कुमुद भौजी -कुमुदनी का ताल
लेकिन आज नाउन भौजी भी एकदम चुप, मेरे चेहरे की ओर देखते हुए, और फिर उसने बोलना शुरू किया,
" एक दिन की बात नहीं थी, पहले दिन से ही, …समझदार माँ. बेटी को समझा के बोलती हैं,
’ बेटी मुंह बंद रखना, पहली रात में कुछ हो, न हो, …मरद दारु पी के आये, करवट कर के सो जाए,.. लेकिन अगले दिन ननदें जो चिढ़ायें, छेड़े तो मुस्करा के, लजा के,…”
तो बस वही हुआ,… तोहरी भौजी के साथ, " पैर दबाती हुयी नाउन भौजी बोलीं। फिर कुछ रुक के आगे की बात बतायी,
" लेकिन सास ननद, ....दो महीने के बाद ही पीछे पड़गयी, पोता चाहिए, भतीजा चाहिए। वो अपनी ओर से पूरा साथ देती,.... कभी हाथ से छू के पकड़ के यहाँ तक की मुंह से भी, …लेकिन, …कभी थोड़ा बहुत होता, कभी नहीं होता. अक्सर तो बाहर ही, घुसने से पहले ही, …पर वो कुछ नहीं बोलती थीं, खुश रहती थी। लेकिन एक दिन बस तोहरे भौजी क किस्मत ख़राब थी.सांझ से ही, …"
और अब नाउन भौजी की आँखे डबडबा आयीं, वो भी चुप हो गयी। तेल की कटोरी एक ओर रख दी और सब किस्सा बताने लगी ,
'उस दिन सांझ से ही जो कहारिन, अरे उनकी सास की मुंहलगी, वही,,,,
" लागत है मायके में खूब गुल्ली डंडा खेली हैं, दो चार बार पेट गिराए होंगी तो बच्चेदानी पे असर पड़ गया,” और उनकी सास ने और जोड़ा,
“अरे ये बाँझिन हमरे बेटवा क किस्मत में, ...रूप रंग लई के का चाटब, … दूसर जमाना होत तो चूतड़ पे लात मार के मायके भेज देते,... दूसरी ले आते, "
भौजी तोहार चूल्हा में भीगी लकड़ी सुलगा रही थी। एक एक बात सुन रही थी,किससे बोलतीं की,… दोस तो कही, ....लेकिन,…
रात में जब तोहरे भौजी क मरद,… उँगरी, होंठ कुल जोर लगा दी तोहार भौजी, कउनु तरह से, एक बार,… फिर भीतर घुसने से पहले ही लूज लूज
और ऊपर से वो जोर से डांटा, " तुमको बोले थे न ठीक से टांग फैलाओ, फिर, …"
और उनकी किस्मत खराब धीरे से मुंह से निकल गया, ‘हम का करी, तोही से, …’
चटाक जोर से एक चांटा मुंह पे पड़ा, वो पहला चांटा था और उससे ज्यादा किस्मत खराब थी उनकी सास जो हरदम दीवाल से कान चिपकाए रहती थीं, उन्होंने भी तोहरी भौजी क ये बात सुन ली
" हम का करी, तोही से,… "
और अगले दिन से ही मुझे याद आया,.... भाभी के पीठ पर नील का निशान, और मैंने नाउन भौजी को बताया। किसी तरह आंसू रोकती वो बोलीं,
"अगले ही दिन, उनकी सास, बेल्ट से , और उनकी ननद और जो कहाईन बर्तन साफ़ करती है न, उनकी सास की मुंहलगी, उसके सामने ही .
और ये गालियां .
