Adultery Manhoos se mahan tak - Page 27 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 199



दिव्या का मन विचलित था जब देर तक उसे नींद न पड़ी तो वो अमित को देखने क लिए उसके कमरे में चली गयी . जहाँ वो आराम से सो रहा था. दिव्या उसके करीब जाकर उसे चैन से सोता देख कर थोड़ा शांत हुई. अमित क चेहरे पर सुकून था जिसे देख कर दिव्या को ाचा लगा और उसका माथा चूम लिया. जाने फिर दिल में क्या आया क उसके साथ hi लेट गयी. दिव्या का बेचैन दिल अब सुकून में था जैसे प्यासे को जलाशय मिल गया हो. अमित क चेहरे को देखती हुई वो करवट क बल उसके साथ hi लेट गयी. अमित नींद में था और शायद किसी ख्वाब में . उसका एक हाथ दिव्या की कमर पर आ गया और उसे अपनी तरफ खींचने लगा . दिव्या अंदर से मचल उठी पर न खुद वहां से हटी और न अमित का हाथ वहां से हटाया. बल्कि उसका जिस्म जैसे उसके दिमाग से बगावत करता हुआ खुद hi आगे को सरक कर अमित क साथ जा चिपका. दिव्या का दिमाग उसे रोक रहा था पर जिस्म तो जैसे दिल की सुन रहा था.

‘ ये क्या कर रहा है ? मुझे ऐसे क्यों खिंच रहा है ? नहीं नहीं , मुझे इसे रोकना होगा नहीं तो फिर कहीं ,,,,,, ‘ मन में यही सब सोचती दिव्या खुद को अमित को रोकने या खुद को वहां से हटाने की सोच तो रही थी पर उसका उलट हो रहा था. जब अमित ने उसे अपने साथ लगाया तो दिव्या ने अमित को पीछे करने क लिए उसकी छाती पर हाथ रखा जो खुद hi सरक कर पीछे चला गया और अब अमित दिव्या की बाँहों में था. अमित की गरम साँसे दिव्या को अपनी गर्दन और चेहरे पर महसूस होने लगी जिससे वो खुद भी गरम होने लगी. और उसका हाथ अमित क बालों को सहलाने लगा . अमित भी शायद शीना क साथ हो कुछ हुआ था उसी की वजह से उसका सपना देख रहा था . और जब दिव्या अमित की गरम साँसे महसूस करती अपना चेहरा उसके करीब ले आयी तो अमित क होंठ दिव्या क चेहरे पर जा लगे. दिव्या तो मनो पागल सी हो गयी. वो खुद hi अपना चेहरा अमित क होंठों पर रगड़ने लगी. और अमित क होंठ भी जैसे काम पर लग गए और उसके चेहरे को चूमने लगे . दिव्या जैसी सुंदरी को प्यार देने क लिए अमित का सोया हुआ जिस्म जैसे खुद hi काम करने लगा था. चेहरे पर अमित क होंठों का आनंद लेते हुए दिव्या क होंठ जब अमित क होंठो से जा लगे तो उसकी मनो धड़कन hi रुक गयी और वो हैं रुक गयी. क्यूंकि अमित क होंठों ने उसके होंठों को जकड लिया था.

