Adultery Kundali Bhagya - Page 17 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 110

जूही मुझे छोड़ने आयी थी तो में स्कूल जल्दी पहुंच गया था, वो मुझे छोड़ कर चली गयी, मापने दोस्तों के पास चला गया. उन्दोनो के चेहरे पर बारे बजे हुए थे.

शिव : क्या हुआ, मुँह क्यों लटका रक्खा है?

महेश : (मेरी और देखते hue)Jaise तुजे पता hi नहीं, अगर फ़ैल हुआ तो वैट लगनेवाली है.

शिव : तो फिर पढ़ाई किआ करो, पढ़ाई करनी नहीं और फिर ऐसी चिंता करनी है, क्या फायदा होगा?

हर्ष: ज्यादा लेक्चर मात de.(Tabhi स्कूल की घंटी baji)Chalo बुलावा आया है. (उसने जिस तरह से कहा था मेरी हसी निकल गयी, हम सब क्लास के पास पहुंचे hi थे की मुझे बिना मैडम आती दिखाई दी, मैडम को देख कर महेश और हर्ष जल्दी से क्लास में घुस गए, पर मेने मैडम की आँखों में देखा तो वो मुझसे बात करना चाहती थी, तो में दरवाजे पर hi रुक गया. वो नजदीक आयी.

मैडम : कैसी तबियत है शिव?

शिव : अच्छा हु मैडम.

मैडम : दर्द तो नहीं है?

शिव : नहीं मैडम, सब ठीक है. (ज्यादा तो बात कर नहीं शक्ति थे तो हम अंदर चले गए, हजारी लेने के बाद उन्होंने रिजल्ट के बारे में बोलै)

मैडम : ये तुम लोगो की पहली एग्जाम थी, कई लोगो के अच्छे मार्क है और कुछ के बहोत ज्यादा ख़राब, जिनके ख़राब है उन्हें अपने आप पर ध्यान देने की जरुरत है, अगर ऐसा hi चलेगा तो वो फाइनल में फ़ैल भी हो शक्ति है, अगर पढ़ाई में कोई दिक्कत है तो मुझसे या अपने विषय शिक्षक से वो पूछ कर अपने अपने डाउट क्लियर कर शक्ति है, अभी भी तुम्हारे पास समय है तो सुधर जाओ, वैसे तो ये पहली hi एग्जाम है तो किसी को ज्यादा खुस और दुखी होने की जरुरत नहीं है, सब एक एक करके अपने अपने रिजल्ट ले लो और घर से सिग्न करवा कर वापस जमा करवाना है. वैस्वी से रहा नहीं गया.

वैस्वी : मैडम किसका पहला नंबर है?

मैडम : ये पहली hi एग्जाम है तो स्कूल का नियम है की ऐसे किसी को नंबर न दिए जाये, सिर्फ ग्रेड दिए जाते है.

वैस्वी : फिर भी मैडम, आपको तो पता होगा की किसके मार्क सबसे ज्यादा है?

मैडम : है मुझे पता है, पर फिर भी मेने कहा न की ये स्कूल के नियमो के खिलाफ है की किसी को नंबर दिए जाये, क्यों की इसकी वजह से कई बच्चो में मायूसी आ जाती है, तुम अपने मार्क पर ध्यान दो, अपना रिजल्ट ले लो.

वैस्वी का मुँह लटक गया, उसने सोचा था की मैडम उसका नाम अनाउंस करेगी और सबके सामने ये साबित हो जायेगा की वो शिव से भी होशियार है. उसने अपना रिजल्ट देखा, उसे ा+ रैंक मिला हुआ था, पर उसके चेहरे पर खुसी नहीं थी, उसने मुद कर शिव की और देखा तो वो लोग भी अपना रिजल्ट देख रहे थे, शिव के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान थी वही उसके दोस्त भी खुस थे. उसकोजन न था की शिव के कितने मार्क आये है. उसका ध्यानतब भांग हुआ जब संयम ने उसे पीछे से बुलाया.

संयम : देख वैस्वी मेरा ा+ है, तेरा बता. (वैस्वी ने उसे अपना रिजल्ट दिया, उसके मार्क शमीम से ज्यादा थे, पर संयम अपने रिजल्ट से खुस थी, उसने देखा की वैस्वी बार बार पीछे देख रही है, तो उसकी नज़र भी शिव पर पड़ी, वो सब खुस थे, वो भी जान न चाहती थी की शिव के कितने मार्क है, पर अभी नहीं पूछ सकते थे, मैडम ने थोड़ी देर पढ़ाया फिर वो चली गयी, ऐसे hi दो पीरियड निकल गए, जब छोटी रेसस्स हुई तो वैस्वी ने देखा की शिव और उसके दोस्त बहार जा रहे है, उसने फ़ौरन संयम से कहा.

वैस्वी : चल बहार जा कर आते है. (संयम जानती थी की वो बहार क्यों जाना चाहती है, वो दोनों बहार निकले, कही भी शिव और उसके दोस्त दिखाई नहीं दे रहे थे, वैस्वी badbadayi)Kaha गए???

संयम : (उसने सुना की वैस्वी क्या बड़बड़ायी पर वो जान बुज कर वो अनजान बानी रही, वैस्वी की बेचैनी देख कर उसे बहोत मज़ा आ रहा tha.)Chal न रुक क्यों गयी?

वैस्वी : किस तरफ जाये?

संयम : किस तरफ क्या, मुझे लगा तुजे बाथरूम जाना है, जाना है न?

वैस्वी : है, चल. (वो दोनों बाथरूम की और जाने लगी, वैस्वी इधर उधर शिव को hi धुंध रही थी, बाथरूम आ गया पर शिव न दिखा, वो दोनों बाथरूम में चले गए, पेशाब कर के वो बहार आये, फिर वापस क्लास की और जा रहे थे की थोड़ी दूर शिव और उसके दोस्त दिखे, पर वो जा कर पूछ तो नहीं शक्ति थी, उसने संयम से kaha)Dekh वो तेरा दोस्त खड़ा hai(Samim ने देखा की वो शिव की और िःस्सारा कर रही है, पर उसने खास ध्यान नहीं दिया, वैस्वी ने झुंझलाते हुए kaha)Tuje मिलना नहीं है, उस से?

संयम : (अनजान बनते hue)Milana है??? किस की बात कर रही है तू?

वैस्वी : वो है न तेरा dost(Usne शिव की और इस्सर किआ)

संयम : (उसे पता था की वह शिव खड़ा hai)Harsh की बात कर रही है तू?

वैस्वी : (झुंझलाते hue)Harsh तेरा दोस्त है?

संयम : (अपनी हसी दबाते hue)Ha, महेश भी मेरा दोस्त है, पर अभी नहीं मिलना मुझे, बाद में मिल लुंगी.

वैस्वी : (वो अंदर hi अंदर संयम पर बहोत गुस्सा हो रही थी, उसकी बोखलाहट उसके चेहरे पर नज़र आ रही thi)Me शिव की बात कर रही हु.

संयम : ओह शिईयिव, नहीं तो मुझे उस से क्यों मिलना है?

वैस्वी : उसके मार्क्स नहीं पूछने तुजे?

संयम : (शांति se)Nahi, मुझे पता है की उसके मार्क्स अच्छे hi होंगे, बाद में मिलूंगी तब पूछ लुंगी.

वैस्वी : जा अभी पूछ ले.

संयम : नहीं, वैसे भी तुजे पसंद नहीं की में शिव से मिलु, तो जब तू नहीं होगी तब मिल lungi(Samim अंदर hi अंदर बहोत है रही थी)

वैस्वी : (अपना गुस्सा पिटे हुए उसने अपने आपको शांत किआ, और जितनी नरम आवाज कर शक्ति थी उसने की) नहीं मुझे कोई बुरा नहीं लगेगा, जा तू मिल आ.

संयम : छोड़ न, वैसे भी अभी टाइम नहीं है, रेसस्स ख़तम होनेवाली है, में बाद में मिल लुंगी. (और वो क्लास की और चलने लगी, वैस्वी वही कड़ी रह कर संयम को देख रही थी, संयम आगे जा कर ruki)Chal न, क्लास में नहीं जाना क्या.?

वैस्वी ने अपने आप को शांत किआ और वो चल पड़ी, संयम उसकी हालत पे बहोत मज़े ले रही थी, वैसे उसको भी जान न था की शिव के कितने मार्क है, पर वो जानती थी की शिव पिछले दिनों बहोत बिजी रहा है और शायद उसके मार्क वैस्वी से काम भी हो शक्ति है क्यों की उसने वैस्वी का रिजल्ट देखा था, तकरीबन सब में उसके मार्क ज्यादा थे, तो वो उसे मौका नहीं देना चाहती थी की वो शिव को निचा दिखाए. वो बाद में भी शिव से पूछ सकती थी.

बड़ी रेसस्स में भी जब दोनों गार्डन में बेथ के नास्ता कर रही थी तो भी वैस्वी ने दो तीन बार संयम से कहा की जा कर मिल ले शिव से पर संयम ने ये कह के मन कर दिया की तुजे पसंद नहीं है न इस लिए वो उस से मिलने नहीं जा रही है. वैस्वी अंदर hi अंदर बहोत बेचैन थी, किसी भी तरह वो शिव के मार्क जान न चाहती थी, पर संयम किसी भी तरह से मान hi नहीं रही थी. जब स्कूल की छुट्टी हो गयी तो वो दोनों चलते हुए स्कूटर की और जा रही थी तो शिव पार्किंग में अकेला खड़ा था, वो वैस्वी के स्कूटर के पास नजदीक hi खड़ा था, वो दोनों चलते हुए स्कूटर के नजदीक पहुंची, अब संयम के पास और कोई चारा नहीं था.

संयम : Hi.

शिव : (मुस्कुराते hue)Hi.

संयम : अकेले क्यों खड़े हो, हर्ष और महेश कहा गए.

शिव : वो लोग अभी अभी गए है, में जूही का इंतजार कर रहा हु, वो मुझे लेने आनेवाली है.

वैस्वी : वो तो तुम्हारी मैडम है न, तो फिर नाम से क्यों बुला रहे हो? (वैसे तो वैस्वी बात नहीं करना चाहती थी पर वो बिच में बोल hi पड़ी)

शिव : (उसके ऐसे पूछने पर मेने उसकी और देखा, वो झेप गयी, में जूही को चाहे कैसे भी बुलाऊ, उस से उसे क्या मतलब था जो वो ऐसा पूछ रही है, पर जब पूछा तो मेने जवाब diya)Hum अब दोस्त है, और उसने hi मुझे अपने नाम से बुलाने को कहा है. (शिव ने शांति से hi जवाब दिया)

वैस्वी : (वो भी अपने आप को कोष रही थी, मान में :मुझे क्या जरुरत थी ऐसा पूछने की, वो उन्दोनो के बिच की बात है, पर पता नहीं क्यों मुझे क्यों उसका ऐसे किसी लड़की के साथ होना अच्छा नहीं लगता, मुझे क्या वो जो भी kare)Kya रिजल्ट आया तुम्हारा? (संयम ने वैस्वी को देखा, उसे यकीं नहीं हो रहा था की वैस्वी ने सीधे hi शिव से पूछ लिया)

शिव : ा+ ग्रेड है.

संयम : (बात को टालने के लिए वो बिच में hi बोल padi)Are वह, कोंग्रटुलतिओन्स, मेरा भी ा+ है और वैस्वी का भी.

शिव : तुम दोनों को भी कोंग्रटुलतिओन्स.

वैस्वी : मार्क कितने है?

शिव : (में जनता था की वो क्यों पूछ रही है, पर जब उसने पूछ hi लिया था तो मेने बता दिया)228.

संयम : (जैसे hi संयम ने सुना वो खुस हो गयी, क्यों की वैस्वी के मार्क उसे पता थे, वैस्वी के 225 आये the)Wow! कोंगट्रॉटुलेशन्स शिव, तुम्हारे सबसे ज्यादा hi है. (वैस्वी का चेहरा उतर गया था, जिसे देख मुझे पता चल गया की उसके मार्क काम है)

शिव : थैंक यू, पर इस से क्या फर्क पड़ता है, ये तो सिर्फ पहला टेस्ट था, कोई फाइनल एग्जाम नहीं, ा+ ग्रेड सब के है, तो हम सब एक जैसे hi हुए.

वैस्वी : (बहोत उदास हो चुकी थी, उसने इतनी म्हणत की थी, पर वो पहले नंबर पर नहीं आ पायी थी, उसने बुझे हुए मान से kaha)Congratulations. (और वो स्कूटर की तरफ बढ़ गयी)

जूही भी मुझे आती दिखाई दी, तो में उसकी और बढ़ गया, वैसे मुझे भी यकीं नहीं हो रहा था की मेरे मार्क उस से भी ज्यादा थे, पर सिर्फ पढ़ने से होशियार नहीं बन शक्ति, उसे समझना भी जरुरी होता है, और शायद इसीलिए मेरे मार्क्स ज्यादा थे. वैसे भी ज्यादा फर्क नहीं था पर उस से आगे तो में था hi, में उसमे कुछ नहीं कर शक्ति था, मुझे उसे हराना नहीं था, क्यों की मुझे उस से कोई फर्क भी नहीं पड़ता था. जूही को भी मेने रस्ते में अपना रिजल्ट बता दिया, वो भी खुस हो गयी. उसने मुझे घर छोड़ा और वो चली गयी.

मेने दीदी को भी अपना रिजल्ट बताया, वो खुस हो गयी, मेने खाना खाया, दोपहर को दीदी मुझे नहाने बुलाने आयी, सुबह तो में नहाया नहीं था, मुझे बाथरूम में ले जा कर उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया. मेरे हाथ को संभल कर उन्होंने मेरा शर्ट उतरा, वैसे प्लास्टर नहीं था तो मेरा हाथ खुला था, बस उसे आराम देने के लिए hi कंधे से ले कर हाथ तक की पट्टी थी, उन्होंने मुझे पूरा नंगा कर दिया, भले hi हम दोनों के बिच सब कुछ हो चूका था पर फिर भी एक बार के लिए तो मुझे शर्म आ गयी, मेरी हालत पर वो मुस्कुरायी. उन्होंने मुझे नहलाया, उनके छूने से मेरा लुंड अकड़ गया. (लता उस कड़क लुंड को देख कर शर्माने लगी, पर उसे अच्छा भी लग रहा था, थोड़ी देर बाकि सब जगह साबुन लगाने के बाद उसने लुंड को भी साबुन लगाया, उस कड़क लुंड से वो कुछ ज्यादा देर तक खेलती रही, उसकी छूट भी गीली हो रही थी, जैसे तैसे उसने पानी दाल कर सब साबुन साफ़ किआ, नहलाने के बाद वो टॉवल से उसे पोछने लगी पर लुंड कड़क हो कर खड़ा hi था, वो शर्मा रही थी, सो अपना काम कर रही थी, वो शिव से नज़ारे भी नहीं मिला रही थी, उसने लुंड के निचे लटकते अंडो को भी अच्छे से साफ़ किआ, उसने हिचकिचाते हुए शिव की और देखा तो वो आंखे बंद किये हुए उसके स्पर्श का मज़ा ले रहा था, लता का दिल जोरो से धड़क रहा था, और उसकी सांसे भी तेज चल रही थी, आखिर उस से रहा न गया और उसने लुंड को अपने मुँह में ले लिया, जब उसने देखा की शिव ने उसकी और देखा तो वो शर्मा गयी और नज़ारे झुका ली पर लुंड को चुस्ती रही, वो गरम लुंड उसे इतना पसंद था की वो उसके बगैर रह hi नहीं प् रही थी, वो थोड़ी देर चुस्ती रही, शिव भी उसके शिर को पकड़ कर अपनी कमर आगे पीछे कर रहा था, थोड़ी देर चूसने के बाद वो कड़ी हो गयी, उसे पता था की ऐसे शिव का पानी नहीं निकलेगा, वो बिना शिव की और देखे अपनी पंतय उतरने लगी, उसे पता था की शिव उसे hi देख रहा होगा, वो शर्म से पानी पानी हो रही थी पर, उसके अंदर आग लग चुकी थी, वो अपना पेटीकोट उठाते हुए दीवाल का सहारा ले कर झुक गयी, उसके नंगे कूल्हे शिव की और थे, वो उसका इंतजार करने लगी, जैसे hi शिव ने उसके कूल्हे छुए उसकी आंखे बंद हो गयी, उसके कूल्हे दबाने के बाद वो उसकी छूट और गांड के छेड़ को चाटने लगा, वो और थोड़ा झुक गयी ताकि शिव को आसानी हो, उसने अपनी सिस्किअ दबाने के लिए अपना मुँह हाथ से दबा दिया. थोड़ी देर उसकी छूट चाटने के बाद शिव ने लुंड उसकी छूट के छेड़ पर रक्खा और उसपे लुंड रगड़ने लगा, वो वैसे भी गरम हो गयी थी, लुंड उसकी छूट को फैलता हुआ अंदर उतरने लगा. उन दोनों की प्रेम लीला सुरु हो गयी, आधे घंटे तक शिव ने उसे अच्छे से छोड़ा, उसकी छूट के सरे तर ढीले हो गए थे, इस बिच वो दो बार झाड़ के तृप्त हो गयी, आखिर शिव ने अपन वीर्य उसके कूल्हों पर निकल दिया. वो शर्मा रही थी पर शिव ने उसके होठो को चूसा तो वो लता की तरह अपने शिव से लिपट गयी और उसके होठो को चूस कर अपना प्यार दिखने लगी. जब वो रूम में गयी तो गायत्री और सरिता लेती हुई थी.

सरिता : बहोत देर लगाडी. (हलाकि वो जानती थी की क्यों देर हुई थी पर वो जान बुज कर अपनी सहेली को छेड़ रही थी, और जिर तरह लता शर्मा रही थी उसे और मज़ा आ रहा tha.)Lagta है रगड़ रगड़ कर नहलाया उसे. (गायत्री अपना मुँह छुपाये है रही थी)

लता : (जूठा गुस्सा दिखते hue)Ha तो तुजे क्या, अच्छे hi नहलाऊंगी न, सो जा तू.

वो सब आराम करने लगी. तीन दिन ऐसे hi निकल गए, एक बार भार्गवी मैडम भी मिलने आयी थी. अभी स्टेडियम में, में दौड़ तो नहींपा रहा था तो स्टेडियम के गयम में पैरो की कसरत कर रहा था. चौथे दिन जब में स्कूल से लौटा खाना खा कर बैठा hi था की भार्गवी मैडम आयी.

शिव : आइये मैडम, कैसे आना हुआ?

भार्गवी : डॉक्टर से मेने अपॉइंटमेंट ली हुई है, चेक उप के लिए, तो तुम्हे लेने आयी हु. तुम्हारा कन्धा कैसा है अब.

शिव : अच्छा है मैडम.

भार्गवी : ठीक है फिर, चलो एक बार डॉक्टर को भी दिखा देते है.

वो मुझे ले कर डॉक्टर के पास चली गयी, वह मेरी जाँच की, उनकी भी जाँच हुई, छोटे तो उनको भी लगी थी, घर तो तकरीबन भर चुके थे, और मेरा कन्धा भी अब ठीक था. में और भार्गविमडम डॉक्टर के सामने बैठे थे.

डॉक्टर : सब ठीक है, कोई फाक्टूरे था नहीं तो अब दिक्कत नहीं है, अगर तुम्हे दर्द नहीं है तो तुम्हे अब ये बेल्ट पहन ने की जरुरत नहीं है. वैसे तुम्हारी हड्डिया काफी चौड़ी और मज़बूत है, इसीलिए शायद तुम इतनी मार सेह गए. फिर भी में कुछ दवाइया लिख रहा हु, कुछ दिन उसे लेते रहना, और अगर कोई दिक्कत हो तो मुझे दिखा जाना.

शिव: जी सर.

हम दोनों वह से निकले, मैडम मुझे अपने घर ले गयी. हम दोनों पानी पि कर सोफे पर बैठे हुए थे.

भार्गवी : अब कैसा दर्द है तुम्हारा, हाथ की वजह से कोई दिक्कत तो नहीं हुई?

शिव : (अब में उन्हें क्या कहता, मेरा एक हाथ बंधा हुआ था पर मेरे कई हाथ मेरी सेवा में लगे हुए थे, कभी लतादिदी तो कभी सरितादिदी ने मेरी सेवा की और साथ में सेवा ली, रंजन और गायत्री दीदी ने भी मेरी सेवा का लाभ लिया और मुझे अपनी सेवा दी) नहीं, घर में सब है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई, बल्कि मेरी वजह से उन्हें दिक्कत हुई, आप तो अकेली थी, आप को तो कोई दिक्कत नहीं हुई न.

भार्गवी : वैसे तो कोई दिक्कत नहीं थी, पर शरीर में दर्द रहता था तो नींद खुल जाया करती थी.

शिव : आप को अपनेघर वालो को बुला लेना चाहिए था.

भार्गवी : (थोड़ा मायूसी se)Chhodo उस बात को, अब मेरा उनसे कोई रिस्ता नहीं बचा है.

शिव : (मेने भी उस बात को कुरेदना ठीक नहीं समजा) दर्द तो मेरे बदन में भी था पर कोई न कोई मेरी मालिश कर देता था जिस से मुझे रहत रहती थी.

भार्गवी : तुम खुसनसीब हो जो सब के साथ रहते हो.

शिव : आप के वह भी तो काम करने के लिए कोई औरत आती है, आप उनसे कह शक्ति थी.

भार्गवी : नहीं, मुझे वैसा पसंद नहीं.

शिव : क्या अभी भी आपके शरीर में दर्द है?

भार्गवी : है थोड़ी जकड़न तो है, मेने डॉक्टर को भी बोलै तो उन्होंने भी मालिस का hi सुझाव दिया था, पर ये मुमकिन नहीं.

शिव : अगर आप को बुरा न लगे तो आप मेरे साथ चलिए, लतादिदी या सरितादिदी आपकी मालिस कर देगी.

भार्गवी : थैंक यू शिव, पर में ऐसे किसी को तकलीफ देना नहीं चाहती, डॉक्टर ने दवाइया दी है तो सब ठीक हो जायेगा.

शिव : आप की hi तरह मेरी भी वही हालत थी, मुझे पता है मालिस से कितना आराम मिलता है, प्लीज आप ज्यादा मात सोचिये और मेरे साथ चलिए.

भार्गवी : नहीं, कोई जरुरत नहीं, छोडो उसे वो ठीक हो जायेगा.

शिव : (वो मेरी बात मान नहीं रही थी, तो में उनके पास गया, वो बड़े सोफे पर बैठी थी तो में उनके बाजु में बेथ gaya)Ulta घूम जाइये.

भार्गवी : Kyu?(Unki बाह पकड़ कर उलटी तरफ धकेला तो वो उलटी घूम गयी, में उनके पीछे घुटना तक कर ऊपर हो गया) क्या कर रहे हो तुम? (मेने उनकी बात को अनसुना किआ और उनके कंधे दबाने लगा, वो आगे की और झुक कर अपना कन्धा छुड़ाते hue)Kya कर रहे हो, इसकी कोई जरुरत नहीं है. (उन्होंने थोड़ा रूढ़ तरीके से कहा था, पर मेने उसे नजर अंदाज किआ)

शिव : (उनका कन्धा पकड़ कर मेरी और खींचते hue)Aap सीधी बैठिये. (में उनके दोनों कंधे पकड़ कर उन्हें दबाने लगा और गर्दन से बाह तक के स्नायु को दबा कर मालिश करने लगा)

भार्गवी : छोड़ मुझे शिव (थोड़ा सख्ती से उन्होंने कहा)

शिव : चुप चाप बैठी रहो, जब देखो तब अपनी ढोस जमती रहती हो (मेने भी थोड़ा सख्ती से कहा और उनके कंधे दबाना चालू रक्खा और साथ में अंगूठो से उनकी पीठ को भी दबा रहा था)

भार्गवी : (उसे भी अच्छा लग रहा था, पर कोई उसे ऐसे छुए वो उसे पसंद नहीं था, एक मिनट बाद hi वो बोल padi)Bas हो गया, अब छोडो muje.(Unki आवाज थोड़ी नरम जरूर पड़ी थी पर अभी भी एक चिढ जरूर थी)

शिव : क्या दिक्कत है आप की, चुप चाप बेठियेना, में कर रहा हु न.

भार्गवी : मुझे ये पसंद नहीं की कोई मुझे ऐसे छुए.

शिव : तो में क्या करू (में उनके कंधे की मालिस करता रहा, उनकी गर्दन पर भी में दबा कर मालिस कर रहा था)

भार्गवी : तुम मेरी नरमाई माँ ज्यादा hi गैर लाभ उठा रहे हो, भूलो मत की में कौन हु.

शिव : कोण हो? इंसान hi हो न? की कोई और हो?

भार्गवी : किसी की हिम्मत नहीं है की मेरे साथ ऐसी बात करे.

शिव : (उनकी अकड़ देख कर मुझे भी गुस्सा आ रहा था) वो कोई और होंगे मैडम, ये शिव है, किसी से नहीं डरता. (मेने उन्हें पकड़ा और सोफे पर उल्टा लेता दिया)

भार्गवी : शीइइइइव (चिढ़ते हुए उन्होंने कहा)

शिव : अगर इतना hi गुस्सा आ रहा है तो बाद में निकल लेना, अभी चुप चाप लेती रहिये (पता नहीं मेरी भी सायद खिसक गयी थी, में उनके कंधो से ले कर पीठ तक के भाग को मसलने लगा, मेरे मान में कोई भी ऐसा वैसा विचार भी नहीं था, में बस उन्हें आराम देना चाहता था, उनकी रीढ़ की हड्डी पर में अंगूठे से मालिस करने लगा और साथ में उनके आस पास के हिस्सों को भी मालिस करने लगा, वो भी उसके बाद कुछ न बोली, थोड़ी देर उनकी पीठ की मालिस करने के बाद में उनके पैरो की भी मालिश करने लगा, में सिर्फ घुटनो के निचे और तलवो की hi मालिस कर रहा था, पैरो के मसल्स को भी अच्छे से रिलैक्स कर दिया, फिर से उनके कंधो की मालिश की फिर पैरो की) लो हो गया. (उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, मेने उनके चेहरे को ध्यान से देखा तो वो सो चुकी थी, उनके चेहरे पर शुकुन था, में भी पास वाले सोफे पर बेथ गया, करने को कुछ था नहीं तो मेने भी आंखे बंद कर दी)

भार्गवी लगभग एक घंटे बाद उठी, वो अभी भी सोफे पर उलटी लेती हुई थी, थोड़ी देर वो वैसे hi लेती रही फिर उसने अपना शिर मोड़ कर देखा तो शिव सोफे पर बैठे बैठे सो रहा था, वो उसे देखने लगी, आज जिस तरह से शिव ने उसके साथ किआ था, ऐसी किसी ने हिम्मत नहीं की थी, वो बस थोड़ी देर उसे देख रही थी, उसे समाज नहीं आ रहा था की वो गुस्सा करे की खुस हो. वो अपने जीवन में किसी को दाखिल होने देना नहीं चाहती थी, उसने अपने आप को अकेले बना लिया था, लोगो से सम्बन्ध बनाने से वो कतराती थी, वो अब किसी को भी उसे हर्ट करने का मौका नहीं देना चाहती थी. एक तरफ तो उसे शिव की ये जबरदस्ती अच्छी लगी थी, जिस हक़ से वो उसके साथ पेश आया था, कही न कही वो उसे अच्छा लगा था, पर फिर भी उसे गुस्सा भी आ रहा था, ये गुस्सा उसे किस बात का आ रहा था ये उसे भी पता नहीं चल रहा था. वो उठ कर बेथ गयी, उसका शरीर काफी रिलैक्स लग रहा था, पर ऐसे किसी लड़के का उसके शरीर को छूना उसे अच्छा नहीं लगा था, उसे समाज नहीं आ रहा था की उसने शिव को रोका क्यों नहीं, अगर उसे पसंद नहीं था तो उसने कैसे अपने शरीर को ऐसे छूने दिया. शिव ने उसके कंधो से ले कर उसकी कमर तक के हर हिस्से को छुआ था और उसके पैरो को भी दबाया था, हलाकि वो कपडे पहने हुए थी पर फिर भी आज बरसो बाद किसी ने उसे ऐसे छुआ था. वो उठी और अपने रूम में चली गयी, उसने अलमारी से कपडे निकले, जो कपडे पहने थे उसे निकल दिया, सामने लगे शीशे में वो अपने आपको देखने लगी, ब्रा और पंतय में वो कड़ी थी, उसने अपने आप को ऊपर से निचे तक देखा, सुडौल शरीर की वो मालकिन थी, लोग अक्सर उसे घूरते थे पर वो उन्हें उनकी फितरत मान कर उसे इग्नोर कर देती थी. उसने अपने जीवन से इस हिस्से को जैसे नेस्तो नाबूद कर दिया था, अब उसका काम hi एक मात्रा लक्ष्य बचा हुआ था. उसने एक पूरी लम्बाई का गौण पहना और बहार आयी, शिव अभी भी सोया हुआ था, वो किचन में गयी और चाय बनाने लगी. शिव के लिए भी दूध बनाया, वो बहार आयी, टेबल पर सब रखने के बाद वो शिव के पास गयी, वो थोड़ी देर उसे देखती रही.

भार्गवी : (मान में : ये क्या सोच रही है तू, वो एक स्कूल जाता हुआ एक लड़का है, अभी उसे इतनी समाज नहीं होगी की किसी लड़की या औरत के साथ इस तरह की हरकत नहीं करनी चाहिए, (फिर उसे वो याद आया जब उसका वो अंग कड़ा हो कर उसके कूल्हों के बिच चुभ रहा था) वो तो बस एक हादसा था, वो इतना भी छोटा नहीं है, कुदरत तो अपना असर दिखाएगी hi, एक जवान लड़का अगर किसी लड़की के साथ अगर ऐसे रहेगा तो, वो सब तो हो hi सकता है, उसमे शिव की कहा गलती है, वो परिस्थितिया hi ऐसी हो गयी थी, (उसके चेहरे को देख kar)Kitna मासूम और भोला है, उसे क्या वो अपने रुतबे से डरा रही थी, वो अभी एक मासूम लड़का है, उसे क्या पता की क्या करना चाहिए और क्या नहीं, में यु hi उस पर गुस्सा हो रही थी) शिव, uthooo.(Usne शिव को हिलाया)

शिव : ह्म्मम्म्म्म.

भार्गवी : उठो शिव. (मेने आंखे खोल कर उन्हें देखा, उनके चेहरे पर न गुस्सा था न मुस्कान) हाथ मुँह धो लो, मेने दूध बनाया है. (मेने उन्हें देखा और उठ कर हाथ मुँह धो कर वापस बेथ गया, उन्होंने मेरी और दूध बढ़ाया) लो, दूध पीओ.

शिव : (दुधलेटे hue)Aap तो सो hi गयी थी.

भार्गवी : पतानहीं कैसे, पर है, मुझे नींद आ गयी थी.

शिव : देखा, मेने कहा था न की आपको अच्छा लगेगा, आप ख़म खा गुस्सा हो रही थी.

भार्गवी : तुम मेरे साथ वैसा सब कर रहे थे तो गुस्सा hi करुँगी न, तुम ऐसे hi मुझे कैसे छू सकते हो.

शिव : इसमें क्या दिक्कत है, ओह अच्छा, आप लड़की हो इस लिए ऐसा कह रही थी, पर दर्द तो लड़की और लड़का नहीं देखता, और मेने आप को लड़की समाज कर नहीं, एक दर्द से पीड़ित इंसान समाज कर आपको छुआ था.

भार्गवी : बहोत बाटे बनानी आती है तुम्हे.

शिव : में बाटे नहीं बना रहा था बस बता रहा था. (दूध ख़तम हो गया tha)Achchha में चलता हु.

भार्गवी : कैसे जाओगे? में छोड़ देती हु तुम्हे.

शिव : में चला जाऊंगा.

भार्गवी : एक काम करो, मेरी बाइक ले जाओ.

शिव : उसकी जरुरत नहीं, में चला जाऊंगा.

भार्गवी : वैसे भी वो पड़ी रहती है, अभी मुझे उसकी जरुआत नहीं है, तुम जब आओ तब वापस ले आना.

शिव : ठीक है, में स्टेडियम से लौट ते हुए दे जाऊंगा.

भार्गवी : तो फिर खाना यही खाना

शिव : (अब में क्या kehta)Thik है मैडम.

में चला गया वह से. घर जा कर तैयार हो कर जूही के घर पहुंच गया, वो निकल hi रही थी, मेरे हाथ में पट्टी न देख कर उसने वजह पूछी तो मेने बता दिया की डॉक्टर ने निकल दी है. बाइक के बारे में भी पूछने लगी तो मेने बता दिया की मैडम के साथ गया था तो उन्होंने दी है. हम दोनों बाइक पर hi स्टेडियम गए, वह मेने दौड़ तो लगायी पर ज्यादा नहीं. स्टेडियम से निकल hi रहा था की पवनसीर का फ़ोन आया, उन्होंने मुझे अपने घर बुलाया था. मेने जूही को घर छोड़ा और पवनसीर के घर की और निकल गया.
 
अपडेट 111

पवनसीर ने मुझे अपने घर बुलाया था, में उनके घर पहुंच गया, और दूर बेल बजायी, स्नेहा ने hi दरवाजा खोला, वो शायद मेरा hi इंतजार कर रही थी, मुझे देख कर hi उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गयी, जैसे hi में अंदर गया वो मेरे गले लग गयी, में घबरा गया, क्यों की मुझे पवनसीर ने बुलाया था तो वो घर पर hi होंगे.

शिर : क्या कर रही हो, सर कहा है?

स्नेहा : वो बाथरूम में है, अभी आते है, तब तक तो मुझे अपने प्यारे से शिव से थोड़ा प्यार कर लेने do(Kehte हुए वो मेरे होठो को चूसने लगी, में भी उसको किश करने लगा, थोड़ी देर बाद वो मुझे हाथ पकड़ कर सोफे तक ले गयी और मुझे बैठने को बोल कर वो अंदर चली गयी और मेरे लिए पानी ले कर आयी, में पानी पि रहा था की पवनसीर आये)

पवनसीर : आ गए तुम?

शिव : जी सर. (मेने खड़े होते हुए कहा)

पवनसीर : बैठो बैठो शिव, कैसे हो? और अब तुम्हारा हाथ कैसा है?

शिव : सब ठीक है सर, डॉक्टर ने भी पट्टी हटा दी है.

पवनसीर : चलो, अच्छी बात है, मेने तुम्हे कुछ बताने के लिए बुलाया था, वैसे तो में फ़ोन पर भी बता सकता था, पर सोचा की इस बहाने तुम्हारी मुलाकात भी हो जाएगी, स्नेहा भी तुम्हे याद कर रही थी. (मेने स्नेहा की और देखा तो वो मुस्कुरायी) मेरी सूर्यदेवजी से बात हुई थी, वो भी बहोत खुस है की उनका टेंशन दूर हो गया, वो तुमसे मिलना चाहते थे.

शिव : जब भी आप कहे, में मिल आऊंगा सर.

पवनसीर : अरे नहीं, वो तुमसे मिलने आना चाहते है, वो तुम्हारे अनाथालय आना चाहते थे.

शिव : अनाथालय? वह क्यों?

पवनसीर : वो तो पता नहीं, पर उन्होंने वह मिलने को कहा था, तो तुम बताओ काब वो आ शक्ति है?

शिव : इसमें में क्या कहु सर, वो बड़े आदमी है, वो जब कहेंगे तब में मिल लूंगा, अगर स्कूल से छुट्टी लेनी है तो पहले से hi बोल दीजियेगा.

पवनसीर : उसकी जरुरत नहीं, मेने उन्हें कहा था की तुम्हारा स्कूल भी होता है, तो वो दोपहर को hi मिलने आएंगे, क्या कल सही रहे गए?

शिव : है, सर क्यों नहीं.

पवनसीर : ठीक है तो में उनसे बात कर के तुम्हे बता दूंगा, वैसे वो अपने प्रोजेक्ट को हमे देने को राज़ी है, पर भी फ़िलहाल उसकी घोसना नहीं करना चाहते, क्यों की उन्हें शक है की मला जरूर कुछ न कुछ करेगा और हमे प्रोजेक्ट मिलने से प्रकाश रओ भी भड़केगा, तो अभी वो सब राज़ hi रखना चाहते है, कुछ दिनों बाद वो ऑफिशियली अनाउंस कर देंगे.

स्नेहा : पवन, ये प्रोजेक्ट तुम्हारे लिए बहोत महत्व रखता है, और ये प्रोजेक्ट तुम्हे शिव की वजह से hi मिला है, तो शिव को भी फायदा मिलना चाहिए. (पवन अपनी पत्नी की और देख कर मुस्कुराये, स्नेहा का मेरे लिए बोलना मुझे भी अच्छा लगा)

शिव : उसकी जरुरत नहीं है मैडम, वैसे भी सर ने मेरे लिए बहोत कुछ किआ है, ये तो अचानक हो गया, में इनके किसी काम आ शका, एहि मेरे लिए बहोत बड़ी बात है.

पवनसीर : तुम ऐसा सोचते हो ये बहोत अच्छी बात है, पर स्नेहा का कहना भी सही है, और में तुम्हे बता du(Unhone स्नेहा की और देख कर कहा) मेने भी उसके बारे में सोचा है, (मेरी और देख kar)agar तुम न होते तो ये प्रोजेक्ट सुरु hi नहीं होनेवाला था और अगर ये प्रोजेक्ट मुझे प्रकाशराओ की और से मिलता तो मेरे हिस्से में काम मुनाफा hi आता, तो मैंने सोचा है की में तुम्हे इस प्रोजेक्ट में 20% का पार्टनर बना रहा hu.(Sneha की और देख kar)Ab खुस? (मेने स्नेहा की और देखा तो उसका चेहरा खुसी से छलक रहा था)

शिव : सर, ये आप क्या कह रहे है, में ये सब कैसे कर पाउँगा?

पवनसीर : तुम्हे कुछ करने की जरुरत नहीं है शिव, जैसे अभी काम संभल रहे हो वैसे hi तुम्हे काम देखना है, और ऐसा कर के में तुम पर कोई एहसान नहीं कर रहा हु, अगर में प्रकाशराओ के साथ काम करता तो भी मेरे हिस्से में जितना मुनाफा आता उस से दुबले मुनाफा मुझे मिलनेवाला है, और जो काम तुम ने किआ है, उस काम के लिए सूर्यदेवजी का भी जाने कितना पैसा बर्बाद होता, ये बात शायद वो भी समाज रहे है इस्सलिये hi शायद वो तुमसे मिलना छह रहे होंगे.

शिव : सर, इन सब की कोई जरुरत नहीं है, मेने जो भी किआ है आपके लिए किआ है, मेने उनका सोच कर नहीं आप का सोच कर किआ था.

पवनसीर : स्नेहा, अब तुम hi इससे समजाओ.

स्नेहा : पवन सही कह रहे है शिव, तुमने ये सब भले hi हमारे लिए किआ है पर इसका फायदा तो तुम्हे मिलना hi चाहिए, जब मेने ये सुना था तो मुझे सच में तुम्हारे ऊपर गुस्सा आया था, मेने पवन को भी डांटा था की क्या सोच कर उन्होंने तुम्हे इतना खतरनाक काम करने दिया, अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो?

पवनसीर : मेने उसे ऐसा कुछ करने के लिए नहीं कहा था, और मेने तो उसे कुछ करने के लिए कहा भी नहीं था, तुम hi बताओ शिव, मेने तुम्हे कहा था की कुछ करो?

