Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - Page 79 - SexBaba
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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

ननद -भौजाई साथ साथ





लेकिन उनकी हालत खराब होने से मेरे मन में कोई दया माया नहीं आयी. हो तो हो, पहली रात से जिस दिन मैं इस घर में गौने उतरी थी, इस लड़के ने मुझे पागल कर के रख दिया था, और रात क्यों दिन में,... तीसरे दिन ही, दिन में ही रसोई में भी सेंध लगा दिया मेरी बिल में, सास मेरी आयीं, हम दोनों को मैथुनरत देख कर लौट गयीं दबे पाँव।

लेकिन मैं अभी अपनी ललचाती ननद का चेहरा देख कर अपने को नहीं रोक सकी. हर बहन अपने भाई के पाजामे के अंदर के नाग को देखने के लिए छूने के लिए पकड़ने के लिए दीवानी रहती है। और इनकी बहन तो दो बार उसका मजा ले चुकी थी मेरे सामने,... तो मैं उसके चेहरे की रंगत लालच, देख कर मुझे दया आ गयी.

मैंने इनके खूंटे को छोड़ दिया, मुंह से निकाल दिया और अपनी ननद को ऑफर कर दिया। मैं उन भौजाइयों में से नहीं थी जो ननद के साथ ' मेरी तेरी ' करते हैं। जो मेरी वो उसकी, जो उसकी वो मेरी।

लेकिन ननद ने बजाय चूसने चाटने के,... ननद के नीचे वाले मुंह में आग लगी थी। बस ननद मेरी अपनी भाई के मोटे लंड पर चढ़ गयी और उन्हें चिढ़ाया भी,

" क्यों भैया बहुत चोद रहे थे अपनी बहिनिया को न, अब बहन चोदेगी भाई को "

" एकदम अब चल हम ननद भाभी मिल के इनकी रगड़ाई करते हैं, इस स्साले की माँ चोद देते हैं " इनकी रगड़ाई करने में तो मैं अपनी ननद का भी साथ दे देती।

" एकदम भाभी " ननद ने हुंकारी भरी और एक साथ हम दोनों ननद भौजाई चालू हो गए।

ननद मेरी पक्की खिलाड़ी, मायके की छिनार, खानदानी सातपुश्त की रंडी,... क्या धक्के मारने उसने शुरू किये, और साथ में अपने भैया का गन्ना अपने कोल्हू में पेर भी रही थी, कभी चूत निचोड़ लेती, सिकोड़ लेती,तो कभी ढीली कर के कस के धक्के मारती। धीरे धीरे उसकी भूखी सुरंग ने पूरा बित्ता भर घोंट लिया।

और मैं भी उनके मुंह पे अपनी बुर रगड़ती उनकी महतारी को चुन चुन के गाली दे रही थी.

और हम ननद भौजाई साथ साथ भी मस्ती कर रहे थे, शुरुआत मेरी ननद ने ही की, मेरे उभारों को दबा के मसल के और चिढ़ा के

" भौजी इस जोबन का रस सब पहले किस ने लिया "

" तेरी और तेरी माँ के इस खसम ने जो हम दोनों के नीचे दबा है , लेकिन अब तोहार जोबन मैं लूटूँगी "

और यह कह के मैं भी उसके जोबन का रस लेने लगी, कभी एक हाथ से ननद की जाँघों के बीच हाथ डालकर उसकी चुनमुनिया मसल देती और वो पगला जाती, कस कस के अपने भैया को चोदने लगती,

बीबी के सामने अपनी बहन को चोदने का सुख, इनकी भी मस्ती से हालत खराब हो रही थी.

