Adultery उर्वशी🧚.... माँ-बेटे की अनोखी प्रेम कहानी - Page 5 - SexBaba
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Adultery उर्वशी🧚.... माँ-बेटे की अनोखी प्रेम कहानी

जी आप के सराहनापूर्ण शब्दों के लिए धन्यवाद 💐🙏
 
part -10





शुभम अब निश्चिंत हो कर सो रहा था , अब जय और उर्वशी के बिच के मिलन पर उसने प्रतिबन्ध लगा दिया था, जय ने शुभम को प्रॉमिस क़र के वादा दे दिया था के आज से वो शुभम के mom की चुदाई नहीं करेगा. इस सब मे चलाक अदनान का बड़ा हाथ था, उसीकी ही प्लानिंग काम क़र गई, उसी ने बड़े अच्छे तरीके से जय को होश मे ला क़र धीरज बँधाया था जिस धीरज के कारण जय शुभम को मना सका....





दूसरी तरफ आर्यन था, अब वो उर्वशी को ले कर अलग ही ख़याली दुनिया मे ख़ोने लगा था, शुभम से तीन साल बड़ा उसका क्लास मेट आर्यन बहोत ही हरामी किस्म का लड़का था, उसे शुभम से कोई लगाव था ही नहीं, पर क्लास मे हमेशा अव्वल रहने वाले शुभम के साथ रह कर वो किसी प्रकार से अपनी आधी अधूरी पढ़ाई पूर्ण करना चाहता था, इसी स्वार्थ को साधने वो शुभम के साथ यारी बनाये रहता था, BASKETBALL खिलाडी आर्यन पढ़ाई हमेशा dump ही करता रहा था, इस वजह से वो दो बार fail भी हो चूका था, और तो और स्कूल मे एक lady teacher और लड़कीओ से बतसलूकी के वजह से उसे फिर एक बार fail कर के पुराने school से निकाल दिया गया था. उसके बड़े मामा का बड़ा political दबदबा था. political वजन रखने वाले उसके मामा ने उसे बड़ी मुश्किल से पिछले वर्ष ही शुभम के स्कूल मे दाखिल दिलवाया था. School मे lady teacher और लड़कियों से बदसुलुकी करने का अंजाम भुगत चूका आर्यन अब अपने से बड़ी उमर की milf आंटीओ मे रूचि लेने लगा था, शुभम के ही कॉलोनी मे कही पास मे ही family के साथ रहता था. शुभम के साथ वो अक्सर शुभम के घर आया जाया करता था. ज़ब भी वो आता उर्वशी के गदराये बदन पर आँखे सेके बिना नहीं रहता था, उर्वशी भी उसकी नजरों से भली भाती परिचित थी...!

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आज रविवार था, जय और अदनान आज उनके flat मे ही थे....

जय : भाई शुभम को तो प्रॉमिस कर के मना लिया...! अब उर्वशी का क्या करू....! शुभम अब रात मे नजर रखेगा, उर्वशी बुलाएगी तब कैसे उसे टालू....!

अदनान : अरे भाई, बहाना कर ले और टाल दे....!

जय : क्या बहाना करू...! वही तो सूझ नहीं रहा है...!

अदनान : देख अब शुभम की exams आ रही है...! बोल दे के रात मे वो पढ़ाई करते रगेगा, इसलिए अब तुम दोनों का मिलन उसकी exams ख़त्म होने तक़ बंद कर देते है...! इस बात से वो भी खुश हो जाएगी...!

जय : वाह..! वाह..! भाई तेरे दिमाग़ का जवाब नहीं...!

अदनान : और हा, इन दिनों शुभम से नजदीकीया बढ़ा दे...! प्यार दे उसे...! बाप के साये से दूर है बेचारा, उसे तेरा साथ अच्छा लगेगा... और हा तू अगर उसका दिल जीत सका तो आगे तेरे लिए आसानी होंगी...!

जय : मतलब समझा नहीं...!

अदनान : मतलब तू उर्वशी को चाहता है और वो तुझे... तुम्हारा मिलन होता रहे इसमें काटा तो शुभम ही है ना...? बोलो...!

जय : हा.... बिलकुल...!

अदनान : तो तू बस उसका दिल जीत ले... बाकि मै हु ना...! मै सब जुगाड़ बनवा दूंगा...! देख लियो...!

जय : ठीक है...! आज से शुभम का दिल जितने की तैयारी सुरु...! पर अब तू ही ये बता कैसे....!

अदनान : किसी का दिल जितना बड़ी बात नहीं है....! बस उसे अपना मान ले...! उस के साथ वक़्त बिता...! उसकी बाते सुना कर...! बस हो गया...!

जय : hum... Hum.... ठीक है उसे घुमाने भी ले जाया करूंगा...!





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अदनान और जय बस बात कर ही रहे थे के कमर लचकाती हुईं उर्वशी वहा आ गई, गोलाकार चिकने मटके जैसे नितंब, मोटे रसीले झूमते हुए स्तन, पतली कमर से सराबोर यौवन पर लाल साड़ी और लाल ब्लाउज पहनी हुईं उर्वशी बड़ी नजाकत से एक एक कदम बढ़ा रही थी. कच्चे दूध सा साफ बदन का रंग और उस पर पडती सूरज की किरनो से वो कुंदन सी चमक रही थी. बालो के जुड़े पर सफ़ेद तौलिया लपेटे हुईं उर्वशी ऊँगलीओ से छोटी छोटी लटाओ को बड़ी प्यार से कानो के पीछे दबा देती. उसके बदन की खुशबु और काले नागिन से घने बाल बता रही थी के वो कयामत की बला अभी अभी नहा के बाहर आई हो इसलिए गजब की नमकीन लग रही थी. बड़ी नजाकत से कपडे सुखाती, इधर उधर कावरीबावरी घूमती हुईं उसकी नजरें जय के मर्दाना बदन को देखना चाहती थी, खुद के कुंदन से बदन पर लिपटी लाल साड़ी दिखाना चाहती थी, कई बार जय के हाथो उर्वशी नंगी हो चुकी थी, जय ने भी उसके गोरे गोरे बदन को एड़ी से चोटी तक़ कई बार नंगा देखा था, जय के गोद मे बच्ची बन कर कई बार उर्वशी बैठ चुकी थी.





जैसे कोई नई नवली दुल्हिन उसके पति को लुभा कर उसका पवित्र स्पर्श पाने आतुर रहती वैसे ही उर्वशी रोज जय को लुभाने ऊपर आजाती. हर रोज नहा कर अपनी अदाए दिखाती हुईं उर्वशी कपड़े सुखाने के बहाने अपने प्रेमी से मिलने जरूर आती. लटक मटक कर देह प्रदर्शन यु करती मानो वो जय को बताना चाहती हो के उसके अंदर आज भी एक कुवारी कन्या है जो उसके प्रेमी से शरीर सुख पाने के लिए उतावली हो रही है....





जय भी उसके देह प्रदर्शन का खूब लुफ्त उठता, देह प्रदर्शन का उत्तर देह प्रदर्शन करता हुवा जय उसके 6 फिट के gym मे कसे हुए भारी भरकम शरीर का वो भी मर्दाना प्रदर्शन किया करता, सफ़ेद बनियान से घिरी हुईं मांसल चौड़ी छाती, और short pant से आधे ढके हुए मांसल जांघे निहार कर उर्वशी का दिन बन जाता था....

उर्वशी के ऊपर आते ही जय उसके अंग प्रदर्शन कार्यक्रम को देखने बाहर जरूर निकलता, अपनी प्रेमिका अपने लिए ही सज कर आती है इसका उसे बड़ा अभिमान होता...! इस बार भी वो उर्वशी की राह ताक ही रहा था के उर्वशी आ भी गई...

