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सुबह क करीब 10:15 हुए होंगे और अपने जवान बेटे को उठाने क बाद हर्षिता क जिस्म क अंदर काफी रंगीन तरंगे उठानी सुरु हो चुकी थी, वो मुस्कुराते हुए सीधा रसोईघर की और चल पड़ी थी.. जहा से उसे घर क पीछे वाले सालों से बंद कमरे की सफाई में मदद करने वाली शीला क लिए पीना का और नीचे की जमीन धुलने क लिए पानी लेके जाना था
पर अभी थोड़ी दिएर पहले अपनी बड़की भौजाई क साथ हुई कामुक वार्तालाप क कारन उसके दिन की कामुक सी सुरुवात हो चुकी थी.. और उन बातों क कारन उसके जिस्म क अंदर एक नयी कामुक खुजली सी उठ गयी थी, पर उस खुजली में अभी इतना दम नहीं था की वो उसकी योनि से कॉमर्स की धार बहा सकती
पर अगर आज सुबह हर्षिता क साथ सिर्फ इतना hi हुआ होता तोह बात अलग थी.. आज तोह जैसे इस घरघोर वर्षा क साथ साथ उसके कॉमर्स की वर्षा होनी भी तय थी, सायद इसीलिए जब हर्षिता अपनी बड़की भौजाई ‘सविता’ से हुई उस मस्तानी nauk-jhauk क बाद आगे बढ़ती है और छप्पर क नीचे सुबह क 10 बजने क बाद भी सोते हुए अपने जवान बेटे की रज़ाई खींचती है तोह जो चीज़ उसे सबसे पहले नज़र आती है वह था सोनू क पैरों क बीचे उसका फैन उठाये हुआ नाग..
कुछ पलों क लिए तोह जैसे हर्षिता भूल hi गयी थी की आखिर वो यहाँ आयी क्यू थी.. वो तोह एक तुक बस अपने जवान बेटे की उठी हुई जवानी घूरे जा रही थी जिससे अनायास hi उसकी साड़ी क अंदर एक अजीब सी गर्मी का तापमान सा बढ़ने लगा था, मानो जैसे किसी भी पल उसकी साड़ी जो हलकी सी भीगी हुई थी उसमें आग की लपटे पकड़ लेंगी
हर्षिता न जाने ऐसे hi और कितनी दिएर अपने जवान बेटे का उठा हुआ फैन देखती रहती.. उसे न समय की परवा थी न सुरु हो चुकी उस घरघोर वर्षा की जो कभी धीमी होती तोह कभी अपनी पूर्ण ताकत क साथ वापस से बरसना सुरु हो जाती
वो तोह सुबह hi ठंडी हवा ने सोनू की नींद तोड़ने का कार्य कर दिया था.. और फिर उसके बाद किया हुआ ये तोह आप जानते hi है
अपने बेटे की जवानी को देखने क बाद हर्षिता सीधा रसोईघर में पहुंच चुकी थी जहा वो आते hi एक किनारे रखे हुए पानी क घड़े की और ऐसे लपकती है मानो ऐसी वर्षा ऋतू में भी उसके अंदर कही आग भड़क गयी हो, वो जल्दी से गिलास भर पानी नीलकलती है और वही खड़े खड़े गिलास उठा क पीना सुरु कर देती है
जहा एक और ठण्ड का प्रहार ऐसा था की लोगो की हटिया तक काँप जा रही थी, वही दूसरी और अपने जवान बेटे क जवान होने की निशानी देख क हर्षिता का मन मस्तिक उससे लड़ने पे उतारू होता जा रहा था.. जैसे जैसे ठंडा पानी हर्षिता क गले से होता हुआ उसके अंदर समां रहा था वैसे वैसे उसके अंदर की गर्मी भी हलकी सी भुजनि सुरु हो चुकी थी
पर आज का ये दिन इतनी आसानी से कहा पूर्ण होने वाला है.. जैसे की ये बात मैंने पहले भी कही है
हर्षिता इस समय घड़े क पास hi कड़ी हुई गिलास को ऊपर उठाये हुए पानी पिए जा रही थी, मानो न जाने कोनसी पियास थी जो भुज hi नहीं रही थी उस पानी से..
