Adultery Manhoos se mahan tak - Page 23 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 174



मंजरी को यद् करता मैं अपने कमरे में जाने कब तक अकेला बैठा रहा. मुझे हमारी वो आखिरी मुलाकात क मंजरी क शब्द बार बार यद् आ रहे थे ‘ पता नहीं क्यों मगर मेरा दिल नहीं मन रहा मुझे ऐसा लगता है क मैं आप से बहुत दूर चली जाउंगी ‘ मंजरी की ये बातें सच हो गयी और वो हमेशा क लिए मुझसे दूर हो गयी. मेरा किसी से भी बात करने का दिल नहीं था इस लिए फ़ोन भी बंद कर क साइड में रख दिया था. सरे घर में शाम क वक़्त लाइट जल चुकी थी बस मेरा hi कमरा अँधेरे में था. मैं बस लेता लेता मंजरी की यादों में खोया था क मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला और करुणा दीदी अंदर आ गयी शायद वो मुझे जगाने आयी थी. कमरे में अँधेरा देख वो लाइट जलने लगी तो मैंने अपनी ऑंखें बंद कर ली और सोने की एक्टिंग करने लगा. करुणा दीदी ने मुझे 1-2 बार आवाज़ दी पर मैं नहीं हिला. मुझे सोया हुआ समझ कर वो मेरे ऊपर hi लेट गयी और मुझे किश करने लगी. मैं वैसे hi पड़ा रहा और कोई रिस्पांस नहीं दिया . करुणा दीदी अपने नरम होंठों से मेरे होंठ चूस रही थी . कभी वो ऊपर वाले होंठ को चुस्ती और कभी निचे वाले को. जब मेरी तरफ से किसी तरह का रिस्पांस न मिला तो वो मेरे ऊपर से हटी.

करुणा : अजीब लड़का है , कैसे घोड़े बेचकर सो रहा है . यहाँ मैं मर रही हूँ प्यार करने क लिए और इसे परवाह hi नहीं कोई . ो हीरो उठ जा देख कितना टाइम हो गया है. पापा भी आ गए हैं . माँ बुला रही है चल उठ अब . उठ न कितना सोता है.

मैंने उठने की एक्टिंग करते हुए कहा

अमित : क्या हुआ दीदी क्यों परेशां कर रही हो .

करुणा दीदी : ाचा !! मैं परेशां कर रही हूँ ? परेशां तो तू कर रहा है . 4 दिन हो गए तुझे यहाँ आये और अभी तक तूने मुझे एक बार भी टाइम नहीं दिया. अब भी कैसे आराम से सो रहा है . वैसे ाचा है आज रत तुझे मैं सोने नहीं दूंगी .

अमित : आपको बस एक hi काम सूझता है ? कल आपको शॉपिंग करवाई न मैंने ? फिर क्यों परेशां कर रही हैं ? अब हटिये मैं आ रहा हूँ नीचे .

करुणा दीदी : हुआ क्या है तुझे ? ये कैसे बात कर रहा है तू ? पहले तो कभी ऐसे बात नहीं करता तू ? दिल भर गया है क्या मुझसे ? नहीं करती तुझे परेशां

मुझे अपने गलती का एहसास हुआ मैं कुछ ज्यादा रौदे हो रहा था करुणा दीदी क साथ. वो तो मुझे प्यार करती थी और मैं उन्हें ऐसे जवाब दे रहा था. मैं कुछ कहता इससे पहले hi करुणा दीदी पेअर पटकते हुए कमरे से बहार चली गयी . अपने दुःख से दुखी हो कर अपने चाहने वालों को दुखी करना भी तो सही नहीं होता. करुणा दीदी का भला क्या दोष था इसमें . वो तो दिल से मुझे चाहती थी और मेरी परवाह भी करती थी . मैं जल्दी से उठा और फ्रेश हो कर नीचे चला गया. मौसा जी हॉल में बैठे थे और साथ में hi नेहा दीदी करुणा दीदी भी. मौसी किचन में थी . मुझे देखते hi करुणा दीदी में नाराज़गी से मुँह फेर लिया . मैं मौसा जी क साथ बैठ गया और उनसे बातें करने लगा. टाइम 8 से ऊपर हो चूका था इस लिए मौसी रत का खाना बना रही थी. नेहा दीदी वैसे तो किताब पढ़ रही थी पर उनकी नज़र मुझ पर भी थी. कई बार मेरी उनसे नज़र मिली तो हर बार उन्हें खुद को देखता हुआ पाया. खाना खाने क बाद मैं अपने कमरे में चला आया , करुणा दीदी भी अपने कमरे में चली गयी. मुझे करुणा दीदी को ऐसे नाराज़ करना ाचा नहीं लग रहा था. मैंने सोच लिया क उनके पास जा कर उन्हें मनाता हूँ. अभी मैं सोच hi रहा था क नेहा दीदी कमरे में आ गयी . नेहा दीदी को इस वक़्त अपने कमरे में देख कर मैं हैरान हो रहा था क्यूंकि वो इतने दिनों से ऐसे आयी hi नहीं थी मेरे पास. मेरे कुछ कहने से पहले वो दरवाज़ा बंद कर क मेरे पास आ कर बैठ गयी और मेरे सर पर हाथ फेरते हुए बोली.

नेहा दीदी : क्या बात है ? किस बात को लेकर तू इतना टेंशन में है ?

अमित : कुछ नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं .

नेहा दीदी : झूठ मत बोल , तेरे चेहरे पर साफ नज़र आ रहा है क तू किसी बात पर टेंशन में है . अगर बहिन मंटा है अपनी तो बता मुझे सब . आज तक तू इतनी देर तक अपने कमरे में नहीं रहा और तेरी ऑंखें बता रही हैं क तू किसी बात पर दुखी है. तेरा दुःख मैं महसूस कर सकती हूँ . बता मुझे क्या बात है ?

नेहा दीदी जो हमेशा काम बोलती थी वो मुझे इतनी गौर से देख रही थी क उन्होंने वो जान लिया जो किसी और ने नहीं देखा.

अमित : किसी की यद् आ रही थी दीदी , एक दोस्त जो मेरे बहुत करीब था वो अचानक मुझसे बहुत दूर चला गया . आज मैं उसकी माँ से मिला था तो बस तब से उसी को यद् कर रहा था . काश क मैं उससे फिर से एक बार मिल सकता . आखिरी बार उससे बात भी नहीं हो पायी थी .

नेहा दीदी : दोस्त ? तेरी आँखों की नमी बता रही है क वो दोस्त लड़का नहीं कोई लड़की होगी . मैं सच कह रही हूँ न.

न चाहते हुए भी मेरी आँखों में रुका पानी छलक पड़ा और ये देख नेहा दीदी ने फ़ौरन मुझे अपने गले से लगा लिया .

नेहा दीदी : मत रो मेरे भाई मत रो. तू इतना कमज़ोर नहीं है. खुद को संभल . तीनो आँखों में ये आंसू अचे नहीं लगते. तू अपने सरे आंसू मुझे देदे . तेरे सरे दुःख तू मुझे देदे. मैं तुझे रोने नहीं दूंगी . तू तो मेरा प्यारा भाई है न.

अमित : मेरे साथ hi ऐसा क्यों होता है दीदी ? पहले माँ पापा चले गए और फिर वो भी चली गयी. मुझे जो भी प्यार करता है उसे मुझसे छीन लिया जाता है . ऐसा क्यों होता है दीदी. क्या ऐसे hi एक एक कर क सब मुझसे दूर हो जायेंगे ? कभी कभी तो दर लगता है क कहीं सब मुझे अकेला छोड़ कर चले जायेंगे .

नेहा दीदी: ऐसा क्यों कहता है ? ऐसा कभी नहीं होगा. देख सभी तुझे कितना प्यार करते हैं . फिर भी तू ऐसे सोचता है. मैं हूँ न तेरे पास . चाहे कुछ भी हो जाये मैं तेरा साथ कभी नहीं छोडूंगी . तू hi तो मेरा भाई है. मैं तुम्हे कभी अकेला नहीं रहने दूंगी मैं तुझे छोड़ कर कहीं नहीं जाउंगी .

नेहा दीदी भी मुझे गले से लगाए रोने लगी थी तो मैंने खुद को कण्ट्रोल किया और नेहा दीदी क आंसू पोंछे .

अमित : आओ क्यों रो रही हैं दीदी ? मेरी तो किस्मत में आंसू लिखे हैं पर आप ऐसे रो कर खुद को दुखी मत कीजिये .

नेहा दीदी: मेरी आँखों से तेरे hi आंसू बह रहे हैं मेरे भाई. जब तक तू दुखी है इन आँखों में ख़ुशी कैसे आ सकती है.

अमित : दीदी !!!

मैंने ज़ोर से नेहा दीदी को गले से लगा लिया. नेहा दीदी क दिल में मेरे लिए कितना प्यार था ये मुझे पता चल रहा था. वो जताती नहीं थी पर शायद मुझसे ज्यादा वो किसी से प्यार नहीं करती थी .

नेहा दीदी : अब तू कुछ भी मत सोचना , जो होता है भगवन की मर्ज़ी से होता है. जितना तू सबको प्यार करता है न उससे ज्यादा hi मिलेगा तुझे देख लेना.

नेहा दीदी काफी देर तक मेरे पास बैठी रही और फिर रीता दीदी मेरे लिए दूध ले आयी तब कहीं जा कर नेहा दीदी मेरे कमरे से गयी.

रीता मौसी : आज रत सो मत जाना मैं तुम्हारे कमरे में आउंगी तेरे मौसा क सोने क बाद. कल से आग लगी हुई है. खुद से कुछ होता नहीं और मुझे भड़का देते हैं.

अमित : पर मौसी परसों hi तो किया था न हमने .

रीता मौसी : क्या बताऊँ तुझे, सब तेरे मौसा का कसूर है. मैं तो कल hi आ जाती तेरे पास अगर दिव्या न होती तो. कल से बुरा हल है मैं सब को सुला कर अति हूँ तेरे पास.

अमित : नहीं मौसी आज मेरा मन नहीं है .

रीता मौसी : क्या बात है ? शाम को भी तू इतनी देर तक सोता रहा . कोई बात है तो मुझे बता.

अमित : नहीं मौसी ऐसी कोई बात नहीं है बस आज मन नहीं है .

रीता मौसी : ( उदास होते हुए ) ाचा ठीक है. तू आराम कर जब तेरा मन हो तो बता देना.

इतना कह कर मायूस होती रीता मौसी नीचे चली गयी . मैं दूध पिने क बाद कुछ देर लेता रहा . फिर मुझे करुणा दीदी का ख्याल आया. मैं उठ कर उनके कमरे में चला गया .

करुणा दीदी करवट क बल लेती हुई थी . बीएड क किनारे दूध का गिलास ढाका हुआ पड़ा था जो उन्होंने नहीं पिया था. मैंने आहिस्ता से दरवाज़ा बंद किया और बीएड क दूसरी तरफ से घूम कर जब करुणा दीदी क पास गया तो देखा वो जग रही थी और उनकी आँखों में आंसू थे. मुझे देखते hi उन्होंने ऑंखें बंद कर ली. करुणा दीदी मेरी वजह से दुखी थी , मुझसे देखा न गया और मैंने उनके ऊपर झुकते हुए उनके चेहरे पर हर जगह किश कर क अपनी गलती की माफ़ी मांगी.

अमित : दीदी मुझे माफ़ कर दो मुझसे गलती हो गयी. मुझे ऐसे बात नहीं करनी चाहिए थी. प्लीज मुझे माफ़ कर दो.

मैंने लगातार दीदी को चुनता जा रहा था. उनके चेहरे से आंसुओं की धार मैंने अपनी जीभ से साफ की.

करुणा दीदी : बात मत कर मुझसे. मैं तेरे पास आने क लिए मरती रहती हूँ और तुझे मेरी कोई परवाह hi नहीं है. कभी सोचा है मेरा क्या बल होता है? कभी मेरे लिए अपने आप टाइम निकला है तुमने ? क्या कसूर है मेरा जो ऐसे मुझसे सजा दे रहे हो तुम ?

अमित : ी ऍम सॉरी दीदी. मेरा मूड ठीक नहीं था इस लिए आपसे ऐसे बात कर बैठा. आप भी जानती हैं न क मैं आपसे कितना प्यार करता हूँ.

करुणा : ाचा प्यार है तुम्हारा , मैं इतने दिनों से प्यार करने को कह रही हूँ और प्यार करने की बजाये मुझ पर गुस्सा दिखा रहे हो .

अमित : गलती हो गयी दीदी कहा न , अब अपनी गलती को ठीक करने hi तो आया हूँ .

करुणा दीदी : हटो पीछे मुझे कुछ नहीं करना है. तुम बैठे रहो अपना ख़राब मूड लेकर .

अमित : ऐसे कैसे बैठा रहूं , अब तो मैं आपको प्यार किये बिना कहीं नहीं जाने वाला .

इतना कह कर मैंने करुणा दीदी क होठों पर अपने होंठ रख दिए . करुणा दीदी मुझे पीछे हटाने की कोशिश कर रही थी पर मैं नहीं हटा और फिर वो भी मेरा साथ दें लगी. जल्दी उनकी किश वाइल्ड होने लगी और मुझे बीएड पर गिरा कर वो खुद मेरे ऊपर आ गयी. करुणा दीदी मेरे होंठों काटने hi लगी थी. जंगली बिल्ली की तरह वो मेरे ऊपर हावी हो रही थी .

करुणा दीदी : आआह्ह्ह उम्म्म्म उम्म्म्म बहुत तंग किया है तूने मुझे बहुत तरसाया है आज सारा हिसाब लूंगी उम्म्म उम्म्म

करुणा दीदी मेरे होंठ चबाती मुझे किश कर रही थी और मेरी T-shirt खिंच रही थी. मैंने भी उनका साथ देते हुए अपनी T-shirt उतर दी और उनकी T-shirt भी उतरने लगा जो उन्होंने एक झटके में खुद hi उतर दी. टीशर्ट क साथ ब्रा भुई उतारते हुए करुणा दीदी ने अपने कच्चे आम निर्वस्त्र कर दिए . मैंने झट से उनके चुचों को थम लिया और मसलने लगा .

करुणा दीदी : आअह्ह्ह कक्कक्क्स आह्हः आज आयी है तुम्हे इनकी यद् ? इतने दिनों से यद् नहीं था क इनको प्यार भी करना है ? कक्कक्स जितना मुझे तड़पाया है आज मैं तुम्हे भी तड़पाऊंगी .

करुणा दीदी ने अपने चुचों से मेरे हाथ हटाए और मेरे लोअर को पकड़ कर खींचते हुए मेरे पैन से निकल दिया. मेरा लैंड अंडरवियर में hi अकड़ने लगा था . करुणा दीदी ने मेरे ुंडाइवेअर को भी खिंच कर निकल दिया. मैं तो बस करुणा दीदी को देख रहा था क वो प्यार कर रही हैं या गुस्सा . निर्वस्त्र होते hi मेरा लैंड स्प्रिंग की तरह उछलने लगा. करुणा दीदी ने बिना देर किये मेरा लैंड अपने हाथों में थम लिया. मैं दीदी की इस हरकत पर हैरान हो गया.

करुणा दीदी : बहुत तड़पते हो न तुम अब बताती हूँ तुम्हे. सारूउप साररूउप सरररूउप

दीदी ने बिना देर किये मेरा लैंड सुपडे तक अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी. मैं तो हैरान हो रहा था क दीदी आज किस मूड में हैं. वो सच में hi बदला लेने की कोशिश कर रही थी . धीरे धीरे आधा लैंड दीदी अपने मुँह में लेने लगी . वो बड़े hi जोश क साथ लैंड चूस रही थी. मैं भी दीदी की इस लैंड चूसै से पागल होने लगा . मेरे हाथ अपने आप दीदी क सर पर पहुँच गए . दीदी लैंड चूसने क साथ मेरे अंडकोष भी सेहला रही थी. मुझसे ये बर्दाश्त नहीं हो रहा था पर दीदी तो रुकने का नाम hi नहीं ले रही थी .

अमित : सीसीसी हहहा उम् रुक जाओ दीदी कक्कक्स रुक जाओ

करुणा दीदी : साररूपप सरररूपप उम्म्म क्यों अब पता चला अभी तो आगे आगे देखो .

दीदी रुक hi नहीं रही थी तो मैंने दीदी को ज़बरदस्ती अपने लैंड से हटाया और उनका लोअर पेंटी समेत उतर दिया. दीदी की बिना बालों की चिकनी छूट मेरे सामने थी. करुणा दीदी की मैंने अभी तक एक hi बार चुदाई की थी और उसमे भी लैंड पूरा नहीं डाला था. करुणा दीदी की छूट क होंठ थोड़े से खुले थे और अंदर से थोड़ा सा मांस चोंच की शकल में बहार था . मैंने झुक कर दीदी की छूट पर मुँह लगा दिया और अपनी जीभ अंदर घुसा दी . दीदी भी तड़प उठी और मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी .

करुणा दीदी : आआह्ह्ह्ह ककक उम्म्म्म खा जाओ ककक खा जाओ इसे बहुत रोटी है ये तुम्हे यद् कर क आज इसे अछि तरह रुला दो. कक्कक्स आअह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ आठ ओह्ह्ह्ह

मैंने अभी 2-3 मिनट्स hi चूसा था क दीदी का जिस्म क ओने लगा और अकड़ कर उनका बदन ढीला पद गया . मैंने उनका पानी निकलने क बाद उनकी टंगे खोल कर बीच में आते हुए अपना लैंड छूट पर लगाया तो दीदी ने एक बार ऑंखें खोल कर मुझे देखा . और फिर से ऑंखें बंद कर ली. मैंने छूट पर लैंड सेट किया और हल्का धक्का मर कर लैंड का सूपड़ा अंदर घुसा दिया. दीदी को थोड़ा दर्द हुआ पर उन्होंने बर्दाश्त कर लिया. मैंने एक और धक्का मर कर आधा लैंड छूट में घुसा दिया.

करुणा दीदी : आह्ह्ह्ह रुको मत कक्कक्स आज मैं इसे पूरा लेना चाहती हूँ कक्कक्स मेरे अंदर समां जाओ . आअह्ह्ह्ह

करुणा दीदी दर्द सेहती हुई भी मुझे पूरा अंदर करने को कह रही थी. जबकि पिछली बार उनकी इतने में hi बुरी हालत हो गयी थी. मैंने भी उनकी बात मानते हुए एक ज़ोरदार धक्का मारा और पूरा लैंड छूट में घुसा दिया.

करुणा दीदी : आआआ माआआआ मममममम

लैंड पूरा घुसते hi करुणा दीदी दर्द से तड़प उठी और उनके मुँह से चीख निकल गयी . मैंने जल्दी से उनके होंठ अपने होंठों से लॉक कर दिए. दीदी को दर्द तो हो रहा था पर छूट तो पहले hi खुल चुकी थी इस लिए उतना दर्द नहीं था पर लैंड आज पहली बार पूरा अंदर गया था तो वो बर्दाश्त नहीं कर प् रही थी. मैंने कुछ देर उनके बूब्स मसलते हुए उन्हें किश करता रहा. जब वो कुछ नार्मल हुई तो मैंने लैंड अंदर बहार करना शुरू कर दिया. लैंड छूट में पूरा फास फास कर आ जा रहा था. जब मुझे लगा क करुणा दीदी अब आराम से लैंड को झेलने लगी है तो मैंने उनके होंठ आज़ाद कर दिए और सीधा बैठ कर अपनी कमर हिलने लगा.

करुणा दीदी : ाःह ककक उम् अब मज़ा आ रहा है ऐसे hi करते रहो . सीसीसी आह्हः आअह्ह्ह मुझे यकीन नहीं हो रहा क कक्कक्स क पूरा अंदर चला गया उम्म्म दीदी सच hi कह रही थी ाःह आह्हः जब पूरा जाता है तो और भी मज़ा अत है आअह्ह्ह आह्हः

अमित : तो ये सब नैना दीदी बताती है आपको . आपकी ये बहुत टाइट है नैना दीदी से भी ज्यादा.

करुणा दीदी : आअह्ह्ह आअह्ह्ह तो कार्डो न ढीली . तुम्हे hi करना है जो करना है आअह्ह्ह आह्हः इसे अआपने हिसाब से ढीली करलो आअह्ह्ह आह्हः और तेज़ करो

मैंने दीदी की छूट में ताबड़तोड़ धक्के पेलने शुरू कर दिए . कुछ देर इस पोज़ में छोड़ने क बाद मैंने उन्हें अपने ऊपर बिठा लिया और वो लैंड पर बैठ कर उछलने लगी. दीदी क उछलने से उनके बूब्स और भी दिलकश लग रहे थे. मैं उनके बूब्स थामे नीचे कमर उछाल कर धक्के पेल रहा था. दीदी का एक बार फिर से पानी निकल गया. फिर मैंने उन्हें घोड़ी बाण दिया और पीछे से लैंड घुसा कर कमर थामे तेज़ धक्के मरने लगा पर करुणा दीदी अभी इतनी चुदाई क काबिल नहीं थी इस लिए वो जल्दी hi अपना पेट पकड़ कर बैठ गयी और मुझे रुकने को कहने लगी.

करुणा दीदी : रुका जा भी प्लीज आअह्ह्ह्ह रुक जा मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती प्लीज आह्हः माआ बहुत दर्द हो रहा है .

आज मेरा ध्यान भी चुदाई में काम था इस लिए मुझे ज्यादा देर लग रही थी. मैं रुकना तो नहीं चाहता था पर करुणा दीदी की हालत देख कर मैं रुक गया .

अमित : दीदी आप ठीक तो हैं ?

करुणा दीदी : बहुत दर्द हो रहा है अमित मैं और नहीं सेह सकती प्लीज

अमित : कोई बात नहीं दीदी it’s ok. आप रेस्ट कीजिये . कोई पैन किलर है क्या आपके पास ?

करुणा दीदी : हाँ शायद यदि हो ड्रावर में देखो .

मैंने देखो तो ड्रावर में पैन किलर पड़ी थी मैंने दीदी को पानी क साथ टेबलेट डी और उन्हें कपडे पहना दिए. दीदी को बीएड पर लेता कर मैं भी अपने कपडे पहने और कमरे का दरवाज़ा बंद कर क बहार निकल गया. मेरा पानी नहीं निकला था तो ऐसे में नींद अचे से नहीं आने वाली थी तभी मुझे मौसी का ख्याल आया. वो मेरे पास उम्मीद से आयी थी और मैंने उन्हें वापिस भेज दिया था. मैं अपने कमरे में जाने की बजाये नीचे मौसी क रूम में चला गया. दरवाज़ा खोला तो मौसा और मौसी दोनों बीएड पर सो रहे थे . कमरे में हलकी रौशनी का बल्ब चल रहा था. मैं चुपके से अंदर गया और दरवाज़ा बंद कर क मौसी की तरफ जा कर खड़ा हो गया. मौसी करवट क बल लेती निघ्त्य पहने सो रही थी. मैंने मौसी क बड़े बड़े चुके पकडे और ज़ोर से मसल दिए. मौसी क मुँह से एक चीख निकली जिसे मैंने मुँह पर हाथ रख कर दबा दिया. मौसी की ऑंखें खुल चुकी थी और मुझे सामने देख कर वो चुप हो गयी.

अमित : शहहह मौसा hi उठ जायेंगे .

रीता मौसी : नहीं उठेंगे सुबह से पहले मैंने उन्हें दूध पीला दिया था. पर तुम तो कह रहे थे क मूड नहीं है.

अमित : मैं सोचा आपको अचे से नींद नहीं आएगी तो चला आया.

रीता मौसी : ( मुस्कुराते हुए ) तो देर किस बात की है हो जाओ शुरू.

इतना सुनते hi मैंने मौसी को किश किया और उनके चुके निघ्त्य क ऊपर से hi मसलते हुए नीचे चलता हुआ उनके पाऊँ तक आ गया. मौसी का पाऊँ पर मैंने किश किया और उनकी तरफ देखा और उनसे परमिशन मांगी. मौसी मुझे ऐसा करते देख शर्मा गयी. मैंने मौसी क दोनों पाऊँ पकड़ कर उठा दिए और उनकी निघ्त्य उनकी कमर पर इकठी हो गयी. मौसी ने पेंटी नहीं पहनी हुई थी मैंने भी अपना लोअर और अंडरवियर निचे किया और लैंड को छूट पर सेट कर क ज़ोरदार धक्का मरते हुए एक hi बार में पूरा लैंड छूट में जड़ तक घुसा दिया . मौसी ज़ोर से कराह उठी. मौसा जी तो नींद की दवा क असर से उतने वाले थे नहीं इस लिए मौसी भी खुल कर मज़ा ले रही थी. मैंने बिना रुके मौसी की छूट की धज्जीआं उड़ानी शुरू कर दी और दी अपना पानी रीता मौसी की छूट में निकल दिया. तब तक मौसी का भी काम हो गया था. मौसी हैरान हुई क आज मेरा इतनी जल्दी कैसे हो गया. अब मैं उन्हें क्या बताता क उनकी बेटी भी मुझे म्हणत करवा चुकी थी पहले hi. खैर थोड़ी देर में hi मौसी को मैंने अचे से रगड़ दिया था तो वो भी तसल्ली से सो गयी और मैं भी अपने कमरे में आ कर सो गया.

अगली सुबह नेहा दीदी ने मुझे जगाया . रत देर से सोया था तो आँख नहीं खुली थी . नेहा दीदी क जगाने क बाद मैं उठ कर तैयार हो कर करुणा दीदी क कमरे में गया तो वो भी तैयार हो रही थी. मुझे देखते hi उनके चेहरे पर शर्म आ गयी जैसे सुहाग रत क अगले दिन नव विवाहिता शर्माती है अपने पति को देख कर.

अमित : गुड मॉर्निंग दीदी , कैसी हैं आप ?

करुणा दीदी : शरमाते हुए) अकेले में तो दीदी मत कहा कर. और ठीक हूँ मैं बस थोड़ी सी सूजन है वहां.

