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- Dec 5, 2013
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सुबह जब लता उठी तो उसने देखा की उसने पहना हुआ घघरा ऊपर चढ़ा हुआ है और उसकी नंगी तंग शिव के ऊपर है. अपनी ऐसी स्थिति देख वो चौक जाती है, वो कैसी अवस्था में शिव के साथ थी. अपनी ऐसी स्थिति पर उसे शर्म आने लगी, वो अपना पेअर हतलेना चाहती थी पर उसका दिल कुछ और hi कह रहा था, जवानी अपना रंग बिखेर रही थी. शर्म के साथ साथ उसे रोमांच भी हो रहा था. उसने आहिस्ता से शिव को देखा जो गहरी नींद में सोया हुआ था. लता का ध्यान गया की उसे निचे कुछ चुभ रहा है, उसके शरीर से एक कपकपी गुजर गयी, उसका जवान जिस्म इस चुभन से मदहोश होने लगा. (सुबह की वजह से शिव का लुंड खड़ा था और ढीले वस्त्रो की वजह से वो आगे की और खड़ा हुआ था.) लता को अपनी छूट पर हो रही वो चुभन इतनी भ रही थी को वो ऐसे hi लेती रही. वो लगातार शिव को देख रही थी, उसकी साँस तेज हो रही थी, वो धीरे धीरे अपनी कमर चलने लगी जिस की वजह से उसकी छूट पर लुंड की रगड़ मिलने लगी. वो मदहोश हो रही थी, ये चुभन उसको इतना उत्तेजित कर रही थी की उसकी छूट ने रास बहाना शुरू कर दिया था. उसकी चड्डी भीग के चिपक गयी थी जिसकी वजह से उसकी छूट के होठ उभर कर स्पस्ट दिख रहे थे और शिव का लुंड उस दरार को और फैला रहा था. जवानी का ये एहसास लता को पागल बना रहा था और वो अपनी छूट लगातार लुंड पर घिसे जा रही थी. वो दर रही थी कही शिव जाग न जाये पर लुंड की ये छुअन उसके अंग अंग को रोमांचित कर रही थी. न चाहते हुए भी उसकी कमर की रफ़्तार बढ़ने लगी. उसको शिव जग रहा है या सो रहा है उसका भी होश न रहा वो आंखे बंद किये hi अपनी छूट को लुंड पर घिसे जा रही थी. ऐसा आनंद उसे आज तक नहीं मिला था. उसकी इच्छा हुई की वो अपनी छूट में वो कड़क अंग अंदर घुसा ले. वो पागल हुए जा रही थी. उसके अंदर बहोत कुछ हो रहा tha.Use लगने लगा की कुछ निकलने वाला है, वो शिव के कूल्हे को पकड़ कर उसे अपनी और खींचने लगी, वो लगातार अपनी कमर चला रही थी, उसकी छूट की दरार और फ़ैल गयी थी, उसे छूट के छेद पर कड़क लुंड महसूस हो रहा था, हिलने से छूट के ऊपर का दाना भी रगड़ रहा था, वो इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी की वो अपनी छूट जोर जोर से रगड़ने लगी. अचानक उसे क्या हुआ पता न चला पर उसकी आँखों के सामने अँधेरा छ गया और उसका शरीर अकड़ गया और वो जटके खाने लगी और कुछ उसकी छूट से निकलने लगा. वो शिव से चिपक गयी और उसकी छूट से ढेर सारा रास बहने लगा. उसकी पूरी कच्छी भीग गयी. वो इस आनंद को महसूस करने लगी जिसे वो आज पहलीबार महसूस कर रही थी. वो आंखे मूंदे बस शिव से चिपकेहुए पड़ी रही. जब दिमाग से खुमार उतरा तो उसे अपनी स्थिति का बहन हुआ और उसने फ़ौरन शिव की और देखा जो अभी भी गहरी नींद में था. (वो सचमुच सो hi रहा था. उस बेचारे को ये सब पता hi नहीं था. वो तो उसे सुबह का सपना hi समाज रहा था. जब लता को यकीं हो गया की शिव अभी भी सोया है तो उसकी जान में जान आयी. वो उसे प्यार से निहार ने लगी. उसे शर्म भी आ रही थी की उसने क्या कर दिया था. पर ये शर्म उस आनंद के सामने कही भी टिक नहीं पायी जिसे उसने अभी अभी महसूस किआ था.
