सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी - Page 4 - SexBaba
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सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी

अपडेट 26

सुप्रिया की नींद घर की दुर्बल से खुली, शायद कुछ देर से दुर्बल बज रही थी. वह झूलते हुए दरवाज़ा खोलने गयी, और देखा की अतुल थोड़े गुस्से में घर आया था, उसके चेहरे पर झुंझुलाहट साफ़ दिख रही थी. वह जल्दी से घर में घुसा और जूते उतारने लगा.

अतुल - कहाँ थी, इतनी देर से बेल्ल बजा रहा हूँ...

सुप्रिया - हाँ, सॉरी, मैं सो गयी थी...

अतुल - ये कोई सोने का टाइम है.. और ये टीशर्ट जीन्स कैसे पहना हुआ है आज?

सुप्रिया - ऐसे hi... मैं कर रहा था...

अतुल को टेबल पर रखे गुलाब के फूल दिखे - कोई घर आया था क्या?

सुप्रिया - नहीं तोह?

अतुल - तोह ये फूल कहाँ से आये..

सुप्रिया ने सोच, ओह सहित, वह फूल हटाना तोह भूल hi गयी थी, अब क्या बोलू - वह मेघा ले कर आयी थी..

अतुल का चेहरा मेघा का नाम सुनते hi और भी सद्द गया - मैंने कितनी बार कहा है की उससे दूर hi रहा करो, पर तुम सुनती hi नहीं हो..

आज तोह अतुल घर आते hi ज्यादा hi चीड़ चीड़ कर रहा था, सुप्रिया ने पुछा - क्या हुआ, इतना गुस्सा क्यों हो आज?

अतुल - राहुल की वजह से.

सुप्रिया एक डैम से घबरा सी गयी, क्या राहुल ने अतुल को कुछ बता दिया था? नहीं, अगर ऐसा होता तोह अतुल घर आने का इंतज़ार नहीं करता शायद.

सुप्रिया - क्या किया राहुल ने?

अतुल - कुछ भी नहीं किया... आज भाईसाहब दिन में ऑफिस से निकल गया और फिर शाम को वापस आया. पता नहीं किस लड़की के चक्कर में पड़ा है.

सुप्रिया ने मैं hi मैं रहत की सांस ली, शायद उसने कुछ नहीं बताया था.

अतुल - काम उसका पूरा होता नहीं है... ऐसे रहा तोह उसकी नौकरी चली जाएगी...

सुप्रिया ये सुन कर थोड़ा सा बुरा फील कर रही थी, वह नहीं चाहती की राहुल की जॉब चली जाये. इतना भी बुरा नहीं था वह. आज उसकी वजह से राहुल को शायद ऑफिस में दांत पड़ी होगी.

सुप्रिया - चलो आप खाना खा lo...kafi लेट हो गया है...

दोनों ने खाना खाया और अतुल बीएड पर लेटते hi सो गया. सुप्रिया बीएड में बराबर में लेती थी, पर उसका मैं तोह आज जो भी उस में hi चल रहा था. जो हुआ उससे उसे ाचा तोह लगा था पर उसे राहुल पर भी दया आ रही थी, आज काफी बुरा दिन गया था उसका. उसने अपना फ़ोन उठाया और थोड़ी देर सोचने के बाद राहुल को मैसेज किया.

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सुप्रिया - Hi..kya कर रहे हो..

राहुल घर पर अभी भी ऑफिस के काम में hi लगा था. उसके फ़ोन पर मैसेज pop-up हुआ और सुप्रिया का नाम देखते hi उसने झट से फ़ोन उठा लिया.

राहुल - Hi...office के काम में hi लगा हूँ...

सुप्रिया - ाचा... कैसा रहा ऑफिस में सब आज?

राहुल - अतुल ने बताया नहीं? काफी गुस्सा किया उसने मुझपर.

सुप्रिया - ओह... बनानासाद ी ऍम सॉरी मेरी वजह से तुम्हे ये सुन्ना पड़ा... थैंक यू सो मच आज हेल्प करने के लिए...

राहुल - ारी कोई नहीं, तुम्हारी वजह से नहीं था वह. वैसे मैंने तुम्हारा स्व तुम्हे ईमेल कर दिया है.

सुप्रिया - थैंक यू! होप तुम्हारा काम जल्दी से पूरा हो जाये और तुम सो पायो...

राहुल - मुझे ाचा लगा तुमने मैसेज किया सुप्रिया..

सुप्रिया - गुड नाईट..

राहुल - गुड नाईट...

सुप्रिया ने पेट में थोड़ी सी गुदगुदी सी हो रही थी की वह रात को किसी को ऐसे मैसेज कर रही थी. ख़ास कर राहुल को, जिसने उसे बोल hi दिया था की वह उसे लिखे करता है. उसने जल्दी से अपने सारे मैसेज डिलीट किये. उसे थोड़ा गलत लग रहा था जैसे वह अतुल से चीटिंग कर रही हो, पर फिर उसने सोचा की इसमें तोह कुछ भी गलत नहीं था, वह बस एक दोस्त को hi तोह मैसेज कर रही थी.

स्व तोह बन गया था पर अब बस जॉब ढूढ़नी थी. वैसे तोह उसे याद था की विक्रम ने उसे जॉब का ऑफर दिया था पर वह विक्रम के यहाँ जॉब नहीं करना चाहती थी. विक्रम और प्रताप एक दुसरे को जानते थे, शायद सब आपस में मिले हुए hi होंगे ये बड़े लोग. उसे ऐसी जगह नहीं काम करना था जहाँ उसे डर लगे.

रात भर, सुप्रिया अपने फ़ोन पर जॉब ढूंढ़ती रही और उन पर अप्लाई करती रही. उसे लगता था की उसे चाहे फ्रेशर की hi जॉब मिल जाये वह भी ले लेगी. ऑनलाइन अप्प पर वह जॉब अप्लाई करती करती सो गयी.

सुबह अतुल के जाने एक बाद सुप्रिया ने अपना ईमेल चेक किया तोह अभी तक तोह किसी का जवाब वापस नहीं आया था. शाम होते होते वह काफी निराश हो गयी थी की उसे एक भी कॉल नहीं आया. थोड़ा तोह एक्सपीरियंस था hi उसे. अगले 1-2 दिन भी एहि हाल रहा, वह जॉब अप्लाई करती रही पर कोई कॉल नहीं आ रहे थे. शायद उसकी किस्मत में hi जॉब करना नहीं लिखा था.

सुप्रिया ने थक कर साड़ी आशा छोड़ दी थी जब तीसरे दिन उसके फ़ोन पर एक घंटी बजी. दूसरी तरफ एक लड़की की आवाज़ थी.

लड़की - Hello, मिस सुप्रिया?

सुप्रिया - हांजी... आप कौन?

लड़की - Hi, ी ऍम कृति फ्रॉम क्रिएटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड. आपने अकाउंटेंट की जॉब के लिए अप्लाई किया था.

सुप्रिया ये सुन कर एक डैम से काफी एक्ससिटेड हो गयी - यस ma'am. मैंने जॉब अप्लाई किया था...

कृति - आप कल आ सकते है क्या इंटरव्यू के लिए, 11 o'clock?

सुप्रिया ने बिना सोचे समझे जल्दी से बोलै - यस ma'am, बिलकुल. ी विल बे तेरे.

कृति - Ok ग्रेट, वे विल सी यू टुमारो.

सुप्रिया - Ma'am पर आना कहाँ है...

कृति - ओह हमारे ऑफिस का एड्रेस होगा न जॉब एप्लीकेशन में. गोमती Nagar...see यू टुमारो...

सुप्रिया के मैं में और बहुत सारे सवाल थे, पर इससे पहले वह कुछ पूछ पाती, कृति ने फ़ोन काट दिया. सुप्रिया बहुत hi खुश और एक्ससिटेड फील कर रही थी. आखिर उसको एक इंटरव्यू के लिए कॉल आ hi गया था. ओह, पर इंटरव्यू तोह कल hi था, इतनी जल्दी वह कैसे सब मैनेज करेगी. क्या क्या ले कर जाना होगा इंटरव्यू में, क्या कपडे पेहेन्ने होंगे, कैसे जाएगी वह वहां, क्या पूछेंगे उससे वहां?

वह बेसब्री से शाम को अतुल के आने का इंतज़ार कर रही थी. वह उसे ये खुशखबरी सुनना चाहती थी. अतुल हमेशा की तरह थका हुआ सा घर वापस आया.

सुप्रिया ने उसके घर में घुसते है उसे बता दिया - अतुल! आपको पता है मुझे फाइनली जॉब के लिए कॉल आ गया आज...

अतुल - ओह, तुम अभी भी जॉब ढून्ढ रही हो, मुझे लगा था तुमने बंद कर दिया है. तोह क्या बोलै उन्होंने?

सुप्रिया - एहि की मुझे कल आना है.. इंटरव्यू के लिए...

अतुल - ाचा अभी इंटरव्यू है, जॉब नहीं मिली...

सुप्रिया ने चहकते हुए कहा - वह भी मिल जाएगी कल, आप देखना...

अतुल - इतना आसान नहीं होता, वह बहुत सारे लोगो का इंटरव्यू लेंगे, और फिर तुम्हे क्यों जॉब देंगे?

सुप्रिया - क्यों नहीं देंगे? मेरे पास एक्सपीरियंस है.

अतुल - है है है, वह झाँसी की छोटी सी जगह का एक्सपीरियंस...

सुप्रिया को थोड़ा सा गुस्सा आना शुरू हो गया था, अतुल हमेशा उसे नीचे करने में क्यों लगा रहता था. क्या बस उसकी जॉब एक बड़ी जॉब थी. एक दिन वह अतुल से भी बड़ी जॉब पर होना चाहती थी. पर अभी उसने किसी तरह से उसकी नेगेटिविटी को इग्नोर किया.

सुप्रिया - आप चलोगे न मेरे साथ कल इंटरव्यू पर...

अतुल - नहीं बाबा, कल नहीं हो पायेगा, कल कुछ इम्पोर्टेन्ट क्लाइंट्स आ रहे है.

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सुप्रिया हारा हुआ सा महसूस कर रही थी, अब वह बिना अतुल के कैसे इंटरव्यू पर जाएगी. ऑटो तोह कर hi सकती है, पर अगर टाइम पर ऑटो न मिला तोह? इतनी सुबह सुबह तोह काफी भीड़ भी होती है. और बाकी सब सवाल भी तोह थे, अतुल का तोह मूड नहीं लग रहा था उसकी हेल्प करने का. उसे किसी और से hi मदद मांगनी होगी. मेघा को तोह कुछ भी चलना आता नहीं, तोह फिर कौन बचा - राहुल??

अब फिर वह उस बेचारे को परेशान करे. पर कोई और था भी तोह nahi...Ab क्या करे वह... उसे तोह लगा था अतुल खुश होगा और उसे समझायेगा की कैसे करना है कल इंटरव्यू में, पर उसे तोह कोई इंटरेस्ट hi नहीं था इस टॉपिक में, जैसे उसने सोच लिया हो की सुप्रिया को ये जॉब नहीं मिलने वाली थी.

रात को फिर से सुप्रिया ने राहुल को मैसेज किया. अब तोह वह एक दुसरे को फिर से मैसेज करने लगे थे. रोज़ रात को गुड नाईट बोलना जैसे एक आदत सी हो गया था.

सुप्रिया ने भारी मन से राहुल को मैसेज किया - Rahul....mujhe एक हेल्प चाहिए थी प्लीज...

राहुल - हाँ, बोलो न...

सुप्रिया - कल सुबह मुझे गोमती नगर ड्राप कर डोज क्या? मेरा जॉब इंटरव्यू है..

राहुल - ारी वह... फाइनली... कोंग्रटुलतिओन्स...

सुप्रिया - पहले जॉब तोह मिल जाए, फिर कॉंग्रट्स कर देना...

राहुल - हाँ बताया न कितने बजे सुबह...

सुप्रिया - उन्होंने तोह 11 बजे बुलाया है, पर तुम्हे भी तोह ऑफिस जाना होगा न, तोह सुबह 11 से पहले कभी भी ड्राप कर देना... कोई दिक्कत तोह नहीं है न...

राहुल - ठीक है, मैं तुम्हे 9.30 बजे पिक करता हु, तब तक राहुल भी घर से निकल गया होगा, और 10.15 तक वहां ड्राप कर दूंगा. थोड़ा टाइम तोह ऑफिस ढूंढ़ने में भी लग जायेगा.

सुप्रिया - हाँ ये ठीक रहेगा, थैंक यू.

राहुल - ारी, no थैंक यू नीडेड. कुछ भी और याद आये तोह बता देना.

सुप्रिया - मैं क्या पह्नु कल के लिए?

राहुल को लगा की सुप्रिया उससे ये क्यों पूछ रही है, जैसे अतुल नहीं वह उसका पति हो. उसने भी हिम्मत करके मैसेज दाल दिया - तुम तोह हर चीज़ में बहुत खूबसूरत लगती हो, कुछ भी पेहेन लो.

सुप्रिया - बताया न प्लीज...

राहुल - उम्म्म, मुझे पता नहीं वहां का क्या ड्रेस कोड है, पर शायद सलवार कमीज सेफ ऑप्शन रहेगा.

सुप्रिया - ठीक है, ये ाचा आईडिया है.

राहुल - और सुनो, अपने बाल मत बांधना कल, खुले रखना उन्हें, बहुत अचे लगते है खुले बाल तुम पर.

सुप्रिया को उसके फ्लिर्टी से मेस्सगेस पद कर हलकी सी मुस्कान चेहरे पर आ गयी. थोड़ी देर बाद वह बाथरूम में कड़ी अपने आप को आईने में देख रही थी. पिछले कुछ दिनों में टेंशन से उसका वेट थोड़ा काम हो गया था, उसके गोल गोल गाल थोड़े अंदर हो गए थे. वह अलग अलग तरह से अपने बाल बना कर देखने लगी. सच में खुले बालों में hi वह सबसे खूबसूरत लगती थी. उसने तोह कभी इस बारे में सोचा भी नहीं था पर राहुल ने काफी गौर किया था उस पर.

अगले दिन हमेशा की तरह, सुप्रिया ने जल्दी जल्दी अतुल का खाना पैक किया और वह ऑफिस चला गया. पर आज उसे जल्दी जल्दी अपने इंटरव्यू के लिए तैयार होना था. 8.15 तोह बज भी चुके थे. वह फटाफट से नाहा के आयी और रात को अलग निकले हुए एक नए सलवार कमीज को पेहेन लिया, और अचे से मेक उप कर लिया. उसने अपने होंठों पर एक सुर्ख लाल लिपस्टिक लगा ली जिससे उसका पूरा चेहरा और भी खिल उठा. उसने अपने आप को आईने में देखा तोह वह बहुत hi सुन्दर लग रही थी.

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तैयार होते होते 9.30 बज hi गए थे, और राहुल का कॉल आ रहा था. वह नीचे आ गया था, तोह सुप्रिया भी जल्दी से भागी भागी नीचे गयी, उसने अपने साथ एक फोल्डर ले लिया था जिसमे उसने अपने कॉलेज की मार्कशीट, बाकी एक्टिविटीज के सर्टिफिकेट्स, और पिछली जॉब के सर का एक लेटर रख लिया था.

राहुल गेट के बहार hi उसका वेट कर रहा था. सुप्रिया जल्दी से आगे की सीट पर बैठी. अभी वह इंटरव्यू के लिए इतनी नर्वस थी की उसे उस दिन के सीखे हुए कोई भी बनावटी खेल याद नहीं थे.

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सुप्रिया - सॉरी, देर तोह नहीं हुई?

राहुल - नहीं नहीं, अभी आया हूँ.

राहुल ने उसकी और देखा, क्या गज़ब लग रही था वह इस नीली ड्रेस में, और उसके खुले बाल, उफ्फ्फ्फ़ - बहुत अछि लग रही हो...

सुप्रिया ने शरमाते हुए कहा - थैंक यू, और मैंने बाल खुले hi रखे जैसे तुमने बोलै था...

राहुल भी मुस्कुरा उठा. सच में आज तोह बिलकुल पहले जैसी लग रही थी सुप्रिया, क्यूट और भोली भाली सी. हाय इसे तोह कोई भी देख कर जॉब दे देगा. राहुल ने गाडी चलना शुरू कर दिया.

राहुल - नर्वस तोह नहीं हो न...

सुप्रिया - थोड़ी सी हूँ, पर हो जायेगा सब...

राहुल - बिलकुल, सब ाचा hi होगा. अतुल नहीं चला तुम्हारे साथ?

सुप्रिया ने मुँह बनाते हुए कहा - मुझे अभी नहीं सोचना उनके बारे में...

राहुल - ाचा ठीक है, बस गहरी सांस लो और अपना मंद क्लियर रखना...

थोड़ी देर के बाद वह लोग ऑफिस के बहार पहुंच गए. एक बड़ा सा ऑफिस काम्प्लेक्स था जिसमे कई साड़ी कम्पनीज के ऑफिस थे.

राहुल - यहाँ पार्किंग मिलना थोड़ा मुश्किल है, तोह मुझे यहीं ड्राप करना होगा.

सुप्रिया - हाँ, कोई नहीं, मैं चली जयुंगी..

राहुल - मुझे कॉल कर देना जब इंटरव्यू हो जाए मैं आ जायूँगा तुम्हे लेने..

सुप्रिया - मैं ऑटो से चली जयुंगी वापस, पर थैंक यू सो मच.

सुप्रिया गाडी से उतरने hi वाली थी, उसने राहुल की और देखा. सच में कितना हेल्पफुल तहत वह, और कितनी केयर भी थी उसे उसकी. ऐसा बाँदा उसे क्यों नहीं मिल सकता था लाइफ में. पता नहीं उसे क्या हुआ एक डैम से, उसने जल्दी से राहुल के गाल पर एक हलकी सी किश की और फिर गाडी से उतर कर अंदर की और चली गयी. शायद बस ये उसकी नर्वस्नेस hi थी, और कुछ नहीं. उसके तेज कदम उसे जल्दी से बिल्डिंग के अंदर ले गए.

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राहुल भी इस अनएक्सपेक्टेड किश से हैरान रह गया. सुप्रिया क्यों फिर से उसके मैं में प्यार की आशा सी जगह रही थी. पीछे से हॉर्न पड़ते hi उसने अपनी गाडी चलनी शुरू कर दी, और किसी तरह से चलते चलते सुप्रिया को मैसेज किया - आल थे बेस्ट! एंड थैंक यू फॉर थे किश. हार्ट

सुप्रिया अंदर कुछ नयी चीज़ो का सामना कर रही थी, उसका ध्यान उसके फ़ोन पर नहीं था. उसे समझ hi नहीं आ रहा था की वह कहाँ जाए. अंदर एक बोर्ड पर बहुत साड़ी कम्पनीज के नाम लिखे थे और उनका फ्लोर नंबर भी लिखा था. इतना कुछ था सामने की कुछ भी पड़ा नहीं जा रहा था. पर आखिर कार उसे बीच में कहीं - क्रिएटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड लिखा दिख गया. उनका ऑफिस 9तह फ्लोर पर था.

वह जल्दी से लिफ्ट की और गयी और 9तह फ्लोर दबा कर ऊपर पहुंच गयी. उस फ्लोर पर उतारते hi उसने देखा की पूरा फ्लोर कितना साफ़ सुथरा चमकता हुआ सा था. इतना ाचा ऑफिस तोह उसने आज तक नहीं देखा था. ज़मीन एक डैम मार्बल जैसी, और बहुत hi सुन्दर लाइट्स और पेंटिंग. और सामने एक रिसेप्शनिस्ट का डेस्क था. वह उस डेस्क की तरफ गयी.

सुप्रिया - Hello, मैं यहाँ इंटरव्यू के लिए आयी हु...

रिसेप्शनिस्ट - Ok ma'am, कितने बजे है आपका इंटरव्यू?

सुप्रिया - 11 बजे.

रिसेप्शन - ओह, अभी तोह सिर्फ 10.30 बजे है. आप वहां बैठ कर वेट कर ले.

सुप्रिया ने टाइम का तोह ध्यान दिया hi नहीं था. राहुल ने उसे थोड़ा जल्दी hi ड्राप कर दिया था और अब उसे आधा घंटा यहाँ वेट करना पड़ेगा. उफ़, इससे ाचा तोह नीचे hi वेट कर लेती. पर नीचे ऐसा लग रहा थी की पता नहीं ऊपर कैसे जाना होगा.

वह वहीँ लॉबी में सोफे पर बैठ कर वेट करने लगी और इधर उधर देखने लगी.

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सुप्रिया सोच रही थी की ये तोह काफी बड़ी कंपनी लग रही है. क्या उसकी जॉब यहाँ लग जाएगी? आते जाते लोग भी उसे घूर रहे थे, कुछ आपस में बात करके है रहे थे. क्या वह उसे देख कर है रहे थे? क्या उसके कपडे तोह ठीक थे? बाल? वह किसी तरह से निर्वसली बैठी रही.

लगभग 25 मिनट के बाद, 2 लोग उसकी तरफ आये. 1 आदमी और एक लड़की. लड़की यंग और सुन्दर थी और उसने शर्ट पंत और उसके ऊपर एक कोट पहना हुआ था. काफी फॉर्मल कपडे थे पर उसकी स्माइल से वह बहुत hi फ्रेंडली सी लग रही थी. आदमी ने भी शर्ट पंत पहनी हुई थी, और उसकी आगे थोड़ी बड़ी थी, काम से काम 35 तोह होगी, सुप्रिया ने सोचा. वैसे लड़को के पास और ऑप्शन भी क्या होता है शर्ट पंत पेहेन्ने के इलावा. पता नहीं ऐसे टाइम में भी सुप्रिया के दिमाग में ये सब मजाक कैसे सूझ जाता था.

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कृति ने एक बड़ी सी मुस्कान के साथ कहा - Hi सुप्रिया, ी ऍम कृति, हमारी फ़ोन पर बात हुई थी.

सुप्रिया भी कड़ी हो गयी - Hi कृति, कैसे हो आप.

कृति - मैं अछि हु. हाउ अरे यू? सो नीस की आप आ सकीय आज. ये है मेरे सीनियर - मर. साहिल, एंड हम दोनों आपका इंटरव्यू लेंगे.

साहिल का चेहरा काफी सीरियस था, कोई हसी नहीं उसमे, एक डैम खड़ूस - Hello सुप्रिया.

कृति - सो लेटस जो, वहां मीटिंग रूम में चलते है.

सुप्रिया को कृति जितनी स्वीट और प्यारी लग रही थी उतना hi डर उसे साहिल से लग रहा था. जिस तरह से वह उसे घूर रहा था.

कृति - सो, ऑफिस ढूंढ़ने में कोई प्रॉब्लम तोह नहीं हुई?

सुप्रिया - नहीं, कोई प्रॉब्लम नहीं...

कृति - वाटर, कॉफ़ी, कुछ चाहिए?

सुप्रिया - नहीं, कुछ नहीं. थैंक यू.

ऐसे hi बातें करते हुए वह लोग मीटिंग रूम में घुसे और सुप्रिया उन दोनों के सामने बैठी थी.

कृति - सो सुरपिया, मैंने आपका रिज्यूमे देखा था, एंड आईटी वास् इंटरेस्टिंग.

साहिल - सुप्रिया आप अपना रिज्यूमे देना जरा.

सुप्रिया तोह अपना रिज्यूमे लायी hi नहीं थी, उसका पास कंप्यूटर या प्रिंटर तोह था नहीं. उसे लगा था की वह आलरेडी रिज्यूमे को ऑनलाइन भेज चुकी है.

सुप्रिया - उम्म्म... सॉरी सर... वह तोह नहीं है मेरे पास...

साहिल - आप रिज्यूमे के बिना आ गए इंटरव्यू में?

कृति - No प्रॉब्लम, मेरे पास 2 कपीस है. ये लीजिये...

कृति ने मुस्कुरा के सुप्रिया को देखा जैसे उसे कलम डाउन करा रही हो.

साहिल - सो इनका एक्सपीरियंस तोह कुछ ख़ास नहीं है, आपने शॉर्टलिस्ट क्यों किया इन्हे कृति?

सुप्रिया का दिल ये सब सुन कर बैठे जा रहा था. सच में काफी ज्यादा खड़ूस था साहिल.

कृति - सर, इंटरेस्टिंग था, ी थिंक इन्होने का फर्म में जॉब की है, और फिर रिज्यूमे भी काफी अचे से बना हुआ था. ी थिंक एक बार इनकी स्टोरी तोह समझ लेते है.

सुप्रिया कृति से काफी इम्प्रेस हो गयी थी. साहिल उससे जैसे चाहे बात कर रहा था, कृति के चेहरे पर मुस्कान गायब नहीं हुई थी और न hi उसकी आवाज़ ुचि नीची हुई थी. ये देख कर सुप्रिया को भी थोड़ा कॉन्फिडेंस आ गया, और वह उन्हें अपने एक्सपीरियंस के बारे में बताने लगी. सब कुछ उसने काफी अचे से बता दिया और बीच में उनके सवालों का भी जवाब दे दिया.

साहिल - तोह आप हाउसवाइफ हो, अभी आप ये जॉब करना चाहते हो, कल छोड़ डोज..

सुप्रिया - नहीं सर, मैं काफी सीरियस हु जॉब को लेकर, और मैं कहीं न कहीं तोह जॉब जरूर करुँगी.

साहिल - यहाँ काफी काम होता है, और अभी इतना स्टाफ नहीं है तोह दुसरे डिपार्टमेंट में भी हेल्प करना पड़ता है..

सुप्रिया - कोई प्रॉब्लम नहीं सर, मैं सब सीख सकती हु...

साहिल - ठीक है, हम आपको कॉल करके बता देंगे.. कृति मुझे लेट हो रहा है मीटिंग के लिए तोह मैं जा रहा हूँ. बाद में बात करते है.

साहिल - और मस सुप्रिया, ये हार्ट वाले कपडे यहाँ नहीं चलते तोह आपको देखना पड़ेगा...

कृति - Ok सर.

साहिल जल्दी से रूम से चला गया और सुप्रिया अपने डाक्यूमेंट्स समेत कर वापस रखने लगी. साहिल की बातों से उसे लग रहा था की उसे जॉब नहीं मिलेगी, उसने उसके कपड़ो पर भी कमेंट कर दिया था, जो उसे काफी खराब लग रहा था.

कृति - कोंग्रटुलतिओन्स...

सुप्रिया हैरान होते हुए - किस चीज़ के लिए...

कृति ने इधर उधर देखा, जैसे उसे कोई सुन तोह नहीं रहा था - थोड़ा जल्दी है पर ी ऍम सूरे आपको ये जॉब मिल गयी है...

सुप्रिया - उम्म्म... मुझे तोह नहीं लगा ऐसा, साहिल सर की बातें नहीं सुनी आपने...

कृति - आप उनकी बात का बुरा मत मानो. आईटी विल बे ग्रेट तो हैवे ानोथेर गर्ल इन थे टीम. शठ... पर अभी किसी को बोलना मत...

सुप्रिया कृति की और देख रही थी. उसमे कितना उत्साह और चुलबुलापन था. देखने में तोह इतनी बड़ी नहीं लगती थी, पर उसका इंटरव्यू तोह उसने hi लिया था.

कृति - और वैसे न सर को फैशन का सेंस नहीं है, ी लव योर ड्रेस.

सुप्रिया - थैंक यू...

कृति और वह दोनों लिफ्ट की और चल पड़े - चलो, मैं आपको नीचे तक छोड़ देती हूँ.

सुप्रिया - अरे आप क्यों परेशान हो रहे हो, मैं चली जयुंगी…

कृति - इस बहाने थोड़ी सी वाक हो जाएगी चलो…

सुप्रिया सोच रही थी कितना ाचा नेचर था कृति का. सच में काश उसे ये जॉब मिल जाये तोह कृति के साथ काम करना कितना आसान होगा.

वह नीचे पहुंच कर लिफ्ट से बहार निकले hi थे की सामने से सुप्रिया को विक्रम आता दिखा. वह यहाँ क्या कर रहा था. क्या उसका ऑफिस में इसी बिल्डिंग में था. अगर वह उससे जॉब के बारे में पूछेगा तोह वह क्या बोलेगी की उसने विक्रम की जॉब क्यों नहीं ली. विक्रम तोह उनकी और hi आ रहा था, अब वह क्या करे.

विक्रम - मस. सुप्रिया आप यहाँ कैसे. और वह भी मस कृति के साथ?

सुप्रिया - वह बस... ऐसे hi...

कृति है के बोली - मर. विक्रम सिंह, आप बताइये आप यहाँ kaise...aur आप सुप्रिया को कैसे जानते है?

शायद कृति और विक्रम पहले से एक दुसरे को जानते थे.

विक्रम ने घूर कर कृति को देखा और फिर सुप्रिया को - मस सुप्रिया, मुझे तोह लगा था आप मुझे जॉब के लिए मैसेज या कॉल करेंगी, पर आपका तोह कोई मैसेज नहीं आया. और अब यहाँ Ms.Kriti के साथ? कहीं आप मस कृति की कंपनी तोह नहीं ज्वाइन कर रही?

ओह गॉड, अब वह क्या करे, वह तोह इन दोनों के बीच में फास गयी थी. कृति उसके बारे में क्या सोच रही होगी, और विक्रम भी.

सुप्रिया - सर... वह....

तभी एक डैम से कृति और विक्रम दोनों हसने लगे और एक दुसरे के गले मिले. सुप्रिया हैरान हो गयी थी की ये क्या हो रहा था.

विक्रम - भैया की जगह मर. विक्रम कब से बोलना शुरू कर दिया कृति.

कृति - जब से आपने मुझे मस. कृति बोलना शुरू kiya...aur ये कंपनी मेरी कबसे हो गयी?

विक्रम - जबसे तुमने ज्वाइन की है, तब से तुम hi चला रही हो

कृति - मैं?? मैं तो एक जूनियर एम्प्लोयी हु यहाँ, मेरी तोह कोई सुनता भी नहीं है यहाँ. और आप पता नहीं कहाँ कहाँ बिजी रहते हो.

विक्रम - हाँ क्या करू, इतना बड़ा बिज़नेस है मैनेज करने के लिए. पर तुम जानती हो न मेरे लिए ये काफी ख़ास है, क्यूंकि ये मैंने शुरू किया है. बाकी सब तोह ईशा की फॅमिली का hi है.

कृति - ओह सुप्रिया, ये मेरी कजिन भैया है - विक्रम, पर लगता है आप तोह एक दूसरे को पहले से जानते हो. पर कैसे?

विक्रम - हाँ, मैं कब से तरय कर रहा हूँ की सुप्रिया हमारी कंपनी ज्वाइन कर ले, पर इन्हे कोई इंटरेस्ट hi नहीं है.

कृति - पर आज तोह इन्होने आप की hi कंपनी के लिए इंटरव्यू दिया है...

विक्रम - ओह acha...thats ग्रेट...

सुप्रिया को तोह पता hi नहीं था की वह विक्रम की hi कंपनी में इंटरव्यू देने आयी थी. उसने तोह जान बुझ कर विक्रम को मैसेज नहीं किया था पर यहाँ अब वह वापस उसके पास hi पहुंच गयी थी.

सुप्रिया - ओह सॉरी, मुझे पता नहीं था की ये आपकी कंपनी है...

विक्रम - ाचा, तोह आप मेरी कंपनी में काम नहीं करना चाहती हो... अब समझ में आया..

सुप्रिया - नहीं सर, ऐसा कुछ नहीं, मैं बस अपने आप इंटरव्यू दे कर जॉब पाना चाहती थी.

विक्रम - किसी की हेल्प लेने से कोई छोटा नहीं हो जाता, मस सुप्रिया. और अगर आप मेरे थ्रू भी आती तोह इंटरव्यू तोह तब भी देना hi होता.