अमित : तो आज आप छुट्टी कर लीजिये न कॉलेज से . ऐसे तो आप को तकलीफ होगी.

करुणा दीदी ने मेरे होंठों को हलके से चूमा और कहा.

करुणा दीदी : थैंक्स मेरी इतनी परवाह करने क लिए पर इतनी भी नाज़ुक नहीं हूँ मैं. खाने क बाद एक पैन किलर ले लुंगी . चल अब नीचे चलते हैं माँ ने नाश्ता बना लिया होगा .

करुणा दीदी थोड़ा पाऊँ फैला कर चल रही थी और मुझे दर लग रहा था क कहीं मौसी ने ये बात नोटिस कर ली तो क्या कहेंगी. पर खैर ऐसा नहीं हुआ. मौसी नाश्ता बना रही थी. मौसा जी क साथ बैठ कर मैं भी नाश्ता करने लगा. मौसी मुझे देख मुस्कुरा रही थी और उनकी आँखों में ख़ुशी बता रही थी क वो अब संतुष्ट हैं. खाना खाने क बाद सब अपने अपने रस्ते हो लिए. करुणा दीदी नैना दीदी क घर चली गयी और नेहा दीदी कल्पना क साथ.

दूसरे लेक्चर में मंजू म मुझे नाराज़गी से देख रही थी और लेक्चर ख़तम होने क बाद जब वो क्लास से जाने लगी तो मुझे अपने साथ आने को कहा . मैं उनके साथ क्लास से बहार आ कर गलियारे में खड़ा हो गया .

मंजू म : नाराज़ हो मुझसे ?

अमित : नहीं मम आप ऐसे क्यों कह रही हैं ?

मंजू म : तो आ क्यों नहीं रहे तुम घर ? कल तो तुमने फ़ोन भी नहीं उठाया मेरा . क्या बात है ? अगर मुझसे कोई गलती हुई है तो बताओ मैं माफ़ी मांग लेती हूँ .

अमित : ये आप क्या कह रही हैं. ऐसी कोई बात नहीं है. कल मैं थोड़ा अपसेट था तो इस लिए किसी से भी बात नहीं की.

मंजू म : तुम अपसेट थे और मुझसे बात करना भी ठीक नहीं समझा? क्या इतनी भी जगह नहीं तुम्हारी ज़िन्दगी में मेरी? खुद तो मेरे हर दुःख को तुमने अपना कर दूर कर दिए और अपनी बरी आयी तो अकेले सेह रहे हो सब कुछ .

अमित : वो कल कुछ ऐसा हो गया था क मैं अपसेट हो गया और बस फिर खुद को अकेला कर लिया. आप कुछ ऐसा वैसा मत सोचो मैं आपसे कुछ भी छू पता नहीं हूँ. और आपको सब बता भी दूंगा . प्लीज आप कुछ मत सोचो .

मंजू म : ठीक है , शाम को बात करते हैं . आज अगर न ए तो फिर मैं बात नहीं करुँगी तुमसे कह देती हूँ .

अमित : मैं ज़रूर आऊंगा . अब आप जाइये वर्ण सब पता नहीं क्या क्या सोचेंगे.

मंजू म : मेरा बस चले तो सबके सामने तुम्हे गले से लगा लूँ, खैर शाम को मिलते हैं .

कैंटीन में रोज़ की तरह हंसी मज़ाक हो रहा था. शीना ने बताया क वो कल निधि दीदी को कार सीखने गयी थी तो इस बात नेहा दीदी और राधा क साथ कल्पना भी थोड़ी हैरान हुई. मगर इस बात पर सब खुश भी थी. मोहित ने बताया क आंटी और करिश्मा दीदी मुझे यद् कर रहे हैं . मैंने भी उसे शाम को आने का कह दिया . कॉलेज से छुट्टी क बाद मैं आज सीधा रीता मौसी क घर गया. और सबके साथ लंच भी किया. लंच क बाद मैं कुछ देर आराम करने क लिए अपने कमरे में चला गया.

2 घंटे आराम करने क बाद मैं मंजू क क घर क लिए निकल गया . जब मैं मंजू म क घर पहुंचा वो घर पर अकेली थी और बाइक की आवाज़ सुनते hi उन्होंने दरवाज़ा खोल दिया .

मंजू म : अगर आज भी न आते तो मैं बात नहीं करती तुमसे .

अमित : ऐसा मैं कभी होने नहीं दूंगा.

अंदर आते hi मैंने मंजू म को अपनी बाँहों में भर लिया . वो जान बुझ कर रूठने का दिखावा कर रही थी

मंजू म : हटो पीछे , अब बड़ा प्यार आ रहा है . जो दो दिन से शकल तक नहीं दिखाई उसका क्या.

अमित : बताया तो था आपको क कल मूड अपसेट हो गया था.

मंजू म : ऐसा क्या हो गया था जो मूड अपसेट हो गया?

अमित : मैंने आपको मंजरी क बारे में बताया था न . कल उसकी माँ मिल गयी थी . बस उसके बाद फिर उसकी यादें उसके साथ बिताया हर लम्हा मेरी आँखों क सामने घूमता रहा .

मंजू म : गंभीर होते हुए) तुम अकेले बैठ कर खुद को दुखी करते रहे . क्या मुझे अपने दुःख में शरीक करना तुम्हें ठीक नहीं लगा ? मुझे ख़ुशी होती अगर तुम अपना हर वो लम्हा मुझे दे देते जिसमे तुम दुखी होते हो.

‘ तुम्हारे गम को अपना गम बना लूँ तो करार ए ,

तुम्हारा दर्द साइन में छुपा लूँ तो करार ए,

तड़प इस दिल की थोड़ी सी मुझे मेरे सनम देदो ,

अगर मुझसे मुहब्बत है मुझे सब अपने हूँ देदो..

किसी पुराने हिंदी गाने की ये लाइन्स मंजू म ने मेरी आँखों में देखते हुए इतनी गंभीरता से कही क मैं उनकी आँखों में hi खो गया और उन्हें अपने सीने से लगा कर कास लिया. मंजू म भी सच्ची प्रेमिका की तरह मेरी धड़कनो को महसूस करती मेरे दिल की तड़प को अपने दिल में उतर रही थी. कुछ देर वो ऐसे hi मेरे साथ चिपकी रही और फिर मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड लिया. इस चुम्बन में कहीं में भी काम वासना या उतावला पैन नहीं था. बड़े hi आराम से वो मेरे होंठों को अपने कोमल होंठों में पकडे जैसे मुझे अपने प्यार का एहसास करवा रही थी. मैंने उन्हें अपनी बाँहों के उठा लिया और सोफे पर बैठ गया . वो मुझे किश करती हुई ऐसे hi मेरी गोद में बैठ गयी. मंजू म कभी किश करती कभी मेरे गले लग जाती.

मंजू म : मुझे हर सुख दिया है तुमने जो मुझे नहीं मिला था. मेरे दुःख दूर कर क अपने दुःख मुझसे छुपा कर तुम ाचा नहीं कर रहे. मैं सब कुछ सेह सकती हूँ अमित पर तुम्हे दुखी नहीं देख सकती. तुम्हारी मुस्कराहट hi मेरी असली ख़ुशी है . अगर तुम्हे कभी भी मुझसे कोई भी शिकायत हो प्लीज एक बार कह देना . मैं तुम्हारे कुछ भी कर सकती हूँ . किसी को भी ( ऋतू को यद् करते हुए )छोड़ सकती हूँ. पर मुझे कभी खुद से अलग मत करना .

मंजू की आँखों में आयी नमी उनके एक एक अल्फ़ाज़ की सचाई की गवाह थी.

अमित : ये आप क्या कह रही हैं? इतने दुःख सहने क बाद आपको अपनों का प्यार मिला है. मैं भला क्यों चाहूंगा क आप किसी को छोड़ें?

मंजू म : मुझे हर ख़ुशी तुमसे hi मिली है वर्ण मैं तो अकेली हो गयी थी. तब कौन था मेरे पास? अगर तुम न होते तो ये सब मुझे कभी नसीब न होता. अगर कभी मुझे किसी एक को चुनना पड़ा तो मैं ख़ुशी से तुम्हे hi चुनूंगी.

अमित : मैं ऐसा वक़्त नहीं आने दूंगा. हर किसी की अपनी एहमियत होती है ज़िन्दगी में जैसे माँ बाप भाई बहिन और दोस्त रिश्तेदार. ज़िन्दगी में हर रंग होना ज़रूरी है. आपने इतने साल अकेलेपन में गुज़र दिए . मैं उन्हें वापिस तो नहीं का सकता पर इतना चाहता हूँ क आपकी आने वाली ज़िन्दगी में एक भी दुःख न हो.

मंजू म : एक बात पूछूं ? तुम्हे मेरे किसी रिश्तेदार या कासी से कोई ऐतराज़ तो नहीं है न?

अमित : नहीं , मुझे भला क्यों ऐतराज़ होगा? वैसे भी सभी को तो मैं जनता हूँ और वो भी मुझे जानते हैं. तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो ?

मंजू म : इस लिए क मैं नहीं चाहती क किसी की वजह से तुम मुझसे दूर हो जाओ.

अमित : मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा और न hi मुझे किसी से कोई ऐतराज़ है.

अभी हम बात कर hi रहे थे क बहार से दरवाज़े की बेल्ल बजने लगी

मंजू म : लगता है शीना आ गयी . मुआअह्ह्ह्ह जल्दी hi मुझे कहीं घूमने ले कर चलो. बड़े दिन हो गए मुझे टाइम नहीं दे रहे हो तुम.

जाते जाते मंजू म मेरे होंठो पर किश देकर अपनी शिकायत करती हुई दरवाज़ा खोलने चली गयी. दरवाज़े पर शीना hi थी. शीना क आने क बाद मैं किताब लेकर बैठ गया. शीना ने थोड़ी बहुत नार्मल बातें की और फिर मंजू म हम दोनों को hi पड़ने लगी . घडी पर अभी 6 बजने में ठोस वक़्त था क बहार से गाड़ियों की आवाज़ आयी और बेल्ल बजी. शीना ने जा कर दरवाज़ा खोला और उसके साथ hi सप ऋतू सिंह अपनी वर्दी में सामने आ कर कड़ी हो गयी. मुझे देख कर एक कल क लिए वो रुकी पर मैंने उससे नज़रें नहीं मिलायी.

मंजू म : अरे ऋतू तुम !! आओ आओ बैठो.

ऋतू सिंह : कैसी हो मंजू ? इधर से गुज़र रही थी सोचा तुमसे मिलती चलूँ. आज तो अमित भी आया हुआ है यहाँ . कैसे हो अमित?

अमित : मैं ठीक हूँ . ाचा मम अब मैं चलता हूँ. मुझे मोहित क घर भी जाना है

मंजू म : अरे रुको तो अभी तो 6 भी नहीं बजे . इतनी जल्दी क्या है?

अमित : मम वो करिश्मा दीदी और आंटी को कुछ काम है . मेरा जाना ज़रूरी है. ाचा आप अपनी सहेली से बातें करो मैं चलता हूँ.

इतना कह कर मैं जल्दी से वहां से निकल गया.

ऋतू सिंह अमित से बात करना छह रही थी मगर आज भी अमित उसको इग्नोर करता हुआ चला गया. वहीँ मंजू को भी दुःख हुआ क अमित ऋतू क आने से एक डैम जल्दी जल्दी में निकल गया. ऋतू क ऊपर वो कितना गुस्सा है ये वो महसूस कर प् रही थी. वो किसी भी कीमत पर अमित को खोना नहीं चाहती थी इस लिए उसने अमित से ऋतू का नाम लिए बिना पूछा भी मगर उसने तब ऐसी कोई बात नहीं की मगर अब ऋतू क आने पर इस तरह उसका चले जाना साफ साफ इशारा था क वो ऋतू को पसंद नहीं करता . मंजू मन hi मन सोचने लगी क वो ऋतू को मन कर दे ताकि अमित कहीं उसकी वजह से यहाँ आना न बंद कर दे. शीना भी अमित क जाते hi चली गयी.

मंजू म : ऋतू तू मेरी बेस्ट फ्रेंड है अगर मैं तुम्हे कुछ कहूं तो तू गुस्सा तो नहीं करेगी ?

ऋतू सिंह : ये क्या बात कर रही है तू ? तेरी किसी बात का गुस्सा मैं कर सकती हूँ भला . बोल क्या कहना है तुझे .

मंजू म : तूने देखा न कैसे वो तेरे आते hi चला गया . मुझे लगता है वो तुझसे कुछ ज्यादा hi नाराज़ है. तू उसे कैसे भी कर क मन ले या ...

ऋतू सिंह : बोल मैं सुन रही हूँ .

मंजू म : या तू उस वक़्त न आया कर जब उसका टाइम होता है यहाँ आने का.

ऋतू को मंजू की ये बात सुनकर बड़ा दुःख हुआ. उसके लिए मंजू hi तो सब कुछ दिए. आरसे बाद उसे कोई अपना मिला था मंजू क रूप में और वो hi उसे यहाँ न आने को कह रही थी . पर इसके साथ hi वो मंजू की मज़बूरी भी समझ रही थी क वो अमित से कितना प्यार करती है. और वो अमित को नाराज़ करने का खतरा मोल नहीं लेना चाहती . ऋतू तो खुद अमित से माफ़ मांग कर बात ख़तम करना छह रही थी पर वो था क ऋतू से बात करने को भी तैयार नहीं था.

ऋतू सिंह : मैं समझ सकती हूँ तू ऐसा क्यों कह रही है मंजू . मेरा यकीन कर मैं रोज़ यही सोच कर आती हूँ क मैं आज अमित से माफ़ी मांग कर बात को ख़तम करुँगी पर तेरे सामने hi देख वो मुझसे बात करने को भी तैयार नहीं है.

मंजू म : तूने खुद hi मुझे मन किया था न क मैं अमित से बात न करूँ अब तू hi बता मैं क्या करूँ? कहीं ऐसा न हो क मैं फिर से अकेली रह जॉन . मैं उसे किसी कीमत पर खोना नहीं चाहती मेरी बहिन . मुझसे समझने की कोशिश कर. मैं तुझे भी छोड़ना नहीं चाहती और न उसे छोड़ सकती हूँ. अब तू hi बता मैं क्या करूँ.

ऋतू सिंह : तू चिंता मत कर मंजू अब मैं hi कुछ करती हूँ. मैं तुझे दुखी नहीं होने दूंगी. मैं तब तक तुझे अपनी शकल नहीं दिखाउंगी जब तक क अमित को मन न लूँ.

इतना कह कर ऋतू सिंह घर से बहार निकल गयी . मंजू ने उसे रोकने की कोशिश की पर वो नहीं रुकी. दोनों सहेलियों को इस बात से दुःख तो बहुत हुआ था. पर ऋतू सिंह अपने जज़्बात छुपा कर वही सपाट चेहरा लिए अपनी गाड़ी में बैठ कर चली गयी जबकि मंजू नाम आँखों से अपनी बेस्ट फ्रेंड को जाते हुए देखती रही.

मंजू म क घर से निकल के मैंने सीधा मोहित क घर गया . मैं जैसे hi अंदर गया तो आंटी बेहद hi खूबसूरत परिधान में पूरे मेकअप में तैयार हुई बिलकुल जवान लड़कियों सी सजी हुई, स्टाइलिश हेयर स्टाइल में आँखों में काजल की लम्बी धार लगाए गहनों से सजी बिलकुल किसी काम देवी जैसी प्रतीत हो रही थी . मैं उन्हें देखता hi रह गया.

आंटी : शुक्र है तुम आ गए, पर ये क्या तुम इन कपड़ो में ? जाओ अपने कमरे में जा कर अचे से कपडे पेहेन लो .

अमित : पर बात क्या है आंटी?

आंटी : मोहित ने बताया नहीं तुम्हे? करिश्मा की सहेली क यहाँ फंक्शन है. तेरे अंकल तो देर से आएंगे और मोहित भी कहीं जा रहा है तो तुम्हे हमारे साथ चलना है. अब जल्दी करो करिश्मा भी तैयार हो रही है. ज्यादा देर मत लगाना .

अमित : पर मुझे ...

आंटी : चिंता मत करो साडी रत नहीं रुकना है 10 बजे से पहले आ जायेंगे. अब जल्दी करो.

आंटी की बात मानते हुए मैं ऊपर अपने कमरे में चला गया. मेरे कपडे यहाँ वैसे hi पड़े हुए थे जो आंटी ने मुझ दिलवाये थे. मैंने एक ाचा सा ब्लेजर पेहेन लिया और निचे आया तो आंटी क साथ करिश्मा दीदी भी तैयार बैठी थी. करिश्मा दीदी को देख कर मेरी नज़रें उन पर जैम गयी. वो जब गाओं आयी थी तब भी इतनी सुन्दर नहीं लगी थी. मगर आज तो जैसे वो भी बिजलियाँ गिरा रही थी. रंगत और सूरत तो पहले hi आंटी जैसी थी ऊपर से आज वो जिस तरह से सज धज कर तैयार हुई थी वो किसी को भी दीवाना बना देने क लिए काफी था. 34 -30- 36 की ज़बरदस्त फिगर और 5’6” की हाइट . बड़ी बड़ी ऑंखें जो काजल लगाने से और भी बड़ी लग रही थी. काले रेशमी बल हो खुले छोड़े हुए थे गले में सिर्फ मंगलसूत्र . फक्क गोरा रंग पिंक सूट में वो खुद भी पिंकिश hi लग रही थी. मैं उन्हें एक तक देखे जा रहा था क मेरे चेहरे क आगे हाथ कर क उन्होंने चुटकी बजायी और मुझे वापिस होश में लायी.

करिश्मा दीदी : ोये ऐसे क्या देख रहा है ? पहले कभी लड़की नहीं देखि क्या? लगता है तेरे लिए कोई लड़की देखनी पड़ेगी.

अमित : आए आप बहुत अछि लग रही हैं ..

करिश्मा दीदी : ाचा ठीक है ठीक है. जल्दी चल मुझे लेट नहीं होना. वैसे तू भी कुछ काम नहीं लग रहा.

आंटी : लाखों में एक है अमित , नज़र न लगे इसे किसी की.

इतना कह कर आंटी ने अपनी आँख से काजल ले कर मेरे कण पर लगा दिया .

अमित : वैसे आज काम तो आप भी नहीं लग रही. अगर अंकल यहाँ होते तो पक्का घायल हो जाते .

करिश्मा दीदी : हे हे हे बिलकुल सही कहा . माँ आज आप कमल की लग रही हो .

आंटी : शरमाते हुए ) धत्त तू भी शुरू हो गयी उसके साथ. चलो अब देर नहीं हो रही ?



आंटी क इतना कहते hi करिश्मा दीदी जल्दी से अपना छोटा सा पर्स हाथ में लटकाये आगे बाथ गयी और आंटी ने आँखों से hi मुझे इशारा किया और स्माइल करती हुई आगे चल पड़ी. मैं उनकी मटकती गांड देखता हुआ उनके पीछे पीछे चल पड़ा. बहार कार तैयार कड़ी थी और साथ hi ड्राइवर. मैं आगे वाली सीट पर बैठ गया और आंटी करिश्मा दीदी क साथ पीछे बैठ गयी.
 
भाई लोग आज क लिए सॉरी कल मिलते हैं.
 
अपडेट 175



‘ यार तू चिंता मत कर. मेरी आज hi बात हुई है हाई कमान में . कुछ लोग विरोध कर रहे हैं तेरा पर तू चिंता मत कर. तुझे मिनिस्ट्री ज़रूर मिलेगी. मुझे भरोसा दिलाया गया है क तू कैबिनेट में ज़रूर शामिल होगा. बस एक को अभी रस्ते से हटाना पड़ेगा जो उछाल रहा है ज्यादा’ बलजीत राइ अपने दोस्त मला नारायण दस् क साथ बैठा जैम टकरा रहा था.

न. डी. : नाम बता साले का , कौन है वो मादरचोद जिसे अपनी ज़िन्दगी से प्यार नहीं. खून की नदियां बहा दूंगा मैं. 10 साल लग गए मुझे यहाँ तक आते आते अगर किसी ने टांग आदि तो साला पूरे खंडन का नाम मिटा दूंगा.

बलजीत राइ : कण्ट्रोल कर भाई कण्ट्रोल, 10 साल से तूने इतना भी नहीं सीखा क राजनीती में दुश्मनी से नहीं दोस्ती से मारा जाता है. अगर यही सब गुंडागर्दी hi करनी है तो फिर राजनीती में आने की ज़रूरत क्या थी ? उसमे तो तू पहले hi मास्टर है.

न. डी. : अगर मेरे को मिनिस्ट्री नहीं मिली तो फिर दिखा दूंगा सबको क मैंने पेशा छोड़ क सफ़ेद चोला डाला है भूला नहीं हूँ कुछ. तू नाम तो बता साला है कौन जो अपनी माँ छुड़ा रहा है.

बलजीत राइ : मला सुशिल कुमार. वो भी मिनिस्ट्री क लिए हाथ पैन मर रहा है. और मुझे पता चला है जो थोड़े दिन पहले पुलिस ने राइड मर कर तेरे आदमी पकडे हैं उनका मामला हाई कमान में वही उठा रहा है.

न. डी.: इसकी माँ की ,, उसका मतलब बहनचोद वो राइड भी इसी ने करवाई थी. सेल की ऐसी गांड मरूंगा क दोबारा राजनीती करने का नाम नहीं लेगा. साला कैसे हाथ जोड़ कर भाई कह कर मिलता है और मेरी hi गेम बजने में लगा है . आज hi इसका no. लगता हूँ.

बलजीत राइ : मेरी सुनेगा या अपनी hi करेगा? तुझे यहाँ तक पहुँचाने क लिए तुझसे ज्यादा मैंने पैसा और ताकत लगाई है जनता है न. तुझे मिनिस्टर भी मैं hi बनवाऊंगा. बाद तू वही कर जो मैं कहता हूँ. उस गांडू को अभी पता नहीं क मला तू है मगर तेरे पीछे मैं हूँ. अत तो मेरे पास hi है वो भी चंदे क लिए. उसने जो खेल खेला है उसी से उसको मात देंगे. तू बस इतना करना क अब कोई गुंडा नहीं करना. और जो भी कोई नाजायज़ काम हैं फ़िलहाल सब रोक दो और सबके सुबूत मिटा दो. क्या नाम बताया था तूने उस पुलिस वाली का ?

न. डी.: सप ऋतू सिंह है कोई. साली न रिश्वत लेती है न डर्टी है. अगर मिनिस्ट्री लेने की बात न होती तो साली को कब का रस्ते से हटा दिया होता .

बलजीत राइ : है है है तू भी साला दिमाग से पैदल hi रहेगा. उसे रस्ते से हटाने की बजाये अब उसे इनाम देने की बरी है दोस्त. वो hi अब हमारा काम करेगी.

न. डी.: तेरा दिमाग तो सेट है ? मैं बता रहा हूँ साली न डर्टी है न रिश्वत लेती है और तू कह रहा है वो हमारा काम करेगी .

बलजीत राइ : मेरा दिमाग बिलकुल सेट है. वो हमारा काम करेगी और उसको इनाम भी हम hi देंगे. तू ये बता क जो आदमी पकडे गए हैं वो कितने वफादार हैं अपने ?

न. डी.: वो मेरे खास हैं सब क सब. कोई अपनी ज़ुबान नहीं खोलेगा.

बलजीत राइ: उनको बोलो क मुँह खोलें और पुलिस को सब बता दें जो भी वो जानना चाहती है.

न. डी.: बहनचोद तेरा दिमाग ठीक है या साला तू भी मेरे खिलाफ जाने की सोच रहा है. अगर ऐसा सोचा भी तो अंजाम ाचा नहीं होगा .

बलजीत राइ : मेरी पूरी बात तो सुन ले पहले. अपने आदमियों से कह क वो पुलिस को सब बता दें. और तेरे नाम की बजाये सुशिल का नाम बता दें. लेकिन उससे पहले कुछ और लोग पकड़वाओ उसके घर गोदाम दफ्तर में से , कुछ नशा और हथियारों क साथ. इन सब को अरेस्ट करेगी वही ईमानदार सप . खबर हमारे hi लोग पहुंचा देंगे. सब लोग नाम सुशिल का लेंगे और कुछ सुबूत उसके घर से बरामद हो करवा देंगे. बाकि अपनी तरफ से जो मैं करूँगा उसके बाद सुशिल क पास और कोई रास्ता नहीं बचेगा सिवाए जेल जाने क. जब वो पुलिस की गिरफ्त में आ गया तो तेरा रात अपने आप क्लियर हो जायेगा और फिर तू मिनिस्टर बन जायेगा. अब आयी बात समझ में ?

न. डी .: तू साला वाकई में बड़ा तगड़ा हरामी है. इतनी दूर तक सोच लेता है. इसी लिए मैं तेरे पे भरोसा करता हूँ.

बलजीत राइ : है है है दूर तक सोचता हूँ तभी यहाँ तक पहुंचा हूँ . वर्ण कब का ख़तम हो गया होता. अब तू देख तुझे कहाँ से कहाँ तक पहुंचता हूँ . बस चुपचाप वो करता जा जो मैं कहता हूँ और कहीं भी अपना दिमाग चलने की कोशिश मत करना .

न. डी.: 100 हरामी मरे हो गए तब तू पीड़ा हुआ होगा सेल. मैं तेरे हिसाब से hi चलूँगा. पर कभी मेरे खिलाफ जाने का सोचा तो यद् रखना क तुझे ज़मीन से आसमान तक पहुँचाने वाला मैं हूँ और आसमान से भी ऊपर पहुंचा सकता हूँ बिना देर किये.

बलजीत राइ : तुझे मुझसे ज्यादा कौन जानेगा. अब पुराणी बातें छोड़ दे और एक नेता की तरह बात किया कर. जल्द hi तुझे मिनिस्टर बनना है अब तू वो सुपारी ले कर काम करने वाला गुंडा नहीं है . चल अब मेरे लिए किसी नए मॉल का इंतज़ाम कर शराब तो बहुत हो गयी अब शबाब की ज़रूरत है.

