सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी - Page 5 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी

अपडेट 34

अगले दिन संडे की सुबह सुरपिया 5.30 बजे उठ गयी थी. पिछली शाम को उसने अतुल को बताया था की वह और मेघा सुबह जॉगिंग करने नीचे जायेंगे, अगर अतुल को चलना है तोह वह भी चल सकता है. सुप्रिया को अछि तरह पता था की इतनी सुबह अतुल बिस्तर से नहीं निकलने वाले थे और मेघा का नाम सुनकर तोह बिलकुल भी नहीं. सुप्रिया ने एक ढीली सी टीशर्ट एंड लेग्गिंग्स पहनी और जूते पेहेन लिए. उसके ये रनिंग शूज उसने अतुल से जिद्द करके खरीदवाए थे, ये बोल कर की वह इन्हे पेहेन कर जॉगिंग करने जाएगी. पर शायद मुश्किल से कोई एक दिन जब उसने इन्हे पहना होगा.

सुप्रिया ने अपना चेहरा धो का नींद भगायी. आज तोह जैसे उसमें जोश भरा पड़ा हो इस नए काम को शुरू करने के लिए. उसके साथ हमेशा ऐसा होता था की नए काम के लिए वह सुबह टाइम से पहले उठ जाती थी. उसका मैं था की वह चाय पी ले, पर इतनी सुबह सुबह वह ज्यादा खातर पातर नहीं करना चाहती थी. वह बालकनी से बहार देखने लगी, मौसम अभी थोड़ा ठंडा सा hi था. सूरज निकलना शुरू हो रहा था, तोह काफी अँधेरा सा था. शायद 15 मिनट बाद थोड़ा उजाला हो जाये.

5.55 के आस पास सुप्रिया ने अपना फ़ोन लिया और लिफ्ट से नीचे आ गयी. बिल्डिंग के ठीक सामने इक़बाल ने एक सफ़ेद रंग की गाडी कड़ी करि हुई थी. गाडी थोड़ी पुराणी सी थी, पर सुप्रिया को इससे क्या मतलब, उसे तोह बस गाड़ी चलना सीखना था. इक़बाल सामने गाडी पर तक लगा कर खड़ा था. सुप्रिया मुस्कुराते हुए उसकी और चल पड़ी.

सुप्रिया को आते देख इक़बाल का चेहरा भी खिल उठा - मैडमजी आप तोह एक डैम टाइम से आ गए… मैं सोच रहा था की कहीं आप नहीं जगे तोह….

सुप्रिया - कैसे नहीं आती… टाइम दिया न मैंने आपको…

इक़बाल - सच में… आप जुबान के पक्के हो…

सुप्रिया - तोह अब यहीं से चलना शुरू करू क्या?

इक़बाल - नहीं मैडमजी, आपने बोलै था न की आपने कभी भी गाडी नहीं चलायी है… तोह ऐसा करते है पहले किसी खाली मैदान में चलते है… यहीं पास में hi है एक…

सुप्रिया - हाँ ये ठीक रहेगा… चलिए…

सुप्रिया आगे की सीट पर पैसेंजर वाली साइड बैठ गयी और इक़बाल ड्राइवर वाली सीट पर बैठ कर गाडी चलने लगा. सुप्रिया गाडी में इधर उधर देख रही थी. गाडी काफी अछि स्मेल कही थी जैसे किसी ने अभी थोड़ी देर पहले कोई परफ्यूम छिड़का हो. गाडी में इक़बाल के धर्म की कुछ फोटो और माला तंगी हुई थी जिसे देख कर लग रहा था की किसी '. की hi गाडी है. थोड़ी सी hi देर में इक़बाल गाडी को एक खुले मैदान में ले आया. वहां पहुंचते पहुंचते थोड़ी सी रौशनी हो गयी थी. पूरे मैदान में अभी बस इक्का दुक्का hi लोग थे. इक़बाल ने गाडी रोकी और गाडी से बहार निकला. सुप्रिया भी कड़ी हो कर ड्राइवर वाली साइड पर आ गयी.

सुप्रिया ड्राइवर वाली साइड पर बैठी थी और इक़बाल वहीँ दरवाज़ा खोले खड़ा था. वह सुप्रिया के पैरो के और देख रहा था, देखना तोह उसे ये था की सुप्रिया के पेअर सही जगह लगे हो, पर उसे सुप्रिया की टाइट लेग्गिंग्स में बस उसके सेक्सी जाँघे hi दिख रही थी.

उसने अपने आप पर किसी तरह काबू रखते हुए बोलै - मैडमजी तोह नीचे तीन पेडल है, एक्सेलरेटर, ब्रेक और क्लच. दिख रहे है न आपको?

सुप्रिया ने नीचे झांकते हुए देखा और फिर अपने दाहिने पेअर से तीनो को एक एक करके टच किया. बीच वाला पेडल बाकि दोनों से थोड़ा सा बड़ा था. सुप्रिया के पेअर पेडल पर अचे से नहीं पहुंच पा रहे थे और उसे नीचे सरकना पद रहा था.

इक़बाल - नहीं नहीं ऐसा आप लेटो मत, सीट आगे कर लो….

सुप्रिया - कहाँ से होगी सीट आगे?

सुप्रिया के गाल शर्मिंदगी से लाल हो गए थे. कार चलना तोह दूर उसे तोह ये भी नहीं पता था की सीट कैसे आगे पीछे होती है. अब वह थोड़ी न कार में इतना ज्यादा बैठी थी अपनी लाइफ में. अपनी खुद की कार में तोह वह मुश्किल से 3-4 बार बैठी थी पिछले एक महीने में.

इक़बाल उसकी शकल देख कर समझ गया था - कोई नहीं मैडमजी… मैं आपको सब समझा दूंगा… सबको इस दुनिया में hi आ कर सीखना होता है न… आपकी सीट के नीचे एक डंडा है, उसे दबायो और सीट को आगे कर लो…

सुप्रिया में अपनी सीट के नीचे हाथ डाला… कुछ तोह था और वह उसे नीचे दबाने की कोशिश कर रही थी पर वह नीचे नहीं हो रहा that’s… कुछ सेकंड वह ऐसे hi हाथ मारती रही. इक़बाल भी संयम से खड़ा उसे देख रहा था.

सुप्रिया - कहाँ दबायु… नहीं समझ आ रहा…

इक़बाल - मैं बता देता हूँ…

इक़बाल झुका और उसने अपना हाथ सुप्रिया के खुले पैरो के बीच में से ले जाते हुए सीट के नीचे उसके हाथ पर रख दिया. सुप्रिया एक सेकंड के लिए तोह घबरा गयी की वह क्या कर रहा था और सीट पर थोड़ा उचक गयी.

इक़बाल - डरो मत मैडमजी, एहि है वह डंडा.. इसे आप ऊपर की और दबायो…

सुप्रिया - ओह ाचा… मैंने इसे नीचे पुश कर रही थी…

इक़बाल ने उसका हाथ पकड़ते हुए सीट के लीवर पर रखा और उसे ऊपर करा. और फिर दुसरे हाथ से सुप्रिया की सीट आगे धकेल दी. पर सीट एकदम से कुछ ज्यादा hi आगे हो गयी और सुप्रिया के बूब्स स्टीयरिंग व्हील पर जा कर लगे. इक़बाल का हाथ भी वहीँ सुप्रिया की जाँघों के बीच में खींचता हुआ फास गया.

सुप्रिया की हलकी सी चीख निकल गयी - Ouchhh…ye क्या किया...

सुप्रिया ने नीचे इक़बाल के हाथ की तरफ देखा और थोड़ा गुस्से में इक़बाल की तरफ देखा. इक़बाल ने घबरा कर झट से अपना हाथ बहार खींचा, जो उसके जांघो से रगड़ता हुआ बहार निकला - सॉरी मैडमजी… एकदम से ज्यादा आगे हो गयी सीट.

सुप्रिया ने इक़बाल की शकल देखते हुए अपने गुस्से को शांत किया - कोई नहीं… आप हेल्प hi कर्मा ओह रहे थे…. मैं अब पीछे करू सीट?

इक़बाल की सांस में सांस आयी - हाँ.. आप तरय करो पीछे करने का…

सुप्रिया को अब समझ आ गया था की लीवर कहाँ है, और उसने उसे दबाते हुए अपनी सीट पीछे कर ली. ये करते hi उसके चेहरे पर स्माइल आ गयी, जैसे उसने कोई बड़ी चीज़ सीख ली हो. इक़बाल भी उसकी स्माइल देख कर उसकी तरफ मुस्कुरा दिया. सुप्रिया ने फिर सीट को आगे पीछे करके अपने पेअर अचे से एडजस्ट कर लिए.

सुप्रिया - हाँ अब मेरे पेअर सही से पहुंच रहे है.

इक़बाल- ठीक है आप सीट बेल्ट लगाया, इतने मैं दूसरी साइड बैठता हूँ.

सुप्रिया ने सीट बेल्ट लगायी और इतनी देर में इक़बाल पैसेंजर वाली साइड आ कर बैठ गया. उसने देखा की सुप्रिया की सीट की बेल्ट उसके मम्मो के बीच में से गुज़रते हुए उन्हें और बड़ा बना रही थी. उसे देख कर इक़बाल का लुंड टाइट होने लगा था.

60.png


इक़बाल ने स्टीयरिंग को हाथ लगते हुआ कहा - ये स्टीयरिंग व्हील है, इससे गाडी इधर उधर होती है…

सुप्रिया झेपते हुए बोली - इतनी बुद्धू भी नहीं हु मैं.. ये तोह मुझे पता है…

इक़बाल है पड़ा - मैंने कब कहाँ आप बुद्धू हो मैडमजी. बस बता रहा था. और फिर ये बीच में जो डंडा है, इससे गाडी गियर में जाती है…

सुप्रिया ने उसे भोलेपन से देखते हुए कहा - उससे क्या होता है?

इक़बाल - इससे गाडी आगे चलती है... ये देखो इसके आस पास कुछ नंबर लिखे है न.. 1, 2, 3, 4, 5 और र. ये डंडे को 1 में डालने से आगे चलती है और र में डालने से पीछे जाती है...

इक़बाल कितनी बारीकी से सुप्रिया को सब समझा रहा था, पर डंडे को डालने की बात से सुप्रिया की मनो हसी छूट रही हो, उसने किसी तरह से अपने आप पर कण्ट्रोल रखा.

सुप्रिया - समझ गयी... 1 से आगे और र से पीछे...

इक़बाल - हाँ बिलकुल... और ये चाबी ले कर गाडी को स्टार्ट करो...

सुप्रिया ने इक़बाल के हाथ से गाडी की चाबी ली hi थी की इक़बाल एकदम से बोल पड़ा - रुको रुको मैडम... आपकी पहली बार है न...

इक़बाल ने अपने हाथ दुआ के लिए आगे बढ़ाये - Bismillah-ar-rahman-ar-rahim....

सुप्रिया इस सब के बारे में ज्यादा नहीं जानती थी, इसलिए वह पूछ बैठी - इससे क्या होता है?

इक़बाल - कोई भी नया काम करने से पहले इसे बोलते है तोह काम ाचा होता है... आपके यहाँ भी होता होगा न कुछ ऐसा...

सुप्रिया - हाँ मैं ज्यादा भगवन को मानती तोह नहीं हु, पर हाँ हमारे यहाँ कुछ भी नया काम करने से पहले गणेश जी की पूजा करते है या घी शक्कर कहते है...

इक़बाल - घी शक्कर तोह नहीं है यहाँ और पूजा भी कैसे करोगे, मेरे ख्याल से आप भी बिस्मिल्लाह hi बोल के शुरू कर दो...

सुप्रिया ने ek-do सेकंड सोचा, वह ज्यादा '. तोह थी नहीं, और उसे हमेशा से hi हर धर्म की इज़्ज़त करना hi सिखाई गयी थी, तोह उसे ऐसे करने में कोई हर्ज़ नहीं लगा. बस हाँ थोड़ा सा अजीब लगा क्यूंकि उसे ये शब्द अचे से नहीं आते थे, तोह वह कुछ गलत नहीं बोलना चाहती थी. उसने इक़बाल की तरफ देखते हुए कहा - बिस्मिल्लाह...

इक़बाल ने अपने हाथ आगे करके दुआ में बना के दिखाए और इशारा किया की वह भी ऐसा hi करे, और फिर उसे आगे के शब्द फिर से बता दिए - ar-rahman ar-rahim.

सुप्रिया ने भी अपने हाथ दुआ में उठा लिए - ar-rahman ar-rahim.

ezgif-3643ff83faa672-Photoroom.png


इक़बाल सुप्रिया के ऐसा करने पर काफी ज्यादा खुश सा हो गया - बहुत hi बढ़िया मैडमजी... अब आप जरूर कामयाब होंगे... आप शुरू करो अब गाडी

इक़बाल ने जहाँ बोलै था सुप्रिया वहां चाबी लगाने की कोशिश कर रही थी, पर चाबी अंदर नहीं जा रही थी....

सुप्रिया - ये तोह नहीं जा रही है... शायद ये इसकी चाबी नहीं है...

इक़बाल - नहीं मैडमजी, आप चाबी को दूसरी तरफ घुमा के देखो.. वह जाएगी अंदर... ये इसका hi छेड़ है... थोड़ा ज़ोर से अंदर डालो...

सुप्रिया घबराते हुए बोली - ठीक hai...main तरय करती हु...

सुप्रिया ने चाबी को दूसरी तरफ घुमाया और हाँ इस बार चाबी अंदर चली गयी.

इक़बाल - अब आप अपने बाये पेअर से क्लच दबा के रखो... और चाबी को घुमा दो...

सुप्रिया ने हलके से चाबी घुमाई और इंजन स्टार्ट होने की आवाज़ आयी पर वह जल्दी से बंद हो गया. सुप्रिया ने इक़बाल की और परेशान होते हुए देखा.

इक़बाल - ज़ोर के घुम्यो मैडमजी...

सुप्रिया ने इस बार ज़ोर के ज़ोर के चाबी को घुमाया और इंजन इस बार स्टार्ट हो गया. पर उसने जल्दी से अपना पेअर क्लच से हटा लिया जिससे गाडी झटका खा के बंद हो गयी.

इक़बाल - नहीं मैडमजी... ऐसे नहीं... आप पहले गियर को 1 पर ले कर आना है... और फिर धीरे धीरे क्लच को छोड़ना है... एकदम से नहीं...

सुप्रिया इतने साड़ी चीज़े सुन कर काफी परेशान सी हो गयी थी. शायद ये गाडी उसकी बस की चीज़ नहीं थी - नहीं इक़बाल, मुझसे नहीं हो पायेगा ये... ऐसा करो घर वापस ले चलो...

इक़बाल - अभी तोह हमने शुरू भी नहीं किया है और आप अभी से क्यों हार मान रहे हो... आप परेशान मत हो... मैं काफी आराम से सिखायूँगा.. आप अपना ये हाथ इस डंडे पर रखो और गाडी फिर से ों करो...

सुप्रिया ने अपना हाथ गियर की स्टिक पर रखा और फिर से क्लच को दबाते हुए गाडी की चाबी को ज़ोर के घुमा दिया. गाडी ों होते hi, इक़बाल ने अपना हाथ सुप्रिया के हाथ के ऊपर रखते हुए गियर स्टिक को पहले गियर में करा, और फिर सुप्रिया को धीरे धीरे क्लच से पेअर हटाने के लिए कहा. सुप्रिया ने 1 सेकंड में क्लच से पेअर हटा लिया और गाडी फिर से बंद हो गयी थी.

इक़बाल ने अपना हाथ सुप्रिया के हाथ के ऊपर hi रखा हुआ था - कोई बात नहीं, हम फिर से तरय करेंगे.... इस बार थोड़ा और धीरे क्लच को छोड़ना.

सुप्रिया ने फिर से वही सब किया पर इस बार क्लच को थोड़ा और धीरे धीरे छोड़ा. क्लच पर से पेअर हटते hi गाडी धीरे धीरे आगे बढ़ने लगी. सुप्रिया ने ख़ुशी में इक़बाल की तरफ देखा, पर उसका दूसरा हाथ स्टीयरिंग पर नहीं था.

इक़बाल थोड़ी सी तेज़ आवाज़ में बोलै - मैडमजी दूसरा हाथ स्टीयरिंग पर रखो न...

सुप्रिया - हाँ... सॉरी....

इक़बाल - अब इसको इधर करोगे तोह गाडी इधर जाएगी और उधर करोगे तोह उधर...

इक़बाल ने अपना दूसरा हाथ स्टीयरिंग व्हील पर रखा और हलके हलके उसे इधर उधर घूमने लगा. उसके दया हाथ अभी भी सुप्रिया के बाए हाथ को कास कर पड़के हुए था. गाडी अब थोड़ी तेज़ चलनी शुरू हो गयी थी.

थोड़ी सी आगे जाकर उसने सुप्रिया को बोलै - अब बस आप ब्रेक मार दो...

सुप्रिया - ब्रेक कहाँ है....

इक़बाल ने हड़बड़ाते हुए कहा - बीच वाला पेडल मैडमजी, क्लच को दबा के रखो और दुसरे पेअर से ब्रेक को धीरे धीरे दबायो.

सुप्रिया ने झटके से ब्रेक और क्लच दोनों दबाये, और गाडी झटके से रुक गयी.

इक़बाल - कोई नहीं मैडम जी... आज बस इसी पर काम करते है... धीरे धीरे आपको आ जायेगा...

सुप्रिया - ऐसा लगता है मुझे सालो लग जायेंगे गाडी सीखने में...

इक़बाल - नहीं लगेंगे मैडम जी... और जितना भी टाइम लगे.. मैं आपको सीखा के रहूँगा...

सुप्रिया - शुक्रिया इक़बाल आपका... आप सच में कितना सब्र रख रहे हो मेरे साथ...

इक़बाल हस्ते हुए बोलै - लगता है मेरे साथ रहते रहते आपकी उर्दू भी अछि हो जाएगी... आप के मुँह से उर्दू तोह और भी हसीं लगती है...

सुप्रिया ने शरमाते हुए अपना हाथ इक़बाल के हाथ के नीचे से हटा लिया - मुझे ज्यादा नहीं आती....

इक़बाल सुप्रिया के सुर्ख लाल गाल देख कर और भी खुश हो गया - कोई नहीं मैडमजी... मैं सीखा दूंगा आपको...

सुप्रिया और इक़बाल ऐसे hi थोड़ी देर तक गाडी स्टार्ट करना और थोड़ी दूर सीधे चलने की प्रैक्टिस करते रहे. इक़बाल ने घडी में टाइम देखा तोह 7.30 बजने को आये थे.

इक़बाल - मैडम जी अब चले घर... मेरी ड्यूटी का टाइम होने वाला है.. पर आप बोले तोह और देर भी रुक सकते है...

सुप्रिया ने भी घडी में टाइम देखा - ओह्ह्ह... 7.30 बज गए... हाँ अतुल जागने वाले होंगे... चलो जल्दी से चलते है...

सुप्रिया ने गाडी रोकी और जल्दी से दोनों ने अपनी जगह एक्सचेंज की. इक़बाल जल्दी से गाडी चलता हुआ वापस बिल्डिंग की तरफ ले गया. उसने गाडी बिल्डिंग के बहार रोकी.

सुप्रिया - थैंक यू इक़बाल... आप प्लीज ये गाडी वाली बात अतुल से न कहना... अभी मैंने उन्हें कुछ नहीं बताया है...

इक़बाल - मैडम जी... आपके मेरे बीच की बात किसी को नहीं पता चलेगी... आप बेफिक्र रहो... मैंने वह दुसरे भैया वाली बात भी किसी से नहीं करि है... वैसे आज कल वह दीखते नहीं है...

सुप्रिया का चेहरा एक डैम से थोड़ा सीरियस सा हो गया - नहीं वह अब यहाँ नहीं आएंगे... और अगर आये तोह आप उनको अंदर आने से पहले मुझे कॉल कर देना...

इक़बाल को तोह हमेशा से hi राहुल ाचा नहीं लगता था और इस बात ने तोह उसे बेहद खुश कर दिया था. क्या मैश,.' दिन था उसके लिए.

इक़बाल - बिलकुल मैडम जी... आज के बाद वह आपकी इज़ाज़त के बिना इस बिल्डिंग में दाखिल नहीं हो पायेगा...

सुप्रिया - चलिए, अभी मैं चलती हूँ... वीकडेस पर तोह सीखना मुश्किल है... अब तोह शनिवार को hi आगे सीख पयूंगी...

इक़बाल - कोई बात नहीं... आप मुझे एक रात पहले बोल देना बस... मैं हाज़िर हो जायूँगा...

सुप्रिया - ठीक है इक़बाल... बहुत बहुत शुक्रिया फिर से...

सुप्रिया ने जैसे मूवीज में देखा था, उसने इक़बाल को हलके से आदाब किया, और अपने घर की तरफ निकल पड़ी. वह सोचने लगी की काम से काम उसने आज कुछ तोह शुरुवात की गाडी चलने में. इक़बाल ने सच में कितना पेशेंस दिखाया था उसका साथ. अगर अतुल होते तोह वह उसे 5 मिनट के बाद hi घर वापस ले आते. इक़बाल उससे पैसे भी नहीं ले रहा था, उसे कुछ तोह करना hi होगा इक़बाल के लिए. वैसे कितना मीठा बोलता था इक़बाल, सच तोह कह रही थी करुणा, सीधा hi है वह.

उधर इक़बाल भी काफी खुश था की आखिर कार उसे उसकी प्यारी मैडम जी के साथ कुछ टाइम बिताने का मौका तोह मिला. और टाइम क्या, वह तोह उनका मुलायम हाथ भी अपने सख्त हाथ में पकड़ सका था. सच में गुलाब के फूल की पंखुड़ी से भी ज्यादा मुलायम था उनका हाथ. वह अपने हाथ को ऐसे मसल रहा था जैसे अभी भी सुप्रिया के हाथ का कुछ हिस्सा वहां बाकी हो.

सुप्रिया ने घर आ कर देखा तोह अतुल अभी भी सो रहे थे. वह काफी ज्यादा खुश थी, और उसके अंदर जैसे एक नया जोश भर गया था. उसने अपने कपडे वहीँ कमरे में उतारे और नहाने घुस गयी.

a1c7d674378242c1b7ca887b0f2999c3.gif


जब वह नाहा के बहार आयी तोह देखा की अतुल जग गया था. उसने बीएड पर लेते लेते hi सुप्रिया से पुछा - कैसी रही तुम्हारी जॉगिंग? लगता है काफी दूर तक जॉगिंग करके आयी हो...

सुप्रिया - नहीं... ज्यादा दूर तक तोह नहीं गए थे... पर हाँ मज़ा काफी आया....

अतुल - वह तोह लग hi रहा है तुम्हारा चेहरा देख कर...

सुप्रिया - चलो मैं जल्दी से चाय बनती हूँ...

सुप्रिया ये कह कर गुनगुनाते हुए किचन में चाय बनाने घुस गयी. आज सच में उसे ऐसा लग रहा था की वह कुछ भी कर सकती थी. चाय नाश्ते के बाद सुप्रिया घर के और कामो में लग गयी. पर आज उसमे इतनी ख़ुशी थी की वह बहार जाकर सेलिब्रेट सा करना चाहती थी. उसकी पहली सैलरी भी तोह आ चुकी थी.

सुप्रिया - अतुल... काफी दिन हो गए कहीं बहार गए हुए... आज रात बहार खाना खाये क्या?

अतुल - आज रात? कल ऑफिस भी तोह है...

सुप्रिया - चलो न प्लीज... जल्दी वापस आ जायेंगे.. ये समझो की मेरी पहली सैलरी की पार्टी है...

अतुल - ठीक है मैडम... जैसे आप कहो... ऐसा करते है 7 बजे चलते है और 9 - 9.30 तक वापस आ जायेंगे...

सुप्रिया - हाँ... ये ठीक रहेगा...

शाम को सुप्रिया बहार जाने के लिए रेडी हो गयी. उसने एक लाल रंग का सूट पहना जिसमे वह बहुत hi सुन्दर लग रही थी. उसने जल्दी से अपनी एक सेल्फी खींची.

photo-6206092602030277780-x.jpg


इतने में अतुल भी तैयार हो गया था और दोनों नीचे चल पड़े.

सुप्रिया - अतुल... आज कार से चले क्या?

अतुल - कार से... पर बाइक से जल्दी काम हो जायेगा न...

सुप्रिया चिढ़ते हुए बोली - ये तोह सही है... कार ली है पर इस्तेमाल भी मत करो...

अतुल - ाचा बाबा ठीक है... कार से चलते है....

सुप्रिया ये सुनकर खुश हो गयी - आपका बहुत बहुत शुक्रिया अतुल जी…..

अतुल है पड़ा - क्या बात hai...aaj तोह बड़ी खुश लग रही हो...

सुप्रिया मुस्कुरायी - बस ऐसे hi... खुश नहीं लग सकती क्या...

अतुल और सुप्रिया उनकी वगोंड़ में बैठे और चल पड़े. इक़बाल की ड्यूटी शायद ख़तम हो चुकी थी और अब वह बहार नहीं खड़ा था. सुप्रिया आज अतुल को गौर से गाडी चलते देख रही थी. पर थोड़ी देर बाद वह बोर होते हुए अपना फ़ोन चलने लगी. उसने कल डाउनलोड किया नया अप्प इंस्टाग्राम खोला. आज के पूरे जोश में उसने सोचा की घर पर खींची सेल्फी ऑनलाइन दाल hi देती हूँ. वैसे भी उसमे कुछ भी ऐसा वैसे तोह था नहीं. उसने मैं में बिस्मिल्लाह बोलते हुए अपनी फोटो पोस्ट कर दी. पता नहीं क्यों उसे सुबह क्या बिस्मिल्लाह अभी तक याद था.

रात को ट्रैफिक काफी था और उन्हें रेस्टोरेंट पहुंचने में थोड़ा टाइम लग गया. सुप्रिया को साउथ इंडियन बहुत ाचा लगता था और उसने अपने लिए डोसा आर्डर किया, अतुल ने अपने लिए नूडल्स. काफी भीड़ थी तोह खाना आने में टाइम लग गया और उन्हें कहते कहते 9.30 तोह रेस्टोरेंट में hi बज गए थे. वह लोग जल्दी से वहां से निकले घर की तरफ.

रास्ते में एक रेड लाइट पर उनकी गाडी के साइड में दो लड़के बाइक पर थे. अतुल की कार के शीशे नीचे थे तोह वह दोनों सुप्रिया को साफ़ देख पा रहे थे. वह सुप्रिया को देख कर उस पर कमेंट करने लगे...

लड़का - कहाँ जा रही हो मैडम इतनी रात को...

दूसरा लड़का - ओह भाई साहब... कहाँ से लाये हो इस माल को...

लड़का - Madam...ye लाल कुर्ती कहाँ से ली... वैसे हमारे साथ चलो... इससे तोह कहीं ज्यादा मज़ा करा देंगे तुम्हे...

सुप्रिया को उनकी बाते सुनकर गुस्सा आने लगा था, उसने अतुल की और देखा - आप कुछ बोलो न उन्हें...

अतुल ने गाडी के शीशे ऊपर कर लिए - कोई फायदा नहीं है सुप्रिया इनसे उलझने का... बस सामने देखती रहो...

उनमे से एक लड़का सुप्रिया की साइड के शीशे को नॉक करने लगा... सुप्रिया ने उसे गुस्से में देखा... पर उस लड़के ने जीब से अपने होंठ चाट ते हुए सुप्रिया को गन्दा सा इशारा किया.

सुप्रिया से रहा नहीं गया और उसने अपनी साइड का शीशा नीचे किया - तुम्हे लड़कियों की इज़्ज़त करना आता... अगर तुम्हारी बेहेन के साथ कोई ऐसी हरकत करे तोह...

बाइक पर पीछे बैठे लड़के को तोह जैसे मौका hi चाहिए था - मेरी बेहेन ऐसे रात को सड़को पर रंडी की तरह नहीं घूमती... चल तुझे बताता हूँ तेरी इज़्ज़त के साथ क्या करूँगा...

सिग्नल ग्रीन हो गया था और अतुल ने अपनी गाडी आगे दौड़ाई... उन लड़को ने भी अपनी बाइक उनकी गाडी के पीछे लगायी...

अतुल खीजते हुए सुप्रिया से बोलै - क्या जरूरत थी उनसे उलझने की... क्या मुसीबत पाल ली फालतू में...

अतुल ने मिरर में देखा तोह वह लोग अभी भी उसके पीछे आ रहे थे. किसी तरह अतुल गाडी चलता हुआ अपने बिल्डिंग तक पंहुचा. उसे वह पीछे तोह नहीं दिखाई दिए अब, शायद उन्होंने बीच रास्ते में पीछा करना छोड़ दिया होगा. अतुल ने गाडी पार्किंग में लगायी, और सुप्रिया और वह ऊपर घर की तरफ चले गए.

ऐसा नहीं था की आज से पहले किसी ने उस पर फब्तियां न कासी हो... पर आज शायद सुप्रिया बर्दाश्त करने के मूड में नहीं थी. अतुल अभी भी सुप्रिया पर थोड़ा गुस्सा था, पर उसने कुछ ज्यादा और बोलै नहीं. सुप्रिया भी चुप चाप अपने कपडे बदल कर सोने की तैयारी करने लगी.

