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दिव्या का मन विचलित था जब देर तक उसे नींद न पड़ी तो वो अमित को देखने क लिए उसके कमरे में चली गयी . जहाँ वो आराम से सो रहा था. दिव्या उसके करीब जाकर उसे चैन से सोता देख कर थोड़ा शांत हुई. अमित क चेहरे पर सुकून था जिसे देख कर दिव्या को ाचा लगा और उसका माथा चूम लिया. जाने फिर दिल में क्या आया क उसके साथ hi लेट गयी. दिव्या का बेचैन दिल अब सुकून में था जैसे प्यासे को जलाशय मिल गया हो. अमित क चेहरे को देखती हुई वो करवट क बल उसके साथ hi लेट गयी. अमित नींद में था और शायद किसी ख्वाब में . उसका एक हाथ दिव्या की कमर पर आ गया और उसे अपनी तरफ खींचने लगा . दिव्या अंदर से मचल उठी पर न खुद वहां से हटी और न अमित का हाथ वहां से हटाया. बल्कि उसका जिस्म जैसे उसके दिमाग से बगावत करता हुआ खुद hi आगे को सरक कर अमित क साथ जा चिपका. दिव्या का दिमाग उसे रोक रहा था पर जिस्म तो जैसे दिल की सुन रहा था.
‘ ये क्या कर रहा है ? मुझे ऐसे क्यों खिंच रहा है ? नहीं नहीं , मुझे इसे रोकना होगा नहीं तो फिर कहीं ,,,,,, ‘ मन में यही सब सोचती दिव्या खुद को अमित को रोकने या खुद को वहां से हटाने की सोच तो रही थी पर उसका उलट हो रहा था. जब अमित ने उसे अपने साथ लगाया तो दिव्या ने अमित को पीछे करने क लिए उसकी छाती पर हाथ रखा जो खुद hi सरक कर पीछे चला गया और अब अमित दिव्या की बाँहों में था. अमित की गरम साँसे दिव्या को अपनी गर्दन और चेहरे पर महसूस होने लगी जिससे वो खुद भी गरम होने लगी. और उसका हाथ अमित क बालों को सहलाने लगा . अमित भी शायद शीना क साथ हो कुछ हुआ था उसी की वजह से उसका सपना देख रहा था . और जब दिव्या अमित की गरम साँसे महसूस करती अपना चेहरा उसके करीब ले आयी तो अमित क होंठ दिव्या क चेहरे पर जा लगे. दिव्या तो मनो पागल सी हो गयी. वो खुद hi अपना चेहरा अमित क होंठों पर रगड़ने लगी. और अमित क होंठ भी जैसे काम पर लग गए और उसके चेहरे को चूमने लगे . दिव्या जैसी सुंदरी को प्यार देने क लिए अमित का सोया हुआ जिस्म जैसे खुद hi काम करने लगा था. चेहरे पर अमित क होंठों का आनंद लेते हुए दिव्या क होंठ जब अमित क होंठो से जा लगे तो उसकी मनो धड़कन hi रुक गयी और वो हैं रुक गयी. क्यूंकि अमित क होंठों ने उसके होंठों को जकड लिया था.
‘ ये क्या हो रहा है ? हे भगवन मैं अमित क साथ .... मैं खुद को रोक क्यों नहीं प् रही ? ये गलत है ,,,, ओह्ह्ह्ह मुझे इतना ाचा क्यों लग रहा है ? ये मुझे क्या हो रहा है ? ‘ दिव्या क दिमाग ने एक ने फिर से उसे रोकने की कोशिश की मगर जिस्म की भूख और प्यार की चाहत ने उसकी एक न चलने दी. बस फिर वो खुद hi अमित क होंठो को चूमने लगी. दिव्या और भी ज्यादा अमित क साथ चिपकने की कोशिश करने लगी जब उसकी एक तंग अमित की जांघ क ऊपर चढ़ गयी उसे पता भी न चला . इसी क्रम में उसकी सदी थोड़ी सी ऊपर सरक गयी थी. वहीँ अमित भी जैसे सपने में कुछ ज्यादा hi रोमांस करने लगा था. दिव्या क होंठों को वो अपने होंठों में ऐसे चुम और चूस रहा था मनो वो जग रहा हो. अगले hi पल एक और धमाका हुआ और अमित का हाथ दिव्या की कमर से उसके चितारै पर आकर कास गया और उसकी गांड को मसलता हुआ अपने साथ जोर से चिपकने लगा . दिव्या भी खुद को अचे से अमित क साथ चिपका रही थी और उसके गले में बहन दाल उसे प्रेमिका की तरह चुम रही थी. अमित तो सो रहा था पर इस गरमी से अमित का लैंड जाग गया और जैसे hi उसने दिव्या की छूट पर ठोकर मरी तो साडी क अंदर से hi मनो उसकी छूट ने उसे महसूस कर लिया और स्वागत में चिकनाई बहा दी. अमित दिव्या क नाज़ुक बदन को अब ज़ोर से मसलने लगा था जिससे दिव्या को थोड़ा दर्द भी हो रहा था पर उसे मज़ा भी आ रहा था. दिव्या क बदन क साथ खेलते हुए अमित ने दिव्या क ऊपर आते हुए चित लिटा दिया और खुद उसके ऊपर आ गया था. एक तंग दिव्या की पहले hi अमित क ऊपर थी और अब दूसरी तंग ने भी खुल कर अमित को जैसे सही जगह प्रदान की. अब तो दिव्या का नाज़ुक बदन अमित क भरी शरीर क नीचे डाब गया था पर उसे तो जैसे ये भी ाचा लग रहा था . अब दिव्या दोनों हाथ अमित की पीठ और सर पर चलती हुई उसे मज़े से चूम रही थी. पर ये क्या!! , अमित तो अपना लैंड घुसाने क लिए अपनी कमर का ज़ोर लगाने लगा और उसका खड़ा हुआ लैंड अब दिव्या की छूट क ऊपर दबाव बसता जा रहा था. दिव्या को तो ऐसे लगा जैसे वो कपड़ों क साथ hi अंदर घुस जायेगा. अमित अब ज्यादा हरकत नहीं कर रहा था पर उसका लैंड लगातार दबाव बनता जा रहा था. दिव्या खुद को और ज्यादा रोक न पायी और लैंड क इस दबाव ने hi दिव्या की छूट को झड़ने पर मजबूर कर दिया. दिव्या की छूट से इतना पानी निकला की उसकी पेंटी क साथ साथ पेटीकोट और सदी भी वहां से भीग गयी. वो कुछ देर तो इस चरम का सुख लेती रही पर जब होश आया तो अमित अभी भी नींद में लैंड से जैसे कुआँ खोदने में लगा हुआ था. दिव्या ने अपनी हालत देखि तो खुद hi शर्मा गयी. उसकी सदी घुटनो तक ऊपर हो चुकी थी और घुटनो से नीचे की टंगे अमित की जांघों क पीछे से मनो अमित को अपने ऊपर दबा रही थी . दिव्या ने अमित को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश की पर वो उसे हिल नहीं रहा था. अब उसे एहसास हो रहा था क वास्तव में वो कितना भरी है . जैसे तैसे दिव्या अमित क नीचे से सरक कर एक तरफ को निकली और उठ कर अपनी सदी सही की . उसकी नज़र अमित पर पड़ी तो वो अब बीएड पर उल्टा लेता हुआ था और उसके होंठ मनो नींद में अभी भी किश कर रहे थे. दिव्या उसकी ऐसी हालत देख कर मुस्कुरा उठी .
‘ पागल है पूरा , पता नहीं कैसे कैसे सपने देखता रहता है . ये भी नहीं पता क साथ कौन सो रहा है . अगर बीच में कपडे न होते तो.... हे भगवन ये मैं क्या सोचने लगी . मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए . ये मुझसे क्या हो गया ? मुझे इससे दूर hi रहना चाहिए ‘ सुरूर उतरने क बाद अब जैसे दिव्या का दिमाग फिर से कण्ट्रोल अपने अंडर ले चूका था पर अब परवाह किसे थी. दिल की हसरत तो एक तरह से पूरी हो hi गयी थी. दिव्या जल्दी से अपने कमरे में भागी और कपडे उतर कर बाथरूम में घुस गयी और खुद को साफ करने क बाद कपडे बदल कर बीएड पर लेट गयी . उसे पता hi नहीं चला क कब उसे नींद आ गयी .
सुबह उठ कर मैंने एक्सरसाइज की. मौसम अब काफी हद तक रंग बदल चूका था . सर्दी शुरू हो चुकी थी. मैं एक्सरसाइज करने क बाद नीचे आया तो अभी तक मौसी और रद्द में से कोई उठा नहीं था. राधा का तो चलो पता hi था पर मौसी क्यों भी उठी ये सोच कर मैं उनके कमरे तक गया तो उन्हें चैन से सोया देख कर वापिस आ गया. क्यूंकि मैं उनका सामना करने में कटरा रहा था. मैंने अपने कमरे में नहाने क लिए जा रहा था क सोचा राधा को मौसी को जगाने को कह दूँ. इस लिए मैं राधा क पास उसके कमरे में चला गया. राधा बच्चों की तरह टांगों को घुटनो से मोड हुए पेट की तरफ किये सो रही थी. उसने दोनों बाज़ू अपने साथ hi कैसे हुए थे जिनमे कुछ था. मैं राधा को उठाने hi वाला था मेरी नज़र उसकी बाज़ुओं में बंद उस डायरी पर पड़ी. ये कोई साधारण नोट बुक नहीं थी और न hi कोई किताब. राधा का इस तरह डायरी को खुद से चिपका के लेटना मुझे अजीब लगा. मैंने सोचा चलो देखते हैं क इस डायरी में क्या है . मैंने डेरी को एक सिरे से पकड़ कर धीरे धीरे राधा क बाज़ुओं से बहार को खींच लिया. डायरी क ऊपर माय लाइफ माय ड्रीम लिखा हुआ था और अंग्रेजी का पहला अल्फाबेट ‘ा’ जो पूरे कवर पर था एक डिज़ाइन क रूप में. मुझे समझ नहीं आया इसका मतलब. सोचा चलो अंदर देखते हैं क्या है. मैंने अभी डायरी खोली hi थी क एक झटके से वो मेरे हाथों से निकल गयी.
