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में बिना मैडम से मिलने उनके घर चला गया, दरवाजे की घंटी बजायी तो थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला, मुझे वह देख कर वो खुस हो गयी.
बिना
खुस हो कर): शिईयिव, आओ अंदर आ जाओ. मेने सोचा नहीं था की तुम आओगे.
शिव : क्यों, आप ने कहा था न?
बिना : है कहा तो था पर, तुम इतने बिजी होते हो तो मुझे लगा तुम आ नहीं पाओगे. इतना जल्दी आये हो, मतलब खाना भी नहीं खाया होगा, है न?
शिव : जी, मैडम, मुझे लगा की आप खिला देंगी.
बिना : मुझे लगा के बच्चे, ये नहीं कह शक्ति की मेरे साथ खायेगा, तुजे क्या लगता है की में खिलाऊंगी नहीं? (में बस मुस्कुरा रहा था) एक काम कर, तू बेथ, में क्यूकेर चढ़ा के नाहा लेती हु, मुझे पहले से बोलै होता तो में सब तैयार रखती. (वो किचन में गयी और सब निपटा कर टॉवल ले कर बाथरूम की और चली गयी. मेरे दिमाग में आईडिया आया, मेने अपने कपडे निकले और बाथरूम के दरवाजे पर दस्तक दी, शावर की आवाज बंद hui)Kya हुआ शिव?
शिव : दरवाजा खोलिये. (बिना मैडम ने थोड़ा दरवाजा खोला और बहार झाकने लगी, मुझे नंगा देख कर उनका मुँह खुला का खुला रह गया, फिर वो मुस्कुरायी और शर्मा gayi)Ab दरवाजा खोलिये और मुझे अंदर आने दीजिये. वो दरवाजे से हैट गयी, में दरवाजा खोल कर अंदर चला गया, शर्म की वजह से उन्होंने मेरी और पीठ कर ली थी पर उनके मस्त उभरे हुए कूल्हे देख कर तो मेरा लुंड खड़ा हो गया, उन्होंने धीरे से मेरी और देखा, मुझे अपने कूल्हों के देखते प् कर वो शर्मा गयी, पर उनकी निगाह जब मेरे खड़े हो चके लुंड पर गयी तो और शर्मा गयी.

शिव : इतना क्यों शर्मा रही हो मैडम, हम पहलीबार तो नहीं कर रहे.
बिना : ये भले hi पहली बार न हो पर शर्म तो आती hi है.
शिव : मेरी और घूमिये न मैडम, में आप को देखना चाहता हु.
बिना : (शरमाते हुए) सब तो देखा है, अब क्या देखना है?
शिव : जैसे आप को हर बार शर्म आती है वैसे hi मुझे भी हर बार आप नयी hi लगती है, आप कितनी खूबसूरत हो मैडम, और आपका ये शरीर बहोत hi ज्यादा उत्तेजक है, इससे देख कर hi मेरी हालत ख़राब हो जाती है.
बिना : (मुस्कुराते hue)Wo मुझे नजर आ रहा hai.(Unka इस्सर मेरे खड़े लुंड की और था, में मुस्कुराया तो वो भी शर्मा कर मुस्कुराने लगी, उसे भी ये सब बहोत अच्छा लग रहा था, समाज में चाहे वो किसी भी मुकाम पर क्यों न हो, पर वो एक लड़की थी, एक औरत थी तो उसे अपने पसंदीदा मर्द के साथ खुल कर सेक्स करने का पूरा हक़ था, चाहे ये समाज उसे बुरा समजे या जैसा भी समजे, सो आहिस्ता से शिव की और घूम गयी, शिव उसे ऐसे घर कर देख रहा था जैसे उसे अभी खा जायेगा, वो भी तो यही चाहती थी, उसने देखा की शिव उसके बड़े बड़े चुचो को देख रहा है तो वो उसे अपने हाथ में ले कर दबाने लगी, वो ये जानती थी की वो कितनी बेशर्मी कर रही है पर उसे ऐसा करना कही न कही बहोत अच्छा लग रहा था, वो शिव को रिज़ा रही थी, ऐसा वो पहली बार कर रही थी. वो अपने अंगो का जैसे प्रदर्शन कर रही थी, शिव को उसे ऐसे आंखे फाडे देखते देख उसे शर्म भी आ रही थी पर अच्छा भी लग रहा था, वो मुस्कुराते हुए शिव को अपनी चूचिया दबा ते हुए ललचा रही थी, शिव खड़ा खड़ा अपने लुंड को सहलाने लगा, उसने भी अपने हलके बालो वाली छूट को सहलाया,

शिव को जैसे यकीं hi नहीं हो रहा था, ये देख वो और मुस्कुराने लगी. इतनी बेशर्मी से अपने गुप्त अंगो को ऐसे किसी और के सामने करते हुए उसे बड़ा अजीब लग रहा था पर साथ में बहोत hi ज्यादा उत्तेजक भी लग रहा था. शिव जैसे hi उसके नजदीक आया उसने शिव को पकड़ लिया और उसे किश करने लगी,

उसका लुंड उसके पेट पर चुभ रहा था जो उसे और उत्तेजना प्रदान कर रहा था, शिवने भी अपने लुंड को दो झांघो के बिच सेट किआ और कूल्हों को पकड़ते हुए उसे अंदर बहार करने लगा, अपनी छूट पर हो रहे घर्षण से वो शिव को जोर जोर से किश करने लगी, अब वो इस बड़े से अंग का महत्व जानती थी, उसे पता था की ये अंग उसे कितनी खुसी देता है, तो उसे उस लुंड को अपने हाथ में थम लिया और उसे हिलने लगी. (मेडम मेरे साथ इतना खुल कर प्यार जाता रही थी जो मुझे बहोत अच्छा लग रहा था, में भी उनके अंगो से खेलने लगा, वैसे भी वो सच में बचत hi कमलकी थी, उनका हर अंग बेमिसाल था, इतनी खूबसूरत लड़की को छोड़ने के ख्याल से hi मेरा लुंड ठुमके मार रहा था, थोड़ी देर बाद वो अपने घुटनो पर बेथ गयी, वो मेरे लुंड को देख रही थी, वो मुझे भी देख रही थी, मुझे लगा वो थोड़ी झिक्जाक रही है, वैसे भी वो थी तो मेरी टीचर hi, मेने उनकी झिझक को समजा और मेरे खड़े लुंड को उनके मुँह में दाल दिया, उन्होंने भी बिना किसी एतराज के मेरे लुंड को मुँह में भर लिया.

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वो मेरे लुंड को अच्छे से चूसने लगी, जब हमारी नज़ारे मिलती तो वो शर्मा रही थी, पर लुंड को वो लगातार चूस रही थी. गरम गरम मुँह में अपने लुंड पर हो रही सरसराहट महसूस कर के में पागल हो रहा था. वो मेरे लुंड को काफी अंदर तक ले रही थी. मेने उन्हें खड़ा किआ. वो मुझे देखने लगी)
बिना मैडम : तुम्हे लग रहा होगा की में कितनी बेशर्म हु, पर पता नहीं क्यों, मुझे ये सब अच्छा लग रहा है.
शिव : इसमें बेशर्मी कैसी, ये सब तो खुलकर करने में hi मज़ा आता है, में आपके बारे में कुछ भी गलत नहीं सोच रहा. आप को जो अच्छा लगे वो कीजिये, ये हम दोनों के निजी पल है, न में किसी को बतानेवाला हु न आप, तो बिना कोई झिझक के जो मर्जी आये वो कीजिये.
बिना : सच कहती हु शिव, तुम्हारे साथ जुड़ने के बाद hi मुझे इन सब का सही से पता चला है, अगर में तुमसे न मिलती तो शायद कभी ये आनंद नहीं प् पति.
शिव : चलिए तो फिर अपने इस आनंद को आगे बढ़ाते है.
बिना : चलो, बैडरूम में चलते है, वह अच्छे से हो पायेगा.
