सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी - Page 9 - SexBaba
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सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी

अपडेट 62

दो दिन बाद शनिवार को अतुल भी घर वापस आ गया था. उसके वापस आने से सुप्रिया को ख़ास ख़ुशी नहीं थी और वह फिर से उसके सामने झूठ बोलने पर मज़बूर थी. सुप्रिया को काफी गिलटी सा महसूस हो रहा था की वह अतुल के साथ ऐसा कर रही थी, पर उसके बार और चारा hi क्या था. उसका बस चलता तोह वह शायद अतुल को सब कुछ बता भी देती, पर अभी उसे खुद hi नहीं समझ आ रहा था की उसका भविष्य क्या होने वाला था.

अतुल की ट्रिप शायद अछि गयी थी और वह थोड़े अचे मूड में था. वापस आने के बाद दिन भर अतुल सुप्रिया के नज़दीक आने की कोशिश करता रहा पर सुप्रिया ने उसे कोई ख़ास रिस्पांस नहीं दिया. रात को दोनों बीएड में साथ लेते हुए थे, जैसे की वह हर रात एक hi बीएड पर सोते थे.

अतुल ने सुप्रिया का हाथ हलके से पकड़ा, पर सुप्रिया ने अपना हाथ पीछे खींच लिया और दूसरी और मुँह फेर लिया. अतुल ने सुप्रिया का कन्धा अपनी और खींचते हुए सुप्रिया के पेट पर अपना हाथ रख दिया. सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था की वह किस तरह से अतुल को रोके. अतुल ने उसकी छुपी को गुस्सा समझते हुए अपने होंठ सुप्रिया के गाल की तरफ बड़ा दिए, उसे किश करने के लिए. पर सुप्रिया ने अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया. इस समय तोह उसे ऐसा लग रहा था की जैसे कोई पराया मर्द उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा हो.

अतुल आज कुछ अलग hi मूड में था और उसने हार नहीं मानी. वह सरक कर सुप्रिया के ठीक ऊपर आ गया. उसने सुप्रिया का चेहरा अपने दोनों हाथों से पकड़ते हुए अपनी और किया और फिर उसके होंठों पर एक ज़ोर किश दे डाली.

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सुप्रिया उसके इस एग्रेसिव बेहेवियर से एकदम से दांग सी रह गयी और वह उसे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी. पर अतुल उस पर भारी पद था और उसने सुप्रिया की टीशर्ट के अंदर हाथ घुसते हुए सुप्रिया के बूब्स को ज़ोर से पकड़ लिया. सुप्रिया को अतुल के इस तरह उसके इतना करीब आने से घिन्न सी हो रही थी, और उसने किसी तरह एक ज़ोर का धक्का दे कर अतुल को साइड किया.

सुप्रिया बीएड से कड़ी होती हुई ज़ोर से चिल्लाई - अतुल क्या कर रहे हो!!! दिख नहीं रहा आपको की मेरा मूड नहीं है...

अतुल झल्लाते हुए बोलै - क्या गलत किया मैंने? तुम मेरी बीवी हो सुप्रिया! ऐसा कब तक चलेगा... तुम्हारा तोह कभी मूड नहीं होता...

सुप्रिया ने झूठ बोलते हुए कहा - मेरे पीरियड्स चल रहे है अभी... मेरे मूड स्विंग्स होते रहते है... मेरा बिलकुल मैं नहीं है कुछ भी करने का...

अतुल - पर तुम तोह अब मुझे हाथ भी लगाने नहीं देती हो... मैं तोह बस किश hi कर रहा था...

सुप्रिया - ये किश कर रहे थे... ऐसे जबरदस्ती...

अतुल - इसमें जबरदस्ती की बात कहाँ से आ गयी... और फिर क्या करू मैं? बहार जा कर किसी को किश करू?

सुप्रिया - वही करना चाहते हो न आप!! तोह करो फिर...

अतुल ने एक गहरी सांस ली, जैसे वह अपने गुस्से पर काबू पाने की कोशिश कर रहा हो - मैं तुम्हे पहले भी समझा चूका हूँ, जो कुछ नई ईयर की पार्टी में हुआ, वह सब बस एक छोटी सी गलती थी, उसकी इतनी बड़ी सजा क्यों मिल रही है मुझे? तबसे तुम मुझसे कटी कटी सी रहने लगी हो, अब तोह कई महीने हो गए उस बात को.

सुप्रिया के पास जैसे कुछ जवाब नहीं था अतुल की बात का और वह चुप चाप कड़ी हो कर नीचे देख रही थी.

अतुल उसे छुप देख कर बोलै - तुम्हारे मैं में जो कुछ है वह क्लेअर्ल्य कहो न मुझसे? क्या प्रॉब्लम है मुझ से?

सुप्रिया - मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है... और न hi मेरे मैं में कुछ नहीं है... मैं बस अभी सोना चाहती हूँ... आपको यहाँ सोना है तोह सो जाइये और नहीं तोह बहार सोफे पर सो जाइये...

अतुल कुछ सेकंड सुप्रिया को गुस्से से घूरने के बाद अपना तकिया उठाये बहार लिविंग रूम में चला गया. सुप्रिया उसके जाने के बाद सोच में पद गयी, सच hi तोह कह रहा था अतुल, पता नहीं वह दोनों कब तक एक दुसरे के साथ ऐसे रह पाएंगे. इस तरह तोह उन दोनों की hi लाइफ ख़राब सी हो रही थी. रात भर सुप्रिया बीएड पर अकेली लेती हुई अपनी ज़िन्दगी के बारे में सोचती रही.

जब वह विक्रम के साथ होती तोह वह कितना ाचा महसूस करती अपने बारे में, और सब चीज़ो के बारे में. और फिर अतुल के साथ तोह शायद उसकी पटरी कभी ठीक से बैठी भी नहीं थी. अतुल उसके लिए कभी सही नहीं था, शायद उसे ये शादी करनी hi नहीं चाहिए थी. पर पता नहीं विक्रम के साथ उसका कोई फ्यूचर था भी या नहीं. इन्ही सब खयालो से परेशान होती हुई वह कब सो गयी उसे पता नहीं चला.

अगले दिन सुबह नाश्ते के तुरंत बाद hi अतुल घर से निकल गया. शायद इसी से उन दोनों को शांति मिलने वाली थी. सुप्रिया बैठी हुई फिर से नेगेटिव खयालो में जा hi रही थी की उसके फ़ोन की घंटी बजी. एक अननोन नंबर से कॉल आ रहा था.

सुप्रिया ने रूखी सी आवाज़ में फ़ोन उठाया - Hello...

दूसरी और से किसी औरत की आवाज़ आयी - Hello सुप्रिया बीटा... कैसी हो...

ये आवाज़ सुप्रिया को जानी पहचानी सी लग रही थी, पर उसे समझ नहीं आ रहा था ये किसकी आवाज़ है.

सुप्रिया - जी ठीक... आप....

औरत - लगता है तुमने मेरी आवाज़ नहीं पहचानी, और हाँ शायद नंबर भी सेव्ड नहीं होगा... मैं नलिनी बोल रही हु, विक्रम की माँ...

सुप्रिया ये सुन कर एक डैम से लड़खड़ा सी गयी - आंटी आप... सॉरी... कैसी है आप? मैं ठीक हु...

माँ - मैं भी ठीक हु... बिजी तोह नहीं थी न... बात कर सकते है अभी...

सुप्रिया - जी बिलकुल... मैं बिजी नहीं हु...

माँ - सॉरी मैंने ऐसे hi फ़ोन कर दिया... तुम भी काफी सुरप्रीसेड रह गयी होंगी... कैसा रहा तुम्हारा और विक्रम का मुंबई का ट्रिप...

सुप्रिया थोड़ा हैरान थी की उनको इसके बारे में पता था, पर शायद विक्रम ने hi उन्हें बताया होगा. उसे मुंबई के ट्रिप के बारे में बात करते हुए थोड़ी शर्म सी आ रही थी, आखिर इतना कुछ हुआ था उसके और विक्रम के बीच वहां - सब ठीक था... ठीक hi था...

माँ - ाचा....

सुप्रिया - विक्रम ने कुछ कहा क्या?

माँ - नहीं नहीं... वह कहाँ कुछ बताता है मुझे... बस ऐसे hi... बस वह काफी परेशान लग रहा था जब कल घर आया था तोह...

सुप्रिया - परेशान?

माँ - Haan...Vikram नोर्मल्ली कभी इतना परेशान नहीं होता... मुझे लगा शायद तुम्हे कुछ पता होगा..

सुप्रिया सोच में पद गयी - नहीं... मुझसे तोह उनकी कोई बात नहीं हुई…

माँ - हम्म्म… विक्रम पर काफी स्ट्रेस है बहुत साड़ी चीज़ो का आज कल..

सुप्रिया - हाँ... मैं समझ सकती हु...

माँ - वह तुमसे बहुत ज्यादा प्यार करता है... मैं ये बात महसूस कर सकती हु... और मुझे उम्मीद है की तुम भी ये बात महसूस कर पा रही होगी...

ये बात सुन कर सुप्रिया का मैं विक्रम की तरफ पिघलता जा रहा था - हाँ आंटी... मैं जानती हु...

माँ - तुम भी मुझे माँ बुला सकती हो… आंटी क्यों कहती हो बार बार…

सुप्रिया - वह बस…. मैं….

माँ - कोई नहीं… जैसा तुम कम्फर्टेबले फील करो.. पर तुम विक्रम से बात करके देखना... क्या पता उसका स्ट्रेस काम हो जाये तुमसे बात करके...

सुप्रिया - जी बिलकुल... वैसे विक्रम आज कहाँ होंगे?

माँ - आज तोह शायद वह अपने घर पर hi होगा...

सुप्रिया - ओह ाचा...

माँ - अगर तुम चाहो तोह उसके घर जा सकती हो आज... ईशा कहीं बहार गयी हुई है....

सुप्रिया - मैं.... सोचती हु... तरय करती हु....

माँ - चलो... जल्द hi मिलते है हम लोग... अपना ध्यान रखना...

विक्रम की माँ से फ़ोन पर बात करने के बाद सुप्रिया को और ख़राब सा लग रहा था. शायद उसने hi विक्रम को कुछ ज्यादा स्ट्रेस दे दी थी. विक्रम उसे सच्चे दिल से चाहता था और वह पता नहीं क्या क्या सोचती रहती थी विक्रम के बारे में. फ़ोन कॉल तोह नहीं, शायद विक्रम से मिलकर hi इस सब के बारे में बात करना ठीक रहेगा.

सुप्रिया जल्दी से तैयार होना शुरू हुई और उसने विक्रम की दिलाई हुई एक ड्रेस पेहेन ली. अपने मैं की खलबली को शांत करने के लिए उसे विक्रम से मिलना जरूरी था. जो भी हो, वह विक्रम को नहीं खोना चाहती थी. वह अपनी कार ले कर विक्रम के यहाँ चल पड़ी. पता नहीं विक्रम कैसे रियेक्ट करेगा जब वह उसके सामने होगी तोह.

सुप्रिया बे थोड़ी देर बाद विक्रम के आलिशान घर के सामने अपनी गाडी लगायी, और अंदर की और आ गयी. उसने गार्ड को बोलै की वह विक्रम सर से ऑफिस के सिलसिले में मिलने आयी है और उन्होंने उसे अंदर जाने दिया. घर के अंदर ड्राइंग रूम में पहुंच कर वह विक्रम का वेट करने लगी. विक्रम के घर के नौकर ने शायद उसे बता दिया था की कोई उससे मिलना आया है. सुप्रिया बेताबी से इंतज़ार करने लगी.

थोड़ी देर बाद विक्रम एक कमरे से निकलता हुआ बहार आया और सुप्रिया को देखते hi उसके पेअर थम से गए - सुप्रिया... तुम यहाँ?

सुप्रिया ने एक हलकी सी स्माइल के साथ कहा - Hi... कैसे हो आप विक्रम?

विक्रम ने मुस्कुरा के कहा - ी ऍम गुड, और तुम्हे देख कर तोह और भी ाचा.. व्हाट ा सरप्राइज!

सुप्रिया - होप मैंने आपको डिस्टर्ब तोह नहीं किया....

विक्रम - नहीं... बिलकुल नहीं... ईशा भी घर पर नहीं है तोह मैं अकेला hi था घर पर...

सुप्रिया ने देखा की वहां हॉल में विक्रम के घर के नौकर भी काम कर रहे थे - हम कहीं अकेले में बात कर सकते है क्या?

विक्रम समझ गया की सुप्रिया हाउस स्टाफ के सामने बात नहीं करना चाहती थी - चलो रूम में चल कर बात करते है...

विक्रम सुप्रिया का हाथ पकड़ता हुआ उसे नीचे वाले फ्लोर में एक कमरे में ले गया, शायद ये गेस्ट रूम था. सुप्रिया का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था. इससे पहले वह इस घर में एक बार और आयी थी, होली वाले दिन, और उस दिन वह और विक्रम एक hi बाथरूम में थे जब उसने कपडे बदले थे.

दोनों एक कमरे में आ गए और विक्रम ने दरवाज़ा बंद कर दिया.

सुप्रिया - सॉरी... बिना बताये आने के लिए... मुझे लगा शायद आप…

विक्रम - सॉरी क्यों? मेरे लिए तोह ये एक बहुत hi स्वीट सा सरप्राइज है… मैं भी तुमसे मिलना चाहता था.. वैसे तुम्हे कैसे पता चला की ईशा घर पर नहीं है?

सुप्रिया - वह आपकी माँ का फ़ोन आया था… वह काफी परेशां साउंड कर रही थी आपके लिए...

विक्रम - ओह… माँ भी न…

सुप्रिया ने आगे बाद कर विक्रम को हुग कर लिया - विक्रम, मैं… ी ऍम रियली सॉरी… मैंने शायद आपको कुछ ज्यादा hi स्ट्रेस दे दिया न..

विक्रम - सुप्रिया… नहीं… ऐसा कुछ नहीं…

सुप्रिया - पर फिर भी, मैं बहुत घबरा गयी थी उस दिन. ी लव यू विक्रम…

विक्रम - ी लव यू मोरे थान यू क्नोव…

सुप्रिया का चेहरा विक्रम की छाती से चिपक गया था और उसने अपने हाथ विक्रम से लपेट लिए थे. एक अजीब सा hi सुकून मिल रहा था उसे विक्रम को हुग करके.

विक्रम ने सुप्रिया की थोड़ी पर हाथ रखते हुए उसका चेहरा ऊपर उठाया और उसके माथे पर एक हलकी सी किश की. सुप्रिया और विक्रम एक दुसरे की आँखों में खोये हुए थे. तभी सुप्रिया ने हिम्मत दिखते हुए अपने हाथ अपने से लम्बे विक्रम के गले में उचकते हुए डाले और विक्रम के होंठों पर एक किश जड़ दी. उस किश के बाद विक्रम से भी नहीं रहा गया और विक्रम भी सुप्रिया को चूमने लगा. दोनों कमरे में खड़े एक दुसरे को अछि तरह चूम रहे थे.

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विक्रम ने अपने हाथ सुप्रिया की पीठ पर रखते हुए उसे अचे से जकड लिया. सुप्रिया के हाथ अभी भी विक्रम की गर्दन पर बंधे हुए थे, और विक्रम ने उसे उठाते हुए हवा में घुमा दिया. सुप्रिया भी उसके प्यार में बुरी तरह खोयी हुई थी, मुंबई वाली ट्रिप के बाद से hi मैं और भी मचल रहा था विक्रम के साथ ये सब करने के लिए.

थोड़ी देर बार जब उनकी किश टूटी, तब विक्रम ने सुप्रिया के बाल उसके चेहरे से साइड करते हुए कहा - यू क्नोव… मुझे रीलीज़ हुआ की मैं कितना सेल्फिश था पिछली बार…

सुप्रिया ने थोड़ा हैरान होते हुए पुछा - सेल्फिश कैसे थे?

विक्रम - मैंने सिर्फ अपने बारे में सोच रहा था, और तुम्हारे प्लेअसुरे के बारे में तोह मैंने सोचा hi नहीं… आज शायद उसी कमी को पूरा करने का टाइम है…

सुप्रिया - मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है…

विक्रम - अभी समझ जायेगी… तुम बस रिलैक्स करो आज…

सुप्रिया इससे पहले कुछ बोल पाती, विक्रम ने अपना हाथ सुप्रिया के ड्रेस के ठीक नीचे उसकी जाँघों के बीच लगा दिया.

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सुप्रिया एक डैम से झटपटा गयी - उफ्फ्फ.. विक्रम… क्या कर रहे हो…

विक्रम - मैंने कहा न, तुम बस रिलैक्स करो.. तुम्हे बहुत ाचा लगेगा…

विक्रम ने सुप्रिया को उठाते हुए बीएड पर हलके से धकेल दिया. सुप्रिया बीएड पर गिरते हुए थोड़ा सा पीछे सर्कि जिससे उसकी ड्रेस थोड़ा ऊपर हो गयी और उसकी पंतय विक्रम को दिखाई देने लगी. विक्रम भी बीएड पर बैठ गया और उसने उसके पेअर पकड़ते हुए अपने पैरो के ऊपर रखे लिए. फिर उसकी टांगो को हलके से सहलाने लगा.

सुप्रिया के पेअर बिलकुल माखन की तरह मुलायम थे उसके पेअर, कहीं भी कोई भी निशाँ नहीं. अब तक विक्रम उसके शरीर के हर हिस्से को अछि तरह देख चूका था, उसे पता था सुप्रिया के शरीर पर कहाँ कितने टिल थे. सुप्रिया को बहुत ाचा लग रहा था विक्रम का ऐसे प्यार से उसके पैरो को मसलना.

कुछ मिनट बाद विक्रम ने हाथ सुप्रिया की जांघ तक पहुंच गए थे, और वह उसके जांघ के अंदरूनी हिस्से को प्यार से छूने लगा. वह हिस्सा काफी सेंस्टिविए था और सुप्रिया की सांसें तेज़ होती जा रही थी. सुप्रिया ने अपने जाँघे बंद कर ली और विक्रम का हाथ उसकी जाँघों के बीच में फास गया, जहाँ विक्रम हलकी सी नमी महसूस कर पा रहा था.

बहुत hi अछि सी खुशबू आ रही थी विक्रम को और वह अपने आप को और कण्ट्रोल नहीं कर पा रहा था. उसने जाँघों के बीच में फसा अपना हाथ निकला और फिर वहां झुक कर हलके से किश कर दिया. सुप्रिया तोह एक डैम से उछाल सी पड़ी पर विक्रम अभी भी उसके पेअर पकडे हुए था. इसी बीच उसने सुप्रिया की ड्रेस को थोड़ा ऊपर सरकड़ा दिया जिससे उसे सुप्रिया की पूरी टाँगे दिखने लगी. सुप्रिया ने अंदर एक लास वाला अंडरवियर पहना हुआ था जिसमे उसकी गोरी टाँगे बहुत hi आकर्षिक दिख रही थी.

विक्रम उसके पैरो पर अपनी उंगलियां चलने लगा और उसका दूसरा हाथ सुप्रिया की जांघ को कास के पकड़ा हुआ था.

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सुप्रिया - विक्रम… ममममम….. प्लीज रुको न…

विक्रम - ट्रस्ट में… जो भी करूँगा, तुम्हे बहुत ाचा लगेगा..

विक्रम ने फिर से अपना मुँह सुप्रिया के जानगोह पर रखते हुए वहां हलकी सी किश की. सुप्रिया की त्वचा वहां बहुत hi सेंसिटिव थी और वह हर छुअन से पागल होती जा रही थी. विक्रम ने अपनी जीब निकल कर सुप्रिया की गोरी गोरी जाँघों के बीच में घुसा दी.

सुप्रिया ने ऐसा करने पर अपने जांघ खोल दी - अह्ह्ह्हह… मममममम… उफ्फ्फ.....

विक्रम - मममम.... ाचा लगा न... अभी और भी ाचा लगेगा... बस तुम मेरा साथ दो...

सुप्रिया ने हलके से हाँ में सर हिलाया. विक्रम फिर से उसके पैरो को अपनी जीब से महसूस करने लगा. सुप्रिया को गुदगुदी भी हो रही थी और बेचैनी भी, पर पता नहीं क्यों ये सब बहुत ाचा भी लग रहा था. विक्रम की जीब सुप्रिया की पंतय से थोड़ा सा नीचे आ कर रुक गयी. सुप्रिया का हाथ वहां एक कवच की तरह लगा हुआ था.

विक्रम ने सीधे बैठते हुए सुप्रिया को अपने ऊपर खींचा और उसकी छोटी सी पंतय से बहार निकलते हुए उसके नितम्बो को अपने मुठी में कास के दबा लिया.

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सुप्रिया उचकती हुई विक्रम के गले लग गयी, विक्रम के ये सब करने से वह और भी गरम होती जा रही थी.

सुप्रिया - Ufff.....mmmmm..... अह्हह्ह्ह्ह

विक्रम - बहुत सॉफ्ट हो तुम सुप्रिया... बॉडी के हर हिस्से में...

विक्रम ने एक बार फिर सुप्रिया के नितम्बो को ज़ोर के दबाया, और उसका मुँह सुप्रिया की ड्रेस के ऊपर से उसके बूब्स पर था. विक्रम ने वहां हलके से काटा तोह सुप्रिया बीएड पर पीछे गिर गयी, और पलट कर दूसरी और करवट ले ली. सुप्रिया की गांड विक्रम की तरफ थी और वह उसके ऊपर आते हुए उसके पीठ को चूमने लगा. उसके मुँह नीचे जाते हुए सुप्रिया की पंतय पर रुका.

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सुप्रिया की गांड देख कर विक्रम बेकाबू होता जा रहा था और उसने वहां हलके से कटा, जिससे सुप्रिया की हलकी सी चीख निकल गयी. उसका मैं कर रहा था की वह अभी सुप्रिया की पंतय उतार कर अपना लुंड उसकी गांड में दाल दे, पर उसे फिर ख्याल आया की उसका मक़सद आज सुप्रिया को खुश करना था न की अपने आप को.

सुप्रिया अपनी ड्रेस को नीचे करने की कोशिश करने लगी - विक्रम... अह्ह्ह.... प्लीज हटो न...

विक्रम - सुप्रिया... जो भी मैं करने वाला हूँ... जस्ट ट्रस्ट में... ok..

विक्रम ने सुप्रिया को सीधा घुमाया और एक hi झटके में उसकी पंतय को नीचे खींच कर उतार दी.

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सुप्रिया ने शर्म के मारे अपनी ड्रेस नीचे खींच दी और अपने पेअर बंद कर लिए - उईईईईई.... विक्रम....

विक्रम - बस अब तुम आँखें बंद करके लेट जायो... लेट में दो थे रेस्ट...

सुप्रिया - नहीं प्लीज.... मुझसे नहीं होगा... मुझे नहीं ाचा लगता...

विक्रम - तुम्हे पता है मैं क्या करने वाला हूँ...

सुप्रिया - हाँ... थोड़ा तोह आईडिया है...

विक्रम - लगता है तुमने पहले किया है, पर शायद एन्जॉय नहीं किया...

सुप्रिया सोचने लगी जब उसने पहली और आखरी बार ये राहुल के साथ किया था और उसे बहुत अजीब सा लगा था. उसके बाद उसने ये कभी नहीं किया था - हम्म्म... शायद... पता नहीं...

विक्रम - इस बार थोड़ा अलग होगा... यू विल लिखे आईटी... के...

विक्रम ने सुप्रिया पकड़ते हुए अपने पास किया - तुम मेरे मुँह के ऊपर बैठ जायो...

सुप्रिया ने तेज़ी से न में सर हिलाया - नहीं विक्रम... मैं ऐसे कैसे आपके मुँह पर बैठ जायु?

विक्रम - प्लीज... जस्ट एक बार... ट्रस्ट में...

सुप्रिया बुरी तरह काँप रही थी, और उसका हाथ विक्रम के हाथ में था. विक्रम बीएड पर लेट गया और सुप्रिया नीचे से पूरी नंगी विक्रम की छाती पर बैठ गयी. उसे ऐसे बैठना hi अजीब सा लग रहा था. विक्रम ने अपने हाथ सुप्रिया के नंगे कूल्हों पर रखे और उसे अपने मुँह के पास खींचा.

सुप्रिया ने आँखें बंद कर ली, अब जो होना था वह तोह होना hi था. बस वह विक्रम को अपने आप को इतनी पास से नहीं देखने देना चाहती थी, तोह उसने विक्रम की आँखें अपने हाथों से धक् दी, और विक्रम ने उसकी कमर को ऊपर उठाते हुए उसकी छूट को अपने मुँह के ऊपर रख दिया.

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जैसे hi विक्रम ने सुप्रिया को अपने होंठों के ऊपर बिठाया, सुप्रिया की तोह हालत hi ख़राब हो गयी. आज तक उसने ऐसा कुछ नहीं किया था, और एक मर्द के होंठ उसने नीचे के होंठों के ठीक नीचे, बाप रे बाप. विक्रम ने वहां नीचे हलके से चूमा जिससे सुप्रिया के पूरे शरीर में एक सिरहन सी दौड़ गयी, और उसने अपने हाथों से अपनी ड्रेस फिर से नीचे खींचने की कोशिश करि.

विक्रम बहुत की आराम से, बिलकुल किसी कलाकार की तरह सुप्रिया को बहुत आराम आराम से नीचे चूम रहा था. सुप्रिया उठ कर कड़ी होना चाहती थी पर विक्रम ने उसकी कमर को पकडे रखा. फिर विक्रम ने अपने होंठों को थोड़ा खोलते हुए सुप्रिया की छूट को अपने मुँह में घेरा और वहां हलके हलके चूसने लगा.

सुप्रिया - Ahhhhh.....mmmmmm..... उईईईईई

विक्रम - ममममम.....

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सुप्रिया को ऐसा कभी पहले महसूस नहीं हुआ था, इतना अजीब सा लग रहा था और साथ hi इतना ाचा भी. जैसे कोई प्यारा सा सिरद दर्द हो रहा हो, जिसे वह ख़तम नहीं होने देना चाहती हो. विक्रम वहां नीचे लेता हुआ बिलकुल आराम से सुप्रिया को छूट को अपने मुँह में दबाये चूसे जा रहा था. अंदर का हल्का हल्का गीलापन भी जो निकल रहा था, वह भी विक्रम बिना किसी झिझक के अपने मुँह में ले रहा था.

सुप्रिया - अह्ह्ह... विक्रम.... क्या कर रहे... अअअअअअअ.... उफ्फ्फ....

दोनों के आँखें मिली और विक्रम सुप्रिया की शकल देख कर समझ गया की उसको इस समय कितना मजा आ रहा था. सुप्रिया तोह बस किसी तरह से अपने आप को संभाले बैठी थी की कहीं उसका सब कुछ विक्रम के मुँह पर न निकल जाये.

सुप्रिया - विक्रम... मुझे हटने दो प्लीज... गड़बड़ हो जाएगी..

पर विक्रम ने उसे नहीं छोड़ा. विक्रम ने अपनी जीब बहार निकाल कर सुप्रिया के छूट को तेज़ी से चाटना शुरू कर दिया. सुप्रिया का शरीर जवाब दे चूका था और उसनेविक्रम के ऊपर झुकते हुए अपने हाथों से अपने आप को बीएड पर सहारा दिया. जो कुछ हो रहा था उसमे उसे एक ऐसा आनंद आ रहा था जो आज तक उसे नहीं मिला था.

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विक्रम ने अपनी जीब सुप्रिया की गीली छूट के अंदर घुसा दी और वहां लपलप चाटने लगा. सुप्रिया बस आनंद से कररहने के इलावा कुछ न कर पायी. कुछ देर ऐसे hi करने के बाद उसे अपने अंदर का बहाव तेज़ होता हुआ महसूस हुआ और उसने फ़ौरन विक्रम के ऊपर से अपनी टाँगे हटा दी. फिर उसके टांगो के बीच से बहते हुए पानी ने बीएड का एक पूरा हिस्सा भिगो दिया.

सुप्रिया अपने छूट हलके से सहलाते हुए बीएड पर झटपटा सी रही थी - विक्रम...... उफ्फ्फ... ये क्या किया आपने....

विक्रम के चेहरे पर एक स्माइल थी, उसे पता था आज उसने सुप्रिया को जो मज़ा दिया था वह जल्दी से भूलने वाली नहीं थी, पर अभी तोह वह उसके साथ और खेलना चाहता था. ये सब होने के बाद भी उसका पानी दुबारा निकलवाने का डैम रखता था.

विक्रम - सुप्रिया... कैसा लगा...

सुप्रिया अभी भी अपनी तेज़ साँसों पर काबू पाने की कोशिश कर रही थी. पर इससे पहले वह जवाब देती, कमरे के दरवाज़े पर एक हलकी सी दस्तक हुई. दस्तक सुनते hi सुप्रिया एक डैम घबरा सी गयी और जल्दी से बीएड पर अपने कपड़ो को ढूंढ़ने लगी.

उसने लचर नज़रो से विक्रम की और देखा, उससे पूछते हुए की कौन होगा बहार. वह तोह इस सब में भूल hi गयी थी की वह किस होटल के रूम में नहीं, विक्रम के घर के एक कमरे में थी. विक्रम ने अपने होंठों पर ऊँगली रखते हुए सुप्रिया को छुप रहने का इशारा किया, और वह अपनी टीशर्ट पेहेनते हुए दरवारे की और गया और उसे हल्का सा खोला.

बहार से एक नौकर झांकता हुआ बोलै - सर... आपको डिस्टर्ब करने के लिए सॉरी... बहार दिशा जी आयी है...

विक्रम - कोई बात नहीं... उन्हें बिठायो... मैं आता हूँ...

विक्रम ने दरवाज़ा बंद किया और आईने में देख कर अपने कपडे और बाल ठीक करने लगा - सुप्रिया तुम यहीं रुको... मैं अभी 10 मिनट में आता हूँ. दिशा आज संडे को आयी है तोह कुछ जरूरी काम होगा उसे.

सुप्रिया अब तक अपने कपडे पेहेन चुकी थी और वह अभी अपने बाल ठीक करने में लग गयी. उफ्फ्फ आज कितनी बड़ी गलती हो गयी थी उससे यहाँ आ कर.

विक्रम कमरे से बहार निकला और बहार निकलते हुए कमरे का दरवाज़ा बंद करके ड्राइंग रूम में चला गया. विक्रम जैसे hi बहार ड्राइंग रूम में पंहुचा तोह दिशा वहां सोफे पर बैठी थी.

दिशा उसे देखते hi बोली - सॉरी विक्रम... आपको संडे के दिन डिस्टर्ब करने के लिए... बिग बॉस ने कुछ अर्जेंट डाक्यूमेंट्स सिग्न करने के लिए कहा है...

विक्रम - No प्रॉब्लम... मुझे पता है तुम ऐसे नहीं आती...

दिशा ने विक्रम को कुछ कागज़ पकड़ाए और विक्रम उन्हें सिग्न करने में लग गया, और फिर बीच में बोलै - दिशा.. कुछ लोगी.. चाय, कॉफ़ी, लंच?

दिशा - नहीं, कुछ नहीं. मुझे अभी कहीं और जाना है... और फिर शायद आप भी बिजी से लग रहे है...

विक्रम - नहीं... ऐसा कुछ नहीं...

दिशा - मैं आपके साथ 4 साल से काम कर रही हूँ.. इतना तोह पहचान hi लेती हूँ...

विक्रम - हम्म... ये लीजिये मैडम... डाक्यूमेंट्स बड़े सर के लिए...

दिशा - थैंक यू सर... ी विल सी यू टुमारो इन ऑफिस...

दिशा कड़ी hi हुई थी जाने के लिए, की विक्रम ने पुछा - हाउ इस अतुल दोंग?

दिशा एक पल के लिए हड़बड़ाई और फिर बोली - मैं समझी नहीं?

विक्रम - हम्म्म... यू फॉरगेट की मैं भी तुम्हारे साथ 4 साल से काम कर रहा हूँ...

दिशा - अगर आप कुछ सोच रहे है तोह वैसा बिलकुल नहीं है... मुझे मेरी बौंडरीएस अछि तरह पता है... अतुल के साथ भी और आपके साथ भी...

विक्रम - ी क्नोव... that's व्हाई यू अरे माय फवौरीते... एनीवे.. चलो सी यू टुमारो...

दिशा वहां से साइंड पेपर्स ले कर चली गयी और विक्रम वापस सुप्रिया के कमरे में पंहुचा. जब उसने कमरा खोला तोह सुप्रिया निर्वसली बीएड पर तैयार हो कर बैठी थी.

सुप्रिया ने विक्रम को देखते hi उससे पूछना शुरू कर दिया - दिशा चली गयी क्या? उसे पता तोह नहीं चला न की मैं यहाँ हूँ?

विक्रम - नहीं... उसे कुछ नहीं पता चला... पर ये क्या, तुम तोह पूरी तरह ड्रेस्ड उप हो गयी...

सुप्रिया - हाँ... मुझे अब चलना चाहिए... ये जगह ठीक नहीं है शायद हमारे मिलने के लिए...

विक्रम - हम्म्म... बूत थैंक यू सो मच फॉर किंग... ी फील की तुम्हारे आने से मेरा स्ट्रेस लेवल बिलकुल काम हो गया है...

सुप्रिया - और मुझे लग रहा है की मेरा बाद गया है...

विक्रम - तोह फिर ऐसा करते है, एक दिन बहार कहीं मिलते है और मैं तुम्हारा सारा स्ट्रेस उतार देता हूँ…

सुप्रिया ने विक्रम की और देखा, उनके चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल थी - आप न विक्रम, मुझे बेशरम बना देंगे..

विक्रम - तोह उसमे क्या गलत है…

दोनों एक दुसरे को देख कर हसने लगे. विक्रम ने पास आ कर फिर से सुप्रिया को हुग किया और दोनों कुछ देर और बैठे प्यार की बातें करते रहे.

उसके बाद सुप्रिया भी विक्रम के घर से अपनी गाडी ले कर अपने घर की और निकल गयी. चाहे वह कितनी नर्वस थी उन दोनों के रिलेशनशिप को लेकर, पर आज विक्रम ने जो कुछ किया उसमे उसे बहुत ज्यादा मज़ा आया था.

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इस सब के 2 हफ्ते बाद, ऑफिस के मीटिंग रूम में विक्रम, साहिल, सुप्रिया और कृति बैठी हुए मंथली सेल्स के नंबर रिव्यु कर रहे थे. विक्रम की कंपनी की सेल्स हर महीने बढ़ती hi जा रही थी और उन्होंने हाल hi में कुछ इम्पोर्टेन्ट मिलेस्तोनेस में पूरे किये थे. सब लोग काफी खुश थे पर उन्हें पता था की आगे और भी काफी काम था.

कृति - भैया, ी थिंक थिस कॉल्स फॉर ा पार्टी... वे शुड डेफिनिटेली सेलिब्रेट थे सक्सेस ऑफ़ आवर टीम...

विक्रम - हाँ सूरे... यू के उप विथ ा सेलिब्रेशन आईडिया एंड वे विल सेलिब्रेट....

कृति खुश होते हुए बोली - हाँ सूरे, लेट में प्लान समथिंग...

साहिल - इससे पहले हम कुछ सेलिब्रेट करे, ये मर. जेम्स का ईमेल देखा आप सब ने. वह और सुप्प्लिएर्स एक्स्प्लोर कर रहा है, थाईलैंड में... कैन यू इमेजिन?

विक्रम - ओह इस आईटी? उसकी टीम को तोह यहाँ आना था न...

साहिल - अब वह लोग यहाँ नहीं आ रहे है... वह लोग वहां के मनुफक्चरर्स से मिलने जा रहे है... मैंने सुना है की माइक और डनण्य के साथ जेम्स भी वहां जा रहा है…

विक्रम - हम्म्म...

साहिल - अगर हमने उनके कॉन्ट्रैक्ट को खो दिया तोह काफी बड़ा लोस्स होगा.... शायद हमें कुछ लोगो को भी…

विक्रम ने साहिल को हाथ के इशारे से शांत किया - नहीं ऐसा नहीं होगा, लेट में टॉक तो जेम्स...

कृति - भैया एक आईडिया है... क्यों न हम भी थाईलैंड चले और वहां उनसे मिल ले...

विक्रम - नॉट ा बाद आईडिया... एक्चुअली ग्रेट आईडिया!

साहिल - मैं तोह नहीं जा पायूँगा... मेरी यहाँ जरूरत है...

विक्रम - सुप्रिया, कृति, मैं और आकाश चले जाते है... व्हाट दो यू से?

सुप्रिया इंडिया के बहार जाने के नाम से काफी खुश सी हुई, पर उसके पास तोह पासपोर्ट भी नहीं था - वाओ... हाँ काफी ाचा रहेगा.. पर मेरे पास पासपोर्ट नहीं है...

कृति - Don't वोर्री सुप्रिया... वह तोह काफी जल्दी बन जायेगा... ी विल हेल्प यू आउट ों तहत...

विक्रम ने सुप्रिया की और देखते हुए कहा - यस, ी थिंक तुम्हारा जाना ाचा रहेगा सुप्रिया, आखिर यू क्नोव थम वैरी वेल... सो लेट में गेट थे डिटेल्स फ्रॉम जेम्स एंड फिर हम लोग जाने का प्लान करते है...

कुछ देर बार मीटिंग ख़तम हो गयी और विक्रम बहार जाने के लिए खड़ा हुआ. कृति भी विक्रम से बात करने के लिए उसके साथ बहार की और हो ली. वैसे तोह सुप्रिया भी विक्रम से बात करना चाहती थी, कभी कभी तोह उसे लगता था की वह दोनों आज कल बात hi नहीं कर पा रहे थे. विक्रम भी बिजी चल रहे थे और वह भी ऑफिस और घर के बीच में पीसी हुई सी hi थी.

मीटिंग रूम में साहिल और सुप्रिया बैठे थे और सुप्रिया अपने पेपर्स समेत रही थी.

साहिल ने इधर उधर देखा, जैसे चेक कर रहा हो की वह और सुप्रिया अकेले hi थे न - सुप्रिया... एक बात कहु...

सुप्रिया - जी सर...

साहिल - वैसे मेरा कोई हक़ नहीं है ये सब बोलने का... पर काफी दिनों से मेरे मैं में था तोह कह hi देता हूँ...

सुप्रिया पूरी अटेंशन से साहिल की और देखने लगी, पता नहीं ऐसा क्या था जो आज वह कहना चाहते थे.

साहिल - हम मिडिल क्लास लोग है... और हमें ये बात कभी नहीं भूलनी चाहिए... तुम समझ रही हो न मैं क्या कहना चाहा हूँ...

सुप्रिया को साफ़ साफ़ तोह नहीं समझ आ रहा था, पर उसे अजीब सा लग रहा था की आज साहिल सर उससे ऐसी बातें क्यों कर रहे थे - सर... नहीं मुझे कुछ समझ नहीं आया...

साहिल - सुप्रिया... तुम मेरी छोटी बेहेन जैसी हो... इसलिए मैं तुम्हे थोड़ा और खुल के समझा देता हूँ.. कोशिश करो की तुम अपने आप को इन लोगो की लाइफ से दूर hi रखो....

सुप्रिया - सर.... किस्से?

साहिल ने गहरी सांस भरी, शायद सुप्रिया उसकी बात को समझना hi नहीं चाहती थी. साहिल अपना लैपटॉप लेकर मीटिंग रूम से निकल गया. सुप्रिया भी शायद थोड़ा बहुत समझ गयी थी की साहिल क्या कहना चाहता था, पर वह अब विक्रम के साथ इतनी आगे बाद चुकी थी की उसके लिए अब अपने कदम पीछे करना नामुमकिन सा था.

सुप्रिया अपने पेपर्स ले कर बहार अपने डेस्क पर आयी तोह उसने देखा की वहीँ पास में विक्रम और कृति खड़े बातें कर रहे थे. ऐसा लग रहा था की कृति उन्हें किसी चीज़ के बारे में मानाने की कोशिश कर रही थी पर विक्रम मान नहीं रहे थे. सुप्रिया उनकी बातें ध्यान से सुनने की कोशिश करने लगी.

विक्रम - और तुम कब मूव ों करोगी राहुल से...

कृति - मूव ों मतलब?

विक्रम - यू क्नोव व्हाट ी मैं... हम पहले भी इस बारे में डिसकस कर चुके है...

कृति - के ों, हे इस रियली नीस... पर ाचा ठीक है... आप मेरी हेल्प करा दे न एडमिशन में... फिर पक्का... ी विल मूव ों...

विक्रम - इतना आसान नहीं है वहां एडमिशन होना...

कृति - आपके लिए इतना मुश्किल भी नहीं है...

विक्रम - मेरे लिए या ईशा के डैड के लिए?

कृति - शामे hi तोह है... आप मेरे लिए उनसे इतनी सी हेल्प नहीं ले सकते?

विक्रम - हम्म्म.... तुमने चाचू से बात की इस बारे में?

कृति - यू क्नोव वह मन hi करेंगे न.... हे जस्ट वांट्स में तो गेट मैरिड...

विक्रम - हम्म्म... हे इस नॉट रॉंग... बूत ok लेट में थिंक अबाउट आईटी... बूत हाँ ी सीरियसली आस्क की यू रथिंक अबाउट राहुल...

कृति - अब मैं आपको कैसे कन्विंस करू...

थोड़ी देर बाद दोनों का डिस्कशन ख़तम हुआ, और कृति अपने डेस्क पर आ कर बैठ गयी. सुप्रिया सेंस कर पा रही थी की उसका मूड थोड़ा ख़राब था, पर वह उससे अभी कुछ भी पूछना नहीं चाहती थी. और फिर विक्रम सही तोह कह रहा था, राहुल सही नहीं था कृति के लिए. उसके लिए क्या, किसी के लिए भी सही नहीं था. पर सुप्रिया तोह राहुल से जितना हो सके उतना दूर रहना चाहती थी, तोह उसका इस सब में पड़ने का कोई सवाल hi नहीं बनता था. वह जल्द hi सब कुछ भुला कर वापस अपने काम में लग गयी.
 
मैंने कोशिश तोह करि थी विक्रम की स्टोरी को जल्दी फ़ास्ट फॉरवर्ड करने की… तब भी लोग खुश नहीं थे…. एनीवे…. मैं आगे का सस्पेंस नहीं स्पोइल करुँगी… बूत वेट एंड वाच.

अब मैं स्टोरी जल्दी से आगे निकाल दू तोह मुझे आप कुछ न कहना… वैसे आगे भी बदनी है मुझे स्टोरी, यहाँ तोह स्टक नहीं रहूंगी न.
 
अपडेट 63

पिछले 3-4 हफ्तों से, विक्रम और सुप्रिया हफ्ते में काम से काम एक बार तोह ऑफिस के बहार मिल hi लेते थे. Kabhi-kabhi दो बार भी. विक्रम जब सुप्रिया के ऑफिस आता तोह, वह सुप्रिया को घर ड्राप करने अपनी कार में ले जाता, और अक्सर कार कहीं बीच में रुक hi जाती. और फिर दोनों कार में अलग अलग तरह से अपने प्यार को अंजाम देते. कभी सुप्रिया विक्रम के ऊपर और कभी विक्रम सुप्रिया के ऊपर.

