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- Dec 5, 2013
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अपडेट -38
अब तक
मैं ज्वाला के कबीले में tha...usse बात करने के बाद मैं पोलर बेयर प्रिंस को देखने के लिए निकल गया tha...wahi निकिता अपने साथियों के पास गयी thi...haa साथी जिनके साथ वो रहती thi...yaha स्कूल आने से pahle...wo उनको कुछ सच बताने गयी thi...Prof. सूरज का sach...aur उसने बताया भी और सबूत भी diye...par उसके बाद वो बिन्ना कुछ कहे सुनने वह से निकल गयी स्कूल की oor...wahi दब वो खुश था अपने महल में सभी के saath...inn बातों से अनजान की क्या क्या हुआ है एल्फ कंट्री mein...aur सीना नायक जी परेशां थे क्यूंकि उनको समझ नहीं आ रहा था की उनके फुलप्रूफ प्लान का हुआ kya....sab सेट करके रखा था उसने पर कुछ हुआ hi nahi...Leemo अपनी बहन और अपनी भंगजे के साथ खुश था...
अब आगे...
पहले तो हीरो के पास hi चलते है जो अभी ज्वाला के कबीले में घुम्म रहा है...
(प्रतीक के रेस्पेक्ट में)
मैं यहाँ वह देखता हुआ जा रहा था वैद्य के pass....aaj लोग नाराज से लग रहे थे mujhse....sayad इनको भी उस पोलर बेयर प्रिंस का मेरा यहाँ लाना पसंद नहीं aaya...aaye भी kyun..dusman जो थे wo...par अगर ध्रुव की बात को मन्ना jaaye...matlab की पोलर बेयर और ज्वाला के कबीलों को एक साथ कर दिया जाए तो इनका मुकाबला करना बहुत मुश्किल हो jaayega...aur ये जो प्रिंस है वो इसमें एक एहम भूमिका निभा सकता था...
मैं ऐसे hi सोचते हुए जा पंहुचा वह वैद्य जी के pass...aur जब वह पंहुचा तो ठण्ड से मेरी भी कुल्फी जमने लगी....
मैं - यहाँ इतनी ठण्ड क्यों लग रही hai....kya हो रहा है यहाँ...
वैद्यजी - ये सब आपके लाये हुए इस मेहमान का किया धरा hai...maine इसको दवाई di..taaki ये ठीक हो jaaye...ab जब ये ठीक होने लगा है तो यहाँ के वातावरण से गर्मी को खींच रहा hai...pata नहीं क्यों और kaise...par इसके आस पास की साड़ी गर्मी को ये अपने अंदर सोखे जा रहा hai...meri समझ में कुछ नहीं आ रहा है..
मैं - कही इससे कोई दिक्कत तो नहीं होने वाली naa...ye ठीक तो हो जाएगा ना...
वैद्यजी ने अपनी गर्दन निच्चे कर li...aur बोले... "मुझे पता नहीं है क्या hoga....maine पहले कभी किसी पोलर बेयर को ठीक नहीं किया hai...to मैं अंदाज़ा भी लगा के कुछ नहीं कह सकता..."
मैं - ध्रुव ये सब क्या है क्या कुछ गड़बड़ होने वाली है यहाँ पे...
ध्रुव - देखो अब फ्यूचर तो मैं बता नहीं सकता par....dekhne से तो लग रहा है की गड़बड़ hogi...iss भालू के सरीर को dekho...iske फुर्र के रंग कुछ बदल रहे है...
मैं- अरे हां मैंने देखा hi nahi...par क्या इससे कोई दिक्कत होगी..
ध्रुव - अब मैं ये कैसे bataun...tumhe ओल्ड आउल से बात करना chahiye...wo hi है जो इन् दोनों कबीलों को जानता है वो भी बड़े अच्छे se...wo बता सकता है...
मैं -हां ये सही hai...(vaidya जी से) आप ओल्ड आउल को बुल्ला सकते है क्या यहाँ...
वैद्य जी- वो उल्लू... हां बुल्ला तो सकता हु पर...
मैं- पर वॉर छोड़ो और उनको बुलाओ...
वैद्यजी ने एक पोर्टल खोला जिसमे से वो अंदर आ gaye...pahle तो वो समझ नहीं पाए की वह पहुंचे kaise...aur जब समझे तो अपने सामने उस वैद्य को देख के थोड़ा गुस्सा हो गए...
मैं - ओल्ड आउल हममे मदद चाहिए...
ओल्ड आउल - aap...haa बताइये क्या मदद चाहिए....
मैं - wo....(maine उस प्रिंस की ओर इशारा किया...) जब से ये यहाँ आया है और ठीक होने लगा है यहाँ पे ठण्ड बढ़ती जा रही hai...aur इसके फुर्र देखिये वो भी रंग बदल रहे है...
ओल्ड आउल - इसको यहाँ कौन लेके aaya...isko अभी बर्फ में लेके chalo...agar यहाँ रहा तो इसको खतरा hai...ye गर्मी सोख्ता जाएगा और फिर दिक्कत हो जायेगी...
मैं - पर कहा लेके जाए इसको...
ओल्ड आउल ने एक पोर्टल khola.....aur हममे वह लेके आ gata...saath में उस वैद्य को bhi...ye एक बर्फीला इलाका tha...Old आउल आप इसको बर्फ से धकिये तब तक वैद्यजी यहाँ पे इसको रखने का इंतेज़ाम करते है....
मैं - हम्म ठीक है..
मैंने उस भालू को वही बर्फ पे रखा और उसके ऊपर बर्फ डालने laga...par उसका सर बर्फ से बहार रख रहा tha...wahi ओल्ड आउल वैद्यजी को कुछ समझा रहे the...bade गुस्से में लग रहे थे wo...pata नहीं क्या बात थी...
थोड़ी देर बाद वैद्यजी वह कुछ करने lage...wahi ओल्ड आउल मेरे पास आ गए...
ओल्ड आउल - मैंने सब कुछ समझा दिया है isko...ab मैं चलता हु आपका काम देखने को...
मैं - मेरा kaam...mera कोण सा काम...
ओल्ड आउल - अरे आपने hi तो कहा था प्रोफ. सूरज पे नज़र rakho...main वही कर रहा हु...
मैं - अरे हां वो वह से बच निकला था बताया था दीदी ने mujhe....to कहा है wo...aur किस हालत में है...
ओल्ड आउल - हालत की बात kare...to बिजली ने जो उसको झटका दिया है उसके बाद उसकी हालत बहुत ख़राब hai...par ज्यादा दिन ऐसा नहीं rahega...wo अभी डेमोस में है और वह पे उसको राज महल में रखा जा रहा hai.....wo जल्दी से ठीक हो जाएगा waha...Lucifer है उसके साथ...
मैं - Demos....wo डेमोस कैसे pahucha..aur लूसिफ़ेर ???
ओल्ड आउल - लूसिफ़ेर वह का राजा hai....Demos में वो उसी की मदद से पंहुचा hai...pata नहीं क्यों वो उसको बचने में इतना लगा हुआ है...
मैं - नज़र rakho...aur खबर देते रहा karo....kab बताने वाले थे ये sab...jab वो वापस से हुम्ला करता तब...
ओल्ड आउल - मैं बस आने hi वाला tha....bas उन् बातों का पता लगाके...
मैं - अब se....jaise hi कोई बात पता चले मुझे batao...ab जाओ यहाँ से...
ओल्ड आउल वह से चला gaya...WO वैद्य भी वह कुछ करने laga...agla इन् सब के चाकर में मेरा जादुई काढ़े का क्लास छूट गया tha...aur अगर इसके बाद बुआ का क्लास भी छूट जाता तो फिर से मुझसे सब पुच्जन लगती...