तोहरी भौजी की महतारी को, उनकी छोट बहिनिया को, ....एक बेल्ट मारती थीं फिर गारी,
" तोहार महतारी इहो न सिखाई की मरद के आगे मुंह नहीं खोलते,… छिनार, इतना तोहरी बुर में आग लगी है की हमरे बेटवा से जबान लड़ाती है, बाँझिन "
और फिर बेल्ट और जोर से पीठ पे,
"और वो कहिनिया बुरचोदी, मुँहझौंसी," नाउन भौजी बहुत गुस्से में लग रही थी, रुक के बोलीं,
" वो और, बोलने लगी,तोहरे कुमुद भौजी से
'अरे तोहार सास एकदम सीधी गाय हैं, कोई और होता तो जलता लुआठा ले के,…"
"एकदम," सास बोली और तिबारा सटाक से बेल्ट, फिर सास चालु हो गयी,
"अइसन चुदवास लगी हो तो जाय के चमरौटी, भरौटी में मुंह करिया करा,… हमार जान छोड़ दा, "
और एक बेल्ट और, फिर ननद भी मैदान में आ गयी,
" रात भर तो भैया चढ़े रहते हैं तो भी मन नहीं भरता, तो… "
और आगे की बात पूरी की उसी कहाईन ने,
“हरवहवा से पेलवाय ला,… जाती, तो हो खरमिटाव देने, ….बाँझिन को तो गाभिन भी होने क डर नहीं"
और ननद ने तुरंत हाँ में हाँ मिलाई, " एकदम खेत तो जोतता है तोहरो खेत जोत देगा, सही तो कह रही हैं "
मैं दहल गयी, सोच के ही, नाउन भी चुप फिर आगे की बात, उस रात की बात , जिसके अगले दिन कुमुद भाभी,
मैं चुपचाप बैठी सुन रही थी, लग रहा था जैसे कान में कोई पिघला शीशा घोल रहा हो।
कुमुद भौजी रात में खाना बना रही थी, उन्ही के सामने, सास उनकी बोल रही थी, पहले की बात होती तो एक बोतल किरासिन तेल काफी था, कह देते खाना बना रही थी जल गयी,
तबतक उनका बेटा, भौजी का पति आ गया और चुप का इशारा करते हुए माँ को बाहर बुलाया,
" अरे माँ, ....ये सब सोचना भी मत आज कल क़ानून,... "
लेकिन उनकी बात काटते हुए सास बोलीं
" कौन करेगा थाना कचहरी, …महतारी तो उसकी भिखमंगी है, और छुटकी बहिनिया भी है,.. उसका बियाह, "
" हाँ माँ, उसी को ले आएंगे, और छोटी है तो क्या, गाँव में कौन, …अभी आठ में पढ़ती है लेकिन हमरे भैया हुमच के, …तो एक बार में छोटी से बड़ी हो जायेगी " ननद चहकती हुयी बोली।
कुमुद एक एक बात सुन रही थी और रोटी सेंकती जा रही थी, उसी की शादी में घर गिरवी हो गया था, और,... छोटी बहन,
जब वो अपने कमरे में चली गयी, तो एक बार फिर, सास, सास का बेटा, ननद भी मौजूद थी।
उन लोगो ने अपने हरवाह का बुलाया, २४-२५ साल का, और उसको बोला की उसको पंचायत बुलानी है और कहना है की उसका संबंध कुमुद से है, वो नहीं चाहता था लेकिन कुमुद ने जबरदस्ती करके, …
और सास ने समझा भी दिया, चार बिस्सा पोखरा के बगल वाली जमीन अधिया पे, और बीस कट्टा धान, और पंचायत में तो सब अपने ही हैं तोहें कुछ नहीं होगा।
जिंदगी में एक इंच ज़मीन जिसकी न हो चार बिस्सा मिल जाए, भले ही अधिया हो लेकिन हरवाह ने एक सही सवाल उठाया,
" कौन मानेगा हमारी बात, बड़मनई क मेहरारू, …हरवाह के साथ "
और अब ननद मैदान में आ गयी, " अरे तो कोई निशान बता देना न जो और कोई न देखा हो, भैया बता देंगे न, ओकरे बाद तो पंचायत तोहरे ओर, "
भैया ने बता दिया,’ बायीं जांघ पे एकदम ऊपर, एक बड़ा सा तिल है, और दायीं और चूतड़ के बीचोबीच, एक बड़ा सा दाग है पैदाइश का।
