- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 31,779
Part - 14

आर्यन : आंटी....! इंजेक्शन तैयार है चलिए अब घोड़ी बनिये...! आप के इलाज का वक़्त आ गया है....!
आर्यन के तेवर अब बदले हुए थे. उसने उर्वशी के बाल पकड़े दो तीन बार पकड़ कर हिलाये. उसके चेहरे को देखने लगा. उसके चेहरे पर creepy smile और हवस भरी अजीब emotions छाए हुए थे. पहली बार उर्वशी के बाल कोई पकड़ कर खींच रहा था. नशे में लाचार उर्वशी उसको देख कर फिर भी हसीं जा रही थी. पता नहीं क्यों उर्वशी आर्यन की निच हरकते सही जा रही थी. आखिर नशे में भर कर आर्यन की गुलाम बन चुकी थी. बाल पकड़ कर आर्यन ने उर्वशी को सोफे पर खींच लिया. आर्यन के हुक्म का पालन करती हुईं उर्वशी सोफे पर चढ गई, कमर झुकाई, टांगे फैलाई और गांड ऊपर कर खुद घोड़ी बन गई,

पीछे खड़ा आर्यन नजारा देख रहा था.
मस्ती उसके सर चढ़ी हुईं थी. नशे मे उसे ही कहा था. नशे से पगलाई उर्वशी अजीब हरकते करने पर उतारू हो गई थी. गांड को तितली जैसे फडफड़ाये जा रही थी. नितंब हिला हिला कर मटका रही थी. उर्वशी पूछने लगी...
उर्वशी : देखो बेटा... ये देखो...! कैसे दिख रही हूँ...ऐसे ठीक है ना...? अब इंजेक्शन लगा सकते हो...!

आर्यन : waw....! आंटी...!
तानी हुईं गोरी त्वचा उसमे खचाखच भरा हुवा नर्म मांस और perfect गोल आकर ऐसे लग रहा था के ये गांड नहीं बल्कि gas से भरे हुए दो मोटे मोटे गुब्बारे आपस मे सटे हो. आर्यन के सामने उर्वशी की गोरी मोटी मटकेनुमा गोलाकार गांड चमक रही थी. एक दूसरे से फ़ैलते सिमटते चिकने गांड पल्लो के बिच गोरी गुलाबी फूल सी खिलतीं फुदी ऐसे दिख रही थी की मानो फुदी नहीं सुखभवन(heaven) हो. और गांड के लपपाते गोले उसके दरवाजे. आर्यन के सामने उर्वशी गांड हिला हिला कर लपालप झाड रही थी के उस सुखभवन(heaven) के दरवाजे खुल कर आर्यन का लिंग अंदर खींचना चाहते हो. उर्वशी को इस अंदाज में देख कर आर्यन किसी राक्षस जैसा ठहाके लगा कर हसने लगा हां
हां
हा
...! उसका लंड अजीब से ऊपर निचे फडफड़ाने लगा. उर्वशी की जन्नत देख कर आर्यन के मन में में लड्डू फूटने लगा. उसने अब उर्वशी गांड के पल्ले फैलाये, सुंगने लगा और उर्वशी के गांड चाटने लगा. सर सर सर्लप्
...!सर सर सर्लप्
...!

पहली बार कोई जीभ से उर्वशी के छेद को कुरेद रहा था. ये अहसास उर्वशी के लिए बिलकुल नया था. गुदगुदी भरा ये अहसास मानो आर्यन की करंट भरी जीभ से short circuit हो कर उर्वशी के गांड के छेद पर shockwaves निर्माण कर रहे थे. नितंब खोल कर आर्यन उर्वशी के गांड के सटीक छेद मे नुकली जीभ से ऐसे कुरेद रहा था जैसे कोई सुई से काटा निकालता हो....सप... सप...सर्लप्...!
उर्वशी की फुदी इतनी खूबसूरत थी के किसी की नजर उसके इस छेद पर पड़ी ही नहीं. फूल सी खिली फुदी के चक्कर मे सभी ने उसके गांड(ass hole) पर घोर अन्याय किया था. उर्वशी के गांड पर हुवा अन्याय आज आर्यन जीभ से चाट कर धो रहा था.
आर्यन के जवान हाथो के मसलन और गांड चाटने के अजीब अंदाज ने उर्वशी के अंदर वासना का तूफान भीनभीना रहा था.

आर्यन गांड चाटते हुए उर्वशी की काम रस से लबालब भरी हुईं योनि मे कुरेदे जा रहा था. योनि के अंदर दो उंगलिया सीधी कर डालता पर टेढ़ी कर निकलता जैसे के उसके हाथो योनि नहीं कोई हिरे की खदान लगी हो. इन खदान से उंगलियां टेढ़ी कर आर्यन कोई हिरे चुन रहा था. हर angle मे उंगलिया घुमाता उसे मथ रहा था.
अब आर्यन उठ खड़ा हुवा, उर्वशी के गांड पर जोर से चार पांच चाटा जड दिए....
चट
चट
चट
चट
चट...!
उर्वशी : आह...! उई माँ..!
आर्यन : आंटी...! मु खोलो...! जल्दी से इंजेक्शन चूस कर इसे गिला कर दो...!
आर्यन बड़ी तेजी से उर्वशी के सामने आ कर खड़ा हो गया. उर्वशी के बिखरे बालो को समेट उसकी चोटी बना कर मुट्ठी मे कस कर पकड़ ली. उर्वशी के आँखो के सामने आर्यन का फोलादी लंड झूल रहा था. उर्वशी ने उसे लपक कर पकड़ लिया...

जड़ से टोपे तक अच्छे से चुमने लगी सर्ल
सर्ल
सर्लप्
...! चूसने लगी गोप
गोप
गोप
....! चुम चूस कर लार से लबालब चिकना कर दिया. उसके ओठोंसे होते हुए आर्यन के अंडकोष तक लार की धारा टपक रही थी. लार की बुँदे टिपिक टिपिक उसके लंड शहद जैसे गिरने लगी...!
अब आर्यन ने उर्वशी के पकड़े हुए बाल हिलाये.... चेहरा पकड़ा... जबड़ा दबा कर ओठ खोल दिए... एक बार किस करते हुए बोल पड़ा...
आर्यन : आंटी अब आप हिलियेगा नहीं......! मै एकदम आराम से इंजेक्शन दूंगा...! थोड़ा दर्द होगा पर आप डरिये नहीं....!
आर्यन क्या करने वाला था इसका अंदाजा उर्वशी को था ही नहीं. उर्वशी तो नशे मे धुत थी. ऊपर से आर्यन उसके साथ जो नंगा खेल कर रहा था उस से उर्वशी के रग रग मे बस वासना ही दौड़ रही थी. आर्यन फिर उर्वशी के पीछे आ गया. उर्वशी ने आर्यन के स्वागत के लिए टांगे फैला कर गांड और भी चौड़ी कर दी. घुटनो के बल घोड़ी बन कर खड़ी थी. बस क्या था. एक हाथ से आर्यन ने उर्वशी के बाल जोर से पकड़ लिए पीछे खींचे जिस से के उर्वशी के पीठ मे एक झुकाव हो गया. गांड के पल्लो के बिच से आगे बढ़ता हुवा आर्यन का मूसलाकार लिंग उर्वशी के गांड के सकूचे छेद पर जा टिका. और धीरे धीरे दबाव बनाने लगा. उर्वशी एकदम से दचक गई. आर्यन के मूसलाकार लिंग इतना मोटा लंबा था के उसके वार से पहले भी उसकी योनि जख़्मी हो चुकी थी. घाव बनाने वाला लिंग गांड मे वो सह नहीं पायेगी इस से घबराने लगी.
उर्वशी : आह्ह..! उम्मम्म्म...! बेटा ये क्या कर रहे हो आप...!
आर्यन : आंटी..! आप को इंजेक्शन दे रहा हूँ...!
उर्वशी : नहीं बेटा..! गलत जगह है...! वहां नहीं...!
आर्यन ने उर्वशी के बाल जोर से खींचे और बोल पड़ा
आर्यन : चुप करो आंटी...! यहि सही है...!
उर्वशी ये नहीं चाहती थी. आर्यन के लंड की घुसखोरी उसे मंजूर नहीं थी. उसने सारी जान लगा कर गांड का छेद सकूँचा लिया. आगे होने वाले पीड़ा के डर से उसके चेहरे पर तनाव साफ दिखने लगा. आर्यन भी पूरी ताकत से उसपर दबाव बना रहा था. बार बार गांड के दरवाजे पर लंड से ठोक मार रहा था जैसे के कोई तोफ किले पर गोले दाग रहा हो. पर गांड के छेद से टकरा कर उसका लंड मूड जाता और ऊपर या निचे फिसल जाता. उर्वशी के नामर्जी से ये सब हो रहा है आर्यन ये जान गया...!
आर्यन : मान जाओ आंटी...! नहीं तो आप की फट जाएगी..!
उर्वशी : बेटा...! plz वहा नहीं...! बहोत गंदा दुखेगा...!
आर्यन : hmm..! ऐसे ही रुको...! मै अभी आया...!
आर्यन दौड़ते हुए वहा से जाने लगा. शुभम के room के पास पोहच कर अंदर झाकने लगा. शुभम नींद के गोलिओ के चपेटे मे गहरी नींद सो रहा था. देख कर room मे कदम बढ़ाये. उसने बेड पर पड़ी bag उठाई, जल्दी जल्दी खोलने लगा. Bag के कोने मे पड़ी एक lubricant gel की शीशी उठाई... और बाहर निकलने लगा.