न. डी.: है है है , वो तो पहले hi तैयार है. साथ वाले कमरे में बैठी है . साली मन नहीं रही थी तो थोड़ी खातिरदारी करनी पड़ी बाकि तू खुद देख लेना . वैसे तू उस गांडू सुशिल की तरफ कब जा रहा है?

बलजीत राइ : कल जा रहा हूँ. करवा चौथ है न. तेरी भाभी बुला रही है. 5 महीने हो गए घर नहीं गया. अब कल जाना hi पड़ेगा. और वहीँ मिल भी लूंगा उस पुलिस वाली से भी. ाचा गुड नाईट . मैं ज़रा सुहागरात मन लूँ. है है है

मैं आंटी और करिश्मा दीदी क साथ जिस जगह पहुंचा ये एक शहर क बहार की तरफ बना एक बहुत hi बड़ा फार्महाउस था . साज सज्जा से hi पता चल रहा था क रईस लोगों का फंक्शन है . और पार्किंग में कड़ी मेहेंगे ब्रांड्स की बड़ी बड़ी गाड़ियों को देख कर यकीन हो गया क यहाँ सब हाई क्लास क hi लोग होंगे. मैं आंटी और करिश्मा दीदी क साथ चलता हुआ अंदर लॉन में से चल कर उस 2 मंज़िला फार्महाउस में जा रहा था. चरों तरफ एक से बाद कर एक लड़की भाभी आंटी सब की सब अलग hi फैशन क कपडे और स्टाइल क साथ नज़र आ रही थी जैसे क ये फंक्शन न हो कर कोई मॉडलिंग कांटेस्ट हो. किसी की पूरी पीठ नंगी थी तो किसी की जांघें कपड़ों से बहार, कोई अपनी दूध की थैलियां दिखा रही थी तोकोई गांड मटका रही थी . हर तरह की पौषकनौर स्टाइल यहाँ मौजूद था. मैंने नोटिस किया क कई लड़कियां और औरतें मुझे नोटिस कर रही हैं और शायद ये आंटी और करिश्मा दीदी ने भी नोटिस कर लिया था.

‘ तू आ गयी करिश्मा , मुझे तो लगा था तू नहीं आएगी. जब से शादी करवा क तू गयी है आज नज़र आ रही है . ‘

ये एक लड़की थी करिश्मा दीदी की hi उम्र की. जिसे बहुत साडी औरतें घेर कर कड़ी थी . उसे नीचे स्टूल पर बिठाया हुआ था और हर कोई उसकी गॉड में कुछ न कुछ शगुन दाल रहा था. पेट थोड़ा उभरा हुआ था जिसका मतलब था क वो प्रेग्नेंट है और झोली में सब शगुन दाल रहे हैं तो ज़रूर इसकी गॉड भरे होगी. हाथों में चूड़ा था मतलब अभी शादी को साल भी नहीं हुआ होगा.

करिश्मा दीदी : क्या करूँ मोना शादी क बाद तुझे भी पता चल गया होगा क लाइफ कैसी हो जाती है. एनीवे कोंग्रटुलतिओन्स भगवन करे तेरे जैसा चाँद सा बचा हो तेरा. लड़का हो या लड़की दोनों एक बराबर हैं.

मोना : थैंक यू , वैसे शादी तो मेरी भी हुई है पर तू तो कुछ ज्यादा hi बिजी होने का बहाना करती है. मैं भी तो टाइम निकल कर मिल hi लेती हूँ कभी कभी दोस्तों से पर तूने तो एक बार भी कोशिश नहीं की किसी से मिलने की.

मोना नहीं करिश्मा दीदी से बात कर hi रही थी क मैं भी करिश्मा दीदी क पीछे से निकल कर उनके साथ खड़ा हो गया और मोना की नज़र मुझ पर पड़ी. मैंने हाथ जोड़ कर नमस्ते की तो मुझे सर से पाऊँ तक उसने गौर से देख जैसे पहचानने की कोशिश कर रही हो .

मोना : अब समझी तू क्यों नहीं आती , इतने हैंडसम हस्बैंड को छोड़ कर आने को दिल नहीं करता होगा न ? क्या पता कौन दौरे दाल ले. सही है तू. ऐसे हीरो जैसा पति तो किस्मत से hi मिलता है. पर ये क्या जीजा जी देखने में इतने हट्टे करते हो आप और अभी तक मेरी दोस्त की गॉड खली है. क्या अभी सिर्फ मज़े करने का hi प्लान है ?

मोना ने मुझे करिश्मा दीदी का हस्बैंड समझ किया था शायद . मुझे तो उसकी बात सुनते hi शर्म आ गयी और यही हल करिश्मा दीदी का भी हुआ. मगर वो जल्द hi बोल पड़ी .

करिश्मा दीदी : दुफर भाई है ये मेरा. तेरे जीजा जी नहीं आये.

मोना : ो सॉरी सॉरी ! पर तेरे भाई को तो मैं अछि तरह जानती हूँ इसे तो कभी नहीं देखा मैंने.

करिश्मा दीदी : ये मेरे चाचा जी का बीटा है मेरे पापा क फ्रेंड का. मेरे सेज भाई की तरह hi है. बरसों बाद आया है तू कहाँ से देख लेती.

मोना: धीमी आवाज़ में ) वैसे यार जो भी है तेरा भाई है बड़ा हैंडसम. अगर पहले नज़र अत तो मैं इसी से शादी कर लेती

करिश्मा दीदी : धत्त शर्म नहीं आती तुझे . ले पकड़ तेरी गॉड भरे का तोहफा मेरी तरफ से.

मोना : अपने भाई से नहीं मिलवाएगी?

करिश्मा दीदी : अमित ये है मेरी बेस्ट फ्रेंड मोना और मीणा ये है अमित .

मोना : अमित यार तुम सच में बहुत हैंडसम हो . अगर मेरी कोई छोटी बहना होती तो अभी क अभी तेरा रिश्ता पक्का कर देती मैं. वैसे अगर कोई यहाँ पसंद आ जाये तो बेजिझक बता देना.

अमित : थैंक्स दीदी , वैसे आप ज्यादा खूबसूरत हैं और इस रूप में और भी अछि लग रही हैं. माँ , सबसे पवित्र रूप है किसी भी औरत का.

मोना : तुम तो बहुत अछि बातें करते हो. शुक्रिया मेरी इतनी तारीफ क लिए. करिश्मा क साथ कभी घर ज़रूर आना. करिश्मा ले क आना अपने इस भाई को. बड़ी hi प्यारी बातें करता है ये. और तू भी अब जल्दी से गॉड भर ले. मुझसे पहले शादी हुई है तेरी और तू अभी तक कंजूसी के रही है. तेरा दिल नहीं करता क्या माँ बनने का ? मुझे तो बड़ा hi ाचा लग रहा है अभी से सब कितनी सेवा कर रहे हैं.

करिश्मा दीदी : चल अब ज्यादा बातें मत कर. अपना ध्यान रखना इस हालत में.

आंटी किसी औरत क साथ बातें कर रही थी शायद वो मोना की माँ होगी जो उनके साथ hi आकर करिश्मा दीदी और मुझसे भी मिली. फिर हम तीनो ने एक साथ फोटो खिचवाई मोना क साथ. करिश्मा दीदी को कुछ सहेलियां मिल गयी और वो उनके साथ hi गयी. सबकी नज़रें मुझे नोटिस कर रही थी और दीदी क साथ आंटी ने भी ये नोट किया तो आंटी मुझे अपने साथ दूसरी तरफ ले गयी.

आंटी : उनका कसूर नहीं है तुम हो hi इतने हैंडसम क वो भी क्या करें. जब मैं खुद को नहीं रोक पति तो किसी को क्या कहूं. वैसे भी तुम्हारे जैसा हे मन तो यहाँ कोई है भी नहीं ऊपर से कोई एक बार तुम्हारा हथियार देख ले तो सर क बल दौड़ी आएगी तेरे पीछे.

अमित : क्या आंटी आप भी . ऐसी बातें थान मत कीजिये अगर किसी ने सुन लिया तो.

आंटी : ध्यान रखती हूँ हर तरफ ऐसे hi नहीं शुरू हो जाती. अगर ऐसी होती तो घर पर hi चांस मर लेती . इतने दिन हो गए हैं मुझे सटिस्फी हुए. करिश्मा की वजह से रुकी हुई हूँ वर्ण आज तो मेरा दिल कर रहा था क सब छोड़ कर पहले तुम्हारे साथ एक बार मैच खेल hi लूँ.

अमित : अगर इतना hi दिल है तो चलिए कहीं चलते हैं.

आंटी: जले पर नमक छिड़क रहा है न . सब जानती हूँ मैं. पर तुम मुझे नहीं जानते. अगर अपनी पर आ गयी तो यहाँ भी चांस लगा लुंगी.

अमित : जनता हूँ मैं , अब आइये बैठते हैं कहीं. वैसे आज आप बड़ी ज़बरदस्त लग रही हैं. मन तो मेरा भी मचल रहा है आपको देख कर. करिश्मा दीदी से कहीं भी काम नहीं लग रही आप.

आंटी : तुम्हारे लिए hi तैयार हुई हूँ. तेरे अंकल का मुझे पहले hi पता था वो नहीं आएंगे इस लिए खास तयारी की है .

अमित : वाकई आप आज कमल की लग रही हैं पर अफ़सोस क कुछ कर नहीं सकता वर्ण ....

आंटी ने मेरी अधूरी बात पर मेरी आँखों में देखा. उनकी नज़रों में भी एक खास चला क थी.

आंटी : ाचा तुम ज़रा यहाँ बैठो मैं अभी अति हूँ.

इतना कह कर आंटी अंदर चली गयी . मैं बहार लॉन में इस गोल टेबल क पास अकेला बैठा था. मुझे अकेला देख कर एक 30-32 साल की भाभी मेरे पास आ कर कड़ी हो गयी .

भाभी : क्या मैं यहाँ बैठ सकती हूँ ?

अमित : हाँ हाँ बैठिये

भाभी : मेरा नाम अंकिता है. मैं मोना की ननद हूँ. तुम्हे पहले कभी नहीं देखा क्या मैं तुम्हारा नाम जान सकती हूँ ?

अमित : जी मेरा नाम अमित है और मोना दीदी मेरी बहिन करिश्मा दीदी की फ्रेंड हैं.

अंकिता : ओह ाचा तो तुम मोना क भी भाई हुए न एक किसम से. यानि क तुम लड़की वालों की तरफ से हो फिर तो मैं हक़ से बात कर सकती हूँ.

अमित : जी खोये मैं क्या कर सकता हूँ आपके लिए?

अंकिता : कर तो बहुत कुछ सकते हो फ़िलहाल कुछ देर बातें कर लो उसके बाद देखते हैं .

अंकिता ने बड़ी ऐडा से मेरी आँखों में देखते हुए कहा. मुझे उसकी नज़रे अजीब लग रही थी. देखने में अछि खासी थी. सादे पांच फ़ीट हैघट क साथ गोरा रंग फिगर भी ज़बरदस्त था 36-32-28 . अचे से मेकअप कर क बम बानी हुई थी और सदी क साथ हो ब्लाउज पहना था वो उसकी बरी बड़ी घाटियों क बीच की गहरायी दिखा रहा था. लाल लिपस्टिक होंठों को रक्तिम बना रही थी.

अमित : जी कहिये क्या बात कर करनी है आपको?

अंकिता : बातें तो बहुत साडी हैं पर पहले ये तुम जी जी कहना छोडो. मुझे मेरे नाम से बुलाओ और दोस्त की तरह बात करो. मुझे ाचा लगेगा.

अमित: पर मैं कैसे आपको...

अंकिता : कॉमन यार एक दोस्त की तरह बात करो. मैं कोई ओल्ड आगे थोड़ा hi हूँ. वैसे तुम्हारी कोई गफ है?

अमित : जी वो

अंकिता : फिर वही जी जी. मैंने कहा न दोस्त की तरह बात करो. तुम्हारी गफ नहीं है क्या जो इतना श्रम रहे हो?

अमित : जी नहीं है : मेरा मतलब मेरी कोई गफ नहीं है.

अंकिता : कमल है, ये तो बात गले नहीं उतर रही . मतलब इतने हैंडसम लड़के की कोई गफ नहीं है? क्या लड़कियां अंधी हो गयी हैं या उनको परख नहीं है ? वैसे करते क्या हो तुम ?

अमित : कॉलेज में पड़ता हूँ .

अंकिता : हम्म्म और फिर भी गफ नहीं. लगता है तुम कुछ ज्यादा hi सीधे हो . तुम्हे कुछ सीखना पड़ेगा.

अमित : मतलब ?

अंकिता : मतलब यही खरे तुम जैसे हैंडसम लड़के क पास काम 3-4 गफ तो होनी चाहिए और तुम कह रहे हो क एक भी नहीं है. मैं तुम्हे सिखाऊंगी क गफ कैसे बनाते हैं और कैसे गफ को खुश रखा जाता है. एक बार सिख जाओगे तो साडी उम्र ऐश करोगे. बोलो सीखोगे ?

‘ क्या सिखाया जा रहा है मेरे बेटे को ? ‘ आंटी चलती हुई हमारे पास आयी तो मैंने चैन की सांस ली वर्ण ये अंकिता तो पीछे hi पद गयी .

अंकिता : अरे आप यहाँ ? ये आपका बीटा है ?

आंटी : हाँ मैं यहाँ , मोना मेरी बेटी करिश्मा की दोस्त है और ये मेरे देवर का बीटा है . मेरे लिए भी बेटे सामान है.

अंकिता : ओह ाचा , बहुत hi ाचा है ये तो. इसे भी ले कर आया कीजिये न क्लब पार्टीज में.

आंटी : हाँ ज़रूर पर अभी इसका ध्यान पड़े और गेम में है

अंकिता : वैसे कौन सी गेम खेलता है ये ?

आंटी : रेसलिंग और अपने कॉलेज की टीम का बेस्ट प्लेयर गई

अंकिता : तभी इतनी अछि बॉडी बनाई हुई है.

आंटी : एक्सक्यूज़ में अंकिता मुझे ज़रा अमित को किसी से मिलवाना है.

अंकित : हाँ हाँ कोई बात नहीं . मैं यहीं हूँ आप का वेट करुँगी इधर hi.

आंटी : चलो अमित

आंटी मुझे अपने साथ अंदर ले आयी. चलते चलते हम दूसरी मंज़िल पर आ गए . यहाँ पर कुछ कमरे थे और इस वक़्त यहाँ पर इक्का दुक्का hi लोग थे . आंटी मुझे अपने साथ एक कमरे में ले गयी और एक बार बहार का जायज़ा लेने क बाद दरवाज़ा बंद कर दिया.

आंटी: क्या बातें कर रही थी वो तुम्हारे साथ?

अमित : मुझे तो खुद समझ नहीं आ रहा. मेरी गफ क बारे में पूछ रही थी.

आंटी : पानी आ गया होगा न मुँह क साथ साथ नीचे भी तभी तेरे पीछे पद गयी. बच क रहना उससे. सब जानते हैं उसके पति में डैम नहीं है उसकी आग बुझाने क लिए इसी लिए तुझे देखते hi डोरे डालने लगी. कामिनी कहीं की मेरी सौतें बन रही है.

अमित : आपकी सौतें ?

आंटी : और नहीं तो क्या , तुम्हारे ऊपर डोरे दाल कर वो मेरी सौतें hi तो बनना चाहती है. चलो अब जल्दी करो हमारे पास ज्यादा वक़्त नहीं है कोई भी आ सकता है यहाँ.

अमित : आप क्या कह रही हैं?

आंटी : अभी खुद hi तो कह रहे थे तुम्हारा दिल कर रहा है करने का . अब देर मत लगाओ

अमित : पर यहाँ ?

आंटी : ज्यादा मत सोचो , मुझसे भी कण्ट्रोल नहीं हो रहा.

इतना कह कर आंटी पलट गयी और अपनी सलवार नीचे कर ली. सलवार शायद लास्टिक वाली थी जो आराम से नीचे हो गयी. आंटी ने अपनी कमीज का पल्लू अपनी पीठ पर कर लिया और बीएड पर हाथ रख कर झुक गयी. आंटी क नंगे चूतड़ मेरे सामने आ गए. पेंटी भी उन्होंने सलवार क साथ hi नीचे कर ली थी. मैंने उनके मांगे चूतड़ देखने लगा . चूतड़ों क नीचे छूट की फांके नज़र आ रही थी जो बालों से बिलकुल साफ़ थी. मैं अभी आंटी क चूतड़ देखने में hi खोया था क आंटी ने सर पीछे घुमा कर मेरी तरफ देखा और बोली.

आंटी : अब जल्दी करो सोच क्या रहे हो. कपडे उतरने का टाइम नहीं है हमारे पास . तुम भी मत उतरना . जल्दी करो कब से बुरा हल हो रहा है सोच सोच कर.

अमित : पर यहाँ करना रिस्की है.

आंटी : बातों में टाइम वास्ते मत करो. जल्दी से मेरी आग बुझा दो.

मैंने भी आंटी की बात मानते हुए ज़िप खोल कर अपना लैंड बाहर निकल लिया जिसमे पहले hi तनाव आने लगा था आंटी क चूतड़ देख कर . मैं आंटी क करीब हो गया और अपने लैंड को एक हाथ से पकड़ कर आंटी की छूट पर रगड़ा. आंटी क मुँह से सिसकी निकल गयी. मैंने 3-4 बार ऐसा किया और मेरा लैंड पूरा अकड़ कर खड़ा हो गया . छूट में सूपड़ा फसते हुए मैंने आंटी की कमीज थोड़ी और ऊपर को करते हुए उनकी नंगी कमर पकड़ ली.

अमित : आंटी खुद को संभालना ज्यादा आवाज़ मत कीजियेगा.

आंटी : तुम मेरी परवाह न करो बस मेरी आग शांत कर दो.

इतना कह कर आंटी ने अपने दुपट्टा अपने मुँह में दाल लिया . मैंने घुटने थोड़े से बेंड किये और कमर को थामे हुए ज़ोर से धक्का पेल दिया और एक बार में hi जड़ तक लैंड छूट में घुस गया. आंटी का पूरा जिस्म इस धक्के से हिल गया. वो आगे को गिरने को हुई पर मैंने उन्हें थामे रखा. और उनके मुँह से दबी दबी आवाज़ें निकलने लगी ‘ गुणनं गुणनण गुणनं ‘ कितने दिनों क बाद आंटी मेरा लैंड ले रही थी. ऊपर से न छूट को मैंने चिकन किया था न लैंड को. आंटी को बहुत दर्द हो रहा था अगर मुँह में कपडा न होता तो ज़ोर ज़ोर से चीखती. मैं रुक कर टाइम वास्ते नहीं करना चाहता था क्यूंकि यहाँ कोई भी आ सकता था . मैंने आंटी की कमर को थामे ताबड़तोड़ धक्के पेलने शुरू कर दिए. कुछ देर आंटी दर्द से कराहती रही और फिर मज़े से खुद hi कमर को पीछे धकेलें लगी. मैं भी लैंड को सुपडे तक खिंच कर ज़ोरदार धक्के पेल रहा था. आंटी और मैं जल्दी जल्दी में काम निपटने में लगे थे. कपडे ख़राब न हो जाएँ इस लिए मैंने आंटी क चुके भी नहीं पकडे. आंटी 10 मिनट्स भी नहीं तिकी अउ उनका पानी निकल गया. मगर मैं धक्के पेलता रहा. आंटी पानी निकलने क बाद खुद को संभल नहीं प् रही थी. मैंने उन्हें बीएड पर लिटाने hi वाला था क दरवाज़े पर दस्तक हुई और मेरे साथ आंटी की भी गांड फैट गयी . बहार से जो आवाज़ आयी थी वो करिश्मा दीदी की थी .

करिश्मा दीदी : माँ आप अंदर हो ? दरवाज़ा खोलिये .

मैं तो वहीँ जड़ हो गया था और आंटी की भी हालत पतली थी. डरते डरते उन्होंने करिश्मा दीदी को जवाब दिया.

आंटी : हह है हाँ करिश्मा मैं अभी खोली हूँ दरवाज़ा .

आंटी जल्दी से सीधी कड़ी हुई और अपनी सलवार पेंटी समेत ऊपर कर क अपने कपडे ठीक करने लगी. मैंने भुई अपना लैंड जो इतने में hi मुरझा गया था वापिस पेण्ट में डाला और छुपाने की जगह ढूंढने लगा.

आंटी : तुम उधर बाथरूम में घुस जाओ . मैं करिश्मा को देखती हूँ.

मैं जल्दी से कमरे क साथ अटैच्ड बाथरूम में घुस गया. आंटी में दरवाज़ा खोला और करिश्मा दीदी अंदर आ गयी. उन्होंने इधर उधर देखा और फिर आंटी से बात करने लगी.

करिश्मा दीदी : आप यहाँ क्या कर रही थी माँ? और वो अमित कहाँ है ? कहीं नज़र नहीं आ रहा.

आंटी : मैं वाशरूम में जाने क लिए यहाँ आयी थी. वो नीचे सब जगह बिजी थे न. अमित कहाँ है ? उसे तो मैं नीचे hi छोड़ कर आयी थी. चलो जल्दी पहले उसे ढूंढते हैं . कहीं कोई उसे घेर hi न ले.

बड़ी सफाई से आंटी ने करिश्मा दीदी को अपनी बातों में लपेट लिया और कमरे से बहार ले गयी. उन दोनों क जाने क बाद मैं भी जल्दी से बहार निकल और नीचे आ गया. करिश्मा दीदी और आंटी मुझे ढूंढ रही थी मैं हाथ म जूस का गिलास पकड़े उनके सामने आ गया.

आंटी : कहाँ चले गए थे तुम?

अमित : मैं वो जूस लेने गया था क्यों क्या हुआ?

आंटी : कुछ नहीं करिश्मा को चिंता हो रही थी क कहीं तुम चले तो नहीं गए कहीं.

अमित : मैं कहाँ जा सकता हूँ भला. आपके साथ आया हूँ तो आपके साथ hi जाऊंगा न. दीदी आप भी ऐसे hi चिंता करती हैं.

करिश्मा दीदी : चलो अब घर चलते हैं.

आंटी : पर अभी तो टाइम है न

करिश्मा दीदी : मेरा दिल नहीं कर रहा माँ यहाँ रुकने का. चलिए चलते हैं. वैसे भी मैं मोना से मिलने आयी थी और उससे मिल तो लिया

आंटी : ाचा चलो जैसी तुम्हारी मर्ज़ी.

करिश्मा दीदी और आंटी क साथ मैं पार्किंग की तरफ चल पड़ा. आंटी थोड़ा पैन फैला कर चल रही थी और मैं दर रहा था क कहीं करिश्मा दीदी नोट न कर लें क आंटी की चल कैसे बदल गयी इतनी जल्दी. खैर ऐसा कुछ नहीं हुआ. हम तीनो 9 बजे तक वापिस घर पहुँच गए थे. मैंने भगवन का शुक्रिया किया क आज बच गए वर्ण आंटी की जल्दबाज़ी ने आज मरवा hi दिया था. मैंने वापिस कपडे चेंज किये और घर क लिए निकल गया. हालाँकि आंटी मुझे रोकने की कोशिश करती रही पर मैं नहीं मन और वापिस रीता मौसी क घर की तरफ चल दिया. घर जाते जाते मैं कल वाले बस स्टॉप क पास से गुज़र रहा था जहाँ मुझे मंजरी की माँ मिली थी तो मेरे दिमाग में मंजरी क चाचा से मिलने की बात आ गयी और मैंने बाइक उधर घुमा ली.

‘ कौन हो तुम और किस्से मिलना है ? ‘ दरवाज़ा एक अधेड़ से आदमी ने खोला. मैं देखते hi समझ गया क ये मंजरी का चाचा है.

अमित : आपका नाम श्याम है?

श्याम : हाँ कहो क्या काम है और तुम कौन हो?

अमित : जी मेरा नाम अमित है और मैं क्सक्सक्सक्स गाओं से आया हूँ. विजय शंकर जी का बीटा हूँ और आप hi से मिलने आया हूँ.

श्याम : ाचा तो तुम hi ए थे कल भी. आओ अंदर आओ.

श्याम क साथ मैं अंदर आया और उसने मुझ सोफे पर बिठाया. अंदर से उसने आवाज़ दे कर पानी लेन को कहा और साथ hi काकी को भी बुलवा लिया.

श्याम : तो कहो क्या बात करनी थी तुम्हे?

अमित : जी मैं जानना चाहता हूँ अपने मंजरी क एक्सीडेंट की रिपोर्ट कहाँ करवाई थी.

श्याम : मुझे कहाँ पता बीटा क वो पुलिस किस ठाणे से आयी थी. मैं तो अपने भैया और भतीजी को उस हालत में देख कर होश hi खो बैठा था. पुलिस को फ़ोन भी मैनेजर साहब ने किया था. मैं कहाँ जनता हूँ पुलिस वालों को ये तो बड़े लोगों की जान पहचान होती है पुलिस वालों क साथ.

अमित : क्या आपको पुलिस अफसर का नाम यद् है किसी का ?

श्याम : नहीं बीटा मैंने बताया न क मुझे होश hi कहाँ था अपने भाई को उस हालत में देख कर.

अमित : तो आप बाद में पता करने भी नहीं गए केस क बारे में?

श्याम : बीटा घर में जब ऐसे दो दो मौतें हो जाएँ तो इंसान कहाँ कुछ होश रहता है. वैसे भी जो होना था वो तो हो गया अब पता कर क भी क्या करना . वो एक एक्सीडेंट था, दोनों बाप बेटी मुझसे मिलने आये थे फैक्ट्री में और वापिस आते वक़्त सड़क पार करते ये हादसा हो गया. किसी ने देखा भी नहीं किस गाड़ी क साथ एक्सीडेंट हुआ था तो पुलिस भी क्या पता लगाती.