‘ किसी की पर्सनल डेरी बिना पूछे नहीं खोलते . ख़बरदार जो मेरी डायरी को हाथ लगाया तो ‘ राधा मेरे हाथों से डायरी छीन कर उसे छुपाने की कोशिश कर रही थी और थोड़ा नाराज़गी से मुझे देख रही थी .
अमित : ऐसा क्या खास है इसमें जो ऐसे छुपा रही हो ? क्या मुझे नहीं बताओगी?
राधा : नहीं बिलकुल नहीं ( मन में ) तुम hi तो इसमें और कोई है hi कहाँ .
अमित : इसका मतलब ज़रूर कोई लड़का पसंद आ गया है तुम्हे और तुम नहीं चाहती क मुझे पता चले है न ??
राधा : जो मर्जी समझो , मैं कुछ नहीं बताने वाली. ये मेरी पर्सनल डायरी है. माँ कहाँ हैं ?
अमित : अरे हाँ वो मैं तुम्हे यही कहने आया था क मौसी अभी भी सो रही है. जाओ उन्हें जगा दो और खुद भी तैयार हो जाओ .
राधा : माँ अभी तक सो रही है ? तुम जगा देते उन्हें . तुमने जगाया क्यों नहीं ?
अमित : वो रत भी मुझसे गुस्सा हो गयी थी इस लिए मैं उनके सामने नहीं गया . अब जाओ और जगाओ उन्हें .
राधा : तो ऐसे काम hi क्यों करते हो ? चुपचाप घर पर टाइम से आया करो वर्ण तुम्हारी शिकायत बड़े मां से कर दूंगी मैं हाँ . और गुड मॉर्निंग, जगाने आये थे और अभी तक गुड मॉर्निंग नहीं कहा. बस आते hi लग गए तकझक करने.
राधा ने मुँह बनाते हुए कहा तो मुझे हंसी आ गयी और मुझे हँसता देख वो भी हसने लगी.
‘ गुड मॉर्निंग देवी जी , आज्ञा हो तो दिन की शुरुआत कर दी जाये या अभी भी रत मन कर बीएड पर लेते रहना है? जो भी आपका हुकुम होगा सर आँखों पर होगा. ‘ मैंने झुक कर राधा को सलाम करते हुए कहा तो राधा खिलखिलाती हुई बीएड से उठ गयी .
‘ हम खुश हुए गुलाम, चलिए अब जाकर तयारी कीजिये शाही सवारी की , शहज़ादी को कॉलेज तुम hi ले कर जाओगे ‘ राधा ने पूरी ऐडा से ये बात कही जैसे वो सच मुझ राजकुमारी हो और मैं उसका गुलाम. हम दोनों हसने लगे और फिर मैं अपने कमरे में नहाने चला गया राधा मौसी को जगाने .
‘ माँ उठो , देखो टाइम क्या हो गया है ? आपकी तबियत तो ठीक है न ? ‘ राधा ने अपनी माँ दिव्या को जगाया तो उसकी आंख खुल गयी. सामने रद्द को देख कर वो एक बार तो हैरान हुई मगर घडी की तरफ देख कर उसे एहसास हुआ क वो आज कितनी देर तक सोती रही है.
‘ अमित उठ गया ‘ दिव्या क मुँह पर पहला नाम अमित का hi निकला उसे खुद भी पता नहीं क्यों पर उसका ये रिएक्शन बिलकुल ऐसे था जैसे सुहागरात क बाद अगली सुबह पत्नी अपने पति को बीएड पर न पाकर सवाल करती है .
‘ वो तो कब का उठ गया माँ , अपने कमरे में तैयार हो रहा है. मुझे उसी ने जगाया है. पर आप आज इतनी देर तक कैसे सो रही हैं ? कोई प्रॉब्लम तो नहीं है ? ‘ राधा ने फिर से दिव्या को सवाल कर लिया जिससे वो थोड़ा सकपका गयी और नज़रें चुराने लगी .
‘ हाँ वो रत को नींद नहीं आ रही थी तो थोड़ा देर से सोई थी इस लिए पता hi नहीं चला . तू चल मैं नाश्ता बनती हूँ ‘ . दिव्या ने राधा को जाने को कहा और जल्दी से उठी. वो हाथ मुँह धोने बाथरूम में गयी जहाँ उसके रत वाले कपडे पड़े थे उन्हें देखते hi उसे रत की वो घटना यद् आ गयी .
‘ अमित मुझे जगाने क्यों नहीं आया ? कहीं वो रत को जग तो नहीं रहा था ? नहीं नहीं , मैंने खुद देखा था वो गहरी नींद में था . पर उसका वो तो कैसे ,,,,, इतना बड़ा और सख्त ....... ये मैं क्या सोचने लगी. मुझे उससे दूर रहना चाहिए . हे भगवन ये मुझे क्या होता जा रहा है. ‘ मुँह पर पानी मर कर वो जल्दी से किचन में भागी . अभी उसने चूल्हा जलाया hi था क बहार से बेल्ल बजने लगी . दिव्या ने जाकर दरवाज़ा खोला तो उसकी ऑंखें बड़ी हो गयी और ख़ुशी से चेहरा खिल गया .
‘ भैया अआप ,,, इतनी सुबह सुबह यहाँ ? ‘ दरवाज़े पर विजय खड़ा था . जिसे देख कर दिव्या खुश हो गयी. वैसे तो 2 दिन पहले hi वो अपने भाई क घर hi थी पर आज विजय बड़े दिनों बाद उसके घर आया था.
‘ हाँ वो आज थोड़ा काम था मंडी में तो सोचा तुम लोगों से मिलता जाऊंगा. अमित और राधा भी घर hi होंगे न? मैं रस्ते से गरमा गरम कचोरी लेकर आया हूँ साथ में नाश्ता करते हैं. ‘ दिव्या क सर पर हाथ रखते हुए विजय ने अंदर आते हुए उसके हाथ में लिफाफा पकड़ाया जो गरम कचोरियों से भरा हुआ था .
‘ इसकी क्या ज़रूरत थी बहिया? मेरा हाथ का खाना ाचा नहीं लगता क्या आपको ‘ दिव्या ने थोड़ा मुँह बनाते हुए कहा. पर एक तरह से वो खुश भी हुई क चलो बना बनाया खाना आ गया वर्ण वो इतनी जल्दी नाश्ता कैसे बनती .
‘ अरे मेरी बहना तेरे हाथ का तो खाना मैं साडी उम्र खता रहूं फिर भी मन न भरे. मैं तो ये इस लिए लता हूँ क तुम सब आज बहार का भी खा लो थोड़ा. वैसे ये चंदू मॉल हलवाई की कचौरी है . बहुत नाम है उसका . और फिर बच्चों को भी ाचा लगेगा. ‘ विजय अभी हॉल में आया hi था क अमित अंदर क रूम से बाहर निकला और विजय क पाऊँ छूने लगा मगर विजय ने उसे गले से लगा लिया.
‘ बाबा आप यहाँ ? बिना बताये ? माँ कहाँ है ? ‘ अमित ने विजय को अकेला देख कर अपनी माँ क बारे में पूछ hi लिया .
‘ अरे भाई मैं मंडी क काम से आया हूँ. अब तेरी माँ को थोड़ा साथ लेकर घूमता वैसे भी अब उसको बहार आना जाना मन है. तुम सुनाओ कैसे हो? ‘ विजय अमित को अपने साथ लगाए सोफे पर बैठ गया और दिव्या किचन में चली गयी.
‘ मां जीई ‘ राधा भी आते hi विजय क गले लग गयी. विजय ने भी उसे दुलार किया.
‘ मेरी राजकुमारी कैसी है ? ठीक तो है न ? आज तो तुम बड़ी प्यारी लग रही हो ‘
‘ मैं बिलकुल ठीक हूँ . और अब आप को देख कर और भी अछि हो गयी हूँ. वैसे आज ये सरप्राइज एंट्री किस ख़ुशी में ? ‘ राधा ने ऑंखें बचते हुए विजय से सवाल किया .
‘ भैया मंडी क काम से ए हैं . और तुम भी ज़रा सीधी हो कर बैठो . देखो भैया सबके लिए कचोरियाँ लाये हैं ‘ दिव्या ने राधा को ठीक से बैठने को कहते हुए विजय क आने का कारन बता दिया .
‘ लो अमित इसे अपने पास रखलो. तुम सुबह जल्दी में थे तो तुम्हारी माँ को यद् नहीं रहा. ये तुम्हारे लिए दिवाली का उपहार और कॉलेज खरच क लिए ‘ खाना खाने क बाद जब अमित उतने लगा तो विजय ने उसके हाथ में पैसों की गद्दी थमा दी. 500-500 क नोटों की दो गड्डियां. अमित वो पैसे लेने से मन करने लगा .
‘ मां जी क्या मेरे लिए नहीं है दिवाली गिफ्ट ?’ राधा ने मज़ाक में विजय को देख कर सवाल किया और अमित भी उसकी तरफ देखने लगा.
‘ हाँ बेटी तू बोल तुझे कितने चाहिए , मैं अभी ला देता हूँ . ‘
‘ कोई बात नहीं मां जी मैं इसी से ले लुंगी , वैसे भी ये भी तो मेरे hi हैं ‘ राधा ने ये बात पैसों की जगह अमित को देखते हुए कही थी. विजय ने तो इस बात पर गौर न किया पर किचन से अति दिव्या ने इस बात को देखा था.
‘ तुझे पैसे क्यों चाहिए? भैया उसके लिए लाये हैं न ‘
‘ तो क्या हुआ ? इसका भी तो पूरा हक़ है . बीटा तुझे जितने चाहिए हो ले लेना. अपनी माँ की बात मत सुनो. इसे अपना टाइम भूल गया है ‘ विजय ने राधा के सर पर हाथ रख कर कहा तो राधा क चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी. अमित जो पैसे वापिस करने का कह रहा था अब उसे वो रखने hi पड़े. कॉलेज का टाइम हो गया था तो दोनों जल्दी से कॉलेज क लिए निकल गए .