पता नहीं उसके मन मे क्या आया. अब फिर मूड कर शुभम के चेहरे के पास जा खड़ा हुवा. और बुदबूदाने लगा... साला कैसे सो रहा है, उधर उसकी रंडी माँ चुदा रही है... loser कहिका...! देख बे साले...! मेरा लंड देख...! इसपर तेरी माँ की ही लार टपक रही है...! सुंग इसे...! तेरी माँ गजब चूसती है...! आज तेरे mom की गांड मरूंगा...! फिर उसे रात भर चोदुँगा...! तू कुछ नहीं कर पायेगा...! ही
... ही
... ही
...! आर्यन के आवाज मे आज अजीब मगरूरी थी. चेहरे पर मर्दानगी भरा अभिमान...!
(इतना बोल कर आर्यन वहा से निकल तो गया, पर आर्यन के बोले हुए बोल सोये हुए शुभम के कानो से होते हुए उसके sub conscious mind मे घुस पड़े. सोये हुए mind के अंदर आर्यन के शब्द तांडव करते हुए शुभम के शांति भरे नींद मे प्रलय का तांडव करने लगें. आखिर शुभम के जीवन मे एक उर्वशी उसकी mom ही तो थी. चाहें जैसी भी हो पर वही उसके लिए सब कुछ थी. उसी से शुभम के जीवन का हर पहलू जुडा हुवा था. और शुभम को सबसे ज्यादा प्यारी भी वही थी. आर्यन ने उसके mom के बारे मे जो शब्द बोले थे उसका अब परिणाम होने वाला था. उसके mom के बारे मे अब तक उसने ऐसे निच गंभीर शब्द सुने नहीं थे. अब इन शब्दों ने शुभम के सोये हुए मन मे एक हलचल पैदा कर दी)
आर्यन ने उस शीशी से लबालब lubricant gel की धार उर्वशी के गांड के छेद पर उधेल दी. कुछ बुँदे ऊँगली पर भी लगा दी और गांड ऊँगली करने लगा.

Celicon based lub ने आर्यन का काम आसान कर दिया. अब आर्यन की ऊँगली उर्वशी के गांड के sphincters को बड़ी आसानी से सरका कर अंदर बाहर होने लगी. आर्यन ने gel भरी ऊँगली कर कर के उर्वशी के गांड के अंदर तक lube लबालब भर दिया. चिकनाई भरे lub से सनी गांड का छेद और उसमे फिसल कर घुसती हुईं ऊँगली का अहसाह उर्वशी को बड़ा भाने लगा. अब उर्वशी के तनाव पूर्ण चेहरे पर गुदगुदी की हसीं छाने लगी.
आर्यन : आंटी अब कैसा लग रहा है...!
उर्वशी : अब अच्छा लग रहा है..!
उर्वशी अब तैयार है ये जान के आर्यन ने उसके लंड पर भी gel लगा कर तैयार कर दिया. उसने उर्वशी की गांड सहलाई, गोलो को हाथो से सरका दिए, और फिर एक बार उर्वशी के गांड के किले को नीस्तनाबूद करने आर्यन का काबुली तोफ आगे सरक रहा था. उर्वशी के गांड के sphincters पर फिर आर्यन ने का टोपा दबाव बनाने लगा. धीरे धीरे बढ़ते दबाव बढ़ता जा रहा था. उर्वशी सोफे पर आह्हः अह्ह्ह अह्ह्ह... कर्राह रही थी...!
उर्वशी : धीरे धीरे...! आह्हः... आह्ह...!
आर्यन : बस आंटी...! सब ठीक हो जायेगा...!
आर्यन का लंड का टोपा उर्वशी के sphincters को चिरता हुवा अंदर धसने लगा, बढ़ते दबाव और lubricant के फिसलन से उर्वशी की गांड इंच इंच लंड का टोपा निगल रही थी... फ्लप...! सख्त मोटा छतरी नुमा टोपा उर्वशी के अंदर धसते ही फस सा गया....फ्लप..! टोपा अंदर धसते ही उर्वशी कमर उचका कर हिल गई. उर्वशी के गुदाद्वार मे कलाई जितना मोटा औजार फस चूका था. इस से उर्वशी के गुदा मे तेज दर्द होने लगा जैसे किसी तेज ब्लेड से कट लग गया हो.
उर्वशी : आह... आह्हः.... मर गई... मर गई मै..! उहूँ हूँ हूँ...! उहूँ हूँ हूँ...!
आर्यन : आंटी...! हिलो नहीं...! बस हो गया...!
आर्यन ने अब उर्वशी की कमर कस के पकड़ ली ता के उर्वशी steady रहे हिले नहीं. "और एक शानदार shot , एक ही shot मे लंड गांड के sphincters को खोलता हुवा anul canal की boundary लाँघ कर rectum तक पहोच गया"
पत्थर जैसा सख्त, मोटा, आर्यन का बंबू उर्वशी के अंदर भर चूका था. उसके सुनहरे झाटो वाले अंडकोष ही उर्वशी के बाहर लटक रहे थे, उसके फुदी को ढके हुए थे ..!
अब उर्वशी को आभास हो रहा था के उसने गलत हाथो ने अपनी इज्जत सोप दी है. पर अब बहोत देर हो चुकी थी. उर्वशी के दर्द का अब ठिकाना न रहा. भयंकर तेज दर्द से उर्वशी की टांगे कपकपाने लगी. मानो कोई ज्वालामुखी उसके अंदर फट कर भूचाल लाया हो.
उर्वशी : उई मोरी मैय्या...! मेरी कमर तुट गई...! छोड़ो मुझे...! आर्यन...! छोड़ दो...!
आर्यन : छोड़ दू....! ऐसे कैसे छोड़ दू...!
आर्यन की मजबूत पकड़ और गांड के अंदर जड़ तक फसे लंड के कारण उर्वशी का हिलना मुश्किल हो चूका था. दर्द के मारे कपकपाती उर्वशी चीखती बिकखती छोड़ने के लिए request करती, पर उसकी हर हरकत के साथ आर्यन उसके कमर पर पकड़ और भी मजबूत कर देता. उसकी एक न मानता. उर्वशी के गिरते आँसू भी आर्यन का दिल पिघला न सके....
उर्वशी : छोड़ दो.. उहूँ हूँ हूँ...
आर्यन : ही
ही
ही
...! चोदे बिन नहीं छोड़ूगा...! आंटी मान जा...!
बार बार उर्वशी उसे छोड़ने के लिए रोती, बिलख रही थी, विनती कर रही थी. पर आर्यन हस रहा था. आर्यन के अंदर का भेड़िया अपने संपूर्ण भेस मे था. उसके अंदर भेड़िये की ही फितरत थी. एक साल से उर्वशी के घर परिवार की रेकी उसने की हुईं थी. दो लोगो के इस बड़े मकान की उची दीवालों को आवाज लाँघ नहीं पायेगी यह भी जानता था. एक साल से वो शिकार करने के लिए घात लगाने का प्रयास कर रहा था. आज ज़ब उसे ये मौका मिला कैसे गवा देता.
उर्वशी की हलचल शांत होने तक आर्यन थोड़ा रुका, उर्वशी की झटपटाहट शांत होने लगी. फ़ैलता सिकुड़ता फैलता सिकुड़ता उर्वशी के गांड का द्वार(sphincter) अजनबी चोर का जायजा ले रहा था. आर्यन का लंड उर्वशी के अंदर अपना स्थान बना चूका था. उर्वशी की गांड की मांसपेशीया आर्यन के लंड को दुश्मन मान रही थी, अब वो दुश्मनी ख़त्म हो कर दोस्ती मे बदल रही थी, पकड़ ढीली हो रही थी. अब उसके गांड की मांस पेशीओ ने आर्यन के लिंग के घूसखोरी को स्वीकार कर लिया था. आर्यन के लिंग की मोटाई उर्वशी के अंदर एकदम फिट बैठी हुईं थी. आर्यन ने धीरे धीरे कमर हिलना सुरु कर दी थी. धीरे धीरे बाहर खींचता रुकता फिर खींचता. धीरे धीरे आर्यन का लंड उर्वशी के sphincter तक बाहर आ गया. वहां तक आते ही उर्वशी के गांड ने आर्यन का लंड बाहर उगल दिया... फ्लॉप...!

