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अगले दिन संडे की सुबह सुरपिया 5.30 बजे उठ गयी थी. पिछली शाम को उसने अतुल को बताया था की वह और मेघा सुबह जॉगिंग करने नीचे जायेंगे, अगर अतुल को चलना है तोह वह भी चल सकता है. सुप्रिया को अछि तरह पता था की इतनी सुबह अतुल बिस्तर से नहीं निकलने वाले थे और मेघा का नाम सुनकर तोह बिलकुल भी नहीं. सुप्रिया ने एक ढीली सी टीशर्ट एंड लेग्गिंग्स पहनी और जूते पेहेन लिए. उसके ये रनिंग शूज उसने अतुल से जिद्द करके खरीदवाए थे, ये बोल कर की वह इन्हे पेहेन कर जॉगिंग करने जाएगी. पर शायद मुश्किल से कोई एक दिन जब उसने इन्हे पहना होगा.
सुप्रिया ने अपना चेहरा धो का नींद भगायी. आज तोह जैसे उसमें जोश भरा पड़ा हो इस नए काम को शुरू करने के लिए. उसके साथ हमेशा ऐसा होता था की नए काम के लिए वह सुबह टाइम से पहले उठ जाती थी. उसका मैं था की वह चाय पी ले, पर इतनी सुबह सुबह वह ज्यादा खातर पातर नहीं करना चाहती थी. वह बालकनी से बहार देखने लगी, मौसम अभी थोड़ा ठंडा सा hi था. सूरज निकलना शुरू हो रहा था, तोह काफी अँधेरा सा था. शायद 15 मिनट बाद थोड़ा उजाला हो जाये.
5.55 के आस पास सुप्रिया ने अपना फ़ोन लिया और लिफ्ट से नीचे आ गयी. बिल्डिंग के ठीक सामने इक़बाल ने एक सफ़ेद रंग की गाडी कड़ी करि हुई थी. गाडी थोड़ी पुराणी सी थी, पर सुप्रिया को इससे क्या मतलब, उसे तोह बस गाड़ी चलना सीखना था. इक़बाल सामने गाडी पर तक लगा कर खड़ा था. सुप्रिया मुस्कुराते हुए उसकी और चल पड़ी.
सुप्रिया को आते देख इक़बाल का चेहरा भी खिल उठा - मैडमजी आप तोह एक डैम टाइम से आ गए… मैं सोच रहा था की कहीं आप नहीं जगे तोह….
सुप्रिया - कैसे नहीं आती… टाइम दिया न मैंने आपको…
इक़बाल - सच में… आप जुबान के पक्के हो…
सुप्रिया - तोह अब यहीं से चलना शुरू करू क्या?
इक़बाल - नहीं मैडमजी, आपने बोलै था न की आपने कभी भी गाडी नहीं चलायी है… तोह ऐसा करते है पहले किसी खाली मैदान में चलते है… यहीं पास में hi है एक…
सुप्रिया - हाँ ये ठीक रहेगा… चलिए…
सुप्रिया आगे की सीट पर पैसेंजर वाली साइड बैठ गयी और इक़बाल ड्राइवर वाली सीट पर बैठ कर गाडी चलने लगा. सुप्रिया गाडी में इधर उधर देख रही थी. गाडी काफी अछि स्मेल कही थी जैसे किसी ने अभी थोड़ी देर पहले कोई परफ्यूम छिड़का हो. गाडी में इक़बाल के धर्म की कुछ फोटो और माला तंगी हुई थी जिसे देख कर लग रहा था की किसी '. की hi गाडी है. थोड़ी सी hi देर में इक़बाल गाडी को एक खुले मैदान में ले आया. वहां पहुंचते पहुंचते थोड़ी सी रौशनी हो गयी थी. पूरे मैदान में अभी बस इक्का दुक्का hi लोग थे. इक़बाल ने गाडी रोकी और गाडी से बहार निकला. सुप्रिया भी कड़ी हो कर ड्राइवर वाली साइड पर आ गयी.
सुप्रिया ड्राइवर वाली साइड पर बैठी थी और इक़बाल वहीँ दरवाज़ा खोले खड़ा था. वह सुप्रिया के पैरो के और देख रहा था, देखना तोह उसे ये था की सुप्रिया के पेअर सही जगह लगे हो, पर उसे सुप्रिया की टाइट लेग्गिंग्स में बस उसके सेक्सी जाँघे hi दिख रही थी.
उसने अपने आप पर किसी तरह काबू रखते हुए बोलै - मैडमजी तोह नीचे तीन पेडल है, एक्सेलरेटर, ब्रेक और क्लच. दिख रहे है न आपको?
सुप्रिया ने नीचे झांकते हुए देखा और फिर अपने दाहिने पेअर से तीनो को एक एक करके टच किया. बीच वाला पेडल बाकि दोनों से थोड़ा सा बड़ा था. सुप्रिया के पेअर पेडल पर अचे से नहीं पहुंच पा रहे थे और उसे नीचे सरकना पद रहा था.
इक़बाल - नहीं नहीं ऐसा आप लेटो मत, सीट आगे कर लो….
सुप्रिया - कहाँ से होगी सीट आगे?
सुप्रिया के गाल शर्मिंदगी से लाल हो गए थे. कार चलना तोह दूर उसे तोह ये भी नहीं पता था की सीट कैसे आगे पीछे होती है. अब वह थोड़ी न कार में इतना ज्यादा बैठी थी अपनी लाइफ में. अपनी खुद की कार में तोह वह मुश्किल से 3-4 बार बैठी थी पिछले एक महीने में.
इक़बाल उसकी शकल देख कर समझ गया था - कोई नहीं मैडमजी… मैं आपको सब समझा दूंगा… सबको इस दुनिया में hi आ कर सीखना होता है न… आपकी सीट के नीचे एक डंडा है, उसे दबायो और सीट को आगे कर लो…
सुप्रिया में अपनी सीट के नीचे हाथ डाला… कुछ तोह था और वह उसे नीचे दबाने की कोशिश कर रही थी पर वह नीचे नहीं हो रहा that’s… कुछ सेकंड वह ऐसे hi हाथ मारती रही. इक़बाल भी संयम से खड़ा उसे देख रहा था.
सुप्रिया - कहाँ दबायु… नहीं समझ आ रहा…
इक़बाल - मैं बता देता हूँ…
इक़बाल झुका और उसने अपना हाथ सुप्रिया के खुले पैरो के बीच में से ले जाते हुए सीट के नीचे उसके हाथ पर रख दिया. सुप्रिया एक सेकंड के लिए तोह घबरा गयी की वह क्या कर रहा था और सीट पर थोड़ा उचक गयी.
इक़बाल - डरो मत मैडमजी, एहि है वह डंडा.. इसे आप ऊपर की और दबायो…
सुप्रिया - ओह ाचा… मैंने इसे नीचे पुश कर रही थी…
इक़बाल ने उसका हाथ पकड़ते हुए सीट के लीवर पर रखा और उसे ऊपर करा. और फिर दुसरे हाथ से सुप्रिया की सीट आगे धकेल दी. पर सीट एकदम से कुछ ज्यादा hi आगे हो गयी और सुप्रिया के बूब्स स्टीयरिंग व्हील पर जा कर लगे. इक़बाल का हाथ भी वहीँ सुप्रिया की जाँघों के बीच में खींचता हुआ फास गया.
सुप्रिया की हलकी सी चीख निकल गयी - Ouchhh…ye क्या किया...
सुप्रिया ने नीचे इक़बाल के हाथ की तरफ देखा और थोड़ा गुस्से में इक़बाल की तरफ देखा. इक़बाल ने घबरा कर झट से अपना हाथ बहार खींचा, जो उसके जांघो से रगड़ता हुआ बहार निकला - सॉरी मैडमजी… एकदम से ज्यादा आगे हो गयी सीट.
