सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी - Page 10 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी

अपडेट 69

जय आरती के ऊपर पीछे से छाड़ः हुआ अपना पूरा डैम लगा कर उसे छोड़ रहा था. पिछले 25-30 मिनट से उसने अलग अलग पोजीशन में आरती की अछि तरह से रेल बना राखी थी. अब तक तोह कोई भी लड़की कब की झाड़ जाती पर आरती तोह पूरा होने का नाम hi नहीं ले रही थी. जय और आरती पसीनो में टर्र हो चुके थे और आरती की कांपती हुई सिसकियाँ पूरे रूम में गूँज रही थी.

आरती - उन्न्नध्ह्हः…. उन्न्हठ्ह…. ममममममम

जय - भाभी जेईई…. अह्हह्ह्ह्ह…. आज ऐसा छोडूंगा न की भैया को भूल जाओगे….

videotogif-2025-01-08-13-50-46.gif


जय ने आरती के गद्देदार गांड पर अपना भार डालते हुए हुए ज़ोर के झटके मारे. आरती का हाथ साइड में जय के हाथ को ढून्ढ रहा था, वह दर्द के मारे कुछ कास के पकड़ लेना चाहती थी. पर उसका अहंकार उसे जय को रोकने नहीं दे पा रहा था. उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था जय की इस ताबड़ तोड़ चुदाई से.

आरती - उननननननहहह…. Ssssssssssss….. ईईईई…

जय कुछ पल के लिए रुका और उसने आरती की गांड पर एक ज़ोर का थप्पड़ लगाया, आरती की गांड अब तक पूरी लाल हो चुकी थी.

कुछ देर से आरती की उलटे जवाब भी बंद हो चुके थे, जैसे वह आखिर जय के आगे झुक गयी हो - ुघठ... भाभी जी.... अब कैसा लग रहा है... भैया ऐसे तोह नहीं करते होंगे...

आरती - ुह्ह्ह्ह... आह्ह्ह्णण... ाहहननन... जय और करो न.... और मैं तुम्हारी भाभी नहीं हूँ....

जय ने आरती के पीछे खींचते हुए पकड़ लिए और फिर से अंदर धक्के मारने लगा - तोह क्या बुलायु आपको, मेरी जानेमन?

tumblr_nzbrakJ3k31ujpqwxo1_500.gif


आरती ने अपना मुँह बीएड की तरफ कर लिया, वह अपनी चीखे जय को नहीं सुनना चाहती थी. सच में जय ने जिस तरह से आज उसकी ली थी, आज तक उसके पति भी नहीं ली थी. इतना स्टैमिना की वह 30 मिनट से बस बिना रुके उसे चोदे जा रहा था.

जय ने आरती के बाल पकड़ते हुए कहा - बोलिये आरती जी....

आरती - Uhhhnnnn....mmmmm.... अह्ह्ह्ह.....

जय - लगता है भैया ने आपका छेड़ अछि तरह खोल दिया है इतने सालो में... चलिए फिर आपकी दूसरी गुफा भी टटोली जाये.... वहां तोह भैया शायद नहीं गए होंगे...

आरती एक डैम से काँप गयी, उसने कई बार गांड में सेक्स करने के बारे में सोचा था पर उसे खुद ये बोलते हुए शर्म सी आती थी, और उसका पति तोह खुद से वह करने से रहा था.

जय ने अपनी दो उंगलियां आरती के गांड में घुसा दी - उफ्फफ्फ्फ़.... काफी टाइट है... अब आएगा मज़ा...

आरती जय को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी - जय... नहीं ... वहां नहीं...

जय - क्या हुआ... निकल गयी साड़ी हेकड़ी... अब तोह ये हो कर hi रहेगा...

जय ने अपने लुंड पर थोड़ा सा थूक लगाया और आरती की गांड में अपना लुंड घुसना शुरू किया. जय ने आरती के हाथों को कास के पकड़ लिया ताकि वह हिल न पाए. अब निकली थी आरती की असली चीखें...

rough-tough-touch-824-001.gif


आरती - अह्ह्ह्ह.... हरामजादे... हट जा... उफ्फ्फ....

जय ने अपना संयम बनाते हुए आरती की गांड में अपना लुंड और अंदर किया - आपके मुँह से गालियां शोभा नहीं देती .....

आरती - उफ्फ्फ्फ़... जय... बहनचोद... तेल तोह लगा ले...

जय को आरती के मुँह से गालियां सुनने में मज़ा आ रहा था और उसने धीरे धीरे अपनी रफ़्तार तेज़ करनी शुरू करि - अब तोह आपका hi तेल निकलूंगा...

आरती उसके आगे बिलकुल कमज़ोर पद गयी थी, और जैसे hi जय ने उसकी गांड में धक्के लगाने शुरू करे, उसकी ज़ोर ज़ोर की सिसकियाँ निकलने लगी.

आरती - ुह्ह्ह्हह्ह्णण.... मार दिया.... आअह्ह्ह्ह...

जय ने आरती के हाथों को छोड़ दिया और उसके बाल पकड़ते हुए पूरे डैम से उसकी गांड को छोड़ने लगा. आरती के हाथ तोह आज़ाद हो गए थे, पर अब उसे गांड में लुंड के घिसने से एक अलग सा hi मजा आ रहा था, जैसे उसने आज पहली बार सेक्स किया हो.

आरती आँखें बंद करके सिसकियाँ लेती रही - उन्न्नन... मममम.... हाँ.... उफ़....... आआअह्ह...

जय अपना लुंड अंदर बहार करता रहा और आरती की कमर और गांड भी अब आगे पीछे होने लग गयी थी. कुछ मिनट में उसने एक बार फिर आरती के अंदर विस्फोट कर दिया, इस बार उसकी गांड में अपना माल निकलते हुए. आरती हर जगह से बुरी तरह जय के सफ़ेद चिप चिप पानी से ढकी हुई थी.

जय ने कुछ सेकंड का ब्रेक लेते हुए आरती की गांड से अपना लुंड बहार निकाला - मज़ा आया न आरती जी.... सालो का एक्सपीरियंस आज काम आया... वैसे आप भी काम नहीं है... मुझे भी पूरा थका दिया...

आरती अपनी गांड को मसल रही थी, और तेज़ तेज़ सांसें ले रही थी, उसकी गांड में पहली बार लेने से बहुत बुरी तरह दर्द हो रहा था - ममममम.... आह्ह्ह्ह.....

जय - ज्यादा दर्द हो रहा है क्या... कोई नहीं पहली बार का दर्द था... अब तोह आपका मैं करेगा बार बार वहां करवाने का... भैया से न हो तोह मुझे बुला लेना...

आरती अपनी गांड को पकडे हुए दर्द से करहा रही थी.

जय - आज आपकी बारी थी.... कल सुप्रिया की बारी होगी... आपको लगता है वह ये सब सेह पाएगी...

जैसे hi जय ने सुप्रिया का नाम लिया, आरती एकदम से होश से में आयी, जैसे उसने रीलीज़ किया हो की वह यहाँ आयी क्यों थी.

आरती - जय.... तुम्हे मैंने कहा था न... सुप्रिया को भूल जायो...

जय हस्ते हुए बोलै - उसे कैसे भूल सकता हूँ... उसी के चक्कर में तोह ये सब हुआ है... माना आप कमल हो... पर अभी उसका रास भी मुझे चखना है...

आरती अपना दर्द भूते हुए एकदम एकदम से बीएड से कड़ी हुई और अपना फ़ोन उठाते हुए उसने जय की नंगी फोटो खींचनी शुरू कर दी - मैं सुप्रिया को सब बता दूंगी... ये साड़ी फोटो दिखा दूंगी... फिर वह तुम्हारा असली रूप जान जाएगी...

जय को यकीं नहीं हो रहा था की आरती अभी भी एहि मान रही थी की वह और सुप्रिया लवर्स थे. पर वह कौन था आरती के इस ब्रह्म को दूर करने वाला - जैसा आप चाहे... दिखा देना उन्हें ये फोटोज...

जय ने पोज़ बनाते हुए अपना लुंड ठीक सामने कर दिया ताकि आरती और अचे से फोटो खींच पाए - पर अभी तोह वापस बीएड पर आइये न....

आरती का सर बुरी तरह झन्ना रहा था, उसे ऐसा लग रहा था जैसे वह अभी किसी बुरी सपने से जाएगी हो. उसने जय को देखा और फिर अपनी हालत को, उसे यकीं hi नहीं हो रहा था की वह इतनी देर से जय के साथ बिना किसी शर्म के ये सब कर रही थी.

आरती को टेबल पर रखे जूस के गिलास दिखाई दिए - तुमने कुछ मिलाया था न जूस में.... जिससे मैं बहक गयी...

जय - ारी... ये तोह गलत बात है... सब कुछ हो जाने के बाद आप मुझे बदनाम कर रही है... आप ने hi तोह साड़ी शुरुवात की थी...

आरती के गाल बुरी तरह लाल हो गए - नहीं... वह तोह मैं बस तुम्हे आज़मा रही थी...

जय - तोह फिर कैसा लगा मैं आज़मा के... जॉब पक्की है मेरी?

आरती - अह्ह्ह... पता नहीं कोई आदमी चार चार बार झाड़ कर कैसे अपना लुंड खड़ा रख सकता है... तुमने भी कुछ लिया था न...

जय मुस्कुरा के बोलै - पांचवी बार करना है तोह बताइये... मैं तोह उसके लिए भी तैयार हूँ... सच में भैया है बहुत लकी.... एक तरफ पलंग तोड़ बीवी और दूसरी तरफ जवान सेक्सी बेहेन...

आरती ने दर्द के मारे सही से चला भी नहीं जा रहा था, पर उसने दर्द में कमरे में फैले अपने कपडे ढूंढ़ने शुरू कर दिए थे, और वह जय की बातों पर फोकस नहीं कर रही थी - मैं जा रही हूँ... और मुझे अब रोकने की कोशिश की न तोह ाचा नहीं होगा...

जय मुस्कुरा के बोलै - आप फिर मुझे गलत समझ रही है... आप आयी अपनी मर्ज़ी से थी... और जा भी अपनी मर्ज़ी से सकती है...

आरती दर्द से कराहती हुई फिर से बीएड पर लेट गयी. उसने अभी अपने कपडे पूरी तरह नहीं पहने थे और उसे बहुत दर्द हो रहा था. पर मैं के एक दबे हुए कोने में शायद वह चाहती थी की जय उसके साथ कुछ और करे.

जय ने उसकी गोरी नंगी पीठ पर उसके लम्बे बाल फैले हुए देखे और वह खुद को उसकी पीठ को अपने हाथों से मसलने से नहीं रोक पाया.

123.jpg


___________________________________________________

दूसरी और बहार इक़बाल खड़ा आरती का इंतज़ार कर रहा था. आरती को अंदर गए हुए 2 घंटे हो चुके थे और इक़बाल इतनी देर से होटल पर नज़र बनाये रखा था. वहां बहुत सारे आदमी और औरत आ रहे थे, पर उन्हें देख कर इक़बाल को वहां का माहौल कुछ ठीक नहीं लग रहा था. काफी देर परेशान खड़े रहने के बाद, वह थोड़ा घबराते हुए होटल के अंदर घुसा और फ्रंट डेस्क पर खड़े आदमी से पुछा.

इक़बाल - यहाँ... 1-2 घंटे पहले एक मैडमजी आयी थी किसी से मिलने... आपने देखा क्या...

आदमी हस्ते हुए बोलै - यहाँ तोह बहुत साड़ी मैडमजी आती है... तुम कौनसी वाली की बात कर रहे हो...

इक़बाल - नहीं... वह यहाँ किसी दोस्त से मिलने आयी थी... साड़ी पहने हुई थी उन्होंने...

आदमी आँख मारते हुए बोलै - सब दोस्त से hi मिलने आती है यहाँ... पति से मिलने कौन आएगा... तुम कौन हो उसके? कहीं पति तोह नहीं हो?

इक़बाल - नहीं मैं तोह उन्हें यहाँ लेकर आया था...

आदमी - ाचा ड्राइवर है... परेशान क्यों होता है... आ जाएँगी जब खेल ख़तम हो जायेगा...

इक़बाल - मतलब?

आदमी ने थोड़ी धीमी आवाज़ में कहा - नया है क्या? तेरी मैडमजी छुड़वा रही होंगी किसी रूम में अपने आशिक़ से... आ जाएँगी...

इक़बाल गुस्सा होते हुए बोलै - क्या बकवास कर रहा है...

आदमी - तमीज में रह कर बात कर ले... गलत काम तुम्हारी मैडम करे... और गुस्सा तुम हम पर हो...

इक़बाल - मुझे जल्दी से बता वह किस रूम में होंगी...

आदमी को भी गुस्सा आ गया - चल बहार निकल यहाँ से... जब आएँगी तेरी मैडम तब पूछ लियो उनसे की किसके साथ ऐश कर रही थी...

होटल के गार्ड्स के इक़बाल को धक्का देते हो बहार किया. इक़बाल परेशान होता हुआ बहार निकला और उसने तुरंत सुप्रिया को कॉल लगाया. उसके पास तोह आरती का फ़ोन नंबर hi नहीं था जो वह उन्हें कॉल करता.

सुप्रिया ने इक़बाल का फ़ोन आते देख जल्दी से उठाया - क्या हुआ इक़बाल, सब ठीक?

इक़बाल - मैडमजी... आपकी भाभी को लेकर आया था यहाँ... कुछ ठीक नहीं लग रहा मुझे यहाँ....

सुप्रिया - मतलब? हो कहाँ तुम? भाभी तोह अपनी दोस्त से मिलने जा रही थी न...

इक़बाल - जी. वहीँ लेकर आया था... पर ये होटल कुछ गलत सा लग रहा है... आप कॉल करो उन्हें एक बार... वह ठीक तोह है न...

सुप्रिया ने झट से इक़बाल का कॉल कट किया और आरती को फ़ोन लगाया. आरती का फ़ोन साइलेंट पर था और उसके कपड़ो के बीच में कहीं दबा हुआ था तोह उसे पता hi नहीं चला. सुप्रिया ने 2-3 बार तरय किया, और उसके चेहरे पर परेशानी बढ़ती जा रही थी.

सुप्रिया ने फिर से इक़बाल को कॉल लगाया - इक़बाल... तुम मुझे एड्रेस भेजो... मैं आ रही हूँ वहां...

इक़बाल - नहीं मैडमजी आप क्यों आएँगी यहाँ...

सुप्रिया - जल्दी से मुझे एड्रेस भेजो... बहस का टाइम नहीं है...

सुप्रिया जल्दी से ऑफिस से निकली, उसे कुछ सूझ नहीं रहा था की क्या हुआ होगा. अगर वहां कुछ गड़बड़ हुई थी, क्या वह अतुल को भी फ़ोन करके बुला ले. नहीं अगर सच में कुछ गड़बड़ हुई तोह अतुल शायद कुछ न कर पाए.

सुप्रिया ने विक्रम को कॉल लगाया, और हड़बड़ाते हुए बोली - विक्रम... आप फ्री है क्या...

विक्रम - सुप्रिया... क्या हुआ... तुम काफी परेशान साउंड कर रही हो...

सुप्रिया - मेरी भाभी... वह किसी से मिलने गयी थी... पर वहां शायद कुछ गड़बड़ हो गयी है...

विक्रम - कैसी गड़बड़...

सुप्रिया - पता नहीं मुझे... बस काफी डर लग रहा है... आप आ सकते है क्या...

विक्रम अपने ऑफिस में था और आज का दिन उसके लिए काफी बिजी था, पर सुप्रिया के लिए तोह वह कुछ भी कर सकता था - मैं पहुँचता हूँ वहां... तुम मुझे एड्रेस भेजो...

सुप्रिया ने विक्रम को एड्रेस भेजा, और जैसे hi विक्रम ने वह एड्रेस देखा वह अपनी सीट से उठ खड़ा हुआ. इस होटल में वह जय के साथ कई बार जा चूका था. उसे ये जगह काफी गन्दी सी लगती थी, पर जय को यहाँ लड़कियों को छोड़ने में बहुत मज़ा आता था. क्या ये बस इत्तेफाक था की सुप्रिया इसी जगह पर जा रही थी.

विक्रम ने तुरंत जय को कॉल लगाया पर जय भी अपना फ़ोन नहीं उठा रहा था. जरूर कुछ तोह गड़बड़ थी. विक्रम तुरंत hi अपने ऑफिस से निकला और होटल संतूर की तरफ जल्दी से ड्राइव करते हुए पंहुचा. अगर सुप्रिया अपने ऑफिस से वहां जा रही थी, तोह शायद वह ज्यादा नज़दीक था उस जगह के.

विक्रम वहां जल्द hi पहुंच गया और उसने वहां बहार इक़बाल को खड़े देखा. वह उससे बस एक बार पहले मिला था, पर उसने उसे पहचान लिया.

विक्रम - इक़बाल... क्या हुआ....

इक़बाल शायद विक्रम को नहीं पहचान पाया था - सिरजी... आप...

विक्रम - मैं सुप्रिया का फ्रेंड... उसने मुझे यहाँ बुलाया है... क्या मामला है...

इक़बाल - जी वह सुप्रिया की भाभी अंदर गयी थी होटल के... दोस्त से मिलने... पर ये लोग कह रहे है की.... और मुझे भी बहार निकाल दिया...

विक्रम - तुम आयो मेरे साथ....

विक्रम जल्दी से होटल के अंदर घुसा, और इक़बाल उसके ठीक पीछे. इक़बाल को देखते hi गार्ड फिर से उसे धक्का देने को हुए पर इस बार इक़बाल ने दोनों गार्ड्स को एक एक मुक्का मार कर गिरा दिया.

रिसेप्शन पर खड़ा आदम ज़ोर के चिल्लाया - ये क्या कर रहा है...

पर विक्रम ने उसे हाथ दिखा कर रोका - सुनो. जय है क्या यहाँ?

आदमी विक्रम को देख कर एकदम से रुका - सर आप....

विक्रम ने एक कड़क आवाज़ में उससे कहा - मैंने कुछ पुछा न तुमसे...

आदमी अटकते हुए बोलै - सर.... हाँ ... रूम 405...

विक्रम - उनके साथ कौन है...

आदमी - कोई लेडीज थी... साड़ी पहने हुए... पहले नहीं देखा उन्हें यहाँ...

इक़बाल एकदम से बोलै - यही तोह पुछा था तुझसे पहले.... जरूर वह सुप्रिया की भाभी होंगी...

विक्रम जल्दी से रूम की तरफ चल दिया और इक़बाल उसके ठीक पीछे पीछे. विक्रम ने इक़बाल की तरफ पलट कर देखा, उसने अपनी मुट्ठी कास के बाँध राखी थी और उसके चेहरे पर एक अलग hi गुस्सा था. विक्रम इक़बाल को इतने गुस्से में देख कर बोलै - इक़बाल सुनो... मुझे ये हैंडल करने दो... तुम यहीं रुको...

इक़बाल - पर सिरजी...

विक्रम - मुझे हैंडल करने दो ये... सब ठीक होगा...

इक़बाल के फ़ोन पर तभी सुप्रिया का कॉल आने लगा - मैडमजी....

सुप्रिया - कहाँ हो इक़बाल.... मैं यहाँ पहुंच गयी...

इक़बाल - मैं आता हूँ आपको लेने... यहाँ ऊपर है... रूम 405 की तरफ जा रहे है..

विक्रम जल्दी से रूम की तरफ बड़ा और इक़बाल नीचे सुप्रिया को लेने. विक्रम ने रूम के बहार पहुंच कर ज़ोर के खटखआया. कुछ देर दरवाज़ा नहीं खुला तोह एक बार फिर.

अंदर से जय की आवाज़ है - कौन है बे साला... बहार दो नॉट डिस्टर्ब का बोर्ड लगा है न...

जय ने एक तौलिया लपेटे हुए दरवाज़ा खोला और विक्रम को वहां देख कर वह चौंक गया - दोस्त! तुम यहाँ? इतनी दूर बैठे भी तुमने यहाँ की खुसबू सूंघ ली...

विक्रम - जय तू यहाँ क्या कर रहा है... तेरे साथ अंदर कौन है?

जय - आयो... तुम भी देखो...

विक्रम कमरे के अंदर आया और उसने देखा अंदर एक जवान औरत जल्दी जल्दी अपने कपडे पेहेन रही थी. उसके चेहरे पर डर साफ़ था. विक्रम ने अपनी आखें आरती से हटा ली और कहा - आप सुप्रिया की भाभी हैं?

आरती इस तरह किसी और अनजान आदमी को कमरे में देख कर बुरी तरह काँप रही थी. और ये आदमी सुप्रिया को भी जानता था, उफ्फ्फ पता नहीं वह कहाँ फास गयी थी. आरती ने हलके से अपना सर हिलाया.

विक्रम ने एकदम से जय को दीवार की तरफ धकेला और उस पर ज़ोर से चिल्लाया - तुझे पता है तू ये क्या कर रहा है... ये सुप्रिया की भाभी हैं...

जय हस्ते हुए बोलै - तोह? क्या हुआ... तूने बोलै था न सुप्रिया से दूर रहने के लिए... उनकी भाभी के बारे में तोह कुछ नहीं कहा था न...

विक्रम ने जय को एक ज़ोर का घुसा मारा उसके पेट पर - हरामीपन की हद्द होती है जय...

जय वापस नहीं लड़ रहा था - तू भी ले ले मज़े... किसने रोका है... मैंने कोई जबरदस्ती नहीं की... इनको भी बहुत मज़ा आया था...

विक्रम ने जय को एक मार कर ज़मीन पर नीचे गिरा दिया. आरती कमरे के एक कोने में कड़ी ज़मीन की और देखने के इलावा कुछ नहीं कर पा रही थी...

जय - अह्ह्ह... अब ये सब करना भी गलत है तेरे लिए... तूने जो किया उसी को वजह से मुझे ये सब करना पड़ा...

विक्रम - मैंने क्या किया?!!!

जय - इतना सालो की दोस्ती के बाद भी तूने एक लड़की की लिए मुझसे झूठ बोलै... जबकि तू उसके साथ सो रहा था...

विक्रम - मैं सुप्रिया से प्यार करता हूँ समझा... और उसकी फॅमिली मेरी फॅमिली जैसी है... तुझे ये सब करने से पहले दर बार सोच लेना चाहिए था.

विक्रम के नीचे गिरे हुए जय को किक किया. इस बीच सुप्रिया और इक़बाल भी बहार आ गए थे और सुप्रिया जल्दी से रूम में घुसती आरती के गले लगी.

सुप्रिया - भाभी!!! आप ठीक तोह है न....

सुप्रिया को वहां देख कर आरती बुरी तरह चौंक गयी और उसने भी सुप्रिया को गले लगा लिया. आरती की आँखों से आंसू बहने लगे थे.

विक्रम - सुप्रिया... तुम भाभी को लेकर जायो... मैं यहाँ सब सॉर्ट आउट कर लूंगा...

सुप्रिया रूम में सिचुएशन को समझने की कोशिश कर रही थी. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, जय वहां क्या कर रहा था? उसके और भाभी के बीच क्या हुआ था? और विक्रम जय को क्यों मार रहा था?

विक्रम ने सुप्रिया को फिर से बोलै - सुप्रिया... जायो तुम यहाँ से...

पर बीच में जय बोल पड़ा - सुप्रिया जी... जाने से पहले सब सच तोह जान कर जाइये...

सुप्रिया - कौनसा सच?

जय - विक्रम का सच... और क्या...

विक्रम ने जय को एक और मारा और सुप्रिया की और घूर कर देखा - सुप्रिया... मैंने कहा न तुम जायो यहाँ से भाभी को लेकर...

सुप्रिया जय की बात सुने बिना नहीं जाना चाहती थी - विक्रम... नहीं... उसे बोलने दो....

जय को विक्रम की लात घुसो से दर्द हो रहा था पर अभी उसे सुप्रिया को सब सच बताना था - पूछो अपने विक्रम से.... कितनी लड़कियों के साथ हमने ये सब किया है इस होटल में... और सिर्फ इस होटल में नहीं, और पता नहीं कहाँ कहाँ....

विक्रम - सुप्रिया तुम इसकी बातों पर ध्यान मत दो...

जय - पूछ के तोह देखो....

सुप्रिया ने विक्रम की और देखा, जैसे उससे पूछ रही हो की क्या ये सच है. विक्रम ने कोई जवाब नहीं दिया.

जय के चेहरे पर अभी भी थोड़ी सी मुस्कान थी - और ये भी तोह पूछो की इसका आपके लिए क्या प्लान था. कैसे इसने आपको धीरे धीरे सेट किया...

सुप्रिया के पैरो टेल ज़मीन खिसक गयी थी, उसे यकीं hi नहीं हो रहा था की जय ये सब क्या बोल रहा था विक्रम के बारे में.

सुप्रिया के मुँह से हलके से निकला - विक्रम....

विक्रम - सुप्रिया... सुनो... ी कैन एक्सप्लेन....

जय - सुप्रिया जी... और भी बहुत कुछ है बताने के लिए... आज जो हुआ उसके बारे में भी... और फिर आपकी भी तोह कुछ कहानियां है बताने के लिए...

सुप्रिया के हाथ पेअर बिलकुल जाम पद गए थे. आरती ने सुप्रिया का हाथ पकड़ते हुए खींचा - सुप्रिया... चलो... हमे यहाँ से जल्दी से निकल जाना चाहिए...

आरती सुप्रिया को कमरे से बहार खींचती हुई ले गयी, और इक़बाल उन दोनों के साथ वहां से निकल गया. विक्रम कुछ पल के लिए होटल के रूम में खड़ा रह गया था, जब वह ऑफिस से निकला था, उसे अंदाज़ा भी नहीं था की यहाँ कुछ ऐसा हो जायेगा. जय सरक कर बीएड पर आ गया था और मुस्कुराता हुआ विक्रम की और देख रहा था.
 
थैंक यू एवरीवन फॉर थे फीडबैक एंड कमैंट्स. काफी एनर्जी मिलती है कमैंट्स पद के स्टोरी जारी रखने में.

मैं एक्सपेक्टेशंस क्लियर करने के लिए बता देती हूँ - नेक्स्ट अपडेट में कोई सेक्स सन नहीं है, क्यूंकि मुझे इस अपडेट के फर्स्ट हाफ में जो हुआ उसके कोंसेकेंस और डिस्कशन लिखने में लग गया और उसके बाद आगे की स्टोरी सेटअप करने के लिए कुछ सीन्स लिखने पड़े. ये आगे के काफी एक्ससिटिंग उपदटेस को सेटअप करेगा, सो प्लीज दो बे पेशेंट.

ी कैन वेट एंड तरय तो पोस्ट 2 उपदटेस टुगेदर ताकि लोगो को ऐसा न लगे की बस स्टोरी स्टोरी लिख दी और कुछ मज़ा नहीं आया.
 
अपडेट 70

घर के पूरे रास्ते में सुप्रिया और आरती चुप थे. आरती जो पिछले 4-5 दिनों से सुप्रिया को non-stop नसीहत दिए जा रही थी, उसका मुँह तोह बिलकुल बंद सा हो गया था. वह किस मुँह से सुप्रिया से कुछ कहती या समझती.

दूसरी तरफ सुप्रिया तोह एक डैम सुन्न सी पड़ गयी थी. जय ने जो कुछ कहा विक्रम के बारे में उससे उसके हाथ अभी तक बुरी तरह काँप रहे थे. उसे इस सब में शायद ये भी होश नहीं रहा था की वह आरती से पूछ ले की वहां उसके और जय के बीच क्या हुआ था. बस वह आगे की सीट पर बैठी गहरी सोच में डूबी हुई थी. वह इस सब के बाद अपने बराबर में बैठे इक़बाल से भी नज़रे नहीं मिला पा रही थी.

पर इक़बाल तोह गाडी चलते हुए बस उन्हें सही सलामत घर पहुंचना चाहता था. उसने शायद कमरे की पूरी बात नहीं सुनी थी पर उसे भी अंदाज़ा था की मामला बहुत hi सीरियस था. होटल से बहार निकलने के बाद उसने सुप्रिया से बहुत ज़िद्द करने के बाद सुप्रिया को मन hi लिया था की वह अपनी गाडी वहीँ छोड़ कर पहले सुप्रिया की गाडी में उन दोनों को घर छोड़ देगा.

जैसे hi गाडी उनके बिल्डिंग में रुकी, सुप्रिया का ध्यान भांग हुआ.

इक़बाल - मैडमजी... ये लीजिये... आपकी गाडी की चाबी...

सुप्रिया का मुँह उतरा हुआ था - हँ... हाँ... थैंक यू इक़बाल....

इक़बाल - मैं कुछ मदद कर सकता हूँ आपकी?

सुप्रिया - नहीं नहीं... आपने काफी हेल्प कर दी आज... आप नहीं होते तोह शायद मैं घर भी नहीं पहुंच पाती आज...

इक़बाल - ऐसा मत बोलिये... कुछ भी काम हो या कोई भी दिक्कत हो... आप बस मुझे फ़ोन कर देना... मैं किसी भी टाइम हाज़िर हो जायूँगा...

सुप्रिया - बिलकुल... भाभी... चले ऊपर...

आरती गाडी से धीरे से उत्तरी. उसकी गांड अभी भी बुरी तरह दर्द कर रही थी, इतना दर्द तोह शायद उसे पहली बार सेक्स करने पर भी नहीं हुआ था. उससे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था, पर वह सुप्रिया के सामने और खासकर इक़बाल के सामने अपने आप को कमज़ोर नहीं दिखाना चाहती थी.

आरती - हाँ... चलो....

आरती और सुप्रिया लिफ्ट से ऊपर आ गए और घर में घुसते hi आरती अपने कमरे के बाथरूम में घुस गयी. उसे अपने शरीर पर से जय के विरए की बदबू को हटाना था. जय का माल उसके शरीर के कई हिस्सों पर सूख कर कड़क हो चूका था, और उसे बहुत hi गन्दा सा महसूस हो रहा था.

सुप्रिया भी दुसरे कमरे में दूर बंद करके बैठ गयी और हलके हलके सुबकने लगी. इतनी देर से उसने इक़बाल और भाभी के सामने अपने आंसू रोके हुए थे, पर अब उससे और नहीं रुका जा रहा था. जय ने जो कुछ कहा, विक्रम ने उसे एक बार भी सही से नहीं झुटलाया. ऐसा नहीं था की वह पूरी तरह अनजान थी की विक्रम ने उससे पहले और लड़कियों के साथ सेक्स किया होगा, पर जय के मुँह से ये सब सुन्ना कितना गन्दा सा लगा था.

विक्रम पर भरोसा कर के कितना बड़ा डिसिशन लिया था उसने अपनी जिंदगी में. विक्रम को न सिर्फ उसने अपना तन दिया था पर अपना पूरा मैं भी. वह उसके लिए क्या कुछ नहीं कर बैठी थी, क्या विक्रम को इसका अंदाज़ा भी था? और वह क्या थी विक्रम की लिए, बस अपने दोस्तों में बाटने की कोई चीज़? और वह न मिली तोह उसके दोस्त ने उसकी भाभी के साथ hi वह सब कर डाला....

सुप्रिया को भाभी के सामने जाने में शर्म भी आ रही थी और साथ hi गुस्सा भी. पता नहीं वह यहाँ आयी hi क्यों थी. न वह आती और न hi शायद ये बवाल होता. पर अगर अब नहीं होता तोह शायद उसकी आँखें कभी न खुलती. काफी देर तक सुप्रिया बीएड पर बैठे रोटी इसी सब के बारे में सोचती रही.

जब उसके आंसू थोड़े से थामे उसे भाबी के बारे में होश आया. पता नहीं वह किस हाल में थी, सुप्रिया को तोह ठीक से पता भी नहीं था की उनके साथ हुआ क्या था. उसने सोचा की शायद उसे अतुल के घर वापस आने से पहले भाभी के पास जाकर बात करनी चाहिए. उसने बस ये सोचा hi था की उसके दरवाज़े पर एक हलकी सी दस्तक हुई और भाभी नाहा कर दुसरे कपड़ो में तैयार हो कर उसके कमरे में दाखिल हुई.

आरती की शकल देख कर लग रहा था की शायद वह अब तक अपने आप को संभल चुकी थी, पर उसे पता था की सुप्रिया ऐसा नहीं कर पायी होगी. आरती ने अंदर आ कर दरवाज़ा बंद कर दिया और सुप्रिया को घूरा. सुप्रिया तोह उनकी सीरियस शकल देख कर hi घबरा सी गयी थी.

3099b74cb8d6e477d0da85a1c0fbbf35.jpg


सुप्रिया ने जल्दी से अपनी आँखों से आंसू पोछे और उठ कड़ी हुई, उनसे गले लगने के लिए - भाभी आप ठीक हो न.... मैं बस आ hi रही थी वहां...

आरती ने अपना हाथ आगे करके सुप्रिया को अपनी और आने से रोके. आज उनकी आवाज़ में ज़रा सी भी मिठास नहीं थी - सुप्रिया... बैठ जायो...

आरती ने सुप्रिया के पास आते हुए उसके कंधे पर हाथ रखते हुए उसे वापस बीएड पर बिठा दिया. वह खुद भी उसके बराबर में बैठ गयी - काफी देर हो गयी थी तुम्हे कमरे में... तोह मैंने सोचा की देख लू सब ठीक है न....

सुप्रिया अपने से ज्यादा आरती के लिए परेशां थी अब - वह तोह मुझे आपसे पूछना चाहिए... पता नहीं वहां क्या हुआ आपके साथ...

आरती - देखो... जो सब हुआ... हमे उसके बारे में बात कर लेनी चाहिए... नहीं तोह पता नहीं हमारे अंदर का गुब्बारा कब किसके सामने फुट जाये... ये तोह न तुम चाहोगी न मैं...

सुप्रिया आरती के इस ठन्डे से व्यहवार से काँप सी रही थी. सुप्रिया ने आरती की और देखा, शायद उसके अंदर तोह इस सब के बारे में बात करने की हिम्मत भी नहीं होती, पर भाभी यहाँ खुद hi पहल कर रही थी.

आरती - मुझे तुम सब बतायोगी यहाँ सब क्या हुआ है... या मैं अतुल को सब सच बता दू?

सुप्रिया को यकीं सा नहीं हो रहा था की भाभी उसके साथ ऐसे भी बात कर सकती है. वह भी थोड़ा गुस्सा होते हुए बोली - ठीक है... पर पहले आप बताइये... आप वहां क्या कर रही थी... नहीं तोह मैं भी भैया को सब बता सकती हूँ...

आरती को नहीं लगा था की सुप्रिया में इतनी हिम्मत होगी की वह उसे इस तरह से धमकी देगी. उसने गहरी सांस ली - ठीक है, वहां जो कुछ हुआ उसके बारे में हम आज के बाद बात भी नहीं करेंगे... मैं बात घुमा फिर कर नहीं कहूँगी... और शायद मुझे पहले hi खुल के बोल देना चाहिए था...

आरती - पिछले 4-5 दिनों से तुम्हारे हाव भाव देख कर मैं ये तोह समझ गयी थी की कुछ तोह गड़बड़ है... और कल की तुम्हारी बातों से तोह ये और भी स्पष्ट हो गया था की तुम्हारे किसी के साथ चक्कर चल रहा है...

आरती की अलग सी टोन सुप्रिया को छुब्ध सी रही थी. भाभी ने कभी उससे इस तरह से बात नहीं की थी - भाभी... ऐसा कुछ....

आरती ने उसकी बात काट दी - कुछ भी सफाई देने से पहले मेरी पूरी बात सुन लो... फिर उस दिन जय से मॉल में मिलकर मुझे लगा की तुम दोनों के बीच.... शायद यहीं मैं थोड़ा सा धोका खा गयी... मुझे लगा मैं उस से मिल कर सब कुछ ठीक कर पयूंगी... और तुम्हारी जिंदगी फिर से पटरी पर ले आयो... पर लगता है मैं खुद hi वहां पटरी से नीचे उतर गयी...

सुप्रिया को थोड़ी शर्मिंदगी सी महसूस हो रही थी की उसकी वजह से भाभी जय से मिलने गयी थी, पर उसने फिर भी गलती आरती पर डालते हुए कहा - अगर आपके मैं में कोई सवाल था, तोह आप मुझसे खुल कर बात कर सकते थे न... बिना मुझ पर शक करे हुए...

आरती भड़कते हुए बोली - मैंने कोशिश की थी सुप्रिया... और मैं काफी हद्द तक सही भी थी... जय की बुरी नज़र थी तुम पर... वह तोह ाचा हुआ तुम उससे बच गयी... पर मैं नहीं... मैं तोह उसे वहां आजमाने गयी थी, पर उसी ने मुझे...

सुप्रिया - भाभी... आपके और जय के बीच क्या हुआ था वहां....

आरती ने अपनी आँखें फेर ली - वह सब मत पूछो मुझसे... मैं नहीं बता पयूंगी... पर तुम नासमझ नहीं हो... तुम्हारे आशिक़ ने तोह...

सुप्रिया - वह मेरा आशिक़ नहीं है!! मेरे और जय के बीच में ऐसा कुछ नहीं है!!!

आरती - हाँ... वह तोह मैं अब समझ hi चुकी हूँ... वह दूसरा आदमी वहां... क्या नाम था उसका... उसके साथ तोह है न... (आरती ने सुप्रिया को गुस्से में अकड़ते देख अपनी टोन थोड़ी हलकी करि) मैं तुम्हे जज नहीं कर रही हूँ... बस ये चाहती हूँ तुम मुझे खुल कर सब बताया...

शायद भाभी का गुस्सा hi बेहतर था उनके शांत व्यव्हार से. सुप्रिया बिलखते हुए बोली - भाभी.... मैं... कैसे समझायु.... मैंने कुछ... जान बूझ कर नहीं किया...

आरती - सुप्रिया मैं समझती हूँ... जवानी में अक्सर भूल हो जाती है... और खासकर अगर एक लड़की को किसी और मर्द में वह दिखे जो उसे अपनी पति में चाहिए होता है... पर तुम जिन लोगो के चक्कर में पड़ी हो, वह मुझे बहुत hi खतरनाक लगे...

सुप्रिया - मैं जय को तोह अछि तरह जानती भी नहीं... पर विक्रम ऐसे नहीं है... वह और मैं एक दुसरे से प्यार...

आरती सुप्रिया के मुँह से अभी भी ये सब सुन कर हैरान हो रही थी पर उसने जताया नहीं - विक्रम... वह दूसरा आदमी वहां... सुप्रिया... मुझे खुल कर साड़ी बात बताया... मुझ पर विश्वास करो... मैं तुम्हारा गलत नहीं चाहूंगी...

सुप्रिया ने अपनी आँखें नीचे करि, उसने कभी सोचा नहीं था की उसे किसी को ये सब बताना पड़ेगा. शायद कुछ सोचा hi नहीं था ये सब करने से पहले, तभी तोह आज वह इस हालत में थी - ठीक है, मैं आपको सब बताती हूँ...

सुप्रिया ने धीरे धीरे आरती को विक्रम के बारे में बताना शुरू किया की कैसे वह विक्रम से मिली, कैसे उसे विक्रम से प्यार हुआ, और कैसे वह इतनी नज़दीक आ गए. उसे कई चीज़े बताने में शर्म भी आ रही थी पर आरती उसे बिना रोके तोके उसकी साड़ी बात सुन रही थी. सुप्रिया बोलते बोलते मीठी यादों में इतना खो गयी थी की वह अभी भी अपने आप को विक्रम की तारीफ करने से नहीं रोक पा रही थी. आरती ने अपने चेहरे के एक्सप्रेशन को न्यूट्रल रखने की कोशिश करि ताकि सुप्रिया बोलने से घबराये नहीं.

