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जूही मुझे छोड़ने आयी थी तो में स्कूल जल्दी पहुंच गया था, वो मुझे छोड़ कर चली गयी, मापने दोस्तों के पास चला गया. उन्दोनो के चेहरे पर बारे बजे हुए थे.
शिव : क्या हुआ, मुँह क्यों लटका रक्खा है?
महेश : (मेरी और देखते hue)Jaise तुजे पता hi नहीं, अगर फ़ैल हुआ तो वैट लगनेवाली है.
शिव : तो फिर पढ़ाई किआ करो, पढ़ाई करनी नहीं और फिर ऐसी चिंता करनी है, क्या फायदा होगा?
हर्ष: ज्यादा लेक्चर मात de.(Tabhi स्कूल की घंटी baji)Chalo बुलावा आया है. (उसने जिस तरह से कहा था मेरी हसी निकल गयी, हम सब क्लास के पास पहुंचे hi थे की मुझे बिना मैडम आती दिखाई दी, मैडम को देख कर महेश और हर्ष जल्दी से क्लास में घुस गए, पर मेने मैडम की आँखों में देखा तो वो मुझसे बात करना चाहती थी, तो में दरवाजे पर hi रुक गया. वो नजदीक आयी.
मैडम : कैसी तबियत है शिव?
शिव : अच्छा हु मैडम.
मैडम : दर्द तो नहीं है?
शिव : नहीं मैडम, सब ठीक है. (ज्यादा तो बात कर नहीं शक्ति थे तो हम अंदर चले गए, हजारी लेने के बाद उन्होंने रिजल्ट के बारे में बोलै)
मैडम : ये तुम लोगो की पहली एग्जाम थी, कई लोगो के अच्छे मार्क है और कुछ के बहोत ज्यादा ख़राब, जिनके ख़राब है उन्हें अपने आप पर ध्यान देने की जरुरत है, अगर ऐसा hi चलेगा तो वो फाइनल में फ़ैल भी हो शक्ति है, अगर पढ़ाई में कोई दिक्कत है तो मुझसे या अपने विषय शिक्षक से वो पूछ कर अपने अपने डाउट क्लियर कर शक्ति है, अभी भी तुम्हारे पास समय है तो सुधर जाओ, वैसे तो ये पहली hi एग्जाम है तो किसी को ज्यादा खुस और दुखी होने की जरुरत नहीं है, सब एक एक करके अपने अपने रिजल्ट ले लो और घर से सिग्न करवा कर वापस जमा करवाना है. वैस्वी से रहा नहीं गया.
वैस्वी : मैडम किसका पहला नंबर है?
मैडम : ये पहली hi एग्जाम है तो स्कूल का नियम है की ऐसे किसी को नंबर न दिए जाये, सिर्फ ग्रेड दिए जाते है.
वैस्वी : फिर भी मैडम, आपको तो पता होगा की किसके मार्क सबसे ज्यादा है?
मैडम : है मुझे पता है, पर फिर भी मेने कहा न की ये स्कूल के नियमो के खिलाफ है की किसी को नंबर दिए जाये, क्यों की इसकी वजह से कई बच्चो में मायूसी आ जाती है, तुम अपने मार्क पर ध्यान दो, अपना रिजल्ट ले लो.
वैस्वी का मुँह लटक गया, उसने सोचा था की मैडम उसका नाम अनाउंस करेगी और सबके सामने ये साबित हो जायेगा की वो शिव से भी होशियार है. उसने अपना रिजल्ट देखा, उसे ा+ रैंक मिला हुआ था, पर उसके चेहरे पर खुसी नहीं थी, उसने मुद कर शिव की और देखा तो वो लोग भी अपना रिजल्ट देख रहे थे, शिव के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान थी वही उसके दोस्त भी खुस थे. उसकोजन न था की शिव के कितने मार्क आये है. उसका ध्यानतब भांग हुआ जब संयम ने उसे पीछे से बुलाया.
संयम : देख वैस्वी मेरा ा+ है, तेरा बता. (वैस्वी ने उसे अपना रिजल्ट दिया, उसके मार्क शमीम से ज्यादा थे, पर संयम अपने रिजल्ट से खुस थी, उसने देखा की वैस्वी बार बार पीछे देख रही है, तो उसकी नज़र भी शिव पर पड़ी, वो सब खुस थे, वो भी जान न चाहती थी की शिव के कितने मार्क है, पर अभी नहीं पूछ सकते थे, मैडम ने थोड़ी देर पढ़ाया फिर वो चली गयी, ऐसे hi दो पीरियड निकल गए, जब छोटी रेसस्स हुई तो वैस्वी ने देखा की शिव और उसके दोस्त बहार जा रहे है, उसने फ़ौरन संयम से कहा.
वैस्वी : चल बहार जा कर आते है. (संयम जानती थी की वो बहार क्यों जाना चाहती है, वो दोनों बहार निकले, कही भी शिव और उसके दोस्त दिखाई नहीं दे रहे थे, वैस्वी badbadayi)Kaha गए???
संयम : (उसने सुना की वैस्वी क्या बड़बड़ायी पर वो जान बुज कर वो अनजान बानी रही, वैस्वी की बेचैनी देख कर उसे बहोत मज़ा आ रहा tha.)Chal न रुक क्यों गयी?
वैस्वी : किस तरफ जाये?
संयम : किस तरफ क्या, मुझे लगा तुजे बाथरूम जाना है, जाना है न?
वैस्वी : है, चल. (वो दोनों बाथरूम की और जाने लगी, वैस्वी इधर उधर शिव को hi धुंध रही थी, बाथरूम आ गया पर शिव न दिखा, वो दोनों बाथरूम में चले गए, पेशाब कर के वो बहार आये, फिर वापस क्लास की और जा रहे थे की थोड़ी दूर शिव और उसके दोस्त दिखे, पर वो जा कर पूछ तो नहीं शक्ति थी, उसने संयम से kaha)Dekh वो तेरा दोस्त खड़ा hai(Samim ने देखा की वो शिव की और िःस्सारा कर रही है, पर उसने खास ध्यान नहीं दिया, वैस्वी ने झुंझलाते हुए kaha)Tuje मिलना नहीं है, उस से?
संयम : (अनजान बनते hue)Milana है??? किस की बात कर रही है तू?
वैस्वी : वो है न तेरा dost(Usne शिव की और इस्सर किआ)
संयम : (उसे पता था की वह शिव खड़ा hai)Harsh की बात कर रही है तू?
वैस्वी : (झुंझलाते hue)Harsh तेरा दोस्त है?
संयम : (अपनी हसी दबाते hue)Ha, महेश भी मेरा दोस्त है, पर अभी नहीं मिलना मुझे, बाद में मिल लुंगी.
वैस्वी : (वो अंदर hi अंदर संयम पर बहोत गुस्सा हो रही थी, उसकी बोखलाहट उसके चेहरे पर नज़र आ रही thi)Me शिव की बात कर रही हु.
संयम : ओह शिईयिव, नहीं तो मुझे उस से क्यों मिलना है?
वैस्वी : उसके मार्क्स नहीं पूछने तुजे?
संयम : (शांति se)Nahi, मुझे पता है की उसके मार्क्स अच्छे hi होंगे, बाद में मिलूंगी तब पूछ लुंगी.
वैस्वी : जा अभी पूछ ले.
संयम : नहीं, वैसे भी तुजे पसंद नहीं की में शिव से मिलु, तो जब तू नहीं होगी तब मिल lungi(Samim अंदर hi अंदर बहोत है रही थी)
वैस्वी : (अपना गुस्सा पिटे हुए उसने अपने आपको शांत किआ, और जितनी नरम आवाज कर शक्ति थी उसने की) नहीं मुझे कोई बुरा नहीं लगेगा, जा तू मिल आ.
संयम : छोड़ न, वैसे भी अभी टाइम नहीं है, रेसस्स ख़तम होनेवाली है, में बाद में मिल लुंगी. (और वो क्लास की और चलने लगी, वैस्वी वही कड़ी रह कर संयम को देख रही थी, संयम आगे जा कर ruki)Chal न, क्लास में नहीं जाना क्या.?
वैस्वी ने अपने आप को शांत किआ और वो चल पड़ी, संयम उसकी हालत पे बहोत मज़े ले रही थी, वैसे उसको भी जान न था की शिव के कितने मार्क है, पर वो जानती थी की शिव पिछले दिनों बहोत बिजी रहा है और शायद उसके मार्क वैस्वी से काम भी हो शक्ति है क्यों की उसने वैस्वी का रिजल्ट देखा था, तकरीबन सब में उसके मार्क ज्यादा थे, तो वो उसे मौका नहीं देना चाहती थी की वो शिव को निचा दिखाए. वो बाद में भी शिव से पूछ सकती थी.