इस बार एक अजीब सी गंध के साथ एक आवाज आई...फर फरर्र फ्लप...!
आर्यन के लिंग के दबाव से उर्वशी के खदान के अंदर की बदबूदार हवा आझाद हो गई. फर फर फ़्लप...!
आर्यन : आंटी...! घबरा रही हो क्या...! या दर्द के मारे पाद रही हो...!
आर्यन के इस बेतुके सवाल से उर्वशी सकूचा गई. आर्यन के औजार ने उर्वशी की खदान अंदर तक खोद कर जो गैस मुक्त कर दी थी उस से उर्वशी शर्मिंदा feel कर रही थी. और आर्यन अभिमान feel कर रहा था.
आर्यन ने फिर lubricant gel की धारा उर्वशी की गांड और खुद के लंड के चारो तरफ उधेडा.
फिर एक बार चढ़ाई करने लगा. सोफे पर चढ़ गया उर्वशी के कंधो पर पंजो से पकड़ बनाने लगा. पीछे लिपटे किसी कुत्ते जैसा आर्यन उर्वशी को दबोच रहा था. अब रास्ता आसान हो गया था. उसने गांड के दरार पर लंड लगा कर थोड़ा ही दबाव बनाया. उर्वशी के गांड ने इंच इंच फ़ैलना सुरु कर दिया. थोड़े ही दबाव से आर्यन के लंड को मानो उर्वशी के पिछवाड़े ने निगलना सुरु किया... फ़्लप...!
आर्यन : आंटी जी अब आएगा मजा...!
आर्यन ने अब उसका नंगा खेल सुरु कर दिया था. उर्वशी के बालो को पकड़ कर सपासप...रपारप...उर्वशी को ठोके जा रहा था. उर्वशी के गांड पर आर्यन की जांघे टकरा आवाजे गूंजने लगी फच..फचा... फच...! उर्वशी के अंदर बाहर होता हुवा आर्यन का भाला उसके अंदर के गुदाद्वार को भाहर तक खींच लेता... फ्लप... फ्लॉप....फ्लिप...!

आर्यन का तपते हुवे मांस का हाथोड़ा उसके अंदर जो छेद कर रहा था. उस से उर्वशी को तेज दर्द के साथ एक अजीब सुख समाधान का अहसास हो रहा था. तेज दर्द भी था. मीठा सुकून भी था. आँखो मे आँसू भी थे और ओठों पर हसीं भी थी. जो heavenly painful feelings अब तक उस से अनजान थी कभी अनुभव कि भी नहीं थी आज उसे आर्यन के संसर्ग से मिलने लगी.
आज आर्यन उर्वशी की छिपी हुईं ये खदान हर तरीके से खोल कर रखने वाला था. योनि मे घाव तो उसने पहले भी कर रखा था जिस घाव को जय ने चाट कर लार से भर दिया था. पर आज जो आर्यन उसके छिपे खदान मे घाव बना रहा था उसे जय भी कभी भर नहीं पायेगा. आज आर्यन उर्वशी के उस अछूत भाग मे भी घाव मार रहा था जिसे अब तक उर्वशी ने छिपा कर रखा था. आर्यन के हमले से थकी हुईं उर्वशी पसीने से भीग रही थी. उसके बदन के पसीने मे आर्यन का पसीना बूंद बूंद मिल कर एक हो रहा था. उसके ही बेटे का दोस्त आर्यन उसकी ये हालत करेगा उसने सोचा भी नहीं था.
उर्वशी के आँखो से आंसू बह रहे थे. मन भारी सा हो गया था. ओठ सुख गए थे. अब उसे होश आ रहा था. नशा उतर रहा था, हवस शांत हो रही थी. आर्यन के भाले ने उर्वशी का नशा और चुदाई का भुत दोनों उतार दिया. आर्यन के हर एक shot से उर्वशी घबरा जाती. कमर से एड़ी तक थरथरा जाती. फडफड़ा जाती.

आर्यन रपारप सपासप उर्वशी को दबोच रहा था, आर्यन के ताकतवर झटके उर्वशी के नितंबो पर टकरा टकरा कर जबरन मिलन की आवाजे गूंजने लगी...फच...फचा... फच....! आर्यन का हर एक shot उर्वशी को एड़ी से चोटी तक हिला डालता, हर एक shot के साथ उर्वशी की चुडिया और पायल के घुंगरू एक साथ तालमेल बिठा कर बजने लगी ...खन... खना.. खन..! छन... छना... छन...! उर्वशी के दर्द का ठिकाना न रहा. गिड़गिड़ाती बिलखती उर्वशी आर्यन को उसे छोड़ देने के लिए विनती करती पर आर्यन उसकी एक न सुनता. आँखो मे भरे हुए आंसू चेहरे से होते हुए बूंद बूंद टपक रहे थे. दर्द के मारे भरा हुवा मन रोने पर उतारू हो गया था. ओठ सुख गए थे. आर्यन के हर झटको के साथ उर्वशी की चीखे निकल जाती.. आह...आह्ह...अह्ह्ह...!
इस घर के दीवालों ने कई बार उर्वशी की इस हालत मे देखा था. कई बार इन गुंजो को दीवालों ने रोका था. जय ने भी उर्वशी को कई बार बजाया था. कई बार उसकी चुडिया और पायल को जय ने भी बजने पर मजबूर किया था. पर कभी उस की गूंजे इतनी तेज नहीं हुईं. आज उर्वशी के चीखो के साथ उसकी बजती पायल और खनकती चूड़ीओ की गूंज दीवाले भी रोक न पा रही थी. रात के सन्नाटे को चिरती हुईं गूंजे आज सारे घर मे समा रही थी. भला ये गूंजे शुभम के रूम तक कैसे न जाती. भला एक बेटा अपनी mom की खनकती चुडिया, बजते घुंगरू को कैसे न सुनता. इन सब मे मिली हुईं उर्वशी की चीखे दीवार दरवाजे पार करती हुईं शुभम के कानो तक जाने लगी. इन सब गंभीर गतिविधिओ से गोलिओ का असर टूटने लगा, पलके खुलने लगी. अब शुभम की नींद खुलने लगी.
Mom की चीखे सुन कर नींद की गोलिओ को बेअसर करता हुवा एक बेटा जाग रहा था. गोलिओ के reaction से उसकी आँखे भारी और लाल हो चुकी थी. माथा भारी और दर्द कर रहा था. उसने आँखे खोल कर रूम मे देखा. रात मे रूम मे जो zero wat बल्ब lights on रहती थी आज वो भी बंद थी. बेड से उठ कर रूम मे चारो तरफ देखने लगा. उसके बेड के सामने वाला जहाँ आर्यन सोया था वो बेड खाली पड़ा था. रूम मे आर्यन कही नहीं था. बस घोर अँधेरे के शांति को चिरते हुए अब भी उर्वशी की चीखे... आह्ह आह्हः अह्ह्ह...! चुडियो की आवाजे.. खन..खना.... खन...!
पायल के घुंगरू..झन...झना...झन...!
उसके कानो तक पोहोच बना रहे थे. इन सब गुंजन से शुभम घबरा गया. उसका दिल किसी पुराने डीजल रेल इंजिन जैसा धड... धड...धड....! धड़कने लगा.
कुछ सोच विचार करें यह समय नहीं था बस उसने आवाजे सुनी और मम्मी...मम्मी... मम्मी...! चिल्लाते हुए दौड़ पड़ा.
जैसे ही शुभम hall मे पहोंचा. दंग रह गया.