शिव : आज तो जो कुछ भी होगा वो यही होगा, आप देखती जाइये. (मेने उनकी एक तंग उठायी और अपने लुंड को छूट पर एडजस्ट किआ और अंदर उतरने लगा)

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बिना : अह्हह्ह्ह्ह, आहिस्ता से शिव. (ऐसे खड़े खड़े अपनी छूट में उतर रहे लुंड को महसूस करते हुए उसने शिव के कंधे पर अपना शिर रख दिया, शिव ने आधे से ज्यादा लुंड उसकी छूट में दाल दिया, ये एहसास उसने कभी अपने पति के साथ महसूस नहीं किआ था, जब शिव उसके कूल्हे थम कर अपना लुंड अंदर बहार करने लगा तो वो आनंद में डूबने लगी. शावर के निचे, इस तरह से करने का उसका पहला अनुभव था, वो शिव के मजबूत कंधो का सहारा लिए अपनी छूट में अंदर बहार हो रहे लुंड को महसूस कर रही थी) शह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह (वो उसको अपने से चिपका रही थी, उसके बालो को सहलाते हुए उसकी गर्दन पर अपने गर्म होठो का मज़ा दे रही थी, शिव लगातार धक्के लगा रहा था, जब शिव ने उसे पूरी ऊपर उठा लिया तो घबरा कर उस से पूरी तरह से चिपक गयी, वो मोटा लुंड उसकी छूट को पूरी तरह से भरते हुए उसकी बच्चेदानी के मुँह पर लग गया. उसकी आंखे बंद हो गयी, उसने शिव को कास के गले लगा लिया. शिव ने उसे ऐसे उठा रक्खा था जैसे वो कोई नन्ही बच्ची हो, बचपन के बाद वो शिव था जिसने उसे गॉड में उठाया था, वो अपने इस ताकतवर प्रेमी पर न्योछावर होती जा रही थी, वो ऐसे ऐसे अनुभवों से गुजर रही थी जो उसके लिए नए थे साथ में बहोत आनंद दायक थे., बाथरूम में लगातार उसकी सिस्किअ और आहे गूंज रही थी, साथ में थप थप की ध्वनि जैसे इस माहौल को और रंगीन बना रही थी. थोड़ी देर ऐसे छोड़ने से उसने पानी छोड़ दिया. अपने स्खलन को प् कर वो शिव से लिपट गयी और उसके होठो को चूसने लगी. थोड़ी देर बाद शिव ने उसे नीचे उतरा. वो शिव को ऐसे देख रही थी जैसे दुनिया का सबसे प्यारा इंसान हो, और प्रतीक्षा कर रही थी उसके अगले कदम का. शिव ने इससरए से पूछा भी क्या हुआ तो उसने न में गर्दन हिला दी. वो मुस्कुराया और उसे पलटने लगा, वो भी पलट गयी, जब शिव ने उसके कंधे को पकड़ कर हल्का धक्का देने लगा तो वो समाज गयी, सामने की दीवाल के सहारे वो थोड़ा झुक गयी, जब शिव ने उसके कूल्हों को सहलाया तो शर्म के साथ उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, जब शिव का लुंड उसके कूल्हों के बिच से उसकी छूट के छेड़ पर लगा तो वो थोड़ी और झुक गयी. फिर से लुंड उसकी छूट को भरता हुआ अंदर उतर गया. वो अपनी आंखे बंद किये, लुंड को अंदर बहार होता महसूस करने लगी.

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फिर से थप थप और आह आह का संगीत बाथरूम में गूंजने लगा. शिव के धक्के इतने तेज लग रहे थे की वो लगातार आगे खिसक रही थी, आखिर कर वो दीवाल से साथ गयी, उसकी चूचिया दीवाल में धसने लगी, वो लगातार हो रहे धक्के को मज़े से सेह रही थी. यही तो वो आनंद था जिसे पाने के लिए वो हमेशा बेक़रार रहने लगी थी. अब शिव के धक्के काफी रफ़्तार से लग रहा थे, उसने शिव को रोका और निचे फर्श पर घोड़ी बन गयी, शिव फिर से उसकी कमर को थामे धक्के लगाने लगा. ऐसी धुआँधार चुदाई से एक बार फिर वो झाड़ गयी, पर शिव को उसने रोका नहीं, शिव की रफ़्तार बता रही थी की वो अब झाड़नेवाला है. अपने ससुराल में हुई बात उसको याद आ गयी. वो अंदर से मायूस हो गयी थी, उसे पता था की अब इन सब का कोई मतलब नहीं है, वो शायद अब कभी माँ नहीं बन पायेगी. जब उसे लगा की शिव अभी थोड़ी hi देर में छूट जायेगा तो उसने शिव को रोका और सीधी निचे लेट गयी. शिव उसके पैरो को फैलते हुए बेथ गया और फिर से अपना लुंड अंदर दाल दिया. थोड़ी देर रफ़्तार से धक्के लगाने के बाद वो झाड़ गया. बिना अपने बच्चेदानी पर हो रही गर्म वीर्य की बरसात को महसूस कर रही थी, उसने शिव को अपने शाइन से लगा दिया. थोड़ी देर ऐसे hi रहने के बाद वो अचानक चौकी.
बिना : शीइइइइव, कुकर.... जल्दी हटो. (में ऊपर से उठा तो वो ऐसे नंगी hi किचन की और भागी. में बाथरूम के दरवाजे पर खड़ा था, थोड़ी देर बाद वो आयी तो अपने आप को ऐसे नंगा प् कर वो शर्माने लगी) मुझे ऐसे मात देखो, क्या हर वक़्त घूरते रहते हो. (मेने कोई जवाब नहीं दिया, बस मुस्कुरा diya)(Hum दोनों फिर नहाने लगे, मेने साबुन लिया और उनके सरे बदन पर लगाने लगा तो वो शर्मा रही थी पर मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थी, मेने उनके स्तन पर साबुन लगाया फिर उनके कूल्हों पर फिर दरार में, शिव को ऐसे नहलाते देख वो मुस्कुरा रही थी, ये सब उसके जीवन के खास पल थे जो वो महसूस कर रही थी. दरार की गर्मी अपनी उंगलिओ पर महसूस कर के फिर से मेरा लुंड खड़ा हो गया, मेने उनकी छूट को भी साफ़ किआ तो उन्होंने मेरे कंधे को दबा दिया. जब उनकी नज़र मेरे लुंड पर पड़ी तो) शिव तुम कभी थकते नहीं? (मेने जब देखा की वो मेरे लुंड को देख कर ऐसा कह रही है तो में मुस्कुराया)
शिव : ये आप की वजह से खड़ा हो जाता है.
बिना : ऐसा क्यों होता है शिव, तुम्हारे साथ मुझे वक़्त काम hi लगता है.
शिव : वो भी वक़्त आएगा, जब आप को नहीं लगेगा की वक़्त काम पद गया. चलिए अब नहलेते है warna...(Beena मैडम मुस्कुरायी)
हम दोनों नाहा कर बहार आ गए. मैडम ने अपने बदन को पूछा और बिना ब्रा और पंतय के अपने ऊपर गाउन दाल दिया और खाना बनाने लगी. हम दोनों ने साथ में मिल कर खाया. फिर हम दोनों तैयार होने लगे. वो एक बॉक्स ले कर मेरे पास आयी. मेने देखा तो वो मोबाइल का बॉक्स था.
शिव : ये क्या है?
बिना : में तुम्हारे लिए लायी थी.
शिव : पर उसकी क्या जरुरत है?
बिना : मोबाइल की तो सब को जरुरत रहती है, और वैसे भी तुम दस दिन के लिए जा रहे हो, मेरा हमेसा मान करता है तुम से बात करने का, तो मेने सोचा की में तुम्हारे लिए मोबाइल ले लू.
शिव : में भी सोच रहा था, में भी लेने hi वाला था, आपने क्यों तकलीफ की.
बिना : (उदास चेहरे se)Abhi भी तुम मुझे अपना नहीं मानते na.(Unki आँखों में आंसू छलकने hi वाले थे)
शिव : अरे, मेने ऐसा नहीं कहा.
बिना : नहीं तुम्हारा यही मतलब है, अगर तुम मुझे अपना मानते तो ऐसा वैसा कुछ भी नहीं बोलते, पता है में कितना प्यार से खरीद कर लायी थी, में कितना खुस हो रही थी तुम्हारे लिए लेते वक़्त, और tum...tum मेरा तेरा कर रहे हो.
शिव : (मेने उन्हें गले lagaliya)Mera ऐसा कोई मतलब नहीं था, मेरे कहने का मतलब ये था की में सब को क्या कहूंगा, की मेरे पास मोबाइल कहा से आया? अगर मेने ये कहा की आप ने दिया है तो सब क्या सोचेंगे? मैडम ने शिव को मोबाइल क्यों दिया?
बिना : में कुछ नहीं जानती, जिसे जो सोचना है सोचे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. और तुम्हे कहने की जरुरत क्या है, तुम ये कह देना की तुमने लिया है.
शिव : थकी है बाबा, अब रोना बंद करो, कभी कभी तो शक होता है की आप मेरी टीचर हो?
बिना : नहीं हु, यहाँ में तुम्हारी टीचर नहीं हु.
शिव : तो फिर क्या ho?(Mene मुस्कुरा कर पूछा)
बिना : (उनके चेहरे पर भी मुस्कराहट आ gayi)Pehle रुलाते हो फिर हसते हो.
शिव : सॉरी, अब नहीं करूँगा, चलिए तैयार हो जाइये, स्कूल भी तो जाना है.
हम दोनों ऑटो कर के स्कूल आ गए. स्कूल में और तो कुछ खास नहीं हुआ. शाम को में घर चला गया. में गायत्री दीदी से मिला.
शिव : कैसा रहा दिन दीदी?
गायत्री : सब ठीक hi था.
शिव : अगर कोई दिक्कत हो तो जूही से या मुझे बता देना.
गायत्री : ठीक है.
