अपडेट 181
हेमा की ज़ोरदार चुदाई से एक बार में hi चल बदल गयी थी. वो अब पाऊँ फैला कर धीरे धीरे चल रही थी . छूट में आयी सूजन की वजह से उसे तकलीफ हो रही थी. हम फ्लैट से वापिस हेमा क ऑफिस आ गए. क्यूंकि इस हालत में अभी घर जाना दोनों को मुश्किल में दाल सकता था. मैं हेमा को बार बार तंग कर रहा था उसकी हालत पर मुझे हंसी आ रही थी.
हेमा : हंस लो , मेरी हालत ख़राब हो गयी है और तुम्हे हंसी आ रही है. ऊपर नीचे दोनों जगह सूजन आ गयी है.
अमित: खुद hi तो कह रही थी ज़ोर से करो अब इसमें मेरी क्या गलती है .
हेमा : वो तो उस हालत में मुँह से पता नहीं क्या क्या निकल जाता है इसका मतलब ये तो नहीं जान hi निकल दो. देखो इन्हे अब तो ब्रा भी दर्द दे रही है
अमित : तो उतर दो न क्यों पहनी है.
हेमा : तो क्या सबको दिखती फिरूं , ड्रेस भी ऐसी है क फिर सब पता चल जायेगा देखने वालों को.
अमित : ाचा है न कइयों का काम देखने से hi हो जायेगा
हेमा : दिमाग तो ठीक है तुम्हारा , लोग क्या कहेंगे क मैं कोई रंडी हूँ
अमित : लोगों की छोडो मेरी तो रंडी हो न चलो अब जल्दी से एक बार इसे मुँह में लो
हेमा : कैसी बातें कर रहे हो ये ऑफिस है मेरा
अमित : तो क्या हुआ , यहाँ कौन सा कोई बिना पूछे अचे अंदर आएगा . तुम मेरी रंडी हो यद् है न अब अगर कहना नहीं मानोगी तो फिर ये लैंड भी नहीं मिलेगा दोबारा.
हेमा अपनी चेयर पर बैठी और मैं अपनी चेयर से उठ कर उसके पास आ गया और जिपंखोल कर अपना लैंड उसके मुँह क पास कर दिया. हेमा ने एक बार मेरी तरफ देखा फिर मेरा लैंड पकड़ लिया
हेमा : बड़े ख़राब हो तुम , इसको तो मन कर hi नहीं सकती अब मैं . पर मेरी हालत नहीं इसे फिर से लेने की और तुम्हारा इतनी जल्दी होता नहीं
अमित : चिंता मत करो , बस थोड़ी देर मुँह में ले कर इसे प्यार करो मैंने कौन सा पानी निकलना है . अब जल्दी से मुँह में लो और इसे प्यार करो
मैंने हेमा का सर अपने लैंड पर झुकाते हुए उसके मुँह में लैंड दाल दिया . न चाहते हुए भी हेमा को मेरी बात माननी पड़ी और वो मेरा लैंड चूसने लगी . मैं ये सब इस लिए कर रहा था क हेमा पूरी तरह से मेरी गुलाम बन जाये और मेरी हर बात मने . करिश्मा दीदी क लिए अब मैंने इस बिगड़ी घोड़ी को लगाम लगाने का तरीका सोच लिया था. थोड़ी देर मैंने हेमा से लैंड चुसवाया और फिर अपनी जगह पर बैठ गया. शाम क चार तो हमें फ्लैट पर hi हो गए थे . कुछ देर और हेमा जैसे तैसे ऑफिस में बैठी रही और अपना काम देखा फिर 7 बजे ऑफिस बंद कर क हम घर चल पड़े. कार में घर आते वक़्त भी मैं हेमा क साथ छेड़छाड़ करता रहा . घर आते hi हेमा अपने कमरे में चली गयी ताकि कुछ देर आराम कर सके पर करिश्मा दीदी उसे गौर से देख रही थी और फिर मुझे भी घूर क देखने लगी. मैं भी फ्रेश होने का कह कर अपने कमरे में चला गया. रत क खाने तक मैं अपने कमरे में hi रहा . डिनर क वक़्त भी हेमा ने अपने कमरे में hi अपना खाना मंगवा लिया. करिश्मा दीदी की नज़रें मुझ पर hi थी. मैं उनके इस तरह घूरने से अंदर से घबरा भी रहा था इस लिए मैं अनुपमा क साथ बातों में लगा रहा. खाने क बाद मैं अनुपमा क साथ hi उसके कमरे में चला गया.
अनुपमा : अरे बीटा तुम अब आराम करो थक गए होंगे.
अमित : कैसी बातें करती हैं आप भी , मैं तो यहाँ आया hi आपसे मिलने हूँ. बड़ी तारीफ सुनी थी आपकी . और सच कहूं तो जितना सुना था काम hi सुना था. आप सच में बहुत अछि हैं.
अनुपमा : ाचा क्या सुना था मेरे बारे में ?
अमित : यही क आप बहुत hi अछि हैं. और सच कहूं तो आप अछि होने क साथ साथ बहुत खूबसूरत भी हैं
अनुपमा : मज़ाक ाचा कर लेते हो , मैं कहाँ से खूबसूरत हूँ भला. अब तो बड़ी हो गयी हूँ.
अमित : कोई अँधा hi होगा जो आपके बारे में ऐसा सोचेगा. मुझे तो आप हेमा दीदी की बड़ी बहिन hi लगती हैं. अभी तक आप की जवानी वैसी hi कायम है. सच कहूं तो अंकल आपके सामने कुछ लगते hi नहीं . बुरा मत मानियेगा मेरी बात का पर आप दोनों की जोड़ी मुझे कुछ जमी नहीं . कहाँ आप अभी तक इतनी जवान हैं और कहाँ अंकल बूढ़े से लगते हैं.
अनुपमा की आँखों में ख़ुशी साफ़ झलक रही थी अपनी तारीफ सुन कर . पर वो जान बुझ कर इंकार कर रही थी ताकि मैं और तारीफ करूँ. हर औरत ऐसी hi होती है अपनी तारीफ की भूखी
अनुपमा: इतनी भी खूबसूरत नहीं हूँ जितना तुम कह रहे हो और तेरे अंकल को तो काम क इलावा कुछ पता भी नहीं है इस लिए वो बूढ़े हो गए हैं. उनकी काम में लगन और ईमानदारी देख कर hi मेरी शादी उनसे करवा दी थी मेरे बाप ने वर्ण ...