तभी उसने अपने फ़ोन पर गौर किया, एक अननोन नंबर से 2-3 मिस्ड कॉल थी. शायद उसने अपना फ़ोन बीच में साइलेंट कर दिया था तोह उसे पता नहीं चला था. साथ hi एक मैसेज भी था उस नंबर से.

मैसेज - जानेमन... मैं लखनऊ आ रहा हु इस हफ्ते किसी काम से... तुमसे मिलने के लिए बेकरार हु... मुझे कॉल करो... प्रताप.

सुप्रिया ये मैसेज देख कर काँप गयी. कुछ महीनो पहले, जो कुछ प्रताप ने उसके साथ निक्की की शादी में किया था, वह उसने एक भयानक सपना समझ कर भुला दिया था. अब जब उसकी लाइफ में सब कुछ ाचा होने लगा था ये मुसीबत क्यों फिर से उसके सामने आ गयी थी. वह फटी आँखों से उस मैसेज को थोड़ी देर घूरती रही, उसे समझ hi नहीं आ रहा था की वह अब क्या करे.
 
अपडेट 35

अगले दिन ऑफिस में सुप्रिया का दिमाग अभी भी प्रताप के मैसेज पर hi घूमे जा रहा था. और घूमता भी क्यों नहीं… बात hi इतनी सीरियस थी. कितनी मुश्किल से तोह उसने उस वाकये को अपने दिमाग में कहीं दबाया था. और अब वह फिर से उसी डर और डिप्रेशन को आता हुआ महसूस कर रही थी. प्रताप के बारे में सोचते hi उसकी पूरा शरीर काँप उठता था. वह फिर से उस ठरकी बुड्ढे को अपने शरीर को हाथ नहीं लगाने देना चाहती थी.

पिछली पूरी रात वह जागते हुए इसी के बारे में सोचती रही. पर उसने जितना भी सोच लिया, उसे इस बात का कोई हल दिखाई नहीं दे रहा था. पता नहीं वह इस चक्कर में क्यों और कैसे फास गयी थी. उसने ये सोचा की वह अतुल को जो भी उस शादी में हुआ था उसके बारे में बता दे. पर फिर उसे लगा की अतुल शायद उसकी तब की परिस्थितियों को न तोह समझ पायेगा और न hi स्वीकार कर पायेगा. तोह क्या वह रेनू से बात करे? नहीं, उसी ने तोह उसे इस पूरे झमेले में फसाया था. और कौन था जो उसकी मदद कर सकता था. एक बार के लिए इक़बाल का नाम भी उसके दिमाग में आया था… पर नहीं वह तोह बस एक वॉचमन था, और कुछ भी नहीं.

सुप्रिया इसी उलझन में खोयी हुई अपने ऑफिस के डेस्क पर बैठी थी, की कृति ने उसे आवाज़ लगायी - कहाँ खोयी हुई हो आज गॉर्जियस… और चेहरा भी थोड़ा बुझा बुझा सा लग रहा है..

सुप्रिया ने एक बनावटी मुस्कान चेहरे पर लाते हुए कहा - हाँ वह थोड़ा लेट सोई थी न कल रात को…

कृति ने सुप्रिया को आँख मारते हुए कहा - ओह हो... लेट नाईट स्लीपिंग… साउंड्स फन…. पता नहीं मेरी किस्मत में ये रोमांटिक नाइट्स कब आएँगी..

सुप्रिया हलके से हस्ते हुए - कोई रोमांटिक नाईट विगत नहीं थी, बस ऐसे hi नींद नहीं आ रही थी... और वैसे भी तुम्हारे पीछे तोह लड़को की लाइन लगी होगी… वह गयम वाली फोटो पर hi देखलो कितने सारे आशिक़ो के कमैंट्स आये है…

कृति - ुघ्हहह… वह सब तोह बेकार है.. ी ऍम लुकिंग फॉर थे राइट गाए, जैसे तुम्हे मिला है…

सुप्रिया सोचने लगी की कृति को क्या पता उसकी लाइफ में क्या चैलेंजेज थे. और वैसे भी क्या सच में उसे "राइट मन" hi मिला था. अतुल हर लिहाज़ से बस ठीक hi तोह था… पर इससे ज्यादा शायद एक मिडिल क्लास लड़की को क्या hi मिल सकता था.

कृति - एक मिनट… अगर तुमने मेरी वह पिछ देखि थी ली तोह इसका मतलब तुमने इंस्टा ज्वाइन कर लिया… कोई पिछ भी डाली है क्या… लेट में चेक…

कृति ने झट से अपना फ़ोन उठाया और इंस्टा पर चेक करने लगी, और उसे जल्द hi सुप्रिया का अकाउंट मिल गया और साथ ुइ उसकी रात वाली फोटो भी दिख गयी - ओह माय गॉड… क्या हॉट एंड क्यूट पिछ है यार… और कितने सारे लाइक्स और कमैंट्स भी है… वाओ…

सुप्रिया ने फोटो डालने के बाद दुबारा इंस्टा खोला भी नहीं था, तोह वह ये सुन कर थोड़ा हैरान हो गयी. वह तोह किसी को इंस्टा पर जानती भी नहीं थी तोह उसे थोड़ा सा सुप्रिसिंग लग रहा था की उसकी फोटो पर लाइक्स या कमैंट्स आये होंगे. शायद कृति कुछ ज्यादा hi बड़ा छडा के बोल रही थी. पर अभी उसका कोई मैं नहीं था इंस्टा चेक करने का.

सुप्रिया - हम्म्म… क्या फरक पड़ता है उससे…

कृति - क्यों नहीं पड़ता फरक?? लोग अपने फोल्लोवेर्स काउंट करते है... जिसके ज्यादा फोल्लोवेर्स वह उतना पॉपुलर. एंड हम वैसे कितने लोगो को इन्फ्लुएंस कर सकते है अपनी फैशन चोइसस से.. वैसे भी तुम्हे तोह मुझसे भी ज्यादा लोग लिखे और फॉलो करेंगे…

सुप्रिया - ऐसा क्यों भला?

कृति - तुम्हे सीरियसली नहीं पता? यू क्नोव यू हैवे तहत सेक्सी देसी पटाखा विबे गोइंग फॉर यू जो सभी टाइप के लोगो को तुम्हारी तरफ खींचती है. यू अरे लिखे थे गर्ल नेक्स्ट दूर बूत ा वैरी वैरी हॉट ओने.

सुप्रिया - है है है… तुम भी न… ये सब छोडो. ाचा ये बताया आज साहिल सर इतने टेंशन में क्यों है?

कृति - मैंने बताया था न की थर्सडे को एक एक्सपोर्ट ट्रेड शो है जिसमे काफी सारे फोरेइग्नेर्स आएंगे… हम लोग भी उसमे part ले रहे है… क्या पता कोई बड़ा आर्डर मिल जाये.

सुप्रिया - हाँ… सॉरी मैं भूल गयी थी… कौन कौन जा रहा है उसमे?

कृति - साहिल सर और मैं जा रहे है और एक दो लोग सेल्स की साइड से. भैया भी आएंगे थोड़ी देर के लिए. तुम्हे भी चलना है क्या? यहीं पास में hi हिल्टॉन होटल में है…

सुप्रिया - नहीं… मैं क्या करुँगी जा कर…

कृति - ारी ाचा ब्रेक होगा ऑफिस से, एन्जॉय करेंगे, अमेजिंग फ़ूड… एंड मय्बे सम गुड लुकिंग अंग्रेजी गाए?

सुप्रिया हस्ते हुए - तब तोह तुम्हे hi जाना चाहिए... उन अंग्रेज़ो से मिलने...

कृति - ठीक है, लेट में क्नोव िफ़ यू चेंज योर मंद.

सुप्रिया फिर से काम में लग गयी. कृति से बात करके कुछ पल के लिए hi सही वह प्रताप को अपने दिमाग से निकाल पायी थी. उसने फिर अपना मैं काम में लगाने की कोशिश करि. उसने सोचा की क्या पता प्रताप उसे दुबारा कॉल या मैसेज hi न करे. पर उसका ये सोचना बिलकुल गलत था. लंच के थोड़ी देर बाद उसके फ़ोन वास् उसी अननोन नंबर से दुबारा कॉल आने लगा. सुप्रिया ने डरते डरते वह कॉल उठायी.

सुप्रिया - Hello….

प्रताप - कहाँ बिजी हो मेरी जान… कितने फ़ोन करने पड़ते है तुम्हे…

सुप्रिया - Hello सर… आप कैसे है…

प्रताप - बस ये मत पूछो… तड़प रहा हूँ तुम्हारे बिना….

सुप्रिया धीरे धीरे अपनी सीट से उठी और एक मीटिंग रूम में अंदर चली गयी - क्या सर?

प्रताप - मेरा लुंड तड़प रहा है तुम्हे देखने को… जब से ये तुम्हारा हुआ है… कोई और इसे पसंद hi नहीं आता… सब के सामने मेरी नाक कटवा देता है...

सुप्रिया - सर… प्लीज आप क्या बोल रहे है…

प्रताप - जब मिलोगी न तब इसकी बात तुमसे करायूंगा… तुम इसे प्यार से अपने मुँह में लेकर समझाना…. अह्ह्ह्ह... तुम्हारा बारे में सोचते hi ये टाइट होने लगा है…

सुप्रिया - सर… मैं उस टाइप की लड़की नहीं hu...woh बस एक बार की बात थी जैसे रेनू जी से बात हुई थी…

प्रताप - एक तोह ये सर बोलना बंद करो… प्रताप जी बोलो मुझे… और तुम जिस टाइप की लड़की हो न तुम्हे खुद भी पता नहीं है अभी…

सुप्रिया - प्रताप जी… आप मेरी बात समझिये…

प्रताप - सुन लड़की… अभी मैं बहुत आराम से बात कर रहा हूँ, तू जानती नहीं है मेरा गुस्सा… एड्रेस भेज रहा हूँ… थर्सडे शाम को चुप चाप आ जइयो… पूरी रात मज़े करेंगे...

सुप्रिया - मैं नहीं आ पयूंगी प्रताप जी.. मैं अपने पति को क्या बोलूंगी…

प्रताप हस्ते हुए - मुझे याद है तेरा वह छुछुंदर सा पति… उससे इतना क्यों डर रही है… और सुन एक सेक्सी सी साड़ी पेहेन कर ाइयो.. फिर से सुहाग रात banayenge…ahhhh....

सुप्रिया फ़ोन पर बिलकुल चुप हो गयी… प्रताप से बहस करने का कोई फायदा नहीं था.. बहस करने से शायद उसका गुस्सा बाद hi रहा था…

प्रताप - क्या हुआ? शर्मा गयी क्या? मुझे तेरी जैसी शर्मीली लडकियां बहुत पसंद है… पर वैसे तेरी जैसी तोह कोई और है भी नहीं… चल अभी मैं रखता हूँ… और हाँ सुन कोई ड्रामा नहीं चाहिए मुझे... नहीं तोह सीधे तेरे घर पहुंच जायूँगा और तेरे पति से सामने hi...

प्रताप से फ़ोन रख दिया और सुप्रिया वहीँ मीटिंग रूम में चेयर पर धम्म से बैठ गयी. उसकी आँखों के सामने बस अँधेरा सा hi था, और कोई रास्ता नहीं दिख रहा था इस दलदल से बहार निकलने का. थोड़ी देर बाद मीटिंग रूम के बहार साहिल सर ने नॉक किया, उन्हें शायद वह रूम उसे करना था. सुप्रिया ने किसी तरह अपने आप को संभाला और बहार आयी.

साहिल - किसी वेंडर के साथ मीटिंग में थी क्या?

सुप्रिया ने नीचे देखते हुए कहा - उम्म्म्म… हांजी सर…

साहिल - क्या हुआ? किसी ने कुछ कहा क्या?

सुप्रिया ने अपने चेहरे के भाव ठीक करते हुए कहा - नहीं नहीं सर… आल गुड…

साहिल सर सुप्रिया को देखते हुए रूम में जल्दी से घुस गए और दरवाज़ा बंद कर लिया. सुप्रिया अपनी सीट पर वापस आ गयी और उसके फ़ोन पर प्रताप का मैसेज आ गया था - होटल हिल्टॉन, गोमती नगर. क्या ये वही होटल था जो सुबह कृति ने मेंशन किया था? और थर्सडे… ओह गॉड, शायद प्रताप भी उसी ट्रेड शो में आ रहा था जिसमे उनकी कंपनी जा रही थी… ये तोह और भी गड़बड़ हो गयी.

ऑफिस का बाकी का दिन सुप्रिया के लिए ऐसे hi सोचते सोचते निकला. शाम को वह ऑटो पकड़ कर घर चली गयी. उसका कॉन्फिडेंस अब फिर से बुरी तरह हिल गया था और वह अपने खयालो में hi खोयी हुई थी. बिल्डिंग की एंट्रेंस पर उसने ये भी ध्यान नहीं किया की इक़बाल उसके लिए एक बड़ी सी स्माइल लेकर खड़ा है. सुप्रिया उसे अनदेखा करती हुई चले जा रही थी.

तभी इक़बाल ने उसे आवाज़ लगायी - मैडमजी… कैसे हो आप?

इक़बाल की मीठी सी आवाज़ ने सुप्रिया को जैसे किसी गंदे सपने से जगा दिया हो - इक़बाल… ठीक हु मैं….

इक़बाल - क्या हुआ… आज आप मुझसे बिना बात किये जा रहे हो… कोई गलती हुई क्या मुझसे?

सुप्रिया - नहीं नहीं सॉरी… मैं बस थोड़ा थकी हुई हु.

इक़बाल - आप क्यों सॉरी बोल रहे हो... आपको इतना काम नहीं करना चाहिए… मैंने आपसे पहले भी बोलै है…

सुप्रिया - हाँ वह…. थोड़ी तबियत ख़राब सी लग रही है…

इक़बाल - आप आराम करो ऊपर जा कर, मैं करुणा को कॉल करके बुलायु क्या?

सुप्रिया - उसे क्यों परेशां करोगे… वह तोह खाना बना गयी होगी…

इक़बाल - इसमें परेशानी क्या… आपके लिए तोह मैं कुछ भी….

इक़बाल की बात सुनकर सुप्रिया के थके हुए चेहरे पर हलकी सी मुस्कान आ गयी - कुछ होगा तोह मैं बता दूंगी आपको... ाचा वैसे ये बताया… अगर कोई आदमी मुझे परेशान कर रहा हो तोह?

ये सुन कर इक़बाल की आँखें जैसे गुस्से में लाल हो गयी - कौन परेशान कर रहा है आपको मैडमजी… वह लौंडा है क्या जो यहाँ आता था….

सुप्रिया - नहीं नहीं… मैं तोह बस ऐसे hi मजाक कर रही थी…

इक़बाल के अंदर जैसे उसका खून उफान रहा हो - मजाक नहीं… आप मुझे बस एक बार बता दो, जो भी है मैं उस हरामी को कान्त के फैक दूंगा….

सुप्रिया - इक़बाल.. आप शांत हो जायो… ऐसा कुछ नहीं… मैं सच में मजाक hi कर रही थी... मजाक कर सकती हु न आपका साथ?

इक़बाल - हांजी मैडमजी... आप तोह जो चाहे मजाक कर लो मेरे साथ... पर हाँ अगर कोई भी परेशान कर रहा हो तोह आप मुझे बता देना, फिर उस आदमी की खैर नहीं...

सुप्रिया - बिलकुल.. अगर कभी कुछ ऐसा होगा तोह आपके पास hi आयूंगी... ाचा मैं अब चलती हूँ...

इक़बाल - खुदा हाफिज...

सुप्रिया - खुदा हाफिज..

सुप्रिया इक़बाल को bye बोल कर ऊपर अपने घर आ गयी और थोड़ी देर बाद अतुल भी ऑफिस से आ गए. दोनों साथ में बैठ कर खाना खा रहे थे. सुप्रिया खाना कहते हुए सोच रही थी की शायद अतुल को सब बताना hi हल होगा, इसके इलावा तोह कोई भी सलूशन नहीं दिख रहा था उसे. उसने धीरे से इस बारे में बात करने का सोचा.

सुप्रिया - अतुल... सुनो.. एक बात करनी थी...

अतुल - हाँ बोलो न... क्या हुआ?

सुप्रिया - उम्म्म.... वह.... आराम से सुन्ना... गुस्सा मत करना...

अतुल - बताया तोह... पहेलियाँ मत बुझायो...

सुप्रिया - एक आदमी मुझे परेशान कर रहा है...

अतुल - ाचा... तोह?

सुप्रिया - आपको कोई फरक नहीं पड़ता अगर मुझे कोई परेशां कर रहा है तोह?

अतुल - मैंने तुम्हे जॉब लेते टाइम भी बताया था न... यहाँ सब लोग ऐसे hi होते है... पर मेरी बात तुम कब समझती हो... कल भी फालतू में उन लड़को से भीड़ गयी थी...

सुप्रिया - पर....

अतुल - पर वॉर कुछ नहीं... बात को समझो... ये दुनिया सेफ नहीं है लड़कियों के लिए... मेरा भी बहुत लोगो से पाला पड़ता है और मैं देखा हूँ वह कैसे लड़कियों को देखते है या उनके बारे में बात करते है. मेरी मानो तोह तुम जॉब छोड़ दो... और कुछ टाइम ग्वालियर चली जायो.. मम्मी भी तुम्हे याद कर रही थी. ऑफिस में है क्या कोई जो परेशां कर रहा है?

सुप्रिया - नहीं ऑफिस में नहीं है कोई... और मैं क्यों जॉब छोड़ू? इतनी मुश्किल से तोह इतनी अछि जॉब मिली है.

अतुल - ठीक है... अगर तुम इतनी hi समझदार हो न तोह खुद अपनी प्रोब्लेम्स सोल्वे करो फिर...

सुप्रिया अतुल की बात से काफी डिसअप्पोइंटेड सी हो गयी, उसे नहीं लग रहा था की अतुल उसकी बात को समझ पायेगा. रही दुनिया की बात, सुप्रिया अब उससे डील करने में सक्षम थी. बस ये तोह उसकी नादानी में की गयी एक पहले की भूल थी जो उसे अब सजा देने आयी थी.

खाना खाने के बाद सुप्रिया और अतुल दोनों बीएड पर सोने के लिए लेट गए. अतुल शायद थोड़ी मस्ती करना चाहता था और उसने अपना हाथ सुप्रिया के पेट पर रखा. पर सुप्रिया का अतुल के साथ कुछ भी करने का मूड नहीं था तोह उसने उसका हाथ पीछे धकेल दिया. अतुल भी उसका ख़राब मूड देख कर दूसरी और पलट कर सो गया.

सुप्रिया अभी भी अपनी सोच में hi डूबी हुई थी. अगर उसे थर्सडे शाम को प्रताप से मिलने होटल जाना पड़ा, तोह वह अतुल को क्या कहेगी? और अगर प्रताप ने उसे पूरी रात फिर वहीँ रोक लिया तोह... इस बार तोह उसके पास कोई नींद की गोली भी नहीं थी. तभी उसे लगा की क्यों न वह पहले से वहां जाकर प्रताप से मिल कर रिक्वेस्ट करे और उसे समझाए तोह... पर क्या वह सुनेगा सुप्रिया की बात. तरय तोह करना hi पड़ेगा... अगर कुछ काम नहीं बना तोह ज्यादा से ज्यादा वह उसका लुंड अपना मुँह में लेकर उसे शांत कर दे तोह... चीटी.... ये सोचते hi सुप्रिया को घिन्न आने लगी.

अगले दिन ऑफिस में सुबह सुबह hi सुप्रिया कृति के पास पहुंच गयी - कृति... कल तुम वह ट्रेड शो के बारे में बात कर रही थी न... मैं चल सकती हु क्या उसमे...

कृति - तुम्हे जाना है उसमे? पहले बताती न... मैंने तोह लास्ट टिकट वह प्रोडक्शन में किसी को दे दिया...

ये सुन कर सुप्रिया का मुँह उतर गया - ओह ाचा... कोई बात नहीं...

कृति हस्ते हुए बोली - है है है... मैं कर दूंगी अर्रंगे वह टिकट... तुम तोह इतनी जल्दी परेशान हो जाती हो न. पर ड्रेस कोड है इवेंट का... साड़ी पेहेन कर जाना है...

सुप्रिया एकदम से खुश हो गयी - थैंक यू सो मच! हाँ साड़ी में क्या प्रॉब्लम है... मेरे पास काफी साड़ी है...

कृति - वह नहीं... कंपनी जो साड़ी एक्सपोर्ट करती है न... उसमे से... ताकि हम लाइव मॉडल लगे.. है है...

सुप्रिया - हम लोग साड़ी भी एक्सपोर्ट करते है??

कृति - हाँ, और क्या? चलो मैं भी साड़ी चूसे करने hi जा रही थी, तुम भी साथ में चलो.

दोनों एक रूम की तरफ गए जहाँ काफी किसी स्टोर की तरह hi लग रहा था. बहुत अचे से डेकोरेटेड, स्टोर की तरह hi वहां काफी सारे कपडे टंगे हुए थे, और शायद यहाँ अक्सर क्लाइंट्स आते थे जिन्हे वह इंडिया की मार्किट वाली फील करवाना चाहते थे. सुप्रिया पहली कभी इस रूम में आयी नहीं थी, उसने देखा कितने अलग अलग तरह के सैम्पल्स वहां लगे हुए थे, साड़ी, कुर्ती, शर्ट्स, पैन्ट्स यहाँ तक की लिंगेरी भी. सुप्रिया के लिए तोह ये जैसे एक हेवन था, बिना पैसे के आराम से शॉपिंग करो. दोनों मिल कर साड़ी के कलेक्शंस में से एक अछि सी साड़ी ढूंढ़ने लगे. दोनों काफी साडी साड़ी निकाल कर साइड में रख चुके थे, कोई समझ hi नहीं आ रही थी.

कृति - मैं तोह साड़ी बहुत ररली कभी पहनती हूँ, तोह इतना आईडिया नहीं है... तुम तोह रेगुलरली पहनती होगी न...

सुप्रिया - हाँ, पर आजकल थोड़ा काम हो गया है... ऑफिस में नहीं पहनती न...

कृति ने एक साड़ी निकल कर सुप्रिया को दिखाई - ये कैसी है?

सुप्रिया - नहीं... काफी सिंपल है... ये वाली देखो ये पर्पल वाली... ये अछि है...

उस साड़ी को देख कर कृति की आँखें चमक गयी. वह एक डिज़ाइनर साड़ी थी जिस पर बहुत hi एलिगेंट सा पर्पल डिज़ाइन का काम हो रखा था जिससे वह काफी मॉडर्न सी लग रही थी - वाओ... थिस इस प्रीटी...

सुप्रिया - तुम ये वाली ले लो... मैं कोई और ढूंढ़ती हु अपने लिए...

कृति - ाचा अगर मैं ये ले रही हु... तोह मैं तुम्हारे लिए पिक करती हु...

सुप्रिया ने उसकी और देखा, कृति ने एक बार भी उस साड़ी के लिए मन नहीं किया. अगर किया होता तोह वह पक्का उस साड़ी को रख लेती. थोड़ा और ढूंढ़ने पर कृति को एक लाइट पिंक सिल्क साड़ी दिखी जो बहुत hi स्टाइलिश सी लग रही थी.

कृति - ये देखो... ये तुम पर बहुत सूट करेगी...

सुप्रिया - हाँ अछि तोह है... पर इसका ब्लाउज स्लीवलेस है...

कृति - यहाँ सभी साड़ी के ब्लाउज स्लीवलेस hi है... विदेश में भेची जा रही है ये मैडम.

सुप्रिया - पर ये मेरे फिट भी आएगा...

कृति ब्लाउज को उठा का उसका साइज चेक करने लगी - ब्लाउज की फिटिंग..... हाँ यहाँ लिखा है... 34स की फिटिंग है.... तुम्हारा साइज क्या है??

सुप्रिया के गाल शर्म से लाल हो गए, और वह धीरे से बोली - उम्म्म... हाँ मैं.... 34स hi पहनती हु...

कृति - तब तोह ये तुम्हारे लिए hi बानी है... वैसे परफेक्ट साइज है तुम्हारा..

सुप्रिया - थैंक यू...

सुप्रिया और कृति दोनों अपनी साड़ी ले कर वापस डेस्क पर आ गयी. बाद में कृति ने सुप्रिया को ट्रेड शो का पास भी ला कर दे दिया. दिन में एक मीटिंग हुई जिसमे ट्रेड शो इवेंट की प्लानिंग हुई. किसको क्या करना था ये सब डीडे हुआ. सुप्रिया का काम एक बूथ पर इनक्विरिएस को हैंडल करना और सैंपल दिखाना था. उसके साथ सेल्स टीम का एक पर्सन होगा. साहिल सर ने सबको टाइम से आने के लिए और काफी प्रेसेंटाब्ले दिखने के लिए बोल दिया था.

घर पहुंच कर सुप्रिया ने परसो के शो की तैयारी करनी शुरू कर दी. नोर्मल्ली तोह सुप्रिया को इस टाइप के इवेंट में जाने की काफी ज्यादा एक्ससिटेमेंट होती, पर जब सर पर प्रताप नाम की तलवार लटक रही हो तोह वह कैसे एक्ससिटेड फील करती थी. पर फिर भी अब जब उसने शो में जाने के लिए हाँ भर दी थी तोह उसने डीडे किया था की वह अचे से hi तैयार हो कर जाएगी. उसने साड़ी पेहेन कर देखि तोह वह उस पर बहुत प्यारी लग रही थी. इस सारे में तोह एक डैम डॉल की तरह लग रही थी, ब्लाउज भी परफेक्ट फिट का था बस कंधे से थोड़ा सा लूसे था, पर उसको ठीक करवाने का टाइम तोह नहीं था.

सुप्रिया परसो सुबह इवेंट के लिए तैयार होना शुरू हुई. आखिर वह दिन आ hi गया था जिससे वह डर रही थी. उसका दिल सुबह से hi ज़ोर से धड़क रहा था पर उसने किसी तरह उसे काबू में किया और अचे से तैयार हुई. तैयार होने के बाद अतुल भी उसे बस देखता hi रह गया था. इस महंगी सिल्क साड़ी में क्या गज़ब लग रही थी वह. स्लीवलेस ब्लाउज में उसकी गोरी गोरी बाहें कितनी सेक्सी लग रही थी. उसके होतो की हलकी सी पिंक लिपस्टिक साड़ी के साथ अचे से मैच हो रही थी और उसका पूरा ध्यान उनकी तरफ जा रहा था. जैसे एक गोर से चेहरे पर एक टारगेट हो हिट करने के लिए.

अतुल उसके पास आकर उसकी बाहों को हलके से सहलाने लगा - आज तोह लगता है केहर धयोगी उस ट्रेड शो में...

सुप्रिया - अतुल... थोड़ा पीछे रहो न... साड़ी मुस जाएगी.

अतुल - और मेरा दिल मुस जायेगा... उसका क्या?

सुप्रिया अभी भी आईने में देख कर फाइनल टॉचेस दे रही थी - मूसने दो... आप भी तोह मेरी दिल की फ़िक्र नहीं करते...

अतुल - आज रात तुम्हारी साड़ी शिकायत दूर कर दूंगा...

सुप्रिया ने झूठ बोलते हुए कहा - आज हो सकता है मुझे थोड़ा सा लेट हो जाये... शाम को एक पार्टी है शो के बाद... मैं बता दूंगी...

अतुल - ठीक है... मुझे बता देना... मैं आ जायूँगा

सुप्रिया - आज प्लीज कार से ड्राप कर देना... इतनी सज धज के बाइक से नहीं जयुंगी...

अतुल - ठीक है, आपका आदेश सर आँखों पर...

अतुल ने सुप्रिया को कार में हिल्टॉन पर ड्राप किया और वहां से अपने ऑफिस निकल गया. सुप्रिया थोड़ा सा घबराई हुई होटल में दाखिल हुई, इवेंट एक बड़े से हॉल में था जहाँ पहले से बूथ लगे हुए थे. सुप्रिया टाइम पर hi थी, और उसे जल्द hi अपनी कंपनी का बूथ मिल गया. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की जैसे आज साड़ी नज़रे बस उसी पर तिकी हुई हो. सामने कृति उस पर्पल डिज़ाइनर साड़ी में कड़ी थी.

a8e5fd871897cad8fd8d8b134e036054.jpg


कृति ने उसे आते देखा - वाओ... मस होत्तीए... क्या लग रही हो...

कृति ने इतनी धीरे भी नहीं बोलै था ये तोह आस पास के और लोग भी सुन पाएंगे होंगे शायद ये. उनके बीच ये मजाक तोह चलता रहता था ऑफिस में, पर यहाँ सब के सामने सुप्रिया को और भी शर्म आने लगी थी - कृति.... धीरे बोलो न... तुम भी बहुत अछि लग रही हो वैसे...

कृति - मैं तोह बस अछि लग रही हु... पर तुम तोह मंद ब्लोइंग...

सुप्रिया - नहीं ऐसा नहीं... तुम भी बहुत अमेजिंग लग रही हो... किसने बाँधी साड़ी... परफेक्ट है...

कृति - माँ ने... सही है न...

सुप्रिया - अमेजिंग... जस्ट लिखे यू...

साहिल बीच में बोल पड़ा - ये तुम लोग यहाँ फैशन डिसकस करने आये हो क्या... समझ लो क्या करना है.