कृति - भैया आप तोह सुप्रिया को जानते hi हो तोह आप साहिल सर से बात कर लेना न उनके लिए...

विक्रम - ओह साहिल ने इंटरव्यू लिया था? नहीं भाई, उसके बीच में तोह मैं भी नहीं पडूंगा, वह जो बोले फाइनल है. सॉरी सुप्रिया.

सुप्रिया - कोई नहीं सर, जो भी होगा ाचा के लिए hi होगा.

कृति - डोंट वोर्री सुप्रिया, सब ाचा hi होगा.

सुप्रिया - थैंक्स कृति. मैं चलती हूँ अब...

कृति और विक्रम - Bye सुप्रिया...

सुप्रिया उनके bye करके बहार की और चल पड़ी. उसे पीछे से कृति की आवाज़ आयी - कितनी प्रीटी है न वह... सुप्रिया उसकी आवाज़ सुन कर मंद मंद है पड़ी और बहार निकल गयी.

बहार उसे जल्दी से ऑटो मिल गया और वह घर की और निकल गयी. रास्ते भर वह सोचती रही की क्या उसे ये जॉब मिलेगी और अगर मिल भी गयी तोह क्या उसे लेनी चाहिए. शायद विक्रम भी खुश नहीं था, तोह वह क्यों उसे जॉब देगा. और साहिल तोह बिलकुल भी नहीं, पता नहीं कृति क्यों इतना कॉंफिडेंट थी की उसे जॉब मिल गयी थी.

सुप्रिया घर पहुंची थी तोह उस में एनर्जी hi नहीं थी, सब कुछ उल्टा पुल्टा सा हो गया था. उसके फ़ोन पर राहुल के मैसेज थे जो पूछ रहे थे की उसका इंटरव्यू कैसा गया. उसके उसे एक लाइन का रिप्लाई की सब ठीक था. अभी वह किसी से भी बात नहीं करना चाहती थी. अतुल का कोई भी मैसेज नहीं था कुछ भी पूछने के लिए. वह भी उसे कुछ बताने नहीं वाली थी.

शाम को जब अतुल घर आया तोह सुप्रिया ने इंटरव्यू के बारे में कोई बात नहीं छेड़ी, और अतुल ने भी कुछ नहीं पुछा. शायद उसे याद भी नहीं था सुप्रिया के इंटरव्यू के बारे में. आज सच में काफी ख़राब दिन था सुप्रिया का.

2-3 दिन तक कोई खबर नहीं आयी, शायद उसे जॉब नहीं मिली थी. वह बेकार में hi सोच रही थी उसे विक्रम की वजह से जॉब को रिजेक्ट करना पड़ेगा, यहाँ तोह उसे जॉब hi नहीं मिली. और अतुल कितना खुश हो रहा था अंदर hi अंदर, जैसे उसका कहा सच हो गया हो. अब तोह वह उसे और भी कुछ नहीं समझेगा.

बिना मैं के सुप्रिया काम में लगी हुई थी की उसका फ़ोन बज उठा, एक अननोन नंबर था.

सुप्रिया - Hello.

साहिल - मस सुप्रिया, hello, साहिल थिस साइड..

सुप्रिया ने एक डैम से सारा काम छोड़ दिया - Hello Sir..kaise है आप...

साहिल अपनी खड़ूस सी आवाज़ में hi बोल रहा था - गुड, ाचा सुनिए, मैंने आपको ये बताने के लिए कॉल कर रहा हूँ की हमने काफी लोगो का इंटरव्यू लिया और अचे से सबको कंसीडर किया...

सुप्रिया का दिल बैठा जा रहा था, लगता है उसे जॉब नहीं मिली थी. वह शायद रो hi पड़े इस कॉल के बाद.

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साहिल - और, हमने पाया की शायद आप इस जॉब के लिए ठीक रहेंगी. हर से कोई आपको कॉल करके डिटेल्स शेयर करेगा, आप देख लेना. जोइनिंग डेट, आप सोच के बता देना.

इतनी गंदे से कौन किसी को ये बताता है की उसकी जॉब लग गयी है. साहिल ने तोह पूरा hi डरा दिया था सुप्रिया को. हद्द हो गयी.

सुप्रिया - थैंक यू सर, थैंक यू सो मच.

साहिल - Ok, चलिए, bye..

सुप्रिया को जॉब मिल गयी थी. क्या ये सच था, उसे तोह यकीं hi नहीं आ रहा था. उसका सपना था एक अछि कंपनी में काम करने का और आज वह शायद पूरा होना शुरू हुआ था. उसका मैं था की वह अभी की अभी किसी के साथ ये खुशखबरी शेयर करे.

उसने अपना फ़ोन उठाया, और वह अतुल को मैसेज भेजने hi वाली थी की उसने वह मैसेज डिलीट कर दिया. फिर एक दूसरा मैसेज टाइप करके राहुल को भेज दिया - राहुल…. मुझे जॉब मिल गयी!!!! थैंक यू सो मच तुम्हारी हेल्प के लिए…
 
अपडेट 27

शाम को अतुल घर आया तोह सुप्रिया सोच रही थी की अतुल को कैसे बताये की उसकी जॉब लग गयी है. वैसे भी उसे ये खबर सुन कर खुश तोह होना नहीं था. पर बताना तोह पड़ेगा न, नहीं तोह वह जॉब कैसे जाएगी.

सुप्रिया ने बिना किसी ख़ास उत्साह के बोलै - अतुल.. आज वह कंपनी से कॉल आया था.. मुझे जॉब मिल गयी है..

अतुल - ारी वह... ये तोह बहुत hi अछि न्यूज़ है.. कोंग्रटुलतिओन्स...

सुप्रिया ने इस रिएक्शन की उम्मीद तोह नहीं की थी अतुल से. इतनी ख़ुशी से और वह भी बिना कोई ताना मारे वह उसे कोंग्रटुलते कर रहा था. अतुल ने उसे पास आ कर हुग कर लिया.

सुप्रिया को ऐसे उसके हुग की आदत नहीं थी - थैंक यू.. क्या बात है आज तोह बड़े खुश से लग रहे हो...

अतुल - सॉरी मैं कुछ दिनों से काफी चीड़ चिड़ा सा था, तुम्हे पता है न कितना स्ट्रेस है ऑफिस का. अब तुम जॉब करोगी न तोह तुम्हे भी पता चलेगा.

सुप्रिया उसकी सॉरी सुन कर hi खुश थी, बाकी सब तोह उसने सुना भी नहीं - नहीं इतस ok, मैं समझ सकती हु. आप कितना ज्यादा काम करते हो.

अतुल - हाँ, आज वह बड़ा वाला लोन भी पास हो गया हेडक्वार्टर से, विक्रम सर का. तुम मिली था उनसे एक बार बैंक में, पर तुम्हे शायद याद नहीं होगा.

सुप्रिया - एक्चुअली तुम्हे जान कर हैरानी होगी. जहाँ मेरी जॉब लगी है वह विक्रम सर की hi कंपनी है. मैं तोह खुद काफी सुरप्रीसेड हो गयी थी जब मुझे पता चला.

अतुल - ओह ाचा... हाँ काफी साड़ी कम्पनीज है उनकी. चलो वह सब छोडो, इसी ख़ुशी में आज तोह बस मस्ती करने का मैं है.

अतुल ने सुप्रिया के गालो पर किश करना शुरू कर दिया. वह एक के बाद एक किश किश कर रहा था सुप्रिया के गालों पर.

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सुप्रिया - क्या कर रहे हो, अभी तोह आये तोह, खाना तोह खा लो.

अतुल ने उसके बूब्स की तरफ इशारा करते हुए कहा - आज तोह पहले इन्हे hi खाऊंगा. खाना बाद में..

सुप्रिया ने हलके से उसके कंधे पर मारा, आज तोह अतुल बहुत hi शरारती मूड में था, बिलकुल पहले वाले जैसा. कितनो दिनों के बाद वह लोग ऐसे हस्ते हस्ते एक दुसरे के साथ खेल रहे थे. अतुल सुप्रिया के हाथ को खींचता हुआ उसे बैडरूम में ले गया, और फिर उसे बीएड पर लिटा कर उसके गालों और होंठों पर किश करने लगा. थोड़ी देर ऐसे hi वह एक दुसरे के होंठों को चूसते रहे.

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जल्द hi दोनों के कपडे उतर चुके थे और वह एक दुसरे के नंगे शरीर को महसूस कर रहे थे. कई हफ्ते हो चुके थे उन्हें सेक्स किये हुए. शादी में जो कुछ हुआ था, उसके बाद उसका hi मैं नहीं था सेक्स करने का, फिर वह अपने घर चली गयी थी, और वहां से आने के बाद तोह जैसे लड़ाई hi चल रही थी. सेक्स के बारे में सोचते hi सुप्रिया की छूट गीली होनी शुरू हो गयी थी. अतुल भी तोह कितनी ज़ोर ज़ोर से उसके बूब्स पर टूट पड़ा था. वह भी जैसे काफी दिनों से भूका hi था और सुप्रिया के बूब्स को चूस रहा था. इस सबसे सुप्रिया की छूट खुलने लगी थी, जैसे लुंड का इंतज़ार कर रही हो.

और फिर कुछ hi देर में अतुल का लुंड उसके अंदर था और सुप्रिया ने उत्तेजित होते हो कर अपनी आँखें बंद कर ली - अह्ह्ह, अह्ह्ह, ahhh..mmmm

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अतुल तोह आज पहले से भी ाचा फ़क कर रहा था, और अभी तक उसका माल निकला नहीं था. अतुल की रफ़्तार से सुप्रिया के बूब्स उछाल रहे थे और उसने अपने हाथ ऊपर करते हुए पलंग को अचे से पकड़ लिया. अतुल ने भी उसकी एक टांग तो पकड़ कर थोड़ा सा ऊपर किया और उसे अचे से छोड़ने लगा. इतने दिनों बाद ये सब हो रहा था तोह सुप्रिया को भी बहुत hi मज़ा आ रहा था और वह अपनी आँखें बंद कर चुदाई का मज़ा लेने लगी. बंद आँखों में सुप्रिया को अचानक से अपने सामने राहुल का चेहरा दिखाई दिया, जैसे राहुल hi उसके साथ ये सब कर रहा हो. उसने झट से अपनी आखें खोल दी, और अतुल का हाथ पकड़ लिया. अतुल ने भी उसका हाथ जकड लिया और आखरी कुछ झटके देते हुए उसका काम पूरा हो गया.

थोड़ी देर उसका लुंड ऐसे hi सुप्रिया की छूट में निढाल पड़ा रहा, और वह दोनों एक दुसरे के साथ चिपके रहे. फिर अतुल खड़ा हो कर कपडे पेहेन कर रूम से बहार की और चल पड़ा - ये करने के बाद तोह और भी भूक लग रही है. मैं खाना गरम करने लगता हु, तुम भी कपडे पेहेन कर आ जायो.

सुप्रिया अभी भी बीएड पर नंगी लेती हुई थी, और उसने अपने हाथ अपने बूब्स पर रख दिए, उन्हें महसूस करते हुए. सेक्स करते हुए उसे राहुल का चेहरा क्यों दिखाई दिया था, एहि बात उसके दिमाग को खाये जा रही थी. किचन में से अतुल की आवाज़ ने उसे अपने खयालो से जगाया और वह भी कपडे पेहेन कर किचन में चली गयी.

रात का खाना उन दोनों ने एक साथ से बड़े प्यार से खाया और फिर बीएड पर आ कर लेट गए. दोनों बड़े प्यार से एक दुसरे को देख रहे थे, जैसे फिर से वह एक दुसरे को प्यार करने लगे हो. थोड़ी देर बाद ऐसे hi लेते हुए, अतुल को नींद आ गयी, पर सुप्रिया की तोह नींद उडी हुई थी. वह तोह राहुल के बारे में hi सोच रही थी. अतुल से साथ इतना ाचा सेक्स होने के बावजूद उसके दिमाग में पता नहीं क्यों राहुल hi चल रहा था. उसने अपना फ़ोन चेक किया, तोह दिन में जो उसने राहुल को मैसेज किया था उसका जवाब आया हुआ था.

राहुल - बहुत बहुत कोंग्रटुलतिओन्स! अब तोह पार्टी बनती है मैडम...

सुप्रिया ने राहुल को मैसेज किया - पहले सैलरी तोह मिल जाये फिर पार्टी ले लेना. अभी तोह ये भी नहीं पता की सैलरी क्या होगी.

राहुल भी शायद जगा हुआ था और उसका मैसेज फटाफट से आ गया - जो भी होगी, अछि hi होगी. वैसे कुछ भी और काम हो तोह मुझे बता सकती हो. आज एक बड़ा काम ख़तम हो गया तोह थोड़ा काम का प्रेशर थोड़ा काम है.

सुप्रिया ने उसे चिढ़ाने का सोचा - और काम का प्रेशर होता तोह?

राहुल - मैं फिर भी आ जाता.

सुप्रिया के चेहरे पर पता नहीं क्यों एक बड़ी सी मुस्कराहट आ जाती थी राहुल से चाट करके - मुझे पता है, तभी तोह तुम्हे मैसेज करती हु. एक काम तोह है पर वह मैं शायद अतुल के साथ करू.

राहुल - अतुल के साथ तोह हमेशा hi करती हो, एक बार मेरे साथ करके देखो...

सुप्रिया को राहुल की ये डबल मीनिंग वाली बात समझ आ गयी थी, अब इतनी बुद्धू नहीं थी वह. आज कल राहुल की हिम्मत फिरसे बाद रही थी. सुप्रिया ने सोचा वैसे खुद उसने अपने आपको भी तोह फसाया था इस जाल में, एक गलत मैसेज टाइप करके. जवाब देने से पहले उसने कुछ सेकंड सोचा की वह क्या बोले उसे.

सुप्रिया - काफी बोरिंग काम है, अतुल को तोह बिलकुल नहीं पसंद...

राहुल - तुम्हारे साथ कोई काम बोरिंग हो hi नहीं सकता.

सुप्रिया - अभी तुम्हारी शादी नहीं हुई न, इसलिए ऐसा बोल रहे हो, जब हो जाएगी तोह इस काम के लिए तोह बिलकुल मन कर डोज.

राहुल - वह तोह देपेंद करता है की बीवी कैसी है. तुम्हारे जैसी हो तोह...

सुप्रिया अब इस फ्लिर्टी सी बात चीत को और आगे नहीं बढ़ाना चाहती थी - ाचा बस बस... ऑफिस के लिए क्लोथ्स लेने hai...aur कोई काम नहीं है.

राहुल - ये तोह बहुत hi इंटरेस्टिंग काम है, जब तुम चाहो तब चल सकते है.

सुप्रिया - तुम्हे ऑफिस में काम नहीं होता क्या?

राहुल - होता तोह है, पर तुम्हारे लिए मैं हमेशा टाइम निकाल लूंगा.

सुप्रिया ने कुछ सेकंड सोचा और फिर हिचकते हुए मैसेज दाल दिया - कल चले फिर? पर सोच लो, मैं काफी टाइम लगाती हु शॉपिंग में...

राहुल - और भी ाचा, मुझे ज्यादा टाइम मिलेगा तुम्हारे साथ. पक्का फिर कल का.

सुप्रिया ने खुद hi तोह बढ़ावा दिया था राहुल को ये सब टाइप करने का, अब वह कैसे बोल दे उसे पीछे हटने के लिए. और इतनी तोह मदद करि थी उसने सुप्रिया की जॉब दिलवाने में. अगर वह उसके साथ थोड़ा सा है के बोल लेगी तोह इसमें क्या बुराई है. पर वह अतुल को क्या बोलेगी? आज तक उसने लखनऊ में अकेले शॉपिंग भी नहीं करि थी. एहि सोचते सोचते उसे नींद आ गयी.

सुबह होते होते सुप्रिया को समझ आ गया था की वह अतुल को क्या बोलेगी. उसे अतुल से झूठ बोलते हुए ख़राब तोह लग रहा था पर फिर उसने खुद को समझाया की वह किसी के साथ घूमने नहीं जा रही थी, बस ऑफिस के कपड़ो की शॉपिंग के लिए जा रही थी. ये भी तोह एक जरूरी hi काम था, और अतुल को तोह शॉपिंग जाना hi ाचा नहीं लगता था.

उठने के थोड़ी देर बाद सुप्रिया ने अतुल को बोलै की उसे मेघा के साथ ऑफिस के कपड़ो के लिए शॉपिंग करने जाना है. मेघा का नाम सुन कर अतुल को ाचा नहीं लगा था पर अभी वह ज्यादा कुछ बोल कर उनके बीच फिर से लड़ाई नहीं करना चाहता था. अतुल ने सुप्रिया को शॉपिंग के लिए कुछ पैसे दे दिए जिससे सुप्रिया काफी खुश हो गयी. इतने में तोह इससे तोह अचे से शॉपिंग हो जाएगी, उसने सोचा. थोड़ी देर बाद अतुल ऑफिस चला गया और सुप्रिया शॉपिंग जाने के लिए तैयार होने लग गयी.

करीब 12 बजे के आस पास राहुल भी नीचे आ गया था, और सुप्रिया उसके साथ कार में चल पड़ी. सुप्रिया को पता था की काफी कपडे तरय करने पड़ेंगे इसलिए उसने एक सिंपल जीन्स और टीशर्ट पहनी हुई थी, बस टीशर्ट की ऊपर एक पतली नई डेनिम जैकेट थी. वह राहुल के साथ कार में आगे बैठी. राहुल कोशिश कर रहा था की वह सुप्रिया को न घूरे.

राहुल - तोह कहाँ जाना है हमे?

सुप्रिया - हम्म... ऐसा करते है मॉल चलते है, वहां ऑफिस के लिए अचे कपडे मिल जायेंगे शायद.

राहुल - तुम्हारे तोह सारे hi कपडे अचे होते है. इस ड्रेस में भी कितनी सुन्दर लग रही हो तुम.

सुप्रिया - पर किसी को नहीं लगता की मेरे कपडे अचे है... बल्कि खराब hi है...

राहुल - किसने कहा ऐसा?

सुप्रिया - है कोई... जाने दो. तुम्हे पता है सुबह हर का कॉल आ गया. वह मुझे पूरे 20 हज़ार की सैलरी दे रहे है, और कुछ और चीज़े अलग से. 20 हज़ार तोह बहुत होते है...

राहुल उसकी एक्ससिटेड सी आवाज़ सुन कर मुस्कुरा रहा था - होते तोह है...

सुप्रिया - वैसे तुम्हारी सैलरी कितनी है?

राहुल - क्यों??? मैं क्यों बतायु?

सुप्रिया - ारी.. मैंने भी तोह बताई अभी, और मैं कौनसा तुम्हारी सैलरी ले लुंगी.

राहुल - ः, तुम भी न, ले लो जो लेना है.

सुप्रिया को लगा की राहुल फिर से डबल मीनिंग बातें कर रहा है, और वह चुप सी हो गयी. फिर थोड़ी देर बाद उसने राहुल की और देखा और बोली - कुछ नहीं लेना मुझे... ी थिंक हमे थोड़ा लिमिट में नहीं रहना चाहिए...

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राहुल - मैं कौनसी लिमिट पार की? तुम भी न, कुछ भी सोचती हो. ाचा ये बताया, वैसे तुम रोज़ ऑफिस तक कैसे आयोगी जायेगी? तुम्हारे घर से तोह दूर है. मैं ड्राप कर दू?

सुप्रिया - Nahi...main मैनेज कर लुंगी, सोच रही हु एक स्कूटी ले लू. नहीं तोह हम वहीँ मेरे ऑफिस के पास शिफ्ट हो जाये. या फिर अतुल मुझे ड्राप कर देंगे.

राहुल - बहुत महंगा एरिया है वह madam...acha ये लो तुम्हारा मॉल भी आ गया.

दोनों मॉल के अंदर गए और सुप्रिया हर दुकान में अचे से टाइम लगा कर कपडे देख रही थी. राहुल वहीँ उसके साथ खड़ा था, बिना जरा सा भी परेशान हुए. वह गौर से देख रहा था की सुप्रिया को किस तरह से कपडे पसंद थे. सुप्रिया अपने ऑफिस के लिए कुछ स्टाइलिश से बूत डेन्ट टाइप के कपडे चाहती थी. काफी सारे कपड़ो में मुश्किल से कोई एक उसे समझ आता. बीच बीच में राहुल भी उसे अलग अलग कपडे दिखता रहा जो शायद उस पर अचे लगते.

कई साड़ी शॉप्स में काफी सारे कपडे तरय किया और बीच में एक जगह बैठ कर उन दोनों ने खाना भी खा लिया. दोनों ऐसे hi थोड़ी देर बैठे एक दुसरे से हसी मजाक कर रहे थे. सुप्रिया को बहुत मजा आ रहा था राहुल के साथ शॉपिंग में. अतुल के साथ तोह सब कुछ इतनी जल्दी जल्दी करनी पड़ती थी, पर अभी वह राहुल के साथ आराम से सब कुछ देख पा रही थी.

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सुप्रिया - कुछ भी नहीं मिला अब तक. अब बस एक hi शॉप बची है मॉल में, पर वह काफी महंगी है.

राहुल - तोह क्या हुआ, चलते है न वहां.

सुप्रिया - मेरा इतना बजट नहीं है, और काम से काम 2-3 ड्रेस तोह लेनी है है.

राहुल - ारी तुम चलो तोह.

वह दोनों उस शॉप में आ गए. ज्यादा लोग नहीं थे उस शॉप में और कपडे भी थोड़े महंगे महंगे hi थे. सुप्रिया को यहाँ कुछ कपडे समझ आने शुरू हुए. उसने कुछ ड्रेसेस उठा कर राहुल को पकड़ा दी. राहुल भी यहाँ कपडे देख रहा था, कुछ तोह काफी सेक्सी सी ड्रेसेस थी.

एकदम से सुप्रिया ने उसे कहा - मैं एक बार ट्रायल रूम में पेहेन कर देख लू..

राहुल - हाँ, क्यों नहीं. बहार आकर मुझे भी दिखा देना की कैसी लग रही है...

सुप्रिया - उम्, तुम्हे क्यों?

राहुल - और तोह कोई है नहीं यहाँ, तोह मेरी एडवाइस hi लेनी पड़ेगी न.

सुप्रिया - ठीक है, तुम ट्रायल रूम के सामने hi खड़े रहना, मैं बस दरवाज़ा खोल कर दिखा दूंगी. ठीक है न?

राहुल - हाँ ठीक है. मैं यहीं खड़ा रहूँगा तुम्हारे लिए.

सुप्रिया ट्रायल रूम में अंदर गयी और अपने कपडे चेंज करने लगी. उसने पहली ड्रेस पेहेन कर देखि. ये वाली थोड़ी थोड़ी कृति के कपड़ो की तरह थी, बड़ी मुश्किल से उसे मिली थी. उतनी अछि तोह नहीं लग रही थी सुप्रिया को, क्यूंकि शायद कृति की ड्रेस तोह काफी महंगी होगी. पर अब उसके बजट में तोह शायद ये hi आने वाली थी. उसने दरवाज़ा खोला और राहुल को ड्रेस दिखाई.

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राहुल ने उसे ऐसे ट्राउज़र्स और कोट में देखा तोह उसे लगा की उसकी पूरी पर्सनालिटी hi बदल गयी थी. काफी प्रोफेशनल सी लग रही थिस सुप्रिया.

सुप्रिया - कैसी है ये? अजीब तोह नहीं लग रही न?

राहुल - तुम पर तोह सब कुछ hi ाचा लगता है...

सुप्रिया थोड़ा झुंझलाते हुए - पर ये कैसी है?

राहुल - ाचा है मैडम, ले लो....

सुप्रिया खुश होते हुए - ठीक है, मैं दूसरी ड्रेस पेहेन कर दिखती हु.

अगली वाली ड्रेस में सुप्रिया और भी अछि लग रही थी. एक फुल लेंथ ड्रेस थी, जिसमे उसकी फिगर अचे से पता चल रही थी. ये देख कर तोह राहुल और भी बेताब हो जायेगा, ये सोचते हुए उसने अपने बाल पीछे बांधे और बहार आयी.

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राहुल - वाओ... इसमें तोह और भी अछि लग रही हो...

सुप्रिया - सच? तोह ये भी फाइनल कर दू?

राहुल - हाँ, ये तोह ले hi लो. सुनो, एक बार ये वाली पेहेन कर आयो...

राहुल ने एक ड्रेस सुप्रिया के हाथ में दी और वह उसे लेकर वापस ट्रायल रूम में चली गयी. जैसे hi उसने ड्रेस को खोला, उसे रीलीज़ हुआ की ये तोह काफी छोटी सी ड्रेस है, जो उसके घुटने से भी काफी ऊपर तक आएगी. वह कुछ सेकंड के लिए सोच में पद गयी, पर फिर उसने सोचा की तरय करने में क्या जाता है, और उस ड्रेस को पेहेन लिया. वह इसमें काफी ज्यादा hi हॉट लग रही थी, पर ये बहार जा कर किसी को दिखने लायक नहीं थी. ड्रेस में उसके पेअर ऊपर तक खुले दिख रहे थे. पता नहीं राहुल ने क्या सोच कर उसे ये ड्रेस दी थी, ये तोह वह ऑफिस में नहीं पेहेन सकती थी.

तभी उसे बहार से राहुल की आवाज़ आयी, जैसे वह काफी बेचैन हो सुप्रिया को इस ड्रेस में देखने के लिए - सुप्रिया, ड्रेस पेहेन ली क्या? बहार आयो न.

सुप्रिया - नहीं बाबा, ये क्या दे दिया तुमने मुझे.

राहुल - तुमने पहनी या नहीं अभी तक वह ड्रेस?

सुप्रिया - पेहेन ली पर... मैं इसमें बहार नहीं आ सकती.

राहुल - ारी, तोह मैं अंदर आ जाता हूँ.

राहुल तोह बहुत ज्यादा hi पागल हो रहा था उसे देखने के लिए, पर सुप्रिया उसे चेंज रूम में अपने साथ अंदर नहीं आने देना चाहती थी.

सुप्रिया - ाचा रुको, मैं बस एक सेकंड के लिए दरवाज़ा खोलूंगी, ठीक है?

राहुल - हाँ ठीक है...

सुप्रिया ने दरवाज़ा खोल दिया, उसके चेहरे को देख कर ऐसा लग रहा था जैसे वह राहुल को कह रही हु - इसीलिए चुनी थी न तुमने ये ड्रेस, ताकि मुझे इस तरह से देख पायो.

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सुप्रिया को देख कर राहुल का मुँह खुला का खुला रह गया. उसने पहली बार सुप्रिया की नंगी जाँघे देखि थी, एक डैम गोरी सी, मुलायम सी. इस ड्रेस में तोह वह बहुत hi सेक्सी लग रही थी. राहुल क्या, बल्कि वहां खड़ा हर इंसान सुप्रिया को hi घूर रहा था, सिक्योरिटी गार्ड से लेकर सेल्समेन तक. शायद खुश किस्मती ये थी की उस समय शॉप में ज्यादा लोग शॉपिंग नहीं कर रहे थे.

सुप्रिया - ये तोह पेहेन कर ऑफिस नहीं जयुंगी na....pata नहीं क्यों तुमने ये दी मुझे...

राहुल अभी भी उसे hi घूर रहा था - हाँ.. ये तोह नहीं पेहेन के जायेगी... पर प्लीज इसे ले लो न..

सुप्रिया - जब पहनूंगी नहीं तोह इसे ले कर क्या करुँगी? इतने पैसे नहीं है की कोई भी ड्रेस ले लू.

राहुल - ये मेरी तरफ से गिफ्ट समझो न प्लीज...

सुप्रिया - पागल हो क्या, मैं नहीं लेनी वाली ये... ाचा लोग घूर रहे है.. मैं चेंज करके आती हु.

सुप्रिया जल्दी से वापस ट्रायल रूम में घुस गयी. राहुल कैसे घूर रहा था उसे, उसकी शकल देखने वाली थी, जैसे वह उसे खा hi जायेगा. काफी तड़पा दिया उसने शायद राहुल को इस ड्रेस में. ये सोचते हुए सुप्रिया ड्रेस को उतारने की कोशिश कर रही थी पर पीछे ड्रेस का जिपर कहीं अटक गया और उसने जितनी भी कोशिश कर ली वह नीचे नहीं जा रहा था. जिपर नीचे हुए बिना तोह ड्रेस उतरने नहीं वाली थी. वॉच सोचने लगी की अब वह क्या करे. ये ड्रेस पेहेन कर भी बहार नहीं जा सकती थी, अब तोह वह फास hi गयी थी. उसने फ़्रस्ट्रेशन में हलकी सी चीख निकली.

उसकी चीख सुन कर बहार से राहुल की आवाज़ आयी - क्या हुआ सुप्रिया, सब ठीक है न?

सुप्रिया - नहीं... एक प्रॉब्लम हो गयी है.

राहुल - क्या हुआ?

सुप्रिया - ये ड्रेस नहीं खुल रही है पीछे से, मैं इसमें स्टक हो गयी हु...

ये सुनते hi राहुल का लुंड तोह खड़ा होना शुरू हो गया, क्या उसे फिर से सुप्रिया को देखने को मिलेगा इस ड्रेस में - मैं आयु अंदर हेल्प करने?

सुप्रिया ने एकदम से कहा - बिलकुल नहीं...

राहुल - तोह फिर? ऐसे hi चल लो इसी ड्रेस में.

सुप्रिया - इस ड्रेस में? इतनी भीड़ भाड़ वाले मॉल में? तुम भी न, कहाँ फसा दिया मुझे...

सेल्समेन भी उनकी बातें सुन कर आ गया था - क्या हुआ सर? कोई प्रॉब्लम?

राहुल - हाँ वह मैडम की ड्रेस अटक गयी है, खुल नहीं रही.

सेल्समेन - हो जाता है कभी कभी. मैडम, मैं अंदर आकर हेल्प कर दू क्या?

सेल्समेन की आवाज़ सुनकर सुप्रिया और घबरा गयी. एक सेल्समेन को तोह वह कभी भी अपने साथ इस छोटे से ट्रायल रूम में नहीं आने देगी. इससे तोह ाचा था की राहुल hi आकर उसकी हेल्प कर दे.

राहुल भी उसे चिढ़ाने के लिए बोलै - हाँ सुप्रिया, ये भैया आ कर हेल्प कर दे क्या?

सुप्रिया - नयी भैया. राहुल तुम hi आ जायो.. ये नहीं खुल रही...

सेल्समेन ये सुन कर अपने हाथ मलते हुए थोड़ा पीछे चला गया. सुप्रिया ने जैसे hi दूर खोला राहुल झट से अंदर घुस गया और सुप्रिया ने दरवाज़ा बंद कर दिया. सुप्रिया उसकी शकल देख कर समझ गयी थी की उसके मैं में तोह लड्डू फूट रहे है. पर कोई और चारा भी तोह नहीं था. ट्रायल रूम बहुत छोटा सा था, बस इतना की 2 लोग खड़े हो जाये, और उनके बीच हल्का सा गैप.

सुप्रिया - प्लीज जल्दी से ज़िप को खोल दो और फिर बहार जायो.

राहुल - ाचा मुङो तोह, मैं देखता हूँ क्या प्रॉब्लम है.

सुप्रिया राहुल की और पीठ करके कड़ी थी और उसे इस ड्रेस में उसके सेक्सी नंगे कंधे और पीठ राहुल को साफ़ दिख रहे थे.

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राहुल ने उसकी ड्रेस की ज़िप को पकड़ कर नीचे करने की कोशिश करि, पर वह बुरी तरह अटकी हुई थी. उसका हाथ सुप्रिया की पीठ हो छू रहा था.