मैं - जल्दी करो जो करना है मुझे यहाँ से जाना भी है...
वैद्यजी - हां पता hai....Main पोर्टल खोल देता hu...aap चले जाओ इसका ध्यान मैं रख लूंगा...
मैं - देखो ये बहुत जरुरी है इसको कुछ होना नहीं चाहिए samjhe...jaisa ओल्ड आउल ने कहा है बिलकुल वैसा hi karna...agar मदद चाहिए तो मैं वह ज्वाला से कह देता हु....
वैद्य जी- हम्म ठीक है..
मैंने ज्वाला को याद किया उसने पोर्टल खोला और पहले तो मुझे उस जगह देख के थोड़ा शॉकेड hua...fir मैंने उसको सब bataya....usne अपने कुछ लोगो को ब्वैद्यजी की मदद के लिए भेज दिया और मेरे जाने के लिए पोर्टल भी खोल diya...main वह से स्कूल में आ गया जहा मैं जल्दी से बुआ के क्लास के लिए रेडी हो गया...
अभी इसको यहाँ क्लास अटेंड करने देते है और हम चलते है स्पेन mein...Rupal दीदी के pass....jo अभी कुछ लोगो को सबक सीखने के ंबारे में सोच रही थी...
रूपल दीदी होटल में अपने ऑफिस में बैठी thi...aur सोच रही थी की कैसे उन् इंसानो को बिन्ना मारे हुए रोक्का jaaye...aisa नहीं था की उन्होंने पुलिस की मदद नहीं li...unhone पहले यही kiya...par कोई बात नहीं banni...jinn लोगो की शिकायत इस बार पोप लेके आये थे वो एक बड़े गैंग के मेंबर्स the....jinki पहुंच बहुत ऊपर तक thi..to ज्यादा कुछ हुआ nahi...balki दीदी का होटल उन् लोगो के निशाने पे आ गया tha....aaj दोपहर में hi ूनक्वे होटल के 2 गेस्ट्स को मर्रा था उस गैंग के मेंबर्स ने और उन्हें वो होटल छोड़ने को कहा tha...Didi प्रेशर में thi...ek तो ये उनका पहला काम था और दूसरा की वो अभी चाचा जी को इन् सब में नहीं लांना चाहती thi/...wo खुद इसको हैंडल करना चाहती thi....par कैसे करे ये hi समझ नहीं आ रहा tha...mujhse भी तो राय आंगी थी उन्होंने पर सायद मैं कुछ हेल्प नहीं कर पाया...
वो ऑफिस में बैठी सोच hi रही थी की एक वेटर ने उनके ऑफिस का दरवाजा खटखटाया...
रूपल दीदी - हां अंदर आ जाओ...
वेटर अंदर आया और खड़ा हो गया...
रूपल दीदी - हां बताओ क्या बात है...
वेटर - वो हमारे होटल की गाडी को पकड़ लिया है....
रूपल दीदी - kya...kisne पकड़ लिया...
वेटर - वो गैंग वालो ने...
रूपल दीदी - तुमने पुलिस को खबर किया...
वेटर - मिस आप तो जानती है वो कुछ नहीं karenge....phir भी मैंने कर दिया hai....ye हमारी तीसरी गाडी है जो....
रूपल दीदी - तीसरी gaadi...pahli दो कब गायब hui..aur तुमने बताया क्यों नहीं...
वेटर - मिस मुझे लगा पुलिस को बता दूंगा और वो रिकवर कर लेंगे बात आप तक पहुंचेगी hi nahi....nahi तो आप बेकार में परेशां हो जाओगी....
रूपल - और ab..ab क्या मैं परेशां नहीं लग rahi....inn गैंग वालो का कुछ करना होगा....
वो बात hi कर रहे थे की वह पे दरवाजा वापस से खटखटाया गया....
रूपल - देखो कोण है...
दरवाजा खुला और सामने मास्टर कड़ी thi...ye पता नहीं कर क्या रही है पहले निकिता को और ab...didi के पास...
रूपल दीदी - आप yaha...(Waiter से) तुम जाओ और दूध लेके आओ...
वो जल्दी से वह से निकल गया वही मास्टर ने रूपल दीदी से बैठने को kaha....wo खुद बैठ चुकी थी...
मास्टर - मैंने सुन्ना तुम्हे बहुत परव्शानी हो रही hai...ab तुमने मदद की थी तो मई न भी तुम्हे कुछ उपाय बताने आ gayi...waise तो तुम उन् इंसानो को दर्रा सकती ho...aur वो दार भी jaayenge...par कभी भी अपना चेहरा ख़राब नहीं करना chahiye...apne हथियार का उसे karo...yaad है ना ये क्या क्या करती है....
रूपल दीदी - क्या कुल्हाड़ी ka...par उससे to....aur मैं क्या अभी कण्ट्रोल कर पाऊँगी उसको....
मास्टर - ये तो करने के बाद hi पता चलेगा naa...Ab एक और बात sunno....ab से मैडिटेशन का टाइम बढ़ाओ apna...aur रोज प्रक्टिस अलग से करना होगा तुम्हे.....
रूपल दीदी - Practice..theek है पर ये सब किस लिए.....
मास्टर - तुमको पहली बार देखने से मैं समझ गयी थी तुम सही हो इस काम के liye...par अभी तैयार नहीं ho...to पहले तैयार हो जाओ और फिर काम भी बता dungi....ek और बात दूध पसंद नहीं है मुझे...
रूपल दीदी - ठीक है पर काम तो....
वो अपनी बात पूरी करती उससे पहले hi मास्टर वह से निकल गयी...
रूपल दीदी को समझ नहीं आ रहा था वो अब कुल्हाड़ी को उसे कैसे kare,....jaisa उन्होंने देखा था उस हिसाब से तो उनको लोगो को मारना hoga...par ये वो करना नहीं छह रही थी...
उन्होंने अपने हाथ में कुल्हाड़ी को लिया और सोचने लगी की कैसे क्या किया जाए....
"कैसी हो...." एक आवाज आयी उनके कानो mein...wo यहाँ वह देखने लगी पर कोई नहीं था वह पे...
रूपल दीदी को लगा वहम hoga...wo वापस से सोचने लगी....
"अरे तुम्ही से बात कर रही hu...batao भी क्या करना hai...yaa ऐसे hi बस बुल्ला लिया है..."
आवाज वापस aayi...didi यहाँ वह देखने लगी पर कोई था नहीं वह पे....
"अरे निच्चे हाथ में.." कम्मल करती हो तुम bhi..mujhe बुल्ला लिया और अब....
रूपल दीदी को विस्वास तो नहीं हो रहा था par...ye कुल्हाड़ी hi थी जिससे आवाज आ रही थी..
रूपल दीदी - तुम बोल सकती हो...
कुल्हाड़ी - तुम सुन सकती ho......tum सच में सुन सकती हो क्या मुझे....
रूपल दीदी - हां मुझे आवाज सुनाई दे रही है अपर tum..kaise..
कुल्हाड़ी - असली hakdaar....bas वही सुन सकता था mujhe...tum मुझे सुन सकती ho..matlab तुम मेरी असली हकदार हो...
रूपल दीदी - क्या...
कुल्हाड़ी में से अचानक से रौशनी आने lagi....aur अचानक से टेबल पे एक किताब भी आ gayi...ek पुराणी kitab...jo खुद से khuli...aur एक पैन पे जा रुक्की...
