Adultery Kundali Bhagya - Page 25 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 172

में घर पंहुचा और अंदर गया, तो स्नेहमड़ाम और पवनसीर बैठे हुए थे और कुछ बच्चे मिठाई खा रहे थे, सब मस्ती कर रहे थे, जैसे hi में पंहुचा तो सबकी निगाहे मेरी और हुई.

लता : आए गया तू. (में मुस्कुराते हुए उनके पास पंहुचा)

शिव : नमस्ते सर, नमस्ते मैडम. (पवनसीर बस मुस्कुराये पर स्नेहा मैडम बोल पड़ी)

स्नेहा : नमस्ते के बच्चे, कहा घूम रहा है, तुम्हे मिलने घर आये और तुम hi गायब.

शिव : सॉरी, मुझे पता नहीं था न की आप आ रहे हो, कह देते तो में मौजूद रहता.

पवनसीर : क्यों खामखा दन्त रही हो, कामियाब हुआहै वो और तुम उसे दन्त रही हो.

स्नेहा : (मुस्कुराते hue)Me दन्त नहीं रही हु, बस कह रही हु, कोंग्रटुलतिओन्स. तुमने तो मुँह मीठा नहीं करवाया पर में ले आयी, आओ में अपने हाथसे तुम्हारा मुँह मीठा करवाती हु. (कहते हुए उन्होंने एक पैदा लिया और मुझे खिलाया)

शिव : थैंक यू.

स्नेहा : सिर्फ थैंक यू से काम नहीं चलेगा, पार्टी देनी पड़ेगी.

शिव : जैसा आप कहे. (बड़े सब ने मिठाई नहीं खायी हुई थी)

स्नेहा : ये सब तुम्हारा hi इंतजार कर रहे थे, किसी ने तुम्हारे बगैर मिठाई नहीं खाई, तुम hi खिलाओ सबको. (मेने मिठाई का डिब्बा लिया और सबको बरी बरी मिठाई khilayi)Sabko खिलाई मुझे नहीं क्यों? (में मुस्कुराया और उन्हें भी खिलाई और पवनसीर को भी, फिर बच्चे अंदर चले गए और विणा, रंजन और गायत्री दीदी भी)

पवनसीर : क्यों भाई, बहोत शिकायते आ रही है तुम्हारी? (उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : कैसी शिकायते सर?

पवनसीर : (मुस्कुराते hue)Site से और कहा से? (उन्होंने इसरो में hi जहान्वी की बात की)

शिव : (मुस्कुराते hue)Ab नहीं आएगी.

स्नेहा : वैसे शिकायत तो मुझे भी है. (में उन्हें देखने लगा) तुम घर पर भी नहीं आ रहे हो, ज्यादा बिजी हो गए हो क्यों.

शिव : नहीं ऐसी बात नहीं है मैडम, आऊंगा में.

ऐसे hi हमारी बाटे होती रहे, करीब एक घंटे बाद वो दोनों गए. लता और सरिता सब ठीक करने लगी और में अपने रूम में चला गया, पुरे दिन की भागादौड़ी से मुझे नींद आ गयी और में सो गया. दोनों काम ख़तम कर के मेरे रूम में आयी तो मुझे सोते पाया.

सरिता : ये तो सो गया.

लता : थका होगा, चल हम बड़े रूम में सो जाते है. उसे आराम करने दे. (मान दोनों का नहीं था, पर मुझे डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी तो वो दोनों चली गयी)

सुबह उठ कर मेने फिर दौड़ की प्रैक्टिस की और फिर में स्कूल के लिए निकल गया, आज बाइक थी तो विणा और रंजन को भी स्कूल छोड़ दिया, वो दोनों भी खुस हो गयी, उसके बाद में संयम के घर के मोड़ पर पंहुचा तो कोई नहीं था तो में स्कूल के लिए निकल गया. वह पंहुचा तो संयम, वैस्वी, हर्ष और महेश सब खड़े हुए थे, मुझे देख कर महेशबोला.

महेश : क्यों बे, किसी उठलाया?

शिव : में इसकी तरह उठा नहीं लता. (वैस्वी की और देख kar)Aaj तुम दोनों साथ में आये?

वैस्वी : है तुमने कहा था तो लेने चली गयी थी, पहले ये मन कर रही थी पर जब मेने तुम्हारा नाम लिया तब मणि, मेने तो कह दिया की जो जवाब देना है शिव को देना, तब जा के बैठी, लगता है तुमसे डर्टी है. (संयम को देख कर वो मुस्कुराने लगी)

संयम : में कोई डर्टी वर्ती नहीं सामजी, अब नहीं आउंगी.

शिव : क्या तुम भी, ये किसी से नहीं डर्टी, बस. चलो अब बेल्ल बज गयी है. आज बीनमदं नहीं आयी थी, मुझे आश्चर्य हुआ, मेने सोचा की फिर बात करता हु. दूसरे टीचर ने पीरियड लिया ऐसे hi पढ़ाई चलने लगी. जब स्कूल से छूटे तो वैस्वी अपने घर के लिए निकल गयी और संयम मेरे साथ बेथ गयी, वो दुरी बना कर hi बैठी थी और ज्यादा कुछ बोली भी नहीं, मेने भी कोई बात नहीं छेड़ी. जब हम पहुंचे तो नाज़िआ दीदी उसका इंतजार कर रही थी, मुझे देख कर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी.

नाज़िआ : आज तुम बाइक से?

शिव : है, वो काम था तो ले आया, आप कैसी हो?

नाज़िआ : अच्छी हु, चलो घर.

शिव : अभी नहीं, फिर आता हु.

नाज़िआ : ठीक है. (वो दोनों चली गयी, में भी घर के लिए निकल गया, रस्ते में मुझे रंजन और विणा की स्कूल की याद आयी तो में उनके स्कूल की और निकल गया, वो रस्ते में hi मिल गयी मुझे, उनको ले कर में घर की और निकल गया, रंजन मुझसे चिपक कर बैठी थी, उसके स्तन मुझे चुभ रहे थे, मेने साइड मिरर से उसे देखा तो वो मुस्कुरायी, वो जानती थी की क्या हो रहा है, वो और अपने स्तन गढ़ने लगी, में मुस्कुराया तो वो भी मुस्कुरायी)

रंजन : आज कल बहोत बिजी हो गया है न. टाइम hi नहीं हमारे लिए.

शिव : घर पे तो होता हु. और बाकि तो तू जानती hi है.

रंजन : जानती हु और खुस भी हु, पर कभी कभी तो समय निकल ले, तेरा मान नहीं होता क्या? (में क्या जवाब देता, में मुस्कुराया, उसने भी बात को नहीं खिंचा, हम घर आ गए, वो दोनों निचे उतरी, और मेरे लिए कड़ी रही, मेने बाइक स्टैंड की, वो दोनों मुझे देख कर मुस्कुरायी, फिर हम तीनो अंदर चले गए, फ्रेस हुए और खाना खाने बेथ गए. उसके बाद में साइट की और निकल गया. आज जल्दी पंहुचा था मेने देखा की जहान्वी अभी नहीं आयी थी, में पिंकेशभाई से मिला, फिर सबसे मिलने लगा, भोली ने तो तना hi दे दिया.





भोली : कल आये फिर भी मिले भी नहीं, उस मैडम के लिए टाइम है, मेरे लिए नहीं है.

शिव : पागल है क्या तू, अभी मिलने आया न.

भोली : बड़े आये मिलने, अब हम छोटे लोगो से क्या मतलब, अबतो बड़े लोगो में उठना बैठना हो गया है न.

शिव : मर खायेगी तू, में कोनसा बड़ा हो गया हु जो ऐसा कह रही है.

भोली : और क्या कहु, यहाँ भी नहीं आता तो मिलेगा क्या.

शिव : मेरा कॉम्पिटिओं था, राज्यालेवाल क्लियर किआ है मेने, उसके लिए hi गया था.

भोली : पिंकेशबाबू बता रहे थे, पर समाज में कुछ नहीं आया.

शिव : (उसके भोले पैन से में muskuraya)Ye समाज ले की हमारे पुरे राज्य में दौड़ में पहले नंबर पर आया हु.

भोली : अच्छा, ये तो बहोत अच्छी बात है, पर फायदा क्या होता है?

शिव : (मुस्कुराते hue)Bahot फायदा होता है, तुम्हारा नाम होता है, सर्कार की और से इनाम मिलता है, आगे बढ़ने पर और भी बहोत कुछ मिलता है.

भोली : देखा मेने कहा था नई की अब बड़ा आदमी हो गया है, मेने क्या जूथ कहा था फिर.

शिव : तू जिस तरह से कह रही थी न वैसा बड़ा नहीं हुआ में सामजी.

भोली : अच्छा ऐसा है तो फिर कमली की शादी में आओगे?

शिव : कमली की शादी (मेने उसकी और देखा तो उसने नज़ारे झुका ली) कब है?

भोली : अभी बिस दिन है, पर आओगे तुम?

शिव : है है, क्यों नहीं आऊंगा, कमली बुलाएगी तो जरूर आऊंगा, वैसे बधाई ho(Mene कमली को कहा, उसने एक बार मुझे देखा और मुस्कुरायी)

जहान्वी : तो तुम यहाँ हो. (मेने देखा की जहान्वी अंदर आ रही थी, उसे देख कर भोली का मुँह बिगड़ गया और ये जहान्वी ने भी देखा) आज जल्दी आ गए तुम.

शिव : है, वो टाइम था तो आ गया.

जहान्वी : ठीक है, में ऑफिस में हु, (कहते हुए वो बहार चली गयी)

भोली : (जैसेही वो नजरो से दूर hui)Jao बुला रही है तुमको, इसको भी तुम्हारे बगैर चैन नहीं है.

शिव : (जुमारी और कमली अपना मुँह छुपा कर मुस्कुरा रही thi)Tu भी न, उन्होंने ऐसा थोड़ी न कहा.

भोली : नाम भोली है, में भोली नहीं हु समजे, लड़की हु, उसका मतलब और उसका चेहरा दोनों समाज सकती हु.

शिव : (में भी समाज रहा था पर मेने जान बुज कर kaha)Aisa कुछ नहीं है.

भोली : तो रुको फिर यहाँ.

शिव : है तो में यही तो हु, तुम अब काम करो, में यही हु. (वो फिर अपने अपने काम में लग गए, में थोड़ी देर वह घूमते हुए सब देख रहा था, करीब बिस मिनट बाद वो सब खाने बैठे और में वह से निकला और ऑफिस में चला गया, जहान्वी ऑफिस में कुर्शी पर बैठी हुई थी और कुछ सोच रही thi)Hello.

जहान्वी : (मेरी और हलके गुस्से से देखते hue)Mil गया time.(Muskurate हुए में सामने चेयर पर betha)Ab इसमें मुस्कुराने की क्या बात hai(Usne चिढ़ते हुए कहा)

शिव : (मुस्कुराते hue)Nahi कुछ नहीं. वो बस भोली की बात याद आ गयी (मेने जानबुज कर कहा था और वो सच में थोड़ी और चीड़ गयी)

जहान्वी : तो वही रहते, यहाँ क्यों आये.

शिव : अपने बुलाया था इस्सलिये आ गया.

जहान्वी : मेने कहा बुलाया था, तुम खुद hi आये हो, जाओ अगर मान नहीं है तो (उसने नखरे से कहा)

शिव : उनके साथ रहना hi तो मेरा काम है, वो नहीं करूँगा तो आप मुझे नौकरी से निकल degi(Mene मुस्कुराते हुए कहा)

जहान्वी : ज्यादा स्मार्ट मात बनो, हो नहीं तुम. (वो हलके गुस्से से बोली)

शिव : मेने कब कहा ऐसा. और यहाँ काम करने आया हु तो काम hi करूँगा न, इसमें क्या जूथ कहा मेने.

जहान्वी : तो जाओ न, काम करो, यहाँ क्यों बैठे हो?

शिव : वो सब खाना खाने बैठे तो में आ गया.

जहान्वी : (झुंझलाते hue)Oh! तो वो खाना खाने बैठे इस लिए आये, तुम्हे नहीं आना था.

शिव : मुझे बैठेरहने की पगार थोड़ी न मिलती है, और आपके साथ में कैसे बेथ सकता हु मालकिन. (मेने हसी छुपाते हुए कहा, वो मुझे गुस्से से घर रही थी)

जहान्वी : तो जाओ न फिर यहाँ क्यों बैठे हो?

शिव : अभी लंच टाइम है तो में अपनी दोस्त से मिलने आ गया. पर लगता है वो थोड़ी नाराज है. (में मुस्कुराया)

जहान्वी : (उसको भी हसी आ गयी पर वो अपनी हसी दबा gayi)Yaha कोई दोस्त नहीं है तुम्हारी.

शिव : है यार, बड़ी प्यारी, खूबसूरत है थोड़ी णखचड़ी है बाकि अच्छी है.

जहान्वी : (वो अपनी मुस्कान छुपाने का भरपूर प्रयास कर रही thi)Me णखचड़ी हु?

शिव : मेने आपको थोड़ी न कहा, में तो अपनी दोस्त की बात कर रहा हु, वैसे है वो बहोत मस्त, उसके होठ भी बहोत मीठे है (मेने उनके होठो को देख कर कहा, मेरा ऐसे देखने से वो शर्मा गयी, जहान्वी को ऐसी बाते बहोत अच्छी लग रही थी)

जहान्वी : (शरमाते hue)Maar खाओगे तुम. (उसने धीमी आवाज में कहा).

शिव : खाना तो और कुछ है, पर अभी मार hi सही.

जहान्वी : (उसकी सांसे चढ़ने लगी thi)Kya खाना है?

शिव : खाने के लिए नजदीक जाता हु तो वो भाग जाती है, पता नहीं क्यों?

जहान्वी : शायद तुम्हे जो खाना है वो उसके पास नहीं है.

शिव : ऐसा तो हो नहीं सकता, है उसके पास, मुझे पता है.

जहान्वी : पर जैसा तुम्हे चाहिए वैसा न हो.

शिव : (मुझे भी उनकी बात समाज नहीं आयी, आखिर वो कहना क्या चाहती थी, में उन्हें देख कर समझने की कोशिस करने laga)Me समजा नहीं. (वो कुछ नहीं बोली, बस नज़ारे झुका ली उन्होंने, में उठा और उनके पास गया, उनकी चेयर को मेरी और घुमाया, पर वो नज़ारे झुकाये हुएहि थी, मेने झुक कर उनके दोनों हाथ पकड़े, वो सिमटने लगी, मेने उन्हें चेयर से हल्का खींचा तो वो कड़ी भी हो गयी, पर मेरी और नहीं देख रही thi)(Jhanvi का दिल जोरो से धड़क रहा था, उसको शिव अच्छा भी लगता था पर वो वर्जिन नहीं है ये बात उसके दिल में बेथ गयी थी, पर फिर भी वो उसके सामने नज़ारे झुकाये कड़ी rahi)Kya बात है? (वो कुछ नहीं बोली) में पसंद नहीं (उसने न में शिर hilaya)Matlab में पसंद नहीं.

जहान्वी : ऐसी बात नहीं है. (उन्होंने फ़ौरन कहा)

शिव : तो फिर क्या बात है? (वो फिर कुछ नहीं बोली, में उनको दीवाल के सहारे खड़ा कर diya)Bolo वर्ण फिर में उस दिन की तरह जबरदस्त कर लूंगा, (वो फिर भी कुछ नहीं बोली बस नज़ारे झुकाये कड़ी rahi)Me सच कह रहा हु, में फिर वो बदतमीजी कर लूंगा. (वो बस नज़ारे झुकाये हुए कड़ी थी न कुछ बोल रही थी न मन कर रही थी, में उनके चेहरे को देखने लगा, सच में वो एक खूबसूरत लड़की थी, उनके होठ कैंप रहे थे, उनकी सांसे भी तेज चल रही थी, मतलब तो साफ़ था की उन्हें मेरे किश करने से कोई भी एतराज नहीं था, वो जोर जोर से सांसे ले रही थी तो उनके स्तन भी ऊपर निचे हो रहे थे, ये सब देख कर में भी सब भूल गया, में भी उत्तेजित होने लगा था, मेरी भी सांसे तेज हो रही थी, में थोड़ा और नजदीक गया, गाल को सत्ता कर उनके कान में धीरे से kaha)Me सच में जबरदस्ती किश कर लूंगा (उन्होंने मेरे शर्ट को कमर से मुठी में भर लिया, में थोड़ा दूर हुआ और उनके चेहरे को देखने लगा, वो बहोत उत्तेजित दिख रही थी, चेहरे पर गंभीरता थी, साँस भी ठीक से नहीं ले प् रही थी, मेने चेहरा और नजदीक किआ और मेरी नक् उनकी नक् से टकराई, में अपनी नाक को उनकी नक् पर रगड़ने laga)Me सचमे किश कर लूंगा (उन्होंने अपना चेहरा थोड़ा ऊपर उठा दिया, वो पूरी तरह से तैयार थी, वो चाहती थी की में किश करू, उनकी सांसे भी मुझे सुनाई दे रही थी, मेने दाहिना हाथ ऊपर किआ और उनके गले को और कंधे को ऐसे सहलाने लगा की मेरे हाथ को उनके स्तन का ऊपर भाग भी महसूस हो रहा tha)Meri और देखो जहान्वी (उसने एक पल नज़ारे उठायी पर फिर झुका di)Tum चाहती हो की में ऐसा करू? (उसने कोई जवाब नहीं दिया, में अपने होठ और नजदीक ले गया, अब मेरे होठ उनके होठो से छूने भी लगे the)Jhanvi (उसने मेरे शर्ट को और जोरो से मुठी में कास लिया, और अपने चहरे को आगे किया, मेरे होठो उनके होठो से सात गए, पर अभी किश नहीं कर रहे थे, मेरे होठ थोड़ा खुले और मेने उनके ऊपरी होठ को पकड़लिया, वो मुझसे सात गयी, मुझसे भी अब रहा नहीं गया तो मेने उनके होठो को अच्छे से चूसना सुरु कर दिया, वो भी मेरे होठो को चूसने लगी,





सांसे तेज चलने लगी थी, मेरा लुंड भी खड़ा हो चूका था, मेने एक हाथ को निचे किआ और उनकी कमर को पकड़ कर मेरी और खिंचा तो मेरा लुंड पूरी तरह से उनकी छूट से सात गया (उनकी सांसे और तेजी से चलने लगी, नक् से सांसे लेना भी मुश्किल हो गया था, मेने लुंड से एक दो धक्के भी मर दिए, और कमर से हाथ निचे ले जा कर उनके पोस्ट कूल्हे को मसल दिया) (जहान्वी से बर्दास्त नहीं हो रहा था, साँस भी नहीं ले प् रही थी, उसने अपना शिर दीवाल से लगा दिया और ऊपर देखते हुए जोर जोर से सांसे लेने लगी, में उनके गले पर किश करने लगा, वो मेरी कमर को पकड़ कर अपनी और खींचने लगी)





जहान्वी : शह्ह्ह्ह शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह. नहीं शिईयिव शह्ह्हह्ह्ह्ह, मात करो शहहहहह.





शिव : क्यों भाग रही हो, मान नहीं है क्या?





जहान्वी : शहहहहह मात करो शिईयिव शह्ह्ह्ह तुम्हारी नजरो में गिर जाउंगी में शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : पागल हो क्या, ऐसी क्या बात है?

जहान्वी : शह्ह्ह्ह नहीं बता सकती शह्ह्हह्ह्ह्ह, मात करो शहहहहह.

शिव : तुम नहीं चाहती की ऐसा करू में.

जहान्वी : शहहहहह चाहती हूउउउउ.

शिव : तो फिर.

जहान्वी : नहीं बता सकतीईई शह्ह्ह्हह्ह मात करो शह्ह्ह्हह्ह.





शिव : आज तो बताना hi पड़ेगा तुम्हे (में दोनों हाथो से कूल्हे पकड़ कर अपने लुंड को छूट पर ठोकने लगा)

जहान्वी : शह्ह्ह्ह माआ शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह.

अभी हमारा ये खेल चल hi रहा था की निचे का दरवाजा खुलने की आवाज आयी हम दोनों ने एक दूसरे को देखा, तभी सीढ़ियों पर किसी के चाहड़ने की आवाज आयी तो हम दोनों अलग हुए, वो चेयर पर बेथ गयी और में सामने चेयर पर बेथ गया. (वो अपने बल ठीक करने लगी और अपना चेहरा सही करने लगी, मेने भी अपने होठ पोछे, की तभी पिंकेशभाई दरवाजे पर आये.

पिंकेश : आ जाऊ मैडम.

जहान्वी : (अपने आपको सँभालते hue)Ha आओ. (फिर वो सब काम के लिए बताने लगा, ये हो गया है अब ये करना है, और ये मंगवाना है, वगैरह वगैरह, पंद्रह मिनट तक वो सब बताता रहा और जहान्वी सुनती रही, उसका जरा भी मान नहीं था, वो कैसे भी पिंकेश को भेजना चाहती थी, वो शर्मा कर बार बार शिव को देख रही thi)Thik है, चालू करवाओ, में आर्डर कर देती हु.

पिंकेश : (पर पिंकेश के मन में काम hi चल रहा था, उन्होंने मेरी और देख कर kaha)Agar फ्री हो तो जरा तुम क्सक्स नंबर में देख लो में दूसरे घर की इंस्ट्रक्शन दे देता hu.(Us बेचारे को थोड़ी न पता था की अभी एक कोनसा काम चल रहा था और उसने आ कर उसमे भांग दाल दिया)

शिव : है है, क्यों नहीं, चलिए. (वो आगे बहरे निकले, मेने जहान्वी को देखा, वो मुझे बिनती भरे अंदाज में देख रही थी, उसकी आंखे कह रही थी की मात जाओ, पर मेरे पास रुकने का कोई बहाना नहीं था, मेने उसे आँखों hi आँखों में सॉरी कहा और वह से बहार निकल गया)

थोड़ी देर जहान्वी दरवाजे को hi देखती रही, फिर टेबल पर अपने हाथ रख कर उसने अपना शिर पकड़ा और अभी जो हुआ था उसके बारे में सोचने लगी, उसके चेहरे पर एक सुकून की मुस्कान आ गयी जीस्त तरह से शिव ने उसे पकड़ा था वो अंदर hi अंदर बहोत खुस हो रही थी, अगर अभी पिंकेश न आया होता तो शायद कुछ भी हो जाता, वो अकेले अकेले hi शर्माने लगी. वही दूसरी तरफ ध्रुव अपनी तैयारिओं में लगा हुआ था.

ध्रुव : तू वो टेबलेट ले आया?

दोस्त : है ले आया हु, पर ये टेबलेट क्यों मंगवाई, वो गरम करनेवाली मंगवाता तो और मज़ा आता न, साली छोड़ने के लिए तड़प उठती, ऐसी गरम लड़की को छोड़ने में मज़ा आता.

ध्रुव : मेने भी पहले यही सोचा था पर ये साली अलग है, गरम तो हो जाती पर पुरे होशमे रहती और कही अपने आपको संभल ले तो लेने के देने पद सकते है, में कोई रिस्क लेना नहीं चाहता, एक बार बेहोशी में hi कर लेंगे, बाद में तो वो छुडवायेगी hi, तब वो टेबलेट दे कर छोड़ेंगे.

दोस्त : हमें भी छोड़ने देगा न?

ध्रुव : अभी नहीं, पहले में उसको अच्छे से छोड़ लू बाद में तो तुम सबको छोड़ना hi है, अभी तो साली मेरी hi पर्सनल रंडी बनेगी, बहोत उड़ रही है न, उसको भी पता चले की ध्रुव क्या चीज़ है.

दोस्त : पर ये सब होगा कैसे?

ध्रुव : ये टेबलेट उसको बियर में मिला कर दे देंगे, जब उसको नींद आएगी तो हम उसको एक कॉटेज में ले जायेंगे, वह में उसकी वीडियो बनाते हुए छोड़ लूंगा, सिंपल है.

दोस्त : पर भाभी भी तो होंगी न, उनको पता चल गया तो?

ध्रुव : उसको hi कहा है की वो उसे नशेवाली ड्रिंक देगी, और वो hi उसे कॉटेज में ले आएगी, तू फ़िक्र मत कर, सब सेट है.

दोस्त : तुम्हारे तो मज़े है यार, अपने दोस्तों को भूल मत जाना.

ध्रुव : क्यों बे चूतिये, इतने तो मज़े करवाए है, विदेशी रंडिया भी लाया हु की नहीं.

दोस्त : है भाई, तुम्हारी वजह से तो विदेशी लड़कीअ छोड़ने का मौका मिला है वर्ण हमारी क्या औकात.

ध्रुव : बस तो फिर, उस दिन भी दो तीन रंडिया भी आएगी, तुम भी मज़े करना.

दोस्त : वह भाई, तुम अपने दोस्तों का कितना ख्याल रखते हो.

आज बिना अपने ससुराल आयी थी, उसने फ़ोन से अपने पति को समजा दिया था, उसने गुरूजी से मिलने का सारा अरैंजमेंट करवा दिया था. दोनों अभी उनके ठिकाने की और hi जा रहे थे.

जिग्नेश : ऐसी क्या जरुरत ाँ पड़ी जो तुम्हे गुरूजी से मिलना है, पापा सब देख रहे है न.

बिना : (अपने पति की और देखते hue)Hai कुछ काम, उनसे मिल कर hi सब पता चलेगा.

जिग्नेश : ऐसा क्या है जो उनसे मिलकर hi पता चलेगा, और ऐसा कुछ था तो मुझे बता देती में मिल आता, तुम इतनी दूर तक क्यों आयी?

बिना : क्यों मेरा आना अच्छा नहीं लगा? (उसने अपने पति को मीठे गुस्से से देखा)

जिग्नेश : पागल है क्या, मुझे क्यों अच्छा नहीं लगेगा, में तो बस तुम्हारे लिए फ़िक्र कर रहा था, इतनी दूर तक आयी हो. वैसे अब तो बता सकती हो न की क्या पूछना है तुम्हे?

बिना : अभी नहीं, पहले में उनसे बात कर लू फिर बताती हु.

जिग्नेश : (थोड़ा चिढ़ते hue)Kya बात है पता नहीं, अपने पति से भी छुपा रही हो. (उसने हलके गुस्से से कहा)

बिना : (वो मान में सोचने लगी की क्या बताऊ, क्या बताऊ, फिर उसे कुछ सुजा तो वो boli)Wo गुरूजी बता रहे थे न की सबका आना जरुरी है, पर मुझे नहीं लगता की सब आ पाएंगे, आप को तो चाचाजी और चाचीजी की हालत पता hi है, अब ऐसे में उनकी अनुपस्थिति में अगर ये अनुष्ठान होगा तो क्या वो हमें लाभ दे पायेगा?

जिग्नेश : ये तो पापा को भी पता है, उन्होंने पूछा भी तो था, तुम ख़म खा टेंशन ले रही हो, इतनी सी बात के लिए यहाँ तक चली आयी, एक बार पूछ तो leti.(Usne हलके गुस्से में hi कहा)

बिना : (वो चुप रही, क्यों की वो सही कारन तो बता नहीं सकती थी, पर उसका गुरूजी से मिलना आवश्यक था, उसको ये जान न था की शिव कही शिवांश तो नहीं, उसको पूरा यकीं था की वो शिवांश hi है, अगर ऐसा हुआ तो वो क्या करेगी, उसको नींद नहीं आती थी, वो बेचैन hi रहती थी, और ऐसे समय में जब उसके गर्भ में बच्चा था उसका इन परिस्थितिओ में रहना भी ठीक नहीं था, उसके बच्चे पर भी इसका असर हो सकता था. इसीलिए वो आज यहाँ आ गयी थी, उसने ममतादिदी से भी बात की थी पर वो नहीं आ शक्ति थी, इसीलिए वो अकेले hi आ गयी थी. दोनों खामोश बैठे रहे, थोड़ी देर बाद दोनों एक आश्रम में पहुंच गए, थोड़ा जंगल जैसे इलाके में ये आश्रम था,





कुछ अनुयायी यहाँ वह अपने काम में लगे हुए थे, कुछ लोग भी दिख रहे थे वह, बहार कुछ कार भी पड़ी हुई थी. लोग बहोत मानते थे गुरूजी को, दूर दूर से उनसे मिलने आते थे लोग. बिना ने साड़ी पहनी थी, वो दोनों अंदर आये और एक अनुयायी से गुरूजी से मिलने की ख्वाहिस जताई और अपनी पहचान भी उसको बायती, उसने एक कुटीर में प्रतीक्षा करने को कहा, और वो वह से चला गया. जिग्नेश इधर उधर देख रहा था फिर वो अपनी बीवी को भी देख लेता था, वो नज़ारे झुकाये बैठी थी और किसी सोच में hi डीठि, वो कुछ नहीं बोलै बस बैठा रहा. करीब पंद्रह मिनट बाद वो अनुयायी वापस आया और उनसे अपने साथ चलने को कहा, दोनों उसके साथ चल दिए बिना ने साड़ी का पल्लू अपने शिर पर ले लिया. गुरूजी एक पेड़ की छाव में बैठे हुए थे, उनके पास एक औरत और एक मर्द बैठे हुए थे, अनुयायी ने उन्हें वही रुकने को कहा, थोड़ी देर बाद वो दोनों गुरूजी के पॉ छू कर वह से निकल गए तो अनुयायी ने उन्हें जाने को कहा, दोनों उनके पास पहुंचे, दोनों ने उनके पेअर छुए.

गुरूजी : जीते रहो, आओ बैठो. (दोनों वही निचे बेथ gaye)Kaho कैसे आना हुआ? (जिग्नेश ने अपनी पत्नी की और देखा)

बिना : गुरूजी आपसे बात करनी थी.

गुरूजी : कहो पुत्री, जो पूछना है पूछो, हमारे बस में होगा तो हम जरूर उत्तर देंगे.

बिना : (अपने पति की उपस्थिति में थोड़ी हिचकिचारहि थी, और ये गुरूजी ने भी नोटिस kia)Babaji, आपको ज्ञात है न आपने हमारे घर पर हमसे क्या कहा था?

गुरूजी : (मुस्कुराते hue)Yaad है बेटी.

बिना : (उसने अपने पति की और देखा, वो सीधे सीधे बात करने से कटरा रही thi)Apne अनुष्ठान में सब को आने को कहा है, क्या ये मुमकिन है बाबाजी?

गुरूजी : ये सब तो ऊपरवाला तय करता है बेटी, वो जो चाहेगा वो होगा. (बिना बेचैन हो रही थी, उसे जो पूछना था वो पूछ नहीं प् रही थी, वो अपनी साड़ी का पल्लू मसल रही थी, गुरूजी उसकेमान को समाज गए और जिग्नेश से कहा) बीटा मुझे इनसे कुछ बात करनी है अगर तुम्हे एतराज न हो तो.

जिग्नेश : नहीं बाबाजी, मुझे क्या एतराज होगा (कहते हुए वो खड़ा हुआ और जिस और से आया था उस और चला गया, थोड़ी दूर जा कर वो खड़ा हो गया, यहाँ से वो उन दोनों को देख सकता था पर उनकी बाटे नहीं सुन सकता था, उसको भी बेचैनी हो रही थी की आखिर ऐसी क्या बात है जो इनको करनी है)

गुरूजी : कहो बेटी, क्या बात है?

बिना : बाबाजी, आप तो सब जानते है, आपने जो कहा था वो अभी भी मेरे दिमाग में गूंज रहा है, उसका हमारे घर से क्या कोई नाता है?

गुरूजी : (उन्होंने मुस्कुराते हुए dekha)Tumhe क्यों जान न है बेटी?

बिना : (उल्जन भरे स्वर se)Babaji आप ने जो कहा है तब से में बेचैन हो उठी हु, मेरी समाज में नहीं आ रहा है की में क्या करू, मुझे शक है की वो वो....

गुरूजी : आज तुम्हे जिस बात का ख्याल आ रहा है, उस वक़्त नहीं आया था जब तुम ने ये कदम उठाया. (बिना की शर्म के मरे नजर झुक गयी, ये सच hi था की उसने शिव के साथ सम्बन्ध बनाये ये गलत hi था) एक बात बता ता हु बेटी, जो कुछ भी होता है वो हमारे बस में नहीं होता, जो उपरवाले की मर्जी हो वही होता है, तो जो हो चूका है उसके बारे में सोच कर परेशान क्यों हो रही हो, जो होना था वो हो चूका है.

बिना : पर वो hi क्यों बाबाजी, और सिर्फ में अकेली होती तो समाज में भी आता, पर हर जगह वो hi क्यों, क्यों बाबाजी?

गुरूजी : ऐसे बहोत सरे क्यों होते है बेटी, अगर सब हमारी समाज में आ जाता तो हम hi भगवन हो जाते, उसकी लीला है, वो hi जाने.

बिना : पर बाबाजी इतना तो बता दीजिये की वो ...वो हमारे कुल का hi है?

गुरूजी : भविष्य जान न एक अभिशाप है बेटी, अगर हमे सब पहले से hi पता हो की क्या होनेवाला है तो इंसान जीने का मज़ा hi खो देगा, ये जीवन कई पहेलिओ से भरा हुआ है, कई उतर चढाव है इसमें, अगर दुःख न हो तो सुख का मज़ा नहीं आता, अगर हर न हो तो जीत का मज़ा नहीं होता, और जैसा मेने कहा की इंसान को अगर सब पता चल जाये तो वो भगवन बन जाये, और में कोई भगवन नहीं हु, एक सामान्य सा इंसान hi हु, और में भी गलत हो सकता हु, तो कुछ भी कहना मेरे लिए भी संभव नहीं है.

बिना : आप hi मेरे मार्गदर्शक है, अगर ाफी ऐसा कहेंगे तो हम जैसे तुच्छ इंसान कहा जायेंगे, जहा तक मुझे पता चला है, आपने हमारे कुल के उस चिराग की भी कुंडली पढ़ी थी, क्या ये वो हो सकता है?

गुरूजी : होने को तो कुछ भी हो सकता है बेटी, उसकी लीला है, न जाने उसने क्या सोचा है.

बिना : आप मुझे उलझा रहे है गुरूजी, मुझे स्पस्ट उत्तर दीजिये, क्या ये वो hi है की नहीं, और अगर है तो इस अनुष्ठान में उसका होना आवश्यक है की नहीं?

गुरूजी : (मुस्कुराये) मेने कहा न बेटी, में भगवन नहीं हु, है में कुछ अनुमान लगा शक्ति हु, पर वो भी जरुरी नहीं की सही hi हो, तुम्हारा सोचना जायज है, पर अभी परिस्थिति स्पस्ट नहीं है, और अगर एक बार मान भी ले की ये वो hi है तो उसका वह उपस्थित होना आवश्यक है पर ये भी याद रखना की उसका वह होना उसके लिए घातक भी हो सकता है, भाग्य ने कुछ सोच कर hi उसको अपने स्थान से दूर किया होगा, और जब समय आएगा तो वो वापस भी आ जायेगा, अगर उस से पहले आया तो उसके लिए खतरा भी हो सकता है.

बिना : इसका मतलब ये वो hi है?

गुरूजी : (मुस्कुराते hue)Ye तुम्हारे शब्द है बेटी, तुम मुझे अपने शब्दों में बांध रही हो, मेने ऐसा कुछ भी नहीं कहा.

बिना : बाबाजी, आप मुझे उलझा रहे हो, मुझे येबताइये की उसको अनुष्ठान में होना चाहिए की नहीं.

गुरूजी : वो तुम्हारे बच्चे का होनेवाला बाप है, और ये अनुष्ठान हम बच्चो के लिए hi कर रहे है, इस नाते उसका वह होना आवश्यक है, पर अगर ये वो hi है तो उसके लिए खतरा भी है, और ऐसी कई बाटे है जो अभी तुम्हे पता नहीं है, आगे जा कर उलझने और बढ़ सकती है.

बिना : (उसका दिमाग घूम रहा था, उसको कुछ समाज नहीं आ रहा tha)Anusthan कब रख रहे हो आप?

गुरूजी : इस माह की पूर्णिमा को.

बिना : ठीक है गुरूजी, तो फिर में उसे ले आउंगी.

गुरूजी : ये तो भाग्यै तय करेगा. जो उसके भाग्य में होगा वो hi होगा.

बिना : अगर ये वो hi है तो मेरी उलझाने बढ़ जाएगी गुरूजी.

गुरूजी : तुमने अपनी ये परिस्थिति खुद hi निर्माण की है, अब तुम इसे बदल नहीं सकती, तो जो हुआ है उसका स्वीकार करो, जो भाग्य में है वो hi होगा.

बिना : में आपके पास जवाब की आशा से आयी थी, आपने तो मुझे और उलझा दिया.

गुरूजी : मेने कहा था बेटी, भविष्य जान न और ज्यादा खतरनाक है, उस से इंसान उलझ hi जाता है, तो जो हो रहा है उसे स्वीकार करो और इस जीवन का आनंद लो.

बिना : (प्रणाम करते hue)Jaisi आपकी आज्ञा गुरूजी. (उसने अपने पति की और देखा और उन्हें भी बुलाया, दोनों ने मिल कर गुरूजी के पेअर छुए)

गुरूजी : कल्याण हो. (जिग्नेश ko)Tumhari पत्नी जो कर रही है वो तुम्हारे कुल के उद्धारके लिए hi कर रही है, उसका साथ देना.

जिग्नेश : जी बाबाजी, आज्ञा दीजिये.

वो दोनों वह से निकल गए, वो जाना चाहते थे पर अनुयायिओं ने उन्हें भोजन करवा कर hi bheja.Raste में जिग्नेश बहोत कुछ पूछना चाहता था पर वो चुप रहा, वैसे भी वो अपनी पत्नी को जनता था, वो स्वाभाव की अच्छी थी, सबका ख्याल रखती थी, गुरूजी ने भी कहा की वो जो कुछ कर रही है उसके कुल के उद्धार के लिए hi कर रही है, तो उसने ज्यादा पूछताछ करना ठीक नहीं समजा, दोनों वह से घर आ गए.

उसके बाद काम की वजह से मुझे कोई मौका नहीं मिला, जहान्वी भी वह आ गयी जहा में काम कर रहा था, वो ऐसे hi बेहवे कर रही थी जैसे कुछ हुआ hi न हो, कभी कभी हमारी नज़ारे आपस में टकरा जाती तो वो शर्मा जाती थी. में भी मुस्कुरा देता, ऐसे hi छूटने का समय हो गया, मुझे जाना था क्यों की जूही वेट कर रही होगी, जहान्वी की नज़ारे मुझे रुकने का निमंत्रण दे रही थी पर में रुक नहीं सकता था. में वह से निकलने गया. थोड़ी hi देर बाद उनका मश्ग भी आ गया.

जहान्वी : रात को में लेने आउंगी.

शिव : Ok.

मेने और कुछ नहीं कहा, में वह से घर आ गया और तैयार हो कर जूही के वह पहुंच गया, उसने दरवाजा खोला और शर्मा गयी, वो ट्रैक पहने रेडी थी.

शिव : (तुम ठीक हो, मेने अंदर आते हुए पूछा, वो बिना कोई जवाब दिए मुझसे लिपट गयी, मेने भी उसको बहो में भर लिया, वो मेरे गले लगे रही, थोड़ी देर बाद में थोड़ा अलग हुआ और उसकी आँखों में देखते हुए puchha)Bataya नहीं, ठीक हो? (उसने शरमाते हुए हां का इस्सर किआ, उसको बहोत शर्म आ रही थी, आज जैसे सब बदला बदला लग रहा था उसे, शिव से शर्म भी आ रही थी और उसको अपनी बाहोंमे भरने का भी मान कर रहा था, वो फिर से गले लग गयी, शिव की नजरो का सामना करना भी उसको शर्मा दे रहा tha)Agar ठीक नहीं हो तो आज मात आओ.

जूही : (धीमी आवाज me)Me ठीक हु, जितना होगा में कर लुंगी, और तुम तो कर hi सकते हो न, तुम जानते हो अब ज्यादा म्हणत करनी पड़ेगी, एक एक दिन कीमती है.

शिव : ठीक है जाते है, पर कुछ देर तो रुक शक्ति है na(Mene नॉटी स्माइल के साथ कहा)

जूही : (मेरा मतलब समाज कर वो शर्मा gayi)Kyu? (उसने शर्म से मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : (उसके नाजुक होठो पर अंगूठा फिरते हुए kaha)Thodi एनर्जी तो ले लू. (वो शर्मा गयी, मेने देर न करते हुए उसके होठो को पीना सुरु कर दिया)

जूही : (वो भी तो यही चाहती थी, वो भी लिपट गयी और उसका पूरा साथ देने लगी, कुछ देर बाद उसने अपने आपको छुड़ाया और हांफ ने लगी)

शिव : क्या हुआ?

