Adultery मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas) Part #02 Running - Page 12 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas) Part #02 Running

Latest Update 🆕 on Page No. 326 👇

Post in thread 'मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas)'
 
नया अपडेट कल तक आ पायेगा, मैंने अपडेट पूरा लिख लिया था पर फिर वो खुद मुझे hi पसंद नहीं आया.. इसलिए रेवरिटे कर रहा हु 🙏
 
प्रीवियस अपडेट ों पेज No. 📃 326

अपडेट #18

घाना जंगल

सन 🖼️ #03

images.jpg


सुंदरपुर गाओं में सुबह से अभी तक किया किया हुआ इसके बारे में तोह काफी कुछ जान लिया हमने, वैसे तोह अभी बारिश क इस दिन में कामुकता की ये वर्षा बंद नहीं हुई है.. पर अभी हम मिलकर थोड़ा सा आगे चलते है यानि ऐसी दिन में आगे वह तक, जबतक ये पूरा गाओं रात क अँधेरे में डूब नहीं जाता

रात क करीब 11:15 हो रहे होंगे, सुंदरपुर पूरी रात शांत नज़र आ रहा था.. पर बारिश अब भी बंद नहीं हुई थी, है अब उसमे पहले जैसी रफ़्तार नहीं बची थी पर वो अब भी अपनी फुहार से गाओं की गर्मी को शांत करने का कार्य कर रही थी

वैसे तोह ठण्ड का खूबसूरत मौसम यहाँ अब भी चल hi रहा था ऐसे में आज हुई इस घनघोर बारिश ने पुरे गाओं की ठण्ड को कई गुना बड़ा दिया था.. पर इसके बाद भी कोई ऐसा भी था जो रात क अँधेरे का फायदा उठाते हुए धीरे धीरे सुंदरपुर गाओं क उस रहस्यमय जंगल की और बड़े जा रहा था जहा लोग दिन में भी जाना पसंद नहीं करते

और अगर किसी कारन उन्हें वह जाना भी पड़ा तोह गलती से भी जंगल क ज्यादा अंदर जाने की गलती नहीं करते

पर ये इंसान कुछ तोह अलग था ककी उसकी रफ़्तार और जिस प्रकार से वो छुपते हुए आगे बाद रहा था, उससे तोह यही लग रहा था की उसका गंतव्य जंगल नहीं अपितु उसके अंदर कही किसी ेस्थान पे है

बारिश की उस तेज़ फुहार से वो पूरी तरह भीग चूका था उसके जिस्म पे नीचे जहा जीन्स थी तोह वही ऊपर उसके एक चमड़े की काली जैकेट पहनी हुई थी जो उसे न सिर्फ उस ठण्ड से बचा रही थी बल्कि उसे उस अंधेरे में विलीन भी कर रही थी

जल्दी hi वो जंगल क अन्दर प्रवेश कर चूका था, उसका हर एक कदम बिलकुल साधा हुआ और नपा तुला था.. वो इस बात का पूरा धियान रख रहा था की उसके कारन एक हलकी सी भी आवाज़ उत्पन्न न, वर्ण सायद किसी को उसके वह होने का ज्ञान हो सकता था

वो जिस प्रकार छुपते हुए आगे बाद रहा था उससे एक बात तोह पक्की थी की वो ऐसे कामो में माहिर है, और जल्दी hi वो रात क अँधेरे में जंगल क काफी अन्दर तक आ चूका था.. काले साये में घिरा हुआ वो जंगल पूरी तरह एक अजीब सा दर का माहौल खुद में बसाये हुए था और ऐसे गुप्त अँधेरे में भी वो इन्शान बिना किसी रौशनी क धीरे धीरे आगे बढ़ता hi जा रहा था

तभी उसे एहसास होता है की एक बार फिर से बारिश ने अपनी गति पकड़नी सुरु कर दी है, वो वही एक पेड क पास रुक क अपनी जैकेट क अंदर अपना हाथ डालता है और अगले hi पल उसके हाथ में एक छोटी पर महंगी दारू की बोतल थी.. बिना कोई समय व्यर्थ किये वो उसका एक घुट अपने गले से नीचे उतर लेता है

"आह्ह्ह्ह.. कही इतनी रात को इस जंगल में आने का मेरा फैसला गलत तोह नहीं ?"

tumblr-660c22c15372414c7beb7eed5515a443-999ca774-640.gif


वो खुद से ये कहता है और उस बोतल में भरी दारू का एक और घूंट भरने क बाद उसे वापस अपनी जैकेट में अंदर की पॉकेट में रख लेता है.. और फिर उसके बाद वो अपने दाहिने हाट में ऊपर की तरफ किसी चीज़ को छू क उसकी इस्तिथि का ेशास लेता है

"सब ठीक है"

वो एक लम्बी सी सांस भरता है और चारो तरफ फैले उस काले अँधेरे में कुछ देखने की कोशिश करने क बाद वो आगे बढ़ते हुए धीरे से अपनी जीन्स की पॉकेट से एक प्लास्टिक में रखा हुआ फ़ोन निकलता है जिसकी स्क्रीन पे अब रात क 11:40 हो चुके थे

वो वापस से अपने फ़ोन को यथा इस्तिथि में रखता है और एक आखिरी बार खुद से कहता है

"चल रॉकी.. आज पता कर hi लेते है, किया है इस जंगल का राज़ ?'

और एक बार फिर से उसके कदमो की रफ़्तार बाद चलती है, पर किया मज़ाल की उसके पैरों से जरा सी भी आवाज़ उत्पन्न हो रही हो, ऐसा लग रहा था जैसे कोई शिकारी अपने सिखर पे आगे बाद रहा है

वैसे आप बताने की जरुरत तोह है नहीं की ये और कोई नहीं अपितु रॉकी है

8d71f735f6e23ea241ca35ee87f44082-1.jpg


उम्मीद है आपको ये याद होगा

रॉकी जैसे जैसे आगे बाद रहा था जंगल और ज्यादा घाना और अँधेरे में डूबता चला जा रहा था.. वही बारिश ने एक बार फिर से सुबह वाली रफ़्तार पकड़ ली थी

करीब 20 मं और अन्दर चलने क बाद अब वो जंगल क मध्य तक आ चूका था जहा उसके चेहरे पे मुस्कान तब खिलती है जब वो कही दूर धीमी सी आती हुई एक हलकी सी रौशनी को देखता है

"मेरा सक सही था, कुछ तोह है कहानी इस जंगल की"

रॉकी अब पूरी सावधानी से धीरे धीरे आगे बाद रहा था.. वैसे तोह बारिश अपनी पूरी रफ़्तार पकड़ चुकी थी, पर वो भी उसके बढ़ते हुए कदमो को रोक नहीं प् रही थी

तेज़ बारिश में जंगल क विशाल पेड़ अपनी डालियों से आसमान को छू रहे थे,

तोह वही बारिश की बूँदें पेड़ों की पत्तों पे गिरते हुए एक मधुर संगीत बजा रही थी

रात क अँधेरे में जंगल क पेड़ो क बीच बहती हुई हवा काफी ठंडी थी और उसमे मिटटी की गीली खुशबू की सुगंध घुली हुई थी, रॉकी दबे पाऊँ आगे बाद रहा था की तभी दूर कहीं एक जानवर की घुर्राहट सुनाई पड़ती है, जो शायद एक सियार का स्वर था

रॉकी अब धीरे धीरे उस रौशनी की और दबे पाऊँ आगे बाद रहा था, उसका पूरा सरीर बारिश क कारन भीग चूका था.. उसकी उस काली जैकेट क अंदर की सफ़ेद T-Shirt पूरी तरह उसकी चौड़ी छाती से चिपकी हुई थी जो उसकी मर्दानगी का सबूत बन रही थी

रॉकी एक पल क लिए अपनी जगह पे रुकता है और एक बार फिर से अपने दाहिने हाथ क ऊपर की तरह दूसरे हाथ से कुछ छू क उसका एहसास लेता है और फिर धीरे से वो आगे बाद चलता है, अब वो रोशनी काफी पास आती जा रही थी

तभी बारिश और उस रात क अँधेरे क बीच उस सन्नाटे को चीरती हुई एक आवाज़ उसके कानो में पड़ती है.. जिससे रॉकी क कदम वही क वही रुक जाते है, वो आवाज़ शायद उसी सियार की थी

रॉकी अपना सफर वापस से सुरु करता है तभी उसे जंगल क बीच एक मैदान जैसी जगह में एक छोटे से तालाब क पास एक आलीशान घर नज़र आता है.. उसे तोह अपनी आँखों पे यकीन hi नहीं होता की जंगल क इतने अन्दर ऐसा कुछ बनाना मुमकिन भी कैसे हो सकता है, पर तभी उसका जिस्म पूरी तरह सनसना सा जाता है ककी उसे उस घर क ठीक बहार कालिया नज़र आता है जो बीड़ी पीते हुए घर क मुख्या दरवाजे पे पहरा दे रहा था

"ठाकुर का ये कुत्ता यहाँ कैसे.. "

IMG-20250830-231937-027.jpg


रॉकी खुद से hi सवाल करता है, पर वह कालिया को देख उसके मन में कोतुहल और ज्यादा बाद चुकी थी की आखिर बात किया है ?