थोड़ी देर बाद लोग आने शुरू हो गए थे. सुप्रिया और सेल्स से आकाश बूथ पर लोगो को सैम्पल्स दिखा रहे थे और उनकी सवालों के जवाब दे रहे थे. कृति और साहिल कुछ के क्लाइंट्स से मिलने और बाकी कॉम्पिटिटर्स के बूथ पर विजिट करके उनसे चीज़े समझ रहे थे. पर ऐसा लग रहा था जैसे सुप्रिया के बूथ पर hi सबसे ज्यादा भीड़ हो. हर कोई उसकी तरफ hi खींचा जा रहा था. कुछ पल के लिए सुप्रिया भी आगे आने वाली मुसीबत को भूल कर बहुत hi स्वीट्ली लोगो को प्रोडक्ट्स दिखा रही थी. वह खुद hi अपनी कंपनी के लिए एक चलती फिरती मॉडल थी.

photo-4985961074058702442-y.jpg


काफी सारे लोग उनके प्रोडक्ट्स में इंटरेस्टेड थे, अब नहीं पता कितने जेन्युइन थे और कितने सिर्फ सुप्रिया में इंटरेस्टेड थे. पर हाँ सुप्रिया और आकाश ने काफी सारे लोगो के कांटेक्ट ले लिए थे. अलग अलग देशो से लोग आये हुए थे - अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, जापान, चीन... सुप्रिया को तोह पता hi नहीं था की जापान में भी हिंदुस्तानी साड़ी की डिमांड थी. अभी फिलहाल उसे के 2 लोग सुप्रिया से बात कर रहे थे, एक गोरा आदमी था और एक काला. सुप्रिया ने आज तक सिर्फ टीवी पर hi इतनी काले इंसान को देखा था. उसकी इंग्लिश मध्यम की पढाई आज काम आ रही थी. दोनों की hi हाइट सुप्रिया से काफी ज्यादा थी.

सुप्रिया - सो यस, यस कैन मेक अकॉर्डिंग तो यू नीड...

गोरा - That's गुड, that's गुड. योर प्रोडक्ट सिम्स रियली नीस.

काला - येह गुड तहत योर कंपनी टैक्स केयर ऑफ़ कस्टमर नीड्स. डस योर कंपनी सेल्ल व्हाट यू अरे वेअरिंग तू?

सुप्रिया को उनका एक्सेंट अचे से समझ तोह नहीं आ रहा था पर वह मुस्कुरा के उनका जवाब दे रही थी. आकाश अभी दुसरे कस्टमर्स से बात कर रहा था.

सुप्रिया - यस, वे सेल्ल आल टाइप्स ऑफ़ गारमेंट्स...

काला - इवन अंडर गारमेंट्स?

सुप्रिया - यस यस, एवरीथिंग. हेरे अरे सम सैम्पल्स...

काले बन्दे ने एक ब्रा का सैंपल उठाया और सुप्रिया को देखते हुए अपने हाथों से हलके हलके ब्रा को मसलने लगा. सुप्रिया को उसे देख कर लगा की शायद हर देश के मर्द ऐसे hi ठरकी होते है. वह इधर उधर देखने लगी, और उसे कृति आती हुई दिखी.

कृति मुस्कुराते हुए उसके पास आ कर फुसफुसाई - लगता है देसी से बाद कर अब तोह तुम्हारी हॉट विदेशी बेब वाली वाइब्स हो गयी है...

सुप्रिया भी दांत भींच कर उसे फुसफुसा कर बोली - प्लीज इनसे बचा न मुझे... ये तोह चिपक hi गए है यहाँ...

कृति ने उनसे बात करनी शुरू करि और उन्हें प्रोडक्ट के फैब्रिक के बारे में और कंपनी की हिस्ट्री के बारे में बताने लगी. दोनों ने अपने कांटेक्ट डिटेल्स उनके पास छोड़े और फिर आगे चल दिए.

सुप्रिया ने गहरी सांस ली - थैंक गॉड, चले गए...

कृति हस्ते हुए - बेब... कोई ज्यादा क्रिप्य हो रहा हो न तोह टेक्निकल डिटेल्स में घुस जायो... ाचा अब तुम ऐसा करो, लंच ब्रेक ले लो.. मैं इतने बूथ संभालती हु... वहां दुसरे रूम में बुफे लगा है, ी हर्ड इतस अमेजिंग.

सुप्रिया हाँ में सर हिलाते हुए लंच रूम की तरफ चल पड़ी. वह लंच रूम में पहुंची hi थी की उसके फ़ोन पर एक मैसेज आ गया. उसने मैसेज खोल कर देखा तोह ये तोह किसी ने उसकी hi फोटो उसे भेजी थी. किसी ने शायद बूथ में काम करते हुए क्लिक करि थी.

मेरी लिए अचे से तैयार हो कर आयी है मेरी प्यारी दुल्हन.

photo-4985961074058702441-y.jpg


मैसेज प्रताप के hi नंबर से था. सुप्रिया वह मैसेज देख कर ठिठक गयी. उसने आस पास पलट कर देखा, और उसे लंच रूम में दूर प्रताप खड़ा दिखाई दिया. उसके चेहरे पर एक गन्दी सी मुस्कराहट थी, जिसे देख कर सुप्रिया का दिल एकदम से नीचे बैठ गया.
 
अपडेट 36

प्रताप ठीक एक शैतान की तरह सुप्रिया के सामने खड़ा था. उसे देख कर सुप्रिया की जैसी साड़ी भूक hi मर गयी हो. प्रताप हॉल के दूसरी और से धीरे धीरे चलता हुआ सुप्रिया की और आ रहा था. प्रताप ने कोट पंत पहना हुआ था पर कोट में उसकी तोंद साफ़ दिखाई दे रही थी. उससे भी ज्यादा उसकी वह गन्दी सी स्माइल, जिसे सुप्रिया न तोह तब बर्दाश्त कर पायी थी और न आज.

प्रताप उसके ठीक सामने आ कर रुक गया - मैं तोह खाना खाने आया था, पर लगता है खाना तोह अब परोसा गया है...

प्रताप ने ये बोलते हुए सुप्रिया की कलाई को पकड़ लिया.

सुप्रिया अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी - प्रताप जी...

प्रताप ने उसकी बात को अनसुना किया अपनी हथेली सुप्रिया की हथेली पर राखी और फिर अपनी उँगलियों को उसकी उँगलियों में फ़साने लगा - मेरे लिए इतना सज के आयी हो... मुझे बहुत ाचा लगा...

सुप्रिया इधर उधर देख रही थी, कहीं कोई जानने वाला उसे देख तोह नहीं रहा था न - प्रताप जी... बहुत लोग है यहाँ... मेरा हाथ छोड़िये...

प्रताप - इतनी दिनों बाद तोह आज हाथ आयी हो, कैसे छोड़ दू... और वैसे भी यहाँ कोई छू भी नहीं करेगा मेरे आगे...

सुप्रिया के छोटे से गोर हाथ जैसे उसके काले हाथों में समां गए हो - प्रताप जी, मुझे आपसे बात करनी थी...

प्रताप - शाम को करते है न बात... तुम कहना मैं सुनूंगा... फिर पूरी रात मैं कहूंगा और तुम सुन्ना..

सुप्रिया उसके सामने गिड़गिड़ा सी रही थी - प्लीज अभी बात करनी थी... मेरी रिक्वेस्ट है आपसे...

प्रताप हस्ते हुए - इतनी बेकरार हो तुम की शाम तक रुका भी नहीं जा रहा... ठीक है.. आयो मेरे पीछे...

सुप्रिया प्रताप के पीछे पीछे वहीँ नीचे एक छोटे से खली कमरे में दाखिल हुई. वहां होटल स्टाफ के कपडे देख कर सुप्रिया को लगा की ये शायद होटल स्टाफ का सामान रखने का रूम था.

प्रताप ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा - अब बोलो मेरी जान... क्या बात करनी थी..

सुप्रिया - देखिये प्रताप जी, प्लीज मेरी आपसे रिक्वेस्ट है....

प्रताप ने अपना हाथ सुप्रिया के बालों पर हलके से फेरा - क्या रिक्वेस्ट है तुम्हारी?

सुप्रिया ने पहले से रहेएरसे की हुई लाइन्स बोलनी शुरू कर दी - आप प्लीज समझिये... मैं मैरिड हु और मेरे हस्बैंड को उस सब के बारे में कुछ नहीं पता…

प्रताप - ाचा… अगर पति का प्रॉब्लम है तोह उसको हम सोल्वे कर देंगे, तुम परेशान क्यों होती हो… फिर तुम बस मेरी बन जाना..

सुप्रिया उसकी बातें सुन कर फ़्रस्ट्राटे होना शुरू हो गयी थी - नहीं, मैं कैसे….. आपको तोह कोई भी लड़की मिल जाएगी, आप मेरे पीछे क्यों पड़े है?

प्रताप हस्ते हुए - अभी पीछे तोह कुछ किया भी नहीं… वह तोह बाकी है…

प्रताप ने सुप्रिया के कंधे पर उसके ब्लाउज के स्ट्राप के नीचे अपनी ऊँगली डाली और फिर उसकी ब्रा में 2 ऊँगली फसते हुए उसे ज़ोर के खींचा. ब्रा का स्ट्राप खींचते हुए थोड़ा सी ऊपर गया और फिर प्रताप ने उसे झट से छोड़ दिया जिससे वह तेजी से वापस जाता हुए सुप्रिया के गोर कंधे पर ज़ोर से लगा. सुप्रिया के मुँह से ज़ोर से ोुछहहह निकल गया.

प्रताप - ये छोटे छोटे ब्लाउज तुम पर बहुत अचे लगते है... और इसमें फसे हुए तुम्हारे गोल गोल चूचे...

प्रताप ने सुप्रिया के बूब्स की तरफ इशारा करते हुए अपने दोनों हाथ गोल गोल घुमाये. सुप्रिया थोड़ा सा पीछे हो गयी और उसके चेहरा पर साफ़ दिख रहा था की वह इस पूरी सिचुएशन में बहुत hi उनकंफर्टबले महसूस कर रही थी.

प्रताप को सुप्रिया को परेशान देख कर जैसे बहुत मज़ा आ रहा था - ाचा ठीक है, मैं तुम्हे जाने दूंगा…

ये सुनकर सुप्रिया की आँखों में चमक आ गयी और वह ख़ुशी में बोल उठी - सच?? थैंक यू प्रताप जी, थैंक यू!

प्रताप - सुनो पहले... चली जाना… पर जाने से पहले तुम मेरे लिए क्या कर सकती हो…

सुप्रिया के प्रताप की आँखों में देखा और उन्हें देख कर नहीं लग रहा था की वह उसे आज आसानी से छोड़ेगा - मैं क्या करू आपके लिए?

प्रताप ने उसके होंठ पर हलके से ऊँगली फेरते हुए कहा - तुम्हे पता तोह है मुझे क्या ाचा लगता है…

ezgif-4aca47f89e2af8.gif


सुप्रिया उसकी बात समझ गयी थी, इतनी भी अनजान नहीं थी वह. सुप्रिया पिछले 4 दिन से इसी के बारे में तोह सोच रही थी, की प्रताप से पीछा छुड़ाने के लिए वह कहाँ तक जा सकती है, और उसे कैसे मन सकती है.

सुप्रिया - क्या आप... वह कह रहे है...

प्रताप - शायद... पर मैं तुम्हारे मुँह से सुन्ना चाहता हूँ...

सुप्रिया - आप चाहते है.... मैं आपका.... वह...

प्रताप - नहीं नहीं, ऐसे नहीं. ऐसे बोले जैसे तुम मुझसे वह करने की इज़ाज़त मांग कर रही हो. जैसे तुम सच में वह करना चाहती हो. जल्दी बोलो... तभी जाने दूंगा.

सुप्रिया हिचकिचाते हुए आँखें नीचे करके धीरे से बोली - क्या main….main…. वह aapka…agar आप चाहे तोह…. सूचक…

प्रताप - क्या??? मुझे कुछ समझ नहीं आया, खुल के बोलो ज़रा, और हिंदी में बोलो, मुझे अंग्रेजी समझ नहीं आती… और मेरी तरफ देख कर बोलो… ऐसे बोलोगी तोह मैं नहीं जाने दूंगा.

सुप्रिया ने किसी तरह से अपनी आँखें ऊपर करके उसकी और देखा - क्या मैं… क्या मैं आपका.... लुंड चूस सकती हूँ…

सुप्रिया शर्म के मारे पानी पानी हो रही थी. इस कमीने इंसान ने उसके मुँह से ये बुलवा के hi छोड़ा था. प्रताप ने उसकी और देखते हुए एकदम से अपनी उँगलियों से उसके होंठ ज़ोर के दबा दिए. सुप्रिया ने डर भरी आखों से प्रताप की और देखा और उसका हाथ रोकने के लिए उसके हाथ की और बढ़ाया. क्या वह अभी अपना लुंड उसके मुँह में डालने वाला था. पर प्रताप ने अपने दुसरे हाथ से उसका हाथ पकड़ के मोड़ दिया.

photo-5078193641314430811-w.jpg


सुप्रिया - अह्ह्ह... ोुछः... छोड़िये मेरा हाथ...

प्रताप - बस ऐसे hi मैं चाहता हूँ तू हमेशा मेरा लुंड अपने मुँह में मांगती रहे. मैंने तुझे समझाया था न फ़ोन पर... पर तुझे समझ नहीं आता लगता है. तेरे पति को देख कर तोह नहीं लगा था की वह तुझे सटिस्फी कर पता होगा. तुझे एक स्ट्रांग मर्द चाहिए जो तेरी जवानी को अचे से संभल सके. और वह मर्द मैं हूँ, समझी.

सुप्रिया होंठ दबने से कुछ बोल नहीं पा रही थी... बस अपनी बड़ी बड़ी आँखों से प्रताप की और देख रही थी. प्रताप ने आखिर अपना हाथ नीचे कर दिया. सुप्रिया के होंठ अभी भी दर्द से काँप रहे थे.

प्रताप - देख मैं तेरे साथ इतना बेरहम नहीं होना चाहता... शाम को रूम में आजा फिर आराम से बात करेंगे... तेरे पति का भी कोई न कोई समाधान ढून्ढ hi लेंगे.

प्रताप ने सुप्रिया के गालो पर हलके से हाथ लगते हुए कहा - चल अभी मुझे काफी काम है, नहीं तोह अभी तेरी कही हुई बात पूरी कर देता.... रूम 415 में आ जाना शाम को.. और नहीं आयी न तोह सीधे तेरे घर पहुंच जायूँगा, और वहीँ तेरे पति से सामने…

प्रताप ने सुप्रिया को हल्का सा धक्का दिया और वहां उसे छोड़ कर कमरे से बहार निकल गया. सुप्रिया वहीँ कड़ी हलके हलके सुबक रही थी, उसे समझ नहीं आ रहा था वह अब क्या करे. शायद अतुल ठीक hi कह रहा था, उसे ये जॉब छोड़ कर वापस ग्वालियर चले जाना चाहिए. और ग्वालियर hi क्यों, आज के बाद तोह शायद वह अपने hi घर वापस चली जाये. कमरे पर एक नॉक हुई और वह सेहम सी गयी, एक वेटर ने दरवाज़ा खोला.

वेटर - ओह सॉरी ma'am... पर आपको यहाँ नहीं होना चाहिए...

सुप्रिया रुंधे हुए गले से बोली - सॉरी, मैं बस एक कॉल कर रही थी यहाँ से. आप 2 मिनट रुकेंगे प्लीज?

वेटर - सूरे ma'am. आप ठीक तोह है?

सुप्रिया ने अपने आंसू पोछते हुए कहा - हाँ मैं ठीक हु, कुछ नहीं बस घर से कॉल था तोह थोड़ी इमोशनल हो गयी.

पता नहीं वह क्यों इस वेटर को समझा रही थी की वह क्यों रो रही थी. वेटर ने दरवाज़ा बंद कर दिया और बहार इंतज़ार करने लगा. सुप्रिया ने अपना ब्रा की स्ट्राप को ठीक किया और ासु पॉच कर उस कमरे से निकल गयी. किसी तरह से वह वापस अपनी कंपनी के बूथ पर पहुंची. उस समय वहां कृति के साथ विक्रम सर भी खड़े थे और कस्टमर्स से बात कर रहे थे.

कृति ने उसे आता देख कहा - सुप्रिया... कहाँ चली गयी थी... मैंने आकाश को भी लंच के लिए भेजा था पर वह कह रहा था तुम वहां थी hi नहीं...

सुप्रिया - हाँ वह सॉरी मैं बाथरूम गयी थी...

कृति - इतना टाइम लगता है क्या बाथरूम में .... क्या हुआ, आल ok, योर आईज अरे रेड?

सुप्रिया हलके से बोली - हाँ वह सॉरी मेरे पीरियड्स चल रहे है न.. मैं उसमे थोड़ा इमोशनल हो जाती हु..

कृति - ओह सॉरी सॉरी, पहले बताना था न. Ok, मैं अब जाती हु लंच करने... तुम भैया के साथ बूथ सम्भालो. ठीक है न?

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया और कृति को लंच की और जाते देखा. सुप्रिया ने दूसरी और पलट के देखा तो विक्रम अभी किसी कस्टमर से बात करके फ्री हुआ था.

विक्रम उसकी और मुदा और हमेशा की तरह जोश में बोलै - Hello मस सुप्रिया... मैंने सुना की आपकी वजह से काफी कस्टमर्स अत्त्रक्ट हो रहे थे आज हमारे बूथ पर.

सुप्रिया ने रुखा सा जवाब दिया - नहीं सर, ऐसा कुछ नहीं. वह तोह बस प्रोडक्ट्स देख कर hi आ रहे थे.

सुप्रिया को एक सेकंड के लिए ऐसा लगा की विक्रम उसके चेहरे को बारीकी से पड़ने की कोशिश कर रहा था. किसी तरह सुप्रिया अपने चेहरे के भाव को छुपाने की कोशिश कर रही थी.

विक्रम - Ok, अस यू से. पर हाँ काफी लम्बी लिस्ट हो गयी है पोटेंशियल कस्टमर्स की. नेक्स्ट वीक से सबको कॉल करना स्टार्ट करेंगे, होपफ़ुल्ली वे कन्वर्ट ा फ्यू.

सुप्रिया धीरे से बोली - नेक्स्ट वीक का पता नहीं सर, मैं हु या न हु कंपनी में...

विक्रम ने उसकी बात को हलके में लेते हुए कहा - ओह ाचा, क्या हुआ? क्विटिंग सो सून.

सुप्रिया - हाँ, ी थिंक ये जॉब मेरे बस की बात नहीं है..

विक्रम - क्या हुआ झाँसी की रानी ने लड़ना छोड़ दिया?

सुप्रिया ने विक्रम को घूरते हुए कहा - मैं नहीं हु झांसी की रानी, आप प्लीज मुझे ये मत बुलाया करो...

विक्रम ने एक हलकी सी स्माइल की - Ok चिल... रिलैक्स...

दोनों फिर कुछ और कस्टमर्स से बात करने लगे. धीरे धीरे भीड़ काम होती जा रही थी, सब लोग वहां एक दुसरे हॉल में शो के एन्ड की स्पीच के लिए बैठे थे. आकाश के वापस आने के बाद विक्रम भी वहां चला गया, और थोड़ी देर बाद साहिल सर ने आकर उन दोनों को भी वहां जाने के लिए बोलै. वैसे भी अब कोई उनके बूथ पर आने नहीं वाला था.

सुप्रिया ने वहां पहुंच कर देखा और आगे की रौ में विक्रम और कृति बैठे थे. कृति कितनी खुश लग रही थी, और खुश हो भी क्यों न. उसकी लाइफ में तोह सुप्रिया जैसी कोई भी प्रोब्लेम्स नहीं थी. वह तोह एक स्मार्ट इंडिपेंडेंट कॉंफिडेंट खूबसूरत लड़की थी, जिसे कोई भी ऐसे hi परेशान नहीं कर सकता था. आज पहली बार सुप्रिया को कृति की लाइफ से थोड़ी सी जलन सी हुई थी.

715afe1e5d5c25590ac3cab50cfbe3ee.jpg


स्पीच के बाद सारे कम्पनीज के ओनर्स ऊपर स्टेज पर गए और फोटो खिचवाई, जिसमे विक्रम भी थे, और साथ hi सुप्रिया को प्रताप भी दिखाई दिया. कुछ देर बाद शो ख़तम हो चूका था.

प्रताप स्टेज से उतरता हुआ सीधे सुप्रिया की डायरेक्शन में आया और उसके कान में फुसफुसाया - 15-20 मिनट में ऊपर आ जाना.

सुप्रिया वहीँ स्तम्भव कड़ी रह गयी. क्या करे वह अब, अगर वह ऊपर प्रताप के कमरे में गयी तोह शायद वह पूरी रात वहां से नहीं निकल पाएगी. और अगर न गयी तोह उसका अंजाम और भी बुरा हो सकता था. पर जो भी हो उसे अतुल को कॉल करके ये तोह बताना hi होगा की वह लेट हो जाएगी. पर कितना लेट? उसे खुद नहीं पता था.

सुप्रिया ने अतुल को कॉल लगाया - Hello..Atul…

अतुल - हाँ सुप्रिया… कैसा चल रहा तुम्हारा ट्रेड शो?

सुप्रिया - सब ठीक है, सुनो… मैंने कहा था न की मैं लेट हो जयुंगी… बस वही बताने के लिए कॉल किया है.

अतुल - ाचा… मैं आ जायूँगा तुम्हे लेने अगर ज्यादा लेट होगा तोह.

सुप्रिया की आवाज़ काँप रही थी - सुनो… मुझे नहीं पता कितना लेट होगा..

अतुल - क्या हुआ, सब ठीक है न? ज्यादा लेट क्या करना, बस निकल जाना वहां से 7-8 बजे तक.

सुप्रिया फ़ोन पर चुप थी, क्या बोले वह अतुल को.

अतुल - बोलो भी… कितने बजे पिक करू?

सुप्रिया - मैं खुद आ जयुंगी…

अतुल को गुस्सा आने लगा था - ठीक है तुम्हारी जो मर्ज़ी है वह करो, एहि है न तुम्हारे मैं में.

सुप्रिया - अतुल सुनो तोह…

पर अतुल ने फ़ोन काट दिया था. कॉल में कुछ सेकंड के लिए सुप्रिया को लगा था की अतुल को उसकी फ़िक्र है और वह उसे सब बता दे पर फिर से अतुल ने अपने ईगो और गुस्से के आगे उसकी बात नहीं समझी थी. पर शायद पूरी गलती उसकी भी नहीं थी, वह भी तोह अतुल को अपनी बात नहीं बता पायी थी.

सुप्रिया ने घडी में टाइम देखा, 6 बजने वाले थे. कृति और बाकी सब लोग वहां से निकल रहे थे.

कृति - चलो सुप्रिया, आज तोह आकाश हम सबको ड्राप कर रहा है. मैंने साड़ी पहनी है न तोह ड्राइव नहीं किया आज.

सुप्रिया - तुम जायो, मेरे हस्बैंड आएंगे मुझे लेने…

कृति - कितनी देर में, मैं रुक जाती हु जब तक वह नहीं आते. साहिल सर और भैया भी नहीं दिख रहे कहीं, शायद उनकी ड्रिंक्स पार्टी हो रही होगी. और तुम्हारी तबियत भी ठीक नहीं है.

सुप्रिया - नहीं तुम जायो, आकाश वेट कर रहा है तुम्हारा. वैसे भी होटल में hi हु, कोई किडनैप थोड़ी न कर लेगा मुझे यहाँ से.

कृति - इतनी हॉट लग रही हो… किसी अँगरेज़ ने किडनैप कर लिया तोह? और अगर कर hi रहा है तोह हम दोनों को साथ hi कर ले…

सुप्रिया ने उसको हलकी सी स्माइल दी - तुम जायो…. सब ठीक रहेगा….

कृति - Ok bye… कल मिलते है ऑफिस में…

सुप्रिया कृति को आकाश के साथ जाते देख रही थी. काश वह भी उनके साथ हस्ते हस्ते यहाँ से निकल पाती. अगर ऐसा होता तोह उसका दिन कितना ाचा एन्ड हुआ होता. कृति और आकाश हमेशा एक दुसरे की टांग खींचने में लगे रहते थे. वह भी उनकी मस्ती में शामिल हो पाती. पर उसके लिए तोह अभी एक पूरी काली रात बाकी थी.

पर क्या ये उसके हाथ में नहीं था की आज उसके साथ क्या होगा. सुप्रिया की साँसे तेज होने लगी और उसने कुछ तय किया. आज जो भी हो जाये, वह कमज़ोर नहीं पड़ेगी. फिर चाहे जो भी अंजाम हो, या तोह उसका या प्रताप का, किसी का भी. वह कैसे क्या करेगी, उसे खुद भी नहीं पता था, पर बस अब और अबला नारी नहीं बन कर रह सकती थी.

घडी में थोड़ी देर और टाइम देखने के बाद सुप्रिया कांपते हुए पैरो से लिफ्ट की तरफ गयी और उसने 4तह फ्लोर का बटन दबाया. ये दूसरी बार वह एक महंगे होटल में रुकी थी और हर बार ऐसी जगह उसे hi महंगी पड़ती थी. लिफ्ट 4तह फ्लोर पर रुकी और वह बहार निकल कर गैलरी में से होती हुई रूम 415 को ढूंढ़ने लगी. कुछ रूम बंद थे और कुछ रूम खुले हुए. खुले हुए रूम्स की सफाई चल रही थी.

वहीँ थोड़ी दूर एक कमरे से कुछ आवाज़ें आ रही थी, जैसे कोई दर्द में हो. सुप्रिया उस रूम के ठीक सामने पहुंची जहाँ से आवाज़ आ रही थी. वह पूरी तरह खुला हुआ था सुप्रिया अपने आपको अंदर झाँकने से नहीं रोक पायी. अंदर कारपेट पर एक आदमी पूरा नंगा बैठा हुआ था, उसका मुँह बुरी तरह सूजा हुआ था और शरीर पर ताज़ी चोट के निशाँ थे. किसी ने इस आदमी की अभी खूब पिटाई की थी. सुप्रिया ने उसे एक पल दुबारा देखा तोह उसे यकीं hi नहीं हुआ, ये तोह प्रताप hi था. उसने खुले हुए रूम के दरवाज़े पर रूम न नंबर चेक किया और वह 415 hi था.

सुप्रिया शायद प्रताप से इंसानियत के नाते पूछना चाहती थी उसके साथ ये क्या हुआ था. चाहे उसने कभी सुप्रिया के साथ इंसानियत न दिखाई हो. पर उसका मुँह खुला का खुला रह गया और गले से आवाज़ बहार hi नहीं निकल रही थी. किसी ने प्रताप के साथ वह कर दिया था जो आज वह करना चाहती थी, शायद उससे भी ज्यादा कर दिया था. आज से पहले उसने रियल लाइफ में किसी को इतनी बुरी तरह पिटे हुए नहीं देखा था. प्रताप की आँखें अभी भी हलकी हलकी खुली हुई थी और वह सुप्रिया के और hi देख रहा था, जैसे कुछ बोलने की कोशिश कर रहा हो. सुप्रिया की आँखें ये दृश्य देख कर धुंदली हो गयी थी, और उसे सब साफ़ नहीं दिखाई दे रहा था. पास में hi किसी के आने की आवाज़ हुई और सुप्रिया ने अपना सर उस और मोड़ा.

तभी किसी आदमी ने उसका हाथ पकड़ा और उसे वापस दूसरी तरफ ले जाने के लिए खींचा. सुप्रिया का सर अभी भी पीछे की और hi देख रहा था, और वहां उसे दूर से एक वेटर आता दिखा, ये तोह शायद वही था जिसने दिन में उसे रट हुए देखा था. सुप्रिया ने फिर अपना हाथ खींचने वाले की तरफ ऊपर देखा तोह वह हक्की बक्की रह गयी, ये तोह विक्रम सर थे. पर विक्रम सर यहाँ क्या कर रहे थे? विक्रम सुप्रिया को खींचता हुआ उसे लिफ्ट तक ले गया. लिफ्ट के बहार पहुंचने के बाद विक्रम ने सुप्रिया का हाथ छोड़ा और लिफ्ट का नीचे का बटन दबाया.

सुप्रिया कुछ तोह बोलना चाहती थी, पर अभी उसके गले से आवाज़ hi नहीं निकल रही थी. उसे लग रहा था की विक्रम सर hi उससे कुछ बोलेंगे या सवाल करेंगे, पर वह भी चुप चाप खड़े थे. उसने शर्म से अपना सर झुका लिया और चुप चाप नीचे देखने लगी. दोनों बिलकुल चुप चाप खड़े थे, और शायद एहि बेहतर था, क्यूंकि सुप्रिया उन्हें कुछ समझने से ाचा ज़मीन में गड जाना ज्यादा पसंद करती. कुछ सेकंड का लिफ्ट का सफर जैसे बहुत लम्बा हो गया हो.

लिफ्ट होटल की लॉबी पर रुकी और विक्रम धीमे कदमो से किसी और चल दिया. सुप्रिया भी चुप चाप विक्रम सर के पीछे चलते चलते होटल के एक रेस्टोरेंट में आ गयी और विक्रम सर के एक इशारे पर होटल स्टाफ उन्हें एक बिलकुल प्राइवेट डाइनिंग एरिया में ले गए. सुप्रिया ने सोचा की वह खाने के लिए बिलकुल मन कर देगी, वह इस हालत में नहीं थी की कुछ खा पाए. पर उससे बिना पूछे विक्रम ने कुछ खाने का आर्डर दे दिया. खाना आने तक वह ऐसे hi सर झुकाये बैठी रही और विक्रम अपने फ़ोन पर कुछ टाइप करता रहा.