अमित : मुझे भी ऐसा hi कुछ लगा था वर्ण आपके लिए तो कोई दमदार हैंडसम पति hi चाहिए था . आप बैठी क्यों है लेट जाइये मैं आपके पाऊँ दबा देता हूँ.
अनुपमा: अरे नहीं नहीं तुम हमारे मेहमान हो तुमसे पाऊँ दबवाउंगी क्या
अमित : आपकी सेवा करना तो मेरा फ़र्ज़ है लड़की वालों की तरफ से हूँ न . वैसे इसी बहाने आपके पास रहने का मौका तो मिलेगा.
अनुपमा न न करते हुए भी लेट गयी और मैं उसके पाऊँ क पास बैठ गया . मैंने अनुपमा क पाऊँ पर हाथ रखा और उन्हें सहलाने लगा.
अमित : अनुपमा जी बुरा न मने तो एक बात कहूं ?
अनुपमा : कहो मैं भला क्यों बुरा मानूंगी तुम्हारी बात का , तुम तो इतनी अछि बातें करते हो इतने संस्कारी हो
अमित : आपके पाऊँ बहुत खूबसूरत हैं , अभी भी आप इतनी हसीं है . पता नहीं आप अपनी जवानी में कितनी खूबसूरत रही होंगी.
अनुपमा की आँखों में चमक और बढ़ गयी और चेहरे पर स्माइल आ गयी
अनुपमा : छोडो पुराणी बातें अब तो कितने साल हो गए. वैसे मैं उस टाइम में हेमा जैसी hi थी.
अमित : मतलब हेमा दीदी आप जैसी हैं? हेमा दीदी तो बिलकुल किसी हेरोइन की तरह लगती हैं इसका मतलब आप भी उस टाइम में हेरोइन hi लगती होंगी. पर मैं ताकें से कह सकता हूँ क आप उनसे भी खूबसूरत रही होंगी तभी तो वो इतनी खूबसूरत हैं. वैसे तब आपके पीछे तो लड़कों की लाइन लग जाती होगी फिर अंकल क साथ कैसे ....
अनुपमा : बस बीटा किस्मत hi कह लो इसे. तेरे अंकल मेरे बाप क पास काम करते थे . उनकी म्हणत और ईमानदारी की वजह से मेरे बाप ने मुझे उनके पल्ले बांध दिया ताकि काम भी चलता रहे हो और एक लौटी बेटी उनकी आँखों क सामने रहे . वर्ण मेरे लिए तो एक से एक अचे लड़कों क रिश्ते आते थे.
अमित : आपके पिता जी ने आपके साथ बड़ी नाइंसाफी करदी. अंकल तो किसी एंगल से भी आपके साथ फिट नहीं बैठते. कहाँ आप एक हूर पारी और कहाँ वो ....
मैंने अनुपमा क पाऊँ सहलाते हुए उसकी सदी को धीरे धीरे सरका कर घुटनो तक कर दिया था और उसकी नंगी चिकनी पिंडलियों को प्यार से सेहला रहा था. अनुपमा बातों में इतनी मगन थी की उसने इस तरफ शायद ध्यान नहीं दिया या फिर वो भी मज़ा ले रही थी.
अनुपमा : अब किस्मत में जो लिखा है वो कौन बदल सकता है.
अमित : किस्मत को मैं नहीं मंटा अनुपमा जी. मेरा तो मन्ना है क अपने दिल की सुन्नी चाहिए. जो सही लगे वो करो . लोगों का क्या है वो तो कुछ न कुछ कहते hi रहेंगे. और जहाँ तक आपकी बात है आप तो अभी भी जवान हैं. ज़रा खुद को नए ज़माने क हिसाब से रख कर बहार निकलेंगी तो आज भी आपके पीछे लाइन लग जाएगी.
अनुपमा : ऐसा नहीं है
अमित : ऐसा hi है , आप नहीं जानती. आप में वो हर बात है जो कोई भी मर्द पसंद करता है
अनुपमा : ाचा !! मैं भी तो सुनूं ऐसा क्या है मुझमे जो मर्दों को पसंद है.
अमित : जाने दीजिये अगर मैं कुछ कहूंगा तो आप बुरा मन जाएँगी.
अनुपमा: अरे नहीं मानती मैं बुरा तुम कहो.
अमित : नहीं रहने दीजिये , हमारा रिश्ता ऐसा है क आपको गुस्सा आ जायेगा और फिर मेरी शिकायत कर देंगी आप
अनुपमा : अरे नहीं करती मैं शिकायत तुम कहो तो सही .
अमित : आप सर से पाऊँ तक चलती फिरता खूबसूरती का नमूना हैं. एक तो इतनी अछि हाइट ऊपर से गोरा रंग. ऊपर वाले ने आपको मैं नक्श भी कितने अचे दिए हैं. बस आप ने खुद पर ध्यान नहीं दिया इस लिए थोड़ा सा शरीर भरी हो गया है पर सच कहूं तो ये आपको और भी ज्यादा हॉट बना देता है. ज़रूरी हिस्सों पर चर्बी होना भी ज़रूरी है. कहाँ आज कल की लड़कियां तो हड्डियों का ढांचा hi होती हैं और आप तो परफेक्ट हैं. अगर ज़रा सा खुद पर ध्यान दे तो आज कल की लड़कियां भी आपके सामने पानी भरने लगेंगी .
अनुपमा : सच !! क्या मैं सच में ऐसी हूँ ? कहीं तुम मेरा मज़ाक नॉट नहीं बना रहे?
अमित : आपको मज़ाक लग रहा है ? मेरी एक एक बात दिल से निकली है अनुपमा जी और सच कहूं तो अगर रिश्तों की रुकावट न होती तो ...
अनुपमा : तो ???
अमित : तो पता नहीं मैं क्या कर बैठता.