‘ रीमा मुझे तुमसे कुछ कहना है ‘ अमित ने रीमा को अकेले में मिलन को कहा था तो इस वक़्त दोनों लाइब्रेरी में अकेले थे . अभी दूसरा hi लेक्चर था और दोनों अपनी अपनी क्लास बंक कर क यहाँ मौजूद थे. अमित कुछ कहना चाहता है ये तो रीमा पहले hi समझ चुकी थी पर अब उसकी आवाज़ में भरी पैन और आँखों में अलग hi दर्द सा था .
‘ मुझसे बात करने क लिए तुम्हे पूछने की ज़रूरत नहीं है. जो भी कहना है बिना डरे कहो , मैं तुम्हारी किसी बात का बुरा नहीं मानूंगी ‘ रीमा ने अमित का चेहरा दोनों हाथों में पकड़ कर आँखों में देखते हुए कहा.
‘ मैंने तुम्हारा विश्वास तोडा है रीमा, मुझे समझ नहीं आ रहा मैं कैसे कहूं ‘ ये कहते हुए अमित की नज़रें अपराध बोध से झुक गयी और वो ज़मीन में नज़रें गड़ाए जा रहा था.
‘ शीना दीदी की वजह से ऐसा कह रहे हो न ? मुझे सब पता है ‘ रीमा ने नार्मल लहजे में ये बात कही जैसे उसे कोई फरक hi न पड़ता हो उस बात से. मगर ये सुन कर अमित की ऑंखें की फटी फटी रह गयी. जो बात वो कहने की हिम्मत नहीं कर प् रहा था वो रीमा ने कितनी आसानी से कह दी. पर उसे पता कैसे चल ये बड़ा सवाल तह. अमित क रिएक्शन देख कर रीमा क चेहरे पर मुस्कान आ गयी.
‘ ऐसे क्या देख रहे हो ? यही सोच रहे हो न क मुझे कैसे पता ? दीदी ने खुद hi बता दिया था कल रत. ‘ रीमा क इस खुलासे से अमित थोड़ा शांत तो हुआ पर शीना ने कैसे ये सब बता दिया ये भी बड़ी हैरानी थी उसके लिए
‘ ी ऍम सोरर.....’ अमित की बात पूरी होने से पहले hi रीमा ने अपना हाथ उसके मुँह पर रख कर उसको रोक दिया.
‘ सॉरी किस बात की ?? तुमने तो कोई गलत काम नहीं किया न . दीदी ने मुझ सब बता दिया है और ये भी क तुमने उन्हें साफ़ मन कर दिया था मेरे बारे में बता कर ‘
‘ तुम्हे बुरा नहीं लगा मैंने जो किया ? ‘ अमित को अब भी यकीन नहीं था क रीमा को गुस्सा नहीं इस बात पर.
‘ दीदी ने मुझे सब कुछ बता दिया क वो तुम्हे कितना प्यार करती हैं. सच कहूं पहले मुझे बुरा लगा था क्यूंकि वो मेरी दीदी हैं पर उनका प्यार देख कर मैं समझ गयी क उन्होंने जो किया वो सच्चे दिल से किया. तुमने उनको हमारे बारे में सच बताया ये जान कर मुझे तुम पर और भी प्यार आ रहा है. तुमने उनका फायदा नहीं उठाया बल्कि उनके प्यार को सम्मान दिया. उन्होंने मुझसे माफ़ी भी मांगी इस बात क लिए और मेरे दिल में कोई गुस्सा नहीं उनके प्रति पर तुम से है ‘ रीमा ने थोड़ा मुँह बनाते हुए कहा. अमित तो साडी बात सुन कर अब अपने ऊपर गुस्से की बात सुन कर टेंशन में आ गया
‘ मुझ पर गुस्सा क्यों हो अगर तुम्हे सच पता चल hi गया है तो ?’
‘ गुस्सा नहीं करूँ तो क्या करूँ ? मैं कब से तुम्हे कह रही हूँ क मुझे एक बार वो हक़ देदो जो मैं चाहती हूँ पर तुम मुझे हर बार बहाना बना देते हो . और दीदी को मुझसे पहले hi वो दे दिया जिस पर मेरा हक़ था . ये कोई बात हुई , जाओ मैं नहीं बात करती तुमसे . तुम्हे पेरी परवाह है hi नहीं ‘ रीमा ने रूठते हुए ये बात कहो तो अमित क दिल को थोड़ी तसल्ली हुई पर अब रीमा रूत गयी थी और उसकी बात अपनी जगह सही भी थी
‘ मैं कहाँ कुछ कर रहा था यार वो तो शीना ने मुझे तुम्हारी कसम दे दी थी और ‘....’
‘ और तुम मन गए . मेरी कसम पर मन गए और मैं कब से कह रही हूँ पर वो नहीं मानते, मतलब मेरे नाम पर कोई कुछ भी करवा सकता है बस मेरी नहीं सुनोगे हुन्न्न ‘ रीमा ने अमित को नखरा दिखते हुए कहा.
‘ तुम तो मेरी जान हो , तुम्हारे लिए तो कुछ भी कर सकता हूँ’
‘ तो फिर चलो आज मुझे मेरा हक़ दे दो बाद में चाहे साडी दुनिया को परसाफ बाँट ते रहना.’
‘ तुम क्यों ज़िद कर रही हो पता भी है तुम्हे कितना दर्द होगा ? मैं तुम्हे दर्द नहीं देना चाहता’
‘ पता है कितना दर्द डोज , दीदी आज भी बिस्तर पर hi हैं. दीदी बता रही थी क तुम्हारा वो नार्मल नहीं है पर मुझे कुछ नहीं पता. जो भी जैसा भी है मेरा है और एक बार तो ये दर्द सबको सहना hi पड़ता है . मुझे मेरा हक़ चाहिए बस ‘ रीमा की इतनी क्लियर बात सुन कर अब अमित निरुत्तर हो चूका था.
‘ ाचा ठीक है जो तुम कहो मैं करूँगा. पर आज नहीं कल. अब तो मन जाओ ‘ अमित की ये बात सुन कर रीमा खुश हो गयी और पलट कर उसके होंठों पर अपने होंठ लगा कर किश करने लगी . अमित ने भी रीमा क होंठों को किश करना शुरू कर दिया. दोनों ने एक दूसरे क होंठों को भरपूर चूमा और फिर अलग हो गए. क्यूंकि लेक्चर की बेल्ल बज गयी थी. रीमा बहुत खुश थी क्यूंकि उसकी मुराद अब कल पूरी होने का फाइनल एलान हो गया था.
‘ कहाँ थे तुम ? तुम तो बोल कर गए थे क अभी आया और पूरा लेक्चर निकल दिया . ‘ कल्पना ने अमित से आते hi सवाल किया. कैंटीन में सब एक साथ बैठे थे सिवाए शीना क जो आज कॉलेज hi नहीं आयी थी.
‘ वो मैं ज़रा सर क पास गया था वहीँ टाइम लग गया’ अमित ने ज़रा संभल कर ये जवाब दिया जबकि उसकी इस हालत पर रीमा मंद मंद मुस्कुरा रही थी .
‘ तुझे क्यों हंसी आ रही है ? ‘ राधा ने रीमा से सवाल किया तो एक पल को वो भी सकपका गयी जिस पर अब अमित मुस्कुरा रहा था
‘ कुछ नहीं बस ऐसे hi . पर तुम क्यों गुस्सा कर रही हो? तुम्हे हंसी नहीं आ रही ? देखो तो कैसे भीगी बिल्ली बन रहा है कल्पना क सामने ‘ रीमा ने राधा को मेरी तरफ इशारा करते हुए कहा ‘
‘ बात तो सही है यार , इसे कल्पना hi ठीक कर सकती है . वैसे भी दोनों हैं तो एक hi लाइन क ‘ मीनल ने भी बात का मज़ा लेते हुए कहा .
‘ बिल्ली नहीं है शेर है , ये बस सबकी परवाह करता है . ‘ राधा ने भी तुनक कर जवाब दे दिया पर सबकी नज़र उसकी तरफ हो गयी उसका जवाब सुन कर.
‘ बिलकुल सही कहा , पर इस शेर को बिल्ली बना देती है लेडी ब्रूस ली . क्यों सही कहा न ? ‘ मीनल ने फिर से मज़ा लेते हुए कहा.
‘ अब ऐसी भी बात नहीं है , लड़कियों क सामने ये ऐसा hi है . ये तो इसकी क्वालिटी है वर्ण इसका जलवा तो कॉलेज ने पहले hi दिन देख लिया था’ ये बात शालू ने कही थी. पर मीनल कहाँ चुप रहने वाली थी
‘ लगता है दीदी आप ने कुछ ज्यादा hi जलवा देख लिया है जो और किसी ने नहीं देखा ‘ मीनल की इस बात पर शालू पानी पानी हो गयी पर खुद को संभालती हुई बोली .
‘ क्यों तुमने नहीं देखा नज़ारा ? तुम भी देख लो ‘ शालू ने अब मीनल को hi लपेट लिया था .
‘ न दीदी मेरे पास तो जलवा दिखने वाला है और मैं इसी का देखती हूँ . अमित का तो आप hi देखो ‘ मीनल बात को किस तरफ ले जा रही थी ये सब समझ रहे थे और हैरान भी हो रहे थे
‘ ोये तू अपना मुँह बंद रख और जा क देख जो भी देखना है तूने अपने मजनू का . पता नहीं क्या क्या बोले जा रही है. मेरा बेस्ट फ्रेंड है इस लिए मेरी इतनी इज़्ज़त करता है और कुछ न सोचो तुम .’ कल्पना ने मीनल को चुप करवाते हुए थोड़ा दन्त कर ये बात कही .
‘ वही तो मैं भी कहती हूँ क ये hi आपके लिए बेस्ट है ‘ मीनल ने फिर से तीर चला दिया था जो राधा को ाचा नहीं लगा और वो थोड़ा गुस्से से मीनल की तरफ देखने लगी जिसे उसने नहीं देखा .