पर थोड़ी देर में हम दोनों ने जगह बदल ली, खूंटा मेरे हवाले और ननद की चुनमुनिया जो चुद चुद के भाई के लंड पर उछल उछल कर चासनी से सराबोर थी, वो बहिनिया अपने भैया को चटा रही थी, उनके मुंह पे बैठ के। और उनकी जीभ भी बहन के बिल के अंदर तक धंसी,

मैंने ननद को उकसाया,

" अरे भैया का पिछवाड़ा तो बहुत चाटा चूसा, तनी अपने गोल गोल लौंडा छाप चूतड़ का, पिछवाड़े की गली का भी तो रस चखाओ अपने भैया को "

बस ननद ने मेरी बात मान ली, पहले थोड़ा सा उठी, अपने दोनों हाथों से पिछवाड़े के छेद को फैला कर, चौड़ा कर, भैया को दरसन करवाया और फिर उनके खुले मुंह पे पिछवाड़े का छेद,

उनका मुंह अब सील बंद और हम दोनों, भौजाई ननद मस्ती कर रहे थे , लेकिन ननद छिनार ने अपने भैया से क्या कहा समझाया उन्होने पलटी मार ली

और मेरी गाँड़ के अंदर।

उईईईईई - जोर से मेरी चीख निकली,... गप्पांक से मोटा सुपाड़ा इनका मेरी गाँड़ में घुसा, पूरी ताकत से,
 
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भाग ८७ - इन्सेस्ट कथा -इंटरवल और थोड़ा सा फ्लैश बैक







भाई बहन दोनों थक के बिस्तर पर पड़े थे सुध बुध खोये, और साथ में मैं भी,... बाहर चांदनी झर रही थी , आम के बौर की, महुए की मादक महक हवा के साथ आ रही थी।

रात आधी से ज्यादा गुजर गयी थी, मेरी ननद दो बार अपने सगे भाई की सेज चढ़ चुकी थी, और जिस तरह से चूतड़ उठा उठा के उसने मलाई घोटी थी अपने भैया की मुझे पक्का अंदाज था की वो अपने भैया से गाभिन हो गयी होगी।
 
Erotica - जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

जोरू का गुलाम भाग २२७गुड्डी रानी की रगड़ाई- किचेन में मस्ती----------27,73,899बाहर निकल टेबल सेट करती हुयी गुड्डी को मैंने देखा तो उसकी हालत तो मुझसे भी खराब थी, रुक रुक के खड़ी हो जाती थी। रोकने पर भी सिसकी निकल जाती थी जैसे जोर की चिल्ख उठ रही हो, उसकी ये हाल उसके भैया और रीनू ने मिल...

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जोरू का गुलाम भाग २२७ - गुड्डी रानी की रगड़ाई -किचेन में मस्ती

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Erotica - फागुन के दिन चार

ननदें पकड़ी भी गयीं, रगड़ी भी गयीं, गुड्डी चंदा भाभी के हाथ तो रीत दूबे भौजी के लेकिन नयनसुख आनंद बाबू को मिलावो भी कन्या रस और नारी रस दोनों का. बनारस की होली.

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फागुन के दिन चार भाग 16 -गुड्डी और रीत -होली की मस्ती

अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें, मजे लें, लाइक करें और कमेंट करें
 
हल्दी की रसम डाक्टर भौजी

" भौजी हँसते हुए बोलीं

“अरे मैं अपने लिए पूछ रही थी, हल्दी चुमावन सब रस्म होगी न, तो भौजाई हूँ तो जब हल्दी लगाउंगी, बिना ननद की चुनमुनिया में अच्छी तरह हल्दी पोते कहीं भौजाई की हल्दी की रस्म होती है। “

माँ को लग रहा था की डाकटर भौजी ऐसे ही, …जो इतनी बिजी हैं, सुबह से लेकर रात तक, दस दिन का अप्वाइंटमेंट मिलता है वो कहाँ गाँव वाली रस्म में

लेकिन डाक्टर भौजी आयीं न सिर्फ हल्दी और चुमावन में बल्कि माटी कोड़ने और बाकी रस्म में और रात में गाने में भी कई दिन सीधे क्लिनिक से,

हल्दी की रसम में भी मैं एक पियरी सिर्फ पहन के, कस के पकड़ के बैठी थी, पीछे नाउन की नयी नयी बहुरिया, मुझे पकड़ के, और सब भौजाई कोशिश तो कर ही रही थीं की हाथ पैर और गाल पे हल्दी लगाने क बाद साडी के अंदर हाथ डालने की, लेकिन मैं खूब कस के दबोच के बैठी थी, लेकिन डाक्टर भौजी तो,