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जब अतुल बहार ट्रेवल कर रहा होता तोह दोनों रात किसी होटल में साथ में बिता लेते. हर दिन जैसे उनका रिश्ता और मजबूत होता जा रहा था और उनके बीच का प्यार और भी हॉट. सुप्रिया को तोह अब जैसे विक्रम की आदत सी hi पद गयी थी और उसके बिना उसका दिन अधूरा सा लगता. और विक्रम भी कुछ ऐसा hi हाल था. दोनों रात रात भर जग कर एक दुसरे से प्यार जताते और खुल कर अपने मैं की बात करते. बस उनके रिश्ते का कोई नाम नहीं था, बाकी सब कुछ hi जैसे था उनके बीच.

पर प्यार और दुश्मनी छुपाये कहाँ छुपती है, और सुप्रिया और विक्रम ने चाहे लाख छुपाने की कोशिश की हो, उन्हें कुछ लोगो ने एक साथ अलग अलग जगह देख hi लिया था. और इसकी खबर ईशा के कानो तक भी पहुंच गयी थी.

वैसे तोह ईशा और विक्रम के बीच एक अंडरस्टैंडिंग थी वह दोनों एक दुसरे की सेक्स लाइफ में दखल नहीं देंगे, पर ये मामला ईशा को कुछ ज्यादा hi खटक सा रहा था. वैसे भी ईशा के हिसाब से उनके बीच ये तय हुआ था की वह किसी के साथ भी सो सकते थे पर किसी से रोमांटिकल्ल्य इन्वोल्वेद नहीं हो सकते थे. ये बस एक ओपन मैरिज थी, पर किसी और से प्यार करने का लाइसेंस नहीं.

एक रात जब विक्रम अपने घर पंहुचा तोह उसने 1-2 ज्यादा hi पेग छडाए हुए थे. विक्रम फिर भी अपने शरीर के पूरे कण्ट्रोल में था. उसने घर के स्टाफ से पुछा तोह पता चला की ईशा ऊपर अपने कमरे में hi थी.

विक्रम किसी तरह से अपने आप को थोड़ा नार्मल करके ऊपर पंहुचा और अपने बीएड पर जाकर लेट गया. ईशा शायद वाशरूम में थी उस टाइम. विक्रम बीएड पर लेता हुआ कुछ सोच रहा था, शायद सुप्रिया के बारे में hi, की काश वह यहाँ उसके साथ होती.

थोड़ी देर बाद ईशा बाथरूम से बहार निकली, एक निघटजोन पहने हुए. वह विक्रम को नज़र अंदाज़ करते हुए अपने ड्रेसिंग मिरर की तरफ गयी और अपने चेहरे पर नाईट क्रीम लगाने लगी. विक्रम भी छुप था, उनके बीच वैसे भी ज्यादा कुछ बातचीत होती नहीं थी. आज एक तरह से चमत्कार सा hi था की वह दोनों रात को 12 बजे से पहले एक साथ एक hi कमरे में थी. अक्सर वह दोनों अलग अलग कमरों में hi सोते थे. विक्रम को ऐसा लग रहा था की जैसे उसे वहां उस कमरे में घुटन सी महसूस हो रही हो और वह बीएड से खड़ा हो गया.

ईशा ने मिरर से विक्रम को बहार जाते देखा - कहाँ जा रहे हो… यहीं सो जायो आज…

विक्रम तुनक कर बोलै - क्यों? तुम डीडे करोगी मैं कहाँ सयुंगा?

ईशा - मुझे इतना ऐटिटूड दिखने की जरूरत नहीं है... यहीं बैठ जायो... मुझे कुछ बात करनी है...

विक्रम आँखें बंद करता हुआ बीएड पर फिर से बैठ गया - व्हाटएवर...

ईशा - हाउ इस योर एक्सपोर्ट ऑफिस थिंग गोइंग?

विक्रम - It’s फाइन… सब ठीक है…

ईशा - तुम क्यों वहां इतना टाइम क्यों वास्ते करते हो, मुझे तोह समझ hi नहीं आता, और न hi डैडी को…

विक्रम - अब जो तुम्हे और तुम्हारे डैडी को समझ आएगा वही करना होगा क्या मुझे…

ईशा - ी डोंट अंडरस्टैंड की तुम मेरे साथ इतना विशियस बेहवे क्यों करते हो… ी ऍम ट्राइंग तो फंड आउट की हाउ वास् योर डे और तुम इतनी रूडली जवाब दे रहे हो...

विक्रम - अगर तुम मुझसे ये सब पूछ रही हो तोह इसके पीछे भी कोई मतलब hi होगा...

ईशा ने गहरी सांस ली - हम्म्म... ी हैवे हर्ड सम थिंग्स...

विक्रम - व्हाट थिंग्स?

ईशा - एहि की तुम अपने से लोअर स्टैण्डर्ड के लोगो के साथ हैंग आउट करते हो आज कल...

विक्रम - लोअर स्टैण्डर्ड?!! तुम्हारे लिए तोह सब कुछ लोअर स्टैण्डर्ड है न…

ईशा ने विक्रम की बात को अनसुना करते हुए कहा - क्या नाम है उसका… श्रेया? सुप्रिया? ी हर्ड तुम उसके साथ होटल्स जाते हो, रेस्टोरेंट्स जाते हो, और वह भी हमारे फवौरीते स्पॉट्स में?

विक्रम - तुम्हे किसने बोलै ये सब?

ईशा - ी हैवे ा लोट ऑफ़ फ्रेंड्स...

विक्रम हस्ते हुए बोलै - ये तुम्हारी गलत फेहमी है की वह लोग तुम्हारे फ्रेंड्स है...

ईशा - अन्य वे बात को पलटो नहीं... इस लड़की के साथ चल क्या रहा है… ी ऍम हियरिंग तू मच अबाउट हेर… जैसे हर जगह उसकी प्रजेंस हो… मेरे इंस्टिंक्ट कहते है की कुछ तोह गड़बड़ है…

विक्रम - मुझे लगा वे वेरे बोथ फ्री तो दो व्हाटएवर वे वांटेड…

ईशा ने विक्रम को घूर कर देखा - सिर्फ सेक्स… और कुछ भी नहीं...

विक्रम - यू क्नोव की जब तुमने िनीतिकल्ली मुझे ये सब करने के लिए मनाया था… ी हॉटेड आईटी... ी डिडन्ट वांट तो शेयर यू विथ एनीवन... सो अब तुम्हे क्या फरक पड़ता है की मैं क्या करता हूँ… ी don't आस्क व्हाट यू दो...

ईशा - फरक पड़ता है मुझे… तुम सिर्फ मेरे हो…

विक्रम - पर हम और लोगो के साथ सब कुछ कर सकते है??

ईशा - तहत इस डिफरेंट... सेक्स सिर्फ सेक्स होता है... और कुछ नहीं...

विक्रम - मुझे ये सब समझ नहीं आता…

ईशा - समझ नहीं आता फिर भी इतनी साड़ी लड़कियों के साथ सो चुके हो...

विक्रम - जब बैडरूम रात को खली हो तोह उसने शैतान बैठ hi जाता है न…

ईशा - वैसे मुझे भी तोह कभी अपना वह शैतान दिखायो बीएड में… मैंने सुना है काफी वाइल्ड हो जाते हो तुम आज कल…

विक्रम - ः... अब ये किसने कहा? जय ने?

ईशा - ी थिंक तुम फिर से टॉपिक चेंज कर रहे हो... ी ऍम टेलिंग यू... ी हेट तहत बीच... और मैं उसके बारे में आगे से नहीं सुन्ना चाहती हूँ... फ़क हेर एंड बे दोने विथ आईटी...

विक्रम - ईशा… तुम मुझे डाइवोर्स क्यों नहीं दे देती…

ईशा - नॉनसेंस… मैं भला ऐसा क्यों करुँगी.. और तुम क्यों मुझसे डाइवोर्स चाहोगे...

विक्रम - हम दोनों की ख़ुशी के लिए…

ईशा - मैं तोह खुश हूँ… तुम बताया, कहीं तुम्हे उस लड़की से प्यार तोह नहीं हो गया…

विक्रम - और अगर हो गया है तोह?

ईशा ने विक्रम को अपनी आँख के कोने से देखा - तोह तुम्हे पता है मैं क्या करुँगी… ये मत सोचना मैं जरा भी हेसिटते करुँगी... यू क्नोव में...

विक्रम इस बात को और आगे नहीं बढ़ाना चाहता था. बात आगे बाद गयी तोह न तोह सुप्रिया के लिए ाचा होगा न उसके लिए - हम्म्म... ी वास् जस्ट किडिंग... हाँ ी ऍम फूकिंग हेर, बूत it's जस्ट टाइम पास, नथिंग मोरे...

ईशा - विक्रम... जस्ट गेट रीद ऑफ़ हेर... एंड अगर तुम नहीं कर सकते तोह मुझे बताया... पापा के काफी लोग है ये सब करने के लिए...

विक्रम - नहीं... ी विल सॉर्ट आउट... लीव आईटी विथ में... मुझे एक और हेल्प नहीं चाहिए तुम्हारे डैड से...

ईशा - विक्रम, डैड लव्स यू सो मच, तुम क्यों इस सब के बारे में इतना सोचते हो. तुम hi तोह सब चला रहे हो, एंड एवरीवन फोल्लोव्स योर डिरेक्शंस. एंड ी लव यू ा लोट… इन माय ओन वे…

विक्रम - हम्म्म…

ईशा - ी थिंक यू नीड तो ब्लो ऑफ सम स्टीम, लेट में हेल्प यू.

ईशा विक्रम के पास आकर नीचे ज़मीन पर बैठ गयी और अपने हाथ उसके घुटनो पर रख दिए - मैं चाहे किसी के साथ भी सेक्स करू, मेरे खयालो में हमेशा तुम hi होते हो.. माय फर्स्ट एंड ओनली ट्रू लव…

ईशा ने वहां नीचे बैठे हुए अपने गाउन का टॉप भी उतार दिया. उसके बड़े बड़े बूब्स जो इम्प्लांट्स से और बड़े किये गए थे विक्रम के सामने थे. विक्रम को उसका ये प्लास्टिक का शरीर बिलकुल ाचा नहीं लगता था. उसके मन करने पर भी ईशा ने अपने शरीर पर कई ऑपरेशन्स करवाए थे. ईशा ने अपने बड़े बड़े बूब्स विक्रम की टांगो के बीच में फसा दिए.

ईशा - टेक ऑफ योर पंत...

विक्रम - नहीं इतस ok... मैं मूड में नहीं हूँ...

ईशा - विक्रम! के ों...

ईशा ने विक्रम की बेल्ट खोलनी शुरू करि, और उसके बाद उसकी पंत के बटन और ज़िप. विक्रम का अंडरवियर दीखते hi ईशा ने उस पर अपने हाथ से रब करना शुरू किया. ईशा ने अपने होंठों पर अपनी जीब फेरी, जैसे विक्रम को इशारा कर रही हो की वह क्या करने वाली थी.

ईशा - विक्रम.. तुम्हारे लिए तोह आज मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ… नहीं तोह मैं किसी को जल्दी से ब्लोजॉब नहीं देती…

विक्रम समझ गया था की ईशा आज मैंने वाली नहीं थी और अगर वह उसे ज्यादा मन करेगा तोह वह फिर से सुप्रिया वाले टॉपिक पर आ जाएगी. वह हल्का सा उठा और ईशा ने विक्रम की पंत और अंडरवियर उसके घुटनो तक नीचे खींच लिए. विक्रम का लुंड ईशा के सामने था पर वह अभी भी पूरी तरह खड़ा नहीं था.

ईशा उसका मुरझाया हुआ लुंड देख कर उसे छिड़ते हुए बोली - अव्व्व... सो क्यूट... कितना छोटा सा है ये आज... परफॉरमेंस इशू आज कल? ये तोह कॉमन है आजकल फॉर में ऑफ़ योर आगे एंड स्ट्रेस लेवल्स...

विक्रम को ये सुन कर थोड़ा गुस्सा सा आया है और उसने ईशा के बाल अपनी मुठी में पकड़ लिए.

विक्रम के ऐसा करते hi ईशा की आँखों में चमक सी आ गयी - अह्ह्ह्ह… यस… शो में योर एनिमल टुनाइट… कितने दिन हो गए है हमें कुछ वाइल्ड करे हुए…

ईशा ने अपना मुँह विक्रम के लुंड की तरफ नीचे झुकाते हुए अपनी जीब उसके लुंड की टोपी पर फेर दी, और फिर वह पूरे लुंड पर जीब फेरते हुए उसके तत्तो तक पहुंच गयी. उसने उसके तत्तो को अपने होंठों में दबा लिया. ये करते है विक्रम की अह्ह्ह निकल गयी.

ईशा ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा - प्रॉमिस में, तुम उस सलूट को फ़क करके भूल जाओगे… प्रॉमिस में…

विक्रम - प्रॉमिस…

ईशा अपनी आवाज़ को स्वीट बनाते हुए बोली - That’s माय गुड बॉय… अब मैं अपने बेबी को ऐसे खुश करुँगी की उसके दिमाग से ये साड़ी रंडिया निकल जाये..

ईशा ने विक्रम के पूरे लुंड पर अपनी जीब अचे से फेरनी शुरू करि, उसका लुंड पूरा भीग गया था ईशा के थूक में. विक्रम ने पीछे से ईशा की ब्रा का हुक खोला जिससे उसके बड़े बड़े मम्मी छलांग लगते हुए बहार आ गए.

विक्रम - बोलो की तुम आज मेरी रंडी हो...

ईशा - व्हाट?

विक्रम ज़ोर से बोलै - बोलो.. मेरी रंडी हो आज रात...

ईशा उसका ये रूप देख कर और एक्ससिटेड होती जा रही थी, और उसने सोफ़्त्ल्य कहा - मैं आज रात तुम्हारी रंडी हु...

विक्रम ने ईशा को बड़े बड़े बूब्स को ज़ोर से दबा दिया और उसके निप्पल्स को हलके से खींचा. ईशा की चीख निकल गयी जब विक्रम ने ऐसे किया.

विक्रम ने फिर से ईशा के बाल अपनी मुट्ठी में पकड़ लिए - गुड... तुम्हे पता है मैं तुम जैसी रंडियों के साथ क्या करता हूँ?

ईशा ने सांसें तेज़ हो रही थी और वह हलके से बोली - नहीं...

विक्रम - मैं उनके ये बड़े बड़े मम्मी छोड़ देता हूँ... यू क्नोव... ी लिखे तो फ़क थेइर बूब्स...

ये सुन कर ईशा के चेहरे पर काफी एक्ससिटेमेंट आ गयी. विक्रम का लुंड अभी भी पूरा तरह नहीं खड़ा था, और उसने अपना लुंड ईशा के बूब्स पर मारना शुरू किया.

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ईशा के बूब्स उसके सांस लेते हुए ऊपर नीचे हो रहे थे और उसके मुँह से ज़ोर की आहें निकल रही थी - आअह्ह्ह... अह्ह्ह... हिट थम हार्ड विक्रम...

विक्रम ने दोनों बूब्स पर बारी बारी अपना लुंड रगड़ना शुरू किया, जिससे उसका लुंड और कड़क होने लग गया था. ईशा ने अपने दोनों हाथ से अपने बूब्स को दबा के अपनी बीच की खाई को और बड़ा और गहरा किया और फिर उन्हें विक्रम के लुंड पर लगते हुए उस पर मसलने लगी.

ईशा - अह्ह्ह.... तुम मेरे साथ आज कुछ भी कर सकते हो... पूरी परमिशन है तुम्हे...

विक्रम - मुझे तुम्हारी परमिशन की जरूरत नहीं है...

विक्रम ने ईशा के सर को पकड़ते हुए अपने आप को बैलेंस दिया और फिर ईशा के बूब्स के बीच में अपने लुंड को तेजी से ऊपर नीचे रगड़ने लगा.

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विक्रम का लुंड ईशा के बूब्स पर रगड़ते हुए फाछह फाछह की आवाज़ कर रहा था, और साथ hi ईशा उत्साहित हो कर करहा रही थी.

ईशा - उफ्फ्फ... और तेज़... और तेज़ करो न...

विक्रम ने ईशा को बालो से पकड़ते हुए बीएड पर धक्का दिया और फिर वह अपने पेअर छोड़े करते हुए ईशा के ठीक ऊपर आ गया. ईशा अभी भी अपने बूब्स को पकडे हुई थी, और विक्रम ने फिर से अपना लुंड उसके बूब्स के बीच में घुसा दिया. इस बार और ज़ोर से उसके बूब्स को छोड़ते हुए.

विक्रम - बीच... अह्ह्ह... फ़क.... इसीलिए बड़े कराये था न तुमने अपने मम्मी...

ईशा के बड़े बड़े बूब्स के बीच में रगड़ते हुए ईशा के बूब्स लाल हो चुके थे और उसे दर्द होना बे शुरू हो चूका था, पर वह इस समय विक्रम के इस मूड को नहीं रोकना चाहती थी. वह अपनी आखें बंद किये अपने बूब्स को हलके हलके दबती रही.

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ईशा - यस.... यस.... उफ्फ्फ.... आह्हः....

विक्रम - तुम्हे ऐसे hi पसंद है न छोड़ना अपने आशिक़ो से... अह्ह्ह्ह.....

बीच बीच में विक्रम अपने हाथों से ईशा के बूब्स पर थप्पड़ लगा रहा था जिससे उसके बूब्स और भी लाल हो गए थे.

ईशा ने अपने बूब्स को पकडे रखा और अपने बूब्स को उसके लुंड पर अचे से घूमने लगी. उसे दिख रहा था की विक्रम किसी भी पल उसके बूब्स पर विस्फोट कर सकता था. और ठीक एहि हुआ, विक्रम का सफ़ेद ईशा के बूब्स, गले और चेहरा पर एक तेज़ धार से निकल गया. पानी ईशा के पेट से नीचे जाते हुए उसके पूरे शरीर को गीला कर रहा था.

ईशा - अह्ह्ह्ह..... ममममम....

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विक्रम - ाचा लगा..

ईशा का और लोगो के साथ भी प्यार वाइल्ड hi होता था पर किसी की हिम्मत नहीं होती थी की वह उसके पूरे शरीर को इस तरह गीला कर दे. पर ये तोह उसका पति था, और आज वह चाहती थी उसकी रात यादगार बनाना. ईशा ने हाँ में सर हिला दिया.

विक्रम ने त्योरि छेड़ते हुए कहा - तोह अब मेरा लुंड कौन साफ़ करेगा...

ईशा ने ये सुनते hi अपनी जीब बहार कर दी, और विक्रम अपना लुंड उसकी जीब पर रगड़ने लगा, और फिर जैसे अपने लुंड से हर एक बूँद ईशा के मुँह में डालने के लिए अपने लुंड को ईशा की जीब पर ज़ोर ज़ोर से पटकने लगा.

ईशा अपना मुँह खोले उसके प्यार की हर निशानी को अपने अंदर लिए जा रही थी.

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कुछ देर बाद विक्रम का लुंड ईशा के मुँह से नीचे हुआ तोह ईशा की आवाज़ निकल पायी - अरे यू दोने?

विक्रम ने गुर्राते हुए कहा - दो यू थिंक ी ऍम दोने विथ थिस?

ईशा ने रहत की सांस ली, अब भी विक्रम में वही आग और डैम था जो पहले हुआ करता था. ईशा की छूट ज़ोर से फड़क रही थी और वह चाहती थी की विक्रम आगे उस खूब अचे से छोड़ दे.

ईशा - ी डिडन्ट थिंक सो... ी ऍम स्टिल आल योर्स...

ईशा ने आगे बाद कर विक्रम के होंठों को चूमने की कोशिश करि, पर विक्रम ने उसे धकेल कर साइड कर दिया.

ईशा बीएड पर साइड में जा कर गिरी - अह्ह्ह्हह... विक्रम...

विक्रम बीएड पर लेट गया और ज़ोर से बोलै - मैं जिन स्लोट्स को फ़क करता हूँ न... उन्हें किश नहीं करता... सो no किसिंग टुनाइट...

ईशा हलके से मुस्कुरायी - Ok बॉस, जो आपका हुकुम हो...

ईशा ने अपनी पंतय उतारी और पूरी तरह नंगी हो कर फिर से विक्रम के पास आ गयी. उसने सुना था की विक्रम को क्या पसंद है और आज चाहे वह खुश न हो, उसे विक्रम को पूरे मजे देने थे. उसने अपनी गांड विक्रम की और की और फिर धीरे धीरे उसके पैरो पर बैठ कर अपनी गांड उसके लुंड पर रगड़ने लगी.

विक्रम का लुंड जो पतन से थोड़ा सा सॉफ्ट हो गया था, एकदम से हरकत में आ गया.

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विक्रम ने पीछे से ईशा की कमर को पकड़ा और अपनी एक ऊँगली उसकी गांड के छेड़ में घुसा दी.

विक्रम के ऐसा करने से ईशा एकदम हैरान सी रह गयी और उसके मुँह से एक हलकी सी चीख निकल गयी - उईईईईई....

विक्रम - क्या हुआ... इतने से में hi....

ईशा - नहीं... मैं बस तैयार नहीं थी...

विक्रम - अब तोह तैयार हो न…

ईशा ने विक्रम की और पलट कर देखा - ी क्नोव यू लिखे तहत होल ा लोट… लेट में राइड ों टॉप ऑफ़ यू…

ईशा ने अपना शरीर ऊपर करते हुए अपने नीचे के हिस्से को विक्रम के लुंड के ठीक ऊपर टिकाया. जिस एंगल में वह थी उसे विक्रम का लुंड सही से दिख नहीं रहा था. लुंड उसकी छूट और गांड के छेड़ के बीच में टकरा रहा था. विक्रम ने अपने लुंड को अपने हाथ से दिशा देते हुए ईशा के गांड के छेड़ पर लगा दिया. अब बाकी काम तोह ईशा को hi करना था.

ईशा धीरे धीरे लुंड पर नीचे हुई और उसे विक्रम का लुंड उसकी गांड में जाता हुआ महसूस हुआ. विक्रम का लुंड था भी थोड़ा मोटा, तोह उसे वह महसूस हो रहा था. पर अब तक उसके सारे छेड़ इतने खुल चुके थे की विक्रम को कुछ ख़ास मजा नहीं आ रहा था. ईशा धीरे धीरे अपने विक्रम के लुंड पर उठती बैठती रही. लुंड उसकी गांड के छेड़ में आधे तक अंदर समां रहा था.

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विक्रम कुछ देर तक ईशा की धीमी स्पीड में अपने लुंड पर नीचे आने को टोलेराते करता रहा, पर ये जल्द hi उसके लिए काफी बोरिंग सा होने लगा था और बर्दाश्त के बहार भी.

उसने आगे बाद कर ईशा की कमर को पकड़ा और उसे अपने ऊपर पीछे खींचे हुए लिटा लिया. जैसे hi उसने ये किया विक्रम का पूरा लुंड ईशा की गांड में समां गया.

ईशा एक डैम से चिल्ला पड़ी - अह्ह्ह्हह... उफ्फ्फ.....

विक्रम - नाउ ी विल शो यू व्हाट अनल सेक्स इस...

विक्रम ने ईशा की जांघो को अपने हाथों से पकड़ा और फुल स्पीड में ईशा की गांड में अपना लुंड अंदर बहार करने लगा. ईशा अपने होंठ अपने मुँह में दबती हुई इसे काफी एन्जॉय करने लगी.

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ईशा - यस.... एस..... उफ्फ्फ... आह्हः... हर्डर.... और तेज़...

विक्रम अपने नीचे के हिस्से को उठाते हुए ईशा को और तेज़ी से छोड़ने लगा. ईशा की चीखे प्लेअसुरे में और तेज़ होती जा रही थी. उसे इतनी अछि चुदाई बहुत दिनों से नहीं मिली थी. विक्रम का लुंड उसके अंदर के मांस से टकरा रहा था और वह रुकने का नाम hi नहीं ले रहा था.

ईशा बुरी तरह से सिसक रही थी - मममम... ममममम .... ममममम.... नमममममम

विक्रम उसकी सिसकियाँ सुन कर और तेज़ होता जा रहा था - अह्ह्ह... फ़क.....

ईशा - उफ्फ्फ्फ़.... विककक.... क्या कहते हो तुम... उफ्फ्फ्फ़... आठ...

विक्रम ईशा के पेअर पकडे हुए थक hi नहीं रहा था, काफी शक्ति चाहिए होती है ऐसे पोज़ में छोड़ने के लिए. कुछ देर बाद विक्रम ज़ोर से गुर्राया और चार पांच ज़ोर के झाकतो के बाद उसने अपना सारा माल ईशा की गांड में निकल दिया.

उसने साइड में लेट ते हुए ईशा के पैरो को छोड़ा और वह उसके लुंड से सरकती हुई नीचे हो गयी. उसकी सांसें अभी भी बहुत तेज़ थी, उसे ऐसा लग रहा था की उसका गांड का छेड़ और भी बड़ा हो गया हो.

ईशा हाँफते हुए बोली - विक्रम.... यू अरे अमेजिंग... वे शुड दो थिस मोरे ओफ्तें...

विक्रम आराम से बीएड पर लेता रहा और ऊपर छत की तरफ देखता रहा. उसके अंदर का जानवर थोड़ा शांत हो गया था और उसके शांत होने के बाद उसकी आँखों के सामने सुप्रिया का नाज़ुक सा चेहरा hi घूम रहा था.

विक्रम का कोई जवाब नहीं आया तोह ईशा ने पलट कर उसकी और देखा - विक्रम... मैं तुमसे कुछ बोल रही हो... कहाँ खो गए...

विक्रम - हम्म्म... बोलो...

ईशा - इस थिस हाउ यू फ़क योर स्लोट्स... वाओ... अमेजिंग... तुम पहले तोह बीएड में ऐसे नहीं थे...

विक्रम - तुम्हे पहले वाला विक्रम पसंद था या ये वाला?

ईशा ने अपना सर विक्रम के हाथ पर रख दिया - ऑब्वियस्ली ये वाला... पहले वाला तोह कितना बोरिंग सेक्स करता था...

विक्रम - हम्म्म्म....

ईशा - एनीवे... ी लव यू मेरी जान... और हम दोनों के बीच में किसी और के प्यार की जगह नहीं है...

विक्रम - पर सेक्स की है?

ईशा - ओह, लेटस नॉट स्टार्ट अगेन... ी मैं let's स्टार्ट अगेन िफ़ यू स्टिल हैवे स्टैमिना...

विक्रम ने मुस्कुरा के ईशा को देखा - मेरे पास हमेशा स्टैमिना होता है...

दोनों कुछ देर बाद फिर से एक अलग पोजीशन में सेक्स करने में लग गए. काफी यादगार रात थी वह ईशा के लिए.

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इस रात के लगभग दो हफ्ते बाद, सुप्रिया की फ्लाइट बस अभी थाईलैंड में लैंड hi हुई थी, और वह एयरपोर्ट पर अपना सामान कलेक्ट कर रही थी. उसके साथ hi कृति और आकाश भी अपना सामन का वेट कर रहे थे. और थोड़ी hi दूर विक्रम और राहुल भी खड़े थे. सुप्रिया वैसे तोह बहुत खुश थी यहाँ घर से इतनी दूर आकर, पर उसे कृति ने पहले नहीं बताया था की राहुल भी इस ट्रिप पर आने वाला था. फ्लाइट में सीट्स भी ऐसी मिली थी की राहुल उसके पास hi बैठा था और पूरे रास्ते वह उससे बात करने की कोशिश करता रहा. पर सुप्रिया तोह उसे इग्नोर hi कर रही थी.

सुप्रिया ये भी सोच रही थी की अगर उसे पता होता की राहुल आ रहा है तोह शायद वह अतुल को अपने साथ आने के लिए कहती. पर पता नहीं अतुल आना भी चाहता या नहीं. अब तोह जैसे आदत सी पद रही गयी थी उन दोनों को अलग रहने की. अतुल अपने नए काम के सिलसिले में पूरे उत्तर प्रदेश में घूमता रहता. और अब सुप्रिया की बारी थी यहाँ काम के सिलसिले में आने की.

सुप्रिया अपने खयालो में खोयी hi हुई थी की कृति उसके पास आयी - तुम्हारा लगेज आ गया क्या?

सुप्रिया - हाँ... मेरा लगेज तोह आ गया...

कृति - सहित... मेरा बैग नहीं आया अब तक... बाकि सब के बैग्स आ गए...

राहुल और विक्रम उन तीनो के पास आये और उन्हें कृति के मिसिंग बैग की जानकारी मिली.

विक्रम - ी थिंक यहाँ खड़े रहने से तोह कुछ नहीं होगा, इतस गेटिंग लेट. सो, लेटस इन्फॉर्म थे एयरलाइन्स स्टाफ एंड जो तो थे होटल.. क्या कहती हो कृति?

कृति - हाँ... मैक्स सेंस...

बहार से विक्रम ने दो टैक्सी की, और एक में वह, सुप्रिया और कृति, और दुसरे में आकाश और राहुल बैठ कर होटल की तरफ चल पड़े. वह लोग बैंकाक से थोड़ा सा बहार एक रिसोर्ट में रुके थे, और टैक्सी से वहां जाने में लगभग एक घंटा लग गया.

विक्रम टैक्सी में आगे बैठा था, और सुप्रिया और कृति पीछे. वह दोनों हमेशा की तरह अपनी गिरली गॉसिप और हसी मजाक कर रहे थे. विक्रम उनकी बातों पर कोई ख़ास ध्यान नहीं दे रहा था, और वह अपने वर्क रिलेटेड इमेल्स वैगेरा फ़ोन पर देख रहा था.

बीच में कृति ने विक्रम को आवाज़ दी - भैया... आपने ये गलत किया की बॉयज को अकेले एक टैक्सी में भेज दिया...

विक्रम - क्यों? इस में क्या गलत किया...

कृति - ये बैंकाक है भैया... पता नहीं दोनों होटल पहुंचेंगे भी या नहीं... पता चल कहीं और hi पहुंच गए तोह...

सुप्रिया और कृति हसने लगे और विक्रम हलके से मुस्कुरए के बोलै - Don't वोर्री... मैंने तभी उनका बैग इस कार में रखवा दिया था... उनके पासपोर्ट तोह हमारे पास है...

कृति - वाओ... ये ाचा किया आपने...

कुछ देर और हसी मज़ाक के बाद रात के अँधेरे में चुप्पी सी हो गयी थी. सुप्रिया और कृति की आँख लगने लगी थी और वह थोड़ी देर के लिए कार में सो गए. जब कार रिसोर्ट पर रुकी तोह विक्रम ने दोनों को जगाया.

रिसोर्ट एक बीच के किनारे था और काफी शानदार लग रहा था. विक्रम ने दोनों को लॉबी में बैठने का इशारा किया और काउंटर पर जाकर रूम की कीस ले ली. इस बीच राहुल और आकाश भी आ गए थे.

विक्रम ने सबके पास आ कर कहा - Ok गाइस, सो वे हैवे 5 रूम्स... 3 ों थे शामे फ्लोर एंड 2 ों ा डिफरेंट फ्लोर.

कृति एकदम से बोल पड़ी - राहुल एंड ी कैन बे ों थे शामे फ्लोर...

विक्रम ने उसे बीच में काटते हुए कहा - नहीं... तुम और राहुल एक फ्लोर पर नहीं होंगे...

कृति - भैया... के ों...

विक्रम - मैंने राहुल को ट्रिप पर आने दिया है... पर इसका मतलब ये नहीं की... एनीवे... सुप्रिया, आकाश दो यू हैवे ा परेफरेंस? सुप्रिया, ी वास् थिंकिंग की तुम और राहुल एक फ्लोर पर...

कृति - एटलीस्ट सुप्रिया को तोह मेरे फ्लोर पर hi रखो...

सुप्रिया भी राहुल के पास अपना कमरा नहीं चाहती थी - हाँ प्लीज विक्रम, कृति वाले फ्लोर पर...

विक्रम - ओह गॉड, तुम लोग कितना किद्दिष बेहवे करते हो... यहाँ बिज़नेस ट्रिप के लिए आये है, न की कोई फॅमिली ट्रिप के लिए... Ok फाइन, आकाश, राहुल.. यू गाइस अरे ों थे 10तह फ्लोर... एंड थे 3 ऑफ़ उस अरे ों 15तह फ्लोर... लेटस जो तो थे रूम एंड गेट रेफ्रेशेड फॉर टुमारो.

सुप्रिया और कृति एक दुसरे को देख कर हसने लगे. जल्द hi सब ऊपर अपने कमरे की तरफ चल पड़े और होटल स्टाफ ने उनका सामान उनके कमरे तक पंहुचा दिया. सुप्रिया के रूम से बहार समुद्र का बहुत hi प्यारा नज़ारा था. उसके रूम में एक बालकनी भी थी.

कुछ देर तक सुप्रिया बहार का नज़ारा देख hi रही थी की उसके कमरे के दरवाज़े पर एक दस्तक हुई. सुप्रिया चौंकते हुए दरवाज़े की तरफ गयी और िएहोले से बहार देखा. बहार विक्रम खड़ा था. सुप्रिया ने जल्दी से दरवाज़ा खोला और विक्रम को अंदर आने दिया.

सुप्रिया - विक्रम... आप...

विक्रम ने दरवाज़ा बंद करते हुए सुप्रिया के होंठों पर टूट पड़ा - इतने दिन हो गए थे तुमसे मिले हुए की मुझसे रुका hi नहीं गया...

दोनों बंद दरवाज़े के पास खड़े एक दुसरे के होंठों को चूमते और चूसते रहे. दोनों की गरम सांसें एक दुसरे के चेहरे पर पद रही थी. कुछ देर किश करने के बाद विक्रम और सुप्रिया अपना माथा एक दुसरे से सताए खड़े हुए थे.

सुप्रिया - ममममम.... काफी लेट नहीं हो गया... मैं तोह काफी थक गयी हु... सोने hi वाली थी बस...

विक्रम - तुम कहो तोह मैं थकन उतार दू तुम्हारी...

सुप्रिया ने विक्रम की आँखों में शरारत देखि और मासूम बनते हुए उससे पुछा - और वह कैसे?

विक्रम - एक हॉट शावर... पर ठन्डे पानी के नीचे...

सुप्रिया - जब पानी ठंडा होगा तोह वह हॉट शावर कैसे?

विक्रम - तुम्हारे होने से hi शावर हॉट हो जायेगा...

सुप्रिया - और बस शावर.... उसके बाद आप चले जायेंगे...

विक्रम ने सुप्रिया के आँखों में देखते हुए कहा - हाँ... पक्का... उसके बाद मैं चला जायूँगा...

सुप्रिया ने शर्म से अपनी आँखें नीचे कर ली - ाचा... ठीक है... मैं पहले बाथरूम उसे कर लू?

विक्रम - मैं अंदर इंतज़ार कर सकता हु क्या?

सुप्रिया एकदम से बोल पड़ी - नहीं... इतनी भी कम्फर्टेबले नहीं हु मैं... दो मिनट दो मुझे... मैं आवाज़ लगा दूंगी...

सुप्रिया बाथरूम के अंदर गयी और विक्रम बेचैनी से बहार खड़ा रहा. हर सेकंड जैसे मिनट के बराबर हो. कुछ मिनट बाद सुप्रिया की अंदर से सॉफ्ट सी आवाज़ आयी - विक्रम... आप अंदर आ सकते हो...

विक्रम ने बाथरूम का दरवाज़ा खोला और अंदर शावर के नीचे सुप्रिया बिना किसी कपड़ो के कड़ी थी. उसका एक हाथ उसके बूब्स और निप्पल्स को ढके हुए था और दूसरा हाथ उसके नीचे के हिस्से को. विक्रम अंदर घुस कर बस सुप्रिया को देखता hi रह गया था. आज तोह कुछ ज्यादा hi बोल्ड हो गयी थी वह.

विक्रम - वाओ... लुकिंग अमेजिंग...

सुप्रिया शरमाते हुए - हम्म्म्म... बस शावर.... और कुछ भी नहीं...

विक्रम ने पास आते हुए कहा - पर पानी बिना शावर कैसे करोगी...

विक्रम ने एक डैम से अपना हाथ शावर के नॉब पर रखा और शावर को चला दिया. ठंडा ठंडा पानी ऊपर से सुप्रिया के ऊपर गिरने लगा, और सुप्रिया के हाथ उसके बूब्स और छूट से हाथ कर ऊपर की और हो गए जैसे पानी को रोकने की कोशिश कर रहे हो.

सुप्रिया कांपती हुई बोली - अह्ह्ह्ह... बहुत ठंडा पानी है... बररररर.....

विक्रम उसके सुडोल नंगे शरीर को भीगता हुआ देख रहा था. सुप्रिया का मखमली शरीर एक डैम परफेक्ट था. उसकी चूचियां थोड़ा सा ऊपर की और कड़ी थी, और ठण्ड के मारे वह एक डैम कड़क हो गयी थी. विक्रम ने अपनी टीशर्ट उतारी और अपनी पंत और अंडरवियर को भी नीचे करते हुए पूरा नंगा हो गया. उसका लुंड अभी से पूरा खड़ा हो चूका था.

सुप्रिया ने विक्रम को नंगा देख अपनी पीठ उसकी और कर ली. विक्रम ने शावर में उतारते हुए पीछे से सुप्रिया के पेट पर हाथ रखा और उसे पकड़ लिया. उसका लुंड सुप्रिया की गांड को छू रहा था. अब तक वह सुप्रिया की गांड को नहीं ले पाया था. उसने पानी के नीचे अपना लुंड हल्का सा सुप्रिया की गांड की दरार के बीच में लगाया.

सुप्रिया एक डैम से काँप सी गयी और वह विक्रम की और पलट गयी. वह अपनी कोमल सी आवाज़ में बोली - विक्रम... क्या कर रहे हो... वहां नहीं प्लीज...

विक्रम ने अपने दोनों हाथ सुप्रिया की गांड पर रखे और उन्हें हलके हलके दबाने लगा. सुप्रिया ने भी अपने हाथ विक्रम के लुंड पर लगा दिए और वह उसके लुंड को मसलने लगी. ऊपर से दोनों का गीला शरीर चिपका हुआ था और वह दोनों बीच बीच में एक दुसरे को चूम रहे थे.

कुछ देर बाद विक्रम ने एक भोली से शकल बनाते हुए सुप्रिया से कहा - वहां का कोई चांस नहीं है क्या?

सुप्रिया ने न में सर हिलाते हुए कहा - नहीं... वहां नहीं... प्लीज...

विक्रम ने गहरी सांस भरी, वह सुरप्रिया के साथ ऐसा कुछ नहीं करना चाहता था जिसमे वह उनकंफर्टबले हो. उसने अपने हाथ सुप्रिया की गांड से हटाए और उसकी कमर पर रखते हुए अपना मुँह उसके निप्पल्स पर लगा दिया. ऊपर से पानी बह रहा था और वह सुप्रिया के मम्मो को अपने मुँह में लिए प्यार से चूस रहा था.

सुप्रिया की मुँह से ाँहें निकल रही थी - ाह्णण... Ahnnnn....mmmmm

विक्रम को उसकी ाँहें सुन कर समझ आ गया थी की वह चुदाई के लिए तैयार है. सुप्रिया कभी अपने मुँह से नहीं बोलती थी की वह सेक्स चाहती थी बस उसकी ाँहें hi ये विक्रम को बयां कर देती थी. वैसे तोह वह ये खेल लम्बा खींचना चाहता था पर रात काफी हो चुकी थी और उन दोनों को hi कल के लिए फ्रेश फील करना था तोह उसे पता था की उसे अपनी प्यास जल्दी hi बुझानी होगी.

विक्रम ने वहीँ रखे एक बोतल में से थोड़ा सा साबुन अपने हाथ में लिया और सुप्रिया के शरीर पर मलना शुरू किया. साबुन से सुप्रिया का पूरा शरीर झाग में हो गया और विक्रम ने कुछ साबुन अपनी ऊगली में ले कर अपनी ऊँगली सुप्रिया की छूट में घुसा दी.

सुप्रिया ने विक्रम को कास के पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से सांसें लेने लगी - अह्ह्ह्ह.... ufff....mmmmm.....

विक्रम ने सुप्रिया की गर्दन पर किश करते हुए कहा - ी लव यू सो मच.... मममम....

विक्रम का हाथ सुप्रिया की छूट के नीचे टिका हुआ था और उसने सुप्रिया का एक पेअर ऊपर उठाते हुए शावर की दीवार पर लगा दिया. सुप्रिया सच में काफी फ्लेक्सिबल थिस जिससे उसके साथ सेक्स करने में और भी मज़ा आता था. सुप्रिया ने अपना एक हाथ विक्रम के गले में डालते हुए उसे पकड़ लिया, उसे डर था की कहीं वह फिसल के नीचे न गिर जाये.

विक्रम उसका डर समझते हुए बोलै - Don't वोर्री... मैं गिरने नहीं दूंगा...

सुप्रिया ने हलके से सर हिलाया और विक्रम ने अपना एक हाथ उसकी उठी हुई टांग के नीचे और दूसरा उसकी कमर पर रखते हुए अपना लुंड उसकी छूट के नीचे सही से पोजीशन किया.

पानी और साबुन से उसकी छूट बहुत hi चिकनी हो चुकी थी और उसका लुंड बड़ी आसानी से उसकी छूट के अंदर घुस गया. विक्रम अपना लुंड इस पोजीशन में लिया उसे प्यार से छोड़ने लगा.

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सुप्रिया - मममम.... मममम... अह्ह्ह्ह....

विक्रम - अहह... अह्ह्ह... ी लव यू....

बीघे शरीर के बीच में पानी की चाप चाप सुनाई दे रही थी. सुप्रिया ने आनंद में अपनी आँखें बंद कर ली और विक्रम को कास के पकड़ा रखा. विक्रम इतने प्यार से उसके साथ सब कुछ करता था की उसे अब कोई डर hi नहीं लगता था विक्रम से. कुछ पल बाद सुप्रिया का पेअर दर्द करने लगा था, और उसने पेअर नीचे करने की कोशिश करि.

विक्रम ने आराम से उसका पेअर नीचे किया और उसे थोड़ा सा नीचे झुकाते हुए खड़े हुए डोग्गिस्टीले में उसके साथ सेक्स करने लगा. इस पोजीशन में विक्रम का लुंड उसके काफी अंदर चला जाता था और सुप्रिया कांपती हुई उसके लुंड को झेल रही थी. विक्रम ने सहारे के लिए सुप्रिया के हाथों को पीछे की और पकड़ा और अपनी रफ़्तार बढ़ाते हुए उसकी छूट के अंदर बहार अपना लुंड करने लगा.

पानी का असर कह लो या थकन का, या फिर सुप्रिया की जवानी का, कुछ मिनट बाद विक्रम सुप्रिया के अंदर झाड़ गया था. उसने अपना लुंड जल्दी से बहार निकाल लिया और पानी में उसका विरए बेहटा हुआ नीचे हो लिया.

सुप्रिया अपने आप को संभालती हुई सीधे कड़ी हुई - उफ्फ्फ.... विक्रम...

विक्रम ने उसके गाल पर किश किया - ठीक हो न तुम...

सुप्रिया - हाँ... पर आप भी न... शावर का बोल कर क्या क्या कर दिया....

विक्रम - आज तोह कुछ भी नहीं किया... अभी तोह तुमने अपने मुँह में भी नहीं लिया...

सुप्रिया - नहीं प्लीज... आज रात नहीं...

विक्रम - आज अगर यहीं इसी कमरे में सो जायु तोह? तुम्हारे साथ बहुत अछि नींद आती है...

