फंतासी इम्मोर्टल्स - Page 6 - SexBaba
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फंतासी इम्मोर्टल्स

अपडेट -38

अब तक

मैं ज्वाला के कबीले में tha...usse बात करने के बाद मैं पोलर बेयर प्रिंस को देखने के लिए निकल गया tha...wahi निकिता अपने साथियों के पास गयी thi...haa साथी जिनके साथ वो रहती thi...yaha स्कूल आने से pahle...wo उनको कुछ सच बताने गयी thi...Prof. सूरज का sach...aur उसने बताया भी और सबूत भी diye...par उसके बाद वो बिन्ना कुछ कहे सुनने वह से निकल गयी स्कूल की oor...wahi दब वो खुश था अपने महल में सभी के saath...inn बातों से अनजान की क्या क्या हुआ है एल्फ कंट्री mein...aur सीना नायक जी परेशां थे क्यूंकि उनको समझ नहीं आ रहा था की उनके फुलप्रूफ प्लान का हुआ kya....sab सेट करके रखा था उसने पर कुछ हुआ hi nahi...Leemo अपनी बहन और अपनी भंगजे के साथ खुश था...

अब आगे...

पहले तो हीरो के पास hi चलते है जो अभी ज्वाला के कबीले में घुम्म रहा है...

(प्रतीक के रेस्पेक्ट में)

मैं यहाँ वह देखता हुआ जा रहा था वैद्य के pass....aaj लोग नाराज से लग रहे थे mujhse....sayad इनको भी उस पोलर बेयर प्रिंस का मेरा यहाँ लाना पसंद नहीं aaya...aaye भी kyun..dusman जो थे wo...par अगर ध्रुव की बात को मन्ना jaaye...matlab की पोलर बेयर और ज्वाला के कबीलों को एक साथ कर दिया जाए तो इनका मुकाबला करना बहुत मुश्किल हो jaayega...aur ये जो प्रिंस है वो इसमें एक एहम भूमिका निभा सकता था...

मैं ऐसे hi सोचते हुए जा पंहुचा वह वैद्य जी के pass...aur जब वह पंहुचा तो ठण्ड से मेरी भी कुल्फी जमने लगी....

मैं - यहाँ इतनी ठण्ड क्यों लग रही hai....kya हो रहा है यहाँ...

वैद्यजी - ये सब आपके लाये हुए इस मेहमान का किया धरा hai...maine इसको दवाई di..taaki ये ठीक हो jaaye...ab जब ये ठीक होने लगा है तो यहाँ के वातावरण से गर्मी को खींच रहा hai...pata नहीं क्यों और kaise...par इसके आस पास की साड़ी गर्मी को ये अपने अंदर सोखे जा रहा hai...meri समझ में कुछ नहीं आ रहा है..

मैं - कही इससे कोई दिक्कत तो नहीं होने वाली naa...ye ठीक तो हो जाएगा ना...

वैद्यजी ने अपनी गर्दन निच्चे कर li...aur बोले... "मुझे पता नहीं है क्या hoga....maine पहले कभी किसी पोलर बेयर को ठीक नहीं किया hai...to मैं अंदाज़ा भी लगा के कुछ नहीं कह सकता..."

मैं - ध्रुव ये सब क्या है क्या कुछ गड़बड़ होने वाली है यहाँ पे...

ध्रुव - देखो अब फ्यूचर तो मैं बता नहीं सकता par....dekhne से तो लग रहा है की गड़बड़ hogi...iss भालू के सरीर को dekho...iske फुर्र के रंग कुछ बदल रहे है...

मैं- अरे हां मैंने देखा hi nahi...par क्या इससे कोई दिक्कत होगी..

ध्रुव - अब मैं ये कैसे bataun...tumhe ओल्ड आउल से बात करना chahiye...wo hi है जो इन् दोनों कबीलों को जानता है वो भी बड़े अच्छे se...wo बता सकता है...

मैं -हां ये सही hai...(vaidya जी से) आप ओल्ड आउल को बुल्ला सकते है क्या यहाँ...

वैद्य जी- वो उल्लू... हां बुल्ला तो सकता हु पर...

मैं- पर वॉर छोड़ो और उनको बुलाओ...

वैद्यजी ने एक पोर्टल खोला जिसमे से वो अंदर आ gaye...pahle तो वो समझ नहीं पाए की वह पहुंचे kaise...aur जब समझे तो अपने सामने उस वैद्य को देख के थोड़ा गुस्सा हो गए...

मैं - ओल्ड आउल हममे मदद चाहिए...

ओल्ड आउल - aap...haa बताइये क्या मदद चाहिए....

मैं - wo....(maine उस प्रिंस की ओर इशारा किया...) जब से ये यहाँ आया है और ठीक होने लगा है यहाँ पे ठण्ड बढ़ती जा रही hai...aur इसके फुर्र देखिये वो भी रंग बदल रहे है...

ओल्ड आउल - इसको यहाँ कौन लेके aaya...isko अभी बर्फ में लेके chalo...agar यहाँ रहा तो इसको खतरा hai...ye गर्मी सोख्ता जाएगा और फिर दिक्कत हो जायेगी...

मैं - पर कहा लेके जाए इसको...

ओल्ड आउल ने एक पोर्टल khola.....aur हममे वह लेके आ gata...saath में उस वैद्य को bhi...ye एक बर्फीला इलाका tha...Old आउल आप इसको बर्फ से धकिये तब तक वैद्यजी यहाँ पे इसको रखने का इंतेज़ाम करते है....

मैं - हम्म ठीक है..

मैंने उस भालू को वही बर्फ पे रखा और उसके ऊपर बर्फ डालने laga...par उसका सर बर्फ से बहार रख रहा tha...wahi ओल्ड आउल वैद्यजी को कुछ समझा रहे the...bade गुस्से में लग रहे थे wo...pata नहीं क्या बात थी...

थोड़ी देर बाद वैद्यजी वह कुछ करने lage...wahi ओल्ड आउल मेरे पास आ गए...

ओल्ड आउल - मैंने सब कुछ समझा दिया है isko...ab मैं चलता हु आपका काम देखने को...

मैं - मेरा kaam...mera कोण सा काम...

ओल्ड आउल - अरे आपने hi तो कहा था प्रोफ. सूरज पे नज़र rakho...main वही कर रहा हु...

मैं - अरे हां वो वह से बच निकला था बताया था दीदी ने mujhe....to कहा है wo...aur किस हालत में है...

ओल्ड आउल - हालत की बात kare...to बिजली ने जो उसको झटका दिया है उसके बाद उसकी हालत बहुत ख़राब hai...par ज्यादा दिन ऐसा नहीं rahega...wo अभी डेमोस में है और वह पे उसको राज महल में रखा जा रहा hai.....wo जल्दी से ठीक हो जाएगा waha...Lucifer है उसके साथ...

मैं - Demos....wo डेमोस कैसे pahucha..aur लूसिफ़ेर ???

ओल्ड आउल - लूसिफ़ेर वह का राजा hai....Demos में वो उसी की मदद से पंहुचा hai...pata नहीं क्यों वो उसको बचने में इतना लगा हुआ है...

मैं - नज़र rakho...aur खबर देते रहा karo....kab बताने वाले थे ये sab...jab वो वापस से हुम्ला करता तब...

ओल्ड आउल - मैं बस आने hi वाला tha....bas उन् बातों का पता लगाके...

मैं - अब se....jaise hi कोई बात पता चले मुझे batao...ab जाओ यहाँ से...

ओल्ड आउल वह से चला gaya...WO वैद्य भी वह कुछ करने laga...agla इन् सब के चाकर में मेरा जादुई काढ़े का क्लास छूट गया tha...aur अगर इसके बाद बुआ का क्लास भी छूट जाता तो फिर से मुझसे सब पुच्जन लगती...

मैं - जल्दी करो जो करना है मुझे यहाँ से जाना भी है...

वैद्यजी - हां पता hai....Main पोर्टल खोल देता hu...aap चले जाओ इसका ध्यान मैं रख लूंगा...

मैं - देखो ये बहुत जरुरी है इसको कुछ होना नहीं चाहिए samjhe...jaisa ओल्ड आउल ने कहा है बिलकुल वैसा hi karna...agar मदद चाहिए तो मैं वह ज्वाला से कह देता हु....

वैद्य जी- हम्म ठीक है..

मैंने ज्वाला को याद किया उसने पोर्टल खोला और पहले तो मुझे उस जगह देख के थोड़ा शॉकेड hua...fir मैंने उसको सब bataya....usne अपने कुछ लोगो को ब्वैद्यजी की मदद के लिए भेज दिया और मेरे जाने के लिए पोर्टल भी खोल diya...main वह से स्कूल में आ गया जहा मैं जल्दी से बुआ के क्लास के लिए रेडी हो गया...

अभी इसको यहाँ क्लास अटेंड करने देते है और हम चलते है स्पेन mein...Rupal दीदी के pass....jo अभी कुछ लोगो को सबक सीखने के ंबारे में सोच रही थी...

रूपल दीदी होटल में अपने ऑफिस में बैठी thi...aur सोच रही थी की कैसे उन् इंसानो को बिन्ना मारे हुए रोक्का jaaye...aisa नहीं था की उन्होंने पुलिस की मदद नहीं li...unhone पहले यही kiya...par कोई बात नहीं banni...jinn लोगो की शिकायत इस बार पोप लेके आये थे वो एक बड़े गैंग के मेंबर्स the....jinki पहुंच बहुत ऊपर तक thi..to ज्यादा कुछ हुआ nahi...balki दीदी का होटल उन् लोगो के निशाने पे आ गया tha....aaj दोपहर में hi ूनक्वे होटल के 2 गेस्ट्स को मर्रा था उस गैंग के मेंबर्स ने और उन्हें वो होटल छोड़ने को कहा tha...Didi प्रेशर में thi...ek तो ये उनका पहला काम था और दूसरा की वो अभी चाचा जी को इन् सब में नहीं लांना चाहती thi/...wo खुद इसको हैंडल करना चाहती thi....par कैसे करे ये hi समझ नहीं आ रहा tha...mujhse भी तो राय आंगी थी उन्होंने पर सायद मैं कुछ हेल्प नहीं कर पाया...

वो ऑफिस में बैठी सोच hi रही थी की एक वेटर ने उनके ऑफिस का दरवाजा खटखटाया...

रूपल दीदी - हां अंदर आ जाओ...

वेटर अंदर आया और खड़ा हो गया...

रूपल दीदी - हां बताओ क्या बात है...

वेटर - वो हमारे होटल की गाडी को पकड़ लिया है....

रूपल दीदी - kya...kisne पकड़ लिया...

वेटर - वो गैंग वालो ने...

रूपल दीदी - तुमने पुलिस को खबर किया...

वेटर - मिस आप तो जानती है वो कुछ नहीं karenge....phir भी मैंने कर दिया hai....ye हमारी तीसरी गाडी है जो....

रूपल दीदी - तीसरी gaadi...pahli दो कब गायब hui..aur तुमने बताया क्यों नहीं...

वेटर - मिस मुझे लगा पुलिस को बता दूंगा और वो रिकवर कर लेंगे बात आप तक पहुंचेगी hi nahi....nahi तो आप बेकार में परेशां हो जाओगी....

रूपल - और ab..ab क्या मैं परेशां नहीं लग rahi....inn गैंग वालो का कुछ करना होगा....

वो बात hi कर रहे थे की वह पे दरवाजा वापस से खटखटाया गया....

रूपल - देखो कोण है...

दरवाजा खुला और सामने मास्टर कड़ी thi...ye पता नहीं कर क्या रही है पहले निकिता को और ab...didi के पास...

रूपल दीदी - आप yaha...(Waiter से) तुम जाओ और दूध लेके आओ...

वो जल्दी से वह से निकल गया वही मास्टर ने रूपल दीदी से बैठने को kaha....wo खुद बैठ चुकी थी...

मास्टर - मैंने सुन्ना तुम्हे बहुत परव्शानी हो रही hai...ab तुमने मदद की थी तो मई न भी तुम्हे कुछ उपाय बताने आ gayi...waise तो तुम उन् इंसानो को दर्रा सकती ho...aur वो दार भी jaayenge...par कभी भी अपना चेहरा ख़राब नहीं करना chahiye...apne हथियार का उसे karo...yaad है ना ये क्या क्या करती है....

रूपल दीदी - क्या कुल्हाड़ी ka...par उससे to....aur मैं क्या अभी कण्ट्रोल कर पाऊँगी उसको....

मास्टर - ये तो करने के बाद hi पता चलेगा naa...Ab एक और बात sunno....ab से मैडिटेशन का टाइम बढ़ाओ apna...aur रोज प्रक्टिस अलग से करना होगा तुम्हे.....

रूपल दीदी - Practice..theek है पर ये सब किस लिए.....

मास्टर - तुमको पहली बार देखने से मैं समझ गयी थी तुम सही हो इस काम के liye...par अभी तैयार नहीं ho...to पहले तैयार हो जाओ और फिर काम भी बता dungi....ek और बात दूध पसंद नहीं है मुझे...

रूपल दीदी - ठीक है पर काम तो....

वो अपनी बात पूरी करती उससे पहले hi मास्टर वह से निकल गयी...

रूपल दीदी को समझ नहीं आ रहा था वो अब कुल्हाड़ी को उसे कैसे kare,....jaisa उन्होंने देखा था उस हिसाब से तो उनको लोगो को मारना hoga...par ये वो करना नहीं छह रही थी...

उन्होंने अपने हाथ में कुल्हाड़ी को लिया और सोचने लगी की कैसे क्या किया जाए....

"कैसी हो...." एक आवाज आयी उनके कानो mein...wo यहाँ वह देखने लगी पर कोई नहीं था वह पे...

रूपल दीदी को लगा वहम hoga...wo वापस से सोचने लगी....

"अरे तुम्ही से बात कर रही hu...batao भी क्या करना hai...yaa ऐसे hi बस बुल्ला लिया है..."

आवाज वापस aayi...didi यहाँ वह देखने लगी पर कोई था नहीं वह पे....

"अरे निच्चे हाथ में.." कम्मल करती हो तुम bhi..mujhe बुल्ला लिया और अब....

रूपल दीदी को विस्वास तो नहीं हो रहा था par...ye कुल्हाड़ी hi थी जिससे आवाज आ रही थी..

रूपल दीदी - तुम बोल सकती हो...

कुल्हाड़ी - तुम सुन सकती ho......tum सच में सुन सकती हो क्या मुझे....

रूपल दीदी - हां मुझे आवाज सुनाई दे रही है अपर tum..kaise..

कुल्हाड़ी - असली hakdaar....bas वही सुन सकता था mujhe...tum मुझे सुन सकती ho..matlab तुम मेरी असली हकदार हो...

रूपल दीदी - क्या...

कुल्हाड़ी में से अचानक से रौशनी आने lagi....aur अचानक से टेबल पे एक किताब भी आ gayi...ek पुराणी kitab...jo खुद से khuli...aur एक पैन पे जा रुक्की...

कुल्हाड़ी - मुझे बस मेरा असली हकदार hi सुन्न सकता hai...aur वही मुझे मेरी शक्तियों की सीमा तक pahuchayega..aur मैं उसको...

रूपल दीदी - ये सब है kya...aur ये किताब कहा से आयी.....

कुल्हाड़ी - ये kitab..arre ये तो बहुत पहले से है मेरे pass...wo chodo..iss किताब के हिसाब से तुम hi हो wo...meri असली maalik...ab तुम hi मुझे बनाओगी takatwaar...aur मैं tumhe..ab बताओ क्या करना है मुझे ताकतवर होने के लिए....

रूपल दीदी - एक minute...main नहीं जानती तुम क्या बो रही ho....aur तुम लड़की हो...

कुल्हाड़ी - नहीं जानती से क्या मतलब hai...tumne मुझे बुलाया क्यों फिर..

रूपल दीदी- मैंने वो मैं कुछ परेशां hu..to..

कुल्हाड़ी - मेरी असली हकदार परेशां hai...batao क्या बात है मैं सब सही कर dungi...tum जानती नहीं मेरे पावर ko.....arre खौफ था मेरा पहले यहाँ...

रूपल दीदी ने उसको सब बातें बताई...

कुल्हाड़ी - मतलब मारना नहीं hai...par काम रुक जाए कुछ ऐसा करना hai...yahi ना....

रूपल दीदी - हां यही....

कुल्हाड़ी - देखो मर्रे हुए को मारने से तो मन्ना नहीं किया है ना किसी ने....

रूपल - मतलब..

कुल्हाड़ी - Matlab...ab बस chalo...kabristaan....wahi पे सब पता चलेगा...

रूपल दीदी- kabristaan...par क्यों...

कुल्हाड़ी - अरे यार चलो तो...

रूपल दीदी ने कुछ देर सोचा और फिर निकल गयी चर्च की ओर...

जब वो वह पहुंची फिर कब्रिस्तान के साइड चली गयी....

कुल्हाड़ी - मुझे लगता है हम एअर्थ पे hi hai...hai naa....kitni अच्छी जगह थी ye....wo भी क्या दिन थे...

रूपल दीदी - हां एअर्थ पे hi है और अच्छी जगह तो है ये पर तुम्हे कैसे पता और किन्न दिंनो की बात कर रही हो तुम....

कुल्हाड़ी - देखो सब कुछ मैं नहीं बताने वाली samjhi...ab कुछ खुद भी पता karo..dhyaan लगाने आता है क्या तुम्हे...

रूपल दीदी - हां आता है...

कुल्हाड़ी - चलो ये सही hai....to कल से लगाओ ध्यान हमारी बॉन्डिंग बढ़ेगी तो तुम सब जान hi jaogi...ab देखने दो mujhe...yaha पे सबसे कामीणा कोण है...

रूपल दीदी - क्या मतलब सबसे कमीना कोण hai...tum करने क्या वाली हो..

कुल्हाड़ी - अरे मेरी जान बस देखती jao....ye सही लग रहा hai...par वो भी सही hai...dimmag तो इस वाले में tha...takat दूसरे वाले में hai....dono को hi लेके चलते है क्या बोलती हो...

रूपल दीदी - अरे पहले ये तो बताओ किनकी बात कर रही हो तुम और किनको कहा लेके जाना है.....

कुल्हाड़ी - पहली बार है ये आँखें बंद करो अपनी....

रूपल दीदी - आँखें बंद karu...par क्यों....

वो बोल hi रही थी की आसमान से बिजली girri...do कब्रों पे...

कुल्हाड़ी - इसी के रौशनी से बचने के liye....yaha वह सब दिख तो रहा है ना मैं नहीं चाहती असली हकदार पहले hi दिन आंधी हो जाए...

रूपल दीदी - क्या था ye....aur क्यों था ye...dekho तो क्या haaa.........kabron को तो कुछ हुआ hi nahi...par मैंने देखा बिजली गिर्री थी....

कुल्हाड़ी - हां तो गिर्री थी naa...chalo अब chalo....aur तुम dono....kaam पे millo...taiyaar होक आना वर्ण वापस से दाल दूंगी अंदर समझे...

रूपल दीदी - किस्से बातें कर रही हो कोई नहीं है यहाँ.....

कुल्हाड़ी - बाद में पता chalega...tum चलो..

रूपल दीदी वापस से आ गयी वह अपने होटल mein...aur जब वो वह आयी तो थोड़े देर बाद hi उनसे मिलने 2 अजीब से लोग आये जिन्होंने बसदे अज्जेब से कपडे पहन रखे the....dono अलग अलग वक़्त से लग रहे थे....

रूपल दीदी - कोण हो तुम दोनों...

"मैं हु मानुएल ब्लांको रोमसंता थे wolf...waahoooooooooooooooooooooooooooo"

"मैं हु हाहाहा Pirate...Augustin ब्लांको पायरेट हु मैं...."

कुल्हाड़ी - आ गए dono...aur ये कैसे कपडे पहने है कहा था ना वापस अंदर दाल दूंगी...

दोनों ने जैसे hi उसकी आवाज सुन्नी कांपने लगे...

"नहीं nahi....hum आप जो बोलोगे वो करेंगे..."

रूपल दीदी - कोण है ye....aur ये सब क्या है...

कुल्हाड़ी - अरे बताया तो नाम इन् दोनों ne...ye दोनों हेल्प के लिए आये hai/...wo जो वुल्फ बता रहा है कूद को वो सकनी पागल है 18तह केन्टुअरी में इसको एक कुत्ते ने कटा था जो वुल्फ जैसा दीखता tha...tab से साये खुद को वरवोल्फ समझने लगा और लोगो को मारने laga...issi वजह से फ़ासी दे दी isko...aur ये पायरेट ये होसियार hai...naa जाने कितनी बार जय से भगा है ye...dimmag बहुत है isme....ab ये दोनों hi तुम्हारी प्रॉब्लम सोल्वे करेंगे...

रूपल दीदी - पर कैसे...

कुल्हाड़ी - दर्रा के और kaise...(dono से) कपडे बदलो अपने और जो समझाया था वो याद rakhna...pirate लीड तुम karoge..wolf बस साथ dega....kaam जितनी जल्दी पूरा हो सके karo..samjhe...

पायरेट - Ji...jaisa आप कहे...

कुल्हाड़ी - पैसे देदो इसको kuch....baaki इन् दोनों को अभी के बारे में मैंने जितना था सब समझा दिया hai....aur हां कोई भी नहीं मरेगा...

रूपल दीदी - पर ये कर्नेगे क्या....

कुल्हाड़ी - यार सवाल नबहुत करती ho...paise दो इनको ये कपडे लेंगे अपने लिए और फिर काम करेंगे...

रूपल दीदी - हम्म ठीक है पर कोई गड़बड़ ना हो...

रूपल दीदी अभी आसानी से कुल्हाड़ी की साड़ी बातें मान जा रही thi..kyunki वो अभी खुद के कण्ट्रोल में नहीं thi...asar हो रहा था उनपे कुल्हाड़ी ka..par कुल्हाड़ी भी उनका फायदा नहीं उठाना चाहती थी तभी सब अच्छा हो रहा tha....Chalo यहाँ से वापस चलते है स्कूल में जहा पे क्लासेज ख़तम हो चुक्की thi....Nikita बैठी हुई थी एक बेंच pe...akele बिलकुल akele....Main बस वह से जा रहा था और वो अकेले थी तो मुझे लगा उससे मिलना चाहिए....

मैं उसके पास गया

मैं - क्या हुआ निकिता अकेले बैठी हुई हो...

निकिता - क्यों अब यहाँ भी ना baithu...yaha से भी भगा डोज....

मैं - अरे मैं थोड़ी ऐसा बो रहा hu...main तो बस....

निकिता - सब जानती हु सब के सब खुदगर्ज़ होते है...

मैं - अरे हुआ क्या ये तो बताओ....

निकिता - जाओ यहाँ से...

मैं - देखो अगर तुम कहो तो मैं अभी hi पावर्स वापस लेने की तैयारी करता hu...agar तुम उस वजह से परेशां हो तो...

निकिता - नहीं वो वजह नहीं hai....baitho...

मैं बैठ गया..

मैं - हां अब बताओ...

निकिता - मेरे साथ hi ऐसा क्यों होता है जिनकी मैं परवाह करती हु वो छोड़ के चले जाते है......

उसकी ये बात संके मुझे उसकी मेमोरी याद आने lagi...kaise एक बच्ची थी डार्क वर्ल्ड में जिसको वह से यहाँ भेजा गया उसके बाद जब वो यहाँ थी तो जिसके साथ रह रही थी उसको मार दिया गया और फिर वो कही और रहने लगी अपने जैसे लोगो के साथ...

मैं - अरे ऐसा कहा hai...tum कविता मैडम की परवाह करती ho...kya वो छोड़ के गयी tumhe....tum हम सब की परवाह भी करती ho...aur हम सब है ना यहाँ...

निकिता - मैंने कब कहा मैं तुम सब की परवाह करती hu....haa कविता मैडम की करती हु वो मुझे पद्धति है और अच्छी लगती है इस लिए रूपल दीदी भी अच्छी है पूनम मैडम भी अच्छी है पर तुम nahi....tumne मुझे बेकार में फसा दिया है...

मैं - हां हां बेकार में फसा दिया है मैं तो कह रहा हु की पावर्स वापस ले लेता hu...par तुम रेडी hi नहीं हो....

निकिता - मैं रेडी hu....par अभी nahi...tumhe पता है मैं अभी कहा गयी थी.......

मैं - मार्किट में गयी थी.....

निकिता - तुम्हे कैसे पता...

मैं - मेरी पावर्स se....arre मैं तो दिन रात तुमपे नज़र रखता hu...har वक़्त हर जगह.....

निकिता - क्या बकवास कर रहे ho...wapas लो ये पावर्स.....

मैं - मजाक कर रहा tha...aisa कुछ नहीं होता पावर्स se...wo तो मैंने मास्टर को तुमसे बात करते देखा था और उसके बाद तुम मार्किट में चली गयी....

निकिता - Haa...aur वह पे मैं अपने पुराने साथियों से मिली...

मैं - कोण साथी...

निकिता - वही जिन्होंने मुझे मारने की कोशिश की थी...

मैं - kya....aur तुम उनसे अकेले मिलने चली gayi...par क्यों....

निकिता - उनको बताना tha...sach दिखाना था उन्हें...

मैं - तो कर आयी अपना काम....

निकिता - हां बता दिया सब कुछ...

मैं - फिर उदास क्यों बैठी हो...

निकिता - मैंने बताया ना सब चले जाते है इस बार भी वही hua...wo सब चले गए मैं अकेले हो गयी वापस से.....

मैं - अरे मैंने भी बताया ना हम सब है तो तुम्हारे साथ...

निकिता - हां पर फिर भी...

मैं - हम्म कल कही घूमने चलते है ok...

निकिता - मतलब..

मैं - मतलब कल बता dunga..chalo मैं चलता हु मुझे काम है....

मैं वह से उठा और अपने रूम की ओर चला गया वो वही बैठी रही....

डार्क वर्ल्ड में जब कुल्हाड़ी ने उन् दोनों को वापस से जिन्दा किया था यहाँ पे तो वह पे कुछ अजीब घटना hui....Slayer अपने गुफा से पहली बार इतने सैलून में बहार nikla.....uski आँखों में एक अज्जेब सी चमक thi...aisa लग रहा था जिसकी तलाश में वो था वो उसको मिलने वाली ho....par बस एक hi भाव नहीं था उसके चेहरे पोर भी भाव थे जैसे सुरप्रीसेड hona....usko पता है की जिनको वो धुंध रहा है वो इस तरह तो मिलने से rahe...par ये जो भी tha....wo उसी के जैसा tha....yaa यूँ कहे की सायद वही tha...wo कन्फर्म तो नहीं था पर उसको लग रहा था की ये वही hai....aur वो इसको चेक करना चाहता tha....pani पावर्स से उसको ये तो पता चल hi गया था की वो चीज कहा पे hai....aur वो वह जाने के लिए निकलने वाला भी tha...lekin पहले तो अपनी भूख मिटानी थी उसको....

अपने गुफा से निकलते hi वो चल दिया एक कबीले की oor...jaha उसको अपना खाना मिलने वाला था आत्माएं...

वही स्कूल में दब वापस आ गया tha....raat के खाने से pahle...wo अकेला नहीं आया था साथ में अपने यहाँ से कुछ पकवान भी लेके आया tha...apne दोस्तों के लिए हमारे लिए...

मैं और निकिता बैठे थे एक टेबल पे जहा वो मुझसे पूछ रही थी की कल कहा चलने की बात की थी मैंने और मैं उसको बता नहीं रहा tha...itne में वह दब आया अपने हाथ में एक ढाबा leke...aur हमारे पास आ गया...

दब - कैसे हो doston...mujhe याद किया या नहीं.....

मैं कुछ बोलता उससे पहले निकिता ने बोलै...

निकिता - फालतू लोगो को कोण याद करता है...

दब - इससे पहले हममे बहेश हो मैं तुम दोनों के लिए कुछ लाया hu..maine बताया था न मेरे प्लेनेट पे पूजा होती है...

निकिता - हां जिसमे राज परिवार के सभी लोग सबसे कमजोर होते और पूजा होने के बाद उनकी पावर्स अगले दिन वापस आ जाती है...

दब - तुम्हे कैसे पता मैंने ये सब तो नहीं बताया था...

मैं - अरे kitabein...kitab पढ़ रही थी ना वही दिखा होगा isko....hai ना...

निकिता - हां वही ...किताबें...

दब - हां ऐसा hi होता है और इसी वजह से मैं नहीं आ पाया था यहाँ wapas...accha तो मैं अब तुम दोनों के लिए कुछ खाना लेके आया हु....

दब ने डब्बा खोला तो उसमे वही सब था जो हमने लीमो को यहाँ खाया था रात ko....Kya खाना था वो भी....

दब हममे डिश के बारे में बताने laga...par निकिता सब के बारे में पहले hi बता deti...pata नहीं ये ऐसा क्यों कर रही थी...

मैं उसको टोक रहा था पर वो कहा सुन रही थी मेरी बातों ko...wahi दब हैरान हुआ जा रहा था की आखिर इसको इतना सब कैसे पता है उसके कंट्री के बारे में....

खाना ख़तम हुआ और सब अपने अपने रूम में चले गए सोने के liye...par मैं बुआ के पास गया उनसे milne...unse कुछ बात करनी thi..kal के बारे mein...main उनसे बात करने के बाद रूम में आया और सो gaya...aur फिर पहुंच गया अपने दोस्तों के pass...Albus और कूपर के पास...

आज के लिए इतना hi आगे देखते है ये कुल्हाड़ी और क्या क्या करती hai....aur निकिता के बारे में देखेंगे थोड़ा bahut...saath में स्लेयर क्या करता है और ये लूसिफ़ेर क्यों लगा हुआ है बचने mein....Prof. सूरज को...

बनने रहिये...
 
अपडेट - 39

अब तक..

पोलर बेयर प्रिंस अभी वैद्यजी के साथ tha...jaha वो उसका ख्याल रख रहे थे wahi...Rupal दीदी को जो कुल्हाड़ी मिली थी वो उनको अपना असली हकदार बता रही thi...matlab बातें कर रही thi...jo की नार्मल तो नहीं tha...Kulhadi रूपल दीदी को अपने काम में मदद करने वाली thi...aur उसके लिए उसने पता नहीं कैसे पर 2 अलग अलग पीरियड के विल्लियंस को वापस बुल्ला लिया tha.....ek पायरेट था वही दूसरा एक सीरियल किलर जो की खुद को एक वरवोल्फ समझता tha...ajeeb होते है ये इंसान bhi...rahi निकिता की बात तो वो अब किसी ऐसे की तलाश में थी जो उसके साथ rahe...naa की दूसरों की तरह उसको छोड़ के चला jaaye....ek और भी बात हुई thi...Slayer जी डार्क वर्ल्ड में अपने गुफा से थोड़े कन्फ्यूज्ड होक्के बहार आ gaye...usko समझ में नहीं आ रहा था की जो उसको महसूस हुआ है वो असल है या कुछ aur...ye जो भी था वो था इम्पोर्टेन्ट तभी तो उसने चेक करना सही समझा वर्ण ना जाने कब से उसी गुफा में बैठा रहता है वो...

अब आगे....

वही सुबह से hi शुरू करते है आज भी मैं जल्दी उठा और तैयार होक चल दिया वह ध्यान लगाने ko...uss जगह पंहुचा तो आज बुआ नहीं थी waha...aur ये देख के मैं खुश hua...waha पे मैं कविता मैडम मास्टर निकिता hi थे abhi...main जब आया तब तक वो सब ध्यान लगाने बैठ चुक्के the...so मैं भी बैठ gaya....aaj जब ध्यान लगाने बैठा तो मेरी चन्दर एलिमेंट वाली पावर्स जिनको बढ़ने के लिए मुझे बॉल्स को एक साथ लाना होता था जो मुझे दिखाई ेते the...wo सब कुछ दिखाई hi नहीं diya....ye अज्जेब ta...aisa पहले नहीं हुआ था...

मैं - ध्रुव ये सब क्या है मैं ऐसे में कैसे अपने एलिमेंट पावर पे कंसन्ट्रेट करू...

ध्रुव - तुम batao...kaise करोगे...

मैं - क्या मतलब है कैसे karunga...wo तो दिख hi नहीं रहे मुझे....

ध्रुव- दिख इस लिए नहीं रहे है क्यूंकि तुमने अब और एलिमेंट्स पाने की कपाबिलिटी आ गयी है....

मैं - मतलब...

ध्रुव - मतलब ये की तुममे अब और भी एलिमेंट्स के पावर्स आ सकते है...

मैं - hmm....to फिर कैसे लाना है उनको...

ध्रुव - इसके बारे में मैं नहीं jaanta...koi नहीं जानता sayad...ye तो खुद होता hai....elements खुद आते है...

मैं - मतलब वो खुद hi आने वाले hai...aur मुझे इसमें कुछ नहीं करना है...

ध्रुव - हां वो खुद aayenge...tumko बस उनपे कंसन्ट्रेट करना है और उनपे पुररी तरह से कण्ट्रोल करना hai....ab थंडर एलिमेंट के बारे में सोचो वो सामने honge...fir उनपे अपना काम karo...matlab कंसन्ट्रेट करो...

मैंने ठीक वैसा hi किया और जैसा पहले दीखता था वैसे hi इस बार भी सब दिखने laga...wo छोटे छोटे balls...aur एक बड़ा बॉल जिसमे उन् छोटे बॉल्स को मिलाना होता hai...Main फिर अच्छे से कंसन्ट्रेट करने laga...aur जब उठा तो सामने कोई नहीं tha...sabhi जा चुक्के the...Main भी जल्दी से क्लास के लिए निकल gaya...1st क्लास वही वेपन्स वाली thi...jo आज एक अस्सिस्टेंट प्रोफ. ने ली thi...aur प्रक्टिकल्स के लिए भी वही the...inki क्लास ख़तम हुई फिर बारी आयी काढ़े वाली क्लास ki...yaha पे आज खुद होड़ साहब आये the...unhone खुद क्लास li...lagta है मास्टर के यहाँ होने से उनको आना pada....warna कहा खुद आते थे ye...hamesha कोई अस्सिस्टेंट प्रोफ. hi क्लास लेता tha...ye भी ख़तम हो gayi...aur इसके बाद मैं निकलने वाला था स्कूल से निकिता के saath...pahle तो मैंने कन्फर्म किया की सब सही है या nah...aur जब वह से ग्रीन सिग्नल मिला तो मैं निकिता को केके पहुंच गया वह उस सफ़ेद पत्ते वाले पेड़ के nicche...wo पहले मन्ना कर रही thi...bol रही थी बुआ का क्लास है मिस नहीं करना chahti...aur ना जाने क्या kya....ab उसको कहा पता था की बुआ खुद नहीं होगी क्लास mein...hum दोनों वह आ गए और मैंने पहले तो आस पास dekha...mujhe कोई नहीं dikha...sayad ज्यादा एक्सीटेंड होने की वजह से देख ना saka...aur उसको वह से बहार आने का तरीका समझाया और उसको पहले बहार भेजा और फिर खुद बहार आ gaya...aur हम वेट करने lage...bus ka...par...

बस के आने से पहले एक आवाज aayi...jaani पहचानी aawaj...jo की दब की थी....

दब - तुम दोनों स्कूल से भाग के कहा जा रहे ho...aur ये रास्ता मुझे क्यों नहीं बताया...

पहले तो हम दोनों hi चौक gaye...fir जब देखा की दब है तो थोड़ा सांत हुए...

मैं - दब तुम यहाँ क्या कर रहे ho...tum तो क्लास में गए थे ना...

दब - जा hi रहा था की अपने दोस्त को एक सनकी वैम्पायर के साथ देख liya...to लगा देखना chahiye...ek मिनट कही तुम दोनों में kuch....matlab यहाँ तो नार्मल है ना warewolf...fairy के saath...vampire...insan के saath...to..

निकिता - नहीं ऐसा कुछ नहीं hai,..aur तुम यहाँ क्या कर रहे तो जाओ यहाँ से...

दब - अरे अगर है भी तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है मैं ब्रॉड- माइंडेड हु...

मैं - चुप raho...kuch भी...

मैं बात पूरी करता उससे पहले बस आ gayi...aur मेरी बात पूरी होने से पहले निकिता ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खींच लिया बस में....

मैं - अरे दब वही पे है वो अंदर कैसे जाएगा..

निकिता - रहने दो usko...mujhe kya...humne उसकी पुररे देश को बचाया और उसको dekho...kuch पता hi nahi...ye..aise होते है क्या राज कुमार..

मैं - अरे वो सब हम बाद में बात karenge...(DB से...) ऊपर aao...jaldi वर्ण बस निकल जायेगी...

वो जल्दी से बस में आ gaya...thodi देर में hi कंडक्टर आया और हमसे कहा जाना है ये puccha....Maine उसको टिकट dikhayi...par टिकट तो दो hi thi...DB तो अच्चानक आया tha...aur मैं अभी से नहीं बताना चाहता था निकिता को की हम कहा जा रहे hai...to मैंने कंडक्टर को साइड में ले जाके उसके लिए टिकट liya..aur फिर थोड़ी hi देर में हम वह the...mere घर के पास...

हम तिण्णो निच्चे उतरे....

दब - ये कोण सी जगह hai...kon रहता है यहाँ...

निकिता - ये प्रतीक का गर hai..yaha पे उसकी फॅमिली राहत है...

दब - अरे waah...par तुमने बताया नहीं कभी कुछ अपने फॅमिली के बारे में..

मैं- हां वो कभी मौका hi नहीं milla...tum दोनों इधर hi रुको मैं अभी आया...

मैं उन् दोनों को वह छोड़ के जल्दी से घर के अंदर gaya...waha गया तो सभी थे वह pe..aur सभी तैयारी कर रहे the...Rupal दीदी कुछ खोयी खोयी सी लग रही thi..par जब मैं आया तो मुझे देख के वो भी खुश हो गयी...

मैं - सुनने एक प्रॉब्लम है...

चची - क्या बात है वो नहीं आयी kya....humne तो सब इंतज़ाम कर लिया है...

मैं - नहीं चची वो तो आयी है पर साथ में दब भी आ गया है...

बुआ - वो यहाँ कैसे आ गया...

मैंने उनको बताया की वो हमारे पीछे से उसी पेड़ के सहारे यहाँ आ गया...

चाचा - कोई बात nahi...dost hi तो है वो भी...

बुआ - हां इसको भी तो मिला दो अपनी फॅमिली se...Bhabhi वह पे सब रेडी है ना....

चची - मैंने पापा और माँ से बात कर ली thi...jab उसनहोने मेरी बात सुन्नी तो बहुत खुश hue...ab बस निकिता भी मान जाए...

मैं - हां देखते hai..kaisa लगता है उसको हमारा सरप्राइज...

चची - अब लेके भी आओ usko....waha पे सब वेट कर रहे honge....pahle यहाँ का काम कर लेते है फिर वह का भी करना hai....Pooonam टुन्ने कविता को नहीं बुलाया क्या...

