- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 31,779
मंजू भाभी - किस्सा

और मंजू भाभी ने पता नहीं सच पता नहीं बना के किस्सा सुनाया।
बुच्ची को अपनी ओर खींच के बोलीं
" एकदम बुच्ची वाला किस्सा, लेकिन हम बुच्ची से साल भर छोट ही रहे होंगे,.... मामा के लड़के की शादी, और उनकी कोई सगी बहन तो थी नहीं तो सब रसम और जैसे बुच्ची कोहबर रखा रही है तो हम भी और साथ में सब भौजाई गाँव की,
तो एक भौजाई ने हमको भैया के साथ कमरे में बंद कर दिया और लालटेन भी बाहर ले गयीं, घुप्प अँधेरा। "
“फिर”, शीला और बुच्ची एक साथ बोलीं।
" फिर का, हमार भैया तोहरे भैया ऐसे बुरबक थोड़े थे और मैं खुद उनको अपनी कच्ची अमिया दिखा के ललचाती थी। उनका पैंट पूरा टाइट हो जाता था। तो बस भैया को मौका मिला गया और एक झटके में मेरी फ्राक पकड़ के खींच दी, ऐसे "
और शीला इशारा समझ गयी, झट से उसने पीछे से बुच्ची के दोनों हाथ कस के दबोच लिए और मंजू भाभी ने बुच्ची की फ्राक खींच के मुन्ना बहू के पास फेंक दी, और फ्राक के अंदर कुछ था भी नहीं।
चड्ढी पहले ही भौजाइयों ने उतरवा दी थी।

और इमरतीया और मुन्ना बहू क्यों मौका छोड़तीं, बुच्ची के टिकोरे दोनों ने बाँट लिए और कस कस के रगड़ने मसलने लगीं।
जाँघों के बीच मंजू भाभी का हाथ था, वहां सहलाते बात उन्होंने आगे बढ़ाई,
" अरे जब जुबना पे भाई का हाथ सबसे पहले पड़ता है तो कस के गदराता है। सगा न हो तो ममेरा, फुफेरा, चचेरा जो भी हो और ऊपर से हमर भौजाई कुल, भैया के खूंटे में नउनिया भौजी तेल चुपड़ चुपड़ के एकदम चिक्क्न की थीं और हमरी बुलबुल भी, तो बस, भैया हमार दोनों टांग उठा के बुरिया पे रगड़ रगड़ के, और जब हम अपने मुंह से कहे,
' भैया पेलो न तभी "
फिर, सोच सोच के बुच्ची की भी हाल खराब थी, लेकिन सुनना भी चाहती थी,
" फिर क्या, तोहरे अस बहिन पाय के कोई भाई छोड़ेगा, तो वो भी पेल दिए , और पूरे दस मिनट तक "
और इमरतिया कुछ और सोच रही थी, उसका देवर, सुरजू तो आधे घंटे से पहले झड़ने के नजदीक भी नहीं पहुंचेगा, आज देख चुकी थी वो

मंजू भाभी ने रस लेकर अपनी पहली चुदाई का हाल सुनाया,
कैसे अपने ममेरे भाई से अपनी कसी कोरी चूत फड़वायी।
सुन के तो सब गरमा रही थीं, लेकिन सबसे ज्यादा हालत बुच्ची की खराब हो रही थी। एक तो दो दो खूब खेली खायी भौजाइयां इमरतिया और मुन्ना बहू जम के उसकी छोटी छोटी चूँची रगड़ रही थीं और फिर मंजू भौजी जिस तरह से अपनी हथेली उसकी कुँवारी चुनमुनिया पे मसल रही थी, बुच्ची की बुरिया गीली हो रही थी,
लेकिन उससे भी ज्यादा, बुच्ची की हालत खराब थी ये सोच सोच के की सुरुजू भैया अपना मोटा खूंटा उसकी कसी कोरी बिलिया में घुसाएँगे, केतना दर्द होगा, केतना मजा आएगा। लेकिन उससे रहा नहीं गया, उसने मंजू भौजी से पूछ लिया,
" भौजी बहुत दर्द हुआ होगा न "
" अरे पूछो मत, बहुत। बस जान नहीं निकली और वो भी एक बार नहीं, दो बार। पहली बार जब भैया का सुपाड़ा घुसा, और थोड़ी देर बाद जब झिल्ली फटी, लेकिन मजा भी बहुत आया। अरे पगली बिना दर्द के कहीं मजा आता है, जितना दर्द उतना मजा, लेकिन असली मजा दुबारा आया। "
" कैसे " अभी चारों एक साथ बोली, बुच्ची, शीला, इमरतिया और मुन्ना बहू।
" अरे हमार सब भौजाई नंबरी छिनार" मंजू भाभी बोलीं और बुच्ची और शीला खिलखिला के बोलीं,
" एकदम भौजी, ....कुल भौजी छिनार होती हैं और हम दोनों को तो नम्बरी छिनार "