वैसे रॉकी अभी भी उस घर से काफी दूर था पर उस एकलौते घर की रौशनी क कारन उसे सब साफ़ नज़र आ रहा था, वैसे भी रात क अँधेरे में हलकी रौशनी भी काफी होती है, यहाँ तोह एक पूरा घर रोशन हुआ पड़ा था

बारिश अब भी अपनी पूरी रफ़्तार से हो रही थी.. और ऐसा लग रहा था मानो वो अपनी रफ़्तार को बढ़ती hi जा रही हो, रॉकी सामने से आगे नहीं बाद सकता था इसलिए उसने अपनी दिशा बदल ली ककी अब वो उस घर क पिछले हिस्से की और जाने का फैसला कर चूका था

रॉकी अपने साढ़े कदमो से अब जंगल में घूमता हुआ पीछे की और चल पड़ा था, उसका उद्देश्य था की वो किसी प्रकार उस घर में अंदर प्रवेश कर सके.. वर्ण काम से काम ये तोह जान hi सके की वह अन्दर चल किया रहा है

जल्दी hi रॉकी घर क पिछले हिस्से में आ चूका था पर अब भी उसने काफी दुरी बना राखी थी, वो पहले अचे से पक्का कर लेना च रहा था की वह उस कालिया क अलावा और कोई तोह नहीं है

उसे अचे से याद था की जब पिछले बार उसकी भेट उस कालिया से हुई थी तोह कितनी मुश्किल से वो वह से निकल पाया था.. और अगर आज फिर से कालिया ने उसे वह पकड़ लिया तोह उसकी सचाई सामने आ सकती है

[ अगर आपने कालिया और रॉकी क बारे में नहीं पड़ा है तोह आप


Part 02, अपडेट 13 पद सकते है 👇

Post in thread 'मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas)' ]

Rocky charo taraf dekhte hue ab dhire se us ghar ki aur pehla hi kadam aage badata hai ki tabhi uske sarir mein bijli si daud padti hai qki use aage ek paid k sahare ek aadmi khada hua nazar aata hai, wo bina samay vyarth kiye jaldi se wahi bagal wale paid k peeche ho jaata hai

"Behenchod ese toh dekha hi nahi tha"

Rocky apni badti hui saanson ko kabu karte hue dheere se apna sar aage karke us aadmi ki taraf dekhta hai aur jaise hi uski nazar sahi se us aadmi pe padti hai wo buri tarah chauk sa jaat hai

Qki us aadmi ke haath mein ek Automatic Machine Gun thami hui thi, jispe barish ki tez bundhe gir rahi thi aur pure drishya ko aur khatarnak bana rahi thi

Rocky ko ache se yaad tha ki pichle baar jab wo us Kaaliya se mila tha tab uske pass bas ek desi do-naali banduk hi thi.. phir aaj achanak aisa hatiyar kaise ?

Rocky us aadmi ko dekhne ki koshish karta hai par wo uska chehra nahi dekh paata qki uska aadha sarir us paid ki aad mein chupa hua tha

"Ye kaise sambhav hai ?,

Aise chhote se gaon mein ek jungle k andar kisi ko aise hatiyar ki zarurat kyun padegi?

Aur usse bada sawal ye hai ki es Gaon mein aise adhunik hatiyar aaye kaha se ?"

Rocky k dimag mein tufan umadne laga tha, wo ek lambi saans lete hue wapas se apne dahine hath k uper kisi cheez ko chu k uska aabhas karta hai aur man hi man khud se kehta hai

'Agar pehle pata hota toh puri tayyari se aata ?

Waise ye asan nahi hoga aise adhunik hatiyar-dhari se samna karna ?

Aakhir Saala chal kiya raha hai es Gaon mein ?'

Tabhi Rocky dekhta hai ki wo aadmi apni jagah se hilta hai aur us ghar ki aur chal padta hai, dekhte hi dekhte wo ghar k bilkul peeche pahuch chuka tha aur wahi diwar ko taik laga k neeche baith jata hai, usne apni bandook ko wahi apne pass rakh liya tha aur wo apni aankhon ko band kar chuka tha

Sayad wo khade khade thak chuka tha, esliye thoda aaram karne laga tha.. waise wo es samay us ghar ki pichli diwar k sahare baitha hua tha jis karan sayad wo barish se bhi kuch bach raha hoga, par Rocky us jagah se dur tha aur beeche mein kaafi ghane paid bhi aa rahe thay esliye wo kuch bhi pakke taur pe nahi keh sakta tha

Rocky ek pal k liye aage badne ki sochta hai par phir khud hi kehne lagta hai

"Abhi aur aage badna khatre se khali nahi lag raha hai. par phir aisi thand mein Jungle k itna andar aane ka laabh hi kiya hoga ?"

Rocky ka ek man use aage badne k liye bol bhi raha tha, wahi dusra man use rok bhi raha tha qki wo ache se janta tha ki khatra bada hai

Rocky abhi apne man me chal rahi udherbun mein uljha hi hua tha ki tabhi barf jaisi koi thandi cheez theek uske peeche uski gardan se aake chuti hai, aur uske sath sath ek sard sabd bhi uske kaano mein ghul se jaate hai

"Kon be saale… kya kar raha hai?"

Rocky ne apni taraf se puri satarkta rakhi thi, esliye use aisi kisi cheez ki tanik bhi ummid nahi thi, uska pura sarir ke pal k liiye kaanp sa gaya tha, jo kanpkapi use es thande mausam mein barish mein bheegne k karan honi chahiye thi wo ab use mehsus hui thi

Rocky samajh chuka tha ki wo buri estithi mein fas chuka hai par aise haal mein bhi uska dimag tezi se chal raha tha, wo sabse pehle dur us ghar k peeche baithe aadmi ki aur dekhta hai jo sayad ab so raha tha aur barish ki tez shor k karan use abhi tak kuch sunai nahi pada tha

Yani abhi k liye khatra sirf ek taraf se tha.. par agar usne jaldi kuch nahi kiya toh ye khatra kai guna bad jayega

Tabhi phir se uske kaano mein wahi khurduri aawaz padti hai

"Madarchod bolega.. kiya kar raha hai yaha ?"

Rocky apne aap ko shant rakhte hue kisi bheegi billi sa kaanpna suru kar deta hai aur maano gidgidate hue kehta hai

"Bhaiya.. main na.. wo.. wo"

"Saale kiya wo wo laga raha hai, sidha sidha jawab de ?

Kon hai be tu.. kiya kar raha hai yaha, Police wala hai ?"

Police ki baat sunte hai, Rocky ka pura sarir jhurjhuri si kha jaata hai, wo haklate hue

"Police.. kaisi.. kaisi baat karte hai Bhaiya, main toh

Wo… main… wo ek Photographer hoon"

Uske peeche khada aadmi uski gardan se hata k uske sar pe us thandi cheez ko lagate hue

"Madarchod chutiya samjha hai, itne andhere mein teri Amma chud rahi hai kiya ?

Jo yaha Photo nikalne aaya hai ?"

Rocky ek pal k liye ghusse se apni mutthi bhich leta hai par wo apni estithi janta tha, esliye shant man se kehta hai

"Main sach keh raha hu Bhaiya.. main toh es Gaon ka bhi nahi hu"

Uske peeche khada aadmi haste hue kehta hai

"Teri ek yahi baat sachi lagti hai, qki agar tu es Gaon ka hota toh teri Gand mein itna dum nahi hota ki tu akele itni raat ko jungle mein itni andar tak aata

Chal ab sach sach bata.. Madarchod tu hai kon ?"

Rocky apni aawaz mein dar gholte hue, aur aise apni baat kehta hai jaise dar se uska bura haal ho

"Main sach keh raha hu Bhaiya"

"Behenchod tu aise sach nahi bolega, tujhe Kaaliya Bhai si sudharenge.. chal edhar mud"

Rocky ne jaise hi Kaaliya ka naam suna use samajhte dair nahi lagi ki yaha maujud in logo ka sardar sayad wahi hai, par wo ye bhi janta tha ki agar aaj phir se wo Kaaliya k samne aaya toh uska sach bahar aane se koi nahi rok sakta

Rocky dheere se apne dono haath jode hue lagbhag kaanpte hue uski aur mudna suru kar deta hai aur jaldi hi wo puri tarah uski aur mud chuka tha, par ab bhi uska sar aise jhuka hua tha maano wo dar k mare kahi mut na de

"Madarchod.. teri toh abhi se Gand phat rahi hai"

Wo Aadmi rocky ko uper se neeche tak dekhte hue has padta hai

Rocky ka pura jism maano dar se kaanp raha ho, use dekh k koi ye nahi keh sakta hai ki wo ek Police wala hai.. Rocky bhi vinti bhari awaaz mein dhire se bolta hai

"Bhaiya… Main sach mein photographer hoon… mujhe dar lag raha hai… yeh bandook hata lijiye na.."

Rocky ki nazrein jhuki hui thi, par us bechare bandook dhari ko kiya pata ki Rocky ka dimag ek yojana bana raha hai, barish ki boondein uske chehre pe joro se gir rahi thi aur jungle ke sannate mein ek dheemi si kisi siyar ki wo pukar us pure vatavaran ko aur darawana bana rahi thi

Rocky k dimag mein ek sath kai baaten chal rahi thi.. Kaaliya, wo Adhunik bandook wala aur ab ye

"Chal pe jara Chehra toh dikha, dekhu toh kon hai jiski gand mein keede hai raat mein Jungle aane ka ?"

Rocky apne aap ko tayyar karte hue dhire se apna Chehra uper karta hai aur wo jaise hi us aadmi ko dekhta hai uski aankhen badi hone lagti hai aur wo apne dimag pe jor dete hue khud se kehta hai

"Ye Chehra.. kiya ye sach mein wahi hai ?"