शिव : नहीं.

पवनसीर: देखा, मेने तो सिर्फ उस प्रोजेक्ट के बारेमे बताया था, में दुविधा में था तो मेरे मुँह से निकल गया, मुझे क्या पता था की ये इतना सब कर जायेगा, और सच कहता हु स्नेहा, अगर तुम वह होती तो तुम्हे पता चलता, मुझे तो अभी भी विस्वास नहीं है की ये सब िस्सने किआ है, भले hi मेने अपनी आँखों से उन सबकी हालत देखि थी, वह भार्गवी मैडम भी थी, और वो पुलिस है, मेरा दिमाग तो अभी भी यही कह रहा है की ये सब उन्होंने hi किआ है, पर जिस तरह से भार्गवी मैडम ने भी बताया था, मुझे मान न पद रहा है की उन सब की हालत शिव की वजह से hi थी, इतने दिन हो गए, वो सब अभी भी अस्पताल में hi है, अपनी टूटी हुई हड्डीओं के साथ. सच कहता हु, तुम्हे देख कर लगता नहीं की तुम्हारा ऐसा भी रूप हो शक्ति है.

स्नेहा : अब इसको ज्यादा चढ़िये मात, इसकी तो में खबर लुंगी, में तो इससे अस्पताल में hi डाँटनेवाली थी, पर इसकी हालत देख कर चुप रही. (पवनसीर मेरी हालत देख कर हसने लगे, तभी मेरे फ़ोन की घंटी बजी, ये भार्गवी मैडम का फ़ोन था)

शिव : Hello.

भार्गवी : कहा रह गए तुम? कितनी देर लगेगी?

शिव : बस थोड़ी देर में निकल रहा हु.

स्नेहा : कोण है? और क्या थोड़ी देर में निकल रहा हु, खाना खा कर जाना है.

शिव : नहीं मैडम, आज नहीं, आज भार्गवी मैडम ने खाने के लिए कहा था, उन्ही का फ़ोन था.

स्नेहा : ओह, अब वो भी तुम्हे खाने के लिए बुलाने लगी, क्यों न हो, मेने अख़बार में पढ़ा था की उनकी भी तरक्की की बाटे चल रही है, अख़बार वाले तो यही बता रहे थे की कैसे एक दबंग महिला पुलिस ने इतना बड़ा कारनामा कर दिया, कोई जा कर उनसे भी पूछता की ये सब किसने किआ है.

शिव : उन्होंने कहा था मैडम की ये सब हमदोनो ने मिलकर किआ है.

स्नेहा : है पर तुम्हे देख कर सब को यकीं है की ये सब उसने अकेले किआ है, सिर्फ तुम उसके साथ थे, और तुम्हारा चेहरा देख कर कोण ये यकीं करेगा की एक भोले भले दिखनेवाला ये सब कर शक्ति है, सारा क्रेडिट तो उस मैडम को hi मिल गया, तो बुलाएगी न तुम्हे खाने पर. (स्नेहा की बातो में जलन साफ़ दिख रही थी, पर जैसा वो सोच रही थी वैसी तो कोई बात थी hi नहीं)

शिव : मुझे इजाजत दीजिये सर, में चलता हु.

स्नेहा : (अभी भी गुस्सा thi)Aur मेने खाना बनाया है उसका क्या?

पवनसीर : क्यों उसे तंग कर रही हो, तुम जाओ शिव, में तुम्हे मश्ग कर दूंगा की सूर्यदेवजी कब आनेवाले है.

शिव : जी सर. (में बहार निकला तो स्नेहा भी मेरे पीछे पीछे आ गयी)

स्नेहा : (धीमी आवाज में, लेकिन गुस्से me)Usne क्यों खाने पे बुलाया है?

शिव : जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ भी नहीं है, ये उनकी बाइक है, मुझे उन्हें लौटने जाना था तो उन्होंने कहा की रात का खाना मेरे साथ खाना, और कुछ नहीं.

स्नेहा : (रूठे स्वर me)Mujse तो मिलने आते नहीं और उसके घर खाने पे जा रहे हो.

शिव : ये क्या कह रही हो, दो दिन पहले तो मिला था.

स्नेहा : वो मिलना भी कोई मिलना है, वैसे कब मिलने आनेवाले ho(Uske चेहरे पर शर्मीली मुस्कान थी)

शिव : जल्द hi आऊंगा. अब में जाऊ?

स्नेहा : में इंतजार करुँगी. Bye. (उन्होंने दरवाजे की और देखा और मेरे गाल पर किश कर दी)

शिव :(मुस्कुराते hue)Bye.

उदयसिंह अपने महल नुमा हवेली के बगीचे में बैठा था, सामने टेबल पर उमड़ा सरब की बोतले रक्खी हुई थी जिसमे से एक गिलास में बर्फ के साथ थोड़ी सी सरब थी, वो किसी सोच में डूबा हुआ था और बिच बिच में सरब की चुस्किअ ले रहा था. तभी उसका बीटा पृथ्वीसिंह उधर आया.

पृथ्वीसिंह : पापा आपने बुलाया मुझे.

उदयसिंह : (अपने बेटे की और देखते hue)Ha, औ बैठो (उसकी निगाहे अपने बेटे पर hi थी, 6 फ़ीट के तगड़े बदनवाले अपने बेटे के लिए उसने खुद एक गिलास में थोड़े बर्फ के टुकड़े डेल और उसमे सरब भर कर अपने बेटे की और बढ़ाया, पृथ्वीसिंह ने भी बिना झुझके वो गिलास ले लिया, क्यों की ये उनके लिए कोई पहली बार नहीं था)

पृथ्वीसिंह : क्या हुआ पापा, आप किसी चिंता में है?

उदयसिंह : (एक गहरी निगाह अपने बेटे पर डालते hue)Aisi कोई खास चिंता तो नहीं hai(Usne एक और घुट पिया, पृथ्वीसिंह देख रहा था की बात तो कोई जरूर है, पर वो बोलै कुछ नहीं, थोड़ी देर बाद फिर से उदयसिंह ने kaha)Aaj भी ये प्रॉपर्टी योगेंद्र के नाम hi है, अभी कुछ दिन पहले जो डेट थी उसमे भी कोर्ट ने ये प्रॉपर्टी हमारे नाम पर करने से मन कर दिया था, उनका कहना है भले hi योगेंद्र कोमा में है पर वो जिन्दा तो है, इतनी मुस्किलो से हांसिल की हुई ये जमीं जायदाद अभी भी हमारी नहीं हो पायी है.

पृथ्वीसिंह : तो परेशानी क्या है पापा, आज नहीं तो कल ये प्रॉपर्टी हमारी hi होनी है, जो इतने सालो से कोमा मई है वो तो उठनेवाले है नहीं और चची भी अपना मानसिक संतुलन खो बैठी है, फिर हमे क्या खतरा है.

उदयसिंह : फिर भी ये दर लगा रहता है की अगर वो उठ गया तो क्या होगा?

पृथ्वीसिंह : अगर ऐसा है तो उसे मार देते है, फिर सारा मसाला hi ख़तम.

उदयसिंह : (अपने बेटे की और देखते hue)Ye इतना आसान नहीं है, अगर ये बात हमारे ऊपर आयी तो प्रॉब्लम हो शक्ति है, ऊपर से योगेंद्र की जिम्मेदारी उस सुखदेव ने उठायी हुई है, वो भली भाटी हमारे इरादे जनता है, इस लिए उसे इतनी सुरक्षा में रक्खा है की हम उसे छू नहीं सकते. और अगर हमने हमला किआ तो हम फंस सकते है, जैसे तैसे मेने अपने ऊपर से उसके बेटे का केस हटाया है, साबुत न होने की वजह से में बच गया, पर अगर इसके क़त्ल में मेरा नाम आया तो उसके बेटे के क़त्ल का इल्जाम भी मुज पर आ जायेगा.

पृथ्वीसिंह :पर पापा हम इस जायदाद को ऐसे hi नहीं जाने दे शक्ति, कुछ न कुछ तो हमें करना hi होगा.

उदयसिंह : मेरे और इस जायदाद के बिच जो भी आएगा, वो मारा जायेगा, जैसे उसके बेटे को मार दिया था.

पृथ्वीसिंह : और एक बात पापा, ये चंद्रभान चाचा का क्या चक्कर है, मेने सुना है वो किसी ज्योतिष को धुंध रहे है?

उदयसिंह : वो पागल है, जो इन ढ़ोंगीओ के चक्करो में पद रहा है, उसी ज्योतिष ने योगेंद्र के बेटे की कुंडली बनायीं थी, उसके मुताबित ये लड़का इस खंडन का तारक होगा, और बहोत लम्बी आयु का होगा, पर हुआ क्या, क्या वो बचा, नहीं, तो ऐसे ढ़ोंगीओ की बातो पर विस्वास करना उसकी बेवकूफी है, उसे करने दे जो वो कर रहा है, वैसे भी हमे उस से कोई फर्क नहीं पड़नेवाला. हम अपना भाग्य खुद बनाते है, तू उसकी चिंता मात कर, में देख लूंगा वो सब. जा तू आराम कर.

पृथ्वीसिंह : ठीक है पापा. (उसने गिलास खली किआ और अपने कमरे की और बढ़ गया, जब वो कमरे में आया तो उसकी बीवी पद्मा बिस्तर पर तक लगाए बैठी हुई थी, अपने पति को देख कर वो सीधी बेथ गयी, पद्मा एक पढ़ीलिखी खूबसूरत लड़की थी, चेहरा मनो चाँद का टुकड़ा था, उसकी आंखे इतनी खूबसूरत थी की जैसे अभी बोल पड़ेगी, पर अभी उसकी आँखों में खौफ था, वैसे भी पिछले कुछ समय से उसके और उसके पति के बिच पति पत्नीवाले सम्बन्ध hi नहीं थे, सम्बन्ध थे तो एक मर्द औरत के, उसका पति कभी कभी उसे अपने निचे रोड कर सो जाता था)

पृथ्वीसिंह : कड़ी कड़ी घर क्या रही है, जा मेरे लिए पानी ले आ.

पद्मा : जी, अभी लायी (वो भाग कर गयी और पानी का जग और गिलास ले आयी, उसने पानी का गिलास दिया जो वो पि gaya)Kh...khana निकलू.

पृथ्वीसिंह : हम्म्म्म.

पद्मा : जल्दी से कमरे से निकल कर बहार चली गयी, (थोड़ी देर बाद पृथ्वीसिंह भी बहार निकल गया)

वही चंद्रभान अपनी पत्नी निर्मलादेवी के साथ बैठा हुआ था.

निर्मलादेवी : क्या हुआ जी, बाबाजी की कोई खबर मिली.

चंद्रभान : उन्हें hi धुंध रहा हु, मेने सुना है की हमारे घर के हादसे के बाद वो यहाँ से चले गए थे. उन्होंने जो भविस्यवाणी की थी वो सबको पता थी, और उस बच्चे की मौत हो जाने से लोगो ने उनपर भरोसा करना छोड़ दिया था तो वो यहाँ से कही चले गए, मेने अपने लोगो को उन्हें ढूंढने के लिए भेज दिया है, देखते है क्या होता है.

नर्मदादेवी : बात तो ये भी सही है जी, उन्होंने कहा था की ये लड़का hi आपके कुल का तारणहार है, और बहोत लम्बी आयु ले के आया है, जबकि वो तो मर गया. उसकी कुंडली देख कर hi तो सुखदेवभाईसहब ने अपनी बेटी की जिंदगी बर्बाद करदी. अब अगर सोचने जाये तो क्या हम बाबाजी पर भरोसा कर शक्ति है?

चंद्रभान : कभी कभी किसी से गलती हो जाती है, और वैसे भी हमारे पास इस का कोई हल नहीं, तो एक बार उनसे पुछलेने से क्या फर्क पद जायेगा.

नर्मदादेवी : मुझे तो योगेन्द्रभाईसहब की भी चिंता लगी रहती है, बड़ेभैसाहब तो जैसे सैतान hi हो गए है, कैसे अपने hi फूल जैसे भतीजे को उन्होंने नदी में फेक कर मार दिया.

चंद्रभान : धीरे बोलो भाग्यवान, दीवारों के भी कान होते है.

नर्मदादेवी : अपने hi घर में में क्यों दारू. मन की वो बड़े है, पैसो के दम पर ताकतवर भी है पर वो इतने भी ताकतवर नहीं की भगवन के सामने खड़े हो जाये, पता नहीं क्यों पर अभी भी मुझे तो विस्वास नहीं होता की वो लड़का नदी में दुब कर मर गया है, उसे बचने के लिए योगेन्द्रभाईसहब ने इतने तेज बहाव में भी छलांग लगा दी थी, वो तैरना जानते थे फिर भी इतने तेज बहाव में अपने hi बेटे को नहीं बचा पाए, वो भी कितनी दूर मिले थे, शिर पर चोट की वजह से वो आज तक कोमा में है, और बेचारी चन्द्रिका, इतने वर्षो से पागलखाने में है. ये सब देख कर तो कभी कभी लगता है की भगवन है hi नहीं, अगर होते तो उन्हें ये सब नहीं दीखता, कैसे एक शैतान ऐसे अच्छे लोगो को बर्बाद कर रहा है. शिवांस की तो आज तक लाश भी न मिली, बेचारा, कितना प्यारा बच्चा था, आप को क्या लगता है, क्या वो जिन्दा बच सकता है?

चंद्रभान : क्या पागलो जैसी बात कर रही हो, योगेंद्र तैरने में इतना माहिर था फिर भी उसकी ये हालत हो गयी तो वो एक छोटा बच्चा कैसे बचसकता है?

नर्मदादिवि : तो उसकी लाश क्यों नहीं मिली?

चंद्रभान : अरे भाग्यवान, ये नदी है, इसमें मगर भी होते है, इतने छोटे बच्चे को तो वो पूरा का पूरा निगल जायेंगे, कैसे मिलेगी उसकी लाश.

नर्मदादेवी : भगवन करे वो बच गया हो.

चंद्रभान : अगर वो बच गया है तो वो जहा है वही अच्छा है, अगर कभी यहाँ आया तो वो फिर से मारा जायेगा, तुम्हे क्या लगता है बड़ेभैसाहब उसे जिन्दा छोड़ेंगे? तो दिमाग के घोड़े दौड़ना बंद करो और खाना लगाओ, भूख लगी hai.(Narmadadevi थोड़ी देर अपने पति को देखती रही, उनकी बात भी सही थी, अगर किसी तरह वो बच भी गया हो और यहाँ आये तो ये लोगो उसे छोड़ेंगे नहीं, उसने एक गहरी साँस छोड़ी और कड़ी हो गयी और रसोई की और चल दी)

यहाँ में भार्गवी मैडम के घर पंहुचा, बाइक रक्खी और बेल बजायी. थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला, सामने मैडम कड़ी थी, गहरे ब्लू कलर की साड़ी पहने हुई थी, वो खूबसूरत तो थी hi पर साड़ी में बहोत hi ज्यादा अच्छी लग रही थी, में दरवाजे पर खड़ा रह गया और उन्हें देखने लगा, में उन्हें ऊपर से निचे तक देख रहा था (भार्गवी, उसे ऐसे अपनी और देखते देख आश्चर्य से उसे देख रही थी, वो उसे देखने में ऐसे खोया था की पलके भी नहीं जपका रहा था)





भार्गवी : सीईव.

शिव :ह्म्म्मम्म.

भार्गवी : हम्म्म्म क्या अंदर आओ, (में हड़बड़ा गया और अंदर चला gaya)Kitni देर लगा दी, मुझे कितनी भूख लगी थी. (उसने शिव के ऐसे देखनेवाली बात को जैसे इग्नोर कर दिया)

शिव : जी, वो पवनसीर का फ़ोन आया था, उनके घर hi टाइम लग गया.

भार्गवी : अब हाथ मुँह धो लो, में खाना निकलती हु.

शिव : जी. (में हाथ मुँह धो कर दिंनिंग टेबल पर बेथ गया, में कार्नर की पहली कुर्सी पर बैठा था, वो भी टेबल की बाजूवाली साइड पर बेथ गयी, ऐसे बैठने से उन्हें खाना निकलने में सहूलियत हो गयी, वो मेरी थाली में खाना निकलने लगी तो मेने उन्हें रोक diya)Me ले लूंगा मैडम, आप ले लीजिये.

भार्गवी : क्यों में निकल के दू तो कोई दिक्कत है?

शिव : नहीं, ऐसी बात नहीं है, में आप को कास्ट नहीं देना चाहता.

भार्गवी : मेने तुम्हे अपने घर बुलाया है तो में hi खाना खिलाऊंगी न.

शिव : उसकी जरुरत नहीं मैडम, आप ये सब काम कर रही है तो थोड़ा अजीब लगता है.

भार्गवी : क्यों अजीब लगता है?

शिव : आप पुलिस अफसर हो, तो आपके लिए एक इमेज बन जाती है.

भार्गवी : पुलिस अफसर होने से क्या में औरत नहीं रही.

शिव : नहीं ऐसी बात नहीं है, पर थोड़ा अजीब लगता है.

भार्गवी : इसीलिए मुझे घर कर देख रहे the(Akhir उसके मुँह से निकल hi गया)

शिव : (में हड़बड़ा gaya)Nahi, आप ... में wo..ghur नहीं रहा था, सॉरी, मेने कहा न की आप को जिस तरह देखा है तो आप को ऐसे देखना दिमाग एक्सेप्ट नहीं कर पता.

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Achchha तो दिमाग कैसे एक्सेप्ट करता है?

शिव : (में भी muskuraya)Wo hi, सब की बंद बजती हुई, आप को वही सूट करता है.

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Khana खाओ. (हमदोनो खाना खाने lage)Kaisa है खाना?

शिव : अच्छा है मैडम, आपकी कुक अच्छा खाना बनती है.

भार्गवी : ये मेने बनाया है.

शिव : (आश्चर्य se)Kya सचमे! आपने बनाया है?

भार्गवी : तुम तो ऐसे बात कर रहे हो जैसे में लड़की हु hi नहीं, लड़की चाहे कैसी भी हो, खाना बनाना तो आता hi है.

शिव : नहीं ऐसी बात नहीं है, पर मेने कहा न की दिमाग एक्सेप्ट नहीं कर पता, सचमे खाना बहोत अच्छा बना है, पर आपने क्यों तकलीफ की?

भार्गवी : बहोत दिन हो गए थे, तो सोचा बनालू.

शिव : सचमे आप कमल हो मैडम, बहोत टेस्टी खाना है. (हम दोनों ने खाना खाया और फिर सोफे पर बेथ गए, मैडम ने टीवी चालू कर दिया, न्यूज़ देखा, पर कुछ खास नहीं था तो उनहोनेत्त्व बंद कर दिया)

भार्गवी : तो, क्यों गए थे पवनजी के वह? कोई खास काम था?

शिव : वैसे तो खास hi था, आपकी वजह से मुझे वो अपने काम में पार्टनर बना रहे है.

भार्गवी : मेरी वजह से, वो कैसे?

शिव : ये जाहिर गेराज वाले किस्से की वजह से वो जमीं का मसाला सुलझ गया, तो उन्हें प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट उन्हें मिलनेवाला है, वो सोचते है की ये सब मेरी वजह से हुआ है तो वो मुझे अपना पार्टनर बना रहे है.

भार्गवी : तो इसमें गलत क्या है, तुम्हारी वजह से तो हुआ है, अब तो लगता है की अच्छा हुआ हम पकड़े गए, वर्ण ये सब होता hi नहीं.

शिव : आप की वजह से hi हम पकड़े गए थे.

भार्गवी : मेरी वजह से नहीं, तुम्हारी वजह से हम पकड़े गए थे.

शिव : आप याद कीजिये, आपके हिलने से hi आवाज हुई और उसका ध्यान हमारी और गया था.

भार्गवी : है पर में हिली तो तुम्हारी वजह से hi थी न.

शिव : मेरी वजह से? वो कैसे?

भार्गवी : वो tumhara...(wo बोलते बोलते रुक गयी, मेरे भी दिमाग में लाइट हो गयी, मतलब उन्हें सब पता था, हम दोनों चुप हो गए, कुछ देर ख़ामोशी छायी रही, मेरे चेहरे के बदले भाव देख कर वो boli)Yaad आ गया न अब, तुम्हारी वजह से hi सब हुआ.

शिव : (अब में क्या kehta)Sorry मैडम वो...

भार्गवी : तुम्हे शर्म नहीं आती, कैसे तुम वो...

शिव : (थोड़ी नाराजगी se)Meri कोई गलती नहीं थी, वो तो आपकी वजह से hi...

भार्गवी : (मेरे ऊपर दोष डालते hue)Achchha मेरी वजह से, मेने कहा था की...

शिव : (नरम आवाज me)Wo आप मेरे इतना नजदीक थी to...wo हो गया...

भार्गवी : ये भी मेरी hi गलती थी, है न, मेने hi तुम्हे ज्यादा छूट दे दी है, जिसका तुम फायदा उठा रहे हो. अगर तुम्हारी जगह कोई और होता न तो...

शिव : में कोई फायदा नहीं उठा रहा, और अगर मेरी जगह कोई और होता तो ????

भार्गवी : (पास के टेबल पर पड़ी गन उन्होंने उठायी और उसे कवर से बहार निकला, और मेरी और तन kar)Isse देख रहे ho...(Me कभी गन को तो कभी उनको देख रहा था) अगर किसी ने ऐसी हरकत की होती तो उसके भेजे में गोली दाल देती.

शिव : (मेने उन्हें देखा तो सच में वो थोड़ी गुस्सा थी और उनके चेहरे पर कोई भी ऐसी निसानी नहीं थी जिस से लगे की वो मजाक कर रही hai)Aap मुझे डराइए मात, में नहीं डरता, जो सच है वो सच है, मेरी गलती नहीं थी, आप hi मेरे इतने नजदीक कड़ी थी तो वो हो गया.

भार्गवी : तुम्हे पता होना चाहिए की में कोण हु, अभी बताओ, क्या ये गन देख कर भी तुम्हे ऐसा हो सकता hai(Me उनके चेहरे को देख रहा था) में कोई आम लड़की नहीं हु जो तुमने वैसी हरकत कर di.(Muje समाज नहीं आ रहा था की वो क्यों इतना गुस्सा हो रही है, बात कहा थी और कहा आगयी थी, और बात इतनी बड़ी भी नहीं थी, अगर वो मुझसे ऐसे सात कर कड़ी रहेगी तो ऐसा हो gaya)Ab दर लग रहा है न.

शिव : नहीं, मुझे दर नहीं लग रहा (मेने सपाट लहजे में बात की)

भार्गवी : अच्छा दर नहीं लग raha(Unhone मेरे शिर पर गन लगा दी, मुझे समज नहीं आ रहा था की वो मजाक कर रही है की वो सीरियस है, में उनका चेरा पढ़ने की कोशिस कर रहा था पर उनके चेहरे पर कही भी ऐसे संकेत नहीं थे की वो मज़ाक कर रही है)
 
अपडेट 112

भार्गवी मैडम का कुछ समाज नहीं आ रहा था, उन्होंने मेरे माथे पर गन लगा दी थी, में उन्हें देख रहा था, वो मुस्कुरायी, पर ये मुस्कराहट खुसीवली नहीं थी, वो जैसे मेरा मज़ाक उदा रही थी.

भार्गवी : अब पता चला, में कोइड आम लड़की नहीं हु, एक पुलिसवाली हु, तो अब कभी मेरे लिए वैसे विचार आये तो संभल जाना.

शिव : (शांति se)Agar आपको लगता है की वैसी सिचुएशन फिर न हो तो फिर आप मुझसे दूर hi रहा कीजिये.

भार्गवी : क्या मतलब है तुम्हारा?

शिव : अगर फिर से आप मेरे वैसे hi नज़दीक आयी तो फिर से वही होगा.

भार्गवी : (वो आंखे फाडे शिव को देख रही थी, उसे शिव की आँखों में दर नहीं दिख रहा था, उसने गन शिर पर लगा रक्खी थी फिर भी वो कह रहा था की वैसा फिर से हो शक्ति hai)Achchha तुम्हे लगता है की तुम फिर से वैसी हरकत कर शक्ति हो?

शिव : है, हो शक्ति hai.(Gaand तो मेरी भी फैट रही थी, पर ऐसे में झुक जाऊ ये हो नहीं शक्ति)

भार्गवी : (पता नहीं उसे भी क्या बहुत साधा था, हर कोई उस से डरता था, और ये लड़का उसको चुनौती दे रहा था, उसने घूरते हुए kaha)Itni हिम्मत है तो मुझे छू कर दिखाओ? (वो उसे hi देख रही थी, उसने अच्छे अच्छा की पंत गीली होते देखा था)

शिव : (खड़े होते hue)Me चलता हु.

भार्गवी : (उसे समाज नहीं आया, वो भी कड़ी हो गयी, बन्दुक अभी भी उसके हाथ में थी पर निचे की और thi)Kyu निकल गयी साडी हवा?

शिव : (मुझे उनका रवैया समाज नहीं आ रहा tha)Ye सब तब होता है जब दो इंसान एक दूसरे को पसंद करते है, शायद मुझे आप अच्छी लगी थी तो आपके करीब आने से ऐसा हो गया.

भार्गवी : (हस्ते hue)Aur अब बन्दुक देख कर फैट गयी.

शिव : (थोड़े गुस्से दे देखते hue)To आपको लगता है की में बन्दुक से दर गया, और आपको क्या लगता है, आप मुझे गोली मर शक्ति है (भार्गवी उसको देख रही थी, सचमे उसकी आंखोमे कोई दर नहीं था, बन्दुक से डरने की बजाये वो थोड़ा उसके नजदीक आया तो उसने फिर से बन्दुक तन di)(Meri भी सनक गयी थी, मेने उनकी आँखों में देखा, बन्दुक वाले हाथ को साइड में करने लगा तो वो जोर लगा रही थी, मेने और जोर लगा कर बन्दुक साइड में की और उनके और नजदीक जा के खड़ा हो गया, वो मेरी आँखों में देख कर समझने की कोशिस कर रही थी, वो कुछ समझती उस से पहले में झुका और उनके होठो को किश करने लगा, मेने आंखे खुली hi रक्खी थी, उनकी आंखे भी चूड़ी हो गयी, उनकी आँखों से लग रहा था की उन्हें विस्वास नहीं हो रहा था की में उनके साथ ऐसा भी कर शक्ति हु, विस्वास तो मुझे भी नहीं हो रहा था, उन्होंने मुझे धकेलने की कोशिस की तो मेने उनकी कमर में हाथ दाल कर उन्हें कास के पकड़ लिया और उनके होठो को अच्छे से चूस ने लगा, उन्होंने मुझे धक्का दिया तो में दो कदम पीछे हैट गया.





भार्गवी : (अपने होठो को पोछते hue)Tumhari इतनी हिम्मत. (उन्होंने फिर मेरी और बन्दुक तानी)

शिव: इतना क्या सोच रही है, मर दीजिये गोली. (वो खुन्नस में मेरी और देख रही thi)Waise वो सब तो अनजाने में हुआ था, ये तो मेने जान बुज कर किआ है, अब आप मर शक्ति है गोली, पर एक बात कहूंगा, आप है बड़ी मीठी. (मेने अपने होठो पर जीभ फेरी तो वो आश्चर्य से मुझे देखने लगी, में फिर उनकी और बढ़ा)

भार्गवी : वही रुक जाओ, में मजाक नहीं कर रही.

शिव : तो में कोनसा मज़ाक कर रहा हु, आपके रसीले होठो का रास पिने के लिए तो में गोली खाने को भी तैयार hu.(Me आगे बढ़ने लगा)

भार्गवी : (मेरी छाती पर बन्दुक लगते hue)Ruk जाओ, वर्ण में गोली चला दूंगी.

शिव : (मुस्कुराते hue)Chala देना, किसने रोका है, पर एक बार फिर से इन होठो का रास तो पि lu.(Mene उनकी बन्दुक वाले हाथ को साइड में हटाया और फिर से उनके होठो को चूसने लगा, इस बार में अच्छे से उनके होठो को चूस रहा था, वो मुझे धक्का दे रही थी पर मेने उन्हें अच्छे से कास के पकड़ रक्खा था, वो थोड़ी देर मुझे धकेलते रही पर धीरे धीरे उनका धकेलने का जोर काम होता गया, थोड़ी देर बाद वो शांत हो गयी, वो जैसे बूत बन गयी थी, उनके होठो को अच्छे से चूसने के बाद में मेने किश तोड़ी और उनकी आँखों में dekha)Lo अब मारो गोली. (वो अभी भी बूत बने hi कड़ी थी, उनको जैसे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था) कितनी बार कहु की पहले जो भी हुआ था वो अनजाने में हुआ था और परिस्थितिओ की वजह से हुआ था, पर अभी मेने जो किआ वो जानबुज कर किआ है. तो अब मारो गोली. (किश की वजह से वो तेज तेज सांसे ले रही थी, वो थोड़ा होश में आयी और फिर से मेरी कनपट्टी पर बन्दुक लगा दी, और मेरी आँखों में देखने लगी, में मुस्कुराया, उन्होंने घर कर मुझे देखा, उनके खूबसूरत चेहरे पर गुस्सा जांच रहा था, उनके होठ जो हलके लिपस्टिक के रंग से रेंज हुए थे, उन पर लिपस्टिक थोड़ी बिखर गयी थी, मेने उनकी और देखा, वो मेरी आँखों में देख कर समझने की कोसिस कर रही थी, बन्दुक अभी भी मेरी कनपट्टी पर लगी हुई थी, में फिर से झुका और उनके रसीले होठो को चूसने लगा, मेने देखा की उनकी आंखे बंद हो गयी थी, बंदूकवाला हाथ भी मेरे शिर के पीछे चला गया था, मेने उन्हें अपनी और खिंचा और एक हाथ से उनकी कमर को लपेट कर पकड़ा और दूसरे हाथ से उनकी पीठ को अपनी और खिंचा, वो कुछ कर नहीं रही थी पर विरोध भी नहीं कर रही थी, में उनके होठो को चुस्त रहा, मेने अपनी जीभ उनके मुँह में डाली तो उनका मुँह भी खुल गया, में उनकी जीभ से खेलने लगा और उनके बदन को मसलने लगा, उनकी सांसे बहोत तेज चल रही थी, साँस लेने की आवाज भी आ रही थी. उनके होठो को अच्छे से रगड़ने के बाद मेने फिर किस तोड़ी तो वो जोर जोर से सांसे लेने लगी, में उन्हें देख रहा था, वो मेरी और देखने से कतरा रही थी)





शिव : क्या हुआ मैडम, अभी तक गोली नहीं मरी आपने. (उन्होंने मेरी और देखा, फिर उनकी आँखों में थोड़ा गुस्सा नजर आया, तो में मुस्कुराया, उन्होंने गुस्से से अपनी नजर ferli.)Aap तो बहोत स्ट्रांग थी न, फिर क्यों एक आम लड़की की तरह बेहवे कर रही है? आप से ज्यादा तो कोई आम लड़की विरोध करती, लगता है आप खुद भी यही चाहती थी की में आपके साथ ये सब करू, है na?(Wo मुझे घर के देखने lagi)(Bhargavi खुद नहीं समाज प् रही थी की वो विरोध क्यों नहीं कर रही है, अब तक तो उसे गोली मर देनी चाइये थी, पर वो ऐसा कर क्यों नहीं प् रही है, आज बरसो के बाद किसी लड़के ने उसे छुआ था, क्या वो सचमे चाहती थी ऐसा, उसे अपने आप पर hi गुस्सा आ रहा था) आप सचमे बहोत खूबसूरत हो मैडम, मेने कुछ भी गलत नहीं सोचा था आपके बारे में, वो तो बस हो गया था, पर अब आपको देख कर लगता है की शायद में जानते बुझते वो सब करू, पहले इससे rakhdijiye(Mene उनके हाथ से बन्दुक लेनी चाही तो उन्होंने छोड़ी nahi)De दीजिये मैडम, कही गलती से लग गयी तो मेरा सच में राम नाम सत्य हो jayega.(Mene उनके हाथोसे बन्दुक ले ली और टेबल पर रख दी, फिर में उनके सामने खड़ा हो गया, जैसे hi में उनके नजदीक जाने लगा उन्होंने अपना हाथ बीचमे रख दिया, में उन्हें देखने लगा)

भार्गवी : (वो कनपटी आवाज में boli)Tum जाओ शिव.

शिव : चला जाऊंगा, पहले ये बताइये आप मुझपर गुस्सा क्यों है?

भार्गवी : पता nahi(Unhone थोड़े गुस्से में कहा)

शिव : मेने ऐसी तो कोई गलती नहीं कर दी थी की आप इतना गुस्सा हो जाये, आप भी जानती है की वो सब गलती से हुआ था.

भार्गवी : (वो मुझे देख रही थी, थोड़ी देर बाद वो थोड़े गुस्से में hi boli)Aise किसीका मेरे करीब आना मुझे पसंद नहीं.

शिव : मुझे तो नहीं लगता की आप को मेरा करीब आना अच्छा नहीं लगा.

भार्गवी : (गुस्से se)Kya मतलब है तुम्हारा.

शिव : अगर में झूठ बोल रहा हु तो अपने आप से पूछिए, क्या मेरा किश करना इतना बुरा लगा aapko?(Unhone नजर घुमा ली, में मुस्कुराया, मेने उनकी कमर में हाथ दाल कर अपनी और खिंचा तो वो मुझे धक्का देने लगी)

भार्गवी : अपनी हद में रहो शिव, मत भूलो की में कोण हु.

शिव : मुझे पता है, आप एक बहोत खूबसूरत और प्यारी लड़की हो, और में वही कर रहा हु जो ऐसी प्यारी लड़की के साथ किया जाता hai....pyar.(Muje लग रहा था की मेरी भी सटक गयी है, में उन्हें देख रहा था, वो भी मुझे देख रही थी, पर अब उनकी आँखों में ज्यादा गुस्सा नहीं दिख रहा था, मुझे लग रहा था की वो मेरे पर गुस्सा नहीं है पर अपने आप पर गुस्सा है की वो मेरी गुस्ताखिओ को क्यों बर्दास्त कर रही है, उनको छेड़ने में मुझे भी मज़ा आ रहा tha)Aap बहोत मीठी है मैडम, आपके होठ इतने रसीले है की उन्हें फिर से चूमने का मान कर रहा hai.(Me उनके नजदीक हुआ तो उन्होंने फिर से मुझे रोका)

भार्गवी : शिव, में सच में तुम्हे मर दूंगी.

शिव : अब और कितना मारेंगी, में तो पहले hi मर चूका हु. शायद इन होठो का अमृतपान कर लू तो जिन्दा हो jau(Unke होठो पर हाली सी हसी आयी और गायब हो गयी, में उनकी और झुकता गया)

भार्गवी : (मुझे धकेलते hue)Shiiiiiiiiiv. (उनके धक्के में ज्यादा विरोध नहीं था, मेने फिर से उनको मेरी और खिंचा और किश करने की कोशिस करने लगा तो वो अपना शिर इधर उधर कर रही थी, मेने उनका शिर पकड़ा और होठो का रास पिने लगा, वो मुझे थोड़ी देर धकेलती रही पर फिर शांत हो गयी, में फिर से उनके होठो को पिने लगा, पता नहीं क्यों पर उनका विरोध मुझे और उकसा रहा था, इस जंगली घोड़ी को काबू करने में एक अजीब सा आनंद आ रहा था, वो कितनी खतरनाक थी वो में अच्छे से जनता था, अगर वो सचमे नाराज हो गयी तो मेरी खटिया कड़ी कर सकती थी, पर फिर भी मुझे एक अजीब सा आनंद आ रहा था, उनके होठो को अच्छे से चूमने के बाद में उनके गलो को गिला करते हुए उनके गले को चाटने लगा.

भार्गवी : (वो अंदर तक हिल गयी थी, वो इस स्पर्श से पिघल रही थी, पर फिर भी वो उसके काबू में नहीं आना चाहती thi)Shiiiiiiv (उसने उसे धकेलने की कोशिस की, पर वो सच में एक मजबूत शरीर का मालिक था, वो पहला मर्द था जिसके सामने वो अपने आप को कमजोर महसूस कर रही थी, पर फिर भी वो उसे अपने पर हावी नहीं होने देना चाहती थी, अब वो किसी को अपने जीवन में शामिल नहीं करना चाहती थी, पर उसके होठो का गिला पैन उसकी गर्दन पर उसके गलो पर और उसके होठो पर अपना असर दिखा रहा था, वो किसी माँ की गुड़िया की तरह पिघल रही thi.)Chhodo मुझे Shiiiiv(Uski आवाज में भी इतना दम नहीं बचा था, शिव ने जब उसे पलटा तो वो बिना किसी विरोध के पलट गयी, शिव अब उसके पीछे था, वो जाना पहचाना स्पर्श वो अपने कूल्हे पर महसूस कर रही थी, वो चुभन उसकी दिल में हो रही थी, उस चुभन के असर से उसकी आंखे बंद हो रही थी, जिसे वो खुली रखने का प्रयास कर रही थी, शिव का हाथ उसकी नंगी कमर की त्वचा को सेहला रहा था, उसके मजबूत हाथो की पकड़ और उसके तपते होठो की गर्मी से वो पिघल रही thi)Shhhhhhhhhhh , छ्हूऊऊदो shhhhhhhhh(Uski आवाज इस बात का प्रमाण थी की वो इस मरदाना स्पर्श का आनंद ले रही है, उसकी आंखे पूरी तरह से बंद हो चुकी थी, अगर वो खोलने का प्रयास भी करती तो उसे अपनी पलकों पर इतना भर मुसुस हो रहा था की वो वापस बंद हो जा रही thi)(Madam की सिसकी मुझे उकसाने लगी, में उनके सपाट और मखमली पेट को दबोचने लगा, में सोच रहा था की क्या में इस से आगे बढ़ समता हु? थोड़ा दर भी था दिल में, मेरा भी दिल धड़क रहा था, मेने हिम्मत कर के एक हाथ को ऊपर की और उठाया, जैसे hi मेरे हाथ ने उनके स्तन के निचले भाग को छुआ, उन्होंने मेरा हाथ पकड़ liya)Shiiiiv , नाहीईई.

शिव : (उनकी कान की बूत को अपने मुँह में भरते hue)Maat रोकिये मुझे.

भार्गवी : शहहहहह, नहीं शिव, में शह्ह्ह्ह, ऐसा नहीं कर शक्ति.

शिव : क्यों नहीं कर शक्ति?