दीदी को बोल कर में जूही के पास चला गया, मेने उनसे यही कहा की मेने मोबाइल लिया है, तो सिम लेनी है. हम दोनों ने सिम ले ली. रात को निकलना था तो फिर में घर चला गया और अपने कपडे और किताबे पैक करने लगा. थोड़ी देर बाद लतादिदी आयी. पहली बार था की में इतने दिनों के लिए जा रहा था तो वो रोने लगी. सरिता दीदी भी आयी, रंजन और विणा भी आयी. गायत्री दीदी भी आयी सरितादिदी, लतादिदी और रंजन तीनो मुज से लिपट कर रो रही थी. विणा और गायत्री दूर कड़ी देख रही थी. वो देख प् रही थी की ये सब एक दूसरे के कितने करीब है. में उनसे भी गले मिला, और विणा से भी गले मिला. मेने दीदी को अपना मोबाइल नंबर दिया. रात की तरीन थी तो जूही मुझे अनाथालय लेने आयी, हम दोनों स्टेशन चले गए, वह पार्किंग में स्कूटर रखदिया और हम अंदर चले गए. तक़रीबन आधे घंटे बाद ट्रैन आयी, टिकट तो बुक करवाली थी पर हमें रिजर्वेशन नहीं मिली थी. जूही ने तक से बात की तो उसने एक बर्थ का इंतजाम कर दिया. ट्रैन में भीड़ ज्यादा थी तो एक hi बिरथ से काम चलना था. हम दोनों अंदर आये और अपनी सीट ढूंढने लगे. रात का वक़्त था तो ज्यादातर लोग सोये हुए hi थे. हमे सबसे ऊपरवाली बर्थ मिली थी. हम दोनों ऊपर चढ़ गए. हमारे कम्पार्टमेंट में दो सुप्ले थे, एक कपल का सात आठ साल का बच्चा था जो हमारे सामनेवाली बिरथ पर सोया हुआ था. ज्यादातर लाइट बंद थी, थोड़ी सी रौशनी थी जिस से हम दोनों अपनी बिरथ पैर बेथ गए. अब किआ भी क्या जा शक्ति था. एक सिस में सामान रख कर हम दोनों बेथ गए. सफर काफी लम्बा था. थोड़ी देर में ट्रैन चल पड़ी. स्टेशन की वजह से जो लाइट जाली थी वो भी बंद होने लगी. एक दो लाइट को छोड़ कर सब लाइट बंद हो चुकी थी. हम दोनों थोड़ी देर ऐसे hi बिना बात किये बैठे रहे, वैसे भी सब सो रहे थे तो बाते करना ठीक नहीं था और रात का समय था तो अस्स पास देख कर टाइम पास करना भी संभव नहीं था. हम दोनों घुटने मोड़कर बैठे हुए थे, थोड़ी देर बाद मेने जूही को देखा तो वो अपनी आंखे बंद किये हुए बैठी थी. में उसके नजदीक खिसका और उसके शिर को अपने कंधे की और झुकाने लगा तो एक बार उसने मेरी और देखा फिर मुस्कुराते हुए उसने मेरे कंधे पर शिर रख दिया. मेने भी अपनी आंखे बंद कर ली. आधे घंटे बाद अब मुझे भी नींद आ रही थी पर ऐसे बैठे बैठे शिर लुढ़क जा रहा था और नींद टूट जाती थी. और आधा घंटा बीत गया. एक जगह किसी स्टेशन पर ट्रैन रुकी तो जूही भी जाग गयी.
शिव : ऐसे नींद नहीं आ रही न?
जूही : हम्म्म.
शिव : एक काम करो, तुम सो जाओ में निचे उतर जाता हु.
जूही : निचे जा कर तुम क्या करोगे, तुम थोड़ी न सो पाओगे. एक काम करो तुम एक साइड लेट जाओ, में तुम्हारे एक साइड सो जाती हु.
शिव : (में समाज रहा था की वो क्या कह रही है पर उसके साथ ऐसे सोना, मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था, ये पहला मौका था जब हम दोनों इस परिस्थिति में थे) वो कैसे होगा, इतनी सी जगह में हम दोनों नहीं सो पाएंगे, तुम hi सो जाओ.
जूही : मेने कहा न, एक बैग का तकिया बनाओ और लेट जाओ (मेरे पास और कोई चारा भी नहीं था, में वैसे hi लेट गया, जगह बहोत काम थी तो वो भी लेटने का प्रयास करने लगी, पर हम दोनों पूरी तरह से सटे हुए थे, उसने मेरी बाह पर अपना शिर रक्खा और लेट गयी, में बहार की तरफ था और वो अंदर की तरफ थी, झिझक तो वो भी रही थी, इस लिए वो मेरी और पीठ कर के लेती, उसकी पीठ मेरी छाती से पूरी तरह चिपकी हुई थी, उसके साथ ऐसे लेटने सेमेरी धड़कने बढ़ चुकी थी. उसके बदन की गर्मी में महसूस कर पर रहा था. वो भी लम्बी थी तो उसके कूल्हे ठीक मेरे लुंड के पास थे. में ऐसा बिलकुल भी नहीं चाहता था पर लुंड साला सुन hi नहीं रहा था, वो उठना सुरु हो गया. में जितनी कोशिस कर रहा था वो उतना hi उठ रहा था. मुझे बहोत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी, ऐसा पहले भी एक बार हो चूका था बस में. में इसमें कुछ भी नहीं कर शक्ति था तो अपनी आंखे बांड कर के अपने आप को शांत रखने की कोशिस करने लगा. (जूही अपने कूल्हों पर उस चुभन को महसूस कर रही थी, वो आंखे बंद किये हुए मंद मंद मुस्कुरा रही थी. शिव उसकी वजह से उत्तेजित हो गया है ये सोच कर वो शर्माने भी लगी, पर उसे ये सब बहोत अच्छा लग रहा था. किस्मत से आज वो शिव के साथ ऐसे सात कर सोई हुई थी. सीट न मिलने से जहा उसे पहले बुरा लगा था वही अब उसे वो अच्छा लग रहा था. अब वो सोच रही थी की अच्छा हुआ की दूसरी सीट नहीं मिली. वो भी इस मधुर स्पर्श का आनंद लेते हुए सोने की कोशिस करने लगी) थोड़ी देर में हम दोनों सो गए. रात को जूही के हिलने से में फिर जाग गया.
शिव : क्या हुआ?
जूही : एक करवट से लेटने पर दर्द हो रहा है. (उसने अपनी करवट बदली और अब वो मेरी और मुँह कर के लेट गयी, मेने अपने शिर को थोड़ा पीछे खिसका दिया, फिर से मेने अपनी आंखे बंद कर di.)(Juhi ने भी अपनी आंखे बंद कर दी पर थोड़ी देर बाद उसने आंखे खोली और शिव की और देखा जो अपनी आंखे बंद किये हुए था. आज वो उसे और ज्यादा अच्छा लग रहा था, कब से वो उसके साथ इस तरह से लेती हुई थी पर फिर भी उसने कोई आईसीआईसी हरकत नहीं की थी, सिवाय उसके की उसका अंग खड़ा हो गया था, वो उत्तेजित भी हो गया था पर फिर भी उसने कोई आईसीआईसी हरकत नहीं की थी. अगर वो कुछ भी करता तो भी जूही उसे रोकती नहीं. पर शिव वैसा नहीं था. वो प्यार से उसे निहार रही थी, उसका दिल कर रहा था की वो शिव को किश करे, पर वो लड़की सहज लज्जा से वो कर नहीं प् रही थी. उसने अपनी बाह शिव के ऊपर रक्खी और उस से चिपक गयी, उसके शाइन में अपने शिर को रख कर उसे बहोत सुकून मिल रहा था. थोड़ी देर बाद शिव ने भी उसे अपनी बहो में ले लिया और उसके ऊपर अपना पेअर रख दिया, वो थोड़ी चौकी पर उसने कोई विरोध नहीं किआ. वो देखना चाहती थी की शिव क्या करता है, पर उसने कोई और हरकत नहीं की, शायद उसने नींद में hi उसे अपनी आगोश में ले लिया था, वो भी सुकून से उसकी बहो में समाये सो गयी. उसकी नींद तब खुली जॉब उसकी जीब में रक्के मोबाइल पर अलार्म baja.)(Me भी उस अलार्म से जाग गया, मेने देखा की मेने जूही को अपनी बहो में लिया हुआ है तो मेने फ़ौरन अपन हाथ हातलिया.) (जूही ने अपने ट्रैक की जेब से मोबाइल निकला और अलार्म ऑफ किआ. अलार्म का मतलब था की अब उनका स्टेशन आनेवाला था. उसने शिव की और देखा तो वो उसे hi देख रहा था, वैसे तो उसे शर्म आ रही थी पर ऐसा मौके को वो गवाना नहीं चाहती थी तो वो फिर से उसके शाइन से लग gayi)(Juhi ऐसे मेरे शाइन से लगी थी जैसे लतादिदी रोज मुज से चिपक कर सोती थी, में उसके प्यार को समाज रहा था, हम थोड़ी देर ऐसे hi लेते रहे, थोड़ी देर बाद डिब्बे में हरकत सुरु हो गयी तो उसने मुझे छोड़ा और कड़ी हो कर बेथ गयी, में भी बेथ गया. वो मेरी और hi देख रही थी, मेने भी उसे देखा, वो थोड़ी नजदीक खिसकी और मेरे कंधे पर अपना शिव शिर रख दिया, मेने भी अपनी बाह उसके कंधे पर रक्खी और उसे अपनी और खिंच लिया. थोड़ी देर बाद हम दोनों निचे आ गए. अपना सामान लिए हम दोनों दरवाजे के पास खड़े हो गए. थोड़ी देर बाद ट्रैन रुकी, और हम दोनों निचे उतर गए. स्टेऑन की लाइट अभी जल रही थी, पर आसमान में उजाला हो चूका था. सूरज अभी नहीं निकला था. हम दोनों स्टेशन से बहार आये, जूही आस पास देखने लगी, उसने अपना हाथ ऊपर उठा कर हिलाया. मेने उस और देखा तो एक आदमी अपनी खुली जीप लिए वह खड़ा था.
