Adultery Kundali Bhagya - Page 10 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट53

रंजन और विणा दोनों वह से निकल गयी. सरिता और लता बहोत चिंतित हो चुकी थी.

लता : ये क्या हॉट गया सरिता, अब क्या होगा. शिव ने कुछ नहीं किआ है, में जानती हु, वो ऐसा कभी कर hi नहीं शक्ति, पर ये वो कैसे साबित करेगा. वो अभी छोटा है, ऐसे हालातो का सामना तो उसने कभी किआ hi नहीं. ऊपर से हम अनाथ है, न कोई हमें बचने आएगा न किसी को हमारी परवाह होगी. हे भगवन ये कैसी मुसीबत में दाल दिया है, अब तू hi हम बेसहारो का सहारा है.

सरिता : हिम्मत रख लता, ऐसे हिम्मत हर जाने से क्या होगा, हमे इसका सामना करना hi होगा. हमे तो अपनों ने भी ठुकरा दिया था पर फिर भी जिंदगी ने हमारा दमन नहीं छोड़ा, हिम्मत रक्, भगवन इतना भी बेरहम नहीं हो शक्ति, वो शिव को कुछ होने नहीं देगा.

लता : (आँखों में आंसू आ गए) तूने देखा न वो हरामजादा क्या कह रहा था, अगर उसने मेरे साथ कुछ गलत किआ तो में जिन्दा नहीं रहूंगी.

सरिता : शहहहहह, कुछ नहीं होगा, (सरिता उसकी हिम्मत बढ़ा रही थी पर खुद उसकी समाज में नहीं आ रहा था की अब क्या होगा)

मुझे जीप में बिठा कर पुलिस स्टेशन ले गए. में पुरे रस्ते बस एक hi बात दोहरा रहा था, मेने कुछ नहीं किआ, मेने कोई चोरी नहीं की. दो हवलदार मुझे पकड़ के पुलिस स्टेशन में ले गए. वह एक लेडी इंस्पेक्टर भी थी, अपने सीनियर इंस्पेक्टर को देख कर वो कड़ी हो गयी.

धनपाल : भार्गवी, इसे लॉक उप में डालो.

भार्गवी : जी, सर, क्या चार्जेज है, सर.

धनपाल : इसने दस हजार की चोरी की है, पैसे इसकी बैग से बरामद हुए है. अभी शिकायत करता आ रहा है, साडी डिटेल्स वो तुम्हे लिखवा देगा. (वो ये कहते कहते अपने केबिन में चला गया)

शिव : मैडम, मेने कोई चोरी नहीं की, ये मेरे पैसे है.

भार्गवी : (गुस्से se)Chup, (हवलदार ko)Dalo इससे लॉक उप में.

शिव :, मैडम, मेरी बात मानिये, मेने कोई चोरी नहीं की, ये पैसे मेरे है, प्लीज मैडम.

भार्गवी : अपना मुँह बंद रख, हर चोर यही कहता है. चुप चाप बेथ वह पे वर्ण दो डंडे मरूंगी.

शिव : में सच कह रहा हु मैडम, मेने कोई चोरी नहीं ki.(Hawaldar ने मुझे लॉकअप में धकेल दिया, अंदर दो और लोग भी थे. में जेल के सलिये पकड़ कर मैडम से यही बात दोहरा रहा tha)Madam मेने कोई चोरी नहीं की.

थोड़ी देर में वह, मैनेजर भी आ गया, पहले वो धनपाल के ऑफिस में गया, उसने, उसे भार्गवी के पास भेजा. वो सब डिटेल्स लिखवाने लगा. में जेल में खड़ा उसे देख रहा था.

भार्गवी : (नाम वगैरह लिखने के baad)Kitne पैसे चोरी हुए थे?

मैनेजर : जी, दस हजार.

भार्गवी : तुम कैसे कह शक्ति हो की दस हजार hi थे?

मैनेजर : जी सौ सौ के नोटों की गद्दी थी, जो मेने ड्रावर में राखी थी.

भार्गवी : ठीक है. (मैनेजर उठ कर फिर धनपाल के केबिन में चला गया, भार्गवी ने पैसे देखे तो जैसा मैनेजर बता रहा था वैसे सौ सौ के नोट नहीं थे, कुछ सौ की नॉट थी, कुछ पाँचसौ की थी. उसने पैसे गिने तो दस हजार पांच सौ हुए, वो सोच में पद गयी, उसने अपनी रिपोर्ट में ये सब बाटे लिख दी)

शिव : मैडम, प्लीज, मेरी बात मानिये, मेने कोई चोरी नहीं की है.

भार्गवी : (वो इस लड़के को गौर से देखने लगी, उसके चेहरे पर उसे सच्चाई दिख रही थी, पर वो कुछ नहीं कर सकती थी, वो अपने सीनियर के ऊपर नहीं जा शक्ति थी. और वो अपने सीनियर को भी अच्छी तरह से जानती थी. वो बात बात पर सब पर चिल्लाता है. उसने रिपोर्ट बनाने में hi अपना ध्यान देना ठीक समाज)

यहाँ रंजन और विणा दोनों कई जगह घूम चुकी थी. रात का टाइम था तो उन्हें दिक्कत हो रही थी. गयम बंद हो रहे थे या हो चुके थे. वो दोनों चलते चलते थक चुकी थी पर फिर भी उन्होंने हर नहीं मणि थी. एक गयम के पास दोनों पहुंची. वो गयम बंद hi कर रहे थे.

रंजन : नमस्ते सर. (उस आदमीने मुद कर इन दो लड़कीओ को देखा)

आदमी : है बोलो.

रंजन : सर, आप के वह शिव नामका कोई काम करता है?

आदमी : (उन दोनों को गौर से देखने के बाद) है करता है, पर आज वो आया नहीं है.

रंजन : (खुस होते hue)Kya वो लम्बा है?

आदमी : है, लम्बा है, तुम कोण हो और उसके बारे में क्यों पूछ रही हो?

रंजन : हम अनाथालय से है सर, और शिव मुसीबत में है, क्या ये गयम स्नेहा मैडम का hi है?

आदमी : है वो गयम के ओनर की पत्नी है.

रंजन : सर प्लीज, उनका नंबर दीजिये, बहोत जरुरी है.

पुलिस स्टेशन में,

धनपाल : भार्गवी, उस लड़के का बयां ले कर उसके सिग्न ले लो.

भार्गवी : पर सर, वो तो एक hi बात दोहरा रहा है, की उसने चोरी नहीं की.

धनपाल : तो उगलवाओ, मुझे हर हल में उसके कबूलनामे पर उसके दस्तखत चाहिए.

भार्गवी : जी सर. (वो शिव के पास चली गयी)

शिव : मैडम, मैंने कोई चोरी नहीं की, प्लीज एक बार मेरी बात सुनलीजिये.

भार्गवी मैडम : चुप, अपनी खैरियत चाहता है तो मान ले की तूने चोरी की है.

शिव : मैडम वो मैनेजर मुझे फंसा रहा है, अगर आपको यकीं नहीं होता है तो में आपको एक नंबर देता हु उन्हें बुला लीजिये वो बतादेंगे की ये पैसे उन्होंने hi दिए है.

मैनेजर इंस्पेक्टर से बात करके वापस अनाथालय आ गया. आज वो बहोत खुस था. आज उसकी बरसोंकी मुराद पूरी होनेवाली थी. वो आज कैसे भी कर के लता की सील खोलने की सोच बैठा था. लता और सरिता साथमे उदास चेहरे लिए बैठी थी. वो दुखी थी पर छोटे बच्चो को खाना खिलाना भी जरुरी था तो वो उन सब को खिला कर सुला रही थी. जब उन्होंने मैनेजर की आवाज आयी.

मैनेजर : कहा है सब, सरिता ो सरिता.

सरिता :(सरिता बहार aayi)Wo बच्चो को सुला रहे थे.

मैनेजर : लता कहा है.

सरिता : (उसे मैनेजर के मुँह से शराब की बू आ रही thi)Wo बच्चो को सुला रही है.

मैनेजर : भेज उसे रूम में.

सरिता : वो बीमार है, कोई काम हो तो मुझे बता दीजिये.

मैनेजर : साली, तुजे समाज नहीं aata,(Jor से) भेज उसे.

सरिता :(रोने जैसी हो गयी thi)Aap ने कहा था की आप किसी भी और लड़की के साथ गलत काम नहीं करेंगे. इसीलिए तो में आप के साथ ये सब करती थी. अब आप ...

मैनेजर : में कोई राजा हरिश्चंद्र हु, अब मुझे नयी छूट चाहिए, जा समजा दे साली को, बहोत नखरे कर लिए उसने. अब गया वो कमीना, अब वो नहीं आनेवाला. उसे कह इसी में उसकी भलाई है. अगर उसे यहाँ रहना है तो मेरी बात मन नई hi पड़ेगे. यहाँ में एक अकेला हु, अगर यहाँ से निकल दूंगा तो बहार मेरे जैसे बहोत सरे है. तो यहाँ रह कर मुज से छुडवाओगी या बहार जा कर रंडी बनोगी.

लता को सब सुनाई दे रहा था. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे. वो अपने आप को बहोत मज़बूर महसूस कर रही थी. वो अपनी किस्मत को कोस रही थी. थोड़ी देर बाद एक गाड़ी अनाथालय पर आ कर रुकी. जो सख्स अंदर आया उसे देख कर मैनेजर खड़ा हो गया.

मैनेजर : आइये सर, आप का hi इंतजार कर रहा था.

इंस्पेक्टर : वो तो मुझे आना hi था, तेरे कहने पर hi तो उस सेल को लॉक उप में फिट किया है, मैंने अपना वडा निभाया अब तेरी बरी है.

मैनेजर : सर, मुज से कभी आप नीरस नहीं होंगे. दो कच्ची कालिया है, एक को आप मसल न दूसरी शेखर सर के लिए hai.(Manager, सरिता को आवाज लगता है, इस्पेक्टर अपने साथ लायी शराब की बोतल वह पड़ी टेबल पर रखता है, मैनेजर हस्ते hue)Aap सब इंतजाम कर के आये है.

इस्पेक्टर : मूड तो बनाना पड़ता है न. ये स्पेशल बोतल है.

मैनेजर : (कबत से चखना और गिलास निकलता है, सरिता भी वह आ गयी thi)Ranjan और विणा कहा है, बुला उनको.

सरिता : (डरते hue)Wo तो नहीं है, बहार गयी है.

मैनेजर :(गुस्से me)Bahar , इतनी रात को, क्या अपनी माँ छुड़वाने गयी है.

सरिता : (बहोत दर गयी thi)Ji, वो जल्दी आने का बोल कर गयी है पर अभी तक नहीं लौटी.

Ispector:(Kaminepan से सरिता को ऊपर से निचे तक देखता hai)Ye कोण hai?(Sarita को इसरा कर के बुलाता hai)Yaha aa.(Sarita डरते हुए मैनेजर को देखती है पर वो कुछ नहीं बोलता, वो डरते डरते उसके नजदीक जाती है)

मैनेजर : ये आपके काम की नहीं है, ये मेरी पर्सनल रंडी है साहब.

इंस्पेक्टर :(सरिता की गांड पर हाथ घूमता है और उसको को दबाते hue)Maal तो ये भी करारा है.

मैनेजर : अब इसमें अब वो बात नहीं रही और ये तो यही है, इसे बाद में छोड़ लेना. आज तो आप के लिए इस से भी छोटी छोटी दो कालिया है, किसी को भी आप फूल बना देना. अभी आ जाएँगी, जाएँगी kaha.(Bottle खोल कर गिलास भरते hue)Tab तक आप अपना मूड बनायीं ye.(Sarita se)Tu जा और जैसे hi वो दोनों आती है मुझे खबर कर.

सरिता वह से फ़ौरन निकल गयी. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे वो रूम में जा कर लता से लिपट कर जोर जोर से रोने लगती है.

सरिता :ये कमीना आज अपने कमीनेपन पर उतर आया है.

लता :(रट hue)Me यहाँ से चली जाउंगी, मुझे नहीं रहना यहाँ.

सरिता : कहा जाएगी इतनी रात को. और जा कर क्या करेगी.

लता : कही भी चली जाउंगी, और अगर कही कुछ न मिला तो मर जाउंगी पर अब यहाँ नहीं rahungi.(Bebasi में रट hue)Ye क्या हो गया, शिईयिव. हे भगवन तुजे जरा भी दया नहीं आती हम पर?.
 
अपडेट 54

भार्गवी अपनी सोच में डूबी हुई थी. वो कभी कभी शिव की और देख रही थी. उसे इतना तो यकीं हो गया था की ये लड़का जूथ नहीं बोल रहा है पर फिर भी वो उसकी मदद नहीं कर शक्ति थी. उसकी मदद करना मतलब मुसीबत को आमंत्रण देना. और वैसे भी इस वक़्त उसके हाथ में कुछ नहीं था. जो तय होना होगा वो कोर्ट तय करेगा.

शिव का दिल बड़ी जोरो से धड़क रहा था. उसे लग रहा था की कुछ गलत होनेवाला है. उसके जहँ में बार बार लतादिदी का चेहरा आ रहा था. उसे ऐसा लग रहा था जैसे लतादिदी उसे बुला रही है. उसने एक बार उस लेडी इंस्पेक्टर को देखा. वो अपने खयालो में खोयी हुई थी.

शिव : मैडम, मैडम, प्लीज, madam.(Wo कब से एक फ़ोन के लिए रिक्वेस्ट कर रहा था)

भार्गवी : (उसने शिव की और देखा, वो कड़ी हुई और उसके पास गयी, अपनी जेब से फ़ोन निकल कर उसने शिव को diya)Lo करलो, पर जल्दी.

शिव : (मुझे एक hi नंबर याद था, जूही मैडम का, मेने फ़ौरन उनको फ़ोन लगा दिया, थोड़ी देर रिंग बजने के बाद उन्होंने फ़ोन uthaya)Hello, hello, मैडम.

जूही मैडम : सीईव? क्या हुआ शिव, तुम इतने घबराये हुए क्यों हो?

शिव : मैडम, मुझे अनाथालय के मैनेजर ने चोरी के इल्जाम में फ़सादिया है, मुझे जेल में बंद कर दिया है. मैडम मेने कोई पैसे नहीं चुराए, मुझे वो पैसे स्नेहा मैडम ने और बिना मैडम ने दिए थे, प्लीज आप कुछ कीजिये मैडम. प्लीज मैडम.

जूही मैडम : (अचानक ऐसा सुन कर वो थोड़ा घबरा गयी पर फिर अपने आपको सँभालते हुए) शिव, तुम चिंता मात करो में अभी आती हु, तुम चिंता मात करना, में कुछ करती हु.

शिव : मैडम, प्लीज, आप उन्हें भी ये बता देना. (उसने फ़ोन रख दिया) थैंक यू मैडम, थैंक यू वैरी मच.

भार्गवी : (शांति se)Koi बात नहीं. (वो अपनी जगह जा कर बेथ गयी)

यहाँ जूही ने फ़ौरन स्नेहा को फ़ोन किआ.

जूही : Hello, स्नेहा, Hello.

स्नेहा : (वो भी थोड़ी घबराई हुई थी) है जूही, में सुन रही हु.

जूही : स्नेहा. शिव को पुलिस ने जेल में दाल दिया है.

स्नेहा : मुझे पता है जूही, अभी थोड़ी देर पहले hi मदन सर के फ़ोन से अनाथालय की लड़की का फ़ोन आया था. वो दोनों वही कड़ी है, में और पवन वही जा रहे है.

जूही : में भी आती हु.

सब मिल के पुलिस स्टेशन पहुंच गए. शिव को लॉक उप में देख कर रंजन और विणा रोने लगी और जूही और स्नेहा की आँखों में भी आंसू आ गए. पवन सर ने एक हवलदार से बात की तो उसने भार्गवी मैडम से बात करने को कहा. पवनसीर उनके पास पहुंच गए.

पवनसीर : मैडम, हम शिव के लिए आये है, क्या बात है, क्यों उसे लॉकअप में बंद किआ है?

भार्गवी : उस पर दस हजार की चोरी का इल्जाम है. पैसे भी उसके पास से बरामद किये गए है.

पवनसीर : ये ऐसा लड़का नहीं है मैडम, ये मेरे यहाँ नौकरी करता है, ये मेरे वह फीस भी कलेक्ट करता है, मैडम. आज तक कभी एक रूपया भी इसने नहीं लिया.

भार्गवी : देखिये, उसने चोरी की है या नहीं की है, ये देखना मेरा काम नहीं है, इसे सीनियर इंस्पेक्टर साहब ने लॉकअप में डाला है. मेरी तो सलाह है की आप लोग किसी अच्छे वकील से बात कीजिये. कल इसे कोर्ट में पेश किआ जायेगा तो आप वही दलील देना.

स्नेहा : (वो ये सब सुन रही thi)Madam, इसने चोरी नहीं की है, पैसे इसको मेने दिए थे.

भार्गवी : क्यों?

स्नेहा : क्यों क्या, उसकी मदद के लिए, उसे जरुरत थी, तो मेने दिए थे.

भार्गवी : कितने पैसे दिए थे.

स्नेहा : पांच हजार.

भार्गवी : उसके पास से दस हजार रिकवर हुए है.

शिव : मैडम, पांच हजार इन्होने दिए थे, तीन हजार बिना मैडम ने और ढाई हजार मुझे सैलरी मिली थी.

भार्गवी : (मान में, मतलब टोटल दस हजार पांच सौ, जो रिकवर हुए hai)Dekhiye, मेरी सलाह है आप किसी अच्छे वकील से बात कीजिये, मेरी और से किसी भी प्रकार की मदद की जरुरत हो तो में रेडी हु, है में इसे छोड़ नहीं सकती, ये कोर्ट तय करेगा.

रंजन और विणा दोनों शिव के पास पहुंच गयी और उसका हाथ पकड़ कर रोने लगी.

एक हवलदार: ै, आइए लड़कीओ दूर रहो.

भार्गवी : मिल लेने दो. (भार्गवी मैडम का आदेश सुन कर हवलदार पीछे हो गया)

स्नेहा और जूही भी उसके पास पहुंच गयी.

स्नेहा : तुम चिंता मात करो, हम है न.

जूही : है शिव, हम कुछ करते है, तुम चिंता मात करो. सब ठीक हो जायेगा.

पवनसीर : (जो किसी से फ़ोन पर बात कर रहे थे) स्नेहा, चलो हमे वकील के वह चलना hai.(Sab पुलिस स्टेशन के बहार आये, सब शिव को पीछे मुद मुद कर देख रहे the)(Pawansir, रंजन और विणा ko)Tum लोग, घर जाओ में देखता हु.

रंजन : नहीं सर, में यही बैठी हु, आप जा आइये. मेहरबानी कर के शिव को बचलीजिये सर.

पवनसीर : यहाँ बैठे रहने से कोई फायदा नहीं है, जैसे वो बता रही थी, जो कुछ भी होगा वो कल hi होगा, फिर भी में वकील से बात करता हु.

यहाँ अनाथालय में लता और सरिता बैठी अपनी किस्मत पर आंसू बहा रही थी. वो दोनों काफी देर से दारू पिरहे थे, मैनेजर ने घडी देखि और लड़खड़ाता हुआ बहार निकला और सरिता और लता जिर रूम में थी उसके दरवाजे पर आ के खड़ा हुआ.

मैनेजर : आयी क्या वो दोनों?

सरिता :(सरिता और लता दोनों एक दूसरे का हाथ जोर से पकड़ ते hue)Nahi आयी.

Inspector:(Uske पीछे पीछे इंस्पेक्टर भी लड़खड़ाता हुआ आ gaya)Kya हुआ?

मैनेजर :(डरते hue)Ji साहब, वो दो लड़कीअ अभी तक नहीं आयी है, अभी आ जाएँगी, आप बैठिये.

इंस्पेक्टर :(उसकी नजर लता पर पड़ती है, वो उसके रूप से मोहित होने लगता hai)Ye इतना करारा मॉल है तो सही.

मैनेजर : (डरते hue)Wo...wo सर, आप इससे छोड़िये, वो दो तो इस से भी कमल है औरकमसीन माल है, वो अभी थोड़ी देर में आ जाएँगी.

इस्पेक्टर :(गुस्से me)Madar ***, अब मेरा मूड बन गया है, अब तो में इसीको छोडूंगा.

मैनेजर :(वो जनता था अब वो कुछ नहीं कर शक्ति, वो चाहता था की वो लता की सील खोले, पर उसकी किस्मत में शायद ये नहीं था, तो हर मानते hue)Thik है सर, आप कर लीजिये.

लता :(रट हुए, गुस्से me)Ye क्या बकवास कर रहे हो, चले जाओ यहाँ से.

इंस्पेक्टर : (लड़खड़ाते हुए लता के पास जाता है, लता को बालो से पकड़ते hue)Kyu बे साली, मुझे मन कर रही है. आज तो तेरी hi छूट को फाड़ूंगा, तुजे छोड़ कर hi तुजे सबक सिखाऊंगा.

सरिता : (इंस्पेक्टर का हाथ पकड़ते हुए, गुस्से me)Chhod दो उसे.

मैनेजर :(सरिता के बल पकड़ते hue)Tu दूर hi रह मदर ****. आज तेरी वजह से लता की सील में नहीं खोल पाउँगा, आज तो तेरी गांड मरूंगा कामिनी.

सरिता : छोड़ दे लता को वर्ण अच्छा नहीं होगा.

मैनेजर : (एक लात सरिता को मरते hue)Kya कर लेगी, मदर ****.(उसकी सदी खींच कर निकलते hue)Bahot पर निकल आये है न तेरे, आज देख तेरी क्या हालत करता हु.

सरिता : (गुस्से me)Sale भड़वे, अपने चूहे जैसे लुंड से तू क्या कर लेगा. कभी किसी असली मर्द का लुंड देखा है. (इंस्पेक्टर लता की सदी खींचने लगता है.)

लता : (रट hue)Muje छोड़ दो, (जोर से चिल्लाते hue)bachaooooooo, bachaoooooo(Is शोर से वह सोये बच्चे भी जग गए तो और वो जोर जोर से रो रहे थे)

सरिता : छोड़ उसे, कमीने छोड़ उसे, अगर उसे कुछ हुआ तो तू जिन्दा नहीं बचेगा.

इंस्पेक्टर : साली मुझे धमकी देती है, देखता हु तू क्या कर legi(Lata को बालो से खींच कर बहार ले जाते hue)Yaha कोई बचने नहीं आने वाला तुजे. आज तो तेरी सील में खोलकर hi rahunga.(Usne अपनी पंत उतरी, अंडरवियर के ऊपर से hi अपने लुंड को मसलने लगा)

लता :(जोर से चिल्लाते hue)Bachaooooooooo, शीइइइइइइव, Shiiiiiiiiiiiiiv.

इस्पेक्टर : वो नहीं आने वाला. अब वो सड़ेगा जेल में. अब तो तू रोज मुज से छुड़नेवाली hai.(Uska ब्लाउज पकड़ कर कीचता है तो कुछ हिस्सा फैट जाता है.

लता : Shiiiiiiiiiiiiiiv, bachaoooooooo(Lata की आँखों से आंशुओ की नदिया बह रही थी)

इंस्पेक्टर : (लता को एक झापड़ मरते hue)Sali चिल्ला मत, कान के पदादे हिला दिए. (झापड़ इतना जोर से मारा था की उसके होठ फैट गए और सिस से खून निकलने laga)Sidhi तरह से छोड़ने दे वर्ण आज तेरी वो हालत करूँगा की याद rakkhegi.(Usko लेता कर उसके ऊपर चढ़ने लगता है)

लता : शीइइइइइइइववववव, बचाआंआऊऊऊओ

इंस्पेक्टर लता के होठो की और बढ़ hi रहा था की किसी ने उसके बालो से पकड़ कर उसे खींचा, बल इतनी जोर से खींचे की उसके मुँह से जोर से चीख निकल गयी, वो कुछ समजे उसे पहले hi उसे किसी ने बालो से पकड़ कर किसी सूखे पत्ते की तरह उसे ऊपर उठा दिया और घुमा कर धोबी पछाड़ देते हुए उसे दूर पटक दिया. नशे की वजह से उसे सब धुंधला धुंधला दिख रहा था, उसे समाज hi नहीं आया की क्या हुआ, उसे इतनी बुरी तरह से पछाड़ा था की उसकी हड्डिया तक दुखने लगी थी, उसने अपनी आंखे मलते हुए देखा तो वो चौंक गया.

इंस्पेक्टर : तू, यहाँ? तू तो जेल में था न.

इंस्पेक्टर की कराहने की आवाज सुन कर मैनेजर घबराजाता है और वो भी सरिता को छोड़ कर बहार की और भागता है. भर का नज़ारा देख कर उसकी आंखे फटी की फटी रह जाती है. वह शिव था और इंस्पेक्टर निचे पड़ा हुआ था.

लता : (दौड़ते हुए शिव से लिपट जाती है, )शिव , शिव तू आगया (वो जोर जोर से रोने लगती है)

सरिता: (सरिता भी कमरे से बहार आती है, शिव को देख कर वो भी शिव की और दौड़ती hai)Shiiiiiv. (जा कर सीधे वो शिव से लिपट जाती hai)Tu आ गया. (उसकी आँखों से आंसुओ की धरा बहने लगती है)

इंस्पेक्टर : (अब वो थोड़ा होश में आ गया था, दीवाल का सहारा ले कर वो खड़ा हुआ, आदत के अनुसार उसका हाथ अपनी कमर पर गया जहा पिस्तौल रक्खी होती है, पर इस वक़्त वो वह नहीं थी, दारू पिटे हुए उसने, वो सब साइड में रख दिया था, उसे अपनी गलती का एहसास हुआ पर उसने अपने आपको संभाला) तू आया कैसे वो में बाद में पूछूंगा, तू क्या समझता है, तू आ गया है तो कोई फर्क पड़नेवाला है. कोई फर्क नहीं पड़नेवाला. अब में तेरे सामने hi इससे छोडूँगाआआआ. (अभी वो अपना वाकया पूरा करता उस से पहले hi शिव, बिजली की गति से उसके ऊपर कूड़ा, उसकी लात का प्रहार इतना तेज था की इंस्पेक्टर, धड़ाम से पीछे खम्भे से जा कर टकराया, उसका शिर घूमने लगा, उसकी आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा, शिव इतने से hi नहीं रुका, वो इंस्पेक्टर को कुत्ते की तरह धो ने लगा. एक के बाद एक घुसे और लात पद रहे थे और इस्पेक्टर के मुँह से सिर्फ आह , माँ ओह्ह्ह यही निकल रहा था.

ये सब देख कर मैनेजर पहले तो सदमे में चला गया पर जल्द hi खुद को संभाला और जा कर शिव को पीछे से लात मरी. शिव ने गुस्से से मुद कर पीछे देखा, उसके आँखों में गुस्से की गर्मी देख कर hi मैनेजर की मूत निकल गयी, वो दर से शिव को दखने लगा, इतने में उसे भी एक जोर का घुसा उसके जबड़े पर पड़ा. घुसा इतना जोरदार था की उसके दन्त तक हिल गए और वो धड़ाम से जमीं पर गिरा. इतने में दरवाजे से रंजन, विणा, स्नेहा मैडम, पवनसीर, जूही मैडम और बिना मैडम भी अंदर दाखिल हुई. रंजन ने अंदर का नज़ारा देखा तो वो समाज गयी और वो दौड़ते हुए मैनेजर के पास गयी और उस पर लातो से टूट पड़ी. शिव ने इंस्पेक्टर को पकड़ा और उसे सुत्ने लगा. सरिता, विणा, लता सब रंजन को देख कर मैनेजर और इंस्पेक्टर पर टूट पड़े. मैनेजर रंजन को मरने जा रहा था की शिव ने उसे एक और घुसा मारा तो वो वापस जमीं पर लीधाक गया, सब लड़कीअ मिल कर दोनों को मर रही थी, अगर कोई सामने मरने जाता तो शिव उसे वही पटक देता. शिव बरी बरी दोनों को मर रहा था. लकीओ के हाथ थक गए तो जिसके हाथ में जो आया उस से उन्हें मरने लगे. इंस्पेक्टर तो मर कहते हुए और शराब के नशे में बेहोस hi हो गया. शिव ने मैनेजर को पकड़ा.

सरिता : (रट हुए जोर से chillayi)Ise छोड़ न मत शीइइइइइव, इसने लता की इज्जत लूटनी चाही, और बरसो से मेरी लूट रहा है. छोड़ना मत ीसीईई. आज ये रंजन और विणा की भी इज्जत इस इंस्पेक्टर के हाथो लुटवाना चाहता था.

मैनेजर तो पहले से डरा हुआ था ऊपर से सरिता की बात सुन कर वो खौफ से शिव की और देखने लगा. इतनी मार से वो समाज गया था की आज वो बचने वाला नहीं. शिव ने गुस्से में मैनेजर को देखा तो उसे अपनी मौत दिखाई देने लगी.

मैनेजर : मुझे माफ़ करदे शिव, में अब कभी ऐसा नहीं करूँगा. में माफ़ी मांगता हु, मुझे मात करदे.

रंजन : नहीं शिव, इससे मत छोड़ना, इसने अनाथालय की बहोत सी लड़कीओ के साथ ये सब किआ है, बरसो से वो सरिता दीदी को नोच रहा है, आज उसने लतादिदी पर हाथ डाला है, उसे छोड़ना मत.

मैनेजर लाचारी से रंजन को देख रहा था, उसने डरते डरते शिव को देखा. शिव ने घुसो और लातो को बारिश कर दी. स्नेहा को लगा की कही मैनेजर मर न जाये.

स्नेहा मैडम :पवन उसको रोको , कही वो मर न jaye.(Pawansir ने आगे बढ़कर शिव का हाथ पकड़ लिया.)

स्नेहा मैडम : शिव रुक जाओ, वो मर गया तो तुम फास जाओगे. (शिव फिर भी लातो से मैनेजर को मर रहा था)

सरिता : लता , रोक उसे, वो मर डालेगा उसे.

लता दीदी : Shiiiiiiiiiiiv, छोड़ दे उसे, वो मर जायेगा, तुजे कुछ हो गया तो मेरा क्या होगा. में किसके सहारे रहूंगी, छोड़ दे उसे.
 