बड़ी रेसस्स में भी जब दोनों गार्डन में बेथ के नास्ता कर रही थी तो भी वैस्वी ने दो तीन बार संयम से कहा की जा कर मिल ले शिव से पर संयम ने ये कह के मन कर दिया की तुजे पसंद नहीं है न इस लिए वो उस से मिलने नहीं जा रही है. वैस्वी अंदर hi अंदर बहोत बेचैन थी, किसी भी तरह वो शिव के मार्क जान न चाहती थी, पर संयम किसी भी तरह से मान hi नहीं रही थी. जब स्कूल की छुट्टी हो गयी तो वो दोनों चलते हुए स्कूटर की और जा रही थी तो शिव पार्किंग में अकेला खड़ा था, वो वैस्वी के स्कूटर के पास नजदीक hi खड़ा था, वो दोनों चलते हुए स्कूटर के नजदीक पहुंची, अब संयम के पास और कोई चारा नहीं था.
संयम : Hi.
शिव : (मुस्कुराते hue)Hi.
संयम : अकेले क्यों खड़े हो, हर्ष और महेश कहा गए.
शिव : वो लोग अभी अभी गए है, में जूही का इंतजार कर रहा हु, वो मुझे लेने आनेवाली है.
वैस्वी : वो तो तुम्हारी मैडम है न, तो फिर नाम से क्यों बुला रहे हो? (वैसे तो वैस्वी बात नहीं करना चाहती थी पर वो बिच में बोल hi पड़ी)
शिव : (उसके ऐसे पूछने पर मेने उसकी और देखा, वो झेप गयी, में जूही को चाहे कैसे भी बुलाऊ, उस से उसे क्या मतलब था जो वो ऐसा पूछ रही है, पर जब पूछा तो मेने जवाब diya)Hum अब दोस्त है, और उसने hi मुझे अपने नाम से बुलाने को कहा है. (शिव ने शांति से hi जवाब दिया)
वैस्वी : (वो भी अपने आप को कोष रही थी, मान में :मुझे क्या जरुरत थी ऐसा पूछने की, वो उन्दोनो के बिच की बात है, पर पता नहीं क्यों मुझे क्यों उसका ऐसे किसी लड़की के साथ होना अच्छा नहीं लगता, मुझे क्या वो जो भी kare)Kya रिजल्ट आया तुम्हारा? (संयम ने वैस्वी को देखा, उसे यकीं नहीं हो रहा था की वैस्वी ने सीधे hi शिव से पूछ लिया)
शिव : ा+ ग्रेड है.
संयम : (बात को टालने के लिए वो बिच में hi बोल padi)Are वह, कोंग्रटुलतिओन्स, मेरा भी ा+ है और वैस्वी का भी.
शिव : तुम दोनों को भी कोंग्रटुलतिओन्स.
वैस्वी : मार्क कितने है?
शिव : (में जनता था की वो क्यों पूछ रही है, पर जब उसने पूछ hi लिया था तो मेने बता दिया)228.
संयम : (जैसे hi संयम ने सुना वो खुस हो गयी, क्यों की वैस्वी के मार्क उसे पता थे, वैस्वी के 225 आये the)Wow! कोंगट्रॉटुलेशन्स शिव, तुम्हारे सबसे ज्यादा hi है. (वैस्वी का चेहरा उतर गया था, जिसे देख मुझे पता चल गया की उसके मार्क काम है)
शिव : थैंक यू, पर इस से क्या फर्क पड़ता है, ये तो सिर्फ पहला टेस्ट था, कोई फाइनल एग्जाम नहीं, ा+ ग्रेड सब के है, तो हम सब एक जैसे hi हुए.
वैस्वी : (बहोत उदास हो चुकी थी, उसने इतनी म्हणत की थी, पर वो पहले नंबर पर नहीं आ पायी थी, उसने बुझे हुए मान से kaha)Congratulations. (और वो स्कूटर की तरफ बढ़ गयी)
जूही भी मुझे आती दिखाई दी, तो में उसकी और बढ़ गया, वैसे मुझे भी यकीं नहीं हो रहा था की मेरे मार्क उस से भी ज्यादा थे, पर सिर्फ पढ़ने से होशियार नहीं बन शक्ति, उसे समझना भी जरुरी होता है, और शायद इसीलिए मेरे मार्क्स ज्यादा थे. वैसे भी ज्यादा फर्क नहीं था पर उस से आगे तो में था hi, में उसमे कुछ नहीं कर शक्ति था, मुझे उसे हराना नहीं था, क्यों की मुझे उस से कोई फर्क भी नहीं पड़ता था. जूही को भी मेने रस्ते में अपना रिजल्ट बता दिया, वो भी खुस हो गयी. उसने मुझे घर छोड़ा और वो चली गयी.
मेने दीदी को भी अपना रिजल्ट बताया, वो खुस हो गयी, मेने खाना खाया, दोपहर को दीदी मुझे नहाने बुलाने आयी, सुबह तो में नहाया नहीं था, मुझे बाथरूम में ले जा कर उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया. मेरे हाथ को संभल कर उन्होंने मेरा शर्ट उतरा, वैसे प्लास्टर नहीं था तो मेरा हाथ खुला था, बस उसे आराम देने के लिए hi कंधे से ले कर हाथ तक की पट्टी थी, उन्होंने मुझे पूरा नंगा कर दिया, भले hi हम दोनों के बिच सब कुछ हो चूका था पर फिर भी एक बार के लिए तो मुझे शर्म आ गयी, मेरी हालत पर वो मुस्कुरायी. उन्होंने मुझे नहलाया, उनके छूने से मेरा लुंड अकड़ गया. (लता उस कड़क लुंड को देख कर शर्माने लगी, पर उसे अच्छा भी लग रहा था, थोड़ी देर बाकि सब जगह साबुन लगाने के बाद उसने लुंड को भी साबुन लगाया, उस कड़क लुंड से वो कुछ ज्यादा देर तक खेलती रही, उसकी छूट भी गीली हो रही थी, जैसे तैसे उसने पानी दाल कर सब साबुन साफ़ किआ, नहलाने के बाद वो टॉवल से उसे पोछने लगी पर लुंड कड़क हो कर खड़ा hi था, वो शर्मा रही थी, सो अपना काम कर रही थी, वो शिव से नज़ारे भी नहीं मिला रही थी, उसने लुंड के निचे लटकते अंडो को भी अच्छे से साफ़ किआ, उसने हिचकिचाते हुए शिव की और देखा तो वो आंखे बंद किये हुए उसके स्पर्श का मज़ा ले रहा था, लता का दिल जोरो से धड़क रहा था, और उसकी सांसे भी तेज चल रही थी, आखिर उस से रहा न गया और उसने लुंड को अपने मुँह में ले लिया, जब उसने देखा की शिव ने उसकी और देखा तो वो शर्मा गयी और नज़ारे झुका ली पर लुंड को चुस्ती रही, वो गरम लुंड उसे इतना पसंद था की वो उसके बगैर रह hi नहीं प् रही थी, वो थोड़ी देर चुस्ती रही, शिव भी उसके शिर को पकड़ कर अपनी कमर आगे पीछे कर रहा था, थोड़ी देर चूसने के बाद वो कड़ी हो गयी, उसे पता था की ऐसे शिव का पानी नहीं निकलेगा, वो बिना शिव की और देखे अपनी पंतय उतरने लगी, उसे पता था की शिव उसे hi देख रहा होगा, वो शर्म से पानी पानी हो रही थी पर, उसके अंदर आग लग चुकी थी, वो अपना पेटीकोट उठाते हुए दीवाल का सहारा ले कर झुक गयी, उसके नंगे कूल्हे शिव की और थे, वो उसका इंतजार करने लगी, जैसे hi शिव ने उसके कूल्हे छुए उसकी आंखे बंद हो गयी, उसके कूल्हे दबाने के बाद वो उसकी छूट और गांड के छेड़ को चाटने लगा, वो और थोड़ा झुक गयी ताकि शिव को आसानी हो, उसने अपनी सिस्किअ दबाने के लिए अपना मुँह हाथ से दबा दिया. थोड़ी देर उसकी छूट चाटने के बाद शिव ने लुंड उसकी छूट के छेड़ पर रक्खा और उसपे लुंड रगड़ने लगा, वो वैसे भी गरम हो गयी थी, लुंड उसकी छूट को फैलता हुआ अंदर उतरने लगा. उन दोनों की प्रेम लीला सुरु हो गयी, आधे घंटे तक शिव ने उसे अच्छे से छोड़ा, उसकी छूट के सरे तर ढीले हो गए थे, इस बिच वो दो बार झाड़ के तृप्त हो गयी, आखिर शिव ने अपन वीर्य उसके कूल्हों पर निकल दिया. वो शर्मा रही थी पर शिव ने उसके होठो को चूसा तो वो लता की तरह अपने शिव से लिपट गयी और उसके होठो को चूस कर अपना प्यार दिखने लगी. जब वो रूम में गयी तो गायत्री और सरिता लेती हुई थी.