जूही : (शरमाते hue)Basss, वर्ण में अपने आपको रोक नहीं पाऊँगी, संजो न. (में उसकी बात से मुस्कुराया तो वो और शर्माने लगी, मेने उसको ज्यादा तंग करना सही नहीं समजा क्यों की में भी फिर नहीं रुक पता)

शिव : ठीक है चलो. (हम दोनों बहार निकले, उसने लॉक लगाया और मेरे पीछे आ कर बेथ गयी, उसने मेरी कमर में हाथ डाला और मुझसे सात गयी, मेने बाइक आगे बढ़ा दी, हम दोनों स्टेडियम पहुंच गए, और प्रैक्टिस करने लगे, में देख रहा था की उसको थोड़ी तकलीफ है पर फिर भी वो जी जान से म्हणत कर रही थी, उसको देख कर मुझे उस पर और प्यार आने लगा, वो अपने गोआल के प्रति कितनी समर्पित थी, उसको देख कर मुझे भी हौसला मिल रहा था, में भी अपनी पूरी सकती के साथ प्रैक्टिस करने लगा, हमारी म्हणत को लोग देख रहे थे, अब उन्हें ये भी पता था की हम किस लेवल पर पहुंच गए है तो उनकी नजरो में हमारे लिए एक अलग hi भाव था, उनके लिए हम प्रेरणा थे, हमदोनो ने लगातार दो घंटे तक जी तोड़ म्हणत की, आखिर कर अँधेरा होने पर हम वह से निकल गए, जब मेने उसे घर छोड़ा तो उसने अंदर आने को कहा)

शिव : मुझे कही जाना है, घर जा कर नाहा कर तैयार होना पड़ेगा.

जूही : कहा जा रहे हो?

शिव : झांविमडम ने बुलाया है, वो मुझे अपने साथ पार्टी में ले जा रही है.

जूही : तुम जाओ उस से मुझे कोई एतराज नहीं है पर ऐसी पार्टयों में नशा करते है ऐसा मेने सुना है, तुम दूर रहना इनसब से. एक खिलाडी के तौर पर तो ये अच्छा नहीं hi है पर एक इंसान के तौर पर भी ये अच्छा नहीं होता, समाज रहे हो न. (उसने बड़े प्यार से कहा)

शिव : बहोत ख्याल रखती हो न मेरा.

जूही : (मुस्कुराते hue)Wo तो रखूंगी hi, और अब तो और ज्यादा रखूंगी.

शिव : वो क्यों?

जूही : क्यों की अब हम एक है, और में ख्याल नहीं रखूंगी तो कोण रखेगा.

शिव : तुम hi रखना, ok में चलता हु, bye, लव यू.

जूही : Bye, लव यू तू.

में वह से निकल गया, घर पहुंच कर नाहा लिया और कपडे पहन लिए, इतने ज्यादा अच्छे तो नहीं थे पर जो भी थे वो पहन लिए. लतादिदी को भी बता दिया की में कहा जा रहा हु. में इंतजार कर रहा था की जहान्वी का फ़ोन आया, वो बहार आ चुकी थी. में बहार गया, उसने गाड़ी का दरवाजा खोला तो में अंदर आ गया, मेने देखा की वो एक खूबसूरत ड्रेस पहने हुए थी





ब्लैक कलर का टॉप था जो कंधे से निचे था, कुछ दिख नहीं रहा था पर उनके गोर कंधो को उजागर किये हुए थे, मेकअप भी किआ हुआ था, गले में सफ़ेद मोतिओं की माला टी और बल खुले हुए थे, देख कर hi लग रहा था की वो किसी को भी अपनी और आकर्षित करने को सक्षम है, कुछ पल में उन्हें hi देखता रहा. (शिव को अपनी और ऐसे देखते देख वो शर्मा गयी, और धीरे से बोली)

जहान्वी : ऐसे क्या देख रहे हो?

शिव : आप भोत खूबसूरत लग रही हो.

जहान्वी : तो क्या इस तरह देखोगे? (उन्होंने मुस्कुरा कर कहा)

शिव : इस तरह मतलब?

जहान्वी : कुछ नहीं, चले?

शिव : चलिए. (दो पहर की घटना के बाद हम पहली बार अकेले में मिले थे, क्या बोलू समाज में नहीं आ रहा था, शायद उनका भी यही हल था, वो गाड़ी चला रही थी, मेने उनकी और देखा तो उनके चेहरे पर मुस्कान थी, मुझे अपनी और देख कर उन्होंने भी मेरी और देखा, और आँखों के इससरए से पूछा, क्या????, मेने न में गर्दन हिलायी, वो समाज रही थी, वो भी मुस्कुराते हुए आगे देखने लगी और गाड़ी चलने लगी, थोड़ी देर बाद हम सिटी से बहार निकल aaye)Hum कहा जा रहे है?

जहान्वी : कोई फार्म हाउस है, में भी नहीं गयी कभी, एड्रेस है, धुंध लेंगे. कार चलाओगे?

शिव : में इस वक़्त?

जहान्वी : क्यों अपने आप पर भरोसा नहीं है?

शिव : है, पर में अभी इतना तेज नहीं चला सकता.

जहान्वी : हमे भी कोनसी जल्दी है, वो तो तुम आ रहे थे इसलिए में आयी वर्ण में आती hi नहीं, हमारे थोड़ी देर से पहुंचने से क्या फर्क पद जायेगा, तुम्हे चलनी है की नहीं.

शिव : ठीक है. (दर तो मुझे भी लग रहा था, पर अब इतना तो कॉन्फिडेंस था की गाड़ी चला लू, उन्होंने गाड़ी साइड में की और निचे उतर गयी, में भी उतर गया, जब वो घूम कर मेरे सामने आयी तो मेने उन्हें ऊपर से निचे तक देखा, निचे लम्बा स्कर्ट पहना था पर ऊपर कन्धा और पेट नंगे थे, और इस रौशनी में भी उनका गोरा रंग दमक रहा था, हम दोनों की नज़ारे टकराई, वो शर्मा गयी और मुस्कुराते हुए दूसरी और चली गयी, में भी ड्राइविंग सीट पर बेथ गया, मेने एक बार गियर, क्लच और सब देखा, वो मुझे hi देख रही थी, मेने भी उनकी और देखा और मुस्कुराया, गाड़ी चालू hi थी, तो मेने गाड़ी गियर में डाली और चलने लगा, अँधेरा था और सामने से आती गाड़िओ की रौशनी में मुझे देखना मुश्किल हो रहा था, में धीरे धीरे hi गाड़ी चला रहा था)

जहान्वी : सामनेवाली गाड़िओ की रौशनी की परवाह मत करो, उनकी और मात देखो, अपने रस्ते पर नजर गड़ाए रक्खो और कुछ न भी दिखे तो अपने रस्ते पर गाड़ी सीधी चलते रहो, कुछ नहीं होगा.

शिव : (मुझे दर भी लग रहा था, पर में गाड़ी चलता raha)Aap कैसे चलती हो, मुझे तो कुछ दिख hi नहीं रहा है.

जहान्वी : रात को ऐसा होता है, मुझे भी नहीं दीखता जब सामने से गाड़ी आती है, पर अपने रस्ते पर नजर गड़ाए रक्खो और जो रस्ते पर सफ़ेद धारिया बानी हुई है उस पर अपनी नजर रखना, कार उसके बहार न जाये, बस यही ध्यान रखना. (थोड़ी hi देर में में अभ्यस्त हो गया, स्पीड तो ज्यादा नहीं थी पर में गाड़ी चला रहा tha)Achchha चला रहे हो.

शिव : अपने hi सिखाया है, वर्ण में कहा गाड़ी चला पता.

दूसरी और ध्रुव बेचैन था, वो जहान्वी का इंतजार कर रहा था, पर भी तक वो नहीं दिखी थी, 8 बजे का सबको बोलै था पर भी साढ़े अंत होने को आये थे पर अभी तक वो नहीं दिखी थी. वो करुणा के पास गया जो अपनी सहेलिओ के साथ थी और बाटे कर रही थी. उसने करुणा को एक साइड में बुलाया.

करुणा : क्या हुआ?

ध्रुव : जहान्वी नहीं आयी, तुमने बात तो की थी न?

करुणा : (थोड़ा चिढ़ते hue)Ha की थी, वो निकल रही थी घर से.

ध्रुव : तो अभी ता आयी क्यों नहीं फिर.

करुणा : जितना इंतजार उसका कर रहे हो कभी मेरा किआ है क्या? (उसने हलके गुस्से से कहा)

ध्रुव : (जो अभी परेशान tha)Tum अलग हो और वो अलग है.

करुणा : क्या मतलब है तुम्हारा? (उसने घूरते हुए कहा)

ध्रुव : (थोड़ा संभल kar)Are यार, तुम तुम हो, वो वो है, तुम तो मेरी जान हो, उस से तो बस बदला लेना है, तुम तो ख़म खा गुस्सा हो रही हो.

करुणा : अभी भी समय है ध्रुव, एक बार फिर सोच लो, वो जहान्वी है, जानते हो उसेतुम, उसका भाई और उसका बाप कोण है ये भी तुम्हे पता है, एक बार फिर सोच लो.

ध्रुव : तुम क्यों फ़िक्र करती हो, सब सेट है, बस एक बार आ जाये, फिर कभी वो अपना मुँह नहीं खोलेगी, ट्रस्ट में यार.

करुणा: पता नहीं क्यों पर मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा.

ध्रुव : तुम तो ऐसे hi परेशान हो रही हो, में सब संभल लूंगा.

(में गाड़ी चला रहा था, उन्होंने गूगल मैप ों किआ और मुझे रास्ता बताती गयी, हम एक अँधेरी सड़क पर थे, लग रहा था की आगे कुछ भी नहीं है, शायद रास्ता भटक गए the)Rasta तो सही है न, कुछ दिख नहीं रहा है, न कोई गाड़ी आ जा रही है.

जहान्वी : गूगल मैप तो यही रास्ता दिखा रहा है, फार्म हाउस है न तो ऐसी जगह पर hi होगा, एक दो किलोमीटर hi रह गया है, जो दिखा रहा है वह जा कर देख लेते है अगर न हुआ तो वापस चले जायेंगे. (में गाड़ी चलता रहा, आखिर कर हम वह पहुंच गए, वह बहार बोर्ड लगा हुआ था जिस पर एक लाइट थी, पर पीछे बड़े बड़े पेड़ थे तो अँधेरा hi था, हम गेट के पास पहुंचे तो एक गार्ड आया, और उसने दरवाजा खोल दिया, जैसे hi गाड़ी नजदीक पहुंची उसने सलाम किआ) ये ध्रुव का फार्म है?

गार्ड : है है, आप गाड़ी अंदर ले लीजिये, अंदर पार्किंग है.

शिव : (मेने गाड़ी अंदर ले ली, कुछ दिख नहीं रहा tha)Ajeeb जगह hai.(Wo कुछ नहीं बोली बस अस्स पास देख रही थी, थोड़ा अंदर जाने पर हमे रौशनी दिखाई दी, वह भी एक गार्ड खड़ा था, उसने हमे रास्ता दिखाया और गाड़ी कड़ी करने की जगह बताई, मेने गाड़ी वह कड़ी कर दी, हम दोनों बहार निकले, अंदर काफी रोशनी थी, पूरा माहौल सजाया हुआ था, म्यूजिक की आवाज भी आ रही thi)Bahar से पता hi नहीं चल रहा की अंदर इतना सब हो रहा है.

जहान्वी : है, वो पेड़ो की वजह से कुछ भी दिख नहीं रहा है, चले?

शिव : है चलिए. (हम दोनों चलते हुए अंदर की और जाने लगे, म्यूजिक की आवाज और तेज होती चली गयी, कुछ लड़के लड़कीअ नाच भी रहे थे, पूरी पार्टी सजी हुई थी, में पहली बार ऐसी पार्टी में आया था, जहान्वी सब देखते हुए अंदर जा रही थी, अंदर पहुंचे तो उसे ध्रुव सामने से आता दिखाई दिया, जैसे वो हमारा hi इंतजार कर रहा tha)(Dhruv ने देखा की जहान्वी के साथ कोई और लड़का भी है, उसे देखते hi ध्रुव पहचान गया, पर उसको समाज नहीं आ रहा था की वो जहान्वी के साथ कैसे, पर अभी उसका ध्यान जहान्वी पर था)

ध्रुव : आइये आइये, खुशनसीबी की आप हमारे गरीबखाने पर आये. (वो बहोत खुस था की आखिर कर चिड़िया आ hi गयी, उसे ऊपर से निचे तक देख रहा था, और मान में सोचने लगा, क्या हॉट पटाखा है साली, आज तो जी भर के इसको निचोड़ूंगा)
 
अपडेट 173





ध्रुव खुस था की जहान्वी आ गयी थी और कपडे भी ऐसे पहने थे की देख कर hi क़यामत लग रही थी, उसको देख कर hi उसके मुँह में पानी आने लगा था,





पर साथ में शिव को देख कर उसका मज़ा किरकिरा हो रहा था, उसको समाज में नहीं आ रहा था की जहान्वी शिव के साथ क्यों है, वो मान hi मान शिव को गालिया दे रहा था, पर उसने मुस्कराहट चहरे पर लेट हुए कहा,

ध्रुव : Hi, तुम भी आये हो?

शिव : (मुस्कुराते hue)Ji.

ध्रुव : (जहान्वी की और देख kar)Driver बनाकर या बॉडीगार्ड बना कर लायी हो इससे?

जहान्वी : (जहान्वी को ये अच्छा नहीं लगा की उसने शिव के बारे में ऐसा kaha)Dost है मेरा.

ध्रुव : ओह दोस्त, (शिव की और देख kar)par कमसे काम पार्टी के लायक कपडे तो पहन कर आते.

शिव : (उसकी ये बात सच hi थी, मेने नजर दौड़ाई थी की सब अच्छे कपड़ो में थे, ध्रुव भी काफी महंगे कपडे पहने हुए था और जहान्वी भी बहोत महंगे कपडे पहने हुए thi)Sorry, मेरे पास यही कपडे है.

जहान्वी : (नाराजगी se)Tum क्यों सॉरी कह रहे हो शिव (ध्रुव की और देख kar)Agar तुम्हे एतराज है तो हम यही से वापस चले जाते है.

ध्रुव : अरे नहीं यार, में तो बस ऐसे hi कह रहा था, में तो इसके लिए hi कह रहा था, यहाँ एक से एक खूबसूरत लड़कीअ आयी हुई है, अगर अच्छे कपड़ो में होता तो कोई सेटिंग hi हो जाती (उसने मजाकिए अंदाज से कहा, जैसे चापलूसी कर रहा ho)Tum क्यों बुरा मान रही हो, में तो ऐसे hi कह रहा था, क्या तुम्हे बुरा लगा शिव? अगर लगा हो तो सॉरी बडी, मेरा वो इरादा नहीं था.

शिव : कोई बात नहीं, और मुझे वैसे भी इन सब में इंट्रेस्ट नहीं है, और रही बात किसी लड़की की तो शायद सबसे खूबसूरत लड़की तो मेरे साथ hi है फिर मुझे किसी को इम्प्रेस करने की क्या जरुरत है (मेने जहान्वी को देख कर कहा तो वो मुस्कुरायी, ये देख कर ध्रुव के दिल में कांटे चुभ गए पर वो मुस्कुराता रहा)

ध्रुव : बिलकुल सही कहा, वैसे बहोत तेज हो तुम, बुरा मात मनो यार, दोस्तों में तो ये सब चलता रहता है, आओ तुम अंदर आओ, सब इंतजार कर रहे है. (हम अंदर गए, अंदर पूरा माहौल सजा हुआ था,





कई लड़के लड़कीअ नाच रहे थे, कुछ लोग टेबल पर बेथ कर पि रहे थे, और कुछ हाथ में बोतल लिए नाच रहे थे, वो हमें एक और ले गया जाया करुणा और दूसरी लड़कीअ बैठी हुई thi)Hey करुणा, देखो तो कोण आया है.

करुणा : (उसने जहान्वी को देखा और साथ में शिव को भी, उसको भी समाज में नहीं आया की शिव यहाँ क्यों hai)Hi जहान्वी, hi शिव. (उसने हाथ आगे बढ़ाया तो मेने भी अपना हाथ आगे बढ़ाया, जैसे hi मेने उसके हाथ को पकड़ा वो मेरे हाथ को देखने lagi)Tumhare हाथ तो कितने बड़े है यार, मेरा हाथ तो जैसे कोई छोटी बच्ची जैसा लग रहा है. (में क्या कहता बस मुस्कुराया) Bye थे वे, ये हमारी फ्रेंड है झिनल, रस्मी और वृद्धि. (जहान्वी तो सबको जानती थी तो उसने मुझे परिचय करवाया.

झिनल : Hi शिव (उसने हाथ बढ़ाया तो मेने भी मिलाया)

रस्मी और वृद्धि : Hi शिव. (उन्होंने भी हाथ मिलाया)

करुणा : (थोड़े आश्चर्य se)Tum जानती हो इससे?

झिनल : जानते है न, उस दिन इसके वह नहीं गए थे सब, वो मीडिया के सामने प्रोग्राम रक्खा था तब.

करुणा : है, याद आया.

रस्मी : और वैसे भी कल भी तो इसकी फोटो आयी थी अख़बार में, कोंग्रटुलतिओं शिव.

शिव : थैंक यू.

जहान्वी : (उसने ध्रुव को देखा जो जलन के मरे शिव को देख रहा tha)Kya कहते हो ध्रुव, बिना अच्छे कपड़ो के बिना कोई पैसा खर्चा किये, बिना कोई दिखावा किये भी लोग शिव को जानते है.

ध्रुव : (उसने जूठी मुस्कान di)Are यार तुमने तो बात दिल पर ले ली, मेने तो बस ऐसे hi कहा था, करुणा, इनकी खातिरदारी करो यार, बैठो न तुम दोनों खड़े क्यों हो. (हम दोनों बेथ गए) क्या पिओगे, बियर या वोडका या और कुछ.

शिव : सॉरी, में ये सब नहीं पिता.

ध्रुव : (उसको एक और मौका मिल gaya)Obviously, ये सब बच्चो के लिए नहीं है (और है पड़ा, जहान्वी ने फिर घर के dekha)Sorry सॉरी, मुँह से निकल गया. बियर तो पि शक्ति हो, ये तो लड़कीओ की ड्रिंक है kyu(Wo फिर मुस्कुराया)

शिव : नहीं, में वो भी नहीं पिता.

ध्रुव : यार तो फिर पार्टी में करोगे क्या (और हसने लगा, फिर अपने आपको संभल kar)Tum तो पिओगी न?

जहान्वी : नहीं, मुझे भी नहीं पीना, में जूस hi पिऊँगी.

ध्रुव : तुम्हारी वजह से ये भी मन कर रही है यार, कुछ तो lo(Usne शिव को कहा)

शिव : आप लीजिये न, में ये सब नहीं पिता. (मेने जहान्वी को कहा)

करुणा : तुम पूछ क्या रहे हो, ये बियर पिएगी, तुम ले आओ.

ध्रुव : (मुस्कुराते hue)Jaisa हुकुम. (कहते हुए स्टाइल मरते हुए वो निकल गया).

करुणा : क्या यार तुम भी, पार्टी में आयी हो तो क्या एन्जॉय नहीं करोगी (शिव की और देख kar)Beer पिने से कुछ नहीं होता, अब इतने बड़े तो हो hi गए हो की बियर तो पि hi सको.

शिव : सॉरी, हम एथलिट के लिए ये अच्छा नहीं है.

करुणा : क्या बात कर रहे हो, विदेशी खिलाडी तो पिटे है, उन्हें कुछ होता है क्या?

शिव : नहीं, पर मुझे नहीं पीना.

करुणा : चलो कोई नहीं, पर पार्टी में आये हो तो डांस वन्स तो करोगे न?

शिव : मुझे नहीं आता.

करुणा : क्या यार तुम भी, डांस में क्या है, जैसे मर्जी हो बस हिलना hi तो है, अगर जहान्वी को बुरा न लगे तो में सीखा सकती हु (उसने मजाकिए अंदाज में मुस्कुराते हुए कहा)

जहान्वी : मुझे क्यों बुरा लगेगा, ये तो शिव की मर्जी, है पर ये देखना की कही ध्रुव को बुरा न लग jaye.(Usne हस्ते हुए कहा)

करुणा : उसे क्यों बुरा लगेगा, सिर्फ डांस hi तो कर रही हु, आओ शिव. (उसने खड़े होते हुए शिव की और हाथ बढ़ाया)

शिव : अरे नहीं, मुझे नहीं आता. (मेने मन किआ)

करुणा : (मेरा हाथ पकड़ कर खींचते hue)Tum चलो तो, में हु न. (मेने जहान्वी की और देखा तो उसने अपने कंधे उचकाए, जैसे कह रही हो की में क्या janu)Usko क्या देख रहे हो चलो na.(Usne शिव को खिंचा पर वो जरा भी हिला nahi)Bapre, कितनी ताकत है तुम में, दिखने में तो सामान्य लगते हो पर हिल भी नहीं रहे मुझसे तो. (में मुस्कुराया और खड़ा हो गया, पर में दर रहा था की मुझे डांस नहीं आता, वो लगभग खींचते हुए मुझे वह ले गयी जहा सब डांस कर रहे थे, पेड़ो पर लाइट लगा कर वह सजाया गया था, म्यूजिक भी अच्छा चल रहा था, में सबको देख रहा था, सब बस हिल hi रहे थे और जैसे मर्जी हो वैसे नाच रहे the)Dekha कितना आसान है, चलो अब. (वो मुझे बिच में ले गयी, और म्यूजिक पर थिरकने लगी, और मुझे भी वैसा करने के लिए इस्सर करने लगी, थोड़ी देर मेने उसको देखा फिर मेने भी अपने हाथ हिलने सुरु किये, फिर थोड़े थोड़े पेअर bhi)Dekha कितना आसान है.





जहान्वी वह बैठे बैठे शिव और करुणा को hi देख रही थी, शिव कैसे शर्मा रहा था ये देख कर उसको बहोत अच्छा लग रहा था.





रस्मी : ये तेरा बॉयफ्रेंड है?

जहान्वी : (उसकी और देख kar)Ye क्या बोल रही है.

रस्मी : है तो बोल दे, वर्ण फिर कहेगी की मेरे बॉयफ्रेंड पर डोरे दाल रही है.

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)Wo मेरा बॉयफ्रेंड नहीं है. बस दोस्त है.





रेशमी : तो में तरय करू तो तुजे एतराज तो नहीं न.

जहान्वी : (झुंझलाते hue)Wo वैसा नहीं है.

रस्मी : तुजे बड़ा पता है की वो कैसा है, (उसने अपना बियर का मग पिटे हुए कहा)

जहान्वी : में उसे जानती हु इसलिए कह रही हु. और कुछ नहीं.

रस्मी : तरय तो करने दे, कितना हैंडसम है यार वो, और ऊपर से लम्बा भी, उसका वो भी लम्बा hi होगा (उसने जहान्वी के कान में कहा)

जहान्वी : हैट, बेशरम.

रस्मी : इसमें क्या शर्माना यार, मज़े करने आये है तो मज़ा hi करेंगे न, तुजे करना है तो तू कर, तेरा नंबर पहले, क्यों की आखिर उसको तू hi तो लायी है.

जहान्वी : मरूंगी में तुजे, थोड़ी तो शर्म कर (उसने शरमाते हुए कहा)

रस्मी : अपना चेहरा तो देख, कैसे शर्मा रही है, ये मज़े करने के दिन है यार, जवानी बार बार नहीं आती, जितना हो सके एन्जॉय करलो, बाद में तो शादी होनी hi है.

जहान्वी : तू नहीं सुधरेगी.

रस्मी : मुझे क्यों सुना रही है, अभी तो मेरा कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं है, उसे देख (करुणा को दिखा kar)Uska तो बॉयफ्रेंड भी यही है फिर भी वो कैसे चिपक रही है उस से. (जहान्वी ने देखा की सचमे करुणा शिव से चिपक कर डांस कर रही थी, शिव उस से अंतर बनाने की कोशिस कर रहा था पर वो उसके और नजदीक चली जाती थी, जहान्वी को गुस्सा भी आ रहा था पर वो किस हक़ से रोकती, तो वह बैठी रही, तभी ध्रुव बियर का मग ले कर आ गया)

ध्रुव : लो तुम्हारे लिए. (उसने देखा की जहान्वी, गुस्से से शिव और करुणा को देख रही थी, वो करुणा को बोलणेहि वाला था की शिव को दूर करे, पर उसने खुद hi उसे दूर कर दिया था, वो अंदर hi अंदर खुस हो रहा tha)Kya देख रही हो पीओ, उन्हें एन्जॉय करने दो.

जहान्वी : वो तुम्हारी गर्लफ्रेंड है, तुम्हे गुस्सा नहीं आ रहा.

ध्रुव : वो सिर्फ नांच hi रो रही है, के ों यार, इतनी तो आज़ादी होने चाहिए न, तुम पीओ. (जहान्वी ने हलके गुस्से से बियर का मग हाथ में लिया और होठो से लगाया, स्वाद थोड़ा अजीब लगा पर उसका ध्यान शिव और करुणा पर hi था, चार पांच घूंट पिने के बाद उसका मुँह बिगड़ गया तो उसने वह रक्खी चिप्स मुँह में दाल दी, ध्रुव मुस्कुराते हुए जहान्वी को देख रहा था, तभी करुणा और शिव उसी और आये, ध्रुव ने करुणा को kaha)Hey बेबी, एंजोयिंग.

करुणा : या (कहते हुए उसने अपना बियर का मग लिया और दो चार घूंट भर लिए, फिर शिव को देख कर) देखा कितना सिंपल है, और तुम ख़म खा दर रहे थे.

ध्रुव : किस बात पे दर रहा था ये?

करुणा : डांस करने से, इसीलिए में इससे सीखने ले गयी थी.

ध्रुव : तुम भी न, इसे कहा ये सब आता होगा, बेचारा अनाथाश्रम में पला है, ये सब तो वो जिजवान में पहली बार देख रहा होगा, क्यों शिव. (शिव कुछ नहीं बोलै, बस मुस्कुराया, ध्रुव ने करुणा को kaha)Achchhe से सीखा देना उसे, फिर कही जाये तो प्रॉब्लम न हो इससे. तुम कुछ पिओगे अब?

शिव : है, पानी.

ध्रुव : तुम भी न यार (उसने एक वेटर को आवाज दी और पानी मंगवाया, शिव ने पानी पिया)

वह वेटर थे पर फिर भी जहान्वी के लिए वो बियर लेने गया था क्यों की उसको बियर में नशे की गोलिया जो मिलनी थी. अभी टाइम था, जहान्वी को इतना नशा चढ़ा नहीं था तो ध्रुव ने करुणा से कहा

ध्रुव : अब मेरे साथ भी थोड़ा डांस करलो (करुणा थोड़ा सकपका गयी, वैसे भी उसके शिर पर भी बियर का नशा चढ़ा था तो उसने शिव के साथ डांस करने का मौका पकड़लिया था, वो भी शिव के प्रति आकर्षित थी, तो उसने मौके का फायदा उठालिया था, पर अब ध्रुव के सामने उसे थोड़ा पछतावा हो रहा था)

करुणा : है चलो. (उसने नज़ारे झुका कर कहा, वो दोनों उठ कर चले गए, और डांस करने लगे, ध्रुव को बात करनी थी तो वो उसको बहो में लिए नाच रहा था)

ध्रुव : लगता है बहोत पसंद आ गया है?

करुणा : (हल्का गभराते hue)Nahi ऐसी बात नहीं है, में तो बस उसको सीखा रही थी, तुम गलत मत समझना.

ध्रुव : इसमें गलत क्या समझना, में तो चाहता हु तुम थोड़ा आगे बढ़ो.

करुणा : (उसको यकीं नहीं हो रहा था की ध्रुव क्या कह रहा hai)Kya मतलब है तुम्हारा?

ध्रुव : अरे मेरा मतलब है उसको थोड़ा अपनी और आकर्षित करो और उसको यहाँ से थोड़ा दूर ले जाओ.

करुणा: ये क्या कह रहे हो तुम, तुम्हे शर्म नहीं आयी ऐसा कहते हुए, में तो बस डांस कर रही थी और कुछ नहीं.

ध्रुव : में जनता हु यार, में तो बस कह रहा था की उसको अपने हुस्न के जाल में थोड़ा ुलजाओ और यहाँ से उसको दूर करो ताकि में जहान्वी को ले जा सकू, वर्ण वो यही रहे गए तो कैसे होगा फिर.

करुणा : ये जयादा हो रहा है ध्रुव, तुम जानते हो में ऐसा नहीं कर शक्ति, तुम्हारे शिव में किसी और के साथ वो सब नहीं कर सकती.

ध्रुव : में कहा कुछ करने के लिए कह रहा हु, बस उसको अपनी बातो में ुलजाओ, थोड़ा रिज़ाओ और कुछ नहीं.

करुणा : ये काया बकवास कर रहे हो तुम, में ऐसा नहीं करुँगी, तुम्हे शर्म आणि चाहिए ऐसा मुझे कहते हुए, तुम सचमे मुझसे प्यार करते हो की नहीं?

ध्रुव : ये भी कोई कहने की जरुरत है, में तुमसे hi प्यार करता हु यार, और मुझे तुम पर पूरा भरोसा है, पर जो मेने सोचा है वो करने के लिए, उसका यहाँ से दूर जाना जरुरी है, तुम उसे थोड़े समय के लिए उलझा के रक्खो, में अपना काम कर लूंगा, उसके बाद तो वो भी कुछ नहीं कर पायेगा. वैसे भी वो अभी बच्चा है, और ये मेरा इलाका है, में उसके सामने भी ले जा सकता हु, पर में कोई बखेड़ा नहीं करना चाहता, इसलिए कह रहा हु, वैसे भी तुम इतनी खूबसूरत हो वो तुम्हारे इसरो पर नाचेगा hi.

करुणा : (वैसे तो वो भी चाहती थी, और अब तो ध्रुव ने भी परमिशन दे दी थी तो वो खुस हो गयी थी पर वो दिखाना नहीं चाहती thi)Me ये तुम्हारे कहने पर hi कर रही हु, फिर मुझपर िलझम मत लगाना.

ध्रुव : में क्यों िलझम लगाने लगा, मुझे तुम पर पूरा भरोसा है, और तुम्हारी कसम, इसके बाद में कभी जहान्वी को भी कुछ नहीं करूँगा, में तो बस उसका गरूर तोडना चाहता हु और कुछ नहीं, मेरे लिए तो मेरी करुणा hi बेस्ट है. (उसने थोड़ी चापलूसी भी की)

करुणा : ठीक है, पर सिर्फ तुम्हारे लिए.

ध्रुव : थैंक यू मेरी जान. (उसने करुणा को गले लागलिया, फिर दोनों डांस करने लगे, वह जहान्वी और शिव बैठे थे, दूसरी लड़कीअ भी डांस करने गयी थी)

जहान्वी : लगता है डांस में बहोत मज़ा आया, क्यों. (उसने जलन के मरे कहा)

शिव : (झेपते hue)Aisi बात नहीं है, वो तो वो hi मुझे जबरदस्ती ले गयी थी, मेने तो कहा भी की मुझे डांस नहीं आता.

जहान्वी : (उसको हल्का हल्का नशा छाने लगा tha)Itna hi शौक था तो मुझे कहते, में सिखाती.

शिव : आप गलत समाज रही है, और में आपके साथ कैसे डांस कर शक्ति हु.

जहान्वी : क्यों, मुझे किश कर शक्ति हो, मेरे साथ वो सब कर शक्ति हो तो डांस नहीं कर शक्ति?

शिव : (मेने उन्हें देखा, उनके चेहरे से लग रहा था की वो थोड़ी अलग है, शायद इसी को नशा कहते होंगे, उनकी आंखे थोड़ी बोझिल लग रही थी और बोलते बोलते शब्द भी थोड़े इधर उचार हो रहे थे, वैसे भी मेने कभी नशा किआ नहीं तो मुझे पता hi नहीं था की क्या होता hai)Ye आप क्या कह रही है, और वैसे भी वो सिर्फ हम दोनों जानते है, ऐसे में सबके सामने आपसे उस तरह का व्यव्हार नहीं कर shakta(Muje उनकी इज्जत का ख्याल था, मेरे जैसे सामान्य लड़के के साथ उनका नाम जुड़े तो उनकी बदनामी hi होगी)

जहान्वी : (उसके दिमाग पर नशा हावी हो रहा tha)Akele में मेरे साथ कुछ भी करोगे, मुझे जबरदस्ती पकड़ कर किश करोगे, और भी न जाने क्या क्या करते हो, और यहाँ सबके सामने शर्म आ रही है क्यों.

शिव : ऐसी बात नहीं है.

जहान्वी : ऐसी बात नहीं है तो मेरे साथ भी डांस करो, चलो. (वो कड़ी हो गयी)

शिव : ये आप क्या कह रही है.

जहान्वी : उस करुणा के साथ डांस कर शक्ति हो, मेरे साथ नहीं, क्यों? मुझे डांस करना है.

शिव : पर मुझे सचमे नहीं आता (मेने बचाव किआ)

जहान्वी : जूते कही के, अभी तो नाच रहे थे, मेरे साथ hi नहीं नाचना तुम्हे.

शिव : ठीक है, चलिए (में बहेश नहीं करना चाहता था तो में खड़ा हो गया, हम दोनों भी उस और चल दिए, जहान्वी की हालत अभी ठीक थी, वो लड़खड़ा भी नहीं रही थी, पर शिर पर सुरूर छाया था, वह जा कर उसने अपने हाथ उठा दिए, शिव को कुछ समाज नहीं आया तो वो देख रहा था)

जहान्वी : देख क्या रहे हो, देखो उसने कैसे पकड़ा है (उसने एक कपल की और इस्सर किआ जो अपनी गफ को पकड़ कर नाच रहा था, उसका एक हाथ लड़की की कमर में tha)Pakado मुझे. (मेने हिचकिचाते हुए उनकी कमर में हाथ रक्खा, कमर नंगी थी तो मेरे दिल में हलचल हुई, और ये जहान्वी ने भी महसूस किआ, उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, उन्होंने एक हाथ मेरे कंधे पर रखदिया और दूसरा हाथ मेरे हाथ में दे दिया, मेने उस कपल को देखा की वो दोनों कैसे डांस कर रहे है, तो में भी उसी तरह हिलने लगा, मेने जहान्वी को देखा तो वो मुस्कुरा रही थी, हम दोनों थोड़ी देर डांस करते रहे, सबके सामने में थोड़ा हिचकिचा रहा tha)Kyu मेरे साथ डांस करना अच्छा नहीं लग रहा?

शिव : ऐसी बात नहीं है, अच्छा लग रहा है, पर सब देख रहे है.

जहान्वी : देखने दो, हमे क्या, तुम बस मुझे महसूस करो.





शिव : क्या मतलब? (वो कुछ नहीं बोली बस मुस्कुरायी, हम दोनों थोड़ी देर ऐसे hi डांस करते रहे, नाचने से जहान्वी का नशा भी थोड़ा काम हो गया था, पर उस पर अब शिव का नशा चढ़ रहा था, उसका मान कर रहा था की उसके गले लग कर डांस करे पर उसने अपने आपको संभाला. ऐसे hi थोड़ी देर बाद करुणा वह आ गयी)

करुणा : मई ी?

जहान्वी : (थोड़ा चिढ़ते hue)Dhruv के साथ जा.

करुणा : वो पिने गया है, थोड़ी देर तो डांस करने दे.

जहान्वी : (उसको अच्छा नहीं लग रहा था पर वो अलग हुई और टेबल की और चली गयी)

करुणा : उसको क्या देख रहे हो, मेने सिखाया और मेरे साथ hi डांस नहीं कर रहे.

शिव : ऐसी बात नहीं है.

करुणा : तो फिर सुरु हो जाओ (उसने भी जहान्वी की तरह हाथ उठाये तो मेने उनकी कमर में भी हाथ रखा और फिर हम नाचने lage)Ek बात पुछु?

शिव : (मेरी नज़ारे जहान्वी पर thi)Ha पूछिए?

करुणा : तुम्हारे और जहान्वी के बिछ कुछ है?

शिव : (झेपते hue)Nahi, कुछ नहीं है.

करुणा : तो फिर क्यों फ़िक्र कर रहे हो, एन्जॉय करो यार. (वो मेरे साथ डांस करने लगी, वो थोड़ा जयदा hi चिपक रही थी, थोड़ी देर बाद वो अपनी छूट मेरे लुंड वाले भाग पर रगड़ रही थी, मेने उनकी और देखा तो वो बस शरमाते हुए muskurayi)(Udhar जहान्वी को गुस्सा आ रहा था, उसने बियर उठायी और गाठ गाठ कर के आधी बियर ख़तम कर दी.)

जहान्वी : (मान me)Kamini, अपने बॉयफ्रेंड को छोड़ कर शिव के पीछे पड़ी है, इतनी आग लगी है तो जा न अपने बर्फ के पास. बोलते बोलते उसने दो तीन और घूंट भर लिए, तभी उसकी दूसरी फ्रेंड भी वह आ गयी और जहान्वी से बात करने लगी, उसने भी शिव की और से ध्यान हटा कर उनसे बात करना hi ठीक समजा)

करुणा : (दोनों थोड़ी देर नाचते रहे, करुणा शिव को यहाँ से ले जाना चाहती थी, तो उसने शिव से kaha)Meri हेल्प करोगे?

शिव : हेल्प?, क्या?

करुणा : मेरे साथ चलो न.

शिव : कहा?

करुणा : (शरमाते hue)Please, चलो न, तुम समज जाओगे.

शिव : (मेरी समाज में नहीं आ रहा था की वो कहा ले जाना चाहती है, मेने एक नजर जहान्वी पर डाली तो वो अपनी सहेलिओ के साथ बात कर रही thi)Thik है. (वो मुस्कुरायी और एक और चल दी, में भी उसके साथ चल दिया, चलते चलते हम थोड़ी दूर आ गए, म्यूजिक तो सुनाई दे रहा था, पर ये जगह कोट्टेगे के पीछे थी, मेरी समाज में नहीं आ रहा था, में पूछने hi वाला था की मेरी नजर एक जगह पर पड़ी जहा लिखा था टॉयलेट और वो उस और hi जा रही थी तो मेने कुछ नहीं पूछा, उसने एक बार मुझे देखा और शरमाते हुए मुस्कुरायी और अंदर चली गयी, में सोचने laga)Agar इसको टॉयलेट hi जाना था तो मुझे क्यों ले आयी, किसी सहेली के साथ आती. (में थोड़ी देर वह कड़ा रहा, थोड़ी देर बाद वो अपने कपडे ठीक करते हुए बहार आयी.)

करुणा : सॉरी, वो बहोत जोर की लगी थी. (वो क्यों मेरे साथ ऐसी बात कर रही थी मुझे समाज नहीं आया) तुम्हे भी जाना है तो जा आओ. (वैसे तो मुझे भी लगी hi थी तो में अंदर चला गया, टॉयलेट इस तरह से बना था की आगे एक दीवाल थी जो एक और से बंद थी और अंदर तीन क़तर में टॉयलेट बने हुए थे. में दरवाजा खोल कर एक में घुस गया, जब बहार आया तो उसी गलियारे में करुणा कड़ी थी, उसे देख कर में चौंक गया)

शिव : आप यहाँ?

करुणा : शह्ह्ह्ह (अपने होठो पर ऊँगली रखते हुए उसने मुझे चुप रहने का इस्सर किआ और वो मेरे नजदीक आयी)

शिव: आप क्या कर रही है?

करुणा : क्या लड़कीओ के जैसे बेहवे कर रहे हो, एक लड़की अकेले में तुम्हारे करीब आयी है और तुम हो की...

शिव : (में उसकी बात समाज रहा था पर में ऐसा वैसा कुछ नहीं करना चाहता था, मुझे जहान्वी की फ़िक्र थी, वो सिर्फ डांस करने से hi चीड़ गयी थी, अगर ऐसा वैसा कुछ पता चलेगा तो पता नहीं क्या करेगी, और वैसे भी मुझे इसके साथ करने की कोई इच्छा भी नहीं थी) देखिये, मुझे लग रहा है की हमे चलना चाहिए.

करुणा : (मेरे एक दम नजदीक आ गयी और मेरी छाती को सहलाने lagi)Kya लड़कीओ की तरह शर्मा रहे हो, पार्टी में आये हो तो एन्जॉय करो, लड़की सामने से तुम्हारे पास आयी है तो मज़े लो, क्या में खूबसूरत नहीं हु?