अपडेट 55

में रुक गया, मैंने दीदी की और देखा तो वो रो रही थी, सरितादिदी उनके साथ hi कड़ी थी. दोनों की आँखों से आंसू बह रहे थे. मैंने देखा तो मैनेजर भी बेहोस हो गया था. मेने उसे छोड़ा और दीदी के पास पंहुचा.

शिव :(लतादिदी का गाल सहलाते hue)Didi आप ठीक ho?(Latadidi रट हुए मुझसे लिपट गयी और जोर जोर से रोने लगी, मेरी भी आँखों में आंसू आ gaye)Didi आप को कुछ हुआ तो नहीं न?

लतादिदी : (रट hue)Me ठीक हु शिव, में ठीक हु, तू आ गया, तू आ gaya.(Muje और कास लिया)

शिव :(मैंने सरिता दीदी को dekha)aap ठीक हो न didi(Saritadidi भी रट हुए मुज से लिपट गयी)

सरितादिदी : शिव, तू आ गया, टाइम पर आ गया वर्ण अनर्थ हो जाता.

रंजन और विणा भी आ कर मुज से लिपट कर रोने लगी. मेने चारो को अपनी बहो में भर लिया.

शिव : रोना नहीं, में हु न, में हु यहाँ. किसी को डरने की जरुरत नहीं.

अंदर से बच्चो के रोने की आवाजे आ रही थी तो लतादिदी, सरितादिदी, रंजन और विणा सब कमरे में चली गयी. वो बच्चो को शांत करने लगी. स्नेहा, जूही और बिना मैडम, आंखे फाडे शिव को देख रही थी. उन्होंने जो अपनी आँखों से देखा था उसपर अभी भी उन्हें यकीं नहीं हो रहा था. उन्होंने आज शिव का एक अलग hi रूप देखा था. आज उन्होंने शिव को तांडव करते देखा था. पवन भी कभी शिव को तो कभी निचे पड़े उन दो लोगो को देख रहा था. उसे चिंता होने लगी, उसने फ़ौरन वकील को फ़ोन लगा दिया, वो वकील भी अभी अभी उनके साथ hi पुलिस स्टेशन से निकली थी. उन्होंने वकील को यहाँ क्या हुआ है वो सब बता दिया.

वकील : पवन जी आप पुलिस स्टेशन में फ़ोन कर दीजिये, में अभी वह पहुँचती हु.

वकील और इंस्पेक्टर भार्गवी साथ साथ hi वह पहुंचे. भार्गवी अंदर का नज़ारा देख कर चंक गयी. इंस्पेक्टर साहब और मैनेजर वह अंडरवियर में बेहोश पड़े हुए थे. पवनसीर ने सब बता दिया. अब मामला सीनियर इंस्पेक्टर से जुड़ा हुआ था तो भार्गवी ने अपने बड़े अफसर को फ़ोन किआ और उन्हें सारा माजरा समजा दिया. उनसे बात करने के बाद उसने एम्बुलेंस को भी बुला लिया. दोनों अभी भी बेहोश hi थे, उनको को एम्बुलेंस में दाल दिया. वकील जो थी वो वही थी जिनकी शिव ने गयम में मालिश की थी, है काव्य मैडम.

काव्य : (भार्गवी को) मैडम, यहाँ जो हुआ उसके लिए आपको शिव को वापस गिरफ्तार करना पड़ेगा, पर ये अकेले शिव पर न दाल कर आप सब का नाम लिखिए ताकि सेल्फ डिफेन्स में ये हुआ है वो कोर्ट में साबित किआ जाये. वैसे भी शिव कोई गुनेहगार नहीं है, इन लोगो ने बलारकर करने की कोशिस की और उसी के बचाव में ये सब हुआ है.

भार्गवी : में सब समझती हु पर ये पुलिस पर हुए हमले की वारदात है तो मुझे इसकी रिपोर्ट तो करनी hi पड़ेगी.

काव्य मैडम : ये पुलिस नहीं बलात्कारी है, और बलात्कारी चाहे कोई भी हो उसे बक्शा नहीं जा शक्ति. आप खुद एक लड़की है आप समाज शक्ति है. और ये लोग यही है, में सुबह इन्हे पुलिस स्टेशन ले आउंगी, अभी सब डरे हुए है और यहाँ और कोई मर्द भी नहीं है. सब बच्चे और लड़कीअ बहोत दरी हुई है, मेरी जिम्मेदारी है, ये कही नहीं जायेंगे.

भार्गवी : ठीक है, में समझती हु. (भार्गवी भी समाज रही थी तो उसने अपने रिस्क पर अभी किसी को गिरफ्तार नहीं किआ और उन्दोनो को एम्बुलेंस में दाल कर वो निकल गयी. उसने उन दोनों के और लता और सरिता के फाटे कपड़ो के साथ फोटो भी ले लिए थे.)

सब संभल चुके थे. लता भी अपने आप को ठीक महसूस कर रही थी. उसे समाज नहीं आ रहा था की शिव कैसे यहाँ आ गया. बच्चो को सुलाने के बाद सब बहार आये. आते hi उसने शिव से पूछा.

लतादिदी : शिव तू कैसे आया? तुजे तो पुलिस ने पकड़ लिया था, और वो इंस्पेक्टर तो कह रहा था की वो तुजे बहार नहीं आने देगा.

शिव : ये सब इनलोगो की वजह से हुआ है, और रंजन और विणा की वजह से. रंजन और विणा पता नहीं कैसे स्नेहा मैडम और पवन सर को वह ले आयी, और मेने भार्गवी मैडम से रिक्वेस्ट कर के उनके फ़ोन से जूही मैडम को फ़ोन कर दिया था.

लतादिदी : (रंजन के शिर पर हाथ रखते hue)Ranjan तुम बताओ कैसे हुआ ये सब?.

रंजन : दीदी, किस्मत से जब हम गयम गए तो वो बंद hi कर रहे थे, उनसे हमे पवनसीर का फ़ोन नंबर मिल गया, उन्होंने hi पवनसीर को फ़ोन किआ. जब मेने उन्हें सब बताया तो वो और स्नेहा मैडम वह आ गए.

जूही मैडम : और शिव ने मुझे फ़ोन किआ और बताया की उसके ऊपर पैसो की चोरी का इलज़ाम लगा कर उसको पुलिस लॉकअप में बंद कर दिया है. और ये पैसे उसको स्नेहा ने और उसकी क्लास टीचर ने दिए थे. मैंने स्नेहा को फ़ोन किआ तो उसने कहा की उसे सब पता चल गया है और वो पुलिस स्टेशन hi जा रही है. मेरे पास बिना मैडम का नंबर था तो मैंने उन्हें फ़ोन लगाया और सब बता दिया. उन्होंने मुझे लेने आने को कहा, तो में उन्हें ले कर पुलिस स्टेशन पहुंच गयी. जब हम पुलिस स्टेशन पहुंचे तो हमने भार्गवी मैडम से बात की. उन्होंने हमें वकील से बात करने को कहा.

पवनसीर एक वकील को जानते थे, वो हमारे गयम में hi आती है. में भी उन्हें जानती हु पर पता नहीं था की वो वकील है.

पवनसीर ने उन्हें फ़ोन लगाया और उन्हें सब बताया. वो भी शिव को जानती थी. पर प्रॉब्लम ये थी की रात हो गयी थी और रात को कुछ नहीं हो सकता था. जैसे तैसे काव्यजि ने जज को रिक्वेस्ट की और जमानत का इंतजाम करवाया, इस भगा दौड़ी में काफी टाइम निकल गया. जब वो जमानत के कागजात लेकर पुलिस स्टेशन पहुंची तो भार्गवी मैडम ने सीनियर इंस्पेक्टर को फ़ोन किआ पर वो उठा नहीं रहा था. उन्होंने ऊपर बात की और शिव को छोड़ दिया.

शिव : जब में बहार आया तो भार्गवी मैडम मुझे साइड में ले गयी. उन्होंने बताया, जल्दी से अपने घर पहुँचो, मुझे लगता है वह गड़बड़ है, में जानती हु फिर भी ओफ्फिशलय कुछ नहीं कर शक्ति क्यों की वो मेरा ऊपरी है. पर मुझे लगता है वह कोई लड़कीअ है जिनकी इज्जत खतरे में है. जैसे hi मेने ये सुना, में फटाफट जूही मैडम के पास गया.

शिव : मैडम जल्दी अनाथालय चलिए.

जूही मैडम : क्या हुआ शिव?

शिव : में रस्ते में बताता हु आप जल्दी चलिए.

जूही समाज गयी कोई गंभीर बात है तो वो जल्दी से वह से निकली और अपने स्कूटर पर शिव को बिठा कर अनाथालय की और निकल गयी. शिव ने सब को अनाथालय आने को बोल्दिया.

जब हम यहाँ पहुंचे तो मुझे लतादिदी की चीखे सुनाई दे रहे थी. मेरा दिल घबरा गया और में चालू स्कूटर से hi कूद कर अंदर की तरफ दौड़ा. जब में अंदर आया तो देखा की कोई लतादिदी पर जबरदस्ती करने की कोशिस कर रहा है. बस फिर उसके बाद का तो आप को पता hi है.

लतादिदी : अब आगे क्या होगा शिव? वो अब हमे यहाँ नहीं रहने देगा.

पवनसीर : वो यहाँ का मैनेजर है कोई मालिक नहीं. कोण है यहाँ का मालिक.

लतादिदी : हमे नहीं पता, कई सालो से हमने सिर्फ मैनेजर को hi देखा है.

पवनसीर : यहाँ के सब डाक्यूमेंट्स कहा रक्खे होते है?

सरितादिदी : उस रूम में.

पवनसीर : आओ शिव, हम वह देखते है, शायद कुछ मिल जाये.

शिव :(वह ऑफिस में काफी साडी फाइल्स थी और पवनसीर सब देख रहे थे. बहार सब लड़कीअ और मैडम बैठी हुई थी.)

स्नेहमड़ाम : (वो सोच रही थी शिव ने अपनी टीचर से क्यों पैसे लिए? अगर उसे ज्यादा पैसो की जरुरत थी तो वो मुझसे मांग सकता था, शिव से पूछना पड़ेगा.)

यही बात बिना के दिमाग में भी घूम रही थी. पर अभी उसका जवाब मिल नहीं शक्ति था. वो देख रही थी की यहाँ बहोत सरे छोटे बच्चे थे. कुछ छोटे तो कुछ थोड़े बड़े. शिव और ये दूसरी लड़कीअ और ये छोटे बच्चे, उन्हें इनकी हालत पर दया आ रही थी. काफी समय गुजर गया. शिव और पवनसीर बहार आये. उनके हाथ में कुछ फाइल्स थी.

पवनसीर: मुझे उनका नाम और एड्रेसस तो मिल गया है. मुझे और भी कुछ मिला है पर मुझे इसके बारे में और डिटेल में देखना पड़ेगा तो में अभी ये अपने साथ hi ले जा रहा हु.

मेने सब का सुक्रिया ऐडा किआ, में बिना मैडम से थोड़ा कतरा रहा था. उनका भी यही हाल था. फिर सब लोग वह से निकल गए. सब इतने डरे हुए थे तो सब साथ में बच्चो के साथ hi बड़े हॉल में hi सो गए.

सुबह सुबह hi भार्गवी मैडम पुलिस जीप ले कर आ गयी.

भार्गवी मैडम : शिव तुम्हे पुलिस स्टेशन चलना होगा.

लतादिदी :आप क्यों इससे पुलिस स्टेशन ले जा रही है, आप को तो पता है की इसने चोरी नहीं की.

भार्गवी :इससे चोरी की वजह से नहीं पर मैनेजर और इंस्पेक्टर को मरने की वजह से ले जा रहे है. उन दोनों की हालत बहोत ख़राब है, कई फाक्टूरे हुए है. और ये में नहीं कर रही पर ऊपर से आर्डर है.

सरितादिदी : पर इसने तो हमें बचाया है उनलोगो से.

भार्गवी : है पर इसने कानून को अपने हाथ में लिया है. और ये गुनहगार है की नहीं ये कोर्ट तय करेगा. चलो शिव.

लतादिदी :(मेरे आगे आ gayi)Nahi में इससे नहीं ले जाने दूंगी.

सरितादिदी : है हम इससे नहीं ले जाने देंगे, अगर इसे ले गयी तो हम भी साथ चलेंगे.

शिव : दीदी, इन्हे अपना काम करने दीजिये. इन्होने तो हमारी मदद hi की है. क्या में एक फ़ोन कर सकता hu.(Bhargavi मैडम ने अपना फ़ोन दिया) थैंक यू. (मैंने जूही मैडम को hi फ़ोन लगाया और उन्हें सब बता दिया.

जूही मैडम : तुम फ़िक्र मात करो में पवनसीर को फ़ोन कर देती हु. वो काव्यजि से बात कर लेंगे. में भी आती हु वह.

में भार्गवी मैडम के साथ जीप में निकल गया. उन्होंने मुझे लॉक उप में बंद नहीं किआ पर वह एक बेंच पर बिठा दिया. पवन सर ने काव्य मैडम से बात की और उन्हें पुलिस स्टेशन आने को कहा. उन्होंने गयम में मदन सर को भी फ़ोन कर दिया और आज सब को छुट्टी देने को कह दिया. दोपहर होते होते तो पुरे सहर में ये बात आग की तरह फ़ैल गयी. भार्गवी मैडम ने यही केस दर्ज किआ की मैनेजर और इंस्पेक्टर, अनाथालय की लड़कीओ का शारीरिक शोषण कर रहे थे, और उनपर बलात्कार करने जा रहे थे और शिव और वह की लड़कीओ ने मिल कर इनको मारा है. ये उन्होंने काव्य मैडम के कहने पर किआ ताकि सारा इल्जाम शिव पर न आये. जैसे जैसे लोगो को पता चला सब का गुस्सा मैनेजर और इंस्पेक्टर के लिए बढ़ने लगा. कई लोग मोर्चा ले कर पुलिस स्टेशन आ गए और मीडिया वाले भी वह पहुंच गए. सब यही कह रहे थे की मैनेजर और इंस्पेक्टर जैसे भेडिओ के साथ यही होना चाहिए था. शिव को गिरफ्तार कर के पुलिस और गलत कर रही है.

न्यूज़ चेनलो पर भी ये खबर चलने लगी तो कई स्टूडेंट्स भी वह आने लगे. जब ये बात संयम और मेरे दोस्तों को पता चली तो वो लोग भी वह आ गए. काफी भीड़ जमा हो गयी थी वह पुलिस स्टेशन के बहार. काव्य मैडम और पवनसीर ने जज से मिले और मेरी जमानत की अर्जी दी. और साथ में उन्होंने कुछ ऐसे दस्तावेज जमा करवाए जो दर्शाते थे की मैनेजर एक निहायती कमीना इंसान था और वो अनाथालय के पैसो का भी गमन कर रहा था.

इतने हंगामे की वजह से और काव्य मैडम की दलीलों की वह से मुझे जमानत मिल गयी. हम सब बहार निकले तो वह इकठ्ठा हुई भीड़ ने मेरा अभिवादन किआ. मीडिया वाले मुझे कई सवाल करने लगे पर काव्य मैडम ने सब संभल लिया. उन्होंने मीडिया को भी यही बयां दिया की मैनेजर और इंस्पेक्टर, बलात्कार करने की कोशिस कर रहे थे तो सब ने मिलकर उनको मारा है. हम लोग वह से निकल गए. मैंने काव्य मैडम और पवन सर का धन्यवाद किआ. जूही मैडम मुझे अनाथालय ले गयी.

मुझे वापस आया देख सब मुज से लिपट कर रोने लगे. थोड़ी देर ये सब चला फिर हम सब अंदर आ गए.

जूही मैडम : कल स्कूल में खेल महा कुम्भ है, शिव.

शिव : आप देख रही है क्या हल है.

जूही मैडम : में देख रही हु, पर तुम्हे ये करना hi होगा.

लतादिदी : है शिव, ये तुम्हारे भविस्य का सवाल है, ये सब तो चलता रहेगा, पर तुजे कल, अपने लिए नहीं, हमारे लिए ये करना होगा.

शिव : ठीक है दीदी.

लतादिदी : अब क्या होगा. ये अनाथाश्रम बंद हो गया तो हम कहा जायेंगे. और ये दूसरे बच्चे भी कहा जायेंगे.

सच कहु तो मेरे दिमाग में भी यही सब चल रहा था. वैसे तो हम अब बड़े हो गए थे तो कही भी जा सकते थे पर जो चल रहा था वो सब अब नहीं हो सकता था. मेरा मतलब है अब हमे पैसे चाहिए होंगे, पढ़ाई वगैरह सब हो पायेगा? ऊपर से ये छोटे बच्चे, इनका क्या होगा पता नहीं? जूही मैडम भी हमारी बाते सुन कर परेशान हो गयी थी. अभी फ़िलहाल तो इसका कोई इलाज नजर नहीं आ रहा था तो वो अपने घर चली गयी. रात को भी सब यही बाते चल रही थी. अभी फ़िलहाल के लिए तो रसन था तो खाना बना और सब ने मिलकर खाया. हम जितने बड़े थे उनको अपनी चिंता नहीं थी क्यों की हम सब अपना गुजरा कर शक्ति थे पर चिंता थी बच्चो की. खैर हम सब मिलकर साथ में सो गए.
 
अपडेट 56

आज स्कूल सुबह का था, वैसे तो आज संडे था पर स्कूल में खेल महोत्सव का आयोजन किआ गया था. सुबह में उठ कर तैयार होने लगा. नाहा धो कर में अपने कमरे में कपडे पहन रहा था तो लतादिदी आ गयी. मुझे तैयार होता देख वो मेरे पास आयी, में शर्ट पहन रहा था, वो पास आकर मेरे बटन बंद करने लगी. में उन्हें hi देख रहा था, वो शर्मा रही थी. हम दोनों का सम्बंद अचानक बदल गया था, फिर भी वो थी तो मेरी दीदी hi. में उनके प्यारे से मुखड़े को देख रहा था, उन्हें पता था की में उन्हें hi देख रहा हु तो वो मुस्कुरा रही थी. मेने उन्हें कमर से पकड़ कर मेरी और खिंचा तो वो मेरी आँखों में देखने लगी. पिछली घटनाओ की वजह से, ये एक दो दिन बहोत ख़राब गुजरे थे, तो मेने उन्हें सहज करने के लिए उनके होठो को हलके से चूमा.

शिव : दीदी, आप चिंता मात करना, सब ठीक हो जायेगा.

लतादिदी : (शरमाते हुए, अपनी नज़ारे झुकाये thi)Me जानती हु. तू भी चिंता मात करना, जो होगा वो हम सब साथ में मिल कर संभल लेंगे. तू बस अपने लक्ष पर ध्यान दे. अच्छे से अपने खेल को खेलना.

शिव : दीदी, आज इतना कोई खास नहीं है, ये स्कूल लेवल पर है तो मेरे लिए आसान है, आप चिंता मात करना. और है पता नहीं हम कब छूटेंगे, तो आप रह मत देखना, और खाना खा लेना.

लतादिदी : हम्म्म्म.

हम बहार आये तो, सरितादिदी, रंजन और विणा ने भी मुझे बेस्टो ऑफ़ लक विश किआ. में वह से निकल कर स्कूल के लिए निकल गया. आज हम सब हमारे स्कूल के मैदान में hi इकठ्ठा हुए थे. मैदान में सफ़ेद पाउडर की मदद से लकीरे खींची गयी थी. अलग अलग तरह के इवेंट होने थे तो उस हिसाब से मैदान तैयार किये गए थे. यहाँ कुछ इवेंट ऐसी थी की सभी का भाग लेना कंपल्सरी था तो सभी लोग मैदान में थे. गोला फेंक, बरछी फेंक, kho-kho, वॉलीबॉल, लॉन्ग जम्प, हाई जम्प. और भी बहोत साडी गेम्स थी. हम तीनो दोस्त साथ में थे. कल के हादसे की वजह से हर जगह मेरी hi बाते चल रही थी. सब लोग मुझे hi देख रहे थे. हर जगह इवेंट चल रहे थे. मेरी ऊंचाई की वजह से लॉन्ग जम्प, हाई जम्प में भी में फर्स्ट आया. लास्ट में पुरे मैदान के इर्द गिर्द सब खड़े हो गए और दौड़ का सिलसिला सुरु हुआ. 10-10 लोगो को दौड़ाया गया. जो जित रहे थे फिर उनकी दौड़ कराई गयी. लास्ट 10 में मैं और महेश थे दूसरे लड़को के साथ. हर्ष बहार हो गया था. लड़कीओ की भी रेस थी पर उन में वैस्वी और संयम नहीं थे. अब तक की दौड़ के रिजल्ट के अनुसार सब को यकीं हो गया था की मैं hi जीतूंगा तो जब हम दौड़ के लिए ट्रैक पर खड़े हुए तो कई लड़के और लड़कीअ मेरा नाम चिल्ला रहे थे. संयम भी जोर जोर से ‘के ों शिव’ ‘के ों शिव’ चिल्ला रही थी. ऐसे सब मेरा नाम चिल्ला रहे थे तो वैस्वी सब को देख रही थी, पर वो शांत रही. एक दो बार संयम ने उसका हाथ पकड़ कर चिल्लाने को कहा पर उसने मन कर दिया. जब रेस हुई तो वही हुआ जो होना था. जीता तो मैं hi पर सब इस बात से दांग थे की मेरे और दूसरे नंबर के बिच बहोत फैसला था. टीचर्स और प्रिंसिपल भी मेरे परफॉरमेंस से बहोत प्रभावित थे. समापन समारोह में प्रिंसिपल ने मेरी बहोत तारीफ की. चीफ गुएस्ट के तौर पर एक महिला को आमंत्रित किआ गया था. मुका नाम मनीषा देवी था. उनके हाथो से मुझे मैडल पहनाया गया. कई खेल में में ावल आया था, तो बरी बरी कई टीचर और प्रिंसिपल सर ने भी मुझे मैडल पहनाया. मेरी क्लास टीचर होने के नाते बिना मैडम भी मुझे मॉडल पहनाने आयी थी. उन्होंने मुझे हाथ मिला कर कोंग्रटुलतिओं भी कहा. जब जब मुझे मैडल पहनाया गया, संयम और मेरे दोस्त और बहोत सरे लड़के लड़कीअ जोर जोर से मेरा नाम पुकार रहे थे. मुझे इतने सरे मॉडल मिलने पर मनीषा देवी ने मुझे पांच हजार एक का इनाम देने का एलान किआ. सब लोगो ने बहोत तालिया बजायी. जब में अपने दोस्तों के पास पंहुचा तो कई लड़के लड़कीओ ने मुझे विश किआ, कई लोग मुझसे हाथ मिला रहे थे. संयम मुझे विश करने आयी.

संयम : (खुसी से चहकते hue)Shiv क्या दौड़ते हो तुम, बाप रे, सब देखते hi रह गए. सब लोग तुम्हारी कितनी तारीफ कर रहे हे. आज तो सच में मज़ा आ गया.

शिव : जीता में हु और तुम ऐसे खुस हो रही हो जैसे तुम hi जीत के आयी हो.

संयम : तुम जीते मतलब में भी जीत गयी. यार अपने दोस्त की कामयाबी पर खुसी तो होती hi है. सचमुच आज मुझे बहोत hi ज्यादा खुसी हुई.

जितने भी लोग जीते थे उनके साथ सब टीचर्स और प्रिंसिपल फोटो खिंचवा रहे थे तो मुझे देर हो गयी. मेरे दोस्त और संयम, वैस्वी, और दूसरे स्टूडेंट्स सब चले गए थे. सब निपटा कर में बाथरूम में गया, वह फ्रेश हो कर जब में बहार आया तो स्कूल में लगभग कोई नहीं था, कुछ टीचर्स अपने व्हीकल्स ले कर निकल रहे थे. मेने देखा की बिना मैडम भी चलते हुए गेट के बहार निकल रही थी. में उनसे काफी पीछे था. वो चल कर रस्ते पर जा कर कड़ी हो गयी और ऑटो का इंतजार करने लगी. में चलते हुए उनके नजदीक पंहुचा तो उनकी भी नज़र मुज पर पड़ी. में शिर झुकाये चलता रहा, मेने उनको क्रॉस किआ hi था की उन्होंने मुझे पुकारा.

बिना मैडम : शिव. (आवाज काफी धीमे थी, पर मेने सुन ली, में रुक गया, में थोड़ा आगे निकल गया था तो पीछे मुद कर उनके पास पंहुचा)

शिव : जी, मैडम.

बिना मैडम : चल कर जा रहे हो.

शिव : जी मैडम, में रोज चलकर hi जाता हु.

बिना मैडम : में रिक्शा से जा रही हु, मेरे साथ चलो.

शिव : (में उन्हें देखने लगा, क्यों की हमारे बिच जो हुआ था उसके बाद वो मुज से बात भी करेगी इसकी मुझे उम्मीद नहीं थी) नहीं मैडम, में चला जाऊंगा. (वो कुछ बोलना चाहती थी पर वो बोली नहीं तो में निकलने लगा)

बिना मैडम : (मुझे निकलता dekh)Ruko...(Me रुक गया, वो जैसे कुछ कहना चाहती thi)Jaldi में हो क्या?

शिव : (मुझे कोई जल्दी नहीं thi)Nahi तो मैडम.

बिना मैडम : (हिचकिचाते हुए) घर चलोगे?

शिव : (उनके ऐसा पूछने पर में चौक गया, मुझे कतई ऐसी उम्मीद नहीं थी, में उन्हें देख रहा था, और समझने की कोशिस कर रहा tha)Par मैडम, wo...(Me क्या कहु कुछ समाज नहीं आ रहा था, वो मुझे घर बुला रही थी, क्या सच में वो मुझे घर बुला रही थी, में समाज नहीं प् रहा था)

बिना मैडम : (वो खुद hi जानती थी की, उसने कितनी मुश्किल से ये कहा था, उसे खुद पता नहीं था की उसके मान में क्या चल रहा है, कही न कही उसे लग रहा था की उसने गलती की है तो वो उस बारे में बात कर के सब सही करना चाहती thi)(Par वो नहीं जानती थी की इसको सही करने के चक्कर में वो किस नयी परिस्थिति को जन्म देने जा रही thi)Chaloge?

शिव : (वो मेरी टीचर थी, तो में मन तो कर नहीं शक्ति था, पर वो मुझे क्यों घर बुला रही है वो मेरी समाज से बहार था) जी मैडम.

उतने में एक रिक्शा दिखी तो मैडम ने हाथ कर के उसे बुलाया, हम दोनों रिक्शा में बेथ गए, वो रिक्शा के एक कोने में थी और में दूसरे कोने में बेथ गया. पुरे रस्ते हम दोनों चुप hi थे. उनकी सोसाइटी के बहार हम दोनों उतर गए और पैदल hi उनके घर पहुंचे. दोपहर की वजह से और ऊपर से काफी गर्मी थी तो बहार कोई नहीं था. उन्होंने दरवाजा खोला, हम दोनों अंदर आ गए. मुझे बहोत अजीब लग रहा था, उस दिन की घटना के बाद आज हम दोनों पहली बार मिल रहे थे. क्या बात करू और कैसे करू मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा था. उन्हें देख कर लग रहा था की उनकी भी यही हालत है.

बिना मैडम : बैठो. (में सोफे पर बेथ गया, वो अंदर गयी और दो गिलास पानी ले कर आयी, एक मुझे दिया और दूसरा वो खुद ले कर मेरे सामने बेथ गयी, में पानी पिने लगा, मेरी निगाहे बार बार उनकी और जा रही थी, वो अपनी नज़ारे झुकाये पानी पि रही थी, पानी पिने के बाद मेने गिलास वही टेबल पर रख दिया, उन्होंने में पानी पि लिया था. उन्होंने भी गिलास रक्खा. वो गिलास को hi देखे जा रही थी, उन्हें देख कर hi लग रहा था की वो किसी सोच में है, वो कुछ बोल नहीं रही थी, वो hi मुझे ले कर आयी थी, में क्या करू मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था, मुझे लगा की मुझे hi शुरुआत करनी चाहिए)

शिव : सॉरी, मैडम. (बिना मैडम ने मेरी और देखा, मेने सॉरी कहा तो पहले उन्हें कुछ समाज नहीं aaya)Us दिन के लिए मुझे माफ़ करदिजिये, में सचमे बहोत दिलगीर हु, में माफ़ी मांगता हु अपने उस बर्ताव के लिए.

बिना मैडम : (वो थोड़ी देर शिव को देखती रही, फिर अपनी नज़ारे झुका कर, बड़ी मुश्किल से धीमी आवाज में boli)Tumhari कोई गलती नहीं thi.(Hum दोनों के बिच कुछ पल शांति छई रही)

शिव : नहीं मैडम, मेरी hi गलती थी, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिएथा. मुझे माफ़ करदिजिये, में फिर कभी ऐसी बदतमीजी नहीं करूँगा.

बिना मैडम : मेने कहा न, तुम्हारी कोई गलती नहीं थी, वो to...wo तो... मेने hi...

शिव : में समाज नहीं मैडम.

बिना मैडम : मेने कहा न तुम्हारी कोई गलती नहीं थी, छोडो उस बात को.

में भी सोच में पद गया, में जनता था मेरी कोई गलती नहीं थी, उस वक़्त मैडम ने hi वो सब किआ था, पर फिर मुझे लगा था शायद मेरी hi गलती हो गई, में hi कुछ गलत समाज लिया था. पर आज मैडम खुद कह रही है की मेरी गलती नहीं थी, और इतना सब होने के बाद भी वो मुझे आज अपने घर ले कर आयी थी. में समाज ने की कोशिस कर रहा था की, मैडम चाहती क्या है. में उनके चेहरे को देख कर समझने की कोशिस कर रहा था. अब जब वही कह रही थी की मेरी कोई गलती नहीं थी तो में सहज होने लगा. कुछ सोचते हुए मेने उनसे पूछा

शिव : अगर मेरी गलती नहीं थी तो आपने मुझे मारा क्यों tha.(Usne ये अपेक्षा नहीं थी की में ऐसा कुछ बोलूंगा, वो आंखे फाडे मुझे देख रही थी) बताईये, आप ने मुझे मारा क्यों था.

बिना मैडम : तुमने वैसी हरकत जो की थी.