चलो कुछ पलों क लिए हर्षिता को यही पानी पाइक अपनी पियास भुजने की म्हणत करते हुए चोर क हम सविता की और चलते है.. और देखते है वह किया हो रहा है
अपनी छोटी देवरानी क साथ हुई कामुक nauk-jhauk क कारन सविता का दिल ख़ुशी से भरा हुआ था, वैसे भी उसका आज का दिन कुछ ज्यादा hi खास गुजर रहा था.. मानो जैसी आज की इस वर्षा में पानी नहीं अपितु सुंदरपुर गाओं में कामुकता का रास बरस रहा हो
सविता क दिन की सुरुवात स्नानघर क बहार आती हुई मालती की उन आवाज़ों से हुई जिसके कारन उसके अंदर एक आग उत्त्पन हो गयी.. जिसे उसने वह से सीधा बहार जेक छप्पर नीचे सोते हुए अपने जवान बेटे सत्यम क लुंड पे चढ़ क बुझाया वो भी अपने पति क समीप होते हुए
पर जैसे की मैं बार बार कहता आ रहा हु.. आज का ये दिन काफी कुछ बदलने वाला है, वैसे ऊपर आपने पड़ा hi की कैसे रसोईघर से आते hi सविता की भेट उसकी देवरानी हर्षिता से होती है और कैसी बातें होती है.. आशा है वो आपको पसंद आया होगा
तोह चलिए अब आगे बढ़ते है और देखते है की जब हमारी भरी भरकम जिस्म वाली कामुक गदरायी भैंस जैसी सविता अंदर कमरे में प्रवेश करती है तोह आगे किया होता है..
हर्षिता से शरारती बातों क कारन सविता मुस्कुराते हुए अंदर कमरे में प्रव्रश करती है जहा उसके आगे बढ़ते हर एक कदम क साथ उसके उन्नत उरोज किसी मोठे ताज़े कबूतर जैसे कुछ ज्यादा hi हिलोरे खा रहे थे.. मानो जैसे किसी भी पल उसके ब्लाउज को पहाड़ क बहार आ जायेंगे और खुली हवा में उड़ना सुरु कर देंगे
सविता क लिए आज का ये दिन कुछ ज्यादा hi ाचा बीत रहा था
वैसे अगर अभी यहाँ मालती होती तोह सायद उसे अकेले इतना काम नहीं करने देती, पर इसमें भी उसकी hi गलती थी ककी उसने खुद hi शीला और हर्षिता को घर का पिछले कमरा जो सालों से बंद था उसे खोलने और साफ़ करने का आदेश दिया था.. और घर क बाकि बचे कामो को खुद अपने हिस्से में ले लिया
बाकि एक महिला hi ये जान सकती है की वर्षा ऋतू में उसका काम कितना ज्यादा बाद जाता है
सविता मुस्कुराते हुए अंदर प्रवेश करती जहा बारिश क कारन उसके हलके भीगे कपडे और खास करके उसका धीरे धीरे पारदर्शी होता हुआ ब्लाउज एक अलग hi कहानी कह रहा था.. जिसे कोई भी बड़े hi धियान से सुन्ना पसंद करेगा
सविता की बड़ी और भरी भरकम चूचिया जो आज भी मजबूती से उठान लिए हुई थी और पुरे गर्व से कड़ी थी वो इस समय बारिश की बूंदों क कारन हलकी सी नज़र आणि सुरु हो चुकी थी, वैसे उसके ब्लाउज क भीगने का एकलौता कारन बारिश का पानी नहीं अपितु बर्तन धुलते हुए पानी hi वो बंधे बी थी जो उसके जिस्म से खुद को अलग नहीं कर प् रही थी.. इन सभी करने की वजह से उसके हर एक कदम पे उसकी चूचियों उछलते हुए अपने गेहुआ रंग पे गर्व करने से खुद को रोक नहीं प् रही थी.. मानो जैसे उन्हें पता हो की वो किया क़यामत धने का दम रखती है
सविता की साड़ी अब भी उसकी कमर में पहले की hi भांति घुसी हुई थी, जिससे कारन उसका पल्लू पूरी तरह उसके एक मोठे उरोज को खासे हुए था, सीढ़ी सधी भाषा में कहु तोह सविता को देख क ऐसा लग रहा था मानो जैसे कोई देसी गर्दै भैंस बारिश की फुहार में मस्त आगे बाद रही हो.. सविता अब पूरी तरह उस कमरे में प्रवेश कर चुकी थी जहा वह क एकलौते बिस्तर पे हमारा जवान मोनू सुबह क 10 बजने क बाद भी आँखों को बंद किये हुए अपनी नींद पूरी कर रहा था
जहा एक तरफ बहार ठण्ड ने हड्डियों तक को हिला रखा था, ठंडी हवा क तेज़ झोंके बदन में सिरहन पैदा कर रहे थे.. वही दूसरी और यहाँ अंदर कमरे का वातावरण पूरी तरह अलग था.. बहार क ठाणे माहौल से बिलकुल विपरीत ठीक हमारी सविता की गरम योनि जैसा गरम