बुआ - बुलाया ना Bhabhi...par वो उसको ना कुछ काम tha..to वो खाने के वक़्त hi आएगी...

चची - चलो ये भी ठीक hai...tu खड़ा क्या है लेके आ उन् दोनों को...

मैं - हां...

मैं अंदर से वापस बहार गया और वह पंहुचा तो दोनों कुत्ते बिल्ली की तरह लड़ रहे the...maine दोनों को शांत कराया और फिर दोनों को घर चलने को कहा...

अब निकिता को तो पता था बुआ और मेरे बारे में पर दब इसको कुछ पता नहीं tha....hum तिण्णो घर में aaye..sab लोग हॉल मेंबैठे हुए the...Bua उस वक़्त सायद ऊपर गयी थी अपने रूम में कुछ काम के liye...aur दादा दादी जो थे वो तो रूपल दीदी के नाना नानी के साथ उनके घर में थे वह पे तैयारी देख रहे the....to हम तिण्णो अंदर aaye...Nikita मुझसे पूछ रही थी की यहाँ पे क्या hai...humare अंदर आते hi सबने उन् दोना का स्वागत किया...

निकिता को तो सब जानते थे दब से सबकी पहचान मैंने karayi...sala राज परिवार से था ना तो इसका तरीका अलग था वो क्या कहते है तहज़ीब के साथ मिला वो सभी se...par ये ज्यादा देर नहीं chal...hua कुछ ऐसा की जब मैंने उसको सबसे मिलवा diya...aur उसको चची ने सोफे पे बैठने को kaha...aur खुद पानी लेने चली गयी tab...unki जगह पानी लेके बुआ aayi...sayad उतने वक़्त में वो ऊपर से किचन में चली गयी thi....DB बैठा था आराम se...Bua आयी पीछे से पानी का गिलास लेके..

बुआ - एल्फ प्रिंस पानी लेंगे...

बुआ की आवाज सुनते hi उसके तो तोते उड़द gaye..wo समझ hi नहीं पाया की ये यहाँ पे कैसे आ gayi..ek बार को तो वो ये तक सोच बैठा की स्कूल वालो ने पकड़ लिया है humko...aur अब हमारा पैकउप होने वाला है वह से....

दब - aa...aaap yaha....sorry मैं wo...hum वो बस...

बुआ ने जब देखा की वो दर्रा हुआ है तो मज़्ज़े लेने के लिए उन्होंने भी कड़क आवाज में कहा...

बुआ - क्या मैं हम कर रहे ho...ek तो इतने दिन से क्लास नहीं की और फिर आज भी bunk...aaj तो गए तुम..

दब - Nahi...aisa मत kariyue...Main रोज आऊंगा क्लास में ....एक्स्ट्रा क्लास भी ले lunga...par ऐसा मत kariye...mere पिता जी मुझे छोड़ेंगे नहीं अगर उन्हें ये पता चला तो..

चची - पूनम क्यों डरा रही हो isko...dost है ना वो प्रतीक का..

बुआ - मैं कहा bhabhi...ye तो खुद डर रहा है...

निकिता - हम्म देखो तो सही राज कुरम जी डरते हुए कैसे लगते है...

दब - क्या matlab...kya हो रहा है yaha..aur मैडम आप यहाँ पे कैसे...

बुआ - मेरा घर है ye...main नहीं रहूंगी तो क्या भूत रहेगा yaha...Prateek मवेरे भतीजा है...

दब - kya....bhatija है...

निकिता - क्यों तुम्हे नहीं पता भतीजा क्या होता है...

दब - नहीं matlab...par उसने कभी बताया नहीं....

बुआ - मैंने hi मन्ना किया tha...ab वो chodo...Bacchu शुरू karo..Rupal...Rupal..kya सोच रही है लेके आओ...

रूपल दीदी- हां अभी laayi...wo अब किचन में गयी और वह से पहले तो एक केक लेके आयी और साथ में कुछ बैग्स...

दब - ये सब क्या हमारे लिए hai..iski कोई जरुरत नहीं है...

रूपल दीदी - नहीं तुम्हारे लिए नहीं है तुम तो बिन बुलाये आये हो ना...

चची - रूपल...

रूपल दीदी - मज़ाक tha...aap भी naa...Nikita ये lo..ye सब तुम्हारा है...

निकिता - mera...par क्यों...

रूपल दीदी - अभी बताती हु...

हाथ में जो केक था उसको सीधा उन्होंने निकिता के चारे पे दाल दिया...

चची - रूपल क्या है ये सब...

दीदी - मम्मी अब कपडे ख़राब नहीं करती तो क्या ये चेंज करती abhi..ab देखो कैसे जल्दी से कपडे चेंज karegi...Hai ना निकिता...

निकिता - ये क्या किया aapne...aur ऐसा क्यों किया...

बुआ - ड्रेस चेंज करने के liye...aur ज्यादा सवाल नहीं पूछने का abhi..jab पूछने को कहा जाएगा तब पूछ लेना samjhi...Rupal रूम में लेके जाओ इसको...

निकिता को रूम में ले जाय गया वह पे एक ड्रेस थी उसको वो दिया gaya,,aur रेडी किया gaya....wahi बहार दब सबसे बातें कर रहा था..

थोड़ी देर में निकिता बहार aayi..Kya लग रही थी wo...ek तो उसकी स्किन पूरी वाइट thi....aur उसके hont...wo तो जैसे लाल गुलाब की पंखुड़ी ho..aur ड्रेस में उसको एक पूरी ब्लैक कलर का गाउन पहनाया गया tha...jo उसके वाइट स्किन को और भी वाइट बना रही thi...Main तो उसको देखता hi रह gaya...sirf मैं hi नहीं सभी के सभी...

चाचू - ये तो कम्मल की लग रही है...

चची - हां देखो तो कितनी अच्छी लग रही hai....Nikita चलो अब अपने दांत भी बहार निकालो...

निकिता ने बस अपने दोनों दांत बहार निकल liye..aur अब वो डरावनी लग रही थी...

दब - अंदर hi रखो वैसे hi सही दिख रही थी...

निकिता - तुमसे पूछा किसी ne...chup रहो...

बुआ - हां अब चुप चाप सभी बहार लगी हुई कार्स में baitho....Rupal...iske बाकी के सामान वही लेके चलते है...

रूपल - हां बुआ ये सही hai...wahi उनपैकिंग कर लेंगे एक बार में hi..

निकिता - कहा जाना है मैं ऐसे चलूंगी क्या..

चची - हां ऐसे hi बिलकुल ऐसे hi...bahut प्यारी लग रही हो तुम...

हम सब बहार गए और बहार लगी हुई कार में बैठ गए....3 कार्स थी एक में बुआ रूपल दीदी और निकिता थी दूसरे में मैं और दब और चची the...aur तीसरे में सामान और चाचू..

कार आगे badhi...wais तो ज्यादा दूर नहीं जानना था पर सायद कोई मान्यता थी ऐसी या पता नहीं kya....thodi देर चलने के बाद कार रुक्की रूपल दीदी के नाना नानी के yaha...aur हम सब कार्स से निच्चे utre..bas निकिता को नहीं उतरने दिया गया...

दब - ये किसका घर है...

मैं - ये नाना नानी का घर है...

दब - वो कौन है...

मैं - क्या मतलब कोण है...

वो कुछ तो bola...par मुझे सुनाई नहीं diya....thoda उखड़ा उखड़ा सा लगने लगा था जब उसको बुआ और मेरे बारे में पा चला..

हम सब वही the..ki नाना और नानै दोनों hi ब्लैक ड्रेसेस में अपने घर से बहार nikle...aur दोनों खुद जाके निकिता को उसकी कार में से बहार nikala...aur..aur फिर अपने साथ अंदर चलने को कहा...

निकिता ने एक बार सबकी ओर dekha..aur वो समझ गयी की यहाँ ोे क्या चल रहा है क्यों उसको ये ब्लैक ड्रेस पहनने को दिया गया और फिर क्यों उसको अपने दांत बहार रखने के लिए बोलै gaya....usko याक्किन नहीं हो रहा था की य सब भी हो सकता है....

वो कार से निकली और बस वही पे कड़ी rahi...aage जाने की जैसे शक्ति hi ना बची ho....fir नानी ने उसका हाथ पकड़ा और अपने साथ अंदर ले जाने lagi..aur वो भी किसी अच्छे बच्चे की तरह बिन्ना किसी तरह का विरोध kiye....ander जाने लगी...

ये एडॉप्शन tha....Nana Nani...Nikita को अडॉप्ट कर रहे the...wo भी पुरे रीती riwaj..yaa जो भी था उसके saath....Nikita और वो दोनों अंदर गए घर ke...aur उनके पीछे हम सब भी....

दब - ये जो हुआ अभी वो क्या था....

मैं - अब निकिता यहाँ rahegi...ye उसका घर है अब से...

मैं दब को बता hi रहा था की तभी निकिता आयी और मुझसे गल्ले लग गयी....

मैं - अरे आराम से...

उसकी आँखों से आशु बाह रहे the...Maine उसको सीधा किया...

मैं - अब कभी अकेली नहीं होगी tum...ab ठीक है ना..

निकिता - पर तुम सब ने ये sab....inn सब की कोई जरुरत नहीं थी...

नानी - नहीं कैसे thi...ab से तुम हमारे साथ रहोगी samjhi...aur हां कोई कन्फूसिओं ना हो इसके लिए अभी से बता देती hu...humme दादा दादी hi kahna...ab आखें साफ़ करो और रूम देखो अपना...

निकिता - मेरा रूम...

नानी - नहीं चाहिए क्या....

रूपल दीदी - नानी रहने देते है इसके रूम को ना मेरे लिए खली रहने do...main रह लुंगी वह...

नानी - तुम्हारा भी रूम hai....tum दोनों के लिए तैयारी हुई है yaha..ab चलो dono...Nani दोनों को ऊपर लेकर गयी....

यहाँ ये सब चल रहा है वही दूसरी oor....Dark वर्ल्ड में कुछ परिवार टूट गए hai..wajah सिर्फ स्लेयर tha..aur उसकी आत्माएं खाने की bhookh...par ये तो बस शुरुवात thi.....agar यहाँ पे इन् लोगो ने जल्द कुछ नहीं किया तो बहुत बड़ी प्रॉब्लम आने वाली है इन् लोगो के लिए....

कुछ कबीले वाले एक साथ आये हुए है इन् सब के baad..wo अब परेशां हो गए थे इन् सब se.....hjar रोज किसी को khona..aam बात नहीं hoti...ye वही वक़्त था जब स्लेयर यहाँ पे कहउँ ख़राब करने के baad...Earth पे जाने के लिए निकल गया tha...ab इसकी पावर्स इतनी बढ़ चुक्की थी की ये सपास में ट्रेवल कर सकता था कुछ वक़्त के लिए hi sahi...aur ये वही कर रहा tha...Earth की ओर बढ़ रहा था ye..par...par इसको ये पता नहीं था की एअर्थ के ऊपर एक कवच लगा हुआ है जो जङ्गर शुभम ने लगाया tha...jab ये स्लेयर एअर्थ को छोड़ के गया था tabhi....aur वो अभी तक काम कर रही thi....uss कवच का मकसद hi था स्लेयर को rokna...ye बात बड़ी अजीब थी की कुछ लोग आ जा सकते थे और कुछ नहीं और ना आ जा सकने वालो में स्लेयर का नाम सबसे पहले tha..to वो एअर्थ के पास तो आ गया par....par आगे जा hi नहीं sakka...uss कवच ने उसको रोक liya...Salyer पुररे गुस्से में अपनी पावर्स उसे करने लगा कवच pe...par ये कवच उसकी पावर को सोख के खुद मजबूत होता जा रहा था...

बहुत देर तक वो वैसे hi करता raha....wahi...Dark वर्ल्ड में उन् लोगो ने कुछ वैसा hi शील्ड बनाने का रास्ता धुंध लिया tha...par इसके लिए कुर्बानी चाहिए thi...wo भी सच्चे दिल se....to उन् कबीले वालो में से कुछ लोग सामने आये और खुद को कुर्बान कर diya...jiske baad..Dark वर्ल्ड पे भी एक कवच आ गया और सभी वह पे भी सेफ हो gaye...wahi स्लेयर गुस्से में था क्यों की वो ांडीर जा नहीं पा रहा था एअर्थ pe....Wo लगा रहा वही पे इस बात से अनजान की जहा से वो आया था उस जगह पे भी अब नहीं जा पायेगा....

आज के लिए इतना hi रखते है कुल्हाड़ी का किस्सा अगले अपडेट mein...aur लूसिफ़ेर और प्रोफ. सूरज का chapter bhi....saath hi देखते है स्लेयर क्या करता है आगे....

बनने रहिये..

और हां

हैप्पी नई ईयर....
 
अपडेट - 40

अब तक

निकिता को गॉड लेने का सोचा था नाना नानी ne....aur उन्होंने किया भी waisa...wahi दब को मेरे और मेरी family....jisme बुआ hai..wo सब पता चल गया जिससे वो सायद कुछ नाराज़ hai...wahi दूसरी oor...Slayer के साथ सही नहीं hua...naa घर के रहे ना घाट के वाली बात हो gayi....jiss चीज़ज़ के पीछे निकला था wo..waha पे जाने का रास्ता hi बंद tha...aur जहा से निकला था वह पे लोगो ने बंद कर दिया उसके वापस आने का रास्ता....

अब आगे...

चलिए हीरो के पास चलते hai,....shaam हो गयी thi...Nikita को नानी ने सब कुछ दिखा दिया था और अब पार्टी की तयारी चल रही thi...Main दब के साथ था पर वो बात नहीं कर रहा tha....bas ताअने मार रहा tha...mujhe लगा मुझे इसको थोड़ा टाइम देना चाहिए अकेले mein....to मैं बस वह से निकल गया दीदी के pass...jo पहले से hi कुछ उखड़ी उखड़ी नज़र आ रही thi...Main गया उनके pass...aur उनसे पूछा..

मैं - क्या बात है दीदी आप कुछ...

रूपल दीदी - Kya...kya बात है..

मैं - अरे आप बताओ मैंने पूछा आप ऐसे क्यों लग रही हो....

रूपल दीदी - कैसी लग रही hu...thik तो hu...hmmm...accha तू ना मेरे साथ चल मुझे कुछ पूछना था तुझसे...

मैं - पूछना hai....yahi पूछ लो naa..bahar कहा जाना

रूपल दीदी - ज्यादा बातें nahi...kaha ना chal...matlab चल...

और मेरा हाथ pakda..aur घर से बहार ले जाने लग...

चची - kaha...oo...kaha चली तुम इसको लेके....

रूपल दीदी - Wo..wo मम्मी इसको naa....haa इसका कुछ सामान है जो घर पे रह गया hai..hum अभी आते है लेके...

चची - इसको घर पता hai...Prateek कहा लेके जा रही है ये tumhe....batao..

मैं - वो चची सच में कुछ सामान है घर में बस वही लाने जा रहा hu...hum तुरंत आएंगे...

रूपल दीदी - dekha....kaha था ना...

चची - हम्म ठीक hai..par याद rahe...meri नज़र है tumpe....aur अब से तुमपे भी prateek...jao..aur जल्दी आना

चची ने ऐसा कहा और उनकी बात ख़तम होते hi मुझे खींचते हुए वो बहार लेके चली गयी...

मैं - हां अब बताओ...

दीदी - chup...abhi nahi...humme घर hi जानना होगा...

अब ये मानने वाली तो थी nahi...aur इनसे लड़ने का दिल नहीं करता तो मैं भी चल दिया उनके saath....waha पहुंचे तो वो घर के अंदर जाने के जगह पीछे के गार्डन में लेके चली गयी mujhe....aur मुझे एक जगह खड़ा कर के मेरे सामने कड़ी हो gayi...pata नहीं क्या करने वाली thi....Maine वेट किया पर वो कुछ बोल hi नहीं रही थी या उनको समझ नहीं आ रहा था की क्या बोले...

मैं - क्या बात है didi...aap..

मैं बात पूरी करता उससे पहले hi उन्होंने हाथ से रुकने का इशारा किया aur...ek लम्बी सांस ली उसके बाद जल्दी जल्दी में बहुत कुछ बोल gayi....jinme से मुझे बस कुछ सब्द hi समझ में आये क्यूंकि सायद वो एक दो बार रिपीट हुए the....baat बोलके वो शांत हो गयी और मुझे देखने लगी....

मैं - दीदी मुझे कुछ समझ नहीं आया आप थोड़ा धीरे बोलने की कोशिश kar....maine बस कुल्हाड़ी और दो लोगो के बारे में sunnaa...aur कुछ भी समझ नहीं paya...ek बाफर अच्छे से बताओ..

दीदी - तुझे याद है एल्फ कंट्री के पास मुझे कुल्हाड़ी मिली थी...

मैं - हां आपने बताया था वो प्रोफ. सूरज की कुल्हाड़ी...

दीदी - वो बात करती है...

मैं - कोण बात करती है...

दीदी - वो कुल्हाड़ी बात करती है और उसने 2 मर्रे हुए इंसानो को जिन्दा कर दिया है...

मैं - Kya...kulhadi कैसे बात karegi....aur जिन्दा करना वो भी इंसानो ko....aap ठीक हो ना...

ध्रुव - वो सच बोल रही hai...matlab...matlab वक़्त काम है वो सब जल्दी शुरू हो गया है...

मैं - क्या sab...ab तुम क्या बोल रहे हो....

दीदी - तुझे याक्किन नहीं हो रहा naa....ruk....

उन्होंने अपना हाथ पीछे किया और उनकी कुल्हाड़ी उनके हाथ में आ गयी...

दीदी - उन् दोनों को यहाँ लेके आओ....

मैं - आप सच में....

ध्रुव / दीदी - चुप रहो...

मैं कुछ बोलता उससे पहले वह पे एक पोर्टल जैसा hi कुछ खुल gaya...par ये अलग tha....jwala या उसके लोगो द्वारा खोले जाने वाले पोर्टल से तो अलग hi tha...Main तो उसको बस देखता रह gaya...aur fir...ussi में से 2 लोग nikle...dekhne में अजीब....

दीदी - यही है वो दोनों....

मैं - आप सच बोल रही thi...par ये सब कैसे...

दीदी - ये कुल्हाड़ी मुझसे बात करती है और मुझे खुद की असली हकदार बताती है...

मैं - असली हकदार....

ध्रुव - ये नहीं हो sakta...itna तो मैंने भी नहीं सोचा था...

मैं - क्या नहीं हो सकता और तुमने क्या नहीं सोचा था.....

ध्रुव - kya...kya बोल रहा था मैं...

मैं - तुमने कहा तुमने ये नहीं सोचा tha..to तुमने क्या नहीं सोचा था....

ध्रुव - wo...wo मैंने ये नहीं सोचा था की ऐसा भी कोई हतियार हो सकता hai....Rupal का स्पिरिट एनिमल कोण सा है....

मैं - मुझे क्या पता...

दीदी - मैं परेशां thi...mujhe समझ नहीं आ रहा था उन् इंसानो को कैसे सबक sikhau...aur फिर ये बोलने lagi....aur fir...isne मुझे ऐसा करने को kaha...aur कल रात...

मैं - कल रात क्या दीदी....

दीदी - कल रात इन् दोनों ne...unn लोगो में से कुछ को मार दिया hai....main अब पापा से क्या kahungi...jab उनको पता चलेगा की मैं...

ध्रुव - kya......sach mein....ye सब भी सुन सकता था main...mujhe तो यकीं hi नहीं हो रहा है.....

मैं - तुमको हुआ क्या hai...pagal हो गए हो kya....badbad करते जा रहे ho...chup रहो..

मैं (दीदी से) - दीदी पर उन् लोगो को इन् दोनों ने मारा hai...aapne कुछ नहीं किया....

दीदी - ये मेरी वजह से यहाँ आये है और इन् दोनों की जिम्मेदारी मेरी होनी चाहिए....

मैं - haa..par ये इन् दोनों ने खुद किया hai..aur आप इन् दोनों को सज़्ज़ा देदो...

दीदी - और उससे क्या होगा वो जिन्दा हो जाएंगे....

ध्रुव - खुनी घुड़सवारों की raani...aur ऐसी baatein...mujhe कुछ समझ नहीं आ रहा hai...kahi मैं किसी जाल में तो नहीं फस्स गया हु...

मैं - क्या तुम चुप नहीं रह sakte....aur ये सब क्या बोले जा रहे हो.....

ध्रुव - मैं कहा कुछ बोल रहा hu...par एक बात समझ नहीं आ rahi...ye कुल्हाड़ी असली तो नहीं हो sakti....fir इसमें इतनी पावर्स....

मैं - दीदी आपने hi तो कहा था वो इंसान बुर्रे the...sayad यही उनके कर्मो का फल ho....sayad इन् दोनों के हाथो मरना hi लिखा हो उनके नसीब में...

दीदी - Par....main मारना नहीं चाहती थी unko...aur अब मैं क्या karungi...jab वह पे उन् प्रीस्ट्स को पता चलेगा की मेरी वजह से वो लोग....

मैं - नहीं पता chalega...aap चिंता मत करो....

दीदी - उन्हें पता चल भी गया hoga...aur अब वो पापा से बोल देंगे और फिर...

चाचू - और फिर तुम्हारे पापा तुमको साबासि देंगे....

मैं - चाचू आप...

चाचू - हां main...Rupal यहाँ aao....aur तुम भी प्रतीक...

हम दोनों उनके पास गए...

चाचू - Rupal...pata है अभी कुछ देर पहले एक कॉल आया मुझे...

दीदी - पापा मुझसे गलती हो gayo...wo कुछ लोग...

चाचू - वो गलती नहीं thi....wo बिलकुल सही tha....jinn लोगो को मारा है तुमने वो सब बम बना रहे the....Spain में हमले होने वाले the....aur उन् सब के मरने की वजह se...wo सब रुक gaya....jinka ये प्लान था वो तो भाग गए किसी तरह par...musibat ताल गयी..

दीदी - Kya...bomb बना रहे थे...

मैं - वो दीदी बम ना वो फट जाता है और उससे लोग मर....

दीदी - पता hai...tujhse ज्यादा पता है इंसानो के खिलौनों के बारे mein...par पापा क्या सच में....

चाचू - हां सच में ऐसा hi होने वाला tha...aur क्यूंकि तुमने उन् सब को maara...aur वह के लोगो को बचाया hai...to चर्च की तरफ से तुम्हे इनाम मिलने वाला hai...saath hi में कुछ तौफे bhi....wo तो आज hi बुल्ला रहे थे पर मैंने कल आने के लिए कहा है...

मैं - वाह ये तो अच्छी बात है..

चाचू - हां ये अच्छा hai...aur अब तुम्हारी baari....tumne आज जो किया वो बहुत अच्छा tha....Nikita को यहाँ lanna....aur फिर रूपल के नाना नानी के साथ रहने को kahna...ye सब अच्छा hai...tum बिलकुल मेरे भाई की तरह हो....

मैं - या पापा भी ऐसा करते...

चाचू - नहीं तुम्हारे पापा इतना सब तो कभी नहीं कर paate...par तुमने kiya....tumne नाना नानी को जैसे इसके लिए राज़ी kiya...aur फिर सब taiyari..ye सब बाहत hi अच्छा था...

मैं - अरे चाचू राज़ी क्या karna...wo दोनों तो पहले दिन से उसको अपने साथ रखना छह रहे the...aur अभी निकिता के साथ कुछ ऐसी घटनाये हुई है की उसको जरुरत थी इन् सब ki....to मैंने बस...

चाचू - दोस्तों की मदद करना ये अच्छी बात होती hai...par ध्यान rahe...dost ध्यान से बनाने chahiye...chalo अब bahutbhua...tum दोनों के चाकर में कही मुझे ना दांत पद jaaye....waise रूपल किन्न दोनों की बातें कर रही थी tum....main जब आ रहा था तो सुन्ना था की उन् दोनों ने मारा hai...kon दोनों..

रूपल दीदी - नहीं वो मैं अपने hi बारे में कर रही thi,...mere गुस्से ने मारा था उन् दोनों को...

हम तिण्णो बातें करते हुए वापस से पहुंच गए पार्टी वाली जगह pe.....par दीदी ने चाचू को नहीं बताया kuch...uss कुल्हाड़ी के बारे mein...yaa वो दो insan....aur जैसे hi चाचू आये वो दोनों भी गायब से हो गए the...pata नहीं kaise...Chachu के जाने के बाद मैंने दीदी से इस बारे में पूछा...

मैं - दीदी आपने चाचू को क्यों नहीं बताया...

रूपल दीदी - क्या batati..ki मैं स्ट्रेंज वर्ल्ड गयी थी वह पे कुल्हाड़ी milli....wo बहुत गुस्सा karte....aur मैं ये नहीं देख पाती......

मैं - और वो दोनों गायब कैसे हो गए थे...

रूपल दीदी - कुल्हाड़ी से और kaise...maine उसको पहले hi बोल दिया tha...jab तक मैं ना चहु उसके शक्ति को कोई देख ना paaye.....to जैसे hi वो आये होंगे उसने उन दोनों को वापस भेज दिया hoga...yaa फिर और कुछ कर दिया होगा...

मैं - अब आप ठीक ho....matlab अब कोई गिल्ट तो नहीं है...

रूपल दीदी - हां बुर्रा तो लग रहा है मेरी वजह से मर्रे wo...par ये जान के अच्छा लग रहा है की मेरे वजह से hi बहुत से लोग बच भी gaye....bas ये बात मेरी गिल्ट को ख़तम कर रही hai....aur अब मुझे भूख लग रही hai..tu जा जाके तैयारी kar...main चली कुछ खाने को...

यहाँ का छोड़ के अब हम एक नज़र पोलर बेयर प्रिंस की ओर भी डालते है जो अभी बर्फ में hi दक्का हुआ tha...aur उसके आस पास ज्वाला के कबीले वाले the...Vaidyaji भी वही पे बैठे the....bahut वक़्त हो गया था उसको बर्फ में धक्के hue...par हलचल नहीं हो रही थी koi...jis वजह से वैद्यजी को थोड़ी थोड़ी घबराहट हो रही thi....unko समझ नहीं आ रहा तह ा की करे तो करे kya....wo यही सब सोच रहे थे की ाकहाँक से उनको बर्फ में कुछ हल्चा होते हुए दिखाई diya....unhone पहले तो बर्फ हटाने का सोचा फिर ओल्ड आउल का चेहरा उनकी आँखों के सामने आ गया और उन्होंने बर्फ को नहीं हटाया बस देखते रहे usko...aur थोड़ी hi देर में उस बर्फ से एक पंजा बहार aaya...panja था पोलर बेयर प्रिंस ka...pahle एक पंजा फिर pair...aur ऐसे करते करते पूरी बॉडी उसकी बहार आ gayi....par वो बच्चा tha...aur दर्रा हुआ भी tha....usko समझ नहीं आ रहा था की वो वह ऐसे आ gaya...wo तो रात को अपनी माँ के पास सोया tha...aur अभी वो वह पे tha....usko जब कुछ समझ नहीं आया तो वो थोड़ा पीछे हुआ और हमला करने की पोस्टिव में आ gaya...aaye भी क्यों ना क्यूंकि सामने uske....wo the...jinko उसका और उसके कबीले का दूसम्मान बताया जा रहा है उससे जब से वो पैदा हुआ hai...aas पास देखा तो वह पे सिर्फ ज्वाला के कबीले वाले hi the...ab उसको डर भी लग रहा tha....tabhi वह पे ज्वाला आ जाता hai...usko खबर पहुंच गयी थी की पोलर बेयर प्रिंस को होश आ gayahai...aur प्रतीक की बात को मानते हुए उसने hi अब उसको उसके घर तक पहुंचना tha....par वो ये भी जानता था की ऐसा करना मलतब अपने पेअर पे कुल्हाड़ी माँरा hoga..jo वो नहीं चाहता tha.....usne यहाँ आने से pahle...Bijli को अच्छे से समझाया की बिन्ना कोई पन्गा kiye...usko पोलर बेयर कबीले में जानना है और वह पे ये खबर पहुचानी hai....jisse वह से कोई आ जाए उनके pass...aur वो अपने राज कुमार को लेके चला jaaye...Bijli भी ये सब समझ के चल देती है खबर देने ko....wahi Jwala...wo अभी पोलर बेयर प्रिंस के पास खड़ा था....

ज्वाला - दर्रो नहीं हम कोई नुकसान नहीं pahuchayenge....hum तुम्हे तुम्हारे घर भेज देंगे...

ज्वाला की बात सुन के और उसको देख के वो बच्चा और दार गया और इस बार खुद के दार को चुप्पा नहीं sakka...aur रोने लग गया...

ज्वाला - अरे मैं कुछ नहीं करूँगा कोई कुछ नहीं karega....thodi hi देर में तुम्हारे कबीले से लोग आएंगे और तुम्हे ले जाएंगे....

पर वो सुनने को तैयार hi नहीं tha...wo बस रूट जा रहा tha....Jwala को कुछ समझ नहीं आ रहा tha....to उसने अपनी माँ को बुल्ला लिया...

वो वह पे aayi...aur वो अपने साथ कुछ खाने को लेके आयी thi...unhone आते hi वो चीज़ प्रिंस के सामने रख diya...aur सभी को पीछे जाने को kaha....thodi देर तो पोलर बेयर प्रिंस उसको देखता raha....usko sungha...aur जब उससे उसकी भूख पे भी काबू नहीं रहा तो वो उसको खाने laga.....dekhne से तो लग रहा था बहुत दिन से भूखा है वो...

ज्वाला - आपने ये कैसे kiya...aapko कैसे पता की इसको भूख लगी है...

J.Mom - वैसे hi जैसे तुम्हे कब भूख लगी है ये पता होता है mujhe...(prince को देख के) ये दर्रा हुआ hai...tum सब जाओ मैं इसको देखती हु...

ज्वाला - आप संभल लोगी ना इसको....

J.mom - तुम्हे संभाला है इसको भी संभल lungi....ab jao....aur हां इसकी माँ का पता करो jaldi...jitna मैं जानती hu...inki प्रजाति में इस उम्र के बच्चे अपनी माँ से ज्यादा दिन दूर रहने pe...nahi रहते...

ज्वाला - मैंने बिजली को खबर देने भेजा hai....wo हममे सबसे तेज़्ज़ है अब तक तो वह पहुंच भी गयी होगी वो....

J.mom- हां बस कोई कारनामा ना कर आये हमेशा की तरह...

इन् सब को भी छोड़ के हम कहते है स्लेयर के पास...

स्लेयर ने बहुत कोशिश ki....Earth पे आने की पर वो नहीं आ पाया जितनी ताकत वो लगता tha...usse ज्यादा ताकत उसको रोक लेती thi...usko समझ में नहीं आ रहा था ऐसा हो क्यों रहा hai...aur जब ज्यादा कुछ पता नहीं चल पाया तो वो वापस से डार्क वर्ल्ड जाने के बारे में सोचने laga.....par जाते जाते उसने एअर्थ के चारो oor...kuch kiya...pata नहीं क्या था wo....par उसके वह से जाते hi....wo जो भी था वो जल gaya....aur ये देख वो आग बबूला हो गया tha...gussa सातवे आसमान पे था uska....wo जल्दी से डार्क वर्ल्ड की ओर बढ़ने laga....aaj तो वह पे ये बहुत खून खराबा करने वाला hai....par kismat...waha पंहुचा तो वह पे भी वो अंदर नहीं जा paaya....yaha पे भी उसने कोशिश की पर कुछ नहीं hua.....usne अपने अंदर मौजूद सभी आत्मायों को आदेश दिया अपनी साड़ी शक्ति उसको देने ki...jisse वो अंदर जा sake....par ऐसा हुआ hi nahi....unn आत्मायों ने शक्ति तो di....par उससे कुछ नहीं hua.....aisa लग रहा था जैसे वो पावर्स शील्ड खुद hi खींच ले रही थी...

स्लेयर - ये क्या हो रहा hai....meri पावर्स मुझे देखा नहीं दे सकती....

वो गुस्से में और भी तरीके आज़मा रहा tha...par कुछ हो hi नहीं रहा tha...jis वजह से उसका गुस्सा बढ़ता जा रहा tha....wahi डार्क वर्ल्ड में लोग देख सकते थे usko...uske गुस्से ko....wo समझ रहे थे अगर वो शील्ड टूट gaya....to वो सभी को मार dega....par वो कुछ कर भी नहीं सकते थे....

बस देख सकते थे wo....ur उम्मीद कर सकते थे की ये वह से चला jaaye....aur सायद आज इनकी ये उम्मीद कायम रहने वाली thi...kyunki...Slayer ने बहुत ताकत उसे कर ली थी apni....aur अब उसको जरुरत thi...aatmayon ki...nahi तो वो कमज़ोर होता jaata...wo वह से निकल gaya......ab उसके पास कुछ hi जगह थे जहा पे वो अपनी भूख मिटता सकता tha....ek फोमोस और दूसरा Demos....waise तो और भी जगह the...par वह जाने में वक़्त लगता साथ hi खाना मिलता या नहीं इसका पता भी नहीं tha...to उसने अपने सबसे नजदीक जगह फोमोस जाना तय kiya....wo जगह बिकुल रहने लायक नहीं thi...waha खाने के लिए पहले मुकाबला करना होता tha...jungli लोगो की बस्ती थी जैसे wo...par ये जगह अभी के लिए तो स्लेयर की हर एक जरुरत पूरी करने वाला tha.....wo यहाँ पे आ गया...

चलिए अब हम एक नज़र अपने प्रोफ. पर भी दाल लेते है...

जनाब की हालत ठीक नहीं hai...wo अभी भी बिस्तर पे पड़े हुए the...aur उसके बगल में खुद डेमोस का राजा और वह का सेनापति खड़ा था...

लूसिफ़ेर - कब तक होस आएगा इसको.....

ा1 - पता नहीं maharaj...Main नहीं jaanta...ye कब जागेगा....

लूसिफर - तो पत्ता karo....agar ये नहीं जाएगा तो तुम और तुम्हारे साथ hi सेनापति जी भी सो जायेगे हमेशा के लिए....

सेनापति - Maharaj...Main माफ़ी मांगने के लायक तो नहीं hu...par मुझे लगता है हमारे साथ धोखा हुआ है...

लूसिफ़ेर - लगता hai....nahi हुआ है सीना pati....tumhe पता भी नहीं चला कब इसने तुम्हारी नाक के निच्चे से वो हतियार उठा liya.....yaa फिर तुमने खुद उसको ऐसा करने diya...waha तुम्हारे अलावा कोई जा नहीं सकता....

सेनापति - नहीं महाराज मैं तो....

लूसिफ़ेर - समझ गया main.....(A1 से) जाओ इसके घर वालो को उठा के ले आओ....

सेनापति - Nahi....maharaj मैंने hi दिया था उसको वो hathiyaar....mujhe लगा आप खुश होंगे....

लूसिफ़ेर - खुश होता अगर तुम कामियाब hote...par...marna तो तब भी तय था tumhara.....mujhse बिना पूछे वो हथियार लेके कैसे गए tum...(A1 से) अब ये खुद अपने परिवार को maarega....leke आओ सभी ko...ye सब एरीना में होगा....

सेनापति - नहीं महाराज ऐसा मत kariye...unka कोई कुसुर नहीं....

लूसिफ़ेर - मैं तुम्हे दो रस्ते देता hu...Yaa तो तुम खुद अपने परिवार को आराम से अच्छी मौत dedo....yaa मुझे अपने हाथ गंदे करने honge...jo की तुम्हे पता है बहुत दर्द देंगे unhe...to बताओ कोण सा रास्ता....

सेनापति - महाराज मुझे माफ़ कर दो...

लूसिफ़ेर - ये कोई रास्ता नहीं hai...(A1 se)leke आओ उन्हें खड़े क्यों हो.....

वो भागता हुआ वह से चला gaya....Seenapati ने अपनी तलवार निकली और खुद को मारने की कोशिश की par....par लूसिफ़ेर ने उसकी तलवार hi गायब कर di....aur फिर उसको अपनी शक्ति से बाँध लिया....

लूसिफ़ेर - मुझसे देखा किया है tumne....tum maroge....aur ये bhi...par पहले मुझे मेरे सवालों के जवाब देगा उसके बाद

ओल्ड आउल बहार से सब देख और सुन्न रहा tha....wo वह से उड़द गया

आज के लिए बस इतना hi....next में पोलर बेयर कबीले की ladayi....saath में स्लेयर का फोमोस पे jaana....aur ध्रुव की कुछ यादें जो गलती से प्रतीक को पता चलने वाली है
 
अपडेट - 41

अब तक

ध्रुव को कुछ नयी बातें पता chali...jinko जान के वो थोड़ा आश्चर्यचकित हो gaya...wahi डेमोस में लूसिफ़ेर ने अपने सेनापति को एक सज़्ज़ा sunayi...isliye क्यूंकि उसने उससे बिन्ना पूछे हुए कुल्हाड़ी को प्रोफ. सूरज को दे दिया tha...aur अब प्रोफ. सूरज बेहोश पड़ा हुआ tha....wahi जनता था कुल्हाड़ी कहा gayi...wahi स्लेयर पुरे गुस्से में फोमोस की ओर निकल पड़ा tha...kyunki ना वो एअर्थ पे जा पाया जहा वो जाना चाहता था और ना hi वापस डार्क वर्ल्ड में जा paya..jaha से वो आया tha...aur भी बातें हुई थी जैसे पोलर बेयर प्रिंस का होश में aana...aur बिजली का पोलर बेयर कबीले में jaana....usko वह पे खबर पहुंचने भेजा गया था :lol:

अब आगे..

पहले तो बिजली के पास चलते hai.....wo कुछ परेशां सी thi...wo बहुत जल्दी में कबीले में आयी और सीधा ज्वाला के पास चली gayi...par वह पे ज्वाला नहीं tha....to वो उसको ढूंढने लगी यहाँ waha.....kuch देर में जब ज्वाला उसको मिला तो उसने उसको साड़ी बातें batayi...jisko सुनने के बाद उसको समझ में नहीं आने लगा की आखिर करे तो करे क्या wo...usne उसी वक़्त प्रतीक को वह बुलाना सही samjha...waise भी उससे पूछ कर hi अब कोई डिसिशन लिया जा सकता tha....inn सब के dauran...wo प्रिंस अभी ज्वाला की माँ के पास tha,..wahi उसकी देखभाल कर रही thi...Jwala ने उनसे भी पूछना सही samjha...jab वो वह गया तब प्रिन्स सो रहा था...

ज्वाला - माँ एक परेशानी है...

उसकी माँ बिन्ना उसके ओर देखे hi अपना पूरा ध्यान प्रिंस की नींद ना टूटे इस बात पे रखते हुए धीरे से क्या हुआ पूछा...

ज्वाला ने उनको बहार आने को kaha...pahle तो उन्होंने ये सुनिश्चित किया की प्रिंस सही से सोता रहे उसके बाद वो उठी और ज्वाला के पास गयी....