सुप्रिया ने इक़बाल की शकल देखते हुए अपने गुस्से को शांत किया - कोई नहीं… आप हेल्प hi कर्मा ओह रहे थे…. मैं अब पीछे करू सीट?
इक़बाल की सांस में सांस आयी - हाँ.. आप तरय करो पीछे करने का…
सुप्रिया को अब समझ आ गया था की लीवर कहाँ है, और उसने उसे दबाते हुए अपनी सीट पीछे कर ली. ये करते hi उसके चेहरे पर स्माइल आ गयी, जैसे उसने कोई बड़ी चीज़ सीख ली हो. इक़बाल भी उसकी स्माइल देख कर उसकी तरफ मुस्कुरा दिया. सुप्रिया ने फिर सीट को आगे पीछे करके अपने पेअर अचे से एडजस्ट कर लिए.
सुप्रिया - हाँ अब मेरे पेअर सही से पहुंच रहे है.
इक़बाल- ठीक है आप सीट बेल्ट लगाया, इतने मैं दूसरी साइड बैठता हूँ.
सुप्रिया ने सीट बेल्ट लगायी और इतनी देर में इक़बाल पैसेंजर वाली साइड आ कर बैठ गया. उसने देखा की सुप्रिया की सीट की बेल्ट उसके मम्मो के बीच में से गुज़रते हुए उन्हें और बड़ा बना रही थी. उसे देख कर इक़बाल का लुंड टाइट होने लगा था.
इक़बाल ने स्टीयरिंग को हाथ लगते हुआ कहा - ये स्टीयरिंग व्हील है, इससे गाडी इधर उधर होती है…
सुप्रिया झेपते हुए बोली - इतनी बुद्धू भी नहीं हु मैं.. ये तोह मुझे पता है…
इक़बाल है पड़ा - मैंने कब कहाँ आप बुद्धू हो मैडमजी. बस बता रहा था. और फिर ये बीच में जो डंडा है, इससे गाडी गियर में जाती है…
सुप्रिया ने उसे भोलेपन से देखते हुए कहा - उससे क्या होता है?
इक़बाल - इससे गाडी आगे चलती है... ये देखो इसके आस पास कुछ नंबर लिखे है न.. 1, 2, 3, 4, 5 और र. ये डंडे को 1 में डालने से आगे चलती है और र में डालने से पीछे जाती है...
इक़बाल कितनी बारीकी से सुप्रिया को सब समझा रहा था, पर डंडे को डालने की बात से सुप्रिया की मनो हसी छूट रही हो, उसने किसी तरह से अपने आप पर कण्ट्रोल रखा.
सुप्रिया - समझ गयी... 1 से आगे और र से पीछे...
इक़बाल - हाँ बिलकुल... और ये चाबी ले कर गाडी को स्टार्ट करो...
सुप्रिया ने इक़बाल के हाथ से गाडी की चाबी ली hi थी की इक़बाल एकदम से बोल पड़ा - रुको रुको मैडम... आपकी पहली बार है न...
इक़बाल ने अपने हाथ दुआ के लिए आगे बढ़ाये - Bismillah-ar-rahman-ar-rahim....
सुप्रिया इस सब के बारे में ज्यादा नहीं जानती थी, इसलिए वह पूछ बैठी - इससे क्या होता है?
इक़बाल - कोई भी नया काम करने से पहले इसे बोलते है तोह काम ाचा होता है... आपके यहाँ भी होता होगा न कुछ ऐसा...
सुप्रिया - हाँ मैं ज्यादा भगवन को मानती तोह नहीं हु, पर हाँ हमारे यहाँ कुछ भी नया काम करने से पहले गणेश जी की पूजा करते है या घी शक्कर कहते है...
इक़बाल - घी शक्कर तोह नहीं है यहाँ और पूजा भी कैसे करोगे, मेरे ख्याल से आप भी बिस्मिल्लाह hi बोल के शुरू कर दो...
सुप्रिया ने ek-do सेकंड सोचा, वह ज्यादा '. तोह थी नहीं, और उसे हमेशा से hi हर धर्म की इज़्ज़त करना hi सिखाई गयी थी, तोह उसे ऐसे करने में कोई हर्ज़ नहीं लगा. बस हाँ थोड़ा सा अजीब लगा क्यूंकि उसे ये शब्द अचे से नहीं आते थे, तोह वह कुछ गलत नहीं बोलना चाहती थी. उसने इक़बाल की तरफ देखते हुए कहा - बिस्मिल्लाह...
इक़बाल ने अपने हाथ आगे करके दुआ में बना के दिखाए और इशारा किया की वह भी ऐसा hi करे, और फिर उसे आगे के शब्द फिर से बता दिए - ar-rahman ar-rahim.
सुप्रिया ने भी अपने हाथ दुआ में उठा लिए - ar-rahman ar-rahim.
इक़बाल सुप्रिया के ऐसा करने पर काफी ज्यादा खुश सा हो गया - बहुत hi बढ़िया मैडमजी... अब आप जरूर कामयाब होंगे... आप शुरू करो अब गाडी
इक़बाल ने जहाँ बोलै था सुप्रिया वहां चाबी लगाने की कोशिश कर रही थी, पर चाबी अंदर नहीं जा रही थी....
सुप्रिया - ये तोह नहीं जा रही है... शायद ये इसकी चाबी नहीं है...
इक़बाल - नहीं मैडमजी, आप चाबी को दूसरी तरफ घुमा के देखो.. वह जाएगी अंदर... ये इसका hi छेड़ है... थोड़ा ज़ोर से अंदर डालो...
सुप्रिया घबराते हुए बोली - ठीक hai...main तरय करती हु...
सुप्रिया ने चाबी को दूसरी तरफ घुमाया और हाँ इस बार चाबी अंदर चली गयी.
इक़बाल - अब आप अपने बाये पेअर से क्लच दबा के रखो... और चाबी को घुमा दो...
सुप्रिया ने हलके से चाबी घुमाई और इंजन स्टार्ट होने की आवाज़ आयी पर वह जल्दी से बंद हो गया. सुप्रिया ने इक़बाल की और परेशान होते हुए देखा.
इक़बाल - ज़ोर के घुम्यो मैडमजी...
सुप्रिया ने इस बार ज़ोर के ज़ोर के चाबी को घुमाया और इंजन इस बार स्टार्ट हो गया. पर उसने जल्दी से अपना पेअर क्लच से हटा लिया जिससे गाडी झटका खा के बंद हो गयी.
इक़बाल - नहीं मैडमजी... ऐसे नहीं... आप पहले गियर को 1 पर ले कर आना है... और फिर धीरे धीरे क्लच को छोड़ना है... एकदम से नहीं...
सुप्रिया इतने साड़ी चीज़े सुन कर काफी परेशान सी हो गयी थी. शायद ये गाडी उसकी बस की चीज़ नहीं थी - नहीं इक़बाल, मुझसे नहीं हो पायेगा ये... ऐसा करो घर वापस ले चलो...
इक़बाल - अभी तोह हमने शुरू भी नहीं किया है और आप अभी से क्यों हार मान रहे हो... आप परेशान मत हो... मैं काफी आराम से सिखायूँगा.. आप अपना ये हाथ इस डंडे पर रखो और गाडी फिर से ों करो...
सुप्रिया ने अपना हाथ गियर की स्टिक पर रखा और फिर से क्लच को दबाते हुए गाडी की चाबी को ज़ोर के घुमा दिया. गाडी ों होते hi, इक़बाल ने अपना हाथ सुप्रिया के हाथ के ऊपर रखते हुए गियर स्टिक को पहले गियर में करा, और फिर सुप्रिया को धीरे धीरे क्लच से पेअर हटाने के लिए कहा. सुप्रिया ने 1 सेकंड में क्लच से पेअर हटा लिया और गाडी फिर से बंद हो गयी थी.
