अपडेट 76
हम सब साथ में बेथ कर खाना खा रहे थे, दिव्या मेरे बाजु की कुर्शी पर hi बैठी हुई थी. दूसरी और रंजन, फिर विणा और उसके बाजु में कुसुम. हम सब एक घेरा बना के बैठे हुए थे. खेत में आये मज़े की hi बाटे चल रही थी. रंजन को बहोत मज़ा आया था, वो दोबारा जाने का प्लान बना रही थी.
रंजन : यार सच में बहोत मज़ा आया वह, मेरा तो आने का दिल hi नहीं कर रहा था, (दिव्या se)Kya हम दोबारा वह जायेंगे.
दिव्या : देखते है, अगर मौका मिला तो जायेंगे.
रंजन खुस हो गयी. दिव्या ने अपने घुटने को मेरे घुटने से टच करवादिया. मेने उसकी और देखा तो वो ऐसे दिखा रही थी की उसे जैसे पता hi नहीं हो. मुझे भी लगा की शायद बेध्यानी में हो गया होगा, में अपना खाना खाने लगा, पर वो बार बार मेरे घुटने को अपने घुटने से धक्का दे रही थी. में समाज गया की वो ये जानबुज कर कर रही है. मेने सामने बैठी विणा और कुसुम को देखा तो वो दोनों अपना खाना खाने में व्यस्त थी, रंजन तो बाजुमें थी तो उसको ये नहीं दिख रहा था. मेने दिव्या को देखा तो उसने नटखट सी स्मिल दी. वो हाथ मुँह धो कर मेरे पीछे पद गयी थी.
हम सब खाना खा रहे थे की एक टेम्पो में कुछ सामान आया. कुछ लोग सामान उतर रहे थे, दिव्या के पापा वही खड़े रह कर सब गईं रहे थे. सामान में कुछ टेबल भी थे जो एक साथ रक्खे हुए थे. में भी खाना कहते हुए उन को देख रहा था. काम करने के लिए मजदुर थे तो सिर्फ उन पर नज़र hi रखनी थी. दिव्या के पापा एक नोट में सब लिख रहे थे. सब खिंचा तानी में मुझे लगा की जो तब्लो की थप्पी थी वो सरक रही है, जैसे जैसे सामान खिसक रहा था वो थप्पी झुकती जा रही थी, किसी का भी ध्यान उस और नहीं था, मुझे लगा की वो गिरनेवाली है, और निचे hi दिव्या के पापा खड़े हुए थे, अगर वो गिरती तो उनके ऊपर hi गिरनी थी. मेरा अंदेशा सही निकला और वो सरकते हुए गिरने लगी, मेने फाटक से थाली फेंकी और उस और दौड़ा, कोई कुछ समझता उस से पहले वो टेबल गिरने लगे, दिव्या के पापा का भी ध्यान गया पर अब देर हो चुकी थी, उन्होंने बचने के लिए अपने हाथ ऊपर उठा दिए, तब्लो के खिसकने की आवाज से सब का ध्यान उस और गया, सब को लग रहा था की ये सब दिव्या के पापा पे गिरेंगे, में स्फूर्ति से वह पंहुचा और अपनी पूरी ताकत से उसे पकड़ लिया, उस से बचने के लिए दिव्या के पापा धड़ाम से निचे बेथ गए, पर मेने तब्लो को पकड़ लिया था, सब एक दम से दर गए, जैसे hi मजदूरों ने देखा की मेने तब्लो को पकड़ा है वो सब मेरी मदद को आ गए. जब उन्होंने पकड़ लिया तो मेने छोड़ दिया और दिव्या के पापा को हाथ पकड़ कर खड़ा किआ. सब देख रहे थे की उन चारो को वो टेबल उठाने में परेशानी हो रही थी तो कुछ और लोग भी मदद को आये. सब ने मिल कर तब्लो को वापस धकेल दिया. एक आदमी जो तब्लो को उठाने में मदद कर रहा था वो हमारी तरफ आया.
आदमी : मोतीलाल जी आप बच गए, (मेरी और देख kar)Bahot ताकतवर हो बेटे, हम सब मिलकर उसे सम्बल नहीं प् रहे थे और तुमने अकेले hi उसे पकड़ लिया था. (मोतीलाल, दिव्या के papa)Sach कहता हु, अगर ये लड़का सही समय पर उसे न पकड़ता तो अनर्थ हो जाता. आपको इस लड़के ने बचालिया मोतीलालजी.
मोतीलाल : (मेरी और बड़े आदर से देखते hue)Sukriya बीटा, तुम्हारा बहोत बहोत सुक्रिया.
दिव्या

वो भी वह आ गयी thi)Papa आप ठीक है न?