Rocky dekhta hai ki uske samne khada wo aadmi kareeb 40-42 saal ka hoga, par dekhne se hi koi bada gunda aur ghinone chehra wala inshan lag raha tha

Rocky man hi man

'Ye Pakka wahi hai.. par ye yaha kaise ?'

Rocky us chehre ko dekhta hai toh uske dimag mein ek hi naam ghunjta hai

'Chilla'

34fc7aa5bc6841915657b372d12cf4ca-1.jpg




वही वो आदमी जो रॉकी क हिसाब से चिल्ला था वो रॉकी को ऊपर से नीचे तक देखता है और एक गन्दी हसी क साथ आगे कहता है

"क्यू बे.. गांड पहात रही है"

और ये बोलते hi खुद hi हसने लगता है, पर उसकी नज़रें रॉकी क सरीर पे ऊपर से नीचे तक घूमने लगी थी, मानो जैसे वो रॉकी को स्कैन कर रहा हो

"आज तोह कालिया क मज़े है, तेरा जैसा लौंडा तोह उसकी कमजोरी है"

चिल्ला, रॉकी को देखते हुए हस्ते हुए अपनी बात कहता hi है की अचानक से उसकी हसी गायब होने लगती है.. ककी रॉकी क डरे हुए चेहरे पे एक हलकी सी मुस्कान खिलने लगती है, जिसे देख के चिल्ला असमंजस में पद जाता है

"क्या बे.. क्या सोच रहा है?"

चिल्ला गुस्से से इस बार अपनी आवाज़ को थोड़ा तेज़ hi कर पाया था की अचानक से उसकी आवाज़ दबती चली जाती है और उसके मुंह से घुटी घुटी आवाज़ बहार आने लगती है.. मानो अचानक से सब कुछ बदल गया था

ककी रॉकी ने तय कर लिया था की उसे अब किया करना है, और चिल्ला क इस बार कुछ बोलते hi रॉकी अपने दाहिना हाथ को एक झटका सा दिया था, जिससे एक पल क लिए चिल्ला को उसकी जैकेट क हाथ वाले हिस्से पे कुछ हलचल सी दिखाई पड़ती है.. और इस बीच उसे एक पल क लिए ऐसा लगा था जैसे कोई चमकीली धार दार चीज़ अचानक से रॉकी क हाथ में आ गयी हो

और उसी चीज़ ने उसके सब्दो को शांत कर दिया था, ककी जब तक चिल्ला उस सब को समाज पाटा रॉकी का वो हाथ तेज़ी से उसकी गर्दन की और चल पड़ता है.. सायद इतनी दिएर से रॉकी को गिड़गिड़ाते हुए देख क वो उसे खतरा मन्ना बंद कर चूका था.. और यही चीज़ रॉकी क लिए मौका बन गयी थी

रॉकी क हाथ में थमी उस धार धार चीज़ ने अपना काम कर दिया था, और सब कुछ इतनी शांति आउट तेज़ी से हुआ था की चिल्ला कुछ समझ hi नहीं पाया था

और उसके कुछ समझने से पहले hi उसकी गर्दन से लाल फव्वारा फुट पड़ता है और उसकी गर्दन की स्वास नाली काट चुकी थी

चिल्ला- Ghuuuuuuuuuu....... हूउउउउउउउ

चिल्ला अपने दोनों हाथों को रॉकी की और बढ़ाता है पर अगले hi पल रॉकी का हाथ फिर से घूमता है और इस बार वार फिर से वही हुआ था, एक तेज़ खून का फव्वारा निकल पड़ता है जो खुद रॉकी को भी भिगोता चला जाता है

रॉकी- मादरचोद... साला

रॉकी ये कहते हुए तुरंत पीछे मुद क दिवार क सहारे बैठे हुए उस बन्दूक वाले को देखता है जहा उसे तसल्ली होती है की वो अब भी उस सब से बेखबर था

जल्दी hi चिल्ला की गर्दन से बेहटा वो खून का फव्वारा बारिश क पानी क साथ मिलने लगता है, और चिल्ला लड़खड़ते हुए गिरने लगता है पर रॉकी इतने पे hi नहीं रुकता, वो अगले hi पल आगे बढ़ता है और अपने एक हाथ से चिल्ला का मुंह ज़ोर से दबा देता है.. ककी इस समय रॉकी और ज्यादा जोखिम नहीं ले सकता था

फिर उसके हाथ में थामे उस छोटे से चाकू का प्रहार सीधा चिल्ला क दिल वाले हिस्से पे होता है, वार इतना सटीक था की दूसरे वार की जरुरत hi नहीं थी

चिल्ला का जिस्म एक बार को पूरी तरह थरथरा पड़ता है और अगले hi पल वो पूरी तरह शांत होता चला जाता है.. रॉकी धीरे से उसके मुंह से अपना हाथ हटते हुए उसे चोर देता है और चिल्ला किसी बेजान मूर्ति जैसे लहरा क जमीन पे गिर पड़ता है

रॉकी की साँसें तेज़ी से भाग रही थी वो एक बार को उस बन्दूक वाले की और देखता है और फिर जमीन पे गिरे उस शांत पद चुके चिल्ला की और

रॉकी अपने उस छोटे से धारदार चाकू को अपनी जैकेट की आस्तीन में साफ़ करता है और फिर उसे वापस से अपने ब्याह क अंदर मानो जैसे किसी चीज़ में फसा देता है

रॉकी एक पल क लिए जमीन पे ेस्थिर पड़े उस बेजान सरीर को देखता है और फिर वापस इस बार जब वो दिवार क सहारे आराम करने वाले उस बंदूकधारी की और देखता है तोह उसका जिस्म झुरझुरी सी खा जाता है ककी वो अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ था और अंगदी से ले रहा था

रॉकी वैसे तोह ऐसी जगह था जहा उसे देखा नहीं जा सकता था, उसपे रात का अँधेरा भी उसका सहायक बना हुआ था.. पर वो सोचने पे मजबूर हो जाता है

'अभी आगे बढ़ना खतरनाक हो सकता है, वैसे भी इधर ये है तोह सामने की तरफ वो कालिया'

रॉकी ने अभी क लिए आगे बढ़ने का अपना फैसला ताल दिया था, पर इससे पहले की वो वह से निकलता उसने जल्दी से अपनी जेब में रखे फ़ोन को निकला और उस शांत हो चुके चिल्ला क सरीर की एक फोटो खींच ली और उसने उसी पल उस फोटो को अपने सीनियर को भेज दिया जिसके कहने पे वो यहाँ इस गाओं में आया हुआ था

पर जंगल क इतने अंदर नेटवर्क कहा से आता.. इसलिए वो और समय नस्ट न करके जल्दी से फ़ोन को अपनी जेब में रखता है और पेड़ो क पीछे छुपते हुए वापस गाओं की और चल पड़ता है

रॉकी जिस सफाई से जंगल क अंदर आया था.. ठीक उसी प्रकार वापस भी निकल आता है

वैसे इस समय रात क 12:55 हो चुके थे, जिसका मतलब था ये दिन समाप्त हो चूका है

पर इस बीते हुए दिन में काफी कुछ हुआ है, जो अभी आपको बताना बाकी है

और वो सब मैं आपको अपडेट #19 में बताना सुरु करूँगा

अपडेट #19 में 4 सन 🖼️ होंगे

मिलता हु जल्दी hi, कीप रीडिंग 📖
 
Latest Update 🆕 on Page No. 334 👇

Post in thread 'मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas)'
 
नई अपडेट 👆

Danny69 Shetan Mukhtar lundbur123 soumyaranjan Deepaksoni Napster Pandu1990 insotter Dharmendra Kumar Patel Rinkp219 aidenabhishek urc4me Rajizexy zhyny Krishna kumar devi kings Raj9977 mahima_ maurya Vishalji1 fuckre Ravi 23 R_Raj Aryan Raj Vrushali U.and.me ashokdaji Vikashkumar Rajesh karan121 Yashu7979 tigereye zhyny The_Void pankukipriya Nike11 Akash18 lunc Ashiq Baba the_bull_000 tigereye pussylover1 Musal_sandh fuzzycheek1 kriti009 Praju starlet ✨ mmmmmmmm rajeev13 fuzzycheek1 kriti009 Musal_sandh Kanika kumari Rajesh sanjaysaroj7790 zhyny Leo Shine True Detective pussylover1 Ravi 23 Thevamp royalroy motalund4554 Pandu1990 Somdavid imdelta shaliniarora Shan.gupta0051 vijay19884verma ashokdaji12 Eternallover012 pankuk1988 Amol2 babasandy appanna1234 Fuck#123 Premkumar65 rmj0231 DEMONIC_BULL Goku_09 snehaaa Black_Shadow Gauravv Raja jani shruti vaskale 1 vijay19884verma Dhansu2 pprsprs0 Fuck#123 chud ka bhukha Amol2 pankuk1988 @raj2012_rks
 
प्रीवियस अपडेट ों पेज No. 📃 334

अपडेट #19

कोण नहीं छोड़ना चाहता.. मालती को ?