और उसका कारन थी कमरे में खिड़की क पास राखी हुई वो अंगेठी, जिसे महेंद्र क आदेश पे सत्तू ने hi वह रखा था ताकि मोनू को किसी भी प्रकार की परेहनी न हो.. उस अंगेठी की गर्मी ने उस पूरे कमरे को एक मदहोश सी गर्माहट दे राखी थी, जिसके कारन वह पहुंचते hi सविता को ास्मीन रहत मिली, वैसे भी आप जानते hi है ठण्ड कैसी भी हो पर औरते मर्दो जैसे भरी भरकम कपडे पहनना पसंद नहीं करती
अंगेठी की लाल रौशनी पुरे कमरे में चाय हुई थी और ऐसा लग रहा था जैसे कमरे में कही से हलकी हलकी गरमाहट क साथ न मात्र की लाल रौशनी भी चाय हुई हो.. सविता एक लम्बी सी सांस लेती है और जब वो अपने मुंह से हवा को बहार करती है तोह उसके चेहरे क पास दुआ जैसे नज़र अत है, जिससे सविता क चेहरे पे ऐसी ख़ुशी खिल उठती है जैसे किसी बचे का हाल होता है अपने मुंह से पहली बार दुआ निकलते हुए देख क
सविता आगे बढ़ती है और ठीक अंगेठी क सामने कड़ी होती है.. जहा वो कुछ पलों तक उसकी गर्माहट में मानो खो सी जाती है, वैसे भी उसके हलके भीगे ब्लाउज और कपड़ों क कारन उसे कुछ ज्यादा hi ठण्ड महसूस हो रही थी.. पर उसने तय कर रखा था की सभी काम निपटने क बाद hi वो स्नान करेगी और कपडे बदलेगी
सविता झाड़ू को वही जमीन पे रखते हुए थोड़ा सा नीचे झुक क अपने दोनों हाथों को आगे करके उस अंगेठी क सामने करती है और उसकी गर्माहट महसूस करते हुए अपने दोनों हाथों को आपस में रैगर क मानो और गर्मी उत्पन्न करने का कार्य करती है..
फिर मुस्कुराते हुए बिस्तर की और उसका चेहरा घूमता है जहा उसे शांति से सोता हुए मोनू नज़र आता है, जिसके भोले चेहरे को देखते हुए सविता मानो कुछ पलों क लिए उसमें कही खो सी जाती है पर तभी हवा का एक झोंका अंगेठी क ऊपर वाली खिड़की को हिला क उसे वास्तविकता में वापस ले आता है
वैसे अगर में मोनू की बात करू तोह वो इस समय शांति से बिस्तर पे गहरी नींद में लीं था.. जहा वो भरी रज़ाई उसके चेहरे तक छड़ी हुई थी, वैसे तोह आपको याद hi होगा की दिन की सुरुवात मोनू क जागने से हुई थी पर अभी करीब 1 जानते पहले hi उसने नास्ता किया था और उसके उपरांत खुद शीला ने उसे त्यागी जी द्वारा दी हुई जड़ी बूटी से बना हुआ वो कड़वा काढ़ा पिलाया था.. जिसे पीते hi मोनू की आँखें भोजील सी होने लगी थी और अब इस समय वो पूर्ण गहरी नींद में सोया हुआ पड़ा है
सविता एक पल क लिए मोनू को एक माँ की ममता भरी नज़रों से देखती है और फिर मुस्कुरा क अपनी साड़ी क पल्लू को एक बार फिर से अपनी कमर में अचे से घुसा लेती है ताकि वो निकल क उसके बड़े गले से नज़र आती उसकी इज्जत को खुला न चोर दे.. बाकि तोह आप खुद hi जानते है की सविता की इज्जत कितनी बड़ी और भरी है
और फिर किया था.. लग पड़ी सत्तू की माँ अपने कार्य में.. यानि उस कमरे सी साफ़ सफाई में
सविता कभी झुक क झाड़ू लगाती तोह कभी पूरी तरह बैठ जाती और सफाई करने लगती.. अंगेठी की तेज आग ने पुरे कमरे को कुछ ज्यादा hi गरम किया हुआ था, और सायद ऐसी कारन लगातार म्हणत करती हुई हमारी सविता क चेहरे पे अब धीरे धीरे पसीने की नन्ही मोती सामान बुँदे नज़र आणि सुरु हो चुकी थी.. पर ये बुँदे उसकी खूबसूरती को कई गुना बड़ा रही थी
सविता इस समय एक ग्रहणी क रूप में बड़ी की कामुक प्रतीत हो रही थी, वो जब झुक क झाड़ू लगाती तोह उसकी साड़ी उसकी गांड से ऐसे काश जाती की एक पल क लिए तोह दर लगता की कही वो साड़ी पीछे से पहात न जाये.. वैसे अगर ऐसा कुछ होता भी तोह इस समय वह जो देख सकता था वो गहरी नींद में खोया हुआ था