" अभी बताउंगी कितनी छिनार हूँ हम तीनो, "
हंस के मंजू भाभी बोलीं और आगे का किस्सा बयान किया।
उनके भैया ने बाहर की खिड़की थोड़ी खोल दी थी तो थोड़ी चांदनी आ रही थी, लेकिन बहन चोदने की जल्दी में वो भूल गया था की भौजाइयों ने दरवाजा बाहर से तो बंद कर दिया था लेकिन अंदर से उन लोगो ने नहीं बंद किया है। बस थोड़ी देर में चारो भौजाई अंदर और मंजू के पीछे
" क्यों मंजू, मजा आया हमरे देवर के साथ और चलो अब हमरे सामने, पहले चूस चूस के अपने भैया का फिर से खड़ा करो और एक भौजाई ने कस के मंजू भाभी का गाल दबा के मुंह खोलवा दिया और दूसरे ने मंजू भाभी के भैया का खूंटा पकड़ के उनके मुंह में। छत का दरवाजा बंद था, आधी रात बाकी थी तो किसी के आने का भी खतरा नहीं था। मारे जोश के उसके भैया अपनी बहन का सर पकड़ के गप गप

फिर थोई देर में भौजाइयों ने अपने सामने,
एक बोली
" अरे जंगल में मोरा नाचा किसने देखा, ….जबतक बहन की चुदाई हम सब के सामने "
और दूसरी बोली, " अरे तुम दोनों नौसिखिया हो, हम लोग सब गुन ढंग सिखा देंगे " बस एक ने मंजू भाभी के भाई का खूंटा पकड़ के बिल में और तीसरी ने देवर को ललकारा,
" पेल दे एकबार में "

मंजू भाभी चूतड़ पटकती रहीं, चीखती रही हैं और उनके भैया चोदते रहे।
और उनकी बात खतम होते होते बुच्ची की हालत ख़राब। पता नहीं मंजू भाभी की कहानी सच्ची थी या झूठी लेकिन असर हो गया था , बुच्ची ने मन ही मन तय कर लिया था, अब चाहे जो हो जाए, उसके सूरजु भैया चाहे जितना लजाधुर हों, सोझ हों, लेकिन बुच्ची उनसे चुदवा के रहेगी, भले ही उसे भैया से जिद्द करनी पड़े, खुद बेशर्म होना पड़े, लेकिन वो किसी से कम नहीं है, वो भी अपने भैया का लंड घोंट के रहेगी, अरे जो दुलहिनिया आएगी, उससे तो साल भर ही बड़ी है तो वो घोंट सकती है तो बुच्ची काहें नहीं, और दर्द होगा तो होगा, सबको होता है, कौन वो दुनिया में पहली बार चुदेगी.

और अब समय था जोड़ी बनाने का , इमरतिया सोच रही थी की मंजू भाभी खुद बुच्ची का निवान करेगी, लेकिन मंजू भाभी एक चालाक उन्होंने शीला की उकसाया,
" अरे शीलवा, खुद तो गन्ना के खेत में टांग उठाय के मोट मोट लंड घोंटती हो और तोहरी सहेली क बिलिया अभी तक कोरी है , तानी उसकी टांग उठाय के दिखाओ, कैसे लौंडे पेलेंगे उसको "
" एकदम भौजी " हँसते हुए शीला बोली और जब तक बुच्ची समझे, उसकी दोनों टाँगे, शीला के कंधे पे और क्या चूत से चूत पेघिस्सा मारा

