकार बिलकुल बैसा hi था जैसा पहले ाँस का था. मैंने उसे प्रणाम किया. और वो चमकने लगे और ज्यादा और आलिआ ने भी उसे प्रणाम किया. और उसके बाद मैंने अपने हाथ बढ़ाया और उस ाँस को अपने हाथ में ले लिया और फिर बही हुआ जैसा पहली बार हुआ था. वो हाथ में आते hi मेरे सरीर में समां गया.

और ऐसा होते hi मेरे सरीर में रक्त का प्रबाह काफी बाद गया. मेरी अंदर की नसे और मजबूत होने लगी मेरी आंतरिक शक्ति बढ़ने लगी. ये ाँस मेरे सरीर को अंदर से मजबूती प्रदान करने लगा. और मेरा सरीर से तेज़ रौशनी चमकने लगी जो थोड़ी देर तक लिए hi थी. और थोड़ी देर बाद वो साडी रौशनी बापिस से अंदर चली गयी.

आलिआ- अब हमें परीलोक चलना चाहिए. आज शायद दूसरा दिन है. और आज सूर्य ढलने के साथ hi वो असुर सबको मारने लगेगा

मैं- तुम चिंता मत करो आलिआ. उस असुर की कुंडली अब मेरे हाथ में है. तुम्हारी माँ और बाकि सभी औरतो को एक खरोच भी नहीं आने दूंगा में.

आलिआ- मुझे विस्वास है तुमपर. अब जल्दी चलो. लेकिन हम यहाँ से बहार कैसे निकलेंगे.

मैं- तुम चिंता क्यों करती हो में हु न.

और ऐसा कहकर मैंने अपनी चुटकी बजे. और उसके अगले hi पल हम परीलोक के दरवाजे पैर खड़े थे. जिसे देखकर आलिआ थोड़ी हैरान हो गयी की ये कैसे हुआ.

मैं- सोचना बंद करो. और देखो की अब क्या होता है…….



तो बे कॉन्टिनुए………………..
 
अपडेट 58



हम दोनों परीलोक के दरवाजे पैर खड़े थे और अंदर जाने के लिए पूरी तरह से रेडी. लेकिन मुझे अभी तक इस कालनेमि की कोई भी जानकारी पता नहीं चल पाई थी. जैसे उसको जैसा वरदान प्राप्त है. और उसकी कमजोरी क्या है उसे कैसे हराया जा सकता है. और सबसे जरुरी उसने कहा सबको छिपा कर रखा हुआ है. इन बातो के आल्वा बाकि सब ठीक था.

आलिआ- कहा खो गए

मैं- कही नहीं. अब अंदर तो ले चलो या यही पैर खड़ा रखने का इरादा है. पहली बार तुम्हारे घर आ रहा हु. मुझे बढ़िया मेहमान नवाज़ी चाहिए. वर्ण में रूत जाऊंगा.

मेरी बात सुनके आलिआ के चेहरे पैर एक हलकी सी मुस्कान आगयी. और यही मुझे चाहिए था. क्युकी जब से उसकी माँ का किडनैप हुआ था तब से उसके चेहरे पैर हसी आई hi नहीं थी. हलाकि थोड़ी हसी आई थी जब हमने ाँस को देखा था लेकिन वो थोड़ी अलग हसी थी और जो अब आई थी वो नार्मल मुस्कान थी. जिससे उसकी खूबसूरती में चार चाँद लग गए थे.

मैं- बड़ी क्यूट लग रही हो. ऐसे hi हस्ते रहा करो.

आलिआ- जी भर कर हसूँगी एक बार माँ और बाकि सभी बापिस आजाये. मुझसे बड़ा करो तुम उन्हें कुछ भी होने नहीं डोज

मैं- में इस वादे को निभाने की पूरी कोसिस करूँगा.

आलिआ- तुमने वादा नहीं किया.

मैं- दरअशल मुझे अभी तक कालनेमि की छोटी सी भी जानकारी नहीं मिली है. और ऐसे में उसे हराना बहुत मुश्किल हो जाता है. और इस दौरान अगर उसने किसी को कुछ नुकसान पंहुचा दिया तो मेरा वादा टूट जायेगा जो में होने नहीं दे सकता. इसलिए मैंने वादा नहीं किया. बल्कि तुम्हारे वादा को निभाने की कोसिस करूँगा ऐसा कहा.

मेरी बातो को सुन कर समझ कर आलिआ बोली.

आलिआ- मेरे किये यही काफी होगा. ये तुम्हारी लड़ाई नहीं है. फिर भी तुम यहाँ आये मेरी मदद करने को यही मेरे लिए बहुत बड़ी बात है. और इस लड़ाई में अगर कुछ उल्टा हो जाता है तो तुम्हे कसम है मेरी की तुम उसका दोष अपने सर पैर नहीं लोगे.