अमित : फिर भी उन लोगों को सजा तो मिलनी चाहिए न जो मासूम ज़िन्दगियों को ऐसे कुचल देते हैं. और कल चची ने बाथ था क आप पुलिस वालों से मिलते रहे हैं केस क सिलसिले में. तो कहाँ मिलते थे आप ? मुझे बताइये बाकि मैं खुद पता करवा लूंगा.

श्याम : वो क्या है न वो मैनेजर साहब ने hi बुलाया था इंस्पेक्टर साहब को.

अमित : कंप्लेंट तो आप क नाम से hi दर्ज होगी न या वो भी मैनेजर साहब क नाम से है? खाई कोई बात नहीं मैं खुद hi पता करवा लूँगा.

श्याम : अरे बीटा तुम कहाँ चक्कर में पद रहे हो. आराम से अपनी पड़े करो . अब जाने वाले तो चले गए उनको यद् कर क तुम अपनी पड़े ख़राब मत करो.

अमित : जाने वाले तो चले गए पर मैं जानना चाहता हूँ क आखिर उन लोगों क साथ हुआ क्या था. और पता मैं लगा कर रहूँगा. अगर किसी ने उनके साथ गलत किया है तो उसे सजा ज़रूर मिलेगी. वैसे आपके मालिक कुछ ज्यादा hi दयालु हैं जो आप पर इतने मेहरबान हैं. लगता है उनसे मिलना hi पड़ेगा. ाचा काकी मैं चलता हूँ.

इतना कह कर मैं घर से बहार निकल गया. मगर मेरी बातें सुन कर मंजरी क चाचा क चेहरे का रंग बदल गया था . मंजरी की माँ तो बेचारी चुपचाप कड़ी हमारी बातें hi सुनती रही थी . मंजरी क चाचा की बातें सुन कर मेरा शक और भी बाथ गया था क ज़रूर कुछ छुपाया जा रहा है. मंजरी का चाचा जिस तरह से हर बात पर घबरा रहा था उससे साफ ज़ाहिर था क कुछ तो ज़रूर हुआ है मंजरी और उसके बापू क साथ.

इन सब बातों क बारे में सोचता मैं घर वापिस पहुँच गया. मौसा जी खाना खा कर अपने कमरे में चले गए थे. रीता मौसी किचन में काम कर रही थी. नेहा दीदी और करुणा दीदी हल में बैठी थी. मौसा hi क इलावा किसी ने खाना नहीं खाया था . मेरे आते hi पहले तो मौसी नाराज़ हुई फिर हम सब ने मिल कर खाना खाया. खाने क बाद सब अपने अपने कमरों में चले गए . करुणा दीदी ने बता दिया था क उनकी छूट पर अभी सूजन है तो वो रत को कुछ नहीं करने वाली. मैं अपने कमरे में बैठ कर मंजरी क चाचा की बातों पर विचार का रहा था. इस मामले में कौन मेरी मदद कर सकता है मैं इस बारे में सोच रहा था . मुझे कल्पना hi उम्मीद की किरण नज़र आ रही थी जिससे मैं मदद मांग सकता था. मैं अभी सोच hi रहा था क रीता मौसी मेरे लिए दूध ले आयी.

रीता मौसी : क्या कर रहे हो ?

अमित : कुछ नहीं बस सोने की तयारी कर रहा था.

रीता मौसी : लो ये दूध पिलो, और आज रत आराम से सो जाना. कल करवा छोटू का व्रत है तो सुबह जल्दी उठना पड़ेगा मुझे. वर्ण आज रत तुम्हे सोने नहीं देती. कल तुम जा रहे हो ये सोच कर दिल बैठा जा रहा है.

अमित : अरे मौसी ये कैसी बातें कर रही हैं आप ? मैं कहाँ जा रहा हूँ? रहूँगा तो यहीं आपके आसपास hi. हाँ कल गाओं जाना है तो वापिस मंडे को hi आऊंगा शहर.

रीता मौसी : मंडे से फिर रमा क पास जा रहे हो ?

अमित : जी , पर आप चिंता मत करो जब कभी मेरी ज़रूरत पड़े मुझे फ़ोन कर दीजियेगा .

रीता मौसी : थोड़े दिनों में hi तेरी आदत हो गयी है बीटा. पता नहीं तुम्हारे बिना दिल कैसे लगेगा. चल अब तू आराम कर मैं भी चलती हूँ.

जाने से पहले रीता मौसी ने मुझे किश किया और फिर मेरा माथा चूम कर नीचे चली गयी. मैं भी कुछ देर बाद सो गया.

अगले दिन मैं जल्दी उठ गया और एक्ससरसीसे करने लगा. एक्सरसाइज करने क बाद मैं तैयार हो कर नीचे आ गया. रीता मौसी तो आज पुअर सुहागन बानी हुई थी. लाल साडी , सिन्दूर , लाल चूड़ियां और हाथों में मेहेंगी जो शायद रत को खुद hi लगाई थी उन्होंने. बड़ी hi आकर्षक लग रही थी और ऊपर से बालों में गजरा लगाया हुआ था . नयी नवेली दुल्हन की तरह पूरा हार श्रृंगार किया था उन्होंने. मैं तो एक बार बस उन्हें देखता hi रह गया था. मौसी ने जब मुझे इस तरह मुझे घूरते देखा तो उनके होंठों पर भी मुस्कान आ गयी.

मौसा जी : आज तो कमल की लग रही हो रीता , सोच रहा हूँ आज ऑफिस से छुट्टी ले लूँ.

मौसा जी भी रीता मौसी क जलवों से घायल हो रहे थे

रीता मौसी : रहने दीजिये , जानती हूँ अछि तरह से आपको. अभी फ़ोन आ जायेगा तो भागे जाओगे ऑफिस. बस इतना यद् रखियेगा क शाम को टाइम से घर आ जाइएगा. अगर आज भी देर से आये तो फिर देख लेना.

मौसा जी : अरे तुम कहो तो जाता hi नहीं . आज छुट्टी कर लेता हूँ .

रीता मौसी : जाइये जाइये वर्ण फिर कहोगे मैंने छुट्टी करवा दी.

करुणा दीदी : माँ वैसे आज आप कमल की लग रही हो. ये मेहंदी आपने कब लगाई?

रीता मौसी : रत को hi लगाई थी. चलो अब सब नाश्ता करो उसके बाद मुझे थोड़ी देर सोना भी है . 3 बजे से जग रही हूँ

नाश्ता कर क मौसा जी ऑफिस निकल गए और करुणा दीदी नैना दीदी की तरफ . कल्पना भी टाइम पर आ गयी और नेहा दीदी को लेकर निकल गयी.

रीता मौसी : ऐसे क्या घूर रहे थे?

अमित : आज आप इतनी प्यारी लग रही हैं क घुरून नहीं तो क्या करूँ. मौसा जी की तरह मेरा भी दिल नहीं कर रहा जाने का

रीता मौसी: शरमाते हुए ) आज उनका दिन है वर्ण मैं खुद तुम्हे जाने नहीं देती .

अमित : मौसा जी कितने लकी हैं, जो आप जैसी पतन मिली है.

रीता मौसी : इस हिसाब से तो तुम भी लकी हो

अमित : वो तो हूँ hi पर सच कहूं तो आज मौसा जी से जलन हो रही है मुझे .

रीता मौसी : अगर इतना hi दिल कर रहा है तो करलो अपने दिल की , मैं तुम्हे रोकूंगी नहीं.

मैंने आगे बढ़ कर रीता मौसी को बाँहों में भर लिया और उनके सुराख़ होंठों पर अपने होंठ रख कर उनका रास पिने लगा . मौसी भी मेरा साथ देने लगी. किश करने क बाद मैं मौसी से अलग हो गया तो वो सवालिया नज़रों से मेरी तरफ देखने लगी.

अमित : आज आप अपना पत्नी धरम निभाइये , मेरे लिए फिर किसी दिन ऐसे hi तैयार हो जाइएगा. अब मैं चलता हूँ.

रीता मौसी : रुको , ऐसे जाओगे तो सबको पता चल जायेगा क क्या कर क आये हो.

मौसी ने मेरे होंठों पर लगी लिपस्टिक को साफ़ किया और फिर मुझे मुस्कुरा कर जाने को कहा. मैं बाइक लेकर कॉलेज पहुँच गया. मैं थोड़ा लेट हो गया था तो सब क्लास में जा चुके थे . मैं भी क्लास में चला गया. आज तो चन्दर्कांता भी आज लाल पारी बानी हुई थी. सच कहूं तो आज पहली बार उसे एक औरत की तरह देख रहा था मैं वर्ण हमेशा चांडाल hi दिखती थी मुझे. 36 क बूब्स और 40 की गांड क साथ वो भी कमल की थी पर अफ़सोस ज़ुबान इतनी कड़वी थी क कभी उस पर ध्यान जाता hi नहीं था. चन्दर्कांता का लेक्चर ख़तम होने क बाद जब मंजू मैडम क्लास में आयी तो मैं उन्हें देखता hi रह गया. दिल तो किया क अभी जा कर उन्हें बाँहों में भर लूँ. वो भी आज लाल सदी में थी और चेहरे आज कुछ ज्यादा hi ग्लो कर रहा था. आँखों में काजल और होंठों पर सुर्ख लाल लिपस्टिक उनके रूप को जानलेवा बना रही थी. आज मंजू म ने लाल चूड़ियां भी पहनी थी जबकि वो नोर्मल्ली चूड़ियां नहीं पहनती थी. मैं मंजू म की तरफ hi देखे जा रहा था. उनकी नज़र जब मुझ पर पड़ी तो वो शर्मा गयी और एक मनमोहक मुस्कान उनके चेहरे पर आ गयी. मैंने जब गौर किया तो क्लास में ज्यादातर लड़के मंजू म को खा जाने वाली नज़रों से देख रहे थे. मुझे इस बात पर गुस्सा आने लगा. मोहित और कल्पना ने भी मंजू म की तारीफ की तो मुझे ाचा लगा. और किसी को पता हो न हो पर मुझे तो पता था वो ये सब मेरे लिए hi कर क आयी हैं.

लेक्चर ख़तम होने क बाद मंजू म ने मुझे इशारा किया तो मैं मोहित और कल्पना को कैंटीन में भेज कर मंजू क पीछे चला गया. स्टाफ रूम क बहार hi वो रुक कर मुझसे बात करने लगी.

मंजू म : ऐसे क्या देख रहे थे क्लास में ? अगर कोई देख लेता तो ?

अमित : इसमें मेरी क्या गलती है , आप लग hi इतनी प्यारी रही हैं क नज़रें हैट hi नहीं रही थी आप से. और मेरा hi नहीं सबका यही हल था.

मंजू म : और किसी की मुझे परवाह नहीं है. मेरे लिए तुम hi सब कुछ हो. तुम्हारे लिए hi ऐसी बन कर आयी हूँ. सोचा आज करवा चौथ है , सुहागन तो नहीं हूँ पर तुम hi मेरा सब कुछ हो.

अमित : आज आप वाकई में बहुत प्यारी लग रही हैं और जिस चीज़ की कमी है वो मैं पूरी कर दूंगा.

मेरे इतना कहते hi मंजू म की आँखों में नमी आ गयी.

मंजू म: मैं भी यही चाहती हूँ पर अभी वो वक़्त नहीं आया. मैं खुद उस वक़्त का इंतज़ार कर रही हूँ जब तुम मुझे हमेशा क लिए अपने साथ रख लोगे. अब जाओ और शाम को एक बार ज़रूर मिल लेना जाने से पहले.

मंजू म की बातों से कुछ पल के लिए मैं सब कुछ भूल कर उनके बारे में सोचने लगा. मंजू म को मैं उतना वक़्त नहीं दे प् रहा था जितना उन्हें देना चाहिए था. उन्हें मेरी ज़रूरत थी पर फिर भी वो मुझे फाॅर्स नहीं करती थी. मंजू म क पास से फिर मैं कैंटीन में आ गया और यहाँ अलग hi सरप्राइज मेरा इंतज़ार कर रहा था.

कैंटीन में हमारी मंडली अपनी जगह पर hi बैठी थी. मगर इन सब में 2 अलग hi परियां बन कर बैठी हुई थी. एक थी रीमा और दूसरी राधा. रीमा आज लाल सूट में थी और राधा पिंक में. रीमा जहाँ रेड रोज बानी हुई थी वहीँ राधा पिंक रोज. रीमा की उन बिलोरी आँखों में देखते hi मुझे उसके जज़्बात अपने आप महसूस होने लगे . की वो मेरे लिए hi ऐसे सज संवर कर आयी है . वहीँ राधा जो पहले hi ज़माने भर की मासूमियत और खूबसूरती अपने अंदर समाये हुए थी. वो भी मेरी तरफ hi देख रही थी. ऐसे में किसी एक को देखना मेरे बस में नहीं था . दोनों ने अपने एक एक हाथ में मेहँदी लगा राखी थी. जो मैंने नोटिस कर लिया शायद दोनों ने व्रत रखा हो पर ऐसा होने का चांस नहीं था . रीमा का तो चलो मन सकता हूँ क मेरे लिए उसने रखा होगा पर राधा का समझ से बहार था. मौसी न जैसे hi बैठने क लिए जगह देखने लगा तो रीमा और राधा ने अपने बीच मेरे लिए जगह बना दी. मैं उनके बीच आ कर बैठ गया. मेरे बैठते hi रीमा ने टेबल क नीचे से अपनी एक तंग मेरी तंग से रगड़ दी. मैं उसे देखा तो उसने अपना मेहँदी वाला हाथ मुझे दीखते हुए दिल क डिज़ाइन में बने मेरे नाम क फर्स्ट अल्फाबेट को दिखाया.

कल्पना : तो दोस्तों आज हमारे बीच दो लोग व्रत रख कर बैठे हैं मगर किसके लिए ये हमें अभी तक पता नहीं. और जिसका पता है उसने तो व्रत रखना नहीं है. तू तो अपना बिमा करवा hi ले मोहित मजनू तेरा कुछ नहीं हो सकता. तेरी ये गफ तेरी लम्बी उम्र क लिए व्रत नहीं रखने वाली.

मीनल: जब शादी हो जाएगी तब रख लूंगी अभी से क्यों भूखी प्यासी रहूं . न बाबा न मुझसे तो नहीं होगा पता नहीं शादी क बाद भी कैसे रखूंगी

कल्पना : देखा क्या कहा था मैंने, अरे भूख़ड एक दिन भूखे प्यासे रहने से कोई मर नहीं जाता. ये भी तो बैठी हैं तेरे सामने.

मीनल : पता नहीं यार ये दोनों किस मिटटी की बानी हैं. कौन रखता है ये व्रत शादी से पहले. अरे यार काम से काम इतना hi बता दो किसके लिए रखा है व्रत तुम दोनों ने ? कहने को हम सब बेस्ट फ्रेंड्स हैं और तुम लोग ऐसे छुपा रही हो क जैसे हम खा जायेंगे उसे. मेरी तरफ देखो कोई पर्दा नहीं पूरी सचाई सबके सामने ओपनली.

कल्पना : हाँ यार हमें तो बता दो कम से काम . कौन है वो लकी बॉयज जिनके लिए व्रत रखे जा रहे हैं.

रीमा : बॉयज क्या होता है ? बॉय कहो , और कुंवारी लड़कियां भी व्रत रखती हैं माँ ने बताया था. कहते हैं इससे मन चाहा वर मिलता है.

कल्पना : अगर मुझे पता होता तो मैं भी रख लेती पर क्या करूँ बताने क लिए माँ नहीं है न.

राधा : ऐसा मत कहो कल्पना, माँ ने कहा था न क तुम उन्हें माँ कह सकती हो. कुछ भी बात हो माँ से कर लिया करो

कल्पना : तू नहीं बता सकती थी क तू व्रत रखने वाली है ? अब एक साल वेट करना पड़ेगा. वैसे तुमने किसके लिए रखा है.

राधा : अपने राज कुमार क लिए जिसके साथ मैं अपनी ज़िन्दगी बिताने वाली हूँ. जिसके लिए मैंने जनम लिया है. ये साथ जन्मो जन्मो का है.

शिवानी: अरे वह यार इतनी डीप फीलिंग. तू सच में सब से अलग है. अब बता भी दे क कौन है वो?

राधा : अभी बताया तो है मेरा राज कुमार इस राधा का कृष्णा. जब वो मुझे मिल जायेगा तब सबको बता दूंगी .

कल्पना : मतलब तू भी ख्वाब hi देख रही है.

नेहा दीदी : राधा को उसकी पसंद का hi लड़का मिलेगा देख लेना

रीमा : और मैं दीदी ?

नेहा दीदी : तुम दोनों एक जैसी hi हो , तुम दोनों को तुम्हारी पसंद का hi लड़का मिलेगा.

मीनल : ये न हो क दोनों एक जैसी हैं तो दोनों लड़का भी एक hi पसंद कर लें

रीमा : अगर ऐसा हुआ तो मैं राधा क साथ ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार कर लुंगी .

शिवानी/ शालू / कल्पना / मीनल : हैंण्ण्ण्न ???

रीमा : राधा मेरी दोस्त hi नहीं मेरी बहिन जैसी है. इसके साथ मैं साडी ज़िन्दगी ख़ुशी ख़ुशी रह लुंगी. बस इसे ऐतराज़ न हो

राधा : मेरी लिए भी तुम बहिन जैसी hi हो और बेस्ट फ्रेंड भी , हमारी दोस्ती हमेशा ऐसी hi रहेगी

नेहा दीदी : भगवन करे तुम दोनों क बीच कभी कोई न आये.

मीनल : आ तो चूका है देखो ये बीच में बैठा है पहलवान.

रीमा : ये कहाँ बीच में है ? ये तो हमारे साथ hi जुड़ा हुआ है. क्यों राधा सही कहा न ?

राधा : हम्म अमित अलग कहाँ है ? ये तो मेरे .... हमारे साथ hi है.

नेहा दीदी : ये शीना आज कहाँ है नज़र नहीं आ रही ?

रीमा : दीदी को कुछ काम था तो वो आज नहीं आयी .

इसी तरह बातें चलती रही और मैं बीच बीच में रीमा को टेबल क नीचे छेड़ देता. रीमा ने जो कुछ भी कहा था मुझे समझ नहीं आया था पर राधा क साथ उसका जुड़ाव काफी स्ट्रांग हो गया था. लेक्चर ख़तम होने क बाद सब अपनी अपनी क्लास में चले गए. लेक्टर्स ख़तम होने क बाद जब हम साइंस ब्लॉक की तरफ जा रहे थे तो मैंने कल्पना से अकेले में बात की

अमित : कल्पना मुझे तुम्हारी मदद की ज़रूरत है.

कल्पना : कहो क्या कर सकती हूँ मैं तुम्हारे लिए?

अमित : वो बात ऐसी है क मेरी एक दोस्त थी स्कूल में . मंजरी नाम था उसका . कुछ महीने पहले वो और उसके बापू दोनों की एक साथ मौत हो गयी थी . मौत की वजह एक्सीडेंट बताई गयी थी. पर मुझे शक है क सचाई कुछ और है

कल्पना : तुम्हे ऐसा क्यों लगता है .

अमित : मैं परसों मंजरी की माँ से मिला था......

फिर मैंने कल्पना को सब बता दिया जो भी बातें हुई और जो मैंने नोटिस किया.

कल्पना : हम्म पक्का कुछ तो गड़बड़ ज़रूर है. मैं पापा से बात करती हूँ वो ज़रूर मंजरी को इंसाफ दिलवाएंगे.

अमित : थैंक्स कल्पना मैं तुम्हारा एहसान....

कल्पना: इससे आगे कुछ बोलै तो मुँह तोड़ दूंगी. दोस्त भी कहते हो और ऐसी 3रद क्लास बातें भी करते हो. मुझे ख़ुशी होगी अगर मंजरी को इंसाफ मिलेगा तो. तुम सच में बहुत अचे हो , मंजरी दुनिया में नहीं है फिर भी तुम दोस्ती निभा रहे हो. ी ऍम प्राउड ऑफ़ यू.

छुट्टी होते hi नेहा दीदी मीनल रीमा और राधा भी आ गयी.

राधा : क्या तुम मेरे साथ चलोगे ?

अमित : कोई ज़रूरी काम है क्या ?

राधा : आज तुम गाओं जाने वाले हो तो इस लिए गाओं जाने से पहले एक बार हमारी तरफ भी आ जाओ माँ भी खुश होगी .

अमित : ाचा ठीक है चलो .

हम अभी पार्किंग में hi थे क निधि दीदी की कॉल आने लगी.

अमित : जी दीदी कहिये

निधि दीदी : घर पहुँच गए या अभी कॉलेज में हो?

अमित : अभी अभी छुट्टी हुई है दीदी कहिये

निधि दीदी : आज गाओं जा रहे हो तुम ?

अमित : जी दीदी

निधि दीदी : मुझे भी गाओं जाना है इस लिए अपने साथ लेते हुए जाना.

अमित : ाचा दीदी ठीक है मैं आ जाऊंगा



दीदी से बात करने क बाद मैंने बाइक निकली और राधा मेरे पीछे बैठ गयी . फिर हम घर की तरफ चल पड़े .
 
भाई आज अपडेट दूंगा बस थोड़ा सा काम और करना है इस पर
 
अपडेट 176



‘ आज तुम हमारे यहाँ नहीं रुक सकते ? गाओं कल चले जाना. ‘

कॉलेज से घर जाते वक़्त राधा मुझसे बात करने लगी. वो मुझसे बात करने क लिए आगे होकर मेरी पीठ से चिपक कर बात कर रही थी अपना मुँह मेरे कानो क पास लती हुई.

अमित : तुम्हे पता है न माँ मेरा इंतज़ार करती रहती है क मैं कब घर आऊंगा. 5 दिन यहाँ रहने क बाद तो घर जाना होता है अगर नहीं गया तो माँ को बुरा लगेगा.

राधा : हम्म बड़ी ममी तुमसे बहुत प्यार करती हैं. वैसे अगर आज रुक जाते तो ... चलो कोई बात नहीं . निधि दीदी आज गाऊं किस लिए जा रही हैं? तुम्हे पता है कुछ ? आज तो करवा चौथ का व्रत है . और दीदी ने ज़रूर रखा होगा . वो तो हर दाल रखती हैं.

अमित : मुझे क्या पता क्यों जा रही हैं? खुद hi पुछलो. वैसे आजकल रीमा क साथ बड़ी दोस्ती हो गयी है तुम्हारी.

राधा : तुम्हे ाचा नहीं लगा क्या ? अगर तुम्हे कोई ऐतराज़ है तो बता दो. वैसे वो बहुत अछि है और मेरे साथ hi रहती है अब तो सारा दिन कॉलेज में और फ़ोन पर भी हम रोज़ बात करते हैं. पता है आंटी भी बहुत अचे हैं. उनसे भी बात होती रहती है. वो तो मुझे घर आने को कहती रहती है पर मैं hi नहीं जाती. हाँ वो ज़रूर आ जाती है कभी कभी.

अमित : ये तो बहुत अछि बात है क तुम्हे अछि दोस्त मिल गयी . और मुझे ऐतराज़ क्यों होगा? रीमा एक अछि लड़की है मैं जनता हूँ और आंटी भी अछि हैं . तुम्हारी रीना से बात नहीं हुई कभी ?

राधा : वो घर होती कहाँ हैं. वैसे वो हमसे बड़ी हैं , निधि दीदी जितनी बड़ी तो हैं hi तो तुम उन्हें दीदी क्यों नहीं कहते ?

अमित : है है है खुद hi पूछ लेना उनसे. उन्होंने hi ऐसा करने को कहा है.

राधा : हाँ वो भी बहुत अछि हैं.

बातें करते हुए हम घर पहुँच गए. दिव्या मौसी ने दरवाज़ा खोला तो मुझे देखते hi वो खुश हो गयी और मुज्जे गले लगा लिया.

दिव्या मौसी : अमित !!!! तुम आ गए . मुझे तो लगा था तुम नहीं आओगे

राधा : आया नहीं मैं लायी हूँ इसे . ये अपने आप कहाँ अत है .

दिव्या मौसी : जो भी ये आया तो सही. आओ अंदर आओ.

दिव्या मौसी नार्मल hi लग रही थी . मतलब आज करवा चौथ था और हर कोई सज संवर रही थी मगर दिव्या मौसी क लिए जैसे ये मॉल दिन hi हो. मुझे ये अजीब लग रहा था.

अमित : मौसी ये क्या , आज करवा चौथ है और आप ऐसे hi सिंपल बानी हुई हैं आज भी.

दिव्या मौसी : ाचा ! तो क्या करना चाहिए मुझे ?

अमित : आज तो आपको दुल्हन की तरह सजना चाहिए , लाल सदी लाल चूड़ियां आँखों में काजल बालों में गजरा और हाथों में मेहँदी. बिलकुल दुल्हन की तरह.

दिव्या मौसी : तुम्हे बड़ा पता है क क्या क्या करना चाहिए. कुछ ज्यादा hi नज़र रखता है तू सब पर हाँ ???

दिव्या मौसी ने मज़ाक में ये बात कही तो मैं झेंप गया और राधा भी हसने लगी.

अमित : क्या मौसी आप मेरा मज़ाक बना रही हैं. वो तो आज रीता मौसी को देखा था ऐसे तो मैंने कहा . क्या आप ने व्रत नहीं रखा आज ?

दिव्या मौसी : रखा है पर सजने संवारने की ज़रूरत क्या है? आखिर किस लिए करूँ ये सब ? राधा क पापा तो बहार हैं तो फिर क्या फायदा उन सब चीज़ों का? तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए पानी ले कर आयी

दिव्या मौसी की बातों से उनकी मायूसी साफ़ झलक रही थी. वो मुझे बैठने का बोलकर किचन में चली गयी . राधा ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने कमरे में ले गयी .

राधा : यहाँ बैठो तुम

राधा ने मुझे अपने बीएड पर बिठाते हुए कहा और अपने मोबाइल से मेरी फोटो निकलने लगी.

अमित : ये क्या कर रही हो ?

राधा : देखते नहीं फोटो खिंच रही हूँ

अमित : वही तो पूछ रहा हूँ क किस लिए खिंच रही हो ?

राधा : मेरी मर्ज़ी , तुम्हे कोई ऐतराज़ है ?