मान गयी मंजू भाभी शीला, स्साली पक्की चुदक्कड़ है, खूब गन्ने और अरहर के खेत में कबड्डी खेली होगी। बुच्ची को यही छिनार सुधारेगी।
शीला के पहले धक्के में ही बुच्ची की सिसकी निकल गयी। और कच्चे टिकोरों को देख के न मरदो से रहा जाता है न खेली खायी औरतों से, और रिश्ता अगर ननद भौजाई का हो तो कहना ही क्या।
बस इमरतिया और मुन्ना बहू भी फाट पड़ीं, बुच्ची क चूँची पे।
लेकिन थोड़ी देर में शीला और बुच्ची की जोड़ी तो थी ही, मुन्ना बहू और इमरतिया ने मिल के टुकुर टुकुर देखती मंजू भाभी को छाप लिया और घपाघप, घपाघप,
फिर जब मंजू भाभी निकल पायीं तो उन्होंने इमरतिया को दबोच लिया।
हाँ बुच्ची के लिए इमरतिया ने साफ़ इशारा कर दिया था, एक तो उसकी झड़ने नहीं देना है, बस झड़ने के किनारे तक ले जा के छोड़ दो, जिससे दिन भर कल बुरिया में आग लगी रहे, छनछनाती घूमे। और दूसरे ऊँगली अंदर नहीं करनी, कोरी है तो कोरी ही रहेगी, जबतक मोटा मूसल न घुसे।
सब एक दूसरे से चिपक के सो गए, और मुंह अँधेरे, भिन्सारे शीला और मुन्ना बहू निकल गयीं, ये बोल के की दस बजे के पहले आ जाएंगी।
पांचो की लाज शर्म उसी बोरसी में सुलग के, सुबह होते होते
हाँ दो बातें, जैसे मंजू भाभी ने बोला था की उनकी भाभियों ने किया था, उसी तरह इमरतिया ने बुच्ची की दोनों फांके फैला के बूँद बूँद सौ ग्राम सरसों का तेल टपका दिया, " शादी बियाह का घर है, का पता कब कौन मिल जाए ? और जब मर्दो का खूंटा खड़ा होता न तो वो चिकनाई और तेल नहीं ढूंढते,… बस पटक के पेल देते हैं, इसलिए अपनी सावधानी खुद बरतना चाहिए। "
और मंजू भाभी ने खूब समझाया बुच्ची को सूरजु के बारे में
" अरे हमार देवर तनी ज्यादा ही लजाधुर है, तोहिं को पहल करना पड़ेगा, हरदम उसके आस पास रहो, उसे देख के मुस्कराओ। अपने दोनों चूजे उभार के दिखाओ और जैसे मर्दो की निगाह औरत की चूँची पे रहती है न तो अगर वो तेरे चूजे देखे तो तू उसका खूंटा देखो। वो भी समझ जाएगा।

और मंजू भाभी ने पता नहीं सच पता नहीं बना के किस्सा सुनाया।
बुच्ची को अपनी ओर खींच के बोलीं
" एकदम बुच्ची वाला किस्सा, लेकिन हम बुच्ची से साल भर छोट ही रहे होंगे,.... मामा के लड़के की शादी, और उनकी कोई सगी बहन तो थी नहीं तो सब रसम और जैसे बुच्ची कोहबर रखा रही है तो हम भी और साथ में सब भौजाई गाँव की,
तो एक भौजाई ने हमको भैया के साथ कमरे में बंद कर दिया और लालटेन भी बाहर ले गयीं, घुप्प अँधेरा। "
“फिर”, शीला और बुच्ची एक साथ बोलीं।
" फिर का, हमार भैया तोहरे भैया ऐसे बुरबक थोड़े थे और मैं खुद उनको अपनी कच्ची अमिया दिखा के ललचाती थी। उनका पैंट पूरा टाइट हो जाता था। तो बस भैया को मौका मिला गया और एक झटके में मेरी फ्राक पकड़ के खींच दी, ऐसे "
और शीला इशारा समझ गयी, झट से उसने पीछे से बुच्ची के दोनों हाथ कस के दबोच लिए और मंजू भाभी ने बुच्ची की फ्राक खींच के मुन्ना बहू के पास फेंक दी, और फ्राक के अंदर कुछ था भी नहीं।
चड्ढी पहले ही भौजाइयों ने उतरवा दी थी।

और इमरतीया और मुन्ना बहू क्यों मौका छोड़तीं, बुच्ची के टिकोरे दोनों ने बाँट लिए और कस कस के रगड़ने मसलने लगीं।
जाँघों के बीच मंजू भाभी का हाथ था, वहां सहलाते बात उन्होंने आगे बढ़ाई,
" अरे जब जुबना पे भाई का हाथ सबसे पहले पड़ता है तो कस के गदराता है। सगा न हो तो ममेरा, फुफेरा, चचेरा जो भी हो और ऊपर से हमर भौजाई कुल, भैया के खूंटे में नउनिया भौजी तेल चुपड़ चुपड़ के एकदम चिक्क्न की थीं और हमरी बुलबुल भी, तो बस, भैया हमार दोनों टांग उठा के बुरिया पे रगड़ रगड़ के, और जब हम अपने मुंह से कहे,
' भैया पेलो न तभी "
फिर, सोच सोच के बुच्ची की भी हाल खराब थी, लेकिन सुनना भी चाहती थी,
" फिर क्या, तोहरे अस बहिन पाय के कोई भाई छोड़ेगा, तो वो भी पेल दिए , और पूरे दस मिनट तक "
और इमरतिया कुछ और सोच रही थी, उसका देवर, सुरजू तो आधे घंटे से पहले झड़ने के नजदीक भी नहीं पहुंचेगा, आज देख चुकी थी वो