साड़ी कहानी पूरी हो जाने पर दोनों थोड़ी देर छुप बैठे रहे. सुप्रिया शुरू में जितना शर्मसार महसूस कर रही थी, सब बोलने के बाद उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके सर से कोई भारी बोझ उतर गया हो.

आरती ने सुप्रिया की और देखा, वह उसे पहले hi बहुत दांत चुकी थी, और वह इस नासमझ लड़की को वह और क्या hi बोलती. ये लड़की तोह अभी भी पागलो की तरह विक्रम से hi प्यार करती थी, और उसके दिमाग में अतुल तोह शायद कहीं दूर दूर तक नहीं था.

आखिर आरती से रुका नहीं गया- अब तुम क्या चाहती हो... उस जय ने तोह विक्रम के बारे में क्या क्या नहीं कहा था वहां... और इस सब में अतुल का क्या? तुम उसके साथ नहीं रहना चाहती तोह उसे डाइवोर्स hi दे दो... उस बेचारे को इस सब में क्यों लटका रखा है... उसे तोह ज़रा सा अंदाज़ा भी नहीं इस सब के बारे में...

सुप्रिया ने एकदम से आरती की और देखा. भाभी ऐसे कैसे बोल सकती थी की वह अतुल को डाइवोर्स दे दे. उसने तोह आज तक इस बारे में सोचा भी नहीं था - भाभी... डाइवोर्स???

आरती - हाँ, और क्या... अभी तोह तुमने मुझे बताया की कैसे तुम और अतुल एक साथ खुश नहीं हो और तुम लोगो के बीच अब कुछ भी नहीं है... और शायद वह भी ये बात जानता है... तभी तोह उसने मुझे फ़ोन किया था...

सुप्रिया एकदम से चौंकी - अतुल ने आपको फ़ोन किया था???

आरती - हाँ... उसने मुझे लगभग एक महीने पहले कॉल किया था और सब बताया था की कैसे तुम लोगो के बीच कुछ भी ठीक नहीं है... वह मेरी मदद चाहता था... पहले तोह मुझे लगा की इतनी बड़ी बात नहीं होगी... पर यहाँ आकर जो मैंने देखा उसके बाद तोह... मैं तोह तुम्हारा घर बचने आयी थी, और पता चला की मेरा hi घर...

सुप्रिया - आप ऐसा क्यों कह रही है...

आरती - चलो वह छोडो... तुम्हे अंदाज़ा भी है की मर्द तुम जैसी हसीं शादी शुदा लड़कियों पर टाक लगाए बैठे होते है... की कब उन्हें कोई मौका मिले...

सुप्रिया अभी भी विक्रम के बारे में hi सोच रही थी - विक्रम ऐसे नहीं है... जरूर जय सब झूठ बोल रहा होगा...

आरती तुनक कर बोली - तोह फिर उसे बोलो न की वह अपनी बीवी को छोड़ कर तुमसे शादी कर ले... ताकि इतने सारे लोगो का घर बर्बाद न हो... अतुल भी फिर किसी और के साथ घर बसा सकता है न...

सुप्रिया - अतुल ने ऐसा कहा क्या? वह किसी और के साथ...

आरती - क्यों? अगर तुम ये सब कर सकती हो तोह उसे ये हक़ नहीं है क्या?

सुप्रिया इस बात को मान hi नहीं पा रही थी की अतुल उसे छोड़ कर किसी और का साथ पा सकता था. ऐसा लग रहा था जैसे एक hi दिन में उसने सब कुछ खो दिया हो.

सुप्रिया को परेशान देख कर आरती ने कहा - तुम्हे भी पता है विक्रम ऐसा कुछ नहीं करेगा... इसीलिए मैं जबसे यहाँ आयी थी तुम्हारे और अतुल के बीच सब कुछ ठीक करने की कोशिश कर रही थी... अतुल अभी भी हाथ से नहीं निकला है... पर तुम्हारे बर्ताव से उसे भी किसी और की तरफ खींचने में ज्यादा देर नहीं लगेगी...

सुप्रिया ने बीते हुए दिन याद किये, क्या अतुल सच में किसी और से प्यार करने लगा था? उस रात भी वह सुप्रिया को बिस्तर पर अकेला छोड़ कर कमरे से बहार चला गया था. और उससे पहले भी सुप्रिया को ऐसा लगा लगा था जैसे अतुल उसे कुछ बताना चाहता हो.

आरती - काफी टाइम हो गया है... अतुल बस आता hi होगा... तुम अपना फेस वाश कर लो... उसके सामने हम ऐसे कोई बात नहीं करेंगे... समझ गयी न...

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया और आरती उसे बैडरूम में छोड़ कर किचन में चली गयी. सुप्रिया भी कुछ पल बाद कड़ी हो कर अपना चेहरा, बाल और कपडे ठीक करने लगी. भाभी की बातों ने उसे और भी परेशान कर दिया था.

___________________________________

रात को खाने की टेबल पर, सुप्रिया, अतुल और आरती चुप चाप खाना खा रहे थे. आज जैसे किसी में भी बात करने की हिम्मत hi न हो.

आखिर अतुल ने hi छुपी तोड़ी - भाभी, आप अपनी दोस्त से मिलने गयी था न आज... कैसा रहा?

आरती - हाँ... सब बढ़िया था... आपका दिन कैसा रहा...

अतुल - ठीक था... नार्मल ऑफिस का दिन... वैसे तोह मेरी आज बॉस से एक मीटिंग होनी थी, पर उन्हें एकदम से कहीं जाना पड़ा..

सुप्रिया नीचे देख कर खाना खा रही थी. उसे पता था अतुल विक्रम के बारे में बात कर रहा था, पर वह इस बात को आगे नहीं खींचना चाहती थी...

आरती को सुप्रिया ने आज शाम को hi बताया था की विक्रम अतुल और उसके दोनों का बॉस था, तोह वह भी पूछ बैठी - ाचा... कुछ काम था क्या उनसे?

अतुल - मैंने सोचा था उनसे कुछ छुटियो के बारे में बात करूँगा... ताकि हम सब कहीं घूमने चल सके... पर बात hi नहीं हो पायी... बॉस तुम्हारे यहाँ आये थे क्या सुप्रिया...

ये सुनते hi सुप्रिया को ज़ोर का धसका लग गया और वह खांसने लगी.

अतुल - ारी.. ये लो... पानी पियो... सब ठीक तोह है न...

सुप्रिया ने ek-do घूँट पानी के पिए और फिर जवाब दिया - हाँ सब ठीक है... वह शायद गस्सा अटक गया था...

अतुल - आराम से खा लो...

आरती उन दोनों को अकेले थोड़ा टाइम देना चाहती थी - तुम दोनों खायो... मैं ज़रा नीचे टहल कर आती हूँ... इस बहाने तुम्हारे भैया से भी बात हो जाएगी...

आरती वहां से उठ कड़ी हुई और थोड़ी सी देर बाद घर से बहार निकल गयी. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की वह और अतुल दो अजनबी की तरह साथ में बैठे हुए खाना खा रहे हो. दोनों में से किसी के पास कुछ कहने को hi नहीं था.

तभी अतुल के फ़ोन पर साइलेंट विब्रेशन्स की आवाज़ आने लगी, जैसे कोई उसे बार बार मैसेज कर रहा हो. अतुल का फ़ोन टेबल पर उल्टा रखा हुआ था तोह सुप्रिया को मैसेज नहीं दिख रहे थे. इतना दिनों से उसने अतुल पर कोई ध्यान hi नहीं दिया था, पर आज भाभी की बातों से वह बहुत साड़ी चीज़े सोचने पर मजबूर हो गयी थी.

कुछ देर बाद अतुल जैसे hi प्लेट सिंक में रखने और हाथ धोने के लिए खड़ा हुआ, सुप्रिया ने अतुल का फ़ोन पलट कर जल्दी से देखा. फ़ोन लॉक्ड था और उसे अतुल का पस्सकदे नहीं पता था पर वह फिर भी सबसे नए मैसेज को पद पा रही थी.

डी - खाना खा लिया क्या आपने? आज रात बात कर सकते है क्या?

अतुल को आते सुन सुप्रिया ने जल्दी से फ़ोन को वापस उल्टा रख दिया. "डी" अक्षर से किसका नंबर सेव्ड था और वह अतुल से ये सब क्यों पूछ रहा / रही थी? सुप्रिया ने थोड़ा और सोचा पर उसे समझ hi नहीं आ रहा था की ये कौन हो सकता था.

अतुल वहां आ कर अपना फ़ोन टेबल से ले कर टीवी के सामने चला गया. सुप्रिया परेशान बैठी इस बारे में बस सोचती hi रही. इस तरह की बातें तोह कोई नार्मल फ्रेंड नहीं पूछता. तोह इसका मतलब अतुल भी किसी और से !!??

थोड़ी देर बाद भाभी भी वापिस आ गयी थी. सुप्रिया के मैं में आ रहा था की वह उनसे hi पूछ ले इस सब के बारे में, क्या पता उन्हें hi कुछ पता हो. पर आज जो कुछ हुआ था, उसके बाद उसकी हिम्मत hi नहीं हुई कुछ पूछने की.

रात को भाभी के बिना कहे भी वह अतुल के कमरे में आकर वहीँ बीएड पर लेट गयी. आज तोह जैसे एक तरफ कुआ था और दूसरी तरफ खायी, वह न तोह अतुल का सामना करना चाहती थी न hi आरती क. वह अतुल के कमरे में लेती हुई फिर से सोचने लगी की ये "डी" कौन हो सकता था. तभी उसके दिमाग में एक नाम क्लिक किया, "दिशा". वह अतुल के ऑफिस में hi काम करती थी, और उसने उन दोनों को ek-do बार बात करते हुए देखा था.

तोह क्या अतुल और दिशा का अफेयर चल रहा था? सुप्रिया ने सोचा, की अतुल के अंदर ये हिम्मत कबसे आ गयी की वह उसकी जैसी खूबसूरत बीवी को छोड़ कर एवरेज से दिखने वाली दिशा के साथ अफेयर कर ले. सुप्रिया को काफी तेज़ गुस्सा आने लगा था.

कुछ देर बाद अतुल कमरे में आकर उसके बराबर में बीएड पर लेट गया. सुप्रिया ने अपने इमोशंस को काबू में लाते हुए उनके बीच की छुपी को तोड़ते हुए पुछा - आपकी जॉब कैसी चल रही है... अब तोह आपको कई महीने हो गए वहां...

अतुल - ठीक hi है...

सुप्रिया - वहां काफी बोरिंग होता है न... मैंने भी उस ऑफिस में कुछ दिन काम किया है... काफी सीरियस से लोग है वहां... कोई ऑफिस में फ्रेंड बना?

अतुल - नहीं... ऑफिस में कौन फ्रेंड बनेगा... सब कलगुएस hi हैं...

सुप्रिया - हाँ पर कलगुएस में भी कोई तोह फ्रेंड बन hi जाता है...

अतुल - नहीं ऐसा तोह कोई नहीं.

अतुल की बातों से सुप्रिया को साफ़ लग रहा था की वह झूठ बोल रहा था. पर सुप्रिया सीधे सीधे दिशा का नाम नहीं लेना चाहती थी.

अतुल - तुम बताया, तुम्हारी जॉब ठीक चल रही है...

सुप्रिया - हाँ ठीक है... पर मैं सोच रही हूँ की जॉब छोड़ दू...

अतुल ने चौंकते हुए कहा - क्यों?

सुप्रिया - बस ऐसे hi... मैं नहीं है अब जॉब करने का...

अतुल - कुछ दिन और कंटिन्यू रख लो... अभी क्यों छोड़ रही हो... घर पर भी तोह बोर hi हो जायेगी...

सुप्रिया - हाँ... ये भी है... सोचती हूँ...

अतुल दूसरी और करवट ले कर सो गया. सुप्रिया अभी भी अतुल और दिशा के बारे में hi सोच रही थी, और आज रात शायद उसे उन दोनों के hi सपने आने वाले थे. शायद उसने अतुल को अपने से इतना दूर कर दिया था की वह दिशा के करीब हो गया था.

__________________________

सुबह हुई, और सुप्रिया अब ऑफिस जाने के बिलकुल मूड में नहीं थी. इतना सब हो जाने के बाद वह किस मुँह से उस ऑफिस में जाती, और वह भी उस जगह जहाँ विक्रम उसका बॉस था. सुबह आते आते उसे फिर से विक्रम पर गुस्सा आने लगा था. कल की घटना के बाद विक्रम ने एक बार भी उससे बात करने की कोशिश नहीं की थी. शायद अब उसे परवाह hi नहीं थी की वह क्या सोचती थी.

सुप्रिया ने बीएड में लेते हुए साहिल सर को मैसेज कर दिया की वह आज ऑफिस नहीं आएगी. शायद वह अब कभी ऑफिस न जाना चाहे.

सुप्रिया सोच hi रही थी की शायद साहिल सर बस "OK" टाइप करके जवाब दे देंगे, पर इस बार ऐसा नहीं हुआ.

साहिल सर का मैसेज आया - सुप्रिया, तुम्हारी काफी साड़ी लीव्स हो गयी हैं पिछले एक हफ्ते में... ये रिक्वेस्ट डिनाइड है...

सुप्रिया को मैसेज पद कर hi गुस्सा आने लगा. उसने गुस्से में मैसेज टाइप करके भेज दिया - ठीक है सर... मैं अभी रिजाइन करती हूँ...

साहिल सर का कोई जवाब नहीं आया, और सुप्रिया फिर से आखें बंद करके लेट गयी. उसे पता hi नहीं चला की कब अतुल उठ कर तैयार हो कर ऑफिस जा चूका था. सुप्रिया बीएड से उठ कर बहार आयी तोह देखा की भाभी अपना सामान पैक कर रही थी.

सुप्रिया - भाभी आप सामान क्यों पैक कर रहे हो?

आरती - अब क्या करुँगी मैं यहाँ रुक कर... मुझे घर hi निकल जाना चाहिए न...

सुप्रिया - पर आप मुझे ऐसे कैसे छोड़ कर...

आरती - सुप्रिया जो तुम्हे करना है तुम वही करोगी... मेरे बोलने से कोई फरक नहीं पड़ता... कल भी तुम्हारे दिमाग से विक्रम का भूत अभी उतरा नहीं था. कल से उसका कोई भी मैसेज आया तुम्हारे लिए?

सुप्रिया छुप हो गयी, उसके पास इस बात का कोई जवाब hi नहीं था.

आरती - मुझे तुम्हारे भैया से बात करनी है आज... की वह मेरी ट्रैन की टिकट जल्दी की करा दे..

सुप्रिया - पर बस एक hi हफ्ते की तोह और बात है, उसमे जल्दी जाकर क्या कीजियेगा...

आरती - हम्म्म... जैसे तुम्हारी मर्ज़ी है... वैसे hi मेरी भी मर्ज़ी है...

सुप्रिया परेशान होते हुए बैठ गयी, अब क्या भाभी भी यहाँ से चली जाएँगी. पिछले 5-6 दिनों में hi ऐसा लग रहा था की उसकी पूरी जिंदगी बिखर सी गयी हो.

आरती ने सुप्रिया को परेशां देख पूछा - अतुल से कोई बात हुई रात को...

सुप्रिया - नहीं...

आरती - तुम्हे उससे बात कर लेनी चाहिए...

सुप्रिया - और क्या कहु उसे?

आरती - एहि की तुम उससे बहुत प्यार करती हो, और क्या.

पर सुप्रिया भी जानती थी की ये सच नहीं था. तभी सुप्रिया के फ़ोन की घंटी बजने लगी. कृति उसे कॉल कर रही थी. सुप्रिया आरती के साथ की बातचीत को बीच में छोड़ते हुए कॉल अटेंड करने के लिए अपने रूम में चली गयी.

कृति - बेब... क्या हुआ? तुम ठीक तोह हो न...

सुप्रिया - हाँ... बस वह थोड़ा...

कृति - सॉरी मुझे बेब नहीं... भाभी बोलना चाहिए था...

सुप्रिया ने रूखी आवाज़ में कहा - नहीं... प्लीज... मुझे सुप्रिया hi बुला लो... भाभी वभि नहीं... किसी काम से कॉल किया था क्या?

कृति सुप्रिया के इस बर्ताव से थोड़ा सा हैरान हो गयी - नहीं बस, साहिल सर काफी गुस्सा हो रहे थे... तुमने कुछ कहा क्या उनको...

सुप्रिया रुकते हुए बोली - कृति... मैं ये जॉब छोड़ रही हो... मुझसे नहीं हो पायेगा...

कृति - क्या!! एवरीथिंग गुड? कोई पर्सनल स्ट्रेस? (हस्ते हुए) भैया से लड़ाई तोह नहीं हो गयी...

सुप्रिया - ऐसा कुछ नहीं... मैं बस अब जॉब नहीं कर सकती...

कृति - ओह Ok! तुमने भैया से बात की क्या इस बारे में?

सुप्रिया भड़कते हुए बोली - क्यों? मुझे उनसे क्यों बात करनी होगी इस बारे में... ये मेरा डिसिशन है... मैं नहीं ले सकती क्या मेरा डिसिशन?

कृति दूसरी साइड बिलकुल छुप हो गयी. आज तक सुप्रिया उस पर ऐसे भड़की नहीं थी.

सुप्रिया ने भी एक डैम से अपनी गलती रीलीज़ कर ली - सॉरी कृति, मैं तुम पर नहीं चिल्लाना चाहती थी, पर मैं अभी एक्सप्लेन नहीं कर सकती... मैं बाद में बात करती हूँ...

कृति - हाँ ok... ी होप वे कैन टॉक सून...

सुप्रिया ने फ़ोन रख दिया, उसे समझ नहीं आ रहा था की वह क्या करे. सब कुछ उसके हाथ से निकलता hi जा रहा था, विक्रम, अतुल, उसके घरवाले, सब कुछ. और वह अब कुछ भी नहीं कर सकती थी.

अगले कुछ घंटे वह परेशां होते हुए घर में इधर से उधर घूमती सी रही. उसने कई बार सोचा की वह भाभी से अतुल और दिशा के बारे में बात कर ले, पर फिर उसे डर था की उसे भाभी का लेक्चर hi सुनने को मिलेगा.

पूरा दिन ऐसे hi टेंशन में निकल गया, और सुप्रिया ने पाया की वह बेसब्री से अतुल का इंतज़ार कर रही थी. शाम को अतुल घर आया भी तोह वह फिर से अपने फ़ोन पर hi लगा हुआ था. सुप्रिया ने सोचा की शायद ये सब कुछ महीनो से चल रहा था, बस सुप्रिया ने hi ध्यान नहीं दिया.

रात होते होते फिर से सुप्रिया ने मौका लगते hi अतुल का फ़ोन चेक किया, उसने 2-3 पस्सकदे तरय किये पर वह अतुल का फ़ोन नहीं खोल पायी. पर जैसे hi उसने फ़ोन की नोटिफिकेशन्स को नीचे स्लाइड किया तोह उस पर "डी" नाम के इंसान की 3-4 मिस्ड कॉल्स थी, कुछ कल रात की और कुछ अभी थोड़ी देर पहले की. सुप्रिया को अब पक्के तरीके से लग गया था की जरूर अतुल उससे कुछ छुपा रहा है.

Tum-Dena-Saath-Mera-Kya-Riya-legi-Manan-se-badla-FULL-EPISODE-109-1-16-scr.png


रात के अँधेरे में सुप्रिया के आंसू बह रहे थे और वह चुप चाप रो रही थी. उसके पास अब कुछ भी तोह नहीं बचा था. इसमें शायद उसकी hi गलती थी, किसी और की नहीं.

अगली सुबह उसके अंदर बीएड से उठने की जैसे हिम्मत hi नाह थी, और वह आँखें बंद किये बीएड पर लेती रही. अतुल ऑफिस जा चूका था, और भाभी बहार ड्राइंग रूम में बैठी थी. तभी सुप्रिया के घर की घंटी बजी. सुप्रिया को लगा की इस समय करुणा hi आयी होगी, शायद थोड़ा जल्दी आ गयी आज.

पर कुछ hi सेकंड बाद भाभी ने दरवाज़ा खोलने के बाद सुप्रिया को तेज़ आवाज़ लगनी शुरू कर दी - सुप्रिया! सुप्रिया!! बहार आयो!

सुप्रिया झुंझलाते हुए कड़ी हुई और बहार की तरफ आयी. पता नहीं ऐसा क्या हो गया की भाभी उसे बुला रही थी. पर जैसे hi वह दरवाज़े की तरफ आयी उसके कदम एक डैम से रुक गए. घर के बहार विक्रम खड़ा था, और उसके ठीक पीछे इक़बाल. सुप्रिया विक्रम को वहां देख कर हैरान थी, और उससे भी ज्यादा इस बात से की इक़बाल ने उसे ऊपर उसके घर तक आने कैसे दिया था.

इक़बाल सुप्रिया को देख कर बोलै- मैडमजी... मैं आपको कॉल hi कर रहा था पर आपने फ़ोन नहीं उठाया... इन सर को आपसे कुछ बात करनी थी...

विक्रम - सुप्रिया... मैं प्लीज अंदर आ सकता हूँ क्या...

सुप्रिया काफी ज्यादा हैरान थी पर वह इस तरह विक्रम को अपने घर से बहार से वापिस जाने को कैसे बोलती. आरती दरवाज़े से थोड़ा पीछे हैट गयी थी और सुप्रिया दरवाज़े के ठीक सामने थी.

सुप्रिया ने एक कदम पीछे लिया, विक्रम को अंदर आने के लिए हाँ करते हुए - इक़बाल मैं दरवाज़ा बंद कर रही हूँ ताकि आवाज़ बहार न आये... पर तुम यहीं रहना...

इक़बाल - मैं यहीं हु मैडमजी... आप फ़िक्र मत कीजिये... जाइये सर... आप अंदर जाइये...

विक्रम ने अंदर आते हुए दरवाज़ा बंद कर दिया - काफी ाचा वॉचमन है ये... बहुत मुश्किल था इसे मानना की ये मुझे ऊपर आने दे, पर वह शायद समझ गया था की मेरे इरादे बुरे नहीं है...

सुप्रिया ने उसकी बात को इग्नोर करते हुए कहा - आप यहाँ क्यों आये है... जो कुछ हुआ उसके बाद...

विक्रम - सॉरी मुझे आने में 2 दिन लग गए, तुम सोच रही होंगी की मैं कहाँ गायब था 2 दिन से. पर मैं ऐसे hi यहाँ नहीं आना चाहता था...

विक्रम ने आरती की तरफ देख कर अपने हाथ जोड़ लिए - भाभी, मैं जय की तरफ से माफ़ी नहीं मांगूंगा, क्यूंकि अगर मैं माफ़ी मांगता हूँ तोह इसका मतलब ये होगा की मैंने उसे माफ़ कर दिया या मैं उसे अपना कुछ समझता हूँ...

विक्रम - जय मेरा दोस्त नहीं है... बस एक इंसान जिसे मैं जानता हूँ... जो हुआ वह बहुत ज्यादा गलत था... वह जय का तरीका था मुझसे बदला लेने का... मुझे बस इस बात का अफ़सोस है की आप इस सब के बीच में आ गयी. उस बात के लिए मैं बेहद शर्मिंदा हूँ...

आरती तोह बस बारी बारी विक्रम और सुप्रिया की तरफ hi देख रही थी, उसे समझ नहीं आ रहा था वह क्या बोले.

विक्रम - सुप्रिया... मैं दो दिन से एहि सोच रहा हूँ की मैं तुम्हारा सामना कैसे करूँगा... पर मैं किसी तरह हिम्मत करके यहाँ चला आया...

सुप्रिया - कल जय ने आपके बारे में सब बता hi दिया था... अब और क्या रह गया है बात करने के लिए...

विक्रम ने इमोशनल होते हुए बोलना शुरू किया - जय ने जो कुछ कहा उसमे कुछ सच्चाई थी, मैं ये देंय नहीं करता. पर एक सच्चाई ये भी है की मैं तुमसे बहुत ज्यादा प्यार करता हूँ... और मैं जब से तुमसे मिला हूँ, मेरी एहि कोशिश रही है की तुम पर कोई आंच न आये... तुम्हे किसी और से बाटने के बारे में तोह मैं कभी सपने भी नहीं सोच सकता... शायद तुम भी ये बात जानती होगी...

सुप्रिया छुप हो कर विक्रम की बात को सुन रही थी.

विक्रम - जब से मैं तुमसे मिला हूँ, मैं तुम्हारे सिवा किसी के बारे में नहीं सोच पाया हूँ... और मेरे लिए अब बस तुम hi सब कुछ हो... यहाँ तक की ईशा से भी कहीं ज्यादा...

सुप्रिया विक्रम की बातों से पिघलने सी लगी थी, पर उसने आरती के सीरियस चेहरे की और देखा, उसे पता था भाभी क्या सोच रही थी. सुप्रिया ने उनके मैं की बात खुद hi कह दी - पर उससे क्या फरक पड़ता है... न आप कभी ईशा को छोड़ेंगे और न hi हम कभी साथ हो सकते है...

विक्रम - मैंने उसका हल ढून्ढ लिया है... और हम साथ हो सकते है...

आरती बीच में बोल पड़ी - साथ रहने का मतलब क्या होता है, सुप्रिया और आप दोनों hi शादी शुदा हो, तोह इस रिश्ते का कोई मतलब नहीं. आप कभी सुप्रिया से शादी नहीं कर पाएंगे तोह फिर...

विक्रम - नहीं, मैं शादी की hi बात कर रहा हूँ... मैं सुप्रिया को पूरी तरह अपनाना चाहता हूँ... शादी करके....

सुप्रिया को यकीं hi नहीं हो रहा था की विक्रम क्या कह रहा था. क्या ये सच था?

विक्रम - मैं सुप्रिया से शादी करूँगा. मैंने सुप्रिया के लिए यहाँ से दूर लंदन में एक घर ले लिया है... वहां हमें किसी का डर नहीं होगा...

आरती - और आपकी यहाँ की जिंदगी, आपकी बीवी... आप उसे छोड़ कर वहां चले जायेंगे?

विक्रम - मैं ईशा को नहीं छोड़ सकता पर मेरे लिए सुप्रिया hi सब कुछ होगी...

आरती - जब आप अपनी बीवी को नहीं छोड़ सकते तोह हम इस बारे में बात hi क्यों कर रहे है... उसे छोड़े बिना आप सुप्रिया से शादी कैसे कर सकते है...

सुप्रिया को भी विक्रम की बात काफी अजीब सी लग रही थी.

विक्रम ने सुप्रिया की तरफ देखा - सुप्रिया, तुम मुझ पर भरोसा करती हो... मुझसे प्यार करती हो...

सुप्रिया ने कुछ सेकंड के लिए विक्रम की आँखों में देखा और उसे वहां सिर्फ सच्चाई hi दिखाई दी. उसने हलके से सर हिला कर हाँ कर दिया - हाँ... पर विक्रम जो भाभी भी कह रही है... शादी के बिना हमारे रिश्ते का कोई नाम नहीं होगा...

विक्रम - सुप्रिया... तुम मेरे लिए सब कुछ हो लाइफ में.... पर ये भी सच है की ईशा मुझे कभी डाइवोर्स नहीं देगी, और अगर उसे पता चला मैं तुमसे शादी करने के लिए डाइवोर्स के बारे में सोच भी रहा हूँ तोह वह पता नहीं क्या कर बैठेगी...

सुप्रिया - तोह फिर, हम कैसे शादी कर सकते है...

विक्रम - वे विल बोथ कन्वर्ट एंड मर्री...

आरती और सुप्रिया दोनों के मुँह से ज़ोर के निकला - क्या!!!!

विक्रम - मैंने कई महीनो इस प्रॉब्लम के बारे में सोचा है, और मुझे इसके इलावा कोई और सलूशन नहीं मिला है... ये लीगल भी है और यहाँ से निकल कर दुसरे देश में रहना तुम्हारे लिए सेफ भी होगा...

आरती - नहीं, ये क्या कह रहे हो... दूसरा उपाय ये है की तुम और सुप्रिया एक दुसरे को भूल जायो और अपनी अपनी जिंदगी में लौट जायो... ये बकवास की बातें बंद करो...

विक्रम - हाँ... वह भी एक ऑप्शन है... और अगर सुप्रिया एहि चाहती है तोह फिर हम बात एहि ख़तम कर देंगे...

आरती - सुप्रिया... तू बोल दे न इसे...

सुप्रिया - भाभी आप.... मुझे थोड़ा सोचने के लिए टाइम चाहिए....

आरती को यकीं hi नहीं हो रहा था की सुप्रिया इस बारे में सोच भी कैसे सकती थी.

विक्रम - ये मेरे लिए भी कोई आसान डिसिशन नहीं था, अगर किसी को कानो कान भी इसकी भनक लग गयी तोह मेरा पर्सनल प्रोफेशनल पोलिटिकल करियर सब ख़तम हो सकता है... पर सुप्रिया के लिए मैं ये भी करने को तैयार हु... सुप्रिया, तुम्हे मेरे इरादों पर शक है?

सुप्रिया - विक्रम... ऐसा नहीं है... पर मुझे कुछ टाइम चाहिए सोचने के लिए...

विक्रम - That's फेयर, तुम सोच लो... पर अगर तुम मुझसे अभी भी प्यार करती हो तोह मुझे उम्मीद है तुम मुझ पर ट्रस्ट करोगी... अभी इस बात का जिक्र किसी से भी नहीं करना... किसी से भी नहीं...

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया. विक्रम अपने हाथ जोड़ कर घर से बहार की और निकल गया. सुप्रिया घर के हॉल में कड़ी सोचती hi रह गयी थी की विक्रम ने ये कैसा अजीब सा सलूशन उसके सामने रख दिया था.

______________________________

विक्रम के जाने के बाद सुप्रिया और आरती काफी देर तक छुप हो गए थे.

आरती ने hi आखिर वह छुपी तोड़ी - सुप्रिया... तू इस बारे में सोच भी कैसे सकती है... हमने एहि बात की था न, तू अतुल के साथ अपने रिश्ते को ठीक कर...

सुप्रिया ने हलके से कहा - और अगर अतुल इस रिश्ते को ठीक न करना चाहते हो तोह?

आरती - मतलब? अगर वह ठीक नहीं करना चाहता तोह मुझे क्यों कॉल करता?

सुप्रिया - क्या पता वह सब बस दिखावा hi हो... आपको क्या पता अतुल क्या कर रहा है...

आरती - बात को घुमा फिर के मत बोल...

सुप्रिया - अतुल का भी अफेयर चल रहा है...

आरती - क्या? पागल हो गयी है क्या? अतुल का कोई अफेयर नहीं चल रहा है...

सुप्रिया - आपको क्या पता, जो जितना सीधा दीखता है होता नहीं है... उसके ऑफिस में एक लड़की है... वह और अतुल...

आरती - तू किसकी बात कर रही है... उसके ऑफिस में तोह दिशा है.. और वह तोह...

सुप्रिया चौंकते हुए बोली - ओह्ह्ह! तोह आप भी जानती है दिशा के बारे में... (और फिर भड़कते हुए) ये सही है... यहाँ मुझे नसीहत दिए रहे हो... और खुद ये बात छुपा कर रखे हो...

आरती - ऐसा कुछ नहीं... तू गलत समझ रही है... अतुल ने मुझसे कुछ नहीं छुपाया है... और मेरी और दिशा की बात हुई थी...

सुप्रिया - वाओ... आपकी और दिशा की बात भी हुई थी... आप हो किसकी साइड... मुझे तोह ये भी समझ नहीं आ रहा...

आरती छुप हो गयी, सुप्रिया उसकी हर बात को गलत तरीके से लेकर जा रही थी.

सुप्रिया का गुस्सा बहुत तेज़ हो चूका था - आप खुद hi जय से मिलने गयी थी न, आपने hi कहा था न की आप उसे आजमाने गयी थी. चलो मान लो जय ने आपके साथ कुछ गलत करना शुरू किया, पर आप वहां से निकल भी नहीं पायी?

आरती - सुप्रिया... होश कर ले... क्या बोल रही है...

सुप्रिया - मुझे अब सब समझ आ रहा है...

आरती अपनी जगह से कड़ी हो गयी - सुप्रिया... ये मत भूलो की मैं तुम्हारी भाभी हूँ...

सुप्रिया - एहि सोच कर मैं छुप थी अब तक... आप शुक्र करो मैं भैया को कुछ नहीं बतायूंगी...

सुप्रिया की बात सुनकर आरती का चेहरा गुस्से से तमतमाने लगा था. उसने कभी सोचा नहीं था की उसके और सुप्रिया के बीच कभी ऐसी बात भी हो जाएगी. वह उसके सामने से हैट कर दुसरे कमरे में चली गयी.

सुप्रिया भी अकेले गुस्से में बैठी सब कुछ सोच रही थी. उसे ऐसा लग रहा था की जैसे उसे उसकी खुद की भाभी ने और अतुल ने भी उसे बहुत बड़ा धोका दिया हो. शायद वह उसी पल अपना मैं बना चुकी थी, पर वह अभी विक्रम को फ़ोन नहीं करना चाहती थी.
 
अपडेट 71

आरती रोड के किनारे एक गाडी का इंतज़ार कर रही थी, और आते जाते लोग उसकी और घूर रहे थे. उसकी मोती गद्देदार गांड साड़ी में लिपटी हुई सड़क पर खड़े लोगो का ध्यान अपनी और खींच रही थी. उसकी गांड थी hi इतनी मस्त की किसी का भी ध्यान अपनी और खींच ले. सड़क परे खड़े कुछ मजदूर पंत के ऊपर से अपना लुंड मसल रहे थे.

आरती की नज़र उन पर पड़ी तोह उसने उन्हें अनदेखा कर दिया. ये पहली बार नहीं थी की लोग उसकी गांड को घूर रहे थे, अब तोह जैसे उसे इसकी आदत सी पद गयी थी. एक बार उसकी चचेरी ननद ने उसे बताया था की वह पूरे रिश्तेदारी में बड़ी गांड वाली बहभी के नाम से मशहूर थी. उसे ये सुन कर काफी हसी आयी थी.

आरती रोड के दोनों तरफ बारी बारी देख रही थी, एहि सोचते हुए की जाने कब वह आने वाला था. काफी देर हो गयी थी उसे खड़े हुए.

8.gif


कुछ hi देर बाद एक काले रंग की गाडी उसके सामने आकर रुकी. गाडी के शीशो पर काली फिल्म छड़ी हुई थी तोह आरती को अचे से अंदर बैठा इंसान नहीं दिख रहा था. गाडी का शीशा थोड़ा नीचे हुआ और अंदर बैठे आदमी ने उससे लेट आने के लिए माफ़ी मांगी.

आरती दरवाज़ा खोल कर अंदर बैठ गयी और उसके बैठते hi गाडी वहां से फर्राटे से चल पड़ी.

आरती बार बार कार के साइड मिरर से पीछे की और देख रही थी, ये देखने के लिए की कोई उसका पीछा तोह नहीं कर रहा था. पर उसका पीछा करेगा कौन? सुप्रिया?

दो दिन पहले उसकी और सुप्रिया की काफी ज्यादा hi लड़ाई हुई थी, और उसके बाद से उन दोनों के बीच बोल चाल बिलकुल बंद पद गयी थी. इन दो दिनों में घर में ऐसी घुटन हो गयी थी की उसका सांस लेना भी मुश्किल था. उसका बस चलता तोह वह कबकी वापस अपने घर चली जाती, पर उसके पतिदेव ने उसकी एक न सुनी, और 4 दिन पहले आने के लिए टिकट बदलने से मन कर दिया.

पर वह कब तक ऐसे hi बैठी रहती उस घर में! उसकी प्यारी सी गोलू तोह अब कुछ अलग hi ख्वाब बन रही थी. आज सुबह आरती उठी, नाहा के त्यार हुई और सुप्रिया को बिना बताये घर से बहार निकल गयी. आखिर सुप्रिया अपने आप को समझती क्या थी, वह उससे पूछ कर हर काम थोड़ी न करने वाली थी.

वह बस अब यहाँ थी, इस कार में, इस बार सुप्रिया या किसी और के लिए, बल्कि अपने लिए. उस दिन जो कुछ अधूरा रह गया था उसे पूरा करने के लिए. उसने ड्राइवर सीट पर बैठे जय की और देखा, जो अपने होठों की मुस्कान को किसी तरह दबाये हुए था.

जय ने आरती को पांचवी बार पीछे की और झांकते हुए देखा तोह उससे रहा नहीं गया - आरती जी... परेशान क्यों हो रही हैं आप... कोई पीछा नहीं कर रहा आपका... आराम से बैठिये... गाने चला दू?

जय ने दो दिन पहले आरती को मैसेज करके अँधेरे में तीर मारा था, उसे क्या पता था वह तीर निशाने पर लग hi जायेगा. पर शायद ये तीर तोह लग्न hi था.

उस दिन जब विक्रम ने उनका कमरा खटखआया था तब वह और आरती फिर से एक दुसरे से लिपटे हुए थे, और अभी तोह उनका काफी खेल बाकी था. पर उसे क्या पता था उस समय बहार विक्रम hi खड़ा मिलेगा. विक्रम ने वहां आ कर उसका सारा मजा किरकिरा कर दिया था.

आरती - मैं परेशान नहीं हूँ... बस देख रही हूँ बहार...

जय ने आरती के शरीर को ऊपर से नीचे तक देखा. आरती का भरा हुआ शरीर बेहद आकर्षक था - अंदर इतनी खूबसूरती है और आप बहार देख रही है… टस्क टस्क टस्क…

आरती जय की तीव्र नज़र को अपने शरीर पर पड़ते हुए महसूस कर पा रही थी - वह तुमने मैसेज किया था मिलने के लिए... मैंने सोचा एक बार घर जाने से पहले तुमसे मिल लू...

जय - आप घर जा रही हैं? इतनी जल्दी?

आरती - हाँ... वह... जिस काम से आयी थी वह तोह नहीं हुआ...

जय - चलो कोई नहीं... आप आयी यहाँ, ये भी ऊपर वाले ने लिखा hi था, और इस बहाने ये दूसरा काम तोह हो गया हमारे बीच...

आरती ने अपने बौहें चढ़ाते हुए उसकी और देखा - हम्म्म... मुझे एहि बात करने के लिए बुलाया था क्या?

जय - नहीं नहीं... और भी बहुत सी बातें करनी है... उस दिन के लिए खेद भी व्यक्त करना है...

आरती को उसकी शुद्ध हिंदी पर थोड़ी सी हसी आ रही थी पर वह उसके सामने हसी नहीं - किस बात का खेद??

जय - एहि की उस दिन जो कुछ हमारे बीच दुबारा शुरू हुआ था वह कहातम नहीं हो पाए... हमने तोह अपने आपको पूरी तरह से सौंप दिया था आपको... पर आपको पूरा समय नहीं मिला…

आरती ने जय की और देखा, और दिन की बातें उसके ज़हन मरीन घूम गयी. विक्रम के आने से पहले वह जय की लुंड के ऊपर बैठी हुई अपने कमर को ऊपर नीचे कर रही थी. सच एहि था की उस दिन भी जय ने उसके साथ कोई जबरदस्ती नहीं करि थी. और न hi आज उसने फाॅर्स किया था उसे यहाँ आने के लिए. जय जिस तरह अपने आप को आरती के हवाले कर देता था, आरती के अंदर एक अलग hi आग लगा देता था.