शिव : आप खूबसूरत हो पर आपका भी बर्फ है, किसी को पता चल गया तो आप मुसीबत में पद जाओगी.

करुणा : (शिव का हाथ पकड़ कर अपने कूल्हों पर रखते hue)Tum उसकी फ़िक्र मत करो, किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. (वो मेरे लुंड पर हाथ फिरने लगी, साला लुंड भी खड़ा होने लगा, जिसे महसूस कर के करुणा के चेहरे पर भी मुस्कान आ gayi)Isse तो में पसन् आयी, ये तो खड़ा हो रहा है (वो और मेरे लुंड को मसलने लगी, अब लुंड कहा बात सुनता है, लड़की के सहलाने से वो खड़ा होने लगा, जैसे जैसे वो खड़ा हो रहा था करुणा का दिल धड़क रहा था, उसको पंत के ऊपर से hi उसका साइज समाज आ रहा था, वो इतना तो समाज गयी थी की वो बड़ा है, ये देख कर उसकी छूट में भी पानी आने लगा था, वो उसको पकड़ कर दबाने लगी, जिस से वो और बड़ा होने लगा, उसको यकीं नहीं हो रहा था उसने एक बार उस उभर को देखा और फिर शिव की और देखा, उसकी सिस्किअ निकलने lagi)Shhhhhhh यार ये तो बहोत बड़ा है.

शिव : आप समझती क्यों नहीं, कोई आ जायेगा तो मुसीबत हो जाएगी. (उन्होंने मेरा दूसरा हाथ पकड़ा और अपने स्तन पर रख दिया, वो आकर में भरे हुए थे)

करुणा : शह्ह्ह्ह प्लीज दबाओ न यार शह्ह्हह्ह्ह्ह थोड़ी देर (उसने जैसे बिनती की, वो सिर्फ ध्रुव की मदद करने आयी थी पर अब उसकी भी हालत कहरब होने लगी थी, इतना बड़ा लुंड देख कर उसके अंदर छोड़ने की लालसा पैदा हो गयी थी, वैसे भी वो काफी टाइम से संतुस्ट नहीं हो पायी थी)

दूसरी और जहान्वी का शिर घूम रहा था, वो बात तो अपनी सहेलिओ से कर रही थी पर उसको जैसे सब घूमता नजर आ रहा था.

रश्मि : क्या हुआ जहान्वी?

जहान्वी : पता नहीं यार शिव घूम रहा है.

रस्मी : (मसूकूरते hue)Latga hi चढ़ गयी.

जहान्वी : पता नहीं यार, सीईव.

रस्मी : (आस पास देखते hue)Yaha तो वो दिख नहीं रहा.

जहान्वी : शहहहहह (उसने अपना शिर टेबल पर रख दिया और बाद बढ़ाने lagi)Shiiiiiiv.

रस्मी : (वो थोड़ा गभरा गयी thi)Jhanviiiii, क्या हुआ तुजे. (ध्रुव यही नज़ारे गढ़ाए हुए था, वो मान hi मान मुस्कुराया और वह आ गया और अनजान बनते हुए)

ध्रुव : क्या हुआ?

रस्मी : पतानहीं, कह रही है की शिर घूम रहा है.

ध्रुव : ज्यादा पिने से हो जाता है कभी कभी, थोड़ी देर आराम करेगी तो ठीक हो जाएगी.

रस्मी : यहाँ कहा आराम करेगी?

ध्रुव : मेरे फार्म हाउस पर कत्तागेस भी बने हुए है hi, उसको सुला देता हु. (जहान्वी ko)Jhanviii ो झानवीई.

जहान्वी : (नशे me)Ummmmmm.

ध्रुव : चलो में तुम्हे रूम में सुला देता हु.

जहान्वी : शीइइइइव.

ध्रुव : वो दिख नहीं रहा, आता है तो भेज दूंगा में तुम्हारे पास, चलो. (वो उसे उठाने लगा तो रस्मी ने मदद की, रस्मी ko)Tum एन्जॉय करो, में ले जाता हु.

रस्मी : ध्यान से ले जाना, कही गिर न जाये. (ध्रुव उन्हें ले कर जाने laga)Agar सहन नहीं होती को इतना क्यों पिटे है लोग. (उसने अपनी सहेली से कहा)

एक लड़का : क्या हुआ ध्रुव?

ध्रुव : अरे कुछ नहीं, चढ़ गयी है. (वो भी हसने लगा, ध्रुव उसको लिए वह से चलने लगा)

वह करुणा निचे बेथ गयी थी और शिव के लुंड पर पंत के ऊपर से hi अपना चेहरा रगड़ रही थी, उसको भी बियर का सुरूर चढ़ा हुआ था.

शिव : क्या कर रही है आप.

करुणा : (झुंझलाते hue)Kya लड़कीओ के जैसे नखरे कर रहे हो, चुप रहो थोड़ी देर. (उसने लगभग गुस्से से कहा, वो कामाग्नि में पागल हो चुकी थी, वो पंत की झिप खोलने लगी)

शिव : क्या कर रही है आप, कोई देख लेगा, जहान्वी जी मुझे धुंध रही होगी.

करुणा : वो क्या तुम्हारी गफ है जो तुम्हे इतनी फ़िक्र हो रही है, वो भी एन्जॉय कर रही होगी, पार्टी में आये हो तो मज़ा करो, क्यों मूड ख़राब कर रहे हो, इतना बड़ा डंडा लिए घूम रहे हो कभी सेक्स किआ है की नहीं.

शिव : देखिये आप नशे में है (मेने उनको पकड़ कर खड़ा करने लगा)

करुणा : (करुणा भी कड़ी हो gayi)Ha हु नशे में, और नशे में साडी गलतिया माफ़ होती है, में सामने से कह रही हु छोड़ ले फिर भी नखरे कर रहा है. जहान्वी ने छोड़ने दिया है तुम्हे?

शिव : आप क्या बोल रही है, चलिए यहाँ से.

करुणा : क्या यार तुम भी, लुंड खड़ा है, छूट सामने से छोड़ने को बेक़रार है, और तुम कह रहे हो चलिए, मर्द hi हो न की बस ऐसे hi लटकाये घूम रहे हो.

शिव : में जो हु वो हु, में आखरी बार कह रहा हु, चलना है तो चलिए वर्ण में जा रहा हु.

करुणा : ध्रुव सच hi कह रहा था, अभी बच्चे हो तुम, मर्द होते तो ऐसा न कहते.

शिव : आपको जो समझना है समजिये, में जा रहा हु. (में जाने लगा)

करुणा : (शिव का हाथ पकड़ते hue)Tum ऐसा नहीं कर शक्ति, एक प्यासी लड़की को तुम ऐसे नहीं छोड़ सकते.

शिव : आप नशे में हो, में जा रहा हु. (मेने उनका हाथ छुड़ाया और वह से बहार निकल गया)

करुणा : (चिल्लाते hue)Namard कही के, कहा जा रहा है रुक... (मेने उनकी बात को अनसुना किआ और वह से निकल gaya)Shiiiiiiiv, Shiiiiiiiiiiv. (वो चिल्लाती रही पर शिव नहीं रुका)

में वह से निकल कर आगे की और आ रहा था की मुझे ध्रुव और जहान्वी दिखे, ध्रुव के सहारे से जहान्वी चल रही थी, में तुरंत उनके पास पहुंच गया.

शिव : क्या हुआ?

ध्रुव : (शिव को देख कर उसको अपने मंसूबो पर पानी फिरता दिखा, उसको करुणा पर गुस्सा आया की थोड़ी देर नहीं रोक शक्ति थी, उसने संभल कर kaha)Kuchh नहीं, शायद चढ़ गयी है, में उसको सोने के लिए रूम में ले जा रहा था, थोड़ी देर आराम करेगी तो ठीक हो जाएगी.

जहान्वी : (नशे me)Shiiiiiiiv.

शिव : में यही हु मैडम, क्या हुआ आपको? (जहान्वी नशे में थी पर उसको थोड़ा होश था वो शिव की और घूमने लगी तो शिव ने उनके हाथ को पकड़ कर अपने कंधे का सहारा दिया, जहान्वी भले hi नशे में थी पर उसने ध्रुव के कंधे से हाथ हटा दिया और शिव की और घूम गयी, ध्रुव को बहोत गुस्सा आ रहा था पर क्या करता, वो चाहता तो शिव को मार भी सकता था, अपने आदमीओ के सहारे उसे पिट भी सकता था पर ऐसा करने पर हंगामा हो जाता और वो नहीं चाहता था की ऐसा हो, क्यों की ऐसा होने पर बात फ़ैल जाती और वो जहान्वी के बाप को तो जनता hi था, तो उसने मान मार कर सरीफ बन ने का hi नाटक किआ)

ध्रुव : इससे रूम में ले चलो. (में जहान्वी मैडम को ले कर उस और चलने लगा पर वो लड़खड़ा रही थी तो मेने उन्हें पूरा अपनी बहो में उठा लिया, जहान्वी ने अपनी आंखे थोड़ी खोली और शिव को देखा और मुस्कुराते हुए उसके कंधे पर अपना शिर रख दिया, तभी वह करुणा भी आ गयी, शिव जहान्वी को उठा कर एक कॉटेज की और ले जा रहा था, वो ध्रुव के पास गयी)

करुणा : क्या हुआ?

ध्रुव : (गुस्से को दबाते hue)Thodi देर नहीं रोक सकती थी उसे, में बस कॉटेज में पहुंचने hi वाला था.

करुणा : (वो भी गुस्से में thi)To क्या करती, नंगी हो कर लेट जाती उसके सामने? (वैसे तो वो तैयार hi थी पर अभी वो अपना गुस्सा ध्रुव पर निकल रही थी)

ध्रुव : मेने ऐसा तो नहीं कहा यार, बस पांच मिनट देर से आता तो में उसको कॉटेज में ले जा चूका होता.

करुणा : वो नहीं रुका तो में क्या karu(Usne गुस्से से कहा)

ध्रुव : छोडो अभी, बाद में देखेंगे (कहते हुए वो शिव और जहान्वी की और बढ़ा तो करुणा भी उसके साथ गयी, शिव ने कमरे में जा कर जहान्वी को बिस्तर पर लेटाया)

शिव : (ध्रुव और करुणा की और देख kar)Ab क्या करे? (शिव को तो ध्रुव और करुणा के प्लानिंग का तो पता hi नहीं था, वो तो नोर्मल्ली hi बेहवे कर रहा था)

ध्रुव : इसका नशा उतरने में तो टाइम लगेगा, इसको यही सोने दो, हम चलते है, तुम तो एन्जॉय करो, खनवाना खाओ. ये सब तो पार्टयों में होता रहता है.

शिव : में इन्हे ऐसे नहीं छोड़ सकता, नशा उतरने का कोई तो तरीका होगा? तुम लोग तो पितहो, तुम्हे तो पता होगा hi.

ध्रुव : (वो क्यों नशा उतरवाने लगा, पर शिव के होते हुए वो कुछ कर भी नहीं सकता tha)Aise hi उतर जायेगा.

करुणा : लिम्बुपानी पिलाने से शायद जल्दी उतर जाये?

ध्रुव : (उसको गुस्सा आया पर वो बोलै कुछ नहीं, शिव उसे देख रहा था तो वो utha)Me ले कर आता हु, शायद मिल जाये. (ध्रुव बहार चला गया, शिव जहान्वी का शिर सहलाने लगा)

करुणा : देख कर लगता नहीं की ये तुम्हारी गफ नहीं है, कितनी फ़िक्र कर रहे हो (टॉन्ट मरते हुए.)

शिव : तुम्हे जो समझना है संजो, आप इनकी दोस्त hi हो न? (वो भी शिव का टॉन्ट समाज गयी, दोनों कुछ नहीं बोले, थोड़ी देर बाद ध्रुव लिम्बुपानी ले आया, शिव ने गिलास लेते हुए जहान्वी को ऊपर उठाया और पीछे बेथ कर सहारा दिया)

जहान्वी : Ummmmmm(Usko सोना था)

शिव : ये पि लो, अच्छा लगेगा तुम्हे. (में उसके मुँह में लगा के उसको पिलाने लगा, जहान्वी अपना मुँह बिगड़ते हुए पिने लगी, आधा गिलास ख़तम करने के बाद उसने मुँह हटा लिया और मेरे कंधे पर hi सोने लगी, मेने उसे अच्छे से सुला दिया)

ध्रुव : करुणा तुम रुको यहाँ, में जाता हु, सबको देखना पड़ेगा न. चलो शिव तुम भी. (उसका इरादा था की कैसे भी करके शिव को यहाँ से हटाए, बाद में तो वो आ hi सकता था)

शिव : में नहीं आ रहा, में इनके साथ hi आया था, वैसे भी में किसी को नहीं जनता, इनके ठीक होने तक में यही हु.

ध्रुव : (अब वो कुछ नहीं कर सकता tha)Jaisi तुम्हारी मर्जी, अगर ये बेथ रहा है तो तुम्हे आना है तो आ शक्ति हो.

करुणा : (उसको अपना उल्लू सीधा करना tha)Nahi तुम जाओ, में बैठी हु. (ध्रुव ने भी सोचा की शायद ये कोई जुगाड़ कर के शिव को ले जाएगी और मुझे बुला लेगी)

ध्रुव : ठीक है, कुछ हो तो फ़ोन करना, में आ जाऊंगा. (वो वह से चला गया)

जहान्वी : शीइइइइव (वो नींद में hi थी)

करुणा : इसको नींद में भी चैन नहीं (शिव की झंघ पर हाथ रखकर शिव को देखने लगी, जैसे कह रही हो की मौका अच्छा है)

शिव : (उनका हाथ हटते hue)Aap इनकी दोस्त है, सलीके में रहिये. (करुणा भी गुस्से में कड़ी हो गयी और अपन मुँह बनाते हुए वह से निकल gayi)(Me वही बैठा रहा और जहान्वी को देख रहा था, मुझे चिंता हो रही थी की अगर होश नहीं आया तो इनके घरवालों को क्या कहूंगा, वो लोग इसे ढूंढेंगे तो जरूर. मेने जहान्वी का गाल थप thapaya)Jhanviiiii.

जहान्वी : उन्न्नध्ह्हः सोने दो न. (वो अभी भी नशे में थी, करीब एक घंटे बाद उन्हें थोड़ा होश आया, वो शिर पकड़ कर बेथ गयी, और मुझे और आस पास देखने lagi)Kya हुआ?

शिव : क्या, क्या हुआ, मेने कहा था न की शराब पीना अच्छा नहीं होता, आपको नशा हो गया था. (वो अभी भी हलकी नींद में hi थी)

जहान्वी : भूख लगी है. (शायद भूख की वजह से hi वो नींद से जगी थी)

शिव : में ले कर आता हु. (में बहार गया, और खाना लेने लगा, ध्रुव ने मुझे देखा तो मेरे पास आया)

ध्रुव : क्या हुआ?

शिव : वो जाग गयी है और खाना मांग रही है.

ध्रुव : (उसे पता चल गया की उसका सारा प्लान फ़ैल हो चूका hai)Oh! किसी को भेजू क्या?

शिव : नहीं, में ले जाता हु. (शिव खाना ले कर चला गया)

ध्रुव का दोस्त: क्या हुआ ध्रुव? काम बना की नहीं?

ध्रुव: अपना काम कर na(Usne गुस्से में कहा तो वो भी सटक लिया) सेल ने सब चौपट कर दिया, कब तक बचेगी साली.

शिव : (में खाना ले कर वापस आया तो वो वापस बीएड पर सो चुकी थी, मेने खाना साइड में रक्खा और उन्हें फिर जगाया, वो फिर नारजगी वाला मुँह किये जगी, मेने उन्हें बीएड के सहारे बिठाया और उन्हें खाना खिलने लगा) (थोड़ा खाने के बाद जहान्वी को भी होश आ रहा था, उसने देखा की शिव उसे खाना खिला रहा है, वो बड़े प्यार से उसे देखने लगी, जबसे वो बड़ी हुई थी पहली बार था की कोई उसे खाना खिला रहा था)

जहान्वी : तुमने खाया?

शिव :नहीं, अभी खता हु.

जहान्वी : (अच्छे से बैठते hue)Itna सारा में नहीं खा सकती, तुम भी खालो, में अपने आप खा लेती हु.

शिव : मेरे हाथ जूते हो चुके है, आप अपने हाथ जूते मत कीजिये, में खिला रहा हु.

जहान्वी : मेरी वजह से हाथ जूते है इसलिए तुम नहीं खा रहे न?

शिव : ऐसी बात नहीं है, आप खा लीजिये में बाद में खा लूंगा.

जहान्वी : (जिद करते hue)Nahi अभी खाओ, वर्ण मुझे भी नहीं खाना.

शिव : अच्छा बाबा, में खता हु. (ये कहते हुए उसने अपना हाथ जहान्वी की और बढ़ाया)

जहान्वी : पहले तुम खाओ. (शिव ने कोई बहेश नहीं की और खुद अपने मुँह में निवाला रख दिया, जहान्वी मुस्कुराने लगी, फिर शिव दूसरा निवाला बनाने लगा तो वो कूद अपना मुँह खोल कर बैठी रही, वो बच्चो जैसी हरकत कर रही थी और चेहरे पर बच्चो के जैसी hi मासूमियत थी, सच कहु तो मुझे भी अच्छा लगा, अक्षर लोगो को लड़कीओ में पता नहीं क्या क्या दीखता है पर ये मासूमियत ये बचपना नहीं दीखता, वो कोई हवस मिटने का साधन नहीं होती, प्यारी सी मासूम सी इंसान hi होती है, हम दोनों ने खाना khaya)(Fir उसने अपना शिर पकड़ा) शहहहहह ये दर्द, अभी भी शिर घूम रहा है, मुझे घर जाना है.

शिव : ठीक है, चलते है. (हम दोनों बहार निकले, बहार अभी भी पार्टी चल रही थी, सबसे किनारा कर के हम दोनों पार्किंग तक पहुंच गए, वो अभी भी मेरे सहारे hi चल रही thi)Gadi चला पाओगी?

जहान्वी : शिर घूम रहा है अभी भी.

शिव : मुझे अभी इतने नहीं आती, पता है न?

जहान्वी : धीरे धीरे चलना.

शिव : अब कर भी क्या सकते है. (मेने उन्हें साइड में बिठाया और में ड्राइवर सीट पर बेथ गया, जैसे तैसे मेने गाड़ी बहार निकली और सड़क पर दौड़ा दी. मेने देखा की वो फिर से सीट पर सो गयी थी, जैसे तैसे में सिटी तक तो आ गया, पर में कभी इनके घर नहीं गया था तो मुझे एड्रेस पता नहीं था तो मेने गाड़ी साइड में lagayi)Jhanvijiiii (मेने उन्हें हिलाया)

जहान्वी : उम्मम्मम्म.

शिव : आपका एड्रेस बताइये. (वो फिर सो गयी थी, तो मेने hilaya)Jhhanvi जीई. आपका एड्रेस बताइये.

जहान्वी : अपने घर ले चलो. (नींद में hi बाद बड़ाई)

शिव : ये एक और मुसीबत, पता नहीं लोग पिटे क्यों है, अब क्या karu(Me सोचने लगा, इन्हे ऐसी हालत में घर कैसे ले जाऊ, और अगर इनको इनके घर नहीं पहुंचाया तो भी मुसीबत, क्यों की वो लोग भी ढूंढने लगेंगे, तभी मुझे वैस्वी का ख्याल आया, पर रात काफी हो चुकी थी, फ़ोन करू तो कैसे करू, मेरे पास और कोई विकल्प नहीं था तो मेने फ़ोन लगा दिया, थोड़ी देर बाद वैस्वी ने फ़ोन उठाया, वो नींद में hi थी)

वैस्वी : Hello(Neend में)

शिव : Hello, में शिव बोल रहा हु.

वैस्वी :(नींद me)Kon शिव.

शिव : में शिव बोल रहा हु शिव, नींद में हो क्या.

वैस्वी : इस वक़्त आदमी नींद में नहीं होगा तो कैसे होगा.

शिव : सुनो न, एक काम था.

वैस्वी : बोलो.

शिव : तुम्हे मला के घर का एड्रेस पता है?

वैस्वी : है.

शिव : प्लीज मुझे सेंड करोगी.

वैस्वी : (वो थोड़ी नींद से बहार आ चुकी thi)Kyu, तुम्हे उनका एड्रेस क्यों चाहिए, वो भी अभी.

शिव : वो में बाद में बताऊंगा, प्लीज मुझे वाट्सप करो न.

वैस्वी : ठीक है करती हु.

शिव : सॉरी यार इस वक़्त डिस्टर्ब किआ.

वैस्वी : पर हुआ क्या है वो तो बताओ.

शिव : कोई खास बात नहीं है, कल मिल कर बताता हु.

थोड़ी देर में hi उसका मश्ग आ गया, में एड्रेस ढूंढते ढूंढते उनके घर पहुंच गया, मालकिन की गाड़ी देख कर hi वॉचमन ने गेट खोला, पर ड्राइवर सीट पर अनजान लड़के को देख कर वो बहार आया. उसने साइड में सोती हुई मालकिन को देखा, शिव ने गाड़ी अंदर ले ली. और जहान्वी को जगाने लगा.

शिव : झन्वीजी, उठिये घर आ गया. (बड़ी मुश्किल से वो जगी, थोड़ी देर तक वो आस पास देखती रही फिर कार से उतरी, मेने उन्हें सहारा दिया.

शिव : (मेने वॉचमन से kaha)Kisi को बुला दीजिये. (वो मेरी बात समाज गया और अपनी बीवी को बुला लाया, उसकी बीवी का सहारा ले कर जहान्वी अंदर चली गयी, मेने चाबी वॉचमन को दी और वह से निकल गया. (निचे हो रही आवाजों से कमलनाथ बालकनी में आ गया था, उसने शिव को देखा, और अपनी बेटी की हालत भी देखि, पर वो कुछ नहीं बोलै)

इतनी रात को रिक्शा भी नहीं मिल रही थी, मेने फिर दौड़ लगा दी और घर पहुंच गया, दरवाजा बंद था तो थोड़ी देर खत खतया तब जा कर लतादिदी ने दरवाजा खोला.

लता : इतनी देर क्यों हो गयी.

शिव : छोड़िये वो सब, कल शांति से बताऊंगा. (में रूम में जा कर कपडे बदलने लगा, लतादिदी पानी ले आयी, में शार्ट पंत में था, मेने पानी पिया और गिलास वही रख दिया, दीदी जाने लगी तो मेने उन्हें अपनी बाहोंमे भर लिया)

लता : क्या कर रहे हो?

शिव : यही सो जाइये न.

लता : ठीक है, दरवाजा तो बंद करने दे. (मेने उन्हें छोड़ दिया, वो दरवाजा बंद कर आयी, में उनको ले कर बिस्तर पर लेट gaya)Kaha घूम रहा था?

शिव : अभी ये सब छोडो, बाद में बताऊंगा.

लता : नींद आ रही है?

शिव : नहीं, अपनी लता को प्यार करना है. (वो शर्मा गयी, मेने उनके कपडे उतर दिए, वो संकुचन लगी, उनकी शर्म hi उनका गहना था, मेने अच्छे से उनकी छूट को छठा, उनके स्तन दबाये और निप्पल को चूस चूस कर लाल कर दिया, वो सिस्किअ लेती रही, में निचे लेट तय और उनको अपने लुंड की और बढ़ाया तो वो मेरे लुंड को चूसने लगी, चूसते चूसते मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी, मेने उन्हें अपने निचे लिए और लुंड को छूट का रास्ता दिखा दिया, उनके चेहरे पर दर्द उभर आया पर थोड़ी hi देर में वो मस्ती से छुड़वाने लगी, करीब एक घंटे बाद दोनों नंगे hi सो गए, मेने देखा की उनके चेहरे पर संतुस्ती की मुस्कान थी, वो अपने पेअर मेरे ऊपर डेल सो रही थी, में भी उनके सुडौल कूल्हों को पकड़े हुए सो गया.)

सुबह जब जहान्वी नास्ता करने के लिए आयी तो उसके पिता वही बैठे हुए थे.

जहान्वी : गुड मॉर्निंग पापा.

मला : ह्म्म्मम्म. (वो नास्ता करने लगी, थोड़ी देर बाद कमलनाथ ने puchha)Raat को कहा गयी थी?

जहान्वी : दोस्तों की पार्टी थी पापा, वही गयी थी.

मला : किस हालत में लौटी हो पता भी है? (जहान्वी ने शिर झुका liya)Apane नौकरो के साथ घूमना अच्छी बात नहीं है.

जहान्वी : वो नौकर नहीं है पापा, वैसे भी वो हमारी नौकरी नहीं करता, वो पवनजी का पार्टनर है.

मला : उसकी तो बुद्धि भ्रस्ट हो गयी है, भला कोई रह चलते भिखारी को पार्टनर बनता है क्या, मात भूलो तुम किसकी बेटी हो.

जहान्वी : मुझे याद है पापा, वो अच्छा लड़का है, कल वो मुझे सही सलामत घर पंहुचा गया था.

मला : तुम कहना क्या चाहती हो की अच्छा लड़का है, वो इस लायक नहीं की तुम उसके साथ घूमो और लोग बाटे बनाये.

जहान्वी : कोई बाटे नहीं बना रहा पापा, और वो उन लड़को से तो कई गुना ज्यादा अच्छा है जो अपने बाप के पैसो पर ऐश करते है, एक्सक्यूज़ me.(Kehte हुए वो उठी और अपने कमरे में चली गयी)

सिखादेवी : (वो वह aayi)Ye कहा चली गयी?

मला : जरा अपनी बेटी को सम्भालो.

सिखादेवी : वो समझदार है, पढ़ीलिखी है, में क्या सँभालु.

मला : तुमसे तो बात करना hi बेकार है. (कहते हुए वो भी खड़ा हो गया और अपने कमरे में चला गया)

सिखादेवी : पता नहीं सुबह सुबह baap-beti में क्या नाटक चल रहा है. (वो भी अपने काम में लग गयी)

में स्कूल चला गया, आज भी बिना मैडम नहीं आयी थी, रेसस्स में वैस्वी ने मुझे पूछा तो मेने शार्ट में बता दिया, संयम भी थी वह पर उसको कुछ समाज नहीं आया, पर उसने कुछ पूछा भी नहीं. दो पहर को में घर में था की जहान्वी का फ़ोन आया.

जहान्वी : कहा हो?

शिव : घर पर और कहा?

जहान्वी : में तुम्हे लेने आ रही हु, तैयार रहना.

शिव : क्या बात है?

जहान्वी : मिल कर बात करते है.

शिव : ठीक है, आ जाइये.

मेरी समाज में नहीं आया की वो क्यों मुझे लेने आ रही है. में अपने कमरे में hi था की रंजन आयी.

रंजन : कोई आया है, तुमसे मिलने.

शिव : कोण है?

रंजन : लड़की के अलावा कोण होगा. वो उस दिन आयी थी न क्या नाम था उनका, है झंविदिदी, वो आयी है.

शिव : तू चल में आया. (में बहार गया तो लतादिदी, जहान्वी से बात कर रही thi)Hi. (वो बस मुस्कुरायी)

जहान्वी : चले?

शिव : चलिए. (लतादिदी ko)Me जाता हु. (उन्होंने मुस्कुरा कर है कहा, में और जहान्वी बहार निकले, वो गाड़ी चलने lagi)Kya हुआ?

जहान्वी : कल क्या हुआ था? (जहान्वी ने सीधा सवाल किआ)

शिव : क्या हुआ था क्या, आपको चढ़ गयी थी, मेने कहा भी था की पीना अच्छी बात नहीं है.

जहान्वी : तुमने कभी पि है?

शिव : नहीं.

जहान्वी : तो फिर, मेने सिर्फ आधा मग hi पिया था वो भी बियर का.

शिव : कहना क्या चाहती हो आप.

जहान्वी : इतनी बियर से ऐसी हालत नहीं हो शक्ति, मेने पहली बार थोड़ी न पि थी, कुछ तो गड़बड़ हुई थी.

(में उनके चेहरे को देखने लगा, वो बहोत गंभीर थी, मुझे भी लगा की कोई तो बात है)
 
अपडेट 174

में और जहान्वी वह से निकल गए, वो सीधी मुझे कॉफ़ी शॉप ले गयी, वह एक कोन के टेबल पर हम बेथ गए, वो अभी भी किसी सोच में डूबी थी.

शिव : क्या हुआ, आप इतनी परेशान क्यों है?

जहान्वी : मुझे अभी भी लग रहा है की कुछ तो गड़बड़ हुई है, में जितना सोचती हु उतना hi मेरा दिमाग कह रहा है की कुछ तो गड बाद हुई है, तुम बताओ, वह क्या क्या हुआ था?

शिव : जो हुआ सब आपके सामने hi तो हुआ था, सिर्फ आप नशे में थी तब में आपको कॉटेज ले गया और वह सुलाया.

जहान्वी : ऐसे नहीं, जो भी हुआ वो सब तुम्हारे नजरिये से बताओ, हम पार्टी में गए तब से लेकर तुमने मुझे घर छोड़ा, सब कुछ.

शिव : हमे ध्रुव ने रइवे किआ, उसके बाद वो हमें अंदर ले गया... ....(में सब बताता चला gaya)....Aur आखिर मेने आपको घर छोड़ दिया.

जहान्वी : (उनके चेरे पर गुस्सा था, उन्होंने दन्त पिस्टे हुए kaha)Karunaaaa.(Fir थोड़ी hi देर में उनके चेहरे पर मुस्कान थी, जो हुआ उसके लिए नहीं पर शिव ने जो उसके साथ किया उसके liye)Tumne मुझे खाना खिलाया था? (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : जी, आप नशेमे थी तो ठीक से हाथ नहीं काम कर रहे थे, तो मेने खिलाया.

जहान्वी : तुम और में अकेले थे कॉटेज में?

शिव : है, थोड़ी देर करूणाजी थी फिर वो चली गयी थी.

जहान्वी : (हल्का शरमाते hue)Mera गायेदा उठाने का मान नहीं किआ?

शिव : में क्या फायदा उठता?

जहान्वी : क्यों, में बेसुध थी, तुम जो चाहे कर शक्ति थे.

शिव : आपको लगता है की में ऐसा कुछ करूँगा?

जहान्वी : नहीं, में तो बस पूछ रही थी, पर मुझे लग रहा है की जिसने भी ये किआ था वो ऐसा hi कुछ फायदा उठाना चाहता था.

शिव : ऐसा क्यों लग रहा है आपको?

जहान्वी : सीधी सी बात है, इतनी बियर से ऐसी हालत नहीं होती, और दूसरी बात, इतने वेटर होते हुए भी ध्रुव खुद बियर ले कर आया था, तीसरी बात, करुणा ने तुम्हे वह से दूर किआ. हो न हो ये ध्रुव की hi प्लानिंग लग रही है, पार्टी भी उसी ने दी थी.

शिव : पर वो ऐसा क्यों करेगा?

जहान्वी : अब ये तो वही बताएगा. (उन्होंने कॉफ़ी पिटे हुए कहा)

शिव : एक बार मान भी ले की उसी ने किआ है, फिर भी वो क्यों बताएगा?

जहान्वी : वो क्या उसका बाप भी बताएगा, अभी उसने जहान्वी को पहचाना नहीं. उसको तो में बताउंगी अब.

शिव : क्या करने वाली हो आप?

जहान्वी : सब पता चल जायेगा. पहले मेरी खास दोस्त से तो मिल ले. (वो रहस्यमयी ढंग से मुस्कुरायी, हम दोनों ने कॉफ़ी पि और वह से निकल गए, उन्होंने कार एक बंगलो के आगे कड़ी की और हॉर्न बजाय, दरवान ने बहार देखा और फिर दरवाजा खोल दिया, ये भी बड़ा बंगलो था.

शिव : ये किसका घर है?

जहान्वी : चलो, सब पता चल जायेगा. (हम दोनों गेट पर गए, उन्होंने बेल्ल बजायी तो एक औरत ने दरवाजा खोला, 40-45 साल की खूबसूरत औरत थी, कुरता पजामा पहना था, कपड़ो से hi लग रहा था की मालदार घर की hai)Namaste आंटी.

औरत : अरे जहान्वी, बहोत दिनों बाद, आओ अंदर आओ. (फिर उन्होंने मेरी और देखा तो मेने नमस्ते की, वो बस मुस्कुरायी)

जहान्वी : करुणा कहा है आंटी?

औरत : अभी खा कर अपने कमरे में गयी है, देर से उठी है न. तुम भी तो गयी थी पार्टी में.

जहान्वी : है आंटी, में उसके कमरे में hi जाती हु, तुम बैठो शिव. (में क्या बोलता, में वही बेथ गया, आंटी ने नौकर को बुला कर पानी मंगवाया, फिर वो मुझसे मेरे बारे में पूछने लगी, में बताता गया, करीब आधे पौने घंटे बाद वो दोनों आयी, करुणा थोड़ी दरी हुई लग रही थी)

आंटी : बड़ी देर लगा दी, शिव बैठा बैठा मेरे साथ बोर हो गया होगा.

शिव : नहीं आंटी, में ठीक हु.

जहान्वी : क्या करू आंटी, पक्की सहेली जो है, बात करने में टाइम का कहा पता चलता है.

आंटी : पर ये बेचारा तो बैठे बैठे बोर हो गया न, मेने सोचा की तुम आओ तभी नास्ता देती हु, तुम्हारे चक्कर में मेने भी इसे नास्ता नहीं दिया.

जहान्वी : नहीं आंटी इसकी कोई जरुरत नहीं है, हम बहार कर लेंगे. चले करुणा? (मेने देखा की करुणा मुझे hi देख रही थी)





करुणा : ह... है, चलो.

जहान्वी : Bye आंटी.

आंटी : अरे पर, (मेरी और देख kar)Ye तो पहलीबार हमारे घर आया है, इसको ऐसे hi थोड़ी न जाने दे शक्ति हु.

जहान्वी : उसको फिर कभी ले आउंगी, आप खातिरदारी कर लेना.

आंटी : तुम लड़कीअ भी न, हमेशा घोड़े पर सवार रहती हो.

शिव : (हम तीनो वह से निकल गए, दोनों कुछ बोल नहीं रही थी, मेरी भी समाज में नहीं आ रहा था, जहान्वी गाडी अपने घर ले गयी, घर देखते hi में पहचान गया)

जहान्वी : तुम बैठो, में पांच मिनट में आयी. (कह कर वो अंदर चली गयी)

शिव : क्या हुआ?

करुणा : (उसने मेरी और देखा, उसके चेहरे पर दार साफ़ दिख रहा tha)Tumne सब बता दिया?

शिव : उनके साथ इतना बड़ा हादसा हो गया था, वो जान न चाहती थी तो मेने बता दिया, इसमें क्या गलत किआ?

करुणा : (हलके गुस्से se)Aisi बात कोई बताता है क्या?

शिव : नहीं बताता, पर ऐसा भी नहीं होता है, जैसे वो बता रही है उन्हें कुछ गलत होने का अंदेशा है, तो मुझे बताना पड़ा, क्या बात हुई आप दोनों की? (इतने में जहान्वी आ गयी, हमारी बात रुक गयी, वो मुस्कुराते हुए बैठी और गाड़ी चला दी)

जहान्वी : ध्रुव को पूछो, कहा है वो?

करुणा : जहान्वी, मेने कहा न गलती हो गयी यार, इस बात को यही ख़तम कर दे, क्यों बढ़ा रही है?

जहान्वी : (अपने गुस्से को दबाते हुए, जहरीली मुस्कान के sath)Galti हो गयी, अगर सब प्लान के मुताबित हो जाता तो? तुम्हे शर्म नहीं आयी ऐसा करते हुए? में समझती थी की तुम मेरी सबसे बेस्ट फ्रेंड हो, तुमने hi ऐसा किआ?

करुणा : में माफ़ी मांगती हु यार, कहे तो तेरे पेअर पकड़लेति हु, मेने बहोत मन किआ था उसको.

जहान्वी : पर आखिर कर मान गयी, मेरा भी ख्याल नहीं आया? शर्म नहीं आयी ऐसा करते हुए तुम्हे?

शिव : (उन दोनों की बात मेरी समाज में hi नहीं आ रही thi)Akhir बात क्या है? कोई मुझे भी बताएगा?

जहान्वी : एक दोस्त ने दूसरे दोस्त की पीठ में खंजर भोका है, तुम जानते नहीं शिव, गर कल तुम न होते तो क्या अनर्थ होनेवाला था.

शिव : क्या होनेवाला था?

जहान्वी : अभी पता चल जायेगा, करुणा, फ़ोन कर.

करुणा : झानवीई (उसने रिक्वेस्ट भरे स्वर में कहा)

जहान्वी : मेने कहा न फ़ोन कर (जहान्वी थोड़ी ऊँची आवाज में चिल्लाई, करुणा ने फौरन फ़ोन कर diya)Speaker पर कर. (उसने स्पीकर चालू कर दिया, सामने रिंग जा रही थी पर कोई उठा नहीं रहा था, उसने दोबारा डायल किआ, फिर रिंग जाती रही, आखिर कर तीसरी बार में सामने से आवाज आयी)

ध्रुव : हलुओ (उसने उबासी लेते हुए कहा)

करुणा : कहा हो तुम?

ध्रुव : फार्म हाउस पर hi हु, रात को लेट सोया था तो अभी भी सो hi रहा था, क्या हुआ? (करुणा ने जहान्वी को देखा, वो धीरे से फुसफुसाई)

जहान्वी : उसको बोल में वह आ रही हु.

करुणा : कुछ नहीं, में वह आ रही हु.

ध्रुव : अभियई???

करुणा : है अभीयी.

ध्रुव : अभी क्या काम है यार, सोने दे न, शाम को मिलते है न.

करुणा : (हलके गुस्से se)Mene बोलै न अभी आ रही हु.

ध्रुव : गुस्सा क्यों हो रही है मेरी जान, ठीक है आजा, साथमे नहाएंगे. (करुणा ने फ़ोन काट दिया, ध्रुव ने फ़ोन देखा फिर साइड में रख कर वापिस सो गया)

शिव : हम वह क्यों जा रहे है?

जहान्वी : तुम सवाल बहोत पूछते हो (वो मेरी और देख कर मुस्कुरायी)

शिव : आपको लगता है में बेवकूफ हु?

जहान्वी : ऐसा क्यों कह रहे हो यार.

शिव : (हलके गुस्से se)Aapko लगता है की कुछ गलत हुआ है, करूणाजी की हालत देख कर hi लग रहा है की ये सब ध्रुव ने hi किआ है, और आप सामने से उसके hi फार्म हाउस पर जा रही हो, ये सेफ नहीं है.

जहान्वी : (गाड़ी अभी कच्छे रस्ते पर आ चुकी थी, उन्होंने मुस्कुराते हुए मुझे dekha)Me जानती हु की तुम इंटेलीजेंट हो, और ये भी जानती हु की कुछ हुआ तो तुम हो.

शिव : में हु से क्या मतलब है, में कोई सपर हीरो नहीं हु, और जानबुज कर खतरा मोल लेने कहा की समाज दरी है? (मेरी बात सुन कर उन्होंने गाड़ी रोक दी और मुझे देखने लगी, फिर कुछ सोचने लगी)

जहान्वी : बात तो तुम्हारी सही है (फिर उन्होंने मोबाइल निकला और मश्ग टाइप करने लगी, मश्ग भेज कर वो muskurayi)Thik है, मेने सेफ प्लान कर लिया.

शिव : क्या?

जहान्वी : बता दूंगी, (फिर मेरी आँखों में देखते hue)Agar तुम्हे नहीं आना तो में तुम्हे वापस छोड़ देती हु.

शिव : मेने ऐसा तो नहीं कहा, मेरे कहने का मतलब है की हम उसे अपनी जगह भी तो बुला सकते है, ऐसा तो है नहीं की आप वह मारा मरी करने जा रही हो, बात hi करनी है तो बहार भी कर शक्ति है.

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)Dhruvbabu को भी पता चलना चाहिए न की उसने किस पर हाथ डालने की कोशिस की है, उसके hi इलाके में, उसके hi घर में, उसकी औकात दिखने का मज़ा hi अलग है, अपने इलाके में बुला कर धमकाना तो कोई भी कर शक्ति है, पर उसी के इलाके में उसे धमकाने से उसकी साडी अकड़ ख़तम हो जाती है.

शिव : मेने सोचा नहीं था की आपका ये रूप भी हो सकता है.

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)Kyu दार लग रहा है?

शिव : डरता तो में किसी के बाप से भी नहीं.