कुल्हाड़ी - मुझे बस मेरा असली हकदार hi सुन्न सकता hai...aur वही मुझे मेरी शक्तियों की सीमा तक pahuchayega..aur मैं उसको...
रूपल दीदी - ये सब है kya...aur ये किताब कहा से आयी.....
कुल्हाड़ी - ये kitab..arre ये तो बहुत पहले से है मेरे pass...wo chodo..iss किताब के हिसाब से तुम hi हो wo...meri असली maalik...ab तुम hi मुझे बनाओगी takatwaar...aur मैं tumhe..ab बताओ क्या करना है मुझे ताकतवर होने के लिए....
रूपल दीदी - एक minute...main नहीं जानती तुम क्या बो रही ho....aur तुम लड़की हो...
कुल्हाड़ी - नहीं जानती से क्या मतलब hai...tumne मुझे बुलाया क्यों फिर..
रूपल दीदी- मैंने वो मैं कुछ परेशां hu..to..
कुल्हाड़ी - मेरी असली हकदार परेशां hai...batao क्या बात है मैं सब सही कर dungi...tum जानती नहीं मेरे पावर ko.....arre खौफ था मेरा पहले यहाँ...
रूपल दीदी ने उसको सब बातें बताई...
कुल्हाड़ी - मतलब मारना नहीं hai...par काम रुक जाए कुछ ऐसा करना hai...yahi ना....
रूपल दीदी - हां यही....
कुल्हाड़ी - देखो मर्रे हुए को मारने से तो मन्ना नहीं किया है ना किसी ने....
रूपल - मतलब..
कुल्हाड़ी - Matlab...ab बस chalo...kabristaan....wahi पे सब पता चलेगा...
रूपल दीदी- kabristaan...par क्यों...
कुल्हाड़ी - अरे यार चलो तो...
रूपल दीदी ने कुछ देर सोचा और फिर निकल गयी चर्च की ओर...
जब वो वह पहुंची फिर कब्रिस्तान के साइड चली गयी....
कुल्हाड़ी - मुझे लगता है हम एअर्थ पे hi hai...hai naa....kitni अच्छी जगह थी ye....wo भी क्या दिन थे...
रूपल दीदी - हां एअर्थ पे hi है और अच्छी जगह तो है ये पर तुम्हे कैसे पता और किन्न दिंनो की बात कर रही हो तुम....
कुल्हाड़ी - देखो सब कुछ मैं नहीं बताने वाली samjhi...ab कुछ खुद भी पता karo..dhyaan लगाने आता है क्या तुम्हे...
रूपल दीदी - हां आता है...
कुल्हाड़ी - चलो ये सही hai....to कल से लगाओ ध्यान हमारी बॉन्डिंग बढ़ेगी तो तुम सब जान hi jaogi...ab देखने दो mujhe...yaha पे सबसे कामीणा कोण है...
रूपल दीदी - क्या मतलब सबसे कमीना कोण hai...tum करने क्या वाली हो..
कुल्हाड़ी - अरे मेरी जान बस देखती jao....ye सही लग रहा hai...par वो भी सही hai...dimmag तो इस वाले में tha...takat दूसरे वाले में hai....dono को hi लेके चलते है क्या बोलती हो...
रूपल दीदी - अरे पहले ये तो बताओ किनकी बात कर रही हो तुम और किनको कहा लेके जाना है.....
कुल्हाड़ी - पहली बार है ये आँखें बंद करो अपनी....
रूपल दीदी - आँखें बंद karu...par क्यों....
वो बोल hi रही थी की आसमान से बिजली girri...do कब्रों पे...
कुल्हाड़ी - इसी के रौशनी से बचने के liye....yaha वह सब दिख तो रहा है ना मैं नहीं चाहती असली हकदार पहले hi दिन आंधी हो जाए...
रूपल दीदी - क्या था ye....aur क्यों था ye...dekho तो क्या haaa.........kabron को तो कुछ हुआ hi nahi...par मैंने देखा बिजली गिर्री थी....
कुल्हाड़ी - हां तो गिर्री थी naa...chalo अब chalo....aur तुम dono....kaam पे millo...taiyaar होक आना वर्ण वापस से दाल दूंगी अंदर समझे...
रूपल दीदी - किस्से बातें कर रही हो कोई नहीं है यहाँ.....
कुल्हाड़ी - बाद में पता chalega...tum चलो..
रूपल दीदी वापस से आ गयी वह अपने होटल mein...aur जब वो वह आयी तो थोड़े देर बाद hi उनसे मिलने 2 अजीब से लोग आये जिन्होंने बसदे अज्जेब से कपडे पहन रखे the....dono अलग अलग वक़्त से लग रहे थे....
रूपल दीदी - कोण हो तुम दोनों...
"मैं हु मानुएल ब्लांको रोमसंता थे wolf...waahoooooooooooooooooooooooooooo"
"मैं हु हाहाहा Pirate...Augustin ब्लांको पायरेट हु मैं...."
कुल्हाड़ी - आ गए dono...aur ये कैसे कपडे पहने है कहा था ना वापस अंदर दाल दूंगी...
दोनों ने जैसे hi उसकी आवाज सुन्नी कांपने लगे...
"नहीं nahi....hum आप जो बोलोगे वो करेंगे..."
रूपल दीदी - कोण है ye....aur ये सब क्या है...
कुल्हाड़ी - अरे बताया तो नाम इन् दोनों ne...ye दोनों हेल्प के लिए आये hai/...wo जो वुल्फ बता रहा है कूद को वो सकनी पागल है 18तह केन्टुअरी में इसको एक कुत्ते ने कटा था जो वुल्फ जैसा दीखता tha...tab से साये खुद को वरवोल्फ समझने लगा और लोगो को मारने laga...issi वजह से फ़ासी दे दी isko...aur ये पायरेट ये होसियार hai...naa जाने कितनी बार जय से भगा है ye...dimmag बहुत है isme....ab ये दोनों hi तुम्हारी प्रॉब्लम सोल्वे करेंगे...
रूपल दीदी - पर कैसे...
कुल्हाड़ी - दर्रा के और kaise...(dono से) कपडे बदलो अपने और जो समझाया था वो याद rakhna...pirate लीड तुम karoge..wolf बस साथ dega....kaam जितनी जल्दी पूरा हो सके karo..samjhe...
पायरेट - Ji...jaisa आप कहे...
कुल्हाड़ी - पैसे देदो इसको kuch....baaki इन् दोनों को अभी के बारे में मैंने जितना था सब समझा दिया hai....aur हां कोई भी नहीं मरेगा...
रूपल दीदी - पर ये कर्नेगे क्या....
कुल्हाड़ी - यार सवाल नबहुत करती ho...paise दो इनको ये कपडे लेंगे अपने लिए और फिर काम करेंगे...
रूपल दीदी - हम्म ठीक है पर कोई गड़बड़ ना हो...
रूपल दीदी अभी आसानी से कुल्हाड़ी की साड़ी बातें मान जा रही thi..kyunki वो अभी खुद के कण्ट्रोल में नहीं thi...asar हो रहा था उनपे कुल्हाड़ी ka..par कुल्हाड़ी भी उनका फायदा नहीं उठाना चाहती थी तभी सब अच्छा हो रहा tha....Chalo यहाँ से वापस चलते है स्कूल में जहा पे क्लासेज ख़तम हो चुक्की thi....Nikita बैठी हुई थी एक बेंच pe...akele बिलकुल akele....Main बस वह से जा रहा था और वो अकेले थी तो मुझे लगा उससे मिलना चाहिए....
मैं उसके पास गया
मैं - क्या हुआ निकिता अकेले बैठी हुई हो...