सन 🖼️ #01



23787618-046-068d.jpg


नवंबर का खूबसूरत मौसम.. यानि गर्मी का प्रभाव लगभग काम हो चूका था और ठण्ड का अस्तित्व अपने पेअर ज़माने लगा था

जहा देखो वह दूर दूर तक फैले हरे भरे खूबसूरत मनमोहक खेत और उन खेतों क पास से बहते हुए पानी की कलकल करती मधुर आवाज़ सुंदरपुर गाओं की खूबसूरती को कई गुना बढ़ती चली जा रही थी

सुबह का शांत खुशनुमा मौसम हो या दिन की हलकी धुप वाली गर्मी.. इस समय सुंदरपुर गाओं की खूबसूरती अलग hi निखार क सामने आती है

ऐसे मैं गाओं से दूर, जहा गाओं क कच्चे पक्के घर लगभग ओझल हो जाते है.. वह एक खूबसूरत खेत में कुछ अलग hi कहानी रची जा रही थी

और इस कहानी में कामुकता है.. जी है सिर्फ और सिर्फ कामुकता

सूरज dheere-dheere पश्चिम की तरफ ढल रहा था और उसकी सुनहरी किरणें सरसों के खेतों पे पद रही थी तोह ऐसा लग रहा था मानो वो खेत स्वर्ग की कोई परछाई हो

07eccb8922712987859606a22703d120.jpg


यहाँ peele-peele फूल हलकी बहती हुई हवा क कारन एक साथ ऐसे लहरा रहे थे मानो खुद hi मन्त्रमुघ होक नरतिय कर रहे हो

खेत क हर कोने में सिर्फ सरसों क पत्तों की हरियाली और उनके ऊपर खिले पीले फूल नज़र आ रहे थे.. मानो जैसे किसी कलाकार की सबसे खूबसूरत रचना हो

शाम हो जाने क कारन Halki-halki ठंडी हवा चल रही थी जो उन सरसों के पत्तों को छेड़ती हुई ऐसे आगे बाद रही थी मानो अटखेलिया कर रही हो, और उस ठंडी हवा क कारन उन पौधों क बीच एक धीमी सी सरसराहट भी पैदा हो रही थी, पर सायद कुछ लोग थे वह जिन्हे उन सब से कोई फर्क नहीं पद रहा था

खेत के एक तरफ एक छोटा सा तालाब था, जिसका पानी सूरज की किरणों में चमक रहा था और उसके किनारे पे एक पुराण पीपल का विशाल पेड़ खड़ा हुआ था

सूरज की किरणें अब dheere-dheere लाल होनी सुरु हो चुकी थी और खेत का रंग सुनेहरा पीला हो चूका था मानो जैसे उन फूलों में सूरज की हलकी सी लालिमा घुल गयी हो

और ऐसे मनोरम दृस्य क बीच सरसो क उस खेत क ठीक बीचों बीच एक कामुक खेल खेला जा रहा था

जहा एक तरफ दूर दूर तक पूरी शांति चाय हुई थी और जहा देखो वह सिर्फ सरसों क फूलों से लाडे हुए खेत hi नज़र आ रही थे वही इस समय इस खेत क ठीक मध्य में एक खूबसूरत औरत अपने दोनों हाथों को खेत की कच्ची मिटटी पे जमाये हुए झुकी हुई थी.. उसकी कामुक और दूध से भरी और लजारती बड़ी बड़ी गोल सख्त चूचिया नीचे हलके से लटकने की कोशिश कर रही थी, पर उनमे कसावट इतनी ज्यादा थी की वो उस हालत में भी किसी विशाल पर्वत की छोटी सी नुकीली तानी हुई थी नज़र आ रही थी.. पर ऐसा भी लग रहा था जैसे हलके पड़ते थपेड़ो क कारन उनमें खूबसूरत सी थिरकन भी हो

tumblr-o0sf8txnid1v4nc4lo1-500.gif


उसका दूध जैसा मखमली जिस्म उस सुनहरी किरणों क बीच और सरसो क फूलों क मध्य में ऐसा नज़र आ रहा था मानो खूबसूरती की परिकाष्ठा यही आके समाप्त होती हो

अब ये लिखने या बताने की जरुरत तोह है नहीं की वो औरत इस समय पूर्ण रूप से निवस्त्र है.. यानि उसके सरीर पे कपडे का एक सूत भी नज़र नहीं आ रहा था

और ऐसी अवस्था में झुकी हुई वो औरत इस समय यहाँ अकेली नहीं थी, अपितु उसका साथ देने क लिए 3 जवान लड़के वह उपस्थित थे.. और तीनो ने hi अपनी अपनी जगह ले राखी थी

उन तीनो में से एक जवान होता हुआ लड़का जो दिखने में काफी hast-pust था पर रंग से थोड़ा ज्यादा hi काला था वो इस समय उस औरत क पीछे जमा हुआ था और पूरी मुस्तैदी से अपने कार्य में लीं था

"आज मुझे अपनी किस्मत पे यकीन नहीं हो रहा है.. की मेरा लुंड इस गाओं की सबसे खूबसूरत औरत की कासी हुई गांड में है"

images-4.jpg


वो जवान होता लड़का अंततः अपने विचार व्यक्त कर hi देता है, वैसे वो इस समय उस खूबसूरत और हलकी गुलाबी जिस्म वाली उस औरत क पीछे से चिपका हुआ था और उसके दोनों हाथ उस औरत की कमर को थामे हुए थे और उसका विशाल मोटा काला लुंड उस औरत की कासी हुई गांड क छेद में पूरा अंदर भरा हुआ नज़र आ रहा था

ये तोह था इन तीनो में से तीसरा लड़का, अब दूसरे वाले की बात करते है.. ककी वो इस समय उस औरत क ठीक आगे जमा हुआ था और उसका काम सायद उस खूबसूरत औरत क मुंह को बंद रखना था.. वो भी अपने मोठे विशाल और भयंकर लुंड से

यानि उस दूसरे लड़के का मोटा लुंड उस खूबसूरत औरत क मुंह की गर्मी को बर्दाश्त कर रहा था, और वो लड़का इस कार्य में बहुत खुस भी नज़र आ रहा था.. तभी तोह वो पूरी म्हणत कर रहा था और अपने घुटनों पे बैठा हुआ उस औरत क मुंह की गहराई नाप रहा था

"आआआह्ह्ह्ह.. मेरी जान मालती.. उफ्फफ्फ्फ़ तेरा मुंह भी छूट वाला मज़ा देता है.. आआह्ह्ह्हह्ह साललललईईईई.... जोर जोर से चूस... ेस्स्स्सह्ह्ह.... Maaaaaaaaaaaaaaaaa"

bootygifswillmakeyoucum-001.gif


तोह अब उस दूसरे लड़के की बातों से ये तोह साफ़ हो गया की ये औरत और कोई नहीं अपितु कुंदन की पत्नी और मोनू की माँ मालती है

तभी उस औरत क पीछे अपनी इस्थिति पे जमा हुआ वो तीसरा लड़का पुरे वेग से अपना लुंड बहार निकलता है और उसी गति से वापस उस खूबसूरत गांड में अंदर तक उतारते हुए कहता है

"आआआअह्ह्ह्ह... यकीन नहीं होता.. मैं मालती चची को छोड़ रहा हु.. आआह्ह्ह्ह..

यकीन नहीं कर प् रहा हु की मेरा लुंड उनकी गांड की गहराई नाप रहा है"

"कमीने पूरा लुंड मेरी माँ की गांड में घुसाने क बाद भी तुझे यकीन नहीं हो रहा है"

ये अनमोल सब्द थे मालती क सुपुत्र मोनू क जो उन तीनो में से पहला था और वही पास में पूरा नंगा होक अपने हाथ में अपना लुंड थामे हुए उस दृस्य को देखे जा रहा था.. की कैसे आज उसकी माँ की गांड में एक मोटा लुंड विलीन हो रहा है और कैसे कोई उसकी माँ क मुंह की गर्मी को ठंडा कर पाटा है ?

hardcore-scaled.webp


मोनू की बात का उत्तर भी मिलता है

"Aaahhhhhhhhhhhhhhhhhh...... किया करू मोनू.. इस गांड क सिर्फ सपने hi देखते थे

मुझे किया पता था, कभी ये सपना सच भी होगा

यकीन नहीं हो रहा है.. की मैं आज तेरे सामने hi तेरी माँ छोड़ रहा हु.. Aaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh............... मनुउउउउउ देख..."

उस लड़के क धक्के अब इतने जोरदार हो चुके थे की हर जोरदार दक्का मोनू की माँ का पूरा जिस्म हिला दे रहा था, उसकी बड़ी बड़ी चूचिया ऐसे हिलोरे कहते हुए हिल रही थी की देखने वालों का पानी यही उसके लुंड से बहना सुरु कर दे.. वही उस जवान और काला लड़के क जोरदार दक्कों क कारन उसके मोठे मोठे ाँद जब कुंदन की पत्नी की जांघ से टकराते तोह पुरे खेत में पत्ततत्तट्ठह्ह........ Phhhhhaaaatttttttttttttt.... phhhhaaaaaaaaaaaaatttttttttt... की मधुर आवाज़ गूंज जाती

anal-gif-hard-anal.gif


मालती पूरी तरह पागल होती जा रही थी ककी इन जोरदार दक्कों क साथ साथ उसके सरीर में एक मीठा मीठा दर्द भी फैला हुआ था.. जो उसकी गांड क धीरे धीरे चौड़ा होने का सबूत भी था

उसकी गांड में घुसता वो मोटा लुंड उसे पूरी तरह आनंदित तोह कर रहा था पर साथ hi साथ वो अनोखा दर्द भी दे रहा था जिसे महसूस करते हुए सायद मालती कहना च रही होगी

'Aaaahhhhhhhhhhhh... haiiiiiiiiiiiiiii.. Maaaaaaaaaaa.......... आअज पहहहहादददद दे बीटा मेरी गांड को.. Aaaahhhhhhhhh...Jor से पहाड़... और जोर से... आआआहहहहह.... Maaaaaaaaaaaaaaaaa'

पर वो ऐसा बोल नहीं सकती थी ककी उसके मुंह की गहराई में वो मोटा लुंड जो घुसा हुआ था

वही मोनू की बात सुनकर उसकी माँ की गांड में अपना मोटा लुंड घुसाने वाला वो लड़का जैसे है पड़ता है

वही मालती क मुंह वाला मोर्चा संभाले हुए वो लड़का हस्ते हुए कहता है

"साले झींगुर.. किया यकीन नहीं हो रहा ?