सुप्रिया - अगर आप आज यहाँ रुके तोह हम दोनों में से कोई नहीं सोयेगा... वैसे भी... आपने hi कहा था की ये तोह वर्क ट्रिप है...

विक्रम मुँह लटकते हुए बोलै - हम्म्म्म... ok फाइन... तुम चलो मैं आता हूँ 2 मं अचे से नाहा कर...

सुप्रिया ने शावर से बहार निकलते हुए अपने ऊपर एक तौलिया लपेटा और अपने आप को पोछते हुए बाथरूम से बहार आ गयी. सुप्रिया ने अपना बैग बीएड पर रखा और उसमे से कपडे निकाल कर पेहेनना शुरू किया. उसने बस ब्रा और पंतय पहने hi थे की उसके दरवाज़े पर एक और दस्तक हुई. इस बार सुप्रिया और भी बुरी तरह चौंक गयी. उसने जल्दी से एक टीशर्ट पहनी और बहार दरवाज़े की और आयी. पता नहीं इस समय यहाँ कौन था, अभी तोह कमरे में उसके साथ विक्रम थे.

उसने ऑय होल से देखा तोह बहार कोई भी नहीं था, तोह उसने हल्का सा दरवाज़ा खोला देखने के लिए.

दरवाज़े के साइड में कड़ी कृति ने उसे डरते हुए कहा - बोऊ!!

सुप्रिया एक डैम से उछाल पड़ी और उसकी चीख निकल गयी - अह्ह्ह!!!!!

ये चीख शायद डर के मारे थी या फिर कृति को वहां देख कर, या फिर दोनों कारन से. कृति उसे डरा हुआ देख कर हसने लगी - सॉरी रात को डिस्टर्ब करने के लिए... मेरा सामान नहीं आया था तोह सोचा तुमसे थोड़े कपडे बोर्रोव कर लू कल सुबह के लिए...

सुप्रिया इस समय बुरी तरह घबराई हुई थी, किसी भी तरह उसे कृति को अपने रूम से बहार hi रखना था.

कृति हस्ते हुए बोली - क्या हुआ? ऐसे लग रहा है तुम्हे देख कर की जैसे कोई भूत देख लिया हो... ड्रेस hi मांग रही हु यार और कुछ नहीं...

इससे पहले सुप्रिया कुछ कहती उसके बाथरूम का दूर हल्का सा खुला. कृति को अंदर का कुछ दिख नहीं रहा था पर उसे अंदर की आवाज़ से समझ आ गया था की कोई और भी रूम में था.

कृति ने चौंकते हुए कहा - कोई रूम में है क्या?

सुप्रिया नीचे तौलिया लपेटे थोड़ा बहार आ गयी और अपने पीछे दरवाज़ा ढाल दिया - नहीं तोह... कोई नहीं है...

पर उसकी आवाज़ बुरी तरह काँप रही थी, ऐसी आवाज़ पर तोह बिलकुल यकीं न हो.

कृति - कौन है अंदर? Don't तेल्ल में!! यहाँ आते hi किसी को ढून्ढ लिया... वाओ... लेट में सी...

कृति सुप्रिया के हाथ के नीचे से निकलती हुई कमरे में घुस गयी पर वहां कोई नहीं था - वाओ सुप्रिया... हम तोह बस मजाक कर रहे थे आकाश और राहुल के बारे में, और तुमने तोह सच में कर दिखाया... पर है कौन और कहाँ मिला… ी ऍम सो क्यूरियस नाउ सॉरी…

सुप्रिया उसके पीछे पीछे आती हुई बोली - कोई भी नहीं है यार... तुम्हे गलत फेहमी हुई है...

तभी बाथरूम से एक खटक की आवाज़ आयी, जैसे फर्श पर कुछ गिरा हो.

कृति - ओह... बाथरूम में... अब तोह देखना hi पड़ेगा...

सुप्रिया कृति को रोकने की कोशिश कर रही थी पर कृति ने हस्ते हुए बाथरूम के दूर का हैंडल नीचे करते हुए खोल दिया. पर दूर खोलते hi उसके चेहरे की साड़ी हसी गायब हो गयी. जिसे वह अपने सामने देख रही थी उसके यहाँ होना वह कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी.

कृति का मुँह खुला का खुला रह गया - भैया आप!!!
 
@सलमा @हरिंदर @आल

मैं तरय कर रही हु अपडेट जल्दी देने का पर आजकल डे में बिलकुल टाइम नहीं मिल पा रहा अपडेट लिखने का. विल तरय तो गिव नेक्स्ट अपडेट इन 1-2 डेज. ी डोंट वांट तो गिव वैरी स्माल उपदटेस, उसमे किसी को मज़ा नहीं आएगा.
 
अपडेट 64

विक्रम को बाथरूम में देख कर कृति की सांसें hi अटक गयी थी. क्या ये सब सच में हो रहा था या कोई बुरा सपना? उसने बिना कुछ और बोले, बाथरूम का दूर बंद कर दिया और फिर धीमी चाल से आकर बीएड के सिरहाने पर बैठ गयी.

सुप्रिया थोड़ी दूर टॉवल में लिपटी हुई दिवार से लगी कड़ी हुई नीचे की तरफ देख रही थी. वह कृति की तरफ देखने की भी हिम्मत नहीं कर पा रही थी. कुछ सेकंड बाद विक्रम बाथरूम से बहार आया और कृति के ठीक बराबर में आ कर बैठ गया.

कृति के मैं में सवालो का तूफ़ान था - हर एक पल, हर एक बात जो पहले छोटी सी लगती थी, अब जैसे समझ आने लगी थी. कृति ने बरी बरी से विक्रम और सुप्रिया की और देखा, जैसे उनसे कोई एक्सप्लनेशन एक्सपेक्ट कर रही हो. पर शॉक में उसके मुँह से एक शब्द भी नहीं निकल रहा था.

विक्रम और सुप्रिया भी कुछ नहीं बोल रहा थे, रूम में एक डैम सन्नाटा सा था. कुछ पल की चुप्पी के बाद, सुप्रिया ने रीलीज़ किया की वह अभी भी तौलिया लपेटे हुए कड़ी है, और वह पास में टेबल पर राखी लेग्गिंग को उठाते हुए तेज़ी से बाथरूम में घुस गयी. जैसे बाथरूम नहीं कोई छिपने की जगह हो. शायद एहि बेहतर था, खुद को कृति की पैनी नज़रो से बचने के लिए, या फिर अपनी hi नज़रो से.

सुप्रिया के अंदर जाते hi कृति का सब्र का बाँध टूटा - भैया ये सब क्या? और प्लीज, अब ये मत कहना की आपके रूम का शावर नहीं चल रहा था तोह आप यहाँ आ गया… इतनी बेवक़ूफ़ तोह नहीं हूँ मैं…

विक्रम ने कृति का हाथ पकड़ने की कोशिश की उसे शांत करने के लिए - नहीं… ी क्नोव यू अरे वैरी स्मार्ट…

कृति को ऐसा लगा की विक्रम उसे ताना मार रहा हो की अगर वह इतनी hi स्मार्ट थी तोह पहले क्यों नहीं जान पायी इस सब के बारे में. हर एक पल जिसमे उसने पहले महसूस किया था की कुछ तोह अजीब था, पर फिर इग्नोर कर दिया था, अब उसे क्लिक होना शुरू हो गया था - आप और सुप्रिया!! ओह गॉड… मुझे शायद बहुत पहले hi समझ जाना चाहिए था… कब से ये सब?

विक्रम ने आराम से कहा - हम्म्म… लेटस नॉट जो ईंटो थे स्पेसिफिक्स…

कृति - मैं स्पेसिफिक्स नहीं मांग रही हूँ, मुझे बस यकीं hi नहीं हो रहा है… आप दोनों मैरिड हो... आप दोनों की लाइफ में लाइफ पार्टनर्स है...

विक्रम - हम्म्म... ी थिंक इतना सिंपल नहीं है... लाइफ में सब कुछ ब्लैक एंड वाइट नहीं होता...

कृति थोड़ा गुस्सा होते हुए - और आप दोनों के बीच का आगे गैप...? वह तोह ब्लैक एंड वाइट hi है...

विक्रम - कृति के ों, तुम एक मॉडर्न लड़की हो कर ऐसी बात कर रही हो… आगे बस एक नंबर है… आईटी डोएसेंट मटर… और वैसे भी इतना बूढ़ा भी नहीं हूँ मैं...

कृति झेपते हुए - नहीं मेरा वह मतलब नहीं था… बस सब कुछ इतना अजीब सा लग रहा है… कितना गलत सा... ईशा भाभी… और सुप्रिया का हस्बैंड? उनका क्या? वह तोह सिर्फ नंबर्स नहीं है न... It's नॉट अबाउट बीइंग मॉडर्न, इतस अबाउट लॉयल्टी...

विक्रम ने एक गहरी सांस ली - कृति, मुझे नहीं पता की तुम ये सब समझ पयोगी या नहीं... ी थिंक यू क्नोव की मेरे और ईशा के बीच सब कैसा है... ी थिंक तुम स्मार्ट एनफ हो सब समझने के लिए…

कृति सोच में पद गयी, उसे पता था की विक्रम और ईशा के बीच कुछ भी ठीक नहीं था, बल्कि उसे तोह ईशा ज़रा भी अछि नहीं लगती थी. और फिर वह सुप्रिया के हस्बैंड से भी मिली थी और वह भी उसे कहीं से भी सुप्रिया के लायक नहीं लगा था. सुप्रिया उसकी बेस्ट फ्रेंड जैसी hi बन गयी थी पिछले एक साल में. पर फिर भी ये सब ठीक था क्या? दोनों की तरफ से extra-marital अफेयर... काफी वीयर्ड साउंड कर रहा था उसे...

कृति - ऐसा नहीं की ी don't अंडरस्टैंड भैया... पर फिर भी मैंने कभी इस बारे में सोचा hi नहीं... it's जस्ट हार्ड फॉर में तो डाइजेस्ट...

विक्रम - मैं समझ सकता हु तुम्हारे पर्सपेक्टिव से...

कृति - एंड थें, ी हैवे सो मान्य क़ुएस्तिओन्स. आपके और सुप्रिया के रिलेशनशिप का नाम क्या है? इसका फ्यूचर क्या है? इस आईटी जस्ट ा फ़्लिंग, समथिंग टेम्पररी? या फिर...

विक्रम - नहीं कृति... it's मच मोरे थान तहत... मैं सुप्रिया को एक लाइफ पार्टनर की तरह देखता हूँ... हम लोग चीज़े फिगर आउट कर रहे है... पर इससे ज्यादा मैं अभी कुछ नहीं बता सकता...

कृति ने शायद इसी आंसर की उम्मीद की थी विक्रम से, और साड़ी कड़ियाँ जैसे अब जुड़ सी रही थी - क्या इसीलिए सुप्रिया उस दिन पूजा में... तेजी को...

विक्रम - हाँ... माँ को सब पता है... एंड शी इस सुप्पोर्टीवे...

कृति - ओह! और किस किस को पता है... क्या सिर्फ मुझे नहीं पता था?

विक्रम हस्ते हुए - नहीं, तुम माँ के बाद दूसरी पर्सन हो जिसे ये पता चला है...

कृति ये सुन कर थोड़ी सी खुश सी हो गयी, काम से काम उसे ये बात बाकी लोगो से तोह पहले hi पता चल गयी थी. पर फिर भी उसका दिमाग अभी भी चक्र सा रहा था - सुप्रिया बहार आती है तोह मैं आप दोनों से कई सारे और सवाल करुँगी... िफ़ that's ok?

विक्रम ने बाथरूम के दूर की तरफ देखा, सुप्रिया अब तक चेंज कर चुकी होगी पर उसे पता था की वह बहार नहीं आने वाली थी - कृति... यू जो तो योर रूम... तुम तोह सुप्रिया को जानती hi हो... शी इस किते सेंसिटिव... वह शायद तुम्हारे रहते आज बहार नहीं आने वाली है...

कृति जानती थी की ये बात सच है. वह ये सुन कर कड़ी हो गयी बहार जाने के लिए - Ok भैया... लेट में स्लीप ओवर थिस... कैन वे टॉक अबाउट थिस टुमारो?

विक्रम - सूरे... पर हो सके तोह प्लीज किसी और से इस बात का कोई डिस्कशन नहीं करना... राहुल से तोह बिलकुल भी नहीं... ी होप यू अंडरस्टैंड की कितना सेंसिटिव मटर है...

कृति ने सर हिलाया - हाँ... ी अंडरस्टैंड... आप परेशां मत हो मेरी तरफ से... मैं किसी से इस मटर पर डिस्कशन नहीं करुँगी...

विक्रम और कृति ने एक दुसरे को गूडनिघत बोलै और कृति धीरे धीरे रूम से बहार चली गयी. जब 30 मिनट पहले वह अपने रूम से निकली थी तोह उसे थोड़ी न पता था की कुछ ऐसा हो जायेगा. वह गहरी सोच में डूबी हुई वापस अपने रूम चली गयी.

उसके जाने के बाद विक्रम ने बाथरूम के दरवाज़े पर हल्का सा नॉक किया - सुप्रिया... कृति चली गयी है... तुम बहार आ सकती हो...

कुछ सेकंड बाद सुप्रिया ने दरवाज़ा खोला, उसका चेहरा देख कर विक्रम को समझ आ रहा था की वह अंदर रो रही थी और काफी परेशान थी.

विक्रम ने उसके चेहरे को अपने हाथों से हलके से पकड़ा - हे... don't वोर्री... सब कण्ट्रोल में है...

सुप्रिया - क्या कहा कृति ने... कुछ कुछ आवाज़ आ रही थी अंदर एंड वह काफी अपसेट सी लग रही थी... उसने अगर किसी को बता दिया तोह...

विक्रम - वह ऐसा नहीं करेगी... ी ट्रस्ट हेर...

सुप्रिया - विक्रम, पता नहीं हमारे इस रिश्ते का कोई फ्यूचर है भी या नहीं... शायद हमें ये सब ख़तम कर देना चाहिए... अगर कृति को hi ये सब एक्सेप्ट करने में इतनी प्रॉब्लम हो रही है तोह बाकी लोग तोह पता नहीं...

विक्रम - तुम इस सब के बारे में मत सोचो... लखनऊ वापिस पहुंच कर ी विल फिगर समथिंग आउट... ी प्रॉमिस...

सुप्रिया ने विक्रम को हलके से हुग कर लिया और उसके आंसू विक्रम की शर्ट को गीला करने लगे. विक्रम उसे उठा कर बीएड पर ले गया, और बीएड में लिटा दिया.

विक्रम ने उसे सोफ़्त्ल्य किश करते हुए कहा - It's किते लेट... अभी तुम रेस्ट करो... we'll टॉक टुमारो... गुड नाईट...

सुप्रिया ने गुड नाईट कहने के लिए हलके से सर हिलाया और विक्रम उसे बीएड में धक् कर रूम से बहार निकल गया. सुप्रिया सा सर बुरी तरह दर्द कर रहा था और थोड़ी देर बाद वह सो चुकी थी. सुबह वह अपने दरवाज़े पर दस्तक से जगी. शायद थोड़ी देर से ये दस्तक हो रही थी. उसने टाइम चेक किया तोह सुबह के 8 बज चुके थे.

सुप्रिया ने नींद में बिना देखे, बिना सोचे दरवाज़ा खोला तोह बहार कृति को खड़ा पाया. उसे देख कर उसकी नींद एक डैम से उड़द गयी. उसे समझ नहीं आ रहा था की वह कृति को क्या बोले.

कृति ने सॉफ्ट सी आवाज़ में कहा - ओह्ह्ह... जिस काम के लिए मैं रात को आयी थी... वह तोह मैं भूल hi गयी थी कल रात...

उसकी सॉफ्ट टोन सुन कर सुप्रिया की टेंशन थोड़ी सी काम हुई - हाँ... सॉरी... वह मैं भी भूल गयी थी...

कृति - ऑब्वियस्ली... उस टाइम ड्रेस देती तोह अजीब सा लगता... उम्म्म... मैं अंदर आ सकती हु क्या... कोई अंदर तोह नहीं.. ी मैं भैया तोह नहीं... ी don't वांट तो...

सुप्रिया ने दरवाज़ा पूरा खोल दिया - नहीं... कोई नहीं है अंदर रूम में... आयो न...

सुप्रिया साइड हुई और कृति उसके रूम के अंदर आ गयी. कृति रूम को गौर से देख रही थी, ये वही रूम था क्या जहाँ उसे कल रात इतना बड़ा सीक्रेट पता चला था. सुबह के उजाले में ये कल वाली काली रात से अलग लग रहा था. उसके पीछे सुप्रिया ने दरवाज़ा बंद कर दिया था.

कृति ने पलट कर उसकी और देखा - सुप्रिया... ी जस्ट वांटेड तो से... सॉरी...

सुप्रिया उसके मुँह से सॉरी सुन कर चौंक सी गयी - सॉरी क्यों?

कृति - ी मैं... जो भी था... है... मैं कौन हूँ उसे जज करने वाली... it's नोने ऑफ़ माय बिज़नेस...

सुप्रिया - नहीं... प्लीज... ऐसे मत कहो...

कृति - मुझे बोलने दो... तुम और भैया दोनों एडल्ट्स हो... और शायद तुम्हे बेस्ट पता है की तुम्हारे लिए क्या बेस्ट है... एंड तो बे ऑनेस्ट, मैंने जब भैया को यहाँ देखा तोह पता नहीं कितने गंदे गंदे ख्याल आ रहे थे मेरे मैं में... बूत उनसे बात करके लास्ट नाईट... ी फेल्ट की हे ट्रूली लव्स यू एंड केयर्स अबाउट यू...

सुप्रिया को नहीं पता था की कृति और विक्रम के बीच क्या बात हुई थी और उसके लिए ये सब काफी सुर्प्रिसिंग सा था.

कृति बोलती hi जा रही थी - ी मैं, मैंने भैया को कभी ऐसे इमोशनली बात करते कभी नहीं देखा, एंड ी फील की वह अपनी मैरिज में ट्रैप्ड फील करते है... शायद तुम भी... एंड यू गाइस डेसेर्वे तो बे हैप्पी...

सुप्रिया - कृति...

कृति - मैं पूरी रात इस सब के बारे में सोचती रही... तुम दोनों साथ में कितने अचे लगते हो, और कितने खुश भी... यू अरे थे स्वीटेस्ट पर्सन एवर, एंड भैया इस लिखे अमेजिंग...

कृति बस बोले hi जा रही थी, और सुप्रिया ने आगे बाद कर उसे ज़ोर का हुग दे दिया. उसे ऐसा लग रहा था की कृति ने जैसी उसकी साड़ी टेंशन दूर कर दी हो. उसे बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी की ऐसा भी कुछ होगा. कृति ने भी सुप्रिया को हुग कर लिया. दोनों इमोशनल हो कर थोड़ा सा रो रहे थे. जब वह दोनों एक दुसरे से अलग हुए तोह उन्होंने देखा की दोनों के hi चेहरे पर आंसू थे, पर साथ hi एक मुस्कराहट भी.

कृति ने शरारत भरी आवाज़ में कहा - सो.... मैं तुम्हे अभी भी सुप्रिया बुलायु या फिर भाभी?

सुप्रिया के चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल आ गयी और उसने कृति के कंधे पर मजाक में हल्का सा हाथ मारा - सुप्रिया hi ठीक है...

कृति - यू क्नोव... हम दोनों दोस्त है... तुम मुझसे शेयर कर सकती थी ये सब... मैं तुम्हारा सपोर्ट hi करती...

सुप्रिया - सॉरी... ी क्नोव, तुमने तोह हमेशा मेरा सपोर्ट hi किया है... सब कुछ पता नहीं कब और कैसे हुआ, मुझे खुद समझ नहीं आया.... मैं शेयर कैसे करती ये बात...

कृति - ी अंडरस्टैंड...

सुप्रिया - बूत थैंक यू सो मच... तुमने मेरे सर से गिल्ट का एक काफी बड़ा बोझ हल्का कर दिया...

कृति - चलो अब वह ड्रेस दे दो, हम दोनों hi लेट हो रहे है... सब लोग नीचे हमारे वेट कर रहे होंगे... बूत प्लीज गिव में आल थे डिटेल्स टुनाइट... अगर तुम फ्री हो तोह (कृति ने सुप्रिया को आँख मारते हुए कहा)..

सुप्रिया - ओफ़्कौर्से मैं फ्री हु... तुम भी न कुछ भी सोचती हो... आयो वह ड्रेस पिक कर लो...

सुप्रिया ने अपने बैग खोलते हुए कृति को अपने कपडे दिखाए और कृति ने उसकी एक ड्रेस चूसे करके ले ली. कृति फिर अपने रूम चली गयी चेंज होने के लिए और सुप्रिया भी तैयार होना शुरू हो गयी. रात की टेंशन सुबह तक ख़तम हो गयी थी और सुप्रिया अब तोह और भी ाचा सा महसूस कर थी. उसने सोचा की शायद उसकी साड़ी प्रोब्लेम्स अब दूर होने वाली है.

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होटल के ब्रेकफास्ट एरिया में विक्रम एक टेबल पर आकाश और राहुल के साथ बैठा हुआ फ्रूट्स खा रहा था. बहार से दिख नहीं रहा था पर उसके मैं में भी हलकी सी बेचैनी थी. पता नहीं सुप्रिया और कृति आज कैसे रियेक्ट करने वाले थे, और उनका बदला हुआ मूड बाकि सबको क्या इशारा करेगा. कृति को तोह शायद वह संभल ले, पर अगर आकाश और राहुल को भी सब पता चल गया तोह शायद गड़बड़ हो सकती थी.

तभी उसे सामने से कृति और सुप्रिया साथ में आती हुई दिखी. दोनों एक दुसरे से है के बात कर रहे थे जैसे कल कुछ hi नहीं हो. उन्हें देख कर कोई कह hi नहीं सकता था की कल से कुछ बदला हुआ था.

दोनों चलते हुए विक्रम और बाकी सब की टेबल पर पहुंचे और कृति ने चहक कर कहा - गुड मॉर्निंग बॉयज… व्हाट इस गुड फॉर ब्रेकफास्ट?

राहुल और आकाश गुड मॉर्निंग बोल कर कृति से बात करने में लग गए. विक्रम ने चुप चाप सुप्रिया से नज़रे मिलायी, जैसे उससे पूछ रहा हो की ये चामतर कैसे हुआ. सुप्रिया की आँखों में उसे बिलकुल भी टेंशन नहीं दिखी, बल्कि वह काफी खुश लग रही थी. विक्रम भी इससे रहत सी महसूस कर रहा था.

ब्रेकफास्ट के बाद सभी इखट्टा हुए और विक्रम ने उन्हें बताया की वह लोग जेम्स और उसकी टीम से मिलने जा रहे थे. क्यूंकि राहुल उनकी कंपनी का एम्प्लोयी नहीं था, वह उनके साथ नहीं जा सकता था.

वह लोग थोड़ी देर बाद एक गाडी लेकर एक दुसरे होटल में पहुंचे जहाँ वह अँगरेज़ लोग ठहरे हुए थे. ये होटल थोड़ा शहर के पास था और इसमें वह रिसोर्ट वाली फील नहीं थी, बस एक बिज़नेस होटल वाली फील थी.

वहां पहुंच कर विक्रम और उसकी टीम एक कांफ्रेंस रूम पहुंचे जहाँ जेम्स, माइक और डनण्य पहले से मजूद थे. पिछले साले जब सुप्रिया उनसे मिली थे तब उस इ उन पर इतना ध्यान नहीं दिया था पर इस बार वह उन्हें अचे से देख रही थी.

डनण्य लगभग 5’10 इंच, विक्रम से थोड़ा लम्बा, जवान स्लिम गोरा लड़का था. उसने सुनहरे से बाल थे और नीली आँखें. ऐसी लुक तोह सुप्रिया ने बस मूवीज में hi देखि थी. उसके चेहरे पर एक बड़ी मधुर सी मुस्कान थी, और वह सुप्रिया को देख कर और भी स्माइल कर रहा था.

दूसरी और माइक, डनण्य से भी लम्बा, पर थोड़ा और चौड़ा, जैसे कोई बॉडी बिल्डर हो. उसकी त्वचा एक दाम काली, और सर पर जरा भी बाल नहीं. उसके जैसे लोग भी सुप्रिया ने बस मूवीज में hi देखे थे और खासकर वैसे वाली मूवीज में.

जेम्स, जो उन दोनों का बॉस था, उम्र में सबसे बड़ा लग रहा था.

वह विक्रम को देखते hi खड़ा हो कर उसकी और हाथ बढ़ाते हुए गया - विक्रम…. ग्रेट तो सी यू हेरे… ी ऍम ग्लैड यू मेड आईटी आउट हेरे तू…

विक्रम - शामे हेरे जेम्स… वेल यू डीडेड तो नॉट के तो इंडिया सो ी हद तो के हेरे…

जेम्स - येह, वेल थे टीम वेंट तो इंडिया लास्ट ईयर एंड थे वांटेड तो दो समथिंग डिफरेंट थिस टाइम. बूत एनीवे, लेटस हैवे सम इंट्रोडक्शनस.

विक्रम ने अपनी टीम को इंट्रोडस किया, डनण्य और माइक तोह सुप्रिया को पहले से जानते hi थे, और कृति और आकाश से भी उनकी ईमेल पर बातचीत हो चुकी थी. इंट्रोडक्शनस के बाद सब लोग बैठ कर डिस्कशन कर थे, पर ज्यादातर विक्रम और जेम्स hi बात कर रहे थे. मीटिंग के एन्ड तक भी वह किसी ख़ास नतीजे पर नहीं पहुंचे.

विक्रम - जेम्स... यू मिगहत गेट च्यापेर प्रिंसेस हेरे बूत थे क्वालिटी इस नॉट व्हाट वे कैन ऑफर यू...

जेम्स - ी don't क्नोव अबाउट तहत विक्रम...

विक्रम - Let's दो ओने थिंग, थे तवो ऑफ़ उस कैन मीट ा फ्यू ग्रुप्स टुमारो एंड अस्सेस्स...

जेम्स - सूरे... साउंड्स गुड तो में...

विक्रम - जस्ट थे तवो ऑफ़ उस, वे विल लीव थे रेस्ट ऑफ़ थे क्रू ात थे होटल... एंड लिसेन... no ऑफेंस बूत थे होटल वे अरे स्टेइंग ात इस मच बेटर थान थिस, लेट में गेट यू गाइस मूव्ड ईंटो तहत, ात माय एक्सपेंस.... थी गाइस कैन आल हैंग आउट टुगेदर टुमारो...

जेम्स - Ok विथ में... अरे यू गाइस ok? (जेम्स ने माइक और डनण्य की तरफ देखते हुए कहा)

डनण्य और माइक दोनों ने साथ में कहा - सूरे, वर्क्स फॉर में...

विक्रम - कृति, सुप्रिया... कैन यू गाइस हेल्प थम मूव तो आवर होटल... ी विल कॉल थे होटल फ्रंट डेस्क तो लेट थम क्नोव... ी नीड तो मीट उप विथ ा फ्यू पीपल विथ जेम्स...

सुप्रिया और कृति ने हाँ में सर हिलाया और मीटिंग ख़तम होते hi विक्रम जेम्स के साथ चला गया. थोड़ी देर बाद माइक और डनण्य भी अपने रूम से अपना सामान लेकर आ गए और वह सब लोग वापिस होटल की तरफ चल पड़े.

कार में वापिस जाते हुए एक कार में सुप्रिया और डनण्य थे, और दूसरी में माइक, कृति और आकाश. सुप्रिया खुश थी की उसे काम से काम माइक का साथ तोह नहीं बैठना पड़ेगा.

कार में बैठते hi डनण्य और सुप्रिया की बातचीत शुरू हो गयी. डनण्य भी फ्लिर्टिंग में काम नहीं था - ओह गॉड सुप्रिया, यू अरे मोरे ब्यूटीफुल इन रियल थान यू लुक इन वीडियो कॉल्स..

सुप्रिया ब्लश करते हुए बोली - थैंक यू सो मच डनण्य...

डनण्य और ज़ोर डालते हुए बोलै - No, ी रियली मैं आईटी... यू लिटेराल्ल्य लुक लिखे ा बॉलीवुड एक्ट्रेस...

सुप्रिया हस्ते हुए बोली - ोकककक.... हैवे यू सीन अन्य बॉलीवुड मूवीज? और जस्ट सयिंग आईटी लिखे तहत...

डनण्य - ी हैवे सीन ा लोट ऑफ़ बॉलीवुड मूवीज... ी लव थम... यू don't बिलीव में... यू लुक लिखे सोनाली बेंद्रे...

सुप्रिया एक डैम चौकते हुए, की इसे इतनी पुराणी एक्ट्रेस का नाम भी पता था - ओह के ों... नाउ यू अरे जस्ट पुल्लिंग माय लेग...

डनण्य मुस्कुरा के बोलै - ः, एनीवे लिसेन... नाउ तहत वे अरे अलोन, ी हैवे तो तेल्ल यू समथिंग... ी don't थिंक माइक इस गोइंग तो अल्लोव तहत डील विथ योर कंपनी... हे इस जस्ट तू माध ात यू फॉर सम रीज़न... नॉट सूरे व्हाट यू दीद तो पइसस हिम ऑफ...

सुप्रिया - बूत... ी didn't दो एनीथिंग... व्हाई इस हे एंग्री विथ में?

डनण्य ने अपने कंधे उचकते हुए कहा - ी ऍम नॉट सूरे... ी मैं िफ़ आईटी वास् उप तो में, यू गाइस वोउल्ड बे माय पिक... बूत... it's माइक, एंड हे है कन्विंस्ड जेम्स सोमेहो...

सुप्रिया - हम्म्म ok... व्हाट दो यू सुग्गेस्ट वे दो?

डनण्य - ी don't क्नोव... let's नॉट टॉक अबाउट वर्क... ी वांट तो गेट तो क्नोव मोरे अबाउट यू...

सुप्रिया उसकी बात सुन कर फिर से हसने लगी. डनण्य सच में उसमे कुछ ज्यादा hi दिलचस्पी दिखा रहा था. और उसकी बातें भी इतनी फ्लिर्टी थी की सुप्रिया अपनी हसी नहीं रोक पा रही थी. डनण्य और सुप्रिया बातें करते हुए रिसोर्ट पहुंचे. दूसरी गाडी भी लगभग उनके पीछे पीछे hi रिसोर्ट पहुंच गयी थी. उस गाडी में से उतारते hi कृति की शकल पर थोड़ा गुस्सा था. वह बड़बड़ाती हुई सुप्रिया के पास पहुंची.

सुप्रिया - क्या हुआ? इतनी अपसेट क्यों हो...

कृति - गरररर... बाद में बताती हूँ... अभी इनको चेक इन करा दे...

सुप्रिया - हम्म्म... हाँ चलो, इन्हे चेक इन कराये...

डनण्य और माइक इस रिसोर्ट होटल को देख कर खुश से थे, ये उनके पहले वाले होटल से कई गुना बेहतर था.

माइक - वाओ... थिस प्लेस इस सो मच बेटर.. थे पूल इस लुकिंग प्रीटी कूल तू... ी ऍम गोइंग स्ट्रैट तो थे पूल आफ्टर चेकिंग इन...

डनण्य - शामे हेरे... हे अरे यू गर्ल्स गोइंग तो ज्वाइन उस?

सुप्रिया और कृति ने एक दुसरे के और देखा, जैसे पूछ रही हु आपस में की क्या हमें भी इन्हे ज्वाइन करना पड़ेगा.

सुप्रिया ने डनण्य को बोल दिया - सूरे, वे विल ज्वाइन यू...

Check-in के बाद उनके ऊपर रूम में जाते hi कृति ने सुप्रिया की और देखा - बोल तोह दिया की वे विल ज्वाइन यू, बूत वह बोर्ड देखो - पूल एरिया में जाने के लिए तोह स्विमिंग ड्रेस चाहिए... तुम्हारे पास है स्विमिंग ड्रेस?

सुप्रिया - ओह... नहीं यार...

कृति - मैं एक लेकर आयी थी, पर अब तोह बैग hi नहीं है... अब यहाँ आ रही थी तोह एक तोह रखनी चाहिए थी न...

सुप्रिया - हम्म्म... वह तोह मैंने सोचा hi नहीं... अब क्या करे...

कृति - वह देखो... होटल की शॉप है... वहां से ड्रेस परचेस कर लेते है...

सुप्रिया - पर वहां तोह काफी महंगी होंगी न...

कृति ने सुप्रिया को चिढ़ाते हुए कहा - सुप्रिया जी... आप इसकी फ़िक्र न करिये... सब भैया के अकाउंट से hi जायेगा... या अब आपको उनकी पॉकेट की चिंता है...

सुप्रिया झेपते हुए बोली - ऐसा कुछ नहीं... ठीक है... ले लेते है... मुझे क्या...

कृति - तोह फिर चलो...

कृति और सुप्रिया ने शॉप में घुस कर स्विमिंग ड्रेस देखनी शुरू कर दी. साड़ी ड्रेसेस इतनी छोटी सी थी, जैसे अँगरेज़ लड़कियों के लिए hi बानी हो. सुप्रिया सोचने लगी की वह ये सब तोह नहीं पेहेन सकती थी. पर कृति को इतनी फ़िक्र नहीं थी, उसे शायद आदत थी ऐसी स्विमिंग ड्रेस पेहेन्ने की.

सुप्रिया ने शॉप में कृति से पुछा - क्या हुआ, तुम इतना अपसेट क्यों थी कार से उतारते hi...

कृति - वह माइक... मुझे ाचा नहीं लगा... काफी गन्दी तरह से देख रहा था मेरी तरफ... यू क्नोव व्हाट ी मैं न... तुम्हारे वाला कैसे था...

सुप्रिया - वह तोह ठीक था... काफी फनी है वैसे वह...

कृति ने सुप्रिया को छिड़ते हुए कहा - ओह हो... क्या बात है... फ्लिर्टिंग चल रही है लगता है...

सुप्रिया एक डैम से बुरी तरह झेप गयी, और उसे समझ नहीं आया वह क्या बोले - नहीं... वह तोह बल्कि तुम्हारे बारे में पूछ रहा था...

कृति ने थोड़ा सा इंटरेस्ट दिखते हुए कहा - ाचा... क्या पूछ रहा था...

सुप्रिया ने और झूठ बोलते हुए कहा - वह तोह उससे पूछना... पर हाँ बोल रहा था की तुम काफी क्यूट हो...

कृति - हाहाहा... ok... राहुल से मत कहना... परेशान हो जायेगा बेचारा...

सुप्रिया - मैं किसी से कुछ नहीं कह रही...

कृति ने एक तवो पीेछे स्विमिंग ड्रेस उठायी - ये कैसी है...

सुप्रिया - वाओ.... काफी सेक्सी और बोल्ड है...

कृति ने एक छोटी सी तवो पीेछे बिकिनी उठाते हुए कहा - तुम भी कुछ ऐसी hi ले लो...

सुप्रिया - नहीं... मैं ऐसी ड्रेस नहीं पेहेन सकती....

कृति - भैया के सामने तोह पेहेन hi सकती हो... उनके लिए hi ले लो... और साथ में अभी के लिए ये कवर उप ले लो...

कृति जैसे अब और भी खुल के मजाक करने लगी थी सुप्रिया से, और सुप्रिया बुरी तरह ब्लश कर रही थी. कृति ने दोनों ड्रेसेस ले ली और पेमेंट करके वह दोनों पूल के पास एक चेंज रूम में चेंज करने लगी. दोनों hi काफी ज्यादा हॉट लग रही थी. कृति एक स्टाइलिश से तवो पीेछे बिकिनी में और सुप्रिया की बिकिनी ढकी हुई थी पर वह फिर भी काफी हॉट लग रही थी.

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दोनों पूल में अपने पेअर दाल कर बैठ गए. सुप्रिया इधर उधर देख रही थी की कोई जान पहचान का तोह वहां नहीं था, पर न hi आकाश वहां दिख रहा था और न राहुल. थोड़ी hi देर में माइक और डनण्य सिर्फ शॉर्ट्स पहने हुए वहां आ गए. दोनों की hi छाती पर ज़रा से भी बाल नहीं थे, और दोनों को देख कर ऐसा लगता था जैसे वह काफी ज्यादा एक्सरसाइज करते हो.

डनण्य उन दोनों की तरफ देखते हुए बोलै - यू गर्ल्स लुक अमेजिंग... रेडी फॉर सम पूल फन...

इससे पहले सुप्रिया कुछ कहती, कृति बोल पड़ी - येह सूरे...

माइक पास में एक पूल चेयर पर बैठ गया और डनण्य सीधे पूल में अंदर कूद गया. वह पूल में थोड़ा तैरता हुआ सुप्रिया और कृति के पैरो के पास आ गया. सुप्रिया घबरा रही थी की पता नहीं डनण्य क्या करने वाला था, पर अचानक से कृति ने डनण्य के मुँह पर थोड़ा सा पानी उछाल दिया. डनण्य ने हस्ते हुए अपना ध्यान कृति की और किया और उसके पैरो को खींचते हुए उसे पानी में उतार दिया.

कृति एक डैम से नीचे हुई और पानी में डुबकी लगते हुए डनण्य से थोड़ा सा दूर हुई. डनण्य भी उसका पीछे पीछे स्विम करने लगा. दोनों पानी में एक दुसरे से खेल रहे थे और सुप्रिया का पूरा ध्यान उनकी और hi था. डनण्य आखिर कृति तक पहुंच hi गया और उसने कृति को पीछे से पकड़ते हुए उसे अपनी और खींचा. कृति पानी में लेटते हुए पूरी तरह से डनण्य के हाथों के ऊपर आ गयी थी. डनण्य का एक हाथ कृति की गांड के नीचे था और दूसरा कमर के नीचे.

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दोनों के बीच काफी मस्ती सी चल रही थी, दोनों पानी के अंदर चले गए, जहाँ से सुप्रिया को वह नहीं दिख रहे थे. जब वह पानी से बहार आये तोह कृति डनण्य के कंधो पर बैठी हुई थी, और डनण्य के हाथ उसकी जाँघों को कास के पकडे हुए थे, और सर के पीछे का हिस्सा कृति की पंतय से बिलकुल सत्ता हुआ.

सुप्रिया को ये सब देख कर गुस्सा आने लगा था. जो कृति कल विक्रम और उसे उपदेश दे रही थी, आज वह खुद बॉयफ्रेंड होते हुए एक दुसरे मर्द के साथ पूल में एक उसके साथ खेल रही थी. उसने तोह बस मजाक में कहा था की डनण्य कृति की तारीफ कर रहा था, कृति ने तोह शायद सीरियसली ले लिया.

सुप्रिया के ठीक पीछे बैठा काला माइक भी उसकी बेचैनी समझ गया था और वह उसके ठीक साथ आ कर बैठ गया - लुक्स लिखे डनण्य बॉय है ताकें ान इंटरेस्ट इन योर फ्रेंड...

सुप्रिया ने उसकी और देखा और रूखी आवाज़ में कहा - थे अरे जस्ट प्लेइंग इन थे पूल...

माइक - सिम्स ा लोट मोरे थान प्ले तो में.. हेहेहे... सिम्स लिखे डनण्य जस्ट फाउंड हिज नई प्ले थिंग...

सुप्रिया - शी आलरेडी है ा बॉयफ्रेंड...

माइक - वेयर इस हे... ी don't सी हिम हेरे... हहै... ी कैन रीड योर फेस... यू अरे जेलस ऑफ़ योर फ्रेंड... वेल डनण्य बॉय won't मंद बीइंग सैंडविचेड बिटवीन थे तवो ऑफ़ यू... हेलल, ी won't मंद आईटी ऐथेर...

सुप्रिया ने सोचा की वह क्यों जेलस फील करेगी कृति से, उसके पास तोह आलरेडी विक्रम था. कृति वैसे भी शादी शुदा नहीं थी, और वह जो चाहे कर सकती थी.

माइक ने सुप्रिया की ठीक पीछे ज़मीन पर अपना बड़ा सा हाथ रखा, उसका हाथ के सबसे लम्बी ऊँगली सुप्रिया की गांड से हल्का सा टकराई. सुप्रिया ने उसे घूर कर देखा, माइक के चेहरे पर एक गन्दी सी मुस्कान थी. सुप्रिया वहां से गुस्से में कड़ी होती हुई पूल के दुसरे कोने पर चली गयी.

सुप्रिया पूल के दुसरे और पहुंची तोह वहां उन्हें कृति और डनण्य के बीच की मस्ती और पास से दिखने लगी. कृति और डनण्य इतनी पास तैर रहे थे की वह आपस में चिपके हुए hi थे.

सुप्रिया ने तय किया की उसे भी पानी में उतरना चाहिए, तोह उसने अपना ऊपर के कवर उतार दिया. एक ब्लू बिकिनी वह हद्द से ज्यादा कामुक लग रही थी. और उसे लगा की एक पल के लिए पानी में होते हुए भी डनण्य का ध्यान उसकी और गया.

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कृति सुप्रिया की और स्विम करके आयी और बोली - चलो थैंक गॉड तुम में भी हिम्मत आ गयी बिकिनी में आने की... आ जायो पानी में... पानी का टेम्प्रेचर सही है..

सुप्रिया - नहीं अभी मुझे गीला नहीं होना, और वैसे भी डनण्य और तुम साथ में...

कृति - ारी... वह तोह ऐसे hi पानी का फन है... आ जायो न... तुम भी कर लो फन...

कृति ने सुप्रिया का हाथ पकड़ कर उसे पानी में खींच लिया और सुप्रिया खुश होते हुए कृति के साथ तैरने लगी. दोनों डनण्य की और देख कर उसे चिढ़ाने लगे, और डनण्य भी उनकी और पानी फेकने लगा.

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सुप्रिया ने कृति को फुसफुसाया - इसे बड़ी मस्ती आ रही है तुम्हारे साथ... क्या बात है?

कृति ने सुप्रिया को आँख मारते हुए कहा - हाँ तोह इसमें क्या प्रॉब्लम है... मस्ती hi तोह कर रहा है... और कुछ थोड़ी न...

सुप्रिया ने सोचा की कृति वैसे नहीं थी जैसी दिखती थी.

डनण्य उनके और करीब आ गया और थोड़ी देर ऐसे hi वह तीनो पानी में खेलते रहे. सुप्रिया देख रही थी की जैसे hi डनण्य सुप्रिया के पास आने की कोशिश करता कृति उसे अपनी और खींच लेती. थोड़ी देर में वहां बारिश शुरू हो गयी और सब लोग पूल से निकलते हुए छाँव के नीचे भागे. सुप्रिया और कृति भी पूल से निकलते हुए चेंज रूम की तरफ चले गए और अपने कपडे बदलने लगे.

दोनों एक hi चेंजिंग रूम में अपने कपडे बदल रहे थे. कृति ने बिना किसी घबराहट के अपने ऊपर का टॉप उतार दिया और उसके छोटे पर गोर मम्मी सुप्रिया के ठीक सामने थे. उसके चूचे इस तरह से सख्त हो कर खड़े थे की कोई भी आदमी देख कर अपने मुँह में ले ले. सुप्रिया ने अपनी नज़रें दूसरी और कर ली. उसे दूसरी तरफ से कृति की गीली पंतय की उतरने की आवाज़ भी आयी.