शिव : पर अभी तो आप कह रही थी की मेने कोई गलती नहीं की thi.(Wo मुझे ऐसे देख रही थी जैसे वो कंफ्यूज थी की क्या जवाब दे, मेने अपनी बात आगे बधाई) आप कह रही है की मेने वैसी हरकत की थी फिर भी आप कह रही है की मेरी गलती नहीं थी, मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा मैडम. (में मैडम की मनोस्थिति समाज सकता था, मुझे अब यकीं होने लगा था की मैडम क्या चाहती है, या चाहती है भी की नहीं ये मुझे कन्फर्म करना था, में उठ कर उनके बाजु में बेथ गया, बिना मैडम का चेहरा ऐसा हो गया था की उन्हें यकीं नहीं हो रहा tha)To बताइये मैडम, मेरी गलती थी की नहीं थी.

बिना मैडम : Shiv...(Use ऐसी अपेक्षा नहीं थी की शिव ऐसे बेहवे करेगा) तुम जाओ शिव.

शिव : कहा जाऊ मैडम, वापस अपनी जगह पर या आप के घर से बहार.

बिना मैडम : तुम ऐसा क्यों कर रहे हो शिव.

शिव : मुझे जान न है की मेने गलती की थी या नहीं.

बिनामदं : Shiiiv.(Unki आवाज में हो रहे कम्पन से मुझे पता चल रहा था की वो क्या चाहती है, मेने उनके हाथ पर हाथ रखदिया, वो आंखे फाडे मुझे देख रही थी, धीमी आवाज में उन्होंने kaha)Shiiiiiiv, जाओ यहाँ से.

शिव : (अब मुझे पूरा यकीं हो चूका था की मैडम क्या चाहती है) आप के जवाब के बगैर तो नहीं जाऊंगा. (में उनके हाथ को अपने हाथ में पकड़ कर सहलाने लगा, मुजमे इतनी हिम्मत कहा से आ गयी थी, पता नहीं, या फिर में अब लड़कीओ को समझने लगा था)

बिना मैडम : (कपटी आवाज me)Aisa क्यों कर रहे हो Shiv.(Me उनकी और और थोड़ा घूम गया, में उनके होठो को देखने लगा, मुझे ऐसे अपने होठो को देखता हुआ प् kar)Nahi शिव.

शिव : अगर में गलत हु तो आज फिर मुझे mariye.(Me उनके होठो की और झुकने लगा)

बिना मैडम : नहीं शिव, ऐसा मात करो. (में उनकी बात को अनसुना करते हुए उनके होठो की और बढ़ने लगा, वो पीछे झुकने lagi)Ruk जाओ Shiv(Unki आवाज में विरोध काम, बेबसी ज्यादा थी, मेने अपना एक हाथ बढाकर उनको पीछे झुकने से roka)Shiv ऐसा मात करो, में तुम्हारी टीचर hu.(Me उनके चेहरे के काफी करीब था, मेने उनकी आँखों में देखा, जहा गुस्सा बिलकुल नहीं था, में और झुका तो उन्होंने आंखे बंद कर दी, वो पूरी तरह तैयार थी, मेरा मान भी किआ की उनके होठो को चूस लू, पर में रुक गया, मेने उन्हें छोड़ दिया और उनसे दूर होने laga)(Bina को कुछ समाज नहीं आया, उसने आंखे खोली और शिव को देख कर समझने की कोशिस करने लगी)

शिव : आपने मुझे मारा क्यों नहीं?

बिना मैडम : ऐसा क्यों कह रहे हो?

शिव : मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा, आप कह रही है, उस दिन में गलत नहीं था फिर भी आपने मुझे मारा था, पर आज तो में गलत hi हु न, तो फिर आपने मुझे क्यों नहीं mara?(Wo कुछ नहीं बोली, बस अपनी नज़ारे झुकाये बैठी रही) एक बात बताइये, उस दिन आपने मुझे वह छुआ था न? (उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, मेने उसका मतलब है hi समजा) क्यों छुआ था?( वो कुछ नहीं बोल रही थी) बताइये न, क्यों छुआ था?

बिना मैडम : में,,,, वो me.....bahek गयी थी.

शिव : क्या आप फिर से उसे छूना चाहती है? (उन्होंने चौक कर मुझे देखा, में मुस्कुरा रहा था, उन्होंने अपना शिर ना में हिलाते हुए अपनी नज़ारे झुका ली, मुझे लग रहा था की वो चाहती है पर कह नहीं प् रही है, मेने उनका हाथ पकड़ा तो वो कैंप रही थी, अब ऐसी स्थिति बन गयी थी की मुझे उत्तेजना होने लगी, मेरे लुंड ने अकड़ना सुरु कर दिया, मेने उनका हाथ मेरी झंघ पर रक्खा तो वो उसे खींचने लगी, पर मेने खींचने नहीं दिया) अगर आप को छूना है तो आप छू सकती है.

बिना मैडम : नहीं शिव, ऐसा मात करो.

शिव : क्यों?

बिना मैडम : में ऐसा नहीं कर शक्ति.

शिव : क्यों?

बिना मैडम : बस नहीं कर शक्ति.

शिव : और अगर में करू तो?

बिना मैडम : तुम ऐसा नहीं कर शक्ति?

शिव : क्यों?

बिना मैडम : तुम, ऐसे नहीं हो.

शिव : पर, आप ऐसी है की किसी का भी मान बदल जाये.

बिना मैडम : कैसी हु?

शिव : एकदम तजा गुलाब के फूल जैसी, जिसे देख कर hi कोई भी खिंचा चला आये, (में ये क्या बोल रहा हु) ऐसी संगेमरमर की मूरत हो जिसे एक बेहतरीन संशे में तराशा गया है.

बिना मैडम : (वो शर्माने lagi)Ye क्या कह रहे हो शिव?

शिव : वही जो सच है.

बिना मैडम : प्लीज शिव, ऐसी बाते मात karo(Aaj तक किसी ने उस से ऐसी बाटे नहीं की थी, यहाँ तक की उसके पति ने भी कभी उसकी तारीफ नहीं की थी, वो अंदर hi अंदर बहोत खुस हो रही थी पर अभी भी उसके अंदर की वो दीवारे कायम थी, जिसके अंदर एक औरत हमेसा कैद रहती है)

शिव : ठीक है मैडम, में चलता hu.(Me खड़ा होने लगा)

बिनामदं : (बिना को कुछ समाज नहीं आया, की अचानक क्या हो गया, वो बैठे बैठे शिव को देखने लगी)

शिव : (मेने मैडम का हाथ पकड़ा और खड़ा kia)Me जाऊ न?

बिनामदं : तुम ऐसा क्यों कर रहे हो शिव?

शिव : मैडम, अगर में यहाँ अब रुका तो, कुछ हो जायेगा.

बिनामदं : कुछ नहीं होगा, तुम betho.(Wo भी चाहती थी की कुछ हो पर अभी एक पर्दा था जो वो तोड़ नहीं प् रही थी)

मैडम मुझे जाने नहीं दे रही थी, मतलब वो भी छह रही है, मेने उन्हें अचानक पकड़ लिए और अपनी बहो में भरते हुए, उनके होठो को अपनी गिरफ्त में ले लिया, (बिना आंखे फाडे शिव को देख रही थी, पर उसकी आंखे बोझिल होती चली गयी, और आखिर कर उसकी आंखे बंद हो gayi)(Me खुद अचंबित था की में ऐसा भी कुछ कर सकता हु)
 
अपडेट 57

अपने होठो को ऐसे चूसे जाने से बिना का शरीर कंपनी लगा, शिव उसके मुँह में अपनी जीभ दाल कर उसकी जीभ से खेल रहा था, वो चिप छिपा एहसास, उसके मन मस्तिक को बहोत भ रहा था. उसने डरते डरते अपनी जीभ को भी आगे कर दिया तो शिव उसकी जीभ को अपने होतो से चूसने लगा. ये किस तरह का खेल शिव उसके साथ खेल रहा था, वो शिव को क्यों रोक नहीं प् रही थी. उसके होठो को काफी देर चूसने के बाद जब शिव उसकी और देख रहा था तो वो अपनी नज़ारे उठा नहीं प् रही थी. एक और तो उसे लग रहा था की शिव रुक क्यों गया, वही दूसरी और उसको इतनी शर्म आ रही थी की वो शिव से आंख भी मिला नहीं प् रही थी.

शिव : (मेने उन्हें देखा तो वो नज़ारे झुकाये कड़ी थी, न उन्होंने मुझे डांटा न गुस्सा किआ, वैसे भी वो बहोत hi सुन्दर थी, उनकी वो शर्मीली मुस्कान मुझे अपनी और खिंच रही थी. पता नहीं मुझे क्या हो रहा था, में उनकी और खींचता hi जा रहा था. साड़ी से झक्ति उनकी कमर पर मेरी नज़ारे चिपक गयी, वो मखमली गोरी त्वचा मुझे जैसे आमंत्रित कर रही थी. मेने अपना हाथ बढ़ाया और उनकी कमर को थम लिए.

बिना : (अपनी नंगी कमर पर शिव के हाथ का स्पर्श पते है वो शहर gayi)Nahi Shiv...(Mene उनकी बात नहीं सुनी, में अपने हाथ को पीछे की और ले जा कर उनकी नंगी कमर पर हाथ फिरने लगा, मेरे दबाव से वो और मेरी तरफ खिसक aayi)Nahi Shiv...(Wo न तो कह रही थी पर मुझे रोक नहीं रही थी, वो मेरे इतने करीब थी तो मेने उनकी गर्दन पर अपने होठ लगा दिए, )Shhhhhhhhhh nahiiii(Meri हिम्मत बढ़ती जा रही थी, उनकी चिकनी कमर को सहलाते हुए मेने अपना हाथ निचे सरकाया और उनके उभरे हुए मस्त गोल पहाड़ को सहलाने laga)Shhhhhhh अह्ह्ह्हह Shiiiiiv(Bina अपने कूल्हों पर शिव के हाथ को महसूस कर कैंप गयी, शिव उसके साथ ऐसा भी करेगा उसने सोचा नहीं, उसके इतने निजी अंग को शिव सेहला और दबा रहा था, उसका ऐसा करना उसे बहोत अच्छा लग रहा था पर वो शर्मा रही थी, वो उसे रोकना चाहती थी, वो उसका स्टूडेंट था, वो उसके साथ ये सब नहीं कर शक्ति थी, पर उसका दिल उसे रोकने नहीं दे रहा था, अपने कूल्हों पर घूम रहे उसके हाथ से उसके शरीर में हलचल सी होने लगी थी, उसे लग रहा था की उसकी झंगो के बिच में चिप छिपा रास निकल रहा है, वो अपनी झांघो को आपस में सत्ता कर उस रास को रोकने का प्रयास कर रही थी, थोड़ी देर बाद शिव रुक गया, वो उसकी आँखों में देख रहा था, पर वो शर्म के मरे अपनी नज़ारे नहीं उठा प् रही थी, वो कुछ समझती उस से पहले शिव ने उसे अपनी गॉड में उठा लिए, वो इतनी दर गयी की उसने अपनी बहे शिव के गले में दाल दी. वो हैरानी से शिव को देखने लगी तो वो बड़ी बेशर्मी से उसे देख कर मुस्कुरा रहा था, वो शर्मा गयी और अपनी नज़ारे झुका ली, वो उसे उठाये अंदर रूम में ले जाने लगा, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, वो सोचने लगी, क्या शिव उसके साथ वो सब करेगा, वो उसे बिस्टेर पर ले जा रहा है तो इसका मतलब तो वही होता है, उसका दिल अभी भी मर्यादा के बंधन से आज़ाद नहीं हो प् रहा था, एक और तो उसे लग रहा था की जैसे नव्या अपने देवर के साथ मज़े ले रही है, तो वो क्यों नहीं ले शक्ति, पर फिर भी उसके संस्कार उसे इसकी इजाजत नहीं दे रहे थे, कई बार उसने शिव के साथ ये सब करने की सोची भी थी पर अभी जब वो वक़्त आया है तो उसकी हिम्मत जवाब दे गयी थी. वो अपने खयालो से तब बहार आयी जब शिव ने उसे बिस्तर पर बिठाया, उसने एक बार शिव को देखा पर वो ज्यादा देख न पायी, उसने अपनी नज़ारे निचे झुका ली, अपने घुटने मोड कर वो बिस्टेर पर ऐसे बेथ गयी जैसे अपने आपको वो समेत लेना चाहती हो. अचानक उसे याद आया की अपनी सुहागरात पे भी वो ऐसे hi बैठे अपने पति का इंतजार कर रही थी, ये सोचते hi उसके शरीर से एक लहर गुजर गयी. वो हलके हलके कंपनी लगी. उसने तिरछी नजरो से शिव को देखा, जो उसे hi देख रहा था)

शिव : (मेने देखा की वो किसी सोच में डूबी है, मेने घुटनो पर रक्खे उनके हाथ पर हाथ रक्खा और उनके पास बेथ गया)

बिना मैडम : (धीमी आवाज me)Nahi शिव.

शिव : क्या नहीं?

बिना मैडम : वो hi जो तुम करने जा रहे हो.

शिव : क्या करने जा रहा हु?

बिना मैडम : में कोई स्कूल जाती बच्ची नहीं हु, जो समाज न सकू.

शिव : (मुस्कुराते hue)Par लगती तो वैसी hi हो.

बिना मैडम : क्या? (मुझे अपनी और ऐसे देखते प् कर वो शर्मा गयी)

शिव : सच कह रहा हु मैडम, आप बिलकुल एक बच्चे जैसी प्यारी लगती हो.

बिना मैडम : (अपनी नज़ारे झुकाते hue)Juthe कही के, 27 साल की हु में, तुम्हे बच्ची लग रही हु.

शिव : जूथ नहीं कहूंगा मैडम, आपका चेहरा सच में एक लड़की जैसा hi है, है ये अलग बात है की निचे सब...

बिना मैडम : (उसकी बातो का मतलब समाज रही थी पर उसे ये सब सुन न अच्छा लग रहा था) क्या सब?

शिव : आप फिर मुझे मारेंगी.

बिना मैडम :(निचे देखते hue)Nahi मरूंगी, बताओ.

शिव : अगर बुरा लगे तो पहले से सॉरी बोल देता हु, आप का चेहरा एक स्कूल की लड़की जैसा hi है पर आपका ये शरीर एक भरपूर nav-yovna जैसा है. आप में वो सबकुछ है जो किसी भी लड़के को आपकी और खिंच शक्ति है.

बिना मैडम : (मंद मंद मुस्कुराते hue)Tumhe शर्म नहीं आती, अपनी hi टीचर से ऐसी बाटे करते हुए. तुम भी दिखने में कितने भोले लगते हो, पर हरकते देखो पुरे मावलीओ जैसी.

शिव : ऐसी क्या हरकत करदी मेने.

बिना मैडम : अभी क्या कर रहे थे, शर्म नहीं आती, ऐसे मेरे होठो ko...(Wo बोलते बोलते रुक गयी)

शिव : तो और क्या करू, आप के होठ कितने मीठे है, ऐसा लग रहा था जैसे गुलाबजामुन खा रहा हु.

बिना मैडम : (जूठा गुस्सा दिखते hue)Badmash, शर्म नहीं आती क्या तुम्हे.

शिव : शर्म करूँगा तो इतनी खूबसूरत मैडम को कैसे प् शाकुंगा.

बिना मैडम : कुछ नहीं मिलनेवाला तुम्हे, अब जाओ.

शिव : उसके लिए सॉरी, अभी फ़िलहाल में अप्प की बात नहीं मान शक्ति. अभी और मुझे गुलाबजामुन खाने hai.(Me उनके ऊपर झुकता चला गया, वो बिस्टेर पर लेट टी गयी.)

बिना मैडम : नहीं शिव, ये ठीक नहीं है. (में उन पर झुकता गया और जब वो पूरी निचे लेट गयी तो मेने फिर से उनके होठो को अपनी गिरफ्त में ले liya)Ummmmmm (वो बोलना छह रही थी पर उनके सब्द उनके मुँह में hi रह गए, मेने उनके एक बड़े उभर को अपनी हथेलीमे कास लिया, मैडम मेरा हाथ हटाने लगी तो मेने दूसरे हाथ से उनके दोनों हाथ पकड़ लिए और उन्हें उनके शिर के ऊपर कर दिए, वो छूटने की कोशिस कर रही थी पर मेरी पकड़ के सामने उनकी एक न चली, थोड़ी देर छटपटाने के बाद वो शांत हो गयी, में उनके भरे हुए स्तन को बरी बरी दबाने लगा और साथ में उनके होठो का रास पिने laga.)Ummmmmm उम्मम्मम्म. (में उनकी कमर को सहलाते हुए अपना हाथ निचे ले जाने लगा, वो अपनी कमर को हिलने लगी, वो मुझे रोक नहीं प् रही थी तो वो छटपटा रही थी, पता नहीं क्यों पर में पूरी बेशर्मी पर उतर आया था, शायद अब में लड़कीओ के नखरे समाज रहा था, उनके दिल में है हो फिर भी वो नखरे करती है है, मेने उनकी कमर से हाथ को फिसलते हुए उनकी झांघो के बिच रख दिया, उन्होंने अपनी कमर हवा में उठा दी, वो किश तोडना चाहती थी पर मेने उनके होठो को चूसना चालू रक्खा, उनकी सांसे बहोत तेज चल रही थी, वो अपनी आंखे फाडे मुझे देख रही थी, उनकी आंखे कह रही थी की मात करो, पर में उनकी छूट को मसल रहा था, साड़ी, पेटीकोट और पंतय के होते हुए भी मुझे छूट के होठो का आभास हो रहा था. वो अपनी झांघो को आपस में सताने की कोशिस कर रही थी, उनकी छटपटाहट की वजह से उनकी साडी और पेटीकोट थोड़ा ऊपर हो गया तो मेने उसे उठा दिया, और उनकी छूट पर अपना हाथ रक् दिया, अब मेरे हाथ और उनकी छूट के बिच सिर्फ पंतय hi थी. उन्होंने झटके से अपना शिर घुमाया, और मेरे होठो से अपने होठ छुड़ाए) छोडो शिव.

शिव : (में उनकी और देखने laga)Kyu?

बिना मैडम : तुम पागल हो गए हो, छोडो मुझे.

शिव : आप भी तो यही चाहती है.

बिना मैडम : (थोड़ सख्ती se)Nahi ! में ऐसा कुछ नहीं चाहती.

शिव : तो फिर अपने उस दिन मेरा वो क्यों पकड़ा था, और आज आप मुझे यहाँ क्यों ले कर आयी?

बिना मैडम : (वो थोड़ी नरम आवाज me)Wo सब मेरी गलती थी, पर में, ये नहीं कर शक्ति.

शिव : क्यों?

बिना मैडम : पता नहीं, पर में ये सब नहीं कर शक्ति.

शिव : में जनता हु की आप भी यही चाहती है, अब इतना सब होने के बाद में नहीं ruknewala(Mere हाथ में उनकी छूट थी, मेने अपने हाथ को उनकी पंतय में दाल दिया और उनकी नंगी छूट को अपने हाथो में भर लिया)

बिना मैडम : (छूटने का प्रयास करते hue)Shiv छोडो मुझे. में चिल्ला दूंगी.

शिव : ठीक है, चिल्लाइये.

बिना मैडम : तुम ऐसा क्यों कर रहे हो शिव?

शिव : अगर आप को नहीं करना था तो मुझे यहाँ क्यों ले कर आयी थी आप, और ये इतनी गीली क्यों hai.(Mene उनकी छूट को दबा कर कहा)

बिना मैडम : शीइइइइइव.

शिव : अगर आप को मजा नहीं आ रहा था तो फिर ये यहाँ चिकनाहट क्यों है?

बिना मैडम : (वो एकदम शांत हो गयी थी, वो कुछ बोल नहीं रही थी, में उनकी बाजु में लेट गया)

शिव : ठीक है अगर आप अभी रेडी नहीं तो में वो सब नहीं करूँगा, प्रॉमिस करता हु, पर मुझे भी पता है की आप वो सब चाहती है, अगर न चाहती होती तो उस दिन आप वैसी हरकत न करती. ज्यादा नहीं तो थोड़ा hi सही, मुझे प्यार करने दीजिये, आप जब भी कहेंगी में रुक जाऊंगा, प्रॉमिस. अपने दिल पर हाथ रख कर कहिये की आप को कुछ भी मज़ा नहीं आ रहा था. अगर आप कहेंगी तो में यहाँ से चल जाऊंगा, फिर कभी यहाँ नहीं आऊंगा.

बिना मैडम : मेने ऐसा तो नहीं कहा, क्या तुम ऐसे hi नहीं आ शक्ति?

शिव : रसमलाई सामने हो और रोज उसको सिर्फ देखकर चला जाऊ, ऐसा बेवकूफ तो नहीं हु.

बिना मैडम : (मुस्कुराते हुए) बहोत बदमाश हो तुम.

शिव : बहोत भूख लगी है मैडम, क्या में थोड़े गुलाब जामुन खा lu(Wo शर्मा कर मुस्कुराने लगी, में भी मुस्कुराते हुए उनके होठो को चूसने लगा, थोड़ी hi देर में वो मेरे बालो को सहलाने लगी, उनको चूमते हुए में उनके स्तन को सहलाने लगा तो वो एक दो सेकंड के लिए रुकी पर फिर वो मुझे चूमने लगी, में इत्मीनान से उनके स्तन को सहलाते हुए दबाने लगा, वो मेरे बालो को सहलाते हुए खींचने लगी)

बिना मैडम : (ये लड़का मुझे ऐसे चुम रहा है की मेरा रोआ रोआ खड़ा हो गया है, ऐसा एहसास तो मुझे अपने जीवन में कभी नहीं हुआ, सच में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है, मेरे बदन में तरंगे उठ रही है, मेरे स्तन को दबाते दबाते वो मेरे ब्लॉउज के बटन खोलने लगा, एक बार मेरा हाथ उसे रोकने के लिए बढ़ा पर मेने उसे रोका नहीं, अपनी छाती पर रेंगते उसके हाथ को, महसूस कर के में उत्तेजित हो रही थी, वो सच hi कह रहा था की अगर मुझे मज़ा नहीं आ रहा तो मेरी झांघो के बिच इतना ऋषव क्यों हो रहा है, मेरा दिमाग उसे रोकने को कह रहा था पर शरीर साथ नहीं दे रहा था)

शिव : (बिना मैडम की बड़ी चूचिया ब्रा में कैद थी, ब्लॉउज की परत हाथ चुकी थी, उस नगम गोलों को सहलाते हुए में उनके आधे बहार नंगे भाग को चूमने लगा, मैडम का हाथ मेरे शिर को सेहला रहा था, वो मुझे रोक नहीं रही थी, निप्पल को ब्रा के ऊपर से hi चूसते हुए मेने एक हाथ से पंतय में कैद छूट को दबोच लिया, पंतय आगे से पूरी तरह गीली होचुकी थी. अब आगे बढ़ने की बरी थी तो में थोड़ा ऊपर हुआ और मैडम को देखने लगा, उन्होंने एक बार मेरी और देखा फिर अपनी नज़ारे दूसरी और कर दी, में अपने शर्ट के बटन खोलने लगा, वो तिरछी नजरो से मुझे देख रही थी, मेने शिर और बनियान दोनों निकल दिए, में ऊपर से पूरा नंगा हो चूका था, मैंने अपना पंत भी निकल दिया, अब में सिफत अंडरवियर में था.)

बिनामदं : (शिव को अपने कपडे उतारते देख रही थी, वो सोच में पद गयी की अभी तो वो कुछ भी करने से मन कर चूका था, फिर क्यों अपने कपडे उतर रहा है, वो तिरछी, नजरो से उसे कपडे उतारते हुए देखती रही, अब उसके शरीर पर सिर्फ अंडरवियर था, उसका वो अंग उसे साफ़ साफ़ दिख रहा था, उसकी सांसे तेज चलने लगी, वो वापस उसके बाजु में बेथ गया, उसकी आंखे उस खड़े अंग से हैट hi नहीं रही थी, शिव ने उसे साइड में पलटा तो वो बगैर किसी विरोध के पलट गयी, वो उसके ब्रा के हुक खोलने लगा, उसने उसका ब्लॉउज भी उतरदिया, वो शर्म से गाढ़ी जा रही थी पर फिर भी न जाने क्यों उसे रोक नहीं प् रही थी, उसने ब्रा और ब्लॉउज पुरे निकल दिए, वो उसकी नंगी पीठ पर अपने होठो से चूमते हुए चाट रहा था, ये किस तरह का प्यार जाता रहा था? आज तक उसे ऐसा अनुभव नहीं हुआ था, उसके शरीर से ऐसा प्यार तो उसके पति ने कभी नहीं किआ था. वो उसकी पीठ को चूमते हुए निचे खिसका और उसके बड़े उभरे कूल्हों को सहलाते हुए मसलने लगा, उसकी ये बेशर्मी, उसे बहोत अच्छी लग रही थी, वो अपना शिर टिकाये इस सुखद स्पर्श का मज़ा लेने लगी. उसका दिल जोरो से धड़कने लगा जब वो उसके पेटीकोट के नदी को ढूंढने लगा. उसे रोकने की बजाये उसने अपनी गांड उठा कर उसके हाथ को रास्ता दिया जिस से वो नाडा धुंध पाया और उसे खिंच कर ढीला कर दिया. शिव जैसे hi उसका पेटीकोट शरक़ने लगा, बिना की शर्म ने आवाज दी तो उसने पेटीकोट को पकड़ लिया. शिव ने हलके से उसके हाथ को छुड़ाया तो उसने छोड़ भी दिया. वो शर्म से मरी जा रही थी पर ये एहसास उसे और भी उत्तेजित कर रहा था. शायद उसके पति ने भी उसे इस अवस्था में नहीं देखा होगा. अक्सर वो ये सब अँधेरे में hi करते थे. ऐसे दिन के उजलेमे वो अपने hi स्टूडेंट के साथ इस अवस्था में थी. वो शर्म के मरे पानी पानी हो रही थी. वो सिर्फ पंतय में नंगी लेती हुई थी. वो शिव के हाथ और होठो को अपने कूल्हों पर महसूस कर के पागल होने लगी, उसने चद्दर को अपनी मुट्ठी में जकड लिया. वो उसके कूल्हों को ऐसे चुम रहा था जैसे उसे कोई मन चाही चीज मिल गयी हो, उसे गुड़ गुड़ी भी हो रही थी, वो अपने कूल्हों को छुड़ाने की भी कोशिस कर रही थी पर फिर वो उसे उसकी मन मणि करने दे रही थी. वो उसे रोकती तो वो रुक भी जाता, पर उसका दिल hi नहीं कर रहा था की वो उसे रोके. जब शिव ने उसकी पंतय के शिरो को पकड़ा तो उसने चद्दर को जोरो से पकड़ लिया और अपनी आंखे जोरो से बंद कर ली. वो पूरी नंगी होने जा रही थी.)

शिव : मैडम के कूल्हे बहोत बड़े और चौड़े थे, सच में औरतो का ये अंग मुझे अपनी और आकर्षित करता था, वो पंतय में भी बहोत आकर्षक लग रहे थे पर मुझे उन्हें नंगे देखने थे, मैडम मुझे बिलकुल रोक नहीं रही थी, मेने पंतय को थोड़ा खिसकाया तो कूल्हों की दरार दिखने लगी, मेरा लुंड ये देख कर hi कूदने लगा. जैसे जैसे पंतय निचे खिसक रही थी वो दरार लम्बी होती जा रही थी, कूल्हों का उभर ऊपर की और बढ़ता जा रहा था, आखिर कर एक जगह पहुंच कर वो उभर फिर से घटने लगा, उनके कूल्हे पुरे नंगे थे. मेने कूल्हों को देखते हुए पूरी पंतय निकल दी.)





क्या नज़ारा था, बिना मैडम पूरी नंगी लेती हुई थी, उनके उभरे हुए कूल्हे जानलेवा थे, इतना कुछ होने पर भी उन्होंने मुझे रोका नहीं था तो मुझे यकीं हो गया था की अब वो मुझे नहीं रोकेगी. मेने अपनी अंडरवियर भी उतर दी. मेने देखा की मेरा लुंड पूरी तरह तन कर खड़ा था. मैडम को देख कर मुझे इच्छा हुई की जा कर सीधे hi उनके ऊपर चढजो. पर मेने अपने आप को संभाला, उनके पास बैठते हुए मेने उनके कूल्हों पर हाथ घुमाया, मैडम के शरीर में कम्पन हुआ. उनकी पीठ पर फैले बालो को मेने साइड में किआ और उनकी गर्दन पर चुम्बन करते हुए उनके कूल्हों को मसलने लगा. मैडम के मुँह से हलकी हलकी सिसकरिअ निकल रही थी जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी. उनकी पीठ का चुम्बन करते हुए में निचे की और जाने लगा. मेने दोनों कूल्हों को मसाला और उन्हें चूमने और चाटने लगा.





बिना मैडम : शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऐसा मात करो शिव, शहहहहह मुझे कुछ हो रहा है.

शिव : मैडम, आप के ये कमल के है, (अपना चेहरा रगड़ते हुए) में बता नहीं शक्ति की, इन्हे देख कर मुझे क्या हो रहा है मैडम. (में उनके पैरो के ऊपर बैठते हुए उनके कूल्हों को फ़ैलाने लगा, मुझे गांड का छे और छूट का थोड़ा सा भाग भी दिखने लगा, मैडम ने फ़ौरन अपना हाथ पीछे करते हुए उसे छुपाने का प्रयास करने लगी, उनका हाथ पकड़ते hue)Please मैडम, मुझे देखने दीजिये.





बिना मैडम : मुझे शर्म आ रही है शिव, में तुम्हारे सामने ऐसे...

शिव : मुझे बहोत अच्छा लग रहा है मैडम, आप को ऐसे देखना तो जैसे एक सपना ho.(Mene उनका हाथ साइड में हाथ दिया, और झुक कर दरार को फैला कर दरार पर अपनी जीभ फिराई)

बिना मैडम : शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइइइव, वह मुँह क्यों लगा रहे हो, वो गन्दी जगह है.

शिव : मुझे तो नहीं लग रही, (उनकी गांड के छेद को पूरी तरह से कहते hue)Kitna मजेदार है.

बिना मैडम : (उसने सपने में भी कभी ऐसा सोचा नहीं था, जो चीजे उसे गन्दी लग रही थी उसी में उसे मजा आ रहा tha.)Shhhhhh शीइइइइइइव ये कैसा खेल है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : आप को अच्छा लग रहा है न मैडम.