सविता क माथे पे आयी हुई नन्ही बंधे बेह्त्ते हुए जब उसके खूबसूरत चेहरे से बह कर आगे बढ़ती और उसके बड़े गले वाले ब्लाउज से पूरी तरह खुली हुई घाटी में सामने लगती तोह वो किया hi कामुक नज़ारा बनता.. ये मैं समझा भी नहीं सकता
जल्दी hi हमारी कामुक सविता की म्हणत रंग लाती है और जो कमरा उसके आने पे पूरी तरह ast-vyast और गन्दा था वो अब पूरी तरह खिल चूका था.. ये एक ऐसा जादू है तोह सिर्फ एक ग्रहणी hi जानती है
पर इन सब क कारन वो खासा थक भी गयी थी और अब बुरी तरह लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी, वैसे भी इस बारिश ने उसका काम कई गुना बड़ा रखा था
अंगेठी की गर्मी जहा पुरे कमरे को गरम बनाये हुए थी.. वही उसकी गरमाहट भरी रौशनी जब उसके चेहरे पे पड़ती तोह उसके चेहरे और माथे की पसीने की बंधे किसी मोती सामान चमक उठती.. वही इतनी दिएर से म्हणत और बहते पसीने क कारन उसका ब्लाउज अब पहले से ज्यादा गीला महसूस हो रहा था और खास करके उसकी चूचियों क बीच की घाटी पे तोह कुछ ज्यादा hi पसीने की बुँदे नज़र आ रही थी, मानो जैसे वो बंधे वह से आगे जाना hi न च रही हो
लगभग पूरा कमरा साफ़ हो चूका था, अब बस मोनू क बिस्तर क नीचे वाला हिस्से hi बचा था.. इसलिए सविता और समय नस्ट न करते हुए उसके लिए आगे बढ़ती है
सविता बिस्तर क ठीक पास पहुंच क घुटनो क बल बैठ जाती है और अपना हाथ आगे बड़ा क झाड़ू बिस्तर क नीचे जहा तक पहुंच प् रहा था वह तक की सफाई में मग्न सी हो जाती है, पर उसके ऐसे बैठने क कारन उसकी badi-badi दुधारू चूचियां उसके घुटनो से बार बार टकरा रही थी और ब्लाउज तोह पहले से hi इतना कैसा हुआ था, उसपे बार बार उसकी लगनी वाली ठोकर क कारन अब हाल कुछ ऐसा था की मानो किसी भी पल उसकी कोई एक चुकी बहार निकल पड़ेगी
और अभी तोह ऐसा हाल था मानो जैसे दोनों चूचियों में हौद लगी हो की कोण पहले बहार आएगी
सविता जब बिस्तर क और नीचे सफाई क लिए और ज्यादा झुकती है तोह उसके कैसा हुए ब्लाउज को देख क लगता जैसे किसी भी पल उसकी सिलाई खुल जाएगी, सविता क भरी भरकम दूध उसके इतना झुकने पे लगभग पुरे hi बहार नज़र आने लग रहे थे.. यहाँ तक कई बार तोह उसके घुटनो से उसकी बड़ी चुकी जब टकराती तोह उसकी कोई एक चुकी इतनी बहार नज़र आने लगती की उसकी काली घुंटी यानि जामुन जैसे निप्पल्स का आधा हिस्सा तक नज़र आना सुरु हो जाता
ये तोह खालिद क बाप की सिलाई का झाड़ू था, जो अब तक ऐसी भरी भरी चूचियों को आज़ाद होने से रोके हुए थे.. सविता पूरी तरह थक चुकी थी इसलिए काम पूरा होते hi वही उसी जगह अपने दोनों पैरों को फैला क बैठ जाती है और अंगेठी से आती हुई गर्माहट का आनंद लेने लगती है
वो अपने पल्लू से अपने चेहरे का पसीना पॉच hi रही की तभी उसे बिस्तर पे हलकी सी हरकत महसूस होती है और बिना समय गवाए जब वो अपना चेहरा ऊपर उठती है तोह उसे वह पहले से hi वो 2 आँखें एकटुक उसके यौवन पे तिकी हुई नज़र आती है
वैसे अब ये तोह जान hi गए होंगे की इन आँखों का मालिक कोण है.. वैसे मोनू तोह अपनी सी सुध में खोया हुआ गहरी नीड में पड़ा था की तभी उसे महसूस हुआ की बार बार उसका बिस्तर हिल रहा है.. असल में सविता बिस्तर क नीचे जादू लगते समय अपना एक हाथ बिस्तर पे जमाये हुए थी ताकि और गहराई तक झाड़ू पाउच सके और उसी कारन बार बार बिस्तर हिलने लगा था जिसने मेरी (मोनू) की नींद चीन ली थी
पर जैसे hi मेरी आँखें खुली है सामने था ये कामुक नज़ारा, बड़ी माँ ठीक मेरे बिस्तर क पास बैठी हुई एक हाथ बिस्तर पे जमाये हुए आधी से ज्यादा बिस्तर क नीचे घुसी हुई थी पर जो चीज़ बहार नज़र आ रही थी.. मेरी आँखें तोह वही अटक गयी थी, ककी उस समय तक वो पल्लू हैट चूका था जिसका काम उस यौवन को छुपाना था
कंटिन्यू..