लता : (मान में ) तू सचमुच भगवन का दिया हुआ वरदान hi है मेरे लिए. तू न होता तो क्या होता मेरा. मुझे माफ़ करदे में अपने आप को रोक नहीं प् रही हु. मुझे पता है मुझे ये नहीं करना चाहिए पर क्या करू, मेरा मुज पर कण्ट्रोल hi नहीं है. सॉरी बाबू.
वो हलके से उसके होठ चूमती है, फिर खुद hi शर्मा जाती है. आहिस्ता से वो शिव से अलग हुई और उठ कर बाथरूम की और चली गयी. जब वो वापस आयी तो शिव अभी भी सोया था तो उसने उसका माथा सहलाते हुए उसे जगाया. उनके जगाने से में भी उठ गया और बेथ कर अपनी प्यारी दीदी का चेहरा देखने लगा, मुझे इतना प्यार आया की मेने उनहेगले लगा लिया.
लतादिदी : (मुस्कुराती hui)Chal अब्ब जल्दी से तैयार हो जा गयम नहीं जाना क्या.
शिव : अभी तैयार तो जाता हु दीदी. (और लता के गाल को चुम कर बाथरूम की और निकल गया).
लता बस मुस्कुराकर hi रह गयी. तैयार हो कर मेने गयम की और दौड़ लगा दी. रस्ते में एक सरप्राइज मेरा इंतजार कर रहा था.
घर से निकल कर उसने रस्ते पर दौड़ लगा दी. रस्ते में वो अपनी hi धुन में दौड़े जा रहा था की मुझे किसी ने पुकारा तो में रुक गया और इधर उधर देखने लगा. उतनेमे एक घर में से मुझे जूही मैडम आती हुई दिखाई दी जिन्हो ने ट्रैक सुइट पहना हुआ था. उन्हें देख कर पहले तो में चौका फिर मुस्कुराते हुए दौड़ कर उनके पास चला गया.
शिव : गुड मॉर्निंग मैडम, आप?
जूही : गुड मॉर्निंग शिव, है में यही रहती हु. मुझे पता था तुम इसी रस्ते से जाते हो तो तुम्हारा hi वेट कर रही थी.
शिव : (मेने उनके घर की और देखा फिर जुहीमदाम को देखते hue)Mera hi वेट कर रही थी मतलब?
जूही : मेने सोचा की तुम दौड़ते हुए इसी रस्ते से जाते आते हो तो में भी तुम्हे ज्वाइन करू, इसी बहाने मेरी भी दौड़ हो जाएगी.
शिव : पर आप के पास तो स्कूटर है न.
जूही : तो क्या हुआ, सुबह दौड़ना सेहत के लिए फायदेमंद होता है. कई बार मेने सोचा था पर ऐसे अकेले अकेले जाना ठीक नहीं लगा, पर अब तुम साथ हो तो फिर सोचा मैं भी तुम्हे ज्वाइन कर लू, (मुस्कुराते हुए) अगर तुम्हे कोई ऐतराज़ न हो तो?
शिव : (वो भी है देता hai)Are नहीं मैडम मुझे क्या ऐतराज होगा, चलिए फिर चलते है. सॉरी दौड़ते है
वो भी मुस्कुरा देती है और दोनों दौड़ लगते हुए गयम की और चल देते है. शिव तो लम्बा था hi पर जूही भी कुछ काम नहीं थी. वो 6 फ़ीट से ज्यादा hi थी. शिव अचम्बे से जूही मैडम को दौड़ते हुए नोटिस कर रहा था. वो काफी स्ट्रांग थी और दौड़ भी काफी तेज रही थी, हलाकि उनकी की वजह से शिव थोड़ा स्लो दौड़ रहा था, पर जूही ने hi कहा.
जूही : क्या तुम थोड़ा तेज नहीं दौड़ सकते?
शिव : (वो ताज्जुब से उनकी और देखता है, फिर हिचकिचाते हुए) वो मैडम आप के लिए hi में स्लो दौड़ रहा हु.
जूही : क्यों? कही तुम्हे ऐसा तो नहीं लग रहा न की में लड़की हु तो तेज नहीं दौड़ सकती?
शिव : वो वो...
जूही : अगर तुम्हे ऐसा लगता है तो चलो रेस लगते है, देखते है कोण तेज है.