भार्गवी : पता नहीं, पर ऐसा मात करो, shiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiv (मने उनके एक स्तन को पकड़ hi लिया और दबा diya)Ssssssssss. मत करो शिव छोडो मुझे, (मेने दूसरे स्तन को भी पकड़ लिया और उसे मसलने लगा, भरे हुए स्तन मेरे हाथो में डाब कर रह गए, मेने कभी सपने भी नहीं सोचा था की में मैडम के साथ ऐसा करूँगा, पर अभी उसके सुडौल स्तन मेरे हाथ में थे, में उन्हें मसलने laga)Shiiiiiv मत करो शहहहहह नहीं shiiiiiiv.(Me उनके गाल को चाटने लगा तो उन्होंने अपना मुँह पीछे की और किआ ताकि में उनके होठो को चूस सकू, ऐसे तो वो मन कर रही थी पर वो मेरा साथ भी देने लगी थी, में उनके होठो को चूसने laga)(Bhargavi बेकाबू हो रही थी, इतने समय बाद वो किसी मर्द के बाहोंमे थी, उसने तो सोच लिया था की अब कभी वो ऐसा नहीं करेगी, उसने अपने आप को एक दायरे में बांध दिया था, पर शिव उसके रोके नहीं रुक रहा था, वो उसके काबूमें भी नहीं आ रहा था, वो एक बेलगाम घोड़े की तरह उसके ऊपर हावी हो रहा था, शिव के सख्त हाथो में उसके स्तन मसाले जा रहे थे, दर्द के साथ जो आनंद वो महसूस कर रही थी, वो बयां नहीं कर शक्ति थी, उसके पुरे तब बदन में चींटिया रेंग रही थी, ऊपर से वो कहता उसके चुत्तड़ो को चुभता हुआ अंदर घुसने का प्रयास कर रहा था, उसकी आवाज भी कमजोर पड़ती जा रही thi)Ruk जाओ Shiv(Wo अब हुकुम नहीं चला रही थी, वो बिनती कर रही थी)

शिव : अभी तो सुरु भी नहीं हुआ है और आप रुकने की बात कर रही hai.(Yaha खड़े खड़े मजा नहीं आ रहा था, मेने उन्हें मेरी और घुमाया, वो मुझे देख रही थी, वो कुछ समझती उस से पहले मेने उन्हें अपनी गॉड में उठा लिया, उन्होंने दर से मेरे गले में अपनी बहे दाल दी, में muskuraya)Viswas रक्खो, गिरने नहीं दूंगा. (वो मेरी आँखों में देख रही थी जैसे कुछ ढूंढ रही ho)Bedroom???

भार्गवी : (शिव मुझे पूछ रहा था की बैडरूम कहा है, वो मुझे बैडरूम में ले जाना चाहता था, सच में मेरा दिल भी कर रहा था पर फिर भी कुछ था जो मुझे रोक रहा था) नहीं शिव, में ऐसा नहीं कर शक्ति.

शिव : (मेने उन्हें थोड़ा ऊपर उठाया और उनके होठो को चूमने लगाम फिर उनकी और देख कर फिर puchha)Bedroom???(wo मेरी और देख रही थी, फिर जैसे हथियार डालते हुए उन्होंने अपने एक हाथ से इस्सर करते हुए उन्होंने बैडरूम दिखाया, में मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी, उनको उठाये हुए hi में उस और बढ़ गया, बैडरूम का दरवाजा खोल कर में अंदर गया और उन्हें बीएड पर रक्खा तो वो सिमट ते हुए बेथ गयी, उनको देख कर में मुस्कुराया, और उनके पास बेथ gaya)Inspeeeectooooor भार्गवी sahiba(Mene जिस तरह से बोलै वो मुझे देखने लगी, में मुस्कुराया) में आपको याद दिला रहा हु मैडम, आप एक खतरनाक इंस्पेक्टर हो, हो अच्छे अच्छे को धूल छठा देती है और भी आप ऐसा वर्तन कर रही है जैसे आप एक आम लड़की हो. जरा अपने आपको देखिये, ऐसे सिमट कर बैठी है जैसे एक अबला नारी ho.(Wo मुझे घर कर देखने लगी, में खड़ा हुआ और अपने शर्ट के बुट्टोम खोलने लगा)

भार्गवी : (शिव को कपडे निकलते देख वो अंदर तक हिल gayi)Nahi शिव, हम ऐसा नहीं कर शक्ति.

शिव : क्यों नहीं कर शक्ति?

भार्गवी : ये ठीक नहीं है शिव.

शिव : क्या आप मुझे अपने लायक नहीं समझती?

भार्गवी : (उसे देख रही थी, उसने अपना शर्ट निकल दिया और बनियान भी, उसका कैसा हुआ शरीर देख कर उसके अंदर भी कुछ कुछ होने लगा था, वो उसके पेट पर बने कटाव देख रही थी, लम्बाई में तो वो ावल नंबर था, उसकी आवाज नरम थी) ऐसी बात नहीं है शिव, तुम अभी छोटे हो.

शिव : (मुस्कुराते hue)aur ये आपको कैसे लगा?

भार्गवी : छोटे तो हो hi, हमारी उम्र में भी काफी फर्क है, अगर किसी को पता चल गया तो बहोत बदनामी होगी.

शिव : मतलब आप भी चाहती हो, पर लोगो के दर की वजह से आप मन कर रही हो. (में अपना शर्ट और बनियान निकल चूका था, पता नहीं में अब इतना खुल चूका था की मुझे अब ज्यादा शर्म नहीं आती थी, में अपना पंत भी खोने लगा)

भार्गवी : रुक जाओ शिव, ऐसा मात करो. (में मुस्कुराया और उन्हें देखते हुए अपना पंत भी निकल दिया, ुंडेरवेरा में मेरा उठा हुआ लुंड साफ़ दिख रहा था, उन्होंने भी उसे dekha)Shiv, प्लीज, हम ऐसा नहीं कर शक्ति.

शिव : मैडम, लगता है आप फिर भूल गयी, आप एक पुलिस इंस्पेक्टर हो, अगर आप को पसंद नहीं तो आप बिनती मात करो, सीधा थोक दो मुझे.

भार्गवी : (उनके चेहरे पर हलकी सी हसी थी )में ऐसा नहीं कर shakti(Unke बोलने भी शर्म छलक रही थी).

शिव : क्यों, थोड़ी देर पहले तो आप ने मुज पर बन्दुक तन दी थी.

भार्गवी : मुझे लगा था की तुम दर jaoge.(Me उनके नजदीक गया और उनके कंधे को सहलाया तो कैंप रही थी, मेने उन्हें हलके से धकेलते हुए बिस्तर पर लेता दिया, वो मेरी आँखों में देख रही thi)Nahi शिव, मात करो न. (वो जितना मात करो मात करो कह रही थी मेरा लुंड उतना hi ज्यादा कड़क हो रहा था, उनके गाल को सहलाया और झुकते हुए में फिर से उनके होठो को चूसने लगा, उनकी आंखे फिर से बंद हो गयी, अब वो भी मेरे होठो को चूस रही थी, (भार्गवी का मान तो विरोध कर रहा था पर उनका शरीर साथ नहीं दे रहा था), उनका एक हाथ मेरी कमर को सहलाने लगा था, थोड़ी देर बाद फिर मेने किश तोड़ी और उन्हें देखा, वो मेरी आँखों में देख रही thi)Ruk जाओ Shiv(Wo मुझे रुकने को बोल रही थी पर मुझे रोक नहीं रही थी, में साइड से लेता हुआ था तो एक हाथ को उनके नंगे पेट पर रख दिया और उसे सहलाने लगा, मेरे हाथ को पकड़ते hue)Shiiiiiv.

शिव : कुछ नहीं होगा शांत रहिये. (मेने अपने हाथ को ऊपर खिसकाया और उनके स्तन को मसलने लगा, ब्लाउज में कैद उन उन्नत मास्स के गोले को में अच्छे से दबा रहा था, वो अपने होठो को दबा कर आवाज दबाने की कोशिस कर रही थी) आप बहोत कमल की हो madam(Bhargavi समाज रही थी की उसके स्तन को कमल के कह रहा था, वो जानती थी मर्दो को ये अंग बहोत आकर्षित करता है, उसके स्तन को दबाने से वो मचल रही थी, उसके सख्त हाथ वो अपने नाजुक से स्तनों पर महसूस कर रही थी) वो उसके ब्लाउज की हुक खोने लगा तो उसकी धड़कने तेज चलने लगी, उसने हाथ पकड़ कर रोकना चाहा पर शिव ने उसके हाथ को झटक दिया, जैसे जैसे हुक खुल रहे थे उसकी हालत ख़राब हो रही थी, आखिर कर ब्लाउज खुल गया और उसके ब्रा में कैद स्तन शिव के सामने थे, वो शर्म से गाढ़ी जा रही थी, उसने अपने स्तन को ढकने का प्रयास की, पर शिव ने उसका हाथ हटा दिया)

भार्गवी : शिव, मुझे शर्म आ रही है, ऐसा मात करो, please.(stan भरे हुए थे और ब्रा में कैद होने पर ऊपर की तरफ निकल आये थे, में उस नंगी जगह पर अपने हाथो से छू रहा tha)(Bhargavi ने चद्दर को अपनी मुठी में पकड़ liya)Ummmmm ummmmmm(Wo एक तरफ तो शिव को रोकना चाहती थी पर वो असमर्थ थी, उसको ये एहसास इतना अच्छा लग रहा था की वो उसे रोक नहीं प् रही थी, जब वो उसकी बाकि बची साड़ी को उतरने लगा तो उसने कोई विरोध नहीं किआ, अब वो पेटीकोट में थी, शर्म से वो पानी पानी हो रही थी पर उत्तेजना उसके शरीर पर हावी थी, जब शिव ने उसकी झंघ को सहलाया तो वो कैंप सी गयी, उसने अपनी झंघे आपस में सत्ता दी, पर फिर भी शिव के हाथ नहीं रुके, वो लगातार उसकी झांघो को सेहला रहा था, और उसके स्तन को चुम रहा था, जब वो उसके पेटीकोट को ऊपर उठाने लगा तो उसे इतनी शर्म आयी की वो घूम गयी)

भार्गवी : नहीं शिव, (वो मन कर रही थी, वो भूल गयी की शिव के सामने अब उसके फैले हुए कूल्हे थे, जब शिव के हाथ ने उसके कूल्हों को मसाला तो उत्तेजना और शर्म के मिले जुले आनंद से वो कैंप ने lagi)Shhhhh नहीं शह्ह्ह्ह मत करो shhhhhhhh(Wo बिना रुके मेरे कूल्हों को मसल रहा था, मेरे कूल्हों की गोलाई पर अपने पंजी से सेहला रहा था, एक अजीब सी लहर मेरे पुरे शरीर में दौड़ रही थी, कूल्हों को दबाते हुए वो नंगी पीठ को चूमने लगा और ब्लाउज को निकलने लगा, में जैसे एक कठपुतली बन गयी थी,)( शिव ने उनका ब्लाउज निकल दिया, और उनके उन्नत उरोजों को अपने हाथो से मसलने लगा, उसने अपने आपको उसके पीछे सत्ता दिया था जिस से उसका वो तना हुआ अंग उनके कूल्हों की दरार में घुस रहा था, उसके स्तनों को अच्छी तरह मसलने के बाद उसका हाथ निचे गया और उसके पेटीकोट की गांठ को ढूंढने laga)(Bhargavi ने उसका हाथ पकड़ लिया पर वो उसे रोक न पायी, शिव के आगे जैसे वो बेबस थी, उसका नाडा खुल चूका था, शिव बिस्तर पर बेथ गया और उसका पेटीकोट निचे खींचने लगा, उसने पेटीकोट को पकड़ कर रोकने का प्रयास किआ पर वो नाकाम रही, शिव ने उसका पेटीकोट निकल दिया था, वो जानती थी पंतय में कैद उसके आधे नंगे कूल्हे शिव के सामने थे, वो महसूस कर रही थी की कैसे शिव उसके कूल्हों को देख रहा होगा, शर्म के साथ साथ उसको उत्तेजना महसूस हो रही थी, थोड़ी देर में hi उसकी शर्म उस पर हावी होने लगी और उसने अपने हाथ से अपने कूल्हों को छुपाने की नाकाम कोशिस करने लगी, हलाकि उसे पता था की उसके बड़े कूल्हे उसके हाथ से छुप नहीं शक्ति पर वो उसे ढकने की कोशिस की. पर शिव ने उसका हाथ पकड़ कर हटा दिया, वो शर्म और उत्तेजना से कैंप रही थी, शिव ने उसके कूल्हों को सहलाने लगा, और दबाते हुए उसे महसूस कर रहा था, शिव के हाथ उसके नंगे कूल्हों को छू रहे थे, उसकी छूट में से बेहटा ढेर सारा रास वो महसूस कर प् रही थी, उसने शिव के हाथ को रोकने का भी प्रयास किआ पर शिव कहा मन रहा था. शिव उसके हाथ को पकड़ कर उसके कूल्हों को चुम ने लगा, उसके होठ उसके कूल्हों की गोलाई पर फिसल रहे थे, वो पूरी उलटी लेट गयी, शिव उसकी नंगी पीठ को चूमते हुए उसके कूल्हों को दबा रहा था, जिस से उसके बदन में चिंगारिया फुट रही थी, इस स्पर्श के आनंद से उसके शरीर का रोआ रोआ खड़ा हो गया था, पर अभी भी वो इस परिस्थि से बहार आने की सोच रही थी, अभी भी वो अपने आप को इस के लिए तैयार नहीं समाज प् रही थी, कहना कही उसे लग रहा था की वो ऐसा नहीं कर शक्ति, वो ये सोच hi रही थी की शिव उसके ऊपर हो गया, उसका वो कड़क लुंड उसके छतादो के नीचे चुभ ने लगा, शिव की नंगी छाती का स्पर्श उसे अपनी नंगी पीठ पर होने लगा, उस गरम बदन के एहसास से hi उस की एक लम्बी सिसकी निकल गयी, वो महसूस कर रही थी की शिव जान बुज कर उसका वो अंग उसके हुलहो की दरार में दबा रहा था और उसकी नंगी पीठ को चुम रहा था, सिसकीओ से पूरा कमरा गूंज रहा था. वो एक नौजवान लड़के के साथ जिस अवस्था में थी उसे बहोत शर्म भी आ रही थी, शिव उसके कूल्हों पर अपने कड़े अंग से हलके हलके धक्के लगा रहा था उसे महसूस करके वो शर्म से गाढ़ी जा रही थी पर वो कुछ कर नहीं प् रही थी, वो बस सिसक शक्ति थी, वो अपने आपको पूरी तरह बेबस महसूस कर रही थी, शिव उसे अपने निचे दबाये उसके साथ खेलता रहा, ये सब उसकी कल्पना से बहार था, ऐसी उत्तेजना तो उसने कभी अपने पति के साथ भी महसूस नहीं की थी, शिव उसे अपने निचे दबाये हुए उसकी गर्दन और नंगी पीठ पर अपने दांतो से हलके हलके काट रहा था, वो बेबसी से उसकी कठपुतली बानी हुई थी. पीछे लगे ब्रा के हुक भी शिव खोलने लगा तो उसने उसे खोलने दिया और उसकी ब्रा को जब वो उसके कंधे से सरका रहा था उसने कोई भी विरोध न करके उसकी मदद की, अब उसकी पीठ पूरी नंगी थी. शिव उसके ऊपर फिर से चिपक गया, उसकी छाती नंगी hi उसकी पीठ से चिपक गयी, उसके नंगे बदन का एहसास अद्भुत था, कितने साल बाद वो किसी मर्द के साथ इस अवस्था में थी, इस सुखद एहसास से वो पूरी तरह पिघल रही थी.

शिव : Madam(Jab शिव ने उसके कान के पास आ कर कहा तो वो शर्मा गयी, वो बोलने से कटरा रही थी, उसने कोई जवान न दिया, शिव ने फिर pukara)Madam. (जब भार्गवी ने कोई जवाब न दिया तो शिव फिर bola)Me आपकी पंतय उतरने जा रहा hu.(Bhargavi का दिल जोरो से धड़कने लगा, वो उसे रोकना चाहती थी)

भार्गवी : (लम्बी लम्बी सांसे लेते हुए उसने kaha)Nahi Shiv.(Par शिव उसकी सुन hi नहीं रहा था, वो उसकी नंगी पीठ पर अपने होठो का जादू चलते हुए निचे की और खिसकने लगा, वो आंखे बंद किये हुए शिव के होठो को निचे की और फिसलते महसूस कर रही थी, जब वो उसकी कमर तक पहुंच गया तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, उसने महसूस किआ की शिव ने उसकी पंतय के अंदर हाथ दाल कर उसके शिरो को पकड़ लिया है और उसे थोड़ा निचे खिसकते हुए कूल्हों की दरार पर अपने होठ से चुम रहा है, ये जितना उत्तेजक था उस से ज्यादा उसे शर्म से भर रहा था, उसका हाथ पीछे चला गया, पर उसके हाथ में शिव के बाल आये, उसने बालो को पकड़ कर उसे रोकने का प्रयास किआ पर शिव की जीभ उसके कूल्हों मि दरार में घुस रही थी और पंतय निचे की और खिसक रही थी,) नहीं शीइइइइव, रुक jao(par वो उसकी पंतय उतरता रहा, उसने महसूस किआ की उसके चुत्तड़ पुरे नंगे हो चुके है, शिव ने उसकी पंतय निकल कर उसे पूरी नंगी कर दिया है ये सोच कर hi वो शर्म से गाढ़ी जा रही थी, वो पूरी नंगी शिव के सामने थी)

में उस हुस्न को देखने के लिए बिस्तर से उतर कर खड़ा हो गया, में इस बेमिसाल हुस्न को देख रहा था, कसरती बदन, पतली कमर, और वो एक औरत थी तो जूही के मुकाबले उसके कूल्हे और फैले हुए थे, भरे हुए उस मॉस के गोलों को देख कर मेरी हालत ख़राब हो रही थी, गोर रंग का वो बदन बे डेग तो नहीं था, कई जगह टिल और हलके गहरे डेग उस बदन की सोभा बढ़ा रहे थे, बालो का नमो निशान नहीं था, पेअर पर भी बाल नहीं थे, वो किसी कातिल हसीना से काम नहीं थी, मुझे यकीं नहीं हो रहा था की वो भार्गवी मैडम hi है, उनके शरीर पर एक भी वस्त्र नहीं था और वो पूरी नंगी लेती हुई थी, उनके कूल्हे उभर कर अपना अस्तित्व प्रमाणित कर रहे थे, वो किसी को भी अपनी और आकर्षित करने का सामर्थ्य रखते थे, में उस हुस्न की देवी को निहार ने में खोया हुआ था, मेरा लुंड ठुमके मर रहा था. (कमरे में कोई भी हलचल नहीं थी, मेने शिव को भी बिस्तर से उतारते महसूस किआ था, मेरी समाज में नहीं आ रहा था की वो कहा गया, में बिस्तर पर पूरी नंगी लेती हुई थी, ऐसा नहीं था की में पहली बार नंगी थी, एक शादीशुदा होने की वजह से ऐसा कई बार हुआ था, पर वो मेरा पति था, और ये शिव, वैसे वो कोई अंजना नहीं था, पर वो कोई उसका प्रेमी या पति भी नहीं था, है वो उसे पसंद जरूर था, क्यों की शिव था hi ऐसा, वो दिखने में इतना प्यारा था की जब उसने पहली बार उसे देखा था, तभी वो उसकी और आकर्षित हो गयी थी, उस दिन वो एक मुजरिम के तौर पर उसकी कस्टडी में था, पर फिर भी उसे देख कर hi उसके दिल में कुछ हुआ था, ऐसे तो वो कभी किसी लड़के या मर्द की और आकर्षित नहीं होती थी, न hi वो कभी उस नजर से उन्हें देखती थी, पर पता नहीं क्यों वो शिव के प्रति आकर्षित हो गयी थी, इसीलिए उसने उसकी मदद भी की थी, जब उसने मैनेजर और इंस्पेक्टर को धोया था तो उसे आश्चर्य हुआ था की ऐसा भोला दिखनेवाला लड़का ऐसा कैसे कर शक्ति है, पर जब उसने उसे परखा तो पता चला की वो सचमे ताकतवर है, वो उसकी और खींचती चली गयी थी, पर वो अपने स्थान को भी समझती थी, वो इस तरह की घटिया हरकत नहीं कर शक्ति थी, वो उसके करीब तो आना नहीं चाहती थी पर अपने आपको रोक भी नहीं पायी थी, कसरत ने उसे वो मौका दिया था, वो कई सालो बाद किसी लड़के के साथ इतना नजदीक हुई थी, जब वो चला जाता तो वो अपने आपको समजती की वो ऐसा नहीं कर शक्ति पर उसका दिल मान hi नहीं रहा था, पता नहीं क्या जादू था उसमे. ऊपर से उसकी वजह से hi उसको ये मौका मिला था और वो इस पुलिस स्टेशन की इंचार्ज तक बन गयी थी. और जब उसने जाहिर गेराज में तबाही बन कर उन गुंडों को मरते देखा तो वो उसकी फैन बन गयी, पर फिर भी वो अपने स्थान, अपने रुतबे को नहीं छोड़ सकती थी, और अगर उसके सम्बन्ध शिव के साथ बांभी गए तो क्या फायदा था, उन्दोनो की उम्र में काफी अंतर था, इस्सलिये वो उस से दूर hi रहना चाहती थी, आज उसने बन्दुक तन कर उसे डरने का तक प्रयास कर दिया था, पर नतीजा क्या निकला, वो अभी बिस्तर पर नंगी लेती हुई थी, उसने हलके से आंख खोल कर देखा तो उसने शिव को खड़ा पाया, अभी उसके कमर तक का भाग hi दिख रहा था तो उसने थोड़ी गर्दन मोदी और उसके चेहरे की और देखा, तो वो ललचायी नजरो से उसके नंगे बदन को देख रहा था, उसे शर्म के साथ साथ अपने आप पर गर्व भी हुआ की वो इतनी आकर्षक है की वो उसे ऐसे देख रहा है, तभी उसने देखा की शिव उसकी अंडरवियर उतर रहा है, जब उसकी नजर उछलकर बहार आये उस बड़े से अंग पर पड़ी तो उसका कलेजा मुँह को आ गया, उसकी सांसो की रफ़्तार तेज चलने लगी, वो दर और आश्चर्य से उसे देख रही थी, उसने अपने पति का लुंड देखा था पर ये उसकी कल्पना से बहार था, वो एक अच्छी लड़की थी तो अपने पति के अलावा उसने किसी और का देखा नहीं था और नहीं कभी ऐसा सोचा था, पर इससे देख कर उसके पशीने छूट गए, जब उसने देखा की शिव उसकी और बढ़ रहा है तो वो दर गयी और उसने अपने पास में पड़ी चद्दर से अपने आपको छुपाते हुए बेथ गयी)

अचानक उनके ऐसे रवैये से में चौंक गया और उनकी और देखने लगा, में पूरा नंगा उनके सामने था, मेरा लुंड उनकी और hi खड़ा था, वो फटी आँखों से मेरे लुंड को hi देख रही थी.

शिव : (में उनके नजदीक gaya)Kya हुआ मैडम, आप ऐसे क्यों बर्ताव कर रही है?

भार्गवी : वो.... बहोत बड़ा है.

शिव : (मुझे हस्सी आ गयी) क्या मैडम, में आपकी बन्दुक से नहीं डरा और आप मेरी बन्दुक से दर गयी?

भार्गवी : ये मज़ाक था, है है, पर मुझे हसी नहीं आयी.

शिव : (मुझे भी उनकी हालत समाज आयी, में उनके साथ में बेथ गया और उनके कंधे पर हाथ रक्खा) आप तो शादीसुदा थी, आप ने पहलीबार तो नहीं देखा, फिर क्यों इतना ज्यादा रियेक्ट कर रही है.

भार्गवी : वो इतना बड़ा नहीं होता शिव.

शिव : अगर थोड़ा बड़ा है तो क्या हुआ?

भार्गवी : नहीं शिव, वो बहोत बड़ा है. (उनकी सांसे अभी भी तेज चल रही थी, मुझे एक और तो हसी आ रही थी, इतनी बड़ी अफसर, कैसे बच्चो जैसा व्यव्हार कर रही थी)

शिव : तो क्या हुआ, कुछ नहीं होगा.

भार्गवी : नहीं शिव, वो वह अंदर नहीं जायेगा. (अचानक भार्गवी को ख्याल आया की वो क्या बोल गयी तो वो शर्मा गयी, में उनके दर को निकलना चाहता था तो मेने कहा)

शिव : कुछ नहीं होगा, आप भरोसा kijiye(Wo मेरी और देख रही थी, अभी भी उन्हें मेरी बात पर भरोसा नहीं था, मेने उनकी आँखों में देखा और उन्हें सहज करने के लिए फिर से उनके होठो को चूमने लगा)

भार्गवी : (वो उसका साथ देने लगी, पर फिर से उसके मान में लुंड की तस्वीर उभर आयी, उसने शिव को धकेलते hue)Nahi शिव, मुज से नहीं होगा, प्लीज, हम फिर कभी करेंगे. (पता नहीं क्यों वो दर रही थी, उनके मान से दर निकलना जरुरी था, वो इतनी मातुरे थी पर फिर भी इतनी से बात को नहीं समाज रही थी, इन लड़कीओ का मुझे समाज hi नहीं आ रहा था, दुनिया के सामने वो अलग थी और यहाँ एकांत में वो अलग थी, उनके इस भोले पैन पर सच में मुझे बहोत प्यार आ रहा था, पर परिस्थिति को संभालना भी जरुरी था, में सोच में पद गया, क्या अभी रहने दू या फिर थोड़ी जबरदस्ती कर लू ताकि उनका दर निकल जाये)
 
अपडेट 113

भार्गवी मैडम अपने आप को चद्दर में समेटे हुए बिस्तर पर बैठी हुई थी, में उन्हें देख रहा था, वो क्यों घबरा रही थी मुझे समाज नहीं आ रहा था, वो एक शादीशुदा औरत है, उन्होंने बरसो सेक्स किआ होगा, फिर वो क्यों इतना ओवर रियेक्ट कर रही है. सेक्स मेरे लिए इतना मायने नहीं रखता था, अभी में अगर घर चला गया तो वह सब मेरा ख्याल रख लेंगे, पर मुझे चिंता थी मैडम की, जितना में उन्हें जनता था वो एक अच्छी और शरीफ लड़की है, अपने शादीशुदा जीवन से वो बहोत दुखी है, जवानी में वो अकेले जीवन गुजर रही है, जिस तरह वो सेक्स के लिए राज़ी हो गयी थी वो दर्शाता था की उन्हें भी इसकी आवस्यकता है. समाज में वो एक ओहदे पर थी, और उस ओहदे का मान रखते हुए वो कोई घटिया हरकत नहीं कर शक्ति थी और न hi वो किसी के साथ इस तरह के सम्बन्ध जाहिर कर शक्ति थी, आज शायद बरसो बाद वो अपनी भावनाओ में बह कर इतना आगे बढ़ गयी थी, मुझे उनका दर दूर करना hi होगा, मुझे पता है की सेक्स भी कितना जरुरी होता है, ये न केवल शरीर को सुख देता है बल्कि मान को भी प्रफुल्लित कर देता है, मेने उनका एक हाथ अपने हाथ में लिया, वो मेरी और देख रही थी.

शिव : क्या आप ये पहली बार कर रही है? (मेने भी ये बेवक़ूफ़ीवाला सवाल जानबुज कर किआ था)

भार्गवी : (मेरी आँखों में देखते hue)Nahi.

शिव : तो फिर आप इतना ओवर रियेक्ट क्यों कर रही है? मुझे तो ऐसा लग रहा है की जैसे कोई नादाँ लड़की पहली बार करने से पहले घबरा रही है.

भार्गवी : मुझे तो लगा था की तुम नादाँ हो, पर लगता नहीं की तुम उतने भी भोले हो.

शिव : सच कह रही हो आप, इसीलिए में कह रहा हु की कुछ नहीं होगा, ट्रस्ट में. और अगर आपको फिर भी दर लग रहा है तो हम सेक्स नहीं करेंगे.

भार्गवी : वही तो में कह रही हु.

शिव : मेरा मतलब है सेक्स नहीं करेंगे, पर प्यार तो कर hi शक्ति हु.

भार्गवी : मतलब?

शिव : (उनके हाथ को चूमते hue)Me आप को पूरा देखना चाहता हु और आपको हर जगह चूमना चाहता हु. आपको भले hi एहसास न हो पर आप सचमे बहोत खूबसूरत है, और आपको देखना और प्यार करना, किसी सपने से काम नहीं होगा.

भार्गवी : (मैडम के चेहरे पर मुस्कान टेरने lagi)Chane के झाड़ पर चढ़ा रहे हो?

शिव : (उनके हाथ को चूमते हुए एक ऊँगली को अपने मुँह में ले लिया, वो मुझे देख रही थी, उनका चेहरा बदल रहा tha)Me सच बोल रहा hu(Me उनके साइड में बेथ गया, और एक हाथ उनके गले में डालते हुए उनके स्तन पर ले गया, दूसरे हाथ से उनका चेहरा मेरी और कर के उनके होठो पर किश करने लगा, थोड़ी देर किश करने से वो पूरी तरह से शांत हो गयी, किश करने के बाद वो मुझे देख रही थी)

भार्गवी : क्या में सचमे इतनी खूबसूरत हु? (उन्होंने हर लड़की की तरह मुझे सवाल किआ, हर लड़की को अपनी तारीफ सुन न पसंद होता है, और लड़की क्यों, हर एक इंसान को अपनी तारीफ पसंद होती है)

शिव : है, सच मच, यू अरे सो बूटीफुल, एंड टूवू सेक्सी.

भार्गवी : (मेरी छाती पर मुक्का मरते hue)Marungi.

शिव : क्यों?

भार्गवी : ब्यूटीफुल तो ठीक है पर सेक्सी, तुम्हे शर्म नहीं आती मुझे ऐसा कहते हुए.

शिव : आप सचमे सेक्सी हो, पहले मेने आपको उस नज़र से नहीं देखा था पर आज मेने आपको वैसे देखा जैसे एक लड़की को देखते है, आप सच में सुपर हॉट और सेक्सी हो, आपकी वर्दी मुझे आपकी और ऐसे देखने से रोकती थी, पर अभी आप इंस्पेक्टर नहीं एक आम लड़की हो, तो में आपको वैसे देख सकता हु.

भार्गवी : (थोड़ा सीरियस होते hue)Shiv (वो खामोश हो गयी, वो मेरी आँखों में देख रही थी, जरूर उनके मान में कुछ चल रहा था)

शिव : क्या हुआ, कहिये जो कहना है.

भार्गवी : शिव, ये सम्बन्ध बनाने से और बढ़ने से क्या फायदा?

शिव :(में उनकी बात समाज रहा था, एकस्वर अच्छी लड़कीअ ऐसा hi सोचती है, वो एक रात वाले सम्बन्ध का नहीं सोचती) सच कहु तो मुझे भी नहीं पता, ये आपके ऊपर है की आपको क्या चाहिए, सच कहु तो अभी तो मुझे भी कोई फायदा नजर नहीं आता, में कोई वादा भी नहीं कर शक्ति, तो फायदा कोई नहीं है पर नुकशान भी कोई नहीं है. अगर सिर्फ अभी का फायदा सोचे तो मुझे एक बहोत खूबसूरत लड़की मिल रही है. आपका पता नहीं.

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Tabhi तुम मुझे अच्छे लगते हो, तुम दुसरो की तरह दिखावा नहीं करते, मेने अक्सर देखा है की लड़के ये सब करने के लिए कोई सा भी वादा कर लेते है, पर तुमने वैसा नहीं किआ, में भी समाज शक्ति हु की हमारा कोई भविस्य नहीं हो सकता, और शायद इसीलिए में आगे बढ़ने से कतरा रही हु.

शिव : जूथ मत बोलिये, आपतो मेरा वो देख कर दर रही है.

भार्गवी : (Muskurayi)Wo भी है, वो इतना बड़ा कैसे है?

शिव : वो तो मुझे पता नहीं, शायद में लम्बा हु इस लिए वैसा है, पर सच कहता हु आपको मज़ा आएगा. (वो शर्मा गयी, और मुझे एक मुक्का mara)Sach कह रहा हु, अगर आप उस से दोस्ती कर लोगी तो वो आपको खुस कर देगा.

भार्गवी : (उसे बहोत हसी आ रही थी, वो जिस तरह से बात कर रहा था, ऐसी बाटे उसने कभी नहीं की thi)Achchha, और उस से दोस्ती कैसे करते है?

शिव : ऐसे (मेने मैडम का हाथ पकड़ कर मेरे लुंड पर रख दिया, वो अपना हाथ खिंडने लगी पर मेने खींचने नहीं diya)Sharmaiye मात, बस उसे थम लीजिये.

भार्गवी : (उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, वो पहली बार शिव के अंग को पकड़ रही थी, किसी के साथ इतना नजदीकी सम्बन्ध, उसके अंदर हलचल मचा रहा tha)Shiiiiiv, मुझे शर्म आ रही है, छोडो मेरा hath.(Mera हाथ तो उनके स्तन पर hi था, मेने उसे हलके हलके दबाते हुए कहा)

शिव : कुछ नहीं होगा, उसे महसूस कीजिये, आपका दर भी निकल jayega.(Bhargavi उस अंग को देख रही थी, वो उसके हाथ में भी नहीं समां रहा था, उसे आश्चर्य भी हो रहा था पर उसके अंदर एक अजीब सी हलचल हो रही थी, अनजाने में hi सही पर उसे अपने पति का याद आ गया, वो जब उसे पकड़ती थी तो उसकी उंगलिअ और अंगूठा आपस में मिल जाता था, पर इससे पकड़ते हुए उसने देखा की अंगूठे और उंगलिओ के बीचमे भी तीन उंगलिओ का अंतर है, उसने शिव का निजी अंग पकड़ा हुआ था, उसे शर्म भी आ रही थी, पर इतने सालाबाद वो पुरुष के अंग को छू रही थी, एक स्त्री के तौर पर उसके शरीर में हलचल होना तो स्वाभाविक था, उसको अपनी योनि में सरसराहट होती महसूस हो रही थी, शिव दोनों हाथो से उसके स्तनों से खेल रहा था, वो उसके निप्पल को दबा रहा था, उसके ऐसा करने से सीधे उसकी छूट के अंदर कुछ हो रहा था, उसकी सांसे भरी होने लगी थी, वो लुंड की चमड़ी को हलके हाथो से ऊपर नीचे कर रही थी, अंदर से बहार झांकता लाल रंग का सूपड़ा भी काफी मोटा दिख रहा था, दर के साथ साथ एक रोमांच भी था. वो लुंड में इतना खोयी हुई थी की उसे पता hi न चला की कब शिव का एक हाथ उसकी योनि की और चला गया, वो उसकी झांघो को फ़ैलाने की कोशिस कर रहा था, उसने अपनी झंघे स्टडी तो उसका हाथ डाब गया, पर उसकी एक ऊँगली अपना काम कर रही थी, उसके अंदर तरंगे उठना सुरु हो गयी थी, उसका दबाव काम होता गया और उसकी झंघे खुलने लगी, वो शिव की और देखने की भी हिम्मत नहीं जूता प् रही थी, आज कितने सालो बाद उसकी छूट से कोई खेल रहा था, ये रोमांच उसके तन बदन में आग भर रहा था, अपनी छूट के रास से भीगी ऊँगली उसकी दरार में फिसल रही थी, उसका हाथ लुंड पर कसता चला गया, उसकी सांसे तेज चलने लगी, उसका पूरा ध्यान शिव की ऊँगली पर था, जब वो ऊँगली उसकी छूट के छेड़ पर तिकी तो उसकी सांसे थम गयी, उगंली उसकी छूट के छेड़ में उतरने लगी, वो आंखे बंद किये उस ऊँगली को अंदर जाते महसूस कर रही थी, हलके हलके रगड़ते हुए शिव अपनी ऊँगली छूट में दाल रहा था, अपनी छूट में हो रहे घरसँ को वो आंख बंद किये हुए महसूस कर रही थी, उसे ऊँगली और अंदर चाहिए थी, उसने अपनी झंघे फैला दी ताकि शिव को आसानी ho)s

मेरी नजर मैडम के चेहरे पर थी, ऊके चेहरे पर कामोत्तेजना साफ़ दिख रही थी, वो आंखे बंद किये सिसकिया ले रही थी, मुझे छूट पर बाल नजर आ रहे थे, पर उन्हें काट कर छोटा किआ गया था, छूट के फुले हुए होतो के बिच मेरी ऊँगली अंदर बहार हो रही थी, जिस तरह से छूट से पानी बह रहा था मुझे यकीं था की उन्हें बहोत मज़ा आ रहा है, में ऊँगली से छूट की अंदरूनी दीवाल को जल्दी जल्दी कुरेद रहा था, वो अपनी झंघे फैला रही थी और साथ में निचे की और खिसक रही थी, मुझे भी उनकी छूट देखनी थी, में लालायित था उनकी छूट को देखने के लिए, मेने उनकी गर्दन से हाथ निकला और ऊँगली करते हुए hi निचे जाने लगा, मेरा लुंड उनके हाथ से छूट गया, मेने उनके चेहरे को देखा तो वो अधखुली आँखों से मुझे देख रही थी, में उनके पैरो के बिछ बेथ गया और ऊँगली करते हुए उनकी छूट देककन लगा, छूट अभी भी गुलाबी होतोवाली थी, छेड़ देख कर लग रहा था की जैसे किसी कुवारी कन्या के हो, गुलाबी छेद से ढेर सारा पानी बह रहा था. में झुक गया और उनके छूट के डेन को चूसने लगा, मैडम की कमर हवामे उठ गयी और शर बिस्तर पर चला गया, उनके हाथ ने मेरे बालो को चिंच दिया, में बालो के दर्द को नजर अंदाज करते हुए उनकी छूट को चाटने लगा, मेने ऊँगली बहार निकल दी और पूरी छूट के होठो को चूसने लगा, वो नमकीन मीठा पानी मेरे मुँह में अपना असर दिखने लगा, उनकी छूट की खुसबू से मेरे नथुने भर गए और मेरा लुंड कूदने लगा. मैडम की गर्म सिसकरिअ मेरी उत्तेजना बढ़ा रही थी. मेने देखा की मैडम, अपनी आंखे बंद किये हुए अपनी कमर ुंचक कर अपनी छूट को मेरे मुँह पर रगड़ रही थी,

उन्हें ऐसे देख मेरी हालत भी उत्तेजना से ख़राब होने लगी, में उनकी पूरी छूट को, गांड के छेड़ तक चाट रहा था, वो इतना उछाल रही थी की उन्हें काबू करना भी मेरे लिए मुश्किल हो रहा था, उनकी बेसब्री देख में समाज रहा था की वो शायद छूटनेवाली है, और कोई वक़्त होता तो में उन्हें छूटने में मदद करता पर भी में इस बात का फायदा उठाना चाहता था, छूट को चाट ते हुए में ऊपर जाने लगा, उनका पेट चाट ते हुए में ऊपर होने लगा, उनके बूब्स को चाट ते हुए में उनके होठो तक पहुंच गया.