निकिता - क्यों अब यहाँ भी ना baithu...yaha से भी भगा डोज....
मैं - अरे मैं थोड़ी ऐसा बो रहा hu...main तो बस....
निकिता - सब जानती हु सब के सब खुदगर्ज़ होते है...
मैं - अरे हुआ क्या ये तो बताओ....
निकिता - जाओ यहाँ से...
मैं - देखो अगर तुम कहो तो मैं अभी hi पावर्स वापस लेने की तैयारी करता hu...agar तुम उस वजह से परेशां हो तो...
निकिता - नहीं वो वजह नहीं hai....baitho...
मैं बैठ गया..
मैं - हां अब बताओ...
निकिता - मेरे साथ hi ऐसा क्यों होता है जिनकी मैं परवाह करती हु वो छोड़ के चले जाते है......
उसकी ये बात संके मुझे उसकी मेमोरी याद आने lagi...kaise एक बच्ची थी डार्क वर्ल्ड में जिसको वह से यहाँ भेजा गया उसके बाद जब वो यहाँ थी तो जिसके साथ रह रही थी उसको मार दिया गया और फिर वो कही और रहने लगी अपने जैसे लोगो के साथ...
मैं - अरे ऐसा कहा hai...tum कविता मैडम की परवाह करती ho...kya वो छोड़ के गयी tumhe....tum हम सब की परवाह भी करती ho...aur हम सब है ना यहाँ...
निकिता - मैंने कब कहा मैं तुम सब की परवाह करती hu....haa कविता मैडम की करती हु वो मुझे पद्धति है और अच्छी लगती है इस लिए रूपल दीदी भी अच्छी है पूनम मैडम भी अच्छी है पर तुम nahi....tumne मुझे बेकार में फसा दिया है...
मैं - हां हां बेकार में फसा दिया है मैं तो कह रहा हु की पावर्स वापस ले लेता hu...par तुम रेडी hi नहीं हो....
निकिता - मैं रेडी hu....par अभी nahi...tumhe पता है मैं अभी कहा गयी थी.......
मैं - मार्किट में गयी थी.....
निकिता - तुम्हे कैसे पता...
मैं - मेरी पावर्स se....arre मैं तो दिन रात तुमपे नज़र रखता hu...har वक़्त हर जगह.....
निकिता - क्या बकवास कर रहे ho...wapas लो ये पावर्स.....
मैं - मजाक कर रहा tha...aisa कुछ नहीं होता पावर्स se...wo तो मैंने मास्टर को तुमसे बात करते देखा था और उसके बाद तुम मार्किट में चली गयी....
निकिता - Haa...aur वह पे मैं अपने पुराने साथियों से मिली...
मैं - कोण साथी...
निकिता - वही जिन्होंने मुझे मारने की कोशिश की थी...
मैं - kya....aur तुम उनसे अकेले मिलने चली gayi...par क्यों....
निकिता - उनको बताना tha...sach दिखाना था उन्हें...
मैं - तो कर आयी अपना काम....
निकिता - हां बता दिया सब कुछ...
मैं - फिर उदास क्यों बैठी हो...
निकिता - मैंने बताया ना सब चले जाते है इस बार भी वही hua...wo सब चले गए मैं अकेले हो गयी वापस से.....
मैं - अरे मैंने भी बताया ना हम सब है तो तुम्हारे साथ...
निकिता - हां पर फिर भी...
मैं - हम्म कल कही घूमने चलते है ok...
निकिता - मतलब..
मैं - मतलब कल बता dunga..chalo मैं चलता हु मुझे काम है....
मैं वह से उठा और अपने रूम की ओर चला गया वो वही बैठी रही....
डार्क वर्ल्ड में जब कुल्हाड़ी ने उन् दोनों को वापस से जिन्दा किया था यहाँ पे तो वह पे कुछ अजीब घटना hui....Slayer अपने गुफा से पहली बार इतने सैलून में बहार nikla.....uski आँखों में एक अज्जेब सी चमक thi...aisa लग रहा था जिसकी तलाश में वो था वो उसको मिलने वाली ho....par बस एक hi भाव नहीं था उसके चेहरे पोर भी भाव थे जैसे सुरप्रीसेड hona....usko पता है की जिनको वो धुंध रहा है वो इस तरह तो मिलने से rahe...par ये जो भी tha....wo उसी के जैसा tha....yaa यूँ कहे की सायद वही tha...wo कन्फर्म तो नहीं था पर उसको लग रहा था की ये वही hai....aur वो इसको चेक करना चाहता tha....pani पावर्स से उसको ये तो पता चल hi गया था की वो चीज कहा पे hai....aur वो वह जाने के लिए निकलने वाला भी tha...lekin पहले तो अपनी भूख मिटानी थी उसको....
अपने गुफा से निकलते hi वो चल दिया एक कबीले की oor...jaha उसको अपना खाना मिलने वाला था आत्माएं...
वही स्कूल में दब वापस आ गया tha....raat के खाने से pahle...wo अकेला नहीं आया था साथ में अपने यहाँ से कुछ पकवान भी लेके आया tha...apne दोस्तों के लिए हमारे लिए...
मैं और निकिता बैठे थे एक टेबल पे जहा वो मुझसे पूछ रही थी की कल कहा चलने की बात की थी मैंने और मैं उसको बता नहीं रहा tha...itne में वह दब आया अपने हाथ में एक ढाबा leke...aur हमारे पास आ गया...
दब - कैसे हो doston...mujhe याद किया या नहीं.....
मैं कुछ बोलता उससे पहले निकिता ने बोलै...
निकिता - फालतू लोगो को कोण याद करता है...
दब - इससे पहले हममे बहेश हो मैं तुम दोनों के लिए कुछ लाया hu..maine बताया था न मेरे प्लेनेट पे पूजा होती है...
निकिता - हां जिसमे राज परिवार के सभी लोग सबसे कमजोर होते और पूजा होने के बाद उनकी पावर्स अगले दिन वापस आ जाती है...
दब - तुम्हे कैसे पता मैंने ये सब तो नहीं बताया था...
मैं - अरे kitabein...kitab पढ़ रही थी ना वही दिखा होगा isko....hai ना...
निकिता - हां वही ...किताबें...
दब - हां ऐसा hi होता है और इसी वजह से मैं नहीं आ पाया था यहाँ wapas...accha तो मैं अब तुम दोनों के लिए कुछ खाना लेके आया हु....
दब ने डब्बा खोला तो उसमे वही सब था जो हमने लीमो को यहाँ खाया था रात ko....Kya खाना था वो भी....
दब हममे डिश के बारे में बताने laga...par निकिता सब के बारे में पहले hi बता deti...pata नहीं ये ऐसा क्यों कर रही थी...
मैं उसको टोक रहा था पर वो कहा सुन रही थी मेरी बातों ko...wahi दब हैरान हुआ जा रहा था की आखिर इसको इतना सब कैसे पता है उसके कंट्री के बारे में....
खाना ख़तम हुआ और सब अपने अपने रूम में चले गए सोने के liye...par मैं बुआ के पास गया उनसे milne...unse कुछ बात करनी thi..kal के बारे mein...main उनसे बात करने के बाद रूम में आया और सो gaya...aur फिर पहुंच गया अपने दोस्तों के pass...Albus और कूपर के पास...
आज के लिए इतना hi आगे देखते है ये कुल्हाड़ी और क्या क्या करती hai....aur निकिता के बारे में देखेंगे थोड़ा bahut...saath में स्लेयर क्या करता है और ये लूसिफ़ेर क्यों लगा हुआ है बचने mein....Prof. सूरज को...