Zero wat के बल्ब मे नजारा भले धुंधला दिख रहा हो पर शुभम ने नंगी उर्वशी और उसपर सवार आर्यन को साफ साफ देख लिया. आर्यन के भार और घनघोर वार से उसकी mom के स्तन जेली जैसे हिले जा रहे थे. आर्यन के जांघो को उसकी mom की गांड टकरा कर बज रही थी फट...फट...फट...! आर्यन की ताकद के आगे उसकी mom दबी कुचली पड़ी थी. आर्यन उसकी थोड़ी पकड़ कर पीछे से चढ़ा हुवा खींच रहा था... रपारप चोद रहा था.... फच...फच...फच...!

शुभम को सामने देख कर भी आर्यन रुका नहीं. घबराया नहीं. शर्माया भी नहीं. और भी तेजी से shot लगाने लगा. बल्कि शुभम के आँखो मे आँखे डाल कर बड़ी हिम्मत से, अहंकार से उसे देख रहा था. "मानो मन ही मन कह रहा हो देख तेरी mom को तेरे सामने ही ले रहा हूँ...!" उसको तो अपना कार्यक्रम पूरा करना ही था. चुदाई का भुत उसके माथे पर चढ़ा हुवा था. बड़ी क्रूरता पूर्ण हवसी नजरो से उसने शुभम की और देखा. हसने लगा और रपारप shot जारी रखे....
हुर परी जैसी दिखने वाली उसकी mom आज किसी porn star जैसी रांड दिख रही थी. आँखो मे सूखे आंसू, पलकों से बिखरा काजल, ओठों से नोची हुईं लाली फ़ैली हुईं थी. नंगी पड़ी हुईं थी. उसी के नजरो के सामने उसी के घर मे उसकी खूबसूरत mom आर्यन के निचे बेबस पड़ी वह हैरानी से देख रहा था. आर्यन के निचे झूलती हुईं उर्वशी आर्यन के झटको से ही बजे जा रही थी, चीख रही थी, हाफ रही थी. चुडियो और पायल की आने वाली आवाज का राज शुभम अब समझ गया. स्तन उसपर दांत और पंजो के गंभीर निशान उर्वशी की हालत उस से देखि नहीं जा रही थी ये सब देख कर शुभम के अंदर का एक बेटा जाग गया. तेजी से आगे बढ़ा.
शुभम को सामने देख उर्वशी मे अब हिम्मत आने लगी. पर मेरा बेटा इस हालत मे मुझे देख रहा है, परेशान हो रहा है. उर्वशी ने अब शर्म से गर्दन झुका ली थी. इतनी शर्म उसे कभी न आई. शुभम से आँखे मिला सके इतनी हिम्मत उसमे बचि ही नहीं. आर्यन कई घंटो से उसे थका रहा था बेचारी थक कर हार चुकी थी, भुके पेट जो थी, नशे मे थी, पावडर के नशे ने उसका सारा बल छीन लिया था. आर्यन के पकड़ से छूटने की नाकाम कोशिश कर रही थी....
उर्वशी : छोड़ दे... छोड़ दे...! कमीने...!
उठने की कोशिस कर रही थी. झटपटा रही थी. पर आर्यन उसे फिर दबोच कर झुका देता...
आर्यन : मान जा आंटी थोड़ी देर बस...!
शुभम : अरे कुत्ते...! तूझे मैंने भाई माना...! और तू ये क्या कर रहा है निच..! (शुभम ने आर्यन को पकड़ कर जोर से खींचा)
आर्यन : चल हट...! निकल...! ये मेरा शिकार है...! (आर्यन ने शुभम को धक्का दे कर सरका दिया. आर्यन के धक्के से शुभम जा गिरा)
उर्वशी : मेरे बेटे को हाथ मत लगा... आर्यन...! उहूँ हूँ हूँ...उहूँ हूँ हूँ...!
उर्वशी अब रोने लगी. एक खिलाडी, मजबूत शरीर और वैशी दरिंदगी से भरा आर्यन के सामने शुभम कमजोर पड़ गया. उसी के आँखो के सामने उसी का दोस्त उसी के mom को जिस प्रकार चोद रहा था यह सब शुभम के लिए असहनीय हो रहा था. क्या किया जाय इतना उसे सूझ नहीं रहा था. उसके मासूम चेहरे पर बारा बजे हुए भाव थे.
शुभम : छोड़ दे कमीने...! नहीं तो तुझे मै मार दूंगा...! (शुभम ने आर्यन को फिर पकड़ कर एक दो घुसे जड़ दिए)
आर्यन : चल हट...! काम पूरा किये बिगर मै नहीं छोड़ता...! (आर्यन ने शुभम के कमजोर घुसे सह लिए. उर्वशी को छोड़ कर उठ खड़ा हुवा. उर्वशी के गुफा से आर्यन का लम्बा कोबरा निकल कर बाहर आ गया. और फिर शुभम को धक्का लगाते हुए दूर तक सरका दिया.)
आर्यन : जा...! जा कर सो जा...!
कॉलेज-पढ़ाई-गिने चुने दोस्त-घर-mom बस इतना ही उसका संसार था. शुभम अब तक समाज के नंगी सच्चाई से दूर था. सभ्य समाज मे छिपे हुए भेड़िये आसान शिकार ढूंढ़ते हुए कैसे घर तक पोहोच जाते है, कैसे उर्वशी जैसी पति से दूर अकेली रहने वाली जवानी मे झूलासती औरते इन भेडिओ के जाल मे फस जाती है इसका उसे कोई अंदाजा नहीं था. इन सब से बेखबर शुभम ने गलती से एक भेड़िये से दोस्ती कर ली थी. आर्यन के इरादों, मनसूबो और छल का उसे कोई अंदाजा नहीं था. पढ़ाई छोड़ कर आर्यन शारीरिक कूवत मे हर प्रकार से उस उमर के लड़को से कई गुना आगे था. इस भेड़िये जैसी नियत और असामान्य ताकद के मालिक आर्यन के आगे शुभम की एक न चलि. आर्यन की धोकेबाजी और उसके साथ निचे चुद रही उसकी mom की गंदी हरकत उसे रास न आई. दोनों को रंगे हाथ पकड़ने जाने से शुभम के मासूम मन मे बदले की आग पैदा होने लगी.
शुभम शुभम मन ही मन बोलने लगा...छी mom...! तुम इतना गिर जाओगी... थू.. थू.. थू...! हवस की आग मे किसी के भी साथ नंगी हो जाओगी. मेरे दोस्त को भी ऊपर चढ़ाने लग जाएगी.... Shame on you..! आर्यन तू दोस्त हो कर इतना निचे गिरेगा मेरी mom को ही निचे ले लेगा. मेरे ही सामने...!
जैसी भी हो मेरी mom है, mom के साथ क्या करना है ये मै बाद मे देख लूंगा. पर कम से कम आज दोनों को exposed कर के ही दम लूंगा.
"जय ने कहा था कोई भी जरुरत हो मुझे याद करना" शुभम को अब जय ने किया हुवा वो वादा याद आने लगा. अब जय ही आर्यन को निपट सकता है. चाहें कुछ भी हो जाए इस धोकेबाज दोस्त को जय से पिटवा दूंगा. शुभम के आँखो मे आज अँगारो की ज्वाला भर गया था.
शुभम : आज ही बदला लूंगा. मेरी mom पर मेरे ही घर मे आज तूने हाथ डाला है...! यह सोच कर शुभम ने खुद को संभाला. हिम्मत बांधी. उठ खड़ा हुवा. तेजी से भागा. पिछला दरवाजा खोला. ऊपर की सीढीया चढने लगा. जहाँ जय रहता था. वहा जा धमका. दरवाजा ठोकने लगा....
ठक ठक ठक....!
ठक ठक ठक...!
ठक ठक ठक...!