सुप्रिया - जल्दी करो न प्लीज...

राहुल - तरय तोह कर रहा हो यार, पर ये स्टक hai...ahhh...

राहुल ने और ज़ोर के ज़िप को नीचे खींचा और वह एक डैम से खुल कर काफी नीचे हो गयी. राहुल को सुप्रिया की ब्रा दिख रही थी और ब्रा के थोड़ा ऊपर एक छोटा सा काला टिल. ड्रेस नीचे होते hi उसका हाथ सुप्रिया की ब्रा और पीठ पर था. पीछे से उसकी फिगर कितनी सेक्सी लग रही थी.

राहुल का हाथ अपनी ब्रा पर लगते hi सुप्रिया काँप उठी - उफ्फ्फ.. ये क्या किया राहुल...

सुप्रिया ने एक डैम से पलट कर राहुल की और अपना चेहरा कर लिया, पर ये तोह शायद और भी ख़राब आईडिया था, क्यूंकि आगे से उसकी ब्रा और ब्रा में कैद बूब्स राहुल को साफ़ दिख रहे थे. राहुल तोह जैसे उन्हें hi घूरता रह गया.

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सुप्रिया ज़ोर से बोली - राहुल! राहुल! तुम बहार जायो प्लीज...

पर राहुल तोह खोया हुआ था उसके बूब्स को घूरने में. सुप्रिया के 2-3 बार हुए बोलने पर वह एक डैम से होश में आया और चेंजिंग रूम के बहार चला गया. उसे अभी भी जैसे यकीं hi नहीं हो रहा था की उसे क्या देखने को मिल गया था.

थोड़ी देर बाद सुप्रिया चेंज करके बहार आयी, उसके हाथ में सारे कपडे थे जो उसने तरय किये थे. उसने राहुल की और देखा तोह उसके चेहरे पर एक स्माइल थी. उसका मैं तोह था की राहुल पर गुस्सा करके अभी उसके चेहरे की पूरी स्माइल मिटा दे, पर ये शायद सही जगह नहीं थी.

राहुल - तोह ले रही हो न ये ड्रेस?

सुप्रिया - नहीं... इसका जिपर ख़राब है...

राहुल - बस इसी रीज़न से नहीं ले रही?

सुप्रिया ने राहुल की आँखों में घूरते हुआ कहा - हाँ.. बस एहि रीज़न है.. और वैसे भी तुम्हे जो इस ड्रेस से चाहिए था वह तोह तुम्हे मिल hi गया न...

राहुल की स्माइल और बड़ी हो गयी - ऐसा क्या?

सुप्रिया उसकी बेशर्मी देख कर खुद भी है पड़ी - ाचा चलो अब, जो कपडे ले रहे है उनकी पेमेंट कर दे?

राहुल ने हाँ में सर हिलाया और वो दोनों पेमेंट काउंटर की तरफ चल पड़े. काउंटर पर बिल आने पर सुप्रिया अपने बैग में से पैसे निकल hi रही थी की राहुल बोलै.

राहुल - तुम रुको, मैं पाय करता हु न...

सुप्रिया - ारी.. तुम क्यों पाय करोगे?

राहुल - बाद में कर लेंगे न....

राहुल ने सुप्रिया का हाथ खींच कर नीचे कर दिया और बिल पाय करने लगा.

काउंटर पर कड़ी सलेसगिरल बोली - सर, आप और मैडम की जोड़ी बड़ी क्यूट है. कितना टाइम हुआ आपकी शादी को?

राहुल ने सुप्रिया की और देख कर मुस्कुराते हुए कहा - अभी तोह एक साल भी नहीं हुआ शादी को.

सुप्रिया ने एक डैम से हैरान हो कर राहुल की और देखा, ये क्या बोल रहा था वह.

सलेसगिरल - तभी लग रहा है, आप दोनों एक दुसरे के काफी लव करते ho...Madam तोह बहुत hi ज्यादा प्रीटी है.

राहुल ने सुप्रिया के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा - हाँ सच में, बहुत hi ज्यादा प्रीटी है... काफी लकी हूँ मैं...

सुप्रिया चुप चाप कड़ी थी, अब वह क्या hi बोलती इस सब में. उसे गुस्सा तोह पूरा आ रहा था, अब वह उन दोनों को मैरिड और इन लव बता रहा था, और अब कंधे पर भी हाथ रख दिया. बिल पाय होते hi वह दोनों शॉप से बहार निकले.

सुप्रिया ने अपने कंधे से उसका हाथ हटाया और दबी आवाज़ में गुस्से में बोलै - ये क्या था...

राहुल - क्या क्या था?

सुप्रिया - हम लोग मैरिड है?

राहुल - वह तोह ऐसे hi मजाक था, और वैसे भी मैंने ये नहीं बोलै की हम लोग मैरिड है. बस ये बोलै की अभी तोह एक साल भी नहीं हुआ शादी को.

सुप्रिया - पर मतलब तोह वही था न. और हम दोनों एक दुसरे से प्यार करते है?

राहुल ने सुप्रिया की और देखा और कहा - मैंने कब कहा? मैंने तोह ये कहा की तुम बहुत प्रीटी हो? क्यों नहीं हो क्या?

सुप्रिया ने उसकी आँखों में घूर कर गुस्से में देखा - सच में मजाक की भी हद्द hi होती है.

राहुल - ारी, इतना भी सीरियस मत हो, चले अब घर?

सुप्रिया ने अपनी आँखें नीचे कर ली - हाँ, चलो, काफी लेट हो गया है...

वापस जाते हुए पूरे रास्ते दोनों चुप चाप कार में बैठे रहे. राहुल तोह अभी भी ट्रायल रूम में जो भी हुआ उसी के बारे में सोच रहा था. सुप्रिया की काली ब्रा, उसकी पीठ का टिल, उसकी गर्दन, उसके बूब्स, बस वही सब चल रहा था उसके दिमाग में. काश वह उसके शरीर को और थोड़ी देर देख पाटा, उसके पीठ के टिल अचे से गईं पाटा.

दूरसी और सुप्रिया राहुल की बातों के बारे में सोच रही थी. क्या राहुल सच में उससे प्यार करता था, या मज़ाक कर रहा था? क्या वह भी राहुल को प्यार करने लगी थी? उसे उसके साथ बात करना, टाइम स्पेंड करना ाचा लगता था. जिस तरह से वह उससे बात करता था, चिडता था, सताता था, सब कुछ में तोह कितना मज़ा आता था. पर वह मैरिड थी, अतुल से, और भी उससे कितना प्यार करता था. पता नहीं वह राहुल के बारे में सोच भी क्यों रही थी फिर.

इन्ही सब खयालो में थोड़ी देर बाद वह सुप्रिया की बिल्डिंग के बहार पहुंच गए.

सुप्रिया - थैंक you...aaj की शॉपिंग के लिए..

राहुल - थैंक यू किस लिए.. ाचा रहा काफी दिन...

सुप्रिया ने उसे चिढ़ाते हुए कहा - हाँ तुम्हारे लिए तोह ाचा hi रहा होगा. वैसे क्या ाचा रहा?

राहुल - पता hi होगा तुम्हे... तुम्हारे साथ टाइम स्पेंड करना...

सुप्रिया - ाचा ji...jhooth. चलो मैं अभी चलती हु, काफी काम बाकी है घर में...

राहुल - अब तोह तुम मेरी वाइफ हो न, तुमसे क्यों झूठ बोलूंगा...

सुप्रिया ने उसे पलट कर देखा - ये वाला मजाक अभी पूरा नहीं हुआ क्या... और वैसे भी लोग अपने वाइफ से hi सबसे ज्यादा झूठ बोलते है.

सुप्रिया जल्दी से गाडी से उतर गयी और अपने खयालो में खोयी हुई मुस्कुराते हुए अपने घर की तरफ चल पड़ी. राहुल भी गाडी ले कर अपने घर की तरफ चल पड़ा, कितना hi प्यारा दिन था आज उसके लिए. वह और सुप्रिया जैसे और भी करीब आ गए थे.
 
अपडेट 28

अब बस सुप्रिया का ऑफिस शुरू होने में 1 दिन hi रह गया था. पिछले हफ्ता कितनी जल्दी गुज़र गया था, उसे पता hi नहीं चला था. आज कल तोह लगभग हर रोज़ शाम को अतुल पूरे मूड में घर आता और वह दोनों अचे से सेक्स करते. सुप्रिया को लगता की पता नहीं अतुल को क्या हो गया था पर आज कल उसका स्टैमिना भी ाचा रहता और वह कभी आराम से और कभी तेज़ से उसे अछि तरह संतुष्ट करता.

सुप्रिया का भी मैं सेक्स के लिए बहुत ज्यादा उतावला सा रहता, पर ये सब करके भी उसके मैं भी एक छोटा सा कोना शायद राहुल के लिए बन्न गया था. जब रात को अतुल सो जाता तोह वह राहुल से मस्सागिंग शुरू कर देती. हर रात वह दोनों काफी देर तक एक दुसरे को मैसेज करते रहते. एक दुसरे को बताते की उनका दिन कैसा गया था, सुप्रिया अपने ऑफिस के तैयारियों के बारे में बताती, राहुल अपने ऑफिस के बारे में. थोड़ी बहुत प्यार भरी नोक झोक, हसी मजाक होता, और फिर वह दोनों सो जाते.

सुप्रिया उसके साथ किये सारे मेस्सगेस को डिलीट कर देती. कभी तोह उसे लगता की वह ये सब करके गलत कर रही है, और अतुल को पता चला तोह वह काफी नाराज़ होगा, पर फिर जैसे hi रात होती तोह उससे रुका hi नहीं जाता. फिर सुबह होते होते उसे फिर से सब कुछ गलत सा लगने लगता जैसे वह अतुल के पीठ पीछे उसे धोका दे रही हो.

पर अब बस कल तोह ऑफिस जाना hi था. अतुल ने तय किया था की वह सुप्रिया को सुबह ऑफिस ड्राप कर देगा, और फिर शाम को सुप्रिया ऑटो करके घर वापस आ जाएगी. पर अतुल अब जल्द hi गाडी भी खरीदने की सोच रहा था, और साथ hi सुप्रिया को एक स्कूटी दिलाने की बात भी चल रही थी. अब घर से दोनों hi बहार रहेंगे तोह ये भी हुआ किसी तरह दोनों मिल कर घर का काम कर लेंगे.

रात को hi सुप्रिया ने अपने कपडे निकाल के रख लिए. उसने सोचा की पहले दिन वह एक सिंपल सा सलवार सूट पेहेन कर hi ऑफिस चली जाये तोह बेहतर रहेगा. रात को अतुल के सो जाने के बाद उसने सोचा की वह भी आज जल्दी hi सो जाएगी, आज राहुल से आज बात नहीं करेगी. राहुल वैसे भी उसके मैसेज का वेट करता था, तोह उसने अभी कोई मैसेज नहीं किया था सुप्रिया को.

सुप्रिया ने ek-do करवट बदली, उसे काफी नर्वस्नेस थी कल जॉब की, और नींद नहीं आ रही थी. आखिर हार मान कर उसने अपना फ़ोन उठा hi लिया.

सुप्रिया - Hello, क्या कर रहे हो

हमेशा की तरह, राहुल का जवाब भी जल्दी से आ गया - तुम्हारे मैसेज का इंतज़ार...

सुप्रिया - तुम न... बिलकुल पागल हो...

राहुल - ये तोह बिलकुल सच है... टंग

सुप्रिया - ाचा, कल फर्स्ट डे के लिए आल थे बेस्ट नहीं कहोगे.

राहुल - कहूंगा क्या, मैं तुम्हे ड्राप कर देता हूँ न मॉर्निंग में.

सुप्रिया - नहीं, अतुल मुझे ड्राप कर देंगे मॉर्निंग में.

राहुल - ओह, ाचा... तुम लोगो के बीच में सब कैसा चल रहा है.

सुप्रिया - सब ाचा है, क्यों, तुमने क्यों पुछा?

राहुल - तोह फिर मुझे क्यों मैसेज करती हो?

उसका ये मैसेज देख कर सुप्रिया के चेहरे की स्माइल गायब हो गयी और उसे रहौल पर गुस्सा आने लगा - क्यों नहीं कर सकती क्या? ठीक है अब से नहीं करुँगी.

राहुल - ाचा, सॉरी बाबा. मैंने तोह ऐसे hi मज़ाक में बोलै था.

सुप्रिया - तुम्हारा मजाक कभी ख़तम नहीं होता न.

राहुल - नहीं, कभी नहीं. आखिर मॉल वाली बीवी हो तुम मेरी.

सुप्रिया - राहुल... गुस्सा करू क्या?

राहुल - मुझे दिखेगा hi नहीं अभी गुस्सा.

सुप्रिया - मुझे नींद आ रही है, bye, गुड नाईट.

राहुल - दिखायो जरा नींद आ रही है तोह.

सुप्रिया ने झट से एक सेल्फी खींची और राहुल को भेज दी - देखो, मेरी आँखें बंद होने वाली है.

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पर भेजने के तुरंत बाद उसे रीलीज़ हुआ की शायद उसे फोटो नहीं भेजनी चाहिए थी. उसने बस एक पतली सी कैमिसोल पहनी हुई थी, और कोई मेक उप भी नहीं किया हुआ था. पता नहीं फोटो देख कर राहुल को क्या लगे.

उधर राहुल भी उसकी फोटो देख कर एक्ससिटेड सा हो गया. पहली बार सुप्रिया ने रात को चैटिंग करते हुए एक फोटो भेजी थी. वह उस फोटो को बारीकी से देखने लगा. इस सफ़ेद स्लीवलेस टॉप में उसकी गोरी बहन कितनी सुन्दर लग रही थी. उसके बिखरे हुए बाल क्या गज़ब ध रहे थे. और उसके गुलाबी होंठ, उन्हें देख कर राहुल का मैं कर रहा था की उन्हें अचे से चूस ले. बिना किसी मेक उप के भी कितनी सुन्दर लग रही थी वह.

राहुल - वाओ, बहुत सुन्दर लग रही हो. तुम्हारी गर्दन का टिल मुझे कहीं और के टिल की याद दिला रहा है.

राहुल की चाट पद कर, सुप्रिया ने झट से फोटो डिलीट कर दी. उसे समझ आ गया की राहुल तोह लगता है उसकी फोटो को अचे से ज़ूम करके देख रहा था.

राहुल - ारी, डिलीट क्यों कर दी फोटो. प्लीज भेजो न फिर से.

सुप्रिया - नहीं, तुम कुछ ज्यादा hi गौर से देख रहे हो.

राहुल भी अब उतावला सा हो गया था - प्लीज प्लीज भेजो न. ये तोह गलत बात है.

सुप्रिया - तोह तुम मेरी पीठ के टिल के बारे में क्यों बोल रहे थे.

राहुल - मैंने कब कहा? और वैसे भी उस दिन वह गलती सी दिख गया था तुम्हारी हेल्प करते हुए. प्लीज एक फोटो और भेजो न.

सुप्रिया ने कुछ सेकंड सोचा, फिर तय किया की एक और फोटो भेज देती हु. कितना मजा आता है इसे तड़पने में.

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सुप्रिया - लो भेज दी, अब कोई कमेंट मत करना मत. मैं बस सोने के लिए hi लेती हुई हूँ.

सुप्रिया को भी अचे से पता था की उसकी फोटो राहुल पैट क्या कहर ध रही होगी. उसने अतुल के और पलट कर देखा, वह दूसरी तरफ मुँह करके गहरी नींद में सो रहा था.

राहुल भी फोटो को hi घूर के देख रहा था. इस फोटो में तोह सुप्रिया के बूब्स भी बहुत हलके से टीशर्ट के ऊपर से दिख रहे थे. कितनी प्यार और क्यूट लग रही थी वह. उसका लुंड अचे से खड़ा हो गया था और उसने उसे निकाल के हिलना शुरू कर दिया था. काश उसे थोड़ा और देखने को मिल जाता.

राहुल - मुझे तोह तुम्हारी आँखों में ज़रा सी भी नींद नहीं लग रही है…

सुप्रिया - तोह फिर क्या लग रही है?

राहुल ने उसे चिढ़ाने के लिए लिखा - Shararat…acha इस बनियान जैसे ड्रेस को क्या क्या कहते है?

सुप्रिया उसके मैसेज से चीड़ भी गयी - इसे बनियान नहीं, कैमिसोल कहते है. तुम्हे ये भी नहीं पता.

राहुल - हिंदी में तोह बनियान hi होती है न. ाचा कैमरा थोड़ा नीचे करके इस बनियान की पूरी फोटो खींचो न प्लीज...

सुप्रिया को पहले तोह समझ नहीं आया की राहुल क्या कह रहा है, पर जैसे hi समझ आया उसने बनवाती गुस्से में उसे मैसेज किया - ओह गॉड.. पागल हो kya..tum सारे लड़के एक जैसे hi होते हो.

राहुल - और भी कोई है क्या मेरे सिवा?

सुप्रिया को उसका ये मैसेज देख कर सच में गुस्सा आ गे था - Bye! गूडनिघत!

राहुल - सॉरी सॉरी सॉरी! सुनो न.

पर सुप्रिया का कोई जवाब नहीं आया. राहुल ने भी अभी दुबारा मैसेज करना ठीक नहीं समझा. उसने जल्दी से इस फोटो को सेव कर लिया और उसे काफी देर तक देखता रहा. सुप्रिया उधर राहुल की बात से गुस्सा हो कर सोने की कोशिश करने लगी. उसे वह फोटो शायद भेजनी hi नहीं चाहिए थी. पता नहीं राहुल उसे क्या समझने लगा था. वह भी तोह शायद कोई अनलिखी सीमा लांघ रही थी. थोड़ी देर बाद उसे भी नींद आ गयी और वह सो गयी.

अगले दिन सुबह सब कुछ काफी भाग दौड़ में करना पड़ा. सुप्रिया जल्दी उठ गयी और उसने फुर्ती से सारे काम पूरे करने शुरू किये - अतुल का लंच लगाना, अपना लंच लगाना, नाश्ता बनाना, नाहा के आना. सब कुछ टाइम पर hi हो गया. फिर जो कपडे उसने ऑफिस जाने के लिए निकाले थे वह उनमे तैयार होने लगी. एक सिंपल नीली कुर्ती में भी काफी सुन्दर लग रही थी. उसने बालकनी में खड़े हो कर सेल्फीज़ खींचनी शुरू की.

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तभी अंदर से अतुल की आवाज़ आयी - अगर फोटो सेशन हो गया हो तोह चले मैडम?

जैसे hi उसने मैडम शब्द सुना सुप्रिया को राहुल की याद आ गयी, राहुल उसे हमेशा मैडम hi बुलाता रहता था. फिर उसे रात के मेस्सगेस की याद आयी की राहुल ने उसे क्या लिखा था, और उसे फिर से राहुल पर गुस्सा आने लगा. क्या राहुल को नहीं पता था की वह सिर्फ उसे hi मेस्सगेस करती थी. कितनी गन्दी बात लिखी थी उसने. पर अभी ये सब सोचने का टाइम नहीं था, आज तोह ऑफिस ज्वाइन करना था.

सुप्रिया - हाँ, आयी.... मैं रेडी हु, चलते है.

सुप्रिया ने अपना दुपट्टा लिया और वह दोनों अपना बैग ले कर नीचे आये और सुप्रिया अतुल की बाइक पर पीछे बैठ गयी. बाइक मैं गेट तक पहुंची, जहाँ इक़बाल आज ड्यूटी पर था. वह काफी दिनों से सुप्रिया को दिखा भी नहीं था. इतने गेट खुल रहा था, इक़बाल और सुप्रिया आपस में बात करने लगे.

इक़बाल - गुड मॉर्निंग मैडम जी.

सुप्रिया - गुड मॉर्निंग इक़बाल जी.

इक़बाल - ारी आप क्यों मुझे इक़बाल जी बोल रहे हो, आप तोह बस इक़बाल बोल सकते हो. आज आप सुबह सुबह कहीं जा रहे हो.

सुप्रिया - हाँ, मेरी जॉब लग गयी है, तोह मैं उसके लिए जा रही हु.

इक़बाल - बहुत बढ़िया मैडम जी. आप बहुत अचे लग रहे हो.

सुप्रिया ने मुस्कुरा के कहा - थैंक यू इक़बाल, ाचा अब हम चलते है.

इक़बाल उसे बाइक पर जाते देख रहा था. आज तोह जैसे सुबह सुबह hi इसके दर्शन हो गए थे, शायद उसका दिन ाचा चला जाये.

रास्ते भर सुप्रिया जॉब के बारे में hi सोच रही थी, की सब कैसा रहेगा, उसे क्या काम करना पड़ेगा. इतना टाइम भी तोह हो गया था उसे जॉब किये हुए, और आज तक उसने किसी बड़ी कंपनी में भी जॉब नहीं की थी. उसे वह खड़ूस साहिल के बारे में सोचते hi डर भी लग रहा था. पर उम्मीद थी की कृति शायद उतनी hi स्वीट निकले जैसे वह उस दिन थी. पता नहीं वह ये जॉब कर पायेगी या नहीं, और अगर नहीं कर पायी तोह उसकी कितनी बेज़्ज़ती हो जाएगी.

जल्द hi वह सुप्रिया के ऑफिस के बहार पहुंच गए. सुप्रिया बाइक पर से उतरी, यहाँ तोह मंडे को काफी भीड़ भाड़ थी. वह चाहती थी की अतुल थोड़ी देर और उसके साथ खड़ा रहे, पर उसे तोह जाना था. अतुल ने उसे bye बोलै और अपनी बाइक लेकर वहां से निकल गया. सुप्रिया वहीँ सड़क के किनारे कड़ी थी, अभी तोह थोड़ा टाइम था ऑफिस शुरू होने में. तभी उसे पीछे से किसी लड़की की आवाज़ आयी, और उसने उसे पलट कर देखा.

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कृति - Hi सुप्रिया!!! तुम फाइनली आ गयी.

सुप्रिया - Hi कृति. आप कैसे हो.

कृति - ारी, आप क्यों. हम तोह ऑलमोस्ट शामे आगे के है न, क्या पता मैं तुमसे छोटी hi हु.

सुप्रिया - हाँ सॉरी... मुझे आदत है.

कृति - एंड वाओ, यू अरे लुकिंग सो प्रीटी इन थिस ड्रेस. और ये तुम्हारी क्यूट सी बिंदी, अमेजिंग.

सुप्रिया - थैंक यू, तुम भी बहुत प्रीटी लग रही हु. साहिल सर को इस ड्रेस से तोह कोई प्रॉब्लम नहीं होगी न.

कृति - तुम अभी भी उस दिन की बात के बारे में सोच रही हु. साहिल सर तोह ऐसे hi कुछ भी बोल देते है. उनकी बात को इतना सीरियसली मत लेना. वह दीखते सीरियस है, बूत दिल के बहुत अचे है. पर हाँ उन्हें फैशन का सेंस नहीं है, यू क्नोव थोड़ा ओल्ड फाशिवेद.

सुप्रिया - ठीक है, पर आखिर मेरे बॉस तोह वही है न.

कृति - चिल, डोंट वोर्री अबाउट आईटी ात आल. चलो ाचा अंदर चलते है, नहीं तोह यहाँ लाइन लग जाएगी लड़को की तुम्हारे लिए.

सुप्रिया उसकी बात सुन कर मुस्कुरा उठी, पर कुछ बोली नहीं.

कृति - वैसे तुम यहाँ ड्राइव करके आयी क्या?

सुप्रिया - नहीं मेरे हस्बैंड ने मुझे ड्राप किया था. शाम को शायद मुझे खुद hi जाना होगा.

कृति - मैं ड्राप कर दूंगी न, मैं ड्राइव करके आती हूँ.

सुप्रिया - ारी नहीं आप क्यों ड्राप करोगे?

कृति - फिर से आप!! इतस नॉट ा बिग डील, मैं ड्राप कर दूंगी. No आर्गुमेंट ों तहत.

सुप्रिया ने हस्ते हुए हाँ में सर हिलाया और दोनों अंदर की और चले गए. लिफ्ट तक पहुंचते पहुंचते सुप्रिया को महसूस हुआ की जैसे कई लोगो की नज़रें बस उसी पर है, या शायद उन दोनों पर है.

कृति - सो आज पहले कुछ बेसिक पेपर वर्क होगा सुबह, और आईटी वाले तुम्हे कंप्यूटर लॉगिन दे देंगे. उसके बाद हम लोग थोड़ा बहुत काम की शुरुवात कर सकते है. पर हाल अभी इतना टेंशन मत लेना, शुरू में थोड़ा स्लो hi होता है.

सुप्रिया - ठीक है...

दोनों ऊपर पहुंचे और कृति ने सुप्रिया को उसकी सीट दिखा दी. कृति और सुप्रिया आमने सामने hi बैठे थे, उन दोनों की सीट के बीच में एक आधा प्लास्टिक की दीवार का पार्टीशन सा था. साहिल सर पास hi में एक केबिन में बैठे थे, जो शायद ाचा hi था क्यूंकि सुप्रिया उनसे थोड़ा दूर hi रहना चाहती थी. पूरे ऑफिस में भी शायद इतने ज्यादा लोग नहीं थे, एहि कोई कुल मिलकर 25-30 लोग. विक्रम ने बताया तोह था सुप्रिया को की ये एक नयी कंपनी थी.

जैसे कृति ने बताया था सुप्रिया तोह सुबह बस अलग अलग फॉर्म hi भर रही थी, इतने फॉर्म्स तोह उसने शायद अपनी पूरी जिंदगी में नहीं भरे थे. फिर आईटी वाले ने आकर उसे कंप्यूटर का ईद और पासवर्ड दे दिया. सब कुछ कितना कायदा से चल रहा था. उसकी पुराणी जॉब में तोह ऐसा कुछ नहीं था, किसी भी कंप्यूटर का कोई पासवर्ड नहीं होता था, और वह ऐसे hi किसी भी सिस्टम पर काम कर लेती थी.

हर कोई इतने अचे से सुप्रिया से बात कर रहा था, सुप्रिया को यकीं hi नहीं हो रहा था. और ख़ास कर कृति, सुप्रिया सोच रही थी की वह कितनी स्वीट सी प्यारी सी लड़की थी जो उसे बिना किसी ऐटिटूड के सब कुछ अचे से बता रही थी. ये कंपनी उसके भैया की कंपनी थी, फिर भी वह बिना किसी केबिन के सबके साथ ऐसे घुल मिल कर एक साधारण से एम्प्लोयी की तरह काम कर रही थी.

बीच बीच में साहिल सर उसे अपने केबिन में बुला लेते और वह कुछ न कुछ काम ले कर वापिस आती. वह और लोगो को भी हेल्प करते हुए जैसा बहुत सारा काम कर रही थी. सच में काफी बिजी थी वह.

सुप्रिया बस अपने कंप्यूटर पर बैठी सोच hi रही थी की उसे क्या काम मिलेगा करने को. अब वह बस जल्दी से जल्दी काम पाना चाहती थी.

सुप्रिया ने अपनी सीट से उचक कर कृति को बोलै - कृति... मैं कुछ हेल्प कर सकती हु क्या तुम्हारी?

कृति अपने काम में hi डूबी हुई थी, और उसने बिना ऊपर देखे बोलै - हम्म्म्म... हो गया सब पेपर वर्क?

सुप्रिया - हाँ, अब मैं फ्री hi हु.

कृति - ाचा, ये लो फिर, ये दो रजिस्टर है, इनको जरा मैच कर लोगी, कोई डिफरेंस तोह नहीं है.

कृति फिर उसकी सीट पर आकर काम समझने लगी. ऐसा कुछ काम तोह सुप्रिया ने पहले किया हुआ था. शायद इतने बड़े नंबर नहीं थे, पर करा तोह हुआ था. वह जल्द hi समझ गयी उसे क्या करना है, और कृति उसे काम के साथ छोड़ कर वापस अपनी सीट पर चली गयी. सुप्रिया भी काम में डूब गयी और बारीकी सी काम करने लगी.

थोड़ी देर बाद, कृति ने उसे आवाज़ दी - सुप्रिया.... सुप्रिया.. चलो लंच कर लेते है..

इतनी जल्दी लंच का भी टाइम हो गया था, टाइम तोह ऐसे बीता जा रहा था. सुप्रिया ने तोह शायद अभी आधा hi काम पूरा किया था.

सुप्रिया - तुम चलो, मैं ये काम ख़तम करके खा लुंगी.

कृति - काम कहीं नहीं जायेगा, लंच करके कर लेना. चलो चलो.

कृति उसकी सीट पर आयी और उसे उठाते हुए अपने साथ ले गयी. वह दोनों कुछ और लोगो के साथ एक छोटे से कैंटीन एरिया में बैठ कर लंच करने लगे. वहां बस 4-5 टेबल चेयर थी, एक पानी की मशीन, और एक फ्रिज. कृति तोह कोई सलाद सा लायी थी, उसके सामने सुप्रिया को अपनी रोटी सब्जी खानी थोड़ी अजीब सी लग रही थी. पर फिर कृति ने बिना पूछे उसके टिफ़िन में से रोटी का एक गस्सा तोड़ कर खा लिया.

कृति - सॉरी, बहुत टेम्पटिंग सा लग रहा था. और बहुत अमेजिंग है, तुमने कुक किया है?

सुप्रिया - और लो न. हाँ मैंने hi कुक किया है.

कृति - वाओ, तुम तोह अमेजिंग कुक भी हो. सच में योर हस्बैंड इस सो लकी तो हैवे यू. ब्यूटी एंड ब्रेन्स बोथ.

सुप्रिया उसकी तारीफ सुन कर बस मंद मंद मुस्कुरा रही थी - तुम्हारा भी हस्बैंड लकी hi होगा..

कृति - शादी!! अभी तोह बिलकुल नहीं. पहले करियर तोह सेट हो जाये.

सुप्रिया ने हस्ते हुए कहा - सब ऐसे hi बोलते है.

ऐसे hi बातचीत करते हुए लंच भी पूरा हो गया. लंच के बाद सुप्रिया फिर से काम में लग गयी. उसने 1-2 घंटो बाद काम पूरा कर दिया था.

सुप्रिया - कृति.. मैं ये कर दिया है... कुछ डिफरेंसेस है दोनों रजिस्टर में, मैं उन्हें नोट कर लिया है.

कृति - ओह, तुमने कर भी लिया, वैरी फ़ास्ट. ऐसा करो तुम जा कर साहिल सर को बता इस बारे में.

सुप्रिया - साहिल सर को? तुम बता दो न प्लीज?

कृति - ारी, घबरायो नहीं उनसे. कुछ नहीं कहेंगे वह.

सुप्रिया - ठीक है.

सुप्रिया डरते डरते साहिल सर के केबिन तक पहुंची. उसने देखा की वह अपने कंप्यूटर में काफी बिजी है. उसने उनके दूर पर हलके से नॉक किया.

सुप्रिया - सर, मई ी के इन?

साहिल अपनी कड़क आवाज़ में बोलै - मस. सुप्रिया! हांजी बताइये.

सुप्रिया - सर वह कृति ने मुझे ये रजिस्टर चेक करने को बोलै था, वह मैंने कर लिया, और ये कुछ...

साहिल - ाचा दिखाइए.

सुप्रिया ने केबिन में घुस कर साहिल को रजिस्टर दिए और दिखने लगी की कहाँ कहाँ डिफरेंस थे. साहिल गौर से सब देख रहा था और उसकी बातें सुन रहा था.

फिर उसने सुप्रिया की और देखा जो उसके सामने कड़ी थी - हम्म्म... आपने किया है ये...

सुप्रिया - हांजी सर.