मंजू भाभी ने रस लेकर अपनी पहली चुदाई का हाल सुनाया,
कैसे अपने ममेरे भाई से अपनी कसी कोरी चूत फड़वायी।
सुन के तो सब गरमा रही थीं, लेकिन सबसे ज्यादा हालत बुच्ची की खराब हो रही थी। एक तो दो दो खूब खेली खायी भौजाइयां इमरतिया और मुन्ना बहू जम के उसकी छोटी छोटी चूँची रगड़ रही थीं और फिर मंजू भौजी जिस तरह से अपनी हथेली उसकी कुँवारी चुनमुनिया पे मसल रही थी, बुच्ची की बुरिया गीली हो रही थी,
लेकिन उससे भी ज्यादा, बुच्ची की हालत खराब थी ये सोच सोच के की सुरुजू भैया अपना मोटा खूंटा उसकी कसी कोरी बिलिया में घुसाएँगे, केतना दर्द होगा, केतना मजा आएगा। लेकिन उससे रहा नहीं गया, उसने मंजू भौजी से पूछ लिया,
" भौजी बहुत दर्द हुआ होगा न "
" अरे पूछो मत, बहुत। बस जान नहीं निकली और वो भी एक बार नहीं, दो बार। पहली बार जब भैया का सुपाड़ा घुसा, और थोड़ी देर बाद जब झिल्ली फटी, लेकिन मजा भी बहुत आया। अरे पगली बिना दर्द के कहीं मजा आता है, जितना दर्द उतना मजा, लेकिन असली मजा दुबारा आया। "
" कैसे " अभी चारों एक साथ बोली, बुच्ची, शीला, इमरतिया और मुन्ना बहू।
" अरे हमार सब भौजाई नंबरी छिनार" मंजू भाभी बोलीं और बुच्ची और शीला खिलखिला के बोलीं,
" एकदम भौजी, ....कुल भौजी छिनार होती हैं और हम दोनों को तो नम्बरी छिनार "

" अभी बताउंगी कितनी छिनार हूँ हम तीनो, "
हंस के मंजू भाभी बोलीं और आगे का किस्सा बयान किया।
उनके भैया ने बाहर की खिड़की थोड़ी खोल दी थी तो थोड़ी चांदनी आ रही थी, लेकिन बहन चोदने की जल्दी में वो भूल गया था की भौजाइयों ने दरवाजा बाहर से तो बंद कर दिया था लेकिन अंदर से उन लोगो ने नहीं बंद किया है। बस थोड़ी देर में चारो भौजाई अंदर और मंजू के पीछे
" क्यों मंजू, मजा आया हमरे देवर के साथ और चलो अब हमरे सामने, पहले चूस चूस के अपने भैया का फिर से खड़ा करो और एक भौजाई ने कस के मंजू भाभी का गाल दबा के मुंह खोलवा दिया और दूसरे ने मंजू भाभी के भैया का खूंटा पकड़ के उनके मुंह में। छत का दरवाजा बंद था, आधी रात बाकी थी तो किसी के आने का भी खतरा नहीं था। मारे जोश के उसके भैया अपनी बहन का सर पकड़ के गप गप

फिर थोई देर में भौजाइयों ने अपने सामने,
एक बोली
" अरे जंगल में मोरा नाचा किसने देखा, ….जबतक बहन की चुदाई हम सब के सामने "
और दूसरी बोली, " अरे तुम दोनों नौसिखिया हो, हम लोग सब गुन ढंग सिखा देंगे " बस एक ने मंजू भाभी के भाई का खूंटा पकड़ के बिल में और तीसरी ने देवर को ललकारा,
" पेल दे एकबार में "