पर अभी थोड़ी दिएर पहले अपनी बड़की भौजाई क साथ हुई कामुक वार्तालाप क कारन उसके दिन की कामुक सी सुरुवात हो चुकी थी.. और उन बातों क कारन उसके जिस्म क अंदर एक नयी कामुक खुजली सी उठ गयी थी, पर उस खुजली में अभी इतना दम नहीं था की वो उसकी योनि से कॉमर्स की धार बहा सकती
पर अगर आज सुबह हर्षिता क साथ सिर्फ इतना hi हुआ होता तोह बात अलग थी.. आज तोह जैसे इस घरघोर वर्षा क साथ साथ उसके कॉमर्स की वर्षा होनी भी तय थी, सायद इसीलिए जब हर्षिता अपनी बड़की भौजाई ‘सविता’ से हुई उस मस्तानी nauk-jhauk क बाद आगे बढ़ती है और छप्पर क नीचे सुबह क 10 बजने क बाद भी सोते हुए अपने जवान बेटे की रज़ाई खींचती है तोह जो चीज़ उसे सबसे पहले नज़र आती है वह था सोनू क पैरों क बीचे उसका फैन उठाये हुआ नाग..
कुछ पलों क लिए तोह जैसे हर्षिता भूल hi गयी थी की आखिर वो यहाँ आयी क्यू थी.. वो तोह एक तुक बस अपने जवान बेटे की उठी हुई जवानी घूरे जा रही थी जिससे अनायास hi उसकी साड़ी क अंदर एक अजीब सी गर्मी का तापमान सा बढ़ने लगा था, मानो जैसे किसी भी पल उसकी साड़ी जो हलकी सी भीगी हुई थी उसमें आग की लपटे पकड़ लेंगी
हर्षिता न जाने ऐसे hi और कितनी दिएर अपने जवान बेटे का उठा हुआ फैन देखती रहती.. उसे न समय की परवा थी न सुरु हो चुकी उस घरघोर वर्षा की जो कभी धीमी होती तोह कभी अपनी पूर्ण ताकत क साथ वापस से बरसना सुरु हो जाती
वो तोह सुबह hi ठंडी हवा ने सोनू की नींद तोड़ने का कार्य कर दिया था.. और फिर उसके बाद किया हुआ ये तोह आप जानते hi है
अपने बेटे की जवानी को देखने क बाद हर्षिता सीधा रसोईघर में पहुंच चुकी थी जहा वो आते hi एक किनारे रखे हुए पानी क घड़े की और ऐसे लपकती है मानो ऐसी वर्षा ऋतू में भी उसके अंदर कही आग भड़क गयी हो, वो जल्दी से गिलास भर पानी नीलकलती है और वही खड़े खड़े गिलास उठा क पीना सुरु कर देती है
जहा एक और ठण्ड का प्रहार ऐसा था की लोगो की हटिया तक काँप जा रही थी, वही दूसरी और अपने जवान बेटे क जवान होने की निशानी देख क हर्षिता का मन मस्तिक उससे लड़ने पे उतारू होता जा रहा था.. जैसे जैसे ठंडा पानी हर्षिता क गले से होता हुआ उसके अंदर समां रहा था वैसे वैसे उसके अंदर की गर्मी भी हलकी सी भुजनि सुरु हो चुकी थी
पर आज का ये दिन इतनी आसानी से कहा पूर्ण होने वाला है.. जैसे की ये बात मैंने पहले भी कही है
हर्षिता इस समय घड़े क पास hi कड़ी हुई गिलास को ऊपर उठाये हुए पानी पिए जा रही थी, मानो न जाने कोनसी पियास थी जो भुज hi नहीं रही थी उस पानी से..
चलो कुछ पलों क लिए हर्षिता को यही पानी पाइक अपनी पियास भुजने की म्हणत करते हुए चोर क हम सविता की और चलते है.. और देखते है वह किया हो रहा है
अपनी छोटी देवरानी क साथ हुई कामुक nauk-jhauk क कारन सविता का दिल ख़ुशी से भरा हुआ था, वैसे भी उसका आज का दिन कुछ ज्यादा hi खास गुजर रहा था.. मानो जैसी आज की इस वर्षा में पानी नहीं अपितु सुंदरपुर गाओं में कामुकता का रास बरस रहा हो
सविता क दिन की सुरुवात स्नानघर क बहार आती हुई मालती की उन आवाज़ों से हुई जिसके कारन उसके अंदर एक आग उत्त्पन हो गयी.. जिसे उसने वह से सीधा बहार जेक छप्पर नीचे सोते हुए अपने जवान बेटे सत्यम क लुंड पे चढ़ क बुझाया वो भी अपने पति क समीप होते हुए
पर जैसे की मैं बार बार कहता आ रहा हु.. आज का ये दिन काफी कुछ बदलने वाला है, वैसे ऊपर आपने पड़ा hi की कैसे रसोईघर से आते hi सविता की भेट उसकी देवरानी हर्षिता से होती है और कैसी बातें होती है.. आशा है वो आपको पसंद आया होगा
तोह चलिए अब आगे बढ़ते है और देखते है की जब हमारी भरी भरकम जिस्म वाली कामुक गदरायी भैंस जैसी सविता अंदर कमरे में प्रवेश करती है तोह आगे किया होता है..