मोतीलाल : है बीटा, में ठीक हु, (मेरी और देखते hue)isne मुझे बचलिया. (कुछ और लोग भी मुझे शाबाशी देने लगे, थोड़ी देर बाद में वापस खाने के लिए बैठा तो देखा की मेरी थाली निचे पड़ी हुई थी)
दिव्या : तुम रुको, में दूसरी थाली ले कर आती हु. (वो गयी और दूसरी थाली में खाना ले कर आ गयी, मुझे थाली देते हुए) थैंक यू शिव, अगर आज तुम नहीं होते तो पता नहीं क्या हो जाता.
शिव : इसमें थैंक यू की क्या बात है, ये तो मेने देख लिया तो अच्छा हुआ.
दिव्या की मम्मी : (जैसे hi उन्हें पता चला वो घबरा गयी, और भागते हुए बहार आयी, अपने पति se)Aap ठीक है न? आप को लगी तो नहीं, मेने कितनी बार कहा आप दूर रहिये इन सब से, पर नहीं सब काम खुद hi करने है. अगर आप को कुछ हो जाता तो.
मोतीलाल : अरे गंगा क्यों इतना उत्तेजित हो रही हो, देखो में ठीक हु, मुझे कुछ नहीं हुआ. (मेरी और इस्सर करते हुए) उसने मुझे बचालिया, इतने भरी तब्लो को मेरे ऊपर गिरने से उसने hi रोकलिया था.
गंगादेवी : है दिया, उस लड़के ने? वो तो अभी छोटा बच्चा है.
मोतीलाल : सिर्फ दिखने में, चार लोग जिसे नहीं उठा प् रहे थे उसने अकेले hi उसे उठालिया था. सच कहता हु अगर वो न होता तो आज अनर्थ हो जाता.
गंगादेवी : सुबह सुबह बोलिये जी. (वो मेरी और आयी, में खाना खा रहा था, मेरे शिर पर हाथ रखते हुए) जग जग जिओ मेरे बच्चे, आज तूने हमे bachaliya(Mene उनकी और देखा तो उनकी आँखों में आंसू थे.) आज तेरी वजह से एक बहोत बड़ा खतरा ताल गया. (दिव्या ko)Hat तू, मुझे मेरे बच्चे के पास बैठने दे, (बेथ kar)La में तुजे खिलाती हु, मेरा बच्चा. (मोतीलाल जी भी वह आगये)
शिव : रहने दीजिये आंटी, में खेलूंगा.
मोतीलाल : खिलने दे उसे बीटा, उसका दिल है तो उसे रोक मात.
वो रोये जा रही थी और मुझे खिला रही थी, दुल्हन भी जब वो सुना तो वो वह आगया था, काफी लोग वह खड़े हो गए थे, आंटी की आँखों में आंसू तो थे पर चेहरे पर मुस्कान थी, वो मुझे खिला रही थी, दिव्या की भी आँखों से आंसू टपक रहे थे. सब खुसी खुसी ये दृश्य देख रहे थे. मेरा पेट भर जाने तक वो मुझे खिलाती रही. जब खाना ख़तम हुआ तो दिव्या ने अपनी मम्मी के हाथ से थाली ले ली. कुसुम जा कर पानी ले आयी. आंटी मुझे पिलाने लगी तो मेने उनके हाथ से ले लिया और खुद पि लिया.
परम (दिव्या का भाई) : थैंक यू भाई, तुम ने पापा को बचालिया.
शिव : ऐसा कुछ नहीं है, मेने तो बस...
परम : तुमने जो किआ, वो सबने देखा.
गंगादेवी : इससे भगवन ने भेजा था, हमारी मदद के लिए. (दिव्या को) अनजाने में hi सही पर आज पहलीबार तूने एक सही काम किआ है. (दिव्या फूली नहीं समां रही थी) अब जा इससे आराम करने के लिए उपरवाले कमरे में ले जा, (रंजन और विणा ko)Jao बेटी, तुम भी सब आराम करो, अब सब कुछ शाम को hi है.
पूरा माहौल hi बदल गया था. हर कोई मुझे दिखा कर बाते कर रहा था. जिन्होंने देखा नहीं था वो सब मेरी और देखते हुए बड़े ध्यान से उनकी बाते सुन रहा था. हम सब ऊपर आ गए.
दिव्या : तुम सब बैठो में सरबत ले आती हु.
शिव : अरे भाई नहीं, अभी नहीं, आंटी ने इतना खिलाड़िया है की एक घूंट पानी भी निचे नहीं उतरेगा.
दिव्या : ठीक है, तुम आराम करो में नीचे जाती हु. चलो कुसुम.
रंजन : में भी आती हु, मुझे भी कोई आराम नहीं करना.
विणा : में भी आती हु.