जय : hum भाबी...! लाल साड़ी...! वाह भाबी...! जच रही हो...!🤤

उर्वशी : क्या बात है जय...! आज आज sad लग रहे हो...! उर्वशी ने जय का चेहरा निहारते हुए कहा...!

जय : sad तो हु...! एक वज़ह है भाबी...!

उर्वशी : हा बताओ... क्या वजह है..!

जय : भाबी अगले हप्ते शुभम की exams start हो रही है...! अब वो रात रात जाग कर पढ़ेगा...! ऐसे मे अब exams होने तक हमारा मिलना ठीक नहीं होगा...! कुछ देख लिया, या कोई उसे शक हो गया तो खामखा disturbed हो जायेगा....! उसके पढ़ाई पर बुरा असर पड़ेगा...!🫠

उर्वशी : आयहाय...! बड़े पिता बन रहे हो मेरे बेटे के...! वैसे शुभम की चिंता मुझे भी है ...!अब उसकी exams होने तक आप को याद भी करुँगी ये बात तो भूल ही जाओ...!😏

जय : हा भाबी...! पर मेरा क्या होगा वो क्यों नहीं सोचा आप ने... 🫠

उर्वशी : तुम्हारे बारेमे क्या सोचना है...! दो दो बेटे नहीं पाल सकती मै...!

जय : बेटा...! भाबी...! मै बेटा कब से बन गया...!

उर्वशी : ज़ब से दूध पिया है तब से...!(श्लीलता भरी हसीं के साथ उर्वशी बोली)

जय : तब भाबी...! इस बेटे के भूक की भी कुछ इंतजामात करिये... हो सके तो बिच बिच मे दूध पिलाने ऊपर ही आजाया करिये ...!

तभी अदनान वहां आता है....

अदनान : क्या बाते हो रही है दीदी..!

जय : दूध का...! मेरा मतलब है दूध मे केला डालकर दूध पिने से तबियत चुस्त रहती है.... क्यों भाबी...!😉(उर्वशी के दूध नीहार कर जय ने लंड तौलिया के अंदर adjust करते हुए कहा)

उर्वशी : मुझे केला पसंद नहीं है...😏! (नकछड़े नखरेल अंदाज से जय को देखते हुए उर्वशी बोलते हुए उर्वशी कमर मटकाते हुए जाने लगी)

शुभम : मम्मी...! आज और कल के दिन आर्यन और वासु जल्दी आएंगे...! कल से school ने भी exam के priperition करने के लिए छूट्टीया दी है मम्मी...! परसो से हम group study बंद कर देंगे...! और self study पर ज्यादा focus करेंगे...!

उर्वशी : ठीक है बेटा...! Lunch redy है पहले lunch कर लो आप...!

शुभम : ठीक है मम्मी...!

(शुभम lunch कर रहा था, उर्वशी बेडरूम मे जा कर आयने के सामने सवरने लगी, लाल साड़ी, लाल ब्लाउज, लाल लिपस्टिक, कमल की पंखुडियो सी बड़ी बड़ी आँखो मे काजल, लाल चुड़ी, घुंगरू वाली पायल, और उसके नाजुक कमर से निचे लटकती हुईं काले नागिन सी लटकती हुईं चोटी बांध कर सज धज कर तैयार हो रही थी तभी आर्यन और वासु वहा आजाते है.)

वासु : hello... शुभम...!

शुभम : hii.. आर्यन...! Hii... वासु...!

आर्यन : आंटी जी कही दिखाई नहीं दे रही है...!

शुभम : है घर मे ही है...! मम्मी...! मम्मी...!

उर्वशी : आ गए हो...! अच्छा...!

वासु : नमस्ते आंटी...!

(उर्वशी को देखते ही आर्यन उसका बदन ऊपर से निचे तक scan करने लगता है, मन ही मन उर्वशी को नजरों से नंगी करने लगता है. बड़ी उमर की औरतों मे रूचि रखने वाला आर्यन उर्वशी को केवल एक मादा समझता था,





उर्वशी के लिए आर्यन जरूर कम उम्र है नया नर था मगर वह एक Basketball का खिलाड़ी था एक स्पोर्ट्स पर्सन था, उसकी शारीरिक क्षमता अपने समकालीन अन्य लड़को से ज्यादा थी और उसका कलाई जितना मोटा, असामान्य रूप से लंबा, योनि मे घाव बना देने वाला औजार उसे बहुसंख्यक लड़को आदमियों से अलग करता था. वह पत्थर सा सख्त, आगे से नुकिला बिच मे मोटा और ताकतवर था, निश्चित रूप से उर्वशी उसे देख कर मोहित हो गई और उसे विश्वास हो गया कि ये उसके खेत मे बीज जरूर बो देगा तभी तो उर्वशी ने आर्यन को अपना खेत सौपने का फैसला कर लिया था, दो दिन पहले ही अपने पदार्पण मैच में उर्वशी के पुरानी पिच पर आर्यन ऐसी पारी खेल चूका था कि पहली पारी(inning) में ही अनबीटन सेंचुरी मार कर उर्वशी की पिच(pitch) घायल कर दी थी. और वो मादा जो सिर्फ ये समझती थी कि उसके खेत मे कोई मजबूत और तजुर्बेकार किसान ही हल चला कर जोत सकता है गलत साबित हुई, आर्यन के दमदार performance से प्रभावित उर्वशी आर्यन से अब नजरें चुराने लगी थी, आर्यन एक सुरक्षित दुरी बना कर रखना चाहती थी, उसके ताकतवर लिंग के आगे फिर टांग खोलना नहीं चाहती थी. वही आर्यन अलग ही अकड़ मे था, उर्वशी के पिच पर एक बार विजय प्राप्त कर चूका था. "एक मादा जो मेरे आगे टांग खोल चुकी हो, जिसके योनि अंदर तक की गहराई मैंने नाप ली हो उसे मै क्यों पहले greet करू, उर्वशी खुद हो कर मुझे greet करें" ऐसी भावना पाले हुए बैठा था. उर्वशी को देख कर आर्यन ने उसे greet भी नहीं किया था, आर्यन का ये अंदाज उर्वशी को बिलकुल भी पसंद नहीं आ रहा था, अब वो आर्यन को अपने नखरो से हैरान करने वाली थी,)

शुभम दोनों को उसके रूम मे ले आया और तीनो मिल कर group study करने लगें, लेकिन आर्यन का मन कही और ही था, कई बार पानी पिने के बहाने तो कभी सुसु करने के बहाने आर्यन उर्वशी को ताकने बाहर गया पर उर्वशी ने उसके bed room का दरवाजा ओढ़ कर रखा था, दोपहर के 4 बज रहे थे....

वासु : शुभम... Bro आंटी से कह कर कॉफी बनवा लो...!

आर्यन : हा भाई...! आंटी के हाथ की बनी कॉफी मिल जाती तो मजा आजाता...!

शुभम : ठीक है...! अभी बोल कर आता हु...!(शुभम उर्वशी को कॉफ़ी के लिए बोल कर आता है, उर्वशी कॉफी बनाने लगती है, कुछ snakes और कॉफ़ी redy कर के उर्वशी शुभम के रूम मे enter करती है....)

उर्वशी : बच्चो...! लो गरमा गरम कॉफी...!

(अब नखरे दिखाती हुईं उर्वशी ने आर्यन के और देखा तक नहीं, न ही कोई बात की, आर्यन जैसे लौंडों को ठीक करना वो बखूबी जानती थी. कॉफी पी कर आर्यन cup किचन मे रखने जाने लगा, सोचता के उर्वशी खुद उसके साथ बात करेगी, पर ऐसा हुवा नहीं. अब भी उर्वशी ने उसको दूध मे पड़ी मक्खी के जैसे नजर अंदाज कर दिया)

शाम के 4 बजने आये थे, study निपटा कर दिनों room से बाहर आने लगें, उर्वशी tv पर कुछ प्रोग्राम्स देखने मे busy थी.