हर्षिता से शरारती बातों क कारन सविता मुस्कुराते हुए अंदर कमरे में प्रव्रश करती है जहा उसके आगे बढ़ते हर एक कदम क साथ उसके उन्नत उरोज किसी मोठे ताज़े कबूतर जैसे कुछ ज्यादा hi हिलोरे खा रहे थे.. मानो जैसे किसी भी पल उसके ब्लाउज को पहाड़ क बहार आ जायेंगे और खुली हवा में उड़ना सुरु कर देंगे
सविता क लिए आज का ये दिन कुछ ज्यादा hi ाचा बीत रहा था
वैसे अगर अभी यहाँ मालती होती तोह सायद उसे अकेले इतना काम नहीं करने देती, पर इसमें भी उसकी hi गलती थी ककी उसने खुद hi शीला और हर्षिता को घर का पिछले कमरा जो सालों से बंद था उसे खोलने और साफ़ करने का आदेश दिया था.. और घर क बाकि बचे कामो को खुद अपने हिस्से में ले लिया
बाकि एक महिला hi ये जान सकती है की वर्षा ऋतू में उसका काम कितना ज्यादा बाद जाता है
सविता मुस्कुराते हुए अंदर प्रवेश करती जहा बारिश क कारन उसके हलके भीगे कपडे और खास करके उसका धीरे धीरे पारदर्शी होता हुआ ब्लाउज एक अलग hi कहानी कह रहा था.. जिसे कोई भी बड़े hi धियान से सुन्ना पसंद करेगा
सविता की बड़ी और भरी भरकम चूचिया जो आज भी मजबूती से उठान लिए हुई थी और पुरे गर्व से कड़ी थी वो इस समय बारिश की बूंदों क कारन हलकी सी नज़र आणि सुरु हो चुकी थी, वैसे उसके ब्लाउज क भीगने का एकलौता कारन बारिश का पानी नहीं अपितु बर्तन धुलते हुए पानी hi वो बंधे बी थी जो उसके जिस्म से खुद को अलग नहीं कर प् रही थी.. इन सभी करने की वजह से उसके हर एक कदम पे उसकी चूचियों उछलते हुए अपने गेहुआ रंग पे गर्व करने से खुद को रोक नहीं प् रही थी.. मानो जैसे उन्हें पता हो की वो किया क़यामत धने का दम रखती है
सविता की साड़ी अब भी उसकी कमर में पहले की hi भांति घुसी हुई थी, जिससे कारन उसका पल्लू पूरी तरह उसके एक मोठे उरोज को खासे हुए था, सीढ़ी सधी भाषा में कहु तोह सविता को देख क ऐसा लग रहा था मानो जैसे कोई देसी गर्दै भैंस बारिश की फुहार में मस्त आगे बाद रही हो.. सविता अब पूरी तरह उस कमरे में प्रवेश कर चुकी थी जहा वह क एकलौते बिस्तर पे हमारा जवान मोनू सुबह क 10 बजने क बाद भी आँखों को बंद किये हुए अपनी नींद पूरी कर रहा था
जहा एक तरफ बहार ठण्ड ने हड्डियों तक को हिला रखा था, ठंडी हवा क तेज़ झोंके बदन में सिरहन पैदा कर रहे थे.. वही दूसरी और यहाँ अंदर कमरे का वातावरण पूरी तरह अलग था.. बहार क ठाणे माहौल से बिलकुल विपरीत ठीक हमारी सविता की गरम योनि जैसा गरम
और उसका कारन थी कमरे में खिड़की क पास राखी हुई वो अंगेठी, जिसे महेंद्र क आदेश पे सत्तू ने hi वह रखा था ताकि मोनू को किसी भी प्रकार की परेहनी न हो.. उस अंगेठी की गर्मी ने उस पूरे कमरे को एक मदहोश सी गर्माहट दे राखी थी, जिसके कारन वह पहुंचते hi सविता को ास्मीन रहत मिली, वैसे भी आप जानते hi है ठण्ड कैसी भी हो पर औरते मर्दो जैसे भरी भरकम कपडे पहनना पसंद नहीं करती
अंगेठी की लाल रौशनी पुरे कमरे में चाय हुई थी और ऐसा लग रहा था जैसे कमरे में कही से हलकी हलकी गरमाहट क साथ न मात्र की लाल रौशनी भी चाय हुई हो.. सविता एक लम्बी सी सांस लेती है और जब वो अपने मुंह से हवा को बहार करती है तोह उसके चेहरे क पास दुआ जैसे नज़र अत है, जिससे सविता क चेहरे पे ऐसी ख़ुशी खिल उठती है जैसे किसी बचे का हाल होता है अपने मुंह से पहली बार दुआ निकलते हुए देख क