शिव : है भाई, तुम लोग जाओ, मेने तो इतना खा लिया है की अभी लेटना hi पड़ेगा.
में बिस्तर पर लेट गया, वो सब चली गयी, मेने आंखे बंद कर ली. पता नहीं कब मेरी आंख लग गयी. कितनी देर तक सोता रहा मुझे पता नहीं था, मेरी नीं तब खुली जब मुझे अपने होठो पर हलचल महसूस हुई, जैसे जैसे मेरी नींद टूटी मुझे लगा कोई मेरे होठो को किश कर रहा है. में थोड़ा हिला तो वो जो कोई भी था वो तुरंत वह से भगा, नींद से आंखे खोलता उस सेपहले वो दरवाजे के बहार चली गयी, मेने थोड़ी सी hi झलक देखि थी जिस से मुझे लग रहा था की वो दिव्या थी पर में सूरे नहीं था. में थोड़ी देर लेते लेते hi सोचता रहा की ये दिव्या थी या कोई और. ये दिव्या hi हो शक्ति थी, क्यों की वो सुबह से hi aisi-waisi हरकते कर रही थी. मेने मुँह हाथ धोये और वह से निचे चला गया. सब लड़कीअ मेहँदी लगवा रही थी. मेने देखा की दिव्या और रंजन बेथ कर मेहँदी लगवा रही थी. मेने ये भी देखा की दिव्या अपने एक हाथ पर लगवा चुकी थी और दूसरा हाथ चल रहा था, रंजन का एक हाथ ख़तम होने को आया था. कुसुम और विणा वह बैठी अपनी बरी का इंतजार कर रही थी. मुझे देख कर रंजन बोली
रंजन : उठ गया, कितनी देर सोता रहा पता hai.(Mene देखा तो शाम के पांच बजनेवाले थे. में तक़रीबन तीन घंटे तो सो hi गया था, में पूछनेवाला था की मुझे कौन उठाने आया था पर में चुप रहा, वह काफी लड़कीअ बैठी हुई थी. में वह से बहार निकला तो परम मुझे सामने मिलगया)
परम : उठ गए भाई, चाय वाई पि की नहीं?
शिव : नहीं, अभी उठा हु. (उन्होंने किसी को आवाज दी और मेरे लिए छायी मंगवाई)
परम : तुम आराम से छायी पीओ, मुझे थोड़ा काम है.
वो चले गए, में एक कुर्शी पे बेथ कर चाय पिने लगा. उतने में hi दिव्या के पापा मेरे पास आये, उनके साथ दो और भी लोग थे.
मोतीलालजी : उठ गए बीटा.?
शिव : जी अंकल.
मोतीलालजी : (उन दोनों ko)Ye hi है शिव, मैंने तुम्हे बताया था न.
एक आदमी : भाई तुमने तो कमल कर दिया, वर्ण आज शादी में विघ्न आना तय था.
शिव : मेने कुछ नहीं किआ अंकल, वो तो बस ऐसे hi.
दूसरा आदमी : अरे क्या कहती हो, जिन्होंने भी ये देखा है वो यही कह रहा है. (अब में क्या बोलता, में बस मुस्कुरादिया)
मोतीलालजी : तुम चाय पीओ, चलो भाई बहोत काम है. (वो लोग चले गए, और दिव्या आ गयी, वो वही कुर्शी पर बेथ गयी)
दिव्या : देखो शिव, कैसी है मेरी मेहँदी.
शिव : बहोत अच्छी है.
दिव्या : चाय पि रहे हो, मुझे भी पिणि थी, कब से मेहँदी लगवा रही थी, पर अब कैसे पिऊ.
शिव : में पीला दू?
दिव्या : (मुस्कुराते हुए) तुम पिलाओ गए, सच्ची, (उसने किसी को आवाज दी और छायी मंगवाई, वो लड़का छायी ले कर आया और दिव्या के सामने खड़ा हो गया) इन्हे de.(Mere हाथ में आलरेडी चाय थी, तो वो लड़का सवालिया नजरो से मुझे देखने लगा, मेने चाय ले ली, और दिव्या को पिलाने लगा, में खुद भी पि रहा था)
शिव : कोई मुझे उठाने आया था क्या?
दिव्या : है, कुसुम आयी थी, क्यों, तुम्हे नहीं पता था क्या.
शिव : (अब में क्या bolta)Nahi वो मुझे जगा रही थी पर में जगा नहीं तो वो वापस मुद गयी थी, पर मुझे लगा की मुझे कोई जगा रहा था.