वासु : अच्छा आंटी...! हम चलते है...!

उर्वशी : ठीक है बेटा...!

(तभी जय वहा आता है)

जय : नमस्ते भाबी...!





उर्वशी : नमस्ते...! कहा की तैयारी है बुलेट राजा...!(बड़ी नजाकत से जय के साथ उर्वशी बात कर रही थी)

जय : भाबी जी...! आप की permission हो तो शुभम को साथ ले जाऊ...!

उर्वशी : हा... हा...! कभी हमें भी घुमाने ले चलिए...!

जय : जी जरूर...! कहिये कहा ले चलू...!

उर्वशी : बताएँगे...! शुभम की छुट्टीया लग जाये तब ले चलिए...!

जय : जी बिलकुल...! आप बस एक बार बता देना..!

उर्वशी : जी बिलकुल...!

जय : अरे शुभम, पार्क चलोगे...! घूम कर आते है...!

शुभम : ठीक है अंकल...!

जय : 6 बजे तैयार रहना,...!

शुभम : जी ठीक है...!





(ये पहली बार था ज़ब जय और आर्यन एक दूसरे को देख रहे थे, एक शिकार पर दावेदारी ठोकने वाले दो शिकारीओ की ये पहली मुलाक़ात थी. "एक तरफ उर्वशी को अपना मान चूका बब्बर शेर(lion) जय" तो "दूसरी तरफ उर्वशी पर झपट्टा मार अपने निचे लेने की फिराक मे घात लगाए हुए ताक मे बैठा शेर(tiger) आर्यन" एक दूसरे को यु निहार रहे थे जैसे के अपने area पर दबदबा बनाने के लिए लड़ाई से पहले दो शेर एक दूसरे की ताकद आजमा रहे हो.....

जय और उर्वशी जिस अंदाज नजरों मे नजरें डाल कर हस हस कर बाते कर रहे थे उस से आर्यन के अंदर जलन सी होने लगी, ज़ब के उर्वशी ने आर्यन की और देखा तक नहीं, न उस से कोई बात भी की, इस सब से उकड़ा हुवा चेहरा ले कर आर्यन वहा से जाने लगा.)

शाम के 6 बजे ही थे के जय तैयार हो कर वहा आ गया, उसकी बाइक बुलेट(royal Enfield) बाहर निकालते हुए शुभम को आवाज देने लगा....

जय : शुभम...! चलो निकलते है...!

शुभम : आया...! बस एक मिनिट...!

जय ने बाइक को किक मारी, एक ही किक मे धड... धड... धड... धड... की आवाज करती हुईं बाइक start कर दी, बाइक start होते ही शुभम बाइक पर सवार हो गया के दोनों बाते करते करते निकल पड़े,,, देखते ही देखते destination पर पोहोच गए...





जय : कैसे चल रही है पढ़ाई...!

शुभम : जी पढ़ाई तो पूरी कर चूका हु, अब तो बस revision कर रहा हु...!

जय : बहोत बढ़िया...! अब next week exams है, एक काम करो आज ही exams के जरुरी सामान खरीद लेते है...!

शुभम : पर अंकल मैंने पैसे नहीं लाये है...!

जय :पैसो की चिंता तुम मत करो...!याद है मैंने तुमसे वादा किया था के तुम्हारा मै खयाल रखूँगा... मै बस मेरा वादा निभाना चाहता हु...!

शुभम : पर मम्मी डाँटेगी...!

जय : मै उनको बोल दूंगा के मैंने खुद forces कर के shopping करवाई है..! ठीक है ना...!

शुभम : hum hum...!

जय : अच्छा शुभम, वो आज तुम्हारे घर दो लड़के कौन आये थे... फ्रेंड्स है क्या...?

शुभम : हा... दोनों classmates है... वो जो ऊंचा लड़का था उसका नाम आर्यन है, दूसरा वासु है...!

जय : पर शुभम...! आर्यन कुछ ठीक नहीं लगा मुझे...!

शुभम : जी वो ना थोड़ा aggressive है, BASKETBALL खेलता है, बस इसी का attitude है उसे...!(शुभम ने आर्यन की सारी history बता दी)

जय : hum...! लगा ही मुझे...! वो लड़का थोड़ा बिगड़ा हुवा है...!

वैसे तुम्हारे घर कब से आता जाता है...!

शुभम : बस इसी साल से आता है अंकल...!

जय : ऐसे लड़को को घर मे लाना ठीक नहीं होता है...! इनकी नजरो का कोई भरोसा नहीं होता है...!

शुभम : जी पर वो...

जय : ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी...! मुझे बस तुम्हारी फ़िक्र है...! अच्छा कोई परेशानि हुईं तो मुझे बताना... मै हु...! आने दो उसे...!

शुभम : जी अंकल...! अब आप है तो किसी से क्या डरना...!

( यु ही बातो बातो मे जय शुभम को exams का जरुरी सामान खरीद दिया, ice cream खिलाई and पार्क घुमा लाया, देखते ही देखते दोनों घर पोहोच गए.) दोनों ज़ब घर पोहोचे तब उर्वशी किचन मे खाना बना रही थी...!

जय : भाबी...! देखिये शुभम की exams के लिए जो जरुरी सामान खरीद लाये है वो मैंने उसे दिलवाया है...! इतना तो मेरा हक बनता है...!(यु कह कर जय ने शुभम के बालो मे उंगलियां फहराई और ऊपर उसके flat मे जाने लगा)

उर्वशी : हा बिलकुल...! अच्छा किया जय....!

शुभम : मम्मी.. मम्मी... जय अंकल कितने अच्छे है ना...! पापा भी होते तो मुझे ऐसे ही घुमाने ले जाते😊...!

उर्वशी : हा बेटा...!

(दूसरी तरफ आर्यन का कुछ अलग ही चल रहा था, दो दिन पहले उर्वशी की चुदाई कर के उसने ये मान लिया था के उर्वशी पर अब सिर्फ और सिर्फ उसी का हक है पर आज उर्वशी ने उसे दूध मे गिरी मक्खी के तरह नजर अंदाज कर दिया और तो और जय के साथ उर्वशी जिस अंदाज मे गुलुगुलु कर रही थी उस सब के वज़ह से आर्यन आगबबूला होने लगा था, इसे वो खुद का अपमान मान बैठा. धूर्तता, चालाकियाँ और बदमोसी से भरा हुवा आर्यन अब उर्वशी को अच्छे से फ़साने की प्लानिंग करने लगा...

मन ही मन बुदबूदाता हुवा आर्यन सोचने लगा "एक साल से मै उर्वशी पर लाइन मार रहा हु, उसके बदन को पाने के लिए मैंने बहोत मेहनत की है अब कोई दूसरा आ कर मेरा हक छीन जाये ये मै बर्दास्त नहीं करूंगा, उर्वशी मेरे से set हो चुकी थी पर ऐसा क्या हुवा जो उसने मुझे नजरअंदाज कर दिया, कोई बात नहीं मै उसे प्यार मे फसाउँगा, उसे मेरी दीवानी कर दूंगा फिर उसे अच्छे से रगडूंगा, उसकी चुत और गांड का छेद एक कर दूंगा...और चोद चोद कर मन भर जाये तब मै उसे मै छोड़ दूंगा. उर्वशी तुझे तेरे बदन का बड़ा गुरुर है मै उस बदन को तहस नहस कर दूंगा, तेरे पाव भारी कर दूंगा, तेरे बच्चो का नाजायज बाप मै ही बनूंगा, कल group study का आखरी दिन है मुझे कल ही कुछ करना पड़ेगा'"....आर्यन अब उर्वशी को प्यार से मनाने, अपने प्रेम जाल मे फ़साने की की प्लानिंग करने लगा....!