‘ क्या यार तुम लोग क्या बातें बना रहे हो . रीमा यार शीना को क्या हुआ आज आयी क्यों नहीं वो ? ‘ शिवानी ने बात का रुख मोड़ते हुए रीमा से पूछा.
‘ वो दीदी की तबियत थोड़ा ठीक नहीं थी तो आज रेस्ट कर रही हैं . कल आ जाएँगी ‘ रीमा ने जवाब दिया .
‘ क्या हुआ शीना को ? कल तो अछि भली थी ‘ नेहा दीदी ने शीना की चिंता करते हुए सवाल पूछा . रीमा मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी जैसे मेरी पोल खोलनी हो .
‘ वो दीदी कल एक कण खजूरे ने उन्हें काट लिया था तो इस लिए आज वो रेस्ट कर रही हैं . कल आ जाएँगी ‘ रीमा ने मुझे देखते हुए hi ये बात कही. रीमा ने मुझे कण खजुरा कहा तो मैंने अपने दन्त पिस्टे हुए उसे देखा और वो और ज्यादा मुस्कुराने लगी.
‘ कहीं कुछ प्रॉब्लम तो नहीं हुई न ? ‘ शिवानी और शालू दोनों क चेहरे पर hi टेंशन साफ़ नज़र आ रही थी.
‘ नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं है , वो कल आ जाएँगी . बस आज थोड़ा फीवर लग रहा था तो रेस्ट करने क लिए छुट्टी मर ली ‘ सब शीना क लिए फिक्रमंद हो रहे थे. खैर उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ और लेक्चर क बाद हम अपनी क्लास में वापिस चले गए .
इधर दिव्या आज फिर से बेचैन थी और बेचैनी की वजह थी अमित. एक तरफ तो वो अब उसके पास न आने का खुद hi इरादा कर रही थी वहीँ उसे अमित की चुप्पी परेशां कर रही थी. वो लगातार दिव्या से कटरा रहा था . ये बात दिव्या क दिल को ठेस पहुंचा रही थी.
‘ वो क्यों मुझसे दूर होता जा रहा है ? क्यों वो अब मुझसे बात नहीं कर रहा? मुझे क्या ज़रूरत थी उस पर गुस्सा होने की ? देर से भी अत है तो अत तो मेरे पास hi है न. फिर क्यों मैं ऐसे hi गुस्सा कर लेती हूँ ? पर करूँ भी क्यों न , कहीं वो किसी गलत सांगत में पद गया तो ? इतनी सी बात भी नहीं समझता. मुझे उसे मानना होगा . उससे बात करनी होगी. जो भी बात है उससे पूछनी होगी क वो ऐसा क्यों कर रहा है ? पर कैसे मानों उसे? वो तो नज़रें उठता hi नहीं है और न hi खुद से कोई बात करता है . क्या करूँ ,,, क्या करूँ ??? हाँ जाने से पहल वो मेरे लिए सूट लाया था . वो तो तैयार भी हो चुके हैं. क्यों न आज मैं वो सूट पहनूं ?? वो मुझे उन कपड़ों में देखना चाहता था. आज देखेगा तो कितना खुश होगा . हाँ एहि करती हूँ ‘ खुद hi मन में सोच विचार करने क बाद दिव्या को जैसे रास्ता मिल गया था. वो ये सोच रही थी क वो अमित को मानाने क लिए ये सब कर रही है ताकि वो उससे दूर न जाये पर असल में उसका अंतर्मन उसे अमित को रिझाने को लालायित कर रहा था बिलकुल वैसे hi जैसे एक पत्नी अपने पति को और एक प्रेमिका अपने प्रेमी को रिझाती है . बस फिर क्या था दिव्या लग गयी अपने काम पर इसके साथ अब उसका दिल उससे और भी कुछ करवाने वाला था जिसका असर अमित पर गहरा हो .
‘ मैडम उस मैनेजर की पत्नी का सुराग मिला है , वो किसी नए no. से अपनी माँ से बात कर रही थी . हमने कॉल रिकॉर्ड की है ये वही है. जैसा आपने कहा था वैसा hi हुआ. मैनेजर ने तो अपने किसी रिश्तेदार से बात नहीं की पर उसकी बीवी ने की है. और no. की लोकेशन हमने ट्रेस कर ली है. ‘ ऋतू सिंह क ऑफिस में ये इंस्पेक्टर उसे मैनेजर क केस क बारे में इनफार्मेशन देने आया था. जिसके लिए ऋतू सिंह ने सख्त हिदायत दे राखी थी क इसकी इनफार्मेशन किसी को भी नहीं देनी.
‘ वैरी गुड , अभी क अभी अपनी 2 टीम्स ले जाओ. सब क सब सिविल में hi जाओ . No यूनिफार्म no इन्फॉर्म. वहां क किसी पुलिस वाले को भी खबर देने की ज़रूरत नहीं है. जा कर घर लगाओ और जैसे hi वो नज़र आये उठा कर ले आओ. अपने साथ हथियार ज़रूर रखना और चौकन्ने रहना . वहां कुछ और लोग भी मिल सकते हैं ‘ ऋतू सिंह को अंदेशा था क वहां मुठभेड़ भी हो सकती है और पुलिस को इन्फॉर्म करने से खबर लीक हो जाने का भी दर था जिसका रिस्क वो नहीं लेना चाहती थी . ऋतू सिंह का आर्डर मिलते hi इंस्पेक्टर निकल गया. ऋतू सिंह क चेहरे पर चमक आ गयी थी इस बात पर क अब वो उस मैनेजर को धार दबोचेगी और फिर साडी सचाई सामने आ hi जाएगी.
उधर रमा ने अमित की दिए हुए मेमोरी कार्ड से वो वीडियोस देखनी शुरू की तो वो सब नज़ारा देख कर उसकी अपनी छूट hi गीली होनी शुरू हो गयी. कितने hi दिनों से वो प्यासी जो थी. अमित का लैंड आँखों क सामने देख कर उसकी बेचैनी बढ़ने लगी थी. वो अपनी छूट को अपने हाथ से रगड़ hi रही थी क अचानक से कमरे में करिश्मा आ गयी और अपनी माँ की हालत देख कर वो हैरान हो गयी
‘ माँ ये आप क्या कर रही हैं ? और ये लैपटॉप पर क्या ....... ओह माय गॉड ये , ये सब क्या है ? ‘ करिश्मा की नज़र जैसे hi लैपटॉप पर पड़ी तो अमित को हेमा और सुषमा की वाइल्ड चुदाई करते देख उसकी ऑंखें बहार आ गयी. वैसे तो वो ये सब देख चुकी थी पर ये सब ऐसे रिकॉर्ड भी है उसे नहीं पता था. रमा की तो हालत hi ख़राब हो गयी थी क्यूंकि करिश्मा ने उसे अपनी छूट सहलाते हुए देख लिया था और ऊपर से अमित का लाइव शो.
‘ कक कुछ नहीं बेटी वो वो अमित ने तुम्हारी सास और ननद क खिलाफ जो सुबूत इकठा किये हैं वो देख रही थी.’ रमा ने खुद को सँभालते हुए सफाई दी और अपनी हालत ठीक की . रमा ने जल्दी से लैपटॉप की स्क्रीन डाउन कर दी
‘ आप इसका क्या करने वाली हैं? ‘
‘ कुछ नहीं , अगर वो लोग डाइवोर्स देने से मन करते हैं तो इसका इस्तेमाल करेंगे’
‘ माँ आप ये क्या करने जा रही हैं ? इससे तो उन दोनों क साथ अमित भी बदनाम हो जायेगा. अगर पापा को पता चल गया तो या फिर अमित की फॅमिली को , तो क्या होगा? सोचा भी है अपने? इसका इस्तेमाल अमित क खिलाफ भी हो सकता है . लाइए मुझे दीजिये , मैं उसके फेस ब्लर्र कर देती हूँ वर्ण बेचारा मेरी वजह से बदनाम हो जायेगा.’ करिश्मा की बात पर रमा को भी अपनी गलती का एहसास हुआ. पर उसे शर्म भी आ रही थी क करिश्मा अमित को ऐसी हालत में देखेगी .
‘ बेटी तू रहने दे किसी और से करवा लेंगे ये काम ‘
‘ किस्से ? जो भी देखेगा वो क्या सोचेगा अमित क बारे में? नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकती . इतना काम मैं खुद hi कर लुंगी . और हाँ दरवाज़ा लॉक कर क करा कीजिये जो करना हो . अगर कहें तो मैं अमित को बुला दूँ ? ‘ करिश्मा को लगा क उसकी माँ को शायद अमित की ज़रूरत है इस लिए उसने ये बात कह दी पर अगले hi पल उसे उसकी गलती का एहसास हुआ क वो क्या कह गयी क्यूंकि रमा की नज़रें झुक गयी थी . करिश्मा रमा को शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी .
‘ ी ऍम सॉरी माँ वो गलती से निकल गया. पर मैं ये कहना चाहती थी की अगर आप अमित को मिस कर रही हैं तो आप उसे बुला लीजिये . मैं अपने कमरे में hi रहूंगी तब तक ‘ करिश्मा ने अपनी माँ को गले लगते हुए ये कहा तो रमा को भी बुरा नहीं लगा. उसकी बेटी ने एक सहेली की तरह ये बात कही थी जो शायद उसकी ज़रूरत को समझ रही थी
‘ नहीं बीटा मैं वो बस देखते हुए खुद को रोक नहीं पई. तुम चिंता मत करो मैं ठीक हूँ’ दोनों माँ बेटी ने एक बार एक दूसरे को गले लगाया और फिर करिश्मा लैपटॉप लेकर अपने कमरे में चली गयी वो काम करने जो अभी उसने माँ को बताया था.
कॉलेज से अमित और राधा जैसे hi घर पहुंचे तो दिव्या का नया रूप देख कर अमित क साथ साथ राधा का भी मुँह खुला का खुला रह गया .