दिव्या : है वो थोड़ी शर्मीली है, वो तो आने से दर रही थी मेने hi उसे जबरदस्ती भेजा था, में मेहँदी लगवा रही थी वर्ण में hi आनेवाली thi.(Hum बात कर hi रहे थे की वह से दिव्या की मम्मी गुजारी, किसी औरत ने उसकी मम्मी का दयँ हमारी और खिंचा तो हमारी और hi चली आयी)
गंगादेवी : आरी बे शर्म, मेरे बच्चे से ये क्या काम करवा रही है? सब देख रहे है, तुजे जरा भी शर्म नहीं.
दिव्या : मेरे दोनों हाथो में मेहँदी लगी हुई है, मुझे कोई चाय नहीं पीला रहा था तो मेने शिव को बोल दिया, उसे कोई दिक्कत नहीं है, क्यों शिव?
शिव : जी आंटी, कोई बात नहीं.
गंगादेवी : इससे ज्यादा शिर पर मात चढ़ा, वार्ना ये तेरे शिर पर hi नाचेगी, (दिव्या रूठे हुए चेहरे से अपनी माँ को देखने लगी)
शिव : कोई बात नहीं आंटी.
गंगादेवी : मेरा प्यारा बीटा, (उन्होंने मेरे शिर पर हाथ रक्खा और चली गयी, अभी हम बात hi कर रहे थे की रंजन भी आ गयी, मुझे चाय पिलाते देख उसे जलन हुई)
रंजन : मुझे भी चाय पिणि है.
शिव : मेरी भी चाय ख़तम hi होनेवाली है, ख़तम करके में तुजे पिलाता हु.
रंजन : तेरे में से hi मुझे पीला दे.
शिव : मेरी झूठी चाय पीयेगी.
रंजन : तो क्या हुआ, मुझे कोई एतराज नहीं है, तू पीला. (अब में क्या कहता, में दोनों को चाय पिलाने लगा, आते जाते सब लोग देख रहे थे और है रहे थे )
चाय पीने के बाद हम थोड़ी देर बाते करते रहे, विणा और कुसुम भी आ गयी, मेने कुसुम की और देखा तो वो नज़ारे चुरा रही थी. वैसे उसने जो किआ था तब में नींद में था, पता नहीं इन लड़कीओ को क्या हो जाता है. मेने सोचा अगर वो दोबारा कुछ करेंगी तो में उसे रोक दूंगा, पर अभी उसकी हालत देख कर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, वो मुज से ऐसे दर रही थी की मेरी तरफ देखने भी हिम्मत नहीं कर रही थी. मुझे उसे और छेड़ने का मान किआ.
शिव : दिव्या, ऐसा लगता hai,tumhare घर में चूहे ज्यादा है.
दिव्या : नहीं तो, ऐसा क्यों कह रहे हो?
शिव : में सोया हुआ था तो मुझे लगा कोई चूहा मेरे चेहरे पर घूम रहा hai(Mene कुसुम की और देखा तो मेरी बात सुन कर वो चूकते हुए मुझे hi देख रही थी, जैसे hi हमारी नज़ारे मिली, उसने घबराकर अपनी नज़ारे निचे झुका ली)
दिव्या : नहीं, शिव, जहा तक मुझे पता है हमारे घर में कोई चूहा नहीं है.
शिव : हो शक्ति है कोई चुहिया, बाजु के घर से आयी हो?
दिव्या : में पापा से कहती हु.
शिव : अरे नहीं, उन्हें क्यों डिस्टर्ब करती हो, अगर दोबार वो नजर आयी तो में hi उसे दबोच लूंगा.
रंजन : तुम्हे कैसे पता की वो चुहिया hi थी.
शिव : मेरे होठो के पास सूंघ रही थी तो शायद मेरी चुम्मी ले रही हो, तो चुहिया hi होगी न, चूहा तो तुम्हारे पास आता, मेरे पास थोड़ी न आता.
दिव्या : (सब हसने lage)Tum भी न शिव.
सब है रहे थे पर कुसुम दर रही थी. खैर हम सुब बाटे करते रहे फिर सब तैयार होने चले गए. वैसे भी लड़कीओ को तैयार होने में टाइम लगता है, मेने वही कपडे पहने थे, बस हाथ मुँह धो कर तैयार हो गया. लड़कीअ तो अभी आयी नहीं थी तो में उस तरफ चला गया जहा, खाने की तैयारियां हो रही थी. परमभाई और अंकल सब को सब बता रहे थे. में उनके पास गया.
शिव : नमस्ते अंकल, मेरे लायक कोई काम.
मोतीलालजी : अरे नहीं बीटा, कोई काम नहीं है, सब हो गया है, तुम आराम से बैठो. (तभी एक लड़की आयी)
लड़की : अंकल, दिव्या को कुछ सामान लाना है, आप किसी को भेजिए न.