सुप्रिया ने अपने आँख के कोने से कृति के नंगे बदन को देखा, उसकी छूट पर ज़रा भी बाल नहीं थे.

सुप्रिया सोच में पद गयी, लगता है आज उसे इस रूम में कृति के सामने hi चेंज करना पड़ेगा. कोई और चारा न देख, सुप्रिया ने धीरे से अपने कपडे उतारने शुरू करे, और वह भी कुछ पल के लिए पूरी तरह नंगी हो गयी. कृति शायद उसकी और hi देख रही थी. सुप्रिया का शरीर कृति के शरीर से थोड़ा सा ज्यादा भरा हुआ था.

कृति ने सुप्रिया को देखते हुए कहा - सुप्रिया... एक बात पूछू... प्लीज don't मंद... ok...

सुप्रिया अपने कपडे पेहेन hi रही थी, पता नहीं क्या पूछने वाली थी कृति - हाँ सूरे, पूछो न...

कृति - तुम्हारा बॉडी काउंट क्या है?

सुप्रिया को उसका क्वेश्चन समझ नहीं आया - बॉडी काउंट मतलब?

कृति ने हस्ते हुए कहा - उफ्फ्फ.. तुम्हे बॉडी काउंट नहीं पता? मतलब कितने लोगो के साथ तुमने वह सब...

सुप्रिया एक डैम से चौंक गयी की कृति उससे ऐसा क्यों पूछ रही थी - इमम्म.... ये क्यों पूछ रही हो...

कृति - बताया न प्लीज...

सुप्रिया - ाचा पहले तुम बताया...

कृति - ाचा ok, मेरा काउंट तवो है... पहले एक बॉयफ्रेंड था कॉलेज के टाइम पर... और अब राहुल... अब तुम बताया..

सुप्रिया ने सोचा की वह आज तक तीन मर्दो के साथ सो चुकी थी, अतुल, राहुल और विक्रम, पर राहुल के बारे में वह कृति को कभी नहीं बता सकती थी. सुप्रिया ने शरमाते हुए कहा - ओह ाचा... मैंने बस अतुल के साथ...

कृति - और भैया? उनके साथ भी तोह सब किया hi होगा...

कृति को तोह जैसे कोई शर्म hi नहीं आ रही थी अपने भाई और सुप्रिया के बीच की सेक्स लाइफ के बारे में जानने में. सुप्रिया संकोच करते हुए बोली - हम्म्म... तुम्हे तोह शायद सब पता hi है न... पर ये सब क्यों पूछ रही हो...

कृति - ऐसे hi मैं में क्वेश्चन आया... और फिर तुमने भैया के साथ कितनी बार...

अब तोह सुप्रिया के गाल बुरी तरह लाल हो चुके थे - अब ये नहीं बतायूंगी मैं... प्लीज...

कृति - के ों, हम लोग आपस में फ्रैंक हो सकते है, मैं भी तुम्हे सब बता दूंगी. ाचा मैं नंबर बोलती हु, जहाँ तक हो वहां मुझे रोक देना.. 5...... 10...... और ज्यादा क्या... 15..... उफ्फ्फ हॉट..... 20... ओह गॉड कहाँ रुकेगी ये गाडी जाकर...

सुप्रिया ने हस्ते हुए कहा - बस बस... सच बतायु तोह मैंने कभी गिना hi नहीं ये सब... मुझे सच में नहीं पता कितनी बार किया है हमने.... पर इतनी ज्यादा बार भी नहीं किया...

कृति मुस्कुरा के बोली - Ok फेयर एनफ, लास्ट क्वेश्चन, ी क्नोव इतस ा वैरी पर्सनल क्वेश्चन बूत तुम्हे भैया के साथ करके कैसा लगता है... कपरेड़ तो अतुल...

सुप्रिया कृति से नज़रे नहीं मिला पा रही थी - ओफ्फो... तुम भी न... इतने ज्यादा पर्सनल क़ुएस्तिओन्स पूछ रही हो...

कृति - ः... तुम्हारे लाल गाल देख कर मुझे सब समझ आ रहा है... सॉरी आप दोनों की कल रात स्पोइल करने के लिए... होपफ़ुल्ली आज रात को कोई भी आपके बीच नहीं आएगा.

सुप्रिया ने किसी तरह से मुस्कुराते हुए कृति से नज़रे मिलायी. सुप्रिया और कृति जैसे hi चेंज करके लुचरूम में आये, उन्हें वहां आकाश और राहुल दिख गए जो आलरेडी माइक और डनण्य से बात कर रहे थे.

सुप्रिया ने कृति से कहा - मैं थोड़ा टायर्ड फील कर रही हु... मुझे भूक नहीं है... मैं रूम में जाकर आराम कर लू?

कृति - हाँ बिलकुल... तुम जाकर आराम करो... आकाश और मैं इनको देख लेंगे... और फिर तुम्हे रात के लिए फ्रेश भी तोह फील करना होगा...

कृति ने सुप्रिया को आँख मारी, और सुप्रिया मुस्कुराते हुए वहां से अपने रूम की तरफ चली गयी.
 
अपडेट 65

सुप्रिया की नींद दरवाज़े पर हो रही खत खत से टूटी. शायद वह कुछ ज्यादा hi देर तक सो गयी थी. उसने घडी में टाइम देखा तोह 6 बज चुके थे. दरवाज़े पर दस्तक होये जा रही थी.

सुप्रिया ने दरवाज़ा खोला तोह सामने कृति कड़ी थी.

कृति - सॉरी.. मैंने डिस्टर्ब तोह नहीं किया...

सुप्रिया - नहीं... ाचा hi किया मुझे उठा दिया... पता hi नहीं चला की शाम हो गयी...

कृति - हाँ... मैं भी थोड़ा परेशान hi होने लगी थी की तुम ठीक तोह हो...

सुप्रिया - आयो न अंदर... अंदर कोई नहीं है...

कृति हस्ते हुए - हाहाहा... हाँ मुझे पता है... भैया तोह जस्ट अभी नीचे पहुंचे है...

सुप्रिया - कैसा रहा बाकी का दिन...

कृति - गुड.... राहुल और माइक के बीच तोह ज़रा सी देर में hi जैसे गहरी दोस्ती हो गयी हो, तोह उसने उसे एंटरटेनेड रखा... मेरी एक टेंशन काम हो गयी...

सुप्रिया ने मुस्कुरा के कहा - और दूसरी टेंशन?

कृति ने सुप्रिया को ऐसे देखा जैसे उसे कुछ समझ hi नहीं आया हो.

सुप्रिया - ओह... लगता है उसे तोह तुमने टेंशन समझा hi नहीं... डनण्य की बात कर रही हूँ...

कृति के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी थी - ओह्ह्ह्ह.... डनण्य.... नहीं उसने कुछ ख़ास परेशान नहीं किया...

सुप्रिया ने मजाक करते हुए कहा - हम्म्म... बच के रहना... कहीं रात को परेशान न कर दे...

कृति ने भी सुप्रिया को उल्टा जवाब दिया - बच के तुम रहना आज रात...

सुप्रिया - क्यों, ऐसा क्यों?

कृति - आज रात तुम्हे देख कर भैया के होश जो उड़ने वाले है... नींद hi नहीं आएगी उन्हें पूरी रात....

सुप्रिया - ऐसा क्या होना वाला है...

कृति - हम्म्म... उम्... चेंज करते हुए मैंने देखा की तुम मुझे देख रही थी... मेरे नीचे का एरिया...

सुप्रिया - उम्म्म... नहीं... ऐसा कुछ नहीं...

कृति - शरमायो मत... ी क्नोव इतस वैरी अट्रैक्टिव... और लड़को के लिए तोह और भी ज्यादा... एनीवे, मैंने hi कल आपकी रात स्पोइल करि थी, और मैं hi आज उसे स्पेशल बनायूंगी...

सुप्रिया - स्पेशल कैसे?

कृति के हाथ में एक डब्बा था, जिस पर सुप्रिया की नज़र अब तक नहीं गयी थी - ये देखो, ये एक क्लियर है जो नीचे के सारे हेयर्स रिमूव कर देगी... और स्किन और बहुत hi स्मूथ बना देगी...

सुप्रिया ने कृति के हाथ से डब्बा लिया और उसकी और देखने लगी.

कृति - काफी एक्सपेंसिव क्रीम है... और इंडिया में इतनी आसानी से नहीं मिलती...

सुप्रिया ने कृति को डब्बा वापस किया - नहीं... मुझे नहीं उसे करनी....

कृति - के ों... बस एक बार... आप लोगो की नाईट स्पेशल करने के लिए...

सुप्रिया - पर इससे क्या....

कृति - पर वॉर कुछ नहीं... लेटस दो आईटी नाउ..

सुप्रिया - ाचा मैं लगा लुंगी बाद में....

कृति - नहीं तुम अकेली नहीं कर पयोगी... अगर सही से नहीं लगायी और हटाई तोह बुरण हो सकता है नीचे...

सुप्रिया ने मुँह बनाते हुए कहा - उफ्फ्फ.. काफी डेंजरस है फिर तोह... मुझे नहीं उसे करनी...

कृति - कुछ नहीं होगा... ट्रस्ट में... लेट में अप्लाई आईटी... बस 10-15 मीन्स की तोह बात है...

सुप्रिया - अभी....??

कृति ने सुप्रिया का हाथ पकड़ते हुए उसे बीएड पर बिठाया - हाँ.... और कब? भैया के लिए रेडी होना है न तुम्हे.... चलो अब तुम बस आराम से पीछे हो कर लेट जायो...

सुप्रिया ने घबराते हुए अपने टंगे बीएड पर ऊपर करि और पीछे सरक कर बीएड पर लेट गयी. कृति ने उसके पाजामे का नाडा खोलते हुए नीचे कर दिया. सुप्रिया को काफी अजीब सा लग रहा था इस तरह कृति के सामने नंगे होना.

कृति उसके गोर गोर पैरो को देख कर बोली - वाओ... तुम्हारा स्किन टोन तोह बहुत hi ाचा है... एकदम गोरा, सॉफ्ट... अब मैं तुम्हारी पंतय उतारूंगी... घबराना मत...

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया और अपनी आँखें हलके से बंद कर ली. कृति सुप्रिया की पंतय को नीचे सरका के उसके घुटनो तक ले आयी. अंदर कृति को बारीक से कालो बालो में सुप्रिया की छूट के बहार का हिस्सा दिखा. कृति ने अपने हाथ सुप्रिया की गांड के नीचे लगते हुए उन्हें हल्का सा उठाया.

कृति - वाओ... तुम्हारी तोह नीचे का पूरा हिस्सा कितना गोरा है... और लगता है तुम शेव भी करती रहती हो...

सुप्रिया - हाँ... कभी कभी... मेरे पास एक इलेक्ट्रिक शेवर है...

कृति - तुम कोई वाइब्रेटर या डिलडो भी उसे करती हो क्या?

सुप्रिया को आईडिया था की वह क्या होते थे पर उसने कभी इस्तेमाल नहीं किये थे. वह अनजान बनते हुए बोली - वह क्या होते है?

कृति - तसककक... ारी... वही जो मस्टरबैशन में हेल्प करते है... सेक्स की फीलिंग देते है...

सुप्रिया - नहीं... वह तोह नहीं है मेरे पास....

कृति - वैसे तोह भाइये तुम्हे कोई कमी नहीं होने देते होंगे, बूत मैं तुम्हे एक लाकर दे दूंगी... ाचा, अब मैं क्रीम लगाना शुरू कर रही हूँ...

कृति ने अपने हाथ में थोड़ी क्रीम ले कर सुप्रिया के छूट के बालों पर क्रीम लगनी शुरू करि. क्रीम लगते हुए कृति की उंगलियां सुप्रिया के छूट के बहार के हिस्से से हल्का सा छू गयी जिससे वह एक डैम सिहर सी उठी.

सुप्रिया - अह्ह्ह्ह..... उफ्फ्फ... ठंडी लग रही है क्रीम से...

कृति - हाँ वह शुरू में कोल्ड है... फिर एक डैम हॉट हो जाएगी... कुछ मिनट रुको...

क्रीम लगाने से सुप्रिया को एक अजीब सी झनझनात सी महसूस हो रही थी अपने नीचे. कृति उसकी गांड पे हाथ लगाए उसे थोड़ा उठाये थी की कहीं क्रीम बीएड पर न लगे. सुप्रिया को बहुत अजीब लग रहा था की उसकी गांड इस तरह किसी और लड़की की हाथ में थी. वह नज़रे hi नहीं मिला पा रही थी कृति से.

कृति सही hi कह रही थी, कुछ देर की ठंडक के बाद, क्रीम गर्मी पकड़ती जा रही थी. ऐसा लग रहा था की जैसे वह क्रीम उसके बाल को जला रही हो. कुछ मिनट बाद कृति ने पास में रखे एक तौलिये से हालसे से क्रीम को पोछना शुरू किया. क्रीम के साथ साथ नीचे के बाल भी बड़ी आराम से निकल के आ रहे थे.

जैसे hi कृति तौलिये को हलके से सुप्रिया की छूट के बहार रगड़ती सुप्रिया की ाहन्नँ निकल जाती. वह बहुत hi बेचैन बेहसूस कर रही थी.

कृति - वाओ... बाल निकलने के बाद तुम्हारे नीचे का असली गुलाबी रंग निकल के आ रहा है... उफ्फ्फ.... मैं लेस्बियन तोह नहीं हु... पर ये जरूर कह सकती हूँ की इसे देख कोई भी पागल हो जाये.

कृति ने तौलिया साइड किया और सुप्रिया की छूट के बहार के होंठों के ठीक बीच अपनी ऊँगली फेरी, जिससे सुप्रिया काँप सी उठी. उसकी छूट का ऊपर का हिस्सा बुरी तरह फड़क रहा था.

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सुप्रिया - अहहह्णंन्न....

कृति - उफ्फ्फ.. इतनी भी एक्साइट नहीं हो... मैं तोह बस चेक कर रही थी की कोई बाल तोह नहीं रहा कहीं....

सुप्रिया को बुरी तरह शर्म आ रही थी और साथ hi वह उत्तेजित होती जा रही थी. उसने हिम्मत जुटते हुए कहा - अपने भैया के लिए इतने तैयारी...

कृति - हाँ... और क्या... हे डेसेर्वेस थे बेस्ट... रुको मैं तुम्हारी पुसी को अचे से मस्सगे करके रिलैक्स्ड कर देती हूँ... इससे सेक्स में हेल्प मिलती है...

इससे पहले सुप्रिया कुछ कहती, कृति ने अपने दोनों हाथों की उँगलियाँ सुप्रिया की छूट के बहार मसलनि शुरू कर दी. छूट के बहार का हिस्सा जैसे hi उँगलियों से टकराता, सुप्रिया की तोह जान hi निकल जाती.

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सुप्रिया को मज़ा बहुत आ रहा था पर वह अभी कृति के सामने विस्फोट नहीं करना चाहती थी - कृति... बस बस... प्लीज और नहीं...

कृति - क्यों... क्या हुआ...

सुप्रिया - बात को समझो... गड़बड़ हो जाएगी...

कृति हस्ते हुए - ाचा... मैं समझ गयी...

कृति ने अपने हाथ रोकते हुए पीछे कर लिए और सुप्रिया ने नीचे के हिस्से को एक तौलिये से धक् दिया.

कृति - सच में सुप्रिया... भैया बहुत लकी है की उन्हें तुम मिली हो... तुम्हारे नीचे के हिस्से को देख कर लगता hi नहीं की तुमने ज्यादा सेक्स किया है... शायद दिन में मेरे नंबर्स बिलकुल गलत थे....

सुप्रिया मुस्कुरा कर बोली - शायद....

कृति - पर अभी काम पूरा नहीं हुआ है... मैं एक दूसरी क्रीम लेकर आती हूँ जो आपकी बॉडी को पूरा सॉफ्ट बना देगी है... और साथ एक सेक्सी सी ड्रेस लेकर आती हूँ...

सुप्रिया - ड्रेस? कहाँ से...

कृति - मेरा सामन आ गया था दिन में... मेरे पास एक बिलकुल नयी ड्रेस है जो मैंने राहुल के लिए खरीदी थी, पर तुम उसे पेहेन लो... आखिर अब तोह तुम मेरी भाभी जैसी हो....

सुप्रिया के गाल सुर्ख लाल थे, एक hi दिन में जैसे उसका और कृति का रिश्ता hi बदल गया था. कृति जल्दी से रूम से बहार निकली और बहार दो नॉट डिस्टर्ब का बोर्ड टांगते हुए अपने रूम में चली गयी. और फिर जल्दी से वापस आ कर एक और क्रीम और एक ड्रेस सुप्रिया के पास ले आयी.

कृति ने सुप्रिया के पूरे शरीर पर ये दूसरी क्रीम मालनी शुरू की जिससे सुप्रिया का बदन और भी चमक और महक उठा. कृति के हाथ सुप्रिया के सुडोल बदन पर दौड़ रहे थे जिससे सुप्रिया को गुदगुदी और एक अजीब सा एहसास हो रहा था. पर किसी तरह उसने अपने आप को संभाले रखा.

सब हो जाने के बाद सुप्रिया ने कृति से पुछा - मैं ये दोनों क्रीम्स रख लू क्या?

कृति - हाँ हाँ... सूरे... ये भी कोई पूछने की बात है...

सुप्रिया - थैंक यू कृति... अब मैं अकेले में तैयार हो जायु क्या?

कृति थोड़ा चौंक सी गयी पर इतना तोह हक़ था hi सुप्रिया - सूरे... मैं चलती हूँ अब... अगर भूक लगे तोह मुझे बता देना... नहीं तोह आज तोह भैया से hi काम चलना पड़ेगा...

सुप्रिया हस्ते हुए - अभी तोह बिलकुल भूक नहीं लगी है... हाँ पर जरूरत पड़ेगी तोह मैं तुम्हारे भैया से बोल दूंगी... जायो तुम भी जायो... देखो कहीं कोई तुम्हारा इंतज़ार तोह नहीं कर रहा.

कृति - तुम मेरी फ़िक्र मत करो... ाचा ये भैया के रूम की के है... क्यों न तुम उन्हें वहां सरप्राइज दो... ये मत पूछना की मैंने उनके रूम की के कैसे हासिल की...

कृति हस्ते हुए रूम से चली गयी और सुप्रिया उस नयी ड्रेस में तैयार होना शुरू हो गयी. ड्रेस पेहेन कर उसने अपने आप को इस सेक्सी सी ब्लैक ड्रेस में देखा. विक्रम उसे देख कर पागल होने वाला था, और ये ड्रेस उसके जिस्म पर ज्यादा देर तक नहीं टिकने वाली थी. ये सोचते hi उसका दिल ज़ोर से धक् धक् करने लगा. पहले hi कृति ने उसकी छूट को बहुत बुरी तरह फड़का दिया था और उसे आज विक्रम से कुछ ऐसा चाहिए था जो उसे पहले न मिला हो.

सुप्रिया ने अपने होंठों पर लिप ग्लॉस लगाया जिससे उसके लिप्स काफी शिनय से हो गए और वह ऊपर से नीचे तक बहुत hi सेक्सी लग रही थी. उसे बहार जाते हुए भी घबराहट सी हो रही थी. कहीं कोई उसे एक गलत टाइप की लड़की न समझ ले.

पर अब ये तोह करना hi था. वह अपने दिल को किसी तरह थामे अपने कमरे से निकली और चार कमरे छोड़ कर विक्रम के कमरे में घुस गयी. कमरे में अभी कोई भी नहीं था और सुप्रिया ने एक को बहुत ठन्डे पर कर दिया. आखिर आज काफी ज्यादा गर्मी जो होने वाली थी. उसने कमरे की लाइट नहीं जलाई और वह बीएड पर जाकर लेट गयी. होटल की सफ़ेद चादर पर उसकी काली ड्रेस और गोरा बदन बहुत hi बढ़िया कंट्रास्ट बना रहा था. सुप्रिया के मैं में हलचल हो रही थी, पता नहीं विक्रम कितनी देर में आने वाला था.

सुप्रिया ने बीएड पर कुछ करवट ली और वह बेसब्री से इंतज़ार करने लगी. दिन में इतनी गहरी नींद लेने के बाद, वह पूरी तरह सचेत थी. करीब 15-20 मिनट वह बीएड पर इंतज़ार में लेती रही, और तभी उसे बहार किसी के कदमो की आहात हुई.

दरवाज़ा खुला और किसी के अंदर आने की आवाज़ आयी. सुप्रिया घबराई हुई थी, जहाँ वह लेती थी, उसे दिखाई नहीं दे रहा था की रूम में कौन आया था.

वह विक्रम hi था, उसने रूम बंद करते hi कहा - ओह हो... काफी ठंडा कर रखा है रूम...

विक्रम ने गैलरी की लाइट जलाई और थोड़ा और अंदर आया और उसने जैसे hi सुप्रिया को बीएड पर एक सेक्सी सा पोज़ बनाये देखा, वह बुरी तरह से चौंक गया. कोई और होता तोह शायद डर से चिल्ला hi पड़ता.

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सुप्रिया ने कांपती हुई आवाज़ में कहा - लाइट ऑफ कर दो न प्लीज...

विक्रम ने दो कदम पीछे लिए और लाइट का स्विच ऑफ कर दिया. उसने अपने जूते और जुराब उतार कर साइड में रखे. कमरे में इतना सन्नाटा था की विक्रम सुप्रिया के तेज़ी से धड़कते हुए दिल की आवाज़ सुन सकता था.

विक्रम बीएड तक फिर से पंहुचा और बीएड के एक कोने पर बैठ गया. कमरे में अभी भी इतनी रौशनी आ रही थी की विक्रम को सुप्रिया अचे से दिख रही थी. सुप्रिया आज उसके लिए इतना सज्ज धज के तैयार हो कर आयी थी. सुप्रिया किसी मॉडल से काम नहीं लग रही थी. इस छोटी सी ड्रेस में उसकी छाती की गोलियां बहार निकल रही थी और आज उसकी त्वचा में एक अलग सी चमक और खुशबू थी. उसके होंठों को देख कर विक्रम का मैं कर रहा था की बस वह उन्हें चूसे hi जाये.

सुप्रिया ने अपना सर उठा कर विक्रम की और देखा. ऐसा लग रहा था की वह किसी गहरी सोच में खोया हुआ है.

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सुप्रिया ने धीमी सी आवाज़ में कहा - क्या सोच रहे हो...

विक्रम - एहि की मुझे नहीं पता था होटल वाले मेरे रूम में इतना हसीं तोफा छोड़ने वाले है...

सुप्रिया ने ब्लश करते हुए नीचे देखा - ये सब कृति का प्लान था.... शायद वह कल के लिए सॉरी बोलना चाहती थी हमसे....

विक्रम - हम्म्म... तब तोह उसकी अपोलोग्य को एक्सेप्ट करना पड़ेगा…

विक्रम भी बीएड पर अपने हाथ रखते हुए लेट गया और सुप्रिया के थोड़ा और करीब आ गया. विक्रम सुप्रिया की आँखों में देख रहा था. सुप्रिया को आज उसको आँखों में अलग सी भूक नज़र आ रही थी.

विक्रम - इतनी दूर क्यों हो… यहाँ थोड़ा पास आयो न…

विक्रम ने अपना हाथ सुप्रिया के हाथ के ऊपर के हिस्से पर रखा. सुप्रिया को हाथ लगते hi उसके रोंगटे से खड़े हो गए. सुप्रिया वैसे hi काफी मुलायम सी थी पर आज तोह वह पहले से भी ज्यादा मुलायम महसूस हो रही थी. जैसे वह कोई रुई दार बर्फ हो जो उसके हाथ लगते hi पिघल जाएगी.

सुप्रिया ने भी विक्रम का हाथ लगते hi अपने होंठ अपने मुँह में हलके से भींचे, जैसे उसने हाथ न लगाया हो बल्कि कुछ और hi कर दिया हो. विक्रम सुप्रिया के हाथ को मसल रहा था, ये कोई सॉफ्ट टच नहीं था बल्कि वह उतावला होता हुआ अभी से थोड़ा कड़क होता जा रहा था.

सुप्रिया - ममममम…. आह्ह्ह्ह… आराम से….

विक्रम - अभी तोह कुछ किया भी नहीं है… तोह आराम से क्या करू…

सुप्रिया थोड़ा सा बीएड पर पीछे सर्कि और विक्रम एक शेर की तरह उसके पीछे पीछे उसकी तरफ बड़ा. और पीछे जाने की जगह नहीं थी और विक्रम सुप्रिया के ठीक ऊपर आ गया था. उसने अपने हाथ सुप्रिया की बाहों के नीचे फसाये और अपने पेअर उसकी टांगो के इर्द गिर्द, ताकि उसे कहीं भी हिल दल न सके.

विक्रम की आँखें आज कुछ ज्यादा hi लाल थी, पता नहीं उसने कुछ पिया हुआ था या बस वह थका हुआ था. उसका चेहरा सुप्रिया के चेहरे से एक फ़ीट ऊपर उसकी आँखों में घूर रहा था. सुप्रिया के होंठों की लिप ग्लॉस उसके होंठों को और भी रसीला बना रही थी. सुप्रिया को आभास हो रहा था की किसी भी पल उसके होंठों पर हमला होने hi वाला था.

विक्रम ने अपना चेहरा सुप्रिया के चेहरे के और नज़दीक किया और उसे विक्रम की गरम सांसें अपने चेहरे पर महसूस होने लगी. शायद लड़कियों को पहले hi पता चल जाता है की कब उनकी हालत ख़राब होने वाली है, और सुप्रिया को कुछ ऐसा hi एहसास होने लगा था.

विक्रम ने सुप्रिया का चेहरा पकड़ते हुए अपने होंठ उसके होंठ पर लगा दिए. कुछ तोह बात थी आज सुप्रिया के होंठों में जो विक्रम को पागल किये जा रही थी. उसने एकदम से ताबड़ तोड़ किश करनी शुरू कर दी.

सुप्रिया भी एक डैम से बाउछकी सी रह गयी थी - मममम... ममममम... ममम...

विक्रम उसे कुछ बोलने का मौका hi नहीं दे रहा था. उसने अपने जीब सुप्रिया के मुँह में घुसा दी और सुप्रिया की जीब से भिड़ने लगा. विक्रम की जीब सुप्रिया के पूरे मुँह में बे रोक टोक घूम रही थी, कभी वह उसके दांतों से टकराती, कभी उसकी जीब से, कभी उसके गाल के अंदरूनी हिस्से से. ऐसा लग रहा था मानो की विक्रम के होंठ भी सुप्रिया के मुँह में hi घुस गए हो.

विक्रम गहरी सांसें लेते हुए सुप्रिया को चूमे जा रहा था - ममममम.... अह्ह्ह्हह...

ऐसा लग रहा था जैसे आज उसे किसी का डर नहीं था, आखिर कृति को भी तोह पता चल hi गया था, और उसने खुद सुप्रिया को ऐसे तैयार करके विक्रम के पास भेजा था.

विक्रम ने सुप्रिया की जीब को अपने होंठों में दबाये उसके मुँह के बहार की और खींचा और उसे ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. दोनों बुरी तरह से हांफ रहे थे, और सुप्रिया के हाथ विक्रम के सर को पीछे से पकडे हुए थे. जितना पागल विक्रम हो रहा था उतनी hi पागल सुप्रिया भी.

विक्रम - अह्ह्ह्ह.... फ्फ्फफ्फ्फ़.... ममममम....

सुप्रिया की उंगलियां विक्रम की शर्ट के बटन खोलने लगी थी. उसकी चिकनी छाती को वह अपने होंठों से महसूस करना चाहती थी. सुप्रिया ने एक झटके में विक्रम को धकेलते हुए करवट दी और वह उसके ऊपर आ गयी. और फिर वह उसकी पंत पर बैठे हुए उसकी छाती को अपनी जीब से चाटने लगी. विक्रम ने अपने हाथ सुप्रिया की गांड पर लगते हुए ज़ोर से दबा दिया.

सुप्रिया - अह्ह्ह.... ममममम... विक्रम.... ी लव यू...

शर्ट के सारे बटन खुल गए थे और सुप्रिया विक्रम के शरीर पर किश करते हुए उसके पेट तक पहुंच गयी. सुप्रिया अपने जूनून में विक्रम की पंत के ऊपर से अपना मुँह उसके लुंड पर रगड़ने लगी. आज तक उसने ऐसा कुछ नहीं किया था, पर आज तोह वह अपना पूरा आप खो चुकी थी.

विक्रम ने पंत के अंदर hi अपना लुंड पूरा तन्न होते हुए महसूस किया और सुप्रिया के मुँह की तरफ धक्के मारने लगा. वह चाहता थी की अभी उसकी पंत और अंडरवियर उतर जाए ताकि सुप्रिया उसके लुंड को अपने मुँह में अचे से ले पाए.

विक्रम - सुप्रिया.... मेरी पंत उतारो जल्दी से... उफ्फ्फ....

सुप्रिया ने ज़रा भी देर नहीं की और उसने विक्रम की बेल्ट खोलते हुए उसकी पंत और अंडरवियर को नीचे खींच दिया. और जैसे hi उसने ये किया, विक्रम का पूरा खड़ा हुआ लुंड सुप्रिया के फेस पर जाकर टकराया. सुप्रिया किसी भूकी बिल्ली की तरह विक्रम के लुंड पर झपट पड़ी, और उसे ऊपर से नीचे तक चाटने लगी, विक्रम की बॉल्स से लेकर लुंड के ऊपरी टिप तक. उसने विक्रम के लुंड को अपने सॉफ्ट हाथों में पकड़ा और ऊपर से नीचे तक जीब फेरने लगी.

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विक्रम सुप्रिया को ऐसे देख कर और भी पागल होता जा रहा था. पता नहीं सुप्रिया ने आज क्या लिया था, पर जो भी था आज वह उसके साथ अचे से सेक्स करने वाला था. उसने अपना लुंड अपने हाथ में पकड़ा और फिर उसे सुप्रिया के फेस के ऊपर बहार से रगड़ने लगा. आज तक शायद उसने अपना लुंड इतना कड़क होते नहीं महसूस किया होगा.

सुप्रिया ने आँखें बंद कर ली और विक्रम के लुंड को अपने गालो और आँखों पर महसूस करने लगी. उसने hi विक्रम के अंदर आज ये आग भड़कायी थी और अब इसे बुझाने का और कोई दूसरा रास्ता नहीं था. वह चाहती थी विक्रम उसे अछि तरह से दिल खोल के चोदे आज.

विक्रम ने सुप्रिया के सर पीछे से पकड़ते हुए उसके होंठों को अपनी लुंड की तरफ खींचा और फिर अपना लुंड उसके होंठों पर ज़ोर से रगड़ने लगा.

सुप्रिया आँखें बंद किया बस - मममममम.... की आवाज़ hi निकल पा रही थी.

आखिर उसने अपने होंठ खोल hi दिए और लुंड जाकर उसके दांतों पर लगा. विक्रम आज उसे किसी भी तरह नहीं बक्श रहा था और उसने अपना लुंड सुप्रिया के दांतों पर मसलना शुरू किया. ऐसा करने पर सुप्रिया का मुँह अपने आप खुल गया और लुंड सीधा अंदर खूब गहरा चला गया.

सुप्रिया एकदम से गैग हो गयी, और उसे लग रहा था की कहीं उसे उलटी न हो जाये - ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.... मममममम

विक्रम ने उसकी हालत देख कर लुंड को थोड़ा सा बहार निकाला और फिर उसके चेहरे को पकड़ कर लुंड को मुँह के अंदर बहार करने लगा. विक्रम ने फिर एक डैम से अपना लुंड बहार निकाला और अपनी एक बॉल सुप्रिया के होंठों के ऊपर रख दी.

विक्रम ने धीमी आवाज़ में पर अथॉरिटी के साथ कहा - चूसो इसे...

सुप्रिया हैरान थी की विक्रम उसे ये करने के लिए बोल रहा था पर आज शायद कुछ नहीं रहने वाला था. सुप्रिया ने विक्रम की बॉल को अपने होंठों में दबाते हुए चूसना शुरू किया. विक्रम का लुंड तना हुआ ऊपर की और था और सुप्रिया उसके तत्तो को अपने होंठों से चूस रही थी.

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सुप्रिया आँखें बंद करके पूरे जोश में विक्रम के टट्टे चूस रही थी. विक्रम को ऐसा लग रहा था की किसी भी पल उसका पूरा माल सुप्रिया के चेहरे पर निकल सकता था. उसका लुंड बुरी तरह फड़क रहा था. पर वह अभी अपने माल को बर्बाद नहीं करना चाहता था.

उसने सुप्रिया के चेहरे को थोड़ा पीछे किये और फिर से अपना लुंड उसके मुँह में घुसा दिया.

विक्रम - उफ्फ्फ... सुप्रिया... आज तोह तुम कमल कर रही हो... अहह... मैंने सोचा नहीं था...

सुप्रिया ने विक्रम से ऑय कांटेक्ट बनाये रखा और वह विक्रम के लुंड के तेज़ झटके अपने मुँह में सेहती रही. विक्रम अपनी स्पीड बढ़ाये हुए था.

विक्रम - Ahhhh.....aahhhh

विक्रम और ज़ोर से सुप्रिया के मुँह अपना लुंड डाले रफ़्तार बढ़ाता रहा. सुप्रिया के बाल उसकी मुट्ठी में थे और वह ज़ोर से खींच रहे थे. विक्रम के लुंड से निकलता हुआ रास, सुप्रिया के मुँह के थूक में घुल रहा था.

सुप्रिया ने गुहार लगते हुए विक्रम की और देखा की वह अपना माल उसके मुँह में न निकले. विक्रम ने बिलकुल एन्ड मिनट में अपना लुंड बहार निकाल लिया और उसका झाग सुप्रिया के हाथों पर आकर गिरा.

सुप्रिया ने गन्दा सा मुँह बनाया और वह बाथरूम की तरफ भागी. उसकी ड्रेस अभी भी विक्रम के नीचे दबी हुई थी और वह बड़ी आसानी से उतर गयी. सुप्रिया पूरी नंगी बाथरूम में अपना हाथ और मुँह धोने लगी. विक्रम उसके पीछे पीछे बाथरूम में आया.

सुप्रिया अभी भी सिंक पर कड़ी कुल्ला कर रही थी.

विक्रम दरवाज़े पर नंगा आ कर खड़ा हो गया, उसका लुंड अभी भी कड़क था - सुप्रिया… यू ok? आज तुम कुछ ज्यादा hi जोश में थी..

सुप्रिया के चेहरे पर एक नर्वस सी हसी थी - हाँ मैं ठीक हूँ… आपको ाचा नहीं लगा क्या?

विक्रम - बहुत ाचा लगा, बस अब बीएड पर वापस आयो जायो... अभी तोह मैं कोर्स बाकी है...

सुप्रिया ने शरमाते हुए कहा - मैं बस दो मिनट में आती हूँ....

विक्रम वापस बीएड की तरफ आ गया और बेसब्री से सुप्रिया का इंतज़ार करने लगा. सुप्रिया के जिस्म पर अब एक भी कपडा नहीं था, और उसकी गर्माहट भी काम हो चली थी. पर विक्रम तोह अब पूरे जोश में आ चूका था. वह घबराते हुए बहार आयी.

विक्रम उसे देखते hi उसकी और तेज़ी से बड़ा और दोनों के नंगे जिस्म एक दुसरे से फिर से चिपक गए. विक्रम फिर से उसके होंठों को बुरी तरह चूसने लगा, उसके गालो पर काटने लगा.

सुप्रिया - अह्ह्ह.. विक्रम... please...ahhh....

विक्रम - सुप्रिया प्लीज... आज मैं नहीं रुक पायूँगा शायद... तुम मुझे किसी तरह से झेल लेना...

सुप्रिया के जिस्म की भीनी भीनी खुशबू उसे पागल कर रही थी. विक्रम सुप्रिया के हाथ पकड़ते हुए ऊपर की और कर दिया और वह उसके बूब्स पर टूट पड़ा, उन्हें ज़ोर ज़ोर से चूसते हुए. सुप्रिया का पूरा बदन बेहद hi मुलायम था आज, विक्रम की उंगलियां जहाँ भी छूती ऐसा लगता की वह कोई रेशम का कपडा छू रहा हो.

कुछ देर ऐसे hi विक्रम सुप्रिया के बूब्स को चूसता रहा, और कभी कभी उसके निप्पल्स को अपने होंठ में दबा के आराम से खींचता रहा. सुप्रिया कांपती हुई विक्रम के ऊपर सहारा लेकर कड़ी थी.

सुप्रिया - अह्ह्ह. ोुछः.... उम्मम्मम.. आआआ

विक्रम - मममममम..... आअह्ह्ह्हह

जैसे hi विक्रम ने सुप्रिया के बूब्स पर काटा सुप्रिया उसका चेहरा पकड़ कर हटाने को हुई, पर विक्रम ने उसके दोनों हाथों को पकड़ते हुए उसके पीठ के पीछे कर दिए.

सुप्रिया - विक्रम... अह्ह्ह.. आराम से... दर्द हो रहा...

विक्रम - सुप्रिया आज तुम मुझे रोको नहीं प्लीज...

विक्रम ने सुप्रिया को घुमाया और नीचे बैठते हुए उसकी गांड के बहार चाटने लगा.

सुप्रिया - विक्रम ये क्या कर रहे हो... प्लीज रुको न...

विक्रम - तुम्हे मजा आएगा... घबरायो मत...

विक्रम सुप्रिया के हाथ पीछे पकडे हुए उसे बीएड तक ले गया और सुप्रिया अपने घुटनो पर बीएड पर बैठ गयी.

सुप्रिया - विक्रम... प्लीज मेरे हाथ छोडो न...

विक्रम हाँफते हुए बोलै - ठीक है... पर मुझे रोकना नहीं...

जैसे hi सुप्रिया के हाथ छूटे उसने उन्हें बीएड पर रखते हुए अपने आप को सहारा दिया. विक्रम उसकी टाँगे पकडे हुए उसकी गांड की दरार के बीच में अपनी जीब घुमा रहा था.

सुप्रिया को एक अजीब से सेंसेशन हो रही थी और वह अपने बाल पकड़ते हुए बीएड पर थोड़ा नीचे हो गयी. आज तोह जैसे हर हद्द पार हो गयी थी.

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विक्रम की जीब उसके गांड के छेड़ के ठीक बहार टकरा रही थी और सुप्रिया को पागल कर रही थी.

विक्रम ने अपने हाथ से सुप्रिया के गांड के गोलों को थोड़ा अलग किया और उसे सुप्रिया का छोटा सा गांड का छेड़ दिखा. उसे देखते hi उसका लुंड बुरी तरह टाइट हो गया.

विक्रम - सुप्रिया... मैं तुम्हारी अस्स में डालना चाहता हूँ....

सुप्रिया घबरा कर पीछे मुड़ी - नहीं विक्रम प्लीज.... आज नहीं... आज वैसे hi बहुत कुछ हो चूका है...

विक्रम थोड़ा सा गुस्सा होते हुए बोलै - तुम हमेशा मन कर देती हो... कब फिर?

सुप्रिया - आज नहीं प्लीज... मैं नहीं ले पयूंगी वहां.... और और कैसे भी कर ले... पर वहां नहीं....

विक्रम का गुस्सा तेज़ हो रहा था पर उसे अपने शैतान पर किसी तरह काबू रखना था - ाचा ठीक है.. आगे देखो...

सुप्रिया ने मुँह आगे किया और विक्रम अपना शरीर उसकी पीठ के ठीक ऊपर लाते हुए, एक जानवर की तरह उसे सूंघने लग गया था. उसका लुंड सुप्रिया की छूट के ठीक बहार था. उसने सुप्रिया के गले पर अपने हाथ रखे और अपना लुंड एक तेज़ झाकते में सुप्रिया की छूट के अंदर घुसा दिया.

सुप्रिया बुरी तरह चीख उठी, आज तक विक्रम ने उसके साथ बहुत आराम से hi सेक्स किया था, किसी भी हड़बड़ी में नहीं.

सुप्रिया - अह्ह्ह्हह.... uffff.uuffff..ufff... अहह हहहहहह... मम्मीयीय.....

विक्रम - मैंने कहा न... आठ... आज बस तुम किसी तरह सेह लेना... वैसे भी गांड तोह मारने नहीं दे रही तुम...

विक्रम उसकी गर्दन पकडे हुए उसके अंदर धक्के मारने लगा. सुप्रिया अपनी आखें बंद करने के इलावा कुछ नहीं कर पायी..

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विक्रम का लुंड सुप्रिया के अंदर तक ज़ोर ज़ोर से टकरा रहा था. उसकी हालत ख़राब हो चुकी थी, विक्रम ने खूब स्पीड पकड़ ली थी. विक्रम के टट्टे सुप्रिया के नीचे टकरा रहे थे और उसे बुरी तरह दर्द कर रहे थे.

सुप्रिया - अहहह्णनम... ाहहनननन.... मममममम... नहीं... प्लीज...

विक्रम - अह्हह्हरररर... अह्ह्ह्हह

सुप्रिया ने कभी इस तरह के प्यार की अनुभूति नहीं की थी. नीचे जो हीट पैदा हो रही थी दोनों के बीच वह उसे बुरी तरह जला रही थी पर मज़ा भी दे रही थी.

सुप्रिया की चिकनी सी छूट में विक्रम का लुंड इतनी आसानी से अंदर फिसल रहा था, और उसे जो मज़ा आ रहा था आज, वह बयां भी नहीं कर सकता था. पूरी एक्ससिटेमेंट में और भी बेरहम सा हो गया था.

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विक्रम कितनी देर तक सुप्रिया को छोड़ता रहा सुप्रिया को खुद hi होश रही रहा. अलग अलग पोसिशन्स में जैसे वह पूरी रात hi विक्रम से चुदती रही हो. कभी डोग्गिस्टीले, कभी स्पूनिंग में लेट कर, कभी वह विक्रम के ऊपर. विक्रम का स्टैमिना ख़तम hi नहीं हो रहा था.

और आखिर में वह दोनों टूटे पड़े हुए एक दुसरे से लिपटे हुए बिना किसी चद्दर के बीएड पर सो गए.

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सुबह जब सुप्रिया उठी तोह उसने पाया की विक्रम अभी भी उसके बराबर में सो रहा था. उसके नीचे काफी दर्द हो रहा था और वह किसी तरह से खड़े हो कर टॉयलेट कर के आयी. कल रात तोह वह दोनों hi जानवर से बन गए थे. पर शुरुवात तोह उसने hi की थी.

सुप्रिया ने रूम में राखी कॉफ़ी मशीन से एक कॉफ़ी बनायीं और खिड़की के पास रखे सोफे पर एक कम्बल ोड कर बैठ गयी. सुप्रिया के कमरे का पर्दा खोला और बहार बीच का काफी ाचा नज़ारा दिख रहा था. वह सोचने लगी की जो कुछ हुआ उसमे उसे कितना मज़ा सा आया था कल रात. ऐसा लग रहा था की जैसे किसी ने उसे प्यार करने के कई नए तरीके सीखा दिए हो.

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कमरे का पर्दा खुलते hi विक्रम की भी आँख खुली. वैसे तोह वह हमेशा जल्दी उठ जाता था पर कल रात उसे ऐसा लग रहा था की उसके लुंड की हर एक बूँद बहार निकल गयी हो. उसने खिड़की पर सुप्रिया को बैठे देखा. वह बहुत hi सेक्सी और प्यारी सी लग रही थी. वैसे तोह वह किसी लड़की के साथ एक बार से ज्यादा नहीं सो पाटा था, पर इतना वाइल्ड सेक्स होने के बाद भी सुप्रिया के लिए उसकी छह काम नहीं हुई थी.