‘ ये क्या हो रहा है ? हे भगवन मैं अमित क साथ .... मैं खुद को रोक क्यों नहीं प् रही ? ये गलत है ,,,, ओह्ह्ह्ह मुझे इतना ाचा क्यों लग रहा है ? ये मुझे क्या हो रहा है ? ‘ दिव्या क दिमाग ने एक ने फिर से उसे रोकने की कोशिश की मगर जिस्म की भूख और प्यार की चाहत ने उसकी एक न चलने दी. बस फिर वो खुद hi अमित क होंठो को चूमने लगी. दिव्या और भी ज्यादा अमित क साथ चिपकने की कोशिश करने लगी जब उसकी एक तंग अमित की जांघ क ऊपर चढ़ गयी उसे पता भी न चला . इसी क्रम में उसकी सदी थोड़ी सी ऊपर सरक गयी थी. वहीँ अमित भी जैसे सपने में कुछ ज्यादा hi रोमांस करने लगा था. दिव्या क होंठों को वो अपने होंठों में ऐसे चुम और चूस रहा था मनो वो जग रहा हो. अगले hi पल एक और धमाका हुआ और अमित का हाथ दिव्या की कमर से उसके चितारै पर आकर कास गया और उसकी गांड को मसलता हुआ अपने साथ जोर से चिपकने लगा . दिव्या भी खुद को अचे से अमित क साथ चिपका रही थी और उसके गले में बहन दाल उसे प्रेमिका की तरह चुम रही थी. अमित तो सो रहा था पर इस गरमी से अमित का लैंड जाग गया और जैसे hi उसने दिव्या की छूट पर ठोकर मरी तो साडी क अंदर से hi मनो उसकी छूट ने उसे महसूस कर लिया और स्वागत में चिकनाई बहा दी. अमित दिव्या क नाज़ुक बदन को अब ज़ोर से मसलने लगा था जिससे दिव्या को थोड़ा दर्द भी हो रहा था पर उसे मज़ा भी आ रहा था. दिव्या क बदन क साथ खेलते हुए अमित ने दिव्या क ऊपर आते हुए चित लिटा दिया और खुद उसके ऊपर आ गया था. एक तंग दिव्या की पहले hi अमित क ऊपर थी और अब दूसरी तंग ने भी खुल कर अमित को जैसे सही जगह प्रदान की. अब तो दिव्या का नाज़ुक बदन अमित क भरी शरीर क नीचे डाब गया था पर उसे तो जैसे ये भी ाचा लग रहा था . अब दिव्या दोनों हाथ अमित की पीठ और सर पर चलती हुई उसे मज़े से चूम रही थी. पर ये क्या!! , अमित तो अपना लैंड घुसाने क लिए अपनी कमर का ज़ोर लगाने लगा और उसका खड़ा हुआ लैंड अब दिव्या की छूट क ऊपर दबाव बसता जा रहा था. दिव्या को तो ऐसे लगा जैसे वो कपड़ों क साथ hi अंदर घुस जायेगा. अमित अब ज्यादा हरकत नहीं कर रहा था पर उसका लैंड लगातार दबाव बनता जा रहा था. दिव्या खुद को और ज्यादा रोक न पायी और लैंड क इस दबाव ने hi दिव्या की छूट को झड़ने पर मजबूर कर दिया. दिव्या की छूट से इतना पानी निकला की उसकी पेंटी क साथ साथ पेटीकोट और सदी भी वहां से भीग गयी. वो कुछ देर तो इस चरम का सुख लेती रही पर जब होश आया तो अमित अभी भी नींद में लैंड से जैसे कुआँ खोदने में लगा हुआ था. दिव्या ने अपनी हालत देखि तो खुद hi शर्मा गयी. उसकी सदी घुटनो तक ऊपर हो चुकी थी और घुटनो से नीचे की टंगे अमित की जांघों क पीछे से मनो अमित को अपने ऊपर दबा रही थी . दिव्या ने अमित को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश की पर वो उसे हिल नहीं रहा था. अब उसे एहसास हो रहा था क वास्तव में वो कितना भरी है . जैसे तैसे दिव्या अमित क नीचे से सरक कर एक तरफ को निकली और उठ कर अपनी सदी सही की . उसकी नज़र अमित पर पड़ी तो वो अब बीएड पर उल्टा लेता हुआ था और उसके होंठ मनो नींद में अभी भी किश कर रहे थे. दिव्या उसकी ऐसी हालत देख कर मुस्कुरा उठी .

‘ पागल है पूरा , पता नहीं कैसे कैसे सपने देखता रहता है . ये भी नहीं पता क साथ कौन सो रहा है . अगर बीच में कपडे न होते तो.... हे भगवन ये मैं क्या सोचने लगी . मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए . ये मुझसे क्या हो गया ? मुझे इससे दूर hi रहना चाहिए ‘ सुरूर उतरने क बाद अब जैसे दिव्या का दिमाग फिर से कण्ट्रोल अपने अंडर ले चूका था पर अब परवाह किसे थी. दिल की हसरत तो एक तरह से पूरी हो hi गयी थी. दिव्या जल्दी से अपने कमरे में भागी और कपडे उतर कर बाथरूम में घुस गयी और खुद को साफ करने क बाद कपडे बदल कर बीएड पर लेट गयी . उसे पता hi नहीं चला क कब उसे नींद आ गयी .

सुबह उठ कर मैंने एक्सरसाइज की. मौसम अब काफी हद तक रंग बदल चूका था . सर्दी शुरू हो चुकी थी. मैं एक्सरसाइज करने क बाद नीचे आया तो अभी तक मौसी और रद्द में से कोई उठा नहीं था. राधा का तो चलो पता hi था पर मौसी क्यों भी उठी ये सोच कर मैं उनके कमरे तक गया तो उन्हें चैन से सोया देख कर वापिस आ गया. क्यूंकि मैं उनका सामना करने में कटरा रहा था. मैंने अपने कमरे में नहाने क लिए जा रहा था क सोचा राधा को मौसी को जगाने को कह दूँ. इस लिए मैं राधा क पास उसके कमरे में चला गया. राधा बच्चों की तरह टांगों को घुटनो से मोड हुए पेट की तरफ किये सो रही थी. उसने दोनों बाज़ू अपने साथ hi कैसे हुए थे जिनमे कुछ था. मैं राधा को उठाने hi वाला था मेरी नज़र उसकी बाज़ुओं में बंद उस डायरी पर पड़ी. ये कोई साधारण नोट बुक नहीं थी और न hi कोई किताब. राधा का इस तरह डायरी को खुद से चिपका के लेटना मुझे अजीब लगा. मैंने सोचा चलो देखते हैं क इस डायरी में क्या है . मैंने डेरी को एक सिरे से पकड़ कर धीरे धीरे राधा क बाज़ुओं से बहार को खींच लिया. डायरी क ऊपर माय लाइफ माय ड्रीम लिखा हुआ था और अंग्रेजी का पहला अल्फाबेट ‘ा’ जो पूरे कवर पर था एक डिज़ाइन क रूप में. मुझे समझ नहीं आया इसका मतलब. सोचा चलो अंदर देखते हैं क्या है. मैंने अभी डायरी खोली hi थी क एक झटके से वो मेरे हाथों से निकल गयी.