मोतीलालजी : इस लड़की को भी अभी सब सूझता है, मेने पहले से hi बोलरेखा था की जो चाहिए वो याद से मँगवाले, अभी इस वक़्त सब काम में व्यस्त है किसको bheju(Meri और देख कर) शिव बीटा, तुम्हे स्कूटर आता है?
शिव : है अंकल.
मोतीलालजी : जा न बीटा, दिव्या को कुछ लाना है, उसे ले जा, वर्ण मुँह फुला कर घूमती रहेगी.
शिव : जी अंकल.
में उस लड़की के साथ गया, वो अंदर चली गयी, थोड़ी देर में चहकते हुए दिव्या आयी.
दिव्या : तुम साथ चल रहे ho(Uske चेहरे से hi खुसी टपक रही थी)
शिव : है सब काम में व्यस्त थे तो अंकल ने मुझे hi कह दिया.
दिव्या : है चलो, ये लो चाबी.
मेने स्कूटर चालू किआ और वो पीछे बेथ गयी, अभी भी उसने मेहँदी नहीं निकली थी, पर मेहँदी सुख जरूर गयी थी. वो मुझे बताती गयी वैसे वैसे में स्कूटर चलने लगा. ये एक कॉस्मेटिक की दुकान थी. हम अंदर चले गए, उसे जो जो चाहिए था वो बताती गयी और वो दुकानदार निकलता गया. जब पैसे देने की बरी आयी तो वो दुविधा में पद गयी.
शिव : (मेने puchha)Kya hua?(Wo मेरी और देख रही थी, मेने फिर पूछा) क्या हुआ?
दिव्या : (दुकानदार se)Ek मिनट भैया, (वो मुझे एक कौन में ले गयी, यहाँ हम दुकानदार से थोड़ी दुरी पर थे, दुकान दर दूसरे ग्राहक के साथ व्यस्त था)
शिव : क्या हुआ?
दिव्या : मैंने पैसे जल्दी जल्दी में यहाँ रक्खत्वा दिए थे, (वो अपनी छाती की और इस्सर कर रही थी और शर्मा भी रही थी)
शिव : (हमारी छाती पर तो जेब होती है पर मुझे वह कोई जेब नहीं dikhi.)Kaha?
दिव्या : यहाँ अंदर.
शिव : तो फिर?
दिव्या : तुम निकल दो.
शिव : पागल हो क्या, चलो, में अभी दे देता हु, तुम बाद में मुझे दे dena.(Divya मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी, मेने पैसे दिया और हम वह से निकल गए, हम स्कूटर के पास जा रहे थे पर वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी) क्या हुवा, इतना क्यों मुस्कुरा रही हो?
दिव्या : शिव, तुम बहोत अच्छे हो.
शिव : (मुस्कुराते hue)Paise दिए इस लिए?
दिव्या : नहीं शिव, में ने खुद तुम्हे मेरे वह से पैसे निकलने को कहा, तुम्हारी जगह और को लड़का होता तो ऐसा मौका अपने हाथ से जाने न देता, पर तुम वैसे नहीं हो, इस्सलिलिये कह रही हु की तुम बहोत अच्छे हो.
शिव : सुबह से में तुम्हारी हरकते देख रहा हु, आखिर तुम मेरे बारे में जानती hi क्या हो, मेरी इतनी सी बात से तुम्हे लग रहा है की में अच्छ हु, में कोई अच्छा नहीं हु, अपने दिमाग से ये सब निकल दो.
दिव्या : तुम्हे क्या लगता है, में सुबह से तुम्हारे पीछे पड़ी हु, नहीं शिव, में उस दिन से तुम्हारे पीछे पड़ी हु जिस दिन मेने तुम्हे पहलीबार स्कूल में देखा था.
शिव : देखो दिव्या, जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ मुंकिन नहीं है, बेहतर है तुम इन सब में न पदों.
दिव्या : अब जो होना था वो हो गया.
शिव : कुछ नहीं हुआ है, अभी घर चलो, तुम्हारे भाई की शादी है, और अपने दिमाग से ये सब निकल दो. (मेने स्कूटर चालू किआ, पर वो बैठी nahi)Dekho दिव्या, यहाँ तमाशा मात करो, यहाँ तुम्हे और अंकल को सब जानते है, तो तमाशा मात करो और बेथ जाओ. (उसने रोनी शकल से मुझे देखा और स्कूटर पर बेथ गयी, पुरे रस्ते न में कुछ बोलै न वो, मेने उसे घर छोड़ दिया और में फिर से वह चला गया जहा सब तयारी कर रहे थे. लगभग सब तयारी हो गयी थी और काफी लोग वह इकठ्ठा भी हो चुके थे, थोड़ी देर में खाने का कार्यक्रम चला, सब मेहमान आने लगे, बहोत सरे लोग खाने आये थे, में भी सब की मदद में लग गया, करीब दो घंटा बहोत भीड़ रही, फिर धीरे धीरे भीड़ काम होने लगी, दूसरे आधे घंटे में तक़रीबन सब खाना खा चुके थे अब सिर्फ घर वाले और कुछ घर के मेहमान hi बचे थे)
मोतीलालजी : शिव बीटा, तुमने बहोत मदद की, अब खाना खा लो फिर संगीत भी है.