गाल पर हल्दी लगाते हुए, मुझसे बोलीं, वो देख ऊपर कौन सी चिड़िया बैठी है, और जैसे ही मेरी नजर ऊपर, उनके हाथ साड़ी के अंदर दोनों जोबन पे और पूरी आधी कटोरी दोनों उभारों पर मलती बोलीं,

" छिनार, ननदोई से तो खूब हंस हंस के मिजवायेगी और हम भौजाइयों से छिपा रही है, यहाँ तो हल्दी लगाना सबसे जरूरी है।"


हल्दी के कुछ वीडियो मैंने प्रस्तुत किये ऊपर की दो पोस्टों में सिर्फ इस बात को बताने के लिए वो पुरानी परम्पराएं आंशिक रूप से ही सही जीवित है और रीत रिवाज निभाए भी जाते हैं

पहले जो रसम होती थी यानि करने का तरीका एक सामजिक मान्यता और परम्परा अब वह इवेंट में तब्दील हो गयी है और जो काम नाउन करती थी, घर की बुजुर्ग औरतें, बुआ और दादी करती थीं, भाभियाँ करती थी अब वह इवेंट मैनेजर करते हैं।

बस एक बात और इन वीडियों में एक बात और हम देख सकते हैं करीब करीब महिलाये ही हैं और असली बात है हल्दी पूरी देह पर लगनी चाहिए, और कुछ जगहों पर कैमरा भी थोड़ा सा लिहाज करता है यह दिखाते हुए की ये वॉयरिस्टिक डिलाइट नहीं है बल्कि रीत रिवाजों को जिन्दा रखने की एक भरपूर कोशिश है

हाँ लेकिन उसी में मजा भी छेड़छाड़ भी है, चिढ़ाना भी है और थोड़ा बहुत देह सुख भी, और फिर ननद भाभियाँ होगीं, ननद की हल्दी होगी तो भाभियाँ बिना छेड़े छोड़ेंगी थोड़े
 
Rites of passage are much less important in those societies that emphasize the "individual" as the most pivotal social unit, in contrast to the family, clan or some other association, which rely upon knowledge-based exclusively upon empiricism and rationalism. That probably explains the withering away of most of the customs, added by nuclear families, fast urbanization, migration and the glitz of Bollywood, which became the role model for fat Indian weddings. But that is just my opinion.
 
भाग ८७ - इन्सेस्ट कथा -इंटरवल और थोड़ा सा फ्लैश बैक

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भाग ८७ - इन्सेस्ट कथा -इंटरवल और थोड़ा सा फ्लैश बैक





भाई बहन दोनों थक के बिस्तर पर पड़े थे सुध बुध खोये, और साथ में मैं भी,... बाहर चांदनी झर रही थी , आम के बौर की, महुए की मादक महक हवा के साथ आ रही थी।

रात आधी से ज्यादा गुजर गयी थी, मेरी ननद दो बार अपने सगे भाई की सेज चढ़ चुकी थी, और जिस तरह से चूतड़ उठा उठा के उसने मलाई घोटी थी अपने भैया की मुझे पक्का अंदाज था की वो अपने भैया से गाभिन हो गयी होगी।

भाई बहिन एक दूसरे से चिपके मस्ती में लेटे थे,

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भाग ८८

इन्सेस्ट कथा - मेरा मरद, मेरी ननद

१८,४०,३४१

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मैंने ननद को उकसाया,

" अरे भैया का पिछवाड़ा तो बहुत चाटा चूसा, तनी अपने गोल गोल लौंडा छाप चूतड़ का, पिछवाड़े की गली का भी तो रस चखाओ अपने भैया को "

बस ननद ने मेरी बात मान ली, पहले थोड़ा सा उठी,

अपने दोनों हाथों से पिछवाड़े के छेद को फैला कर, चौड़ा कर, भैया को दरसन करवाया और फिर उनके खुले मुंह पे पिछवाड़े का छेद,