बनने रहिये...
अब तक
मैं ज्वाला के कबीले में tha...usse बात करने के बाद मैं पोलर बेयर प्रिंस को देखने के लिए निकल गया tha...wahi निकिता अपने साथियों के पास गयी thi...haa साथी जिनके साथ वो रहती thi...yaha स्कूल आने से pahle...wo उनको कुछ सच बताने गयी thi...Prof. सूरज का sach...aur उसने बताया भी और सबूत भी diye...par उसके बाद वो बिन्ना कुछ कहे सुनने वह से निकल गयी स्कूल की oor...wahi दब वो खुश था अपने महल में सभी के saath...inn बातों से अनजान की क्या क्या हुआ है एल्फ कंट्री mein...aur सीना नायक जी परेशां थे क्यूंकि उनको समझ नहीं आ रहा था की उनके फुलप्रूफ प्लान का हुआ kya....sab सेट करके रखा था उसने पर कुछ हुआ hi nahi...Leemo अपनी बहन और अपनी भंगजे के साथ खुश था...
अब आगे...
पहले तो हीरो के पास hi चलते है जो अभी ज्वाला के कबीले में घुम्म रहा है...
(प्रतीक के रेस्पेक्ट में)
मैं यहाँ वह देखता हुआ जा रहा था वैद्य के pass....aaj लोग नाराज से लग रहे थे mujhse....sayad इनको भी उस पोलर बेयर प्रिंस का मेरा यहाँ लाना पसंद नहीं aaya...aaye भी kyun..dusman जो थे wo...par अगर ध्रुव की बात को मन्ना jaaye...matlab की पोलर बेयर और ज्वाला के कबीलों को एक साथ कर दिया जाए तो इनका मुकाबला करना बहुत मुश्किल हो jaayega...aur ये जो प्रिंस है वो इसमें एक एहम भूमिका निभा सकता था...
मैं ऐसे hi सोचते हुए जा पंहुचा वह वैद्य जी के pass...aur जब वह पंहुचा तो ठण्ड से मेरी भी कुल्फी जमने लगी....
मैं - यहाँ इतनी ठण्ड क्यों लग रही hai....kya हो रहा है यहाँ...
वैद्यजी - ये सब आपके लाये हुए इस मेहमान का किया धरा hai...maine इसको दवाई di..taaki ये ठीक हो jaaye...ab जब ये ठीक होने लगा है तो यहाँ के वातावरण से गर्मी को खींच रहा hai...pata नहीं क्यों और kaise...par इसके आस पास की साड़ी गर्मी को ये अपने अंदर सोखे जा रहा hai...meri समझ में कुछ नहीं आ रहा है..
मैं - कही इससे कोई दिक्कत तो नहीं होने वाली naa...ye ठीक तो हो जाएगा ना...
वैद्यजी ने अपनी गर्दन निच्चे कर li...aur बोले... "मुझे पता नहीं है क्या hoga....maine पहले कभी किसी पोलर बेयर को ठीक नहीं किया hai...to मैं अंदाज़ा भी लगा के कुछ नहीं कह सकता..."
मैं - ध्रुव ये सब क्या है क्या कुछ गड़बड़ होने वाली है यहाँ पे...
ध्रुव - देखो अब फ्यूचर तो मैं बता नहीं सकता par....dekhne से तो लग रहा है की गड़बड़ hogi...iss भालू के सरीर को dekho...iske फुर्र के रंग कुछ बदल रहे है...
मैं- अरे हां मैंने देखा hi nahi...par क्या इससे कोई दिक्कत होगी..
ध्रुव - अब मैं ये कैसे bataun...tumhe ओल्ड आउल से बात करना chahiye...wo hi है जो इन् दोनों कबीलों को जानता है वो भी बड़े अच्छे se...wo बता सकता है...
मैं -हां ये सही hai...(vaidya जी से) आप ओल्ड आउल को बुल्ला सकते है क्या यहाँ...
वैद्य जी- वो उल्लू... हां बुल्ला तो सकता हु पर...
मैं- पर वॉर छोड़ो और उनको बुलाओ...
वैद्यजी ने एक पोर्टल खोला जिसमे से वो अंदर आ gaye...pahle तो वो समझ नहीं पाए की वह पहुंचे kaise...aur जब समझे तो अपने सामने उस वैद्य को देख के थोड़ा गुस्सा हो गए...
मैं - ओल्ड आउल हममे मदद चाहिए...
ओल्ड आउल - aap...haa बताइये क्या मदद चाहिए....
मैं - wo....(maine उस प्रिंस की ओर इशारा किया...) जब से ये यहाँ आया है और ठीक होने लगा है यहाँ पे ठण्ड बढ़ती जा रही hai...aur इसके फुर्र देखिये वो भी रंग बदल रहे है...
ओल्ड आउल - इसको यहाँ कौन लेके aaya...isko अभी बर्फ में लेके chalo...agar यहाँ रहा तो इसको खतरा hai...ye गर्मी सोख्ता जाएगा और फिर दिक्कत हो जायेगी...
मैं - पर कहा लेके जाए इसको...
ओल्ड आउल ने एक पोर्टल khola.....aur हममे वह लेके आ gata...saath में उस वैद्य को bhi...ye एक बर्फीला इलाका tha...Old आउल आप इसको बर्फ से धकिये तब तक वैद्यजी यहाँ पे इसको रखने का इंतेज़ाम करते है....
मैं - हम्म ठीक है..
मैंने उस भालू को वही बर्फ पे रखा और उसके ऊपर बर्फ डालने laga...par उसका सर बर्फ से बहार रख रहा tha...wahi ओल्ड आउल वैद्यजी को कुछ समझा रहे the...bade गुस्से में लग रहे थे wo...pata नहीं क्या बात थी...
थोड़ी देर बाद वैद्यजी वह कुछ करने lage...wahi ओल्ड आउल मेरे पास आ गए...
ओल्ड आउल - मैंने सब कुछ समझा दिया है isko...ab मैं चलता हु आपका काम देखने को...
मैं - मेरा kaam...mera कोण सा काम...
ओल्ड आउल - अरे आपने hi तो कहा था प्रोफ. सूरज पे नज़र rakho...main वही कर रहा हु...
मैं - अरे हां वो वह से बच निकला था बताया था दीदी ने mujhe....to कहा है wo...aur किस हालत में है...
ओल्ड आउल - हालत की बात kare...to बिजली ने जो उसको झटका दिया है उसके बाद उसकी हालत बहुत ख़राब hai...par ज्यादा दिन ऐसा नहीं rahega...wo अभी डेमोस में है और वह पे उसको राज महल में रखा जा रहा hai.....wo जल्दी से ठीक हो जाएगा waha...Lucifer है उसके साथ...
मैं - Demos....wo डेमोस कैसे pahucha..aur लूसिफ़ेर ???
ओल्ड आउल - लूसिफ़ेर वह का राजा hai....Demos में वो उसी की मदद से पंहुचा hai...pata नहीं क्यों वो उसको बचने में इतना लगा हुआ है...
मैं - नज़र rakho...aur खबर देते रहा karo....kab बताने वाले थे ये sab...jab वो वापस से हुम्ला करता तब...
ओल्ड आउल - मैं बस आने hi वाला tha....bas उन् बातों का पता लगाके...
मैं - अब se....jaise hi कोई बात पता चले मुझे batao...ab जाओ यहाँ से...
ओल्ड आउल वह से चला gaya...WO वैद्य भी वह कुछ करने laga...agla इन् सब के चाकर में मेरा जादुई काढ़े का क्लास छूट गया tha...aur अगर इसके बाद बुआ का क्लास भी छूट जाता तो फिर से मुझसे सब पुच्जन लगती...