शिव : जी अंकल, में सब को बुलाके लता हु. (में अंदर गया वह मुझे विणा दिखी, मेने उसे कहा की सब को ले कर बहार खाने के लिए आ जाये. थोड़ी देर बाद रंजन, विणा और कुसुम और दो और लड़कीअ वह खाने के लिए आयी, दिव्या नहीं आयी थी) दिव्या कहा है?
रंजन : वो कह रही है, उसे नहीं खाना है.
शिव : क्यों?
रंजन : पता नहीं कब से मुँह फुला के बैठी हुई है, कोई कुछ पूछता है तो कुछ जवाब नहीं देती, तैयार भी नहीं हुई. उसकी मम्मी भी कब से पूछ रही है.
शिव : में देखता हु.
रंजन : रहने दे, वो किसी की बात नहीं सुन रही है.
शिव : एक बार तरय तो करने दे.
रंजन : वो हमारी सहेली है, जब हमारी बात नहीं सुन रही तो तुम्हारी बात क्यों सुनेगी?
शिव : अरे एक बार बात तो करने दे.
रंजन : तुम्हारी मर्जी, जाओ.
में मुस्कुराते वह से घर के अंदर चला गया. बहोत सरे लोग इधर उधर घूम रहे थे, एक दो कमरों में मेने देखा पर वह मेहमाहो की भीड़ लगी हुई थी, मुझे दिव्या की मम्मी दिख गयी.
शिव : आंटी, दिव्या कहा है?
गंगादेवी : क्या कहु बीटा, पता नहीं किस बात पर मुँह फुला के बैठी है, अपने भाई की शादी है और वही ऐसा कर रही है, कुछ बताये तो भी पता चले, उसके पापा भी पूछ चुके, कुछ बताती hi नहीं, वैसे भी मेहमानो को सँभालने का इतना टेंशन है और ऊपर से वो भी पतानहीं किस बात पे नाराज़ हो कर बैठी है.
शिव : पर वो है कहा?
गंगादेवी : उपरवाले कमरेमे बैठी है, क्या करू इस लड़की का समाजमे hi नहीं आता.
शिव : में देखता हु.
गंगादेवी : है बीटा, जरा समाज उसको, अगर कुछ चाहिए तो बोल दे.
शिव : में बात करता हु आंटी.
में ऊपर की और चला गया, निचे सब खाने का कार्यक्रम चल रहा था तो ऊपर कोई नहीं था, मेने देखा तो दरवाजा बंद था, मेने खटकाया तो कोई जवाब न मिला, एक दो बार और खटकाया, पर कोई उत्तर न मिला.
शिव : दरवाजा खोलो, में हु शिव. (फिर भी दरवाजा न खुला) देखो, मुझसे बात तो करो (फिर भी दरवाजा न खुला) अगर तुम दरवाजा नहीं खोलोगी तो में अभी यहाँ से वापस सहर चला जाऊंगा. (मेरी बात का असर हुआ और दरवाजा अंदर से खुलने की आवाज आयी, मेने दरवाजा धकेल कर अंदर गया तो वो दीवाल से सात कर कड़ी थी, उसे देख कर hi लग रहा था की वो रो रही थी, और अभी अभी आंसू पोछे है.) ये क्या कर रही हो तुम, तुम्हारे भाई की hi शादी है और तुम इस तरह अपने आप को कमरे में बंद किये हुए बैठी हो, तुम्हारे घरवाले कितने परेशान हो रहे है. (वो कुछ बोल नहीं रही थी) अभी मुझसे मिले तुम्हे कुछ hi दिन हुए है, तुम मुझे ठीक से जानती भी नहीं और मेरे लिए अपने भाई की शादी को तुम बिगड़ रही हो, तुम्हारी माँ और पापा कितने परेशान है. उन्हें समाज नहीं आ रहा की अपने बेटे की शादी की ख़ुशी मनाये या तुम्हारे रूठने का गाम.
दिव्या : मेरा मान नहीं है.
शिव : ऐसा क्या हो गया की तुम्हारा मान नहीं है, ऐसा क्या है मुज में जो मेरे लिए तुम अपने माँ बाप को दुखी कर रही हो, अपने भाई के बारे में तो सोचो.
दिव्या : क्या में अच्छी नहीं हु?
शिव : क्या कहना चाहती हो?
