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(दीदी के साथ ये निजी पल बहोत hi खास नोट जा रहे थे)
मेने उनके घाघरे का शिरा दोनों और से पकड़ ते हुए उसे उतरने लगा तो लतादिदी ने अपने कूल्हे उठा कर मेरी मदद की. वो जानती थी की अब वो सिर्फ पंतय में है तो उन्हें शर्म आ रही थी, वो दूसरी और hi देख रही थी पर उसका ध्यान मेरी हरकतों पर hi था. फूली हुई छूट, सफ़ेद पंतय में अपना स्पस्ट आकर दिखा रही थी.

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छूट की फैंको के बिच की दरार पर पंतय एक जगह से भीगी हुई दिख रही थी. मेरी नज़र उनकी छूट पर hi तिकी हुई थी. ऐसा नहीं था की मेने दीदी की छूट को नंगा नहीं देखा था पर उस टाइम बात अलग थी, उस समय देखने में भी दर लगता था, ऐसा लगता था की में कुछ गलत कर रहा हु. पर आज बात अलग थी, आज दीदी खुद चाहती थी की में उसे देखु. ये रोमांच hi कुछ अलग था. मेने दीदी की और देखा तो उनके होठो पे मुस्कान थी पर शर्म की वजह से वो अपना चेहरा ढके दूसरी और hi देख रही थी. में छूट के फुले हुए होठो को अपनी उंगलिओ से मेहसुसुस करना चाहता था, मेने एक बार फिर दीदी की और देखा. लतादिदी के घुटने के निचे पैरो पर हलके बल थे, और उनकी बगल में भी बाल दिख रहे थे. सच कहु तो लड़कीओ के इन जगह पे बल मुझे और उत्तेजित कर रहे थे. मेने छूट की और हाथ बढ़ाया और उस पर हलके से हाथ रख कर उसे सहलाने लगा. उनके मुँह से हलकी हलकी सिस्किअ निकलने लगी थी और उसका शरीर बलखाने लगा. में प्यार से उनकी छूट को अच्छे से सहलाने लगा और उसकी दरार पर भी ऊँगली फिरने लगा. जहा ज्यादा गिला था वह मेने अपनी ऊँगली थोड़ी दबायी तो दीदी का शरीर हिल गया.
शिव : (पंतय उनके ऊपर का आखरी वस्त्र था, उसे उतरने से पहले मेने दीदी से पूछ hi लिया) दीदी इससे भी उतरदु?
लतादिदी : (लता की हालत ख़राब थी, शिव का हाथ अपनी छूट पर उस से वैसे भी बर्दास्त नहीं हो रहा था, उसके मुँह से सिर्फ इतना hi nikala)Hmmmmm
दीदी की सहमति प् कर मेने आहिस्ता से पंतय निचे सरकायी, मेने देखा की पहले दीदी के छूट के ऊपर बल ज्यादा थे पर आज उसे काट कर छोटे करदिये थे ( उनके पास रेज़र नहीं था तो सिर्फ कैची से hi बाल कटे थे).

में अपनी उंगलियों से उन बालो को सहलाने लगा. (लता चुपके से शिव के चेहरे को देख रही थी जो उसकी छूट की और hi देख रहा था. अपने निजी अंग को उसे देखते हुए देख वो शर्माने लगी. शिव ने धीरे धीरे पंतय और निचे सरकायी तो लता ने फिर से अपने कूल्हे उठादिये.) मेने पंतय सरकते हुए उसे पैरो से निकल दी. दीदी पूरी तरह से नंगी थी. बीएड पर लेती वो किसी अप्सरा से काम न था. उस काम की देवी की अतुलनीय काया को में बड़ी हसरत से देख रहा था.