सरिता : बहोत देर लगाडी. (हलाकि वो जानती थी की क्यों देर हुई थी पर वो जान बुज कर अपनी सहेली को छेड़ रही थी, और जिर तरह लता शर्मा रही थी उसे और मज़ा आ रहा tha.)Lagta है रगड़ रगड़ कर नहलाया उसे. (गायत्री अपना मुँह छुपाये है रही थी)
लता : (जूठा गुस्सा दिखते hue)Ha तो तुजे क्या, अच्छे hi नहलाऊंगी न, सो जा तू.
वो सब आराम करने लगी. तीन दिन ऐसे hi निकल गए, एक बार भार्गवी मैडम भी मिलने आयी थी. अभी स्टेडियम में, में दौड़ तो नहींपा रहा था तो स्टेडियम के गयम में पैरो की कसरत कर रहा था. चौथे दिन जब में स्कूल से लौटा खाना खा कर बैठा hi था की भार्गवी मैडम आयी.
शिव : आइये मैडम, कैसे आना हुआ?
भार्गवी : डॉक्टर से मेने अपॉइंटमेंट ली हुई है, चेक उप के लिए, तो तुम्हे लेने आयी हु. तुम्हारा कन्धा कैसा है अब.
शिव : अच्छा है मैडम.
भार्गवी : ठीक है फिर, चलो एक बार डॉक्टर को भी दिखा देते है.
वो मुझे ले कर डॉक्टर के पास चली गयी, वह मेरी जाँच की, उनकी भी जाँच हुई, छोटे तो उनको भी लगी थी, घर तो तकरीबन भर चुके थे, और मेरा कन्धा भी अब ठीक था. में और भार्गविमडम डॉक्टर के सामने बैठे थे.
डॉक्टर : सब ठीक है, कोई फाक्टूरे था नहीं तो अब दिक्कत नहीं है, अगर तुम्हे दर्द नहीं है तो तुम्हे अब ये बेल्ट पहन ने की जरुरत नहीं है. वैसे तुम्हारी हड्डिया काफी चौड़ी और मज़बूत है, इसीलिए शायद तुम इतनी मार सेह गए. फिर भी में कुछ दवाइया लिख रहा हु, कुछ दिन उसे लेते रहना, और अगर कोई दिक्कत हो तो मुझे दिखा जाना.
शिव: जी सर.
हम दोनों वह से निकले, मैडम मुझे अपने घर ले गयी. हम दोनों पानी पि कर सोफे पर बैठे हुए थे.
भार्गवी : अब कैसा दर्द है तुम्हारा, हाथ की वजह से कोई दिक्कत तो नहीं हुई?
शिव : (अब में उन्हें क्या कहता, मेरा एक हाथ बंधा हुआ था पर मेरे कई हाथ मेरी सेवा में लगे हुए थे, कभी लतादिदी तो कभी सरितादिदी ने मेरी सेवा की और साथ में सेवा ली, रंजन और गायत्री दीदी ने भी मेरी सेवा का लाभ लिया और मुझे अपनी सेवा दी) नहीं, घर में सब है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई, बल्कि मेरी वजह से उन्हें दिक्कत हुई, आप तो अकेली थी, आप को तो कोई दिक्कत नहीं हुई न.
भार्गवी : वैसे तो कोई दिक्कत नहीं थी, पर शरीर में दर्द रहता था तो नींद खुल जाया करती थी.
शिव : आप को अपनेघर वालो को बुला लेना चाहिए था.
भार्गवी : (थोड़ा मायूसी se)Chhodo उस बात को, अब मेरा उनसे कोई रिस्ता नहीं बचा है.
शिव : (मेने भी उस बात को कुरेदना ठीक नहीं समजा) दर्द तो मेरे बदन में भी था पर कोई न कोई मेरी मालिश कर देता था जिस से मुझे रहत रहती थी.
भार्गवी : तुम खुसनसीब हो जो सब के साथ रहते हो.
शिव : आप के वह भी तो काम करने के लिए कोई औरत आती है, आप उनसे कह शक्ति थी.
भार्गवी : नहीं, मुझे वैसा पसंद नहीं.
शिव : क्या अभी भी आपके शरीर में दर्द है?
भार्गवी : है थोड़ी जकड़न तो है, मेने डॉक्टर को भी बोलै तो उन्होंने भी मालिस का hi सुझाव दिया था, पर ये मुमकिन नहीं.
शिव : अगर आप को बुरा न लगे तो आप मेरे साथ चलिए, लतादिदी या सरितादिदी आपकी मालिस कर देगी.
भार्गवी : थैंक यू शिव, पर में ऐसे किसी को तकलीफ देना नहीं चाहती, डॉक्टर ने दवाइया दी है तो सब ठीक हो जायेगा.
शिव : आप की hi तरह मेरी भी वही हालत थी, मुझे पता है मालिस से कितना आराम मिलता है, प्लीज आप ज्यादा मात सोचिये और मेरे साथ चलिए.
भार्गवी : नहीं, कोई जरुरत नहीं, छोडो उसे वो ठीक हो जायेगा.
शिव : (वो मेरी बात मान नहीं रही थी, तो में उनके पास गया, वो बड़े सोफे पर बैठी थी तो में उनके बाजु में बेथ gaya)Ulta घूम जाइये.
भार्गवी : Kyu?(Unki बाह पकड़ कर उलटी तरफ धकेला तो वो उलटी घूम गयी, में उनके पीछे घुटना तक कर ऊपर हो गया) क्या कर रहे हो तुम? (मेने उनकी बात को अनसुना किआ और उनके कंधे दबाने लगा, वो आगे की और झुक कर अपना कन्धा छुड़ाते hue)Kya कर रहे हो, इसकी कोई जरुरत नहीं है. (उन्होंने थोड़ा रूढ़ तरीके से कहा था, पर मेने उसे नजर अंदाज किआ)
शिव : (उनका कन्धा पकड़ कर मेरी और खींचते hue)Aap सीधी बैठिये. (में उनके दोनों कंधे पकड़ कर उन्हें दबाने लगा और गर्दन से बाह तक के स्नायु को दबा कर मालिश करने लगा)
भार्गवी : छोड़ मुझे शिव (थोड़ा सख्ती से उन्होंने कहा)
शिव : चुप चाप बैठी रहो, जब देखो तब अपनी ढोस जमती रहती हो (मेने भी थोड़ा सख्ती से कहा और उनके कंधे दबाना चालू रक्खा और साथ में अंगूठो से उनकी पीठ को भी दबा रहा था)
भार्गवी : (उसे भी अच्छा लग रहा था, पर कोई उसे ऐसे छुए वो उसे पसंद नहीं था, एक मिनट बाद hi वो बोल padi)Bas हो गया, अब छोडो muje.(Unki आवाज थोड़ी नरम जरूर पड़ी थी पर अभी भी एक चिढ जरूर थी)
शिव : क्या दिक्कत है आप की, चुप चाप बेठियेना, में कर रहा हु न.
भार्गवी : मुझे ये पसंद नहीं की कोई मुझे ऐसे छुए.
शिव : तो में क्या करू (में उनके कंधे की मालिस करता रहा, उनकी गर्दन पर भी में दबा कर मालिस कर रहा था)
भार्गवी : तुम मेरी नरमाई माँ ज्यादा hi गैर लाभ उठा रहे हो, भूलो मत की में कौन हु.
शिव : कोण हो? इंसान hi हो न? की कोई और हो?
भार्गवी : किसी की हिम्मत नहीं है की मेरे साथ ऐसी बात करे.