इतना कहते हुए मैंने अपना हाथ सदी क अंदर घुटनो से थोड़ा ऊपर रख दिया. अनुपमा मेरी आँखों में hi देख रही थी हम दोनों कुछ देर क लिए खामोश हो गए. तभी बहार से अंकल की आवाज़ आयी वो घर वापिस आ गए थे. मैं जल्दी से उठ गया और अनुपमा भी सीधी हो कर बैठ गयी. अंकल कमरे में आ गए और मैं उनसे मिल कर अपने कमरे में वापिस आ गया. मेरा अंदाज़ा सही था अनुपमा अपने पति को पसंद नहीं करती थी इस लिए अपनी तारीफ सुन कर और अपने पति क बारे गलत सुन कर उसे मज़ा आ रहा था. मेरे सहलाने से उसने बुरा नहीं मन मतलब वो भी अपनी बेटी की तरह hi गरम औरत होगी जो मेरे सहलाने से गरम हो रही थी. हो भी क्यों न हेमा जितनी गरम थी ज़रूर माँ का hi असर होगा. ज़रूर ये भी अपने टाइम पर बड़ी कामुक रही होगी तभी बाप ने नौकर क पल्ले बांध दिया. खैर वो सब ज़रूरी नहीं था. ज़रूरी था तो इन दोनों माँ बेटी को काबू करना. आंटी ने तो मुझे हेमा को काबू करने को कहा था पर मैं तो उसकी माँ को भी अब अपने नीचे लेन का सोच रहा था ताकि साडी समस्या जड़ से hi ख़तम हो जाये. खैर उसके बाद मैंने अपने कमरे में आ कर कुछ देर रीमा से बात की और फिर सो गया.
उधर ऋतू सिंह शाम तक बिजी रही सुशिल कुमार क केस की वजह से. सारा दिन बड़े बड़े ऑफिसर्स क फ़ोन आते रहे उससे केस की प्रोग्रेस क बारे में मगर ऋतू सिंह ने कोई भी डिटेल किसी को नहीं दी वो हर बात का गोल मोल जवाब देती रही क्यूंकि वो जानती थी क वो लोग असल में जानना क्या चाहते हैं. ऋतू सिंह इस केस को अलग hi एंगल से देख रही थी क्यूंकि कुछ चीज़ें उसने नोट की थी जो अलग hi कहानी की तरफ इशारा कर रही थी और हल उस तरफ का कोई खास एविडेंस हाथ नहीं आया था सिवाए एक क. शाम तक बिजी रहने क बाद उसने अपने ऑफिस में hi सभी स्टेशन इन्चार्जेस को बुला लिया मंजरी क केस क रिगार्डिंग मगर उम्मीद क उलट किसी ने भी इस तरह का कोई कैसे होने की बात नहीं मणि . जिस वजह से ऋतू का गुस्सा उसके सर चढ़ गया और उसने सबको सीधे सीधे वार्निंग दे दी क वो खुद इस केस क बारे में पता लगाएगी और जिसके भी ठाणे का ये केस हुआ उसे वो ससपेंड करवा देगी. इसके बाद भी किसी ने हामी नहीं भरी. जब कोई बात नहीं बानी तो ऋतू ने मंजू से hi जानना चाहा क्यूंकि उसको लगा क शायद मंजू से अमित ने इस बारे में कोई बात की हो मगर मंजू को भी कुछ पता नहीं था. ऋतू एक बार फिर से निराश हो गयी. एक तरफ उसको शाबाशी मिल रही थी उसकी कामयाबी क लिए पर ऋतू को तो जैसे कोई सरोकार hi न था उस बात से. फ़्रस्ट्रेशन में आज फिर वो अपने सरकारी आवास में अकेली बैठी वीने पिने लगी जैसा क वो अक्सर करती थी इस हालत में. पर अमित क साथ किया गया उसका गलत सलूक और फिर अमित का रिएक्शन उसे और भी तड़पने लगा. ऋतू खुद को बहुत अकेला महसूस कर रही थी. वो मंजू क पास भी नहीं जा सकती थी क्यूंकि उसने खुद hi तो फैसला किया था क अमित को मानाने तक वो मंजू क पास नहीं जाएगी .
दूसरी तरफ रुपाली ने भी बलजीत राइ से बचने क लिए अपनी तबियत का बहाना कर क हॉस्पिटल में एडमिट होना hi ठीक समझा. वैसे भी शीना क बर्थडे पार्टी क चलते उसे दर था क कहीं बलजीत राइ उसे फिर से न दबोच ले. शीना ने भी उसकी मज़बूरी को समझते हुए किसी तरह का सवाल नहीं उठाया. रीना तो अपनी माँ क पास hi हॉस्पिटल में hi रुक गयी. जबकि रीमा को शीना ने अपने साथ रखा .
राधा की तरह दिव्या भी अमित को मिस कर रही थी. करवा चौथ वाले दिन जिस तरह अमित ने दिव्या को मजबूर कर क तैयार करवाया था उससे भी दिव्या क मन में अमित क लिए फीलिंग्स और बढ़ गयी थी . और फिर जो सूट अमित ने उसे दिलवाये थे उसने वो अपने लिए सिलवाने क लिए दे दिए थे. वैसे तो वो अब सूट नहीं पहनती थी पर वो अमित क लिए फिर से वो सब करना चाहती थी जो वो कब की छोड़ चुकी थी सिर्फ उसकी ख़ुशी क लिए. दिव्या अब मन hi मन अमित को बेटे की जगह प्रेमी hi समझने लगी थी जिसमे बहुत हद तक हाथ उसके सपनो का था जिसमे उसे अपनी बहिन दामिनी की आवाज़ hi रास्ता दिखती आयी थी. अब ये आवाज़ दामिनी की थी या उसके दिल क दबे कुचले अरमानों की ये तो वो भी नहीं जानती थी . पर राधा क साथ वो भी अब सपनो में अमित को hi देखती थी. उधर निधि भी करवा चौथ क बाद से अमित को और भी ज्यादा मिस कर रही थी . जिस तरह वो उस दिन अमित की बहिन में सोई थी वो उसे भूल नहीं प् रही थी और रोज़ रत तकिये को अमित समझ कर कास क अपने साइन से लगा कर सोने लगी थी . फ़िलहाल निधि अमित को वापिस आने पर सरप्राइज देना चाहती थी जिसके लिए वो जी जान से म्हणत कर रही थी.