खाना आते hi विक्रम ने उसकी प्लेट पर खाना लगा कर उसके सामने आराम से रख दिया. सुप्रिया ने सुबह से कुछ भी नहीं खाया था और उसे ज़ोर के भूक लगी थी. दिन के खाने के टाइम भी वह प्रताप से बात करने चली गयी थी. कुछ सेकंड की हिचकिचाहट के बाद उसने खाने की एक बाईट ली और फिर दूसरी और फिर जल्दी जल्दी खाना खाने लगी.

79.jpg


कुछ निवाले नीचे जाने के बाद, उसने सामने विक्रम की और देखा वह आराम से सामने बैठा एक ड्रिंक सिप कर रहा था. उसे देख कर ऐसा लग hi नहीं रहा था की जैसे अभी थोड़ी देर पहले कुछ हुआ हो. उसने न तोह सुप्रिया से कुछ पुछा और न hi कुछ बताया की ऊपर क्या हुआ था. सुप्रिया के मैं में बहुत सारे सवाल थे, पर वह उन्हें पूछने की हिम्मत नहीं जूता पा रही थी.

सुप्रिया के खाना खाने के कुछ पल बाद विक्रम की आवाज़ पहली बार निकली - सुप्रिया, चलो. ी विल ड्राप यू होम.

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया और फिर से उनके पीछे पीछे होटल के एंट्रेंस पर पहुंच गयी. कोई कार ले कर सामने आया और विक्रम ने कार का पीछा का दूर सुप्रिया के लिए ओपन किया और सुप्रिया कार में पीछे बैठ गयी. उसे लगा था की विक्रम दूसरी साइड से आकर पीछे बैठेगा. पर ड्राइवर वहीँ उतर गया और विक्रम आगे की सीट पर बैठ कर कार चलने लगा. उस एक बहुत hi सॉफ्ट म्यूजिक ों कर दिया और भीड़ भरी सड़को में गाडी चलता हुआ सुप्रिया के घर की और चल दिया. पता नहीं उसे कैसे पता था की सुप्रिया कहाँ रहती थी.

80.jpg


गाडी में भी सुप्रिया के दिमाग में प्रताप का बुरी तरह ज़ख़्मी चेहरा hi घूम रहा था. पर अपने घर तक पहुंचते पहुंचते सुप्रिया धीरे धीरे नार्मल हो रही थी. पर म्यूजिक के इलावा कार में कोई और आवाज़ नहीं हुई. कार जब सुप्रिया के बिल्डिंग के गेट तक पहुंची, सुप्रिया कुछ सेकंड कार में hi बैठी रही, जैसे उसके अंदर अपने आप को घर तक पहुंचने की भी हिम्मत न हो.

विक्रम ने उनके बीच की चुप्पी को तोड़ते हुए कहा - ी विल सी यू नेक्स्ट वीक… वे विल नीड एवरीवन तेरे… मैं साहिल को बोल दूंगा की तुम कल ऑफिस नहीं आयोगी. गूडनिघत.

सुप्रिया - थैंक यू सर, गुड नाईट.

सुप्रिया बोलना तोह और भी कुछ चाहती थी, पर वह ये बोल कर गाडी से उतर गयी. उसके चेहरे पर फाइनली एक हलकी सी स्माइल आ गयी थी. आज जो भी हुआ, ये तोह वह कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी. जब उसने साड़ी आशा छोड़ दी थी तब ये चमत्कार पता नहीं कैसे हुआ था. गाडी से उतारते हुए वह फिर से जैसे अपने आप को खुश सा महसूस कर रही थी. और एक मुस्कराहट लिए वह बिल्डिंग में घुसी, सामे इक़बाल खड़ा था.

सुप्रिया ने आज उसे स्माइल करके देखा - कैसे हो इक़बाल.

इक़बाल उसके ये पूछने से खुश हो गया - ठीक हु मैडमजी! आज तोह आप बोहोत hi ज्यादा सुन्दर लग रहे हो, और खुश भी.

सुप्रिया - हाँ ऐसा लग रहा है जैसे सर से कोई भारी भोज उतर गया हो.

इक़बाल - ये तोह बोहोत अछि बात है. आज कोई नयी गाडी आयी थी आपको छोड़ने?

सुप्रिया - हाँ वह मेरे बॉस थे…

इक़बाल - ाचा... फिर तोह आपने बहुत ाचा किया की आप पीछे वाली सीट पर बैठे थे. वैसे तोह एक औरत को उसके शोहर के साथ hi जाना चाहिए, पर आपका ये तरीका भी ठीक है पर्दा करने के लिए… ताकि आप अपने आप पर नाज़ रख सके.

सुप्रिया को उसकी बात थोड़ी सी अटपटी लगी, पर शायद वह उसका भला hi चाहता था - हांजी, वैसे वह काफी अचे इंसान है…

इक़बाल - बोहोत अछि बात है, खुदा आपके साथ रहे…

सुप्रिया - शुक्रिया इक़बाल, मैं अब चलती हूँ ऊपर.

सुप्रिया खुश होते हुए अपने घर की तरफ बड़ी. उसने घर का लॉक खोला तोह अंदर अतुल को ड्राइंग रूम में गुस्से में बैठे देखा. इतना कुछ हो गया की वह अतुल को कॉल या मैसेज भी नहीं कर पायी थी. उसने घडी में टाइम देखा तोह 9 बज चुके थे. आज रात वह और कोई ड्रामा नहीं चाहती थी, पर शायद ये उसकी किस्मत में नहीं था.
 
अपडेट 37

आज कितने दिनों बाद सुप्रिया घर पर अकेली थी. आज न तोह ऑफिस था और न hi अतुल घर पर था. और ाचा hi था की अतुल घर पर नहीं था क्यूंकि कल रात उन दोनों की जैम के लड़ाई हुई थी. अतुल ने पता नहीं गुस्से में क्या क्या बोल दिया था. सुप्रिया ने अपने आप को शांत रखने की कोशिश करि थी, क्यूंकि न तोह उसमे लड़ाई करने की हिम्मत बची थी और न hi वह अतुल को सब कुछ समझा सकती थी. पर फिर भी उसके मुँह से भी कुछ तोह निकल hi गया था.

रात का गुस्सा सुबह भी नहीं उतरा था और अतुल बिना नाश्ता किया और बिना खाना लिए घर से निकल गया था. कहीं न कहीं अतुल भी अपनी जगह सही hi था. पर सुप्रिया को लग रहा था की वह भी गलत नहीं थी. अतुल बेवजह hi उस पर इतना चिल्ला रहा था. खैर अब तोह वह शाम तक वापस नहीं आने वाला था और कुछ घंटे तोह सुप्रिया शान्ति से अपनी छुट्टी मन सकती थी.

जो कुछ बोलै गया उस में सबसे ज्यादा उसे अतुल की ये बात चुभी थी की आज कल वह कुछ ज्यादा hi बन थान कर ऑफिस जाती है. अतुल ने अपनी बात तोह पूरी नहीं की थी पर वह उसका मतलब समझ गयी थी. सुप्रिया ने भी गुस्से में उसे दूसरी औरतों को घूरने का इलज़ाम लगा दिया था, ख़ास कर अपनी कामवाली को. इससे तोह जैसे उसका पारा और भी गरम हो गया था. अब जब शान्ति से सुप्रिया बैठ कर सोच रही थी तोह अतुल को ये बोलना तोह उसका गलत था. अतुल वैसे तोह काफी शरीफ इंसान hi था, हाँ उसने उसे कई बात करुणा को घूरते हुए पकड़ा था. पर फिर करुणा भी तोह ऐसे कपडे पेहेन कर आती थी, कोई भी मर्द देखेगा hi.

कल जो होटल में हुआ वह भी ज़ाहिर तौर पर उसके दिमाग में चल hi रहा था. उस बारे में सोचते सोचते सुप्रिया ने कुछ कड़ियाँ तोह आपस में जोड़ ली थी. पर अभी भी काफी कुछ था जो उसे समझ नहीं आया था की कैसे हुआ था. पर हाँ सच में, अगर कल विक्रम सर वहां न होते तोह जाने क्या हो जाता. बिलकुल किसी फ़िल्मी हीरो की तरह उन्होंने सुप्रिया को प्रताप से बचाया था. सोचते सोचते सुप्रिया ने रीलीज़ किया की वह कितना काम जानती थी विक्रम सर के बारे में. उसे बस ये पता था की वह काफी बिजी इंसान है जो अपनी वाइफ का एक बड़ा सा बिज़नेस चला रहे थे. और ये छोटा सा बिज़नेस खुद उनका था, जिसे वह बेहद कामयाब होता देखना चाहते थे.

कृति से कभी कभी उसे उनकी वाइफ के बारे में सुनने को मिल जाता. कृति को अपने भैया की वाइफ बिलकुल पसंद नहीं थी, एक दो बार उसने उन्हें घमंडी या स्नॉब्बीश बताया था. पर अपने भैया के लिए तोह उसके मुँह से हमेशा तारीफ hi निकलती थी. चाहे वह दोनों कौसिन्स hi थे, फिर भी उन दोनों में काफी ज्यादा अटैचमेंट था और शायद विक्रम की hi वजह से आज कृति इतनी सक्सेसफुल थी, पर साथ hi बिलकुल डाउन तो एअर्थ भी. जितना सुप्रिया ने देखा था, सच में, विक्रम सर हर किसी को काफी इज़्ज़त दे कर बात करते और किसी के साथ भी आराम से घुल मिल जाते. ऑफिस में उनकी पहली दांत के बाद उसने कभी उनसे फिर दांत नहीं खायी थी. बल्कि उसे अब उनका सबसे मजाक करने का स्टाइल भी दिखने लगा था. पर हाँ वह सबसे उतना hi हार्डवर्क और डेडिकेशन एक्सपेक्ट करते थे, जितना वह खुद करते थे.

कृति का मैसेज भी आया था उसका हाल चाल पूछने के लिए और ये बताने के लिए की कैसे उसने कल शाम की कॉफ़ी मिस कर दी और आज सुप्रिया के बिना ऑफिस कितना खली खली लग रहा था. उसकी बातों से तोह ऐसा नहीं लगा की विक्रम सर ने उसे कुछ बताया होगा, और जितना वह कल विक्रम सर को समझ पायी थी, अगर बताया होता तोह उसे बहुत ज्यादा हैरानी होती.

यूँ hi बैठी बैठी सुप्रिया सोच hi रही थी की मैं दूर में चाबी लगने की आवाज़ आयी और दरवाज़े का हैंडल घूमा. सुप्रिया एक पल के लिए घबरा hi गयी थी, और दरवाज़े से अंदर आती करुणा भी. करुणा तोह सुप्रिया से भी ज्यादा एक डैम से सकपका सी गयी. सुप्रिया भी भूल गयी थी की दिन में तोह करुणा आती थी.

करुणा ज़ोर से बोली - मेमसाब आप आज घर पर....

सुप्रिया - हाँ... आज छुट्टी पर हूँ... क्या हुआ, ऐसा लग रहा है जैसे भूत देख लिया हो...

करुणा से दरवाज़े से बहार की और कुछ पल देखा और फिर सुप्रिया की और - नहीं, आपको देख कर एक डैम से डर गयी और कुछ नहीं... मैं अंदर काम करती हु...

सुप्रिया - क्या हुआ? कोई है क्या बहार?

करुणा - नहीं वह इक़बाल है bas....upar राउंड लगाने जा रहा है शायद...

सुप्रिया को अजीब लगा की इक़बाल इसी समय क्यों उसके फ्लैट के बहार था, क्या वह करुणा के साथ आया था? क्या वह दोनों यहाँ कुछ करने आये थे... क्या वह पहले भी उसके घर में... कहीं उसके बिस्तर पर तोह नहीं... ओह गॉड!! सुप्रिया को ये सोच कर hi गुस्सा आने लगा. जरूर ये करुणा का hi किया धरा होगा, इक़बाल तोह सच में कितना सीधा और नेक इंसान लगता था. पता नहीं कब से चल रहा है ये सब, और वह भी उसके hi घर में. सुप्रिया ने एक पल के लिए सोचा की वह करुणा से इस बारे में पूछे पर अभी बिना किसी सबूत के वह उस पर कैसे कोई आरोप लगा देती.

करुणा किचन में काम करने घुस गयी और सुप्रिया बहार सोफे पर बैठी अपना फ़ोन चला रही थी. आज इतने दिनों बाद उसने आखिर कार अपना इंस्टाग्राम अप्प खोल hi लिया, और पाया की कृति सच hi बोल रही थी. उसकी फोटो पर 100 से ऊपर लाइक्स थे और काफी सारे कमैंट्स भी थे. सुप्रिया ने कमैंट्स सेक्शन खोला तोह काफी सारे कमैंट्स तोह अचे hi थे जैसे गॉर्जियस, अति सुन्दर, सो स्वीट, मंद ब्लोइंग जैसे. कुछ कमैंट्स ऐसे भी थे - हु इस शी? कुछ फायर इमोजी, या हर्ट्स इमोजी या बैंगन के इमोजी. पर एक कमेंट ने उसको हैरान कर दिया - मैंने इन्हे लखनऊ में कहीं देखा है.

सुप्रिया ने वह कमेंट देखते hi, झट से अप्प बंद कर दिया. वह अब और फोटोज नहीं पोस्ट करने वाली थी, क्या पता कौन उसे पहचान ले. क्यों बिना वजह कोई और मुसीबत मोल लेनी.

थोड़ी देर बाद करुणा भी काम करके चली गयी, आज उसने सुप्रिया से ज्यादा चतर पातर नहीं की, शायद उसकी चोरी जो पकड़ी गयी थी. पर सुप्रिया अभी भी पूरे यकीं से नहीं कह सकती थी की हुआ क्या था. पता नहीं वह कन्फर्म करे तोह कैसे करे.

करुणा के जाने के बाद सुप्रिया ने घर के छोटे मोठे काम किये और फिर उसे याद आया की कल तोह शनिवार का दिन था और उसे आगे ड्राइविंग सीखनी थी. उसने इक़बाल को ड्राइविंग का याद दिलाने के लिए मैसेज किया.

सुप्रिया - Hello इक़बाल... आप कल सुबह मुझे ड्राइविंग सीखा पाओगे...

थोड़ी hi देर बाद इक़बाल का मैसेज आ गया - हांजी मैडमजी, मैं भी आपसे पूछने hi वाला था. वही टाइम, सुबह 6 बजे... आपके लिए ठीक है न?

सुप्रिया - हांजी... मिलते है कल सुबह.

शाम होते hi जैसे जैसे अतुल के घर आने का टाइम पास आ रहा था, सुप्रिया की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. पता नहीं आज अतुल किस मूड में घर आएगा, और उससे कैसे बात करेगा. सुप्रिया ने सोच लिया था की अगर उसने आज कोई गलत बात बोली तोह वह चुप नहीं रहेगी. कल के वायके ने जैसे उसे और भी हिम्मत दे दी हो.

पर इसके ठीक उलट, अतुल घर बिलकुल शांत आया, उसने चुप चाप अपने जूते उतरे और हाथ धो कर सोफे पर बैठ गया. सुप्रिया लड़ने के लिए तोह तैयार थी, पर इसके लिए नहीं. थोड़ी देर बाद उसने अपने बैग से मिठाई का एक छोटा सा डब्बा निकला और टेबल पर रख दिया.

सुप्रिया से अब रहा नहीं गया और उसने पूछ hi लिया - अतुल.. ये मिठाई किस लिए...

अतुल धीमी आवाज़ में बोलै - मेरा प्रमोशन हो गया है...

सुप्रिया - क्या!! वाओ... कोंग्रटुलतिओन्स!! ये तोह इतनी अछि खबर है, और आप इतनी लौ आवाज़ में बता रहे हो...

अतुल - आ तोह रहा था मैं कल रात तुम्हे पिक करने और साथ hi ये खुशखबरी देने... पर तुमने hi...

सुप्रिया - ी ऍम रियली सॉरी, सच में. पर अब कल की बात नहीं उठाते न फिर से... ी ऍम सो हैप्पी फॉर यू... आप कब से इस प्रमोशन के लिए इतनी म्हणत कर रहे थे.

सुप्रिया अतुल से गले लग गयी और अतुल ने भी उसे कास के पकड़ लिया. दोनों ऐसे hi थोड़ी देर तक एक दुसरे से लिपटे खड़े रहे. अतुल सुप्रिया को चूमते हुए बैडरूम में ले गया, और बीएड पर लिटाते hi अपने और उसके कपडे उतारने लगा. वह सुप्रिया के ऊपर आते हुए उसके अंदर अपना लुंड डालने hi वाला था की सुप्रिया ने अपने हाथ से उसे रोका.

सुप्रिया अभी सेक्स के लिए तैयार नहीं थी - अतुल... प्लीज आज सेक्स नहीं करते... बस ऐसे hi कुड्ले कर लेते है न...

अतुल के चेहरे पर हलकी सी डिसअप्पोइन्त्मेन्त आयी - कितने दिन हो गए कुछ भी करे हुए...

सुप्रिया - हाँ.. सॉरी.. पर प्लीज आज नहीं...

अतुल ने सुप्रिया के बराबर में लेट कर उसे अपनी बाहों में भरा - ाचा ठीक है... उम्म्म्म... पर एक काम करोगी क्या आज...

सुप्रिया ने अपना हाथ अतुल की छाती पर रखते हुए कहा - क्या काम?

अतुल ने अपने लुंड की तरफ इशारा करते हुए कहा - आज तुम... मुँह में ले लो न इसे प्लीज...

सुप्रिया ने अपना हाथ पीछे करना चाहा, पर अतुल ने उसका हाथ पकड़ लिया.

सुप्रिया - नहीं अतुल... हम पहले बात कर चुके है इस बारे में... मुझे नहीं ाचा लगता ये करना...

अतुल - बस प्लीज आज... एक बार... मेरे लिए...

सुप्रिया - अतुल.....

अतुल - और इतना तोह बनता है न अगर तुम सच में सॉरी हो... बस ये समझ लो मेरे प्रमोशन का गिफ्ट है...

अतुल उसकी आँखों में देख कर बेहद मिन्नतें कर रहा था की आज आखिर वह इस चीज़ के लिए मान hi जाए. सुप्रिया सोच में पद गयी, पता नहीं इन आदमी लोगो को मुँह में डालने में क्या मज़ा आता था. पर प्रताप का लुंड मुँह में लेने से तोह बेहतर hi था की वह ये सुख अतुल को दे. और फिर शायद उसने आज तक जो कुछ अतुल की पीठ पीछे किया था ये उसका पश्चाताप था.

सुप्रिया - ठीक है... पर आप पूरा दिन बहार थे... पहले वहां साफ़ करके आयो...

अतुल को अपने कानो पर यकीं hi नहीं हुआ की सुप्रिया इसके लिए मान गयी थी - हाँ मैं अभी एक मिनट में आया.

अतुल जल्दी से बाथरूम की और भागा, और जल्दी से अपने लिंग के एरिया को साबुन और पानी से साफ़ किया. फिर वापस जल्दी से बीएड पर आया इससे पहले की सुप्रिया अपना मैं बदल ले.

अतुल झट से बीएड पर बैठा - लो मैं आ गया साफ़ करके... अब कैसे करे...

सुप्रिया को ये सवाल अजीब सा लग - मुझसे क्यों पूछ रहे हो?! आपको करना था न ये...

अतुल झेपते हुए - हाँ, सॉरी... उम्म्म्म.. ऐसा करता हूँ मैं यहाँ खड़ा हो जाता हूँ और तुम पलंग पर बैठ कर इसे सूचक कर लो..

सुप्रिया उसकी और देखते हुए - शर्म तोह आ नहीं रही न आपको ये सब बोलते हुए...

अतुल - ारी... अभी तोह तुमने बोलै की बताया कैसे करना है... और फिर इसमें अब शर्माना कैसा..

अतुल बीएड से नीचे उतर का बीएड के सिरहाने पर खड़ा हो गया, और अपना लुंड अपने हाथ से सहलाने लगा. सुप्रिया उसके थोड़ा पास आयी और बीएड पर उसके सामने बैठ गयी. उसने आज तक सिर्फ एक बार पहले ये किया था और तब उसे बिलकुल ाचा नहीं लगा था. सुप्रिया ने अतुल को ऊपर खड़े देखा, और उसको इशारे से पूछा की अब क्या. हालाँकि वह इतनी भोली भी नहीं थी की उसे पता न हो की अब उसे क्या करना था.

अतुल - थोड़ा और आगे आयो न... और इसे पकड़ो...

सुप्रिया थोड़ा सा और आगे आयी और उसने अपने हाथ से अतुल का लुंड पकड़ा. साफ़ करने की वजह से वह अभी भी थोड़ा सा गीला था. अतुल का लुंड बस अब उसके होंठों से थोड़ा hi दूर था.

अतुल - अब अपने होंठ पास लायो और इसे मुँह में ले लो...

सुप्रिया अपने होंठ पास लायी और उसने हलके से अतुल के लुंड को अपने होंठों से छुआ. उसके ये करते hi अतुल ने एक बड़ी सी सिसकी ली - Ahhhhhhhhhh

फिर सुप्रिया ने अपना मुँह खोलते हु, अतुल के लुंड के ऊपर के हिस्से को अपने मुँह में लिया. सुप्रिया के ऐसा करने से अतुल की हालत ख़राब होती जा रही था, और उसका लुंड अपने आप फड़क कर थोड़ा और ऊपर उठ गया.

अतुल - अह्हह्ह्ह्ह...... ममममममम.... वव्वव्वव्व

अतुल को इतना एक्ससिटेड देख कर सुप्रिया भी थोड़े जोश में आ गयी और उसने उसके लुंड को थोड़ा और अंदर अपने मुँह में लिया. अतुल का लुंड वैसे भी इतना बड़ा नहीं था की उसके मुँह को ज्यादा परेशान करता. वह लुंड को अपने मुँह से चूसने लगी, उसकी जीब का थूक उस पर लगने से वह गीला होता जा रहा था और आराम से उसके मुँह से अंदर बहार जा रहा था.

अतुल ने आनंद में अपनी आँखें बंद कर ली और सुप्रिया के सर पर हलके से हाथ फेरने लगा.

74.gif


सुप्रिया बखूबी ऊपर देखते हुए उसके लुंड को अपने मुँह से चूसती रही. अतुल की हालत ऐसे थी की सुप्रिया ने अपने होंठों से उसके पूरे शरीर का खून चूस लिया हो और वह अभी नीचे गिरने वाला हो. उसका खड़े रह पाना मुश्किल था.

अतुल - ओह गॉडडडड..... यार इसलिए लोग करवाना चाहते है ये….. तुम तोह सच में अमेजिंग हो... अह्ह्ह्हह...

सुप्रिया अपनी तारीफ सुन कर खुद भी एक्ससिटेड हो रही थी.

अतुल - अह्ह्ह..... तुम तोह कह रही थी की तुमने पहले ये कभी किया नहीं... पर वाओ यार... ऐसा लगता है की तुम तोह एक्सपर्ट हो ये करने में.... मममममम… बस ज़रा सा और…

अतुल की ये बात सुन कर सुप्रिया ने गुस्से में अपना मुँह पीछे करते हुए लुंड को अपने मुँह से निकाल दिया - कहना क्या चाहते हो आप... मैं एक्सपर्ट हु का क्या मतलब है...

अतुल - अह्ह्ह्हह्हह... मेरा कोई गलत मतलब नहीं था... बस ये कह रहा था की तुम बहुत ाचा कर रही हो... ओह गॉड... मेरा निकल रहा है...

अतुल ने एक डैम से सुप्रिया से दूर होते हुआ अपना सारा झाग ज़मीन पर निकाल दिया. वह अपने लुंड को पकडे उसे अचे से निचोड़ रहा था.

सुप्रिया ने सोचा की ाचा किया उसने सही समय पर मुँह से निकाल दिया था नहीं तोह उसके मुँह पर सब आ जाता. आज उसे ये करना इतना ख़राब तोह नहीं लगा था जितना पहली बार लगा था जब प्रताप ने जबरदस्ती अपना लुंड उसके मुँह में ठूस दिया था. अतुल ने काफी आराम से भी किया था. पर उसने सोच लिया था की वह कभी ये नहीं करने वाली थी अतुल के साथ, चाहे वह कितनी भी मिन्नतें कर ले. पता नहीं क्या समझने लगा तोह वह उसे.

सुप्रिया अपने अंदर भी अब गर्मी महसूस कर रही थी, उसका पूरा शरीर जैसे तप रहा हो. पहले तोह उसने मन कर दिया था पर अब वह चाहती थी की अतुल उसके साथ कुछ करे.

अतुल बाथरूम में घुस गया और थोड़ी देर वापस आया. सुप्रिया तब तक पीछे हो कर बीएड पर लेट गयी थी. अतुल ने सुप्रिया को फिर से अपनी बाहों में लिया और बीएड पर लेट गया, और सुप्रिया के पेट पर हलके हलके उंगलियां घुमा कर गोले बनाने लगा. सुप्रिया और भी कुछ करना चाहती थी, पर उसने देखा की अतुल का लुंड तोह सिकुड़ के छोटा हो चूका था. थोड़ी देर बाद दोनों ऐसे hi बिना किसी कपड़ो के एक दुसरे से चिपट कर सो गए. दोनों hi शायद पिछली रात की लड़ाई के बाद काफी थके भी हुए थे, और सुप्रिया को जैसे काफी दिनों बाद एक सुकून की नींद आयी हो.

सुबह सुबह सुप्रिया की आँख खुली तोह उसने पाया की वह अतुल के ऊपर नंगी लेती हुई थी. अतुल का लुंड कल रात से थोड़ा ज्यादा खड़ा था, जैसे सुबह होता था, और उसके पेट पर हलके से रगड़ रहा था. उसने अतुल की और देख कर सोचा की कल रात को अतुल का काम तोह हो गया था पर उसका नहीं.

photo-5085107894415896065-y.jpg


फिर उसका ध्यान टाइम पर गया, पूरे 6 बजे हुए थे, वह ड्राइविंग सीखने के लिए लेट हो रही थी. वह फटाफट बीएड से उठी और तैयार होते हुए नीचे भागी. नीचे पहुंचते पहुंचते 6.20 हो चुके थे, और उसे लग रहा था की आज शायद ड्राइविंग क्लास न हो पाए. इक़बाल का कोई मैसेज भी नहीं था उसके फ़ोन पर. पर इक़बाल वहीँ बिल्डिंग के ठीक सामने अपनी गाडी लगाए हुए खड़ा था.

सुप्रिया हड़बड़ाती हुए इक़बाल की तरफ पहुंची - सॉरी इक़बाल मैं लेट हो गयी... वह नींद hi नहीं खुली टाइम पर...

इक़बाल - कोई बात नहीं मैडमजी... मुझे यकीं था आप आओगे… बस ये लगा रहा था की कहीं नाराज़ तोह नहीं हो…

सुप्रिया - मैं आपसे क्यों नाराज़ हूँगी? आप तोह मेरी हर तरह से मदद hi करते हो... इतना सारा टाइम दे रहे हो अपना गाडी सीखने के लिए...

इक़बाल - वक़्त hi तोह मैं आपको दे सकता हूँ मैडमजी... और कुछ तोह है भी नहीं मेरे पास... चलिए चलते है...

इक़बाल सुप्रिया को लेकर फिर से उसी पास वाले मैदान पर पहुंच गया. सुप्रिया ने पहले जो उस दिन सीखा था उसी की जल्दी जल्दी प्रैक्टिस करि. फिर उसके बाद इक़बाल उसे मैदान के गोल गोल चक्कर लगवाने लगा. सुप्रिया ने पहले स्कूटी चलायी हुई थी तोह उसे गाडी की स्टीयरिंग में इतनी दिक्कत नहीं हुई. पर अभी भी वह एक्सेलरेटर, ब्रेक और क्लच के बीच में गड़बड़ कर देती थी. अब वह दुसरे गियर तक पहुंच गयी थी, पर गियर सही से चेंज करना भी एक चैलेंज सा hi था.

कुछ एक घंटा प्रैक्टिस के बाद सुप्रिया ने गाडी को मैदान के साइड में रोक दिया.

इक़बाल - मैडम जी आपने बहुत अछि गाडी चलायी आज… आप काफी जल्दी सीख लेते हो सब कुछ…

सुप्रिया - शर्करीय इक़बाल.. हाँ ये तोह है.. मैं काफी जल्दी सीख गयी… पर सीखने वाला भी तोह इतना ाचा मिला है न मुझे…

ये सुन कर इक़बाल के चेहरे पर मुस्कान आ गयी. आज अब तक उसका चेहरा थोड़ा लटका हुआ सा hi था - शुक्रिया मैडम जी... आपका दिल बहुत बड़ा है जो आप ये कह रहे हो.

सुप्रिया - क्या हुआ इक़बाल जी... आप काफी परेशान लग रहे हो आज... और शुरू में ये क्यों पुछा की मैं आपसे नाराज़ तोह नहीं?

इक़बाल - मैडमजी मैं किस मुँह से बोलू...

सुप्रिया - बोलिये न… क्या हुआ?

इक़बाल - ठीक है… वैसे भी अब बात आपसे छुपी भी नहीं है. कल आप घर पर थे जब...