एक बार मेने छूट को देखा फिर लतादिदी को देखा. मेने उनके पैरो को हलके से फैलाना चाहा तो दीदी ने खुद अपनी टंगे फैला दी. मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था. मेने छूट को हलके से दबोचा तो दीदी ने चद्दर मुट्ठी में कास ली. मेने उंगली थोड़ी सी दबायी तो वो दरार में घुस गयी, मुझे अपनी ऊँगली पर छेद का अनुभव होने लगा था, वो चिप छिपा भी था और गरम भी था. में महसूस कर प् रहा था की वो छेड़ मेरे ऊँगली के बराबर hi है. में उस छेड़ को देखने के लिए मारा जा रहा था, पर अभी भी झिझक थी, मेने दीदी को देखा तो वो आंखे बंद किये मेरे स्पर्श का मज़ा ले रही थी. मेने एक लम्बी साँस छोड़ी और उनकी दो टैंगो के बिच बेथ गया. मेने हलके से छूट और झांघो को सहलाया. फिर में दोनों अंगूठो की मदद से छूट के होठो को फैलाया तो मुझे वो छेड़ दिखने लगा. उस छेद के ऊपर भी दो छोटे छोटे होठ जैसा था. मैंने उसे और फ़ैलाने की कोशिस की तो वो छेड़ थोड़ा फ़ैल गया पर अंदर से वो जुड़ा हुआ था, अंदर कोई भी जगह नहीं थी बस एक गुलाबी मांस hi दिखाई दे रहा था. मेने उंगली से उसे टटोलना चाहा तो दीदी के मुँह से हलकी सी सिसकी निकल गयी.
में सच में बहोत दुविधा में था. (लता कब से शिव के चेहरे को गौर से देख रही थी, उसके चेहरे की परेशानी वो समाज रही थी, दरी हुई तो वो भी थी, पर उसे विस्वास था की सब लड़कीअ सेक्स करलेती है तो फिर उसका भी हो hi जायेगा. पर दर तो लग रहा था, क्यों की किसी का अनुभव सुन न और खुद अनुभव करना दो अलग बाटे होती है, शिव की ुसलजन को देख कर उसने कहा)
लता : क्या हुआ शिव, तू रुक क्यों गया?
शिव : दीदी, ये बहोत छोटी है. ये उसके अंदर नहीं जायेगा.
लता : है जानती हु, पर तू जोर से करेगा तो वो अंदर चलजाएगा.
शिव : अगर मैंने ऐसा किया तो आप जानती है कितना दर्द होगा दीदी?
लता : तो होने दे न.
शिव : नहीं दीदी में आपको दर्द नहीं दे सकता.
लता : पागल ये दर्द तो हर लड़की हस्ते हुए सेहलेति है. कभी न कभी तो ये दर्द मुझे सहना hi पड़ेगा.
शिव : नहीं दीदी अभी में तैयार नहीं हु. में कभी सोच भी नहीं सकता की मेरी वजह से आप को दर्द मिले.
लता : दर्द के बाद सुख भी तो मिलता है, क्या तू चाहता है मुझे वो सुख कभी न मिले.
शिव : अभी रहने दो न दीदी. में आपको ऐसे दर्द में नहीं देख paunga.(Lata उसके प्यार को समाज रही थी, )यहाँ आ, मेरे पास (में उनके साथ लेट गया)
लता

वो शिव की आँखों में देख रही थी जहा प्यार hi प्यार भरा पड़ा था. वो जानती थी की ये दिन कभी नहीं आएगा, शिव कभी उसे दर्द नहीं देगा, कुछ सोचते हुए वो शिव का गाल सहलाने लगी) शिव, मुझे किश कर na.(Maine हैरानी से उनको देखा, उनकी आँखों में छह थी, तो मैंने हलके से उनके होठो को chuma)Aise नहीं शिव, अच्छी तरह से kar.