आर्यन : आंटी....! इंजेक्शन तैयार है चलिए अब घोड़ी बनिये...! आप के इलाज का वक़्त आ गया है....!
आर्यन के तेवर अब बदले हुए थे. उसने उर्वशी के बाल पकड़े दो तीन बार पकड़ कर हिलाये. उसके चेहरे को देखने लगा. उसके चेहरे पर creepy smile और हवस भरी अजीब emotions छाए हुए थे. पहली बार उर्वशी के बाल कोई पकड़ कर खींच रहा था. नशे में लाचार उर्वशी उसको देख कर फिर भी हसीं जा रही थी. पता नहीं क्यों उर्वशी आर्यन की निच हरकते सही जा रही थी. आखिर नशे में भर कर आर्यन की गुलाम बन चुकी थी. बाल पकड़ कर आर्यन ने उर्वशी को सोफे पर खींच लिया. आर्यन के हुक्म का पालन करती हुईं उर्वशी सोफे पर चढ गई, कमर झुकाई, टांगे फैलाई और गांड ऊपर कर खुद घोड़ी बन गई,

पीछे खड़ा आर्यन नजारा देख रहा था.
मस्ती उसके सर चढ़ी हुईं थी. नशे मे उसे ही कहा था. नशे से पगलाई उर्वशी अजीब हरकते करने पर उतारू हो गई थी. गांड को तितली जैसे फडफड़ाये जा रही थी. नितंब हिला हिला कर मटका रही थी. उर्वशी पूछने लगी...
उर्वशी : देखो बेटा... ये देखो...! कैसे दिख रही हूँ...ऐसे ठीक है ना...? अब इंजेक्शन लगा सकते हो...!

आर्यन : waw....! आंटी...!
तानी हुईं गोरी त्वचा उसमे खचाखच भरा हुवा नर्म मांस और perfect गोल आकर ऐसे लग रहा था के ये गांड नहीं बल्कि gas से भरे हुए दो मोटे मोटे गुब्बारे आपस मे सटे हो. आर्यन के सामने उर्वशी की गोरी मोटी मटकेनुमा गोलाकार गांड चमक रही थी. एक दूसरे से फ़ैलते सिमटते चिकने गांड पल्लो के बिच गोरी गुलाबी फूल सी खिलतीं फुदी ऐसे दिख रही थी की मानो फुदी नहीं सुखभवन(heaven) हो. और गांड के लपपाते गोले उसके दरवाजे. आर्यन के सामने उर्वशी गांड हिला हिला कर लपालप झाड रही थी के उस सुखभवन(heaven) के दरवाजे खुल कर आर्यन का लिंग अंदर खींचना चाहते हो. उर्वशी को इस अंदाज में देख कर आर्यन किसी राक्षस जैसा ठहाके लगा कर हसने लगा हां

पहली बार कोई जीभ से उर्वशी के छेद को कुरेद रहा था. ये अहसास उर्वशी के लिए बिलकुल नया था. गुदगुदी भरा ये अहसास मानो आर्यन की करंट भरी जीभ से short circuit हो कर उर्वशी के गांड के छेद पर shockwaves निर्माण कर रहे थे. नितंब खोल कर आर्यन उर्वशी के गांड के सटीक छेद मे नुकली जीभ से ऐसे कुरेद रहा था जैसे कोई सुई से काटा निकालता हो....सप... सप...सर्लप्...!
उर्वशी की फुदी इतनी खूबसूरत थी के किसी की नजर उसके इस छेद पर पड़ी ही नहीं. फूल सी खिली फुदी के चक्कर मे सभी ने उसके गांड(ass hole) पर घोर अन्याय किया था. उर्वशी के गांड पर हुवा अन्याय आज आर्यन जीभ से चाट कर धो रहा था.
आर्यन के जवान हाथो के मसलन और गांड चाटने के अजीब अंदाज ने उर्वशी के अंदर वासना का तूफान भीनभीना रहा था.

आर्यन गांड चाटते हुए उर्वशी की काम रस से लबालब भरी हुईं योनि मे कुरेदे जा रहा था. योनि के अंदर दो उंगलिया सीधी कर डालता पर टेढ़ी कर निकलता जैसे के उसके हाथो योनि नहीं कोई हिरे की खदान लगी हो. इन खदान से उंगलियां टेढ़ी कर आर्यन कोई हिरे चुन रहा था. हर angle मे उंगलिया घुमाता उसे मथ रहा था.
अब आर्यन उठ खड़ा हुवा, उर्वशी के गांड पर जोर से चार पांच चाटा जड दिए....
उर्वशी : आह...! उई माँ..!
आर्यन : आंटी...! मु खोलो...! जल्दी से इंजेक्शन चूस कर इसे गिला कर दो...!
आर्यन बड़ी तेजी से उर्वशी के सामने आ कर खड़ा हो गया. उर्वशी के बिखरे बालो को समेट उसकी चोटी बना कर मुट्ठी मे कस कर पकड़ ली. उर्वशी के आँखो के सामने आर्यन का फोलादी लंड झूल रहा था. उर्वशी ने उसे लपक कर पकड़ लिया...

जड़ से टोपे तक अच्छे से चुमने लगी सर्ल
अब आर्यन ने उर्वशी के पकड़े हुए बाल हिलाये.... चेहरा पकड़ा... जबड़ा दबा कर ओठ खोल दिए... एक बार किस करते हुए बोल पड़ा...
आर्यन : आंटी अब आप हिलियेगा नहीं......! मै एकदम आराम से इंजेक्शन दूंगा...! थोड़ा दर्द होगा पर आप डरिये नहीं....!
आर्यन क्या करने वाला था इसका अंदाजा उर्वशी को था ही नहीं. उर्वशी तो नशे मे धुत थी. ऊपर से आर्यन उसके साथ जो नंगा खेल कर रहा था उस से उर्वशी के रग रग मे बस वासना ही दौड़ रही थी. आर्यन फिर उर्वशी के पीछे आ गया. उर्वशी ने आर्यन के स्वागत के लिए टांगे फैला कर गांड और भी चौड़ी कर दी. घुटनो के बल घोड़ी बन कर खड़ी थी. बस क्या था. एक हाथ से आर्यन ने उर्वशी के बाल जोर से पकड़ लिए पीछे खींचे जिस से के उर्वशी के पीठ मे एक झुकाव हो गया. गांड के पल्लो के बिच से आगे बढ़ता हुवा आर्यन का मूसलाकार लिंग उर्वशी के गांड के सकूचे छेद पर जा टिका. और धीरे धीरे दबाव बनाने लगा. उर्वशी एकदम से दचक गई. आर्यन के मूसलाकार लिंग इतना मोटा लंबा था के उसके वार से पहले भी उसकी योनि जख़्मी हो चुकी थी. घाव बनाने वाला लिंग गांड मे वो सह नहीं पायेगी इस से घबराने लगी.
उर्वशी : आह्ह..! उम्मम्म्म...! बेटा ये क्या कर रहे हो आप...!
आर्यन : आंटी..! आप को इंजेक्शन दे रहा हूँ...!
उर्वशी : नहीं बेटा..! गलत जगह है...! वहां नहीं...!
आर्यन ने उर्वशी के बाल जोर से खींचे और बोल पड़ा
आर्यन : चुप करो आंटी...! यहि सही है...!
उर्वशी ये नहीं चाहती थी. आर्यन के लंड की घुसखोरी उसे मंजूर नहीं थी. उसने सारी जान लगा कर गांड का छेद सकूँचा लिया. आगे होने वाले पीड़ा के डर से उसके चेहरे पर तनाव साफ दिखने लगा. आर्यन भी पूरी ताकत से उसपर दबाव बना रहा था. बार बार गांड के दरवाजे पर लंड से ठोक मार रहा था जैसे के कोई तोफ किले पर गोले दाग रहा हो. पर गांड के छेद से टकरा कर उसका लंड मूड जाता और ऊपर या निचे फिसल जाता. उर्वशी के नामर्जी से ये सब हो रहा है आर्यन ये जान गया...!
आर्यन : मान जाओ आंटी...! नहीं तो आप की फट जाएगी..!
उर्वशी : बेटा...! plz वहा नहीं...! बहोत गंदा दुखेगा...!
आर्यन : hmm..! ऐसे ही रुको...! मै अभी आया...!
आर्यन दौड़ते हुए वहा से जाने लगा. शुभम के room के पास पोहच कर अंदर झाकने लगा. शुभम नींद के गोलिओ के चपेटे मे गहरी नींद सो रहा था. देख कर room मे कदम बढ़ाये. उसने बेड पर पड़ी bag उठाई, जल्दी जल्दी खोलने लगा. Bag के कोने मे पड़ी एक lubricant gel की शीशी उठाई... और बाहर निकलने लगा.