आरती - ाचा जी…. सौंप दिया था अपने आप को या तुमने मुझे बुरी तरह तोड़ दिया था... कुछ ज्यादा hi नहीं हो गया था उस दिन…

जय मुस्कुराते हुए - ारी… आप टूटने वालो में से कहाँ हो... आप मुझे जितना झेल गयी उस दिन... शायद hi किसी ने आज तक झेला हो! बुरी तरह थका दिया था आपने...

आरती को अपनी तारीफ बहुत अछि लग रही थी, और वह मंद मंद मुस्कुराने लगी. यह पहली बार नहीं था की उसने ये किसी से सुना था, उसका खुद का पति भी उसकी कामुकता की तारीफ करे बिना रह नहीं पाटा था.

आरती मुस्कुराते हुए बोली - रहने दो… जैसे तुम थक hi गए थे... अभी ek-do घंटे और मुझ पर छडे hi रहते अगर तुम्हारा दोस्त न आता तोह..

जय - ये भी सच है.. पर फिर विक्रम ने आकर मुझे मार मार कर थका दिया... सबके सामने आप तोह सटी सावित्री बन कर निकल ली... और मुझे जनरल साब से पिटवा दिया...

आरती - तुमने काम hi ऐसा किया था न.. मार खाने लायक... मुझे झूठ बोलै की तुम्हारे और सुप्रिया के बीच...

जय हस्ते हुए - हेहेहे... सपनो में तोह मैं एहि सोचता था की मेरे और सुप्रिया के बीच कुछ होगा... पर अब लगता है...

आरती - पर अब क्या लगता है?

जय बेशरम होते हुए बोलै - अब तोह लगता है बस आप पर hi छडा राहु..

आरती अपनी हसी नहीं रोक पा रही थी - सुप्रिया के चक्कर में तोह तुमने मुझे वहां बुलाया था… अब उसे भी भूल रहे हो…

जय - उस दिन से पहले मुझे क्या पता था की विक्रम इतना सीरियस है उसके बारे में... पता होता तोह मैं... हहै... फिर भी उसके बारे में थोड़ा तोह सोचता... पर फिर शायद उस पर इस तरह तरय नहीं मारता... आखिर दोस्त है मेरा वह…

आरती - विक्रम ने तुम्हे इतना मारा फिर भी तुम उसके बारे में सोच रहे हो... मैं मान hi नहीं सकती की तुम इतने सीधे हो…

जय - सच कह रहा हूँ... और वैसे भी हर लड़की के पास छेड़ hi तोह होता है… मुझ जैसे मर्द से भरवाने के लिए... ऊप्स सॉरी… माफ़ कीजिये मुझे...

आरती सोचते हुए बोली - नहीं सही कह रहे हो तुम... सब के पास छेड़ hi तोह है... किसी का बड़ा किसी का छोटा…

जय - किसी का बिलकुल परफेक्ट आपकी तरह…

आरती - रहने दो… मैं अछि तरह जानती हो मर्दो को… तुम्हे मौका मिले तोह अभी भी सुप्रिया को छोड़ोगे नहीं… पर मैं सीरियस हो कर बोलती हूँ… उसकी तरफ आँख उठा कर भी नहीं देखना…

जय - सच कहूं तोह उस दिन के बाद से मैंने तोह सुप्रिया के बारे में सोचा भी नहीं है... वैसे भी मैंने सुना है, वह तोह काफी जल्दी थक जाती है बिस्तर में… बहहह... उसमे क्या मज़ा... असली मज़ा तोह आपके साथ आया था...

आरती चौंकते हुए - किस्से सुना है तुमने ये? विक्रम से?

जय - नहीं नहीं…. विक्रम कहाँ ये सब बोलेगा...

आरती - तुम्हे लगता है विक्रम सच में सुप्रिया के बारे में सीरियस है?

जय - इतना सीरियस तोह मैंने उसे कभी नहीं देखा… चलिए छोड़िये ये सब बात... उस दिन आपकी वजह से इतनी मार खायी थी... आज थोड़ा प्यार करके मरहम तोह लगा दीजिये न...

आरती - मैं इसलिए नहीं आयी हूँ यहाँ...

जय - मैं तोह आपकी सेवा में हाज़िर हूँ... जो आपका हुकुम हो...

आरती - मेरा कोई हुकुम वुकुम नहीं है… सेवा के बदले मेवा खा जाओगे तुम…

जय आँख मारते हुए बोलै - आपको भी खिला देता हूँ थोड़ी मेवा… वैसे भी आप 2 दिन बाद तोह यहाँ से चली hi जाएगी, उसके बाद आप कहाँ मैं कहाँ...

जय ने अपना हाथ आरती की जांघ पर रख दिया. आरती का दिल ज़ोर से धड़क रहा था, पहली बार जो कुछ जय के साथ हुआ उसे तोह वह शायद सुप्रिया के सर पर दाल दे, पर आज जो कुछ होने वाला था उसकी तोह वह hi जिम्मेदार होगी.

जय - आपको पता है मैं अपनी बात का पक्का हूँ... किसी को कुछ नहीं पता चलेगा... आप और मैं मजे करके अपने अपने रास्ते चले जाएंगे…

जय इंतज़ार कर रहा था की फिरसे पहल आरती hi करे. आरती थोड़ा सा सोचते हुए अपने हाथ मसल रही थी.

जय ने हलके से आरती के गाल पर हाथ फेरा, वह आरती के मैं में चल रही हलचल को अछि तरह परख चूका था. इस औरत को बस सेक्स नहीं चाहिए था, कुछ ऐसा चाहिए था को इसे कभी मिला न हो - इतना मत सोचिये... आज मुझे असली वाली आरती से मिलवा hi दीजिये... उस आरती से जिससे शायद भैया जी भी कभी मिले नहीं होंगे…

जय ने आरती का हाथ पकड़ा और अपनी जीन्स के ऊपर रख दिया. वहां आरती जय के उभरते हुए लुंड को महसूस कर पा रही थी. उसका सब्र का बाँध टूट रहा था और आखिर कार उसने जय की जीन्स के बटन और ज़िप को खोलना शुरू कर दिया.

आरती की उँगलियों ने झट से जय की जीन्स को खोल दिया और अंदर जय के जॉकी के अंडरवियर में उसका लुंड तना हुआ था, बहार निकलने को बेताब. आरती ने लुंड पर अंडरवियर के ऊपर से अपनी हथेली फेरी जिससे वह हरकत करने लगा.

जय गाडी चलते हुए विचलित सा हो रहा था - अह्ह्ह्ह.... ममममम....

जय अपनी सीट पर हल्का सा ऊपर उचका और उसने अपनी जीन्स और अंडरवियर को थोड़ा सा नीचे सरका दिया - ये लीजिये... अब अछि तरह से चलेगा आप हाथ...

34.gif


जय का लुंड खड़ा था और आरती अपना हाथ उस पर ऊपर से नीचे तक मसल रही थी, उसके हाथ जय की जाँघों के बीच के हिस्से में घुसते हुए जा रहे थे. उसके नाख़ून जैसे hi वहां चुभते जय एक मीठे से दर्द में एक सिसकी ले उठता. सच में आरती के पास एक अलग hi कला थी ये सब करने की. जय का रोम रोम उत्तेजित होता जा रहा था.

आरती उसकी शकल की और देखते हुए बोली - गाडी चला पाओगे न... एक्सीडेंट मत कर देना...

जय - आप फ़िक्र मत कीजिये... अह्ह्ह्हह.... बस आप इसका ध्यान रखिये...

आरती अपने दोनों हाथों से जय के बॉल्स को मसलने लगी, उसके हाथ अछि तरह से जय के लुंड की मालिश कर रहे थे. जय से तोह अपनी सीट पर सही से बैठा भी नहीं जा रहा था.

आरती ने अपना मुँह जय के जांघ पर रखते हुए उसके लुंड को पकड़ा. जय ने अपना एक हाथ स्टीयरिंग व्हील से हटाया और आरती का मुँह अपने लुंड के और पास धकेला. आरती के लिए ये पोजीशन थोड़ी सी उनकंफर्टबले थी, पर उसने अपनी जीब बहार निकाल ली और वह लेते लेते जय के लुंड पर अपनी जीब फेरने लगी.

जय - अघहहहह...... उफ्फ्फ... क्या चीज़ हो आप....

जय ने अपना एक हाथ आरती की गोरी पीठ पर रख दिया और अपनी उँगलियों को आरती के टाइट ब्लाउज में घुसाने की कोशिश करने लगा, उसकी पीठ को मसलते हुए. आरती की पीठ बेहद नरम थी और उसे सेक्स के दौरान अपनी पीठ मालिश करवाना बहुत ाचा लगता था. तोह वह भी हलके हलके सिसकने लगी.

आरती ने अपने होंठ जय के लुंड पर लगा दिए और उसे चूसने लगी. जय के लिए तोह क्या hi आनंद था की गाडी चलते हुए उसे इस सुख की अनुभूति हो रही थी.

ezgif-407dec456e2f7c.gif


जय अपना एक हाथ आरती की पीठ पर रखे हुए उसे अछि तरह जकड़े हुए था और बीच बीच में वह उसके बालों पर चूम लेता.

जय - आरटीईई..... आआह्ह्ह.... बहनचोद....

आरती जय के मुँह से गाली सुन कर और भी तेज़ी से लुंड को चूसने लगी. जय का सूपड़ा लगभग उसके पति जितना hi था और वह अपने पति का लुंड भी चूसती थी, पर आज तक उसने ऐसे चलती गाडी में किसी का लुंड नहीं चूसा था. गाडी तेज़ी से सड़क पर दौड़े जा रही थी, और काले शीशे होने के कारन बहार से अगर कोई अंदर देखने की कोशिश करता तोह उसे आरती ये सब करती हुई न दिखती.

जय ने एक्ससिटेड होते हुए स्टीयरिंग व्हील को कास के पकड़ लिया - उफ्फफ्फ्फ़….. सब यहीं मत निकल देना... अभी तोह हमे पूरा दिन साथ में बिताना है...

__________________________________________

सुप्रिया एक होटल के कमरे के बहार जीन्स टीशर्ट पहने कड़ी थी और उसने हलके से दरवाज़े पर नॉक किया. जैसे hi विक्रम ने दरवाज़ा खोला, सुप्रिया तेज़ी से उसकी और बाद कर उसके गले लग गयी. विक्रम ने भी उसे कास के पकड़ते हुए उसके गाल पर एक हल्का सा किश किया. सुप्रिया के आँखों थोड़ी सी गीली थी.

विक्रम ने उसका चेहरा पकड़ते हुए प्यार से पुछा - हैययय... क्या हुआ... रो क्यों रही हो...

सुप्रिया - बस ऐसे hi... आपको पता है न मैं कितनी इमोशनल हु... सॉरी मैंने आपके बारे में गलत सोचा... बस इतना सब कुछ हो गया था और...

विक्रम - It's ोकककक… इस बारे में मत सोचो अब... ी लव यू...

सुप्रिया - ी लव यू तू...

विक्रम ने सुप्रिया के होंठों पर एक किश किया - तुम्हारे बिना सब कुछ कितना अधूरा सा लग रहा था…

सुप्रिया - मुझे भी… मैं तोह डर hi गयी थी…

विक्रम का हाथ सुप्रिया की चीन पर था - कोई नहीं… थिस वास् ा टेस्ट फॉर आवर लव… इस सब के बाद मैं तुमसे दूर रहने के बारे में सोच भी नहीं सकता…

सुप्रिया - हम्म्म… पर अब आगे सब कैसे क्या करेंगे?

विक्रम - इसीलिए तोह मैंने तुम्हे यहाँ बुलाया है, हम लोग बैठ कर सब प्लान कर लेते है की कैसे क्या करना है...

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया - हाँ... वैसे आपको पता है न, मैंने उस दिन गुस्से में साहिल सर को मैसेज दाल कर बोल दिया था की मैं क्विट कर रही हूँ... शायद आपको साहिल सर या कृति ने बता दिया होगा…

विक्रम - हाँ, ी क्नोव. थोड़ा शॉकिंग था, पर मैंने बाद में सोचा तोह रीलीज़ किया की that’s गुड एक्चुअली. हमे अपने बीच की दूरी बदनी होगी…

सुप्रिया ने परेशान होते हुए विक्रम को देखा - मैं समझी नहीं?!!

विक्रम - मेरा मतलब है की दुनिया की नज़रो के सामने हमे अब एक दुसरे से बिलकुल दूर रहना होगा…

सुप्रिया - पर ऐसा क्यों?

विक्रम - ताकि जो हम करने जा रहे है, उसका किसी को बिलकुल भी शक न हो... ईशा मुझ पर नज़र रखे हुए है... हमे बहुत केयरफुल रहना होगा... किसी को भी कुछ पता नहीं चलना चाहिए...

सुप्रिया - आप ईशा से इतना डरते क्यों है… उस दिन भी आपने कहा था… आप उसे छोड़ क्यों नहीं देते…

विक्रम - मैं उससे नहीं डरता… और सिर्फ मेरी बात तोह मैं उसे कब का छोड़ देता, ट्रस्ट में. मुझे बस तुम्हारी फ़िक्र है… और मैं चाहता हूँ वह तुम्हारे बारे में सोचे भी न, इसी में हम दोनों की भलाई है.

सुप्रिया - पर वह ऐसा क्या कर सकती है?

विक्रम हस्ते हुए - सुप्रिया, तुम उसकी टेंशन मत लो, बूत प्लीज ट्रस्ट में ों थी. चलो आयो अंदर चल कर बात करते है.

सुप्रिया और विक्रम कमरे में अंदर आ गए और दोनों बीएड पर बैठ गए. विक्रम सुप्रिया के चेहरे पर आते हुए उसके बालों से खेलने लगा और अपने आगे का प्लान बताने लगा.

विक्रम - हाई लेवल, हमे अब काम से काम 2-3 हफ्तों तक एक दुसरे से बिलकुल दूर रहना होगा, फिर उसके बाद हम मस्जिद जाकर कन्वर्ट कर लेंगे... उसके बाद शादी और फिर फाइनली तुम यहाँ से लंदन के लिए रवाना हो जायेगी. मैं लगभग एक हफ्ते बाद वहां आ जायूँगा. Don't वोर्री वहां तुम्हारी हेल्प करने के लिए कोई होगा.

सुप्रिया - पर मैं अतुल को क्या बोलूंगी? क्या हमें उसे सब सच बता देना चाहिए?

विक्रम - ी थिंक सब हो जाने के बाद hi अतुल को सच बताना ठीक होगा, उससे पहले नहीं. सोचते है की ये कैसे हैंडल किया जाये.

सुप्रिया के मैं में बहुत सारे सवाल चल रहे थे, पर उसे विक्रम पर पूरा भरोसा था. विक्रम सब कुछ सोच समझ कर hi कर रहे होंगे.

सुप्रिया और विक्रम आगे की प्लानिंग करने में बिजी हो गए. इस बात से बिलकुल बेखबर की उनके साथ के कमरे में जय और आरती एक दुसरे से लिपटे हुए थे.

____________________________________________

कार से यहाँ तक का सफर इतना हसीं था, पूरे रास्ते आरती जय का लुंड चूसते हुए आयी थी. इस बार जय उसे एक बहुत hi अचे होटल में ले कर आया था. आज वह आरती को अचे से दिखाना चाहता था की उसमे कितना डैम था.

कमरे में घुसते hi वह आरती पर बुरी तरह टूट पड़ा था, और उसके गले और कंधे पर काटने लगा.

आरती - अह्ह्ह्ह.. आराम से... निशाँ पद जायेगा...

जय - पड़ने दीजिये आज ये निशाँ... ये आपको मेरी याद दिलाएंगी कुछ दिनों तक तोह...

जय ने अपना चेहरा आरती की छाती पर लगते हुए वहां चूमना शुरू कर दिया और फिर ब्लाउज के ऊपर से काटना भी.

aroopam-movie-hot-stills7.jpg


आरती का मसला गुदगुदा शरीर जय को बहुत ज्यादा एक्साइट कर रहा था. आरती के शरीर की हर जगह इतनी सॉफ्ट थी और उसे सब कुछ दबाने में बहुत मज़ा आ रहा था. कभी उसका हाथ आरती के मम्मो पर होता तोह कभी उसकी गांड पर.

जय आरती को दबोचे हुए कमरे में बीएड तक ले गया और उसे बीएड पर लिटा कर उसके शरीर से खेलने लगा. आरती उसके हर बाईट पर हलके हलके आहें ले रही थी.

तभी जय ने अपने जेब में एक ब्लू पिल निकली और उसे बिना पानी के hi जातक गया.

आरती - ारी... ये क्या ले लिए... तुम्हे इसकी जरूरत भी पड़ती है क्या...

जय ने आरती का चेहरे अग्ग्रेस्सिवेली पकड़ते हुए कहा - आज मैं आपके सामने कमज़ोर नहीं पड़ना चाहता उस दिन की तरह....

photo-6330294242957707566-y.jpg


आरती एक हल के लिए तो हिल सी गयी थी, पर साथ hi वह काफी रोमांचित सा महसूस कर रही थी. जय की आंखों में उसे जानवरो जैसी भूक दिख रही थी, और आज वह शायद उसके अंदर सालो से पनप रही ख़ुदक को मिटा देगा.

जय ने बीएड पर बैठते हुए आरती का हाथ पकड़ कर उसे बीएड से नीचे खड़ा कर दिया. और फिर अपने पेअर कड़ी हुई आरती के दोनों तरफ लगा दिए - मुझे पता है आपको क्या चाहिए... चलो आज सोच लो की मैं hi आपका पति हो... एक बहुत hi जल्लाद सा पति... तोह कैसे सेवा करोगी मेरी...

आरती ने रोले में आते हुए कहा - जैसे आप कहेंगे...

जय - और मैं अगर थोड़ा बदतमीज़ी से बात करो तोह? चलेगा आपको?

आरती ने अपनी गर्दन गोल घुमा दी - हाँ.... जैसा आप चाहे... आज तोह आप मेरे पति है न..

जय - बहुत अचे... चल अब जूते उतार मेरे..

आरती ने अपने हाथ जय के जूते पर रखे और उन्हें उतारने लगी. मैं में वह एहि सोच रही थी की आज तोह इसका रूप पूरी तरह बदला हुआ था. जूते उतरने के बाद उसने जय की जुराबे उतार दी और उसके पैरो को अपने हाथ से मसलने लगी.

जय हलके से मुस्कुरा रहा था, उसे मज़ा आ रहा था आरती को इस तरह अपनी पर्सनल रखैल बनाते हुए. आज आरती उसकी हर बात मैंने वाली थी.

जय ने ऊपर से अपनी शर्ट उतार दी. जैसे hi आरती अपना हाथ उसकी बेल्ट की तरफ लायी, जय उस पर गुर्राया - मैंने बोलै अभी पंत उतारने को.... चल कोई नहीं उतार दे...

आरती अपना हाथ जय की बेल्ट पर लायी और उसने उसकी बेल्ट खोल दी. और फिर वह जय की आँखों में देखने लगी, जैसे उसके अगले हुकुम का इंतज़ार कर रही हो.

जय - रुकी क्यों है... पंत उतार न...

आरती ने जल्दी से उसकी पंत नीचे उतार दी. जय सिर्फ अंडरवियर पहने हुए खड़ा हुआ और कमरे के दूसरी छोर पर जाकर खड़ा हो गया - चल अब घुटनो पर चल कर मेरे पास इधर आ...

आरती ने अपने हाथ कमरे की ज़मीन पर रखे और घुटनो के बल चलते हुए जय की तरफ जाने लगी. जय ने इस बीच अपना अंडरवियर उतार दिया. कार में वह अचे से आरती के मुँह को नहीं छोड़ पाया था, और वह कमी वह अब पूरी करने वाला था.

आरती रेंग कर जैसे hi उसके पास पहुंची जय ने अपने हाथ उसके सर पर फेरते हुए कहा - गुड गर्ल...

ezgif-2291e913397d1f.gif


जय ने थोड़ा सा आगे होते हुए अपना लुंड आरती के सर के ठीक ऊपर कर दिया - चल अब मुँह ऊपर कर और दिखा तू क्या कर सकती है..

आरती ने अपनी गर्दन ऊपर करके अपनी जीब अतुल के लुंड तक पहुंचने की कोशिश करि, पर वह थोड़ी सी दूर थी.

जय - क्या हुआ... नहीं पहुंच पा रही...

आरती - थोड़ा सा ऊपर उचक जायु?

जय हस्ते हुए - चल ठीक है... उचक जा...

आरती ने अपने हाथ ज़मीन से उठाये और अपना आगे का शरीर किसी जानवर की तरह ऊपर करते हुए अपना मुँह जय के तक पहुंचाया.

वह अपना हाथ जय के लुंड पर रखने hi वाली थी की जय बोलै - यह यह... छूना नहीं है मुझे... बिना हाथ लगाए चाट इसे...

आरती ने अपने हाथ पीछे खींच लिए और उसका मुँह आखिर जय के लुंड तक पहुंच गया था. जय का लुंड इधर उधर हिल रहा था और वह बिना पकडे उसे सही से मुँह में नहीं दाल पा रही थी. आखिर उसने अपना मुँह बड़ा सा खोला और एक झटके में पूरा लुंड अपने मुँह में ले लिया.

आरती हवा में झूलती हुई जय के लुंड को चूस रही थी - मममममम..... ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.....

जय ने अपने हाथ थोड़ी देर पीछे रखे पर फिर एक डैम से उसने आरती के बालों का गुच्छा बना कर अपने हाथ में पकड़ा और अपने लुंड को उसके मुँह में तेज़ तेज़ अंदर घुसाने लगा. जय का लुंड आरती के मुँह के हर कोने में जा रहा था. उसके अंदर के गालो पर तेज़ तेज़ लगता हुआ बहार की तरफ उभर आ रहा था.

आखिर कर आरती ने भी अपने आप को सहारा देने के लिए अपने हाथ जय के पैरो पर लगा दिए.

जय ने उसके गाल पर थप्पड़ लगाया - ये क्या किया तूने... मन किया था न की छूना नहीं है...

आरती का पूरा मुँह झनझना उठा था, और उसकी सांसें भरी. जय पूरी तरह उस पर हावी हो चूका था.

जय - चल इसकी पेनल्टी लगेगी अब.... अपना ब्लाउज उतार.... जल्दी...

आरती ने अपनी साड़ी का पल्लू नीचे फेका और जल्दी जल्दी अपने ब्लाउज के हुक खोलने लगी. जय पीछे से उसका ब्लाउज खींच रहा था, अगर वह और जल्दी न खोलती तोह शायद उसका ब्लाउज फैट hi जाता. हुक खुलते hi आरती का चिपका हुआ ब्लाउज उसके ऊपर से हैट गया और उसकी सफ़ेद ब्रा में वह जय के सामने थी.

जय - चल इसे भी खोल....

आरती ने अपने हाथ जल्दी से पीछे किये अपनी ब्रा खोलने के लिए, पर उससे ब्रा का हुक खुल hi नहीं रहा था.

जय फिर से गुर्राया - क्या हुआ... एक काम नहीं होता तुझसे ठीक से...

जय का हाथ आरती को मारने के लिए उठा hi था, की वह बोली - मैं कर रही हूँ... मारना नहीं आप....

आरती ने अपनी ब्रा ऊपर ने निकलते हुए उतार फेकि. जय ने आरती के होंठों पर अपनी उंगलियां रखते हुए उन्हें ज़ोर से दबा दिया.

जय - चल अब मेरा लुंड अपने मम्मो से सेहला दे....

आरती अपने घुटनो पर बैठी और ऊपर सीधे हो कर बैठ गयी. जय का लुंड उसकी गर्दन तक hi आ रहा था, उसे काफी उचकना पड़ेगा अपने मम्मी उसके लुंड तक पहुंचने के लिए.

जय - सोच क्या रही है... इंतज़ार कर रहा हूँ न...

आरती ने अपने घुटने थोड़े ऊपर उठाये और अपने बूब्स जय के लुंड तक पहुचाये. जय का कड़क लुंड उसके बूब्स से टकरा रहा था. लुंड का प्रेकम उसके बूब्स से लगते हुए उन्हें हल्का हल्का गीला कर रहा था.

आरती - मैं हाथ से पकड़ सकती हूँ क्या... ताकि मैं इसे अपने दूध के बीच में...

जय - चल ठीक है... पकड़ ले...

आरती ने जय का लुंड अपने हाथों में लिया और अपने बड़े बड़े मम्मो के बीच में घुसा दिया. जय का लुंड तोह इस सब से बस फूलता hi जा रहा था. आरती ने किसी तरह से अपने शरीर को जमीन से ऊपर नीचे करना शुरू किया.

आरती ने अपने हाथ से अपने बूब्स को दबाये एक साथ रखा ताकि जय का लुंड इधर उधर न फिसले. कुछ देर आरती धीरे धीरे जय के लुंड को अपने मम्मो के बीच में रगड़ती रही.

पर फिर जय से आरती की थोड़ी पर अपना हाथ लगाया और उसका मुँह ऊपर की और कर दिया. और अपने लुंड को तेज़ तेज़ उसके बूब्स के बीच में अंदर बहार करने लगा.

15481362.gif


जय का दूसरा हाथ आरती के बालों को पीछे से पकड़ा हुआ था और वह आवाज़ें निकलता हुआ उसके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से छोड़ रहा था.

जय - अह्ह्ह्ह... एहहहह... ufff.....saali....

आरती - ुह्ह्हहनननन.... ममममममम..... आईएईए....

पूरा कमरे उनकी आवाज़ों से गूँज रहा था. जय का लुंड पिल खाने की वजह से बुरी तरह अकड़ गया था और आरती को ऐसा लग रहा था की कहीं उसके बूब्स hi न छील जाये.

आरती - अह्ह्ह... सुनिये.... ahahh..ahhh.... सुनिए....

जय - बोल.....

आरती - मुझे बाथरूम जाना है....

जय - 2 मिनट रुक जा...

आरती - मुझसे रुका नहीं जा रहा....

जय - ुह्ह्हह्ह.... चल तुझे बाथरूम करयु....

जय ने आरती के बाल पकड़ते हुए उसे ऊपर उठाया, और अपने दुसरे हाथ से उसकी साड़ी को निकल दिया - बाथरूम में क्या ये पेटीकोट पेहेन कर जाएगी... उतार दे इसे यहाँ...

आरती ने अपने हाथों से पेटीकोट का नाडा खोला और पेटीकोट खुद hi नीचे गिर गया. अब वह एक मैचिंग सफ़ेद पंतय में जय के सामने कड़ी थी. जय की नज़रे उसकी मोती मोती जाँघों पर तिकी हुई थी.

आरती - मैं बाथरूम करके आती हूँ....

जय - चल मैं भी चलता हूँ...

आरती - आप क्या करेंगे बाथरूम में....

जय - तू क्या करेगी वहां....

आरती - मैं तोह...

जय - मुटेगी न... वहीँ देखूंगा वहां...

आरती एकदम काँप सी गयी, आजतक उसने ये करते हुए तोह किसी को नहीं दिखाया था, कितना गन्दा और अजीब लगेगा...

जय - चल घबरा मत... कुछ नहीं करूँगा... बस देखूंगा....

जय ने आरती की गांड पर एक थप्पड़ मारा और उसका हाथ पकड़ कर उसे बाथरूम की और ले गया.

_____________________________

साथ वाले कमरे में बैठे विक्रम और सुप्रिया अपना आगे का प्लान ऑलमोस्ट बना hi चुके थे. विक्रम काफी टायर्ड सा महसूस कर रहा था और वह अपना सर पकड़ते हुए बीएड पर पीछे की और गिर गया.

सुप्रिया - क्या हुआ... टायर्ड हो क्या??? या स्ट्रेस्ड?

विक्रम - हाँ बस थोड़ा सा स्ट्रेस्ड....

सुप्रिया - मैंने आपको काफी स्ट्रेस दे दी है न....

विक्रम - नहीं तुमने नहीं... बस इस ज़माने ने... दो प्यार करने वाले एक साथ अपनी ज़िन्दगी भी नहीं गुज़र सकते....

सुप्रिया भी विक्रम के हाथ पर अपना सर रख कर उसके बराबर में लेट गयी. सुप्रिया ने अपना हाथ विक्रम की छाती पर रखा और अपना मुँह भी उसके शरीर से चिपका लिया.

सुप्रिया - आप और भी हैंडसम लगते हो जब परेशान होते हो...

विक्रम मुस्कुराते हुए बोलै - तोह मुझे क्या हमेशा परेशान रहना चाहिए?

सुप्रिया - मैंने ऐसा तोह नहीं कहा...

विक्रम - यहाँ आयो तुम...

विक्रम ने अपना हाथ से सुप्रिया को अपने ऊपर धकेल दिया और सुप्रिया का चेहरा उसके चेहरे के ठीक ऊपर आ गया.

सुप्रिया ने अपनी आँखें बंद करि और हलके से झुक कर विक्रम को चूमा, और तुरंत hi अपने होंठ फिर ऊपर उठा लिए. विक्रम ने भी अपने हाथ सुप्रिया के बालों में सहलाते हुए उसके होंठों को अछि तरह से चूसने लगा. आज इस टीशर्ट जीन्स में तोह सुप्रिया बिलकुल कमल hi लग रही थी.

fdce60fde3be33c8e77e23dc098420a9.jpg


वह दोनों एक दुसरे को चूम hi रहे थे की उन्हें बराबर के कमरे से ज़ोर ज़ोर से आवाज़ें आने लगी, जैसे दो लोग एक दुसरे के साथ जैम कर सेक्स कर रहे हो. सुप्रिया और विक्रम ने एक दुसरे को देखा और खिलखिला के हसने लगे.

सुप्रिया - लगता है कोई......

विक्रम - हम्म्म्म....

सुप्रिया - क्या हम भी जब... करते है... तोह किसी को....

विक्रम - हम तोह शायद ऐसे नहीं करते की इतनी आवाज़ आये...

सुप्रिया शरमाते हुए बोली - ाचा... वह भूल गए आप... थाईलैंड में कैसे आपने...

विक्रम - अभी तोह बहुत कुछ बाकी है तुम्हे सीखना....

सुप्रिया - अब जो भी सीखना है... वह शादी के बाद hi सीखना... तब मैं किसी चीज़ के लिए मन नहीं करुँगी...

विक्रम की आँखों में एक चमक सी आ गयी - किसी भी चीज़ के लिए नहीं!!??

सुप्रिया धीरे से बोली - हाँ... बोलै तोह...

विक्रम - सोच लो....

सुप्रिया - सोच लिया....

विक्रम - हम्म्म... फिर तोह मुझे अभी से अपनी लिस्ट बता देनी चाहिए... या शायद नहीं... कहीं तुम दर न जायो...

सुप्रिया - हेहेहे... मुझे पता है आपके मैं में क्या hai...main डरने वाली नहीं हूँ...

विक्रम - ाचा... इतनी तोह छुई मुई सी हो... और वह तोह मुझे तुम में सबसे ज्यादा पसंद है... वैसे क्या है मेरे मैं है...

सुप्रिया ने अपना चेहरे विक्रम की छाती में छुपा लिया - मैं नहीं बता रही... बूत कुछ तोह है जो आप बार बार बोलते है...

विक्रम - मैंने तोह बार बार बस अस्स....

सुप्रिया ने विक्रम के कंधे पर एक ज़ोर के मारा उसे छुप करने के लिए - शह्ह्ह्ह.... मैं सच में डर जयुंगी... मत बोलिये....

विक्रम ने हस्ते हुए सुप्रिया को अचे से जकड लिया - मममम... ः... ठीक है.... उफ़ ये सर दर्द जाता hi नहीं...

सुप्रिया ने विक्रम की और देखा, उसके चेहरे पर काफी स्ट्रेस नज़र आ रहा था - आज आपका स्ट्रेस उतारने के लिए मैं कुछ कर सकती हूँ...

विक्रम - क्या?

सुप्रिया - आप बस आँख बंद करके लेते रहना.... आँखें नहीं खोलनी है आपको... पक्का?

विक्रम - पक्का!!

सुप्रिया बीएड पर सरक कर थोड़ा सा नीचे बैठ गयी और उसने धीरे धीरे विक्रम की पंत और अंडरवियर नीचे उतार दिया. विक्रम का लुंड अभी शांत बैठा हुआ था, इतना शांत तोह शायद सुप्रिया ने इसे कभी नहीं देखा था.

उसने लुंड को अपने कोमल कोमल हाथों से सहलाना शुरू किया, जिससे उसमें खून दौड़ना शुरू हो गया.

विक्रम आँखें बंद किये लेता हुआ हलके हलके कसमसा रहा था.

सुप्रिया अपने दोनों हाथों से उसके लुंड को मसलती हुई अछि तरह से उसके लुंड की मालिश कर रही थी. बराबर वाले रूम से आती हुई आवाज़ें उसे भी बेताब कर रही थी. उसने विक्रम के पूरे लुंड को सहलाते हुए उसके दो अंडो को हलके से दबाया, जिससे विक्रम की बड़ी सी आह निकल गयी.

सुप्रिया हस्ते हुए बोली - अब आप मत डरो… मैं कुछ ऐसा वैसा नहीं करुँगी…

विक्रम - कर लो ऐसा वैसा… मुझे भी तोह पता चला वैसा होता क्या है…

सुप्रिया बनावटी गुस्सा दिखते हुए बोली. - ाचा जी…

उसने इस बार विक्रम का लुंड ज़ोर के अपनी मुट्ठी में दबा दिया, पर विक्रम ने अपने ऊपर कण्ट्रोल रखते हुए उफ़ तक नहीं की.

सुप्रिया - दर्द दबा रहे हो न…

विक्रम - अब तोह आदत सी हो गयी है दर्द दबाने की… ममममम…

सुप्रिया ने विक्रम के डायलाग पर एक सर झटका और फिर से उसके लुंड को सहलाने लगा. विक्रम के लुंड अब पूरी तरह खड़ा हो चूका था. सुप्रिया ने सीधे उसे अपने मुँह में ले लिया और लोल्लिपोप की तरह चूसने लगी.

images.jpg


विक्रम मैं hi मैं सोच रहा था की कितना कुछ बाकी था सुप्रिया को सीखना. अब तक वह लुंड भी अचे से चूसना नहीं सीख पायी थी. बस एक बार वह यहाँ से निकल जाये उसके बाद वह पति पत्नी बन कर आराम से दूर कहीं रह पाएंगे.

सुप्रिया विक्रम के शांत चेहरे की और देखते हुए उसका लुंड पूरे फोकस से चूस रही थी, ऊपर से नीचे तक अछि तरह. अब तोह जैसे उसे लुंड चूसने की आदत सी पद गयी थी और उसे लगता था की वह ये काम बखूबी करती थी.

वह बस विक्रम का स्ट्रेस एक डैम काम करना चाहती थी. पिछले कुछ दिन इतने स्ट्रेस में गए थे की वह हसना भी भूल गयी थी. पर आज विक्रम के साथ बिताये ये पल इसे बहुत hi खुश कर रहे थे.

कितनी खुश थी वह अपने भविष्य को लेकर. पर उसे फिलहाल ये क्या पता था की बराबर वाले कमरे में उसकी भाभी जय से लिपटी हुई अपनी गांड खुदवा रही थी.
 
@खेमूचा आप सही कह रहे है, अगर कोई हेट है टुवर्ड्स Supriya’s करैक्टर तोह शायद वह मेरे द्वारा hi प्लांटेड है रीडर्स के मंद में बेस्ड ों हाउ थे करैक्टर वास् रिटेन. नॉट रेवेलिंग तू मच, बूत अस यू मई बे अवेयर, तेरे अरे करैक्टर ट्रोपेस इन अन्य स्टोरी एंड शी मय्बे फाल्स ईंटो थे ट्रोप ऑफ़ “तमंग ऑफ़ थे श्रेव”.

थैंक फॉर यू लिकिंग थे स्टोरी, एंड लिकिंग Aarti’s part. होवेवेर, डबल टेमिंग का तोह कोई प्लान नहीं है मेरा फिलहाल इस स्टोरी में.
 
अपडेट 72

जय आरती की नंगी गांड पर हलके हलके थप तपता हुआ उसके साथ बाथरूम के अंदर आ गया. वह बीच बीच में आरती की गांड पर चुटकी ले लेता और आरती दर्द से कराह उठती.

आरती ने पीछे पलट कर जय को देखा - जय... तुम बहार इंतज़ार कर लो न... ये कोई देखने की चीज़ थोड़ी न है...

जय - "तुम"!? आप बोल मुझे... पति हूँ न तेरा... और मियां बीवी के बीच क्या गुप्त काम... कर ले जो भी करने आयी है यहाँ... मैं कौन सा रोक रहा हूँ...

आरती सोचने लग गयी, उसने ये तोह कभी अपने असली पति के सामने भी नहीं किया था. कितना अजीब सा लगेगा जय के सामने ये करना, शायद वह कर भी न पाए. जय ने फिर से उसकी गांड पर ज़ोर का हाथ लगाया और उसे कमोड की तरफ इशारा किया.

आरती ने आगे बाद के अंग्रेजी टॉयलेट का कवर खोला और उस पर बैठ गयी. इस समय वह पूरी नंगी हो चुकी थी, और उसकी झांट के घने बाल जय को साफ़ साफ़ दिख रहे थे. जय को ठीक सामने देख उसे टॉयलेट भी नहीं आ रहा था.

जय ने उसे घूर कर देखा और कड़क आवाज़ में पुछा - घर पर अंग्रेजी टॉयलेट है या देसी?

आरती ने बेझिजक जवाब दिया - देसी...

जय - तोह ऐसे क्यों बैठी है... ऊपर पेअर करके बैठ न...

आरती - ारी... इसमें क्या दिक्कत है..

जय ने पास आ कर आरती का चेहरा पकड़ा - मुझसे बहस मत कर... और जैसा मैं बोल रहा हूँ वैसा कर...

आरती उसकी मंशा को समझ गयी - ाचा ठीक है... करती हूँ... पर पीछे तोह हटो...

आरती सिंक का सहारा लेते हुए कमोड पर पेअर ऊपर करके बैठने लगी. किसी तरह से उसने अपने पेअर चिकनी सी कमोड सीट पर जमाये, और अकड़ू हो कर बैठ गयी, उसकी गांड नीचे की और. जय को अब उसकी छूट का छेड़ साफ़ दिख रहा था.

संकोच के मारे आरती का पेशाब hi नहीं निकल रहा था. एक तोह गिरने का डर और दूसरा जय ठीक सामने खड़ा था.

जय - कर न अब... जो करने आयी थी... इंतज़ार किस बात का...

आरती ने उसे उल्टा जवाब दिया - जब आएगा तभी तोह करुँगी... ऐसे थोड़ी न...

जय - जबान मत लड़ा मुझसे... एक लगयूंगा न...

आरती उसकी और शरारत से देख कर बोली - फिर मैं भी चुप रहने वालो में से नहीं हूँ... तुम एक लगाओगे... तोह मैं दो...

जय समझ गया था की वह कितनी कोशिश कर ले इस औरत को उसकी मर्ज़ी के बिना दबा नहीं पायेगा - चल ठीक है... मैं तेरी पीठ मसलता हूँ....

जय उसके पास आकर खड़ा हो गया और आरती की नंगी पीठ को मसलने लगा, और फिर उसकी जांघो को, और हलके हलके आवाज़ें निकलने लगा.

जय - पुछःह..... स्स्सस्स्स्स...... स्स्स्सस्स्स्स..... पुछःह....