(Maine उन्हें देखा वो बड़ी ाश लिए मुझे देख रही थी. मुझे भी उनसे प्यार था पर थोड़ी झिझक थी. में उनको किश करने लगा तो वो भी मुझे किश करने लगी, वो मेरे पुरे शरीर को सेहला रही थी, उनका हाथ मेरे अंडरवियर में चले गए और मेरे कूल्हे सहलाने लगे. उन्होंने मेरा अंडरवियर निचे खिसकना चाहा तो में किश तोड़ने लगा पर उन्होंने मेरे होठ छोड़े hi नहीं. उन्होंने अपने हाथ और पैरो की मदद से मुझे पूरा नंगा कर दिया. वो पलट ते हुए मुझे अपने ऊपर खींचने लगी, में उनके ऊपर हो गया. उन्होंने अपनी टंगे फैला दी और मेरी कमर पर लपेट दी. चुदाई की परफेक्ट पोसिटिव थी. दो गरम जिस्म आपस में रगड़ रहे थे. लतादिदी का मुलायम गर्म जिस्म, मेरे ऊपर जादू बिखेरने लगा. मेरा लुंड अपनी पूरी औकात में खड़ा हो चूका था. में अपनी कमर उनसे दूर रखने की कोशिस कर रहा था पर वो बार बार अपने पैरो से मुझे अपनी और खींच रही थी और अपनी छूट मेरे लुंड पे रगड़ रही थी. लुंड से रास निकल रहा था और छूट से भी निकल रहा था. दोनों एक दूसरे को अपने अपने रास से नेहला रहे थे. उनकी छूट के होठ रास से भीग चुके थे. (लता अपनी छूट पर हो रही लुंड की रगड़ से बहोत ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी. वो शिव को अपनी और खींच रही थी. वो छह रही थी की शिव अपना लुंड उनकी छूट में दाल दे पर वो दूर रह रहा tha.)(Didi अपनी कमर ऐसे हिला रही थी की मुझे दर लगने लगा की मेरा लुंड अंदर घुस न जाये, क्यों की अगर ये घुस गया तो उनकी क्या हालत होगी ये सोच कर मुझे दर लग रहा था. पर वो मान hi नहीं रही थी)
लतादिदी : शिव ऐसा क्यों कर रहा है, मुझे प्यार कर न, (मेरा हाथ अपने स्तन पर रख कर) शिव मुझे प्यार kar,(Maine उनकी और देखा, वो मुझे ऐसे देख रही थी जैसे मुज से विनती कर रही हो, मेने दोनों चुके थम लिए और उन्हें मसलने laga)Ha शिव, आह्ह्ह्ह दबओओओओ इससे, (वो अपनी छूट मेरे लुंड पर घिसने लगी, मेने भी लुंड छूट पर घिसना चालू कर दिया, में छह रहा था की वो जल्द से जल्द स्खलित हो जाये, ताकि वो शांत हो jaye)shiiiiii, सीईई अम्म्मम्म हा शिव, ऐसे hi कर मुझे बहोत अच्छा लग रहा है shhhhhhhh(Kamar हिलाते हुए वो मुझे और खींच रही thi)mmmmmm, सीईई अह्ह्ह्हह शिव मुझे बहोत मज़ा आ रहा hai(Wo मेरी गर्दन को मेरी छाती को मेरे होठो को हर जगह चुम रही थी ), शिव में पागल हो रही हु, मुझे प्यार कर न शिव, ahhhh(Apni छूट को लुंड पर रगड़ते hue)Shiiiiiiv अह्हह्ह्ह्ह, शीइइइइव शहहहहह अह्ह्ह्ह दाल दे न भाई अह्ह्ह्हह शहहहहह क्यों तरसा रहा hai(Kamar जोर जोर से हिला रही thi)Shiv अह्ह्ह्हह शिईयिव, दाल दे न भाई कुछ नहीं होगा, शह्ह्ह्ह. आईईईई , शह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह कुछः नहीं होगा shivvvv,(Wo बहोत ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी, मई अपने आप पर कैसे कण्ट्रोल किये हुए था मुझे hi पता था)
शिव : अह्ह्ह, दीदी मत करो ऐसा डीडीइइइइइ अह्ह्ह्हह आपको दर्द होगा, अह्ह्ह दीदी रुक जाओ
लता : कुछ नहीं होगा शिव, दाल दे मेरे भाई, में छूटने वाली हु शिव दाल दे shiv,(Wo छूटने के कगार पर थी, )अह्ह्ह्ह, सीईव तुजे मेरी कसम अह्ह्ह्ह दाल दे वर्ण में तुज से कभी बात नहीं karungi(Lund छूट के छेड़ पर पहले से सेट था वो पल ऐसा आया की दीदी झड़ने के करीब थी तो उन्होंने निचे से धक्का मर दिया, दीदी ने मुझे कसम दी तो मेने भी हर कर धक्का मर दिया लुंड का सूपड़ा छूट को फैलते हुए फच से दीदी का कौमार्य भांग करता हुआ दीदी की छूट में काफी अंदर तक घुस gaya.)aiiiiiiiiiiiiiiiiiiii, maaaaaaaaaaa (दीदी झड़ने लगी और साथ में दर्द से कराहने लगी,)