जूही मैडम ने फ़ास्ट दौड़ना सुरु कर दिया, में ये देख के हैरान था की वो काफी तेज दौड़ रही थी तो मैंने भी तेज दौड़ना सुरु कर दिया. गजब की लड़की है ये मैडम तो, इनमे काफी स्टेमिना था तो वो लगातार तेज दौड़ रही थी. तो में भी कहा पीछे रहनेवाला था, में भी उसके साथ hi तेज दौड़ने लगा. उनको पीछे करना आसान नहीं था, जितना में उनसे आगे जाने की कोशिस कर रहा था वो भी लगातार दौड़ रही थी, तक़रीबन हम साथ साथ hi दौड़ते हुए गयम पहुंच गए जहा पवनसीर जस्ट आके अपनी कार को लॉक hi कर रहे थे.
पवन : अरे वह आज दोनों साथ साथ वो भी दौड़ ते हुए.
जूही : (अपनी सांसो को सँभालते हुए) गुड मॉर्निंग सर, वो शिव रोज सुबह दौड़ते हुए आता है तो मैंने भी सोचा मैं भी ज्वाइन कर लू तो वर्कआउट भी हो जायेगा. (फिर शिव की और देख kar)Waise इसमें बहोत स्टेमिना है ये लगातार मेरे साथ hi दौड़ रहा था.
पवन : (सुर्प्रिसिंगलली) रियली, थॉट्स वैरी नीस, तुम जूही के साथ साथ दौड़ लिए मतलब अच्छा दौड़ते हो और स्टेमिना भी अच्छा है.
शिव : (आश्चर्य से दोनों को देख रहा tha)Me कुछ समजा नहीं सर?
पवन : जूही एथलीट है और वो स्टेट चैंपियन रह चुकी है.
शिव : क्या सचमे ! (में अचम्बे से जूही मैडम की और देख रहा था)
जूही : (मुस्कुराती है) वैसे तुम भी काफी स्ट्रांग हो दौड़ने में. अगर थोड़ी म्हणत करोगे तो तुम थी एथलीट बन सकते हो.
पवन : अब तुम्हारे साथ है तो तुम hi देख लो. गयम तो है hi अपना. ट्रैन कर दो इसे भी.
जूही : जी सर. चलिए अंदर चलते है.
मुझे तो कुछ समाज hi नहीं आ रहा था. हम सब अंदर गए और शिव अपने काम में लग गया. उसने रजिस्टर डेस्क पे निकल दिया क्यों की सबके आने का टाइम हो चूका था. लोग आने लगे और सिग्न कर कर चेंजिंग रूम में जाने लगे. जूही मैडम पवन सर के साथ उनके केबिन में थी और कुछ बात कर रही थी. फिर वो बहार निकली और मेरे सामने देख कर मुस्कुराती हुई वर्कआउट सेक्शन में चली गयी. जब सब लोग आ गए तो अब मुझे बस बैठना hi था तो जूही मैडम ने मुझे अंदर आने का इस्सर किआ और में चला गया.
जूही : तुमने सुना न बहार पवनसीर ने क्या कहा. क्या तुम चाहते हो एथलीट बन न?
शिव : मैडम मेरी तो कुछ समाज नहीं आ रहा. क्या में एथलिट बन सकता हु?
जूही : (हस्ते हुए) तुम क्या हो वो मैं देख लुंगी, पर सबसे जरुरी है की तुम चाहते हो की नहीं?
शिव : मैडम में क्यों नहीं चाहूंगा? पर क्या ये मुमकिन है?
जूही : तुम्हारी हाइट अच्छी है और तुम्हारा स्टेमिना में देख चुकी हु. है तुम्हारा कॉम्पिटिओं लड़को के साथ होगा तो तुम्हे और स्ट्रांग बन न पड़ेगा जिसके लिए तुम्हे और अच्छे से और अनुसाशित तरीके से प्रैक्टिस करनी पड़ेगी जो में तुम्हे करवा शक्ति हु. पर क्या तुम रेडी हो.
शिव : (में काफी उत्साहित tha)Ji बिलकुल मैडम.
जूही : ठीक है फिर मैं जो जो एक्सेरसिस बोलू वो करते जाओ.
वह कसरत कर रही लड़कीअ और औरते भी भी मुझे देख रही थी. तो मैडम ने सब से पूछा.
जूही मैडम : आप लोगो को तो कोई ऐतराज नहीं न की एक लड़का आपके साथ कसरत करे तो.
एक औरत : जी नहीं मैडम, हम शिव को जानते है काफी अच्छा लड़का है. मुझे तो कोई ऐतराज़ नहीं.