‘ किसी की पर्सनल डेरी बिना पूछे नहीं खोलते . ख़बरदार जो मेरी डायरी को हाथ लगाया तो ‘ राधा मेरे हाथों से डायरी छीन कर उसे छुपाने की कोशिश कर रही थी और थोड़ा नाराज़गी से मुझे देख रही थी .

अमित : ऐसा क्या खास है इसमें जो ऐसे छुपा रही हो ? क्या मुझे नहीं बताओगी?

राधा : नहीं बिलकुल नहीं ( मन में ) तुम hi तो इसमें और कोई है hi कहाँ .

अमित : इसका मतलब ज़रूर कोई लड़का पसंद आ गया है तुम्हे और तुम नहीं चाहती क मुझे पता चले है न ??

राधा : जो मर्जी समझो , मैं कुछ नहीं बताने वाली. ये मेरी पर्सनल डायरी है. माँ कहाँ हैं ?

अमित : अरे हाँ वो मैं तुम्हे यही कहने आया था क मौसी अभी भी सो रही है. जाओ उन्हें जगा दो और खुद भी तैयार हो जाओ .

राधा : माँ अभी तक सो रही है ? तुम जगा देते उन्हें . तुमने जगाया क्यों नहीं ?

अमित : वो रत भी मुझसे गुस्सा हो गयी थी इस लिए मैं उनके सामने नहीं गया . अब जाओ और जगाओ उन्हें .

राधा : तो ऐसे काम hi क्यों करते हो ? चुपचाप घर पर टाइम से आया करो वर्ण तुम्हारी शिकायत बड़े मां से कर दूंगी मैं हाँ . और गुड मॉर्निंग, जगाने आये थे और अभी तक गुड मॉर्निंग नहीं कहा. बस आते hi लग गए तकझक करने.

राधा ने मुँह बनाते हुए कहा तो मुझे हंसी आ गयी और मुझे हँसता देख वो भी हसने लगी.

‘ गुड मॉर्निंग देवी जी , आज्ञा हो तो दिन की शुरुआत कर दी जाये या अभी भी रत मन कर बीएड पर लेते रहना है? जो भी आपका हुकुम होगा सर आँखों पर होगा. ‘ मैंने झुक कर राधा को सलाम करते हुए कहा तो राधा खिलखिलाती हुई बीएड से उठ गयी .

‘ हम खुश हुए गुलाम, चलिए अब जाकर तयारी कीजिये शाही सवारी की , शहज़ादी को कॉलेज तुम hi ले कर जाओगे ‘ राधा ने पूरी ऐडा से ये बात कही जैसे वो सच मुझ राजकुमारी हो और मैं उसका गुलाम. हम दोनों हसने लगे और फिर मैं अपने कमरे में नहाने चला गया राधा मौसी को जगाने .

‘ माँ उठो , देखो टाइम क्या हो गया है ? आपकी तबियत तो ठीक है न ? ‘ राधा ने अपनी माँ दिव्या को जगाया तो उसकी आंख खुल गयी. सामने रद्द को देख कर वो एक बार तो हैरान हुई मगर घडी की तरफ देख कर उसे एहसास हुआ क वो आज कितनी देर तक सोती रही है.

‘ अमित उठ गया ‘ दिव्या क मुँह पर पहला नाम अमित का hi निकला उसे खुद भी पता नहीं क्यों पर उसका ये रिएक्शन बिलकुल ऐसे था जैसे सुहागरात क बाद अगली सुबह पत्नी अपने पति को बीएड पर न पाकर सवाल करती है .

‘ वो तो कब का उठ गया माँ , अपने कमरे में तैयार हो रहा है. मुझे उसी ने जगाया है. पर आप आज इतनी देर तक कैसे सो रही हैं ? कोई प्रॉब्लम तो नहीं है ? ‘ राधा ने फिर से दिव्या को सवाल कर लिया जिससे वो थोड़ा सकपका गयी और नज़रें चुराने लगी .

‘ हाँ वो रत को नींद नहीं आ रही थी तो थोड़ा देर से सोई थी इस लिए पता hi नहीं चला . तू चल मैं नाश्ता बनती हूँ ‘ . दिव्या ने राधा को जाने को कहा और जल्दी से उठी. वो हाथ मुँह धोने बाथरूम में गयी जहाँ उसके रत वाले कपडे पड़े थे उन्हें देखते hi उसे रत की वो घटना यद् आ गयी .

‘ अमित मुझे जगाने क्यों नहीं आया ? कहीं वो रत को जग तो नहीं रहा था ? नहीं नहीं , मैंने खुद देखा था वो गहरी नींद में था . पर उसका वो तो कैसे ,,,,, इतना बड़ा और सख्त ....... ये मैं क्या सोचने लगी. मुझे उससे दूर रहना चाहिए . हे भगवन ये मुझे क्या होता जा रहा है. ‘ मुँह पर पानी मर कर वो जल्दी से किचन में भागी . अभी उसने चूल्हा जलाया hi था क बहार से बेल्ल बजने लगी . दिव्या ने जाकर दरवाज़ा खोला तो उसकी ऑंखें बड़ी हो गयी और ख़ुशी से चेहरा खिल गया .

‘ भैया अआप ,,, इतनी सुबह सुबह यहाँ ? ‘ दरवाज़े पर विजय खड़ा था . जिसे देख कर दिव्या खुश हो गयी. वैसे तो 2 दिन पहले hi वो अपने भाई क घर hi थी पर आज विजय बड़े दिनों बाद उसके घर आया था.