इक़बाल ने अपना हाथ सुप्रिया के हाथ के ऊपर hi रखा हुआ था - कोई बात नहीं, हम फिर से तरय करेंगे.... इस बार थोड़ा और धीरे क्लच को छोड़ना.
सुप्रिया ने फिर से वही सब किया पर इस बार क्लच को थोड़ा और धीरे धीरे छोड़ा. क्लच पर से पेअर हटते hi गाडी धीरे धीरे आगे बढ़ने लगी. सुप्रिया ने ख़ुशी में इक़बाल की तरफ देखा, पर उसका दूसरा हाथ स्टीयरिंग पर नहीं था.
इक़बाल थोड़ी सी तेज़ आवाज़ में बोलै - मैडमजी दूसरा हाथ स्टीयरिंग पर रखो न...
सुप्रिया - हाँ... सॉरी....
इक़बाल - अब इसको इधर करोगे तोह गाडी इधर जाएगी और उधर करोगे तोह उधर...
इक़बाल ने अपना दूसरा हाथ स्टीयरिंग व्हील पर रखा और हलके हलके उसे इधर उधर घूमने लगा. उसके दया हाथ अभी भी सुप्रिया के बाए हाथ को कास कर पड़के हुए था. गाडी अब थोड़ी तेज़ चलनी शुरू हो गयी थी.
थोड़ी सी आगे जाकर उसने सुप्रिया को बोलै - अब बस आप ब्रेक मार दो...
सुप्रिया - ब्रेक कहाँ है....
इक़बाल ने हड़बड़ाते हुए कहा - बीच वाला पेडल मैडमजी, क्लच को दबा के रखो और दुसरे पेअर से ब्रेक को धीरे धीरे दबायो.
सुप्रिया ने झटके से ब्रेक और क्लच दोनों दबाये, और गाडी झटके से रुक गयी.
इक़बाल - कोई नहीं मैडम जी... आज बस इसी पर काम करते है... धीरे धीरे आपको आ जायेगा...
सुप्रिया - ऐसा लगता है मुझे सालो लग जायेंगे गाडी सीखने में...
इक़बाल - नहीं लगेंगे मैडम जी... और जितना भी टाइम लगे.. मैं आपको सीखा के रहूँगा...
सुप्रिया - शुक्रिया इक़बाल आपका... आप सच में कितना सब्र रख रहे हो मेरे साथ...
इक़बाल हस्ते हुए बोलै - लगता है मेरे साथ रहते रहते आपकी उर्दू भी अछि हो जाएगी... आप के मुँह से उर्दू तोह और भी हसीं लगती है...
सुप्रिया ने शरमाते हुए अपना हाथ इक़बाल के हाथ के नीचे से हटा लिया - मुझे ज्यादा नहीं आती....
इक़बाल सुप्रिया के सुर्ख लाल गाल देख कर और भी खुश हो गया - कोई नहीं मैडमजी... मैं सीखा दूंगा आपको...
सुप्रिया और इक़बाल ऐसे hi थोड़ी देर तक गाडी स्टार्ट करना और थोड़ी दूर सीधे चलने की प्रैक्टिस करते रहे. इक़बाल ने घडी में टाइम देखा तोह 7.30 बजने को आये थे.
इक़बाल - मैडम जी अब चले घर... मेरी ड्यूटी का टाइम होने वाला है.. पर आप बोले तोह और देर भी रुक सकते है...
सुप्रिया ने भी घडी में टाइम देखा - ओह्ह्ह... 7.30 बज गए... हाँ अतुल जागने वाले होंगे... चलो जल्दी से चलते है...
सुप्रिया ने गाडी रोकी और जल्दी से दोनों ने अपनी जगह एक्सचेंज की. इक़बाल जल्दी से गाडी चलता हुआ वापस बिल्डिंग की तरफ ले गया. उसने गाडी बिल्डिंग के बहार रोकी.
सुप्रिया - थैंक यू इक़बाल... आप प्लीज ये गाडी वाली बात अतुल से न कहना... अभी मैंने उन्हें कुछ नहीं बताया है...
इक़बाल - मैडम जी... आपके मेरे बीच की बात किसी को नहीं पता चलेगी... आप बेफिक्र रहो... मैंने वह दुसरे भैया वाली बात भी किसी से नहीं करि है... वैसे आज कल वह दीखते नहीं है...
सुप्रिया का चेहरा एक डैम से थोड़ा सीरियस सा हो गया - नहीं वह अब यहाँ नहीं आएंगे... और अगर आये तोह आप उनको अंदर आने से पहले मुझे कॉल कर देना...
इक़बाल को तोह हमेशा से hi राहुल ाचा नहीं लगता था और इस बात ने तोह उसे बेहद खुश कर दिया था. क्या मैश,.' दिन था उसके लिए.
इक़बाल - बिलकुल मैडम जी... आज के बाद वह आपकी इज़ाज़त के बिना इस बिल्डिंग में दाखिल नहीं हो पायेगा...
सुप्रिया - चलिए, अभी मैं चलती हूँ... वीकडेस पर तोह सीखना मुश्किल है... अब तोह शनिवार को hi आगे सीख पयूंगी...
इक़बाल - कोई बात नहीं... आप मुझे एक रात पहले बोल देना बस... मैं हाज़िर हो जायूँगा...
सुप्रिया - ठीक है इक़बाल... बहुत बहुत शुक्रिया फिर से...
सुप्रिया ने जैसे मूवीज में देखा था, उसने इक़बाल को हलके से आदाब किया, और अपने घर की तरफ निकल पड़ी. वह सोचने लगी की काम से काम उसने आज कुछ तोह शुरुवात की गाडी चलने में. इक़बाल ने सच में कितना पेशेंस दिखाया था उसका साथ. अगर अतुल होते तोह वह उसे 5 मिनट के बाद hi घर वापस ले आते. इक़बाल उससे पैसे भी नहीं ले रहा था, उसे कुछ तोह करना hi होगा इक़बाल के लिए. वैसे कितना मीठा बोलता था इक़बाल, सच तोह कह रही थी करुणा, सीधा hi है वह.
उधर इक़बाल भी काफी खुश था की आखिर कार उसे उसकी प्यारी मैडम जी के साथ कुछ टाइम बिताने का मौका तोह मिला. और टाइम क्या, वह तोह उनका मुलायम हाथ भी अपने सख्त हाथ में पकड़ सका था. सच में गुलाब के फूल की पंखुड़ी से भी ज्यादा मुलायम था उनका हाथ. वह अपने हाथ को ऐसे मसल रहा था जैसे अभी भी सुप्रिया के हाथ का कुछ हिस्सा वहां बाकी हो.
सुप्रिया ने घर आ कर देखा तोह अतुल अभी भी सो रहे थे. वह काफी ज्यादा खुश थी, और उसके अंदर जैसे एक नया जोश भर गया था. उसने अपने कपडे वहीँ कमरे में उतारे और नहाने घुस गयी.
जब वह नाहा के बहार आयी तोह देखा की अतुल जग गया था. उसने बीएड पर लेते लेते hi सुप्रिया से पुछा - कैसी रही तुम्हारी जॉगिंग? लगता है काफी दूर तक जॉगिंग करके आयी हो...
सुप्रिया - नहीं... ज्यादा दूर तक तोह नहीं गए थे... पर हाँ मज़ा काफी आया....
अतुल - वह तोह लग hi रहा है तुम्हारा चेहरा देख कर...
सुप्रिया - चलो मैं जल्दी से चाय बनती हूँ...