मंजू भाभी चूतड़ पटकती रहीं, चीखती रही हैं और उनके भैया चोदते रहे।
और उनकी बात खतम होते होते बुच्ची की हालत ख़राब। पता नहीं मंजू भाभी की कहानी सच्ची थी या झूठी लेकिन असर हो गया था , बुच्ची ने मन ही मन तय कर लिया था, अब चाहे जो हो जाए, उसके सूरजु भैया चाहे जितना लजाधुर हों, सोझ हों, लेकिन बुच्ची उनसे चुदवा के रहेगी, भले ही उसे भैया से जिद्द करनी पड़े, खुद बेशर्म होना पड़े, लेकिन वो किसी से कम नहीं है, वो भी अपने भैया का लंड घोंट के रहेगी, अरे जो दुलहिनिया आएगी, उससे तो साल भर ही बड़ी है तो वो घोंट सकती है तो बुच्ची काहें नहीं, और दर्द होगा तो होगा, सबको होता है, कौन वो दुनिया में पहली बार चुदेगी.

और अब समय था जोड़ी बनाने का , इमरतिया सोच रही थी की मंजू भाभी खुद बुच्ची का निवान करेगी, लेकिन मंजू भाभी एक चालाक उन्होंने शीला की उकसाया,
" अरे शीलवा, खुद तो गन्ना के खेत में टांग उठाय के मोट मोट लंड घोंटती हो और तोहरी सहेली क बिलिया अभी तक कोरी है , तानी उसकी टांग उठाय के दिखाओ, कैसे लौंडे पेलेंगे उसको "
" एकदम भौजी " हँसते हुए शीला बोली और जब तक बुच्ची समझे, उसकी दोनों टाँगे, शीला के कंधे पे और क्या चूत से चूत पेघिस्सा मारा

मान गयी मंजू भाभी शीला, स्साली पक्की चुदक्कड़ है, खूब गन्ने और अरहर के खेत में कबड्डी खेली होगी। बुच्ची को यही छिनार सुधारेगी।
शीला के पहले धक्के में ही बुच्ची की सिसकी निकल गयी। और कच्चे टिकोरों को देख के न मरदो से रहा जाता है न खेली खायी औरतों से, और रिश्ता अगर ननद भौजाई का हो तो कहना ही क्या।
बस इमरतिया और मुन्ना बहू भी फाट पड़ीं, बुच्ची क चूँची पे।
लेकिन थोड़ी देर में शीला और बुच्ची की जोड़ी तो थी ही, मुन्ना बहू और इमरतिया ने मिल के टुकुर टुकुर देखती मंजू भाभी को छाप लिया और घपाघप, घपाघप,
फिर जब मंजू भाभी निकल पायीं तो उन्होंने इमरतिया को दबोच लिया।
हाँ बुच्ची के लिए इमरतिया ने साफ़ इशारा कर दिया था, एक तो उसकी झड़ने नहीं देना है, बस झड़ने के किनारे तक ले जा के छोड़ दो, जिससे दिन भर कल बुरिया में आग लगी रहे, छनछनाती घूमे। और दूसरे ऊँगली अंदर नहीं करनी, कोरी है तो कोरी ही रहेगी, जबतक मोटा मूसल न घुसे।
सब एक दूसरे से चिपक के सो गए, और मुंह अँधेरे, भिन्सारे शीला और मुन्ना बहू निकल गयीं, ये बोल के की दस बजे के पहले आ जाएंगी।
पांचो की लाज शर्म उसी बोरसी में सुलग के, सुबह होते होते
हाँ दो बातें, जैसे मंजू भाभी ने बोला था की उनकी भाभियों ने किया था, उसी तरह इमरतिया ने बुच्ची की दोनों फांके फैला के बूँद बूँद सौ ग्राम सरसों का तेल टपका दिया, " शादी बियाह का घर है, का पता कब कौन मिल जाए ? और जब मर्दो का खूंटा खड़ा होता न तो वो चिकनाई और तेल नहीं ढूंढते,… बस पटक के पेल देते हैं, इसलिए अपनी सावधानी खुद बरतना चाहिए। "
और मंजू भाभी ने खूब समझाया बुच्ची को सूरजु के बारे में
" अरे हमार देवर तनी ज्यादा ही लजाधुर है, तोहिं को पहल करना पड़ेगा, हरदम उसके आस पास रहो, उसे देख के मुस्कराओ। अपने दोनों चूजे उभार के दिखाओ और जैसे मर्दो की निगाह औरत की चूँची पे रहती है न तो अगर वो तेरे चूजे देखे तो तू उसका खूंटा देखो। वो भी समझ जाएगा।