दिव्या का मन विचलित था जब देर तक उसे नींद न पड़ी तो वो अमित को देखने क लिए उसके कमरे में चली गयी . जहाँ वो आराम से सो रहा था. दिव्या उसके करीब जाकर उसे चैन से सोता देख कर थोड़ा शांत हुई. अमित क चेहरे पर सुकून था जिसे देख कर दिव्या को ाचा लगा और उसका माथा चूम लिया. जाने फिर दिल में क्या आया क उसके साथ hi लेट गयी. दिव्या का बेचैन दिल अब सुकून में था जैसे प्यासे को जलाशय मिल गया हो. अमित क चेहरे को देखती हुई वो करवट क बल उसके साथ hi लेट गयी. अमित नींद में था और शायद किसी ख्वाब में . उसका एक हाथ दिव्या की कमर पर आ गया और उसे अपनी तरफ खींचने लगा . दिव्या अंदर से मचल उठी पर न खुद वहां से हटी और न अमित का हाथ वहां से हटाया. बल्कि उसका जिस्म जैसे उसके दिमाग से बगावत करता हुआ खुद hi आगे को सरक कर अमित क साथ जा चिपका. दिव्या का दिमाग उसे रोक रहा था पर जिस्म तो जैसे दिल की सुन रहा था.
‘ ये क्या कर रहा है ? मुझे ऐसे क्यों खिंच रहा है ? नहीं नहीं , मुझे इसे रोकना होगा नहीं तो फिर कहीं ,,,,,, ‘ मन में यही सब सोचती दिव्या खुद को अमित को रोकने या खुद को वहां से हटाने की सोच तो रही थी पर उसका उलट हो रहा था. जब अमित ने उसे अपने साथ लगाया तो दिव्या ने अमित को पीछे करने क लिए उसकी छाती पर हाथ रखा जो खुद hi सरक कर पीछे चला गया और अब अमित दिव्या की बाँहों में था. अमित की गरम साँसे दिव्या को अपनी गर्दन और चेहरे पर महसूस होने लगी जिससे वो खुद भी गरम होने लगी. और उसका हाथ अमित क बालों को सहलाने लगा . अमित भी शायद शीना क साथ हो कुछ हुआ था उसी की वजह से उसका सपना देख रहा था . और जब दिव्या अमित की गरम साँसे महसूस करती अपना चेहरा उसके करीब ले आयी तो अमित क होंठ दिव्या क चेहरे पर जा लगे. दिव्या तो मनो पागल सी हो गयी. वो खुद hi अपना चेहरा अमित क होंठों पर रगड़ने लगी. और अमित क होंठ भी जैसे काम पर लग गए और उसके चेहरे को चूमने लगे . दिव्या जैसी सुंदरी को प्यार देने क लिए अमित का सोया हुआ जिस्म जैसे खुद hi काम करने लगा था. चेहरे पर अमित क होंठों का आनंद लेते हुए दिव्या क होंठ जब अमित क होंठो से जा लगे तो उसकी मनो धड़कन hi रुक गयी और वो हैं रुक गयी. क्यूंकि अमित क होंठों ने उसके होंठों को जकड लिया था.
‘ ये क्या हो रहा है ? हे भगवन मैं अमित क साथ .... मैं खुद को रोक क्यों नहीं प् रही ? ये गलत है ,,,, ओह्ह्ह्ह मुझे इतना ाचा क्यों लग रहा है ? ये मुझे क्या हो रहा है ? ‘ दिव्या क दिमाग ने एक ने फिर से उसे रोकने की कोशिश की मगर जिस्म की भूख और प्यार की चाहत ने उसकी एक न चलने दी. बस फिर वो खुद hi अमित क होंठो को चूमने लगी. दिव्या और भी ज्यादा अमित क साथ चिपकने की कोशिश करने लगी जब उसकी एक तंग अमित की जांघ क ऊपर चढ़ गयी उसे पता भी न चला . इसी क्रम में उसकी सदी थोड़ी सी ऊपर सरक गयी थी. वहीँ अमित भी जैसे सपने में कुछ ज्यादा hi रोमांस करने लगा था. दिव्या क होंठों को वो अपने होंठों में ऐसे चुम और चूस रहा था मनो वो जग रहा हो. अगले hi पल एक और धमाका हुआ और अमित का हाथ दिव्या की कमर से उसके चितारै पर आकर कास गया और उसकी गांड को मसलता हुआ अपने साथ जोर से चिपकने लगा . दिव्या भी खुद को अचे से अमित क साथ चिपका रही थी और उसके गले में बहन दाल उसे प्रेमिका की तरह चुम रही थी. अमित तो सो रहा था पर इस गरमी से अमित का लैंड जाग गया और जैसे hi उसने दिव्या की छूट पर ठोकर मरी तो साडी क अंदर से hi मनो उसकी छूट ने उसे महसूस कर लिया और स्वागत में चिकनाई बहा दी. अमित दिव्या क नाज़ुक बदन को अब ज़ोर से मसलने लगा था जिससे दिव्या को थोड़ा दर्द भी हो रहा था पर उसे मज़ा भी आ रहा था. दिव्या क बदन क साथ खेलते हुए अमित ने दिव्या क ऊपर आते हुए चित लिटा दिया और खुद उसके ऊपर आ गया था. एक तंग दिव्या की पहले hi अमित क ऊपर थी और अब दूसरी तंग ने भी खुल कर अमित को जैसे सही जगह प्रदान की. अब तो दिव्या का नाज़ुक बदन अमित क भरी शरीर क नीचे डाब गया था पर उसे तो जैसे ये भी ाचा लग रहा था . अब दिव्या दोनों हाथ अमित की पीठ और सर पर चलती हुई उसे मज़े से चूम रही थी. पर ये क्या!! , अमित तो अपना लैंड घुसाने क लिए अपनी कमर का ज़ोर लगाने लगा और उसका खड़ा हुआ लैंड अब दिव्या की छूट क ऊपर दबाव बसता जा रहा था. दिव्या को तो ऐसे लगा जैसे वो कपड़ों क साथ hi अंदर घुस जायेगा. अमित अब ज्यादा हरकत नहीं कर रहा था पर उसका लैंड लगातार दबाव बनता जा रहा था. दिव्या खुद को और ज्यादा रोक न पायी और लैंड क इस दबाव ने hi दिव्या की छूट को झड़ने पर मजबूर कर दिया. दिव्या की छूट से इतना पानी निकला की उसकी पेंटी क साथ साथ पेटीकोट और सदी भी वहां से भीग गयी. वो कुछ देर तो इस चरम का सुख लेती रही पर जब होश आया तो अमित अभी भी नींद में लैंड से जैसे कुआँ खोदने में लगा हुआ था. दिव्या ने अपनी हालत देखि तो खुद hi शर्मा गयी. उसकी सदी घुटनो तक ऊपर हो चुकी थी और घुटनो से नीचे की टंगे अमित की जांघों क पीछे से मनो अमित को अपने ऊपर दबा रही थी . दिव्या ने अमित को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश की पर वो उसे हिल नहीं रहा था. अब उसे एहसास हो रहा था क वास्तव में वो कितना भरी है . जैसे तैसे दिव्या अमित क नीचे से सरक कर एक तरफ को निकली और उठ कर अपनी सदी सही की . उसकी नज़र अमित पर पड़ी तो वो अब बीएड पर उल्टा लेता हुआ था और उसके होंठ मनो नींद में अभी भी किश कर रहे थे. दिव्या उसकी ऐसी हालत देख कर मुस्कुरा उठी .
‘ पागल है पूरा , पता नहीं कैसे कैसे सपने देखता रहता है . ये भी नहीं पता क साथ कौन सो रहा है . अगर बीच में कपडे न होते तो.... हे भगवन ये मैं क्या सोचने लगी . मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए . ये मुझसे क्या हो गया ? मुझे इससे दूर hi रहना चाहिए ‘ सुरूर उतरने क बाद अब जैसे दिव्या का दिमाग फिर से कण्ट्रोल अपने अंडर ले चूका था पर अब परवाह किसे थी. दिल की हसरत तो एक तरह से पूरी हो hi गयी थी. दिव्या जल्दी से अपने कमरे में भागी और कपडे उतर कर बाथरूम में घुस गयी और खुद को साफ करने क बाद कपडे बदल कर बीएड पर लेट गयी . उसे पता hi नहीं चला क कब उसे नींद आ गयी .
सुबह उठ कर मैंने एक्सरसाइज की. मौसम अब काफी हद तक रंग बदल चूका था . सर्दी शुरू हो चुकी थी. मैं एक्सरसाइज करने क बाद नीचे आया तो अभी तक मौसी और रद्द में से कोई उठा नहीं था. राधा का तो चलो पता hi था पर मौसी क्यों भी उठी ये सोच कर मैं उनके कमरे तक गया तो उन्हें चैन से सोया देख कर वापिस आ गया. क्यूंकि मैं उनका सामना करने में कटरा रहा था. मैंने अपने कमरे में नहाने क लिए जा रहा था क सोचा राधा को मौसी को जगाने को कह दूँ. इस लिए मैं राधा क पास उसके कमरे में चला गया. राधा बच्चों की तरह टांगों को घुटनो से मोड हुए पेट की तरफ किये सो रही थी. उसने दोनों बाज़ू अपने साथ hi कैसे हुए थे जिनमे कुछ था. मैं राधा को उठाने hi वाला था मेरी नज़र उसकी बाज़ुओं में बंद उस डायरी पर पड़ी. ये कोई साधारण नोट बुक नहीं थी और न hi कोई किताब. राधा का इस तरह डायरी को खुद से चिपका के लेटना मुझे अजीब लगा. मैंने सोचा चलो देखते हैं क इस डायरी में क्या है . मैंने डेरी को एक सिरे से पकड़ कर धीरे धीरे राधा क बाज़ुओं से बहार को खींच लिया. डायरी क ऊपर माय लाइफ माय ड्रीम लिखा हुआ था और अंग्रेजी का पहला अल्फाबेट ‘ा’ जो पूरे कवर पर था एक डिज़ाइन क रूप में. मुझे समझ नहीं आया इसका मतलब. सोचा चलो अंदर देखते हैं क्या है. मैंने अभी डायरी खोली hi थी क एक झटके से वो मेरे हाथों से निकल गयी.