इतनी दिएर से मेरी मालती चची की गांड पहाड़ रहा है और बहनचोद कहता है यकीन नहीं हो रहा"

यानि अब ये भी साफ़ था की गांड में सुरंग बनाने का काम करने वाला और कोई नहीं अपितु सत्यम का दोस्त झींगुर यानि जगत है.. और मोनू और मालती का तोह आप जान hi चुके है

पर वो दूसरा वाला कोण है, जो खूबसूरत मालती क मुंह का छोडन कर रहा है ?

"आआह्ह जोर जोर से चूस साली.. देख तेरा बीटा भी देख रहा है, दिखा उसे की तुझमे कितनी गर्मी है"

उस जवान लड़के की बातों का न जाने किया असर होता है खूबसूरत मालती पे की वो अपने मुंह में उस मोठे लुंड को घुसाए हुए एक बार अपने बेटे मोनू की और अपनी नज़रें घूमती है.. और जैसे hi माँ बेटे की नज़रें एक होती है वो लड़का अचानक से अपनी रफ़्तार बड़ा देता है

"आआह्ह्ह... साली दिखा उसे.. ाचा से दिखा.. दिखा उसे की तू कैसे मेरा मोटा लुंड चुस्ती है.. दिखा कुटिया.. दिखा उसे"

मालती पे न जाने कोनसा जूनून सवार हो जाता है.. और वो पूरी हिम्मत से उस मोठे भयंकर लुंड को चूसना सुरु कर देती है, मानो वो सच में मोनू को दिखाना च रही थी की उसकी माँ में कितना दम है

मालती उसी हालत में अपनी नज़रों को ऊपर उठा क उसके मुंह में अपना लुंड घुसते हुए उस इन्शान को देखती है तोह उसके पुरे जिस्म में ख़ुशी की लहर उमड़ पड़ती है और वो अपने काम में लग जाती है

"Srrrrrrppppppppppp..... Srrrrrrppppppppppp....... Srrrrrrppppppppppp..... Ummmmmmmmmm.... ह्ह्ह्हह्हहपपपपपू..... Ghhhhmmmmmmmmmmmm..... Srrrrrrppppppppppp..... उम्मम्मम्मम्मम...... सललललररररररपपपप.... ससससससललललललपपपपपपप..... Ummmmmmmmmmmmmm"

मालती आज अपने अंदर की असली रंडी को जगा देना चाहती था.. ताकि उसके बेटे को देखने का असली मज़ा मिल सके, जो उसे देखते हुए जोर जोर से अपना लुंड मसलता जा रहा था

yum-scaled.webp


मालती पूरी सिद्दत से उस मोठे लुंड की भरपूर चूसै कर रही थी.. जिससे उस दूसरे लड़के का लुंड जोरो से उसके मुंह क अंदर उछाल रहा था और उसके लुंड की नसे भी फूल चुकी थी

"आआअह्ह्ह्ह... देख मोनू.. देख कैसे तेरी माँ मेरा लुंड चूस रही है

अब बता.. किया लगती है तेरी माँ.. मेरी ?"

वही अपनी माँ क साथ ऐसा कामुक खेल होते हुए देख क मोनू की तोह आँखें hi बंद होती जा रही थी, वो तोह बस जोर जोर से अपने लुंड को मसलते हुए उस अनोखे खेल को देखे जा रहा था.. वो कभी अपनी माँ की खूबसूरत और कासी हुई गांड में झींगुर का मोटा अंदर बहार होता हुआ लुंड देखता तोह कभी अपनी माँ क खूबसूरत लाल लाल होंठो क बीच उस काले और भयंकर लुंड का खेल

मोनू क होंठ धीरे से फड़फड़ा पड़ते है और वो जोर जोर से अपने लुंड की चमड़ी को आगे पीछे करते हुए अपनी उखड़ती हुई साँसों क साथ कहता है

"मेरी माँ तुम्हारी... र..."

"चची.. चची.. मेरी जान मालती चची"

अचानक ऐसा लगता है जैसे मालती क कानो में उसके बेटे की आवाज़ नहीं अपितु कोई अलग सी आवाज़ पड़ने लगी हो, और मालती का खूबसूरत जिस्म एक हल्का सा झटका खाता है और अगले hi पल उसकी आँखें खुल पड़ती है

उसकी साँसें थोड़ी तेज़ थी पर जब वो उस आवाज़ की दिशा में देखती है तोह उसे खंडहर क टूटे हुए विशाल दरवाजे क पास उसका भतीजा सत्यम खड़ा हुआ नज़र आता है जो उसकी और hi देखे जा रहा था.. वैसे सत्यम इस समय भी पूर्ण नंगा था और उसका विशाल काला लुंड अब भी उसकी टैंगो क बीच ऐसे लटक रहा था, मानो वो कभी भी नींद से जाग सकता है

मालती को अगले hi पल ये समझते दिएर नहीं लगती की अभी अभी जो हुआ वो सिर्फ एक सपना था.. पर कितना अजीब और कामुक

अजीब इस लिए ककी उसने कभी भी झींगुर को लेके ऐसा कुछ नहीं सोचा.. बल्कि सोचना तोह दूर की बात है वो तोह झींगुर को सही से कभी मिली भी नहीं था, सिवाए इस बात क की वो उसके भतीजे सत्यम का खास दोस्त है

पर अगले hi पल मालती क कानो में सत्यम क वो सब्द गुजने लगते है जो उसने उसकी छूट का कीमा बनाने से पहले जोश में आते हुए कही थी

"सच में.. सही कहता है झींगुर, असली गदराई माल है मोनू की माँ"

मालती क अधरों में मुस्कान खुद hi खेल जाती है की तभी उसे सत्यम क वो सब्द भी याद आते है

जो उसने अपनी पूरी ताक़त का सबूत देते हुए कही थी

"Aaahhhhhhhhhhhh... Saaallliiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii... रंडी.... सोच मैं तुझे ऐसे जोर जोर से छोड़ रहा हु और मोनू हमे देख ले... तोह सोच किया होगा..."

मालती को अब समझते दिएर नहीं लगती की ऐसे अजीब सपने की वजह सायद ये सब्द hi थे.. वो न जाने कैसे एक अनोखे सपने में बदल गए

पर जैसे की लिखा की ये सपना जितना अजीब था उतना hi कामुक भी.. और ऐसा कहने का कारन था मालती की गीली छूट, जो एक बार फिर से गरम और गाड़े पानी को बहाने लगी थी

कितनी हैरानी की बात है न की ऐसी 2 बार भयंकर चुदाई क बाद भी एक सपने ने उसकी योनि को फिर से गीला कर दिया.. और वो भी कितने अनोखे और अजीब सपने ने

मालती अभी भी उस सपने क बारे में hi सोच रही थी की तभी फिर से उसके कानो में सत्यम का सब्द पड़ते है

"घर चलना है या.. तीसरी बार.."

30022421-012-a533.jpg


मालती का जिस्म कामुकता से कंपकपा उठता है, वो जल्दी से सबसे पहले बहार की और देखती है तोह उसे हैरानी होती है की बारिश लगभग बंद हो चुकी थी.. पर अब भी हलकी और नन्ही बंधे नज़र आ रही थी, पर ऐसे मौसम में इससे ज्यादा सायद hi कुछ होने वाला था

इसलिए मालती बिना कोई विलम्ब क अपनी जगह से उठती है और सबसे पहले उसे वही आग क पास पड़े उसके कपडे नज़र आते है, जिन्हे वो बिना समय व्यर्थ करे उठा लेती है और पहनना सुरु कर देती है.. पर ये किया उन कपड़ों में उसकी ब्रा नहीं थी

मालती- (इधर उधर देखते हुए) बीटा.. वो मेरी.. ?

इतना सब होने क बाद भी मालती एक ब्रा सब्द बोलने में शर्मा रही थी.. वही सत्यम उसे देखते हुए धीरे से अपने लुंड पे हाथ फिरते हुए कहता है

"किया हुआ चची.. वैसे में समझ सकता हु

ककी मेरा भी मन है की एक और बार..."