और भी कई लड़कीओ ने कहा की उन्हें भी कोई ऐतराज़ नहीं. फिर सुरु हुई मेरी ट्रेनिंग. मैडम जो बोल रही थी वो में कर रहा था. वो भी वही सब मेरे साथ कर रही थी. दोनों एक एक सेट के हिसाब से कर रहे थे. एक सेट वो करती तो एक सेट में करता. में उनके साथ साथ hi सब कर रहता तो वो काफी इम्प्रेस थी मुज से. खैर ऐसे hi लड़कीओ की बैच का टाइम ख़तम हो गया और साडी लेडीज जाने लगी. आज वो मुझे hi देख रही थी. फिर मदन सर और लड़के आने लगे पैर आज जूही मैडम गयी नहीं. जब सब आ गए तो वो अपना काम करने लगे. फिर जूही मैडम ने मदन सर से बात की और वो दोनों बार बार मेरी और hi देख रहे थे. मुझे भी मैडम ने बुलाया और फिर हम दोनों एक्सेरसिस करने लगे. कुछ लड़के अचंबित थे जूही मैडम को इस वक़्त देख कर पर कुछ खुस भी थे. वो उन्हें इम्प्रेस करने के चक्कर में ज्यादा एक्सेरसिस कर रहे थे पर मैडम तो मैडम थी उनके सामने कहा सब टिक पते. मदन सर ने भी मुझे काफी एक्सेरसिस करवाई. में तो जैसे सब आराम से कर रहा था तो मदन सर भी काफी इम्प्रेस हुए. जब सबका जाने का टाइम आया तो में अपनी जगह पर आ गया. जब सब लोग चले गए और हम चारो hi बचे थे.
पवन सर: बहोत अच्छे शिव, ऐसे hi म्हणत करते रहना.
ये कहकर वो चले गए. मदन सर भी वैसे hi मेरी पीठ थपथपाई और चले गए. अब मैं और जूही मैडम hi बचे थे. वो बस मुझे देख मुस्कुरा रही थी.
शिव : क्या हुआ मैडम आप ऐसे क्यों मुस्कुरा रही है.
जूही : शिव तुम जानते नहीं तुम क्या हो. आज पहले दिन hi तुम्हारा जो परफॉरमेंस है वो अच्छे अच्छा को हासिल करने में कई साल लग जाते है. पर मुझे ये समाज नहीं आता तुम्हारे अंदर इतना स्टेमिना कैसे है. क्या तुम एक्सेरसिस करते हो?
शिव : नहीं मैडम में एक्सेरिस तो नहीं करता.
जूही : ऐसा हो hi नहीं सकता. तुम्हारी बॉडी बता रही है की इस पे काफी काम हुआ है. ऐसे hi तुम इतना नहीं दौड़ सकते.
शिव : वो मैडम बचपन से hi मुझे दौड़ कर hi स्कूल जाना पड़ता था. और लेट हो जाऊ तो सजा के तौर पर भी मैदान के राउंड लगाने पड़ते थे. और ये तक़रीबन रोज का था. फिर घर पर काम भी बहोत करना पड़ता है. लकडिया काटना और कोई भी भरी काम करना हो तो वो सब मुझे hi करना पड़ता है. शायद इसी लिए.
जूही : ओह ! वैसे तो तुम्हारे साथ सब बुरा होता रहा पर इन सबकी वजह से ये फायदा हुआ की तुम इतने स्ट्रांग बन गए. चलो जो हुआ उसे बदल तो नहीं सकते पर यही कह सकती हु की जो होता है वो अच्छे के लिए hi होता है. चलो अब घर जाना नहीं है क्या?
शिव : बस पांच मिनट, में सब ठीक कर दू फिर चलते है.
फिर हम वह से निकल गए. वापस भी हम दौड़ लगा कर hi गए. अब रस्ते पे लोग ज्यादा थे तो सब हमे देख रहे थे पर हम उनको इग्नोर करते हुए निकल लिए. जूही मैडम के घर के पास पहुंचे तो उन्होंने आने के लिए कहा पर मेने कहा की मुहे स्कूल भी जाना है तो फिर कभी. वो भी मान गयी और में घर की और निकल गया. जब मेने ये साडी बाते लतादिदी को बताई तो वो बहोत खुस हो गयी और वह सब लड़कीअ थी तो वो भी काफी खुस हो गयी. फिर में तैयार हो कर स्कूल निकल गया.