‘ हाँ वो आज थोड़ा काम था मंडी में तो सोचा तुम लोगों से मिलता जाऊंगा. अमित और राधा भी घर hi होंगे न? मैं रस्ते से गरमा गरम कचोरी लेकर आया हूँ साथ में नाश्ता करते हैं. ‘ दिव्या क सर पर हाथ रखते हुए विजय ने अंदर आते हुए उसके हाथ में लिफाफा पकड़ाया जो गरम कचोरियों से भरा हुआ था .

‘ इसकी क्या ज़रूरत थी बहिया? मेरा हाथ का खाना ाचा नहीं लगता क्या आपको ‘ दिव्या ने थोड़ा मुँह बनाते हुए कहा. पर एक तरह से वो खुश भी हुई क चलो बना बनाया खाना आ गया वर्ण वो इतनी जल्दी नाश्ता कैसे बनती .

‘ अरे मेरी बहना तेरे हाथ का तो खाना मैं साडी उम्र खता रहूं फिर भी मन न भरे. मैं तो ये इस लिए लता हूँ क तुम सब आज बहार का भी खा लो थोड़ा. वैसे ये चंदू मॉल हलवाई की कचौरी है . बहुत नाम है उसका . और फिर बच्चों को भी ाचा लगेगा. ‘ विजय अभी हॉल में आया hi था क अमित अंदर क रूम से बाहर निकला और विजय क पाऊँ छूने लगा मगर विजय ने उसे गले से लगा लिया.

‘ बाबा आप यहाँ ? बिना बताये ? माँ कहाँ है ? ‘ अमित ने विजय को अकेला देख कर अपनी माँ क बारे में पूछ hi लिया .

‘ अरे भाई मैं मंडी क काम से आया हूँ. अब तेरी माँ को थोड़ा साथ लेकर घूमता वैसे भी अब उसको बहार आना जाना मन है. तुम सुनाओ कैसे हो? ‘ विजय अमित को अपने साथ लगाए सोफे पर बैठ गया और दिव्या किचन में चली गयी.

‘ मां जीई ‘ राधा भी आते hi विजय क गले लग गयी. विजय ने भी उसे दुलार किया.

‘ मेरी राजकुमारी कैसी है ? ठीक तो है न ? आज तो तुम बड़ी प्यारी लग रही हो ‘

‘ मैं बिलकुल ठीक हूँ . और अब आप को देख कर और भी अछि हो गयी हूँ. वैसे आज ये सरप्राइज एंट्री किस ख़ुशी में ? ‘ राधा ने ऑंखें बचते हुए विजय से सवाल किया .

‘ भैया मंडी क काम से ए हैं . और तुम भी ज़रा सीधी हो कर बैठो . देखो भैया सबके लिए कचोरियाँ लाये हैं ‘ दिव्या ने राधा को ठीक से बैठने को कहते हुए विजय क आने का कारन बता दिया .

‘ लो अमित इसे अपने पास रखलो. तुम सुबह जल्दी में थे तो तुम्हारी माँ को यद् नहीं रहा. ये तुम्हारे लिए दिवाली का उपहार और कॉलेज खरच क लिए ‘ खाना खाने क बाद जब अमित उतने लगा तो विजय ने उसके हाथ में पैसों की गद्दी थमा दी. 500-500 क नोटों की दो गड्डियां. अमित वो पैसे लेने से मन करने लगा .

‘ मां जी क्या मेरे लिए नहीं है दिवाली गिफ्ट ?’ राधा ने मज़ाक में विजय को देख कर सवाल किया और अमित भी उसकी तरफ देखने लगा.

‘ हाँ बेटी तू बोल तुझे कितने चाहिए , मैं अभी ला देता हूँ . ‘

‘ कोई बात नहीं मां जी मैं इसी से ले लुंगी , वैसे भी ये भी तो मेरे hi हैं ‘ राधा ने ये बात पैसों की जगह अमित को देखते हुए कही थी. विजय ने तो इस बात पर गौर न किया पर किचन से अति दिव्या ने इस बात को देखा था.

‘ तुझे पैसे क्यों चाहिए? भैया उसके लिए लाये हैं न ‘

‘ तो क्या हुआ ? इसका भी तो पूरा हक़ है . बीटा तुझे जितने चाहिए हो ले लेना. अपनी माँ की बात मत सुनो. इसे अपना टाइम भूल गया है ‘ विजय ने राधा के सर पर हाथ रख कर कहा तो राधा क चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी. अमित जो पैसे वापिस करने का कह रहा था अब उसे वो रखने hi पड़े. कॉलेज का टाइम हो गया था तो दोनों जल्दी से कॉलेज क लिए निकल गए .

‘ रीमा मुझे तुमसे कुछ कहना है ‘ अमित ने रीमा को अकेले में मिलन को कहा था तो इस वक़्त दोनों लाइब्रेरी में अकेले थे . अभी दूसरा hi लेक्चर था और दोनों अपनी अपनी क्लास बंक कर क यहाँ मौजूद थे. अमित कुछ कहना चाहता है ये तो रीमा पहले hi समझ चुकी थी पर अब उसकी आवाज़ में भरी पैन और आँखों में अलग hi दर्द सा था .