साहिल - हम्म्म.... ठीक है, ये और कुछ फाइल्स है, इन्हे भी ले जाइये.

साहिल ने उसे 3-4 और फाइल्स थमा दी और वह उन्हें ले कर बहार आ गयी. उसे समझ hi नहीं आया था की उसका काम सही था या गलत, और फिर साहिल ने कुछ और बोलै भी नहीं.

कृति ने उसे परेशान आता देख पुछा - क्या हुआ?

सुप्रिया - सर ने उस बारे में तोह कुछ ख़ास बोलै नहीं, पर ये फाइल्स पकड़ा दी.

कृति ने मुस्कुराते हुए कहा - फाइल देने का मतलब है की तुम्हारा काम ाचा था, तभी तोह तुम्हे और काम पकड़ा दिया उन्होंने.

सुप्रिया ने रहत की सांस ली. उसे तोह साहिल सर समझ hi नहीं आ रहे थे. पर जो काम मिला था वह उसमे फिर से डूब गयी. बीच बीच में उसे थोड़ा बहुत कृति से पूछना पड़ा पर उसे ऐसा लगने लगा था की शायद वह ये जॉब कर पाएगी, इतनी भी मुश्किल नहीं थी जितना वह सोच रही थी. उसका पूरा दिन ऐसे hi काम में निकल गया.

शाम को 6 बजे के आस पास कृति ने उसे चलने का इशारा किया. तब तक काफी लोग जा चुके थे पर साहिल सर अभी भी अपने केबिन में बैठे थे.

कृति - सुप्रिया... चलो भी... काम बंद करो अब.

सुप्रिया - थोड़ा सा बचा है, ये भी कर लू क्या?

कृति - नहीं, कल कर लेना...

सुप्रिया - पर सर तोह अभी भी बैठे है.

कृति - उन्हें बैठने दो, कोई फरक नहीं पड़ता. चलो, मुझे गयम भी जाना है.

सुप्रिया ने असहज होते हुए अपना बैग में अपना सारा सामान रखा और फिर कृति के साथ नीचे चल पड़ी.

कृति - तुम यहीं वेट करो, मैं गाडी ले कर आती हु.

सुप्रिया वहीँ बहार बैठ गयी और उसने अपना फ़ोन देखा तोह राहुल का मैसेज आया हुआ था - मैडम, मैं आ रहा हूँ आपको लेने.

सुप्रिया ने उसे जवाब दिया - नहीं, मुझे कोई और ड्राप कर रहा है आज. तुम मत आयो.

राहुल - कोई और, कौन?

सुप्रिया - कोई तोह है, तुम्हे क्यों बतायु? तुम्ही ने तोह कहा था न कल रात.

राहुल - ारी बाबा, सॉरी कल रात के लिए. जब मिलोगी तोह मैं अपने कान अपने पेअर से पकड़ लूंगा.

सुप्रिया को उसकी बात सुन कर मुस्कुराने लगी. इतने में कृति भी कार लेकर आ गयी थी और उसने सुप्रिया को आवाज़ दी.

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सुप्रिया जल्दी से गाडी में जा कर बैठ गयी. अभी भी राहुल के मैसेज आये जा रहे थे और फ़ोन पर टिंग टिंग की आवाज़ कर रहे थे.

कृति गाडी चलते हुए बोली - लगता है तुम्हारे हस्बैंड तुम्हे काफी मिस कर रहे है.

सुप्रिया - नहीं नहीं, ऐसा कुछ नहीं है. बस ऐसे hi.

सुप्रिया ने राहुल को मैसेज किया - मैं बाद में बात करती हु, घर पहुंच कर.

उधर राहुल थोड़ा घबराया हुआ सा था. आखिर सुप्रिया किसके साथ घर जा रही थी. क्या सच में कोई और भी था? या फिर उसके ऑफिस का कोई लड़का जो उसे ड्राप कर रहा था? सुप्रिया तोह सच में इतनी भोली सी थी, अगर वह किसी और के चक्कर में पद गयी तोह. राहुल भी अपनी कार ले कर सुप्रिया के घर की और चल पड़ा.

कृति ने कार में हल्का सा म्यूजिक ों कर दिया और वह हलके हलके गुनगुनाते हुए कार चला रही थी. सुप्रिया ने उसे दिन में hi बता दिया था की वह कहाँ रहती थी, और वह बिल्डिंग कृति के घर के रास्ते में hi थी.

कृति - तोह कैसा लग पहले दिन?

सुप्रिया - बहुत ाचा.. ऐसा लगा hi नहीं की मेरा पहला दिन हो.

कृति - सच में, तुमने कितनी जल्दी पिक उप कर लिया काफी कुछ. कुछ hi टाइम में तुम तोह ऑफिस की स्टार बन जायेगी.

सुप्रिया ने झेपते हुए कहा - नहीं ऐसा कुछ नहीं, तुमने hi तोह सिखाया था मुझे आज सब कुछ.

कृति - काफी मॉडेस्ट हो... भैया को बतायूंगी मैं की तुमने कितना ाचा किया आज.

सुप्रिया - आपके भैया, ी मैं मर. विक्रम रोज़ ऑफिस नहीं आते क्या?

कृति - नहीं, वह हफ्ते में एक बार आ जाते हैं, कभी और भी काम. एक्चुअली वह ईशा भाभी का काफी बड़ा बिज़नेस है उसे भी मैनेज करते है. ईशा उनकी वाइफ है.

सुप्रिया - ओह ाचा...

कृति - भैया तोह सुपरस्टार है, पता नहीं इतना सब कुछ कैसे मैनेज करते है. वह आते नहीं है, पर उन्हें पता सब होता है की क्या चल रहा है.

सुप्रिया - हाँ सच में, लगता है उन्हें देख कर.

कृति - पर आज तोह पूरे ऑफिस में बस तुम्हारी hi चर्चा चल रही थी.

सुप्रिया हैरान होते हुए - ऐसा क्यों भला?

कृति - Well…ummm…..kuch लोग बस ये जानना चाहते थे की तुम मैरिड हो या नहीं और तुम्हारा नंबर कैसे मिल सकता है…

सुप्रिया शरमाते हुए - ओह गॉड..

कृति - सच, क्या गज़ब ध रही थी तुम आज. तोह क्या बोलू उन्हें? नंबर दे दू क्या?

सुप्रिया - Kriti…tum भी न ाचा मजाक कर लेती हो. उन सबको बता देना की मैं मैरिड हु और उनका कोई चांस नहीं.

कृति - ओह्ह्ह्ह…. तब तोह बेचारे काफी डिप्रेशन में चले जायेंगे, कहीं कंपनी hi छोड़ के न चले जाये.

सुप्रिया - नहीं जायेंगे… देखने में भी उनको मजा hi आता है.

दोनों एक दुसरे की और देख कर ज़ोर ज़ोर से हसने लगी.

इसी सब बातों में जल्दी hi वह सुप्रिया की बिल्डिंग के बहार पहुंच गए. कृति काफी अछि ड्राइवर थी, इतना ट्रैफिक होते हुए भी उसने काफी अचे से ड्राइव किया था. सुप्रिया ने कृति को bye बोलै और बिल्डिंग के अंदर चल पड़ी. उसने इक़बाल को मुस्कुरा के hello बोलै, काफी अचे मूड में थी वह. इक़बाल भी उसे आज फिर से देख कर खुश हो गया.

तभी पीछे से एक गाडी काफी तेज़ी से आकर बिल्डिंग के बहार रुकी. और उसे राहुल की ज़ोर की आवाज़ सुनाई दी.

राहुल - सुप्रिया...

सुप्रिया ने पलट कर देखा की राहुल अपनी गाडी के बहार खड़ा था. उसकी शकल पर बारह बजे हुए थे, जैसे वह काफी परेशान था.

राहुल ने फिर से सुप्रिया को आवाज़ दी - सुप्रिया....

सुप्रिया जल्दी से मैं गेट की तरफ आयी. पता नहीं राहुल क्या कर रहा था यहाँ इस टाइम, और उसका नाम ज़ोर ज़ोर के बुला के पता नहीं क्यों तमाशा बना रहा था. सुप्रिया झुंझलाते हुए गेट की तरफ आयी. इक़बाल भी दरवाज़े के पास आ गया था, देखने के लिए की ये सब क्या हो रहा था. उसने देखा की ये तोह वही आदमी था जो उस दिन सुप्रिया के घर आया था, शायद राहुल नाम था इसका. उसे राहुल बिलकुल पसंद नहीं था.

इक़बाल - क्या हुआ मैडम... सब ठीक है न...

सुप्रिया - हाँ इक़बाल, सब ठीक है. मैं देख लुंगी.

सुप्रिया गेट के बहार गयी - राहुल, क्या कर रहे हो तुम यहाँ इस टाइम...

राहुल - मैं घबरा गया था इसलिए....

सुप्रिया - क्यों घबरा गए they...maine कहा तोह था मैं किसी के साथ आ रही हु घर.

सुप्रिया ने देखा की लोग उन्हें hi घूर कर देख रहे थे, जैसे कोई तमाशा चल रहा हो - राहुल ऐसा करो, कल बात करते है, अभी तुम घर जायो.

राहुल को तोह जैसे सांस hi नहीं थी - नहीं सुप्रिया, मुझे अभी बात करनी है...

सुप्रिया यहाँ खुले में राहुल से कोई बात नहीं करना चाहती थी. वैसे hi इतने सारे लोग देख रहे थे, पता नहीं वह उसके बारे में क्या सोच रहे होंगे - राहुल, ऐसा करो, जल्दी से गाडी साइड में लगाया, और ऊपर चल कर बात करते है.

राहुल ने ठीक है बोल कर जल्दी से गाडी बिल्डिंग के बहार hi साइड में लगायी और सुप्रिया के साथ अंदर आने लगा.

सुप्रिया - इक़बाल, प्लीज बस 10-15 मं की बात है, इतनी देर ये गाडी बहार पार्क रहने डोज?

इक़बाल - ठीक है मैडम, पर कोई प्रॉब्लम है तोह मुझे कॉल कर देना आप.

इक़बाल ने राहुल की और घूर कर देखा, जैसे वह सुप्रिया को परेशान कर रहा हो. सुप्रिया और राहुल दोनों ऊपर की और चल पड़े. सुप्रिया के मैं में घबराहट हो रही थी. उसने राहुल को ऊपर आने के लिए तोह बोल दिया था, पर कहीं अतुल ऑफिस से न आ जाये. वैसे तोह वह थोड़ा लेट hi आता था, पर कभी कभी 7 बजे तक भी आ जाता था.

राहुल तोह जैसे घर पहुंचने के बेसब्री सी इंतज़ार कर रहा था. उसका मैं उसके बस में नहीं था इस समय, उसे बस किसी तरह से भी सुप्रिया को मानना था. वह बस उसकी थी, और किसी की भी नहीं. लिफ्ट में उसकी नज़र अचे से सुप्रिया के कपड़ो पर पड़ी, इस सिंपल सी कुर्ती में भी कितनी क्यूट और सेक्सी लग रही थी वह.

घर में घुसते hi सुप्रिया उस पर गुस्से से बोली - राहुल, ये क्या तमाशा था neeche...tumhe पता है लोग कैसे देख रहे थे हमे...

राहुल - सॉरी, मैं बस थोड़ा परेशान था. मैं कल के लिए काफी सॉरी हु, मैंने पता नहीं क्या लिख दिया था.

सुप्रिया - पर वह बात तुम कॉल पर भी बोल सकते थे न.

राहुल - वह तुमने कहा न की तुम किसी के साथ घर आ रही हो, तोह मैं....

सुप्रिया - तोह तुम क्या? देखने आये थे की मैं किस लड़के के साथ आयी हु घर...

राहुल ने सुप्रिया को शांत करने के लिए उसके गालो को पकड़ना चाहा, पर सुप्रिया ने राहुल के हाथों को पीछे कर दिया.

सुप्रिया - और फिर आगे क्या? उस लड़के को अपने घर तक लेकर आयी हु? ये सोचते हो तुम मेरे बारे में?

राहुल - नहीं सुप्रिया, ऐसा कुछ नहीं. मैं बस तुमसे प्यार करता हु.

राहुल के मुँह से ये शब्द आखिर निकल hi गया था. सुप्रिया एक डैम से हैरान सी हो गयी थी और राहुल की आँखों में देखने लगी, क्या राहुल उससे सच में प्यार करता था.

सुप्रिया की लदखती हुई सी आवाज़ निकली - राहुल क्या बोल रहे हो तुम...

राहुल ने भी उसके आँखों में घूर कर देखा, और फिर उसके गुलाबी होंठों. उससे अब रुका नहीं जा रहा था, वह सुप्रिया के होंठों को जैम के चूमना चाहता था. सुप्रिया की आँखों में भी उसे हाँ hi दिख रही थी.

उसने एक डैम से सुप्रिया का चेहरा पकड़ा और उसके गालों और चेहरे पर किश करते हुए टूट पड़ा. सुप्रिया ने अपने हाथों से उसे रोकना चाहा पर राहुल ने खींच कर उसके हाथ नीचे कर दिए. दोनों की सांसें बहुत तेज़ थी. राहुल हांफता हुआ सा सुप्रिया के हाथ पकडे खड़ा था.

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सुप्रिया - राहुल... पीछे हटो प्लीज... अतुल आते hi होंगे, तुम अभी जायो यहाँ से.

राहुल उसके हालो में हाथ फेरते हुए बोलै - सुप्रिया, बस थोड़ा सा और...

राहुल ने और और किश के लिए सुप्रिया की तरफ अपना चेहरा बढ़ाया, पर इस बार सुप्रिया ने अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया.

सुप्रिया ने किसी तरह अपने ऊपर काबू किया - तुम बस ये जानने आये थे न की मुझे किसने ड्राप किया? कोई लड़का नहीं था, ऑफिस की एक लड़की थी....

राहुल को अपने होंठों पर सुप्रिया की नरम सी हथेली भी बहुत अछि लग रही थी, और वह उसे भी हलके हलके चूमने लगा. सुप्रिया ने अपना हाथ उसके होंठों से हटा दिया.

सुप्रिया ने उसकी और सख्ती सी देखा - मिल गया न जवाब, अब जायो प्लीज, अतुल आ गए तोह गड़बड़ हो जाएगी.

सुप्रिया ने किसी तरह धकेलते हुए राहुल को घर के दरवाज़े तक किया. राहुल का मैं तोह था की वह और आगे सुप्रिया के साथ कुछ कर ले पर फिलहाल तोह वह इस किश से hi खुश था. और सच में अतुल आ गया तोह सब गड़बड़ hi हो जाएगी. उसने भी अपने आप को किसी तरह से संभाला और मुस्कुराता हुआ नीचे अपनी गाडी की तरफ चल पड़ा और वहां से निकल गया.

दूसरी तरफ सुप्रिया के होश तोह अभी भी उड़े हुए से थे. राहुल ने आज फिर उसे चूमा था, पर पता नहीं क्यों आज उसे पहली बार जैसे गन्दा नहीं लग रहा था, बल्कि अंदर एक मीठी और तीखी सी फीलिंग हो रही थी. जैसे राहुल के हाथ अभी भी उसके बालों और चेहरे को जकड़े हुए हो. राहुल तोह पता नहीं आज उसके अंदर क्या आग जला के चला गया था. उसने किसी तरह पानी का गिलास उठा कर पिया.

थोड़ी hi देर बाद घर की घंटी बजी. सुप्रिया ने अपने आप को नार्मल करते हुए दरवाज़ा खोला, सामने अतुल थे.

अतुल - पहुंच गयी तुम घर. कैसा रहा तुम्हारा दिन?

सुप्रिया - ाचा tha...kafi ाचा था...

अतुल - राहुल आया था क्या तुम्हे ड्राप करने?

सुप्रिया एक डैम से उसकी बात सुन कर रुक गयी, क्या अतुल को नीचे राहुल मिल गया था, या किसी ने उसे कुछ कह दिया था. अब वह क्या समझाएगी अतुल को.

अतुल - मैं इस तरफ आ रहा था तोह उसकी गाडी देखि शायद जाते हुए.

सुप्रिया ने किसी तरह बिना कोई भाव दिखाए कहा - नहीं, राहुल ने तोह ड्राप नहीं किया. मेरी ऑफिस की कलेग है न - कृति, मैंने बताया था न उसके बारे में, उसने hi ड्राप किया मुझे.

अतुल - ओह्ह... हो सकता हो मुझे गलत लगा हो.

सुप्रिया अतुल से छुपने के लिए किचन में घुस गयी. आज तोह शायद वह बाल बाल बची थी.
 
थैंक यू, मैंने बाद मैं इस अपडेट में कुछ डायलॉग्स ऐड किये है. मैं हमेशा अपना अपडेट पोस्ट करने के बाद पड़ती हु और छोटे मोठे मिस्टेक्स ठीक करती हु या कुछ लाइन्स ऐड करती हु.
 
अपडेट 29

दो मरदाना हाथ सुप्रिया के बूब्स को कास के दबा रहे थे, उन्हें राउंड रहे थे. सुप्रिया ज़ोर ज़ोर से आवाज़ें निकाल रही थी - अह्हह्ह्ह्ह... ोुछ.... उफ्फ्फ... पर वह हाथ नहीं रुक रहे थे. बड़ी बेदर्दी से वह उसके मम्मो को कुचल रहे थे, और अछि तरह कुचलने के बाद उस आदमी ने अपने होंठ सुप्रिया की चूचियों पर लगा दिए. सुप्रिया के बूब्स में कोई दूध नहीं था पर वह होंठ जैसे दूध की तलाश में उन्हें अपने मुँह के अंदर और ज्यादा ले गए. एक हाथ से दबाते हुए उसने बूब को और ऊपर उठा दिया और अचे से मुँह में घुसा लिया. सामने एक डैम कई सारे चेहरे घूम गए - ध्रुव, विनीत, प्रताप, कारन और आखिर में राहुल का. एकदम से राहुल ने उसके बूब्स को ज़ोर से काटा.

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बूब्स को काटते hi सुप्रिया चिल्ला उठी, और उसकी आँख खुल गयी. वह तोह अभी भी अपने बिस्तर में थी, अतुल के बराबर में लेती हुई. सुप्रिया की दिल की धड़कन काफी तेज़ थी, उसने अपने आप को सँभालते हुए रीलीज़ किया की ये तोह बस एक सपना था. सपने में जो भी हुआ वह सच नहीं था पर बिलकुल सच जैसा hi लग रहा था. सांसें थोड़ी धीमी हुई तोह वह सपने के बारे में सोचनी लगी. सपने में जो भी उसके साथ हो रहा था उसे पता नहीं क्यों ाचा सा लग रहा था. काफी दर्द था पर एक मीठा सा एहसास भी था. कल रात hi तोह राहुल ने कुछ ऐसे hi जोर से पकड़ कर होंठों पर चूमा था. उसे राहुल पर गुस्सा आना चाहिए था, पर पता नहीं क्यों इस बार उसे गुस्सा नहीं बल्कि एक अजीब सा एहसास हो रहा था.

रात को उसने राहुल को मैसेज नहीं किया था, और जैसा उनका तय हुआ था राहुल का भी कोई मैसेज नहीं आया था. अतुल और सुप्रिया दोनों hi थके हुए थे और जल्दी hi सो गए थे. आखिर कल सुप्रिया की जॉब का पहला दिन जो था, वह मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से काफी थक गयी थी रात होते होते, और उसे अचे से नींद आयी थी. और उसी नींद में ये सपना. सुप्रिया ने अपने फ़ोन में टाइम देखा तोह अभी तोह सिर्फ सुबह के 5 बजे थे. उसने थोड़ी देर और आँखें बंद करके लेट गयी और सोचने लगी.

पता नहीं राहुल उसे क्या समझने लगा था, वह उससे ऐसे मजाक करता था जैसे वह उसकी गर्लफ्रेंड हो, और कल तोह वह कितना जेलस सा हो कर घर तक भी पहुंच गया था. और उसे रोकने की जगह सुप्रिया का मैं कर रहा था की वह उसे और बढ़ावा दे. फिर दूसरी और ये ख्याल आता की अभी तोह उसकी जॉब शुरू हुई है और वह पता नहीं क्यों राहुल के साथ इतना उलझ रही है. अतुल भी तोह उसे वह सब कुछ दे पा रहा था जिसकी उसे जरूरत थी. उसका दिमाग ये सब सोचते सोचते भरी होने लगा था और थोड़ी देर बाद उसे फिर से नींद आ गयी.

अतुल की ज़ोर की आवाज़ से उसकी आँख खुली, 7.30 बज चुके थे और वह दोनों hi लेट हो गए थे. सुप्रिया जल्दी से हड़बड़ाते हुए बाथरूम की और भागी और नाहा का तैयार हुई. नाहा कर उसने जल्दी से किचन में कुछ बनाया और दोनों के लंच लगा लिए.

सुप्रिया - सॉरी... मैं टाइम से नहीं उठी आज... प्लीज आज आप इस लंच से मैनेज कर लोगे?

अतुल - हाँ... ठीक hai...koi प्रॉब्लम नहीं?

सुप्रिया ने अतुल के गाल पर हलके से किश करते हुए कहा - थैंक यू सो मच!

उसके गाल पर किश करते hi अतुल ने भी उसे पीछे से पकड़ लिया और उसे किश करने लगा - वैसे, बहुत अछि लग रही हो आज. क्या कहती हो, हम दोनों ऑफिस कैंसिल करे क्या आज.

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सुप्रिया - छोडो न प्लीज... देर हो रही है, आप छुट्टी ले सकते हो, मैं नहीं, मेरा दूसरा hi दिन है.

अतुल - तोह फिर... आज रात रेडी रहना.

सुप्रिया ने अतुल को जीब दिखाई और उसके ऊपर से उठते हुए घर से निकलने की तैयारी करने लगी. अतुल ने सुप्रिया को ऑफिस में ड्राप कर दिया, सुप्रिया टाइम पर पहुंच गयी थी पर कल की तरह जल्दी नहीं थी. उसने देखा की कृति पहले से अपनी सीट पर थी और किसी के साथ फ़ोन कॉल पर थी. सुप्रिया ने भी जल्दी से अपना कंप्यूटर ों करके काम शुरू कर दिया. काम करते करते लंच होने को hi आया था की सुप्रिया के फ़ोन पर एक कॉल आने लगा, राहुल का कॉल था. सुप्रिया उसकी कॉल देख कर थोड़ा सा घबरा सी गयी, पता नहीं वह उसे क्यों कॉल कर रहा था और वह भी ऑफिस में. उसे थोड़ा टाइम लगा कर राहुल का कॉल उठाया.

राहुल - Hi ब्यूटीफुल... तुमने रात को मैसेज क्यों नहीं क्या?

सुप्रिया बहुत hi दबी आवाज़ में बात करने लगी - क्या हुआ? अभी क्यों कॉल किया मुझे?

राहुल - बस तुम्हारी आवाज़ सुनने का मैं था...

सुप्रिया - तुम न... कुछ ज्यादा hi...

राहुल - ज्यादा तोह अभी कुछ भी नहीं हुआ है...

सुप्रिया - मुझे अभी काफी काम है ऑफिस में, मैं अभी नहीं बात कर सकती.

राहुल - ठीक है. मैं शाम को तुम्हे पिक करने आ रहा हूँ. रेडी रहना शाम के लिए.

सुप्रिया - राहुल सुनो न... नहीं... प्लीज मुझे पिक करने मत आना...

राहुल - शाम को मिलते है...

राहुल ने फ़ोन काट दिया. सुप्रिया सोचने लगी की आज ये दूसरा मर्द है जिसने उसे बाद के लिए तैयार रहने के लिए बोलै है. आज तोह पता नहीं क्यों हर कोई उस पर प्यार लुटाने को बेकरार था. पहला तोह खुद उसका पति था जिसका उस पर पूरा हक़ था. पर राहुल... राहुल का उस पर क्या हक़ था, और वह क्यों उसके पीछे पागल हो रहा था जबकि वह जानता था की वह एक शादी शुदा लड़की है.

कृति की आवाज़ ने उसकी सोच को भांग किया - सुप्रिया जी... चले लंच के लिए?

सुप्रिया सोचने लगी की कहीं कृति ने उसे राहुल से बात करते तोह नहीं सुन लिया. पर वह तोह न उसके हस्बैंड को जानती थी न राहुल को. पर फिर भी सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की जैसे कृति से कुछ छुपा रही हो.

सुप्रिया ने अपने चेहरे का भाव ठीक करते हुए मुस्कुरा के उसकी और देखा - हांजी चलिए...

कृति - लगता है हस्बैंड से बात कर रही थी, तभी इतनी खुश खुश सी लग रही हो. क्या नाम है तुम्हारे हस्बैंड का?

सुप्रिया - अतुल... अतुल नाम है उनका.

कृति - लगता है अतुल तुम्हे काफी मिस कर रहा है...

सुप्रिया - नहीं, ऐसा कुछ नहीं, बस उन्हें कुछ काम था.

कृति - जिस तरह से तुम्हारे गाल लाल है, लगता तोह नहीं की सिर्फ काम था. या कोई और काम था...

सुप्रिया - ारी बाबा सच... तुम्हे न जासूस होना चाहिए.

दोनों हस्ते हुए कैफेटेरिया में बैठ कर लंच करने लगे. कृति का नेचर सुप्रिया को बहुत ाचा लगने लगा था और ek-do दिनों में hi उनमे इतनी अछि सी टोनिंग हो गयी थी. कैफेटेरिया में बैठे बैठे दोनों ऐसे hi हसी मजाक करते रहे, और कृति ने सुप्रिया को ऑफिस के कुछ और लोगो से भी मिलवा दिया. लंच के बाद दोनों फिर से काम में लग गए और काम करते करते शाम भी हो गयी.

शाम को 5.30 बजे के आस पास सुप्रिया के फ़ोन पर राहुल का मैसेज आया - सुप्रिया, मैं नीचे आ गया हु, वेटिंग फॉर यू...

सुप्रिया उसका मैसेज देख कर थोड़ा परेशान सी हो गयी. ये तोह सच में आ गया, अब क्या करू. अभी तोह सभी बैठे है, कोई भी नहीं गया ऑफिस में से.

सुप्रिया - कृति... मुझे अभी निकलना होगा, ok है क्या?

कृति - हाँ हाँ जायो न... कोई प्रॉब्लम नहीं है... हस्बैंड आये है क्या नीचे?

सुप्रिया - हाँ... वह लेने आये है...

ये बोलते hi सुप्रिया की मैं की बेचैनी और बाद गयी. वह राहुल को अपना पति बता रही थी, और सिर्फ बता hi नहीं रही थी, पता नहीं क्यों उसे ऐसा hi फील हो रहा था की उसका पति उसे लेने आया हो.

कृति - चलो मैं भी नीचे चलती हु. मैं मिलना चाहती हु तुम्हारे हस्बैंड से..

सुप्रिया ये सुन कर सकपका सी गयी - नहीं आज नहीं... किसी और दिन मिलते है न... आज थोड़ी जल्दी है..

कृति उसे आँख मारते हुए बोली - क्यों, ऐसी क्या जल्दी है? मैं तोह चल रही हु नीचे.

तभी साहिल सर ने कृति को आवाज़ दी.

कृति - लगता है आज तोह नहीं जा पयूंगी, चलो पक्का नेक्स्ट टाइम.

सुप्रिया ने रहत की सांस ली और अपना सामान लेकर नीचे की और गयी. सुप्रिया की दिल की धड़कन तेज़ होनी शुरू हो गयी थी, पता नहीं क्यों उसे सुबह का सपना याद आ रहा था. उसने किसी तरह से उस सपने को अपने दिमाग से निकला. नीचे जा कर सुप्रिया ने पाया की राहुल तोह कहीं दिख नहीं रहा था.

सुप्रिया ने जल्दी से राहुल को मैसेज किया - कहाँ हो? तुमने तोह कहा था आ गए?

तभी सामने राहुल की गाडी आ कर रुकी. सुप्रिया अपनी मुस्कराहट दबाने की कोशिश कर रही थी, पर राहुल को देख कर उसका चेहरा एक पल के लिए खिल उठा. वह जल्दी से जाकर कार में बैठ गयी.

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कार में बैठते hi सुप्रिया ने बनावटी गुस्से के साथ राहुल को कहा - तुमने झूठ बोलै था न की तुम आ गए हो, अभी आये हो तुम...

राहुल - मुझे पार्किंग नहीं मिली, इसलिए मुझे पूरा चक्कर काट कर दुबारा आना पड़ा. सच में 20 मं हो गए मुझे आये हुए.

सुप्रिया - हम्म्म... मुझे तोह नहीं लगता...

राहुल ने अपने एक हाथ से उसका हाथ पकड़ते हुआ कहा - लगता है कोई बेसब्री से मेरा इंतज़ार कर रहा था...

राहुल के हाथ लगते hi सुप्रिया के मैं में चल रहा शोर जैसे और बाद गया. सुप्रिया ने उसका हाथ पीछे करते हुए बोलै - मैं इंतज़ार नहीं कर रही थी, बस काम छोड़ कर आयी हु क्यूंकि तुम आ गए थे.

राहुल - सॉरी.. मुझे लगा तुम्हारा ऑफिस 5.30 ख़तम हो जाता होगा, इसलिए मैं आ गया. वैसे बहुत क्यूट लग रही हु आज.

सुप्रिया ने हलके से कहा - थैंक you...sirf आज hi?

राहुल के चेहरे पर भी बड़ी सी स्माइल आ गयी थी - हमेशा की तरह...

सुप्रिया - आज तोह ठीक है, पर प्लीज मुझे कल से पिक करने मत आना, मैं घर आ जा सकती हु अपने आप.

राहुल - मुझे पता है तुम सब अपने आप कर सकती हो. पर कभी कभी किसी का साथ भी ाचा लगता है...

सुप्रिया सामने देखते हुए बोली - अतुल साथ है न. वैसे वह भी कार लेने hi वाले है...

राहुल - अब ये कार कहाँ से बीच में आ गयी. मैं तोह कुछ और hi बात कर रहा था...

सुप्रिया ने नीचे देखते हुए कहा - क्या बोल रहे थे...

राहुल - तुम्हे कुछ फील नहीं हुआ कल रात को?

राहुल ने फिर से सुप्रिया के हाथ पर अपना हाथ रख दिया. इस बार सुप्रिया ने उसका हाथ नहीं हटाया. राहुल हलके हलके अपनी उंगलियां सुप्रिया के हाथ पर फेर रहा था. कितना मुलायम था उसका हाथ.

सुप्रिया - तुम ड्राइविंग पर ध्यान दो न... एक हाथ छोड़ कर क्यों चला रहे हो कार...

राहुल ने गाडी को एक जगह साइड में रोका, वहां ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं थी और वैसे भी रात में कार के अंदर बहार से कुछ ख़ास नहीं दिख रहा था.

राहुल - ये लो अब कार भी बंद है. अब बताया, तुम्हे कुछ महसूस नहीं हुआ कल?

सुप्रिया - क्या महसूस hota...tum पागल होते जा रहे हो... हम बात कर चुके है न इस बारे में.

राहुल - तोह तुम मुझे नहीं चाहती?

सुप्रिया की आवाज़ लड़खड़ा सी रही थी - नहीं... मैं मैरिड हु, तुम्हे पता है. तुम क्यों मेरे पीछे पड़े हो?

राहुल ने अपने दोनों हाथों से सुप्रिया का चेहरा पकड़ा और अपनी और किया. राहुल का चेहरा सुप्रिया के ठीक सामने था. सुप्रिया ने अपनी आँखें नीचे कर ली, पर राहुल ने भी उसकी थोड़ी पर हाथ रख कर उसका चेहरा फिर से ऊपर कर दिया, और उसकी आँखों में देखने लगा. राहुल के दोनों हाथ सुप्रिया के कान के पास उसके बालों में होते हुए उसे पकडे हुए थे.