मैं- अब छोडो ये मायूसी की बातो को. हम उसे जरूर हरा देंगे. देखना तुम. अब चलो भी.

आलिआ- ok ok.

उसके बाद आलिआ ने अपनी छड़ी को घुमाया और ऐसा करते hi परीलोक के बड़े बड़े दरवाजे अपने आप खुलने लगे. और अंदर से सूर्य की रौशनी बहार झाकने लगी. ऐसा लग रहा था जैसे इस रौशनी को किसी ने गोल्ड के पानी में नेहला दिया हो. एक डैम सुनहरी रौशनी. जिसको देखकर hi मन में अति उत्साह और आनंद भर जाये. और कुछ ऐसा मेरे साथ भी होने लगा था. ये रौशनी मुझे एक नया जोश प्रदान कर रही थी. खैर दरवाजे के खुलते hi हम अंदर दाखिल हुए और ऐसा करते hi दरवाजा फिर से बंद होने लगा. हम आगे को बड़े. बड़ा hi खूबसूरत था परीलोक. उसकी सुंदरता कहते नहीं बनती थी. लेकिन फिलहाल जो कृषि चारो तरफ फैली रहती है वो गायब थी. हर इंसान बहा पैर मायुश था. अपने किसी खास के जाने से. जो में देखते hi समाज गया था. और ये सब हाल देखकर आलिआ का मुँह फिर से लटक गया था.

इस सूर्य के अस्त होने से पहले मुझे कालनेमि को ढूंढ कर सबको छुड़ाना था. इसलिए टेंशन तो मुझे भी हो रही थी. लेकिन अब मुझे कोसिस करनी hi पड़ेगी सबको ढूंढ़ने की. क्युकी अब दूसरा ाँस मेरे पास था और कालनेमि अंतरिक्ष का hi एक असुर था. इसलिए अब उसको ढूंढ़ना मुश्किल नहीं होना चाहिए. बाकि जैसी महादेव की इक्छा होगी बही होगा. इसी उम्मीद के साथ हम आलिआ के महल में आगये. जहा एक सभा लगी हुई थी. में तो बस महल की खुनसुरति में hi खो गया tha.kitna ऊँचा महल tha.or कितनी सुन्दर आकृति बानी हुई थी दीवारों पैर. बकै में ये सब किसी सपने से काम नहीं था. लेकिन ये कोई सपना भी नहीं था. खैर सभा में पहुंच कर आलिआ में अपने पिता को आवाज लगाई.

राजाजी- हम तुम्हारा hi इन्तजार कर रहे थे पुत्री. तुम्हे कुछ पता चला उस ाँस में बारे में. और उस इंसान के बारे में.

आलिआ- पिताजी में उस ाँस को अपने साथ लेके आई हु. और उस इंसान को भी

राजाजी- क्या बात है पुत्री तुमने तो हमारी साडी मुस्किलो को पल भर में दूर कर दिया. हमें दिखाओ उस ाँस को और उस इंसान से भी मिलवाओ हमें.

आलिआ- जरूर पिताजी.

उसके बाद आलिआ ने मुझे आवाज लगाई. में इस वक़्त दरवार के गेट पैर खड़ा हुआ tha.aalia ने मुझे बही रोक दिया था. और जैसे hi उसकी आवाज आई में सभा मर अंदर आज्ञा. और सभा का नजारा देख कर एक बार फिर से में आश्चर्यचकित रह गया. कितनी सुन्दर आकृति और कितने सुन्दर इंसान और बहा की भेसभूसा भी. बकै में. लेकिन एक बात समाज में नहीं आई थी अभी तक. जिसका जवाब सायद आलिआ के पिता hi दे सकते थे. खैर में अंदर आया. और अब चोकने की बरी उनसबको थी. क्युकी में तो ामीणसँ था. मेरा बैसा hi भेस था. इसलिए सब मुझे घर रहे थे. और मेरे हाथ में फरसे को देखकर तो और सभी के होश उड़े हुए थे.

आलिआ- पिताजी ये देवज. पृथ्वी पैर निवेश करते है. इनके भेष पैर मत जाइये ये आम इंसानो की तरह hi है. लेकिन है बहुत शक्तिशाली. इतनी काम उम्र में इन्होने कई असुरो का विनाश कर दिया है. जिनमे मयासुर और उसका भाई भी शामिल है.

ये बाटे सुनकर तो जैसे सभी के पैरो टेल जमीन hi खिसक गयी हो. ऐसा लगा मुझे.

राजाजी- क्या ये सच है पुत्री.