जूही : आओ शिव ( हम दोनों उनकी और चले गए) भैयाआ (कहते हुए जूही अपने भैया के गले लग गयी, मेने देखा की जूही अपने भाई से भी ऊँची थी, जब उनका मिलना ख़तम हुआ to)Bhaiya ये शिव है.
भैया : (वो इस युवक को ऊपर से निचे तक देखने लगे, कद काठी से वो अपनी बहन से भी कही ज्यादा था) Hello.
शिव : (अपने हाथ जोड़ kar)Namaste भैया.
भैया : मेरा नाम चंद्रपाल है.
जूही : सॉरी भैया, मेरे लिए आप को इतनी सुबह सुबह आना पड़ा.
चंद्रपाल : अरे पगली, इसमें क्या है, चल बेथ जा, घर पर सब तेरा इंतजार कर रहे है.
जूही : (हम दोनों ने अपना सामान पिच्छे रक्खा, जूही आगे की सीट पर बेथ गयी और में पीछे, जीप चल padi)Bhabhi कैसी है भैया, और माँ.
चंद्रपाल : तू खुद चल कर देख लेना.
जीप अपनी रफ़्तार से चली जा रही थी, आस पास खेतो में लोग जाने लगे थे, रस्ते में कई लोग दिखे जो जूही के भैया को देख कर अपने हाथ जोड़ रहे थे, वो भी कभी कभी अपना हाथ उठा कर उसका जवाब देते थे. जूही के भैया को देख कर तो लग रहा था की वो लोग बड़े लोग है. वैसे तो वो गांव था पर जब हम एक घर के सामने रुके तो मेने देखा की ये बहोत बड़ा घर था, रस्ते में देखे हुए घरो में सब से बड़ा, घर के पास जगह भी बड़ी थी जिस को सीमेंट की दिवार से कवर किआ हुआ था. गाड़ी रुकी तो जूही कूद कर उस से उतर गयी और एक और दौड़ने लगी, मेने देखा की एक 45 साल या 50 साल के आस पास की औरत दरवाजे से निकल रही थी. जूही दौड़ कर उनके गले लग गयी.
जूही : माआआ.
माँ : आ गयी, इतना माँ माँ होता है तो जाती क्यों है?
जूही : अभी सुबह सुबह सुरु मात हो जाओ माँ (तभी एक और औरत दरवाजे से बहार आयी, 24-25 साल की थी, साड़ी पहनी थी और शिर पर पल्लू लिए हुए थी) भाभीयी (जूही उनके भी गले लग गयी, में अपनी और जूही की बैग लिए थोड़ी दुरी पर खड़ा हो गया) कैसी हो भाभी?
भाभी : में अच्छी हु, तुम कैसी हो? (उनकी नज़र मेरी और गयी)
जूही : (जूही ने देखा की उसकी भाभी और उसकी माँ दोनों शिव को देख रही है) माँ, ये शिव है. (में आगे बढ़ा और जूही की माँ के पेअर छू कर आशीर्वाद लिया)
माँ : जीते रहो बीटा, (मुझे ऊपर से निचे देखते हुए) मुझे तो लग रहा था की एक यही है दुनियामे इतनी लम्बी. (में मुस्कुराया, मेने भाभी को भी नमस्ते किआ, तो उन्होंने भी मेरे नमस्ते का जवाब नमस्ते से दिया) आओ बीटा अंदर आओ. बहु, इनके चाय नास्ते का इंतजाम कर तो.
भाभी : जी, मजी.
जूही : ये भी चाय नहीं पिता, ये भी मेरी तरह दूध hi पिता है.
माँ : ये तो अच्छी बात है, बहु, बदामवाला दूध hi बना. आओ तुम दोनों, पहले मुँह हाथ धो लो.
जूही : आओ शिव. (में उसके पीछे पीछे चला गया)
चंद्रपाल : माँ, इससे जूही क्यों लायी है?
माँ : उसका फ़ोन आया था, ये भी उसकी तरह खिलाडी है, यहाँ अपने जिले में कैंप है तो दस दिनों के लिए आया है.
चंद्रपाल : तो क्या ये यहाँ रहनेवाला है?
माँ : तुजे क्या दिक्कत है?
चंद्रपाल : एक अनजान लड़के को ऐसे रखना ठीक नहीं.
माँ : वो तेरे मेरे लिए अनजान है, जूही के लिए नहीं, वो उसे जानती है, अगर उसने कहा है तो सोच समझकर hi कहा होगा. जा तू अपना काम देख.
चंद्रपाल : ठीक है माँ, जैसे तुम कहो, में खेतो की और जा रहा हु.
(वो वह से चला गया, पर उसको शिव का यहाँ रहना ठीक नहीं लग रहा था, पर वो अपनी बहिन और माँ के सामने कुछ बोलै nahi.)(Hum दोनों रसोई में बैठे दूध और मसाले वाली रोटी खा रहे थे, मेने देखा की भाभी चुपके से मुझे hi देख रही थी, जैसे hi मेरी नजर उनकी और जाती वो दूसरी और देखने लगती, मेरी समाजमे नहीं आ रहा था, नास्ता करने के बाद हम सब बैठक वाले कमरे में बैठे थे)
माँ : तो बेटी अब कहो, तुम्हारी क्या योजना है.
जूही : माँ, शिव मेरी तरह एथलीट है, हमारे जिले में कैंप है तो में इससे यहाँ लायी हु ताकि उसे इन सब का अनुभव मिले, ताकि वो आगे बढ़ शेक.
माँ : ये रहेगा कहा?
जूही : जैसे आप कहो माँ, वैसे इसका रहने का इंतजाम वह स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में भी हो शकता है, पर में चाहती हु की ये यहाँ रहे, इसकी दो वजह है, एक तो में इससे वह रहने देना नहीं चाहती और दूसरी वजह है की वो घर में रहे तो घर को समजे, माँ शिव अनाथालय में पला बड़ा है, उसने कभी घर देखा hi नहीं, में चाहती हु की वो आप के साथ रहे तो समजे की माँ क्या होती है, और आप से अच्छी माँ तो हो hi नहीं शक्ति.
माँ : (मुस्कुराते hue)Jyada चापलूसी मात कर. चल ठीक है, पर यहाँ कहा रहेगा?
जूही : ऊपर दो कमरे है न, उसमे रहलेगा, वैसे भी इससे अपने एग्जाम की तयारी करनी है तो ऊपर रहेगा तो एकांत में पढ़ पायेगा.
माँ : अब अपनी बात, तू क्यों नहीं रुक रही?
जूही : अभी फ़िलहाल तो मेरा रुकना मुश्किल है, पर तुम्हारे लिए खुशखबरी है?
माँ : वो क्या?
जूही : माँ, में नौकरी छोड़ रही हु.
माँ : (खुस हो kar)Ye हुई न बात, में तुजे कब से कह रही हु, क्या रक्खा है ऐसी नौकरी में, जब हमारे पास सब कुछ तो है.
जूही : ऐसे नहीं माँ, में नेशनल के लिए तयारी करना चाहती हु, इस लिए.
माँ : तुजे कितनी बार संजो, छोड़ ये सब, अब शादी का सोच, पर तू है की समझती hi नहीं.
जूही : क्या शादी करना hi एक लड़की के लिए सब कुछ होता है, और में ये नहीं कह रही की नहीं करुँगी, पर अभी फ़िलहाल नहीं. और में इस बारेमे और कोई बहस नहीं करना चाहती.
माँ : मेने hi तुजे शिर पर चढ़ा रक्खा है.
जूही : (उठ कर उनके बाजु में बेथ कर उनके गाल को चुम कर) मेरी प्यारी माँ, इस्सलिये तो कह रही हु की दुनियामे सबसे अच्छी है मेरी माँ.
माँ : छोड़ मुझे, ज्यादा मस्का मात लगा. कब वापस जानेवाली है?
जूही : वैसे तो आज hi जानेवाली थी पर अब सोच रही हु एक दिन रुक jau(Ye कह कर उसने मेरी और देखा) में सोच रही थी की शिव को मेरा गांव दिखाऊ.
माँ : ठीक है, पर खाने के वक़्त तक आ जाना.
जूही : ठीक है माँ. चलो शिव.
हम दोनों बहार आये, जूही ने एक बीके निकली, में तो उसे देखता hi रहा, क्या लड़की है यार. बाइक चालू कर के मुझे बैठने को कहा तो में बेथ गया. उसने गांव की और बाइक दौड़ा दी.