पता नहीं उसके मन मे क्या आया. अब फिर मूड कर शुभम के चेहरे के पास जा खड़ा हुवा. और बुदबूदाने लगा... साला कैसे सो रहा है, उधर उसकी रंडी माँ चुदा रही है... loser कहिका...! देख बे साले...! मेरा लंड देख...! इसपर तेरी माँ की ही लार टपक रही है...! सुंग इसे...! तेरी माँ गजब चूसती है...! आज तेरे mom की गांड मरूंगा...! फिर उसे रात भर चोदुँगा...! तू कुछ नहीं कर पायेगा...! ही
(इतना बोल कर आर्यन वहा से निकल तो गया, पर आर्यन के बोले हुए बोल सोये हुए शुभम के कानो से होते हुए उसके sub conscious mind मे घुस पड़े. सोये हुए mind के अंदर आर्यन के शब्द तांडव करते हुए शुभम के शांति भरे नींद मे प्रलय का तांडव करने लगें. आखिर शुभम के जीवन मे एक उर्वशी उसकी mom ही तो थी. चाहें जैसी भी हो पर वही उसके लिए सब कुछ थी. उसी से शुभम के जीवन का हर पहलू जुडा हुवा था. और शुभम को सबसे ज्यादा प्यारी भी वही थी. आर्यन ने उसके mom के बारे मे जो शब्द बोले थे उसका अब परिणाम होने वाला था. उसके mom के बारे मे अब तक उसने ऐसे निच गंभीर शब्द सुने नहीं थे. अब इन शब्दों ने शुभम के सोये हुए मन मे एक हलचल पैदा कर दी)
आर्यन ने उस शीशी से लबालब lubricant gel की धार उर्वशी के गांड के छेद पर उधेल दी. कुछ बुँदे ऊँगली पर भी लगा दी और गांड ऊँगली करने लगा.

Celicon based lub ने आर्यन का काम आसान कर दिया. अब आर्यन की ऊँगली उर्वशी के गांड के sphincters को बड़ी आसानी से सरका कर अंदर बाहर होने लगी. आर्यन ने gel भरी ऊँगली कर कर के उर्वशी के गांड के अंदर तक lube लबालब भर दिया. चिकनाई भरे lub से सनी गांड का छेद और उसमे फिसल कर घुसती हुईं ऊँगली का अहसाह उर्वशी को बड़ा भाने लगा. अब उर्वशी के तनाव पूर्ण चेहरे पर गुदगुदी की हसीं छाने लगी.
आर्यन : आंटी अब कैसा लग रहा है...!
उर्वशी : अब अच्छा लग रहा है..!
उर्वशी अब तैयार है ये जान के आर्यन ने उसके लंड पर भी gel लगा कर तैयार कर दिया. उसने उर्वशी की गांड सहलाई, गोलो को हाथो से सरका दिए, और फिर एक बार उर्वशी के गांड के किले को नीस्तनाबूद करने आर्यन का काबुली तोफ आगे सरक रहा था. उर्वशी के गांड के sphincters पर फिर आर्यन ने का टोपा दबाव बनाने लगा. धीरे धीरे बढ़ते दबाव बढ़ता जा रहा था. उर्वशी सोफे पर आह्हः अह्ह्ह अह्ह्ह... कर्राह रही थी...!
उर्वशी : धीरे धीरे...! आह्हः... आह्ह...!
आर्यन : बस आंटी...! सब ठीक हो जायेगा...!
आर्यन का लंड का टोपा उर्वशी के sphincters को चिरता हुवा अंदर धसने लगा, बढ़ते दबाव और lubricant के फिसलन से उर्वशी की गांड इंच इंच लंड का टोपा निगल रही थी... फ्लप...! सख्त मोटा छतरी नुमा टोपा उर्वशी के अंदर धसते ही फस सा गया....फ्लप..! टोपा अंदर धसते ही उर्वशी कमर उचका कर हिल गई. उर्वशी के गुदाद्वार मे कलाई जितना मोटा औजार फस चूका था. इस से उर्वशी के गुदा मे तेज दर्द होने लगा जैसे किसी तेज ब्लेड से कट लग गया हो.
उर्वशी : आह... आह्हः.... मर गई... मर गई मै..! उहूँ हूँ हूँ...! उहूँ हूँ हूँ...!
आर्यन : आंटी...! हिलो नहीं...! बस हो गया...!
आर्यन ने अब उर्वशी की कमर कस के पकड़ ली ता के उर्वशी steady रहे हिले नहीं. "और एक शानदार shot , एक ही shot मे लंड गांड के sphincters को खोलता हुवा anul canal की boundary लाँघ कर rectum तक पहोच गया"
पत्थर जैसा सख्त, मोटा, आर्यन का बंबू उर्वशी के अंदर भर चूका था. उसके सुनहरे झाटो वाले अंडकोष ही उर्वशी के बाहर लटक रहे थे, उसके फुदी को ढके हुए थे ..!
अब उर्वशी को आभास हो रहा था के उसने गलत हाथो ने अपनी इज्जत सोप दी है. पर अब बहोत देर हो चुकी थी. उर्वशी के दर्द का अब ठिकाना न रहा. भयंकर तेज दर्द से उर्वशी की टांगे कपकपाने लगी. मानो कोई ज्वालामुखी उसके अंदर फट कर भूचाल लाया हो.
उर्वशी : उई मोरी मैय्या...! मेरी कमर तुट गई...! छोड़ो मुझे...! आर्यन...! छोड़ दो...!
आर्यन : छोड़ दू....! ऐसे कैसे छोड़ दू...!
आर्यन की मजबूत पकड़ और गांड के अंदर जड़ तक फसे लंड के कारण उर्वशी का हिलना मुश्किल हो चूका था. दर्द के मारे कपकपाती उर्वशी चीखती बिकखती छोड़ने के लिए request करती, पर उसकी हर हरकत के साथ आर्यन उसके कमर पर पकड़ और भी मजबूत कर देता. उसकी एक न मानता. उर्वशी के गिरते आँसू भी आर्यन का दिल पिघला न सके....
उर्वशी : छोड़ दो.. उहूँ हूँ हूँ...
आर्यन : ही
बार बार उर्वशी उसे छोड़ने के लिए रोती, बिलख रही थी, विनती कर रही थी. पर आर्यन हस रहा था. आर्यन के अंदर का भेड़िया अपने संपूर्ण भेस मे था. उसके अंदर भेड़िये की ही फितरत थी. एक साल से उर्वशी के घर परिवार की रेकी उसने की हुईं थी. दो लोगो के इस बड़े मकान की उची दीवालों को आवाज लाँघ नहीं पायेगी यह भी जानता था. एक साल से वो शिकार करने के लिए घात लगाने का प्रयास कर रहा था. आज ज़ब उसे ये मौका मिला कैसे गवा देता.
उर्वशी की हलचल शांत होने तक आर्यन थोड़ा रुका, उर्वशी की झटपटाहट शांत होने लगी. फ़ैलता सिकुड़ता फैलता सिकुड़ता उर्वशी के गांड का द्वार(sphincter) अजनबी चोर का जायजा ले रहा था. आर्यन का लंड उर्वशी के अंदर अपना स्थान बना चूका था. उर्वशी की गांड की मांसपेशीया आर्यन के लंड को दुश्मन मान रही थी, अब वो दुश्मनी ख़त्म हो कर दोस्ती मे बदल रही थी, पकड़ ढीली हो रही थी. अब उसके गांड की मांस पेशीओ ने आर्यन के लिंग के घूसखोरी को स्वीकार कर लिया था. आर्यन के लिंग की मोटाई उर्वशी के अंदर एकदम फिट बैठी हुईं थी. आर्यन ने धीरे धीरे कमर हिलना सुरु कर दी थी. धीरे धीरे बाहर खींचता रुकता फिर खींचता. धीरे धीरे आर्यन का लंड उर्वशी के sphincter तक बाहर आ गया. वहां तक आते ही उर्वशी के गांड ने आर्यन का लंड बाहर उगल दिया... फ्लॉप...!