शिव : (उनकी अकड़ देख कर मुझे भी गुस्सा आ रहा था) वो कोई और होंगे मैडम, ये शिव है, किसी से नहीं डरता. (मेने उन्हें पकड़ा और सोफे पर उल्टा लेता दिया)
भार्गवी : शीइइइइव (चिढ़ते हुए उन्होंने कहा)
शिव : अगर इतना hi गुस्सा आ रहा है तो बाद में निकल लेना, अभी चुप चाप लेती रहिये (पता नहीं मेरी भी सायद खिसक गयी थी, में उनके कंधो से ले कर पीठ तक के भाग को मसलने लगा, मेरे मान में कोई भी ऐसा वैसा विचार भी नहीं था, में बस उन्हें आराम देना चाहता था, उनकी रीढ़ की हड्डी पर में अंगूठे से मालिस करने लगा और साथ में उनके आस पास के हिस्सों को भी मालिस करने लगा, वो भी उसके बाद कुछ न बोली, थोड़ी देर उनकी पीठ की मालिस करने के बाद में उनके पैरो की भी मालिश करने लगा, में सिर्फ घुटनो के निचे और तलवो की hi मालिस कर रहा था, पैरो के मसल्स को भी अच्छे से रिलैक्स कर दिया, फिर से उनके कंधो की मालिश की फिर पैरो की) लो हो गया. (उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, मेने उनके चेहरे को ध्यान से देखा तो वो सो चुकी थी, उनके चेहरे पर शुकुन था, में भी पास वाले सोफे पर बेथ गया, करने को कुछ था नहीं तो मेने भी आंखे बंद कर दी)
भार्गवी लगभग एक घंटे बाद उठी, वो अभी भी सोफे पर उलटी लेती हुई थी, थोड़ी देर वो वैसे hi लेती रही फिर उसने अपना शिर मोड़ कर देखा तो शिव सोफे पर बैठे बैठे सो रहा था, वो उसे देखने लगी, आज जिस तरह से शिव ने उसके साथ किआ था, ऐसी किसी ने हिम्मत नहीं की थी, वो बस थोड़ी देर उसे देख रही थी, उसे समाज नहीं आ रहा था की वो गुस्सा करे की खुस हो. वो अपने जीवन में किसी को दाखिल होने देना नहीं चाहती थी, उसने अपने आप को अकेले बना लिया था, लोगो से सम्बन्ध बनाने से वो कतराती थी, वो अब किसी को भी उसे हर्ट करने का मौका नहीं देना चाहती थी. एक तरफ तो उसे शिव की ये जबरदस्ती अच्छी लगी थी, जिस हक़ से वो उसके साथ पेश आया था, कही न कही वो उसे अच्छा लगा था, पर फिर भी उसे गुस्सा भी आ रहा था, ये गुस्सा उसे किस बात का आ रहा था ये उसे भी पता नहीं चल रहा था. वो उठ कर बेथ गयी, उसका शरीर काफी रिलैक्स लग रहा था, पर ऐसे किसी लड़के का उसके शरीर को छूना उसे अच्छा नहीं लगा था, उसे समाज नहीं आ रहा था की उसने शिव को रोका क्यों नहीं, अगर उसे पसंद नहीं था तो उसने कैसे अपने शरीर को ऐसे छूने दिया. शिव ने उसके कंधो से ले कर उसकी कमर तक के हर हिस्से को छुआ था और उसके पैरो को भी दबाया था, हलाकि वो कपडे पहने हुए थी पर फिर भी आज बरसो बाद किसी ने उसे ऐसे छुआ था. वो उठी और अपने रूम में चली गयी, उसने अलमारी से कपडे निकले, जो कपडे पहने थे उसे निकल दिया, सामने लगे शीशे में वो अपने आपको देखने लगी, ब्रा और पंतय में वो कड़ी थी, उसने अपने आप को ऊपर से निचे तक देखा, सुडौल शरीर की वो मालकिन थी, लोग अक्सर उसे घूरते थे पर वो उन्हें उनकी फितरत मान कर उसे इग्नोर कर देती थी. उसने अपने जीवन से इस हिस्से को जैसे नेस्तो नाबूद कर दिया था, अब उसका काम hi एक मात्रा लक्ष्य बचा हुआ था. उसने एक पूरी लम्बाई का गौण पहना और बहार आयी, शिव अभी भी सोया हुआ था, वो किचन में गयी और चाय बनाने लगी. शिव के लिए भी दूध बनाया, वो बहार आयी, टेबल पर सब रखने के बाद वो शिव के पास गयी, वो थोड़ी देर उसे देखती रही.
भार्गवी : (मान में : ये क्या सोच रही है तू, वो एक स्कूल जाता हुआ एक लड़का है, अभी उसे इतनी समाज नहीं होगी की किसी लड़की या औरत के साथ इस तरह की हरकत नहीं करनी चाहिए, (फिर उसे वो याद आया जब उसका वो अंग कड़ा हो कर उसके कूल्हों के बिच चुभ रहा था) वो तो बस एक हादसा था, वो इतना भी छोटा नहीं है, कुदरत तो अपना असर दिखाएगी hi, एक जवान लड़का अगर किसी लड़की के साथ अगर ऐसे रहेगा तो, वो सब तो हो hi सकता है, उसमे शिव की कहा गलती है, वो परिस्थितिया hi ऐसी हो गयी थी, (उसके चेहरे को देख kar)Kitna मासूम और भोला है, उसे क्या वो अपने रुतबे से डरा रही थी, वो अभी एक मासूम लड़का है, उसे क्या पता की क्या करना चाहिए और क्या नहीं, में यु hi उस पर गुस्सा हो रही थी) शिव, uthooo.(Usne शिव को हिलाया)
शिव : ह्म्मम्म्म्म.
भार्गवी : उठो शिव. (मेने आंखे खोल कर उन्हें देखा, उनके चेहरे पर न गुस्सा था न मुस्कान) हाथ मुँह धो लो, मेने दूध बनाया है. (मेने उन्हें देखा और उठ कर हाथ मुँह धो कर वापस बेथ गया, उन्होंने मेरी और दूध बढ़ाया) लो, दूध पीओ.
शिव : (दुधलेटे hue)Aap तो सो hi गयी थी.
भार्गवी : पतानहीं कैसे, पर है, मुझे नींद आ गयी थी.
शिव : देखा, मेने कहा था न की आपको अच्छा लगेगा, आप ख़म खा गुस्सा हो रही थी.
भार्गवी : तुम मेरे साथ वैसा सब कर रहे थे तो गुस्सा hi करुँगी न, तुम ऐसे hi मुझे कैसे छू सकते हो.
शिव : इसमें क्या दिक्कत है, ओह अच्छा, आप लड़की हो इस लिए ऐसा कह रही थी, पर दर्द तो लड़की और लड़का नहीं देखता, और मेने आप को लड़की समाज कर नहीं, एक दर्द से पीड़ित इंसान समाज कर आपको छुआ था.
भार्गवी : बहोत बाटे बनानी आती है तुम्हे.
शिव : में बाटे नहीं बना रहा था बस बता रहा था. (दूध ख़तम हो गया tha)Achchha में चलता हु.
भार्गवी : कैसे जाओगे? में छोड़ देती हु तुम्हे.
शिव : में चला जाऊंगा.
भार्गवी : एक काम करो, मेरी बाइक ले जाओ.
शिव : उसकी जरुरत नहीं, में चला जाऊंगा.
भार्गवी : वैसे भी वो पड़ी रहती है, अभी मुझे उसकी जरुआत नहीं है, तुम जब आओ तब वापस ले आना.
शिव : ठीक है, में स्टेडियम से लौट ते हुए दे जाऊंगा.
भार्गवी : तो फिर खाना यही खाना
शिव : (अब में क्या kehta)Thik है मैडम.
में चला गया वह से. घर जा कर तैयार हो कर जूही के घर पहुंच गया, वो निकल hi रही थी, मेरे हाथ में पट्टी न देख कर उसने वजह पूछी तो मेने बता दिया की डॉक्टर ने निकल दी है. बाइक के बारे में भी पूछने लगी तो मेने बता दिया की मैडम के साथ गया था तो उन्होंने दी है. हम दोनों बाइक पर hi स्टेडियम गए, वह मेने दौड़ तो लगायी पर ज्यादा नहीं. स्टेडियम से निकल hi रहा था की पवनसीर का फ़ोन आया, उन्होंने मुझे अपने घर बुलाया था. मेने जूही को घर छोड़ा और पवनसीर के घर की और निकल गया.