अमित : नहीं , खिंच लो मेरा क्या जाता है.

‘ तो तस्वीरें खींची जा रही हैं ‘ दिव्या मौसी पानी का गिलास हाथ में लिए कमरे में आ गयी.

राधा : माँ ये पकड़ो आप हम दोनों की फोटो खींचो

दिव्या मौसी : उसे पानी तो पिने दे.

राधा : पानी बाद में पि लेगा न . मैंने कौन स पानी पिया है सुबह से.

अमित : लाओ मौसी मुझे पकड़ो आप फोटो खिंच दो पहले वर्ण ये नाराज़ हो जाएगी

मेरी बात पर राधा ने पहले मुँह बनाया फिर हसने लगी. मैंने मौसी क हाथ से गिलास पकड़ कर साइड में रख दिया . राधा मुस्कुराती हुई मेरे पास बैठ गयी . मेरे साथ जुड़ कर बैठते hi राधा शर्माने लगी. दिव्या मौसी ने हम दोनों की तस्वीरें खींची और फिर मैंने राधा को दिव्या मौसी क साथ मेरी तस्वीर खींचने को कहा .

दिव्या मौसी : अब तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए खाना बनती हूँ.

अमित : नहीं मौसी आप रहने दो , आपने व्रत रखा है ऐसे में मैं आपसे खाना नहीं बनवाऊंगा. पर एक बात आप मेरी मानेंगी?

दिव्या मौसी : अगर तू खाना खायेगा तभी मानूंगी वर्ण नहीं.

अमित : मौसी !! ाचा ठीक है पर फिर आपको भी मेरी बात माननी पड़ेगी .

दिव्या मौसी : हाँ हाँ मन लुंगी चल अब तुम दोनों बैठो मैं खाना बना क तुम्हे आवाज़ दे दूंगी .

दिव्या मौसी इतना कह कर कमरे से निकल गयी.

राधा : तो क्या कहना है माँ से तुमने ?

अमित : तुम्हे ये ठीक लगता है ? आज करवा चौथ है सब औरतें सज संवर कर रहती हैं इस दिन और मौसी .....

राधा : तुमने पहली बार देखा है न इस लिए तुम्हे ऐसा लग रहा है. वो तो हमेशा hi ऐसे रहती हैं. उनकी बात भी सही है. पापा तो यहाँ होते नहीं और आते भी तो 2-2 साल बाद हैं. तो फिर तैयार हों भी तो किसके लिए . उनकी ज़िन्दगी कितनी अकेली उदास है ये तुम नहीं जानते .

राधा और मैं कुछ देर बातें करते रहे और फिर दिव्या मौसी ने मेरे लिए कहाँ बना लिया . मौसी क हाथ का खाना हमेशा की तरह स्वादिष्ट था. खाना खाने क बाद मैंने मौसी को अपने पास बिठा लिया.

अमित : अब आपको मेरी बात माननी पड़ेगी

दिव्या मौसी : हाँ तो कहो क्या कहना है तुम्हे .

अमित : आज करवा चौथ है और आप ऐसे hi बैठी हुई हैं. मुझे बिलकुल भी ाचा नहीं लग रहा. आपको भी सुहागन की तरह सजना होगा. आप ऐसे उदास रहना छोड़ दीजिये अब. मैंने पहले भी कहा था. अब आपको खुश रहना होगा. अपने लिए भी और हमारे लिए भी.

दिव्या अमित की ये बात सुन कर कुछ पल उसके आँखों को देखती रही. अमित की अपने प्रति इतनी परवाह और उसके द्वारा उसे है से तैयार होने क लिए कहना दिव्या को ाचा लगा था . पर अपने पति की इतने सैलून से की गयी बेरुखी की वजह से वो कभी बन संवर क नहीं रहती थी और अब तो उसका मन भी नहीं होता था ऐसा कुछ करने का बस कभी कोई फंक्शन होता तो दिखने क लिए थोड़ा बहुत कर लेती थी. पर औरत क मन में जो भाव होता है अपने मर्द क लिए तैयार होना सजना संवारना वो तो जैसे ख़तम hi हो चूका था. पर पिछले कुछ समय से न चाहते हुए भी जैसे दिव्या का मन अमित क प्रति आसक्त होने लगा था इसकी वजह से अब अमित का उसे तैयार होने क लिए कहना भी जैसे अमित का प्यार hi लगा उसे.

दिव्या मौसी: अगर तू मुझे वैसा hi देखना चाहता है तो ठीक है. मैं तेरी ओछा ज़रूर पूरी करुँगी .

अमित : तो ठीक है आप तैयार हो जाइये मैं तब तक किसी से मिल कर अत हूँ.

राधा : अब किस से मिलना है ??

अमित : बस अभी अत हूँ एक छोटा सा काम है

इतना कह कर मैं घर से निकल गया . असल में रीमा ने और मैंने अकेले मिलने का प्रोग्राम बनाया था. मैंने घर से निकलते hi रीमा को फ़ोन किया तो उसने बता दिया क वो कहाँ पर मेरा इंतज़ार कर रही है. मैं बाइक को हवा में उडाता जल्दी से उस जगह पहुँच गया. रीमा कार में hi बैठी थी. मेरे आते hi वो कार से उतरी और हम दोनों इस बड़े से पार्क क अंदर चल दिए . दोपहर की वजह से सिवाए कुछ प्रेमी जोड़ों क और कोई नज़र नहीं आ रहा था. मैं रीमा को लिए एक घनी छाया वाले पेड़ क निचे बैठ गया.

अमित : तुम आज बहुत अछि लग रही हो रीमा. दिल कर रहा है क तुम्हे अपनी आँखों में समां कर ऑंखें बंद कर लूँ और फिर कभी ऑंखें न खोलूं .

रीमा : आज hi अछि लग रही हूँ , रोज़ अछि नहीं लगती क्या तुम्हे ?

अमित : सच कहूं तो हर गुज़रते दिन क साथ मैं खुद को तुम्हारे साथ जुड़ता हुआ महसूस कर रहा हूँ और इसी लिए कभी कभी दर भी लगता है क कहीं तुम्हे कोई मुझसे छीन न ले

रीमा : मुझे तुमसे कोई अलग नहीं कर सकता . मेरी हर साँस तुम्हारे hi नाम है. सिर्फ मौत hi मुझे .....

अमित : शहहहहह ऐसा कभी मत कहना. कभी भी नहीं. तुम जानती हो न क ज़िन्दगी मेरे साथ ये खिलवाड़ पहले भी कर चुकी है. अगर फिर से वो सब गया तो मैं भी ज़िंदा नहीं रहूँगा.

रीमा: ी ऍम सॉरी , मैं कभी ऐसा नहीं कहूँगी . पर तुम भी वडा करो क तुम कभी ऐसा नहीं सोचोगे , चाहे कुछ भी हो. तुम्हारे साथ बहुत से लोग जुड़े हुए हैं और हर कोई तुम्हे चाहता है. किसी एक क चले जाने से बाकि सब को सजा देने का हक़ तुम्हे नहीं है.

अमित : पर इस दिल को कैसे समझों ? ये और दर्द सेह नहीं पायेगा.

रीमा : इसे दर्द होने भी नहीं दूंगी मैं . मैं तुम्हे इतना प्यार करुँगी इतना प्यार करुँगी क तुम्हे कभी कोई दर्द महसूस hi नहीं होगा .

अमित : मैं भी यही चाहता हूँ क मैं तुम्हारे सिवा कुछ भी यान न रखूं. वैसे ये आज व्रत रखने का ख्याल कहाँ से आया तुम्हे ?

रीमा : कहाँ से मतलब ? जब से तुम्हे चाहने लगी हूँ तो अपने आप hi हर चीज़ जो तुम्हे अछि लगे उसे मैं अपनाने लगी हूँ. तुमने देखा नहीं क मैंने जीन्स T-shirt कब की छोड़ दी जो तुम्हे पसंद नहीं . व्रत भी माँ से सुना था तो रख लिया. वैसे तो घर में कोई नहीं रखता . क्यूंकि पापा तो है नहीं और ताई जी रखती नहीं. माँ को अभी नहीं पता और न hi मैंने दीदी को बताया है . पर शीना दीदी को तो पता चल hi जायेगा पता नहीं क्या पूछेंगे वो. वैसे राधा ने भी तो व्रत रखा है ,तुम्हे कैसा लगा ?

अमित : अब मैं उसमे क्या कह सकता हूँ? उसकी मर्ज़ी है जो चाहे करे. एक बात बताओ तुम आज बड़ा उसका नाम ले ले कर बात कर रही थी और ये क्या है साडी ज़िन्दगी साथ रहने वाली बात ?

रीमा : तुम न बड़े बुद्धू हो. तुम्हे कुछ नज़र नहीं अत. जब समझ में आएगा तो तब देखूंगी क्या हालत होती है तुम्हारी.

अमित : तुम किस बारे में बात कर रही हो?

रीमा : वो सब छोडो, मैंने आज व्रत रखा है तुम्हारे लिए तो मुझे क्या डोज ?

अमित : हुकम करो क्या चाहिए ? तुम्हारे लिए तो जान भी हाज़िर है

रीमा : जान तो पहले hi मेरी है और दिल भी. मुझे जो चाहिए वो तो तुम देते नहीं हो.

अमित : क्या चाहिए जो मैं नहीं देता ?

रीमा : मैंने कहा था न क मुझे एक बार अपनी बना लो . मैं वो पहले मिलान को पाना चाहती हूँ और तुम हो क दूसरों को प्रसाद बाँट ते फिरते हो और मुझे हर बार बहाना बना देते हो.

अमित : चलो उठो आज hi तुम्हारी ख्वाहिश पूरी कर देता हूँ.

रीमा : अरे अरे ये क्या बात हुई , ऐसे थोड़ी न . तुम्हे पता नहीं आज व्रत रखा हुआ है मैंने तुम्हारी सलामती क लिए और तुम

अमित : तुम्ही ने तो कहा , अब तुम आज नहीं करना चाहती तो फिर तुम्हारी मर्ज़ी दुबारा मैं नहीं कहने वाला .

रीमा : ये तुम्हारा आखिरी फैसला है?

अमित : हाँ

रीमा : तो ठीक है चलो फिर . ले चलो जहाँ तुम्हारा दिल करे

मैं रीमा क साथ मज़ाक कर रहा था मुझे पता था उसने व्रत रखा हुआ है इस लिए कभी मानेगी नहीं पर अब उसने मुझे भी हैरान कर दिया था इतना कह कर.

अमित : तुम्हारा दिमाग तो ठीक है ? सुबह से पानी तक नहीं पिया तुमने और ये .... मरना है क्या ?

रीमा : तुम्हारे लिए किसी भी हद तक जा सकती हूँ. अगर तुम आज hi करना चाहते हो तो आज hi सही

अमित : चुप , तुम्हे प्यार करता हूँ मैं कोई हवस की बात नहीं है ये. और तुम्हारे साथ मैं तभी करूँगा जब हम दोनों एक हो जायेंगे

रीमा : पर मेरे दिल को चैन नहीं है अमित प्लीज मेरी बात भी तो समझो. एक अंजना सा दर मुझे लगा रहता है कहीं मैं तुम्हे खो न दूँ. प्लीज एक बार मुझे अपनी बना लो उसके बाद मैं तुम्हे दोबारा वो सब करने को नहीं कहूँगी. प्लीज मेरी इतनी सी बात मन लो .

अमित : पर ...

रीमा : प्लीज ....

अमित : ाचा ठीक है , पर हम वो सब फुर्सत में करेंगे . कोई जल्दबाज़ी नहीं.

रीमा : खुश होते हुए ) जब तुम कहो जैसे तुम कहो. बस मुझे एक बार अपनी बना लो ताकि मेरे अंदर का दर ख़तम हो जाये.

अमित : तुम्हे डरने की ज़रूरत नहीं है. तुम्हे तो वैसे भी खुद से अलग नहीं होने दूंगा . चलो अब मुझे प्यारी सी किश दो

रीमा : ुँहुँणन , आज नहीं

अमित : क्यों ?

रीमा : आज मेरा व्रत है. जब तक व्रत पूरा नहीं होता तब तक no किश

अमित : ये तो नाइंसाफी है, मेरे लिए व्रत रखा है और मुझे hi किश नहीं डौगी.

रीमा : क्यूंकि मैं अगर किश करुँगी तो तुम्हारे होंठों का रास जायेगा न मुँह में ? इससे व्रत टूट जायेगा. अगर किश चाहिए तो शाम को आ जाना व्रत खुलवाने. और चाहे तो जो मर्ज़ी कर लेना

अमित : धत्त बेशरम फिर से शुरू हो गयी, चलो आज की किश उधर रह गयी. मुआअह्ह्ह

मैंने रीमा क गलों पर किश कर दी.

रीमा : ये क्या था ?

अमित : ये तो ब्याज है मूल फिर ले लूँगा

रीमा : बदमाश अभी बताती हूँ तुम्हे ....

कुछ देर और हम दोनों साथ रहे और फिर रीमा चली घर चली गयी . मैं रीमा से मिलने क बाद मंजू म घर आ गया . बाइक की आवाज़ सुनते hi मंजू क ने दरवाज़ा खोल दिया. मंजू म अभी भी उन्ही कपड़ों में थी जिनमे वो कॉलेज आयी थी.

अमित : आप ने कपडे नहीं बदले अभी तक ?

मंजू म : तुम्हारा hi इंतज़ार कर रही थी. अंदर आओ पहले

मैं अंदर आया तो मंजू म मुझे अपने साथ अपने कमरे में ले आयी . मुझे अपने सामने खड़ा करके मंजू म ने मेरी आँखों में देखा और अपनी सदी का पल्लू अपने सर पर लेते हुए मेरे पाऊँ छूने लगी. मगर मैं अचानक पीछे हैट गया

अमित : ये क्या कर रही हैं आप ?

मंजू म: वही कर रही हूँ जो मुझे करना चाहिए. तुम्हे मैं अपना सबकुछ मानती हूँ. इस लिए आज तुम्हे अपना पति मानकर तुम्हारे पाऊँ छूना चाहती हूँ . तुम्हारे पाऊँ की धुल से अपनी मांग भरना चाहती हूँ. क्या तुम मुझे ऐसा नहीं करने डोज ? क्या तुम मुझे पति का प्यार नहीं डोज?

अमित : मैंने तो पहले hi आपको वो सब दिया है न . तो फिर भला इस सब की क्या ज़रूरत है ?

मंजू म : ज़रूरत है , क्यूंकि मैं चाहती हूँ क मैं तुम्हे पूरी तरह से अपने पति क रूप में चहुँ ताकि ज़रा सी भी गुंजाईश न रहे किसी और बात की . तुम मुझे पत्नी क रूप में स्वीकार करते हो न ? अगर नहीं भी करते तो कोई बात नहीं बस अपने चरणों में थोड़ी सी जगह दे दो इतना hi बहुत है.

इतना कह कर मंजू क फिर से मेरे पाऊँ में गिर गयी और पाऊँ छूने क बाद अपनी मांग में लगाने लगी मैंने उनको बाँहों से पकड़ कर उठाया और अपने गले से लगा लिया.

अमित : आपका मेरा रिश्ता मैं नहीं जाता क्या है पर मैं आपको अपने पाऊँ में नहीं देखना चाहता . आपकी जगह मेरे दिल में है. आप हमेशा मेरी hi रहोगी , मैं आपको कभी खुद से दूर नहीं करूँगा.

मंजू म: मैं भी बस तुम्हारी हूँ और तुम्हारे लिए hi जियूँगी हमेशा . जानते हो मैं व्रत रखना चाहती थी आज पर फिर सोचा कहीं तुम बुरा न मन जाओ

अमित : आप की किसी बात का बुरा मन सकता हूँ मैं भला.?

मंजू म : आज तुम गाओं जा रहे हो न ?

अमित : हम्म्म

मंजू म : कितने दिन हो गए मैं तुम्हे टाइम नहीं दे प् रही न? उस दिन भी शीना आ गयी और तुम अधूरे रह गए

अमित : उससे कोई फरक नहीं पड़ता. आप ऐसा कुछ मत सोचो. वैसे कभी कभी मैं भी ये सोचता हूँ क मैं आपको वक्त नहीं दे प् रहा.

मंजू म : जितना भी वक़्त तुम देते हो मैं संतुष्ट हूँ. जानती हूँ क तुम कितना बिजी रहते हो.

अमित : फिर भी मैं आपको उल्टी खुही नहीं दे प् रहा जितनी आपको मिलनी चाहिए

मंजू म : मेरी चिंता मत करो , जितनी ख़ुशी तुमने मुझे अब दे दी है उसके लिए तो मैं कितने सालो से तड़प रही थी.

अमित : मगर मैं इससे संतुष्ट नहीं हूँ. वैसे आज आप कुछ ज्यादा hi हसीं लग रही हैं और इस मौके पर आपको इनाम तो मिलना hi चाहिए . उम्म्म्म

इतना कह कर मैंने मंजू म क होंठों पर अपने होंठ रख दिए. मंजू म भी मेरा साथ देने लगी . मैंने मंजू म की गर्दन को अपने हाथों से सहलाते हुए किश करना जारी रखा. होंठों पर किश करने क बाद मैंने उनकी गर्दन पर किश किया और उनकी सदी का पल्लू हटा कर उनकी छाती पर भी किश किया. मंजू म इतने में hi गरम हो कर सिसकारियां छोड़ने लगी. पर मैं इससे आगे नहीं बढ़ना चाहता था तो रुक गया.

मंजू म : रुक क्यों गए ? अभी शीना क आने में टाइम है

अमित : नहीं बस इससे ज्यादा नहीं . मुझे अभी मौसी की तरफ जाना है और फिर दीदी को लेकर घर भी जाना है. जब वापिस आऊंगा तब आगे करेंगे .

मंजू म : जैसी तुम्हारी मर्ज़ी .

अमित : ये चूड़ियां आपके हाथों में बहुत अछि लग रही हैं . कभी कभी पेहेन लिया करो आप . रोज़ तो मुश्किल है .

मंजू म : मैं तो पूरी तरह तुम्हारी हूँ जब जैसा कहोगे वैसी बन जाउंगी.

अमित : ाचा अब इजाज़त दीजिये फिर आऊंगा . मुहाः

मैंने मंजू म क होंठों पर एक किश की और चल दिया वापिस दिव्या मौसी की तरफ . जब मैं वापिस दिव्या मौसी क घर पहुंचा तो दरवाज़ा राधा ने hi खोला. राधा क चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान थी और आँखों में ख़ुशी की झलक.

अमित : क्या बात है बड़ी खुश नज़र आ रही हो ?

राधा : हम्म्म अंदर तो आओ फिर तुम भी खुश हो जाओगे.

अमित : ऐसी क्या बात है ?

राधा : खुद hi देख लो

मैं राधा क साथ अंदर आया तो सामने दिव्या मौसी लाल आदि में दुल्हन की तरह सजी संवरी कड़ी थी. मौसी को देखते hi मैं वहीँ खड़ा रह गया . दिव्या मौसी की खूबसूरती आज और भी बढ़ गयी थी. मुझे अपनी तरफ देखते हुए पाकर मौसी सच मच शर्मा गयी. मौसी ने पूरा हार श्रृंगार किया था बस मेकअप उतना नहीं था पर फिर भी वो कमल लग रही थी. वैसे भी उन्हें मेकअप की ज़रूरत कहाँ थी.

राधा : बस बस इतना मत घूरो , नज़र लगाओगे क्या माँ को?

राधा क ऐसा कहने पर दिव्या मौसी तो शर्म से ज़मीन में hi ग्रह जाने वाली हालत में हो गयी. जबकि मुझे भी अपनी हालत पर शर्म आ गयी. सच में दिव्या मौसी सब से ज्यादा खूबसूरत लग रही थी ऊपर से उनकी सादगी और हाय तो सोने पे सुहागा थी.

अमित : मौसी सच में आप बहुत खूबसूरत हो. आप तो राधा से भी ज्यादा खूबसूरत लग रही हो.

मेरी इस बात पर दिव्या मौसी क साथ राधा भी शर्मा गयी.

दिव्या मौसी : शरमाते हुए ) शर्म नहीं अति तुझे ये अब कहते हुए. राधा मुझसे कहीं ज्यादा खूबसूरत है मैं तो बड़ी हो गयी हूँ अब

दिव्या ( मन में ) कैसे मेरी बेटी क सामने hi मुझे ऐसे घूरे जा रहा है . हए राम ये लड़का मुझे पागल कर देगा

राधा : वैसे माँ अमित सही कह रहा है . आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं.

दिव्या मौसी : तू भी इसके साथ मिल गयी मेरी टांग खींचने क लिए

अमित : नहीं मौसी सच में आप बहुत खूबसूरत हैं. बिलकुल किसी देवी सी लग रही हैं आप . मौसा जी कितने किस्मत वाले हैं जो आप उन्हें मिली हैं.

दिव्या मौसी : ज्यादा बाएं न बना तेरी माँ जैसी हूँ मैं और तू मुझसे दिल्लगी कर रहा है

अमित : माँ भी आप जैसी hi लगती होगी न ऐसे सज धज क? काश वो ....

मैं अपनी बात पूरी भी न कर पाया था क दिव्या मौसी ने आगे बढ़ कर मुझे अपने गले से लगा लिया.

दिव्या मौसी : वो तो मुझसे भी अछि थी , मैं उसके जैसी कभी बन hi नहीं पायी . पर तू उसे यद् कर क दुखी क्यों होता है ? मैं हूँ न . मेरे बेटे को कभी कमी महसूस नहीं होने दूंगी मैं माँ की

कुछ देर दिव्या मौसी ने मुझे गले से ऐसे hi लगाए रखा . राधा भी पीछे से दिव्या मौसी से चिपक गयी .

दिव्या मौसी : चलो अब ज़रा है कर दिखाओ मुझे. देख तेरी बात मन ली न मैंने. अब मेरी बात मानेगा न तू ?

अमित : वो तो मैं वैसे भी मानूंगा hi जो आप कहेंगी

दिव्या मौसी : तो हमेशा खुश रहा कर और दामिनी को यद् कर क दुखी मत हुआ कर. अगर कभी उसकी यद् आये तो सीधा मेरे पास आ जाता कर. बैठ यहाँ और बता क्या लेगा.

अमित : आपका प्यार hi बहुत है मौसी और कुछ नहीं चाहिए .

दिव्या मौसी : रद्द जा तेरा मोबाइल तो लेकर आ ज़रा , मेरी फोटो खिंच मेरे बेटे क साथ .

रद्द फ़ौरन दौड़ कर गयी और अपन मोबाइल ले आयी और हमारी कुछ तस्वीरें खींची. कुछ देर मैं मौसी और राधा क साथ बातें करता रहा और फिर निधि दीदी का फ़ोन आने लगा. मैं दिव्या मौसी से इजाज़त ले कर रजनी मौसी क घर चला गया जहाँ निधि दीदी मेरा इंतज़ार कर रही थी.

नैना दीदी : आ गए महाराज ? दीदी कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही हैं.

मैं नैना दीदी क साथ अंदर आया तो रजनी मौसी सामने hi मिल गयी. वो भी आज पूरी आज संवर क तैयार कड़ी थी.

रजनी मौसी : आ गए बीटा , निधि कब स रह देख रही थी.

अमित : नमस्ते मौसी कैसी हैं आप ? वैसे आज तो आप बड़ी अछि लग रही हैं.

मेर मुँह से तारीफ सुन कर रजनी मौसी क चेहरे पर मुस्कान आ गयी और जब मैं उनके पाऊँ छूने लगा तो उन्होंने मुझे अपनी छाती में भींच लिया. रजनी मौसी क बड़े बड़े चुचों में मेरा मुँह जब लगा तो मुझे उनकी सॉफ्टनेस का एहसास हुआ. मुझे रीता मौसी की बातें एक डैम से यद् आ गयी और मैं कुछ देर ऐसे hi रजनी मौसी क चुचों में मुँह लगाए कहर रहा .

‘ कहाँ रह गए थे इतनी देर लगा दी तुमने ?’ निधि दीदी की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी तो मैंने उनकी तरफ देखा. आज तो एक क बाद एक मेरे ऊपर बम फुट रहे थे. निधि दीदी भी आज कहर बरपा रही थी. हमेशा hi सिंपल सी नज़र आने वाली निधि दीदी आज अप्सरा बानी हुई थी. बाल भी एक डैम स्ट्रेट किये हुए थे चेहरे पर हल्का मेकअप आँखों में काजल , होंठों पर लिपस्टिक एक बांह में चूड़ियां और नाक में नाथ डाली हुई थी. एक हाथ पर मेहँदी भी लगी हुई थी. निधि दीदी की नोसेपिन में लगा वो चमकदार पत्थर का टुकड़ा हीरे की तरह चमक रहा था. लाल सूट में वो बिलकुल रेड रोज hi लग रही थी. मैं तो उनकी खूबसूरती क मायाजाल में कैद hi हो गया कुछ पल क लिए . निधि दीदी की नज़रें मुझे देखते hi अपने आप झुक गयी . मेरे मुँह से तो शब्द hi नहीं निकल रहे थे.

नैना दीदी : ोये कहाँ खो गया तू ? देख माँ ये भी हैरान हो रहा है निधि दीदी को देख कर. दीदी आज सच में बहुत खूबसूरत लग रही हैं. पता नहीं दीदी को ये गाओं जाने की क्या पड़ी है. आज तो हमें कहीं घूम कर आना चाहिए .

निधि दीदी : घूमने तो हम कभी भी जा सकते हैं न . पर मैं आज गाओं जाना चाहती हूँ. मेरा दिल कर रहा है.

नैना दीदी : पर दीदी आप ने व्रत भी तो रखा है न.

निधि दीदी : तो क्या हुआ ? व्रत मैं गाओं में खोल लुंगी जा कर. वैसे भी वहां मंदिर तो है hi उधर भी हो आउंगी .

रजनी मौसी : अरे तुम अभी तक खड़े हो , चलो बैठो मैं तुम्हारे लिए कुछ लती हूँ.