‘ मुझसे बात करने क लिए तुम्हे पूछने की ज़रूरत नहीं है. जो भी कहना है बिना डरे कहो , मैं तुम्हारी किसी बात का बुरा नहीं मानूंगी ‘ रीमा ने अमित का चेहरा दोनों हाथों में पकड़ कर आँखों में देखते हुए कहा.

‘ मैंने तुम्हारा विश्वास तोडा है रीमा, मुझे समझ नहीं आ रहा मैं कैसे कहूं ‘ ये कहते हुए अमित की नज़रें अपराध बोध से झुक गयी और वो ज़मीन में नज़रें गड़ाए जा रहा था.

‘ शीना दीदी की वजह से ऐसा कह रहे हो न ? मुझे सब पता है ‘ रीमा ने नार्मल लहजे में ये बात कही जैसे उसे कोई फरक hi न पड़ता हो उस बात से. मगर ये सुन कर अमित की ऑंखें की फटी फटी रह गयी. जो बात वो कहने की हिम्मत नहीं कर प् रहा था वो रीमा ने कितनी आसानी से कह दी. पर उसे पता कैसे चल ये बड़ा सवाल तह. अमित क रिएक्शन देख कर रीमा क चेहरे पर मुस्कान आ गयी.

‘ ऐसे क्या देख रहे हो ? यही सोच रहे हो न क मुझे कैसे पता ? दीदी ने खुद hi बता दिया था कल रत. ‘ रीमा क इस खुलासे से अमित थोड़ा शांत तो हुआ पर शीना ने कैसे ये सब बता दिया ये भी बड़ी हैरानी थी उसके लिए

‘ ी ऍम सोरर.....’ अमित की बात पूरी होने से पहले hi रीमा ने अपना हाथ उसके मुँह पर रख कर उसको रोक दिया.

‘ सॉरी किस बात की ?? तुमने तो कोई गलत काम नहीं किया न . दीदी ने मुझ सब बता दिया है और ये भी क तुमने उन्हें साफ़ मन कर दिया था मेरे बारे में बता कर ‘

‘ तुम्हे बुरा नहीं लगा मैंने जो किया ? ‘ अमित को अब भी यकीन नहीं था क रीमा को गुस्सा नहीं इस बात पर.

‘ दीदी ने मुझे सब कुछ बता दिया क वो तुम्हे कितना प्यार करती हैं. सच कहूं पहले मुझे बुरा लगा था क्यूंकि वो मेरी दीदी हैं पर उनका प्यार देख कर मैं समझ गयी क उन्होंने जो किया वो सच्चे दिल से किया. तुमने उनको हमारे बारे में सच बताया ये जान कर मुझे तुम पर और भी प्यार आ रहा है. तुमने उनका फायदा नहीं उठाया बल्कि उनके प्यार को सम्मान दिया. उन्होंने मुझसे माफ़ी भी मांगी इस बात क लिए और मेरे दिल में कोई गुस्सा नहीं उनके प्रति पर तुम से है ‘ रीमा ने थोड़ा मुँह बनाते हुए कहा. अमित तो साडी बात सुन कर अब अपने ऊपर गुस्से की बात सुन कर टेंशन में आ गया

‘ मुझ पर गुस्सा क्यों हो अगर तुम्हे सच पता चल hi गया है तो ?’

‘ गुस्सा नहीं करूँ तो क्या करूँ ? मैं कब से तुम्हे कह रही हूँ क मुझे एक बार वो हक़ देदो जो मैं चाहती हूँ पर तुम मुझे हर बार बहाना बना देते हो . और दीदी को मुझसे पहले hi वो दे दिया जिस पर मेरा हक़ था . ये कोई बात हुई , जाओ मैं नहीं बात करती तुमसे . तुम्हे पेरी परवाह है hi नहीं ‘ रीमा ने रूठते हुए ये बात कहो तो अमित क दिल को थोड़ी तसल्ली हुई पर अब रीमा रूत गयी थी और उसकी बात अपनी जगह सही भी थी

‘ मैं कहाँ कुछ कर रहा था यार वो तो शीना ने मुझे तुम्हारी कसम दे दी थी और ‘....’

‘ और तुम मन गए . मेरी कसम पर मन गए और मैं कब से कह रही हूँ पर वो नहीं मानते, मतलब मेरे नाम पर कोई कुछ भी करवा सकता है बस मेरी नहीं सुनोगे हुन्न्न ‘ रीमा ने अमित को नखरा दिखते हुए कहा.

‘ तुम तो मेरी जान हो , तुम्हारे लिए तो कुछ भी कर सकता हूँ’

‘ तो फिर चलो आज मुझे मेरा हक़ दे दो बाद में चाहे साडी दुनिया को परसाफ बाँट ते रहना.’

‘ तुम क्यों ज़िद कर रही हो पता भी है तुम्हे कितना दर्द होगा ? मैं तुम्हे दर्द नहीं देना चाहता’

‘ पता है कितना दर्द डोज , दीदी आज भी बिस्तर पर hi हैं. दीदी बता रही थी क तुम्हारा वो नार्मल नहीं है पर मुझे कुछ नहीं पता. जो भी जैसा भी है मेरा है और एक बार तो ये दर्द सबको सहना hi पड़ता है . मुझे मेरा हक़ चाहिए बस ‘ रीमा की इतनी क्लियर बात सुन कर अब अमित निरुत्तर हो चूका था.