जूही मुझे छोड़ने आयी थी तो में स्कूल जल्दी पहुंच गया था, वो मुझे छोड़ कर चली गयी, मापने दोस्तों के पास चला गया. उन्दोनो के चेहरे पर बारे बजे हुए थे.
शिव : क्या हुआ, मुँह क्यों लटका रक्खा है?
महेश : (मेरी और देखते hue)Jaise तुजे पता hi नहीं, अगर फ़ैल हुआ तो वैट लगनेवाली है.
शिव : तो फिर पढ़ाई किआ करो, पढ़ाई करनी नहीं और फिर ऐसी चिंता करनी है, क्या फायदा होगा?
हर्ष: ज्यादा लेक्चर मात de.(Tabhi स्कूल की घंटी baji)Chalo बुलावा आया है. (उसने जिस तरह से कहा था मेरी हसी निकल गयी, हम सब क्लास के पास पहुंचे hi थे की मुझे बिना मैडम आती दिखाई दी, मैडम को देख कर महेश और हर्ष जल्दी से क्लास में घुस गए, पर मेने मैडम की आँखों में देखा तो वो मुझसे बात करना चाहती थी, तो में दरवाजे पर hi रुक गया. वो नजदीक आयी.
मैडम : कैसी तबियत है शिव?
शिव : अच्छा हु मैडम.
मैडम : दर्द तो नहीं है?
शिव : नहीं मैडम, सब ठीक है. (ज्यादा तो बात कर नहीं शक्ति थे तो हम अंदर चले गए, हजारी लेने के बाद उन्होंने रिजल्ट के बारे में बोलै)
मैडम : ये तुम लोगो की पहली एग्जाम थी, कई लोगो के अच्छे मार्क है और कुछ के बहोत ज्यादा ख़राब, जिनके ख़राब है उन्हें अपने आप पर ध्यान देने की जरुरत है, अगर ऐसा hi चलेगा तो वो फाइनल में फ़ैल भी हो शक्ति है, अगर पढ़ाई में कोई दिक्कत है तो मुझसे या अपने विषय शिक्षक से वो पूछ कर अपने अपने डाउट क्लियर कर शक्ति है, अभी भी तुम्हारे पास समय है तो सुधर जाओ, वैसे तो ये पहली hi एग्जाम है तो किसी को ज्यादा खुस और दुखी होने की जरुरत नहीं है, सब एक एक करके अपने अपने रिजल्ट ले लो और घर से सिग्न करवा कर वापस जमा करवाना है. वैस्वी से रहा नहीं गया.
वैस्वी : मैडम किसका पहला नंबर है?
मैडम : ये पहली hi एग्जाम है तो स्कूल का नियम है की ऐसे किसी को नंबर न दिए जाये, सिर्फ ग्रेड दिए जाते है.
वैस्वी : फिर भी मैडम, आपको तो पता होगा की किसके मार्क सबसे ज्यादा है?
मैडम : है मुझे पता है, पर फिर भी मेने कहा न की ये स्कूल के नियमो के खिलाफ है की किसी को नंबर दिए जाये, क्यों की इसकी वजह से कई बच्चो में मायूसी आ जाती है, तुम अपने मार्क पर ध्यान दो, अपना रिजल्ट ले लो.
वैस्वी का मुँह लटक गया, उसने सोचा था की मैडम उसका नाम अनाउंस करेगी और सबके सामने ये साबित हो जायेगा की वो शिव से भी होशियार है. उसने अपना रिजल्ट देखा, उसे ा+ रैंक मिला हुआ था, पर उसके चेहरे पर खुसी नहीं थी, उसने मुद कर शिव की और देखा तो वो लोग भी अपना रिजल्ट देख रहे थे, शिव के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान थी वही उसके दोस्त भी खुस थे. उसकोजन न था की शिव के कितने मार्क आये है. उसका ध्यानतब भांग हुआ जब संयम ने उसे पीछे से बुलाया.
संयम : देख वैस्वी मेरा ा+ है, तेरा बता. (वैस्वी ने उसे अपना रिजल्ट दिया, उसके मार्क शमीम से ज्यादा थे, पर संयम अपने रिजल्ट से खुस थी, उसने देखा की वैस्वी बार बार पीछे देख रही है, तो उसकी नज़र भी शिव पर पड़ी, वो सब खुस थे, वो भी जान न चाहती थी की शिव के कितने मार्क है, पर अभी नहीं पूछ सकते थे, मैडम ने थोड़ी देर पढ़ाया फिर वो चली गयी, ऐसे hi दो पीरियड निकल गए, जब छोटी रेसस्स हुई तो वैस्वी ने देखा की शिव और उसके दोस्त बहार जा रहे है, उसने फ़ौरन संयम से कहा.
वैस्वी : चल बहार जा कर आते है. (संयम जानती थी की वो बहार क्यों जाना चाहती है, वो दोनों बहार निकले, कही भी शिव और उसके दोस्त दिखाई नहीं दे रहे थे, वैस्वी badbadayi)Kaha गए???
संयम : (उसने सुना की वैस्वी क्या बड़बड़ायी पर वो जान बुज कर वो अनजान बानी रही, वैस्वी की बेचैनी देख कर उसे बहोत मज़ा आ रहा tha.)Chal न रुक क्यों गयी?
वैस्वी : किस तरफ जाये?
संयम : किस तरफ क्या, मुझे लगा तुजे बाथरूम जाना है, जाना है न?
वैस्वी : है, चल. (वो दोनों बाथरूम की और जाने लगी, वैस्वी इधर उधर शिव को hi धुंध रही थी, बाथरूम आ गया पर शिव न दिखा, वो दोनों बाथरूम में चले गए, पेशाब कर के वो बहार आये, फिर वापस क्लास की और जा रहे थे की थोड़ी दूर शिव और उसके दोस्त दिखे, पर वो जा कर पूछ तो नहीं शक्ति थी, उसने संयम से kaha)Dekh वो तेरा दोस्त खड़ा hai(Samim ने देखा की वो शिव की और िःस्सारा कर रही है, पर उसने खास ध्यान नहीं दिया, वैस्वी ने झुंझलाते हुए kaha)Tuje मिलना नहीं है, उस से?
संयम : (अनजान बनते hue)Milana है??? किस की बात कर रही है तू?
वैस्वी : वो है न तेरा dost(Usne शिव की और इस्सर किआ)
संयम : (उसे पता था की वह शिव खड़ा hai)Harsh की बात कर रही है तू?
वैस्वी : (झुंझलाते hue)Harsh तेरा दोस्त है?
संयम : (अपनी हसी दबाते hue)Ha, महेश भी मेरा दोस्त है, पर अभी नहीं मिलना मुझे, बाद में मिल लुंगी.
वैस्वी : (वो अंदर hi अंदर संयम पर बहोत गुस्सा हो रही थी, उसकी बोखलाहट उसके चेहरे पर नज़र आ रही thi)Me शिव की बात कर रही हु.
संयम : ओह शिईयिव, नहीं तो मुझे उस से क्यों मिलना है?
वैस्वी : उसके मार्क्स नहीं पूछने तुजे?
संयम : (शांति se)Nahi, मुझे पता है की उसके मार्क्स अच्छे hi होंगे, बाद में मिलूंगी तब पूछ लुंगी.
वैस्वी : जा अभी पूछ ले.
संयम : नहीं, वैसे भी तुजे पसंद नहीं की में शिव से मिलु, तो जब तू नहीं होगी तब मिल lungi(Samim अंदर hi अंदर बहोत है रही थी)
वैस्वी : (अपना गुस्सा पिटे हुए उसने अपने आपको शांत किआ, और जितनी नरम आवाज कर शक्ति थी उसने की) नहीं मुझे कोई बुरा नहीं लगेगा, जा तू मिल आ.
संयम : छोड़ न, वैसे भी अभी टाइम नहीं है, रेसस्स ख़तम होनेवाली है, में बाद में मिल लुंगी. (और वो क्लास की और चलने लगी, वैस्वी वही कड़ी रह कर संयम को देख रही थी, संयम आगे जा कर ruki)Chal न, क्लास में नहीं जाना क्या.?
वैस्वी ने अपने आप को शांत किआ और वो चल पड़ी, संयम उसकी हालत पे बहोत मज़े ले रही थी, वैसे उसको भी जान न था की शिव के कितने मार्क है, पर वो जानती थी की शिव पिछले दिनों बहोत बिजी रहा है और शायद उसके मार्क वैस्वी से काम भी हो शक्ति है क्यों की उसने वैस्वी का रिजल्ट देखा था, तकरीबन सब में उसके मार्क ज्यादा थे, तो वो उसे मौका नहीं देना चाहती थी की वो शिव को निचा दिखाए. वो बाद में भी शिव से पूछ सकती थी.