बिना मैडम : हाआआआ शहहहहह ये किस तरह का अनुभव है, shhhhh(Mene उन्हें सीधा किआ तो उन्होंने अपनी छूट और अपने बूब्स पर एक एक हाथ रख दिया, उसे लगा शिव उसे छोड़ने जा रहा hai)Nahi शीइइइइइइइव.

शिव : क्या नहीं मैडम, मुझे देखने दीजिये.

बिना मैडम : शिव, मुझे बहोत शर्म आ रही है.





शिव: कुछ नहीं होगा, में सिर्फ देख रहा hu.(Mene उनकी छूट वाला हाथ हटा दिया, उन्होंने शर्म से अपनी आंखे बंद कर के अपना मुँह साइड में कर दिया, उनकी छूट मेरे सामने थे, में गौर से देख रहा था, हलके बल से सजी हुई छूट के होठ आपस में चिपके हुए थे, छेड़ भी बड़ी मुश्किल से दिख रहा था. में सोच में पद गया. मैडम शादीशुदा है तो ये कैसे हो शक्ति है. अब में चूड़ी हुई छूट और कुवारी छूट में फर्क समाज शक्ति था. अभी भी मुझे विस्वास नहीं हो रहा था, मेने हलके से छूट के होठो को सहलाया तो मैडम ने मेरी कलाई पकड़ ली)

बिना मैडम : shhhhhhhhhhh. (मैंने उनसे हाथ छुड़ाने की कोई कोशिस नहीं की, में उंगलिओ से hi छूट की दरार को सहलाने लगा, छूट पूरी तरह से भीग चुकी थी, मेरे ऊँगली फिरने से होठ भी चिप छिपे होने lage)Shhhhhhhh अह्ह्ह्हह्हह shhhhhhhhh(Bina इस नए अनुभव से बहोत उत्तेजित हो रही थी, एक और उसे शर्म आ रही थी तो दूसरी और उसे बहोत मज़ा आ रहा था, ये खेल उसकी कल्पना से भी कही अधिक मज़ेदार था. ऐसे दिन के उजाले में वो अपने hi स्टूडेंट के सामने नंगी लेती हुई थी, अगर सब कुछ सामान्य होता तो वो कभी भी ऐसी परिस्थिति में न होती. पर वो अब समाज रही थी की असल में सेक्स क्या होता है और शायद उसने आज तक सेक्स किआ hi नहीं था. एक न एक दिन तो ये होना hi था तो उसने अपने आपको समाज लिया था और वो ये मज़ा पाने की कोशिस कर रही थी. शिव उसकी छूट के होठो को फैलते हुए उसकी छूट का छेड़ देख रहा था, उसके पति की तो बात hi क्या करे, आज तक उसने खुद उस छेड़ को नहीं देखा था. उसे लगता था की ये सब गन्दी चीजे है तो कभी उसने उसे गौर से देखा hi नहीं था. शिव की उंगलिअ उसे छेड़ को सेहला रही थी, उसके शरीर के अंदर ऐसी तरंगे उठ रही थी की उसकी कमर झटके खा रही थी, वो अपने मुँह से निकलती सिसकारिओ को रोकने का प्रयास कर रही थी पर वो रोक नहीं प् रही थी.)

शिव : (जैसा मुझे लग रहा था, मैडम की छूट बहोत छोटी थी, क्या वो कुवारी है, पर ये कैसे हो शक्ति है, कई सवाल मेरे जहँ में घूम रहे थे, मेने ऊँगली को थूक लगाया और उसे हलके से छूट के छेड़ में डाला, अभी ऊँगली एक इंच भी अंदर नहीं गयी थी की बिना मैडम ने मेरा हठ पकड़ लिया)

बिना मैडम : अह्हह्ह्ह्ह शिईयिव, दर्द हो रहा है.

शिव : (अब मुझे यकीं हो चूका था की वो कुवारी hi है, मेने उस कुवारी छूट के होठो पर अपने होठ लगा दिए और उसके छेड़ में जीभ डालते हुए उसे चूसने लगा)

बिना मैडम : Ahhhhhhhhhhh shhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh, (वो लैप लापति झीब उसकी छूट के छेड़ में महसूस कर के बिना मचलने लगी, उसकी टंगे और फैलने लगी, वो अपनी छूट को शिव के मुँह पर दबाने लगी, ये एहसास उसे पागल कर रहा था, जिस छूट को वो दुनिया भर से छुपाये रहती थी उस छूट को शिव बड़ी सिद्दत से चूस रहा था, वो चिप छिपा एहसास प् कर वो पागल होने लगी, उसने अपने दोनों हाथो से शिव के शिर को पकड़ लिया. वो कभी उसके शिर को धकेल रही थी तो कभी खिंच रही थी, शर्म और मज़े का ये मिला झूला एहसास उसे दीवानी बना रहा tha.)Ye क्या हो रहा है शिव, शह्ह्ह्ह मात करो अह्ह्ह्हह में पागल हो जाउंगी, शहहहहह ahhhhhhhhhh. (उनकी बात सुने बगैर में अपना काम कर रहा था, मुझे भी छूट को चाटने में बहोत मज़ा आ रहा था, मैडम ज्यादा सेह नहीं पायी और अपने हाथ को दांतो में दबाते हुए झटके खाने लगी और उनकी छूट से रास की धरा बहने लगी, मेने बगैर मुँह हटाए, उस रास को चाट रहा था, आखिर कर वो शांत हो gayi)(Bina के शिर से जैसे hi सेक्स का नशा काम हुआ उसे अपनी स्थिति का आभास होने लगा, वो शर्म से पानी पानी होने लगी, वो पूरी नंगी थी और शिव उसके बेहद hi निजी अंग को अपने होठो में बारे हुए था, वो शिव को हटाना चाहती थी, वो साइड में होने लगी)

शिव : (मेने उन्हें साइड में होने नहीं दिया, और ऊपर जाते हुए उनके पुरे ऊपर हो गया, मेरा लुंड उनकी छूट को छूने लगा था, वो अपने आप को और ऊपर करना चाहती थी पर मेने उन्हें पकड़ लिया, वो मेरी आंखोमे देखने से भी कतरा रही थी)

बिना मैडम :(उन्होंने नरम आवाज में kaha)Chhodo मुझे शिव.

शिव : क्यों?

बिना मैडम : बस शिव, अब और नहीं.

शिव : (में कोहनी के बल हुआ और उनके चेहरे को पकड़ कर मेरे चेहरे के सामने kia)Kya हुआ?

बिना मैडम : (अपना चेहरा घूमना छह रही थी, पर मेने घूमने नहीं diya)Tumne प्रॉमिस किआ था शिव.

शिव : है किआ था, पर मेने ये नहीं सोचा था की हमारे बिच इतना कुछ होगा. सच कहु तो अब में नहीं रुक शक्ति मैडम.

बिना मैडम : (मेरी आंखोमे देखते hue)Tum ऐसा नहीं कर शक्ति शिव. में जानती हु तुम अपना प्रॉमिस नहीं तोड़ोगे.

शिव : एक बात पुछु? सच सच जवाब देंगी?

बिना मैडम : पूछो?

शिव : आप अभी तक कुवारी क्यों हो?

बिना मैडम : ये क्या बकवास है, मेरी सदी को दो साल हो चुके है.

शिव : पर सरीर से अभी भी आप कुवारी हो.

बिना मैडम : पागल होगये हो तुम, ऐसा कुछ नहीं है.

शिव : आप ने सेक्स किआ है?

बिना मैडम : है, कई बार, तुम पागल हो गए हो शिव, तुम्हे कुछ पता नहीं है.

शिव : मुज पर यकीं कीजिये, एक बात बताइये, मेरे ऊँगली डालने पर भी आप को दर्द हुआ था की नहीं?

बिना मैडम : है हुआ था. (वो सवालिए नज़रो से शिव को देख रही थी)

शिव : मेरा यकीं करो, आप अभी भी कुवारी हो. अगर आप नहीं चाहती की में आपके साथ ये सब करू और अप्पके कौमार्य भांग करू तो ठीक hai.(Me उठने लगा)

बिना मैडम : (वो पूरी तरह से उलझ गयी थी, उसे समाज नहीं आ रहा था की ये कैसे हो शक्ति है, शिव उठने लगा तो उसने उसकी कमर में हाथ दाल कर उसे रोक लिया) रुको Shiv(Me रुक gaya)Ye कैसे हो शक्ति है?

शिव : वो मुझे नहीं पता, में आपकी उसको देख कर इतना hi कह शक्ति हु की आप अभी कुवारी हो.

बिना मैडम : (मुस्कुराते hue)Tuje बड़ा अनुभव है. एक नंबर के बदमाश हो तुम.

शिव : (में मुस्कुराते हुए झुका और उनके होठो को किश kia)Ab क्या िर्रादे है.

बिना मैडम : (शरमाते हुए,) आगे बढ़ने का.

शिव : आप को दर्द होगा.

बिना मैडम : क्या बहोत ज्यादा होगा?

शिव : Nahi(Juth).

बिना मैडम : ठीक है.

वो सच में समाज नहीं प् रही थी, उसे यकीं नहीं हो रहा था, उसके पति उसे निचे से नंगी कर के कई बार उसके पारो के बिछ आये थे, वो धक्के भी लगते थे, है ये बात अलग है की उसे कभी कुछ खास महसूस नहीं हुआ, अक्सर उसकी छूट वाले भट पर कुछ नरम नरम छूइज होती थी, वो कई बार उत्तेजित भी जो जाती थी, पर फिर एक दो मिनट में hi वो सो जाते थे. वो कभी समाज hi नहीं पायी थी. आज शिव की बहो में अपनी छूट पर हो रही चुभन को वो साफ़ साफ़ महसूस कर रही थी, वो अंग एकदम सख्त था. वो उसकी छूट के होतो को फैलाये छूट को रगड़ रहा था. उसने शिव को देखा तो वो उसे देख कर मुस्कुरा रहा था, उसे शर्म तो आ रही थी पर अब प्यार आने लगा था, उसने शिव को अपनी और खिंचा और उसके होठो को अपने होठो में भर लिया, ये उसके जीवन का पहला किश था जिसे वो खुद कर रही थी, वो उसके होठो को पूरी तरह निचोड़ने लगी, अब उसे पता था की आगे क्या करना है तो वो अपनी जीभ उसके मुँह में दाल कर उसके जीभ से खेलने लगी. वो अपने आपको बहोत ज्यादा उत्तेजित महसूस कर रही थी, वो शिर की जीभ को अपने होठो से पकड़ कर चूसने लगी.





मेने महसूस किआ की वो बहोत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी है, और यही सही मौका है, मेरा लुंड छूट के रास से पूरी तरह भीग चूका था, मेने लुंड को छूट के छेड़ पर रख diya.(Bina ने महसूस किआ की शिव ने उसकी छूट के छेड़ पर लुंड को रख दिया है, उसे बहोत अच्छा लग रहा था, वो शिव को किश करने लगी, अचानक वो बड़ा अंग उसकी छूट के नाजुक होठो को चीरता हुआ अंदर घुस गया, एक तेज दर्द उसे महसूस हुआ, वो चीखना चाहती थी पर शिव ने उसके होठो को अपने होठो से दबा दिया,

उसकी आंखे फ़ैल गयी थी, वो कुछ संभालती उस से पहले hi दोबारा वो अंग उसकी छूट को चीरता हुआ और अंदर उतर गया, उसे इतना दर्द हुआ की उसने शिव को पूरी ताकत से धक्का दिया पर शिव और भी ज्यादा ताकतवर था, वो जरा भी न हिला. वो छटपटा रही थी की तीसरी बार उसे तेज दर्द हुआ, उस से सहन नहीं हुआ और उसकी आंखे बंद होती चली गयी. क्या हुआ कैसे हुआ उसे कुछ पता न चला. थोड़ी देर बाद उसे शिव की आवाज सुनाई दी, वो उसके गाल पर थपकिअ मर रहा था.

शिव : मैडम , मैडम. (शिव ने काफी देर उन्हें नहीं जगाया था, वो बेहोश हो गयी थी, वो चाहता था की बेहोशी में hi उनका दर्द काम हो जाये, इस लिए वो रुका रहा, काफी देर बाद भी वो न जगी तो वो उन्हें जगाने लगा)

बिना मैडम : अह्ह्ह्हह्हह, शीइइइइव, छुडो मुझे, अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआआआ.

शिव : (उनका शिर सहलाते hue)Shhhhhhh शांत हो जाईये, शह्ह्हह्ह्ह्ह.

बिना मैडम : मुझे बहोत दर्द हो रहा है शिव, शठ बहार निकालो उसे.

शिव : क्या बहार निकलू मैडम? (वो उन्हें बातो से बहलाना चाहता था, ताकि उनका ध्यान भटके)

बिना मैडम : (घूरते hue)Apna वो बहार निकालो.

शिव : वही तो पूछ रहा हु, क्या?

बिना मैडम : मजाक नहीं शिव, मुझे बहोत दर्द हो रहा है, प्लीज निकल लो न.

शिव : (उनका चेहरा सहलाते hue)Abhi सब ठीक हो जायेगा, सबके साथ होता है, आप समझती हो, है न?

बिना मैडम : मेने सुना था शिव, पर इतना दर्द होगा, ये पता नहीं था.

शिव : अब तो यकीं हुआ न की आप कावेरी है.

बिना मैडम : (मेरे शाइन पर मुक्का मरते hue)Thi.

शिव : जो होना था वो हो चूका, अब तो मुझे अपनी सेक्सी टीचर को प्यार करने दो, (में उनके होठो को चूसते हुए उनके स्तन को मसलने लगा)

बिना मैडम : (मुस्कुराते hue)Gande, अपनी टीचर को ऐसा बोलते हो, शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (बरी बरी दोनों चुचो से खलेते हुए उनके निप्पल को चूस रहा था, मेरा लुंड जो इतनी देर में थोड़ा नरम हुआ था वो वापस अपनी औकात में आने लगा, सच में उनकी छूट ने मेरे लुंड को बड़ी जोरो से जकड रक्खा था, मेने थोड़ा लुंड हिलाया तो...)

बिना मैडम : अह्हह्ह्ह्ह शिईयिव.

शिव : (उन्हें देखते hue)Jyada दुःख रहा है?





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बिना मैडम : (शरमाते hue)Thoda thoda...(Mene उनके होठो को चूसना सुरु किआ और हलके हलके लुंड को आगे पीछे करने लगा)

(बिना को दर्द हो रहा था पर उस से भी ज्यादा वो उत्तेजित हो रही थी, आज वो अपनी छूट में लुंड को साफ़ साफ़ महसूस कर प् रही थी, उसे पता चल रहा था की कुछ उसके शरीर के अंदर है, ये एहसास उसे और उत्तेजित कर रहा था. आज उसे पता चला था की सच में सेक्स होता क्या है, अपनी छूट में हो रही सरसराहट को वो महसूस कर के उत्तेजित हो रही थी, वो रगड़ उसे बहोत अच्छी लग रही थी, शिव का अंग बड़ा था जिस की वजह से उसे दर्द हो रहा था पर वो जानती थी की लड़की को एक बार तो ये दर्द सेहन करना hi पड़ता है. उसने ये कई बार सुना था पर कभी उसे वैसा महसूस नहीं हुआ था, वो इतनी अंतर्मुखी थी की उसने इस बारे में कभी किसी के साथ बात नहीं की थी. उसने सिर्फ छोटे बच्चो का hi देखा था तो उसे मर्दो के इस निजी अंग के बारे में भी ज्यादा जानकारी नहीं थी. आज पता चल रहा था की जब एक लड़का पहली बार किसी लड़की के साथ सेक्स करता है तो कैसा लगता है, उसे अपने दर्द से ज्यादा इस बात की ख़ुशी थी की आज वो लड़की से औरत बन गयी थी. उसे हो रहे दर्द के बावजूद उसने शिव को अपनी बहो में भर लिया, वो उसके धक्को को सेह रही थी. लगातार अब दर्द काम होता जा रहा था, दर्द की जगह उसे सरसराहट महसूस हो रही थी. वो अपनी उस संकरी गली में अंदर बहार हो रहे उस बड़े से अंग को महसूस कर रही थी, वो उसका आगे का शिरा साफ़ साफ़ महसूस कर प् रही थी, वो अंदर कही एक खास जगह पर छू रहा था तो उसके अंदर एक कम्पन पैदा कर रहा था. उसने शिव की और देखा तो वो उसकी छूट की और देखते हुए धक्के लगा रहा था. उसे थोड़ा ताज्जुब हुआ तो उसने अपना शिर उठा कर निचे देखा तो वो शर्मा गयी, शिव का बड़ा लुंड उसकी छूट को फैलते हुए अंदर बहार हो रहा था, वो ये दृश्य देख कर शर्माने लगी, उसे अपनी आँखों पर यकीं नहीं हो रहा था की इतना बड़ा अंग उसकी छूट में अंदर जा रहा है. वो ये देख रही थी की उसे लगा की शिव उसे देख रहा है, उसने उसकी और देखा तो वो सच में उसे देख कर मुस्कुरा रहा था, वो इतनी शर्मा गयी की उसने वापस बिस्तर पर अपना शिर रख दिया और अपना चेहरा हाथो से छुपा लिया.

शिव : (मैडम का ऐसा शर्माना कितना प्यारा लग रहा था, मेने उनके हाथ हटाए और उनकी आँखों में देखने लगा, वो भी अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मुझे देख रही थी) कैसा लग रहा है?

बिना मैडम : (शरमाते hue)Muje नहीं पता.





शिव : मुझे तो बड़ा अच्छा लग रहा है.

बिना मैडम : है, तुम्हे तो अच्छा लगे गए hi, ये नहीं देखा की मेरी क्या हालत हो गयी थी, जान निकलते निकलते बची है.

शिव : उसके लिए में माफ़ी मांगता हु. अभी कैसा है, अच्छा लग रहा hai.(Unhone मुस्कुराते हुए है में जवाब दिया, मेने धीरे धीरे स्पीड बढ़ने लगा, उन्हें छोड़ते हुए उनके स्तन से खेल रहा था)

बिना मैडम : शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह शहहहहह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह अह्ह्ह.

शिव : (बहते बैठे उनकी टंगे फैला कर धक्के लगाने laga)Hmm हम्म्म हम्म्म हम्म्म.

बिना मैडम : अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह शःह्हीीिव आठ अह्ह्ह अह्ह्ह्ह.

शिव : अच्छा लग रहा है ?

बिना मैडम : हआ शठ अह्ह्ह अह्ह्ह्ह बहोत अच्छा अह्ह्ह अह्ह्ह धीरे शिव अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शहहहहह.

शिव : (उनके दोनों पैरो को पकड़ कर छूट में धक्के मर रहा था, में देख प् रहा था की खून बह कर चद्दर पर फ़ैल गया है, मेरे लुंड पर भी खून लगा हुआ था, में समाज सकता था की ये तो होना hi था. मेने मैडम की और देखा तो वो मुझे hi देख रही थी, उनकी आंखे नशीली हो चुकी थी, वो बिस्तर पर आगे पीछे हिल रही थी, साथ में उनके स्तन भी उछाल रहे थे, में लगातार उन्हें छोड़ रहा था और वो भी आह्ह्ह भरते हुए चुद रही थी, में निचे झुका और फिर उनके होठो को चूसने लगा तो वो अपनी बहे मेरे गले में डालते हुए मुज से पूरी तरह लिपट गयी, मेने महसूस किआ की उन्होंने अपने पेअर भी मेरी कमर पर लपेट दिए थे, मुझे पता चल रहा था की उन्हें बहोत अच्छा लग रहा है, मुझे भी बहोत मज़ा आ रहा था, में अपनी hi टीचर को छोड़ रहा था, सच में यकीं कर पाना मुश्किल था, मैडम सच में बहोत प्यारी दिखती थी, लड़कीअ अपने निजी पालो में कितनी बदल जाती है, सामान्य समय में सीधी और शर्मीली दिखने वाली लड़कीअ, ऐसे पालो में कितनी खुल कर साथ देती है, में उनकी गर्दन को अपनी नाक से सहलाते हुए धक्के मार रहा था)





बिना मैडम : शहहहहह अह्ह्ह्हह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह बॉस शठ सीईव सुनो शह्ह्ह्हह्ह रुको अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : क्या हुआ मैडम?

बिना मैडम : (वो शर्मा रही thi)Ahhhhhh शह्ह्ह्हह्ह बस्सस अह्ह्ह्ह अब और नाहीईईई शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : थोड़ी देर मैडम.

बिना मैडम : (आखिर उनसे रहा न gaya)Shhhhh अह्ह्ह संजो शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह मेरा अह्ह्ह्ह मेरा पेशाब निकल जायेगा अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : (मुझे पता था उनका स्खलन होनेवाला hai)ho जाने दीजिये.

बिना मैडम : नहीं शीइइइइव यहाँ नाहीई शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह रुक जाओ शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह मुम्मीईई अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह निकल जाएगी शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइव बाससस rukoooooo.(Mene उनकीबाट सुनी नहीं और उन्हें धक्के लगता गया, अब मेरा भी होनेवाला था)

शिव : कुछ नहीं होता मैडम, हो जाने दीजिये, शहहह मेरा भी होनेवाला है, कहा निकलू?

बिना मैडम : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह मुझे नहीं पता शह्ह्ह्हह्ह में गयी, मेरा निकलनेवाला है, aaaaaaaaaaaaaaaaaaa mumiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii(Wo झटके खाने लगी)

शिव : (मेने भी सोचा की ये उनका पहली बार hi है तो अंदर hi करता हु, में लगातार धक्के लगा रहा था, में भी बेहद करीब था)

बिना मैडम : बुस्स्सस्स अह्ह्ह्ह अब नहीं शह्ह्ह्हह्ह रुको शहहहहह अह्ह्ह्हह शीइइइइइव अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : दो मिनट मैडम बस मेरा भी होनेवाला है, अह्ह्ह हम्म्म ह्म्म्मम्म हम्म्म्म.

बिना मैडम : अह्ह्ह्हह ममी शहहह अह्ह्ह धीरे शिव धीरे अह्ह्ह धीरे अह्हह्ह्ह्ह shhhhhhhh(uske धक्के इतने तेज लग रहे थे की बिना अंदर तक हिल रही थी, उस से सहन नहीं हो रहा था, ये दर्द नहीं था पर उत्तेजना का चरम था जिसे वो सेहन नहीं कर प् रही थी, अचानक शिव ने एक जोर का धक्का मारा और उसके अंदर कुछ गरम गरम भरने लगा, वो इस सुखद एहसास से भर गयी और अपनी आंखे बंद किये वो शिव से चिपक गयी, शिव दो तीन बार और धक्के मरे और हर बार उसे वो गरम गरम एहसास हो रहा था, वो सोच में पद गयी की इस खेल में कितने प्रकार के सुख है, इसी लिए नव्या कह रही थी की एक बार जिसने ये महसूस किआ वो रह नहीं शक्ति., वो शिव के पशीने से भीगे शरीर को सेहला रही थी, वो आंखे बंद किये हुए अपने अंदर समाये उस बड़े से अंग की हलचल को महसूस कर रही थी.

काफी देर में, मैडम के ऊपर hi लेता रहा. आखिर कर उनके ऊपर से उठा और साइड में सीधा लेट gaya.Mene देखा की मैडम अपनी टंगे फैलाये, आंखे बंद करके लेती हुई है. मुझे यकीं नहीं हो रहा था की मेने मैडम के साथ सब कुछ कर लिया. मेने उनके स्तन पर हलके से हाथ रक्खा और उसे सहलाया. मैडम ने एक बार मेरी और देखा और शर्मा के दूसरी और अपनी गर्दन धुंआ दी.

बिना मैडम : (धीमी आवाज me)Shiiiiiv. तुम इस बारे में किसी को बताओगे तो नहीं.?

शिव : में क्यों बताने लगा.

बिना मैडम : अगर किसी को पता चल गया तो में किसी को मुँह दिखने काबिल नहीं रहूंगी शिव.





शिव : (उनका चेहरा मेरी और करते hue)Me किसी से कुछ भी नहीं कहूंगा, आप को भरोसा नहीं मुज पर.

बिना मैडम : (वो मेरी और खिसकी तो मेने उन्हें अपनी बहो में भर liya)Muje यकीं है शिव, शायद इसी लिए मेने तुम्हे ये सब करने दिया.

शिव : आपको अच्छा लगा?

बिना मैडम : ह्म्म्मम्म, तुम्हे?

शिव : मुझे तो बहोत अच्छा लगा, आप सच में बहोत कमल हो.

बिना मैडम : (मुस्कुराते हुए उसके शाइन में घुस gayi)Badmash!!!!!!!!
 
अपडेट 58

बिना मैडम के साथ वो हसीं पल बिताने के बाद में जूही मैडम के घर चला गया. आज स्टेडियम जाना नहीं था पर मेने सोचा की उनको स्कूल में हुई प्रतियोगिता के बारे में बता दू. मैंने जा का बेल्ल बजायी, जैसे hi दरवाजा खुला उन्होंने मुझे देखा, और देखते hi अपनी बहे खोल दी, उनको ऐसे बहे खोले देख में जीजाक गया पर उनके चेहरे की मुस्कान देख, में उनके गले लग गया.

शिव : (मुस्कुराते hue)To आप को खबर मिल gayi.(Wo बहोत ऊँची थी तो वो अच्छी तरह से मेरी बहो में आ रही थी, वो गले लगी हुई थी तो उनके सख्त उभर मेरी छाती पर अपना एहसास दिला रहे थे, मेने उन्हें और बहो में कास लिया )

जूही मैडम : खबर तो रखनी hi थी. कोंग्रटुलतिओं अपनी पहली कामयाबी पर. आज से सब में शिव की पहचान बन नई सुरु हो गयी.

शिव : ये मेरी नहीं आपकी कामयाबी है.

जूही मैडम :(मेरे गाल थप तपते hue)Aao अंदर आओ. कहा रह गए थे, कब से में तुम्हारा इंतजार कर रही थी.

शिव : (अब में उन्हें क्या batata)Wo..wo कॉम्पिटिओं के बाद सब फोटो खिंचवा रहे थे, उसके बाद दोस्तों के साथ था.

जूही मैडम : कोई बात नहीं. तुम बैठो में दूध ले आती हु.

वो दूध बना रही थी और में उन्हें सब बताता गया, वो बड़ी खुसी से सुन रही थी, उनके चेहरे की मुस्कराहट hi बता रही थी की वो आज बहोत खुस है. वो मेरे लिए दूध ले आयी. हम बाटे करते हुए दूध पिने लगे. जब में निकल रहा था तो एक बार फिर मेने उन्हें गले लागलिया तो वो भी बड़े प्यार से मेरी बहो में समां गयी. इस समय मेरे अंदर कोई गलत फीलिंग्स नहीं थी, मेरी जिंदगी को एक दिशा देने के लिए, में दिल से उनका सुक्रिया कर रहा था,. फिर में अपने घर गया और लता दीदी, सरिता दीदी , विणा रंजन सब को प्रतियोगिता के बारेमे बताया. वो सब भी बहोत खुस हुए, रंजन तो उछाल उछाल कर नाचने लगी, मेने उसे सब के सामने गले लगा लिया तो वो भी मुझसे पूरी तरह चिपक गयी. ये देख कर सब हसने लगे तो वो शर्मा गयी.

मैनेजर की गिरफ़्तारी से बहोत से लोगो की नींद उडी हुई थी. उसमे से एक था इंस्पेक्टर शेखर. उसने भार्गवी को भी फ़ोन किआ था, भार्गवी से उसने संभल कर बात की थी, उसने ऐसे hi जताया था की उसने ऐसे hi फ़ोन किआ है. उसने कहा की उसे इस बारे में पता चला तो जान ने के लिए फ़ोन किआ था और उसे बधाई भी दी थी. भार्गवी की बातो से उसे इतना तो पता चल गया था की अब वो मैनेजर छूटनेवाला नहीं है. उसे दर इस बात का था की अगर उसके और मैनेजर के सम्बन्ध बहार आ गए तो उसे बहोत प्रॉब्लम हो शक्ति है. वो दारू के गिलास पे गिलास पि रहा था और ऐशट्रे में सिगरेट का तो जैसे पहाड़ बन गया था. इतनी दारू पिने के बाद भी उसे नशा नहीं हो रहा था. उसने एक आदमी को फ़ोन लगाया और उसके साथ काफी देर बात करता रहा. बात करने के बाद फिर वो दारू पिटे हुए अपनी सोच में दुब गया.

रात को हम सब साथ में hi सोये थे. एक तरफ लतादिदी थी और उनके बाजु में सरितादिदी सो रही थी. दूसरी और रंजन सोई हुई थी और उसके साथ में विणा सोई थी. पुरे दिन कहि थकन के कारन में गहरी नींद में सो गया. रात को अचानक मेरी नींद खुली तो मुझे लगा की मेरा लुंड किसी गर्म जगह में है. नींद की वजह से पहले तो मुझे कुछ समाज नहीं आया. हलकी रौशनी थी तो मेने निचे देखा. कोई मेरे लुंड को अपने मुँह में ले कर चूस रहा था. में दर गया क्यों की सब आस पास hi थे, मेने देख की लतादिदी और सरितादिदी सोई हुई है. साइड में रंजन नहीं थी, जब मेने ध्यान से देखा तो वो रंजन hi थी जो मेरा लुंड चूस रही थी. मेने उसके शिर पर हाथ रक्खा तो वो मेरी और देख के मुस्कुराने लगी. वापस उसने मेरा लुंड अपने मुँह में भर लिया.

शिव: (धीमी आवाज me)Ye क्या कर रही हो, कोई जाग गया तो?

रंजन : (मेरी बाजु में लेट ते hue)Chal न शिव, मेरे रूम में चलते है.

शिव : (वो ऊपर से नंगी थी, उसके स्तन मेरी छाती को छू रहे थे, एक बार तो मेरा भी मान हो गया की उसे ले चालू, पर अपने आपको सँभालते hue)Pagal हो गयी है, सब साथ में सो रहे है, दीदी जग गयी तो क्या जवाब देंगे?

रंजन : (उसने मेरे लुंड को पकड़ लिया और हाथ से सहलाने लगी) चल न शिव, मुझे बहोत मान हो रहा है.

शिव : पागल मात बाण, थोड़े दिन रुक जा.