में बिना मैडम से मिलने उनके घर चला गया, दरवाजे की घंटी बजायी तो थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला, मुझे वह देख कर वो खुस हो गयी.
बिना
शिव : क्यों, आप ने कहा था न?
बिना : है कहा तो था पर, तुम इतने बिजी होते हो तो मुझे लगा तुम आ नहीं पाओगे. इतना जल्दी आये हो, मतलब खाना भी नहीं खाया होगा, है न?
शिव : जी, मैडम, मुझे लगा की आप खिला देंगी.
बिना : मुझे लगा के बच्चे, ये नहीं कह शक्ति की मेरे साथ खायेगा, तुजे क्या लगता है की में खिलाऊंगी नहीं? (में बस मुस्कुरा रहा था) एक काम कर, तू बेथ, में क्यूकेर चढ़ा के नाहा लेती हु, मुझे पहले से बोलै होता तो में सब तैयार रखती. (वो किचन में गयी और सब निपटा कर टॉवल ले कर बाथरूम की और चली गयी. मेरे दिमाग में आईडिया आया, मेने अपने कपडे निकले और बाथरूम के दरवाजे पर दस्तक दी, शावर की आवाज बंद hui)Kya हुआ शिव?
शिव : दरवाजा खोलिये. (बिना मैडम ने थोड़ा दरवाजा खोला और बहार झाकने लगी, मुझे नंगा देख कर उनका मुँह खुला का खुला रह गया, फिर वो मुस्कुरायी और शर्मा gayi)Ab दरवाजा खोलिये और मुझे अंदर आने दीजिये. वो दरवाजे से हैट गयी, में दरवाजा खोल कर अंदर चला गया, शर्म की वजह से उन्होंने मेरी और पीठ कर ली थी पर उनके मस्त उभरे हुए कूल्हे देख कर तो मेरा लुंड खड़ा हो गया, उन्होंने धीरे से मेरी और देखा, मुझे अपने कूल्हों के देखते प् कर वो शर्मा गयी, पर उनकी निगाह जब मेरे खड़े हो चके लुंड पर गयी तो और शर्मा गयी.

शिव : इतना क्यों शर्मा रही हो मैडम, हम पहलीबार तो नहीं कर रहे.
बिना : ये भले hi पहली बार न हो पर शर्म तो आती hi है.
शिव : मेरी और घूमिये न मैडम, में आप को देखना चाहता हु.
बिना : (शरमाते हुए) सब तो देखा है, अब क्या देखना है?
शिव : जैसे आप को हर बार शर्म आती है वैसे hi मुझे भी हर बार आप नयी hi लगती है, आप कितनी खूबसूरत हो मैडम, और आपका ये शरीर बहोत hi ज्यादा उत्तेजक है, इससे देख कर hi मेरी हालत ख़राब हो जाती है.
बिना : (मुस्कुराते hue)Wo मुझे नजर आ रहा hai.(Unka इस्सर मेरे खड़े लुंड की और था, में मुस्कुराया तो वो भी शर्मा कर मुस्कुराने लगी, उसे भी ये सब बहोत अच्छा लग रहा था, समाज में चाहे वो किसी भी मुकाम पर क्यों न हो, पर वो एक लड़की थी, एक औरत थी तो उसे अपने पसंदीदा मर्द के साथ खुल कर सेक्स करने का पूरा हक़ था, चाहे ये समाज उसे बुरा समजे या जैसा भी समजे, सो आहिस्ता से शिव की और घूम गयी, शिव उसे ऐसे घर कर देख रहा था जैसे उसे अभी खा जायेगा, वो भी तो यही चाहती थी, उसने देखा की शिव उसके बड़े बड़े चुचो को देख रहा है तो वो उसे अपने हाथ में ले कर दबाने लगी, वो ये जानती थी की वो कितनी बेशर्मी कर रही है पर उसे ऐसा करना कही न कही बहोत अच्छा लग रहा था, वो शिव को रिज़ा रही थी, ऐसा वो पहली बार कर रही थी. वो अपने अंगो का जैसे प्रदर्शन कर रही थी, शिव को उसे ऐसे आंखे फाडे देखते देख उसे शर्म भी आ रही थी पर अच्छा भी लग रहा था, वो मुस्कुराते हुए शिव को अपनी चूचिया दबा ते हुए ललचा रही थी, शिव खड़ा खड़ा अपने लुंड को सहलाने लगा, उसने भी अपने हलके बालो वाली छूट को सहलाया,

शिव को जैसे यकीं hi नहीं हो रहा था, ये देख वो और मुस्कुराने लगी. इतनी बेशर्मी से अपने गुप्त अंगो को ऐसे किसी और के सामने करते हुए उसे बड़ा अजीब लग रहा था पर साथ में बहोत hi ज्यादा उत्तेजक भी लग रहा था. शिव जैसे hi उसके नजदीक आया उसने शिव को पकड़ लिया और उसे किश करने लगी,

उसका लुंड उसके पेट पर चुभ रहा था जो उसे और उत्तेजना प्रदान कर रहा था, शिवने भी अपने लुंड को दो झांघो के बिच सेट किआ और कूल्हों को पकड़ते हुए उसे अंदर बहार करने लगा, अपनी छूट पर हो रहे घर्षण से वो शिव को जोर जोर से किश करने लगी, अब वो इस बड़े से अंग का महत्व जानती थी, उसे पता था की ये अंग उसे कितनी खुसी देता है, तो उसे उस लुंड को अपने हाथ में थम लिया और उसे हिलने लगी. (मेडम मेरे साथ इतना खुल कर प्यार जाता रही थी जो मुझे बहोत अच्छा लग रहा था, में भी उनके अंगो से खेलने लगा, वैसे भी वो सच में बचत hi कमलकी थी, उनका हर अंग बेमिसाल था, इतनी खूबसूरत लड़की को छोड़ने के ख्याल से hi मेरा लुंड ठुमके मार रहा था, थोड़ी देर बाद वो अपने घुटनो पर बेथ गयी, वो मेरे लुंड को देख रही थी, वो मुझे भी देख रही थी, मुझे लगा वो थोड़ी झिक्जाक रही है, वैसे भी वो थी तो मेरी टीचर hi, मेने उनकी झिझक को समजा और मेरे खड़े लुंड को उनके मुँह में दाल दिया, उन्होंने भी बिना किसी एतराज के मेरे लुंड को मुँह में भर लिया.

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वो मेरे लुंड को अच्छे से चूसने लगी, जब हमारी नज़ारे मिलती तो वो शर्मा रही थी, पर लुंड को वो लगातार चूस रही थी. गरम गरम मुँह में अपने लुंड पर हो रही सरसराहट महसूस कर के में पागल हो रहा था. वो मेरे लुंड को काफी अंदर तक ले रही थी. मेने उन्हें खड़ा किआ. वो मुझे देखने लगी)
बिना मैडम : तुम्हे लग रहा होगा की में कितनी बेशर्म हु, पर पता नहीं क्यों, मुझे ये सब अच्छा लग रहा है.
शिव : इसमें बेशर्मी कैसी, ये सब तो खुलकर करने में hi मज़ा आता है, में आपके बारे में कुछ भी गलत नहीं सोच रहा. आप को जो अच्छा लगे वो कीजिये, ये हम दोनों के निजी पल है, न में किसी को बतानेवाला हु न आप, तो बिना कोई झिझक के जो मर्जी आये वो कीजिये.
बिना : सच कहती हु शिव, तुम्हारे साथ जुड़ने के बाद hi मुझे इन सब का सही से पता चला है, अगर में तुमसे न मिलती तो शायद कभी ये आनंद नहीं प् पति.
शिव : चलिए तो फिर अपने इस आनंद को आगे बढ़ाते है.
बिना : चलो, बैडरूम में चलते है, वह अच्छे से हो पायेगा.