भार्गवी के मान में गुस्सा भर रहा था, कितना अच्छा लग रहा था उसे, बरसो का जमा हुआ पानी निकलने hi वाला था की शिव ने उसकी छूट से अपना मुँह हातलिया था, वो जोर जोर से सांसे ले रही थी, और शिव को कंधे से पकड़ कर निचे धकेलने की कोशिस कर रही थी, पर वो था की ऊपर hi आ रहा था, उसने पूरी ताकत से उसे निचे धकेलने की कोशिस की पर वो बहोत ज्यादा ताकतवर था, उसने उसे अपने निचे दबोचलिया था, पर ऐसा करते hi उसकी छूट पर लुंड की चुभन होने लगी, उसकी फैंको के बिच लुंड फिसल रहा था, लुंड के छूटे hi फिर से उसे आनंद आने लगा और वो अपनी छूट को लुंड पर रगड़ने लगी, इस वक़्त उसके दिमाग में और कुछ भी नहीं था, बस उसे अपना पानी निकलना था, वो उसको जकड़ते हुए अपनी कमरे हिला हिला के लुंड पर अपनी छूट रगड़ रही थी, (में भी सचेत था, में सही समय को धुंध रहा था, मैडम की बेसब्री भी मुझे महसूस हो रही थी, मेने जैसे तैसे लुंड को छेड़ पर सेट किआ) भार्गवी को भी महसूस हुआ की लुंड उसकी छूट के छेड़ पर है पर वो उत्तेजना में पागल हो रही थी, बरसो बाद मिले इस आनंद से वो पागल होने लगी, वो अपनी कमर को हिला कर लुंड पर दबाने लगी, उसको महसूस हुआ की शिव ने उसकी कमर पकड़ ली है और उसे अपनी और खिंच रहा है, वो समाज चुकी थी की अब वो उसकी छूट में प्रवेश कर जायेगा, वो रोके की न रोके ये सोचती समझती उस से पहले hi लुंड उसकी छूट की दीवारों को फैलता हुआ अंदर उतरने लगा,





एक तो इतने समय बाद उसकी छूट में कुछ जा रहा था ऊपर से शिव का लुंड मोटा भी था, उसे महसूस हुआ की उसकी छूट का छेड़ बहोत ज्यादा फ़ैल गया है, उसे दर्द हुआ पर लुंड को अंदर जाता महसूस कर उसे अच्छा भी लग रहा था, दर्द के बावजूद वो शिव को अपनी और खिंच रही थी, लुंड उसकी छूट को चीरता हुआ अंदर और अंदर जा रहा था, उसकी सांसे फूलने लगी थी, वो शिव से चिपक गयी और उसने शिव के कंधे पर अपने दन्त भी गड़हड़िये, उसे दर्द महसूस हो रहा था और साथ में वो पशीने से भीग चुकी थी. वो इतनी उत्तेजित हो चुकी थी की खुद hi अपनी कमर हिला कर लुंड को महसूस कर रही थी, उसने खुद hi लुंड को अंदर बहार करना सुरु कर दिया, दर्द को वो बर्दास्त कर रही थी पर छूट को वो बड़ा लुंड चाहिए था, वो शिव से पूरी तरह लिपट गयी थी और अपनी कमर हिला रही थी,





शिव भी उसकी कमर को पकड़ कर हलके हलके धक्के लगा रहा था, जिस से वो बेकाबू हो रही थी, वो फिर से अपने चरम पर पहुंच रही थी, बरसो बाद वो इस को अनुभव कर रही थी, इस बेहद कामोत्तेजक पल से उसका रोम रोम खड़ा हो गया था, उसकी कमर लुंड की और उछाल रही थी और चीखते हुए उसने अपना पानी छोड़ दिया, शिव भी उसके होठो को बुरी तरह निचोड़ने लगा, वो हांफ रही थी, शिव उसके होठो को चूस रहा था, पर वो आंखे बदन किये हुए पड़ी रही. जब तूफान थमा तो उसे होस आया की क्या हो गया है, उसने आंख खोली तो शिव उसे hi देख रहा था, दोनों की आंखे एक हुई, शिव ने उसके गाल को सहलाया.

शिव : आप ठीक ho?(Usne इतने प्यार से पूछा था की वो रुक न पायी, उसने शिव को अपनी और खिंचा और उसके होठो को चूसने लगी, लुंड उसकी छूट में फंसा हुआ था, वो शिव को किश किये जा रही थी, थोड़ी देर बाद वो शांत हुई)

भार्गवी : तुमने तो कहा था की तुम सेक्स नहीं करोगे.

शिव : (मुस्कुराते hue)Mene कहा किआ, आपने hi किआ सब.

भार्गवी : गंदे कही के, अब सारा इल्जाम मुज पर दाल रहे हो, में सब समाज रही हु, तुमने मुझे फंसाया.

शिव : (मुस्कुराते hue)Ab जो होना था वो हो गया, क्या में अब अपना काम करू?

भार्गवी : मुझे वह दर्द हो रहा है Shiv.(Unhone थोड़ी रोनी सूरत से कहा)

शिव : थोड़ी देर होगा, फिर सब ठीक हो जायेगा. (मेने उनके गाल पर किश किआ और हलके हलके धक्के लगाना सुरु किआ, उनके चेहरे पर दर्द दिख रहा था, मेने उनके स्तन को अपने मुँह में भरा और धक्के लगाना चालू रक्खा)

भार्गवी : (शिव के द्वारा अपने स्तन को और निप्पल को चूसे जाने पर उसे उत्तेजना महसूस होने लगी, वो शिव को देख रही थी, कैसे वो उसके तने हुए निप्पल को चूस रहा था, एक सर सराहत सी उसके अंदर महसूस हो रही थी, शिर्म के बावजूद वो शिव का शिर अपने स्तन पर दबा रही थी और उसे चूसने के लिए उत्साहित कर रही thi)Shhhhhhh शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शहहहहह अह्ह्ह्हह शहहहहह ओफ्फफ्फ्फ्फ़ शहहह अह्ह्ह्ह ahhhhhh.(Me उनकी छूट को छोड़ रहा था, मुझे यकीं नहीं हो रहा था, छूट भले hi सबकी होती है पर हर एक इंसान के साथ एक अलग hi एहसास होता है, भार्गवी मैडम को छोड़ने का एक अलग hi एहसास हो रहा था, उनकी छूट मेरे लुंड को पकड़ रही थी, मेने अभी तक पूरा लुंड नहीं डाला था, उनकी छूट की मासपेशिया मुझे लुंड पर महसूस हो रही थी,





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सो चिप छिपी सुरंग में जाता लुंड में महसूस कर शक्ति था, में थोड़ी देर तक उन्हें ऐसे छोड़ता रहा और उनके स्तन और होठो को चुस्त रहा, उनकी आवाजे बता रही थी की अब वो अच्छा महसूस कर रही है, उन्होंने अपने पेअर फैला दिए थे और मुझे अपनी और खिंच रही थी, और मेरे पीठ पर अपने हाथ चला रही थी, में उन्हें प्यार से छोड़ रहा था, ये दृस्य काफी कामोत्तेजक था, ऊपर से उनकी सिस्किअ केहर ध रही थी, अभी छुड़वाते हुए वो एक अलग hi व्यक्ति थी, पुलिस स्टेशन की भार्गवी और बीएड पर छुड़वा रही भार्गवी में जमीं आसमान का फर्क था, उनका चेहरा इस चुदाई के आनंद से दमक रहा tha)Shhhhh अह्ह्ह्हह शहहहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : अच्छा लग रहा है?

भार्गवी : हाआआ शिव शह्ह्ह्ह बहोत अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : दर्द तो नहीं हो रहा?





भार्गवी : शह्ह्ह्ह हो रहा है शहहहहह पर अच्छा भी लग रहा है शहहह तुम्हारा वो बहोत मोटा है शह्ह्ह्ह.

शिव : आप तो खामखा दर रही थी.

भार्गवी : शहहह तुम्हे क्या पता शठ कितना दर्द हुआ शह्ह्ह्ह मुझे तो अभी भी आश्चर्य है की वो अंदर चला गया, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शहहहहह.

शिव :अगर यकीं नहीं होता तो देख लीजिये, यकीं हो जायेगा.

भार्गवी : गंदे कही के, मुझे कितनी शर्म आ रही है पता है, एक स्कूल के लड़के के साथ में ये सब कर रही हु, कोई सुनेगा तो क्या सोचेगा मेरे बारेमे.

शिव : कोण सुनेगा, न में किसी को बतानेवाला हु न आप.

भार्गवी : शह्ह्ह्ह शिईयिव शहहहहह मेरी इज्जत अब तुम्हारे हाथ में है शह्ह्ह्ह पता नहीं में ये कसिए कर गयी शह्ह्ह्हह्ह शह्ह्ह्हह्ह एक और तो मुझे शर्म आ रही है शह्ह्हह्ह्ह्ह की में ऐसा काम तुम्हारे साथ कर रही हु शह्ह्हह्ह्ह्ह तुम्हारी hi गलती है शह्ह्हह्ह्ह्ह तुमने hi मुझे बहकाया शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (उनकी छूट में धक्के लगते hue)Ab ये इल्जाम भी मेरे ऊपर.

भार्गवी : और नहीं तो क्या, में ऐसी बातो से दूर hi रहती थी, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह धीरे शिवत्व शह्ह्ह्ह दर्द होता है शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, तुमने hi मुझे बहकाया, शह्ह्ह्ह कैसे उस दिन कसरत करते वक़्त तुमने मेरे साथ वो किआ था, पुरे बेशर्म हो शहहहहह अह्ह्ह्हह.

शिव : आप मेरे इतने करीब थी तो हो गया, आप के बदन की खुसबू जब मेरे अंदर गयी और आपके गर्म जिस्म की गर्मी मुझे महसूस हुई तो वो अपने आप hi खड़ा हो गया था.

भार्गवी : शह्ह्ह्ह तुम नहीं जानते शिव शहहह मुझे वो हर वक़्त ऐसा महसूस होता था, मुझे हमेसा ऐसा लगता की वो वह चुभ रहा है शहहहहह तुमने मुझे पागल कर दिया, शह्ह्ह्हह्ह और आज मेरे साथ ऐसा गन्दा काम कर रहे हो.

शिव : (मुस्कुराते hue)Ye गन्दा काम है, इतनी खूबसूरत लड़की को छोड़ना गन्दा काम है?

भार्गवी : मरूंगी एक, जो ऐसी गन्दी बाटे बोले तो, शर्म नहीं आती ऐसा बोलते हुए?

शिव : अब जो कर रहा हु, वही तो बोल रहा हु.

भार्गवी : पर बोलना जरुरी है काया, कितना अजीब लगता है.

शिव : में तो ऐसे hi बोलूंगा, क्यों आपको छुड़वाना अच्छा नहीं लग रहा?

भार्गवी : गंदे इंसान, बंद करो ऐसी गन्दी बाटे, शह्ह्ह्हह्ह शर्म नहीं आती, मेरे सामने ऐसे बोलते हुए, shhhhhhh.(Me उनके दोनों स्तन को मसलते हुए उन्हें में चूसने लगा, जोश में आते हुए मेरे धक्के तेज हो रहे the)Ahhhhh शहहहहह धीरे सीईव शहहहहह दुखता है वह शहहहहह धीरे अह्ह्ह्ह शहहहहह.

शिव : अभी तो पूरा गया नहीं और आप दुःख रहा है ऐसा कह रही है, जब पूरा जायेगा तब क्या होगा?

भार्गवी : (आश्चर्य se)Kya बकवास है ये, (वो मेरी आँखों में देख रही thi)kya सचमे? क्या अभी वो पूरा नहीं गया?

शिव : विस्वास नहीं होता तो खुद देख लो.

भार्गवी : (में उठने लगा तो उन्होंने मुझे पकड़ liya)Nahi शिव, मुझे शर्म आ रही है, मुझे नहीं देखना.

शिव : अब शर्माना काम कीजिये और देखिये, आपको भी मज़ा आएगा, (में उठ गया और पैरो के बिच में बेथ गया, उन्होंने मुझे देखा और शरमाई, वो अपनी कोहनी के बल उठी और नीचे देखने लगी, उनके चेहरे से आश्चर्य साफ़ छलक रहा tha)Kyu देख लिया न?

भार्गवी : मुझे तो लग रहा है की वो पूरा अंदर चला गया है, वो जहा टकरा रहा है वह से अंदर जानेका तो जैसे रास्ता hi नहीं है शिव.

शिव : ये आपको लगता है, अभी वो रास्ता बंद है, पर कभी न कभी तो वो खुलेगा hi.(Me उन्हें ऐसे hi छोड़ने लगा, मेरा लुंड उनकी छूट के होठो को रैलाये अंदर बहार हो रहा था, वो अपनी छूट में आते जाते लुंड को देख रही थी, जब उन्हें एहसास हुआ की में उन्हें hi देख रहा हु तो वो शर्मा gayi)Kaisa लग रहा hai?(Mere ऐसा पूछने पर वो और शर्मा गयी)

भार्गवी : (शर्म से मुस्कुराते hue)Ek hi दिन में हम कितना करीब आगये न Shiv.(Unke चेहरे पर आये भाव में अच्छे से समाज रहा था, अब तक हम दोनों में जान पहचान थी पर अब हम दोनों एक दूसरे के बहोत करीबी महसूस कर रहे थे)

शिव : आप खुस तो है न?

भार्गवी : पता नहीं शिव, में ये जानती हु की ये सब गलत है, पर फिर भी अच्छा लग रहा है, में समाज नहीं प् रही हु की में गलत कर रही हु की सही.

शिव : ज्यादा सोचिये मात, एक बात का यकीं रखिये, में कभी भी आपकी इज्जत जाये ऐसा काम नहीं करूँगा, आपकी इज्जत मेरी इज्जत है.

भार्गवी :(वो मेरे होठो की और आने अलगी तो मेने उन्हें अपनी गॉड में बिठा दिया, लुंड छूट में hi था, वो मुझे किश करने lagi)Pata नहीं क्यों शिव, पर मुझे तुम पर पूरा भरोसा है, शायद इसलिलिये में तुम्हारी तरफ खींचती चली gayi(apani कमर हिलाते हुए, वो मेरा लुंड अंदर बहार कर रही थी,





में उन्हें अपनी बाहोंमे भर ऊपर निचे होने में मदद कर रहा tha)Muje अच्छा लग रहा है शिव, शायद इतना मज़ा तो मुझे पहले भी कभी नहीं आया था, एक अजीब तरह का रोमांच हो रहा है और बदन में पूरी चिंगारिया फुट रही है, मुझे ऐसे hi प्यार करते रहना, (वो मुझे किश करने लगी, थोड़ी देर बाद मेने उनके कूल्हे पकड़े और उन्हें अपने लुंड पर ऊपर निचे करने laga)Shhhhhhh अह्ह्ह्हह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कितना मज़ा आ रहा है शहहहहह जब वो अंदर जाता है तो दर्द होता है पर फिर भी बहोत अच्छा महसूस हो रहा है.

शिव : आपके कूल्हे भी मस्त है, कितने गद्देदार hai(Mene उन्हें मसलते हुए कहा)

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Tum सुधरोगे नहीं है न. शह्ह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह (उनकी आंखे बंद हो gayi)Shiiiiv शहहह वो कही छू रहा है तो अजीब सा आनंद आ रहा है शहहहहह और जल्दी करो शह्ह्ह्ह में फिर से छूटनेवाली हु शह्ह्ह्ह ये कैसा जादू है शह्ह्हह्ह्ह्ह कितना अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्ह जल्दी जल्दी शिव शह्ह्ह्ह हआ ऐसे hi शह्ह्हह्ह्ह्ह ओह शीइइइइव शह्ह्ह्ह हा ऐसे hi शह्ह्ह्ह में बस छूटनेवाली hi हु शह्ह्ह्ह जल्दी जल्दी शिव शहहहहह अह्ह्ह्ह हआ में गई shhhhhhhhhh ोूओमाआआ शहहहहह (वो अपनी कमर झटकने लगी और मुझसे लिपट गयी, वो लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी, मेने कूल्हे से हाथ हटाया तो वो थोड़ी निचे hui)Ouchhhhh शीइइइइइइइव (मेरे छोड़ने से वो लुंड पर दबाव से बेथ गयी जिस से लुंड और गहराई में उतर गया, जिस से उन्हें दर्द हुआ, उन्होंने अपने पेअर टिकड़िये ताकि वो और अंदर न जा शेक, थोड़ी देर वो मुझसे लिपट के रही, फिर उन्होंने puchha)Shiv, तुम्हारा अभी तक निकलता क्यों नहीं?

शिव : अभी थोड़ी देर है.

भार्गवी : ये कैसे हो रहा है, मेने तो कभी इतनी देर तक नहीं किआ, उसका तो कब का निकल जाता था.

शिव : मतलब आपके पति का.

भार्गवी : पति नहीं, पूर्व पति, अब वो मेरा कुछ नहीं hai.(Unke चेहरे पर मायूसी उभर आयी)

शिव : सॉरी, छोडो उसे, अब कड़ी हो जाइये और पीछे घूम जाइये.

भार्गवी : (शरमाते hue)Muje लेता कर करलो न शिव, वैसे मुझे शर्म aayegi.(wo कहते कहते उनके चेहरे पर हाली शर्मीली मुस्कान थी)

शिव : पर मुझे तो देखना है (मेने उन्हें पकड़ कर उठाया और घुमा दिया, तो वो शरमाते हुए पलट गयी, अब मेरे सामने उनकी फैली हुई गांड थी, छूट से रास टपक रहा था)

भार्गवी : (अपनी छूट को छुपाते hue)Aise मात देखो शिव, मुझे शर्म आ रही है, कैसा अजीब लग रहा है, में ऐसे तुम्हारे सामने हु)

शिव : आप बहोत शर्मा रही है, कितना मस्त नज़ारा hai(Mene उनकी छूट को सहलाया तो वो सिसकने लगी, मेने उन्हें मेरी और खिंचा तो वो मेरी और खिसक गयी, अब उनकी छूट मेरे मुँह के पास थी, में कूल्हों को फैला कर देख रहा था, गांड का छेड़ खुल बंद हो रहा था और छूट हलकी सी फ़ैल कर अपना छेड़ देखा रही थी)

भार्गवी : (उसे बहोत शर्म आ रही थी, वो नंगी अपनी गांड फैलाये शिव की और झुकी हुई थी, और शिव उसकी छूट को देख रहा था, लड़कीअ अपने अंग सब से बचा कर रखती है, जब भी खोलना पड़े तो अस्स पास देख कर इत्मीनान कर के उसे खोलती है ताकि कोई देख न शक्ति, और यहाँ शिव उसे कितनी बारीकी से देख रहा था, और उसे छू भी रहा था, जब उसने महसूस किआ की शिव उसकी छूट को छत रहा है तो शर्म और मज़े के मिले झूले रूप से उसकी आंखे बंद हो गयी, उसकी जीभ उसकी छूट के छेड़ में अंदर बहार हो रही थी, मज़े से उसकी सिस्किअ निकलने lagi)Shhhhhh शह्ह्हह्ह्ह्ह shhhhhhhhh(Jaise जैसे शिव उसकी छूट को चाट रहा था उसे बहोत अच्छा लग रहा था, वो बेशर्मो की तरह अपनी नंगी गांड को उसके सामने परोसे घोड़ी बानी हुई थी, शिव उसकी छूट को ऐसे चाट रहा था जैसे उसे कोई स्वादिस्ट व्यंजन मिल गया हो, उसकी जीभ और होठो के घरसँ से उसे इतना मज़ा आ रहा था की वो और झुक गयी ताकि उसे आसानी हो, जब उसने महसूस किआ की शिव उसकी गांड का छेड़ चाट रहा है तो वो काहुनक गयी, उसके पति ने बहोत काम ऐसे प्यार किआ था, पर गांड के छेड़ को उन्होंने कभी नहीं छुआ था, और वैसे भी वो जगह गन्दी होती है और लोग उसे ाकुदरति सेक्स कहते है, तो उसे शिव का वह जीभ लगाना अजीब laga)Kya कर रहे हो शिव, वो गन्दी जगह है.

शिव : मुझे तो नहीं लगती, आपको अच्छा नहीं लग रहा?

भार्गवी : (जैसे जैसे शिव उसकी गांड के छेड़ को अपनी जीभ से कुरेद रहा था, एक अजीब सा एहसास उसके अंदर भर रहा tha)Ajib है पर अच्छा लग रहा है, तुम्हे क्यों गन्दा नहीं लगता, तुम्हे पता है की वो किस काम के लिए उपयोग होता है.

शिव : मुझे पता है मैडम, पर आपका हर अंग मुझे अच्छा लग रहा है.

भार्गवी : तुम अजीब हो शिव, तुम कैसे वह अपने मुँह से कर रहे हो, मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे तुम्हे अपनी मन पसंद चीज मिल गयी हो.

शिव : सच hi तो है, लड़को को अक्सर लड़की का निजी अंग स्वादिस्ट hi लगता है, क्या आपने कभी लुंड मुँह में नहीं लिया.

भार्गवी : शीइइइइव, ऐसा गन्दा मत bolo.(Par शिव उसकी छूट और गांड को चाटने में लगा हुआ tha)Ha किआ है मेने.

शिव : तो आपको गन्दा लगता है?

भार्गवी : पहले लगता था पर फिर नहीं लगा.

शिव : आपको मेरा चूसना है?

भार्गवी : में मरूंगी तुम्हे, अगर फिर ऐसा बोले तो.

शिव : तो आप hi कहिये कैसे कहु में?

भार्गवी : मुझे नहीं पता, तुम्हे अगर ऐसा करना था तो तुम मेरे मुँह के पास ले आते, में समाज जाती.

शिव : मेने बोल कर पूछ लिया, क्या गलत है?

भार्गवी : मेने कभी इस तरह से बात नहीं की तो अजीब लगता है.

शिव : ठीक hai(Me निचे लेट गया और उनके पेअर को अपने मुँह के अगल बगल ले लिए, उनका मुँह मेरे लुंड की तरफ था, जब थोड़ी देर तक उन्होंने कुछ न किआ तो में bola)Ab क्या हुआ, चूसिये न.

भार्गवी क्या कहती, वो लुंड को देखने में खोयी हुई थी, उसे अजीब लग रहा था, क्यों की वो पहली बार शिव के लुंड को अपने मुँह में लेने जा रही थी, वो इतना बड़ा था की उसे शक था की मुँह में जायेगा की नहीं, उसने लुंड को पकड़ा और उसकी चमड़ी को निचे खिसकाया, लाल सूपड़ा उसके सामने था, उसने पीछे देखा तो शिव उसकी छूट को छत रहा था, वो झुकी और मुँह फैला कर लुंड को अंदर घुसाने लगी, उसका मुँह पूरा भर गया था, लुंड पर दन्त न लगे इस लिए उसे अपना मुँह बहोत फैलाना पद रहा था, शर्म का एक एक पर्दा गिर रहा था, वो जानती थी की मर्द और औरत के बिछ क्या क्या होता है, और वो ये भी जानती थी की इसमें मज़ा भी आता है, वो जैसे तैसे उसके बड़े लुंड को अपने मुँह में भर कर चूसने का प्रयास करने लगी.





वो थोड़े से लुंड को अपने मुँह में ले पायी, उसकी आंख से पानी भी निकल गया, उसकी खांसी तक निकल आयी.

शिव : (में उनके निचे से निकलने लगा, निकलने के baad)Aap ठीक हो?

भार्गवी : खु khu...wo खु खु वो थोड़ा बड़ा है इसलिए खु खु.

शिव : कोई बात नहीं (में उनके पीछे आ गया और अपना लुंड उनकी छूट पर रगड़ने लगा, वो अपने आपको एडजस्ट करने लगी, जब मेने देखा की वो तैयार है तो मेने लुंड छूट के छेड़ पर लगाया और अंदर उतरने laga)(Bhargavi ने अपना मुँह दबा दिया, अभी तो अंदर गया था फिर भी उसे दर्द हुआ tha)(Jab मेरा लुंड अंदर चला गया तो में उनकी कमर पकड़ कर धक्के लगाने लगा,





लड़की को इस तरह छोड़ने में एक अजीब सा आनंद मिलता है, एक तो उनके नंगे कूल्हे आँखों के सामने होते है और लुंड अंदर बहार होता नज़र आता है, मैडम की छूट फ़ैल गयी थी, में उनको धक्के लगाने लगा,





उनकी सिस्किअ फिर से कमरे में गूंजने लगी, पंद्रह मिनट तक में उन्हें ऐसे hi छोड़ रहा था, वो फिर से झड़ने के करीब पहुंच गयी थी, मेने लुंड बहार निकला और उन्हें सीधा लेटते हुए फिर से लुंड अंदर दाल दिया, अब में भी करीब था)

शिव : मैडम...





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भार्गवी : hmmmmmmmmmm

शिव : अंदर निकलू की बहार (मेरे सवाल से उन्होंने मेरी और देखा, दो पल वो खामोस रही)

भार्गवी : शह्ह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह अंदर.

शिव : अगर आप प्रेग्नेंट हो गयी तो?

भार्गवी : शह्ह्ह्ह उफ्फ्फ में गोली खा लुंगी, पर अभी मुझे वो सब महसूस करना है. (भार्गवी को लुंड बहोत अंदर तक महसूस हो रहा था, शिव के धक्के इतने तेज लग रहे थे की वो उसकी छूट में अंदर अपना रास्ता बना रहा था, उसे दर्द भी हो रहा था पर एक अजीब सा आनंद भी मिल रहा था, वो शिव को लगातार चुम रही थी, उसके धक्के इतनी तेज थे की वो सेह न पायी और झाड़ गयी, झड़ते हुए भी उसके धक्के लगातार चल रहे थे, वो इस तरह का सेक्स पहली बार महसूस कर रही थी, शिव कब से उसे तेज धक्को से छोड़ रहा था, उसका पति ऐसा सीरत एक मिनट hi कर पता था और झाड़ जाता था, पर शिर लगातार न जाने कब से उसे ऐसी स्पीड से छोड़ रहा था, उसकी छूट का हर कोना दर्द कर रहा था पर फिर भी उसे कोई शिकायत नहीं थी, उसकी छूट भी लगातार रास बहा रही थी,





उसने महसूस किआ की उसका लुंड और फूल रहा है, उसने अपने होठ दांतो से दबा दिए, शिव पशीने से भीग चूका था, शिव का पसीना और उसका पसीना आपस में मिल रहे थे, वो ऐसे भीग गयी थी की जैसे अभी अभी नाहा कर आयी हो, उसने अपने पेअर शिव की कमर पर लपेट दिए थे, लुंड उसकी छूट की धज्जिया उदा रहा था, लगातार वो आगे बढ़ रहा था, शिव ने उसे ऐसे दबा रक्खा था जैसे किसी शेर ने मैंने को दबा रक्खा हो, वो बेबस थी पर ऐसी परिस्थिति में भी उसे मज़ा आ रहा था, वो एक लड़की थी और अपने ऊपर हावी मर्द को कैसे पसंद न करती,





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वो उसकी पीठ सहलाते हुए उसे जोश दिला रही थी, पालन पूरा हिल रहा था, वो खुद पूरी हिल रही थी, शिव की जदप बता रही थी की अब वो किसी भी पल छूट सकता है, वो उसके कंधे को उसके गले को चुम रही थी, उसके बालो को नोच कर अपनी छूट को छोड़ने को उस्क्स रही थी, झड़ते हुए शिव ने एक जोर का धक्का मारा तो उसकी सस्नसे hi रुक गयी, उसका लुंड उसकी छूट को चीरता हुआ अंदर तक घुस गया था, तेज दर्द के साथ अंदर गिरते वीर्य को भी वो महसूस कर रही थी,

वो पूरी ताकत से शिव से लिपट गयी, उसने खुद अपनी छूट को लुंड पर दबा दिया ताकि एक भी बून्द बहार न निकले, उसकी कमर खुद झटके खा कर शिव के लुंड से सारा पानी खिंच रही थी, ये कुदरत का एक अजीब खेल था, दर्द भी मज़ा दे रहा था, वो शिव के शरीर को सहलाते हुए उसके काम की शाबाशी दे रही थी, वो उसे चुम रही थी सेहला रही थी. एक अद्भुत संगम ख़तम हुआ था, वो उस से ऐसे लिपट गयी थी की अब कभी जुड़ा नहीं होगी.

तूफान थम चूका था, वो अभी भी शिव से चिपके हुए लेती थी, लुंड थोड़ा सिकुड़ गया था, पर उसकी छूट से बहार नहीं आया था, उसे तेज पेशाब की इच्छा हो रही थी, वो कब से उसे रोके हुए थी ताकि शिव से अलग न होना पड़े पर अब वो नहीं रुक शक्ति थी.

भार्गवी : Shiiiiv(Usne उसे सहलाते हुए कहा)

शिव : ह्म्म्मम्म्म्म.

भार्गवी : मुझे बाथरूम जाना है.

शिव : ह्म्मम्म्म्म.

भार्गवी : क्या हम्म्म, utho.(Mene उनकी आँखों में dekha)Please. (में उठा, और लुंड बहार निकला तो ढेर सारा वीर्य बहार निकला, साथ में थोड़ा लाल वीर्य भी nikala)(Jaise hi लुंड बहार निकला साथ में उसकी छूट से वीर्य बहार बहने लगा, उसने अपने हाथ से उसे रोकने का प्रयास किआ, ताकि बिस्तर पर न गिरे, वो उठने लगी पर उसे दर्द महसूस hua)Oooo माआ. शीइइइइव.

शिव : है मैडम.

भार्गवी: शह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है.

शिव : में ले चालू?

भार्गवी : है शिव, मुंईईई शहहहहह. इसीलिए में मन कर रही थी, मुंईईई shhhhhhhhh.(Wo अपनी छूट को दबा रही थी, उनके चेहरे पर दर्द साफ़ दिख रहा tha)Aise क्या देख रहे हो, मुझे दर्द हो रहा है, कुछ करो.

शिव : पेनकिलर है घर में?

भार्गवी : वह ड्रावर में है. (मेने दवाई निकली और पानी ले आया और उन्हें khilayi)Shhh मुझे जल्दी से बाथरूम ले चलो, जल्दी. (मुझे समाज आया की उन्हें बहोत जोर की लगी है, मेने उन्हें उठाया और बाथरूम में ले गया और उन्हें कमोड कर बिठा कर खड़ा रहा, उन्हें इतनी जोर से लगी थी की वो फ़ौरन मूतने लगी, जब मेरी और उनका ध्यान गया तो मुझे मरते hue)Besharam, बहार जाओ. (में मुस्कुराता हुआ बहार निकल गया, दस मिनट तक वो अंदर hi रही, जब वो बहार न आयी तो मुझे चिंता हुई, मेने उन्हें पुकारा)

शिव : मैडम. आप ठीक ho?(Ander से शावर चलने की आवाज आ रही थी)

भार्गवी : है ठीक हु, एक टॉवल देना, वही कपबोर्ड में है. (में टॉवल लिया और उन्हें पुकारा तो उन्होंने दरवाजे के हैंडल पर लगाने को बोलै., थोड़ी देर बाद वो लंगड़ाते हुए टॉवल लपेटे बहार निकली, में उनके पास चला गया और उन्हें उठा लिया, वो मुस्कुरा कर मुझे देखने लगी, मेने उन्हें बीएड पर rakkha)Jao तुम्हे भी नहाना है तो नाहा लो.

शिव : (मुस्कुराते hue)Pehle बुलाती तो आ जाता, अब नहीं नहाना.

भार्गवी : (उसका मतलब समझते hue)Tum बहोत शैतान हो शिव. (घडी में देखते hue)Bapre, बारह बज गए.

शिव : है बहोत टाइम हो गया है, मुझे जाना hoga.(Me कपडे पहन ने लगा)

भार्गवी : आज यही रुक जाओ न.

शिव : (कपडे पहन कर में उनके पास जाते hue)Ruk जाता, पर घर पर सब रह देख रहे होंगे.

भार्गवी : ठीक है, कल वो i-pil तुम्हे hi लेके आणि पड़ेगी.

शिव : क्यों?

भार्गवी : क्यों क्या?, में लेने जाउंगी? सब को पता है में अकेले रहती हु, और i-pil खरीदने आयी हु.

शिव : (मुस्कुराते hue)Thik है, में दोपहर में दे जाऊंगा.

भार्गवी : बाइक ले जाना.

शिव : आज बाइक देने आया था, अब कल फिर देने आना पड़ेगा.

भार्गवी : (वो शर्मा गयी, फिर मुस्कुराते hue)Ha, रोज़ देने आना.

शिव : क्या?

भार्गवी : गंदे, मरूंगी तुम्हे तो में.

शिव : (में muskuraya)Agar आपको ज्यादा दर्द है तो में घर बोल कर वापस आ जाता हु.

भार्गवी : नहीं, उसकी जरुरत नहीं, अब ठीक है.

शिव : हमारे बिच के ऐसे सम्बन्ध से आप विचलित तो नहीं है न?

भार्गवी : पता नहीं शिव, अजीब लग रहा है पर फिर भी खुस भी हु.

शिव : ठीक है, में चलता हु, दरवाजा बंद कर lijiyega(Unke होठ चुम kar)Bye.

भार्गवी : Ruko(Unhone मुझे देखा और कड़ी हो गयी, मुझे अपनी और खिंच कर मेरे होठो को चूमने लगी, मेने भी उन्हें बहो में भर लिया, थोड़ी देर किश करने के bad)Thank यू.

शिव : किसलिए?

भार्गवी : बस ऐसे hi.

शिव : (उनका चेरा सहलाते hue)Aap सचमे बहोत खूबसूरत हो.

भार्गवी : (अपने चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान लेट hue)Ab में यकीं करती हु.

शिव : वो क्यों?

भार्गवी : लड़के अक्सर वो सब करने के लिए झूठ बोलते है, पर जब वो सब कलेने के बाद तारीफ करे तो समझलेना की वो सच में तारीफ कर रहा है.

शिव : Bye.

वो मुझे दरवाजे तक छोड़ने आयी, में बाइक ले के चला गया, लतादिदी ने दरवाजा खोला, मुझे देरसे आने का कारन पूछा तो मेने कहा की बातो बातो में देर हो गयी, और उन्हें बे भी बता दिया की कल दोपहर में सूर्यदेवजी आनेवाले है.
 
अपडेट 114

में कपडे बदल कर सोने लगा, दीदी आज मेरे साथ सोने आ गयी थी, जब में लेता तो मेरे मोबाइल पर मश्ग आया, मेने देखा तो ये भार्गवी मैडम का था, उन्होंने लिखा था

भार्गवी :पहुंच गए?

शिव : है, अभी लेता हु, आप ठीक तो हो न?

भार्गवी : है ठीक हु (असल में उसे थोड़ा दर्द था)

शिव : Ok, गुड नाईट.

भार्गवी : गुड नाईट, एंड मिस यू.

शिव : (मेरे चेरहे पर मुस्कान आ gayi)Miss यू तू, bye.

भार्गवी : Bye.

मेने देखे तो दुसरो के भी मश्ग थे, मेने सब को रिप्लाई किआ. दीदी मुझसे लिपट कर लेती थी, मेने उन्हें बहो में भरा और सो ने लगा. भार्गवी काफी देर तक शिव के बारेमे सोचती रही, आज जो भी हुआ था उसे याद करते हुए वो बार बार मुस्कुरा रही थी और शर्मा भी रही थी, ये सब इतना अचानक हो गया था की उसे एक सपने जैसा लग रहा था, पर वो खुस थी, अपनी अकेली जिंदगी में शिव जैसे साथी को पाकर. उसने भी आंखे बंद की और सोने लगी.

सुबह में स्कूल चला गया, जब पंहुचा तो मुझे वैस्वी और संयम खड़े दिखे. मुझे देख कर वैस्वी जाने लगी और संयम कड़ी रही, में उसके पास पहुंच गया.

शिव : Hi.

संयम : (मुस्कुराते hue)Hi, कैसे हो?

शिव : तुम्हारे सामने हु, क्या हुआ, तुम क्यों कड़ी हो?

संयम : तुमसे बात करने को, क्यों नहीं रहना चाहिए था?

शिव : ऐसी बात नहीं है, वो तुम दोनों साथ में थी न तो मेने पूछा.

संयम : मेने उसे कहा की मुझे तुमसे बात करनी है, तो वो चली गयी.

शिव : है कहो.

संयम : ऐसी कोई खास बात नहीं है, बस ऐसे hi तुमसे बात करनी थी, वैस्वी की वजह से में तुमसे बात नहीं कर पति न.

शिव : पता नहीं उसको क्या प्रॉब्लम है.

संयम : वो ऐसी hi है, ऊपर से इस बार भी तुम्हारे मार्क्स उस से ज्यादा आ गए, उसने बहोत म्हणत की थी, तुमसे आगे निकलने के लिए.

शिव : अब इसमें में क्या कर शक्ति हु, वैसे भी मुझे पढ़ने को समय काम मिलता है, मुझे तो लगा था की इससबार मेरे नंबर काफी काम आएंगे, पर पता नहीं क्यों ज्यादा आ गए.

संयम : होता है, कुछ लोगो के दिमाग ऐसे होते है की उन्हें एक बार में hi समाज आ जाता है, किसी किसी को ज्यादा म्हणत करनी पड़ती है. मुझे hi देख लो, क्या में नहीं पढ़ती? फिर भी मेरे मार्क्स तो तुम दोनों से काम है.

शिव : वैसे ये सब तुम्हारी वजह से hi हुआ है, तुमने मुझे नोट्स भेजे थे तो मुझे ज्यादा सहूलियत हो गयी, मुझे तुम्हे थैंक यू कहना चाहिए.

संयम : तो कहो, मैंने कब मन किआ hai(Wo मुस्कुराने लगी)

शिव : (में भी muskuraya)Thank यू.

संयम : ऐसे hi, मुझे लगा कोई पार्टी वर्तय डोज, कुछ नहीं तो काम से काम आइस क्रीम hi किला डोज. कोई बात नहीं जैसे तुम्हारी मर्जी. (वो मेरी खिंचाई कर रही थी)

शिव : मेने कब मन किआ, जब तुम कहो.

संयम : ट्रीट तुम देनेवाले हो, तुम बताओ. तुम hi ज्यादा बिजी होते हो.

शिव : ठीक है, कल स्कूल छूटने के बाद.

संयम : कल क्यों, आज क्यों नहीं?

शिव : आज घर पे कुछ लोग आनेवाले है, तो कल.

संयम : (स्कूल की बेल भी बज गयी, मेरे दोस्त शायद पहले hi अंदर चले गए the)Thik है, तो कल पक्का न. (हम क्लास की और जाने लगे)

शिव : है, पक्का.

दो पहर में रेसस्स में संयम और वैस्वी बात कर रहे थे.

वैस्वी : ऐसी क्या बात करनी थी तुजे.

संयम : कोई खास बात नहीं थी, बस बात करनी थी.

वैस्वी : उसके पहले नंबर पे आने से तुजे बहोत खुसी हुई, है न?

संयम : है, क्यों नहीं होगी, वो भी तो मेरा दोस्त है. तुम पहले नंबर पर आती तो भी मुझे खुसी होती.

वैस्वी : पर उसके आने से तुम्हे ज्यादा खुसी हुई, है न?

संयम : तुम क्यों बात को बढ़ा रही हो, तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है यार, वो होसियार है तो है, इसमें बुरा माननेवाली क्या बात है.

विवि : तुम्हे पता है, वो मेरा पापा के अंडर में काम करता है, ऐसे देखा जाये तो वो हमारा नौकर है.

संयम : (उसको बुरा लगा ये सुन के, वो थोड़े गुस्से में बोली) क्या मतलब है को वो नौकर है, नौकरी करने से कोई नौकर नहीं हो जाता, हो सकता है की वो तुम्हारे पापा के वह नौकरी करता हो, पर उस से वो नौकर नहीं बनजाता. वो इतना काबिल है की उसे कही भी काम मिल जायेगा. और वो जो भी कर रहा है वो अपना खर्चा निकलने के लिए कर रहा है, तू और में अपने अपने पापा के पैसो पर रहते है और पढ़ते है, वो अपने दम पर इस पोसिओं पर है. न सिर्फ वो अपना खर्चा चलता है बल्कि वो अपने अनाथालय के दूसरे लोगो का भी ख्याल रखता है. पता नहीं तुजे किस बात की चिढ है, वो तुमसे और मुझसे कही काबिल है.

वैस्वी : (टॉन्ट मरते hue)Tuje बहोत पड़ी है उसकी.