विक्रम - गुड मॉर्निंग....

सुप्रिया ने हलके से जवाब दिया - गुड मॉर्निंग....

दोनों के बीच एक अजीब सा सन्नाटा था, पर विक्रम को पता था की कल रात जो भी हुआ उसे तोह एकनॉलेज करना hi पड़ेगा - सुप्रिया... कल रात जो हुआ... पता नहीं... मैं कुछ बहक सा गया था...

सुप्रिया - हम उस बारे में बात नहीं करते न प्लीज... वैसे मैं भी कुछ ज्यादा hi बहक गयी थी.... आपकी गलती नहीं है...

विक्रम - पर जो कुछ हुआ, काफी अमेजिंग था.... तुम बहुत अमेजिंग थी...

सुप्रिया के गाल शर्म से लाल हो गए - वैसे मैंने जो भी किया... आप पता नहीं मेरे बारे में क्या सोच रहे होंगे...

विक्रम - मुझे बहुत अछि लगी तुम्हारी बोल्डनेस.. और मैं बस ये सोच रहा हूँ की तुम बस मेरी हो... हमेशा हमेशा के लिए.... और हम बस ऐसे hi प्यार करते रहेंगे....

सुप्रिया शर्मा के बहार की और देखने लगी. विक्रम भी खड़ा हो कर सुप्रिया के पास आ गया और उसके ब्लैंकेट में घुसते हुए उसे अपनी गोदी में बिठा लिया. विक्रम सुप्रिया को पकडे हुए था और हलके हलके उसकी गर्दन को चूम रहा था. थोड़ी देर वह दोनों ऐसे hi बैठ रोमांस करते रहे.

घडी में टाइम 8 बजने वाला था और आज का बाकी प्रोग्राम भी शुरू करना था. तोह थोड़ी देर बाद वह दोनों अलग हुए और सुप्रिया रूम में बिखरे हुए अपने कपडे ढून्ढ कर पेहेनते हुए अपने कमरे में चली गयी. सच में पिछली रात बहुत hi यादगार थी उसके लिए.

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नाश्ते के बाद सब लोग नीचे इखट्टा हो गए और आज के प्लान में बीच की कुछ एक्टिविटीज प्लांड थी. विक्रम ने जेम्स से कल hi बात कर ली थी की वह माइक और डनण्य को अपने लोगो के साथ एक्टिविटीज में बिजी रखेगा. जेम्स और विक्रम इस बीच थोड़े और सुप्प्लिएर्स से मिल कर सब फाइनल करेंगे, और फिर शाम को सब लोग साथ में डिनर करेंगे.

होटल से hi बीच का एक्सेस था तोह सब लोग चलते हुए बीच की तरफ चल पड़े.

रास्ते में सुप्रिया और कृति साथ में चल रहे थे और उनसे थोड़ा आगे बाकी सब - डनण्य, माइक, राहुल और आकाश.

सुप्रिया तोह जैसी कृति से नज़रे hi नहीं मिला पा रही थी, और वह नीचे देखते हुए चल रही थी. वह बस आशा कर रही थी की कृति कल रात के बारे में उससे कुछ न पूछे.

पर आखिर कृति कैसी नहीं पूछती - सो... हाउ वास् लास्ट नाईट??

सुप्रिया - हम्म्म....

कृति - हम्म्म मतलब? गुड, बाद, एक्ससिटिंग, सुपर हॉट...

सुप्रिया - आखरी वाला.. जो कहा तुमने...

कृति एक डैम खिलखिला के है पड़ी - ओह वाओ.... सो क्रीम काम कर गयी...

सुप्रिया ने कृति की और देखा - ऐसा क्या था उस क्रीम में....

कृति - हहह... उसमे कुछ हर्ब्स थे जिनकी स्मेल सेक्सुअल एक्ससिटेमेंट बढ़ती है...

सुप्रिया - तुम भी न... मुझे पहले क्यों नहीं बताया.... पता है क्या क्या हुआ उसकी वजह से...

कृति ने आखें बड़ी करते हुए सुप्रिया की और देखा - क्या क्या हुआ... मैं तोह सुन्ना hi चाहती हूँ...

सुप्रिया ने हस्ते हुए अपना सर न में हिलाया - वह नहीं बतायूंगी... पर मुझे ऐसा लगा की मैंने अपना आप hi खो दिया हो और फिर तुम्हारे भैया ने भी....

कृति - ाचा है न... स्पेशल नाईट हो गयी... मैंने hi पिछली नाईट स्पोइल की थी और इससे हिसाब बराबर हो गया... वैसे ाचा किया तुम पर टेस्ट कर ली वह क्रीम...

सुप्रिया - टेस्ट कर ली मतलब??!! तुमने पहले नहीं उसे की थी वह... ओह गॉड, मैं hi मिली थी वह उसे करने के लिए...

वह बात hi कर रहे थे की डनण्य थोड़ा आगे रुक गया ताकि वह उनको ज्वाइन कर सके - सो व्हाट अरे यू गर्ल्स टेकिंग अबाउट?

कृति - ओह नथिंग स्पेशल... जस्ट अबाउट लास्ट नाईट....

डनण्य - लास्ट नाईट... व्हाट हप्पेनेड लास्ट नाईट...

कृति - वेल सुप्रिया एंड...

सुप्रिया ने कृति के पेट पर कोहनी मारी उसे छुप करने के लिए. कृति तोह बस सुप्रिया को छिड़ा रही थी, वह डनण्य को सब बताने नहीं वाली थी.

कृति - सुप्रिया एंड ी प्लाएड कार्ड्स टुगेदर... that's आल...

डनण्य - ी लिखे प्लेइंग कार्ड्स... मय्बे ी कैन ज्वाइन यू टुनाइट....

सुप्रिया कृति की और देख कर मुस्कुरायी, दोनों एहि सोच रहे थे की कितनी बेताबी थी डनण्य को उनके साथ टाइम स्पेंड करने की.
 
अपडेट 66

सब लोग चलते चलते बीच तक पहुंच गए थे. वहां पहले से hi एक इंस्ट्रक्टर उनका इंतज़ार कर रहा था.

इंस्ट्रक्टर सब को इखट्टा करके कहने लगा - सो... वे हैवे ा फ्यू एक्टिविटीज प्लांड, लिखे तेरे इस पारा सेलिंग एंड अंडर वाटर स्विमिंग एंड ओठेर्स....

कृति ने एकदम से कहा - ी विल दो पारा सेलिंग... प्लीज में फर्स्ट...

राहुल उसको हिंदी में बोलने लगा - ारी बाबा... पहले इन लोगो को करने दो न...

कृति ने उसे आँखें दिखाई - नहीं, पहले मैं जयुंगी न....

डनण्य शायद उनकी बातें समझ गया था - लेट हेर जो फर्स्ट... ी कैन जो सेकंड...

इंस्ट्रक्टर - Ok, सो यू तवो जो इन तहत बोट एंड थिस मन विल हेल्प यू गेट सेटअप फॉर पारा सेलिंग.

कृति खुश होते हुए डनण्य और उस दुसरे आदमी के साथ एक बोट पर निकल गयी.

राहुल - सुप्रिया, तुम और माइक फिर अंडरवाटर स्विमिंग चले जाना, ये इंस्ट्रक्टर है वह तुम्हे डीप वाटर में ले जायेगा...

सुप्रिया - तुम नहीं आ रहे?

राहुल - नहीं, मुझे और थोड़े इंतज़ाम करने है...

सुप्रिया ने मुँह बनाया, उसे माइक से साथ इस बोट पर अकेले जाना होगा. इससे ाचा तोह वह न hi जाये तोह बेटर है. कल रात की चुदाई के बाद उसका अंग अंग दर्द कर रहा था वैसे भी. पर अब वह किस तरह से माइक को मन करती. वैसे भी वह समुद्र के बीच में जाकर स्विमिंग का अनुभव करना चाहती थी.

सुप्रिया ने एक टाइट टॉप पहने हुआ था जिसमे उसका पेट साफ़ दिख रहा था और उसके नीचे स्विम शॉर्ट्स, और शॉर्ट्स के ऊपर एक दुपट्टा सा बाँधा हुआ था. दूसरी और माइक ने भी एक टीशर्ट और स्विम शॉर्ट्स पहने हुए थे. दोनों बोट में बैठ गए और बोट उन्हें समुद्र में काफी दूर ले गयी. सुप्रिया समुद्र में इतनी दूर जाकर सब कुछ बहुत ध्यान से देख रही थी.

तेज़ हवा से उड़ते बाल और काले चश्मे में सुप्रिया बहुत hi सुन्दर लग रही थी.

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दूसीर और माइक का ध्यान तोह बस सुप्रिया की टांगो पर hi था. वह सोच रहा था की किस तरह से वह सुप्रिया की टांगो को छू पाए. और शायद थोड़ा और कुछ भी.

थोड़ी दूर आकर इंस्ट्रक्टर उन्हें सब कुछ समझने लगा - Ok... लिसेन उप... सेफ्टी फर्स्ट... ma'am कैन यू रिमूव थिस क्लोथिंग टाईड तो योर वैस्ट, एंड थें वियर थिस स्विमिंग सेफ्टी इक्विपमेंट.... एंड यू तू सर...

सुप्रिया ने अपना दुपट्टा खोल कर साइड में रख दिया. और फिर सेफ्टी इक्विपमेंट पेहेन लिया. माइक बस सुप्रिया को hi घूरे जा रहा था, और ये बात सुप्रिया को भी महसूस हो रही थी.

इंस्ट्रक्टर ने पहले माइक तो पानी में उतारा, फिर सुप्रिया को, और फिर आखिर खुद पानी में उतरा. सुप्रिया घबरा रही थी, और पानी भी काफी ठंडा था. सुप्रिया को अचे से स्विमिंग आती थी पर स्विमिंग पूल और समुद्र में स्विमिंग करना दो अलग बात थी. पानी के अंदर सुप्रिया को तैरने में दिक्कत हो रही थी, किसी तरह से पानी के ऊपर अपना सर रख पा रही थी. दूसरी और माइक फिर भी अचे से तैर पा रहा था और वह पानी के अंदर भी गोते लगा रहा था.

सुप्रिया धीरे धीरे थोड़ा सा कम्फर्टेबले फील करने लगी. इंस्ट्रक्टर ने उसका हाथ पकड़ कर उसे पानी के अंदर डुबकी दिलवाई. यहाँ पानी का अलग hi नज़ारा था.

तभी सुप्रिया महसूस हुआ की कोई उसके ठीक पीछे आ गया है. पहले तोह वह घबरा गयी की कहीं कोई शार्क या बड़ी मछली न हो, पर फिर एक हाथ उसकी गांड पर लगा. सुप्रिया ने पीछे पलट कर देखा तोह ये माइक का हाथ था.

सुप्रिया ने उसे गुस्से से घूरा और उसका हाथ अपनी गांड से दूर झटक दिया. पानी सर तक होने के कारण वह कुछ बोल नहीं पा रही थी. पर माइक ने फिर से अपने हाथ सुप्रिया की कमर पर रखे और उसे थोड़ा सा अपनी और खींचा.

माइक के पेअर सुप्रिया के पैरो से टकरा रहे थे. माइक अपने पेअर ऊपर नीचे करते हुए सुप्रिया की जांघो पर रगड़ रहा था. सुप्रिया बहुत बेबस सा महसूस कर रही थी क्यूंकि वह इतने गहरे पानी में अचे से स्विम नहीं कर पा रही थी.

सुप्रिया ने किसी तरह माइक की छाती पर हाथ लगते हुए उसे अपने से दूर किया. पर माइक ने उसका हाथ पकड़ते हुए उसे ऑलमोस्ट हुग hi कर लिया.

सुप्रिया ने इस बार अपना घुटना उठाते हुए माइक के पेट पर हल्का सा मारा और वह माइक से थोड़ा दूर हो गयी. माइक अपना पेट मसलता हुआ उसके ठीक पीछे स्विम करते हुए आ गया.

सुप्रिया ने इंस्ट्रक्टर की और देखा.

इंस्ट्रक्टर - तेल्ल योर हस्बैंड तो नॉट मेस उप थे वायर्स....

सुप्रिया किसी तरह से अपना मुँह खोल कर बोली - हे इस नॉट माय हस्बैंड... कैन यू आस्क हिम तो स्टे अवे....

इंस्ट्रक्टर - ओह ok...

आखिर कर इंस्ट्रक्टर को hi माइक को थोड़ा पीछे होने के लिए बोलना पड़ा ताकि उन दोनों के सेफ्टी इक्विपमेंट की तारे न उलझे. माइक ने इंस्ट्रक्टर को हस्ते हुए देखा और फिर उसने पानी में डुबकी लगा ली. सुप्रिया को ऐसा hi लग रहा था की माइक उसके आस पास hi तैर रहा था. सुप्रिया को बस अब बोट पर वापस जाना था, बहुत हो गया था बस.

इंस्ट्रक्टर ने सुप्रिया को स्ट्रगल करते देख उसे बोट पर वापस चढ़ा दिया और थोड़ी देर बाद माइक भी वापस बोट पर आ गया. सुप्रिया उस समय एक तौलिया ले कर अपना बदन और बाल पॉच रही थी. माइक के पूरे कपडे गीले थे और सुप्रिया की एक नज़र उसके शॉर्ट्स पर पड़ी तोह वहां एक बड़ा सा उभर था. सुप्रिया ने जल्दी से अपनी नज़रे दूसरी और फेर ली.

पर माइक की नज़रे तोह बस सुप्रिया पर hi तिकी हुई थी.

माइक - ी थिंक यू मिस्ड ा स्पॉट तेरे, जस्ट बिलो योर नैक. िफ़ यू वांट ी कैन वाइप आईटी फॉर यू....

सुप्रिया ने रूखी आवाज़ में कहा - No थैंक्स, ी ऍम गुड...

माइक - यू अरे ा प्रीटी गुड स्वीम्मर... वैरी नीस लेग्स... एंड अस्स....

सुप्रिया - स्टॉप आईटी... ी don't लिखे आईटी.... व्हाट यू अरे दोंग नाउ एंड व्हाट यू दीद इन थे वाटर...

माइक - के ों... it's जस्ट फ्लिर्टिंग, नथिंग मोरे...

सुप्रिया - माइक, don't यू गेट टायर्ड ऑफ़ ट्राइंग तो फ़्लर्ट विथ में... ी हैवे आलरेडी टोल्ड यू मल्टीप्ल टाइम्स...

माइक - ी गेट प्रीटी टायर्ड आफ्टर सम गुड सेक्स... बूत वे हवेत हद अन्य सो फार....

माइक के चेहरे पर एक गन्दी सी मुस्कान थी. सुप्रिया को समझ नहीं आया वह क्या जवाब दे और उसने अपना मुँह दूसरी और कर दिया.

बोट वापस बीच की तरफ जाने लगी. सुप्रिया ने ऊपर आसमान की तरफ देखा तोह उसे कृति और डनण्य साथ में पारा सेलिंग करते हुए दिखे, कृति आगे और डनण्य उसके ठीक पीछे. दोनों एक्ससिटेमेंट में चिल्ला रहे थे और काफी खुश लग रहे थे. चलो काम से काम कोई तोह खुश था आज.

सुप्रिया उन्हें देखती हुई खोयी हुई थी की एकदम से माइक बोलै - सो what's थे प्रॉब्लम विथ में... इस आईटी तहत ी ऍम ब्लैक और इस आईटी तहत ी ऍम नॉट योर बॉस?

सुप्रिया ने माइक की और देखा - ी don't क्नोव व्हाट यू मैं....

माइक - ी सी हाउ यू गर्ल्स हैवे बीन लुकिंग ात डनण्य... रेडी तो जम्प ात हिज वाइट कॉक... एंड ी आल्सो क्नोव एवरीथिंग अबाउट यू एंड मर. विक्रम....

सुप्रिया ये सुन कर बुरी तरह से चौंक गयी, माइक को विक्रम और उसके बारे में किसने बताया होगा. कृति ने तोह डेफिनिटेली नहीं, तोह फिर क्या राहुल?

सुप्रिया - ी.... don't क्नोव व्हाट यू अरे सयिंग... मर. विक्रम एंड ी अरे जस्ट कलगुएस....

माइक हस्ते हुए - हाहाहा.... कलगुएस विथ बेनिफिट्स.... गेस ी विल हैवे तो टॉक तो मर. विक्रम...

सुप्रिया - अबाउट व्हाट?

माइक ने सुप्रिया को आँख मारी - हे स्टिल नीड्स थिस कॉन्ट्रैक्ट doesn't हे... मय्बे यू कैन हेल्प हिम गेट आईटी...

बोट बस वापस बीच पर पहुंची hi थी. सुप्रिया गुस्से में बोट से उतारते हुए माइक से दूर चलने लगी. बीच पर राहुल खड़ा उनका वेट कर रहा था.

राहुल ने सुप्रिया को गुस्से में देख कर पुछा - क्या हुआ सुप्रिया, सब ठीक?

सुप्रिया ने राहुल को भी गुस्से में घूरा - तुम hi ये सब फालतू बातें कर रहे हो न मेरे और विक्रम सर के बारे में... इस काले से....

राहुल परेशान होते हुए बोलै - कुछ कह रहा था क्या?

सुप्रिया बुरी तरह भड़की हुई थी - वही कह रहा था जो तुमने उसे कहा होगा.... तुम घूम रहे हो न उसके साथ कल से...

राहुल - सच यार... मेरी इस बारे में कोई बात नहीं हुई उससे... हम तोह बस ऐसे hi....

सुप्रिया - मैं कृति को बोल दूंगी, अगर तुमने ऐसी फालतू हरकतें करनी ज़ारी राखी तोह... मैं घबराती नहीं हूँ तुमसे...

ये सुन कर राहुल के चेहरे का एक्सप्रेशन बदल गया - कृति को क्यों बीच में लाती हो इस सब के... मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा... और वैसे भी तुम और विक्रम फ़क कर रहे हो न... तोह सच बोलने से इतना डर्टी क्यों हो... मुझे बताना होता तोह अतुल को कब का बता चूका होता...

सुप्रिया की आवाज़ थोड़ी धीमी हुई - ऐसा कुछ नहीं है... ये सब तुम्हारा ब्रह्म है...

राहुल - ाचा... मुझे सब पता है... कल रात भी तुम उसके hi कमरे में थी न...

सुप्रिया - तुम मेरी जासूसी कर रहे हो... अपने काम से मतलब रखो... पता चला की जो तुम्हारे पास है उससे भी हाथ धो बैठो...

राहुल - मैंने अगर कृति के सामने मुँह खोल दिया न तोह तुम्हारे लिए भी ाचा नहीं होगा. वैसे तुम जानती hi क्या हो विक्रम के बारे में...

सुप्रिया - मतलब??

राहुल हस्ते हुए बोलै - कभी तोह अपनी आखें खोलना सीखो... चलो अभी आकाश आ रहा है वहां से... उसके सामने ये बात नहीं करते...

सुप्रिया और राहुल बिलकुल चुप हो गए. सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था की राहुल विक्रम के बारे में क्या बोल रहा था.

आकाश उनके पास आकर बोलै - गाइस... व्हाई सो सीरियस... चलो... अब हमारी बारी है पारा सेलिंग की...

सुप्रिया - नहीं आकाश तुम करो... मुझे डर लगता है... मैं नहीं करने वाली...

आकाश - Ok... अस यू विश...

सुप्रिया - कृति वापस आ गयी क्या?

आकाश - हाँ... वह और डनण्य बस अभी वापस आये... कृति को मैंने उधर चेंजिंग रूम्स की तरफ जाते देखा था...

सुप्रिया - थैंक्स...

सुप्रिया भी बीच पर बने चेंजिंग रूम्स की तरफ चल पड़ी, काम से काम कृति के साथ उसे कोई टेंशन तोह नहीं होगी. वह गर्ल्स के चेंज रूम की तरफ गयी जहाँ अंदर छोटे छोटे स्टाल्स थे जिनमे दरवाज़े लगे हुए थे, पर नीचे से पेअर दिख रहे थे.

उसे एक स्टाल के अंदर से दो लोगो की आवाज़ें आ रही थी, जैसे वह किश कर रहे हो - मममममम.... अह्ह्ह्ह....

सुप्रिया ने झाँक के देखा तोह नीचे उसे दो लोगो के पेअर दिखाई दिए, एक किसी गोर आदमी के पेअर और दुसरे किसी लड़की के पेअर, जो इंडियन से लग रहे थे. ओह गॉड, जरूर hi कृति और डनण्य hi होंगे, सुप्रिया चौंक गयी और वह दबे पाँव पीछे जाने लगी. उन दोनों के बीच अभी भी किसिंग जारी थी शायद इसलिए उन्हें पता नहीं चला की वहां कोई और भी आया था.

सुप्रिया धीमे कदमो से चेंजिंग रूम के बहार निकली और उसने थोड़ी दूर आकर चेंजिंग रूम पर नज़रे बनायीं राखी. वह अपने शक को पूरी तरह यकीं में बदलना चाहती थी की उस स्टाल में कृति और डनण्य hi साथ में थे.

कुछ 5-10 मिनट बाद, अपना टॉप ठीक करते हुए कृति वहां से बहार निकली. उसने इधर उधर देखा, पर उसकी नज़र दूर कड़ी सुप्रिया पर नहीं गयी. वह वापस आकाश और बाकी सब की तरफ चल दी. उसके 1-2 मिनट बाद डनण्य भी वहीँ से बहार निकला. उसके चेहरे पर एक अलग सी ख़ुशी झलक रही थी.

सुप्रिया उन दोनों का ये खेल देख कर थोड़ा सा हैरान थी. कृति भी काम चालू नहीं थी, जो राहुल के होते हुए किसी और आदमी के साथ किसिंग और जाने क्या कर रही थी.

कुछ देर बाद सुप्रिया भी बाकी सब के पास आ गयी. उसने कृति को कुछ भी ज़हीन नहीं होने दिया और सब के साथ मिल कर फिर से मस्ती करने लगी.

सुप्रिया और कृति बीच के पानी में उतर गए थे और डनण्य और आकाश भी उनके साथ hi मस्ती कर रहे थे. राहुल और माइक का कहीं भी अत पता नहीं था, पर सुप्रिया उनके न होने से hi खुश थी. पानी में रहते रहते सुप्रिया और कृति के कपडे गीले हो गए थे और कृति की सी थ्रू टीशर्ट में उसके अंदर की ब्रा साफ़ दिख रह थी.

डनण्य और आकाश तोह जैसे कृति के बूब्स की तरफ hi देख रहे थे और दोनों को काफी मज़ा सा आ रहा था. ऐसा लग रहा था की कृति को भी उन्हें तड़पने में मज़ा सा आ रहा था.

काफी देर पानी में रहने के बाद सब बहार निकल गए और थोड़ी फोटोज क्लिक करके वापस होटल की तरफ चले गए. आखिर सब को शाम की पार्टी के लिए भी तोह रेस्ट करके फ्रेश होना था.

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शाम होते होते सुप्रिया ने तैयार होना शुरू कर दिया था. रिसोर्ट के पार्टी हॉल में एक डांस पार्टी होने वाली थी और सब लोगो को अचे से ड्रेस हो कर वहां जाना था. मेंस के लिए सूट और लेडीज के लिए वेस्टर्न गाउन या ड्रेस.

सुप्रिया को बिलकुल आईडिया नहीं था की ऐसा भी कुछ होगा ट्रिप पर, और उसके पास इस इवेंट के लिए कोई ड्रेस नहीं थी. पर एक बार फिर से कृति ने उसे बचा लिया और वह उसने सुप्रिया को अपनी एक ड्रेस दे दी. सुप्रिया ने ड्रेस पेहेन कर अपने आप को आईने में देखा. पता नहीं कृति ने एहि ड्रेस उसे क्यों दी थी. ये काफी ज्यादा छोटी ड्रेस थी जिसमे उसके बूब्स ऊपर से बहार निकल रहे थे और उसकी जाँघे भी पूरी तरह नहीं ढकी हुई थी.

सुप्रिया ने अपने आप को रूम के आईने में देखा. वह हद्द से ज्यादा हॉट लग रही थी, पर ऐसा भी लग रहा था जैसे वह अपने जिस्म की नुमाइश कर रही हो. ऊपर के हिस्से में तोह जैसे ड्रेस थी hi नहीं, कोई भी स्ट्राप नहीं. और नीचे भी ड्रेस में काफी बड़े स्लिट्स थे, जिससे जैसे hi सुप्रिया चलती उसकी नंगी टाँगे और जांघ साफ़ दिख रही थी.

उसका दिल ज़ोर से धड़कने लगा था अपने आप को ऐसे देख कर और उसे पता था की लोग उसे ऐसे देख लेंगे तोह उनकी तोह हालत hi ख़राब हो जाएगी. विक्रम के सामने कल रात वह ड्रेस पेहेनना और बात थी पर सब के सामने ऐसे जाना बिलकुल अलग.

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उसे कृति से hi बात करनी होगी, और वह hi बताये की क्या ये ड्रेस पार्टी के लिए सही होगी...

सुप्रिया अपने रूम से निकली, और बहार निकलते hi उसे एक वेटर दिखा जिसने उसे ऊपर से नीचे तक घूरा. सुप्रिया उसे किसी तरह से इग्नोर करती हुई कृति के कमरे के बहार पहुंची और उसका दूर खटखटाया.

कुछ पल बाद कृति ने दरवाज़ा खोला, और उसने सुप्रिया को देखते hi कहा - ओह वाओ.. यू अरे लुकिंग लिखे ा बेबी डॉल इन थिस ड्रेस.... होइयैतत्तत!!!!

सुप्रिया ने अंदर आते हुए कहा - उफ्फ्फ.... एहि तोह डर है, देखा है मैं कैसी लग रही हूँ इसमें...

कृति - ओह के ों... तुम इंडिया में नहीं हो... यहाँ सब ऐसे hi कपडे पेहेनते है... इतना मत सोचो और एन्जॉय करो..

सुप्रिया ने अपने बूब्स की तरफ इशारा करते हुए कहा - देखो... कुछ भी तोह नहीं ढाका हुआ...

कृति ने अपने हाथ सुप्रिया के बूब्स के साइड पर लगाए - वही तोह... और इतनी शाइन कर रही है तुम्हारी स्किन.... अमेजिंग... केहर धयोगी तुम आज रात....

सुप्रिया को अजीब सा लग रहा था जिस तरह से कृति ने उसके बूब्स पर हाथ रखा हुआ था - मुझे नहीं धना केहर... कहीं लेने के देने न पद जाये....

कृति - जस्ट चिल... एंड हैवे फन... मेरी भी तोह ऐसी hi ड्रेस है...

सुप्रिया ने कृति की और देखा, वह भी एक छोटी सी ड्रेस पहने हुई थी. उसे ऐसी ड्रेस में देख कर सुप्रिया को थोड़ा और कॉन्फिडेंस आया.

कृति - िफ़ यू अरे रेडी... let's जो...

कृति और सुप्रिया होटल के टेरेस पर पहुंचे जहाँ ये पार्टी हो रही थी. बहार हवा तेज़ चल रही थी और सुप्रिया की ड्रेस उड़ उड़ कर उसके पैरो से हैट रही थी जिससे उसकी गोरी टाँगे सबको दिखने लगी. सभी सुप्रिया की और देख रहे थे.

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सुप्रिया कृति के हाथ पकड़ते हुए उससे फुसफुसाई - देखो.. सब मेरी और कैसे घूर रहे है...

कृति हस्ते हुए बोली - इतनी हॉट जो लग रही हो तुम... मैं लड़का होती तोह मैं भी तुम्हे hi घूरती... don't वोर्री अबाउट एनीवन... कैर्री योरसेल्फ विथ कॉन्फिडेंस.

सुप्रिया - हम्म्म...

सुप्रिया और कृति चलते हुए राहुल और आकाश के पास आ गए. राहुल भी सुप्रिया को ऊपर से नीचे तक चेक आउट कर रहा था. सुप्रिया को देख कर उसे ऐसा लग रहा था की उसका अंडरवियर हल्का सा गीला हो गया हो. कृति पास में hi कड़ी थी तोह वह उसे अचे से देख भी नहीं पा रहा था. दूसरी और आकाश की भी नज़रे बार बार सुप्रिया की टांगो पर hi जाकर रुक रही थी.

सुप्रिया - बहार यहाँ कितनी ठण्ड है न...

कृति - हाँ... सुप्रिया तुम यहीं रुको, मैं फटाफट से रूम से ऊपर कुछ कवर करने के लिए लाती हूँ....

इससे पहले सुप्रिया उसे रोकती, कृति बहुत जल्दी से वहां से निकल गयी. सुप्रिया ठण्ड में अपने हाथ अपनी बाहों पर मलने लगी अपने आप को गरम करने के लिए.

राहुल ने आकाश को बोलै - आकाश... सुप्रिया को ठण्ड लग रही है... जा ड्रिंक्स ले आ उसके लिए...

सुप्रिया - नहीं... इतस ok... मुझे नहीं चाहिए कुछ...

सुप्रिया की नज़र आस पास खड़े मर्दो पर पड़ी, जो उसके बूब्स की तरफ आखें गड़ाए हुए थे और पंत में अपने टाइट होते हुए लुंड को एडजस्ट कर रहे थे. सब के मुँह जैसे लार टपक रही हो सुप्रिया को देख कर.

सुप्रिया ने परेशां होते हुए भीड़ में विक्रम को ढूंढ़ना शुरू किया, ताकि वह उसके साथ कड़ी हो कर किसी तरह से अपनी जवानी को इन सब से छुपा ले. कृति भी तोह एक डैम से गायब हो गयी थी.

तभी माइक भी उन तीनो के पास आ गया - Hello डिअर... लुकिंग किते गॉर्जियस टुनाइट...

माइक उसके बहार निकलते हुए मम्मो की तरफ hi देख रहा था, और सुप्रिया को बिलकुल ाचा नहीं लग रहा था, पर उसने किसी तरह अपने गुस्से को सँभालते हुए कहा - थैंक यू....

राहुल - हे माइक, हाउ इस आईटी गोइंग.

माइक सुप्रिया की और देखते हुए बोलै - पार्टी वास् गोइंग बोरिंग, बूत आल ऑफ़ सुद्दीन इतस ा लोट मोरे इंटरेस्टिंग...

राहुल - लेट में गेट यू ा ड्रिंक... के आकाश...

राहुल आकाश को अपने साथ वहां से ले गया और सिर्फ सुप्रिया और माइक बहार खड़े रह गए. सुप्रिया ने समुद्र की और देखना शुरू कर दिया और माइक पीछे से उसकी गांड को निहार रहा था.

माइक भी उसके साथ आकर खड़ा हो गया - यू क्नोव योर अस्स इस अमेजिंग... ी बेट it's आल वाइट इनसाइड...

सुप्रिया ने उसे गुस्से में देखा - Don't स्टार्ट अगेन विथ में...

माइक - Ok, हाउ अबाउट ा बेट... ी गेस योर पंतय कलर एंड िफ़ इतस रॉंग... ी विल लीव यू अलोन...

सुप्रिया ने सोचा की ये उसकी पंतय का कलर कैसे बता पायेगा, और वह उसका पीछा छोड़ दे तोह एहि बेहतर होगा - Ok... फाइन...

माइक ने सुप्रिया को ऊपर से नीचे तक देखा और एक बड़ी सी स्माइल के साथ कहा - It's ब्लैक... isn't आईटी... जस्ट लिखे में...

सुप्रिया की पंतय काले hi रंग की थी पर उसने किसी तरह से अपने चेहरे पर शिकन नहीं आने दी - No, यू अरे रॉंग... नाउ लीव में अलोन...

माइक - ी क्नोव यू अरे लाइंग... यू don't सीम गुड ात आईटी...

सुप्रिया को तभी भीड़ में थोड़ा दूर विक्रम और जेम्स खड़े हुए दिखे और वह उनकी और जाने लगी.

पर माइक भी उसके साथ वहां चल पड़ा - गोइंग टुवर्ड्स विक्रम एंड जेम्स... लेट में टेक यू तेरे....

माइक ने अपना एक हाथ सुप्रिया की पीठ पर लगाया और सुप्रिया को अपने साथ लेते हुए विक्रम के पास चल दिया. उन्हें पास आते देख विक्रम और जेम्स की नज़र भी सुप्रिया पर पड़ी. एक बार के लिए तोह उन दोनों का भी मुँह खुला रह गया.

माइक हस्ते हुए उनके पास आया - लुक हु ी ब्रौघत विथ में... थे एवर ब्यूटीफुल मस. सुप्रिया...

जेम्स मुस्कुरा के बोलै - इनडीड... यंग लेडी, यू अरे ब्राइटनिंग उप थिस पार्टी...

विक्रम अपने चेहरे पर हलकी सी मुस्कराहट लाया और उसने अपना सर हाँ में हिलाया. पर उसकी नज़र माइक के हाथ पर थी जो अभी भी सुप्रिया की पीठ पर टिका हुआ था. सुप्रिया छह कर भी उसका हाथ अपनी पीठ ने नहीं हटा पा रही थी.

बीच की ठंडी हवा चलते हुए सुप्रिया के पूरे शरीर पर चुभ रही थी. सुप्रिया को ठिठुरता हुआ देखा जेम्स बोलै - यू लुक कोल्ड डिअर... दो यू नीड माय कोट तो कीप यू वार्म...

सुप्रिया - No थैंक्स... ी ऍम गुड...

माइक - लेट में वाक यू इनसाइड एंड मय्बे वे कैन गेट ा ड्रिंक टुगेदर... (माइक ने विक्रम की और देखा) इस तहत ok विथ यू मर. विक्रम....

विक्रम का गुस्सा बढ़ता जा रहा था पर वह किस तरह से माइक को रोकता - सूरे....

सुप्रिया की आँखों की बेबसी और परेशानी वह समझ रहा था. सुप्रिया उसे देखते हुए दूसरी और मुड़ी और अंदर की और जाने लगी, माइक उसके ठीक पीछे. वह इतना लम्बा छौड़ा था की सुप्रिया उसके आगे दिखाई hi नहीं दे रही थी.

सुप्रिया अंदर आ कर कड़ी हो गयी और अंदर कपल्स डांस कर रहे थे. सुप्रिया वहीँ कड़ी हो कर डांस को देखने लगी सुप्रिया ने देखा की माइक उसका पीछा hi नहीं छोड़ रहा था और वह भी उसके बराबर में hi खड़ा था.

सुप्रिया - यू साइड यू वोउल्ड लीव में िफ़ यू गेस्सेड रॉंग...

माइक - प्रोवे में रॉंग... ी थिंक ी ऍम राइट...

सुप्रिया - हाउ दो ी प्रोवे यू रॉंग?

माइक ने अपने होंठ छत्ते हुए सुप्रिया के नीचे की और देखा - बी शेविंग में तहत it's नॉट ब्लैक...

सुप्रिया भड़कते हुए बोली - व्हाट नॉनसेंस...

माइक हस्ते हुए - Ok, हाउ अबाउट ा डांस थें....

सुप्रिया कुछ नहीं बोली और माइक ने उसकी छुपी को हाँ समझते हुए उसका हाथ पकड़ लिया. माइक उसका हाथ पकडे हुए उसे डांस फ्लोर पर ले गया और उसके साथ डांस करना शुरू कर दिया.

सुप्रिया तोह उसके लिए किसी गुड़िया की तरह थी जिसे वह आराम से इधर से उधर कर पा रहा था. गाने की धुन थोड़ी सी स्लो होते hi उसने हिम्मत करते हुए अपना हाथ सुप्रिया की कमर पर रख दिया. सुप्रिया उसका हाथ अपनी कमर से हटाने की कोशिश कर रही थी पर वह उसकी उँगलियों को नहीं हटा पा रही थी.

कोई चारा न दीखते हुए सुप्रिया ने अपने नाख़ून माइक के हाथ पर गदा दिए. माइक को तोह जैसे कोई दर्द hi नहीं हुआ और उसने अपना दूसरा हाथ सुप्रिया की गांड पर रखते हुए, अपनी बड़ी बड़ी उंगलियां सुप्रिया की गांड के बीच में गदा दी.

सुप्रिया एक डैम से चिल्लाई पर उसकी आवाज़ पार्टी के शोर में डाब गयी.

माइक अपना मुँह उसके कान के पास लेट हुए बोलै - रूम 802... ी वांट तो मीट यू तेरे... नाउ...

माइक ने सुप्रिया पर अपनी पकड़ ढीली करि और उसकी और देख कर गंदे से मुस्कुराने लगा. सुप्रिया एकदम से उससे दूर हुई और अपने कमरे की तरफ चल पड़ी. माइक की इस अश्लील हरकत से उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था. वह जल्दी से अपने रूम पहुंची और रूम को लॉक कर लिया.

माइक की इतनी हिम्मत बाद गयी की उसने भरी पार्टी में उसकी गांड पर हाथ लगा दिया, सुप्रिया को बहुत गुस्सा आ रहा था. वह सोच रही थी की उसे विक्रम को ये सब बता देना चाहिए, पर उसे डर भी था की पता नहीं विक्रम कैसे रियेक्ट करेगा. शायद छुप रहना hi ठीक था, जो हुआ सो हुआ.

_____________

सुप्रिया अपने कपडे चेंज करने लगी और कुछ पल के लिए बाथरूम में गयी. वह बाथरूम में hi थी की उसके रूम के दरवाज़े पर ज़ोर ज़ोर से दस्तक होने लगी. सुप्रिया घबराते हुए बहार आयी, और सोचने लगी की कहीं माइक तोह उसके कमरे तक नहीं पहुंच गया.

पर तभी बहार से हिंदी में आवाज़ आयी, कृति की आवाज़ - सुप्रिया... तुम अंदर हो क्या...

सुप्रिया ने जल्दी से दरवाज़ा खोला और बहार कृति और आकाश परेशान खड़े थे.

कृति - सुप्रिया तुम अपना फ़ोन क्यों नहीं उठा रही थी...

सुप्रिया - क्या हुआ? तुम लोग इतना परेशान क्यों हो?

कृति - भैया और माइक की लड़ाई हो गयी नीचे और ऑफिसर्स भैया को पकड़ कर ले गए!!

सुप्रिया चौंकते हुए बोली - क्या!!!???

आकाश - हाँ... पता नहीं क्या हुआ... लोग कह रहे थे की वह आपस में बात कर रहे थे और एकदम से विक्रम ने माइक को पीटना शुरू कर दिया...

सुप्रिया - ओह गॉड! विक्रम से बात हुई क्या...

कृति - हाँ उन्होंने बस ये बोलै की देखो सुप्रिया कहाँ है... तोह हम तुम्हारे लिए परेशान थे... तुम्हे कुछ पता है क्या की क्या हुआ था...

सुप्रिया - नहीं... मुझे नहीं पता कुछ... अब क्या करेंगे?

कृति - राहुल गया है पता करने... मैं इंडिया कॉल लगाती हूँ इतने...

तभी राहुल भी वहां पंहुचा - मैंने बात की अफसर से, सब के बयां से तोह एहि लग रहा है की विक्रम ने माइक को मारा और माइक पर अपने आप को बचा रहा था. और क्यूंकि वह अमेरिकन नेशनल भी है ऑफिसर्स उसकी बात hi सुन रहे है. अब वह विक्रम जेल ले कर जा रहे है... कल यहाँ किसी लॉयर को ढून्ढ कर पूरा प्रोसेस समझना पड़ेगा...

सुप्रिया - क्या!!! विक्रम जेल में रहेंगे तब तक?

राहुल - हाँ... और क्या ऑप्शन है...

कृति - ओह गॉड, ये किस मुसीबत में फास गए यहाँ. मैं ईशा भाभी को कॉल कर रही थी पर उन्होंने उठाया नहीं... मैं और लोगो को तरय करती हूँ...

आकाश - मैं भी साहिल सर से बात करता हूँ...

कृति - पता नहीं कोई भी फ़ोन क्यों नहीं उठा रहा...

राहुल - काफी लेट नाईट है न...

कृति और आकाश फ़ोन पर लगे हुए रूम से बहार चले गए, और रूम में बस सुप्रिया और राहुल रह गए. सुप्रिया को समझ hi नहीं आ रहा था वह क्या करे. जरूर विक्रम और माइक की लड़ाई उसे hi लेकर हुई होगी. वह बहुत परेशान फील कर रही थी. सुप्रिया बुरी तरह से परेशान थी, उसको बचने के चक्कर में विक्रम जेल पहुंच गया थे.

थोड़ी देर की चुप्पी के बाद राहुल बोलै - मुझे पता है माइक तुम्हारे साथ बदतमीज़ी कर रहा था इसलिए विक्रम ने....

सुप्रिया चुप चाप नीचे की और देख रही थी, उसे काफी गिल्ट था जो कुछ हुआ उसके लिए.

राहुल - दुसरे देश के लीगल मामले काफी उलझे हुए होते है, ये इंडिया नहीं की अफसर को रिश्वत दी और बहार.

सुप्रिया - हम्म्म्म....

राहुल - पर एक और रास्ता है हम लोग के पास...

सुप्रिया - कौन सा रास्ता...

राहुल - मैंने माइक से बात की है... माइक काफी गुस्सा है जिस तरह से तुम और विक्रम उसके साथ पेश आये हो... तुम अपना ईगो ड्राप करके उसे सॉरी बोल दो और उससे केस वापस लेने की रिक्वेस्ट कर लो.

सुप्रिया - तुम पागल हो क्या... मैं क्यों उससे सॉरी बोलूंगी... उसने गलत किया जो किया...

राहुल - ी क्नोव बूत... पर शायद ये करने से मटर जल्दी सोल्वे हो जाये...

सुप्रिया - नहीं... मैं उससे सॉरी वोर्री नहीं बोलने वाली... किस बात की सॉरी.... कृति कुछ न कुछ फिगर आउट कर लेगी...

राहुल - ठीक है पर सोच लो... विक्रम को जेल में टाइम लग सकता है... 1-2 हफ्ते...

सुप्रिया - 1-2 हफ्ते???!!

राहुल - काम से काम.... और ज्यादा भी लग सकते है.... और इंडिया में विक्रम की बदनामी अलग से होगी... हो सकता है तुम्हारा नाम भी इस सब में जुड़ जाये... कृति किसी से भी बात कर ले इतनी जल्दी मटर सोल्वे नहीं होने वाला है...

सुप्रिया गहरी सोच में पद गयी, पर वह माइक का सामना तोह बिलकुल नहीं करना चाहती थी. पता नहीं राहुल को उस पर दबाव बना रहा था माइक से सॉरी बोलने के लिए - तुम जायो यहाँ से.... मुझे प्लीज अकेला छोड़ दो...

राहुल - Ok... जैसा तुम कहो... पर अगर तुम्हारा मंद चेंज होता है तोह मुझे बता देना... मैं तुम्हारे साथ चल सकता हूँ....

राहुल ये बोलकर कमरे से बहार निकल गया और सुप्रिया बीएड पर बैठी उसकी बातों के बारे में सोचती रही. थोड़ी hi देर बाद कृति रूम में अंदर आयी.

कृति - सहित यार... ईशा भाभी वास् सो माध ात में एंड भैया...

सुप्रिया - हो गयी उनसे बात... क्या बोल रही थी वह....