अमित : अरे नहीं मौसी , अगर अभी और देर की तो अँधेरा हो जायेगा. और फिर दीदी को भी तो साथ ले कर जाना है. चलें दीदी ?

निधि दीदी : (शरमाते हुए ) चलो

मैं निधि दीदी को लेकर बहार आ गया . रजनी मौसी और नैना दीदी दरवाज़े तक हमें बहार छोड़ने आयी. मैं निधि दीदी को पीछे बिठा कर चल दिया. घर से थोड़ा दूर आते hi दीदी का हाथ मेरे कंधे से उतर कर मेरी कमर पर आ गया .

निधि दीदी : चुप क्यों हो कोई बात करो न .

अमित : दीदी आज आप बहुत खूबसूरत लग रही हो . सच में , मेरे पास शब्द नहीं हैं आपकी तारीफ क लिए .

निधि ( मन में ) तुम्हारे लिए hi तो सजी हूँ , आज का व्रत तुम्हारे हाथों से hi पनिबपिंकर तुड़वाना चाहती हूँ मैं इसी लिए तुम्हारे साथ आ रही हूँ. और ऐसा लग रहा है जैसे आज अपने ससुराल जा रही हूँ. काश मेरा ये सपना पूरा हो जाये.

निधि दीदी : तुम्हे ाचा लगा मेरा ऐसे तैयार होना ?

अमित : बहुत ाचा , और किसे ाचा नहीं लगेगा? आज आप इतनी सुन्दर लग रही हैं क कोई भी आपको देख कर दीवाना हो जाये

निधि दीदी : पर तुम तो हुए नहीं

अमित : मैं कैसे हो सकता हूँ दीदी आप मेरी बहिन जो हैं.

निधि दीदी : और अगर बहिन न होती तो ?

अमित : तो ..... ये आप क्या पूछ रही हैं दीदी कोई और बात करो

निधि दीदी : बताओ न , अगर मैं बहिन न होती तो क्या तुम मुझे पसंद करते ?

अमित : मैं इस सवाल का जवाब नहीं दे सकता .

निधि दीदी : पर मुझे जवाब चाहिए , तुम्हे मेरी कसम

अमित : ये क्या दीदी , हर बात पर कसम .

निधि दीदी : मुझे जवाब चाहिए बस

अमित : ाचा ठीक है . दीदी आप सच में बहुत हसीं हैं. आप इतनी खूबसूरत है क कोई भी आपका दीवाना हो सकता है . और आप की सादगी तो जैसे एक वरदान hi है . बहुत बड़ा किस्मत वाला होगा जिसकी किस्मत में आप होगी .

निधि ( मन में ) वो किस्मत वाले तुम hi तो हूँ बुद्धू. बस एक बार कह कर तो देखो . तुम्हारे कदमो में खुद को बिछा दूंगी .

निधि दीदी : तुम मुझे इतना पसंद करते हो ?

अमित : पसंद तो करता हूँ दीदी पर एक भाई की नज़र से .

निधि दीदी : तुम सच में बहुत प्यारे हो . ी लव यू .

इतना कह कर दीदी ने पीछे से hi मुझे अपनी बाँहों में भर लिया. उनके बदन से आ रही खास महक मेरी सांसों में घुलने लगी और एक पल क लिए तो उनका ये एहसास मेरे दिलो दिमाग में hi छ गया पर फिर मैंने खुद को संभाला

अमित : क्या कर रही हो दीदी हम सड़क पर हैं .

ऐसे hi बातें करते हम गाओं पहुँच गए. घर पर करवा चौथ क साथ एक और समस्या हमारा इंतज़ार कर रही थी .

दूसरी तरफ आज शीना कॉलेज इस लिए नहीं आयी थी क्यूंकि आज उसक बाप बलजीत राइ वापिस घर आ रहा था काफी समय बाद. रुपाली ने पहले hi बीमार होने का बहाना कर क बिस्तर पकड़ लिया था रीमा क कॉलेज जाते hi. शीना को तो पता चल hi चूका था क उसका बाप भी उसकी चची रुपाली का शोषण करता है इस लिए उसने भी अपनी चची की मदद करने की ठान ली. उसने अपनी माँ से भी के दिया क चची को वायरल बुखार है इस लिए कोई उनके कमरे में न जाये. बलजीत राइ अपने दाल बल क साथ घर आया और इतने महीनों बाद अपनी लाड़ली को देख कर बहुत खुश हुआ. वो चाहे कैसा भी था पर अपने बच्चों से बहुत प्यार करता था . उसके दोनों बचे hi उसके वारिस थे चाहे वो अपने भाई की बीवी और भतीजी पर गन्दी नज़र रखता था बाकि परायी औरतों की तरह.

बलजीत राइ : कैसी हो माय प्रिंसेस, आँखें तरस गयी थी अपनी डॉल को देखने क लिए.

इतने महीनो बाद बलजीत राइ अपनी बेटी को गले लगते हुए प्यार से बोलै. मगर शीना क अंदर अब अपने बाप क लिए वो प्यार वो सम्मान नहीं रहा था फिर भी वो अपने अंदर क भाव चिपटी हुई चेहरे पर मुस्कान लिए उससे मिली .

शीना : ी सो हैप्पी तो सी यू डैड. शुक्र है आपको अपनी बेटी की यद् तो आयी .

बलजीत राइ : यद् तो उसे किया हटा है जिसे भूल गए हो. तुम तो मेरी धड़कन हो मेरी पारी . तेरा भाई पता नहीं क्यों इतने दिनों से जर्मनी में जाकर बैठा है. तुम दोनों बच्चों को देखने क लिए तो ऑंखें तरस जाती हैं मेरी. वेयर इस योर माँ?

शीना : माँ कहीं बहार गयी हैं . आओ आइये अंदर .

बलजीत राइ : तुम्हारी चची नज़र नहीं आ रही .

शीना : चची को वायरल फीवर हुआ है डैड इस लिए वो अपने रूम में हैं. डॉ ने कहा है क उनके पास न जाये कोई वर्ण उसे भी इन्फेक्शन हो सकती है. आप मेरे साथ बैठिये कितने दिनों बाद मिल रहे हैं कुछ देर अपनी बेटी से भी बातें कर लीजिये .

बलजीत राइ : क्यों नहीं बीटा , तुम्हारे लिए hi तो आया हूँ. ाचा रीना और रीना कहाँ हैं.

शीना : दीदी तो हॉस्पिटल में हैं , रीमा कॉलेज गयी है.



शीना अपने बाप को मौका नहीं देना चाहती थिंक वो रुपाली चची क पास जा सके इस लिए वो उससे इधर उधर की बातें करने लगी. इस दौरान उसने अपने साथ हुई घटना क बारे में बताया और किस तरह अमित ने उसकी मदद की ये भी . बलजीत को पहले तो बहुत गुस्सा आया क उसकी बेटी पर किसी ने हाथ डालने की हिम्मत कैसे की पर फिर अमित क बारे में सुन कर उसने अमित से मिलने की इच्छा ज़ाहिर की तो शीना को भी ये ाचा लगा और उसने भी जल्दी hi अमित से उसे मिलाने की बात कह दी .
 
भाई अपडेट अभी आधा भी नहीं लिख पाया ज्यादा टाइम नहीं मिल प् रहा आज कल . कल कोशिश रहेगी
 
अपडेट 177



हमारे घर पहुँचते hi बुलेट की आवाज़ सुन कर माँ कमरे से निकल कर बहार आ गयी. जैसे hi मैं और निधि दीदी घर क आंगन में दाखिल हुए माँ गले लग कर हम दोनों से मिली. माँ भी आज खूब सजी संवरी हुई थी. लाल साडी और हाथों में लाल चूड़ियों क साथ मेहँदी भी लगी हुई थी. माँ का चेहरा खूब दमक रहा था.

गौरी म : तू आ गया , मैं कब से तेरा इंतज़ार कर रही थी. निधि बीटा तुम आज अचानक ?

निधि दीदी : ममी जी मेरा मन था आज यहाँ आ कर करवा चौथ देखने का के आप कैसे मानते हैं. इस लिए चली आयी. ऐसे भी कल मंदिर माथा तक लूंगी.

गौरी म : ये ाचा किया बीटा, तेरे मां भी खुश होंगे तुझे देख कर. अभी तीनो भाई बहार hi हैं बस आने वाले होंगे.

अमित : माँ आज घर में रौनक नहीं लग रही. कोई रौशनी भी नहीं की इस बार .

गौरी म : वो . . तू नहीं था न यहाँ तो लूँ करता ये सब ? तेरे बाबा और छोटे मां भी बिजी थे. चलो तुम दोनों मुँह हाथ धोलो मैं तुम लोगों क खाने को कुछ लती हूँ.

माँ हमें हाथ मुँह धोने का कह कर किचन में चली गयी. पर उनकी बातों से मुझे लग रहा था क वो कुछ छुपा रही हैं . शायद निधि दीदी क सामने वो न कहना चाहती हो. निधि दीदी हाथ मुँह धोने बाथरूम गयी तो मैं माँ क पीछे पीछे किचन में चला गया.

अमित : क्या बात है माँ? आप कुछ छुपा रही हो . कोई बात हुई है घर में क्या ?

गौरी म : तू पहले हाथ मुँह तो धो ले , आते hi तुझे इन सब बातों की पद गयी. चल पहले कुछ देर आराम कर फिर तुझे सब बता दूंगी मैं. तेरे बाबा देख रहे हैं सब.

अमित : बाबा देख रहे हैं ? बात क्या है माँ ? तुम्हे मेरी कसम मुझे सब बताओ.

गौरी म : तू ..... कितनी बार कहा है क अपनी कसम मत दिया कर. तुझसे तो वैसे भी मैं खुद hi कहने वाली थी क तुम बात करो दीपिका से.

अमित : दीपिका ममी से ?? क्या हुआ क्या है?

गौरी म : होना क्या है , उस दिन कमलेश ने तुम पर हाथ उठाया था उसके बाद से hi दीपिका कमलेश से बात नहीं कर रही है. वो तो आरव को भी छूने नहीं देती उसे. गुस्सा तो सबको hi आया था कमलेश पर अब उसका करें भी तो क्या तुझे भी पता है वो बातों में जल्दी आ जाता है. तेरे बाबा ने और अजय ने कमलेश को बहुत डांटा भी उसके बाद . पर दीपिका है क उसे माफ़ नहीं कर रही. कमलेश तो तुमसे माफ़ी मांगने का भी कह चूका है पर दीपिका नहीं मन रही. आज भी सुबह से कमरे से बहार नहीं निकली. अब तू hi कुछ कर. ऐसे कैसे चलेगा. आखिर है तो वो उसका पति hi न. पर दीपिका तो तुझे hi सब कुछ मानती है. मैंने समझने की कोशिश की तो कहने लगी क वो अपने साथ हुई हर बात बर्दाश्त कर सकती है पर तुम्हारे बारे में कोई गलत कहे ये उसे बर्दाश्त नहीं. और अब वो तेरे समझने से hi मानेगी.

अमित : मैं कुछ करता हूँ.

मैं इतना कह कर किचन से बहार निकल तो निधि दीदी भी किचन में आ hi रही थी. माँ दीदी को पानी देने लगी और मैं सीधा दीपिका ममी क कमरे में चला गया. दीपिका ममी अपने बिस्तर पर करवट क बल लेती हुई थी. उनकी पीठ दरवाज़े की तरफ थी. मैंने कमरे में दाखिल होते hi खांसी करते हुए अपने आने का इशारा किया.

दीपिका म : मिल गया वक़्त घर आने का ? काम से काम आज तो जल्दी आ जाते . पता है माँ आज कौन सा दिन है .

अमित : ये मैं हूँ अमित

दीपिका म : तुमसे hi कह रही हूँ तुम्हे बिना आवाज़ क भी पहचान लेती हूँ मैं.

दीपिका ममी बीएड से उठ कर कड़ी हो गयी और आगे बढ़ कर मुझे गले लगा लिया. मैंने भी दीपिका ममी को बाँहों में कास लिया पर जल्द hi उन्हें अलग कर दिया क्यूंकि निधि दीदी घर में hi थी. दीपिका ममी सवालिया नज़रों से मुझे देखने लगी

अमित : निधि दीदी भी आयी हैं मेरे साथ. वैसे ये मैं क्या सुन रहा हूँ , आप छोटे मां से झगड़ा कर क बैठी हैं

दीपिका म : नाम मत लो उसका मेरे सामने. नफरत करती हूँ मैं उससे

अमित : जो कुछ हुआ उसे भूल जाइये न. उनको गलत रेहनी हो गयी होगी. पर अब आप ऐसा कर क गलत कर रही हैं

दीपिका म : तुम भूल सकते हो जो कुछ हुआ पर मैं नहीं. सबके सामने उसने तुम्हे बेइज़्ज़त किया . मैं ये कभी नहीं भूल सकती. मेरे साथ इतना कुछ करने क बाद भी उसका मन नहीं भरा क अब वो तुम्हारे साथ वो सब ... कोई कुछ भी कहे पर मेरे और मेरे बेटे क लिए तुम hi सब कुछ हो कमलेश नहीं. उसका कोई हक़ नहीं न मुझ पर न मेरे बेटे पर . खुद को समझता क्या है. जिस बेटे की वजह से वो छाती ठोकता फिरता है सूजी क बाप को बेइज़्ज़त किया उसने. अरे वो इंसान hi नहीं है. न उसे मेरी कोई कदर थी न किसी और की. एक बचा तो पैदा करने की उसकी औकात नहीं है और मर्द बना फिरता है. तुम पर हाथ उठाया उसने तुम पर . जिसकी वजह से वो समाज में सर उठाने क काबिल हुआ है . अगर सचाई पता चले तो चुल्लू भर पानी में डूब मरे. मुझे तो पहले hi उसने मार पिट कर घर से निकल दिया था अगर तुम न होते तो मैं आज ज़िंदा hi न होती. तुमने न सिर्फ मुझे बचाया बल्कि नई ज़िन्दगी भी दी और आरव को मेरी झोली में दाल कर तुम पूरी तरह से मेरे भगवन बन गए. वो इसी लायक है. और तुम भी मुझे उसे माफ़ करने को मत कहना क्यूंकि मैं ये नहीं करने वाली .

अमित : आप समझ क्यों नहीं रही . दुनिया की नज़र में वो hi आरव क पापा हैं और आप क्या चाहती हैं क आरव को बाप का प्यार न मिले ? या लोग उसे गलत नज़र से देखें ? बोलिये क्या आप चाहती हैं क आरव को लोग गलत नज़र से देखें ?

दीपिका म : ?????

अमित : अगर कभी किसी को पता चला क उसका बाप मैं हूँ तो लोग क्या कह कर बुलाएँगे उसे जानती हैं आप ? और आप पर क्या क्या इलज़ाम लगाए जायेंगे?

दीपिका म : मुझे कुछ नहीं पता

अमित : थोड़ा शांति से सोचिये , आरव क लिए यही ाचा है क उसे बाप का प्यार मिले नाम मिले इज़्ज़त मिले. मैं तो हमेशा साथ रहूँगा hi पर मैं उसके माथा पर कलंक नहीं लगने देना चाहता. जो कुछ भी उस दिन हुआ मैं उसे भूला चूका हूँ और आप भी भूल जाइये . यही ाचा है सबके लिए .

दीपिका म : पर ...

अमित : बस और कोई बात नहीं. आज करवा चौथ है. और आज क दिन तो हर औरत अपने पति क लिए व्रत रखती है उसकी सलामती क लिए . आज आप अपनी साडी नाराज़गी दूर करिये ताकि घर का माहौल ठीक हो. देखिये ज़रा बहार , आपकी वजह से माँ भी उदास है और घर भी कितना सूना लग रहा है.

दीपिका म : घर की असल रौनक तो तुम हो , तुम आ गए हो तो सब ठीक हो जायेगा. रही बात करवा चौथ की तो व्रत मैंने भी रखा है अपने सुहाग की सलामती क लिए . तुम्हारे लिए . मेरी लिए तुम hi मेरे पति हो. कमलेश ने ये हक़ उसी दिन खो दिया था किस दिन आधी रत को मुझे घर से मर कर निकल दिया था मरने क लिए. तुम कहते हो तो आरव क लिए कमलेश से समझौता कर लेती हूँ पर इससे ज्यादा कुछ नहीं. और मेरा व्रत तुम hi खुलवाओगे ये सुन लो. बस और कुछ नहीं .

अमित : पर ....

दीपिका म : मैं सब देख लूंगी . अब अपने बेटे से भी मिल लो . कितने दिन हो गए इसने अपने पापा को नहीं देखा .

दीपिका ममी ने जब आरव का ज़िकर किया तो मैंने आगे बढ़ कर आरव को गॉड में उठा लिया और उसे प्यार करने लगा .

दीपिका म : चल अब बहार चलते हैं , निधि से भी मिल लूँ और दीदी को भी बता दूँ क बुला ले अपने देवर को .

मैं आरव को गोद में उठाये ममी क साथ कमरे से बहार निकल आया . निधि दीदी माँ क साथ कामिनी ममी क कमरे में गयी थी तो हम भी वहीँ चले गए. कामिनी ममी मुझे देख कर खुश हो गयी. वो मुझे गले लग कर मिली. उनका पेट काफी बहार को उभर आया था. निधि दीदी दीपिका ममी से मिली और मेरी गोद से आरव को ले लिया.

अमित : माँ बाबा और छोटे मां को बुला लो.

माँ ने मेरी बात सुन कर दीपिका ममी की तरफ देखा तो ममी ने हाँ में सर हिला दिया. माँ क चेहरे पर ख़ुशी आ गयी और उन्होंने तुरंत बाबा को फ़ोन कर क बता दिया . कुछ hi देर में बाबा अजय मां और कमलेश मां भी आ गए. बाबा और अजय मां मुझे और निधि दीदी को देख कर बड़े खुश हुए और हम दोनों को प्यार दिया. कमलेश मां खामोश खड़े थे और दीपिका ममी भी उनकी तरफ नहीं देख रही थी फिर माँ ने hi बात की .

गौरी म : कमलेश दीपिका ने तुझे माफ़ कर दिया है पर तू भी वडा कर क ऐसी गलती फिर नहीं करेगा .

कमलेश मां : मैं तो पहले hi कितनी बार कह चूका हूँ भाभी . वो सब गलतफहमी में हो गया था. मैं सचमुच उसके लिए शर्मिंदा हूँ कितनी बार कहूं . अमित , तुम भी मुझे माफ़ कार्डो . मुझसे बात ो सब ...

अमित : अरे मां जी आप क्यों माफ़ी मांग रहे हैं? आप का मुझ पर पूरा हक़ है . मेरे मां हैं आप. आपसे भला मैं नाराज़ हो सकता हूँ. हाँ मुझे बुरा ज़रूर लगा था क आपने मुझ पर विश्वास नहीं किया. शायद मुझ में hi कमी है .

अजय मां : देखा कमलेश , तू इस पर शक कर रहा था . इसने तुझे बिना किसी बात क माफ़ कर दिया और अगर एहि तेरे साथ होता तो क्या तू माफ़ करता किसी को?

कमलेश मां : मुझे अपनी गलती का एहसास है भैया. दुबारा कभी ऐसा नहीं होगा.

विजय म : चलो अब बात ख़तम, आज हमारी सबसे समझदार बेटी हमसे मिलनी आयी है चलो इसकी सेवा करो.

निधि दीदी : मां जी अभी नहीं पहले ममी जी को व्रत खोलने दो आप , मैं यही तो देखने आयी हूँ.

गौरी म : ठीक है वैसे चाँद भी निकले वाला होगा अब तो. मैं तयारी करती हूँ.

छोटे मां को माफ़ी मिलते hi उन्होंने आरव को गॉड में उठा लिया और उसके साथ खेलने लगे. दीपिका ममी माँ क साथ तयारी करने लगी. मैं बाबा और अजय मां क साथ बैठ कर बातें करने लगा और निधि दीदी माँ क पास चली गयी. जब चाँद निकलने का वक़्त हुआ तो माँ और दीपिका ममी सर पर सदी का पल्लू कर क हाथ में थाली लिए आँगन में आ गयी . गाओं में घर ज्यादा ऊँचे नहीं होते और ऊपर से हमारा आँगन बड़ा था तो आंगन से hi चाँद नज़र आ जाता था. कामिनी ममी ने तो व्रत रखा नहीं था इस लिए अजय मां ममी क पास चले गए . जबकि बाबा और छोटे मां माँ और दीपिका ममी क सामने खड़े हो गए. मैं और निधि दीदी पास hi खड़े उन्हें देख रहे थे. माँ ने छन्नी में पहले चाँद को देख और फिर बाबा को और जल का छींटा दे कर बाबा क पाओ छुए और बाबा ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए पानी पिलाया. उधर दीपिका ममी ने भी छोटे मां को छन्नी में देखा और उनके पाऊँ छुए

कमलेश मां : पानी कहाँ है ?

दीपिका ममी : वो मैं किचन में hi भूल गयी . अमित

अमित : मैं ले क अत हूँ ममी जी

मैं किचन से पानी लेने गया तो दीपिका ममी मेरे पीछे hi आ गयी . गिलास पहले hi भर कर रखा हुआ था. मैंने जैसे hi गिलास उठा कर पलटा तो पीछे से दीपिका ममी कड़ी थी.

अमित : मैं ला तो रहा था आप यहाँ क्यों चली आयी?

दीपिका ममी : बुद्धू गिलास मैं जान बुझ कर छोड़ कर गयी थी .

अमित : मगर वो क्यों

दीपिका म : ताकि मेरा व्रत तू hi खुलवाए. चलो जल्दी से पिलाओ अपने हाथों से .

अमित : पर ..

मैं कुछ कहता उससे पहले ममी ने मेरे हाथ से hi गिलास अपने मुँह को लगा लिया और दो घूँट भर लिए.

दीपिका म: मैंने व्रत तेरे लिए रखा था न की तेरे मां क लिए . भगवन करे तुझे मेरी भी उम्र लग जाये.

मेरे हाथ से गिलास ले कर वो बहार निकल गयी. मैं तो बस उनकी इस हरकत और बातों पर hi सोचता रह गया. किचन से बहार आया तो दीपिका ममी को कमलेश मां ने पानी पीला दिया था. उसके बाद माँ और ममी जल्दी से खाना लगाने की तयारी करने लगी. सुबह से भूखी प्यासी जो थी .

निधि दीदी : अमित मेरे साथ आना ज़रा.

निधि मुझे ले कर ऊपर छत पर चली आयी.

अमित : दीदी यहाँ क्या करने आयी हैं आप ?

निधि दीदी : मैंने सोचा यहाँ से ाचा नज़र आएगा चाँद.

छत पर आ कर निधि दीदी चाँद को डकः कहने लगी और मेरी बेटियों रात देखने लगी.

निधि ( मन में ) हे भगवन मेरा व्रत सफल हो . अमित को सदा सलामत रखना. मैं नहीं जानती क कैसे होगा पर अगर मेरा प्यार सच्चा है तो मुझ पर सिर्फ अमित का hi अधिकार हो. मैं किसी और की नहीं होना चाहती. मैं मन से अमित को अपना पति मन चुकी हूँ और इस तन पर भी मैं किसी और का अधिकार नहीं चाहती.

अमित : क्या हुआ दीदी ? ऐसे क्या देख रही हैं ?

मैंने निधि दीदी को एक तक ख़ामोशी से अपनी तरफ देखते हुए पाया तो पूछा.

निधि दीदी : कुछ नहीं वो मुझे प्यास लगी है क्या पानी हैं यहाँ ?

अमित : मैं अभी लाया.

मैं जल्दी से दौड़ कर नीचे गया और पानी का गिलास ले कर वापिस दीदी क पास आ गया . मैं जब पहुंचा तो दीदी पाऊँ पकड़ कर नीचे बैठी हुई थी .

अमित : दीदी क्या हुआ आप नीचे क्यों बैठी हैं?

निधि दीदी : आह देखो न पाऊँ मुद गया यहाँ से अँधेरे में पता नहीं चला.

अमित : लौटे मैं मालिश कर देता हूँ.

निधि दीदी : नहीं नहीं बस ज़रा सी बात है तू मुझे जल्दी से पानी पीला मेरा गाला सुख रहा है.

मैं दीदी क पाऊँ को पकड़ने लगा तो दीदी ने पाऊँ पीछे खिंच लिया.

अमित : लीजिये

निधि दीदी : अरे खुद hi पीला दे न अपने हाथों से . जल्दी कर

मैंने दीदी को गिलास पकड़ने की कोशिश की तो उन्होंने गिलास नहीं पकड़ा. मैंने उनकी बात मानते हुए उन्हें अपने हाथों से hi पानी पिलाने लगा. दीदी पानी पिटे हुए मेरी आँखों में hi देख रही थी.

अमित : लाइए मैं देखता हूँ क्या हुआ है.

निधि दीदी : नहीं मैं ठीक हूँ अब चल नीचे चलते हैं .

मैं जब खड़ा हुआ तो दीदी ने उठते हुए मेरे पाऊँ पर हाथ रख दिए. मुझे लगा उन्हें दर्द हो रहा है उठने में तो मैंने उनको बाजुओं से पकड़ कर उठाया.

अमित : आप को तो दर्द हो रहा है चलिए आप यहीं बैठ जाइये मैं खाना यहीं ले अत हूँ आपका.

निधि दीदी : अरे नहीं बाबा मैं ठीक हूँ . देख तेरे सामने hi सीढ़ियां उतर कर जाउंगी.

इतना कह कर दीदी मेरे आगे आगे सीढ़ियां उतर कर नीचे आने लगी. माँ और दीपिका ममी ने खाना दिया था. हम सबने मिल कर खाना खाया और फिर माँ ने निधि दीदी को मेरे साथ वाले कमरे में बिस्तर लगवा दिया . मैं अपने कमरे में कपडे बदल रहा था तो माँ मेरे पास आयी.

अमित : माँ आप यहाँ ? आज तो आपको बाबा क साथ होना चाहिए न.

गौरी म : तुझे बुरा तो नहीं लगेगा ? इतने दिनों बाद तू आया है और मैं...