सुप्रिया ये कह कर गुनगुनाते हुए किचन में चाय बनाने घुस गयी. आज सच में उसे ऐसा लग रहा था की वह कुछ भी कर सकती थी. चाय नाश्ते के बाद सुप्रिया घर के और कामो में लग गयी. पर आज उसमे इतनी ख़ुशी थी की वह बहार जाकर सेलिब्रेट सा करना चाहती थी. उसकी पहली सैलरी भी तोह आ चुकी थी.
सुप्रिया - अतुल... काफी दिन हो गए कहीं बहार गए हुए... आज रात बहार खाना खाये क्या?
अतुल - आज रात? कल ऑफिस भी तोह है...
सुप्रिया - चलो न प्लीज... जल्दी वापस आ जायेंगे.. ये समझो की मेरी पहली सैलरी की पार्टी है...
अतुल - ठीक है मैडम... जैसे आप कहो... ऐसा करते है 7 बजे चलते है और 9 - 9.30 तक वापस आ जायेंगे...
सुप्रिया - हाँ... ये ठीक रहेगा...
शाम को सुप्रिया बहार जाने के लिए रेडी हो गयी. उसने एक लाल रंग का सूट पहना जिसमे वह बहुत hi सुन्दर लग रही थी. उसने जल्दी से अपनी एक सेल्फी खींची.
इतने में अतुल भी तैयार हो गया था और दोनों नीचे चल पड़े.
सुप्रिया - अतुल... आज कार से चले क्या?
अतुल - कार से... पर बाइक से जल्दी काम हो जायेगा न...
सुप्रिया चिढ़ते हुए बोली - ये तोह सही है... कार ली है पर इस्तेमाल भी मत करो...
अतुल - ाचा बाबा ठीक है... कार से चलते है....
सुप्रिया ये सुनकर खुश हो गयी - आपका बहुत बहुत शुक्रिया अतुल जी…..
अतुल है पड़ा - क्या बात hai...aaj तोह बड़ी खुश लग रही हो...
सुप्रिया मुस्कुरायी - बस ऐसे hi... खुश नहीं लग सकती क्या...
अतुल और सुप्रिया उनकी वगोंड़ में बैठे और चल पड़े. इक़बाल की ड्यूटी शायद ख़तम हो चुकी थी और अब वह बहार नहीं खड़ा था. सुप्रिया आज अतुल को गौर से गाडी चलते देख रही थी. पर थोड़ी देर बाद वह बोर होते हुए अपना फ़ोन चलने लगी. उसने कल डाउनलोड किया नया अप्प इंस्टाग्राम खोला. आज के पूरे जोश में उसने सोचा की घर पर खींची सेल्फी ऑनलाइन दाल hi देती हूँ. वैसे भी उसमे कुछ भी ऐसा वैसे तोह था नहीं. उसने मैं में बिस्मिल्लाह बोलते हुए अपनी फोटो पोस्ट कर दी. पता नहीं क्यों उसे सुबह क्या बिस्मिल्लाह अभी तक याद था.
रात को ट्रैफिक काफी था और उन्हें रेस्टोरेंट पहुंचने में थोड़ा टाइम लग गया. सुप्रिया को साउथ इंडियन बहुत ाचा लगता था और उसने अपने लिए डोसा आर्डर किया, अतुल ने अपने लिए नूडल्स. काफी भीड़ थी तोह खाना आने में टाइम लग गया और उन्हें कहते कहते 9.30 तोह रेस्टोरेंट में hi बज गए थे. वह लोग जल्दी से वहां से निकले घर की तरफ.
रास्ते में एक रेड लाइट पर उनकी गाडी के साइड में दो लड़के बाइक पर थे. अतुल की कार के शीशे नीचे थे तोह वह दोनों सुप्रिया को साफ़ देख पा रहे थे. वह सुप्रिया को देख कर उस पर कमेंट करने लगे...
लड़का - कहाँ जा रही हो मैडम इतनी रात को...
दूसरा लड़का - ओह भाई साहब... कहाँ से लाये हो इस माल को...
लड़का - Madam...ye लाल कुर्ती कहाँ से ली... वैसे हमारे साथ चलो... इससे तोह कहीं ज्यादा मज़ा करा देंगे तुम्हे...
सुप्रिया को उनकी बाते सुनकर गुस्सा आने लगा था, उसने अतुल की और देखा - आप कुछ बोलो न उन्हें...
अतुल ने गाडी के शीशे ऊपर कर लिए - कोई फायदा नहीं है सुप्रिया इनसे उलझने का... बस सामने देखती रहो...
उनमे से एक लड़का सुप्रिया की साइड के शीशे को नॉक करने लगा... सुप्रिया ने उसे गुस्से में देखा... पर उस लड़के ने जीब से अपने होंठ चाट ते हुए सुप्रिया को गन्दा सा इशारा किया.
सुप्रिया से रहा नहीं गया और उसने अपनी साइड का शीशा नीचे किया - तुम्हे लड़कियों की इज़्ज़त करना आता... अगर तुम्हारी बेहेन के साथ कोई ऐसी हरकत करे तोह...
बाइक पर पीछे बैठे लड़के को तोह जैसे मौका hi चाहिए था - मेरी बेहेन ऐसे रात को सड़को पर रंडी की तरह नहीं घूमती... चल तुझे बताता हूँ तेरी इज़्ज़त के साथ क्या करूँगा...
सिग्नल ग्रीन हो गया था और अतुल ने अपनी गाडी आगे दौड़ाई... उन लड़को ने भी अपनी बाइक उनकी गाडी के पीछे लगायी...
अतुल खीजते हुए सुप्रिया से बोलै - क्या जरूरत थी उनसे उलझने की... क्या मुसीबत पाल ली फालतू में...
अतुल ने मिरर में देखा तोह वह लोग अभी भी उसके पीछे आ रहे थे. किसी तरह अतुल गाडी चलता हुआ अपने बिल्डिंग तक पंहुचा. उसे वह पीछे तोह नहीं दिखाई दिए अब, शायद उन्होंने बीच रास्ते में पीछा करना छोड़ दिया होगा. अतुल ने गाडी पार्किंग में लगायी, और सुप्रिया और वह ऊपर घर की तरफ चले गए.
ऐसा नहीं था की आज से पहले किसी ने उस पर फब्तियां न कासी हो... पर आज शायद सुप्रिया बर्दाश्त करने के मूड में नहीं थी. अतुल अभी भी सुप्रिया पर थोड़ा गुस्सा था, पर उसने कुछ ज्यादा और बोलै नहीं. सुप्रिया भी चुप चाप अपने कपडे बदल कर सोने की तैयारी करने लगी.
तभी उसने अपने फ़ोन पर गौर किया, एक अननोन नंबर से 2-3 मिस्ड कॉल थी. शायद उसने अपना फ़ोन बीच में साइलेंट कर दिया था तोह उसे पता नहीं चला था. साथ hi एक मैसेज भी था उस नंबर से.
मैसेज - जानेमन... मैं लखनऊ आ रहा हु इस हफ्ते किसी काम से... तुमसे मिलने के लिए बेकरार हु... मुझे कॉल करो... प्रताप.
सुप्रिया ये मैसेज देख कर काँप गयी. कुछ महीनो पहले, जो कुछ प्रताप ने उसके साथ निक्की की शादी में किया था, वह उसने एक भयानक सपना समझ कर भुला दिया था. अब जब उसकी लाइफ में सब कुछ ाचा होने लगा था ये मुसीबत क्यों फिर से उसके सामने आ गयी थी. वह फटी आँखों से उस मैसेज को थोड़ी देर घूरती रही, उसे समझ hi नहीं आ रहा था की वह अब क्या करे.