जहान्वी : (बड़ी सी मुस्कान के sath)Issiliye तो तुम जहान्वी के इतने करीब आ पाए हो, वर्ण किसी की मजाल है जो मेरी मर्जी के खिलाफ मुझे छू भी सके. (में भी मुस्कुराया) फिर भी कह रही हु, अभी भी लौटना चाहो तो लौट सकते हो.

शिव : चलिए मिलते है ध्रुवबाबू से. (मेने मुस्कुरा कर कहा तो वो भी मुस्कुरायी और गाड़ी आगे बढ़ा दी) (करुणा इन दोनों को देख कर दार रही थी, वो अपने आपको कोष रही थी की क्यों उसने ध्रुव की बात मणि, वो दरी सेहमी सी बैठी रही, आखिर गाडी फिर से फार्म हाउस में पहुंच गयी, ध्रुव बहार hi बैठा था और चाय पि रहा था, हम को देख कर वो पहले चौंका फिर मुस्कुरया)

ध्रुव : अरे जहान्वी तुम? व्हाट ा सरप्राइज! (में आसपास देख रहा था, वह काम करनले लोग थे और गेट पर दो सेक्युरिटीवाले थे, ऐसा कोई खास खतरा नहीं था, वैसे भी ये किसी डॉन का अड्डा थोड़ी hi था)

जहान्वी : तुम्हारी इतनी खरीर्दारी के बाद एक थैंक यू तो बनता है न. (जहान्वी ने मुस्कुरा के कहा)

ध्रुव : इसमें थैंक यू की क्या बात है, वैसे भी तुम दोनों तो जल्दी चले गए थे, रुके होते तो मज़ा आता.

जहान्वी : कभी कभी अकेले में ज्यादा मज़ा आता है. (उसकी चाय की और देख kar)Akele अकेले पि रहे हो, आज मुझे कुछ नहीं पिलाओगे?

ध्रुव : (उसके दिमाग में कल वाली बात आ गयी, पर वो muskuraya)isme पूछनेवाली क्या बात है, कहो क्या पिओगी?

जहान्वी : फ़िलहाल तो कॉफ़ी चल जाएगी.

ध्रुव : क्यों नहीं (एक आदमी की और देख kar)Are हरिया, यहाँ थोड़ी चेयर लगवाओ तो.

जहान्वी : यहाँ धुप में कहा बैठना, अंदर बैठते है.

ध्रुव : है है, अंदर चलो, एक भी है. (फिर उसी आदमी ko)Rukhi को कहना तीन अच्छी सी कॉफ़ी बना कर भेजे.

हरिया : जी मालिक.

ध्रुव : आओ अंदर बैठते है. (हम सब एक कॉटेज में गए, वह जा कर उसने एक ों कर diya)Me यहाँ अक्सर आता रहता हु तो सब सुविधा करवा रक्खी है, बैठो तुम लोग. (वो अभी भी नाईट गाउन में था)

जहान्वी : कल कोई खास बियर थी क्या?

ध्रुव : (सवाल से वो थोड़ा चूंकि, पर अपने चेहरे पर मुस्कान बरक़रार रखते hue)Beer तो बियर होती है, वासी मुझे नहीं पता था की तुम्हारी ये हालत हो जाएगी, कितनी पि ली थी तुमने? एक तो में hi देकर गया था.

जहान्वी : मेने सिर्फ वो hi बियर पि थी, वो भी आधी hi.

ध्रुव : (वो अपने आपको नार्मल दिखने की कोशिस कर रहा था, उसने करुणा को देखा जो अपनी नज़ारे झुकाये बैठी थी) तुम तो आधी बियर में hi टल्ली हो गयी thi(Usne मजाकिए अंदाज में कहा, तभी एक औरत कॉफ़ी ले कर आयी, वो कॉफ़ी रख कर चली गयी, हम सबने कॉफ़ी ले ली, जहान्वी कॉफ़ी को सूंघते हुए)

जहान्वी : इसमें तो कुछ नहीं मिलाया न?

ध्रुव : (वो थोड़ा घबरा गया, पर अपने आपको शांत रखते hue)Milaya मतलब, क्या मिलाया?

जहान्वी : वो तो तुम्हे hi पता होगा?

ध्रुव : (मसूकूरआने की कोशिस करते hue)Mene थोड़ी न कफ बनायीं है, कफ में जो मिलाया जाता है वो hi मिलाया होगा.

जहान्वी : अब में सीधे सीधे पूछती हु, कल मेरी बियर में तूने क्या मिलाया था?

ध्रुव : (गभराते hue)Kya कहना चाहती हो? मेने कुछ नहीं मिलाया था.

जहान्वी : तू अपने आप को होशियार समझता है, सुबह जब में उठी तभी मुझे शाक्त हो गया था, में अपने ब्लड और उऋण सैंपल चेक करवाए है, उसमे कोई नशीली चीज पायी गयी है, अगर देखना चाहे तो रिपोर्ट भी दे शक्ति हु.

ध्रुव : तो क्या हुआ, तुमने कल पि थी तो नशीली चीज तो आएगी hi. (उसने घबराते हुए कहा)

जहान्वी : तू ऐसे नहीं मानेगा है न.

ध्रुव : (अब उसका राज़ खुल गया था, वो समाज गया था की ये सब जान चुकी है तो वो सीधा बेथ गया और मुस्कुराने laga)Chal मान लिया की मेने hi ये सब किआ है, पर साबित कैसे करेगी.

जहान्वी : तू क्या समझता है, सिर्फ तुजे hi प्लानिंग आती है, मेरे पास भी सबूत है.

ध्रुव : Kkk..kya सबूत है की मम.. मेने hi किआ है. (उसने लड़खड़ाती जबान में पूछा)

जहान्वी : (अपने मोबाइल पर उसने एक वीडियो प्ले किआ, उसमे करुणा सब बोल रही थी, मेने भी वो देखा, शायद ये तब हुआ था जब वो उसके कमरे में गयी थी) देख लिया. (ध्रुव ने गुस्से से करुणा को देखा, वो नज़ारे झुकाये बैठी थी)

ध्रुव : इसने कहा और तुमने मान लिया, जाओ कोर्ट में में भी देखता हु की क्या बिगड़ लेती हो तुम मेरा.

जहान्वी : तुम्हे क्या लगता है, मुझे कोर्ट जाना है क्या, अगर में चाहती तो पुलिस कम्प्लेन भी कर शक्ति थी, पर मुझे वो सब नहीं करना, जो करना होगा वो में खुद करुँगी. मुझे बस ये जान न है की तूने ऐसा क्यों किआ.

ध्रुव : तेरी अकड़ ठिकाने लगाने के लिए, जा में कहता हु की मेने hi तुम्हारी बियर में नशीली गोलिया मिलायी थी, जो उखाड़ना है उखड le.(Muje गुस्सा आ रहा था)

जहान्वी : मुझे नशीली गोलिया खिलने से मेरी अकड़ कैसे काम होती?

ध्रुव : तुजे नशा करवाके तुजे अपने निचे ले आकर तेरी वीडियो बनानेवाला था, जो कल बाकि रह गया था वो आज पूरा हो जायेगा. (में गुस्से से अपनी जगह खड़ा हो गया, उसने मुझे देखा और muskuraya)Bachcho को इन सब में नहीं पड़ना चाहिए.

शिव : तुजे क्या लगता है? तेरे फार्म हाउस पर है तो में दार जाऊंगा (कहते हुए में उसकी और बढ़ा तो वो भी खड़ा हो गया)

ध्रुव : क्या कर लेगा बे, आज तो तेरे सामने hi इसकी लूंगा, यही. (वो बस बोलै hi था)

शिव : दृऊव. (ध्रुव एक बार तो ये दहाड़ सुन कर hi कैंप गया) (मेने उसका गाला पकड़ liya)(Dhruv अपने गले पर की पकड़ छुड़ाने की कोशिस करने लगा, वो खुद एक गयम में जाता था, शरीर भी मजबूत था, और शायद इसीबात का उसको घमंड भी था, उसे लगा था की वो ताकतवर है, पर अभी जिस पंजी में उसकी गर्दन फांसी थी वो छुड़ा नहीं प् रहा था, वो छटपटाने लगा और अपने आपको छुड़ाने की कोशिस करने लगा पर गले पर पकड़ इतनी मजबूत थी की वो कुछ नहीं कर प् रहा था, उसने चिल्ला न चाहा पर उसकी आवाज भी नहीं निकल रही थी, उसकी आँखों में दर के मरे खून जमा होने लगा, उसके सामने अँधेरा छाने लगा.

जहान्वी : (जहान्वी भी ध्रुव की हालत देख कर दर gayi)Chhodo उसे शिव, मर जायेगा wo.(Dhruv को उम्मीद की एक किरण नजर आयी, की तभी उसके गले का फंदा हैट गया, वो खासते हुए अपने गले को पकड़ कर वही बेथ गया. कुछ पल बाद उसको होश aaya)Sale, तूने मुझे हाथ लगाया (कहते हुए वो अपना मोबाइल उठाने लगा तो मेने उसके हाथ की कलाई पकड़ कर उसको मरोड़ दिया, उसके हाथ से मोबाइल छूट gaya)Aiiiiii छूऊद मदरसससस. (मेने और जोर diya)Aiiiiiiii.

शिव : (शांति se)Gali नहीं, लड़कीअ बैठी है. (वैसे भी शिव की आवाज बहोत भरी थी, और ऐसा लग रहा है जैसे वो गुर्रा रहा है)

जहान्वी : अगर चिल्लाया न तो गोली मार दूंगी. (मेने चौंक कर जहान्वी को देखा तो उसके हाथ में पिस्तौल थी, ध्रुव भी दर के मरे जहान्वी को देखने लगा)

शिव : इसकी जरूरत नहीं है.

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)Janti हु, पर अभी में ज्यादा हल्ला नहीं चाहती. (ध्रुव की और देख kar)to तू समाज गया होगा की ye(Shiv) क्या है, शायद तूने कभी अख़बार पढ़ा नहीं लगता, कभी इसके कारनामे पढ़ लेता तो ऐसी गुस्ताखी नहीं करता. अगर अभी भी दिल में उमंगें उठ रही हो तो पूरा कर ले, में कुछ नहीं करुँगी. (कहते हुए उसने पिस्तौल का रुख निचे कर diya)Shiv उसको मोबाइल दे. (मेरी समाज में नहीं आ रहा था पर मेने मोबाइल उठाया और उसको diya)Apane सिक्योरिटी को बुलाना चाहता है न? बुला ले, उनके सामने hi तुजे नंगा करुँगी, और तेरा वो हसरा करवाउंगी की तू भी याद रक्खेगा. (ध्रुव ने मोबाइल देखा पर कॉल नहीं किआ) तुजे क्या लगता है बे चूतिये, तू मेरा बेहोशी में फायदा उठा लेता और मेरा वीडियो बना लेता तो में दार जाती. सुकर मन की ऐसा कुछ हुआ नहीं, वर्ण तेरे घर में घुस कर तेरे शिर में गोली मरती. वीडियो बना कर दुनिया को दिखाना चाहता है की देखो में कितना बड़ा मर्द हु, एक बेहोश लड़की के साथ ये कर रहा हु, या मुझे नंगी दिखा कर मुझे बदनाम कर के ये समझता था की मेरी जिंदगी तबाह हो जाएगी. वो ज़माने गए बे. आज कल तो बड़ी बड़ी पोर्न स्टार को लोग अपनी फिल्मो में हेरोइन बनाते है, बड़े बड़े शोज करवाते है. अबे चूतिये, में विदेश में रही हु, वह चली जाती कोण घंटा मुझे पूछता. में आज की लड़की हु, इन इज्जत के चक्करो से डरनेवाली नहीं, समजे. तू मेरी अकड़ तोडना चाहता था न, अब में तेरी अकड़ तोड़ती हु. तूने इसको चारा बनाया था न (उसने करुणा की और इस्सर kia)Now थिस बीच विल फ़क इन फ्रंट ऑफ़ यू.

करुणा : (दर के maare)Ye क्या बोल रही हो तुम जहान्वी?

जहान्वी : क्यों? अकेले में तो शिव के साथ बहोत कुछ कर रही थी, अब क्या हो गया?

करुणा: (ध्रुव ko)Mene कहा था न की ऐसा मात करो, तुम जानते हो इससे, मेने तुम्हे आगाह भी किआ था, मेरे hi दिमाग में पत्थर पड़े थे जो में तुम्हारी बात मान गयी.

ध्रुव : तुम ऐसा नहीं कर शक्ति जहान्वी.

जहान्वी : क्यों नहीं कर शक्ति, जब तुम मेरे साथ इतना सब करने का प्लानिंग कर शक्ति हो तो में ये नहीं कर शक्ति. या तो में तेरी कम्प्लेन पुलिस में कर के तुजे जेल भिजवाउंगी या फिर ये तेरे सामने hi सब करेगी, चॉइस तेरी है.

शिव :(मेरी समाज में नहीं आ रहा था की जहान्वी क्या बोल रही hai)Ye आप क्या कह रही है, में ऐसा कुछ नहीं करूँगा.

जहान्वी : क्यों, तुम्हे क्या प्रॉब्लम है, एक अच्छीखासी लड़की मिल रही है. (वो मुस्कुरायी)

शिव : ये गलत है, अगर आपको सजा देनी है तो ध्रुव को दीजिये, आप कहो तो में इसको मर मर के इसका भरता बना देता हु, पर किसी लड़की के साथ ये सब करना ठीक नहीं है.

जहान्वी : और वो कर रहा था वो ठीक था, सोचो शिव अगर वो अपने मंसूबो में कामियाब हो जाता तो? क्या तब तुम्हे मेरी हालत ठीक लगती, वो मुझे सरे आम झालील करता, मुझसे न जाने क्या क्या करवाने का सोचा होगा इसने, क्या वो सब ठीक होता.

शिव : में मंटा हु की वो गलत था, पर इसकी सजा ध्रुव को देनी चाहिए न, न की इसको (करुणा की और इस्सर कर के)

जहान्वी : क्यों, इसने भी तो इसका साथ दिया था, अपनी सहेली से गद्दारी नहीं कर रही थी वो, उसने क्यों नहीं सोचा की मेरा क्या होगा? या तो ये जेल जायेगा या फिर ये करेगी, चॉइस इनकी है. (तभी उनके मोबाइल पर फ़ोन aaya)Hello मैडम. (सामने से किसी ने कुछ bola)Nahi मैडम, अभी फिलहाल सब ठीक है, वो मैंने सेफ्टी के लिए आपको मश्ग किआ था, (फिर सामने से कुछ bola)Me यहाँ से निकलूंगी तो आपको फ़ोन कर दूंगी (.....) नहीं नहीं, अभी आने की जरुरत नहीं है, वो एक प्रॉब्लम हो गयी थी, पर अभी सब कण्ट्रोल में है, पर फिर भी में एक घंटे बाद फिर कॉल करुँगी, अगर मेरा कॉल न आये तो आप प्रॉकेड करना. (....)थैंक यू मैडम. (उसने फ़ोन रख दिया, और ध्रुव की और देख kar)Police स्टेशन से फ़ोन था, भार्गवी मैडम को तो तुम जानते hi होंगे, मेने उनको कहा था की अगर एक घंटे में मेरा फ़ोन न आये तो इस फार्म हाउस के पते पर आ जाये. (मुझे याद आया की इन्होने किसी को मश्ग किआ था) चॉइस इस योर्स. (उसने ध्रुव को कहा)

ध्रुव : प्लीज, मुझे माफ़ कर दो, में फिर कभी ऐसी गलती नहीं करूँगा, छोड़ दो उसे. (ध्रुव, करुणा से सच में प्यार करता था)

जहान्वी : क्यों छोड़ दू? अब बात अपने घर पर आयी तो समाज आ रहा है, दुसरो की इज्जत नहीं है क्यों. (उसने करुणा की और dekha)Lagta है मुझे पुलिस में hi कम्प्लेन कर देनी चाहिए (उसने फिर फ़ोन उठाया)

करुणा : Nahi....(Fir वो थोड़ी देर रुक गयी, और धीमी आवाज में boli)Me तैयार हु. प्लीज उसको जेल मत भेजो.

शिव : (जहान्वी की और देख kar)Me कुछ नहीं करनेवाला.

जहान्वी : ठीक है तो फिर, ये तय रहा की ध्रुव जेल जायेगा. (वो फिर फ़ोन पर नंबर डायल करने लगी).

करुणा : प्लीज जहान्वी, कॉल मत करो, (शिव की और देख kar)Please शिव.

शिव : (मेने जहान्वी को देखा, पता नहीं वो क्यों ऐसा कर रही थी, मेने कभी सपने भी उसका ये रूप सोचा नहीं था, में खड़ा hi रहा, आगे नहीं बढ़ा)

जहान्वी : अब ये तुम पर है करुणा, उस रात को बड़ा रिझाने का प्रयास कर रही थी, आज क्या hua?(Karuna ने जहान्वी को देखा, फिर उसने ध्रुव की और देखा जो शिर निचे कए बैठा था, वो कड़ी हुई और शिव के पास आ गयी, उसने फिर एक बार ध्रुव को देखा, फिर शिव को)

करुणा : प्लीज शिव. (उसने बिनती भरे चेहरे से कहा)

शिव : प्लीज स्टॉप थिस (जहान्वी की और देख कर)

जहान्वी : मेने कहा मन किआ है, में तो रेडी हु, मत करे ये, मुझे कॉल करने दो, मुझे कम्प्लेन करने दो और जेल जाये ये, मुझे क्या.

करुणा : वो नहीं मानेगी, प्लीज उसको जेल जाने से बचा लो. (अब में क्या करू समाज में नहीं आ रहा था, एक लड़की मुझे छोड़ने को कह रही थी, पर उसको ऐसे जलील करना भी ठीक नहीं था, और जहान्वी का गुस्सा भी सही था, अगर सोचा जाये तो उसके साथ अगर वो सब हो जाता तो उसकी जिंदगी भी बर्बाद हो सकती थी, उसकी बेस्ट फ्रेंड ने hi उसको धोखा दिया tha)(Shiv को ऐसे सोच में खड़ा देख करुणा ने उसका हाथ पकड़ा)

(पास्ट)

करुणा के रूम में जब जहान्वी गयी थी ये तब की बात है, जहान्वी को इस वक़्त देख कर करुणा चौंक गयी थी, पर नार्मल रहने का प्रयास करते हुए वो बोली,

करुणा : अरे जहान्वी, तुम इस वक़्त, कैसी तबियत है तुम्हारी?

जहान्वी : (हलके गुस्से से दन्त पिस्टे hue)Ab ज्यादा नाटक मात कर, मुझे समाज में आ गया है की कल मेरे साथ क्या हुआ था.

करुणा : कहना क्या चाहती है तू?

जहान्वी : तुम लोगोने मुझे नशे की कोई चीज खिलाई थी, है न.

करुणा : ये क्या कह रही है तू? तू hi तो पि रही थी.

जहान्वी : ये पहली बार था क्या, हमने साथ में कितनी बार पि है, कभी ऐसा हुआ है, और मेने पूरी बियर भी नहीं पि थी, तुजे लगता है की आधी बियर में मेरी ये हालत हो शक्ति है.

करुणा : (अनजान बन ने का नाटक करते hue)Muje क्या पता की तूने कितनी पि है, में तो डांस कर रही थी.

जहान्वी : है, तू कुछ ज्यादा hi डांस कर रही थी, मेने देखा था, (तभी उसके फ़ोन पर कॉल आया, उसने बात की) Ok, थैंक यू. (करुणा को देख kar)Le कन्फर्म हो गया, मेने अपने रिपोर्ट्स निकलवाए थे, उन्होंने भी कन्फर्म कर दिया की ये सिर्फ बियर नहीं थी कुछ और भी था. और जिस तरह से तू शिव को वह से ले गयी, मुझे यकीं है की तू भी इसमें शामिल थी.

करुणा : में शिव को कही नहीं ले गयी थी, में वही तो थी.

जहान्वी : मुझे शिव ने सब बता दिया है, उसने बताया की तू उसको पीछे टॉयलेट के पास ले गयी थी और उसके sath....Tuje जरा भी शर्म नहीं आयी अपनी खास सहेली के साथ ऐसा करते हुए, में तुजे अपना सच्चा दोस्त मानती थी, और तूने मेरे साथ ऐसा किआ.

करुणा : (वो चाहती तो मन ने से इंकार भी कर शक्ति थी पर यहाँ उसकी दोस्त थी और वो भी उसको अपना बेस्ट फ्रेंड hi मानती थी तो उसने मान liya)Sorry यार, में बाहेक गयी थी, मेने ध्रुव को बहोत समजने का प्रयास किआ पर वो बस एक hi रत लगाए बैठा था, में क्या करती.

जहान्वी : मेरे साथ ऐसा हो जाने देती क्यों, तुजे आईडिया भी है की तू क्या करने जा रही थी. और अगर ध्रुव की ऐसी सोच है तो वो तेरे लिए ठीक नहीं है, समाज रही है तू.

करुणा : शायद तू ठीक कह रही है, पर अब बहोत देर हो चुकी है, हमारे घरवाले भी सब जानते है, और हमारी शादी का भी सोच रहे है.

जहान्वी : पर उसकी ऐसी हरकत के बाद में उसको छोड़नेवाली नहीं हु, में पुलिस कम्प्लेन करुँगी.

करुणा : ऐसा करने से क्या फायदा होगा, और साथ में तेरी भी बदनामी होगी वो अलग. अगर तू कहे तो मेरे पास एक और रास्ता भी है.

जहान्वी : क्या?

करुणा : उसको झालील करने का.

जहान्वी : वो कैसे? (करुणा ने उसको सब संजय, जिसे सुन कर जहान्वी का मुँह खुला का खुला रह gaya)Tu कितनी कामिनी है, उसके सामने hi सब करेगी?

करुणा : है, और उसके साथ भी रहूंगी, पूरी जिंदगी ये महसूस करेगा की अपनी hi होनेवाली बीवी को किसी के साथ छुड़वाया.

जहान्वी : और ये तू क्यों करेगी?

करुणा : तेरी कसम खा कर कहती हु, मुझे उसका तुझको फ़साने का प्लान बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा था यार, सच कहती हु, इसीलिए मेने शिव को भी ज्यादा रोका नहीं, वर्ण मेरा तो इतना मूड था की कपडे hi निकल दू, फिर देखती की वो कैसे जाता.

जहान्वी : वो वैसा नहीं है. (उसने शिव का बचाव किआ)

करुणा : क्यों वो मर्द नहीं है?

जहान्वी : मैंने ऐसा कब kaha?(Jhepte हुए वो बोली)

करुणा : (मुस्कुराते hue)Matlab तू जानती है की वो क्या है, क्या क्या किआ है उसके साथ? (उसने छेड़ते हुए पूछा)

जहान्वी : (शरमाते hue)Kuchh नहीं किआ.

करुणा : शर्माते ऐसे रही है जैसे सब कर चुकी है.

जहान्वी : में तेरे जैसी बे शर्म नहीं हु सामजी, अपनी hi दोस्त को ऐसे चंगुल में फ़साने चली थी.

करुणा : (सीरियस हो kar)Tuje यकीं न आये तो में अपने maa-papa की कसम कहती हु यार, में सच में नहीं चाहती थी, में कैसे भी करके तुजे बचाना चाहती थी, पर उसको देख कर इमां दोल गया.

करुणा : शिव को, और किसको.

जहान्वी : एक नंबर की राण.... (वो रंडी बोलते बोलते रुक गयी)

करुणा : जो बोलना है बोल यार, बस एक बार उसके निचे लेटवा de.Tu जो कहेगी वो सब में करुँगी.

जहान्वी : में ऐसा नहीं कर शक्ति.

करुणा : तू उसे चाहती है न?

जहान्वी : वो मुझसे छोटा है. (हलकी मायूसी से वो बोली)

करुणा : छोटा है तो क्या हुआ, चाहने में क्या बुराई है, जबसे उसका वो पकड़ा है मेरी तो हालत ख़राब हो रही है (अपने हाथ को देखते hue)Kal से मेरे हाथ में बस वही महसूस हो रहा है यार.

जहान्वी : थोड़ा तो लिहाज कर कामिनी.

करुणा : अरे छोड़ न यार, मेरे नशीब में तो बस ध्रुव hi है, अगर तू मान जाये तो थोड़े मज़े भी ले लू, प्लीज.

जहान्वी : (मान में, वैसे भी मेरी तो हिम्मत नहीं हो रही, िसिबाहने शायद मेरा भी कल्याण हो जाये) चल ठीक है.

करुणा : जेओ मेरी शेरनी. (खुस होते हुए उसने kaha)Chal अब वीडियो चालू कर, में सब बोलती हु, फिर उसका बंद बजाते है.

जहान्वी : अगर उसने तुजे छोड़ दिया तो.

करुणा : तू उसकी चिंता मात कर, में उसको ऐसा करने नहीं दूंगी, उसको बड़ा शौक था हमारी वीडियो बनाने का, तो वो सब मेरे पास है, वो चाहे तो भी मुझे नहीं छोड़ सकता.

(फिर दोनों ने मिल कर वो वीडियो बनाया)

(प्रेजेंट)

करुणा : (ध्रुव की और देख kar)Dekha, तुम्हारी वजह से में किस हल में आ गयी, मेने तुम्हे पहले भी संजय था, तुम hi बताओ, अब में क्या करू? (ध्रुव नज़ारे झुकाये बैठा रहा)

शिव : (मेने जहान्वी मैडम को देखा तो वो भी नज़ारे चुराने lagi)Mene आपको ऐसा नहीं सोचा था.

जहान्वी : (उसको भी अब ये खेल कुछ ज्यादा hi लग रहा था, पहले तो उसको इस बात का एहसास नहीं था, पर जब अब सब सुरु होनेवाला था तो उसे लग रहा था की उसे शिव के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए, वो रोकना चाहती थी, पर अब जबान उसका साथ नहीं दे रही थी)

करुणा : प्लीज शिव, वो कम्प्लेन कर देगी तो ध्रुव जेल चला जायेगा, और ऐसे केस में बरसो तक उसे जेल में रहना पड़ेगा, जहान्वी बस ये बदला चाहती है तो प्लीज कर लो, में ध्रुव के लिए कुछ भी कर शक्ति हु.

शिव : ये ठीक नहीं है. (मेने उनकी और देख कर कहा)

करुणा : ध्रुव ने भी जहान्वी के साथ ठीक नहीं किआ, वो अपनी जगह बिलकुल सही है, तुम कुछ मात करो, बस मेरा साथ दो, प्लीज. (करुणा इस बात को ज्यादा खींचना नहीं चाहती थी, वो जल्द से जल्द चुद जाना चाहती थी, उसने शिव के हाथ को अपने स्तन पर रख दिया, और खुद hi शिव के हाथ को दबा कर अपने स्तन दबवाने लगी)

शिव :(उसके सॉफ्ट स्तन पर हाथ लगते hi मेने करुणा को देखा, उसने भी मुझे देखा, फिर ध्रुव की और देखा तो वो निचे देख रहा था, उसने हलकी सी स्माइल दी मुझे, में समाज नहीं प् रहा था की वो मजबूरी में कर रही है की खुसी से, उनको जल्दी थी शायद, तो वो एक हाथ निचे ले गयी और मेरा लुंड सहलाने लगी, मेने जहान्वी को देखा तो वो अपनी नज़ारे चुराने लगी, मेने ध्रुव को देखा तो वो अपना शिर पकड़ कर निचे देख रहा था, मेने करुणा को देखा तो वो मुस्कुरा रही थी, मेरी समाज में नहीं आ रहा था की क्या करू, पर वो मेरे लुंड को सेहला और दबा रही थी, मेरे लुंड में अकड़न आना शुरू हो गयी, मेरे हाथ रुक गए थे तो करुणा ने अपने दूसरे हाथ का दबाव मेरे हाथ पर दबा कर मुझे फिर मुझे अपने स्तन दबाने का इस्सर किआ, मेने उसके स्तन को मसाला तो उसके चेहरे पर कामुकता छ गयी, वो एन्जॉय कर रही थी, तो में उसके स्तन को मसलने लगा वो बड़ी कामुकता से मुझे देखने लगी, उसके चेहरे पर हल्का दर्द भी उभर आया पर वो मेरा लुंड जोर से दबाने लगी, वो अपने होठ दबा रही थी ताकि मज़े की सिसकी न निकल jaye)(Jhanvi अपनी तिरछी नजरो से ये सब देख रही थी, उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था और साथ में गरम भी हो रही thi)(Mera लुंड अब पूरी औकात में आ चूका था, मुझे पंत में परेशानी भी हो रही थी, करुणा थोड़ी दूर हुई और मेरे लुंड को देखा, फिर एक बार ध्रुव पर नजर डाली मेने भी देखा, वो निचे hi देख रहा था, फिर वो मेरा पंथ खोलने लगी, उसने ज़िप निचे की और अंदर हाथ dala)(Karuna ने जैसे hi अंदर हाथ डाला तो अंदर के गरम एहसास से hi उसकी छूट में पानी आने लगा, उस बड़े लुंड का उसे आभास हो चूका था, वो और ज्यादा उत्तेजित होने लगी और उस लुंड को दबाने लगी, उस से बर्दास्त नहीं हो रहा था तो दूसरे हाथ से शिव का हाथ पकड़ कर अपनी छूट के पास ले गयी, शिव भी अब आगे बढ़ने के मूड में लग रहा था, उसने फ़ौरन उसकी छूट को दबोच लिया, उसने खुसी से शिव को देखा, उसके बड़े पंजी ने उसकी छूट को दबोच लिया था, वो अपने होठ दबा कर अपनी आवाज को रोकने का प्रयास करने lagi)(Mere हाथ में छूट का एहसास हो रहा था, वो स्कर्ट पहने हुए थी, मेने एक हाथ से स्कर्ट को ऊपर उठाया और उसकी पंतय में हाथ दाल दिया, नंगी छूट मेरे हाथ में थी, वो बहोत गीली हो चुकी थी, मेने करुणा को देखा तो वो शर्माने लगी, उसको एहसास हो गया की में क्या कहना चाहता हु. उसने कामुकता से मुझे है में इस्सर किआ जैसे कह रही हो की है में बहोत गीली हो चुकी हु, प्लीज कुछ करो, मेने भी एक ऊँगली उसकी छूट में घुसा दी, उसने जोर से अपने होठ को काट लिया और सिसकी रोकने का भरपूर प्रयास करने लगी. गरम गरम छूट में मेरी ऊँगली अंदर पहुंच चुकी थी, वो अंदर से पूरी तरह से गीली थी, में ऊँगली अंदर से हिलने लगा तो उसने मेरी कलाई पकड़ ली और मुझे ना में इस्सर करने लगी, पर अब मुझे घंटा फर्क पड़नेवाला था, मुझे क्या, वो सामने से छोड़ने आयी थी तो में भी क्या करता. वो बहोत कामुक भाव दे रही थी, कभी अपने होठो को काट टी तो कभी अपने होठो पर जीभ फिरती, उसकी कमर भी झटके खा रही थी) (करुणा को ऊँगली भी लुंड जैसी लग रही थी, और वो ऊँगली जिस तरह से उसके अंदर कोहराम मचाये थी उसके लिए बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था, वो सब भूल चुकी थी, वो ये भी भूल गयी थी की दो लोग और है जो इस कमरे में है.)

करुणा : (धीमी आवाज me)Shhhhhhhhhh, आअह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (उसकी आवाज सुन कर ध्रुव ने भी एक बार देखा, फिर नज़ारे फेर ली, जहान्वी की भी वही हालत थी, उसने अपनी झंघ आपस में सत्ता ली thi)(Karuna से खड़ा होना भी मुश्किल लग रहा था, उसके पेअर कैंप रहे थे, उसने शिव के हाथ को जोरो से पकड़ लिया था.)

शिव : (वो बहोत पानी छोड़ रही थी, मेरा लुंड अब अंदर दर्द करने लगा तो मेने छूट से हाथ हटाया और अपनी पंत की बेल्ट खोल दी और अंडरवियर समेत थोड़ी निचे खिसका दी जिस से लुंड बहार निकल आया) (करुणा ने ये देखा और लुंड को देख कर hi वो दर गयी)





(जहान्वी ने भी ये देखा और उसकी भी सांसे थम सी गयी, लुंड को वो अपनी फटी आँखों से देख रही थी, पर जैसे hi उसे होश आया उसने शिव को देखा तो वो उसको hi देख रहा था, उसने अपनी नजर घुमा ली, पर अभी भी उसके जहँ में वो बड़ा लुंड hi था, उसकी छूट में भी पानी आ रहा था, वो अपनी झांघो को जोर से आपस में सत्ता कर उसको रोकने का प्रयास कर रही thi)(Karuna थोड़ी संभल चुकी थी, पर उसकी निगाहे लुंड पर hi चिपकी हुई थी, उसने कांपते हाथो से लुंड को छुआ और देखने लगी की वो सच है या सपना. गरम गरम खाल का एहसास होते hi उसने लुंड को अपनी उंगलिओ की मदद से थम लिया, वो उसके हाथ में समां भी नहीं रहा था, और कड़क तो इतना था की जरा भी नहीं डाब रहा tha.)(Dhruv ने भी एक नजर डाली, वो देखना चाहता था की क्या हो रहा है तो उसकी भी नजर शिव के लुंड पर पड़ी, उसकी भी आंखे फटी की फटी रह गयी, ऐसा तो उसने सिर्फ पोर्न फिल्मो में hi देखा था और वो भी किसी का hi ऐसा था, उसको अपने लुंड की साइज पर शर्म आने लगी, वो जिसे बच्चा कह रहा था वो तो उसका भी बाप था)
 
अपडेट 175

करुणा के हाथ में शिव का बड़ा लुंड था, जिस का एहसास वो कल रात hi कर चुकी थी, शायद उसी की छह में वो जान बुज कर ये सब करने को तैयार हो चुकी थी, अगर वो चाहती तो अलग से भी शिव को रिझाने का प्रयास कर शक्ति थी, पर जब ध्रुव ने उसको शिव के साथ आगे बढ़ने को कहा था तब कही न कही उसको ध्रुव पर गुस्सा आया था, वो जानती थी की वो उस से प्यार करता है फिर भी वो किसी और के साथ उसको भेज रहा था, और वो खुद दूसरी लड़की के साथ करने की प्लानिंग कर रहा था, जिस से ये प्रतीत होता था की वो उसकी जानकारी के बगैर किसी और के साथ सेक्स करता होगा और वो कई हो सकती थी, उसके सामने ये सुनेहरा अवसर था, एक तो उसकी तृप्ति जो उसको काफी टाइम से मिल नहीं रही थी और दूसरा ध्रुव को भी सबक सीखना, वो ये बताना चाहती थी की अगर वो दुसरो के साथ कर सकता है तो वो भी कर शक्ति है, वैसे भी उसके दिल में अपनी hi खास दोस्त को धोका देने का दर्द था, वो बिलकुल नहीं चाहती थी की जहान्वी के साथ कुछ भी बुरा हो, पर कही न कही ध्रुव का साथ दे कर वो भी इस गुनाह का हिस्सा बन ने जा रही थी, जिसके लिए वो सजा की हक़दार थी. शिव में उसे एक मासूम सा लड़का hi दिख रहा था, उसके अंदर किसी भी बात के लिए घमंड नहीं था, उसकी जिस तरह की सख्सियत थी वो अगर कहता की उसके साथ सेक्स करे तो वो तैयार भी हो जाती, वो क्या कोई भी लड़की तैयार हो जाती. और आज तो उसने शिव का लुंड भी देख लिया था जो किसी भी लड़की को संतुस्ट करने की क्षमता रखता था, लम्बा, मोटा और एकदम गोरा, भले hi उसके शरीर के मुकाबले वो थोड़ा काम गोरा था पर ध्रुव के गहरे रंग के सामने तो वो बहोत ज्यादा गोरा था, और वैसे भी रोड़ा रंग इंसानो को आकर्षित करता hi है, वो बड़े चाव से उसको देखते देखते उसको महसूस कर रही थी, उसके लुंड को देख कर वो उसकी और आकर्षित हो रही थी, अगर वो शिव के साथ अकेली होती तो एक पल न लगाती अपने मुँह में लेने के लिए, पर चार और आंखे थी जो उन्हें देख रही थी, और वो ध्रुव को भी दिखाना चाहती थी की वो मज़बूरी में कर रही है, सिर्फ उसको बचने के लिए कर रही है.

जहान्वी को अब पछतावा हो रहा था की उसने करुणा की बात क्यों मणि, जिस शिव पर उसका हक़ था वो अभी करुणा के साथ था, और करुणा का चेहरा hi बता रहा था की वो कितनी खुस है, वो जिस तरह से शिव के बड़े अंग को थामे उसे सेहला रही है ये देख कर hi जहान्वी को गुस्सा आ रहा था, तभी शिव ने उसके कंधे पकड़ कर उसको निचे होने का इस्सर किआ तो वो अपने घुटनो पर बेथ गयी, और शिव की आंखोमे देखने लगी, जैसे पूछ रही हो की आगे क्या आदेश है मेरे आका.

(Shiv)Pata नहीं मेरे मान में क्या चल रहा था, एक और तो मुझे लग रहा था की जहान्वी के साथ जिन्होंने इतना बुरा करने का सोचा उन्हें सबक सीखना चाहिए, वही दूसरी और किसी की मजबूरी का फायदा उठाना मुझे गवारा नहीं था, सच कहु तो करुणा दिखने में काफी सुन्दर थी, मॉडर्न वेशभूसा में वो काफी आकर्षक लग रही थी, उसके भरे हुए स्तन और उभरे हुए कूल्हे उसे आकर्षक बनाते थे. वो जिस तरह से मुझे और मेरे लुंड को देख रही थी मुझे यकीं हो गया था की वो अपने मान से ये सब करने को तैयार है, मेने अपने लुंड को उसके चेहरे पर रगड़ा तो वो बड़े मादक तरीके से उस एहसास को अपने अंदर सामने लगी, उसकी आँखों में नशा सा चढ़ने लगा, उसका मुँह भी खुल गया था और वो उसको अपने मुँह में लेने के लिए आतुर लग रही थी. मेने अपने लुंड का टोपा उसके होठो पर रगड़ा तो मेरे लुंड से निकलता रास उसके होठो पर लगने लगा, वो अपनी जीभ निकल कर उसे महसूस करने लगी, में खुद दुविधा में था, मेरा कड़क लुंड तो कह रहा था की में तैयार हु, कर ले, मेने लुंड को उसके मुँह पर लगाया तो उसने अपना पूरा मुँह खोल दिया और टोपे को अपने अंदर प्रवेश करने दिया, और उसे चूसने लगी, गरम मुँह का एहसास होते hi मेरी भी आंखे बंद हो गयी और में उसके शिर को पकड़ कर अपने लुंड पर आगे पीछे करने लगा, वो सही से बेथ गयी और मेरे लुंड को चूसने लगी.

करुणा : (मान me)Shhhhhh कितना मोटा है यार शहहहहह आज तो सरे अरमान पुरे हो जायेंगे, उम्मम्मम उम्मम्मम शह्ह्ह्हह्ह, पोर्न में देखा था तब सोचती थी की ऐसा कभी मुझे मिलेगा की नहीं, पर किस्मत देखो, आज वैसा hi मेरे मुँह में है, और थोड़ी देर में मेरी छूट में भी होगा. शहहहहह थैंक यू ध्रुव शह्ह्ह्हह्ह तुम्हारी वजह से hi आज मुझे ये मौका मिला है. सलररररप सलररररप. उम्म्म्म. (वो बड़े चाव से लुंड चूसने लगी, उसने इस तरह से अपने आपको एडजस्ट किआ की ध्रुव को उसका चेहरा न दिखे,





वो भी उस से प्यार करती थी, तो उसको भी शर्म आ रही थी की वो उसके hi सामने ये सब कर रही है.

वही दूसरी और जहान्वी ने एक बार देखा की करुणा ने शिव के लुंड को अपने मुँह में ले लिया है, अब उसको उत्तेजना नहीं हो रही थी, अब उसको अपने आप पर गुस्सा आ रहा था, उसने शिव को देखा जो आंखे बंद किये हुए था, उसने नज़ारे फेर ली, उस से ये दृश्य देखा hi नहीं जा रहा था, वो यहाँ से निकलजाना चाहती थी.

शिव : (थोड़ी देर बाद मेने आँखे खोली और करुणा को देखा, जो बड़े प्यार से मेरा लुंड चूस रही थी, मेने ध्रुव को देखा जो अपना मुँह छुपाये था, और जहान्वी भी अपनी नज़ारे दूसरी और किये हुए थी. मेने फिर करुणा को देखा और उसको पीछे धकेलने लगा पर वो जोर लगा कर मेरे लुंड की और hi रहना चाहती थी, मेने थोड़ा और जोर लगाया तो वो मुझे देखने लगी, जैसे कह रही हो की क्यों हटा रहे हो मुझे, पर मेने उसको दूर धकेला और लुंड को उसके मुँह से बहार निकल लिया.