अगले दिन सुबह मैं जल्दी उठ गया और एक्ससरसीसे करने क लिए रेडी हो गया. हेमा भी रेडी हो कर एक्ससरसीसे करने छत पर आ गयी. अब वो बिलकुल ठीक लग रही थी. मुझे देखते hi वो मेरे पास आ गयी. इस वक़्त हेमा एक तक सूट में थी और फिटिंग वाले इस ड्रेस में उसके बूब्स और गांड केहर ध रही थी. उसके आते hi मैंने उसकी गांड मसलनि शुरू कर दी.
अमित : कैसी हो मेरी जान रत तो तुम खाना खाने भी नहीं आयी नीचे .
हेमा : नीचे क्या अति , मेरी हालत कैसी थी पता नहीं तुम्हे ? खामखा किसी को शक हो जाता मेरी हालत देख कर. देखा नहीं था कैसे घूर घूर क देख रही थी करिश्मा.
अमित : चलो वो सब तो ठीक है , आज का क्या विचार है? आज फिर रेडी हो न गांड देने क लिए?
हेमा : ये तुम मेरी गांड क पीछे hi क्यों पड़े हो ?
अमित : इस लिए मेरी हाँ क तुम्हारी ये मस्त गांड जब भी देखता हूँ तो मेरा लैंड खड़ा होने लगता है. इतनी मस्त गांड अगर न मरी तो फिर कुछ भी नहीं किया
हेमा : पर तुम्हारा इतना बड़ा डंडा अंदर लेना मुश्किल होगा मेरे लिए
अमित : उसकी चिंता तुम न करो , वो मैं कर लूंगा . तुम बस रेडी रहो लेने क लिए
हेमा : तुम तो घुसा hi डोज तुम्हारा क्या है , हालत तो मेरी ख़राब हो जाएगी.
अमित : अब मज़े लेने की थोड़ी बहुत कीमत तो चुकानी पड़ेगी न . वैसे भी एक बार hi दर्द होगा उसके बाद तुम्हे भी मज़ा hi आएगा.
हेमा : मज़े का तो पता नहीं गांड ज़रूर फैट जनि है मेरी.
अमित : अब ज्यादा बातें मत बनाओ , ये बताओ गांड कहाँ डौगी ? बहार चल कर या यही घर में ?
हेमा : पागल हो ? यहाँ किया तो सबको पता चल जायेगा. बहार hi चलते हैं. वही जगह सेफ है.
अमित : तो ठीक है पर आज ऑफिस कल की तरह ज्यादा टाइम मत लगाना.
हेमा : नहीं लगाती, तुम नाश्ता कर क तैयार रहना.
अमित : तो अभी क लिए भी थोड़ा बहुत हो जाये.
हेमा : अभी क्या करना है सुबह सुबह
अमित : इधर आओ मैं बताता हूँ.
मैं हेमा को खींच कर उसके गयम में ले गया और उसे वहीँ घुटनो पर बिठा कर उसके मुँह में लैंड पेल दिया. हेमा भी बिना कोई न मुकुर किये लैंड चूसने लगी. थोड़ी देर उससे लैंड चुसवाकर मैंने कपडे ठीक किये और हम दोनों नीचे आ गए. मैंने इस दौरान हेमा को मसल मसल कर पूरा गरम कर दिया था. वो तो छुड़वाने को तैयार हो गयी थी वहीँ पर मैंने जान बुझ कर उसे नहीं छोड़ा. तैयार हो कर नाश्ता करने क लिए जब हम नीचे आये तो अंकल जल्दी से नाश्ता कर क निकल लिए. मुझे देखते hi अनुपमा क चेहरे पर चमक आ गयी.
अनुपमा: अरे आ गए तुम अमित आओ आओ मैं तुम्हारा hi इंतज़ार के रही थी नाश्ते क लिए. करिश्मा जल्दी से नाश्ता लगाओ .
अमित : गुड मॉर्निंग जी आप कैसी हैं?
अनुपमा : मैं तो बिलकुल अछि हूँ. जल्दी से नाश्ता के लो फिर मैं तुम्हे ले कर चलती हूँ आज शॉपिंग करने .
हेमा : शॉपिंग? ये आज शॉपिंग का ख्याल कहाँ से आ गया माँ ?
अनुपमा: वो क्या है न अमित पहली बार यहाँ आया है तो मैं सोच रही थी क आज अमित को शॉपिंग करवा क लती हूँ . आखिर हमारा भी तो कुछ फ़र्ज़ है न उसकी सेवा करने का.
हेमा : ये तो आप ठीक कह रही हैं क हमारा भी कुछ फ़र्ज़ है इसकी सेवा करने का.
हेमा ने इतना कह कर मेरी तरफ कामुक ऐडा से देखा.
हेमा : पर क्या है न माँ क आज मैं अमित को अपने साथ लेकर जा रही हूँ . आप कल ले जाना इसे शॉपिंग क लिए.
हेमा की बात सुनते hi अनुपमा का चेहरा उतर गया .
अनुपमा : बीटा कल तुम लेकर गयी तो थी इसे ? आज मुझे शॉपिंग करवाने दे
हेमा : माँ वो कल एक जगह रह गयी थी आज वहीँ ले कर जाना है इसे . बस आज की बात है कल आप ले जाना.
अमित : मैं तो यहीं हूँ जब तक आप कहेंगी , तो हम कल चल पड़ेंगे
अनुपमा : मायूस होते हुए ) ाचा ठीक है चलो कोई बात नहीं कल सही. आज शाम को मुझे पार्टी में जाना था तो सोचा अमित क साथ साथ अपने लिए भी कुछ देख लेती हूँ.
हेमा : अरे माँ आपके पास तो पहले से hi इतनी साडी कलेक्शन हर तरह की. कोई सा भी पेहेन लो. वैसे भी किटी पार्टी पर hi तो जाना है आपने.
करिश्मा दीदी मेरे आगे खाने की प्लेट रखती हुई मुझे फिर से घूर रही थी. ऐसा लग रहा था क उन्हें मेरा ऐसे है है क हेमा और अनुपमा से बात करना ाचा नहीं लग रहा था. पर उन्हें क्या पता मैं तो उन्ही क लिए ये सब कर रहा था और इन हवस की मरी माँ बेटी को काबू करने क लिए ये सब कर रहा था. हेमा ने बस थोड़ा सा hi नाश्ता किया और मुझे चलने क लिए कहने लगी. मैंने भी जल्दी से नाश्ता ख़तम किया और उसके साथ चल पड़ा. हेमा ने आज लॉन्ग स्कर्ट और टॉप पहना था. शायद इस लिए क उसकी आज गांड फटने वाली थी और वो उसके बाद अपनी बिगड़ी हुई चल छुपाना चाहती हो.