अमित : इसमें बुरा लगने वाली कौन सी बात है? आप पर बाबा का अधिकार मुझसे पहले है माँ. और वैसे भी आज आप दोनों का दिन है. वैसे एक बात कहूं माँ , आज आप बहुत अछि लग रही हो

मेरे इतना कहते hi माँ शर्मा गयी.

गौरी म : और कुछ चाहिए तो बता दो मैं ला देती हूँ

अमित : नहीं मैं खुद hi ले लूंगा आप जाओ बाबा क पास .

माँ ने एक बार मुझे देखा और फिर मुस्कुराती हुई चली गयी. मैं अपने बीएड पर आराम से लेट गया. कुछ देर बाद hi निधि दीदी कमरे में आ गयी. मैं उन्हें कमरे में आया देख उठ कर बैठ गया.

अमित : दीदी आप इस थे वक़्त यहाँ ?

निधि दीदी : अकेले नींद नहीं आ रही थी तो सोचा तुम्हारे साथ कुछ देर बात कर लेती हूँ.

अमित : हाँ हाँ क्यों नहीं. आइये बैठिये.

निधि दीदी : और क्या कर रहे थे

अमित : कुछ नहीं करना क्या है बस सोने की तयारी कर रहा था.

निधि दीदी : तुम्हे सब कितना मने है न , कैसे आज छोटी ममी ने तुम्हारे एक बार कहने से छोटे मां को माफ़ कर दिया .

अमित : छोटी ममी तो ऐसे hi बात को बढ़ा रही थी. अब गलती तो किसी से भी हो सकती है न इसका मतलब ये तो नहीं क रिश्ते hi तोड़ दिए जाएँ.

निधि दीदी : पर मां ने भी तो ठीक नहीं किया था तुम्हारे साथ. छोटी ममी बहुत मानती हैं तुम्हे. इसी लिए मां को ऐसी सजा दी उन्होंने. सच कहूं गुस्सा तो मुझे भी बहुत था और अब भी है पर तुम पता नहीं किस मिटटी क बने हो हो तुम्हे गुस्सा नहीं आता . उल्टा तुम किसी न किसी तरह मदद hi करते हो सबकी.

अमित : वो सब छोड़िये , मुझे आप से एक बात पूछनी है .

निधि दीदी : पूछो

अमित : आप किसी को पसंद करती हैं ? मेरा मतलब है आपने आज व्रत रखा है , क्या ये व्रत आपने किसी क लिए रखा है .

निधि दीदी : लड़कियां व्रत क्यों रखती हैं क्या इतना भी नहीं पता तुझे ?

अमित : पता तो है पर मैं जानना चाहता था की ..

निधि दीदी : मैं भी एक लड़की hi हूँ न , तो मैंने भी व्रत उसी लिए रखा है. वैसे तुम क्यों जानना चाहते हो क मैंने किसके लिए व्रत रखा है?

अमित : सिंपल , मौसी को बोल कर आपकी शादी की बात करवा दूंगा .

निधि दीदी : तुझे बहुत जल्दी है मेरी शादी की , अगर मैं शादी करना hi न चहुँ तो ?

अमित : ऐसे कैसे चलेगा , एक दिन शादी तो करनी hi पड़ती है सबको.

निधि दीदी : मुझे नहीं करनी तू कोई और बात कर. तुझे करनी है तो बोल

अमित : मैं अभी बहुत छोटा हूँ न दीदी अभी तो आप की होगी फिर नैना दीदी नेहा दीदी करुणा दीदी कारन भैया. फिर मेरी होगी.

निधि दीदी : वैसे मेरी एक बात का जवाब डोज?

अमित :पूछिए

निधि दीदी : एक लड़के की नज़र से तुझे मैं कैसी लगती हूँ ?

अमित : ये आप कैसी बात कर रही हैं .

निधि दीदी : मैं बस जानना चाहती हूँ क लड़कों की नज़र से मैं कैसी हूँ . तू बता अगर तुझे अपने लिए लड़की पसंद करनी हो तो मुझ में कौन सी अछि और कौन सी बुरी बातें हैं.

अमित : आप बहुत अछि हैं दीदी , हर तरह से आप बहुत अछि हैं. आप जितनी खूबसूरत हैं उतनी hi खूबसीरत भी हैं. आप बिना मेकअप क hi इतनी सुन्दर दिखती हैं क जैसे कुदरत में खुद आपको सजाया हो. और आज तो आप इस हलके से मेकअप में भी कमल लग रही हैं . देखने वाला तो देखते hi आपका दीवाना हो जाये.

निधि दीदी : तुम तो नहीं हुए ..

निधि दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुए ये बात कही तो एक पल क लिए हम दोनों hi खामोश हो गए .

अमित : मैं ऐसा कैसे सोच सकता हूँ दीदी . मैं आपका भाई हूँ.

निधि ( काश ऐसा न होता, मैं खुद को छह कर भी नहीं रोक प् रही और इसमें भगवन की भी मर्ज़ी है. एक दिन तुम्हे मेरे प्यार का एहसास ज़रूर होगा.

निधि दीदी : मुझे अकेले नींद नहीं आएगी , क्या मैं आज रत तुम्हारे साथ यहीं सो जॉन?

अमित : इसमें पूछने वाली क्या बात है दीदी, बचपन में भी तो कभी कभी हम साथ में सो जाते थे. आइये मैं इधर हो जाता हूँ.

निधि दीदी अपने साथ आराम दायक कपडे लायी थी जो अब उन्होंने पेहेन रखे थे. मैं बीएड पर एक साइड हो गया तो दीदी मेरे साथ बीएड पर लेट गयी.

अमित: दीदी ये तकिया ले लीजिये आप

निधि दीदी : ये तकिया तुम रखो मुझे तकिये की ज़रूरत नहीं है.

इतना कह कर दीदी ने मेरी बाज़ू को सीधा किया अपने सर उस पर टिका लिया.

निधि दीदी : ये है मेरा तकिया . अब मुझे अछि नींद आएगी.

कुछ देर दीदी ने इधर उधर की बातें की और फिर हम सो गए.

उधर रीमा को घर आ कर पता चला क उसकी माँ की तबियत ख़राब है . उसे अपनी माँ की बड़ी चिंता हुई मगर शीना ने उसे समझा दिया क दर वाली की बात नहीं . रीमा बेचारी को तो कुछ पता hi नहीं था. वो भी अपने तय hi से मिल कर खुश हुई . बलजीत राइ ने भी गौर किया क रीमा अपनी माँ जैसी hi सुन्दर होती जा रही है. रीमा ज्यादा देर उसके अस नहीं रुकी और चली गयी अपनी पड़े करने . माँ से मिलने से तो शीना ने मन कर दिया था. रीना रोज़ की तरह हॉस्पिटल से लेट hi आयी. वैसे भी उसे पता चल चूका था क उअका तय आ चूका है इस लिए वो और भी देर से आयी ताकि उससे सामना न हो पर जब वो घर आयी तो न चाहते हुए भी बलजीत से सामना हो hi गया.

बलजीत राइ : अरे रीना बेटी कैसी हो तुम ? कितने दिनों बाद देख रहा हूँ तुम्हे. इधर आओ अपने बड़े पापा से नहीं मिलोगी ?

अब सब क सामने रीना कोई बहाना भी नहीं बनाना चाहती थी इस लिए चुपचाप बलजीत क पास चली गयी. बलजीत ने खुद hi उसे अपने सीने से लगा लिया मगर एक बाप ता बुज़ुर्ग की नज़र से नहीं बल्कि वो तो रीना क कोमल बदन को महसूस कर रहा था . रीना को तो घिन आ रही थी इस लिए वो जल्दी hi पीछे हैट गयी

रीना : मैं ठीक हूँ तय जी. इस बार तो आप काफी लम्बा वक़्त बहार लगा कर आये हैं. अब कितने दिनों क लिए आये हैं?

रीना जानना चाहती थे क और कितने दिन उसे बर्दाश्त करना होगा और उसे अपनी माँ की भी चिंता थी.

बलजीत राइ : अब बेटी तुम्हे पता hi है मेरे पास वक़्त कितना काम होता है. बस एक हफ्ता hi रुक पाउँगा यहाँ. शीना का जन्मदिन मन कर hi जाऊंगा वर्ण मेरी बेटी नाराज़ हो जाएगी. तुम बताओ तुम्हारी डॉक्टरी कैसे चल रही है? तुम कहो तो तुम्हे तुम्हारा खुद का अपना क्लिनिक या हॉस्पिटल खोल दूँ ? सुना है इसमें भी ाचा मुनाफा है .

रीना : सॉरी तय hi पर मैंने इस प्रोफेशन को लोगों की सेवा क लिए चुना है न की पैसे क लिए . और रही बात क्लिनिक या हॉस्पिटल की तो अभी मुझे प्रैक्टिस करनी है.

शीना : दीदी आप कुछ दिन से कुछ ज्यादा hi बिजी नहीं हो गयी ? चक्कर क्या है ?

रीना : हाँ वो मैनेजमेंट की मीटिंग्स चल रही हैं कुछ बहार से डॉ भी आये हुए हैं. मुझे लंदन जाने को कह रहे हैं नई टेक्नोलॉजी से सर्जरी सिखने क लिए ताकि एडवांस्ड मचिनेस यहाँ लायी जा सकें.

शीना : that’s ग्रेट दीदी , तो अब आप लंदन जा रही हैं. कितनी देर क लिए जा रही हैं?

रीना : मैं नहीं जा रही , मेरा दिल नहीं है जाने का.

रीना ( मन में ) पहले hi इतने दिनों से मिल नहीं पायी हूँ अमित से अगर अब और उससे दूर रही तो कहीं कोई और उसे न पता ले. मैं ये रिस्क नहीं लेने वाली.

बलजीत राइ : तू

हे ये मौका मिस नहीं करना चाहिए बीटा, तुम्हारा सारा खर्च मैं कर लूँगा तुम्हे जो भी कोर्स करना है करो. मेरी भी तो ज़िम्मेदारी है कुछ तुम्हारे प्रति. तुम्हारी मैनेजमेंट से मैं बात करूँगा. उनके साथ मिल कर और भी नफा हॉस्पिटल बनाऊंगा मैं और तुम्हे सब की हेड बनाऊंगा . देख लेना तुम्हे कहाँ से कहाँ पहुंचता हूँ.

बलजीत राइ वही चल चल रहा था जो वो हर जगह चलता था किसी भी लड़की या औरत को अपने जल में फ़साने क लिए . लालच देकर शीशे में उतरना पर रीना को तो उसकी ये बात भी ज़हर hi लग रही थी.

रीना : नहीं तय जी मैं बहार जाना hi नहीं चाहती और न hi मुझे हेड बनना है किसी की. ाचा अब मैं सोने जा रही हूँ. आज बहुत थक गयी हूँ. गुड नाईट

इतना बोल कर रीना अपना पीछा छुड़ाते हुए उठ कर अपने कमरे में चली गयी. बलजीत राइ रीना की कमर हिलती हुई देख रहा था जिसे शीना ने नोट कर लिया. मन hi मन उसे अपने बाप पर गुस्सा आने लगा था.

सप ऋतू सिंह आज कुछ गुस्से में थी . आज कोशिश कर क वो फिर से अमित से मिलने गयी थी पर आज भी बात नहीं कर पायी. कॉलेज में अब मंजू की मौजूदगी में बात करने से ाचा उसने कॉलेज क बहार hi अमित से बात करने का सोचा पर वहां भी बात नहीं बानी. असल में जब ऋतू सिंह अमित से मिलने क लिए रस्ते में कड़ी थी तो वहां से अमित राधा क साथ बाइक पर जा रहा था तो ऋतू ने उसे रोकना सही नहीं समझा. अपने ऑफिस में वो गुस्से और फ़्रस्ट्रेशन से भरी बैठी थी जब उसे इनफार्मेशन मिली क जिन लोगों को उस दिन अरेस्ट किया गया था लड़कियों की किडनेपिंग वाले केस में वो रिमांड में अपना मुँह खोलने को तैयार हो गए हैं. ऋतू सिंह झटके से अपनी कुर्सी से उठी और रिमांड रूम में चली गयी. उस दिन क बाद से पता नहीं कितनी बार ऋतू ने इन लोगों पर अपना गुस्सा उतरा था पर किसी ने मुँह नहीं खोला था मगर आज जा कर वो लोग अपना मुँह खोलने लगे थे. ऋतू सिंह जब इंटेररोगेशन रूम में गयी तो वहां उन गुंडों का मुख्या सरगना कुर्सी पर बंधा हुआ था रस्से से . सर क ठीक ऊपर एक बल्ब बड़े से कैप क साथ लगा झूल रहा था. आसपास 2-3 पुलिस वाले भी मौजूद थे हाथ में डंडे पकड़े जो रोज़ hi बरी बरी से इन लोगों की ठुकाई करते थे. ऋतू सिंह ने आते hi इस गुंड क बाल मुठी में पकड़ कर ज़ोर से खिंच कर उसका चेहरा ऊपर किया.

सप ऋतू सिंह: तो आखिर अकाल ठिकाने आ hi गयी तेरी. बोल कौन है तेरा बाप ? यद् रखना इस बार कोई चालबाज़ी नहीं . मुझे फिर से छोटी मछलियों की खबर नहीं चाहिए.

गुंडा : छोड़ दीजिये मैडम और मर नहीं सेहन कर सकता मैं. मैं आपको सब सच सच बता दूंगा. बस मुझसे वडा कीजिये आप मुझे बचा लेंगी. मेरे मुँह खोलते hi वो मुझे मरवा देगा.

सप ऋतू सिंह: तुम्हे कुछ नहीं होगा, मैं तुझे पूरी प्रोटेक्शन में रखूंगी. मगर इस बार पुलिस को बेवक़ूफ़ बनाने की कोशिश की तो तेरा एनकाउंटर मैं खुद करुँगी.

गुंडा : नहीं नहीं मैडम मैं सब सच सच बताऊंगा. पर आप उसका कुछ बिगड़ नहीं सकेंगी वो बहुत पावरफुल इंसान है. कानून उसकी जेब में है. आपके बड़े बड़े अफसर उसे सलाम ठोकते हैं.

सप ऋतू सिंह: तू बस नाम बता तारीफ नहीं सुन्नी मुझे किसी की.

गुंडा : मला सुशिल कुमार

सप ऋतू सिंह : शॉकेड ) तू सच कह रहा है ? अगर इस बार तूने झूठ बोलै तो सच कहती हूँ ये तेरी आखिरी गलती होगी.

गुंडा : मैं सच कह रहा हूँ मैडम मुझे अपने बीवी बच्चों की कसम

सप ऋतू सिंह : सिर्फ नाम बताने से कुछ नहीं होगा. मुझे उसके खिलाफ पक्के सबूत चाहिए. वो क्या करता है ? कौन कौन से गैरकानूनी काम हैं उसके और कहाँ कहाँ से कैसे वो ये सब कर रहा है पूरी डिटेल दो मुझे. हर एक चीज़ पुलिस को बतानी होगी वर्ण तू अपना अंजाम सोचले. इंस्पेक्टर इससे साडी इनफार्मेशन लो. ऋतू सिंह क आर्डर से एक इंस्पेक्टर कागज़ पेन ले कर उस गुंडे से साडी इनफार्मेशन लेने लगा. ऋतू सिंह अपने केबिन में वापिस आयी और दस विक्रम राठौर को फ़ोन लगा कर साडी इनफार्मेशन दी. विक्रम राठौर ने भी आगे एक्शन लेने को कह दिया और सख्त हिदायत भी क बिना पुख्ता सबूतों क मला सुशिल कुमार पर हाथ न डाला जाये.

सुबह मेरी नींद जल्दी खुल गयी. मैं उठने लगा तो देखा दीदी मेरे सीने पर सर रख मेरे साथ चिपक कर सो रही थी. सुबह का उजाला कमरे में आने लगा था. दीदी का चेहरा सोते हुए बहुत hi प्यारा लग रहा था. बाल खुल कर कुछ उनके चेहर पर आये हुए थे. ऐसा लग रहा था जैसे चाँद बादलों से झांक रहा हो. सच में निधि दीदी बहुत hi हसीं थी. चेहरे पर हमेशा नूर और गंभीरता रहती थी उनके. सबसे समझदार अउ सबका ख्याल रखने वाली निधि दीदी सबसे खास थी मेरे लिए. दीदी को उठाना मुझे सही नहीं लगा और कुछ देर ऐसे hi मैंने उन्हें अपन ऊपर सर रखे सोने दिया. फिर मैंने आहिस्ता से उनका सर ऊपर उठाते हुए खुद नीचे से खिसक कर एक तकिया अपनी जगह रख दिया और दीदी का सर उसके ऊपर टिका दिया. मैंने उठने से पहले दीदी क बाल साइड कर क उनके गालों पर एक किश कर दी. दीदी क चेहरे पर नींद में hi मुस्कान आ गयी. मैं बाथरूम में फ्रेश होने चला गया.



अमित क बाथरूम जाते hi निधि उठ कर बैठ गयी . असल में उसकी नींद तब hi टूट गयी थी जब अमित ने उसका सर ऊपर उठाया था पर वो जान बूझ कर सोई रही. जब अमित ने निधि क गलों पर किश की तो निधि अंदर तक हिल गयी. उसका तन मन ख़ुशी से नाच उठा . उसे ऐसे लगा जैसे अमित ने एक प्रेमी की तरह उसे किश किया हो. अमित तो बाथरूम में जा चूका था पर निधि अभी भी उस एहसास में खोयी थी. उसका रोम रोम नाच उठा था. उसका बस चलता तो वो पलट कर अमित को चूम लेती पर वो ऐसा नहीं कर सकती थी. निधि क दिल क किसी कोने में एक छोटी सी उम्मीद ने जनम ले लिया था क अमित भी शायद उसे उस नज़र से देखता है. जो वो चाहती है. खुद hi शर्माती मुस्कुराती वो अपने गाल सहलाती फिर से वापिस लेट गयी.
 
भाई आज तो नहीं लिख पाया. कोशिश रहेगी क कल एक अपडेट दे दूँ. अगर नहीं लिख पाया तो फिर 3-4 दिन की छुट्टी भी हो सकती है . एक ज़रूरी काम से जाना है बहार
 
अपडेट 178



‘ तुम्हारा क्या कहना है ? आज तक ऐसी कोई जानकारी पहले कभी नहीं मिली सुशिल कुमार क खिलाफ. कुछ जबरन ज़मीन हथियाने , भ्रष्टाचार करने और और कई तरह क गैरकानूनी काम करने की शिकायतें तो हैं पर जो तुम बता रही हो वो तो आला दर्जे क क्रिमिनल वाली चीज़ें हैं. जबकि ये आदमी ऐसी बैकग्राउंड से नहीं है. इस लिए hi मैं कह रहा हूँ क पहले इसके खिलाफ पुख्ता साबुत इकठे करो और अगर ये ऐसा निकलता है तो इसको अरेस्ट करवाने क लिए होम सेक्रेटरी से मैं आर्डर ले कर आऊंगा. ‘

दस विक्रम राठौर अपने ऑफिस में सप ऋतू सिंह क साथ गुप्त मीटिंग कर रहे थे. जहाँ वो ऋतू सिंह द्वारा अपराधियों क कबूलनामे क बाद साडी जानकारी देने आयी थी.

सप ऋतू सिंह : सर ये सफ़ेद पॉश कितनी बड़ी मेल हैं देश और समाज क लिए ये आप और मैं बेहतर जानते हैं. मैं आपकी बात से सहमत हूँ क इस आदमी की बैकग्राउंड ऐसी नहीं है पर जब अपराधी खुद कबूल कर रहे हैं तो एक बार जांच करना तो बनता hi है. मैं इस बात का पूरा ध्यान रखूंगी की पुख्ता सुबूत हाथ में आने क बाद hi सुशिल कुमार पर हाथ डाला जाये. वर्ण ऐसे राजनीतिक लोग कैसे आम लोगों का इस्तेमाल कर क बवाल खड़ा करते हैं मैं अचे से जानती हूँ.

दस विक्रम राठौर : थें जो अहेड मेरी तरफ से तुम्हे फुल सपोर्ट रहेगा और मैंने एक केस का पता करने को कहा था उसका कुछ पता चला?

ऋतू सिंह : उसके लिए मैंने सभी स्टेशन इंचार्ज को बोलै है जल्दी hi पता चल जायेगा सर. सर क्या मैं जान सकती हूँ आप किस लिए पता लगाना चाहते हैं इस केस क बारे में ?

विक्रम राठौर: तुम्हे यद् है वो लड़का अमित ? मेरी बेटी का दोस्त है दोनों साथ hi पड़ते हैं. वो लड़की अमित की hi दोस्त थी और उसे सही है क उस लड़की का कतल हुआ है . इसी लिए उसने रिक्वेस्ट की है. अब उसके लिए इतना तो कर hi सकते हैं हम फॉर कंपनसेशन.

ऋतू सिंह : इसके लिए अमित ने रिक्वेस्ट की है!! Don’t वोर्री सर मैं जल्दी hi इसका भी पता लगा लुंगी और खुद देखूंगी इस केस को.

विक्रम राठौर : गुड , और कोई बात हो तो अन्य टाइम यू मई आस्क .

ऋतू सिंह : थैंक्स यू सर , जय हिन्द

ऋतू सिंह विक्रम राठौर से बात करने तो गयी थी सुशिल कुमार क रिलेटेड पर अब यहाँ आ कर अमित से जुड़ा केस हाथ में आते hi उसे एक उम्मीद नज़र आने लगी क वो अमित को अब मन hi लेगी उसकी मदद कर क. अपने ऑफिस वापिस आते hi उसने जल्द से जल्द इस केस से रिलेटेड फाइल अपने पास लेन को कह दिया और साथ hi सुशिल कुमार क खिलाफ पक्के साबुत जुटाने क लिए उसने उस गुंडे से जितनी भी इनफार्मेशन मिली थी उन सब जगहों पर छापेमारी की तयारी करने लगी.

मैं सुबह जल्दी से फ्रेश होकर अखाड़े क लिए निकल गया. बड़े दिन हो गए थे एक्ससरसीसे छूट गयी थी. अखाड़े में डरा भैया से मुलाकात हुई और उस्ताद जी से भी. कुछ देर आज गाओं में अखाड़े की मिटटी में पसीना बहा कर बड़ा ाचा लगा.

अमित क जाने क बाद गौरी उसके कमरे में आयी तो बीएड पर निधि को सोये हुए पाया. एक पल क लिए वो हैरान तो हुई पर उसे पता था क निधि कितनी समझदार है और कितना प्यार करती है अमित से.

गौरी : निधि , निशि बीटा उठ जाओ.

निधि : उम्म्म गुड मॉर्निंग ममी जी , आप ?

निधि नींद में थी पर गौरी क उठाते hi जल्दी से उठ गयी. और खुद को सही करते हुए नज़रें चुराने लगी .

गौरी : तुम यहाँ कैसे ? और अमित कहाँ है?

निधि : वो मुझे अकेले नींद नहीं आ रही थी तो मैं यहाँ आ गयी . अमित तो जल्दी उठ गया था शायद बहार गया है.

गौरी : लगता है दोस्तों से मिलने अखाड़े में चला गया होगा. चल तू भी तैयार हो जा मैं तेरे लिए दूध गरम कर क लती हूँ.

निधि अपने कमरे में चली गयी और गौरी नीचे आ गयी. निधि को पता hi नहीं वाहक था क कब उसे दोबारा नींद आ गयी थी . वो अब भी मुस्कुरा रही थी अमित क उसकी गाल पर किये गए किश को यद् कर क. शावर क नीचे कड़ी वो अपने गाल को सहलाती खुद से hi बातें कर रही थी

‘ खुद hi जो चाहे कर लेते हो कभी मुझसे पुछा है क मैं क्या चाहती हूँ. कभी मुझे भी तो मौका दो क मैं भी तुम्हे प्यार कर सकूँ ‘

अखाड़े में आज कुछ ज्यादा hi देर हो गयी थी . जब मैं घर आया तो निधि दीदी आरव को गॉड में लिए दीपिका ममी से बतिया रही थी.

गौरी म : आज बड़ी देर लगा दी कहाँ रह गए थे ?

अमित : वो आज इतने दिनों बाद अखाड़े में गया था तो पता hi नहीं चला टाइम का.

गौरी म : अब जल्दी से तैयार हो जा. निधि ने मंदिर जाना है तेरे साथ . कब से रह देख रही है तेरी .

अमित : ओह्ह्ह मैं तो भूल hi गया था , सॉरी दीदी मैं अभी आया.

निधि दीदी : कोई बात नहीं मैं इंतज़ार कर रही हूँ आराम से तैयार हो कर आओ.

मैं जल्दी से नाहा धो कर तैयार हो कर नीचे आ गया और निधि दीदी को मंदिर ले गया. दीदी ने पैदल hi मंदिर चलने को कहा और मेरे साथ बातें करती रही. मंदिर से आने क बाद मैं सब क साथ बैठ कर नाश्ता कर रहा था क मुझे आंटी की कॉल आ गयी .

आंटी : अमित कहाँ हो तुम ?

अमित : कैसी हैं आंटी ? मैं तो गाओं में हूँ.

आंटी : तुम बस जल्दी से यहाँ आ जाओ.

अमित : क्या हुआ क्या बात है ?

आंटी : वो करिश्मा ज़िद कर रही है वापिस जाने की , कह रही है आज hi जाना है वापिस. मैं बहुत समझाया पर मन नहीं रही. तेरे अंकल भी रोक रहे हैं पर वो ज़िद पर अदि है. तुम जल्दी से आ जाओ. इस बार तुम जाओगे उसके साथ. मैं तब तक उसे रोक कर रखती हूँ.

अमित : दीदी ऐसे अचानक ज़िद क्यों कर रही हैं कुछ हुआ है क्या ?

आंटी : पता नहीं वो कौन सा बताती है कुछ. तुम जल्दी आ जाओ .

अमित : ठीक है मैं अत हूँ.

इतना कह कर मैंने कॉल काट दी. आंटी कुछ ज्यादा hi परेशां लग रही थी इस लिए मैंने भी जाने का सोच लिया.