J.Mom - हां बताओ क्या परेशानी hai...aur वो बिजली आयी की नहीं अभी तक...

ज्वाला - माँ ये उसी के बारे में hai...wo

अभी वो कुछ बताता उससे पहले hi प्रतीक यानी मैं भी वह पहुंच gaya....bich पार्टी से वह आना पड़ा है mujhe...aisa नहीं है की गुस्सा आए रहा ho...par अच्छा तो बिलकुल नहीं लग रहा था...

मैंने देखा ज्वाला अपनी माँ के साथ कुछ बातें कर रहा tha....Main भी वह चला gaya...aur उनसे उनका हाल समाचार pucha...wahi ज्वाला परेशां हुआ जा रहा था....

ज्वाला - अब मेरी बात सुनने....

मैं - हां बताओ...

ज्वाला - पोलर वेअर कबीले पे कब्ज़ा हो गया है...

मैं - क्या तुमको मैंने मन्ना किया था ना फिर क्यों किया ऐसा...

ज्वाला - अरे हमने नहीं किया है kuch...waha पे पहले से hi ऐसा हो चुक्का tha...aur ये जो प्रिंस है इसको उसकी माँ की सेविका ने किसी तरह वह से बचाया पर वो ज्यादा दूर नहीं निकल पायी और वह पे इसको छोड़ और खुद की जान से हाथ डी bhaithi....jaha तुम्हे ये मिक्ला था...

मैं - कोण है जिसने इनके कबीले पे कब्ज़ा किया है...

ज्वाला - पता नहीं बस इतना पता है उनके पेअर भी है और पंख bhi....kaale इतने की कोयला भी देख के खुद को गोर्रा bataye....raat के अँधेरे में hi निकलते है वो....

मैं - ये कोण सा जीव hai...aur इतना सब बिजली को किसने बताया....

बिजली - वो मैं गयी थी खबर लेके पर वह पहुंची तो देखा wo...jinke बारे में अभी बताया वो hi घूम रहे थे यहाँ waha...aur कुछ तो उलटे लटके हुए भी the...main उन्ही सब को देख के समझने की कोशिश hi कर रही थी की अच्चानक से किसी के चिल्लाने की आवाज आयी मैंने उस आवाज की ओर देखा तो वह पे...

मैं - वह पे क्या....

बिजली - वह पे एक पोलर बेयर को पकड़ के और उनके सरीर में वो जीव अपना मुँह लगाए उसका खून पि रहा tha...jab उसका पेट भर गया तो वो वह से चला गया बिन्ना देखे की वो जिन्दा है या मर gaya...wo उस वक़्त तक जिन्दा tha...Main उसके पास गयी ताकि पता लगा सक्कु आखिर बात क्या हुई hai...usne मरते मरते मुझे वह घाटी घटनाओ के बारे में बताया...

ज्वाला - उस कबीले पे अँधेरी जंगल के एक कबीले ने हमला कर दिया hai....inke बारे में हममे नहीं pata..aur ये तो कभी जंगल से निकलते hi नहीं the...Polar बेयर किंग और क्वीन दोनों hi बंधी बना लिए गए hai.....aur कल सुबह hi उन् दोनों को भी...

J.mom - अगर इसकी माँ को कुछ भी होता है तो ये खुद bhi...humme उनकी मदद करनी चाहिए....

बिजली - Par...wo तो दुस्मन hai...hum क्यों करे madad...aur अभी तक हम जो भी कर रहे थे वो तो बस इसलिए की कोई जुंग ना ho...ab जब उनको वो मार hi देंगे तो झगड़ा भी नहीं hoga...matlab सब सही है....

मैं - सब सही hai....haa सब सही hai....aur ऐसे hi अगर हम सब सोचते रहे और वो लोग जिन्होंने उनपे हमला किया है वो यहाँ भी आ जाए to....tab क्या करेंगे...

J.mom - हां हम ऐसे बैठे नहीं रह सकते हममे कुछ करना hoga...humme उनकी मदद करनी hi होगी...

ज्वाला - हम्म ठीक hai...Bijli सभी को bulao...hum अभी सभी से बात करेंगे...

बिजली ने ये सुन्ना और लग गयी काम pe....usne पुरे कबीले में जितने भी प्रमुख थे सबको ज्वाला के सामने आने को kaha....aur देखते hi देखते वो सब वह आ gaye....wahi मैंने ध्रुव से कुछ देर बातें ki...aur उन् जीवों के बारे में जान्ने की कोशिश करने laga...par वो ज्यादा कुछ बता hi नहीं पेय...

मैंने फिर ओल्ड आउल को बुलाना सही samjha...aur मैंने उसे याद किया hi की वो भी मेरे सामने आ गया tha...sayad वो आ hi रहा था...

मैंने उसको सब कुछ बताया की क्या हुआ है कैसे हुआ hai...par वो तो बस ऐसे सुनने जा रहा था जैसे सब पहले से जानता हो wo....aur जब मैं सांत हुआ तो उसने कहा...

ओल्ड आउल - प्रोफ. सूरज को डेमोस में मार देगा वो लूसिफ़ेर....

मैं - मैं यहाँ पे क्या बात कर रहा हु और तुम उसकी बात लेके बैठे हो...

ओल्ड आउल - आप मेरी बात suniye...wo किसी कुल्हाड़ी के पीछे hai...aur वो कुल्हाड़ी आखिर बार प्रोफ. सूरज के पास thi...jo अब उन के पास नहीं hai...wo जरूर उसके पीछे जाएंगे...

मैंने ये सुन्ना और मेरी घंटी बज्जी वो कुल्हाड़ी रूपल दीदी के पास thi...aur अगर ये बात उनको पता चली तो वो सब आएंगे उनके पीछे...

ध्रुव - अभी ये सब सोचने की जरुरत नहीं है वो kya...abhi उनके जैसा कोई नहीं आ सकता यहाँ pe....naa कोई फोमोस से आ सकता है ना hi कोई डेमोस se...to इस बात को यही छोड़ के हममे पोलर बेयर के बारे में सोचना चाहिए...

मैं - पर दीदी खतरे में है...

ध्रुव - hahaha....tum जिसकी बात कर रहे हो naa...wo अगर अपने पे आ जाए तो पता नहीं क्या क्या कर de...to अभी उनकी बात को छोड़ो और यहाँ पे फोकस करो....

मैं - क्या मतलब है tumhara...Didi कहा ऐसा कुछ कर सक...

ज्वाला - तो तय raha...ek टुकड़ी अभी जायेगी वह और उस जगह में सबके बारे में पता lagayega...Raja और रानी कहा रखे गए है और क्या जो भी जिन्दा है उनको कहा रखा गया hai..sab कुछ..

मैं वैसे तो ध्रुव से बात कर रहा था पर ये सुन के मुझे बिच में बोलना hi pada....waise तो ये सही tha...par अगर हमारी ये टुकड़ी पकड़ी जाती तो ख़तरा भी हो सकता tha...aur वैसे भी अभी बस हममे पता hi लगाना था की क्या कहा है....

मैं - ज्वाला मुझे लगता है हममे ओल्ड आउल को वह भेजना चाहिए ये इस काम में एक्सपर्ट है ये बिन्ना नज़र आये सब कुछ पता लगा के आ जाएगा...

ज्वाला - वक़्त काम है और ये अकेले जाके....

ओल्ड आउल - Maharaj...main अकेला कहा jaunga...main अपने लोगो के साथ jaunga....tab तक आप सब उस कबीले के पास तैयार rahiye...humm आपको वह पे खबर दे देंगे..

मैं - अब ठीक hai...old आउल ये काम जल्दी होना चाहिए वक़्त काम hai....aur मुझे लगता है मुझे भी कुछ लोगो को बुलाना चाहिए....

ज्वाला - तुम ऐसा नहीं कर सकते इस जगह के बारे में उनको पता नहीं चलना चाहिए...

मैं - मैं बस रूपल दीदी के बारे में सोच रहा था और निकिता के बारे में भी पर आज उसके लिए खास दिन है तो उसको नहीं बुला सकता...

ज्वाला - नहीं अगर जरुरत पड़ी तो मैं खुद उनको लेके आ jaunga...par अभी nahi...jitna हो सके हममे खुद hi देखना होगा ये सबब...

मैं इसको अभी आर्डर दे सकता था पर बार बार ऐसा करना सही नहीं hota...to बस जो जैसा चल रहा था वैसा hi चलने देते है...

ओल्ड आउल वह से टेलिपोर्ट हो चूका tha......aur हम सब यहाँ पे तैयारी कर रहे थे...

ध्रुव - मुझे लगता है तुम्हे एक बार पार्टी में वापस जानना chahiye...sab धुंध रहे होंगे तुम्हे...

मैं - क्या बात कर रहे ho...hum यहाँ हमले की तैयारी कर रहे है और तुम मुझे वह जाने को कह रहे हो...

ध्रुव - जानना hi hoga...ab जल्दी chalo...aur ये वैद्य कहा है...

मैं - वैद्य ji...unse क्या काम है....

ध्रुव - कुछ नहीं बस कुछ बाते पता करनी hai...jo इसके और ओल्ड आउल के बिच में चल रही thi...tum ज्वाला को बोलके उसको अपने साथ चलने के लिए कहो...

मैं - यहाँ ये लोग लड़ने जा रहे hai...aur तुम मुझे इनके वैद्य को ले जाने की बात कर रहे ho...agar ये फालतू हुआ ना तो बहुत बुर्रा होगा...

ध्रुव - ठीक hai....ab जल्दी से लेके चलो इसको...

मैं गया ज्वाला के पास और उसको सब bataya....meri बातें सुनने पे तो वो मुझे अजीब तरह से देखने laga....par वो मन्ना नहीं कर सकता tha...aur उसने मुझे जो चाहिए था वो diya...matlab की वैद्यजी और साथ हिपार्टय में वापस जाने भी दिया...

मैं जल्दी से नाना नानी के घर के पीछे आ गया और वैद्य जी को वही पे रुकने को kaha...aur मैं अंदर चला gaya....abhi तक वह पे कविता मैडम भी आ चुक्की थी और सब पार्टी एन्जॉय कर रहे the...Maine देखा कोई मुझे धुंध नहीं रहा था...

मैं - देखो कहा कोई धुंध रहा है mujhe......aur तुम बेकार में मुझे यहाँ ल....

"कहा गए the...kab से धुंध रही हु तुमको..." पीछे से रूपल दीदी की आवाज आयी...

मैं - मैं कहा गया tha...yahi तो हु कब से...

रूपल दीदी - अच्छा यही पे tha...(ghurte हुए..)

मैं - हां यही था बस बहार गया था थोड़ी देर के लिए...

रूपल दीदी - हम्म ठीक hai...cal आजा तुझे कुछ दोस्तों से मिलवाती hu...bahut दिंनो के बाद आये है wo....aur मैं कब से तुझे उनसे मिलवाना चाहती thi...wo जो तेरा दोस्त है दब वो उन्ही लोगो के साथ है....

मैं - दब उनके saath...chalo मुझे भी मिलवाओ...

वो मुझे एक लड़कियों की ग्रुप की ओर लेके गयी जहा पे 5 लड़कियां thi...wo सब देखने में अजीब thi...matlab यहाँ के हिसाब से सायद नार्मल हो पर मेरे लिए तो अजीब hi thi...aur उन्ही सब के बिच में दब tha...wo बड़ा खुश लग रहा tha...hum दोनों भी गए वह...

दीदी - ये dekho...isse मिलो ये है मेरा bhai...Prateek...

उन् सब ने मेरी ओर एक नज़र देखा और फिर वापस मूड gayi....mujhe कुछ समझ नहीं aaya...par इस बात से दीदी लाल पिल्ली जरूर हो गयी थी....

दीदी - प्रतीक चलो और लोगो से मिलते है....

वो मुझे खींचते हुए वह से लेके चली aayi....aur साइड में ले जाके मुझे सॉरी कहने लगी....

मैं - पर kyun...aap क्यों बोल रही हो सॉरी...

दीदी - देखा नहीं उन् लोगो को उन् लोगो ने तुमसे बात तक नहीं की....

मैं - तो उससे क्या...

दीदी - तुम्हे पता है ना क्यों नहीं की baat....mujhe बुलाना hi नहीं चाहिए था unko...main तो बुलाती भी नहीं अगर मम्मी ने नहीं कहा होता तो...

मैं - अप्प माँ पापा की बात कर रही है ना....

दीदी - हां...

मैं - अरे कोई बात nahi...main समझ गया हु उन्होंने कुछ गलत किया जिसकी वजह से सब उनसे नफरत करते है और उनकी वजह से आप सब से bhi....aur अब ये नफरत अगर मुझे विरासत में मिल रही है तो कोई बड़ी बात नहीं...

ध्रुव - चलो हो गया यहाँ का काम अब बहार चलो उससे बात करनी है...

मैं - तुम क्या मुझे यहाँ बेइज़्ज़त करने लेके आये थे...

ध्रुव - और नहीं तो kya...mujhe देखना tha...ab जल्दी से चलो...

मान तो किया इसको बहुत maaru...agar सामने होता तो मारता bhi....par ये तो मेरे hi अंदर था और ना इसकी कोई बॉडी hai...to बस इसको सुनते हुए मैं बहार जाने के बारे में सोचने लगा...

मैं - दीदी मैं बहार से आता हु...

दीदी - अभी तो बहार hi था naa....tu गुस्सा तो नहीं है ना...

मैं - नहीं दीदी वो ना बस लोगो के बिच रहने की आदत नहीं है तो बहार जानना चाहता hu...thodi देर अकेला रहूँगा और फिर आ जाऊंगा खुद...

दीदी - ठीक hai...par जल्दी aana....main भी तबतक कुछ काम निपटा लेती हु...

मैं बहार चला aaya...aur पहुंच गया वैद्य जी के पास...

ध्रुव - पूछो इससे...

मैं - क्या पुछु ये तो बताओ...

वैद्य जी - मुझे माफ़ कर do...mujhe पहले hi बता देना चाहिए tha....mujhe पता था उनपे हमला हुआ hai..agar मैंने बता दिया होता तो सायद उतने लोग नहीं मारे jaate...par मुझे क्या पता था की आप उनकी मदद करने jaaoge...main तो उनको दुसमन hi समझता tha...aur जब हमारे बिन्ना कुछ किये hi हमारे दुश्मनो का खत्म हो रहा था तो क्यों बेकार में ये सब करना...

मैं - क्या बोल रहे है aap...aapko पता tha...par कैसे....

वैद्यजी - मैंने सुन्ना tha...unn अँधेरे जंगलों में से जड़ी बत्ती लाने गया था तब सुन्ना था मैंने ये sab...waha पे कोई तो आ गया hai...pata नहीं कहा से और कैसे पर वो पोलर बेअर्स को ख़तम करना चाहता tha..aur ये तोअच्छी बात थी naa....Main ये बात महाराज को बताता उससे पहले आप आ गए उस राजकुमार के साथ..

मैं - ओल्ड आउल क्यों नाराज़ है आपसे...

वैद्यजी - इसी वजह se...mujhe पता था ये सब हुआ hai...aur तो और ये भी पता था की राजकुमार वह से निकल चुक्का है और कही हमारे इलाके के पास hai...par मैंने ये सब बताया नहीं किसी को...

ध्रुव - ओल्ड आउल को पता tha...usko सब पता tha..par वो उस वक़्त यहाँ आ नहीं सक्का क्यूंकि वो दूसरे जरुरी काम में लगा हुआ था....

मैं - पर वो आया था एक बार और उसने तब भी कुछ नहीं बताया...

ध्रुव- वजह होगी koi...isse पूछो सब कुछ उन् जीवों के बारे में और ये किसकी बात कर रहा है जो वह आया था...

मैंने पूछा ये sab...to वैद्यजी ने ज्यादा तो नहीं बस कुछ बातें बताई जो उसको पता thi...jaise वो सब चमगादड़ the...aur किसी ने उनकी रानी को पकड़ लिया है और उनसे वो सब अब करवा रहा hai...ab ये कोण था जिसने उनकी रानी को पकड़ा था ये नहीं पता था उसको...

ध्रुव - चलो यहाँ का भी हो गया अब इसको बोलो वह के लिए पोर्टल खोलने ko...sab पहुंच गए honge...aur ओल्ड आउल भी अपने काम में लगा हुआ होगा...

अभी तो बस ध्रुव की बात कम्पलीट हुई hi थी की अच्चानक से एक लड़की घर के पीछे भगति हुई aayi...darri हुई थी वो बहुत jyada...Maine उसको देखा तो लगा इसको कही देखा hai...aur जब याद किया तो ये तो उन्हों 5 लड़कियों में से एक thi...jo दीदी की दोस्त thi...main कुछ ुचता उससे पहले hi वो निकल गयी वह से...

मैं - ये क्या था और इसको क्या हुआ जो ये ऐसे...

ध्रुव - कहा था ना यहाँ का काम करना जरुरी hai...ab देखते जाओ आगे क्या क्या होता hai...par अभी nahi...apbhi जल्दी से वापस चलो...

मैंने वैद्यजी को पोर्टल खोलने कहा और उन्होंने खोला और हम तिण्णो hi वह पहुंच गए...

वैद्यजी - मैंने जो किया अनजाने में किया मुझे पता नहीं था ये सब...

मैं - क्या पता नहीं था वह का राजकुमार अभी एक बच्चा है अगर उसको कुछ हो जाता to...ab अभी के लिए ये सब रहने देते hai..aap अपना काम करो और मैं अपना करता hu...baad में इसके बारे में बात होगी...

वो वह से चले गए सभी सैनिकों के pass....wahi मैं चला गया ज्वाला के pass....jo अभी बिजली के साथ बात कर रहा tha..usko सबको तैयार रहने को बता रहा था...

इन् लोगो ने 3 ग्रुप्स बनायीं thi...pahle को खुद ज्वाला लीड करने वाला था और दूसरे को Bijli...aur तीसरे ग्रुप को वह का एक और pramukh...jitni इनके पास खबर थी उस हिसाब से 2 ग्रुप्स दाए और बाए तरफ से हमला करने वाली thi..aur तीसरा ग्रुप जिसमे वो प्रमसख tha...uska काम था वह से राजा Rani...aur बाकी के बच्चे हुए कैदियों को छुड़ा के सेफ जगह पे laana...ye सब प्लान बन hi रहा था की वह पे ओल्ड आउल भी आ गया और अपने साथ अपने लोगो को भी लाया tha...Old आउल ने और उसके लोगो ने हम सब को वह के बारे में सब bataya...kya कहा पे hai..aur किस जगह पे ज्यादा सुरक्षा hai...par उसको ये पता नहीं चला राजा रानी कहा पे hai...bas बाकी के कैदियों के बारे में पता चला...

ज्वाला - सब कुछ वैसा hi rahega...tisra गुट तुम सब को कैदियों को छुड़ाना है और उन्हें सेफ जगह पे लेके जाना hai...sayad उनमे से किसी को खबर हो राजा रानी कहा पे है...

ओल्ड आउल - हमारे लिए क्या आदेश है....

मैं - आप लोग अँधेरे जंगल को कितनी अच्छी तरह से जानते है....

ओल्ड आउल - वो अँधेरा जंगल है उसको जितना जानो उतना hi काम hai....waha पे ना जाने कितने hi तरह तरह के जीव पाए जाते hai....aur वो सब बहुत खतरनाक होते है..

मैं - आपको वही जाना hoga..aur आपको ढूँढना है इन् जीवों के रहने की जगह को....

ज्वाला - पर kyun..uss जगह को धुंध के क्या hoga...mujhe लगता है इनसब को तीसरे गुट के साथ मिलके कैड़यों को छुड़ाने में मदद करनी चाहिए...

मैं - नहीं वो भी जरुरी hai..Old आउल जाओ तुम सब....

मेरी बात सुनने के बाद वो सब चले gaye....wahi ज्वाला थोड़ा गुस्सा हुआ....

मैं - चलो अब हमारी baari...taiyaar raho....(Dhruv से) मेरी बॉडी संभल lena....aur अलबूस और कूपर को भी तैयार rakho...sayad जरुरत पद जाए...

ध्रुव - उनको मैं तैयार करता hu...par मैं भो वह जा रहा hu...old आउल के saath.....sayad और तुम्हारी बॉडी को सेफ रखूँगा...

मैं - ठीक है पर संभल ke....Main अपनी बॉडी से निकला और ज्वाला के अंदर चला गया हम दोनों की सोल एक हुई और ज्वाला की बॉडी में चंगेस आने lagi...wahi ध्रुव मेरी बॉडी लेके वह से निकल गया..

ज्वाला - ने सबको आएगी बढ़ने को कहा और सब चल दिए आगे....

हममे लेफ्ट साइड से हुम्ला करना tha...hum सब वह से चले gaye...aur हुम्ला शुरू कर diya....maine ध्यान diya...jitne भी सैनिक थे वो सब कुछ ज्यादा hi उत्सुक the...aisa नहीं की उनको नहीं होना chahiye...par ये कुछ ज्यादा hi tha...aur ऐसा क्यों था इसका भी जवाब मिल gaya...inn सब को उन् पोलर बेअर्स को बचने से ज्यादा उस कबीले के बिल्डिंग को बर्बाद करने में मज़्ज़ा आ रहा tha....aur साथ hi वो जीव भी दिखने lage...humne देखा तो वो सच में चमगादड़ की hi तरह दीखते the...aur हरकते भी उन्ही की tarah...Jwala ने आग से हुम्ला किया तो सारे यहाँ वह भागने lage.....roshani से इनको चिढ होती hai...pasand नहीं है इनको roshni..aur इसी वजह से वो सब यहाँ वह हो gaye...jiske बाद ये हमारे लिए आसान हो gaya...hum सब 2 या 3 के ग्रुप में बात के उन् सब का मुकाबला करने age...par ये ज्यादा देर नहीं chala...jaise hi हमले का पता सब्को चला बहुत से चमगादड़ वह पहुंच gaye...aur उनकी तादात बहुत ज्यादा thi...wo एक पैटर्न में आते the....ek के पीछे एक ...और किसी तरह अगर हमने पहले को बहेगा तो दूसरा हमपे हुम्ला कर deta...aisa hi चलता raha...wahi दूसरी taraf...Bijli के गुट का भी वही हाल tha..shur में तो सब सही था पर फिर इनकी तादात बहुत बढ़ गयी और कण्ट्रोल से बहार हो gaya....wo तो बजली थी वह जिसने अपनी थंडर पावर्स से बहुतों को ख़तम कर दिया tha...aur लगी हुई भी थी करने mein....wahi तीसरे गुटतट के लिए ये सब सही जा रहा tha....humle का पता चलने पे कैदियों की रक्षा के लिए जो the...unme कम्मी आ घई thi...aur इसी बात का फायदा उठा के उन् लोगो ने अपना रेस्क्यू मिशन शुरू kiya...aur बिन्ना ज्यादा लड़ाई के शांति से वो कामियाब भी हो रहे the...bas देखते hi देखते वो पहुंच गए उस जगह पे जहा पे पोलर बेअर्स को रखा गया tha...aur उन् सब की हालत ख़राब thi...Polar बेअर्स ने जब देखा की ये ज्वाला के कबीले के लोग है मतलब की उनके दुसमन तो उनका मननोबल और टूट gaya..ab उनको पक्का लगने लगा था की मौत आणि hi hai....par ये तो जैसे चमत्कार hi tha..ki उन् सब को वो बचने आये the....pahle तो गेट तोडा गया ार उसके बाद 2 -2 मिलके एक पोलर बेयर को वह से उठाते और बहार nikalte...aur उनको सेफ जगह पे ले जाने लग gaye...ek यही काम था जो आसानी से हो रहा tha..aur जब पोलर बेअर्स को याक्किन हुआ की उनके दुसमन उनकी मदद कर रहे है तो वो समझ नहीं पाए kuch....unhi में से कुछ ने बताया की ऐसे hi और 2 ठिकाने है जहा पे और भी कैदी रखे हुए hai...inn ठिकानो का पता ओल्ड आउल को नहीं लग पाया tha...unse पूछा गया की उनकी रानी कहा hai...aur उनके राजा के बारे mein...tio जवाब में यही मिला की पुररे राज परिवार की हत्या कर दी गयी hai..wo जिन्दा नहीं hai....tisre गुट ने ये सब सुन्ना और अपने कुछ लोगो को हमारे पास भेजा ये खबर सुंनने के liye...aur वो सब लगे रहे अपने काम mein....wahi हमरे हुत्त में अब हालत कुछ उलटे हो गए the....sirf कुछ hi सैनिक थे जो अब सही the...aur एक मैं और Jwala....Hum दोनों hi पूरी ताकत लगा रहे the...par इन् सब की तादात का क्या hi kahna...ye बस बढे hi जा रहे the..aisa लग रहा था की ये मरते hi नहीं hai...bas अपनी जगह से गायब हो जाते है और फिर वापस से आ जाते hai...wahi ओल्ड आउल जो अभी गया हुआ था अपने लोगो के साथ अँधेरे जंगल में और उसी के साथ ध्रुव भी मेरी बॉडी लेके गया tha...wo सब पहुंच चुक्के थे उस जगह जहा पे उन् चमगादड़ों के होने का अनुमान tha...Old आउल ने अपने कुछ लोगो को उस जगह को सुरक्षित करने को kaha...iska मतलब की वह पे एक ऐसा शील्ड लगाया जाए जिससे कोई बहार से नहीं आ sake....bas अंदर वाले hi rahe..aur उनसे hi निपटना ho...par एक बात और thi...iss शील्ड के लगते hi जितने भी जीव होंगे इस अँधेरे जंगल के वो सब के sab...issi के ओर आने लग jaayenge....yahi एक खतरनाक बात thi...par ओल्ड आउल ने ये करवा दिया...

ध्रुव भी वही tha...aur वो अब ओल्ड आउल के साथ आगे जा रहा tha....wo सब किसी गुफा के पास the...Dhruv ने ओल्ड आउल से कुछ कहा और ओल्ड आउल वही पे ृक्क गया और ध्रुव मेरी बॉडी लेके खुद अकेला अंदर चला gaya...uska अंदर जाना था और पता नहीं फिर क्या hua...ek अजीब सी चमक दिखी mujhe...jabki मैं ज्वाला के साथ था उसके शरीर mein...aur उस चमक की वजह से मेरी आँखें बंद हो गयी और जब खुली तो मैं अपनी बॉडी में tha..ussi गुफा mein....aur कोई चीज़ थी जो मेरे गर्दन पे लगी हुई thi...aur अच्चानक से फिर से मेरी आँखें बंद हो gayi...aur जब वी खुली तो मैं पता नहीं कहा tha....samne एक आदमी tha...Main उसके पास गया और उससे पूछने को हुआ की कोण हो तुम और ये जगह कोण सी है की तभी वो उठ गया और वह से आगे जाने laga....Main उसको आवाज लगता रहा पर वो सुन hi नहीं रहा tha....wo बस आगे भद्दे जा रहा tha...Main भी उसके पूछे चल diya...aur फिर हमारे सामने एक गाओं aaya....jaha पे लोग the...maine सोचा ये तो कुछ बताने से रहा तो वही जाके उनसे hi पूछ लेता hu...jab तक मैं वह पंहुचा तब तक उस आदमी ने अपनी तलवार बहार निकल ली थी.....2 तलवारें thi...ek में से काले रंग का कुछ निकल रहा था और दूसरे में से सफ़ेद रंग की roshni....Maine तब तक नहीं देखा था usko...main तो बाकी लोगो से बात करने की नाकाम कोशिश कर रहा tha....par कोई मेरी बात hi नहीं सुन्न रहा था ऐसा लग रहा था जैसे मैं वह था hi nahi....aur फिर अच्चानक से चिल्लाने की आवाजें आने lagi...aur देखते hi देखते वो पूरा gaon...aur वह के लोग सब शांत हो gaya.....sannata चा गया वह pe.....ab वह बच्चे थे बस मैं और वो आदमी जिसके पीछे मैं आया tha.....wo पूरा खून में भिनगा हुआ tha...saath hi उसकी तलवारें bhi....par उसके आँखों में ासु the....usne अभी अभी एक पुर गाओं को मार दिया था और अब उसके आँखों में आशु the....ye सब समझना मुश्किल tha...Main उसकी ओर बढ़ा उसको मारने के लिए और जैसे hi मेरे हाथ ने उसको चुवा एक बार फिर से रौशनी हुई और मैं वापस से अपने hi बॉडी में tha...aur इस बार मेरे सामने एक तीन पैरों वाली कोई जीव पड़ी हुई थी मर्री hui....aur सामने थेपोलर बेयर किंग और क्वीन रस्सी से बंधे hue....aur उसके बगल में एक बड़ी सी चमगादड़ thi....sayad यही उनकी रानी hogi..jisko पकड़ लिया गया tha...par किसने पकड़ा था ये पता नहीं....

मैं - ध्रुव मैं यहाँ कैसे आ गया और ये कोण सा जीव पड़ा हुआ है यहाँ पे...

वो कुछ नहीं bola...mujhe लगा सायद कुछ हुआ hai....aur वो थक गया hoga...Main वह से उठा किसी tarah....mujhe भी बहुत थकन हो रही thi...aisa लग रहा था जैसे मेरी ताकत किसी ने खिंच ली हो मेरे अंदर se...bahut कमजोरी सी लग रही thi...uthne के बाद मैं उन् तिण्णो की ओर gaya...aur वो जिस भी चीज़ से बंधे हुए थे उसको kaata...pata नहीं कोण सी चीज़ थी ye....rassi तो नहीं thi...maine अपनी तलवार निकली और उससे उसको काट diya...aur उन् तीनो को hi आज़ाद karaya....wo तिण्णो बहुत कमज़ोर थे.....

मैं - ओल्ड आउल यहाँ aao....kaha हो तुम.....

मेरे पुकारने से वो तुरंत hi वह पे आ गया.....

मैं - इन् तिण्णो को यहाँ से लेके jao....aur हममे भी निकलना है यहाँ से...

ओल्ड आउल - जी...

उसने अपने कोच लोगो को बुलाया और एक पोर्टल khola...saath hi उसने बाकी सब को भी ऐयार रहने को kaha....kyunki अब वह पे बहुत से जीव आ चुके थे उस शील्ड की ओर आकर्षित hoke...aur अब जैसे hi ओल्ड आउल के लोग वह से हट्टे वो शील्ड तोड़ के अंदर आ जाते और फिर हम सब को खतरा tha...bas इसी वजह से उसने सबको ऐयार रहने को kaha....jaise hi पोर्टल khulle...shield बंद कर दी जाए और सभी तुरंत उस पोर्टल से बहार निकल jaaye...Mujhe पता नहीं क्या hua....maine उस जीव को भी उठा liya...aur फिर जैसा की ओल्ड आउल का प्लान था वही hua....hum सब जल्दी से बहार चले gaye....sayad यही एक टीम थी जिसमे किसी को चोट नहीं आयी thi...siway mere...jaise hi हम वह से बहार nikle...aur सेफ जगह पे pahuche...pahle तो वह पे मौजूद सभी पोलर बेयर अपने राजा रानी को देख के खुश हो गए पर उनकी हालत देख के उद्दस bhi...ussi जगह पे वैद्यजी भी the...humme देख के वो हमारे पास आये और मरहम पट्टी करने लग gaye....mujhe बहार से तो कोई चोट नहीं आयी थी तो मैं बस बैठा raha...aur वह पे मौजूद लोगो से वह का हाल समाचार लेने लग gaya....bahut से लोग जख्मी हुए the...aur कुछ नहीं भी रहे the...par यही तो होता है लड़ाई mein....lekin अभी लड़ाई रुक्की नहीं थी ये अब भी चल hi रही thi...wo चमगादड़ अभी भी लड़ रहे the...sayad उनको पता नहीं था की उनकी रानी अब आज़ाद है या कोई और hi वजह रही होगी...

इतने देर में वैद्यजी ने उन् िन्नो की मरहमपट्टी कर दी thi...wo चमगादड़ो की रानी को बहुत छूट आयी थी पर अब वो काम से काम बोल पा रही थी...

मैं - ये लड़ाई रोक्को isko....bahut से लोग मारे गए hai...ab और नहीं...

उसने बस अपनी गर्दन ना में hilayi...pata नहीं क्या चाहती थी wo...aur अभी तो वो हमारे सामने थी अगर मैं चाहता तो मार देता usko....fir भी वो लड़ाई नहीं रुकवा रही thi...Maine जोर से कहा लड़ाई रोक्को तो उसने मुझे अपने पास बुलाया और बताया की वो नहीं रोक sakti...uski पावर्स बहुत काम hai..aur वो उनको वापस से अपनी बॉडी में लेने के काबिल नहीं hai....agar उसने ऐसा किया तो वो पावर्स और खतरनाक हो जाएंगे और फिर उनसे और तबाही होगी....

मैं - तो क्या kare...hum ऐसे hi इस लड़ाई को होते हुए नहीं छोड़ सकते...

वो - उस जगह को छोड़ दो abhi...aur किसी ऐसे को लेके आओ जो वैम्पायर ho...kyunki बस एक वैम्पायर hi मेरी शक्तियां पा सकती है और इन् सब की रानी बन सकती है और इनको रोक सकती hai....par तब तक के लुइयये उस जगह को छोड़ do...wo सारे उस जगह पे रहेंगे वह से बहार नहीं aayenge...par अगर कोई वह गया तो उसको भी बहार नहीं आने देंगे...

मैं - ठीक hai...(dhruv से) ध्रुव क्या करू main...batao कुछ...

वो वापस कुछ नहीं bola...wo बस शांत tha...aur अब मुझे गड़बड़ लगने लगी thi...pata नहीं क्या हुआ है इसको कही वापस से वो डार्क पावर का कोई लफड़ा ना हुआ ho..agar ऐस हुआ होगा तो ना सिर्फ ये बल्कि निकिता और ज्वाला भी ुसिबत में होंगे....

मैंने कुछ कबीले वालो को बाकी के गुटों को खबर पहुंचने के लिए बोलै की जैसे hi सारे कैदी निकल जाए सब लोग उस जगह को खली कर denge....par मेरी बात सुनते hi वह पे पड़े हुए पोलर बेयर किंग ने एक डाहड मारी...

किंग - नहीं वो मेरी जगह है मेरे लोगो की जगह हम उसको नहीं छोड़ेंगे....

मैं - अगर नहीं छोड़ा तो मारे jaoge...aap सब के सब...

किंग - हममे अपनी धरती पे मिली मौत भी मंजूर है पर ऐसे भाग के नहीं jaayenge...wo जगह मेरे पूर्वजों ने बनायीं थी...

मैं - आप अभी होश में नहीं है अभी यही पे rahe....(vaidyaji से) इनका ध्यान रखो अच्छे se....aur ज्यादा बात करे तो बेहोश कर do...(Rani से) आपका बच्चा सही सलामत है और अभी ज्वाला के कबीले में है उसकी माँ के saath....aap अपने पति को समझाइये की वापस अपने कबीले में अभी जानना बहुत खतरनाक hai....khudkhusi के बराबर है wo......kya आओ अपने लोगो को ये करने denge....apne बच्चे को लेके जाएंगे वह...

किंग - मेरा बीटा जिन्दा hai...ab तो हम वह जरूर जाएंग...

मैं - Vaidyaji...inko अच्छे से sulao....(Rani से) आप समझ रही है मैं क्या कह रहा hu...aur मैं वडा करता hu...wo जगह जो आपकी है आपको जरूर वापस दिलाऊंगा...

किंग - हम अपनी जमीं खु......

इस बार इससे ज्यादा नहीं बोल पाया wo....Vaidyaji ने उसके नाक के पास कोई फूल रख दिया और उसकी खुसबू से वो बेहोश हो गए...

थोड़ी hi देर baad....jin लोगो को मैंने भेजा था खबर पहुंचने वो सब वापस आ gaye...apne साथ कुछ जख्मियों को लेके साथ hi कुछ लाशें bhi....unme से एक ने मुझे बताया की अब ज्यादा लोग नहीं है वह कैदखाने mein....ab सब वापस आने वाले है...

थोड़ी देर इंतज़ार करने के बाद hi वो सब के सब वापस आ gaye....Jwala को क्जूट लगी हुई thi....Vaidyaji उसके पास गए और उसको देखने lage....Main भी उसके पास गया....

मैं - तुम ठीक तो हो...

ज्वाला ने उस वक़्त कुछ नहीं कहा पहले पट्टी कराई और फिर वैद्यजी के जाने के बाद मुझे कहा...

ज्वाला - तुम ाकनक से कहा चले गए the.....hum दोनों साथ थे और फिर कुछ हुआ जिसके बाद तुम नहीं the...mujhe लगा कुछ हो गया है तुम्हे...

मैं - वो मेरी बॉडी को सायद कुछ हुआ था और इसी वजहस इ मेरी सोल वह से निकल gayi....Raja रानी सेफ है साथ hi हममे इन् चमगादड़ों की रानी भी मिली hai...par ये अभी इन् सब को ख़तम करने के काबिल नहीं hai...humme वो जगह अभी वैसे hi छोड़नी होगी...

ज्वाला - हां वैसे भी अब वो रहने के लायक तो नहीं बची hai...waha रहने के लिए वह पे बहुत साड़ी मरमत की जरुरत होगी...

मैं - हां वो तो hai....par तब तक इनका क्या करना है...

ज्वाला - देखो कबीले में तो सायद ये रह hi नहीं paayenge...kyunki वह पे गर्मी hai...par हां उस जगह जहा राजकुमार को होश आया था वह पे ये लोग तम्बू गाड़ के रह सकते है जब तक ुम सब सही नहीं कर dete...hum सब इनकी पूरी मदद करेंगे....

मैं - तुम सच बोल रहे ho...agar ऐसा है तो बहुत अच्छा hai....Main तो यही चाहता hu..aur इसी बहाने तुम दोनों कबीलों में दोस्ती की शुरुवात हो जायेगी..

ज्वाला - हां सायद हो जाए...

मैं - एक बात बताओ क्या आज भी तुम्हे डार्क पावर का अहसास हुआ था क्या....

ज्वाला - नहीं to....aaj नहीं hua....uss दिन के बाद से आज तक नहीं हुआ है...

मैं समझ नहीं paya...agar ये बात नहीं है तो ये ध्रुव जवाब क्यों नाह दे रहा hai...mujhe लगा सायद मैं ट्रेनिंग के लिए जाऊं तो पता चल jaaye...aur उसके लिए अब घर जानना होगा...

मैं = ज्वाला पोर्टल खोलो मुझे घर जाना hai....waha सब वेट कर रहे honge...aur हां अगर कोई गड़बड़ हो तो मुझे बताना...

ज्वाला ने पोर्टल खोला मैंने उस मर्रे हुए जीव को उठाया और पोर्टल से होते हुए वापस आ gaya..Nana नानी क घर के picche....iss बार लेट हो गया tha...aur सभी मुझे धुंध रहे the....Main जब अंदर पंहुचा तो सभी मुझे देखे जा रहे थे...