शिव : आईइइइइइइइ शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (मुझे भी लुंड पर तेज दर्द महसूस हुआ, और एक जलन सी होने लगी)

दीदी को भी दर्द हो रहा था, मुझे भी मेरे लुंड पर तेज दर्द का एहसास हो रहा था और ऐसी जलन हो रही थी जैसे किसी ने खुले जख्म पर मिर्ची दलदी हो. में समाज नहीं प् रहा था क्या हुआ पर दर्द मुझे भी हो रहा था ऐसा पहली बार हुआ था. ( झड़ने के बाद लता को अपनी छूट में हो रहे अशीम दर्द का एहसास हुआ, वो हफ्ते हुए शांत होने लगी. में भी अपने दर्द को बर्दास्त करते हुए उनसे लिपट कर उनके ऊपर hi रहा. आखिर कर वो शांत हो गयी पर अब उनके चेहरे पर दर्द की लकीरे दिखने लगी. मेरे भी चेहरे पर दर्द की लकीरे थी. मैंने लुंड निकलने के लिए उठना चाहा तो उन्होंने मेरी कमर पकड़ ली. और अपना शिर हिलाते हुए न कहा. मेरा लुंड बड़ी सख्ती से उस छोटेसे से छेद में फंसा हुआ था. दीदी मुझे देख रही थी और मेरे गाल को सेहला रही थी. उन्होंने मेरा शिर पकड़ा और मुझे अपनी और खींच लिया और मेरे होठो को चूसने lagi.(Lata को अपनी छूट में बहोत दर्द हो रहा था पर वो शिव को दिखाना नहीं चाहती थी. उसे पता था की एक बार तो ये होना hi था. शिव को भी दर्द हो रहा था पर वो लतादिदी को कहना नहीं चाहता था, दर्द की वजह से उसका लुंड थोड़ा सिकुड़ने लगा था)
लतादिदी : तुजे क्या हुआ शिव, क्या तुजे भी दर्द हो रहा है.
शिव : है दीदी.
लतादिदी : पर तुजे दर्द क्यों हो रहा है Shiv(Wo अपना दर्द भूल कर शिव के दर्द से दुखी होने लगी)
शिव : पता नहीं दीदी.
लतादिदी : क्या पहले भी होता था.
शिव : (अब में क्या कहता दीदी को, मेने दीदी को थोड़ी न बताया था की में सरिता दीदी को छोड़ चूका हु) नहीं दीदी, आज पहलीबार हुआ है.
(दरअसल, शिव आज पहली बार सील पैक छूट को छोड़ रहा था, और उसके लुंड का टंका इस कासी हुई छूट के सामने टिक नहीं पाया और वो टूट गया था. लोग अकसर छूट की सील की बात करते है पर लुंड पर भी सील होती है निस से पता चलता है की ये लुंड चुदाई कर चूका है, है ये बात अलग है की उसे टूटने के लिए खुली छूट नहीं, टाइट छूट चाहिए)
लता दीदी : (मेरे गाल सहलाते हुए मेरी आँखों में देख रही थी, दोनों को दर्द हो रहा था, लता को खुद के दर्द का तो पता था पर वो शिव के दर्द को नहीं समाज प् रही थी, पर उसे इतना तो पता था की उसे दर्द है, तो उसने ध्यान को दूसरी डिसमे ले जाने का सोचा, वो शिव को किश करने लगी, और उसे सहलाने लगी, थोड़ी देर बाद उसकी आँखों में देखते हुए) तू मेरे अंदर है शिव, मुज से जुड़ा हुआ है. हम दोनों दो नहीं, एक है abhi.(Muje भी एहसास हुआ की मेरा लुंड दीदी की छूट में है और हम दोनों जुड़ चुके है, दीदी आगे बोन लगी) जितनी ख़ुशी अभी मुझे मिल रही है, वो में तुजे बयां नहीं कर शक्ति, आज में तेरी हुई शिव.
शिव : आप तो हमेशा से मेरी hi थी दीदी.
लतादिदी : वो में तेरी दीदी थी, अब में तेरी bi....(Wo बोलते बोलते रुक गयी)
शिव : रुक क्यों गयी दीदी, बोलो न अब क्या हो.