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कोई कितना भी पढ़ाकू क्यों न हो, क्लास मे अव्वल भी आता रहा हो पर पिता का साथ न हो तो दुनियदारी के exams मे वो fail ही हो जाता है. अब तक अपने काम से काम रखने वाला शुभम अजीब अज्ञातवास मे जीवन बिता रहा था. पर अगले दिन जो आर्यन कांड करने वाला था उस से शुभम के जीवन मे एक महत्पूर्ण बदलाव आने वाला था....!
 
देखिये... यह स्टोरी incist ही बनेगी... आप सय्यम रख सकते तो ही मेरे story thred मे बने रहे..... अन्यथा आप story पढ़े बिन ही जा सकते हो... धन्यवाद 🙏
 
जल्दी ही आएगा 💐

आप बने रहिये 🙏
 
part 11

अप्रेल की तेज गर्मि पड़ रही थी. दोपहर के 12 बज रहे थे, आज आर्यन और वासु समय से पहले आ कर शुभम बेडरूम मे पढ़ाई कर हे थे, उर्वशी को ताड़ने के फिराक मे बहाना ढूंढता हुवा आर्यन बोल पड़ा....





आर्यन : मै अभी सुसु कर के आता हू.. ( आर्यन ने वासु को इशारा किया, वासु समझ गया ये ठरकी आंटी ताड़ने जा रहा है, ये वापस आने तक शुभम को यहि अटका कर रखना है, जैसे के दोनों मे इस बात का वादा किया हो)

उर्वशी के bedroom का दरवाजा आधा बंद कर उसके खुली जगह मे परदे लगे हुए थे, लाल साड़ी मे लिपटी हुईं उर्वशी पलंग पर लेटी हुईं थी, AC भी on था पर उर्वशी की गर्मि है के AC भी ठंडक नहीं दे पा रही थी, कमर से थोड़ा ऊपर साड़ी उठाई हुईं उर्वशी अपने पिंडलीओ को अपने ही हाथो से सहला रही थी जिस से ये साफ दिख रहा था के उसकी दोनों पिंडलिओ के बिच फसी हुईं panty इतनी छोटी थी के मुश्किल से उसकी कचोरी जैसे फूली हुईं योनि को ढक पाती. Panty का मुलायम जालीदार कपड़ा उसके योनि के दोनों ओठो (labia)को बगल मे सरका कर गुलाबी दरार पर सट कर चिपके हुए थे. परदे के पीछे से उर्वशी की ये हालत देख कर आर्यन ललचा जा रहा था, ऐसे घूरे जा रहा था जैसे कोई भूखा भेड़िया बेखबर खरगोश को दबोचने से पहले उसका जायजा लेता हो. उर्वशी की ढके हुए गुलाबी गुफा मे कुंडली मारने के लिए आर्यन का नाग फन फ़ैला कर हिचकोले मार रहा था, हिम्मत जुटा कर आर्यन सीधा अंदर प्रवेश करता है....





आर्यन : आंटी.... आंटी....!

भारी मर्दानगी भरा आवाज सुन कर उर्वशी दचक गई, साड़ी निचे खींच कर उसने गांड के चिकने गोलो पर पर्दा कर लिया, लेकीन पल्लू अभी भी निचे ही पड़ा रहा. bed पर उठ कर बैठने लगी, सामने देखती है तो उसे साडे छे फिट का आर्यन उसके बगल मे ही खड़ा उसे निहार रहा था. हवसी आँखो को वो उर्वशी के बदन पर सेक रहा था. के दोनों की नजरें आपस मे टकराने लगी....

आर्यन : i am sorry...!really sorry...! आप से rude बर्ताव कर के आंटी मैंने आप का दिल दुखाया...!

उर्वशी : hum....! कोई बात नहीं बेटा...! इस उमर मे जवान लड़के थोड़े अजीब बर्ताव करते है...! मै समझ सकती हु...!

आर्यन : आंटी मै बहक गया था...! मै आप के प्यार को समझ ना सका...! Plz मुझे माफ कर देना...!

उर्वशी : ठीक है बेटा...! अब आप study पर focused रहिये...!

आर्यन : मै study पर focused नहीं हो पा रहा हु आंटी...! बस दिन रात आप के बारे मे सोचता रहता हु...! आंटी I LOVE YOU...! 🫶

उर्वशी : अरे आप ऐसा ना कहो...! मै आप से बहोत बड़ी हु...!

आर्यन : जी मै जानता हु...! अब मेरा मन आप के ही यादो मे डूबा रहता है आंटी...! आप मुझसे बात नहीं करोगी तो मै फिर से fail हो जाऊंगा...🥹

उर्वशी : बस इतनी सी बात है...! ठीक है...! आप की exams होने तक मै आप से बात करूंगी...! पर उसके बाद बंद...! बोलो मंजूर है...!

आर्यन : जी आंटी...😊 और एक बात, मै आप के साथ प्यार करना चाहता हु..,! आप को दुलारना चाहता हु...! आप को किस करना चाहता हु...!😊

उर्वशी सोच मे पड़ गई ये किस पागल से पाला पड़ गया है, इसकी exams भी आने वाली है, और इसकी गर्मी बढ़ते जा रही है...! अब क्या किया जाए...! इसकी गर्मी शांत नहीं हुईं तो ये पगला जायेगा, fail हो गया तो मुझपर दोष आएगा. और इसका औजार भी तो लंबा चौड़ा है, इसका भाला फुदी मे घाव बना देता है, इसे अंदर लेना मतलब "आ बैल मुझे मार"...! पर ज़ब तक जय से दुरी है तब तक इस से काम चला लेती हु, सोच विचार कर उर्वशी बोली....!

उर्वशी : अच्छा एक काम करते है...! आप के लिए थोड़ा बहोत मै कुछ कर देती हु...! पर जितना मै कहु उतना ही करना पड़ेगा...! और आगे से ज़ब तक मै खुद न बोलूगी तब तक तुम मुझे तंग नहीं करोगे...!बोलो मंजूर है...!

आर्यन : जी आंटी मंजूर है...!

उर्वशी : अच्छा मै बोलती हु वैसा ही करो, कल या परसो तुम तुम्हारे घर मे यह बोल दो के मेरी exams की priperition पूरी नहीं हुईं है, और पढ़ाई भी मेरे समझ मे नहीं आ रही, इसलिये रात मे शुभम के घर जा कर पढ़ूंगा, शुभम से सीखूंगा, शुभम मुझे पढ़ाने वाला है, बस एक रात के लिए permission मांग लो, बस इतना करो आप बाकि यहां का मै संभाल लुंगी...!

आर्यन : आंटी...! यह सब आज ही करता हु...! आज ही permission मांग कर आजाता हु...! आप का प्यार मिल जाये तो मेरा काम बन जायेगा...! मै study पर focus रह पाउँगा आंटी...!

(ब्लाउज के आगोश मे ढके हुए उसके चिकने मोटे और मलाई से भरे हुए दोनों स्तन एक दूसरे से सट कर बिच मे जो दरार बना रहे थे वो दरार किसी खूबसूरत पर्वतो के बिच छिपी वादी जैसे मनमोहक दिख रही थी, आर्यन की नजर उस वादी से हो कर ब्लाउज के अंदर ऐसे डूबी जा रही थी के जैसे कोई गोताखोर ऊपर से समंदर की घहराई मे गोता लगाना चाहता हो. आर्यन का गोरा चेहरा उर्वशी के उम्मीदभरी बातो से लालीमा लिए चमक रहा था. अजीब अकड़न से उसकी गोरी मांस पेशीया अकड़ी हुईं दिख रही थी जिस पर हरी हरि नसो का जाल फूल कर साफ दिख रहा था. उर्वशी के बदन को भोगने की ये लालसा थी, बेसबरी थी)

उर्वशी : hum....! ठीक है..!