हेमा कल की तरह फिर से मुझे ऑफिस में ले आयी और अपने स्टाफ को काम बताने लगी . मैं ऑफिस में उसके साथ बैठा था और वो फिर कल की तरह टाइम लगा रही थी तो मुझे ाचा नहीं लग रहा था. हेमा ने मुझे फ़्रस्ट्राटे होते देखा तो मुझ पर हसने लगी .
हेमा : क्या हुआ इतने खामोश क्यों हो और ये मुँह कैसा बना रखा है ?
अमित : और कितनी देर लगाओगी , मुझसे और इंतज़ार नहीं हो रहा . जल्दी करो वर्ण मैं यहीं शुरू हो जाऊंगा .
हेमा : थोड़ा सबर रखो यार थोड़ी देर की तो बात है एक बार सारा काम देख लूँ फिर चलते हैं. इतनी भी क्या जल्दी है सारा दिन अपना है .
हेमा जान बुझ कर मुझे चिढ़ाने वाले एक्सप्रेशन बना रही थी तो मुझे भी ताव आ गया और मैं अपनी चेयर से उठ गया
अमित : तो तुम ऐसे नहीं मानोगी , अभी बताता हूँ तुझे .
इतना कह कर मैं हेमा क पास आया और उसे चेयर से उठा कर टेबल पर झुका दिया. इससे पहले क वो कुछ समझती मैंने एक हाथ से पीछे से उसकी स्कर्ट उठा कर कमर पर चढ़ा दी और उसकी पेंटी खिंच कर पाऊँ में गिरा दी. साथ hi अपनी 2 उंगलियां उसकी छूट में घुसा दी.
हेमा. : आअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स उईईई माआआअह्ह्ह्ह ... क्या कर रहे हूऊऊ कोई आए जायेगा आए
अमित : आता है तो आये मुझसे और इंतज़ार नहीं हो रहा. कब से देख रहा हूँ और तू मुझे चिढ़ा रहे है . ये ले
मैंने तेज़ी से उंगलियां अंदर बहार करनी शुरू कर दी. हेमा मुझे पीछे हटाने की कोशिश कर रही थी पर मैंने उसकी पीठ पर दबाव बना कर उसे दबा दिया . कुछ hi पलों में वो गरम हो गयी और सिसकने लगी.
हेमा : उनननममममम आआह्ह्ह्ह कक्कक्क्स अब डाल भी दो करलो जो करना है प्लीज उनननननममम जल्दी से दाल दो.
हेमा जब पूरी गरम हो गयी तो मैंने उसे छोड़ दिया. मैं उसे छोड़ कर पीछे हैट गया और अपनी चेयर की तरफ बढ़ाने लगा तो हेमा ने जल्दी से पलट कर मेरा हाथ पकड़ लिया.
हेमा : रुक क्यों गए ? करो न , मुझे क्यों तड़पा रहे हो ?
अमित : अब पता चला तुम मेरे साथ क्या कर रही हो इतनी देर से.
हेमा : प्लीज एक बार अभी दाल दो देखो मेरा क्या हाल हो रहा है .
अमित : अगर लैंड लेना तो चलो जल्दी , मैं नहीं चाहता क यहाँ सब तुम्हारी चीखें सुने.
हेमा ने जल्दी से अपनी पेंटी ऊपर की और मेरा हाथ पकड़ कर बहार चल पड़ी . हेमा की आग भड़क उठी थी इस लिए उसे जल्दी लैंड चाहिए था छूट में . कार को तेज़ी से चलते हुए वो जल्दी फ्लैट पर ले आयी. तेज़ कदमो से चलती वो मुझे खींचती हुई तेज़ी से अपने फ्लैट में ले आयी. मुझे मन hi मन हेमा की हालत पर हंसी आ रही थी. फ्लैट पर पहुँचते hi हेमा ने दरवाज़ा अंदर से बंद करते hi मुझ पर हमला कर दिया और मुझसे किश करते हुए मेरी पेण्ट खोलने लगी. पेण्ट नीचे कर क वो झट से घुटनो क बल बैठ गयी और मेरा लैंड मुँह में ले कर रंडी की तरह चूसने लगी .
हेमा : उम्म्म्म साररूउप सैरूयप्प उम्म्म आआह्ह्ह उम्मम्मम सारूउप सारिऊप
मैंने हेमा का सर पकड़ा और उसके मुँह में लैंड पेलने लगा. हेमा क मुँह से थूक की पर नीचे गिर रही थी . एक बार मेरा धक्का ज्यादा ज़ोर से लग गया और लैंड उसकी हलक में घुस गया. हेमा की ऑंखें hi बहार आ गयी और वो ज़ोर ज़ोर से खांसने लगी
हेमा : ाखुन ाखुन ाखुन हहहहह ाखुन ाखुन ाखुन हहहहह मरना है क्या
अमित : मरना नहीं मारनी है , तेरी छूट मारनी है मेरी रंडी . चल जल्दी घोड़ी बन जा .
मैंने हेमा को वहीँ हॉल में पड़े सोफे की बैक पर झुकाया और उसकी स्कर्ट कमर पर चढ़ा कर उसकी पेंटी उतर दी. हेमा ऊपर से कपड़ों में थी और नीचे से पूरी नंगी . उसकी नंगी गोरी टांगों को फैला कर मैंने उसके बड़े बड़े खरबूजे जैसे कूल्हों पर ज़ोर ज़ोर से थप्पड़ मरे और उसकी गांड लाल करदी
चटाक चटक चटक
हेमा : आअह्ह्ह्हह ककक अब दाल भी दो क्यों तड़पा रहे हो कब से मेरी छूट तड़प रही है .