मालती.. सत्यम की बात सुनकर उसकी और देखती है तोह वो पाती है की सत्यम उसके नंगे सरीर को देखते हुए धीरे धीरे अपना लुंड मसल रहा था और मुस्कुरा रहा था

मालती जल्दी से बिना ब्रा क hi अपना ब्लाउज पेहेनते हुए

"चुप कर.. तू भी कपडे पेहेन जल्दी से, मौसम का कोई भरोषा नहीं"

वैसे तोह मालती ने ये बात कह दी थी, पर उस सपने क कारन उसकी कामुकता की अग्नि में फिर से घी पद चूका था

अगले 10 मं बात मालती और सत्यम उन नन्ही बँधो क बीच अपने घर की और कदम बड़ा चुके थे

वही बिना ब्रा क होने क कारन मालती क हलके भीगे हुए ब्लाउज में उसके जामुन जैसे निप्पल्स का आकर साफ़ साफ़ नज़र आ रहा था

पर किस्मत से अभी तक उन्हें कोई मनुस्य नहीं मिला था.. जो हमारी खूबसूरत मालती को ऐसे अवतार में देख पाटा, पर सवाल ये था की किया घर तक की ये यात्रा इतनी hi सरल होगी

ककी जिस रस्ते पे मालती और सत्यम आगे बाद रहे थे.. उसी रस्ते से कोई उन दोनों की और भी आगे बाद रहा था

वही सत्यम.. मालती क ठीक बगल में चलते हुए एक बार को मालती क तने हुए निप्पल्स पे अपनी नज़र डालता है और हलके उछलते हुए उसके दूध देख क उसके चेहरे पे एक कामिनी सी मुस्कान खेल जाती है

उसकी आँखों में आयी वो चमक उसकी आँखों क आगे वो दृश्य उत्पन्न करने लगती है जब उसने जान क मालती की ब्रा को वही उस खंडहर में उसी जगह रख दिया था जहा से उसे वो चटाई और लालटेन मिली थी

मानो जैसे वो उस ब्रा क द्वारा उस खंडहर में जाने वाले अगले व्यक्ति को बताना च रहा हो की वो ब्रा इस बात की निशानी है की उसने वह एक औरत को नंगा किया था.. और ये काम उसने तब किया था जब मालती उस अजीब से सपने में खोयी हुई थी

स्टोरी कंटिन्यू.. इन अपडेट #19, सन 02

नष्ट अपडेट ों वेडनेसडे ( 10-09-25)
 
Latest Update 🆕 on Page No. 338 👇

Post in thread 'मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas)'
 
गौरैया तोह याद hi होनी न 😉

IMG-20250605-094417-764.jpg
 
प्रीवियस अपडेट ों पेज No. 📃 338

अपडेट #19


सन 🖼️ #02

गौरैया का पति.. गांड का दीवाना




93837070-021-fd99.jpg


नोट 🖋️


Gauraiya ko agar nahi jaante toh kripya pehle ye Update jarur pade

Update 17, Scene 🖼️ 01 (Part 02) 👇

Post in thread 'मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas)'


📖

सुंदरपुर गाओं मैं आज सुबह से ठण्ड ने अपने पेअर पसर लिए थे और मौसम क तोह कहने hi किया.. मालती जिस समय मंदिर पहुंची थी उसी समय मौसम कुछ ऐसा था की आज चारो और ठण्ड की चादर फैली हो और वो भी एक ऐसी ठंडी चादर जिसके अंदर रौशनी भी धीरे धीरे अपना दम तोडना सुरु कर चुकी हो

ककी उस समय तक हवाएं काफी ज्यादा ठंडी हो चुकी थी और वह मंदिर क पास मालती, सत्यम और उनसे मिली गौरैया.. ये तीनो क hi जिस्म पूरी तरह ठण्ड से कांपने सुरु हो चुके थे

और बेचारे सूरज मां पूरी तरह से चुप चुके थे और उस कारन धीरे धीरे पूर्ण अँधेरे बढ़ता जा रहा था.. जिस कारणवस ऐसा लग hi नहीं रहा था की उस समय सुबह क 9 बज रहे होंगे

आसमान में एक अजीब सी ख़ामोशी थी जैसे बारिश कभी भी पुरे गाओं को भिगोने का कार्य कर सकती है, पहाड़ और जंगलों से घिरा सुंदरपुर कुछ ऐसा hi है.. यहाँ वर्षा ऋतू कभी भी च जाती है

10065816ee64d4b1ef9468eaa8a9618b.jpg


मुरली दस क घर की कहानी तोह हमने काफी जान ली, पर आज समय है ऐसी गाओं क एक और घर की और चलने की.. वैसे इस घर और इनके लोगो क बारे में बताने का अपना hi एक कारन है जो आगे आप जान hi जायेंगे

अभी क लिए इस घर में प्रवेश करते है

ये घर है 55 की आयु वाले 'चुम्बक लाल' का, जहा वो अपने बेटे और बहु क साथ रहते है

8d37ef6f2aa6a3f08b003fa0097e7f31.jpg


ककी उसकी धर्मपत्नी 'कोकिला देवी' ने तोह आज से करीब 10 साल पहले hi ये दुनिया चोर दी थी और तबसे लेके आज तक वो अकेले hi है.. पर जब उनके घर में गौरैया ने कदम रखा तोह घर की खुशियां मानो लौट सी आयी

और यहाँ बात भी गौरैया की hi होने वाली है.. करीब 31-32 साल की गौरैया 'चमन लाल' की पत्नी और 'चुम्बक लाल' की बहु है

'चमन लाल' गाओं का एकलौता सुनार है और गाओं क सबसे शक्तिशाली आदमी यानि ठाकुर साहब का खास भी है.. गाओं क किसी गरीब किशन को जब पैसे की जरुरत होती है तोह चमन लाल hi उसके काम आता है पर बदले में चमन लाल ाचा ब्याज भी वसूलता है

और अगर कभी कोई किशन समय पे पैसे नहीं नहीं दे पाटा तोह चमन लाल उसे ठाकुर साहब का दर भी दिखने से पीछे नहीं हत्ता

वैसे तोह चमन लाल अपने ब्याज का काम और ज्यादा बढ़ाना चाहता था, पर जब कुंदन क पिता 'मुरली दस' इस गाओं क सरपंच थे तब उन्होंने एक नियम बनाया था की अगर कोई किशन किसी कारणवस किसी क पैसे नहीं चूका सकता तोह कुछ भी हो जाये पर बदले में उसकी जमीन कभी नहीं हड़पी जाएगी.. और इस फैसले से सबसे ज्यादा कास्ट चमन लाल को hi हुआ था

चलो वापस गौरैया पे लौट आते है..

गौरैया का पति 'चमन लाल' भी अपने बाप जैसा hi सुनारी का काम करता है पर वो ये काम पडोसी गाओं 'लोभी गाओं' में करता है.. ककी इस गाओं में तोह उसके पिता का नाम पहले से hi चलता है

d82f6647a28192a50709dbd3844313fb.jpg


चमन लाल

और लोभी गाओं में उसका काम सुरु करवाने में ठाकुर साहब का hi हाथ था, अब इसके पीछे किया कारन है ये तोह चुम्बक लाल या चमन लाल hi जान सकते है

जैसा की पहले भी बताया था की गौरैया की शादी को लगभग 6 साल होने को है.. पर अभी तक उसे माँ बनने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हो पाया है, ऐसी कारन वो हर सुबह अपने घर से नंगे पाऊँ मंदिर आती है और पूजा करने क बाद उसी अवस्था में वापस भी लौटती है

उसने प्राण किया है जी जबतक उसके गर्भ में बीज नहीं ठहरेगा वो ऐसा hi करती रहेगी

अगर गौरैया क सरीर की बात करू तोह वो हलकी सावली और पक्के रंग की है, पर उसकी बड़ी बड़ी आँखें और उसका सलोना सा मुखड़ा बहुत hi सुन्दर लगता है

IMG-20250910-005142-277.jpg


ज्यादातर साड़ी पहनने वाली गौरैया अपने घर क सरे काम खुद hi करती है, उसके ससुर जी ने कई बार उसे कोई नौकरानी रखने क लिए कहा पर वो हमेशा मन कर देती है.. सच तोह ये है की उसे घर का काम स्वयं करना hi ाचा लगता है

वैसे तोह गौरैया का सलोना मुखड़ा हमेशा खिला hi रहता था पर अब धीरे धीरे इतने सालों से बचे की आस लगाए बैठी गौरैया की खूबसूरती भी मानो अपना दम तोड़ती जा रही है.. उसके सलोने चेहरे का निखार मानो कही खो सा गया था और वो हर समय कुछ भुजी भुजी सी रहती है

पर इसका ये मतलब नहीं की उसके अंदर की आग ठंडी हो चुकी है, वो तोह दिन प्रतिदिन बढ़ती hi जा रही है

यु समझो उसकी आग में हर रोज़ सिर्फ घी डाला जा रहा था.. उसे भुजने की कोशिश नहीं की जा रही थी

अगर उसके कामुक अंगों की बात करू तोह पूरा hi सरीर कॉमर्स से भरा हुआ है, उसकी 32डी की चूचियों को देख क ऐसा लगता है जैसे उन्हें उतना नहीं मसला गया है जितना उसे मसल और चूसा जाना चाहिए

81300866-056-0e42.jpg


पर अगर उसकी बड़ी और मोती हिलती हुई गांड की बात करू तोह माहौल पूरा बदल जाता है.. ककी जहा उसकी चूचियों में अभी उभर नहीं आया है वही उसकी गांड कुछ ज्यादा hi निखार लिए हुए है

ऐसा लगता है साड़ी म्हणत वही पे करि जा रही है

आशा है अब आप गौरैया और उसके परिवार क बारे में काफी कुछ समझ गए होंगे.. तोह चलिए घर क अंदर प्रवेश कर hi लेते है

चुम्बक चाचा की सलोनी सूरत वाली बहु गौरैया इस समय अपने घर के आँगन में झाड़ू लगा रही थी.. मंदिर से लौटकर आने में उसने देरी नहीं की इसलिए वो बारिश की बूंदों से बच पायी थी

पर इतना लम्बा सफर करने क कारन उसके जिस्म पे पसीने की मोतियों सामान बंधे नज़र आने लगी थी.. वैसे तोह वो काफी थक चुकी थी पर फिर भी आते hi उसने जादू उठा लिया था और घर क बचे हुए कामो में लग चुकी थी