करुणा : (मान me)Ab वो आगे बढ़ना चाहता है शायद, उसके चेहरे पर मुस्कान आयी और वो कड़ी हो गयी, और उसको देखने लगी की अब क्या करू, कैसे करोगे. पर उसके आश्चर्य के बिच शिव अपना पंत पहन ने लगा और अपने लुंड को अंदर करने लगा, करुणा ने फ़ौरन उसका हाथ पकड़ लिया, वो बोलतो कुछ नहीं सकीय पर अपनी आँखों से hi पूछने लगी की क्यों इसे अंदर कर रहे हो? (मेने उनकी और ध्यान नहीं दिया और जैसे तैसे अपने लुंड को अंदर कर दिया और ज़िप लगा कर बेल्ट भी बंद कर दिया, और जहान्वी की और गया जो अभी दूसरी और देख रही थी, मेने उसका हाथ पकड़ा और उसे उठाने laga)(Jhanvi आश्चर्य से शिव को देखने लगी, एक पल के लिए तो वो घबरा गयी की शिव उसी हालत में उसके पास कैसे आ गया, उसकी नजर निचे गयी तो उसने पंत पहनी हुई थी, उसे कुछ समाज में नहीं आया, वो आश्चर्य से कभी शिव को तो कभी वह कड़ी करुणा को देखने लगी, करुणा का चेहरा भी बता रहा था की उसको भी विस्वास नहीं हो रहा है, पर शिव के खड़े करने पर वो कड़ी हो गयी)

शिव : देखिये मैडम (जहान्वी को) में ये सब नहीं कर शक्ति, आपको जो करना है करिये, आपको ध्रुवभाई को जेल भेजना है तो भेजिए, या जो करना है करिये, अभी भी में कह रहा हु की अगर आपको गुस्सा है तो में मार मार केंकि हालत ख़राब कर दूंगा, अगर आपको मरना है तो मारिये, में देखता हु कोण रोकता है आपको. चाहे इनके गार्ड आये चाहे कोई भी, में हु, पर में ऐसे किसी की मजबूरी का फायदा नहीं उठा सकता, में ध्रुव नहीं हु जो किसी को बेहोश कर के उसके साथ ये सब कर के उसको झालील करे. मुझसे नहीं होगा, सॉरी. (जहान्वी की तो हालत ऐसी थी की पूछो मात, वो इतनी खुस हो रही थी की अभी शिव के गले लग जाये, उसने अपनी पिस्तौल अपने पर्स में रख दी.

जहान्वी : मुझे कुछ नहीं करना शिव, चलो यहाँ से. (वो शिव का हाथ पकड़ कर ले जाने लगी)

ध्रुव : रुको जहान्वी. (उसने बहोत नरम लहजे में कहा था, हम दोनों रुक गए और उसको देखने lage)Sorry यार, गलती हो गयी, गुस्से में पता नहीं क्या करने चला था में, मुझे माफ़ कर दो.

जहान्वी : किस बात का गुस्सा था तुम्हे, तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त के बॉयफ्रेंड हो, और मुझे लगा की तुम भी दोस्त हो, तो दोस्तों में हसी मजाक चलता रहता है, उस से कोई ऊँचा या निचा नहीं हो जाता, कभी कभी गुस्से में या ख़राब मूड के चलते मुँह से कुछ निकल जाता है, तो क्या तुम ये करोगे, अगर मेरी जगह कोई लड़का होता तो? अक्षर मर्दो को निचा दिखने के लिए औरत के साथ यही करना होता है, क्या इस से औरत का अभिमान टूट जाता है? ये तुम्हारी hi नहीं, ज्यादातर मर्दो की सोच होती है, इसमें तुमने कुछ गलत नहीं किआ. ये सब कर के शायद तुमने दोस्ती का रिस्ता hi तोड़ दिया है, मुझे कुछ नहीं करना, में कोई कम्प्लेन नहीं करुँगी, तुम आज़ाद हो. (उसने एक बार करुणा को देखा जो ऐसे कड़ी थी की उसको कुछ समाज hi न आ रहा हो की ये क्या हो gaya)Sorry करुणा. (कहते हुए वो शिव को ले कर वह से निकल गयी, ध्रुव आहिस्ता से चलते हुए करुणा के पास आया)

ध्रुव : सॉरी यार (कहते हुए उसने करुणा को गले से लगा लिया और रोने लगा, करुणा ठगी सी वही कड़ी रह गयी, उसको समाज नहीं आ रहा था की वो खुस होये या दुखी हो)

में और जहान्वी बहार निकले, दोनों में से कोई कुछ बोल नहीं रहा था, हम सिटी की और जा रहे थे की तभी उनके मोबाइल पर कॉल आया.

जहान्वी : Hello मैडम (.....)नहीं नहीं, एव्री थिंग इस शॉर्टेड आउट, अब कोई दिक्कत नहीं है, थैंक यू फॉर यू कंसर्न मैडम. (.....)थैंक यू मैडम, में आपसे रूबरू मिलती हु. (....)Ok थैंक यू.

शिव : (में समाज गया की ये किसका फ़ोन था, अब मेरी गांड फैट रही थी, मेने डरते हुए kaha)Police???

जहान्वी :है, भार्गवी मैडम का फ़ोन था, सच में बहोत अच्छी अफसर है, मेरे एक मश्ग को भी उन्होंने बहोत सीरियसली लिया, आवर सिटी इस नई सेफ हैंड्स.

शिव : है वो तो है, पर उनको इन सबके बारे में मात बताना.

जहान्वी : क्यों?

शिव : में कह रहा हु न, ये जो कुछ अभी हुआ वह वो सब मात बताना.

जहान्वी : तुम दार क्यों रहे हो, तुमने कुछ गलत नहीं किआ, फिर किस बात का दर.

शिव : (अब में क्या बताऊ इनको, अगर मैडम को पता चला तो मेरी बंद बजा degi)Aap समाज नहीं रही हो, ये सब किसी को बतानेवाली बात होती है क्या.

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)Mujme भी अकाल है, मुझे पता है की क्या बताना है और क्या नहीं.

शिव : आप मेरा नाम मात बताना, प्लीज.

जहान्वी : तुम दार क्यों रहे हो, अभी तो वह शेर बने हुए थे, और भार्गवी मैडम का नाम सुन कर ऐसे बेहवे कर रहे हो.

शिव : वो बात अलग है और ये बात अलग है, वैसे भी कई केस के लिए मुझे उनके पास जाना होता है, प्लीज आप मेरा नाम मत लेना वर्ण वो समझेगी की में hi ऐसा हु.

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)Nahi लुंगी बस. (मेने घडी देखि, साढ़े तीन बज रहे the)Kya हुआ, कही जाना है?

शिव : शाम को प्रैक्टिस के लिए जाना है न, तो टाइम देख रहा था.

जहान्वी : वो तो तुम पांच बजे के बाद जाते हो न. (में बस मुस्कुराया, फिर हम दोनों चुप हो गए, वो मुझे बार बार देख रही थी, मेने इग्नोर किआ और सड़क को देख रहा था, वो साइट पर गाड़ी ले आयी, पिंकेशभाई ऑफिस की और hi आ रहे थे, मैडम की गाड़ी देख कर रुक गए)

पिंकेश : गुड आफ्टरनून मैडम, hi शिव.

जहान्वी : (में कुछ जवाब देता उस से pehle)Hello, क्या चल रहा है?

पिंकेश : वो मैडम...

शिव : अगर बुरा न मने तो पिंकेशभाई हमे एक प्रोजेक्ट पर डिस्कस करनी है, अभी वही से आ रहे है, तो प्लीज हमे थोड़ा टाइम लगेगा, अगर जरुरी न हो तो बाद में बात करे? (पिंकेश ठगा सा वह खड़ा रह कर शिव को देखने लगा)

जहान्वी : (वो अंदर से हिल गयी थी, शिव सामने से हिदायत दे रहा था की कोई डिस्टर्ब न करे, पता नहीं वो क्या करना चाहता था, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, पिंकेश उसकी hi और देख रहा था, तो उसने सँभालते हुए kaha)Ha पिंकेशजी, अगर कोई खास काम न हो टूवू.

पिंकेश : नहीं मैडम, कोई खास काम नहीं है, प्लीज आप कैर्री ों करे. (वो अपना शिर खुजाते हुए पीछे मुद गया)

शिव : आइये (कहते हुए अंदर जाने लगा, जहान्वी भी अपने बाल ठीक करते हुए मुस्कुराते हुए अंदर जाने लगी)





जहान्वी का दिल जोरो से धड़क रहा था, एक तो वह फार्म हाउस पर जो हुआ था, और अब ये शिव उसको अकेले hi अंदर ले जा रहा था, ऊपर से किसी को डिस्टर्ब न करने की हिदायत भी दे रहा था, दो संकुचती हुई उसके पीछे पीछे चलने लगी, दोनों ऊपर आ गए, जैसे hi वो अंदर आयी शिव ने दरवाजा बंद करदिया, ये देख कर hi उसकी नज़ारे अपने आप hi झुक गयी, और धड़कते दिल से वो इंतजार करने लगी की शिव क्या कर रहा है.

शिव : (सोफे की और इस्सर करते hue)Aiye. (जहान्वी ने एक बार शिव को देखा और सोफे की और बढ़ गयी, उसके चेहरे पर गब्रहत दिख रही thi)Khadi क्यों है, बेथ जाइये.

जहान्वी : हम्म्म. (कहते हुए वो बेथ गयी, शिव भी उसके बिलुल पास बेथ गया, उसकी नजर उठाने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी)

शिव : तो बताइये, क्या खेल चल रहा था वह?

जहान्वी : (सकपकाते hue)Kaisa खेल?

शिव : आपको क्या लगता है की में बेवकूफ हु?

जहान्वी : ऐसा क्यों कह रहे हो?

शिव : वह आपकी सहेली जिस तरह से बेहवे कर रही थी, वो देख कर तो लग नहीं रहा था की वो मजबूर है, और मजबूरी में सब कर रही है. (जहान्वी उसको देखने लगी) वो अपनी मर्जी से सब कर रही थी न? (जहान्वी ने भी जूथ बोलना सही नहीं समजा और हां में शिर हिलाया)

शिव : क्यों कर रही थी वो ऐसा?

जहान्वी : दो वजहों से, एक तो तुम और दूसरा ध्रुव.

शिव : में समजा नहीं.

जहान्वी : वो ध्रुव को सबक सीखना चाहती थी.

शिव : क्यों?

जहान्वी : उसने मेरे साथ जो सलूक करना चाहा उसके लिए और उसको किसी गैर लड़के के साथ भेजा इसके लिए.

शिव : ये तो एक वजह हुई, और दूसरी वजह, यानि में कैसे?

जहान्वी : वो तुम्हारे पीछे लट्टू हो गयी है. (उसने नज़ारे झुकाये हुए कहा)

शिव : मतलब आप दोनों मिल कर ये खेल, खेल रही थी.

जहान्वी : में ध्रुव को सबक सीखना चाहती थी, में तो उसको जेल hi भिजवाने वाली थी, पर करुणा ने मुझसे रिक्वेस्ट की की ऐसा करने पर उसकी भी जिंदगी तबाह हो जाएगी, वो मेरी दोस्त थी तो मेने उसकी बात मान ली.

शिव : अगर बात मान hi ली थी तो फिर चेहरे पर दर्द क्यों था? (मेरे बात सुन कर वो मेरी आँखों में देखने लगी, उनकी आंखे बहोत कुछ कह रही थी, पर जुबान साथ नहीं दे रही थी, वो ख़ामोशी से मुझे देखती रही, में उनकी आँखों की भासा समाज रहा था, पर में उनके मुँह से सुन न चाहता tha)Bataiye, अगर अपने ये सब प्लान hi किआ था तो फिर उस वक़्त आपके चेहरे पर दर्द क्यों था?

जहान्वी : (उसकी नज़ारे झुक gayi)Muje नहीं पता.

शिव : मुझे इसमें क्यों घसीटा?

जहान्वी : तो किसको कहती, और करुणा भी यही चाहती थी. (में सोच में पद गया और सोचने लगा, जहान्वी मुझे देख रही थी, थोड़ी देर बाद वो boli)Tum रुक क्यों गए?

शिव : क्या मतलब है आपका की में रुक गया, में वो सब करना hi नहीं चाहता था.

जहान्वी : क्यों?

शिव : में ऐसे किसी की मजबूरी का फायदा नहीं uthata.(Mene थोड़े ऐटिटूड से कहा)

जहान्वी : (धीमी आवाज में जैसे अपने आपको hi कह रही ho)Bade आये फायदा नहीं उठता.

शिव : क्या कहा आपने (मुझे सब सुनाई दिया था पर फिर भी मेने पूछा)

जहान्वी : कुछ नहीं.

शिव : मेने सुना जो अपने कहा, अगर में चाहता तो सबकुछ कर सकता था, पर मेरा मान नहीं कर रहा था, में ऐसे किसी का फायदा नहीं उठता, में किसी के साथ जबरदस्ती नहीं करता.

जहान्वी : और मेरे साथ की थी वो जबरदस्ती नहीं थी?

शिव : आपकी बात अलग है.

जहान्वी : क्यों अलग है, मेरे साथ वो सब जबरदस्ती नहीं किआ था क्या. (उसने नाराजगी से कहा)

शिव : (हम दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, में थोड़ा सीधा हुआ और उनके कंधे पकड़ कर उन्हें सोफे पर झुकाते हुए अपने चेहरे को उनके चेहरे के पास ले gaya)Wo तो में अभी भी कर सकता हु. (मेने धीमी आवाज में कहा, वो मेरी आँखों में देख रही थी, उनकी सांसे चढ़ने लगी)

जहान्वी : (जोर जोर से सांसे लेते hue)Kyu?

शिव : क्यों की आप मुझे पसंद करती हो.

जहान्वी : (अपनी मुस्कराहट रोकने का प्रयास करते हुए जूठा गुस्सा दिखते hue)Kisne कहा?

शिव : मुझे पता है.

जहान्वी : गलत फहमी है तुम्हारी.

शिव : तो फिर करुणा के साथ करने देती, क्यों रोका मुझे.

जहान्वी : मेने कहा रोका, में तो कुछ भी नहीं बोली.

शिव : ये जो आपकी बड़ी बड़ी आंखे है न, वो बहोत कुछ बोलती है. (उनके चेरहे पर मुस्कान आ gayi)Dekha सही कहा न मेने. (में भी मुस्कुराया, उन्होंने फौरन अपनी हसी छुपा ली)

जहान्वी : ग़लतफहमी है तुम्हे. (उन्होंने ऐडा से कहा)

शिव : (उनकी आँखों में देखते hue)Me फिर जबरदस्ती करने जा रहा हु, चाहो तो रोक लो.

जहान्वी : (उखड़ती सांसो se)Nahi शिव.

शिव : अगर रुकना चाहती तो निचे hi रुक जाती, मेने तो निचे hi कहा था की कोई डिस्टर्ब करने न आये, तो फिर आप क्यों आ गयी, निचे hi रुक जाती.

जहान्वी : वो में, wo...(unhone अभी अपना वाक़्या पूरा भी नहीं किआ था की मेने उनके होठो पर अपने होठ रख दिए, उनकी आंखे बंद हो गयी, पर उन्होंने अपने हाथ से मुझे हलके से धक्का देना सुरु कर दिया, पर में नहीं रुका, में आराम से उनके रसीले होठो को चूमने लगा, उनके धक्के का जोर काम होता गया, में उनके रसीले होठो को अच्छे से चूमने लगा और अपनी जीभ उनके मुँह में डालने लगा, अब वो मुझे धक्का देने की बजाये मेरे शिर को नोचने lagi)Ummmm उम्म्म्म सलूयर्प उम्म्म्म उम्मम्मम (में उनको सोफे पर लेटने लगा तो वो भी निचे लेट गयी, में उनके ऊपर आ गया और आराम से उनके होठो का रास पिने लगा, वो मेरी छाती पर नाख़ून चुभो रही thi)Ummmmm सलूरररप, उम्म्म्मह्ह्ह्हह्ह. (मेरा लुंड फिर से औकात में आ चूका था, उनके पेअर फैला कर में बिच में आ गया और मेरे कड़क लुंड को उनकी छूट पर दबा दिया, वो फिर से छूटने का प्रयास करने लगी, और अपना मुँह हटाने लगी, पर मेने होठ नहीं chhode)Ummmmm उम्म्म्म नननननन (फिर से थोड़ी hi देर में उनका विरोध संत हो गया, में हलके हलके धक्के लगाने laga)Ummmm उम्म्म्म उम्मम्मम (वो धक्के के साथ हलके हलके कराह ने lagi)(Jhanvi से बर्दास्त नहीं हो रहा था, सांसे लेना भी मुश्किल हो गया था, उसने अपने होठ पूरी ताकत से हटाए और जोर जोर से सांसे लेने lagi)Haaaaa हआ हआ (में उनके गले को चाटने लगा, उन्होंने मेरे कंधे पर के शिर्क को नोरो से अपने नाख़ून से दबोच liya)Shhhhhh नाहीईई शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : क्यों नाहीईईई ह्म्म्मम्म.

जहान्वी : (जोर जोर से सांसे ले रही thi)haaa हा फूऊऊऊ शह्ह्ह्हह्ह नाहीईई शह्ह्ह्हह्ह (मेने उनके एक स्तन को दबाते हुए उनके होठो को फिर से दबोच liya)Ummmm उम्मम्मम (उनके बाये स्तन को में अपनी दये हाथ से दबोच रहा था, वो छूटने का प्रयास कर रही thi)Ummmmmmmmm (वो छूटने का प्रयास करने लगी तो मेने उनके होठ छोड़े और उनकी आँखों में देखने लगा, वो भी जोर जोर से सांसे लेते हुए मुझे देखने लगी)

शिव : आप नहीं चाहती? (वो कुछ नहीं बोली, बस मुझे देखती रही) मुझे आपकी आँखों में साफ़ दिखाई दे रहा है की आप क्या चाहती है, फिर क्यों विरोध कर रही हो (वो फिर भी मुझे देखती रही, पर बोली कुछ nahi)Aaj तो बोलना hi पड़ेगा, वर्ण में रुकने वाला नहीं हु.

जहान्वी : (शिव को धक्का देने के लिए उसके छाती पर दोनों हाथ रख दिए और उसे धकेलने lagi)Nahiiii शिईयिव, प्लीज.

शिव : (मेने उनके दोनों हाथ पकड़ लिए और उनके शिर के ऊपर कर diya)Aaj नहीं. (कहते हुए में झुका और उनके कपड़ो के ऊपर से hi उनके स्तन की छोटी को दांतो से हलके हलके काटने लगा)

जहान्वी : (छटपटाते hue)Shhhhhhh नाहीईई शह्ह्ह्ह मात करो शिईयिव शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : अगर इतना hi बुरा लग रहा है तो चिल्लाओ, सबको इकठ्ठा कर लो. (उनकी आँखों में देखते हुए मेने कहा, वो बेबसी से मेरी आँखों में देखृ रही, में फिर झुका और उनके नरम स्तन के गोलों पर अपना चेहरा रगड़ने लगा)

जहान्वी : शहहहहह मात करो शिव शहहहहह रुक जावूओ.

शिव : (फिर मेने उनकी आँखों में dekha)Kyu रुक जाऊ (वो फिर कुछ नहीं बोली बस मुझे देखती rahi)Agar नहीं बोलोगी तो में रुकूंगा नहीं. (कहते हुए में बेथ गया और उनकी कुर्ती को ऊपर करने लगा, वो मेरा हाथ पकड़ने लगी, पर उनका जोर कहा चलने वाला था, उनका गोरा पेट मेरे सामने था, सपाट पेट में उनकी गहरी नाभि, मुझे अपनी और बुला रही थी, में झुक गया अरु नाभि को चूसने और चाटने लगा)

जहान्वी : शहहहहह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह (जहान्वी इस एहसास से पागल हो रही थी, वो बहोत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी, पर फिर भी वो अपने आपको रोक रही thi)Maat करो सीईव शहहहहह. (शिव उसकी कुर्ती को और ऊपर करने लगा, वो उसको रोक रही थी पर इतना जोर नहीं था, कुर्ती ऊपर होती गयी, और उसके स्तन के निचे फास गयी, कुर्ती टाइट थी तो इस से ऊपर नहीं चढ़ सकती थी क्यों की उसके भरे हुए स्तन थे, शिव जबर दस्ती ऊपर कर रहा था पर हो नहीं रही thi)Fat जाएगी सीईव.

शिव : तो खोलो इससे.

जहान्वी : (उसको देखती रही, फिर धीरे से boli)Pichheeee... ज़िप... (इतना सुनते hi शिव ने उसको ऊपर खिंचा तो वो बेथ गयी, शिव उसकी पीठ पर हाथ घूमते हुए ज़िप ढूंढने लगा, जहान्वी ने अपने हाथ उसके गले में दाल दिए और उस से चिपक गयी और उसके कान में कहें lagi)Maat कर न यार, प्लीज. (पर वो सुन hi नहीं रहा था, उसने ज़िप खोल दी और उसकी कुर्ती ढीली हो गयी, वो उसको ऊपर उठाने लगा, उसने थोड़ा विरोध किआ पर शिव ने उसकी कुर्ती ऊपर करदी तो उसने भी हाथ उठा दिए, कुर्ती उसके शरीर से अलग हो गयी, शिव फिर उसे निचे लेटने लगा तो वो उसके गले से चिपक gayi)Nahi शिव प्लीज रुक जाओ.

शिव : (उनका गोरा और मखमली बदन मेरी बहो में था, में उनकी गरम गरम पीठ पर हाथ फेरने लगा, ब्रा स्टारप के अलावा पूरी पीठ नंगी थी, में अपने हाथो से उसको महसूस कर रहा tha)You आर सो हॉट जहान्वी. (ये सुन कर जहान्वी ने शिव को जोर से गले लगा लिया और उसके गले को चूमने लगी, अपनी पीठ पर घूम रहे शिव के हाथो को वो महसूस कर रही थी, उसके लिए भी विरोध करना मुश्किल होता जा रहा था, वो शिव का शर्ट पीछे से पकड़ कर ऊपर खींचने लगी जैसे कह रही हो की इससे utaro)(Me अपने शर्ट के बटन खोलने लगा, और शर्ट को उतरने लगा पर वो मुझसे दूर नहीं हो रही थी, जैसे तैसे मेने अपना शिर निकला और बनियान भी निकलने लगा, वो मुझे छोड़ नहीं रही थी तो मेने उनको जैसे तैसे अलग किआ, वो अपने दोनों हाथ को क्रॉस करके अपने स्तन छुपाने लगी, मेने अपनी बनियान निकल दी, और उनकी और देखा, वो अपने बदन को ढकने का प्रयास कर रही थी, में उनके हाथ पकड़ते हुए फिर से उनको निचे लेता दिया और उनके ऊपर आ गया, वो अपने हाथ नहीं हटा रही थी तो मेने थोड़ा जोर दे कर उनके हाथ हटा दिए और उन्हें देखने लगा, गोर बदन पर स्किन के कलर की hi ब्रा थी,





facebook app image

वो शर्मा रही थी, उनका रूप देख कर मुझसे रहा नहीं गया, और में ब्रा के ऊपर से hi उनके निप्पल को चूसने लगा)

जहान्वी : शहहहहह मात करो यार, शह्ह्ह्हह्ह, कोई आ जायेगा सीईव.

शिव : (एक बार मेने उनको देखा और फिर उनकी बगल में चाटने लगा, वह से एक अजीब सी महक आ रही थी, वह एक भी बल नहीं था, पूरी क्लियर थी, में सूंघते हुए चाटने लगा)

जहान्वी : शह्ह्ह्हह्ह गुड़ गुड़ी हो रही है शह्ह्ह्हह्ह तुम मान क्यों नहीं रहे हो शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, बस करो न यार. (एक तो लुंड छूट पर चुभ रहा था और ऊपर से शिव उसको चाट रहा था, उसके शरीर के साथ वो इस तरह से प्यार कर रहा था जैसे उसकी मन चाही चीज मिल गयी ho.)Agar इतना hi मान था वो करुणा के साथ कर लेते. (मेने तुरंत उनकी आँखों में देखा, वो मुँह फुलाए मुझे देख रही थी)

शिव : ऐसी फालतू बार मत करिये.

जहान्वी : (शिव को चिढ़ाते hue)Kyu, क्या फर्क पद जाता, वो भी तो लड़की hi थी.

शिव : (में समाज गया की वो मुझे चिड़ा रही है, तो में फिर निचे झुक गया और उनके स्तन को चूमने लगा, और फिर एक हाथ को छोड़ कर अपने हाथ को निचे लाया और ब्रा को थोड़ा निचे खिसकते हुए उनके दाहिने स्तन के निप्पल को बहार निकल लिए, वो मुझे रोकने का प्रयास करने लगी तो फिर से मेने उनका हाथ पकड़ लिया और ऊपर कर दिया)

जहान्वी : तुम्हे सरम नहीं आती ऐसे जबरदस्ती करते हुए? (उन्होंने जूते गुस्से से कहा)

शिव : में कोई जबरदस्ती नहीं कर रहा, बस आप नखरे कर रही हो, और कुछ नहीं. (कहते हुए में निप्पल को देखने लगा, गहरे रंग के गोलाकार के बिच तना हुआ छोटा सा निप्पल मुझे अपने पास खिंच रहा था)

जहान्वी : (उसको शर्म आ रही थी, शिव उसके निप्पल को देख रहा था, उसकी आँखों में वो देख प् रही थी की वो क्या करने जा रहा hai)Nahi सीईव, वह नहीं. (मेने उनकी आँखों में देखा, वो ना में शिर हिला रही थी, पर में कहा मंटा, में झुक गया और उनके निप्पल को मुँह में भर लिया और जोरो से चूस liya)Shhhhhhhh डीईईडीईए शह्ह्हह्ह्ह्ह. (वो उसकी सुन नहीं रहा था और उसके निप्पल को जोरो से चूस रहा था, एक अज्जेब सी लहर उसके तन बदन में दौड़ gayi)Shhhhhh डीईईडीई शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह दर्द हो रहा हैईईईई aiiiiiiiiiiiii. (वो अपने हाथ छुड़ाने का प्रयास करने लगी, मेने भी उनके हाथ छोड़ दिए, वो मुझे धकेलने लगी पर में उनके निप्पल को चुस्त रहा, उन्होंने मेरे शिर को अपने दोनों हाथो से आगोस में ले लिया और मेरे बालो को नोचने लगी और सहलाने lagi)Shhhhhh मात करो शिईयिव shhhhhhhhhhh aiiiiiiiiiiii. (वो मन कर रही थी पर उनके हाथ कुछ और hi कह रहे थे, में अपने लुंड से हलके हेल धक्के मरने laga)Shhhhh शीइइइइइव शहहहहह नाहीईई. (मेने दूसरे स्तन को भी बहार निकला और उसके निप्पल को भी चूसने लगा, दूसरे स्तन को मसलने laga)Shhhhhhh कोई आ जायेगा शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : जिसको आना है उसे आने दो.

जहान्वी : (उसके चेहरे पर मुस्कान आ gayi)Kyu, मुझे बदनाम करना चाहते हो.

शिव : जो तुम्हे सोचना है वो सोचो.

जहान्वी : शह्ह्ह्हह्ह धीरे चुसो न दर्द होता है यार. (वो चिहुँक uthi,jab शिव ने जोरो से निप्पल को चूसा, वो मसूकूरआने लगी और उसके शिर को सहलाते हुए boli)Papa को पता चल गया तो तुम्हारी खैर नहीं, तुम जानते नहीं हो उन्हें.

शिव : (थोड़ा ऊपर उठ के उनकी आँखों में देखते hue)Wo मुझे नहीं जानते, कभी खिसक गयी नाटो उनके सामने तुम्हे उठा के ले जाऊंगा.

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)Kyu, क्यों उठा के ले जाओगे मुझे?

शिव : मेरी मर्जी, कभी ऐसा दिन आया तो खुद देख लेना.

जहान्वी : इतनी हिम्मत है तुम में? (उसको शिव का ये रूप बहोत अच्छा लग रहा था)

शिव : आज़मा लेना कभी.

जहान्वी : वो में देख चुकी हु, वर्ण किसी की मजाल जो मुझे छू सके. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : तो फिर रोक क्यों रही हो.

जहान्वी : तुम कहा रुक रहे हो (शिव ने अपने लुंड को छूट पर ghisa)Shhhhhh अभी वह नहीं शिव.

शिव : क्यों?

जहान्वी : क्यों की में कह रही हु.

शिव : थोड़ी देर करने दो, बहोत अच्छा लग रहा है, आपको मज़ा नहीं आ रहा?

जहान्वी : पूछो मात, में कभी इतनी एक्सीटेंड नहीं हुई (शिव के धक्को ने उसकी हालत ख़राब करदी, छूट पर हो रहे धक्को से वो झाने के कगार पर आ गयी)

जहान्वी : शहहहहह जल्दी जल्दी करो शिईयिव शहहहहह (में धक्के लगाने laga)Shhhhh हआ ऐसे hi शहहहहह मुझे कुछ हो रहा hi शिव शहहहहह (में उनके स्तन चूसते हुए धक्के लगातार लगा रहा tha)oooohhhh गॉड, शह्ह्ह्ह मेरा होनेवाला है सीईव शह्ह्ह्हह्ह आईईईई शह्ह्ह्हह्ह ी चैंट बेलीवे आईटी शहहहहह में gayiiiiiiiiiiiiiii. (वो झटके कहते हुए झाड़ रही थी, में उनके स्तन के साथ खेल रहा था, वो मेरा शिर सेहला रही थी, बिना चूड़े hi वो झाड़ गयी थी, में ऊपर हुआ और उनकी पंत में हाथ डालने लगा तो उन्होंने मुझे रोक दिया)

जहान्वी : वह नहीं शिव.

शिव : क्यों रोक रही हो मुझे.

जहान्वी : (प्यार से देखते हुए, muskurayi)Fir कभी बताउंगी.

शिव : क्यों पहेलियाँ बजा रही हो, जो है सीधे सीधे कहो न.

जहान्वी : अभी मुज में इतनी हिम्मत नहीं है.

शिव : ऐसी क्या बात है?

जहान्वी : है कुछ. (मेरा भी मूड ख़राब हो गया तो मेने उन्हें छोड़ दिया और उनकेऊपर से उठ गया और सीधा बेथ गया, (जहान्वी को भी इसका एहसास हो गया की वो नाराज हो गया है, वो उसी हालत में उठी और शिव की गॉड में दोनों पेअर फैला कर बेथ gayi)Kya हुआ?

शिव : (चीड़ ke)Kuchh नहीं.

जहान्वी : तुम्हे बस वो hi चाहिए तो कर लो, में नहीं रोकूंगी. (उसने उदास हो कर कहा)

शिव : तुम्हे लगता है ऐसा?

जहान्वी : जानती हु तभी तो हु तुम्हारे साथ, मुझे थोड़ा टाइम दो, प्लीज.

शिव : (हलकी नाराजगी se)Thik है, जैसा तुम्हे ठीक लगे.

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)Meri ब्रा को पूरा खोल दो शिव.

शिव : क्या! (चौंकते हुए).

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)Jo कहा है वो करो.

शिव : अभी मन कर रही थी और अभी ये.

जहान्वी : इंटरकोर्स hi सब कुछ नहीं होता, रोमांस भी कोई चीज होती है, और मुझे तुम्हारे साथ उसे फील करना है.

शिव : इतना काफी नहीं था? और अगर में आगे बढ़ गया तो?

जहान्वी : अगर तुम्हे अपने आप पर कण्ट्रोल न होता तो तुम करुणा के मुँह से न खिंच लेते.

शिव : आखिर तुम चाहती क्या हो?

जहान्वी : लोग कहते है की लड़कीओ को समझना मुश्किल होता है, (उसने मुस्कुराते हुए कहा, और खुद hi अपनी ब्रा निकल दी, उनके कैसे हुए गोल गोल स्तन मेरी आँखों के सामने थे, मेने उन्हें देखा तो वो मुस्कुरायी और अपना स्तन पकड़ कर मेरे मुँह के पास ले आयी)

शिव : (उसको देखते hue)Muje तरसने में मज़ा आ रहा है न आपको?

जहान्वी : (एक दम मदहोस करने वाली हाशि के sath)Tumhe क्या पता की कोण किसको तरसा रहा है, मेरे दिल में झांक कर देखो तो पता चले, की में तरसा रही हु या तरस रही हु.

शिव : तो फिर क्यों कर रही हो ऐसा (उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया पर मेरा शिर पकड़ कर अपने स्तन पर दबा दिया, उन नुकीले निप्पल का एहसास होते hi मेने मुँह खोल दिया और निप्पल चूसना सुरु कर दिया)

जहान्वी : शहहहहह शिईयिव shhhhhh(Wo अपनी कमर हिलने लगी और अपनी छूट मेरे लुंड पर घिसने lagi)Shhhhhh तुमने पागल कर दिया है यार. (में उनकी पीठ को सहलाने लगा, थोड़ी hi देर में मेरा हाथ उनके कूल्हों की तरफ बढ़ गए तो वो थोड़ी और ऊपर हो गयी और मुझे सहूलियत दी, मेरी समाज से बहार थी ये लड़की, वो क्या चाहती थी वही समाज नहीं आ रहा था, मेने सोचना छोड़ दिया और उनके प्रूस्त भरे हुए गोल कूल्हों को सहलाने लगा, उनके आकर पर हाथ फिरने से मेरा लुंड बहोत कड़क होने लगा और मेरे पंत में दर्द करने लगा)

जहान्वी : शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह शीइइइइव शह्ह्ह्ह यू अरे अमेजिंग शह्ह्ह्हह्ह, पहले क्यों नहीं मिले मुझे शहहहहह. (वो मेरे लुंड पर बेथ गयी तो उनके भर से मुझे दर्द हुआ, मेरी आवाज से वो समाज गयी, और मेरी आँखों में देखते हुए boli)Dard हो रहा है? (मेने है कहा तो वो मेरे ऊपर से उठ गयी और सोफे के निचे बेथ गयी, वो मेरे उभर को देखने लगी , कभी मुझे देखती तो कभी उभर को, में उनको समझने की कोशिस कर रहा था, तभी वो कामुकता से boli)Isse निकालो न.

शिव : क्यों?

जहान्वी : मुझे देखना है, प्लीज.

शिव : (मुझे पता था की कुछ करना तो है नहीं फिर निकलना क्यों, तो मेने थोड़ा चीड़ से kaha)Khud निकल लो.

जहान्वी : (नखरे se)Karuna के लिए तो खुद hi पंत खोल दी थी, और मुझे खुद करने के लिए बोल रहे हो, कोई बात नहीं में भी बदला lungi(Kehte हुए वो मेरा बेल्ट खोलने लगी, फिर हुक, फिर ज़िप खोल कर मेरा पंत निचे खींचने लगी तो मेने अपने कूल्हे उठा लिए और उसने पंत निचे खिंच दिया, पंत निकल ने से मुझे रहत हुई, पंत मेरे घुटनो में था, वो मेरे अंडरवियर में बने तम्बू को देख रही थी, फिर उन्होंने मेरी और dekha)Ye कितना बड़ा है न? (में कुछ नहीं बोलै बस उनके चेहरे को देख रहा था, उनके चेहरे पर खुसी थी, उन्होंने कांपते हुए अपना हाथ बढ़ाया और मेरे लुंड को ऊपर से hi पकड़ लिया,

हलके से दबाते हुए वो मेरी आँखों में देखने लगी, जैसे जान न चाहती हो की मुझे कैसा लगता है, लुंड के आकर और कड़क पैन से उनके चेहरे पर आश्चर्य और खुसी दोनों दिख रही thi)Ye इतना बड़ा क्यों है?

शिव : (चिढ़ते hue)Aap रुको, में पूछ के आता हु.

जहान्वी : (वो मुस्कुरा उठी) चीड़ क्यों रहे हो?

शिव : करना कुछ नहीं है और खली फ़ोकट में उसको खड़ा कर रही हो.

जहान्वी : ये पहले से hi ऐसा है, और मेने कहा रोका, तुम्हारी marji,jo चाहे कर लो.

शिव : ज्यादा दिमाग ख़राब मात करो, देख लिया हो तो में कपडे पहन लू.

जहान्वी : मेरे कपडे उतर ते वक़्त कुछ नहीं और अपने कपडे उतर रहे है तो जनाब को गुस्सा आ रहा है. (उसने प्यार से मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : सिर्फ ऊपर के निकले है, निचे तो चुने नहीं दे रही हो.

जहान्वी : वह भी चुने दूंगी, पर फिर कभी. (वो थोड़ी ऊपर हुई और अपना चेहरा जुका कर मेरे लुंड को सूंघने लगी, में कुछ बोलणेहि वाला था की उन्होंने मेरे होठो पर ऊँगली रख दी, में कुछ नहीं बोलै, वो सूंघते हुए अपनी नाक मेरे लुंड पर रगड़ने लगी, फिर अपने गाल bhi)(Pata नहीं जहान्वी को कोनसा नासा हो रहा था, वो कैसी कैसी हरकते कर रही थी) (वो जिस तरह से मेरे लुंड के साथ खेल रही थी मुझे अच्छा लगने लगा तो में उनका शिर सहलाने लगा, उन्होंने मुस्कुरा कर मुझे देखा, मेरे चेहरे पर आयी खुसी उनको नजर आ रही थी.) ये मस्त है शिव, सच में. (उन्होंने खुसी से मुझे देखा, उनकी आंखे कह रही थी की वो अंडरवियर उतरने जा रही है, मेने भी आँखों hi आँखों में है कहा, उन्होंने मेरे अंडरवियर को दोनों और से पकड़ा और उसे निचे खिसकने लगी, लुंड उछाल कर बहार आ gaya)Ahhhhh! (कहते हुए वो पीछे हो गयी और लुंड को देखने लगी, उनको अभी भी विस्वास नहीं हो रहा था, उन्होंने मेरी और देखा, में बस उनके चेहरे के बदलते भाव को देख रहा था, वो फिर आगे आयी और मेरे लुंड को कांपते हुए हाथो से पकड़ लिया और उसे गौर से देखने लगी)

जहान्वी :(जहान्वी की हालत ख़राब थी, उसने इतना बड़ा लुंड कभी सचमे नहीं देखा था, जब करुणा इसको देख रही थी तब उसने देखा था पर थोड़ा दूर से, और वो हिचकिचा भी रही थी उस वक़्त. पर अभी ये अजूबा उसके hi हाथ में था, वो उसको महसूस कर रही थी) ये कितना गरम है शिव (उसने हलके से खाल निचे खींची तो लाल लाल बड़ा सूपड़ा बहार आ गया, इतना गोरा लुंड देख कर वो खुसी से फूली नहीं समां रही थी, वो इसको छू रही थी,





ये उसका होनेवाला था, ये सोच कर hi वो खुस थी, उसने खुसी से शिव को देखा, वो उसको hi देख रहा था, उसको शर्म आ रही थी पर वो शिव को खुस करना चाहती थी, वो उसके लुंड को हलके हलके सहलाने लगी और ऊपर निचे हिलने लगी)





शिव : जब करना नहीं है तो क्यों कर रही हो आप? (जहान्वी कुछ नहीं बोली और उसे हिलती रही, उसको मुँह में लेने का मान हो रहा था पर उसको शर्म आ रही थी, वो हिचकिचा भी रही थी, पर आखिर कर उसका दिल जित गया और उसने अपने आपको एडजस्ट किआ और लुंड पर झुक गयी, वो जानती थी की शिव उसे देख रहा है, उसे इतने शर्म आ रही थी की वो उसकी और देख भी नहीं रही थी, और आखिर वो बड़ा सूपड़ा उसने अपने मुँह में प्रवेश करवा दिया, वो पहली बार तो नहीं कर रही थी पर ऐसा रोमांच ऐसी खुसी उसे पहली बार हो रही थी. उसकी आंखे बंद हो गयी और वो उसको महसूस करते हुए चूसने लगी)





शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (जब उसने शिव के मुँह से सिसकी सुनी तो उसने आंख खोल कर उसे देखा, वो उसको hi देख रहा था, वो शर्मा गयी पर अपना काम करती रही, वो अपने शिर को ऊपर निचे करते हुए लुंड को चूसने लगी, शिव ने अपना हाथ उसके स्तन की और बढ़ाया तो वो थोड़ी और उसकी और खिसक गयी ताकि वो उसके स्तन दबा सके, उसके चूसने का दुआर चलता रहा, शिव सिस्किअ ले रहा था और वो बड़े मान से उसका लुंड चूस रही थी, काफी देर तक वो लुंड चुस्ती रही पर शिव का वीर्य निकल hi नहीं रहा था,





उसने अपने पिछले बॉयफ्रेंड को पांच मिनट में hi झाड़ दिया था, पर ये है की झड़ने का नाम hi नहीं ले रहा. वो रुक गयी और बेबसी से शिव को देखने lagi.)Kya हुआ? (मेने प्यार से पूछा, क्यों की मुझको बहोत मज़ा आ रहा था)

जहान्वी : (मायूसी se)Mera मुँह दुःख रहा है, तुम्हारा निकलता क्यों नहीं?