संयम : है, है, जो सच है वो सच है, वो काबिल है तो है?

वैस्वी : कही प्यार तो नहीं करने लगी उस से?

संयम : तुजे तो जवाब देना hi बेकार है, अपने दिमाग से ये कचरा निकल के कभी सोचना की वो क्या है, अपने आपको कभी उसकी जगह पर रख के सोचना, क्या है तुम में इतनी हिम्मत की बिना maa-baap के तुम यहाँ तक पहुंच पाओ.

वैस्वी : छोड़ उसे, उसके लिए हम क्यों जगहद रहे है, अगर तुजे बुरा लगा हो तो सॉरी, चल क्लास में चलते है.

संयम : (वैस्वी ने मुस्कुराते हुए कहा था, तो उसने भी बात को यही छोड़ना उचित samaja)Chal, और सॉरी तुजे बुरा लगा हो तो.

वैस्वी : छोड़ उस बात को, पर मुझे लग रहा है, उसके लिए तेरे दिल में बहोत कुछ चल रहा है. (वैस्वी ने ये बात मुस्कुराते हुए कही थी पर उसके दिल में कही न कही दर्द हो रहा था, वो समाज नहीं प् रही थी पर संयम का शिव के प्रति झुकाव उसे अच्छा नहीं लग रहा था, ये जलन थी या क्या था वो खुद समाज नहीं प् रही थी)

संयम : कुछ नहीं चल रहा है, चल अब. (उसने भी ये ऐसे hi कहा था, पर सच तो ये था की वो शिव के बारेमे सुन के सच में गुस्सा हो गयी थी, वो अपनी पक्की सहेली से भी लड़ पड़ी थी, पर उसे खुद नहीं पता था किआ सीए क्यों है तो वो क्या कहती)

इन सब से बेखबर में अपने दोस्तों के साथ था. स्कूल ख़तम होने के बाद में घर लौट आया. भार्गवी मैडम की बाइक थी तो में जल्दी पहुंच गया. मेने देखा की वह दो बड़ी गाड़िया कड़ी हुई थी. मतलब सूर्यदेवजी आ गए थे, दूसरी गाड़ी पवनसीर की थी. में फटाफट अंदर गया तो वो सब बहार hi बैठे हुए थे, ऑफिस की कुर्सियां बहार hi रख दी थी. लतादिदी और सरिता दीदी वही कड़ी थी, रंजन और विणा, मनीषा मैडम के छोटे बच्चे के साथ खेल रही थी. सबसे पहले मुझपर मनीषा मैडम की नजर पड़ी.

मनीषा : लो, शिव भी आ गया. (सब मेरी और देखने लगे, लतादिदी और सरितादिदी भी वही कड़ी थी पर उनकी पीठ मेरी और थी, वो भी मेरी और मुड़ी, में उनके पास पहुंच गया)

शिव : आप लोग आ गए?

लतादिदी : ये लोग क्या कह रहे है शिव?

शिव : (मुझे तो कुछ पता hi नहीं था) क्या हुआ दीदी?

मनीषा : में बताती हु, हमने यहाँ देखा की आज भी यहाँ खाना लकडिओ की मदद से पकाया जाता है, तो ये (सूर्यदेव) कह रहे है की यहाँ गैस के चूल्हे लगाड़िये जाये.

शिव : गैस के चूल्हे?

मनीषा : है, गैस के चूल्हे, लता बताया की लकडिया तुम्हे hi कटनी पड़ती है, और दूसरी बात धुए की वजह से भी सेहत पर असर पड़ता है, ये लड़कीअ कितनी म्हणत करती है, तो हमने सोचा है की इनकी म्हणत और तुम्हारी म्हणत भी काम कर दी जाये.

शिव : कोई जरुरत नहीं है मैडम, हमे कोई दिक्कत नहीं है.

सूर्यदेवजी : अरे भाई, हमे भी मदद करने का मौका दो, में इस सहर में रहता हु पर मुझे hi नहीं पता था की यहाँ अनाथालय है, ये सहद कभी ध्यान नहीं दिया. पैसो के पीछे इंसान मशीन बन जाता है. अब तुम्हारी वजह से हमे पता चला है तो, हमे भी कुछ पुण्य कमाने का मौका दो. (अब में क्या कहता, में उन्हें देख रहा था) ज्याद सोचने की जरुरत नहीं है, मेने आलरेडी आर्डर दे दिया है, do-teen घंटे में यहाँ सारा इंतजाम हो जायेगा.

शिव : थैंक यू सर.

सूर्यदेव : थैंक यू तो मुझे तुम्हे कहना चाहिए, तुमने मेरा काम जो किआ है.

शिव : वो तो आपके लिए एक छोटी सी बात थी सर.

सूर्यदेव : अगर पैसो के लिहाजसे सोचे तो है, वो छोटी बात थी, पर ईगो के लिहाज से सोचे तो वो बहोत बड़ी बात थी, मुझे पसंद नहीं की कोई मुझे झुका कर काम करवाए, अभी वो सत्ता में है तो में ज्यादा कुछ कर नहीं प् रहा था, हम बुसिनेस्स मन है, हमे उनकी और उन्हें हमारी जरुरत पड़ती रहती है. पर ये ईगो का सवाल था, और में झुकना नहीं चाहता था, नुकसान होता है तो हो जाने देता. पर दूसरी और ये मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट भी था, में अपने सहर के लिए कुछ करना चाहता था, और ये सब तुम्हारी वजह से मुमकिन हुआ है. उसके लिए मेने और मनीषा ने तुम्हे ये देने का सोचा है. (उन्होंने मेरी और एक कवर बढ़ाया, मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था, मेने पवनसीर और स्नेहा मैडम की और देखा, उनके चेहरे पर भी हैरत के भाव थे, मतलब उन्हें भी पता नहीं था)

शिव : ये क्या है सर.

सूर्यदेव : खुद देख लो?

शिव : (मेने कवर खोला तो उसमे से चेक निकला, जब मेरी नजर रकम पर पड़ी तो में चौंक गया) ये क्या है सर.

स्नेहा : क्या है शिव?

शिव : 5 लक्स का चेक है. (वह खड़े सब लोग चौंक गए थे) सर, मेने ऐसा कोई काम नहीं किआ जिस की वजह से आप मुझे इतना बड़ा इनाम दे रहे है.

सूर्यदेव : ऐसा तुम्हारा सोचना है शिव, मेने जैसा कहा, ये बात सिर्फ पैसो की नहीं थी, अगर में उनकी बात न मंटा और लीगल तरीके से ये मसाला हल करने की कोशिस करता तो मुझे इससे भी ज्यादा का खर्चा होता, और अगर में उनकी बात मंटा तो झुकने का दर्द हमेसा मेरे दिल में रहता. और में ये पैसे इस्सलिये नहीं दे रहा की तुमने ये काम किआ है, उसके लिए तो मेरी और पवनजी की बात हुई है, में इस प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट तुम्हारी फर्म को दे रहा हु, और पवनजी ने मुझे बताया है की तुम्हे वो लीगली पार्टनर बना रहे है, तो तुम्हारे काम का इनाम तो तुम्हे मिलता hi रहेगा. ये पैसे एक तरह से में अनाथालय को दे रहा हु, पर इन पैसो को तुम अपने पास hi रखना, अपने अकाउंट में. मुझे पता है की ये पैसे तुम अपने लिए तो खर्चने से रहे, जिस तरह से यहाँ की ये लड़कीअ तुम्हारे बारेमे बता रही है, तुम इन सबका ख्याल रखते हो, तो पैसे तुम्हारे पास रहे या अनाथालय के अकाउंट में एक hi बात है, पर फिर भी में ये इस्सलिये कह रहा हु की अगर किसी वजह से कोई दिक्कत आती है तो तुम्हारे अकाउंट में रहे पैसे तुम्हे काम आ शक्ति है.

शिव : पर मेरा कोई बैंक अकाउंट नहीं है.

पवनसीर : वो में देख लूंगा, वैसे भी अब तुम्हारा बैंक अकाउंट खोलना hi पड़ेगा. तो इसी चेक से खुलवाडेंगे. कल मेरे साथ बैंक चलना, में सब करवाडुंगा. (में क्या कहता, मेरी तो कुछ समाजमे hi नहीं आ रहा था, मेने लतादिदी और सरितादिदी की और देखा तो उनके चेहरे पर खुसी समां नहीं रही थी.)

शिव : थैंक यू सर.

सूर्यदेव : इसमें थैंक यू की क्या बात है, बस अब कोई अड़चन नहीं आणि चाहिए, और जल्द से जल्द ये प्रोजेक्ट सुरु करो.

पवनसीर : में कॉन्ट्रैक्ट बनवाता हु, सिर्फ चिंता इस बात की है की अभी जो प्रोजेक्ट चल रहे है वो प्रकसराओ के साथ है, इस प्रोजेक्ट की वजह से वो सब में दिक्कत न आजाये.

शिव : सर, रिस्क तो लेना hi होगा, अगर तरक्की करनी है तो रिस्क और हिम्मत जरुरी है, वैसे भी सारा मन पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर हमारी कंपनी प्रोवाइड कर रही है, सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट उनकी बदौलत है, तो नुकसान उनका hi होगा.

पवनसीर : शायद तुम सही कह रहे हो, हिम्मत तो करनी hi होगी, दर सिर्फ इस लिए लगता है की पावर उनके हाथ में है, सत्तामे रहके वो सत्ताका दुरुपयोग करके कुछ न कुछ बखेड़ा कर देते है.

शिव : ये प्रजा तंत्र है, सरकार हर पांच साल में बदलती रहती है, अगर वो हमे उन hi खटक रहा है तो हमे अपना कोई आदमी इलेक्शन में खड़ा करना चाहिए.

पवनसीर : ये इतना आसान नहीं है शिव, ये मला का इलेक्शन है, सीधे तौर पर कोई खड़ा नहीं हो सकता.

शिव : क्यों नहीं खड़ा रह शक्ति, मला के एलक्शन के लिए जो लघुत्तम मर्यादाये है अगर वो सब हम किसी के अंदर है तो वो एलक्शन में खड़ा हो सकता है.

पवनसीर : वो सब कागजो पर hi होता है, यहाँ सब पावर और पैसो का खेल होता है, वो बरसो से राजनीती में है, और रूलिंग पार्टी का कैंडिडेट है, आज तक तो कोई उसके सामने नहीं जीता. सिर्फ एलक्शन में नॉमिनेशन कर लेने से एलक्शन नहीं जीते जा शक्ति,

सूर्यदेव : अप्प सही कह रहे है, ये लोग वैध- अवैध तरीके अपना कर किसी भी तरह सत्ता में आ जाते है, और फिर जनता को लूट ते रहते है, ये पुराणी कई की तरह जैम गए है, इन्हे कोई नहीं निकल शक्ति.

शिव : मंटा हु की उन्हें हराना आसान नहीं, पर क्या मुमकिन hi नहीं? ये में नहीं मान शक्ति. (मनीषा और स्नेहा दोनों ये सब सुन रही थी, एक छोटा दिखनेवाला लड़का कैसे इन दो दिग्गजों से चर्चा कर रहा था)

पवनसीर: चलो एक बार मान भी लेते है की हम उनके सामने एलक्शन लड़ेंगे, पर लड़ेगा कोण, कैंडिडेट भी चाहिए, ऐसा कोई नहीं है जो उनके सामने खड़ा रह सके. (उनकी ये बात तो सही थी की वो बहोत ताकतवर है, उनके सामने ऐसा कोई भी नाम नहीं है जो खड़ा रह सके, और ऐसे वैसे को खड़ा करके कोई फायदा नहीं है, क्यों की अगर उनके सामने हुए और हर गए तो वो और ज्यादा नुकसान दायक होगा, और में तो वैसे भी किसी को इतना जनता नहीं था)

शिव : ऐसा कोई तो होगा, जो उनके खिलाफ खड़े रहने की हिम्मत दिखाए, ऐसा तो है नहीं की वो बिना इलेक्शन जित रहे है, उनके सामने कोई न कोई तो खड़ा रहता होगा?

पवनसीर : खड़े रहते है, और बड़े मार्जिन से हारते भी है. वैसे भी इन बातो का कोई फायदा नहीं, बिना बात के हमे इन लफड़ो में नहीं पड़ना चाहिए, हम अपने काम पर ध्यान देते है.

सूर्यदेव : ठीक कहा आपने, पॉलिटिक्स से हमे क्या लेना देना, हम बुस्सिनेस्स्में है, हमे उस पर hi ध्यान देना चाहिए.

शिव : सर, आपने कहा था की, वो आपको और आपको काम आते है, तो जरा थोड़ा विस्तार से बताइये की वो आपको और आप उनको किस तरह से काम आते है?

सूर्यदेव : वो हमे बुसिनेस्स के दौरान आती सरकारी दिक्कतों से बचते है, सरकारी कॉन्ट्रैक्ट दिलवाने में मदद करते है, और उसके बदले हम उन्हें पैसो का चंदा देते है.

शिव : जिस तरह से वो आप को इस प्रोजेक्ट में फंसा रहा था, वैसे hi वो खुद hi दिक्कते पैदा करता होगा और फिर आपसे पैसे ऐठता होगा, और जो भी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट दिलवाता होगा उसके सामने इतने पैसे लेता होगा की वो एक तरह से उस कॉन्ट्रैक्ट का पार्टनर hi हो. है न सर.

सूर्यदेव : वो तो है. पर इतना तो करना hi पड़ता है.

शिव : अब वो पैसा आप अपने उमीदवार पर लगते हो तो आपका तो कोई नुकसान नहीं होगा, पर अगर वो जित गया तो आप बहोत साडी मुसीबतो से बच जायेंगे.

पवनसीर : तुम्हारी बात सही है, पर ये हो नहीं सकता, हम छह कर भी ऐसा नहीं कर सकते. हमारे पास ऐसा कोई उमीदवार नहीं है जो उनके सामने कही से भी टिकता नजर आये.

शिव : है. (सब चौंक कर मेरी और देखने लगे)

पवनसीर : कोण?

शिव : मनीषा मैडम. (अपना नाम सुन कर वो चौंक गयी)

सूर्यदेव : मनीषा?? ये नहीं हो सकता.

शिव : क्यों नहीं हो सकता?

सूर्यदेव : ये राजनीयेति है, वो ये सब नहीं कर सकती.

शिव : और आपको ऐसा क्यों लगता है, की वो ये सब नहीं कर शक्ति?

सूर्यदेव : वो नहीं कर शक्ति, में जनता हु उसे, और अभी अभी वो माँ बानी है, वो ये सब नहीं कर शक्ति.

शिव : वो ये नहीं कर शक्ति आप ये कह रहे है, जब की में इन्हे जनता हु, ये सोशलिस्ट है, कई फंक्शन्स में ये बतौर चीफ गुएस्ट जाती है, कई जगह ये मला जी के साथ में भी दिखी है, मतलब लोग इन्हे मला जितना सम्मान देते है, इन सब की वजह से अखबारों में भी इनके बारे में लिखा जाता है, मतलब ऐसा नहीं है की लोग इस नाम से अनजान है.

सूर्यदेव : वो सब तो ये टाइम पास के लिए करती है, और हर जगह इससे इसलिए बुलाया जाता है की वो मेरी बीवी है. वो ये सब नहीं कर शक्ति.

शिव : आपने इनसे शादी क्यों की thi?(Mere सवाल से सूर्यदेवजी थोड़े चौंक गए, पवनसीर भी और स्नेहा भी, मनीषा अपने पति को देख रही थी, वो जान न चाहती थी की उसका पति क्या जवाब देता है)

सूर्यदेव : ये क्या सवाल है शिव? और जो अभी बाटे चल रही है, उसमे इसका क्या लेना देना?

शिव : आप जवाब देने से हिचकिचा रहे है तो में hi आपकी मदद करता हु ताकि आपको जवाब देने में सहूलियत हो. आपने इनसे शादी की उस वक़्त आपने इनके अलावा भी कई लड़कीओ को देखा होगा, हर किसी में कुछ न कुछ खुबिया होगी, आप जिस स्थान पर है, वो लड़कीअ भी कोई सामान्य तो होगी नहीं, फिर भी आपने उन सब में मनीषा मैडम को सेलेक्ट किआ, नतलब आपने उनमे, उन सब लड़कीओ से खुछ खास hi देखा होगा, तो अब आप कैसे कह शक्ति है की वो ये नहीं कर शक्ति, उनमे ये सब करने की काबिलियत नहीं है, और वैसे भी उन्हें ये नहीं करना है, हम सब को मिलकर करना है, वो अकेली नहीं है, हम सब उनके साथ है, तो फिर वो ये ल्यू नहीं कर शक्ति?

सूर्यदेव : (मनीषा की और देखते hue)Ye तो तुमने सच कहा शिव, सबमे बेस्ट थी तभी वो आज मेरी बीवी है, हम अक्सर ये भूल जाते है, जो इतने समय से हमारे साथ रहती है वो हमे आम दिखने लगती है, जब की सब में बेस्ट होने की वजह से hi उसे चुना गया था. अगर ये करना चाहे तो मुझे कोई एतराज नहीं है.

मनीषा : (थोड़ा घभराते hue)Ek दम से मेरी और मात देखो, (मेरी और देखते हुए, हलके जिथे गुस्से se)Muje क्यों फंसा रहे हो?

शिव : में कहा फंसा रहा हु, मेने तो वही कहा जो मुझे लगा.

मनीषा : (अपने पति की और टैंट मरते hue)Itne वर्षो में इन्हे जो नहीं लगा वो तुम्हे लग गया.

शिव : (मुस्कुराते hue)Madam, मेने आपको फंक्शन्स में देखा है, आप जिस जगह बिराजमान थी वो खास अतिथि की जगह होती है, और कोई खास ऐसे hi नहीं बन जाता, और आप पॉलिटिक्स अच्छे से कर शक्ति है, किसी को फ़साना तो आपके बाये हाथ का खेल है. (वो मेरी और घर कर देखने लगी)

सूर्यदेव : ये क्या कह रहे हो शिव, इसने किसी को फसाया? कहना क्या चाहते हो?

शिव : मेरा मतलब है की वो बोलने में और बातचीत में इतनी काबिल है की किसी को भी अपनी बातो से इम्प्रेस कर के अपना काम निकल शक्ति है, ये परफेक्ट है इन सब के लिए.

मनीषा : मुझे कुछ नहीं पता, मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा.

शिव : हमने कब कहा की कल इलेक्शन है और आपको अपना नाम देना है, मुझे जो लगा वो मेने कह दिया, आगे सब सोच समाज कर आपको hi नक्की करना है, आप सोचिये, और अब किसी भी फंक्शन में जाये तो उस तरह से सोचियेगा, और खुद को परखिये की क्या आप ये कर शक्ति है?

पवनसीर : मुझे तो शिव की बात सही लग रही है, में भी इनसे कई बार फंक्शन्स में मिला हु, ये जिस तरह से भासन देती है, वो लाजवाब है, जब ये स्टेज से सबको भासन दे शक्ति है तो ये कुछ भी कर शक्ति है, मुझे तो शिव की बात सही लग रही है, आप ये कर शक्ति है.

मनीषा : (मेरी और हलकी नाराजगी से देखते hue)Thik है, में सोचूंगी.

हमारी चर्चा काफी लम्बी चली थी, वो सब निकल गए, मुझे स्टेडियम भी जाना था, मुझे भार्गवी मैडम को i-pill देने भी जाना था, में वह से निकला और दवाई ली और मैडम को फ़ोन किआ. वो पुलिस स्टेशन में थी.

शिव : आप प्प्लिके स्टेऑन में?

भार्गवी : और कहा होउंगी?

शिव : आपकी तबियत ठीक नहीं थी न.

भार्गवी : (फ़ोन पर भी शर्मा गयी, वैसे वो केबिन में अकेली थी तो दिक्कत नहीं थी, उसकी आवाज धीमी हो gayi)Me ठीक हु. (उसके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान थी)

शिव : (मुझे भी हिचकिचाहट हो रही थी, पता नहीं अचानक जैसे हम दोनों का रिस्ता hi बदल गया था) वो i-pil....

भार्गवी : शाम को ले लुंगी, 72 घंटो में ले शक्ति हु.

शिव : ठीक है मैडम, में स्टेडिम से लौटने के बाद आता हु.

भार्गवी : सुनो.

शिव : है बोलिये.

भार्गवी : खाना मेरे साथ hi खाना.

शिव : कल तो खाया था.

भार्गवी : तो क्या हुआ, आज फिर नहीं खा शक्ति?

शिव : ठीक है.

भार्गवी : जल्दी आना.

शिव : ठीक है.

हमारा वार्तालाप अजीब था, एक hi दिन में कितनी चीजे बदल गयी थी. मेने अपने दिमाग को जतका और जूही के घर चला गया, वो मेरे साथ ऐसे हो गयी थी की जैसे हम बरसो से एक दूसरे के साथ हो, वो बिना झिझक मुझे किस कर देती थी, वो सचमे प्यारी थी, मुझे समाज नहीं आ रहा था की इस लड़की को कैसे संजो. वैसे भी हमारे बिच सब सामान्य था को कोई दिक्कत नहीं थी. हम दोनों ने पशीने बहाये और में उसे छोड़ कर घर चला गया.

शिव : दीदी, में खा कर aunga.(Mene लतादिदी को कहा)

सरितादिदी : ये तेरा क्या नाटक है, जब देखो तब कही न कही जाना होता है.

लतादिदी : क्यों दन्त रही है उसे, काम होगा.

सरितादिदी : में इसके सरे काम समझती हु, जब देखो तब कोई न कोई बुलाती रहती है, लड़की का hi नौटा है न, बोल, बोल न चुप क्यों है?

शिव : वो दीदी, भार्गवी मैडम ने कहा था.

सरितादिदी : कल तो खा कर आया, अब क्या रोज रोज वो तुजे खिलाएगी?

शिव : अब इसमें में क्या कहु, उन्होंने कहा तो में क्या कहता?

लतादिदी : ये क्या बोल रही है तू, तूने देखा नहीं, अब कितने बड़े बड़े लोग यहाँ आने लगे है, हमारे अनाथालय को कितने लोगो का सपोर्ट है, ये सब ऐसे hi हो गया क्या, वो सब इसकी बदौलत है, इसके सम्बन्ध है तभी तो लोग खुद यहाँ चल कर आते है. तू जा शिव. (में वह से निकल gaya)(Sarita se)Kyu उसको इतने सवाल कर रही थी?

सरिता : और नहीं तो क्या, हर जगह अपना प्यार लुटाता फिर रहा है, हम क्या काम है.

लता : ये क्या बोल रही है तू, वो भार्गवी मैडम के वह जा रहा है.

सरिता : तुजे क्या लगता है, वो औरत नहीं है.

लता : क्या, कुछ भी सोचती रहती है, उन्होंने हमारी कितनी मदद की है.

सरिता : अच्छा, पहले कहा थी वो, शिव से मिलने के बाद hi उनका प्यार अचानक अनाथालय के लिए बढ़ गया. में भोली नहीं हु, तेरी तरह.

लता : ऐसा कुछ नहीं है, तू ज्यादा दिमाग मात चला, और काम में ध्यान दे.

वह भार्गवी आज जल्दी घर आ गयी थी, उसने खाना खुद बनाया, और नाहा कर तैयार हो गयी थी, और सोफे पर बैठी टीवी चालू किये, शिव का इंतजार कर रही थी. टीवी चालू था पर उसका ध्यान बार बार घडी पर जा रहा था, और बहार से आती हर एक आहत पर उसका दिल धड़क जाता था. वो बेचैनी से शिव का इंतजार कर रही थी. आज जब शिव का फ़ोन आया था तब वो इतना शर्मा गयी थी, एक तो वो गर्भनिरोधक गोली देने आ रहा था, और वो भी पुलिस स्टेशन में, वो शर्मा के पानी पानी हो रही थी, उसे याद आ रहा था की उसने कैसे बात की थी शिव से, उसने कहा था “जल्दी आना”, क्या जरुरत थी उसे जल्दी बुलाने की? एक तो अभी भी उसकी छूट में हल्का हल्का दर्द हो रहा था, आज वो छूती hi लेना चाहती थी पर काम ऐसा था की जाना पड़ा, जब भी उसको दर्द होता उसे शिव की याद आ जाती थी. घर आने के बाद सज धज कर वो ऐसे शिव का इंतजार कर रही थी जैसे उसका प्रेमी उसका पति आनेवाला हो. ऐसा क्या बदल गया था? क्या आज भी कल की तरह hi होगा, क्या वो दोनों सेक्स करेंगे? उसको दर्द हो रहा है, उसका क्या? वो कैसे बात करेगी? सब सोच कर hi वो शर्म से पानी पानी हो रही थी. उसे बहोत शर्म आ रही थी, कितना कुछ बदल गया था, वो नयी नवेली दुल्हन की तरह शर्मा रही थी, एक तरफ तो वो चाहती थी की वही सब हो, पर वो पहल भी नहीं कर शक्ति थी, क्या शिव आज फिर से उसके साथ वो सब करेगा? कैसे करेगा? क्या कह कर उसे राज़ी करेगा? वो तो पूरा बेशर्म है, कैसे बात कर रहा था, उसका कोई भरोसा नहीं, वो तो सीधे सीधे hi कह शक्ति है की मुझे आपके साथ सेक्स करना है, या फिर कहेगा भी नहीं और पकड़ के शुरू हो जायेगा.

पता नहीं भार्गवी क्या उटपटांग सोच रही थी, कभी मुस्कुरा रही थी तो कभी शर्मा रही थी, तभी उसे बाइक की आवाज आयी, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, वो दौड़ते हुए गयी और दरवाजा खोला.
 
अपडेट 115

उसने दरवाजा खोला तो शिव उसे बाइक पार्क करता नजर आया, वैसे तो उसने रोज़ की तरह t-shirt और जीन्स hi पहन रक्खा था और कुछ खास नहीं पहना था, पर फिर भी वो बहोत हैंडसम दिख रहा था, उसके शरीर पर कोईभी कपड़ा अच्छा hi लगता था, वो दरवाजे पर कड़ी उसे देख रही थी, जब शिव की नजर उसपर पड़ी तो वो मुस्कुराया, ऐसा कुछ भी नहीं था पर फिर भी उसको शर्म आ रही थी, ये वही लड़का था जिसने कल उसके साथ सेक्स किआ था, पता नहीं क्यों पर उसे शर्म आ रही थी, पर फिर भी वो उसके सामने से हटना नहीं चाहती थी, वो जैसे जैसे उसके करीब आ रहा था उसके दिलकी धड़कने तेज हो रही थी, जब वो उसके नजदीक आ कर खड़ा हुआ तो वो उसकी आँखों में देख रही थी, उसका मान कर रहा था की कास वो उसको वही पकड़ कर उसको किश करने लगे.

शिव : गुड इवनिंग मैडम.

भार्गवी : (थोड़ा हकलाते hue)Gggood इवनिंग, आए आओ.

शिव : (उन्हें जब दरवाजे के पास खड़े देखा था तो वो इतनी खूबसूरत लत रही थी की मेरा मान किआ की जा कर उन्हें पकड़ कर किश कर लू, पर में न कर शका, भले hi हमारे बिच सेक्स हो चूका था, पर फिर भी वो उस पोसिटिव पर थी की उनके साथ ऐसी चिप हरकत में नहीं कर शक्ति tha)Kaisi हो आप?

भार्गवी : (हिचकिचाते hue)Achchhi hu(Uff ये झिझक, ये शर्म) बैठो, में पानी लती हु. (वो अंदर जाने लगी, में उन्हें जाते हुए देख रहा था, पता नहीं पर मेरी नजर उनके थिरकते कूल्हों पर चली गयी, उनके कूल्हे बहोत आकर्षक तरीके से लहरा रहे थे, क्या वो जान बुज कर ऐसे चल रही थी? में ये सोचते हुए उन्हें देख रहा था की उन्होंने चलते चलते पीछे देखा, मेरी चोरी पकड़ी गयी थी, वो मुस्कुरायी और अंदर चली गयी, में अपने आप को रोकने की कोशिस कर रहा था की कोई जल्दबाजी मात करना, पर दिल मान hi नहीं रहा था, वो पानी ले कर वापस aayi)Lo. (में एक hi साँस में पानी पि gaya)Aaram से पीओ. (मेने पानी पि कर गिलास उनको दिया तो उन्होंने गिलास वही रख दिया और मेरे पास बेथ गयी) खाना तैयार hi है, अभी खाना है की बाद में. (पता नहीं उनके मान में क्या चल रहा था, पर उन्हें देख कर लग रहा था की वो अपनी बात कर रही है, की वो तैयार है, फिर भी में उनकी आँखों में देखते हुए समझने की कोशिस कर रहा tha)Aise क्या देख रहे हो, मेने काया खाना तैयार है, अभी खाओगे की बाद में.

शिव : थोड़ी देर बाद कहते है, आज वैसे भी में जल्दी आ गया, अभी टाइम है, अरे है (मुझे याद आया तो मेने अपनी जेब से i-pil निकली और उन्हें di)Ye लीजिये. (I-pil देख कर वो शर्मा गयी, और उन्होंने नज़ारे निचे झुका ली, मुझे लग की मेने गलती कर di)ss..sorry, वो ....

भार्गवी : (अजीब सी परिस्थिति थी, एक हिचकिचाहट थी, क्या करे न करे वो समाज hi नहीं आ रहा था, दिल कुछ कह रहा था और दिमाग कुछ कह रहा था, दोनों के दिल में एक hi बात थी पर दोनों में से पहल कोण करे वो hi समस्या थी, भार्गवी ने शरमाते हुए वो i-pil ले li)Tum क्यों सॉरी कह रहे हो, मेने hi तो मंगवाई thi.(Use वही टेबल पर रख दिया)

शिव : (वो झिझक रही थी और में भी, पर जितना हमारे बिच हुआ था, मुझे लगा की मुझे hi झिझक छोड़नी चाहिए, आखिर में एक लड़का हु और वो लड़की, चाहे वो किसी भी स्थान पर हो पर ये सच नहीं बदलनेवाला, में हिम्मत कर के उनकी और खिसका और मेने उनके हाथ पर अपना हाथ रख दिया और उसे हलके से pakada)Aapka दर्द कैसा है? (मुझे कुछ सूज नहीं रहा था तो मेने पूछ लिया, पर क्यों पूछ रहा था, क्या में जान न चाहता था की आज सेक्स कर शक्ति हु की नहीं, या फ़िक्र से पूछा tha)(Shiv के सवाल से भार्गवी शर्मा गयी, वो उसे पूछ रहा था की उसकी छूट में दर्द है की नहीं, उसे हल्का हल्का दर्द था, पर वो भी चाहती थी की कुछ हो, इस्सलिये उसने शरमाते हुए न में गर्दन हिलायी, उसे इतनी शर्म आ रही थी की वो उसकी और देख भी नहीं प् रही थी, पर शिव का आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ना उसे अच्छा लगा था, वो ऐसे सिमट रही थी की जैसे अभी शिव आगे badhega)(Me उन्हें देख रहा था, वो पूरीतरह से एक लड़की की तरह hi बेहवे कर रही थी, उनकी शर्म, उनकी हाय, उन्हें और खुबसुआरत बना रही थिए, मेने उनके हाथ में अपनी उंगलिअ पिरोयी तो उन्होंने भी मेरा हाथ थमलिया, ये मेरे लिए सिग्नल था, ये शायद उनकी मूक सम्मति थी, मेने फिर से पूछा,) आप को दर्द नहीं है na(ab मेने यही जान ने के लिए पूछा था की हम आगे बढ़ सकते है न, शायद उनका भी यही हल था, उन्हों ने है में गर्दन hilayi,)(Ye अजीब माहौल था, मुझे इतनी शर्म आ रही थी, में उसके हिसाब से बड़ी लड़की थी, वो मुज से कई साल छोटा था, में जिस मुकाम पर थी, मुझे ऐसी हरकत सोभा नहीं देती थी, पर में कुदरत के सामने बेबस थी, कुदरत ने मुझे एक लड़की का शरीर दिया था और वो लड़के के साथ मिल कर hi पुअरा होता था, समाज ने कई नियम बनाये थे, पर आखिर में कोई भी इस कुदरत के नियम को नहीं जुटला शक्ति था, मेरे मन को पता था की ये गलत है पर फिर भी उसे वो करना था, उसके सिर्फ हाथ पकड़ने से hi मेरे अंदर कुछ हो रहा था, वो खड़ा हुआ, एक पलके लिए मेने उसे देखा, पर नजर मिलाने की हिम्मत नहीं हो रही थी, मेरी नज़ारे शर्म से फिर झुक गयी, दिल जोरो से धड़क रहा था, उसने मुझे जब अपनी बहो में उठाया तो मेने भी उसके गले में बहे दाल दी, भले में उसकी और देख नहीं रही थी, पर शर्म और खुसी से भर गया, चेहरे पर मुस्कान और शर्म की लाली थी, उसके ताकतवर हाथो में में किसी गुड़िया की तरह झूल रही थी, वो बैडरूम की और बढ़ने लगा तो मेरी हालत और ख़राब होने लगी, दिल खुस हो रहा था पर शर्म और बढ़ गयी थी, मेने अपना शिर उसकी छाती से चिपका लिया, वो चलते हुए मुझे बैडरूम में ले गया, और बीएड के पास उसने मुझे नीचे रक्खा, में निचे hi देख रही थी, उसने मेरा चेहरा थोड़ी से पकड़ कर उठाया, में उसकी और देखने से शर्मा रही थी)

शिव : क्या आप चाहती है? (वो मुझसे सहमति मांग रहा था, में तो कबसे तैयार थी, पर उसका यु पूछना मुझे अच्छा लगा, में उसकी नज़रो का सामना नहीं कर शक्ति थी, में कैसे कहती की में तैयार हु, मेरे साथ सेक्स कर लो, कैसी अजीब परिस्थिति थी, में उसके साइन में छुप गयी और धीमी आवाज में गर्दन हिला के है kaha)Aap इतनी शर्मा क्यों रही है?

भार्गवी : शर्म तो आती है न शिव, बहोत अजीब भी लग रहा है, सब सोच कर hi मुझे बहोत शर्म आ रही है.

शिव : आप सचमे चाहती है की में आगे बधु, या आप को लगता है की ये गलत है.

भार्गवी : हां, शिव, में चाहती हु, बस मुझे शर्म आ रही है. (में उनकी बात समाज रहा था, लड़कीओ के लिए ये नार्मल था, उनको शर्म आती है, जिस जिस्म को वो बर्षो छुपा के रखती है जब कोई उसे नंगा करेगा तो शर्म तो आएगी hi, में उन्हें बहो में भरे खड़ा था तो में उनकी पीठ सहलाने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी और मेरी पीठ सेहला रही थी, थोड़ी देर में वो सहज होने लगी और मेने उनके होठो को चूसना और चूमना सुरु कर दिया, वो मुझे पकड़ कर चूमने लगी, वो मेरे मुँह में अपनी जीभ डालने लगी, एक दूसरे को हम काफी देर तक चूमते रहे, जब मेने उनको देखा तो वो फिर शर्मा गयी, मेने उनके स्तानक को मसलते हुए फिर से उन्हें चूमना सुरु कर दिया, थोड़ी देर बाद फिर मेने उन्हें देखा तो वो फिर शर्माने लगी) शिईयिव, ऐसे मत देखो मुझे, शर्म आती hai(Unhone मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : आप को ऐसे देखना बहोत अच्छा लगता है, आप बहोत खूबसूरत दिखती है ऐसे शरमाते हुए, आपका ये रूप सिर्फ में hi देख शक्ति हु, तो देखना अच्छा लग रहा है.

भार्गवी : पर मुझे कितनी शर्म आती है वो में hi जानती हु. (में मुस्कुराते हुए उनकी साड़ी निकलने लगा, और उनके पीछे चला गया, साड़ी निकल के मेने उन्हें पीछे से पकड़ लिया और उनके स्तन मसलते हुए उनकी गर्दन चूमने लगा, उनका हाथ मेरे पंजो पर tha)Shhhhh आहिस्ता शिईयिव शहहहहह दर्द होता है.

शिव : आहिस्ता से तो कर रहा hu.(Unki सिस्किअ मुझे और उत्तेजित कर रही थी)

भार्गवी : (शिव के मजबूत पंजो में मसले जा रहे स्तन से दर्द और मज़ा, दोनों का मिलाजुला अनुभव हो रहा था, सिसकते हुए उसने कहा) वो तुम्हे लगता है की तुम आहिस्ता से कर रहे हो, पर मेरी हालत ख़राब होजाती है, तुम्हारे जाने के बाद कल मुझे कितना दर्द था पता है, पुरे शरीर में दर्द था, और ये भी दुःख रहे थे. (अपने स्तन की और इस्सर करके उन्होंने कहा)

शिव : आपको दर्द था तो फिर है क्यों कहा?

भार्गवी : शह्ह्ह्हह्ह, दर्द होता है पर अच्छा भी लग रहा है.

शिव : (स्तनों को मसलते हुए, में एक हाथ निचे ले गया और उनकी छूट को दबोच लिया, अब मेने शर्म छोड़ दी थी, करना hi है तो फिर खुल कर hi करना chahiye)Aap लड़कीओ का समाजमे नहीं आता, आपको समजना मुश्किल होता है.