और एक बार मर्दों वाली पंचायत में हरवाह ये सब बोल देता तो तोहार भौजी को औरतों की पंचायत वहीँ तुरंत, नाउन भौजी बोलीं
" उसमें का होता है " मैंने जानना चाहा।
" खाली औरतें, …कुँवारी लड़कियां भी नहीं। सास उसकी बोलीं, अपनी कहिनिया को बोल देंगी, वही बरतन वाली, अपने पुरवा के दो तीन औरतों के साथ झोंटा पकड़ के ले जायेगी। पंचायत में सब औरतें ही है,… तो सबके सामने साड़ी ब्लाउज पेटीकोट, ….एकदम नीसूति
फिर जो जो निशान हरवाहा बताया था, वही कहिनिया और दो चार औरतें जांचती,
और निशान अगर मिल गया तो उसकी बात पक्की ।
लेकिन इतना ही नहीं एक कड़ाही में दो सेर तेल साथ में खौलाया जाता और तोहार भौजी क बात सही है की गलत जानने के लिए उनका हाथ उसी खौलते तेल में दस मिनट तक,…. अगर हाथ नहीं जला, तो मतलब औरत बेदाग़ है लांछन गलत है और एक फफोला भी पड़ गया तो लांछन सही है, फिर पंचायत सजा सुनाएगी। " नाउन भौजी बतायी और जोड़ी,
" तोहरे भौजी क सास बोलीं, अरे कहिनिया रही न आपन, उसीको लगाउंगी, बहुत जोर है, कस के हाथ पकड़ के डालेगीऔर दस मिनट हो या आधा घंटा जब अच्छी तरह हथवा झुलस नहीं जाएगा तब तक,…. "
अब मुझसे नहीं रहा गया, " भौजी लेकिन उ हरवहवा क ना हाथ कड़ाही में, …ओकर कउनो जांच ना '
नाउन भौजी चुप थीं, बड़ी देर तक मुझे देखती रहीं। फिर मेरी ठुड्डी पकड़ के ठंडी सांस ले के बोलीं,
" बबुनी तू ता पढ़ल लिखल हो, …अगिन परिच्छा आज तक खाली औरत की हुयी ना,… "
मैंने भी ठंडी सांस ली और हम दोनों चुप रहे, लांछन लगाने वाले से कौन पूछता है , सही कह रही थी भौजी।
" और एक बार हाथ झुलस गया तो सजा पंचायत के हाथ, ….बाल मुड़ाय के , मुहे पे करिखा पोत के गदहा पे बैठा के,…. गाँव के बाहर”
भौजी बस रो नहीं रही थीं,... करेजा काट के बता रही थी,
फिर बोलीं, "हम खुद अपने काने से एक एक बात सुने, ....लेकिन बाद में जब सब होय गया,... तो हमें अंदाज है की तोहार भौजी, ….उहो कुल बात सुन ली होंगी,"
हम दोनों चुप थे . लेकिन मैं सोच रही थी कुमुद भाभी ने क्या सोचा होगा, बदनामी से तो अच्छा, ....फिर जो छोटी बहन बैठी है उससे भी कोई शादी नहीं करेगा, माँ की बेइज्जती अलग, ....और सुबह सुबह,…
वही कहिनिया, बर्तन वाली, और उसके पुरवा वाली बोलीं की पोखर के किनारे बैठीं थी,…. 'हाथ धो रही थीं, फिसल गयी, हम लोग बहुत हल्ला किये लेकिन,…'
वो हरवाह भी बोला, अंगूठा भी लगाया,… की खेत में जा रहा था तो वो देखा की पोखर के किनारे बैठ के हाथ गोड़ धो रही हैं, फिसल गयीं,
कुमुदिनी के फूलों के बीच छितरायी कुमुद भाभी की देह, जैसे कुमुदिनी का बड़ा सा फूल हो,
जब मेरी ननद ने मुझसे कहा, " भौजी, कहीं ताल पोखर में मिलूंगी। मैं अगर मेरी सास ने जबरदस्ती आश्रम भेजा,… "
मेरे सामने कुमुद भाभी की सीन, ....पोखर में कुमुदनी के बीच
कुछ भी हो जाए, कोई पाप करना पड़ें, कुछ भी लेकिन मैं अपनी ननद को उस तरह नहीं देख सकती थी और आश्रम में गिद्ध की तरह नोची जाती वो,
मैं खिड़की से बाहर देख रही थी, कभी आँख के सामने कुमुद भाभी का चेहरा,.... कभी अपनी ननद का,