शिव : (मुस्कुराते hue)Wo थोड़ा देर से hi निकलता है. (आप रहने दीजिये)

जहान्वी : (अपनी नज़ारे झुकाते hue)Tum कर लो शिव.

शिव : क्यों?

जहान्वी : कुछ नहीं, तुम कर लो, में कोई नाराज नहीं हु, में कह रही हु न.

शिव : (मुस्कुराते hue)Aise नहीं, अब तो जब आप मुझे सब बता डौगी और आपका मान हल्का हो जायेगा तभी कुछ होगा.

जहान्वी : पर में चाहती थी की तुम स्खलितो, ताकि तुम्हे अच्छा लगे.

शिव : अगर मुझे स्खलित करना चाहती हो तो और भी तरीके है. (वो कन्फूसिओं से देखने लगी, में उनकी और झुका और उनके होठो को चुम कर )अपने इन प्यारे स्तन का इस्तेमाल करिए. (जहान्वी समाज गयी और शर्मा गयी, उसने कभी ऐसा किआ नहीं था पर देखा जरूर था, उसने अपने स्तन की घाटी में लुंड को फसाया और उसके सुपडे को अपनी घाटी की सैर करवाने लगी,





गिला पैन लेन के लिए अपनी थूक से गिला करने लगी, में उन्हें hi देख रहा था, एक और तो वो कुछ करने से मन कर रही थी पर दूसरी और वो इस अवस्था में क्या क्या कर रही थी, वैसे भी वो काफी सेक्सी भी थी, में उनके चेहरे के हाव भाव hi देख रहा था, जब उन्होंने मेरी और देखा तो मुझे ऐसे देखते देख वो मुस्कुरायी और शर्मा गयी,





google picture search app

और अपनी नज़ारे झुकाये अपना काम करने लगी, मान तो कर रहा था की अभी चढजो पर किसी बात को ले कर वो मन कर रही थी, मुझे उनकी भावनाओ की कदर करनी चाहिए, वो काफी देर म्हणत करती रही) (जहान्वी कभी कभी शिव को देखलेति थी, ऐसा काम उसने कभी नहीं किआ था, पर शिव के लिए वो ये कर रही थी, उसको भी मज़ा आ रहा था, शिव उसके साथ इस अवस्था में भी कोई जबरदस्ती नहीं कर रहा था, उसने खुद उसको बोलै था फिर भी उसने नहीं किआ, वो उसकी भावनाओ की कदर कर रहा था, और यही बात उसको बहोत अच्छी लग रही थी, पहलीबार उसके अनादि पैन की वजह से वो गलत चॉइस कर बैठी थी, पर अब उसे लग रहा था की शिव सही लड़का है, वो बड़े प्यार से उसके लुंड के साथ खेलती रही, ऐसा करना उसको भी बहोत अच्छा लग रहा था, काफी देर म्हणत ककरने के बाद शिव झाड़ा और उसके स्तन पर वीर्य की बौछार हो गयी, पहली पिचकारी तो उसके गले पर लगी, वो तब तक करती रही जब तक की लुंड ने पिचकारी छोड़ना बंद नहीं किआ, ढेर सारा वीर्य उसके स्तन पर फ़ैल गया था, वो फ़ौरन उठी और बाथरूम की और चली गयी, अंदर जा कर उसने अपने आपको देखा, अपने स्तन पर गिरे सफ़ेद वीर्य को देख कर वो हैरान थी, कितना सारा था वो. वो शिव की ताकत और स्टैमिना से काफी प्रभावित थी, मुस्कुराते हुए उसने अपने आपको साफ़ किआ, अपनी पंतय देखि तो उसकी छूट के रास से वो पूरी भीग चुकी थी, उसने अपने आप को साफ़ किआ, पर वो ऊपर के कपडे बहार hi छोड़ आयी थी, अब उसको शर्म आने लगी थी, करते वक़्त तो सब कर लिया था पर अब वो इस अवस्था में कैसे बहार जाये ये सोचने लगी, और कोई रास्ता तो था नहीं तो उसने शिव को आवाज दी.)

जहान्वी : सुनो न.

शिव : है बोलिये.

जहान्वी : (हिचकिचाते hue)Wo मेरे कपडे दो न. (में उनकी हालत समझता था तो कपडे ले कर दरवाजे के पास खड़ा हो गया)

शिव : लीजिये. (उन्होंने दरवाजा खोला, वो बाथरूम के दरवाजे के पीछ अपने आपको छुपा रही थी, मेरे सामने देख भी नहीं रही थी, उन्होंने मेरे हाथ से कपडे लिए पर मेने कपडे छोड़े नहीं, वो शरमाते हुए मुझे देखने लगी, में मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी)

जहान्वी : (शरमाते hue)Please छोडो न. (में फिर भी मुस्कुराता रहा, मुस्कुराते हुए उन्होंने मेरे हाथ से कपडे छीने, और दरवाजा बंद कर दिया, काफी देर तक वो बहार नहीं आयी तो मेने आवाज दी)

शिव : मैडम.

जहान्वी : ह्म्म्मम्म.

शिव : क्या हुआ?

जहान्वी : कुछ नहीं.

शिव : कोई प्रॉब्लम है?

जहान्वी : नहीं, तुम निचे जाओ में आती हु.

शिव : ऐसा क्यों, आप बहार आइये, सब ठीक तो है न.

जहान्वी : मुझे शर्म आ रही है शिव, तुम जाओ न.

शिव : में यही हु, बहार आइये. (मेने जोर दे कर कहा, थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला, वो दरवाजे पर hi नज़ारे झुकाये कड़ी thi)Kya हुआ? (वो अभी भी नज़ारे जुकायेखड़ी thi)Aap भी अज्जेब हो, कभी कुछ कभी कुछ, समाज hi नहीं आता. बहार आइये. (मेने उनकी बाह पकड़ कर बहार खिंचा, वो बिना डोर की पतंग की तरह बहार आ गयी, मेने उनके चेहरे को देखा, वो नज़ारे नहीं मिला रही thi)Kya हुआ? (मेने उनके गाल को पकड़ कर कहा तो वो मेरे गले लग गयी)

जहान्वी : मुझे सच में बहोत शर्म आ रही है. में वैसी नहीं हु जैसा तुम सोच रहे हो.

शिव : आपको क्या लग रहा है की में क्या सोच रहा हु.

जहान्वी : मेने तुम्हारे साथ ये सब किआ तो शायद तुम मेरे बारे में सोच रहे होंगे की कैसी लड़की है.

शिव : अब ज्यादा दिमाग के घोड़े दौड़ना बंद कीजिये, में कुछ भी नहीं सोच रहा हु, और न आपको गलत समाज रहा हु, दर तो मुझे लग्न चाहिए, पिस्तौल ले कर घूमती हो, पता नहीं मेरा क्या कर डौगी.

जहान्वी : वो तो सिर्फ सेफ्टी के लिए लायी थी, तुम पर थोड़ी न इस्तेमाल करुँगी.

शिव : गुस्ताखियाँ तो में भी करता रहता हु, कही किसी रोज़ मुज पर गुस्सा आ गया और मुज पर hi गोली चला दी तो?

जहान्वी : ऐसा कभी नहीं होगा, मुझे तुम पर गुस्सा नहीं aata.(Unhone शर्मा कर कहा)

शिव : चाहे कुछ भी करू?

जहान्वी : इतना सब तो कर चुके हो मेरे साथ, मेने गुस्सा किआ?

शिव : (मुस्कुराते hue)Chaliye, पांच बजनेवाले है, निचे चलते है, ठीक है.

जहान्वी : (वो अलग hui)Hmmmmm.

में और वो निचे आ गए, सब हाथ पेअर धो रहे थे, भोली मुझे खा जाने वाली नजरो से देख रही थी, उसके चेहरे पर गुस्सा साफ़ दिख रहा था, पर वो कुछ नहीं बोली. हम दोनों भी वह से निकल गए. वो चुप थी.

शिव : क्या हुआ?

जहान्वी : कुछ नहीं.

शिव : आपको अच्छा नहीं लगा?

जहान्वी : पागल हो, (थोड़ा रुक kar)It वास् थे बेस्ट.

शिव : तो फिर प्रॉब्लम क्या है?

जहान्वी : मुझे लगा नहीं था की हम दोनों इतना आगे निकल जायेंगे, थोड़ा अजीब लग रहा है और कुछ नहीं. (फिर हम दोनों चुप हो गए, उन्होंने मुझे घर उतरा).

शिव : क्या हुआ? फिर पुरे रस्ते चुप हो गयी.

जहान्वी : कुछ नहीं, थैंक यू शिव, तुमने जो कुछ भी मेरे लिए किआ, इतस मीन्स ा लोट.

शिव : मेने कहा न, ज्यादा दिमाग के घोड़े मत दौड़ाइए, कल मिलते है.

जहान्वी : (मुस्कुराते हुए )Bye.

शिव : Bye. (वो चली गयी, में भी अंदर चला गया और तैयार हो कर जूही को ले कर स्टेडियम चला गया, जूही के साथ कुछ पल रोमांस कर के घर चला आया)

दूसरे दिन में स्कूल चला गया, वैस्वी और संयम कड़ी थी, पर में बाइक से गया था.

नाज़िआ : बाइक से आनेवाले थे तो बोल देते, बेचारी वैस्वी को आना पड़ता है.

शिव : नहीं दीदी, वो तो में वापस देने नहीं जा पाया तो थी, रोज़ थोड़ी न होगी. (उन दोनों की और देख kar)Chale? (संयम नहीं देख रही थी पर वैस्वी ने मुस्कुरा कर है कहा, हम वह से निकल गए, रस्ते में, में और वैस्वी बात कर रहे थे, दोनों अलग अलग व्हीकल पर थे तो ज्यादा बात नहीं हुई, संयम कभी कभी मुझे देख लेती थी, पर बोली कुछ नहीं, हम स्कूल पहुंच गए, आज बिना मैडम आ गयी थी, पढ़ते हुए भी वो मुझे बार बार देख रही थी, मुझे लगा की कोई बात है तो मेने सोचा की बाद में बात करता हु, जब छुट्टी हुई तो हम सब खड़े थे की बिना मैडम वह से निकली, उन्होंने फिर मुझे देखा पर रुकी नहीं, वैस्वी सीधे घर चली गयी, संयम मेरे साथ बेथ गयी, हम दोनों चुप चाप जा रहे थे)

संयम : (बड़बड़ाते hue)Uske साथ तो बहोत बाटे होती है और अभी एक सब्द भी नहीं निकल रहा.

शिव : क्या कहा तुमने?

संयम : कुछ नहीं, बाइक चलाओ.

शिव : तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है?

संयम : तुम.

शिव : क्या?

संयम : है तुम हो मेरी प्रॉब्लम.

शिव : कुछ पल्ले पड़े वैसा कहो तो समाज में भी आये. हुआ क्या है तुम्हे?

संयम : मुझे नहीं बताना.

शिव : तुम्हारा कुछ समाज में नहीं आता, मान करता है दो चार लगा दू.

संयम : हाथ लगा कर तो दिखाओ, फिर बताती हु.

शिव : अब तो में हाथ लगाऊंगा hi, देखता हु क्या कर लोगी.

संयम : तुम मुझे जानते नहीं ho(Usne शेखी मरी)

शिव : तुम भी मुझे जानती नहीं हो.

संयम : अच्छी तरह से जानती हु, गंदे इंसान.

शिव : में गन्दा, कैसे?

संयम : अपने आप से पूछो, मुझसे क्या पूछते हो. (ऐसे hi हम उसके नुक्कड़ के पास पहुंच गए, वह आंटी और नाज़िआ दीदी कड़ी thi)Aap यहाँ क्यों कड़ी हो? (आंटी मुझसे नज़ारे चुरा रही थी)

नाज़िआ : अच्छा हुआ तू आ गयी, हम दोनों हॉस्पिटल जा रहे है.

शिव : हॉस्पिटल, क्यों?

नाज़िआ : बस रूटीन चेक उप है.

शिव : तो चलिए में ले चलता हु.

नाज़िआ : नहीं, तुम क्यों टाइम ख़राब करते हो, स्कूल से आये हो अभी खाया भी नहीं होगा, हम चले जायेंगे. हम रिक्शा का hi वेट कर रहे थे.

शिव : ऐसी कोई बात नहीं है, आपको बाइक पर बैठने में तो कोई परेशानी नहीं है न?

नाज़िआ : नहीं, ऐसी कोई दिक्कत नहीं है.

शिव : बस तो फिर, चलिए.

नाज़िआ : (अम्मी की और देख kar)Aap घर जाइये, में इसके साथ चली जाती हु.

ज़ोया: ठीक है.

वो पीछे बेथ गयी, मेने बाइक चला दी, मेने आईने से देखा तो नाज़िआदिदी मुस्कुरा रही थी.

शिव : मुस्कुरा क्यों रही हो.

नाज़िआ : तुम नहीं संजोगे.

शिव : समझाएगी तो समझूंगा न.

नाज़िआ : आज तुम्हारे साथ हॉस्पिटल जा रही हु, हमारे बच्चे के चेकउप के लिए, खुसी तो होगी hi.

शिव : अच्छा ये बात है, बोल दिया कीजिये, में आ जाऊंगा.

नाज़िआ : सच में.

शिव : और नहीं तो क्या, ये मेरा भी फ़र्ज़ है.

नाज़िआ : लगता है बाप की जिम्मेदारियां आ रही है.

शिव : बात अजीब तो है, पर ये सच भी तो है.

नाज़िआ : सॉरी, यार मेरी वजह से तुम इतनी सी उम्र में इन जिम्मेदारिओं में फंस रहे हो.

शिव : अब जो हो गया वो हो गया, और में खुस भी हु, आप जैसा खूबसूरत मेरा बच्चा होगा.

नाज़िआ : (शरमाते hue)Tum भी कोई काम खूबसूरत थोड़ी न हो, वो जैसा भी होगा, बेस्ट hi होगा. थैंक यू.

शिव : इसमें थैंक यू क्यों?

नाज़िआ : तुम्हारी वजह से hi तो ये दिन देख रही हु. (हम दोनों हॉस्पिटल पहुंच गए थे, कई प्रेग्नेंट महिलाये वह आयी हुई थी, कोई अपने पति के साथ तो कोई अपनी साँस के साथ तो कोई अपनी माँ या बहन के साथ. एक अलग hi माहौल था वह, कई औरतो के बड़े बड़े पेट थे, रिसेप्शन पर नाम दर्ज करवा कर नाज़िआदिदी मेरे पास aayi)Kya देख रहे हो?

शिव : कुछ नहीं.

नाज़िआ : में भी ऐसी हो जाउंगी.

शिव : ऐसी मतलब?

नाज़िआ : ऐसी मोती.

शिव : तो?

नाज़िआ : फिर शायद इतनी अच्छी न लागु.

शिव : ये क्या बात हुई, आप जो हो वही रहोगी न. मुझे कोई फर्क नहीं पड़नेवाला.

नाज़िआ : (मुस्कुराते hue)Sach!

शिव : इसमें कहने की क्या बात है. (वो बहोत खुस थी, हम दोनों को वह एक घंटा लग गया, मेने फिर उन्हें घर छोड़ा और में अपने घर चला गया)

लतादिदी : कहा रह गया था तू?

शिव : कुछ नहीं दीदी, वो नाज़िआदिदी को हॉस्पिटल जाना था तो में ले गया था.

लतादिदी : भूखे हो तू, बिना खाये कहा घूमते रहते हो. (फिर उन्होंने मुझे खाना खिलाया, काफी देर हो गयी थी तो मेने जहान्वी को फ़ोन कर के बता दिया की में नहीं आ रहा, वो मेरी बात से थोड़ी मायूस हुई पर में क्या करता, टाइम था तो सोचा की बिना मैडम से मिल लेता हु)

में बाइक से मैडम के घर पहुंच गया, बाजु की एक आंटी बहार थी, वो मुझे देख रही थी, मेने उनको इग्नोर किआ और बेल्ल बजायी. थोड़ी देर खड़ा रहा पर कोई नहीं आया. वो आंटी मुझे देखते हुए अंदर चली गयी, मेने फिर से बेल्ल बजायी, थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला तो सामने अलसायी मैडम कड़ी थी, शायद नीं से जगी थी, वो मुझे देखने लगी, फिर जैसे होश में आयी हो.

बिना : तुम इस वक़्त.

शिव : (मुस्कुराते hue)Wapas चला जाऊ.

बिना : (मुस्कुराते hue)Mene वैसे नहीं कहा, आओ. (वो थोड़ी साइड हो गयी, में अंदर गया, उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया, किचन की और जाते hue)bataya नहीं था न तुमने, इस लिए आश्चर्य हुआ.

शिव : (सोफे पर बेथ ते hue)Kyu बिना बताये नहीं आ सकता. (वो पानी ले कर आयी, और एक गिलास मुझे दिया और दूसरे गिलास को हाथ में लिए सामने सोफे पर बेथ गयी, और पानी पिने लगी, मेने भी पानी पि लिया)

बिना : आ शक्ति हो, मेने कब मन किआ, पर कभी आते नहीं हो न इस लिए.

शिव : आप hi दूर दूर रहने लगी ho(Mene हलकी नाराजगी से कहा)

बिना : ऐसी बात नहीं है. (उन्होंने नज़ारे झुका कर कहा, फिर वो खामोस हो गयी, में उन्हें देख रहा था, फिर नार्मल होने का नाटक करते हुए वो boli)Aur सुनाओ, कैसा चल रहा है सब.

शिव : सब अच्छा चल रहा है, आप कहा गयी थी?

बिना : घर गयी थी, क्यों?

शिव : आपने कुछ बताया नहीं और स्कूल नहीं आईथी तो पूछा.

बिना : अगर इतनी hi चिंता थी तो फ़ोन भी तो कर सकते थे.

शिव : मेने सोचा था की फ़ोन कर लू, पर फिर उलझ गया था कही.

बिना : (थोड़ी उदासी se)Koi बात नहीं, कहो कैसे आये?

शिव : आपका हल चल जान ने hi आया था, ऐसे hi गयी थी, या कोई कारन था.

बिना : (मेरी और देखते हुए कुछ सोचने लगी, फिर boli)Karan तो था, पर...

शिव : (में अपनी जगह से उठा और उनके बाजु में बेथ gaya)Koi परेशानी है?

बिना : (मेरी और देखते hue)Paresani तो नहीं है, पर...

शिव : मेने पहले भी कहा है की इन हालातो में ज्यादा स्टेसस मात लीजिये, पर आप सुनती hi नहीं, चेकउप के लिए गयी थी?

बिना : (उनके चेहरे पर मुस्कान आ gayi)Aaj बड़ी चिंता हो रही है, क्या बात है?

शिव : ऐसे hi पूछ रहा हु, क्यों नहीं पूछना चाहिए? (मेने उनके हाथ को अपने हाथ में लिए, वो मेरी आँखों में देखने लगी)

बिना : जाना है, दो तीन दिन बाद.

शिव : मुझे बुला लेना.

बिना : (मुस्कुराते hue)Aaj मेरी बड़ी फ़िक्र हो रही है, कोई खास बात.

शिव: कोई खास बात नहीं है, आज किसी को ले कर हॉस्पिटल गया था तो मुझे आपका ख्याल आया, तो पूछ लिया.

बिना : तुम क्यों आना चाहते हो मेरे साथ?

शिव : नहीं आना चाहिए?

बिना : सवाल के बदले सवाल नहीं, कहो क्यों आना चाहते हो?

शिव : मुझे समाज आ रहा है, इन परिस्थितिओ में औरत को केयर की जरुरत होती है, आप अकेले रहती हो, मुझे फ़िक्र लगी रहती है.

बिना : चिंता मात करो, जूही आ जाती है, स्वर्णादिदी भी आती रहती है. पर मुझे अच्छा लगा की तुम्हे मेरी फ़िक्र है.

शिव : ऑफ़ कोर्स है, ऐसा क्यों कह रही हो आप.

बिना : कुछ नहीं, तुम अपनी उम्र से बहोत बड़े हो शिव.

शिव : अच्छा बताओ, क्यों गयी थी आप?

बिना : अपने कुछ सवालो के जवाब चाहिए थे.

शिव : मिले?

बिना : पूरी तरह से तो नहीं, पर अगली पूर्णिमा को तुम्हे मेरे साथ आना है.

शिव : कहा?

बिना : मेरे घर (मान में, और शायद तुम्हारे भी).

शिव : मुझे कोई दिक्कत नहीं है, पर आपके साथ आप मुझे कैसे ले जाओगी, क्या कहोगी, कोण हु में.

बिना : वो hi सोच रही हु, पर एक बात तो तय है की तुम्हे आना hi है, कैसे वो पता नहीं.

शिव : ठीक है, जब आप कहोगी, जैसे आप कहोगी, में आ जाऊंगा, बस टेंशन मात लीजिये.

बिना : तुम्हारे होते मुझे किस बात की टेंशन.

शिव : इसीलिए दूर भगति हो मुझसे. (वो कुछ नहीं बोली, बस मेरी आँखों में देखती रही, उनकी आँखों में भी चाहत थी, में उनके होठो की और झुकने लगा, वो मुझे देख रही थी, जैसे hi में उनके होठो के नजदीक पंहुचा उन्होंने मुँह घुमा लिया, मेने एक गहरी साँस ली और वापस सीधे बेथ गया, वो नज़ारे झुकाये बैठी thi)thik है में चलता हु.

बिना : (तुरंत मेरी और घूम gayi)Kyu?

शिव : मेरे रहने से आप शायद कम्फर्टेबले फइलल नहीं कर रही.

बिना : ऐसी बात नहीं है, बैठो न, बहोत दिन बाद मिले हो, कमसे काम बाते hi हो जाएगी. स्टेट लेवल के खिलाडी बन गए हो, कोंग्रटुलतिओन्स. जूही बता रही थी वह कुछ हुआ था.

में काफी देर उनके साथ बैठा और बाते की, उनके वह दूध पिया और फिर जूही के साथ स्टेडियम चला गया. रात को जहान्वी का फ़ोन आया, मेने कल आने का बोलै. अभी फ़ोन रक्खा hi था की वैस्वी का फ़ोन आया.

शिव : Hello.

वैस्वी : (चहकते hue)Kya कर रहे हो?

शिव : बैठा हु, कहो.

वैस्वी : तुमसे बात करनी थी तो फ़ोन किआ.

शिव : क्या बात करनी थी.

वैस्वी : वो मुझे नहीं पता, बस बात करनी थी.

शिव : Ok , वैसे, है तो बोलो.

वैस्वी : संयम की वजह से ठीक से बात नहीं हो पति न, फिर हम वैसे भी नहीं मिले.

शिव : वैसे मतलब?

वैस्वी : उस दिन गए थे न, कब जा रहे है फिर?

शिव : जब तुम कहो, तुम्हे hi घर पर सब एडजस्ट करना होता है, मेरा क्या है, में तो कभी भी आ शक्ति हु.

वैस्वी : ज्यादा बनो मात, सबसे ज्यादा तो तुम hi बिजी हो, सुबह से ले कर शाम तक का पूरा सेदूएल बना हुआ है, टाइम hi कहा है तुम्हे.

शिव : कहो तो अभी आ जाऊ.

वैस्वी : आ jao.(Masti में)

शिव : सचमे आ जाऊंगा.

वैस्वी : तो क्या तुम जूथ बोल रहे थे (चिढ़ाते हुए)

शिव : आ रहा हु, कहा आना है बताओ.

वैस्वी : मेरे घर hi हु, आ जाओ.

शिव : आता हु फिर. (कहते हुए मेने फ़ोन काट दिया, और तैयार हो कर निकलने लगा)

लता : कहा जा रहा है.

शिव : आता हु थोड़ी देर में.

लता : जल्दी आना.

शिव : ठीक है.

(मेने बाइक ली और निकल गया)
 
अपडेट 176

शिव से बात करने के बाद वैस्वी थोड़ी घबरा गयी, वो सिर्फ मजाक कर रही थी, और शिव ने आने को बोल दिया, वो सोचने लगी की क्या शिव सच में आएगा? पर जिस तरह से शिव ने बोलै था वो आएगा hi ऐसा लग रहा था, अब वो फास गयी थी, इतनी रात को वो क्या बहाना बना कर बहार jayegi.Kuchh सोच कर उसने पानी का जग लिया और बहार निकली, उल्जन में hi चलते हुए वो निचे जाने लगी, साथ में वो निचे का जायजा लेने लगी, जब वो निचे पहुंची तो स्वर्णाभाही किचन में काम कर रही थी. वैसे तो सब काम नौकरो ने hi कर दिया था, वो बस छोटा मोटा hi कर रही थी. वैस्वी को देख कर वो मुस्कुराये,

स्वर्ण : क्या हुआ, कुछ चाहिए क्या?

वैस्वी : (हल्का घबराते hue)Na नहीं, में तो बस पानी पिने और लेने आयी थी, ख़तम हो गया था न. (उसने आस पास देखते हुए पानी पिया, और जग भरने लगी, एक दो बार भाभी से नजर मिली तो वो मुस्कुरायी)

स्वर्ण : किसे धुंध रही हो?

वैस्वी : नहीं तो भाभी, में किसे ढूंढूंगी, सब अपने कमरे में चले गए? (उसने हिचकिचाते हुए पूछा)

स्वर्ण : तेरे भैया, कमरे में है, और maa-babuji बहार गए है, कोई काम था?

वैस्वी : मुझे क्या काम होगा? में तो बस ऐसे hi पूछ रही थी. आप को कोई हेल्प चाहिए?

स्वर्ण : (मुस्कुराते hue)Muje कोई हेल्प नहीं चाहिए, मेरा सब हो hi गया है, में भी कमरे में hi जा रही थी.

वैस्वी : है, चलिए फिर साथ hi चलते है. (स्वर्ण मुस्कुरायी और अपना काम निपटने लगी)

स्वर्ण : और कैसा चल रहा है सब?

वैस्वी : सब ठीक hi है.

स्वर्ण : और मिक्की वाला.

वैस्वी : में नहीं मिलती उस से, एक दो बार फ़ोन किआ था, पर मेने मन कर दिया, मेने साफ़ साफ़ बता दिया की बाद की बाद में देखेंगे, में अभी से इन सब में नहीं पड़ना चाहती, चाहे जो करलो.

स्वर्ण : (मुस्कुराते hue)Apane प्रॉब्लम हमे खुद hi हैंडल करने पड़ते है, वैसे भी अभी से पापा ने थोड़ी जल्दबाजी करदी थी, वो भी समाज जायेंगे. चलो मेरा काम तो हो गया.

वैस्वी : है चलिए. (उसने आस पास का जायजा लिया तो सरे नौकर चले गए थे)

स्वर्ण : इस तरह से क्या देख रही हो कबसे?

वैस्वी : कुछ भी तो नहीं, में तो बस ऐसे hi देख रही थी, आप अकेली काम कर रही थी, सरे नौकर चले जाते है क्या?

स्वर्ण : कभी रात को रूम से बहार आओगी तब पता चलेगा न, इस वक़्त सब चले जाते है, आगे गेट पर वॉचमन hi होता है, और वो सब काम कर के गए थे, में तो बस कुछ यहाँ वह रख रही थी, सब काम तो उनके भरोसे नहीं छोड़ सकते न. तेरी भी शादी हो जाएगी तब तुजे भी सब समाज में आ जायेगा.

वैस्वी : क्या भाभी आप भी सुरु हो गयी. (उसने शरमाते हुए कहा)

स्वर्ण : में अभी हो जाएगी ऐसा थोड़ी न कह रही हु, पर कभी न कभी तो होगी न.

वैस्वी : होगी तब देख लुंगी, और आपसे सब सिख भी लुंगी. (दोनों स्वर्ण के कमरे के पास पहुंच गए थे)

स्वर्ण : और कुछ हो तो बोल.

वैस्वी : (मुस्कुराते hue)Kuchh नहीं है, आप मज़े कीजिये, गुड नाईट.

स्वर्ण : (वो भी muskurayi)Badi आयी मज़े करने को कहने वाली, तेरी होगी तब पता चलेगा, जा सो जा. (उसने मुस्कुराते हुए गाल पर हलके से चपत मरी, वैस्वी भी मुस्कुराते हुए चली गयी)

वैस्वी : (अपने कमरे में इधर उधर टहलते हुए सोचने lagi)Bahar तो वॉचमन है, क्या कह कर बहार जाउंगी, में भी न पागल hi हु, क्या जरुरत थी मज़ाक करने की, में शिव को कह देती हु की न आये. (उसने फ़ोन उठाया hi था की सामने शिव का कॉल आया, वो दर गयी, उसने तुरंत फ़ोन उठा liya)Hellooo. (उसने धीरे से कहा)

शिव : तुम्हारे घर के पीछे हु, कहा औ बोलो.

वैस्वी : में नहीं आ सकती शिव, आगे, वॉचमन है, में कैसे आउंगी?

शिव : में आ जाता हु.

वैस्वी : पागल हो गए हो क्या, तुम वापस चले जाओ, कल मिलेंगे बस.

शिव : अब इतनी दूर आया हु तो मिल कर hi जाऊंगा. (उसने फ़ोन काट दिया, वैस्वी ने घबरा कर पीछे की खिड़की खोली और देखने लगी, उसे शिव दिख गया, वो इधर उधर देख रहा था, जैसे hi दोनों की नजर मिली वैस्वी इससरए से उसे वापस जाने के लिए कहने लगी, पर शिव सुन hi नहीं रहा था, अस्स पास देख कर वो उसके कंपाउंड की दीवाल चढ़ गया, वैसे भी ये सेफ इलाका था तो लोग ज्यादा सिक्योरिटी नहीं रखते थे, वैस्वी का दिल जोरो से धड़क ने लगा, तभी शिव उसके कपूणद में अँधेरे में गायब हो गया. उसकी खिड़ की पर ग्रिल लगी हुई थी, वो ज्यादा बहार नहीं देख पायी, करीब पंद्रह मिनट तक उसे कोई हलचल नहीं दिखाई दी, तभी उसके फ़ोन पर कॉल आया, शिव की हांफ ने की आवाज आ रही thi)Helloooo.

वैस्वी : (डरते hue)Kaha हो तुम, क्या कर रहे हो यार.

शिव : तुम्हारी घर के छत पर हु, दरवाजा बंद है.

वैस्वी : पागल हो गए हो तुम, मरवाओगे मुझे.

शिव : अब इतनी म्हणत की है तो मिल तो लो.

वैस्वी : तुम रुको, कोई आवाज मात करना, में आ रही हु. (वो घबराई हुई कमरे से बहार निकली, घर शांत था, वो बिना आवाज किये आहिस्ता से चलते हुए, अपने भैया और भाभी के कमरे के पास पहुंची, और अंदर की आवाजे सुन ने लगी, लाइट चालू थी पर सब शांत था, वो आगे बढ़ गयी, और ऊपर की सीढिये चढ़ने लगी, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, जब ऊपर पहुंची तो नसीब से दरवाजा लॉक नहीं था, बस अटकनी लगायी हुई थी, उसने आहिस्ता से उसे खोला पर फिर भी थोड़ी आवाज हो hi गयी, उसका पूरा शरीर कैंप रहा था, उसने दरवाजा खोला तो दीवाल से सटे हुए खाद शिव दिखाई दिया, उसने आस पास देखा, हलकी सी लाइट थी पर सब शांत था, वो हलके गुस्से से boli)Pagal हो गए हो क्या?

शिव : (वैस्वी को कमर से पकड़ कर अपनी और खिंच लिया, वो उस से सात gayi)Tum hi मिलना चाहती थी.

वैस्वी : (उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, एक तो दर ऊपर से शिव ने उसको ऐसे पकड़ा tha)Pagal हो क्या तुम? कोई करता है ऐसा?

शिव : तुमने hi कहा था न की मिलना है, अब क्यों दर रही हो?

वैस्वी : मेरा ये मतलब नहीं था, तुम जाओ शिव, किसी ने देख लिया तो गजब हो जायेगा.

शिव : अब इतनी दूर, इतनी म्हणत कर के आया हु तो ऐसे hi चला जाऊ?

वैस्वी : (उसकी आँखों में देखते हुए वो शर्मा gayi)To क्या करना है?

शिव : (मुस्कुराते hue)Baate.

वैस्वी : (मुस्कुराते hue)Tum सच में पागल हो.

शिव : ऐसे तो बड़ी चिपकती रहती हो, आज अच्छे से गले भी नहीं मिल रही. (वैस्वी फिर मुस्कुरायी और शिव को बहो में भर लिया और उसके साइन से लग गयी, उसको भी शिव से मिलना पसंद था, और ऐसे छुपते छुपाते मिलने का एक अलग hi मज़ा था, उसे दर तो लग रहा था पर शिव के साथ होने से उसको बहोत सुकून भी लग रहा था, वो उसको गले से लग कर बस कड़ी रही और अपनी आंखे बंद कर दी, जैसे वो सबकुछ भूल जाना चाहती हो, तक़रीबन पांच मिनट बाद उसने फिर शिव को देखा, वो उसे देख कर मुस्कुरा रहा था, उसने शिव के शिर के बालो में हाथ डाला और अपनी और झुका दिया और उसके होठो पर अपने नाजुक होठो को रख दिया, शिव भी उसका पूरा साथ देने लगा, और उसके होठो को अच्छे से चूसने लगा, वनो ऐसे खुली छत पर, हलके अँधेरे में एक दूसरे को स्मूच कर रहे थे और एक दूसरे की पीठ और शिर सेहला रहे थे, थोड़ी देर बाद फिर वो दोनों अलग हुए, वैस्वी मुस्कुराते हुए शिव को प्यार से देख रही थी, तभी निचे गाडी आने की आवाज आयी)

वैस्वी : मम्मी - पापा आ गए (उसने घबरा कर कहा, फिर कुछ सोच kar)Jaldi चलो. (कहते हुए उसने शिव का हाथ पकड़ कर अपने साथ खिंचा, जाते जाते दरवाजा बंद किआ और जल्दी से वो अपने कमरे की और बढ़ी, लगभग भागते हुए वो अपने कमरे में पहुंची और दोनों अंदर चले गए और दरवाजा बंद कर दिया, वो जोरो से हांफ रही थी और बहार की आवाजे सुन ने का प्रयास करने लगी, उसके मम्मी पापा की आवाज आ रही थी पर क्या बाते कर रहे थे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था, वो और शिव दोनों दरवाजे के पास hi खड़े थे, एक अजीब सा रोमांच हो रहा था वैस्वी को, पहले भी शिव उसके कमरे में रुका था, पर उस वक़्त सबको पता था, और वो माहौल भी अलग था, पर आज किसी को नहीं पता था की शिव उसके कमरे में है. सब कुछ सही होने पर वो धीरे धीरे शांत होने लगी, उसने अपना दरवाजा अच्छे से बंद किआ और फिर से शिव से लिपट गयी और उसको किश करने लगी. रोमांच और खुसी दोनों बढ़ चुके थे, छत पर उसे दर भी था पर अपने कमरे में उसको जरा भी दर नहीं था, वो लगातार शिव से लिपट रही थी और उसके होठो को चूस रही थी और अपने होठो को चूसने दे रही थी. थोड़ी देर बाद फिर दोनों अलग हुए और बहार की आवाजे सुन ने लगे, बहार सब शांत हो चूका था, उसने शिव को मुस्कुराते हुए kaha)Aao. (ऐडा से चलते हुए वो बीएड के पास ले गयी और, उसने शिव को, अपने बीएड पर बिठाया. जग से पानी निकल कर गिलास में डाला और शिव को दिया, शिव मुक्सुराते हुए पिने लगा)

शिव : एक और दो. (उसने फिर से भर के दिया, वो भी शिव पि गया)

वैस्वी : और दू? (उसने बड़े प्यार से पूछा, पता नहीं पर आज उसे शिव पर बहोत प्यार आ रहा था)

शिव : (मुस्कुराते hue)Nahi. (वैस्वी ने गिलास वापस रख दिया और शिव के पास आ कर बेथ गयी)

वैस्वी : इतनी ऊपर चढ़ते हुए दर नहीं लगा, कही गिर जाते to?(Usne चिंता जताई)

शिव : सच कहु तो बहोत दर लग रहा था, पर चढ़ गया.

वैस्वी : (उसके काढ़े पर शिर रखते hue)Pagal हो तुम, में तो मज़ाक कर रही थी. तुम्हे कुछ हो जाता तो.

शिव : कोई बात नहीं, वैसे भी मंजिल इतनी खूब सूरत हो तो खतरा मोल लेना बेकार नहीं होता. जो होना था वो हो गया.

वैस्वी : (उसकी बात सुन कर वैस्वी के चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान आ गयी, शिव उसके लिए इतना बड़ा खतरा मोल ले कर आया था वो उसे बहोत अच्छा लगा था, उसने फिर भी प्यार से दन्त ते हुए kaha)Kya हो गया, वापस कैसे जाओगे?

शिव : जैसे आया था.

वैस्वी : न बाबा, वह बहोत खतरा है, अभी सब सो जायेंगे तब में तुम्हे पीछे के दरवाजे से बहार निकल दूंगी.

शिव : (उसके कहदे को सहलाते hue)Ab कहो क्या बात करनी थी?

वैस्वी : (मुस्कुराते हुए उसने शिव को dekha)Kuchh बात नहीं थी, बस तुमसे बात करने का मान कर रहा था, मुझे क्या पता था की मिलने का हो जायेगा. अब थोड़ा आराम करो, पता नहीं कैसे इतना ऊपर चढ़ गए.

शिव : कहा आराम करू? (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

वैस्वी : और kaha,yahi बीएड पर. (कहते हुए वो उठी और बड़े पर दो तकिये एक के ऊपर एक सही से रख दिए, यहाँ लेट जाओ. (शिव मुस्कुराते हुए अपने जुटे निकल कर वह लेट गया, वैस्वी उसके कमर के पास बेथ गयी और उसे देखने लगी)

शिव : क्या देख रही हो?

वैस्वी : अभी भी यकीं नहीं हो रहा की तुम मुझसे मिलने के लिए इतना खतरा उठा कर यहाँ तक आ गए हो.

शिव : (मुस्कुराते हुए अपनी बहे फैला kar)Abhi यकीं दिला देता हु. (वैस्वी भी मुस्कुराते हुए उसकी बहो में लेट गयी शिव उसको फिर से किश करने लगा, थोड़ी hi देर में शिव ने उसको साइड में लेता दिया और वो साइड में लेते लेते हुए hi उसके होठो को किश करने लगा. (वैस्वी को यकीं नहीं हो रहा था की वो दोनों कमरे में अकेले है, वैसे भी वो शिव को प्यार करने लगी थी तो उसको कोई हिचकिचाहट नहीं थी, वो उसको अपनी और खींचते हुए उसको अपने रसीले होठो का जाम पीला रही थी,





उसके शरीर में तरंगे उछाल रही थी, वो भले अनजान थी पर उसका परिपक्वा हो चूका शरीर अनजान नहीं था, वो अपने पूरक शरीर को अच्छे से पहचानता था, अनजाने में hi वो उसको अपने ऊपर खींचने lagi)(Me उसकी भावनाये समाज रहा था, वो मुझे अपने ऊपर खिंच रही थी पर में वैसे hi रहा थोड़ी देर वो प्रयास करती रही तो मेने किश तोड़ कर उसकी आँखों में देखने लगा, फिर उसके भीगे हुए होठो को देखने लगा, वो बड़े प्यार से मुझे देख रही थी)

शिव : क्या कर रही हो?

वैस्वी : क्या कर रही हु? (उसने सामने सवाल किआ)

शिव : मुझे अपने ऊपर क्यों खिंच रही हो?

वैस्वी : (वो एकदम से शर्मा गयी और हकलाते हुए boli)Mm m..e कहा खिंच रही थी?

शिव : जूथ मात बोलो.

वैस्वी : (एक दिलकस ादसे उसने मुझे देखा और नखरे से boli)Ha खिंच रही थी तो? (फिर मुस्कुराते hue)Tumhe तुम्हारी म्हणत और हिम्मत का इनाम दे रही थी.