लतादिदी : (शरमाते हुए) आज से इस कमरे में तेरी ... में तेरी bivi...(Wo बोलते बोलते शर्मा गयी और मेरे गले लग गयी) में बहोत खुस हु शिव, ी रॉय लव यू. में तुज से सच में बहोत प्यार करती हु.
शिव : में जनता हु दीदी, और में भी आप से बहोत प्यार करता हु. और आप सच कह रही हो दीदी की अभी हम एक hi है, (में उनके होठो को चूमने लगा तो वो भी मुज से लिपट कर मेरे होठो को चूमने लगी, होठ से होठ और जुबान से जुबान उलझ रही थी, में दीदी के स्तन को सहलाते हुए उन्हें चुम रहा था, उनकी छूट से और मेरे लुंड से खून निकल रहा था, पर जैसे उस से हमे कोई फर्क नहीं पद रहा था, दोनों का खून इकठ्ठा हो कर छूट के किनारो से बहार निकल रहा था)
शिव : दीदी आप खुस हो?
लतादिदी : है शिव, में बहोत खुस हु, आखिर मेने तेरा प्या प् hi लिया.
शिव : पर दीदी हम बचपन से जिस रिश्ते से रहे hai....(Shiv ने बात अधूरी छोड़ दी)
लतादिदी : मुझे नहीं पता, और में समझना भी नहीं चाहती, शिव मुझे बस इतना पता है में तुम्हारी हु, और मेरे दिल में ये जगह किसी और को नहीं दे शक्ति, चाहे जिस रिश्ते से तू मुझे रक्खे पर हमेशा अपने साथ रखना.
शिव : दीदी (मेने उन्हें कास के गले लगा लिया पर ऐसा करने से मेरा लुंड और थोड़ा छूट में उतर गया)
लता दीदी : Aiiii(Unhone अपना हाथ मेरी पीठ पर दबा दिया,)
शिव : सॉरी दीदी.
लतादिदी : जो होना था वो हो गया है शिव, में अब लड़की नहीं रही, तूने मुझे औरत बना दिया मेरे भाई. मुझे तेरा प्यार चाहिए शिव, मुझे एक लड़कीवाला प्यार कर न. में तेरे प्यार के लिए तरस रही हु.
अब में क्या कहता, मेरे लुंड का दर्द भी अब काम हो गया था, लुंड वापस अपनी औकात में आ चूका था. मेरा लुंड उनकी छूट की संकरी गुफा में फंसा हुआ था. उनकी छूट की मांसपेशियों की हलचल में मेहसुसु कर शक्ति था.

शिव : ठीक है दीदी, जैसा आप chaho.(Unke होठो को चूस ने laga)Waise दीदी आप बहोत मीठी ho(Unke चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी, मैंने उनके चुके दबाने laga)Didi ये अब बड़े होनेवाले है.
लतादिदी

शरमातेहुए मुस्कुराती hai)Tereliye hi है, तुजे ये पसंद तो है न.
शिव : मुझे आपका सबकुछ पसंद है didi(Ek निप्पल मुँह में ले कर चूसने लगा)
लतादिदी : शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, अह्हह्ह्ह्ह थोड़ा धीरे भाई, अह्ह्ह्हह (मेरा शिर सहलाते हुए वो मुस्कुरा रही thi)Shhh चूस , पर आराम से अह्ह्ह्हह कितना मज़ा आता है ahhhhh.(Lata को अपनी छूट में काफी रहत हो चुकी थी और उसके जिस्म की गर्मी बढ़ने लगी थी, वो शिव की पीठ और उसके कूल्हों पर अपने नाख़ून रगड़ रही थी, उसने अपनी कमर हिलनी सुरु कर दी. लुंड थोड़ा आगे पीछे होने laga,ye रगड़ उसको मज़ा देने लगी, और उसकी छूट पानी बहाने लगी, उसे इतना मज़ा आ रहा था की वो शिव के बालो को नोचने लगी और अपनी कमर को हिलाते हुए धक्के लगाने लगी, दर्द तो हो रहा था पर उसके सामने जो मज़ा था वो कई गुना ज्यादा था)
दीदी अपनी कमर हिला रही थी. मेरा लुंड चिकनाहट की वजह से आगे पीछे होने लगा था. मेरा लुंड जो थोड़ा ढीला हुआ था वो फिर से अपनी औकात में आ चूका था. मैंने थोड़ा ऊपर हो कर नीचे देखा तो लुंड दीदी की छूट में आधा घुसा हुआ था. में हलके हलके लुंड को आगे पीछे करने लगा.