शिव : आज तो जो कुछ भी होगा वो यही होगा, आप देखती जाइये. (मेने उनकी एक तंग उठायी और अपने लुंड को छूट पर एडजस्ट किआ और अंदर उतरने लगा)

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बिना : अह्हह्ह्ह्ह, आहिस्ता से शिव. (ऐसे खड़े खड़े अपनी छूट में उतर रहे लुंड को महसूस करते हुए उसने शिव के कंधे पर अपना शिर रख दिया, शिव ने आधे से ज्यादा लुंड उसकी छूट में दाल दिया, ये एहसास उसने कभी अपने पति के साथ महसूस नहीं किआ था, जब शिव उसके कूल्हे थम कर अपना लुंड अंदर बहार करने लगा तो वो आनंद में डूबने लगी. शावर के निचे, इस तरह से करने का उसका पहला अनुभव था, वो शिव के मजबूत कंधो का सहारा लिए अपनी छूट में अंदर बहार हो रहे लुंड को महसूस कर रही थी) शह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह (वो उसको अपने से चिपका रही थी, उसके बालो को सहलाते हुए उसकी गर्दन पर अपने गर्म होठो का मज़ा दे रही थी, शिव लगातार धक्के लगा रहा था, जब शिव ने उसे पूरी ऊपर उठा लिया तो घबरा कर उस से पूरी तरह से चिपक गयी, वो मोटा लुंड उसकी छूट को पूरी तरह से भरते हुए उसकी बच्चेदानी के मुँह पर लग गया. उसकी आंखे बंद हो गयी, उसने शिव को कास के गले लगा लिया. शिव ने उसे ऐसे उठा रक्खा था जैसे वो कोई नन्ही बच्ची हो, बचपन के बाद वो शिव था जिसने उसे गॉड में उठाया था, वो अपने इस ताकतवर प्रेमी पर न्योछावर होती जा रही थी, वो ऐसे ऐसे अनुभवों से गुजर रही थी जो उसके लिए नए थे साथ में बहोत आनंद दायक थे., बाथरूम में लगातार उसकी सिस्किअ और आहे गूंज रही थी, साथ में थप थप की ध्वनि जैसे इस माहौल को और रंगीन बना रही थी. थोड़ी देर ऐसे छोड़ने से उसने पानी छोड़ दिया. अपने स्खलन को प् कर वो शिव से लिपट गयी और उसके होठो को चूसने लगी. थोड़ी देर बाद शिव ने उसे नीचे उतरा. वो शिव को ऐसे देख रही थी जैसे दुनिया का सबसे प्यारा इंसान हो, और प्रतीक्षा कर रही थी उसके अगले कदम का. शिव ने इससरए से पूछा भी क्या हुआ तो उसने न में गर्दन हिला दी. वो मुस्कुराया और उसे पलटने लगा, वो भी पलट गयी, जब शिव ने उसके कंधे को पकड़ कर हल्का धक्का देने लगा तो वो समाज गयी, सामने की दीवाल के सहारे वो थोड़ा झुक गयी, जब शिव ने उसके कूल्हों को सहलाया तो शर्म के साथ उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, जब शिव का लुंड उसके कूल्हों के बिच से उसकी छूट के छेड़ पर लगा तो वो थोड़ी और झुक गयी. फिर से लुंड उसकी छूट को भरता हुआ अंदर उतर गया. वो अपनी आंखे बंद किये, लुंड को अंदर बहार होता महसूस करने लगी.

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फिर से थप थप और आह आह का संगीत बाथरूम में गूंजने लगा. शिव के धक्के इतने तेज लग रहे थे की वो लगातार आगे खिसक रही थी, आखिर कर वो दीवाल से साथ गयी, उसकी चूचिया दीवाल में धसने लगी, वो लगातार हो रहे धक्के को मज़े से सेह रही थी. यही तो वो आनंद था जिसे पाने के लिए वो हमेशा बेक़रार रहने लगी थी. अब शिव के धक्के काफी रफ़्तार से लग रहा थे, उसने शिव को रोका और निचे फर्श पर घोड़ी बन गयी, शिव फिर से उसकी कमर को थामे धक्के लगाने लगा. ऐसी धुआँधार चुदाई से एक बार फिर वो झाड़ गयी, पर शिव को उसने रोका नहीं, शिव की रफ़्तार बता रही थी की वो अब झाड़नेवाला है. अपने ससुराल में हुई बात उसको याद आ गयी. वो अंदर से मायूस हो गयी थी, उसे पता था की अब इन सब का कोई मतलब नहीं है, वो शायद अब कभी माँ नहीं बन पायेगी. जब उसे लगा की शिव अभी थोड़ी hi देर में छूट जायेगा तो उसने शिव को रोका और सीधी निचे लेट गयी. शिव उसके पैरो को फैलते हुए बेथ गया और फिर से अपना लुंड अंदर दाल दिया. थोड़ी देर रफ़्तार से धक्के लगाने के बाद वो झाड़ गया. बिना अपने बच्चेदानी पर हो रही गर्म वीर्य की बरसात को महसूस कर रही थी, उसने शिव को अपने शाइन से लगा दिया. थोड़ी देर ऐसे hi रहने के बाद वो अचानक चौकी.
बिना : शीइइइइव, कुकर.... जल्दी हटो. (में ऊपर से उठा तो वो ऐसे नंगी hi किचन की और भागी. में बाथरूम के दरवाजे पर खड़ा था, थोड़ी देर बाद वो आयी तो अपने आप को ऐसे नंगा प् कर वो शर्माने लगी) मुझे ऐसे मात देखो, क्या हर वक़्त घूरते रहते हो. (मेने कोई जवाब नहीं दिया, बस मुस्कुरा diya)(Hum दोनों फिर नहाने लगे, मेने साबुन लिया और उनके सरे बदन पर लगाने लगा तो वो शर्मा रही थी पर मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थी, मेने उनके स्तन पर साबुन लगाया फिर उनके कूल्हों पर फिर दरार में, शिव को ऐसे नहलाते देख वो मुस्कुरा रही थी, ये सब उसके जीवन के खास पल थे जो वो महसूस कर रही थी. दरार की गर्मी अपनी उंगलिओ पर महसूस कर के फिर से मेरा लुंड खड़ा हो गया, मेने उनकी छूट को भी साफ़ किआ तो उन्होंने मेरे कंधे को दबा दिया. जब उनकी नज़र मेरे लुंड पर पड़ी तो) शिव तुम कभी थकते नहीं? (मेने जब देखा की वो मेरे लुंड को देख कर ऐसा कह रही है तो में मुस्कुराया)
शिव : ये आप की वजह से खड़ा हो जाता है.
बिना : ऐसा क्यों होता है शिव, तुम्हारे साथ मुझे वक़्त काम hi लगता है.
शिव : वो भी वक़्त आएगा, जब आप को नहीं लगेगा की वक़्त काम पद गया. चलिए अब नहलेते है warna...(Beena मैडम मुस्कुरायी)
हम दोनों नाहा कर बहार आ गए. मैडम ने अपने बदन को पूछा और बिना ब्रा और पंतय के अपने ऊपर गाउन दाल दिया और खाना बनाने लगी. हम दोनों ने साथ में मिल कर खाया. फिर हम दोनों तैयार होने लगे. वो एक बॉक्स ले कर मेरे पास आयी. मेने देखा तो वो मोबाइल का बॉक्स था.
शिव : ये क्या है?
बिना : में तुम्हारे लिए लायी थी.
शिव : पर उसकी क्या जरुरत है?
बिना : मोबाइल की तो सब को जरुरत रहती है, और वैसे भी तुम दस दिन के लिए जा रहे हो, मेरा हमेसा मान करता है तुम से बात करने का, तो मेने सोचा की में तुम्हारे लिए मोबाइल ले लू.
शिव : में भी सोच रहा था, में भी लेने hi वाला था, आपने क्यों तकलीफ की.
बिना : (उदास चेहरे se)Abhi भी तुम मुझे अपना नहीं मानते na.(Unki आँखों में आंसू छलकने hi वाले थे)
शिव : अरे, मेने ऐसा नहीं कहा.
बिना : नहीं तुम्हारा यही मतलब है, अगर तुम मुझे अपना मानते तो ऐसा वैसा कुछ भी नहीं बोलते, पता है में कितना प्यार से खरीद कर लायी थी, में कितना खुस हो रही थी तुम्हारे लिए लेते वक़्त, और tum...tum मेरा तेरा कर रहे हो.
शिव : (मेने उन्हें गले lagaliya)Mera ऐसा कोई मतलब नहीं था, मेरे कहने का मतलब ये था की में सब को क्या कहूंगा, की मेरे पास मोबाइल कहा से आया? अगर मेने ये कहा की आप ने दिया है तो सब क्या सोचेंगे? मैडम ने शिव को मोबाइल क्यों दिया?
बिना : में कुछ नहीं जानती, जिसे जो सोचना है सोचे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. और तुम्हे कहने की जरुरत क्या है, तुम ये कह देना की तुमने लिया है.
शिव : थकी है बाबा, अब रोना बंद करो, कभी कभी तो शक होता है की आप मेरी टीचर हो?
बिना : नहीं हु, यहाँ में तुम्हारी टीचर नहीं हु.
शिव : तो फिर क्या ho?(Mene मुस्कुरा कर पूछा)
बिना : (उनके चेहरे पर भी मुस्कराहट आ gayi)Pehle रुलाते हो फिर हसते हो.
शिव : सॉरी, अब नहीं करूँगा, चलिए तैयार हो जाइये, स्कूल भी तो जाना है.
हम दोनों ऑटो कर के स्कूल आ गए. स्कूल में और तो कुछ खास नहीं हुआ. शाम को में घर चला गया. में गायत्री दीदी से मिला.
शिव : कैसा रहा दिन दीदी?
गायत्री : सब ठीक hi था.
शिव : अगर कोई दिक्कत हो तो जूही से या मुझे बता देना.
गायत्री : ठीक है.