अगले दिन संडे की सुबह सुरपिया 5.30 बजे उठ गयी थी. पिछली शाम को उसने अतुल को बताया था की वह और मेघा सुबह जॉगिंग करने नीचे जायेंगे, अगर अतुल को चलना है तोह वह भी चल सकता है. सुप्रिया को अछि तरह पता था की इतनी सुबह अतुल बिस्तर से नहीं निकलने वाले थे और मेघा का नाम सुनकर तोह बिलकुल भी नहीं. सुप्रिया ने एक ढीली सी टीशर्ट एंड लेग्गिंग्स पहनी और जूते पेहेन लिए. उसके ये रनिंग शूज उसने अतुल से जिद्द करके खरीदवाए थे, ये बोल कर की वह इन्हे पेहेन कर जॉगिंग करने जाएगी. पर शायद मुश्किल से कोई एक दिन जब उसने इन्हे पहना होगा.
सुप्रिया ने अपना चेहरा धो का नींद भगायी. आज तोह जैसे उसमें जोश भरा पड़ा हो इस नए काम को शुरू करने के लिए. उसके साथ हमेशा ऐसा होता था की नए काम के लिए वह सुबह टाइम से पहले उठ जाती थी. उसका मैं था की वह चाय पी ले, पर इतनी सुबह सुबह वह ज्यादा खातर पातर नहीं करना चाहती थी. वह बालकनी से बहार देखने लगी, मौसम अभी थोड़ा ठंडा सा hi था. सूरज निकलना शुरू हो रहा था, तोह काफी अँधेरा सा था. शायद 15 मिनट बाद थोड़ा उजाला हो जाये.
5.55 के आस पास सुप्रिया ने अपना फ़ोन लिया और लिफ्ट से नीचे आ गयी. बिल्डिंग के ठीक सामने इक़बाल ने एक सफ़ेद रंग की गाडी कड़ी करि हुई थी. गाडी थोड़ी पुराणी सी थी, पर सुप्रिया को इससे क्या मतलब, उसे तोह बस गाड़ी चलना सीखना था. इक़बाल सामने गाडी पर तक लगा कर खड़ा था. सुप्रिया मुस्कुराते हुए उसकी और चल पड़ी.
सुप्रिया को आते देख इक़बाल का चेहरा भी खिल उठा - मैडमजी आप तोह एक डैम टाइम से आ गए… मैं सोच रहा था की कहीं आप नहीं जगे तोह….
सुप्रिया - कैसे नहीं आती… टाइम दिया न मैंने आपको…
इक़बाल - सच में… आप जुबान के पक्के हो…
सुप्रिया - तोह अब यहीं से चलना शुरू करू क्या?
इक़बाल - नहीं मैडमजी, आपने बोलै था न की आपने कभी भी गाडी नहीं चलायी है… तोह ऐसा करते है पहले किसी खाली मैदान में चलते है… यहीं पास में hi है एक…
सुप्रिया - हाँ ये ठीक रहेगा… चलिए…
सुप्रिया आगे की सीट पर पैसेंजर वाली साइड बैठ गयी और इक़बाल ड्राइवर वाली सीट पर बैठ कर गाडी चलने लगा. सुप्रिया गाडी में इधर उधर देख रही थी. गाडी काफी अछि स्मेल कही थी जैसे किसी ने अभी थोड़ी देर पहले कोई परफ्यूम छिड़का हो. गाडी में इक़बाल के धर्म की कुछ फोटो और माला तंगी हुई थी जिसे देख कर लग रहा था की किसी '. की hi गाडी है. थोड़ी सी hi देर में इक़बाल गाडी को एक खुले मैदान में ले आया. वहां पहुंचते पहुंचते थोड़ी सी रौशनी हो गयी थी. पूरे मैदान में अभी बस इक्का दुक्का hi लोग थे. इक़बाल ने गाडी रोकी और गाडी से बहार निकला. सुप्रिया भी कड़ी हो कर ड्राइवर वाली साइड पर आ गयी.
सुप्रिया ड्राइवर वाली साइड पर बैठी थी और इक़बाल वहीँ दरवाज़ा खोले खड़ा था. वह सुप्रिया के पैरो के और देख रहा था, देखना तोह उसे ये था की सुप्रिया के पेअर सही जगह लगे हो, पर उसे सुप्रिया की टाइट लेग्गिंग्स में बस उसके सेक्सी जाँघे hi दिख रही थी.
उसने अपने आप पर किसी तरह काबू रखते हुए बोलै - मैडमजी तोह नीचे तीन पेडल है, एक्सेलरेटर, ब्रेक और क्लच. दिख रहे है न आपको?
सुप्रिया ने नीचे झांकते हुए देखा और फिर अपने दाहिने पेअर से तीनो को एक एक करके टच किया. बीच वाला पेडल बाकि दोनों से थोड़ा सा बड़ा था. सुप्रिया के पेअर पेडल पर अचे से नहीं पहुंच पा रहे थे और उसे नीचे सरकना पद रहा था.
इक़बाल - नहीं नहीं ऐसा आप लेटो मत, सीट आगे कर लो….
सुप्रिया - कहाँ से होगी सीट आगे?
सुप्रिया के गाल शर्मिंदगी से लाल हो गए थे. कार चलना तोह दूर उसे तोह ये भी नहीं पता था की सीट कैसे आगे पीछे होती है. अब वह थोड़ी न कार में इतना ज्यादा बैठी थी अपनी लाइफ में. अपनी खुद की कार में तोह वह मुश्किल से 3-4 बार बैठी थी पिछले एक महीने में.
इक़बाल उसकी शकल देख कर समझ गया था - कोई नहीं मैडमजी… मैं आपको सब समझा दूंगा… सबको इस दुनिया में hi आ कर सीखना होता है न… आपकी सीट के नीचे एक डंडा है, उसे दबायो और सीट को आगे कर लो…
सुप्रिया में अपनी सीट के नीचे हाथ डाला… कुछ तोह था और वह उसे नीचे दबाने की कोशिश कर रही थी पर वह नीचे नहीं हो रहा that’s… कुछ सेकंड वह ऐसे hi हाथ मारती रही. इक़बाल भी संयम से खड़ा उसे देख रहा था.
सुप्रिया - कहाँ दबायु… नहीं समझ आ रहा…
इक़बाल - मैं बता देता हूँ…
इक़बाल झुका और उसने अपना हाथ सुप्रिया के खुले पैरो के बीच में से ले जाते हुए सीट के नीचे उसके हाथ पर रख दिया. सुप्रिया एक सेकंड के लिए तोह घबरा गयी की वह क्या कर रहा था और सीट पर थोड़ा उचक गयी.
इक़बाल - डरो मत मैडमजी, एहि है वह डंडा.. इसे आप ऊपर की और दबायो…
सुप्रिया - ओह ाचा… मैंने इसे नीचे पुश कर रही थी…
इक़बाल ने उसका हाथ पकड़ते हुए सीट के लीवर पर रखा और उसे ऊपर करा. और फिर दुसरे हाथ से सुप्रिया की सीट आगे धकेल दी. पर सीट एकदम से कुछ ज्यादा hi आगे हो गयी और सुप्रिया के बूब्स स्टीयरिंग व्हील पर जा कर लगे. इक़बाल का हाथ भी वहीँ सुप्रिया की जाँघों के बीच में खींचता हुआ फास गया.
सुप्रिया की हलकी सी चीख निकल गयी - Ouchhh…ye क्या किया...
सुप्रिया ने नीचे इक़बाल के हाथ की तरफ देखा और थोड़ा गुस्से में इक़बाल की तरफ देखा. इक़बाल ने घबरा कर झट से अपना हाथ बहार खींचा, जो उसके जांघो से रगड़ता हुआ बहार निकला - सॉरी मैडमजी… एकदम से ज्यादा आगे हो गयी सीट.