सुबह जब लता उठी तो उसने देखा की उसने पहना हुआ घघरा ऊपर चढ़ा हुआ है और उसकी नंगी तंग शिव के ऊपर है. अपनी ऐसी स्थिति देख वो चौक जाती है, वो कैसी अवस्था में शिव के साथ थी. अपनी ऐसी स्थिति पर उसे शर्म आने लगी, वो अपना पेअर हतलेना चाहती थी पर उसका दिल कुछ और hi कह रहा था, जवानी अपना रंग बिखेर रही थी. शर्म के साथ साथ उसे रोमांच भी हो रहा था. उसने आहिस्ता से शिव को देखा जो गहरी नींद में सोया हुआ था. लता का ध्यान गया की उसे निचे कुछ चुभ रहा है, उसके शरीर से एक कपकपी गुजर गयी, उसका जवान जिस्म इस चुभन से मदहोश होने लगा. (सुबह की वजह से शिव का लुंड खड़ा था और ढीले वस्त्रो की वजह से वो आगे की और खड़ा हुआ था.) लता को अपनी छूट पर हो रही वो चुभन इतनी भ रही थी को वो ऐसे hi लेती रही. वो लगातार शिव को देख रही थी, उसकी साँस तेज हो रही थी, वो धीरे धीरे अपनी कमर चलने लगी जिस की वजह से उसकी छूट पर लुंड की रगड़ मिलने लगी. वो मदहोश हो रही थी, ये चुभन उसको इतना उत्तेजित कर रही थी की उसकी छूट ने रास बहाना शुरू कर दिया था. उसकी चड्डी भीग के चिपक गयी थी जिसकी वजह से उसकी छूट के होठ उभर कर स्पस्ट दिख रहे थे और शिव का लुंड उस दरार को और फैला रहा था. जवानी का ये एहसास लता को पागल बना रहा था और वो अपनी छूट लगातार लुंड पर घिसे जा रही थी. वो दर रही थी कही शिव जाग न जाये पर लुंड की ये छुअन उसके अंग अंग को रोमांचित कर रही थी. न चाहते हुए भी उसकी कमर की रफ़्तार बढ़ने लगी. उसको शिव जग रहा है या सो रहा है उसका भी होश न रहा वो आंखे बंद किये hi अपनी छूट को लुंड पर घिसे जा रही थी. ऐसा आनंद उसे आज तक नहीं मिला था. उसकी इच्छा हुई की वो अपनी छूट में वो कड़क अंग अंदर घुसा ले. वो पागल हुए जा रही थी. उसके अंदर बहोत कुछ हो रहा tha.Use लगने लगा की कुछ निकलने वाला है, वो शिव के कूल्हे को पकड़ कर उसे अपनी और खींचने लगी, वो लगातार अपनी कमर चला रही थी, उसकी छूट की दरार और फ़ैल गयी थी, उसे छूट के छेद पर कड़क लुंड महसूस हो रहा था, हिलने से छूट के ऊपर का दाना भी रगड़ रहा था, वो इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी की वो अपनी छूट जोर जोर से रगड़ने लगी. अचानक उसे क्या हुआ पता न चला पर उसकी आँखों के सामने अँधेरा छ गया और उसका शरीर अकड़ गया और वो जटके खाने लगी और कुछ उसकी छूट से निकलने लगा. वो शिव से चिपक गयी और उसकी छूट से ढेर सारा रास बहने लगा. उसकी पूरी कच्छी भीग गयी. वो इस आनंद को महसूस करने लगी जिसे वो आज पहलीबार महसूस कर रही थी. वो आंखे मूंदे बस शिव से चिपकेहुए पड़ी रही. जब दिमाग से खुमार उतरा तो उसे अपनी स्थिति का बहन हुआ और उसने फ़ौरन शिव की और देखा जो अभी भी गहरी नींद में था. (वो सचमुच सो hi रहा था. उस बेचारे को ये सब पता hi नहीं था. वो तो उसे सुबह का सपना hi समाज रहा था. जब लता को यकीं हो गया की शिव अभी भी सोया है तो उसकी जान में जान आयी. वो उसे प्यार से निहार ने लगी. उसे शर्म भी आ रही थी की उसने क्या कर दिया था. पर ये शर्म उस आनंद के सामने कही भी टिक नहीं पायी जिसे उसने अभी अभी महसूस किआ था.