अमित : चुप कर रंडी यहाँ आर्डर मैं दूंगा तू नहीं . चटाक चटाक
मैंने 2-4 और थप्पड़ मरे और थोड़े से घुटने बेंड कर क उसकी छूट पर सूपड़ा लगा कर ज़ोरदार धक्का मरते हुए एक hi बार में पूरा लैंड छूट में घुसा दिया
हेमा : आआआईईईई माआआआ माररररर डालललललाआआ आआअह्हह्ह्ह्हह
अमित : क्यों रंडी अभी तो बड़ी तड़प रही थी अब चीख क्यों रही है? ले न अब लैंड यही तो चाहिए था तुझे
हेमा : आआह्ह्ह्ह एक hi बार में आआह्ह्ह्ह ककक क्यों घुसा दिया मेरी छूट फट गयी है
अमित : तेरी छूट hi तो फाड़ने आया हूँ मैं ये ले
मैंने हेमा की कमर दोनों हाथों से पकड़ी और ताबड़तोड़ धक्के मरने शुरू कर दिए . कुछ देर हेमा चीखती रही और फिर अपने रंग में आ कर मुझे और तेज़ धक्के मरने को कहने लगी. पक्की रंडी थी हेमा उसे तो सिर्फ दमदार चुदाई hi चाहिए थी .
हेमा : आह्हः ाःह ाःह आह्हः आह्हः और ज़ोर से करो आअह्ह्ह फ़ायद दो मेरी उम् आअह्ह्ह ककक उफ्फफ्फ्फ़ फ़क फ़क डीपर हर्डर उम्म्म आअह्ह्ह्ह आह्हः
अमित : ये ले रंडी आज तेरी छूट फाड़ कर hi रहूँगा . आज तुझे आगे पीछे दोनों तरफ से फाड़ूंगा
हेमा : ीीेहःहः फ़क फ़क फ़ायद दो जैसे चाहे फाड़ो मेरी आग बुझा दो आअह्ह्ह आअह्ह्ह फुककक
मैंने हेमा का टॉप उतर दिया और उसकी ब्रा से उसके रसीले आम बहार निकल कर ज़ोर ज़ोर से मसलने शुरू कर दिए. हेमा क बूब्स ज़ोर से पकड़ कर मैं ज़ोरदार धक्के मर रहा था. हेमा का काम जल्दी hi हो गया और उसकी टाँगे कम्पनी लगी. झटके लेते हुए वो निढाल हो गयी. उसकी छूट से पानी निकल कर उसकी टांगों क साथ बेहटा हुआ नीचे ज़मीन तक आने लगा. मेरा लैंड उसकी छूट क गर्म पानी से पूरा चिकना तो था hi. मैंने जल्दी से लैंड छूट से बहार निकला और उसकी गांड पर सेट कर क ज़ोरदार धक् में आधा लैंड गांड में घुसा दिया. हेमा तो मदहोश हुई पड़ी थी उसे उम्मीद न थी क मैं एक डैम से इतनी जल्दी गांड में दाल दूंगा. गांड में लैंड घुसते hi वो ज़ोर से चीख पड़ी.
हेमा : आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मायआ कर गयी निकल बहार हरामज़ादे आयआईईईई मरररररर दलाआआअह्ह्ह माआआआ छोड़ड़ड़ दे मुझे .
हेमा दर्द से छटपटा रही थी और मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी. आगे से वो पहले से hi सोफे क साथ लगी हुई थी और पीछे मुझे वो हटा नहीं प् रही थी. वो पूरी तरह से मेरी गिरफ्त में थी. मैंने उसके गाली देते hi गुस्से में एक और धक्का पेल दिया और पूरा लैंड गांड में घुसा दिया . इस धक्के से हेमा एड़ियां उठा कर आगे को भाग निकलने को हुई पर कोई फायदा नहीं हुआ और पूरा लैंड गांड में घुस गया. वो दर्द से तड़पने लगी
हेमा : ाआईईईईई मायआ छोड़ दे कमीने मेरी गांड फट गयी है मादरचोड़द्द आआआह्ह्ह्ह
अमित : चुप साली रंडी आज तेरी अचे से फडंगातकी फिर तुझे कभी खुजली न हो.
मैंने हेमा की गांड पर थप्पड़ मरे और अपना लैंड बहार को खींचा . हेमा की गांड पूरी तरह से गांड पर कासी हुई थी. ऐसे लग रहा था जैसे लैंड किसी पाइप में कास क जकड़ा हो. मैंने लैंड आधा बहार निकल कर फिर से पूरा घुसा दिया. हेमा फिर से चीखे पर मैंने परवान न करते हुए धक्के जारी रखे. कुछ hi मिंटो में गांड में लैंड की जगह बन गयी और लैंड आराम से अंदर बहार होने लगा. हेमा की चीखें अब सिसकियों में बदल चुकी थी. मैंने अपने हाथ उसकी गर्दन क पास से कन्धों पर रखे और उसे ऊपर को करते हुए ज़ोरदार धक्के पेलने लगा.
हेमा : aa..aaa...aa..aaa मार aaa...aaa मार और ज़ोर से मार
अमित : शाबाश मेरी रंडी अब तू बानी है मेरी पक्की वाली रंडी हहहह उम्म्म अब से तेरी छूट और गांड दोनों मरता रहूँगा जब भी जहाँ भी मेरा दिल करेगा तुझे वहीँ छोडूंगा. बोल छुडवायेगी न मुझसे
हेमा : ाःह आअह्ह्ह फुककक एसससस हाँ जहाँ कहोगे वही छुडवाउंगी ककक आह्हः आह्हः
अमित : तेरी माँ क साथ छोडूंगा तुझे दोनों माँ बेटी को एक साथ छोडूंगा उसकी गांड भी बहुत मस्त है
हेमा : आअह्ह्ह आह्हः आह्हः छोड़ लेना मेरी माँ को भी छोड़ लेना आअह्ह्ह आह्हः दोनों को एक साथ छोड़ लेना वो भी कक्कक्क्स बड़ी गरम है मेरे बाप से ठंडी नहीं होती वो इसी लिए तो कितने साल ड्राइवर से चुदवाती आआअह्ह्ह्ह रही है , बड़े दिनों से प्यासी होगी वो भी ककक फुकककक
हेमा क मुँह से अनुपमा क बारे में सुन कर मुझे जोश आ गया और मैंने स्पीड और तेज कर दी. हेमा को भी अब गांड मरवाने में मज़ा आने लगा था. मैंने 15 मिनट्स उसकी गांड मरी और फिर उसकी गांड में hi अपना पानी निकल दिया. हेमा की छूट भी इस दौरान एक बार और पानी निकल चुकी थी . हेमा की छूट में अपना पानी निकलने क बाद मैंने उसकी गांड से लैंड बहार निकला तो उसकी गांड जो पहले बंद थी अब 2 रूपए क सिक्के क जितनी मुँह खोले थी. गांड का छेड़ किनारों से फट गया था. हेमा तो वहीँ सोफे पर hi आगे को गिरी पड़ी थी उसके पाऊँ ज़मीन से उठ चुके थे . हेमा की गांड छत के तरफ सर सोफे की सीट पर और पेअर हवा में उठे हुए बड़ा दिलकश नज़ारा दे रहे थे पर मुझे पता था क इस वक़्त उसका बुरा हल होगा. मैंने हेमा को अपनी गॉड में उठाया और उसे अंदर ले जाकर बीएड पर दाल दिया. जैसे hi उसकी गांड बीएड पर पड़ी वो उछाल कर पलट गयी .