इस बार एक अजीब सी गंध के साथ एक आवाज आई...फर फरर्र फ्लप...!
आर्यन के लिंग के दबाव से उर्वशी के खदान के अंदर की बदबूदार हवा आझाद हो गई. फर फर फ़्लप...!
आर्यन : आंटी...! घबरा रही हो क्या...! या दर्द के मारे पाद रही हो...!
आर्यन के इस बेतुके सवाल से उर्वशी सकूचा गई. आर्यन के औजार ने उर्वशी की खदान अंदर तक खोद कर जो गैस मुक्त कर दी थी उस से उर्वशी शर्मिंदा feel कर रही थी. और आर्यन अभिमान feel कर रहा था.
आर्यन ने फिर lubricant gel की धारा उर्वशी की गांड और खुद के लंड के चारो तरफ उधेडा.
फिर एक बार चढ़ाई करने लगा. सोफे पर चढ़ गया उर्वशी के कंधो पर पंजो से पकड़ बनाने लगा. पीछे लिपटे किसी कुत्ते जैसा आर्यन उर्वशी को दबोच रहा था. अब रास्ता आसान हो गया था. उसने गांड के दरार पर लंड लगा कर थोड़ा ही दबाव बनाया. उर्वशी के गांड ने इंच इंच फ़ैलना सुरु कर दिया. थोड़े ही दबाव से आर्यन के लंड को मानो उर्वशी के पिछवाड़े ने निगलना सुरु किया... फ़्लप...!
आर्यन : आंटी जी अब आएगा मजा...!
आर्यन ने अब उसका नंगा खेल सुरु कर दिया था. उर्वशी के बालो को पकड़ कर सपासप...रपारप...उर्वशी को ठोके जा रहा था. उर्वशी के गांड पर आर्यन की जांघे टकरा आवाजे गूंजने लगी फच..फचा... फच...! उर्वशी के अंदर बाहर होता हुवा आर्यन का भाला उसके अंदर के गुदाद्वार को भाहर तक खींच लेता... फ्लप... फ्लॉप....फ्लिप...!

आर्यन का तपते हुवे मांस का हाथोड़ा उसके अंदर जो छेद कर रहा था. उस से उर्वशी को तेज दर्द के साथ एक अजीब सुख समाधान का अहसास हो रहा था. तेज दर्द भी था. मीठा सुकून भी था. आँखो मे आँसू भी थे और ओठों पर हसीं भी थी. जो heavenly painful feelings अब तक उस से अनजान थी कभी अनुभव कि भी नहीं थी आज उसे आर्यन के संसर्ग से मिलने लगी.
आज आर्यन उर्वशी की छिपी हुईं ये खदान हर तरीके से खोल कर रखने वाला था. योनि मे घाव तो उसने पहले भी कर रखा था जिस घाव को जय ने चाट कर लार से भर दिया था. पर आज जो आर्यन उसके छिपे खदान मे घाव बना रहा था उसे जय भी कभी भर नहीं पायेगा. आज आर्यन उर्वशी के उस अछूत भाग मे भी घाव मार रहा था जिसे अब तक उर्वशी ने छिपा कर रखा था. आर्यन के हमले से थकी हुईं उर्वशी पसीने से भीग रही थी. उसके बदन के पसीने मे आर्यन का पसीना बूंद बूंद मिल कर एक हो रहा था. उसके ही बेटे का दोस्त आर्यन उसकी ये हालत करेगा उसने सोचा भी नहीं था.
उर्वशी के आँखो से आंसू बह रहे थे. मन भारी सा हो गया था. ओठ सुख गए थे. अब उसे होश आ रहा था. नशा उतर रहा था, हवस शांत हो रही थी. आर्यन के भाले ने उर्वशी का नशा और चुदाई का भुत दोनों उतार दिया. आर्यन के हर एक shot से उर्वशी घबरा जाती. कमर से एड़ी तक थरथरा जाती. फडफड़ा जाती.

आर्यन रपारप सपासप उर्वशी को दबोच रहा था, आर्यन के ताकतवर झटके उर्वशी के नितंबो पर टकरा टकरा कर जबरन मिलन की आवाजे गूंजने लगी...फच...फचा... फच....! आर्यन का हर एक shot उर्वशी को एड़ी से चोटी तक हिला डालता, हर एक shot के साथ उर्वशी की चुडिया और पायल के घुंगरू एक साथ तालमेल बिठा कर बजने लगी ...खन... खना.. खन..! छन... छना... छन...! उर्वशी के दर्द का ठिकाना न रहा. गिड़गिड़ाती बिलखती उर्वशी आर्यन को उसे छोड़ देने के लिए विनती करती पर आर्यन उसकी एक न सुनता. आँखो मे भरे हुए आंसू चेहरे से होते हुए बूंद बूंद टपक रहे थे. दर्द के मारे भरा हुवा मन रोने पर उतारू हो गया था. ओठ सुख गए थे. आर्यन के हर झटको के साथ उर्वशी की चीखे निकल जाती.. आह...आह्ह...अह्ह्ह...!
इस घर के दीवालों ने कई बार उर्वशी की इस हालत मे देखा था. कई बार इन गुंजो को दीवालों ने रोका था. जय ने भी उर्वशी को कई बार बजाया था. कई बार उसकी चुडिया और पायल को जय ने भी बजने पर मजबूर किया था. पर कभी उस की गूंजे इतनी तेज नहीं हुईं. आज उर्वशी के चीखो के साथ उसकी बजती पायल और खनकती चूड़ीओ की गूंज दीवाले भी रोक न पा रही थी. रात के सन्नाटे को चिरती हुईं गूंजे आज सारे घर मे समा रही थी. भला ये गूंजे शुभम के रूम तक कैसे न जाती. भला एक बेटा अपनी mom की खनकती चुडिया, बजते घुंगरू को कैसे न सुनता. इन सब मे मिली हुईं उर्वशी की चीखे दीवार दरवाजे पार करती हुईं शुभम के कानो तक जाने लगी. इन सब गंभीर गतिविधिओ से गोलिओ का असर टूटने लगा, पलके खुलने लगी. अब शुभम की नींद खुलने लगी.
Mom की चीखे सुन कर नींद की गोलिओ को बेअसर करता हुवा एक बेटा जाग रहा था. गोलिओ के reaction से उसकी आँखे भारी और लाल हो चुकी थी. माथा भारी और दर्द कर रहा था. उसने आँखे खोल कर रूम मे देखा. रात मे रूम मे जो zero wat बल्ब lights on रहती थी आज वो भी बंद थी. बेड से उठ कर रूम मे चारो तरफ देखने लगा. उसके बेड के सामने वाला जहाँ आर्यन सोया था वो बेड खाली पड़ा था. रूम मे आर्यन कही नहीं था. बस घोर अँधेरे के शांति को चिरते हुए अब भी उर्वशी की चीखे... आह्ह आह्हः अह्ह्ह...! चुडियो की आवाजे.. खन..खना.... खन...!
पायल के घुंगरू..झन...झना...झन...!
उसके कानो तक पोहोच बना रहे थे. इन सब गुंजन से शुभम घबरा गया. उसका दिल किसी पुराने डीजल रेल इंजिन जैसा धड... धड...धड....! धड़कने लगा.
कुछ सोच विचार करें यह समय नहीं था बस उसने आवाजे सुनी और मम्मी...मम्मी... मम्मी...! चिल्लाते हुए दौड़ पड़ा.
जैसे ही शुभम hall मे पहोंचा. दंग रह गया.

