डाक्टर भौजी और हल्दी की रस्म
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मुझे दोनों ने मिल के एक टेबल पे लिटा दिया, और मेरे पैर उठा के एक कोई फंसने वाली चीज थी, दोनों पैर फैला के उसमे उठा के फंसा दिया और टेबल के ऊपर की बत्ती जला दी,
डाक्टर मीता जैसे किसी माइक में बोल रही थीं, पेल्विक एक्जामिनेशन ऑफ़ कोमल, एज,...
और फिर जो जो चेक कर रही थीं वो बोलती जा रही थी। बीच बीच में छेड़ भी रही थीं, दोनों गुलाबी फांको को उन्होंने फ़ैलाने की कोशिश की, लेकिन मेरी फुद्दी के दरवाजे एकदम चिपके, बंद, वो बोली
" अरे ननद रानी स्साली तेरी तो बहुत टाइट है, लगता है कभी ऊँगली भी नहीं की तूने ठीक से ऊपर से रगड़ के काम चला लेती थी, नन्दोई को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी , लेकिन स्साला मेरी इत्ती प्यारी ननद को ले जा रहा है, करना है तो करे। "
फिर एक बहुत पतली सी ट्यूब, सींक से भी पतली, उसके ऊपर कोई जेल, नर्स से वो बोली, ढेर सारा लॉक्स लगाना, बहुत टाइट है, और फिर कंप्यूटर की स्क्रीन पे मुझे दिखाया,
" देख ये तेरी झिल्ली है, एकदम लाल, थोड़ी मोटी लग रही है, इसलिए पहली बार दर्द ज्यादा होगा, लेकिन सह लेना, और अगर कहेगी तो दर्द की दवा दे दूंगी, सेज पर जाने के पहले ले लेना "
" नहीं नहीं दवा की जरूरत नहीं है "
मेरे मुंह से निकल गया और वो और हेड नर्स दोनों हंसने लगी और डाक्टर भौजी बोलीं,
" देख कैसे चुदवासी हो रही है, वैसे बात तू सही कह रही है ननद रानी, उस दर्द का ही तो मजा है, जिंदगी भर गौने की रात याद रहती है "
फिर उन्होंने कुछ डिवाइस लगाई, मेरे निप्स के छुआ अपनी ऊँगली से और निप्स खड़े होने लगे, और रिकार्ड कर रही थीं
" हाइली सेंसिटिव, नर्व एंडिंग ऑन कम्प्लीट वैजिनल कैनाल, क्लिट वैरी सेंसिटिव "
फिर जब उन्होंने मेरे पिछवाड़े की दरार पर ऊँगली जैसे उन्होंने लगाई, मैं उछल पड़ी
" नहीं भौजी उधर नहीं "" तो क्या सोचती है, वो तेरी गांड नहीं मारेगा" हेड नर्स हँसते हुए बोली।
" और वो नहीं मारेगा तो हम दोनों मिल के उसकी और तेरी दोनों की मार लेंगे, ऐसे मस्त चूतड़ और मारी न जाए, संख्त नाइंसाफी है " हसंते हुए डाक्टर भौजी बोलीं, और मैं समझ गयी ये हेड नर्स, न सिर्फ उनकी मुहलगी है बल्कि पक्की सहेली की तरह है।
चेक के बाद जब मैं और डाक्टर भौजी बाहर आये तो डाक्टर भौजी ने माँ से पूछा, शादी की तारीफ़ पूछी और माँ ने शादी क्या शादी, तिलक सब बता दी, ये भी की अगले महीने है। और अब डाक्टर भौजी सीधे मुझ से,
" तेरा महीना, कब आएगा, अगला "
" चार दिन बाद, एकदम कैलेण्डर देखकर आंटी जी आती हैं, हर २५ दिन बाद, "
हँसते हुए जैसे कोई सहेली से बात करता है बस उसी तरह मैं बोली, लेकिन डाक्टर भौजी की आँख कलेण्डर पे चिपकी थी, फिर उन्होंने दो बातें बोलीं, एक मम्मी से, एक मुझसे।
मम्मी से उन्होंने कहा,
" अच्छा है शादी के १० दिन पहले खून खच्चर बंद हो जाएगा " और मुझे हुकुम दिया, जिस दिन महीना शुरू हो उसी दिन आ जाना, मैं गोली दे दूंगी, तीन चार महीने के लिए। "
" लेकिन शादी से का मतलब,. इसका, …बिदाई तो गौने के बाद ही,… इसका बोर्ड का इम्तहान खत्म होने के बाद "
माँ बोलीं और भौजी हँसते हुए बोलीं
“अरे मैं अपने लिए पूछ रही थी, हल्दी चुमावन सब रस्म होगी न, तो भौजाई हूँ तो जब हल्दी लगाउंगी, बिना ननद की चुनमुनिया में अच्छी तरह हल्दी पोते कहीं भौजाई की हल्दी की रस्म होती है। “
माँ को लग रहा था की डाकटर भौजी ऐसे ही, …जो इतनी बिजी हैं, सुबह से लेकर रात तक, दस दिन का अप्वाइंटमेंट मिलता है वो कहाँ गाँव वाली रस्म में