कृति - जाने दो.... पर अभी फिलहाल आज रात तोह हम कुछ फिगर आउट नहीं कर पाएंगे...

सुप्रिया ने कृति की तरफ देखा, ऐसा लग रहा था की जैसे वह अभी थोड़ी देर पहले hi रोई हो. सुप्रिया ने उसका हाथ पकड़ते हुए उसे अपने साथ बिठाया. दोनों एक दुसरे को हुग करके रोने लगे. उन दोनों को hi समझ नहीं आ रहा था की आगे क्या होगा.

कृति - पता नहीं हम क्या करेंगे अब... हमारी तोह फ्लाइट्स भी है कल रात की...

सुप्रिया - Don't वोर्री.... सब ठीक हो जायेगा... तुम थोड़ी देर आराम करो अपने रूम में जाकर...

कृति - ऐसे में तोह कहाँ नींद आएगी यार...

सुप्रिया - सुबह के लिए एनर्जी चाहिए गई न... तुम जाकर रेस्ट करो प्लीज...

कृति - ठीक है... पता नहीं नींद आएगी या नहीं पर मैं मैं सुबह होते hi यहाँ के लॉयर्स से बात करती हूँ..

कृति सुरपिया को हुग करके रूम से चली गयी. सुप्रिया रूम में बिलकुल अकेली बहार की तरफ देख रही थी. उसके मैं में कई ख्याल चल रहे थे. कितनी बार तोह विक्रम ने उसकी मदद करि थी, और आज भी वह उसके लिए hi तोह माइक से भीड़ गया था. और अब वह जेल में था. कृति की बातों से उसकी बीवी ईशा भी इस सब से काफी गुस्सा सी लग रही थी. अगर माइक से माफ़ी मांगने से विक्रम बहार आ जाता है, तोह शायद उसे ऐसा कर hi लेना चाहिए.

पर अगर वहां जाकर कुछ ऐसा वैसा हो गया तोह, और माइक ने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की तोह? सुप्रिया अपना मैं नहीं बना पा रही थी. और उसे सोचते सोचते 1 घंटा हो चूका था. आखिर उसने अपना मैं बनाया और अपने रूम से माइक के रूम 802 की तरफ चल पड़ी.

सुप्रिया ने लिफ्ट पकड़ी और 8तह फ्लोर पर पहुंच कर 802 के सामने पहुंची. वह थोड़ा सा हिचकिचाई और फिर दरवाज़े पर नॉक किया. कुछ देर तक अंदर से कोई आवाज़ नहीं आयी, सुप्रिया ने सोचा की क्या पता माइक सो गया हो. वह वापस जाने hi वाली थी की रूम का दरवाज़ा खुला.

माइक के चेहरे पर ज़रा भी मुस्कान नहीं थी - यू... व्हाट दो यू वांट?

सुप्रिया - हे माइक... उम्म्म्म.... ी वांटेड तो टॉक अबाउट व्हाट हप्पेनेड बिटवीन यू एंड विक्रम....

माइक - हम्म्म... के इनसाइड...

माइक दरवाज़ा खुला छोड़ कर अंदर चला गया और सुप्रिया कुछ पल सोचने के बाद कमरे के अंदर घुस गयी. माइक अंदर जाकर बीएड पर बैठ गया था और सुप्रिया बीएड के दूसरी और जाकर कड़ी हो गयी. सुप्रिया उससे आँखें नहीं मिला पा रही थी.

माइक - व्हाट दो यू वांट तो से?

सुप्रिया - विक्रम... व्हाट हप्पेनेड बिटवीन यू तवो?

माइक - विक्रम... he's योर बॉयफ्रेंड इस हे?

सुप्रिया - No... नथिंग लिखे तहत... वे अरे जस्ट कलगुएस...

माइक - Ok... थें योर कलेग हिट में... हे वास् एंग्री विथ में एंड हे हिट में... हे सीमेड वैरी पोस्सेस्सिवे ऑफ़ यू...

सुप्रिया उससे बोलना चाहती थी की तू पिटाई के लायक hi था, पर अभी वह और लड़ाई मोल नहीं लेना चाहती थी - लुक, ी ऍम सॉरी फॉर व्हाट हप्पेनेड... कैन यू प्लीज....

माइक - ड्राप थे केस? No वे...

सुप्रिया - प्लीज ी अपोलॉगीज़े....

माइक की आँखों में सुप्रिया को गिड़गिड़ाते देख एक चमक सी आ गयी - हम्म.... व्हाट दो ी गेट इन रेतुर्न....

सुप्रिया का मुँह लटका हुआ था - हम्म्म.... ी don't क्नोव....

माइक - ी विल बे स्ट्राइटफॉरवर्ड.... यू अरे वैरी सेक्सी, एंड ी वांट तो स्पेंड थे नाईट विथ यू...

सुप्रिया ने घबराते हुए उसकी और देखा - No, ी ऍम नॉट दोंग तहत...

माइक खीजते हुआ बोलै - लुक, ी ऍम नॉट गोइंग तो बार्गेन विथ यू.... एंड don't बे सकारेद... ी ऍम नॉट गोइंग तो सडनली ग्रैब यू हेरे... सो, यू ऑफर में समथिंग इन रेतुर्न एंड िफ़ वे एग्री, ी विल ड्राप थे केस...

सुप्रिया सोच में पद गयी, वह क्या बोले माइक को. उसने हिम्मत करते हुए कहा - हाउ अबाउट फ्रॉम आवर डील एअरलिएर... ी शो यू माय.... पंतय... जस्ट शो... no टच...

माइक - नहहह.... नॉट एनफ... हे हिट में ा लोट यू क्नोव...

सुप्रिया के चेहरे की परेशानी साफ़ झलक रही थी - हम्म्म.... व्हाट ेल्स कैन ी ऑफर...

माइक ने अपने लुंड की तरफ देखते हुए कहा - यू क्नोव ी ऍम रियली स्ट्रेस्ड आउट राइट नाउ एंड ी कुड रियली उसे ा माउथ ों आईटी....

सुप्रिया उसका इशारा समझ गयी - No.... ी can't दो तहत...

माइक - यू से no ा लोट... that's माय फाइनल ऑफर... और ेल्स यू कैन लीव... लिखे ी साइड ी ऍम नॉट गोइंग तो फाॅर्स माइसेल्फ ों यू....

सुप्रिया का दिल बैठा जा रहा था, माइक उसके पास कोई और ऑप्शन नहीं छोड़ रहा था, पता नहीं वह क्या करे.

माइक हस्ते हुए बोलै - यू क्नोव... यू मिगहत जस्ट लिखे आईटी... ी ऍम वैरी गुड ात आईटी... व्हाट दो यू से...

सुप्रिया ने हलके से हाँ में सर हिलाया जिससे माइक के चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल आ गयी.

सुप्रिया - बूत नथिंग ेल्स बेसिडेस तहत... यू won't टच में एनीवेयर ेल्स... एंड ओनली ओने टाइम टिल यू ेजकुलाते...

माइक - ी प्रॉमिस... ी won't टच यू एनीवेयर ेल्स एक्सेप्ट योर फेस एंड हेयर्स... एंड माउथ ओफ़्कौर्से... एंड हैंड्स तो होल्ड माय डिक...

सुप्रिया - एंड वन्स यू अरे दोने, यू विल गेट विक्रम आउट इम्मेडिएटली...

माइक - ओफ़्कौर्से... डील?

सुप्रिया ने उसकी और देखते हुए हलके से सर हिलाया.

माइक - यू हैवे तो से आईटी.... डील?

सुप्रिया ने हलके से कहा - डील....

माइक एक डैम से एक्ससिटेड होता हुआ अपने कपडे उतारने लगा. सुप्रिया कोशिश कर रही थी की वह उस और न देखे पर उसकी नज़रे बार बार माइक की पंत की तरफ जा रही थी. माइक ने अपने शॉर्ट्स और अंडरवियर उतार के फेके और अंदर से एक बड़ा मोटा कला लुंड बहार निकला. माइक का लुंड देखते hi सुप्रिया की आँखें फटी की फटी रह गयी और उसके मुँह से एक बड़ी सी हाफन निकल गयी.

माइक ने अपना काला लुंड मसलते हुए कहा - दो यू लिखे व्हाट यू सी.... ी ऍम सूरे यू हैवे नेवर सीन समथिंग बिग्गेर थान थिस इन रियल...

सुप्रिया की सांस ऊपर नीचे हो रही उसका लुंड देख कर. विक्रम का लुंड मोटा था पर इसके जितना लम्बा नहीं, राहुल का लुंड विक्रम के लुंड से थोड़ा सा लम्बा था पर पतला था, और अतुल का लुंड तोह कहीं दूर दूर तक इसके जैसा नहीं था. उसने एक बार दूर से इक़बाल का लुंड देखा था, जब वह करुणा की चुदाई कर रहा था, और शायद उसका लुंड लम्बा और मोटा दोनों था. सुप्रिया ने ये वाहियात ख्याल अपने दिमाग से निकले, पता नहीं वह क्यों इस काले के लुंड को बाकी लोगो के लुंड से कपड़े कर रही थी.

माइक - हे.... के ों हेरे.... यू सीम लॉस्ट... हाहाहा...

सुप्रिया उसके लुंड के तरफ देखते हुए बोली - प्रॉमिस में यू won't टच में एनीवेयर ेल्स...

माइक ने आराम से कहा - प्रॉमिस... ी जस्ट नीड योर हेड एंड हैंड्स, that's आईटी...

सुप्रिया का मुँह बुरी तरह बना हुआ था - कैन यू प्लीज वियर ा कंडोम िफ़ यू हैवे ओने...

माइक - नाह... तहत wasn't part ऑफ़ आवर डील... ी वांट तो फील योर टंग ों माय डिक... एंड स्माइल िफ़ यू कैन, आईटी विल मेक आईटी मोरे एन्जॉयबले...

सुप्रिया धीरे धीरे चलते हुए माइक के पास आकर बैठ गयी. उसने एक पल के लिए आँखें बंद की और उसे बस विक्रम का चेहरा hi अपनी बंद आँखों के सामने दिखाई दिया. वह जो भी करने जा रही थी बस विक्रम के लिए hi था, उसने अपने आप को समझाया. सुप्रिया ने अपनी कलाई से एक हेयर बंद उतरा और अपने बाल ऊपर की और बाँध लिए.

माइक बीएड से ऊपर खड़ा हो गया और अपना बड़ा सा लटका हुआ लुंड सुप्रिया के ठीक सामने ले आया. सुप्रिया ने उसे अपनी आँखों से नपा, ये तोह शायद उसके चेहरे से भी बड़ा था. उफ्फ्फ... वह कैसे लेगी इसे अपने मुँह में.

सुप्रिया बीएड पर बैठी हुई थी और वह अपनी बड़ी बड़ी आँखों से माइक की तरफ ऊपर देखने लगी. माइक उसके मासूम से चेहरे की और देख रहा था, और आगे जो होगा उसके बारे में सोचते hi माइक का लुंड टाइट होता जा रहा था.

माइक ने हलके से सुप्रिया के सिल्की बालो को सहलाया - Ok गॉर्जियस... ी वांट यू तो पूत योर हैंड्स ों माय डिक एंड स्टार्ट स्ट्रोकिंग आईटी... यू हैवे दोने तहत बिफोर राइट... व्हाट ी ऍम सयिंग, ओफ़्कौर्से यू हैवे, यू हैवे सुच ा फुकाबले फेस...

सुप्रिया ने हलके से हाँ में सर हिलाया और अपने हाथ धीरे से माइक के लुंड पर रख दिए.

जैसे hi सुप्रिया के हाथ माइक के लुंड पर पड़े उसने आनंद में अपना मुँह ऊपर कर लिया - ओह्ह्ह्हह.... फ़क.... यू हैवे रियली सॉफ्ट हैंड्स.... परफेक्ट फॉर होल्डिंग ा हार्ड रफ़ डिक लिखे माइन...

माइक का लुंड इतना मोटा था का सुप्रिया का छोटा सा हाथ उसके लुंड को पूरी तरह नहीं पकड़ पा रहा था. उसका हाथ बस आधे लुंड को नीचे से पकड़ा रह गया.

माइक - यू मई वांट तो उसे तवो हैंड्स... एंड स्टार्ट रोब्बिंग आईटी...

सुप्रिया ने अपना दूसरा हाथ भी माइक के लुंड पर रखा और अब वह उसके लुंड को पकड़ पा रही थी. सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था वह कहाँ देखे, वह इस भयानक से लुंड की और देखना नहीं चाहती थी और ऊपर माइक की आँखों में तोह बिलकुल नहीं. उसने अपनी आँखें हलकी सी बंद की और अपने हाथ माइक के लुंड पर चलने शुरू करे.

माइक का लुंड काफी चिकना हो रखा था और कुछ hi देर में सुप्रिया के हाथ अपने आप hi गति पकड़ते गए. उसे ऐसा लग रहा था की जैसे वह की जानवर के लुंड को सेहला रही हो.

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सुप्रिया ने अपनी आखें बंद राखी, और उसे बस माइक की हलकी हलकी ाँहें सुनाई दे रही थी.

माइक - अह्ह्ह.... ऊह्ह्हह्ह.... यू अरे ा नेचुरल ात थिस....

माइक ने अभी भी अपना हाथ सुप्रिया के सर पर रखा हुआ था और वह वहां हल्का हल्का प्रेशर दाल रहा था. सुप्रिया माइक का लुंड मसलते हुए उसके लुंड पर तानी हुई नसों को महसूस कर पा रही थी. साथ hi माइक का लुंड आगे से थोड़ा चिप चिप होना शुरू हो गया था जो सुप्रिया के मसलने से उसकी हथेली पर लग गया.

सुप्रिया ने गीलापन महसूस करते hi अपने हाथ पीछे खींचने की कोशिश करि. उसका ऐसा करते hi माइक ने उसके सर पर और प्रेशर डाला और सुप्रिया ने आखें खोल कर ऊपर देखा.

माइक - यू तू ऑफ योर हैंड्स तू सून... that's ा पेनल्टी इन माय बुक...

सुप्रिया - ी फेल्ट समथिंग वेट... एंड ी थॉट यू वेरे दोने...

माइक - दोने सो सून... no वे... नॉट विथ यू... थिस इस जस्ट माय प्रे छुम…. नाउ लीक थे विटनेस ात थे टिप ऑफ़ माय डिक...

सुप्रिया - व्हाट???

माइक ने सुप्रिया का सर थोड़ा और नीचे पुश किया जिससे सुप्रिया को दर्द होना शुरू हो गया. माइक ने अपना एक हाथ सुप्रिया के होंठों पर फेरया और उन्हें हलके से दबाया.

माइक - क्विकली.. ब्रिंग योर टंग आउट और ी विल पुल्ल आईटी आउट....

माइक सुप्रिया के होंठों से थोड़ा और रफ़ तरीके से छू रहा था. माइक ने अपना लुंड सुप्रिया के होंठों और नाक पर लगाया. सारा गीला पदार्थ उसके चेहरे से चिपकने लगा. सुप्रिया नहीं चाहती थी की वह उसके मुँह में दाल कर उसकी जीब बहार निकले तोह उसने आखिर अपनी जीब बहार hi निकल दी.

जीब निकलते hi माइक ने अपना गीला लुंड उसकी जीब पर लगाना शुरू किया. माइक का प्रे छुम सुप्रिया के जीब से लगता हुआ उसके मुँह में जा रहा था, उसे बहुत गन्दा लग रहा था पर वह इस समय बिलकुल बेबस थी.

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माइक - अह्ह्ह्ह.... उउउउउउउ.... नाउ स्टार्ट लिकिंग आल ऑफ़ माय डिक... स्ट्रेच आउट योर टंग...

सुप्रिया - प्लीज... कैन यू लेट माय हेड जो...

माइक - No... it's माइन फॉर नाउ... लीक आईटी प्रॉपरलय एंड ी विल लूसेन माय गृप.. एंड लिखे ी साइड बिफोर... थे मोरे यू एन्जॉय आईटी... थे सूनर आईटी विल फील ओवर...

सुप्रिया के सर पर माइक का काफी दबाव बन रहा था. सुप्रिया ने आखिर अपनी जीब थोड़ी सी और बहार निकली और माइक के लुंड की टोपी पर फेरनी शुरू करि. माइक का लुंड उसकी जीब से छूटे hi खुद hi थिरक सा रहा था. उसने अपना लुंड सुप्रिया के गालो पर हलके से मारा.

माइक - मममममम.... व्हाट ा ब्यूटीफुल टंग यू हैवे... नाउ लीक आल ऑफ़ माय डिक...

माइक ने सुप्रिया के सर का अपना दबाव काम किया और सुप्रिया अब माइक का लुंड अचे से चाटने लगी. जो होना था वह तोह हो गया था, और अब थोड़ा काम चाटने से वह सटी सावित्री नहीं बनने वाली थी.

माइक सुप्रिया की जीब को अपने आप चलते देख एक्ससिटेड होता जा रहा था - यस... यस... जस्ट लिखे तहत... यू मेक ा गुड सलूट.... लीक आल थे वे डाउन तो माय बॉल्स....

माइक ने अपनी उंगलियां सुप्रिया के बालों में लपेटी और उसका मुँह नीचे करते हुए अपने तत्तो तक ले गया. अब कल रात hi तोह सुप्रिया ने विक्रम के टट्टे पहली बार चूसे थे और अब माइक के बड़े बड़े अंडे उसके होंठों में थे.

माइक सुप्रिया के चेहरे को अपने लुंड के नीचे पूरे डैम से धकेल रहा था. सुप्रिया का मुँह इतना नीचे हो गया था की उसे माइक की गांड का छेड़ भी दिख रहा था. उसने अपनी आखें बंद कर ली.

माइक ने सुप्रिया के बालों को ज़ोर से खींचा - यू गोत तो पूत मोरे एफर्ट... सूचक थम ड्राई....

दर्द से सुप्रिया का मुँह और भी खुल गया और माइक का एक पूरा टाटा उसके मुँह को छौड़ा करता हुए उसके मुँह के अंदर आ गया. कुछ देर ऐसे hi माइक सुप्रिया के बाल पकडे हुए अपने बॉल्स को उसके मुँह पर घिसता रहा.

सुप्रिया अपने होश खोटी जा रही थी, और बस अब जो हो रहा था उसके साथ वह हो रहा था.

थोड़ी देर बाद माइक ने सुप्रिया का चेहरा ऊपर खींचा - टाइम फॉर थे मैं कोर्स... मीट इन योर माउथ...

माइक ने सुप्रिया के सर को पीछे से पकड़ा और अपना लुंड उसके मुँह में घुसना शुरू किया. सुप्रिया की आँखें बड़ी होती जा रही थी, ये लुंड उसके मुँह में नहीं आने वाला था पर माइक रुक hi नहीं रहा था.

माइक - के ों... यू कैन टेक मोरे इनसाइड...

माइक ने एक दो ज़ोर के झटके मारे, और लुंड को सुप्रिया के मुँह में और घुसा दिया. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की जैसे लुंड उसकी जीब को पार करके उसके गले तक पहुंच गया हो. उसे सांस hi नहीं आ रही थी, और आँखें ऊपर की और छड़ी जा रही थी.

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पर माइक तोह जैसे लुंड को पूरा अंदर पहुंचना चाहता था. आखिर वह कैसे इस सौदे को हलके में छोड़ देता.

अपनी फाॅर्स बढ़ाने के लिए उसने सुप्रिया के बाल पकड़ते हुए उसे बीएड पर पेट के बल लिटाया और फिर एक टांग बीएड पर रख कर फिर से अपना लुंड सुप्रिया के मुँह में दाल दिया. उसका एक हाथ सुप्रिया के सर पर था और दूसरा उसके गले पर. अब उसे वह सहारा मिल रहा था जो उसे सुप्रिया के मुँह को छोड़ने के लिए चाहिए था.

माइक उसके मुँह में अपना लुंड घुसते हुए आवाज़ें निकलने लगा - अह्ह्ह हहहहह हहह अह्ह्ह... बीच...

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माइक ने देखा की सुप्रिया की हालत ख़राब होती जा रही थी और उसे ऐसे एक तरफ़ा सब करने में मज़ा भी नहीं आ रहा था. उसने अपना लुंड बहार निकला और सुप्रिया अपने गले को पकड़ते हुए बीएड पर लेट गयी.

माइक - फ़क... के ों... एन्जॉय ा बिट... ी विश योर फ्रेंड वास् आल्सो हेरे... ी हर्ड शी गावे गुड हेड तो डनण्य....

सुप्रिया ने एकदम से चौंकते हुए माइक की तरफ देखा, उसके गले से किसी तरह आवाज़ निकली - हु??? कृति???

माइक - येह... हु ेल्स.... नाउ के ों... लेट में सी यू सूचक आईटी.... ोथेरविसे ी विल नीड तो राम आईटी डाउन योर थ्रोट अगेन...

सुप्रिया फिर से अपना वह हाल नहीं चाहती थी और इस बार उसने hi माइक लुंड पकड़ते हुए अपने मुँह में लेना शुरू कर दिया. इस तरह से काम से काम वह उसके मुँह में ज्यादा अंदर तोह नहीं जा रहा था. सुप्रिया ने उसे तेज़ तेज़ से घिसना शुरू कर दिया ताकि जितना जल्दी हो सके माइक झाड़ जाए, पर उसने तोह जैसे कोई ताकत वाली जड़ी बूटी खायी हुई थी की झड़ने का नाम hi नहीं ले रहा था.

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माइक खड़ा हुआ अब थोड़ा एन्जॉय करने लगा था, काम से काम सुप्रिया कुछ तोह कर रही थी. सुप्रिया का एक हाथ माइक के मोठे लुंड पर था और वह माइक की और देखते हुए उसे अछि तरह से चूस रही थी.

माइक - यस... यस... जस्ट लिखे तहत... आईटी सिम्स लिखे ी ऍम ट्रेनिंग यू वेल तो बे ा सलूट...

सुप्रिया बस चुप चाप उसके लुंड को तेज़ी से चूसे जा रही थी..

माइक - यू सूरे यू don't वांट में तो रेतुर्न यू थे फवौर.... ी हैवे ा बिग टंग...

सुप्रिया ने ना में सर हिलाया - No… वे मेड ा डील…

माइक - ी वास् जस्ट ट्राइंग तो रेतुर्न यू थे फेवर बूत व्हाटएवर यू लिखे.

माइक भी अब फिर से पूरे जोश में आ गया था, उसे लगने लगा था की वह अब किसी भी पल उसका माल बहार आ सकता था. उन्हें ये खेल खेलते हुए आधा घंटा हो चूका था. वह सब कुछ हो जाने से पहले पूरे मजे लेना चाहता था.

माइक ने एक बार फिर से सुप्रिया के बाल पकडे और अपनी स्पीड तेज़ करते हुए उसके मुँह को अचे से छोड़ने लगा.

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माइक - फ़क... टेक आईटी इन... एस..... ममममम....

सुप्रिया ने अपने हाथ माइक की टांगो पर रखे ताकि वह उसके मुँह के और अंदर न जा पाए और उसे कुछ सहारा भी मिल जाये. उसे माइक की स्पीड देख कर समझ आ गया था की उसका बस होने hi वाला था.

माइक ने पूरी गति बड़ा दी और बहुत तेज़ी से सुप्रिया के मुँह में अपना लुंड अंदर बहार करने लगा.

माइक - अह्ह्ह.... फुककक... ऑलमोस्ट तेरे.....

माइक का सफ़ेद पानी एक तेज़ बौछार बन कर सुप्रिया के मुँह के अंदर निकला, सुप्रिया ने एक डैम से माइक का लुंड अपने मुँह से निकाल दिया तोह बाकी सारा पानी उसके चेहरे पर निकलने लगा.

माइक - Yes.....mmmmm.... यू हैवे ड्राईनेद उप में....

सुप्रिया ने एक डैम से दूसरी और अपना मुँह किया और अंदर गए माल को बहार उगल दिया. उसके होंठ और चेहरा बुरी तरह सफ़ेद चिप चिप से साणे हुए थे.

इतने गन्दी हालत में वह अपनी आवाज़ नहीं निकलना चाहती थी पर ये बहुत ज़रूरी था - वे अरे दोने माइक... स्टॉप.... कॉल थे ऑफिसर्स एंड गेट विक्रम आउट...

माइक ने सुप्रिया की और देखा, और उसके बाल छोड़ते हुए मुस्कुराया - ा डील इस ा डील.... ी विल मेक थे कॉल... थिस वास् ओने ऑफ़ थे बेस्ट ब्लोवजॉब्स फॉर में एवर… योर माउथ इस जस्ट अमेज़िंगली सॉफ्ट…

सुप्रिया के मुँह से एकदम से निकल गया - थैंक्स….

माइक - ः… सी… इवन यू लिखे तो बे प्राइज़्ड फॉर गुड वर्क… तेल्ल में नाउ, वास् ी राइट अबाउट योर पंतय कलर एअरलिएर?

सुप्रिया ने आँखें झुका ली और हलके से कहा - यस… यू वेरे राइट…

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कुछ hi देर बाद सुप्रिया बुरी हालत में झूलते हुए अपने कमरे तक पहुंची. उसे डर था की कहीं माइक अपनी बात का पक्का न निकला तोह गड़बड़ हो जाएगी, पर माइक ने तभी उसके सामने hi कॉल कर दिया था.

सुप्रिया का मुँह बहुत बुरी तरह दर्द कर रहा था और वह बस अब थोड़ी नींद चाहती थी. उसने माइक के रूम के बाथरूम में चाहे अपना मुँह कितना भी साफ़ कर लिया हो, उसे ऐसा hi लग रहा था की जैसे वह हमेशा के लिए गन्दा हो गया हो.

कमरे में पहुंचते hi सुप्रिया बीएड पर गिर का सो गयी. उसे काम से काम ये सुकून था की विक्रम बस अब कुछ hi देर में वापस आ जायेंगे.

सुप्रिया को तोह ऐसा hi लगा था की कुछ पल बीते हो, और उसके कमरे पर ज़ोर ज़ोर से दस्तक होने लगी. पर करीब 4-5 घंटे बीत चुके थे उसे रूम में वापस आये हुए.

सुप्रिया का सर बुरी तरह झन्ना रहा था और उसने किसी तरह से उठ कर दरवाज़ा खोला. उसके आँखों के सामने अभी भी सब कुछ धुंदला सा hi था पर ऐसा लगा की सामने कृति काफी खुश कड़ी थी.

कृति - सुप्रिया... भैया को रिलीज़ कर दिया... वह बस अभी पहुंचे अपने रूम में...

सुप्रिया की नींद एक डैम से उड़ गयी, और उसने अनजान बनते हुए कहा - ओह!! ये कैसे हुआ....

कृति - पता नहीं एक्साक्ट्ली, पर राहुल ने जाकर माइक से काफी रिक्वेस्ट करि और वह किसी तरह मान गया कंप्लेंट वापस लेने के लिए...

सुप्रिया एक डैम चौंकी - क्या??!!!!

कृति - हाँ... मैं भी काफी सुरप्रीसेड थी... पर चलो अब भैया राहुल के बारे में इतना नेगेटिव नहीं सोचेंगे... क्या हुआ, तुम सो गयी थी क्या? मुझे तोह रात भर नींद hi नहीं आयी...

सुप्रिया - हाँ वह थोड़ी सी आँख लग गयी थी...

कृति - तुम जाकर मिल लो भैया से... वह शायद तुम्हारा hi वेट कर रहे है...

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया और विक्रम के कमरे की और चल पड़ी. उसका दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था. विक्रम ने अगर सब कुछ भांप लिया तोह? और ये राहुल ने पता नहीं कैसे इस सब का पूरा क्रेडिट ले लिया. सुप्रिया को hi पता था की उसे क्या करना पड़ा था रात को विक्रम को छुड़ाने के लिए.

रूम का दरवाज़ा हल्का सा खुला हुआ था और सुप्रिया अंदर घुसी तोह विक्रम किसी से फ़ोन पर बात कर रहा था.

विक्रम - ईशा... it's आल फाइन... मैंने बताया न.... मिसुन्दरस्टण्डींग हो गयी थी कृति को... वह कुछ ज्यादा hi पैनिक कर गयी....

विक्रम ने सुप्रिया की और एक नज़र से देखा और उसे 5 मिनट रुकने का इशारा किया.

विक्रम - यस... पापा को क्यों बतायोगी... इसमें कुछ बताने लायक hi नहीं है... मैं आज रात तक घर पहुंच जायूँगा, फिर डिसकस करते है... हाँ...

विक्रम ने फ़ोन म्यूट करके सुप्रिया की तरफ मुस्कुरा के देखा - जस्ट गिव में 2 मोरे मिनट्स... ी क्नोव तुम कितनी टेंशन में थी... बूत don't थिंक की इस सब में तुम्हारा कोई फाल्ट था... अगर कोई तुम्हारा तरफ आँख भी उठाएगा न, तोह मैं उसका एहि हाल करूँगा...

विक्रम फ़ोन को उन्मुते करके एक बार फिर से फ़ोन पर लग गया. सुप्रिया ने विक्रम का मुस्कुराता हुआ चेहरा देखा, जो कुछ हुआ शायद उसे उसका अंदेशा भी नहीं था. पता नहीं वह उसके सामने किस तरह से नार्मल रहेगी. पर उसे किसी भी तरह से स्ट्रांग रहना था और विक्रम को इस बारे में कभी नहीं पता लगने देना था.

सुप्रिया ने भी विक्रम की और मुस्कुरा के देखा और बीएड पर बैठते हुए उसकी कॉल ख़तम होने का इंतज़ार करने लगी.
 
अपडेट 67

सुप्रिया सुबह अपने घर पर ब्रश कर रही थी. उसे घर वापस आये हुए एक हफ्ता हो चूका था.

थाईलैंड में सब लोगो ने रहत की सांस ली थी जब विक्रम वापस आ गए थे, और कोई भी वहां एक पल भी नहीं रुकना चाहता था. किसी को भी नहीं पता था की सुप्रिया को क्या क्या करना पड़ा था विक्रम के लिए. सब लोग राहुल की पीठ hi थोक रहे थे, और राहुल खुद अपनी hi तारीफ करने में लगा हुआ था. ये देख कर सुप्रिया का खून तोह खौल रहा था पर छुप रहने में hi उसकी भलाई थी.

ब्रश करते हुए सुप्रिया आईने में अपने मुँह को अचे से देख रही थी की जैसे उस पर हमेशा के लिए कोई कालिख लग गयी हो माइक के लुंड से. वह तब से अब तक न तोह अचे से न खाना खा पायी थी और न पानी पे पायी थी. जब भी वह कुछ निगलती उसे ऐसा लगता है वह माइक का झाग निगल रही हो. चीटी, सोचते hi उसे गन्दा सा लगने लगता. माइक ने अपना काफी सारा माल उसके मुँह के अंदर निकाल दिया था, और वह उसके मुँह के हर कोने में भी चला गया था.

विक्रम ने जब भी उसके साथ ओरल सेक्स किया था, उसके पास इतना कण्ट्रोल था की वह कुछ निकलने से पहले अपना लुंड बहार निकाल देता था. सुप्रिया ने आईने में देखते हुए अपना मुँह खोला और गन्दी सी शकल बनायीं. उसके मैं में ब्रह्म सा बैठ गया था की माइक ने उसके मुँह को थोड़ा चौड़ा कर दिया था. अब उसे कौन समझाता का की मुँह कोई ऐसे hi चौड़ा नहीं हो जाता.

सुप्रिया और अतुल ऑफिस के लिए तैयार हुए और अपने अपने रास्ते निकल गए. दोनों के बीच की बातचीत काफी काम हो गयी थी और कुछ समय से तोह दोनों अलग अलग कमरे में भी सोने लग गए थे. सुप्रिया शायद अतुल के बारे में सोचना बहुत महीनो से बंद कर चुकी थी और अब वह किसी तरह से बस एक छत के नीचे रह रहे थे.

सुप्रिया ऑफिस पहुंच कर काम कर रही थी. ऑफिस का माहौल भी थोड़ा शांत सा था. जो कुछ हुआ उसके बाद उस वाला क्लाइंट तोह उनके साथ और बिज़नेस नहीं करने वाला था, और नयी क्लाइंट्स भी इतनी आसानी से नहीं मिल रहे थे.

सुप्रिया अपना लंच करके अपने डेस्क पर वापस आयी hi थी की उसके फ़ोन पर करुणा का फ़ोन कॉल आने लगा.

सुप्रिया ने मैं hi मैं सोचा की अब क्या हो गया और फ़ोन उठाया - हाँ बोल करुणा, क्या हुआ?

करुणा - दीदी!! आपके घर के बहार कोई लेडीज कड़ी है... और बार बार घंटी बजा रही है...

सुप्रिया - लेडीज!! कौन लेडीज??

करुणा - पता नहीं दीदी... अपना सामान ले कर कड़ी है... आज कोई आने वाला था क्या?

सुप्रिया - नहीं तोह... तू दरवाज़ा खोल कर पूछ ले न... क्या पता गलत घर पर आयी हो...

करुणा - मैं दरवाज़ा नहीं खोल रही... आप समझा करो...

सुप्रिया - क्या समझू...

करुणा - ारी.. मैं और इक़बाल...

सुप्रिया समझ गयी करुणा क्या बोल रही थी - टछहः... ओफ्फो!! तोह मैं क्या करू अब?

करुणा - उसने चार घंटी बजा दी, और शायद उसे अंदाज़ा हो गया है की अंदर कोई है...

तभी सुप्रिया के फ़ोन पर एक दूसरा कॉल आने लगा, जिसे देख कर वह और भी चौंक गयी, आरती भाभी का कॉल. भाभी तोह कभी इस टाइम कॉल करती नहीं थी, उनका फिक्स था शाम को या वीकेंड पर बात करने का. जरूर घर पर कोई सीरियस बात हुई होगी.

सुप्रिया - तू रुक ज़रा, मैं करती हूँ 2 मं में...

करुणा - ारी दीदी सुनो न...

सुप्रिया ने उसका फ़ोन काटते हुए भाभी का फ़ोन उठाया - Hello भाभी... सब ठीक है न?

दूसरी तरफ से भाभी की गुस्से में आवाज़ आयी - ख़ाक ठीक है... बार बार तुम्हारे घर की घंटी बजा रहे है, और तुम हो की दरवाज़ा hi नहीं खोल रही हो... 609 तुम्हारा hi फ्लैट नंबर है न...

ये सुन कर तोह सुप्रिया की तोह जान hi निकल गयी और वह ऑलमोस्ट अपनी सीट सी गिर पड़ी. उसके मुँह से एकदम से निकला - भाभी... आप हो बहार!!??

भाभी ने खीज के कहा - हाँ वही तोह बोलै मैंने....

सुप्रिया - पर आप बिना बताये कैसे आ गए....

भाभी - अब तुमसे पूछ कर तुम्हारे घर आएंगे क्या... दरवाज़ा खोलो तोह सब बताती हूँ...

सुप्रिया - भाभी, पर मैं तोह ऑफिस में हूँ, आपको पता है न की मैं जॉब करती हूँ...

भाभी - पर आज तोह शुक्रवार है न... आज भी काम करते हो... हम तोह इसीलिए आज के दिन आये थे.... और वैसे अगर तुम ऑफिस में हो तोह तुमने ये क्यों कहा की - आप हो बहार... मुझे तोह घर के अंदर से किसी की आवाज़ सुनाई दी है...

सुप्रिया - भाभी वह... आप अकेले हो या भैया भी है साथ में...

भाभी - सब कुछ फ़ोन पर hi पूछ लोगी... अकेले आये है इतनी दूर और इतनी देर से बहार खड़े है... अतुल जी है क्या अंदर.... मैं उन्हें फ़ोन लागयु क्या?

सुप्रिया - नहीं नहीं... वह भी ऑफिस में है... बस कामवाली hi होगी अंदर...

भाभी - तोह फिर उसे बोलो की ये दरवाज़ा खोले जल्दी से... बहुत गुस्सा आ रहा है हमें... और एक मिनट भी खड़े रहे न तोह दरवाज़ा hi तोड़ देंगे...

सुप्रिया को समझ hi नहीं आ रहा था की कैसी अजीब सी सिचुएशन में फास गयी थी वह. एक तरफ भाभी उसके घर पहली बार आयी थी और उसे खुश होना चाहिए था, पर दूसरी और अभी घर के अंदर इक़बाल और करुणा थे, और उन्हें वहां देख भाभी क्या सोचेंगी. पर उन्हें इतने गुस्से में देख बहार खड़े रखना भी ठीक नहीं था. वह अभी घर जाना भी शुरू करेगी तोह उसे 45 मिनट लग जायेंगे.

सुप्रिया - आप रुकिए, मैं दरवाज़ा खुलवाती हूँ... और मैं आ रही हूँ घर... आप इतने अपना गुस्सा शांत करना, फिर बैठ कर बातें करते है...

सुप्रिया ने जल्दी से करुणा को वापस कॉल लगाया - करुणा... तुम दोनों ने कपडे पेहेन लिए?

करुणा - नहीं दीदी... इक़बाल ने पेहेन लिए... मैंने नहीं...

सुप्रिया का गुस्सा उसकी लिमिट पार कर गया, उसने अपना माथा hi पीट लिया - ारी... तुरंत कपडे पहनो और दरवाज़ा खोलो... जो बहार कड़ी है वह मेरी भाभी है...

करुणा - आपकी भाभी?!

सुप्रिया - हाँ, और सुनो... तुम बोल देना की तुम बाथरूम में सफाई कर रही थी इसलिए सुनाई नहीं दिया और इक़बाल भी लाइट फिक्स कर रहा था, कोई भी बहाना मार देना... समझ गयी न...

करुणा - दीदी... आप हमे फसा डौगी... 15 मिनट हो चुके है उन्हें बहार खड़े हुए... आप बस जल्दी से आ जायो दीदी...

सुप्रिया - मैं बस आ रही हूँ... बस थोड़ा संभल लेना सब तक...

सुप्रिया ने जल्दी से फ़ोन काटा और अपना लैपटॉप बंद करते हुए बैग में डाली और फिर उछाल कर जल्दी से कड़ी हुई. उसने पांच सेकंड के लिए साहिल सर के केबिन में जाकर उनसे बोलै की उसे घर पर इमरजेंसी है और जाना है और बिना उनका जवाब सुने वह जल्दी से वहां से निकल गयी.

लिफ्ट में उसका दिमाग 100 कम प्रति घंटे की स्पीड से चल रहा था. पता नहीं भाभी करुणा और इक़बाल को साथ देख कर क्या सोच रही होंगी, पता नहीं भाभी बिना बताये आयी भी क्यों है. उफ्फ्फ, उसे कभी भी इक़बाल और करुणा को उसके घर पर ये सब करने की इज़ाज़त नहीं देनी चाहिए थी.

सुप्रिया अपनी कार तक पहुंची, और उसने एक पल के लिए सोचा की वह भाभी को कॉल करे, पर वह उनकी दांत नहीं सुन्ना चाहती थी. उसने फिर से करुणा को hi फ़ोन लगाया - दरवाज़ा खुला या नहीं???

दूसरी तरफ से करुणा की बिलकुल hi नरम आवाज़ आयी - जी दीदी... आ गयी आपकी भाभी जी अंदर...

सुप्रिया - ाचा... और बाकि सब... ठीक?

करुणा - उम्... जी दीदी... आप घर आ जायो...

सुप्रिया समझ गयी की करुणा खुल के बात नहीं कर पा रही और घर जाकर hi उसे पता चलेगा. सुप्रिया ने जल्दी से घर की और गाडी दौड़ाई. रास्ते भर वह बस प्रैक्टिस hi कर रही थी की भाभी को जाकर क्या बोलेगी. फ़ोन पर बात करना और बात थी, पर भाभी अब उसके ठीक सामने होंगी, और उनके गुस्से वाला रूप तोह बहुत hi खतरनाक था.

सिग्नल पर सुप्रिया ने किसी तरह से बोतल से पानी पिया पर पानी उसकी शर्ट पर जाकर गिरा और उसकी शर्ट थोड़ी गीली हो गयी. उफ्फ्फ, आज hi साड़ी गड़बड़ होनी है, सुप्रिया ने सोचा. कुछ देर बाद जैसे hi वह अपने घर की बिल्डिंग के पास पहुंची उसकी दिल की धड़कन और तेज़ होने लगी थी. गेट पर इक़बाल और दूसरा वॉचमन खड़ा था. इक़बाल ने सुप्रिया को देखते hi शर्म के मारे अपना मुँह फेर लिया.

सुप्रिया का ध्यान अभी उसका और था भी नहीं, उसने गाडी पार्किंग में लगायी और वहीँ कार में कुछ पल बैठे हुए एक लम्बी सांस ली. उसके अंदर से आवाज़ आयी - चलो, जो भी अब होगा, उसका सामना तोह करना hi पड़ेगा. सुप्रिया कार से निकली और लिफ्ट की तरफ बड़ी. लिफ्ट में घुसते hi वह लिफ्ट में दिख रही अपनी परछाई को देख कर अपने कपडे ठीक करने लगी. उसकी शर्ट ऊपर से काफी गीली हो गयी थी.

सुप्रिया आखिर अपने घर के दरवाज़े के बहार पहुंची और उसने अपने चेहरे पर एक झूठी मुस्कराहट लाते हुए दरवाज़ा खोला. सामे लिविंग रूम में उसकी भाभी सोफे पर पेअर ऊपर करके बैठी थी.

सुप्रिया एक बड़ी सी मुस्कराहट के साथ बोली - भाभीइइइइइइ..... मेरी प्यारी भाभी....

सुप्रिया आकर उनके गले लग गयी. पर आरती के चेहरे पर काफी गुस्सा सा था.

भाभी - ये प्यारी भाभी वाला नाटक तोह करो मत मुझसे...

सुप्रिया - आप इतना गुस्सा क्यों हो रही हो.... गुस्सा तोह मुझे होना चाहिए, एक तोह पहली बार यहाँ आ रही थी, वह भी अकेले, मुझे बता तोह देते, मैं या अतुल आपको लेने आ जाते स्टेशन पर..

भाभी की आवाज़ थोड़ी सी नरम हुई - वह मेरा आईडिया था... मैं तुम्हे सरप्राइज देना चाहती थी... (और फिर एकदम से फिर थोड़ी कड़क हो गयी) पर यहाँ आकर तोह मुझे hi सरप्राइज मिलता है...

सुप्रिया - क्या सरप्राइज? अब आप आये भी हो ऑफिस वाले दिन, तोह मैं घर पर थोड़ी न मिलती...

भाभी ने अपनी आवाज़ बिलकुल धीमी करि - तुम्हे पता भी है तुम्हारे पीछे से तुम्हारी कामवाली क्या क्या करती है... उसके साथ इस घर में एक मर्द भी था...

सुप्रिया ने अनजान बनते हुए शॉकेड होने का नाटक किया - कौन करुणा??? नहीं वह तोह बहुत सीढ़ी है...

भाभी ने फिर से धीमी आवाज़ में तना मारते हुए कहा - हाँ वह तोह बहुत hi सीढ़ी है... झूठ बोल रही थी मुझसे की वह वॉचमन घर में बिजली का काम कर रहा था...

सुप्रिया ने किचन की और देखा, करुणा अभी भी वहीँ थी - मैं बात करती हूँ करुणा से, वह झूठ नहीं बोलती... जरूर इक़बाल होगा, उसे मैंने hi सुबह बिजली का कुछ काम करने को बोलै था...