मैं - जल्दी करो जो करना है मुझे यहाँ से जाना भी है...
वैद्यजी - हां पता hai....Main पोर्टल खोल देता hu...aap चले जाओ इसका ध्यान मैं रख लूंगा...
मैं - देखो ये बहुत जरुरी है इसको कुछ होना नहीं चाहिए samjhe...jaisa ओल्ड आउल ने कहा है बिलकुल वैसा hi karna...agar मदद चाहिए तो मैं वह ज्वाला से कह देता हु....
वैद्य जी- हम्म ठीक है..
मैंने ज्वाला को याद किया उसने पोर्टल खोला और पहले तो मुझे उस जगह देख के थोड़ा शॉकेड hua...fir मैंने उसको सब bataya....usne अपने कुछ लोगो को ब्वैद्यजी की मदद के लिए भेज दिया और मेरे जाने के लिए पोर्टल भी खोल diya...main वह से स्कूल में आ गया जहा मैं जल्दी से बुआ के क्लास के लिए रेडी हो गया...
अभी इसको यहाँ क्लास अटेंड करने देते है और हम चलते है स्पेन mein...Rupal दीदी के pass....jo अभी कुछ लोगो को सबक सीखने के ंबारे में सोच रही थी...
रूपल दीदी होटल में अपने ऑफिस में बैठी thi...aur सोच रही थी की कैसे उन् इंसानो को बिन्ना मारे हुए रोक्का jaaye...aisa नहीं था की उन्होंने पुलिस की मदद नहीं li...unhone पहले यही kiya...par कोई बात नहीं banni...jinn लोगो की शिकायत इस बार पोप लेके आये थे वो एक बड़े गैंग के मेंबर्स the....jinki पहुंच बहुत ऊपर तक thi..to ज्यादा कुछ हुआ nahi...balki दीदी का होटल उन् लोगो के निशाने पे आ गया tha....aaj दोपहर में hi ूनक्वे होटल के 2 गेस्ट्स को मर्रा था उस गैंग के मेंबर्स ने और उन्हें वो होटल छोड़ने को कहा tha...Didi प्रेशर में thi...ek तो ये उनका पहला काम था और दूसरा की वो अभी चाचा जी को इन् सब में नहीं लांना चाहती thi/...wo खुद इसको हैंडल करना चाहती thi....par कैसे करे ये hi समझ नहीं आ रहा tha...mujhse भी तो राय आंगी थी उन्होंने पर सायद मैं कुछ हेल्प नहीं कर पाया...
वो ऑफिस में बैठी सोच hi रही थी की एक वेटर ने उनके ऑफिस का दरवाजा खटखटाया...
रूपल दीदी - हां अंदर आ जाओ...
वेटर अंदर आया और खड़ा हो गया...
रूपल दीदी - हां बताओ क्या बात है...
वेटर - वो हमारे होटल की गाडी को पकड़ लिया है....
रूपल दीदी - kya...kisne पकड़ लिया...
वेटर - वो गैंग वालो ने...
रूपल दीदी - तुमने पुलिस को खबर किया...
वेटर - मिस आप तो जानती है वो कुछ नहीं karenge....phir भी मैंने कर दिया hai....ye हमारी तीसरी गाडी है जो....
रूपल दीदी - तीसरी gaadi...pahli दो कब गायब hui..aur तुमने बताया क्यों नहीं...
वेटर - मिस मुझे लगा पुलिस को बता दूंगा और वो रिकवर कर लेंगे बात आप तक पहुंचेगी hi nahi....nahi तो आप बेकार में परेशां हो जाओगी....
रूपल - और ab..ab क्या मैं परेशां नहीं लग rahi....inn गैंग वालो का कुछ करना होगा....
वो बात hi कर रहे थे की वह पे दरवाजा वापस से खटखटाया गया....
रूपल - देखो कोण है...
दरवाजा खुला और सामने मास्टर कड़ी thi...ye पता नहीं कर क्या रही है पहले निकिता को और ab...didi के पास...
रूपल दीदी - आप yaha...(Waiter से) तुम जाओ और दूध लेके आओ...
वो जल्दी से वह से निकल गया वही मास्टर ने रूपल दीदी से बैठने को kaha....wo खुद बैठ चुकी थी...
मास्टर - मैंने सुन्ना तुम्हे बहुत परव्शानी हो रही hai...ab तुमने मदद की थी तो मई न भी तुम्हे कुछ उपाय बताने आ gayi...waise तो तुम उन् इंसानो को दर्रा सकती ho...aur वो दार भी jaayenge...par कभी भी अपना चेहरा ख़राब नहीं करना chahiye...apne हथियार का उसे karo...yaad है ना ये क्या क्या करती है....
रूपल दीदी - क्या कुल्हाड़ी ka...par उससे to....aur मैं क्या अभी कण्ट्रोल कर पाऊँगी उसको....
मास्टर - ये तो करने के बाद hi पता चलेगा naa...Ab एक और बात sunno....ab से मैडिटेशन का टाइम बढ़ाओ apna...aur रोज प्रक्टिस अलग से करना होगा तुम्हे.....
रूपल दीदी - Practice..theek है पर ये सब किस लिए.....
मास्टर - तुमको पहली बार देखने से मैं समझ गयी थी तुम सही हो इस काम के liye...par अभी तैयार नहीं ho...to पहले तैयार हो जाओ और फिर काम भी बता dungi....ek और बात दूध पसंद नहीं है मुझे...
रूपल दीदी - ठीक है पर काम तो....
वो अपनी बात पूरी करती उससे पहले hi मास्टर वह से निकल गयी...
रूपल दीदी को समझ नहीं आ रहा था वो अब कुल्हाड़ी को उसे कैसे kare,....jaisa उन्होंने देखा था उस हिसाब से तो उनको लोगो को मारना hoga...par ये वो करना नहीं छह रही थी...
उन्होंने अपने हाथ में कुल्हाड़ी को लिया और सोचने लगी की कैसे क्या किया जाए....
"कैसी हो...." एक आवाज आयी उनके कानो mein...wo यहाँ वह देखने लगी पर कोई नहीं था वह पे...
रूपल दीदी को लगा वहम hoga...wo वापस से सोचने लगी....
"अरे तुम्ही से बात कर रही hu...batao भी क्या करना hai...yaa ऐसे hi बस बुल्ला लिया है..."
आवाज वापस aayi...didi यहाँ वह देखने लगी पर कोई था नहीं वह पे....
"अरे निच्चे हाथ में.." कम्मल करती हो तुम bhi..mujhe बुल्ला लिया और अब....
रूपल दीदी को विस्वास तो नहीं हो रहा था par...ye कुल्हाड़ी hi थी जिससे आवाज आ रही थी..
रूपल दीदी - तुम बोल सकती हो...
कुल्हाड़ी - तुम सुन सकती ho......tum सच में सुन सकती हो क्या मुझे....
रूपल दीदी - हां मुझे आवाज सुनाई दे रही है अपर tum..kaise..
कुल्हाड़ी - असली hakdaar....bas वही सुन सकता था mujhe...tum मुझे सुन सकती ho..matlab तुम मेरी असली हकदार हो...
रूपल दीदी - क्या...
कुल्हाड़ी में से अचानक से रौशनी आने lagi....aur अचानक से टेबल पे एक किताब भी आ gayi...ek पुराणी kitab...jo खुद से khuli...aur एक पैन पे जा रुक्की...