सविता आगे बढ़ती है और ठीक अंगेठी क सामने कड़ी होती है.. जहा वो कुछ पलों तक उसकी गर्माहट में मानो खो सी जाती है, वैसे भी उसके हलके भीगे ब्लाउज और कपड़ों क कारन उसे कुछ ज्यादा hi ठण्ड महसूस हो रही थी.. पर उसने तय कर रखा था की सभी काम निपटने क बाद hi वो स्नान करेगी और कपडे बदलेगी
सविता झाड़ू को वही जमीन पे रखते हुए थोड़ा सा नीचे झुक क अपने दोनों हाथों को आगे करके उस अंगेठी क सामने करती है और उसकी गर्माहट महसूस करते हुए अपने दोनों हाथों को आपस में रैगर क मानो और गर्मी उत्पन्न करने का कार्य करती है..
फिर मुस्कुराते हुए बिस्तर की और उसका चेहरा घूमता है जहा उसे शांति से सोता हुए मोनू नज़र आता है, जिसके भोले चेहरे को देखते हुए सविता मानो कुछ पलों क लिए उसमें कही खो सी जाती है पर तभी हवा का एक झोंका अंगेठी क ऊपर वाली खिड़की को हिला क उसे वास्तविकता में वापस ले आता है
वैसे अगर में मोनू की बात करू तोह वो इस समय शांति से बिस्तर पे गहरी नींद में लीं था.. जहा वो भरी रज़ाई उसके चेहरे तक छड़ी हुई थी, वैसे तोह आपको याद hi होगा की दिन की सुरुवात मोनू क जागने से हुई थी पर अभी करीब 1 जानते पहले hi उसने नास्ता किया था और उसके उपरांत खुद शीला ने उसे त्यागी जी द्वारा दी हुई जड़ी बूटी से बना हुआ वो कड़वा काढ़ा पिलाया था.. जिसे पीते hi मोनू की आँखें भोजील सी होने लगी थी और अब इस समय वो पूर्ण गहरी नींद में सोया हुआ पड़ा है
सविता एक पल क लिए मोनू को एक माँ की ममता भरी नज़रों से देखती है और फिर मुस्कुरा क अपनी साड़ी क पल्लू को एक बार फिर से अपनी कमर में अचे से घुसा लेती है ताकि वो निकल क उसके बड़े गले से नज़र आती उसकी इज्जत को खुला न चोर दे.. बाकि तोह आप खुद hi जानते है की सविता की इज्जत कितनी बड़ी और भरी है
और फिर किया था.. लग पड़ी सत्तू की माँ अपने कार्य में.. यानि उस कमरे सी साफ़ सफाई में
सविता कभी झुक क झाड़ू लगाती तोह कभी पूरी तरह बैठ जाती और सफाई करने लगती.. अंगेठी की तेज आग ने पुरे कमरे को कुछ ज्यादा hi गरम किया हुआ था, और सायद ऐसी कारन लगातार म्हणत करती हुई हमारी सविता क चेहरे पे अब धीरे धीरे पसीने की नन्ही मोती सामान बुँदे नज़र आणि सुरु हो चुकी थी.. पर ये बुँदे उसकी खूबसूरती को कई गुना बड़ा रही थी
सविता इस समय एक ग्रहणी क रूप में बड़ी की कामुक प्रतीत हो रही थी, वो जब झुक क झाड़ू लगाती तोह उसकी साड़ी उसकी गांड से ऐसे काश जाती की एक पल क लिए तोह दर लगता की कही वो साड़ी पीछे से पहात न जाये.. वैसे अगर ऐसा कुछ होता भी तोह इस समय वह जो देख सकता था वो गहरी नींद में खोया हुआ था
सविता क माथे पे आयी हुई नन्ही बंधे बेह्त्ते हुए जब उसके खूबसूरत चेहरे से बह कर आगे बढ़ती और उसके बड़े गले वाले ब्लाउज से पूरी तरह खुली हुई घाटी में सामने लगती तोह वो किया hi कामुक नज़ारा बनता.. ये मैं समझा भी नहीं सकता
जल्दी hi हमारी कामुक सविता की म्हणत रंग लाती है और जो कमरा उसके आने पे पूरी तरह ast-vyast और गन्दा था वो अब पूरी तरह खिल चूका था.. ये एक ऐसा जादू है तोह सिर्फ एक ग्रहणी hi जानती है