ये आवाज़ें सुन कर आरती से और रुका नहीं जा रहा था और कुछ hi सेकंड में उसका टॉयलेट एक धार से निकल गया. जय बहुत hi एक्ससिटेड होकर आरती को टॉयलेट करते हुए देखने लगा.

जय - लगता है ज्यादा पानी नहीं पिया आज?

आरती ने उसकी और देखा - शर्म तोह आ नहीं रही होगी न आपको... मुझसे ये सब करवा रहे हो....

जय - शर्म कैसी इसमें... तू मेरी लुगाई... और मैं तेरा खसम....

आरती का टॉयलेट अब बूँद बूँद करके टपक रहा था और वह बंद होते hi वह टॉयलेट सीट से उतर गयी. उसके पेअर बुरी तरह अकड़ गए थे ऐसी पोजीशन में बैठने से. वह सिंक में अपने हाथ धो hi रही थी, की जय भी वहीँ उसके ठीक सामने टॉयलेट करने लगा..

जैसे hi आरती ने जय के लुंड की और देखा, जय बोलै - ले... तू भी देख ले मुझे मोटे हुए... मैं कौनसा मन कर रहा हूँ...

आरती ने मुस्कुराते हुए अपना सर न में हिलाया, सच में बेशर्मी की हद्द hi हो गयी थी उन दोनों के बीच आज. जय ने अपने लुंड से पेशाब की बूंदो को नीचे झटका और फिर आरती की तरफ देखा.

जय - चल आजा... चूस ले फिर से...

आरती - अभी??? अभी तोह आपने किया है....

जय - तोह क्या हो गया... मुँह से साफ़ करदे अपने...

जय ने आरती के पास आते हुए उसके कंधे पर हाथ रख कर उसे नीचे घुटनो पर बिठाया. आरती भी बहुत hi आराम से नीचे हो गयी. जय ने फिर उसके बालों को ज़ोर से पकड़ कर अपना लुंड उसके मुँह में घुसा दिया.

आरती उसका गीला लुंड महसूस कर पा रही थी और उसे बदबू भी आ रही थी, पर जय उसका मुँह छोड़ नहीं रहा था, और उसने पीछे से उसे धकेलते हुए अपना लुंड उसके गले तक उतार दिया.

345.gif


आरती की हालत खराब थी, जय के अंदर शायद वह ब्लू पिल अब पूरी तरह काम कर रही थी और वह उसके मुँह को जैम के चोदे जा रहा था.

आरती - गगगगगगह्ह्हह्ह.... आह्ह्ह्हह....

जय - निकल ले आवाज़... यहाँ कौन है सुनने वाला...

आरती को बिलकुल भी सांस hi नहीं आ रहा था - ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह.... घपपपपप....

जय उसे छोड़ hi नहीं रहा था, कुछ 2-3 मिनट वह उसके मुँह को छोड़ता रहा. लुंड आरती के गले तक नीचे उतर गया था और जय उसे बहार निकलने नहीं दे रहा था. आरती के मुँह के अंदर वह अभी नहीं झड़ना चाहता था.

कुछ मिनट बाद वह आरती के बाल पकड़ कर उसे वापस बैडरूम में ले गया और उसे बीएड पर धकेल दिया. लुंड मुँह से बहार निकलते hi आरती ने गहरी सांस ली, जैसे उसकी जान में जान वापस आयी हो.

पर जय कहाँ उसे सांस ले कर आराम से बैठने देना वाला था. वह आरती के ठीक पीछे आया और उसकी पीठ पर हाथ रखते हुए उसने उसे बीएड पर घोड़ी की पोजीशन में बिठा दिया. और फिर उसने अपने दोनों हाथों से आरती के मम्मो को कुचलना शुरू किया.

आरती बीएड पर अपने घुटनो और हाथों के बल बैठी हुई थी और पीछे से जय उसके मोठे मोठे मम्मो को दबोच रहा था. आरती के अंदर भी गर्मी बढ़ती जा रही थी और वह अपने हिप्स को जय की और पीछे धकेल रही थी, पर अभी जय का लुंड उसके अंदर नहीं था. वह बहुत hi बेताब होते हुए अपने दांतों से अपने होंठों को काटने लगी.

ezgif-3b94c8db5a84b7.gif


आरती कराहते हुए बोली - जय.... अह्ह्ह्ह..... दाल दो न मेरी छूट में अपना लुंड....

जय - अभी इतनी क्या जल्दी है... दाल देंगे...

जय उसके निप्पल्स को ज़ोर ज़ोर से खींचने लगा जैसे उसका दूध बहार निकाल रहा हो. आरती दर्द के मारे बुरी तरह कराहने लगी. शायद उसकी एहि चीख थी जो सुप्रिया और विक्रम को बराबर वाले कमरे में सुनाई दी थी.

__________________________________

उधर दुसरे कमरे में सुप्रिया विक्रम का लुंड चूस रही थी, और बराबर के कमरे की वेह्शी आवाज़ें दोनों को hi पागल कर रही थी. सुप्रिया ने मैं में सोच रखा था की वह अब शादी से पहले कोई सेक्स वेक्स नहीं करेगी. जितना हो सके वह अब विक्रम को बेताब hi करके रखेगी ताकि बाद में उसकी तरफ से भी मिलान की उत्सुकता हो.

वह यह सोच hi रही थी की विक्रम बोल पड़ा - सुप्रिया... मेरे आँखें बंद है... पर तुम्हारे लिए थोड़ा अनफेयर नहीं है...

सुप्रिया - अनफेयर कैसे?

विक्रम - तुम मुझे सूचक करके मेरी टेंशन काम कर रही हो... तोह मुझे भी ये नहीं करना चाहिए?

सुप्रिया जल्दी से बोल पड़ी - नहीं... इतस ok... मुझे नहीं करवाना...

विक्रम - प्लीज न.... दोनों को मज़ा आएगा... एक साथ करेंगे...

सुप्रिया - मैंने बोलै न अब सब कुछ शादी के बाद hi होगा...

विक्रम - मैं कौनसा कुछ अपने लिए मांग रहा हूँ... बस तुम्हारे लिए.... प्लीज.... याद नहीं पिछली बार जब मैंने तुम्हे नीचे छटा था तोह तुम्हे कितना ाचा लगा था....

सुप्रिया - मुझे याद नहीं...

विक्रम - याद तोह करो... तुमने मेरे मुँह पर hi अपना पानी निकाल दिया था...

सुप्रिया के गाल शर्म से लाल हो गए और वह पिघलती hi जा रही थी, सच में उसे ाचा तोह बहुत लगा था - प्लीज मुझे याद मत दिलाया उसके बारे में... कितना गन्दा था वह...

विक्रम - मुझे तोह बहुत ाचा लगा था... और तुम्हे भी... नहीं तोह इतना पानी कैसे निकलता? के ों... ी प्रॉमिस... यू विल लव आईटी...

सुप्रिया - ाचा ठीक है... पर आप अपनी आईज क्लोज्ड hi रखनी पड़ेगी... अगर आपने आँखें खोली तोह मैं तभी सब कुछ रोक दूंगी... अगर मंजूर है तोह...

विक्रम - बिलकुल मंजूर है जी...

सुप्रिया विक्रम का लुंड अभी भी अपने हाथों से मसल रही थी - अब क्या करू?

विक्रम - पहले अपनी जीन्स और पंतय उतार के मेरी चेस्ट पर बैठ जायो...

सुप्रिया बीएड पर कड़ी हुई और अपनी जीन्स और पंतय उतारने लगी. उसकी नज़र विक्रम की आँखों पर hi थी. जैसे hi वह आँखें खोलेगा, सुप्रिया ये सारा खेल बंद कर देगी.

सुप्रिया - मैं अब जीन्स उतार रही हूँ... देखो ज़रा...

विक्रम के चेहरे पर एक मुस्कराहट थी पर उसने आँखें नहीं खोली.

सुप्रिया - अब मैंने अपनी फ्लोरल पंतय भी उतार दी... और मैंने नीचे शेव किया हुआ है... देखो तोह ज़रा विक्रम... आपका देखने का मैं नहीं है क्या?

विक्रम उसकी बातों में नहीं आने वाला था. सुप्रिया कुनमुना के रह गयी, उसने अपने नीचे के दोनों कपडे उतार दिए थे. वह धीरे से आकर विक्रम की नंगी छाती पर बैठ गयी. जैसे hi सुप्रिया की सॉफ्ट सी गांड विक्रम की छाती पर लगी, उसकी मुँह से एक बड़ी सी अह्हह्ह्ह्ह निकल गयी.

विक्रम ने अपना हाथ उसकी गांड पर लगते हुए महसूस किया - ारी मेरी तरफ नहीं... दूसरी तरफ मुँह करो...

सुप्रिया ने तुरंत hi विक्रम का हाथ दूर कर दिया - और कुछ नहीं छूना आपको...

विक्रम - ारी. मैं तोह बस बता रहा था की कैसे करना है... इतस कॉल्ड 69... तुम्हारा मुँह मेरे डिक पर और मेरा मुँह तुम्हारी पुसी पर... समझ गयी न...

सुप्रिया ने हलके से सर हिलाया, वह थोड़ा सा उठी और मुद कर बैठ गयी - पर अब मुझे कैसे दिखेगा की आपकी आँखें बंद है या खुली?

विक्रम - तुम्हारे ठीक सामने एक मिरर होगा, उसमें देख सकती हो...

सुप्रिया ने सामने देखा. विक्रम आँखें बंद होने के बावजूद बिलकुल सही कह रहा था. विक्रम ने पीछे से उसके हिप्स को पकड़ते हुए अपनी और सरकाया.

विक्रम - लेट जायो मेरे ऊपर... मेरे लुंड की तरफ...

सुप्रिया को उसके मुँह से लुंड शब्द सुन कर थोड़ा सा अजीब लगा, शायद पहली बार hi विक्रम ने ऐसा कुछ कहा था. विक्रम ने उसकी पीठ पर हलके से हाथ रख कर उसे थोड़ा नीचे झुकाया और अब सुप्रिया की छूट उसके होंठों के ठीक सामने थी. उसने अपनी आँखें अभी भी बंद राखी हुई थी पर वह फिर भी उसकी छूट की खुस्भू को सूंघ सकता था.

विक्रम ने हलकी सी जीब बहार निकाली और सुप्रिया की छूट के बहार एक गोला बनाते हुए छाता.

सुप्रिया बुरी तरह सिसक उठी - उउउउइइइइइइ.... ममममममम....

विक्रम - रेडी हो... तुम मेरा लो अपने मुँह में.... दोनों साथ में करेंगे... 1...2...3...

सुप्रिया ने भी अपनी आँखें बंद कर ली. उसका मुँह विक्रम के लुंड के ठीक सामने था पर विक्रम ने जैसे hi उसके नीचे जीब लगायी वह थोड़ा और झुक गयी और जैसे hi सुप्रिया ने अपनी जीब बहार निकाली उसे महसूस हुआ की वह विक्रम के अंडो को छात रही थी.

ezgif-3ecf3620e006c3.gif


विक्रम अपने हाथ सुप्रिया की पतली कमर पर फहराते हुए उसकी छूट को बहार से चाटने लगा. सुप्रिया भी उसके लुंड एंड बॉल्स को चाटने लगी. सुप्रिया को नीचे बहुत hi गुदगुदी महसूस हो रही थी पर विक्रम के मजबूत हाथ उसे कास के पकडे हुए थे.

विक्रम - अभी टाइमिंग सही नहीं बैठी... इस बार दोनों एक साथ अपने मुँह में ले लेंगे...

सुप्रिया ने घबराते हुए सर हिलाया और इस बार उसने अपना मुँह खोलते हुए विक्रम का लुंड अपने मुँह में ले लिया, और उसे पकड़े हुए चूसने लगी. विक्रम ने भी अपना मुँह खोल कर सुप्रिया की छूट को बहार से अचे से चूसना शुरू किया.

दोनों बुरी तरह एक दुसरे के लिंग को चूसने लगे. विक्रम ने हलके से अपना सर उठाया और वह अपनी जीब सुप्रिया की छूट के अंदर बहार करने लगा. उसे सुप्रिया का शुरुवाती पानी अपनी जीब पर महसूस होने लगा था.

Passionate-69-sex-blowjob-3.gif


_____________________________________________

वापस पहले कमरे में, जय आरती के पीछे लेता हुआ था और वह अभी भी आरती को तड़पते हुए उसके बूब्स से खेल रहा था. उसका कड़क लुंड आरती की गांड की रेखा के बीच में गढ़ता हुआ आरती को पागल करता जा रहा था.

आरती बुरी तरह बेचैन थी, और वह बस इंतज़ार कर रही थी की कब जय उसे तृप्त करेगा.

3891073601a0ec9526da.gif


आरती के काले काले बड़े बड़े निप्पल्स पकड़ने में जय को बहुत hi मज़ा आ रहा था.

आरती - जय.... जय.... दाल दो न अंदर.... और कितना तड़पाओगे...

जय समझ चूका था की आरती के अंदर की आग इतनी ज्यादा भड़क चुकी थी की अब उसे बुझाना ज़रूरी थी.

जय - तैयार हो न... बहुत बुरी तरह छोडूंगी आज...

आरती - कबकी तैयार हूँ... अह्ह्ह.....

जय ने अपनी एक टांग आरती की टांगो के बीच में घुसाई और उसकी टांग को हवा में थोड़ा ऊपर किया. और फिर अपने एक हाथ से आरती का एक हाथ अपनी और पीछे खींचा. हाथ खींचते hi आरती की बुरी तरह चीख निकल गयी.

उसी चीख के साथ जय ने अपना लुंड आरती की छूट के अंदर दे डाला और ज़ोर ज़ोर से उसकी छूट को बजने लगा.

आरती की चीखें तेज़ होती जा रही - उहहहजगहहह... ुह्ह्ह्णण.... मममममम.... आआह्ह्ह... अहहहहहहह... आआ.....

जय ने अपना दूसरा हाथ आरती के मुँह में घुसा दिया उसकी चीखें धीरे करने के लिए. जय उसे इतनी तेज़ छोड़ रहा था की आरती की आँखें ऊपर को चढ़ आयी थी.

ezgif-758ac4af6b13d8.gif


जय - ये ले साली... बहनचोद...... चुदाई चाहिए थी न तुझे.... आह्ह्ह्ह....

आरती - उनननननहहहहह.... गगगगग.... ुह्ह्हह्हह्ह्ह्ह....

जय - और तेज़ छोड़ू साली....

आरती - ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.... मममममम.....

जय उसे बुरी तरह चोदे जा रहा था. कुछ देर बाद अपना हाथ आरती के मुँह से निकला और पोजीशन बदलते हुए उसे अपने नीचे दबा लिया.

जय ने आरती के दोनों चुचो को अपने हाथों में पकड़ा और उन्हें खींचता हुआ तेज़ी से आरती की छूट में अंदर बहार करने लगा. आरती तोह अभी से पूरी गीली चुकी थी, और उसके पुरे जिस्म पर पसीने छूट रहे थे.

ezgif-41c559e9875b56.gif


आरती हाँफते हुए बोली - वहहह राजा.... और तेज़.... घोड़ी हु मैं तेरी... देर तक सवारी करियो मुझ पर....

जय - कुटिया है तू मेरी... घोड़ी नहीं... और मैं तुझे कुत्तो की तरह छोडूंगा आज....

जय फुल स्पीड में आरती को छोड़ता रहा. आरती शायद आज तक इतनी गन्दी तरह नहीं चूड़ी थी, और उसके अंदर के सारे अरमान जैसे पूरे हो रहे थे.

कुछ देर बाद जय ने अपना लुंड आरती की छूट से निकाल कर आरती की गांड में घुसा दिया. फिर से आरती की बुरी तरह चीख निकल गयी. आज तोह उसके तीनो छेड़ बुरी तरह चुद गए थे. उस दिन पहली बार जब उसकी गांड के अंदर लुंड गया था तोह उसे बहुत ज्यादा दर्द हुआ था, पर आज तोह बस मज़ा hi मज़ा था.

आरती ने तोह अपने आप को जय को पूरी तरह से सौंप दिया था और जय उसे बुरी तरह चोदे जा रहा था. आरती बीएड की चद्दर पकडे हुए निढाल सी पद गयी थी.

जय बीच बीच में उसकी गांड पीठ या मम्मो पर थप्पड़ मार कर उसे और बेहाल कर देता.

जय ने एक बार फिर से पोजीशन बदली और इस बार आरती को अपने ठीक सामने बिठाते हुए वह सामने से उसे छोड़ने लगा. बीच बीच में उसके होंठों को चूमते और काटते हुए.

167044-bhabi-movie.gif


उसका स्टैमिना चरम पर था और अगर आज आरती के साथ उसकी आखरी बारी थी तोह अपने मैं की पूरी करना चाहता था.

________________________________________________________

विक्रम और सुप्रिया एक दुसरे के लिंग को प्यार से चूसते हुए एक दुसरे को पूरा मजा दे रहे थे. दोनों की hi स्पीड तेज़ हो चुकी थी और सुप्रिया के बुरी तरह पसीने निकल रहे थे.

Passionate-69-sex-blowjob-4.gif


पता नहीं विक्रम का क्या हाल था पर उसका पानी तोह किसी भी पल निकल कर विक्रम को गीला कर सकता था. पर वह फिर भी पूरी शिद्दत से विक्रम के लुंड को चूस रही थी.

विक्रम भी ऐसा महसूस कर रहा था की जैसे उसकी साड़ी टेंशन ख़तम हो गयी हो. सुप्रिया की कोमल से जांघ और गांड महसूस करते हुए उसका लुंड और भी कड़क हो गया था और उसकी जीब सुप्रिया के अंदर तक जा रही थी.

वह शायद और भी कर लेता, पर तभी सुप्रिया का ढेर सारा पानी उसके होंठों के ऊपर निकल गया और वह उसे अचे से चाटने लगा. विक्रम ने भी अपना कण्ट्रोल खोते हुए अपना विरए तेज़ी से सुप्रिया के मुँह के अंदर निकाल दिया.

सुप्रिया एक डैम से घबरा सी गयी और वह जल्दी से विक्रम के ऊपर से हट गयी और सारा विरए बहार थूकने लगी.

सुप्रिया - ुह्ह्ह्ह.. थोऊ... थोऊ.. विक्रम... ये क्या किया आपने....

विक्रम तोह अभी भी अपने होंठ चाट रहा था - तुमने भी तोह अपना पानी मेरे मुँह पर निकाल दिया... बूत ी don't मंद...

सुप्रिया जल्दी से बाथरूम में घुसी और अपने मुँह के अंदर ऊँगली दाल कर सारा सफ़ेद माल बहार निकलने लगी. उसकी हिम्मत hi नहीं हुई की वह अपना मुँह सामने आईने में देख ले.

विक्रम मुस्कुराता हुआ बीएड पर लेता रहा. वह तोह एहि सोच रहा था की ये आखरी बार नहीं था जब वह सुप्रिया के मुँह के अंदर अपना माल निकलेगा. एक बार वह दोनों एक हो जाये तोह वह सुप्रिया को इसकी आदत भी लगा hi देगा. सुप्रिया की जगह कोई और होती तोह शायद वह उसे अपना पूरा पानी पिए बिना उठने भी न देता.

सुप्रिया थोड़ी देर बाद बाथरूम से बहार निकली, उसका चेहरा लाल पद गया था और वह एक तौलिये से अपनी जीब को रगड़ रही थी. वह बहार आते hi नाराज़ हो कर बोली - विक्रम आपने ये बिलकुल सही नहीं किया...

विक्रम - पर थैंक्स तो यू मेरा स्ट्रेस पूरा ख़तम हो गया...

सुप्रिया की बौहें अभी भी चढ़ी हुई थी.

विक्रम - चलो ी ऍम सॉरी.... बूत अब तोह शायद कुछ दिन हम एक दुसरे से दूर रहने वाले है न... तोह ये नाराज़गी क्यों?

सुप्रिया - नहीं.... नाराज़गी नहीं... बस ाचा नहीं लगा...

विक्रम - हे... भूलना नहीं... तुमने कहा था की लंदन जाकर जो मैं चाहूंगा वह करने डौगी...

सुप्रिया - ये भी करोगे क्या आप? मुँह में निकालना....

विक्रम - हाँ... और क्या...

सुप्रिया बनावटी गुस्से में बोली - तब तोह मुझे नहीं जाना लंदन....

विक्रम मुस्कुराते हुए बोलै - अब तुम पीछे नहीं हट सकती... अब तोह तुम्हे उठा के hi ले जायूँगा...

सुप्रिया मुस्कुराते हुए अपने कपडे पेहेन्ने लगी. शायद उसे इसकी भी आदत पद जाये, जैसे कितनी और चीज़ो की पड़ी है. वह बस विक्रम को ऐसे hi हमेशा ऐसे hi खुश देखना चाहती थी.

_____________________________________________

जय ने आरती की गांड के अंदर अपना लुंड घुसा रखा था, और वह तेज़ी से उसे अंदर बहार कर रहा था. आरती की गांड का छेड़ बहुत hi दर्द कर रहा था पर साथ hi उसे एक अलग सा नशा छाया हुआ था.

अब तक जय उसकी छूट में तोह झाड़ hi चूका था, और अब उसका माल उसकी गांड में भी निकल गया. जय ने अपना लुंड बहार निकला और वह अभी भी कड़क का कड़क खड़ा था.

आरती हाँफते हुए बोली - आईएईए.... उफ्फ्फ्फ़.. बहुत दर्द कर दिया...

जय - ले... मुँह में ले ले... चूसने से दर्द काम हो जायेगा....

आरती - जय... मैं और नहीं संभल पयूंगी तुम्हे... मैं हार मानती हूँ... माफ़ करो मुझे...

जय - ारी ये क्या यार... इतनी जल्दी कैसे हार मान सकती है तू....

आरती - इतनी जल्दी? 2 घंटे से लगे हुए मेरे ऊपर, अंदर, नीचे... हर तरह से तोह छोड़ चुके हो मुझे... अब क्या मेरी जान लोगे...

जय - बस एक राउंड और कर ले न...

आरती - अब बचा hi क्या है करने के लिए... उफ्फफ्फ्फ़.... मुझसे न हो पायेगा... मैं सच में हार मानती हूँ.... बस करो....

जय मुस्कुराते हुए बोलै - तोह आप सच में हार मानती है न आज...

आरती ने हाथ जोड़ लिया - जी हाँ... तुम्हारे सामने मैं हार गयी...

आरती बीएड के सिरहाने पर तक लगा के लेट गयी, उसका पूरा बदन पसीने में बुरी तरह भीगा हुआ था और फिर से जय ने उसे अपने सफ़ेद रंग में रंग दिया था. जय अपने पेअर छोड़े करके आरती के ऊपर आ गया और अपना सर उसकी छाती पर रख कर उसके मम्मो को चूसने लगा.

आरती उसके बालों को हलके हलके प्यार से सेहला रही थी. सब हो जाने के बाद वह शायद वापस सुप्रिया के बारे में सोचने लगी थी.

आरती - जय... हटो न...

जय - करने दो न... आज शायद हमारा आखरी बार है... ये मम्मी मुझे फिर कहाँ मिलेंगे चूसने के लिए...

आरती - ओफ्फो.... सबके एक जैसे hi होते है... तुमने hi कहा था न...

जय मुस्कुरा के बोलै - आपके अलग है बिलकुल...

आरती - जय... ाचा जब तक ये सब कर रहे हो... एक सवाल था तुम्हारे लिए...

जय - पूछो मेरी जान....

आरती - तुम्हारा दोस्त विक्रम.... वह कह रहा था वह सुप्रिया से प्यार करता है... तुम मुझे सच बताया... वह कोई खेल कर रहा है या...

जय ने आरती के बूब्स से मुँह हटते हुए उसकी और देखा - और मैं जो कहूंगा मेरी बात मान लोगी?

आरती - कोशिश तोह करुँगी... मुझे नहीं लगता तुम झूठ बोलोगे...

जय ने उसकी आँखों में देखा - ये तोह सही पकड़ा आपने मुझे... झूठ नहीं बोलता मैं... कई बार बस सच भी नहीं बोलता...

आरती - बताया न... वह सच्चा प्यार करता है सुप्रिया से या...

जय - मैंने बताया तोह था... इतना गंभीर तोह मैंने उसे कभी नहीं देखा... मुझे तोह लगता है वह सुप्रिया से सच में प्यार करता है...

आरती - तुम कैसे कह सकते हो ये....

जय - क्यूंकि आप पूछ रही हो.... पर मजाक अपनी जगह है और सच अपनी जगह... ये सब करने से उसे कोई फायदा तोह नहीं होगा पर काफी नुक्सान हो सकता है... तोह मुझे नहीं लगता वह कोई खेल कर रहा है... वह ऐसा इंसान नहीं है...

आरती हस्ते हुए बोली - ये सही है... दो लड़की बाज दोस्त और दोनों बिलकुल सच्चे...

जय आँख मारते हुए बोलै - लड़की बाज तोह एक hi दोस्त है... और वह आपके सामने है...

जय फिर से आरती के ऊपर लेट गया और उसे हर जगह चूमने लगा.

आरती - मुझे अब चलना चाहिए... सुप्रिया भी घर आती hi होगी...

जय - हम्म्म... जाना जरूरी है क्या... आपके बिना मैं कैसे लगेगा...

आरती - तुम कभी आयो झाँसी तोह.... (आरती ने उसकी आँखों में देखा) तोह.. मुझे मैसेज मत करना... मैं नहीं मिलने वाली...

जय - उफ्फ्फ्फ़... कितना तड़पती हो आप भी... भाभी ननद दोनों एक जैसी...

आरती बनावटी गुस्सा करते हुए बोली - और सुप्रिया की तरफ आँख भी उठा के मत देखना अब... समझ गए न....

जय - जैसा आप हुकुम करे...

कुछ देर वह दोनों एक दुसरे की बाँहों में लेते हुए एक दुसरे को चूमते रहे और फिर आरती अपने कपडे पेहेन कर तैयार होने लगी. 2 बार जय से मिलकर उसने न जाने क्या क्या कर लिया था उसके साथ. उसे शायद ये 2 मुलाकाते हमेशा याद रहने वाली थी.

जय और आरती थोड़ी देर बाद कमरे से बहार निकले, जय आरती को घर के पास छोड़ने जा रहा था. जैसे hi वह गैलरी में आयी गैलरी में अपने से दूर जाती हुई एक लड़की दिखी, जो पीछे से हूबहू सुप्रिया जैसी लग रही थी. हूबहू क्या ये तोह सुप्रिया hi थी.

आरती तुरंत से जय को कमरे में धकेलती हुई वापस अंदर घुस गयी.

जय - क्या हुआ आरती जी... मैं नहीं भरा क्या अभी?

आरती ने अपने होंठों पर ऊँगली लगते हुए उसे चुप रहने का इशारा किया. पता नहीं सुप्रिया ने उसे वहां देखा था या नहीं. उसका दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था.

बहार से कुछ आवाज़ें आयी, सुप्रिया - मैंने अभी यहाँ किसी की आवाज़ सुनी थी... ऐसा लगा जैसे आरती भाभी....

विक्रम - वह यहाँ क्यों होंगी? तुम्हे कुछ और सुनाई दिया होगा.. चलो... लेटस जो डौन्स्टैर्स...

अंदर कमरे में जय आरती को कसके पकडे हुए था और उसके गले लग कर उसकी गर्दन को चूम रहा था. ये आखरी मौका वह कैसे छोड़ देता. आरती के लिए अभी कमरे से बहार निकलना खतरे से खली नहीं था, और वह कुछ देर और जय के साथ वहीँ रुक गयी. शायद किस्मत उन्हें अलग hi नहीं होने दे रही थी.
 
अपडेट 73

पिछले तीन हफ्तों से सुप्रिया घर पर काफी अकेला सा महसूस कर रही थी. भाभी को गए हुए दो ढाई हफ्ते हो चुके थे और उसने अपनी जॉब भी उससे पहले से hi छोड़ी दी थी. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की जैसे वह फिर से एक हाउसवाइफ बन गयी हो. सुबह उठो, अतुल के लिए चाय नाश्ता बनाया, फिर उसका लंच पैक करो, कपडे धोने लगाया, घर में चीज़े सही जगह पर रखो, करुणा की बक बक सुनो, कपड़ो को इस्त्री के लिए भेजो, दिन में थोड़ी देर सो जायो, और फिर शाम होते होते अतुल का इंतज़ार करो.

सब कुछ कितना बोरिंग सा हो गया था. पूरा दिन काटना hi मुश्किल हो जाता. बस कभी कभी कृति उसे कॉल कर लिया करती थी, अपनी पुराणी दोस्त से बात करने के लिए. जैसे विक्रम और सुप्रिया चाहते थे, कृति को एहि लगता था की विक्रम और सुप्रिया अब साथ नहीं थे. उसे कारन तोह अचे से शायद समझ नहीं आया था, पर न hi सुप्रिया उस बारे में बात करती और न hi कृति उसे इसके लिए कुरेदती. बस दोनों के बीच ऐसे hi थोड़ी गपशप और ऑफिस की गॉसिप हो जाती.

भाभी के जाने के बाद सुप्रिया और अतुल भी फिर से रूम मातेस की तरह रहने लगे थे, अलग अलग कमरों में सोना, और अपने काम से मतलब रखना. वैसे भी सुप्रिया को ऐसा लगता था की उन दोनों को hi अपना सही जीवन साथी मिल गया है. बस शायद कुछ hi दिनों की बात थी अब जब वह दोनों अपने रास्ते हो लेंगे.

जाने से पहले 2-3 दिनों में भाभी का उसके प्रति रवैया थोड़ा बदल गया था. उनके बीच जो इतनी कहा सुनी हुई थी, उसे भूलते हुए आरती ने फिर से सुप्रिया पर अपना प्यार hi उड़ेला था. उसके पसंद की खाने की चीज़े बनाना, उसके बालों में प्यार से हाथ फेरना. बस ज्यादा बात नहीं हुई उनके बीच. भाभी जाते जाते भी उसके गले लग का फुट फुट कर रोई थी, जैसे वह सुप्रिया से आखरी बार मिल रही हो.

इस बीच विक्रम ने कन्वर्शन की कागज़ी करवाई भी शुरू कर दी थी. सुप्रिया को पता नहीं था की ये इतना आसान काम नहीं था की बस गए और हो गया. पर उसने ये सब विक्रम के पास hi छोड़ा हुआ था. बस अब कुछ hi दिनों में उसे कहीं जा कर इस काम को पूरा करना होगा.

सुप्रिया इस लम्बे से इंतज़ार में लंदन की फोटोज देख कर अपना मैं बेहला लेती. कितनी प्यारी सी जगह थी जहाँ वह रहने वाली थी. एक दो मंजिला घर, उसके पीछे एक छोटा सा आँगन, जिसमे एक बीएड लगा हुआ था. वहां के लोग कितने अचे से कपडे पेहेनते थे, वह वहां आज़ाद होगी अपनी मैं मर्ज़ी करने के लिए. विक्रम ने उसे बताया था की वहां वह सुप्रिया की जॉब भी लगवा देगा, जिससे वह अपना टाइम पास कर पाए.

कितना अजीब सा लग रहा था इस सब के बारे में सोचते हुए भी. वह अपनी पुराणी जिंदगी छोड़ कर एक नयी जिंदगी में दाखिल होने hi वाली थी.

सुप्रिया बैठे हुए एहि सब सोच रही थी की उसके फ़ोन पर एक कॉल आने लगी. सुप्रिया ने फ़ोन उठा कर देखा तोह उसकी बौहें थोड़ी सी ऊपर चढ़ गयी. राहुल… वह क्यों उसे कॉल कर रहा था? सुप्रिया ने कॉल नहीं उठायी तोह उसकी कॉल एक बार फिरसे आने लगी.

न चाहते हुए भी सुप्रिया ने ये दूसरी कॉल उठा ली - Hello…

राहुल ने सॉफ्ट सी आवाज़ में कहा - Hello… सुप्रिया… कैसी हो तुम…

सुप्रिया - मैं ठीक हु…

सुप्रिया ने ये ढोंग भी नहीं किया की वह पूछ ले की राहुल कैसा है. उसे राहुल से कोई भी मतलब नहीं था.

राहुल ek-do सेकंड रुका जैसे वेट कर रहा हूँ सुप्रिया के कुछ और कहने का - तुम फ़ोन नहीं उठा रही थी न… तोह मुझे लगा…

सुप्रिया ने इर्रिटेट होते हुए कहा - किसी काम से फ़ोन किया था?

राहुल - हाँ वह… मुझे तुमसे मिलना था…

सुप्रिया - मुझसे?? क्यों? मुझे तुमसे नहीं मिलना…

राहुल - प्लीज सुप्रिया… बहुत ज़रूरी काम है.. बस थोड़ी देर… मैं वहां आ जाता हूँ…

सुप्रिया - नहीं!! यहाँ आने की जरूरत नहीं है… जो है वह फ़ोन पर बोलो…

राहुल - ये बात फ़ोन पर करनी ठीक नहीं होगी…

सुप्रिया - मुझे नहीं मिलना तुमसे राहुल और न hi कोई बात करनी, तुम्हे समझ क्यों नहीं आता ये… तुम मुझे परेशान करोगे तोह मैं कृति से इस बारे में बात करने से पीछे नहीं हटूंगी…

राहुल - कर लो उससे बात… मुझे फरक नहीं पड़ता अब… ऐसा लगता है जैसे वह दोनों भाई बेहेन हमारे बीच आ गए थे… पर अब…

सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था राहुल ऐसी बातें क्यों कर रहा है.

राहुल - मुझे पता चला तुम्हारे और विक्रम के बारे में…

सुप्रिया अब उसके कॉल करने के कारन को समझी - ओह…

राहुल - उस कमीने ने तुम्हारा इस्तेमाल करके तुम्हे छोड़ दिया… बास्टर्ड…

सुप्रिया ने सोचा की एक तरह से ाचा hi था की राहुल को भी एहि लगता था की वह और विक्रम अब एक साथ नहीं थे.

सुप्रिया - हम्म्म…

राहुल - मुझे पहले hi बता था की वह किस तरह का आदमी है… मैंने तुम्हे समझाया भी था…

सुप्रिया - हम्म्म… हाँ शायद मैं hi नहीं समझी पायी विक्रम को…

राहुल - सुप्रिया, तुम्हे उसके बारे में पता नहीं है, मैंने धीरे धीरे करके उसकी साड़ी कुंडली निकाल ली है.. वह और उसका हरामी दोस्त जय, दोनों एक नंबर के कमीने है.. ाचा हुआ तुम उसके चंगुल से निकल गयी…

सुप्रिया का बिलकुल मैं नहीं था राहुल की ये सब बातें सुनने का - हम्म्म… थैंक्स… मैं रखती हूँ अब… मेरा मूड नहीं है बात करने का…

राहुल - मैं समझ सकता हूँ तुम पर क्या बीत रही होगी… मैं भी इसी सब से झूझ रहा हूँ…

सुप्रिया - क्यों? तुम्हारे और कृति के बीच तोह सब ठीक hi है न…

राहुल - पर कृति उस हरामज़ादे की hi तोह बेहेन है न…

सुप्रिया अब ध्यान से उसकी बात को समझने की कोशिश करने लगी - इसमें कृति की क्या गलती है… कृति तोह बहुत hi अछि लड़की है.. जो कुछ विक्रम ने किया उससे कृति का कोई लेना देना नहीं है…

राहुल कुछ पल रुका और बोलै - सुप्रिया… मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी थी… मुझे तुम्हारा साथ नहीं छोड़ना चाहिए था…

सुप्रिया एक डैम हक्की बक्की रह गयी की राहुल ये क्या कह रहा था - क्या मतलब?

राहुल - मैं तुमसे बहुत प्यार करता था, बस हमारे बीच थोड़ी सी मिसुन्दरस्टण्डींग हो गयी थी. और फिर तुमने भी तोह मुझे एक बार भी नहीं रोका… सीधे विक्रम की बाँहों में पहुंच गयी तुम…

सुप्रिया को गुस्सा आना शुरू हो गया था की जो कुछ उनके बीच हुआ उसका सारा दोष राहुल उसके सर पर दाल रहा था - तुम्हे पता भी है तुम क्या बोल रहे हो… मैं तुमसे प्यार करने लगी थी और तुमने मुझे छोड़ने में एक पल भी नहीं लगाया. क्या था तुमने उस टाइम की मैं कृति के आगे कुछ नहीं हूँ?

राहुल - मुझसे शायद एक छोटी सी गलती हो गयी थी. उस टाइम मुझे लगा तुम्हे बस वह चाहिए था जो तुम्हे अतुल नहीं दे पा रहा था… और मैं अपनी लाइफ में अपना हमसफ़र ढून्ढ रहा था..

सुप्रिया भड़कते हुए बोली - तुम्हे कुछ याद भी है!!! मैं तुम्हारे साथ भाग कर जाने को भी तैयार हो गयी थी!! और तुम मुझे कह रहे हो की मैं तुम्हारे साथ सिर्फ सेक्स के लिए… छीटे…..

राहुल - सुप्रिया… इसीलिए तोह मैं तुमसे मिलकर सब क्लियर करना चाहता था… मुझे लगा था की अपने hi दोस्त की पत्नी को भगा के ले जाने में हम दोनों की बहुत बदनामी होगी.. मैं डर गया था…

सुप्रिया - और दोस्त की पत्नी के साथ सेक्स करने से डर नहीं लगा था…

राहुल - मुझे माफ़ कर दो… अब तोह मैं बस इतना hi कह सकता हूँ..

सुप्रिया - अब क्या ऐसा हो गया? वही हालत है… वही ज़माना है… अब क्या चाहते हो तुम मुझसे…

राहुल - सुप्रिया… मैं चाहता हूँ… हम दोनों फिर से…

सुप्रिया - ाचा! अब समझी! जैसे hi तुम्हे पता चला की विक्रम और मैं साथ नहीं है तोह तुम मुझ पर दया आ गयी. ओह बेचारी सुप्रिया अब कैसी अपनी रातें अकेले काटेगी.. मैं उसकी मदद कर देता हूँ.. है न…

राहुल - नहीं नहीं… मैंने ऐसा बिलकुल नहीं सोचा… मेरा डैम घुटता है कृति के साथ… उसके हिसाब से सब चीज़े करना… उसकी बक बक सुनते रहना… वह तुम्हारे आगे कुछ नहीं है… मैं अब समझ गया हूँ की तुम और मैं एक दुसरे के लिए बने है… और शायद हमे ये एक और मौका मिला है सब ठीक करने के लिए… इस बार मैं पीछे नहीं हटूंगा…

सुप्रिया - ये साड़ी बातें शायद मैं एक साल पहले मान लेती पर मुझे पता है तुम किस तरह के इंसान हो… मुझे तोह हैरानी है की कृति कैसे नहीं देख पायी है ये अब तक… मैं फ़ोन रख रही हु… आइंदा मुझे कॉल मत करना…

राहुल बोल hi रहा था - सुप्रिया सुनो…

पर सुप्रिया ने बीच में कॉल ख़तम कर दी. उसे बहुत तेज़ गुस्सा आ रहा था. राहुल ने उसे कॉल करके ये सब बोलने की हिम्मत भी कैसे की. वह गुस्से में अपना फ़ोन पकडे बैठी hi थी की तभी उसके फ़ोन पर एक मैसेज आया और फिर दूसरा और फिर तीसरा. सुप्रिया बिना देखे hi समझ गयी थी की ये राहुल का hi मैसेज होगा.