कुल्हाड़ी - मुझे बस मेरा असली हकदार hi सुन्न सकता hai...aur वही मुझे मेरी शक्तियों की सीमा तक pahuchayega..aur मैं उसको...
रूपल दीदी - ये सब है kya...aur ये किताब कहा से आयी.....
कुल्हाड़ी - ये kitab..arre ये तो बहुत पहले से है मेरे pass...wo chodo..iss किताब के हिसाब से तुम hi हो wo...meri असली maalik...ab तुम hi मुझे बनाओगी takatwaar...aur मैं tumhe..ab बताओ क्या करना है मुझे ताकतवर होने के लिए....
रूपल दीदी - एक minute...main नहीं जानती तुम क्या बो रही ho....aur तुम लड़की हो...
कुल्हाड़ी - नहीं जानती से क्या मतलब hai...tumne मुझे बुलाया क्यों फिर..
रूपल दीदी- मैंने वो मैं कुछ परेशां hu..to..
कुल्हाड़ी - मेरी असली हकदार परेशां hai...batao क्या बात है मैं सब सही कर dungi...tum जानती नहीं मेरे पावर ko.....arre खौफ था मेरा पहले यहाँ...
रूपल दीदी ने उसको सब बातें बताई...
कुल्हाड़ी - मतलब मारना नहीं hai...par काम रुक जाए कुछ ऐसा करना hai...yahi ना....
रूपल दीदी - हां यही....
कुल्हाड़ी - देखो मर्रे हुए को मारने से तो मन्ना नहीं किया है ना किसी ने....
रूपल - मतलब..
कुल्हाड़ी - Matlab...ab बस chalo...kabristaan....wahi पे सब पता चलेगा...
रूपल दीदी- kabristaan...par क्यों...
कुल्हाड़ी - अरे यार चलो तो...
रूपल दीदी ने कुछ देर सोचा और फिर निकल गयी चर्च की ओर...
जब वो वह पहुंची फिर कब्रिस्तान के साइड चली गयी....
कुल्हाड़ी - मुझे लगता है हम एअर्थ पे hi hai...hai naa....kitni अच्छी जगह थी ye....wo भी क्या दिन थे...
रूपल दीदी - हां एअर्थ पे hi है और अच्छी जगह तो है ये पर तुम्हे कैसे पता और किन्न दिंनो की बात कर रही हो तुम....
कुल्हाड़ी - देखो सब कुछ मैं नहीं बताने वाली samjhi...ab कुछ खुद भी पता karo..dhyaan लगाने आता है क्या तुम्हे...
रूपल दीदी - हां आता है...
कुल्हाड़ी - चलो ये सही hai....to कल से लगाओ ध्यान हमारी बॉन्डिंग बढ़ेगी तो तुम सब जान hi jaogi...ab देखने दो mujhe...yaha पे सबसे कामीणा कोण है...
रूपल दीदी - क्या मतलब सबसे कमीना कोण hai...tum करने क्या वाली हो..
कुल्हाड़ी - अरे मेरी जान बस देखती jao....ye सही लग रहा hai...par वो भी सही hai...dimmag तो इस वाले में tha...takat दूसरे वाले में hai....dono को hi लेके चलते है क्या बोलती हो...
रूपल दीदी - अरे पहले ये तो बताओ किनकी बात कर रही हो तुम और किनको कहा लेके जाना है.....
कुल्हाड़ी - पहली बार है ये आँखें बंद करो अपनी....
रूपल दीदी - आँखें बंद karu...par क्यों....
वो बोल hi रही थी की आसमान से बिजली girri...do कब्रों पे...
कुल्हाड़ी - इसी के रौशनी से बचने के liye....yaha वह सब दिख तो रहा है ना मैं नहीं चाहती असली हकदार पहले hi दिन आंधी हो जाए...
रूपल दीदी - क्या था ye....aur क्यों था ye...dekho तो क्या haaa.........kabron को तो कुछ हुआ hi nahi...par मैंने देखा बिजली गिर्री थी....
कुल्हाड़ी - हां तो गिर्री थी naa...chalo अब chalo....aur तुम dono....kaam पे millo...taiyaar होक आना वर्ण वापस से दाल दूंगी अंदर समझे...
रूपल दीदी - किस्से बातें कर रही हो कोई नहीं है यहाँ.....
कुल्हाड़ी - बाद में पता chalega...tum चलो..
रूपल दीदी वापस से आ गयी वह अपने होटल mein...aur जब वो वह आयी तो थोड़े देर बाद hi उनसे मिलने 2 अजीब से लोग आये जिन्होंने बसदे अज्जेब से कपडे पहन रखे the....dono अलग अलग वक़्त से लग रहे थे....
रूपल दीदी - कोण हो तुम दोनों...
"मैं हु मानुएल ब्लांको रोमसंता थे wolf...waahoooooooooooooooooooooooooooo"
"मैं हु हाहाहा Pirate...Augustin ब्लांको पायरेट हु मैं...."
कुल्हाड़ी - आ गए dono...aur ये कैसे कपडे पहने है कहा था ना वापस अंदर दाल दूंगी...
दोनों ने जैसे hi उसकी आवाज सुन्नी कांपने लगे...
"नहीं nahi....hum आप जो बोलोगे वो करेंगे..."
रूपल दीदी - कोण है ye....aur ये सब क्या है...
कुल्हाड़ी - अरे बताया तो नाम इन् दोनों ne...ye दोनों हेल्प के लिए आये hai/...wo जो वुल्फ बता रहा है कूद को वो सकनी पागल है 18तह केन्टुअरी में इसको एक कुत्ते ने कटा था जो वुल्फ जैसा दीखता tha...tab से साये खुद को वरवोल्फ समझने लगा और लोगो को मारने laga...issi वजह से फ़ासी दे दी isko...aur ये पायरेट ये होसियार hai...naa जाने कितनी बार जय से भगा है ye...dimmag बहुत है isme....ab ये दोनों hi तुम्हारी प्रॉब्लम सोल्वे करेंगे...
रूपल दीदी - पर कैसे...
कुल्हाड़ी - दर्रा के और kaise...(dono से) कपडे बदलो अपने और जो समझाया था वो याद rakhna...pirate लीड तुम karoge..wolf बस साथ dega....kaam जितनी जल्दी पूरा हो सके karo..samjhe...
पायरेट - Ji...jaisa आप कहे...
कुल्हाड़ी - पैसे देदो इसको kuch....baaki इन् दोनों को अभी के बारे में मैंने जितना था सब समझा दिया hai....aur हां कोई भी नहीं मरेगा...
रूपल दीदी - पर ये कर्नेगे क्या....
कुल्हाड़ी - यार सवाल नबहुत करती ho...paise दो इनको ये कपडे लेंगे अपने लिए और फिर काम करेंगे...
रूपल दीदी - हम्म ठीक है पर कोई गड़बड़ ना हो...
रूपल दीदी अभी आसानी से कुल्हाड़ी की साड़ी बातें मान जा रही thi..kyunki वो अभी खुद के कण्ट्रोल में नहीं thi...asar हो रहा था उनपे कुल्हाड़ी ka..par कुल्हाड़ी भी उनका फायदा नहीं उठाना चाहती थी तभी सब अच्छा हो रहा tha....Chalo यहाँ से वापस चलते है स्कूल में जहा पे क्लासेज ख़तम हो चुक्की thi....Nikita बैठी हुई थी एक बेंच pe...akele बिलकुल akele....Main बस वह से जा रहा था और वो अकेले थी तो मुझे लगा उससे मिलना चाहिए....
मैं उसके पास गया
मैं - क्या हुआ निकिता अकेले बैठी हुई हो...