रंजन : क्या रुक जाऊ, अगर उस इंस्पेक्टर ने या मैनेजर ने मेरे साथ कुछ कर दिया होता तो, नहीं शिव में अब नहीं रुक शक्ति, जिंदगी का क्या भरोसा, में पहलीबार तेरे साथ hi करना चाहती हु. मान जा न.

शिव : (उसके होठो को चूमते hue)Kuchh हुआ क्या? क्यों डर्टी है, मेरे रहते कोई तुजे छू भी नहीं शक्ति. अभी सो जा.

रंजन : ऐसी हालत में मुझे नींद नहीं आएगी, कुछ कर न.

शिव : तू मानेगे नहीं, है na?(Badi मासूमियत से उसने मुस्कुराते हुए है का इस्सर kia)Thik है, पर आवाज मात karna.(Meri बात से वो खुस हो गयी, उसने निचे स्कर्ट पहना हुआ था तो मेने उसे ऊपर उठा दिया, उसकी छोटी सी पंतय को खिसकते हुए उतर दिया, उसकी और करवट लेते हुए उसका पेअर मेरे ऊपर चढ़ा दिया, उसके कूल्हे को मसलते हुए उसके होठो को अपनी गिरफ्त में ले लिया और लुंड को उसकी छूट से सत्ता दिया. उसकी छूट पहले से hi बहोत गीली हो चुकी थी, मेरे लुंड के सुपडे को उसकी गीली दरार पे घिसते हुए में धक्के लगाने लगा, उसकी सांसे फूलने लगी वो मुझे अपनी और खींचने लगी, मेने उसके होठो को बिलकुल नहीं छोड़ा क्यों की अगर में छोड़ता तो आवाज निकल न तय था. उसकी चूक की रगड़ से मुझे भी मज़ा आने लगा, बिना मैडम और स्नेहा मैडम के मुकाबले मेरे घर की लड़कीअ काफी पतली थी, उसकी पतली कमर को सहलाते हुए में मेरे लुंड को लगातार उसकी छूट पे घिस रहा था, मेरा भी मान करने लगा की लुंड उसकी छूट में दाल दू, पर मुझे पता था की अभी ये मुमकिन नहीं है, काफी देर उसे प्यार करता रहा, आखिर कर वो झाड़ गयी और शांत हो गयी. वो सीधी लेट गयी और लम्बी लम्बी सांसे लेते हुए अपने आपको शांत करने लगी. उसके छोटे छोटे भरे हुए चुके ऊपर निचे हो रहे थे, वो मुझे अपनी और खिंच रहे थे. मेने हलके से उसे सहलाते हुए उसके निप्पल को दबाया.

वो नशीली आँखों से मुझे देखने लगी तो में बस मुस्कुराया. वो भी मुस्कुरायी और वापस मेरे गले लग गयी. थोड़ी hi देर में वो सो गयी, थकावट की वजह से मुझे भी नींद आ गयी.

दूसरे दिन सुबह गयम में काव्य मैडम से बात हुई. उन्होंने बताया की आज कोर्ट में केस दाखिल हो जायेगा, लड़कीओ का मामला है इस लिए कोर्ट उन्हें न बुलाये पर उनके बयां लिए जायेंगे. फ़िलहाल तो अभी कोर्ट में केस दाखिल होगा और पुलिस रिमांड मांगेंगी. अगर कुछ हो तो उन्हें बताने को बोलै. मुझे तो इन सब में कुछ समाज आता नहीं था तो में बस उनके सहारे hi था. घर आने के बाद में तैयार हो रहा था. तो लतादिदी आयी. वो थोड़ी उल्जन में थी.

शिव : क्या हुआ दीदी?

लतादिदी : Shiv...(Wo हिचकिचा रही थी)

शिव : कहो न दीदी क्या हुआ?

लतादिदी : रसन में दो तीन चीजे लानी है.

शिव : ठीक है दीदी में कुछ करता हु, क्या क्या लाना है वो मुझे बता dijiye.(Me सोचने लगा, क्यों की मेरे पास जो पैसे थे वो तो पुलिस स्टेशन में थे, अभी फ़िलहाल तो मेरे पास कोई पैसे नहीं थे)

उन्होंने बता दिया और में स्कूल के लिए निकल गया. बिना मैडम आज स्कूल नहीं आयी थी. मुझे उनके लिए चिंता हुई पर अभी फ़िलहाल तो में कुछ कर नहीं सकता था. रेसस्स में में हमारे पे टीचर को मिलने चला गया. उनका नाम वरुणसीर था. वो स्टाफ रूम में बैठे थे. मेरे बुलानेपर वो बहार आ गए.

वरुणसीर : है बोलो शिव, क्या हुआ?

शिव : सर, एक बात पूछनी थी.

वरुणसीर : है है पूछो.

शिर : (हिचकिचाते हुए) सर, वो कल मैडम ने मुझे इनाम देने को कहा था वो पैसे कब मिलेंगे?

वरुणसीर : अरे है, वो तो मेरे दिमाग से निकल hi गया था, एक मिनट रुको में उनसे बात करता hu.(Unse बात करने के बाद) वो कह रही है की वो भिजवाडेंगी, और अगर जल्दी है तो उनके घर जा कर ले आना पड़ेगा. बोलो क्या कहते हो?

शिव : सर, जरुरत तो थी, में ले आऊंगा, आप उनका एड्रेस दे दीजिये.

वरुणसीर ने मुझे एड्रेस दे दिया, मेरे लिए ये पैसे अभी ज्यादा इम्पोर्टेन्ट थे तो में स्कूल से निकल गया. स्कूल से निकल कर में कोर्ट चला गया. वह में काव्य मैडम से मिला.

काव्य मैडम : क्या हुआ शिव, तुम यहाँ कैसे?

शिव : मैडम, आप से काम था.

काव्य मैडम : है है, बोलो.

शिव : मैडम, वो पैसे जिसकी वजह से मुज पर चोरी का इल्जाम लगा था, वो पैसे मुझे वापस कब मिलेंगे?

काव्य मैडम : क्यों क्या हुआ?

शिव : मैडम, मैनेजर जेल में है, अनाथालय के खर्चे के लिए पैसो की जरुरत पड़ी है, इस लिए में पूछ रहा था.

काव्य मैडम : ये तो बड़ी मुसीबत हो गयी, जब तक, केस का फैसला नहीं आता वो पैसे तो जमा hi रहेंगे. पवन जी का भी फ़ोन आया था, उन्होंने अनाथालय के कागजात को ऊपर ऊपर से देखा था तो उन्हें कुछ संदिग्ध मिला था. वो भी शाम को आनेवाले है. एक काम करो तुम भी शाम को मेरे घरवाले ऑफिस पर आ जाना. वही बेथ कर चर्चा करेंगे की क्या किआ जा शक्ति है.

काव्य मैडम से बात करने के बाद में वह से निकल गया. मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था. पैसे थो चाहिए होंगे, स्नेहा मैडम से मांग शक्ति हु, जूही मैडम से भी मांग सकता हु, पर कबतक में उनसे मागूंगा, कुछ तो सोचना hi पड़ेगा. में मनिषामदाम का पता ढूंढते ढूंढते उनके घर पहुंच गया. घर खा बहोत बड़ा बंगलो था. बहार दरबान था, उसने पूछा की क्या काम है, तो मेने बताया की में क्सक्सक्स स्कूल से आया हु और मुझे मनीषा मैडम ने बुलाया है. मुझे वही खड़ा रख कर वो अंदर गया. थोड़ी देर बाद वो वापस आया और मुझे अंदर जाने के लिए कहा. अंदर काफी बड़ा गर्दन था, में देखते हुए अंदर पंहुचा. दरवाजा खुला हुआ hi था, फिर भी में दरवाजे पर hi खड़ा रहा और आवाज दी.

शिव : मैडम.

मनीषा मैडम : (अंदर से आवाज आयी) अंदर आ जाओ.

शिव : (में अंदर दाखिल हुआ, वो एक बड़ा हॉल था, एक जगह सोफे ऐसे रक्खा था की उसका घेरा बना हुआ था, दूसरी तरफ थोड़ी दुरी पर दिंनिंग टेबल भी लगा हुआ था. बड़ा सा टीवी दीवाल पर लगा हुआ था. मेने देखा तो वो सोफे पर बैठी हुई थी और उनके थोड़ी दुरी पर पलना (बच्चो को सुलनेवाला) था, जिसकी वो डोरी थामे थी और उसे झूला रही थी. अंदर एक बच्चा सो रहा tha.)Namaste मैडम.

मैडम : है नमस्ते, बैठो. (किसी को आवाज lagayi)Pani लाना. (थोड़ी hi देर में एक औरत पानी ले कर आयी और मुझे दिया, मेने पानी पिया) शिव, राइट.

शिव : जी मैडम.

मैडम : स्कूल से सर का फ़ोन आया था, अभी तो तुम्हारा स्कूल चल रहा होगा न, (वो मेरे स्कूल का यूनिफार्म और बैग देख कर बोली)

शिव : जी मैडम.

मैडम : में कल स्कूल में भिजवाडेति, तुम्हे स्कूल छोड़ कर आने की क्या जरुरत थी.

शिव : मैडम, मुझे पैसो की जरुरत थी, इस्सलिये में आ गया.

मैडम : है भाई, आज कल पैसो की जरुरत किसी नहीं होती. और तुम्हारी उम्र के लड़को को पैसे पार्टी करने के लिए चाहिए होते है. पैसे आये नहीं की चले पार्टी करने.

शिव : नहीं मैडम, ऐसी बात नहीं है.

मैडम : अरे कोई बात नहीं, में भी तुम्हारी उम्र में ऐसी hi थी, इसमें शरमानेवाली कोनसी बात है, पैसे है तो खर्च तो करेंगे hi. और तुमने तो पैसे अपनी म्हणत से इनाम में कमाए है, तो तुम्हारा हक़ बनता है. तुम्हारे पैसे है तुम चाहे जैसे उड़ाओ.

शिव : नहीं मैडम, में अनाथालय में रहता हु, ये पैसे मुझे अनाथालय के लिए चाहिए, मेरे लिए नहीं चाहिए.

मैडम :(मेरी और ध्यानसे देखने lagi)Shiiiiiiv, परसो पुलिस इस्पेक्टर और मैनेजर वाला जो केस हुआ था क्या वो तुम हो?

शिव : (अपनी नज़ारे झुकाते हुए) जी मैडम.

म. मैडम : ओह माय गॉड, तुमने उन्दोनो को मारा था, (अपने मुँह पर हाथ रखते hue)my गॉड, बुरा मात मन न पर तुम्हे देख कर लगता नहीं की तुम इतने खतरनाक हो.

शिव : (मुझे बहोत शर्म आ रही thi)Me खतरनाक नहीं हु मैडम, वो लोग लड़कीओ के साथ वैसा करने की कोशिस कर रहे थे, वो मेरी अपनी थी, तो हो गया सब.

म. मैडम : अरे नहीं, मेरे कहने का वो मतलब नहीं था. तुम्हारी सकल वैसी नहीं है, दिखने में कितने मासूम लगते हो, सॉरी अगर तुम्हे बुरा लगा हो तो.

शिव : (में कब से उन्हें देख रहा था, वो थोड़ी थोड़ी देर में अपने आप को एडजस्ट कर रही थी, उनके चेहरे पर कुछ दर्द के भाव भी दिखाई दे रहे थे, में समाज नहीं प् रहा था की क्या हो रहा है, आखिरकार मेने उन्हें पूछ hi liya)Koi परेशानी है मैडम.

म मैडम : (झेपते hue)Nahi, नहीं तो, कोई परेशानी नहीं.

शिव : कुछ परेशानी हो तो बताइये, हल निकलेगा.

म. मैडम : नहीं, इसका कोई हल नहीं, तुम बैठो और नास्ता करो, में पैसे लती hu.(Unhone फिर उस औरत को आवाज दी, पर आवाज देते समय भी उनके मुँह से एक सिसकी निकल गयी)

शिव : मैडम, में देख प् रहा हु की आप को कोई परेशानी है, अगर आप कुछ बताएंगी तो उसका हल निकलेगा. मुझे लग रहा है की आपको दर्द है, अगर ऐसा कुछ है तो आप डॉक्टर से बात कर लीजिये.

म मैडम : तुम नहीं संजोगे शिव, इससे डॉक्टर नहीं सोल्वे कर शक्ति.

शिव : (मान में, बिना मैडम को भी दर्द हुआ था, लतादिदी को भी दर्द हुआ था, कही वो वाला तो दर्द नहीं, ये ख्याल आते hi में झेप गया, पर अब बात सुरु कर hi दी थी तो मेने kaha)Madam अगर अंदरूनी दर्द है तो आप दर्दनिवारक गोली ले लीजिये. (और तो में क्या कह शक्ति था)

म मैडम : तुम नहीं संजोगे शिव, ये पेनकिलर से ठीक होनेवाला दर्द नहीं है.

शिव : अब तो मेरे मान में भी जिज्ञासा उठने लगी, की आखिर मैडम को हुआ क्या है?
 
अपडेट 59

एक जगह कुछ लोग बैठे हुए थे. उनके टेबल पर दारू और चिकन परोसा गया था. पिटे हुए और कहते हुए सब बाते कर रहे थे.

आदमी 1 : तो जैसा संजय है, आज रात को hi सब करना है.

आदमी2 : भाई, आप टेंशन क्यों लेते हो, एक hi तो लड़का है, बाकि सब तो लड़कीअ है. में क्या कहता हु, वो काम करने से पहले अगर उन लड़कीओ के साथ थोड़े मज़े करलिए जाये तो कैसा rahega.(Dusare दो लोग थे जिन्होंने भी इसकी है में है मिलायी)

आदमी1 : देखते है, पर छूट के चक्कर में अपना काम नहीं बिगड़ना चाहिए. हमें जिस काम के लिए पैसे मिल रहे है उस काम को पहले करना है. छूट का क्या है, पैसे है तो वो अपने आप हमारे पास आ जाएगी.

आदमी2 : सही कह रहे हो भाई, पर आज में वह देखने के लिए गया था, अनाथ लड़कीअ है, सच कहु तो साली एक से बढ़कर एक माल है. एक तो साली इतनी मस्त दिख रही थी की देख कर hi लुंड खड़ा हो जाये.

आदमी 1 : चूतिये, तुजे ये सब देखने के लिए भेजा था, जो देखना चाहिए था वो ठीक से देखा था न.

आदमी 2 : क्या भाई, ये तो टाइम पास था, जिस काम के लिए आपने बोलै था वो तो में करूँगा hi न. कुछ खास नहीं है, वह कुछ भी खतरा नहीं है, न कोई चौकीदार है न कुछ और है. कुछ बच्चे, दो चार लड़कीअ और एक लड़का बस.

आदमी 1 : चूतिये, उसी लड़के ने उस इंस्पेक्टर को बड़ी बेरहमी से मारा है, में अस्पताल गया था, सेल ने कितनी hi हड्डिया तोड़ दी है.

आदमी 2 : अरे नहीं भाई, वो तो साला दारू के नशे में था, और आप को तो पता है दारू के नशे में कहा होश रहता है. उस इंस्पेक्टर की hi गलती थी ,साला नशे में न होता तो आज उसकी जगह वो लड़का होता. वो भी साला वह उन लोंड़िओ को छोड़ने hi गया था, पर दारू ने सारा खेल बिगड़ दिया.

आदमी1 : तुजे इतना सब पता है तो सेल दारू पिने क्यों बैठा है.

आदमी2 : अरे भाई, हमे कोनसा अभी जाना है, रात तक तो दारू उतर जाएगी, और आप को पता है, काम के वक़्त no दारू.

आदमी 1 : हमे सिफत वह उस ऑफिस के सरे कागजात जलने है, कोई भी रिकॉर्ड वह नहीं बचना चाहिए.

आदमी 2: ऐसा क्या है वह भाई?

आदमी 1 : मुझे क्या पता, और हमे जान ने की जरुरत भी नहीं, हमे बस सब वह जला कर सब ख़तम करना है.

आदमी 2: भाई, में क्या कहता हु, पहले हम उस लड़के को वह बांध देंगे, अगर ज्यादा होशियारी करेगा तो सेल की हड्डिया भी तोड़ देंगे, बाद में उन लड़कीओ का मज़ा लेंगे, फिर वेब जला कर निकल जायेंगे. क्या कहते हो.

आदमी 1 : चूतिये, तेरा दिमाग वही अटक गया है, चल कोई बात नहीं, वैसे hi करेंगे.

आदमी2 : (अपना गिलास उठा kar)Jio भाई, दिल खुस कर दिया.

रंजन और विणा स्कूल में रेसस्स में बाथरूम से वापस लौट रही थी. तभी दो लड़कीअ भी उनके पास आयी. एक लड़की का नाम दिव्या और दूसरी का कुसुम था.

दिव्या : Hi रंजन, hi विणा.

दोनों : Hi.

दिव्या : यार एक बात केहनी थी, कहना नहीं न्योता देना था.

रंजन : कैसा न्योता, कही शादी तो नहीं कर rahi(majakia हस्ते हुए)

दिव्या : (उसने भी हस्ते हुए hi जवाब दिया) अभी ऐसी किस्मत कहा, मेरा नंबर तो एक दो साल बाद लगेगा. अभी मेरे भाई की शादी है. तुम दोनों को आना है.

रंजन : तेर गांव में है शादी?

दिव्या : है.

रंजन : यार वह हम कैसे आएंगे.

दिव्या : दूर थोड़ी न है मेरा गांव, यहाँ नजदीक में hi तो है.

रंजन : यार पर हम दो अकेले नहीं आ शकेंगे.

दिव्या : अकेले क्यों, वो लड़का आया था न उस दिन तुम्हे लेने के लिए, उसे भी अपने साथ ले आना.

रंजन : कामिनी, तू मुझे बुला रही है की उसे.

दिव्या : ऐसा कुछ नहीं है, मेने तो बस सलाह दी, मान न, न मन न तेरी मर्ज़ी. मेने तो ऐसे hi कहा था, तू किसी और को या अपने किसी बॉयफ्रेंड को लेकर आना चाहे तो भी मुझे कोई एतराज nahi(Wo कुसुम को ताली देते हुए हसने लगती है)

रंजन : वैरी फनी. चल में देखती हु, शिव से बात कर के तुजे बताती हु.

दिव्या : ऐसा नहीं, अब तो हम सहेलिया है, तुजे और विणा को आना hi पड़ेगा.

रंजन : ठीक है बाबा, करती हु कुछ.

(फिर वो सब क्लास में चले गए)

यहाँ में मनीषा मैडम के घर पर था, उनका का चेहरा बता रहा था की वो परेशां है और उन्हें कही दर्द भी है, वो मुझे बताने से कतरा रही थी. अपने अनुभवों से में इतना तो सिख hi चूका था की कई बार चुदाई के बाद लड़कीओ को दर्द होता है. तो मेने सोचा की सायद उन्हें भी हुआ हो, या कुछ और. पता नहीं. वो ये भी बता रही थी की पेनकिलर भी उनके काम की नहीं है तो ऐसा कोनसा दर्द होगा.

शिव : मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा है मैडम. अगर में कुछ हेल्प कर शक्ति हु तो मुझे जरूर ख़ुशी होंगी.

म मैडम : (मुझे देखते हुए कुछ सोच रही थी, की तभी उनके वह काम कर रही वो औरत आयी)

औरत : मेम सब और कुछ काम है?

म मैडम : नहीं तुम जाओ, और शाम को टाइम से आ जाना.

औरत : जी मेम सब. (वो चली गयी)

शिव : ठीक है मैडम, अगर आपको एतराज न हो तो वो पैसे मुझे दे दीजिये तो में भी चलता हु.

म मैडम : (वो मेरी और ऐसे देख रही थी जैसे वो मुझे स्कैन कर रही हो, मुझे समझने की कोशिस कर रही थी, मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा tha)Ek बात बताओ शिव, अगर मुझे ऐसी कोई प्रॉब्लम हो जो औरतोवाली हो तो तुम हेल्प करोगे?

शिव : (औरतोवाली प्रॉब्लम, मुझे कुछ समाज नहीं आया) मैडम मुझे ज्यादा तो कुछ पता नहीं है पर अगर में आपके काम आ शकु तो मुझे खुसी होगी.

म मैडम : अब में तुम्हे कैसे संजो, तुम किसी से कहोगे तो नहीं?

शिव : (मेरे दिमाग में घंटी बजने लगी, स्नेहा मैडम का भी यही दिला था, बिना मैडम का भी यही डायलॉग था, क्या ये भी.... नहीं नहीं इनको तो आलरेडी दर्द है, वैसी बात तो नहीं हो सकती, पैट नहीं क्या प्रॉब्लम है मैडम की, मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था, फिर भी मेने हिम्मत कर के कह hi दिया) में क्यों किसी को कहने लगा मैडम, आप मुज पर भरोसा कर शक्ति है, में किसी को कुछ भी नहीं कहूंगा.

म .मैडम : एक मिनट ruko,(Wo उठ कर गयी और दरवाजा बन करके आयी, मेरा दिमाग अभी भी यही कह रहा था की छुडाईवाला किस्सा तो नहीं hi है. तो क्या हो सकता है) शिव, मेरे बच्चे को शायद पेट में प्रॉब्लम हुई है, तो दो दिन से वो दूध ठीक से नहीं पि रहा hai.(Me उन्हें ध्यान से सुन रहा था और अभी भी मुझे समाज नहीं आ रहा था, वो मेरे चेहरे को देख कर समाज रही थी की मुझे समाज नहीं आ रहा) हम औरतो को दूध बनता hi रहता है, अगर बच्चा न पाई तो प्रॉब्लम होती hai.(Wo चुप हो गयी और मुझे देखने लगी, मेरे पल्ले अभी भी कुछ नहीं पद रहा tha)Dudh भर जाने की वजह से मुझे वह बहोत पैन हो रहा है. इतना पैन हो रहा है की में उसे दबा कर भी नहीं निकल shakti.(Me उनकी और सवालिए नजरो से देख रहा था, मेरे चेहरे से वो समाज रही थी की अभी भी मेरे पल्ले कुछ नहीं pada,)(Manisha समाज रही थी की ये अभी एक छोटा लड़का hi तो है, इससे क्या ये सब पता होगा, सच में उसे बहोत दर्द भी हो रहा था, पहले भी एक दो बार ऐसा हुआ था पर तब उसका पति था तो उन्होंने इलाज कर दिया था, पर भी वो बुसिनेस ट्रिप पर गए है, उसने अपनी कामवाली को कहने की भी सोची थी पर उसे कहना उसे अपनी शान के खिलाफ लगा था, अभी इस नौजवान लड़के को बताना भी उसकी मज़बूरी थी, वो जानती थी की वो उसको इस दर्द से छुटकारा दिला शक्ति है, और साथ में एक खूबसूरत लड़के के साथ अपने आपको सोच कर वो अंदर hi अंदर उत्तेजित भी हो रही थी, वो मर्डर ख़यालोवाली लड़की थी, बड़े बाप के घर पाली बड़ी थी, बॉयफ्रेंड बनाना उसके लिए कोई नयी बात नहीं थी, उसकी शादी भी एक बड़े बुस्सिनेसमान के बेटे के साथ hi हुई थी, वो भी काम की वजह से बहार सब करता hi था. हाई सोसाइटी की होने के कारन उसे इनसब में कुछ भी गलत नहीं लगता था. है शादी के बाद वो सब उसने बंद कर दिया था पर शिव को देख कर उसके अरमान जागने लगे थे, वैसे भी बच्चा होने के बाद उसके पति ने उसके साथ ढंग से सेक्स किआ hi नहीं था, तो फ़िलहाल उसे शिव के रूप में सम्भावना दिख रही थी, उसे अपनी इज्जत का भी ख्याल करना था, तो बहोत संभल कर शिव से सब कह रही thi)Tum समाज रहे हो न शिव.

शिव : में समाज रहा हु मैडम, पर में इसमें आपकी क्या मदद कर शक्ति हु, अच्छा यही होगा की आप किसी डॉक्टर से बात कर ले.

म मैडम : नहीं शिव, डॉक्टर इसमें कोई मदद नहीं कर शक्ति, है अगर तुम चाहो तो कर शक्ति हो.

शिव : (डॉक्टर नहीं कर शक्ति पर में कर शक्ति हु, मुझे समाज नहीं aaya)Wo कैसे मैडम?

म मैडम : (बोलते बोलते वो रुक गयी, उसने सोचा की बोलू की न बोलू, पर फिर हिम्मत कर के बोल hi diya)Mera दूध पि kar.(Wo शिव के चेहरे के बदलते भावो को समझने की कोशिस करने lagi)(Me उनको आंखे फाडे देख रहा था, कभी उनको तो कभी उनके भरे हुए स्तन को देख रहा tha)(Manisha, शिव के चेहरे के बदलते भाव देख कर सोचने लगी की कही मेने गलती तो नहीं करदी, अगर शिव न मन आउट उसने किसी से इस बारेमे जीकर किआ तो उसकी बदनामी हो शक्ति है, पर अबतो उसने बोल दिया था, तीर कमान से निकल चूका था, अब पीछे हटने से कोई फायदा नहीं था, तो वो शिव को कैसे भी करके मन लेना चाहती थी) वो अपनी जगह से उठ कर शिव के पास बेथ गयी, उसने शिव की और देखा जो उसे hi देख रहा था, उसने स्माइल के साथ उसकी झंघ पर हाथ रखा )प्लीज शिव, मुझे बहोत दर्द हो रहा है, प्लीज मेरी मदद कर do(apne चेहरे पर भी दर्द लेन का प्रयास किआ, वैसे तो ये सच भी था, उसे दर्द तो हो hi रहा था).

शिव : (में हक्का बक्का रह गया था, मुझे समाज नहीं आ रहा था की क्या जवाब दू, मुझे दर भी लग रहा था की अगर मेने इंकार किआ तो शायद मुझे पैसे भी नहीं मिलेंगे, और मुझे पैसो की बहोत ज्यादा जरुरत थी, फिर भी मेने आखरी कोशिस ki)Par मैडम, में कैसे आपके साथ वो कर शक्ति हु?

म मैडम : (शिव को रस्ते प् आता देख उसकी भी हिम्मत बढ़ गयी, उसकी झंघ पर हाथ घूमते hue)Kuchh नहीं होगा, तुम तरय करो अगर तुम्हे अच्छा न लगे तो मात करना, में दर्द सेह लुंगी. प्लीज शिव मेरी मदद कार्डो.

शिव : (अब में क्या कहता, मेने हथियार डालते हुए puchha)k...kaisee करना है मैडम?

म मैडम : (मेरा जवाब सुन कर वो खुस हो गयी, वो थोड़ी दूर हटी और मुझे अपनी झंघ की और इस्सर करते hue)yaha आओ मेरी गॉड में अपना शिर रख do.(Mene, एक बार उनकी आँखों में देखा, फिर हिचकिचाते हुए उनकी झांघो पर अपना शिर रख कर लेट गया, अजीब सिचुएशन थी, वो मेरे लिए अनजान थी और फिर भी में उनकी घोड़े में लेता हुआ था, मेरे सामने उनके बड़े बड़े स्तन थे, में कभी उनको तो कभी मैडम को देख रहा था)( शिव को अपनी गोदी में लेता देख उसको थोड़ी शर्म भी आ रही थी पर उसके शरीर में उठ रहा रोमांच ज्यादा hi था, वो शिव के प्यारे से चेहरे को देख रही थी, सच में शिव उसे पहली मुलाकात से hi बहोत अच्छा लगा था, ऐसे हंसों, हीरो जैसे लड़के को वो अपना दूध पिलाने जा रही थी ये सोच कर hi उसकी छूट भीगने लगी थी. उसने एक लम्बी साँस ली और अपने स्तन को बहार निकला, स्तन निकलते हुए भी उसको दर्द हुआ, स्तन में दूध इतना भर चूका था की जैसे hi उसे बहार निकला उसके अंदर से दूध की धार निकलने लगी)





(मेरे लिए ये नज़ारा एकदम अजीब और नया था, एक खूबसूरत लड़की के भरे हुए स्तन से दूध अपने आप hi निकल रहा था, वो सीधा मेरे चेहरे पर गिर रहा था, स्तन से निकल रहे दूध को में बड़े ध्यान से देख रहा था) देखो शिव, कितना भर गया है, अपने आप hi बहार निकल रहा hai(Usne शिव का मुँह पकड़ कर अपने निप्पल को उसके मुँह में दाल diya)Chuso इसे शिव, मेरा दूध पिलो, (जैसे hi मेने उनके निप्पल को चूसा, मीठा मीठा दूध मेरे मुँह में भरने लगा, सच में वो बहोत मीठा लग रहा था, दूध का स्वाद मुझे भी अच्छा लगा तो में उसे चूसने लगा) शह्ह्हह्ह्ह्ह हाआआ चुसो इसे शह्ह्ह्हह्ह शिईयिव चुसूऊऊ shhhhhhhhhh.





(ये मेरी कल्पना के बहार का था, मेने अपने आप को थोड़ा एडजस्ट किआ और अपने शिर को थोड़ा उनकी और घुमाया और निप्पल को चूसने लगा, वो मेरे शिर के बालो को सेहला रही थी, दूध मेरे गले से अंदर उतर रहा था, में जोर जोर से निप्पल को चूसने laga)Shhhhhh आहिस्ता शिईयिव शहहहहह (वो मेरे चेहरे को सेहला रही थी, साथ में दूसरे हाथ से मेरे शाइन को भी सहलाने lagi)Kaisa लगा मेरा दूध? अच्छा है? (मेरे मुँह में निप्पल था तो मेने बस शिर हिला कर है कहा) पि लो, ाः अब जेक कुछ रहत मिली, दूसरे को भी चुसो शिव, उसमे भी बहोत दूध भर गया hai.(Madam की आवाज बहोत कामुक हो चुकी थी, उनकी सिस्किअ सुन कर मेरा लुंड खड़ा हो चूका था, यहाँ परिस्थिति अलग थी तो मेरा लुंड उठने से मुझे थोड़ा ावक्वेर्ड लगा, में सिर्फ मैडम के दर्द के इलाज के लिए ये सब कर रहा था और ऐसे में अगर मैडम मेरे खड़े लुंड को देख लेती तो वो क्या सोचेगी, ये सोचते हुए मेने अपना एक हाथ वह रख दिया ताकि मैडम की नजर न pade)(Manisha ने देखा की शिव अपने हाथ से कुछ छुपाने के कोशिस कर रहा है, तुरंत वो समाज गयी की क्या माजरा है, उसके चेहरे पर शर्मीली स्माइल आ गयी, एक हाथ से वो शिव का शिर सेहला रही थी, अपने दूसरे हाथ को शिव के हाथ के ऊपर रख दिया जिस से उसने अपने लुंड को छुपाया tha)Shhhhh कोई बात नहीं शिव ससससस, शर्माओ नहीं, ये नेचुरल hai(Usne शिव के हाथ को हटा दिया, पंत में बने उभर को देख कर उसकी छूट ने रास बहाना सुरु कर दिया, लुंड का उभर देख कर hi उसे उसके कद का अनुमान हो रहा था. जब इतना कुछ हो गया था तो अब शर्माने से क्या फायदा, उसने अपने हाथ को लुंड पर रख दिया और उसका जायजा लेने लगी. उसका आकर, उसकी लम्बाई और मोटाई का एहसास करते hi वो और उत्तेजित होने lagi.)Shhhhh अह्ह्ह्हह सीईव चुसो शह्ह्ह्हह्ह. (वो मेरे लुंड को पकड़ रही थी, में ये नहीं चाहता था, तो मेने उनका हाथ पकड़ liya)Shhhh मेरा हाथ छोडो शिव. मुझे करने दो.