शिव : दीदी (उन्होंने मेरी और dekha)Dard हो रहा है?
लतादिदी: हल्का हल्का, पर मज़ा ज्यादा मिल रहा है शिव.
शिव : आखिर अपने अपने मान की कर hi ली.
लतादिदी : (शरमाते hue)To कब तक रूकती, मुझे भी तेरा प्यार चाहिए था. क्यों तुजे अच्छा नहीं लग रहा.
शिव

मुस्कुराते hue)Muje क्यों नहीं अच्छा लगेगा. पर दीदी आपकी वो बहोत ज्यादा छोटी है.
Latadidi

Meri बात से वो शर्मा gayi)Kyu तुजे अच्छी नहीं लगी.
शिव : आप जानती है मैंने अपने आपको कैसे रोका हुआ है, मुझे इतना मज़ा आ रहा है की जोर जोर से करने का मान कर रहा है.
लतादिदी : तो कर ले न.
शिव : पागल है क्या आप. आपको कितना दर्द होगा पता है.
लतादिदी : नहीं होगा, मुझे भी मान हो रहा है की तू जल्दी जल्दी कर.
शिव : दीदी दर्द होगा.
लतादिदी : होने दे, मुझे बहोत मज़ा आ रहा है, थोड़ा जल्दी जल्दी कर.

सच कहु तो उनकी छूट इतनी टाइट थी की मेरा लुंड पूरी तरह से फंसा हुआ था. पर ऐसा मज़ा भी आज तक मुझे नहीं मिला था. मेरा भी मान कर रहा था तो में थोड़ा जल्दी जल्दी दीदी को छोड़ने लगा. में आधे लुंड से hi छोड़ रहा था. उनको भी मज़ा आ रहा था.
लतादिदी : अह्हह्ह्ह्ह, अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह, है ऐसे hi, और कर शिव अह्ह्ह्ह, हआ हआ हआ शह्ह्ह्हह्ह.
शीववव अह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है, शहहहहह बहोत मज़ा आ रहा है, और प्यार कर मुझे.
शिव : शठ अह्ह्ह दीदी (उनके स्तन जोरो से मसलने लगा, उनके निप्पल को भी मरोड़ने लगा, लुंड की रफ़्तार थोड़ी बढ़ गयी थी)
लतादिदी : शठ एआई एआई आअह्ह्ह शठ श, इतना सुख तो मुझे कभी नहीं मिला ahhhhh(Unhone मेरा शिर पकड़ कर अपनी बहो में भर लिया था, मेरी कमर पर अपने पेअर लपेट लिए, वो खुद निचे से धक्के लगा रही thi)Ahhhh और तेज सीईव, और तेज कर. कितना मज़ा आता है शिव, अह्हह्ह्ह्ह और जोर से कर, मुझे कोई दर्द नहीं हो रहा, कर ले और जोर से करले.
(मेने उन्हें अपने निचे पूरी तरह से दबोच लिया था, लुंड थोड़ा थोड़ा कर के अंदर और ज्यादा घुस रहा था. हम दोनों अपनी खुमारी में थे, अचानक दीदी दहाड़ती हुई मुज से पूरी तरह से चिपक गयी और एकबार फिर झड़ने लगी. तब जा के मेरा ध्यान गया की मेरा पूरा लुंड उनकी छूट में घुस चूका है)
लता : (अपने अंदर पुरे लुंड को महसूस कर रही थी, दर्द अपनी जगह था पर जो ख़ुशी थी वो बयां नहीं की जा शक्ति थी. वो अपनी छूट को फाडे हुए अपने अंदर घुसे उस मोठे से लुंड को महसूस करते हुए झाड़ रही थी)
मुझसे भी अब रहा नहीं जा रहा था. मैंने दीदी को पकड़ा और धक्के लगाने लगा, उनकी संकरी छूट मुझे एक अजीब तरह का आनंद दे रही थी, मेरे धक्के तेज हो गए थे.
शिव

साथ में मुझे दीदी की चिंता भी हो रही thi)Didi दर्द तो नहीं हो रहा?