शिव : क्या इनाम? (वो शर्मा गयी, बस मुस्कुराती रही पर बोली कुछ नहीं, उसकी ये अदा मुझे दीवाना बना रही थी, मेने फिर puchha)Bolo न?

वैस्वी : (शरमाते हुए boli)Kuchh नहीं? (फिर थोड़ा ठीक से बोलते hue)Achchha ये बताओ ,में तुम्हे कैसी लगती हु?

शिव : तुम लड़कीओ के पास और कोई सवाल नहीं होता?

वैस्वी : (वो muskurayi)Nahi होता, अब सही सही बताओ, में तुम्हे कैसी लगती हु?

शिव : (मुझे पता था की लड़कीओ को अपनी तारीफ सुन न बहोत पसंद होता है, लड़कीओ को क्या किसी को भी अपनी तारीफ सुन न पसंद होता hai)Bahot प्यारी, और खूबसूरत.

वैस्वी: (उसके चेहरे पर मुस्कान फ़ैल gayi)Us दिन तो मोती कह रहे थे muje.(Halke नखरे से कहा)

शिव : (हलके मजाकिए अंदाज me)Wo तो तुम हो.

वैस्वी : (नखरे से मुँह बिगड़ते hue)Kaha से मोती हु?

शिव : (उसके साथ थोड़ा और सात कर लेट ते हुए, उसका चेहरा sehlaya)Batau?

वैस्वी : (जिस तरह से शिव उसको देख रहा था उसकी सांसे ऊपर निचे होने लगी, भरी सांसो से वो boli)Bataoooo.

शिव : (मेने उसको ऊपर से निचे तक देखा, सांसे लेने से उसके स्तन ऊपर निचे हो रहे थे, वो हलकी भरी हुई थी तो स्तन भी भरे हुए थे, सच कहु तो वो सच में एक क़यामत थी, फिर मेने उसकी आँखों में dekha)Sach में जान न चाहती हो?

वैस्वी : (उखड़ती सांसो se)Hmmmmm.

शिव : एक बार जरा ठीक से देख लू?

वैस्वी : हआ (वो कह रही थी की साँस छोड़ रही थी पता hi नहीं चल रहा था)

शिव : (उसके पेट पर हाथ रखते हुए उसके पेट और कमर को सहलाने लगा, वो जोर जोर से सांसे लेने लगी, वो नाईट सूट में थी, निचे पजामी और ऊपर शर्ट जैसे पहना था, में उसको सेहला रहा था, वो नशे में दुब रही थी, पर मेरा दिल भी बेकाबू हो रहा था, मुझे और छूना था उसे, मेने kaha)Aise पता नहीं चल रहा (कहते हुए मेने शर्ट थोड़ा ऊपर किआ और उसके मखमली पेट पर हाथ रख दिया, उसने अपने होठो को काट लिया और आवाज को रोका, में उसके नरम पेट को सहलाने लगा, हलकी चर्बी वाला वो नरम नरम पेट कंपन कर रहा था, उसको सहलाते हुए में उसकी कमर को भी पकड़ कर दबाने लगा)

वैस्वी : Shiiiiiiiiiiv (वो उत्तेजित हो कर बोली, उसका चेरे से hi पता चल रहा था की वो कितनी सेंसेटिव है)

शिव : (उसकी आँखों में देखा तो वो नशे से भरी हुई thi)Yaha तो तुम मोती नहीं लग रही हो, शायद में गलत था. (मेरे छूने से वो जैसे बेजान सी हो गयी थी, जैसे जैसे में उसकी मखमली काया को सेहला रहा था वो बस जोर जोर से सांसे ले रही thi)Dusari जगह छू कर देखु?

वैस्वी : (वो भी इस पल को जी लेने चाहती थी, उसने लम्बी साँस छोड़ते हुए kaha)Haaaaaa.

शिव : (उसकी सहमति प् कर में अपने हाथ को उसके बूब्स की और बढ़ने लगा, उसकी सांसे बेकाबू हो रही thi)Yaha छू कर देखु? (उसके गले पर अपनी नाक रगड़ने लगा हुए मेने उसके कान में धीरे से कहा)

वैस्वी : (वो शिव का मतलब समाज रही थी, वो उसके स्तन को छूने की बात कर रहा था, उसकी सांसे और तेज होने lagi)Haaaaaaaa. (वैस्वी के हाथ मेरे बालो में चले गए, वो मेरे बाल नोचने लगी, जैसे जैसे मेरा हाथ ऊपर हो रहा था उसकी सांसे तेज हो रही थी, में शर्ट के ऊपर से hi हाथ बढ़ा रहा tha)Shiiiiiiiiiv शह्ह्ह्हह्ह. (मेरा हाथ उसके स्तन के निचे पहुंच चूका था, मेरे हाथ पर उसका स्तन भी महसूस हो रहा था, उस नरम मांस को में अच्छे से पहचान रहा था)

शिव : और ऊपर देखु?

वैस्वी : (उसकी हालत ख़राब थी, उस से सांसे लेना भी मुश्किल हो रहा था, वो अपना मुँह भी खोल दी थी, और जोर जोर से सांसे ले रही thi)Haaaaaaaaaa शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह, जो करना है करो. (मेने एक बार उस उठे हुए स्तन को देखा और हाथ ऊपर बढ़ाते हुए उसके पुरे स्तन को दबा दिया, उस भरे हुए कड़क स्तन का अच्छे से एहसास होने लगा मुझे, मेरी भी सांसे तेज हो चुकी थी, और गर्म सांसे उसके गले पर गिर रही थी, उसने मेरे बालो को नोचना सुरु कर दिया tha)Shhhhhhhhh shiiiiiiiiiiv shhhhhhhhhh, ी मिस यू जहां shhhhhhhhhhh. मुझे तुम्हारी बहोत याद आती है शह्ह्ह्हह्ह. (में उसका एक स्तन दबाता रहा और दूसरे स्तन पर अपना मुँह ले गया और स्तन के ऊपर से hi उसको चूसने laga)Shhhhhh Shiiiiiiiiiiv शह्ह्हह्ह्ह्ह ी लव यू जाएं शह्ह्ह्हह्ह (वो मेरे बालो को नोचती तो कभी सहलाती. हालत ऐसे बन गए थे की मेरा लुंड पूरी औकात में था, और वैस्वी को भी उसका एहसास था, क्यों की वो अपने घुटने से लुंड को सेहला रहा thi)Shhhhh लव में शिईयिव, लव में बेबी. (एक और तो मुझे लग रहा था की यही रुक जाता हु वर्ण पता नहीं क्या हो जायेगा, पर मान नहीं मान रहा था, सच में वो बहोत ज्यादा खूबसूरत थी और वो मुझे अच्छी भी लगती थी, उसके प्यार को भी मेने महसूस किआ था, में उस नरम नरम स्तन को सहलाते हुए दबा रहा था तभी उसने उखड़ती सांसो से puchha)Waha से में कैसी हु शीइइइइइइव. (उसने मादक आवाज में कहा tha)Kya में मोती हु?

शिव : तुम कही से मोती नहीं हो, हर जगह से परफेक्ट हो.

वीएसवी : (उसने मुस्कुराते हुए मुझे देखा, उसके चेहरे पर खुसी thi)Me तुम्हे अच्छी लगती हु? (मेरे बालो में किश करते हुए वो बोली)

शिव : है, मुझे तुम बहोत अच्छी लगती हो.

वैस्वी : थें लव में शिव.

शिव : Vaiswiiiiiii......(Mene उसे कुछ कहना चाहा पर उसने मुझे रोक दिया)

वैस्वी : शहहहहह (मुझे चुप करते hue)Kuchh मत सोचो शिव, जस्ट लव में. (मेरी भी हालत ख़राब hi थी, मेने जोर से उसके स्तन को दबोच liya)Aiiiii आराम से बाबूउ शह्ह्ह्ह दर्द होता hai.(Vaiswi पे जवानी का सरूर छाया हुआ था, उसके शरीर को शिव ऐसी जगह छू रहा था तो उसके शरीर में चिंगारिया भड़क रही थी) (में भी काफी गरम हो गया था, मेरे लिए भी रुकना न मुंकिन सा लग रहा था, पर में जैसे तैसे रुक गया और उसके दोनों हाथो को पकड़ कर बिस्तर पर दबा दिया और उसके गले पर अपना शिर रख कर जोर जोर से सांसे लेने लगा और अपने आप को शांत करने लगा, (वैस्वी को बहोत अच्छा लग रहा था पर शिव रुक गया था कुछ कर नहीं रहा था, उसे कुछ समाज नहीं आ रहा था, शिव कुछ नहीं कर रहा था बस जोर जोर से सांसे ले रहा था तो वैस्वी ने बड़े प्यार से puchha)Kya हुआ शिव, रुक क्यों गए?

शिव : (ऊपर हो कर उसकी आँखों में देखते hue)Abhi नहीं वैस्वी.

वैस्वी : (उल्जन से उसे देखते hue)Kyu, क्या हुआ?

शिव : में बहोत उलझा हुआ हु वैस्वी, तुम भी इस जाल में फंस जाओगी.

वैस्वी : (प्यार se)Muje परवाह नहीं है शिव.

शिव : तुम समाज नहीं रही हो, क्यों जानबुज कर उलझना चाहती हो?

वैस्वी : शायद मेरे भाग्य में यही है.

शिव : अभी भी कुछ नहीं बिगाड़ा वैस्वी.

वैस्वी : कुछ भी बाकि नहीं बचा शिव, मुजमे मेरा कुछ भी नहीं है है, सब तुम्हारा hi है, सिर्फ ये शरीर बाकि है.

शिव : वैस्वी....

वैस्वी : (मुस्कुराते hue)Me तुम्हारी हु, अभी नहीं तो फिर कभी सही, पर में तुम्हारी hi रहूंगी.

शिव : तुम कुछ नहीं जानती मेरे बारे में.

वैस्वी : मुझे जान न भी नहीं है. संयम चाहे जो भी कहे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, में जानती हु तुम्हे, अभी भी तुम अपने आपको रोके हुए हो, में बेवकूफ नहीं हु शिव, अगर तुम वैसे होते तो इस वक़्त मेरे बारे में नहीं सोच रहे होते.

शिव : मुझे थोड़ा टाइम दो.

वैस्वी : चाहे जितना टाइम ले लो, पर मुझे ये बताओ की जो चिंगारी तुमने मेरे अंदर लगायी है उसको बुझाने में कहा जाऊ?

शिव : कैसी चिंगारी?

वैस्वी : मेरा मान, मेरा तन तुम्हे पाने को तड़प रहा है, उसका में क्या करू?

शिव : ये और कुछ नहीं है, सिर्फ इस मुग्धवस्था का, इस उम्र का आकर्षण है, इस उम्र में अक्सर ऐसा होता है, शरीर को ये सब अच्छा लगता है.

वैस्वी : वो जो कुछ भी हो, तुम्हे लगे की महज आकर्षण है तो वही सही, आकर्षण hi प्यार की पहली सीधी होती है, बिना आकर्षण के कोई किसी से प्यार नहीं करता, तुम्हारे साथ दो रात बिता चुकी हु, तुम hi मेरे मन मस्तिक पर छाये हुए हो शिव, अपने प्यार करनेवाले को ऐसे तरसना ठीक नहीं है (उसने बड़े प्यार से कहा, में उसकी आँखों में hi देख रहा था, वो बड़े प्यार से मुस्कुरा रही थी, उसने अपने हाथ छुड़ाए तो मेने छोड़ दिए, उसने मेरे चेहरे को पकड़ा और मुझे hi देखती रही, फिर अपने हाथ निचे ले गयी और वो मेरे शर्ट के बटन को खोलने लगी, में उसको नहीं रोक प् रहा था, उसने एक एक कर के मेरे सरे बटन खोल दिए, और मेरे शर्ट को निकलने लगी, मेने भी उसका साथ दिया, उसने मेरी बनियान भी निकल दी, अब में ऊपर से नंगा था, वो मेरे शरीर को अपनी ऊँगली से टटोलने लगी, वो मेरी छाती पर हाथ फिरने लगी, जैसे hi उसने मेरे निप्पल को भी अपने नाख़ून से कुरेदा)

शिव : शहहह क्या कर रही हो? (वो बस मुस्कुरायी, हलाकि ये सब उसके लिए भी पहला hi मौका था पर उसका दिल जो कह रहा था वो कर रही थी, वो थोड़ी ऊपर उठी तो शिव भी ऊपर हुआ, उसने शिव को एक बार देखा फिर शरमाते हुए अपने मुँह को निप्पल की और ले गयी और उसको चूसने लगी, हलाकि वो बहोत hi छोटा था और उसने मुँह में भी नहीं आ रहा था तो उसने दन्त से उसको kata)Shhhhhh क्या कर रही हो.

वैस्वी : मुझे अच्छा लग रहा है शिव, आज तुम मेरे साथ हो, मुझे मात रोको, में तुम्हे महसूस करना चाहती hu(Wo थोड़ी देर मेरे निप्पल को और मेरी छाती को चूमती रही, फिर वापस लेट गयी, में उसको देख रहा था, तो उसने मेरे बाह सेहलायी और उसको खिंचा तो मेने वो हाथ उठाया, उसने उसे पकड़ कर अपने स्तन पर रख दिया, जैसे कह रही हो की अब तुम्हारी बरी, उसके इस मादक खेल से मुझे बहोत अच्छा लग रहा था, मेने एक दो बार उसके स्तन को सहलाया और फिर उसके बटन पर हाथ रक्खा तो उसने आँखों से है में इस्सर किआ तो में खोने लगा, वो बस मेरी आँखों में देख रही थी, पहला बटन, दूसरा बटन, फिर तीसरा, उसकी ब्रा झाँकने लगी, मेने सरे बटन खोल दिए और शर्ट को साइड में कर दिया, और उसके हुस्न को देखने लगा, वो शर्मा गयी और अपना चेहरा साइड में कर दिया) (वैस्वी की हालत ख़राब थी, एक तो पहली बार वो किसी लड़के के सामने इस अवस्था में थी, शर्म आ रही थी पर फिर भी उसको सब करना था तो वो वैसे hi पड़ी रही और शिव के चेहरे के बदलते भावो को कनखीओं से देखती रही, शिव ने हाथ आगे बढ़ाये और उसके अधनंगे स्तन को सहलाने लगा, उसके शरीर में अज्जेब सी तरंगे उठने लगी, उसको बहोत अच्छा लग रहा था, शिव जैसे वशीभूत हो कर उसके स्तन से खेल रहा था, जब उसने ब्रा को पकड़ कर निचे खिसकाया तो उसकी साँस hi रुक गयी, उसके निप्पल बहार आ गए थे, उसको बहोत शर्म आने लगी तो उसने अपनी मुट्ठिया बंद कर दी पर शिव को रोका नहीं, वो कभी उसके चेहरे को तो कभी उसके स्तन को देख रहा था, उसने ऊँगली से निप्पल को छुआ तो उसकी सिसकी निकल गयी, वो जैसे जैसे उसके निप्पल को ऊँगली लगता उसका शरीर मचलने लगता था,





दोनों उंगलिओ से वो उसके निप्पल को हलके हलके मसलने लगा, उसके शरीर में खास करके उसकी योनि में करंट लग रहा था, वो अपनी झंघे आपस में सत्ता कर दबा रही थी, इस तरह का एहसास उसको जीवन में पहली बार हो रहा था, तभी शिव झुका और उसके निप्पल को मुँह में ले कर च्सुने लगा,





गरम गरम मुँह का एहसास होते hi उसकी कमर धनुस बन gayi)Shhhhhiiiiiiiiiiiv. (वो उसके निप्पल चूस रहा था उसको गुदगुदी के साथ एक अजीब सी खुसी मिल रही थी, उसने अपने हाथ को उठाया और शिव के शिर को सहलाने lagi)Shhhhh शीइइइइइव (उसको शिव पर इतना प्यार आ रहा था की पूछो मत, उसके चेहरे पर अज्जेब से भाव थे, कभी उसका मुँह खुल जाता तो कभी वो अपने होठो को काट लेती, शिव का शिर सहलाते हुए उसको अपनी चुकी पीला रही थी, एक अजीब सा सांतोस मिल रहा था उसे, शिव ने दूसरी निप्पल मुँह में ली, फिर पहली, ऐसे वो बरी बरी दोनों निप्पल को चूस रहा था, वैस्वी हलके हलके सिसक रही थी और शिव की पीठ और शिर सेहला रही थी, उसको इस क्रिया में बहोत आनंद आ रहा था. थोड़ी देर बाद वो हटा और उसे देखने लगा, वो भी उसको देख रही थी, जब शिव की नजर उसकी पजामी पर गयी तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, वो समाज रही थी की शिव के दिल में क्या चल रहा है, वो मन में hi कहने लगी, आगे बढ़ो शिव प्लीज. जैसे शिव ने उसकी बात सुन ली और उसके पेट पर हाथ रखते हुए निचे की और खिसकने लगा, आखिर कर शिव का हाथ उसके बेशकीमती खजाने पर पहुंच चूका था, वो उसको दबा कर उसका एहसास कर रहा था, वैस्वी का तो साँस लेना दूभर हो गया था, वो उसके पैरो के बिच चला गया, वो जोर जोर से सांसे ले रही थी, और शिव को देख रही थी, वो पहली बार किसी लड़के के साथ इस तरह का सब कर रही थी, जब शिव ने अपना मुँह वह लगाया तो उसका शरीर धनुस की तरह तन गया, पजामी के ऊपर से hi वो उसकी योनि को सूंघ रहा था, वैस्वी तो उत्तेजना के मरे आधी बेथ hi गयी और शिव को देखने लगी की वो क्या कर रहा है, वो उसकी योनि को सूंघ रहा था, उसको हलके से चाट रहा था और काट रहा था, ये सब उसके लिए बहोत ज्यादा था, वो उत्तेजना से कैंप रही थी, उसने अपने पेअर और फैला दिए और शिव का शिर सहलाने लगी, उसको यकीं hi नहीं हो रहा था की आज उसको इतना कुछ मिलेगा, जैसे जैसे शिव उसकी योनि से खेल रहा था उसको बहोत मज़ा आ रहा था पर पजामी के कपडे की वजह से मज़ा अधूरा लग रहा था, उस से रहा नहीं गया और वो खुद अपनी पजामी निचे सरकने लगी, जब शिव ने उसे देखा तो वो शर्मा गयी पर वो मजबूर थी, शिव ने भी उसकी बेबसी समाजी और उसकी पजामी निकल ने में मदद की, पजामी पूरी निकलदी उसने, और फिर से उसके होतो पंतय के ऊपर से hi छूट पर लगा दिए, ये अद्भुत आनंद वैस्वी को अंदर तक भिगो गया, कितना अजीब लग रहा था, आज पहली बार कोई उसकी योनि को ऐसे प्यार कर रहा था, उसे पता hi नहीं था की इस खेल में इतना मज़ा आता होगा, अब तो पंतय भी उसको रोड़ा लगने लगी, पर उसको बहोत शर्म आ रही थी, वो शिव को कैसे कहे की पंतय भी निकल दो, पर जैसे शिव सब जनता था, उसने पंतय को साइड में खिसकाया और उसकी योनि को देखने लगा,





उसको बहोत शर्म आ रही थी, उसका वो अंग जो बड़े होने के बाद सिर्फ उसी ने देखा था आज उसे कोई और देख रहा था, वो फिर से लेट गयी, और अपनी आंखे बंद कर ली, पर उसका पूरा ध्यान निचे शिव की हरकतों पर था, तभी शिव ने अंगूठे से सहलाया योनि को sehlaya)Shhhhhhh शीइइइइइइइव ये क्या हो रहा है मुजीई शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (वो लगभग रोने लगी थी बस आंसू नहीं थे)





शिव : अच्छा लग रहा है?

वैस्वी : हआ शीइइइइइव बहोत अच्छा लग रहा है, और करो. (शिव ने अपना मुँह वह लगा दिया और चिकने रास से लिपटी छूट के होठो को चूसने laga)Shiiiiiiiiiv अअअअअअअ क्या कर रहे हो yaar(Wo रोने जैसे आवाज करने लगी तो मेने दर कर उसको देखा, पर वो रो नहीं रही थी, बस आवाज वैसी थी, में फिर उसकी योनि को चाटने लगा, छोटा सा छेड़ मुझे महसूस हो रहा था, वो बिलकुल कच्ची काली थी, उसकी छूट पूरी तरह से बंद थी, बल भी छोटे छोटे थे जैसे ट्रिम किये हो, एक छोटा छेड़ था वह, में जीभ से उसे कुरेदने लगा, वो रट हुए boli)Shiiiiiiv क्या हो रहा है मुझे शहहहहह मुझसे रहा नहीं जा रहा मुम्मीईईई अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइइइइव. (में फिर भी चाट ता रहा, वो अपनी कमर हिला रही थी, अंदर से रास लगातार बह रहा था, उस नमकीन पानी को में बड़े चाव से चाट रहा tha)Ahhhh शीइइइइव अह्ह्ह्हह शह्ह्हह्ह्ह्ह .(वैस्वी से बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था, वो शिव के शिर को धकेलने lagi)Basss सीईव बस्सस और बर्दास्त नहीं हो रहा शह्ह्हह्ह्ह्ह (उसकी कमर झटके खा रही थी, पर शिव जैसे सुन hi नहीं रहा tha)Shhhhhh बस करो शीइइइइव (वो लगभग रोनी आवाज में बोल रही thi)Shhhhhh अब बर्दस्त नहीं हो रहा शिव, पेशाब निकल जाएगी (में समाज रहा था की क्या निकलने वाला है, में उसको अच्छे से चाट ता रहा और चुस्त raha)Shhhhhhh बस करो शिईयिव (वो मुझे धकेलने लगी, पर में नहीं ruka)Peshab निकल जाएगी सीईव छोड़ो मुझे (उस से बर्दास्त नहीं हो रहा tha)Samaj क्यों नहीं रहे हो शिईयिव, हटो वह से (उसने जोर लगाया पर शिव उसकी छूट को चाट hi रहा tha)Shiiiiiiiv सुन क्यों नहीं रहे हो यार, तुम्हारे ऊपर हो जायेगा प्लेस हटो न. अह्ह्ह्हह्हह शह्ह्हह्ह्ह्ह मेरा निकल जायेगा शीइइइइव हतोऊ शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (वैस्वी बर्दास्त नहीं कर पायी और वो स्खलित होने lagi)Ahhhhhhhh shiiiiiiiiiiiiiv (वो अपना पानी छोड़ने लगी जो की शिव के मुँह में फवारे की तरह गिरने लगा, वैस्वी को तो होश hi नहीं रहा और वो बिस्तर पर लुढ़क गयी, आँखों के सामने अँधेरा छ गया था)

शिव : (में इस अध्भुत नव यौवना के रास को अच्छे से महसूस कर रहा था, उसका स्वाद मेरे मुँह में था, शायद ये उसका पहला स्खलन था, थोड़ी देर तक में उसे चुस्त रहा और वो झटके खा रही थी, जब वो शांत हो गयी तो मेने ऊपर देखा, वो हांफ रही थी, में उसे जो सुख देना चाहता था वो मेने दे दिया था, मेरा लुंड मुझे दर्द कर रहा था पर मेने अपने को संभाले रक्खा, मेने उसके ऊपर चद्दर दाल दी ताकि उसकी छूट धक् जाये, थोड़ी देर वो लेती रही, में उठा और पानी पिया और एक गिलास ले कर उसके पास gaya)Vaiswi (उसने नशे की हालत में हो वैसे मुझे dekha)Pani पीओ. (वो अब शर्मा रही थी, नज़ारे झुकाये वो बैठी और अपने आपको चद्दर से अच्छे से ढँक लिया, फिर उसने पानी पिया, मेने गिलास वापस रख दिया, और उसका चेरा सहलाते हुए puchha)Tum ठीक हो? (वो मेरे गले लग गयी)

वैस्वी : है में ठीक हु, तुम तो ठीक हो न, मेने तुम्हारे मुँह पर....

शिव : (उसको देखते हुए में muskuraya)Jo तुम समाज रही हो वो नहीं हुआ है.

वैस्वी : (वो शर्मा gayi)Me समाजी नहीं.

शिव : तुमने मेरे मुँह पर पेशाब नहीं की है. (मेरी मुस्कराहट से वो और शर्मा गयी) तुम स्खलित हुई हो तो तुम्हारा रास निकला था.

वैस्वी : सॉरी, में वो रोक नहीं पायी.

शिव : (उसके भोले पैन पर भी मुझे प्यार आ रहा tha)Pagal, इसमें सॉरी कहनेवाली कोई बात नहीं होती, तुम्हे मज़ा आया?

वैस्वी : (शरमाते हुए muskurayi)Bahot ज्यादा.

शिव : अब मुझे चलना चाहिए, काफी देर हो गयी है.

वैस्वी : रुक जाओ न थोड़ी देर. (उसने प्यार से कहा)

शिव : (मुस्कुराते hue)Fir कभी आऊंगा. बुलाओगी न?

वैस्वी : (मेरा हाथ पकड़ kar)Mera बस चले तो में तुम्हे जाने hi न दू शिव, में इंतजार करुँगी शिव. ी रॉय लव यू. (वो मेरे गले लग गयी, मेने भी उसकी पीठ सेहलायी, फिर अचानक वो बोली जैसे कुछ याद आया ho)Ek बात पुछु शिव?

शिव : पूछो?

वैस्वी : अब में वर्जिन नहीं रही न?

शिव : क्या? (मुझे उसकी बात समाज में नहीं आयी)

वैस्वी : हमने ये सब किआ तो अब में वर्जिन नहीं रही न?

शिव : (मुझे उसकी बात पर सचमे हसी आ रही thi)Tum सचमुच भोली हो क्या? (मेरा ऐसा कहने पर वो मुझे देखने लगी जैसे उसकी समाज में नहीं आ रहा हो) हमने कुछ भी नहीं किआ है.

वैस्वी : तुमने वह किआ तो सही.

शिव : पागल (में कुछ पल उसको देखा, पर वो कंफ्यूज hi दिखी मुझे, तो उसको समजने के लिए में bola)Jis दिन मेरा वो तुम्हारे अंदर जायेगा न तब तुम वर्जिन नहीं रहोगी.

वैस्वी : (उसने शिव के पैरो के बिच देखा, उसको थोड़ा समाज में आया, उसने बड़े भोले पैन से kaha)To दाल दो न, मुझे वर्जिन नहीं रहना है शिव.

शिव : वो क्यों?

वैस्वी : है कुछ बात, बस मुझे वर्जिन नहीं रहना है, तुम्हे जो करना है वो करो, पर मुझे वर्जिन नहीं रहना है.

शिव : अजीब लड़की हो यार, अभी वो नहीं हो सकता, मुझे घर भी जाना है, पहले hi बहोत देर हो चुकी है.

वैस्वी : में कुछ नहीं जानती, एक बार दाल दो, बस मुझे वर्जिन नहीं रहना. (वो प्यार से जिद करने लगी)

शिव : ऐसा नहीं होता पगली, उसके लिए टाइम लगता है, वो बड़ा होता है और तुम्हारा छेड़ छोटा, संभल कर करना पड़ता है.

वैस्वी : (वो शिव को देख कर उसकी बात समझने की कोशिस करने लगी, फिर boli)Muje वो दिखाओ न.

शिव : क्या?

वैस्वी : वो hi... तुम्हारा. (उसने शर्मा कर कहा)

शिव : (उसका गाल सेहला kar)Agali बार.

वैस्वी : प्लीज, एक बार. (वो मुझे रिक्वेस्ट करने लगी)

शिव : (में भी जल्दी जाना चाहता था तो मेने kaha)Thik है (कहते हुए में खड़ा हुआ ज़िप खोली और अपने पंत से लुंड बहार निकल ने लगा, पर अभी वो बैठा नहीं था तो बहार नहीं आ रहा था, मेने बेल्ट खोली और बटन खोल कर ऊपर से लुंड बहार निकला, जैसे hi लुंड उसके सामने आया, उसने अपने मुँह पर अपना हाथ रख दिया और आश्चर्य से उसे देखने लगी, में कुछ पल खड़ा रहा फिर bola)Dekh लिया (कहते हुए में उसको वापस अंदर करने लगा तो वैस्वी फ़ौरन लपकी और मेरा हाथ पकड़ लिया)

वैस्वी : देखने तो दो, तुमने मेरा भी सब कुछ देखा न, मेने रोका था क्या.

शिव : वैस्वीी.....





वैस्वी : शह्ह्ह्ह (मुझे चुप रहने का इस्सर कर के, वो गौर से लुंड को देखने lagi)Ye कितना बड़ा होता है. (वो इधर उधर नजर घुमा कर देख रही थी, उसने कांपते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाया, लुंड को पकड़ने से पहले उसने एक बार मेरी और देखा, में उसे hi देख रहा था, उसने फिर अपनी नजर लुंड पर की और कांपते हुए उसको पकड़ लिया और उसको जांचने लगी,





उसके छूने से लुंड और कड़क होने लगा और उसने ठुमका मारा, वैस्वी दर गयी और पीछे हैट gayi)Ahhhhh.

शिव : देख लिया न? (में फिर उसको अंदर करने लगा)

वैस्वी : (उसने फिर मेरा हाथ रोक liya)Kya जल्दी है तुम्हे. (उसने हलके गुस्से से मुझे देखा, में उसकी हालत समाज रहा था, पर मुझे पता था की उसकी चाहत काम नहीं होने वाली बढ़ती hi जाने वाली hai)Tumne मेरा साथ इतना सब किआ मेने रोका तुम्हे, अपनी बरी आयी तो भाग रहे हो.

शिव : में भाग नहीं रहा हु, अगली बार जी भर के जो देखना है देख लेना.

वैस्वी : (वो जैसे मेरी बात सुन hi नहीं रही थी और अपने हाथ से मेरे लुंड को पकड़ कर देखने लगी, वो उसे दबा कर भी चेक कर रही thi)Isse सच में वह डाला जाता है शिव?

शिव : (में उसके कहने का मतलब समाज रहा था, उसको यकीं नहीं हो रहा था की इतना बड़ा वह चला jayega)Haa.

विस्वी : कैसे जायेगा ये?

शिव : चला जाता है.

वैस्वी : एक बार डालके दिखाओ न मुझे. (उसकी निगाहे लुंड पर चिपकी थी और वो लुंड को hi गुरे जा रही थी)

शिव : (मेने उसको daraya)Aise hi नहीं जाता, पहली बार में बहोत दर्द होता है और खून भी निकलता है. (मेरी बात का असर हुआ उस पर, उसने लुंड छोड़ दिया और दर से मुझे देखने लगी)

वैस्वी : बहोत दर्द होता है क्या?

शिव : (मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ, मुझे उसको डरना नहीं chahiye)Hota है, पर बहोत ज्यादा नहीं, वर्ण सब क्यों करते?

वैस्वी : ये भी है, मेरे साथ कब करोगे शिव?

शिव : मेने कहा न, मुझे थोड़ा टाइम दो.

वैस्वी : ये तो तुम हर बार कहते हो, चाहे जितना भी दर्द हो मुझे परवाह नहीं, मुझे ये करना hi है. (मान में, मुझे वर्जिन नहीं रहना, फिर देखती हु कैसे वो मुझसे शादी करने की जिद करता hai)(Muje पता था की अगर ये आएगी चला तो अभी कुछ हो जायेगा तो मेने घूम कर उसे अपने पंत में दाल दिया, वो कड़ी हो गयी थी, जैसे hi में उसकी और घुमा तो वो मेरे गले लग गयी)

शिव : क्या हुआ अब?

वैस्वी : ी लव यू शिव.

शिव : लव यू तू वैस्वी.

वैस्वी : सच में न?

शिव : ये कैसा सवाल है, मेने तुम्हे पूछा, ‘ सच में क्या?’

वैस्वी : (मुस्कुरायी और मुझे किश करने लगी, मेने भी उसको किश किआ, फिर मेरी आँखों में देखते hue)Jaldi आना.

शिव : कहा, यहाँ?

वैस्वी : वो मुझे नहीं पता, यहाँ या कही और पर जल्द hi मिलना.

शिव : ठीक है, कपडे तो पहन लो, मुझे निकलना भी है. (वो शर्मा गयी और जल्दी से कपडे पहने, उसने एक बार फिर मुझे किश किआ, हम बहार आये तो सब शांत था, घर में किसी को भनक तक नहीं थी की क्या हो रहा है, वो मुझे पिछले रस्ते से बहार निकली, में फिर बॉउंड्री कूद कर बहार निकल गया, मेरी बाइक कड़ी थी, उसे ले कर में घर चला गया, दरवाजे पर लॉक लगा हुआ था, वैसे भी काफी देर हो गयी थी, मेने जाली खत खटाई तो थोड़ी देर बाद लतादिदी आती नजर आयी, उन्होंने जाली खोली.

लता : बहोत देर करदी.

शिव : सॉरी, वो थोड़ा लेट हो गया (तभी सामने से विणा आती दिखाई दी, शायद जाली खटकने की वजह से वो उठ गयी थी, हमे देख कर वो बाथरूम की और चली गयी)

लता : ठीक है जाओ सो जाओ.

शिव : आप भी चलो न.

लता : वैसे hi देर हो गयी है, अगर और जगा तो सुबह उठ नहीं पायेगा, अपनी सेहत का भी ख्याल रख, में वही सो जाती हु, तू भी आराम कर. (वो चली गयी, में सोचने लगा की वो मेरा कितना ख्याल रखती है, में भी बिस्तर में घुस गया और सो गया)

दूसरे दिन सुबह में स्कूल चला गया, मेरे पास बाइक थी, जब में वह पंहुचा तो वो तीनो मेरी hi रह देख रही थी.

नाज़िआ : आ गए तुम, ये कबसे तुम्हारा वेट कर रही है.

संयम : में नहीं, ये कर रही थी, कब से कह रही हु चलो, चलो, पर ये है की अभी आ जायेगा कह रही है, जल्दी चलो देर हो जाएगी.

शिव : (वैस्वी मुझे बहोत प्यार से देख रही थी, उसके चेहरे की मुस्कान में hi पहचानता था, फुम तीनो निकल गए, वैस्वी बार बार मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी)

संयम : (चीड़ kar)aage देख कर चला. (वैस्वी झेप गयी पर फिर भी वो शिव को देख hi लेती थी, तीनो स्कूल पहुंच गे)

में क्लास में पढ़ रहा था पर कुछ टॉपिक मुझे समाज में नहीं आ रहे थे, शायद पिछले दिनों मेरी छूटीओ के कारन ये हुआ था. रेसस्स में हम मिले तो मेने ये बताया की मुझे ये समाज में नहीं आया.

संयम : इतनी छुट्टिया करोगे तो ऐसा hi होगा न.

वैस्वी : (उसको हलके से दन्त ते hue)Wo कॉम्पिटिओं पर गया था, (फिर मेरी और देख kar)Me सीखा दूंगी.

शिव : कब?

वैस्वी : (कुछ सोचते hue)Me घर जा कर फ़ोन करती हु, उन्हें पूछ कर में बता दूंगी)

शिव : तुम टेंशन मात लो, ये है न, ये सीखा देगी मुझे. (संयम की और इस्सर करते हुए)

संयम : में नहीं सिखानेवाली, इसी के घर जाना, वो सीखा देगी तुम्हे.

शिव : अब ज्यादा भाव मात खा, में तेरे घर आ जाऊंगा, सामजी. (संयम ने मुँह टेढ़ा किया पर मन नहीं किआ, में मुस्कुराया, वैस्वी की और देख kar)Tum टेंशन मात लो, अगर कुछ होगा तो में बोल दूंगा. (उसने शर्मा के है कहा)

स्कूल की जब छुट्टी हुई तो वैस्वी सीधे चली गयी, संयम मेरे साथ आ गयी.

संयम : (थोड़े रूखे पैन se)Kab आओगे?

शिव : क्या? (ऐसे सीधे सवाल से में समजा नहीं तो मेने पूछा)

संयम : (थोड़ा चीड़ kar)Sikhne के लिए बोल रहे थे न तो वो पूछ रहे हु.

शिव: (मुझे उस पर हसी आ रही थी, मेने उसको छेड़ते हुए kaha)Tumhe पसंद नहीं तो रहने दो, में देख लूंगा.

संयम : (थोड़ा और चिढ़ते hue.)Mene मन किया है क्या?

शिव : पर बात तो ऐसे hi कर रही हो, रहने दो, में वैस्वी से बोल दूंगा.

संयम : है, अब तो वो hi है सब, में तो कुछ हु hi नहीं न.

शिव : तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है यार, तुम्हारे पास अउ तो प्रॉब्लम, न औ तो प्रॉब्लम, तुम चाहती क्या हो? (संयम कुछ नहीं बोली, मेने मिरर से उसका चेहरा देखा तो वो उदास दिख रही थी, तो मेने kaha)Ghar जा कर खाना खा कर आता हु. (उसे पता नहीं था की में उसे देख रहा हु, उसके चेहरे पर आयी मुस्कान मुझे साफ़ दिख रही थी, सच में इस लड़की का कुछ समाज में नहीं आ रहा था, मेने उसको नाके पर छोड़ा और घर चला गया, खाना खा कर किताबे ले कर संयम के घर के लिए निकल रहा था की मेरे फ़ोन पर कॉल आया, मेने देखा तो मनीषा मैडम का था)

शिव : Hello मैडम.

मनीषा : कहा हो तुम? (उन्होंने नॉर्मली hi कहा)

शिव : घर पर hi मैडम, कुछ काम था?

मनीषा : है काम था, आ शक्ति हो अभी.

शिव : में पढ़ाई के लिए जा रहा था, कोई खास काम है क्या?

मनीषा : ओह!, नहीं इतना भी नहीं, कब तक फ्री होंगे?

शिव : एक दो घंटे में.

मनीषा : ठीक है तो फिर घर hi आ जाना, में घर पर hi हु.

शिव : Ok मैडम. (मेरी समाज में नहीं आया की क्या बात है, में सोचते हुए में संयम के वह निकल गया)
 
अपडेट 177

में संयम के घर पहुंच गया, मेने बेल्ल बजायी तो आंटी ने दरवाजा खोला, मुझे देख कर वो थोड़ी हिचकिचाई.

शिव : नमस्ते आंटी.

ज़ोया : (नज़ारे चुराते hue)Namaste. (तभी अंदर से आवाज आयी)

नाज़िआ : कोण है अम्मी? (कहते हुए उन्होंने बहार की और नजर की तो मुझे dekha)Shiv! तुम, इस वक़्त.

शिव : है, वो संयम से बात हुई थी, में छुट्टी पे था तब पढ़ाई छूट गयी थी तो मेने उस से कहा था.

नाज़िआ : है है, पर बहार hi खड़े रहने का इरादा है क्या? अंदर तो आओ. (में अंदर चला गया, आंटी बिना पीछे मुड़े अंदर चली गयी, नाज़िआ दिमि आवाज में boli)Kaise हो? (उनकी मुस्कराहट बहोत कुछ कह रही थी, में भी मुस्कुराया)

शिव : अच्छा हु.

नाज़िआ : खड़े क्यों हो, बेथ जाओ.

शिव : संयम कहा है?

नाज़िआ : (मुस्कुराते hue)Bas उसी से मिलने आये हो?

शिव : ऐसी बात नहीं है. (में क्या कहता)

नाज़िआ : (मुस्कुराते हुए मुझे देखा फिर उन्होंने आवाज lagayi)Samim ो संयम.

संयम : (ऊपर से hi आवाज देते hue)Ha आप?

नाज़िआ : शिव आया है.

संयम : ऊपर भेज दो उसे.

नाज़िआ : लगता है तुम दोनों में सुलह हो गयी है.

शिव : मेरी तरफ से तो कुछ बिगाड़ा hi नहीं था, मेने उसको पूछा तो उसने आने को कहा तो में आ गया.

नाज़िआ : चलो अच्छा है, तुम जाओ.

शिव: (में ऊपर चला गया, वो रूम में उलटी हो कर कुछ पढ़ रही थी, मेने उसको देखा तो सलवार कमीज़ पहने हुए वो लेती थी, उसके कूल्हे अपना आकर दिखा रहे थे)

संयम : (संयम को पता था की शिव आके खड़ा है, पर उसने उस और देखा hi nahi)Wahi खड़े रहने का िर्रादा है क्या? (में झेप गया क्यों की में उसके कूल्हों को देख रहा था, वैसे भी लड़कीओ का ये नजारा पता नहीं क्यों देखने में अच्छा लगता है, मेने नजर हटाई और अंदर चला गया, वह बीएड पर में बेथ गया, वो पलटी और बेथ गयी और मुझे देखने लगी, में भी उसको देख रहा था और समझने की कोशिस कर रहा था)

शिव : ऐसे क्यों देख रही हो?