(इस से आज ही छुटकारा पाना पड़ेगा नहीं तो ये हरामी रोज घर आ कर तंग करेगा ये सोच कर उर्वशी बोली)

उर्वशी : पर सुनो...! वासु को कानो कान खबर न लगें...! और शुभम से कहना के मेरे मम्मी पापा आज out of city गए है इसलिये मै सोने यहां आया हु...!

आर्यन : जी समझ गया... आंटी...!

खुश हो कर आर्यन उर्वशी को ताड़ते हुए वहा से जाने लगा, अब उसके नवयुवक चेहरे पर हरामीपंति की एक अजीब चमक थी, आर्यन की उम्मीद जीत मे बदलने वाली थी. शुभम के रूम मे आ कर वो बड़े ध्यान से पढ़ाई करने का नाटक करने लगा.

वासु : भाई तू पढ़ाई छोड़ कर क्यों जाता रहता है... तू पक्का एखाद subject मे fail हो जायेगा...!

शुभम : उसका ध्यान पढ़ाई मे रहता ही कहा है...!

आर्यन : अरे भाई मै तो बस आंटी का काम कर रहा था...! उन्हीने मुझे आम और संतरे लाने के लिए बाहर भेजा था...!

🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷

दोपहर के चार बज रहे थे तभी उर्वशी वहा आती है, उसके हाथो मे संतरा जूस का एक ट्रे था अब की बार आर्यन आर्यन और उर्वशी की नजरें एक हो गई, आर्यन की नजरें उर्वशी के आँखो से निचे उतर कर उसके ब्लाउज मे लटके हुए दो स्तनों के बिच मे उस सुंदर वादी का दीदार करने लगी, उर्वशी भी आर्यन के इस उदंडता पर बिन प्रतिक्रिया मन ही मन मजे लूट रही थी.

आर्यन : wow...! आंटी का संतरा...! संतरा जूस...!(आर्यन का हाथ भले ही ग्लास के और जा रहा था पर उसकी अश्लील निगाहेँ उर्वशी के ब्लाउज मे झूलते दोनों bals पर टिकी हुईं थी.)

वासु : thanks आंटी...!





🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷

तीनो group study कर के निकलने लगें थे, रोज की तरह आज भी वासु ने उर्वशी को greet कर के bye कहा, पर आज आर्यन भी उर्वशी को बड़े प्यार से greet कर के चला गया...

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उर्वशी आयने के सामने बैठी थी, बिच बिच मे खुद से ही बाते करने लगी, अपने जवानी के जादू पर इतराने लगी...जीभ बाहर निकाल कर अपने ही ओठों पर फेरने लगी.. उसने ब्लाउज और सुनहरी जालीदार bra के हूक खोल दोनों स्तन आझाद कर दिए, उफ्फ... मेरा यौवन...जवान लडके भी पागल हो रहे है, उसने दोनों गोल स्तनों को हातो मे पकड़ा, भींचते हुए आयने के सामने सहलाने लगी, आर्यन की गंदी नजरें उसे उसके उसे पसंद आने लगी....उसके लिंग का वो नुकिला टोपा जिसे उर्वशी पहके भी चख चुकी थी, चूस चुकी थी उस लिंग को मन ही मन याद कर रही थी....बदन पर मचलते हुए उसके हाथ panty को छूने लगें....उफ्फ्फ ये कम्बख्त झाटे क्यों मेरे योनि को घेरे रहते है...इनका यहां कोई हक नहीं.... आर्यन की प्यारी जीभ कितनी अच्छी है, उसकी जीभ जो मेरे मुंह मे मैंने चखी थी उसकी नर्म लज्जत अभी भी मुझे याद है... उस जीभ से ज़ब आर्यन मेरी योनि से खेलेगा तब ये बाल उस हसीन जबान से दुश्मनी मोल लेगी, मुझे ये मंजूर नहीं...आयने के सामने ही नंगी लेट कर उसने टांगो के बिच छिपा बगीचा खोल दिया... Dressing table पर पड़ा एक स्प्रे का डिब्बा उठा लिया... और... Spreeeeeee spreeeee spreeeee की एक अजीब आवाज आई, डिब्बे के स्प्रिंग को दबा कर उसका ठंड भरा फोम योनि पर उधेड़ने की ये आवाज थी.... आह.... आहह्ह्ह्ह... अह्ह्ह्ह... ये ठंडक....AC की ठंडक पंखे के फ़ोर्स से तेजी से उर्वशी के योनि पर चिपके उस फोम को सूखा रही थी. कमर उठा उठा कर उर्वशी उस ठंडी हवा के झोको को फुदी के फूली हुईं कचोरी पर feel कर रही थी. आह्ह...

उसने ड्रेसिंग टेबल पर पड़ी नैपकिन उठाई और उसके फुदी पर चिकपे उस फोम के झाग को साफ करने लगी. बार बार टांगे उठा कर फैला कर उर्वशी अपने साफ मैदान हो चुके योनि को निहार रही थी... आह... आह्ह.. मैदान साफ हो गया.... अह्ह्ह्ह.... उर्वशी उंगलिओ से योनि के दोनों ओठों(labia) फैला कर देखती....अंदर का गुलाबी गाभा चिपचिपे काम रस से लबालब सना हुवा था योनि के परदे खुलते ही वो चिपचिपे काम रस को शहर ही धारा बन कर रिसने लगा.... आह्ह.......





शुभम वही परदे के पीछे से ये सब देख रहा था, अपनी mom की ये हरकते अक्सर उसने देखि हुई थी, सुलझे हुए स्वभाव का शुभम यहि सोचता के ये सब महिलाओ की गुप्त गतिविधियों मे से एक है, इस गतीविधिओ से उसकी mom अलग नहीं है... उर्वशी की ये हालत देख कर शुभम वहा से चुप चाप चला गया, जैसे कुछ देखा ही न हो...

🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷

रात के 8 बज रहे थे,

मम्मी मम्मी... भूक लगी है...

उर्वशी : हा बेटा...! खाना लगा देती हू...बस एक मिनिट...!

जय dinning table पर बैठा ही था, तभी उर्वशी वहा खाना लगाने आई...!

आज उसका look कुछ अलग ही दिख रहा था, baby pink रंग की साड़ी, ब्लाउज, उसी रंग की लिपस्टिक और चुडिया उसके गोरे बदन पर खुल रही थी....

शुभम : wow... मम्मी क्या बात है... बहोत सुंदर दिख रही हो...!

उर्वशी : अच्छा सच मे बेटा...!

शुभम : हा मम्मी... कुछ special है क्या...!

उर्वशी : नहीं तो... बस बोर हो रही थी तो time pass के लिए श्रृंगार कर लिया है...!

शुभम : अच्छा...! वैसे जय अंकल नहीं आएंगे आज मम्मी...!

शुभम के मु से ये शब्द सुन कर उर्वशी का दिल रेल इंजिन जैसे धड़कने लगा, एक पल के लिए वो रुक गई, माथे पर पसीने के बूंद औस बन कर उभरने लगें, आज सज सवर कर आर्यन से चुदने तैयार बैठी उर्वशी जय का नाम सुनते ही बर्फ की मूरत बन गई ...!





शुभम : घबराओं नहीं मम्मी...! मै बहोत पहले से ये सब जानता हू...! पर मैंने चुप रहना सही समझा...! पर अब जय अंकल से मैंने वादा ले लिया है, अब वो रात मे घर कभी नहीं आएंगे...!

उर्वशी : क..क..क्या...! क्या बेटा..!(शुभम की यु बाते सुन कर उर्वशी मानो भीगी बिल्ली बनि हुईं थी, क्या जवाब दे उसे कुछ सूझता तब बोलती )

शुभम : मम्मी आप मेरी माँ है माँ ही रहोगी...! मै आप को कभी बुरी नहीं बोल सकता...! आप ही मेरे पापा हो आप ही मेरी मम्मी...! आप जैसी हो मुझे प्यारी हो मम्मी...!