सुप्रिया उसकी बात समझ गयी थी, वह करुणा और अपनी बात कर रहा था जब वह दिन में घर पर थी. उसे नहीं लगा था की इक़बाल इस बात को उठाएगा, बल्कि ये तोह उसकी एक परेशानी दूर कर रहा था. शायद इक़बाल से hi उसे पता चल जाये की उसके और करुणा के बीच क्या चल रहा था.

सुप्रिया - करुणा के साथ आप भी थे न? आप बिल्डिंग का राउंड नहीं लगा रहे थे न.

इक़बाल सुप्रिया से नज़रे नहीं मिला प् रहा था - मैं आपसे झूठ नहीं बोल सकता... हाँ मैं उसके साथ था.

सुप्रिया - आप लोग पहले भी आयो हो हमारे फ्लैट में? क्या करते हो आप...

इक़बाल बिलकुल चुप था... जैसे उसके पास इस बात का कोई जवाब hi न हो. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था जैसे इक़बाल कोई गुणघर हो और वह इक़बाल से तफ्तीश कर रही हो. करुणा तोह कहती थी की इसे बहुत गुस्सा आता है, पर ये तोह अभी उसके सामने भीगी बिल्ली बना बैठा था. उसके इस बर्ताव से सुप्रिया की हिम्मत और भी

बढ़ती जा रही थी.

सुप्रिया ने फिर से सख्ती से पुछा - बताइये मुझे... क्या करुणा आपको लेके आती है वहां?

इक़बाल - मैं उसे कैसे सारा दोष दे दू, जब मैंने भी उसका साथ दिया था तोह...

सुप्रिया - तोह फिर आप और करुणा वह सब करते है वहां... क्या आप लोगो ने हमारे बीएड पर भी?

ये सोचते hi सुप्रिया को एक डैम से अजीब सा लगने लगा क्यूंकि कल रात वह इस बात को पूरी तरह भूल चुकी थी और उसी बीएड पर वह और अतुल बिना कपड़ो के सो रहे थे.

इक़बाल जल्दी से बोल पड़ा - नहीं नहीं मैडमजी... आपके बिस्तर पर तोह कभी भी नहीं... मैंने करुणा को मन किया था... उसे बस आपके घर में करना ाचा लगता है...

सुप्रिया - आपकी तोह बीवी है न गाँव में.... तोह फिर?

इक़बाल - हाँ... पर घर गए हुए तोह काफी वक़्त हो गया है... और अब मैं वहां जा भी नहीं सकता...

सुप्रिया - क्यों ऐसा क्यों? क्यों नहीं जा सकते गाँव...

इक़बाल - वह एक लम्बी कहानी है, कभी और आपको बतायूंगा...

सुप्रिया - बीवी नहीं है यहाँ तोह आप करुणा के साथ करेंगे?

इक़बाल - मैडमजी इस शरीर के सुकून के आगे इंसान कई बार कुछ ऐसा कर बैठता है जो उसे नहीं करना चाहिए... आप तोह ये बात समझ hi सकते होंगे...

सुप्रिया हक्की बक्की रह गयी, इक़बाल का क्या मतलब था, उसने तोह बात सुप्रिया पर पलट दी थी - बात मत घुम्यो... और आप क्या कहना चाहते हो मेरे बारे में?

इक़बाल ने हाथ जोड़ते हुए कहा - मैडमजी माफ़ कीजिये मुझे... आइंदा कभी आपके घर नहीं ायूँगा... मैं उस कमीनी करुणा को भी बोल दूंगा...

सुप्रिया - नहीं!! पहले मुझे बात करने दो करुणा से... आप अभी उसे कुछ भी नहीं बोलेंगे, ठीक है?

इक़बाल - जैसा आप ठीक समझे... मैं उसे कुछ नहीं बोलूंगा...

सुप्रिया - ये बात अभी बस हमारे बीच रहेगी... मैं नहीं चाहती की करुणा काम छोड़ कर चली जाये या फिर आपकी भी नौकरी पर कोई खतरा आये. पर हाँ मुझे करुणा से बात तोह करनी पड़ेगी. उसे मुझसे झूठ नहीं बोलना चाहिए था.

इक़बाल - आपका बोहोत बोहोत शुक्रिया...

सुप्रिया - और अभी हम ये ड्राइविंग क्लास ज़ारी रखेंगे, कल सुबह भी. ठीक है? चलिए अब वापस घर की तरफ चलते है... लेट हो रहा है...

इक़बाल और सुप्रिया ने जगह बदली और इक़बाल गाडी चलता हुआ वापस उनकी बिल्डिंग की तरफ चल पड़ा. सुप्रिया मैं hi मैं खुश थी की उसने इतनी जल्दी ये पूरी मिस्ट्री सोल्वे कर दी, और इक़बाल से सब उगलवा दिया. सच में काफी सीधा hi था इक़बाल. हाँ शायद वह समझ सकती थी शरीर की जरूरत को, पर क्या उसका hi घर मिला था उन्हें ये सब करने के लिए.
 
अपडेट 38

सुप्रिया घर आ कर नहाने घुस गयी और नहाते नहाते सोचने लगी की वह करुणा से कैसे ये बात छेड़े. इक़बाल ने तोह खुद hi बड़ी जल्दी अपना जुर्म क़बूल कर लिया था. पर सुप्रिया को पता था की करुणा इतनी सीढ़ी नहीं थी, वह इतनी जल्दी अपनी गलती नहीं मैंने वाली थी. और फिर अतुल भी तोह घर पर होंगे, उनके सामने वह ये बात कैसे कर पाएगी. पर अगर आज बात नहीं की तोह फिर पूरे हफ्ते की गाडी निकल जाएगी.

जब वह नाहा के बहार निकली तोह अतुल एक बड़ी सी स्माइल लिए बीएड पर लेता था, और सुप्रिया को शरारत भरी नज़र से देख रहा था. सुप्रिया कमरे में आयी और तैयार होने लगी.

अतुल - तोह फिर... कैसा लगा कल रात...

सुप्रिया - कैसा क्या लगा?

अतुल - तुम्हे पता तोह है मैं क्या कह रहा हूँ... मेरा वह... तुम्हारे मुँह में...

सुप्रिया ने नाक सिकोड़ते हुए कहा - बहुत hi गन्दा...

अतुल - ारी.. इसमें गन्दा क्या था... साफ़ तोह करके आया था मैं... और तुम्हे देख कर तोह नहीं लग रहा था की तुम्हे गन्दा लगा था...

सुप्रिया - अब आप सुबह सुबह फिर से मत शुरू हो जायो उस बारे में... मैं नहीं करने वाली अब से कभी वह... भूल जायो बस...

अतुल ने पीछे से आते हुए सुप्रिया को पकड़ा - ऐसे कैसे भूल जायु... एक बार और अभी करते है न...

सुप्रिया - अतुल नहीं! मैं नाहा चुकी हु और आप भी जा कर नाहा लो...

अतुल - ाचा ठीक है... आज का क्या प्लान है?

सुप्रिया - आज दिन में मेघा घर आएगी कुछ देर के लिए... उसे कुछ काम है...

मेघा का नाम सुनते hi अतुल का मूड पूरा ऑफ हो गया था - वह क्यों आएगी...

सुप्रिया - मेरा मिलना नहीं होता उससे ऑफिस की वजह से... इसलिए वह आज आएगी... आपको साथ बैठ कर बातें करनी है तोह कर सकते हो...

अतुल - उससे क्या बात करूँगा मैं...

सुप्रिया - थैंक यू बोल देना उसे.

अतुल - किस चीज़ के लिए?

सुप्रिया - जो रात को किया, उसी ने सिखाया था मुझे...

अतुल - ओह ाचा... तभी कहूं इतना... (वह बोलते बोलते रुक गया) उम्म्म्म ऐसा करता हूँ आज कुछ बहार के काम निपटा देता हूँ...

सुप्रिया को पता था की अब अतुल बिलकुल भी घर पर नहीं रुकने वाला था - ाचा... देख लो... आपकी मर्ज़ी...

अतुल - हम्म्म्म... यार... मुझे मैसेज दाल देना जब वह चली जाये...

अतुल नाहा के, नाश्ता करके घर से निकल गया. सुप्रिया ने उसे टाइमिंग hi ऐसी बताई थी की उसे पता था वह शाम से पहले घर वापस नहीं आने वाला था. चलो काम से काम एक चीज़ का तोह सलूशन मिला. उसके जाने के थोड़ी देर बाद करुणा भी काम करने आ गयी थी. थोड़ी देर बाद सुप्रिया भी किचन में आकर कड़ी हो गयी.

सुप्रिया - करुणा एक बात पूछनी थी तुमसे...

करुणा - हाँ दीदी... बोलो न...

सुप्रिया - तुम्हारी शादी हो चुकी है क्या?

करुणा - दीदी, आपको बताया तोह था. शादी हुई थी पर मैं छोड़ कर आ गयी...

सुप्रिया - क्यों छोड़ कर आयी थी तुम?

करुणा को समझ नहीं आ रहा था की आज सुप्रिया को क्या हो गया था - दीदी... वह मेरा मरद ाचा नहीं था...

सुप्रिया - क्या ाचा नहीं था उसमे?

करुणा हस्ते हुए - दीदी इतना क्यों पूछताछ कर रहे हो आज... कुछ हुआ क्या?

सुप्रिया ने उदास होते हुए कहा - नहीं बस जानना था की लोग क्यों अलग हो जाते है... मुझे तोह समझ hi नहीं आता...

अब करुणा के कान खड़े हो गए थे - क्या हुआ दीदी... सब ठीक तोह है न...

सुप्रिया - सब ठीक hi है...

करुणा - भैया भी नहीं दिखे आज घर पर... कोई लड़ाई हुई क्या आपकी?

सुप्रिया - हम्म्म... नहीं ऐसा कुछ नहीं...

करुणा - आप मुझे बता सकता हो... कोई भी परेशानी हो तोह...

सुप्रिया - बस कुछ ठीक नहीं चल रहा हमारे बीच....

करुणा - भैया ने तोह पता नहीं पिछले जनम में क्या पुण्य किये थे जो उनको आपके जैसी सुन्दर बीवी मिली. कहीं वह आपको मारते तोह नहीं? मुझे बोलना, मेरी सिक्योरिटी अफसर में पहचान है...

सुप्रिया - नहीं नहीं... ऐसा कुछ नहीं...

करुणा - तोह फिर क्या.... ओह ाचा... वह वाली दिक्कत है क्या उनको? मैंने भी इसलिए hi छोड़ा था अपने मरद को...

सुप्रिया - ाचा....

करुणा - हाँ... पर आप फ़िक्र मत करो... मैं और भी इलाज जानती हु इस सब के... आपके जैसी बीवी मिलकर भी भैया का ये हाल है..

सुप्रिया को बुरा लग रहा था की वह अतुल के बारे में ऐसी इमेज बना रही थी करुणा के आगे, पर उसे बस ये hi रास्ता सूझा था.

सुप्रिया - तोह तुमने क्यों नहीं किया वह इलाज अपने मरद का...

करुणा - उसका कुछ नहीं होने वाला था... वह तोह बस...

सुप्रिया - और अब इक़बाल अचे से कर लेता है...

करुणा जोश में बोली - हाँ दीदी वह तोह बहुत अचे.....

करुणा बोलते बोलते रुक गयी थी, उसने सुप्रिया की और देखा, वह उसके सामने कुछ ज्यादा hi बोल गयी थी.

सुप्रिया - कब से चल रहा है तुम्हारे और इक़बाल के बीच में सब..

करुणा - कुछ महीने हो गए दीदी... आपको कैसे पता?

सुप्रिया - कल लायी तोह थी तुम उसे यहाँ...

अब बात खुल hi गयी तोह करुणा भी पीछे कहाँ हटने वाली थी - दीदी... आप तोह समझ सकीय हो... कितना जरूरी है वह सब होना...

सुप्रिया - पर यहाँ मेरे घर में क्यों?

करुणा के चेहरे पर हलकी सी हसी आ गयी - Didi...ek तोह आपके घर में दिन में कोई होता नहीं है... और दूसरा....

सुप्रिया - दूसरा क्या?

करुणा - पता नहीं क्या बात है पर यहाँ जब वह करता है तोह बोहोत hi जोश में करता है... शायद आपकी खुशबु रहती है न घर में..

सुप्रिया - क्या बकवास कर रही हो... काम बोलै करो थोड़ा सा... कुछ भी...

करुणा - माफ़ करो दीदी... और कहाँ जायेंगे... आप hi बताया न... हमारे घर आपके जैसे नहीं होते न... और यहाँ पर आप hi सबसे अचे लोग हो जिनके घर करते हुए डर नहीं लगता... बस यहीं किचन के बहार hi करते है... आपके बिस्तर या सोफे पर भी कभी नहीं किया...

सुप्रिया को लगा कहीं अभी पूरी कहानी hi न सुना दे की क्या क्या करते है - ाचा ठीक है ठीक है... फिर अब क्या करोगी...

करुणा ने अपना चेहरा मुरझाते हुए बोलै - आप जैसे बोले... आप बोलेंगी तोह नहीं करेंगे अब से यहाँ... फिर पता नहीं कैसे hi करेंगे... और तोह न उसका कोई न मेरा...

सुप्रिया दो मैं में थी, पता नहीं वह क्या करे. उसे ये लोग कुछ करके नुक्सान तोह नहीं पंहुचा रहे थे, पर कहीं न कहीं ये भी लग रहा था की बात अगर बहार आ गयी तोह दिक्कत न हो जाये. किसी दिन अतुल घर पर हुआ तोह?

सुप्रिया को यकीं hi नहीं हो रहा था अपने आप पर की वह ये बोल रही थी, पर शायद दो प्यार करने वालो को रोकना भी तोह गुनाह hi होगा - ाचा... अगर अब कभी करना हो तोह पहले मुझसे पूछ लेना..

करुणा खुश होते हुए बोली - सच दीदी!!! आप सच में बोहोत अचे हो... और अब आप परेशान मत होना.. भैया का इलाज मैं ढूंढ़ती हु..

सुप्रिया - ये भैया वाली बात सिर्फ हमारे बीच रेहनी चाहिए... किसी और को नहीं बोलोगी... इक़बाल को भी नहीं...

करुणा - दीदी... आप मुझे पर भरोसा कर सकते हो...

सुप्रिया सोचने लगी की पता नहीं कितना भरोसा कर सकती थी वह करुणा पर. उसने सोचा तोह था की वह करुणा को अब सब सच बता दे की ऐसे कोई प्रॉब्लम नहीं थी. पर फिर उसे लगा की ये जानकार न जाने करुणा उसके बारे में क्या सोचेगी, की उसने झूठ बोल कर करुणा से बात निकलवा दी. सुबह से दो झूठ तोह बोल hi चुकी थी सुप्रिया, अब पता नहीं क्यों उसके लिए झूठ बोलना और आसान होता जा रहा था.

थोड़ी देर बाद करुणा भी चली गयी और सुप्रिया थोड़ी देर जा कर मेघा से मिल ली. वह दोनों काफी दिनों बाद मिले थे, पर उसने मेघा हाल में हुई बातें कुछ ख़ास नहीं बताई. पता नहीं कौनसी बेकार सी सलाह दे दे वह इस बार, ये सोचते हुए, सुप्रिया ने बातें अपने तक hi रखना ठीक समझा. उसके बाद उसके फाइनली अतुल को मैसेज कर hi दिया की मेघा चली गयी है और वह वापस घर आ सकता है.

शाम होते होते सुप्रिया के अंदर काफी आग लगी हुई थी. पिछली रात अतुल ने अपना काम तोह निकलवा लिया था पर बदले में सुप्रिया को कुछ नहीं दिया था. सुप्रिया के मैं में एक पल के लिए ये तोह आया था की अतुल भी उसे नीचे छाते, पर उसने आज तक ये नहीं किया था सो वह अतुल को कुछ न बोल पायी. डिनर के बार उसने अपनी एक सेक्सी सी नाईट ड्रेस पेहेन ली ताकि अतुल भी अछि तरह मूड में आ जाये.

90.jpg


अतुल ने जैसे hi सुप्रिया को एक छोटी सी पिंक ड्रेस में देखा, वह भी पागल हो चला था. उसे देख कर उसके पूरी दिन की झुंझुलाहट एकदम से ख़तम हो गयी. वह झट से सुप्रिया को चूमता हुआ उसे पर टूट पड़ा.

सुप्रिया - ोुछः... आराम से... क्या कर रहे हो...

अतुल - आराम से करने के लिए तोह ये ड्रेस नहीं पहनी है शायद...

56.gif


अतुल ने सुप्रिया के ड्रेस उतारते हुए उसके गले और होंठों पर ज़ोर से किश किया. सुप्रिया के नंगे बदन पर अतुल के किश सुप्रिया की बेताबी बढ़ाते जा रहे थे. थोड़ी देर चूमने के बाद जैसे hi अतुल ने अपना लुंड सुप्रिया के अंदर डाला, सुप्रिया के अंदर करंट सा दौड़ गया. कितने दिनों बाद आज उसे ये पल मिला था. सुप्रिया ने अपनी टाँगे उठाते हुए अतुल को अचे से जकड लिया और वह दोनों थोड़ी देर ऐसे hi एक दुसरे को चूमते हुए सेक्स करते रहे. अतुल सुप्रिया के अंदर धक्के मार रहा था, और फिर थोड़े पल बाद उसने अपने आप को सुप्रिया के अंदर झाड़ा दिया.

36087.gif


सुप्रिया अपने क्लाइमेक्स तक तोह नहीं पहुंची थी पर इतने दिनों के बाद जो हुआ वह उसे ाचा लगा था. काश अतुल बस थोड़ी देर कर पाटा तोह वह अपने आप को पूरा संतुष्ट महसूस कर पाती. सब होने के बाद सुप्रिया को ये सोच कर हसी आने लगी की उसने आज करुणा को क्या बोल दिया था अतुल के बारे में. पता नहीं करुणा अब जब अतुल को देखेगी तोह क्या सोचेगी उसके बारे में. अतुल को पता चल गया तोह वह उसे मार hi डालेगा.

थोड़ी देर बाद दोनों एक दुसरे के बाहों में समाये सो गए.

संडे की सुबह भी सुप्रिया ने गाडी सीखने में लगायी और अब थोड़ी और प्रैक्टिस के बाद वह मैदान में आराम से गाडी चलने लगी थी. गियर भी अब थोड़े आराम से hi चेंज हो रहे थे. इक़बाल की बातों से लग रहा था की अगले हफ्ते से वह उसे रोड पर गाडी चलवाने वाला था. ये सोच कर सुप्रिया थोड़ा घबरा रही थी पर साथ hi एक्ससिटेड भी थी की उसे शायद अब जल्द hi गाडी चलना आ जाये. न hi इक़बाल ने कोई और बात छेड़ी न सुप्रिया ने, और सबकी भलाई भी शायद इसी में थी.

संडे का बाकी दिन भी ऐसे hi निकल गया और आखिर कार मंडे भी आ hi गया. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था जैसे पता नहीं वह कितने दिनों बाद ऑफिस जा रही हो. आखरी बार वह वेडनेसडे ऑफिस गयी थी और उसके बाद वह ट्रेड शो और फिर छुट्टी. ऑफिस जाने में थोड़ी सी हिचकिचात भी थी की जैसे लोगो को पता hi हो उस शाम होटल में क्या हुआ था. पर सुप्रिया अपनी घबराहट को शांत करते हुए ऑफिस पहुंच गयी.

ऑफिस में आज नार्मल से ज्यादा चहल पहल थी. सब लोग टाइम पर पहुंचे हुए थे और बड़े वाले मीटिंग रूम में आलरेडी काफी लोग िक्खता होना शुरू हो गए थे.

सुप्रिया ने अपनी सीट पर बैग रखा और कृति से पुछा - क्या हो रहा आज?

कृति - गुड मॉर्निंग… भैया ने एक मीटिंग राखी है सुबह… ओह हाँ मैं तोह भूल गयी थी तुम आउट थी फ्राइडे को. चलो.. चलते है…

सुप्रिया और कृति मीटिंग रूम की तरफ गए. उस 20 लोगो के रूम में 40 लोग पैक्ड थे, पर सुप्रिया और कृति को लोगो ने बैठने की जगह दे दी थी. सामने विक्रम सर खड़े थे और उनके बराबर में साहिल सर. शायद ये मीटिंग्स हर 2-3 महीने में होती थी, बस सुप्रिया के लिए पहली बार थी.

विक्रम सर ने बोलना शुरू किया - सॉरी एवरीवन, ये मीटिंग सुबह रखने के लिए, मुझे बस इसके बाद कहीं निकलना है. फर्स्ट ऑफ़ आल, ग्रेट जॉब एवरीवन!! सब इतना ाचा काम कर रहे है और हमारी सेल्स बस बढ़ती hi जा रही है, एंड ग्रेट दसिग्नस एंड क्वालिटी.

सब लोग विक्रम की बात सुन कर तालियां बजने लगे.

विक्रम - बूत थे वर्क इस नॉट दोने येत, एंड वे हैवे ा लॉन्ग वे तो जो. ग्रेट जॉब ात थे ट्रेड शो. वहां हमें मोरे थान 25 क्लाइंट लीडस् मिली है, आल थैंक्स तो थे 2 प्रीटी लेडीज (विक्रम ने सुप्रिया और कृति की तरफ इशारा करते हुए कहा)… एंड ऑब्वियस्ली आल्सो आकाश (विक्रम ने एक दबी हुई स्माइल से कहा)!

विक्रम सर के जोके पर लोग हसने लगे.

विक्रम - सो लेटस कन्वर्ट ठोस लीडस् एंड हेल्प ग्रो थिस कंपनी. साहिल सर सबको क्लाइंट असाइनमेंट्स समझा देंगे, एंड ी ऍम होपफ़ुल की वे विल दो ग्रेट!

क्लैपिंग के साथ मीटिंग ख़तम हुई और लोग वापस अपने डिस्कस पर जाने लगे. सुप्रिया पहले तोह डेस्क पर जाने के लिए मुड़ी, पर फिर वह वहीँ मीटिंग रूम में ठहर गयी. सब लोग, सिवाए विक्रम, साहिल और सुप्रिया के मीटिंग रूम से निकल चुके थे.

साहिल और विक्रम आपस में बात कर रहे थे जब उन्होंने देखा की सुप्रिया अभी भी वहीँ कड़ी थी.

साहिल - सुप्रिया, कुछ काम था तुम्हे?

सुप्रिया - नहीं सर… वह…

विक्रम - ारी हाँ… मैंने hi तोह सुप्रिया को बोलै था मीटिंग के बाद रुकने के लिए… वह उस वाले क्लाइंट आप इनको hi असाइन करना… आपसे hi उनकी बात हुई था न…

सुप्रिया - हांजी सर…

विक्रम - साहिल तुम चलो… मुझे सुप्रिया से क्लाइंट के बारे में समझना था…

साहिल ने हाँ में सर हिलाया और मीटिंग रूम से बहार चला गया.

सुप्रिया ने देखा जब वह दोनों अकेले है - सर… वह उस दिन.. मैं आपको अचे से थैंक यू भी नहीं बोल पायी थी… बस एहि कहना था…

विक्रम - किस दिन? किस चीज़ के लिए?

सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था विक्रम सर ऐसे क्यों बोल रहे है, वह तोह अछि तरह जानते थे की वह क्या कहना चाहती है.

विक्रम - तुम मुझे इसलिए तोह थैंक यू नहीं कर रही हो की मैं तुम्हे झांसी की रानी बोलकर इनसपिरे करता हूँ?

सुप्रिया - सर, नहीं, उसके लिए नहीं…

विक्रम - ओह तोह मैं आपको झांसी की रानी नहीं बोल सकता हूँ?

सुप्रिया - बोल सकते है सर… (कुछ सोचते हुए) एक्चुअली नहीं बोले तोह बेटर है… पर आप समझ रहे है न मैं क्या कह रही हूँ. पता नहीं आप मेरे बारे में क्या सोच रहे होंगे, एंड मैं कुछ क्लैरिफी भी नहीं कर पायी उस रात.

विक्रम - सुप्रिया डोंट वर्थिंक अबाउट आईटी… मैं तुम्हारे बारे में कुछ गलत नहीं सोच रहा हूँ... ी थिंक यू अरे ा वैरी गुड गर्ल... हो न गुड गर्ल?

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया.

विक्रम - चलो… ी ऍम गेटिंग लेट नाउ, सो ी हैवे तो लीव... बूत येह लेटस गेट तहत क्लाइंट...

सुप्रिया - सूरे सर, ी विल.

सुप्रिया मुस्कुराते हुए वापस अपनी सीट पर आ गयी. सामने कृति जैसे उसका इंतज़ार hi कर रही थी.

कृति - क्या हुआ? कहाँ रह गयी थी?

सुप्रिया - कुछ नहीं... वह विक्रम सर एंड साहिल सर मुझे क्लाइंट के बारे में बता रहे थे...

कृति - ाचा... कौनसे क्लाइंट पर वर्क करना है तुम्हे?

सुप्रिया - मुझे उस वाले क्लाइंट पर वर्क करने के लिए बोलै है..

कृति - ऊऊओह्ह्ह्ह ाचा.... वह काले गोर की जोड़ी....

सुप्रिया ये सुनकर हैरान सी हो गयी, उसे आईडिया hi नहीं था की उस वाला क्लाइंट है कौन - ओह, वह वाले....

कृति हस्ते हुए - हाँ मैडम वह वाले... जो आपके पीछे पद गए थे....

सुप्रिया - वही क्लाइंट देना था मुझे, उनको तोह देख कर भी अजीब लगता है...

कृति - अजीब या कुछ और?

सुप्रिया - मतलब?

कृति ने शरारत भरी नज़र से सुप्रिया को देखा और फिर फुसफुसाई - वह काले वाले को देख कर तोह मुझे कुछ वीडियोस याद आ जाती है...

सुप्रिया ने कृति को घूर कर देखा - तुम्हारा न दिमाग चल गया है.. कुछ भी बोलती हो.... चीटी

कृति - ारी इसमें क्या है... और तुम भी सच बोलो... तुमने नहीं देखि वह वीडियोस कभी? और उसको देख कर नहीं आया दिमाग में वह वाली वीडियोस?

सुप्रिया ने अपने कंप्यूटर की तरफ नज़र करते हुए कहा - नहीं मैंने कभी नहीं देखि... और न देखनी है...

कृति - झूठ! तोह फिर की क्यों बोलै...

दोनों एक दुसरे को देख कर हसने लगी...

सुप्रिया - ाचा वैसे उस दिन शाम को ाचा हुआ न मैं नहीं आयी तुम्हारे और आकाश के साथ...

कृति - क्या बोल रही हो... आकाश एंड में... नेवर...

सुप्रिया - रहने दो... मैंने देखा है हाउ यू लुक ात हिम...

कृति - नहीं बेब... सच... होता तोह मैं बता देती... बूत तेरे इस थिस कूल गाए ात माय गयम....

सुप्रिया - ओह ाचा... क्या नाम है... मिलवाया न मुझे उससे...

कृति के गाल लाल थे - अभी नहीं... पर होपफ़ुल्ली सून... वैसे ी गोत तो क्नोव की नेक्स्ट मंथ तुम्हारा बर्थडे है?

सुप्रिया खुद अपने बर्थडे के बारे में भूल गयी थी, इतना कुछ जो चल रहा था उसकी लाइफ में - हम्म्म्म.... हाँ शायद...

कृति - हाँ शायद क्या... बर्थडे सेलिब्रेशन तोह करेंगे hi... ी विल प्लान समथिंग...

सुप्रिया - ठीक है... पर अपने उस गयम वाले को भी लेकर आना...

कृति - No प्रॉमिसेस, इतस स्टिल तू अर्ली... बूत ी विल तरय...

सुप्रिया - चलो अब काम कर ले... नहीं तोह साहिल सर बोलेंगी की इन दोनों को बात करने के इलावा कुछ काम hi नहीं है...

सुप्रिया बस अब एक hi चीज़ चाहती थी, की वह विक्रम सर के लिए उस क्लाइंट से आर्डर फाइनल करवाना. वह इस काम के लिए अपनी पूरी म्हणत लगाने को तैयार थी. उधर अतुल भी अब असिस्टेंट ब्रांच मैनेजर की पोस्ट पर काफी बिजी हो गया था. अगला महीने उन दोनों के लिए hi काफी बिजी जाने वाला था, और दोनों के लिए एक दुसरे के लिए और भी काम टाइम हो गया था. और एहि चीज़ कैसे उनकी पूरी जिंदगी बदल देगी, उन दोनों को hi बिलकुल भी आईडिया नहीं था.
 
अपडेट 39

सुप्रिया ऑफिस में बैठी सोच रही थी की पिछले एक महीना कैसे निकला पता hi नहीं चला. पिछले एक महीने से सुप्रिया ऑफिस में अक्सर देर रात तक रुक कर उस वाले क्लाइंट से बात कर रही थी, ताकि वह उन्हें एक परचेस आर्डर दे सके. ज्यादातर उसकी बातचीत उनके गोर परचेस मैनेजर - डनण्य से होती थी, जो स्वाभाव से बहुत hi ाचा था और अपनी कंपनी की डिटेल्ड रिक्वायरमेंट्स बहुत अचे से बताता. उसके ऐसा करने से सुप्रिया का काम थोड़ा आसान हो गया था और सुप्रिया ने उन्हें कुछ सैम्पल्स भी भिजवा दिए थे. पर आखिरी अप्रूवल तोह उसके बॉस, उस काले, माइक का लग्न था. पर अब तक सुप्रिया की बात उससे नहीं हो पायी थी, जो सुप्रिया के लिए काफी फ़्रस्ट्रेटिंग था. पर जब भी विक्रम सर से इस बारे में बात होती, वह उसको पेशेंस रखने की सलाह देते.