हेमा : आयी माआ मर गयी . बहुत दर्द हो रहा है आअह्ह्ह तुमने सच में मर गांड फाड़ दी .
अमित : सबर करो पहली बार दर्द तो होता hi है . कोई क्रीम है क्या ज़ख्मों पर लगाने वाली ?
हेमा : मेरे पर्स में पड़ी है जाओ ले आओ कक्कक्स उईईई पता था मुझे ऐसा hi होगा कुछ . पैन किलर भी होगी साथ में वो भी ले आना आअह्ह्ह
मैं जल्दी से हॉल में वापिस आया तो दरवाज़े क पास hi ज़मीन पर उसका पर्स गिरा पड़ा था . मैंने उसमे से क्रीम और पैन किलर टेबलेट निकल कर पानी का गिलास साथ लिया और हेमा क पास आ गया. मैंने हेमा को सहारा देकर बिठाया करवट क बल बिठाया और उसे टेबलेट दी. फिर उसे लिटा कर मैंने उसकी गांड पर क्रीम भी लगा दी. हेमा को आराम की ज़रूरत थी इस लिए मैंने उसे आराम करने दिया और खुद भी उसके पास hi लेट गया .
दमदार चुदाई क बाद मुझे भी नींद आ गयी थी. जब मेरी आँख खुली तो देखा शाम क 4 बज चुके थे. हेमा मेरे पास hi उलटी लेती हुई थी. ऊपर से वो नंगी थी और स्कर्ट भी आधी टांगों पर अस्त व्यस्त थी. मैंने स्कर्ट उठा कर उसके चूतड़ नंगे किये और उन्हें फैला कर गांड को चेक करने लगा . मेरे द्वारा चूतड़ पकड़ने से hi हेमा क मुँह से सिसकी निकल गयी और उसकी नींद टूट गयी .
हेमा : आअह्ह्ह दर्द है अभी भी, क्यों तंग कर रहे हो ?
अमित : बस देख रहा था क अब कैसी हालत है. चलो अब उठ जाओ वापिस भी जाना है .
हेमा : रुक जाओ कुछ देर अभी भी दर्द हो रही है . सच में गांड फट गयी है . इतना दर्द तो पहली बार छूट की सील टूटने पर भी नहीं हुआ था. आआह्ह्ह
अमित : एक और टेबलेट खा लो जल्दी आराम आ जायेगा. पहली बार तो दर्द होता hi है . एक दो बार और लोगी तो अपने आप ये भी खुल जाएगी
हेमा : न बाबा अब नहीं ले पाऊँगी मैं. एक hi बार में इतनी बुरी हालत कर दी है.
अमित : गांड तो देनी hi पड़ेगी वर्ण भूल जाओ फिर छूट भी .
हेमा : ये तुम बात बात पर ब्लैकमेल क्यों करते हो? एक तो गधे जितना बड़ा लैंड ले कर घूम रहे हो पता भी है कितना दर्द हो रहा है अभी भी
अमित : तो क्या हुआ जान मज़ा भी तो लिया न तुमने. चिंता मत करो एक दो बार में सब ठीक हो जायेगा . अब ज़रा बताओ क्या बता रही थी तुम अपनी माँ क बारे में ?
हेमा : क्या बता रही थी मैं ?
अमित : यही क तुम्हारी माँ ड्राइवर क साथ ...
हेमा : लगता है मेरी माँ की लिए बगैर नहीं मानोगे तुम .
अमित : सही कहा , तुम्हारी माँ भी मस्त माल है . जब तक उसकी ले नहीं लेता मज़ा नहीं आएगा. और तुम दोनों को एक साथ छोड़ने का सोच कर तो मेरा लैंड भी मस्त होने लगता है . अब बताओ अपनी माँ की गर्मी क बारे में भी
हेमा : मेरी माँ भी बहुत गरम है और उसे देख कर hi मैं भी इतनी गरम बन गयी थी. स्कूल में थी जब मैंने पहली बार अपनी माँ को ड्राइवर क लैंड पर उछालते देखा था. तन तो मुझे पता भी नहीं था क वो क्या कर रही है. पापा तो बस काम में बिजी रहते थे और माँ का तो तुम्हे पता hi है. पापा उनके सामने कहीं भी नहीं ठहरते . हमारा एक ड्राइवर हुआ करता था बहुत सैलून तक उससे अपनी प्यास बुझाती रही फिर वो पता नहीं कहाँ चल गया. ड्राइवर क इलावा भी मेरी माँ ने कई लैंड लिए हैं क्यूंकि उसकी एक लैंड से प्यास नहीं बुझती थी. अब तो बहुत बदल गयी है पर मुझे यकीन है क उसमे आग अभी भी होगी.
अमित : तो इसका मतलब तुम्हारे अंदर हो इतनी गर्मी है वो तुम्हारी माँ से hi है. तभी मैं सोचूं क अंकल तो ऐसे हैं नहीं फिर तुम में इतनी गर्मी कैसे. कहीं तुम्हारा बाप भी कोई और तो नहीं??
हेमा : क्या पता ये तो माँ hi बता सकती है.
अमित : अब तो तुम्हारी माँ की चुदाई किये बिना मैं यहाँ से नहीं जाऊंगा . और तुम दोनों को एक साथ भी छोडूंगा
हेमा : मुझे तो कोई ऐतराज़ नहीं , कहोगे तो खुद पकड़ कर तुम्हारा लैंड अपनी माँ की छूट में डालूंगी . चलो अब ज़रा मेरी मदद करो थोड़ा फ्रेश हो लूँ . आअह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स मायआ बहुत दर्द है कक्कक्स
अमित : एक और टेबलेट खा लो दर्द काम हो जायेगा.