दादी - कहा चले गए the...hum सब कब से धुंध रहे है तुम्ह्जे...

मैं - वो दादी मैं बस यहाँ वह टहल रहा था....

चाचू - बता के जानना था ना...

दीदी - वो पापा इसने बताया tha...iske कहा था मुझे ये बहार जा रहा है थोड़ी देर के लिए पर उसके बाद वापस आया hi नहीं....

चची - इसने कहा और तुमने जाने दिया akele..tumko पता है ना इस जगह के बारे में अगर ये कही खोओ जाता to...tumhe इसको जाने नहीं देना चाहिए था...

मैं - अरे चची मैं कोई बच्चा नहीं हु जो खो jaunga....aur आप ये दीदी को डांटना बंद करो...

चची - क्या kaha...usko ना daatu..thik है अब तुझे daatungi...aur सिर्फ डाटूंगी hi nahi...agar बात नहीं सुन्नी तो...

बुआ - अरे भाभी हम भी hai..milke सबक सिखाएंगे अब दोनों भाई बहन ko....par आज नहीं कभी aur...ab हममे जाना hoga...kal स्कूल हैं inka....hum फ्राइडे को वापस आते है तब देखेंगे इनका क्या करना है...

चची - अरे मैं भी भूल गयी स्कूल hai....par प्रतीक एक बात याद रहे यहाँ पे अकेले घूमने नहीं जानना hai....ye जगह तुम्हे पता नहीं कैसी hai..dekha था ना माँ पापा को कैसे उसने बंधी बना के रखा tha...to संभल के रहना ठीक है...

मैं - जी चची...

चची - हम्म ठीक hai..khana खाया था naa...nahi खाया तो खा lo...fir चले जाना स्कूल के लिए...

मैंने खाना खाया और फिर हम सब निकल लिए स्कूल के liye....wahi दूसरी oor....Fumos प्लेनेट पे स्लेयर भी बड़े चौ से आत्माएं निगल रहा tha....aaj यहाँ आते hi उसने 12 लोगो का शिकार किया और सभी की आत्माएं खा गया...

यहाँ पे आते hi जो इसने काण्ड किये वो ना सिर्फ अजीब थे बल्कि डरावने bhi....par यहाँ पे उसकी कुछ पावर्स सायद लॉक हो गयी thi....jab वो डार्क वर्ल्ड में था तो वह पे ये लोग खुद इसके पास मरते बठे और ये उनकी आत्मा ले लेता tha.....par यहाँ पे वैसा नहीं tha....yaha पे इसको खुद hi लोगो को मारना पड़ा अपने हाथों से और उसके बाद आत्माएं निगलनी padi...jisme थोड़ी परेशानी भी हुई उसको...

वो यहाँ फोमोस में साम के वक़्त aaya....aur शाम के वक़्त इस जगह पे लदायिओं का समय होता hai...har जगह लड़ाई होती रहती है और इन् लड़ाइयों का एक hi नियम tha...ki कोई नियम hi nahi....yaha पे सामने वाले को maaro..aur उसकी चीजजें tumhari...uski हर एक chiz.....aur अगर तुम मर्रे तो युम्हारी चीजजें uski....bas ऐसा hi चलता tha....Slayer जब आया तो कमज़ोर tha....usne देखा यहाँ ोपोए बहुत से लोग है जो मर्डर रहे hai...aur ये देख उसने एक बार उनकी आत्माओं ो अपने अंदर खींचने की कोशिश ki....par कुछ हुआ hi nahi....tabhi उसके सामने एक पहलवान जी आगया और उसको चुनौती दे dali....Slayer को शुरू में तो यहाँ के नियमों का पता hi नहीं tha....aur ना ये की यहाँ चल क्या रहा hai...bas फिर क्या tha...wo कुछ समझ पता उससे पहले hi उस पहलवान ने उसपे हमला कर diya....par उसको कहा पता था की ये जो सामने है वो कोई ऐसा वैसा नहीं tha...pahelwan के हाथ स्लेयर के चेहरे पे laga...par स्लेयर को सिर्फ एक झटका महसूस हुआ कोई डारन nahi...wo बस खड़ा रहा हिली थी तो बस उसकी gardan...aur कुछ नहीं वही उस पहलवान को ुटला चोट लग गया tha...uska हाथ दर्द करने लगा tha...Slayer अभी भी उसको बस देखे जा रहा tha...uss पहलवान ने वापस से हमला kiya....aur इस बार भी स्लेयर को घंटा कोई फर्क pada...balki उस पहलवान का दूसरा हाथ उल्टा दुखने laga...Slayer ने उसको फिर देखा और एक पंच marra....punch पड़ते hi वो तो जैसे पंख बन गया ho...hawa में उड़ता हुआ दूर जाके गिर्रा और फिर उठ ना सका उसकी मौत हो गयी thi..aur उसका मरना था की उसकी आत्मा स्लेयर के पसस आके कड़ी हो gayi...Slayer ये देख के हैरान हो gaya....usne उसको अपने अंदर खींचने की कोशिश ki....par वो नहीं जा पा रहा tha....Slayer का भूख से और गुस्से से बुरा हाल होता जा रहा tha...wo उस आत्मा के पास गया और उसके पास जाके अपना मुँह khola...ye बिकलुक किसी वैक्यूम क्लीनर की तरह tha...wo आत्मा उसके मुँह से होते हुए अंदर gayi....aur इस दौरान उसको थोड़ा दर्द भी hua...usne वापस से dekha...waha और भी लोग थे जो मर रहे the...par उनमे से किसी की आत्मा उसके पास नहीं आ रही thi...aana तो दूर की बात है दिख भी नहीं रही thi....abhi वो इन्ही सब को ऑब्सेर्वे कर रहा था की एक और बाँदा आया और उसने आते hi हुम्ला कर दिया उसके upar...aur इस बार भी बिलकुल पहले वाले के hi तरह पहला वार स्लेयर को laga...par उसके बाद उसने भी वार kiya..aur एक वार में वो भी निकल liya...aur उसका आत्मा उसके पास आ gaya...Slayer ने उसको भी खा liya.....ye उसके लिए हिट एंड ट्रेल मेथड की तरह tha...aur ये काम कर रहा tha...to बस इसी तरह से उसने और 10 लोगो को मर्रा और सबके आत्मा को खा गया par...uske बाद रात का वक़्त hua...lekin इन् जनाब का पेट नहीं भरा था अभी tak...inhone एक और बन्दे को मारने की कोशिश ki...par इस बार कुछ नहीं hua..utla स्लेयर को खुद चोट लग gayi...aur वो भी जोर se...aur ये अभी तक नहीं हुआ था उसके saath...wo उठा और उसने वापस से उसी आदमी को मारने की कोशिश ki...aur एक बार फिर से छूट वापस स्लेयर को hi लगी और वो साइड में गिर gaya...waha पे पहले से एक बाँदा था उसने स्लेयर की ओर देखा...

बाँदा - 1सत डे क्या बरोथेर...

स्लेयर ने बस गर्दन हां में हिलाया...

बाँदा - tabhic...rule मालूम होने को होता ना brother...yaha पे बस शाम को hi लड़ाई hoti...aur कभी nahi....aur बस काम करते यहाँ pe....aur अगर रूल्स के माफिक नहीं chale...to khalash.....khood hi खुद को मार देते है log...jaadu किआ है ऐसा इधर..

स्लेयर ने उसकी बात सुन्नी और वो इतना समझ गया की यहाँ पे बस शाम में hi लादयो होगी और खाना milega...waise तो वो और भी बातें पता करने को hua...par वो थक गया tha....sayad पहली बार थक गया था wo...aur इसी वजह से वो वही पे सो गया..

वही हम सब भी पहुंच चुक्के थे School....School आने के बाद मैं सोने चला गया और बाकी सब bhi....Room में आते hi मैंने कपडे चेंज किये और एक बार वापस ध्रुव से कनेक्ट करने की कोशिश ki...par इस बार भी नहीं हुआ कुछ..

मैं जल्दी से बीएड पे चला गया और मुझे नींद आ गयी और मैं पहुंच गया अपने ट्रेनिंग वाली जगह pe....waha पे कूपर और अलबूस the...Mainwaha आते hi ध्रुव को आवाज देने लगा पर वो कोई रिप्लाई hi नहीं दे रहा था....

मैं अभी और कुछ करता उससे पहले जो मुझे त्रिनकरता था उसने कहा....

वो - ध्रुव थोड़ा परेशां है या कहु तो सदमे में hai...wo सुबह तक ठीक हो jaayega....aur आज तुम्हे सच में सोने की जरुरत है तो आज ट्रैनिंग नहीं hogi....ab जाओ...

उसने ऐसा कहा और फिर तुरंत hi वो जगह hi गायब हो गयी ना अलबूस दिखने लगा ना hi Cooper...aur मैं कब सोया मुझे याद नहीं....

आज के लिए इतना hi...next अपडेट में देखते है धर्य्व को क्या hua....aur अब कोण सी वैम्पायर को लेके जॉन जिको वो चमगादड़ों की रानी अपनी शक्ति de....saath hi फोमोस की कुछ baatein.....aur वो कोण सा जीव था जिसने इतना हड़कंप मच्चा रखा था उसके बारे में भी जानते है...

उपदटेस अभी लेट हो सकते hai.....bahut से काम आ गए है एक साथ इसी वजह से....
 
अपडेट -42

अब तक

मैं ज्वाला के बॉडी में था की अच्चानक से कुछ हुआ और मैं अपनी बॉडी में पहुंच गया और और वह ाकनक से hi कुछ हुआ और मैं बेहोश हो गया और मुझे एक आदमी दिखाई diya....iss आदमी ने एक पुरे गाओं को hi ख़तम कर दिया और उसके बाद रो भी रहा tha...ajeeb था वो परबात वह तक भी नहीं रुक्की मैं उस आदमी को मारने जाने लगा और जैसे hi मैंने उसको टच किया वापस से रौशनी hui...maine मेरी आँखें बंद की और वापस से वही पहुंच गया जहा कुछ देर पहले tha...aur इस बार मेरे पास एक 3 पैरों वाला जीव पड़ा हुआ tha..ajeeb सा jeev...par सिर्फ वही nahi...saath में मुझे सामने दिखे पोलर बेअर्स के राजा और रानी और एक बड़ी सी चमदार जैसी दिखने वाली bhi...w उनकी रानी थी जिन्होंने पोलर बेअर्स के कबीले पे हमला किया हुआ tha...Maine उन् तिण्णो को खोला और ओल्ड आउल और उसके लोगो की मदद से वह से बहार निकल aaya...hamdaradon की रानी को जब ये सब रोकने को कहा तो उसने बताया की उसका शरीर अब उसकी पूरी पावर्स को कण्ट्रोल करने के काबिल नहीं बच्ची hai.....agar मैं किसी वैम्पायर को उसके पास लेके जॉन तो वो उसको अपनी पावर्स दे देगी और वो उन् सब को रोक सकती hai...uske बाद मैं वह से सबको ये समझा के निकल गया की वापस वह जानना मौत को दावत पे बुलाने जैसा है तो वो ना kare...Jwala ने बेअर्स को कबीले के पास टेंट लगाने को बोल diya...Main पार्टी में आया और मैंने देखा सब ख़तम हो गया है चची अलग गुस्स्से में thi...aur थोड़ी दांत सुनने के बाद हम स्कूल को चल diye...School में जाते hi मैं अपने रूम में गया और ध्रुव को पुकारने laga...kyunki वो कोई जवाब hi नहीं दे रहा tha...fir मैं सो गया ये सोच के की सायद वो ट्रेनिंग वाले जगह पे मिले par...aaj ट्रेनिंग भी नहीं hui...Mujhe जाने को कह diya...aur कहा की ध्रुव कल सुबह तक ठीक rahega...wahi स्लेयर अभी नए नए नियमो को जान रहा था फोमोस ki...aise नियम जिनको ना मैंने पे खुद के हाथो मरने का खतरा था...

अब आगे..

पहले हम चलते है डेमोस वह पे आज सेनापति को सज़्ज़ा मिलने वाली thi....waha पे वो अपने पुरे परिवार के साथ खड़ा tha...aur साथ में उनसब को देखने आये हुए लोग भी the...sab चिल्ला रहे थे मारो maaro...jaldi maaro...ki तभी एकदम से सन्नाटा चा gaya..sab चुप हो gaye....jaise किसी ने भूत देख लिया ho...chup होने की वजह थी लूसिफ़ेर का वह aana...apne परिवार के saath....aur वो सब वह ऐसे आये थे जैसे कोई पिक्चर देखने जाता ho...sabhi अपनी अपनी जगह पे जाके बैठ गए....

लूसिफ़ेर - अब शुरू किया जाए...

उसने धीरे से hi बोलै पर उसकी आवाज चारो ओर gayi...aur सबने साफ़ साफ़ सुन्नी hogi...sannate की वजह se...uski बाय ख़तम होते hi सनता भी ख़तम वापस से सारे "मारो मारो जल्दी मारो.." चिल्लाने लग गए....

Par....Seenapati वह पे पास में पड़ी तलवार को बस देखे जा रहा tha...aur फिर अपने परिवार ko...aur फिर वापस से उस तलवार ko...wo कुछ कर नहीं रहा tha...bas देखे जा रहा tha...aur अब बस रोने को hi tha...usko पता tha...wo खुद को नहीं मार paayega...usko लूसिफ़ेर ऐसा करने hi नहीं dega...aur वो अपने परिवार को मारना नहीं चाहता tha...aur सायद इस उम्मीद में था की आज तक उसने लूसिफ़ेर की और डेमोस की इतनी सेवा की सायद उसको दया आ जाए..

इसी bich...wo जो अभी उपसेनापति था और इसके मरने के बाद सेनापति बनने वाला था, इसको पता नहीं है की लूसिफ़ेर सेनापति को खुद को मारने नहीं देगा, वो जोर से बोलता है...

उपसेनापति - उन्हें नहीं मार सकते तो खुद मर्डर जाओ...

और उसकी इस बात के बाद सब यही बोलने लग जाते है खुद मार jao...maro maro....jaldi marro...par इन्हे कहा पता था ये सब...

जब लूसिफ़ेर को लगा अब ये कुछ नहीं करेगा तो उसने इशारा किया और कुछ लोग उनकी तरफ बढ़ने lage....ye थे jallad...Demos में इनका अलग hi रुतबा tha...ek तरह से इनको देवता की तरह पूजा जाता tha...koi भक्ति व्यक्ति के कारण nahi...pujne का कारन था daaar...sab डरते थे inse...aur इनके जैसों se....Lucifer जो था वो अक्सर इनसब को भेजा करता था सज़्ज़ा देने के liye..aur ये जिस तरह से सज़्ज़ा देते थे उससे बेहतर मौत होती thi....to लोग इनको पूजते थे की सज़्ज़ा के बदले मौत hi देदो....

तो ये लोग बढ़ने लगे सेनापति और उसके परिवार की oor....inko अपनी ओर आते देख सेनापति भी घबरा गया अपने लिए और साथ में अपने परिवार के iye...jo इस वक़्त वह पे बंधे हुए the....Senapati ने जल्दी से तलवार उठायी और बस उनकी रस्सियां खोल di....aur लूसिफ़ेर की ओर देखने laga...aur अपने हाथ से तलवार जमीं पे गिर्रा दी और वही घुटनो के बल बैठ gaya....puri जगह पे एक बार फिर से सनता फैला हुआ tha...Jallad सारे भी अभी रुक गए थे और लिउसीफर की ओर देख रहे the...par लूसिफ़ेर उसकी नज़र कही और hi thi...wo कुछ ऐसा देखने वाला था जो उसने सोचा नहीं tha...aur ये चीज़ hi उसको एक अलग खुसी दे रही थी....

khaaaaaaaaachhhhhhhhhhhhhh......dmmmmmmmmm......dmmmmmm......drrrrrrrrrrrrrrr

ये आवाज aayi...aur इसीके साथ सब के सब हैरान रह gaye...jitna सब हैरान थे लूसिफ़ेर उतना hi खुश tha...uski खुसी की तो सीमा hi ख़तम हो गयी thi...saayad hi वो इतना खुश हुआ हो कभी...

चलिए इसको यही खुश होने देते है और हु चलते है वापस हीरो के पास....

मैं सुबह utha..aur जल्दी से रेडी होक ध्यान के लिए जाने laga...ki तभी याद aaya...Dhruv के bare....par मैं कुछ बोलता उससे पहले hi उसकी आवाज आयी...

ध्रुव - पहले ध्यान लगा lo...uske बाद बात कर लेंगे...

आवाज से तो ठीक hi लग रहा tha..to मैंने भी उसकी बात को मान के चल दिया ध्यान lagane....waha पंहुचा तो बुआ कविता मैडम और निकिता थे वह pe....Master नहीं थी aaj....Maine सोचा कही और कुछ काम hoga...aur फिर मैं भी बैठ गया वही ध्यान लगाने....

आज भी वैसा hi हुआ पहले कुछ दिखा hi नहीं फिर जब मैंने होने चन्दर एलिमेंट को याद किया तब वो dikha..aur तब मैं उसपे काम करने laga...ab ये भी सोचना था की कोण सा एलिमेंट chunnu....yaa फिर कोण सा एलिमेंट मिल जाएगा मुझे...

ध्यान लगाने के बाद जब आँखें खोली तो मास्टर के जगह पे दब बैठा हुआ tha...aur वो बस बैठा हुआ tha...hum सब को देख रहा tha...aur सायद उसने मुझे ध्यान से जागते हुए देख िया..

दब - यार कितनी देर तक ध्यान लगते ho...itna कोण करता है....

मैं जग्गा और उसके तुरंत बाद बाकी सब bhi....aur उन् लोगो ने भी उसको मास्टर की जगह पे बैठा dekha...aur सब थोड़े नाराज़ हो गए....

कविता मैडम - एल्फ Prince....tumhe पता भी है किसकी जगह पे बैठे हुए हो तुम....

दब - (यहाँ वह देख कर) Nahi...par उससे क्या होता है....

निकिता - वह से पहले हैट जाओ फिर बात करते है...

दब को समझ आ गया की ये सब गुस्सा करने वाले है तो वो बस वह से हैट gaya...aur बोलै...

दब - मुझे क्यों नहीं बताया यहाँ के बारे mein...Main भी ध्यान लगाने आ जाता यहाँ....

निकिता - यहाँ आने की क्या जरुरत तुम तो वैसे भी ध्यान लगा hi लेते हो बाकियों के साथ...

दब - हां पर तुम लोग यहाँ क्यों ध्यान लगाने आते ho...kya यहाँ पे कुछ खास है....

इतना बोल वो वापस से वह हर जगह देखने लग गया...

बुआ - एल्फ प्रिंस यहाँ पे भीड़ नहीं hoti...bas हम कुछ hi होते है इस taraf...aur जैसा तुमने देखा हममे आदत है बहुत वक़्त तक ध्यान में बैठने की तो बस वही करते है...

दब - accha...thik है फिर मैं भी यहाँ आ जाऊंगा कल se....main भी लम्बे वक़्त तक ध्यान लगाना चाहता हु...

निकिता - मैं भी एल्फ कौंरटय की रानी बनना चाहती हु...

दब - क्या बोल रही हो tum...ye नहीं हो sakta....tum एक वैम्पायर हो....

निकिता - हां तो जो तुमने बोलै ना वो भी नहीं hi हो sakta...bahut सी वजहें है इसके picche....jaise में तुम ज्यादातर अपने hi बारे में सोचते रहते ho...dhyaan लगाने वक़्त ना सिर्फ अपने बारे में बलि अपने आस पास के वातावरण के बारे में भी सोचना पड़ता hai...dusra तुम्हारा दिम्माग घूम फिर के एक जगह hi जाता है bas...aur ये भी तुम्हे रोकके rakhega..aur...

कविता मैडम - हां हां बस भी करो अब वो समझ gaya...chalo अब तैयार holo...aur क्लास के लिए भी जानना है....

दब - हां क्लास के लिए भी जाना hai.....waise आप दोनों को तो पता hoga...Prof. सूरज कहा gaye....wo पता नहीं क्यों मेरा कजिन उसके बारे में पूछ रहा था.....

निकिता - देखा ये भी एक वजह है...

बुआ - Nikita....chalo jao....DB हममे नहीं पता वो कहा hai...bas इतना सुन्ना है की उन्हें वक़्त लगेगा आने mein...ab वो कब आते है ये तो वो hi जाने...

कविता मैडम - Haa...par तुम्हारे भाई को उससे क्या काम..

दब - पता नहीं...

कविता मैडम - तो कोशिश karo....pata लगाने की...

बुआ - कविता chalo...ab हमारे जाने का वक़्त हो गया है...

बुआ और कविता मैडम भी वह से चले gaye...ab वह पे बस कन्फ्यूज्ड सा दब बचा tha....aur वो भी थोड़ी देर में अपने रूम में चला gaya....wahi मैं अपने रूम में आके ध्रुव से बातें कर रहा tha...usse पूछ रहा था की आखिर कल हुआ क्या tha....par वो कुछ बताने के जगह मुझसे hi पूछे जा रहा था की जब मैं अपनी बॉडी में आया तो क्या कुछ हुआ था....

मैंने उसको उस आदमी और गाओं के बारे में bataya...jisko सुनने के बाद वो वापस से जवाब नहीं देने लगा अजीब था ye...haa पर इस बहार जनाब ने बता दिया की वो अब 2 क्लासेज के बाद बात karenge...unko भी कुछ काम करने है...

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मैंने भी सोचा होगा कुछ काम isko..to जाने देते hai...aur क्लास में चला गया ब्रेकफास्ट करने के baad.....weaponary की क्लासेज थी वही जो प्रोफ. सूरज लिया करते the....ab कोई और ले रहा tha...par इससे ज्यादा फर्क नहीं पद रहा tha...sab पढ़ रहे the......ye क्लास ख़तम hui...aur फिर आयी बारी दूसरे क्लास की जादुई दवाई वाली क्लास ki....Pankaj के पापा वाली क्लास ki...hum सब गए waha....aaj भी होड़ साहब खुद आये the....par वो परेशां लग रहे the...waise तो हममे उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए tha....par पता नहीं क्यों अच्छा नहीं लग रहा था उनको ऐसे देख ke....class तो उन्होंने कम्पलीट करा दी पर डॉब्टस और प्रक्टिकल्स रिलेटेड प्रोब्लेम्स के लिए वक़्त नहीं diya...ye सबसे अजीब बात thi....iss स्कूल में जहा तक मुझे पता है वो hi थे जिन्होंने ये सब शुरू किया tha...aur इसको स्ट्रिक्टली फॉलो करते the..isse स्टूडेंट्स को काफी मदद मिलती थी...

तो आज उन्होंने ये सब नहीं कराया और वह से निकल gaye....DB और निकिता दोनों hi मेरे साथ थे....

मैं - तुम सब जाओ मैं थोड़ी देर में आता हु....

मैं पता करना चाहता था उनको हुआ क्या hai...aur इसके लिए उनके पीछे जानना पड़ता पर अभी इन् दोनों को साथ ले jaana...khass कर दब को अच्छा प्लान नहीं होता...

मैंने उनसे जाने को कहा तो दब महाराज ताने मारने लग गए...

दब - क्यों कहा जा रहे ho...koi और भी सीक्रेट है kya....aur बढ़ी लोग है क्या यहाँ तुम्हारे ग्रुप के....

मैं - क्या...

निकिता - क्या बात hai...kuch हुआ है kya...dark....

इतना बोलके वो दब की ओर देखने lagi...jaise बता रही हो की वो ये बात यहाँ नहीं बोल सकती ना....

मैं - नहीं ये उसके बारे में नहीं hai....abhi जाओ मैं आता हु थोड़ी देर मैं....

दब - ये डार्क क्या hai...kya बोल रही थी ये...

मैं - मुझे क्या पता उससे पूछो....

वो उसकी ओर मुद्दा और मैं चला गया वह se...waise अगर अभी ये ध्रुव सही होता तो ये सब करने की जरुरत नहीं hoti...apni बॉडी उनको दे देता और खुद निकल जाता होड़ जी के picche...par ये भी भाव खा रहा है अभी...

मैं वह से निकला और देखने लगा की आखिर वो गए kaha....par कुछ मिला hi नहीं ऐसा लगा जैसे वो गायब हो गए है वह से...

मैं - Dhruv....tum सुन रहे ho...mujhe लगता है इनके साथ कुछ तो गड़बड़ है....

ध्रुव - ऐसा लगता है तो ओल्ड आउल से बोलो इनपे नज़र रखने ko...ya वो किसी और को भेज दे...

मैं - हां ये सही है....

मैंने तुरंत ओल्ड आउल को वह पे बुलाया और उससे बोलै की मुझे उनपे नज़र रखनी है...

ओल्ड आउल - मैं खुद भी ये कर देता par...abhi वह कैंप में मेरी जरुरत पद रही hai...ar मुझे अपने यहाँ के भी काम देखने hai...maine अपना सबसे खास उल्लू आपके काम पे लगा देता hu....aap उसपे मेरे जितना hi याक्किन कर सकते है...

मैं - अरे ठीक hai...aur इतना सब बताने की जरुरत नहीं thi...bhej दो उसको हां बस ये बता dena...mujhe रोज खबर चाहिए...

ओल्ड आउल - जी ठीक है...

वो वह से चला गया और मैं चल दिया नेक्स्ट क्लास की oor...waha पंहुचा तो निकिता और दब दोनों hi एकदम अलग अलग बैठे हुए the...sayad वापस से कहा सुन्नी हुई हो दोनों mein...Main गया और बस बैठ gaya....abhi उड़ना sikhana...teleport hona...inn सब की क्लास चल रही thi....wo भी थ्योरी..

मैं - ध्रुव एक और बात hai....wo उस रानी ने कहा है की एक वैम्पायर को लाओ और वो उसी को अपनी पावर्स degi...jiske बाद hi उसके सारे लोग रुकेंगे...

ध्रुव - Vampire....nahi ऐसी वैम्पायर जिसपे हम याक्किन कर sake...jo उन् पावर्स का गलत उसे ना करे...

मैं - जैसे निकिता...

ध्रुव -हां वो हो सकती है par...usse पहले ये जानना होगा की क्या वो ये करना चाहती hai.....Dark पावर के बारे में भुल्ले तो nahi...abhi तक वो परेशां है इसको लेके...

मैं - हां ये भी hai...mujhe उससे बात करना होगा फिर hi कुछ कर सकते है...

ध्रुव - हां और अगर वो मन्ना करे तो हमारे पास और भी ओप्तिओंस होने चाहिए...

मैं - वैम्पायर में तो चची है नाना नानी hai...aur रूपल दीदी भी तो hai......haa पर वो पुरे नहीं है सायद...

ध्रुव - रूपल दीदी.... उसके बारे में सोचना भी mat....wo पहले से खतरनाक है और खतरनाक बनाने की कोई जरुरत नहीं है खुनी घुड़सवारों की रानी को....

मैं - पर और कोण कोण ऑप्शन hai...aur तुम उनको ये क्या बोलते रहते ho..gudsawaron की रानी...

ध्रुव - कुछ नहीं वो बस उसको देख के किसी की याद आने लगती hai....aur ओप्तिओंस तो और ढूंढने honge...kyunki चची आएगी नहीं बल्कि वो तो और तुम्हे बंद कर देगी घर mein....aur नाना नानी का भी यही हाल hai...to कोई नया ढूँढना hoga...yaa फिर हम निकिता को hi तैयार करे...

मैं - हां निकिता को तैयार करने का आईडिया सही है...

ध्रुव - रूपल दीदी से याद आया मुझे लगता है आज भी यहाँ से भागना पड़ेगा.....

मैं - क्लास बंक नहीं कर sakta...Bua ने मन्ना किया hai...waise भी मैं काम hi क्लास अटेंड कर रहा हु...

ध्रुव - क्लास बंक नहीं करने कह रहा पर निकलना तो padega...aur सायद एक और चीज़ भूल रहे हो तुम...

मैं - भूल रहा hu....nahi अब तो सब बता दिया hai....ek मिनट वो जीव उसके बारे में नहीं बताया tha....wo रूम में है मेरे....

ध्रुव - हां पता hai...aur ये सही किया की उसकी बॉडी अपने पास रख li...ye बहुत hi खास प्रजाति hai...mind रीडर्स ki....ye सब जान जाते hai...sab कुछ पर होस्ट की साड़ी एनर्जी भी चूस लेते है जैसे तुम्हारी चूसने लगे the...par डार्क पावर ने बचा लिया तुम्हे...

मैं - ये डार्क पावर के बारे में भी नहीं बताया है अभी tak....iske बारे में भी बताओ...

धुर्व - हां इसके बारे में भी bataunga....par अभी कोई भी बहाना बनाओ और निकलो यहाँ se....aur एक जार और नमकीन पानी का बंदोबस्त karo...wo बॉडी बहुत देर से बहार hai...tumhe उसको संभल के रखना चाहिए था....

मैं - ये बात पहले बतानी थी tumhe...har बार बात करना ताल रहे थे तुम...

ध्रुव - अब बच्चो की तरह शिकायत करना बंद करो और निकलो यहाँ से...

मैं - प्रोफ. मुझे टेलेपोर्टेशन में एक बात समझ नहीं आयी...

प्रोफ. - बच्चे अभी वक़्त है इसको पूरा समझने mein....aur जब तक खुद टेलिपोर्ट नहीं होते ना तब तक साड़ी बातें समझना मुश्किल hi होती hai....lekin कोशिश करने में क्या दिक्कत है बताओ क्या परेशानी है....

मैं - प्रोफ. मैं वो छोटी चीज़ों को टेलिपोर्ट करने की कोशिश कर रहा tha...aur मैंने इसी कोशिश में अपनी एक खास चीज़ खो दी hai....kya वो वापस आ सकती है...

प्रोफ. - आ तो जायेगी पर वक़्त lagega....dekho तुमने उसको बताया एक जगह से दूसरे जगह जाना है तुमने रास्ता भी खोला hoga.....par रस्ते की बनावक़्त ...उसकी लम्बाई चौड़ाई इन् सब के बारे में नहीं सोचा होगा और वो अभी कही घूम रही hogi....jaise main..agar मैंने अभी तुम्हे टेलिपोर्ट करना चला और उन् चीज़ज़ों पे गौर नहीं किया तो तुम घूमते rahoge...bahut वक़्त तक....

ध्रुव - यहाँ से निकलने को बोलै था ये क्या कर आहे हो....

मैं - मुझे लगा ये मुझे बहार कर denge...kyunki ये सबसे इजी टॉपिक था और मुझे इसमें भी प्रॉब्लम है पर ये तो सब बताने लग गए...

ध्रुव चुप हो gaya....aur प्रोफ. मुझे समझते रहे क्लास ख़तम होने tak...unka मैं नहीं भरा था अभी tak..wo मुझे अपने साथ उनके केबिन में लेके जानना छह रहे the...wo तो मैं भाग गया वह से और रूम में आ gaya....aur जल्दी से जार और नमकीन पानी का बंदोबस्त kiya....aur उस जीव के बॉडी को ध्यान से उसके अंदर rakha....jisme ध्रुव ने मदद की...

और फिर बुआ की क्लास की बारी आयी तो मैं वह चला गया...

शाम होने को है तो हम फोमोस चलते है अपने स्लेयर के pass...iss फोमोस पे आके उसको एक दिन hi हुआ tha...aur वो यहाँ के बारे में बस थोड़ा बहुत hi जान पाया tha...yaha पे लीडर वही है जो सबसे खतरनाक hai...aur जिसका दिम्माग सबसे तेज़्ज़ hai...par..abhi जो लीडर था वो कभी बहार आता hi नहीं tha...chup के रहता tha....taaki कोई उसको मार ना de..khass करके शाम के वक़्त तो जैसे वो हो hi नहीं उस प्लेनेट pe....Subah के वक़्त वो रोज वह आता था नज़र रखने ये सब स्लेयर ने सुन्ना tha...Leader यहाँ आता और सबको काम deta....aur उसके बदले उनको सहूलियत दी जाती thi...aur उसके बाद वो दोपहर में hi निकल लेता और फिर सीधा रात के वक़्त hi आता था...

इस जगह पे कुछ ऐसी चीजजें थी जो ना करने की हिदायत दी जाती thi...hidayat इसलिए क्यूंकि जो भी उन् कामो को करने वाला होता था वो या तो गायब हो जाते या बस उनकी लॉस मिलती thi...aur इन् चीज़ज़ों में सबसे पहले आयति थी ध्यान lagana....iss प्लेनेट पे ध्यान लाना अल्लोवेद नहीं tha...dhyaan लगाने से आपकी पावर्स बढ़ती hai...aur ये फोमोस आपको करने नहीं देता है...

हां तो शाम का वक़्त था स्लेयर ने आज सुबह से काम भी किये the...jo उसने कभी नहीं किया tha....kaam से उसका कोई वास्ता hi नहीं tha....school में पढ़ाई ki...fir उसके बाद खून खराबे में उतर aaye...aur फिर बस नए नए पावर्स की तलाश में लगे the...kaam वाम के चाकर में लगे hi नहीं ये kabhi...jo आत्माएं मिलती thi...unse एनर्जी मिल जाट थी कुछ पर वो एनर्जी काम करने जैसी नहीं thi...aur इसी वजह से इनकी हालत ख़राब थी आज...

लड़ाई का टाइम शुरू hua...aur सब लड़ने लग gaye...koi इसको आर रहा है कोई उसको मार रहा hai...bas यही चल रहा था yaha...Slayer ने भी 2 लोगो को marra...bas दो hi log...aur दो hi aatmayein....aur इतने में वक़्त ख़तम हो gaya...paraaj स्लेयर को आत्मायों से काम नहीं चकने वाला था उसने जिनको मर्रा था उनकी बॉडीज भी uthali....aur जैसा की वह पे बहुत से लोग करते the...usne भी उनको खाना शरू कर दिया....

इस जगह की बस यही बातें बताने लायक thi...ab इस जगह पे हम एल्फ किंग के साथ hi aayenge...next अपडेट में...

अब वापस से चलते है हीरो के पास क्लास ख़तम हो गयी थी मैं अपने रूम में आ गया था...

मैं - ध्रुव बताओ अब डार्क पावर और इस जीव के बारे में...

ध्रुव - देखो डार्क पावर के बारे में अभी बताना थोड़ा कठिन hai....ek तो मैं इसमें विशेषज्ञ नहीं hu..aur dusra..ye मेरा काम भी नहीं hai...haa पर मैं वडा करता hu...jald hi उससे मिलाऊँगा जो तुम्हे इसके बारे में bataya...haa पर मैं इस मंद रीडर के बारे में बता सकता हु...

मैं - चलो कुछ नहीं से अच्छा कुछ hi sahi...batao....aur ये कैसा नाम है मंद reader...ye सच में दिम्माग पढता है क्या...

ध्रुव - हां कह सकते है waisa...waise ये दिम्माग नहीं padhta....ye बस हमारे दिम्माग में जो यादें बातें डब्बी हुई होती है ना उनको बहार निकलता hai....hamare सामने रख देता hai...aur हम उनमे खो जाते है और ये हमारी साड़ी एनर्जी सोख लेता है और हममे मार देता hai...yaa बस हमारा इस्तेमाल करता है जैसे में ये wala....ye बहुत hi खास प्रजाति है मंद रीडर्स ki....sayad गिनने चुनने में से एक हो...

मैं - इसमें ऐसी क्या खास बात है...

धुव - ये भी यादें hi दिखता है par...bahut पुराणी yaadein...aur ये आत्मा पे हुम्ला करता hai...isko वैसे तो सोल रीडर्स की केटेगरी में रखना चाहिए tha....par वह पे ये फिट नहीं होता अपनी बॉडी के बनावट की वजह se...khair ये सब बाद mein...pahle इसके बारे में sunno...isme इतनी पावर है की अगर ये चाहे तो हमे हमारे पिछले जन्मो तक की बातें याद दिला de...par ऐसा होता नहीं है...

मैं - पिछले janam...ye पूर्वजन्म पिछलेजनम इनमे मैं नहीं मंटा...

ध्रुव - ना मैंने से क्या होता hai....wo छोड़ो हम इस्पे बात कर रहे the...to ये वो सब भी कर सकता hai....ab इसको यहाँ पे ऐसे रखने की वजह भी जान lo....Maine सुन्ना है टाइटन प्लेनेट पे इसका उसे होता है पूछताछ करने के liye...aur सिर्फ वह hi नहीं ओरियन पे bhi.....issiliye मैंने इसको यहाँ रखने को कहा hai....kya पता कभी हमारे काम आ जाए...

मैं - वाह ये तो कम्मल की चीज़ hai...ye सही किया मैंने इसको यहाँ लेके आ गया...

धरु - चलो ये सब हो गया अब चलते है रूपल के pass....sayad उससे बात करनी होगी....

मैं- बात करनी होगी पर क्यों...

ध्रुव - कल का भूल गए तुम वो जो उसकी सहेली भागी thi...wo सब मुसीबत में hai....agar रूपल को ना रोक्का तो वो अनजाने में उन् सभी की मौत की वजह बन जायेगी....

मैं - Kya....aur तुम ये सब अब बता रहे हो....

ध्रुव - पहले मैं कुछ परेशां tha..aur उसके बाद तुमको क्लास अटेंड करनी thi...ab मैं क्या करता isme....ab भी देर नहीं हुई hai...jo भी होना होगा वो आधी रात से hi शुरू hoga...wo सब कल हझआ tha...to उन् सबके मरने में अभी 3 और रातें होनी chahiye.....haa एक रात में सबक तो शीख hi लिया होगा उन् सब ने...

मैं - जल्दी चलो fir....Jwala पोर्टल खोलो मेरे घर तक के लिए....

मैंने ऐसा बोलै और पोर्टल खुल गया और मैं बिंन्न कुछ सुनने अंदर चला गया..

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में देखते है की क्या हुआ डेमोस में जो सब हैरान हो गए और लूसिफ़ेर ख़ुशी के मारे पागल हुआ जा रहा tha...saath hi फोमोस के लीडर और एल्फ किंग की मीटिंग भी dekhenge...aur मैं क्या करता हु और कैसे बचता हु रूपल दीदी की सहेलियों को...

तो बनने रहे
 
अपडेट - 43

अब तक

मैं ओप्तिओंस ढूंढ रहा था की किसको लेके जाना है ज्वाला के कबीले में उस रानी से मिलने ताकि उसको पावर्स मिल sakke...par आखिर में ध्रुव के साथ बात करने के बाद एक hi नाम आया और वो था निकिता ka...par उससे पहले तो उसको मानना hoga...wo अभी भी डार्क पावर से hi परेशां है कही इस पावर से भी कोई गड़बड़ हुई तो पता नहीं क्या karegi...wahi दूसरी ओर लूसिफ़ेर बड़ा खुश था अपने सामने ऐसी घटना को होते देख ke....wo तो जैसे ख़ुशी के मारे रो दे उतना खुश था वही बाकी के सब हैरान the...Slayer को अब लाशें कहानी पद रही thi...sayad वो अब सोफ़िया अपनी माँ की तरह बनने वाला था... वही ध्रुव से बात करते हुए एक और बात का पता चला रूपल दीदी की जो सहेलियां है उनको खतरा है खुद रूपल दीदी से hi...aur मुझे उनको बचाना है पर अभी हमारे पास 3 रात बाकी the....saath hi मंद रीडर के बारे में भी पता चला mujhe...wahi जीव जिसकी वजह से पोलर बेअर्स के कबीले पे ये सब हो रहा था...