उर्वशी : बेटा अब तो तू बड़ा होने लगा है...! सब समझता है...! हर मर्द और औरत की एक जरुरत होती है बेटा...!

शुभम : मम्मी मै समझ सकता हू...! आप यु हताश ना होइए...! मेरी बातो का बुरा न मानिये...!

उर्वशी : बेटा तुम्हारे पापा के बिना मै अकेली पड़ गई थी...! मुझे एक सहारे की जरुरत लगने लगी थी बेटा....! वो सहारा जय ने मुझे दिया...!

शुभम : आप जवान हो मम्मी...! आप के भी कुछ सपने होंगे...! उसी सपनो को आप ने साकार करना चाहा होगा...!

उर्वशी : क्या तुम्हे इस बात का बुरा नहीं लगा...!

शुभम : बुरा तो बहोत लगा मम्मी...! ये सब देख कर बहोत रोया भी था...! पर जय अंकल एक अच्छे इंसान है...! उन्होंने मुझे promise किया है के वो आप से अब नहीं मिलेंगे...!

शुभम को नादान, भोला समझने वाली उसकी माँ उर्वशी आज उसके मुंह से ये सब सुन कर दचक सी गई. उतना सब पता होने पर भी अपना बेटा अपने लिए इतना अच्छा सोचता है, कोई दूसरा होता तो वैशा या रंडी कह कर धुतकरता, पर ये कैसे मिट्टी का बना है...!

पर उर्वशी ने आज रात के लिए दूसरा जवान ढूंड लिया था इस बात से शुभम बेखबर था....!

🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷

उर्वशी सोच ही रही थी के आज के लिए आर्यन को टाल दू....पर अब आर्यन दरवाजे तक पोहोच गया था...!

तभी दरवाजे की बेल बजी....

आंटी.... आंटी....!

उर्वशी : आ रही हू...!

..
 
Ji incist catagury se story hata di gai hai isliye mujhe aage likhne me pareshani ho rahi hai...disturb ho gai hu..Maine jo socha tha...vo kuch pathako ko pasand nhi aa raha tha 😌
 
Part 12





समाज मे कुछ ऐसे तत्व होते है जो किसी महिला को खुद के बाप की जागीर समझते है, उस महिला ने किसी और के साथ बात करना ऐसे लोगो के अंदर जलन बना देती है आर्यन उसी तत्वों मे से था, आर्यन, जो उर्वशी से बदला लेने के लिए संकल्प ले चूका था, जय के साथ हसीं मज़ाक करती हुईं उर्वशी की खुशी उसे रास न आई, उसने उर्वशी को अपनी जागीर मान लिया था, उसी बदले की आग को पूरा करने मीठे बोल के झांसे मे अपने ही best friend की mom को फसा कर उसके साथ आज वो कांड करने उसके दरवाजे पर दस्तक दे रहा था....





Dinner table पर उर्वशी के साथ शुभम ने जो बाते की उसे सुनकर उर्वशी भौचक्की रह गई, शुभम जो उसी के mom का जय के साथ अफेयर पता लग जाने पर नादान चेहरा, निर्दोष चरित्र, और हिम्मत के आगे जय जैसे सांड भी घुटने टेकने पर मजबूर हो गया था. ईस अभागे लडके ने उसकी mom को पराये मर्द के साथ कई बार नंगी देखा था, उसकी अजीब हरकते करते भी देखी थी , फिर भी नियत सवारे हुए था, फिर भी अपनी mom की उतना ही respect करता जितना एक बेटे ने करना चाहिए. इतना हो कर भी सज्जनता की मूरत बने हुए खुद, खुद के पढ़ाई को और तो और खुद के चरित्र को संभाले हुए था...!





तीसरी तरफ उर्वशी थी, एक माँ, पति से दूर खूबसूरत पत्नी, अकेली अपने घर को संभाल रही थी, अकेले ही जिम्मेदारीया निभा रही थी, पर वासना का भार उस से सहा नहीं जा रहा था...... "सभी जिम्मेदारीया बखूबी निभाने वाली उर्वशी से एक जिम्मेदारी निभाने मे भूल हो गई और वह जिम्मेदारी थी जिस्म को बुरी नजर से बचाने की जिम्मेदारी", पति ज़ब दूर हो तब अपने बदन को पराये मर्द के निगाहो के सामने छुपा कर रखने की बहोत बड़ी जिम्मेदारी वो निभा न सकी....! अपना अकेलापण दूर करने और बदन की तङप बुझाने के लिए जय से प्यार कर बैठी थी. पर इतने पर वो रुकी नहीं, उसके अंदर जो जवानी का तूफान पनप रहा था, उसी जवानी के तूफान ने उसे वासना और हवस के नाले मे ऐसा ला पटका के अपने ही बेटे की नजर मे भी वो मैली बनने लगी, इस वासना के गंदे नशे मे वो ऐसा डूबने लगी के घर मे अपना बेटा जवान हो रहा है, सब समझ रहा है इसका सूद बुद खो बैठी....!

शुभम की बाते सुन कर उसके अंदर के हवस का तूफान एक पल के थम सा गया. शुभम के समझदारी पूर्ण बाते, सूझबुझ और उसका चेहरे की मासूमियत ऐसी थी के उर्वशी के मन, बदन के वासना का ज्वालामुखी ठंडा पड़ कर ममता के सागर मे बदलने लगा,,,,

...पर अब बड़ी देर हो चुकी थी, आर्यन दरवाजे पर दस्तक दे चूका था...

आंटी... आंटी...!.. आर्यन दरवाजा ठोक रहा था... बेल बजा रहा था...

दरवाजे के पार से आर्यन की आती आवाज उर्वशी के कानो पर मौत के घंटी (funeral bell) समान घन... घननन ... घन... सी बजने लगी.

शुभम उर्वशी को निहार रहा था, अपने mom के बदले मिजाज को वो समझ चूका था, पर शुभम के चेहरे पर न क्रोध था, न इर्षा, न कोई दुःख था. उसकी आवाज मे वही सादापन था, वही नादानी थी, जो हमेशा से उसमे उर्वशी ने देखि. सब कुछ शुभम बड़ी सरलतापूर्वक बोल रहा था......

शुभम : जाओ मम्मी, घबराओ नहीं...! आर्यन आया है... उसी के लिए आज आप सजी हो ना...!

शुभम के ये बोल सुन कर अब तो उर्वशी इस प्रकार बर्फ सी ठंडी पड़ गई मानो के उसके मन बदन पर चढ़ा वासना का बुखार उतर गया हो...! लाल परी जैसी दिखने वाली उसके चेहरे चमक उड कर किसी प्रेत पिशाची जैसे धुएँदार सफ़ेद हो गई थी" सांसे धीमी, कंधे झुक गए, और ओठों पर थरथराहट सी छा गई....

खुर्ची से उठ कर शुभम उर्वशी के पीछे हो गया, बड़े प्यार से उसने उर्वशी के कंधो पर हाथ रखा, सहलाया फिर एक बार बोल पड़ा....

शुभम : मम्मी मै आप का बेटा हू, आप ही के कोख से जन्मा हू...! आप को इतना तो जानता ही हू मम्मी ...! उठिये...! जाइये...! आर्यन आप को पुकार रहा है...!

शुभम के ये बोल सुन कर उर्वशी ने शर्म के मारे आँखे बंद कर दिए, दोनों हाथो से चेहरा ढक कर छुपाने लगी ... एक ही पल मे उसके आँखो से बूंद बूंद आंसू की धारा झरने लगी....

चुदाई के मीठे हवसी अरमान सजाये दरवाजे पर खड़ा उतावला, एक नवजवान, उसी के बेटे का दोस्त आर्यन बार बार door bell बजाये जा रहा था, दरवाजा "खटकाये" जा रहा था...

तभी शुभम ने आवाज लगाई...