‘ किसी की पर्सनल डेरी बिना पूछे नहीं खोलते . ख़बरदार जो मेरी डायरी को हाथ लगाया तो ‘ राधा मेरे हाथों से डायरी छीन कर उसे छुपाने की कोशिश कर रही थी और थोड़ा नाराज़गी से मुझे देख रही थी .
अमित : ऐसा क्या खास है इसमें जो ऐसे छुपा रही हो ? क्या मुझे नहीं बताओगी?
राधा : नहीं बिलकुल नहीं ( मन में ) तुम hi तो इसमें और कोई है hi कहाँ .
अमित : इसका मतलब ज़रूर कोई लड़का पसंद आ गया है तुम्हे और तुम नहीं चाहती क मुझे पता चले है न ??
राधा : जो मर्जी समझो , मैं कुछ नहीं बताने वाली. ये मेरी पर्सनल डायरी है. माँ कहाँ हैं ?
अमित : अरे हाँ वो मैं तुम्हे यही कहने आया था क मौसी अभी भी सो रही है. जाओ उन्हें जगा दो और खुद भी तैयार हो जाओ .
राधा : माँ अभी तक सो रही है ? तुम जगा देते उन्हें . तुमने जगाया क्यों नहीं ?
अमित : वो रत भी मुझसे गुस्सा हो गयी थी इस लिए मैं उनके सामने नहीं गया . अब जाओ और जगाओ उन्हें .
राधा : तो ऐसे काम hi क्यों करते हो ? चुपचाप घर पर टाइम से आया करो वर्ण तुम्हारी शिकायत बड़े मां से कर दूंगी मैं हाँ . और गुड मॉर्निंग, जगाने आये थे और अभी तक गुड मॉर्निंग नहीं कहा. बस आते hi लग गए तकझक करने.
राधा ने मुँह बनाते हुए कहा तो मुझे हंसी आ गयी और मुझे हँसता देख वो भी हसने लगी.
‘ गुड मॉर्निंग देवी जी , आज्ञा हो तो दिन की शुरुआत कर दी जाये या अभी भी रत मन कर बीएड पर लेते रहना है? जो भी आपका हुकुम होगा सर आँखों पर होगा. ‘ मैंने झुक कर राधा को सलाम करते हुए कहा तो राधा खिलखिलाती हुई बीएड से उठ गयी .
‘ हम खुश हुए गुलाम, चलिए अब जाकर तयारी कीजिये शाही सवारी की , शहज़ादी को कॉलेज तुम hi ले कर जाओगे ‘ राधा ने पूरी ऐडा से ये बात कही जैसे वो सच मुझ राजकुमारी हो और मैं उसका गुलाम. हम दोनों हसने लगे और फिर मैं अपने कमरे में नहाने चला गया राधा मौसी को जगाने .
‘ माँ उठो , देखो टाइम क्या हो गया है ? आपकी तबियत तो ठीक है न ? ‘ राधा ने अपनी माँ दिव्या को जगाया तो उसकी आंख खुल गयी. सामने रद्द को देख कर वो एक बार तो हैरान हुई मगर घडी की तरफ देख कर उसे एहसास हुआ क वो आज कितनी देर तक सोती रही है.
‘ अमित उठ गया ‘ दिव्या क मुँह पर पहला नाम अमित का hi निकला उसे खुद भी पता नहीं क्यों पर उसका ये रिएक्शन बिलकुल ऐसे था जैसे सुहागरात क बाद अगली सुबह पत्नी अपने पति को बीएड पर न पाकर सवाल करती है .
‘ वो तो कब का उठ गया माँ , अपने कमरे में तैयार हो रहा है. मुझे उसी ने जगाया है. पर आप आज इतनी देर तक कैसे सो रही हैं ? कोई प्रॉब्लम तो नहीं है ? ‘ राधा ने फिर से दिव्या को सवाल कर लिया जिससे वो थोड़ा सकपका गयी और नज़रें चुराने लगी .
‘ हाँ वो रत को नींद नहीं आ रही थी तो थोड़ा देर से सोई थी इस लिए पता hi नहीं चला . तू चल मैं नाश्ता बनती हूँ ‘ . दिव्या ने राधा को जाने को कहा और जल्दी से उठी. वो हाथ मुँह धोने बाथरूम में गयी जहाँ उसके रत वाले कपडे पड़े थे उन्हें देखते hi उसे रत की वो घटना यद् आ गयी .
‘ अमित मुझे जगाने क्यों नहीं आया ? कहीं वो रत को जग तो नहीं रहा था ? नहीं नहीं , मैंने खुद देखा था वो गहरी नींद में था . पर उसका वो तो कैसे ,,,,, इतना बड़ा और सख्त ....... ये मैं क्या सोचने लगी. मुझे उससे दूर रहना चाहिए . हे भगवन ये मुझे क्या होता जा रहा है. ‘ मुँह पर पानी मर कर वो जल्दी से किचन में भागी . अभी उसने चूल्हा जलाया hi था क बहार से बेल्ल बजने लगी . दिव्या ने जाकर दरवाज़ा खोला तो उसकी ऑंखें बड़ी हो गयी और ख़ुशी से चेहरा खिल गया .
‘ भैया अआप ,,, इतनी सुबह सुबह यहाँ ? ‘ दरवाज़े पर विजय खड़ा था . जिसे देख कर दिव्या खुश हो गयी. वैसे तो 2 दिन पहले hi वो अपने भाई क घर hi थी पर आज विजय बड़े दिनों बाद उसके घर आया था.
‘ हाँ वो आज थोड़ा काम था मंडी में तो सोचा तुम लोगों से मिलता जाऊंगा. अमित और राधा भी घर hi होंगे न? मैं रस्ते से गरमा गरम कचोरी लेकर आया हूँ साथ में नाश्ता करते हैं. ‘ दिव्या क सर पर हाथ रखते हुए विजय ने अंदर आते हुए उसके हाथ में लिफाफा पकड़ाया जो गरम कचोरियों से भरा हुआ था .
‘ इसकी क्या ज़रूरत थी बहिया? मेरा हाथ का खाना ाचा नहीं लगता क्या आपको ‘ दिव्या ने थोड़ा मुँह बनाते हुए कहा. पर एक तरह से वो खुश भी हुई क चलो बना बनाया खाना आ गया वर्ण वो इतनी जल्दी नाश्ता कैसे बनती .
‘ अरे मेरी बहना तेरे हाथ का तो खाना मैं साडी उम्र खता रहूं फिर भी मन न भरे. मैं तो ये इस लिए लता हूँ क तुम सब आज बहार का भी खा लो थोड़ा. वैसे ये चंदू मॉल हलवाई की कचौरी है . बहुत नाम है उसका . और फिर बच्चों को भी ाचा लगेगा. ‘ विजय अभी हॉल में आया hi था क अमित अंदर क रूम से बाहर निकला और विजय क पाऊँ छूने लगा मगर विजय ने उसे गले से लगा लिया.
‘ बाबा आप यहाँ ? बिना बताये ? माँ कहाँ है ? ‘ अमित ने विजय को अकेला देख कर अपनी माँ क बारे में पूछ hi लिया .
‘ अरे भाई मैं मंडी क काम से आया हूँ. अब तेरी माँ को थोड़ा साथ लेकर घूमता वैसे भी अब उसको बहार आना जाना मन है. तुम सुनाओ कैसे हो? ‘ विजय अमित को अपने साथ लगाए सोफे पर बैठ गया और दिव्या किचन में चली गयी.
‘ मां जीई ‘ राधा भी आते hi विजय क गले लग गयी. विजय ने भी उसे दुलार किया.
‘ मेरी राजकुमारी कैसी है ? ठीक तो है न ? आज तो तुम बड़ी प्यारी लग रही हो ‘
‘ मैं बिलकुल ठीक हूँ . और अब आप को देख कर और भी अछि हो गयी हूँ. वैसे आज ये सरप्राइज एंट्री किस ख़ुशी में ? ‘ राधा ने ऑंखें बचते हुए विजय से सवाल किया .
‘ भैया मंडी क काम से ए हैं . और तुम भी ज़रा सीधी हो कर बैठो . देखो भैया सबके लिए कचोरियाँ लाये हैं ‘ दिव्या ने राधा को ठीक से बैठने को कहते हुए विजय क आने का कारन बता दिया .
‘ लो अमित इसे अपने पास रखलो. तुम सुबह जल्दी में थे तो तुम्हारी माँ को यद् नहीं रहा. ये तुम्हारे लिए दिवाली का उपहार और कॉलेज खरच क लिए ‘ खाना खाने क बाद जब अमित उतने लगा तो विजय ने उसके हाथ में पैसों की गद्दी थमा दी. 500-500 क नोटों की दो गड्डियां. अमित वो पैसे लेने से मन करने लगा .
‘ मां जी क्या मेरे लिए नहीं है दिवाली गिफ्ट ?’ राधा ने मज़ाक में विजय को देख कर सवाल किया और अमित भी उसकी तरफ देखने लगा.
‘ हाँ बेटी तू बोल तुझे कितने चाहिए , मैं अभी ला देता हूँ . ‘
‘ कोई बात नहीं मां जी मैं इसी से ले लुंगी , वैसे भी ये भी तो मेरे hi हैं ‘ राधा ने ये बात पैसों की जगह अमित को देखते हुए कही थी. विजय ने तो इस बात पर गौर न किया पर किचन से अति दिव्या ने इस बात को देखा था.
‘ तुझे पैसे क्यों चाहिए? भैया उसके लिए लाये हैं न ‘
‘ तो क्या हुआ ? इसका भी तो पूरा हक़ है . बीटा तुझे जितने चाहिए हो ले लेना. अपनी माँ की बात मत सुनो. इसे अपना टाइम भूल गया है ‘ विजय ने राधा के सर पर हाथ रख कर कहा तो राधा क चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी. अमित जो पैसे वापिस करने का कह रहा था अब उसे वो रखने hi पड़े. कॉलेज का टाइम हो गया था तो दोनों जल्दी से कॉलेज क लिए निकल गए .