उसने फ़ोन की और देखा तोह उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी. राहुल ने उसे कुछ फोटोज भेजी थी! इन फोटोज में वह माइक का लुंड चूस रही थी. सुप्रिया का मुँह खुला का खुला रह गया, और उसका दिमाग बुरी तरह घूम गया.

राहुल का कॉल फिरसे उसके फ़ोन पर आने लगा. सुप्रिया का तोह जैसे हाथ hi काम करना बंद हो गया था, पर उसने किसी तरह से कॉल उठाया.

राहुल की आवाज़ अब थोड़ी बदली हुई थी - सुप्रिया.. मैंने कहा था न की मिल कर बात लेते है… मैं ये फोटो नहीं भेजना चाहता था तुम्हे….

सुप्रिया - ये… तुम्हारे पास… कैसे?

राहुल - तुम्हे क्या लगता है बस तुम्हारे पास hi कुछ राज़ है? पर सुनो मैंने तुम्हे ये फोटोज ब्लैकमेल करने के लिए नहीं भेजी है… मैं तुमसे सच में प्यार करता हूँ…

सुप्रिया कुछ बोलने की हालत में hi नहीं थी. ये तोह उसका सबसे गहरा राज़ था जो पता नहीं कैसे राहुल के हाथ में था.

राहुल - मुझे फरक नहीं पड़ता तुमने किस किस का लुंड चूसा है… माइक का, विक्रम का, शायद जय का भी? वैसे काफी अचे से चूसना आ गया है तुम्हे…

सुप्रिया गुर्राई - शट उप!

राहुल - ारी… मैं तोह बस तारीफ कर रहा था…

सुप्रिया - ये फोटोज? माइक ने खींची ये? मेरी मर्ज़ी के बिना? तुम्हे पता है न ये सब गैर कानूनी है…

राहुल - गैर कानूनी तोह बहुत कुछ है मैडम… पर चलो इतना बता देता हूँ की माइक को तोह खबर भी नहीं है की ये वीडियो बानी थी… बाकि सब बताता हूँ… जब मिलोगी….

सुप्रिया - मैं नहीं मिलने वाली… तुम्हे जो करना है कर लो…

राहुल - सोच लो…

सुप्रिया - सोच लिया… तुम मुझे नहीं डरा सकते…

राहुल - मैं इंटरनेट पर दाल दूंगा ये वीडियो और सबको भेज दूंगा. तब देखते है दरोगी या नहीं…

सुप्रिया गुस्से में अपने दांत पीस कर रह गयी.

राहुल - देखो… मैं झूठ नहीं कह रहा.. मैं अभी भी तुम्हारा साथ चाहता हूँ… तुम विक्रम की रखैल बनने को तैयार थी… तोह मेरी माशूका बनने में क्या दिक्कत है….

सुप्रिया बिलकुल चुप रही, उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था.

राहुल - बेफिक्र रहो, मैं किसी को नहीं भेज रहा ये वीडियो… मुझे पता है तुम्हारे लिए काफी शॉकिंग होगा, तोह मैं तुम्हे कुछ टाइम देता हूँ सोचने के लिए. मैं हफ्ते के एन्ड में कॉल करता हूँ. पर उससे पहले तुम्हारा hi कॉल आ जाये तोह बेहतर होगा. ी लव यू….

राहुल ने फ़ोन रख दिया और सुप्रिया बस बुरी तरह शॉकेड थी. राहुल उसे ब्लैकमेल hi तोह कर रहा था. उसकी छाती तेज़ सांसें लेते हुए ऊपर नीचे हो रही थी. सुप्रिया के दिमाग में बहुत सी बातें दौड़ रही थी, जो हुआ उसके बारे में और जो हो सकता था उसके बारे में.

सुप्रिया गुस्से में अपना फ़ोन फैकने को हुई थी, पर एक डैम से रुक गयी. वह राहुल की धमकी में नहीं आने वाली थी. उसे कुछ न कुछ करना hi होगा. क्या वह विक्रम से बात करे और उसे सब सच बता दे? नहीं… नहीं… इतनी मुश्किल से तोह उनके बीच की साड़ी ग़लतफहमी दूर हुई थी, और अब अगर ये बात सामने आ गयी, माइक और राहुल दोनों के बारे में, तोह कहीं वह उसे छोड़ hi न दे…

तोह फिर वह क्या करे? इस तरह से राहुल के आगे दबने के लिए वह बिलकुल भी तैयार नहीं थी. पर उसे को कुछ करना था वह जल्दी से जल्दी करना पड़ेगा. सुप्रिया काफी देर तक परेशान होते हुए इस समस्या का कोई समाधान ढूढ़ने में लगी रही. पर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था.

शाम को अतुल भी घर आ गया और सुप्रिया खोयी खोयी रात का खाना और बाकी काम निपटने लगी. अतुल ने भी गौर किया की वह आज वह कुछ ज्यादा hi परेशान है.

अतुल - सब ठीक तोह है… परेशान सी लग रही हो…

सुप्रिया - हाँ… वह… बस… ऐसे hi घर में बोर हो जाती हूँ…

अतुल - मैंने तोह कहा था जॉब मत छोडो… पर चलो कोई नहीं… कुछ दिन कहीं बहार घूमने चले? तुम्हारा मूड शायद ठीक हो जाये…

अतुल के मुँह से ये सुन कर सुप्रिया थोड़ी हैरान सी हुई, पर वह अपनी सोच में इतनी खोयी हुई थी की उसने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया - हम्म्म हाँ चल सकते है…

अतुल - कहाँ जाना पसंद करोगी? किसी हिल स्टेशन या बीच या कोई और शहर?

सुप्रिया - कहीं भी… जहाँ आप चाहो…

अतुल - ठीक है… मैं पता करके बुक करता हूँ… वैसे भाभी ने कुछ कहा था क्या तुमसे?

सुप्रिया - किस बारे में?

अतुल - किसी भी बारे में… हमारे बारे में?

सुप्रिया - हम्म्म… कुछ तोह कहा था.. पर मुझे ाचा नहीं लगा, आपको खुद कह देना चाहिए था जो भी कहना था…

अतुल - मैं…. मुझे बस समझ hi नहीं आ रहा था कैसे क्या कहु… थोड़ा घबराहट भी थी…

सुप्रिया ने अतुल की और घूर कर देखा - आपको मुझसे बात करने में घबराहट होती है?

अतुल - नहीं मेरा वह मतलब नहीं था…

सुप्रिया - फिर किस से बात करने में घबराहट नहीं होती?

अतुल - मैं कुछ समझा नहीं…

सुप्रिया - कुछ नहीं… बस आजकल आप फ़ोन पर बहुत ज्यादा लगे रहते हो… किस से बात करते रहते हो…

अतुल झेपते हुए बोलै - वह तोह बस ऐसे hi… किसी से ने…

सुप्रिया ने बात को आगे नहीं खींचा और डिनर करने के बाद वह बीएड में लेती हुई फिर से इस नयी समस्या का हल सोचने में लग गयी. पर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था. पता नहीं उसे कब नींद आ गयी और फिर सुबह उठते hi उसके दिमाग में एक समाधान आ गया था. पर इसके लिए उसे किसी की मदद चाहिए होगी.

अतुल के ऑफिस जाने के बाद सुप्रिया ने एक बार फिर सोचा इस बारे में पर उसे और कोई रास्ता नहीं दिखा. सुप्रिया ने अपना फ़ोन उठाया और एक मैसेज दाल दिया - इक़बाल… आप थोड़ी देर ऊपर आ सकते हो क्या?

कुछ hi पल बाद इक़बाल का मैसेज आ गया - जी मैडमजी…

सुप्रिया दरवाज़े के पास खड़े हो कर उसका बेसब्री से इंतज़ार करने लगी. और जैसे hi घर के दरवाज़े पर खटखट हुई, उसने तुरंत hi उसे खोल दिया. सुप्रिया एक साड़ी पहने हुई थी और हमेशा की तरह बहुत hi सुन्दर लग रही थी. इक़बाल कोशिश कर रहा था की वह सुप्रिया के बदन को घूर कर न देखे, पर वह थी hi एंटी सुन्दर की उसकी निगाहें उसकी कमर और बूब्स तक चली गयी. शायद सुप्रिया ने भी इक़बाल को अपनी और देखते हुए पाया था पर उसने इग्नोर कर दिया. आखिर उसे इक़बाल की मदद जो चाहिए थी.

इक़बाल दरवाज़ा बंद करके अंदर आया - मैडमजी… आपने बुलाया… कुछ काम था क्या?

सुप्रिया - हांजी इक़बाल…

इक़बाल - बताइये… मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ…

सुप्रिया - आयो अंदर आयो… बैठ कर बात करते है…

सुप्रिया ड्राइंग रूम में चलते हर गयी और इक़बाल उसके ठीक पीछे. सुप्रिया की मटकती हुई गांड उसका ध्यान अपनी और खींच रही थी.

सुप्रिया ने सोफे पर बैठ कर इक़बाल को बैठने का इशारा किया - बैठो…

इक़बाल सुप्रिया के सामने वाले सोफे पर बिलकुल आगे आधी सीट पर बैठ गया. आज तक सुप्रिया ने इस तरह उसे घर पर अकेले नहीं बुलाया था. बस एक बार उसने सुप्रिया के घर पर खाना खाया था पर तब करुणा भी घर पर hi थी.

सुप्रिया - मुझे आपकी एक मदद चाहिए… पर थोड़ा सा टेड़ा काम है..

इक़बाल - आप बोलिये तोह… आपके लिए हर काम को सीधा कर देंगे…

सुप्रिया - काम को तोह नहीं… पर एक आदमी को सीधा करना है…

इक़बाल - आदमी को? कोई आपको परेशान कर रहा है?

सुप्रिया - हाँ…

इक़बाल गुस्से में बोलै - कौन है वह मदर छोड़… माफ़ कीजिये मेरे मुँह से गाली निकल गयी… पर किस हरामी की हिम्मत हुई आपको परेशान करने की…

सुप्रिया - आपको याद होगा वह गाडी वाला जो नीचे आता था - राहुल…

इक़बाल का गुस्सा आप से बहार हो रहा था - वह बहन का लोढ़ा… क्या किया उसने? आप बताये कहाँ मिलेगा वह… मैं कबसे उसकी गर्दन दबोचना चाहता था.

सुप्रिया उसका गुस्सा देख कर सोचने लगी की शायद उसे ज्याद कुछ बताये बिना hi वह उसका साथ दे देगा - मैं सोच रही थी की हम उसका दिमाग ठिकाने पर ले आये…

इक़बाल - दिमाग क्यों… उसे hi ठिकाने लगा देते है न… साले की बोटी बोटी काट दूंगा…

सुप्रिया घबराते हुए बोली - नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं करना… बस थोड़ा सा डरना धमकाना है… ज्यादा कुछ नहीं…

इक़बाल - मैडमजी डरने धमकाने से क्या होगा… काम से काम उस हरामी की टाँगे hi तोड़ देंगे…

सुप्रिया - नहीं नहीं इतना कुछ नहीं…

इक़बाल - उसने किया क्या है आप ये तोह बताइये…

सुप्रिया के बोलते बोलते आंसू आ गए, वह इक़बाल से नज़रे नहीं मिला पा रही थी - वह… वह… मुझ पर गलत निगाह रखे हुए है… और मुझपर मिलने के लिए दबाव दाल रहा है…

12.png


इक़बाल का चेहरा अब तोह गुस्से में पूरा लाल हो गया था - उस बहन के लौड़े की इतनी हिम्मत… आप मन कर दो उसे मिलने के लिए.. मैं देख लूंगा उसे…

सुप्रिया - मैं उसे मन नहीं कर सकती… उसके पास मेरे कुछ फोटोज और वीडियोस है…

इक़बाल - कैसे फोटोज वीडियोस?

सुप्रिया के गाल अब शर्म से लाल हो गए थे, इक़बाल पता नहीं समझ क्यों नहीं रहा था - अब मैं कैसे समझायु… वह कबसे मेरे पीछे पड़ा था.. और मैं उससे दूर रहने की कोशिश कर रही थी.. तोह उसने मेरी एक फोटो लेकर एक नकली वीडियो बना दी है.. जिसमे… ऐसा लग रहा है मैं कुछ गन्दा काम कर रही हूँ… आप समझो न किस टाइप की वीडियो की बात कर रही हूँ…

इक़बाल दांत पीसते हुए ज़ोर से बोलै - भोसड़ी काआआ… साले की तोह… वह इतना हरामीपन का काम कर रहा है, और आप उसे बस डरा के छोड़ना चाहती है!! उसकी तोह…

सुप्रिया - इक़बाल आप सुनो मेरी बात… मैं बस ज्यादा तमाशा नहीं चाहती… अगर कुछ गड़बड़ हो गयी तोह मेरी hi बदनामी होगी इस सब में… आप समझो..

इक़बाल - आप बेफिक्र रहो… ऐसा हाल करूँगा उसका की दुबारा कभी आपके बारे में सोचेगा भी नहीं…

सुप्रिया - मैं सोच रही थी मैं उससे मिलने जायु और आप मेरे पीछे पीछे…

इक़बाल - आपको जाने की कोई जरुरत नहीं है… बस मुझे उसका पता बता दो…

सुप्रिया - नहीं इक़बाल… मुझे जाना hi होगा… पर आप मेरे साथ होंगे न… तोह किस बात का डर…

इक़बाल - हाँ आपको उस चूज़े से डरने की जरूरत नहीं है… ठीक है साथ hi चलते है…

सुप्रिया - थैंक यू इक़बाल… आप प्लीज किसी से इस बारे में न कहना…

इक़बाल - मैडमजी… आपको ये बोलने की जरूरत hi नहीं है… आप जानते तोह हो की आप मुझ पर पूरा भरोसा कर सकते हो.

इक़बाल और सुप्रिया बात कर hi रहे थे की दरवाज़े की घंटी बजी. सुप्रिया एक डैम चौंक सी गयी, फिर उसे याद आया - करुणा होगी.. मैं दरवाज़ा खोलती हूँ… आप बस बोल देना की यहाँ कुछ ठीक करने आये थे…

इक़बाल - आप मुझे मैसेज करके बता देना की उस हरामज़ादे की हड्डिया कब तोड़नी है…

सुप्रिया ने जल्दी से हाँ में सर हिलाया और जाकर दरवाज़ा खोल दिया. इस बीच इक़बाल भी सोफे से खड़ा हो गया.

करुणा ने दरवाज़ा खुलते hi कहा - दीदी… कैसे हो… आज तोह पता है…

पर जैसे hi उसने इक़बाल को घर के अंदर देखा, उसकी आवाज़ एक डैम से रुक गयी, और उसका मुँह थोड़ा सा फूल गया.

सुप्रिया ने खुद hi सफाई देने की कोशिश करि - इक़बाल यहाँ लाइट ठीक करने आया था… मैं ज़रा एक बार अंदर से प्रेस के कपडे लाती हूँ… इक़बाल वह लेते हुए जाना…

सुप्रिया अंदर चली गयी और करुणा और इक़बाल एक दुसरे को घूरने लगे.

इक़बाल - क्या घूर रही है.. काम शुरू कर न अपना…

करुणा - हाँ मैं काम शुरू करती हूँ… तुम्हारा तोह काम पूरा हो गया न…

इक़बाल - क्या बोल रही है…

करुणा ने फुसफुसा के कहा - दे दिया अपनी मैडमजी को आज अपना लुंड…

इक़बाल उसके पास गुस्से में गया - बकवास मत कर… ऐसी किसी शरीफ औरत के बारे में…

करुणा - बड़ी शरीफ है… तुम्हारा पूरा लुंड समां जाये इसके मुँह में… कच्चा खा जाएगी तुम्हे एक दिन.. देखना…

इतने में सुप्रिया भी अंदर से आ गयी थी - इक़बाल ये लो… ये कपडे नीचे प्रेस वाले को दे देना… और ये वाली शर्ट तुम्हारे लिए है… पहनी हुई नहीं है… बिलकुल नयी है…

इक़बाल - ारी मैडमजी इसकी क्या जरूरत…

सुप्रिया - रख लो प्लीज…

इक़बाल ने कपडे अपने हाथ में ले लिए और बहार की तरफ चल पड़ा. करुणा उसके पीछे पीछे दरवाज़ा बंद करने आयी, और उसने इक़बाल को घूर कर देखा, जैसे उससे कह रही हो - इस शर्ट को तोह मैं बाद में जलती हूँ… और तुमने इसे पहना तोह तुम्हे भी…

______________________________

तीन दिन बाद सुप्रिया राहुल से मिलने के लिए तैयार हो रही थी. उसने एक सुन्दर सा सलवार सूट पहना हुआ था जो उसके शरीर पर अछि तरह से फसा हुआ था. उसके बूब्स की गोलियां और पतली कमर दोनों से hi चिपका हुआ. सुप्रिया ने एक चुन्नी ले कर सूट के ऊपर दाल ली ताकि उसकी जवानी थोड़ी सी धक् जाये.

जब उसकी राहुल से बात हुई थी तोह उसने उसे कहा था की वह सीधे उसके घर पहुंच जाएगी पर राहुल ने काफी ज़िद्द की थी की वह hi उसे लेने आएगा. वह ऑफिस से 1 बजे करीब निकलते हुए सुप्रिया को पिक कर लेगा. जब उसने इक़बाल को ये बताया था तोह इक़बाल को उसका राहुल के साथ जाना बिलकुल ठीक नहीं लगा था, पर सुप्रिया ने उसे किसी तरह मनाया था की वह अपनी गाडी लेकर उनके पीछे पीछे आ जाये.

सुप्रिया को काफी घबराहट हो रही थी. वह पहली बार कुछ ऐसा करने जा रही थी, अगर कुछ भी गड़बड़ हो गयी तोह पता नहीं क्या होगा. सुप्रिया ने एक लम्बी सी सांस ली अपने इमोशंस को काबू में लाने के लिए. राहुल का मैसेज आ गया था, वह नीचे आ गया था.

सुप्रिया नीचे पहुंची और उसकी नज़रे इक़बाल को ढून्ढ रही थी. उसने इक़बाल को मैसेज दाल दिया था की वह तैयार रहे, बस वह नीचे आ hi रही थी. सुप्रिया बिल्डिंग के दरवाज़े से बहार आयी तोह उसे राहुल की गाडी सामने दिखाई दी. अंदर बैठे राहुल के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान थी, जैसे उसने कोई लाटरी जीत ली हो.

सुप्रिया ने इधर उधर देखा, उसे इक़बाल अभी भी कहीं नहीं दिखा, उसकी घबराहट बढ़ती जा रही थी. पर अब पीछे हटने का सवाल नहीं था. वह गाडी का दरवाज़ा खोल कर आगे वाली सीट पर बैठ गयी.

राहुल मुस्कुराते हुए बोलै - सुप्पु… कैसी हो…

सुप्रिया को उसका ये नाम लेना ाचा नहीं लगा - मुझे इस नाम से मत बुलायो…

राहुल - क्यों? पहले भी तोह तुम्हे इसी नाम से बुलाता था.. मेरी प्यार सुप्पु…

सुप्रिया - मुझे तब भी ाचा नहीं लगता और अब तोह बिलकुल भी नहीं…

राहुल - कोई नहीं, तुम आ गयी हो तोह तुम्हे ाचा सा महसूस करा दूंगा… लायो मैं तुम्हारी सीट बेल्ट लगा दू…

राहुल अपना हाथ सुप्रिया के शरीर के बिलकुल पास से निकलते हुए सीट बेल्ट की तरफ ले गया, उसका फेस सुप्रिया के फेस के बेहद पास. फिर उसने बेल्ट को नीचे खींचा, इस बार बेल्ट और उसकी उंगलियां सुप्रिया के दुप्पट्टे से छूटे हुए नीचे आयी. सुप्रिया उसकी इस हरकत से काँप hi उठी. पर इससे पहले वह कुछ और सोच पाती राहुल ने उसके गाल पर एक हलकी सी किश कर दी.

a1ad0e9e1ca6162fb1bcc300322be10b.jpg


सुप्रिया ने राहुल को थोड़ा पीछे धकेला - राहुल!!!! ये क्या कर रहे हो…

राहुल हस्ता हुआ बोलै - ाचा ाचा सॉरी… यहाँ नहीं… कहीं और चल करके करते है ये सब…

सुप्रिया - तुमने मुझे बस बात करने के लिए बुलाया था न… ये सब क्या…

राहुल - बात भी करेंगे… मुलाकात भी करेंगे… सब कुछ करेंगे… तुम भी तो माइक के रूम में बात करने hi गयी थी…

राहुल ने गाडी चलनी शुरू करि. उसका दिल ज़ोर के धड़क रहा था. इक़बाल का भी कोई अत पता नहीं था, अगर वह नहीं आया तोह आज उसे तो एक अलग hi प्लान सोचना पड़ेगा.

राहुल - क्या हुआ? इतनी नर्वस क्यों हो… रिलैक्स करो. बताया कहाँ चले? तुम्हे तोह मेंहगे होटल में जाने की आदत पद गयी होगी, वहीँ ले चालू… ठन्डे एक रूम में खूब गरम हो जायेंगे…

सुप्रिया - राहुल… तुम वह वीडियो और फोटो डिलीट कर दो.. देखो मैं अब कुछ भी ऐसा नहीं करना चाहती…

राहुल - ाचा… अब फिर से पति व्रत हो गयी हो… अतुल अचे से कर रहा है क्या आज कल… क्या बोल कर आयी हो उसे आज? या बताया hi नहीं उसे..

सुप्रिया - मैंने बताया है अतुल को… किसी दोस्त से मिलने जा रही हूँ… पर इस सबसे…

राहुल - उसे मैसेज दाल दो की तुम्हे आज लेट हो जायेगा…

सुप्रिया - नहीं मैं बस थोड़ी देर के लिए आयी हु…

राहुल - ारी मैसेज डालो तोह मेरी जान… इतने दिनों बाद मिली हो, इतनी जल्दी कैसे निकल जायेगी... तुम डालती हो या मैं दालु मैसेज अतुल को...

सुप्रिया ने राहुल की और गुस्से से देखा, अब तोह वह जरा भी नहीं हिचक रहा था उसे धमकाने में. बेबस होते हुए सुप्रिया ने अतुल को मैसेज डाला - हो सकता है मुझे थोड़ा लेट हो जाये आज...

उधर से अतुल का जवाब भी जल्दी से आ गया - कोई बात नहीं...

राहुल - तोह बताया कहाँ चलोगी पहले? मूवी चले? या होटल? या यहीं कार में hi....

सुप्रिया - नहीं... बस घर चलते है तुम्हारे...

राहुल - ओह हो.... घर पर hi... ये भी सही है... हमने 2 बार तोह किया hi था वहां...

सुप्रिया को काफी घिनौना सा लग रहा था वह सब याद करते हुए और वह नीचे की और देख रही थी. उसकी उम्मीद की आशा काम होती जा रही थी.

राहुल ने स्टीयरिंग एक हाथ छोड़ते हुए सुप्रिया के हाथ पर रख दिया और फिर उसकी उँगलियों को अपनी उँगलियों में फसा लिया - ओह सुप्रिया... मैंने कितना मिस किया है हमारे साथ में बिताये हुए पालो को... तुम्हारे ये कोमल मुलायम हाथ... और तुम्हारा नंगे शरीर से खेलना... ममममम....

सुप्रिया ने उसका हाथ झिड़क दिया - मैं अब अतुल के साथ खुश हूँ... तोह प्लीज ये सब बातें मत करो...

राहुल - ाचा ये तोह बताया... तुम विक्रम की सच्चाई पता चल गयी या वह तुम्हे छोड़ते छोड़ते बोर हो गया? उस छोड़ू को क्या पता की तुमने उसे छुड़ाने के लिए एक काले के लुंड से अपना मुँह छुड़वाया था....

सुप्रिया हैरान थी की राहुल अब उसके सामने ऐसी शब्द इस्तेमाल करने से नहीं झिझक रहा था - ये अश्लील बातें करो मेरे सामने… मुझे नहीं ाचा लगता… पहले तोह ये सब नहीं बोलते थे तुम…

राहुल के चेहरे पर एक अलग सी नफरत थी - सॉरी मेरी जान… बस निकल गया मुँह से… मुझे बहुत ऐटिटूड दिखता है वह कुत्ता, और कृति से भैया भैया करे बिना रहा नहीं जाता... वैसे तुमने भी काम ऐटिटूड नहीं दिखाया मुझे जब तुम उसके साथ थी… अब आयी हो थोड़ा जमीन पर…

सुप्रिया - मैंने कौनसा ऐटिटूड दिखाया? तुम्हारी और मेरी बातचीत बंद हो गयी थी न…

राहुल - चलो आज तुम्हे मन hi लेंगे… मैं झूठ नहीं कह रहा था तुम्हारे लिए मैं कृति को छोड़ दूंगा… और तुम भी अतुल को छोड़ देना… हम दोनों कहीं और जाकर साथ रहेंगे…

सुप्रिया - हम्म्म… तुम सच में कृति को छोड़ डोज…

राहुल को लगने लगा की सुप्रिया फिर से सेट हो रही है - हाँ… और क्या… वह तुम्हारे आगे कुछ नहीं है…

सुप्रिया - वह तोह है… पर फिर तुमने मुझे छोड़ा hi क्यों?

राहुल - सॉरी मेरी जान… (राहुल ने अपनी जेब से एक पैकेट निकलते हुए सुप्रिया की और किया)… ये देखो… तुम्हारा फवौरीते फ्लेवर… आज मुझे चूस कर खुश कर डौगी न…

राहुल का लुंड एक्ससिटेमेंट के मारे खड़ा होता जा रहा था. सुप्रिया के नरम मुलायम होंठ उसके लुंड पर, पहले कंडोम के साथ, फिर कंडोम के बिना, कितना मज़ा आने वाला था. सुप्रिया ने उसे बताया था की सबसे पहले उसने hi तोह सुप्रिया के मुँह में डाला था, अतुल से पहले, विक्रम से पहले, किसी से भी पहले.

कृति तोह उसे कई बार सेक्स के लिए मन hi कर देती थी, पर जब वह सुप्रिया के साथ था, वह खुद भी हमेशा इस सब के लिए उत्सुक रहती थी. अब तोह बस उसे बेसब्री से इंतज़ार था घर पहुंचने का, और एहि डर लग रहा था की कहीं ज्यादा एक्ससिटेमेंट में उसका शीघ्रपतन न हो जाये.

कुछ देर में वह दोनों राहुल के घर पहुंच गए. गाडी से उतर के सुप्रिया ने इधर उधर देखा, अभी भी इक़बाल का कोई अत पता नहीं था, शायद उसने भी सुप्रिया का साथ छोड़ दिया. सुप्रिया निराश होते हुए आने वाले पालो के बारे में सोचने लगी.

राहुल का वही अपार्टमेंट, जो तीसरी मंजिल पर था, सुप्रिया उन्ही सीढ़ियों पर ऊपर छेड़ने लगी. आज तोह ये छडाव किसी पर्वत से काम नहीं लग रहा था. वह दोनों ऊपर पहुंचे और राहुल ने दरवाज़ा खोला. वही फ्लैट था बस थोड़ा अलग लग रहा था, शायद कृति ने यहाँ आकर कुछ चीज़े बदल दी थी.

राहुल - तुम बैठो... मैं 2 मिनट में टॉयलेट करके आता हूँ... या बैडरूम में hi आ जायो सीधे...

सुप्रिया - राहुल... पहले बात कर ले... वह वीडियो... तुमने कहीं किसी और को तोह नहीं...

राहुल - ारी... घबरा क्यों रही हो... मैंने किसी और को नहीं भेजी या दिखाई... इतना पागल नहीं हूँ मैं...

सुप्रिया शायद जो होने वाला था उसके लिए तैयार हो चुकी थी - तोह फिर आज जो भी होगा.. उसके बाद तुम वह वीडियो डिलीट कर डोज न... और मुझे उसके बाद परेशान नहीं करोगे न...

राहुल ने सुप्रिया के पास आकर उसके गालो को हलके से छुआ और उसकी गर्दन पकड़ते हुए होंठों पर एक किश दे दी. सुप्रिया इस किश से hi बुरी तरह हिल चुकी थी.

c691f240b19af88dfaad600898927798.jpg


राहुल - मैं चाहता हूँ हमारे बीच सब कुछ पहले जैसा हो... और तुम ऐसे बात कर रही हो जैसे मैं तुम्हे ब्लैकमेल कर रहा हूँ... ये क्या बात हुई?

सुप्रिया - क्यूंकि तुम ब्लैकमेल hi कर रहे हो मुझे...

राहुल - उफ्फ्फ... इतनी नाराज़गी... मैं आता 2 मं में फिर साड़ी नाराज़गी मिटाता हूँ...

राहुल अपना लुंड के पास हाथ लगाए जल्दी से अंदर गया और सुप्रिया ड्राइंग रूम के एरिया में कड़ी रही. वह अपनी किस्मत पर यकीं hi नहीं कर पा रही थी. तभी उसे लगा की बहार दरवाज़े पर एक बहुत hi हलकी सी खत खत हुई है.

सुप्रिया दरवाज़े की तरफ गयी और उसने दूरहोले से बहार देखा. इक़बाल!!!!! सुप्रिया के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी और उसकी जान में जान वापस आयी. उसने जल्दी से पर धीरे से दरवाज़ा खोला.

सुप्रिया उसके गले hi लग गयी थी - इक़बाल! तुम कहाँ रह गए थे...

इक़बाल - मैडमजी... मैं बस थोड़ी सी दूरी बना कर चल रहा था अपनी बाइक पर, ताकि उसे ये न लगे की कोई उसका पीछा कर रहा है. कहाँ है वह रंडी का पिल्ला. कुछ किया तोह नहीं न उसने अब तक?

सुप्रिया ने न में सर हिलाया. और तभी राहुल भी पूरा नंगा हो कर एक कंडोम पहने रूम से बहार आया - डार्लिंग... लो मैं.... (पर इक़बाल को वहां देख कर वह बुरी तरह हैरान रह गया) आईएईए.... ये कौन... ये कौन है... बहार निकल...

इक़बाल उसकी तरफ गुस्से में झपटा - साले... भोस्डिके...

राहुल उसकी गुस्से में फड़फ़ती हुई नसों को देख कर डर के मारे अंदर भागा, पर इक़बाल ने उसकी टांग पकड़ कर उसे नीचे खींच दिया - गांडू साले... तू मैडमजी को हाथ लगाएगा... तेरी इतनी हिम्मत तू उनके सामने नंगा हो कर आया है... तेरा नंगपना तोह मैं निकलता हूँ आज...

इक़बाल ने अपने पेअर राहुल की पीठ पर रख दिए थे और वह उसके ऊपर लातो पर लाते बजाये जा रहा था.

राहुल दर्द से चीख उठा - अहह.. आठ... सुप्रिया... बचायो मुझे...

सुप्रिया भी उसके पास भड़कती हुई आ गयी थी. उसके अंदर का दबा हुआ गुस्सा ज्वालामुखी बन कर बहार फुट रहा था - इक़बाल इसे सीधा बिठायो...

इक़बाल ने राहुल के बाल पकड़ कर उसे सीधा बिठाया, और सुप्रिया ने उसके गालों पर खींच कर एक तमाचा मारा, और फिर एक और, और फिर एक और, और फिर वह राहुल से बोली - क्या बोलै था तूने मुझे कार में. तुझे मेरे नंगे शरीर से खेलना था न... अब खिलवायु तुझे नंगे शरीर से...

इक़बाल भी इस बीच उसे बुरी तरह पीट रहा था.

सुप्रिया गुस्से में बुरी तरह भड़क रही थी, और उसे होश नहीं था वह क्या बोल रही है - और क्या बोलै था तूने? अपना लुंड चुसवायेगा मुझसे...

इक़बाल और भी भड़क गया - साले हरामी.... तेरा लुंड काट कर हाथ में दे दू मैं... लुंड चुसवाने का शौक है न तुझे....

सुप्रिया के देखते देखते इक़बाल ने अपनी पंत नीचे करके अपना लुंड बहार निकाल लिया. सुप्रिया की नज़र जैसे hi इक़बाल के लुंड पर पड़ी, उसे यकीं hi नहीं हुआ की किसी का लुंड इतना बड़ा भी हो सकता है. अभी शायद वह पूरी तरह खड़ा भी नहीं था, पर इतना लम्बा, काला, और आगे से अजीब सा. उस दिन जब इक़बाल और करुणा साथ में कर रहे थे, उसे दूर से इक़बाल के लुंड का साइज पता नहीं चला था, पर आज तोह ये ठीक उसकी आँखों के नीचे था. ये तोह शायद माइक के लुंड से भी बड़ा और मोटा था.

इक़बाल - लौड़े... ये ले... अब तू चूस मेरा लुंड...

राहुल की आवाज़ किसी तरह से निकली - नहीं... मैं...

इक़बाल उस पर इतनी ज़ोर से चिल्लाया की सुप्रिया भी काँप गयी थी - छुप्प भोस्डिके...

इक़बाल ने राहुल के बाल पकड़ते हुए अपना लम्बा काला लुंड राहुल के मुँह में घुसेड़ दिया - चल चूस इसे अब...

राहुल की आँख बहुत ज्यादा बड़ी हो गयी थी, और वह बुरी तरह घबरा गया था. इक़बाल उसकी गर्दन पकडे अपना लुंड उसके मुँह में अंदर बहार कर रहा था. और सुप्रिया भी ये सब होते हुए साफ़ देख रही थी.

इक़बाल - तुझे तोह ाचा लग रहा होगा ये सब गांडू...

इक़बाल ने अपना लुंड उसके गले तक अंदर कर दिया और राहुल दर्द के मारे आवाज़ भी नहीं निकाल पा रहा था.

सुप्रिया को वैसे तोह एक सुकून सा मिल रहा था इक़बाल को बेदर्दी से राहुल के मुँह में अपना लुंड डालते हुए देख कर, पर उसे थोड़ी घबराहट भी हो रही थी. उसने इक़बाल की और देखा जैसे उसे रोकना चाहती हो - इक़बाल....

इक़बाल - मैडमजी, मुझे कोई मज़ा नहीं आ रहा इस चूतिये के मुँह में लुंड दाल कर... पर इसकी हिम्मत कैसे हुई आपको ये सब बोलने की...

सुप्रिया - हम किसी काम से आये थे न... वह भी पूरा करना है... इसका फ़ोन...

इक़बाल ने अपना लुंड हल्का सा बहार निकालते हुए राहुल से पुछा - कहाँ है तेरा फ़ोन...

राहुल ने जल्दी से रूम की तरफ इशारा कर दिया.

इक़बाल - मैडमजी... आप ले आयो इसका फ़ोन... मैं इस लोदु को देखता हूँ अचे से...

सुप्रिया जल्दी से रूम की तरफ गयी और बीएड पर उसे राहुल का फ़ोन दिखाई दिया. वह जल्दी से उसका फ़ोन उठा कर खोलने की कोशिश करने लगी पर फ़ोन पर फेस लॉक था. शायद ये ीफोने उसे कृति ने hi दिलाया होगा.

सुप्रिया जल्दी से फ़ोन बहार लेकर आयी और फ़ोन राहुल के सामने किया पर फ़ोन नहीं खुला.

सुप्रिया - इक़बाल एक बार इसकी शकल दिखानी है फ़ोन में... आप बहार निकालो न अपना...

इक़बाल ने अपना लुंड बहार निकल लिया, वह राहुल से थूक से ढाका हुआ था. कितना कुछ हो रहा था रूम में की सुप्रिया के पास अपने काम के इलावा शर्म या कुछ और महसूस करने का टाइम hi नहीं था. इस बार फ़ोन खुल गया, और सुप्रिया जल्दी से उसके फोटो एल्बम में जाकर वह वीडियो ढूंढ़ने लगी.

इस बीच इक़बाल राहुल के माथे पर अपना लुंड घिस रहा था. राहुल अपनी इतनी दुर्गति से बहुत hi शर्मसार महसूस कर रहा था.

सुप्रिया को वीडियो और फोटोज मिल गयी और उसने उन्हें डिलीट कर दिया, और फिर उसके दिमाग में क्लिक किया - और भी कहीं ये फोटो या वीडियो सेव्ड है क्या?

राहुल बोलने से हिचक रहा था और इक़बाल एक बार फिर से उस पर गुर्राया - बोल बहनचोद... जल्दी से...

राहुल - हाँ, मेरे लैपटॉप में...

सुप्रिया ने इक़बाल की तरफ देखा - वह भी सब डिलीट करनी होगी...

इक़बाल दांत भीचते हुए बोलै - लोदु चाँद... लैपटॉप कहाँ है...

राहुल हांफता हुआ बोलै - अंदर... अंदर... दुसरे रूम में...

इक़बाल ने उसे उसके पैरो पर खड़ा किया, राहुल से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था, उसके पेअर बुरी तरह दर्द कर रहे थे मार से. पर इक़बाल उसकी गर्दन पकडे उसे चलता हुआ दुसरे कमरे में ले गया. सामने एक टेबल चेयर थी और एक लैपटॉप. इक़बाल ने राहुल को चेयर बिठाया और राहुल ने जल्दी से लैपटॉप खोला.

सुप्रिया - कहाँ है वीडियोस?

राहुल - यहीं कहीं... इन फ़ोल्डर्स में... अह्ह्ह... अह्ह्ह....

सुप्रिया राहुल के ऊपर से झुक कर लैपटॉप के फ़ोल्डर्स में चेक कर रही थी. सुप्रिया का दुपट्टा राहुल के शरीर से टच hi हो रहा था की इक़बाल ने राहुल को चेयर से खींच कर हटा दिया - गांडू साले.. अभी भी मैडमजी को छूटा है... मैडमजी आप बैठ कर आराम से कर लो जो आपको करना है...

सुप्रिया जल्दी से चेयर पर बैठी और फ़ोल्डर्स में ढूंढ़ने लगी. बहुत साड़ी वीडियोस थी, उसने एक खोली तोह वह राहुल और कृति की थी. ओह गॉड, इसने तोह कृति की भी वीडियो बनायीं हुई थी. दूसरी खोली तोह उसमे कोई और hi लड़की थी. पता नहीं कितनी लड़कियों के साथ इसने.

इक़बाल की एक नज़र लैपटॉप पर थी और दूसरी राहुल पर. बीच बीच में वह उसके ek-do और जड़ देता.

आखिर सुप्रिया को अपनी वाली वीडियो मिल hi गयी और वह वीडियो खुलते hi सामने दृशय था जिसमे सुप्रिया माइक का लुंड चूस रही थी, और माइक की हलके हलके कराहने की आवाज़ आ रही थी, और माइक सुप्रिया का नाम अंग्रेजी एक्सेंट में ले रहा था. सुप्रिया ने जल्दी से वीडियो को बंद किया पर इतने में शायद इक़बाल की नज़र तोह उस पर पद गयी थी.

इक़बाल - साले... ये झूठी वीडियो बनाते हुए तुझे डर नहीं लगा... आज के बाद लगेगा...

इक़बाल उसे फिर से ज़ोर के मारने लगा. सुप्रिया ने तय किया की साड़ी hi वीडियो डिलीट करना सही रहेगा, और उसने सभी को डिलीट कर दिया.

सुप्रिया - और भी कहीं है कुछ?

राहुल के चेहरे पर नील पड़ना शुरू हो गया था - बस एक वह पेन ड्राइव में... ड्रावर में राखी है...