अब आगे

चलिए पहले चलते है हीरो के पास यानी मेरे paas....aaj फिर से स्कूल से बहार एना pada...baat hi ऐसी thi...Dhruv ने बताया की रूपल दीदी अपनी hi सहेलियों की मौत का कारन बन सकती है और अब मुझे जानना hi था उनको rokne...maine ज्वाला से बोलके पोर्टल खुलवाया और उसके अंदर चला gaya...waise तो मुझे जानना घर पे tha...Didi के pass...par पता नहीं कैसे मैं ज्वाला के कबीले में पहुंच गया...

मैं - ये क्या hai...Jwala मैंने घर के लिए बोलै था यहाँ क्यों लेके आ गए...

ज्वाला - वो चमगादड़ों की रानी उसकी हालत ख़राब है....

मैं - Kya...par वो तो ठीक हो रही थी naa....Vaidya जी कहा है...

ज्वाला - वो उसी को देख रहे hai...Old आउल के यहाँ से भी एक वैद्य आया है उसको dekhne...par...tum कुढ़ देख लो...

मैं - हां चलो....

वो मुझे लेके गया अपने साथ और जब मैं पंहुचा वह तो देखा की उसके शरीर पे और ज्यादा चोट लगी हुई thi...aisa लग रहा था जैसे उसको मर्रा हो...

मैं - ये क्या hai...inke जखम बढ़ कैसे गए है...

ज्वाला - ये ठीक हो hi रही थी ki.....kuch बेअर्स यहाँ आये और इनको....

मैं - Kya....tumhare रहते हुए ऐसा हो gaya....tumhare लोग क्या कर रहे the.....aur बुलवाओ उन् बेअर्स ko...bewakoof है सब के सब...

ज्वाला ने किसी को भेजा उनको बुलाने के लिए....

ज्वाला - सिपाही यहाँ पे the....par ये सब बहित जल्दी hua...aur जो बेअर्स आये थे वो तो इलाज के लिए आये the...aur उन्होंने hi फिर ये सब कर diya....jo लोग थे इसमें वो पकडे गए hai...par..

मैं - हां बताओ पर क्या...

वैद्य जी - इसमें पोलर बेयर किंग का हाथ hai....wo बलदा लेना चाहते थे और उन् लोगो को बस इसीलिए भेजा था...

मैं - गजब चुटिया है ye....kisne इसको राजा बना दिया पोलर बेअर्स का....

ज्वाला - बस ऐसी hi वजहों से तो हम दोनों कबीलों की सोच नहीं milti...hamesha बेवकूफी करते है वो सब...

मैं - उसको भी bulao....aur साथ में रानी को भी bulwao....yaha मैं कुछ और इम्पोर्टेन्ट काम करने निकला था और अब ये कर रहा hu...Jwala वो क्या बोलते hai...haa षभा bulao...sabko bulao...in सब को कुछ समझाना hai...apne कबीले वालो को भी bulao....Old आउल तुम भी अपने लोगो के साथ यहाँ आओ...

गुस्सा आ रहा tha...bahut jyada....matlab कोण सा ठीकठाक राजा ऐसा कड़ा uthayega...uss चूतिये को पता tha...ki उसका राज्य तभी मिलेगा जब वो चमगादड़ों की रानी अपनी ुरी शक्ति किसी वैम्पायर को de....aur वो वैम्पायर उसके लोगो को रुकने को bole...agar अभी कुछ हो जाता isko...to पता नहीं क्या hota...sayad हमेशा के लिए इन् बेअर्स को अपना कबीला नहीं मिलता...

ध्रुव - तो अब क्या करोगे...

मैं - क्या karunga...maan तो कर रहा है उस राजा को वापस भेज du...uske कबीले में वो खुद समझ जाएगा...

ध्रुव - nahi-nahi ये ज्यादा हो जाएगा...

वो बोल hi रहा था की मेरे सामने ओल्ड आउल आ गया...

ओल्ड आउल - आपने बुलाया...

मैं - Haa...tum अपने लोगो के साथ आये हो ना....

ओल्ड आउल - हां वो भी आये है पर बात क्या है...

मैं - कुछ और जिम्मेदारियां देनी है tuhe...main जनता hu....tum उसको सही से देखोगे...

ओल्ड आउल - कैसी जिम्मेदारियां...

मैं कुछ बोलता उससे पहले ज्वाला वापस आया और उसने कहा की सब इक्कठा हो गए है...

मैं उसको और ओल्ड आउल को लेके वह से चल diya...par जाने से पहले दोनों hi वैद्यों को कहा की कोई भी अंदर नहीं आना chahiye..agar कोई कोशिश kare...to मार दो...

बहार हम एक खली जगह पे pahuche...jaha पे कुछ पेड़ भी the...Old आउल के लोग वही पे बैठे the....aur बाकी के सभी bhi...Main जाके खड़ा हो gaya....meri एक साइड ओल्ड आउल और दूसरी साइड ज्वाला खड़ा हो गया...

मैं - इतने काम वक़्त में आने के लिए shukriya....ab मुद्दे पे आता hu....yaha कुछ बेवकूफों ने कुछ किया hai...binna उसके रिजल्ट के बारे में सोचे hue....pata नहीं क्या चलता है इन् बेवकूफों के दिम्माग mein...ab सज़्ज़ा तो milegi....Jwala बुलाओ उन् लोगो को....

मेरी बात ज्वाला ने sunni...ek बार उसने मेरी ओर dekha...sayad उसने ऐसा नहीं सोचा hoga...Maine वापस से इशारा kiya....aur उसने तुरंत hi सिपाहियों को भेजा उनको लाने के liye...Shipahi अपने साथ 6 बेअर्स को लेके aaye...aur सामने खड़ा कर दिया उनक...

मैं - ये जो सामने दिख रहे है यही है वो bewakoof...inn लोगो ने उसपे हमला kiya....usko घायल किया hai...jiske पास रास्ता है बेअर्स के कबीले पे हो रहे हमले को रोकने ka...Sayad ये नहीं चाहते की बेअर्स कभी अपने कबीले में वापस जा पाए...

इतना बोलके मैं रुक gaya...aur सामने देखने laga....unn सब के reactions...bear किंग के reacions....usko कोई पछतावा नहीं tha...ye उन् लोगो में था जो बस अभी के पल के बारे में सोच के काम करते है...

मैं - इन् सभी को अभी के अभी वह वापस भेजा जाता hai...saath हैअगर कोई और जाना chahe...wo भी जा सकता hai...par बच्चे और औरतें यही rahenge...wo यहाँ से नहीं jaayege...main नहीं चाहता कोई प्रजाति पूरी तरह से विलुप्त हो जाए...

बेयर किंग - ओह्ह इंसान कुछ ज्यादा नहीं बोल rahe...manna इस ज्वाला के कबीले का मालिक है tu...to क्या कुछ भी बोलेगा...

उसने वैसा बोलै और ज्वाला और ओल्ड आउल दोनों hi उसकी ओर देखने lage....mahool कुछ गरम हो गया था...

मैं -सबसे बड़ा बेवक़ूफ़ तो ये लगता है mujhe...Main बस तुम सब को बचाना चाहता hu...ab अगर समे कुछ गलत लहग रहा है तो jao...nikal जाओ यहाँ se...par मैं सभी औरतों से एक बात कहना chahunga....aapke राजकुमार को हमने bachaya...aur मैं ये जानता hu..har माँ के liye...uske बच्चे राजकुमार, राजकुमारी से काम नहीं hote...aur मैं ये भरोषा दिलाता hu...agar यहाँ रहे तो मैं उनकी सुरक्षा का ख्याल rakhunga...unko लड़े के लिए तैयार भी किया jaayega...wo भी ओल्ड आउल के लोगो dwara....sath में ज्वाला के लोग भी होंगे जो उनका धजा rakhenge...par मैं कोई जबरदस्ती नहीं कर sakta...ab जिसको जानना है jao..nahi रोकूंगा किसी ko...par ध्यान rahe...aap उन्ही लोगो के साथ jaoge...jo आपकी रक्षा नहीं कर paaye....jo आपके बच्चो की रक्षा नहीं कर paaye...ab आप्पे है सब कुछ...

मुझे पता था अब बेयर किंग क्या कहने वाला hai....Main बस इसको तोडना चाहता tha...kisi की हरकतों पे काबू करना हो तो उसको तोड़ do...ander से तोड़ do...main बस यही कर रहा था...

बेयर किंग -तुम्हे क्या लगता है हमारे यहाँ की औरतें तू जैसे इंसान की बातों पे याक्किन karengi...wo पहले भी हमारे साथ thi...aur अभी भी हमारे.....

बात ख़तम नहीं हुई उसकी और उससे पहले उनकी रानी कड़ी हुई और राजकुमार को अपनी गॉड में लिया और मेरी ओर आने lagi...wo वही पे बैठी ज्वाला की माँ के पास चली gayi....Ab रानी को खुद अगर राजा पे याक्किन ना हो तो बाकी के लोगो का क्या hi kahna....wo सब भी वह आ gaye...aur मेरे चेहरे पे एक मुस्कान आ गयी...

ध्रुव - ये सब क्या था...

मैं - इस बेवक़ूफ़ को आगे कोई गलती करने से पहले रोकने का rasta...ab बस देखते जाओ...

देखते hi dekhte...lagbhag सभी औरतें और बचे एक जगह पे आ गए...

मैं - षभा khatam....Old आउल अपने कुछ लोगो को यही छोड़ do...wo इन् सब पे नज़र रखेंगे और उनका ध्यान rakhenge...Jwala इनको कोई दिक्कत नहीं होनी chahiye....aur हां अब बाकी सब को जो करना है कर सकते है

मैं इतना बोल वह से उठा और जाने laga...Jwala को भी अपने साथ चलने को कहा....

मैं - ज्वाला इन् सब का ध्यान अच्छे से रखना और हां इन् सब को थोड़ा अलग rakho...baki सब se...kuch भी हो मुझे तुरंत batao....ab पोर्टल खोलो मुझे और भी जरुरी काम करने है,...

ज्वाला ने पोर्टल खोला और मैं उसमे से होते हुए पहुंच गया ghar....Main जल्दी से बस दीदी से मिलना चाहता tha...par बिन्ना किसी के नज़र में आये hue...kyunki अगर कोई देख लेता तो बुआ को बता dete...aur वो मेरी क्लास लगा देती...

मैं सीधा अपने रूम के गेट के पास टेलिपोर्ट hua...aur वह पे आके सबसे पहले अपने रूम में चला gaya....thodi देर वह raha....ye निश्चित करने के लिए की किसी को पत्ता ना चला हो यहाँ आने के बारे mein...aur फिर थोड़ी देर बाद वह से बहार nikla...par...sayad भूल गया की ये मेरा hi घर है और यहाँ के लोग मुझसे बड़े है...

रूम का दरवाजा खोला तो सामने चची कड़ी थी हाथों में थाली liye....Main पहले तो दर gaya....inko कैसे पता चला की मैं यहाँ हु...

चची - क्या हुआ बीटा बहुत देर से अंदर ho...kya कर रहे थे...

मैं - Wo...wo मैं बस ऐसे hi आ गया था...

चची - haa...aur..

मैं - aur...aur क्या...

चची - सच में और कुछ नहीं naa....Rupal ने बुलाया ना...

मैं - नहीं नहीं चची उन्होंने नहीं bulaya...haa उनसे मिलना था मुझे...

चची - वो सब बाद में अब अहले ये lo...khana खाओ...

मैं - मैं खाके आया हु...

ये बात बोलनी hi नहीं चाहिए घर में बड़ो ko....kyunki वो सुनती hi nahi...jaise चची ने नहीं सुन्नी thi...mujhe आँखें दिखाई और थाली पकड़ा di...aur खुद आके वह कुर्सी पे बैठ gayi...aur खाने को कहा...

मैं भी खाना खाने लगा...

मैं - आपको कैसे पता चला मेरे यहाँ आने का....

चची - तो क्या लगा तुम्हे की कोई भी मेरे घर में टेलिपोर्ट होक आये और मुझे पता भी ना chale...ye मेरा घर hai...yaha अगर कोई कीड़ा भी आये तो वो भी मुझे पता चल जाता है और तुम तो बच्चे हो hamare...ab बताओ कहा है तेरी didi...aaj आयी नहीं वो...

मैं - Kya...Didi नहीं आयी...

चची - हां नहीं aayi...call किया था की आज कुछ काम करना है तो नहीं आ paayegi...aur अब तुम यहाँ आये ho....usne तो नहीं बुलाया hoga...kyunki वो जानती है मुझे पता लग jaata...aur तुम टेलिपोर्ट होक कैसे आ गए yaha...abhi तो सीखा hi रहे होंगे ना...

मैं - हां सीखा hi रहे the...wo आज मैंने सोचा की कर के देखता hu...aur मैंने तरय किया तो पोर्टल खुल गया और मैं यहाँ आ गया...

चची - टुन्ने खुद खोला था portal....par ये खतरनाक hai...agar फस्स जाते to...koi भी काम करना हो तो पहले टेस्ट करते है चीज़ज़ों के upar...khud के ऊपर नहीं samjhe...ab तुम तबतक ये पोर्टल से नहीं आओगे जब तक अच्छे से आ ना jaaye...Khana खाओ और यही सो jao..main कल तुम्हे स्कूल छोड़ आउंगी...

मैं - चची पर बुआ को पता चल गया तो...

चची - to...to kya...wo कुछ नहीं karegi....haa डाँटेगी पहले तो ये पोर्टल खोल के आने की वजह से...

मैं - चची नहीं वो मास्टर को पता चला तो गड़बड़ हो jaayegi...mujhe लगता है मुझे वापस जाना चाहिए...

चची- तुम्हारी ये Master....accha ठीक है तुम खाना ख़तम karo...Main तुम्हे स्कूल तक छोड़ के आती हु...

मैं - नहीं मैं चला जाऊंगा...

चची - बीटा मैंने ऑप्शन नहीं diya...main बता रही hu...ki मैं तुम्हे वह छोड़ने आ रही hu...ab खाना ख़तम karo...aur लोगे कुछ...

मैं - नहीं चची और कुछ नहीं चाहिए...

मैंने खाना ख़तम किया और चची मुझे लेके चली गयी बस से स्कूल के pass...aur वह से फिर मैं खुद पहुंच गया सीक्रेट रस्ते से स्कूल के ander...aur जब चची को याक्किन हो गया की मैं अंदर hu...tab वो वह से वापस चली गयी...

मैं - ध्रुव यार ये दीदी कहा है...

ध्रुव - आज जो होना था वो हो गया hai...ab तो कल hi होगा kuch...ab रूम में चलो और सो jaao...aur कल फ़ोन करके jaana...sayad वो बता दे की कहा पे है...

मैं - वैसे होने क्या वाला है ये batado...aise नींद नहीं आएगी मुझे...

ध्रुव - नींद तो आ hi jaayegi...aur ये जो होने वाला है वो खुद hi देखो तो सही hoga...sayad तुम भी कुछ सिख जाओ...

मैं वह से रूम में चला gaya...waha पंहुचा तो वह ज्वाला का वही उल्लू बैठा tha...jisko मैंने पंकज के पिता पे नज़र रखने को कहा था...

मैं अंदर गया तो पहले तो वो मुझे देख के झुक्का....

मैं - बस बस तुम यहाँ कैसे...

वो - जानकारी देनी thi...aapne hi कहा था...

मैं - हां बताओ क्या हुआ...

उसने कुछ बातें batayi...ajeeb tha...uske अनुसार अभी पंकज और उसके पिता के बिच चीजजें ख़राब चल रही thi...Pankaj किसी का काम करने वाला था और ये बात उसके पिता को पता चल गयी thi...aur वो उसको रोकना चाहते थे इससे पहले की देर हो jaaye.....par ये क्या काम tha...aur किसके लिए था ये सब पता नहीं चला इसको....

मैं - लगता है तुम्हे थोड़ी मदद chahiye...kisi और को बुलाओ और बाप बेटे दोनों पे नज़र रखो...

वो - ठीक है...

वो चला गया और मैं फ्रेश होने गया और फिर बीएड पे आ gaya....aur बीएड का तो पता है यहाँ आटे hi नींद खुद आ जाती है...

इसको सोने देते है अभी चलते है डेमोस लूसिफ़ेर के pass....Lucifer जो बड़ा खुश tha...wo इस वक़्त अपने महल में tha...apne नए सेनापति के saath...aur उससे सवाल पूछे जा रहा था...

लूसिफ़ेर - कैसा लगा ये karke...accha लगा बुर्रा laga..kaisa लगा...

नया सेनापति कुछ नहीं bola...wo बस खड़ा tha...tabhi वह पे कुछ सिपाही aaye...unke साथ डेमोस के उपसेनापति भी the...jo अभी कैदी की तरह लाया गया था...

लूसिफ़ेर - upseenapati....tumne अपने राजा के निर्णय पे सवाल किया hai...kya अपने इस गुनाह को काबुल करते हो...

उपसेनापति - महाराज वो बस मेरे मुँह से निकल गया था....

लूसिफ़ेर - तुम्हारा भी कोई बीटा है क्या...

उपसेनापति - नहीं महाराज शादी नहीं हुई है...

लूसिफ़ेर - सेनापति इसको मार दो..

लूसिफ़ेर ने अपनी बात ख़तम ki....aur उसके तुरंत बाद hi उपसेनापति की गर्दन निच्चे जमीं पे थी...

लूसिफ़ेर - (तालियां बजाते हुए) तलवार चलना अच्छे से जानते ho...apne पिता से सीखा होगा ना..

सेनापति चुपचाप खड़ा रहा...

लूसिफ़ेर - तुम बोलते नहीं ho....bas यही सही नहीं लगता mujhe...par जो तुमने किया है उसके सामने तो मैं बहुत कुछ नज़रअंदाज़ कर सकता hu...ab वो काम ख़तम karo..jo तुम्हारे पिता ने शुरू किया tha....mujhe वो कुल्हाड़ी वापस chahiye....kisi भी हाल pe.....jisko मरना है maaro...jisko पकड़ना है pakdo...par वो कुल्हाड़ी मुझे चाहिए...

सेनापति ने ये सुन्ना और लूसिफ़ेर का अभिवादन किया और वह से निकल गया...

लूसिफ़ेर - ये मुझे बहुत आगे लेके जाने वाला hai...kaha थे तुम अब tak...kab से तुम जैसे किसी को धुंध रहा था...

वो अपने सिंघासन पे बैठा ये सब बोले जा रहा था...

नेक्स्ट day...Earth पे...

इंसानो की एक बस्ती के pass...aaj पता नहीं kyun...elf लोगो की कुछ ज्यादा hi हलचल हो रही thi...Elf जिन्होंने भेष बदल रखा tha....bas एल्फ hi नहीं थे और भी लोग थे waha...aur वो सब ये सुनिश्चित कर रहे थे की वह सब सही hai...pata नहीं क्या चल रहा था यहाँ...

थोड़ी hi देर में वह पे कुछ hua...pata नहीं कहा से कुछ और लोग आ gaye....aur वो सब एक घर में चले गए...

"एल्फ किंग ये भी कोई जगह hai....aap ये बाएं यहाँ hi क्यों करना चाहते the....aur भी जगह है जहा ये बातें हो सकती थी.."

हां यहाँ पे एल्फ किंग और फोमोस का लीडर आया हुआ tha....dono की मीटिंग होने वाली थी....

एल्फ किंग - मैं बस एक बात कन्फर्म करना चाहता था की तुम यहाँ आ सकते हो या nahi...aur जब तुम यहाँ पे आ गए हो मतलब मैं तुमसे बात तो कर सकता हु...

लीडर - ये सब chodiye...aur बताइये क्या बात hai....aapne ऐसे मीटिंग बुलाली...

एल्फ किंग - कुछ कैदी hai....unko तुम्हारे यहाँ भेजना hai...ab पहले वाली बात तो रही नहीं की बस भेज do...ab तो फोमोस पे भी क़ानून hai...waha के नियमों को भी तो देखना है...

लीडर - वह बस एक hi नियम hai...jinda बच्चे rahna...baaki सब वैसा hi hai...naye लोगो का स्वागत अभी भी होता है वह पे...

एल्फ किंग - तभी मैं sochu...wo प्लेनेट अभी तक ख़तम कैसे नहीं हो gaya....itna खून खराबा..

लीडर - जब तक मैं hu...planet ख़तम होने से raha....aur वो खून ख़राब नहीं है वो तो बस अपनी भड़ास निकलने का रास्ता hai....aap भेज सकते है अपने कैदियों ko...par..

एल्फ किंग - हां पर क्या...

लीडर - आप जानते है मुझे क्या चाहिए....

एल्फ किंग - मैं ये भी बता चुक्का hu...baht पहले hi...ki मैं इसके लिए सही नहीं hu...par हां अगर ये समझौता होता है तो मैं तुम्हे हमेशा उसके बारे में बताता rahunga....aur उसपे कोई भी मुसीबत नहीं आये इसका भी ध्यान रखूँगा....

लीडर - हम्म मैं समझ सकता हु...

एल्फ किंग - वैसे एक और बात जाननी thi...ye तुम्हारे प्लेनेट पे बच्चे नहीं होते क्या...

लीडर -(हस्ते हुए) होते hai...aur हमरे पास रहते hai..jabtak वो लड़ने के काबिल नहीं हो जाते...

एल्फ किंग - तुमने कभी सोचा है उनकी पढ़ाई के बारे में...

लीडर - ये तो उनपे hai...aap जानते है कुछ है उनमे से यहाँ pe...main किसी को बाँध के तो नहीं रख sakta...haa पर वो जब लौट के वापस आते है तब भी लड़ते hi है...

एल्फ किंग - हम्म ये भी सही है....

मीटिंग ख़तम हुई और लीडर वह से चला gaya....apne लोगो के saath...par एल्फ किंग वही पे रुक्के...

एल्फ किंग - Earth....bahut सुन्ना है इस जगह के बारे mein..aaj थोड़ा घूम भी लिया jaaye....Senapati तुम बाकी सबको लेके वापस चले जाओ...

सेनापति - पर चाचा जी...

एल्फ किंग - भूलो मत अभी तुम सेनापति ho....aur यहाँ किसी काम से आये हो...

सेनापति - जी Maharaj...aur आप भी ना भुल्ले की आपकी रक्षा करना मेरा काम hai...to मैं तो नहीं जाने वाला...

एल्फ किंग - चलो ठीक है बाकी सब को भेजो और चलो थोड़ा घूम आते hai...aur हां काम ख़तम हो गया है..

सेनापति - जी चाचा ji...to पहले कहा chalenge...DB से मिलने...

एल्फ किंग - उससे क्या मिलना वो तो आता रहता है ghar....abhi बस यहाँ घूमना है mujhe.....dekhta hu..kaise रहते है यहाँ के Elf...unki बस्ती में चलते है...

ये दोनों निकल लिए यहाँ वह....

वही स्पेन में रूपल दीदी सुबह सुबह ध्यान लगा के uthi...wo कुछ परेशां thi...dhyaan लगाने के बाद ज्यादातर परेशानी ख़तम हो जाए है पर इनका सायद अलग हिसाब चलता है...

कुल्हाड़ी - आप परेशां हो...

दीदी - क्या मैंने सही किया....

कुल्हाड़ी - उसने आपके अपनों को दुःख pahuchaya....aapne तो बस एक शरारत की hai...isme कोई बुराई नहीं...

दीदी - हां सही तो kaha...isme कहा कुछ बुर्रा hai...ye एक्सीडेंट था bas...wo खुद गिर्री और उसका हाथ टुटा...

कुल्हाड़ी - हां यही हुआ था...

रूपल दीदी - हम्म अब ठीक hai....ab ये batao...yaha का क्या हाल है...

कुल्हाड़ी - आप खुद पूछ लो...

कुल्हाड़ी ने ऐसा कहा और वह पे वो पायरेट और वो सनकी जो खुद को वरवोल्फ समझता था आ gaye....dono ने अच्छे कपडे पहन रखे the...par सकल दोनों की hi अजीब थी...

रूपल दीदी के सामने वो दोनों आये और झुक गए...

दीदी - बताओ काम कहा तक पंहुचा...

पायरेट - हम लिस्ट तैयार कर रहे hai....unn सब की जो गलत काम करते है yaha....jaise hi ये ख़तम हो jaaye..hum अपना काम शुरू कर देंगे...

रूपल दीदी - हम्म जल्दी से करो fir..aur हां किसी को bhi...matlab किसी को भी इन् सब का पता नहीं चलना चाहिए...

दोनों - जी...

वो दोनों भी वह से चले गए...

अभी के लिए इना hi नेक्स्ट अपडेट में देखते है रूपल क्या करने वाली hai...inn पोलर बेअर्स का क्या होता hai...Nikita को समझने की कोशिश
 
अपडेट - 44

अब तक

रूपल दीदी कुछ करने वाली thi....par ये वो नहीं कर रही thi...asal में उस कुल्हाड़ी के कारन हो रहा था ये sab....Wahi दूसरी ओर दब के पिता और कजिन यहाँ एअर्थ पे the...par उसको घंटा पता नहीं tha....Slayer वह फोमोस पे अब आत्मायों के साथ साथ डेड बॉडीज भी खाने लगा tha...energy पूरी नहीं हो पा रही thi...par फिर bhi..wo वह पे फंस चुक्का tha...aur प्रतीक लगा हुआ था चीज़ें सोल्वे करने mein...pahle तो वो रूपल दीदी के पास hi जाने वाला tha...par ज्वाला के कबीले में कुछ बात हो गयी तो वह जाना pada...jab वापस आया तो उसको पता ओल्ड आउल के बन्दे ने पंकज और उसके पिता के बारे में bataya...jispe उसे उसको मदद लेने को कहा और दोनों पे नज़र रखने को कहा...

अब आगे...

मैं क्लास में बैठा tha...2nd पीरियड चल रहा tha...aaj होड़ साहब खुद नहीं आये the....aur पता नहीं इस बात को लेके मैं क्यों परेशां हो रहा tha...main मदद करना छह रहा था unki....jabki उन्होंने मुझे निच्चा दिखने के लिए क्या कुछ नहीं kiya....actually में उन्होंने nahi....wo सब सायद पंकज ने किया tha...unhone तो कुछ किया hi नहीं bas...class में कुछ क़ुएस्तिओन्स पूछे the...haa आउट ऑफ़ सिलेबस थे वो sab...par फिर भी और कुछ नहीं किया tha...Main ये सब सोच hi रहा था की

ध्रुव - इस बात को अभी के लिए साइड karo...aur ये socho...ki निकिता को कैसे मानना hai...usko समझाना होगा...

मैं - हां पर kaise....kya करू की वो समझे....

ध्रुव - अब ये तो तुमपे hai......yaha से निकलना होगा....

मैं - क्या...

ध्रुव - निकलो यहाँ se....bahar वो दोनों आये हुए hai...wo ओल्ड आउल के log...sayad कुछ खबर लाये है...

मैं - पर अभी हम क्लास के बिच में hai....kuch करता हु....

ध्रुव - नहीं वक़्त नहीं hai....bas utho...aur निकल जाओ यहाँ से...

मैं - पर ये....

मैं बोल hi रहा था की अच्चानक से दब को कुछ hua...uske कान लाल हो gaye...aur चेहरा भी अजीब सा होने laga...kuch समझ नहीं आ रहा tha....aur देखते hi देखते उसका शील्ड उसके हाथ में आ gaya...puri क्लास उसी को देखने लग गयी...

A.prof - एल्फ Prince...shant हो jao...kya बात है बताओ....

पर वो कहा किसी की सुनने वाला tha...aiisa लग hi नहीं रहा था वो अपने बस में है...

ध्रुव - इसका एलिमेंट ये ऐसा क्यों कर रहा hai....Isko बहार लेके जाओ....

मैं - हुआ क्या है इसको...

ध्रुव - अगर बहार नहीं लेके गए इसको तो ये सबको मार dega,...iska एलिमेंट इसके कण्ट्रोल में नहीं hai....bahar खली जगह लेके जाओ इसको जहा ये अपनी एनर्जी बहार निकल sake...jaldi...

मैंने उसको पकड़ा और उसको बहार लेके जाने laga....par ये बहुत मुश्किल हो रहा था मेरे liye....tabhi निकिता भी मेरे साथ आ गयी और उसको पकड़ के लेके गयी मेरे साथ....

निकिता - क्या हुआ isko....ye ऐसे क्यों कर रहा है...

मैं - इसका एलिमेंट वो इसके कण्ट्रोल में नहीं hai....humme मदद चाहिए....

निकिता - इसका तो नेचर एलिमेंट है naa....iske बारे में तो बहुत काम बातें hi पता है...

मैं - अभी इसको किसी खली जगह पे लेके जाना hai...agar कुछ हुआ तो ये अपनी एनर्जी वह छोड़ सकता है बिन्ना किसी को नुकसान पहुचाये..

ध्रुव - मैंने पता किया hai....kuch बहुत बुरा होने वाला hai...ye कोई आम घटना नहीं hai....koi इसका अपना है जो मुसीबत में hai..ye वह जान चाहता hai...par अभी इसकी पावर्स ऊनि बढ़ी नहीं है की ये सीधा वह जा sake...body रेसिस्ट कर रही है इसकी....

मैं - मुसीबत mein...kon...kuch पता hai,...aur कहा हो रहा है ये sab.....batao मैं देखता हु..

ध्रुव - नहीं वो पता नहीं है वो hi पता लगाना है....

मैं उससे बात hi कर रहा था की ओल्ड आउल के लोग वह पे आ गए...

वो - एल्फ किंग को मारने वाले hai....wo यही है...

मैं - Kya...kya बोल रहे ho...wo यहाँ कैसे और कोण मरने वाला है उनको....

वो - पंकज...

मैं - क्या बात कर रहे ho...Mujhe वह लेके चलो...

वो- हम आपके लिए पोर्टल नहीं खोल सकते उतनी पावर नहीं है...

मैं - ध्रुव तुम करो...

ध्रुव - ज्वाला को bulao...wo जल्दी करेगा हेल्प...

मैं - ज्वाला पोर्टल खोलो......

मेरा बोलना था उसने ना सिर्फ वह तक के लिए पोर्टल खोला बल्कि वह पे आ भी gaya..wahi उसके कुछ लोग भी aaye...aur उन् सब ने दब और निकिता के चारो तरफ एक घेरा बना diya...taaki कुछ बुरा ना हो..

पोर्टल से बहार निकलते hi मैं और ज्वाला एक हो gaye....par सामने देखा तो वह कोई एल्फ नहीं tha..aur वैसे भी मैंने एल्फ किंग को कभी देखा नहीं था की उनको जान paun.....Elf कंट्री गया जरूर था पर वह मिल नहीं सक्का था उनसे...

हां तो यहाँ कोई एल्फ नहीं tha...par भगदड़ मच्छी हुई thi....Insan थे यहाँ पे बहुत सारे insan....aur सभी यहाँ वह भागे जा रहे the...ajeeb था ye....waha कुछ था hi नहीं जिसको देख के ये सब भाग रहे हो....

मैं - ज्वाला कुछ दिख रहा है kya...mujhe तो ऐसा कुछ नहीं दिख रहा जिससे ये सब भाग रहे है...

ज्वाला - नहीं कुछ भी nah...sab सही hai...haa हवा में सायद कुछ है....

मैं - फिर ये भाग क्यों रहे hai....Jwala हममे अलग होना hoga....mujhe इनमे से किसी से बात करनी होगी...

ज्वाला - आप ऐसे भी कर सकते ho..aapko बस उसके सर को चुनना है उसकी साड़ी बातें पता चल जायेगी...

मैं - हम्म ठीक है..

एक बाँदा आ रहा था मेरी ओर मैंने उसको hi pakda...aur उसके सर को chuwa....mujhe सब दिखने laga.....uske बारे mein..uske परिवार के बारे mein....aur भी ना जाने क्या क्या....

मैं - ज्वाला ऐसे तो वक़्त लग जायेगा...

ज्वाला - है तो आपको पूछना होगा ना जो पूछना चाहते ho....nahi तो ये सब कुछ hi बताता जाएगा...

मैं - अच्छा....

मैं - क्या हुआ yaha..kyun भाग रहे हो....

"पता नहीं मैं तो बैंक जा रहा tha...waha से बहार aaya....car में baitha....aur फिर हवा में कुछ फैल गया और main...main...fir पता नहीं क्या हुआ....

मैं - ज्वाला ये भी हवा के बारे में बोल रहा hai....batao क्या है हवा में...

ज्वाला - कुछ धुवा सा hai..par ये तो आम बात है यहाँ pe....jab भी आया hu...aisa hi रहता hai....haa थोड़ा अलग है उससे ये....

ध्रुव - पंकज कौन है याद है naa.....ye सब उसने hi किया hoga....abhi एल्फ किंग को ढूंढो....

मैं - पर kaise...Main नहीं जानता उनको....

ध्रुव - ये जो भी गैस है बस इंसानो पे काम कर रहा hai....tumpe नहीं कर रहा hai...unpe भी नहीं कर रहा hoga....upar jao...aur देखो कौन शांत है इन् सब के बिच....

मैं - हम्म ये सही लग रहा hai....Jwala चलो....

हम उड़ते हुए ऊपर गए और यहाँ वह देखने lage....ab ज्वाला चील tha...uski आँखें tej...nahi बहुत तेज thi....hume ऊपर से पता चल gaya....kuch लोग थे वह जो शांत the....par कन्फ्यूज्ड थे....

मैं - हां मिल gaye.....par यहाँ तो एक से ज्यादा लोग है......

मैं सभी को ध्यान से देखने laga...ek बात याद आ गयी थी mujhe...jo दब ने बताई thi....bas अब मुझे अच्छे से देखना था और मुझे पता चल जाता इन् सब में वो कौन है..

दब ने एक बार बातों बातों में बाय था की उसके पिता एक बार उसके साथ खेल रहे थे ...जब वो छोटा tha..tab गलती se...unki कान पे कोई चीज लग गयी thi...wo आजतक वैसा hi hai....Main जानता था की उन्होंने रूप बदला हुआ hai...par ये कान वाली बात के अलावा और कोई बात नहीं thi....jisse उनको पहचाना jaaye...Main देख रहा था की उनमे से एक के कान मुझे कुछ अजीब lage..jo इंसानो की तरह तो बिलकुल hi नहीं tha....Main जल्दी से उनके पास गया और उनको उड़ा के वह से लेके निकल gaya......ye सब इतनी जल्दी हुआ की सायद वो समझ नाह paaye...par जब उनको समझ आया ककी मैं उनको वह से उठा के लेके जा रहा hu....to वो mujhe..matlab ज्वाला और मेरी बॉडी पे हमला करने लग गए....

मैं - शांत rahiye....madad करने आया हु...

पर सायद इसको ये सब समझ hi नहीं आ रहा tha....ye पंख कीचे जा रहे थे...

ज्वाला - अब और नहीं....

उनसे तुरंत पोर्टल खोला और उनको फेंक दिया अंदर उसके....

मैं - ये क्या kiya.....kaha गए वो....

ज्वाला - स्कूल mein...aur kaha...ab बताओ क्या करना है...

मैं - हम इन् इंसानो को ऐसे नहीं छोड़ sakte..humme मदद करनी होगी....

मैं वापस से वही चला गया जहा वो सब भागे जा रहे थे....

मैं - ज्वाला पता लगा सकते हो kya...ki ये धुवा कहा से आ रहा है....

ज्वाला - 2 जगह hai...aur दोनों hi अलग अलग धुवा hai.....ek सबको ऐसा करा रहा hai...aur दूसरा उनको ऐसा करने से रोक रहा है....

मैं - रोक रहा hai.....Matlab कोई और है यहाँ मदद के liye....ye दूर वाला कहा से आ रहा है...

मैंने ये पूछा और ज्वाला चल दिया उस oor....waha आया तो एक आदमी tha....chadar ोड्डे hue...baitha हुआ जमीं pe....aur उसके चादर से hi वो धुवा बहार आ रहा था....

मैं - ज्वाला ये तो बातें समझ जाएगा ना हमारी...

ज्वाला - हां जरूर...

मैं - आपको इसकी पावर और बढ़ानी hogi...tab जाके सब सही होगा...

वो - अगर पावर बढ़ाया तो बैलेंस ख़राब हो jaayega..aur उनको पता चल जायेगा मेरे यहाँ होने ka....tum...tum कोण ho...aur यहाँ कैसे...

मैं - मैं मदद करने आया hu...aap ये सम्भालो मैं उसको देखता हु जिसने ये शुरू किया...

वो - Nahi...tum तुम यहाँ raho....main उसको देखता हु...

मैं - पर मैं ये सब नहीं jaanta...aur वो खतरनाक हो सकता है...

वो - अगर तुम यहाँ से गए तो मैं ये बंद कर dunga...jiske बाद ये इंसान या तो खुद को मार देंगे या एक दूसरे को मारने लगेंगे...

मैं - ये क्या बात hui....tum तो अच्छे लगते हो...

वो - अगर तुम हिल्ले भी तो सब बंद कर दूंगा....

मैं - ठीक है मैं यही hu...bas सब नार्मल कार्डो...

पता नहीं ये कोण tha...aur ऐसा क्यों लग रहा था की ये उसको बचा रहा है जिसने ये सब सुरु किया tha...Abhi मैं और कुछ करने वाला नहीं tha...kyunki मैं नहीं चाहता था की कोई इंसान marre....to मैं उसकी बात मान के खड़ा raha....kuch देर में वह सब नार्मल होने laga...jo लोग यहाँ वह भाग रहे थे वो सब धीरे धीरे नार्मल होने lage...haa उनके सर में दर्द शुरू हो गया tha...Main उनकी ओर देख hi रहा था की तभी मेरी नज़र उसपे पड़ी जो ये सब कर रहा tha....wo वह से गायब हो gaya...aur जब मैं पीछे मुद्दा तो वो कम्बल वाला भी गायब tha.....pata नहीं कोण थे ये दोनों...

मैं - ज्वाला चलो एक बार ऊपर से सब देख लेते है उसके बाद वापस चलते है एल्फ किंग के पास....

हम दोनों ऊपर गए और वह से एक बार चारो ओर देखने lage....ab सब अपने सर पकडे हुए दिख रहे the....bas एक को छोड़ ke.....aur वो एक गुस्से में लग रहा tha....Main जल्दी से उसकी तरफ बढ़ा par....par वो गायब हो gaya.....mujhe लगा था जैसे इन् सब के पीछे इसका भी हाथ हो सकता hai...par कन्फर्म नहीं कर पाया....