उनका मुंह अब सील बंद और हम दोनों, भौजाई ननद मस्ती कर रहे थे , लेकिन ननद छिनार ने अपने भैया से क्या कहा, समझाया,

उन्होने पलटी मार ली

और मेरी गाँड़ के अंदर।

उईईईईई - जोर से मेरी चीख निकली,... गप्पांक से मोटा सुपाड़ा इनका मेरी गाँड़ में घुसा, पूरी ताकत से,

एक तो दस सांड की तरह इनकी कमर का जोर, फिर लगता है दूबे भाभी के चूरन का असर,... एकदम लोहे का रॉड लग रहा रहा था, जैसे रगड़ते दरेरते घुसा, पक्का चमड़ी छिल गयी थी. परपरा रहा था जोर से, ...

गौने के तीसरे दिन ही मेरी गाँड़ मारी गयी थी,

दिन दहाड़े, सुबह से ही मैं खूब टाइट शलवार कुरता पहन के टहल रही थी, मेरे दोनों चूतड़ कसर मसर,..

मेरी छोटी वाली ने ननद ने छेड़ा,... " भौजी, बहुत टाइट शलवार पहने हो, पिछवाड़ा खूब मस्त दिख रहा है। आज आपका पिछवाड़ा बचेगा नहीं। " "

" न बचे न ननद रानी, ... जब से गौने उतरी हूँ, दिन रात कभी तो नागा नहीं जाता, तेरे भैया चढ़े रहते है अगवाड़े तो पिछवाड़ा भी आज नहीं तो कल,... "





मैं भी गरमाई, थी उसी तरह मस्त हो के ननद को जवाब दिया ,

कल नहीं हुआ, उसी दिन,...दिन दहाड़े, उसी छोटी ननद के कमरे में, इन्होने यह भी नहीं देखा की बगल के कमरे में ही मेरी सास, ननद जेठानी सब है , छोटी ननद के पढ़ने वाली टेबल पर निहुरा के फाड़ दी थी गाँड़,.. दो दिन तक मैं दीवाल का सहारा लेकर चल रही थी, लग रहा था कोई लकड़ी का पिच्चड अंदर घुसा हुआ है।

उस के बाद शायद ही कभी नागा जाता हो, पिछवाड़े का नंबर लगने से

लेकिन आज कुछ ज्यादा ही लग रहा था,... पिछवाड़े की दीवाल फटी जा रही थी, ... और मेरी ननद मेरी चीखे सुन के खिलखिला रही थी.

मैं इनको, इनकी माँ बहन सब गरिया रही थी,...

" बहनचोद, मादरचोद,... अपनी महतारी के दामाद से, अपने खसम से, अपनी बहिनिया के जीजा से तोर महतारी चुदवाउ, ओकर गाँड़ मरवाऊँ,... भोसंडी के,... तोहरी महतारी क भोसंडा नहीं है जिसमें उनके सब समधी नहाते डुबकी लगाते हैं,... हमार कोमल कोमल पिछवाड़ा है , मारना अपनी महतारी क गांड अस, बहुत चूतड़ मटका मटका के चलती है रंडी छिनार,... "





और ननद खूब खुश, हंसती ही जा रही थी, मेरी ठुड्डी पकड़ के बोली,

" अरे भौजी, आपने तो मेरे भैया के मन की बात कह दी, बचपन से माँ का पिछवाड़ा देख के इसका पजामा तम्बू बन जाता था लेकिन अभी तो अपना पिछवाड़ा बचाइए "

सच में आज कुछ ज्यादा ही लग रहा था,... जैसे खरोंचते हुए छीलते हुए अंदर घुस रहा था और जैसे ही गांड का छल्ला पार हुआ मेरी जोर की चीख निकल गयी ,उईईईईई नहीं ओफ्फफ्फ्फ़ बहुत दर्द हो रहा है , रुक न स्साले, तेरी माँ बहन को अपने मायके वालों से ,चुदवाउंगी एक मिनट बस,...