Zero wat के बल्ब मे नजारा भले धुंधला दिख रहा हो पर शुभम ने नंगी उर्वशी और उसपर सवार आर्यन को साफ साफ देख लिया. आर्यन के भार और घनघोर वार से उसकी mom के स्तन जेली जैसे हिले जा रहे थे. आर्यन के जांघो को उसकी mom की गांड टकरा कर बज रही थी फट...फट...फट...! आर्यन की ताकद के आगे उसकी mom दबी कुचली पड़ी थी. आर्यन उसकी थोड़ी पकड़ कर पीछे से चढ़ा हुवा खींच रहा था... रपारप चोद रहा था.... फच...फच...फच...!

शुभम को सामने देख कर भी आर्यन रुका नहीं. घबराया नहीं. शर्माया भी नहीं. और भी तेजी से shot लगाने लगा. बल्कि शुभम के आँखो मे आँखे डाल कर बड़ी हिम्मत से, अहंकार से उसे देख रहा था. "मानो मन ही मन कह रहा हो देख तेरी mom को तेरे सामने ही ले रहा हूँ...!" उसको तो अपना कार्यक्रम पूरा करना ही था. चुदाई का भुत उसके माथे पर चढ़ा हुवा था. बड़ी क्रूरता पूर्ण हवसी नजरो से उसने शुभम की और देखा. हसने लगा और रपारप shot जारी रखे....
हुर परी जैसी दिखने वाली उसकी mom आज किसी porn star जैसी रांड दिख रही थी. आँखो मे सूखे आंसू, पलकों से बिखरा काजल, ओठों से नोची हुईं लाली फ़ैली हुईं थी. नंगी पड़ी हुईं थी. उसी के नजरो के सामने उसी के घर मे उसकी खूबसूरत mom आर्यन के निचे बेबस पड़ी वह हैरानी से देख रहा था. आर्यन के निचे झूलती हुईं उर्वशी आर्यन के झटको से ही बजे जा रही थी, चीख रही थी, हाफ रही थी. चुडियो और पायल की आने वाली आवाज का राज शुभम अब समझ गया. स्तन उसपर दांत और पंजो के गंभीर निशान उर्वशी की हालत उस से देखि नहीं जा रही थी ये सब देख कर शुभम के अंदर का एक बेटा जाग गया. तेजी से आगे बढ़ा.
शुभम को सामने देख उर्वशी मे अब हिम्मत आने लगी. पर मेरा बेटा इस हालत मे मुझे देख रहा है, परेशान हो रहा है. उर्वशी ने अब शर्म से गर्दन झुका ली थी. इतनी शर्म उसे कभी न आई. शुभम से आँखे मिला सके इतनी हिम्मत उसमे बचि ही नहीं. आर्यन कई घंटो से उसे थका रहा था बेचारी थक कर हार चुकी थी, भुके पेट जो थी, नशे मे थी, पावडर के नशे ने उसका सारा बल छीन लिया था. आर्यन के पकड़ से छूटने की नाकाम कोशिश कर रही थी....
उर्वशी : छोड़ दे... छोड़ दे...! कमीने...!
उठने की कोशिस कर रही थी. झटपटा रही थी. पर आर्यन उसे फिर दबोच कर झुका देता...
आर्यन : मान जा आंटी थोड़ी देर बस...!
शुभम : अरे कुत्ते...! तूझे मैंने भाई माना...! और तू ये क्या कर रहा है निच..! (शुभम ने आर्यन को पकड़ कर जोर से खींचा)
आर्यन : चल हट...! निकल...! ये मेरा शिकार है...! (आर्यन ने शुभम को धक्का दे कर सरका दिया. आर्यन के धक्के से शुभम जा गिरा)
उर्वशी : मेरे बेटे को हाथ मत लगा... आर्यन...! उहूँ हूँ हूँ...उहूँ हूँ हूँ...!
उर्वशी अब रोने लगी. एक खिलाडी, मजबूत शरीर और वैशी दरिंदगी से भरा आर्यन के सामने शुभम कमजोर पड़ गया. उसी के आँखो के सामने उसी का दोस्त उसी के mom को जिस प्रकार चोद रहा था यह सब शुभम के लिए असहनीय हो रहा था. क्या किया जाय इतना उसे सूझ नहीं रहा था. उसके मासूम चेहरे पर बारा बजे हुए भाव थे.
शुभम : छोड़ दे कमीने...! नहीं तो तुझे मै मार दूंगा...! (शुभम ने आर्यन को फिर पकड़ कर एक दो घुसे जड़ दिए)
आर्यन : चल हट...! काम पूरा किये बिगर मै नहीं छोड़ता...! (आर्यन ने शुभम के कमजोर घुसे सह लिए. उर्वशी को छोड़ कर उठ खड़ा हुवा. उर्वशी के गुफा से आर्यन का लम्बा कोबरा निकल कर बाहर आ गया. और फिर शुभम को धक्का लगाते हुए दूर तक सरका दिया.)
आर्यन : जा...! जा कर सो जा...!
कॉलेज-पढ़ाई-गिने चुने दोस्त-घर-mom बस इतना ही उसका संसार था. शुभम अब तक समाज के नंगी सच्चाई से दूर था. सभ्य समाज मे छिपे हुए भेड़िये आसान शिकार ढूंढ़ते हुए कैसे घर तक पोहोच जाते है, कैसे उर्वशी जैसी पति से दूर अकेली रहने वाली जवानी मे झूलासती औरते इन भेडिओ के जाल मे फस जाती है इसका उसे कोई अंदाजा नहीं था. इन सब से बेखबर शुभम ने गलती से एक भेड़िये से दोस्ती कर ली थी. आर्यन के इरादों, मनसूबो और छल का उसे कोई अंदाजा नहीं था. पढ़ाई छोड़ कर आर्यन शारीरिक कूवत मे हर प्रकार से उस उमर के लड़को से कई गुना आगे था. इस भेड़िये जैसी नियत और असामान्य ताकद के मालिक आर्यन के आगे शुभम की एक न चलि. आर्यन की धोकेबाजी और उसके साथ निचे चुद रही उसकी mom की गंदी हरकत उसे रास न आई. दोनों को रंगे हाथ पकड़ने जाने से शुभम के मासूम मन मे बदले की आग पैदा होने लगी.
शुभम शुभम मन ही मन बोलने लगा...छी mom...! तुम इतना गिर जाओगी... थू.. थू.. थू...! हवस की आग मे किसी के भी साथ नंगी हो जाओगी. मेरे दोस्त को भी ऊपर चढ़ाने लग जाएगी.... Shame on you..! आर्यन तू दोस्त हो कर इतना निचे गिरेगा मेरी mom को ही निचे ले लेगा. मेरे ही सामने...!
जैसी भी हो मेरी mom है, mom के साथ क्या करना है ये मै बाद मे देख लूंगा. पर कम से कम आज दोनों को exposed कर के ही दम लूंगा.
"जय ने कहा था कोई भी जरुरत हो मुझे याद करना" शुभम को अब जय ने किया हुवा वो वादा याद आने लगा. अब जय ही आर्यन को निपट सकता है. चाहें कुछ भी हो जाए इस धोकेबाज दोस्त को जय से पिटवा दूंगा. शुभम के आँखो मे आज अँगारो की ज्वाला भर गया था.
शुभम : आज ही बदला लूंगा. मेरी mom पर मेरे ही घर मे आज तूने हाथ डाला है...! यह सोच कर शुभम ने खुद को संभाला. हिम्मत बांधी. उठ खड़ा हुवा. तेजी से भागा. पिछला दरवाजा खोला. ऊपर की सीढीया चढने लगा. जहाँ जय रहता था. वहा जा धमका. दरवाजा ठोकने लगा....
ठक ठक ठक....!
ठक ठक ठक...!
ठक ठक ठक...!