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एकदम से दोनों ने एक दुसरे को चूमना शुरू कर दिया. सुप्रिया के हाथ भी राहुल के चेहरे पर आ गए थे. ये पहली बार था जब सुप्रिया ने अपनी मर्ज़ी से राहुल को चूमा था. सुप्रिया का भी सब्र का बाँध टूट चूका था और वह खुल कर राहुल को किश कर रही थी. दोनों एक दुसरे के होंठों को अचे से चूस रहे थे. उनके होंठ जैसे एक साथ बांध से गए थे.

राहुल ने सुप्रिया को और ज़ोर से किश करते हुए उसके नीचे वाले होंठ को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा. राहुल के ये करते hi सुप्रिया के हाथ काबू में नहीं रहे और वह उन्हें राहुल के बालों और गर्दन पर तेज़ी से घूमने लगी. सुप्रिया के नाख़ून बड़े हुए थे और वह राहुल ने कान के पीछे जा कर लगे.

राहुल के मुँह से एकदन से निकला - आउच…

फिर वह सुप्रिया की और देख कर समझ गया की वह भी उतनी hi उत्तेजित है जितना वह था. इस बार सुप्रिया ने उसका चेहरा पकड़ कर फिर से उसे चूमना शुरू कर दिया. राहुल एक पल के लिए तोह थोड़ा हैरान सा हो गया पर फिर उसने भी सुप्रिया को फिर से अचे से किश करना शुरू कर दिया. थोड़ी देर और वह दोनों ऐसे hi एक दुसरे से चोंच लड़ाई खेलते रहे. राहुल के हाथ अब सुप्रिया के चेहरे से नीचे आकर उसके कन्धों तक पहुंच गए थे. कार में काम जगह की वजह से वह सुप्रिया को अपने और पास नहीं ला प् रहा था. वह सुप्रिया के शरीर पर हर जगह चूना चाहता था, अपने होंठों से महसूस करना चाहता था. और भी बहुत सारे अरमान थे उसके.

राहुल - तुम्हारे घर चले या मेरे?

सुप्रिया उसके ये बोलते hi थोड़ा होश सी में आयी - राहुल नहीं… प्लीज मुझे घर ड्राप कर दो, अतुल घर पहुंचते hi होंगे..

राहुल - तुम अतुल से क्यों डर रही हो, मैं हु न…

सुप्रिया ने अपनी आवाज़ तेज़ करते हुए कहा - मैं अतुल से डर नहीं रही हु, वह मेरे पति है. हम जो ये कर रहे है न, ये गलत है.

राहुल - हम दोनों एक दुसरे को चाहते है, तोह इसमें क्या गलत है?

राहुल ने उसका चेहरा फिर से पकड़ना चाहा पर सुप्रिया अपनी सीट में पीछे हो गयी.

सुप्रिया - प्लीज राहुल, चलो अब, लेट हो रहा है.

राहुल ने अपनी गाडी चलायी और सुप्रिया के घर की और ले गया. गेट के बहार पहुंच कर सुप्रिया बिना कुछ बोले कार में से उतर गयी.

पीछे से राहुल नई आवाज़ दी - आज रात को मैसेज करना मत भूलना…

सुप्रिया ने गुस्से में उसे पलट कर देखा, राहुल को तोह उसकी कोई भी बात समझ hi नहीं आ रही थी. वह बिलकुल उसे मैसेज नहीं करने वाली थी. वह वापस मुड़ी और अंदर की और चल पड़ी. राहुल भी अपनी कार लेकर निकल गया. रात के 7 बज चुके थे, राहुल के साथ टाइम कैसे बीत गया पता hi नहीं चला था.

जैसे hi वह बिल्डिंग के अंदर घुसी, सामने इक़बाल खड़ा था. उसके चेहरे पर एक अलग सी मुस्कान थी.

इक़बाल - मैडम जी, आप आ गए….

सुप्रिया - हांजी इक़बाल bhaiya…kuch काम था क्या?

इक़बाल - नहीं वह मैडमजी, आपके हस्बैंड तोह आ गए थे कुछ देर पहले….

सुप्रिया थोड़ा हैरान हो गयी, एक तोह अतुल आज ऑफिस से जल्दी आ गया था और दूसरा पता नहीं क्यों इक़बाल उसे ये सब बता रहा था.

इक़बाल - आप घबरायो मत मैडम जी, मैंने उनको कुछ नहीं बताया….

सुप्रिया - क्या नहीं बताया…

इक़बाल - कुछ भी मैडम जी, कौन आता है कौन जाता है, कल जो भी सब हुआ.

सुप्रिया को नहीं लगा था की इक़बाल सब चीज़ो पर बारीकी से नज़र रखे हुआ था. पर उसका काम तोह एहि था न, सुप्रिया अपने आप को कोसने लगी की उसे थोड़ा और समझदार होना चाहिए था. पर फिलहाल उसे इक़बाल के सामने अपने आप को मजबूत रखना था और उससे भी ज्यादा इक़बाल को अपनी साइड रखना था.

सुप्रिया ने अपनी आवाज़ थोड़ी खिलखिलाती हुई करते हुए कहा - थैंक यू इक़बाल जी, आप कितना ख्याल रखते है मेरा.

इक़बाल उसके इस तरह बोलते hi खुश सा हो गया, उसे बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी की ऐसा कुछ होगा - कोई नहीं मैडमजी, आप मुझे अपना hi समझिये.

सुप्रिया - बिलकुल इक़बाल जी, कुछ भी काम होगा तोह मैं आपके पास hi आयूंगी. ाचा अभी मैं चलती हूँ, वह मेरा ऊपर वेट कर रहे होंगे.

सुप्रिया आगे लिफ्ट की और चल दी. उसने पीछे पलट कर देखा तोह इक़बाल उसे hi देख रहा था. उसने इक़बाल की और मुस्कुरा कर स्माइल किया और उसे हाथ हिला कर bye कर दिया. इक़बाल तोह इस सब से जैसे सातवे आसमान में था. शायद वह मैडम के किसी काम hi आयूंगी जाये और इसी बहाने शायद उसे भी….

दूसरी और सुप्रिया अपने घर पहुंची, अंदर आ कर देखा तोह किचन में खाना बनाने की आवाज़ आ रही थी.

सुप्रिया किचन में आते हुए - आज ये क्या हो रहा है, आप घर जल्दी आ गए और किचन में लगे हुए हो?

अतुल - मैंने सोचा आज तुम्हे सरप्राइज दे दू. और फिर मैं ये नहीं चाहता था की तुम घर आ कर खाना बना कर थक जायो.

सुप्रिया ने अपना चेहरा बनाते हुआ कहा - ओह हो… तोह ये बात है… कुछ चाहिए आपको तभी आज…

अतुल - है है है, कुछ ऐसा hi समझ लो… तुम जायो चेंज कर लो… कुछ सेक्सी सा पेहेन लेना.

सुप्रिया - अतुलललल…. मैं नहीं पेहेन रही कुछ सेक्सी वेस्य… मैं आती हूँ 5 मं में.

सुप्रिया अपने कमरे में आयी, आज तोह अतुल काफी मूड में लग रहा था. अभी कुछ देर पहले तोह वह राहुल के होंठों को चूम रही थी, और आज hi उसका पति रात की प्लानिंग कर रहा था. अंदर hi अंदर उसे ऐसा लग रहा था की वह अतुल को कितना बड़ा धोका दे रही थी. उसे राहुल के साथ सब कुछ ख़तम कर देना चाहिए नहीं तोह पता नहीं बात कितनी आगे बाद जाये. वह ऐसी तोह नहीं थी, पर पता नहीं क्यों ये सब छुपाने में भी उसे एक अलग सा रोमांच आ रहा था. ाचा लगता भी क्यों नहीं, 2 लड़के उसके पीछे लगे थे और उसके लिए कुछ भी करने को तैयार थे.

कपडे बदल कर सुप्रिया वापस किचन में आयी. खाना लग भाग बन hi गया था. अतुल ने सिंपल दाल चावल बनाये थे, पर सुप्रिया के लिए तोह वह भी बहुत कुछ था. दोनों ने साथ बैठ कर खाना शुरू किया और एक दुसरे को अपने दिन के बारे में बताने लगे. शुक्र है की अतुल ने राहुल का नाम नहीं लिया और न hi सुप्रिया ने उसका कोई जिक्र उठाया. सुप्रिया तोह कृति की तारीफ के पल बांधे जा रही थी.

खाना ख़तम होने पर अतुल ने hi किचन को समेटा, और सुप्रिया बहार बैठी टीवी देख रही थी. पता नहीं क्यों हर चैनल पर कोई न कोई लव स्टोरी hi चल रही थी. थोड़ी देर बाद अतुल भी बहार आ गया और सोफे पर सुप्रिया के साथ बैठ गया. सुबह से वह इस पल का इंतज़ार कर रहा था. सुप्रिया तोह अभी भी टीवी में hi डूबी हुई थी, पर वैसे वह सिर्फ चैनल hi पालते जा रही थी.

उसने सुप्रिया को अपनी और खींचा और अपनी गोदी में बिठा लिया, और फिर उसके बालों से खेलने लगा. थोड़ी देर पहले hi राहुल के हाथ इन बालों में थे. फिर उसे सुप्रिया के गालों और गर्दन को चूमना शुरू किया. सुप्रिया को गुदगुदी सी हो रही थी, और वह जान बुझ कर इग्नोर करते हुए टीवी देख रही थी.

अतुल ने एक डैम से सुप्रिया को उठाया और बैडरूम की तरफ ले चला.

सुप्रिया - टीवी तोह बंद करने देते…

अतुल - हो जायेगा बंद बाद में, अभी ये जरूरी है.

सुप्रिया - आज क्या हो गया है आपको…

अतुल - तुमने hi तोह आग लगायी थी सुबह मुझे किश करके, और कितनी क्यूट लग रही थी तुम सुबह.

बीएड पर पहुंच कर अतुल ने अपने कपडे उतार दिए और सुप्रिया के कपडे भी उतारने लगा. सुप्रिया के कपडे उतार कर वह उसके पेट पर चूमने लगा, और फिर धीरे धीरे ऊपर होते हुए उसके बूब्स तक पहुंच hi गया. फिर उसने सुप्रिया के बूब्स को अपने हाथों में दबोच लिया. सुप्रिया को उसके ये करते hi सुबह का सपना फिरसे याद आ गया. आज का पूरा दिन जैसे उसका सपना पूरा करने में लगा हो. अतुल ने उसका बूब्स ने थोड़ा सा नीचे चाटना शुरू कर किया.

सुप्रिया - उफ्फ्फ्फ़… क्या कर रहे हो अतुल….

अतुल - करने दो न please...aaj पूरा दिन इंतज़ार किया है इनका...

सुप्रिया - ोुछ... तुम्हारी दादी चूब रही है, शेव क्यों नहीं कर लेते...

पर अतुल तोह अब उसके बूब्स पर बुरी तरह टूट पड़ा था. सुप्रिया ने भी अपने बूब्स को साइड से दबा कर उसके मुँह में दाल दिया.

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कुछ देर ऐसे hi अतुल उसके बूब्स से खेलता रहा और उसके बाद उसका लुंड सुप्रिया की छूट में था. सुप्रिया ने सेक्स के दौरान अतुल को ज़ोर से पकड़ लिया और उसके नाखून के निशाँ अतुल के कंधे पर पद गए. अतुल भी उसके ऐसे करने से और भी जगली हो गया और उसे छोड़ते हुए उसके बूब्स को अचे से दबाने लगा. कुछ hi देर में उसका काम पूरा हो गया था. आज तोह बहुत hi हॉट सेक्स हुआ था उन दोनों के बीच.

अतुल फिर बीएड पर अपनी और लेट कर सो गया. सुप्रिया ने भी आँखें बंद करके सोने की कोशिश करि, पर उसे अतुल के साथ किये सेक्स से ज्यादा पता नहीं क्यों राहुल को दी हुई किश याद आ रही थी. उसने तय किया था की वह राहुल को आज रात मैसेज नहीं करेगी. पर राहुल ने उसे बोलै था की वह उसके मैसेज कर इंतज़ार करेगा.

थोड़ी देर बाद जब सुप्रिया ने महसूस किया की अतुल सो गया है, उसने अपना फ़ोन उठाया और राहुल को मैसेज कर hi दिया.

सुप्रिया - मैं मैसेज कर रही हूँ तोह इसका कोई मतलब नहीं है...

राहुल - मैंने कब कहा कोई मतलब है. कल ऑफिस के बाद बात करेंगे इस सब के बारे में.

सुप्रिया - नहीं... प्लीज ऑफिस मत आना कल...

राहुल - पर मुझे तुम्हे देखे बिना रहा नहीं जायेगा. एक फोटो hi भेज दो.

सुप्रिया - नहीं, आज कोई फोटो नहीं...

राहुल - प्लीज बस एक, प्रॉमिस करता हूँ कल नहीं ायूँगा तुम्हारे ऑफिस.

सुप्रिया ने सिर्फ अपने चेहरे की एक फोटो खींच कर उसे भेजी.

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राहुल - इसमें तोह कुछ भी नहीं दिख रहा है.

सुप्रिया - क्या देखना है तुम्हे...

राहुल - इतनी भी अनजान मत बनो...

सुप्रिया - ाचा अगर भेज दूंगी तोह इस पूरे हफ्ते मेरे ऑफिस नहीं आओगे, वादा करो.

राहुल - अगर सच में इतनी अछि हुई तोह मैं पूरे हफ्ते तुम्हारे ऑफिस नहीं ायूँगा, पक्का वादा.

सुप्रिया - हम्म्म....

सुप्रिया दबे पाँव कमरे से बहार गयी और झट से 4-5 सेल्फीज़ खींची और उनमे से सब से हॉट वाली फोटो राहुल को मैसेज कर दी. इसमें उसका क्लीवेज हल्का सा दिख रहा था, और उसके सेक्सी होंठ और चेहरे पर आते हुए बाल किसी को भी पागल करने के लिए काफी थे.

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सुप्रिया को यकीं था इस फोटो से राहुल को जो चाहिए वह मिल जायेगा - अब मैं ये चाट डिलीट कर रही hoon...aur अपना वादा मत भूलना...
 
ी ऍम वैरी डिसअप्पोइंटेड विथ माय एक्सपीरियंस ऑफ़ राइटिंग ा स्टोरी ों थिस साइट. इवन आफ्टर पुटिंग इन ा लोट ऑफ़ एफर्ट अड़ वर्क ईंटो प्रोवाइडिंग ा गुड स्टोरी माय स्टोरी इस नाउ रेटेड 3 स्टार्स ों थिस फोरम. पुटिंग आईटी ात थे शामे प्लेस अस ा लोट ऑफ़ इतर स्टोरीज विथ no एफ्फोर्ट्स. किते डिस्कुरागिंग फॉर में एंड मैक्स में थिंक व्हाई दो ी वांट तो स्पेंड हॉर्स एंड हॉर्स तो इवन व्रिठे थिस स्टोरी.
 
अपडेट 30

अगले 2 दिन काफी नार्मल से गए. सुबह सुप्रिया और अतुल ऑफिस साथ में ऑफिस चले जाते. सुप्रिया ऑफिस में जल्दी hi काफी सारा काम समझ गयी थी और अब तोह उसके पास थोड़ी सी भी फुर्सत नहीं होती थी. लंच पर वह कृति और बाकि सारे लोगो के साथ खाना खाती. कभी कभी उसका सामना साहिल सर से भी होता, पर अब उसे उनसे भी डर लग्न थोड़ा काम हो गया था. वह भी उसका काम देख कर उसे और कामो में इन्वॉल्व करना शुरू कर रहे थे. बीच बीच में कृति उसकी टांग खींचती रहती, और वह दोनों एक दुसरे से हसी मजाक करते रहते.

शाम को एक दिन फिर कृति ने उसे घर पर ड्राप कर दिया और दुसरे दिन वह खुद hi ऑटो पकड़ कर घर आ गयी. पिछली दो दिनों से न तोह उसने राहुल को मैसेज किया था न hi उसका कोई कॉल या मैसेज आया था. ऑटो में बैठी बैठी सुप्रिया को लग रहा था की पता नहीं क्यों उसने राहुल को इस हफ्ते न आने के लिए बोलै था. पता नहीं क्यों पर उसके दिल को इतना ाचा लगता था जब वह उसके पास होता था. उसका सारा मैं और चेहरा जैसे खिल उठता था, पर वह राहुल को ये एहसास होने नहीं देती थी. और अब तोह उसकी हिम्मत फिरसे बाद सी गयी थी, उस दिन घर पर किश, और फिर दुसरे दिन कार में किश. पता नहीं क्यों वह भी इस बहाव में बहती जा रही थी.

रात को भी उसे मैसेज करके सोने की जैसी उसकी आदत बन गयी थी, पर उसने किसी तरह से अपने आप को काबू कर के कोई भी मैसेज नहीं किया था. पर फिर वह सोचने लगी, उसने तोह सिर्फ राहुल को आने के लिए मन किया था. वह दिन में एक बार कॉल तोह कर hi सकता था. फिर उसे एक डैम से अतुल का ख्याल आया. अतुल ने तोह उसके साथ कुछ गलत नहीं किया था, तोह वह क्यों किसी दुसरे मर्द के बारे में इतना सोच रही थी. उसने तय किया था न की वह बस राहुल को थोड़ा सा सताएगी, और कुछ भी नहीं.

सुप्रिया ऑटो में अपने खयालो में खोयी हु हुई थी की उसके फ़ोन पर एक कॉल आने लगा. सुप्रिया ने देखा की कृति का कॉल था, और उसने झट से कॉल उठा लिया.

कृति - सुप्रिया... तुम घर पहुंच गयी क्या? सॉरी यार मैं तुम्हे आज ड्राप नहीं कर पायी, मुझे कहीं और जाना था.

सुप्रिया - No प्रॉब्लम कृति. बस पहुंचने hi वाली हु घर. मैं मैनेज कर सकती हु वैसे, परेशां मत हो.

कृति - गुड गुड. ाचा सुनो, कल सुबह भैया ऑफिस आएंगे और हमारी उनसे एक मीटिंग होती है जिसमे उन्हें सारे नंबर्स दिखते है. तोह थोड़ा जल्दी आ जाना कल, थोड़ा प्रेप करना पड़ेगा जल्दी जल्दी.

सुप्रिया - ओह ाचा.. हाँ मैं आ जयुंगी जल्दी. थैंक यू बताने के लिए.

कृति - No प्रॉब्लम, चलो गूडनिघत.

सुप्रिया ने भी गूडनिघत बोल कर फ़ोन रख दिया. कल ऑफिस में उसके पहले हफ्ते का आखिरी दिन था, और ये पहली बार वह विक्रम सर को ऑफिस में देखेगी. पता नहीं कल ये मीटिंग कैसी जाएगी, पर उसे तोह शायद बस सबकी बातें सुन्नी hi होंगी, अभी तोह वह इतनी जूनियर है.

ऑटोरिक्षा भी जल्द hi उसके बिल्डिंग के सामने रुक गया. सुप्रिया ने ऑटो वाले को पैसे दिए और अंदर की और चल पड़ी. उसने देखा की आज भी इक़बाल ड्यूटी पर था. जिस दिन से इक़बाल ने उसे राहुल के बारे में बोलै था उसे इक़बाल को देख कर थोड़ा अजीब सा लगता. पर वह कोशिश करती की वह उससे अचे से बात करे. अगर इक़बाल ने कभी अतुल को राहुल के बारे में बता दिया तोह पता नहीं वह अतुल को कैसे सब समझाएगी.

सुप्रिया ने मुस्कुरा के कहा - Hello इक़बाल... कैसे हो तुम?

इक़बाल भी उसे देख कर एक डैम से खुश हो गया - Madamji...aapne पूछ लिया तोह बढ़िया hi हूँ.

सुप्रिया - ाचा... ऐसे क्यों?

इक़बाल - बस आपकी आवाज़ इतनी अछि है न, मैं करता है बस सुनता जायु. पर सुनने को मिलती hi नहीं.

सुप्रिया हस्ते हुए - मिल तोह रही है सुनने को. और मैं तोह हमेशा hi तुमसे बात करती हूँ.

इक़बाल - आपकी आवाज़ बिलकुल मेरी बीवी जैसी लगती है, बस वह गांव से है तोह उसका बोलना का स्टाइल थोड़ा अलग है.

सुप्रिया - ाचा.. तोह उसकी आवाज़ तोह सुनने को मिलती hi होगी न?

इक़बाल - नहीं मैडमजी, वह अब गाँव में hi रहती है, और मैं यहाँ अकेला.

सुप्रिया - ओह ाचा... फिर तोह काफी मुश्किल होती होगी.

इक़बाल - हांजी मैडमजी. बहुत दिक्कत होती है.

सुप्रिया - कुछ भी चाहिए तोह तुम मुझे बोल सकते हो. मैं वीकेंड पर तुम्हारे लिए खाना दे जयुंगी.

इक़बाल - मैडमजी उसकी कोई जरूरत नहीं है, बस आपने बोल दिया वह hi काफी है. आपको भी कुछ भी चाहिए तोह आप मुझे कॉल कर सकते हो.

सुप्रिया - ठीक है, पक्का.

इक़बाल - आज वह दुसरे भैया नहीं आये?

सुप्रिया - नहीं, वह रोज़ तोह नहीं आते न. वैसे आप उनके बारे में क्यों पूछ रहे हो. वह तोह बस ऐसे hi कुछ सामान देने आये थे.

इक़बाल - नहीं मैडमजी ऐसा कुछ नहीं. उस दिन वह आप पर ज़ोर से बोल रहे थे न बहार. मुझे ाचा नहीं लगा था और आप मुझे बता सकते हो अगर कोई परेशान कर रहा हो तोह. मैं उस ऐसा लप्पड़ दूंगा न,...

सुप्रिया - नहीं नहीं, वह मुझे परेशान नहीं कर रहे थे. बस वह कभी कभी ऐसे hi बात करते है.

इक़बाल - हाँ, पर आपसे किसी को भी ऐसे नहीं बात करनी चाहिए. आप इतनी प्यारी है na...bilkul किसी हूर की tarah..Aur जब आप साड़ी पहनती है न, तोह बहुत hi सुन्दर लगते हो.

इक़बाल की बातें सुनते सुनते सुप्रिया के गाल लाल हो चुके थे. उसे पता hi नहीं था की इक़बाल उसे इतनी बारीकी सी देखता था.

इक़बाल - मैंने कुछ गलत तोह नहीं बोल दिया न मैडमजी.

सुप्रिया - नहीं, आपने कुछ गलत नहीं बोलै है. ाचा मैं अभी चलती हूँ, घर पर काफी काम बाकी है.

इक़बाल - मैडमजी, वैसे आप को इतना काम नहीं करना चाहिए. आप कहो तोह मैं एक कामवाली का नंबर भेज दूंगा आपको.

सुप्रिया - हांजी बिलकुल, आप भेज दो..

सुप्रिया इक़बाल को bye बोल कर अपने घर की तरफ ऊपर चली गयी. कामवाली का उसने भी सोचा था पर अतुल ने पहले मन कर दिया की 2 hi लोगो का तोह काम है. पर अब जब वह ऑफिस जा रही है, तोह वह अतुल से फिरसे बात करके बोलेगी. शादी से पहले अपने घर में तोह उसने इतना काम कभी नहीं किया था. मम्मी और भाभी hi सब कुछ संभल लेते थे. बस भाभी ने किसी तरह उसे कुकिंग सीखा दी ताकि वह ससुराल में खाना तोह बना पाए.

अतुल भी थोड़ी देर बाद घर आ गया था और तब तक सुप्रिया ने खाना बना लिया था. दोनों खाना कर बीएड पर आ गए, और अतुल उसे हलके हलके किश करने लगा.

सुप्रिया ने अतुल को रोकते हुए कहा - अतुल सुनो न, ये ऑफिस और घर दोनों करने में काफी मुश्किल हो रही है, हम लोग कामवाली लगवा ले क्या.

अतुल ने मुँह बनाते हुए कहा - मैंने पहले hi कहा था की दोनों नहीं हो पाएंगे. पर तुम्ही ज़िद्द कर रही थी.

सुप्रिया - प्लीज न, और मेरी सैलरी में से चला जायेगा न उसका खर्चा.

अतुल - ओह, अब तुम्हारी और मेरी सैलरी अलग हो गयी है?

सुप्रिया - मेरा ये मतलब नहीं था, बस ये कह रही थी की पहले मैं घर पर थी तोह बस आपकी सैलरी थी न, और अब मेरी भी है, तोह कामवाली लगवा सकते है न.

अतुल - कामवाली का कोई भरोसा नहीं होता...

सुप्रिया - आपके घर में भी तोह कामवाली आती है ग्वालियर में...

अब उन दोनों की बहस सी शुरू हो गयी थी, और काफी देर ऐसे hi बहस करते करते वह दोनों एक दुसरे से गुस्सा हो कर सो गए. पर सुप्रिया ने ठान लिया था की वह कामवाली को लगवा के hi रहेगी. इक़बाल ने उसे नंबर भी भेज दिया था. एक बार वह लग गयी तोह अतुल कुछ नहीं बोल पायेगा.

सुबह जब वह उठी तोह उसे याद आया की उसे तोह आज ऑफिस जल्दी पहुंचना था. वह रात को लड़ाई में सब कुछ भूल गयी थी और उसने अपने कपडे भी रेडी नहीं किये थे. सुप्रिया हड़बड़ाती हुई उठी, और जल्दी से सब कुछ करने लगी.

सुप्रिया - अतुल आज प्लीज लंच नहीं बना पयूंगी, मुझे जल्दी ऑफिस पहुंचना है.

अतुल - अब ये क्या कल रात का गुस्सा है क्या?

सुप्रिया - नहीं बाबा, आज विक्रम सर ऑफिस आएंगे, मुझे जल्दी पहुंचना है. प्लीज तुम भी थोड़ा जल्दी जल्दी तैयार हो न.

अतुल फिर भी अपनी नार्मल स्पीड में सब काम कर रहा था. सुप्रिया बार बार घडी को देख रही थी, वह ऑफिस जल्दी तोह शायद नहीं पहुंच पाएगी. क्या मुसीबत थी, वह क्या बोलेगी कृति को. वह जल्दी से एक कुर्ती पेहेन कर तैयार हुई, और दरवाज़े पर अतुल का इंतज़ार करने लगी.

अतुल धीरे धीरे अपना बैग ले कर आ रहा था और उसे देख कर सुप्रिया का गुस्सा बढ़ता जा रहा था और वह बेसब्री से अतुल के चलने का इंतज़ार कर रही थी.

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सुप्रिया ने अतुल को गुस्से में कहा - अगर और देर कर सकते हो तोह कर लो...

अतुल ने उसे मुस्कुरा के देखा - नहीं, और देर तोह नहीं कर सकता.. चलो... वैसे गुस्से में तोह और भी सेक्सी लगती हो...

सुप्रिया ने उसकी बात का जवाब नहीं दिया और दोनों जल्द hi घर ने नीचे अतुल की बाइक पर चल पड़े. अतुल ने सुप्रिया को ऑफिस के बहार ड्राप किया और सुप्रिया भागते हुए ऑफिस में ऊपर पहुंची. वैसे तोह टाइम से थी पर आज किसी और दिन के मुकाबले काफी लोग पहले से hi ऑफिस में थे. सुप्रिया जल्दी से अपनी सीट पर पहुंची, उसने देखा की कृति कंप्यूटर पर कुछ जल्दी जल्दी टाइप कर रही थी. उसकी शकल पर थोड़ा सा गुस्सा था, जो सुप्रिया ने आज से पहले नहीं देखा था.

सुप्रिया - Sorry..kuch घर में इमरजेंसी हो गयी थी, इसलिए में और जल्दी नहीं आ पायी..

कृति ने उसे बिना देखे बोलै - That's फाइन, मीटिंग स्टार्टस इन 1 ऑवर. यहाँ आ जायो, वे विल लुक ात आईटी टुगेदर.

सुप्रिया जल्दी से उसकी सीट पर पहुंच गयी और वह देख रही थी की कृति एक प्रेजेंटेशन बना रही थी. सुप्रिया ने आज तक किसी प्रेजेंटेशन पर काम नहीं किया था तोह वह बस कृति को काम करते देखती रही और उसे जो चाहिए था वह इनफार्मेशन देती रही. सुप्रिया को काफी खराब लग रहा था की वह कुछ ज्यादा हेल्प नहीं कर पा रही थी.

एक घंटे बाद वह दोनों एक मीटिंग रूम में गए. वहां साहिल एंड विक्रम पहले से थे. विक्रम ने हमेशा की तरह एक कड़क सा सूट पहना हुआ था, और उसके चेहरे पर उसकी वेल मैनटैनेड दादी उस पर काफी अछि लग रही थी. विक्रम के चेहरे पर हमेशा की तरह एक बड़ी सी मुस्कराहट थी.

विक्रम ने उनके रूम में आती hi काफी जोश से कहा - अहह मस. सुप्रिया एंड कृति... वेलकम वेलकम..

सुप्रिया ने विक्रम को देख कर एक हलकी सी स्माइल की और अपना सर hello में हिलाया और एक चेयर पर बैठ गयी. विक्रम के बराबर में साहिल और सामने कृति, और कृति के साथ में सुप्रिया.

साहिल ने बोलना शुरू किया और पिछले महीने के सेल्स और प्रॉफिट के नंबर सामने टीवी पर थे. सेल्स हर महीने बाद रही थी, पर अभी भी कंपनी लोस्स में थी. बीच बीच में कृति भी बोल रही थी और बता रही थी की वह लोग सेल्स बढ़ाने के लिए क्या कर रहे है. विक्रम काफी गंभीरता से उनकी बातें सुन रहा था. कभी वह साहिल की और देखता, कभी कृति की तरफ और कभी सुप्रिया को. काफी कुछ जो बोलै जा रहा था सुप्रिया को नहीं पता था, उसे लग रहा था की पता नहीं वह इस मीटिंग में थी भी क्यों.

उन दोनों के बोलने के बाद कुछ सेकंड थोड़ी शान्ति रही, और फिर विक्रम बोलै - वेल दोने गाइस... ी थिंक हम लोग प्रोग्रेस कर रहे है.

साहिल और कृति ने हाँ में सर हिलाया.

विक्रम - आपको क्या लगता है मस. सुप्रिया?

अपना नाम सुनते hi सुप्रिया एक डैम से चौंक गयी. उसे नहीं लगा था की उसे कुछ बोलना पड़ेगा, और वह अब बोलती भी क्या.

सुप्रिया - सर.... वह.... ी थिंक सब ठीक hi चल रहा है....

विक्रम ने कड़क आवाज़ में बोलै - ठीक से काम नहीं चलेगा.. हम यहाँ ठीक से ज्यादा चाहिए...

उसकी ये आवाज़ सुनते hi सुप्रिया थोड़ा घबरा सी गयी, शायद उसने कुछ गलत बोल दिया था. उसके आंसू जैसे निकलने वाले हो, पर उसने उन्हें किसी तरह से कण्ट्रोल किया.

विक्रम - साहिल... ी थिंक आप फाइनेंस के साथ साथ प्रोडक्ट्स पर भी फोकस करो, मैं क्लाइंट्स लाइन उप करता हूँ. और सुप्रिया को आप थोड़ा बहुत प्रोडक्ट डेवलपमेंट में भी लगाया.

साहिल - यस बॉस.

मीटिंग ख़तम हुई, और साहिल और कृति जल्दी से मीटिंग रूम से बहार चले गए. सुप्रिया भी रूम से बहार hi जा रही थी की विक्रम ने उसे आवाज़ दी.

विक्रम - मस. Supriya...aap ठीक है न?