भाभी ने घूर कर सुप्रिया की आँखों में देखा. उसे पूरा यकीं था की सुप्रिया भी झूठ बोल रही थी, पर वह इतनी कॉन्फिडेंटली झूठ बोल रही थी की उसे समझ hi नहीं आ रहा था की क्या ये वही सीढ़ी सी लड़की थी जो 18-20 महीने पहले तक उससे कोई बात नहीं छुपा पाती थी.

पर आरती ऐसे सीधे सीधे तोह सुप्रिया पर झूठ बोलने का इल्जाम नहीं लगा सकती न - हम्म्म… मैं देखती हु तुम्हारी वह हीरोइन क्या कर रही है किचन में…

सुप्रिया ने उन्हें उठने नहीं दिया - आप बैठो… मैं देखती हूँ…

सुप्रिया किचन में आयी जहाँ करुणा खाना बना रही थी और उसका मुँह भी फूला हुआ था. उफ्फ्फ एक तरह भाभी गुस्से में और दूसरी तरफ करुणा भी उससे hi लड़ाई करेगी.

सुप्रिया को अंदर आते देख करुणा की नाराज़गी भरी आवाज़ बहार आयी - डीडीई… ये क्या चीज़ है…

सुप्रिया ने उसे चुप रहने का इशारा किया - शहहहहह… मैंने सब संभल लिया है बहार… तुम्हारा काम हो गया क्या…

करुणा - काम तोह बस हो गया है, पर आपकी भाभी बोली ने और 10 काम बोले है करने को…

सुप्रिया - उन्हें मैं संभल लुंगी, तुम बस ये ख़तम करके चली जाना…

करुणा - वह कुछ दिन रुकने वाली है क्या? अगर ऐसा है तोह मैं तोह नहीं आने वाली जब तक वह है यहाँ…

सुप्रिया - ारी… ऐसे थोड़ी न होता है… और कल वैसे भी सैटरडे है, मैं घर पर hi हूँगी… चल मैं अभी बहार जाती हूँ और तुम निकल जाना…

सुप्रिया पानी का एक गिलास भर के बहार लेकर आयी और भाभी को दिया. और फिर से उनके साथ बैठ गयी.

सुप्रिया - भाभी… आपको यहाँ देख कर बहुत hi ाचा लगा… आप ऐसे hi आयी हो या किसी काम से…

भाभी ने किचन की और देखा - बताती हूँ… पहले उसे तोह जाने दे…

और तभी करुणा भी किचन से बहार आकर बहार की और जाने लगी.

भाभी ने कड़क आवाज़ में करुणा से कहा - कहाँ चली… हो गया सारा काम… जो भी मैंने कहा था… सुप्रिया तुमने ध्यान भी दिया है की तुम्हारा किचन कितना गन्दा पड़ा है…

करुणा ने सुप्रिया की तरफ देखा और सुप्रिया उसका बचाव करते हुए बोल पड़ी - उसे अभी जाना है भाभी, वह कल कर देगी… धीरे धीरे सब कर देगी, जो भी आप चाहते हो… करुणा, तुम जायो…

करुणा बिना रुके फटाफट वहां से बहार निकल गयी.

भाभी भी मुँह बनाते हुए बोली - Golu…aise चल रही है तेरी ग्रस्हथी…

सुप्रिया - भाभी… आप अभी तोह आये हो… और आप इतनी टेंशन पता नहीं क्यों ले रहे हो…

भाभी - सब टेंशन में hi है वहां… इसलिए मुझे आना पड़ा… तूने मुझे कुछ सही से बताया भी नहीं की अतुल और तेरे बीच सब ठीक नहीं है…

सुप्रिया एक डैम से हक्की बक्की रह गयी, तोह इसलिए आयी थी भाभी.

भाभी - मम्मी जी की तेरी सास से बात हुई थी और वहां से पता चला की मामला कुछ गड़बड़ चल रहा है… तुझे कॉल भी करने की कोशिश करि थी फिर पता चला तू तोह बहार गयी हुई है…

सुप्रिया - हाँ.. मैं कुछ दिनों के लिए ऑफिस के काम से बहार गयी थी…

भाभी - ऑफिस पर इतना ध्यान है की घर की hi खबर नहीं है…

सुप्रिया - ऐसा क्या हो गया? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है...

भाभी - अब मुझे सब खुल के बोलना पड़ेगा... ठीक है... यही की तेरे और अतुल के बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा... तेरी सास बोल रही थी मम्मी जी से की दो साल होने को आये तुम्हारी शादी को और अभी भी बच्चे का कोई अत पता नहीं, और होगा भी कैसे जब बहु अतुल को अपने आप को छूने भी नहीं देती...

सुप्रिया एक डैम से चिल्लाई - क्या!!!! ये सब बातें कब कैसे हो गयी...

भाभी - अतुल ने hi बताया होगा न अपने घर पर... और कैसे पता चलेगा... गोलू ये सब क्या चल रहा है...

सुप्रिया - भाभी ऐसा कुछ नहीं है... हम दोनों बस जॉब करते है, थक जाते है...

भाभी - तोह बहुत हो गयी ये जॉब वेब, मैं तोह कहती हो सब छोड़ के घर पर ध्यान दो... एक बार मर्द हाथ से निकल जाये तोह वापस नहीं आता है...

सुप्रिया - क्या बात कर रही हो आप... मैं ऐसे कैसे जॉब छोड़ दू... और अतुल कौनसा मेरे हाथ से निकल गए... कुछ और भी है क्या जो मुझे नहीं पता...

भाभी ने दूसरी और देखते हुए कहा - वह सब मुझे नहीं पता... मैंने तोह पहले की कहा था की तुम लोग अभी नादान हो, और तुम्हे अकेले घर से इतनी दूर नहीं रहना चाहिए...

सुप्रिया ने मुँह बनाते हुए उनकी और देखा - आपने कब कहा ये...

भाभी - तुमसे नहीं कहा, पर किसी से तोह कहा hi था...

सुप्रिया - उफ्फ्फ भाभी... किसी और चीज़ के बारे में बात करे...

भाभी - नहीं... मैं अपने पति और बच्ची को छोड़ कर इतनी दूर एहि बात करने आयी हु...

आरती काफी देर तक सुप्रिया को काफी सारा लेक्चर देती रही. सुप्रिया चुप चाप उनकी बात सुनने के कोशिश कर रही थी पर उसे काफी खीज उठ रही थी. अब वह उन्हें कैसे और क्या क्या समझाए. पता नहीं अतुल ने क्या क्या बोल दिया था जिससे ये बवाल खड़ा हो गया था.

शाम हुई तोह अतुल भी वापस घर आया और सुप्रिया ने उसके लिए दरवाज़ा खोला. अतुल चुप चाप घर के अंदर दाखिल हुआ और वह भी भाभी को वहां देख कर एक डैम चौंक सा गया. भाभी उससे अचे से है कर बात करने लगी और थोड़ी देर बाद सबने मिल कर खाना खाया.

भाभी - अतुल जी... आप तोह पहले से काफी कमज़ोर हो गए हो... सुप्रिया तू अचे से खाना नहीं खिलाती क्या...

सुप्रिया ने भाभी को घूर कर देखा. पिछले एक साल में वह इतनी आज़ाद ख़यालात की हो गयी थी की उसे नहीं लगता था की अतुल को अचे से खाना खिलाना उसकी जिम्मेदारी थी. वह भी एक एडल्ट तहत और अपना ख्याल खुद रख सकता था.

अतुल ने है के कहा - नहीं ऐसा कुछ... बस थोड़ा फिट होने की कोशिश है...

भाभी - हाँ... दोनों को hi देख कर ऐसा लग रहा है की कुछ ज्यादा hi फिट होने की कोशिश कर रहे हो...

सुप्रिया चुप चाप नीचे देख कर खाना कहती रही. उसकी नज़र कभी कभी अतुल से मिल जाती तोह अतुल भी अपने नज़रे चुरा लेता, जैसे वह सुप्रिया को अवॉयड कर रहा हो. उसे भी पता था शायद की भाभी यहाँ क्यों आयी थी.

रात होते hi सुप्रिया दुसरे कमरे में भाभी के लिए तकिया और ब्लैंकेट का इंतज़ाम करने लगी.

भाभी - यहाँ तोह है न तकिया और ब्लैंकेट... दूसरा किस लिए...

सुप्रिया - दो लोगो को दो पिलो नहीं चाहियेंगे क्या..

भाभी - कौन दो लोग??

सुप्रिया - मैं और आप... और कौन?

भाभी - तू यहाँ क्यों सोयेगी मेरे साथ?? तू तोह दुसरे कमरे में अतुल के साथ जाकर सो न...

सुप्रिया ने चिढ़ते हुए कहा - हम दोनों अलग hi सोते है...

भाभी - तोह सब सच hi सुना था मैंने फिर... ऐसे तोह फिर हो लिया बच्चा...

सुप्रिया - भाभी आप क्यों बच्चे के पीछे पड़ी हो... अगर नहीं करना हो तोह...

भाभी गुस्से में बोली - मैं पीछे पड़ी हु? अगर तुम लोगो के बीच कुछ है hi नहीं तोह साथ hi क्यों रह रहे हो. वह दूसरी शादी कर ले और तू वापस घर आजा...

सुप्रिया - आप प्लीज सो जायो अब... आप थक गए होंगे... बहुत लम्बा दिन था आज...

सुप्रिया ने अपना फ़ोन उठाया, उस पर विक्रम की एक मिस्ड कॉल थी. भाभी अभी भी कुछ कुछ बड़बड़ा रही थी. सुप्रिया ने अपना फ़ोन उठाया और बाथरूम एक अंदर गयी. उसने कुछ पल के लिए सोचा और फिर विक्रम को फ़ोन कॉल लगी दिया.

सुप्रिया - Hi विक्रम... कैसे हो आप...

विक्रम - गुड... तुम कैसी हो...

सुप्रिया - मैं ठीक हु...

विक्रम - थोड़ा लौ साउंड कर रही हो... सॉरी मैं इस हफ्ते ऑफिस नहीं आ पाया, काफी कुछ चल रहा था...

सुप्रिया - मैं समझ सकती हूँ... यहाँ भी काफी कुछ चल रहा है... लिसेन शायद आज रात हम बात नहीं कर पाएंगे...

विक्रम - That's फाइन... मैं भी अभी बहार hi हूँ और ज्यादा बात नहीं कर सकता...

सुप्रिया - Ok... गुड नाईट...

विक्रम - गुड नाईट....

विक्रम ने फ़ोन अपनी पॉकेट में रखा, और वापस जाकर जय के साथ बैठ गया. वह बहार एक बार रेस्टोरेंट में था.

जय उसको वापस आते देख बोलै - दोस्त मैंने आर्डर प्लेस कर दिया है...

विक्रम - थैंक्स...

विक्रम के चेहरे पर स्ट्रेस झलक रही थी और जय उसे बारीकी से पड़ने की कोशिश कर रहा था - सो... लास्ट वीक कहाँ थे...

उसे जवाब पहले से पता था पर वह देखना चाहता था की विक्रम क्या कहता है.

विक्रम - लास्ट वीक.... एक वर्क ट्रिप के लिए कहीं बहार था...

जय - काफी टायर्ड से लग रहे हो... आल गुड...

विक्रम - हम्म्म... येह आल गुड...

जय समझ गया की शायद विक्रम इतनी जल्दी नहीं बोलने वाला था कुछ. आज थोड़ी देर लगेगी पर उसे जो जानना था वह जान कर hi रहेगा. और 1-2 घंटे इधर उधर की बातें करने के बाद विक्रम उसके सामने थोड़ा हल्का होने लगा.

जय - कितना ाचा लग रहा है आज... काफी दिनों बाद हम लोग ऐसे बैठे है आराम से...

विक्रम - हाँ.... काफी दिन हो गए है... सही में...

जय - तुम्हारे पास टाइम hi नहीं होता मेरे लिए... बस तभी याद करते हो जब किसी की लेनी होती है... और आज कल तोह वह भी बंद कर रखा है... तभी इतने स्ट्रेस में रहते हो...

विक्रम - नहीं... बात वह नहीं है...

जय - तोह फिर?

विक्रम ने एक पल के लिए सोचा, ये पहली बार नहीं होगा जब उसने ईशा और उसके डैड के बारे में जय से करीब किया हो, और जय किसी के सामने अपना मुँह नहीं खोलता था - यू क्नोव न... वह बाप बेटी ने मेरी लाइफ हेलल कर राखी है...

जय हस्ते हुए - पर उनके पैसो पर hi तुम ऐश भी कर रहे हो...

विक्रम - बूत that's नॉट थे पॉइंट... मैं क्यों उन्हें सफाई देता रहा... ी हैवे माय ओन लाइफ तू...

जय - ऐसा क्या हो गया जो इतनी सफाई देनी पद रही है...

विक्रम - वही... वर्क ट्रिप पर... कुछ पन्गा हो गया था... ब्लडी काला...

जय - ाचा... क्या पन्गा...

विक्रम ने एक और घूँट भरा और जय को थोड़ा शार्ट में थाईलैंड में हुए किस्से को बताना शुरू किया. उसने कोशिश करि की वह सुप्रिया का नाम न ले ताकि जय का इंटरेस्ट उसमे फिर से न जागे.

जय - सही काण्ड हो गया था... तुम लकी रहे वैसे... क्या नाम बताया उसका जिसने तुम्हारी हेल्प करि...

विक्रम - राहुल...

जय - हाँ ok... तुम्हारे एक्सपोर्ट ऑफिस वाले लोग थे न वहां...

विक्रम - हाँ... जस्ट ा वर्क ट्रिप यार...

जय ने अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाये. विक्रम जैसे शातिर खिलाडी को शायद वह नहीं दिख रहा था जो उसे दिख रहा था. शायद कभी कभी आप किसी चीज़ के इतना पास होते हो की वह फोकस में hi नहीं रहती. जय ने सोचा की उसे इस राहुल से तोह मिलना hi पड़ेगा.

दोनों की ड्रिंक्स और बातचीत जारी रही, और जय ने उस बात को आगे नहीं छेड़ा ताकि विक्रम को कोई शक न हो.

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सुप्रिया के घर पर सुबह हो गयी थी और आज सब लोग थोड़ा जल्दी hi उठ गए थे. अतुल सुप्रिया और आरती के बीच में घर पर रहने में थोड़ा अजीब सा फील कर रहा था तोह वह नाश्ता करते hi बहार निकल गया.

घर पर बस सुप्रिया और आरती रह गए और आरती ने घर पर कॉल लगा राखी थी. सुप्रिया की मम्मी भी उसे उपदेश देने में लगी थी. उनके बातें करते करते करुणा भी डरते डरते काम करने आ गयी. मानो आरती की एक नज़र तोह उस पर hi थी. थोड़ी देर बाद जब घर की कॉल ख़तम हुई तोह आरती फिर से सुप्रिया को समझने में शुरू हो गयी.

भाभी - गोलू.. आज रात तू अतुल के साथ hi सोयेगी... समझ गयी न... ये सब नाटक नहीं चलेगा...

सुप्रिया - भाभी पर...

भाभी - पर वॉर कुछ नहीं... जब तू तरय hi नहीं करेगा तोह कुछ होगा कैसे...

करुणा भी काम करते हुए उनकी बातों में पूरा इंटरेस्ट ले कर सुन रही थी.

सुप्रिया - ऐसा नहीं है मैंने तरय नहीं किया... हम दोनों के बीच सब नहीं होता सही से...

भाभी - सही से मतलब?

करुणा अपने आप को बीच में बोलने से नहीं रोक पायी - भाभी जी आप गुस्सा न करे तोह एक बात कहु?

भाभी से उसे घूर कर देखा - जी हाँ... आप की hi कमी थी... आप भी बोलिये...

करुणा - दीदी और मेरी इस बारे में पहले बात हुई है... भैया को न कुछ दिक्कत है शायद...

सुप्रिया ने इर्रिटेशन में अपना चेहरा अपने हाथों के बीच में दबा लिया, सभी लोग उसकी पर्सनल लाइफ के एक्सपर्ट बने हुए थे अभी.

करुणा की बात सुनते hi जैसे आरती के कान खड़े हो गए - क्या दिक्कत है?

करुणा को तोह अब जैसे खुल के बोलना का लाइसेंस मिल गया हो - आप hi सोचो न.. दीदी ीत्नीईई खूबसूरत... इतनी प्यारी... उनके साथ कौन नहीं करना चाहेगा...

आरती करुणा की और देख रही थी की इसकी जुबान तोह काफी तेज़ थी.

करुणा - तोह भैया में hi कोई दिक्कत होगी न... या फिर उन्हें लड़कियों की जगह लड़के...

सुप्रिया अतुल के बचाव में बोल बैठी - नहीं... ऐसा कुछ नहीं है... बस हम लोग कम्पेटिबल नहीं है...

भाभी - वह क्या होता है? ये सब तोह मुझे नहीं पता... सुप्रिया तुम आज रात को एक अछि सी निघ्त्य पेहेन कर अतुल के सामने जाना... और उसे रिझाने की कोशिश करना...

सुप्रिया - मैं???

भाभी - तुम नहीं तोह क्या मैं जायु उस कमरे में?

सुप्रिया ने दबी हुई आवाज़ में कहा - आपको जाना है तोह जा सकती हो...

पर आवाज़ इतनी भी धीमी नहीं थी की किसी को सुनाई न दे. करुणा भी ये सुन कर हसने लगी.

भाभी का गुस्सा बढ़ता जा रहा था - अगर कभी तुम्हारे लिए मुझे ऐसा कुछ करना पड़े न तोह मैं वह भी करुँगी मैं..... पर ये सारा बवाल तुमने शुरू किया है इसलिए तुम्ही इसे ठीक करोगी...

सुप्रिया ने झुंझुला के अपनी आँखें घुमाई. भाभी से कोई नहीं जीत सकता था.

भाभी - मैंने देखे है तुम्हारे कपडे आज... काफी छोटे छोटे कपडे है तुम्हारे पास... जब अपने पति के सामने नहीं पहनती हो तोह फिर किसके सामने पहनोगी उन्हें...

सुप्रिया - ाचा ठीक है न... रात को देखते है...

पर रात भी जल्दी hi आ गयी थी. सैटरडे की रात थी तोह अतुल घर जल्दी आ गया था और उन तीनो ने फिर से रात का खाना साथ खाया. सुप्रिया सोने के लिए भाभी वाले कमरे में पहुंची तोह बीएड पर एक नाईट गाउन निकला पड़ा था.

भाभी पीछे से आते हुए बोली - इसे पहनो और चुप चाप उस कमरे में जायो... इतनी ज़िद्द ठीक नहीं है...

सुप्रिया पिछले दो दिनों से भाभी से बहस कर कर के थक चुकी थी और उसने बाथरूम में जाकर नाईट गाउन पेहेन लिया. वह काफी ज्यादा सेक्सी लग रही थी इस नाईट गाउन में. पता नहीं क्यों उसे काफी अजीब सा लग रहा था अतुल के सामने जाना इसमें. पर उसका प्लान एहि था की वह वहां जाकर बस जल्दी से सो जाएगी.

वह धीरे धीरे कमरे की तरफ गयी और उसने हलके से दरवाज़ा खोला. अतुल पहले से hi बीएड में था और वह अपने फ़ोन पर कुछ कर रहा था.

सुप्रिया - सॉरी... मैंने डिस्टर्ब तोह नहीं किया...

अतुल सुप्रिया को इस छोटे से नाईट गाउन में ऊपर से नीचे तक देख रहा था - नहीं... आ जायो..

सुप्रिया - वह... भाभी को शायद भैया से बात करनी है... इसलिए उन्होंने मुझे यहाँ सोने के लिए कहा है...

अतुल - कोई नहीं.. तुम यहाँ सो जायो... मैं बहार सोफे पर सो जाता हूँ...

सुप्रिया ने एकदम से कहा - नहीं... आप भी यहीं सो सकते हो...

उसे पता था की अगर अतुल अभी बहार चला गया तोह भाभी फिर से उसके पीछे पद जाने वाली थी, इससे बेहतर एहि था की वह दोनों एक hi बीएड पर सो जाये.

सुप्रिया आँखें नीचे करते हुए बीएड पर आयी और अतुल से मुँह फेर कर लेट गयी.

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अतुल - लाइट अभी थोड़ी देर में बंद दू क्या?

सुप्रिया - हाँ… जैसे आपको ठीक लगे…

कितना अजीब सा लग रहा था अतुल के साथ एक hi बीएड पर लेटना आज, जैसे वह पति पत्नी hi न हो. सुप्रिया ने अपनी आँखें बंद की और सोने की कोशिश करने लगी. जितनी जल्दी ये रात गुज़र जाये उतना hi ाचा होगा. वह मेंटली बहुत थक गयी थी पूरे दिन भाभी से झूझते झूझते.

अतुल सुप्रिया के गोर कंधे और पीठ की तरफ देखे बिना रह नहीं पा रहा था. शादी से अब तक उसकी सुंदरता तोह जैसे हर दिन बढ़ती hi गयी थी. वह सोचने लगा की पता नहीं सुप्रिया को उससे क्या उम्मीद थी आज रात के लिए और वह ऐसे कपडे पेहेन कर उसके साथ सोने क्यों आयी थी. कितनी प्यारी लग रही थी वह ऐसे सोये हुए.

थोड़ी देर बाद सुप्रिया ने हलकी सी सीढ़ी करवट ली और अतुल ने देखा की उसकी आँखें अछि तरह से बंद थी. उसे अब सामने से सुप्रिया के गोल गोल मम्मी और गोर कंधे दिख रहे थे. शायद यही काफी था उसके लिए आगे बढ़ने के लिए.

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अतुल ने बीएड से खड़े हो कर कमरे की लाइट ऑफ की और बीएड पर वापस आ गया. उसकी एक नज़र पर सुप्रिया पर hi थी. उसके सब्र का बाँध टूटे जा रहा था, और आखिर वह अपना हाथ सुप्रिया के पेट पर रखते हुए उसके पास आ कर लेट गया. उसका लुंड उसके अंडरवियर में टाइट होता जा रहा था और बहार निकलने के लिए तड़प रहा था. सुप्रिया शायद इतनी गहरी नींद में सोई हुई थी की उसे अतुल का हाथ महसूस hi नहीं हो रहा था.

अतुल ने अपना पायजामा उतारते हुए नीचे कर दिया और साथ hi अंडरवियर भी. उसने अपना पेअर हलके से सुप्रिया की चिकनी टांगो पर मसला. सुप्रिया हलके से हिली, जैसे किसी सपने में हो. अतुल इस हलके सी हरकत को उसकी हाँ समझते हुए और आगे बड़ा और वह सुप्रिया को ड्रेस पर हाथ फेरते हुए उसके ठीक ऊपर आ गया.

सुप्रिया की नींद आखिर टूट hi गयी और उसने देखा की अतुल का चेहरा उसके ठीक सामने था. सुप्रिया और अतुल का शरीर एक दुसरे से चिपका हुआ था, और अतुल उसके चेहरे पर अपनी सांसें छोड़ रहा था. अतुल ने सुप्रिया की आँखों में घूर कर देखा जैसे उन में कुछ ढूढ़ने की कोशिश कर रहा हो.

सुप्रिया का नेचुरल रिएक्शन तोह चीखने का होना चाहिए था, पर सुप्रिया नींद में आधी सोई, आधी जाएगी ये सोच रही थी की अतुल कब उसे अचे से चूम ले और जाम कर उस पर बरस पड़े.

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पर अतुल एन्ड मौके पर पीछे हैट गया और बीएड पर बैठ गया. उसने अँधेरे में अपने कपडे ढूंढे और उन्हें पेहेनते हुए कमरे से बहार निकल गया.

सुप्रिया को समझ hi नहीं आया की अभी हुआ क्या था. क्या अतुल उसके साथ जबरदस्ती सेक्स करने की कोशिश कर रहा था और अगर हाँ तोह वह एक डैम से रुक क्यों गया. और पता नहीं वह क्यों नहीं रोक पायी अतुल को. पता नहीं वह क्या सोच रही थी जो भाभी की बातों में आकर अतुल के सामने ऐसे आ गयी. वह विक्रम से प्यार करती थी और अब उसके लिए विक्रम hi सब कुछ था, अतुल नहीं.

सुप्रिया ने अपनी ड्रेस ठीक करि और परेशान होते हुए अपने आप को कम्बल से अछि तरह धक् लिया. पता नहीं आज रात अतुल वापस कमरे में आने वाला था या नहीं. कुछ देर अतुल का इंतज़ार करते करते सुप्रिया की आँख लग गयी.

सुबह उसकी जल्दी आँख खुल गयी और उसने देखा की अतुल उसके बराबर में नहीं सो रहा था. उफ़ भाभी आज भी शायद उसका जीना मुश्किल कर देंगी. सुप्रिया जल्दी से बीएड से उठी और दबे पाँव बहार की तरफ गयी. उसने देखा की अतुल बहार सोफे पर सो रहा था.

सुप्रिया ने उसके पास बैठते हुए अतुल को हलके से हिलाया और धीरे से कहा - अतुल.... अतुल... सुनो...

अतुल ने दूसरी और करवट ली - मममम.... क्या... अभी तोह अँधेरा हो रहा है...

सुप्रिया - अतुल... सुनो... प्लीज बैडरूम में चलो...

अतुल ने आँख खोल कर सुप्रिया की और देखा. क्या ये सब सच में हो रहा था या कोई सपना था.

सुप्रिया - प्लीज... भाभी के जागने से पहले कमरे में सो जायो... नहीं तोह उन्हें लगेगा की हम दोनों...

अतुल सुप्रिया का इशारा समझ गया. ये सच hi था, पर वह सच नहीं जो वह शायद सुन्ना चाहता था. अतुल सोफे से खड़ा होता हुआ वापस कमरे में गया, और सुप्रिया उसके पीछे पीछे. अतुल अभी भी काफी नींद में था और वह बिस्तर पर लेटते hi सो गया. सुप्रिया लेट तोह गयी पर उसे नींद नहीं आ रही थी, पता नहीं जब तक भाभी यहाँ रहेंगी तब तक क्या क्या करना पड़ेगा.

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संडे की सुबह का नाश्ता हो चूका था और अतुल फिर से घर से बहार निकल गया. सुप्रिया भी अपने कामो में लगी थी और वह कोशिश कर रही थी की भाभी को अवॉयड hi करे. कल रात जो कुछ हुआ वह भी भाभी की hi बनायीं हुई अजीब सी सिचुएशन थी. सुप्रिया को रह रह काफी गिलटी सा फील हो रहा था, जैसे वह विक्रम को चीट कर रही हो.

पर आखिर भाभी उसके सामने आकर कड़ी हो hi गयी और सीधे hi सवाल दाग दिया - तोह फिर???

सुप्रिया ने अनजान बनते हुए कहा - तोह फिर क्या?

भाभी - ारी.. इतनी भी बुद्धू नहीं हो तुम... क्या हुआ कल रात को?

सुप्रिया ने आँखें चुराते हुए कहा - वही जो होना था... और क्या...

भाभी - मतलब सब सही से हो गया न...

सुप्रिया ने धीमी आवाज़ में कहा - हाँ...

भाभी खुश होते हुए बोली - चलो.... मेरा यहाँ आना सफल रहा... मैं तुम दोनों की पटरी वापस सही जगह बिठा दूंगी...

सुप्रिया - भाभी... ये सब छोडो... आज संडे है... हम दोनों कहीं बहार चलते है...

भाभी - हाँ... और तोह तुम जहाँ कहोगी मैं वहां चल लुंगी...

सुप्रिया - ठीक है... आप तैयार हो... इतने मैं भी तैयार होती हूँ...

भाभी - ठीक है... क्या पह्नु मैं?

सुप्रिया - जो आपका मैं करे... साड़ी... सूट... जीन्स... (सुप्रिया हस्ते हुए) स्कर्ट... मिनी स्कर्ट.. यहाँ आपकी सास थोड़ी न है आपको रोकने के लिए...

भाभी को थोड़ी शर्म आ गयी - धत्त्त.. मेरे पास कहाँ से आयी स्कर्ट या मिनी स्कर्ट... और मैं कितनी गन्दी लगूंगी उसमे.... मैं तोह साड़ी hi पेहेन लेती हूँ...

सुप्रिया हस्ते हुए - बहुत सेक्सी लगोगी स्कर्ट में वैसे... पर ठीक है... फिर मैं भी साड़ी hi पेहेन लेती हूँ...

सुप्रिया और आरती बहार जाने के लिए अलग अलग कमरे में तैयार होने लगे. सुप्रिया सोच रही थी की चलो इस बहाने भाभी उससे ये फालतू के सवाल तोह नहीं करेंगी. सुप्रिया तैयार हो कर आयी तोह काफी क्यूट लग रही थी. भाभी अभी तक शायद तैयार नहीं थी.

सुप्रिया - भाभी आप रेडी हो क्या?

भाभी - हाँ मैं रेडी हु...

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भाभी तैयार हो कर कमरे से बहार निकली. आरती सुप्रिया से बस 5-6 साल hi बड़ी थी उम्र में, और जब वह सुप्रिया की उम्र की थी तोह भी काम हसीं नहीं थी. और अभी भी उसकी फिगर अछि तरह मैनटैनेड थी, बस वह सुप्रिया से थोड़ी सी बड़ी और मातुरे लगती थी.

सुप्रिया - वाओ भाभी.... आप तोह अमेजिंग लग रहे हो... मुझे पता था आप साड़ी पहनोगे, इसलिए मैंने भी साड़ी hi पेहेन ली..

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आरती ने सुप्रिया की और देखा. सुप्रिया अभी भी एक 25-26 साल hi जवान लड़की थी, और वह हमेशा से hi बहुत ज्यादा सुन्दर रही थी. उसकी त्वचा में एक अलग सी hi चमक थी, जो किसी को भी उसकी और खींच ले.

भाभी ने मजाक में ताना मारते हुए कहा - कितना भी तैयार हो जायु, तुझसे तोह काम hi लगूंगी...

सुप्रिया ने हस्ते हुए कहा - अभी आपकी पिछ क्लिक करके भैया से पूछती हु की वह आपके बिना कैसे रह रहे है... और वैसे उनसे क्या पूछना, नीचे hi किसी से पूछ लेंगे... आपके लिए भी कोई काम लाइन नहीं लग जाएगी यहाँ...

भाभी - कुछ भी बोलती है... मुझे नहीं लगवानी कोई लाइन वाइन यहाँ....

सुप्रिया - हम्म्म... मैं hi मैं तोह लड्डू फूट रहे है आपके... मेरे ख्याल से तोह ज्यादातर लोगो को मुझ से ज्यादा आप पसंद आओगे... आप हो hi इतनी अछि...

भाभी - कुछ ज्यादा hi जुबान नहीं चलने लगी तेरी यहाँ आकर... चल अब लेट नहीं हो रहा...

सुप्रिया और आरती हस्ते हुए नीचे पहुंचे. नीचे आकर एकदम से भाभी ने कहा - ओह रुक... मैं जरा अपना पर्स भूल आयी ऊपर... 2 मिनट में आती हूँ.

सुप्रिया - ठीक है... आप ले आयो... मैं इतने गाडी स्टार्ट करती हूँ.

सुप्रिया गाडी तक पहुंच कर उसमे बैठी hi थी की उसे सामने से इक़बाल आता दिखा. सुप्रिया को पता था वह उसकी और hi आ रहा था और सुप्रिया ने गाडी का शीशा नीचे कर लिया.

इक़बाल पास आकर बोलै - मैडमजी....

सुप्रिया आज थोड़े अचे मूड में थी - Hello इक़बाल जी... कैसे है आप...

इक़बाल - आप ऐसे इक़बाल जी क्यों बोल रहे हो मुझे आज... कुछ गलती हुई क्या मुझसे...

सुप्रिया - ारी नहीं... मैं तोह बस ऐसे hi... (सुप्रिया ने उसके सामने इत्र के कहा) कैसी लग रही हूँ मैं आज?

इक़बाल ने सुप्रिया को ऊपर से नीचे तक देखा - बहुत hi बढ़िया लग रहे हो आप... हमेशा की तरह... साड़ी और सूट तोह आप पर खासकर के अचे लगते है...

सुप्रिया चहक उठी - थैंक यू इक़बाल....

इक़बाल - वह... मुझे आपसे पूछना था... उस दिन... आपकी भाभी आयी थी... मैं और करुणा... आप कहीं किसी मुसीबत में तोह नहीं फास गयी...

सुप्रिया - नहीं नहीं... भाभी तोह भूल भी गयी होंगी उस सब के बारे में.... अभी वह यहाँ है 2 हफ्ते... तब तक...

इक़बाल - नहीं... अब तोह मैं शायद कभी भी नहीं कर पायु वहां कुछ...

सुप्रिया - फिर करुणा का क्या होगा... वह बेचारी कैसे रहेगी आपके बिना...

सुप्रिया आज अपने अचे मूड से सबको शर्म सार कर रही थी. इक़बाल झेपते हुए बोलै - ऐसा कुछ नहीं... उसे भतेरे यार मिल जायेंगे... पर मुझे आप जैसा कोई नहीं मिलेगा... नहीं मेरा वह मतलब नहीं... आप मेरी बात को गलत मत समझियेगा...

सुप्रिया को उसकी बात पर हसी आ गयी - आप परेशां मत हो, मैं कुछ गलत नहीं समझूंगी...

सुप्रिया गाडी में बैठ गयी थी और इक़बाल गाडी के शीशे पर अपना हाथ रख कर खड़ा सुप्रिया से बात कर रहा था. तभी उसे दूर से आरती आती हुई दिखी, और वह खुद hi शर्म के मारे वहां से हट गया.

आरती भाभी जल्दी से आयी और गाडी में आगे पैसेंजर साइड पर बैठ गयी. सुप्रिया गाडी चलने को हो hi रही थी की भाभी ने उससे इक़बाल के बारे में पूछना शुरू कर दिया.

भाभी - ये किस्से बात कर रही थी? ये वही था न, वॉचमन, जो उस दिन तेरे घर पर...

सुप्रिया - हम्म्म... भाभी... मैंने आपको समझाया था न, ऐसा कुछ नहीं जैसा आप सोच रहे हो... इक़बाल काफी ाचा इंसान है...

भाभी - तुझे बड़ी समझ है अचे बुरे की...

सुप्रिया ने अपने कान पकडे - ाचा ठीक है... माफ़ कर दो मुझे... अब चलेउ मैं या नहीं...

भाभी - चल... जहाँ भी ले चल रही है...

सुप्रिया ने मुस्कुराते हुए गाडी चलनी शुरू करि. दोनों के बीच थोड़ा सा नटखट हसी मजाक चलता रहा. सुप्रिया पहले भाभी को पुराने लखनऊ में ले गयी और उसके बाद मॉल में. सुप्रिया को न जाने क्यों ऐसा लग रहा था की कोई उसका पीछा कर रहा हो. एक गाडी हर जगह जैसे उसके पीछे hi लगी हुई थी.

मॉल में पहुंचने के बाद सुप्रिया ने पहले भाभी को थोड़ी शॉपिंग कराई और फिर वह दोनों फ़ूड कोर्ट में आकर बैठ गयी.

सुप्रिया - भाभी आप यहीं बैठो.. मैं खाना लेकर आती हूँ…

भाभी - मैं भी साथ चालू क्या…

सुप्रिया - नहीं नहीं… आप ये सीट घेर कर रखो… मैं बस ले कर आती हूँ…

सुप्रिया ने मॉल के फ़ूड कोर्ट की एक शॉप से खाना लिया और जैसे hi उसने पलट कर भाभी की और देखा, उसने पाया की भाभी के ठीक सामने एक आदमी बैठा हुआ था. उसकी पीठ सुप्रिया की और थी तोह सुप्रिया उसकी शकल नहीं देख पा रही थी, पर भाभी उससे है के बात कर रही थी.

सुप्रिया जल्दी से खाना लेकर सीट पर पहुंची, और उसे एकदम पास आ कर उस आदमी की शकल साफ़ दिख गयी. ये तोह जय था!! पता नहीं वह यहाँ क्या कर रहा था!??

भाभी ने सुप्रिया को आते देख कहा - ये लो… सुप्रिया भी आ गयी… सुप्रिया ये…

सुप्रिया - जय?

जय - Hello सुप्रिया जी... कैसी है आप? आइये.. मैं बस आपकी बेहेन से hi बात कर रहा था..

भाभी हस्ते हुए - नहीं… मैंने अभी तोह बताया की मैं सुप्रिया की भाभी हूँ… बेहेन नहीं…

जय - मुझे तो अभी भी यकीं नहीं आ रहा की आप सच में सुप्रिया की भाभी हो…. आप तोह सुप्रिया की छोटी बेहेन लगते हो..

भाभी और जय दोनों है रहे थे. सुप्रिया को समझ hi नहीं आ रहा था वह क्या बोले. उसे वैसे भी जय ाचा आदमी नहीं लगता था, और पता नहीं वह यहाँ कैसे और क्यों आ गया था. सुप्रिया कुछ पल कड़ी hi रह गयी थी.

भाभी ने सुप्रिया की और देखते हुए कहा - बैठ न… क्या हुआ…

सुप्रिया भाभी से साथ बैठ गयी - नहीं कुछ नहीं… जय आप यहाँ कैसे?

जय - बस यहाँ से गुज़र रहा था और वहां उस शॉप में आपको देखा था तोह सोचा hello करता हुआ चला जायु… पर आप इस बीच गायब hi हो गयी…

सुप्रिया - हाँ वह मैं ये खाना लेने गयी थी…

जय - ये क्या… फ़ूड कोर्ट का खाना? चलिए किसी अचे रेस्टोरेंट में चलते है… क्या आप भाभी को फ़ूड कोर्ट का खाना खिला रही है…

सुप्रिया - नहीं ठीक है… ये भी ाचा hi है…

जय - चलिए चलिए… मैं न नहीं सुनने वाला… चलिए… भाभी जी आप hi समझाए…

भाभी - अब ये तोह आप दोनों के बीच की बात है, मैं कैसे पदु इसमें…

जय खड़ा हो गया और उसने अपना हाथ सुप्रिया के कंधे पर काफी हक़ से रखते हुए कहा - चलिए भी… इतना क्या शर्माना…

सुप्रिया ने उसकी और घूरा, आज जय की हिम्मत कुछ ज्यादा hi बाद गयी थी जो उसने उसे हाथ लगा दिया. वह मुश्किल से 3-4 बार तोह मिले थे अब तक, और वह अचे से जय को जानती भी नहीं थी. पता नहीं क्यों पर उसे हमेशा जय को देख कर एक बड़ी गन्दी सी फीलिंग आती थी.

इससे पहले सुप्रिया कड़ी होती, भाभी कड़ी हो गयी जैसे वह जय के साथ चलने को तैयार हो. ये देखकर जय के चेहरे पर एक स्माइल आ गयी. सुप्रिया न चाहते हुए कड़ी हुई और वह तीनो साथ में मॉल में एक रेस्टोरेंट की तरफ चलने लगे.

जय ने चलते चलते पुछा - सुप्रिया… अब विक्रम कैसा है?

सुप्रिया जय के इस अचानक से सवाल से सकपका सी गयी. वह भाभी के सामने विक्रम का कोई भी जिक्र नहीं करना चाहती थी. और पता नहीं जय उससे क्यों पूछ रहा था विक्रम के बारे में.

भाभी - ये विक्रम कौन है??

सुप्रिया ने हड़बड़ाते हुए कहा - वह हमारी कंपनी के बॉस है...

भाभी - ाचा... जहाँ तुम और जय काम करते हो?

सुप्रिया ने जय की और देखा, पता नहीं उसके आने से पहले जय ने भाभी से क्या बोलै था अपने बारे में.

जय ने बात को सँभालते हुए कहा - जी भाभी.. जहाँ मैं और सुप्रिया काम करते है... वहां के मालिक है विक्रम... मैं तोह बस इसलिए पूछ रहा था की मैं कुछ दिनों से ऑफिस नहीं आया था इसलिए...

सुप्रिया ने हलके से हाँ में सर हिला कर जय की हाँ में हाँ मिलायी. उसे ऐसा लग रहा था की वह जय के बोले हुए झूठ में फस्ती जा रही थी. जय उन्हें लेकर मॉल में एक अचे से रेस्टोरेंट में घुसा और वेटर ने उन्हें एक शांत से कोने में सीट दे दी.

भाभी वाशरूम उसे करने के लिए गयी और सुप्रिया और जय अकेले टेबल पर रह गए.

जय उन्हें जाते हुए देखते हुए बोलै - आपकी भाभी भी काम हसीं नहीं है... लगता है पूरा परिवार hi...

सुप्रिया ने जय को गुस्से में घूरा - जय… आपने उनसे झूठ क्यों बोलै की हम लोग साथ काम करते है...

जय रिलैक्स हो कर चेयर पर बैठ गया - तोह क्या बताता उन्हें... विक्रम के बारे में... आप दोनों के बारे में...

सुप्रिया - विक्रम सर के बारे में क्या?

जय - सर!? ः… तुम उसे कब से सर बुलाने लगी… अब तोह उसे किसी और नाम से hi बुलाती होंगी…

सुप्रिया ने अनजान बनने का नाटक किया - मुझे समझ नहीं आ रहा की आप किस बारे में बात कर रहे है…

जय ने उसकी बात को इग्नोर करते हुए कहा - खैर छोड़िये ये सब... मैं ये सब बातें करने नहीं आया हूँ... मुझे आप से कुछ जरूरी बात करनी थी...

सुप्रिया - क्या जरूरी बात...

जय - विक्रम के hi बारे में, पर वह नहीं जो आप सोच रही है... आप जानती hi कहाँ है विक्रम को अभी... जब तक जानिएगा तब तक पता नहीं क्या से क्या हो जाये...

सुरपिया ने जय की और देखा, पता नहीं वह विक्रम के बारे में ये सब क्यों कह रहा था. जरूर ये उसकी कोई चाल थी उसे भड़काने के लिए - आपको लगता है की आप विक्रम के बारे कुछ भी बोलोगे और मैं मान जयुंगी?

जय - आप सही में बहुत hi वफादार है विक्रम के लिए... और दूसरी तरफ विक्रम ने तोह मुझे सब बता दिया है आप दोनों के बीच की बातें... मुंबई से लेकर थाईलैंड तक, सब पता है मुझे... आपने क्या नहीं किया विक्रम के लिए... यहाँ तक की माइक के साथ भी... और जब आपको उसके बारे में पता चलेगा तोह पता नहीं आपको कैसे लगेगा...

सुप्रिया की आखें फटी की फटी रह गयी. जय को ये सब कैसे पता चला था.

जय - आपकी भाभी आ रही वहां से. उनके सामने तोह ये सब बात करनी ठीक नहीं रहेगी न...

सुप्रिया - हाँ... अभी नहीं बात करते इस सब के बारे में...

जय - ाचा निर्णय है आपका... मैं आपको मैसेज करूँगा... आराम से बैठ कर बात करेंगे...

भाभी मुस्कुराते हुए आकर उन दोनों के साथ बैठ गयी, और दोनों को चुप देख कर बोली - क्या हुआ? तुम दोनों इतने चुप क्यों हो? मैंने डिस्टर्ब कर दिया क्या कुछ?

सुप्रिया - नहीं... बस आपका hi वेट कर रहे थे...

भाभी - ाचा... मुझे लगा मुझे देखते hi चुप हो गए... उससे पहले तोह कुछ इंटरेस्टिंग सी बात कर रहे थे लगता है...