लेकिन पिछवाड़े घुसाने के बाद, चाहे लौंडे की हो या लौंडिया की,... कौन रुकता है एक मिनट। ये भी नहीं रुके।

लेकिन एक बात है की ये उन कम लोगो में थे जिन्हे अगवाड़े और पिछवाड़े लेने का फर्क मालूम था.

अगवाड़े का मजा धक्के में है, लेकिन पिछवाड़े का मजा ठेलने, धकेलने, जबरदस्ती घुसेड़ने में. अगवाड़े तो शुरू में ही नर्व इंडिंग्स होती है और घुसते ही मजा आना शुरू हो जाता है। पिछवाड़े कोई नर्व एंडिंग्स नहीं होती, वहां का मजा है जब एकदम भरा भरा लगे,.. बुरी तरह स्ट्रेच हो जाए, अंदर तक ठूंसी जाए,... इसलिए पिछवाड़े का मजा देने के लिए मूसल का मोटा होना, खूब कड़ा होना बहुत जरूरी है।

और सबसे बड़ी बात ये थी की ये उन बहुत कम लोगों में से थे जो सिर्फ हचक के गाँड़ मार के झाड़ देते थे, बिना बुर में ऊँगली किये, बिना चूँची रगड़े मसले, और बिना मुझे झाड़े तो ये आज तक नहीं झड़े, सच्ची।

आधे से ज्यादा बांस घुस गया था मेरे अंदर, ...





अब मजा आ रहा था,

लेकिन आज की रात तो मेरी ननद के, इनकी बहिनिया के नाम थी, कहाँ से मेरा नंबर,...

मुड़ के मैंने इनकी ओर देखा, शिकायत भरे अंदाज में, पर जिस तरह से ये मुस्कराये, और हलके से आँख मार दी,... मैं समझ गयी इनकी बदमाशी,...

कुछ तो पिलानिंग है इस शरारती लड़के की,... और मैं भी साथ देके, कभी चूतड़ गोल गोल घुमा के कभी धक्के मार के कभी लंड को गाँड़ के अंदर निचोड़ निचोड़ के चुदाई चाहे आगे की हो या पीछे की, औरत को मरद का पूरा साथ देना चाहिए और मैं तो माँ की सिखायी पढाई,...





ये मेरी दोनों चूँचियाँ भी अब कस के निचोड़ रहे थे धक्के फुल स्पीड़ मे पहुंच गए थे,... और हुआ वही जो होना था,... मैं झड़ने लगी, मेरी पूरी देह काँप रही थी चूत की पंखुड़ियां सिकुड़ फ़ैल रही थीं, धीरे धीरे चाशनी बूँद बूँद निकलनी शुरू हो गयी थी,

उहह आहहह उहहहह मैं सिसक रही थी

और जब कुछ देर बाद झड़ना मेरा रुका तो मैंने इनकी ओर देखा, इन्होने मेरी ननद की ओर, और मैं इशारा समझ गयी।

बस कस के ननद की दोनों कलाइयाँ मेरी मुट्ठी में सँडसी की तरह जकड़ लिया था मैंने,...

और मेरे पिछवाड़े से इनका खूंटा निकल के सीधे मेरी ननद के मुंह में,... वो लाख सर पटकती रही लेकिन ये घोंटा के ही माने

और मैंने चिढ़ाना शुरू कर दिया,

" अरे ननद रानी अपने पिछवाड़े का स्वाद तो खूब लिया होगा जब गाँड़ मरवाने के बाद लंड चूसा चाटा होगा, तनी आज अपनी भौजी के पिछवाड़े क भी स्वाद ले लो,... आराम से प्यार से चाटो मजे ले ले कर "





करीब पांच दस मिनट इन्होने अपनी बहन के मुंह में डाल के चुसवाया, बाहर निकला तो एकदम चिक्क्न मुक्कन, अच्छे बच्चे की तरह और खड़ा पगलाया,

अरे कौन भाई होगा जिसका लंड अपनी सगी बहन से चुसवा चुसवा के न पगला जाए,... उस बहन को चोदने के लिए न व्याकुल हो,...
 
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