बड़ी रेसस्स में भी जब दोनों गार्डन में बेथ के नास्ता कर रही थी तो भी वैस्वी ने दो तीन बार संयम से कहा की जा कर मिल ले शिव से पर संयम ने ये कह के मन कर दिया की तुजे पसंद नहीं है न इस लिए वो उस से मिलने नहीं जा रही है. वैस्वी अंदर hi अंदर बहोत बेचैन थी, किसी भी तरह वो शिव के मार्क जान न चाहती थी, पर संयम किसी भी तरह से मान hi नहीं रही थी. जब स्कूल की छुट्टी हो गयी तो वो दोनों चलते हुए स्कूटर की और जा रही थी तो शिव पार्किंग में अकेला खड़ा था, वो वैस्वी के स्कूटर के पास नजदीक hi खड़ा था, वो दोनों चलते हुए स्कूटर के नजदीक पहुंची, अब संयम के पास और कोई चारा नहीं था.
संयम : Hi.
शिव : (मुस्कुराते hue)Hi.
संयम : अकेले क्यों खड़े हो, हर्ष और महेश कहा गए.
शिव : वो लोग अभी अभी गए है, में जूही का इंतजार कर रहा हु, वो मुझे लेने आनेवाली है.
वैस्वी : वो तो तुम्हारी मैडम है न, तो फिर नाम से क्यों बुला रहे हो? (वैसे तो वैस्वी बात नहीं करना चाहती थी पर वो बिच में बोल hi पड़ी)
शिव : (उसके ऐसे पूछने पर मेने उसकी और देखा, वो झेप गयी, में जूही को चाहे कैसे भी बुलाऊ, उस से उसे क्या मतलब था जो वो ऐसा पूछ रही है, पर जब पूछा तो मेने जवाब diya)Hum अब दोस्त है, और उसने hi मुझे अपने नाम से बुलाने को कहा है. (शिव ने शांति से hi जवाब दिया)
वैस्वी : (वो भी अपने आप को कोष रही थी, मान में :मुझे क्या जरुरत थी ऐसा पूछने की, वो उन्दोनो के बिच की बात है, पर पता नहीं क्यों मुझे क्यों उसका ऐसे किसी लड़की के साथ होना अच्छा नहीं लगता, मुझे क्या वो जो भी kare)Kya रिजल्ट आया तुम्हारा? (संयम ने वैस्वी को देखा, उसे यकीं नहीं हो रहा था की वैस्वी ने सीधे hi शिव से पूछ लिया)
शिव : ा+ ग्रेड है.
संयम : (बात को टालने के लिए वो बिच में hi बोल padi)Are वह, कोंग्रटुलतिओन्स, मेरा भी ा+ है और वैस्वी का भी.
शिव : तुम दोनों को भी कोंग्रटुलतिओन्स.
वैस्वी : मार्क कितने है?
शिव : (में जनता था की वो क्यों पूछ रही है, पर जब उसने पूछ hi लिया था तो मेने बता दिया)228.
संयम : (जैसे hi संयम ने सुना वो खुस हो गयी, क्यों की वैस्वी के मार्क उसे पता थे, वैस्वी के 225 आये the)Wow! कोंगट्रॉटुलेशन्स शिव, तुम्हारे सबसे ज्यादा hi है. (वैस्वी का चेहरा उतर गया था, जिसे देख मुझे पता चल गया की उसके मार्क काम है)
शिव : थैंक यू, पर इस से क्या फर्क पड़ता है, ये तो सिर्फ पहला टेस्ट था, कोई फाइनल एग्जाम नहीं, ा+ ग्रेड सब के है, तो हम सब एक जैसे hi हुए.
वैस्वी : (बहोत उदास हो चुकी थी, उसने इतनी म्हणत की थी, पर वो पहले नंबर पर नहीं आ पायी थी, उसने बुझे हुए मान से kaha)Congratulations. (और वो स्कूटर की तरफ बढ़ गयी)
जूही भी मुझे आती दिखाई दी, तो में उसकी और बढ़ गया, वैसे मुझे भी यकीं नहीं हो रहा था की मेरे मार्क उस से भी ज्यादा थे, पर सिर्फ पढ़ने से होशियार नहीं बन शक्ति, उसे समझना भी जरुरी होता है, और शायद इसीलिए मेरे मार्क्स ज्यादा थे. वैसे भी ज्यादा फर्क नहीं था पर उस से आगे तो में था hi, में उसमे कुछ नहीं कर शक्ति था, मुझे उसे हराना नहीं था, क्यों की मुझे उस से कोई फर्क भी नहीं पड़ता था. जूही को भी मेने रस्ते में अपना रिजल्ट बता दिया, वो भी खुस हो गयी. उसने मुझे घर छोड़ा और वो चली गयी.
मेने दीदी को भी अपना रिजल्ट बताया, वो खुस हो गयी, मेने खाना खाया, दोपहर को दीदी मुझे नहाने बुलाने आयी, सुबह तो में नहाया नहीं था, मुझे बाथरूम में ले जा कर उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया. मेरे हाथ को संभल कर उन्होंने मेरा शर्ट उतरा, वैसे प्लास्टर नहीं था तो मेरा हाथ खुला था, बस उसे आराम देने के लिए hi कंधे से ले कर हाथ तक की पट्टी थी, उन्होंने मुझे पूरा नंगा कर दिया, भले hi हम दोनों के बिच सब कुछ हो चूका था पर फिर भी एक बार के लिए तो मुझे शर्म आ गयी, मेरी हालत पर वो मुस्कुरायी. उन्होंने मुझे नहलाया, उनके छूने से मेरा लुंड अकड़ गया. (लता उस कड़क लुंड को देख कर शर्माने लगी, पर उसे अच्छा भी लग रहा था, थोड़ी देर बाकि सब जगह साबुन लगाने के बाद उसने लुंड को भी साबुन लगाया, उस कड़क लुंड से वो कुछ ज्यादा देर तक खेलती रही, उसकी छूट भी गीली हो रही थी, जैसे तैसे उसने पानी दाल कर सब साबुन साफ़ किआ, नहलाने के बाद वो टॉवल से उसे पोछने लगी पर लुंड कड़क हो कर खड़ा hi था, वो शर्मा रही थी, सो अपना काम कर रही थी, वो शिव से नज़ारे भी नहीं मिला रही थी, उसने लुंड के निचे लटकते अंडो को भी अच्छे से साफ़ किआ, उसने हिचकिचाते हुए शिव की और देखा तो वो आंखे बंद किये हुए उसके स्पर्श का मज़ा ले रहा था, लता का दिल जोरो से धड़क रहा था, और उसकी सांसे भी तेज चल रही थी, आखिर उस से रहा न गया और उसने लुंड को अपने मुँह में ले लिया, जब उसने देखा की शिव ने उसकी और देखा तो वो शर्मा गयी और नज़ारे झुका ली पर लुंड को चुस्ती रही, वो गरम लुंड उसे इतना पसंद था की वो उसके बगैर रह hi नहीं प् रही थी, वो थोड़ी देर चुस्ती रही, शिव भी उसके शिर को पकड़ कर अपनी कमर आगे पीछे कर रहा था, थोड़ी देर चूसने के बाद वो कड़ी हो गयी, उसे पता था की ऐसे शिव का पानी नहीं निकलेगा, वो बिना शिव की और देखे अपनी पंतय उतरने लगी, उसे पता था की शिव उसे hi देख रहा होगा, वो शर्म से पानी पानी हो रही थी पर, उसके अंदर आग लग चुकी थी, वो अपना पेटीकोट उठाते हुए दीवाल का सहारा ले कर झुक गयी, उसके नंगे कूल्हे शिव की और थे, वो उसका इंतजार करने लगी, जैसे hi शिव ने उसके कूल्हे छुए उसकी आंखे बंद हो गयी, उसके कूल्हे दबाने के बाद वो उसकी छूट और गांड के छेड़ को चाटने लगा, वो और थोड़ा झुक गयी ताकि शिव को आसानी हो, उसने अपनी सिस्किअ दबाने के लिए अपना मुँह हाथ से दबा दिया. थोड़ी देर उसकी छूट चाटने के बाद शिव ने लुंड उसकी छूट के छेड़ पर रक्खा और उसपे लुंड रगड़ने लगा, वो वैसे भी गरम हो गयी थी, लुंड उसकी छूट को फैलता हुआ अंदर उतरने लगा. उन दोनों की प्रेम लीला सुरु हो गयी, आधे घंटे तक शिव ने उसे अच्छे से छोड़ा, उसकी छूट के सरे तर ढीले हो गए थे, इस बिच वो दो बार झाड़ के तृप्त हो गयी, आखिर शिव ने अपन वीर्य उसके कूल्हों पर निकल दिया. वो शर्मा रही थी पर शिव ने उसके होठो को चूसा तो वो लता की तरह अपने शिव से लिपट गयी और उसके होठो को चूस कर अपना प्यार दिखने लगी. जब वो रूम में गयी तो गायत्री और सरिता लेती हुई थी.