सुप्रिया की शकल पर बारह बजे हुए थे, पर उसने फिर भी कहाँ - हांजी सर, मैं ठीक हूँ...

विक्रम - लग तोह नहीं रहा आपकी शकल से.

सुप्रिया - नहीं सर, इतस ok...

विक्रम - मैंने शायद थोड़ा ुचि आवाज़ में बोल दिया आपको...

सुप्रिया ने कुछ जवाब नहीं दिया, हाँ उसने सब के सामने उससे ुचि आवाज़ में hi बोलै था. उसे बिलकुल ाचा नहीं लगा था, पर वह कैसे बताती ये विक्रम को.

विक्रम के चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कान आ गयी - ी थॉट आप तोह झांसी की रानी हो....

सुप्रिया ने हिम्मत करके बोल दिया - आप क्यों मुझे बार बार झांसी की रानी बुलाते है...

विक्रम - ताकि आपको लड़ना आ सके...

सुप्रिया - सर...??

विक्रम - आप अभी नयी हैं यहाँ, आपको काफी सीखना है. ी थिंक एकाउंटिंग से ज्यादा आपको प्रोडक्ट डेवलपमेंट में कंपनी के बारे में सीखने को मिलेगा...

सुप्रिया - प्रोडक्ट डेवलपमेंट क्या होता है, मुझे तोह पता भी नहीं...

विक्रम - वही तोह, आपको बहुत कुछ सीखना बाकी है.... चलिए फिर मिलते है..

सुप्रिया मीटिंग रूम से बहार आ गयी. आज का दिन hi खराब था उसके लिए. सुबह वह लेट हो गयी, फिर मीटिंग भी उसके लिए बेकार hi गयी और कृति भी उससे अचे से नहीं बोल रही थी. वह अपना लटका हुआ चेहरा लेकर वापस अपने डेस्क पर गयी और बैठ गयी. उसने अपना चेहरा अपने हाथों से पकड़ लिया और अपनी आँखें बंद कर ली.

एक डैम से कृति की आवाज़ आयी - क्या हुआ मैडम? चेहरा क्यों लटका रखा है...

सुप्रिया ने आखें खोली तोह उसकी आँखों में हलके हलके आंसू थे - कुछ नहीं बस सर में दर्द हो रहा है.

कृति - तुम तोह रो रही हो. क्या हुआ? भैया की बात से परेशान हो क्या? उन्हें सब कुछ परफेक्ट चाहिए होता है, ठीक वर्ड उनकी डिक्शनरी में नहीं है.

सुप्रिया - नहीं, ऐसा कुछ नहीं. मुझे बस हेडाचे हो रहा है....

कृति - ाचा ठीक hai....aisa करो, आज तुम ऑफिस से हाफ डे ले लो. वैसे भी तुम्हारा पहला हफ्ता है, और तुमने इतना कुछ कर भी लिया.

सुप्रिया - पर विक्रम सर...?

कृति - वह मैं मैनेज कर लुंगी.

सुप्रिया - थैंक यू सो मच!!

सुप्रिया खुश थी की वह ऑफिस से जल्दी निकल सकती है. पर वह सोच रही थी की वह जल्दी घर जा कर क्या करेगी. उसने अपना फ़ोन उठाया और राहुल का नंबर निकला. उसने एक मैसेज टाइप किया और फिर डिलीट कर दिया. वह बैठी बैठी सोच रही थी वह राहुल को मैसेज करे या न. आखिर उसने hi तोह राहुल को न आने के लिए बोलै था. तोह अब वह क्यों उसकी और बहक रही थी. वह अछि तरह जानती थी की अगर राहुल आ गया तोह वह शायद वह दोनों फिर से....

उसने अतुल को मैसेज करने का सोचा पर कल रात और सुबह की लड़ाई के बाद उसका अतुल को मैसेज करने का कोई मूड नहीं था. आखिर कार वह अपने आप को रोक न पायी और उसने बस एक "Hi" भेज दिया राहुल को. कुछ मिनट तक सुप्रिया अपने फ़ोन को देखती रही, राहुल का मैसेज वैसे तोह तुरंत hi आ जाता था पर आज अब तक नहीं आया था. शायद वह भी उससे गुस्सा hi हो गया होगा.

निराश होते हुए सुप्रिया ने अपना बैग समेटा और नीचे की और चल दी. उसने सोचा की चलो ठीक है वह घर जाकर सो जाएगी, शायद एहि ठीक रहेगा. पर जैसे hi वह नीचे पहुंची, उसका फ़ोन बज उठा. उसने बिना देखे फ़ोन उठा लिया, उसे यकीं था की राहुल का hi कॉल होगा. और था भी.

राहुल - मैडम... आप मुझे किसी दिन मरवाओगी... अतुल के साथ hi बैठा जब तुम्हारा Hi आया.

राहुल की आवाज़ सुन कर सुप्रिया की साड़ी उदासी जैसे दूर हो गयी और वह एक डैम से खिल खिला उठी. उसने अपनी चहकती हुई आवाज़ में कहा - इतना डरते हो अतुल से तोह कॉल क्यों करते हो?

राहुल - डरता नहीं हूँ, बस तुम्हारे लिए... तुम कहो तोह अभी जा कर अतुल से बोल दू?

सुप्रिया - और क्या बोलोगे तुम अतुल से?

राहुल - एहि की मैं सुप्रिया से प्यार करता हूँ.

सुप्रिया - शहहहहह... पागल हो क्या... कोई ऑफिस में तुम्हे सुन लेगा तोह?

राहुल - सुन लेने दो, मैंने कहा न, मैं नहीं डरता.

सुप्रिया - पर मैं तोह तुमसे प्यार नहीं करती. लोगो को तोह गलत फेहमी हो जाएगी न.

राहुल - ाचा, ऐसा क्या....

सुप्रिया - हाँ बिलकुल...

राहुल - सामने आकर बोलना ये तोह मैं जानू... मेरी जानू...

सुप्रिया - चीई... कैसे फ़िल्मी से डायलाग मारते हो तुम...

राहुल हस्ते हुए - तोह कैसे डायलाग मारु? वैसे 2 दिन से कॉल क्यों नहीं किया.

सुप्रिया - तुमने भी तोह नहीं किया.

राहुल - मैं तोह तुम्हारे कॉल या मैसेज का वेट कर रहा था...

सुप्रिया - मैं नहीं कर रही थी. आज बस ऐसे hi कॉल किया. मैं बस ऑफिस से निकल रही थी.

राहुल - मैं भी घर आ जायु क्या?

सुप्रिया - नहीं! नहीं, बिलकुल नहीं. वह वॉचमन है न, इक़बाल, उसे शक है तुम पर.

राहुल - तोह क्या हुआ.

सुप्रिया - नहीं प्लीज, तुम घर मत आना अब कभी.

राहुल - ऐसा क्या? मुझे तोह अतुल ने hi बुलाया है कल घर पर. उसे मन कर दू क्या?

सुप्रिया - हाँ अतुल को प्लीज मन कर दो. तुम घर मत आना.

राहुल - अब तोह आना hi पड़ेगा. वैसे भी पूरा हफ्ता हो गया तुमसे मिले हुए.

सुप्रिया - तीसरा hi दिन hai...Waise अतुल ने तुम्हे क्यों बुलाया है?

राहुल - मुझे क्या पता अतुल ने क्यों बुलाया है. क्या पता शादी की बात करने के लिए?

सुप्रिया ने गुस्से का नाटक करते हुए कहा - मैं कॉल रख रही हूँ, तुम तरय करना की मत आयो. और आयो भी तोह वॉचमन से मत िलझण.

सुप्रिया ने बिना उसका जवाब सुने कॉल काट दी. राहुल से बात करके उसे ऐसा लग रहा था की जैसे उसके सर का पूरा बोझ उतर गया हो, और उसका गन्दा सा दिन ाचा हो गया हो. ऑटो में भी एक ाचा सा रोमांटिक गाना चल रहा था - दिल ने ये कहा है दिल से... मोहब्बत हो गयी है तुमसे. सुप्रिया भी हलके हलके गाना गन गुनने लगी. जल्दी hi उसकी बिल्डिंग भी आ गयी. बहार hi उसे इक़बाल मिल गया.

इक़बाल - मैडमजी... वह कामवाली से बात हुई आपकी?

सुप्रिया - नहीं इक़बाल, अभी नहीं हो पायी, इतनी बिजी थी न आज.

इक़बाल - यहीं है वह अभी सोसाइटी में. मैं उसे आपके घर ले कर आता हूँ अभी थोड़ी देर में.

सुप्रिया ने सोचा की वह तोह अभी सोने वाली थी, पर अब ये पता नहीं क्यों उसके घर आने की बात कह रहा था. पर जरूरत तोह उसे hi थी न, इसलिए वह न नहीं बोल पायी.

सुप्रिया - ठीक है इक़बाल, पर कोशिश करना थोड़ा जल्दी आना.

इक़बाल - बिलकुल मैडमजी, अभी बस आता हूँ 10-15 मिनट में.

सुप्रिया ने अपने घर पहुंच कर जल्दी से घर के एंट्रेंस का एरिया और ड्राइंग रूम साफ़ किया. हालाँकि कोई काम करने के लिए hi उसके घर आ रहा था पर वह नहीं चाहती की किसी को लगे की घर गन्दा है, नहीं तोह वह भी ऐसा hi चलता काम करेंगे. वह थोड़ी बहुत सफाई करके hi चुकी थी की घर की घंटी बजी.

सुप्रिया ने दरवाज़ा खोला. इक़बाल हमेशा की तरफ एक खाकी सी यूनिफार्म पहने हुए था, और उसके साथ एक लड़की थी जो सुप्रिया से थोड़ी hi बड़ी होगी. उसने एक साड़ी पहने हुई थी जो अछि तरह नहीं लपेटे हुई थी, जिससे उसका ब्लाउज और उसमे कैद बूब्स साफ़ दिख रहे थे. उसके बूब्स सुप्रिया से काम से काम 1 साइज बड़े थे और उसकी पतली कमर से उसके बूब्स और गांड और भी ज्यादा बड़े लग रहे थे. सुप्रिया ने उसे देखते hi सोचा की पता नहीं इक़बाल इसे कहाँ से पकड़ कर ले आया है. अगर इसी लड़की को अचे कपडे मिल जाए और थोड़ा मेकअप हो जाए तोह वह भी काफी ज्यादा हॉट लगती.

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इक़बाल - मैडमजी... ये करुणा है... मैंने बात करि थी न आपसे.

सुप्रिया - हाँ आ जायो...

दोनों सुप्रिया के पीछे पीछे घर में अंदर आ गए. सुप्रिया ने आज तक कोई कामवाली नहीं राखी थी तोह उसे समझ नहीं आ रहा था वह कैसे बात करे.

सुप्रिया - तोह पहले काम किया है कहीं?

करुणा - हाँ मेमसाब, इसी बिल्डिंग में 3 और घर करती हु मैं.

सुप्रिया - ाचा... हमारा ज्यादा काम नहीं है, बस हम 2 लोग है... बस थोड़ा hi काम होगा. खाना बना लेती हो क्या?

करुणा - हांजी, सब बना लेती हूँ. चिकन, मटन... जो आप बोलो...

सुप्रिया ने मुँह सिकोड़ कर इक़बाल की और देखा - नहीं नहीं... हम तोह वेजीटेरियन है..

इक़बाल - ारी मैडमजी के घर ये सब नहीं बनता. तुझे आता तोह है सब बनाना, बोलती क्यों नहीं.

करुणा - जो आप बोलो मेमसाब सब बना दूंगी. और बाकी सब काम भी कर दूंगी - सफाई, बर्तन, कपडे...

सुप्रिया - पर कितने बजे आयोगी...

करुणा - बाकी लोग मुझे चाबी दे कर रखते है...

सुप्रिया परेशान होते हुए बोली - चाबी...., उसे पता था अतुल ये सुनकर और भड़क जायेगा.

इक़बाल उसके मैं की बात समझ गया - मैडमजी आप परेशान मत हो. मैं जानता हूँ इसको, और वैसे भी मैं हूँ न नीचे. कुछ भी गड़बड़ करि तोह इसकी गर्दन दबोच लूंगा...

इक़बाल ने हाथ से करुणा की गर्दन की तरफ इशारा किया. सुप्रिया को सब काफी अजीब सा hi लग रहा था. आज तक घर के बड़े लोगो ने hi ये सब बातें तय करि थी, पर अब वह कैसे डीडे करे. और ये नहीं तोह दूसरी कहाँ से वह ढून्ढ के लेकर आएगी.

सुप्रिया - कितने पैसे लोगी?

करुणा - मेमसाब मैं काम बहुत ाचा करती हूँ... 3 हज़ार महीना लेती हूँ.

सुप्रिया - 3 हज़ार!!!!

इक़बाल - क्या बोल रही है, मैडमजी तोह अपनी hi है, उसने कैसे 3 हज़ार. तू 2 में बात फाइनल कर, नहीं तोह मैं कोई और बताता हूँ मैडमजी को.

करुणा - पर 2 में कैसे...

इक़बाल ने एक डैम से अपनी आँखें बड़ी करते हुए उसे घूर के देखा - चुप बिलकुल....

सुप्रिया भी इक़बाल की ऐसी आवाज़ सुन कर एक डैम से घबरा सी गयी. पता नहीं इन दोनों का आपस में क्या hi रिश्ता था.

करुणा - ठीक है, आप 2 दे dena...main संडे नहीं आती बस....

सुप्रिया - वह चलेगा, मैं तुम्हे मैसेज कर दूंगी एक बार अपने पति से बात करके...

इक़बाल - मैडम उनसे क्या बार करनी... आप फाइनल करो न...

सुप्रिया - फाइनल hi hai...bas शाम तक मैसेज कर दूंगी...

इक़बाल - ठीक है मैडमजी. चल अब...

करुणा जल्दी से घर के बहार चली गयी, और इक़बाल वहीँ सुप्रिया के साथ खड़ा था.

इक़बाल - मैडमजी मैं इसे अचे से जानता हूँ, कोई दिक्कत नहीं होगी. कुछ हो तोह आप मुझे बता देना.

सुप्रिया - ठीक है इक़बाल, तुम्हारे भरोसे रख लेती हूँ...

इक़बाल - थैंक यू मैडमजी. आज वैसे कितने दिनों बाद आपके घर आना हुआ. उस दिन आया था न जब साहब को बीएड पर लिटाया था...

इक़बाल के नज़रें घर के हर कोने को गौर से देख रही थी और बीच बीच में सुप्रिया को भी. सुप्रिया को थोड़ा अजीब सा लग रहा था. पता नहीं इक़बाल क्या कहना छह रहा था उससे.

सुप्रिया - थैंक यू इक़बाल, आप हमेशा मेरे काम hi आते हो.

इक़बाल मुस्कुराते हुए - ऐसे hi एक दुसरे के काम hi तोह आना चाहिए मैडमजी...

सुप्रिया पता नहीं क्यों एक डैम से घबरा कर बोल उठी - हाँ बिलकुल. वैसे कल वह भैया आएंगे... आप उनकी गाडी पार्किंग में लगवा देना...

इक़बाल की आँखों की चमक एक पल के लिए थोड़ी हलकी हुई - ाचा वह वाले bhaiya...Rahul?

सुप्रिया - हांजी, राहुल.

इक़बाल - कोई नहीं मैडमजी... किसी को कुछ नहीं बोलूंगा...

सुप्रिया - नहीं कल वह अतुल होंगे घर पर जब राहुल आएगा... कोई दिक्कत नहीं है.. मैंने कहा न वह बस दोस्त है...

इक़बाल - ओह ाचा, ठीक है मैडम जी... मैं चालू फिर...

सुप्रिया - हांजी, थैंक यू आपका.

सुप्रिया ने अपना हाथ बड़ा कर उसके हाथ को छूटे हुए कहा. इक़बाल उसके स्पर्श से एक डैम से रोमांचित सा हो गया और उसके चेहरे का रंग hi बदल गया. इक़बाल ने सुप्रिया के सामने hi अपनी पंत को ठीक करते हु कहा - मैडमजी अभी चलता हूँ...

सुप्रिया भी उसकी ये हरकत देख कर हैरान से रह गयी. इक़बाल के जाने के बाद सुप्रिया ने घर का लॉक लगाया और फिर कपडे बदल कर कुछ देर सोने चली गयी. उसे पता भी नहीं था की अगले दिन क्या नयी मुसीबत ले कर आएगा.
 
अपडेट 31

अगला दिन शनिवार था, दोनों सुप्रिया और अतुल की छुट्टी का दिन था. सुप्रिया देर से सो कर उठी, पूरे हफ्ते की भाग दौड़ से वह काफी थक चुकी थी. अतुल वैसे तोह उसके बाद hi उठता था पर आज पहले से hi उठा हुआ था, और उसने चाय भी बना ली थी. वह कमरे में चाय ले कर आया तोह उसने देखा सुप्रिया अभी भी बीएड पर सो रही है. वह रात को साड़ी पेहेन कर hi सो गयी थी और उसका जिस्म बहुत hi मुलायम और सेक्सी लग रहा था. सुप्रिया को बीएड पर ऐसे लेते देख कर अतुल के मैं में शरारत सूझी.

अतुल ने चाय साइड में राखी और बीएड पर साइड में बैठते हुए अपनी उंगलियां सुप्रिया के हाथ पर चलने लगा. सुप्रिया ने अंगड़ाई लेते हुए करवट ली और बीएड पर सीढ़ी हो गयी. अतुल ने एक डैम से अपनी उंगलियां उसकी नाभि के पास गोल घुमानी शुरू कर दी. सुप्रिया के शरीर का ये हिस्सा काफी सेक्सी और सेंसिटिव था, और सुप्रिया उसकी उंगलियां लगते hi कसमसाने लगी.

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सुप्रिया ने अतुल का हाथ पकड़ते हुए कहा - क्या कर rahe...gudgudi हो रही है...

अतुल - मैं तोह बस तुम्हे चाय के लिए उठा रहा था.

सुप्रिया ने अपनी आखें मसलते हुए कहा - क्या बात है, आज आपने चाय बना ली?

अतुल - हाँ... मेरी नींद खुल गयी थी तोह मैंने चाय बना li...aapka कामवाला हाज़िर है.

सुप्रिया को हसी आ गयी, पर साथ hi उसे याद आया की उसने अभी तक करुणा को मैसेज नहीं किया था - थैंक यू अतुल, आप कितने अचे हो.

अतुल - वह तोह हु, बस तुम hi नहीं समझती.

सुप्रिया - समझती तोह हूँ...

अतुल - सोच रहा हूँ की आज चाय नहीं कुछ और hi पी लू...

अतुल ने सुप्रिया की गर्दन पर हल्का सा किश किया.

सुप्रिया - Ouchh...subah सुबह नहीं प्लीज...

अतुल ने उसके बालों में अपना मुँह घुसा दिया और हलके से उसका कान काटा - सुबह सुबह का मज़ा hi अलग है...

सुप्रिया ने अतुल को पीछे करते हुए जल्दी से उठी और अपने बाल बांधे लगी- Nahi...please....mujhe उठने दो. काफी काम बाकी है.

अतुल जल्दी से बीएड से उठा और सुप्रिया को पीछे से पकड़ लिया.

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अतुल - कहाँ जा रही हो. थोड़ी देर और आराम करते है न बीएड पर...

सुप्रिया मुस्कुराते हुए - आपका आराम होगा इसमें, मेरा नहीं...

अतुल उसकी गर्दन पर किश करने लगा और पीछे से पकड़ कर उसके बूब्स दबाने लगा.

सुप्रिया - अह्हह्ह्ह्ह... रुकिए न please...agar ये सब करना है न तोह मेरी एक बात माननी होगी.

अतुल तोह अभी सुप्रिया के जिस्म के नशे में डूबा हुआ था - कौनसी बात.

सुप्रिया - वह मैंने कामवाली की बात की थी न. इक़बाल ने एक कामवाली बताई थी.

अतुल - इक़बाल कौन?

सुप्रिया - नीचे जो वॉचमन खड़ा होता है, और कौन. कल दिन में वह उस कामवाली को घर ले कर आया था. मुझे ठीक लग रही है, हाँ कर दू क्या.

अतुल उसकी गर्दन को फिर से चूमते हुए - अब वॉचमन का नाम भी जानती है madam...uske सामने ये सेक्सी साड़ी तोह नहीं पहनी हुई थी...

ये सुन कर सुप्रिया को गुस्सा आ गया - अतुल तुम भी न, कुछ भी बोलते हो. वह बस हेल्प कर रहा था...

अतुल - ारी बाबा.. मज़ाक कर रहा था.

सुप्रिया ने अतुल को पीछे किया और उसकी और मुड़ी - मुझे ऐसा मजाक बिलकुल पसंद नहीं.

अतुल - तुम इतनी भोली हो न, डर लगता है कई बार की...

सुप्रिया ने अतुल के और देखते हुए कहा - क्या डर लगता है?

अतुल - कुछ नहीं... बस तुम इस दुनिया को नहीं समझती na...ye वॉचमैन लोगो से बच कर रहना चाहिए.

सुप्रिया सोचने लगी की अतुल तोह शायद उसे अचे से जनता भी नहीं था. पिछले कुछ महीनो में वह इतना कुछ सीख गयी थी इस दुनिया के बारे में. हर मर्द औरत को बस एक hi नज़र से देखता है. हो सकता है की इक़बाल भी उसे वैसे hi नज़र से देखता हो, पर काम से काम वह उसकी कुछ तोह मदद कर hi रहा था. और जब तब वह सावधान रहेगी, कोई उसको छू भी नहीं सकता.

सुप्रिया - ाचा इक़बाल की बात को छोडो, मुझे वह कामवाली को मैसेज करना है. प्लीज जल्दी से बोलो न.

अतुल - क्या बोलू मैं, अगर तुमने सोच hi लिया है तोह.

सुप्रिया ने एक शरारत भरी आवाज़ में कहा - वैसे तुम भी उससे बच के रहना, तुम नहीं जानते ये दुनिया कैसी है...

अतुल - ऐसा क्यों भला?

सुप्रिया - जब तुम उसे देखोगे न, तब समझ जाओगे.

अतुल - पर अभी तोह तुम यहाँ आयो न.

अतुल ने फिर से सुप्रिया को अपनी बाहों में जकड लिया और उसे किश करने लगा. पर तभी अतुल का फ़ोन बजा और उसे न चाहते हुए सुप्रिया को छोड़ना पड़ा.

अतुल - ओफ्फो, कौन कॉल कर रहा है सुबह सुबह.

अतुल ने फ़ोन उठाया, और किसी से बात करना लगा. सुप्रिया भी मौका देख कर जल्दी से बाथरूम में चली गयी. पता नहीं आज अतुल कौनसे मूड में उठा था, वैसे तोह सुबह सोया hi रहता था, और सुप्रिया hi उससे पहले उठती थी.

वापस आकर उसके अतुल से पुछा - क्या हुआ, किसका फ़ोन था?

अतुल - कुछ नहीं, हमें कहीं जाना है 11 बजे.

सुप्रिया - कहाँ?

अतुल ने एक मंद मंद मुस्कान से कहा - सरप्राइज है.

सुप्रिया - क्या सुप्रिसे है, बताओगे नहीं?

अतुल - तोह फिर सरप्राइज कैसा रहेगा.

सुप्रिया - ाचा ठीक है, 9 तोह बज भी गए है. मैं जल्दी से तैयार होती हु और नाश्ता बनती हु. और हाँ मैं वह कामवाली करुणा को मैसेज दाल रही हु की वह आज से hi शुरू कर दे काम.

सुप्रिया जल्दी जल्दी सारे काम करने लगी और फिर बहार जाने के लिए तैयार होने लगी.

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अतुल और सुप्रिया तैयार हो कर नीचे गए. और अतुल अपनी मोटरसाइकिल की तरफ नहीं सीधे बहार चला गया.

सुप्रिया - हम लोग बाइक से नहीं जा रहे क्या?

अतुल - Nahi...auto से जा रहे है..

सुप्रिया को समझ hi नहीं आ रहा था की वह लोग कहाँ जा रहे थे. अतुल कितना सस्पेंस सा बना कर रख रहा था. उसके चेहरे की मुस्कान देख कर ऐसा लग रहा था की कुछ तोह ख़ास था. थोड़ी देर बाद वह एक कार शोरूम के बहार थे.

सुप्रिया - हम यहाँ क्यों आये है?

अतुल ने हस्ते हुए कहा - यहाँ क्यों आएंगे?

सुप्रिया - हम कार ले रहे है????!!!

अतुल - हाँ, काफी टाइम हो गया तुम्हे बाइक पर घूमते घूमते, अब हम लोग कार में घूमेंगे.

सुप्रिया ये सुन कर काफी खुश हो गयी. कितनो दिनों से वह सोच रही थी काश उनकी भी एक कार होती, पर वह अतुल को कुछ बोलती नहीं थी. कितनी बार वह राहुल या कृति की कार में बैठी थी, अब आखिर कार उनकी अपनी कार होगी. अतुल ने साड़ी कागज़ी करवाई पूरी करि और कार शोरूम वालो ने उन्हें नयी कार की चाबी सौंप दी. उनकी कार एक छोटी कार थी, पर जो भी थिस सुप्रिया को बहुत hi अछि लग रही थी.

अतुल ने कार का ड्राइवर का दरवाज़ा खोलते हुए कहा - तुम बैठो न सबसे पहले.

सुप्रिया - मुझे तोह चलनी भी नहीं आती, मैं क्या करुँगी ड्राइवर सीट पर बैठ कर.

अतुल - तोह क्या हुआ, सीख लोगी. बैठो तोह सही, मैं तुम्हारी फोटो लेता हूँ.

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अतुल ने सुप्रिया की फोटो ली और वह दोनों ख़ुशी ख़ुशी पहले मंदिर गए और फिर घर आ गए. गेट पर इक़बाल नहीं था, पर दुसरे वॉचमन ने उनके लिए गेट खोल दिया और उन्होंने अपनी नयी गाडी बिल्डिंग की पार्किंग में लगा ली.

अतुल - अब तुम गाडी चलना सीख लो और तुम गाडी ले कर अपने ऑफिस चली जाना. मुझे तोह अपनी बाइक hi बढ़िया लगती है.

सुप्रिया - नयी गाडी है, और मैं चलेउ? फिर तोह ये जल्दी hi खतरा हो जाएगी.

अतुल - नहीं होगी, मुझे पूरा कॉन्फिडेंस है तुम पर.

सुप्रिया अतुल की बात सुन कर खुश हो गयी, उसका सालो से मैं था की वह गाडी चलना सीखे. उसे गाडी चलनी आ गयी तोह वह कितनी इंडिपेंडेंट हो जाएगी. कहीं भी आराम से आ जा सकेगी, और किसी के भरोसे नहीं बैठना पड़ेगा. सच में अतुल उसके बारे में कितना सोच रहा था.

अतुल - Acha...aaj शाम को मैंने राहुल को घर पर बुलाया hai...use कार की पार्टी देनी है न.

राहुल शाम को घर आएगा ये तोह सुप्रिया को पता था, पर फिर भी उसे अनजान बनने का नाटक करना पड़ा - ाचा... राहुल आ रहा है. काफी दिन हो गए उसे आये हुए.

अतुल - हाँ, एक और काम भी था उससे. तोह इसलिए भी बुलाया है.

सुप्रिया - उससे क्या काम है?

अतुल - शादी की बात करनी है.

सुप्रिया चौंकते हुए - शादी की बात!! मतलब?

अतुल - ारी इतना क्यों चौंक रही हो, तुम्हे पता है न वह शादी के लिए लड़की ढून्ढ रहा है, तोह मैंने सोचा की मामाजी की बेटी की बात कर लू उससे.

सुप्रिया - ओह ाचा....

अतुल - हाँ, ाचा लड़का है, इतना हैंडसम hai...acha रहेगा न रिंकी के लिए.

सुप्रिया - हाँ ाचा रहेगा.

पता नहीं वह तोह क्या सोचने लगी थी. कल hi तोह राहुल और वह ऐसे hi मजाक में बात कर रहे थे, और अब अतुल ने एकदम से शादी की बात बोल दी तोह वह एक डैम से घबरा सी गयी थी. हाँ शायद ाचा hi होगा अगर राहुल की शादी हो जाये तोह, काम से काम वह उसका पीछा तोह छोड़ेगा.

सुप्रिया और अतुल लिफ्ट से ऊपर आ गए, और वहां दरवाज़े के पास सुप्रिया ने करुणा को खड़े पाया.

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कल hi तरह करुणा का चेहरा चमक रहा था, कामवाली हो कर भी कितनी साफ़ त्वचा थी उसकी. उसके बूब्स उसके ब्लाउज से हलके से बहार झाँक रहे थे. और बाल उसने एक पतली छोटी में बना रखे थे. सुप्रिया ने उसकी और देखा, खासकर उसके ब्लाउज से बहार दीखते हुए बूब्स. पता नहीं उसने इसे क्यों काम पर रख लिया था. उसने अतुल के और देखा तोह अतुल भी उसे घूर कर देख रहा था.

सुप्रिया - करुणा... तुम यहाँ.

करुणा - हाँ मेमसाब, आपने बोलै था न आने के लिए. मैं बस अभी आयी और घंटी बजायी थी.

सुप्रिया - ाचा.. हाँ वह बहार गए थे, आ जायो अंदर. अतुल ये करुणा है, मैंने बताया था न सुबह...

अतुल - हाँ ाचा... hello...

करुणा ने हाथ जोड़ते हुए अतुल को दबी आवाज़ में नमस्ते किया. सुप्रिया ने दरवाज़ा खोला और वह तीनो अंदर आ गए. सुप्रिया के नज़रें अतुल पर hi थी की क्या वह करुणा को देख रहा था. उधर अतुल भी कोशिश कर रहा था की वह करुणा को सुप्रिया के सामने न देखे. उसके मैं में था की काश वह एक बार करुणा के ब्लाउज को अचे से देख ले. जब सुप्रिया ने कामवाली बोलै था तोह उसके दिमाग में ये नहीं थी. शायद एहि सुप्रिया का मतलब था सुबह.

सुप्रिया के बोले बिना करुणा किचन में घुस गयी और वहां अचे से देखने लगी की उसे क्या क्या काम करना था. सुप्रिया ने उसे बर्तन साफ़ करने के लिए बोल दिया था, और उसके बाद घर की सफाई करने के लिए. सुप्रिया ने सोचा की वह उससे आज खाना तोह नहीं बनवाएगी. वैसे भी शाम को राहुल आ रहा था, वह कुछ ाचा सा खाना बनाना चाहती थी.

बर्तन करने के बाद करुणा घर में झाड़ू पोछा कर रही थी. अतुल बहार ड्राइंग रूम में बैठा टीवी देख रहा था, पर उसे जब भी मौका मिलता वह करुणा की और देखता. उसके झुक कर काम करने के वजह से अतुल को उसके बूब्स और अचे से दिख रहे थे. सुप्रिया भी करुणा पर पूरी नज़रें गड़ाए थी. उसने शायद गलत hi मुसीबत अपने गले पाल ली थी. फिर उसने सोचा की शायद वह सही थी, सारे मर्द hi ऐसे होते है, अतुल भी कोई अलग नहीं था. वैसे भी आज सुबह सी वह कुछ ज्यादा hi उत्तेजित था.

थोड़ी देर बाद करुणा घर का काम करके जाने लगी. जाने से पहले सुप्रिया ने उसे घर की एक चाबी दे दी ताकि वह मंडे से उनकी गैर हाज़री में सारा काम कर जाये.

उसके जाते hi सुप्रिया ने दरवाज़ा अंदर से लॉक किया और अतुल से बोली - मैंने कहा था न, अपने आप को संभालना...