‘ ाचा ठीक है जो तुम कहो मैं करूँगा. पर आज नहीं कल. अब तो मन जाओ ‘ अमित की ये बात सुन कर रीमा खुश हो गयी और पलट कर उसके होंठों पर अपने होंठ लगा कर किश करने लगी . अमित ने भी रीमा क होंठों को किश करना शुरू कर दिया. दोनों ने एक दूसरे क होंठों को भरपूर चूमा और फिर अलग हो गए. क्यूंकि लेक्चर की बेल्ल बज गयी थी. रीमा बहुत खुश थी क्यूंकि उसकी मुराद अब कल पूरी होने का फाइनल एलान हो गया था.

‘ कहाँ थे तुम ? तुम तो बोल कर गए थे क अभी आया और पूरा लेक्चर निकल दिया . ‘ कल्पना ने अमित से आते hi सवाल किया. कैंटीन में सब एक साथ बैठे थे सिवाए शीना क जो आज कॉलेज hi नहीं आयी थी.

‘ वो मैं ज़रा सर क पास गया था वहीँ टाइम लग गया’ अमित ने ज़रा संभल कर ये जवाब दिया जबकि उसकी इस हालत पर रीमा मंद मंद मुस्कुरा रही थी .

‘ तुझे क्यों हंसी आ रही है ? ‘ राधा ने रीमा से सवाल किया तो एक पल को वो भी सकपका गयी जिस पर अब अमित मुस्कुरा रहा था

‘ कुछ नहीं बस ऐसे hi . पर तुम क्यों गुस्सा कर रही हो? तुम्हे हंसी नहीं आ रही ? देखो तो कैसे भीगी बिल्ली बन रहा है कल्पना क सामने ‘ रीमा ने राधा को मेरी तरफ इशारा करते हुए कहा ‘

‘ बात तो सही है यार , इसे कल्पना hi ठीक कर सकती है . वैसे भी दोनों हैं तो एक hi लाइन क ‘ मीनल ने भी बात का मज़ा लेते हुए कहा .

‘ बिल्ली नहीं है शेर है , ये बस सबकी परवाह करता है . ‘ राधा ने भी तुनक कर जवाब दे दिया पर सबकी नज़र उसकी तरफ हो गयी उसका जवाब सुन कर.

‘ बिलकुल सही कहा , पर इस शेर को बिल्ली बना देती है लेडी ब्रूस ली . क्यों सही कहा न ? ‘ मीनल ने फिर से मज़ा लेते हुए कहा.

‘ अब ऐसी भी बात नहीं है , लड़कियों क सामने ये ऐसा hi है . ये तो इसकी क्वालिटी है वर्ण इसका जलवा तो कॉलेज ने पहले hi दिन देख लिया था’ ये बात शालू ने कही थी. पर मीनल कहाँ चुप रहने वाली थी

‘ लगता है दीदी आप ने कुछ ज्यादा hi जलवा देख लिया है जो और किसी ने नहीं देखा ‘ मीनल की इस बात पर शालू पानी पानी हो गयी पर खुद को संभालती हुई बोली .

‘ क्यों तुमने नहीं देखा नज़ारा ? तुम भी देख लो ‘ शालू ने अब मीनल को hi लपेट लिया था .

‘ न दीदी मेरे पास तो जलवा दिखने वाला है और मैं इसी का देखती हूँ . अमित का तो आप hi देखो ‘ मीनल बात को किस तरफ ले जा रही थी ये सब समझ रहे थे और हैरान भी हो रहे थे

‘ ोये तू अपना मुँह बंद रख और जा क देख जो भी देखना है तूने अपने मजनू का . पता नहीं क्या क्या बोले जा रही है. मेरा बेस्ट फ्रेंड है इस लिए मेरी इतनी इज़्ज़त करता है और कुछ न सोचो तुम .’ कल्पना ने मीनल को चुप करवाते हुए थोड़ा दन्त कर ये बात कही .

‘ वही तो मैं भी कहती हूँ क ये hi आपके लिए बेस्ट है ‘ मीनल ने फिर से तीर चला दिया था जो राधा को ाचा नहीं लगा और वो थोड़ा गुस्से से मीनल की तरफ देखने लगी जिसे उसने नहीं देखा .

‘ क्या यार तुम लोग क्या बातें बना रहे हो . रीमा यार शीना को क्या हुआ आज आयी क्यों नहीं वो ? ‘ शिवानी ने बात का रुख मोड़ते हुए रीमा से पूछा.

‘ वो दीदी की तबियत थोड़ा ठीक नहीं थी तो आज रेस्ट कर रही हैं . कल आ जाएँगी ‘ रीमा ने जवाब दिया .

‘ क्या हुआ शीना को ? कल तो अछि भली थी ‘ नेहा दीदी ने शीना की चिंता करते हुए सवाल पूछा . रीमा मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी जैसे मेरी पोल खोलनी हो .

‘ वो दीदी कल एक कण खजूरे ने उन्हें काट लिया था तो इस लिए आज वो रेस्ट कर रही हैं . कल आ जाएँगी ‘ रीमा ने मुझे देखते हुए hi ये बात कही. रीमा ने मुझे कण खजुरा कहा तो मैंने अपने दन्त पिस्टे हुए उसे देखा और वो और ज्यादा मुस्कुराने लगी.