सुप्रिया ने अपना सर पकड़ लिया... पता नहीं कितनी कॉपी बना राखी थी इस कमीने ने - और भी कहीं है तोह बता दो... इंटरनेट पर कहीं?

राहुल - नहीं और कहीं नहीं है...

सुप्रिया - मैं कैसे मान लू तुम्हारी बात...

राहुल से अचे से बोलै भी नहीं जा रहा था - मैं... सच कह रहा हूँ....

इक़बाल - और नहीं बोल रहा होगा न तोह अगली बार तेरा लुंड hi काट दूंगा...

सुप्रिया ने जल्दी से ड्रावर खोली और उसमे से एक छोटी सी पेन ड्राइव उठायी. अभी टाइम नहीं था इसे डिलीट करने का, वह बाद में कर देगी. उसने पेन ड्राइव को अपनी मुट्ठी में दबा लिया.

सुप्रिया ने सर हिला कर इक़बाल की तरफ देखा, जैसे कह रही हो की काम हो गया था.

इक़बाल ने एक बार फिर राहुल को पकड़ लिया - गांडू... तेरी गांड में डंडा घुसता हु अभी...

राहुल ने डरते हुए सुप्रिया की और देखा - सुप्रिया... प्लीज... रोको इसे... प्लीज... ी ऍम सॉरी... सॉरी...

सुप्रिया - नहीं इक़बाल... रुको... हमे यहाँ से निकलना चाहिए...

इक़बाल - मैडमजी आप जानती नहीं है ऐसे लोगो को... ये सांप की तरह होते है.. अभी इसका फैन नहीं कुचला न तोह पता नहीं कब आपको फिर काट ले...

राहुल - नहीं... मैं कभी नहीं... कभी भी नहीं... सुप्रिया प्लीज...

सुप्रिया के अंदर एक आवाज़ कह रही थी की वह इक़बाल को खुला छोड़ दे राहुल के ऊपर, पर दूसरी आवाज़ उसे रोक रही थी. आज तोह शायद सुप्रिया अपनी उस दूसरी आवाज़ की hi सुनने वाली थी - इक़बाल, सुनो मेरी बात... हमने इसे अचे से जलील कर दिया है... अब नहीं करेगा ये कुछ... और मेरे पास ये पेन ड्राइव भी है...

सुप्रिया ने इक़बाल को खींच कर राहुल से अलग किया. उसका मोटा लम्बा लुंड अभी भी बहार लटका हुआ था. इक़बाल अपने लुंड को पंत में अंदर करने लगा और फिर अपनी ज़िप लगा ली.

इक़बाल ने राहुल को एक आखरी लात मारी और फिर वह और सुप्रिया वहां से बहार की और निकल लिए. राहुल वहीँ रूम में दर्द में कररहता हुआ लेता रहा. उसने कभी सपने में नहीं सोचा था की सुप्रिया उसके साथ कुछ ऐसा कर सकती थी . सुप्रिया ने उसके मुँह में एक लुंड घुसवा दिया था, और इतनी बेरहमी से पिटवाया था. ये तोह शायद वह कभी नहीं भूलने वाला था.
 
अपडेट 74

सुप्रिया इक़बाल की बाइक के पीछे बैठे हुए बुरी तरह से काँप रही थी. उसने इक़बाल को कास के पकड़ा हुआ था, मानो अगर उसने ढीला छोड़ा तोह वह. जब तक वह राहुल के घर पर थी उसके अंदर गुस्से का एक अलग hi उफान था, पर अब जैसे जैसे वह आवेश ठंडा पद रहा था उसकी घबराहट बढ़ती जा रही थी. कहीं राहुल ने जो कुछ हुआ उसके बारे में किसी को बता दिया तोह? उसकी आँखों के सामने अँधेरा सा छा गया और ऐसा लगने लगा की वह बस चक्कर खा कर बाइक से नीचे hi गिर जाएगी.

सुप्रिया ने इक़बाल की पीठ पर हलके से हाथ थपथपा का उसी बाइक रोके का इशारा किया - इक़बाल….

पर उसकी आवाज़ इतनी धीमी थी की वह बहार hi नहीं निकली. उसने फिर एक बार ज़ोर से इक़बाल की पीठ पर थपकी दी. इस बार इक़बाल ने शीशे में झाँक कर सुप्रिया का चेहरा देखा और वह तुरंत समझ गया.

इक़बाल - मैडमजी… बस एक मं… मैं अभी बाइक रोकता हूँ...

कुछ hi पालो बाद इक़बाल ने बाइक को सड़क के किनारे रोका. सुप्रिया झटके से बाइक से नीचे उत्तरी और अपने दोनों हाथ और सर बाइक की सीट पर टीकाकार कड़ी हो गयी.

इक़बाल भी सुप्रिया को इस हालत में देख कर परेशान हो गया - आप ठीक तोह है न…

सुप्रिया ने अपना सर हलके से उठाया, उसकी सांसें तेज़ चल रही थी - नहीं… वह… वहां… हमने उसे… ओह गॉड… अगर उसने किसी को बता दिया…

इक़बाल ने हलके से सुप्रिया के कंधे पर हाथ रखा - आप घबराये नहीं… कुछ नहीं होगा… किसी को कुछ बताने लायक नहीं छोड़ा मैंने उसे… आपको पानी चाहिए क्या?

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया. इक़बाल ने बाइक के हैंडल पर टंगे थैले से एक बोतल निकली.

वह एक पल के लिए रुका - ये लीजिये मैडमजी... पर ये शायद मेरी झूठी..

सुप्रिया ने उसकी पूरी बात सुनी भी या नहीं, या फिर उसे इस समय बस पानी चाहिए था. उसने झट से इक़बाल के हाथ से बोतल ली और उसे मुँह लगते हुए कुछ घूँट पी लिए.

पानी पीने से उसे थोड़ी रहत मिली और उसकी आवाज़ बहार निकली - आपने बहुत मारा उसे… उसका खून भी निकल रहा था…

इक़बाल - मेरे हिसाब से तोह काम hi मारा है… एक दो हड्डी तोह तोड़ hi देनी चाहिए थी…

सुप्रिया - नहीं नहीं… बस उतना hi ठीक था… और फिर आपने उसके मुँह में…

सुप्रिया ये बोलते hi शर्मा गयी और उसने अपनी आँखें नीचे कर ली.

इक़बाल - वह मैं बस गुस्से में बहक गया था… उसने आपके साथ जो करने की बात की थी... पर मैडमजी, मैं वैसा नहीं हूँ!

सुप्रिया को कुछ समझ नहीं आया - वैसा कैसा?

इक़बाल - वही जो कुछ लोग मर्दो के साथ करना पसंद करता है… मुझे वैसा कुछ पसंद नहीं है… कहीं आप मुझे गलत न समझ ले…

सुप्रिया ने फ़ौरन कहा - ओह्ह नहीं... मैंने तोह कुछ ऐसा सोचा hi नहीं…

इक़बाल थोड़ी रहत की सांस लेते हुए बोलै - फिर ठीक है… ये पहली बार hi था मैंने अपना ल… मेरा मतलब ऐसा कुछ किया हो... ाचा भी नहीं लगा ये सब करके… मेरा मतलब मुझे वैसे ाचा लगता है... पर लड़कियों के मुँह में डालना…

सुप्रिया ने शरमाते हुए उसे टोका - मैं समझ गयी, बस बस... और समझने की जरूरत नहीं है...

इक़बाल झेप गया - माफ़ कीजिये… लगता है मैं कुछ ज्यादा hi बोल गया…

सुप्रिया - नहीं नहीं… माफ़ी क्यों… अगर आप वहां नहीं होते तोह पता नहीं आज क्या हो जाता…

इक़बाल ने सीरियस होते हुए कहा - जब तक मैं आपके साथ हूँ... आपके साथ कुछ बुरा नहीं होने दूंगा...

सुप्रिया ने धीमे से मुस्कुरा के कहा - शुक्रिया इक़बाल… तहे दिल से...

इक़बाल से बात करके सुप्रिया की घबराहट थोड़ी काम हो रही थी, और राहुल के साथ जो भी काण्ड हुआ था, उसकी तीस अब थोड़ी काम होने लगी थी. उसने बोतल वापिस इक़बाल को दी और इक़बाल ने उसे बड़े ध्यान से देखते हुए अंदर रख दिया.

इक़बाल - अब आप थोड़ा बेहतर लग रही हैं...

सुप्रिया - थोड़ा… पर मुझे अभी भी चक्कर सा आ रहा है और बहुत ज़ोर की भूक भी लगी है… मैंने सुबह से कुछ खाया नहीं है…

इक़बाल - ारी मैडमजी… आपने सुबह से कुछ नहीं खाया? तभी आप इतनी कमज़ोर सी लग रही है...

सुप्रिया - हाँ वह टेंशन के मारे… कुछ भी खाया नहीं गया...

इक़बाल - चलिए पहले पास में कुछ खा लेते हैं... ताकि आप रास्ते में न गिर जायो...

सुप्रिया - नहीं नहीं... सीधे घर चलते हैं...

इक़बाल - आप मेरी बात मानिये... आपकी शकल से hi पता चल रहा है... चलिए, पास में hi एक ठीक ठाक जगह है...

सुप्रिया के अंदर और ज्यादा मन करने की ताकत नहीं थी, और वह फिर से इक़बाल के पीछे उसकी बाइक पर बैठ गयी. इक़बाल बाइक चलता हुआ उसे पास के एक ढाबे की और ले जाने लगा. रास्ते में सुप्रिया की नज़र दीवारों और बिजली के खम्बो पर लगे पोस्टर्स पर पड़ी, जिनने विक्रम सफ़ेद कुरता पहने हाथ जोड़े खड़ा था. शायद ये पोस्टर उसके चुनाव प्रचार के लिए थे.

इक़बाल भी उन्हें देखते हुए बोलै - मैडमजी… ये तोह विक्रम जी है न… कितनी सही लग रहे है फोटो में…

सुप्रिया ने धीरे से कहा - हाँ…

विक्रम ने उसे काफी दिन पहले बताया था की वह चुनाव में उतरने की कोशिश में लगा था, पर हाल hi में उनकी इस बारे में कोई बात नहीं हुई थी. सुप्रिया का मैं इस समय बहुत सी उलझनों में घिरा हुआ था. कुछ hi देर में वह एक ढाबे के बहार पहुंच गए थे.

इक़बाल - मैडमजी… यहीं खा लेते है… महंगी जगह नहीं है… पर खाना ाचा होता है…

सुप्रिया ने इधर उधर देखा, ढाबे के बहार काफी सारे आदमी खड़े थे और उसे दूर दूर तक कोई भी औरत नहीं दिख रही थी वहां. सबकी नज़रे सुप्रिया पर hi थी, आखिर वहां वह सबसे अलग और चमकदार जो नज़र आ रही थी.

सुप्रिया ने धीरे से बोलै - ये वेग जगह है न... मैं पूरी तरह वेजीटेरियन हो...

इक़बाल - उम्म्म... यहाँ वेग और non-veg दोनों मिलता है... आपके लिए वेग hi मंगवाएंगे...

सुप्रिया थोड़ा हिचकिचाई, वह आप तौर पर बहार पुरे वेग रेस्टोरेंट में hi खाना कहती थी, और ये तोह थोड़ी सी लौ क्लास जगह भी लग रही थी - और आप... आप क्या मंगवाएंगे?

इक़बाल - मैं तोह non-veg खाता हु... लेकिन आप कहेंगी तोह वेग भी खा सकता हूँ आज...

सुप्रिया ने जल्दी से कहा - नहीं नहीं... आप जो कहते है वही मंगवा लीजिये...

दोनों ढाबे के बहार एक टेबल पर बैठ गया. इक़बाल ने वेटर को आवाज़ लगायी - ोये छोटू... सुन... मैडमजी के लिए... क्या लेंगी आप...

सुप्रिया - कुछ भी...

इक़बाल - बोलिये तोह... आपको hi खाना है...

सुप्रिया - मुझे पता नहीं क्या मिलता है यहाँ...

छोटू - सब मिलता है... chicken...mutton... कोरमा... टंगड़ी...

सुप्रिया - नहीं नहीं... ये सब नहीं... कुछ शाकाहारी...

छोटू - शाकाहारी भी सब मिलता है... दाल... पनीर... सब्जी... बोलिये...

सुप्रिया - ऐसा करो... पनीर और रोटी ले आयो...

इक़बाल - एक पनीर और दो तंदूरी रोटी, और मेरे लिए चिकन चंगेज़ी और तंदूरी रोटी... चल जल्दी से ले आ...

सुप्रिया ने इधर उधर देखा, कुछ लोग उन दोनों के काफी पास आकर खड़े हो गए थे. उनमे से कुछ तोह चोरी छुपे सुप्रिया की फोटो और वीडियो भी ले रहे थे.

सुप्रिया को बहुत hi ज्यादा उनकंफर्टबले सा महसूस होने लगा था. तभी एक आदमी उसके ठीक पीछे आकर खड़ा हो गया, बस कुछ सेंटीमीटर का फासला...

इक़बाल ने उसे तुरंत hi फटकार लगायी - यहाँ क्यों आकर खड़ा हो गया... हट यहाँ से... बेहेंछहह...

वह आदमी वहां से हट तोह गया पर उसकी नज़रें अभी भी सुप्रिया पर hi थी. सुप्रिया की नज़रें जैसे hi किसी मर्द से मिलती, उनके चेहरे पर एक अलग hi मुस्कान सी आ जाती. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की जैसे हर कोई अपनी आँखों से उसके बदन को छू रहा हो, या उसके कपडे उतारने की कोशिश कर रहा हो. सुप्रिया असहज होते हुए नीचे की और देखने लगी.

एक आदमी इक़बाल के पास आया और बोलै - भाई साहब... थोड़ा उधर सरक जायो... बैठ जाये ज़रा...

इक़बाल - क्यों? दूसरी कोई जगह नहीं मिली क्या?

आदमी सुप्रिया की और देखते हुए बोलै - देख लो... सारा मामला भरा hi हुआ है...

इक़बाल की आँखें गुस्से से लाल हो गयी, वह उसकी तरह हाथ उठाने hi वाला था की सुप्रिया ने अपना हाथ उसके हाथ पर रखते हुए उसे रोक लिया - नहीं... रहने दो... बस जल्दी से खाना खा के चलते है यहाँ से...

आदमी वहां से जाते जाते बड़बड़ाया - क्या आवाज़ है इसकी बीवी की... उफ्फ्फ...

इक़बाल फिर से खड़ा होने लगा पर सुप्रिया ने उसका हाथ कास के पकड़ लिया - बस आज के लिए काफी मार पीट पहले hi हो चुकी है... और नहीं...

इक़बाल सुप्रिया का नरम हाथ अपने हाथ पर महसूस करता हुआ किसी तरग से शांत हुआ. इस बीच छोटू भी खाना ले आया, पर उसने गलती से चिकन सुप्रिया के आगे रख दिया और पनीर इक़बाल के आगे.

20250731-0015-image.png


सुप्रिया ने तुरंत गन्दा सा मुँह बनाते हुए अपनी नज़रें दूसरी और कर ली.

इक़बाल ने छोटू को डांटा - अरे ोोू... ये क्या कर रहा है... वेग उनका है और non-veg मेरा... सही से रख...

छोटू ने मुँह बनाते हुए उन दोनों के सामने राखी थाली बदल दी. सुप्रिया ने अपनी थाली की और नीचे देखा, उसकी भूँक अब जैसे मर सी गयी थी. सामने बैठे इक़बाल ने खाना शुरू कर दिया, और सुप्रिया को अपने ठीक सामने किसी को नॉन वेग कहते देख काफी अजीब सा लग रहा था.

इक़बाल ने गर्मजोशी से कहाँ - खाइये न मैडमजी...

सुप्रिया ने सर हिलाते हुए एक गस्सा तोडा और पनीर की सब्जी से लगा कर खाया. सच में खाना काफी स्वादिष्ट था, पर इस माहौल में खाने का स्वाद जैसे डाब सा गया था. अभी भी लोग अपने खाने से ज्यादा उसकी और ललचायी हुई नज़रो से देख रहे थे.

सुप्रिया के मैं में एक साथ कई विचार उमड़ रहे थे - आज जो कुछ राहुल के साथ हुआ, विक्रम के पोस्टर, ढाबे में मर्दो की उस पर नज़र, और फिर ठीक सामने बैठा इक़बाल. सुप्रिया बस अब यहाँ से जल्दी से निकलना चाहती थी. यहाँ इस ढाबे से hi नहीं, शायद इस देश से भी. हो सकता है विक्रम का दिन उससे ाचा जा रहा हो.

_____________________________________

विक्रम बस अभी अपने घर hi पंहुचा था. आज वह ऑफिस के काम थोड़ा जल्दी निपटा के आ गया था, उसका स्ट्रेस लेवल काफी हाई था, और वह बस घर के पीछे पूल में स्विम करना चाहता था. रह रह कर उसे बस सुप्रिया की hi याद आ रही थी. काश वह उसके साथ फिर से एक बार इस पूल में अचे से मस्ती कर पाटा. काश...

विक्रम जैसे hi घर के पीछे की साइड पंहुचा, उसे वहां ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने की आवाज़ आने लगी. लगता है किसी को बुरी तरह पीटा जा रहा था. उसने स्लाइडिंग दूर खोला तोह उसे 3-4 हट्टे काटते आदमी पूल के पास बैठे दिखाई दिए और एक और आदमी जो जमीन पर बेहाल पड़ा हुआ था.

ये देख कर विक्रम कर चेहरा सख्त हो गया और उसने झुंझुलाहट में स्लाइडिंग दूर वापस बंद कर दिया. वह ड्राइंग रूम में आ कर ज़ोर ज़ोर से आवाज़ देने लगा - िशाआ.... ईशा....

ईशा धीरे से चलते हुए ड्राइंग रूम में आयी - बोलो... what's उप?

विक्रम - मैंने तुम्हे कितनी बार कहा है न... ये सब यहाँ मत करवाया करो...

ईशा ने बेपरवाही से कहा - असलम की बात कर रहे हो?

विक्रम - और किसकी बात करूँगा... दमन आईटी... मुझे पूल में जाना था...

ईशा - तोह चले जायो... हे इस नॉट सतोप्पिंग यू...

विक्रम की आवाज़ थोड़ी और तेज़ हो गयी - That's नॉट थे पॉइंट! मुझे ये बिलकुल पसंद नहीं... मार पीट... और वह भी हमारे घर में...

ईशा के चेहरे पर एक बहुत hi हलकी मुस्कान आयी, और वह विक्रम को ताना मारते हुए बोली - ाचा... लास्ट टाइम जब तुम्हे जरूरत पड़ी थी तब तोह तुम्हे कोई प्रॉब्लम नहीं थी असलम को बुलवाने में...

विक्रम - वह अलग बात थी... वह हमारे घर पर नहीं हुआ था न... कौन है वैसे... किसको पिटवा रही हो...

ईशा - व्हाई दो यू केयर?

विक्रम - बिकॉज़ ये सब यहाँ हो रहा है... एक तरफ तोह यू अरे आस्किंग में तो स्टे अवे फ्रॉम अन्य नॉनसेंस, एंड दूसरी तरफ ये सब...

ईशा मुँह बिचका के बोली - ब्लडी हेलल... मेरा इवेंट मैनेजर है... एंड हे वास् ट्राइंग तो स्टील फ्रॉम में...

विक्रम परेशान होते हुए बोलै - ओह गॉड... तुम उसे पिटवा रही हो... वह तोह तुम्हारे साथ इतने सालो से काम कर रहा है...

ईशा - 4 इयर्स... बूत उसको पता होना चाहिए की तेरे विल बे कोंसेकुएंसेस...

विक्रम - के ों ईशा... जस्ट स्टॉप आईटी यार... िफ़ आईटी वास् सम मनी, it's नॉट ा बिग डील...

ईशा - नूवो... बिग डील फॉर में... इतस नॉट अबाउट थे मनी, it's अबाउट ट्रस्ट...

तभी बहार बैठे आदमी में से एक अंदर आया, शायद वह hi असलम था - मेमसाब... मैं थोड़ी देर बहार हो कर आता हूँ... लड़के ज़ारी रखेंगे काम... आप कहे तोह इसकी बीवी को भी...

विक्रम बीच में बोल पड़ा - नहीं... नहीं... ऐसा कुछ नहीं करना... उसकी बीवी का इस सब से कोई लेना देना नहीं है...

असलम ने उसकी बात को नहीं सुना, पर ईशा की और hi देखता रहा - मेमसाब...

ईशा थोड़ी देर सोचते हुए चुप रही, फिर बोली - नहीं... रहने दो... हमारे साहब को बहुत प्यार आ रहा है इस पर...

असलम - जैसा आप कहे...

असलम ये कह कर वहां से चला गया और विक्रम ईशा को घूर कर देख रहा था - ये क्या बकवास है यार... कोई गैंगस्टर फिल्म चल रही है क्या यहाँ...

ईशा - लीव आईटी... तुम क्यों इस सब में पद रहे हो... एनीवे दीद यू सी थे पोस्टर्स ों योर वे होम?

विक्रम चौंकते हुए बोलै - व्हाट पोस्टर्स?

ईशा - सीरियसली? सब जगह तुम्हारे पोस्टर्स लगवा दिए है और तुमने देखे भी नहीं...

विक्रम ने गहरी सांस लेते हुए अपनी आँखें बंद कर ली - तस्कक.... ईशा.... यू शुड हैवे अस्केद में फर्स्ट... मैंने अभी तक हाँ नहीं कहा था पोस्टर्स के लिए...

ईशा - What's योर प्रॉब्लम? डैड सब ओर्गनइजे कर रहे है न... यू जस्ट नीड तो बे थे पोस्टर बॉय...

विक्रम को ईशा की बातें सुन कर गुस्सा आ रहा था - मय्बे ी don't वांट तो बे थे पोस्टर बॉय...

ईशा है पड़ी - ओह प्लीज विक्रम, रहने दो... ी क्नोव यू चरावे पावर... चलो अब ये ड्रामा क्वीन बनना बंद करो...

विक्रम ने टेबल पर एक फोल्ड किया हुआ पोस्टर उठा कर खोला. उसे अपनी ये फोटो बिलकुल नकली सी लग रही थी, जैसे उसमे दिख रहे इंसान को वह पहचान भी न पा रहा हो. उसके दिमाग में एकदम से ख्याल आया, कहीं सुप्रिया ने तोह ये पोस्टर देख न लिया हो. पता नहीं वह क्या सोचने वाली, उसने तोह इस बारे में सुप्रिया से अचे से डिसकस भी नहीं किया था.

विक्रम ने बहार पूल की और देखा, हलकी हलकी बारिश शुरू हो गयी थी पर वह लोग अभी भी इवेंट मैनेजर को पीट रहे थे.

_________________________________________

इक़बाल की बाइक बस बिल्डिंग में hi घुसी थी. बस 4-5 मिनट पहले hi बारिश शुरू हुई थी, पहले हलके और फिर तेज़ होते हुए. सुप्रिया की सलवार पूरी तरह भीग चुकी थी. इक़बाल ने बाइक बिलकुल अंदर की तरफ रोकी ताकि सुप्रिया और न भीगे. पर अब शायद भीगने को बचा hi क्या था.

इक़बाल ने सुप्रिया की और देखा, उसकी कुर्ती भीग कर उसके जिस्म से पूरी तरह से चिपक गयी थी. और अंदर की ब्रा की आउटलाइन भी साफ़ दिखाई दे रही थी. हवा थोड़ी सी ठंडी हो गयी थी, जिसके कारन सुप्रिया की चूचियां कड़ी हो कर गीले कपड़ो में साफ़ दिख रही थी.

सुप्रिया ने इक़बाल को अपनी और घूरते हुए पाया और उसने अपनी आंखें नीचे करते हुए अपना गाला साफ़ करने की आवाज़ निकली - ेह्हह्ह्मममम....

2d82e5229ccb56580f30d294f835e985.jpg


इक़बाल उसकी आवाज़ से जैसे होश में आया और उसने तुरंत hi दूसरी और देखा - मैडमजी... माफ़ कीजिये आप भीग गयी... आप ऊपर चले जाइये जल्दी से... और कपडे बदल लीजिये...

सुप्रिया ने हलके से कहा - हाँ... मैं जाती हु... आप भी भीग गए है... आपको कुछ कपडे चाहिए क्या?

इक़बाल - नहीं मैडमजी मैं ठीक हु... मेरे पास रखे होते है यहाँ एक जोड़ी कपडे... वैसे भी कोई देखेगा तोह हमें ऐसे तोह गलत समझ सकता है...

सुप्रिया ने एकदम से जैसे रीलीज़ किया की इक़बाल उसके बहुत hi पास खड़ा था. उसने एक दो कदम पीछे लिए - हाँ... मैं चलती हूँ... आपका बहुत बहुत शुक्रिया आज के लिए... आपने मुझे खाने का बिल भी नहीं चुकाने दिया...

इक़बाल - मैंने कहा न मैडमजी... शुक्रिया की कोई जरूरत hi नहीं थी... और खाने का क्या है... वैसे भी वह जगह मैंने चुनी थी, तोह बिल भी मैं hi ऐडा करूँगा न...

सुप्रिया ने हलके से सर हिलाकर इक़बाल को bye बोलै और जल्दी से लिफ्ट में आ गयी. लिफ्ट के अंदर पहले से hi बिल्डिंग की एक औरत कड़ी थी. उसने सुप्रिया को ऊपर से नीचे तक घूर कर देखा. उसकी शकल से साफ़ लग रहा था की वह सुप्रिया को इस गीली हालत में देख कर उसे जज कर रही थी. सुप्रिया ने उससे नज़रे चुराई और लिफ्ट की दीवार की और देखने लगी.

जैसे hi लिफ्ट सुप्रिया के फ्लोर पर रुकी वह झट से उतर गयी. सुप्रिया ने अपने घर के दरवाज़े की चाबी लगायी, और दरवाज़ा खोलते hi किसी लड़की की खनकती हुई हसी उसके कानो में पड़ी.

लड़की - है है है है… मुझे क्यों बीच में फसा रहे हो यार… कहीं मामला और न बिगड़ जाये…

सुप्रिया का दिल धक् से रह गया. उसने देखा की घर की चौखट के अंदर ज़मीन पर एक लड़की की संदल बिखरी बड़ी थी और ड्राइंग रूम में नज़र डालते hi उसका दिमाग घूम गया. सामने सोफे पर अतुल और दिशा बैठे थे, एक दुसरे के बेहद करीब, लैपटॉप में कुछ देखते हुए उनके चेहरे पर एक मुस्कान थी.

अतुल ने जैसे hi सुप्रिया को देखा, वह एक डैम से खड़ा हो गया - सुप्रिया!! तुम आ गयी…

सुप्रिया ने अपनी घडी में टाइम देखा, अभी तोह सिर्फ 5 बजे थे, शायद वह गलत तिने पर घर वापस आ गयी थी. या फिर बिलकुल सही टाइम पर. सुप्रिया दोनों की और बारी बारी करके देख रही थी. वह गुस्से से तिलमिला रही थी पर उसके मुँह से एक आवाज़ भी नहीं निकल रही थी. शायद आज उसने उन्हें रेंज हाथों पकड़ hi लिया था.

अतुल - तुम तोह पूरी तरह भीग गयी हो… जायो अंदर चेंज करके आ जायो… मैं इतने चाय चढ़ाता हूँ…

दिशा भी हसमुख आवाज़ में बोल पड़ी - हाँ सुप्रिया, चेंज करलो… ठण्ड लग जाएगी...

सुप्रिया को अपने hi घर में दिशा की आवाज़ चुभ सी रही थी. सुप्रिया के घर में, वह किस हक़ से उसे आदेश दे रही थी. पर सुप्रिया उन दोनों के सामने ऐसे गीली नहीं कड़ी नहीं रहना चाहती थी, तोह वह जल्दी से पेअर पटकते हुए बैडरूम में घुस गयी.

उसने अपनी अलमारी से कपडे लिए और बाथरूम में घुस गयी. बाथरूम में घुसते hi उसने खुद को शीशे में देखा. गीले बिखरे बाल, भीगा हुआ चेहरा, पर साथ hi आँखों में भी कुछ भीगा हुआ सा था. सुप्रिया ने अपने कपडे उतारने शुरू किये.

बहार से उसे उन दोनों की हसने की आवाज़ आयी. शायद वह उसी पर है रहे होंगे, की वह दोनों उसके hi सामने उसके घर में बिना किसी शर्म के बैठे थे, और सुप्रिया कुछ कह भी नहीं पायी.

पर वह भी तोह एहि कर रही थी अतुल के साथ. तोह वह क्यों किस हक़ से अतुल को कुछ कहे. सुप्रिया चेंज करके जल्दी से बाथरूम से बहार निकली. और बहार ड्राइंग रूम में आयी. अतुल किचन में चाय बना रहा था और दिशा उसके लैपटॉप पर कुछ कर रही थी. सुप्रिया वहां आ कर उससे जितना दूर हो सके उतना दूर बैठ गयी.

उसने कभी दिशा को हस्ते क्या मुस्कुराते भी नहीं देखा था ऑफिस में. पर इस समय तोह उसके चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कान थी.

सुप्रिया बस अब और पूछे बिना नहीं रह सकती थी. उसने दबी आवाज़ में कहा - कब से चल रहा है ये सब?

दिशा ने चौंकते हुए उसे देखा - हँ.... क्या सब?

सुप्रिया - एहि सब...

दिशा - जब से तुमने देखा... तब से...

सुप्रिया का गाला सूख रहा था, दिशा उसे मजबूर कर रही थी सवाल पूछने के लिए - पहले कितनी बार आयी हो यहाँ?

दिशा ने कंधे उचकते हुए कहा - आज पहली बार...

सुप्रिया - तोह फिर कहाँ मिलते हो तुम दोनों...

दिशा हस्ते हुए - मुझे पता था तुम्हारा दिमाग ऐसी घटिया बात hi सोच सकता है...

सुप्रिया - तुम लोग करो... और मैं सोचु भी न...

दिशा - वैसे तुम कहाँ कहाँ मिलती हो विक्रम से...

सुप्रिया ने दिशा को घूर कर देखा - मैंने वह जॉब कब की छोड़ दी है... और विक्रम सर और मेरे बीच कुछ नहीं था...

दिशा - ठीक है मत मनो... वैसे मैंने अतुल को कुछ नहीं बताया है... ताकि उसके सामने तुम्हारी इज़्ज़त बानी रहे...

सुप्रिया - जब कुछ है hi नहीं तोह बतायोगी क्या...

दिशा - हाँ सही कह रही हो... कुछ है hi नहीं... बिलकुल वैसे जैसे तुम्हारी गाडी उनके घर पर होती है और तुम कहीं दिखाई hi नहीं देती... शायद उनकी गाडी ख़राब हो गयी होगी इसलिए तुमने उन्हें अपनी गाडी दे दी, है न?

सुप्रिया ने गुस्से से अपने दांत भींचे, उसे दिशा पहले दिन से hi कभी अछि नहीं लगी थी - तुम्हे जो सोचना है सोच सकती हो... वैसे अतुल में तुम्हे ऐसा क्या दिख गया... और पता नहीं उसे तुम में क्या नज़र आया...

दिशा - ः... तुम नहीं समझोगी... एनीवे... मैं तुम्हे तोह कोई जस्टिफिकेशन नहीं दूंगी... तुम्हे जो सोचा है सोच सकती हो...

इतने में अतुल चाय ले कर आ गया था, वह दिशा के थोड़ा पास hi बैठ गया - क्या बातें हो रही है...

दिशा मुस्कुराते हुए बोली - कुछ नहीं... ऐसे hi... ऑफिस की... इधर उधर की...

सुप्रिया अपने चेहरे पर एक झूटी मुस्कान लायी, वह सोचने लगी की उसे क्या फरक पड़ता था, इन दोनों को जो करना था वह कर सकते थे.

दिशा ने चाय की चुस्की ली - अतुल... चाय पी कर मुझे चलना चाहिए... लेट हो रहा है... मुम्मा वेट कर रही होंगी...

अतुल - ारी... खाना खा के जाना न...

दिशा - नहीं आज नहीं... कभी और... पक्का

अतुल - ठीक है... जैसा तुम ठीक समझो... आंटी को नमस्ते कह देना मेरी तरफ से...

सुप्रिया चुप चाप बैठी उन दोनों की बातें सुन रही थी. उनकी बातों में कुछ अपनापन सा था जो बस फॉर्मल कलगुएस के बीच में नहीं होता. दिशा चाहे कितना मन कर ले, उनके बीच कुछ तोह था, कुछ ज्यादा.

कुछ hi देर में दिशा अपनी चाय ख़तम करके जाने के लिए कड़ी हो गयी थी. उसने अतुल से हाथ मिला कर उसे bye बोलै, और सुप्रिया की तरफ देखा भी नहीं. सुप्रिया ने भी कोई कोशिश नहीं करि, वह भी सोफे पर बैठी हुए अपना फ़ोन चलती रही.

अतुल दिशा को छोड़ने के लिए नीचे तक गया, दिशा शायद ऑटो से घर जाने वाली थी. सुप्रिया का मैं हुआ की वह बालकनी में जाकर अतुल और दिशा पर नज़र रखे, पर फिर उसने सोचा की वह क्यों देखे? जो देखना था, वह तोह यहीं दिख गया था. उसकी उंगलियां फ़ोन की स्क्रीन पर चल रही थी पर उसका ध्यान स्क्रीन पर नहीं था.

थोड़ी देर बाद अतुल वापस घर में घुसा, उसके चेहरे को देख ऐसा लग hi नहीं रहा था की उसे ज़रा भी अंदाज़ा था की सुप्रिया कैसा महसूस कर रही थी. सुप्रिया को लगा की वह खुद hi समझायेगा की दिशा उनके घर क्यों आयी थी, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ.

थोड़ी देर बाद सुप्रिया ने खुद hi पूछ लिया - ये दिशा यहाँ क्यों आयी थी...

अतुल - आज ऑफिस से थोड़ा जल्दी फ्री हो गए तोह मैंने उसे घर आने के लिए बोल दिया... काफी दिनों से ताल रहा था उसका आना... मुझे लगा तुम भी मिल लोगी...

सुप्रिया - पर यूँ अकेले घर पर... आपको पता था न मैं बहार हु...

अतुल - तोह इसमें क्या है? वह मेरी कलेग है... राहुल भी तोह कई बार मेरे साथ घर आता था...

सुप्रिया - पहले तोह कभी बात नहीं करि आपने दिशा के बारे में?

अतुल - हम्म्म... हाँ ऐसा कुछ बताने के लिए था नहीं... बस ऑफिस में हम दोनों की बात हो जाती है...

सुप्रिया - पर आप लोगो की बातों से तोह ऐसा लग रहा था की आप दोनों एक दुसरे के साथ कम्फर्टेबले हो...

अतुल हस्ते हुए बोलै - ओफ्फो... तुम कबसे शक्की बीवी बनने लग गयी... तुम्हे पता तोह है उस ऑफिस में सब कितने बूढ़े बूढ़े लोग है... बस एक दिशा hi साथ की है... तोह हम लोग साथ लंच कर लेते है और थोड़ी बहुत बातें... जैसे तुम और कृति समझ लो...

सुप्रिया - मैं शक नहीं कर रही हूँ... बस मुझे वह अछि नहीं लगती...

अतुल - कौन दिशा? वह तोह काफी अचे से बात करती है...

सुप्रिया - आपके साथ करती होगी... मुझसे तोह कभी नहीं की... हमेशा ऐटिटूड hi दिखाया है...

अतुल - तब तोह अगली बार तुम दोनों की दोस्ती करवानी पड़ेगी...

सुप्रिया सोफे से कड़ी हो गयी - मुझे नहीं करनी उससे दोस्ती वोस्ती...

अतुल के चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कराहट थी, जैसे उसे ाचा लग रहा हो सुप्रिया का जेलस होना - ाचा ठीक है बाबा... सुनो तोह...

सुप्रिया वहां से हट के किचन में चली गयी. उसने किचन के स्लैब पर अपने दोनों हाथ रख कर अपने आपको थमा. वह क्यों इतनी फ़िक्र कर रही थी की अतुल क्या करता है, वह तोह बस कुछ दिनों में यहाँ से चली hi जाएगी. बस आज का दिन इतना लम्बा और तिरिंग हो गया था की शायद उसके इमोशंस आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो रहे थे.

रात को वह अपने बीएड पर लेती हुई सुप्रिया के मैं में ख्याल आया, क्या अतुल और दिशा इस घर में भी सेक्स कर चुके थे? इतने हफ्ते हो गए थे सुप्रिया को कुछ भी करे हुए और उसके पूरे शरीर में एक आग सी लगी हुई थी.

सुप्रिया ने बहुत सोने की कोशिश करि पर वह आग उसे सोने नहीं दे रही थी. काश वह इस समय विक्रम के साथ होती, और वह उसके साथ जैम के सब कुछ कर पाती. सुप्रिया ने ये सोचते हुए अपने पायजामा न नाडा ढीला किया और अपना हाथ अपनी पंतय में घुसा दिया. उसकी उंगलियां उसके झांट के बालों से होता हुए उसकी छूट तक पंहुचा. वह वहां हलके हलके मसलने लगी.

ezgif-880e54c17dc9cf.gif


सुप्रिया अपने दुसरे हाथ से अपने मम्मो को कुचलने लगी. उसकी कोमल सी त्वचा पर उसके हाथ इतने आराम से चल रहे थे. जब उसे खुद इतना मज़ा आ रहा था अपने शरीर को छूने में, तोह पता नहीं उन आदमियों का क्या हाल हुआ होगा जिन्होंने उसे छुए था. ये सोचते hi सुप्रिया का हाथ और तेज़ हो गया.

12.gif


वह कोशिश कर रही थी की बड़े मोठे लुंड के बारे में सोचे, जो उसे इस समय छोड़ रहा हो. पता नहीं अब उसकी सोच में भी कैसे ये शब्द आने लगे थे. उसने अपनी उंगलियां अपनी छूट में घुसा दी और अंदर बहार करने लगी. वह कोशिश कर रही थी की रात के अँधेरे में ज्यादा आवाज़ न कर.

बस वह अपने क्लाइमेक्स तक पहुंच hi गयी थी, उसने अपने बूब्स को कास के दबाया और नीचे उसका फव्वारा छूट गया. सुप्रिया जल्दी से कमरे से अटैच्ड बाथरूम में भागी और अपनी चड्डी उतार कर अपने आप को साफ़ करने लगी.

सब हो जाने के बाद, उसने एक नया अंडरवियर पहना और बीएड पर आ कर लेट गयी. अब शायद वह एक चैन की नींद सोने वाली थी.

___________________________________________________

अगले दिन सुप्रिया घर पर hi थी, रात की नींद के बाद वह थोड़ा बेहतर महसूस कर रही थी. वह अपने दिमाग से कल के सारे वाक्यों को निकालने की पूरी कोशिश कर रही थी. पर दिमाग बार बार वहीँ लौट जाता.

तभी उसके फ़ोन पर एक कॉल आने लगा, ये तोह कृति का कॉल था. सुप्रिया एक सेकंड के लिए तोह सोचती hi रह गयी की कृति उसे कॉल क्यों कर रही है. कहीं इस कॉल से राहुल का कोई लेना देना तोह नहीं है.

सुप्रिया ने घबराहट के साथ फ़ोन उठाया. दूसरी तरफ से कृति की खिलखिलाती हुई आवाज़ आयी - मैडम... कहाँ गायब हो गयी हो...

उसकी आवाज़ का टोन सुन कर सुप्रिया थोड़ा रिलैक्स हुई - घर पर hi हु... और कहाँ जाउंगी... तुम बताया?