लतादिदी : नहीं शिव, तू कर, अह्ह्ह्हह, मुझे अह्हह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है, शह्ह्ह्हह्ह, अह्ह्ह्हह मेरे अंदर hi डालना.
शिव

Chauktehue)Kya कहा दीदी आपने.
लतादिदी : शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अपना वीर्य मेरे अंदर hi डालना
शिव : ये क्या कह रही हो दीदी, अगर कुछ हो गया तो.
लतादिदी : कुछ नहीं होगा, में जानती हु में क्या कह रही हु, अह्ह्ह मेरे पीरियड्स अभी ख़तम हुए है तो अभी सेफ पीरियड है. भर दे अपना वीर्य शिव, मुझे सब कुछ महसूस करना है. मुझे तेरा पूरा प्यार चाहिए.
शिव : आप कमल हो दीदी, अह्ह्ह्ह इतना मज़ा मुझे कभी नहीं आया दीदी. (में और वो दोनों पशीने से भीग चुके थे, सच में इतना मज़ा तो आज तक मुझे नहीं मिला था, मेरी दीदी, मेरी प्यारी दीदी अब मेरी बीबी बन चुकी थी, उनसे इस तरह का प्यार मुझे उनके और नज़दीक ले आया था, उनका शरीर और उनकी छूट तो लाजवाब थी hi पर वो मेरे लिए लाजवाब थी, वो मेरी प्यारी दीदी थी. में उन्हें चूमते हुए, चाट ते हुए, उनके चुके और उनके कूल्हे मसलते हुए उन्हें छोड़ रहा था)
लतादिदी : अहह कर ले मेरे भाई, जितना मर्जी करले, में खुस हु की मैंने तुम्हे ये ख़ुशी दी. में खुस हु की आज तूने मुझे औरत बनाया. में हमेषा से तुज से प्यार करती थी पर आज मुझे एक अलग तरह का प्यार महसूस हो रहा है, मुझे लग रहा है आज में सच में तेरी हो गयी और तू mera.(Chut पूरी तरह से भरी हुई थी और कोनो से लहू की नदिया बह रही थी, लुंड जड़ तक अंदर बहार हो रहा था, दीदी के टंगे उठाने से उनके कोल्हू से थप थप की आवाजे निकल रही थी, मैंने दीदी को पूरी तरह से जकड लिया था,)
शिव : दीदी मेरा अब निकलने वाला है.
लतादिदी : मेरा भी निकलनेवाला है, भर दे मेरी छूट अपने प्यार से.
शिव : (दीदी के मुँह से छूट सुन कर मुझे कुछ कुछ होने laga)Kya कहा दीदी अपने, क्या भर दू.
Latadidi

Lata को एहसास हुआ की वो क्या बोल गयी पर अब बोल चुकी थी wo)Meri छूट में शिव, अह्हह्ह्ह्ह मेरी छूट में अह्ह्ह्ह अपने लुंड से अह्हह्ह्ह्ह
शिव : अह्ह्ह्ह दीदी आप को ये सब भी बोलना आता है. (दीदी शर्मा रही थी) शर्माओ मात दीदी, आप का ऐसा बोलना मुझे अच्छा लग रहा है, आपकी छूट मेरे लुंड को खींच रही है
लतादिदी : (उन्होंने अपनी आंखे बंद की, वो मुस्कुरा रही thi)Use तेरा लुंड अच्छा लग रहा है , उसे तेरा hi लुंड चाहिए शिव, वो तेरे लुंड के लिए बहोत तरसी है, उसकी इच्छा पूरी कर दे, छोड़ ले उसे, अह्ह्ह और जोर से छोड़ मुझे, तेरा लुंड बहोत बड़ा है शिव, मुझे नहीं पता था इतना मज़ा आता है, अह्ह्ह्हह वर्ण में कब से ये करवा लेती.