शुभम : बस दो मिनिट रुको आर्यन...!

फिर एक बार उर्वशी को सहलाते हुए शुभम बोलने लगा...

शुभम : मम्मी...! मैंने बहोत कुछ देखा है, ये भी देख ही लूंगा...! पर जय अंकल तो बाथरूम मे ही चड्डी छोड़ कर नंगे ही निकल जाते है...! आर्यन को कहना जाते समय चड्डी पहन कर ही जाये...!....इतना बोल कर शुभम अपने room मे चला गया...

"सरलतापूर्वक शुभम के मुंह से निकले बोल बिन बारूद बम बन कर उर्वशी के कलेज़े मे फटे जा रहे थे". उसके आँखों से गिरते हुए आंसू उसके काले पापो को धोने की नाकाम कोशिश कर रहे थे, अपने ही किये करतूतों पर उर्वशी चुप्पी साधे शर्मसार हो रही थी. दीवारों के पीछे छुपी हुईं हवस की सच्चाई ज़ब रिश्तो, नातो के सामने नंगी होती है तब आंसू और दर्द के अलावा आखिर क्या ही मिलेगा...

उसने आंसू पोछे, स्तन बदन ढकने लगी पल्लू सवारने लगी, उर्वशी ने आखिर होश संभाला, और आखिर दरवाजा खोलने लगी, ....

खड़.. खड़ा.. खड़...!

खड़.. खड़ा.. खड़...! दरवाजे की एक आवाज गुंजी.





दरवाजा खुलते ही पुरी तैयारी के साथ कंधो पर एक bag लटकाये ऊपरी body पर hudi निचे cotton lower pant लगाया हुवा साडे छे फिट का गबरू खड़ा था. उसके चेहरे पर हवस भरी चमक, अश्लीलता पूर्ण नजरें जो इसके इरादे साफ जाहिर कर रहे थे. आते ही बौहे ऊपर निचे मटका कर उर्वशी को इश्किया अंदाज मे इशारेबाजी करने लगा...

आर्यन : wow आंटी... गजब...! गजब की पटोला लग रही हो...!

उर्वशी : जाओ... शुभम के room मे जा के सो जाओ...!

आर्यन : पर आंटी... आज करेंगे ना...! (सजीधजी ग़दराई हुईं उर्वशी को देख कर बोलने लगा)





उर्वशी : बाद मे बात करते है बेटा..! जाओ जा कर सो जाओ...!

आर्यन : पर आंटी हुवा क्या...!

उर्वशी : सुनाई नहीं दे रहा तुम्हे...! कहा ना बाद मे बात करते है...!

तेज आवाज मे उर्वशी झल्ला उठी, उसके गीले आँखो मे अब खुद का सम्मान, अभिमान फिर लौट आया था. उर्वशी के अंदर जो वासना का ज्वालामुखी धधक रहा था वो मानो थम सा गया था, यौवन के नशे मे बेसुध उसके अंदर की सभ्य नारी अब होश मे आ गई थी, हवस के भार से दबी हुईं ममता आज फिर उठ खड़ी हुईं थी . अब उसके अंदर की वो रंडी मर गई थी जो उसी के बेटे के दोस्त के साथ इलूईलू करने के लिए उसे उकसाती रहती थी.)

उर्वशी का ये रूप आर्यन ने पहली बार देखा, उसके आँखो मे आज अजीब मिजाज था, आवाज मे अजीब रुबाब था और पल्लू ढके बदन पर सभ्यता साफ दिखाई दे रही थी.

आर्यन : ठीक है आंटी...! शुभम के रूम मे जाता हू...!

आर्यन चुपचाप शुभम के रूम की और निकल पड़ा, शून्य शांति का माहौल, शांत चेहरा और उसकी पढ़ाई मे शुभम रूम मे study table पर बैठ कुछ पढ़ रहा था. तभी आर्यन...





आर्यन : bro क्या हुवा...! आंटी उदास सी लग रही थी, मुझे लगता है वो रो रही थी...! उन्हें कोई परेशानी है क्या...!

शुभम : क्यों...? मम्मी ने कुछ बताया नहीं...! कुछ कहा तो होगा तुमसे...! (शुभम आर्यन को टटोल रहा था, क्या बात हुईं ये जानना चाहता था, उसी हिसाब से जवाब देना चाहता था)

आर्यन : बस इतना ही के शुभम के रूम मे जा के सो जाओ...! और कुछ नहीं कहा...!

शुभम : bro, मेरे नाना की तबियत बहोत serious है...! UCU मे है...!मम्मी इसलिए रो रही...!(शुभम झूठ बोल रहा था, आर्यन को कुछ पता न चले तो बेहतर, आखिरकार वो मेरी mom है, और मै उसका बेटा हू, हम दोनों की बात इसको क्यों ही बताऊ.. यह सोच कर शुभम ने मामला संभाल लिया)

आर्यन : oh... So sad...!

( आर्यन मन ही मन सोचने लगा... अब साली चुदेगी नहीं, बाप मर रहा है ये बोल कर नाटक करेगी साली, बड़ी नखरेल है. कैसी गजब तैयारी कर सजी हुईं थी, इसका बाप पहले मर गया होता तो आज साली रांड रात भर चुद रही होती, धत साला नसीब ही फूटा है,...!ये भी साला रात भर जागता रहेगा उल्लू का बच्चा, पढ़ाई करेगा चुतिया, बात भी नहीं करेगा, मै रात भर बोर हो जाऊंगा, इस लूजर के घर मे बुरा फसा भेनचोद...! ऊपर से लंड पत्थर बन कर डोल रहा है अब क्या करू....! इसके मा की गांड देख कर मुठ भी नहीं मार पाउँगा ...! अब क्या करू...! कैसे लू...! आंटी की घंटी कैसे बजाऊ...!





मेरे पास सब सामान redy है अब कैसे इन दोनों को डोज दिलाऊ...! कुछ तो करना पड़ेगा..)

🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷

उर्वशी अपने आप से ही लज्जित होती bedroom मे आयने के सामने बैठी आँसू बहा रही थी, तू उर्वशी नहीं है...कौन है तू...? क्या तू डायन है...? मेरे बेटे का future तू ही खा रही है ना...? मेरे अंदर बैठ कर तुझे ही जवान मर्दो की हवस है ना...? तेरा जादू आज ख़त्म हुवा...जा भाग जा डायन...! मै आज तुझे जला दूंगी...! अपने ही ही प्रतिबिम्ब मे वो खुद को कही धुंड रही थी, उसे आयने मे एक डायन नजर आ रही थी.





" बहोत हो गया अब मै ये सब बंद कर दूंगी, ना जय से अब मुलाक़ात होंगी ना आर्यन से गुलुगुलु करूंगी. अब बस मै मेरे बेटे का जीवन सवारूंगी उसी के लिए जिऊंगी" उर्वशी मन मे सोचने लगी थी...

(रात्रि के 10 बज रहे थे, घर मे pin drop science छाया हुवा था, न शुभम कुछ हरकत कर रहा था के जिस से आर्यन बात कर सके, इस समशान समान बने हुए सन्नाटे मे आर्यन लोमड़ी बन कर उचित समय की ताक मे था.)

तभी हाथ मे tray उसमे दो भरे दूध के ग्लास लिए उर्वशी वहा आती है,

उर्वशी : बेटा...! दूध पी लेना...! आज dinner भी ठीक से नहीं किये हो आप, आर्यन तुम भी पी लेना...!(इतना बोल कर उर्वशी वहा से चली जाती है, दरवाजे lock करने लगती है, lights off कर के बेडरूम मे चली जाती है)

शुभम : मम्मी आप भी दूध पी लेना... आप ने तो कुछ नहीं खाया था...!

आर्यन को बस एक पहल की प्रतीक्षा थी, उसके धूर्त मन मे झट से कुछ सुझा...