‘ कहीं कुछ प्रॉब्लम तो नहीं हुई न ? ‘ शिवानी और शालू दोनों क चेहरे पर hi टेंशन साफ़ नज़र आ रही थी.

‘ नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं है , वो कल आ जाएँगी . बस आज थोड़ा फीवर लग रहा था तो रेस्ट करने क लिए छुट्टी मर ली ‘ सब शीना क लिए फिक्रमंद हो रहे थे. खैर उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ और लेक्चर क बाद हम अपनी क्लास में वापिस चले गए .

इधर दिव्या आज फिर से बेचैन थी और बेचैनी की वजह थी अमित. एक तरफ तो वो अब उसके पास न आने का खुद hi इरादा कर रही थी वहीँ उसे अमित की चुप्पी परेशां कर रही थी. वो लगातार दिव्या से कटरा रहा था . ये बात दिव्या क दिल को ठेस पहुंचा रही थी.

‘ वो क्यों मुझसे दूर होता जा रहा है ? क्यों वो अब मुझसे बात नहीं कर रहा? मुझे क्या ज़रूरत थी उस पर गुस्सा होने की ? देर से भी अत है तो अत तो मेरे पास hi है न. फिर क्यों मैं ऐसे hi गुस्सा कर लेती हूँ ? पर करूँ भी क्यों न , कहीं वो किसी गलत सांगत में पद गया तो ? इतनी सी बात भी नहीं समझता. मुझे उसे मानना होगा . उससे बात करनी होगी. जो भी बात है उससे पूछनी होगी क वो ऐसा क्यों कर रहा है ? पर कैसे मानों उसे? वो तो नज़रें उठता hi नहीं है और न hi खुद से कोई बात करता है . क्या करूँ ,,, क्या करूँ ??? हाँ जाने से पहल वो मेरे लिए सूट लाया था . वो तो तैयार भी हो चुके हैं. क्यों न आज मैं वो सूट पहनूं ?? वो मुझे उन कपड़ों में देखना चाहता था. आज देखेगा तो कितना खुश होगा . हाँ एहि करती हूँ ‘ खुद hi मन में सोच विचार करने क बाद दिव्या को जैसे रास्ता मिल गया था. वो ये सोच रही थी क वो अमित को मानाने क लिए ये सब कर रही है ताकि वो उससे दूर न जाये पर असल में उसका अंतर्मन उसे अमित को रिझाने को लालायित कर रहा था बिलकुल वैसे hi जैसे एक पत्नी अपने पति को और एक प्रेमिका अपने प्रेमी को रिझाती है . बस फिर क्या था दिव्या लग गयी अपने काम पर इसके साथ अब उसका दिल उससे और भी कुछ करवाने वाला था जिसका असर अमित पर गहरा हो .

‘ मैडम उस मैनेजर की पत्नी का सुराग मिला है , वो किसी नए no. से अपनी माँ से बात कर रही थी . हमने कॉल रिकॉर्ड की है ये वही है. जैसा आपने कहा था वैसा hi हुआ. मैनेजर ने तो अपने किसी रिश्तेदार से बात नहीं की पर उसकी बीवी ने की है. और no. की लोकेशन हमने ट्रेस कर ली है. ‘ ऋतू सिंह क ऑफिस में ये इंस्पेक्टर उसे मैनेजर क केस क बारे में इनफार्मेशन देने आया था. जिसके लिए ऋतू सिंह ने सख्त हिदायत दे राखी थी क इसकी इनफार्मेशन किसी को भी नहीं देनी.

‘ वैरी गुड , अभी क अभी अपनी 2 टीम्स ले जाओ. सब क सब सिविल में hi जाओ . No यूनिफार्म no इन्फॉर्म. वहां क किसी पुलिस वाले को भी खबर देने की ज़रूरत नहीं है. जा कर घर लगाओ और जैसे hi वो नज़र आये उठा कर ले आओ. अपने साथ हथियार ज़रूर रखना और चौकन्ने रहना . वहां कुछ और लोग भी मिल सकते हैं ‘ ऋतू सिंह को अंदेशा था क वहां मुठभेड़ भी हो सकती है और पुलिस को इन्फॉर्म करने से खबर लीक हो जाने का भी दर था जिसका रिस्क वो नहीं लेना चाहती थी . ऋतू सिंह का आर्डर मिलते hi इंस्पेक्टर निकल गया. ऋतू सिंह क चेहरे पर चमक आ गयी थी इस बात पर क अब वो उस मैनेजर को धार दबोचेगी और फिर साडी सचाई सामने आ hi जाएगी.