सुप्रिया ने इक़बाल की शकल देखते हुए अपने गुस्से को शांत किया - कोई नहीं… आप हेल्प hi कर्मा ओह रहे थे…. मैं अब पीछे करू सीट?
इक़बाल की सांस में सांस आयी - हाँ.. आप तरय करो पीछे करने का…
सुप्रिया को अब समझ आ गया था की लीवर कहाँ है, और उसने उसे दबाते हुए अपनी सीट पीछे कर ली. ये करते hi उसके चेहरे पर स्माइल आ गयी, जैसे उसने कोई बड़ी चीज़ सीख ली हो. इक़बाल भी उसकी स्माइल देख कर उसकी तरफ मुस्कुरा दिया. सुप्रिया ने फिर सीट को आगे पीछे करके अपने पेअर अचे से एडजस्ट कर लिए.
सुप्रिया - हाँ अब मेरे पेअर सही से पहुंच रहे है.
इक़बाल- ठीक है आप सीट बेल्ट लगाया, इतने मैं दूसरी साइड बैठता हूँ.
सुप्रिया ने सीट बेल्ट लगायी और इतनी देर में इक़बाल पैसेंजर वाली साइड आ कर बैठ गया. उसने देखा की सुप्रिया की सीट की बेल्ट उसके मम्मो के बीच में से गुज़रते हुए उन्हें और बड़ा बना रही थी. उसे देख कर इक़बाल का लुंड टाइट होने लगा था.
इक़बाल ने स्टीयरिंग को हाथ लगते हुआ कहा - ये स्टीयरिंग व्हील है, इससे गाडी इधर उधर होती है…
सुप्रिया झेपते हुए बोली - इतनी बुद्धू भी नहीं हु मैं.. ये तोह मुझे पता है…
इक़बाल है पड़ा - मैंने कब कहाँ आप बुद्धू हो मैडमजी. बस बता रहा था. और फिर ये बीच में जो डंडा है, इससे गाडी गियर में जाती है…
सुप्रिया ने उसे भोलेपन से देखते हुए कहा - उससे क्या होता है?
इक़बाल - इससे गाडी आगे चलती है... ये देखो इसके आस पास कुछ नंबर लिखे है न.. 1, 2, 3, 4, 5 और र. ये डंडे को 1 में डालने से आगे चलती है और र में डालने से पीछे जाती है...
इक़बाल कितनी बारीकी से सुप्रिया को सब समझा रहा था, पर डंडे को डालने की बात से सुप्रिया की मनो हसी छूट रही हो, उसने किसी तरह से अपने आप पर कण्ट्रोल रखा.
सुप्रिया - समझ गयी... 1 से आगे और र से पीछे...
इक़बाल - हाँ बिलकुल... और ये चाबी ले कर गाडी को स्टार्ट करो...
सुप्रिया ने इक़बाल के हाथ से गाडी की चाबी ली hi थी की इक़बाल एकदम से बोल पड़ा - रुको रुको मैडम... आपकी पहली बार है न...
इक़बाल ने अपने हाथ दुआ के लिए आगे बढ़ाये - Bismillah-ar-rahman-ar-rahim....
सुप्रिया इस सब के बारे में ज्यादा नहीं जानती थी, इसलिए वह पूछ बैठी - इससे क्या होता है?
इक़बाल - कोई भी नया काम करने से पहले इसे बोलते है तोह काम ाचा होता है... आपके यहाँ भी होता होगा न कुछ ऐसा...
सुप्रिया - हाँ मैं ज्यादा भगवन को मानती तोह नहीं हु, पर हाँ हमारे यहाँ कुछ भी नया काम करने से पहले गणेश जी की पूजा करते है या घी शक्कर कहते है...
इक़बाल - घी शक्कर तोह नहीं है यहाँ और पूजा भी कैसे करोगे, मेरे ख्याल से आप भी बिस्मिल्लाह hi बोल के शुरू कर दो...
सुप्रिया ने ek-do सेकंड सोचा, वह ज्यादा '. तोह थी नहीं, और उसे हमेशा से hi हर धर्म की इज़्ज़त करना hi सिखाई गयी थी, तोह उसे ऐसे करने में कोई हर्ज़ नहीं लगा. बस हाँ थोड़ा सा अजीब लगा क्यूंकि उसे ये शब्द अचे से नहीं आते थे, तोह वह कुछ गलत नहीं बोलना चाहती थी. उसने इक़बाल की तरफ देखते हुए कहा - बिस्मिल्लाह...
इक़बाल ने अपने हाथ आगे करके दुआ में बना के दिखाए और इशारा किया की वह भी ऐसा hi करे, और फिर उसे आगे के शब्द फिर से बता दिए - ar-rahman ar-rahim.
सुप्रिया ने भी अपने हाथ दुआ में उठा लिए - ar-rahman ar-rahim.
इक़बाल सुप्रिया के ऐसा करने पर काफी ज्यादा खुश सा हो गया - बहुत hi बढ़िया मैडमजी... अब आप जरूर कामयाब होंगे... आप शुरू करो अब गाडी
इक़बाल ने जहाँ बोलै था सुप्रिया वहां चाबी लगाने की कोशिश कर रही थी, पर चाबी अंदर नहीं जा रही थी....
सुप्रिया - ये तोह नहीं जा रही है... शायद ये इसकी चाबी नहीं है...
इक़बाल - नहीं मैडमजी, आप चाबी को दूसरी तरफ घुमा के देखो.. वह जाएगी अंदर... ये इसका hi छेड़ है... थोड़ा ज़ोर से अंदर डालो...
सुप्रिया घबराते हुए बोली - ठीक hai...main तरय करती हु...
सुप्रिया ने चाबी को दूसरी तरफ घुमाया और हाँ इस बार चाबी अंदर चली गयी.
इक़बाल - अब आप अपने बाये पेअर से क्लच दबा के रखो... और चाबी को घुमा दो...
सुप्रिया ने हलके से चाबी घुमाई और इंजन स्टार्ट होने की आवाज़ आयी पर वह जल्दी से बंद हो गया. सुप्रिया ने इक़बाल की और परेशान होते हुए देखा.
इक़बाल - ज़ोर के घुम्यो मैडमजी...
सुप्रिया ने इस बार ज़ोर के ज़ोर के चाबी को घुमाया और इंजन इस बार स्टार्ट हो गया. पर उसने जल्दी से अपना पेअर क्लच से हटा लिया जिससे गाडी झटका खा के बंद हो गयी.
इक़बाल - नहीं मैडमजी... ऐसे नहीं... आप पहले गियर को 1 पर ले कर आना है... और फिर धीरे धीरे क्लच को छोड़ना है... एकदम से नहीं...
सुप्रिया इतने साड़ी चीज़े सुन कर काफी परेशान सी हो गयी थी. शायद ये गाडी उसकी बस की चीज़ नहीं थी - नहीं इक़बाल, मुझसे नहीं हो पायेगा ये... ऐसा करो घर वापस ले चलो...
इक़बाल - अभी तोह हमने शुरू भी नहीं किया है और आप अभी से क्यों हार मान रहे हो... आप परेशान मत हो... मैं काफी आराम से सिखायूँगा.. आप अपना ये हाथ इस डंडे पर रखो और गाडी फिर से ों करो...
सुप्रिया ने अपना हाथ गियर की स्टिक पर रखा और फिर से क्लच को दबाते हुए गाडी की चाबी को ज़ोर के घुमा दिया. गाडी ों होते hi, इक़बाल ने अपना हाथ सुप्रिया के हाथ के ऊपर रखते हुए गियर स्टिक को पहले गियर में करा, और फिर सुप्रिया को धीरे धीरे क्लच से पेअर हटाने के लिए कहा. सुप्रिया ने 1 सेकंड में क्लच से पेअर हटा लिया और गाडी फिर से बंद हो गयी थी.