‘ रीमा मुझे तुमसे कुछ कहना है ‘ अमित ने रीमा को अकेले में मिलन को कहा था तो इस वक़्त दोनों लाइब्रेरी में अकेले थे . अभी दूसरा hi लेक्चर था और दोनों अपनी अपनी क्लास बंक कर क यहाँ मौजूद थे. अमित कुछ कहना चाहता है ये तो रीमा पहले hi समझ चुकी थी पर अब उसकी आवाज़ में भरी पैन और आँखों में अलग hi दर्द सा था .
‘ मुझसे बात करने क लिए तुम्हे पूछने की ज़रूरत नहीं है. जो भी कहना है बिना डरे कहो , मैं तुम्हारी किसी बात का बुरा नहीं मानूंगी ‘ रीमा ने अमित का चेहरा दोनों हाथों में पकड़ कर आँखों में देखते हुए कहा.
‘ मैंने तुम्हारा विश्वास तोडा है रीमा, मुझे समझ नहीं आ रहा मैं कैसे कहूं ‘ ये कहते हुए अमित की नज़रें अपराध बोध से झुक गयी और वो ज़मीन में नज़रें गड़ाए जा रहा था.
‘ शीना दीदी की वजह से ऐसा कह रहे हो न ? मुझे सब पता है ‘ रीमा ने नार्मल लहजे में ये बात कही जैसे उसे कोई फरक hi न पड़ता हो उस बात से. मगर ये सुन कर अमित की ऑंखें की फटी फटी रह गयी. जो बात वो कहने की हिम्मत नहीं कर प् रहा था वो रीमा ने कितनी आसानी से कह दी. पर उसे पता कैसे चल ये बड़ा सवाल तह. अमित क रिएक्शन देख कर रीमा क चेहरे पर मुस्कान आ गयी.
‘ ऐसे क्या देख रहे हो ? यही सोच रहे हो न क मुझे कैसे पता ? दीदी ने खुद hi बता दिया था कल रत. ‘ रीमा क इस खुलासे से अमित थोड़ा शांत तो हुआ पर शीना ने कैसे ये सब बता दिया ये भी बड़ी हैरानी थी उसके लिए
‘ ी ऍम सोरर.....’ अमित की बात पूरी होने से पहले hi रीमा ने अपना हाथ उसके मुँह पर रख कर उसको रोक दिया.
‘ सॉरी किस बात की ?? तुमने तो कोई गलत काम नहीं किया न . दीदी ने मुझ सब बता दिया है और ये भी क तुमने उन्हें साफ़ मन कर दिया था मेरे बारे में बता कर ‘
‘ तुम्हे बुरा नहीं लगा मैंने जो किया ? ‘ अमित को अब भी यकीन नहीं था क रीमा को गुस्सा नहीं इस बात पर.
‘ दीदी ने मुझे सब कुछ बता दिया क वो तुम्हे कितना प्यार करती हैं. सच कहूं पहले मुझे बुरा लगा था क्यूंकि वो मेरी दीदी हैं पर उनका प्यार देख कर मैं समझ गयी क उन्होंने जो किया वो सच्चे दिल से किया. तुमने उनको हमारे बारे में सच बताया ये जान कर मुझे तुम पर और भी प्यार आ रहा है. तुमने उनका फायदा नहीं उठाया बल्कि उनके प्यार को सम्मान दिया. उन्होंने मुझसे माफ़ी भी मांगी इस बात क लिए और मेरे दिल में कोई गुस्सा नहीं उनके प्रति पर तुम से है ‘ रीमा ने थोड़ा मुँह बनाते हुए कहा. अमित तो साडी बात सुन कर अब अपने ऊपर गुस्से की बात सुन कर टेंशन में आ गया
‘ मुझ पर गुस्सा क्यों हो अगर तुम्हे सच पता चल hi गया है तो ?’
‘ गुस्सा नहीं करूँ तो क्या करूँ ? मैं कब से तुम्हे कह रही हूँ क मुझे एक बार वो हक़ देदो जो मैं चाहती हूँ पर तुम मुझे हर बार बहाना बना देते हो . और दीदी को मुझसे पहले hi वो दे दिया जिस पर मेरा हक़ था . ये कोई बात हुई , जाओ मैं नहीं बात करती तुमसे . तुम्हे पेरी परवाह है hi नहीं ‘ रीमा ने रूठते हुए ये बात कहो तो अमित क दिल को थोड़ी तसल्ली हुई पर अब रीमा रूत गयी थी और उसकी बात अपनी जगह सही भी थी
‘ मैं कहाँ कुछ कर रहा था यार वो तो शीना ने मुझे तुम्हारी कसम दे दी थी और ‘....’
‘ और तुम मन गए . मेरी कसम पर मन गए और मैं कब से कह रही हूँ पर वो नहीं मानते, मतलब मेरे नाम पर कोई कुछ भी करवा सकता है बस मेरी नहीं सुनोगे हुन्न्न ‘ रीमा ने अमित को नखरा दिखते हुए कहा.
‘ तुम तो मेरी जान हो , तुम्हारे लिए तो कुछ भी कर सकता हूँ’
‘ तो फिर चलो आज मुझे मेरा हक़ दे दो बाद में चाहे साडी दुनिया को परसाफ बाँट ते रहना.’
‘ तुम क्यों ज़िद कर रही हो पता भी है तुम्हे कितना दर्द होगा ? मैं तुम्हे दर्द नहीं देना चाहता’
‘ पता है कितना दर्द डोज , दीदी आज भी बिस्तर पर hi हैं. दीदी बता रही थी क तुम्हारा वो नार्मल नहीं है पर मुझे कुछ नहीं पता. जो भी जैसा भी है मेरा है और एक बार तो ये दर्द सबको सहना hi पड़ता है . मुझे मेरा हक़ चाहिए बस ‘ रीमा की इतनी क्लियर बात सुन कर अब अमित निरुत्तर हो चूका था.
‘ ाचा ठीक है जो तुम कहो मैं करूँगा. पर आज नहीं कल. अब तो मन जाओ ‘ अमित की ये बात सुन कर रीमा खुश हो गयी और पलट कर उसके होंठों पर अपने होंठ लगा कर किश करने लगी . अमित ने भी रीमा क होंठों को किश करना शुरू कर दिया. दोनों ने एक दूसरे क होंठों को भरपूर चूमा और फिर अलग हो गए. क्यूंकि लेक्चर की बेल्ल बज गयी थी. रीमा बहुत खुश थी क्यूंकि उसकी मुराद अब कल पूरी होने का फाइनल एलान हो गया था.
‘ कहाँ थे तुम ? तुम तो बोल कर गए थे क अभी आया और पूरा लेक्चर निकल दिया . ‘ कल्पना ने अमित से आते hi सवाल किया. कैंटीन में सब एक साथ बैठे थे सिवाए शीना क जो आज कॉलेज hi नहीं आयी थी.
‘ वो मैं ज़रा सर क पास गया था वहीँ टाइम लग गया’ अमित ने ज़रा संभल कर ये जवाब दिया जबकि उसकी इस हालत पर रीमा मंद मंद मुस्कुरा रही थी .
‘ तुझे क्यों हंसी आ रही है ? ‘ राधा ने रीमा से सवाल किया तो एक पल को वो भी सकपका गयी जिस पर अब अमित मुस्कुरा रहा था
‘ कुछ नहीं बस ऐसे hi . पर तुम क्यों गुस्सा कर रही हो? तुम्हे हंसी नहीं आ रही ? देखो तो कैसे भीगी बिल्ली बन रहा है कल्पना क सामने ‘ रीमा ने राधा को मेरी तरफ इशारा करते हुए कहा ‘
‘ बात तो सही है यार , इसे कल्पना hi ठीक कर सकती है . वैसे भी दोनों हैं तो एक hi लाइन क ‘ मीनल ने भी बात का मज़ा लेते हुए कहा .
‘ बिल्ली नहीं है शेर है , ये बस सबकी परवाह करता है . ‘ राधा ने भी तुनक कर जवाब दे दिया पर सबकी नज़र उसकी तरफ हो गयी उसका जवाब सुन कर.
‘ बिलकुल सही कहा , पर इस शेर को बिल्ली बना देती है लेडी ब्रूस ली . क्यों सही कहा न ? ‘ मीनल ने फिर से मज़ा लेते हुए कहा.
‘ अब ऐसी भी बात नहीं है , लड़कियों क सामने ये ऐसा hi है . ये तो इसकी क्वालिटी है वर्ण इसका जलवा तो कॉलेज ने पहले hi दिन देख लिया था’ ये बात शालू ने कही थी. पर मीनल कहाँ चुप रहने वाली थी
‘ लगता है दीदी आप ने कुछ ज्यादा hi जलवा देख लिया है जो और किसी ने नहीं देखा ‘ मीनल की इस बात पर शालू पानी पानी हो गयी पर खुद को संभालती हुई बोली .
‘ क्यों तुमने नहीं देखा नज़ारा ? तुम भी देख लो ‘ शालू ने अब मीनल को hi लपेट लिया था .
‘ न दीदी मेरे पास तो जलवा दिखने वाला है और मैं इसी का देखती हूँ . अमित का तो आप hi देखो ‘ मीनल बात को किस तरफ ले जा रही थी ये सब समझ रहे थे और हैरान भी हो रहे थे
‘ ोये तू अपना मुँह बंद रख और जा क देख जो भी देखना है तूने अपने मजनू का . पता नहीं क्या क्या बोले जा रही है. मेरा बेस्ट फ्रेंड है इस लिए मेरी इतनी इज़्ज़त करता है और कुछ न सोचो तुम .’ कल्पना ने मीनल को चुप करवाते हुए थोड़ा दन्त कर ये बात कही .
‘ वही तो मैं भी कहती हूँ क ये hi आपके लिए बेस्ट है ‘ मीनल ने फिर से तीर चला दिया था जो राधा को ाचा नहीं लगा और वो थोड़ा गुस्से से मीनल की तरफ देखने लगी जिसे उसने नहीं देखा .