कृति - ऑफिस में... पर अब तुम्हारे बिना मेरा मैं hi नहीं लगता, मेरी जान...

सुप्रिया - ाचा... मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड बन गयी थी क्या?

कृति - कुछ ऐसा hi समझ लो... वैसे बन तोह बहुत कुछ गयी थी तुम...

सुप्रिया उसका इशारा समझते हुआ खामोश सी हो गयी - हम्म्म्म...

कृति - यू क्नोव... जब मुझे तुम्हारे और भैया के बारे में पता चला था न... मैं पहले तोह बहुत गुस्सा हुई थी... हाउ कैन थे दो थिस, it's रॉंग... एंड हाउ कैन यू कीप थिस सीक्रेट फ्रॉम में...

सुप्रिया - ारी... कोई सुन लेगा ऑफिस में... थोड़ा धीरे बोलो...

कृति - कोई नहीं सुनेगा... मीटिंग रूम में अकेली हूँ...

सुप्रिया - ाचा... हम्म्म... तोह अब तोह वैसा hi हुआ न जैसा तुम चाहती थी...

कृति - नहीं न... पूरी बात तोह सुनो... पर लेटर तहत नाईट मैंने जब बहुत सोचा तोह ी रीलीज़ेड की हाउ परफेक्ट यू एंड भैया अरे टुगेदर... एंड तुम मेरी इतनी क्लोज फ्रेंड... मेरी परफेक्ट भाभी होती... स्वीट सी भाभी...

सुप्रिया - हम्म्म... बूत आईटी डिडन्ट वर्क आउट न...

कृति इमोशनल होते हुए बोली - पर क्यों... that's व्हाट ी वांट तो क्नोव...

सुप्रिया - ारी.. मैं नहीं समझा सकती... ये कोई साइंस या लॉजिक की बात तोह है नहीं... बस हमने सब ख़तम करना hi ठीक समझा...

कृति - हम्म्म... न भैया समझा रहे है न तुम... इतस नॉट फेयर...

सुप्रिया - बस इसलिए hi फ़ोन किया था क्या? मुझ पर गुस्सा करने के लिए?

कृति - नहीं बस बोर हो रही थी इसलिए... राहुल भी फ़ोन नहीं उठा रहा कल से...

राहुल का नाम सुन कर सुप्रिया के दिल की धड़कन तेज़ हो गयी थी - ाचा...

कृति - हाँ... बस मैसेज आया था की वह थोड़ा बिजी है... मैं सोच रही हूँ उसके घर hi चली जायु... सरप्राइज देने...

सुप्रिया एकदम से बोली - नहीं!! ी मैं.. जब वह बिजी है तोह रहने दो न... यहाँ मुझसे मिलने आ जायो...

कृति - हम्म्म... देखती हूँ... सुनो, व्हाई don't यू के तो माय हाउस फॉर ा स्लीपोवेर... भैया से लड़ाई हुई है न... मुझसे तोह नहीं...

सुप्रिया - नहीं पर...

कृति - कोई पर नहीं... I'll अर्रंगे समथिंग एंड यू हैवे तो के... ओह वेट... किसी को ये मीटिंग रूम चाहिए... मैं बाद में कॉल करती हूँ...

फ़ोन काट गया था पर सुप्रिया अभी भी सोच रही थी की कृति अगर राहुल से मिली तोह राहुल उसे क्या बताएगा... उसे ये सोचते hi घबराहट सी होने लगी...

___________________________

2-3 हफ्ते बीत गए थे, और सुप्रिया कहीं बहार जाने के लिए तैयार हो रही थी. आज का दिन काफी ज्यादा बड़ा था, और उसे काफी नर्वस भी कर रहा था. उसका दिमाग पूरी तरह सुन्न पद गया था. सुप्रिया ने अपने आधे सर पर चुन्नी डाली और अपने आप को आईने में देखा. उसके चेहरे पर स्ट्रेस साफ़ दिखाई दे रहा था.

photo-5923836478142658971-w.jpg


आज वह 6 हफ्ते बाद फाइनली विक्रम से मिलने वाली थी. उसे विक्रम से मिलने की काफी एक्ससिटेमेंट तोह थी, पर साथ hi जिस कारन से वह मिल रहे थे उससे काफी ज्यादा टेंशन. आज वही दिन था जिसके बारे में वह सोच सोच कर कबसे परेशान हो रही थी. कई बार तोह उसने इस सब का ख्याल भी अपने दिल से निकाल दिया था. आखिर वह ऐसे कैसे कन्वर्ट कर ले. पर शायद विक्रम को पाने के खातिर उसे ये करना hi होगा.

आज भी उसने अकेले न जाकर, अपने सबसे भरोसेमंद आदमी को hi अपने साथ ले जाना का इरादा रखा था. सुप्रिया तैयार हुई और उसने इक़बाल को मैसेज डाला - मैं बस आ रही हो नीचे...

सुप्रिया नीचे पहुंची, और इस बार इक़बाल अपनी गाडी लेकर खड़ा था. अछि hi था वह गाडी लेकर आया था क्यूंकि बारिश का मौसम सा हो रहा था. पिछली बार की तरह सुप्रिया भीगना नहीं चाहती थी.

इक़बाल मुस्कुराता हुआ सुप्रिया का इंतज़ार कर रहा था.

सुप्रिया ने उसे देखते hi कहा - मैं आपको बार बार परेशान करती हु न... आपको भी लगेगा की मुझे ड्राइवर समझ रखा है...

इक़बाल - नहीं मैडमजी... मुझे तोह बहुत ाचा लगता है जब आप मुझे याद करते हो किसी काम के लिए... और ड्राइवर क्या... मैं तोह आपके लिए कुछ भी बन जायो...

सुप्रिया हस्ते हुए बोली - ाचा... आप भी न... कुछ भी बोलते हो...

इक़बाल - सच मैडमजी... वैसे आप बहुत hi अचे लग रहे हो आज...

सुप्रिया मुस्कुराती हुई गाडी में पीछे बैठ गयी और इक़बाल आगे ड्राइवर सीट पर.

इक़बाल - बताइये मैडमजी कहाँ जाना है... आपने कल बताया hi नहीं कहाँ जाना है...

सुप्रिया - उम्म्म्म... आपको याद है... आप मुझे एक बार वहां ले गए थे...

इक़बाल - कहाँ मैडमजी...

सुप्रिया - याद करिये... हम लोग गए थे... जमा मस्जिद...

इक़बाल - हाँ... याद है मुझे हम लोग वहां गए थे... आपको वहां जाना है?

सुप्रिया - बस वहीँ जाना है...

इक़बाल - ारी वह... क्या बात है... आप फिर से मेरे साथ वहां जाना चाहती है...

सुप्रिया - वहां जाना तोह है... पर... मैं आपको बाद में सब समझायुंगी... अभी चले?

इक़बाल - चलिए चलते है...

इक़बाल ने गाडी चला दी. सुप्रिया पूरे रास्ते थोड़ा सा छुप hi थी. पिछले हफ्ते विक्रम का कॉल आया था की कागज़ी करवाई साड़ी पूरी हो गयी है बस अब ये आखरी स्टेप था पूरे प्रोसेस का. उसके लिए उन दोनों को वहां जाना होगा. विक्रम ने पूरी सावधानी राखी थी की वह एक प्रीपेड नंबर से सुप्रिया को कॉल करे ताकि कहीं पर भी उनकी बातचीत दर्ज़ न हो.

जैसे जैसे वह वहां पहुंच रहे थे सुप्रिया की टेंशन बढ़ती जा रही थी. इक़बाल भी शीश से सुप्रिया की और देख रहा था. आज उसकी शकल पर मुस्कान नहीं टेंशन थी.

इक़बाल - मैडमजी... सब ठीक है न...

सुप्रिया ने गहरी सांस लेते हुए कहा - हाँ... बस मैं अभी बात करने की हालत में नहीं हु... प्लीज आप मुझसे ज्यादा कुछ न पूछे...

इक़बाल - कोई बात नहीं... आप आँखें बंद करके बैठ जाये... मैं बता दूंगा आपको जब पहुंचने वाले होंगे...

सुप्रिया ने अपनी आँखें बंद कर ली. पिछले लगभग 2 साल की साड़ी चीज़े उसके दिमाग में घूम रही थी. अतुल, ध्रुव, राहुल, प्रताप, कृति, विक्रम, जय, भाभी... हर कोई जैसे उसे अलग अलग नसीहत दे रहे हो. सुप्रिया ने अपने दोनों हाथ कसके आपस में जकड़े हुए थे. उसे पता नहीं चला की कब उसने हलकी सी झपकी ले ली.

इक़बाल की आवाज़ ने उसे जगाया - मैडमजी... पहुंच गए है बस...

सुप्रिया जागते हुए तेज़ तेज़ सांसें लेने लगी - हँ... ाचा... ऐसा करो... थोड़ा दूर hi लगा देना गाडी... मैं पैदल चली जयुंगी...

इक़बाल - जैसा आप कहे... मैं साथ चलूँगा न आपके...

इक़बाल ने थोड़ी दूर एक भीड़ भाड़ वाले इलाके में अपनी गाडी लगायी और वह और सुप्रिया साथ चलते हुए मंजिल की और बड़े. जैसे hi वह पास पहुंच रहे थे, सुप्रिया को विक्रम की बात याद आयी की वह बिलकुल अकेले वहां पहुंचे.

सुप्रिया ने अपने कदम रोके - इक़बाल... आप यहीं इंतज़ार करो... मैं बस थोड़ी देर में आती हूँ...

इक़बाल - पर मैडमजी... यहाँ... आप अकेले... मैं कुछ समझा नहीं...

सुप्रिया - आप परेशान मत हो... मुझे कुछ नहीं होगा... बस आप मेरा इंतज़ार करना...

इक़बाल पूरी तरह से माना तोह नहीं था, पर उसने फिर भी हाँ में सर हिलाया. सुप्रिया उसे वहीँ छोड़ कर आगे की और बाद गयी. अकेले आगे जाने में तोह उसे और भी घबराहट हो रही थी. जैसे जैसे वह पास पहुंच रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे भीड़ बढ़ती जा रही थी.

धीरे धीरे उसे रास्ता याद आ रहा था, कैसे वह सीढ़ियों से ऊपर गयी थी. और जैसे hi वह सीढ़ियों के पास पहुंची उसे विक्रम वहीँ नीचे खड़ा दिखाई दिया. विक्रम ने एक कुरता पहना हुआ था और एक नकली मच लगा राखी थी, पर सुप्रिया उसे कैसे नहीं पहचानती.

विक्रम को देख कर उसकी जान में जान आयी और चेहरे की खोयी हुई मुस्कान भी वापस आ गयी. वह तोह बस दौड़ के विक्रम के गले लग्न चाहती थी, पर आस पास का माहौल देख कर वह जल्दी से चलते हुए विक्रम के पास पहुंची और उसके कंधे पर हाथ रख दिया.

विक्रम भी सुप्रिया को देख कर मुस्कुरा रहा था, उनके चेहरे देख कर तोह ऐसा hi लग रहा था जैसे दो प्रेमी सदियों के बाद मिले हो. कितना कुछ था जो वह दोनों एक दुसरे से कहना चाहते थे पर शायद ये वह जगह और समय नहीं था.

विक्रम ने सीधे काम की बात की - रेडी?

सुप्रिया - हाँ...

विक्रम - उम्म्म.. हमें यहाँ सामने में अंदर नहीं जाना... बस यहाँ पास hi मैं एक छोटी बिल्डिंग है… वहां जाना है... वहां ये पेपर्स दे देना और एक मौलवी होंगी... वह तुमसे कुछ फॉर्मेलिटी करवाएंगे... और कुछ पेपर सिग्न... बस हो जायेगा...

विक्रम ने पेपर सुप्रिया के आगे किये, पर सुप्रिया ने उन्हें नहीं पकड़ा - आप hi सम्भालिये न इन्हे, मैं क्या करुँगी ले कर...

विक्रम - तुम अपने पेपर्स ले कर जायेगी न... हम दोनों अलग अलग जायेंगे... ताकि किसी को कोई शक न हो...

सुप्रिया के चेहरे पर टेंशन वापिस आ गयी - अकेले??!! पर मैं कैसे...

विक्रम - के ों... यू कैन दो आईटी... इतस वैरी सिंपल... टेंशन मत लो...

सुप्रिया - पर अकेले जाना जरूरी है क्या...

विक्रम - हाँ प्लीज... समझा करो... काफी खतरा है, तुमने किसी को बताया तोह नहीं न की तुम यहाँ आयी हो...

सुप्रिया के मैं में आया वह एक बार के लिए इक़बाल का नाम ले ले पर उसने न में सर हिला दिया.

विक्रम - Ok, पहले मैं हो कर आता हूँ… तुम यहीं वेट करो…

विक्रम वहीँ पास में छोटी बिल्डिंग की और चल पड़ा. सुप्रिया की नज़रें तोह बस उस पर hi तिकी हुई थी. पर कुछ hi देर में वह उसकी नज़रो से ओझल हो गया. सुप्रिया वहीँ एक कोने में बैठ गयी और उसने दुपट्टे से अपना मुँह धक् लिया. उसे महसूस हो रहा था की आते जाते लोग उसकी और देख रहे थे.

एहि कोई 25-30 मिनट का इंतज़ार था, पर सुप्रिया को ऐसे लग रहा था जैसे वह घंटो वहीँ बैठी हुई हो. तभी विक्रम उसे मुस्कुराता हुआ आता दिखा.

जैसे hi वह पास पंहुचा, सुप्रिया ने सवालो की झड़ी लगी दी - हो गया? कैसा था सब? क्या करना पड़ेगा?

विक्रम हस्ते हुए बोलै - ारी इतनी टेंशन क्यों ले रही हो… कुछ भी नहीं है, जल्दी से हो जायेगा सब. चलो अब तुम चली जायो.

विक्रम ने सुप्रिया को कुछ कागज़ थमाए और सुप्रिया उस दूसरी छोटी बिल्डिंग की तरफ चल पड़ी.

सुप्रिया बार बार पीछे मुद कर विक्रम की और देख रही थी पर फिर आखिर में उसे अंदर जाना hi पड़ा. वह सोच hi रही थी की अब आगे क्या करना है की उसे एक और महिला और उसके साथ एक आदमी कागज़ लिए एक तरफ जाती दिखे. वह भी उसके पीछे हो ली.

सुप्रिया उनके पीछे चलते चलते एक दरवाज़े पर पहुंच गयी. अभी जो अंदर जोड़ा गया हुआ था सुप्रिया उन्हें गौर से देखने लगी और कुछ hi देर में उसकी बारी भी आ गयी.

मौलवी ने सुप्रिया की और गौर से देखा - बेटी… आप अकेले आयी हो यहाँ…

सुप्रिया - जी…

मौलवी - आप अपनी मर्ज़ी से ये सब कर रहे हो… किसी का दबाव तोह नहीं है आप पर…

सुप्रिया - जी.. किसी का दबाव नहीं है… पर क्यों?

मौलवी - ाचा.. मुझे पूछना पड़ता है ये सब.. आपके गले में ये मंगलसूत्र… आप शादी शुदा हो?

सुप्रिया ने अपना मंगलसूत्र छुपाने की कोशिश करि पर अब तोह देर हो चुकी थी - जी…

मौलवी - आपके पति को पता है इस बारे में? या वह भी ये करने जा रहे है?

सुप्रिया - नहीं… मुझे उनको बताना पड़ेगा क्या इस बारे में?

मौलवी - आप को उनकी इजाज़त तोह नहीं चाहिए, पर मैं आपको बता दू की ये करने से हमारी नज़र में आपकी शादी जायज नहीं रहेगी…

सुप्रिया चौंकते हुए बोली - क्या मतलब?

मौलवी - मतलब एहि की जो मैंने कहा… आपकी शादी मंसूख हो जाएगी… लगता है आपको ये नहीं पता था?

सुप्रिया - नहीं मुझे किसी ने ये नहीं बताया था…

मौलवी काफी गंभीरता से सब बोल रहा था - जी.. अब ये जानकार, आप फिर भी आगे बढ़ना चाहेंगी?

सुप्रिया का दिमाग बुरी तरह उलझा हुआ था और उसे समझ नहीं आ रहा था वह आगे क्या करे. अब शायद बहुत देर हो गयी थी पीछे हटने के लिए. उसने दो पल के लिए आँखें बंद कर ली सब कुछ दुबारा सोचने के लिए.
 
अपडेट 75

सुप्रिया धीरे धीरे कदम बढ़ती हुई वापस विक्रम के पास जा रही थी. उसकी नज़रें जमीन पर थी, जैसे जो कुछ अभी हुआ, उसका बोझ सर को नीचे झुका रहा हो.

विक्रम अभी भी वहीँ खड़ा था, जहाँ सुप्रिया उसे छोड़ कर गयी थी. जैसे hi सुप्रिया पास आयी, उसने बिना कुछ सोचे विक्रम के गले लग कर अपने शरीर का सारा बोझ उस पर छोड़ दिया. विक्रम भी कुछ पल के लिए भूल गया था की वह कहाँ खड़ा है और उसने भी सुप्रिया को अचे से अपनी बाहों में भर लिया.

a936018de0704465ae997fd081600534.gif


फिर दोनों सँभालते हुए एक दुसरे से अलग हुए. विक्रम ने सुप्रिया के सिल्की बालों को उसके चेहरे से हटाया और उसकी आँखों में कुछ ढूढ़ने लगा. काश वह इस समय कहीं अकेले होते तोह वह उसे जैम कर चूम लेता.

विक्रम ने सुप्रिया की और देखा, उसकी आँखें हलकी सी भरी हुई - हो गया सब सही से?

सुप्रिया ने अपनी आँखें झुका ली, कुछ कहना चाहती थी पर वह शब्द उसके मुँह से नहीं निकल रहे थे - विक्रम वह….

तभी किसी औरत की चुभती हुई आवाज़ सुप्रिया के कानो में पड़ी - ारी... क्या कर रही है तू…

सुप्रिया ने झटके से अपनी गर्दन घुमाई, सीढ़ियों से एक जानी पेचानी बूढ़ी औरत नीचे आती दिखी. यह वही औरत थी जो उसे पहली बार इसी जगह पर मिली थी. सुप्रिया ने चेहरे पर एक टेंशन की लकीर उभर आयी.

औरत उसके पास आते हुए फिर से बोली - ये क्या कर रही है तू… किसके गले पद रही है…

विक्रम ने पुज़्ज़लेड हो कर सुप्रिया की और देखा, जैसे पूछ रहा हो की ये कौन है. सुप्रिया ने विक्रम की और देख कर अपने कंधे उचका दिए.

सुप्रिया धीरे से बोली - मुझे हैंडल करने दो… कोई नहीं है…

औरत - क्या खुसर फुसर कर रही है, मेरे कान अब इतने तेज़ नहीं है…

सुप्रिया - कुछ नहीं अम्मा… आप कैसी है…

औरत - चल इस बार शुक्र है तूने मुझे पहचाना तोह… पिछली बार तो तू बड़ी बद्तमीज़ हो गयी थी… मॉल में उस आदमी के साथ मुझे पहचानने से भी मन कर रही थी…

सुप्रिया - हाँ, वह मैं अपने पति के साथ थी…

औरत - वह तेरा पति था?!! तोह ये कौन है जिसके गले लग रही है… अब ये मत कहियो की अब ये तेरा पति है… तेरे तोह पति इतने बदलते है जितने लोगो के कपडे नहीं बदलते…

सुप्रिया - नहीं… ये मेरे दोस्त है…

औरत - मर्द दोस्त?!! तौबा तौबा… और तू उनसे ऐसे चिपट भी जाती है… अपनी जवानी पर थोड़ा तोह काबू रख… माना खुदा ने तुझे खूबसूरत बनाया है पर इसका मतलब ये तोह नहीं की हर किसी के गले लग जाये…

सुप्रिया को उसकी बातें काफी अन्नोयिंग सी लगने लगी थी - अम्मा आप क्या बोले जा रही हैं...

औरत - सुन मेरी बात... एक बार ये जवानी ढल जाएगी न तब ये सब दोस्त किसी काम न आएंगे...

सुप्रिया थोड़ा छिड़ कर बोली - हमे चलना है अम्मा, आप अपना ख्याल रखना...

औरत - ख्याल तो तू रखियो... और अगली बार किसी और मर्द के साथ मत दिख जइयो… तेरा तोह वह सबसे पहले वाला hi मर्द सही था…

विक्रम को कुछ समझ नहीं आ रहा था की ये औरत क्या बोल रही थी. सुप्रिया ने विक्रम को चलने का इशारा किया और वह दोनों वहां से चल पड़े.

विक्रम ने एक लाइट टोन में पूछा - ये सब क्या था…

सुप्रिया - कुछ नहीं… एक पागल सी औरत है.. मैं एक बार इक़बाल के साथ यहाँ आयी थी तब मुझसे मिली थी और दूसरी बात अतुल के साथ, और अब तीसरी बार आपके साथ… उसे लगता है… खैर जाने दो..

विक्रम हस्ते हुए - हाहाहा… सच में तुमने तोह उसे टेंशन में hi दाल दिया है…

सुप्रिया ने बात पलटते हुए कहा - छोड़िये न… अब ये बताइये आगे का क्या प्लान है?

विक्रम - हम्म्म… बस अब तोह सब क्लियर है… अब बस शादी… या निकाह… जो मर्ज़ी कह लो… फिर हम एक हो जायेंगे...

सुप्रिया ये सुन कर थोड़ा सा शर्मा सी गयी - और फिर उसके बाद?

विक्रम - उसके बाद बस तुम और मैं और लंदन… और एक नयी ज़िन्दगी…

सुप्रिया ये सुन कर थोड़ा एक्ससिटेड हो गयी - सच में... काफी इंतज़ार हो गया है इस सब में...

विक्रम - बस अब इंतज़ार की घड़ियाँ ख़तम hi समझो...

सुप्रिया थोड़ा हिचकिचाते हुए - वैसे.... मैंने आपके वह पोस्टर्स देख थे दीवार पर लगे हुए…

विक्रम की आवाज़ थोड़ी डाब गयी - हाँ.. वह सब ईशा ने बिना मेरी परमिशन के कर दिया था… बूत don’t वोर्री उससे हम पर कोई फरक नहीं पड़ेगा…

सुप्रिया - आप कितना टाइम यहाँ रहेंगे और कितना लंदन में? आपके बिना तोह मैं बिलकुल अकेली पद जयुंगी…

विक्रम - तुम फ़िक्र मत करो.. मैं इसका भी कोई न कोई सलूशन ढून्ढ hi लूंगा… और मैं तरय करूँगा की ज्यादा से ज्यादा टाइम तुम्हारे साथ स्पेंड करू… आखिर तुमसे दूर कैसे रह पायूँगा मैं…

सुप्रिया - हम्म्म… मुझे लगता है अब शायद अतुल को सब बता देना चाहिए…

विक्रम - नहीं अभी नहीं… अभी किसी को भी कुछ बताना सही नहीं होगा… सही वक़्त आने दो...

सुप्रिया - ठीक है… जैसा आप कहे… वैसे कृति भी बार बार कॉल करके मिलने के लिए बोल रही थी… आज भी काफी ज़िद्द कर रही है मिलने के लिए... क्या उससे मिलना सेफ रहेगा.. उससे मिले हुए काफी दिन हो गए..

विक्रम - हाँ कोई प्रॉब्लम नहीं, तुम उससे मिल लो…. एक बार सब हो जाये तोह हमें उसे भी बता hi देंगे… ी ऍम सूरे वह खुश होगी हमारे लिए… वैसे बस कृति को मिस करती हो या मुझे भी…

सुप्रिया - हम्म्म… आपको तोह बिलकुल भी नहीं…

विक्रम - ाचा… वह तोह आज पता hi चल रहा है…

सुप्रिया शरमाते हुए बोली - सच बोलू तोह आपकी इतनी याद आती है न आजकल.. और मिलने का इतना मैं करता है.. खासकर… रात को… जब मैं अपने आप को अकेली महसूस करती हु…

विक्रम - मैं तोह है की अभी तुम्हे कहीं ले चालू जहाँ बस हम दोनों हो…. बस अब कुछ hi दिन की और बात है, और हम दोनों को अपने दिल पर काबू रखना पड़ेगा… फिर उसके बाद तोह बस हम दोनों….

सुप्रिया ने विक्रम की आँखिन में उसे सताते हुए देखा - इंतज़ार तोह करना hi पड़ेगा न…

विक्रम - उफ्फ्फ… तुम तोह मुझे भटकने में लगी हो… सुनो, तुम्हारा वीसा और टिकट्स वैगेरा सब बस आने hi वाले है… तुम बस एक बैग पैक करके रखना, सब हो जाने के बाद तुम्हे जल्दी से जल्दी यहाँ से निकलना पड़ेगा…

सुप्रिया - पर मैं सबको बोलूंगी क्या?

विक्रम - वह तुम मुझ पर छोड़ दो… सॉरी मुझे अभी ऑफिस के लिए निकलना है… तुम चली जायेगी न घर?

सुप्रिया - हाँ, जैसे आयी थी वैसे hi चली भी जयुंगी…

दोनों ने एक दुसरे को प्यार से देखा. दोनों को पता था की अगली बार जब वह मिलने वाले थे तोह वह शादी के बंधन में बांध जायेंगे. विक्रम ने हलके से सुप्रिया के गाल पर हाथ लगाया और वह वहां से जल्दी से निकल गया.

सुप्रिया ने एक गहरी सांस ली और वापस उस और चल पड़ी जहाँ उसने इक़बाल को छोड़ा था.

________________________

विक्रम अपनी गाडी चलता हुआ बस ऑफिस पंहुचा hi था. आज उसे काफी सारे अर्जेंट काम थे ऑफिस में, पर जो काम सुबह हुआ था वह सबसे ज्यादा ज़रूरी था.

वह ऑफिस पहुंच कर सीधा अपने फ्लोर पर पंहुचा. दिशा बहार अपने डेस्क पर बैठी काम में बिजी थी.

विक्रम ने पास आते हुए कहा - दिशा… मेरा कोई कूरियर आया क्या?

दिशा ने ऊपर देखते हुए कहा - हाँ.. मैंने आपके डेस्क पर रख दिया है. और विक्रम वह…

विक्रम - हाँ बोलो न…

दिशा धीरे से बोली - जय सर अंदर हैं…

ये सुनते hi विक्रम का चेहरा सख्त हो गया. एक तोह उसने सोचा नहीं था की उस दिन की लड़ाई के बाद जय उससे मिलने आएगा, और दूसरा अंदर काफी कुछ ऐसा था जो उसकी नज़रो से छिपाना जरूरी था

विक्रम ने थोड़ी से गुस्से भरी आवाज़ में कहा - तुमने उसे अंदर क्यों जाने दिया?

दिशा अपने आप को डिफेंड करते हुए बोली - वह सुनते कहाँ है… और उनका आपके ऑफिस में वेट करना कोई नयी बात तोह नहीं है…

विक्रम ने एक नज़र दिशा पर डाली, शायद वह कुछ और कहना चाहता था पर रुक गया. शायद उसे भी पता था की उसने दिशा को जय की एंट्री को लेकर कोई स्पेसिफिक इंस्ट्रक्शंस नहीं दिए थे. लेकिन वह उसुअल्ल्य ऐसी सिचुएशन को बहुत अचे से पद लेती थी, पता नहीं आज आज उससे ये चूक कैसे हो गयी थी.

विक्रम ने खुद को सँभालते हुए केबिन का दूर खोला. जय उसकी चेयर पर तोह नहीं पर सामने वाली चेयर पर बैठा था, उसके हाथ टेबल पर रखे पपरवेइट से खेल रहे थे.

जय ने विक्रम को देखते hi बड़ी सी स्माइल दी - देखो… आज तुम्हारी सीट पर नहीं बैठा हूँ… तुम्हे शिकायत का कोई मौका नहीं देना चाहता था..

विक्रम ने दरवाज़ा बंद करते हुए सीधे पुछा - जय तुम यहाँ क्या कर रहे हो…

जय ने हमेशा की तरह कासुअल अंदाज़ में कहा - अपने दोस्त से मिलने आया हूँ … और क्या…

विक्रम - ी थॉट उस दिन के बाद ये काफी क्लियर हो गया था की तुम यहाँ वेलकम नहीं हो…

जय - उस दिन को जाने भी दो अब… मैं तोह कबका भूल गया…

विक्रम अपनी चेयर तक जा रहा था, उसके डेस्क के बीचो बीच कूरियर के लिफाफे पड़े थे. उनमे से एक ब्रिटिश कांसुलेट से था, सुप्रिया का वीसा. जैसे भी हो उसे ये एनवलप जय की नज़रो से दूर रखना था.

विक्रम - तोह अब क्या मुझसे क्या चाहते हो… मैं अपना स्टान्स क्लियर कर चूका था उस दिन…

जय - बस तुम्हारी याद आयी और मैं चला आया… चलो जो कुछ हुआ उसके लिए मैं फिर से माफ़ी मांग लेता हूँ…

विक्रम - और अगर मैं माफ़ न करू तोह…

जय - यार तुम्हारे बिना तोह शिकार में भी मज़ा नहीं आता… ऐसा लगता है जैसे उस शर्मा परिवार ने पूरी ज़िन्दगी हिला कर रख दी है… अब कब तक गुस्सा रहोगे उस बात से...

विक्रम अपनी चेयर पर बैठा और हलके से सारे ेनवेलोपेस अपनी साइड करने लगा. इस समय बस वह चाहता था की जय यहाँ से चला जाये - देखो जय, आज मैं थोड़ा बिजी हूँ... मैं आता हूँ तुमसे मिलने…

जय ने विक्रम की आँखों में एक झलक देखते हुए पुछा - पक्का?

विक्रम - बिलकुल पक्का… साथ बैठ कर दारु पीते है जस्ट लिखे ओल्ड डेज…

जय - दोने बॉस दोने… वैसे ये हुई न हमारी बीच की मातुरित्य, मुझे तोह लगा था तुम कुछ ज्यादा hi फिल्मी हो जाओगे…

विक्रम - हम्म्म, नहीं… ी ऍम फाइन.. चलो फिर मिलते है…

जय जाने के लिए खड़ा हुआ - वैसे मिलेंगे कहाँ? यहाँ या लंदन?

ये सुनते hi विक्रम के चेहरे की स्माइल बिलकुल गायब हो गयी. और जय के स्माइल इतनी बड़ी की उसके दांत दिख रहे थे. विक्रम समझ चूका था की जय वह एनवलप देख चूका था.

बात को घूमने का कोई फायदा नहीं था, विक्रम ने सख्त आवाज़ में पुछा - तुम चाहते क्या हो…

जय - ारी दोस्त… तुम मुझे गलत समझ रहे हो… बस लिफाफा सामने रखा था और मेरी नज़र उस पर पद गयी… उस पर सुप्रिया का नाम भी साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा है… दिशा को बोलो ज़रा ऐसी चीज़ी खुले में न छोड़ा करे...

विक्रम - हम्म्म... उसे ये भी बोलना पड़ेगा की तुम्हे कभी फिर यहाँ अंदर न आने दे...

जय - ऐसा मत बोलो... हमारे बीच तोह कभी ऐसा हुआ नहीं... जो मेरा है वह तुम्हारा है.. और जो तुम्हारा है वह मेरा है...

विक्रम - सुप्रिया कोई बाटने की चीज़ नहीं है, तुम चाहे जो कर लो वह तोह तुम्हे मिलने से रही…

जय भी थोड़ा संजीदा होता हुआ बोलै - मैं अब सुप्रिया में इंटरेस्टेड हूँ भी नहीं… मैंने किसी को वादा किया है की उसकी और देखूंगा भी नहीं…

विक्रम हस्ते हुए - ाचा… तुम कहोगे और मैं मान लूंगा?

जय - सच दोस्त… वैसे चल क्या रहा है? तुम उसे लंदन भेज रहे हो?

विक्रम - हम्म्म…

जय - कैसे मनाया उसे? शादी का प्रॉमिस करके? अगर ईशा को पता चल गया तोह? बहुत बड़ी मुसीबत में फास जाओगे तुम दोस्त…

विक्रम - मुझे ईशा की धमकी मत दो…

जय - तुम तोह अभी भी गुस्से में hi हो… शांत रहो... अगर मेरे आने से टेंशन बड़ी है तोह मैं चलता हूँ… पर कुछ भी जरूरत हो तोह मैं हाज़िर हो जायूँगा…

जय दरवाज़े की तरफ चल पड़ा.

विक्रम - जय… हमारी पुराणी दोस्ती के खातिर…

जय - बोलने की जरूरत नहीं है दोस्त… किसी को कुछ नहीं कहूंगा… तुम जानते हो मैं झूठ नहीं बोलता…

विक्रम का दिल कह रहा था वह जय की बात पर यकीं कर ले, पर उसका दिमाग उसे कुछ और hi कह रहा था. उसे जल्द से जल्द सब करके सुप्रिया को यहाँ से निकलना होगा. शायद कल hi सब कुछ करना होगा.

_______________________________

सुप्रिया बस अभी कृति के घर के बहार hi पहुंची थी. रात के 8 बजे थे, और आज वह पूरी रात कृति के घर पर गुजरने वाली थी. वह इतने दिनों बाद यहाँ आयी थी, और कृति के सामने फिर से विक्रम और अपने बीच की बातें छुपाना… वह सोच कर hi थकान सी महसूस हो रही थी. पर ये शायद आखरी बार था जब उसे कृति से कुछ छुपाना पड़ेगा.

सुप्रिया ने घर की घंटी बजायी और कुछ hi पल बाद कृति ने दरवाज़ा खोलते हुए अपनी उसुअल एनर्जी भरी आवाज़ में कहा - हे स्वीटहार्ट!! तुम आ hi गयी!!

सुप्रिया अपने चेहरे पर एक मुस्कान लेट हुए बोली - हाँ… कैसे न आती… तुमने इतनी बार जो बोलै था आने के लिए…

कृति आँख मारते हुए बोली - नहीं बोलती तोह शायद तुम आती भी न…

सुप्रिया को घर के अंदर कदम रखते hi ड्राइंग रूम से किसी की बात करने की आवाज़ आयी. उसने कृति की और देखते हुए पुछा - अंकल आंटी घर पर है क्या?

कृति - नहीं नहीं.. पापा मम्मी तोह बहार गए हुए है... वे हैवे थे हाउस तो ौरसेल्वेस...

सुप्रिया - ओह, फिर ये आवाज़ें... कोई और भी आया है क्या?

कृति - हाँ बस आकाश और राहुल hi हैं… छोटे से ग्रुप को hi इन्विते किया है मैंने…

राहुल का नाम सुनते hi सुप्रिया के कदम रुक गए और उसका चेहरा सफ़ेद पद गया, उसे नहीं पता था की कृति राहुल को यहाँ बुलाने वाली थी. 2-3 हफ्ते पहले जो कुछ हुआ, उसके बाद वह राहुल से कभी नहीं मिलना चाहती थी.

कृति - क्या हुआ? तुम तोह ऐसे रियेक्ट कर रही हो जैसे मैंने किसी भूत का नाम ले लिया हो…

सुप्रिया ने जल्दी से नार्मल होने की कोशिश करि - नहीं, नहीं… बस मुझे लगा था की हम दोनों hi होंगे…

कृति अपने होंठ पोत करते हुए बोली - हाँ वह लास्ट मिनट थोड़ा प्लान चेंज हो गया… इन दोनों को बुलाने के लिए कितना कन्विंस करना पड़ा... तुम सोच भी नहीं सकती...

सुप्रिया - ओह ाचा… कोई स्पेशल ोकशन है क्या?

कृति स्माइल करते हुए बोली - गेस करो?

सुप्रिया कन्फ्यूज्ड थी - उम्म्म… तुम्हारा बर्थडे तोह नहीं!!!

कृति - बर्थडे तो है.. पर मेरा नहीं…

सुप्रिया हैरान होते हुए बोली - फिर किसका?!!

कृति - ओह गॉड!! तुम अपना hi बर्थडे भूल गयी! कल तुम्हारा बर्थडे है डुबो…

सुप्रिया एक पल के लिए भौचक्की सी रह गयी, इतना कुछ चल रहा था उसकी जिंदगी में की वह भूल hi गयी थी की कल उसका hi बर्थडे है.

सुप्रिया ने धीरे से कहा - ओह्ह्ह वाओ… थैंक यू… मुझे तोह याद भी नहीं था...

कृति उसका हाथ पकड़ते हुए उसे खींच कर अंदर ले गयी - सुप्रिसे देना था तुम्हे, पर तुम इतनी सीरियस दिख रही थी की मुझे अभी बताना पड़ा तुम्हे…

कृति सुप्रिया को लेकर अंदर ड्राइंग रूम में आ गयी और वहां राहुल सोफे पर बैठा था और आकाश पास में hi खड़ा था.

आकाश ने सुप्रिया को देखते hi जोश में कहा - सरप्राइज!!!! हैप्पी बर्थडे इन एडवांस!!!

राहुल ने भी बैठे बैठे कहा - हैप्पी बर्थडे तो यू...

सुप्रिया ने उसकी और देखा, उसके चेहरे पर अभी भी चोट के गहरे निशाँ थे. सुप्रिया ने हलकी सी मुस्कान के साथ कहा - थैंक यू…

कृति - सुप्रिया… यू क्नोव राहुल का बाइक से एक्सीडेंट हो गया था, काफी छोट लगी थी… पुअर गाए...

सुप्रिया ने अनजान बनने का नाटक किया- ओह ाचा… मुझे नहीं पता था… कैसे हो तुम अब राहुल…

राहुल - ठीक हूँ… पर अभी भी छोट पूरी तरह से गयी नहीं है…

राहुल ने सुप्रिया को घूर कर देखा, जैसे कह रहा हो की तुम्हे सब तोह पता है, फिर भी अनजान बनने का नाटक कर रही हो. पूरे कमरे में कुछ पल के लिए ख़ामोशी सी छा गयी और कृति बारी बारी सबकी और देख रही थी.

कृति ने hi इस खामोशी को तोडा - Ok गाइस! एनफ सीरियस वाइब्स... आज का प्लान है पिज़्ज़ा, वाइन एंड सम ऐम्बर्रासिंग गेम्स...

आकाश हस्ते हुए बोलै - कृति का मतलब है आकाश की लेम ऐम्बर्रासिंग लाइफ स्टोरीज...

कृति - सिर्फ आकाश की hi नहीं... सबकी...

कृति जल्दी से एक ट्रे में वाइन के ग्लासेज ले आयी और सबको देने लगी. राहुल ने गिलास उठा कर कहा - चियर्स तो थे बर्थडे गर्ल....

कृति और आकाश ने भी ज़ोर के कहा - चियर्स!!!

सुप्रिया बस हलकी सी मुस्कान लिए अपने आपको यहाँ फसा हुआ सा महसूस कर रही थी. उसे यहाँ आज रात नहीं आना चाहिए था, और अब ये पार्टी जो उसके नाम थी, उससे निकलना तोह बहुत hi मुश्किल था.

करीब ek-do घंटे बाद, ड्राइंग रूम की लाइट्स डिम हो चुकी थी, पिज़्ज़ा के डब्बे खली पड़े थे, और 2-3 वाइन की बोतल टेबल पर बिखरी पड़ी थी. सब लोग बैठे हुए हसी मजाक कर रहे थे. कृति सोफे पर छड़ी हुई कुछ ऐसे बैठी थी की उसकी ड्रेस में से उसकी नंगी जांघें साफ़ दिख रही थी. आकाश की नज़र तोह बस वहीँ तिकी थी.