इक़बाल ने अपना हाथ सुप्रिया के हाथ के ऊपर hi रखा हुआ था - कोई बात नहीं, हम फिर से तरय करेंगे.... इस बार थोड़ा और धीरे क्लच को छोड़ना.
सुप्रिया ने फिर से वही सब किया पर इस बार क्लच को थोड़ा और धीरे धीरे छोड़ा. क्लच पर से पेअर हटते hi गाडी धीरे धीरे आगे बढ़ने लगी. सुप्रिया ने ख़ुशी में इक़बाल की तरफ देखा, पर उसका दूसरा हाथ स्टीयरिंग पर नहीं था.
इक़बाल थोड़ी सी तेज़ आवाज़ में बोलै - मैडमजी दूसरा हाथ स्टीयरिंग पर रखो न...
सुप्रिया - हाँ... सॉरी....
इक़बाल - अब इसको इधर करोगे तोह गाडी इधर जाएगी और उधर करोगे तोह उधर...
इक़बाल ने अपना दूसरा हाथ स्टीयरिंग व्हील पर रखा और हलके हलके उसे इधर उधर घूमने लगा. उसके दया हाथ अभी भी सुप्रिया के बाए हाथ को कास कर पड़के हुए था. गाडी अब थोड़ी तेज़ चलनी शुरू हो गयी थी.
थोड़ी सी आगे जाकर उसने सुप्रिया को बोलै - अब बस आप ब्रेक मार दो...
सुप्रिया - ब्रेक कहाँ है....
इक़बाल ने हड़बड़ाते हुए कहा - बीच वाला पेडल मैडमजी, क्लच को दबा के रखो और दुसरे पेअर से ब्रेक को धीरे धीरे दबायो.
सुप्रिया ने झटके से ब्रेक और क्लच दोनों दबाये, और गाडी झटके से रुक गयी.
इक़बाल - कोई नहीं मैडम जी... आज बस इसी पर काम करते है... धीरे धीरे आपको आ जायेगा...
सुप्रिया - ऐसा लगता है मुझे सालो लग जायेंगे गाडी सीखने में...
इक़बाल - नहीं लगेंगे मैडम जी... और जितना भी टाइम लगे.. मैं आपको सीखा के रहूँगा...
सुप्रिया - शुक्रिया इक़बाल आपका... आप सच में कितना सब्र रख रहे हो मेरे साथ...
इक़बाल हस्ते हुए बोलै - लगता है मेरे साथ रहते रहते आपकी उर्दू भी अछि हो जाएगी... आप के मुँह से उर्दू तोह और भी हसीं लगती है...
सुप्रिया ने शरमाते हुए अपना हाथ इक़बाल के हाथ के नीचे से हटा लिया - मुझे ज्यादा नहीं आती....
इक़बाल सुप्रिया के सुर्ख लाल गाल देख कर और भी खुश हो गया - कोई नहीं मैडमजी... मैं सीखा दूंगा आपको...
सुप्रिया और इक़बाल ऐसे hi थोड़ी देर तक गाडी स्टार्ट करना और थोड़ी दूर सीधे चलने की प्रैक्टिस करते रहे. इक़बाल ने घडी में टाइम देखा तोह 7.30 बजने को आये थे.
इक़बाल - मैडम जी अब चले घर... मेरी ड्यूटी का टाइम होने वाला है.. पर आप बोले तोह और देर भी रुक सकते है...
सुप्रिया ने भी घडी में टाइम देखा - ओह्ह्ह... 7.30 बज गए... हाँ अतुल जागने वाले होंगे... चलो जल्दी से चलते है...
सुप्रिया ने गाडी रोकी और जल्दी से दोनों ने अपनी जगह एक्सचेंज की. इक़बाल जल्दी से गाडी चलता हुआ वापस बिल्डिंग की तरफ ले गया. उसने गाडी बिल्डिंग के बहार रोकी.
सुप्रिया - थैंक यू इक़बाल... आप प्लीज ये गाडी वाली बात अतुल से न कहना... अभी मैंने उन्हें कुछ नहीं बताया है...
इक़बाल - मैडम जी... आपके मेरे बीच की बात किसी को नहीं पता चलेगी... आप बेफिक्र रहो... मैंने वह दुसरे भैया वाली बात भी किसी से नहीं करि है... वैसे आज कल वह दीखते नहीं है...
सुप्रिया का चेहरा एक डैम से थोड़ा सीरियस सा हो गया - नहीं वह अब यहाँ नहीं आएंगे... और अगर आये तोह आप उनको अंदर आने से पहले मुझे कॉल कर देना...
इक़बाल को तोह हमेशा से hi राहुल ाचा नहीं लगता था और इस बात ने तोह उसे बेहद खुश कर दिया था. क्या मैश,.' दिन था उसके लिए.
इक़बाल - बिलकुल मैडम जी... आज के बाद वह आपकी इज़ाज़त के बिना इस बिल्डिंग में दाखिल नहीं हो पायेगा...
सुप्रिया - चलिए, अभी मैं चलती हूँ... वीकडेस पर तोह सीखना मुश्किल है... अब तोह शनिवार को hi आगे सीख पयूंगी...
इक़बाल - कोई बात नहीं... आप मुझे एक रात पहले बोल देना बस... मैं हाज़िर हो जायूँगा...
सुप्रिया - ठीक है इक़बाल... बहुत बहुत शुक्रिया फिर से...
सुप्रिया ने जैसे मूवीज में देखा था, उसने इक़बाल को हलके से आदाब किया, और अपने घर की तरफ निकल पड़ी. वह सोचने लगी की काम से काम उसने आज कुछ तोह शुरुवात की गाडी चलने में. इक़बाल ने सच में कितना पेशेंस दिखाया था उसका साथ. अगर अतुल होते तोह वह उसे 5 मिनट के बाद hi घर वापस ले आते. इक़बाल उससे पैसे भी नहीं ले रहा था, उसे कुछ तोह करना hi होगा इक़बाल के लिए. वैसे कितना मीठा बोलता था इक़बाल, सच तोह कह रही थी करुणा, सीधा hi है वह.
उधर इक़बाल भी काफी खुश था की आखिर कार उसे उसकी प्यारी मैडम जी के साथ कुछ टाइम बिताने का मौका तोह मिला. और टाइम क्या, वह तोह उनका मुलायम हाथ भी अपने सख्त हाथ में पकड़ सका था. सच में गुलाब के फूल की पंखुड़ी से भी ज्यादा मुलायम था उनका हाथ. वह अपने हाथ को ऐसे मसल रहा था जैसे अभी भी सुप्रिया के हाथ का कुछ हिस्सा वहां बाकी हो.
सुप्रिया ने घर आ कर देखा तोह अतुल अभी भी सो रहे थे. वह काफी ज्यादा खुश थी, और उसके अंदर जैसे एक नया जोश भर गया था. उसने अपने कपडे वहीँ कमरे में उतारे और नहाने घुस गयी.
जब वह नाहा के बहार आयी तोह देखा की अतुल जग गया था. उसने बीएड पर लेते लेते hi सुप्रिया से पुछा - कैसी रही तुम्हारी जॉगिंग? लगता है काफी दूर तक जॉगिंग करके आयी हो...
सुप्रिया - नहीं... ज्यादा दूर तक तोह नहीं गए थे... पर हाँ मज़ा काफी आया....
अतुल - वह तोह लग hi रहा है तुम्हारा चेहरा देख कर...
सुप्रिया - चलो मैं जल्दी से चाय बनती हूँ...