उसकी साड़ी का पल्लू ठंडी हवा क कारन हौले हौले ुध रहा था जिससे उसकी कामुक और ुनचुइ चूचियों की घाटी नज़र आने लगी थी, और खुले आँगन में उसके ऐसे कामुक सरीर को निहारने वाला भी कोई मौजूद था.. पर सायद गौरैया को ये पता नहीं था या ये भी संभव है की उसे ऐसी किसी चीज़ की उस व्यक्ति से उम्मीद न हो

गौरैया का आँचल उसकी पक्के रंग वाली त्वचा पे कभी उड़ता तोह कभी धीरे से आके उसकी लाज को बचने का काम करने लगता.. वही उसका ब्लाउज जो उसकी लगभग ुनचुइ चूचियों को कैद किये हुए था, वो भी उसके झुके होने क कारन उसके यौवन को बहार निकलने की कोशिश में लगा हुआ था

नंगे पाऊँ घर से मंदिर और फिर मंदिर से घर की यात्रा क कारन उसका सरीर अब भी पूरी तरह पसीने से भीगा हुआ था और उसके ब्लाउज क अंदर उसकी ब्रा की पट्टी को दिखने का कार्य करने लगा था.. कुलमिला क ऐसे ठन्डे मौसम में भी उसके यौवन का झरोखा खुला हुआ था

Screenshot-20250909-212229-1.png


गौरैया काफी थकी हुई नज़र आ रही थी और इस कारन पसीने की nanhi-nanhi बूँदें उसके मुख और बालों से बहती हुई उसके ब्लाउज के विशाल गले में खो सी रही थी.. जिसका परिणाम ये निकल रहा था की उसका ब्लाउज जगह जगह से पसीने क कारन भीग चूका था और उस कारन उसके जिस्म से एक भीनी भीनी सी कामुक खुसबू निकलने लगी थी

पर गौरैया किसी भी बात की परवा किये बिना अपने कार्य में लगी हुई थी और उसकी badi-badi गहरी और कामुक आँखें अपने काम पे तिकी हुई थी.. उसके होंठ हलके से खुले हुए थे और उसकी सांसें झाड़ू लगते हुए थोड़ी भारी हो रही थी

कुछ थकन क करना तोह कुछ इतनी दिएर से झुके हुए पुरे आँगन में झाड़ू लगाने क कारन भी

उसकी मोती उठान लिए हुए कामुक गांड उसकी साड़ी क अंदर पूरी तरह पसीने से भीग चुकी थी, जिस कारन गांड की दरार वाले हिस्से पे हल्का पसीने का डब्बा भी नज़र आ रहा था

वही जब गौरैया आँगन में उपस्थित उस व्यक्ति की और घूम क झाड़ू लगाती तोह उस बेचारे की साँसे उखाड़ने लगती और उसकी धोती में मौजद उसका नाग फैन फ़ैलाने लगता.. पर वो बेचारा उसको अपने हाथों से मसलने क अलावा और कुछ नहीं कर सकता था

गौरैया की मोती गांड जहा झाड़ू लगाने क कारन बार बार नरतिय कर रही थी वही उसकी मासूम चूचिया उस ब्लाउज से बहार आने को तड़प रही थी.. और ऐसे मैं जब गौरैया झाड़ू लगाने क लिए कही पे कुछ ज्यादा झुकती तोह मानो दर लगने लगता की कही उसकी दोनों चूचियों उछाल क बहार न निकल आये, ककी झाड़ू लगाने क कारन गौरैया की ब्लाउज में कासी हुई चूचिया हौले हौले हिलोरे मार रही थी

गौरैया क घर क आँगन में अमरुद, निम्बू और पपीते क पेड 🌴 भी लगे हुए थे और वही उन्ही पैदा क पास एक पुराणी सी चारपाई पे उसका पिता सामान ससुर 'चुम्बक लाल' बैठा हुआ था और धीरे धीरे अपने हुक्के से धुआँ खींच रहा था

गौरैया जब भी अपने ससुर की और घूमती तोह वो उन्हें अपनी और hi देखते पाती जिससे जब भी दोनों की नज़रें आपस में टकराती तोह दोनों hi धीरे से मुस्कुरा पड़ते.. और फिर गौरैया वापस से अपने काम में लग जाती, पर इसमें कोई कामुकता का अंश नहीं था.. कमसेकम गौरैया की तरफ से तोह बिलकुल नहीं

Screenshot-20250909-212216-1.png


गौरैया अपने ससुर जी को बाबूजी कहती है, और वही बाबूजी इस समय आराम से उस चारपाई पे बैठे हुए हुक्के का आनंद लिए जा रहे थे

वही चुम्बक लाल अपने नाम क अनुरूप hi इस समय झाड़ू लगाती हुई अपनी बहु की और खींचा चला जा रहा था, वो बार बार कोशिश करता की वो उस न देखे पर हर बार वो हार जा रहा था.. और किस्मत की hi बात थी की जितनी बार भी उसने चोरी छुपे अपनी बहु को देखने की कोशिश की उतनी बार गौरैया उसी की और मुंह किये हुए झाड़ू लगाती हुई मिली

जिससे हर बार उसे उसकी बहु क ब्लाउज से बहार आने को आतुर उसके फड़फड़ते हुए कबूतर क दर्शन हो रहे थे, जिसका सीधा असर उसकी धोती क अंदर उसके नाग पे हो रहा था

चुम्बक लाल हर बार हुक्के का कास भरने क बाद पहले इधर उधर देखता और फिर मौका देख क अपनी बहु क यौवन में खो जाता.. और इस बार तोह उसकी किस्मत कुछ ज्यादा hi जोरो पे थी

ककी इस बार उसने जैसे hi अपनी बहु की और देखा उसकी साँसें hi उखड़नी सुरु हो गयी.. ककी इस बार गौरैया की भरी और मोती गांड उसकी और थी, और ऐसा लग रहा था जैसे वो कुछ ज्यादा hi हिल रही थी

बेचारा चुम्बक लाल एक पल क लिए तोह सांस लेना hi भूल गया था, और अनायास hi उसके मुंह से दबे दबे ये सब्द निकल पड़ते है

"आआआआअह्हह्ह्ह्ह... किया मोती गांड है मेरी बहु की"

"कुछ कहा किया बाबूजी.. ?"

सायद चुम्बक लाल क ये टूटे फूटे सब्द उसकी बहु गौरैया क कानो तक भी पहुंच गए थे

चुम्बक लाल जल्दी से अपनी इस्थिति को सँभालते हुए

"अरे वो मैं.. है मैं कह रहा था की.. वो

अरे वो.. ये की.. वो...

यही की.. की तू नौकरानी क्यू नहीं कर लेती

ऐसे ाचा थोड़ी लगता है की मेरी बहु घर क काम करे"

अपने ससुर जी बात सुनकर गौरैया मुस्कुरा पड़ती है और अपनी जगह पे सीधी कड़ी होक हस्ते हुए कहती है

"घर मेरा है तोह काम भी मैं hi करुँगी न बाबूजी.. और वैसे भी हम 3 hi तोह लोग है यहाँ"

चुम्बक चोरी छुपे अपनी बहु की नंगी कमर और उसके पसीने की बंधे देखते हुए

"घर तोह तेरा hi है.. पर तू तोह मेरी रानी.. मेरा मतलब घर की रानी है


ऐसे ाचा थोड़ी लगता है की तू सब काम करे"

"किया बाबूजी आप भी न.. आपको कुछ चाहिए तोह नहीं"

चुम्बक लाल मुस्कुरा क बस न में सर हिला देता है, वैसे उसके होंठो पे न जरूर थी पर मन में कुछ पाने की 'है' थी

गौरैया वापस से बचे हुए हिस्से में झाड़ू लगाने लगती है पर इस बार उसका पल्लू पूरी तरह उसके जिस्म का साथ चोर देता है जो उसके यौवन को खुली हवा में ठंडक देने का काम करते है.. गौरैया को जैसे hi अपनी गहरी पर प्रेम से वंचित चूचियों की गहराई में ठंडी हवा महसूस होती है वो जल्दी से उठ कड़ी होती है और अनायास से उसकी नज़र सबसे पहले उसके ससुर पे जाती है, जो किसी भूखे बचे की तरह अपनी माँ क स्तनों की और देख रहा हो

गौरैया का पूरा सरीर शर्म से लाल हो जाता है, वही चुम्बक लाल भी अपनी बहु को सँभालते देख जल्दी से इधर उधर देखना सुरु कर देता है

गौरैया मन hi मन सोचने पे मजबूर हो जाती है

'किया जरुरत थी मुझे ऐसी समय झाड़ू लगाने की, थोड़ी दिएर रुक भी तोह सकती थी.. पता नहीं बाबूजी की मेरे बारे में किया सोच रहे होंगे'

गौरैया से अब वह और नहीं रुका जाता इसलिए वो अपनी नज़रों को चुराते हुए सीधा अपने कमरे की और चल पड़ती है और झाड़ू को भी वही एक किनारे रख देती है

सायद चुम्बक लाल भी इस अजीब सी इस्तिथि को समझ गया था इसलिए वो भी अपना हुक्का उठाते हुए अपनी जगह से उठता है और थोड़ा जोर से बोलता है ताकि आवाज़ अंदर गौरैया क कानो तक पहुंच सके

"चलो अब दुकान पे बैठा जाये.."