भार्गवी : (अपनी छूट के मसाले जाने पर में सिसक रही थी, शिव बिना किसी झिझक के मेरे अंगो के साथ खेल रहा था, मुझे शर्म तो आ रही थी पर अच्छा भी लग रहा था, अभी में सिर्फ एक लड़की थी जो अपने प्रेमी के साथ थी, मुझे अपने रुतबे का और अपनी उम्र का भी कोई सरोकार नहीं था, सम्भोग सुख पाने को में लालायित थी, मेरे मान से भी झिझक काम हो रही थी, में सिस्किअ लेते हुए आनंद ले रही थी, शिव का कड़क लुंड मुझे अपने पीछे चुभ रहा था, आगे शिव की ऊँगली मेरी छूट को सेहला रही थी, और ऊपर वो मेरे स्तन दबा रहा था, में अपने कूल्हे शिव के लुंड पर दबा रही थी, जब शिव ने मुझे धकेल कर बीएड पर झुकाया तो में शर्म से पानी पानी होने लगी, में अपने कूल्हे उठाये उसके सामने थी, जब शिव ने पेटीकोट समेत उसकी साड़ी उठायी तो मेने अपना चेहरा छुपा लिया, शिव कितनी बेफिकरी से मुझे नंगा कर रहा था, मेरे चेहरे पर शर्म के साथ साथ मुस्कान भी थी, जब शिव मेरे कूल्हों को छू कर उसे दबाते हुए महसूस करने लगा तो मुझे बहोत शर्म आने लगी, वो मेरे कूल्हों को मसल रहा था और साथ में उसे चूमते हुए अपना चेहरा रगड़ रहा था, पता नहीं शिव को क्यों इतना मज़ा आ रहा था पर, पर मुझे बहोत मज़ा आ रहा था, मेरा रोआ रोआ खड़ा हो गया था, शर्म के बावजूद में वैसे hi कड़ी थी, शिव ने मेरी छूट वाले भाग को छुआ तो में कैंप गयी, मुझे यकीं था की मेरी छूट से निकले पानी से मेरी पंतय गीली हो गयी होगी और शिव उसे देख रहा होगा, वो बहोत शर्म महसूस कर रही थी, जब शिव ने मेरी पंतय निचे खिसकायी तो मेने कास के अपना चेहरा छुपा लिया, कितना अजीब था ये सब, कोई उसे छूने की हिम्मत नहीं करता था और ये शिव उसकी पंतय निकल कर उसे नंगा कर रहा था, पंतय निचे से पूरी निकलने के बाद वो उसके कूल्हों को फैला कर अंदर देख रहा था, मेरे दिल में हलचल मची हुई थी, शिव उसके एकदम निजी अंग को कितनी बारीकी से देख रहा था, ये सोच कर hi मुझे शर्म आ रही थी की वो उसके गांड का छेड़ और उसकी छूट को देख रहा है, शर्म के बावजूद उतेजना से मेरी छूट से पानी बह रहा था, में शिव को देख तो नहीं रही थी पर पर वो कैसा महसूस कर रहा होगा ये सोच कर hi मुझे शर्म आ रही थी, वो गांड के छेड़ को टटोल रहा था, उसके छूने से एक अजीब सरसराहट हो रही थी, वो छूट के होठो को फैला के भी देख रहा था, इस तरह से तो मेने खुद अपने अंगो को नहीं देखा था, जब उसकी चिकनी जीभ मुझे अपने गांड के छेड़ पर महसूस हुई तो में मज़े से कैंप उठी, वो मेरी छूट के छेड़ में भी अपनी जीभ दाल कर उसका पानी छत रहा था,





लड़का और लड़की, बाहरी दुनिया के सामने कुछ भी हो पर अपने इन ांगत पालो में वो कितने अलग होते है, शर्म के बावजूद मुझे कोई दिक्कत नहीं महसूस हो रही थी की वो मेरे अंगो को ऐसे देख रहा है, छू रहा है, में सिसकती रही और वो मेरे कूल्हों के साथ, मेरी गांड के छेड़ के साथ, मेरी छूट के साथ खेलता रहा. में इतनी गरम हो गयी थी की अगर वो थोड़ी देर और करता तो में झाड़ जाती, पर वो हरजाई, जान बुज कर मुझे तरसा रहा था, उसने मेरे सरे कपडे निकल दिए, में बस कड़ी रही, कितना अजीब है ये सब, कुछ दिन पहले जिस लड़के को में जानती तक नहीं थी, आज वो इतने अधिकार से मुझे नंगी कर रहा है, मेरा ध्यान तब टुटा जब उसका ननगा शरीर मुझसे पीछे से लिपट गया, उसका लुंड मेरी झंगो के बिच से मेरी छूट से सत्ता हुआ था और वो मेरे स्तनों को सेहला रहा था, दबा रहा था, मेरे निप्पलों को निचोड़ रहा था, में सिसकने के अलावा कुछ नहीं कर शक्ति थी. उसने मुझे उल्टा लेता दिया और मेरे कूल्हों को मसलने लगा, उसे जैसे मेरे साथ सम्भोग करने की कोई जल्दी नहीं थी, मेरे पति के साथ जो मेरा अनुभव था, अब तक तो हम सब निपटा कर सो भी चुके होते. पर ये कितने इत्मीनान से मेरे अंगो के साथ खेल रहा था, उसे कोई जल्दी नहीं थी, वो खुद मेरे शरीर का मज़ा ले रहा था और मुझे मज़ा दे रहा था. मुझे यकीं था की वो मेरे कूल्हों को मसलते हुए मेरी छूट और गांड के छेड़ को देख रहा है और उसके मज़े ले रहा है.





थोड़ी देर बाद उसने मुझे बिठा दिया और मेरे स्तन को चूसने लगा, अब तक तो में उसकी आँखों से बच रही थी पर अब वो मेरे सामने था, मुझे शर्म आ रही थी पर अब मज़ा भी आ रहा था, शर्माने से कुछ नहीं होने वाला, जो होगया है और जो होगा, वो आनंद hi देनेवाला है. में सिसकती रही और वो मेरे स्तन दबाते हुए उन्हें चूस रहा था,





जब उसका दिल नहीं भरा तो वो मेरे ऊपर आ गया और मुझे अपने निचे लेता दिया, में सोच रही थी की अब वो सम्भोग करेगा, पर नहीं, वो तो मेरी चुचिओ को चूसने लगा और अपना लुंड मेरी योनि पे रगड़ने लगा, वो सम्भोग नहीं कर रहा था, पर फिर भी मुझे बहोत मज़ा आ रहा था, उसका लुंड मेरी छूट को अच्छे से रगड़ रहा था और साथ में छूट के ऊपर के डेन को भी रगड़ रहा था, मेरे शरीर में करोडो चींटिया दौड़ रही थी, पूरा सरीर आनंद से कैंप रहा था, छूट पुकार रही थी की अब तो मेरी प्यास बजा दे, पर वो शांत था, मेरे साथ खेलना जैसे उसे पसंद था, उसका ऐसा सैयाम देख कर में उसपे वरि जा रही थी, उसे सहलाते हुए में अपना प्यार जाता रही थी.





वो फिर निचे चला गया और मेरी छूट को देखने लगा, क्या देख रहा था पता नहीं, पर में उसे देख रही थी, मुझे शर्म तो आ रही थी पर उसके सामने अपनी छूट को परोसना भी मुझे अच्छा लग रहा था, वो मेरी छूट की और झुका और उसे चाटने और चूसने लगा, छूट चूसने से मुझे बहोत आनंद आने लगा, में उसका शिर सहलाते हुए उसे अपनी छूट चाटने का इनाम दे रही थी, और बता रही थी की उसकी हरकते मुझे बहोत अच्छी लग रही है,





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वो छूट को इतनी जोर से चूस रहा था की में सेहन नहीं कर प् रही थी, मेरी छूट के डेन को सो अपने होठो से मसल रहा था, में उसे अपनी छूट में दबाने को मजबूर थी, में अपनी टंगे फैलाये उसके शिर को पकड़ कर अपनी छूट पर दबा रही थी.





आखिर कर वो ऊपर आया, अभी भी उसकी ुण्डलिया मेरी छूट में अंदर बहार हो रही थी, मेरे होठो को किश करने के बाद उसने पूछा.

शिव : आप तैयार हो? (में तो कबसे तड़प रही थी, मेने उसकी आँखों में देखते हुए कहा)

भार्गवी : हा. (मेरी है सुन कर वो मुस्कुराया तो में शर्मा गयी, शर्म आ रही थी की वो मुझे पूछ रहा था की छोड़ने को तैयार हो और में उसे हां कह रही थी, वो मेरे पेअर फैलते हुए बीचमे बेथ गया, उसके बड़े लुंड से मुझे दर लग रहा था पर फिर भी में तैयार थी. उसने मेरी छूट को अपने लुंड से सहलाया तो में तड़प उठी, में कहना चाहती थी की बस अब और मात तड़पाओ, दाल दो अंदर पर फिर भी मेरी शर्म मुझे ये कहने से रोक रही थी, मेरी आंखे अपना हल बया कर रही थी, वो मेरी हालत समाज रहा था, उसने अपने उस बड़े दैत्याकार लुंड को मेरी छोटी सी छूट के छेड़ पर लगाया, में जानती थी की वो उसकी धज्जिया उदा देगा पर में उसे रोकने में असमर्थ थी, उसका वो गरम सूपड़ा में अपनी छूट के छेड़ पर महसूस कर रही थी, मेने चादर को दबोच लिया, और आनेवाले पल के लिए अपने आपको मजबूत किआ, उसके लुंड का दबाव मेरी छूट पर पड़ा तो वो अंदर की और धसने लगी, मेने अपने होठो को दन्त से दबा दिया, अचानक छूट का छेड़ फ़ैल गया और सूपड़ा अंदर प्रवेश कर गया, हल्का दर्द हुआ पर उसके अंदर जाने से आनद ज्यादा था, वो बहोत काररिंग था, वो कोई जल्दबाजी नहीं कर रहा था, आहिस्ता आहिस्ता उसने अपना आधे से ज्यादा लुंड मेरी छूट में दाल दिया, में उसके हर हिस्से को महसूस कर रही थी, इतने सालो से मेने अपने आप को संभाला था पर अब मेरे लिए संभालना मुमकिन नहीं था, उसने एक बार थोड़ा लुंड बहार निकला फिर वापस अंदर दाल दिया, और मेरी और देखा, मेने हां में शिर हिला के उसे सहमति दी की सब ठीक है, वो आहिस्ता आहिस्ता लुंड अंदर बहार करने लगा और में आनंद सागर में डूबने लगी,





वो पहले आहिस्ता आहिस्ता कर रहा था पर फिर उसकी स्पीड बढ़ती चली गयी, में कबसे गरम थी , में उसके सामने ज्यादा देर टिक न शक्ति और झटके कहते हुए झाड़ ने लगी, कितना अद्भुत आनद था, एक और में झाड़ रही थी और दूसरी और वो लगातार मुझे छोड़ रहा था, जैसा में अपने मान में सोच रही थी में उसको नहीं बता शक्ति थी की मुझे उसका ऐसे छोड़ना अच्छा लग रहा है, फिर से वो मेरे स्तन दबाते हुए अपना लुंड अंदर बहार कर रहा था, कुदरत के इस अद्भुत खेल का में आनंद ले रही थी, में और वो दोनों पशीने से भीग चुके थे पर किसको परवाह थी, में अपनी टंगे फैलाये उसको छोड़ने में सहायता कर रही थी, लुंड आहिस्ता आहिस्ता और अंदर जा रहा था, हलके दर्द के साथ मज़ा बढ़ रहा था,





में उसको चुम रही थी और सेहला रही थी, उसे बता रही थी की उसका छोड़ना मुझे अच्छा लग रहा है, वो जी भर के मुझे छोड़ सकता है, बीएड हिल रहा था और में भी हिल रही थी, उसका लुंड काफी गहराई में पहुंच गया था, में उसे खिंच कर और अंदर डालने को उकसा रही थी, आखिर कर लुंड पूरा अंदर चला गया और छूट के आखरी छोर से टकराने लगा, ये आनंद शिव ने मुझे दिया था, में अपनी छूट को पूरा भराहुआ महसूस कर रही थी.

वो कब तक मुझे ऐसे hi छोड़ता रहा पता नहीं, लगातार उसके धक्को से में किसी और दुनिया में hi थी, जब उसने लुंड बहार निकला तो मुझे समाज नहीं आया, मेने उसे सवालिया नजरो से देखा तो वो मुझे पकड़ कर घोड़ी बना रहा था, शर्म तो थी पर में फ़ौरन घोड़ी बन गयी और अपनी टंगे फैला कर उसका इंतजार करने लगी, उसे मेरी छूट में पता नहीं क्या अच्छा लगता था, उसने मेरी छूट को फिर से छठा, में तड़प कर रह गयी, फिर से उसने अपना लुंड मेरी छूट के छेड़ पर लगाया, मेने टंगे और फैला दी, लुंड अंदर जाने लगा, और मेरी बच्चेदानी से जा टकराया, हल्का दर्द हुआ





भार्गवी : अह्ह्ह्हह शीइइइइव (वो एक दो पल रुका, फिर मेरी कमर पकड़ कर धक्के लगाने laga)Shhhhhh शह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह (पता नहीं ये कैसा मज़ा था, में पूरी नंगी थी, शर्म थी पर आनंद इतना ज्यादा था की मुझे नंगा होना भी अच्छा लग रहा था,





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मेरे कूल्हों को मसलते हुए वो धक्के लगा रहा था, में लगातार उसके धक्को से मजे में डूबी हुई थी, मेरे स्तन हवा में झूल रहे थे, उसके धक्को से रूम में थप थप की आवाजे गूंज रही थी, में सब कुछ भूल कर उसके लुंड को अंदर बहार होते महसूस कर रही थी, में सब भूल कर इस पल का मज़ा ले रही थी.

थोड़ी देर बाद उसने मेरे हाथ पकड़े और मुझे ऊपर उठा दिया, और मुझे पीछे से छोड़ रहा था.

शिव : आप को अच्छा लग रहा है?

भार्गवी :(मुझे शर्म आ रही थी, वो मुझे पूछ रहा था की छोड़ना कैसा लग रहा है, मेरे चेहरे पर मुस्कान के साथ शर्म उभर आयी, पर मुझे इतना अच्छा लग रहा था की में इंकार भी नहीं कर शक्ति thi)Ha शिव शहहहहह बहोत अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह.





शिव : क्या अच्छा लग रहा है?

भार्गवी : शठ अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह वही शहहह जो तुम कर रहे हो शहहहहह अह्ह्ह्हह.

शिव : में तो आपको छोड़ रहा हु. क्या वो अच्छा लग रहा है?

भार्गवी : ऐसा मात बोलो शिव शहहह मुझे शर्म आ रही है शह्ह्ह्हह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह.

शिव : पर में तो वही कर रहा हु, इससे और क्या कहु?

भार्गवी : कुछ कहने की क्या जरुरत है, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह बस करते रहो.

शिव : पर मुझे आपको छोड़ने में मज़ा आ रहा है तो मेने कहा.

भार्गवी : शह्ह्ह्ह गंदे शहहह अह्ह्ह्ह बहोत गंदे हो तुम शहहह भला कोई ऐसा बोलता है शठ अह्ह्ह्हह.

शिव : पर अगर आपका मान हुआ और आपको मुझे कहना है की शिव मुझे छोड़ो तो आप कैसे कहेगी?

भार्गवी : (उसकी ऐसी बातो से मुझे बहोत शर्म आ रही थी, पर चेहरे पर मुस्कान थी, वो भले hi गन्दा लगता था सुन ने में पर सच वही था, वो मुझे अपने लुंड से छोड़ रहा था, और मेरी छूट को अपने लुंड से छोड़ रहा था, पर में ऐसा नहीं कह शक्ति thi)Gande कही के शहहह धीरे शिव शहहह अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : कहिये न, आप कैसे कहोगी?

भार्गवी : में कुछ नहीं कहुगी, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह में तुम्हारे पास चली आउंगी और तुम्हे अपनी बहो में भर लुंगी शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह तुम खुद hi मेरे साथ ये सब करने लगोगे, शह्ह्ह्ह.

शिव : और मेने फिर भी कुछ न किआ तो.

भार्गवी : शह्ह्ह्ह में जानती हु शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह तुम मेरी हरकतों से hi समाज जाओगे शहहह मुझे कुछ कहने की जरुरत नहीं पड़ेगी शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : ऐसा क्या करोगी आप शह्ह्ह्ह , आहिस्ता आप बहोत जोर से मेरे लुंड को पकड़ रही है.

भार्गवी : गन्दा शिव, शह्ह्ह्ह कैसा कैसा बोलते हो तुम, शठ तुम्हे शर्म नहीं आती?

शिव : किसी अनजान के साथ थोड़ा में बात कर रहा हु, में तो आपके साथ बात कर रहा हु, जॉब आपके साथ ये सब कर शक्ति हु तो बोल भी शक्ति हु, अगर आपको अच्छा नहीं लगता तो में नहीं बोलूंगा.

भार्गवी : शहहह अह्ह्ह्ह नहीं शिव शहहह मुझे बस अजीब लग रहा है शह्ह्ह्ह मेने कभी ऐसी बाटे न बोली है शठ न सुनी है शह्ह्ह्ह है पता जरूर है शह्ह्ह्ह पर बोन में अजीब लगता है शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह. पर लगता है कभी न कभी तुम्हारे रंग में रंग hi जाउंगी. (शिव ने मुझे सीधा लेता दिया, मेरी टंगे फैला कर फिर से अपना लुंड अंदर दाल दिया, मेने भी कोई आपत्ति न जताई, वो बिना किसी संकोच के मेरे साथ सब कर रहा था, मुझे भी अच्छा लग रहा था, जैसे मेने अपने आपको उसे सूप दिया था, वो मेरे ऊपर आकर मुझे छोड़ने लगा, उसके धक्के तेज तेज थे, मेने उसे अपनी बहो में भर लिया, इस पल वो मेरा स्वामी था, ऐसे हम कुछ भी हो पर इसा समय वो मेरा था और में उसकी, उसे हर तरीके से अधिकार था, मुझे उसका ऐसे मुज पर अधिकार जाताना अच्छा लग रहा था, में उसको अपनी और खींचते हुए उसके साथ सम्भोग सुख भोग रही थी, मेरी छूट हद तक फैली हुई थी, लुंड के अंदर बहार होने से मुझे बहोत आनंद मिल रहा tha)Shhhhh शिईयिव शह्ह्ह्ह मेरे सीईव शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह, है ऐसे hi shhhhhhhhhh.

शिव : आपको छोड़ना अच्छा लग रहा है.

भार्गवी : (वो लगातार मुझसे ऐसी बाते कर रहा था, मुझे उत्तेजना हो रही थी, उसकी बात अजीब थी गन्दी थी पर साथ थी, मुझे उससे छोड़ना अच्छा लग रहा tha)Haaaa शिव शह्ह्ह्ह मुझे बहोत अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्ह ऐसे hi करो शह्ह्ह्ह वो बहोत अंदर तक चला गया है शहहहहह. अब तो वो पूरा अंदर है न?

शिव : हआ, वो पूरा अंदर चला गया है, मुझे आपकी भोस की अंतिम दीवाल महसूस हो रही है.

भार्गवी : (कितना अजीब लग रहा था, मेरी छूट, मेरी भोस, उसका लुंड, कैसे अजीब सब्द थे पर सच hi था, किसी भी जबान में कहे उनके यही तो नाम the)Tumhe वो अच्छी लग रही है शिव? (भले hi में वो नाम नहीं बोल प् रही थी पर, मुझे ऐसे पूछना भी अजीब लग रहा था, पर में जान न चाहती थी की उसे मुझे छोड़ते हुए कैसा लग रहा hai)Kaho न शिव, मेरे साथ ये सब करना तुम्हे अच्छा लग रहा है?

शिव :है मैडम, आपको छोड़ने में बहोत मज़ा आ रहा है. (में जान बुज कर ये बोल रहा था, ये अजीब था पर सच भी था, में उन्हें छोड़ hi रहा था, मेरे धक्के तेज तेज चल रहे थे)

भार्गवी : तो करते रहो शह्ह्ह्ह तुम बहोत देर तक करते हो शहहहहह मुझे तो पता hi नहीं था की इतना मज़ा आता है शह्ह्ह्हह्ह तुम्हारा जब भी मान करे आ जाना शिव शहहहहह.





शिव : क्यों आपका मान नहीं करेगा?

भार्गवी : मेरा तो मान कर रहा है की तुम यही मेरे साथ रह जाओ shhhhhhhhhh.

शिव : और अगर लोगो ने पूछ की में एक क्यों रह रहा हु, तो क्या कहोगी.?

भार्गवी : पता नहीं शह्ह्ह्हह्ह, में ट्रांसफर ले लुंगी, हम कही और चले जायेंगे.

शिव : (मुस्कुराते हुए मेने उन्हें dekha)Sawal तो हर जगह यही रहेंगे. (वो सोचने lagi)Abhi ज्यादा सोचिये मात, अभी इस पल का मज़ा लीजिये.

भार्गवी : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह धीरे बाबू शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह इतने सालो से मेने अपने आपको संभल रक्खा था शह्ह्ह्ह तुमने सब ख़राब कर दिया शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह अब मुझे तुम्हे hi संभालना पड़ेगा शिव शह्ह्हह्ह्ह्ह. मुझे संभालोगे न? शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : मुझे भी पता नहीं है कैसे, पर में आपको नीरस नहीं करूँगा.

भार्गवी : ओह शिईयिव शहहहहह मुझे हमेसा अपने साथ रखना शह्ह्ह्हह्ह. में झाड़नेवाली हु शिव शह्ह्ह्ह ये कितना अध्भुत है सीईव शह्ह्ह्ह कितना अजीब और अच्छा लगता है shhhhhhhhhh.

शिव : मेरा भी निकलनेवाला है.

भार्गवी : अंदर hi करना शिव शह्ह्ह्हह्ह मुझे बहोत अच्छा लगता है जब तुम अंदर छोड़ते हो शह्ह्ह्हह्ह.

वैसे भी वो गोली कहानी hi थी तो मुझे कोई फ़िक्र नहीं थी. जोर जोर से धक्के लगते हुए आखिर कर में उनके अंदर हिज झाड़ गया, वो मुझसे पूरी तरह से चिपकी रही. थोड़ी देर हम दोनों ऐसे hi रहे और एक दूसरे को चूमते रहे.





फ्रेस होने के बाद उन्होंने बिना कोई अंदरूनी कपडे पहने एक गाउन पहन लिया. मेने टॉवल लपेट लिया और हम दोनों खाना खाने बैठे. खाना खाने के बाद जब में कपडे पहन ने लगा तो वो उदास सी कड़ी दिखी.

शिव : क्या हुआ?

भार्गवी : कुछ नहीं.

शिव : आप तो बहोत स्ट्रांग है, ऐसे क्यों बेहवे कर रही है?

भार्गवी : तो क्या स्ट्रांग होने का ये मतलब है की में अपनी साडी भावनाये दबा दू.

शिव : पर में तो यही हु, नजदीक hi, और आप जानती है की मुझपर बहोत जिम्मेदारियां है.

भार्गवी : में सब जानती हु, par(Wo मुझसे लिपट गयी, मेने उनका चेहरा उठाया और उनके होठो को चूमा)

शिव : आप अकेली रहती है न इस्सलिये आपको ऐसा लगता है, में पास में hi हु, अगर आपका मान करे तो मुझे बुला लेना.

भार्गवी : मेरा तो अभी मान कर रहा है. (मेने उनकी और देखा, वो muskurayi)Iss बहाने कुछ देर और तो मेरे साथ रुकोगे.

शिव : अच्छा तो ऐसे कह रही थी, अगर ऐसा है तो मेरे साथ मेरे घर चलिए.

भार्गवी : वो भी आउंगी, पर फिर कभी.

शिव : तो फिर में जाऊ?

भार्गवी : जल्दी आना?

शिव : यहाँ की पुलिस स्टेशन? (में मुस्कुराया)

भार्गवी : दोनों जगह, जब भी मौका मिले, मिलने आ जाना.

मेने कपडे पहने और में उन्हें bye कह के वह से निकल गया.

प्रकसराओ और मला बैठे थे और व्हिस्की पि रहे थे.

मला : प्रकाशराओं बहोत नुकसान हो गया, वो सूर्यदेव हाथ से निकल गया.

प्रकसराओ : ये सब जाहिर की गलती है, उसे क्या जरुरत थी वह अपना सामान रखने की, अपने चोरी के सामान को छुपाने के लिए उसने गलत जगह को चुना, उस बेवकूफ को पता नहीं की ये जगह कितनी कीमती थी.

मला : उसे दोस देने से क्या होगा, जैसे हम अपना फायदा सोचते है वो भी अपना hi फायदा सोचेगा न. वो लड़का कोण था?

प्रकसराओ : वो पवनका आदमी है, उसके साथ काम करता है, बच्चा है वो.

मला : अगर बच्चा है तो कैसे इतना बड़ा काण्ड कर गया?

प्रकसराओ : वो तो उस पुलिसवाली ने किआ है.

मला : तुम्हारी बेवकूफी का hi ये परिणाम हुआ है, तुम्हे इतना भी पता नहीं है की ये सारा काण्ड उस लड़के की वजह से hi हो गया है, तुम्हे क्या लगता है उस अकेली पुलिसवाली की हिम्मत है ये, वकील गया था जाहिर से मिलने, उसने बताया की उस लड़के ने hi सब को धूल छठा दी थी. पर सवाल ये है की उसे क्या जरुरत थी, जाहिर अगर चोरी का सामान छुपा भी रहा था तो ये पुलिस का काम था, और अगर पुलिस उसे गिरफ्तार करती तो भी उसपर चोरी का इल्जाम होता, उस लड़के ने जाहिर से कागजात क्यों सिग्न करवाए?

प्रकाशराओ : आप सच कह रहे है, इन सब में ये कागजात सिग्न करवाने का मतलब समाज में नहीं आता.

मला : तुमने कहा न की वो पवन का आदमी है, तो ये सब उसीके कहने पर किआ होगा.

प्रकसराओ : पर वो तो एक स्कूल में पढ़नेवाला लड़का है और ऊपर से अनाथ है, न उसका कोई बैकग्राउंड है, न और कुछ, उसे क्या जरुरत पद गयी थी ऐसा करने की.

मला : तुम बेवकूफ के बेवकूफ hi रहोगे, तुमने कहा की वो अनाथ है तो ऐसे लड़को को क्या चाहिए होगा, पैसा.

प्रकाशराओ : तो इसका मतलब है की ये सारा खेल पवन ने रचाया.

मला : हो सकता है, पर हम उसे बरसो से जानते है, उसकी इतनी हिम्मत नहीं हो शक्ति. और वो किसी स्कूल के लड़के को ऐसा काम क्यों सौपेगा, जाहिर से टकराना कोई बच्चो का खेल नहीं था, ऐसा क्या देखा उसने की उसने उस लड़के को ये काम सौपा. आज तक उसने कभी ऐसा नहीं किआ था और न hi वो कर शक्ति था, इस सहर के किसी भी गुंडे से वो संपर्क करता तो हमे पता चल जाता. सचमे मेरी समाजमे तो ये बात hi नहीं उतर रही की उसने उस लड़के के जरिये ये काम करवाया, वो लड़का कोई गुंडा तो है नहीं की वो इसकी सुपारी उठाएगा. ये पैसो का खेल नहीं है प्रकसराओ. मेने ये भी सुना है की आज सूर्यदेव उस लड़के से मिलने उसके अनाथालय गया था. सहर का इतना बड़ा आदमी सामने से उस लड़के को मिलने जाये, कोई तो बात जरूर है उस लड़के में.

प्रकसराओ : पता नहीं, में मिला हु उस लड़के से, मुझे तो ऐसा कुछ खास नहीं लगा, है शरीर मजबूत जरूर था उसका और लम्बाई भी सामान्य से ज्यादा है, पर एक सामान्य सा लड़का hi लग रहा था, मुझसे बात करने से भी वो दर रहा था.

मला : वो जो भी हो, पर हमारे हाथ से पैसे कमाने का मौका तो चला गया. और कुछ सोचना पड़ेगा.

प्रकसराओ : आप खामखा चिंता कर रहे है, है पैसे काम मिलेंगे पर मिलेंगे तो हमें hi, इस सहर में और कोण है जो इतने बड़े प्रोजेक्ट को अंजाम दे सके.

मला : क्यों पवन नहीं कर सकता.

प्रकसराओ : पर वो तो हमारे साथ hi है, हर प्रोजेक्ट में वो हमारे लिए hi काम करता है.

मला : और अगर वो खुद hi ये प्रोजेक्ट करे तो?

प्रकसराओ : वो ऐसा नहीं करेगा, बिना पैसो और सपोर्ट के वो ये सब नहीं कर शक्ति, वो जनता है की उसे हर चीज की परमिशन लेने होगी, बहोत सरे नौ लेने होंगे, सब के लिए उसे हमारे पास hi आना होगा.

मला : बात तो तुम्हारी सही है, पर ध्यान रखना पड़ेगा.

दोनों अपनी अपनी सोच में दुबे पेग पि रहे थे.
 
अपडेट 116

क्या क्या हो रहा था मेरी जिंदगी में, एक समय था की मेरे पास पैसे तक नहीं थे, आज मेने अपने कहते में 5 लॅक रुपये जमा करवाए थे, जूही और बिना मैडम ने जो वीडियो बनाया था, उसकी वजह से रोज कोई न कोई पैसे हमारे कहते में दाल रहा था, दुनिया में अच्छे लोगो की कमी नहीं हुई है, आज दोपहर में जब में घर पंहुचा तो दिव्या और कुसुम आये हुए थे, मुझे आश्चर्य हुआ की वो दोनों यहाँ क्या कर रही है. में उन दोनों से मिला.

शिव : Hi दिव्या, Hi कुसुम. (कुसुम सिर्फ मुस्कुरायी)

दिव्या : Hi, कैसे हो?

शिव : में ठीक हु, आज इस तरफ?

दिव्या : (लतादिदी और सब वही थे to)Ha बस ऐसे hi.

शिव : अंकल, आंटी और सब कैसे है?

दिव्या : सब अच्छे है, पापा याद कर रहे थे तुम्हे, कह रहे थे की शादी के बाद फिर दिखे नहीं.

शिव : (मुझे पता था की वो अपनी बात कर रही थी) है, सब कुछ बहोत जल्दी जल्दी हो रहा था तो टाइम नहीं मिला, कहना उनसे की जल्दी hi मिलने आऊंगा. ठीक है, तुम बाते करो में आता हु. (में कपडे बदलने अंदर चला गया, हमारा खाने का टाइम था तो वो दोनों भी हमारे साथ खाने को बेथ गयी, सबके होते हुए तो कोई बात हो नहीं शक्ति थी, खाना खाने के बाद मुझे साइट पर जाना था तो वो दोनों भी मेरे साथ hi आ गयी, ये कहके की वो भी अब बस से घर चली जाएगी. हम तीनो बहार निकले, कुसुम साथ चल रही थी)

दिव्या : शादी के बाद आज मिल रहे है, मिलने क्यों नहीं आये? (उसके बोलने में शिकायत साफ़ छलक रही थी)

शिव : मेने कहा न की बिजी था.

दिव्या : अगर मिलना चाहो तो टाइम निकल hi आता है, स्कूल भी आ शक्ति थे.

शिव : उसकी समय में मेरा भी स्कूल होता है.

दिव्या : एक दिन अगर छुट्टी ले लोगे तो क्या बिगड़ जायेगा?

शिव : ठीक है, में कोशिस करूँगा.

दिव्या : पहले से बोल देना ताकि में स्कूल hi न जाऊ, अपना नंबर मुझे दो में सेव कर लेती हु, और मेरा नंबर भी सेव कर लो.

शिव : तुम्हारे पास मोबाइल है?

दिव्या : पापा ने दिया है, बस से आती जाती हु तो कभी जरुरत पद जाये इस लिए दिलवाया है. (उसने मेरा नंबर सेव किआ और मेने उसका, कुसुम चुप चाप चल रही थी, है वो मेरी और देख जरूर लेती थी) कब तक आओगे?

शिव : कह ता हु यार, अभी तो मुझे भी पता नहीं है.

दिव्या : तुम्हारा मान नहीं करता, मुझसे मिलने का? (वो ऐसे मुझे देख रही थी की क्या कहु, उसके चेहरे पर नाराजगी थी) में तो तुम्हे रोज़ याद करती हु, मेने कितनी बार रंजन को भी कहा, पर शायद उसने तुम्हे बताया नहीं.

शिव : (में उसकी बात समाज रहा था, हमारे बिच जो भी हुआ था, उसके चलते उसका कहना सही भी था, पर में नहीं चाहता था की ये बात आगे badhe)Divya, हम सिर्फ दोस्त बन सकते है.

दिव्या : (मेरी आँखों में देखते hue)Muje पता है, मेने और क्या माँगा.

शिव : (कुसुम साथ थी तो में और ज्यादा कुछ कह नहीं शक्ति tha)Thik है, हम मिल कर बात करेंगे. (बहार से मेने रिक्शा ली और उन्हें बस स्टेशन ड्राप कर दिया, उसके बाद में साइट चला गया)

वह काम काज चल रहा था, एक माकन में प्लास्टर का काम चल रहा था तो सब वह बिजी थे, सुपरवाइजर वह नहीं था, झुमरी और भोली कमली वह काम कर रही थी, भोली दूसरे माकन में काम कर रही थी. मुझे देखते hi

झुमरी : अरे बाबू, कहा चले गए थे, आज कितने दिन बाद दिखे हो, काम वाम करना है की नहीं?

शिव : (वो मुझसे ऐसे सवाल कर रही थी जैसे वो मेरी बॉस हो, मेने मुस्कुराके जवाब दिया) में काम पर hi था, सर ने दूसरा काम दिया था. तुम सब कैसी हो?

झुमरी : हम तो अच्छे hi है, बस तुम नहीं आ रहे थे तो काम में मान नहीं लग रहा था. (वो काम कर रहे थे और बात भी हो रही थी, मेने देखा की कमली थोड़ी उदास है, और ज्यादा बोल भी नहीं रही थी)

शिव : तुम्हे क्या हुआ, क्यों चुप चुप हो?

कमली : कुछ नहीं, बस ऐसे hi. (तभी वह भोली भी आ गयी)

भोली : ै बाबू, कहा थे इतने दिन?

शिव : (में मुस्कुराया) काम था.

भोली : तुम्हारे हाथ में तो लगा था न, कैसे हो अब?

शिव : तुम्हे तो बड़ा पता है, मेरे बारे में.

भोली : मुझे काया, सब को पता है, तुम्हारी बात होती है, दिनु बता रहा था की तुम्हे चोट लगी है, हम मिलने आना चाहते थे पर काम छोड़ कर आ नहीं शक्ति थे और, शाम को सबके साथ घर जाना होता है.

शिव : कुछ खास नहीं था, में ठीक हु. तुम क्या काम कर रही हो?

भोली : 4 नंबर वाले माकन में इसके बाद प्लास्टर करना है तो मुझे सारा सामान वह रखने को बोलै है, वही कर रही थी. तुम भी चलो न, अकेले अकेले बोर हो गयी हु, तुम बात करोगे तो काम भी जल्दी हो जायेगा.

शिव : ठीक है, तुम जाओ, में आता हु. (वो वह से चली गयी, थोड़ी देर वह सब देखे के बाद में 4 नंबर माकन की और चला गया, वो बहार से सामान अंदर ले जा रही थी, वो बहोत जल्दी जल्दी काम कर रही थी) धीरे धीरे करो भोली, थक जाओगी.

भोली : मुझे इतना काम करना है, जल्दी पूरा करलूँगी तो तुम्हारे साथ बेथ पाऊँगी न. तुम अंदर चलो में आती हु. (में अंदर गया, अंदर कमरे में रेती का छोटा ढेर लगा हुआ था. एक कोने में सीमेंट की चार थैली भी रक्खी हुई थी. थोड़ी देर बाद भोली आयी, मेने देखा की वो हाथ पेअर धोकर आयी है)

शिव : क्या हुआ, काम ख़तम हो गया?

भोली : थोड़ा बाकी है, वो में बाद में कर लुंगी.

शिव : ठीक है, तो चलो फिर वही चलते है जहा सब है.

भोली : क्यों बाबू, मेरे साथ अकेलेमें दर लगता है?

शिव : ऐसा नहीं है, अगर किसी ने देखा तो तुम्हारे बारे में गलत सोच सकता है, इसलिए मेने कहा.

भोली : इसमें क्या गलत सोचेगा, और जिसे जो सोचना है वो सोचे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.

शिव : तुम सिर्फ नाम की भोली हो, भोली हो नहीं. (वो मुस्कुरायी)

भोली : नाम तो मेरा माँ बाप ने रक्खा है, इसमें में कुछ नहीं कर शक्ति, और रही बात मेरी, तो वो तो में जो हु सो हु.

शिव : अच्छा कहो, क्या बात करनी थी?

भोली : नाम मेरा भोली है पर तुम बहोत भोले हो.

शिव : क्या मतलब है तुम्हारा?

भोली : तुम्हारी जगह और कोई होता तो अबतक तो न जाने काया कर दिया होगा, में एक लड़की हो कर तुम्हे अकेले में ले आयी और तुम समाज नहीं रहे हो.

शिव : क्या नहीं समाज रहा हु? (हलाकि में उसके इरादे समाज रहा था)

भोली : अक्सर लोग हमें गन्दी नज़र से देखते है, उन्हें लगता है की हम मजदुर है तो हमे पैसे चाहिए होंगे और हमे पैसो के बदले गन्दा काम करने की छह रखते है, यहाँ में तुम्हे खुद एक अलग घर में ले आयी हु फिर भी तुम समाज नहीं रहे हो, मुझे नहीं लगता की तुम इतने भी भोले हो.

शिव : (में उसे देख रहा था, उसका नाम भोली था और सकल भी भोली hi थी, पर दयनीय दरी ने उसे सब सीखा दिया था, वो पूर्ण परिपक्व लड़की थी, काम कर कर के कैसा हुआ शरीर था, छाती छोटी थी, पर इतनी भी छोटी नहीं थी, शरीर पर अतिरिक्त चर्बी का नमो निशान नथी था, कुलमिला कर वो एक खूबसूरत लड़की थी) में ऐसा वैसा कुछ नहीं सोच रहा, तुमने बुलाया था बात करने को और में वही सोच कर hi आया था, और कुछ नहीं.

भोली : इतनी तो अकाल है मुजमे बाबू, हम लड़कीओ को लड़को की सकल देख कर hi पता चल जाता है की वो हमारे बारे में क्या सोच रहा है, मुझे पता है की आप कुछ गलत नहीं सोच रहे पर मुझे तुम अच्छे लगते हो, क्या में अच्छी नहीं हु?

शिव : तुम अच्छी हो, इसका मतलब ये नहीं की में वैसा hi सोचु.

भोली : सब लोग ऐसे hi होते है, हमे खा जाने वाली नजरो से देखते है, जब से में जवान होने लगी हु तब से लोगो की नजरो का सामना कर रही हु, तुम पहले ऐसे दिखे जो मुझे वैसे नहीं देख रहा था, क्या में सचमे अच्छी नहीं लगी तुम्हे?

शिव : मेने कहा न, तुम अच्छी और खूबसूरत भी हो, पर इसका ये मतलब नहीं की तुम्हे देख कर में वैसा hi सोचु.

भोली : पर बाबू, मुझे तुम अच्छे लगते हो और में तो तुम्हारे बारेमे वैसा hi सोचती हु, तुम अगर मेरे साथ कुछ करोगे तो में बुरा नहीं manungi.(Uski आँखों में शरत थी, वो ऐसे मुस्का रही थी जैसे खुल्ला आमंत्रण दे रही हो)

शिव : में उस तरफ जाता हु.

भोली : (मेरा हाथ पकाते हुए) क्यों बाबू, मेने कुछ गलत कहा क्या, या तुम्हे ऐसा लगता है में अच्छी लड़की नहीं हु, में अभी तक कुवारी हु, चाहे तो चेक कर लो.

शिव : ये क्या बात कर रही हो भोली, तुम्हे शर्म नहीं आ रही, और जिस तरह से तुम बात कर रही हो ऐसा लगता है की जैसे खेली खायी हो.

भोली : मुझे पता है की तुम तो कभी वैसा कहोगे नहीं, तो मुझे hi मजबूरन ऐसी बात करनी पद रही है.

शिव : तुम मुझे जानती कितना हो जो ऐसी बात कर रही हो?

भोली : इसमें जान न क्या, तुम्हे जब पहली बार देखा तभी hi तुम मुझे अच्छे लगे थे, इतने दिनों से तुम्हे देख hi तो रही हु, और अभी भी जिस तरह कर तुम्हारा रवैया है ये बताता है की तुम अच्छे hi हो, वर्ण कहना तो दूरकी बात है अगर कोई लड़की इस्सर hi करदे तो लड़के दम हिलाते हुए आ जाते है. यहाँ में तुम्हे खुद कह रही हु, फिर तुम्हे क्या दिक्कत है?

शिव : तुम पागल हो, चलो उस और चलते है.

भोली :तुमने वडा किआ था बाबू.

शिव : क्या वडा किआ था?

भोली : तिकड़ी से तुम्हारी बात करवाई थी तो तुमने कहा था बाबू, मुझे इनाम डोज.

शिव : तो तुम्हे जो इनाम चाहिए वो कहो, में दे दूंगा.

भोली : मुझे तो तुम hi चाहिए.

शिव : (समजते hue)Tumne कहा की तुम कुवारी हो तो फिर ये सब क्यों करना चाहती हो, आगे जा कर तुम्हे दिक्कत नहीं होगी?