हेमा को मैं सहारा देकर बाथरूम में ले गया. उसके बाद मैंने उसे पैन किलर टेबलेट दी. जब उसे कुछ ाचा लगने लगा तो हम वापिस ऑफिस गए पर हेमा से बैठा नहीं जा रहा था तो हम वापिस घर चल दिए . हेमा को दर्द अभी भी था इस लिए वो धीरे धीरे चल रही थी. हम जब घर पहुंचे तो हेमा फिर सीधा कमरे में चली गयी. कल की तरह आज भी करिश्मा दीदी मुझे और हेमा को घूर रही थी: हेमा गांड बहार को निकल कर चल रही थी जिसे देख कर करिश्मा दीदी की आँखों में थोड़ा गुस्सा भी था मुझे देख कर. हेमा क ऊपर जाते hi करिश्मा दीदी मेरी तरफ बरही क अनुपमा अपने कमरे से बहार निकल आयी . वो किटी पार्टी में जाने क लिए रेडी हो कर आयी थी: हलके मेकअप क साथ वो भी ज़बरदस्त लग रही थी. वैसे तो उसने सदी पहनी थी पर उसका ब्लाउज बड़ा hi आधुनिक था. स्लीवलेस ब्लाउज इतना डीप था क बूब्स आधे साफ़ नज़र आ रहे थे और पूरे कैसे हुए थे. सदी भी ट्रांसपेरेंट थी जिसमे से नंगा पेट नज़र आ रहा था . मैं जान बुझ कर अनुपमा क बूब्स को घूर रहा था . क्यूंकि अब पता तो चल hi चूका था क वो हेमा से भी गरम और प्यासी औरत है तो मैंने भी सोच लिया क उसे एहसास करवा दूँ क मैं उसे किस नज़र से देखता हूँ .
अनुपमा : तुम आ गए बीटा , कैसी लग रही हूँ मैं ?
अमित : ज़बरदस्त!! आप तो सच में खूबसूरती की मिसाल हैं . आज तो पार्टी में सबकी नज़र आप पर hi रहेगी . पता नहीं क्या हल होगा देखने वालों का.
बात करते हुए मैंने 2-3 बार अनुपमा क बूब्स को घूरा जिसे उसने भी नोटिस किया अपनी तारीफ सुन कर उसके चेहरे पर चमक आ गयी. मेरी आँखों का निशान जान कर उसने जान बुझ कर पल्लू ठीक करते हुए सदी का पल्लू बूब्स से ठोस सरका दिया.
अनुपमा : थैंक्स बीटा , तुम भुई साथ चलते तो ाचा लगता अगर कहो तो मैं वेट कर लेती हूँ तुम तैयार हो जाओ
अमित : नहीं नहीं आप जाइये मैं अगर साथ गया तो मुश्किल हो जाएगी ..... मेरा मतलब है मैं थक गया हूँ तो अब थोड़ा आराम करना चाहता हूँ .
अनुपमा भी मेरी आँखों में देखती हुई मेरी बातों का मतलब समझ रही थी. पर वहां करिश्मा दीदी भी थी इस लिए ज्यादा बात नहीं हुई और अनुपमा मुझे आराम करने का कह कर चली गयी बहार. करिश्मा दीदी वहीँ थी. मैं जैसे hi ऊपर जाना लगा तो करिश्मा दीदी ने मुझे रोक लिया .
करिश्मा दीदी : क्या करने आये हो तुम यहाँ ??
अमित : आप क्या कह रही हैं दीदी?
करिश्मा दीदी : सब समझ रही हूँ मैं. चुपचाप अब वापिस चले जाओ मैं नहीं चाहती यहाँ कोई बवाल हो तुम्हारी वजह से .मुझे ज़रा भी उम्मीद नहीं थी तुम ऐसे निकलोगे
अमित : मैं जो भी कर रहा हूँ आपके लिए hi कर रहा हूँ दीदी. आप चाहे कुछ भी समझें .
इतना कह कर मैं सीढ़ियां चढ़ता हुआ अपने कमरे में चला गया . मुझे जो दर था वो hi हुआ . करिश्मा दीदी समझ गयी थी क मैं क्या कर रहा हूँ पर न उन्होंने खुल कर बात की न मैं ये बात उनसे कर सकता था. मैंने कमरे में जा कर आंटी को फ़ोन पर बता दिया क काम कहाँ तक इस पहुंचा है. और ये भी क दीदी को मुझ पर शक हो गया है . आंटी ने कहा क मैं दीदी की टेंशन न लूँ पर मुझे ाचा नहीं लग रहा था .
डिनर क वक़्त hi मैं कमरे से बहार निकला और डिनर कर क वापिस अपने कमरे में आ रहा था क अनुपमा पार्टी से वापिस आ गयी. उसकी चाल देख कर लग रहा था क पार्टी में आज शराब वगैरह पि कर आयी है . मैं सीढ़ियां चढ़ चूका था. अनुपमा को सहारा देने क लिए करिश्मा दीदी जल्दी से उनके पास गयी तो अनुपमा ने ज़ोरदार थप्पड़ जड़ दिया दीदी क गाल पर
अनुपमा: हॉट पीछे , तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझे हाथ लगाने की . नशे में नहीं हूँ मैं . चल जा अपने कमरे में.
करिश्मा दीदी भाग कर रोटी हुई वापिस अपने कमरे में चली गयी. मुझे गुस्सा तो बहुत आया पर मैं चुपचाप साइड हो गया और अनुपमा क कमरे में जाती hi मैं भी अपने कमरे में चला गया. मैं अपने बीएड पर बैठा गुस्से से भरा पड़ा था. अनुपमा को उसकी इस हरकत की सजा देने क बारे में मैं सोच रहा था तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया. घडी पर देखा तो 11 बजने वाले थे. मैं कमरे से बहार निकला तो घर में सन्नाटा था. मैं दबे पाऊँ नीचे उतर कर अनुपमा क कमरे क पास गया. अंकल आज बहार गए थे ये मुझे पहले hi पता था. मैंने अनुपमा क कमरे में झाँकने की कोशिश की तो अंदर का नज़ारा देख कर मेरी आँखों में चमक आ गयी .