निकिता - क्यों अब यहाँ भी ना baithu...yaha से भी भगा डोज....
मैं - अरे मैं थोड़ी ऐसा बो रहा hu...main तो बस....
निकिता - सब जानती हु सब के सब खुदगर्ज़ होते है...
मैं - अरे हुआ क्या ये तो बताओ....
निकिता - जाओ यहाँ से...
मैं - देखो अगर तुम कहो तो मैं अभी hi पावर्स वापस लेने की तैयारी करता hu...agar तुम उस वजह से परेशां हो तो...
निकिता - नहीं वो वजह नहीं hai....baitho...
मैं बैठ गया..
मैं - हां अब बताओ...
निकिता - मेरे साथ hi ऐसा क्यों होता है जिनकी मैं परवाह करती हु वो छोड़ के चले जाते है......
उसकी ये बात संके मुझे उसकी मेमोरी याद आने lagi...kaise एक बच्ची थी डार्क वर्ल्ड में जिसको वह से यहाँ भेजा गया उसके बाद जब वो यहाँ थी तो जिसके साथ रह रही थी उसको मार दिया गया और फिर वो कही और रहने लगी अपने जैसे लोगो के साथ...
मैं - अरे ऐसा कहा hai...tum कविता मैडम की परवाह करती ho...kya वो छोड़ के गयी tumhe....tum हम सब की परवाह भी करती ho...aur हम सब है ना यहाँ...
निकिता - मैंने कब कहा मैं तुम सब की परवाह करती hu....haa कविता मैडम की करती हु वो मुझे पद्धति है और अच्छी लगती है इस लिए रूपल दीदी भी अच्छी है पूनम मैडम भी अच्छी है पर तुम nahi....tumne मुझे बेकार में फसा दिया है...
मैं - हां हां बेकार में फसा दिया है मैं तो कह रहा हु की पावर्स वापस ले लेता hu...par तुम रेडी hi नहीं हो....
निकिता - मैं रेडी hu....par अभी nahi...tumhe पता है मैं अभी कहा गयी थी.......
मैं - मार्किट में गयी थी.....
निकिता - तुम्हे कैसे पता...
मैं - मेरी पावर्स se....arre मैं तो दिन रात तुमपे नज़र रखता hu...har वक़्त हर जगह.....
निकिता - क्या बकवास कर रहे ho...wapas लो ये पावर्स.....
मैं - मजाक कर रहा tha...aisa कुछ नहीं होता पावर्स se...wo तो मैंने मास्टर को तुमसे बात करते देखा था और उसके बाद तुम मार्किट में चली गयी....
निकिता - Haa...aur वह पे मैं अपने पुराने साथियों से मिली...
मैं - कोण साथी...
निकिता - वही जिन्होंने मुझे मारने की कोशिश की थी...
मैं - kya....aur तुम उनसे अकेले मिलने चली gayi...par क्यों....
निकिता - उनको बताना tha...sach दिखाना था उन्हें...
मैं - तो कर आयी अपना काम....
निकिता - हां बता दिया सब कुछ...
मैं - फिर उदास क्यों बैठी हो...
निकिता - मैंने बताया ना सब चले जाते है इस बार भी वही hua...wo सब चले गए मैं अकेले हो गयी वापस से.....
मैं - अरे मैंने भी बताया ना हम सब है तो तुम्हारे साथ...
निकिता - हां पर फिर भी...
मैं - हम्म कल कही घूमने चलते है ok...
निकिता - मतलब..
मैं - मतलब कल बता dunga..chalo मैं चलता हु मुझे काम है....
मैं वह से उठा और अपने रूम की ओर चला गया वो वही बैठी रही....
डार्क वर्ल्ड में जब कुल्हाड़ी ने उन् दोनों को वापस से जिन्दा किया था यहाँ पे तो वह पे कुछ अजीब घटना hui....Slayer अपने गुफा से पहली बार इतने सैलून में बहार nikla.....uski आँखों में एक अज्जेब सी चमक thi...aisa लग रहा था जिसकी तलाश में वो था वो उसको मिलने वाली ho....par बस एक hi भाव नहीं था उसके चेहरे पोर भी भाव थे जैसे सुरप्रीसेड hona....usko पता है की जिनको वो धुंध रहा है वो इस तरह तो मिलने से rahe...par ये जो भी tha....wo उसी के जैसा tha....yaa यूँ कहे की सायद वही tha...wo कन्फर्म तो नहीं था पर उसको लग रहा था की ये वही hai....aur वो इसको चेक करना चाहता tha....pani पावर्स से उसको ये तो पता चल hi गया था की वो चीज कहा पे hai....aur वो वह जाने के लिए निकलने वाला भी tha...lekin पहले तो अपनी भूख मिटानी थी उसको....
अपने गुफा से निकलते hi वो चल दिया एक कबीले की oor...jaha उसको अपना खाना मिलने वाला था आत्माएं...
वही स्कूल में दब वापस आ गया tha....raat के खाने से pahle...wo अकेला नहीं आया था साथ में अपने यहाँ से कुछ पकवान भी लेके आया tha...apne दोस्तों के लिए हमारे लिए...
मैं और निकिता बैठे थे एक टेबल पे जहा वो मुझसे पूछ रही थी की कल कहा चलने की बात की थी मैंने और मैं उसको बता नहीं रहा tha...itne में वह दब आया अपने हाथ में एक ढाबा leke...aur हमारे पास आ गया...
दब - कैसे हो doston...mujhe याद किया या नहीं.....
मैं कुछ बोलता उससे पहले निकिता ने बोलै...
निकिता - फालतू लोगो को कोण याद करता है...
दब - इससे पहले हममे बहेश हो मैं तुम दोनों के लिए कुछ लाया hu..maine बताया था न मेरे प्लेनेट पे पूजा होती है...
निकिता - हां जिसमे राज परिवार के सभी लोग सबसे कमजोर होते और पूजा होने के बाद उनकी पावर्स अगले दिन वापस आ जाती है...
दब - तुम्हे कैसे पता मैंने ये सब तो नहीं बताया था...
मैं - अरे kitabein...kitab पढ़ रही थी ना वही दिखा होगा isko....hai ना...
निकिता - हां वही ...किताबें...
दब - हां ऐसा hi होता है और इसी वजह से मैं नहीं आ पाया था यहाँ wapas...accha तो मैं अब तुम दोनों के लिए कुछ खाना लेके आया हु....
दब ने डब्बा खोला तो उसमे वही सब था जो हमने लीमो को यहाँ खाया था रात ko....Kya खाना था वो भी....
दब हममे डिश के बारे में बताने laga...par निकिता सब के बारे में पहले hi बता deti...pata नहीं ये ऐसा क्यों कर रही थी...
मैं उसको टोक रहा था पर वो कहा सुन रही थी मेरी बातों ko...wahi दब हैरान हुआ जा रहा था की आखिर इसको इतना सब कैसे पता है उसके कंट्री के बारे में....
खाना ख़तम हुआ और सब अपने अपने रूम में चले गए सोने के liye...par मैं बुआ के पास गया उनसे milne...unse कुछ बात करनी thi..kal के बारे mein...main उनसे बात करने के बाद रूम में आया और सो gaya...aur फिर पहुंच गया अपने दोस्तों के pass...Albus और कूपर के पास...
आज के लिए इतना hi आगे देखते है ये कुल्हाड़ी और क्या क्या करती hai....aur निकिता के बारे में देखेंगे थोड़ा bahut...saath में स्लेयर क्या करता है और ये लूसिफ़ेर क्यों लगा हुआ है बचने mein....Prof. सूरज को...
बनने रहिये...