लता : (मान में ) तू सचमुच भगवन का दिया हुआ वरदान hi है मेरे लिए. तू न होता तो क्या होता मेरा. मुझे माफ़ करदे में अपने आप को रोक नहीं प् रही हु. मुझे पता है मुझे ये नहीं करना चाहिए पर क्या करू, मेरा मुज पर कण्ट्रोल hi नहीं है. सॉरी बाबू.
वो हलके से उसके होठ चूमती है, फिर खुद hi शर्मा जाती है. आहिस्ता से वो शिव से अलग हुई और उठ कर बाथरूम की और चली गयी. जब वो वापस आयी तो शिव अभी भी सोया था तो उसने उसका माथा सहलाते हुए उसे जगाया. उनके जगाने से में भी उठ गया और बेथ कर अपनी प्यारी दीदी का चेहरा देखने लगा, मुझे इतना प्यार आया की मेने उनहेगले लगा लिया.
लतादिदी : (मुस्कुराती hui)Chal अब्ब जल्दी से तैयार हो जा गयम नहीं जाना क्या.
शिव : अभी तैयार तो जाता हु दीदी. (और लता के गाल को चुम कर बाथरूम की और निकल गया).
लता बस मुस्कुराकर hi रह गयी. तैयार हो कर मेने गयम की और दौड़ लगा दी. रस्ते में एक सरप्राइज मेरा इंतजार कर रहा था.
घर से निकल कर उसने रस्ते पर दौड़ लगा दी. रस्ते में वो अपनी hi धुन में दौड़े जा रहा था की मुझे किसी ने पुकारा तो में रुक गया और इधर उधर देखने लगा. उतनेमे एक घर में से मुझे जूही मैडम आती हुई दिखाई दी जिन्हो ने ट्रैक सुइट पहना हुआ था. उन्हें देख कर पहले तो में चौका फिर मुस्कुराते हुए दौड़ कर उनके पास चला गया.
शिव : गुड मॉर्निंग मैडम, आप?
जूही : गुड मॉर्निंग शिव, है में यही रहती हु. मुझे पता था तुम इसी रस्ते से जाते हो तो तुम्हारा hi वेट कर रही थी.
शिव : (मेने उनके घर की और देखा फिर जुहीमदाम को देखते hue)Mera hi वेट कर रही थी मतलब?
जूही : मेने सोचा की तुम दौड़ते हुए इसी रस्ते से जाते आते हो तो में भी तुम्हे ज्वाइन करू, इसी बहाने मेरी भी दौड़ हो जाएगी.
शिव : पर आप के पास तो स्कूटर है न.
जूही : तो क्या हुआ, सुबह दौड़ना सेहत के लिए फायदेमंद होता है. कई बार मेने सोचा था पर ऐसे अकेले अकेले जाना ठीक नहीं लगा, पर अब तुम साथ हो तो फिर सोचा मैं भी तुम्हे ज्वाइन कर लू, (मुस्कुराते हुए) अगर तुम्हे कोई ऐतराज़ न हो तो?
शिव : (वो भी है देता hai)Are नहीं मैडम मुझे क्या ऐतराज होगा, चलिए फिर चलते है. सॉरी दौड़ते है
वो भी मुस्कुरा देती है और दोनों दौड़ लगते हुए गयम की और चल देते है. शिव तो लम्बा था hi पर जूही भी कुछ काम नहीं थी. वो 6 फ़ीट से ज्यादा hi थी. शिव अचम्बे से जूही मैडम को दौड़ते हुए नोटिस कर रहा था. वो काफी स्ट्रांग थी और दौड़ भी काफी तेज रही थी, हलाकि उनकी की वजह से शिव थोड़ा स्लो दौड़ रहा था, पर जूही ने hi कहा.
जूही : क्या तुम थोड़ा तेज नहीं दौड़ सकते?
शिव : (वो ताज्जुब से उनकी और देखता है, फिर हिचकिचाते हुए) वो मैडम आप के लिए hi में स्लो दौड़ रहा हु.
जूही : क्यों? कही तुम्हे ऐसा तो नहीं लग रहा न की में लड़की हु तो तेज नहीं दौड़ सकती?
शिव : वो वो...
जूही : अगर तुम्हे ऐसा लगता है तो चलो रेस लगते है, देखते है कोण तेज है.