शिव : नहीं मैडम, वह हाथ मत लगाइये.

म मैडम : क्यों, क्या प्रॉब्लम है?

शिव : ये सही नहीं है मैडम.

म मैडम : (उसके उप्पर उत्तेजना पूरी तरह से हावी thi)Kuchh गलत नहीं है शिव. में सामने से कर रही हु फिर तुम्हे क्या प्रॉब्लम है.

शिव : नहीं मैडम, में ऐसा नहीं कर शक्ति.

म मैडम : क्यों नहीं कर shakte(Wo शिव के लुंड को छू कर जान चुकी थी की ये बहोत बड़ा लुंड है, उसने कई बार फिल्मो में बड़े लुंड देखे थे, पर आज तक हक़ीक़त में नहीं देख पायी थी, शिव के लुंड को देख कर वो ये मौका गवाना नहीं चाहती thi.)Me तुम्हे ज्यादा पैसे दूंगी शिव, तुम्हे जरुरत है न?

शिव : (सच में मुझे पैसो की तो जरुरत थी hi, पर ऐसे एक अनजान औरत के साथ में कैसे ये सब कर शक्ति था, में दूध पिटे पिटे रुक गया था)

म मैडम : (वो समाज चुकी थी की शिव को पैसो की जरुरत है, वो ये मौका किसी भी कीमत पर पाना चाहती थी) में तुम्हे 25 हजार दूंगी शिव. प्लीज मुझे रोको मात.

शिव : (इतने पैसे का नाम सुन कर में हैरान हो गया, अभी फ़िलहाल मुझे पैसो की सख्त जरुआत भी थी, मुझे अपने अनाथालय के बच्चे, लतादिदी, और बाकि सब याद आ गए, मेने सोचा की जब ये खुद कह रही है तो मुझे क्या फर्क पड़ता है. में इस लिए मन कर रहा था की अब में समझने लगा था की ऐसे सम्बन्ध समाज में बुरे मने जाते है. मेने सोचा था की अब तक जो हो गया था वो मुझे पता नहीं था पर अब में किसी और के साथ ऐसे सम्बन्ध नहीं बनाऊंगा पर परिस्थितिया hi ऐसी बन रही थी की में कुछ कर नहीं सकता था)

म मैडम : चुसो न शिव, रुक क्यों गए, पीओ मेरा दूध pio,tumhe ज्यादा पैसे चाहिए तो भी में दूंगी, मुझे करने दो शिव मुझे रोको mat.(Mene उनका हाथ छोड़ दिया और उनके निप्पल को फिर से मुँह में ले कर चूसने लगा) (शिव के समर्पण करने से मनीषा खुस हो गयी, उसे अपने मान की मुराद मिल गयी थी, उसने शिव के लुंड को अपने हाथ से ऊपर से निचे तक सहलाया, फिर उसकी पंत की चैन खोलने लगी, चैन खोल कर उसने अपना हाथ अंदर डाला और लुंड को बहार निकलने की कोशिस करने लगी पर वो बहोत बड़ा था और ऊपर से अंडरवियर भी थी, तो वो उसे निकल नहीं प् रही thi)(Mene खुद अपने पंत के बटन खोल दिए और ुंडेरवेरा के साथ उसे निचे खिसका diya)(Manisha लुंड को देख कर अचंबित थी, ये उसके अनुमान से भी कही ज्यादा बड़ा था, उसकी नरम खाल को सहलाते हुए उसने अपनी उंगलिया लपेट कर उसे पकड़ लिया, वो अंदर से लोहे की तरह सख्त था, शिव उसकी चूचिया चूस रहा है वो उसे याद भी न रहा, वो बस लुंड में इतनी खो गयी thi.)Shiv....ye तो बहोत बड़ा hai(Unka ऐसा कहना मेरे लिए बड़ी बात नहीं थी, क्यों की हर कोई यही कहता था, वो मुज से पूछने लगी) तुमने सेक्स किआ है शिव.





शिव : ह्म्मम्म्म्म.

म मैडम : किसके sath?(Wo लुंड को देखते हुए हिला रही थी)

शिव : (अब में क्या कहता) मेरी गर्लफ्रेंड के साथ.

म मैडम : क्या वो कुवारी थी?

शिव : है.

म मैडम : वो जिन्दा तो है na?(Unke ऐसा बोलने पर मेरे होठो पर हसी आ गयी, मेने उनकी और देखा तो वो भी मुस्कुरायी) सच में वो बड़ी हिम्मतवाली होगी, जो इससे देख कर भी अपने अंदर ले गयी, अगर में कुवारी होती तो इससे देख कर hi दर जाती. सच में ये बहोत बड़ा है.

शिव : (में काफी दूध पि चूका था, मेने देखा की उनके स्तन अब कुछ नरम हो गए थे) अब तो आपको दर्द नहीं है न मैडम.

म मैडम : वह तो सब ठीक है पर किसी और जगह परेशानी सुरु हो गयी है.

शिव : (में उनकी गॉड उठ खड़ा हुआ, मेने उनकी आँखों में देखा, मेने आखरी बार पूछा) क्या आप सचमे चाहती है?

म मैडम : (उनके चेहरे पर बच्चो जैसी जिद और मुस्कान thi)Please, प्लीज please.(Wo अपने हाथ भी जोड़ रही thi)(Muje समाज नहीं आ रहा था की मेरा लुंड देख कर लड़कीओ को ऐसा क्या हो जाता है)

शिव : (अब इतनी खूबसूरत औरत मुझे आमंत्रण दे रही थी तो में कैसे पीछे हैट ta)Yaha करेंगे?

म मैडम : (खुस हो kar)Nahi, चलो अंदर चलते है, मेरे रूम में. (बच्चे के पलने को एक और से पकड़ते hue)Isse भी अंदर ले चलो.

उनके स्तन बहार लटक रहे थे और मेरा लुंड झूल रहा था, ऐसी स्थिति में हम दोनों ने बच्चे को अंदर रख दिया, वो आराम से सोया हुआ था. मुझे पता है क्या करना है, इतने एक्सपीरियंस अब में इतना तो समाज hi चूका था. बगैर शर्माए में मैडम के पास गया और मेने मैडम को पकड़ लिया और उनके होठो को किश करने लगा, अब जब उन्हें छोड़ना hi है तो फिर क्या शर्माना, उन्होंने भी अपनी बहे मेरे गले में दाल दी और किश करने लगी, किश करते हुए मेने उनके कूल्हों को मसलना सुरु कर दिया. दोनों में जैसे जंग छिड़ी थी, दोनों एक दूसरे को पछाड़ने में लगे हुए थे, जीभ से जीभ टकरा रही थी, होठो से होठो की जंग हो रही थी, खून की जगह दोनों के चेहरे थूक से लतपथ हो चुके थे, आखिर कर उन्होंने hi हथियार डालते हुए किश तोड़ी, वो जोर जोर से सांसे ले रही थी. मुस्कुराते हुए मेरी और देखते हुए

मनीषा : जैसे दीखते हो वैसे हो नहीं तुम.

शिव : (मेने भी मुस्कुराते हुए puchha)Kaisa दीखता हु?

मनीषा : दिखने में तो जैसे मासूम बच्चे हो पर हरकते तो देखो, पूरी हिला के रख दी मुझे.

शिव : दिखने में तो आप भी सीधी सदी दिखती हो, आप भी काम नहीं हो.

मनीषा : आज तक किसी ने मुझे इस तरह से किश नहीं किआ, किश तो करते है पर इतनी जोर से किसी ने नहीं किआ, तुम तो जैसे मुँह से मेरी जान hi खिंच रहे थे.

शिव : आप को अच्छा नहीं लगा?

मनीषा : बहोत अच्छा लगा, आज लग रहा है की कोई टक्कर का मिला है, अब बातो में टाइम वास्ते मत करो. (मेने उनकी बूब्स के ऊपर अटकी टीशर्ट निकल दी, उन्होंने भी अपना हाथ ऊपर कर के मेरी मदद की. (T-shirt निकलने के बाद मेने उनके दूध से भरे हुए चुचो को थम लिया और उसे मसलना सुरु कर दिया. चुके मसलने से उनमे से दूध उड़ने लगा, कुछ छींटे मेरे शर्ट पर भी गिरे, मेने अपना शर्ट निकल दिया, और पंत भी अंडरवियर के साथ पूरा निकल दिया, में पूरा नंगा हो गया था, मेरा लुंड सामने टॉप की तरह खड़ा था. वो मेरे लुंड को hi घर रही थी, मेने फिर से उन्हें पकड़ लिया और उनके चुके मसलने लगा, दूध की धराये फिर से बहने लगी, और मेरे शरीर पर गिरने लगी, मेने निप्पल को अपने मुँह में लिया और उसे चूसने लगा, उनके स्तन से दूध निकल रहा था तो मुझे एक अजीब सी खुसी मिल रही थी, उनके चुके मसलते हुए में दूध को पिने लगा,) (मनीषा शिव को नंगा देख कर बहोत hi ज्यादा खुस हो गयी, वो इतना फिट दिख रहा था जैसे उसने कल्पना की थी. ऐसे लम्बे चौड़े हंसों युवक के साथ ये सब करना उसे बहोत अच्छा लग रहा था, उसने भी अपना हाथ बढ़ा कर शिव का लुंड पकड़ लिया और उसे हिलने लगी,,) (में कभी उनका दूध पि रहा था तो कभी उनके होठो का रास, एक हाथ से उनके कूल्हे मसल रहा था तो दूसरे हाथ से उनकी छूट जो अभी पंत में छिपी थी उसे मसल रहा था) शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह ैतनि तीव्रता से तो आज तक मुझे किसी ने नहीं चूसा, शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह आज लग रहा है की मर्द मिला है. शह्ह्ह्ह ऐसे hi चुसो muje.(Mene उनकी जीन्स भी खोल दी, थोड़ी निचे खिसका कर उनकी गद्देदार गांड को मसलने लगा. उनकी गांड आज तक मिली किसी भी लड़की से ज्यादा भरी हुई थी, शायद एक बच्चे की माँ थी और अभी अभी बानी थी तो ज्यादा hi भरी हुई थी. पंतय में हाथ दाल कर में दोनों कूल्हों को फैलते हुए मसलने laga)Ahhhhh शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्हह्ह्ह्ह. तुम मुझे पागल कर डोज शिव, (वो मेरे लुंड को जोर जोर से हिला रही थी, मेने उनका जीन्स पूरा निकल दिया अब वो भी पूरी नंगी हो गयी थी, पेट उनका थोड़ा उभरा हुआ था, पर उनकी सुंदरता में कोई कमी नहीं थी, मेने उन्हें अपने घुटनो पर बिठा दिया, और अपने लुंड को उनके चेहरे पर घूमने लगा, मेरे ऐसा करने पर वो मुझे देख कर मुस्कुराने लगी, मेने उनके होठो पर अपना लुंड रगड़ा तो उन्होंने अपनी जुबान निकल कर लुंड को चाटने लगी, लुंड को पूरा चाटने के बाद उन्होंने अपना मुँह खोल दिया और लुंड को अपने मुँह में भर liya,)Ummm उम्म्म्म सृपपप सृपपपप shhhhhhh.(Lund बहार निकल कर) ये बहोत मोटा है शिव, शह्ह्ह्ह (वो अपना चेहरा लुंड पर रगड़ते हुए चाटने लगी.,

में उन्हें देख रहा था, वो लुंड की दीवानी हुई जा रही थी, वो बार बार मेरे लुंड को देखती और फिर वापस मुँह में भर लेती, काफी देर लुंड से खेलने के बाद मेने उन्हें खड़ा किआ और उनके बिस्तर पर लेता दिया, उन्होंने अपनी टंगे फैला दी, छूट पर हलके बाल थे, और गीली होने की वजह से छूट पूरी चिप छिपी हो गयी थी, में उनकी टैंगो के पास बेथ गया और उनकी झंघे पकड़ते हुए उनकी टंगे और फैलाई. वो रास भरी छूट मुझे अपनी और खिंच रही थी, रेंज फ़ैलाने से छूट का गुलाबी छेड़ भी मुझे स्पस्ट दिख रहा था, अपनी छूट को ऐसे देख ते देख मनीषा मैडम ने पूछा) कैसी लगी? (मेने सिर्फ स्माइल की और अपना मुँह छूट पे लगा दिया और जोर से उनके होठो को चूस लिया, वो बिस्तर पर एक दम से उछली और फिर धाम से वापस गिर गयी, )ऊऊऊ मायआ शहहहहह (में उनकी छूट के होठो को चाटने लगा और उसे चूस चूस कर लाल करने लगा, वो मेरा शिर पकड़ कर मुझे छूट की और दबा रही thi)Oh सीईव अह्ह्ह्हह बहोत अच्छा लग रहा है शहहहहह अह्ह्ह्हह जोर से शिईयिव शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह मज़ा आ गया, ahhhhhh,(Me काफी देर तक उन्हें चूस रहा था, वो आहे भरते हुए मेरे शिर को अपनी छूट पर दबा रही thi,)Shhhh अह्ह्ह सीईव , इसके साथ इतना प्यार तो किसी ने नहीं जताया, शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह चुसो शिईयिव शह्ह्ह्ह (काफी देर के बाद मेने उन्हें खिंच कर बिस्तर पर बिठा दिया और फिर मेरा लुंड उनके सामने कर दिया जिसे उन्होंने बड़े चाव से वापस अपने मुँह में भर लिया, जैसे प्यार मेने उनकी छूट से किआ था वो भी मेरे लुंड पर अपना पीरा बरसाने लगी, थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें वापस लेता दिया और लुंड को उनकी छूट पर रगड़ते हुए पूछा)





शिव : तैयार हो मैडम.

मनीषा : हाआआ शिव, में तैयार hu(Mene लुंड को छूट के छेड़ पर सेट किआ और दबाते हुए अंदर डालने लगा, एक hi बार में मेने पूरा लुंड अंदर दाल दिया) अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माआआ. धीरे सीईव रुको. (में रुक गया, मेरी और देख kar)Aram से शिव, तुम्हारा बहोत बड़ा है. मेरी नार्मल डिलीवरी नहीं है, सकिसोर से डेलिवरी हुई है.

शिव : वो क्या होता है.?

मनीषा : नार्मल डिलीवरी में बच्चा छूट से निकलता है, तो वो चौड़ी हो जाती है, पर सकिसोर से बच्चा पेट काट कर निकलते है तो छूट वैसी hi रहती है. तुमने एकदम से डालदिया तो दर्द हुआ.

शिव : (मेने देखा की मैडम के पेट के निचे एक चीरा लगा हुआ tha)Sorry मैडम. वो जोश में हो गया.

मनीषा : में तुम्हे दन्त नहीं रही शिव, करो पर आराम se.(Mene हलके हलके धक्के लगाने सुरु कर दिए)

शिव : (उनके चेहरे के पास अपना चेहरा करते हुए) ऐसे?

मनीषा : (मेरे होठ पर हलकी पप्पी दे कर मुस्कुराते hue)shhhhh हआ ऐसे hi, शहहहहह अह्ह्ह्हह ओफ़्फ़्फ़्फ़ शह्ह्हह्ह्ह्ह. तुम्हारी गर्लफ्रेंड की क्या हालत हुई होगी शिव, शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह, बेचारी पर तरस आ रहा है, शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (उनके होठो को चूसते हुए धक्के लगाने लगा) आप को अच्छा नहीं लगा ये?

मनीषा : शह्ह्ह्ह पागल हो क्या, ऐसी फिल्लिंग्स तो में भूल hi गयी थी, शुरुआत के दिनों में जैसा लगता था आज वैसा hi लग रहा है, तुमने उसे पूरी फैला दी है.

शिव : आप की वो थोड़ी टाइट है.

मनीषा : (मुस्कुराते hue)Tuje तो चार बच्चे की माँ भी टाइट hi लगेगी, तेरा वो है hi इतना बड़ा. शहहहहह अह्ह्ह्हह कितना अंदर तक जा रहा है, शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह. शिव बड़ा मज़ा आ रहा है, अब सब ठीक यही थोड़ा जल्दी जल्दी और जोर से कर, शह्ह्ह्हह्ह (मेने धक्के जोर जोर से लगाने laga)ahh अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह मा शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह हआ ऐसे hi शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह माआ शहहहहह (में दे धना धन उन्हें छोड़ रहा था, वो मुझे जकड़ते हुए जोरो से सामने धक्के लगा रही थी, )मुम्मीी अह्ह्ह्ह में गयी शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शिईयिव आह्ह्ह्हह्ह में gayiiiiiiii.(Wo झटके कहते हुए मुज से लिपट गे, और मुझे गाल पर गर्दन पर होठो पर हर जगह चूमने लगी., थोड़ी देर बाद वो जोर जोर से सांसे लेते हुए सीधी लेट गयी और मेरी और देखने लगी)





शिव : क्या हुआ?

मनीषा : आज कितने टाइम बाद में झड़ी हु शिव, आह्हः हर बार वो hi झाड़ जाते थे और में प्यासी रह जाती थी, आज कितने टाइम बाद ये हुआ है की में झाड़ गयी और सामनेवाला नहीं झाड़ा.

शिव : कितनो के साथ करवाचुकि है आप.

मनीषा : में ऐसी वैसी नहीं हु, पहले मेरे दो बॉयफ्रेंड थे और फिर अभी मेरा पति है.

शिव : मेने कब कहा की आप आईसीआईसी है.

मनीषा : औरत अगर एक से ज्यादा के साथ हो तो लोग उसे अच्छा नहीं कहते, है बेशक मर्द चाहे कितनी भी औरतो के साथ रहे, उन्हें कोई कुछ नहीं कहता.

शिव : ये सब मुझे नहीं पता, में लोगो को उनके स्वाभाव से पहचानता हु. सेक्स और इंसान का स्वाभाव ये दो अलग चीजे है.

मनीषा : कहना अलग बात है शिव, अगर तुम्हारी गर्लफ्रेंड किसी और के साथ ये सब करे तो तुम hi उसे ठुकरा डोज.

शिव : वो मुझे नहीं पता, पर अगर उसने वैसा किआ और फिर भी वो मेरे साथ रहना चाहेगी तो में मन नहीं करूँगा.

मनीषा : पागल, ऐसा नहीं होता, अगर वो तुज से संतुस्ट होगी तो वो क्यों किसी और के पास जाएगी, जो भी तेरे साथ है उसे ढेर सारा प्यार देना वो कभी तुज से दूर नहीं जाएगी. छोडो अभी ये बाटे, अभी मुझे करो.

शिव : क्या करू?

मनीषा : (मुस्कुराते hue)Chodo मुझे, (मेरे होठो को चुम्लिअ)

शिव : घोड़ी बन जाओ. (वो मुस्कुराते हुए पलटी और घोड़ी बन गयी, मेने उनके चुत्तड़ो को दबाया और उन्हें फैलते हुए थोड़ा chata)Ye बहोत आकर्षक है.

मनीषा : है, तुम मर्दो को पता नहीं ये क्यों इतने अच्छे लगते है. जिसे देखो उसे hi घूरता रहता है. अभी उसे छोडो और अपना वो दाल दो.

शिव : क्यों जल्दी है आपको? अब करना hi है तो फिर तरीके से hi करते है, देखने दो मुझे आपके ये नज़ारे, आप बस मज़े karo(Ye कहते हुए मेने उनके कूल्हों को चेतना और दबाना सुरु कर दिया)

मनीषा : तू कलाकार है शिव, में दर रही थी की क्या तू ये सब करेगा, अगर अभित तू नादाँ होता और मेरे ऐसे प्रस्ताव से दर कर भाग जाता और किसी को बता देता तो मेरी क्या हालत होती, कितना रिस्क होता है इन सब चीजों में. पर मेरा अच्छा नसीब की तू अनुभवी nikala.(Mene उनकी गांड के छेड़ पर अपनी जीभ फिराई) शह्ह्ह्ह वह क्यों मुँह लगा रहा है, वो गन्दी जगह hai.(Mene कोई जवाब नहीं दिया और अपना काम चालू rakkha)Shhhhhh ाआअह, शीइइइइइव शह्ह्ह्ह आह्हः आज तक किसी ने वह नहीं छुआ शहहहहह वह भी कितना मज़ा आ रहा है शीइइइइव shhhhhhhhh.Muj से रहा नहीं जा रहा शिव प्लीज, अपना लुंड वापस मेरी छूट में दाल दो, शह्ह्ह्हह्ह मुझे छोड़ो shiv.(Mene भी उन्हें नहीं तरसाया, उनके बड़े कूल्हों के बिच फूली हुई छूट के होठो को फैला कर लुंड को अंदर उतर दिया. कमर को पकड़ कर धक्के लगाना सुरु कर diya.)Aah शहहह आईईईई अह्ह्ह्हह ऐसे hi शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह जोर से शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अहहहह शह्ह्ह्ह धीरे शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह है ऐसे hi शहहह (वो थोड़ा ऊपर उठी और मेरी और देखने लगी, वो बड़े प्यार से शिव को देख रही थी जो उसकी छूट में अपना लुंड अंदर बहार कर रहा था, कभी कभी तेज धक्के से उसके चेहरे पर दर्द उभर आता पर वो शिव को लगातार देख रही थी, इतनी देर तक तो आज ताकि किसी ने उसे नहीं छोड़ा था, उसके तेज धक्को से वो पूरी हिल रही थी,)





अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह ahhhhhh(Wo वापस बिस्तर पर अपना शिर रख कर आंखे बंद कर के लेट गयी, उसे पता था की ये घोडा इतनी जल्दी हर मन ने वाला नहीं है, वो आहे भरते हुए अपनी छूट की हो रही कुटाई का आनंद ले रही थी, कभी शिव उसे ऊपर उठा कर उसके बूब्स मसल रहा था तो कभी उसे पूरी उलटी लेता कर उसकी छूट की धज्जिया उदा रहा था, जितना उसका पति एक महीने में छोड़ता था उतना शिव ने उसे एक दिन में छोड़ डाला था, शिव ने उसको सीधा किआ और उसकी टंगे फैला कर उसे अपने कंधे पर रख ली और फिर से लुंड को अंदर उतर diya)Ahhhhh maaaaaa(Fir से वो धक्के लगाने लगा, मनीषा बस उसे hi देखे जा रही थी, वो उसकी दीवानी हो रही थी, लगातार वो उसे छोड़ रहा था, हर धक्के पर लुंड उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था, वो उसकी छाती को सहलाते हुए उसका हौसला बढ़ा रही थी, उसने अपनी टंगे मोड़ते हुए अपने हाथो से पकड़ ली, वो अपनी छूट में घुस रहे उस बड़े से लुंड को देख कर और उत्तेजित हो रही थी, छूट के होठो को फैलते हुए वो पूरा अंदर घुस रहा था, अपने एक हाथ से उसने अपनी छूट के डेन को सहलाया, वो जैसे अपनी छूट को अस्वासन दे रही थी की सेह ले मेरी प्यारी, तू इसीलिए तो बानी है, आह सच में तेरा कदरदान मिला है, वो झड़ने के करीब पहुंच गयी थी, वो शिव को ऐसे देख रही थी की प्लीज अब मुज पर दया कर और झाड़ जा. अपनी छूट की ऐसी चुदाई से वो तृप्त हो चुकी थी, वो उसके चेहरे को प्यार से सहलाने लगी और ौको अपनी और खिंच कर उसके होठो को चूसने लगी, उसके धक्के और उसकी हुंकार से उसे पता चल गया की वो अब झाड़नेवाला है, वो सोचने लगी की क्या करू अंदर लू की बहार निकलवाओ, मान तो कर रहा था की अंदर hi लू पर अभी अभी वो माँ बानी थी और अगर ऐसे में वो दोबार माँ बन गयी तो प्रॉब्लम होगी, और बच्चा दूध पि रहा है टोड़ावै लेना भी ठीक नहीं है.

मनीषा : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शिईयिव बहार निकलना, शह्ह्ह्ह अंदर मत dalna.(Mene है में अपना शिर हिलाया, आखरी धक्के मरते हुए मेने अपना लुंड बहार निकला और उनके पेट पर वीर्य की बौछार कर दी, एक दो पिचकारी तो सीधा मनीषा के चेहरे तक गयी थी जिसे देख वो हड़बड़ा गयी थी, उसने अपनी पूरी जिंदगी में इतना वीर्य एक साथ नहीं देखा था, वो आश्चर्य से इस शिव नाम के अजूबे को देख रही थी.

काफी देर वो मेरे लुंड के साथ खेलती ताहि, दूसरी बार भी मेने उन्हें जैम कर छोड़ा. आखिर कर उन्होंने हर मान ली. हमने अपने कपडे पहन लिए. उन्होंने मुझे पच्चीस हजार रुपये दिए. मुझे नहीं पता, मेने सही किआ या गलत पर ये पैसे मेरे लिए बहोत मायने रखते थे. मेने पैसे लिए और घर चला गया.
 
अपडेट 60

शाम को मेने सामान लेने किरानेवाले के वह चला गया. बरसो से हमारा सामान वही से आता था.

किरनेवाला: आओ शिव, कैसे हो?

शिव : में ठीक हु चाहा, आप कैसे हो.

किरनेवाला : हम भी ठीक है, एक बात बताओ, ये तुम्हारे अनाथालय में क्या चल रहा है, मेने सुना मैनेजर ने गलत करने की कोशिस की थी.

शिव : है चाचा.

किरनेवाला : राम राम, कैसा जमाना आ गया है, उस आदमी की तो बुद्धि hi भ्रस्ट हो गयी लगता है. अब सब कैसे चलेगा.

शिव : अभी फ़िलहाल तो पता नहीं, आगे देखते है क्या होता है.

किरनेवाला : तुम तनिक भी चिंता मात करना, कोई छोटी मोती जरुरत हो तो मुझे बताना बीटा, जहा तक हो सकेगा में मदद करूँगा. अब हम इतने भी बड़े नहीं है, और धंधा भी यही है, इसीसी से हमारा भी घर चलता है पर फिर भी कुछ हो तो कहना. कहो कैसे आना हुआ?

शिव : (उनको चिट्ठी देते hue)Ye कुछ सामान है जो ले जाना है.

किरनेवाला : अभी निकलवा देता हु, तुम बैठो, अरे हरिया, पानी लाना भाई के लिए. (एक लड़के ने पानी ला कर मुझे दिया, थोड़ी देर में उन्होंने सब सामान निकलवाडिया)

शिव : कितना हुआ चाचा.

किरनेवाला : अरे रहने दो बीटा बाद में ले लेंगे.

शिव : नहीं चाचा, अभी फ़िलहाल तो ऐसी कोई जरुरत नहीं है, अगर होगी तो आप को बोल दूंगा.

किरनेवाला : चलो कोई बात nahi(Usne हिसाब करके बताया और मेने पैसे चूका दिए) .

शिव : ठीक है चाचा, में चलता हु.

किरनेवाला : जीते रहो बीटा.

मुझे पता है की वो मदद कर देगा पर वो कब तक और कितनी मदद कर शक्ति था. मुझे इसका कोई हल तो निकलना hi पड़ेगा. में सामान ले कर घर पहुंच गया, मेने सामान दीदी को दे दिया.

लतादिदी : पैसो का क्या किआ?

शिव : आप चिंता मात करो, पैसे चूका कर लाया हु, और अगर किसी चीज की जरुरत हो तो आप मँगवाडेना, में पैसे चूका दूंगा.

लतादिदी : तेरे पास पैसे कहा से आये, वो पैसे तो पुलिस ले गयी है न.

शिव : आप क्यों चिंता करती हो दीदी, में हु न.

लतादिदी : तेरे रहते हमे कैसी चिंता, पर ये पैसो का मामला है, लोग अक्सर भटक जाते है.

शिव : वो पैसे थे जो अभी पुलिस के पास थे, वो भी चोरी के नहीं थे, और ये पैसे भी चोरी के नहीं है, आप को यकीं है न मुज पर.

लतादिदी : तुज पर hi तो यकीं है, चल मुँह हाथ धो ले में नास्ता देती हु. रंजन, ये सामान अंदर रख दे.

रंजन : (दौड़ती हुई आयी) जी दीदी. (मेरी और देख कर मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया, वो सामान ले कर चली गयी)

हल्का नास्ता करने के बाद में जूही मैडम के घर चला गया.

जूही मैडम : आओ शिव, तुम बैठो में दो मिनट में तैयार हो जाती हु.

शिव : नहीं मैडम, आज स्टेडियम नहीं आ शक्ति. मुझे काव्यजि से मिलने जाना है.

जूही मैडम : उनसे क्यों मिलने जाना है?

शिव : पता नहीं, वो कुछ बाटे जान न चाहती है और पवनसीर भी आने वाले है, उन्हें कागजात से कुछ पता चला है.

जूही मैडम : चलो तो फिर में भी चलती हु.

शिव : आप स्टेडियम जाओ में देख लूंगा.

जूही मैडम : ठीक है, चलो में तुम्हे उनके घर छोड़ कर चली जाउंगी. रात को जाते हुए मुझे बताते जाना.

शिव : ठीक है मैडम.