आलिआ- पूरी तरह से सच है ये पिताजी. हम अभी मयासुर के बड़े भाई का वध करके hi आरहे है. और एक बात जो में बाटाडू. इनके बारे में. की ये भगवन परसुराम के चौथे सिस्य hai.or इनके हाथ में जो फरसा आप देख रहे है वो स्वयं भगवन परसुराम का hi है. उन्होंने इस फरसे को इनको प्रदान किया है.

जैसे hi ये सुना सभी के सभी अपने िस्थानो पैर से खड़े हो गए. और अचानक से मुझे प्रणाम करने लगे. जो मुझे तो बड़ा hi अजीब लगा.

मैं- आलिआ बस करो. मेरी टैरिफ करना बंद करो. और आप सभी भी बैठ जाइये. ये सब मुझे अच्छा नहीं लगता है.

मेरी बाटे सुनकर आलिआ के पिता के चेहरे पैर एक मुस्कान आगयी.

राजाजी- देवज हम बता नहीं सकते की आज हम हमारा मैं कितना प्रसन्न hai.swayam भगवन परसुराम के सिस्य के दर्शन किये हमने और साथ में उनके फरसे के भी. हमें स्वयं उन्ही के दरसन हो गए हो ऐसा लग रहा है. और आपकी ये विनम्रता को देखकर तो मन में और भी उत्साह भर गया है. आप हमारी मदद करने आये ये हमारे लिए बहुत hi बड़ी बात है.

मैं- राजन यही मेरा फ़र्ज़ है और इसी लिए मेरा जन्म हुआ है. ताकि में दूसरी की मदद कर सकू. और बुराई का अंत मर सकू. बाकि सब तो जैसा महादेव चाहते हक़ बैसा hi होता hai.unhone हमारा मिलना तय किया था और देखिये आज हम मिल गए. और में पूरी कोसिस करूँगा की आपके राज्य की हर एक स्त्री को सही सलामत में बापिस ला सकू. और उस असुर का विनाश कर सकू.

राजाजी- हम धन्य हो गए आपके मुख से ये सुनकर.

मैं- धन्य तो में हुआ हु. जो आप जैसी महँ हस्ती के दर्शन कर पाया और आपका ये सुन्दर राज्य देख पाया. बैसे मेरे मन में एक प्रश्न है. अगर आप आज्ञा दे तो में प्रगट करू.

राजाजी- अवस्य.

मैं- मैंने ऐसा सुना है किस्से कहानियो में की परीलोक में परियो का राज्य होता है. और बहा की प्रधान भी एक पारी होती है. जिसे रानी पारी कहते है. लेकिन यहाँ तो आप का शासन चलता है. फिर इस जगह का नाम परीलोक क्यों है.

मेरे इस प्रश्न को सुनकर उनके चेहरे पैर एक मुस्कान aagyi.or वो बोले.

राजाजी- देवज तुमने जो भी सुना है वो सात प्रतिशत सत्य है. परीलोक में राजा का स्थान परियो को hi दिया जाता है. और मेरी पत्नी hi यहाँ की रानी पारी है. और यहाँ पैर जितने भी पुरुष बैठे हुए है. वो सभी परियो के सहायक hai.ham सब मिलकर काम करते है. चुकी अब यहाँ पैर एक भी पारी नहीं बची है इसलिए में रानीपारी की जगह पैर हु और सबको इस संकट से उबारना मेरा कर्त्तव्य hai.yaha पैर जितनी भी लड़कियों का जन्म होता है वो जन्म से hi पारी होती है. और जितने भी लड़को का जन्म होता है. वो साधारण hi होते है. मगर उनमे भी थोड़ी बहुत शक्तिया तो जन्म से hi होती है. यहाँ पैर लड़को से ज्यादा लड़की होने की सभी दुआ करते hai.kyuki बही यहाँ की सेना में जा सकती है. लेकिन उस मयाबी ने हमारी मुख्या ताकत को hi हमसे छीन लिया और हमें बेबस कर दिया है. अब आप hi हमारी आखिरी उम्मीद है.

मैं- में पूरी कोशिश करूँगा की सभी परियो को बापिस ले औ सही सलामत.

राजाजी- पुत्री वो ाँस कहा है.

आलिआ- पिताजी वो ाँस यही है. देवज के अंदर hi वो ाँस है. असल में कई वर्षो पहले एक दिव्यस्त्र हुआ करता था. जिसमे पंचमहाभूतो की साडी शक्तिया विलीन थी. और वो अस्त्र असुरो के पास था. परन्तु असुरो के पराजित होते hi वो दिव्यास्त्र पांच भागो में बात गया और उसकी शक्तिया भी और वो उस ब्रह्माण्ड में विलीन हो गया. और इनका जन्म उन्ही पंच ांसो को असुरो से पहले प्राप्त करने के लिए हुआ है. इन्होने अभी तक 2 ाँस प्राप्त कर लिया है. जिनमे पृथ्वी और आकाश शामिल है. अब बाकि के तीन एंड बचे हुए है. Agni,jal,or बायु.