घर पर भी अतुल अब 5 की जगह 6 दिन ऑफिस जाता था, कभी कभी तोह सातो दिन भी… और रात को भी देर देर तक घर आता था. मर सक्सेना, ब्रांच मैनेजर कुछ दिनों से किसी पर्सनल रीज़न से छुट्टी पर चल रहे थे, तोह पूरे ब्रांच की जिम्मेदारी एक तरह से ुनोफ़्फ़िसलली अतुल के कंधो पर आ गयी थी. अतुल को अभी एक ब्रांच चलने का एक्सपीरियंस नहीं था पर वह इस मौके को जवना नहीं चाहता था, तोह वह भी दिन रात एक करने में लगा हुआ था. अक्सर अतुल रात को भी घर आकर काम hi कर रहा होता था और उसके पास अब सुप्रिया के लिए कोई टाइम नहीं होता था. सुप्रिया खुद थकी हुई घर आ रही थी तोह वह अतुल से भी क्या hi शिकायत करती.

सुप्रिया की ड्राइविंग भी थोड़ी आगे तोह पहुंची थी, और उसने अब रोड पर गाडी चलना शुरू कर दिया था, पर उसे अभी भी रोड पर गाडी चलने में काफी डर लगता था. Ek-do बार तोह वह शनिवार की सुबह इतनी थकी हुई होती थी की वह ड्राइविंग का प्लान hi कैंसिल कर देती थी. पर इक़बाल की तरफ से सुप्रिया को गाडी सीखने के लिए कोई कमी नहीं थी, वह तोह जब बोलो तब हाज़िर था. इस दौरान, करुणा अब तक तोह सुप्रिया के पास एक बार भी उनके घर पर सेक्स करने की इज़ाज़त लेने नहीं आयी थी, और न hi सुप्रिया ने वह बात दुबारा छेड़ी थी.

और आज सुप्रिया के बर्थडे के दिन भी, उसने नहीं सोचा था वह ऑफिस में बैठी काम कर रही होगी. फ्राइडे का दिन था और दिन के 3 बजने को आये थे. आस पास काफी लोग अपने डेस्क से गायब थे, कृति भी काफी देर से hi गायब थी. सुप्रिया को बैठे बैठे ये सोच कर गुस्सा आ रहा था की उसे क्यों अपने बर्थडे वाले दिन भी काम करना पद रहा है, जबकि दूसरी लोगो को तोह काम hi कुछ पड़ी hi नहीं है. उसने छूती लेने का सोचा था पर जब अतुल खुद ऑफिस में बिजी था तोह वह छुट्टी ले कर क्या hi करती. शादी के बाद का पहला बर्थडे और उस पर भी अतुल पूरा दिन ऑफिस में बिजी.

बस सुबह से घर वालो के मेस्सगेस आये जा रहे थे जिसमे उसे कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं रह गयी थी. आज इतने दिनों बाद उसे राहुल का भी ख्याल आया, उसने भी तोह उसे हैप्पी बर्थडे विश नहीं किया था, पर एंड शायद वह तोह जानता भी नहीं होगा की आज उसका बर्थडे है.

थोड़ी देर बाद कृति हड़बड़ाती हुई सी सुप्रिया के पास आयी - सुप्रिया! एक बड़ी गड़बड़ हो गयी है.

सुप्रिया चौंकते हुए - क्या हुआ?

कृति - साहिल सर ने मीटिंग रूम में बुलाया है, सेल्स की फाइल्स देते हो गयी है, लगता है पूरी रात लगेगी इसे ठीक करने में…

सुप्रिया को बहुत गुस्सा आ रहा था, आज उसके बर्थडे वाले दिन hi ये सब होना था. एक तोह वह इतने अचे से तैयार हो कर आयी थी की क्या पता ऑफिस में उसका बर्थडे सेलिब्रेट हो, पर यहाँ तोह बस काम hi काम था. क्या फायदा ऐसी जॉब का जो एक दिन भी आराम न लेने दे - ओफ्फो... क्या यार... ाचा चलो... देखते है...

मीटिंग रूम तक पहुंचने में जो कुछ सेकंड लगते है उसमे सुप्रिया ने सोच लिया था की साहिल सर क्या बोलने वाले थे और कैसे उन्हें फरक नहीं पड़ेगा की आज सुप्रिया का बर्थडे था या नहीं. कृति और सुप्रिया जल्दी से मीटिंग रूम पहुंचे, पर दरवाज़ा खोलते hi सुप्रिया तोह बिलकुल सुप्रिसेंड हो गयी. अंदर 10-15 लोग पहले से मजूद थे और रूम अछि तरह डेकोरेटेड था. बीच में एक प्यारा सा केक रखा हुआ था.

सुप्रिया के दरवाज़ा खोलते hi सबने हैप्पी बर्थडे गाना शुरू कर दिया. सुप्रिया को इस सुप्रिसे की जरा भी उम्मीद नहीं थी. उसने मीटिंग रूम में नज़रे दौड़ाई तोह लोगो में विक्रम सर और साहिल सर भी थे. सुप्रिया वहीँ दरवाज़े पर hi रुक गयी और उसके चेहरे का पूरा एक्सप्रेशन hi चेंज हो गया. कृति उसे पीछे से धकेलती हुई अंदर ले कर आयी. सुप्रिया ने कृति को पलट कर देखा जैसे उससे पूछ रही हो की ये डाब तुम्हारी कारस्तानी थी न.

कृति ने सुप्रिया के हाथ में एक नाइफ पकड़ाया और केक पर एक कैंडल्स जलाते हुए सुप्रिया को केक काटने का इशारा किया.

45.jpg


हैप्पी बर्थडे तो यू, हैप्पी बर्थडे तो यू, हैप्पी बर्थडे डिअर सुप्रिया…. इस गाने के बीच सुप्रिया ने केक काटा. कृति ने केक का एक पीेछे उठा कर सुप्रिया को खिला दिया, और थोड़ा सा उसके गाल पर लगा दिया. फिर आकाश ने भी ऐसे hi किया और दुसरे गाल पर केक लगा दिया.

विक्रम ने केक का एक पीेछे सुप्रिया के सामने लाते हुए उससे परमिशन सी मांगी - सुप्रिया… हैप्पी बर्थडे.. मई ी तू?

सुप्रिया ने विक्रम को एक बड़ी सी स्माइल दी - थैंक यू सर! यस, सूरे…

विक्रम ने केक का एक छोटा सा पीेछे सुप्रिया के मुँह में डालते हुए उसे खिला दिया. सुप्रिया ने भी केक का एक पीेछे लिया और उन्हें खिला दिया.

सुप्रिया ने साइड में खड़े साहिल सर की और देखा - साहिल सर… ये लीजिये आप भी

सुप्रिया ने उनको भी केक खिलने के लिए हाथ बढ़ाया पर उन्होंने सुप्रिया के हाथ से केक लेते हुए अपने हाथ से केक खा लिया.

विक्रम - सुप्रिया... आज के दिन भी तुम ऑफिस में... आज तोह तुम्हे लीव ले लेनी चाहिए थी... साहिल सर ने मन कर दिया क्या.

सुप्रिया - नहीं सर, ऐसा कुछ नहीं... मैंने खुद hi छुट्टी नहीं ली, सोचा तोह था मैंने... पर आज कल मेरे हस्बैंड अतुल भी काफी बिजी चल रहे है... तोह क्या फायदा घर पर अकेले बैठना का...

विक्रम - हाँ... ी हर्ड... मर अतुल शर्मा इस ा बिजी मन नाउ... बूत चलो उसका लोस्स हमारा गेन है...

सुप्रिया - क्या मतलब सर?

विक्रम - मतलब की इस बहाने आप हमारे साथ तोह बर्थडे सेलिब्रेट कर पायी.

सुप्रिया ने कृति की और देख कर बोलै - कृति… तुमने प्लान किया था ये सरप्राइज…

कृति - हाँ… हु ेल्स… साहिल सर तोह करेंगे नहीं न…

सुप्रिया - और वह सब फाइल डिलीट वाला नाटक… यू अरे जस्ट तू गुड…

कृति हस्ते हुए - है है, मुझे तोह बॉलीवुड चले जाना चाहिए…

सुप्रिया - थैंक यू सो मच यार! तुमने मेरा खराब सा दिन, इतना ाचा कर दिया न...

कृति - ये थैंक यू से काम नहीं चलेगा.. इसके बाद हम लोग पार्टी करने जा रहे है…

सुप्रिया - नहीं बाबा… मैं कहाँ जयुंगी पार्टी करने…

कृति - के ों यार, आज फ्राइडे भी है वैसे भी… भैया आप hi समझायो न इसे.

विक्रम - ी थिंक यू शुड जो एंड एन्जॉय योर बर्थडे सुप्रिया… वैसे भी यू साइड अतुल इस बिजी राइट...

सुप्रिया - आप भी चल रहे है सर?

विक्रम - ी वोउल्ड हैवे लव्ड तो, बूत आज कुछ काम है…

सुप्रिया - आप तोह हमेशा hi बिजी रहते है, कभी हम लोगो के लिए भी टाइम निकलना चाहिए आपको.

विक्रम - नेक्स्ट टाइम पक्का, आप लोगो के लिए ढेर सारा टाइम निकालूंगा.

ऑफिस की सेलिब्रेशन के बाद सुप्रिया वापस अपने डेस्क आयी और वहां उसे एक छोटा सा बैग दिखा. उसने उसे खोला तोह उसमे एक छोटा सा जेवेलरी बॉक्स था जिसमे एक चैन पेंडंट था और साथ में विक्रम सर से एक नोट.

हैप्पी बर्थडे तो ा ब्यूटीफुल यंग लेडी

सुप्रिया को गिफ्ट काफी ाचा लगा, और वह उसे देखती रह गयी. उसने बॉक्स को अपने बैग में रखा और इधर उधर विक्रम सर को थैंक यू बोलने के लिए ढूंढ़ने लगी, पर वह कहीं नहीं दिखे.

तभी कृति वहां आयी - चलो... लेटस गेट आउट ऑफ़ हेरे... यू, में एंड आकाश गोइंग टुगेदर, इन Akash's कार. और बाकी कुछ लोग बाद में आएंगे.

सुप्रिया - तुम्हारा वह गयम वाला बाँदा भी आ रहा है न?

कृति के गाल ब्लश करते हुए लाल हो गए - हाँ, मैंने उसे इन्विते तोह किया है, एंड हे साइड वह आएगा, बूत लेटस सी आता है या नहीं.

कृति और सुप्रिया दोनों साथ में एक रेस्टोरेंट की तरफ निकल पड़े. वहां पहुंच के सुप्रिया ने देखा की ये तोह काफी महंगा रेस्टोरेंट था जिसमे छत पर एक बार भी था जहाँ दारु भी सर्वे हो रही थी.

सुप्रिया - कृति... ये कहाँ आ गए हम... काफी महंगी जगह लग रही है...

कृति - डोंट वोर्री... ी विल मैनेज एवरीथिंग...

सुप्रिया - ारी पर... इतस माय बर्थडे न... सो तुम क्यों...

कृति - ाचा वे विल सॉर्ट आईटी आउट लेटर, अभी तुम बस एन्जॉय करो.. ाचा वह रहा वहां पर मेरा गयम वाला, बिलकुल तुम्हारी तरह वह भी हिचकिचा रहा था यहाँ आने में, इतना कन्विंस करना पड़ा न उसे...

सुप्रिया ने बार की तरफ देखा और उस आदमी की शकल भीड़ में साफ़ नहीं दिख रही थी, पर पता नहीं क्यों वह जाना पहचाना सा hi लग रहा था. कृति सुप्रिया का हाथ पकड़ कर उसे बार की तरफ ले गयी.

कृति - राहुल... मीट थे बर्थडे गर्ल....

राहुल - Hi.... सुप्रिया... तुम यहाँ??

सुप्रिया देख कर हैरान रह गयी की कृति का गयम वाला कोई और नहीं राहुल hi था. उसने तोह सपने में भी नहीं सोचा था की कृति का बॉयफ्रेंड कोई और नहीं राहुल निकलेगा. उसे समझ hi नहीं आ रहा था ये क्या हुआ था.

कृति - ओह, तुम सुप्रिया को जानते हो पहले से...

राहुल के तोह जैसे मुँह पर ताला hi लग गया था. और सुप्रिया भी सोच रही थी की वह अब क्या समझाए कृति को की पूरी दुनिया के सारे लड़को में उसे एहि लड़का मिला था बॉयफ्रेंड बनाने के लिए.

राहुल - हाँ वह... सुप्रिया और मैं..... मैं और सुप्रिया...

सुप्रिया - मेरे हस्बैंड और राहुल एक hi कंपनी में काम करते है…

कृति - ओह ाचा!! वाओ, व्हाट ा कोइंसिडेन्स... इतस सुच ा स्माल वर्ल्ड...

सुप्रिया - हाँ... कभी सोचा नहीं था तुम्हारा गयम वाला राहुल निकलेगा.

सुप्रिया ने राहुल की और देखा, वह उससे आखरी बात दो ढाई महीने पहले मिली थी, जब वह उसके घर गयी थी और फिर राहुल ने उसे ड्राप किया था. इन दो महीनो में ऐसा लग रहा था की राहुल ने अपनी पिसीके और भी अछि कर ली हो और वह काफी ज्यादा हैंडसम लग रहा था.

कृति के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान थी और उसने राहुल का हाथ पकड़ लिया. ये देख कर सुप्रिया को पता नहीं क्यों थोड़ा अजीब सा लग रहा था.

कृति - Ok लेटस ग्रैब ा सीट… मैं 2 मीन्स में आती हु.

कृति, सुप्रिया और राहुल को अकेला छोड़ कर चली गयी और वह दोनों चुप चाप एक दुसरे के सामने खड़े थे. इस चुप्पी को राहुल ने hi कुछ बोल कर तोड़ी.

राहुल - हैप्पी बर्थडे सुप्रिया, मुझे पता नहीं था तुम्हारा बर्थडे है आज.

सुप्रिया - थैंक यू….

राहुल - मुझे ये बिलकुल भी नहीं पता था की कृति और तुम एक hi ऑफिस में काम करते हो…

सुप्रिया - ओह ाचा… वैसे काफी फ़ास्ट हो तुम.

राहुल - क्या मतलब?

सुप्रिया - एहि की कल तक मुझसे प्यार की बातें कर रहे थे और अब इतनी जल्दी कृति जैसी लड़की को भी पता लिया…

राहुल - सुप्रिया ऐसा कुछ नहीं… कृति और मैं बस फ्रेंड्स है…

सुप्रिया - कृति की बातों से तोह ऐसा नहीं लगता… पर वैसे मुझे कोई फरक नहीं पड़ता.

राहुल - कृति को तुम जानती hi होगी… वह ओवर एक्ससिटेड रहती है हमेशा…

सुप्रिया - हम्म्म्म… काफी स्वीट गर्ल है वह… उसके साथ कुछ ऐसा वैसा….

राहुल - नहीं… कभी नहीं… सुप्रिया मैं अभी भी….

राहुल की बात पूरी होने से पहले कृति और बाकी लोग वहां आ गए थे. कृति ने सबके लिए ड्रिंक्स और खाना आर्डर किया. सब लोग खाने और पीने लग गए. पर सुप्रिया का ध्यान तोह बार बार बस राहुल और कृति पे जा रहा था जो साथ साथ बैठे थे, और कृति उस पर अपना पूरा हक़ जाता रही थी. कृति का स्वीट नेचर hi आज उसे बहुत खटक रहा था.

कृति ने सुप्रिया को नार्मल से ज्यादा चुप बैठे देखा तोह वह खुद को रोक न सकीय - सुप्रिया, आज तुम्हारा बर्थडे है, और तुम हो की इतनी बोरिंग तरह से बैठी हो. आज तोह तुम्हे भी ड्रिंक करना पड़ेगा…

सुप्रिया - नहीं यार, मैंने कभी ड्रिंक नहीं किया है….

कृति - प्लीज प्लीज बस आज एक बार…. मेरे लिए...

सुप्रिया - ाचा मैं देखती हूँ….

कृति ने काफी जिद्द करने पर सुप्रिया ने आखिर एक ड्रिंक शॉट पि hi लिया. ड्रिंक अंदर जाते hi एक बार तोह सुप्रिया का तोह पूरा दिमाग hi हिल गया. सब कुछ अलग सा लग रहा था, जैसा सुप्रिया ने पहले कभी महसूस न किया हो. दिमाग को समझ hi नहीं आ रहा था क्या ऊपर है क्या नीचे, क्या सही है क्या गलत.

सुप्रिया सब को देख कर स्माइल कर रही थी खासकर कृति और राहुल को देख कर. कृति ने राहुल का हाथ पकड़ा और उसे डांस फ्लोर की तरफ ले गयी. सुप्रिया भी आकाश का हाथ पकड़ कर डांस फ्लोर की तरफ चली गयी. पर सुप्रिया की नज़र तोह सिर्फ राहुल और कृति पर hi तिकी थी. उसने देखा किस तरह राहुल ने अपना हाथ कृति की कमर पर डाला और फिर उसके साथ डांस करने लगा. दोनों काफी क्लोज हो कर डांस कर रहे थे, एक दुसरे से बिलकुल सटे हुए. और दूसरी तरफ आकाश और सुप्रिया पास खड़े डांस फ्लोर पर हल्का हल्का हिल रहे थे. आकाश सुप्रिया से थोड़ी सी दूरी खुद hi बनाये खड़ा था.

राहुल और कृति को डांस करता देख, सुप्रिया को जैसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. थोड़ी देर बाद सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की जैसे पूरा फ्लोर hi घूम रहा हो और वह वापस जा कर बैठ गयी. वहीँ उसके सामने कुछ ड्रिंक शॉट्स बने रखे थे और उसके एक और उठा कर पी लिया. ये दूसरा शॉट पहले वाले जितना असर तोह नहीं किया और सुप्रिया ने एक और शॉट उठा कर पी लिया. उसकी आँखों के सामने सब कुछ धुंदला सा हो चला था.

जब कृति और राहुल वापस आये तोह सुप्रिया टेबल पर सर रख कर लेती हुई थी.

कृति - लगता है इसको शॉट का असर हो गया… पर एक शॉट से तोह ऐसा नहीं होता…

राहुल - उसने कभी ड्रिंक नहीं किया है न आज से पहले, और शायद एक नहीं कई शॉट्स लगा लिए है…

कृति - ओह सहित… सॉरी यार… मेरी गलती है... उसको फाॅर्स नहीं करना चाहिए था..

राहुल - अब जो हुआ सो हुआ, मैं इसे घर ड्राप कर देता हूँ, कोई बात नहीं.

कृति - इसका हस्बैंड गुस्सा करेगा, इसे इस हालत में देखेगा तोह...

राहुल - पर क्या कर सकते है?

कृति - ऐसा करते है मेरे घर चलते है, आज वहां कोई नहीं है, सुबह फ्रेश उप करके इसको ड्राप कर देंगे?

राहुल - पर अतुल को बताना पड़ेगा न…

कृति - मैं कॉल करती हु उसे...

राहुल - क्या बोलोगी उसे?

कृति - वह तुम मुझ पर छोड़ दो... तुम्हारे पास नंबर है उसका?

कृति ने राहुल से अतुल का नंबर लिया और फिर उसे फ़ोन करने साइड में चली गयी. थोड़ी देर बाद वह मुस्कुराती हुई सी वापस आयी.

कृति - मेरी बात हो गयी है अतुल से, एंड मैंने बोल दिया की सुप्रिया मेरे यहाँ स्टे कर रही है...

राहुल - क्या बोलै तुमने उसे और वह मान कैसे गया?

कृति - एहि तोह मेरा कमाल है... तुम नहीं समझोगे.. चलो अभी... मैडम को लेकर चलते है.. आकाश, हम लोग सुप्रिया को अपने साथ ले जा रहे है... राहुल मुझे ड्राप कर देगा.

आकाश ने हाँ में सर हिलाया और वापस डांस फ्लोर पर चला गया. उधर कृति और राहुल ने सुप्रिया को सहारा देते हुए उसे राहुल की कार तक ले गए. कृति ने राहुल को अपने घर का रास्ता बताया और वह उसके घर की और चल पड़े. आगे ड्राइवर सीट पर राहुल बैठा हुआ, और साथ में कृति. पीछे सीट पर सुप्रिया लेती हुई, आधे होश में और आधी बेहोश.

कृति - ी फील सो बाद मैंने सुप्रिया को प्रेशर किया ड्रिंक के लिए...

राहुल - ठीक है... पर ड्रिंक भी तोह उसने किया न... इसमें तुम्हारी क्या गलती है...

कृति - फिर भी... दो यू क्नोव सुप्रिया वैरी वेल?

राहुल - नहीं... ज्यादा ख़ास नहीं... मैंने बताया न मेरे फ्रेंड की वाइफ है, तोह कभी कभी hi मिलना होता है...

सुप्रिया को अपने कानो में आधे अधूरे शब्द सुनाई दे रहे थे, पर जो भी सुनाई दे रहा था उसे ाचा नहीं लग रहा था.

कृति - हे, मेरे पेरेंट्स घर पर नहीं है... तुम भी रुक जायो न रात को...

राहुल - मैं क्यों रुक जायु वहां?

कृति - प्लीज प्लीज... थोड़ा सा हैंग आउट करेंगे न साथ में...

राहुल - अब तुम मुझे प्रेशर कर रही हो...

कृति हस्ते हुए - तुम्हे तोह प्रेशर कर hi सकती हूँ न...

कृति ने चलती कार में hi अचानक राहुल के गाल पर किश कर दी.

राहुल - क्या कर रही हो एक्सीडेंट हो जायेगा..

कृति - हो जाने दो... ी डोंट केयर...

कृति ने फिर से राहुल के पास आ कर उसे एक और किश करि - अब अगर नहीं रुकोगे तोह मैं समझ जयुंगी...

राहुल - क्या समझ जायेगी?

कृति ने बनावटी गुस्से में कहा - बस एहि की तुम मुझे बिलकुल भी लिखे नहीं करते...

राहुल - ये तोह सच नहीं है, तुम भी जानती हो... (राहुल ने कृति के और देखा और वह तस से मास नहीं होने वाली थी) तुमसे कोई जीत नहीं सकता न...

कृति - नेवर!

राहुल ने कार कृति के घर के बहार पार्क करि, और दोनों सुप्रिया को सहारा देते हुए उसे घर के अंदर ले गए. फाइनली वह एक बैडरूम में पहुंचे जहाँ उन्होंने सुप्रिया को एक बीएड पर लिटा दिया. सुप्रिया आधी जगी हुई और आधी सोई हुई थी. शॉट का नशा अब थोड़ा थोड़ा काम हो रहा था पर वह अब जानना चाहती थी की राहुल और कृति के बीच क्या कुछ चल रहा है, तोह उसने अपनी आँखें बंद hi राखी और सोने का नाटक किया.

545.jpg


कृति - लगता है मैडम तोह अब सुबह से पहले नहीं जागने वाली.

राहुल - तोह फिर क्या करे?

कृति राहुल के नज़दीक आयी और राहुल से लिपट कर उसे किश करने लगे. राहुल ने उसका चेहरा पकड़ते हुए ज़ोर से किश किया.

45.gif


राहुल - यहाँ नहीं... प्लीज... सुप्रिया जग गयी तोह...

कृति - नहीं जागेगी... और जग भी गयी तोह क्या...

पर राहुल अभी भी सुप्रिया की और hi देख रहा था, जैसे वह जगी hi हुई हो. जब राहुल को लगा की सुप्रिया नहीं जगी हुई है, राहुल ने कृति को अपनी बाँहों में लपेटे हुए अपनी गोदी में उठाया और उसके होंठों को चूसने लगा.

राहुल - दुसरे रूम में चले क्या?

कृति ने शरारत भरी आवाज़ में कहा - इतनी जल्दी क्या है....

पर राहुल तोह अब बुरी तरह बेचैन हो चूका था, उसने कृति के गाल काटने शुरू कर दिए, और कृति ज़ोर ज़ोर से हसने लगी. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था जैसे वह उस पर hi है रहे हो. कृति ने राहुल की शर्ट के बटन खोलने शुरू किया और उसकी छाती को पागलो की तरह चूमने लगी. सुप्रिया बीच बीच में हलकी सी आँख खोल कर सब देखने की कोशिश कर रही थी.

कृति - ी लव यू सो मच राहुल....

राहुल के हाथ भी अब बेकाबू हो चुके थे - ी लव यू तू कृति...

ये सुनकर तोह सुप्रिया का मैं कर रहा था की अभी कड़ी हो कर ये सब रुकवा दे, पर वह अब देखना चाहती थी की राहुल कहाँ तक जायेगा.

राहुल ने कृति को नीचे से पकड़ते हुए उठाया और उसकी पीठ को दीवार पर लगते हुए उसे जोर जोर से किश करने लगा. कृति ने भी अपने हाथ राहुल के गले पर डालते हुए उसे वापिस किश करने लगी.

45.webp


राहुल फिर कृति को ऐसे उठाये हुए दुसरे कमरे की और ले गया और सुप्रिया को और कुछ नहीं दिख रहा था. बस आवाज़ें आ रही थी. सुप्रिया थोड़ी देर ऐसे hi बीएड पर लेती रही की कहीं वह वापस न आ जाये, पर शायद कोई भी वापस नहीं आने वाला था. सुप्रिया से अब और रहा नहीं गया और वह धीरे धीरे चुप चाप कमरे के दरवाज़े तक गयी. उसे राहुल और कृति के खिलखिलाने की आवाज़ें आ रही थी. वह धीरे धीरे उन आवाज़ों की तरफ अपने कदम बढ़ती रही.

एक कमरे के बहार पहुंच कर उसे वह आवाज़ें और तेज़ सुनाई दे रही थी, सो उसे यकीं हो गया था की वह लोग उस कमरे में है. उसने बिना किसी आवाज़ किये कमरे के बहार की साइड से कमरे में झाँका, राहुल और कृति बीएड पर लेते हुए थे, राहुल कृति के ऊपर. वह दोनों एक दुसरे में इतने खोये हुए थे की उन्हें बहार एक कोने से झाँक रही सुप्रिया का पता hi नहीं चला.

453.webp


राहुल ने कृति की ड्रेस को नीचे खींचते हुए उसके बूब्स को चूसने लगा. कृति के मुँह से ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ निकल रही थी और राहुल पूरे जोश में उसके बूब्स चूसने में लगा हुआ था.

36068.gif


जो चीज़ आज तक सुप्रिया ने राहुल को नहीं करने दी आज कितने आराम से कृति उसे वह सब करने दे रही थी. सुप्रिये ये देख कर काफी हैरान थी की ऑफिस में स्वीट दिखने वाली लड़की ऐसे किसी मर्द के साथ कितना खुल के सब कर रही थी. शायद उसे ये पहले hi समझ जाना चाहिए था की कृति किस टाइप की लड़की है. उसे इस टाइम कृति पर बेहद गुस्सा आ रहा था.

इतने में राहुल ने कृति की ड्रेस उतारते हुए उसे पूरा नंगा किया, और खुद के कपडे भी उतार दिए. राहुल ने उसे अपने नीचे लिटाते हुए फिर से उसके ऊपर छड्ड गया. दोनों के नंगे बदन एक दुसरे से टकराते हुए. राहुल फिर से कृति के बूब्स पर टूट पड़ा और उन्हें अपने दांतों से काटने लगा. कृति भी राहुल की पीठ को जकड़े हुए पागल होती जा रही थी.

689.gif


सुप्रिया को उनकी आवाज़ साफ़ नहीं सुनाई दे रही थी, और कृति भी उतना hi एन्जॉय कर रही थी जितना राहुल. राहुल ने कृति के अंदर अपना लुंड डालते हुए उसे फ़क करना शुरू किया. सुप्रिया वहीँ बहार दीवार का सहारा ले कर कड़ी हो गयी और ये सब देखने लगी. थोड़ी देर बाद राहुल ने कृति को उल्टा किया और उसे पीछे से पकड़ कर फ़क करने लगा. राहुल कृति के ऊपर छडा हुआ उसे तेज़ी से फ़क करने लगा. कृति की ज़ोर ज़ोर के चीखे अब सुप्रिया को अचे से सुनाई दे रही थी.

36108.gif


सुप्रिया ने जितना तमाशा देखना था देख लिया था. उसने अपने शरीर को किसी तरह से सहारा देते हुए वापस पहले वाले रूम में गयी और वहां बीएड पर लेट गयी. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे. आज उसके बर्थडे के दिन काफी ाचा hi तोहफा दिया था राहुल से उसे. राहुल उसका कुछ था तोह नहीं, पर उसे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उससे आज कुछ छीन लिया हो. िनी बहते हुए आंसू और घुमते हुए सर से थक कर बीएड पर सो गयी.
 
अपडेट 40

सुबह जब सुप्रिया की आँख खुली तोह कमरे में काफी रौशनी हो चुकी थी. उसने घडी में टाइम देखा तोह 9 बज चुके थे, वह काफी ज्यादा देर तक सो गयी थी. सुप्रिया का सर अभी भी काफी भरी था, और किसी तरह से अपने आप को खड़ा किया. सुप्रिया ने अपना फ़ोन चेक किया तोह उस पर अतुल के 2-3 मिस्ड कॉल थी.