जूही मैडम : (शिव के चेहरे पर हलकी चिंता थी, तो उन्होंने शिव को गले लगा liya)Chinta मात करो सब ठीक हो जायेगा, में हु न. (मेने भी उन्हें बहो में कास लिया, सच में मेरे पास भले hi कुछ न हो पर मेरे साथ बहोत से लोग थे, इतने लोगो का प्यार मुझे मिल रहा था, जिनसे मुझे हौसला मिलता था.

शिव : थैंक यू. (उनसे अलग हो kar)Muje अपनी चिंता नहीं है, मुझे चिंता है अनाथालय के बच्चो की.

जूही मैडम : सब ठीक हो जायेगा, में कल से वही सोच रही हु, कुछ न कुछ हल निकल आएगा.

शिव : ठीक है, चलिए चलते है.

हम दोनों वह से निकल गए, उन्होंने मुझे काव्य मैडम के घर छोड़ा. वो भी एक बंगलो में hi रहती थी. वही उन्होंने अपना ऑफिस भी बनाया हुआ था. जब में पंहुचा तो वो किसी से बात कर रही थी, उन्होंने मुझे इससरए से वह रक्खे सोफे पर बैठने को कहा. में उनलोगो की बाते तो नहीं सुन प् रहा था बस देख शक्ति था. वैसे भी वो जनि मणि वकील थी तो लोगो का मिलना आम बात थी. मेने देखा की उनलोगो ने मैडम को कुछ पैसे भी दिए. थोड़ी देर बाद वो सब निकल गए. उन्होंने मुझे इससरए से अंदर बुलाया.

काव्य : आओ शिव, बैठो. अभी थोड़ी देर में पवनजी भी आ रहे है.

शिव : थैंक यू मैडम.

काव्य : किसलिए?

शिव : आप मेरी हेल्प कर रही है, वर्ण मेरी औकात नहीं है कोई वकील करने की.

काव्य : अच्छा तो अभी वो लोग पैसे दे कर गए इस लिए कह रहे हो. है में पैसे से वकील हु तो फीस तो लुंगी hi वर्ण मुझे अपनी दुकान बंद करनी पड़ेगी. (मुझे गौर से देखते hue)Mujse काम करवा रहे हो तो फीस तो तुम्हे भी देनी padegi.(Unki बात सुन कर मुझे टेंशन होने लगी, में कैसे पैसे दे पाउँगा)

शिव : (मेने घबराते हुए puchha)Muje कितने पैसे देने होंगे?

काव्य : (मेरे चेहरे को बड़े गौर से देख रही थी, मेरे चेहरे पे छाये चिंता के बदल देख कर वो हसने लगी) में मजाक कर रही थी, तुम चिंता मात करो, अभी में तुमसे कोई पैसे नहीं लुंगी, पर है अगर तुम्हारे पास पैसे आएंगे तब मुझे देने पड़ेंगे.

काव्य : आएंगे, जरूर आएंगे. मेने देखा है तुम्हे म्हणत करते हुए, तुम जरूर एक दिन बड़े खिलाडी बनोगे और तुम्हारे पास ढेर सरे पैसे आएंगे, तब में तुम्हे नहीं छोडूंगी कह देती हु.

शिव : आप बहोत अच्छी है मैडम. आप को देख कर कोई कह नहीं सकता की आप ऐसे भी बात करती होगी.

काव्य : (अपना मुँह बनाते hue)Kya में इतनी बुरी दिखती हु?

शिव : अरे नहीं मैडम, मेरे कहने का वो मतलब माहि था, मेने आप को पुलिस स्टेशन में भी देखा था और अभी ऑफिस में उनलोगो से बात करते हुए भी, आप कितनी गंभीर हो कर बात करती हो. ऐसा लगता है जैसे आप कभी हस्ती hi नहीं होंगी.

काव्य : वो मेरा पेशा है, और काम के दौरान कोई मस्ती नहीं होती, मेरा पेशा hi ऐसा है की लोग परेशानी में hi हमारे पास आते है तो उनकी परेशानी में हम भी गंभीर हो जाते है.

शिव : पर आप हस्ते हुए बहोत सुन्दर लगती है. (वो खिलखिलाकर है पड़ी) में सच कह रहा हु मैडम. (में सच hi बोल रहा था, वो हस्ते हुए बहोत hi सुन्दर लगती थी, वो है रही थी और में उन्हें देख रहा था)

काव्य : (मेरे चेहरे पर बिलकुल हंसी न देख कर, उन्होंने भी हसना बंद कर दिया, फिर मुस्कुराते hue)Thank यू, मेरी तारीफ करने के लिए.

शिव : में तारीफ नहीं कर रहा हु मैडम, में सच hi कह रहा हु.

काव्य : (मुस्कुराते हुए मुझे देख रही thi)Thank यू. (इतने में पवनसीर भी वह आ gaye)Aiye पवनजी.

पवनसीर : कैसी है आप? और शिव तुम भी यही हो?

काव्य : है, मेने hi उसे बुलाया था. मेने सोचा की अगर अनाथालय के बारे में चर्चा करनी है तो इसे भी पता होना चाहिए.

पवनसीर : अच्छा किआ मैडम. मेने कागजात देखे, उसमे मुझे ये पता चला की ये जो देवीलाल है वो मैनेजर है और जानकीलाल ट्रस्ट से हर महीने पैसे अनाथालय के अकाउंट में आते है. जिसे वो अनाथालय के कामो के लिए खर्च करता है. पर मुझे उसकी पर्सनल पासबुक भी मिली, जिसका बैलेंस देख कर में चौक गया. वो नौकरी करनेवाला है, हर महीने उसके आकउंट में उसकी सैलरी आती है जिसकी अम्मोनत, इतनी नहीं है की उसके कहते में इतने सरे पैसे हो. उसके ाऊंट में लाखो रुपये है. और दूसरी बात, अनाथालय के अकाउंट में भी कई लोगो के चेक जमा होते है, शायद लोगो के डोनेशन के पैसे हो, वो भी ये उथलेटा है और अपने अकाउंट में दाल देता है. जितने पैसे आते है उस हिसाब से तो अनाथालय की हालत बहोत अच्छी होनी चाहिए थी, पर (मेरी और इस्सर karke)inlogoko और अनाथालय के बिल्डिंग को देख कर नहीं लग रहा की ये पैसे इनके पीछे खर्च किये जा रहे है.

(में बड़े गौर से उनकी बाते सुन रहा था) एक और बात, पिछले कुछ सालो में एक अकाउंट से लाखो रुपये उस मैनेजर के अकाउंट में ट्रांसफर हुए है. उस आदमी ने कितने hi पैसे खर्च कर दिए है फिर भी आज भी उसके अकाउंट में लाखो रुपया है.

पवनसीर, सब कागजात काव्य मैडम को दिखा रहे थे, वो जो दिखा रहे थे वो में भी देख रहा था. उसकी बातो में सच्चाई थी.

काव्य जी : ये तो बहोत बड़ा फ्रॉड है, लगता है ये लोगो से अनाथालय के नाम पर पैसे वसूल करता है और फिर अपने कहते में ट्रांसफर कर देता है. आप जिस अकाउंट की बात कर रहे है उसकी भी जाँच करवानी होगी, की आखिर क्यों वो इससे इतने पैसे दिए थे. में भार्गविजई से बात करती हु.

शिव : मैडम अगर हर महीने अनाथालय के लिए पैसे आते है तो हम उसका उपयोग कर शक्ति है न?

काव्यजि: ये हमें बैंक से पता करना होगा, पर मुझे लगता है की उसको उठाने का हक़ मैनेजर के पास hi होगा, तो हमे वो बैंक में बदलवाना पड़ेगा और उसके लिए अनाथालय के मालिक से अनुमति पत्र लिखवाकर बैंक में जमा करना पड़ेगा. पवनजी, क्या अनाथालय के ट्रस्टी या मालिक का कोई कांटेक्ट नंबर है काया?

पवनसीर : जी है है.

काव्यजि : लाइए में उनसे बात करती hu(Unhone नंबर लिया और बात की, बात करने के बाद) अभी फ़िलहाल तो उनसे बात नहीं हो पायी वो कही बहार गए है, उनकी ऑफिस के पता चला है की वो दो दिन बाद आएंगे. हमे वह रूबरू मिलने जाना होगा. ताकि उनसे बात करके उनसे वो पत्र भी लिखवा कर ले आ शेक. उस से पहले हमे बैंक से भी बात करनी होंगी और उनसे प्रोसीजर भी जान नई होगी, अगर कोई फॉर्म है तो उनपर भी दस्तखत करवाने होंगे. जहा तक में समझती हु की हमे पैसे उठाने का हक़ (मेरी और देख kar)tum में से किसी के नाम बदलवाना होगा, तो तुम लोग ये तय कर लो की किसके नाम करना है. इस बारे में भी हमे ट्रस्टी को बताना होगा.

शिव : लतादिदी, उनके नाम ये हक़ करवा शक्ति है, क्यों की वही सब संभालती है.

काव्यजि : ठीक है, तो उनके भी कागजात ले लेना. में फिर से एक बार उनसे बात कर के यहाँ की परिस्थि के बारे में उन्हें बता दूंगी, और अगर वो कोई और इंतजाम करना छह रहे है तो वो भी पूछ लुंगी. और हमें कोर्ट में भी इस पैसो के गमन का केस भी दर्ज करवाना होगा, ताकि अनाथालय के नाम पे लिए गए पैसे अनाथालय को वापस मिल जाये.

शिव : ये सब कब तक होगा मैडम.

काव्यजि : कोर्ट का मामला है तो टाइम तो लगेगा. (मेरे चेहरे पर चिंता देख कर) कोई परेशानी है?

शिव : परेशानी तो नहीं है, पर अनाथालय के खर्चे की थोड़ी दिक्कत हो रही है.

काव्यजि : दो दिन बाद तुम्हारे अनाथालय के ट्रस्टी से मिलते है, मुझे लगता है अगर हम अनाथालय के बैंक का अकाउंट ऑपरेट कर पाए तो तुम्हारी ये प्रॉब्लम सोल्वे हो जाएगी.

काफी कुछ चर्चा काने के बाद में और पवनसीर वह से निकल गए. पवनसीर, हमारी बहोत मदद कर रहे थे, में उनका एहसानमंद था. मुझे अपने आप पर शर्म आने लगी की में उनकी पीठ के पीछे उनकी hi बीबी के साथ वो सब कर के उन्हें धोखा दे रहा हु. हम दोनों गयम hi जा रहे थे, में चुप हो कर बस यही सब सोच रहा था. में तो यहाँ तक सोच रहा था की मुझे अब स्नेहा मैडम के साथ ऐसे रिलेशन नहीं रखने चाहिए. हम दोनों गयम पहुंच गए और में अपने काम में लग गया.

अनाथालय में रंजन और विणा बर्तन साफ़ कर रही थी. काम करते करते दोनों बाते भी कर रही थी.

विणा : दिव्या के यहाँ शादी में जाने के लिए, तेरी बात हुई शिव से.

रंजन : नहीं, अभी तो नहीं हुई, रात को करलेंगे.

विणा : कल रात को तू क्या कर रही थी, शिव के साथ.

रंजन : किस बारे में बात कर रही है?

विणा : अब ज्यादा बन मत, मेने देखा था, तू शिव का wo...(Uski बात समझते hi, रंजन मुस्कुराने लगी) तुजे जरा भी शर्म नहीं आती, है न?

रंजन : इसमें शरमानेवाली कोनसी बात है, वो अनजान नहीं है, और अब तक हमारे बिच बहोत कुछ हो चूका है तो अब क्यों शर्मो.

विणा : तुजे वो सब गन्दा नहीं लगता?

रंजन : इसमें क्या गन्दा?

विणा : तू उसका wo...apne मुँह से...

रंजन : (खिलखिला कर हस्ते hue)Wo भी तो मेरी चुस्त है, तो में भी उसका चुस्ती हु, इसमें गन्दा क्या.

विणा : वह से वो पेशाब करता है और तू भी तो करती है फिर वो गन्दी जगह hi हुई न, और तू तो ऐसे मुहमे ले रही थी जैसे कुल्फी खा रही हो.

रंजन : एक बार तू भी चूसेगी तब तुजे पता चलेगा, और ये गन्दा बाँदा कुछ नहीं होता, जब वो मेरी चुस्त है तो मुझे बहोत मज़ा आता है, तो जब में उसका चुस्ती हु तो उसे भी मज़ा आता होगा, बस यही सोच कर में करती हु.

विणा : क्या सच में इतना मज़ा आता है?

रंजन : है मेरी जान, बहोत मज़ा आता है. तुजे मज़ा करना है?

विणा : न बाबा, मुझे नहीं करना, कितनी शर्म आती है, तू तो बेशर्म हो गयी है, अपनी टंगे खोल कर उसके सामने लेट जाती है, कैसे वो भी बेशर्मी से तेरी वो चूस रहा था.

रंजन : रहने दे रहने दे, मुझे पता है, तू भी वो सब देख कर अपनी छूट सेहला रही थी.

विणा : शहहहहह, धीरे बोल, कैसी गन्दी बाते जोर से बोलती है, दीदी सुनलेगी तो क्या कहेगी.

रंजन : (हस्ते hue)Kuchh नहीं होगा, में सच कह रही हु की नहीं? तू कर रही थी na?(Vina ने कोई जवाब नहीं दिया, वो बस शर्मा रही थी)

रंजन : इसमें शरमानेवाली क्या बात है, अब तू भी जवान हो गयी है तो तुजे भी वो सब करने की इच्छा होगी, उसमे कुछ गलत नहीं है, तू ज्यादा शमा मात.

वो दोनों ऐसे hi काम करते हुए बाते कर रही थी. गयम ख़तम कर के में जूही मैडम के घर पहुंच गया. उन्होंने आने के लिए बोलै था. उन्होंने दतवाजा खोला और मुझे अंदर आने को कहा. में उनके साथ अंदर चला गया.

जूही मैडम : (मुझे पानी देते हुए) क्या हुआ, क्या बाते हुई काव्यजि के waha.(Mene उन्हें साडी बाटे बता दी) वाओ, थॉट्स ग्रेट. में भी कब से तुम्हारी प्रॉब्लम के बारे में hi सोच रही थी. मुझे लगता है हमे लोगो की हेल्प लेनी चाहिए. जैसे की तुमने बताया की मैनेजर लोगो से अनाथालय के नाम पर डोनेशन लेता था तो हम भी ले शक्ति है.

शिव : लोगो की हेल्प? वो कैसे?

जूही मैडम : हम भी लोगो से डोनेशन मांग सकते है न. जैसा की तुमने बताया वैसे हर महीने पैसे आते hi है पर अगर डोनेशन से ज्यादा पैसे आएंगे तो अनाथालय के बच्चो की जिंदगी और बेहतर हो जाएगी.

शिव : पर उसके लिए तो हमे कई लोगो से मिलना होगा. वो मैनेजर भी यही कहता था की वो दर दर जा कर पैसे मांगता है, तो हमे भी वही करना पड़ेगा.

जूही मैडम : नहीं ऐसा नहीं है, हम सोशल मीडिया का सहारा लेंगे. साथ में हम उनलोगो से भी बात करेंगे जिन्होंने अनाथालय को चंदा दिया है, हम एक वीडियो बनाएंगे और उसमे एक बैंक अकाउंट नंबर देंगे और और लोगो से दरख्वास्त करेंगे की वो अनाथालय के बच्चो को दान दे. कई अच्छे लोग होते है जो ऐसे दान देते है. मुझे लगता है की इस से हमारा काम हो जायेगा.

शिव : (उनके चेहरे की खुसी देख कर मुझे लग रहा था की वो सही कह रही है, वैसे मुझे इस बारेमे ज्यादा पता नहीं था) मुझे इस बारेमे कुछ नहीं पता, अगर आप को लगता है की ये हो शक्ति है तो हम वही करेंगे.

जूही : ठीक है, तो फिर इस बारेमे में कोई प्लान बनती हु, की क्या करना है, कैसे करना है.

शिव : (जूही मैडम के हाथ पर हाथ रखकर )थैंक यू.

जूही : इसमें क्या थैंक यू.

शिव : आप मेरे जीवन की एंगल हो, सच में भगवन ने hi आप को मेरे लिए भेजा है.

जूही : (मुस्कुराते हुए उसे देख रही थी, और मान me)Kash ऐसा hi हो, मुझे तुम्हारे लिए hi भेजा हो.

में वह से अपने घर आ गया. खाना खाया और पढ़ाई के लिए बेथ गया. रंजन ने मुझे शादी के बारे में बताया, तो मेने उसे कहा की देखते है. उसके बाद हम सब सोने लगे. आज भी सब साथ में सो रहे थे. मुझे नींद नहीं आ रही थी तो में आंखे बंद करके लेता था. आधे घंटे बाद भी मुझे नींद नहीं आ रही थी.

(मुझे नहीं पता है की आज की रात लम्बी होनेवाली थी)
 
आप लोगो के कई सुग्गेस्टियन्स आये थे, आप के सुग्गेस्टियन्स के पहले में ये अपडेट लिख चूका था, जैसे आप सोच रहे थे वैसे hi मेने भी सोचा था, मुझे आशा है की कुछ बाते छोड़ कर, कई लोगो को उनके जवाब मिल गए होंगे.
 
अपडेट 61

शिव और पवनजी के जाने के बाद काव्य अपने केबिन में बैठी अनाथालय के कागजात को टटोल रही थी और उसमेसे कुछ इम्पोर्टेन्ट हो उसे नोट करती जा रही थी. जैसा की पवनजी ने बताया था काफी पैसो की हेराफेरी दिख रही थी. उसने अनाथालय का बैंक अकाउंट भी खंगाला, उसने मैनेजर के पर्सनल अकाउंट की जानकारी मँगवाली थी. अकाउंट में बहोत साडी संदिग्ध एंट्री थी. उसने देखा की कई बार काफी पैसे डायरेक्ट मैनेजर के अकाउंट में जमा हुए थे, वो पैसे केस जमा हुए थे. उसे ये तो समाज में आ रहा था की लोग पैसे डोनेट करते है पर वो पैसे अनाथालय के आकउंट में जमा होने चाहिए और वो हुए भी हुए थे. फिर अनाथालय के अकाउंट से वो पैसे निकल लिए जाते थे और उसी दिन या दूसरे दिन वो पैसे मैनेजर के अकाउंट में जमा हो रहे थे. पर ये जो पैसे डायरेक्ट मैनेजर के अकाउंट में आ रहे थे वो उसे समाज नहीं आ रहा था. उसने फिर से सरे कागजात खंगाले, एक जगह उसे कुछ एंट्री मिली जिसमे वो पैसे हॉस्पिटल से आये ये पता चल रहा था पर कहा से आये कोनसे हॉस्पिटल से आये, किसने दिए या क्यों दिए ये पता नहीं चल रहा था. बहोत सोचविचार करने के बाद भी उसके दिमाग में ये गुत्थी सुलझ नहीं रही थी. वो काम कर रही थी की उसकी माँ ऑफिस में आयी.

माँ : कितना काम करेगी बेटी, जब से आयी है तब से ऑफिस में hi है, काम से काम नास्ता तो कर लेती.

काव्य : बस माँ थोड़ा काम है, वो ख़तम कर के आती हु.

माँ : तेरा मुझे कुछ समाज नहीं आता, जब देखो तब काम काम काम. बीटा अपनी जिंदगी कब जियेगी. काव्य : माँ, तुम फिर सुरु मात हो जाना, मेने कहा न मुझे शादी नहीं करनी है.

माँ : तो क्या करेगी, अकेली रहेगी?

काव्य : आप लोग है न.

माँ : हम लोग कब तक जिन्दा रहेंगे बीटा. तुजे मेरी बात अभी समाज नहीं आ रही है पर जब तू अकेली हो जाएगी तब तुजे पता चलेगा की ये तेरी माँ जो कह रही थी वो सही कह रही थी.

काव्य : एक hi बात कहते कहते तुम थकती नहीं हो माँ? क्या शादी शादी करती रहती हो, क्या लड़कीओ को शादी करनी इतनी जरुरी होती है. वो जमाना गया जब औरते मर्दो के सहारे जीती थी. में खुद कमा रही हु, अपने पैरो पर कड़ी हु, मुझे क्या जरुरत है शादी करने की.

माँ : तेरे दिमाग पर तो पत्थर पड़े हुए है, पढ़ाई में और वकालत में इतना दिमाग चलता है पर इसमें तेरा दिमाग क्यों बंद हो जाता है पता नहीं. अभी भी कह रही हु, देर नहीं हुई है, शादी कर ले वर्ण उम्र निकल जाने के बाद तू छह कर भी कुछ नहीं कर पायेगी.

काव्य : प्लीज माँ, हम इस बारेमे बाद में बात करेंगे, अभी मुझे काम है, एक काम करो तुम मेरे लिए जूस या दूध भिजवाडो.

माँ : पता नहीं कब तुजे अकाल आएगी, ठीक है कर अपना काम. (वो वह से चली गयी, उन्हें जाता देख काव्य मुस्कुराने लगी. फिर उसका ध्यान अपने काम पर आ गया, उसने पुलिस स्टेशन में भार्गवी को फ़ोन किआ.)

काव्य : Hello भार्गवी मैडम.

भार्गवी : जी बोल रही हु. (वो अभी अभी मैनेजर से पूछताछ कर के बैठी थी, उस पर बहोत सारा परेसुरे था, कई बड़े लोगो के फ़ोन भी आ गए थे उस पर, वो सब इस केस को लेकर hi पूछ रहे थे, ये बात भी उसकी समाज में नहीं आ रही थी)

काव्य : मैडम, में वकील काव्य बोल रही हु, वो अनाथालय वाले केस के सिलसिले में बात करनी है.

भार्गवी : है काव्यजि, कहिये क्या कहना है आप को. आज कल सब उसी केस के बारेमे बात कर रहे है.

काव्य : मैडम बात कुछ ज्यादा hi गंभीर है, क्या आप मेरे ऑफिस आ शक्ति है?

भार्गवी : ऐसी क्या बात है? ये बलात्कार का सीधा मामला है, इसमें ऐसी और क्या बात है?

काव्य : मैडम बात इतनी भी सीधी होती तो में फ़ोन नहीं करती, मुझे ऐसा कुछ मिला है जिसके बारेमे में आप को बताना चाहती हु, उसके बारे में आगे आपको hi जानकारी निकालनी पड़ेगी , ये सब इस केस के लिए बहोत जरुरी है, और में ये सब फ़ोन पर नहीं बता शक्ति, उसके लिए मुझे आप को कुछ दिखाना भी पड़ेगा.

भार्गवी : (काव्य की बातो से उसे लग रहा था की सच में कुछ गंभीर बात होगी, कई बार वो उनसे मिली थी, वो अपने काम में बहोत अच्छी thi)Thik है में आती हु.

काव्य : में आप को एड्रेस भेज देती हु.

भार्गवी : ठीक है.

भार्गवी सोच में पद गयी. ये सीधा सीधा बलात्कार का मामला लग रहा है फिर इसमें और क्या हो शक्ति है? ऊपर से आ रहे परेसुरे से वो भी समाज नहीं प् रही थी की दो बलात्करिओ को बचने के लिए ये लोग इतना क्यों परेसुरे दाल रहे है. वैसे उसने किसी की नहीं मणि थी. वो बहार निकली और अपनी जीप ले कर वो काव्य से मिलने पहुंच गयी.

काव्य :(जैसे hi काव्य ने भार्गवी को देखा तो वो कड़ी होते हुए) आईये मैडम, आप आयी इसके लिए sukriya.(Unhe बैठने के लिए बोलै और बेल्ल बजा कर उनके लिए पानी लेन को कहा)

भार्गवी : क्या बात है मैडम. आप को इस केस में ऐसा क्या अलग लगा.

काव्य : में आप को कुछ दिखती hu.(Wo उन कागजात को भार्गवी को दिखने लगी, साथ में नोट किये हुए पॉइंट्स भी दिखने लगी, जैसे जैसे भार्गवी सुन रही थी उसकी आंखे बड़ी होती जा रही थी. सब दिखने के baad)Ab आप समाज गयी होंगी में क्या कहना छह रही हु. हो सकता है ये महज एक सोच हो पर फिर भी आप को इस की तहकीकात करनी चाहिए.

भार्गवी : (गिलास में रक्खा हुआ पानी एक hi साँस में पिटे hue)Baapre! ये साला इंसान hi है न, कमीना कही का, में छोडूंगी नहीं सेल को. और आपका अनुमान मुझे तो सही hi लग रहा है. इस सेल को बचने के लिए बहोत से लोगो के फ़ोन आ चुके है. में समाज नहीं प् रही थी की ऐसे बलात्कार के केस में फंसे इंसान को क्यों कोई बचाना चाहेगा. ऐसा करने से उसकी भी इमेज ख़राब हो सकती है. पर अब मुझे सारा माजरा समाज में आने लगा है. ये खेल बहोत सालो से खेल रहा है, मुझे अनाथालय के लोगो से भी पूछना पड़ेगा, और उस मैनेजर की तो हड्डिया तोड़ कर सच बहार निकलवाती हु. आप का बहोत बहोत सुक्रिया, में इस एंगल से तहकीकात करती हु.

काव्य : आप को कभी भी मेरी जरुरत हो तो आप मुझे फ़ोन कर शक्ति है.

भार्गवी : जी जरूर, आप की जरुरत तो पड़ेगी hi, आप ये साडी जानकारियों की , मुद्दों के साथ एक फाइल बनाइये. में इन हैवानो को इनकी मंजिल तक पहुंचने का बंदोबस्त करती हु.

काव्य : मैडम, मुझे वो तो बनानी hi है, क्यों की जो पैसा अनाथालय के बच्चो को मिलना चाहिए था, उनके लिए खर्च होने चाहिए थे वो उन्हें मिला नहीं है, वो पैसा रिकवर करने के लिए और अनाथालय को लौटने के लिए मुझे केस इस एंगल से भी दाखिल करना पड़ेगा. में शिव को लेकर कल पुलिस स्टेशन आती हु, पर मुझे अनाथालय के बाकि बच्चो की सुरक्षा को लेकर भी चिंता हो रही है. हो सकता है की ये लोग उन्हें नुकसान पहुंचने की कोशिस करे.

भार्गवी : आप चिंता न करे में उसका भी बंदोबस्त करती हु. चलिए में चलती हु.

काव्य : (हाथ मिलते hue)Ji मैडम, थैंक यू फॉर कमिंग.

भार्गवी : (मुस्कुराते हुए) ये मेरी ड्यूटी है मैडम. चलिए मिलते है.

हम सुब एक hi कमरे में साथ सो रहे थे. लता दीदी भी मेरे साथ में hi सोती थी. एक और रंजन थी और एक और लतादिदी. लता दीदी के बाजु में सरितादिदी और रंजन के बाजु में विणा. पता नहीं पर मुझे नींद नहीं आ रही थी. (लाता को भी नींद नहीं आ रही थी, वो शिव को hi देख रही थी, वो कैसे शिव के साथ पूरी नंगी हो कर सोती थी, ये याद आते hi वो शर्माने लगी. सब के साथ होने से वो खुल कर उसके साथ नहीं सो सकती थी. और ऊपर से ये सब हो गया था, वो ये सोच कर hi कैंप जाती थी की अगर शिव उस वक़्त समय रहते न आया होता तो उसका क्या होता. उसे शिव पर बहोत प्यार आ रहा था, वो छह रही थी को वो उसके साथ लिपट कर सोये, पर सब के सामने वो ऐसा नहीं कर शक्ति थी) मेने आँखे खोल कर देखा तो लतादिदी मुझे hi देख रही थी. मेने इससरए से पूछा क्या हुआ तो उन्होंने न में गर्दन हिलायी. सब के साथ होने की वजह से वो मेरे शाइन से लग कर नहीं सो सकती थी, शायद इसीलिए उन्हें नींद नहीं आ रही थी. मेने उनके शिर के निचे से हाथ डाला और उन्हें अपनी और खिंचा तो वो सरक कर मेरे नजदीक आ गयी. वो मेरी आँखों में देख रही थी और में उनकी. आँखों hi आँखों में जैसे हमारी बात हो रही थी, उनकी चमकती आंखे मुझे बहोत प्यारी लग रही थी, मेने अपना हाथ बढ़ाया और उनका चेहरा सहलाने लगा. उन्होंने आंखे बंद कर ली औरमुस्कुराने लगी. वो मुझे सबसे प्यारी थी, उनकी बंद आँखों को देखते हुए, मेरी नजर उनके मुस्कुराते होठो पर चली गयी, मेने उनके चेहरे को थोड़ा ऊपर किआ और उनके होठो की और बढ़ा, जैसे hi उन्हें ये एहसास हुआ तो उन्होंने अपना मुँह घुमा लिया. मेने वापस उनका मुँह सीधा किआ तो वो मेरी आँखों में देख रही थी. मेने इससरए से पूछा क्या हुआ तो उन्होंने अपनी आंखे घुमा कर सब की और इस्सर किआ. मेने अपने आंख के इससरए से उन्हें अस्वस्थ किआ की कुछ नहीं होगा. मेने उनको अपनी और खिंच कर उनके होठो को चूसने लगा, पहले वो थोड़ी घबरा रही थी पर थोड़ी hi देर में वो शांत हो गयी और मेरे शिर के बालो को सहलाते हुए मेरे होठो को चूसने लगी. हम बिना आवाज किए एक दूसरे को चुम रहे थे. मेने अपनी जुबान, उनके मुँह में डाली तो वो भी अपनी जुबान से मेरी जुबान से खिलने लगी, दोनों की सांसे तेज चल रही थी, उनके गर्म जिस्म के एहसास से मेरा लुंड खड़ा हो गया था, मेने उन्हें कास कर बहो में भर लिया और उनकी पीठ को सहलाते हुए उनकी कमर पर हाथ फिरने लगा, दूसरे हाथ से मेने उनके सुडौल स्तन को सेहलाहा और हलके हलके उन्हें दबाने लगा. दीदी दर रही थी और न में गर्दन हिलने लगी. मेने इससरए से उन्हें शांत रहने को कहा, में उनकी सुडौल चुचिओ को दबाते हुए उनकी गर्दन को चाटने लगा, वो गरम हो रही थी, उनकी सांसे तेज चलने लगी थी. में उनके कूल्हे पे हाथ ले गया और उनको को मसलने लगा तो वो मुज से और चिपकने लगी. जब में उनका घागरा उठाने लगा तो वो मन करने लगी और मेरा हाथ पकड़ रही थी. मेने उनके कान में धीरे से कहा

शिव : करने दो न दीदी.