जूही मैडम ने फ़ास्ट दौड़ना सुरु कर दिया, में ये देख के हैरान था की वो काफी तेज दौड़ रही थी तो मैंने भी तेज दौड़ना सुरु कर दिया. गजब की लड़की है ये मैडम तो, इनमे काफी स्टेमिना था तो वो लगातार तेज दौड़ रही थी. तो में भी कहा पीछे रहनेवाला था, में भी उसके साथ hi तेज दौड़ने लगा. उनको पीछे करना आसान नहीं था, जितना में उनसे आगे जाने की कोशिस कर रहा था वो भी लगातार दौड़ रही थी, तक़रीबन हम साथ साथ hi दौड़ते हुए गयम पहुंच गए जहा पवनसीर जस्ट आके अपनी कार को लॉक hi कर रहे थे.
पवन : अरे वह आज दोनों साथ साथ वो भी दौड़ ते हुए.
जूही : (अपनी सांसो को सँभालते हुए) गुड मॉर्निंग सर, वो शिव रोज सुबह दौड़ते हुए आता है तो मैंने भी सोचा मैं भी ज्वाइन कर लू तो वर्कआउट भी हो जायेगा. (फिर शिव की और देख kar)Waise इसमें बहोत स्टेमिना है ये लगातार मेरे साथ hi दौड़ रहा था.
पवन : (सुर्प्रिसिंगलली) रियली, थॉट्स वैरी नीस, तुम जूही के साथ साथ दौड़ लिए मतलब अच्छा दौड़ते हो और स्टेमिना भी अच्छा है.
शिव : (आश्चर्य से दोनों को देख रहा tha)Me कुछ समजा नहीं सर?
पवन : जूही एथलीट है और वो स्टेट चैंपियन रह चुकी है.
शिव : क्या सचमे ! (में अचम्बे से जूही मैडम की और देख रहा था)
जूही : (मुस्कुराती है) वैसे तुम भी काफी स्ट्रांग हो दौड़ने में. अगर थोड़ी म्हणत करोगे तो तुम थी एथलीट बन सकते हो.
पवन : अब तुम्हारे साथ है तो तुम hi देख लो. गयम तो है hi अपना. ट्रैन कर दो इसे भी.
जूही : जी सर. चलिए अंदर चलते है.
मुझे तो कुछ समाज hi नहीं आ रहा था. हम सब अंदर गए और शिव अपने काम में लग गया. उसने रजिस्टर डेस्क पे निकल दिया क्यों की सबके आने का टाइम हो चूका था. लोग आने लगे और सिग्न कर कर चेंजिंग रूम में जाने लगे. जूही मैडम पवन सर के साथ उनके केबिन में थी और कुछ बात कर रही थी. फिर वो बहार निकली और मेरे सामने देख कर मुस्कुराती हुई वर्कआउट सेक्शन में चली गयी. जब सब लोग आ गए तो अब मुझे बस बैठना hi था तो जूही मैडम ने मुझे अंदर आने का इस्सर किआ और में चला गया.
जूही : तुमने सुना न बहार पवनसीर ने क्या कहा. क्या तुम चाहते हो एथलीट बन न?
शिव : मैडम मेरी तो कुछ समाज नहीं आ रहा. क्या में एथलिट बन सकता हु?
जूही : (हस्ते हुए) तुम क्या हो वो मैं देख लुंगी, पर सबसे जरुरी है की तुम चाहते हो की नहीं?
शिव : मैडम में क्यों नहीं चाहूंगा? पर क्या ये मुमकिन है?
जूही : तुम्हारी हाइट अच्छी है और तुम्हारा स्टेमिना में देख चुकी हु. है तुम्हारा कॉम्पिटिओं लड़को के साथ होगा तो तुम्हे और स्ट्रांग बन न पड़ेगा जिसके लिए तुम्हे और अच्छे से और अनुसाशित तरीके से प्रैक्टिस करनी पड़ेगी जो में तुम्हे करवा शक्ति हु. पर क्या तुम रेडी हो.
शिव : (में काफी उत्साहित tha)Ji बिलकुल मैडम.
जूही : ठीक है फिर मैं जो जो एक्सेरसिस बोलू वो करते जाओ.
वह कसरत कर रही लड़कीअ और औरते भी भी मुझे देख रही थी. तो मैडम ने सब से पूछा.
जूही मैडम : आप लोगो को तो कोई ऐतराज नहीं न की एक लड़का आपके साथ कसरत करे तो.
एक औरत : जी नहीं मैडम, हम शिव को जानते है काफी अच्छा लड़का है. मुझे तो कोई ऐतराज़ नहीं.