दिव्या : क्या में अच्छी नहीं हु, तुम क्यों मुझे मन कर रहे हो?
शिव : पागल, अभी न तुम मुझे जानती हो, न में तुम्हे जनता हु, आज सुबह hi तो मिले है, तुम क्या जानती हो मेरे बारे में जो मेरे लिए ये सब कर रही हो?
दिव्या : मुझे तुम अच्छे लगते हो.
शिव : तो क्या, मुझे भी तुम अच्छी लगती हो इसका ये मतलब थोड़े न है की में तुम्हारे साथ जुड़ जाऊ, मेरी जिंदगी में कोई और भी हो शक्ति है.
दिव्या : (मेरे सामने देखते हुए) क्या, तुम्हारी जिंदगी में कोई और लड़की है?
शिव : है है.
दिव्या : कोण है वो?
शिव : इस से तुम्हे क्या मतलब है?
दिव्या : मुझे जान न है, बताओ न कोण है वो?
शिव : में ऐसे किसी का नाम नहीं उछलता. और इस से तुम्हे कोई फर्क भी नहीं पड़ना चाहिए. चलो अब तैयार हो जाओ और निचे चलो, सब का मूड बिगाड़ा हुआ है.
दिव्या : (मेरी और देखते हुए) मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.
शिव : (मुझे उसकी बात समाज नहीं आयी) क्या कहना चाहती हो?
दिव्या : अगर तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है तो भी मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है, मुझे भी अपनी गर्लफ्रेंड बना लो.
शिव : तुम पागल हो गयी हो, ऐसा होता है क्या?
दिव्या : में ऐसी कई लड़कीओ को जानती हु, जिनके बॉयफ्रेंड थे और आज उनकी शादी कही और हो गयी है, वो खुस भी है, मुझे तुम्हारी दूसरी गर्लफ्रेंड बन ने में कोई प्रॉब्लम नहीं है. और अभी शादी तो बहोत दूर की बात है, वैसे भी पापा ने कोई लड़का देख रक्खा है, मेरी पढ़ाई पूरी होते hi वो मेरी शादी करवाडेंगे, तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.
शिव : ये क्या बकवास किये जा रही हो तुम.
दिव्या : अब तुम्हे क्या प्रॉब्लम है, में कहा तुम्हे मेरे साथ बांध कर रख रही हु, प्लीज मान जाओ न, सच में तुम मुझे बहोत पसंद हो, तुम्हारे साथ भले hi कुछ टाइम hi मिले, पर मिलेगा तो सही, मान जाओ न, प्लीज.
शिव : मुझे सोचने का टाइम दो.
दिव्या : इसका मतलब में तुम्हे बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती है न. क्या में जरा भी खूबसूरत नहीं हु शिव.
शिव : क्या पागलो जैसी बाते कर रही हो, तुम बहोत खूबसूरत हो, पर.
दिव्या : पर वॉर कुछ नहीं, में सिर्फ गर्लफ्रेंड बनाने के लिए hi तो कह रही हु, में तुम्हारे रस्ते में नहीं आउंगी, प्लीज मान जाओ न. प्लीज.
शिव : (अब में क्या कहता, मुझे लगा अभी मान जाता हु फिर धीरे धीरे इससे समजा दूंगा, कमसे काम शादी में तो बखेड़ा नहीं करेगी) ठीक है, पर अभी तैयार हो जाओ, सब वेट कर रहे है.
दिव्या : ओह शिव (वो दौड़ कर मेरे गले लग गयी, उसने मुझे बाहोंमे भर लिया, में वैसे hi खड़ा रहा, थोड़ी देर गले लगे रहने के बाद उसने मुझे देखा, वो मुझे देखती रही)
शिव : क्या हुआ?
दिव्या : में समाज गयी शिव, तुम सिर्फ मेरा दिल रखने के लिए कहा. (उसके चेहरे पर उदासी छ गयी)
शिव : ऐसा क्यों कह रहे हो?
दिव्या : अगर ऐसा न होता तो तुमने भी मुझे अपनी बाहोंमे लिया होता.
शिव : ऐसा कुछ नहीं है, ऐसे एकदम से अचानक तुम मेरे गले लगी तो मुझे कुछ समाज नहीं आया.
दिव्या : (उसकी आँखों में देखते हुए) अगर ऐसा है तो मुझे किश करो.
शिव : दिव्या, हम ये सब बाद में करेंगे, अभी चलो, सब वेट कर रहे है.
दिव्या : देखा, हो गया न साबित, अगर में तुम्हे पसंद नहीं तो कोई बात नहीं, मेरे भाग्य में hi नहीं है, तुम जाओ ,में आती हु.