भोली : तुम मेरी शादी के लिए कह रहे हो? अरे बाबू, हमारे वह कुवारी लड़की नहीं काम करनेवाली लड़कीअ चाहिए होती है, कुछ तो ऐसी लड़कीअ भी है जिनकी शादी छोटे बच्चे से करदी जाती है, उन्हें बहु नहीं, घरमे काम करनेवाली लड़की चाहिए होती है. तो तुम उनसब की चिंता मात करो.

झुमरी : भोली ो भोली कहा हो? (झुमरी की आवाज सुन कर भोली थोड़ी चौकी)

भोली : हम यहाँ है.

झुमरी : (आवाज का पीछा करते hue)Chal न, खाना नहीं है क्या? सब रह देख रहे है?

शिव : अभी तक खाना नहीं खाया?

झुमरी : प्लास्टर की आधे से नहीं छोड़ शक्ति थे तो आज देर हो गयी. (भोली )तेरा मुँह क्यों लटका हुआ है, चल न. (हम तीनो वह आ गए जहा सब थे, वह आनेके बाद मुझे एहसास हुआ की मुझे यहाँ नहीं आना चाहिए था)

शिव : तुम सब खाओ, में बहार हु.

झुमरी : क्यों बाबू, हमारे साथ बैठो न.

शिव : में तो खा कर आया हु, तुम सब खाना खा लो.

भोली : अब हमारा खाना भी अच्छा नहीं लग रहा क्या? (उसने थोड़ी नाराजगी से कहा था)

झुमरी : चखो तो सही, हम कैसा खाना कहते है?

शिव : (बैठते हुए) खाना, खाना होता है, उसमे अच्छा क्या और बुरा क्या, में कोई पकवान नहीं खता हु. अनाथालय में रहता हु पता है न.

झुमरी : है जानते है, तभी तो लगता है की तुम हमारे जैसे hi हो, बस सकल सूरत में किसी राजकुमार जैसे लगते हो. (सब है पड़े, मेने उनके साथ खाना क्या, थोड़ा hi सही, सब में से कुछ न कुछ खाया, ज्यादा तर मक्के की रोटी थी और साक अलग अलग था, कुछ मिर्ची के साथ तो कुछ प्याज के साथ खा रहे थे. खाना खाने के बाद में उठा और हाथ धोने गया तो कमली ने मेरे हाथ पर पानी डाला)

शिव : क्या हुआ तुम्हे, उदास क्यों हो?

कमली : कुछ नहीं है बाबू.

शिव : बात तो जरूर है, अगर बताना चाहो तो.

कमली : फिर कभी बताती हु. (तभी मेरा फ़ोन बजा, मेने देखा तो नाज़िआ दीदी का था)

शिव : Hello, दीदी.

नाज़िआदिदी : अब फ़ोन पे तो दीदी मात कहो, तुम्हारे बच्चे की माँ बन ने वाली हु.

शिव : (में muskuraya)Ji, कहिये, कैसे याद किआ?

नाज़िआदिदी : बस ऐसे hi फ़ोन किआ था, दिखे नहीं फिर तुम, कहा गायब रहते हो, ये नहीं की अपनी शकल hi दिखा जाऊ.

शिव : ठीक है, आता हु जल्दी.

झुमरी : बाबू, तुम्हारा नंबर क्या है?

शिव : क्यों?

झुमरी : कभी जरुरत हो तो फ़ोन कर शेक न, अगर तुम्हे ठीक लगे तो देना.

शिव : इसमें क्या है, लिख लो. (उसने एक छोटी सी डायरी में मेरा नंबर लिख दिया.) तुम्हे पढ़ना लिखना आता है?

झुमरी : है आता है, 8वि तक पढ़ी हु.

शिव : फिर आगे क्यों नहीं पढ़ी.

झुमरी : आएगी क्या करना था, काम तो यही करना था.

शिव : फिर भी पढ़ाई लिखे हर जगह काम आती है.

झुमरी : ज्यादा पढ़लिख के कलेक्टरी तो करनी नहीं थी, मजदूरी hi हमारा काम है तो फिर बड़ी हो गयी तो घरवालों ने काम पर लगा दिया.

फिर सब अपने अपने काम में लग गए, कमली यहाँ से फ्री हो गयी थी तो वो भोली की मदद करने चली गयी.

कमली : बाबू को अकेले क्यों ले आयी थी?

भोली : क्यों इसमें क्या हुआ, में अकेली थी, और अकेले अकेले काम करना अच्छा नहीं लग रहा था.

कमली : चल जूठी, क्या किआ बता.

भोली : कुछ नहीं किआ, बाबू बहोत सीधा है, मेने कहा भी पर वो शायद डरता है. मेरी छोड़, तू क्यों उदास है, कुछ हुआ है क्या?

कमली : (उदास स्वर me)Tu तो जानती है, बापू को जुवा खेलने की और शराब की लत हो गयी है, वो जुए में काफी पैसे हर गए है, घर में भी बहोत झगड़ा हुआ था. जुए का उधर चुकाने उसने सुपरवाइजर से ब्याज पे पैसे लिए थे, अब वो वापस मांग रहा है. अब इतने पैसे कहा से लाये.

भोली : तू समजती क्यों नहीं अपने बापू को.

कमली : क्या संजय, हम लोग तो थक गए है. उस कमीने ने कहा है की दो दिन में पैसे न लौटाए तो...

भोली : तो क्या...

कमली : तू तो जानती है, ये मर्द कमीने, क्या चाहिए होता है उन्हें.

भोली : ऐसा थोड़ी होता है, अगर तेरे बापू ने लिए है तो वो चुकाए, और अगर न चुकपये तो वो भुगते, तू क्यों इसमें पीस रही है.

कमली : मेने भी वही कह दिया की तुम जानो और सुपरवाइजर जाने. पर फिर भी दिमाग तो ख़राब हो hi जाता है.

भोली : कोई बात नहीं, सब ठीक हो जायेगा.

शाम को में वह से निकल गया, स्टेडियम चला गया. दूसरे दिन सूर्यदेवजी के घर पर भी जा आया, उन्होंने भी मान बना लिया था की इलेक्शन लड़ना है, पर अभी फ़िलहाल समाज सेवा की प्रवृत्तिओ पर ध्यान देने का सोचा. सूर्यदेवजी अपने बुसिनेस्स के सिलसिले बहार जानेवाले थे तो उन्होंने मुझे और पवनसीर को, मनीषा मैडम का साथ देने का कहा. सोचविचार के बाद ये तय हुआ की आसपास के गांव में जा कर लोगो से मिला जाये और पता करे की आखिर चुनावी मुद्दा क्या रक्खे. मेरी स्कूल होती थी तो मेरा ज्यादा जाना मुमकिन नहीं था, पर फिर भी मनीषा मैडम मुझे घसीट रही थी, दो चार दिन तक हम दोनों साथ दोपहर में कुछ गांव की मुलाकातों पर गए, वह मुखिया और बाकि बड़े लोगो से बातचीत की. आज संडे था तो सुबह से hi उन्होंने मुझे बुला लिया था, आज उन्होंने जिस गांव जाने का फैसला किआ था वो दिव्या का गांव था, मेने दिव्या के फ़ोन पर बात की और मनीषा मैडम और दिव्या के पापा की बात करवाई, फिर हम उनको मिलने चले गए.

जब हम उनके वह गए तो उन्होंने हमारा स्वागत किआ, मैडम की गाड़ी देख कर hi उनकी हैसियत का पता चल रहा था, और उनके साथ होने से सबकी नजर में मेरी भी बहोत इज्जत बढ़ गयी थी.

मोतीलाल : कैसे हो शिव, बहोत दिनों बाद आना हुआ.

शिव : अच्छा हु अंकल, पढ़ाई से फुर्सत hi नहीं मिलती.

मोतीलाल : तुम्हारी फोटो अख़बार में छपी थी तो दिव्या ने बताई थी, बहोत खुसी हुई थी तुम्हारी कामयाबी पर. (तभी दिव्या और एक खूबसूरत लड़की जो साड़ी पहने थी, वह चाय और नास्ता रखने के लिए आयी) तुम तो मिले hi नहीं हो, ये हमारी बहु है परम की बीवी, माधुरी.

शिव : नमस्ते भाभी. (उन्होंने मुस्कुराकर अभिवादन का स्वीकार किआ, फिर वो दोनों अंदर चली गयी) अंकल ये है मनीषा मैडम, मेने आपसे बात करवाई थी न.

मोतीलाल : नाम तो बहोत सुना है, आज पहली बार मिलने का मौका सौभाग्य मिला है. कहिये में क्या सहायता कर शक्ति हु.

मनीषा मैडम : में एक समाजसेविका हु, में गांव गांव जा कर वह की समस्या जानने का प्रयास करती हु और उन्हें सुलझाने का प्रयत्न करती हु, में आपकी राइ जानना चाहती हु, आपके हिसाब से इस गांव में क्या समस्या है.

मोतीलाल : वैसे तो गावो में समस्याएं होती hi है मैडम, बिजली, पानी की समस्या ये तो आम है, पर खास है बच्चो की पढ़ाई, उन्हें पढ़ने के लिए गांव से दूर जाना पड़ता है, प्राइमरी तक की स्कूल है यहाँ पर आगे पढ़ाई के लिए उन्हें सहर जाना पड़ता है.

मनीषा : आप मुझे मैडम मात कहिये, में आपसे बहोत छोटी हु, आप मुझे नाम से बुला शक्ति है, आपने ठीक कहा की पढ़ाई की समस्या तो है. मौजूदा सर्कार इस पर प्रयास भी कर रही है पर उनके hi लोग अपने निजी फायदे के लिए स्कूल और कॉलेज नहीं खुलने देते. उनके खुद के प्राइवेट स्कूल होते है, या किसी के नाम पर होते है, तो वो क्यों चाहेंगे की गोवत. स्कूल ज्यादा खुले या अच्छे से चले. (हम यहाँ बात कर रहे थे, अंडर माधुरी और दिव्या काम कर रही थी)

माधुरी : कोण है ये?

दिव्या : (थोड़ी शर्मा रही thi)Wo मेरी दोस्त का भाई है.

माधुरी : अच्छा दोस्त का भाई, पर तेरी आंखे तो कुछ और hi बता रही है.

दिव्या : क्या भाभी आप भी, ऐसा कुछ नहीं है, वो मेरी दोस्त का भाई है तो मेरा भी दोस्त बन गया है और कुछ नहीं.

माधुरी : चल जूठी, तेरी सकल hi बता रही है की वो सिर्फ दोस्त नहीं है, वैसे लड़का है बहोत हैंडसम.

दिव्या : वो बहोत होशियार है भाभी, और स्पोर्ट्स में भी अव्वल, सभी स्कूलों में वो पहले नंबर पर आया था.

माधुरी : अच्छा, अगर इतना hi पसंद है तो में तुम्हारे भैया से बात करू.

दिव्या : क्या भाभी, अभी मेरी उम्र नहीं है, अभी तो मुझे पढ़ना है.

माधुरी : ये तो तुमने सच hi कहा, लड़कीओ को पढ़ना hi चाहिए. अच्छा ये बता, वो सिर्फ दोस्त hi है की बात कुछ आगे भी बढ़ी है.

दिव्या : क्या भाभी आप भी.

माधुरी : मुझे अपनी दोस्त समझती है तो बता, में किसी को नहीं बताउंगी, ये हम दोनों का सेक्रेट hi रहेगा. वैसे हो शक्ति है की तुजे मेरी मदद की भी जरुआत पड़े तो तू अपना सेक्रेट मुझसे शेयर कर शक्ति है.

दिव्या : आप मेरी दोस्त hi बन गयी हो भाभी, इसमें क्या शक है, वैसे में बता दू वो अनाथ है, और अनाथालय में रहता है, उसका कोई भी नहीं है, न माँ बाप न घर.

माधुरी : ओह ये तो बड़ी दिक्कतवाली बात है, कितना हैंडसम लड़का है, उसे देख कर कोई कह नहीं शक्ति की वो अनाथालय में रहता है, और आज वो जिनके साथ आया है वो भी कितनी खूबसूरत है और कितनी बड़ी गाड़ी लेकर आयी है. तो लड़के में कोई बात तो जरूर है, जो इतने बड़े बड़े लोगो में जान पहचान है. शादी के लिए लोग बड़ा घर, खंडन ये सब देखते है, मुझे नहीं लगता की बाबूजी तुम्हारी और उसकी शादी के लिए मानेंगे.

दिव्या : मेने कहा न भाभी, अभी शादी का में नहीं सोच शक्ति.

माधुरी : तो बॉयफ्रेंड बनाने का सोचा है? (दिव्या जैसे शर्मा रही थी ये देख कर वो समाज गयी) मुझे तो लगता है जैसे वो तेरा बॉयफ्रेंड hi है, सच कहा न मेने.

दिव्या : भाभीईई.

माधुरी : कहा तक बात पहुंची है?

दिव्या : कही नहीं.

माधुरी : आज कल के लड़के लड़कीओ में कुछ न हो ये हो hi नहीं शक्ति. किश विस्स की क्या? (दिव्या शर्मा gayi)Achchha तो किश हो चुकी है, सब कर लिया क्या?

दिव्या : नहीं भाभी, मेने तो कहा था पर वो नहीं मन. (दिव्या बोल तो गयी पर फिर शर्मा गयी की वो क्या बोल गयी)

माधुरी : (अपने मुँह पर हाथ रखते hue)Hay राम, तूने खुद कहा था?

दिव्या : तो और क्या करती, वो लड़कीओ को वैसी नजर से नहीं देखता, और न hi उनके साथ वो सब करने की सोचता है, मेने उसे हिंट भी दी पर वो आगे बढ़ नहीं रहा था तो में क्या करती.

माधुरी : वैसे तो दिखने में लम्बा चौड़ा है पर हो शक्ति है की उसके पास वो न हो जो हम लड़कीओ को चाहिए होता है. (माधुरी को भी अपनी छोटी ननद के साथ इस तरह की बाटे करने में मज़ा आ रहा था, वो दोनों काम करते हुए धीमी आवाज में hi ये गुफ्तगू कर रही थी)

दिव्या : वो तो बहोत बड़ा है.

माधुरी : है भगवन, तूने वो भी देख लिया है? (दिव्या फिर से अपनी बेवकूफी पर शर्मा गयी) बताना क्या हुआ था?

दिव्या : आप किसी को बताओगी तो नहीं न?

माधुरी : में पागल हु जो किसी को बताउंगी, और ये मेरे घर की इज्जत की बात है, तू मेरी प्यारी सी नानन्द और सहेली है, तेरी इज्जत मेरी इज्जत, में क्यों भला किसी को बताउंगी.

यहाँ बहार,

मोतीलाल : तो में आप को मुखियाजी से मिलवाडेटा हु, दूसरे बड़े लोगो से भी आपकी पहचान करवाडेटा हु. (अवजलागते hue)Divya की माँ, कहा हो?

माधुरी : (वो जल्दी से बहार aayi)Babuji, माजी बिमालककी के वह गयी है अभी नहीं आयी, बुलवाडु.

मोतीलाल : नहीं रहने दे, हम जरा मुखियाजी के वह जा कर आते है.

माधुरी : इनका खाना भी में बनादे रही हु.

मनीषा : अरे नहीं, आप कास्ट न करे, उसकी कोई आवस्यकता नहीं है.

माधुरी : इसमें कास्ट कैसा, में खाना बनादे रही हु, तयारी भी कर्ली है, आप खाना खा कर hi जाना. बाबूजी आप भी कुछ कहिये न.

मोतीलाल : आप पहलीबार हमारे घर आयी है, खाना तो खाकर hi जाना होगा. तुम बनाओ बहु, हम आते है.

गांव वालो की मेहमाँगती भी ऐसी hi होती है, भले उनके पास पैसा काम हो पर दिल बहोत बड़ा होता है, हमे उनकी बात माननी hi पड़ी. हम वह से मुखिया जी से मिलने चले गए. यहाँ नानन्द भाभी दोनों फिर से बातो में लग गयी.

माधुरी : इतना सब हो गया है, और तू कह रही है शादी नहीं करनी, तू पागल है क्या, ये सब इसके साथ करेगी और शादी दूसरे के साथ?

दिव्या : वो सब मुझे नहीं पता, मुझे शिव अच्छा लगता है.

माधुरी : वैसे अच्छा तो है, दिखने भी और इस मामले में भी, भला कोण ऐसा मौका छोड़ता है, तू उसके सामने इस अवस्था में थी फिर भी उसने तुम्हारे साथ कुछ न किया, लकड़ा तो अच्छा hi है, और उसे तुम्हारी फ़िक्र भी है. कस वो अनाथ न होता, उसके माँ बाप होते तो में पक्का तुम्हारी शादी उस से करवा देती. पर लड़की के लिए ये सब देखना भी जरुरी होता है. सिर्फ प्यार से दुनिया नहीं चलती, घर बार भी देखना पड़ता है. मेटो कहती हु की जो हो गया वो हो गया, अब यही रुक जा.

दिव्या : भाभी, क्या आप शादी कर के आयी तो कुवारी थी?

माधुरी : अपने भैया से पूछ ले.

दिव्या : मेने आपको ितं कुछ बताया तो क्या आप मुझसे इतना भी नहीं शेयर कर शक्ति, अभी तो कह रही थी की आप मेरी दोस्त हो.

माधुरी : है में कुवारी थी, हमे यही सिखाया जाता है की शादी तक ये सब करना पाप होता है. (दिव्या थोड़ी उदास हो गयी, उसका उतरा चेहरा देख kar)Ek बात कहु?
 
अपडेट 117





माधुरी : है में कुवारी थी, हमे यही सिखाया जाता है की शादी तक ये सब करना पाप होता है. (दिव्या थोड़ी उदास हो गयी, उसका उतरा चेहरा देख kar)Ek बात kahu?(Madhuri थोड़ी देर रुकी और अपनी नानन्द की और देखती रही)

दिव्या : कहो न भाभी, रुक क्यों गयी?

माधुरी : मेरी एक सहेली थी, उसने शादी से पहले सबकुछ करलिया था, वो उस से शादी करना चाहती थी पर हो नहीं पायी, बादमे उसकी शादी किसी और से हो गयी.

दिव्या : तो क्या कोई दिक्कत हुई?

माधुरी : नहीं, वो खुस है अपने घर में.

दिव्या : तो आप कहना क्या चाहती है भाभी?

माधुरी : तू समझदार है, मुझे समजने की जरुरत नहीं है की में क्या कहना चाहती हु.

दिव्या : आप ये कह रही है की अगर मेने शादी से पहले कुछ किआ तो भी मुझे कोई परेशानी नहीं होगी, है न?

माधुरी : में ऐसा यकीं से तो नहीं कह शक्ति, क्यों की जो हमें सिखाया जाता है उस से तो यही लगता है की ये सब पाप होता है और शादी से पहले ये सब करने से प्रॉब्लम हो शक्ति है, पर मेने जो देखा वो अलग था, हो सकता है की उसकी किस्मत सही हो, फिर भी में एहि कहूँगी की तुम ये सब मात करो, जब शादी होगी तब तो ये सब करना hi है. अभी पढ़ाईमे ध्यान दो.

दिव्या : भाभी, आप जानती है, हमारी स्कूल में भी कई लड़कीओ के बॉयफ्रेंड है और वो सब कुछ करती है, मुझे शिव अच्छा लगता है.

माधुरी : इस उम्र में ये सब लग्न स्वाभाविक है, जब लड़का और लड़की बड़े हो जाते है तो उनके अंदर ऐसी इच्छा होना स्वाभाविक है, पर हम लड़कीओ को ये सब सोच समाज कर करना चाहिए. अभी तुम्हारी उम्र hi क्या है, और न शिव कही भगा जा रहा है, कुछ सालो बाद तुम्हे लगे तो फिर सब कर लेना.

दिव्या : भाभी, एक बात पुछु?

माधुरी : पूछो न?

दिव्या : क्या पहली बार में दर्द होता है? आपको भी हुआ था?

माधुरी : ये क्या बेहूदा सवाल है, में तुम्हारी भाभी हु.

दिव्या : आप मेरी दोस्त भी हो, अगर मुझे जान न है तो में आपसे hi पूछूँगी न.

माधुरी : (उसे अपनी नानन्द की बात सही लगी, एक उम्र के बाद लड़कीओ को सही जानकारी होना जरुरी है, उसकी भी अभी अभी शादी हुई थी, पर उसे ऐसी बाते करने में शर्म आ रही थी, पर फिर भी उसने kaha)Ha थोड़ा दर्द हुआ था. (फिर थोड़ा रुक कर) जितना लोग बताते है, उतना भी डरने की जरुरत नहीं होती, लोग तो बहोत बढ़ा चढ़ा के कहते है.

दिव्या : सचमे भाभी, लोग तो कितना डरते है, की चल भी नहीं पाओगी, शिव भी ऐसा hi बोल रहा था.

माधुरी : मुझे तो ऐसा नहीं लगा, थोड़ा खून भी निकला था, पर ज्यादा कुछ न हुआ. लोग तो खामखा डरते है.

दिव्या : पर भाभी, वो कितना बड़ा होता है, वो कैसे अंदर चला जाता है.

माधुरी : (एक और तो उसे शर्म आ रही थी पर दूसरी और अच्छा भी लग रहा था की उसे दिव्या के रूपमे एक सहेली मिल गयी है) हमने कभी उसे देखा नहीं होता न तो हमे वो बड़ा लगता है.

दिव्या : नहीं भाभी, वो तो इतना बड़ा hai(Usne अपने हाथ से इशारा करके बताया)

माधुरी : पागल, मेने कहा न की हमने उसे कभी देखा नहीं होता न तो वो बड़ा लगता है, (थोड़ा शरमाते हुए, अपने हाथ का इस्सर करते hue)itna hi होता है?

दिव्या : नहीं भाभी, मेने देखा है, वो इतना hi बड़ा था. (अपने उंगलिओ से इस्सर karke)Aur इतना मोटा भी था.

माधुरी : मेने कहा न, ऐसा नहीं होता.

दिव्या : अगर आपको यकीं नहीं है तो में आपको दिखा शक्ति हु.

माधुरी : ये क्या बकवास कर रही है, (फिर कुछ सोच kar)Kaise दिखाएगी?

दिव्या : जब वो आएगा तो में उसे अपने कमरे में ले आउंगी, आप चुपके से देख लेना.

माधुरी : क्या, तू उसे अपने कमरे में ले जाएगी, सब घर पर है, ऐसे कैसे तू किसी लड़के को अपने रूम में ले जाएगी?

दिव्या : आप चिंता मात करो, वो सब में सब देख लुंगी, आपको पता नहीं है, आपकी शादी में शिव ने पापा को बचाया था, तो घर में कोई भी उसे कही भी जाने से मन नहीं karta,to आप उसकी टेंशन मात लो, और रही बात की में सच कह रही हु की नहीं तो आप खुद देख लेना की उसका वो कितना बड़ा है.

माधुरी : ऐसा नहीं होता दिव्या, मेने भी जब पहलीबार देखा तो मुझे लगा था की वो बहोत बड़ा है, ऐसा लगता है क्यों की हमने छोटे बच्चो का देखा होता है तो हमारे दिमाग में उसकी वही तस्वीर छपी होती है, बड़े लड़को का वो कभी देखा नहीं होता न तो हमे वो बड़ा लगता है.

दिव्या : हो सकता है, मेने तो किसी और का देखा नहीं, आप hi देख कर मुझे बताना.

हम लोग यहाँ मुखिया से मिलने आये थे, मुखिया का नाम धरमसिंघ था. उन्होंने हमे अंदर बिठाया.

धरमसिंघ : कहिये मोतीलाल जी, कैसे आना हुआ?

मोतीलालजी : ये हमारे पहचान के है, ये मनीषजी और ये शिव है. मनीषजी, बुस्सिनेस्स्में सूर्यदेवजी की पत्नी है.

धरमसिंघ : सूर्यदेवजी को कोण नै जनता, आयेदिन उनकी खबर मिलती रहती है, कहिये, में क्या सेवा कर शक्ति हु?

मनीषजी : में समाजसेविका हु, में ये जान न चाहती हु की आखिर गावो की तरक्की क्यों नहीं हो रही है, ऐसी क्या दिक्कत आ रही है.

धरमसिंघ : (मुस्कुराते hue)To सीधा सीधा काइये न की आप राजनीति में आना चाहती है, जनता की सेवा, गावो की समस्या, ये सब तो एक बहाना है.

मनीषजी : (वो भी समाज रही thi)Ho सकता है, क्यों की इन समस्याओ को जान कर तो यही लग रहा है की इन्हे अनदेखा किया जा रहा है, और अगर इन्हे सुलझाने की लिए राजनीति में आना पड़े तो भी में आउंगी.

धरमसिंघ : देखिये मैडम, हमने दुनिया देखि है, वैसे भी आप राजनीति में आये उस से मुझे तो कोई दिक्कत नहीं है, आयेदिन कई लोग ये कोशिस जरूर करते है, पर इन इलाको में कमलनाथजी का बड़ा प्रभाव है, और वो है भी रूलिंग पार्टी के सदस्य तो लोग उनको hi सपोर्ट करेंगे. आज कल देश में ऐसा माहौल बना हुआ है की जो ऊपर बैठा है उसके नाम पर पठार भी तैर जाते है. कमलनाथजी की जगह और कोई भी इस पार्टी से खड़ा रहेगा तो वो भी जीत जायेगा. पर पार्टी कमलनाथजी पर भरोसा करती है, तो मुझे नहीं लगता की आपका कोई चांस hai.(Manisha सोच में पद गयी, वैसे भी उसे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था, की वो राजनीति में आये या न आये.)

शिव : वो बाद की बात है, अभी हमे सिर्फ इसमें रास है की समस्याए क्या है, और अगर कोई समस्या नहीं है तो फिर सब सही चल रहा है, जो की है नहीं. जैसा की आप कह रहे है, राजनीति में लोग पैसा कमाने

आते है, समाजसेवा तो एक बहाना होता है, आप शायद ठीक भी हो, पर जैसे की आप जानते है, मैडम को पैसो की कोई जरुरत नै, तो पैसा तो कोई कारन नहीं है. तो फिर आप hi बताइये आपके हिसाब से क्या कोई समस्या है इस गांव में?

धरमसिंघ : (थोड़ा गुस्से और आश्चर्य से शिव को देख रहा था) जब बड़े बात कर रहे हो तो बच्चो को नहीं बोलना चाहिए, अभी तुम स्कूल के बच्चे लगते हो, तो अपनी पढ़ाई पर hi ध्यान दो. और रही बात समस्याओ की तो यहाँ ऐसी कोई समस्या नहीं है.

शिव : आप का बहोत बहोत धन्द्यवाद, चलिए अंकल, चलिए मैडम, इस गांव में कोई समस्या नहीं है.

हमलोग वह से निकल गए, मेने पीछे मुड़कर देखा तो वो धरमसिंघ हमे hi देख रहा था. रस्ते में चलते चलते,

मनीषा : अब क्या?

शिव : मुझे लगता है ये मला का समर्थक है, तो ये हमे सपोर्ट करने से रहा, अब हमे सीधे जनता के पास hi जाना चाहिए.

मनीषा : कहना क्या चाहते हो?

शिव : यही की हमे लोगो से सीधे बात करनी चाहिए.

मनीषा : वो कैसे ?

शिव : इसमें अंकल हमारी मदद करेंगे, हमे अपने हिसाबसे गांव की समस्याओ के बारेमे सोचना होगा, अंकल उसके बारेमे कुछ लोगो से बात करेंगे और अगर हमे समर्थन मिला तो फिर हम उनसे भेट करेंगे.

मनीषा : मतलब, तुम्हारे दिमाग में कोई खिचड़ी पाक रही है. (में मुस्कुराया, हम लोग घर आ गए थे, दिव्या की मम्मी भी आ गयी थी. खाना तैयार था तो हम खाने बेथ गए, भाभी और दिव्या ने हमे परोसते हुए खाना खिलाया, दिव्या का तो समाजमे आ रहा था पर भाभी भी पहोत प्यार से खाना खिला रही थी, वो मेरी और ऐसे देख रही थी की मुझे शर्म आ जाती थी, वो खूबसूरत थी, अभी अभी शादी हुई थी, तो वो औरत से ज्यादा लड़की hi दिख रही थी, शिर पर पल्लू लिए वो और भी प्यारी लग रही थी, जब भी वो मुस्कुराती, उनके मोतिओं से चमकते दन्त उन्हें और आकर्षक बना रहे थे, में उन्हें वैसे देखना नहीं चाहता था पर फिर भी नज़र तो नज़र थी, चली जाती थी और मुझे लग रहा था की उन्हें भी वो पता चल रहा था, जिस से वो मुस्कुराते देख रही थी, उनकी मुस्कान मुझे बता रही थी की मेरा उन्हें ऐसे देखना उन्हें अच्छा लग रहा था, दोनों ने हमे मेहमान नवाजी करते हुए खाना खिलाया, खाना खाने के बाद हम उठे और आगे बेथ गए, सब ठीक से रखने के बाद दिव्या वह आई)

दिव्या : शिव, मुझे रंजन को नोट्स देने है क्या तुम ले जाओगे?

शिव : (मुझे क्या दिक्कत हो शक्ति thi)THik है.

दिव्या : मेरे साथ आओ, में तुम्हे समजादेति हु, तुम वो रंजन को समजा देना. (मेने मनिषामदाम और अंकल की और देखा तो उन्हें कोई एतराज नहीं था तो में दिव्या के साथ चला गया, दिव्या के कमरे में हम पहुंचे तो उसने दरवाजा बंद कर दिया)

शिव : दरवाजा क्यों बंद कर रही हो? (उसने अपने होठो से ऊँगली रखते हुए मुझे चुप रहने का इस्सर किआ, में उसके िर्रादे समाज gaya)To तुमने झूठ बोलकर मुझे यहाँ बुलाया.

दिव्या : तो क्या करती, कितने दिनों बाद मिले हो, क्या तुम्हारी इच्छा नहीं थी?

शिव : सब घर पर है दिव्या, अभी कुछ पागलपन नहीं.

दिव्या : ज्यादा नहीं तो थोड़ा तो कर hi शक्ति hu(Kehte हुए वो मेरे पास आयी और मेरे गले में बहे दाल कर मुझे अपनी और झुकाने लगी, में जल्द से जल्द नीचे जाना चाहता था तो में झुक गया, वो मेरे होठो पर किश करने लगी, उसके भीगे हुए होठो का एहसास होते hi मेरा भी मूड बन ने लगा और मेरा लुंड खड़ा होने लगा, मेने उसके भरे हुए नितम्बो को पकड़ा और दबाते हुए उसे किश करने लगा, वो अपनी कमर हिलाते हुए मेरे लुंड पर अपनी छूट रगड़ने लगी, थोड़ी देर किश करने के बाद में अलग हुआ)

शिव : बस अब और ज्यादा नहीं, चलो निचे.

दिव्या : (उसने शिव को पता न चले उस तरह खिड़की की और देखा तो उसे पता चल गया की उसकी भाभी की आंखे वह जमी हुई है, वैसे भी ये उन दोनों का hi प्लान था, जवानी का रंग अपना असर दिखता hi है, उसकी भाभी ने उसे संजय था की वो इन सबसे दूर रहे पर उसके दिल और छूट में हो रही हल चल उसको कहा चैन लेने दे रही थी, शिव का कड़क हो चूका लुंड जब उसकी छूट को छू रहा था तो उसे कितना मज़ा आ रहा था, उसने शिव के लुंड को पंत के ऊपर से hi पकड़ लिया) शिव ये कड़क हो गया है, इससे बहार निकालो न. (उसने अपनी उखड़ती सांसो से ऐसी मादकता से कहा था की मेरा भी मान ललचाने लगा, पर में परिस्थिति को समाज रहा था)

शिव : अभी ये सब मुमकिन नहीं दिव्या.

दिव्या : थोड़ी देर के लिए शिव, मुझे उसे देखना है. (वो बिनती भरे अंदाज मुझे कह रही थी, उसके बदन की गर्मी ने वैसे भी मेरे लुंड को खड़ा कर दिया था, और वो जिस तरह से मुज से चिपक रही थी, मेरा भी मान हो रहा था, ज्यादा बहस करने से और वक़्त ख़राब होता)

शिव : ठीक है, जल्दी से देख लो (मेरा ऐसा कहते hi उसके चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी और वो फ़ौरन अपने घुटनो के बल बेथ गयी और मेरे पंत की चैन खोलने लगी, अंदर हाथ दाल कर अंडरवियर को निचे करते हुए लुंड बहार निकलने की कोशिस की पर लुंड खाद हो चूका था तो वो निकल नहीं रहा था, मेने पंत का हुक होला तो लुंड बहार आ गया, उसे देख कर उसकी आँखों में चमक आ गयी और वो उसे गौर से देखते हुए अपने नरम हाथो से हलके हलके हिलने लगी) (वह बहार कड़ी माधुरी ने जब ये देखा तो उसकी आंखे फटी की फटी रह गयी, वो बड़ा भयानक लुंड उसकी आँखों के सामने था, उसके पति के मुकाबले वो दोगुना से भी ज्यादा था, उसकी सांसे थम गयी और धड़कन भी एक बार रुक गयी, वो आंखे फाडे उस दैत्याकार लुंड को देख रही थी,





उसे अभी भी अपनी आँखों पर यकीं नहीं हो रहा था, उसने अपनी नानन्द को देखा तो वो उसकी और तिरछी नजरो से देख रही थी, एक और तो उसे शर्म आ रही थी की उसको ऐसे नहीं देखना चाहिए था, वो कैसे किसी गैर मर्द के इस निजी अंग को देख शक्ति है, पर जिज्ञासावस वो चली आयी थी, जिस तरह से उसकी नानन्द उस लुंड को सेहला रही थी, उसे देख रही थी, उसे यकीं नहीं हो रहा था की उसे दर क्यों नहीं लग रहा है, शायद उसे पता नहीं है की अगर ये उसके अंदर जायेगा तो उसकी क्या हालत करेगा, इसीलिए उसे दर नहीं लग रहा. अपने पति का लुंड लेने में hi उसके पशीने छूट गए थे, कितनी कोशिसो के बाद उसके पति का लुंड उसकी छूट में घुसा था, दो तीन दिन तक तो वो लुंड अंदर ही नहीं घुस पाया था, अंदर डालने की कोशिस में hi उसका पानी छूट जा रहा था, जैसे तैसे जब वो अंदर घुसा तो उसे दर्द हुआ था और खून भी निकला था, ये तो अच्छा हुआ की वो सब जल्दी निपट गया था, पर अभी वो जिस अंग को देख रही थी अगर वो उसके अंदर जाता तो यक़ीनन वो पुरे घर को जगा देती इतनी जोर से चिल्लाई होती. ऐसे गंदे ख्याल आते hi उसनेअपने आप को डांटा, की वो कैसी गन्दी बात सोच रही है, वो एक शादीशुदा है उसे ऐसा नहीं सोचना chahiye.)(Divya लुंड को अपने हाथ में पकड़ कर उत्तेजित हो रही थी, भाभी ने लाख सिखाया हो की दूर रहे पर जवानी का रंग hi ऐसा होता है की वो कहा किसी की सुनता है, लुंड को देख कर उसके अंदर चींटिया दौड़ रही थी, उसने मुस्कुराते हुए शिव को देखा और लुंड को अपने मुहमे लेने का प्रयास करने लगी, शिव उसे रोक रहा था पर वो न रुकी,





लुंड को देख कर उस से रुका hi नहीं जा रहा tha)(Madhuri की आंखे फटी की फटी रह गयी जब उसने अपनी भोली सी दिखने वाली अपनी नानन्द को लुंड चूसते हुए देखा, अभी तक उसने अपने पति का लुंड नहीं चूसा था, हलाकि वो कई बार कह चुके थे पर उसे वो गन्दा लगता था, पर उसकी नानन्द कितने चाव से उसके लुंड को अपने मुँह में लिए चूस रही थी,





ये दृस्य देख कर उसकी छूट में पानी भरने लगा, जो भर आ कर उसकी पंतय को भिगोने लगा)

मोतीलाल : Divyaaaaaaa.......bahuuuuuuu....

माधुरी : (अपने ससुर की आवाज सुन कर वो चौंक गयी और बोल padi)Ha बाबूजीइइइइइइइ.

मोतीलाल : शिव को बोलो, मनीषा जी जाने को बोल रही है. (में चौंक गया, मेने जब आवाज का पीछा किआ ता मुझे कोई है ऐसा एहसास हुआ और आवाज सुन के पता चल गया की वो भाभी है, मेने अपने लुंड को पीछे खींचा और पंत में थुश diya.(Madhuri को अपनी गलती का एहसास हुआ पर अब देर हो चुकी थी, वो फ़ौरन वह से निकल गयी)

हमने भी आवाज सुनी थी तो हम भी बहार आ गए, दिव्या ने भी मुझे एक रुफ्फ़ नोट मुझे थमा दी. हमने अंकल से विदा ली, दिव्या हमे छोड़ ने बहार आयी पर भाभी नहीं आयी. हम गाड़ी में बेथ कर वह से निकल गए.

रस्ते में हम दोनों बाते कर रहे थे की आगे क्या करना है, उसके हिसाब से हमने प्लान बनाया और दोबारा वह मिलने का प्लान बनाया. हम रस्ते में थे की उनके घर से भी फ़ोन आ गया था, आया का फ़ोन था, बच्चा जाग गया था, तो मैडम ने गाड़ी तेज चलायी और सीधे हम उनके घर पहुंच गए. वो सीधे गयी और अपने बच्चे को ले आयी, मेरे सामने hi सोफे पर बेथ कर वो उसे दूध पिलाने लगी. जैसे अक्सर माँ अपने बच्चे को छुपा कर दूध पिलाती है वैसे hi वो पीला रहा थी, साथ में हम दोनों बाते भी कर रहे थे, पर मुझे उनके साथ ऐसे थोड़ा अजीब लग रहा था. थोड़ी देर बाद बच्चे ने दूध पि लिया, और वो खेलने लगा. में भी उसके साथ थोड़ी देर खेला. फिर मेने जाने की इजाजत मांगी तो उन्होंने भी दे दी और फिर मिलने का टाइम दे कर में वह से निकल गया. जिस तरह से उन्होंने पहले मेरे साथ व्यव्हार किआ था वैसा कुछ भी वो नहीं कर रही थी, उन्होंने मुझे सेक्स के लिए भी कुछ नहीं कहा. वैसे तो ये मेरी समाज से बहार था, मुझे लगा था की वो इस मौके का फायदा उठा कर मुझे सेक्स करने को कहेगी, पर उन्होंने ऐसा वैसा कुछ न कहा. में वह से वापस अनाथालय चला गया. शाम को जूही के साथ फिर से प्रैक्टिस में लग गया. जो नोट मुझे दिव्या ने दी थी वो रंजन को तो देनी नहीं थी तो मेने वो अपने पास hi रख दी.

बिना अकेले अकेले बोर हो रही थी तो उसने अपनी नानन्द ममता को फ़ोन लगा दिया.

ममता : कैसी हो भाभी, बहोत दिनों बाद याद आयी.

बिना : में ठीक हु, आप कैसी हो? घर में सब ठीक है?

मंटा : है भाभी, सब ठीक है.

बिना : तेरी आवाज से hi लग रहा है की सब ठीक है, बहोत खुस लग रही है, कोई खास बात.