चुम्बक लाल अपनी बात कहते हुए बिना किसी अतिरिक्त विलम्ब क सीधा घर क बहार hi बानी अपनी दुकान की और चल पड़ता है

वैसे बता दू की चुम्बक लाल, गाओं क उन कुछ गिने चुने लोगो में से एक है जिसका घर पूरी तरह पक्का और साडी सुख सुविधा से सुसज्जित है

बिजली से लेके आधुनिक स्नानघर जैसी साडी सुख सुविधा उपलब्ध है उसके वह, पर खुद चुम्बक लाल पूरी तरह देसी है.. अगर कुछ अलग है तोह उसका लालच

जो इस उम्र में भी उससे झूट और घृणित कार्य करवाता रहता है, यु समझ लो की अगर बात पैसों की हो तोह किसी भी हद तक जा सकता है

चुम्बक लाल.. सुंदरपुर गाओं का एकलौता सुनार है इसलिए उसकी दुकान भी सेहर जैसी तोह नहीं पर काफी अचे से सजी और भरी रहती है

चुम्बक लाल की दुकान पे एक लड़का कार्य संभालता है जो उसकी अनुपस्थित में ग्राहकों को रोकता है ककी चुम्बक लाल हर सौधा खुद hi करता है, यानि अगर वो कभी घर क अंदर आता है तोह उस लड़के का कार्य सिर्फ इतना है की वो उसकी अनुपस्थित में दुकान में आये लोगो को रोके रखे और इससे चोरी का खतरा भी नहीं होता

चुम्बक लाल अपनी धोती में उछाल मरते अपने काले नाग को सँभालते हुए बहार आता है और सीधा अपनी दुकान में आके अपनी गद्दी पे बैठ जाता है

वही अब दूसरी और गौरैया क पास चलते है

गौरैया पूरी तरह थकी चुकी थी, इसलिए अंदर कमरे में आते hi बिस्तर पे पसर जाती है.. और लैट्टे hi लम्बी लम्बी साँसें भरने लगी थी, जिससे उसके ब्लाउज में कासी हुई उसकी अनुचि चूचियों में एक उबाल सा दिखने लगता है

गौरैया लेते ललिते खुद से कहती है

"पता नहीं बाबूजी मेरे बारे में किया सोच रहे होंगे, पल्लू को भी उसी समय हटना था

आशा है बाबूजी मुझे गलत नहीं समझेंगे"

गौरैया एक लम्बी सांस भरते हुए खुद से कहती है और कुछ पलों क लिए अपनी आँखों को बंद कर लेती है की तभी उसे बारिश का तेज़ स्वर सुनाई पड़ता है.. मानो वर्षा ऋतू पुरे जोर से अपने आगमन का सन्देश दे रही हो

गौरैया अपनी जगह से कड़ी होती है और कमरे की खिड़की क पास आके आँगन में तेजी से पानी क आगमन की और देखने लगती है

"आज सुबह से hi बादलों का रुख बता रहा था की ऐसा hi कुछ होने वाला है.. यानि ठण्ड और ज्यादा बढ़ने वाली है"

खिड़की पे कड़ी गौरैया बहार तेज़ बारिश का शोर सुन रही थी की तभी उसे उस शोर में बीती रात याद आणि सुरु हो जाती है.. जब हर बार की तरह उसके पति 'चमन लाल' ने उसे गोदी बनने का आदेश दिया था

"आप समझते क्यू नहीं जी.. ऐसे हम कभी भी माँ बाप नहीं बन पाएंगे, उसके लिए आपको.."

गौरैया उस समय पूरी तरह निवस्त्र अवस्था में थी और उसके सरीर का सूखापन बता रहा था की उसके सरीर से अभी प्रेम नहीं किया गया है

चमन लाल.. जो अपनी धोती को खोल चूका था और उसका मोटा 7" का सावला लुंड पूरी तरह अकड़ और अहंकार से सर उठाये हुए खड़ा था, वो उसपे हाथ फिरते हुए मुंह बना क कहता है

"देखो गौरैया.. तुम्हे अचे से पता है मुझे योनि में मज़ा नहीं आता

वो भी कोई छोड़ने की चीज़ है, अरे मज़ा तोह कासी गांड क छेद में लुंड घुसाने का है.. जब लुंड गांड की दीवारों को धीरे धीरे फैलते हुए उस संकरी गली में अंदर घुसता है तोह उसके घरसँ से जो आननद आता है उसकी बात hi अलग है"

93837070-074-efa8.jpg


Chaman Lal jis khubsurti se Gand aur lund k khel ka bakhan kar raha tha usse ye toh saaf tha ki use kis cheez ka sauq hai.. wo apne lund pe hath firate hue phir se kehta hai

"Intizar kis baat ka hai, laao apni Gand edhar karo jaldi se.. mera lund usme ghusne k liye baitaab hai"

Gauraiya puri tarah bidak padti hai

"Are Aap samajhte q nahi.. 6 saal hone ko hai, aapko nahi toh mujhe hi Maa banne ka sukh de dijiye

Pata hai ki Gaon k bade buddhe kaisi kaisi baat karte hai"

Chaman Lal bhi ghusse se bhadak uthata hai

"Tumhara ye roz ka natak ho gaya hai, har baar khade lund pe laat marne ka sauq ho chuka hai tumhe

Aakhiri baar bol raha hu.. mujhe bache se koi dikkat nahi par mujhe Yoni Chodan mein anand nahi aata, aur jis cheez mein anand nahi wo kaam mujhe pasand nahi"

Gauraiya maano ro hi padegi, par wo khud ko sambhalte hue

"Aap q nahi samajhte.. har cheez ki ek prakriya hoti hai aur use pura kare bina..."

"Wo sab mujhe mat sikhao, dekho agar tumhari Yoni mein itni hi aag lagi hai toh koi yaar dhund lo

Qki mujhe toh sirf Gand mein Lund daal k hi sukun milta hai"

Chaman Lal ne apni Patni ki baat ko beech mein hi kaate hue apna aakhiri failsa suna diya tha

Wahi apne Pati k munh se aisi gandi baat sunkar Gauraiya ki aankhein bhar aayi thi

"Ye aap kaisi baat kar rahe hai, aapko main aisi aurat lagti hu"

Chaman Lal apni Patni ki aankhon mein aansu dekh k dhire se samjhane ki koshish karte hue kehta hai

"Dekh aaj kal ye koi badi baat nahi hai, balki main toh kehta hu agar tumhe koi pasand hai toh bula sakti ho.. bas dhiyan rakhna Babuji aur bahar walon ko pata na chale"

Gauraiya ko toh apne kaano pe yakeen hi nahi ho raha tha, uska haal toh aisa tha jaise koi use abhi kaat bhi de toh syaad khoon na nikle

"Aapka dimaag theek hai.. jante bhi hai kiya bakwas kar rahe hai, aap mere bare mein aisa soch bhi kaise sakte hai

Itne saalon se aapke prem k liye minnaten kar rahi hu.. aur aap mujhe.. Chiiiii"

Chaman Lal kisi chikhne ghade saman shant rehta hai aur apni baat kehta hai

"Dekho tum samajhti q nahi.. Yoni k naam pe mera lund hilta bhi nahi hai, par Gand ki khusboo bhi ese mil jaaye toh saala shant nahi hota

Esliye main khud tumhein puri azadi de raha hu, agar Shadi k pehle ka tumhara koi yaar ho toh..."

Gauraiya k sabr ka band ab tut jaata hai

"dur ho jayie meri aankhon k samne se.. warna na jane aaj main kiya kar baithungi"

Chaman Lal samajh jata hai ki abhi aur baat badane se koi fayda nahi, qki unke shor sarabe se Babuji bhi uth sakte hai

Esliye wo bina kuch bole takiya aur ek razai leke chat wale kamre ki aur chal padta hai

Chaman Lal seediyon pe chalte hue

"Ajeeb Pagal aurat hai.. are main khud itni azadi dene ko tayyar hu par eske sar pe toh sati Savitri banne ka bhoot sawar hai

Ye auraten bhi na.. na jane kiya chahti hai"

Edhar Kamre mein Gauraiya puri tarah nivastr hoke bistar pe padi aansu bahane lagi thi aur dekhte hi dekhte uski dhundli aankhein saaf hone lagti hai aur wo khud ko aaj mein wapas lauta hua paati hai.. yani usi khidki pe khadi hui bahar aangan mein girte barish k paani ko dekhte hue

Raat ki beeti hui baat yaad karte uski aankhon mein phir se aansu bhar aate hai.. wo apne Pallu se apne aansu pochte hue bahar hi dekh rahi thi ki tabhi uske kaano mein aaj Maalti k wo sabd ghunjne lagte hai jo usne uske liye kahe thay

'Mayush q hoti hai, dekhna ek din tu bhi ek piyare se bache jo janm degi.. bilkul mere Monu jaisa'

Maalti ki kahi ye baat uske liye jeevan jeene ka ek karan si ban jaati hai, maano bujte hue deepak mein halka sa tail aur daal diya gaya ho

Gauraiya ek lambi saans bharte hue khud se kehti hai

"Kiya kabhi meri khookh mein beej padega.. ?"

Gauraiya ek lambi saans lete hue Maalti k bare mein sochte hue kehti hai

"Maalti Bhabhi ka Beta.

. Monu kitna piyara hai, kash Mera bhi bacha aisa hi ho"

Par Gauraiya ko nahi pata tha.. Maalti ki us baat pe wahi dur khade ek buddhe ne muskurate hue kaha tha

"तथास्तु"

NXT Scene 🖼️

Maalti... (Mega Update)

Story Continue.. in Update #19, Scene 03
 
Back
Top