जय - ारी नहीं भाभी जी... आप आये तोह इंटरेस्टिंग हुआ है माहौल...

जय, सुप्रिया और आरती ने साथ बैठ कर लंच किया और ज्यादातर बात चीत आरती और जय के बीच hi होती रही. बीच बीच में सुप्रिया भी कुछ कुछ बोल देती. जय अछि तरह से सुप्रिया और उसकी भाभी को पूरे लंच देखता रहा. सुप्रिया चाहे कितनी सुन्दर थी, पर उसकी भाभी भी काम नहीं थी. लंच हो जाने के बाद, काफी मन करने पर भी जय ने बिल पाय किया और सुप्रिया और आरती को उनकी कार तक छोड़ने आया.

जय - भाभी जी आपसे मिलकर बड़ा hi मजा आया... आशा करता हूँ की हम फिर मिले...

भाभी - हांजी... जरूर...

जय - सुप्रिया... बात करते है फिर... चलिए bye...

सुप्रिया बिना जय की और देखे गाडी में बैठ गयी और गाडी चलने लगी. सुप्रिया के दिमाग में बस जय की बातें hi घूम रही थी. वह क्या कहना चाहता था विक्रम के बारे में, और उसे थाईलैंड में जो कुछ हुआ उसके बारे में कैसे पता था.

रास्ते में ख़ामोशी को तोड़ते हुए भाभी ने जय की बात छेड़ hi दी - काफी ाचा है तुम्हारा कलेग जय...

सुप्रिया क्या जवाब देती भाभी का - हम्म्म....

भाभी - वैसे वह तोह कह करा था की तुम दोनों दोस्त हो...

सुप्रिया ने अपनी आँखें सड़क पर hi राखी. घर से निकलते वक़्त वह जितनी खुश थी, अभी उतनी hi परेशां - हम्म्म... हाँ सब दोस्त hi होते है जो साथ में काम करते है...

भाभी ने सुप्रिया का चेहरा पड़ने की कोशिश करि, उन्हें कुछ तोह खटक रहा था सुप्रिया और जय के बीच में.
 
सॉरी फॉर थे लेट अपडेट. ी वास् होल्डिंग ऑफ ों पोस्टिंग थिस टिल ी रोट थे नेक्स्ट part... बूत हेरे यू जो.

ी होप तो पोस्ट थे नेक्स्ट part इन थे नेक्स्ट डे और तवो... ी हैवे बीन रियली ेक्सहॉस्टेड ट्राइंग तो बैलेंस आउट एवरीथिंग... सॉरी अगेन...
 
अपडेट 68

रात को खाने के बाद, सुप्रिया फिर से भाभी के कमरे में आ कर बीएड पर उनके बराबर में लेट गयी.

आरती उसे वहां देख कर थोड़ी हैरान हुई - क्या हुआ? तू यहाँ वापस कैसे आ गयी आज रात?

सुप्रिया - मुझे यहाँ सोना है... वहां नींद नहीं आती...

आरती ने हस्ते हुए कहा - मतलब अतुल ने तुझे पूरी रात जगा कर रखा...

सुप्रिया ने मैं hi मैं सोचा की भाभी तोह कुछ और hi सोच रही हैं, पर वह उनकी गलत फेहमी को दूर नहीं करना चाहती थी - कल सो तोह सोई थी वहां... आज यहाँ सोने दो न...

आरती - कल सोई थी तोह? ये कोई जन्मदिन तोह है नहीं की साल में एक बार मानना होता है... पति पत्नी तोह साथ में hi सोते है न... और अभी तोह तुम लोगो को शादी को टाइम hi कितना हुआ है, तुम लोगो को तोह लगभग रोज़ hi वह सब करना चाहिए...

सुप्रिया - रोज़!!??

आरती - और क्या... मैं अपना टाइम याद करू तोह हम लोग तोह बस.... अब जाकर थोड़ा काम हुआ ये सब...

सुप्रिया ने सोचा, रोज़ तोह वह तब भी नहीं करते थे जब उनकी जस्ट नयी नयी शादी हुई थी. कल रात की ऐम्बर्रास्मेंट के बाद उसका कोई मूड नहीं था अतुल के साथ सोने का.

सुप्रिया - मैं नहीं जा रही वहां... मैं यहीं कम्फर्टेबले हु...

आरती - सुप्रिया तू अपनी ज़िद्द पर क्यों अदि रहती है... अतुल क्या सोचेंगे तेरे बारे में?

सुप्रिया को थोड़ा थोड़ा गुस्सा आना शुरू हो गया था - जो सोचना है सोच ले... मुझे फरक नहीं पड़ता...

आरती - ऐसे थोड़ी न होता है...

पर सुप्रिया अपनी चद्दर तान कर आखें बंद करके लेट गयी. आरती को समझ hi नहीं आ रहा था यहाँ हो क्या रहा था. आज सुबह तोह उसे ऐसा लगा था की सारा मामला शायद वह जल्दी hi सुलझा कर घर वापिस चली जाएगी, पर यहाँ तोह शायद कुछ और hi चल रहा था.

आरती ने सुप्रिया को हलके से हिलाते हुए कहा - सुप्रिया... मुझे बता न क्या बात है... सब ठीक तोह हो गया था कल...

सुप्रिया - भाभी मुझे अभी बहुत नींद आ रही है... कल बात करते है...

आरती - ठीक है... पर कल तू ऑफिस नहीं जाएगी...

सुप्रिया जानती थी की भाभी से बहस करना बेकार है. उसे सुबह बीमार होने का बहाना hi करना पड़ेगा.

_________________________

सुबह अतुल के ऑफिस जाने के तुरंत बाद, सुप्रिया और आरती लिविंग रूम में बैठ गए और आरती ने फिर से उससे पूछ ताछ शुरू कर दी. सुप्रिया का पेशेंस जवाब देता जा रहा था.

सुप्रिया - भाभी... आप जब से आये हो, मेरे hi पीछे पड़े हो... आपने एक बार भी मुझसे पुछा की मैं क्या चाहती हूँ...

आरती - तू hi बता दे तू चाहती क्या है... मुझे तोह कुछ समझ नहीं आ रहा...

सुप्रिया ने गहरी सांस ली, वह बुरी तरह थक चुकी थी - भाभी... मान लो... की आपको शादी करने के बाद किसी और से प्यार हो जाता तोह?

आरती - ऐसे कैसे हो जाता किसी और से प्यार... जिससे शादी की है उसी से प्यार होगा न...

सुप्रिया और फ़्रस्ट्राटे होती जा रही थी - मान लो की "मुझे" कोई परफेक्ट लड़का मिल जाता है मेरी शादी के बाद... और हम दोनों को एक दुसरे से प्यार हो जाता है... तोह फिर?

आरती - ये बस ऐसे hi सवाल है न... मान लो वाला... सच तोह नहीं है न...

सुप्रिया - हाँ... कुछ ऐसा hi कुछ समझ लो...

आरती - देख तू स्मार्ट लड़की है... तुझे पता होना चाहिए की अट्रैक्शन अपनी जगह होता है और शादी अपनी जगह... मैं भाभी नहीं, एक फ्रेंड की तरह समझा रही हूँ, अपने खुद के एक्सपीरियंस से... किसी की तरफ आकर्षित होना नार्मल है... शायद मैं बेहला लेने के लिए थोड़ा हसी मजाक तक भी ठीक है... पर हमे अपनी बाउंड्री पता होनी चाहिए....

सुप्रिया - और ये सीमायें कौन तय करेगा... हसी मजाक करते हुए कोई अगर ख़ास बन जाये तोह?

आरती कुछ सेकंड के लिए रुकी और सुप्रिया को सही से एक्सप्लेन करने के लिए - देख मैं खुद अपनी बात बतायु तोह... मेरी जब नयी शादी हुई थी तोह तेरे भैया का एक दोस्त, मुझे पर काफी लाइन मारता था... छूने की कोशिश भी करता था... मैं जवान और नासमझ थी... शायद बहक भी सकती थी... पर मुझे अपनी सीमा पता थी...

सुप्रिया ने एक पल के लिए सोचा की भाभी भैया के किस दोस्त के बारे में बात कर रही थी, पर अभी उसका दिमाग बहुत अलग अलग जगह चल रहा था - और अगर किसी ने वह सीमा पार कर दी हो तोह?

आरती - गोलू तुझे हो क्या गया है यहाँ आकर... कुछ भी बोलती है...

सुप्रिया - मैं तोह बस पूछ hi रही हूँ न...

आरती ने उसकी आँखों में सच को पड़ने की कोशिश करि- जरूर तुझे कोई बेहला फुसला रहा है... तू बहुत भोली है... तुझे समझ नहीं है अभी की मर्द क्या चाहते है तेरी जैसी खूबसूरत लड़कियों से...

भाभी की बात पर सुप्रिया का गुस्सा तेज़ हो गया, वह अभी भी उसे पहली की तरह ट्रीट कर रही थी - इतनी भी नासमझ नहीं हूँ मैं अब... मुझे भी पता है की मर्दों को क्या चाहिए होता है... अतुल को भी तोह वही चाहिए था न, तभी तोह मुझसे शादी की... जबकि हम लोगो का कोई मेल भी नहीं था... वह तोह आपको भी दिखा hi होगा न जब हमारी शादी तय हुई थी...

आरती उसकी शकल देखती hi रह गयी और फिर गुस्से में बोली - तुझे पता है तेरी प्रॉब्लम क्या है... तू अपने आप को दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की समझती है... पर तुझे बिलकुल भी समझ नहीं है की घर कैसे संभाला जाता है...

सुप्रिया की आवाज़ थोड़ी सी धीरे हुई - मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा... मैं बस ऐसे hi कुछ भी बोल रही थी.. पर आपको भी मेरी बात नहीं समझनी होती न...

सुप्रिया वहां से हैट कर दुसरे कमरे में चली गयी. आरती लिविंग रूम में अकेले बैठी हुई सब चीज़ो को सोच कर परेशान हो रही थी. पता नहीं इस लड़की के दिमाग में क्या चल रहा था.

तभी सुप्रिया के साइलेंट फ़ोन पर कुछ मेस्सगेस आने लगे. फ़ोन आरती के ठीक सामने रखा था तोह उसने फ़ोन को उठा कर मैसेज पड़ना शुरू किया.

किसी अननोन नंबर से मैसेज था - सुप्रिया जी... कब मिल सकते है... कल भाभी जी के सामने बात पूरी नहीं हो पायी...

आरती समझ गयी थी की ये जरूर जय का hi मैसेज था, जो कल मॉल में मिला था. आरती ने सोचा की शायद सुप्रिया ने जान बूझ कर उसका नंबर सेव न किया हो ताकि किसी को शक न हो? पिछले 2-3 दिनों से आरती को सुप्रिया का अनलॉक कोड पता था और उसने फ़ोन अनलॉक करते हुए मैसेज का जवाब देना शुरू किया - Hi जय... कैसे हो..

जय - बढ़िया... आप बताया...

आरती ने नार्मल टेक्स्ट करने की कोशिश करि - मैं भी ठीक...

जय - तोह हम लोग कब मिल सकते है... बात पूरी करने के लिए?

कल जिस तरह से सुप्रिया और जय आपस में बात कर रहे थे, और जिस तरह से सुप्रिया ने आज उससे बात की थी, आरती सोचने पर मजबूर हो गयी की हो न हो सुप्रिया का इशारा जय की तरफ hi था. उसे कल भी उन दोनों के बीच एक अलग hi टेंशन महसूस हुई थी. शायद सुप्रिया अपने आप को रोके हुए थी पर जय उसके पीछे पड़ा था?

आरती ने सोचा की शायद उसे hi जय से मिलना पड़ेगा ये मटर सुलझाने के लिए. वह सुप्रिया को न सही, पर क्या पता वह जय को hi समझा पाए.

आरती ने सुरपिया बन कर जवाब दिया - जब आप कहो... मैं आ जयुंगी... कहाँ मिलना है?

जय को इस जवाब की तोह बिलकुल उम्मीद नहीं थी - कल होटल संतूर में मिल सकते है क्या? दिन में 12 बजे करीब... अगर आप ऑफिस से निकल पायो तोह...

आरती को लगा की जय कल ऑफिस नहीं जाने वाले था, उसे बस किसी भी तरह से कल तक सुप्रिया से बात करने से रोकना था - मैं आ जयुंगी... पर आप मुझे इस नंबर पर मैसेज न करना... मैं एक दूसरा नंबर भेज रही हूँ...

जय - सूरे... जैसा आप कहो...

आरती ने जय को अपना खुद का फ़ोन नंबर मैसेज किया - ये रहा दूसरा नंबर... कल वहीँ सीधे मिलते है...

आरती ने उसके और जय के बीच के चाट को जल्दी से डिलीट कर दिया. शायद यही एक मौका था उसके पास सब कुछ ठीक करने का.

थोड़ी देर बाद जब सुप्रिया अपना गुस्सा शांत करके वापस लिविंग रूम में आयी उसे बिलकुल भी अंदाजा नहीं था की जय और आरती के बीच मेस्सगेस में कोई बात हुई थी, और आरती जय से मिलने कल जा रही थी.

थोड़ी देर बाद करुणा भी घर पर काम करने आ गयी थी और सुप्रिया और आरती उसके सामने किसी बहस में नहीं पड़े. आरती तोह बस अब एहि सोच रही थी की वह कल कैसे वहां जाये.

__________________________________

शाम होते होते आरती बहाना ढून्ढ रही थी कल घर से अकेले निकलने का - सुप्रिया मैं जानती हु तुम मेरी बात सुनते सुनते पाक गयी हो...

सुप्रिया - नहीं भाभी... ऐसा कुछ नहीं...

आरती - ऐसा hi है... मैं सोच रही हूँ की कल अपनी एक दोस्त से मिल आयु...

सुप्रिया - यहाँ लखनऊ में आपकी दोस्त?

आरती - क्यों? हो नहीं सकती क्या?

सुप्रिया - हो सकती है... पर आप अकेली कैसे जायेगी भाभी... मैं चलती हूँ आपके साथ... मैं भी आपकी फ्रेंड से मिल लुंगी...

आरती - नहीं... तू परेशान मत हो... मैं चली जयुंगी... तुम आराम करो या ऑफिस चली जायो, जैसे तुम्हारा मैं करे...

सुप्रिया ने सोचा की उसके लिए भी भाभी से ब्रेक लेना जरूरी था, नहीं तोह कहीं उसके मुँह से कुछ ऐसा न निकल जाये जो वह बोलना नहीं चाहती थी - हम्म्म... ठीक है मैं ऑफिस चली जयुंगी... पर मैं आपको अकेले नहीं जाने दूंगी... मैं इक़बाल से बात करती हूँ... वह आपको ले जायेगा और वापस ले आएगा..

भाभी - कौन इक़बाल? वह वॉचमन... नहीं नहीं... मैं उसके साथ नहीं जयुंगी...

सुप्रिया - उसके साथ क्या प्रॉब्लम है? वह बहुत ाचा इंसान है... और आप उसके साथ जायेगी तोह मैं परेशान नहीं हूँगी. नहीं तोह बार बार आपको कॉल करके परेशां hi करती रहूंगी...

भाभी ने सोचते हुए कहा - ाचा ठीक है... तुम परेशान मत हो... मैं उसके साथ चली जयुंगी...

सुप्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा - हाँ ठीक है... मैं उसे कॉल लगाती हूँ...

_______________________________

अगले दिन सुप्रिया और अतुल सुबह ऑफिस के लिए निकल गए, और आरती जय से मिलने जाने के लिए तैयार होने लगी. आरती ज्यादातर साड़ी hi पहनती थी, तोह उसने एक सारी निकल कर पेहेन ली. आरती का फिगर अभी भी अछि तरह मैनटैनेड किया हुआ था और वह मेक उप करके के बाद काफी सुन्दर लग रही थी.

उसने आईने में अपने आप को देखा, और उसके मैं में एक पल के लिए सोच आयी, वह सुप्रिया जितनी सुन्दर तोह नहीं थी, पर कासी हुई साड़ी में उसका भरा हुआ बदन देख कर गली मोहल्ले के मर्दों का लुंड हरकत में आ जाता था. आरती की शादी को 7-8 साल हो चुके थे पर आज भी वह बिस्तर में सुप्रिया के भैया को अछि तरह थका देती थी. बल्कि उसका पति भी उसके hi इशारो पर नाचता सेक्स के दौरान.

आरती को सेक्स की इम्पोर्टेंस बहुत अचे से पता थी. सेक्स की जिज्ञासा ने उसे शादी से पहले hi अपने बॉयफ्रेंड के साथ सब कुछ करने पर मजबूर कर दिया था. उसके पति ने भी उसे शादी के बाद खूब मजे दिए थे, और उसने उनको. जॉइंट फॅमिली में रहने के कारन उनको अपने आप पर कई बार अंकुश लगाना पड़ता था, नहीं तोह आरती का बस चलता तोह वह रोज़ hi सेक्स करती. यहाँ घर से इतनी दूर आकर वह अपने पति के साथ को बेहद मिस कर रही थी.

वह तोह यहाँ बस सुप्रिया के लिए आयी थी, उसकी सीढ़ी सी प्यार सी ननद थी. शायद करुणा सही hi कह रही थी, सुप्रिया शायद अतुल के साथ खुश नहीं थी, और उसकी साइड से भी प्रयास काम था. नहीं तोह सुप्रिया जैसी जवान और खूबसूरत बीवी के साथ कौन नहीं रोज़ सेक्स करना चाहेगा. और कल जो सुप्रिया ने उससे कहा वह भी उसके दिल पर एक भरी पत्थर की तरह पड़ा हुआ था.

पर फिर साथ में आरती को ये भी पता था की अगर एक बार सुप्रिया ने घर के बहार मुँह मार लिया तोह फिर शायद उसकी हिम्मत बस बढ़ती hi जाएगी. जरूर जय उसे बहका रहा होगा. वह बस जय से बात करके इस सारे मामले को अचे से निपटा के hi यहाँ से जाएगी, चाहे इसके लिए उसे कुछ भी करना पड़े.

आरती तैयार हो कर नीचे आयी जहाँ इक़बाल पहले से अपनी पुराणी गाडी लेकर खड़ा था. कल शाम जब सुप्रिया का फ़ोन आया था, पहले तोह वह थोड़ा हिचकिचाया था, पर वह सुप्रिया को कैसे किसी चीज़ के लिए मन कर देता.

आरती को आते देख इक़बाल ने गाडी का दरवाज़ा खोल दिया और घबराते हुए अपनी नज़रें नीचे कर ली. आरती की साड़ी उसके शरीर से अछि तरह चिपकी हुई थी, जिसमे उसकी गोलियां साफ़ झलक रही थी, और इक़बाल नहीं चाहता था की उसकी नज़र उन पर जाए. आरती वहां चलते हुए आयी और गाडी में बैठ गयी. इक़बाल भी ड्राइवर सीट पर बैठ गया.

आरती ने कागज़ का एक टुकड़ा इक़बाल की और आगे किया, जिस पर एड्रेस लिखा हुआ था - भैया... ये एड्रेस है... आपको पता है ये कहाँ है?

इक़बाल ने होटल का एड्रेस देखा - जी... बिलकुल पता है...

इक़बाल ने गाडी चलनी शुरू करि. गाडी में इतनी छुपी सी थी और वह अपने आईने से पीछे की और नर्वस हो कर देख रहा था, जैसे सोच रहा हो की वह कुछ बोले या नहीं. जैसे hi उसकी नज़रें आरती की नज़रो से मिली, उसके मुँह से एक डैम निकल गया - मैडमजी ने कहा था आपको किसी दोस्त से मिलने जाना है...

आरती उसकी घबराहट को भांपते हुए हलके से हसने लगी - मैडमजी...?? सुप्रिया को मैडमजी बुलाते हो?

इक़बाल - जी... मैं तोह सभी लेडीज को मैडमजी hi बुलाता हूँ... पर हाँ सुप्रिया जी को ख़ास कर...

आरती ने भौहें उचकते हुए पुछा - सुप्रिया को खासकर क्यों?

इक़बाल - ुह्ह्ह्ह... वह बहुत अछि है न मैडमजी... इसलिए... बहुत सीढ़ी और सच्ची है...

आरती - हाँ... ये तोह है... पर ऐसा लगता है वह तुम पर काफी भरोसा करती है...

इक़बाल के चेहरे पर एक अलग सी ख़ुशी आ गयी थी - बस जी... मैं कोशिश करता हूँ की मैडमजी हमेशा मेहफ़ूज़ रहे... उन्हें कोई भी दिक्कत न हो...

आरती ने सोचते हुए कहा - एक सवाल करू? अगर तुम बताओगे तोह उससे तुम्हारी मैडमजी की काफी मदद हो जाएगी...

इक़बाल - जी बिलकुल... उनके लिए तोह कुछ भी कर सकता हूँ...

आरती - तुमने अपनी मैडमजी को कभी किसी और मर्द के साथ देखा है क्या...

इक़बाल ने एक पल के लिए पीछे मुद कर आरती की और देखा - आप ऐसा क्यों पूछ रही है?

आरती - क्यूंकि मुझे सुप्रिया की बहुत फ़िक्र रहती है... कहीं कोई उसका गलत फायदा न उठा ले... समझ रहे हो न...

इक़बाल - जी...

आरती - डरो मत... ये बात बस हमारे बीच hi रहेगी...

इक़बाल बोलने में हिचकिचा रहा था, पर ये सुप्रिया की भाभी थी और वह उसका भला hi चाहती थी - जी... एक लड़का है... वह मैडमजी को काफी परेशान करता था... पर अब तोह वह काफी दिनों से दिखा नहीं...

आरती - ाचा... और कुछ उसके बारे में... तुम्हे लगता है की सुप्रिया और वह...

इक़बाल - नहीं नहीं... आप क्या बोल रहे है... मैडमजी तोह बेहद अछि है... और वह लड़का तोह बहुत hi कमीना सा लगता था...

आरती ने सोचा की जरूर इक़बाल जय के बारे में hi बात कर रहा होगा. ये सुन कर उसने और भी पक्का निश्चय कर लिया की वह किसी भी तरह जय को सुप्रिया के पीछे पड़ने से रोकेगी.

आरती अपने खयालो में hi खोये हुई थी की उसे पता hi नहीं चला की कब वह होटल पहुंच गयी थी. ये कोई बहुत बड़ा होटल नहीं था, बल्कि काफी लोकल सा hi था.

इक़बाल ने जगह को देखते हुए आरती से पुछा - आपकी दोस्त यहीं आएँगी क्या?

आरती - हाँ... यहीं बोलै है उसने... मैं उसे मैसेज करती हूँ...

आरती ने अपना मैसेज चेक किया जिसमे जय ने उसे रूम नंबर भेजा हुआ था - हाँ... वह पहुंच गयी है... तुम यहीं कहीं गाडी लगा लो... मैं आती हूँ थोड़ी देर में...

आरती होटल के अंदर घुस गयी. उसका दिल थोड़ा तेज़ धड़क रहा था, पता नहीं जय ने सुप्रिया को अकेले कमरे में क्यों बुलाया था. शायद जय के इरादे ठीक नहीं थे... ये सोचते hi आरती के अंदर अलग सी कम्पन होने लगी. पर अब उसने यहाँ आने का ठान hi लिया था तोह पीछे क्या हटना. आज वह जय का पूरा भन्दा फोड़ के hi रहेगी.

वह होटल के स्टाफ से पूछते हुए जय के दिए हुए कमरे के बहार पहुंची. आरती ने अपने चेहरे से साड़ी घबराहट को दूर किया और ज़ोर से दरवाज़े पर नॉक किया.

अंदर से जय ने गुनगुनाते हुए दरवाज़ा खोला - आ hi गयी...

एकदम से अपने सामने सुप्रिया को न देख उसकी भाभी को देख जय की बोलती बंद हो गयी.

जय - आप?

आरती - हाँ... किसी और का वेट कर रहे थे?

जय अपने होंठों पर हलकी सी स्माइल लाया - शायद... पर आप आयी मुझसे मिलने तोह मुझे और भी ाचा लगा... आइये अंदर..

आरती कमरे के अंदर घुसी, कमरे में एक भीनी भीनी सी खुसबू हो राखी थी. वह कमरे के अंदर घुस कर इधर उधर देख रही थी की कोई और तोह नहीं था वहां. इस बीच जय ने पीछे से दरवाज़ा बंद कर दिया और आरती को ऊपर से नीचे तक देखने लगा. आज जय एक अलग मूड से सुप्रिया से मिलने आया था, शायद वह विक्रम के माल पर हाथ साफ़ करने से कतराता. पर आरती की गांड, गोरी पीठ और सिल्की बाल देख कर उसका मूड पलटने सा लगा था.

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आरती सामने स्लाइडिंग गिलास दूर में जय की परछाई देख पा रही थी और कैसे उसे देख कर जय की लार टपक रही थी. आरती जय की और मुड़ी और उसने बिना किसी हिचकिचात के मैं मुद्दा छेड़ दिया - तोह तुम्हारे और सुप्रिया के बीच में क्या चल रहा है?

जय को एक पल के लिए समझ नहीं आया की आरती क्या बोल रही है, पर वह कोई कच्चा खिलाडी नहीं था. जो भी आरती को समझ आया था शायद उसका hi इस्तेमाल करना पड़ेगा - तोह आपको बता दिया सुप्रिया ने सब?

आरती - पूरी तरह से तोह नहीं पर... पर इतनी नासमझ नहीं हूँ मैं... और जहाँ तक मुझे समझ आया है.. न की तुम... तुम्हे पता है न वह शादी शुदा है...

जय - बिलकुल पता है...

आरती - तोह फिर तुम उसके पीछे क्यों पड़े हो? उसे तोह समझ नहीं है, पर तुम्हे तो है न...

जय - आप कड़ी क्यों है... आराम से बैठ कर बात करते है न...

जय आरती के पास से हो कर निकला और आरती पीछे होते हुए न चाहते हुए भी बीएड पर बैठ गयी.

जय ने पास में राखी टेबल से 2 जूस के गिलास उठाये और एक आरती को लाकर दिया - ये लीजिये... आप आराम से पीछे कम्फर्टेबले हो कर बैठ जाइये... मैं आपको सब समझाता हूँ...

जय आकर आरती के बराबर में बैठ गया और आरती सरक कर थोड़ा अलग बैठ गयी. आरती ने जूस के गिलास से हल्का हल्का सिप लेना शुरू किया.

आरती - तोह बताया फिर... क्या चाहते हो तुम सुप्रिया से... उसे तोह लगता है तुम उससे प्यार करते हो... पर सच मुझे भी पता है और तुम्हे भी...

जय - आपको क्यों लगता है मैं सुप्रिया से प्यार नहीं करता... मैं भी उससे बेहद प्यार करता हूँ... और क्या हुआ अगर उसकी शादी हो चुकी है तोह... आपका आशीर्वाद मिल जाये तोह...

आरती - वह तोह मिलने से रहा...

जय - आप मुझे गलत समझ रही है...

आरती जय को उकसाना चाहती थी, ताकि वह अपने दिल की बात खुल के बोले - मुझे लोगो की अछि तरह पहचान है... और तुम तोह मुझे एक मंझे हुए खिलाडी लग रहे हो...

पर जय आरती की बातों में नहीं फसा - भाभी जी... आप मेरा दिल दुख रही है ये सब बोल कर...

एक रूम में बैठे हुए भी, आरती को अपने कपड़ो के अंदर पसीने छुट्टे हुए महसूस हो रहे थे, उसकी दिल की धड़कन तेज़ हो रही थी. ये लड़का बहुत hi तेज़ था, उसे शायद अपनी कुछ सीमायें लांघनी होंगी ताकि सुप्रिया वह सीमा न लांघे - वैसे एक बात कहु... सुप्रिया तोह अभी कच्ची है.. तुम्हे देख कर लगता है की तुम्हे पके हुए पेड़ के आम खाने में ज्यादा मज़ा आएगा...

जय ने अनजान बनने का नाटक किया - मैं समझा नहीं आपकी बात...

आरती - सुप्रिया के बारे में सोचना बंद करो... अभी तोह मैं तुम्हारे सामने हु...

जय - भाभी जी आप...

आरती - तुम मुझे आरती भी बुला सकते हो... मैंने देखा था तुम मेरी और कैसे देख रहे थे...

आरती के चेहरे के एक्सप्रेशन बदल गए थे और जय को एक लड़की को उससे इस तरह से बात करते हुए एक अलग सी hi सनसनी हो रही थी. आज भाभी जी को पहले कदम बढ़ाते देख उसे बहुत hi मज़ा आ रहा था. हमेशा तोह वह hi शिकार की शुरुवात करता था, पर आज वह खुद शिकार बनने का नाटक कर रहा था.

जय - मैंने कब देखा आपकी और... आप तोह सुप्रिया की भाभी हो...

आरती ने अपना हाथ जय की छाती पर रखा - बनो मत... मुझे पता है तुम्हारा ध्यान कहाँ कहाँ गया था... तुम बोलोगे या मैं बोलू?

जय - आप hi बोल दीजिये न...

जय आरती को बेशरम बनने पर मजबूर कर रहा था - ठीक है मैं hi बता देती हूँ... मेरे ब्लाउज के अंदर झाँक रही थी तुम्हारी आँखें...

आरती ने अपने कंधे उचकते हुए अपनी साड़ी का पल्लू धीरे से नीचे गिरा दिया, जैसे एक्सीडेंट से गिरा हो जानबूझ कर नहीं.

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आरती कामुक आवाज़ में बोली - उफ्फ्फ्फ़... सॉरी जय.... कुछ दिखा तोह नहीं...

जय किसी तरह से अपने आप पर कण्ट्रोल किये हुए था, वह अभी इस तमाशे का और मज़ा लेना चाहता था - क्या कर रही है आप भाभी जी.... पल्लू ऊपर कीजिये न... कोई देख लेगा हमे ऐसे साथ में तोह...

आरती भी जय के इस बर्ताव से और बोल्ड होती जा रही थी. पता नहीं क्या था पर उसके पूरे शरीर में एक अलग सी गर्मी चढ़ रही थी. आरती सोच रही थी पता नहीं उसे और कितना रिझाना पड़ेगा इसे ताकि ये कुछ कदम आगे ले. अगर ये सच में शरीफ हुआ तोह? नहीं नहीं, कोई मर्द शरीफ नहीं होता, जिसको मौका मिलता है वह अपना हाथ साफ़ करता hi है.

आरती ने अपनी ऊँगली जय के गले पर राखी - कौन देखेगा... बस हम दोनों hi तोह हैं यहाँ इस रूम में...

जय - भाभी जी... गड़बड़ हो जाएगी... आप समझा करो...

आरती ने अपनी आवाज़ को और सेक्सी बनाते हुए कहा - हो जाने दो न... डरते क्यों हो...

जय - डर नहीं रहा हूँ... बस रिश्ते का लिहाज है...

आरती - अभी तोह कोई रिश्ता भी नहीं बना है...

आरती को नहीं पता था की वह अब सुप्रिया के लिए ये सब कर रही थी, या उसकी शरीर में छेड़ती हुई गर्मी की वजह से, या फिर जय के दब्बू से व्यहवार से. आरती ने अपने होंठ अपने दांतों से कांटे.

आरती ने जय का हाथ पकड़ते हुए अपने चेहरे की और किया, और फिर उसकी उंगलियां अपने होंठों पर लगते हुए उन्हें नीचे ले जाना शुरू किया. आरती की शकल पर साफी लिखा था की वह अब पूरी तरह से जय के जाल में फास चुकी थी.

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आरती ने अपना मुँह जय के कान के पास लेट हुए कहा - सुप्रिया को भूल जायो... जो तुम्हे चाहिए वह सुप्रिया से कई गुना बेहतर मैं तुम्हे दे सकती हूँ...

आरती अपने आप को सरकते हुए जय की गोदी में आ बैठी थी और उसने जय के शर्ट के ऊपर के दो बटन खोल दिए.

आरती की तेज़ सांसें जय के कानो के पास उसे बेचैन कर रही थी. जय का मुँह आरती के बालों के बीच में था - आप पीछे तोह नहीं हट जाएँगी न... एक बार मैं शुरू हो गया न तोह मुझे रोकना मुश्किल हो जायेगा...

आरती एक भारी आवाज़ में बोली - शुरू तोह हो कर दिखायो...

जय ने अपने हाथ आरती की पीठ पर लपेटे और आरती के गाल पर एक हलकी सी किश कर दी.

आरती ने हलके से हस्ते हुए कहा - ये कैसी बच्चो वाली किश कर रहे हो...

आरती के ताने उसे और भी तड़पा और भड़का रहे थे, बस उसका टाइम आ hi गया था आरती पर बरसने का. जय ने आरती को कास के पकड़ा और अपने होंठ आरती के होंठों पारा लगा दिए और वह उसके होंठों को कांटे हुए खींचने लगा.

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आरती ने जय की शर्ट को कास के पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी - ाह्णण.... मममममम....

जय आरती के होंठों को बुरी तरह चूस और खींच रहा था और आरती अपने पूरे शरीर को जय के शरीर पर रगड़ रही थी. जय ने आरती के पेट के मांस को पकड़ते हुए नोचना शुरू किया. आरती की बुरी तरह चीख निकल गयी. शायद जय उतना भी लल्लू नहीं था जितना उसने सोचा था.

जय ने अपने चेहरा आरती के पेट पर रगड़ दिया - अब ाचा लग रहा है भाभी जी....

आरती ने अपने होंठ अपनी चीब से चाटते हुए हलके से सर हिलाया. जय आरती को बीएड पर नीचे धकेलते हुए उसके ऊपर छड़ गया और उसकी गर्दन और कान पर चूमने लगा. एकदम से जय ने बहुत ज़ोर से आरती के कान पर काटा.

आरती दर्द में थी पर उसे बहुत मज़ा भी आ रहा था. उसका ब्लाउज पूरा पसीने में भीग चूका था.

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आरती - Ahhh.....Tum जैसे दीखते हो... वैसे हो नहीं.... उफ्फ्फ.... मुझे पता था....

जय - भाभी आग तोह आपने hi भड़कायी है... अब बस देखती जाइये आप...

जय आरती की गर्दन और कंधे पर काटने लगा था और उसने आरती को अपने पैरो के नीचे दबोच लिया था. जय ने आरती के ब्लाउज को खींचते हुए उसके कंधो से नीचे सरकाया. आरती नहीं चाहती थी की जय के जंगलीपन में उसका ब्लाउज फैट जाये तोह उसने खुद hi आगे से अपने ब्लाउज के हुक खोलने शुरू कर दिए. ब्लाउज उतारते hi आरती के गोर बूब्स उसकी सफ़ेद ब्रा से बहार निकल रहे थे.

जय - उफ्फ्फ्फ़.... क्या बूब्स है आपके...

जय ने आरती के ऊपर आते हुए अपना मुँह उसके बड़े बड़े मम्मो के बीच में लगा दिया और अपनी जीब उसकी क्लीवेज में घुसाने लगा.

आरती - उफ्फफ्फ्फ़..... अह्ह्ह्ह.....

जय ब्रा के बहार झूलते हुए आरती के बूब्स को छांट और कान्त रहा था. आरती जय के पकड़ से हट्टे हुए बीएड पर बैठी पर जय ने पीछे से आकर आरती को पकड़ लिया और उसकी ब्रा के स्ट्रैप्स को नीचे सरका दिया.

जय पीछे से आरती के बड़े बड़े बूब्स और निप्पल्स को अपनी उँगलियों से मसलने लगा, उसके निप्पल्स को हलके हलके खींचते हुए.

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जय - वहहहह भाभी जी.... लगता है भैया ने काफी काम किया है इन पर....

आरती - उफ्फ्फ्फ़..... जय.... ममममम.....

जय - क्यों अब मज़ा नहीं आ रहा....

जय ने और तेज़ी से आरती के निप्पल्स को अपनी उँगलियों के बीच में दबाया. आरती ने अपनी मुट्ठी से बीएड की छड़दार को बीच लिया. जय ने उसका चेहरे अपनी और करते हुए फिर से उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया था.

आरती की हालत बुरी होती जा रही थी, एक तरफ उसका दिमाग कह रहा था की उसे जय को रोक देना चाहिए, दूसरी और उसका मैं बस भटके hi जा रहा था.

आरती - जय... रुको na....ahhhhh.... तुम तोह सुप्रिया से....

जय - भाभी मैंने कहाँ था न, एक बार मैं शुरू हो गया तोह अपने आप को रोक नहीं पायूँगा... अभी सुप्रिया के बारे में नहीं सोचते.... मुझे पता है आप भी क्या चाहती है इस टाइम...

आरती ने अपने आप को अपने मैं के आगे इतना विवश कभी नहीं पाया था. अपने आप को दिलासा देते हुए उसने याद दिलाया की शायद एहि सुप्रिया के लिए ठीक था, वह तोह अभी कच्ची काली थी और ये जय पक्का खिलाडी - अह्हह्ह्णण........ ममममम..... और ज़ोर के दबायो न इन्हे...

जय ने अपनी पूरी मुट्ठी में आरती के बूब्स को दबा लिया और उन्हें पूरे डैम से दबाने लगा - जैसा आप कहे....

जय ने फिर से आरती को पीछे खींचा और अपना मुँह उसके नंगे स्तनों पर लगा दिया. वह उन्हें ज़ोर ज़ोर से चूस रहा था, और उसका हाथ आरती के पेटीकोट के ऊपर उसकी छूट के पास हलके हलके मसल रहा था.

आरती ने अपने पेअर खुद hi छोड़े कर लिए, जैसे वह जय को अछि तरह जगह दे रही हो उसका हाथ अपनी छूट तक पहुंचने के लिए. उसने खुद hi अपने पेटीकोट का नाडा खींचते हुए नीचे कर दिया और जय को अंदर का नज़ारा दिखा, एक पतली सी कॉटन पंतय में आरती की छूट कैद थी.

जय ने अपने शर्ट और बनियान उतार फेके थे और उसकी उंगलियां पंतय पर छूट के ठीक बहार हलके हलके से गुदगुदी सी कर रही थी, उसे बहुत ज्यादा बेचैन करते हुए.

आरती - उफ्फ्फफ्फ्फ़.... क्या कर रहे हो..... आह्ह्ह्हह्ह.....

जय - क्यों मज़ा नहीं आ रहा...

आरती - अपना लुंड निकालो न बहार... फिर मज़ा आएगा...

जय - जल्दी क्या है... वह सब भी करेंगे... पहले मुझे तोह खुश कर दो...

आरती - अब समझ में आ रहा है, तुम जैसा अपने आप को दिखा रहे थे वैसे हो नहीं....

जय के चेहरे पर एक हसी सी आ गयी और उसने आरती की छूट पर पंतय के ऊपर से हलके से चुटकी ली. आरती बुरी तरह झनझना उठी.

आरती के मुँह से ज़ोर से निकला - उईईईईई..... कमीने......

जय ने फिर से ज़ोर की चुटकी ली और आरती के नीचे के हिस्से पर ज़ोर ज़ोर के मसलने लगा. आरती की बंद आँखें और उसके चेहरे के हाव भाव उसकी हालत अचे से बता रहे थे.

आरती - उफ्फ्फ.... दाल के ख़तम कर न....

जय ने आरती के बाल पकड़ते हुए कहा - दाल दूंगा... पहले आप ज़रा मेरा लुंड तबियत से खड़ा कर दो...

आरती उसका इशारा अछि तरह समझ गयी थी. उसके अंदर एक बेताबी थी जो उससे वैसे तोह बस सुप्रिया के भैया के साथ महसूस होती थी, पर आज इस अनजान लड़के के साथ भी वह वही सब करना चाहती थी. उसने झटपट हाथ जय की जीन्स पर रखे और उसे उतारने लगी. वह बहुत बेचैन हो चुकी थी अब तक और उसे जल्द hi ये खेल ख़तम करना था.

आरती ने जल्दी से जय की जीन्स और अंडरवियर उतारे, और उधर जय ने भी आरती के ब्रा के हुक खोलते हुए उसे ऊपर से पूरा नंगा कर दिया. जय का लुंड थोड़ा खड़ा तोह था पर नीचे की और लटका हुआ था. आरती ने जल्द hi उसे अपने मुँह में ले लिया और सपद सपद करके उसे चूसने लगी.

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जय का प्रेकम लुंड पर लिप्त हुआ था और वह आरती के मुँह में जाते हुए सफ़ेद धागे से बना रहा था. आरती अपने बाल ऊपर करते हुए उसका लुंड चूसने लगी. उसने एक हाथ से जय का लुंड पकड़ा हुआ था और वह तेज़ी से लुंड को अपने मुँह से अंदर बहार करने लगी.

आरती के मुँह की गर्माहट से जय का लुंड जल्द hi बड़ा होता गया. वह देखना चाहता था की आरती कैसे उसका पूरा लम्बा लुंड मुँह में ले पाएगी.

जय - भैया का इससे बड़ा है या छोटा?

आरती उसकी बात को इग्नोर करते हुए लुंड को पूरा अंदर तक चूसती रही.

जय ने उसका जवाब न आते देख उसके बाल अपनी मुट्ठी में बीच लिया - मैंने कुछ पुछा भाभी जी... भैया के लुंड के बारे में...

आरती ने उसे पलट कर जवाब दिया - क्योऊ... तुम्हे मुँह में लेने का भी शौक है क्या..

आरती भले hi उससे चुद रही थी पर ऐसा लग रहा था जैसे वह ये सब अपने हिसाब से hi कर रही था न की जय के प्रेशर में आकर. जय को शायद इसकी आदत नहीं थी और वह आरती के चेहरे पर हसी देख कर गुस्साते जा रहा था.

जय ने अपने हाथ से आरती के सर को अपने पैरो पर दबाया और अपना लुंड पूरी स्पीड में उसके मुँह में दागने लगा. फाड् फाड् फाड् फाड् फाड्... पूरा कमरा में उसके लुंड की आरती के गले से टकराने की आवाज़ आ रही थी.

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आरती ने ज़रा भी झटपटाहट नहीं दिखायी और वह जय के लुंड को अपने मुँह में सेहती रही.

कुछ सेकंड बाद जय ने आरती के सर से अपनी पकड़ ढीली करि - अह्ह्ह्ह... भाभी जी... आप कुछ तेवर ढीले हुए आपके....

आरती ने जय की और देखा - अह्ह्ह.... क्या हुआ.... थक गए क्या.... और करो न...

क्या चीज़ थी ये, जय को यकीं hi नहीं हो रहा था, उसने फिर से फुल स्पीड में आरती के मुँह को छोड़ना ज़ारी रखा. आरती के दिमाग में बस अभी तोह जय का लुंड hi घूम रहा था, वह चाहती थी की जल्दी से वह उसकी छूट तक पहुंचे.

कुछ 2-3 मिनट के बाद जय का पहला डिस्चार्ज आरती के मुँह में निकल गया था. उसने आरती का सर पकड़ते हुए एक एक बूँद को अचे से उसकी जीब और गले के अंदर उतारा.

आरती बुरी तरह काँप रही थी पर उसने जय के विरए को बहार नहीं थूका, बल्कि पूरा अंदर जातक लिया.

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आरती ने सांस आते hi कहा - और कर पयोगे... या हो गया तुम्हारा....

जय - भाभी जी... आपको सलूट है... आप तोह कमल की चीज़ हो...

आरती - मैंने कहा था न... सुप्रिया मेरे आगे कुछ नहीं है...
 
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