‘ क्या यार तुम लोग क्या बातें बना रहे हो . रीमा यार शीना को क्या हुआ आज आयी क्यों नहीं वो ? ‘ शिवानी ने बात का रुख मोड़ते हुए रीमा से पूछा.
‘ वो दीदी की तबियत थोड़ा ठीक नहीं थी तो आज रेस्ट कर रही हैं . कल आ जाएँगी ‘ रीमा ने जवाब दिया .
‘ क्या हुआ शीना को ? कल तो अछि भली थी ‘ नेहा दीदी ने शीना की चिंता करते हुए सवाल पूछा . रीमा मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी जैसे मेरी पोल खोलनी हो .
‘ वो दीदी कल एक कण खजूरे ने उन्हें काट लिया था तो इस लिए आज वो रेस्ट कर रही हैं . कल आ जाएँगी ‘ रीमा ने मुझे देखते हुए hi ये बात कही. रीमा ने मुझे कण खजुरा कहा तो मैंने अपने दन्त पिस्टे हुए उसे देखा और वो और ज्यादा मुस्कुराने लगी.
‘ कहीं कुछ प्रॉब्लम तो नहीं हुई न ? ‘ शिवानी और शालू दोनों क चेहरे पर hi टेंशन साफ़ नज़र आ रही थी.
‘ नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं है , वो कल आ जाएँगी . बस आज थोड़ा फीवर लग रहा था तो रेस्ट करने क लिए छुट्टी मर ली ‘ सब शीना क लिए फिक्रमंद हो रहे थे. खैर उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ और लेक्चर क बाद हम अपनी क्लास में वापिस चले गए .
इधर दिव्या आज फिर से बेचैन थी और बेचैनी की वजह थी अमित. एक तरफ तो वो अब उसके पास न आने का खुद hi इरादा कर रही थी वहीँ उसे अमित की चुप्पी परेशां कर रही थी. वो लगातार दिव्या से कटरा रहा था . ये बात दिव्या क दिल को ठेस पहुंचा रही थी.
‘ वो क्यों मुझसे दूर होता जा रहा है ? क्यों वो अब मुझसे बात नहीं कर रहा? मुझे क्या ज़रूरत थी उस पर गुस्सा होने की ? देर से भी अत है तो अत तो मेरे पास hi है न. फिर क्यों मैं ऐसे hi गुस्सा कर लेती हूँ ? पर करूँ भी क्यों न , कहीं वो किसी गलत सांगत में पद गया तो ? इतनी सी बात भी नहीं समझता. मुझे उसे मानना होगा . उससे बात करनी होगी. जो भी बात है उससे पूछनी होगी क वो ऐसा क्यों कर रहा है ? पर कैसे मानों उसे? वो तो नज़रें उठता hi नहीं है और न hi खुद से कोई बात करता है . क्या करूँ ,,, क्या करूँ ??? हाँ जाने से पहल वो मेरे लिए सूट लाया था . वो तो तैयार भी हो चुके हैं. क्यों न आज मैं वो सूट पहनूं ?? वो मुझे उन कपड़ों में देखना चाहता था. आज देखेगा तो कितना खुश होगा . हाँ एहि करती हूँ ‘ खुद hi मन में सोच विचार करने क बाद दिव्या को जैसे रास्ता मिल गया था. वो ये सोच रही थी क वो अमित को मानाने क लिए ये सब कर रही है ताकि वो उससे दूर न जाये पर असल में उसका अंतर्मन उसे अमित को रिझाने को लालायित कर रहा था बिलकुल वैसे hi जैसे एक पत्नी अपने पति को और एक प्रेमिका अपने प्रेमी को रिझाती है . बस फिर क्या था दिव्या लग गयी अपने काम पर इसके साथ अब उसका दिल उससे और भी कुछ करवाने वाला था जिसका असर अमित पर गहरा हो .
‘ मैडम उस मैनेजर की पत्नी का सुराग मिला है , वो किसी नए no. से अपनी माँ से बात कर रही थी . हमने कॉल रिकॉर्ड की है ये वही है. जैसा आपने कहा था वैसा hi हुआ. मैनेजर ने तो अपने किसी रिश्तेदार से बात नहीं की पर उसकी बीवी ने की है. और no. की लोकेशन हमने ट्रेस कर ली है. ‘ ऋतू सिंह क ऑफिस में ये इंस्पेक्टर उसे मैनेजर क केस क बारे में इनफार्मेशन देने आया था. जिसके लिए ऋतू सिंह ने सख्त हिदायत दे राखी थी क इसकी इनफार्मेशन किसी को भी नहीं देनी.
‘ वैरी गुड , अभी क अभी अपनी 2 टीम्स ले जाओ. सब क सब सिविल में hi जाओ . No यूनिफार्म no इन्फॉर्म. वहां क किसी पुलिस वाले को भी खबर देने की ज़रूरत नहीं है. जा कर घर लगाओ और जैसे hi वो नज़र आये उठा कर ले आओ. अपने साथ हथियार ज़रूर रखना और चौकन्ने रहना . वहां कुछ और लोग भी मिल सकते हैं ‘ ऋतू सिंह को अंदेशा था क वहां मुठभेड़ भी हो सकती है और पुलिस को इन्फॉर्म करने से खबर लीक हो जाने का भी दर था जिसका रिस्क वो नहीं लेना चाहती थी . ऋतू सिंह का आर्डर मिलते hi इंस्पेक्टर निकल गया. ऋतू सिंह क चेहरे पर चमक आ गयी थी इस बात पर क अब वो उस मैनेजर को धार दबोचेगी और फिर साडी सचाई सामने आ hi जाएगी.
उधर रमा ने अमित की दिए हुए मेमोरी कार्ड से वो वीडियोस देखनी शुरू की तो वो सब नज़ारा देख कर उसकी अपनी छूट hi गीली होनी शुरू हो गयी. कितने hi दिनों से वो प्यासी जो थी. अमित का लैंड आँखों क सामने देख कर उसकी बेचैनी बढ़ने लगी थी. वो अपनी छूट को अपने हाथ से रगड़ hi रही थी क अचानक से कमरे में करिश्मा आ गयी और अपनी माँ की हालत देख कर वो हैरान हो गयी
‘ माँ ये आप क्या कर रही हैं ? और ये लैपटॉप पर क्या ....... ओह माय गॉड ये , ये सब क्या है ? ‘ करिश्मा की नज़र जैसे hi लैपटॉप पर पड़ी तो अमित को हेमा और सुषमा की वाइल्ड चुदाई करते देख उसकी ऑंखें बहार आ गयी. वैसे तो वो ये सब देख चुकी थी पर ये सब ऐसे रिकॉर्ड भी है उसे नहीं पता था. रमा की तो हालत hi ख़राब हो गयी थी क्यूंकि करिश्मा ने उसे अपनी छूट सहलाते हुए देख लिया था और ऊपर से अमित का लाइव शो.
‘ कक कुछ नहीं बेटी वो वो अमित ने तुम्हारी सास और ननद क खिलाफ जो सुबूत इकठा किये हैं वो देख रही थी.’ रमा ने खुद को सँभालते हुए सफाई दी और अपनी हालत ठीक की . रमा ने जल्दी से लैपटॉप की स्क्रीन डाउन कर दी
‘ आप इसका क्या करने वाली हैं? ‘
‘ कुछ नहीं , अगर वो लोग डाइवोर्स देने से मन करते हैं तो इसका इस्तेमाल करेंगे’
‘ माँ आप ये क्या करने जा रही हैं ? इससे तो उन दोनों क साथ अमित भी बदनाम हो जायेगा. अगर पापा को पता चल गया तो या फिर अमित की फॅमिली को , तो क्या होगा? सोचा भी है अपने? इसका इस्तेमाल अमित क खिलाफ भी हो सकता है . लाइए मुझे दीजिये , मैं उसके फेस ब्लर्र कर देती हूँ वर्ण बेचारा मेरी वजह से बदनाम हो जायेगा.’ करिश्मा की बात पर रमा को भी अपनी गलती का एहसास हुआ. पर उसे शर्म भी आ रही थी क करिश्मा अमित को ऐसी हालत में देखेगी .
‘ बेटी तू रहने दे किसी और से करवा लेंगे ये काम ‘
‘ किस्से ? जो भी देखेगा वो क्या सोचेगा अमित क बारे में? नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकती . इतना काम मैं खुद hi कर लुंगी . और हाँ दरवाज़ा लॉक कर क करा कीजिये जो करना हो . अगर कहें तो मैं अमित को बुला दूँ ? ‘ करिश्मा को लगा क उसकी माँ को शायद अमित की ज़रूरत है इस लिए उसने ये बात कह दी पर अगले hi पल उसे उसकी गलती का एहसास हुआ क वो क्या कह गयी क्यूंकि रमा की नज़रें झुक गयी थी . करिश्मा रमा को शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी .
‘ ी ऍम सॉरी माँ वो गलती से निकल गया. पर मैं ये कहना चाहती थी की अगर आप अमित को मिस कर रही हैं तो आप उसे बुला लीजिये . मैं अपने कमरे में hi रहूंगी तब तक ‘ करिश्मा ने अपनी माँ को गले लगते हुए ये कहा तो रमा को भी बुरा नहीं लगा. उसकी बेटी ने एक सहेली की तरह ये बात कही थी जो शायद उसकी ज़रूरत को समझ रही थी
‘ नहीं बीटा मैं वो बस देखते हुए खुद को रोक नहीं पई. तुम चिंता मत करो मैं ठीक हूँ’ दोनों माँ बेटी ने एक बार एक दूसरे को गले लगाया और फिर करिश्मा लैपटॉप लेकर अपने कमरे में चली गयी वो काम करने जो अभी उसने माँ को बताया था.
कॉलेज से अमित और राधा जैसे hi घर पहुंचे तो दिव्या का नया रूप देख कर अमित क साथ साथ राधा का भी मुँह खुला का खुला रह गया .