सुप्रिया ये कह कर गुनगुनाते हुए किचन में चाय बनाने घुस गयी. आज सच में उसे ऐसा लग रहा था की वह कुछ भी कर सकती थी. चाय नाश्ते के बाद सुप्रिया घर के और कामो में लग गयी. पर आज उसमे इतनी ख़ुशी थी की वह बहार जाकर सेलिब्रेट सा करना चाहती थी. उसकी पहली सैलरी भी तोह आ चुकी थी.
सुप्रिया - अतुल... काफी दिन हो गए कहीं बहार गए हुए... आज रात बहार खाना खाये क्या?
अतुल - आज रात? कल ऑफिस भी तोह है...
सुप्रिया - चलो न प्लीज... जल्दी वापस आ जायेंगे.. ये समझो की मेरी पहली सैलरी की पार्टी है...
अतुल - ठीक है मैडम... जैसे आप कहो... ऐसा करते है 7 बजे चलते है और 9 - 9.30 तक वापस आ जायेंगे...
सुप्रिया - हाँ... ये ठीक रहेगा...
शाम को सुप्रिया बहार जाने के लिए रेडी हो गयी. उसने एक लाल रंग का सूट पहना जिसमे वह बहुत hi सुन्दर लग रही थी. उसने जल्दी से अपनी एक सेल्फी खींची.
इतने में अतुल भी तैयार हो गया था और दोनों नीचे चल पड़े.
सुप्रिया - अतुल... आज कार से चले क्या?
अतुल - कार से... पर बाइक से जल्दी काम हो जायेगा न...
सुप्रिया चिढ़ते हुए बोली - ये तोह सही है... कार ली है पर इस्तेमाल भी मत करो...
अतुल - ाचा बाबा ठीक है... कार से चलते है....
सुप्रिया ये सुनकर खुश हो गयी - आपका बहुत बहुत शुक्रिया अतुल जी…..
अतुल है पड़ा - क्या बात hai...aaj तोह बड़ी खुश लग रही हो...
सुप्रिया मुस्कुरायी - बस ऐसे hi... खुश नहीं लग सकती क्या...
अतुल और सुप्रिया उनकी वगोंड़ में बैठे और चल पड़े. इक़बाल की ड्यूटी शायद ख़तम हो चुकी थी और अब वह बहार नहीं खड़ा था. सुप्रिया आज अतुल को गौर से गाडी चलते देख रही थी. पर थोड़ी देर बाद वह बोर होते हुए अपना फ़ोन चलने लगी. उसने कल डाउनलोड किया नया अप्प इंस्टाग्राम खोला. आज के पूरे जोश में उसने सोचा की घर पर खींची सेल्फी ऑनलाइन दाल hi देती हूँ. वैसे भी उसमे कुछ भी ऐसा वैसे तोह था नहीं. उसने मैं में बिस्मिल्लाह बोलते हुए अपनी फोटो पोस्ट कर दी. पता नहीं क्यों उसे सुबह क्या बिस्मिल्लाह अभी तक याद था.
रात को ट्रैफिक काफी था और उन्हें रेस्टोरेंट पहुंचने में थोड़ा टाइम लग गया. सुप्रिया को साउथ इंडियन बहुत ाचा लगता था और उसने अपने लिए डोसा आर्डर किया, अतुल ने अपने लिए नूडल्स. काफी भीड़ थी तोह खाना आने में टाइम लग गया और उन्हें कहते कहते 9.30 तोह रेस्टोरेंट में hi बज गए थे. वह लोग जल्दी से वहां से निकले घर की तरफ.
रास्ते में एक रेड लाइट पर उनकी गाडी के साइड में दो लड़के बाइक पर थे. अतुल की कार के शीशे नीचे थे तोह वह दोनों सुप्रिया को साफ़ देख पा रहे थे. वह सुप्रिया को देख कर उस पर कमेंट करने लगे...
लड़का - कहाँ जा रही हो मैडम इतनी रात को...
दूसरा लड़का - ओह भाई साहब... कहाँ से लाये हो इस माल को...
लड़का - Madam...ye लाल कुर्ती कहाँ से ली... वैसे हमारे साथ चलो... इससे तोह कहीं ज्यादा मज़ा करा देंगे तुम्हे...
सुप्रिया को उनकी बाते सुनकर गुस्सा आने लगा था, उसने अतुल की और देखा - आप कुछ बोलो न उन्हें...
अतुल ने गाडी के शीशे ऊपर कर लिए - कोई फायदा नहीं है सुप्रिया इनसे उलझने का... बस सामने देखती रहो...
उनमे से एक लड़का सुप्रिया की साइड के शीशे को नॉक करने लगा... सुप्रिया ने उसे गुस्से में देखा... पर उस लड़के ने जीब से अपने होंठ चाट ते हुए सुप्रिया को गन्दा सा इशारा किया.
सुप्रिया से रहा नहीं गया और उसने अपनी साइड का शीशा नीचे किया - तुम्हे लड़कियों की इज़्ज़त करना आता... अगर तुम्हारी बेहेन के साथ कोई ऐसी हरकत करे तोह...
बाइक पर पीछे बैठे लड़के को तोह जैसे मौका hi चाहिए था - मेरी बेहेन ऐसे रात को सड़को पर रंडी की तरह नहीं घूमती... चल तुझे बताता हूँ तेरी इज़्ज़त के साथ क्या करूँगा...
सिग्नल ग्रीन हो गया था और अतुल ने अपनी गाडी आगे दौड़ाई... उन लड़को ने भी अपनी बाइक उनकी गाडी के पीछे लगायी...
अतुल खीजते हुए सुप्रिया से बोलै - क्या जरूरत थी उनसे उलझने की... क्या मुसीबत पाल ली फालतू में...
अतुल ने मिरर में देखा तोह वह लोग अभी भी उसके पीछे आ रहे थे. किसी तरह अतुल गाडी चलता हुआ अपने बिल्डिंग तक पंहुचा. उसे वह पीछे तोह नहीं दिखाई दिए अब, शायद उन्होंने बीच रास्ते में पीछा करना छोड़ दिया होगा. अतुल ने गाडी पार्किंग में लगायी, और सुप्रिया और वह ऊपर घर की तरफ चले गए.
ऐसा नहीं था की आज से पहले किसी ने उस पर फब्तियां न कासी हो... पर आज शायद सुप्रिया बर्दाश्त करने के मूड में नहीं थी. अतुल अभी भी सुप्रिया पर थोड़ा गुस्सा था, पर उसने कुछ ज्यादा और बोलै नहीं. सुप्रिया भी चुप चाप अपने कपडे बदल कर सोने की तैयारी करने लगी.
तभी उसने अपने फ़ोन पर गौर किया, एक अननोन नंबर से 2-3 मिस्ड कॉल थी. शायद उसने अपना फ़ोन बीच में साइलेंट कर दिया था तोह उसे पता नहीं चला था. साथ hi एक मैसेज भी था उस नंबर से.
मैसेज - जानेमन... मैं लखनऊ आ रहा हु इस हफ्ते किसी काम से... तुमसे मिलने के लिए बेकरार हु... मुझे कॉल करो... प्रताप.
सुप्रिया ये मैसेज देख कर काँप गयी. कुछ महीनो पहले, जो कुछ प्रताप ने उसके साथ निक्की की शादी में किया था, वह उसने एक भयानक सपना समझ कर भुला दिया था. अब जब उसकी लाइफ में सब कुछ ाचा होने लगा था ये मुसीबत क्यों फिर से उसके सामने आ गयी थी. वह फटी आँखों से उस मैसेज को थोड़ी देर घूरती रही, उसे समझ hi नहीं आ रहा था की वह अब क्या करे.