लेकिन डाक्टर भौजी आयीं न सिर्फ हल्दी और चुमावन में बल्कि माटी कोड़ने और बाकी रस्म में और रात में गाने में भी कई दिन सीधे क्लिनिक से,
हल्दी की रसम में भी मैं एक पियरी सिर्फ पहन के, कस के पकड़ के बैठी थी, पीछे नाउन की नयी नयी बहुरिया, मुझे पकड़ के, और सब भौजाई कोशिश तो कर ही रही थीं की हाथ पैर और गाल पे हल्दी लगाने क बाद साडी के अंदर हाथ डालने की, लेकिन मैं खूब कस के दबोच के बैठी थी, लेकिन डाक्टर भौजी तो,
गाल पर हल्दी लगाते हुए, मुझसे बोलीं, वो देख ऊपर कौन सी चिड़िया बैठी है, और जैसे ही मेरी नजर ऊपर, उनके हाथ साड़ी के अंदर दोनों जोबन पे और पूरी आधी कटोरी दोनों उभारों पर मलती बोलीं,
" छिनार, ननदोई से तो खूब हंस हंस के मिजवायेगी और हम भौजाइयों से छिपा रही है, यहाँ तो हल्दी लगाना सबसे जरूरी है।"
और क्या रगड़ा मसला पूरी ताकत से।
फिर पीछे बैठी नाउन को भी उन्होंने पता नहीं कैसे पटा लिया, और वैसे भी हमारी नाउन की बहू तो लगती तो भौजी ही थी, बस पैरों में हल्दी लगाते हुए, मैं कस के दोनों पैर चिपका के बैठी थी, मुझे मालूम था, लेकिन घुटने तक तो, पियरी उठा के, …तो डाक्टर भौजी भी घुटने तक, लेकिन फिर उन्होंने जोर से मुझे चिकोटी काटी, और साथ में पीछे से मुझे पकडे नाउन भौजी को इशारा किया।
चिकोटी काटते ही मेरे पैर खुल गए और पीछे से नाउन की बहुरिया ने वो कस के गुदगुदी लगाई, बस भौजी को मौका मिला गया और उनका हाथ सीधे मेरे खजाने पे दोनों जाँघों के बीच और हथेली से रगड़ रगड़ के, दोनों ऊँगली से फांको को दबा के, एक कटोरा हल्दी तो वही,
मेरी बहने और सहेलियां एक से एक अच्छी वाली गारियां डाक्टर भौजी को सुना रही थीं,
लेकिन उन्हें कोई असर नहीं पड़ रहा था, उसके बाद हालंकि रात में गाने में उन्होंने मेरी बहनों की भी खूब खबर ली।
जैसा उन्होंने कहा था मेरा महीना जब शुरू हुआ तो पहले दिन ही मैं उनके पास गयी और उन्होंने गोली तो दो ही, सब कुछ एकदम साफ़ साफ़ समझाया और ढेर सारी टॉनिक की विटामिन की गोलियां, भी दी। पक्की दोस्ती हो गयी थी,
एक दिन गलती से मेरे मुंह से निकल गया, डाक्टर भौजी और वो उदास हो गयीं,
फिर बोलीं, " यार, डाक्टर और मैडम कहने वाले तो इस शहर में हजारों हैं लेकिन भौजी कहने वाली तो इस शहर में, बल्कि मेरी जिंदगी में तू अकेली। "
उसके बाद मैंने उन्हें भौजी के अलावा कुछ नहीं कहा और हम लोग ननद भौजाई के साथ पक्की सहेली भी थे, जो बात वो किसी से नहीं कह पाती , वो मुझसे कहती थी और मैं भी,
और गौने के अगले दिन सुबह सबसे पहले उन्ही का मेसज आया
" कितनी बार चुदी ? "
और सिर्फ मुझसे नहीं, इनसे भी, अपने नन्दोई से, कोहबर में ही साफ़ साफ़ बोल दिया था, " नन्दोई जी, मेरी ननद गोली खाती है तो आपका दुहरा फायदा, एक तो रबड़ का खर्चा बचा और दूसरे चमड़ी से चमड़ी रगड़ने का मजा"
तो गौने की रात इन्हे भी मालूम था की किसी सावधानी की जरूरत नहीं है। मैंने इनसे तो नहीं बोला था लेकिन खुद सोच रखा था बच्चे कम से कम तीन साल तक नहीं, गौने की रात वाले दिन तक तो मेरे इंटर का रिजल्ट नहीं आया था, इम्तहान ख़तम हुए दो दिन हुए थे बोर्ड के, लेकिन मैंने तय कर लिया था बी ए तो करुँगी ही, भले ही प्राइवेट। इसलिए कम से कम तीन साल,
और मुझे सास भी ऐसी ही मिल गयीं,
जहाँ तक बच्चे वाला मामला था सुहाग रात के अगले दिन ही मेरी सास ने फैसला सुना दिया,... इसका फैसला न मेरी सास करेंगी न इनकी सास। सिर्फ मेरी सास की छोटी बहू यानी मैं करुँगी। और अगले दिन वो खुद आशा बहू के यहाँ ले जाकर तांबे वाला ताला लगवा लायीं।