सुप्रिया ने जल्दी से अपने कपडे ठीक किये और बहार की तरफ आयी. बहार आ कर उसे दिन में घर और साफ़ साफ़ दिखने लगा. वह उस कमरे के सामने से भी गुज़री जिस में उसने कृति और राहुल को सेक्स करते देखा था. उसने वहां अंदर झाँक कर देखा तोह कोई नहीं था, बस वह बीएड अभी भी ास्ट व्यस्त पड़ा था. रात की बात याद आते hi सुप्रिया का गुस्सा फिर से चढ़ने लगा था. उसे राहुल ने ऐसी उम्मीद नहीं थी की वह कृति के साथ सब कुछ कर लेगा. पता नहीं वह उससे कोई भी उम्मीद करके भी क्यों बैठी थी.

वह थोड़ा और बहार आयी तोह ड्राइंग रूम में उसे कृति और राहुल दिखाई दिए. राहुल ने अपनी टीशर्ट ऊपर करि हुई थी और कृति झुक कर उसके एबीएस को छू रही थी. सुप्रिया को सुबह सुबह ये सब नहीं देखना था और वह वापस मुद hi रही थी की राहुल ने उसे देख लिया.

राहुल ने अपनी टीशर्ट नीचे करते हुए कहा - सुप्रिया... तुम जग गयी...

कृति - गुड मॉर्निंग... कैसा फील कर रही हो...

सुप्रिया ने किसी तरह से अपना गुस्सा दबाते हुए कहा - नॉट सो गुड... पता नहीं क्यों ड्रिंक करि मैंने रात को...

कृति - It's ok यार... फर्स्ट टाइम तहत तुम्हारा... (उसने फिर शरारत से राहुल की और देखा) .... पर मेरा नहीं..

राहुल ने कृति की और पलट कर देखा - क्या मतलब??

कृति हसने लगी - कुछ नहीं कुछ नहीं... जस्ट किडिंग...

सुप्रिया उन दोनों के देख रही थी, वह क्या hi बोलती उनके बीच में. पर कुछ तोह बोलना hi था - कैसी रही तुम लोगो की नाईट?

कृति - हम लोग तोह सो भी नहीं....

राहुल ने कृति की बात को बीच में काटते हुए कहा - हम लोग भी सो गए थे थोड़ी देर बाद... बस तुम्हारा hi वेट कर रहे थे जागने का...

सुप्रिया ने मैं hi मैं सोचा की वह इतनी भी बेवक़ूफ़ नहीं थी की उसे पता न हो की उनके बीच क्या कुछ चल रहा था. पता नहीं राहुल उससे क्यों सब छुपाने में लगा था.

सुप्रिया - मुझे चलना चाहिए यार... काफी लेट हो गया... अतुल भी कॉल कर रहे थे...

कृति - अतुल को मैंने बता दिया था और तुम्हारी स्लीप करते हुए की पिछ भी भेज दी की कहीं उसे मुझ पर यकीं न हो... अभी आराम से ब्रेकफास्ट करते है न...

सुप्रिया - ओह ाचा... थैंक्स. कभी और कर लुंगी प्लीज ब्रेकफास्ट, अभी मुझे निकलना है...

राहुल - मैं तुम्हे ड्राप कर देता हूँ सुप्रिया...

सुप्रिया ने उसकी और बिना देखे बोलै - मैं चली जयुंगी...

कृति - ारी तुम्हारी शकल से लग रहा है तहत यू स्टिल हैवे ा हैंगओवर. लेट राहुल ड्राप यू न...

राहुल - हाँ, मैं भी बस निकल hi रहा था... और यहाँ ऑटो भी नहीं मिलेगा आराम से..

सुप्रिया - ाचा ठीक है... चलो.. पर अभी चलना पड़ेगा...

राहुल - हाँ... अभी चलते है...

कृति ने सुप्रिया को पास आकर हुग किया. सुप्रिया उससे गले तोह नहीं लग्न चाहती थी पर वह उसे किस तरह मन करती. कृति ने राहुल को bye बोलै और सुप्रिया और राहुल दोनों बहार उसकी गाडी में आ गए. सुप्रिया चुप चाप आगे की सीट पर बैठ गयी जहाँ वह कई बार पहले राहुल के साथ बैठी थी, और उन लोगो ने किश वैगेरा भी किया था. पर आज उसे ये सीट अपनी नहीं लग रही थी, उसे ऐसा लग रहा था जैसे वह कृति की सीट पर बैठी हो. उसे वहां बैठते hi कल रात की कार की बातें भी हलकी हलकी याद आने लगी.

राहुल भी चुप चाप एक हलकी सी स्माइल लिए गाडी चला रहा था. आखिर कार उसने hi चुप्पी को तोडा - सुप्रिया... सो कल बात करने का मौका hi नहीं मिला...

सुप्रिया ने उसे काफी तुनक के जवाब दिया - क्या? क्या बात करनी है अब?

राहुल - ारी... इतने दिनों बाद मिले है... और तुम्हारा बर्थडे भी था...

सुप्रिया - बर्थडे मेरा था... पर सेलिब्रेट तोह तुमने किया न...

राहुल - मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा तुम क्या कह रही हो...

सुप्रिया - आएगा भी नहीं... एनीवे... तुम्हे तोह जो चाहिए था मिल गया न...

राहुल - तुम कृति की बात कर रही हो??

सुप्रिया - और किसकी बात करुँगी... शी इस रिच, ब्यूटीफुल, स्टाइलिश... और उससे भी ज्यादा... रेडी तो...

राहुल - रेडी तो क्या? मैंने कल भी कहा था न की कृति बस एक फ्रेंड है जो गयम में मिली थी...

सुप्रिया - ाचा... और कितनी ऐसी फ्रेंड्स है तुम्हारी... और मुझे तोह बस तुम थोड़ा बहुत hi जानते हो... यही कहा था न तुमने कृति को.

राहुल - तोह मैं और क्या बोलता कृति को? की मैं तुम्हे पागलो की तरह चाहता हूँ? और तुमने hi लास्ट टाइम क्लियर कर दिया था न सब.

सुप्रिया - राहुल... ये सब नाटक बंद करो मेरे साथ...

राहुल - सुप्रिया, कोई नाटक नहीं है... पता नहीं तुम कब समझोगी...

सुप्रिया ने अपनी बिल्डिंग सामने देख कहा - बस मुझे यहाँ ड्राप कर दो, बाकी तुम कहीं भी जायो... ी डोंट केयर...

राहुल ने जैसे hi गाडी रोकी, सुप्रिया जल्दी से गाडी से उतर गयी.

राहुल ने पीछे से आवाज़ लगायी - सुप्रिया.... सुप्रिया सुनो तोह...

पर सुप्रिया जल्दी से बिल्डिंग की तरफ चलने लगी. सुप्रिया को इस हालत में आता देखा, बहार खड़ा इक़बाल भी एक डंडा लिए राहुल की गाडी की तरफ आने लगा, और उसे देख कर राहुल ने जल्दी से गाडी वहां से निकल ली.

इससे पहले इक़बाल सुप्रिया से कुछ पूछता वह तोह लिफ्ट तक भी पहुंच गयी थी और ऊपर जाने लगी. उसने ऊपर पहुंच कर घर की बेल्ल बजायी पर किसी ने दरवाज़ा नहीं खोला. सुप्रिया ने अतुल को कॉल करने के लिए अपना फ़ोन निकाला तोह उसमे उसे अतुल के मैसेज दिखे.

अतुल - मैं ऑफिस जा रहा हूँ... शाम को मिलते है...

सुप्रिया की झुंझुलाहट बढ़ने लगी, आज शनिवार के दिन भी अतुल को ऑफिस जाना था. उसे ऐसा लग रहा था जैसे हफ्तों से उसने ठीक से अतुल से बात भी नहीं की हो. और कल उसका शादी के बाद का पहला बर्थडे भी बिना अतुल के ऐसे hi निकल गया. वह पूरी रात घर से बहार थी और अतुल को जैसे कोई फ़िक्र hi नहीं थी.

सुप्रिया बस कपडे बदल कर बैठी hi थी की घर के दरवाज़े की बेल्ल बज गयी. करुणा काम करने आयी थी, और उसके चेहरे पर एक अलग hi उत्सुकता सी थी आज.

करुणा - दीदी... आप ठीक तोह हो...

सुप्रिया - हाँ... मुझे क्या हुआ?

करुणा - नहीं, मैंने वह नीचे सुना की कोई आपको परेशान कर रहा था और इक़बाल को उसे डंडा मार के भागना पड़ा...

सुप्रिया एकदम हैरान से रह गयी - क्या??? ऐसा तोह कुछ नहीं हुआ? इक़बाल ने बोलै तुमसे?

करुणा - नहीं वह कहाँ बोलेगा, वह तुम मुझसे अब बात भी नहीं करता अचे से...

सुप्रिया - क्यों क्या हुआ?

करुणा हिचकिचाते हुए - जबसे आपको पता चला है... हमारे बारे में... तबसे...

सुप्रिया - ाचा... मैं पूछने भी वाली थी, तुम लोग यहाँ अब तोह नहीं आते न...

करुणा - नहीं दीदी!! एक बार भी नहीं आये. इक़बाल कभी आपका कहे के खिलाफ जा hi नहीं सकता...

सुप्रिया - ाचा बस बस... तुम्हे काम नहीं करना आज...

करुणा सर हिलाकर किचन में काम करने घुस गयी. सुप्रिया बेचैन कड़ी इधर उधर घूम रही थी और आखिर कार किचन में hi आकर कड़ी हो गयी.

सुप्रिया के चेहरे पर टेंशन देख कर करुणा पूछ बैठी - दीदी... भैया ठीक है न... आजकल दीखते नहीं है...

सुप्रिया - हाँ... सब ठीक है...

करुणा - वैसे दीदी, मैं आपकी समस्या के बारे में सोच रही थी तोह एक और चीज़ दिमाग में आयी... आप कहो तोह बोलू...

सुप्रिया न भी करती तोह करुणा ये बोल कर hi रहती - बोलो...

करुणा - आप इतनी सुन्दर हो तोह मुझे यकीं hi नहीं होता की भैया आपको देख कर.... आप भैया को खुश तोह रखते हो न... इन मर्दो को अगर घर पर कुछ नहीं मिलता है तोह ये बहार मुँह मारते है.

सुप्रिया - क्या बोले जा रही हो तुम... ऐसा कुछ नहीं है...

करुणा - मैं तोह इक़बाल को लेकर भी बहुत परेशान हु.... कहीं किसी और के पास न चला जाये.... उसको बहुत खुराक चाहिए होती है.

सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था की करुणा की बातें कहाँ जा रही है.

करुणा - दीदी... आप अगर करने दो तोह एक बार.... आपके घर पर... आपके कहने के बाद सब रुक गया है..

सुप्रिया को अब समझ आ गया था की करुणा उससे क्या चाहती थी - करुणा... तुम कहना चाहती हो की मेरी वजह सब रुक गया है? मैंने तोह तुम लोगो को नहीं रोका, कहीं और कर लो...

करुणा - नहीं दीदी... आपके घर पर कोई डर नहीं लगता... और अब तोह इक़बाल ने भी मन कर दिया है...

सुप्रिया - अगर उसने मन कर दिया है तोह मैं क्या करू?

करुणा - आप उससे बात कर लो न एक बार...

सुप्रिया - पागल हो क्या? मैं क्यों बात करुँगी उससे इस बारे में?

करुणा - Didi...please... बस एक बार.... मैंने उसे किसी और औरत से बात करते देखा था... वह मुझे छोड़ देगा... मैं आपके हाथ जोड़ती हु...

करुणा ने सुप्रिया के पास आ कर उसके हाथ पकड़ लिए.... उसके चेहरे पर रोना सा आ रहा था... सुप्रिया कोशिश कर रही थी की वह उसकी बातों में न फसे पर करुणा मान hi नहीं रही थी..

सुप्रिया - ाचा ठीक है तुम लोग कर लो यहाँ... मैंने बोलै तोह था... पर मैं शायद इक़बाल से बात नहीं कर पयूंगी इस बारे में...

करुणा - दीदी... आप देख लो... वह आपकी बात को मन नहीं करेगा... आप कोशिश करना...

सुप्रिया - ाचा ठीक है... सोचूंगी...

करुणा के जाने के बाद सुप्रिया बैठी बैठी सोचने लगी. करुणा की एक बात उसके दिमाग में घूम रही थी - इन मर्दो को घर पर कुछ नहीं मिलता है तोह ये बहार मुँह मारते है.

क्या राहुल के साथ भी एहि हुआ था. उसने राहुल को सब करने से मन कर दिया था क्या इसलिए वह कृति के साथ था. उसने कार में उसे बार बार बोलै था की वह अभी भी उससे प्यार करता है. पता नहीं क्या सच था, और उससे भी ज्यादा पता नहीं वह क्या चाहती थी. बार बार उसके दिमाग में कृति और राहुल का सेक्स करते हुए का दृश्य hi चल रहा था. वह इसी सोच में उलझी हुई बैठी रही.

रात को अतुल भी काफी लेट घर पंहुचा था.

अतुल घर के अंदर घुसता हुआ बोलै - सॉरी मैं लेट हो गया आज...

सुप्रिया - आज सैटरडे के दिन भी इतना लेट?

अतुल - हाँ सॉरी वह इतना काम है मेरे सर पर... कल भी ऑफिस जाना पड़ेगा...

सुप्रिया - कल भी?? और आपको फ़िक्र भी थी की मैं कहाँ थी कल?

अतुल - मैसेज आया तोह था तुम्हारी कलेग कृति का, उसके hi घर तोह थी...

सुप्रिया - फिर भी... मेरा बर्थडे था, मैंने सोचा था हम कुछ ख़ास करेंगे....

अतुल - हाँ.... कोई बात नहीं... कभी और कर लेंगे.. बर्थडे तोह कभी भी मन लो...

सुप्रिया गुस्से में पेअर पटकते हुए बैडरूम में चली गयी. थोड़े देर बाद अतुल भी आ कर चुप चाप सो गया. सुप्रिया के मैं में था की वह अतुल से बात करेगी और शायद वह थोड़े रोमांटिक पल भी साथ में बिताये पर शायद वह बिलकुल थका हुआ था. सुप्रिया भी अभी तक कल रात का नशा पूरी तरह नहीं निकाल पायी थी इसलिए वह भी जल्दी hi सो गयी. कल सुबह उसे ड्राइविंग के लिए इक़बाल के साथ भी तोह जाना था.

सुबह के लिए उसने अपने फ़ोन पर अलार्म लगा लिया था और 6 बजे नीचे पहुंच गयी थी. सामने मुस्कुराता हुआ इक़बाल खड़ा था. सुप्रिया वहीँ बिल्डिंग से सीधे ड्राइवर्स सीट पर बैठी और गाडी को सड़क पर बहार चलने लगी. इक़बाल उसे थोड़ा बहुत बताते हुए समझा रहा था की कहाँ कैसे चलायो. पर अब तक सुप्रिया की ड्राइविंग काफी ठीक हो चुकी थी.

तभी उनकी गाडी के बिलकुल साइड से एक बाइक आगे निकलती हुई गयी. उस बाइक पर 2 लड़के सवार थे और हलकी हलकी ब्रेक मारते हुए बाइक को गाडी के ठीक आगे चलने लगे. सुप्रिया ने एक डैम से घबरा कर गाडी की स्पीड धीरे कर ली ताकि एक्सीडेंट न हो. पर इक़बाल ने पैसेंजर सीट से गाडी का हॉर्न मारना शुरू कर दिया.

Car-Driving-gif.gif


इक़बाल ने गाडी का शीशा नीचे किया और ज़ोर से चिल्लाया - सामने से हैट जायो...

बाइक थोड़ा साइड हुई और उनकी गाडी के ठीक साथ साथ चलने लगी. बाइक पर सवार लड़को ने सुप्रिया की और इशारे करने शुरू कर दिए. सुप्रिये ने उन्हें एक झलक मुद कर देखा तोह वह कुछ जाने पहचाने से लग रहे थे.

बाइक पैसेंजर साइड के बिलकुल पास चल रही थी, और उनमे से लड़का बोलै - क्यों हैट जाये? सड़क तेरे बाप की है क्या?

इक़बाल गुस्से में बोलै - तमीज से बात कर ले...

लड़का - लड़की साथ में है तोह ज्यादा हीरो बन रहा है. ारी देख... आज ये किसी और के साथ है... मैंने बोलै था न तुझे इसके बारे में....

इक़बाल को उन्हें सुप्रिया की और देख कर कुछ भी बोलना ाचा नहीं लग रहा था - बकवास मत कर और निकल जा यहाँ से फटा फैट.

लड़का - तुझे क्या प्रॉब्लम है... तू इसका बॉयफ्रेंड है क्या...

दूसरा लड़का - नहीं... ये तोह इसका नौकर लग रहा है... सही है अपने नौकर के साथ भी घूमती है....

सुप्रिया को उनकी बातें सुन कर याद आ गया ये कौन थे. उस रात जब वह अतुल के साथ रेस्टोरेंट से खाना खा कर वापस आ रही थी तोह एहि लड़के उस पर फालतू के कमेंट कर रहे थे. जरूर उन्होंने उसका पीछा किया होगा उस दिन, और आज यहाँ दुबारा मिल गए थे. उसने इक़बाल की और देखा, जिसका चेहरा काफी ज्यादा गुस्से में था. इतना गुस्से में तोह सुप्रिया ने उसे कभी नहीं देखा था.

इक़बाल ने सुप्रिया की और देख कर बोलै - मैडमजी, आप अपनी साइड का दरवाज़ा लॉक कर दो और स्टीयरिंग को हल्का छोड़ दो...

सुप्रिया के हाथ पासने में हो रहे थे - क्यों? क्या करने वाले हो... इक़बाल रहने दो... कोई फरक नहीं पड़ता..

इक़बाल - मुझे पड़ता है...

इक़बाल ने एकदम से स्टीयरिंग घुमा कर बाइक में भिड़ा दी, जिससे बाइक सड़क पर नीचे गिर गयी और वह दोनों लड़के भी गिर गए. उसने फिर जल्दी से कार से उतर कर दोनों को घुसे और लात मारनी शुरू करि. एक लड़का तोह अभी भी बाइक के नीचे फसा हुआ था, पर दूसरा भी इक़बाल से लड़ने लगा. पहले वाला भी जल्द hi बाइक के नीचे से निकल कर लड़ाई में शामिल हो गया.

इक़बाल और उन लड़को के बीच काफी गाली गलोच चल रहा था, और हाथ पायी भी. वह दो थे और इक़बाल अकेला, फिर भी वह उन पर भारी था. पर उनमे से एक ने चक्कू निकाला और इक़बाल को मारने की कोशिश करि, पर इक़बाल ने चक्कू को अपने हाथ से रोकने की कोशिश करि और वह उसके हाथ पर जाकर लगा. सुप्रिया टेंशन से ये साड़ी लड़ाई गाडी से देख रही थी. उसने हॉर्न मार कर लड़को को डरने और भीड़ इखट्टा करने की कोशिश करि. भीड़ आती देख वह दोनों लड़के बाइक लेकर वहां से निकल गए.

सुप्रिया उनके जाने के बाद गाडी से निकली और इक़बाल की तरफ आयी, उसकी हथेली से खून बह रहा था, और भी कई जगह चोट लगी हुई थी.

इक़बाल - भाग गए हरामी साले...

सुप्रिया - इक़बाल... तुम्हारे काफी लग गयी है.... चलो मैं तुम्हे हॉस्पिटल ले चलती हु...

इक़बाल - ठीक हु मैडमजी, इतनी नहीं लगी की हॉस्पिटल जाना पड़े... आप बैठो गाडी में... चलते है...

सुप्रिया और इक़बाल गाडी में बैठे और सुप्रिया ने जल्दी से गाडी को वहां से निकला और थोड़ी दूर वहीँ खाली मैदान में जाकर रोका. इक़बाल का खून अभी भी बह रहा था.

सुप्रिया ने जल्दी से अपना रुमाल निकाल कर इक़बाल के हाथ पर बाँधा - उफ्फ्फ... आपके तोह काफी चोट लग गयी है...

इक़बाल - कुछ भी नहीं है ये मैडमजी, इससे तोह काफी ज्यादा चोट खायी है मैंने...

जाने अनजाने, उसकी चोट देख कर सुप्रिया अपने हाथ से इक़बाल का हाथ सेहला रही थी. उसे बहुत बुरा लग रहा था की उसकी वजह से इक़बाल के इतनी चोट लग गयी थी. इक़बाल सुप्रिया की और देख रहा था, ऐसा लग रहा था की सुप्रिया की आँखों से अभी आंसू निकल जायेंगे. सुप्रिया ने जैसे hi महसूस किया की इक़बाल उसकी और hi देख रहा था उसने झट से अपना हाथ पीछे खींच लिया.

सुप्रिया - सॉरी वह... मैं आपकी चोट देख कर....

इक़बाल ने हलके से मुस्कुरा के कहा - कोई बात नहीं मैडमजी... मुझे ाचा लगा...

सुप्रिया - वैसे आपने मेरे लिए क्यों उन लड़को से लड़ाई मोल ली...

इक़बाल ने बहुत hi आराम से कहा - जो लोग औरतो की इज़्ज़त न करे उनके साथ तोह ऐसा hi करना चाहिए... और फिर आप कोई गैर तोह हो नहीं...

सुप्रिया इक़बाल के भोलेपन को देखती रह गयी थी. सच में इस इंसान से उसे कोई घबराने की जरूरत नहीं थी. एहि शायद मौका था करुणा की बात रखने का.

सुप्रिया - मैं आपसे एक बात कहु...

इक़बाल - बिलकुल मैडमजी... आपको पूछने की जरूरत नहीं है...

सुप्रिया - करुणा कह रही थी की आप अब उससे बात नहीं करते...

इक़बाल - ऐसा कहा उसने? कल hi तोह बात करि थी उससे..

सुप्रिया ने किसी तरह अपने गाल लाल करते हुए बोल hi दिया - बात से आप मेरा मतलब समझ रहे है न... मैं और कैसे खुल के कहूं...

इक़बाल - ओह ाचा... हाँ आपको और आगे बोलने की जरूरत नहीं है... मुझे ाचा नहीं लगेगा आपके सामने ये सब बात करने में...

सुप्रिया ने मैं hi मैं सोचा की करुणा तोह कह रही थी की इसकी सेक्स की खुराक काफी ज्यादा है, और ये यहाँ उसके सामने खुल के कुछ बोल भी नहीं पा रहा. शायद करुणा कुछ ज्यादा hi बड़ा छडा के बात बोलती थी. पता नहीं किस झमेले में दाल दिया उसने उसे. पर जो भी हो सुप्रिया इक़बाल का भला hi चाहती थी.

सुप्रिया - आपकी बीवी गाँव में है... पर क्या आप करुणा से प्यार करते है?

इक़बाल - मैडमजी... कई बार आप जिंदगी में जिसके साथ होना चाहते हो... उससे बहुत बाद में मिलते हो...

ये बार सुन कर जैसे सुप्रिया के मैं की उलझन भी दूर हो गयी हो, और वह एक खिलखिलाती हुई स्माइल के साथ बोली - मैं आपकी बात समझ गयी हु...

इक़बाल - नहीं आप शायद गलत समझ रहे हो... मैं...

पर सुप्रिया ने उसकी बात काटते हुए कहा - मैंने करुणा से बात कर ली है... आप और वह... जो चाहे... हमारे घर पर... मुझे कोई दिक्कत नहीं है...

इक़बाल - पर मैडमजी...

सुप्रिया - पर वॉर कुछ नहीं... करुणा बहुत परेशान थी, और भी मुझे परेशान लग रहे हो...

इक़बाल ने सर झुकाते हुआ कहा - जैसी आपकी मैडमजी... मैं आपको कभी मन नहीं करूँगा...

सुप्रिया को अजीब लग रहा था की इक़बाल ऐसे बोल रहा था. वह कौन थी इक़बाल को कुछ करने के लिए बोलने वाली. वह तोह बस उन दोनों को फिर से मिलाना चाहती थी.

सुप्रिया - ठीक है फिर... अभी चलते है घर...

इक़बाल - हांजी... बिलकुल...

सुप्रिया जल्दी से गाडी चलती हुई अपनी बिल्डिंग की तरफ गयी. अब उसके दिमाग में साड़ी बातें बिलकुल क्लियर हो चुकी थी की उसे क्या करना था आज. वह गाडी बिल्डिंग पर पार्क करके जल्दी से ऊपर गयी और नाहा के तैयार हो गयी. अतुल भी ऑफिस जाने की तैयारी कर चूका था. अब बस सुप्रिया को एक hi जगह जाना था. उसने अपने घर के कपडे चेंज करते हुए एक अछि सी ड्रेस पहनी और ाचा सा मेकअप किया.

सुप्रिया ने एक टेक्स्ट मैसेज भेजा - आज तुम्हे ऑफिस तोह नहीं जाना न?

उधर से राहुल का जवाब आया - नहीं... क्यों?

सुप्रिया - बस ऐसे hi....

राहुल - बताया तोह... क्या हुआ अचानक?

सुप्रिया ने उसका कोई जवाब नहीं दिया. अतुल के ऑफिस निकलने के बाद वह जल्दी से नीचे गयी और ऑटो पकड़ कर राहुल के घर की तरफ चल पड़ी. आज बस वह अपने दिल की सुनने वाली थी, और किसी चीज़ की नहीं. पूरा . डी शायद उसे एहि इशारा कर रहा था की उसे क्या करना था आज.

सुप्रिया राहुल की बिल्डिंग पर पहुंच कर जल्दी से उसकी सीढ़ियों पर चढ़ती हुई ऊपर पहुंची... आज उसमे कुछ ज्यादा hi जोश था, कोई थकन नहीं. उसने राहुल के फ्लैट की बेल्ल बजायी, और राहुल के दरवाज़ा खोलते hi, उसने अपने आप को राहुल की बाहों में गिरा दिया और उसके गालों पर किश करने लगी.

राहुल भी एक डैम से हैरान सा रह गया था की यह क्या हो रहा था - सुप्रिया... तुम ठीक तोह हो न...

पर सुप्रिया कहाँ कुछ सुन रही थी, उसने राहुल का चेहरा पकड़ते हुए अपने होंठ राहुल के होंठों पर जड़ दिए, और एक के बाद एक किश करने लगी. राहुल ने भी अपने हाथ उसकी कमर पर टिकते हुए उसे जकड लिया.

Kissing.gif


सुप्रिया - आज मैं तुम्हे दिखती हूँ की प्यार क्या होता है... फिर कभी किसी और को याद नहीं करोगे...

सुप्रिया ने दरवाज़े को धक्का दे कर बंद किया और अपनी गोरी गोरी बाहें राहुल के गले में डालते हुए उस पर फिर से टूट पड़ी. राहुल भी शायद बेसब्री से इसी पल का इंतज़ार कर रहा था और उसने भी सुप्रिया को चूमना शुरू कर दिया और अपने हाथ उसकी गांड के नीचे लगते हुए उसे उठा लिया. सुप्रिया तोह जैसे रुकने का नाम hi नहीं ले रही थी. सुप्रिया की किश की बौछार से राहुल का बैलेंस बिगड़ गया और वह दोनों नीचे जमीन पर गिर गए.

सुप्रिया - क्या हुआ... कृति के सामने तोह बड़े बॉडी बिल्डर बन रहे थे... और मैं नहीं उठायी जा रही तुमसे...

उसका ताना सुन कर राहुल के अंदर का शेर भी जैसे जग गया था और उसके सुप्रिया को खींचते हुए अपने अपने ऊपर किया. फिर उसकी कमर को पकडे हुए उसे और भी किश करने लगा.

राहुल ने सुप्रिया के गाल पकड़ते हुए कहा - सोच लो... आज तुम्हे बीच में भागने नहीं दूंगा..

सुप्रिया ने राहुल की आँखों में आखें दाल कर कहा - आज मैं कहीं नहीं जाने वाली.
 
मैं फ्राइडे को नेक्स्ट अपडेट पोस्ट करुँगी. मैंने लिखना शुरू कर दिया है, और ाचा अपडेट होगा. प्लीज बस फ्राइडे तक पेशेंस. ऑफिस एंड पर्सनल लाइफ भी काफी बिजी चल रही है. ी थिंक पैर अपडेट 10 पिक्स / गिफ्स की लिमिट है, तोह मैं उस नेक्स्ट अपडेट को 2 part में ब्रेक करुँगी पर शामे डे पोस्ट कर दूंगी.

राहुल को अभी लकी होने दो, अभी स्टोरी बाकी है.
 
अपडेट 41ा

सुप्रिया बीएड पर राहुल के नीचे थी और राहुल उसके गले पर किश करता हुआ उसकी सुराही जैसे नाज़ुक गर्दन को महसूस कर रहा था. सुप्रिया बेचैन होती हुई उसके नीचे झटपटा सी रही थी. वह अपने जोश में यहाँ तक तोह आ गयी थी, पर अब उसके मैं फिर से डगमगा सा रहा था. राहुल ने सुप्रिया की बेचैनी को समझते हुए अपनी हथेली से उसकी हथेली को थामा ताकि वह उसे अपने काबू में ला पाए. उसे यकीं hi नहीं हो रहा था की जिस पल को उसके कई बार सपनो में देखा था, आज वह आखिर सच होने जा रहा था. उसने तोह इस ख्वाब के पूरे होने की आशा भी छोड़ दी थी, पर आज सुप्रिया आखिर कार अपनी मर्ज़ी से hi उसके साथ थी.