गौरी म : किसका फ़ोन था कहाँ जा रहा है तू ?

अमित : माँ वो आंटी का फ़ोन था. करिश्मा दीदी को छोड़ने जाना है उनके ससुराल आज hi. मोहित है नहीं तो वो मुझे कह रही हैं साथ जाने को.

गौरी म : चला जा बीटा , वो भी तेरी बहिन hi तो है .

दीपिका म : उन्हें कह देते क वो कल भेज दें करिश्मा को. एक तो छुट्टी होती है तेरी और वो भी. ..

अमित : आंटी कह रही हैं क कोई ज़रूरी काम है उनके ससुराल में तो इस लिए आज hi निकलना पड़ेगा उन्हें.

गौरी म : कोई बात नहीं कल क्या और आज क्या .

निधि दीद : मैं भी तैयार होती हूँ. मुझे घर छोड़ देना.

गौरी म : तुम तो रुक जाओ

निधि दीदी : नहीं ममी जी कल ऑफिस भी तो जाना है फिर.

थोड़ी देर में hi मैं निधि दीदी वापिस चलने क लिए तैयार हो गए. मैं सब से मिला तब तक बाबा भी आ गए थे. सबसे मिलने क बाद मैं और दीदी वापिस शहर आ गए . दीदी को घर छोड़ने क बाद मैं मोहित क घर पहुँच गया.

आंटी : तू आ गया , कब से तेरा इंतज़ार कर रही थी मैं.

करिश्मा दीदी क साथ अंकल और आंटी भी हॉल में बैठे थे. मैंने अंकल आंटी दोनों क पाऊँ छुए.

अमित : बस दीदी को घर छोड़ कर सीधा आपके पास hi आया हूँ.

अंकल : निधि तुम्हारे साथ थी ? उसे भी ले आते यहीं. सॉरी बीटा तुझे आज परेशानी दी . करिश्मा कल से वापिस जाने को ज़िद कर रही है. हमने फैसला किया है क इसे घर छोड़ने तुम जाओ . इसी लिए तुम्हे बुलाया है.

अमित : इसमें परेशानी की क्या बात है अंकल मैं भी तो आपका बीटा हूँ और करिश्मा दीदी मेरी बहिन.

करिश्मा दीदी : पापा आप ऐसे hi ज़िद कर रहे हो बेवजह इसे परेशानी दी आपने मैं अकेले hi चली जाती.

अमित : ाचा है न दीदी मैं भी इसी बहाने जीजू से मिल लूंगा.

करिश्मा दीदी : पर मुझे ाचा नहीं लगता कोई मेरी वजह से परेशां हो.

अमित : लगता है आप मुझे भाई नहीं मानती .

करिश्मा दीदी: तो तुम्हे इतना पता है मैं तेरी बहिन हूँ .....

आंटी : भाई है तभी तो एक hi फ़ोन पर चला आया. अमित क्या खाओगे ?

अमित : नहीं आंटी मैं तो नाश्ता कर क hi आया हूँ.

आंटी : ाचा तुम्हारा बैग मैंने पैक कर दिया है. अब जा hi रहे हो तो 1-2 दिन रह लेना वहां और अचे से घूम लेना.

अंकल : हाँ बीटा और सब से अचे से मिल लेना. और किसी भी चीज़ की दिक्कत हो तो मुझे फ़ोन कर देना या करिश्मा से कह देना.

करिश्मा दीदी : अब मैं जा सकती हूँ पापा ?

अंकल : मैं कैसे कह दूँ क तुम जाओ, तुम्हे देख कर तो मुझे ख़ुशी मिलती है . मुझे तुम पर हमेशा से नाज़ रहा है. मेरी बेटी , अपने बाप का सर हमेशा ऊँचा रखना.

मैंने अपना और करिश्मा दीदी का सामान गाड़ी में रखा. जाते वक़्त करिश्मा दीदी थोड़ी भावुक हो गयी अंकल से मिलते हुए . आंटी अंकल दोनों का यही हल था. मैं और करिश्मा दीदी सफर पर निकल चले. सफर कोई 3 घंटे का था पर रस्ते में एक बार हल्का फुल्का खाने क लिए हम लोग रुके जिस वजह से एक घंटा और लग गया. रत 9 बजे क करीब हम करिश्मा दीदी क ससुराल पहुंचे. उम्मीद क मुताबिक करिश्मा दीदी क घर भी एक बांग्ला टाइप hi था. रूपए पैसे का रोअब हर तरफ नज़र आ रहा था. गेट पर खड़े सिक्योरिटी गार्ड से लेकर अंदर बड़ा सा लॉन और अंदर कड़ी 2 लक्ज़री कार्स क साथ साथ बंगले का आर्किटेक्चर इस बात की गवाही दे रहा था क यह फॅमिली भी रिच है. जैसा क आंटी ने बताया था क घर में करिश्मा दीदी की सास ससुर और एक ननद है तो हमारा स्वागत करिश्मा दीदी की सास ने hi किया .

करिश्मा दीदी क ससुराल क बारे में कुछ बता दूँ.

अनुपमा ( सास ) उम्र 50 साल . हाइट 5’7” रंग गोरा . शरीर मांसल पेट थोड़ा बहार को निकला हुआ. चुके और गांड अलग hi आकर लिए है. बूब्स तो 38 क इतने बड़े नहीं पर गांड 44 कुछ ज्यादा hi वज़नदार है .पैसे क मामले में घमंडी. रईस बाप की एक लौटी संतान थी इस लिए पति को घर जमाई बना लिया गया. पति को हमेशा दबाकर रखती है और सब पर हुकम चलती है बस अपनी बेटी क आगे ये कुछ ज्यादा hi कमज़ोर है या यूँ कहो क बेटी क आगे न बोलती है न किसी की सुनती है.

राम लाल ( ससुर ) उम्र 52 साल कद काठी में अपनी बीवी से काम hi हैं . पत्नी क आगे बस hi हाज़िर लेने वाला आदमी या यूँ कह लो क नौकर . घर में नाम मात्रा इंसान. हर फैसला बीवी hi लेती है या बचे. घर सिर्फ रत करने क लिए hi आते हैं वर्ण सारा दिन काम में लगे रहते हैं. कोई भी बात hi बीवी की किसी बात को काटने की हिम्मत इन में नहीं है.

हेमा ( ननद ) उम्र 30 साल. हाइट 5’6” फिगर 36-32-40. माँ की तरह गोरा रंग और उसी की तरह अचे कद काठी की है. देखने में भी आकर्षक है पर आँखों में हमेशा प्यास नज़र आती है जैसे सेक्स की बहुत ज्यादा लत हो. लड़कियों की तरह जीन टॉप और नए नए फैशन क कपडे पहनती है. माँ की लाड़ली है तो घर पर माँ की तरह हुकम चलती है . फैशन में अव्वल है और लोगों को भी अपने जैसा बनती है यानि की फैशन डिज़ाइनर है.

राजीव ( करिश्मा ‘स हस्बैंड) उम्र 27 साल . घर का इकलौता बीटा और अपनी माँ बहिन का लाडला. देखने में ठीक थक है पर अपनी बीवी की बजाये माँ और बहिन की hi सुनता है. इसके बारे में अभी ज्यादा नहीं बात करूँगा वैसे भी इसका रोले नहीं है ज्यादा.

अनुपमा : आ गयी तुम करिश्मा ? तुम तो 2 दिन क लिए गयी थी न ?

घर क अंदर दाखिल होते hi करिश्मा दीदी की सास उनसे सवाल करने लगी. मैं अभी सामान निकल रहा था गाडी से.

करिश्मा दीदी : वो माँ जी मेरी सहेली की गॉड भरे का फंक्शन आ गया था सोचा वो भी अटेंड करलूं. शादी क बाद से मिली तक नहीं थी उससे.

अनुपमा : दूसरों की hi गॉड भर्ती देखना इस घर को तो एक वारिस दे नहीं पायी तुम. इतनी रात को तुझे अकेली कैसे आने दिया तेरे घरवालों ने? इतनी भी अकाल नहीं उनमे..... ये लड़का कौन है ?

करिश्मा दीदी की सास उन्हें दांत hi रही थी क मैं बैग उठाये दीदी क पास आ गया और उनकी सास क पाऊँ छुए.

करिश्मा दीदी: ये मेरा भाई है अमित. मेरे चाचा जी का बीटा

अनुपमा : पर आज तक इसे पहले तो कभी देखा नहीं. ये चाचा कौन और कब आ गए?

करिश्मा दीदी : चाचा जी पापा क बेस्ट फ्रेंड थे. उन्ही का बीटा है. पहले अपने ननिहाल में था इसी साल पापा से मिला है .

अनुपमा : खुश रहो ! आओ बीटा तुम भी अपनी बहिन का ससुराल देख लो. देखो कोई कमी तो नहीं तुम्हारी बहिन को यहाँ रहने में.

अमित : कमी कैसे हो सकती है आंटी जी. आपको देख कर hi मैं समझ गया हूँ क दीदी का ससुराल भी आपकी तरह खूबसूरत और ाचा hi होगा.

मैंने आते hi दीदी की सास की खुशामद शुरू कर दी . अनुपमा तो इतनी सी तारीफ से hi खुश हो गयी और इतराने लगी. दीदी ने एक बार मुझे देखा पर कहा कुछ नहीं.

अनुपमा : अरे आओ आओ बीटा अंदर तो आओ पहले. बातें तो बहुत अछि करते हो. करते क्या हो?

अमित : बस आंटी जी अभी तो कॉलेज में पद रहा हूँ. वैसे क्या मैं आपको अनुपमा जी बुला सकता हूँ ? वो क्या है न क आपकी पर्सनालिटी देख कर आपको आंटी कहना मुझे ठीक नहीं लग रहा है.

अनुपमा (ख़ुशी छुपाते हुए ) तुम्हारा जो मन आये कहो , करिश्मा नौकर को बोलकर अपना सामान कमरे में पहुंचा दो . बीटा तुम मेरे साथ आओ .

अनुपमा मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने साथ अंदर ले गयी जबकि करिश्मा दीदी ने नौकर को आवाज़ दी और सामान को कमरे में रखने को बोलने लगी. घर अंदर से भी आलीशान था. बीच में सोफे सेट लगा रखे थे और एक साइड को डाइनिंग टेबल लगा था किचन क पास. दो मंज़िला इस बंगले में बीच में से सीढ़ियां दो तरफ घूम कर ऊपर जा रही थी. जैसे hi मैं अनुपमा क साथ सोफे पर जा कर बैठा तो ऊपर से सीढ़ियां उतर कर नीचे आती हुई आधुनिक मॉडल सरीखी युवती नज़र आयी. देखते hi मैं समझ गया क ये करिश्मा दीदी की ननद हेमा है. एक ढीला सा लोअर और ऊपर एक खुले गले वाली T-shirt पहने वो अपने खुले बालों को हाथ से चटकती हुई हमारी तरफ hi आ रही थी. सीढ़ियां उतरने की वजह से उसके बड़े बड़े बूब्स हिल रहे थे. मैं तो उन हिलती दूध की थैलियों को hi देख रहा था.

हेमा : ये कौन है माँ ?

हेमा मुझे सर से पाऊँ तक गौर से देख रही थी.

अनुपमा: हेमा ये है अमित करिश्मा का भाई. अमित ये है मेरी बेटी हेमा.

अमित : ओह्ह्ह आप हैं हेमा , नमस्ते हेमा जी . मैंने तो सुना था आप जीजू से बड़ी हैं पर आप तो कॉलेज स्टूडेंट लग रही हैं.

हेमा अपनी तारीफ सुन कर मुस्कुरा उठी. उसने भी मुझे खुद को ताड़ते हुए देख लिया था. हेमा गौर से मेरे गठीले बदन को देख रही थी और मैं उसके गदराये यौवन को

हेमा : थैंक्स फॉर थे कॉम्पलिमेंट वैसे करते क्या हो तुम ? बॉडी तो बड़ी सॉलिड बनायीं है .

अमित : कॉलेज जाता हूँ हेमा जी और कॉलेज की रेसलिंग टीम में भी हूँ .

हेमा : तो रेसलर हो ! तभी इतनी सॉलिड बॉडी बनाई है. फिर तो कॉलेज में बड़े फेमस होंगे तुम.

अमित : जी वो....

करिश्मा दीदी : नमस्ते दीदी कैसी हैं आप?

हेमा : आ गयी तुम ? बड़े दिन लगा दिए ? वैसे तुम्हारे इस भाई पहले कभी नहीं देखा , कहाँ से ले आयी इस हीरो को?

करिश्मा दीदी : ये मेरा भाई है दीदी चाचा जी का बीटा है. ननिहाल में था अभी कुछ महीनो पहले hi आया है. मोहित और ये दोनों साथ में पड़ते हैं.

हेमा : देखने में तो स्मार्ट है अब रियल में स्मार्ट है या नहीं ये तो पता लगाना पड़ेगा . वैसे यहाँ कुछ दिन रहोगे न ?

हेमा ने मेरी तरफ गौर से देखते हुए कहा तो करिश्मा दीदी पहले hi बोल पड़ी.

करिश्मा दीदी : ये मुझे छोड़ने hi आया था बस कल सुबह चला जायेगा

अमित : जी मैं दीदी को छोड़ने hi आया हूँ अगर आप कहेंगी तो रुक जाऊंगा

मेरे ऐसा कहने पर करिश्मा दीदी ने फिर से मेरी तरफ देखा.

हेमा: हाँ , क्यों नहीं. अब आये हो तो थोड़ा बहुत सेवा का हमें भी मौका दो. वैसे भी राजीव तो बहार गया है ज़रूरी काम से तो उसकी जगह अब मैं hi तुम्हे अपना शहर दिखा देती हूँ.

अनुपमा : अब ऐसे hi थोड़ा वापिस जाने देंगे चलो अब खाना कहते हैं . करिश्मा अमित को उसका कमरा दिखा दो. जल्दी से फ्रेश हो कर आ जाओ फिर साथ में खाना कहते हैं.

अनुपमा क इतना कहते hi करिश्मा दीदी मुझे ऊपर की मंज़िल पर ले गयी और मुझे मेरा कमरा दिखा दिया.

करिश्मा दीदी: ये है तुम्हारा कमरा. जल्दी से फ्रेश हो कर निचे आ जाओ.

अमित : दीदी आप मुझसे नाराज़ हैं क्या ?

करिश्मा दीदी : तुझे क्या ज़रूरत थी यहाँ रुकने की मैंने कहा था न वापिस चले जाना छोड़ कर .

करिश्मा दीदी ने थोड़ा गुस्से से मुझे कहा

अमित : दीदी मैं पहली बार आपके ससुराल आया हूँ . अगर ऐसे hi चला जाता तो ये लोग क्या सोचते? वैसे भी जीजू यहाँ नहीं हैं तो उनसे मिले बिना कैसे जा सकता हूँ मैं.

करिश्मा दीदी : मुझे कुछ नहीं पता , तू यहाँ ज्यादा देर नहीं रुकेगा. जितना जल्दी हो सके यहाँ से चले जाओ बस.

इतना कह कर दीदी कमरे से निकल गयी. पर मैं दीदी क इस बिहेवियर से हैरान था. आखिर दीदी ऐसा क्यों कर रही हैं. शायद वो नहीं चाहती क मैं उनके ससुराल वालों क साथ ज्यादा टाइम रहूं. पर आंटी ने जो कहा था वो काम भी तो करना था और उसके लिए यहाँ रुकना hi था. हेमा को देख कर मुझे आंटी की बात सही लग रही थी क हेमा वाकई एक गरम लड़की है जिसे मर्द की ज़रूरत तो रहती hi होगी. अब पति से तलाक ले लिया है तो ऐसे में वो भी तलाश में होगी किसी मर्द की. वैसे भी जैसे वो मुझे गौर से देख रही थी मुझे भी लग रहा था क काम बन जायेगा बस उसे नज़ारा करवाना है अपने हथियार का. इसके लिए कुछ टाइम तो उसके साथ रहना hi पड़ेगा. मैंने करिश्मा दीदी की बात को दरकिनार करते हुए हाथ मुँह धोकर कपडे बदल और एक टाइट T-shirt पहन कर एक लोअर पहने निचे आ गया. हेमा की नज़र फिर से मेरे गठीले बदन का सराय करने लगी . डाइनिंग टेबल पर मैं हेमा क सामने वाली चेयर पर बैठ गया. करिश्मा दीदी काम वाली क साथ खाना परोसने लगी. मैंने उन्हें खाने को कहा तो उन्होंने बाद में खाने का कहा. हेमा की नज़र मेरे ऊपर hi थी वो खाना काम खा रही थी और मुझे ज्यादा घूर रही थी .

अनुपमा : अपना hi घर समझ कर अचे से खाना खाओ. और किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो खुद hi कह देना

अमित : जी ज़रूर

हेमा : वैसे गयम तो जाते होंगे न तुम ?

अमित : जी जाता हूँ

हेमा : फिर तो बहुत अछि बात है. तुमसे कुछ सिखने को मिलेगा. ऊपर मैंने गयम बनवा रखा है अपने लिए. मैं रोज़ अकेली hi गयम में एक्सरसाइज करती हूँ. तुम चाहो तो सुबह मेरे साथ एक्ससरसीसे कर सकते हो. मैं कुछ एक्ससरसीसे सिख लुंगी तुमसे. तुमने तो बहुत अछि बॉडी बना राखी है.

अमित : जी ये तो बस अपने आप बन गयी मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा. और आपको भला एक्सरसाइज की क्या ज़रूरत है ? आप तो पहले hi इतनी परफेक्ट शेप में हैं.

मैंने जान बुझ कर ये कहते हुए हेमा की फिगर को देखते हुए कहा तो वो भी मेरा इशारा समझ गयी.

हेमा : अब मेन्टेन कर क भी तो रखना ज़रूरी है न. मैं इतनी जल्दी बड़ी नहीं होना चाहती

अमित : बड़ी ? अभी तो आप जवान हो रही हैं और बात करती हैं बड़ी होने की. मुझे तो आपके सामने अपने कॉलेज की लड़कियां भी फीकी लग रही हैं.

मेरे मुँह से इतने खुले वर्ड्स सुन कर हेमा क चेहरे पर तो रौनक आ गयी पर करिश्मा दीदी का पारा चढ़ गया

करिश्मा दीदी: गुस्से में ) अमित !! तू जनता है तू किस्से बात कर रहा है?

हेमा : क्या कर रही हो करिश्मा? क्या कहा इसने जो तू गुस्सा कर रही है ? मेरी तारीफ hi तो कर रहा है या फिर तुझे मेरी तारीफ पसंद नहीं है?

करिश्मा दीदी: दीदी मैं ऐसा कब कहा

हेमा : कहा नहीं पर उसे तो रोक रही है न. तुझे मैं अछि नहीं लगती मैं अचे से जानती हूँ. इसी लिए तू राजीव क भी कान भर्ती रहती है

अमित : अरे हेमा जी आप तो नाराज़ हो गयी. दीदी तो बस मुझे इस लिए रोक रही थी क आप गुस्सा न हो जाएँ. दीदी को तो पता hi कुछ नहीं . आप तो मुझे बिलकुल भी ऐसी नहीं लगती जो किसी से गुस्सा भी हो सकें.

हेमा जो एक पल में गुस्से में आ गयी थी वो फिर से मेरे मुँह से तारीफ सुन कर ठंडी हो गयी. जबकि दीदी को मुझ पर गुस्सा आ रहा था. गुस्सा तो मुझे भी हेमा पर आया था इस बात से पर मैं अपने मकसद पर फोकस करना चाहता था.

अनुपमा : कितना समझदार है देखा सीख इससे कुछ . मेरी हेमा लाखों में एक है. चल जा गरम गरम रोटी ले क आ.

दीदी अपना गुस्सा दबाये किचन में चली गयी . खाना खाने क बाद अनुपमा ने मुझे आराम करने को कहा और मैं अपने कमरे में आ गया. कमरे में आते hi मैंने राधा रीमा माँ और मंजू म से बात की . रीमा और राधा नाराज़ हो रही थी मेरी इस तरह इतने दिन क लिए बहार आने से . आंटी को मैंने साडी रिपोर्ट देदी और वो भी खुश हुई मेरी बात सुन कर. मैं आराम से बीएड पर लेता था क दरवाज़े पर दस्तक हुई. मैंने जा कर दरवाज़ा खोला तो सामने हेमा कड़ी मुस्कुरा रही थी

अमित : आप इस वक़्त ?

हेमा : क्यों क्या हुआ ? मेरे इस वक़्त आने पर कोई ऐतराज़ है क्या ?

अमित : अरे नहीं नहीं मैंने तो इस लिया पूछा क आप मुझे बुला लेती मैं आपके पास आ जाता आपने तकलीफ क्यों की

हेमा : इस में तकलीफ कैसी? वैसे भी तुम मेहमान हो हमारे पूछना तो फ़र्ज़ है न . किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो वो सामने वाला कमरा मेरा hi है. वैसे मैं सुबह जल्दी उठ जाती हूँ अगर कहो तो तुम्हे भी जगा दूँ एक्ससरसीसे क लिए?

अमित : अगर आप सुबह आ कर जगेंगी तो दिन ाचा hi गुज़रेगा मेरा . पर आप जैसी राजकुमारी को कष्ट देना मुझे ाचा भी नहीं लगेगा

हेमा : मुस्कुराते हुए ) बातें बहुत प्यारी करते हो , इसमें कैसा कष्ट? सुबह जगाने आउंगी तब तक आराम से सो जाना फिर सुबह देखती हूँ तुम्हे.

अमित : सुबह क्या देखना है भला ? अभी आपके सामने hi तो हूँ

हेमा : वो सुबह पता चल जायेगा तुम्हे. ाचा अब मैं चलती हूँ. गुड नाईट

अमित : मैं इंतज़ार करूँगा सुबह का गुड नाईट

हेमा मेरी आँखों में देखती हुई मुस्कुरा कर गांड मटकती अपने कमरे में चली गयी. मैं दरवाज़े पर खड़ा उसकी मटकती गांड देखता रहा. हेमा ने अपने कमरे का दरवाज़ा खोल कर पलट कर मुझे देखा और मेरी नज़रों का निशाना समझ कर स्माइल देती हुई कमरे में चली गयी. मैं भी वापिस बीएड पर आ कर लेट गया.

अगली सुबह मैं जल्दी उठ गया. हेमा अभी मुझे जगाने नहीं आयी थी. हेमा क आने से पहले मैंने जल्दी से अंडरवियर उतर कर सिर्फ लोअर पेहेन लिया और अपना लैंड हिलाकर खड़ा कर लिया. लैंड खड़ा कर क मैं सीधा लेट गया ताकि हेमा मुझे सोया हुआ समझे और उसे मेरे लैंड का भी अचे से नज़ारा हो जाये. जैसा मैंने सोचा था वैसे hi हुआ. कुछ hi देर में कमरे का दरवाज़ा खुला और हेमा अंदर आ गयी. मैं कनखियों से हेमा को hi देख रहा था. हेमा लोअर T-shirt पहने कमरे में दाखिल हुई और चलती हुई बीएड क पास आयी. उसने मुझे एक बार आवाज़ दी पर मैं नहीं हिला. फिर वो मुझे जगाने क लिए जब और करीब आयी तो उसकी नज़र मेरे लैंड पर गयी. लैंड पर नज़र पड़ते hi वो स्टेचू बन गयी. हेमा की ऑंखें बड़ी बड़ी हो गयी और मुँह खुला का खुला रह गया जैसे कोई अजीब चीज़ देख ली हो. लोअर क ऊपर से लैंड का उभर जांचने क लिए हेमा नीचे झुकी और लैंड को थोड़ा दूरी से hi अपने हाथ इसे अंदाज़ा लगाने लगी उसकी लम्बाई और मोटाई का. हेमा लैंड को देखने में इतना खोई थी क उसे ज़रा भी परवाह नहीं थी क मैं सो रहा हूँ क जग रहा हूँ. मैंने जानबूझ कर करवट लेते हुए अपना लैंड हेमा की तरफ hi कर दिया . हेमा झुकी हुई थी तो लैंड उसके हाथ से टच हो गया. हेमा झटके से पीछे हैट गयी जैसे मैं नींद से जग गया हूँ. मुझे सोया हुआ देख कर उसने चैन की साँस ली.

हेमा ( मन में ) उफ्फ्फ कितना बड़ा हथियार लिए फिर रहा है ये तो. एक बार किसी क अंदर चला जाये तो उसकी हालत ख़राब कर दे. ऐसा लैंड तो मैंने ज़िन्दगी में किसी का रियल में नहीं देखा. हो भी क्यों न हत्ता कट्टा तो है ऊपर से पर्सनालिटी भी अछि है. कल जैसे मुझे देख रहा था ये भी पहुंचा हुआ खिलाडी लगता है. इसे मौका देकर देखती हूँ. अगर खिलाडी निकला तो मज़ा आ जायेगा .

हेमा : अमित उठो देखो सुबह हो गयी .

मैंने ऊंघते हुए उठने की एक्टिंग की

अमित : उन्न्नध्ह्हह्ह अरे हेमा जी आप ? गुड मॉर्निंग

हेमा : गुड मॉर्निंग , क्यों कोई और आने वाला था? अब जल्दी से उठो वर्ण लेट हो जायेंगे. जल्दी से फ्रेश हो क आ जाओ. मैं वेट कर रही हूँ बहार.

इतना कह कर हेमा स्माइल करते हुए कमरे से बहार चली गयी.

अमित ( मन में ) पहला तीर सही निशाने पर लगा है. कुछ ज्यादा hi प्यासी लग रही है ये.



मैं जल्दी से उठा और हाथ मुँह धो कर जल्दी से फ्रेश हो कर बहार आ गया .
 
भाई लोगो लिखने में टाइम तो लगता है न. काम से फुर्सत जब भी मिले तब लिखता हूँ . आज आधा भी नहीं लिख पाया इस लिए अपडेट आअज नहीं दे पाउँगा . थोड़ा सबर रखिये काम चल रहा है उसी पर
 
Back
Top