थोड़ी देर यहाँ वह देखने के बाद भी कुछ नहीं dikha....fir मैंने ज्वाला को बोलके पोर्टल से वापस स्कूल चला गया....

यहाँ पे अलग hi कुछ चल रहा tha....Elf किंग को कुछ छूटें लगी हुई thi....par वो यहाँ अपना इलाज नहीं करना चाहते the...unko वापस अपने प्लेनेट पे जाना tha....par वो बिन्ना अपने सेनापति मतलब अपने भतीजे के भी नहीं जाना चाहते the....DB वही पे tha....par वो वह होक भी वह नहीं ho...aisa लग रहा tha...Nikita उसके साथ thi...uddas लग रहा था wo...Main गया वह...

ज्वाला और मैं अलग हो चुक्के the...wo जा चूका था....

मैं सभी के पास गया pahle...waha पे प्रिंसिपल और बाकी के प्रोफ. भी the....sabhi एल्फ किंग से बातें कर रहे थे उनको समझा रहे the....Mujhe देख बुआ मेरे पास आयी....

बुआ - यहाँ क्या कर रहे ho...DB के पास jao...usko जरुरत होगी तुम्हारी....

मैं - Meri....par क्यों...

बुआ - Kyun....tumhe पता nahi....tum थे कहा अब तक...

मैं - मैं बाद में बताता hu...abhi उसके पास जाता हु....

मैं गया दब के पास....

मैं - क्या hua...aise क्यों बैठे ho...tumhare पापा यहाँ आये हुए है...

निकिता - इसको वापस लेके जा रहे hai.....aur..

मैं - Kya....wapas...par...accha कितने दिन के लिए...

निकिता - हमेशा के liye...aur इसको वह कैदखाने में रहना होगा....

मैं - का बोल रही ho....dimmag घूम गया है क्या...

दब - वो सच बोल रही hai....Maine अपने राजा पे हमला किया hai....aur इसके लिए मुझे मौत की सज़्ज़ा मिलेगी....

मैं - Hamla...Raja...hua क्या ये तो बताओ...

इनको छोड़ देते है और हम चलते hai.....Spain....

स्पेन में रूपल दीदी को ना जाने क्या सूझी की वो बस वह से सभी क्रिमिनल्स को ख़तम करने के बारे में सोच रही thi.....aur वो पायरेट और नकली वरवोल्फ दोनों इसी काम में लगे हुए the...wo दोनों के दोनों लिस्ट बना रहे the...jinme सभी क्रिमिनल्स के बारे में लिखा जा रहा tha....aur जब ये काम हो जाता तो ये dono....inn सब को ख़तम करने वाले the....jisme इनकी मदद के लिए और भी लोग आने वाले थे.....

रूपल दीदी अभी अपने ऑफिस में बैठी हुई thi.....ki तभी वह पे पोप आ जाते hai...Didi ने उनको अंदर बुलाया और बिठाया....

दीदी - आप yaha....mujhe बुला lete...main आ जाती....

पोप - नहीं ऐसे hi आ gaya....mujhe लगा मुझे तुमसे मिलना chahiye....kuch बातें है जो बतानी चाहिए....

रूपल दीदी - बातें तो होती rahegi...par अभी मेरी दिलचस्पी इसमें है की आपको क्यों लगा आपको मुझसे मिलना चाहिए....

पोप - hahaaha....bilkul अपने पिता की तरह बात करती ho...haa तो मुझे ऐसा इसलिए लगा क्यूंकि तुम्हे मेरी मदद चाहिए होगी......

रूपल दीदी - मदद mujhe....nahi ऐसी तो कोई बात नहीं है...

पोप- मुझे आभास हुआ है की तुम्हे मदद चाहिए hogi...abhi नहीं तो कुछ वक़्त baad....main अपना नंबर छोड़ जाता hu....tum कॉल कर लेना वक़्त पड़ने pe....ek और बात मैं तुम्हारी हर तरह से मदद karunga...tumhare परिवार के काफी अहसान है mujhpe...agar कुछ काम कर सक्कु तो बहुत अच्छा होगा...

रूपल दीदी - जी ठीक है...

उन्होंने नंबर दिया और रूपल दीदी ने वो नंबर सेव कर liya...aur पोप चले gaye...par दीदी सोचने लग गयी की आखिर ये क्या मदद करेंगे...

कुल्हाड़ी - अब इंसान मदद करेंगे hamari...kaise दिन आ गए है...

ये बात रूपल दीदी को बड़ी अजीब lagi...ye पहली बार था जब इस कुल्हाड़ी ने इस तरह ी बात की ho...uske अंदर से जैसे जलन ghrina...aur ना जाने कौन कौन से भाव झलक रहे the.....Didi को एकदम से लगा जैसे वो कोई बहुत बुरा काम करने जा रही है इस कुल्हाड़ी की बात को मान ke...par सायद ये बात वो कुल्हाड़ी भी समझ gayi...aur इसीलिए संभल भी गयी...

कुल्हाड़ी- मुझे लगता है एक और सररत करने का वक़्त आ गया hai...chalo तुम्हारी सहेलियों से मिल के आते है...

ये बात सुनके दीदी अपने सोच से भटक gayi....aur फिर से जैसे इस कुल्हाड़ी के जाल में फंस गयी ho...wo जाने के लिए तैयार हो गयी....

इनको अपनी शरारत करने देते hai...aur हम चलते है डेमोस pe....jaha एल्फ कंट्री के सेनापति yaani...DB के कजिन को पकड़ लिया गया tha....aur अभी वो नए नए बने हुए सेनापति के सामने खड़ा था....

(दब के भाई के रेस्पेक्ट में)

थोड़ी पहले चलते hai...dekhte है हुआ क्या जो ये एअर्थ से यहाँ आ गया और अब यहाँ पे कैदी बना हुआ है...

मैं बहुत गुस्से में thaa.....aaj तो सब प्लान के हिसाब से hi हो रहा tha...par पता नहीं फिर क्या hua...aur सब ख़राब हो gaya...wo दूसरी दवाई कोण लेके आया था waha....agar वो नहीं होती तो वही पे चाचा जी मारे jaate....aur दब को तो सब नालायक hi समझते hai...main राजा बन jaata....aur मेरा राज होता एल्फ कंट्री pe....fir बस ऐश मौज hi thi...par नहीं....

मैं ये सब बड़बड़ाते हुए डेमोस में आ pahucha...bahut दिन बाद मौका मिला था यहाँ पे सेनापति से मिलने ka....uss दिन के बाद से इसकी कोई खबर hi नहीं आयी thi...aur वो सूरज पता नहीं कहा tha....kitna ोाता लगाया पर कुछ पता नहीं चला....

मैं अभी बढ़ hi रहा था की एक सैनिक ने मुझे देख liya....par इसमें कोई बड़ी बात नहीं thi.....yaha पे लोग जानते थे mujhe....Maine भी उसको हाथ दिखा के अपने पास bulaya....aur उइससे सेनापति से मिलवाने को bola....par पता नहीं इसको क्या hua...ye पहले तो मुझे घूरता हुआ आ रहा tha...aur बस इतना hi नहीं उसके बाद आते hi मेरे ऊपर तलवार तान di...aur फिर हथकड़ी लगा के मुझे लेके जाने laga.....Waise ो मैं बच जातपर देखना चाहता था की इन् सब के पीछे है कोण...

मैं - ुमने मुझे पहचाना नहीं kya....Main तुम्हारे सेना पति का दोस्त hu....aur तुम्हारे राजकुमार भी मुझे जानते है...

वो - राज कुमार का नाम नाह lena.....tum बस सेनापति को जानते the....Rajkumar का नाम इन् सब से दूर रहे वही सबके लिए अच्छा hai...samjhe...ek और baat.....wo नहीं रहे...

मैं - क्या राजकुमार नहीं रहे.....

वो - आई क्या बोलता hai.....Senapati जी नहीं rahe...unko सज्जा मिली है कुल्हाड़ी देने के कारन...

मैं - Kya....to उसने वो दिया tha....phir ये सूरज आया क्यों नहीं.....

मैं ये सोचने लग गया.....

मैं - किसने मारा उसको...

वो - हमारे नए सेनापति ne.....jo उन्ही के बेटे है....

मैं - Kya....apne पिता को मार दिया...

वो - हां वो भी सबके saamne....tabhi तो महाराज खुश है उनसे...

मैं - ये अच्छा नहीं हुआ....

थोड़ी hi देर में हम दोनों पहुंच गए नए सेनापति जी के pass....wo अभी किसी से बात कर रहे थे...

सेनापति - कोण है ये....

सिपाही- सेनापति जी ये खुद को आप पिता का दोस्त बताता है.....

मैं - हां मैं उनका दोस्त tha....aur जो भी हुआ सुन्न के बुर्रा लगा....

सेनापति - हम्म बुरा हुआ उनके saath....aur मेरे साथ bhi...aur मेरा parivar...unke साथ bhi....pata है अब वह बस मेरा एक छोटा भाई रह गया है आदमी के नाम pe......aur सभी औरतें hi hai....jab मैंने वो सब उनको बचने के लिए kiya....tabhi उन्होंने मुझे घर से निकल diya....Ab बताओ गलती किसकी है...

मैं - हम्म वक़्त की गलती ha....aaahhh ये क्या कर रहे हो....

मैं बोल hi रहा था की पता नहीं कहा से उसके पास एक तलवार आ gayi....jiska मेटल एकदम से लाल हुआ पड़ा tha...matlab गरम tha....aur उसने उसको मेरे हाथ से टच करा दिया...

सेनापति - ये भी वक़्त की गलती hai....ye वक़्त बड़ा कमीना होता hai....kabhi भी कुछ भी कर देता hai....accha और किसकी गलती है....

मैं - लुसिफॅ.....

बात पूरी होती उससे पहले hi वही तलवार मेरे पैरों पे सत्ता दी....

सेनापति - राजा कभी गलत नहीं hota....Raja हमेसा hi सही होता hai....aur पूजनीय होता hai....uspe सवाल करना मतलब मौत को bulana...to अब बताओ गलती किसकी थी...

मैं - उसकी जिसने वो कुल्हाड़ी ली thi....tumhare पिता से....

सेनापति - हां ये कुछ कुछ सही hai...Khol दो इसको....

उस सिपाही ने मेरा बंधन खोला...

सेनापति - तो उसको सज़्ज़ा कैसी मुलनि चाहिए....

मैं - Maut...maut hi मिलनी चाहिए....

वो - मैं भी वही चाहता hu...par ये हष में आ जाए फिर इसको तड़पा तड़पा के marunga.....aur कुछ पता भी तो करना है....

मैं - क्या...

वो - कुल्हाड़ी कहा है ये baat.....tumhe तो पता नहीं है ना....

मैं - नहीं मैं नहीं जानता....

वो - hmm....sipahi....pata करो ये सच बोल रहा है या nahi.....aur अगर सच हो तो इसको वापस भेज dena...sunno ये आखिरी बार है जब तुम यहाँ यूँ hi मुँह उत्त्था के आ गए ho....mere पिता के दोस्त the.....issliye जाने दे रहा hu...agli बार से बिन्ना बुलाये अगर यहाँ दिखे तो दिखोगे नहीं....

मैं समझ नहीं पाया ये पिद्दी सा ladka...mujhe धमकी दे रहा tha....aur मुझे दर भी लग रहा tha...iss चूज़जी se.....sach में इसमें कुछ अलग बात thi....wo सिपाही मुझे कही लेके गया और मुझे कुछ पन्ने के लिए दे diya...usko पीटते hi मुझे नींद जैसी आने lagi....aur जब आँख खुली तो मैं कही और hi tha....wo सिपाही मेरे साथ tha.....Mere उठते hi उसने मुझे वह से जाने को kaha....main भी वह से निकल gaya.....mujhe पता था यहाँ पे अब रहना मतलब बेकार का लफड़ा

मैं वह से एल्फ वर्ल्ड जाने को hi tha...ki याद आया की चाचा जी तो वह एअर्थ पे hai...pahle वह जान hoga...aur बहाना अलग बनाना होगा की कहा था अभी तक...

मैंने एअर्थ के लिए पोर्टल खोला और वह चला गया....

यहाँ आने के बाद मुझे ढूंढना था की ये गए kaha....maine तरय kiya....par पता hi नहीं चल रहा tha....abhi मैं और तरय करता उससे पहले कुछ लोग आये और मुझे अपने साथ चलने को कहा....

मैं - कोण हो तुम सब...

उनमे से एक ने बताया वो यहाँ के स्कूल से है और वो मुझे ढूंढ रहे है बहुत देर se...chacha जी वही है...

मैं भी चल दिया उनके saath...ab इस जगह पे थोड़ी ना कोई होगा जो मुझे किडनैप करे...

जान स्कूल में पंहुचा तो व्हा पे अलग hi सन चल रहा tha.....Elf वर्ल्ड से कुछ सैनिक आये हुए the....aur उन् सब ने दब को पकड़ रखा tha.....pata नहीं क्या हुआ yaha...par ये देख के अंदर hi अंदर बहुत खुसी हो रही थी मुझे....

मैं - ये क्या hai....DB को क्यों पकड़ रखा है....

सैनिक- इसने राजा पे हमला किया है....

मैं - Kya...(sach में अजीब tha....aisa कैसे हो gaya....naa जाने मैंने कितनी hi कोशिश की है इसके मान में इसके बाप के खिलाफ बातें डालने की पर कुछ काम नहीं आता tha....aur आज इसने अपने hi बाप पे हमला कर दिया.... वाह..) क्या बात कर रहे ho...jarur कोई गलती हुई है..

सैनिक ने कुछ नहीं बोलै ...ना हिड़ब कुछ बोल रहा था...

मैं - इसको खोलो बात करनी है मुझे इससे....

एल्फ किंग - Senapati....kaha थे तुम....

मैं -(कभी तो नाम से भी बुल्ला लिया करो...) एल्फ किंग मैं गम हो गया tha.....ye प्लेनेट बस देखने में hi सिंपल लगता है पर है बहुत thedda...par ये क्या सुन रहा हु मैं.....

एल्फ किंग - तुम आ गए ho.....to chalo....ab हममे चलना chahiye...Sainikon कैदी को अच्छे से लेके आना...

मैं बात करना छह रहा था दब se....arre और कुछ नहीं तो थोड़ा और बहका deta....kya पता यहाँ भी बीटा खुद अपने बाप को मार de....aur मेरा रास्ता क्लियर हो jaata...tab तो मज़्ज़ा hi आ jaata...par इनको तो जल्दी जाना था....

हम वह से निकल gaye.....aur सैनिक दब को भी लेके आ गए....

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में देखते hai.....Rupal दीदी क्या करने वाली hai....aur दब को क्या हुआ जो जेल जाने की नौबत आ gayi....aur निकिता को समझाना तो रह hi gaya...par ऐसे में उसको समझाना मुश्किल tha...aur वक़्त भी काम है अब तो

थोड़ा सा वेट कर lena...papers hai...waqt मिलने पे अपडेट आते रहेंगे
 
अपडेट - 45

अब तक

बाप ने बेटे को जेल भेजने का फैसला kiya...beta भी शॉक में जेल जाने को तैयार,,, अजीब है ये पर ऐसा hi कुछ hua....saath में पोप ने सायद अपना काम कर दिया tha....usne रूपल दीदी के मैं में एक सवाल तो उठा hi दिया tha....jisse वो थोड़ी देर के लिए hi सही पर कुल्हाड़ी की बातों से बहार nikli....par फिर से अपनी सहेलियों को परेशां करने निकल gayi...aur भी कुछ घटनाएं हुई थी...

अब आगे

शाम हो गयी thi....Db को ेके चले गए थे वो sab....yaha पे मैं और निकिता परेशां the.....jaisa भी था दोस्त था हमारा...

मैं - कुछ तो करना hoga...hum ऐसे hi नहीं छोड़ सकते उसको....

निकिता - पर वो खुद hi बोल रहा था उसने हमला किया hai....aise में हम कैसे बचाये उसको....

मैं - हम वापस जाएंगे waha....elf वर्ल्ड mein....aur उसको समझायेंगे की ये सब उसने kiya...par इसके पीछे की वजह कुछ और थी...

निकिता - क्या मतलब वजह कुछ और thi....main समझी नहीं...

मैं - उसकी नेचर एलिमेंट उसके कण्ट्रोल से बहार चली गयी thi...ye जानती हो naa....uske बाद वो बस जल्दी से अपने पिता के पास जानना चाहता tha...par उसके बाद पता नहीं क्या hua....ki उसने उनपे हमला कर diya...main समझ नहीं पा रहा hu....tum तो साथ थी uske....kya हुआ था अच्छे से बताओ...

निकिता - तुमने कहा था इसको जगह पे लेके जाना hai...aur उसके बाद खुद चले gaye...wo तो मैं उसको लेके गयी खली जगह pe....par फिर कुछ हुआ और हमारे चारो ओर परछाई सी आ गयी thi...par उससे दब कुछ शांत होने लगा tha....main उससे बात कर रही thi....thodi देर तो सब सही रहा पर फिर ना जाने कहा से एल्फ किंग यहाँ आ pahuche....ajeeb था wo....aisa लग रहा था जैसे कोई उनको यहाँ आसमान से गिर्रा के चला गया hai....unka यहाँ आना था और दब फिर से अपने आप से बहार हो गया और वो खड़ा hua...aur...aur फिर पता nahi...jab वो वह से निकला वो परछाई साड़ी मेरे आस पास आ gayi...jaise मुझे बच्चा रही ho...par फिर भी मुझे दिख रहा tha.....ek हरी roshni....charo ओर वो फैली और एल्फ King...unko पेड़ पौधों ने पकड़ लिया tha....unke हाथ पेअर बाँध दिए the...Maine ये देखा तो मैं थोड़ी घबरा gayi...maine दब को pukara...par वो दब दब नहीं tha...uski आँखें पूरी हर्री हो चुक्की thi...aur वो लाइट उसी के अंदर से आ रही thi...wo कण्ट्रोल कर रहा था प्लांट्स ko...Wo आगे बढ़ा और एल्फ किंग के पास gaya.....uske हाथ में एक अजीब सी लकड़ी thi...bahut ajeeb...aur वो उसी से एल्फ किंग को मारने वाला tha...par मार नहीं पा रहा tha...jaise वो खुद को hi रोक रहा ho....aur देखते hi देखते वो जम्मीं पे बेहोश होक गिर gaya....Maine सबको आवाज लगनी शुरू कर di...mujhe समझ नहीं आ रहा था क्या karu...to यही kiya.....aur फिर सभी यहाँ आ gaye...Kavita मैडम ने एल्फ किंग को chudaya...par वो गुस्सा the...bahut ज्यादा gussa...aisa लग रहा था अगर हम नहीं होते तो वो दब ko.....baaki प्रोफ. उनके साथ the...main और कविता मैडम दब को हिश में ला रहे the...jab वो होश में आया तो बोलने laga...Maine हमला किया hai...aur फिर तुम भी आ गए थे...

मैं - ये सब उसके एलिमेंट की वजह से हुआ hai....wo कण्ट्रोल नहीं कर पाया और ये सब हो gaya....ab हममे उसको बचाना होगा....

निकिता - पर कैसे...

मैं - हममे बात करनी hogi...par यहाँ nahi...ghar चलते hai.....Main बुआ और मास्टर को लेके आता hu...tum कविता मैडम को लेके aao....hum तुरंत niklenge....waha रूपल दीदी ो भी बुल्ला लेंगे...

निकिता - पर घर पे....

मैं - haa..wahi होगा जो होना hai....ab जल्दी जाओ...

मैंने घर जाने के लिए कहा क्यूंकि मुझे अब रूपल दीदी का भी कुछ करना tha...Druv के अनुसार 2 दिन hi रह गए the...aur मुझे सही से पता भी नहीं था की चल क्या रहा है उनके saath.....Main पहले बुआ के केबिन में गया वो कुछ सामान धुंध रही थी....

मैं - बुआ बात करनी थी...

बुआ - यहाँ nahi....gha चलते hai...mujhe भी कुछ बात करनी hai....aur निकिता कहा hai...mujhe सब शुरू से जानना है....

मैं - मैंने उसको आने के लिए बोलै hai...Main मास्टर को बुला के आता हु....

बुआ - वो यहाँ नहीं hai....wo स्ट्रेंज प्लेनेट पे गया hai....Elf वर्ल्ड में....

मैं - वो वह क्यों गयी hai....kya दब की वजह से...

बुआ - पता nahi...par सायद haa....unhone कहा है अगर जरुरत पड़ी तो हममे बुल्ला legi...par अभी घर चलते hai....Mujhe सब जल्दी जानना है....

मैं उनके साथ बहार आया उनकी केबिन se.....aur जब आ रहा था तभी मुझे पंकज और उसके पिता dikhe....Pankaj काफी परेशां और डरा हुआ tha....aur उसके पिता उसको कुछ संभ्हल रहे the....hogi कोई baat....par अभी इनसे ज्यादा इम्पोर्टेन्ट काम करना था मुझे....

मैं और बुआ जल्दी से सफ़ेद पत्तो वाले पपड से होते हुए बहार nikle...bahar hi हममे कविता मैडम और निकिता दिख gaye....hum चारो बस पे baithe...aur फिर घर....

घर पे आते समय hi दीदी को भी बुल्ला लिया था बुआ ne...unhone पूछा क्या हुआ है पर बुआ ने कुछ नहीं bataya...Hum घर pahuche...darwaja चची ने खोला tha...hum अंदर जा hi रहे थे की तभी वह पे दीदी भी पहुंच gayi...Chachi को अजीब लगा ये sab...par उन्होंने इस वक़्त कुछ नहीं pucha....hum अंदर गए....

चची -पहले खाना खा लो फिर बातें कर lena...aur वो नहीं आया वो एल्फ लड़का जो tha...usko भी ले aate...Prateek वो फिर से गुस्सा हो जाएगा...

मैं क्या bolta...usko उसके बाप ने अपने देश में अपने hi जेल में कैद कर लिया hai......aur फिर इसके पीछे की wajah....wo क्या batata...ki उसने अपने बाप पे हमला किया...

बुआ - वो कही गया हुआ है भाभी वापस आएगा तो उसको लेके aayenge...abhi आप खाना लगा दो....

चची चली गयी किचन में दादा दादी कही बहार गए हुए the...aur चाचा को और भी काम होते hai...kaam तो चची को भी होते है पर इस वक़्त वो रोज घर आ जाय करती है...

कविता मैडम - क्या हुआ था वह pe...sab बताओ....

रूपल दीदी - कहा pe...kuch हुआ है kya....aur मुझे इतनी जल्दी क्यों आने bola...main किसी के साथ thi....mujhe उसको छोड़ के आना पद गया...

बुआ - पहले खाना खाएंगे बातें मेरे रूम में hongi...ab सब चुप...

रूपल दीदी ने जैसे hi ये बात उसी उनकी आँखें बड़ी हो गयी....

रूपल दीदी - बुआ आपके रूम mein....kuch बड़ा हुआ है kya....chotu टुन्ने कुछ किया kya...yaa कोई तुझे परेशां कर रहा hai...naam bata.....abhi कुछ को ठीक कर रही hu...par ये वेट कर lengi....pahle उसको सबक सिखाऊंगी...

चची - किसको सबक sikhaogi...kya बोल रही थी ये abhi...kuch हुआ है क्या...

कविता मैडम - भाभी ये मुझे सबक सीखने के बारे में बोल रही hai...wo वापस से मैच करना चाहती hai....lagta है भूल गयी अपने हारने की लिस्ट को...

चची - पता नहीं किसपे गयी है ye....mujhe देखा है कभी ऐसे लड़ाई की बातें करते hue....har वक़्त यही सब चलता रहता है दिम्माग में.....

तभी दरवाजे से एक आवाज आयी....

नानी - तुझपे hi गयी hai...badi आयी कभी देखा है क्या मुझे लड़ाई की बातें करते hue....kisse सुनाने लगी इनको तो 2-3 दिन तो निकल hi जाएंगे...

चची - मम्मी aap...aap यहाँ और मैं नहीं लड़ती thi...wo तो बस hi जाता था....

नानी - वो मैं जब यहाँ से जा रही थी तभी बच्चो को देखा था आते hue....to सोचा इनके लिए कुछ ले aaun...ye तो आएंगे नहीं वह...

पता नहीं ये सब क्या चलने लगा yaha.....main दब के लिए परेशां था और ये लोग यहाँ फालतू की बातें कर रहे थे....

मैं काढ़ा हुआ और वह से चला gaya...upar अपने रूम में....

चची - इसको क्या हुआ hai.....Rupal....Poonam क्या किया है...

निकिता - इनलोगो ने कुछ नहीं kiya....wo दब के साथ...

निकिता ने सबको सब कुछ साफ़ साफ़ bataya....har एक baat...jisko सुनने के बाद वो सब चुप हो गए....

चची - तुम सब खाना खाओ मैं उसको लेके आती हु.....

रूपल दीदी - मम्मी मैं भी आती हु...

चची - कहा ना खाना खाओ...

चची ऊपर आए गयी....

जब मैं ऊपर गया तो मैंने ओल्ड आउल को bulaya....aur उसको कहा जाके देखे दब कैसा hai....Sath hi उसको लीमो तक ये बात पहुंचने को बोलै की उसका ख्याल रखा jaaye....Agar चची ने दरवाजा नहीं खोला नॉक किया होता तो सायद मैं अभी ज्वाला के पास hota...uske साथ एल्फ कंट्री जाने के liye....par दवाजा नॉक हुआ...

चची - प्रतीक बाबू दरवाजा kholo....baat करनी है...

मैं - चची अभी nahi...mujhe भूख नहीं लगी है....

चची - अरे मैं खाने को नहीं बोल रही पर दरवाजा तो खोल....

मैंने दरवाजा खोल diya....wo आयी और सामने चेयर पे बैठ गयी...

चची - अब क्या करोगे...

मैं - मतलब....

चची - मतलब ये की मुझे सब पता चल गया hai....ab बस ये जानना है की अब क्या करोगे...

मैं - मुझे उसको बचाना hai...usne कुछ नहीं किया है उसका एलिमेंट कण्ट्रोल से बहार चला गया था और बस इसीलिए ये सब hua...main उसको वह से निकलूंगा...

चची - पता है मैंने सुन्ना tha...tumhare माँ पापा अपने दोस्तों के लिए कुछ भी कर जाते the...par उसमे मुसीबत में भी फंस जाते the....aur सायद ये hi वजह है की वो आज हमारे साथ नहीं है...

मैं - क्या मतलब...

चची - मतलब कुछ nahi...bas इतना कहूँगी जो भी karo....acche के लिए karo...samjhe...aur खुद को संभल के रखा करो...

मैं - आप मुझे रोकेगी nahi....matlab मैं कही फंस गया तो....

चची - (मेरे सर पे हाथ फेरते हुए...) रोकूंगी तो तुम रुकोगे thodi...aur अब बड़ी हो रहे हो tum...bas संभल के करना जो करना ho....waise तुम्हे वह वो एल्फ कंट्री भी जानना होगा naa....usme मैं मदद कर सकती हु...

मैं - आप क्या मदद karogi....aur कैसे....

चची - वो मुझपे छोड़ do....ab पहले खाना khao...nahi तो कही नहीं जाओगे.....

मैं - ठीक है...

मैं उनके साथ निच्चे गया और वह पे खाना खाने laga...wahi वो फ़ोन p[e किसी से बात करने लगी...

बुआ - क्या hua....ab कैसे करेंगे हम kuch...bhabhi तो जाने नहीं देंगी...

मैं - वो तो हमारे जाने के लिए मदद करने वाली है....

रूपल दीदी - क्या.....

मैं - हां....

फिर मैंने उनको सब कुछ बताया.....

बुआ - उन्होंने तुम्हारे माँ डैड के बारे में और कुछ बताया क्या...

मैं - नहीं उसके बारे में नहीं बताया....

बुआ - हम्म ठीक है चलो जल्दी खाना ख़तम करो और यही बातें होंगी अब...

मैंने खाना ख़तम किया और फिर हमारी बातें शुरू hui...shuru क्या होती सब तो पहले hi निकिता ने बता दिया tha...ab ये बातें हो रही थी की हम कर क्या सकते है...

मैं - लीमो को बोलके उसको वह से निकलवा सकते है...

बुआ - इससे लीमो और उसका ग्रुप खतरे में पद सकते hai.....wo मदद तो कर dega.....par हम ऐसा नहीं कर sakte....kyunki उसके बाद वो सेनापति खुल के कुछ भी कर सकता है...

हम बात कर रहे थे की चची वह पे आयी.....

चची - तुम सब का पास रेडी hai....thodi देर में तुम सब कानूनी तौर पे वह जा सकते हो...

बुआ - कानूनी तौर pe....par...aapne कैसे ये...

मैं - एक मिनट कानूनी तौर pe....matlab क्या है iska....maine पढ़ा था हम स्ट्रेंज वर्ल्ड नहीं जा sakte...waha क्या हम कही नहीं जा सकते......

चची - बाबू सही चाभी का उसे करो तो हर तल्ला खुल जाता hai...kuch लोग है जिनको मैं जानती hu......waise तो उनकी मदद माँ डैड के लिए लेनी thi...par वो अब आज़ाद है और इन् सब को बेकार नहीं जाने दे सकते....

मैं - मैं कीउच्च समझा नहीं.....

बुआ - स्ट्रेंज वर्ल्ड के कौंसिल से आपकी अब भी बातें होती hai....aapne बताया क्यों नहीं...

चची - बातें बंद hi कब हुई thi....khair वो chodo...tumhare भैया आ रहे है किसी को लेके वो लेके जाएगा तुम सब ko...aur हां सब कुछ कानूनी hoga...Poonam Kavita....tum दोनों के भरोसे छोड़ रही हु sabko.....Nikita तुम वह मत जाओ.....

निकिता - Kya....par क्यों...

चची - इन् सब को यहाँ भी लोगो की जरुरत hogi....tum मेरे साथ यहाँ कुछ काम karogi...waise तो मैं कविता या रूपल को भी रिओक leti.....par उनकी जरुरत होगी waha...aur दो वैम्पायर मिलके बहुत कुछ कर सकती hai....samjhi...

निकिता - Nahi....par आप कह रही हो तो नहीं jaungi....Prateek मुझे दब यहाँ चाहिए समझे...

मैं - हां हम उसको लेके hi आएंगे....

तभी दरवाजा खुला और चाचा जी एक मॉटे से आदमी के साथ आये अंदर.....

मोटा आदमी - उह Nidhi(Chachi) डार्लिंग कितने दिन हो गए मिले hue....chalo जल्दी से कुछ खिला दो अपने हाटों ka....ghar का खाना खा खा के थक गया हु मैं....

चाचा - अरे रूक्को yaar...tum भी आते hi खाना खाना करने लग जाते ho...pahle इन् सबको सब समझाओ...

वो - Haa....to 1...2...3...और ये 4 ...तुम charo...ab कान खोल के सुनने जो मैं बता रहा hu.....Main यहाँ स्ट्रेंज वर्ल्ड के कौंसिल के तरफ से भेजा गया hu...mujhe एअर्थ पे अपने प्लेनेट के लोगो ka....aur उनके बच्चो का ध्यान रखना होता hai...jo मैं ठीक थक तरीके से कर hi लेता hu....ihair ये सब छोड़ के हम मुद्दे पे आते hai....Tum chare.....sarkari पोर्टल से होते हुए वह jaoge...jaha तुम सबके शील्ड्स रख लिए jaayenge......aur हथियार bhi...par तुम्हे एक लॉकेट milegi....ye लॉकेट तुम्हारी सुरक्षा के लिए hai....jab तक वो तुम्हारे पास है कोई तुमपे हुम्ला नहीं कर sakta...Portal से निकलने के बाद तुम्हे साफ़ किया jaayega.....Bura मत मन्ना वह पे कुछ लोग है जिनि सोच कुछ गिर्री हुई hai...wo समझते है एअर्थ से या और निचे जगहों से जाने वाले साफ़ सफाई पे ध्यान नहीं dete....par उनको पता नहीं उनसे ज्यादा साफ़ सफाई होती है यहाँ एअर्थ pe...khair....uske बाद तुमको पहले तो कौंसिल के सामने ले जाय jaayega...aane की वजह पूछी jaayegi...wo सब मैं देख चुक्का hu....waha कोई भी गड़बड़ नहीं होगी तुम सब के साथ मेरी जुब्बण है ye....Nidhi ने बताया मुझे मामला क्या hai....waise तो ये गंभीर hai...par अगर किसी तरह एल्फ प्रिंस अपने गुनाहों को मैंने से इंकार करदे तो वो सज़्ज़ा से बच jaayega....aur इसका भी बंदोबस्त कर दिया है maine....Strange वर्ल्ड के सबसे बड़े कोर्ट में हमने इन् सब के लिए सुनवाई करने को कहा hai....waha पे एक बहुत hi अच्छा वकील hai....jo हमारे साइड hoga....aur उसकी मदद से हम एल्फ प्रिंस को बच्चा lenge....par...agar एक बार भी उसने गलती से भी अपने मुँह से अपना जुर्म कबूल kiya......to फिर कुछ नहीं हो सकता....

मैं - पर क्या एल्फ किंग उस कोर्ट में आएंगे...

वो - बीटा एल्फ किंग क्या उनके पिता जी भी आ jaayenge...waise वो बड़े दयालु the...main मिला था unse....unhone hi एअर्थ के साथ संधि वाली बातें आगे बधाई thi....unki आत्मा को शांति mille....haa तो वो aayenge...unko आना hi padega...naa आने पे ना सिर्फ उनको और बाकी के एल्फ लोगो को परेशानी होगी बल्कि सज़्ज़ा अलग से मिलेगी...

मैं - तो हममे बस वह जानना है और दब अपना जुर्म कबूल ना करे ये करना है....

वो - हां पर ये जो बस बोलै है ना वो खतरनाक हो सकता hai...abhi तक एल्फ कॉण्डोम में ये बात फैल चुक्की होगी की सबसे बड़े कोर्ट में इन् सब की सुनवाई होने वाली hai.....aur ऐसे में तुम उससे मिल नहीं पाओगे...

मैं - हम कुछ कर लेंगे....

वो - फिर ठीक hai...bahar बस hai...jao बैठ जाओ वो पंहुचा देंगे तुम्हे सरकारी पोर्टल tak.....waise मैंने सब संभल लिया है पर फिर भी थोड़ा आराम से करना जो भी करना हो....

हम - हां ठीक है....

Chacha...chachi हममे वह बस तक छिड़ने aaye...unhone हमसे कुछ बाटें कही और फिर हम निकल गए.....

वही घर पे....

निकिता - मुझे क्या करना होगा....

चची - (मोठे आदमी से) ये निकिता है...

वो - हम्म तो इसने देखा था सब kuch....beta आपको पता है आपको यहाँ क्यों रोक्का है....

निकिता - Nahi...kyun रोक्का है मुझे...

चची - ये लोग तुम्हारी मेमोरी को चेक karenge....ye वो सब देखेंगे जो तुमने वह देखा tha.....inko सच जानना है...

निकिता - पर मैंने सब सही बताया है....

चची - मैं जानती hu....par ये लोग ऐसे नहीं samjhenge....tumhe ये करना hoga....aur जब तुम ये करोगी उसके बाद hi प्रतीक और बाकी सब के लिए कोर्ट तक पहुंचना मुमकिन hoga.....ye सब तुम अपने दोस्त के लिए करोगी...

निकिता - पर इसमें कुछ होगा तो नहीं ना...

चाचा - नहीं कुछ नहीं hoga...hum होंगे वह...

निकिता - पता नहीं कैसे दोस्त मिले है कुछ भी हो फसना मुझे hi hai....chaliye कहा जाना है....

मोटा आदि - जाना कही नहीं hai...main सब कुछ लेके आया hu...yahi कर लेते hai....par उससे pahle....Nidhi...

चची - हां हां ला रही hu.....khana खाना ...हर वक़्त बस यही दीखता है....

वो - अब खाना तुम्हारे हाथ का हो तो मैं कुछ भी कर jaun....waise ये प्रतीक वही है ना पार्थ का बीटा....

चाचा - हां वो मेरा hi भतीजा है.....

वो - हां पर चिंता की बात नहीं है कौंसिल मेंबर्स को इस बात की भनक भी नहीं लगी hai....wo वह सेफ है...

चलो यहाँ से चलते है हम स्ट्रेंज वर्ल्ड में...

हम charo...yaha आ चुक्के the...jaisa की उस मोठे आदमी ने बताया था सब वैसा hi हो रहा tha....par वक़्त लग रहा tha...Hum सबके शील्ड वह पे ले लिए gaye....par रूपल दीदी की कुल्हाड़ी नहीं ली gayi....kisi को पता hi नहीं चला उसके बारे mein...Bua ने अपनी तलवार देदी और कविता मैडम ने अपना bhala....maine भी जो मेरे पास था दे दिया tha.....uske बाद हममे वो लॉकेट मिला फिर साफ़ सफाई और उसके बा कौंसिल से मिलना tha....hum सब इंतज़ार करने लग gaye...tabhi मुझे ओल्ड आउल की आवाज सुनाई दी....

ओल्ड आउल - खबर पंहुचा दी गयी hai.....wo धयान दे रहे है....

मैं - नज़र rakho....aur कोई रास्ता batao....jisse मैं उससे मिल सक्कु..

ओल्ड आउल - ठीक है...

उसकी आवाज आणि बंद हो गयी.....

मैं - ध्रुव अभी वक़्त है क्या मैं दीदी की प्रॉब्लम देख सकता हु...

ध्रुव - एक वक़्त पे एक hi काम करो तो बेहतर hoga...aur अभी रूपल के बारे में ना hi सोचे तो सही है क्यूंकि वो तो यही है....

मैं - हम्म ये भी सही है....

थोड़ी देर में हम लोगो को बुलाया gaya....hum अंदर gaye...ander कुछ लोग the...sabhi अलग alag...prajation के the.....waha एक एल्फ भी tha...jo हममे hi घूर रहा था.....

"पुस्टि हो गयी क्या..."

वही पे किसी ने ऐसा पूछा....

"हां उसके बाद hi इन्हे यहाँ आने दिया है...."

"तो आप सब यहाँ पे एल्फ किंग को चुनती देने आये है..."

मैं - नहीं ऐसा नहीं है हम बस अपने दोस्त को बचने आये है...

मैंने झट से ये बोल दिया...

बुआ ने मेरी ओर देखा और चुप रहने का इशारा किया....

"हम्म हमने देखा वह क्या हुआ tha....aisa लगता है जैसे वो अपने काबू में नहीं ho...koi कण्ट्रोल कर रहा हो उन्हें..."

रूपल दीदी (धीरे से) - इनको तो पता है सब...

"पर वो इस बात को खुद काबुल कर रहा है उसने हमला किया hai....aur इसीलिए हम कुछ नहीं कर सकते..."