आर्यन : अरे शुभम...! आंटी ने भी dinner नहीं किया, पता नहीं dudh भी पीयेगी की नहीं...! चल उनको दूध पीला के आते है...!

शुभम : वो नहीं पीयेगी... रहने दे...!

आर्यन : तू मत आ मै जा के आता हू...!

दबे पाव आर्यन किचन मे जाता है, दूध के पतेले से एक ग्लास मे दूध भरता है, जेब से पुड़िया निकाल कर उसमे से पावडर दूध मे घोल देता है. और दूध ले कर उर्वशी के रूम मे जाता है.

भेड़िये को चांस मिल रहा था, आर्यन के चेहरे पर अजीब सी धूर्त smile थी जिसे वो भोलेपण का भाव ला कर छुपा रहा था, उसके नकली बनाये हुए चेहरे के expression के पीछे, एक चलाक भेड़िया लार टपका रहा था, उसके हाथ मे जो दूध का ग्लास था उसमे उसके नंगे इरादों की हवस भरी पड़ी थी, उसके वासनाओं का नशा मिला हुवा था, जो सफ़ेद दूध मे मिल कर छुप गया था.

आर्यन : आंटी...! plz इतना दूध पी लीजिये...! खाली पेट मत सोइये...! मै आप की परेशानी समझ सकता हू आंटी...!

उर्वशी : तुम नहीं समझ सकते हो आर्यन...! जाओ सो जाओ...!

आर्यन : पर आंटी आप के कहने पर शुभम ने दूध पी लिया...! आप को शुभम की कसम, इतना दूध पी लीजिये...!

शुभम की कसम देते ही उर्वशी उठ बैठी, उसने आर्यन के चेहरे को निहारा, उसे आर्यन के चेहरे मे उसे चोदने वाला आशिक नहीं एक बेटा नजर आने लगा, कुछ सोचा और गटागट दूध पी गई,

फस गई साली, इसका तो काम हो गया, अब उस लूजर को देखता हू, ऐसे सोयेगा नहीं साला उल्लू कहिका, पढ़ते रहेगा, उसे डोज देना पड़ेगा, भारी डोज दूंगा, गहरी नींद सोयेगा साला. सोचता हुवा आर्यन शुभम के रूम मे आ गया, पर शुभम वहा नहीं था, अब उस चलाक लोमड़ी को दूसरा मौका मिल गया, उसने जेब से दो गोलिया निकाली, उंगलियों से दबा कर चूर्ण बनाता हुवा दूध मे मिलाई, और ऊँगलीओ से ही mix कर के, bed पर लेट गया मानो कुछ किया ही ना हो.

"अब चुतिआ आएगा, दूध पियेगा साला, ही ही ही"... उसके चेहरे पर अजीब creepy smile सी छा गई... तभी शुभम वहा आता है...

शुभम : क्या कर रहा है...! कुछ पढ़ ले भाई...!

आर्यन : हा वही सोच रहा हू के कुछ पढ़ लू...! अच्छा सुन...! आंटी को दूध पीला कर आया हू...! तेरी कसम दी तब जा कर आंटी ने दूध पी लिया...! तू भी पी ले भाई...! खाली पेट कैसे पढ़ेगा...!

अपनी माँ ने दूध पी लिया है जान कर शुभम खुश हो गया, उसके चेहरे पर अब चमक आ गई, उसने अपना दूध का ग्लास उठाया और पिने लगा...

शुभम : thank you...! तूने ये सही किया भाई...! तू भी पी ले भाई, और पढ़ने बैठ जा.

नसीब और वक़्त दोनों आर्यन के साथ थे, आर्यन के हर इरादे कामयाब हो रहे थे, बस अब कुछ ही minits, ये उल्लू सोयेगा, फिर इसके माँ का game बजाऊंगा.

धीरे धीरे दूध मे मिलाई गोलिया असर करने लगी, सर मे अजीब खालीपन के साथ आराम सा लगने लगा. शुभम की पलकें अब भारी होने लगी थी, पढ़ते पढ़ते शुभम झपकीया मारने लगा था, उसने किताब उठाई, बिस्तर पर लेता, और नींद की गोली काम कर गई. पढ़ते पढ़ते ही शुभम सो गया. आर्यन बस यहि चाहता था. उसने कुछ मिनिट रुक कर शुभम को आवाज लगाई, शुभम सुन्न हो कर सो रहा है. "उसने अपने लंड को एक बार pant से निकाला, हलके आवाज मे बुदबुदाने लगा "आज तेरी खदान तेरे लिए तैयार है बेटा जम कर खुदाई करना" ही ही ही.. 😁





...मामला अनुकूल है जान कर आर्यन अब दबे पाव उर्वशी के room के तरफ जाने लगा.

उर्वशी के room के परदे के पीछे छिपा आर्यन अंदर का जायजा ले रहा था, उसके अंदर का जानवर आज भेड़िया बन कर तैयार था आज उसे एक आसान शिकार मिलने वाला था.





उर्वशी पर भी पावडर का असर दिखने लगा, धीरे धीरे चढ़ता नशा उसे मदमस्त करने लगा था, पेट से ऊपर धीरे धीरे भीनभीनाता हुवा चढ़ता नशा खून मे मिल कर नस नाड़ीयों से होता हुवा दिमाग़ मे दबी हुईं हवस को फिर जिंदा कर रहा था, कुछ अलग ही नशे का तूफान उर्वशी के मन बदन को घेर रहा था, इस नशे का असर ऐसा था मानो हर एक मिनिट मे धीरे धीरे नशे के साथ ही जिस्म की ज्वाला जलने लगी हो. जिस से उसके त्वचा पर अजीब सी गर्मि भरी कामुक सुन्नता छाने लगी ऊपर से ac की ठंडी हवाएं उसके बदन को अधिक ही उत्तेजित कर रही थी, उर्वशी ने पहले भी जय के साथ शराब का नशा किया था पर उसे आज के नशे का मजा कुछ और ही आ रहा था, बदन हलका हो रहा था, कामुक तड़पन से मन भारी हो रहा था और वासना का विस्फोट होने से उसके योनि मे अजीब टिस सी छाने लगी. योनि के खालीपन मे उसे सख्त लिंग की कमी महसूस होने लगी. स्तन सख्त हो कर पपीते जैसे फूलने लगें, स्तनों के निप्पल तन कर पर्वत शिखर जैसे नुकिले हो गए, अब उस से ये भार सहा नहीं जा रहा था, बेचैनी और तड़प से भरी उर्वशी खुद का ही बदन नंगा करने लगी, ब्लाउज के बटन खोल कर उसने नर्म मुलायम चिकने गोलो को आझाद कर दिया और खुद के हाथो से ही दोनों स्तनों को भींचने लगी





... साड़ी कमर तक उठा कर उसने panty को घुटनो तक निचे करते हुए कचोरी जैसी फूली हुईं योनि ऊँगलीओ से सहलाने लगी. काम रस से भरी हुईं योनि मे ऊँगली धसते ही रस बाहर शहद सा रिसने लगा. काम रस से सनी हुईं उसकी गुलाबी योनि के ओठ(labia) रात के धीमे उजाले मे मानो ऐसी दिख रहे थे जैसे पराग रस से भरा हुवा कमल खिल रहा हो . रात के अँधेरे मे ziro vat के बल्ब के उजाले से उसका गर्म हो चूका गोरा बदन लाल हो कर चमक रहा था....

आर्यन भी तैयार था, एक साल से उर्वशी की रेकी कर रहा था. आज की उसके लिए मानो सुहागरात सी हसीन होने वाली थी, उर्वशी पर नशा चढ़ चूका है यह देख कर उसने कदम बढ़ाये. धीरे धीरे उर्वशी के room मे पोहोच कर उर्वशी के कानो के पास एक धीमी आवाज लगाई.... आंटी जी... मै आ गया हू....





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