संयम : तो कैसे देखु? (थोड़ा नखरे से वो बोली)

शिव : अगर पसंद नहीं था तो स्कूल में hi मन कर देती.

संयम : में तुम्हारी तरह नहीं हु, दिखाओ क्या सीखना है तुम्हे?

शिव: (मुझे उसका इस तरह से कहना अच्छा नहीं लगा पर फिर भी मेने उसे नजर अंदाज किआ और उसको दिखने लगा की मुझे क्या सीखना है, वो ध्यान से टॉपिक देख रही थी, मेने उसकी और देखा तो मेरी नजर सीधे उसके कुर्ते से झक्ति उसकी चुचिओ पर गयी, माध्यम आकर की थी पर उसने बड़े गले का कुरता पहना था तो ब्रा भी दिख रही थी, मेने नजर हटानी चाही पर पता नहीं वह चिपक सी गयी थी, तभी उसने मेरी और देखा तो मुझे वह देखते पाया, वो फ़ौरन सीधी हो गयी, मेने भी नज़ारे निचे कर ली, पर जो होना था वो हो गया था)

संयम : सुधर जाओ.

शिव : में सुधरा हुआ hi हु. तुम्हारी hi गलती है.

संयम : है तुम तो दूध के धुले हुए हो न, मुझे तुम्हारी तरह समजा है क्या.

शिव : क्या मतलब है तुम्हारा की तुम्हारी तरह? जो कहना है साफ़ साफ़ कहो.

संयम : (वो फिर थोड़ी देर मुझे देखती rahi)Chhodo उस बात को.

शिव : नहीं छोडूंगा, पहले ये बताओ की तुम क्यों छिड़ी हुई हो मुझसे?

संयम : तुमने काम hi ऐसा किआ है.

शिव : क्या किआ है मेने?

संयम : (वो कुछ पल मुझे देखती rahi)Mene कहा न छोडो न उस बात को, जो सिखने आये हो उसमे ध्यान दो.

शिव : जो भी प्रॉब्लम है वो सीधे सीधे बोल क्यों नहीं देती, मुझे भी समाज आये की आखिर दिक्कत क्या है तुम्हे.?

संयम : में तुम्हारी तरह बेशर्म नहीं हु जो ऐसी बात अपने मुँह से कहु.

शिव : मुझे जहा तक याद है ये रवैया तब से सुरु हुआ है जब से हम नाज़िआदिदी के घर से आये है, है न?

संयम : चलो कुछ तो ध्यान है तुम्हे. (उसने टॉन्ट मारा)

शिव : वह ऐसा क्या हुआ जो तुम नाराज़ हो गयी, मेने तो कुछ भी नहीं किआ था, और जहा तक मुझे याद है मेने तू उस दिन तुम्हारी तारीफ hi की थी, कोई बदतमीजी भी नहीं की थी.

संयम : इतना सब याद है तो और भी कुछ याद होगा न.

शिव : पहेलियाँ क्यों बजा रही हो, जो कुछ है सीधे सीधे बताओ न.

संयम : (उसके गले तक आ गया की वो बोल दे पर पता नहीं क्यों वो ऐसा बोल hi नहीं प् रही थी, आखिर वो एक अच्छी लड़की थी और ऐसी गन्दी बात कैसे वो अपने मुँह से कहे, वो बस शिव को देख रही thi)Me तुम्हारी तरह बेशर्म नहीं हु.

शिव : (मुझे भी अब दर लग रहा था, में समाज रहा था की शायद उसने आंटी के साथ मुझे देख लिया था, पर जब तक वो नहीं बताती में सूरे नहीं था, पर अब मुझे लग रहा था की हो न हो उसने देखा है, तभी वो ऐसा बेहवे कर रही थी, पर अगर उसने देखा था तो फिर आज क्यों मुझे बुलाया, मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा था, तभी नाज़िआ दीदी आयी, उनके हाथ में गिलास था)

नाज़िआ : लो शरबत पीओ.

शिव : इसकी क्या जरुरत थी.

नाज़िआ : चुप चाप पिलो. (उन्होंने मुस्कुराते हुए मुझे आंखे दिखाई तो में भी मुस्कुराते हुए पिने लगा, वो बीएड में hi बेथ गयी, मेने शरबत पि कर गिलास वापस दिया तो उन्होंने वही साइड में रख diya)Lagta है अभी पढ़ाई सुरु नहीं की.

संयम : इधर उधर की बातो से इनको फुर्सत मिले तब न पढ़ेंगे. (उसने फिर टॉन्ट मारा)

शिव : (मेने उसको घर कर देखा) (संयम बिना कुछ बोले कड़ी हुई और अपनी नोट बुक निकली और वापस बेथ गयी, फिर अभी जो हुआ था उसका उसे ध्यान आया)

संयम : निचे बेथ ते है, यहाँ में लिखूंगी तो तुम्हे उल्टा dikhega.(Usne बहाना किआ, वो जानती थी की फिर उसके सामने वो नजारा होगा)

नाज़िआ वही लेते लेते दोनों को देख रही थी, वो ये सोच कर आयी थी की शिव के साथ कुछ वक़्त बिताएगी, पर दोनों पढ़ रहे थे तो उनको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समजा उसने, पंद्रह मिनट तक वो वही रही पर दोनों पढ़ई कर रहे थे, उसे भी नींद आने लगी थी, पर उनकी आवाजों से नींद खुल जाती थी, वो कड़ी हुई और गिलास ले कर निचे जाने लगी.

संयम : कहा जा रही हो आप, बैठो न.

नाज़िआ : मुझे नींद आ रही है, में निचे जा रही हु, तुम पढ़ाओ इससे. (नाज़िआ निचे चली गयी, उसकी ामी भी काम ख़तम कर के किचन से बहार निकली थी)

ज़ोया : क्या हुआ, निचे क्यों आ गयी.

नाज़िआ : वो दोनों पढ़ रहे है, मुझे डिस्टर्ब हो रहा है, में यही सो जाती हु.

ज़ोया : पर वो दोनों अकेले है ऊपर.

नाज़िआ : तो क्या हुआ ामी, पढ़ रहे है दोनों. (ज़ोया भी कुछ नहीं बोली, वो दोनों रूम में चले gaye)(Me और संयम पढ़ hi रहे थे की मेरे मोबाइल पर कॉल आयी, मेने देखा तो कंपनी का कॉल था, मेने काट दिया, फिर हम पढ़ने लगे, दस मिनट बाद फिर से कॉल आयी, फिर कंपनी का hi था, मेने काट दिया)

संयम : (चिढ़ते hue)Kiska कॉल आ रहा है, बात कर लो.

शिव : वो कंपनी वाले है, में साइलेंट hi कर देता hu(Mene फ़ोन साइलेंट कर दिया) अब कोई कॉल नहीं आएगी, तुम पढ़ाओ. (वो फिर मुझे पढ़ने लगी, वो पढ़ने में फिर खो गयी थी और आगे झुक गयी थी, बाजु में होने के कारन मुझे उसके गले के अंदर सब दिख रहा था, में वह देखना नहीं चाहता था पर फिर भी नजर चली hi जाती थी, उसने मुझे कुछ पूछा तो भी मुझे ध्यान नहीं रहा, उसने गुस्से से मेरी और देखा तो में फिर पकड़ा गया, उसने गुस्से से किताब बंद करदी)

संयम : मुझे नहीं पढ़ना, जाओ तुम.

शिव : सॉरी यार, अब नहीं देखूंगा. (मेने गलती की थी तो मान लेना hi बेहतर था)

संयम : तुम बहोत गंदे हो शिव.

शिव : मेने कहा न की अब में नहीं देखूंगा, वो गलती से नजर चली गयी.

संयम : तुम्हारी नजर जाएगी hi, क्यों की तुम हो hi ऐसे, मेने सोचा नहीं था की तुम ऐसे होंगे.

शिव : अच्छा में ऐसा हु, तुम जब सब करती थी तो तुम वैसी नहीं थी क्या?

संयम : मेने क्या किआ है?

शिव : तुम्हे क्या लगता है की मुझे समाज नहीं आता, स्कूटर पर बैठने के लिए तुम क्यों जगद्ति थी, मुझे यहाँ वह क्यों हाथ लगाती थी.

संयम : (झेपते hue)M म मेने ऐसा कुछ नहीं किआ है, इल्जाम मत लगाओ मुज पर. (उसने अपना बचाव किआ)

शिव : खाओ मेरी कसम और कहो की में जूथ बोल रहा हु.

संयम : में क्यों खो कसम, मेने कह दिया न की मेने वैसा कुछ नहीं किआ है.

शिव : तो खा लो न जूठी कसम, वैसे भी लोग कहते है की जूठी कसम खाने से सामनेवाला मर जाता है, तो तुम्हारे लिए तो अच्छा hi है न, तुम्हे मुझसे छुटकारा मिल जायेगा.

संयम : (उसका मुँह गंभीर हो gaya)Me ऐसा क्यों चाहूंगी?

शिव : वैसे भी मुझसे नाराज हो, मुझसे दूर रहती हो, मुझे सुनती रहती हो, तो खा लो जूठी कसम और कह दो की तुमने वैसा कुछ भी नहीं किआ था.

संयम : (वो पूरी तरह से गंभीर हो गयी थी, और शिव की आँखों में आंखे दाल कर boli)Jab इतना सब पता था तो फिर वैसा क्यों किआ तुमने?

शिव : क्या किआ है मेने?

संयम : (अपनी नज़ारे झुका ke)Meri ...ामीई... के साथ.

मेरे शिर पर जैसे बिजली गिर गयी, जो में नहीं चाहता था वही सच था, वो देख चुकी थी सब, में क्या कहु मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था, वो नज़ारे झुकाये बैठी थी, भले hi मेने कोई गलती नहीं की थी, पर उसकी नजर में में गुनेहगार था. में बस चुप चाप उसे देख रहा था, उसने नज़ारे उठायी तो उसकी आँखों में आंसू भर आया था.

संयम : बताओ शिव, क्या जरुरत पद गयी थी ऐसा करने की, में तुम्हे पसंद करती हु ये तुम्हे पता था तो फिर ऐसा कुछ करना था तो मुझे कहते. (उसकी आँखों से आंसू छलक आये)

शिव : सॉरी यार, वो में...

संयम : सॉरी कहने से सब ठीक हो जायेगा क्या, (वो मेरी और देखती rahi)wo मेरी अम्मी थी शिव, तुम्हे जरा भी ख्याल नहीं आया मेरा.

शिव : (मेने उसके हाथ पर हाथ rakkha)Ye सब तुम नहीं संजोगी संयम, मेने सॉरी इस लिए नहीं कहा की मेने वैसा किआ, तुम्हे बुरा लगा इस लिए मेने तुम्हे सॉरी कहा.

संयम : में क्या नहीं समजुती शिव? मेने कभी अम्मी के बारेमे ऐसा नहीं सोचा था, में नहीं जानती थी की वो इतनी गिरी हुई है, उन्हें तुम्ही मिले थे ये सब करने के लिए, मुझे नफ़रत हो गयी है उनसे.

शिव : इसीलिए मेने तुम्हे कहा था की तुम नहीं संजोगी.

संयम : तो समजाओ मुझे, (उसने हलके गुस्से से kaha)Aisa क्या है जो में समाज नहीं प् रही हु, तुमने मेरी अम्मी के साथ, अपनी दोस्त की अम्मी के साथ ये सब किआ, इसमें क्या है समझने को.

शिव : तुम कह रही हो की मेरे साथ कर लेते, तो क्या मुझे पता नहीं था की तुम मुझे मन नहीं करोगी, मुझे पता था, पर में वो सब हवस मिटने नहीं करता, अभी तुम इस बारे में कुछ भी जानती नहीं हो इसलिए तुम नहीं संजोगी, सच कहु तो कारन मुझे भी नहीं पता, पर मेने उन्हें जिस अवस्था में देखा था मुझे लगा की उन्हें जरुरत है तो मेने मदद कर दी थी.

संयम : किस अवस्था में देखा था तुमने?

शिव : में वो सब नहीं बता सकता, पर में इतना समाज सकता हु की उन्हें उसकी जरुरत थी, तुमने देखा था, मेने कोई जबरदस्ती की थी क्या, और तुम्हे क्या लगता है की तुम्हारी अम्मी वैसी है?

संयम : यही तो मेरी समाज में नहीं आता, न तुम वैसे हो न वो वैसी है तो फिर ऐसा क्यों है.

शिव : इसीलिए मेने कहा न की तुम अभी नहीं संजोगी, अभी तुम छोटी हो.

संयम :(उसने अपने आंसू pochhe)Achchha में छोटी हु, और तुम बहोत बड़े हो गए हो क्यों? (में उसे देख रहा tha)Mat भूलो, में और तुम एक hi क्लास में पढ़ते है.

शिव : में उम्र से छोटी नहीं कह रहा हु, में तजुर्बे से छोटी कह रहा हु, ये सब जो है न वो बहोत अजीब है, इसमें कोई भी समीकरण ठीक नहीं होता है, सब के अलग अलग समीकरण होते है, इसीलिए में कह रहा हु की तुम नहीं संजोगी.

संयम : (उसने रोना बंद करदिया था, वो मुझे ध्यान से देख रही थी और सुन रही thi)Maan लिया की में नहीं संजुगी, पर कब तक, कोई मुझे समजायेगा तभी तो में संजुगी न, ये दिन कैसे मेने गुजरे है मुझे ही पता है, एक और तो तुम पर गुस्सा आ रहा था, एक और अपनी अम्मी पर गुस्सा आ रहा था, में किसी को कुछ कह भी नहीं सकती थी, क्या कहती की मेरी ामी और मेरा सबसे अच्छा दोस्त ऐसा कर रहे है, में कुछ नहीं जानती, तुम्हे मुझे संजना hi पड़ेगा की ये सही कैसे है, वर्ण मान लो की तुमने गलत काम किआ है.

शिव : मेने कहा न की ये ऐसी बाते है जो सही या गलत नहीं होती, तुम्हारी नजर में जो गलत है शायद तुम्हारी अम्मी की नजर में सही हो, और तुम जो मेरे साथ कर रही थी क्या वो सही था, सोचो की वो बात तुम्हारी अम्मी को पता चलती तो क्या वो सही समझती.

संयम : मेने क्या गलत किआ है, मुझे तुम अच्छे लगते हो तो मेने वो किआ. इसमें गलत क्या है?

शिव : गलत कुछ नहीं है, पर समाज इसकी इजाजत नहीं देता.

संयम : ये मेरी जिंदगी है, में जो चाहे करू.

शिव : तुम्हारी अम्मी भी ये कह सकती है की ये उनकी जिंदगी है, वो जो चाहे वो करे.

संयम : पर उनकी शादी हो चुकी है, वो ऐसे कैसे अब्बू को देखा दे सकती है?

शिव : शायद वो देना न भी चाहती हो, पर ऐसा कुछ है जो उन्हें नहीं मिल रहा हो जो उन्हें ऐसे पाना पड़ा हो, और वो हर वक़्त तो ऐसा नहीं चाहती न, कभी कभी कुछ जरूरते तुम पर हावी हो जाती है, तब कदम बहक जाते है, इसीलिए कह रहा हु की तुम नहीं संजोगे.

संयम : मुझे नहीं लगता की ऐसा कुछ हो जाता है की तुम्हारे कदम इस हद तक बहक जाये, मेने तुम्हारे साथ वो किआ क्यों की तुम मुझे पसंद हो, और किसी के साथ में ये सब न करू, समजे.

शिव : मेरे साथ ये सब क्यों करना है, क्या मेरी और तुम्हारी शादी हुई है?

संयम : हो भी सकती है (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : नहीं हो सकती. (मैंने जोर दे कर कहा)

संयम : तुम्हे कैसे पता, तुम खुदा हो क्या? और एक बात बता दू, मुझे किसी से भी शादी नहीं करनी.

शिव : क्यों?

संयम : मेरी मर्जी, नहीं करनी तो नहीं करनी, कोई जबरदस्ती है क्या?

शिव : पर कोई तो वजह होगी न, ऐसे hi कोई इतना बड़ा निर्णय नहीं ले लेता.

संयम : बहार क्या वजह ढूंढनी, एक वजह तो नाज़िहापा है, वो कितनी अच्छी है फिर भी उनके हस्बैंड उन्हें छोड़ने को तैयार हो गए थे, ये तो उनकी अच्छी किस्मत थी की वो माँ बन ने वाली है, वर्ण वो घर hi वापस आ जाती, और दूसरी वजह तुमने दे दी, अम्मी के रूप में, शादीशुदा हो कर भी वो ऐसी हरकत कर रही है, अगर शादी ऐसी hi होती है तो मुझे नहीं करनी.

शिव : इसीलिए कह रहा था की अभी तुम छोटी हो, ये सब बाते तुम्हारी समाज में नहीं आएगी.

संयम : अगर ऐसा hi है तो मुझे नहीं समझना, अच्छा है की में नासमज hi हु, मुझे तो ये समाज में नहीं आता की ऐसा क्या हो जाता है जो ऐसे किसी के साथ भी कुछ भी करने को तैयार हो जाते है.

शिव : तुम्हे भी तो कुछ हुआ होगा, तभी तुम मुझसे चिपक के बैठती थी.

संयम : (वो मुझे देखने लगी, फिर सोच कर boli)Hua होगा, पर में अपने आपको रोक पायी न, जैसेही तुम्हारा रूप मेरे सामने आया तो में पीछे हैट गयी.

शिव : वो इस्सलिये की अभी तक तुमने उसका सही से स्वाद चखा hi नहीं.

संयम : तुमने चिखलिया है, इसीलिए मुझे भी तुम वैसे hi देख रहे थे, है न?

शिव : वो पता नहीं, हो सकता है की तुम मुझे अच्छी लगती हो और कही न कही में जनता था की में भी तुम्हे अच्छा लगता हु, तो शायद इसीलिए में तुम्हे वैसे देख पाया.

संयम : वो सब देखने में क्या अच्छा लगता है तुम्हे?

शिव : हर किसी को में ऐसे नहीं देखता.

संयम : तो मुझे क्यों देखा?

शिव : मेने कहा न की शायद तुम मुझे अच्छी लगती होगी.

संयम : शायद.

शिव : अच्छा ठीक है, तुम मुझे अच्छी लगती हो बस.

संयम : और वैस्वी भी, है न?

शिव : है, वो भी, और कुछ?

संयम : तुम सब एक जैसे hi होते हो.

शिव : दुसरो का तो पता नहीं पर मेरी हालत वैसी hi है, और इसीलिए में दूर hi रहता हु.

संयम : वैस्वी से तो दूर नहीं rehte(Usne टॉन्ट मारा)

शिव : उसको भी पूछ लेना, में हमेसा उस से दूर रहने की कोशिस करता हु.

संयम : है, भाई तुम hi तो एक लड़के बचे हो दुनियामे, जो सभी लड़किया तुम्हारे पीछे है.

शिव : तुम जो भी संजो, और इतना सुना रही हो मुझे, तुम खुद भी मेरे पीछे पड़ी थी न, या ये कहु की अभी भी हो.

संयम : इतना ऊपर मात ऊधो, में कोई तुम्हारे पीछे नहीं पड़ी और न शौख है.

शिव : अगर कोई तुम्हे जबरदस्ती किश करे तो क्या करोगी?

संयम : उसका मुँह नोच्लुँगी. (उसने अपने नाख़ून दिखा कर कहा, दो तीन पल में उसको देखता रहा, वो भी मुझे देख रही थी, हमारे चेहरे एक दूसरे के सामने hi थे, में आगे हुआ और हलके से उसके होठो पर किश कर दिया और हैट गया, उसकी आंखे बड़ी बड़ी हो गयी, उसको यकीं hi नहीं हो रहा था की मेने वैसा किया है, वो पतली मार कर बैठी थी, मेने उसकी झंघ पर हाथ रख दिया और हलके से डाबडिया, वो मुझे अचम्बे से घर रही थी, में फिर उसके होठो की और झुका पर वो वैसे hi रही, न पीछे हुई न आगे आयी, में उसके होठो के नजदीक गया और बिना किश किये वापस हो गया, और अपना हाथ भी उसके झंघ पर से हटा दिया, वो बस मुझे देखे जा रही थी)

शिव : क्या हुआ? न मुझे मारा, न मेरा मुँह नोचा, न chillayi(Mene मुस्कुराते हुए कहा, पर वो तो बस मूर्ति बानी मुझे देखे जा रही थी) अब बोलोगी भी कुछ. (वो थोड़ी होश में आयी, और अपनी नज़ारे झुका ली) देखा, तुमने कुछ नहीं किआ, न मुझे मारा न रोका. और ये में पहले से जनता था, पर मुझे तुम्हारी परवाह है, और में वैसा hi हु जैसा तुमने देखा था, बस में जबरदस्ती नहीं करता, शायद आंटी को वो सुख चाहिए था, मुझे नहीं पता क्यों, पर में उन्हें जनता था और में ये भी समझता था की वो वैसी नहीं है, शायद हमारे बिछ हालत वैसे हो गए जिस वजह से हमारे बिच वो सब हो गया, पर तुम्हारे व्यवहार से शायद उनको भी भनक लग गयी है की तुमने वो सब देख लिया है, इसीलिए वो दरी दरी रहती है, वो मेरे सामने भी नहीं देखती. अगर मेरी वजह से उन्हें सुखमिलता है तो में वो दोबारा भी करूँगा, है पर वो चाहेगी तो hi. मुझसे ज्यादा तुम अपनी अम्मी को पहचानती हो, वो कैसी है वो तुम्हे मुझसे ज्यादा पता है, पर एक औरत की कुछ जरूरते होती है, ये अभी तुम्हारी समाज में नहीं आएगा. अगर तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा की में तुम्हारे घर औ तो में नहीं आऊंगा कभी. तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो और रहोगी. (में उठने लगा, उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, में उसको देखने लगा)

संयम : क्या में खूबसूरत नहीं हु?

शिव : इसमें पूछनेवाली क्या बात है, तुम हो खूबसूरत.

संयम : तो फिर में क्यों नहीं, वैस्वी क्यों?

शिव : इस क्यों का जवाब मेरे पास नहीं है, और वैस्वी भी तुमसे ज्यादा नहीं है मेरे लिए, तुम दोनों hi मेरे लिए सामान हो.

संयम : तो जैसा उसके साथ रहते हो मेरे साथ क्यों नहीं रहते?

शिव : रहता तो हु, तुमसे भी अच्छे से hi बात करता हु न.

संयम : मेरे शिर पर हाथ रख कर कहो की तुम्हारा उसके साथ कोई चक्कर नहीं है.

शिव : इसमें तुम्हारे शिर पर हाथ रखने की जरुरत नहीं है, तुम पूछती तो भी में कह देता, है है, पर वह भी मेने एक लिमिट बांध रक्खी है.

संयम : तो ये भेद भाव क्यों, अगर वो और में एक सामान है तो फिर मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो?

शिव : अभी तुम मेरे बारे में कुछ भी नहीं जानती, में नहीं चाहता की मेरी वजह से में एक अच्छी दोस्त खो दू.

संयम : तुम मुझे अच्छे लगते हो शिव, अपनी अम्मी के साथ देखने के बाद भी में तुमसे नफ़रत नहीं कर पायी, तुम जैसे भी हो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता शिव (कहते हुए वो मेरे नजदीक आयी, में थोड़ा पीछे हैट गया पर उसको तो जैसे कुछ हो गया था, वो मेरे ऊपर होने लगी, और उसने अपने होठ मेरे होठो पर रख दिए, वो बस होठ चिपकाये हुए थी, मुझे हसी भी आ गयी की वो अभी नादाँ है, उसे किश करना भी नहीं आता, थोड़ी देर बाद वो हटी और मुझे देखने लगी, में मुस्कुराते हुए उसे देखने laga)Kya हुआ, ऐसे क्यों है रहे हो?

शिव : तुम्हे तो किश करना भी नहीं aata(Mene मुस्कुराते हुए कहा तो वो शर्मा गयी)

संयम : में तुम्हारी तरह नहीं हु, मेने ये सब कभी नहीं किआ. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : अच्छा, तो बताओ कैसा हु में?

संयम : (मुस्कुराते hue)Ek नंबर के घंट हो तुम.

शिव : तो दूर रहो मुझसे.

संयम : नहीं रह सकती, अगर नहीं आता मुझे तो क्या हुआ, तुम्हे तो सब आता है न, तुम मुझे सिखाओ.

शिव : (में कुछ पल उसको देखता रहा, वो मुझे शरमाते हुए देख रही थी, में थोड़ा संभल gaya)Fir कभी, अभी कोई आ जायेगा तो एक और बबल हो जायेगा.

संयम : (उसने मेरा हाथ पकड़ा और बहोत प्यार से कहा) कोई नहीं आएगा, दोपहर में सब सो जाते है. (ये अपना पूरा मान बना चुकी थी, सच कहु तो में उसको नाराज नहीं कर सकता था, और साथ में वो मुझे पसंद भी थी, पता नहीं दोस्त की तरह या और कुछ)

शिव : (वो मुझसे सात कर hi कड़ी थी, मेने उसकी आँखों में देखा और kaha)Ye रास्ता ठीक नहीं है संयम, क्यों चलना चाहती हो?

संयम : पहले दिन से hi में तुम्हे पसंद करती हु शिव. (वो बहोत प्यार से मुझे देख रही थी, मेने उसके प्यारे चेहरे को देखा, उसमे निमंत्रण था, मेने उसको नीरस नहीं करना चाहता था तो में उसकी और झुकने लगा, उसकी सांसे तेज होती जा रही थी, मेने भी उसको कमर से पकड़ लिया, उसे भी पता चल गया की आगे क्या होनेवाला है तो उसके होठ फड़कने लगे, तभी सीडीओ पर किसी के ऊपर आने की आवाज आयी तो हम दोनों अलग हो गए, आवाज नजदीक आ रही थी, हम दोनों तुरंत किताब के पास बेथ गए, वो किताब में कुछ लिखने का नाटक करने लगी, तभी नाज़िआ दीदी अंदर आयी, हम दोनों के देख कर वो फिर से बीएड पर लेट गयी, बल बल बच गए थे हम)

संयम : (नाटक करते hue)To समाज में आया न तुमको?

शिव : है. (कहते हुए में मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी, ये तो अच्छा था की संयम का चेहरा मेरी तरफ था और नाज़िआदिदी पीछे वर्ण उनको शमीम के चेहरे से hi पता चल जाता) ठीक है तो फिर में चलता हु. (संयम ने मेरा हाथ पकड़ लिया, नाज़िआदिदी को वो नहीं दिख रहा था).

संयम : दूसरा भी था न जो तुम्हे सीखना था?

शिव : आज के लिए ये बहोत हो गया, मुझे कही जाना भी है, में फिर आऊंगा.

संयम : (वो मायूस हो गयी, पर नाज़िआ के होते हुए वो कुछ नहीं बोल सकती थी) कल? (उसने तुरंत कहा)

शिव : में फ़ोन कर के बताता हु.

संयम : कल छुट्टी hi तो है, आ जाना न. (उसने बहोत रिक्वेस्ट भरे स्वर में कहा)

शिव : ठीक है, पर में फिर भी पक्का नहीं कह सकता, में फ़ोन कर दूंगा. (संयम भी ज्यादा कुछ नहीं कह सकती थी, उसे नाज़िआदिदी पर गुस्सा आ रहा था की क्यों ऊपर आ गयी) में चलता हु (कहते हुए में खड़ा हुआ, और नाज़िआदिदी को भी bye कहा, वो मुझे हसरत भरी निगाहो से देख रही थी पर संयम की वजह से वो कुछ नहीं कर सकती थी)

संयम : में तुम्हे निचे तक छोड़ देती हु. (वो भी मेरे साथ निचे आयी, उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, पर निचे उसकी अम्मी थी, वो फुसफुसाते हुए boli)Kal आना, में इंतजार करुँगी.

शिव : ठीक है. (मेने ज्यादा रिस्क नहीं लिया, और में वह से निकल गया, वो मुझे दरवाजे से hi देख रही थी, उसने मुस्कुराते हुए हाथ हिला कर bye कहा, में वह से निकल गया और मनीषा मैडम के घर चल पड़ा)

वह दूसरी और जहान्वी कबसे शिव को फ़ोन कर रही थी, उसने मश्ग भी किये पर शिव का कोई जवाब नहीं आ रहा था, वो अंदर hi अंदर गुस्सा हो रही थी.

जहान्वी : कहा हो तुम, क्या कर रहे हो, कमसे काम जवाब तो दो यार (वो बार बार अपना फ़ोन देख रही थी पर शिव की और से कोई जवाब नहीं आ रहा था, शिव जब नजदीक होता था तो वो दूर भगति थी पर जब नहीं है तो वो बेचैन हो रही थी, ऊपर से करुणा उसका शिर खा रही थी वो अलग, वो याद करने लगी, जब कल करुणा उसके घर आयी थी)

करुणा : सच सच बता, तेरे और शिव के बिछ चक्कर चल रहा है न?

जहान्वी : (अपनी नज़ारे चुराते hue)Aisa कुछ भी नहीं है, वो कहा और में कहा (उसने बस करुणा से पीछा छुड़ाने के लिए कहा था)

करुणा : क्या वो बेवकूफ है, कितना अच्छा मौका था, ध्रुव से तुम्हारा बदला भी पूरा हो जाता.

जहान्वी : मुझे तो लग रहा है की ध्रुव से मेरा बदला पूरा हो ये मुझसे कही ज्यादा तू चाहती थी, या तुजेहि शिव के साथ वो सब करने की ज्यादा खुजली थी. (उसने टॉन्ट मारा)

करुणा : (झेपते hue)Aisa कुछ नहीं है, में तो बस तेरी मदद कर रही थी.

जहान्वी : रहने दे, रहने दे, तेरा चेहरा hi बता रहा है की ये सच नहीं है.

करुणा : तुजसे क्या छुपाना, सच है ये, मुझे hi वो सब करना था, तूने देखा नहीं उसका, कितना मस्त लुंड है यार, ऐसा तो मेने फिल्मो में hi देखा है, उसको सोच कर अभी भी मेरी तो गीली होने लगी है. शहहहहह कशह्ह्हह्ह वो सब कर लेता.

जहान्वी : वो वैसा नहीं है.

करुणा : तुजे बड़ा पता है की वो कैसा है, वो मर्द hi है न, की ऐसे hi इतना बड़ा लटका के घूम रहा है.

जहान्वी : अब तू वेस्यो की भासा बोल रही है, वो अपने ग्राहक को उकसाने को उन्हें नामर्द और न जाने क्या क्या बोलती है, तू भी वैसा hi कर रही है, शर्म नहीं आती तुजे.

करुणा : उसके लिए तो में कुछ भी बन ने को तैयार हु, बस उसको कह की मेरे साथ वो सब कुछ कर ले.

जहान्वी : है जैसे वो मेरी सब बात मान लेगा, में जो कहूँगी वो करेगा, मेने कहा न की वो वैसा नहीं है.

करुणा : मेरे शिर पर हाथ रख कर कह की तेरा और उसका चक्कर नहीं है.

जहान्वी : तुजे जो समझना है समाज, मुझे कोई सफाई देने की जरुरत नहीं है, तू सेक्स के लिए इतना निचे गिर जाएगी मुझे पता नहीं था.

करुणा : (मायूस हो kar)Sahi कह रही है तू, पर में क्या करू यार, उंगलिअ दाल दाल कर थक गयी हु, वो कमीना (ध्रुव) भी पूरा नहीं करता मुझे, और ऐसा तो है नहीं की किसी के भी निचे लेट जाऊ, सच कहु तो शिव पर दिल आ गया है मेरा, और जबसे उसका देखा है एक पल भी चैन नहीं है, कुछ कर न यार, तू जो कहेगी वो में करुँगी, बस एक बार उसका दिलवा दे.

जहान्वी : तू पागल हो गयी है.

जहान्वी अभी भी वो बात सोच कर करुणा पर गुस्सा हो रही थी, सच तो यही था की उसको खुद यकीं नहीं हो रहा था की शिव का इतना बड़ा है, वो खुद पागल हो रही थी, अगर सिर्फ सेक्स की बात होती तो वो कब की शिव के निचे हो चुकी होती, पर कहना कही उसको दर लग रहा था की शिव उसके बारे में क्या सोचेगा जब उसे पता चलेगा की में किसी और के साथ भी ये सब कर चुकी हु, यही बात सोच सोच कर वो परेशान थी, उसने फिर अपने मोबाइल को देखा, उसका कोई जवाब नहीं था, उसे शिव पर बहोत गुस्सा आ रहा था, मान कर रहा था की मोबाइल hi तोड़ दे.

में जब मनीषा मैडम के घर पंहुचा तब एक नौकर ने मुझे बैठने को बोलै, में वही सोफे पर बेथ गया, थोड़ी देर बाद मैडम आयी तो में खड़ा हो गया.

मनीषा : (प्यारी स्माइल देते hue)To आखिर टाइम मिल गया? (हलके टॉन्ट के साथ वो बोली तो में बस मुस्कुराया, फिर नौकर को आवाज देते hue)Pani ले आना. (नौकर पानी ले आया, हमारे बिच तब तक कोई बात नहीं हुई, मेने पानी पि लिया वो वापस जा रहा था तो वो boli)Thoda नास्ता और फिर शरबत भी ले आना.

शिव : उसकी जरुरत नहीं है. (मेने हिचकिचाते हुए कहा)

मनीषा : क्यों जरुरत नहीं है, वैसे भी आते नहीं हो, (अपने नौकर ko)Tum ले आओ. (वो चला गया)

शिव : (हिचकिचाते hue)Sir?

मनीषा : वो अंदर है, कोई काम था?

शिव : नहीं, में तो बस ऐसे hi पूछ रहा था.

मनीषा : में सब समझती हु की तुम कैसे पूछ रहे हो (उन्होंने थोड़ी धीमी आवाज में कहा, और फिर मुस्कुरायी, में झेप gaya)Chinta मात करो, मेने उस वजह से नहीं बुलाया है.

शिव : (में सच में शर्मिंदा tha)Mera वो मतलब नहीं था.

मनीषा : वो सब दोनों तरफ की मर्जी सो हो तो hi मज़ा आता है, में तुम पर कोई दबाव नहीं डालना चाहती.

शिव : (में अब बहोत रिलैक्स था, इस वजह से नहीं की उन्होंने सेक्स के लिए मन किआ था, पर इस वजह से की वो मेरी पसंद न पसंद का भी ख्याल रख रही थी, वो सिर्फ सेक्स के लिए मुझसे सम्बन्ध नहीं बना रही थी, मेने दिल से kaha)Aisi बात बिलकुल नहीं है, में शर्मिंदा हु अगर आपको ऐसा कुछ लगा हो तो, कहिये किस लिए बुलाया था? (तभी नौकर नास्ता और शरबत ले आया, फिर हमारे बिच शांति थी, थोड़ी देर बाद वो बोली)

मनीषा : मोतीलालजी के वह कुछ समस्या है.

शिव : (मोतीलाल मतलब दिव्या के पापा, मुझे समाज नहीं आया की क्या बात है) कैसी समस्या?

मनीषा : वह का शरपंच मनोहरलाल, वो कुछ दिक्कत कर रहा है, वो मोतीलालजी को धमका रहा था, मेने अपने कार्यकर्ताओ को भी भेजा था पर वो संभल नहीं रहा, मोतीलाल जी थोड़े टेंशन में थे, जाहिरी तौर पर तो उन्होंने कुछ नहीं किया है तो हम पुलिस का इस्तेमाल नहीं कर शक्ति, क्या तुम कुछ कर शक्ति हो?

शिव : (सोचते हुए) पर समस्या क्या है?

मनीषा : वैसे तो समस्या नहीं है, मोतीलालजी गांव वालो को समजा रहे है की ये ये सुविधाएं होनी चाहिए गांव में, और वो इस बारे में सरपंच से बात भी करने गए थे, पर वो इनको धमका रहा है की इन सब मामलो में मात पढ़िए.

शिव : आप मुझसे क्या उम्मीद रखती है?

मनीषा : में बस इतना चाहती हु की वो इन पर कोई दबाव न बनाये, धमकाए नहीं, वैसे भी फरियाद करना सबका अधिकार होता है, उस पर अमल करना न करना उनकी मर्ज़ी है, पर वो किसी को आवाज उठाने से दबा नहीं सकते. उनका मुज पर फ़ोन आया था, वो हमारे साथ है, पर वो ठहरे सीधे सादे लोग, तो डरते है, में भी कोई बखेड़ा नहीं करना चाहती, वह कोई झगड़ा फसाद हो वो भी ठीक नहीं, बस संजना है उन्हें. (हम बात कर रहे थे की सूर्यदेवजी भी वह आये, उन्होंने हमारी कुछ बाटे सुनी भी सही).

सूर्यदेव : हमारी बात हुई थी न मनीषा, फिर तुमने इसको क्यों बुलाया? (मनीषा कुछ न बोली, बस अपनी नज़ारे झुका ली, मेरी और देख kar)Sorry, शिव, मेने इस से कहा था की तुम्हे इसमें न घसीटे, पर पता नहीं क्यों इसको तुम पर कुछ ज्यादा hi ट्रस्ट है. (मनीषा की और देख kar)Mana की ये अच्छा है, पर इसका भी कर्रिएर है, अगर कुछ ऊंचनीच हो गयी तो क्या करोगी. तुम जानती हो की पॉलिटिक्स में कितनी गण्डकी है, हमें जो करना है वो कानून की हद में रह कर hi करना है, बिना वजह हमे कोई बखेड़ा नहीं चाहिए.

मनीषा : में ऐसा वैसा कुछ करने के लिए नहीं कह रही, में तो बस उसको कह रही हु की देख ले अगर कुछ होता है तो, गांव की भलाई hi सोच रही हु में, उन्हें बेसिक सुविधाओं से वंचित रक्खा जा रहा है, किसी को तो आवाज उठानी होगी.

सूर्यदेव : ऐसा है तो तुम खुद चली जाओ, जो भी हो पर शिव अभी छोटा है. कोई उसकी बात क्यों मानेगा.

मनीषा : ठीक है, में देखती हु.

शिव : मैडम को सीधे तौर पर जाना ठीक नहीं है, में देखता हु की आखिर समस्या क्या है.

सूर्यदेव : अब में इसमें क्या कहु, पर ध्यान रखना, जगहदा बिलकुल मात करना, बात कर के देख लो, अगर कोई समाधान निकलता है तो ठीक है.

मनीषा : सूर्य ठीक कह रहे है शिव, में भी तुम्हारे साथ hi चलती हु.

शिव : नहीं, में देखता हु की आखिर माजरा क्या है, अगर कुछ होगा तो में आपको बोल दूंगा.

मनीषा : मेने कहा न की साथ hi चलते है, वैसे भी मुझे hi सब देखना चाहिए.

शिव : कब जाना है.

मनीषा : आज hi चलते है, में फ़ोन कर देती हु मोतीलालजी को, नजदीक hi है तो कोई दिक्कत नहीं है.

शिव : ठीक है.

मनीषा : में चेंज कर लेती हु.

वो अंदर चली गयी, सूर्यदेवजी भी उनके साथ hi चले गए, मेने ऐसे hi मोबाइल निकला तो देखा की झन्वीजी के कई सरे मश्ग और कॉल थे, मुझे याद आया की मेने मोबाइल साइलेंट कर दिया था. मश्ग में तो लिखा था की खा हो, कब आओगे? मेने कॉल किआ, एक hi रिंग में उन्होंने फ़ोन उठा लिया.

जहान्वी : Hello, कहा हो तुम? (वो झुंझलाते हुए बोली)

शिव : क्या हुआ?

जहान्वी : कहा हो तुम, आये क्यों नहीं? आ रहे हो न?

शिव: में एक काम में हु, में वह नहीं आ पाउँगा.

जहान्वी : (मायूसी se)Aisa क्यों कर रहे हो?

शिव : में सच कह रहा हु, एक काम है, में बहार जा रहा हु.

जहान्वी : कहा जा रहे हो?

शिव : क्सक्सक्स गांव.

जहान्वी : कब वापस आओगे?

शिव : रात तक आ जाऊंगा, कोई काम था?

जहान्वी : (मायूसी se)Nahi.

शिव : (मेने देखा की मनीषा मैडम आ रही hai)Me बाद में बात करता हु, अभी मुझे जाना है, bye. (उसने कॉल काट दिया)

जहान्वी : (रोनी सूरत बना कर मोबाइल को देख रही थी, उसे समाज नहीं आ रहा था की उसकी ऐसी हालत क्यों हो रही है akhir)Jaldi आना प्लीज. (फ़ोन तो कट हो चूका था फिर भी वो बोली)

में और मनीषजी, गांव की और निकल गए.
 
Back
Top