दीदी को बोल कर में जूही के पास चला गया, मेने उनसे यही कहा की मेने मोबाइल लिया है, तो सिम लेनी है. हम दोनों ने सिम ले ली. रात को निकलना था तो फिर में घर चला गया और अपने कपडे और किताबे पैक करने लगा. थोड़ी देर बाद लतादिदी आयी. पहली बार था की में इतने दिनों के लिए जा रहा था तो वो रोने लगी. सरिता दीदी भी आयी, रंजन और विणा भी आयी. गायत्री दीदी भी आयी सरितादिदी, लतादिदी और रंजन तीनो मुज से लिपट कर रो रही थी. विणा और गायत्री दूर कड़ी देख रही थी. वो देख प् रही थी की ये सब एक दूसरे के कितने करीब है. में उनसे भी गले मिला, और विणा से भी गले मिला. मेने दीदी को अपना मोबाइल नंबर दिया. रात की तरीन थी तो जूही मुझे अनाथालय लेने आयी, हम दोनों स्टेशन चले गए, वह पार्किंग में स्कूटर रखदिया और हम अंदर चले गए. तक़रीबन आधे घंटे बाद ट्रैन आयी, टिकट तो बुक करवाली थी पर हमें रिजर्वेशन नहीं मिली थी. जूही ने तक से बात की तो उसने एक बर्थ का इंतजाम कर दिया. ट्रैन में भीड़ ज्यादा थी तो एक hi बिरथ से काम चलना था. हम दोनों अंदर आये और अपनी सीट ढूंढने लगे. रात का वक़्त था तो ज्यादातर लोग सोये हुए hi थे. हमे सबसे ऊपरवाली बर्थ मिली थी. हम दोनों ऊपर चढ़ गए. हमारे कम्पार्टमेंट में दो सुप्ले थे, एक कपल का सात आठ साल का बच्चा था जो हमारे सामनेवाली बिरथ पर सोया हुआ था. ज्यादातर लाइट बंद थी, थोड़ी सी रौशनी थी जिस से हम दोनों अपनी बिरथ पैर बेथ गए. अब किआ भी क्या जा शक्ति था. एक सिस में सामान रख कर हम दोनों बेथ गए. सफर काफी लम्बा था. थोड़ी देर में ट्रैन चल पड़ी. स्टेशन की वजह से जो लाइट जाली थी वो भी बंद होने लगी. एक दो लाइट को छोड़ कर सब लाइट बंद हो चुकी थी. हम दोनों थोड़ी देर ऐसे hi बिना बात किये बैठे रहे, वैसे भी सब सो रहे थे तो बाते करना ठीक नहीं था और रात का समय था तो अस्स पास देख कर टाइम पास करना भी संभव नहीं था. हम दोनों घुटने मोड़कर बैठे हुए थे, थोड़ी देर बाद मेने जूही को देखा तो वो अपनी आंखे बंद किये हुए बैठी थी. में उसके नजदीक खिसका और उसके शिर को अपने कंधे की और झुकाने लगा तो एक बार उसने मेरी और देखा फिर मुस्कुराते हुए उसने मेरे कंधे पर शिर रख दिया. मेने भी अपनी आंखे बंद कर ली. आधे घंटे बाद अब मुझे भी नींद आ रही थी पर ऐसे बैठे बैठे शिर लुढ़क जा रहा था और नींद टूट जाती थी. और आधा घंटा बीत गया. एक जगह किसी स्टेशन पर ट्रैन रुकी तो जूही भी जाग गयी.
शिव : ऐसे नींद नहीं आ रही न?
जूही : हम्म्म.
शिव : एक काम करो, तुम सो जाओ में निचे उतर जाता हु.
जूही : निचे जा कर तुम क्या करोगे, तुम थोड़ी न सो पाओगे. एक काम करो तुम एक साइड लेट जाओ, में तुम्हारे एक साइड सो जाती हु.
शिव : (में समाज रहा था की वो क्या कह रही है पर उसके साथ ऐसे सोना, मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था, ये पहला मौका था जब हम दोनों इस परिस्थिति में थे) वो कैसे होगा, इतनी सी जगह में हम दोनों नहीं सो पाएंगे, तुम hi सो जाओ.
जूही : मेने कहा न, एक बैग का तकिया बनाओ और लेट जाओ (मेरे पास और कोई चारा भी नहीं था, में वैसे hi लेट गया, जगह बहोत काम थी तो वो भी लेटने का प्रयास करने लगी, पर हम दोनों पूरी तरह से सटे हुए थे, उसने मेरी बाह पर अपना शिर रक्खा और लेट गयी, में बहार की तरफ था और वो अंदर की तरफ थी, झिझक तो वो भी रही थी, इस लिए वो मेरी और पीठ कर के लेती, उसकी पीठ मेरी छाती से पूरी तरह चिपकी हुई थी, उसके साथ ऐसे लेटने सेमेरी धड़कने बढ़ चुकी थी. उसके बदन की गर्मी में महसूस कर पर रहा था. वो भी लम्बी थी तो उसके कूल्हे ठीक मेरे लुंड के पास थे. में ऐसा बिलकुल भी नहीं चाहता था पर लुंड साला सुन hi नहीं रहा था, वो उठना सुरु हो गया. में जितनी कोशिस कर रहा था वो उतना hi उठ रहा था. मुझे बहोत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी, ऐसा पहले भी एक बार हो चूका था बस में. में इसमें कुछ भी नहीं कर शक्ति था तो अपनी आंखे बांड कर के अपने आप को शांत रखने की कोशिस करने लगा. (जूही अपने कूल्हों पर उस चुभन को महसूस कर रही थी, वो आंखे बंद किये हुए मंद मंद मुस्कुरा रही थी. शिव उसकी वजह से उत्तेजित हो गया है ये सोच कर वो शर्माने भी लगी, पर उसे ये सब बहोत अच्छा लग रहा था. किस्मत से आज वो शिव के साथ ऐसे सात कर सोई हुई थी. सीट न मिलने से जहा उसे पहले बुरा लगा था वही अब उसे वो अच्छा लग रहा था. अब वो सोच रही थी की अच्छा हुआ की दूसरी सीट नहीं मिली. वो भी इस मधुर स्पर्श का आनंद लेते हुए सोने की कोशिस करने लगी) थोड़ी देर में हम दोनों सो गए. रात को जूही के हिलने से में फिर जाग गया.
शिव : क्या हुआ?
जूही : एक करवट से लेटने पर दर्द हो रहा है. (उसने अपनी करवट बदली और अब वो मेरी और मुँह कर के लेट गयी, मेने अपने शिर को थोड़ा पीछे खिसका दिया, फिर से मेने अपनी आंखे बंद कर di.)(Juhi ने भी अपनी आंखे बंद कर दी पर थोड़ी देर बाद उसने आंखे खोली और शिव की और देखा जो अपनी आंखे बंद किये हुए था. आज वो उसे और ज्यादा अच्छा लग रहा था, कब से वो उसके साथ इस तरह से लेती हुई थी पर फिर भी उसने कोई आईसीआईसी हरकत नहीं की थी, सिवाय उसके की उसका अंग खड़ा हो गया था, वो उत्तेजित भी हो गया था पर फिर भी उसने कोई आईसीआईसी हरकत नहीं की थी. अगर वो कुछ भी करता तो भी जूही उसे रोकती नहीं. पर शिव वैसा नहीं था. वो प्यार से उसे निहार रही थी, उसका दिल कर रहा था की वो शिव को किश करे, पर वो लड़की सहज लज्जा से वो कर नहीं प् रही थी. उसने अपनी बाह शिव के ऊपर रक्खी और उस से चिपक गयी, उसके शाइन में अपने शिर को रख कर उसे बहोत सुकून मिल रहा था. थोड़ी देर बाद शिव ने भी उसे अपनी बहो में ले लिया और उसके ऊपर अपना पेअर रख दिया, वो थोड़ी चौकी पर उसने कोई विरोध नहीं किआ. वो देखना चाहती थी की शिव क्या करता है, पर उसने कोई और हरकत नहीं की, शायद उसने नींद में hi उसे अपनी आगोश में ले लिया था, वो भी सुकून से उसकी बहो में समाये सो गयी. उसकी नींद तब खुली जॉब उसकी जीब में रक्के मोबाइल पर अलार्म baja.)(Me भी उस अलार्म से जाग गया, मेने देखा की मेने जूही को अपनी बहो में लिया हुआ है तो मेने फ़ौरन अपन हाथ हातलिया.) (जूही ने अपने ट्रैक की जेब से मोबाइल निकला और अलार्म ऑफ किआ. अलार्म का मतलब था की अब उनका स्टेशन आनेवाला था. उसने शिव की और देखा तो वो उसे hi देख रहा था, वैसे तो उसे शर्म आ रही थी पर ऐसा मौके को वो गवाना नहीं चाहती थी तो वो फिर से उसके शाइन से लग gayi)(Juhi ऐसे मेरे शाइन से लगी थी जैसे लतादिदी रोज मुज से चिपक कर सोती थी, में उसके प्यार को समाज रहा था, हम थोड़ी देर ऐसे hi लेते रहे, थोड़ी देर बाद डिब्बे में हरकत सुरु हो गयी तो उसने मुझे छोड़ा और कड़ी हो कर बेथ गयी, में भी बेथ गया. वो मेरी और hi देख रही थी, मेने भी उसे देखा, वो थोड़ी नजदीक खिसकी और मेरे कंधे पर अपना शिव शिर रख दिया, मेने भी अपनी बाह उसके कंधे पर रक्खी और उसे अपनी और खिंच लिया. थोड़ी देर बाद हम दोनों निचे आ गए. अपना सामान लिए हम दोनों दरवाजे के पास खड़े हो गए. थोड़ी देर बाद ट्रैन रुकी, और हम दोनों निचे उतर गए. स्टेऑन की लाइट अभी जल रही थी, पर आसमान में उजाला हो चूका था. सूरज अभी नहीं निकला था. हम दोनों स्टेशन से बहार आये, जूही आस पास देखने लगी, उसने अपना हाथ ऊपर उठा कर हिलाया. मेने उस और देखा तो एक आदमी अपनी खुली जीप लिए वह खड़ा था.