अतुल - Kyaa...mujhe कुछ समझ नहीं आया?

सुप्रिया - इतने भी बोले मत बनो, मैं देख रही थी...

अतुल - क्या?? करुणा की बात कर रही हो क्या? ारी तुम्हारे सामने तोह वह कुछ भी नहीं.

सुप्रिया - अब मुझे आप एक कामवाली से कपड़े कर रहे हो...

अतुल ने हस्ते हुए कहा - मुझे शायद चुप हो जाना चाहिए बिलकुल...

सुप्रिया - हाँ शायद उसी में आपकी भलाई होगी.

सुप्रिया किचन में खाना बनाने के लिए घुस गयी. फिर वह सोचने लगी, अतुल तोह बस देख hi रहा था, वह तोह राहुल को कई बार किश भी कर चुकी थी. क्या वह दोहरे मापदंड नहीं अपना रही थी. पर अतुल पति तोह उसका hi था न, और अगर पति को इतनी छूट दे दी तोह पता नहीं... शायद वह कुछ ज्यादा hi सोच रही थी. आज बस अतुल ने उसे पहली बार देखा था, और मंडे से तोह वह वैसे भी उनके जाने के बाद hi आएगी. और इसने कितने अचे से सारा काम किया था, की पूरी किचन hi चमक रही थी.

शाम होते होते सुप्रिया ने खाने की साड़ी तैयारी लगा दी थी. आज कितने दिनों के बाद राहुल अतुल के सामने उनके घर आएगा. बस वह कुछ ऐसा वैसे न बोले, और कुछ ऐसा वैसे तोह बिलकुल न करे. बिलकुल पहले के तरह हसी मजाक करके चला जाये.

शाम को करीब 7 बजे दरवाज़े की घंटी बजी और बहार राहुल खड़ा था. अतुल दरवाज़ा खोलने गया और सुप्रिया किचन के बहार खड़े हो कर दरवाज़े की तरफ देख रही थी. उसके दिल में इस समय इतनी हलचल क्यों हो रही थी.

अतुल ने दरवाज़ा खोला और राहुल अतुल को कार की बधाई देता हुआ घर में घुसा. उसके हाथ में एक मिठाई का डब्बा था और एक वाइन की बोतल थी.

राहुल - कोंग्रटुलतिओं नयी कार के लिए, ये लो.

अतुल - ारी यार इसकी क्या जरूरत थी. मिठाई तोह ठीक थी, ये क्या लाये हो.

राहुल - मैंने सोचा आज इसी ख़ुशी में बोतल खोलेंगे.

अतुल - नहीं यार... उस दिन मैडम ने इतनी गुस्सा किया था, अब कभी घर में नहीं पियूँगा.

ये सुनकर राहुल के आँखों में हलकी सी निराशा आयी. शायद वह कुछ सोच कर hi बोतल लाया था पर अतुल ने तोह उसका प्लान बिलकुल चौपट कर दिया था. उसने मिठाई का डब्बा खोला और एक बर्फी का टुकड़ा अतुल को खिलाया.

राहुल - सुप्रिया तुम्हे भी कोंग्रटुलतिओन्स, इतने दिनों बाद दिखी हो... ये लो तुम भी खायो...

राहुल सुप्रिया की और बर्फी ले कर बड़ा, और बर्फी का पीेछे उसके मुँह में दे दिया. और इस सब में जान बुझ कर अपना अंगूठा उसके होठों पर रगड़ दिया. सुप्रिया उसकी ये चाल समझ गयी थी और उसके बर्फी उसके हाथ से ले ली.

सुप्रिया - थैंक you...aaj गाडी लगाने में कोई दिक्कत तोह नहीं हुई नीचे...

राहुल - नहीं आज तोह इक़बाल ने आराम से गाडी लगाने दी.

अतुल - अरे वहहह, तुम भी हमारे वॉचमन का नाम जानते हो. मैं hi नहीं पूछता शायद लोगो के नाम.

सुप्रिया को ये सुन कर एक डैम से खासी आ गयी. पता नहीं राहुल ने क्यों इक़बाल का नाम लिया, कहीं अतुल को शक न हो जाये उन पर. राहुल और अतुल बैठ कर बातें करने लगे - ऑफिस की, क्रिकेट की, पॉलिटिक्स की, इधर उधर की. सुप्रिया इतने किचन से चाय बना कर ले आयी.

राहुल - सुप्रिया.. अतुल बता रहा था की ये नयी वाली गाडी तुम चलाओगी.

सुप्रिया - हाँ शायद, पर पहले चलनी तोह सीखनी पड़ेगी न.

राहुल - मैं सीखा दूंगा tumhe...mujhe काफी अछि सीखनी आती है.

अतुल - हाँ तुम्ही सीखा देना... मुझ में इतना पेशेंस नहीं है.

सुप्रिया ने हलके से मुस्कुराते हुए कहा - देखते है, अभी तोह कोई जल्दी नहीं है सीखने की.

तीनो साथ में बैठ कर चाय नाश्ता करने लगे. फिर आखिर कार अतुल ने शादी की बात को छेड़ hi दिया.

अतुल - राहुल, तुम्हारी शादी की सर्च कहाँ तक पहुंची.

राहुल - उस पर तोह मैंने स्टॉप लगा दिया है. कोई समझ hi नहीं आती... उसने सुप्रिया की और देखते हुए कहा.

अतुल - पता नहीं तुम्हे कैसे लड़की चाहिए, इतने टाइम से तोह सर्च कर रहे हो. मुझे देखो, जो पहली लड़की देखि उसे hi हाँ कर दी थी.

राहुल - सच... फिर तोह काफी लकी थे तुम दोस्त, की पहली लड़की hi सुप्रिया जैसी मिली.

अतुल - है है, ये तोह है. ाचा मेरे मामाजी की लड़की है रिंकी, उसके लिए लड़का ढून्ढ रहे है. मैं उनसे बात करने से पहले तुमसे पूछना चाहता था.

राहुल - उम्म्म... किस चक्कर में फसा रहे हो अतुल....

सुप्रिया - चक्कर कैसा.... शादी hi तोह hai...aur अभी तोह बोलै तुमने की अतुल कितने लकी है, तुम्हे नहीं लकी बनना.

राहुल ने सुप्रिया को घूरते हुए कहा - मुझे तोह लगता है मैं अभी भी लकी hi हूँ.

सुप्रिया उसकी हिम्मत देख कर दांग थी, उसने अपनी आँखें नीचे झुका ली.

अतुल ने अपना फ़ोन राहुल के आगे करते हुए कहा - ाचा ये देखो, ये रिंकी की फोटो है.

राहुल ने सामने देखा, एक यंग सी लड़की की एक अचे से सलवार सूट में फोटो थी. उसने बहुत साड़ी लड़कियों के फोटो देखि हुई थी और सब उसे एक जैसी सी hi लगती थी अब. ये भी कोई अलग नहीं थी. साफ़ सुन्दर सिंपल चेहरा, अचे नैन नक्श, पतला शरीर, सब ठीक तोह था. पर उनमे उसे सुप्रिया नहीं दिखाई देती थी, और एहि बात उसे सबको मन कर देने पर मजबूर कर देती थी.

सुप्रिया को भी याद नहीं था की रिंकी कौन है तोह वह भी अतुल के फ़ोन में रिंकी की फोटो को देखने लगी. कितनी प्यारी सी सुन्दर लड़की थी, भला इसे कौन मन कर सकता था.

सुप्रिया - वाओ... कितनी सुन्दर है na...sach में तुम दोनों की जोड़ी काफी अछि रहेगी.

राहुल ने सुप्रिया की और देखा, क्या सच में वह उसकी शादी से खुश होगी. उसने सुप्रिया को चिढ़ाने का सोचा - हाँ सही कह रही हो तुम....

अतुल - और राहुल & रिंकी, कितना मैचिंग सा नाम है न...

राहुल - सच में... नाम भी मैचिंग सा hi है...

राहुल का अचानक से उस लड़की में इंटरेस्ट देख कर सुप्रिया को हैरानी सी हुई. और फिर अतुल और राहुल उसके बारे में और बातें करते रहे, जो सुप्रिया को न जाने क्यों चुभने लगी थी. उसे बिलकुल नहीं लगा था की राहुल उसके आगे इस लड़की के बारे में पूछेगा. उसे तोह यकीन हो गया था की राहुल के दिमाग में तोह बस वह hi घूमती रहती थी. शायद ये उसका ब्रह्म था.

सुप्रिया ने वहां से हटने के लिए कप्स समेटे और किचन की और चल दी. उसे किचन से अतुल और राहुल की आवाज़ें आ रही थी. अतुल काफी एक्ससिटेड हो कर राहुल को रिंकी के बारे में सब कुछ बता रहा था. और राहुल भी पूरा इंटरेस्ट ले कर सवाल कर रहा था. शायद वह hi गलत सोच रही थी, राहुल के लिए तोह बस वह एक खेलने की चीज़ बन गयी थी. सुप्रिया बेमन से किचन में काम करने लगी.

तभी दबे पाँव राहुल किचन में अंदर आया. वह नाश्ते की प्लेट रखने के बहाने किचन में आया था.

किचन में आते hi राहुल तेज़ आवाज़ में बोलने लगा ताकि अतुल को ड्राइंग रूम में बैठे सुनाई दे - Supriya...ye प्लेट्स कहाँ रख दू.

सुप्रिया ने रूखी सी आवाज़ में कहा - वहां रख दो..

राहुल - कुछ और हेल्प कर दू आपकी....

सुप्रिया - नहीं ठीक है....

राहुल - तुम्हे कैसी लगी रिंकी...

सुप्रिया - अछि है...

राहुल - हम्म्म... अगर ये शादी हो गयी तोह मैं तुम्हारा बहनोई बन जायूँगा...

सुप्रिया प्याज काट रही थी जिससे उसकी आँखों में आंसू थे, पर उसे ऐसा लग रहा था उसे सच में रोना आ रहा हो - तोह मैं क्या करू फिर?

राहुल - कुछ नहीं, फिर तुम मेरी कोई बात नहीं ताल पयोगी.

सुप्रिया - वैसे कौन सी बात ताली है...

राहुल ने एकदम से अपनी आवाज़ धीमी करि - कितना कुछ तोह मन कर देती हो, कुछ भी नहीं करने देती हो...

सुप्रिया ने हलके से मुस्कुराते हुए कहा - क्या मन कर दिया मैंने.

राहुल ने एकदम से उसके ठीक पीछे आ कर खड़ा हो गया. फिर उसने अपने हाथ से उसके बाल साइड किये और उसकी गर्दन पर एक हलकी सी किश कर दी.

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राहुल - ी लव यू...

सुप्रिया के चेहरे से मुस्कान गायब हो गयी थी - राहुल पागल हो क्या....

राहुल ने उसे पीछे से पकड़ते हुए कहा - पागल hi तोह हु तुम्हारे लिए...

सुप्रिया ने अपने आप को छुड़ाते हुए कहा - राहुल, अभी जायो यहाँ से...

राहुल - देखा, फिर से मन कर रही ho.....ye गर्दन तोह अचे से देकने दो... फोटो वाला टिल तोह ढून्ढ लू मैं...

सुप्रिया - यहाँ नहीं please...Atul आ गए तोह गड़बड़ हो जाएगी...

अतुल - फिर मंडे शाम को?

सुप्रिया ने हाड़बते हुए कहा - हाँ ठीक है, अब जायो तुम...

सुप्रिया ने राहुल को किचन से बहार धकेला और वह बहार जा कर फिर से अतुल के साथ बैठ गया.

कुछ देर बाद सुप्रिया ने खाना लगाया और उन तीनो ने साथ बैठ कर खाना खा लिया. अतुल फिर से रिंकी की hi बातों में लग गया, उधर सुप्रिया और राहुल एक दुसरे को चोरी छुपे देख रहे थे. राहुल को फिर दुबारा सुप्रिया से अकेले बात करने का मौका hi नहीं मिला. डिनर के थोड़ी देर बाद वह अपने घर के लिए निकल गया. आज शायद सबकी hi प्यास अधूरी रहने वाली थी.
 
अपडेट 32

मंडे को ऑफिस में सुप्रिया का दिन काफी बिजी जा रहा था. फ्राइडे को जो भी मीटिंग में हुआ उसके लिए वह अभी भी थोड़ी सी ऐम्बर्रेस्सेड थी, शायद उसने कुछ ज्यादा hi ओवर रियेक्ट कर दिया था. पर नए दिन के जोश में वह सब कुछ भूलने की कोशिश कर रही थी. दिन काफी बिजी hi जा रहा था, रूटीन के काम के साथ साथ साहिल ने सुप्रिया को और भी काम पकड़ा दिए थे. इन नए कामो को देखते हुए सुप्रिया ने भी बारीकी से और चीज़ो को समझनी शुरू कर दिया था. उनकी कंपनी काफी अलग अलग तरह के गारमेंट्स एक्सपोर्ट करती थी. ये माल अलग अलग देशो में जाता था जैसे इंग्लैंड और अमेरिका.

दिन में उसे अतुल का कॉल आया - हे, आज मुझे ऑफिस लेट हो जायेगा, तुम खाना खा लेना.

सुप्रिया - हे, acha...par क्यों?

अतुल - ारी वह बॉस शाम को एक क्लाइंट की पार्टी में जा रहे है और उन्होंने मुझे भी साथ चलने के लिए बोलै है.

सुप्रिया - ओह्ह्ह्हह, तोह पार्टी में जा रहे हो अकेले अकेले...

अतुल - कोई एन्जॉय करने नहीं जा रहा बस काम के लिए hi जा रहा हूँ.

सुप्रिया - ाचा ठीक है जायो...

अतुल - तुम ऑटो करके घर चली जायेगी न...

सुप्रिया - हाँ, आप परेशान मत हो, मैं घर पहुंच जयुंगी.

अतुल - ठीक है, चलो bye...

सुप्रिया फ़ोन रख कर फिर से काम में लग गयी. बीच में उसे ख्याल आया की उस दिन राहुल ने बोलै था की मंडे को वह उसे शाम को मिलेगा. क्या पता वह भी पार्टी में hi जा रहा हो. वैसे ाचा hi होगा अगर वह न आये तोह.

पर उसका ये सोचना व्यर्थ hi था, क्यूंकि शाम को 5 बजे के करीब राहुल का मैसेज आ hi गया - ऑफिस से निकल रहा हूँ, आधे घंटे में मिलता हूँ.

सुप्रिया ने भी उसे मैसेज कर दिया - तुम मत आयो प्लीज, मैं चली जयुंगी घर...

राहुल - तुमने सैटरडे को प्रॉमिस किया था, मुझे कुछ नहीं सुन्ना, मैं आ रहा हूँ.

सुप्रिया की बेचैनी फिर से बढ़ती जा रही थी. उसका मैं काम में नहीं लग रहा था, और वह बार बार टाइम चेक कर रही थी. सब कुछ तोह ठीक था उसकी लाइफ में फिर वह क्यों राहुल की तरफ खींची जा रही थी. ठीक है वह अतुल से ज्यादा स्मार्ट और हैंडसम था, और मजाक भी ाचा करता था, पर उससे क्या. अगर आज उसने कुछ भी तरय किया तोह वह बिलकुल मन कर देगी उसे.

राहुल को आधे घंटे से ज्यादा hi टाइम लग गया, और उसने पहुंचते hi सुप्रिया को मैसेज किया. सुप्रिया भी मैसेज आते hi जल्दी से ऑफिस से निकल गयी. आज तोह कृति भी जल्दी चली गयी थी. नीचे पहुंच कर सुप्रिया ने देखा की राहुल की गाडी ठीक सामने कड़ी थी.

सुप्रिया ने दरवाज़ा खोला और अंदर बैठ गयी. राहुल ने सुप्रिया के और देखा, आज तोह वह एक स्लीवलेस कुर्ती में क्या मस्त लग रही थी. उसकी गोरी गोरी बाहें, गाला और बगल साफ़ दिख रही थी. कुर्ती थोड़ी टाइट थी तोह उसके बूब्स भी उसमे फास के आ रहे थे, या फिर शायद आज उसके बूब्स कुछ ज्यादा hi बड़े लग रहे थे. उनको देख कर राहुल का लुंड टाइट होना शुरू हो गया था, आज उसने काफी प्लान बना रखे थे. राहुल ने अपना हाथ उसके काढ़े पर रखने के लिए बढ़ाया ताकि वह उसकी नंगी बाहों को महसूस कर पाए.

सुप्रिया ने उसका हाथ पीछे करते हुए कहा - राहुल, प्लीज हाथ पीछे रखो.

राहुल - मैं तोह बस सीट बेल्ट लगा रहा था...

सुप्रिया ने उसे घूरते हुए कहा - वह मैं खुद लगा सकती हु न...

राहुल ने गाडी स्टार्ट करते हुए कहा - ाचा ठीक hai...aaj तोह काफी खराब मूड में हो, किसी से लड़ाई करके आयी हो क्या?

सुप्रिया - Nahi....tumse लड़ाई करुँगी आज....

राहुल मुस्कुराते हुए बोलै - Wow...aakhir वह दिन आ hi गया....

सुप्रिया भी बड़ी मुश्किल से अपनी मुस्कान रोक पा रही थी - शट उप! और आगे देख कर गाडी चलायो...

राहुल - जो हुकुम मैडम....

सुप्रिया - बस मुझे घर ड्राप कर दो.... और कोई हुकुम नहीं है...

राहुल - अभी घर जा कर क्या करोगी... अतुल तोह लेट आएगा...

सुप्रिया - तुम्हे कैसे पता...

राहुल - ारी... एक hi ऑफिस में काम करते है हम... मुझे नहीं पता होगा?

सुप्रिया - तोह क्या हुआ अगर वह लेट आ रहे है तोह, मुझे घर पर काफी काम है....

राहुल - मैं चालू क्या साथ mein...help करवा दूंगा...

सुप्रिया ने झल्लाते हुए कहा - मैं बताया था न की वह वॉचमन को हम पर शक हो गया hai...please तुम रोज़ रोज़ वहां मत आयो.

राहुल अनजान बनते हुए बोलै - किस चीज़ का शक हो गया है उसे?

सुप्रिया - एहि की.... एहि की.....

राहुल - एहि की क्या?

सुप्रिया - कुछ नहीं, इतने नासमझ नहीं हो तुम....

राहुल - और तुम? तुम कितनी नासमझ हो....

सुप्रिया - हद्द से ज्यादा... तभी तोह तुम्हारे साथ इस कार में hu....waise हम जा कहाँ रहे है, ये घर का रास्ता तोह नहीं लग रहा...

राहुल - मेरे यहाँ...

सुप्रिया एक डैम से अपनी सीट से उछाल पड़ी - तुम्हारे यहाँ क्यों????

राहुल - तुम कभी आयी भी नहीं मेरे यहाँ... सो सोचा आज ले चालू एक बार घर....

सुप्रिया - आज नहीं प्लीज Rahul....kisi और दिन अतुल के साथ आती हु न....

राहुल - ारी चलो न, मैं अछि सी कॉफ़ी बना कर पिलायुंगा तुम्हे...

सुप्रिया ने मैं hi मैं सोचा की कॉफ़ी तोह बस बहाना है, पता नहीं क्या सोच कर आया है ये आज - सुनो राहुल.....

राहुल - बोलिये मैडम...

सुप्रिया - ये जो भी है सब गलत hai....Atul को पता चलेगा तोह....

राहुल - कॉफ़ी पीना गलत है? मैं अभी अतुल को कॉल करके बता देता हूँ की मैं सुप्रिया को कॉफ़ी पिलाने अपने घर ले कर जा रहा हूँ.

राहुल ने अपना फ़ोन निकाला और एकदम से अतुल को कॉल लगा दी. सुप्रिया उसकी ये हरकत देख कर हैरान परेशान हो गयी. उसके चेहरे पर एक बड़ी सी शिकन आ गयी और वह राहुल की और देख रही थी.

अतुल - Hello... हाँ राहुल बोलो..

राहुल - Atul...abhi ऑफिस में hi हो....

अतुल - हाँ, बस अभी निकल रहा हूँ. क्यों क्या हुआ?

सुप्रिया उधर अपने होंठों पर ऊँगली रख अपना सर हिला रही थी, राहुल को ये बोलते हुए की वह कुछ न बोले. राहुल भी सुप्रिया के और देख कर मुस्कुरा रहा था.

राहुल - सुप्रिया के बारे में पूछना था....

अतुल - हाँ बोलो???

सुप्रिया के चेहरे का तनाव बढ़ता जा रहा था. राहुल ने तोह सच में उसका नाम ले लिया था. उसने राहुल के हाथ से फ़ोन छींटे हुए म्यूट पर किया और राहुल से बोली - क्या कर रहो, पागल हो क्या?

राहुल - तोह चल रही हो न घर फिर?

उधर से अतुल की आवाज़ आयी - बोलो Rahul...mujhe सही से सुनाई नहीं दिया शायद, तुम सुप्रिया के बारे में कुछ कह रहे थे.

फ़ोन अभी भी म्यूट पर था और राहुल ने सुप्रिया की और देखा. सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया और फ़ोन वापस राहुल को दिया. राहुल ने फ़ोन म्यूट से हटते हुए अतुल को कहा - ओह सॉरी, ख़राब कनेक्शन है शायद. मैं बस पूछ रहा था की सुप्रिया को पिक तोह नहीं करना न उसके ऑफिस से अगर तुम नहीं जा पयोगे.

अतुल - नहीं, वह मैनेज कर लेगी. पर थैंक यू पूछने के लिए.

राहुल - ाचा ठीक है, एन्जॉय थे पार्टी.

अतुल ने थैंक्स बोलकर फ़ोन काट दिया, और अब राहुल की स्माइल और भी बड़ी हो चुकी थी. सुप्रिया तमतमाया सा चेहरा लेकर बैठी थी.

सुप्रिया - ये तुमने गलत kiya....Atul क्या सोचेगा...

राहुल - कुछ नहीं सोचेगा, तुम बेकार में परेशान हो रही ho...ye लो आ भी गए...

राहुल ने एक बिल्डिंग की पार्किंग में गाडी लगते हुए कहा. ये बिल्डिंग सुप्रिया के घर की बिल्डिंग से थोड़ी छोटी और पुराणी थी. इस बिल्डिंग में कोई लिफ्ट नहीं थी और राहुल का फ्लैट तीसरी मंजिल पर था. दोनों ने सीढ़ियां चढ़नी शुरू कर दी. काफी गर्मी थी और सुप्रिया को अब सीढ़ियां चढ़ने की आदत भी नहीं रही थी.

सुप्रिया - कोई और भी रहता है क्या तुम्हारे फ्लैट पर....

राहुल - Nahi...bas मैं अकेला....

2 मंजिल चढ़ने के बाद सुप्रिया ने कहा - कितना और ऊपर जाना है?

राहुल - बस 1 और floor...thak गयी kya....tum कहो तोह तुम्हे उठा कर ले जायु?

सुप्रिया - नहीं, मैं इतनी सीढ़ियां तोह छड्ड hi सकती hu...aur वैसे भी मुझे उठा नहीं पयोगे...

राहुल ने एक डैम से सुप्रिया को हिप्स से पकड़ते हुए अपनी गोदी में उठाया और अपना एक हाथ उसके नितम्बो के नीचे लगते हुए सहारा दिया. उसके ऐसा करते hi सुप्रिया के एक डैम से चीक निकल गयी और उसने डर के मारे राहुक को ज़ोर से पकड़ लिया. राहुल उसे ऐसे उठाये हुए जल्दी से तीसरे फ्लोर पर पहुंच गया.

ऊपर पहुंचते hi सुप्रिया नीचे उतरने के लिए अपने पेअर हिलने लगी - अह्ह्ह्ह... नीचे उतरो मुझे....

राहुल - शठ... ज्यादा शोर मत karo....koi सुन लेगा...

राहुल अभी भी उसे एक हाथ से सहारा दिए ऊपर उठाये हुए था. उसका हाथ सुप्रिया की गांड को छू रहा था जिससे सुप्रिया को काफी उनकंफर्टबले सा लग रहा था और साथ hi हैरानी भी थी की राहुल उसे उठाये हुए कैसे एक पूरा फ्लोर ऊपर छड्ड सकता था. बहार से देखने पर उसकी बॉडी इतनी मस्कुलर तोह नहीं लगती थी.

राहुल ने एक हाथ से दरवाज़ा खोला और घर के अंदर सुप्रिया को धीरे से नीचे उतरा. सुप्रिया सरकते हुए नीचे उतरी और राहुल का हाथ उसकी पूरा गांड पर फिरता हुआ उसकी कमर पर आ कर रुका. दोनों का चेहरा एक दुसरे के काफी पास था, तोह सुप्रिया ने अपना चेहरा दूसरी तरफ मोड़ लिया. राहुल ने अभी भी सुप्रिया की कमर पर हाथ रखा हुआ था. सुप्रिया ने देखा की वह बुरी तरह हांफ रहा tha...Uske चेहरे से पसीना टपकते हुए नीचे गिर रहा था.

सुप्रिया ने उससे दूर होते हुए कहा - हालत देखि है apni...itna हीरो बनने की क्या जरूरत थी?

राहुल ने अपनी सांसें नार्मल करते हुए कहा - कुछ भी तोह नहीं था... तुम्हे तोह मैं पूरे दिन उठा कर भी घूम सकता हूँ.

सुप्रिया ने जीब निकलते हुए कहा - लगता तोह नहीं है…

राहुल ने फिर से अपने हाथ सुप्रिया की कमर की और बढ़ाये - तरय करके देख lo….main अतुल की तरह थकता नहीं हु.

सुप्रिया ने उसे पीछे करते हुए कहा - कितने पसीने में ho...cheeee…peeche रहो...

राहुल - ाचा ठीक है मैं जल्दी से चेंज करके आता हूँ... तुम बैठो ज़रा...

राहुल अंदर कमरे में चला गया और सुप्रिया वहीँ लिविंग रूम में कड़ी थी. घर काफी फैला हुआ था, जैसे काफी दिनों से सफाई न हुई हो. सुप्रिया ने कमरे में झांकते हुए देखा की कपड़ो का एक ढेर बना हुआ था. वह किचन की तरफ गयी तोह वहां भी खली डब्बो का ढेर था. सुप्रिया सोचने लगी की पता नहीं ये लड़के ऐसे कैसे रह लेते है.

राहुल को अंदर गए 5-10 मिनट हो गए थे, तोह सुप्रिया ने कमरे की तरफ आ कर राहुल को आवाज़ दी - Rahul...kahan गए?

पर अंदर से कोई आवाज़ नहीं आयी, तोह सुप्रिया कमरे में घुस गयी और देखने लगी. एकदम से बाथरूम का दरवाज़ा खुला और सामने राहुल सिर्फ अंडरवियर पहने था. उसकी नंगी छाती सुप्रिया को साफ़ दिख रही थी जिस पर कोई भी बाल नहीं थे.

सुप्रिया - ओह सॉरी.... बोलते हुए जल्दी से कमरे से बहार भागी...

राहुल पीछे से चिल्लाया - कोई बात नहीं, इतस नॉट ा बिग डील....

सुप्रिया बहार आ कर सोफे पर बैठ गयी. उसे नहीं पता था की राहुल नाहा रहा है. राहुल की चेस्ट उसने पहली बार hi कपड़ो के बिना देखि थी. उसकी बॉडी अचे से बानी हुई थी, जरा भी फैट नहीं था. शायद वह अपनी फिटनेस पर काफी धयान देता था.

थोड़ी देर बाद राहुल एक स्लीवलेस वेस्ट और शॉर्ट्स पेहेन कर बकर निकला, उसके बाल अभी भी थोड़े गीले थे.

सुप्रिया उसके आते hi एक डैम से उस पर बरस पड़ी - तुम बता तोह देते की नहाने गए हो.... और दूर बंद कर लेना चाहिए था न...

राहुल - मुझे आदत नहीं है न ऐसे दरवाज़ा बंद करने की, बस 2 मिनट के लिए तोह गया था. और तुम मेरे कमरे में क्या कर रही थी...

सुप्रिया - मैं तोह बस तुम्हे ढूंढ़ने गयी थी...

राहुल ने हस्ते हुए कहा - ये तोह बस बहाना है madam...mujhe पता है तुम्हारे मैं में क्या है...

सुप्रिया - शट up...aisa कुछ nahi...main जा रही हु...

सुप्रिया कड़ी हो कर बहार की और जाने लगी पर राहुल ने उसका हाथ पकड़ लिया.

राहुल - रुको toh....sorry बाबा....

सुप्रिया अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी पर राहुल उसे और पास खींच रहा था. राहुल ने सुप्रिया को पीछे से जकड़ते हुए कहा - अब कैसी स्मेल आ रही है मुझसे....

राहुल के ठंडा चेहरा सुप्रिया के चेहरे को छू रहा था. उसके बालो का पानी सुप्रिया पर झड़ते हुए. सुप्रिया को उसमें से काफी अचे से परफ्यूम की खुशबु आ रही थी.

सुप्रिया ने राहुल के और देखते हुए कहा - तुम तोह मुझे यहाँ कॉफ़ी पिलाने लाये थे न..

राहुल - Haan...bas एक कॉफी..

राहुल ने सुप्रिया को पीछे से पकडे हुए उसकी गर्दन पर किश करना शुरू कर दिया.

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राहुल की स्मेल और किश सुप्रिया को पागल कर रही थी. राहुल ने सुप्रिया का चेहरा अपनी और करते हुए अपने होंठ उसके होंठों पर लगा दिए. राहुल उन्हें पहले आराम से चूम रहा था और फिर वह उन्हें अपने होंठों में दबा कर चूसने लगा. उसके दोनों हाथ सुप्रिया की कमर को पकडे हुए थे तोह वह अपने आप को पीछे नहीं कर पा रही थी.

सुप्रिया ने किस तोड़ने के लिए अपना चेहरा पीछे किया और कांपते हुए बोली - ये कौनसी कॉफ़ी है...

राहुल - राहुल स्पेशल कॉफ़ी...

राहुल ने एक हाथ से उसका सर पीछे से पकड़ लिया और फिर से किश करने लगा. किश करते करते उसने अपनी जीब सुप्रिया के होंठों पर लगा दी और उन्हें पार करते हुए सुप्रिया के मुँह में घुसा दी. सुप्रिया ने ऐसी किश कभी नहीं की थी तोह वह थोड़ी हैरान से हो गयी. राहुल की जीब उसकी जीब को छू रही थी, और इससे सुप्रिया को काफी अजीब सा लग रहा था. उसने अपना हाथ राहुल के चेहरे पर रखते हुए उसे अपने मुँह से अलग किया.

सुप्रिया - क्या कर रहे ho...jeeb पीछे रखो न...

राहुल - Kyu…yehi जीब दिखा रही थी न तुम मुझे थोड़ी देर पहले.. तोह मैंने सोचा इसे एक बार अचे से देखा जाए… वैसे मैं ब्रश करके आया हूँ, तोह साफ़ hi है मुँह मेरा.

सुप्रिया ऐसे मौके पर राहुल की ये बात सुनकर अपने चेहरे पर स्माइल आने से नहीं रोक पायी. राहुल ने सुप्रिया को फिर से किश करना शुरू कर दिया और इस बार और भी ज़ोर से उसके होंठों को चूसने लगा. आज वह पहली बार बिना किसी के डर के सुप्रिया को ऐसे चूम पा रहा था. उसके हाथ भी सुप्रिया की बैक पर चल रहे थे.