राहुल ने सुप्रिया के बालों में हाथ फेरते हुए कहा - ओह्ह्ह सुप्रिया... तुम्हारी गर्दन कितनी सेक्सी है...

सुप्रिया आहें भरते हुए राहुल की सांसें और होंठों को अपनी गर्दन पर महसूस कर रही थी - Ahhhhh....mmmmm....

ezgif-6aa38a0131b900.gif


सुप्रिया की हलकी हलकी सिसकियाँ राहुल की दिल की धड़कन और तेज़ और हो गयी और उसके शरीर में एक अजीब से उत्तेजना जागने लगी, जैसे वह आप एक जंगली जानवर बनना चाहता हो. इसी उत्तेजना में उसने सुप्रिया की गर्दन को अपने दांतों से हलके हलके काटना शुरू किया.

सुप्रिया ने अपने हाथों से उसके मुँह को रोकने की कोशिश करि - अहह... ोुछः... काट क्यों रहे हो...

राहुल ने सर ऊपर उठा कर सुप्रिया की आँखों में देखा - तुमने अभी तोह कहा था की आज तुम बस मेरी हो....

सुप्रिया ने भी उसकी आँखों में झाँक कर देखा. एक पल के लिए सुप्रिया की कमज़ोरी उसकी आँखों में साफ़ झलक रही थी, पर दुसरे hi पल उसने अपनी आखों में चंचलता लाते हुए कहा - हाँ... तोह फिर मैं भी जो चाहे कर सकती हूँ न...

राहुल - बिलकुल... जो तुम चाहो...

सुप्रिया ने बीएड पर सीधे बैठते हुए राहुल की टीशर्ट उतार फेकि और उसकी छाती पर हलके से हाथ फेरते हुए उसे और तड़पने लगी. वह अपनी नरम उँगलियों को चलते हुए राहुल की गर्दन तक ले गयी और उसके होंठों पर एक हल्का सा किश किया.

foreplay.gif


राहुल अपनी आँखें बंद किये इस सब का मज़ा ले रहा था. जिस तरह से सुप्रिया उसे अभी तड़पा रही थी और जिस तरह से वह इतने दिन अपनी हरसत को दबाये बैठा था, ये सब उसे और भी उत्तेजित कर रहा था. जितना मज़ा उसे कृति के साथ आया था उससे कहीं ज्यादा उसे अब महसूस हो रहा था. भगवन ने जैसी उसकी साड़ी ख्वाइशें पूरी कर दी हो.

राहुल - तुम भी अपना टॉप उतारो न... मुझे आज सब देखना है...

सुप्रिया जरा सी हिचकिचाई और फिर एकदम से अपना उतार दिया. टॉप उतारते hi राहुल उसे एक सफ़ेद सेक्सी ब्रा में देखता hi रह गया. खासकर उस ब्रा में कैद उसे मुलायम गोर बूब्स को, जो ऐसा लग रहा था की संगमरमर से तराशे गए हो. सुप्रिया ने राहुल को खुले मुँह से अपने बूब्स की और देखते हुए पाया और झिझकते हुए अपने बूब्स को अपने हाथों से धक् लिया.

सुप्रिया - इन्हे क्यों देख रहे हो...

राहुल - वाओ.... इन्हे देखने के लिए तोह मैं कबसे तरस रहा था...

राहुल ने अपने हाथ सुप्रिया के हाथों पर रखते हुए उन्हें साइड किया और सुप्रिया की ब्रा के थोड़ा नीचे हाथ रखते हुए उसके बूब्स को पकड़ लिया. वह अपनी उँगलियों को हलके हलके उसके गोर गोर बूब्स पर घूमने लगा. शायद आज सुप्रिया ने कुछ ज्यादा hi टाइट ब्रा पहनी थी जो उसके बूब्स को और बड़ा बना रही थी, और वह राहुल के छूने से ऊपर नीचे उछाल रहे थे. वह उन्हें उस ब्रा की कैद से आज़ाद करना चाहता था और अछि तरह महसूस करना चाहता था.

79.gif


राहुल के उसके बूब्स को छूटे hi सुप्रिया की शरीर में एक करंट सा डूअड़ गया. राहुल को तड़पने के लिए hi आज उसने एक छोटी सी टाइट ब्रा पहनी थी. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था जैसे आज वह अपनी साड़ी शर्म लाज घर छोड़ कर आयी हो - Ahhhhhhh.....mmmmmm

राहुल ने एकदम से अपना मुँह सुप्रिया के बूब्स के बीच में लगते हुए उन पर अपने होंठ और जीब फेरना शुरू कर दिया. सुप्रिया भी अपनी गर्दन ऊपर करके राहुल से चिपक गयी और अपने हाथों से उसे अछि तरह जकड लिया.

राहुल - ओह्ह्ह गॉड.... सुप्रिया... ी लव यू... ये तोह रुई से भी ज्यादा सॉफ्ट है...

राहुल से अब रहा नहीं जा रहा था और उसने सुप्रिया के सॉफ्ट से बूब्स को ज़ोर ज़ोर से चूमना शुरू कर दिया था.

सुप्रिया - मममममम..... ी लव यू तू....

आखिर कर सुप्रिया ने भी वह शब्द बोल hi दिए थे. उसे अछि तरह पता था की राहुल उसके बूब्स देख कर पागल हो चूका था, पर अभी तोह वह उसे और भी पागल बनाना चाहती थी. ताकि जब तक आज का दिन ख़तम हो उसे कृति कभी भी याद न आये.

राहुल ने सुप्रिया को ऊपर उचकते हुए उसके बूब्स पर ज़ोर के काटा. उसके ऐसा करते hi सुप्रिया की चीख निकल गयी, अतुल ने कभी उसे इतनी बेदर्दी से उसे नहीं काटा था. शायद उसने राहुल को कुछ ज्यादा hi उकसा दिया था आज.

673.gif


सुप्रिया - ोुछहहहहह.... थोड़ा आराम से....

राहुल - क्या करू... तुमने इतना तड़पाया है... कैसे रोके अपने आप को आज...

राहुल ने सुप्रिया के ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स पर अपना मुँह फेरा. और फिर ब्रा की स्ट्राप को साइड करते हुए उसके ब्रा को उसकी निप्पल से नीचे सरकाया. ब्रा सरक कर नीचे हो गयी और सुप्रिया के गुलाबी भूरे निप्पल्स अब उसके नज़र के सामने थे. वह उन्हें कुछ पल देखता hi रह गया और फिर उन पर एक भूके जानवर की तरह बुरी तरह टूट पड़ा. वह उन्हें चूसने लगा और सुप्रिया ने अपना हाथ उसके सर पर रखते हुए उसे अपने बूब्स को अचे से चूसना दिया. राहुल के ऐसा करने से सुप्रिया भी गरम होती जा रही थी, और अपने दांतों से अपना निचला होंठ काँटा. ऐसा मजा तोह उसे आज तक अतुल के साथ कभी नहीं आया था.

789.gif


सुप्रिया - उम्म्म.... उफ्फ्फ्फ़.... राहुल....

राहुल - सुप्पु... क्या कमल के बूब्स है तुम्हारे... कितना लकी है अतुल... नहीं.... कितना लकी हु मैं आज....

राहुल उसके बूब्स को छोड़ hi नहीं रहा था, जैसे आज hi सारा दूध बहार निकाल देगा. वह उन्हें चूसते चूसते उन्हें अपने मुँह से सुप्रिया के निप्पल्स को खींचने लगा.

31053.gif


सुप्रिया - आह्हः.. आराम से.... बहुत सेंसिटिव है ये...

राहुल - बस आज से ये मेरे है... मममममममम

राहुल ने अपने दांत उसके बूब्स पर गदा दिए...

सुप्रिया दर्द से चीख पड़ी - उफ्फ्फ्फ़.... उईईईईई मम्मी.....

सुप्रिया ने दर्द में अपने हाथों से राहुल के बाल खींच लिए, पर उसे जैसे कोई फरक hi नहीं पड़ा. राहुल ने एक बार फिर से अपने दांतो से उसके निप्पल्स पर काँटा.

ezgif-687c3ed0eeacda.gif


सुप्रिया - ोुउउउउ.... इतनी बेदर्दी से क्यों काट रहे हो... सोच लो... अह्ह्ह.... फिर मैं भी अपने दांत तुम्हारे उस पर गदा दूंगी...

राहुल ने चौंकते हुए कहा - किस पर दांत गदा डौगी...

सुप्रिया - कुछ नहीं कुछ नहीं...

राहुल समझ गया था सुप्रिया ने क्या इशारा किया था, पर उसे अभी भी अपने कानो पर यकीं hi नहीं हो रहा था. उसने अपना मुँह ऊपर किया और सुप्रिया की और देखा - बोलो न... किस पर दांत गदा डौगी...

सुप्रिया ने गाल लाल हो गए थे, शायद वह कुछ गलत बोल गयी थी - मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा...

राहुल ने फिर से अपने दांत ज़ोर की सुप्रिया के बूब्स पर गड़ाए.

सुप्रिया - ौवव..... उफ्फ्फ...

राहुल - बोलोगी या फिर से करू...

सुप्रिया ने दर्द में अपने बूब्स को मसलते हुए कहा - क्या बोलू... ोुछ... क्यों बुलवाना चाहते हो मुझसे वह...

राहुल ने अपना अंगूठा सुप्रिया की थोड़ी पर रखा और उसका मुँह हल्का सा ऊपर उठतय - गदयो न वहां दांत....

सुप्रिया ने अनजान बनने का नाटक किया - कहाँ... तुम्हारे निप्पल पर...

राहुल - वहां नहीं... नीचे....

सुप्रिया ने उसे चिढ़ाते हुए कहा - क्यों कृति से भी कटवाया था क्या वहां.

राहुल - वहां तोह आज तक किसी ने नहीं काटा है... तुम पहली होगी... प्लीज....

सुप्रिया सोच में पद गयी... उसने आज ये करने का तोह नहीं सोचा था, पर शायद एहि मौका था राहुल को पूरी तरह अपना बनाने का. उस दिन अतुल को भी तोह कितना ाचा लगा था जब उसने ये किया था. उसने अपनी तीखी आँखों से राहुल की और देख कर अपने हाथ राहुल की जीन्स की बेल्ट की तरफ बढ़ाये और उन्हें खोलने लगी.

सुप्रिया ने झूठ बोलते हुए कहा - मैंने भी पहले कभी नहीं किया ये...

ये सुनते hi राहुल का लुंड जैसे और खड़ा हो गया. आज वह पहला आदमी होगा जो इस खूबसूरत लड़की के मुँह में अपना लुंड डालेगा. क्या किस्मत थी उसकी.

unzip-pants.gif


बेल्ट खुलते hi, सुप्रिया ने राहुल की जीन्स की ज़िप को खींचते हुए खोला. सामने अंडरवियर में राहुल का लुंड बहार निकलने के लिए तड़प रहा था.

सुप्रिया ने एक बार फिर से राहुल की और देखा - तुम सच में चाहते हो मैं ये करू...

राहुल - सुप्पु... प्लीज करो न... मैं भी तुम्हे एहि मज़ा दूंगा...

राहुल ने अपनी जीन्स जल्दी से नीचे की और अंडरवियर में सुप्रिया के सामने था. उसके अंडरवियर में एक टेंट बना हुआ था, एक बड़ा सा टेंट. उसने सुप्रिया के हाथ पकड़ते हुए अंडरवियर के ऊपर से hi अपने लुंड पर रख दिए. सुप्रिया के हाथों में उसका लुंड महसूस हो रहा था, पर सुप्रिया को उसके साइज का ठीक से आईडिया नहीं लग पा रहा था. पता नहीं वह अतुल जैसा hi होगा या उससे अलग.

राहुल ने सुप्रिया के हाथ पकडे पकडे उससे अपना अंडरवियर खींच कर नीचे कर दिया. राहुल का लुंड झूलता हुआ सा बहार निकला. सुप्रिया एक बार तोह उसका लुंड अपनी बड़ी बड़ी आँखों से देखती hi रह गयी थी. राहुल का लुंड अतुल के लुंड से बड़ा भी था और साथ hi उसका का नीचे का एरिया बिलकुल साफ़ था.

7474151.gif


राहुल सुप्रिया की शकल पड़ते हुए समझ गया था की जरूर उसका लुंड अतुल के लुंड से बड़ा होगा. उसे अतुल से ऐसी hi उम्मीद थी. पता नहीं उस जैसे इंसान को इतनी खूबसूरत बीवी कैसे मिली.

राहुल - सुप्पु... पकड़ो न इसे अपने हाथों से...

सुप्रिया को आज से पहले राहुल ने कभी सुप्पु नहीं बुलाया था. आज जैसे वह अपना पूरा हक़ जाता रहा था उस पर. सुप्रिया को लग रहा था की वह कहीं वह बहुत ज्यादा आगे तोह नहीं बाद गयी थी. पर पीछे हटना अब एक ऑप्शन नहीं था, उसने पहले hi बोल दिया था की आज जो भी हो वह बीच में छोड़ कर नहीं जाने वाली थी. आज जो भी हो वह राहुल को अपना दीवाना बना कर hi रहेगी.
 
अपडेट 41बी

राहुल को सुप्रिया के चेहरे पर नर्वस्नेस साफ़ दिख रही थी. सुप्रिया ने अभी कुछ पल पहले उसे बताया था की उसने आज तक किसी का लुंड अपने मुँह में नहीं लिया था, तोह शायद उसका नर्वस होना स्वाभाविक hi था. पर अब इतने पास आ कर वह अपना कलपद नहीं करवाना चाहता था. आज तोह वह अपने लुंड पर सुप्रिया को होंठ और मुँह की नरमी दोनों महसूस करना चाहता था. ये सोचते hi उसका लुंड और भी चौड़ा होता जा रहा था.

राहुल ने सुप्रिया को हाथों को पकड़ते हुए अपने लुंड पर लगा दिया. सुप्रिया के कोमल हाथ लगते हुए उसका लुंड ऊपर नीचे थिरकने लगा. सुप्रिया ने नाज़ुक सी उंगलियां लुंड को हलके से पकडे हुए थी, जैसे लुंड को नाप रही हो. राहुल ने सुप्रिया के बालों पर हलके से हाथ फेरना शुरू किया. कॉलेज में उसकी गर्लफ्रेंड ने कई बार उसका लुंड चूसा था और उसे अचे से पता था की सुप्रिया से कैसे ये करवाना था.

राहुल ने सुप्रिया की सर को हलके से नीचे की और धकेला ताकि उसका लुंड ठीक सुप्रिया के मुँह के सामने हो. सुप्रिया की आँखों के ठीक सामने वह लुंड था, जो देखने में हर तरह से अतुल के लुंड से बेहतर था, पर पता नहीं वह उन्हें अपने दिमाग में कपड़े भी क्यों कर रही थी. वह मैं hi मैं सोच रही थी की पता नहीं इन मर्दो को क्या मज़ा आता है अपने पेशाब करने की जगह को किसी और के मुँह में दाल कर. एक बार तोह वह ये सोच कर hi काँप सी गयी.

राहुल ने अपने लुंड को सुप्रिया के हाथों में पकडे हुए हल्का सा आगे धकेला, जिससे वह हाथों से रगड़ता हुआ सुप्रिया के पेअर पर जा कर लग रहा था. सुप्रिया ने देखा की उसके हाथ से रगड़ते हुए लुंड की खाल पीछे जा रही थी. अतुल ज्यादातर उसे सीधे hi फ़क करने लग जाता था, तोह उसने कभी उसके लिंग पर इतना गौर नहीं किया था. खाल पीछे जाते hi अंदर से एक चिकना सा नंगा लुंड बहार आ रहा था. उसे देखते hi सुप्रिया को अजीब सा लगा और उसने अपनी आखें ऊपर कर ली.

453.gif


राहुल - क्या हुआ... तुम तोह ऐसे बेहवे कर रही हो जैसे कभी ऐसा कुछ देखा hi न हो... कहीं तुम वर्जिन तोह नहीं?

राहुल ने सोचा की उसे हैरानी नहीं होगी अगर ऐसा हुआ तोह, शायद अतुल के बस की कुछ बात hi नहीं थी. तभी तोह उसकी बीवी आज यहाँ उसका लुंड पकडे कड़ी थी. अगर ऐसा हुआ तोह सच में कितना लकी होगा वह की उसे सुप्रिया की सील तोड़ने का मौका मिलेगा.

सुप्रिया ने राहुल को घूरते हुए देखा - तुम्हे सब पता तोह है, फिर क्यों ऐसे फालतू क़ुएस्तिओन्स पूछ रहे हो...

राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा - ाचा... तोह बताया फिर... मेरा अतुल से बड़ा है क्या?

सुप्रिया की हलकी सी हसी निकल गयी - क्यू ये क्यों जानना है तुम्हे, और तुम अतुल का नाम क्यों ले रहे हो अभी... मुझे गिलटी सा फील हो रहा है...

राहुल - बताया न... मुझे जानना है....

सुप्रिया - इतनी जिद्द क्यों करते हो तुम....

राहुल - बोलो भी... इतनी क्या शर्म...

सुप्रिया ने आँखें नीचे करते हुए कहा - शामे सा hi है तुम दोनों का...

ओह्ह गॉड... अतुल के बारे में सोचते hi सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की पता नहीं वह यहाँ आयी की क्यों. उस बेचारे ने तोह उसके साथ कभी कुछ गलत नहीं किया था. पता नहीं क्यों जबसे उसने कृति और राहुल को वह सब करते देखा था, उसके मैं में बस राहुल को वापस अपनी और मोड़ने की जिद्द सी लग गयी थी. पर अब वह यहाँ थी, और शायद उसकी जिद्द उसे आज यहाँ से नहीं निकलने देगी. उसने जल्दी से अतुल को अपने दिमाग से निकाला, वह बस अब यहाँ थी, और कहीं नहीं.

राहुल - तुम्हे झूठ बोलना नहीं आता है, तोह बोलै भी मत करो. कोई नहीं... अभी पता चल जायेगा की किसका लुंड बड़ा है...

सुप्रिया ने उसे शरारत भरी नज़र से देखते हुए कहा - ाचा जी... कैसे पता चलेगा...

राहुल ने अपना लुंड फिर से उसके हाथ की और धकेलते हुए कहा - तुम बस देखती जायो...

थोड़ी देर बाद सुप्रिया के हाथ लुंड पर अब खुद hi चलने लगे थे और अतुल की फोरस्किन भी पूरी तरह खुल चुकी थी. सुप्रिया अपने सॉफ्ट हाथों से राहुल के लुंड को अचे से मसल रही थी.

female-oral-002-44.gif


राहुल ने ऊपर से सुप्रिया की और नीचे देखा. वह एक अप्सरा की तरह बैठी उसका लुंड अपने हाथों से घिस रही थी. राहुल का लुंड भी उसके हाथ में बेकाबू हो रहा था. वह चाहता था की जल्दी से सुप्रिया उसे अपने मुँह में ले ले. सामने बैठी सुप्रिया की बूब्स के ऊपर का टिल भी आज उसे साफ़ साफ़ दिख गया. उसने अपना हाथ बढ़ाते हुए उसके टिल को अपनी ऊँगली से दबाया.

सुप्रिया ने एक नर्वस सी मुस्कराहट की साथ राहुल की और ऊपर देखा. राहुल ने अपनी मुट्ठी बंद करते हुए सुप्रिया की गोलियां को अपने हाथ में ले लिया. उसके ऐसा करते hi सुप्रिया की हलकी सी सिसकी निकल गयी.

राहुल ने बेशर्मी से कहा - लो न इस जल्दी से अपने मुँह में....

राहुल ने सोचा की शायद उसे hi बात आगे बदनी पड़ेगी नहीं तोह सुप्रिया ये नहीं कर पाएगी. राहुल ने अपना एक हाथ सुप्रिया के सर के पीछे लगते हुए उसका सर अपने लुंड की और किया. सुप्रिया ने अपने मुँह का थूक गले में गतका और अपने होंठ आगे करते हुए राहुल के लुंड पर लगा दिए.

ezgif-6d90a5071d0ed4.gif


जैसे hi सुप्रिया के होंठ राहुल के लुंड पर छुए, राहुल के मुँह से एक जोर की अह्ह्ह्हह्हह निकल गयी, और उसने अपनी आखें बंद कर ली. वह सोच भी नहीं सकता था की उसे ऐसे पल की अनुभूति होगी.

राहुल - सूपपूउउ.... अह्हह्ह्ह्ह.....

सुप्रिया - क्या हुआ?? रुक जायु क्या....

राहुल ने अपने हाथ सुप्रिया के कंधो पर रखते हुए अपने आप को सहारा दिया - नहीं यार... अब मत रुकना...

सुप्रिया ने ऊपर राहुल की और देखा, और उसे देख ऐसा लग रहा था की राहुल की पूरी जान अभी उसके हाथों में है. राहुल की ये हालत देख कर सुप्रिया जैसे अपनी हिचकिचाहट फिर से खोने लगी. उसने अपने एक हाथ से राहुल का लुंड पकड़ा और फिर आँखें बंद करते हुए लुंड की टोपी को अपने मुँह में ले लिया.

23.gif


उसका ऐसा करते hi राहुल के पेअर लडखडे से गए और वह बीएड पर लेट गया. सुप्रिया उसका लुंड पकडे हुए वहीँ बीएड से साइड में बैठ गयी और फिर से उसे हलके हलके चूसने लगी. आज पता नहीं क्यों, उसे भी ये करते हुए ाचा सा लग रहा था.

राहुल सुप्रिया की और देख रहा था की वह कितने अचे से उसका लुंड चूस रही थी. उसे देख ऐसा लग hi नहीं रहा था की उसने ये पहले न किया हो. पर वह अभी कुछ भी बोलकर उसे भटकना नहीं चाहता था.

सुप्रिया ने राहुल के चेहरे की और देखा, वह आराम से लेता हुआ पूरा आनंद ले रहा था. सुप्रिया उसकी और देख कर हलके से मुस्कुरायी और फिर से लुंड चूसना शुरू कर दिया. लुंड काँपता हुआ इधर उधर अपने आप हिल रहा था.

hot-blowjob-gif.gif


राहुल - सुप्पु.... तुम अमेजिंग हो यार.... अह्हह्ह्ह्ह

तभी ये करते हुए सुप्रिया को अपने मुँह एक हल्का सा नमकीन पानी सा टास्ते हुआ. और उसने झट से लुंड को छोड़ते हुए अपना मुँह पीछे कर लिया. उस दिन उसने देखा था की किस तरह ये करने के बाद अतुल ने अपना सारा पानी निकाल दिया था, वह नहीं चाहती की राहुल अपना पानी उसके मुँह में निकाल दे.

राहुल - क्या हुआ? रुक क्यों गयी...

सुप्रिया ने अपने हाथ से अपनी जीब साफ़ करते हुए भोलेपन से कहा - तुम मुझ पर अपना झाग तोह नहीं निकाल डोज न? मुझे कुछ नमकीन सा महसूस हुआ...

राहुल को उसकी ये बात सुनकर हसी सी आ गयी - ारी नहीं बाबा... मैं नहीं निकालूंगा... ये तोह बस प्रे छुम होगा... इतनी जल्दी थोड़ी न निकाल दूंगा... ऐसा करो अपना मुँह इस पर रख लो और अपने होंठों से इस पर हवा फूक दो...

सुप्रिया वहीँ उसका लुंड लिया उसके सामने थी. राहुल ने अपना हाथ आगे बड़ा कर सुप्रिया के बालो को हल्का सा खींचा, ताकि उसका मुँह वापस उसके लुंड पर आ जाये... सुप्रिया ने डरते हुए फिर से अपना मुँह उसका लुंड पर दिया. अब तोह उसका लुंड मानो बुरी तरह काँप रहा था. और सुप्रिया के होंठ उस पर लगे हुए उसे अचे से चूस रहे थे, बिलकुल जैसे राहुल ने उसे बताया था.

28538501.gif


राहुल जानता था की सुप्रिया ने उसका लुंड थोड़ी और देर चूसा तोह उसका माल निकल जायेगा. वह सुप्रिया को पूरा एन्जॉय करना चाहता था, ताकि वह और भी खुल जाये.

राहुल - सुप्रिया ऐसा करो... अब तुम्हारी बारी है... तुम अपनी पंतय उतार दो...

सुप्रिया ने राहुल की और देखा, उसके दिल की धड़कन तेज़ हो रही थी. उसकी भाभी ने उसे इस सब के बारे में बताया तोह था, पर आज तक उसने ये किया नहीं था. उसकी कभी हिम्मत भी नहीं हुई थी अतुल को ये बोलने की. कितना अजीब लगेगा जब राहुल अपने मुँह से उसे वहां नीचे छूटेगा. पर भाभी ने कहा था की इसमें मजा बहुत आता है, और वह भी तोह इस सुख की हकदार थी.

सुप्रिया - उम्म्म... तुम वहां.... मेरे नीचे....

राहुल - हाँ... और क्या?

सुप्रिया - पर...

राहुल - तुम्हारे लिए भी तोह फन होना चाहिए... मेरी बात मानो, तुम्हे बहुत ाचा लगेगा... सच...

राहुल उठ के बीएड पर बैठ गया और सुप्रिया के हाथ अपने कन्धों पर रख दिए. सुप्रिया उसके सामने अपने घुटनो पर बैठी थी और सिर्फ एक पंतय में वह हलके हलके काँप रही थी. उसे देख कर ऐसा लग रहा था जैसे उसे सर्दी लग रही हो, जबकि इस समय गर्मी पूरे जोश में थी. राहुल ने सुप्रिया के गले के नीचे हल्का सा किश किया ताकि वह उसकी नर्वस्नेस को दूर कर सके. सुप्रिया इस समय राहुल से नज़रे नहीं मिला पा रही थी. राहुल ने सामने उसकी कॉटन की प्रिंटेड पंतय में बंद ख़ज़ाने के बारे में सोचा. और अपने हाथ आगे बढ़ाते हुए उसकी पंतय को थोड़ा सा नीचे सरकाया.

taking-off-her-p-8695.gif


पंतय नीचे करते hi राहुल को ऐसा लगा की सच में उसे खज़ाना hi मिल गया हो. राहुल ने गौर से सुप्रिया के नीचे के हिस्से को देखा. सुप्रिया का नीचे का हिस्सा एक डैम गोरा सा, और बहुत छोटे छोटे से बाल, जिसे देख कर राहुल बहुत hi एक्ससिटेड हो गया और उसका सिकुड़ता हुआ सा लुंड फिर से हरकत करने लगा. राहुल को अपने और इतनी गौर से देखते हुए सुप्रिया की दिल की धड़कन फिर से तेज हो गयी थी.

राहुल - ऐसा लग रहा है मैं नील आर्मस्ट्रांग हूँ....

सुप्रिया - कौन??

राहुल - चाँद पर पहली बार पहुंचने वाला इंसान....

सुप्रिया के गाल बुरी तरह लाल हो चुके थे, पर अभी उसके अंदर की शरारत नहीं गयी थी - फिर तोह वह नहीं हो सकते न....

राहुल - पर लग तोह ऐसे hi रहा है....

सुप्रिया ने राहुल का कंधे पर अपना हाथ मारा और उसे देख कर मुँह सिकोड़ लिया. राहुल ने भी शरारत में अपनी ऊँगली उसकी नाभि के थोड़ा सा नीचे फेर दी. सुप्रिया उसका हाथ वहां लगते hi उछाल सी पड़ी. ओह गॉड.... सच में राहुल को एक लड़की की कमज़ोरी अछि तरह से पता थी. इतना भी शरीफ नहीं था वह जितना लगता था, और शायद इसी बात ने तोह उसे अपनी और खींचा था.

इससे पहले की राहुल की ऊँगली और नीचे जाती, सुप्रिया ने उसे पकड़ लिया - बस बस... और नीचे नहीं...

राहुल ने अपने हाथ सुप्रिया की नंगी कमर पर रख दिए और उन्हें हलके हलके मसलने लगा. सुप्रिया की सॉफ्ट सी त्वचा उसे पागल कर रही थी. उसे पता था सुप्रिया भी इस समय उतनी hi पागल थी जितना वह. सुप्रिया की पैंतीस उसकी जाँघों पर अटकी हुई थी.

राहुल ने एकदम से सुप्रिया के पेअर अपनी और खींचते हुए उन्हें सीधा किया और फिर उसकी पंतय को अपने दांतो से पकड़ते हुए उतार दिया. पंतय उतारते hi अब इस पोजीशन में राहुल की छूट साफ़ दिख रही थी. हलकी सी गुलाबी, हलकी सी भूरी, थोड़ी सी बहार उभरी हुई.

47.gif


सुप्रिया ने झट से अपने हाथ अपनी छूट पर रख दिए ताकि वह राहुल की नज़र को रोक पाए - राहुल..... ये क्या किया तुमने....

राहुल - इसको उतारे बिना कैसे होगा... तुम बस आराम से लेट जायो... ज्यादा सोचो मत अभी...

सुप्रिया के बूब्स काफी तेज़ साँसों से ऊपर नीचे हो रहे थे, राहुल का मैं कर रहा था वह फिर से उन पर टूट पड़े. पर अभी नहीं, अभी तोह कुछ और करना बाकी था.
 
Back
Top