जूही : आओ शिव ( हम दोनों उनकी और चले गए) भैयाआ (कहते हुए जूही अपने भैया के गले लग गयी, मेने देखा की जूही अपने भाई से भी ऊँची थी, जब उनका मिलना ख़तम हुआ to)Bhaiya ये शिव है.
भैया : (वो इस युवक को ऊपर से निचे तक देखने लगे, कद काठी से वो अपनी बहन से भी कही ज्यादा था) Hello.
शिव : (अपने हाथ जोड़ kar)Namaste भैया.
भैया : मेरा नाम चंद्रपाल है.
जूही : सॉरी भैया, मेरे लिए आप को इतनी सुबह सुबह आना पड़ा.
चंद्रपाल : अरे पगली, इसमें क्या है, चल बेथ जा, घर पर सब तेरा इंतजार कर रहे है.
जूही : (हम दोनों ने अपना सामान पिच्छे रक्खा, जूही आगे की सीट पर बेथ गयी और में पीछे, जीप चल padi)Bhabhi कैसी है भैया, और माँ.
चंद्रपाल : तू खुद चल कर देख लेना.
जीप अपनी रफ़्तार से चली जा रही थी, आस पास खेतो में लोग जाने लगे थे, रस्ते में कई लोग दिखे जो जूही के भैया को देख कर अपने हाथ जोड़ रहे थे, वो भी कभी कभी अपना हाथ उठा कर उसका जवाब देते थे. जूही के भैया को देख कर तो लग रहा था की वो लोग बड़े लोग है. वैसे तो वो गांव था पर जब हम एक घर के सामने रुके तो मेने देखा की ये बहोत बड़ा घर था, रस्ते में देखे हुए घरो में सब से बड़ा, घर के पास जगह भी बड़ी थी जिस को सीमेंट की दिवार से कवर किआ हुआ था. गाड़ी रुकी तो जूही कूद कर उस से उतर गयी और एक और दौड़ने लगी, मेने देखा की एक 45 साल या 50 साल के आस पास की औरत दरवाजे से निकल रही थी. जूही दौड़ कर उनके गले लग गयी.
जूही : माआआ.
माँ : आ गयी, इतना माँ माँ होता है तो जाती क्यों है?
जूही : अभी सुबह सुबह सुरु मात हो जाओ माँ (तभी एक और औरत दरवाजे से बहार आयी, 24-25 साल की थी, साड़ी पहनी थी और शिर पर पल्लू लिए हुए थी) भाभीयी (जूही उनके भी गले लग गयी, में अपनी और जूही की बैग लिए थोड़ी दुरी पर खड़ा हो गया) कैसी हो भाभी?
भाभी : में अच्छी हु, तुम कैसी हो? (उनकी नज़र मेरी और गयी)
जूही : (जूही ने देखा की उसकी भाभी और उसकी माँ दोनों शिव को देख रही है) माँ, ये शिव है. (में आगे बढ़ा और जूही की माँ के पेअर छू कर आशीर्वाद लिया)
माँ : जीते रहो बीटा, (मुझे ऊपर से निचे देखते हुए) मुझे तो लग रहा था की एक यही है दुनियामे इतनी लम्बी. (में मुस्कुराया, मेने भाभी को भी नमस्ते किआ, तो उन्होंने भी मेरे नमस्ते का जवाब नमस्ते से दिया) आओ बीटा अंदर आओ. बहु, इनके चाय नास्ते का इंतजाम कर तो.
भाभी : जी, मजी.
जूही : ये भी चाय नहीं पिता, ये भी मेरी तरह दूध hi पिता है.
माँ : ये तो अच्छी बात है, बहु, बदामवाला दूध hi बना. आओ तुम दोनों, पहले मुँह हाथ धो लो.
जूही : आओ शिव. (में उसके पीछे पीछे चला गया)
चंद्रपाल : माँ, इससे जूही क्यों लायी है?
माँ : उसका फ़ोन आया था, ये भी उसकी तरह खिलाडी है, यहाँ अपने जिले में कैंप है तो दस दिनों के लिए आया है.
चंद्रपाल : तो क्या ये यहाँ रहनेवाला है?
माँ : तुजे क्या दिक्कत है?
चंद्रपाल : एक अनजान लड़के को ऐसे रखना ठीक नहीं.
माँ : वो तेरे मेरे लिए अनजान है, जूही के लिए नहीं, वो उसे जानती है, अगर उसने कहा है तो सोच समझकर hi कहा होगा. जा तू अपना काम देख.
चंद्रपाल : ठीक है माँ, जैसे तुम कहो, में खेतो की और जा रहा हु.
(वो वह से चला गया, पर उसको शिव का यहाँ रहना ठीक नहीं लग रहा था, पर वो अपनी बहिन और माँ के सामने कुछ बोलै nahi.)(Hum दोनों रसोई में बैठे दूध और मसाले वाली रोटी खा रहे थे, मेने देखा की भाभी चुपके से मुझे hi देख रही थी, जैसे hi मेरी नजर उनकी और जाती वो दूसरी और देखने लगती, मेरी समाजमे नहीं आ रहा था, नास्ता करने के बाद हम सब बैठक वाले कमरे में बैठे थे)
माँ : तो बेटी अब कहो, तुम्हारी क्या योजना है.
जूही : माँ, शिव मेरी तरह एथलीट है, हमारे जिले में कैंप है तो में इससे यहाँ लायी हु ताकि उसे इन सब का अनुभव मिले, ताकि वो आगे बढ़ शेक.
माँ : ये रहेगा कहा?
जूही : जैसे आप कहो माँ, वैसे इसका रहने का इंतजाम वह स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में भी हो शकता है, पर में चाहती हु की ये यहाँ रहे, इसकी दो वजह है, एक तो में इससे वह रहने देना नहीं चाहती और दूसरी वजह है की वो घर में रहे तो घर को समजे, माँ शिव अनाथालय में पला बड़ा है, उसने कभी घर देखा hi नहीं, में चाहती हु की वो आप के साथ रहे तो समजे की माँ क्या होती है, और आप से अच्छी माँ तो हो hi नहीं शक्ति.
माँ : (मुस्कुराते hue)Jyada चापलूसी मात कर. चल ठीक है, पर यहाँ कहा रहेगा?
जूही : ऊपर दो कमरे है न, उसमे रहलेगा, वैसे भी इससे अपने एग्जाम की तयारी करनी है तो ऊपर रहेगा तो एकांत में पढ़ पायेगा.
माँ : अब अपनी बात, तू क्यों नहीं रुक रही?
जूही : अभी फ़िलहाल तो मेरा रुकना मुश्किल है, पर तुम्हारे लिए खुशखबरी है?
माँ : वो क्या?
जूही : माँ, में नौकरी छोड़ रही हु.
माँ : (खुस हो kar)Ye हुई न बात, में तुजे कब से कह रही हु, क्या रक्खा है ऐसी नौकरी में, जब हमारे पास सब कुछ तो है.
जूही : ऐसे नहीं माँ, में नेशनल के लिए तयारी करना चाहती हु, इस लिए.
माँ : तुजे कितनी बार संजो, छोड़ ये सब, अब शादी का सोच, पर तू है की समझती hi नहीं.
जूही : क्या शादी करना hi एक लड़की के लिए सब कुछ होता है, और में ये नहीं कह रही की नहीं करुँगी, पर अभी फ़िलहाल नहीं. और में इस बारेमे और कोई बहस नहीं करना चाहती.
माँ : मेने hi तुजे शिर पर चढ़ा रक्खा है.
जूही : (उठ कर उनके बाजु में बेथ कर उनके गाल को चुम कर) मेरी प्यारी माँ, इस्सलिये तो कह रही हु की दुनियामे सबसे अच्छी है मेरी माँ.
माँ : छोड़ मुझे, ज्यादा मस्का मात लगा. कब वापस जानेवाली है?
जूही : वैसे तो आज hi जानेवाली थी पर अब सोच रही हु एक दिन रुक jau(Ye कह कर उसने मेरी और देखा) में सोच रही थी की शिव को मेरा गांव दिखाऊ.
माँ : ठीक है, पर खाने के वक़्त तक आ जाना.
जूही : ठीक है माँ. चलो शिव.
हम दोनों बहार आये, जूही ने एक बीके निकली, में तो उसे देखता hi रहा, क्या लड़की है यार. बाइक चालू कर के मुझे बैठने को कहा तो में बेथ गया. उसने गांव की और बाइक दौड़ा दी.
