सरिता : बहोत देर लगाडी. (हलाकि वो जानती थी की क्यों देर हुई थी पर वो जान बुज कर अपनी सहेली को छेड़ रही थी, और जिर तरह लता शर्मा रही थी उसे और मज़ा आ रहा tha.)Lagta है रगड़ रगड़ कर नहलाया उसे. (गायत्री अपना मुँह छुपाये है रही थी)
लता : (जूठा गुस्सा दिखते hue)Ha तो तुजे क्या, अच्छे hi नहलाऊंगी न, सो जा तू.
वो सब आराम करने लगी. तीन दिन ऐसे hi निकल गए, एक बार भार्गवी मैडम भी मिलने आयी थी. अभी स्टेडियम में, में दौड़ तो नहींपा रहा था तो स्टेडियम के गयम में पैरो की कसरत कर रहा था. चौथे दिन जब में स्कूल से लौटा खाना खा कर बैठा hi था की भार्गवी मैडम आयी.
शिव : आइये मैडम, कैसे आना हुआ?
भार्गवी : डॉक्टर से मेने अपॉइंटमेंट ली हुई है, चेक उप के लिए, तो तुम्हे लेने आयी हु. तुम्हारा कन्धा कैसा है अब.
शिव : अच्छा है मैडम.
भार्गवी : ठीक है फिर, चलो एक बार डॉक्टर को भी दिखा देते है.
वो मुझे ले कर डॉक्टर के पास चली गयी, वह मेरी जाँच की, उनकी भी जाँच हुई, छोटे तो उनको भी लगी थी, घर तो तकरीबन भर चुके थे, और मेरा कन्धा भी अब ठीक था. में और भार्गविमडम डॉक्टर के सामने बैठे थे.
डॉक्टर : सब ठीक है, कोई फाक्टूरे था नहीं तो अब दिक्कत नहीं है, अगर तुम्हे दर्द नहीं है तो तुम्हे अब ये बेल्ट पहन ने की जरुरत नहीं है. वैसे तुम्हारी हड्डिया काफी चौड़ी और मज़बूत है, इसीलिए शायद तुम इतनी मार सेह गए. फिर भी में कुछ दवाइया लिख रहा हु, कुछ दिन उसे लेते रहना, और अगर कोई दिक्कत हो तो मुझे दिखा जाना.
शिव: जी सर.
हम दोनों वह से निकले, मैडम मुझे अपने घर ले गयी. हम दोनों पानी पि कर सोफे पर बैठे हुए थे.
भार्गवी : अब कैसा दर्द है तुम्हारा, हाथ की वजह से कोई दिक्कत तो नहीं हुई?
शिव : (अब में उन्हें क्या कहता, मेरा एक हाथ बंधा हुआ था पर मेरे कई हाथ मेरी सेवा में लगे हुए थे, कभी लतादिदी तो कभी सरितादिदी ने मेरी सेवा की और साथ में सेवा ली, रंजन और गायत्री दीदी ने भी मेरी सेवा का लाभ लिया और मुझे अपनी सेवा दी) नहीं, घर में सब है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई, बल्कि मेरी वजह से उन्हें दिक्कत हुई, आप तो अकेली थी, आप को तो कोई दिक्कत नहीं हुई न.
भार्गवी : वैसे तो कोई दिक्कत नहीं थी, पर शरीर में दर्द रहता था तो नींद खुल जाया करती थी.
शिव : आप को अपनेघर वालो को बुला लेना चाहिए था.
भार्गवी : (थोड़ा मायूसी se)Chhodo उस बात को, अब मेरा उनसे कोई रिस्ता नहीं बचा है.
शिव : (मेने भी उस बात को कुरेदना ठीक नहीं समजा) दर्द तो मेरे बदन में भी था पर कोई न कोई मेरी मालिश कर देता था जिस से मुझे रहत रहती थी.
भार्गवी : तुम खुसनसीब हो जो सब के साथ रहते हो.
शिव : आप के वह भी तो काम करने के लिए कोई औरत आती है, आप उनसे कह शक्ति थी.
भार्गवी : नहीं, मुझे वैसा पसंद नहीं.
शिव : क्या अभी भी आपके शरीर में दर्द है?
भार्गवी : है थोड़ी जकड़न तो है, मेने डॉक्टर को भी बोलै तो उन्होंने भी मालिस का hi सुझाव दिया था, पर ये मुमकिन नहीं.
शिव : अगर आप को बुरा न लगे तो आप मेरे साथ चलिए, लतादिदी या सरितादिदी आपकी मालिस कर देगी.
भार्गवी : थैंक यू शिव, पर में ऐसे किसी को तकलीफ देना नहीं चाहती, डॉक्टर ने दवाइया दी है तो सब ठीक हो जायेगा.
शिव : आप की hi तरह मेरी भी वही हालत थी, मुझे पता है मालिस से कितना आराम मिलता है, प्लीज आप ज्यादा मात सोचिये और मेरे साथ चलिए.
भार्गवी : नहीं, कोई जरुरत नहीं, छोडो उसे वो ठीक हो जायेगा.
शिव : (वो मेरी बात मान नहीं रही थी, तो में उनके पास गया, वो बड़े सोफे पर बैठी थी तो में उनके बाजु में बेथ gaya)Ulta घूम जाइये.
भार्गवी : Kyu?(Unki बाह पकड़ कर उलटी तरफ धकेला तो वो उलटी घूम गयी, में उनके पीछे घुटना तक कर ऊपर हो गया) क्या कर रहे हो तुम? (मेने उनकी बात को अनसुना किआ और उनके कंधे दबाने लगा, वो आगे की और झुक कर अपना कन्धा छुड़ाते hue)Kya कर रहे हो, इसकी कोई जरुरत नहीं है. (उन्होंने थोड़ा रूढ़ तरीके से कहा था, पर मेने उसे नजर अंदाज किआ)
शिव : (उनका कन्धा पकड़ कर मेरी और खींचते hue)Aap सीधी बैठिये. (में उनके दोनों कंधे पकड़ कर उन्हें दबाने लगा और गर्दन से बाह तक के स्नायु को दबा कर मालिश करने लगा)
भार्गवी : छोड़ मुझे शिव (थोड़ा सख्ती से उन्होंने कहा)
शिव : चुप चाप बैठी रहो, जब देखो तब अपनी ढोस जमती रहती हो (मेने भी थोड़ा सख्ती से कहा और उनके कंधे दबाना चालू रक्खा और साथ में अंगूठो से उनकी पीठ को भी दबा रहा था)
भार्गवी : (उसे भी अच्छा लग रहा था, पर कोई उसे ऐसे छुए वो उसे पसंद नहीं था, एक मिनट बाद hi वो बोल padi)Bas हो गया, अब छोडो muje.(Unki आवाज थोड़ी नरम जरूर पड़ी थी पर अभी भी एक चिढ जरूर थी)
शिव : क्या दिक्कत है आप की, चुप चाप बेठियेना, में कर रहा हु न.
भार्गवी : मुझे ये पसंद नहीं की कोई मुझे ऐसे छुए.
शिव : तो में क्या करू (में उनके कंधे की मालिस करता रहा, उनकी गर्दन पर भी में दबा कर मालिस कर रहा था)
भार्गवी : तुम मेरी नरमाई माँ ज्यादा hi गैर लाभ उठा रहे हो, भूलो मत की में कौन हु.
शिव : कोण हो? इंसान hi हो न? की कोई और हो?
भार्गवी : किसी की हिम्मत नहीं है की मेरे साथ ऐसी बात करे.