ममता : (उसके गले तक बात आ गयी की वो कह दे की है भाभी बहोत खास बात है, में माँ बन ने वाली हु, पर वो जानती थी की उसकी भाभी अभी तक माँ नहीं बानी है तो उन्हें दुःख होगा, इस्सलिये उसने कुछ न कहा) नहीं भाभी, बस खुस हु, घर पे माँ से बात हुई थी, वो बता रही थी की वो किसी ज्योतिष बाबा से मिलने जा रही है.

बिना : ज्योतिष बाबा से, वो क्यों?

ममता : अरे वो hi, मेने आपको बताया था न की खंडन में किसी को बच्चा नहीं हो रहा, तो उसीके लिए उनसे मिलनेवाले है, और उपाय पूछने वाले है.

बिना : (अब में तुम्हे कैसे कहु, ये सब बकवास है, इसमें वो बाबा क्या करेगा, में कहना चाहती हु की में माँ बन ने वाली हु पर इन हालातो में कैसे कहु, सब जानते है की ये मुमकिन नहीं ऐसे में अगर मेने ये कहा तो सब क्या सोचेंगे, और दूसरी बात, अगर इन बातो में जरा भी सच्चाई है और अगर मेरे बच्चे को कुछ हुआ तो...... नहीं अभी में कुछ नहीं बता शक्ति) सच कहु तो मुझे इन सब में विस्वास नहीं है, आज कल के ज़माने में कोण ऐसा मंटा है. क्या आप मानती हो?

ममता : (उसके मान में भी शामे तो शामे वही ख्याल आया no बिना के मान में चल रहा था, और वो भी बताने से दर रही thi)Nahi भाभी, मुझे भी यकीं नहीं था, और अब तो बिलकुल भी नहीं.

बिना : अब तो बिलकुल भी नहीं से क्या मतलब है आप का, ऐसा क्या हो गया जो आप ऐसा कह रही है?

ममता : (हड़बड़ा gayi)Nnnn नहीं मेरा वो मतलब नहीं है भाभी, पहले यकीं था पर फिर मेने सोचा की हम जैसे पढ़ेलिखे लोग hi ऐसी बातो पर यकीं करेंगे तो फिर हम में और अनपढ़ में क्या फर्क रह जायेगा, इसीलिए में कह रही हु की अब मुझे यकीं नहीं है. पर आपको क्यों यकीं नहीं.

बिना : वो hi जो तुमने कहा, अगर हम भी वही सब मान ने लगे तो हम में और उन में क्या फर्क रहे ga.(Dono इस बात को छुपाने की कोशिस कर रही थी की वो दोनों माँ बन ने वाली है, और वैसे भी ये मान्यता है की ऐसी खुस खबरि किसी बांज औरत को नहीं सुननी चाहिए, वर्ण कुछ गलत होता है, भले hi वो दोनों इस बात को न मानती हो पर समाज ने उसके साथ ऐसा hi व्यव्हार किआ था, हमेसा उन्हें बांज समाज कर उन्हें इन सब से दुआर रक्खा था, उन्हें उस समय बुरा लगता था पर अभी वो खुद घबरा रही थी, अपने लिए नहीं अपने होनेवाले बच्चे के liye.)(Maan में : में जब तुमसे मिलूंगी तो तुम्हे बताउंगी ममता, और अगर हो सके तो में कोशिस करुँगी की जिस तरह में इस सुख को प् शक्ति हु वैसे hi तुम भी पाओ, पता नहीं में ये कैसे करुँगी पर तुम्हारे लिए मुझे ये करना hi होगा)

ममता : (मुझे माफ़ करना भाभी, इतने बड़ी खुस खबरि में आप से छुपा रही हु, में जब आपसे मुलगी तो आपको जरूर बताउंगी, और अगर शिव मुझे बच्चा दे शक्ति है तो आपको भी दे शकेगा, अगर आप मान गयी तो में आपकी और शिव की मुलाकात करा दूंगी, में जानती हु की ये गलत है और मुझे इसके लिए मेरा ये राज़ आपके सामने खोलना पड़ेगा, पर में ये जरूर करुँगी, अभी मुज में इतनी हिम्म्मत नहीं है, में आपसे मिल कर सब bataungi)Bhabhi, अपना ख्याल रखना, हम बाद में बात करेंगे.

बिना : ठीक है, आप भी अपना ख्याल रखना.

दोनों बिस्तर पर बैठी अपने पेट पर हाथ रक्खे शिव को याद कर रही थी, दोनों इस बात से अनजान थी की उनकी कोख में एक hi इंसान का अंश है.
 
अपडेट 118

शाम को जब में घर पंहुचा तो मेने देखा की बिना मैडम आयी हुई थी, मुझे देखते hi उनके चेहरे पर जैसे बहार छ गयी. में उनके पास hi चला गया, वो और लतादिदी बेथ कर बात कर रही थी.

शिव : मैडम आप.

लतादिदी : है कब की आयी हुई है.

बिना : अकेले अकेले बोर हो रही थी तो सोचा की सब से मिल औ.

शिव : बहोत अच्छा किआ आपने, आप बैठिये में फ्रेश हो कर आता हु. (जब में वापस आया तो मेने देखा की वो काम में मदद कर रही थी.) अरे दीदी ये क्या, मैडम को मां में लगा दिया?

लतादिदी : मेने तो कितना मन किआ पर ये मान hi नहीं रही.

बिना : तो क्या हुआ, में कोई मेहमान नहीं हु, मुझे अच्छा लग रहा है, वैसे भी लता अपना काम छोड़ कर मेरे लिए बैठी थी, मुझे पता है इस वक़्त सब को कितना काम होता है, मेरी वजह से काम में रूकावट नहीं होनी चाहिए. और थोड़ी देर में सबके खाने का समय भी हो जायेगा, बच्चे भी भूखे होंगे, तो मेने सोचा में भी हाथ बता दू.

मेने भी उन्हें बहोत रोका पर वो नहीं मणि, सबके साथ मिलकर उन्होंने खाना बनाया और बच्चो को खिलने में भी मदद की. उनके चेहरे पर बहोत ज्यादा खुसी थी तो मेने उन्हें सब करने दिया. वो हमारे साथ hi खाना खाने बैठी, रात को जब वो जानेवाली थी तो में उन्हें छोड़ने गया, वैसे तो वो रिक्शा से hi जा रही थी तो में उनके साथ उनके घर चला गया. घर के अन्दर जा कर उन्होंने मुझे पानी दिया.

शिव : आज आप बहोत खुस लग रही है?

बिना : है शिव, मुझे अच्छा लगा, वैसे भी अकेले अकेले बोर हो गयी थी.

शिव : जब भी आपका मान करे तो आप आ जाया करो, सब लोग भी आपसे बहोत घुलमिल गए है.

बिना : सच कहा तुमने, मुझे तो ऐसा लग रहा था की जैसे में अपने घर में हु. में सोच रही थी की एक स्कूटर खरीद लू, आने जाने में भी मदद हो जाएगी.

शिव : आप को स्कूटर चलना आता है?

बिना : है आता है.

शिव : तो फिर इतने समय से क्यों नहीं लिया, आपको आने जाने में अच्छा रहता.

बिना : स्कूल से घर और घर से स्कूल बस इतना hi तो में बहार निकलती थी तो जरुरत नहीं पड़ी, और अब तो तुम भी हो, तुम भी चल के और दौड़ के hi हर जगह आते जाते हो, तुम्हे भी काम लगेगा.

शिव : मेरी फ़िक्र मात करिये, वैसे भी दौड़ने से मेरे hi फायदा होता है. पर आप अपने लिए ले लीजिये, कभी जरुरत होगी तो में मांग लूंगा, जूही का भी स्कूटर है और भार्गवी मैडम के पास भी बाइक है, उन्होंने भी मुझे कह रक्खा है की कभी भी जरुरत हो तो ले जाऊ.

बिना : (उसकी कपरिसिओं दुसरो से करने से बिना को जलन हुई) उनकी बात अलग है, पर तुम्हारा और मेरा रिस्ता अलग है, है na?(Ab में क्या कहता, तो में बस muskuraya)Aise मुस्कुरा क्यों रहे हो, क्या मेने कुछ गलत कहा?

शिव : नहीं, आप मेरी टीचर है, वो nahi(Mene सिर्फ छेड़ने के उद्देस्य से कहा था)

बिना : क्या में सिर्फ टीचर हु?

शिव : तो और क्या हो (मेरी मुस्कराहट देख कर वो समाज गयी की में उन्हें छेड़ रहा हु, वो उठी और मेरी और अपना मुँह किये गॉड में बेथ गयी, ऐसा करने से उनकी साडी उनके घुटनो तक हो गयी पर उन्हें कोई दिक्कत नहीं थी)

बिना : तो मुझे बताना पड़ेगा की में कौन हु है na(Hum दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे, वो झुकी और मेरे होठो को चूमने लगी, मेने भी उन्हें बाहोंमे ले लिया और उन्हें किश करने लगा,





उनकी साड़ी जो थोड़ी ऊपर छड़ी थी मेने अपने हाथ से उसे पूरा चढ़ा दिया और उनके मस्त खरबूजे जैसे कूल्हों को पंतय के ऊपर से मसलने लगा, उन्होंने कोई एतराज नहीं किआ ऊपर से वो अपनी छूट को मेरे लुंड पर घुसने लगी, में उनके कूल्हे मसल रहा था वो मुझे किश कर रही थी, थोड़ी देर तक किश करने से hi उनकी सांसे उखाड़ने लगी, वो हफ्ते हुई मुझे देखने लगी, हम दोनों मुस्कुराये) अब समाज में आया की और बताऊ.

शिव : थोड़ा थोड़ा समज आ रहा है थोड़ा और विस्तार से बताएगी तो अच्छे से समाज jaunga(Wo समाज गयी की में क्या कह रहा हु तो वो शर्माने लगी, उनका ऐसा शर्माना कितना च्छ लगता था, हम दोनों फिर से किश करने लगे, मेने उन्हें वैसे hi उठा लिया और बैडरूम में ले गया, पुरे रस्ते वो मुझे किश करती रही, उन्हें उतर कर में अपने कपडे निकलने लगा तो उन्होंने भी शरमाते हुए अपनी साड़ी निकल दी, वो मुझे कपडे निकलते हुए देख रही थी, मेने उनके दूसरे कपड़ो की और इस्सर किआ तो वो शर्मा गयी पर उन्होंने अपना पेटीकोट भी निकल दिया और अपना ब्लाउज खोलने लगी, में पूरा नंगा हो गया था, वो ब्रा और पंतय में थी और अपने आपको शर्म के मरे हाथो से ढकने का प्रयास कर रही थी.

शिव : अभी भी शर्म आती है? (उन्होंने सिर्फ है में शिर हिलाया, मेने उन्हें बिस्तर पर बिठाया और अपना लुंड उनके मुँह के पास ले गया, उन्होंने एक बार मेरी और देखा फिर नज़ारे झुका कर मेरे लुंड को पकड़ लिया और हिलने लगी, मेने उनके चुके पर हाथ रक्खा और सहलाने लगा, में उनके साथ एकदम फ्री हो चूका था तो मुझे किसी भी चीज की शर्म नहीं आ रही thi)Muh में लो न. (उन्होंने फिर से झिझकते हुए मुझे देखा और फिर नज़ारे निचे कर ली, उनके चेहरे की शर्म मेरी उत्तेजना बढ़ा रही थी, मेने उनका शिर पकड़ा और अपने लुंड की और खिंचा तो उन्होंने अपना मुँह खोल दिया और लुंड को अंदर जाने दिया, उनके गर्म मुँह में जाते hi लुंड उछलने लगा, उन्होंने भी शर्म त्याग कर लुंड को चूसना शुरू कर दिया,





मेने उनकी ब्रा निकल दी, जब ब्रा लटक गयी तो उन्होंने खुद उसे निकल दी, में उनके स्तन सेहला रहा था और वो मेरा लुंड चूस रही थी, थोड़ी देर बाद मेने उन्हें बिस्तर पर धकेल दिया मेने देखाकि पंतय पर गीले नीसाण का धब्बा बना हुआ है, में झुका और पंतय को सूंघने लगा, छूट की खुसबू मेरे नथुनों में भरने से मेरा लुंड झटके खाने लगा,





थोड़ी देर छूट को पंतय के उपरसे hi चाटने के बाद मेने उनकी पंतय निकल दी, वो अपनी छूट छुपाने लगी पर मेने उनके हाथ को हटाया तो उन्होंने कोई एतराज न किआ, छूट गीली हो गयी थी, उनसे भी रहा नहीं जा रहा था तो उन्होंने अपने पंतय खुद हटा दी और मेरे सामने उनकी छूट बे पर्दा हो गयी, में होठो को फैला कर छूट को देखने लगा,





उन्हें शर्म आ रही थी तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा पर मुझे रोका नहीं, रास टपकती छूट को देख कर मुझसे रहा न गया और मेने छूट के होठो को चाट ते हुए छेड़ को जीभ से कुरेदना चालू किआ)





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बिना : शह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह. (उनकी मादक सिस्किअ कमरे में गूंजने लगी, में चूर को चूस रहा था और वो मेरा शिर सेहला रही थी, जब वो बहोत ज्यादा गर्म हो गयी





तो मेरे बाल खींचते हुए मुझे ऊपर आने का इसरा करने लगी, में भी खड़ा हुआ और उन्हें सही से बिस्तर पर लेता दिया, उनके पेअर फैला दिए और अपने लुंड को छूट पर रगड़ने लगा, उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ लिया और उसे दबाने लगी, उनकी उत्तेजना में महसूस कर प् रहा था, मेने देर न करते हुए लुंड को छूट में प्रवेश करवा diya)Aiiiiiiiiiii शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (रास बाहरी उस गरम सुरंग में मेरा लुंड अंदर चला गया,





उन्होंने मुझे अपने ऊपर खींचा और मुझसे लिपट gayi)Ohhhh सीईव शह्ह्ह्हह्ह, क्यों तड़पते हो इतना, शह्ह्ह्ह आए क्यों नहीं जाते, शह्ह्ह्ह में रोज तुम्हारा इंतजार करती हु शह्ह्ह्हह्ह, (मेने चुचिओ को चूसते हुए हलके हलके धक्के लगाने सुरु कर दिए)

शिव : आपको छोड़ना अच्छा लगता है?





बिना : शह्ह्ह्ह है शिव मुझे तुम्हारा ऐसा करना बहोत अच्छा लगता है, शह्ह्ह्हह्ह ऐसे hi शह्ह्ह्ह बहोत अच्छा लग रहा है शह्ह्हह्ह्ह्ह बहोत इंतजार करती हु तुम्हारा शहहहहह शीइइइइव शह्ह्ह्ह (में धक्के लगाने लगा, और वो आहे भर्ती रही, में उनके चुचो को मसलते हुए धक्के लगा रहा था, इस तरह से में उनकी छूट में जाता अपना लुंड साफ़ साफ़ देख सकता था, छूट से निकल रहे रास से मेरा लुंड पूरा गिला हो गया था, उनकी झंघे पकड़े हुए में धक्के लगा रहा था, में उनके ऊपर गया और उनके चुके चूसते हुए उन्हें छोड़ने लगा, उन्होंने अपने पेअर फैला दिए थे)





शह्ह्ह्ह सीईव ऐसे hi शह्ह्ह्ह ऐसे hi करो shhhhhhh(Thodi hi देर में वो झड़ने लगी, को कैंप रही थी, मेने उन्हें वैसे hi ऊपर उठाया और अपनी गॉड में बिठा दिया, वो मेरे गले में बहे डेल अपनी कमर हिलाते हुए मेरे लुंड को अपनी छूट में अंदर बहार करने लगी, और साथ में मुझे किश कर रही thi.)Ummmm उम्म्म्म उम्मम्मम उम्मम्मम (में उनके कूल्हों को मसलते हुए उन्हें अपने लुंड पर ऊपर निचे कर रहा था, उनकी छूट मेरे लुंड को मसल रही थी जिस से मुझे बहोत आनंद आ रहा था)

शिव : पीछे घूम जाओ. (वो रुकी और मुझे देखने लगी, फिर शरमाते हुए अपने घोड़ी बन गयी, मेने उनके कूल्हों को और उनकी छूट को और उनकी गांड के छेड़ को थोड़ी देर छठा, वो मजे से सिस्किअ ले रही थी, उनकी बड़ी गांड को देखते हुए मेने लुंड फिर से छूट पर लगा दिया और अंदर दाल दिया, कूल्हों को मसलते हुए उन्हें फिर से छोड़ने लगा, उनकी सिस्किअ जोरो से गूंज रही थी,





धक्को से उनके कूल्हे थिरक रहे थे, काफी देर उन्हें ऐसे छोड़ने के बाद मेने उन्हें फिर से निचे लेता दिया और अपना लुंड दाल दिया, वो मुझे किश करने lagi)Achchha लग रहा है?

बिना : है शिव शहहह बहोत अच्छा लग रहा है.

शिव : मेरा लुंड आपको पसंद है?

बिना : (मुस्कुराते hue)Muje तुम पसंद हो. शहहहहह तुम्हे मेरे साथ मज़ा आता है शिव शह्ह्ह्ह?

शिव : ऐसा क्यों पूछ रही है?

बिना : बस ऐसे hi, मुझे अच्छा लगता है, कहो न क्या मेरे साथ ये सब करना अच्छा लगता है?

शिव : है मुझे आपको को... मेरा मतलब है ये करना अच्छा लग रहा है.

बिना : (वो समाज रही थी की वो क्यों नहीं बोलै, पर उसे भी उसका ऐसा बोलना अब अच्छा लगने लगा था) तुम बोल शक्ति हो शिव.

शिव : क्या?

बिना : वही जो तुम्हे बोलना पसंद है.

शिव : पर आपको अच्छा नहीं लगता न.

बिना : ऐसा नहीं है, बस थोड़ा अजीब लगता है पर बुरा नहीं लगता.

शिव : तो कहिये न की शिव मेरी छूट को छोडो.

बिना : है शिव छोड़ो मुझे, (ये कहते कहते वो भी उत्तेजित होने लगी) मुझे बहोत अच्छा लग रहा है शहहह ऐसे hi मुझे छोड़ो.

शिव : आपको मेरे लुंड से छोड़ना पसंद है?





बिना : है शिव, मुझे बहोत पसंद है, वो वो तुम्हारा वो लल्ल lu..nd शह्ह्ह्ह मुझे तुम्हारा लुंड बहोत अच्छा लगता है शहहहहह, मेरी chu...t शह्ह्ह्ह पूरी भर जाती है शहहह अह्हह्ह्ह्ह धीरे शिवत्व शहहह धिरे छोड़ो शहहहहह मेरे शिव शह्ह्ह्ह छोड़ो अपनी बिना को शहहहहह अपने होनेवाले बच्चे की माँ को शह्ह्ह्ह छोड़ो मुझे शह्ह्ह्हह्ह जोर से शह्ह्ह्ह में झाड़नेवाली हु शहहहहह.

शिव : में भी झाड़नेवाला हु.

बिना : शह्ह्ह्ह भर दो अंदर शह्ह्ह्हह्ह शिव शहहहहह कितना अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्ह धीरे बाबू शहहहहह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह शीइइइइइव में गईइइइइइ शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. मेने भी अपना वीर्य उनकी छूट में भर दिया,





वो मुझसे अपने पेअर कस्ते हुए लिपट गयी, दोनों पशीने से भीग गए थे. हम दोनों ऐसे लिपटे रहे, थोड़ी देर बाद हम दोनों अलग हुए, मेने देखा की वीर्य उनकी छूट से बहार बह रहा था





में सीधा लेट गया वो अपना पेअर मेरे ऊपर चढ़ाते हुए मेरी बगल में शिर रखते हुए लेट गयी, वो मेरी बहो में सुकून से आंख बंद किये हुए थी. उनकी छूट से वीर्य बह रहा था, मेरी छाती पर अपना शिर रक्खे हुए उन्होंने कहा)

बिना : मज़ा आया शिव?

शिव : है, आपको?

बिना : बहोत मज़ा आया, आज यही रुक जाओ न.

शिव : आप जानती है में नहीं रुक शक्ति, घर पर भी सब इंतजार कर रहे होंगे.

बिना : में समझती हु पर ये दिल नहीं समझता.

शिव : आज नहीं, पर जल्द hi रुकने के लिए आऊंगा.

बिना : सच?

शिव : हम्म्म्म.

बिना : शिव एक बात कहु, बुरा तो नहीं मानोगे?

शिव : ऐसी क्या बात है, जो आपको पूछना पद रहा है?

बिना : है ऐसी बात.

शिव : ठीक है, पूछिए.

बिना : तुम जानते हो की में माँ बन ने वाली हु, पर मेरी सास कहती है की ये मुमकिन नहीं.

शिव : आपने उन्हें बतादिया?

बिना : नहीं, वैसे नहीं, वो कहती है की हमारे खंडन में कोई माँ नहीं बन शक्ति.

शिव : ऐसा क्यों?

बिना : वो तो ठीक से मुझे भी नहीं पता, पर वह ऐसा कुछ हुआ है जिस से हमारे खंडन में किसी को भी बच्चा नहीं है, न बहुओ को न घर की लड़कीओ को.

शिव : पर आप तो माँ बन ने वाली हो, हो न?

बिना : है, पर वो लोग कहते है की ऐसा नहीं हो रहा है किसी को भी बच्चा नहीं हो रहा है, मुझे खुद इस बात का आश्चर्य है की में माँ बन ने वाली हु, मेने दो बार चेक उप भी करवाया, डॉक्टर ने भी कहा की सब ठीक है.

शिव : तो दिक्कत क्या है? आप माँ बन रही है तो क्या वो लोग आप पर शक करेंगे?

बिना : नहीं, वैसी बात नहीं है, जब में तुम्हारे साथ इस तरह रहने लगी तो मुझे लग रहा था तो में घर जा आयी थी, तो उन्हें कोई शक नहीं होगा, है आश्चर्य जरूर होगा, मेने तो यहाँ तक सुना है की वो किसी बाबा को ढूंढ रहे है इसके उपाय के लिए.

शिव : ऐसा क्यों कर रहे है, इसमें बाबा क्या करेगा, कभी कभी होता है, किसी के अंदर कोई प्रॉब्लम हो शक्ति है जिसकी वजह से बच्चा न हो, डॉक्टर भी ये मानते है.

बिना : प्रॉब्लम एक में हो शक्ति है, सब में नहीं.

शिव : तो आप कैसे माँ बन ने वाली हो?

बिना : वो तो मेरी भी समाज में नहीं आ रहा, पर अगर में माँ बन शक्ति हु तो दूसरे भी बन शक्ति है.

शिव : सच कहा आपने, वो भी बन शक्ति है.

बिना : मेरी बात समजे नहीं तुम, तुम्हारी वजह से वो माँ बन शक्ति है.

शिव : ये क्या कह रही है आप, क्या आप ऐसा सोच रही है की में उन्हें माँ बनाऊ?

बिना : तो इसमें बुरा hi क्या है?

शिव : आप को पता भी है की आप क्या कह रही है.

बिना : बहोत सोच समाज कर में कह रही हु, ये सब मेरे दिमाग में कितने दिनों से चल रहा था, मेरी ननद है, बहोत सीधी और प्यारी है, वो भी माँ न बन ने की वजह से बहोत दुखी है, में सोच रही थी की....

शिव : एक बात पुछु? (वो मुझे देखने लगी) क्या आपने इसलिए, मेरे साथ ये सब किआ था?

बिना : नहीं शिव, वो तो बस हो गया, मुझे तो ये सब पता भी नहीं था, ये तो जब में पिछली बार अपने घर गयी थी तब मुझे पता चला, उस समय तो हमारा रिस्ता बन चूका था.

शिव : तो आप उनको ये कहोगी की मेरी वजह से आप माँ बन ने वाली है, तो वो भी मेरे साथ रिस्ता बनाये.

बिना : मुझे कुछ पता नहीं है शिव, मुझे पता है में ऐसा नहीं कह शक्ति, पर में उनकी परिस्थिति भी जानती हु, मुझे ये भी पता है की मुझे तुम्हे ऐसा नहीं कहना चाहिए, तुम कोई बच्चा पैदा कवनेवाली मशीन नहीं हो, और ऐसे रिश्ते यु बनाये भी नहीं जा शक्ति, में सब समझती हु पर क्या करू, वो इतनी अच्छी है की मुझे लगता है की मई ऐसा क्या करू की उन्हें भी ये खुसी मिले. तुम समाज नहीं सकोगे ये सब, कितना बड़ा अभिशाप होता है जब एक औरत माँ नहीं बन पति, लोग कैसे कैसे तने मरते है, उनके साथ ऐसा व्यव्हार किआ जाता है जैसे वो कोई अछूत हो. (उनके चेहरे पर बहोत दर्द उभर आया था, में समाज सकता था की वो इस वक़्त क्या महसूस कर रही है)

शिव : तो आपको क्या लगता है की वो इन सब के लिए मान जाएगी?

बिना : मुझे नहीं पता शिव, मुझे तो ये भी नहीं पता की तुम क्या सोचोगे, हमारे रिश्ते की शुरुआत भले hi कैसे भी हुई हो, किसी भी वजह से हुई हो, पर आज की बात अलग है, हम दोनों एक दूसरे से ऐसे जुड़ चुके है की हम कभी अलग नहीं होंगे, हमारा मिला झूला रूप, सदीओ तक इस जहाँ में अपना अस्तित्व बनाये रक्खेगा. में सब समझती हु पर फिर भी, में अपने आपको रोक नहीं प् रही हु, मुझे ऐसा लगता है की में ऐसा क्या करू जिस से उनकी मदद हो सके.

शिव : ठीक है, अगर आपको लगता है की मेरी मदद से ऐसा हो शक्ति है तो में आपके लिए वो कर दूंगा.

बिना : थैंक यू शिव, (कहते हुए उन्होंने मेरे होठ चुम लिए) तुम ज्यादा टेंशन मात लो, क्यों की मुझे भी पता नहीं है की ये मुमकिन होगा की नहीं, पर फिर भी तुम मेरे लिए ये सब करने को तैयार हो गए उसके लिए थैंक यू.

शिव : (छेड़ते hue)Muje क्या, मुझे तो एक और लड़की मिलजाएगी. नुकसान तो आपका hi है.

बिना : मरूंगी एक (फिर मुझे चूमते hue)Me जानती हु, तुम वैसा नहीं सोचते, इसीलिए hi मेरी हिम्मत हुई तुमसे ऐसा पूछने की, क्यों की ये मेरे घर की इज्जत का सवाल है, किसी औरत की इज्जत का सवाल है, में ऐसा वैसा कोई भी फैसला नहीं ले शक्ति. समजे, और वो यहाँ से बहोत दूर रहती है तो तुम्हारा मिलने का तो सवाल hi नहीं उठता, बड़े आये एक और मिल जाएगी, तुम्हारे लिए तो में hi हु, समजे.

शिव : अच्छा ठीक है बाबा, अब में जाऊ?

बिना : दिल तो नहीं मान रहा, पर में इसमें कुछ नहीं कर शक्ति, जल्दी आना फिर.

में मुस्कुराया, कपडे पहने, और उन्हें bye कह के वह से निकल गया. सब सो चुके थे तो में भी सो गया.

परम देर से आनेवाला था तो माधुरी और दिव्या अपनी गुसुरपुसूर कर रही थी, मुद्दा शिव hi था, उन्दोनो की कोई बात नहीं हुई थी, या यु कहे की माधुरी बात करने से कटरा रही थी, आखिर कर दिव्या hi अपनी भाभी के रूम में चली गयी, उसने देखा की उसकी भाभी लेती हुई है और छत को देख रही है, (दरअसल माधुरी ने जो देखा उसके बाद उसके जहँ में बार बार वही आ रहा था, उसने देखा था फिर भी उसे यकीं नहीं हो रहा था, वो सोच रही थी की उसका इतना बड़ा क्यों है, शादी से पहले उसकी सहेलिया ऐसी सब बाटे करती रहती थी, कुछ बेशर्म लड़कीअ तो खुल कर सब कहती थी, कैसे उसने अपने बॉयफ्रेंड का लुंड चूसा, कैसे उसने छुड़वाया, सब डिटेल में बोलती थी, कभी कभी उसका भी मान करता था की वो भी बॉयफ्रेंड बना ले पर घर की इज्जत के लिए उसने कभी वैसा नहीं किआ था, परम से उसकी शादी हो गयी थी, पहली बार सुहागरात को hi उसने लुंड देखा था, शर्म की वजह से वो इतना साथ नहीं दे पायी थी, परम ने उसे नंगी कर दिया था और उसकी टंगे फैला ार अपना लुंड अंदर डालने की कोशिस कर रहा था, अपनी छूट पर पहली बार वो ऐसा कुछ महसूस कर रही थी, शर्म के बावजूद वो परम को अपनी और खिंच रही थी, थोड़ी देर कोशिस के बाद अचानक उसे अपनी छूट पर गर्म गर्म महसूस हुआ और परम हैट गया. थोड़ी देर उसे समाज hi नहीं आया की क्या हुआ, पर परम बिना कुछ बोले सो गया तो उठी और अपनी छूट को देखने लगी, शादी की वजह से उसकी छूट पूरी तरह साफ़ थी, एक भी बाल नहीं था, उसके फुले हुए होठो के ऊपर सफ़ेद चिकना रास लगा हुआ था, उसने परम की और देखा तो वो सो चूका था, उसने उस चिकने पदार्थ को ऊँगली से छुआ और अपने नाक के पास ले गई, ऐसा कुछ खास नहीं था पर उसको ऐसा करना गन्दा लगा और उसने ऊँगली दूर कर दी, वो बाथरूम में गयी और अपने आपको साफ़ किआ और सो गयी, एक हफ्ते तक ऐसा hi चला. एक रात वो ऐसे अपनी टंगे फैलाये थी और परम अंदर डालने की कोशिस कर रहा था की अचानक उसकी छूट में लुंड गया और उसे दर्द हुआ, उसने अपना मुँह दबा दिया वर्ण आवाज निकल जाती, अभी वो संभालती उस से पहले hi उसकी छूट में फिर से वो गर्म गर्म एहसास हुआ, छूट में दर्द के साथ इस गरम एहसास से उसे रहत भी हुई, पर फिर परम साइड में सो गया, उसने देखा तो उसकी छूट से वो सफ़ेद तरल बह रहा था और साथ में थोड़ा खून भी निकला था.

उसके बाद वो दोनों होनेमून पर गए, वह परम उसके साथ सेक्स करता था, अब वो कुछ देर तक उसकी छूट में अन्दर बहार करता था जिस से उसे बहोत अच्छा लगता था, वही उसने परम का लुंड भी देखा था, जब सो उसे चूसने को बोल रहा था, पर उसे वो काम गन्दा लग रहा था तो उसने मन कर दिया था, परम भी उसकी चुचिओ और छूट को सहलाने लगा था, जिस से उसे मज़ा आने लगा था. ऐसे hi उसके दिन बिट रहे थे. वैसे भी अभी उसकी शादी को दिन hi कितने हुए थे.

उसे ये भी याद आ रहा था की उसकी सहेलिया जब बात करती थी तो अपने अपनेबॉयफ्रैंड के लुंड की साइज का भी जीकर करती थी, पर उसने जो देखा था वैसा तो आज तक किसी ने वर्णन नहीं किआ था.)

दिव्या : भाभी.... ो भाभीई.

माधुरी : हहहह हा. ओह दिव्यआ.

दिव्या : क्या हुआ भाभी, कहा इतना खोई हुई हो?

माधुरी : (बैठते hue)Nahi, कुछ नहीं.

दिव्या : भैया के बारेमे सोच रही थी न, आ जायेंगे.

माधुरी : हम्म्म्म, तू क्या कर रही है यहाँ, सोना नहीं है क्या?

दिव्या : नीं नहीं आ रही थी तो सोचा आप अकेली है तोआपसे बात कर लू.

माधुरी : (वो जानती थी की वो क्या बात करने आयी है, फिर भी उसने अनजान बनते हुए kaha)Ha कहो, क्या बात करनी है?

दिव्या : क्या भाभी आप भी, हमारी बात तो हुई थी, मुझे (वो थोड़ी हिचकिचा रही थी) वो मुझे पूछना था की वो वैसा hi होता है न.

माधुरी : (वो समाज रही थी की वो लुंड के बारेमे पूछ रही है, पर ऐसी बाटे करना उसे थोड़ा अजीब लग रहा था तो उसने अनजान बन ने का नाटक जारी rakkha)Kiski बात कर रही है तू?

दिव्या : (शर्म तो उसे भी आ रही thi)Kya भाभी आप भी, हमारी बात हुई थी न, वो शिव का वो वो कैसा है नार्मल hi है न?

माधुरी : एक बात कहु दिव्या, तू बहोत बिगड़ गयी है, कैसे तू उसके साथ वो सब कर रही थी, तुजे शर्म नहीं आती ऐसे किसी लड़के के साथ वो सब करते हुए.

दिव्या : पता नहीं भाभी, जब में उसके साथ होती हु तो मुझे सब अच्छा लगता है, ऊपर से वो सामने से कुछ करता नहीं तो मुझे hi बेशर्म बन न पड़ता है. वो सब छोड़िये, और मेने जो पूछा है उसका जवाब दीजिये, क्या उसका नार्मल hi है न, जैसा भैया... मेरा मतलब है की जैसा सबका होता है वैसा hi है न. (उसकी भाभी कुछ बोल नहीं रही थी, वो बस उसे देख रही thi)Kahiye न भाभी, वो सब नार्मल है न, मतलब कोई खतरा तो नहीं न, सब आराम से हो सकता है न.

माधुरी : Nahi.....wo ...वो bahot...bahot बड़ा है.

दिव्या : भाई से भी बड़ा?

माधुरी : बहोत ज्यादा बड़ा, और मोटा भी.

दिव्या : अब क्या होगा भाभी? क्या बहोत दर्द होगा?

माधुरी : मुझे क्या पता, और तुजे वो सब करना क्यों है, अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो, जब तुम्हारी शादी होगी तब करना ये सब.

दिव्या : भाभी आप दन्त क्यों रही है.

माधुरी : (थोड़ा शांत होते hue)Me दन्त नहीं रही हु, में ये कह रही हु की अभी पढ़ाई पर ध्यान दे, इन सब चक्करो में क्यों पद रही है, और मुझे नहीं लगता की तेरी और शिव की शादी हो सकती है, फिर क्यों उसके साथ सम्बन्ध बनाने के.

दिव्या : वो मुझे अच्छा लगता है भाभी, और कई लड़कीओ के बॉयफ्रेंड होते है, इसमें क्या गलत है? और जब में उसके साथ होती हु तो अपने आपको रोक नहीं पति. वो सब कितना अच्छा लगता है न. आप तो भैया के साथ सब करती है, मेरा भी मान होता है, वैसे तो कई लड़के मेरे पीछे पड़े है पर मुझे कभी ऐसा नहीं लगता, पर शिव को देखते hi मुझे कुछ कुछ होता है भाभी.

माधुरी : लगता है की कोई कुछ भी संजय, तू मानेगी नहीं.

दिव्या : दिल नहीं मंटा भाभी (तभी आहत hui)Lagta है भैया आ गए, में जाती हु, bye, आप मज़े करो (दिव्या ने आँख मर दी).

माधुरी : (मुस्कुराते hue)Bahot बिगड़ गयी है तू.

दिव्या : में कोई बिगड़ी नहीं हु पर बिगड़ने का पूरा इरादा है, bye...(Keh कर वो भाग गयी)

माधुरी : (मुस्कुराते हुए उसे देख रही थी, और अपने पति का कमरे में आने का इंतजार करने लगी)

सूर्यदेव ने भी अपने कांटेक्ट की मदद से अपनी पत्नी की मदद करना चालू कर दिया था, वो बुसिनेस्स छोड़ कर तो नहीं घूम सकता था, तो उसने अपने बुसिनेस्स कांटेक्ट से मनीषा की मदद करने को कह दिया था. जब भी मुझे मौका मिलता तो हम दोनों आस पास के गांव जा रहे थे और मुलाकात कर रहे थे. ये बात मला को भी पता चल चुकी थी.

धरमसिंघ : साहब, वो लोग यहाँ भी आये थे और यहाँ सब पूछ तछः कर रहे थे.

मला : पता नहीं आज कल कोई भी ऐरा गैर पॉलिटिक्स में आने को कूद पड़ता है, इनको क्या लगता है की ये कोई आसान खेल है, कितने पापड़ बेलने पड़ते है तब जेक कुर्शी मिलती है, करने दो उन्हें जो करना है, ऐसे तो कई आये और गए, एक तो मेरा खुद का इतना रुतबा है की मुझे किसी पार्टी की जरुरत नहीं, और ऊपर से में जिस पार्टी में हु उस पर लोग आँख बंद करके भरोसा करते है, हमे कोई फर्क नहीं पड़नेवाला धरम, पर फिर भी कुछ हो तो बताना.

धरमसिंघ : सच कहते हो आप, आपकी पार्टी से तो कोई भी खड़ा हो जाये तो जीत सकता है, और पार्टी आपको छोड़ेगी नहीं, तो किसी और के जितने का तो सवाल hi नहीं है, और अभी कहा इलेक्शन आ गए है, .

मला : अगले साल तो है न, वैसे वो लोग सही दिशा में कदम बढ़ा रहे है, उनकी सोच भी ठीक hi है, पर यहाँ में हु उनके सामने, और मुझसे टकराना मतलब किसी पहाड़ से टकराना है. फिर भी दुसमन को कभी काम नहीं समझना चाहिए, तुम ध्यान रखना और वो आगे जो भी करे मुझे बताते रहना, वो लोग तुम्हारी तरह कई और गावो में भी घूम रहे है, अच्छा है, उन्हें भी तो पता चले की कमलनाथ किस बाला का नाम है.

दो दिन तक में साइट नहीं जा पाया था, आज जाने की सोच रहा था पर थोड़ा लेट हो गया था, तभी मुझे एक कॉल आया. नंबर अंजना था, मेने उठाया.

शिव : Hello, कौन?

भोली : में भोली बोल रही हु बाबू.

शिव : है भोली, कहो क्यों फ़ोन किआ?

भोली : बाबू, आप कहा हो, आ क्यों नहीं रहे हो?

शिव : (मुझे पता था की इनको भी चैन नहीं hai)Me आनेवाला हु आज.

भोली : जल्दी आना बाबू.

शिव : (उसकी आवाज में उस तरह की बात नहीं थी, वो थोड़ी घबराई हुई thi)Kya हुआ भोली, कुछ हुआ है क्या?

भोली : वो कमली को वो सुपरवाइजर... बाबू आप जल्दी आ जाओ.

शिव : क्या कमली ko....muje खुल कर बताओ.

भोली : बाबू, आप जल्दी आ जाओ, में फ़ोन पे सब नहीं बता शक्ति, बस आप जल्दी आ जाओ.

शिव : ठीक है में आता हु. (मेने फ़ोन कटा और साइट की और निकल गया, पता नहीं क्या कह रही थी, क्या सुपरवाइजर कमली के साथ कुछ गलत कर रहा था, अगर ऐसा था तो मुझे फ़ोन करने से क्या होगा, वह बहोत से लोग है, सेल को धो डालते, पर मुझे लग रहा था की वैसी बात नहीं है, पर कुछ तो गड़बड़ थी, मेरा दिल घबरा रहा था, पता नहीं पर में उनलोगो को अब जान ने लगा था तो उनके साथ कुछ बुरा हो ये मुझे बर्दास्त नहीं हो रहा था, मेने रिक्शावाले को जल्दी चलने को बोलै)
 
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