लतादिदी : नहीं शिव, यहाँ सब है.

शिव : सब सो रहे है दीदी, बस थोड़ा sa.(Unhone मेरा हाथ छोड़ दिया, में उनके घाघरे को थोड़ा ऊपर उठा दिया और अंदर हाथ दाल कर उनके कूल्हों को सहलाने लगा, कपडे के निचे होने की वजह से कूल्हे काफी गर्म लग रहे तेह, में हूँहे सहलाते हुए, उन्हें किश कर रहा था., मेने ऊँगली दरार पर फिराई तो गीली छूट का पानी मेरी उंगलिओ पर लग गया)

लतादिदी : शहहहहह शिईयिव , मात करो शहहह मेरी आवाज निकल जाएगी.

शिव : चलो तो फिर बहार चलते hai(Wo मन करने लगी पर में वह से उठ कर बहार निकल गया)

लतादिदी :(लता शिव को जाते हुए देखने लगी, उसने सब पर नजर डाली तो सब शांति से सो रहे थे, वो शर्माती हुई उठी और बिना आवाज किए बहार आ गयी, जैसे hi वो बहार आयी शिव ने उन्हें पकड़ कर दीवाल के सहारे खड़ा कर दिया, वो शरमाते हुए मुझे देखने lagi)Kya कर रहे ho(Halaki उसकी आवाज में कोई शिकायत नहीं थी, शिव उसके करीब आया और उसके होठो को फिर से चूसने लगा, उसकी सांसे तेज हो गयी थी वो भी शिव का साथ देने लगी और दोनों किश करते रहे, कपड़ो के ऊपर से hi में उनके कूल्हों को मसल रहा था, वो मुज से और चिपकते हुए अपनी जीभ से मेरी जीभ को चाट रही थी, में काफी गरम हो गया था, मेने एक हाथ निचे ले जाते हुए उनकी छूट को दबोच liya.)Bas शिव, कोई जग jayega.(Wo शिव को रोक तो रही थी पर उसका खुद का दिल चाहता था की कुछ न रुके)

शिव : कोई नहीं jagega.(Mene लतादिदी को अपनी गॉड में उठालिया और चलने लगा.)

लतादिदी : (उसके गले में बहे डालते hue)Kaha ले जा रहे ho(Kehte कहते वो शर्मा भी रही थी और मुस्कुराभी रही थी)

शिव : ऊपर छत पर चलते है.

लतादिदी : (शिव उसे गुड़िया की रताः उठा कर जा रहा था, वो प्यार से उसे निहार रही थी, पहली बार के संसर्ग के बाद अब उसकी भी बहोत इच्छा जो रही थी, पर शर्म और अभी हुए हादसों की वजह से वो कुछ कह नहीं पायी थी) (जब वो दोनों छत पर पहुंचे तो शिव ने उसे निचे उतर दिया, उसे पता था की शिव उसे क्यों लाया है, उसे ये सोच कर hi इतनी शर्म आ रही थी की वो शिव से नज़ारे नहीं मिला प् रही थी तो वो दूसरी और घूम गयी, जब शिव ने उसे खंधे से पकड़ा तो कैंप गयी)

शिव : क्या हुआ दीदी? आपका मान नहीं है?

लतादिदी : (निचे देखते hue)Aisi बात नहीं है शिव.

शिव : तो फिर क्या हुआ?

लतादिदी : मुझे बहोत शर्म आ रही है.

शिव : (मुस्कुराते hue)Ab कैसी शर्म दीदी, (लतादिदी को अपनी और घूमते hue)didi

लतादिदी :(मंद मंद मुस्कुराते hue)Hmmmm.

शिव : आप बहोत प्यारी हो didi.(Lata शरमाते हुए सिमटने lagi)Didi....me आगे badhu?(Lata शर्मा गयी और अपनी आंखे बंद कर्ली, पर मुस्कान और बढ़ gayi)Kaho न दीदी, badhu?(Lata ने आहिस्ता से अपना शिर है में हिलाया, उसके चेहरे की मुस्कान बढ़ती hi जा रही थी) (मेने उन्हें दीवाल के सहारे खड़ा किआ और उनकी गर्दन को चाट ते हुए उनके स्तन को मसलने लगा) (लता को शरीर में तरंगे दौड़ती हुई महसूस हुई तो उसने शिव के शिर के बालो में हाथ दाल दिया और उसे सहलाने लगी, शिव उसकी गोल गोल चूचियों को मसल रहा था, लता की छूट से पानी रिसना सुरु हो गया था, ऐसे खुले आसमान के निचे उसे शर्म भी आ रही थी और एक रोमांच भी था, जब शिर उसके कूल्हों को मसलने लगा तो वो शिव से चिपकने लगी, उसके लुंड का एहसास अपने पेट पर होते hi उसकी सांसे तेज तेज चलने लगी. वो शिव की छाती पर अपने होंठ रगड़ने लगी, शिव ऊपर से नंगा hi था, निचे उसने एक ढीली चड्डी पहन रक्खी थी, लता का दिल कर रहा था की वो लुंड को पकड़े, पर उसे शर्म आ रही थी. शिव ने जब उसका घाघरा पीछे से ऊपर उठाया और उसके नंगे कूल्हों को सहलाने लगा तो वो कसमसाने लगी,

लतादिदी : शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह shhhhhhhhhh

शिव के हाथ उसके चुत्तड़ो को मसल रहे थे तो उसकी सांसे भरी होने लगी. मेने दीदी का एक हाथ पकड़ा और उसे अपने लुंड की और ले गया. वो अपना हाथ छुड़ाने की कोशिस कर रही थी पर मेने नहीं छोड़ा, मेने उनके हाथ को अपने लुंड पर रगड़ा. (लता को शर्म तो बहोत आ रही थी पर उसे ये अच्छा भी लग रहा था, आखिर कर उसने लुंड को पकड़ hi लिया, वो सख्त डंडा उसे सबसे प्यारा लग रहा था. वो उसे पकड़ कर दबाने लगी, लुंड को पकड़ने से उसकी छूट से पानी की धरा तेज बहने lagi)(Jab मेने देखा की दीदी ने मेरा लुंड पकड़ा है तो में खुस हो गया और मेने अपनी चड्डी उतर di)(Lata नंगे लुंड के स्पर्श से कंपनी लगी थी, लुंड की वो छुअन उसके शरीर में हलचल पैदा कर रहे थे, जब शिव की ऊँगली उसे अपनी छूट पर महसूस हुई तो उसकी टंगे अपने आप खुलने लगी और उसने लुंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया और उसे आगे पीछे करने lagi.)Shhhh अहह शीइइइइव शठ ahhh(Me अपने घुटने मोड़ कर थोड़ा निचे झुका जिस से लुंड छूट के बराबर हो गया, लता दीदी अपनी टंगे फैलते हुए लुंड को छूट पर घिसने लगी, वो बहोत गरम हो गयी थी. वो एक हाथ से अपना घाघरा पकड़े लुंड को छूट पर घिस रही थी, जब मेने उन्हें देखा तो वो मुस्कुराते हुए शर्मा गयी और दूसरी और देखने लगी)

शिव : (मुस्कुराते hue)Ab क्यों शर्मा रही हो दीदी. आप ऐसा कर रही हो तो मुझे बहोत अच्छा लग रहा hai(Wo लुंड को अपनी छूट पर घिस रही थी)

लतादिदी : तू मुझे ऐसे मत देख, मुझे शर्म आ रही hai.shhhhhh ममममममम

शिव : अब क्या शर्माना दीदी (मेने उनके होठो को अपने होठो से पकड़ लिया और उनका रास पिने लगा, वो भी मेरे होठो को चूसने लगी, वो मेरे लुंड को लगातार अपनी छूट पर घिस रही थी जिस से लुंड पूरा चिकना हो गया था, निचे छूट चिकनी हो गयी थी और ऊपर उनका और मेरा मुँह, थोड़ी देर ये खेल चला, (लता बहोत ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी, उसके जवान जिस्म को ये एहसास पागल कर रहा था, उसकी छूट के अंदर जैसे चुटिया काट रही थी, वो जैसे जैसे लुंड को अपनी छूट पर घिस रही थी, उसके छेद से ढेर सारा पानी बह कर नीचे टपक रहा था, शर्म के बावजूद उसके शरीर में उठ रही ये तरंगे उसे पागल कर रही थी, जब उस से रहा न गया तो उसने लुंड को छूट के छेद पर लगा दिया,) (में इतनी जल्दी नहीं डालना चाहता था पर शायद दीदी बहोत ज्यादा गर्म हो गयी थी और उन्होंने लुंड छूट पर लगा दिया था, तो मेने पूछ hi liya)Dal दू kya?(Unhone शरमाते हुए है में शिर हिलाया तो मेने मुस्कुराते हुए लुंड पर थोड़ा दबाव बढ़ाया तो लुंड का टोपा गप्प्प से छूट में समां गया, उनकी छूट के मखमली होठ फ़ैल कर मेरे लुंड के इर्द गिर्द लिपट गए , उस संकरी गली का एहसास बखूभी मुझे अपने लुंड पर हो रहा था)

लतादिदी : आआआह्ह्ह्ह shhhhhhhh(Unke चेहरे पर थोड़ा दर्द उभर आया)

शिव : दीदी???

लतादिदी : (अपने मुँह को दबाते हुए मुझे कहने lagi)Kuchh नहीं हुआ, तू दाल.

शिव : पर दीदी???

लतादिदी : (मुझे दन्त ते hue)Tu दाल न, थोड़ा तो दर्द होगा hi, (फिर वो शांत हुई और जैसे मुझे समजा रही हो वैसे उन्होंने मेरा चेहरा सहलाते हुए कहा) तू क्यों चिंता करता है? ये दर्द भी मुझे अच्छा लगता है, थोड़ी देर दुखेगा, फिर सब ठीक हो जायेगा, तू चिंता मात कर और कर.

शिव :(सच कहु तो अब लड़कीओ को ऐसे दर्द में देख कर भी लुंड और ज्यादा कड़क होने लगता है, पता नहीं ये कैसी कुदरत है, और ये कैसा खेल है, की लोगो को छूट को फाड़ने में और उसमे से खून निकलने में ज्यादा मज़ा आता है, मुझे पता था की दीदी को ऐसे खड़े खड़े ज्यादा दर्द hoga)Didi आप लेट jao.(Unhe भी मेरी बात सही लगी तो मेने लुंड वापस निकल लिया, उन्होंने अपना घाघरा निकल दिया और उसे निचे बिछा दिया, में देख रहा था की थोड़ी देर पहले जो शर्मा रही थी वो कैसे सब तयारी कर रही है, वो अपनी टंगे छोड़ी कर के सीधी लेट गयी और मेरी और देख कर अपनी बहे फैलाये मुझे बुलाने लगी, मेरे चेहरे पर हंसी आ गयी, जब उन्हें ये एहसास हुआ तो वो शर्मा गयी और अपनी टंगे आपस में सत्ता ली और साइड में देख मुस्कुराने लगी., में निचे बेथ कर उनकी टंगे खोलने लगा) अब क्यों शर्मा रही हो didi(Mene उनकी टंगे फैलाई और अपने लुंड को छूट पर सेट kia)Meri और देखो didi(Wo मुस्कुराते हुए न में शिर हिलने लगी, में उनके ऊपर झुक गया और उनके चेहरे को पकड़ कर सीधा kia)Isme क्या शर्माना didi(Mene उनके होठो को चूसा तो वो मेरी कमर को पकड़ कर सहलाने लगी और अपने पैरो को फैला कर मेरे कूल्हे पर टिका दिए और मुझे अपनी और खींचने लगी, जैसे जैसे लुंड अंदर जाने लगा उनकी और से होठ चूसना रुक गया था, पर में चूस रहा था, वो जोर जोर से सांसे ले रही थी, मेने धीरे धीरे करके आधे से ज्यादा लुंड दाल hi दिया, में रुक गया और दीदी को देखने लगा, वो भी मेरी आँखों में देख रही थी पर उनका ध्यान अपनी छूट में फंसे लुंड पर hi था,)

शिव : आप ठीक ho?(Unhone है में शिर हिलाया, पर दर्द उनके चेहरे पर था, में उनका ब्लॉउज खोलने लगा, जब वो खुल गए तो एक निप्पल को अपने मुँह में ले कर चूसने लगा, वो मेरे शिर के बालो को और मेरी पीठ को सेहला रही थी, थोड़ी hi देर में वो मुझे अपनी और खींचने लगी जो संकेत था की अब वो ठीक है तो मेने अपना लुंड बहार निकला और वापस अंदर किआ)

लतादिदी : Ahhhhhh(Mene उन्हें देखा पर रुका नहीं, धीरे धीरे लुंड अंदर बहार करने लगा, दर्द की आहे अब मजे की आहे बन ने लगी, छूट से पानी की धराये बहने लगी, वो मुझे अपने साथ जकड़ने lagi)Shhhhhh अह्ह्ह्ह शीइइइइव अह्ह्ह्ह.

शिव : (लतादिदी की छूट मुझे बहोत मज़ा दे रही थी, उनकी आँखों में देख कर उन्हें छोड़ ने लगा, वो मुझे प्यार से देख रही thi)Didi मज़ा आ रहा है.

लतादिदी : हाआआआ सीईव बहोत अच्छा लग रहा है शठ आह्हः अह्ह्ह अह्ह्ह (मेने उनके पेअर दबाये तो उनके कूल्हे थोड़े ऊपर हो गए, में भी थोड़ा सीधा हो गया था और छूट को देखते हुए धक्के लगाने लगा) ऐसे मात देख, मुझे शर्म आ रही है अह्ह्ह शहहह.

शिव : अब क्यों शर्मा रही हो didi(Mene झुक कर उनका एक स्तन पकड़ा और उसे सहलाने लगा)

लतादिदी : उफ्फ्फ्फ़ शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह शिव शहहह अह्ह्ह्ह तुजे कैसा लग रहा है शहहह मज़ा आ रहा है?

शिव : हआ दीदी बहोत मज़ा आ रहा hai(Me रुक गया और दीदी को उठा कर मेरी गॉड में बिठा दिया, उन्होंने मेरे गले में बहे दाल दी) दीदी आप बहोत पायरी लगती हो muje(Didi की कमर पकड़ कर ऊपर नीचे करने से मेरा लुंड दीदी की संकरी छूट में अंदर बहार हो रहा था, दीदी अपनी आंखे बंद किये हुए आहे भर रही thi)hhhhm हम्म्म शठ दीदी अह्ह्ह आप को दर्द तो नहीं हो रहा न?

लतादिदी : (लता अपने अंदर आगे पीछे हो रहे लुंड को महसूस कर रही थी, उसे हल्का हल्का दर्द भी भी हो रहा था पर ये दर्द उसे मज़ा दे रहा था, वो शिव के शिर को अपनी चुचिओ पर दबाते hue)Nahi शिव, शठ अह्ह्ह्ह तू कर शठ अह्ह्ह मुझे मज़ा अह्ह्ह्ह शठ आए रहा है शहहह (वो भी अपने पैरो की मदद से ऊपर नीचे हो रही थी, उसका शरीर मादकता से भरता जा रहा था, अपनी छूट में लुंड उसे बहोत अच्छा लग रहा था, वो अपनी कमर हिलाकर लुंड पर धक्के लगा रही थी) शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह कितना मज़ा शठ अह्ह्ह (वो अपनी कमर से धक्के लगा कर लुंड को और अंदर ले रही थी)

शिव : (दीदी के कूल्हों को पकड़ कर मसलते हुए नीचे से धक्के लगा रहा था, अपने मुँह के पास चुचिओ को देख उसके निप्पल को चूसने laga)Didi आप की वो बहोत गरम hai(Lata आंखे बंद किये हुए मुस्कुरा रही थी, लुंड उसकी छूट को पूरी तरह फैलाये अंदर बहार हो रहा था, वो सब भूल कर चुदाई का मज़ा ले रही थी, उसकी कमर जोर जोर से चल रही थी, वो लुंड को और अंदर और अंदर ले रही thi)(Me खड़ा होने लगा तो दीदी रुक गयी, वो बस मेरे गले में बहे डेल मुज से चिपकी रही, में उन्हें उठाये हुए hi खड़ा हो गया, चलते हुए शिधियो की दीवाल पर उनकी पीठ लगा दी और उनकी टैंगो को अपने हाथ से थामे हुए धक्के लगाने लगा, धक्के अंदर तक लग रहे थे, मेरे लुंड पर छूट का दबाव बढ़ते जा रहा था, मेने थोड़ा दूर हैट कर दीदी को देखा तो वो शर्मा गयी और मेरे गले लग gayi)Didi अच्छा लग रहा hai?(Lata को बहोत शर्म आ रही थी, शिव उसे गोदी में उठाये उसे छोड़ रहा था, उसे इतना मज़ा आ रहा था की वो सामने से धक्के लगाने की कोशिस कर रही थी, उसकी छूट से रास टपक रहा था, लुंड लगातार अंदर बहार हो रहा था, वो बस लुंड को महसूस कर के आहे भर रही थी, वो परम आनंद भोग रही थी., जीवन में ऐसी ख़ुशी भी नशीब होगी उसका अनुमान भी नहीं tha)(Me लगातार धक्के लगा रहा था, दीदी मेरे शिर को सहलाते हुए अपनी बहो में मुझे कास रही थी, में किसी गुड़िया की तरह उन्हें छोड़ रहा था,

फिर मेने उन्हें निचे उतरा पर लुंड बहार नहीं निकला, अब वो सीधी कड़ी थी और अपनी टंगे थोड़ी फैलाये हुए थी, में उन्हें देखते हुए लुंड अंदर बहार करने लगा, वो पूरी नंगी, सामने शिव नंगा और ऐसे खड़े खड़े वो देख रही थी की शिव का लुंड उसकी छूट की गेहराइम अंदर बैनर हो रहा था, वो शर्मा रही थी, में उनके कूल्हे पकड़ कर धक्के दे रहा था, हमारी टंगे सटी हुई थी पर ऊपर का शरीर व् आकर में अलग tha)Didi कितना मज़ा आ रहा है न, देखो न मेरा वो आपके अंदर कैसे जा रहा hai(Lata उसकी बातो से शर्माने लगी, हलाकि उसकी नज़र अपनी छूट में अंदर बहार हो रहे उस लुंड पर hi थी, जब अंदर लुंड चला जाता तो दोनों के झांटो के बल आपस में उलझ रहे थे, उसे इतना मज़ा आ रहा था की वो बयां नहीं कर शक्ति पर साथ में शर्म भी आ रही थी, वो मुस्कुराती हुई अपनी नज़ारे उठती शिव को देख रही थी, ऐसे खड़े खड़े उसकी छूट का दाना लुंड पर पूरी तरह डाब कर घिस रहा था जिस से उसके अंदर एक अजीब सी सरसराहट पैदा हो रही थी, शिव के हाथ उसके कूल्हों को मसल रहे थे, उसे ाहहए लगातार निकल रही थी, वो शिव के एक बाह को कास कर पकड़ ली थी. शिव अपने मुताबित उसे छोड़ रहा था, और ये बात उसे और ज्यादा उत्तेजित कर रही थी, शिव झुक कर उसके होठो को चूसने लगा तो वो उसके होठो पर टूट पड़ी, अपनी जीभ शिव के मुँह में दाल कर उसकी जीभ से खेलने लगी, वो भी सामने से धक्के लगाने लगी, थोड़ी देर बाद शिव रुक गया तो वो उसे देखने लगी, शिव ने लुंड बहार निकला तो उसके मुँह से आह निकल गयी) दीदी घूम jao.(Wo अपनी नज़ारे झुकाये हुए घूम गयी, उसे बहोत शर्म आ रही थी पर उसे मज़ा भी आ रहा था, शिव ने उसकी कमर पकड़ कर उसे अपनी और खिंचा तो वो दीवाल का सहारा लिए थोड़ी झुक गयी और अपनी गांड उठाये हुए शिव के लुंड का इंतजार करने लगी, पर शिव ने उसके कूल्हे फैलाकर वह अपना मुँह दाल दिया)

लतादिदी : अह्ह्ह्ह ष्ठीीीीिव (शिव उसके कूल्हों को मसलते हुए अपनी जीभ से उसकी छूट चाटने लगा तो वो और झुक गयी, अपनी छूट में घुस रही जीभ से वो पागल होने लगी और जोर जोर से सांसे लेने lagi)Ahhhh शहहह शहहह अह्ह्ह्हह (शिव बड़े प्यार से उस फुले हुए होठो के बिच अपनी जीभ रगड़ रहा tha)Shhhhh अह्हह्ह्ह्ह सीईव शह्ह्ह्ह (वो अपना एक हाथ अपनी चुकी पर ले गयी और उसे मसलने lagi)Ahhh शिईयिव शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह (में उठा और उनकी कमर को खींच कर अपने लुंड के पास लाया और दीदी को देखा तो वो शर्मा कर निचे देखने लगी)

शिव : दीदी , डीडीई, मेरी और देखो na(Wo हिचकिचाते हुए मेरी और गर्दन घुमा कर देखने lagi,)Didi मेरी और hi देख na(Wo मुस्कुराने लगी, में उनकी अन्ह्को में देखते हुए लुंड को छूट पर लगा कर अंदर करने लगा, एक पल उनके चेहरे से मुस्कान गायब हुई पर फिर वापस लोट आयी, मेने उनकी कमर को पकड़ कर लुंड अंदर दाल diya)Didi मुझे hi देखती rehna(Me लुंड अंदर बहार करने लगा, उनकी आँखों में नशा चढ़ें laga)Didi अच्छा लग रहा hai?(Unhone गर्दन हिला कर “हा सीईव” कहा, मेरी उत्तेजना बढ़ रही थी, मेने उनके कूल्हों को देखा जहा मेरा लुंड अंदर बहार हो रहा था, में उस को देखते हुए धक्के लगाने लगा, धक्के थोड़े तेज लग रहे थे)

लतादिदी : अह्ह्ह शिव शठ अह्ह्ह अह्ह्ह शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह हम्म्म्म हम्म्म्म अह्ह्ह्ह.

शिव : दीदी शर्म तो नहीं आ rahi?(Unhone मेरी आँखों में देखा और फिर न में गर्दन hilayi)Didi मुझे बहोत मज़ा आ रहा है, अह्ह्ह अह्ह्ह ahhh(Mere धक्के तेज लग रहे the)Didi ज्यादा तेज तो नहीं है na(Unhone न में गर्दन hilayi)Didi एक बात kahu?(Unhone मेरी और देखा फिर गर्दन हिला कर पूछ क्या hai)Didi आप को ऐसे देख कर मुझे कुछ कुछ हो रहा hai(Wo शर्माने lagi)Didi आपको मज़ा आ रहा है na?(Unhone फिर गर्दन हिलायी) दीदी बोलो न, अह्ह्ह शठ (में उत्तेजित हो रहा था)

लतादिदी : शहहह अहह हाआआआ सीईव अह्ह्ह्हह मुझे मज़ा आआह आआरहा शह्ह्ह्ह हैईईई अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह ahhhh.(Mere धक्के लगातार बढ़ रहे थे, हम दोनों अपने चरम की और बढ़ रहे थे, में उनकी कमर पकड़ कर धक्के लगा रहा था वो पूरी हिल रही थी, उनकी चूचिया लटक रही थी, कड़क होने की वजह से ज्यादा हिल नहीं रही थी, मेने उन्हें पकड़ा और मसलते हुए धक्के लगाने लगा, मेने दीदी की छूट से लुंड निकला और उनका हाथ खींच कर वापस बिछे हुए घाघरे के पास ले आया, वो अपनी टंगे फैलते हुए लेट गयी, मेने उनकी टंगे पकड़ कर और फैलाई और अपने लुंड को छूट पर रखते हुए वापस अंदर उतर दिया. थोड़ी देर धक्के लगाने के बाद में उनके ऊपर झुक गया और उनके होठो को चूसते हुए धक्के लगाने लगा, दीदी के हाथ मेरी पीठ पर घूमते हुए मुझे खिंच रहे थे)

शिव : दीदी???

लतादिदी : ह्म्मम्म्म्म

शिव : आप जानती है में क्या कर रहा हु?

लतादिदी : (शरमाते हुए अपनी नज़ारे दूसरी और घुमा लेती है, पर मुस्कुरा रही थी)

शिव : कहो न दीदी आप जानती hai?(Latadidi ने है में गर्दन हिलायी, पर वो देख दूसरी अहुर hi रही थी, मेने अपने हाथ नीचे से डालते हुए उनके कंधो को थम लिया और जोर जोर से धक्के लगाने laga)ahhh अह्ह्ह आपको मज़ा आ रहा hai(Unhone फिर है में गर्दन hilayi)Aise नहीं दीदी बोल के कहो.

लतादिदी : (मुझे कास कर अपनी बाहोंमे भरते hue)Haaaa शिव शहहह मुझे बहोत मज़ा आ रहा है शह्ह्ह्ह.

शिव : दीदी में आपको छोड़ रहा हु आप जानती है न.

लतादिदी : (अपनी आंखे बंद किये हुए उत्तेजना में )हा शिव में जानती हूउउउउ shhhhssss(Mere धक्के लगातार लग रहे थे, उनका शिर उप्पर नीचे हो रहा tha)Muje बहोत मज़ा आ रहा है शहहह अह्ह्ह्ह शीइइइइइव शह्ह्ह्ह ऐसे hi अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह

शिव : दीदी आपकी छूट बहोत छोटी है आपको दर्द तो नहीं हो रहा?

लतादिदी : शहहह अह्ह्ह्ह नहीं शह्ह्ह्ह मुझे मज़ा आ रहा हैईईई शह्ह्ह्ह.





शिव : दीदी कहा निकलना है?

लतादिदी : (थोड़ी देर सोच रही थी जैसे कुछ गईं रही हो) शह्ह्ह्ह अंदर शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह.

शिव : आपकी भोसस में?

लतादिदी : ये क्या बोल रहा है? शह्ह्हह्ह्ह्ह

शिव :(उन्हें पकड़ कर धक्के तेजी से लगा रहा tha)Kyu दीदी उसे यही कहते हैना? छूट या भोसस. कहो न दीदी आपकी भोसस में निकलू?

लतादिदी : (वो बहोत उत्तेजित हो गयी थी उसका पानी निकलने की कगार पर tha)Haaaaa शठ अह्ह्ह अह्ह्ह्ह जोर से अह्ह्ह शठ जल्दी जल्दी शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह

शिव : बोल कर कहो न दीदी शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह

लतादिदी : शहहह अह्ह्ह्ह हआ मेरी भोसस में भर दे शठ अह्ह्ह्ह तेरे लुंड से भर दे मेरी भोसस अह्ह्ह अब खुस है न शठ

शिव : है दीदी शठ अह्ह्ह आपकी भोसस मुझे बहोत पसंद है दीदी.

लतादिदी : (अपनी आंखे बंद किये हुए शिव के कूल्हों को अपनी टैंगो ले जकड़े उसे अपनी और खींच रही thi)Shhhh अह्ह्ह मुझे भी तेरा लुंड बहोत अच्छा लगता है शहहह शहहह अह्ह्ह्ह मेरी भोसस तेरे लुंड के लिए hi बानी है शहहह ये तेरी hi है शहहह अह्ह्ह्ह ऐसे hi जोर से शठ अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह में गयी शहहह अह्ह्ह्हह aiiiiiiiiii शह्ह्हह्ह्ह्ह.





शिव : मेरा भी होनेवाला है शह्ह्ह्ह आपकी भोसस मेरे लुंड को पकड़ रही है शहहह अह्ह्ह्ह इतना जोर से नहीं दीदी शठ अह्ह्ह्हह मेरा लुंड अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह दीदी इतना जोर से नहीं shhhhh(Chut मेरे लुंड को जकड रही थी जैसे दूध निकल रही ho)Didi में गया शहहह अह्ह्ह्ह ahhhh(Me धक्के लगते हुए झड़ने लगा )अह्ह्ह अह्ह्ह डीडीईई shhhhhhh.(Mene दीदी को अपने निचे दबा दिया और दीदी भी अपनी छूट मेरे लुंड पर दबाते हुए मुज से चिपक गयी, दोनों लम्बी लम्बी सांसे ले रहे थे, वो प्यार से मेरी पीठ सेहला रही थी, हलाकि हलकी हवा बह रही थी जो हमारा पसीना सोखरही थी, थोड़ी देर बाद मेने दीदी को देखा और मुस्कुराहा, उन्होंने शर्मीली मुस्कान दी)

शिव : दीदी आप बहोत मस्त हो, ummmhaa(Mene उनके होठ पर पप्पी दी तो वो मुस्कुराते हुए मेरा चेहरा सहलाने लगी, मेने झुक कर उनका एक निप्पल चूसने लगा)

लतादिदी : शह्ह्ह्ह क्या कर रहा hai(Muje धकेलते hue)Chhod मुझे.

शिव : अभी रुको न दीदी.

लतादिदी : (प्यार se)Chhod na...muje muje...bathroom जाना hai.(Mene अपना लुंड बहार निकला तो साथ में बहोत सारा वीर्य बहार निकल aaya)Shhhhhh ahhhhhhh.(Didi की आंखे बंद हो गयी, थोड़ी देर बाद वो उठने लगी, में उन्हें hi देख रहा था, वो अपनी टंगे आपसमे जोड़ने लगी और अपने स्तन हाथो से छुपाने lagi)Udhar देख बेशरम.

शिव : अब क्यों शर्मा रही हो दीदी?

लतादिदी : उधर देख बोलै न. (में चलते हुए छत की बाउंडरी के पास आ गया और वह बरसाती पानी के जाने की जगह के पास खड़ा हो कर मूतने लगा.)

शिव : दीदी आप भी आ jao.(Lata अपना घाघरा पहन रही थी, शिव की बात पर वो मुस्कुराने लगी, अब वो उसके साथ इतना सब तो कर चुकी थी तो वो वह गयी और निचे बेथ कर मूतने लगी)

लतादिदी : निचे मत देखना.

शिव : क्या दीदी आप भी, कितना शर्माती ho(Me मुस्कुराते हुए बहार देखने लगा, अचानक मेरा ध्यान गया की कुछ साये गेट के पास घूम रहे है, मेने गौर से देखा तो एक साया दरवाजा चढ़ रहा था, मेने फटाफट निचे झुक गया और देखने लगा)
 
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