तभी पीछे से एक आवाज आयी....

"माय लॉर्ड्स पहले तो देरी से आने के लिए माफ़ी chahunga....aur रही बात की वो खुद मान रहा hai...to अभी आपने कहा लगता है जैसे वो किसी और के कण्ट्रोल में ho....to ये मुमकिन है की वो अभी भी ho...Main चाहूंगा उससे सभी जादू हटाने के बाद उसका बयां लिया जाए..."

ये सायद हमारा वकील tha....aate hi सही पॉइंट बोलै इसने...

उसकी इस बात को लेके सभी लो वह बातें करने lage...aur फिर थोड़ी देर बाद.....

"अब आपको वक़्त पे आने की आदत दाल लेनी chahiye....ye हमेशा का हो गया है लेट aana....ayenda ऐसा करने पे 10 सोने के सिक्के दंड honge...aur आपकी बात पे अमल किया jayega...hum कैदी को यहाँ कोर्ट में लाने से पहले उसके ऊपर किये गए सभी जादू हटा denge....mukadma कल hoga...aaj आप सब जा सकते है....

हम सब वह से बहार आ gaye....Vakil ने बुआ से बात ki.....aur फिर चला गया...

हम सब अब वह से बहार nikle....aur अब कहा जाए इसके बारे में सोचने लगे...

"तुम लोगो को बोलै था जब जरुरत पड़ेगी तो मैं खुद बुल्ला lungi....par तुम सब ने नहीं सुन्नी मेरी बात..."

ये मास्टर thi...jo बहार हमारा वेट कर रही थी....

मास्टर - अब यही खड़े rahoge...chalo मैंने कुछ बंदोबस्त किये है....

हम उनके पीछे चलने लगे....

मास्टर - रूपल ध्यान लगा रही हो या नहीं....

रूपल दीदी - kya....haa हां जितना वक़्त मिलता है उतने में लगा लेती हु....

मास्टर - हम्म ठीक है फिर....

वो हममे लेके एक बड़े से घर के पास gayi...aur दरवाजे पे नॉक किया.....

दरवाजा खुला...

"मैडम aap....iss वक़्त..."

मास्टर - क्यों नहीं आ sakti...mera घर है ये...

वो - नहीं मैडम वो bas...aapko बहुत वक़्त से देखा nahi....aur आज इस वक़्त मुझे लगा कोई बात होगी...

मास्टर - जाओ कमरे रेडी करो....

सायद करेटकरर होगा यहाँ ka...wo चला गया ये बात सुन्न के....

मास्टर - चलो सब अंदर....

हम सब अंदर gaye...ye तो किसी महल की तरह लग रहा tha...ekdum से अलग hi था ये....

हम चारो उसको देखते hi रह गए...

मास्टर ने बैठे को कहा और हम सब बैठ gaye...aur फिर उन्होंने पूछा की अब तक क्या क्या हुआ hai....humne भी उनको सब bataya....itne मेंनकारेतकेर वापस आ आगे.....

मास्टर - हम्म रूम्स रेडी है....

वो - जी मैडम सब रेडी है....

मास्टर - तुम सब यही रूक्को मैं बस अभी आयी....

वो वह से उठी और फिर ऊपर कमरों के पास चली gayi....thodi देर बाद वापस aayi...aur हममे भी ऊपर आने को kaha...hum चल दिए ऊपर....

मास्टर - तुम दोनों इन दोनों रूम्स में और ये बचे उधर उन् रूम्स mein....kal सुबह मुझे तुम सब चाहिए गार्डन mein.....Rupal तुम भी...

रूपल - जी...

पता नहीं क्यों पर मास्टर कुछ ज्यादा hi ध्यान दे रही थी दीदी pe...hum सब रूम्स में चले gaye....maine देखा मेरा रूम बिक्कुल पहले जैसा hi tha...main वह गया और सो गया....

सोते hi मैं पहुंच गया अलबूस और कूपर के pass....aaj पता नहीं kyun...par दोनों hi अलग लग रहे the....Main उनके पास गया और उनको chua....aur जैसे hi छुआ एक रौशनी मेरे अंदर से उनके अंदर gayi...aur उसके बदले उनके अंदर से भी कोई रौशनी मेरे अंदर आय थी....

ध्रुव - haa....ye वक़्त सही है.....

मैं - ये क्या hua....ye ऐसे....

मैं बोल hi रहा था की कूपर बड़ा होने लग गया देखते hi dekhte.....aur मेरी आँखें बड़ी होने लगे ये देख ke....matlab अभी जो ड्रैगन मेरे कंधे तक भी नहीं आ रहा tha...wo अच्चानक से बड़ा होने लग gaya.....aur बस यही nahi.....iske पास अलबूस भी वैसे hi बड़ा होने लग गया...

ध्रुव - चलो ये दोनों विकसित हो gaye....ab इनकी पूरी पावर्स उसे कर paaoge..aur तो और जब चाहो इनको अपने दुनिया में ला सकते ho......ye अपना रूप बदल सकते hai...aur ना जाने कैसी कैसी खूबियां आ गयी है इनमे....

मैं - Kya....ye बहार भी आ जाएंगे...

ध्रुव - हां आ सकते है bahar....aur सिर्फ बहार hi नहीं ये रूप भी बदल सकते hai...aur ये सबसे अच्छी बात है....

मैं - रूप बदल सकते hai...hmm ये सच में अच्छा है....

ध्रुव - वैसे कुछ पावर तुम्हारी भी अनलॉक हुई hai....par वो कौन सी है वो खुद पता कर lena.....ab आराम कर lo.....tumhari तलवार बाज़ी की ट्रेनिंग ख़तम हो चुक्की है अब...

मैं - पर इतनी जल्दी...

ध्रुव - ये पावर्स तभी अनलॉक होनी थी जब ट्रेनिंग पूरी होने वाली thi...to उस हिसाब से ये सही वक़्त hai...chalo अब सो जाओ....

मैं - हम्म ठीक hai....waise ये सब यहाँ hua....iska इससे कोई लेना देना तो नहीं है ना...

ध्रुव - नहीं ऐसी कोई बात नहीं hai.....ab सो jao....kal बहुत काम है...

मैं - हां...

और मैं सो gaya....wahi रूपल दीदी के रूम में भी आज मेरे hi रूम की तरह ड्रॉइंग्स और दसिग्नस बनने हुए the....wo अंदर गयी तो उनको अजीब सा लगने laga...jaise कोई उनको उस रूम से बहार जाने को कह रहा ho......par वो जा भी नहीं पा रही thi...aur फिर वो बीएड पे जाके baithi...aur उसके बाद वो सो गयी...

घर पे....

घर पे निकिता की मेमोरी चेक करने के बाद वो मोटा आदमी जा चुक्का tha...aur निकिता चाचा चची के साथ thi...raat काफी हो गयी थी तो उसको सोने के लिए kaha....par उसने नाना नानी के यहाँ जाने के लिए bola....Chachi उसको वह छोड़ के आ gayi....aur वो भी वही सो गयी...

पर एक जगह थी जहा पे कोई इसी रात को jaaga....par सायद हमेशा के लिए सोने के liye.....wo जग्गा उससे कुछ बातें पूछी गयी par...par उसको कुछ भी याद hi नहीं tha..ki आखिर हुआ क्या tha.....aur इसी वजह से उसको मार दिया गया...

नेक्स्ट मॉर्निंग.....

मैं utha...karib 4 बजे honge...main फ्रेश हुआ और बहार आ गया रूम se.....Room का दरवाजा सीधा गार्डन में hi khulla....saamne मास्टर बैठी थी सबका वेट कर रही thi....sabhi ने जैसे जैसे अपने रूम्स खोले वो गार्डन में hi पहुंच गया...

मास्टर - रूपल कैसा लग रहा है अब....

वो - कैसा लग रहा hai....accha लग रहा hai....neend अच्छी आयी थी...

मैं - मास्टर आप दीदी से ऐसा क्यों पूछ रही हो....

मास्टर - वो खुद batayegi...par अभी नहीं ध्यान लगाने के baad....sab ध्यान लगाने बैठो....

हम सब बैठ gaye....Main अपने चन्दर एलिमेंट पे काबू करने लगा पर तभी कुछ अजीब hua.....mujhe वह पे एक तलवार dikhi...jisme मेरी साड़ी थंडर पावर्स जा रही thi....wo उसको सोखे जा रहा था...

मैं - ध्रुव ये क्या हो रहा है...

ध्रुव - मैंने कहा था ना नया एलिमेंट dhundho...ab तक नहीं धुन्धड़ा tumne...par उससे कोई दिक्कत नहीं hai...ye तलवार तुम्हे उन् दोनों ने दिया hai.....ye तुम्हारी साड़ी एलिमेंट्स की पावर्स को अब्सॉर्ब करता rahega....aur जब जरुरत pade...tum इसको बहार निकल सकते हो और उसे कर सकते हो...

मैं - ये अलबूस और कूपर ने दिया है.....

ध्रुव - हां उन्ही दोनों ने दिया hai....aur भी चीजजें hai....par अभी इसी से काम चलाओ...

मैं - ठीक है...

तभी मुझे आवाज सुनाई देने लगती है.....

"बहार निकालो humme....hum बहार आना चाहते hai....tum ऐसा नहीं कर sakti......Hum मदद karenge....badla लेने में मदद karenge....bahar निकालो हममे..."

ये अजीब tha....mujhe तो नहीं कह रहा होगा ये जो भी था क्यूंकि वो "सकती है बोल रहा था" और मैं लड़का hu....par ये आवाज थी किसकी....

मैंने आँखें kholi...aur जब आँखें खोली तो रूपल दीदी के अंदर से वो आवाजें आ रही थी...

मैं- ये क्या है ध्रुव....

ध्रुव - हाथियों की bhasa....jab हैतयार तुम्हारे अंदर है श उसकी भहसा सुने और बोलने की शक्ति भी तुम्हारे ांडीर आ चुकी hai....maine ऐसे hi नहीं कहा की सही वक़्त पे हुआ ये sab....Ab बात करो उंनसे और पूछो क्या चाहते hai...aur कैसे शांत होंगे वो...

मैं - हम्म पर kaise....matlab मैं बोलूंगा तो वो सुनेगी...

ध्रुव - हां सुनेगी...

मैं - कुल्हाड़ियों शांत हो jao...aur बताओ क्या चाहती हो तुम.....

मैंने ये बोलै और वो कुल्हाड़ियाँ जो अभी तक बातें कर रही थी वो चुप हो गयी बिलकुल चुप......

मैं - मैं तुमसे hi बात कर रहा hu....kya चाहते हो तुम.....

वो - ये तो हमारी भासा बोल रहा है पर कैसे.....

मैं - मैं सुन्न रहा hu....par ये नहीं सुन्ना है mujhe....mujhe ये बताओ क्या चाहिए और शांत कैसे होगी तुम.....

वो - हम सब भूल चुके है कहा the...aur यहाँ कैसे aaye...kyun aaye...humme सब याद करना है...

मैं - और वो कैसे होगा....

वो - खून करके .....हमारा यही तो काम hai...hum खून करते है...

मैं - Kya....Dhruv ये तो पागल hai....dekho क्या बोल रही है...,

वो - देखो तो पागल हो गया है ye...khud से बातें कर रहा hai....aur हममे शांत karega.....bahar nikalo....Rupal हम मदद करेंगे...

ध्रुव - ये नकली hai....par बिलकुल असली की tarah.....aur बिजली के झटके के karan....aur इनकी मालिक के इनको वापस लेने के कारन कुछ यादें वापस आ गयी hai....aur ये समझ रही है ये दोनों असली hai....aur ये सब कुछ जानना चाहती hai..jo मुमकिन hi नहीं है.....

मैं - इतना कुछ नहीं जाना है mujhe...ye बताओ इनका करना क्या है....

ध्रुव - शांत हो jao...bata रहा hu.....inn दोनों को एक झटका और dedo...sayad मेमोरी जो आयी है वो चली जाए...

मैं - और वो पावर्स...

ध्रुव - वो तो rahengi.....aur जब तक ये रूपल से जुड़ी हुई होगी हममे कोई चिंता नहीं करनी चाहिए इसको लेके.....

मैं - हम्म ये सही है मतलब मुझे बस बिजली को बुलाना है और वो एक झटका देगी इसको और बात ख़तम....

ध्रुव - हां बात ख़तम...

मैं - जब यही tha.....to पहले क्यों नहीं bataya...ajeeb हो यार तुम भी...

मैं -ज्वाला बिजली को यहाँ भेजो जल्दी.....

ज्वाला - बिजली ko.....wo तो नहीं है...

मैं - kYa....nahi है मतलब....

ज्वाला - वो कही गयी hai...usko कुछ काम आ गया tha...batao मैं कर देता हु जो करना है.....

मैं - बिजली का झटका देना hai...main कर देता hu....kab तक आएगी वो....

ज्वाला - मुझे क्या pata....wo थोड़ी बता के जाती है इतने दिन में लौर aaungi...wo अपने मैं की करती है.....

मैं - अच्छा उसको धुन्ध्दने के लिए कुछ लोग bhejo....aur ये जल्दी karo...mujhe वो यहाँ चाहिए जल्दी और ये इम्पोर्टेन्ट है.....

ज्वाला - यहाँ भेजो लोगो को वह भेजों लोगो ko....ab लोग बच्चे hi नहीं hai...addhe जो है वो अभी ठीक हो रहे hai....aur बाकी के उन् पोलर बेअर्स के पास hai....aur कुछ है जो सरहदों पे रखवाली कर रहे है उनको नहीं भेज सकता मैं....

मैं - कुछ तो करना होगा ज्वाला ये जरुरी है....

ज्वाला - ओल्ड आउल को भेज दो वो तो तुरंत hi पता लगा लेगा...

मैं - वो कही और बिजी hai....hmm तुम jao...tum धुंध के laoo....Haa तुम बिजली को ढूंढो जल्दी....

ज्वाला - मैं यहाँ का राजा hu...mere कबीले में अभी दूसरे लोग आये हुए hai....itna रिस्क नहीं ले सकते...

मैं - ज्वाला ये सच में बहुत जरुरी है मुझे मजबूर मत करो आदेश देने pe...accha नहीं लगता वो...

ज्वाला - ठीक है मैं माँ को यहाँ का देखने बोलता hu.....aur जाता हु....

मैं - जल्दी से लेके आना उसको....

ज्वाला - हां ठीक है....

मैं - ध्रुव अब्ब क्या करे.....

ध्रुव - करना क्या hai....iski बात मानो....

मैं - पर ये तो दीदी का उसे करने वाली है....

ध्रुव - हां और तुम्हे रोकना hai...waise तुम्हारी मास्टर ये काम कर रही है....

मैं - Kya....kya कर रही है वो...

ध्रुव - इनको ध्यान लगाने को kaha....raat में इनका रूम सही kiya....ye सब कर रही है wo....sayad ये भी काम कर jaaye....aasli वाले आये तब के लिए तो अच्छा है ये सब...

मैं - हम्म तो मुझे क्या करना चाहिए...

ध्रुव - दब को बचाओ....

मैं - हां दब क बचाना है.....

सभी ध्यान से उठे और फिर सबने खाना खाया....

मास्टर - तो क्या सोचा है कैसे उसको शांत karoge...wo तो खुद hi काबुल किये जा रहा है....

मैं - हममे मिलना होगा उससे.....

मास्टर - ठीक है मैं लेममो से बात करती hu....kuch देर में चलते है उससे मिलने...

हमने नास्ता ख़तम kiya...uar फिर बहार जाने को हुए....

मास्टर - वो दरवाजा नहीं यहाँ पीछे aao...yaha से जाना है....

हम सब जहा से आये थे उसी जगह से वापस जा रहे the...aur मास्टर ने हममे रोक लिया....

मास्टर - दब से मिलना है ना चलो...

हम्म उस दरवाजे से गए और हम पहुंच गए सीधा एल्फ कंट्री के बॉर्डर pe....jaha वही दीवार thi....jiske आर पार हो जाते है अगर दरवाजे से ना जाए to...bahar एक बगी कड़ी हुई thi...jisme कुछ सिपाही थे.....

मास्टर - हम्म वो raha....ussi से लेके जाएंगे usko...abhi सायद जादू हटा रहे होंगे उसके ऊपर से....

मैं - हम कब बात कर पाएंगे उससे.....

मास्टर - Abhi.....wo dekho....Leemo आ रहा है...

हमने dekha...Leemo एक पेड़ के पास से चला आ रहा tha.....uske साथ और भी दो लोग the...wo बगी के पास गए और वह जो सैनिक थे उनको एक कागज़ dikhayi....kagaz देखते hi वो सब वह से चले gaye......aur थोड़ी देर में वह पे दब को लेके aaye.aur वापस चले गए....

लीमो - आ jao...par वक़्त ज्यादा नहीं hai.....aur राजकुमार मान hi नहीं रहे hai...wo तो जैसे....

हम सब उसके पास गए....

मैं - दब तुम ठीक हो ना.....

दब - मैंने maara...maine मारा...

लीमो - ये जब से आये है ऐसे hi बोलते जा रहे hai....ye शॉक में hai....inko ऐसे कोर्ट में पेश करना मतलब इनकी maut....aur उसके बाद वो सेनापति युवराज बन jaayega.....wo सब बर्बाद कर देगा...

बुआ - अब क्या kare...ye तो बुर्रा हुआ....

मैं - ध्रुव तुमने कहा था वो दोनों रूप बदल सकते hai.....kya वो...

ध्रुव - हां bilkul....bas उनको bulao...aur बताओ क्या करना है....

मैं - अगर ये कोर्ट जाए hi नहीं to...matlab हम इसको भगा के लेके जाते है.....

कविता मैडम - पागल मत बन्नो Prateek...isse इसके खिलाफ वररेंट निकल jaayega....aur शिकारी इसके पीछे लग jaayenge....fir और मुशीबत हो जायेगी...

मास्टर - हम्म वैसे आईडिया बुरा नहीं hai....par कविता की बात में भी दम है...

मैं - हम्म अच्छा आप सब मेरी बात sunno.....Master इसको आप एअर्थ पे मेरे घर pahuchao....baaki मैं लेममो के साथ यहाँ सब संभालता हु...

लेममो - मेरे साथ.....

मैं - Haa....par पहले आप सब jao....aap सब कोर्ट पहुँचो मैं भी वही मिलता हु....

रूपल दीदी - चितु मैं नहीं जा रही kahi....jo होगा मेरे सामने होगा....

बुआ - और मैं भी नहीं जा rahi....aur तुम करने क्या वाले ho...kahi कुछ गड़बड़ हुई तो....

मैं - नहीं hogi...aap समझो....

बुआ - नहीं मतलब नहीं...

ध्रुव - इनके साथ जाने में hi भलाई hai...par पहके बात तो करलो अपने दोस्त se...akele में...

मैं - हां समझ gaya....(sabse) अच्छा मैं अकेले में बात तो कर सकता हु ना इससे....

दीदी - अकेले में क्या बात karega...jo करना है सामने करो....'

मैं - बुआ...

बुआ - हां ठीक hai...Rupal chalo....karne दो बात isko....tum सब भी चलो...

वो सब gaye...aur मैंने ज्वाला को आवाज लगायी....

मैं - ज्वाला इसको पोर्टल से घर पहुचाओ मेरे....

ज्वाला - हां रूक्को अभी किसी चीज़ में फसा हुआ हु....

मैं - Kya....jaldi करो वक़्त नहीं है.....

ज्वाला - मुझे मदद चाहिए यहाँ आओ....

ध्रुव - Jao..par पहले दोनों को बहार nikalo.....ek को खुद में बदलो और दूसरे को Isme...fir जाओ....

मैं - अलबूस ....कूपर बहार aao....aur मेरा और इसका रूप लो...

मैंने ऐसा बोलै ....और मेरे सीने से लाइट nikli....jisme से वो दोनों बहार आये पर रूप बदल के hi आये थे.....

मैं - ध्रुव इनको सब समझाना भी होगा ना....

ध्रुव - थोड़ी मदद मैंने कर दी hai...samjhane की जरुरत नहीं ये सब समझ गए है....

मैं - ज्वाला पोर्टल खोलो हम आ रहे है...

उसने पोर्टल खोला और मैं दब को पकड़ के उसके अंदर चला गया और यहाँ पे अलबूस जोकि मेरे रूप में tha...aur कूपर जो दब के रूप में था वो वही थे...

चलते है ज्वाला के पास देखने की उसको क्या हुआ है.....

हम दोनों पोर्टल से बहार aaaye....ye दब तो अभी तक पागलों की तरह बस एक hi बात बोले जा रहा tha....maine देखा वह पे एक पाथेर है मैंने उसको वही पे बिठा diya....aur ज्वाला के पास चला gaya....Waha पे कोई एक आँख का दानव था जो ज्वाला को पकडे हुए था.....

मैं - ये दानव ने तुम्हे कैसे पकड़ liya...aur तुम हमला क्यों नहीं कर रहे...

ज्वाला - ये बच्चा hai....iskon कुछ किया तोयुद्ध शुरू हो jaayega...aur अभी उस हालत में नहीं है hum...ab छुड़ाओ मुझे....

मैं - तुम तो बिजली को ढूंढने निकले the..yaha इस जगह कैसे आ गए.....

ज्वाला - वो यही से गयी है ऐसा मुझे ोाता चला तो देखने आ गया पर वो जा चुक्की thi.....ab निकालो भी...

मैं - हां निकल रहा हु....

समझ नहीं आ रहा था इस एक आँख वाले दानव का क्या karu....usne तो बोल दिया हमला नहीं करना है तो अब कैसे छुड़ाओ उसको.....

मैं - ध्रुव क्या करना चाहिए अब....

ध्रुव - मैं कोई बच्चे खिलने वाला लगता हु kya....mujhse क्या पूछ रहे हो...

मैं - अरे कुछ तो पता होगा ना....

ध्रव - उसका ध्यान bahtkao....koi नयी चीज दिखाओ usko...sayad छोड़ दे ज्वाला को....

मैं - नयी चीज़ क्या dikhaun...yaha बस ये पत्थर hi hai....aur मेरे पास भी कुछ नहीं hai....kya कुछ खाने को मिल सकता है यहाँ सायद उससे ध्यान हैट जाए इसका...

ध्रुव - साइज देखा है iska...uss हिसाब से बहुत कुछ चाहिए खाने के liye....hmm वैसे वो आ सका है yaha....tumne तो टेलेपरटशन पढ़ा है ना तुम लेके आ जाओ कुछ...

मैं - पर अभी प्रैक्टिस नहीं किया है....

ध्रुव - तरय karo...sayad कुछ हो जाए....

मैंने तरय kiya....School के दिंनिंग हॉल में एक पोर्टल khola...aur वह से खाने की चीज़ें यहाँ लाने laga....bahut कुछ लेके आ गया yaha....par इस दानव को ये दिख hi नहीं रहा था सयाद....

ध्रुव - गरम करो isko....syad स्मेल से पता चल जाए....

मैं - अब आग कहा से laun...Jwala बिन्ना उसको चोट पहुचाये यहाँ आग आगा सकते हो क्या....

ज्वाला - मजाक का वक़्त नहीं है ye.....yaha पे बहुत से पाथेर है खुद करो कुछ....

मैं - हां ये हो सकता hai.....insano के साथ ये सीखा था मैंने....

मैंने कुछ लकड़ियां uthayi...aur फिर पाथेर से उनमे आग लगा के खाने की चीज़ज़्ज़न गरम करने लगा जिससे उसका धययन मेरी ओर aaye...par किस्मत तो ख़राब है मेरी...

उसका ध्यान तो नहीं आया पर एक और बड़ी दानव का ध्यान आ gaya...aur वो वह आ gayi....usne निच्चे मेरी ओर dekha....aur फिर खाने की ओर....

"कोण हो tum...aur मेरे बच्चे को क्यों परेशां कर रहे हो..."

मैं - मैं इसकी भासा समझ पा रहा हु....

ध्रुव - वो नार्मल लैंग्वेज में hi बात कर रही hai....ab बताओ उसको ज्वाला के बारे mein....chudao उसको...

मैं - हां (उससे) आपके बच्चे ने मेरे दोस्त को पकड़ लिया hai...usko छुड़वा dijiye...main आपके लिए खाना लाया हु....

वो - Dost....tumhare दोस्त को पकड़ लिया...

उसने देखा की उसके बच्चे ने ज्वाला को पकड़ा हुआ hai....usne उसको chudwaya....aur निच्चे रख दिया...

वो - तुमने मेरे बच्चे को कोई नुकसान नहीं pahuchaya....wo नासमझ hai...issiliye पकड़ लिया था tumhe....par तुम समझदार ho.....agar कभी जरुरत pade...to मुझे याद करना मैं मदद करने आ जाउंगी...

मैं - जी sukriya.....par अभी हममे जानना होगा....

ज्वाला - Rukko....(unse) आपने मेरे जैसे hi किसी को देखा है पर उसके पंखों में बिजली तैरती है...

वो - तुम्हारे jaisa.....haa देखा hai....wo आगे की ओर गयी hai...parehsan और गुस्से में लग रही thi.....ladayi हो गए क्या उससे...

ज्वाला - नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है....

वो - वैसे तो समझदार लगते ho....baat मानो meri...manna लो usko...wo यहाँ से खायी की तरफ hi गयी hogi...usko मन्ना lo...baat मान लो उसकी....

ज्वाला - हां हां ठीक है अब हम चलते है....

मैं - किस लिए लड़ाई हुई....

ज्वाला - ये जानना जरुरी नहीं hai...wo रहा पोर्टल जाओ tum...main उसको देख के आता hu...pata नहीं क्या क्या देखना होगा मुझे....

मैं दब को लेके पोर्टल से जाने लगा....

मैं - मान लो बात उसकी...

इतना बोल में अंदर चला gaya...ghar पे अभी चाचा चची दोनों the....unko हमारी चिंता हो रही थी इसलिए काम पे नहीं गए the....aur निकिता भी थी wahi...wo भी स्कूल नहीं गयी थी......

मैं दरवाजे के पास पंहुचा और वह दरवाजा खुला हुआ hi tha...main उसको लेके अंदर चला गया...

चची- आ gaye..baaki सब कहा hai...aur ये ऐसे क्यों है....

मैं - आप इसको sambhalo....main अभी आता हु...

मैं इतना बोलके वह से निकला और ज्वाला को फिर से बोल के पोर्टल खुलाया और वह से वापस कोर्ट के पास पहुंच gaya....iss बार सायद किस्मत बहुत अच्छी thi....ye ज लॉकेट हमारे गल्ले में thi...wo असल में हमारी लोकेशन जाने के लिए भी thi...jaise hi कोई उस लॉकेट के साथ बहार चला जाता है यहाँ सबको पता चल जाता hai....mere साथ भी यही hua....par उस वक़्त अलबूस यही कोर्ट में tha...to उनको समझ नहीं आ रहा था ऐसा कैसे hua....par फिर वो सब उसको पकड़ने आने lage...aur मैंने ये देख लिया....

मैं - ध्रुव अलबूस को बहार bualo....main उसकी जगह जाता हु...

ध्रुव - हां ठीक है....

उसने उसको बहार बुलाया और वो मेरे अंदर आ गया और मैं वह जाके बैठ गया जहा पे वो tha.....aur तुरंत hi वह कुछ लोग आ गए...

"क्या हम आपका लॉकेट देख सकते है....."

मैंने लॉकेट उनको दे diya....usko देखने के बाद वो सब चले gaye...wahi कूपर ने भी अपना काम बहुत अच्छे से किया tha...usne ऐसे hi एक कहानी बता दी जो ध्रुव ने उसको समझाया tha...par आंत में एक गड़बड़ हो गयी....

एल्फ किंग ने अपने सेनापति यानी अपने भतीजे को युवराज घिसित कर diya...aur वजह ये बताई ki....agar ऐसा कुछ भविस्य में hua...to दब से सब बर्बाद हो jaayega...aur इतना बड़ा रिस्क नहीं लिया जा सकता hai...unki इस बात पे बाकी सब भी सहमत हो gaye....ur ये फैसला aaya....saath hi उन्होंने कहा की अब दब वापस उस प्लेनेट पे जब स्कूल पूरी तरह ख़तम हो जायेगी तब hi आ paayenge....usse पहले nahi....ye एक तरह से देश निकला था...

हम सब खुश भी थे और उद्दस bhi...phir हम सब के जाने का प्रबंध किया गया और हम सब वापस एअर्थ पे आ gaye.....Ghar के दरवाजे तक पहुंचते hi मैंने कूपर को अपने अंदर खिंच liya....aur असली दब तो अंदर hi tha.....haa कुछ कॉम्प्लीकेशन्स हुई th...par मैंने संभल liya....lekin एक चीज़ज़ नहीं संभल paya....DB अभी भी पागलों की तरह एक hi बात बोले जा रहा था....

कविता मैडम - मुझे लगता है इसको किसी और तरीके से ठीक करना होगा....

बुआ - कैसे...

कविता मैडम - अच्छा सुनने मैं ना टाइम निकल के इंसानो के हॉस्पिटल्स में जाय करती hu....inn सब के हॉस्पिटल्स बड़े अच्छे होते hai...inka ट्रीटमेंट का तरीका अजीब है पर काम करता hai....aur मैं भी देख देख के सिख रही hu.....mujhe लगता है इसको शॉक देना चाहिए....

मैं - Shock...aap इसको वायर्स से शॉक देने की बात कर रही हो....

कविता मैडम - हां bilkul...wahi...wo लोग कुर्सी पे बिठा के शॉक देते है और पेशेंट्स बोलने लग जाते है...

मैं - नहीं इसमें खतरा है....

बुआ - वैसे तरय किया जा सकता है...

मैं - क्या बोल रही हो बुआ इसको कुछ हो गया तो...

रूपल दीदी - अच्छा कल से वैसे भी छुट्टियां शुरू hai....aur आज तो जाने से रहे अब wapas....to इसको यही रखते है और देखते है क्या होता है....

मैं - हां ये ठीक है....

आज के लिए इतना hi.... नेक्स्ट में मन्ना लेंगे निकिता ko....agar कुछ और नहीं हो जाता तो.... :lol: और साथ में एल्फ कंट्री पे होने वाली कुछ बातें भी dekhenege....jo सायद खतरनाक हो सकती है...

बनने रहे
 
अपडेट - 46

अब तक

बहुत कुछ हो गया... :स्वेट: दब को बचने के लिए बहुत कुछ करना पड़ा tha...par कुछ नयी पावर्स की और साथ में अलबूस और कूपर की मदद से सब सही raha...aur दब बच gaya...lekin उससे उसकी जगह चीन ली गयी... अब वो अपने देश का युवराज नहीं raha...saath hi उसको अब अपने देश वापस नहीं जाने दिया जाने वाला था जब तक उसकी पढ़ाई पूरी नहीं हो jaati....inn सब के alawa...uski हालत ख़राब thi...wo अपनी सोचने समझण की क्षमता सायद खो दिया tha...kuch और भी बातें hui...jaise रूपल दीदी की कुल्हाड़ियों से बात karna...aur उनका इलाज भी मिल गया par...par बिजली कही चली गयी thi...pata नहीं kyun....sayad ज्वाला के साथ कुछ हुआ ho...issi दौरान एक एक आँख वाली दानव से भी मुलाकात हुई एयर उसने हममे भविष्य में कभी भी मदद चाहिए तो उसको याद करने के लिए बोलै...

अब आगे

रात बाद मुश्किल से कटती thi....DB सोया hi nahi....hum सब उसको सँभालते रहे पर कुछ नहीं हो रहा tha....aur दूसरी रूपल didi...pata नहीं सायद कुल्हाड़ी उनपे वापस से हावी होने लगी थी इस्सलिये या कुछ aur...wo थोड़ी चिड़चिड़ी हो गयी thi.....issi वजह से मास्टर को यहाँ आना पड़ा tha...aur उन्होंने रूपल दीदी को अपने रूम में भिजवा diya....sab रेडी करने के baad...Humme लगा वो दब को भी ठीक कर degi...par ये उनके सिलबस से भी बहार का tha...isko बड़ा सदमा लगा tha...par हममे ये नहीं पता था की इसकी जो हालत है उसकी वजह से इसके देश की हालत ख़राब होने वाली है...

सुबह hui...sab थके हुए the...sayad थोड़ी थीओडी देर hi तो सभी सोये the....aur सुबह सुबह दरवाजे पे दस्तक...

बुआ - इस वक़्त कौन आ gaya.....Maa पापा तो कल आने वाले थे ना भाभी...

चची - हां कल hi आने वाले the...par सायद आज hi आ गए ho...waise भी आज तुम सब आने वाले थे naa...Main देख के आती हु...

चची अपनी जगह से उठी और दरवाजा khola....darwaje पे एक औरत thi..apni बच्ची के साथ बड़ी घबराई हुई थी..

चची - आप कोण ho....kise मिलना है...

औरत - Prateek....Rajkumar....(aise hi कुछ भी बोले जा रही thi....usne कपडे भी अजीब पहन रखे the....aise कपडे की बस उसकी आँखें hi दिखे चेहरा नहीं...)

चची - आपको प्रतीक से मिलना hai...usko कैसे जानती है आप...

औरत - राज कुमार को बुलाइये...

चची - राज kumar...yaha तो कोई राज कुमार नहीं hai.....Prateek सही नाम बताया था aapne....sayad गलत पत्ते पे आ गयी हो आप...

इतने में बुआ भी गेट पे चली जाती hai....aur सामने उस बच्ची को देखती hai....ye कोई और नहीं लम्मी की बेटी thi...Bua ने उसको पहचान liya...usne चारे पे मास्क नहीं लगा रखा था

बुआ - Tum...tum yaha...aur ये किसके साथ आयी ho....Tumhari माँ कहा है....

वो कुछ नहीं boli.....wo बस वैसे hi rahi....aisa लग रहा था जैसे वो कोई गुड़िया हो....

लिमि - Aap...Raj कुमार अंदर है kya..mujhe उनसे मिलना hai.....app सब को कुछ बताना है....

चची - इसको जानती हो तुम...

बुआ - हां भाभी ये दब के देश से hai...aur ये तो लिमि hai...ander आ jao...isko क्या हुआ है लम्मी ये कुछ बोल क्यों नहीं रही है...

लम्मी अंदर आती hai...aur आते hi दब को ढूंढने लगती hai....DB वही सोफे पे बैठा था बड़बड़ा रहा था कुछ....

लम्मी - Rajkumar...apko वापस चलना hoga....sab मुशीबत में hai...sab ख़तम हो जाएगा...

बुआ - क्या बोल रही हो लम्मी...

मैं अभी अपने रूम में गया tha....fresh होने और वह से निच्चे आया तो देखा लम्मी वह थी....

मैं - लम्मी तुम यहाँ...

लम्मी ने सायद मुझे सुन्ना नहीं वो तो दब को कुछ बताने में hi लगी हुई थी...

मैं निच्चे गया बुआ और बाकी सब भी आ गए the...chacha चची भी...

मैं - क्या बात है लिमि बताओ humme...tum यहाँ कैसे....

लिमि - वह सब गलत हो गया hai.....Rajmukut का हीरा चला गया hai....ab उसके बिन्ना सब तबाह हो jaayega.....bimariyan फैलनी शुरू हो गयी hai....meri Bacchi....meri बच्ची अब बोलती नहीं hai...naa हिलती डुलती hai.....Lemmo ने कहा तुमलोगो के पास आयने ko...tum लोगो को वह वापस आना hoga...hume bachane....hamare लोगो को बचने...

वो बस बोलती gayi.....jo भी वो बोलना चाहती thi...aur hum....humme से जिनको भी बातें समझ में आ रही थी वो सुन के शॉकेड the.....aur जो इस बारे में नहीं फटने थे वो कुछ और hi सोच में डब्बे हुए थे...

इतने में मास्टर जो रात में वापस चली गयी थी वो वापस से घर में आती hai...wo भी कुछ घबराई हुई सी लग रही थी...

मैं - मास्टर लिमि जो बोल रही है क्या वो सच है....

मास्टर ने कुछ नहीं bola...bas हां में गर्दन hilayi...aur वही बैठ गयी....

मैं - पर ये सब हुआ kaise....wo मोती किसने चुराई...

मास्टर - वो मोती नहीं tha...Element tha....Nature Element...Elf किंगडम में एक बहुत पुराणी कहानी hai....main नहीं जानती थी की वो सच hai...mujhe नहीं पता था की मोती सच में गायब हो jaayegi...yaa बुरा मान jaayegi....bahut बुरा हुआ वह....

बुआ - क्या है वो कहानी मैडम......

मास्टर - दब का जब एलिमेंट चेक हो रहा था तुम वही थी ना...

बुआ - हां मैं थी waha....aur इसका एलिमेंट नेचर एलिमेंट tha...jo की इसके परिवार में चलता आ रहा hai....har 2 पीढ़ी के बाद...

मास्टर - Haa....kahte है की इसके परिवार में वो बस एक hi the....jinke पास ये एलिमेंट thi.....aur वही बार बार जनम लेते है और वापस से राजा बन जाते hai...par इस baar...inn सब के karan...ye नहीं होने wala...aur सायद इस बात से एलिमेंट्स गुस्सा hai...aur ये सब हो गया....

मैं - मतलब दब जो है वो दब नहीं hai....wo खुद का पूर्वज hai....Master कैसी बातें कर रही है आप...

बुआ - Bacchu....Madam ये बोल रही है क्यूंकि इसमें सचाई होगी.....

मास्टर - ये इन् लोगो के ग्रंथों में लिखा hai.....Prateek.....

मुझे याक्किन नहीं हो रहा था इस बात पे par...sayad अभी इस बात से कोई मतलब नहीं tha....humme मदद करनी थी इन् लोगो की....

लिमि - मेरी बच्ची को ठीक कर do...ye आखरी निशानी है उनकी...

मास्टर - इसको क्या hua....aur कब से ये ऐसे है.....

लिमि - कल se....ye लीमो के साथ hi खेल रही thi.....accanak से कुछ hua....aur ये गिर्र gayi...aur फिर हिलने hi नहीं lagi....hum जल्दी से इसको लेके वह पे इलाज करने पहुंचे पर वह इसकी तरह और भी बहुत से लोग the.....wahi पे हमको ये पता चला की राज मुकुट से वो हीरा गायब हो गया hai...Leemo वह से चला gaya...aur मुझे भी इसके साथ घर जाने को bola.....fir वो रात में जब आया तो उसने मुझे वह से निकल जाने को kaha.....wo बोल रहा था वह बहुत बड़ी मुशीबत आने वाली hai.....aur बहुत से bacche....wo नहीं रहे....

मैं - ये सब उस हीरे की वजह से....

बुआ - हीरा नहीं एलिमेंट....

रूपल दीदी - इतना सब हो गया वह वो भी इतनी jaldi...begunah लोग मारे gaye...ye अच्छा नहीं हुआ....

चाचा चची भी कुछ बोलना छह रहे the...sayad पूछना छह रहे थे पर वो पूछ नहीं पा रहे थे...