उसने सुप्रिया को उठाया और बैडरूम की तरफ ले गया. सुप्रिया को समझ hi नहीं आ रहा था की वह कैसे राहुल को रोके या फिर अपने आप को भी. राहुल ने सुप्रिया को बीएड पर गिराया और उसके ऊपर आते हुए फिर से उसके होंठों पर टूट पड़ा. वह सुप्रिया के चेहरे को मसलते हुए उसके होंठों को ज़ोर ज़ोर के चूसने लगा. सुप्रिया के हालत ख़राब हो रही थी, वह राहुल का हाथ अपने चेहरे से हटाने की कोशिश कर रही थी, पर राहुल रुकने का नाम नहीं ले रहा था.

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राहुल के हाथ अब सुप्रिया के बूब्स पर आ गए थे और वह उन्हें हलके हलके दबाने लगा. अंदर से राहुल भी बुरी तरह काँप रहा था. कब से उसका अरमान था सुप्रिया के बूब्स को चुने का, जो आखिर आज पूरा हो रहा था. सुप्रिया के बूब्स सच में उतने hi टाइट थे जितने बहार से दीखते थे. कपड़ो के ऊपर से hi भले, उसके हाथ उन्हें अचे से महसूस कर पा रहे थे.

सुप्रिया भी राहुल के छूने के और भी उत्तेजित होती जा रही थी - ममममम..... उफ्फ्फफ्फ्फ़.... राहुल.... रुको न....

राहुल को ये सब सुनाई नहीं दे रहा था, और उसने और जोर से सुप्रिया के बूब्स को दबाना शुरू कर दिया. उसे कुर्ती के ऊपर से hi सुप्रिया के निप्पल्स दिखाई दे रहे थे, और वह हलके हलके दबाने लगा.

सुप्रिया - Ouchh....mmmmmmm....

राहुल अब इस छुपे हुए ख़ज़ाने तक पहुंचना चाहता था, उसने सुप्रिया की कुर्ती को खींच कर ऊपर किया पर वह उसके बूब्स पर जा कर फास गयी. सुप्रिया का नंगा पेट उसके सामने था और वह वहां चूमने लगा. खासकर उसके नाभि के पास. सुप्रिया ने अपनी कुर्ती नीचे करके राहुल का मुँह अपने पेट से हटाने की कोशिश करि पर वह उसे नहीं हटा पा रही थी. वह एरिया उसके लिए वैसे भी इतना सेंसिटिव था की जब भी अतुल उसे वहां छूटा वह और भी ज्यादा बेताब हो जाती थी. जैसे hi राहुल के होंठ सुप्रिया की नाभि पर छूटे, सुप्रिया अपनी कमर ऊपर उचका लेती और ज़ोर से आहें भर्ती. नाभि पर किश करते हुए राहुल ने सुप्रिया के बूब्स को उसकी कुर्ती के ऊपर से hi ज़ोर के चूम लिया.

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सुप्रिया - Ufff....mmmmm...ahhhhhh...oh गॉड...

राहुल - सुप्रिया, हाथ ऊपर करो न, ये कुर्ती बीच में आ रही है...

सुप्रिया - ये क्यों उतारनी है...

राहुल ने सुप्रिया के मम्मो को अपनी मुट्ठी में दबाते हुए कहा - ताकि तुम्हारी पहाड़ो और घाटियों को अचे से देख paayu....aaj तोह ये और भी बड़े लग रहे है...

सुप्रिया ने सिसकियाँ लेते हुए कहा - Nahi....main नहीं उतार रही अपनी kurti...tum दर्द कर डोज...

राहुल - नहीं करूँगा baba...utaaro तोह...

सुप्रिया ने अपने बूब्स को अपने हाथों से ढकते हुए फिर से ना में सर हिलाया.

राहुल - ाचा ठीक है... फिर मैं ऊपर की जगह नीचे चला जाता हूँ.

राहुल एक डैम से सुप्रिया के पेट को चूमते हुए नीचे के तरफ अपना चेहरा कर लिया, सुप्रिया की पजामी की तरफ. उसने सुप्रिया की पजामी का नाडा अपना दाँतों से खींचा और वह ढीली हो गयी. जैसे hi सुप्रिया को ये एहसास हुआ उसने झट से राहुल के बाल ज़ोर के पकड़ लिए और उसका मुँह वहां से हटाने के लिए खींचने लगी.

राहुल भी दर्द में चिल्लाया - अह्ह्ह्हह....

सुप्रिया ने उसकी चीख सुन कर बालो पर अपनी पकड़ थोड़ी ढीली करि - वहां नहीं प्लीज....

राहुल - तुमने मेरा अंडरवियर देखा tha...mujhe भी बस वही देखना है....

सुप्रिया - नहीं... मैंने कोई जांभोज कर तुम्हारा अंडरवियर नहीं देखा था, मुझे तोह याद भी नहीं...

राहुल - मैं फिर से दिखा देता हूँ....

राहुल ने अपने शॉर्ट्स नीचे करे और राहुल के अंडरवियर में सुप्रिया को एक बड़ा सा तम्बू दिखाई दिया. ये दीखते hi, सुप्रिया ने अपनी आँखें झट से बंद कर ली. उफ़ ये क्या होने जा रहा था, उसने तोह कभी सोचा भी नहीं था बात यहाँ तक पहुंच जाएगी. उसे तोह लगा था बस हमेशा की तरह वह थोड़ी बहुत किसिंग करे - ओह god...nahi Rahul...tumne बस एक किश का बोलै tha...tumne अपनी निक्कर क्यों उतार दी.

राहुल ने सुप्रिया के चेहरे पर हलके से हाथ फेरते हुए कहा - इतना क्यों शर्मा रही ho...aankhen खोलो na...dekho ज़रा....

सुप्रिया - तुम प्लीज अपने कपडे पेहेन लो....

राहुल - क्यों par...ye तोह तुम्हारे लिए बेताब hai....aur मुझे पता है तुम भी हो....

सुप्रिया ने किसी तरह अपने आप पर काबू किया और अपनी आखें खोलते हुए राहुल को ज़ोर से कहा - राहुल प्लीज स्टॉप! हम कुछ ऐसा नहीं करना चाहिए जो हमे बाद में पछतावा हो....

राहुल - क्या हुआ?? बीच में सब क्यों रोक रही हो. तुम्हे थोड़ी जबरदस्ती अछि लगती है क्या?

सुप्रिया - पागल हो क्या तुम!! जबरदस्ती करोगे तुम मेरे साथ?? तुम्हे बस एहि चाहिए न मुझसे, सेक्स... इसलिए लाये थे न मुझे yahan...tum सब मर्द एक जैसे hi होते हो.

राहुल भी ज़ोर से चिल्ला पड़ा - और तुम्हे क्या चाहिए? वह सब फोटोज क्यों भेजी mujhe...aur वह हर रात texting....itne सारे किश..

सुप्रिया उसके चिल्लाने से थोड़ा सा सेहम गयी, पहली बार राहुल ने उससे तेज आवाज़ में बात की थी. उसने धीमी सी आवाज़ में कहा - वह मेरी गलती थी शायद....

राहुल फिर से सुप्रिया के और पास आते हुए बोलै - ी लव यू Supriya...main तुमसे बहुत प्यार करता hoon...please मुझे और मत tadpayo...tumhe पता नहीं है की मैं बस तुम्हारे बारे में hi सोचता रहता हूँ.

राहुल ने अपना सर सुप्रिया के सर पर रख दिया और उसके माथे को हलके से किश किया. राहुल का अंडरवियर का उभर सुप्रिया को छू रहा था. सुप्रिया आखों के कोने से राहुल के अंडरवियर की और झाँक रही थी.

सुप्रिया ने अपनी आवाज़ को नीचे करते हुए कहा - Rahul...kaash तुम मुझे पहले मिले hote...par मैं अतुल को ऐसे देखा नहीं दे सकती हूँ...

राहुल - अभी भी कोई देर नहीं हुई है, हम अभी भी साथ हो सकते hai...aajkal डाइवोर्स कोई बड़ी बात नहीं है...

सुप्रिया - तुम समझते क्यों nahi...mere लिए बहुत बड़ी बात है वह.

राहुल ने अपनी निक्कर उठायी और उसको पेहेन के बहार चला गया. वह सुप्रिया के साथ जबरदस्ती कुछ नहीं करना चाहता था.

सुप्रिया थोड़ी देर बाद अपने कपडे ठीक करके बहार आयी - तुम मुझे ड्राप करोगे या मैं ऑटो पकड़ कर चली जायु?

राहुल ने रूखी सी आवाज़ में कहा - लेट हो गया है ऑटो के liye...main ड्राप कर देता हूँ...

राहुल चुप चाप सुप्रिया को उसके बिल्डिंग के बहार ड्राप करके घर निकल गया. तब तक 9 बज चुके थे और सुप्रिया भी बुरी तरह हिल चुकी थी. उसके दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था, उसे आज राहुल के घर जाना hi नहीं चाहिए था. पता नहीं क्यों उसने राहुल को इतना बढ़ावा दिया, और सबसे ज्यादा गुस्सा तोह अपने ऊपर था, पता नहीं आज वह कैसे इतना बहक गयी. अतुल 10 बजे के बाद hi घर आया और सुप्रिया उससे नज़रें नहीं मिला पा रही थी, और चुप चाप बीएड पर लेट गयी. सब कुछ जैसे अभी भी उसकी आँखों के सामने तैर रहा हो. थोड़ी देर बाद उसे नींद आ गयी.
 
अपडेट 33

राहुल और सुप्रिया के बीच की घटना को अब 3-4 हफ्ते हो चुके थे. इन 3-4 हफ्तों में सुप्रिया ने एक बार भी राहुल को कॉल या मैसेज नहीं किया था. उसका पूरा धयान अब सिर्फ अपने ऑफिस और घर पर था. ऑफिस में साहिल सर ने उस पर जल्द hi और जिम्मेदारी दाल दी थी और अब उसे अलग अलग वेंडर्स और लोगो से बात करनी पड़ती थी जिससे दिन प्रति दिन उसका आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा था. शुरू में तोह उस थोड़ी घबराहट होती की वह अपने से काफी बड़ी उम्र के लोगो से कैसे डील करे. पर अब कुछ दिनों से उसकी ये हिचकिचात भी दूर होने लगी थी और उसे और भी कॉन्फिडेंस आने लगा था.

मंडे से फ्राइडे पूरा हफ्ता अतुल और सुप्रिया के लिए भाग दौड़ में निकल जाता. पर करुणा के होने से सुप्रिया को काफी आराम सा लगने लगा था. शुरू की असहजता के बाद, सुप्रिया को अब करुणा भी अछि लगने लगी थी. वह उनके पीछे से सारा काम अचे ने निपटा देते थी - घर की सफाई, बर्तन और रात का खाना भी बना कर फ्रिज में रख जाती थी. सुप्रिया शुरू के कुछ दिन तोह घर वापस आ कर अपना घर अचे से चेक करती की कहीं कुछ गायब तोह नहीं था, पर अब धीरे धीरे उसे करुणा पर विश्वास होने लगा था. कितना ाचा लगता थी की ऑफिस से वापस आयो और किचन में ढेर सारे काम न करना पड़े तोह.

घर और ऑफिस में अब वह इतनी बिजी हो गयी थी की उसे राहुल के बारे में सोचने का टाइम hi नहीं मिला. और न hi इस बार राहुल का hi कोई मैसेज आया. अतुल कभी उसे राहुल के बारे में कुछ बता देता तोह वह सुन लेती पर ज्यादा कोई दिलचस्पी नहीं दिखती.

इन कुछ हफ्तों में उसका सामना विक्रम सर भी 1-2 बार हुआ था. पर इस बार वह उनका सामना करने के लिए अचे से तैयार थी, और उसने अपनी रिपोर्ट्स उसने काफी अचे से पेश की. विक्रम सर भी इतनी जल्दी उसके काम के पिक उप से काफी इम्प्रेस हो गए थे. पर शायद काम के मामले में इम्प्रेस होने का मतलब है की और काम मिलना, को सुप्रिया के साथ भी हुआ. अगर उसे कभी ऑफिस लेट रुकना होता तोह या तोह कृति उसे घर छोड़ देती या फिर अतुल उसे लेने आ जाता. कृति और उसकी टोनिंग भी काफी अछि hi बैठी हुई थी, और अब दोनों का काम भी थोड़ा बात सा गया था, सो सुप्रिया उसे अपने बराबर hi समझने लगी थी.

आज शनिवार का दिन था, और सुप्रिया ने सुबह का नाश्ता बना कर अतुल को दे दिया था. शनिवार को तोह जैसे उन दोनों को hi काफी इंतज़ार रहता था. घर के इतने सारे काम निपटने होते थे. और काम से काम आराम से बैठ कर नाश्ता तोह करने को मिलता था. नाश्ता खाते खाते सुप्रिया अलग अलग चीज़ो के बारे में सोच में hi डूबी हुई थी. उसका दिमाग एक डैम से उनकी कार पर गया, अतुल तोह अभी भी अपनी बाइक लेकर hi ऑफिस जाते थे. पता नहीं क्यों अतुल ने इस कार को लिया था, पैसे के बर्बादी थी बस.

सुप्रिया - Atul…aap वह कार क्यों नहीं ले कर जाते हो office…neeche धुल hi खा रही है वह.

अतुल खाते खाते टीवी देखने में बिजी था - Hmmmmmm…tum ले जायो फिर...

सुप्रिया - मैं???? मुझे तोह चलनी भी नहीं आती.

अतुल ने सुप्रिया पर बिना कोई ध्यान दिए बोलै - तोह सीख लो na…isme क्या प्रॉब्लम है...

सुप्रिया - ठीक है, आप सीखा दो na…aaj छुट्टी भी है…

अतुल - नहीं बाबा.. मैं नहीं सीखा पायूँगा. मुझे बहुत स्ट्रेस हो जायेगा तुम्हे सिखाते सिखाते.

सुप्रिया - फिर कैसे सीखूंगी main...bekar hi कार ली आपने अगर उसे नहीं करनी तोह.

अतुल - राहुल से सीख लो, वह बोल तोह रहा था सीखने के लिए…

सुप्रिया के चेहरे पर शिकन सी आ गयी. जो कुछ हुआ उसके बाद वह राहुल से कार चलना नहीं सीखना चाहती थी - नहीं…. तुम hi सीखा दो न प्लीज.

अतुल - क्यों? राहुल सीखा देगा na...usko मुझसे ज्यादा एक्सपीरियंस भी है...

सुप्रिया कोई बहन ढून्ढ रही थी राहुल को मन करने का - नहीं... वह कहाँ टाइम निकलेगा... बिजी रहता है वैसे bhi…usko परेशां मत करो इसके लिए.

अतुल - हम्म्म.... बिजी तोह रहता है, आजकल तोह काफी गयम वयं भी कर रहा है, बॉडी बना के मानेगा. तोह फिर कोई ड्राइविंग कॉलेज से सीख लो.

सुप्रिया - मैं कहाँ से ढूंडू... ये तोह आपका hi काम है न.

अतुल - ाचा यार, मैं ढून्ढ दूंगा जब टाइम मिलेगा तोह.

सुप्रिया अतुल का उसकी बात में कोई भी इंटरेस्ट न देख कर चीड़ सी गयी - ठीक है, मत करो मेरी हेल्प. मुझे आपसे एहि उम्मीद थी.

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अतुल बिना कोई जवाब दिए टीवी देखने में बिजी हो गया, सुप्रिया को अचे से पता था की अतुल कुछ नहीं ढूंढेगे उसके लिए. सुप्रिया नाश्ता ख़तम करके बाकी के कामो में लग गयी. थोड़ी देर बाद दावे के बेल्ल बजी और बहार करुणा काम करने आयी थी. सुप्रिया ने दरवाज़ा खोला और वह दोनों किचन में आ कर काम करने लगे.

करुणा बर्तन मांज रही थी और सुप्रिया दिन का खाना बना रही थी. दोनों आपस में ऐसे hi इधर उधर की बातें कर रहे थे. करुणा बात करने में काफी तेज़ थी, हालाँकि सुप्रिया और करुणा रोज़ तोह नहीं मिलते थे, जब भी वह साथ होते उनकी बातें आराम से शुरू हो जाती. करुणा को जैसे दुनिया जहाँ की खबर होती थी और उसकी बातें सुनकर सुप्रिया को हसी आ जाती थी. सुप्रिया भी उससे मजाक कर लेती थी.

सुप्रिया को तभी दिमाग में आया की शायद करुणा को पता हो कोई जो गाडी चलना सीखा सके - करुणा… तुम किसी को जानती हो क्या जो गाडी चलना सीखा सके..

करुणा - हाँ मेमसाब, बोहोत लोग है… आपको सीखनी है क्या?

सुप्रिया - हाँ… कोई ऐसा बताना जो भरोसे का हो…

करुणा - भरोसा तोह किसका करोगे मेमसाब आज के टाइम में… पर वैसे वह सीखा देगा न आपको...

सुप्रिया - कौन?

करुणा - इक़बाल, और कौन मेमसाब…

सुप्रिया - उसको आती है गाडी चलनी?

करुणा - हाँ मेमसाब, वह ड्रिवेरी करता है न जब यहाँ ड्यूटी नहीं होती…

सुप्रिया - पर उसके पास टाइम होगा सीखने के लिए?

करुणा हस्ते हुआ - आपके लिए तोह टाइम निकाल hi लेगा...

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सुप्रिया को समझ नहीं आया की करुणा क्या कहना छह रही थी - तुमने ऐसे क्यों बोलै की मेरे लिए तोह टाइम निकाल hi देगा???

करुणा मुस्कुराते हुए - मेमसाब... जब देखो वह आपकी hi बातें करता रहता है…

सुप्रिया उसकी बात सुनकर हैरान सी रह गयी. इक़बाल उसकी बातें करता था और वह भी करुणा से. ऐसा क्यों भला? और ये करुणा और इक़बाल एक दुसरे के क्या लगते थे? इक़बाल ने तोह कहा था की उसकी पत्नी गाँव में है. तोह क्या करुणा और वह...... नहीं, कहाँ करुणा इतनी सुन्दर और कहाँ इक़बाल एकदम काला सा. पर उस दिन भी तोह कैसे धमका रहा था वह करुणा को उसके सामने.

सुप्रिया - क्या बोलता है वह मेरे बारे में? और वैसे तुम लोगो का रिश्ता क्या है आपस में?

करुणा इतने सारे सवाल सुनकर सुप्रिया की और देखने लगी - मेमसाब… जाने दो न… गलती से बोल दिया मैंने…. नहीं बोलना चाहिए था.

सुप्रिया - ारी… अब बात को पूरा करो न. ये बताया की तुम कैसे जानती हो इक़बाल को.

करुणा - इक़बाल मेरे भाई का दोस्त है… हम लोग पास में hi रहते है...

सुप्रिया - तुम्हारे भाई से बोलै क्या उसने मेरे बारे में? क्या बोलै?

करुणा - जाने दो न मैडम... मैं बातें इधर उधर नहीं करती.... आप इक़बाल से hi पूछ लो न...

सुप्रिया - ाचा.. ये कब से हुआ? और वैसे मैं क्यों पूछूँगी इक़बाल से इस बारे में ... तुम से पूछ रही हु न...

करुणा थोड़ा डरते हुए बोली - मेमसाब... आपके बारे में तोह बोहोत लोग बात करते है...

सुप्रिया हैरान होते हुए - और कौन बात करता है मेरे बारे में?

करुणा हस्ते हुए - मेमसाब आप सच में बोहोत भोली हो... आप जैसी मस्त लड़की के बारे में तोह लोग बात करेंगे hi न....

सुप्रिया - ऐसा क्या मस्त है मुझ में....?

करुणा - मेमसाब... आप मर्दो के नज़र से देखोगे न, तब पता चलेगा... आप तोह लोगो के लिए किसी हीरोइन से काम नहीं हो…

सुप्रिया - तोह इक़बाल ने बोलै ऐसा मेरे बारे में?

करुणा एक डैम से चौक्कन्ना होते हुए - नहीं नहीं मेमसाब... उसने कुछ नहीं बोलै ऐसा... वह तोह वैसे काफी सीधा hi है...

सुप्रिया - ाचा... जितनी सीढ़ी तुम हो...

करुणा ज़ोर से है पड़ी - है है है, नहीं नहीं, मुझसे तोह काफी सीधा है... बस उसका गुस्सा थोड़ा तेज़ है... मुझ पर तोह बोहोत गुस्सा करता है...

सुप्रिया - फिर तोह मुझे डर लगेगा उससे सीखने में...

करुणा - आप पर थोड़ी गुस्सा करेगा... ये हो गया, मैं और काम करती हूँ...

करुणा बहार झाड़ू पोछा करने लगी और सुप्रिया वहीँ किचन में कड़ी सोचने लगी की क्या सच में और लोग उसके बारे में बात करते थे, और उसे मस्त समझकर देखते थे. उसे तोह ये सोचते hi अजीब लगने लगा था. उसे हमेशा से hi अपने सुन्दर होने का पता था, बल्कि उसे लगता था की लोग उसकी सुंदरता की तारीफ करे, जो की होता भी आया था. पर लोग उसे माल समझ कर घूर रहे इसका उसे बिलकुल भी पता नहीं था. उसने नीचे अपने ब्लाउज को देखा और फिर अपने कमर को छुआ. क्या लोग उसके बूब्स को घूरते थे या फिर उसकी नंगी कमर को? क्या वह अपने कपड़ो का स्टाइल चेंज करे जिससे लोग उसे न घूरे. पर उसे मेघा ने भी तोह समझाया hi था न की सुन्दर लड़कियों को लोग घूरते hi है. तोह फिर घूरने दो न उन्हें. ये सोचकर hi सुप्रिया के चेहरे पर हलकी सी शर्म भरी मुस्कान आ गयी.

करुणा भी थोड़ी देर बाद घर का काम करके चली गयी. सुप्रिया डीडे नहीं कर पा रही थी की वह इक़बाल को ड्राइविंग सीखने के लिए बोले या न बोले. दिन होते होते अतुल भी फिर से सो गया था. सुप्रिया भी बस ऐसे hi बैठे बैठे अपना फ़ोन चला रही थी. उसके फ़ोन पर कुछ मेस्सगेस आये हुए थे जिसमे कृति ने उसे इंस्टाग्राम ज्वाइन करने के लिए इन्विते किया हुआ था. सुप्रिया का फेसबुक पर एक अकाउंट था पर उसने कभी इंस्टाग्राम या और किसी अप्प पर अपना अकाउंट नहीं बनाया था. और वैसे वह किसी को जानती भी नहीं थी जो ये अप्प उसे करता था.

सुप्रिया ने इनविटेशन पर क्लिक किया जो उसे अप्प स्टोर ले गया और सुप्रिया ने इंस्टाग्राम की अप्प अपने फ़ोन पर डाउनलोड कर ली. लॉगिन करते hi उसे कृति की फोटो दिखाई दी. वह गयम में थी शायद, और काम कपड़ो में उसने अपनी सेल्फी डाली हुई थी. सुप्रिया ये देख कर थोड़ी सी हैरान थी की कृति ने इतनी बोल्ड फोटो ऑनलाइन कैसे डाली हुई थी जिसे कोई भी देख सकता था. और उसकी फोटोज पर काफी सारे लाइक्स और कमैंट्स भी थे.

कैप्शन: आफ्टर ान इंटेंस वर्कआउट

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सुप्रिया फोटो पर कमैंट्स पड़ने लगी. कई लोग उसे हॉट बुला रहे थे, कुछ लोगो ने उसके बूब्स पर कमेंट किया हुआ था, और कुछ तोह और भी ज्यादा. कुछ तोह लड़कियों के भी कमेंट थे जैसे - सले क्वीन, होत्तीए, तोता और पता नहीं क्या क्या. सुप्रिया सोचने लगी की पता नहीं कृति कैसे इतनी कम्फर्टेबले हो जाती है अपनी ऐसी फोटोज पोस्ट करने में. सुप्रिया ने भी फोटो को लिखे कर दिया. सुप्रिया सोचने लगी की क्या वह अपनी फोटो इस अप्प पर डाले? नहीं... पता नहीं लोग उसकी फोटो देख कर कैसे कमेंट करे, उसे तोह ाचा नहीं लगेगा अगर कोई ऐसे वैसे कमेंट करेगा तोह. वैसे hi सुबह करुणा ने उसे बताया था की लोग उसे कैसे देखते थे.

सुप्रिया ने रूम में झाँक कर देखा तोह अतुल अभी भी गहरी नींद में सो रहा था. कितना डिपेंडेंट हो गयी थी वह अतुल पर हर चीज़ के लिए. शायद उसे गाडी चलना सीख hi लेना चाहिए... इक़बाल से बात करने में क्या hi हर्ज़ है. सुप्रिया ने बालकनी से नीचे झाँक के देखा, अभी इक़बाल hi ड्यूटी पर था, वह नीचे जा सकती थी.

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सुप्रिया ने अपनी संदल पहनी और धीरे से घर का दरवाज़ा खोलते हुए बहार आ गयी. सुप्रिया वहीँ बिल्डिंग के नीचे की एंट्रेंस के पास कड़ी थी. आते जाते लोग उसे देख रहे थे, जो उसे अब थोड़ा रीलीज़ हो रहा था. बहार काफी तेज़ धुप थी. सुप्रिया सोचने लगी की अब नीचे आ hi गयी थी तोह क्या सोचना इस बारे में. इक़बाल पता नहीं इतनी चिलचिलाती धुप में कैसे अपनी ड्यूटी निभाता था. क्या करुणा ने इक़बाल को बता दिया था की वह ड्राइविंग सीखना चाहती है? सुप्रिया छाँव में से निकल कर इक़बाल की तरफ बड़ी.

सुप्रिया ने इक़बाल के पास आ कर कहा - इक़बाल.... कैसे हो...

इक़बाल ने उसे आते हुए नहीं देखा था, वह एक डैम से सुप्रिया की आवाज़ सुनकर हड़बड़ा सा गया. उस ने सुप्रिया के तरफ ऊपर से नीचे देखा, आज तोह वह इस चिकनकारी वाले नीले सूट में क्या मस्त लग रही थी - मैडम जी.... बढ़िया... आप यहाँ कैसे?

सुप्रिया - वह आपसे कुछ काम था....

इक़बाल - आपको काम था तोह आप मुझे बुलवा लेते न या मैसेज दाल देते. मैं आ जाता ऊपर. आप क्यों इतनी धुप में आये नीचे.

सुप्रिया - नहीं ठीक है.. कोई बात नहीं... आप भी तोह खड़े हो धुप में...

इक़बाल - मैं तोह पहले से hi धुप में खड़े खड़े काल हो चूका हूँ मैडमजी... आप क्यों अपना गोरा रंग काला करो...

सुप्रिया हस्ते हुए - नहीं होगा काला, आप फ़िक्र मत करो. वह करुणा की आपसे बात हुई थी क्या?

इक़बाल की शकल एक डैम से गुस्से वाली हो गयी - कुछ किया क्या उसने? बताया आप मुझे... अभी उस साली को यहाँ बुलवाता हूँ...

सुप्रिया ने जल्दी से बोलै - नहीं नहीं... तुम शांत हो जायो... उसने कुछ नहीं किया.. वह तोह बहुत ाचा काम कर रही है.

इक़बाल का तमतमाया चेहरा थोड़ा सा शांत हुआ - आप बस मुझे बता देना अगर उसकी तरफ से कोई भी शिकायत हो तोह...

सुप्रिया - नहीं सब ठीक है. करुणा बता रही थी तुम ड्राइविंग सीखा सकते हो...

इक़बाल - हाँ हाँ बिलकुल... किसे सीखनी है.. आपको?

सुप्रिया - हाँ मुझे सीखी है... वह गाडी इस्तेमाल hi नहीं हो रही अभी तोह मैंने सोचा मैं hi सीख लू...

इक़बाल के चेहरे पर ख़ुशी साफ़ झलक रही थी - मैं बढ़िया सीखा दूंगा आपको... मैंने और भी लोगो को सिखाई है पहले...

सुप्रिया - सच... ये तोह बढ़िया है... पर मुझे बिलकुल भी नहीं आती चलनी तोह प्लीज....

इक़बाल - आप फ़िक्र मत करो... मुझसे सीख कर आप दुनिया में कहीं भी गाडी चला पयोगे...

सुप्रिया - थैंक यू इक़बाल... मैं कितनी फीस दू आपको सीखनी की...

इक़बाल - मैडमजी क्या बात कर रहे हो... आपसे थोड़ी न पैसे लूंगा...

सुप्रिया - नहीं पर मुझे सीखने के लिए टाइम तोह निकालोगे न, तोह पैसे क्यों नहीं लोगे...

इक़बाल ने थोड़ा गुस्सा होते हुआ कहा - मैडमजी मैं पैसे तोह नहीं लूंगा... ये तोह बिलकुल तय है...

सुप्रिया उसका गुस्सा बढ़ते देख कर - ाचा ठीक है.. मत लेना... कब से स्टार्ट कर सकते है?

इक़बाल - ये हुई न बात. आप जब कहो तब शुरू कर कर सकते है.

सुप्रिया - कल सुबह से शुरू करे?

इक़बाल - हाँ, सुबह बढ़िया रहेगा... 6 बजे ठीक रहेगा आपके लिए...

सुप्रिया ने सोचा की उसे 6 बजे उठना पड़ेगा वह भी संडे के दिन.

इक़बाल ने उसका चेहरा पड़ते हुए कहा - मैडमजी बाद में भीड़ बाद जाती है और फिर मेरी ड्यूटी भी शुरू करनी होती है.... पर वह तोह मैं संभल लूंगा.

सुप्रिया - नहीं ठीक है, मैं कल सुबह 6 बजे नीचे आ जयुंगी... और साथ में अपनी कार की चाबी भी ले आयूंगी.

इक़बाल - नहीं मैडमजी आपकी कार पर क्यों सीखना. नयी है न वह, अगर कहीं थूक गयी तोह? मैं जो कार चलता हूँ, वह ले कर आ जायूँगा, उस पर पहले हाथ साफ़ कर लो आप.

सुप्रिया - पर वह किसकी कार है? और उसे कुछ हो गया तोह?

इक़बाल - कुछ नहीं होगा, आप बिफिकर रहो बिलकुल... मुझे बस ाचा लग रहा है की मैं आपके किसी काम आ सकता हूँ... आप बाकि सब मुझ पर छोड़ दो.

सुप्रिया - आप तोह हमेशा hi मेरे काम आये हो.

इक़बाल - मेरी भी बस एहि दुआ है की मैं हमेशा आपके काम आ सकू... वैसे एक बात बोलो अगर आप बुरा न मन तोह?

सुप्रिया - हांजी बोलिये न... मैं क्यों बुरा मानूंगी...

इक़बाल - ठीक है... मैं बोल देता हूँ... आप इस सूट में बहुत hi अछि लग रहे हो... जैसे हमारे यहाँ की औरते होती है न... बिलकुल वैसे...

सुप्रिया को समझ नहीं आया वह क्या बोले, तोह वह हलके से शरमाते हुए बोली - थैंक यू इक़बाल... ाचा अभी मैं चलती hoon....kal सुबह मिलते है फिर...

इक़बाल - हाँ मैडमजी आप जायो... धुप बहुत तेज है.

सुप्रिया इक़बाल को bye बोल कर वापस घर आ गयी. वह रास्ते में सोच रही थी की वह अतुल को बताये या न बताये की वह गाडी सीखना शुरू कर रही है. पता नहीं अतुल क्या सोचेगा जब वह सुनेगा की वह इक़बाल से कार चलना सीख रही है तोह. पर शायद उसे बताना भी क्यों, सुबह 6 बजे तोह वह उठता भी नहीं है. और वैसे भी उसने कौनसा उसे सीखने के लिए हाँ कर दी थी. अभी के लिए शायद बेहतर एहि होगा की वह उसे कुछ न बताये, और फिर एक दिन अतुल के लिए hi बड़ा सरप्राइज होगा जब वह देखेगा की उसे कार चलनी आ गयी है.
 
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