और भी कई लड़कीओ ने कहा की उन्हें भी कोई ऐतराज़ नहीं. फिर सुरु हुई मेरी ट्रेनिंग. मैडम जो बोल रही थी वो में कर रहा था. वो भी वही सब मेरे साथ कर रही थी. दोनों एक एक सेट के हिसाब से कर रहे थे. एक सेट वो करती तो एक सेट में करता. में उनके साथ साथ hi सब कर रहता तो वो काफी इम्प्रेस थी मुज से. खैर ऐसे hi लड़कीओ की बैच का टाइम ख़तम हो गया और साडी लेडीज जाने लगी. आज वो मुझे hi देख रही थी. फिर मदन सर और लड़के आने लगे पैर आज जूही मैडम गयी नहीं. जब सब आ गए तो वो अपना काम करने लगे. फिर जूही मैडम ने मदन सर से बात की और वो दोनों बार बार मेरी और hi देख रहे थे. मुझे भी मैडम ने बुलाया और फिर हम दोनों एक्सेरसिस करने लगे. कुछ लड़के अचंबित थे जूही मैडम को इस वक़्त देख कर पर कुछ खुस भी थे. वो उन्हें इम्प्रेस करने के चक्कर में ज्यादा एक्सेरसिस कर रहे थे पर मैडम तो मैडम थी उनके सामने कहा सब टिक पते. मदन सर ने भी मुझे काफी एक्सेरसिस करवाई. में तो जैसे सब आराम से कर रहा था तो मदन सर भी काफी इम्प्रेस हुए. जब सबका जाने का टाइम आया तो में अपनी जगह पर आ गया. जब सब लोग चले गए और हम चारो hi बचे थे.
पवन सर: बहोत अच्छे शिव, ऐसे hi म्हणत करते रहना.
ये कहकर वो चले गए. मदन सर भी वैसे hi मेरी पीठ थपथपाई और चले गए. अब मैं और जूही मैडम hi बचे थे. वो बस मुझे देख मुस्कुरा रही थी.
शिव : क्या हुआ मैडम आप ऐसे क्यों मुस्कुरा रही है.
जूही : शिव तुम जानते नहीं तुम क्या हो. आज पहले दिन hi तुम्हारा जो परफॉरमेंस है वो अच्छे अच्छा को हासिल करने में कई साल लग जाते है. पर मुझे ये समाज नहीं आता तुम्हारे अंदर इतना स्टेमिना कैसे है. क्या तुम एक्सेरसिस करते हो?
शिव : नहीं मैडम में एक्सेरिस तो नहीं करता.
जूही : ऐसा हो hi नहीं सकता. तुम्हारी बॉडी बता रही है की इस पे काफी काम हुआ है. ऐसे hi तुम इतना नहीं दौड़ सकते.
शिव : वो मैडम बचपन से hi मुझे दौड़ कर hi स्कूल जाना पड़ता था. और लेट हो जाऊ तो सजा के तौर पर भी मैदान के राउंड लगाने पड़ते थे. और ये तक़रीबन रोज का था. फिर घर पर काम भी बहोत करना पड़ता है. लकडिया काटना और कोई भी भरी काम करना हो तो वो सब मुझे hi करना पड़ता है. शायद इसी लिए.
जूही : ओह ! वैसे तो तुम्हारे साथ सब बुरा होता रहा पर इन सबकी वजह से ये फायदा हुआ की तुम इतने स्ट्रांग बन गए. चलो जो हुआ उसे बदल तो नहीं सकते पर यही कह सकती हु की जो होता है वो अच्छे के लिए hi होता है. चलो अब घर जाना नहीं है क्या?
शिव : बस पांच मिनट, में सब ठीक कर दू फिर चलते है.
फिर हम वह से निकल गए. वापस भी हम दौड़ लगा कर hi गए. अब रस्ते पे लोग ज्यादा थे तो सब हमे देख रहे थे पर हम उनको इग्नोर करते हुए निकल लिए. जूही मैडम के घर के पास पहुंचे तो उन्होंने आने के लिए कहा पर मेने कहा की मुहे स्कूल भी जाना है तो फिर कभी. वो भी मान गयी और में घर की और निकल गया. जब मेने ये साडी बाते लतादिदी को बताई तो वो बहोत खुस हो गयी और वह सब लड़कीअ थी तो वो भी काफी खुस हो गयी. फिर में तैयार हो कर स्कूल निकल गया.