पर इन सब क कारन वो खासा थक भी गयी थी और अब बुरी तरह लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी, वैसे भी इस बारिश ने उसका काम कई गुना बड़ा रखा था
अंगेठी की गर्मी जहा पुरे कमरे को गरम बनाये हुए थी.. वही उसकी गरमाहट भरी रौशनी जब उसके चेहरे पे पड़ती तोह उसके चेहरे और माथे की पसीने की बंधे किसी मोती सामान चमक उठती.. वही इतनी दिएर से म्हणत और बहते पसीने क कारन उसका ब्लाउज अब पहले से ज्यादा गीला महसूस हो रहा था और खास करके उसकी चूचियों क बीच की घाटी पे तोह कुछ ज्यादा hi पसीने की बुँदे नज़र आ रही थी, मानो जैसे वो बंधे वह से आगे जाना hi न च रही हो
लगभग पूरा कमरा साफ़ हो चूका था, अब बस मोनू क बिस्तर क नीचे वाला हिस्से hi बचा था.. इसलिए सविता और समय नस्ट न करते हुए उसके लिए आगे बढ़ती है
सविता बिस्तर क ठीक पास पहुंच क घुटनो क बल बैठ जाती है और अपना हाथ आगे बड़ा क झाड़ू बिस्तर क नीचे जहा तक पहुंच प् रहा था वह तक की सफाई में मग्न सी हो जाती है, पर उसके ऐसे बैठने क कारन उसकी badi-badi दुधारू चूचियां उसके घुटनो से बार बार टकरा रही थी और ब्लाउज तोह पहले से hi इतना कैसा हुआ था, उसपे बार बार उसकी लगनी वाली ठोकर क कारन अब हाल कुछ ऐसा था की मानो किसी भी पल उसकी कोई एक चुकी बहार निकल पड़ेगी
और अभी तोह ऐसा हाल था मानो जैसे दोनों चूचियों में हौद लगी हो की कोण पहले बहार आएगी
सविता जब बिस्तर क और नीचे सफाई क लिए और ज्यादा झुकती है तोह उसके कैसा हुए ब्लाउज को देख क लगता जैसे किसी भी पल उसकी सिलाई खुल जाएगी, सविता क भरी भरकम दूध उसके इतना झुकने पे लगभग पुरे hi बहार नज़र आने लग रहे थे.. यहाँ तक कई बार तोह उसके घुटनो से उसकी बड़ी चुकी जब टकराती तोह उसकी कोई एक चुकी इतनी बहार नज़र आने लगती की उसकी काली घुंटी यानि जामुन जैसे निप्पल्स का आधा हिस्सा तक नज़र आना सुरु हो जाता
ये तोह खालिद क बाप की सिलाई का झाड़ू था, जो अब तक ऐसी भरी भरी चूचियों को आज़ाद होने से रोके हुए थे.. सविता पूरी तरह थक चुकी थी इसलिए काम पूरा होते hi वही उसी जगह अपने दोनों पैरों को फैला क बैठ जाती है और अंगेठी से आती हुई गर्माहट का आनंद लेने लगती है
वो अपने पल्लू से अपने चेहरे का पसीना पॉच hi रही की तभी उसे बिस्तर पे हलकी सी हरकत महसूस होती है और बिना समय गवाए जब वो अपना चेहरा ऊपर उठती है तोह उसे वह पहले से hi वो 2 आँखें एकटुक उसके यौवन पे तिकी हुई नज़र आती है
वैसे अब ये तोह जान hi गए होंगे की इन आँखों का मालिक कोण है.. वैसे मोनू तोह अपनी सी सुध में खोया हुआ गहरी नीड में पड़ा था की तभी उसे महसूस हुआ की बार बार उसका बिस्तर हिल रहा है.. असल में सविता बिस्तर क नीचे जादू लगते समय अपना एक हाथ बिस्तर पे जमाये हुए थी ताकि और गहराई तक झाड़ू पाउच सके और उसी कारन बार बार बिस्तर हिलने लगा था जिसने मेरी (मोनू) की नींद चीन ली थी
पर जैसे hi मेरी आँखें खुली है सामने था ये कामुक नज़ारा, बड़ी माँ ठीक मेरे बिस्तर क पास बैठी हुई एक हाथ बिस्तर पे जमाये हुए आधी से ज्यादा बिस्तर क नीचे घुसी हुई थी पर जो चीज़ बहार नज़र आ रही थी.. मेरी आँखें तोह वही अटक गयी थी, ककी उस समय तक वो पल्लू हैट चूका था जिसका काम उस यौवन को छुपाना था
कंटिन्यू..