शिव : (मेने उसे देखा तो वो बहोत उदास हो गयी थी, ऐसा लग रहा था की मेरे जाते hi वो रोने लगेगी, मुझे समाज नहीं आ रहा था की में इससे कैसे संजो, मेने मन कर दिया, मेने यहाँ तक कह दिया की मेरे जीवन में कोई और है, फिर भी ये समझने को तैयार नहीं, अब जो होगा सो होगा, अभी से इसकी चिंता करने का कोई फायदा नहीं, और वैसे भी मेने उसे सब सच बता दिया है) ठीक है, अगर तुम ऐसा hi चाहती हो तो ऐसा hi सही.
दिव्या : नहीं शिव, में कोई जबरदस्ती की किश नहीं चाहती, ये मेरे जीवन की पहली किश होगी, तुम अगर बे मान से करो गए तो मुझे पूरी जिंदगी अफ़सोस रहेगा.
शिव : बहोत बोलती हो tum(Mene उसे दीवाल से सत्ता दिया, और उसके गाल को गले के साथ सहलाने लगा, वो मेरी आँखों में देख रही थी) में चाहता था की तुम मुज से दूर रहो, में तुम्हे वो सब नहीं दे पाउँगा जो दो लोग ऐसे रिलेशन में आशा रखते है, इसीलिए में चाहता था की आगे जा कर तुम्हे कोई दुःख न हो, अब जैसा तुम्हारा भाग्य.
दिव्या : मेरा भाग्य अच्छा hi है, तुम्हारे साथ जितने भी पल बितौ ये मेरा ाचाहहए भाग्य hi होगा, मुझे अभी कुछ नहीं सोचना, आगे क्या होगा पता नहीं पर में अभी इस समय को बर्बाद कर के पूरी जिंदगी अफ़सोस नहीं करना chahti.(Mere छूने से उसकी आंखे बोजिल हो रही थी, उसकी सांसे भी तेज चलने लगी थी, में उसकी और झुकने लगा) शिव, अगर में तुम्हे पसंद हु तो hi मुझे किश karna.(Me कुछ न बोलै बस झुकता चला गया. वैसे भी वो खूबसूरत थी, इसमें तो कोई शक था hi नहीं, उसके तड़पते होठो को मेने अपने होठो से पकड़ लिया, उसकी आंखे बंद हो गयी, में उस से और सात गया, में लम्बा था तो उसने अपने पंजो पर कड़ी हो गयी, में नीचे झुका हुआ था, उसने अपनी बहे मेरे गले में दाल दी, में उसके होठो को चूसने लगा, वो बस ऐसे hi रही, थोड़ी hi देर में उसे समाज आ गया की क्या करना है तो वो भी मेरे होठो को चूसने लगी, उसकी सांसे भी बहोत तेज तेज चलने लगी थी, मेने एक हाथ से उसकी पीठ को पकड़ा और दूसरे हाथ से उसकी कमर पकड़ ली, में सीधा होता गया और वो हवामे ऊपर उठने लगी, उसने मुझे कास के पकड़ लिया, जब उसकी सांसे फूलने लगी तो उसने अपने होठ अलग किये और जोर जोर से सांसे लेने लगी, में उसे hi देख रहा था, जब उसकी सांसे कुछ नियंत्रित हुई तो उसने मुझे देखा, मुझे मुस्कुराता देख, वो शर्मा गयी और मुझसे लिपट गयी. वो हवामे hi लटकी हुई थी. थोड़ी देर बाद मेने उसे नीचे उतरा तो उसका चेहरा पूरा लाल हो गया था.
शिव : (मेने मुस्कुराते हुए पूछा) अब खुस.
दिव्या : (मुस्कुराते हुए फिर से मुज से लिपट gayi)Haaa.
शिव : अब चलो, सब रह देख रहे है.
दिव्या : है चलो.
शिव : ऐसे hi?
दिव्या : है, खाने के बाद तैयार हो जाउंगी.
शिव : ठीक है, चलो. (हम दोनों नीचे चले गए)
गंगादेवी : (हमे देखते hi) आ गयी मेरी बच्ची.
दिव्या : (उसकी मम्मी को गले लगते हुए) सॉरी मुम्मा.
गंगादेवी : (उसका शिर सहलाते हुए) सब ठीक है न बीटा, कुछ चाहिए था क्या?
दिव्या : नहीं मुम्मा, कुछ नहीं. में खाना खाने जा रही हु, मुझे बहोत भूख लगी है.
गंगादेवी : है जा (शिव का गाल सेहला kar)Mera बच्चा.
हम दोनों वह से खाना जहा हो रहा था वह चले गए. हम दोनों को साथ आते देख रंजन, विणा और कुसुम का मुँह खुला का खुला hi रह गया. उनको ऐसे देखता देख कर दिव्या शर्माने लगी. हम चलते चलते वह आ गए.