राजाजी- अगर यही वो ाँस है तो हम सबको कैसे छुड़ाएंगे उस मयाबी से.

मैं- उसकी चिंता आप मुझपर छोड़ दीजिये. आप बस मुझे उस असुर की जानकारी दीजिये उसकी शक्तियों और कमजोरियों के बारे में. और उसके वरदान के बारे में अगर आपको पता हो तो. बाकि में देख लूंगा.

राजाजी- सच कहु तो मुझे उसकी शक्तियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है. अगर होती तो हम उसे पहले hi परास्त कर देते. इसीलिए मुझे ज्यादा चिंता हो रही है सभी की.

मैं- ठीक है मुझे थोड़ा वक़्त दीजिये में साडी जानकारी लेने की कोसिस करता हु.

राजाजी- जैसा तुम ठीक समझो.

उसके बाद उन्होंने दास को बुला कर मुझे मेरे कमरे में पंहुचा दिया. और बाकि सभी अपनी अपनी टेंशन लेके बैठ गए.

बही में अपने कमरे में पहुंच कर ध्यान में बैठ में गया. और बैठते hi सबसे पहले गुरुदेव की आवाज मेरे कानो में पड़ी.

मैं- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- विजयी भाव वत्स. तुमने कर दिखाया. दूसरा ाँस भी प्राप्त कर liya.mujhe नाज़ है तुमपर.

मैं- ये सब आपके आसीर्बाद से hi संभव हो पाया हज गुरुदेव.

गुरुदेव- ये तुम्हारी hi म्हणत और परिश्रम का फल है vats.or मेरा आसीर्बाद तो हमेशा तुम्हारे साथ है.

मैं- धन्यबाद गुरुवार. गुरुदेव आप मुझे इस कालनेमि के बारे में बता सकते है क्या

मुझे उसकी जानमारी नहीं मिल प् रही है.

गुरुदेव- वत्स कालनेमि को वरदान पर्पट है. की उसे अंतरिक्ष में न hi कोई ढूंढ सकता है और न hi कोई उसे परास्त कर सकता है. एक तरह से वो पोरे अंतरिक्ष का राजा है फिलहाल.

मैं- तो फिट उसे कैसे हराया जाये गुरुवार. आप मेरा मार्गदर्शन करे.

गुरुदेव- वत्स उसे हारने का एक hi रास्ता है. उसे पृथ्वी पैर ले आओ. किसी भी तरह. क्युकी पृथ्वी पैर hi उसकी हार संभव है.

मैं- गुरुवार परन्तु वो क्यों आएगा पृथ्वी पैर ये जानते हुए की बहा उसकी जान को खतरा है. और उसके पास फिलहाल साडी परिया बंदी है. ऐसे में उसका पलड़ा हमसे ज्यादा भरी hai.agar में उसे ाँस का लालच भी दूंगा तब भी वो मुझे hi कहेगा की लेके मेरे पास आओ उसे. वो कही नहीं जायेगा.

गुरुदेव- में जनता हु. परन्तु उसे हारने का यही एक मात्रा तरीका है. तुम सबसे पहले सभी परियो को मुक्त कराओ. मुझे उम्मीद है तुम्हे उनकी जानकारी जरूर मिल जाएगी.

ये सुनके मेरे मन भी आईडिया आज्ञा. लेकिन उसके लिए सभी परियो का आज़ाद होना जरुरी था.

मैं- आपका कहना उचित है गुरुवार. में उन्ही को ढूंढ़ने की कोसिस करता हु. आपके आसीर्बाद की जरुरत है.

गुरुदेव- विजयी भाव वत्स. अब जाओ और उन्हें ढूंढो.

मैं- जो आज्ञा गुरुदेव.

उसके बाद गुरुदेव की आवाज आणि बंद हो गयी. और में ध्यान में साडी परियो को ढूंढ़ने लगा. पहले ये थोड़ा मुश्किल होता लेकिन अब ाँस मिलने के बाद में इन परियो को ढूंढ प् रहा था. थोड़ी hi देर में मुझे उनकी जगह का पता चल गया की कहा पैर उन्हें क़ैद करके रखा गया है. अब बहा पैर कालनेमि था या नहीं ये मुझे नहीं पता चला. लेकिन जितना पता लगा इतना काफी था. इसलिए अब मुझे बही जाना होगा और सबको बहा से यहाँ लाना होगा.

यही सब सोचकर मैंने अपनी आँखों को खोल लिया. और मेरे सामने इस समय आलिआ कड़ी हुई थी……..

तो बे कॉन्टिनुए………………….

 
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