शिव : दीदी मुझे भी आपको छोड़ने में बहोत मज़ा आ रहा hai.(Meri कमर के निचे का भाग रफ़्तार से चल रहा था, लुंड पिस्टन की तरह अंदर बहार हो रहा था, छूट फ़ैल कर लुंड से लिपट गयी थी, छूट के अंदर का हर हिस्सा में अपने लुंड पर महसूस कर रहा था
लतादिदी : छोड़ ले शिव मुझे, जितना मर्जी हो छोड़ ले, अह्ह्ह्ह इतना मज़ा.... अह्ह्ह में गयी शिववववव में gayiiiiiiiiiiii
शिव : में भी दीदी
आखरी धक्के जोर जोर से लगने लगे, वो पूरी हिल रही थी, मेने उन्हें कंधो से पकड़ लिया था, आखिर कर में भी अपने चरम पर पहुंच गया और में अपना वीर्य, दीदी की छूट में भरने लगा. वो मुझसे पूरी ताकत से लिपट गयी थी और मैंने भी उन्हें अपनी आगोस में दबोच लिया, मेरे झटके चालू थे और वीर्य की पिचकारियां दीदी की छूट में गिर रही थी अशीम आनंद की अनुभूति हो रही थी. दोनों पशीने से लथपथ एक दूसरे को कास के जकड़े हुए थे. छूट के कोनो से वीर्य और खून निकल रहा था. काफी देर हम ऐसे hi चिपके रहे. कमरे में सांसो का तूफान धीरे धीरे काम होने लगा. जब तूफान शांत हुआ तो मैंने दीदी को छोड़ा और थोड़ा ऊपर उठ कर दीदी को देखा. उनके बल पुरे बिखरे हुए थे, वो अपनी अधखुली आँखों से बस मुझे देख रही थी, हम दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, लुंड छूट में धंसा हुआ था, जब दीदी को अपनी स्थिति का बहन हुआ तो शर्माने लगी, उनको इतनी शर्म आ रही थी की उन्होंने अपनी आंखे अपने एक हाथ से धक् ली. पर उनके चेहरे पर मुस्कान बहोत गहरी थी.
शिव : क्या हुआ दीदी?
लतादिदी : मुझे बहोत शर्म आ रही है शिव.
शिव : क्यों?
लतादिदी : पता नहीं.
शिव : आपको अच्छा नहीं लगा दीदी?
लतादिदी : (उन्होंने अपना हाथ हटाया और मेरी और देखा, मुझे खींच कर गले लग gayi)Pagal है क्या? मुझे बहोत मज़ा आया, पर अब शर्म आ रही है. अह्ह्ह्हह
शिव : क्या हुआ दीदी?
लतादिदी : अह्ह्ह्ह, अब दर्द का एहसास भी हो रहा है.
शिव : इसीलिए में आप को मन कर रहा था.
लतादिदी : अब दर्द हो रहा है तो होने दे, ये उस खुसी के सामने कुछ भी नहीं जो तूने मुझे दी है. वह एक गोली रक्खी है वो ला दे मुझे.
शिव : कैसी गोली?
लतादिदी : दर्दनिवारक गोली है.
शिव : (मैंने अपना लुंड बहार निकला तो ढेर सारा वीर्य जो लाल रंग का हो चूका था वो छूट से बहने लगा, मुझे सचमे चिंता होने लगी) दीदी आप सचमे ठीक हो न?
लतादिदी : (वो मुस्कुरायी) जा गोली दे, ज्यादा चिंता मात कर. मरनेवाली नहीं हु में.
शिव : मरे आप के दुसमन, ऐसा क्यों बोल रही हो. (मैंने उन्हें गोली दी, पानी के साथ गोली खिलने के बाद मेने उन्हें kaha)To अपने साडी तयारी कर के राखी थी?
लतादिदी : (उन्हें शर्म आयी तो वो दूसरी और देखने लगी, में उनकी बगल में लेट गया और उनके स्तन से खेलने laga)Shiiiiiv , मुझे मत सत्ता न.
शिव: आपकी तयारी से तो लगता है आप सब प्लान बनाकर बैठी थी, है न?
लतादिदी : तो और क्या करती, तू तो कभी करनेवाला था hi नहीं, दर्द होगा दर्द होगा कर रहा था. तो मुझे hi करना पड़ा.
शिव

उनके स्तन को सहलाते हुए उनके एक निप्पल को चूस kar)App खुस तो है न दीदी?
लतादिदी : भोत ज्यादा शिव. मुझे नहीं पता मैंने ये सही किया या गलत पर में बहोत खुस हु. मुझे हमेशा ऐसे hi प्यार करना शिव.
हम दोनों एक दूसरे के प्यार को महसूस करते हुए काफी देर तक जगे, आखिर कर हम सो गए.