शिव : (उनकी अकड़ देख कर मुझे भी गुस्सा आ रहा था) वो कोई और होंगे मैडम, ये शिव है, किसी से नहीं डरता. (मेने उन्हें पकड़ा और सोफे पर उल्टा लेता दिया)
भार्गवी : शीइइइइव (चिढ़ते हुए उन्होंने कहा)
शिव : अगर इतना hi गुस्सा आ रहा है तो बाद में निकल लेना, अभी चुप चाप लेती रहिये (पता नहीं मेरी भी सायद खिसक गयी थी, में उनके कंधो से ले कर पीठ तक के भाग को मसलने लगा, मेरे मान में कोई भी ऐसा वैसा विचार भी नहीं था, में बस उन्हें आराम देना चाहता था, उनकी रीढ़ की हड्डी पर में अंगूठे से मालिस करने लगा और साथ में उनके आस पास के हिस्सों को भी मालिस करने लगा, वो भी उसके बाद कुछ न बोली, थोड़ी देर उनकी पीठ की मालिस करने के बाद में उनके पैरो की भी मालिश करने लगा, में सिर्फ घुटनो के निचे और तलवो की hi मालिस कर रहा था, पैरो के मसल्स को भी अच्छे से रिलैक्स कर दिया, फिर से उनके कंधो की मालिश की फिर पैरो की) लो हो गया. (उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, मेने उनके चेहरे को ध्यान से देखा तो वो सो चुकी थी, उनके चेहरे पर शुकुन था, में भी पास वाले सोफे पर बेथ गया, करने को कुछ था नहीं तो मेने भी आंखे बंद कर दी)
भार्गवी लगभग एक घंटे बाद उठी, वो अभी भी सोफे पर उलटी लेती हुई थी, थोड़ी देर वो वैसे hi लेती रही फिर उसने अपना शिर मोड़ कर देखा तो शिव सोफे पर बैठे बैठे सो रहा था, वो उसे देखने लगी, आज जिस तरह से शिव ने उसके साथ किआ था, ऐसी किसी ने हिम्मत नहीं की थी, वो बस थोड़ी देर उसे देख रही थी, उसे समाज नहीं आ रहा था की वो गुस्सा करे की खुस हो. वो अपने जीवन में किसी को दाखिल होने देना नहीं चाहती थी, उसने अपने आप को अकेले बना लिया था, लोगो से सम्बन्ध बनाने से वो कतराती थी, वो अब किसी को भी उसे हर्ट करने का मौका नहीं देना चाहती थी. एक तरफ तो उसे शिव की ये जबरदस्ती अच्छी लगी थी, जिस हक़ से वो उसके साथ पेश आया था, कही न कही वो उसे अच्छा लगा था, पर फिर भी उसे गुस्सा भी आ रहा था, ये गुस्सा उसे किस बात का आ रहा था ये उसे भी पता नहीं चल रहा था. वो उठ कर बेथ गयी, उसका शरीर काफी रिलैक्स लग रहा था, पर ऐसे किसी लड़के का उसके शरीर को छूना उसे अच्छा नहीं लगा था, उसे समाज नहीं आ रहा था की उसने शिव को रोका क्यों नहीं, अगर उसे पसंद नहीं था तो उसने कैसे अपने शरीर को ऐसे छूने दिया. शिव ने उसके कंधो से ले कर उसकी कमर तक के हर हिस्से को छुआ था और उसके पैरो को भी दबाया था, हलाकि वो कपडे पहने हुए थी पर फिर भी आज बरसो बाद किसी ने उसे ऐसे छुआ था. वो उठी और अपने रूम में चली गयी, उसने अलमारी से कपडे निकले, जो कपडे पहने थे उसे निकल दिया, सामने लगे शीशे में वो अपने आपको देखने लगी, ब्रा और पंतय में वो कड़ी थी, उसने अपने आप को ऊपर से निचे तक देखा, सुडौल शरीर की वो मालकिन थी, लोग अक्सर उसे घूरते थे पर वो उन्हें उनकी फितरत मान कर उसे इग्नोर कर देती थी. उसने अपने जीवन से इस हिस्से को जैसे नेस्तो नाबूद कर दिया था, अब उसका काम hi एक मात्रा लक्ष्य बचा हुआ था. उसने एक पूरी लम्बाई का गौण पहना और बहार आयी, शिव अभी भी सोया हुआ था, वो किचन में गयी और चाय बनाने लगी. शिव के लिए भी दूध बनाया, वो बहार आयी, टेबल पर सब रखने के बाद वो शिव के पास गयी, वो थोड़ी देर उसे देखती रही.
भार्गवी : (मान में : ये क्या सोच रही है तू, वो एक स्कूल जाता हुआ एक लड़का है, अभी उसे इतनी समाज नहीं होगी की किसी लड़की या औरत के साथ इस तरह की हरकत नहीं करनी चाहिए, (फिर उसे वो याद आया जब उसका वो अंग कड़ा हो कर उसके कूल्हों के बिच चुभ रहा था) वो तो बस एक हादसा था, वो इतना भी छोटा नहीं है, कुदरत तो अपना असर दिखाएगी hi, एक जवान लड़का अगर किसी लड़की के साथ अगर ऐसे रहेगा तो, वो सब तो हो hi सकता है, उसमे शिव की कहा गलती है, वो परिस्थितिया hi ऐसी हो गयी थी, (उसके चेहरे को देख kar)Kitna मासूम और भोला है, उसे क्या वो अपने रुतबे से डरा रही थी, वो अभी एक मासूम लड़का है, उसे क्या पता की क्या करना चाहिए और क्या नहीं, में यु hi उस पर गुस्सा हो रही थी) शिव, uthooo.(Usne शिव को हिलाया)
शिव : ह्म्मम्म्म्म.
भार्गवी : उठो शिव. (मेने आंखे खोल कर उन्हें देखा, उनके चेहरे पर न गुस्सा था न मुस्कान) हाथ मुँह धो लो, मेने दूध बनाया है. (मेने उन्हें देखा और उठ कर हाथ मुँह धो कर वापस बेथ गया, उन्होंने मेरी और दूध बढ़ाया) लो, दूध पीओ.
शिव : (दुधलेटे hue)Aap तो सो hi गयी थी.
भार्गवी : पतानहीं कैसे, पर है, मुझे नींद आ गयी थी.
शिव : देखा, मेने कहा था न की आपको अच्छा लगेगा, आप ख़म खा गुस्सा हो रही थी.
भार्गवी : तुम मेरे साथ वैसा सब कर रहे थे तो गुस्सा hi करुँगी न, तुम ऐसे hi मुझे कैसे छू सकते हो.
शिव : इसमें क्या दिक्कत है, ओह अच्छा, आप लड़की हो इस लिए ऐसा कह रही थी, पर दर्द तो लड़की और लड़का नहीं देखता, और मेने आप को लड़की समाज कर नहीं, एक दर्द से पीड़ित इंसान समाज कर आपको छुआ था.
भार्गवी : बहोत बाटे बनानी आती है तुम्हे.
शिव : में बाटे नहीं बना रहा था बस बता रहा था. (दूध ख़तम हो गया tha)Achchha में चलता हु.
भार्गवी : कैसे जाओगे? में छोड़ देती हु तुम्हे.
शिव : में चला जाऊंगा.
भार्गवी : एक काम करो, मेरी बाइक ले जाओ.
शिव : उसकी जरुरत नहीं, में चला जाऊंगा.
भार्गवी : वैसे भी वो पड़ी रहती है, अभी मुझे उसकी जरुआत नहीं है, तुम जब आओ तब वापस ले आना.
शिव : ठीक है, में स्टेडियम से लौट ते हुए दे जाऊंगा.
भार्गवी : तो फिर खाना यही खाना
शिव : (अब में क्या kehta)Thik है मैडम.
में चला गया वह से. घर जा कर तैयार हो कर जूही के घर पहुंच गया, वो निकल hi रही थी, मेरे हाथ में पट्टी न देख कर उसने वजह पूछी तो मेने बता दिया की डॉक्टर ने निकल दी है. बाइक के बारे में भी पूछने लगी तो मेने बता दिया की मैडम के साथ गया था तो उन्होंने दी है. हम दोनों बाइक पर hi स्टेडियम गए, वह मेने दौड़ तो लगायी पर ज्यादा नहीं. स्टेडियम से निकल hi रहा था की पवनसीर का फ़ोन आया, उन्होंने मुझे अपने घर बुलाया था. मेने जूही को घर छोड़ा और पवनसीर के घर की और निकल गया.











