207941372-350361396457851-7464309943701310272-n.jpg


सबसे ज्यादा पीने वाली कृति थी, और उसके चेहरे पर वाइन का नशा साफ़ दिख रहा था. आकाश का भी कुछ ऐसा hi हाल था. बस राहुल और सुप्रिया ने थोड़ी काम पी थी, पर वह एक दुसरे की तरफ देख भी नहीं रहे थे.

कुछ देर बाद कृति और आकाश साथ खड़े हो कर म्यूजिक पर डांस करने लगे. उन दोनों को इस तरह इतनी करीब डांस करते देख तोह सुप्रिया को भी शर्म सी महसूस होने लगी थी.

कृति ने सुप्रिया को ऊपर उठाने की कोशिश करि - के ों गाइस... ज्वाइन उस....

सुप्रिया कड़ी नहीं हुई, कृति कुछ ज्यादा hi आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो रही थी - कृति नहीं... तुम बैठ जायो...

सुप्रिया ने कृति को खींचा और वह कारपेट पर नीचे धाम से बैठ गयी. कृति को इससे जैसे कोई फरक hi नहीं पड़ा, और वह ताली बजाते हुए बोली - Ok ok सुनो सब लोग! एनफ बोरिंग टॉक... अब ट्रुथ एंड डरे का टाइम है...

आकाश हस्ते हुए बोलै - ओह के ों... ये कॉलेज टाइम वाला गेम कौन खेलता है...

कृति ने उसे घूर कर देखा - छुप... अब हम लोग बड़े हो गए है तोह ट्रुथ और डरे भी बड़े होंगे na....samjha...

सुप्रिया ने परशान होते हुए कृति को कहा - कृति... रहने दो न ये सब...

पर कृति ने तोह ज़िद्द पकड़ ली थी - प्लीज प्लीज.... बस थोड़ी सी देर के लिए....

राहुल ने भी उसकी हाँ में हाँ मिलायी - के ों... कृति इतने प्यार से बोल रही तोह खेलते है न...

सारे लोग नीचे कारपेट पर बैठ गए.

कृति ने एक बोतल उठायी - Ok, मैं बोतल स्पिन करती हूँ... जिसके सामने आएगा उसे एक क्वेश्चन का जवाब देना होगा...

सभी ने हाँ में सर हिलाया और कृति ने बोतल को घुमा दिया, पहली बार बोतल आकाश के आगे आकर रुकी.

आकाश ने ड्रामा करते हुए कहा - ओह गॉड... अब तुम लोग मेरे बारे में कुछ ेम्बरर्सिंग पूछोगे...

कृति ने मुस्कुराते हुए कहा - सुप्रिया... तुम बर्थडे गर्ल हो... तुम पूछो...

सुप्रिया ने थोड़ा पैनिक में कहा - मैं क्या पूछू? तुम लोग hi पूछ लो न...

कृति ने फिर से इंसिस्ट किया - के ों... जस्ट आस्क हिम...

सुप्रिया ने थोड़ा सा सोचा के पुछा - आकाश तुम्हारी गर्लफ्रेंड है?

कृति ने अंगूठे को नीचे करते हुए कहा - बोओओओ... इतना सिंपल क्वेश्चन...

आकाश ने है के जवाब दिया - थैंक यू ma'am.... फिलहाल तोह नहीं है...

कृति ने जल्दी से दूसरा क्वेश्चन पूछ लिया - ाचा तुम किसी को लिखे करते हो?

आकाश - हे, बस एक hi क्वेश्चन पूछना था... रूल्स अरे रूल्स...

कृति हसी - Ok Ok... ी विल स्पिन आईटी अगेन...

इस बार बोतल जाकर कृति पर रुकी. इससे पहले कोई सुप्रिया को क्वेश्चन पूछने के लिए कहता, सुप्रिया ने खुद hi कह दिया - कोई और भी क्वेश्चन पूछ लो, नहीं तोह काफी बोरिंग गेम हो जायेगा...

राहुल - Ok... मैं पूछ लेता हूँ... तुमने लास्ट 6 मोनथस में मेरे इलावा किसी और को किश किया है?

आकाश ने ताना मारा - ोोोू... ये तोह गेम सीरियस हो गया... अब बोलो कृति जी... एन्ड कर दे गेम...

कृति - नहीं... ी विल बे ऑनेस्ट... हाँ मैंने किश किया है... पर एक hi सवाल था सो यू can't आस्क में हु...

इस बार आकाश ने बोतल स्पिन करि और राहुल पर आकर रुका.

कृति ने उसे छिड़ते हुए कहा - Ok... अब तुम भी नहीं बचोगे... तुमने हाल hi में मेरे इलावा किसी और को किश किया है?

सुप्रिया का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था, राहुल ने एक नज़र उसकी और देखा और फिर हलके से कहा - हाँ.... अब नेक्स्ट प्लीज...

आकाश - ोोोू.... सीक्रेट्स अरे किंग आउट...

कृति थोड़ा शॉकेड थी, पर वह अब ये गेम कंटिन्यू रखना चाहती थी. इस बार फिर से आकाश पर बोतल आयी.

राहुल ने झट से उससे सवाल पूछ लिया - दो यू सेक्रेटली हैवे ा क्रश ों कृति?

आकाश ने घूर कर राहुल की और देखा, जैसे वह उसका कोई गहरा राज़ उजागर कर दिया हो - के ों यार... थिस इस नॉट फेयर...

सुप्रिया भी बोल पड़ी - बोलना तोह पड़ेगा न... रूल्स अरे रूल्स...

कृति हलके से स्माइल करते हुए बोली - Don't वोर्री आकाश... सच बोल दो... ी won't मंद...

आकाश झेपते हुए बोलै - हाँ... ी मैं हु वोल्डनत...

कृति के गाल थोड़ी सी शर्म से लाल हो गए थे, पर उसने जल्दी से बोतल दुबारा स्पिन कर दी. इस बार बोतल सुप्रिया पर आकर रुकी.

सुप्रिया घबरा रही थी की कोई उससे क्या पूछेगा. आकाश ने तुरंत hi बदला लेते हुए पुछा - हैवे यू हद सेक्स आउटसाइड ऑफ़ योर मैरिज?

सुप्रिया ने उसकी और गुस्से में देखा - ये कैसा बेहूदा सवाल है... मैं इसका जवाब नहीं दूंगी...

कृति ने भी आकाश को टोक दिया - हे... के ों आकाश... थोड़ी डेन्सी रखो यार क़ुएस्तिओन्स में...

आकाश - ाचा... और जब मुझसे पुछा जा रहा था क्वेश्चन तब?

सुप्रिया ने कृति की और देखा - मैं वह सवाल नहीं पुछा था... और वैसे मैं ये गेम नहीं खेलना चाहती... फालतू के सवाल हो रहे है...

कृति ने सुप्रिया को उठने नहीं दिया और उसे समझते हुए कहा - Ok Ok... कलम डाउन... दुबारा स्पिन कर लेते है...

कृति ने जल्दी से स्पिन करा और इस बार राहुल पर आकर रुका. आकाश उसे भी छोड़ने नहीं वाला था - तुमने जिसे किश किया था, क्या हम उसे जानते है?

सुप्रिया ने झट से राहुल की और देखा, वह उसे कुछ भी बोलने से रोकना चाहती थी. राहुल ने उसकी आँखों में नहीं देखा बस नीचे देखते हुए हलके से बोलै - हाँ...

कृति भी अब सीरियस हो गयी थी, उसका नशा काम होने लगा था - ओह वाओ... that's इंटरेस्टिंग... ऐसा कौन है?

राहुल - No मोरे क़ुएस्तिओन्स...

कृति ने दुबारा पुछा - नहीं राहुल... ी ऍम सीरियस... तेल्ल में... कौन है?

राहुल ने आँखें उठाते हुए सुप्रिया की और देखा, पर कृति को कुछ समझ नहीं आया. उसे लगा बस वह सुप्रिया से परमिशन मांग रहा है उसका नाम लेने के लिए.

कृति - सुप्रिया तुम जानती हो क्या उसे?

सुप्रिया ने झट से कहा - मैं? नहीं तोह...

आकाश आखिर बीच में बोल पड़ा - ओह के ों... वह तुम hi तोह हो... ी मैं एवरीवन कनौस राइट... राहुल और सुप्रिया तोह किश क्या सब कुछ hi कर चुके है...

कृति की आँखें बड़ी हो गयी और वह ज़ोर से बोली - व्हाट!!!! क्या नॉनसेंस बोल रहे हो.... सुप्रिया और राहुल?

आकाश ने आराम से कहा - ी मैं येह... तुम्हे डेट करने से पहले सुप्रिया और राहुल काफी क्लोज थे... राहुल ने hi मुझे ये बताया था...

सुप्रिया जल्दी से उठ कड़ी हुई - ये क्या बेहूदा मजाक है...

राहुल हलकी सी मुस्कान लिए बोलै - के ों सुप्रिया... अब बता भी दो...

कृति को अपने कानो पर यकीं नहीं हो रहा था - एक सेकंड... क्या है ये सब... व्हाट थे हेलल!!!

राहुल - कृति... ी ऍम सॉरी तुम्हे ऐसे ये सब पता चला... पर याद है जब हम लोगो ने बात करना शुरू किया था... और तब तुम मुझसे गुस्सा हो गयी थी गयम में... और हमारी बोल चाल बंद थी... तब मैं और सुप्रिया...

कृति अपनी यादों में जल्दी से साड़ी बातें याद करने लगी - क्या! मुझे तोह सुप्रिया ने बोलै था की तुम... ओह गॉड... फ़क...

कृति ने गुस्से से सुप्रिया की और देखा - हाउ कुड यू दो तहत तो में! यू....

वह शायद कोई गन्दा शब्द बोलने वाली थी सुप्रिया के लिए पर उसे किसी चीज़ ने रोक लिया.

राहुल - और ये मेरे एक्सीडेंट वाले दिन भी सुप्रिया और मैं साथ hi थे... बताया न सुप्रिया सबको क्या हुआ था उस दिन क्या हुआ था...

सुप्रिया गहरी सांसें ले रही थी, उसे समझ नहीं आ रहा था वह यहाँ कैसे फास गयी थी, क्या ये राहुल का hi फैलाया हुआ जाल था उससे बदला लेने का - नहीं... वह... मेरी बात सुनो कृति... राहुल मुझे ब्लैकमेल कर रहा था...

राहुल - ओह के ों... हमारे बीच सब तोह हो चूका था पहले... मैं तुम्हे ब्लैकमेल क्यों करूँगा...

कृति ने गुस्से में बोतल को दूर फैक के मारा और वहां से अंदर कमरे में जाने लगी - गेट आउट! गेट आउट! आल ऑफ़ यू... नाउ!!!

सुप्रिया जल्दी से उसके पीछे पीछे भागी - कृति... मेरी बात सुनो... ये सच नहीं है... पूरा सच तोह नहीं....

कृति ने उसे घूर कर देखा - तुमने भैया को इसलिए छोड़ा... ताकि तुम और राहुल फिर से... फ़क! यू अरे सुच ा पीेछे ऑफ़....

सुप्रिया - कृति नहीं... ऐसा नहीं है...

कृति चलते चलते कमरे तक अंदर अपने कमरे तक पहुंच गयी थी, वाइन का नशा और गुस्से की आग उसे बुरी तरह भड़का रही थी - यू अरे सुच ा लिएर्! तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड थी... मैंने तुम्हारी इतनी हेल्प करि... और तुमने... हमेशा मुझसे झूठ hi बोलै... अपने हस्बैंड से चीट किया... भैया को भी धोका दिया...

उसकी बातें सुन कर सुप्रिया को भी गुस्सा आने लगा था - और तुम... तुम भी तोह राहुल से चीट कर रही थी... तुमने वह गोर डनण्य को किश नहीं किया था? और आज आकाश और तुम्हारे बीच का सच भी ज़ाहिर हो hi गया था...

कृति भड़क कर बोली - Don't यू डरे टर्न आईटी ों में... ी ऍम सो हैप्पी तहत अब तुम भैया की लाइफ में नहीं हो...

सुप्रिया अपने आप को सच बोलने से रोक नहीं सकीय - ाचा... तुम्हे बता दू की विक्रम और मैं अलग नहीं हुए है... हम लोग बस ये दिखावा कर रहे है...

कृति - दिखावा तोह तुम्हारी स्पेशलिटी है न... वह तोह बहुत ाचा कर लेती हो तुम...

सुप्रिया - ये कोई दिखावा नहीं है, विक्रम और मैं बस शादी करने hi वाले है... मेरे और राहुल के बीच अब कुछ नहीं है...

कृति - पर था तोह सही न... OK! ठीक है, मैं भैया को hi सब कुछ बता दूंगी...

ये सुन कर सुप्रिया की अकड़ थोड़ी सी काम हो गयी और उसने कृति का हाथ पकड़ लिया - प्लीज यार... ऐसा मत करना... मेरी बात सुनो...

कृति ने चिल्ला कर उसे कहा और उसका हाथ झिड़क दिया - व्हाई शुड ी लिसेन तो यू!

सुप्रिया - प्लीज... हमारी दोस्ती के खातिर... प्लीज उनसे कुछ मत कहना...

कृति - गेट आउट ऑफ़ थिस हाउस नाउ... बिफोर ी दो समथिंग तहत बोथ ऑफ़ उस विल रिग्रेट... गेट लॉस्ट... नाउ!

कृति जिस तरह उस पर चीख कर पड़ी, सुप्रिया बुरी तरह हिल गयी थी और वह जल्दी से बहार की और निकली. वह डर और गुस्से से कांपती हुई बहार की और निकली, शायद राहुल और आकाश वहां से जा चुके थे. इससे पहले की कृति विक्रम को कुछ भी बताये, उसे विक्रम से बात करनी hi पड़ेगी. उसने विक्रम के प्रीपेड नंबर पर कॉल किया पर वह नंबर बंद पड़ा था.

सुप्रिया जल्दी से अपनी गाडी में बैठी और तेज़ी से गाडी चलती हुई घर की और ले गयी. ये दिन पता नहीं कहाँ शुरू हुआ था और पता नहीं कहाँ जाकर ख़तम होगा. सुप्रिया की आँखें लाल पद गयी थी और थमने का नाम नहीं ले रही थी. रात की खली सड़को पर वह तेज़ी से गाडी चलते हुए अपनी बिल्डिंग पहुंची.

रात के लगभग 11.30 बज गए थे जब सुप्रिया ने अपने घर का दरवाज़ा खोला. जैसे hi सुप्रिया ने धाम से घर का दरवाज़ा धड़ से बंद किया, अतुल शोर सुनकर अपनी आखें माल्टा हुआ बैडरूम से बहार आया - सुप्रिया... तुम... तुमने तोह कहा था सुबह आयोगी...

सुप्रिया ने उसे तीखी नज़रो से देखा - क्यों! मैं गलत टाइम पर आ गयी क्या? कोई और सो रही है क्या तुम्हारे साथ बैडरूम में?

अतुल अननोएड होते हुए बोलै - ये क्या बकवास कर रही हो...

सुप्रिया - क्यों? मेरे जाते hi तुमने दिशा को तोह नहीं बुला लिया अपना साथ देने के लिए...

अतुल - सुप्रिया तुम लिमिट क्रॉस कर रही हो... मैं कुछ बोलता नहीं इसका मतलब ये नहीं...

सुप्रिया - आप कुछ बोलते hi तोह नहीं... तभी तोह ये सब हो रहा है...

अतुल ने अपने आप को थोड़ा कण्ट्रोल करने की कोशिश करि - रात को ये सब तमाशा मत करो...

सुप्रिया चिल्ला कर बोली - क्यों? सच सुनने में प्रॉब्लम हो रही है?

अतुल - लगता है तुमने पी हुई है... मैं तुम्हे पहले भी बता चूका हूँ की दिशा और मेरे बीच ऐसा कुछ नहीं है... बस वह मेरी कलेग है...

सुप्रिया ताना मारते हुए बोली - ाचा... वह बस कलेग है तोह फिर रात को तुम्हे "डी" नाम से कौन मैसेज करता है...

अतुल चौंक गया - क्या? तुमने कब देखा...

सुप्रिया को लगा की उसे भी सच पता चल hi गया - पकडे गए न...

अतुल - क्या पकड़ा गया, तुम्हे पता भी है "डी" कौन है?

सुप्रिया - दिशा ओफ़्कौर्से...

अतुल - "डी"... ध्रुव का नंबर है... मैं उसे बचपन में डी बुलाया करता था...

सुप्रिया ने गुस्से में कहा - क्या? झूठ बोल रहे हो...

अतुल - तुम चेक कर लो मेरा फ़ोन...

सुप्रिया को यकीं नहीं हो रहा था, उसका दिमाग चलना बंद सा हो गया था.

अतुल - मुझे यकीं नहीं आ रहा तुम मुझ पर इतना शक कैसे कर सकती हो... मैंने हमेशा तुम पर ट्रस्ट hi किया... लोगो ने मुझे बहुत भड़काने की कोशिश करि तुम्हारे अगेंस्ट... बूत मुझे नहीं लगता उसमे कुछ भी सच हैं....

सुप्रिया बिलकुल चुप थी, कुछ भी बोलने की हालत में नहीं. उसके अंदर कुछ टूट सा गया था, वह ऐसी तोह कभी नहीं थी.

अतुल - मैं जानता हूँ मैं तुम्हारे लायक नहीं हु, पर मैं तरय तोह कर रहा हूँ... पर तुम तरय कर रही हो क्या? बोलो?

सुप्रिया ने अतुल की और देखा, उसे शायद कुछ तोह बताना hi होगा, वह अब यहाँ और नहीं रह सकती थी - अतुल... मैं ये घर छोड़ कर जा रही हूँ... शायद हम दोनों के लिए वही ठीक होगा...

अतुल - क्या नॉनसेंस है... आराम से बैठो... पानी पियो... सॉरी मैं थोड़ा भड़क गया...

सुप्रिया ने अपना सर जोर से न में हिलाया- नहीं... बस अब हमारे बीच अब कुछ नहीं बचा है...

अतुल - सुप्रिया... सच मनो... मेरे और दिशा के बीच कुछ नहीं है...

सुप्रिया - अतुल, अब बात दिशा की नहीं है... बात हमारी है... हम लोगो को साथ नहीं रहना चाहिए... तुम दूसरी शादी कर लो...

अतुल को लग रहा था इस हालत में वह सुप्रिया से बात नहीं कर रही थी - तुम आराम करो... सुबह बात करते है... पता नहीं तुम किस मूड में बहार से आयी हो...

सुप्रिया ने उसे रोका - नहीं... अभी बात पूरी करते है...

अतुल - सुप्रिया मुझे सुबह ऑफिस में जाना है... इस वक़्त हम सिर्फ लड़ेंगे और कुछ नहीं हासिल होगा...

अतुल उसे वहां छोड़ कर वापस अपने कमरे में चला गया. सुप्रिया रट हुए अकेले अपने कमरे में आ गयी. आज तोह उसने शायद सब कुछ hi खो दिया था, कृति, अतुल और शायद विक्रम को भी. शायद वह आज कुछ ज्यादा hi बहक सी गयी थी.

पर बस अब वह विक्रम को नहीं खोना चाहती थी. वही तोह बचा था उसके पास. शायद उसे विक्रम को सब सच बता hi देना चाहिए.

सुप्रिया ने अपने फ़ोन की और देखा और एक बार फिर विक्रम के प्रीपेड नंबर पर कॉल कर दी.

सुप्रिया को उम्मीद नहीं थी की इस समय विक्रम कॉल उठाएगा, पर 2-3 घंटी बाद दूसरी तरह से विक्रम का सॉफ्ट "hello" आया.

सुप्रिया की सांस उखड सी रही थी - विक्रम... मुझे अभी आपको अभी सब सच बताना है...

विक्रम ने शांत आवाज़ में कहा - हे... कलम डाउन... क्या हुआ?

सुप्रिया - वह कृति के यहाँ.... सब गड़बड़ हो गया...

विक्रम ने आराम से कहा - हाँ वह कृति का कॉल आया था मेरे पास... राहुल को लेकर सब न...

सुप्रिया को समझ नहीं आया की विक्रम इस बात को लेकर इतना चिल कैसे हो सकता था, सुप्रिया - आपको सब पता है?

विक्रम - हाँ... मुझे पहले से सब पता था... पर आईटी doesn't मटर... ी क्नोव यू हेट हिम... एंड हे इस नॉट वर्थ आईटी...

सुप्रिया ने एक चैन की सी सांस ली - ओह विक्रम... मैं इतने टेंशन में आ गयी थी...

विक्रम - कलम डाउन... don't वोर्री...

सुप्रिया - पर कृति बहुत भड़की हुई थी...

विक्रम - मैं उसे समझा दूंगा... गिव हेर सम टाइम... पर लिसेन मैंने इसलिए ये नंबर ों किया था की ी वांट उस तो गेट मैरिड टुमारो... और फिर परसो मैंने तुम्हारी लंदन की फ्लाइट बुक कर दी है... यू नीड तो लीव अस सून अस पॉसिबल...

सुप्रिया - क्यों? कुछ गड़बड़ हो गयी है क्या?

विक्रम - हाँ... पर मैं अभी सब नहीं समझा सकता... मैं बस एक एड्रेस टेक्स्ट कर रहा हूँ... तुम वहां कल पहुंच जाना... उसके बाद हम लोग साथ चल कर अपनी शादी रजिस्टर करवा लेंगे...

सुप्रिया - ठीक है... मैं आ जयुंगी...

विक्रम - अब और टेंशन मत लो... थोड़ा रेस्ट करो... कल काफी ख़ास दिन होने वाला है...

सुप्रिया और विक्रम की कॉल ख़तम हुई और सुप्रिया की बेचैनी थोड़ी सी काम हो गयी थी. शायद सब कुछ इतना भी नहीं बिगड़ा था, विक्रम जरूर कृति को मन लेगा, और खैर वह यहाँ से चली hi जाएगी. कल शायद उसका नया जीवन शुरू होने वाला था.

___________________

सुबह जब सुप्रिया उठी तोह 9 बज चुके थे और अतुल ऑफिस जा चूका था. सुप्रिया का सर अभी भी बुरी तरह घूम रहा था - शायद रात की वाइन एंड झगड़ो की वजह से. पर अभी ये सब सोचने का टाइम नहीं था. आज उसके लिए एक बड़ा दिन था. उसे तैयार हो कर अपने नए जीवन की शुरुवात करने जाना था.

सुप्रिया जल्दी से बिस्तर से उठी और बाथरूम की तरफ भागी. जैसे hi ठंडा पानी उसके मुँह पर पड़ा, वह थोड़े होश से में आयी. नहीं कर बहार निकलने के बाद वह अपनी अलमारी खोल कर कड़ी हो गयी. आज वह कुछ ख़ास पेहेनना चाहती थी.

सुप्रिया ने अपनी अलमारी से एक लाल रंग की साड़ी निकली और उसे पेहेन्ने लगी. उसका दिल ज़ोर के धड़क रहा था और वह काफी ज्यादा बेचैनी और एक्ससिटेमेंट महसूस कर रही थी. लंघना पेहेनना में थोड़ा टाइम लग गया और फिर उसके साथ चूड़ियां पहनी और अचे से मेकअप किया. सुप्रिया ने अपना मंगल सूत्र उठा कर बीएड के साइड की टेबल पर रख दिया. अब इसकी क्या जरूरत थी.

74e418569ca60abfe067c867658191b1.jpg


सुप्रिया को लगभग 2 घंटे लग गए तैयार होते होते. उसने अपने आप को आईने में देखा, विक्रम को वह बहुत hi अछि लगने वाली थी आज, बिलकुल विक्रम के पसंद से तैयार हुई थी आज वह.

अब आखिर वह जाने के लिए तैयार थी. उसे आज भी इक़बाल की जरूरत पड़ने वाली थी और उसने उसे कॉल किया.

इक़बाल ने फ़ोन उठाते hi कहा - मैडमजी, सब खैरियत तोह है न?

सुप्रिया - Hello इक़बाल… सब ठीक है… पर मुझे आज फिर आपकी मदद की जरूरत है…

इक़बाल - बोलिये न…

सुप्रिया - मुझे कहीं जाना है अभी... आप कार से मुझे छोड़ देंगे क्या?

इक़बाल - मैडमजी.... मैं कहीं बहार हूँ... थोड़ा टाइम लग जायेगा पहुंचते पहुंचते...

सुप्रिया - ाचा... कोई नहीं... मैं चली जयुंगी...

इक़बाल - आप कहे तोह मैं किसी को बोल दू आपको छोड़ने के लिए...

सुप्रिया - नहीं नहीं... हो जायेगा मैनेज... आप चिंता मत करो...

इक़बाल - आप मुझे पता भेज दो... मैं वहीँ आपको मिल जायूँगा ताकि आप मेरे साथ वापिस आ सको...

सुप्रिया - ठीक है... मैं भेजती हूँ...

इक़बाल - आप अपना ख्याल रखना... मैं मिलता हूँ आपसे जल्द hi...

सुप्रिया ने फ़ोन रखा. वह इस भरी साड़ी में गाडी तोह बिलकुल नहीं चलना चाहती थी, तोह उसके पास ऑटो पकड़ने के इलावा कोई ऑप्शन नहीं था. सुप्रिया अपना बैग लेकर नीचे पहुंची और बिल्डिंग के बहार से एक टैक्सी पकड़ कर विक्रम के पास चल दी.

रास्ते में उसका दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था. एक पुराणी राह छोड़ने का डर, एक नयी राह पकड़ने का डर. चुप चाप बैठी वह अपने आने वाले कल का इंतज़ार कर रही थी.

टैक्सी ने उसे कुछ देर बाद एक छोटे से मंदिर के बहार उतारा. सुप्रिया जल्दी से मंदिर के अंदर चली गयी और वहां उसे सामने विक्रम खड़ा दिखाई दिया. उसके चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल थी. आज आखिर उन दोनों का मिलान जो होने वाला था.

676d8384a19da00de203b503eebd3ecf.jpg


विक्रम को देखते hi सुप्रिया की टेंशन भी काफी हद्द तक काम हो गयी, और उसके चेहरे की स्माइल भी वापस आ गयी. उसने दूर से hi हाथ हिला कर विक्रम को वेव किया.

जैसे जैसे वह विक्रम के पास पहुंच रही थी, उसके गालो की लाली बढ़ती जा रही थी. उसके होंठ तोह जैसे सील हो गए थे.

विक्रम भी उसे बस देखता रह गया था - वाओ.... यू अरे लुकिंग अमेजिंग... ी लव यू...

सुप्रिया ने इधर उधर देखा और शरमाते हुए बोली - ी लव यू तू...

दोनों मंदिर में एक दुसरे को हुग करने में झिझक से रहे थे. दोनों के लिए hi एक दुसरे से अब एक पल भी दूर रहना आसान नहीं था. बस खड़े हुए एक दुसरे को देखते हुए मुस्कुराते रहे.

विक्रम ने छुपी को तोड़ते हुए कहा - पंडित जी ने बोलै है की 40 मिनट में शुभ मुहूर्त है, तब तक इंतज़ार करना पड़ेगा.

सुप्रिया मुस्कुरायी - कोई बात नहीं, इतना इंतज़ार किया है तोह 40 मिनट और क्या होते है...

विक्रम ने सुप्रिया का हाथ हलके से थाम लिया - मैं सोच रहा था तब तक कुछ और रस्मे कर ले... मैंने कुछ ख़ास तैयारी तोह नहीं की थी, पर अभी याद आया...

सुप्रिया हैरान होकर बोली - कैसी रस्मे?

विक्रम - मैं सोच रहा था की अगर हमारी प्रॉपर शादी होती तोह कुछ तोह रस्मे होते शादी से पहले, हम एक दुसरे को अंगूठी तोह पहनते hi न...

विक्रम सुप्रिया को थोड़ा साइड में एक कमरे में ले गया और अपनी जेब से एक छोटा सा वेलवेट बॉक्स निकला. उसमे एक सुन्दर सी अंगूठी थी. उसने सुप्रिया के ऊँगली में वह अंगूठी पहना दी. सुप्रिया इतनी सुन्दर अंगूठी को बस देखती hi रह गयी थी, उसकी आँखों में हलकी सी नमी और दिल में ख़ुशी.

सुप्रिया उदास होते हुए बोली - पर मैं तोह कुछ लायी नहीं... अब क्या करू?

विक्रम हस्ते हुए बोलै - जो तुम्हारे ऊँगली में है... वही दे दो...

सुप्रिया - पर वह आपके आएगी नहीं.

विक्रम - कोई बात नहीं... लंदन में एक दूसरी ले लेंगे... और फिर उस नयी वाली से इसे एक्सचेंज कर लेंगे.

सुप्रिया ने अपनी ऊँगली की अंगूठी उतार कर विक्रम को दे दी, और फिर वह विक्रम की पहनाई हुई अंगूठी को निहारने लगी. वह बहुत hi ज्यादा सुन्दर थी. दोनों के लिए hi ये पल बेहद हसीं था.

60f2539327ce9dce2761c9c71f7baab0.jpg


तभी सुप्रिया को कुछ घु घु की आवाज़ आने लगी, जैसे किसी का फ़ोन साइलेंट पर रिंग कर रहा हो. उसने अपना फ़ोन चेक किया, ये उसका तोह नहीं था.

सुप्रिया ने विक्रम के हाथ को छोटे हुए कहा - विक्रम... शायद आपका फ़ोन रिंग कर रहा है...

विक्रम - हाँ... देखता हु...

विक्रम ने जैसे hi फ़ोन जेब से निकाल कर देखा, उसके चेहरे पर एक शिकन सी आ गयी.

सुप्रिया ने विक्रम को परेशां देख पूछा - कौन है? उठाया न...

विक्रम ने कसुआलय कहा - नहीं, कोई नहीं है... ऐसे hi... नॉट इम्पोर्टेन्ट टुडे...

पर कुछ hi पल बाद फ़ोन फिर से विबरते करने लगा, विक्रम थोड़ा अन्नोय हो कर बड़बड़ाया - आज के दिन hi इसे कॉल करना है... वैसे तोह कभी नहीं...

सुप्रिया ने फिर पुछा - किसका कॉल है?

विक्रम ने अपने होंठ पर ऊँगली रखते हुए उसे छुप रहना का इशारा किया - शहहह... चुप रहना बिलकुल....

विक्रम ने कॉल उठाया और दूसरी और से ईशा की तेज़ आवाज़ आयी - विक्रम!! वेयर अरे यू?

विक्रम ने अपनी आवाज़ को नार्मल करते हुए कहा - ऑफिस के काम से बहार निकला था, क्यों?

ईशा - अभी के अभी घर पहुँचो...

फ़ोन स्पीकर पर था तोह सुप्रिया भी सब सुन पा रही थी और उसने विक्रम की और देखा, ईशा उसे अभी घर क्यों बुला रही थी.

विक्रम - सब ठीक है न?

ईशा - नहीं... ी वांट यू हेरे ात होम इन थे नेक्स्ट 20 मिनट्स...

विक्रम इर्रिटेट होते हुए बोलै - ईशा मैं किसी क्लाइंट मीटिंग में हूँ... मैं अभी नहीं आ सकता...

ईशा - Ok... फिर तुम रेस्पोंसिबल होंगे जो भी उस बीच के साथ होगा...

विक्रम का दिल तेज़ी से धड़कने लगा - किसकी बात कर रही हो तुम?

ईशा - तुम्हारी प्रेमिका... सुप्रिया शर्मा, और किसकी!!!

विक्रम का दिल बुरी तरह बैठ गया - व्हाट नॉनसेंस यार... वे हैवे डिसकससेड थिस बिफोर...

ईशा ने चीखते हुए कहा - मुझे बेवक़ूफ़ बनाने की कोशिश मत करो... मैंने तुम्हे समझाया था न की जस्ट फ़क हेर एंड गेट रीद ऑफ़ हेर... पर तुम्हे मेरी बात समझ नहीं आयी... तुम उस बीच से शादी करने के सपने देख रहे थे…

विक्रम - ईशा... लिसेन... मैं आ कर सब एक्सप्लेन कर दूंगा, ऐसा कुछ नहीं है...

ईशा - Don't वोर्री, सब क्लियर हो जायेगा आज.. मैंने असलम को आलरेडी भेज दिया है उसके घर...

विक्रम के शकल पर एक दहशत थी - व्हाट!! सुप्रिया... ी मैं ईशा.... जस्ट कॉल हिम बैक... इसकी जरूरत नहीं है...

ईशा - अभी भी तुम्हारे मुँह से उसका hi नाम निकल रहा है न... ुंबलीवबले...

विक्रम - जरूर तुम्हे किसी ने मेरे अगेंस्ट भड़काया है... जय!!! जय आया था क्या घर... ट्रस्ट में उसकी और मेरी लड़ाई हुई थी फाइनेंसियल मैटर्स को लेकर... यू can't ट्रस्ट हिम...

ईशा - जय बोलता तोह शायद मैं एक सेकंड के लिए तुम्हारी बात मान भी लेती... पर ये मुझे जय ने नहीं बताया...

विक्रम - फिर किसने कहा तुमसे ये सब?

ईशा की शकल तोह नहीं दिखाई दे रही थी, पर उसकी आवाज़ से ज़ाहिर था की उसने ये मुस्कुरा के hi कहा होगा - तुम्हारी प्याआरीई बहना आयी थी सुबह घर... उसने मुझे सब बता दिया है... एक एक चीज़... इतने टाइम से ये सब चल रहा था और तुम मुझसे झूठ बोलते रहे…

विक्रम बुरी तरह हक्का बक्का महसूस कर रहा था - कृति!? तुम मजाक कर रही हो न? मैं अभी उसे कॉल करके सब क्लियर करवाता हूँ...

ईशा - Don't बोथेर... उसका फ़ोन बंद होगा... और don't लाश आउट ात हेर... शी जस्ट टोल्ड में थे ट्रुथ...

विक्रम को यकीं नहीं हो रहा था की कृति उसके साथ कुछ ऐसा कर सकती थी. पर शायद उसने ये सब विक्रम के अगेंस्ट नहीं सुप्रिया के अगेंस्ट किया था.

ईशा - डैड उसका एडमिशन करा देंगे उस के कॉलेज में... सो शी इस हैप्पी... एनीवे, ी नीड यू तो के होम नाउ... ोथेरविसे... उस रांड का ऐसा हाल करेगा न असलम... तुम अभी आ जाओगे तोह शायद मैं तुम पर और उसके बाकी फॅमिली मेंबर्स पर थोड़ी नरमी बरतु...

विक्रम काफी डेफेटेड फील कर रहा था, ईशा को इस खेल में हराना बहुत मुश्किल था, उसे वहां जाना hi होगा - मैं आता हूँ... प्लीज मेरे आने तक कुछ भी नहीं करना...

ईशा - के क्विक, तुम्हारी रखैल का शो शुरू होने से पहले...

ईशा ने फ़ोन काट दिया. विक्रम का सर बुरी तरह झुका हुआ था. उसने सुप्रिया की और देखा तोह उसकी हालत तोह और भी ख़राब थी. उसके आंसू बुरी तरह बह रहे थे, और वह अपना हाथ अपने मुँह पर रखे किसी तरह अपनी सिसकियाँ दबा रही थी. फ़ोन रखते hi उसके बिलखने की आवाज़ आने लगी.

यह पल, जो कुछ देर पहले तक उनका सबसे खूबसूरत था, अब एक बुरा सपना बन गया था.

सुप्रिया रट हुए किसी तरह से बोली - विक्रम ये सब.... कृति.... वह ऐसा कैसे कर सकती थी... अब क्या करेंगे हम....

विक्रम बस वहीँ खामोश, परेशां खड़ा था, जैसे उसके पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गयी हो. सब कुछ एक पल में बिखर गया था. लेकिन ज़्यादा वक़्त नहीं था. उसे तुरंत कुछ सोचना होगा, कुछ करना होगा, इससे पहले की सुप्रिया पर मंडरा रहा खतरा सच में एक कभी न मिटने वाली हक़ीक़त बन जाये.

विक्रम - सुप्रिया... अभी ये सब सोचने का टाइम नहीं है... तुम्हे यहाँ से जल्दी से जल्दी निकलना होगा...

सुप्रिया - पर मैं कहाँ जयुंगी...

विक्रम जल्दी से सोचते हुए बोलै - तुम्हारा पासपोर्ट तोह घर पर hi होगा, तोह वह ऑप्शन है नहीं… वैसे भी एयरपोर्ट जाना भी खतरे से खली नहीं है.... हम्म्म... वह तुम्हारा ड्राइवर, वॉचमन... वह कहाँ है?

सुप्रिया - वह तोह...

विक्रम ने अपना फ़ोन निकाला और जल्दी से इक़बाल का नंबर डायल किया - इक़बाल... अभी के अभी यहाँ पहुँचो...

इक़बाल - क्या हुआ साब जी... मैं बस 5 मिनट दूर हूँ... सुप्रिया मैडमजी ठीक तोह है न...

विक्रम - हाँ सब ठीक है... बस जल्दी पहुँचो यहाँ...

सुप्रिया अपने आंसू पोछते हुए बोली - क्या हुआ... आप इक़बाल को क्यों बुला रहे हो...

विक्रम - सुप्रिया... मैंने उसके बारे में सब कुछ पता लगाया हुआ है... उसके घर से सेफ इस समय कोई भी जगह नहीं होगी तुम्हारे लिए...

सुप्रिया चौंकते हुए बोली - इक़बाल का घर!!!! पर वहां क्यों… मैं अपने झाँसी के घर भी तोह जा सकती हु..

विक्रम - ट्रस्ट में... वह लोग तुम्हे वहां ढून्ढ लेंगे… और अगर एक बार तुम ईशा के गुंडों के हाथ लग गयी तोह मैं भी तुम्हे बचा नहीं पायूँगा... वह तुम्हारे साथ कुछ भी...

सुप्रिया ने डर के मारे अपने हाथ विक्रम की छाती पर रख दिए - विक्रम... क्या बोल रहे हो आप...

विक्रम ने सुप्रिया को गले लगा लिया - बस कुछ दिनों की बात होगी... जब तक ये मामला ठंडा पड़ता है...

सुप्रिया के मैं की साड़ी ख़ुशी, साड़ी हसी गायब हो गयी थी, और उसकी जगह बस थी तोह एक दहशत. कल और आज के बीच उसकी पूरी ज़िन्दगी hi तबाह हो गयी थी. और वह भी उसके जन्मदिन पर.
 
सॉरी अभी तोह मैंने नेक्स्ट अपडेट ज्यादा कुछ लिखा नहीं है. लास्ट अपडेट 2 अपडेट के बराबर था. ी वास् ा बिट ेक्सहॉस्टेड एंड नीड ा फ्यू मोरे डेज तो गिव ा प्रॉपर अपडेट. रिमाइंडर तहत ी दो हैवे ा जॉब एंड फॅमिली अस वेल तो टेक केयर, थिस इस मोस्टली रिटेन ात नाईट. ी तरय तो गिव ान अपडेट एव्री वीक एंड सोमेतिमेस मोरे फ्रेक्वेंटली इन 4-5 डेज, बूत हर दुसरे दिन तो देना इम्पॉसिबल होगा.

विल तरय तो व्रिठे टुनाइट बूत बूत ज्यादा ेक्सहॉस्टेड होकर लिखूंगी तोह स्टोरी सही नहीं आएगी.
 
Back
Top