कविता मैडम और निकिता जाके लिमि की बच्ची को चेक करें लगते hai....usko रूम में लेके जाते है और वह सब चेक करना शुरू कर diya...wahi उसको हमने पानी दिया पन्ने के liye....wo दब को देखे जा रही thi....usko भी समझ नहीं आ रहा था इसको हुआ क्या है...

मैं - ये सदमे में hai...par चिंता मत करिये ये ठीक हो जाएगा...

लिमि - Nahi...isko बेर खिलाना padega...isko फीवर आया हुआ hoga...maine देखा है ऐसा pahle...meri बच्ची को भी होता था aisa....kab से है ये ऐसे....

रूपल दीदी - 2 दिन से...

लिमि - तब तो जल्दी करना hoga...agar ये फीवर ज्यादा देर तक रहे तो और खतरनाक हो सकता hai...aapko जल्दी से इन्हे बेर खिलानी चाहिए...

मास्टर - कौन सी berry...maine ऐसे फीवर के बारे में नहीं सुन्ना है...

लिमि - ये कोई आम फीवर नहीं hai...ginne चुनने लोगो को hi होता है ye...aur इलाज सिर्फ एक hai...jungli berries....jo बी फारेस्ट में मिलते hai...usko खिलने से ये फीवर सही हो जाता है....

चची - Bee....Bee forest...kahi और नहीं मिलती क्या वो बेर....

लिमि - नहीं वही की बीडीएस चाहिए...

मैं - ये कौन सी जगह hai.....Main लेके आता हु...

चाचा - नहीं तुम रूक्को मैं देखता हु क्या कर सकते है....

रूपल दीदी - मैंने सुन्ना है इस जगह के बारे mein.....kahi ये वही तो नहीं जहा वो बड़े बड़े बीस और....

चची - रूपल नाम मत लेना उनका..... :युक: वो गंदे भद्दे से janwar....kitne अजीब और :युक: होते है wo....main तो सोच के hi....

बुआ - भाभी कही ये वो तो नहीं.... :युक: Bhaiya....berries को अच्छे से साफ़ करवाने को बोलना...

चची - अरे बस भी karo....itne भी गंदे नहीं होते वो log....aur मैंने कह दिया है....

मैं - कोण है वो लोग जिसने आप दोनों को इतनी चिद्द है...

चची - कोई nahi....aur लम्मी तुमको पक्का यकीं है ना की ये फीवर hi hai....aur ये इसके बाद ठीक हो जाएगा....

लिमि - हां पूरा याक्किन है....

तभी रूम में से निकिता बहार आती है.....

निकिता - कुछ पता नहीं चल रहा है उसको हुआ क्या hai...aisa कुछ कविता मैडम ने पहले नहीं देखा hai....wo पता लगाने की कोशिश कर रही hai...par...ek बात अच्छी hai....wo ठीक hai...maine उसकी एनर्जी को महसूस kiya...wo एकदम से अच्छी hai...Leemi आपको उसके साथ रहना होगा...

मैं - कुछ भी पता नहीं चला क्या....

निकिता - ये एकदम से नयी बीमारी है सायद मैडम ने बहुत तरय किया पता लगाने की पर कुछ समझ नहीं आया उनको...

लम्मी - क्या वो ठीक नहीं हो सकती....

निकिता - मैंने कहा ना उसकी एनर्जी बिलकुल ठीक hai....aisa लगता है जैसे बॉडी बिलकुल जैम हो गयी है...

तभी चाचा बोलते है...

चाचा - मैंने बात कर ली hai.....wo बेर बस आती hogi...maine तुम सब की बातें सुन्नी hai...maine एक एल्फ एक्सपर्ट को भी बुलाया hai...sayad उन्हें कुछ पता चल जाए...

मैं - मास्टर अब हममे क्या करना चाहिए....

मास्टर - जहा तक मुझे पता hai...ab सब तभी सही hoga...jab गद्दी वापस मिले...

मैं - ये सब पहले क्यों नहीं hua...matlab दब के पापा के पास तो ये पावर है नहीं फिर उनके टाइम में क्यों नहीं शुरू हुआ ये सब....

मास्टर - इसके बारे में मैं नहीं jaanti...Main बाद में मिलती hu...sawal बहुत है...

ध्रुव - तुम क्या एक बार मुझे उस बच्ची को दिखा सकते हो...

मैं - हां चलो....

मैं उस रूम में गया जहा पे कविता मैडम उसको चेक कर रही थी....

ध्रुव - तुम जानते हो क्या करना है....

मैं - मतलब...

ध्रुव - ये कुछ देखा हुआ नहीं लग रहा तुम्हे...

मैं - देखा हुआ मतलब...

ध्रुव - निकिता के साथ भी कुछ ऐसा hi हुआ tha...yaad hai....wo भी कोमा जैसी हालत में जाने वाली thi....uss वक़्त भी सबको सब सही hi लग रहा था....

मैं - क्या ये वही है....

ध्रुव - हम्म वही है पर पता नहीं कैसे ये कुछ ज्यादा hi इफेक्टिव hai....tum इसको अभी सही कर सकते हो....

मैं - मतलब मुझे वो सब करना होगा...

ध्रुव - हां और इस बार भी अकेले hi....mujhe लगता है मुझे एक नज़र मार लेनी चाहिए waha...jaisa लिमि ने बताया है की वो बच्चे नहीं rahe....ye सच है या फिर इसी बीमारी के कारन hai.....ye पता लगाना जरुरी है...

मैं - हम्म ठीक है तुम जाओ मैं यहाँ देखता हु....

ध्रुव - सबको अपनी पावर्स नहीं देनी है samjhe.....Nikita की बात और thi...ye बच्ची है....

मैं - फिर मुझे क्या करना चाहिए...

ध्रुव - जिस वजह से इनकी ये हालत हुई है उसको samjho...aur ख़तम करने की कोशिश karo....Main जा रहा hu...tum अब यहाँ सम्भालो...

मैं - एक मिनट पर यहाँ पे kya....main क्या कहूंगा इनको की मैं कहा गया....

ध्रुव - वो सब बाद में देखेंगे...

उसने मुझे मेरे hi बॉडी से निकल दिया और mujhe....aur वो खुद वह से निकल गया....

मैंने उस बच्ची का हाथ pakda...aur देखना शुरू किया की क्या चल रहा है उसके दिम्माग के अंदर....

यहाँ पे एक अलग hi दुनिया thi...Leemi भी थी yaha....aur कोई और भी hai...jo लिमि और इस बच्ची के साथ खेल रहा hai...sayad इसके पिता honge...aur वह पे लीमो भी hai....pata नहीं क्यों पर ऐसा लग रहा है जैसे ये जो भी चीज़ है जो सबको इस हालत में ला देती है वो सबके दिम्माग में hi एक मनचाही दुनिया बना देती है जहा ये कैद हो जाते है...

मैंने पहले सब कुछ देख liya...aur फिर मैंने इसके इस सपनो की दुनिया में जाने का तय kiya....main अंदर गया सब कुछ मैंने देख रखा tha...main जानता था अभी ये कहा hai...to मैं वही पे चला gaya....waha पे लीमो Leemi...aur इसके पिता भी थे.....

मैं- ये निकिता के दिम्माग में जो था उससे थोड़ा बहुत मिलता तो है पर ये वो नहीं लगता....

ध्रुव - प्रतीक सुन रहे ho....yaha सिर्फ बच्चो के साथ ऐसा हुआ hai.....Leemi की बातें सच है....

मैं - हां ध्रुव मैं सुन रहा hu....aur मैं अभी इसके दिमाग में hi hu....ye तो आसान लग रहा hai...isse मैं निपट लूंगा....

ध्रुव - संभल ke....aur अपने तलवार का उसे karna....wo चीज़ों को सोख लेता है और fir...r.r..

आवाज काट gayi...ye बिलकुल ऐसा था जैसे फ़ोन पे बात करते वक़्त नेटवर्क चला jaaye....yaha भी यही हुआ था पर इसकी वजह कुछ और थी...

मैं उस बच्ची की ओर बढ़ रहा था और वो मुझसे hi डरने lagi...sayad मैं इसके सपने में कुछ और hi दिखाई दे रहा hunga....wo डर के लिमि के पास चली गयी थी...

मैं - दर्रो मत मैं तुम्हे तुम्हारी मम्मी के पास ले जाने आया हु....

अब मैंने तो यही kaha....usko पता नहीं क्या सुनाई diya...wo छिलने lagi....aur उसी के साथ वह जो लीमो और एक और बाँदा tha....dono hi मेरी ओर बढे...

ये दोनों जिस तरह से बढ़ रहे the...aisa लग रहा था जैसे अब मेरा खेल khatam....par एक बात क्लियर थी की ये जो भी hai...asli तो नहीं hai...to अगर इनको कुछ कर भी du...koi दिक्कत नहीं hai...Nikita वाले केस से तो यही लग रहा था....

मैंने भी अपनी नयी तलवार को pukara...wahi जो अलबूस और कूपर ने दी thi...talwar के हैंडल पे ड्रैगन पानी हुई thi...saath में ब्लेड पे भी दो ड्रैगन्स बनने हुए the.....maine उसको छू के देखा तो ऐसा लगा जैसे वो हिलने लगी ho...ajeeb था ये.....

वो दोनों मेरे पास पहुंच गए the....aur अभी जो हुआ वो सच में अजीब tha.....unka हाथ खुद तलवार बन gaya....matlab...pahle हाथ hi tha..fir हाथ कुछ बड़ा हुआ और फिर वह एक तलवार आ gayi....ye सच में बहु कम्मल का tha...main तो देखता रह gaya....aur सायद इसी वजह से उनमे से एक को मौका मिल गया और उसने मुझपे वॉर kiya....par मेरी भी ट्रेनिंग ख़तम हो चुक्की thi...koi नौसिखिया नहीं था मैं :lol: मुझे तो यही बताया गया tha....Maine उसके हमले को roka....par उसी वक़्त दूसरे वाले ने दूसरी ओर दे हालमा कर diya...main उसको रोक नहीं paaya....wo मेरी ओर आया और मुझे laga....par मुझे कुछ हुआ नहीं.....

मैं एक पल को देखता रहा अपनी बॉडी को की कहा पे लगी hai...par कही पे नहीं लगी thi....ulta उसकी तलवार टूट गयी थी.....

मैं - वाओ ये क्या था....

मैं एक दम से चौका हुआ tha...matlab अभी एक तलवार मेरी बॉडी को लगा और तलवार hi टूट गया....

मैं तो ये सोच hi रहा था की तब तक उसकी टूटी तलवार वापस से जुड़ गयी thi...aur ये देख के लिमि जो अभ तक बची के पास से हममे देख रही थी और गुर्रा रही thi...wo भी मेरी ओर आ gayi...aur अब वो बच्ची वह पे अकेली बची हुई थी....

मैंने इस बार खुद हमला करने के बारे में socha...main खुद भी देखना चाहता था इस तलवार में कितना दम है....

लिमि मेरे सामने अपने हाथ में तलवार लिए कड़ी thi...maine अपने तलवार se....uski तलवार को 2 टुकड़ों में काट diya...tej तो थी ये talwar....iske बाद कुछ der....bas तलवारबाज़ी चेक कर रहा था main....kabhi एक के साथ कभी 2 के saath...par ऐसे करते हुए एक चीज़ज़ hui...jo वापस से बहुत कम्मल की thi....meri तलवार लीमो को जाके lagi....main उसको इस वक़्त तो नहीं मरना चाहता tha...ain पहले चेक करना चाहता था की ये और क्या क्या करती hai....par जैसे hi ऐसा hua....uski जो बॉडी thi....wo पिघल gayi.....kichad में बदल gayi...par तलवार में कुछ हुआ tha...uss वक़्त ऐसा लगा जैसे उसमे कही से एनर्जी आ गयी ho...aur इस वजह से तलवार चलने की स्पीड मेरी खुद से hi बढ़ gayi....aur इसी वजह से वो दोनों जो बचे हुए थे वो भी मारे gaye....aur इसी के साथ मैं कुछ कर pata...maine चिल्लाने की आवाज sunni...maine उस तरफ देखा तो ये वही बच्ची thi...wo cheekhi...aur वही गिर गयी.....

मैं वह भाग के गया तो देखा की वो गायब हो गयी वह se....aur मैं अभी जहा पे tha....wo जगह भी धीरे धीरे गायब होने lagi....aisa लग रहा था जैसे वह कुछ हो hi nahi...ekkdum घुप अंदर था वह पे अब...

मैं - Dhruv....Dhruv तुम सुन रहे हो....

ध्रुव - हां मैं सुन रहा hu....tum वह से निकलो अभी....

मैं - पर कैसे यहाँ तो कुछ भी नहीं है.....

ध्रुव - ज्वाला को बुलाओ वो निकल लेगा तुम्हे....

मैं - पर वो तो...

ध्रुव - जो कहा करो....

मैं - ज्वाला मुझे यहाँ से बहार निकालो...

मैंने ऐसा बोलै और मुझे उस जगह एक रौशनी दिखने lagi....ye ज्वाला tha...wo वह तुरंत पंहुचा और मुझे वह से बहार nikala.....main अभी wahi...ussi रूम में tha...jaha पे कविता मैडम और वो बच्ची the...apni बॉडी में....

मैं - ध्रुव वो कोण सी जगह थी...

ध्रुव - पता nahi.....par ऐसे जगहों से अभी दूर hi raho...wo ठीक हो गयी है...

मैंने बच्ची की ओर देखा वो ठीक thi...Leemi उसके पास thi....aisa लग रहा था जैसे कुछ हुआ hi ना हो usko.....wahi कविता मैडम भी सोच में पड़ी thi...aakhir ये हुआ क्या...

मैं - ध्रुव तुम्हे सब पता चल गया है क्या...

ध्रुव - नहीं मैं सब देख रहा tha...par फिर कुछ देर के लिए कुछ नहीं दिखने लगा और फिर वो andhera...batao मुझे क्या क्या हुआ था वह....

मैंने उसको सब कुछ bataya....aur इसी दौरान घर पे वो एल्फ एक्सपर्ट साथ में वो बेरीज लेके आ गया tha....ajeeb बात ये थी की ये एक्सपर्ट एक इंसान tha.....ye मेरे किये सच में अलग tha.....isse पहले के जितने भी इंसान से में मिला उनको हमारे बारे में कुछ पता नहीं tha...par सायद मेरी नॉलेज अभी बहुत काम रथी इन् इंसानो के बारे में बह....

चाचा जी ने उसको अंदर बुलाया और उसको लिमि और उसकी बेटी के पास लेके gaye....wo चाहते थे एक बार ये भी उसको चेक कर ले ताकि भविष्य में कोई गड़बड़ ना ho...wo रूम में aaye....apni थैली को निच्चे rakha....Main बस उसको घूरे जा रहा था....

"क्या hua...insan हु तो अजीब लग रहा है..."

मैं - नहीं मुझे लगता था की इंसानो को पता नहीं है हमारे बारे में...

"हां गलतफहमियां बन जाती hai....koi बात nahi....waise बता du...mujhe एल्फ के बारे में सायद ेल्फ्स से ज्यादा पता hai...maine ना जाने कितने साल अध्ययन किया है उनपे..."

मैं - पर kyun....matlab आप क्यों करोगे ऐसा....

चाचा - प्रतीक अभी रूक्को उनको चेक कर लेने दो फिर बातें करते रहना.....

"कोई बात nahi....Mr. वीर बच्चा hai...bacchon में जिज्ञासा बहुत होती hai....aur ये तो वैसे बह..."

चची - आपके लिए पानी लेके आऊं....

वो इंसान एक दम से रुक gaya,...jaise कुछ याद आ गया ho....wo थोड़ा परेशां हो gaya...fir हलके से मुस्कुरा के हां कहा....

मैं - आप कुछ कह रहे थे...

"ummm...haa मैं कह रहा था अभी चेक कर लेने दो isko....fir बातें होती रहेगी...."

और फिर वो बच्ची को चेक करने lage....jaise जैसे वो चेक कर रहे थे उनके चेहरे पे अजीब अकीब तरह के भाव उत्पन्न हो रहे थे...

कविता मैडम उनको गौर से देख रही thi....ki कैसे वो चेक कर रहे है बच्ची ko....wo सिख रही थी ये सब....

वो - अजीब बात hai....ye जो भी tha...wo होना नहीं चाहिए tha...iss वक़्त तो बिलकुल nahi.....Mr. वीर आपको मेरा एक काम करना होगा....

चाचा - हां बताइये...

वो - आपको मेरे लिए क्रोनेड एल्फ फॅमिली के बारे में खबर पहुचानी hogi....ye जो भी था वही से शुरू हुआ tha....aur अब वापस आ गया hai...unko वापस से इसको रोकना hoga....aur इस बार हमेशा के liye...aapko मेरी बात उनसे करनी होगी....

लिमि - हीरा गायब हो चुक्का hai....Raj मुकुट अधूरा है...

ये सब्द जैसे hi उस आदमी ने सुनने वो एकदम से घबरा गया....

वो - ये बहुत गलत hua....par ये हुआ kaise...aisa होना hi नहीं चाहिए था....

हमने उसको पूरी कहानी सुनाई साथ में दब के बारी में भी बताया अभी तक उसको पता नहीं था दब प्रिंस hai....jab उसको सब पता चला तो पहले तो उसने वो बेरीज तैयार kari..DB को खिलने के liye...aur फिर उसको वो खिलाई....

"इतना सब हो गया और हमे कुछ खबर तक nahi....Archery सोसाइटी क्या कर रही hai...wo तो राज परिवार के लिए hi hai...unka क्या हुआ..."

मैं - आपको कैसे पता इसके बारे mein...aap है कोण....

लिमि - मैं लेममो की बहन hu...aur वो है इस सोसाइटी के head....par आपको कैसे पता इसके बारे में....

वो - हम ेलफलॉर्ड को तैयार करते है....

मैं - एल्फ लार्ड अब ये क्या है...

लम्मी - वो राजा जिनके पास नेचर एलिमेंट होता hai....to क्या वो यहाँ आया करते थे....

वो - haa....hamare आश्रम mein....humse सिखने.....

मैं - एक minute....elf Lord...Earth पे इंसानो से सिखने आया करते the.....ye कोई मजाक च रहा है क्या....

वो - एअर्थ प्रमुख ग्रहों में कितने नंबर पे आता है bacche...pata है naa.....log भूल गए है की किस वजह से आता है ye....ye एअर्थ है यहाँ पे पुरे यूनिवर्स के राज़ दफ़न hai...tumhare राज़ bhi...samjhe...aur Insan...hum इंसान उसकी रखवाली करते है....

चाचा - आप शांत हो jaaiye...ye बस जाना छह रहा tha..ye आपका अपमान नहीं करना चाहता था....

वो - हां पता है ये अपमान कर भी नहीं sakte....ab मैं इस प्रिंस को अपने साथ केके जा रहा hu....isko जो सीखना hoga...main खुद सीखा dunga....aur बच्चे नियति है ye...ki इनका एअर्थ पे आना hua...warna बताई jara....kitne साल पहले कोई क्रोनेड एल्फ आया था इस प्लेनेट पे.....

मैं कुछ नहीं बोल paya..mujhe पता hi नहीं tha....par एक बात क्लियर हो गयी thi....knowledge काम थी मुझमे....

निकिता - तो अब हम इससे मिल नहीं पाएंगे...

वो - खास ऐसा कर पता main....par nahi....Strange वर्ल्ड के लोगो की खास नज़र होगी ispe....to ये स्कूल में आता जाता rahega...waise वह किसी प्रोफ. की जरुरत है क्या...

बुआ - आप वह नहीं आ sakte...aur वो भी प्रोफ. बन के....

वो - बीटा अभी आप बहुत कुछ नहीं जानती hai...aur मैं नहीं आ रहा waha...koi आप जैसा hi hoga...par वो मेरे लिए काम करता hai...uska काम होगा इनको मेरे पास लाना और वापस स्कूल bhejna...tum सब से भी एक बात कहनी hai....yaha अभी जो कुछ भी बताया मैंने सब भूल जाओ.....

वो इतना बोलके वह से निकल gaye...par अपने साथ लिमि और उसकी बच्ची को लेके चले gaye....aur ये बता के गए की हम उनसे मिल सकते hai...wahi बेर खाने के बाद बेहोश pada....DB होश में आता है....

दब - मैं यहाँ क्या कर रहा hu....mujhe पापा को बचाना है....

निकिता ने उसको सब कुछ अच्छे से samjhaya....jisko सुनके वो भावुक भी हो गया था.....

ये सब बहुत देर तक चला....

अब शाम होने वाली thi...kisi ने एक वक़्त का खाना नहीं खाया tha.....Chachi और बुआ किचन में चली गयी खाना बनाने वही मैं अपने रूम में चला गया.....

मैं - ध्रुव इंसानो को इतना कुछ पता है हमारे बारे mein...pahle क्यों नहीं बताया....

ध्रुव - ये जान के क्या कर loge....abhi तो पहले निकिता को manao....waqt गुजरता जा रहा hai.....humme पावर्स जल्दी hi ट्रांसफर कर देना चाहिए...

मैं - हां पर अभी तक मौका hi नहीं मिल रहा tha...aur अब पता नहीं कैसे समझौ उसको...

ध्रुव - समझाना तो होगा hi....aaj रात को बात करो उससे....

मैं - हां ठीक hai.....par लगता नहीं वो maanegi....main तो सोच रहा हु रूपल....

ध्रुव - नहीं मुझे ये सही नहीं lagta....unke पास अभी एक पावर है जो उनको मुसीबत में डालने वाली है एक और की जरुरत नहीं है....

मैं - तो मैं निकिता को भी नहीं दाल सकता मुशीबत में....

ध्रुव - तुम मेरी बात नहीं समझ rahe....accha छोड़ो हम रात में hi बात करते hai...mujhe लगता है अभी आराम करने की जरुआत है तुम्हे....

मैं- हां सही kaha....main बहुत थक गया हु..

मैं ऐसे बोलते हुए बीएड पे जा girra....aur फिर कब नींद आयी पता nahi....ye नींद hi thi....kuch और नहीं....

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में निकिता और रूपल दीदी दोनों की hi ज्वाला से मुलाकात होने वाली hai...aur वही जो होना होगा वो hoga...saath में कल दब जाएगा उस इंसान के saath....aur उसके साथ मैं भी जाऊंगा dekhne...inn सब के alawa....Slayer को कुछ खास मिलने वाला है जिससे उसकी ताकत कुछ हद तक बढ़ने वाली है....
 
अपडेट -47

अब तक

चीजें बस बदलती जा रही thi...aur ऐसे ऐसे तरीकों से की क्या hi बोलै jaaye....Humne दब को बच्चा liya...par उसके पिता ने उसको हटा के अपने bhatije...joki सेनानायक था वह का उसको युवराज घोसित कर diya...aur जैसे hi ये hua...waha पे कुछ अजीब घटनाये होने lagi....waha पे जो बच्चे the...wo सब के sab...gahri नींद में सो gaye....wo मर्रे नहीं थे पर हिल नहीं रहे the...unki हालत भी वैसी हो गयी थी जैसी निकिता की हुई थी...

अब आगे

6 बज रहे the....mujhe अभी अभी बुआ ने उठाया tha...Db को होश आ गया tha....aur अब वो कुछ कुछ सही लग रहा tha...par सदमा तो लगा हुआ hi tha....hum उसी के पास थे....

निकिता - अब कैसा लग रहा है...

दब - मैं यहाँ कैसे आ गया मैं to....main तो जेल में...

चची - सब ठीक है बीटा इस बारे में हम बाद में बात karenge..abhi आराम karo....Kavita इसकी वो दवाई जो दी थी उन्होंने वो बना दी क्या...

कविता मैडम - हां भाभी बना दी hai...abhi लाती हु...

वो वह से किचन में जाती है और एक बड़े से कटोरे में सरबत जैसा कुछ लेके आती hai...aur उसको दब को पन्ने के लिए देती है...

दब पहले तो मन्ना करता hai....wo अभी भी समझ नहीं पा रहा था की इतना सब कुछ इतनी जल्दी किऐसे हो gaya....par अभी उसको पूरी पिक्चर का कहा पता tha...abhi तो वो बस यही जानता था उसको निकल दिया hai...ye कहा पता था उसको की उसको निकलने के बाद उस जगह पे क्या कुछ हो रहा hai...aur सायद अभी उसको ये सब बताना सही भी नहीं hoga...to हमने उसको बस खाना खिलाया उसकी दवा के baad....aur फिर वो सो गया...

उसके सोने के baad....mujhe ज्वाला की आवाज आयी....

ज्वाला - बिजली वापस आ गयी है पर सायद वो वह नहीं आ पाएगी...

मैं - क्या बात है वो ठीक तो है ना....

ज्वाला - पता nahi....kuch समझ नहीं आ रहा ये ठीक है या nahi...par अगर तुम hi यहाँ आ जाओ तो सायद ये वो कर दे....

मैं - पर अगर वो ठीक नहीं है तो रहने देते hai...aur वैसे भी रूपल दीदी को वह लाना सही नहीं होगा....

ध्रुव - लेके तो जाना hi hoga....unko वह के बारे में बताना पड़ेगा hi अभी या बाद mein...aur निकिता का क्या karoge....usko तो वह लेके जाना hi होगा ताकि वो पावर्स ले sakke...Mujhe लगता है अभी उसको ये चीजजें बताने का सही समय hai...sayad वो मान भी जाए'

मैं - मैं कुछ समझा नहीं...

ध्रुव - वो उन् सब से गुजर चुक्की है जिससे आज एल्फ कौंरटय के बच्चे गुजर रहे hai...sayad वो उनको बचने के लिए तैयार हो jaaye..tum उसको बताओ ये sab....aur फिर रूपल और उसको दोनों को साथ ले जाते hai....agar कुछ गड़बड़ हुई तो देख लेंगे...

मैं - मुझे नहीं लगता वो मानेगी...

ध्रुव - तुम तरय तो करो...

मैं - हम्म ठीक hai....Jwala मैं थोड़ी देर में बताता हु...

ज्वाला - हां ठीक है...

मैं अभी दब को लेके एक रूम में गया था उसको litane...aur तभी ये सब हो रहा tha...main रूम से निकला और पहले निकिता के पास pahucha...kyunki उसमे वक़्त लग्न tha...par सायद अभी का वक़्त सही tha...wo सायद मान भी जाए ये सब जान ke...Wo अभी बहार thi....main उसको गार्डन में चलने के लिए bola....wo भी आ गयी मेरे साथ बहार....

मैं - निकिता मुझे तुमसे कुछ पूछना है....

निकिता - हां पूछो....

मैं - दब के साथ बुर्रा हुआ ना और उसके लोगो के साथ भी....

निकिता - हां ये तो सही कहा tumne....uske पिता की वजह से ये सब हो gaya...anjaane में hi सही पर इन् सब का दोष उन्ही पे jaayega....Aur वो मासूम बच्चे लम्मी ने जैसा bataya....bahut बुर्रा हुआ....

मैं (मैं में) - ये तो सही जा रही hai...main इसी पे तो आना चाहता था....

मैं - हां सही कहा....

निकिता - मैं यही सोच रही hu....ki कस कुछ किया जा sakta....waha इतने सारे बच्चे honge...jab मैं वह गयी थी एल्फ किंगडम में उस din....waha बहुत से बच्चे the...wo सब खुस the...kuch hi दिन पहले की बात है ना ye....aur अब देखो क्या हो gaya....Agar कोई रास्ता होता तो मैं मदद करती उन् सब ki...par सायद...

मैं - एक रास्ता है तो पर सायद तुम्हे पसंद ना आये...

निकिता - रास्ता hai...par कविता मैडम और मुझे तो पत्ता भी नहीं चला की आखिर हुआ क्या था लम्मी की बच्ची ko....aur वो इंसान उसने भी कहा की सिर्फ दब hi मदद कर सकता है unki....aur वो अभी तैयार नहीं है...

मैं - हां वो तो hai...par सायद हम बह कुछ कर सकते hai....accha अगर तुमको मौका मिले उनकी मदद करने की पर उसके बदले तुम्हे कुछ तकलीफ हो सकती है सायद....

निकिता - मैं कविता मैडम के साथ क्यों रहती hu...pata hai...main उनकी तरह hi एक वैद्य बनना चाहती hu...aur अगर मुझे इतना अच्छा मौका मिल रहा है थोड़ी सी तकलीफ के बदले ो का hi बात है....

मैं - हां तो ठीक hai....ab सुनने तुम्हे कुछ और पावर्स लेनी hogi..jisse तुम उन् सबकी मदद कर पाओ....

निकिता - Kya....powers फिर se...nahi मैं इन्ही से परेशां hu.....aur तुमने तो कहा था इनको भी निकल लोगे...

मैं - हां निकल लेता पर अभी नहीं कर sakta...abhi अगर मदद करनी है तो तुम्हे पावर्स लेनी hi padegi....waise भी तुम्हे पता है वो बच्चे किस चीज़ज़ से गुजर रहे है तुम भी तो गुजरी थी...

निकिता - क्या matlab....main गुजरी थी...

मैं - वो सब भी कैद होते जा रहे है अपनी hi बनायीं हुई दुनिया mein....jaise तुम कैद थी उस किल्ले mein...yaad aaya...jaha से मैंने तुम्हे बचाया tha....ab ये सब तो बचे है....

निकिता - तुम्हे कैसे pata...aur उनके साथ वैसा कैसे हुआ...

मैं - ये तो नहीं पता की कैसे hua....sayad उसी हर्रे की वजह से हुआ होगा जैसा की वो इंसान बता रहा tha...aur मुझे ये पता इस्सलिये है क्यूंकि लम्मी की बच्ची को मैंने उसी तरह ठीक किया जैसे तुम्हे ठीक किया था...

निकिता - Kya....to क्या उसको भी वो पावर्स dedi....wo बच्ची hai....usko कैसे संभल पाएगी....

मैं - नहीं कोई पावर्स नहीं दी usko....aur मैं सभी की नहीं ठीक कर पाऊंगा तो तुम मदद कर देना....

निकिता - Par...main कैसे कर paaungi...kahi कुछ गलत हो गया तो....

मैं - नहीं होगी galti.....main जानता hu...accha अब चलो मुझे किसी और से भी बात करनी है....

पता नहीं ये कन्विंस हुई भी या नहीं पर इतना पता था ये कंफ्यूज हो गयी hai...aur अभी मौका है इसको वो पावर्स दिलाने ka....aur उससे वो पोलर बेअर्स का प्रॉब्लम तो ठीक हो hi jaayega.....saath में यहाँ पे भी थोड़ी मदद मिल jaayegi...Ab बस जल्दी से मुझे रूपल दीदी को देखना tha...aur फिर इन् दोनों को वह ले जाना tha.....sayad निकिता के साथ गलत कर रहा था main...par इससे अच्छा मेरे बस का नहीं tha....baaki जो होगा देखा जाएगा...

मैं जल्दी से अंदर गया और रूपल दीदी को ढूंढने laga....wo अभी चची के साथ thi...unki रूम mein.....sayad कुछ बातें कर रहे थे वो sab.....waise तो मैं रुक जाता पर अभी nahi....maine गेट पे नॉक किया....

चची - कोण है...

मैं - मैं हु चची....

चची - कोण main....aur तुम अंदर कैसे आ गए घर के....

मैं कुछ समझ नहीं पाया ये इनको क्या हो गया....

मैं - Chachi...kya हुआ...

चची - बहार का गेट भी नॉक करके आते naa....tum तो यहाँ पे मेहमान ho.....kuch भी करना हो तो पूछ के करना है ना....

चाचा - अरे वो बोल रही है की गेट नॉक करने की जरुरत नहीं hai....chalo अंदर और बताओ क्या हुआ..

बहार से चाचा जी आ रहे थे उन्होंने कहा....

मैं अंदर चला गया उनके साथ....

मैं - वो मुझे बहार जाना tha....to रूपल दीदी को बुलाने आया था...

चची - इस वक़्त कहा जा रहे हो....

चाचा - जाने do....kuch काम hoga...Rupal ध्यान रखना इसका....

रूपल दीदी - हम्म ठीक है papa....Mummy आप चिंता मत karo....main देख लुंगी वो सब...

चाचा - क्या सब....

रूपल दीदी - कुछ नहीं पापा वो बस हम ऐसे hi बातें कर रहे थे...

इतना बोल के वो वह से बहार चल देती है मुझे पकड़ ke....aur बहार आके

रूपल दीदी - पहले मेरी बात sun....ab मुझे तेरा हुलिया बदलना padega....samjha....

मैं - Kya...kya बोल रही हो आप....

बुआ - हां सही kaha....pichle कुछ दिन में बहुत कुछ हो गया hai......ab रिस्क ज्यादा बढ़ गया hai....main भी इस बात को मानती hu....Rupal भाभी से पूछ लिया ना....

बुआ वह आयी और ये बोलै....

रूपल दीदी - हां बुआ सब तय हो गया hai...unko भी कोई दिक्कत नहीं hai...ab बस हममे जल्दी से कर देना chahiye...isse पहले कोई और आये और किसी को शक हो...

मैं - अरे क्या बातें कर रहे हो आप log...batao भी मुझे...

रूपल दीदी - हम्म बुआ अभी करना सही नहीं hoga..hmm कल सही rahega...Nanu के यहाँ चलेंगे इसको लेके...

बुआ - हां सही kaha...main एक बार वह देख आती हु सब kuch....aur तैयारी भी कर लुंगी...

रूपल दीदी - तू bata..kaha जाना tha...kyun आया था बुलाने.....

मैं - नहीं पहले ये बताओ की क्या बातें कर रहे थे आप dono...kaise हुलिया चेंज कर डोज मेरा...

रूपल दीदी - वो बाद में देख lena,....abhi बता कहा जाना है....

मैं - बहार चलो वह पे निकिता है उसको भी जाना है...

रूपल दीदी - हां चल....

हम दोनों बहार आये अभी भी निकिता कन्फ्यूज्ड hi लग रही thi....hum उसके पास गए....

रूपल दीदी - क्या हुआ निकिता सब सही है ना...

निकिता - Haa...sayad..

मैं - अब दोनों सुनने हम जहा जाने वाले है उसके बारे में किसी को बताना मत samjhe.....kisi को nahi....(Jwala पोर्टल खोलो..)

सायद मुझे उनको और समझाना चाहिए tha....Khair...Jwala ने पोर्टल khola...aur मैं उसके अंदर चला gaya.....par वो दोनों नहीं आयो थी ander....wo बस देखे जा रही थी...

मैं - अब आओ भी जल्दी...

रूपल दीदी - ये क्या hai....tunne पोर्टल खोला...

निकिता - वो भी इतना बड़ा...

मैं - मैंने नहीं khola....ab जल्दी से अंदर आओ...

वो दोनों अंदर आ gayi.....unke अंदर आते hi पोर्टल बंद हो गया और हम तिण्णो अभी ज्वाला के महल में the....Ye दोनों hi महल को देख रही थी....

रूपल दीदी - छोटू ये है kya....kon सी जगह है ये और तू हममे यहाँ क्यों लाया है....

निकिता - ये हममे पावर्स dilayega....Tumne बताया क्यों नहीं रूपल दीदी भी आने वाली hai.....main बेकार hi घबरा रही थी....

रूपल दीदी - पावर dilwayega....kya मतलब है....

मैं - ज्वाला दीदी को उनकी जगह पे pahuchao.....Bijli से मिलाओ unko....aur मैं निकिता को लेके वैद्यजी से मिलने जाता हु....

मैंने ये बोलै और वह पे ज्वाला आ गया....

मैं - दीदी इसके साथ जाओ ये जो कहे वो karna...main आपसे मिलता हु फिर....

रूपल दीदी - ये तो वही है ना जो हममे बचने आया था....

मैं - ये उन सब का राजा hai....abhi आप जाओ मैं आपको सब bataunga...Nikita तुम चलो मेरे साथ....

मैं निकिता को लेके गया वैद्यों के pass....waha पे ओल्ड आउल के यहाँ के वैद्य भी थे और ज्वाला के यहाँ वाले bhi....dono अभी उस चमगादड़ की रानी को hi देख रहे थे....

मैं निकिता को लेके वह गया....

मैं - मैं ले आया एक वैम्पायर ko.....ab तुम इसको अपने पावर्स दे सकती हो.....

वो बीएड पे thi...aur वही से उसने निकिता की ओर dekha...aur अपनी आखें बंद कर ली....

मैंने सोचा कुछ कर रही hogi....to मैं भी रुक्का raha....par जब 10 मिनट तक कुछ हुआ hi नहीं तो मैंने पूछा.....

मैं - क्या hua....powers ट्रांसफर करो....

वो - मैंने एक वैम्पायर माँगा था इसको क्यों लेके आ gaye......koi आम वैम्पायर लेके आओ....

मैं - आम vampire....ye आम hi है....

वो - Nahi...ye आम नहीं hai....ladki मेरे पावर्स तुम्हारे काबिल नहीं hai....agar मैंने तुमको ये दिए तो मेरे पावर्स ख़तम हो जाएंगे और मेरे लोग आज़ाद हो जाएंगे फिर वो पुररे जंगल को तबाह कर denge....main ये नहीं कर सकती....

मैं - क्या मतलब काबिल नहीं है...

रूपल दीदी - ये सब क्या है CHotu...tum कहा लेके आ गए हो mujhe....waha पे एक चील thi...wo मेरे ऊपर बिजली के झटके दे रही थी....

मैं - आप यहाँ...

ज्वाला - हां इनका हो gaya.....ab वो सब सही hai....unko नए जैसा बना दिया hai....wo बस इनकी बात sunenge....aur कुछ भी नहीं....

मैं - चलो एक काम तो hua....par ज्वाला ये देखो ये क्या बोल रही है....

वो - हां ये लड़की सही है मैं इसको अपनी पावर्स दे सकती hu....Ladki अच्छे से उसे करना inko...ye तुम्हे आगे मदद करेगी...

मैं - एक मिनट इनको नहीं....

पर उसने सुन्ना hi नहीं वो तो शुरू हो गयी thi.....aur अपने पावर्स ट्रांसफर करने भी लगी...

मैं - ध्रुव अब kya....ye तो गलत हो रहा है.....

ध्रुव - हां ये गलत हो रहा है पर निकिता क्यों nahi.....usko खास क्यों बताया isne......kya मैं भी नहीं पहचान पाया इसको...

मैं - उसको छोड़ो अब ये बताओ दीदी का क्या होगा.....

ध्रुव - वो कोण है तुमको पता nahi....aur मैं ये सोच रहा hu....ki ये पावर्स उनको दे रही hai...mujhe लगा था वो संभल नहीं paayegi.....par अब देख के लग रहा है जैसे उन्ही के लिए बने हो ये पावर्स...

मैं - तो अब क्या...

ध्रुव - अब देखते hai....kya होता है.....

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में पोलर बेअर्स के सीन्स आने है और निकिता क्यों स्पेशल है इसके बारे में कुछ पता चलेगा
 
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