उधर रमा ने अमित की दिए हुए मेमोरी कार्ड से वो वीडियोस देखनी शुरू की तो वो सब नज़ारा देख कर उसकी अपनी छूट hi गीली होनी शुरू हो गयी. कितने hi दिनों से वो प्यासी जो थी. अमित का लैंड आँखों क सामने देख कर उसकी बेचैनी बढ़ने लगी थी. वो अपनी छूट को अपने हाथ से रगड़ hi रही थी क अचानक से कमरे में करिश्मा आ गयी और अपनी माँ की हालत देख कर वो हैरान हो गयी

‘ माँ ये आप क्या कर रही हैं ? और ये लैपटॉप पर क्या ....... ओह माय गॉड ये , ये सब क्या है ? ‘ करिश्मा की नज़र जैसे hi लैपटॉप पर पड़ी तो अमित को हेमा और सुषमा की वाइल्ड चुदाई करते देख उसकी ऑंखें बहार आ गयी. वैसे तो वो ये सब देख चुकी थी पर ये सब ऐसे रिकॉर्ड भी है उसे नहीं पता था. रमा की तो हालत hi ख़राब हो गयी थी क्यूंकि करिश्मा ने उसे अपनी छूट सहलाते हुए देख लिया था और ऊपर से अमित का लाइव शो.

‘ कक कुछ नहीं बेटी वो वो अमित ने तुम्हारी सास और ननद क खिलाफ जो सुबूत इकठा किये हैं वो देख रही थी.’ रमा ने खुद को सँभालते हुए सफाई दी और अपनी हालत ठीक की . रमा ने जल्दी से लैपटॉप की स्क्रीन डाउन कर दी

‘ आप इसका क्या करने वाली हैं? ‘

‘ कुछ नहीं , अगर वो लोग डाइवोर्स देने से मन करते हैं तो इसका इस्तेमाल करेंगे’

‘ माँ आप ये क्या करने जा रही हैं ? इससे तो उन दोनों क साथ अमित भी बदनाम हो जायेगा. अगर पापा को पता चल गया तो या फिर अमित की फॅमिली को , तो क्या होगा? सोचा भी है अपने? इसका इस्तेमाल अमित क खिलाफ भी हो सकता है . लाइए मुझे दीजिये , मैं उसके फेस ब्लर्र कर देती हूँ वर्ण बेचारा मेरी वजह से बदनाम हो जायेगा.’ करिश्मा की बात पर रमा को भी अपनी गलती का एहसास हुआ. पर उसे शर्म भी आ रही थी क करिश्मा अमित को ऐसी हालत में देखेगी .

‘ बेटी तू रहने दे किसी और से करवा लेंगे ये काम ‘

‘ किस्से ? जो भी देखेगा वो क्या सोचेगा अमित क बारे में? नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकती . इतना काम मैं खुद hi कर लुंगी . और हाँ दरवाज़ा लॉक कर क करा कीजिये जो करना हो . अगर कहें तो मैं अमित को बुला दूँ ? ‘ करिश्मा को लगा क उसकी माँ को शायद अमित की ज़रूरत है इस लिए उसने ये बात कह दी पर अगले hi पल उसे उसकी गलती का एहसास हुआ क वो क्या कह गयी क्यूंकि रमा की नज़रें झुक गयी थी . करिश्मा रमा को शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी .

‘ ी ऍम सॉरी माँ वो गलती से निकल गया. पर मैं ये कहना चाहती थी की अगर आप अमित को मिस कर रही हैं तो आप उसे बुला लीजिये . मैं अपने कमरे में hi रहूंगी तब तक ‘ करिश्मा ने अपनी माँ को गले लगते हुए ये कहा तो रमा को भी बुरा नहीं लगा. उसकी बेटी ने एक सहेली की तरह ये बात कही थी जो शायद उसकी ज़रूरत को समझ रही थी

‘ नहीं बीटा मैं वो बस देखते हुए खुद को रोक नहीं पई. तुम चिंता मत करो मैं ठीक हूँ’ दोनों माँ बेटी ने एक बार एक दूसरे को गले लगाया और फिर करिश्मा लैपटॉप लेकर अपने कमरे में चली गयी वो काम करने जो अभी उसने माँ को बताया था.



कॉलेज से अमित और राधा जैसे hi घर पहुंचे तो दिव्या का नया रूप देख कर अमित क साथ साथ राधा का भी मुँह खुला का खुला रह गया .
 
कल दूंगा अपडेट भाई और पिछले अपडेट की राइटिंग स्टाइल ठीक लगा या पहले जैसा hi रखूं इसके बारे में तो बताया नहीं किसी ने ?
 
अपडेट 200



राधा और अमित अपने सामने दिव्या को इस ा ूप में देख कर हैरान थे. राधा का मुँह तो खुला का खुला hi रह गया और ऐसा hi कुछ हाल अमित का था. होते भी क्यों न , हमेशा साडी में रहने वाली दिव्या आज सूट पहने हुए थी. छरहरी काया होने की वजह से उसका जिस्म लड़कियों की तरह hi तो था और ऊपर से उसका जानलेवा हुस्न . उम्र तो जैसे अभी भी जवानी क पड़ाव से आगे न गयी थी उसकी. गोरा रंग और ऊपर से तीखे नैन नक्श. शादी क बाद उसका जिस्म सिर्फ गदराया था मोटा नहीं हुआ था. और जहाँ पर ज़रूरत होती है बस वही हिस्से भरी हुई थे. कुल मिलकर काम की देवी थी दिव्या और आज इन कपड़ों में जैसे उसका अंग अंग अपनी सही बनावट दिखा रहा था . भले hi वो कपड़ों में थी पर उसे ऐसे लग रहा था जैसे वो बिना कपड़ों क कड़ी हो. क्यूंकि उसका जिस्म जो 7 गज की साड़ी में हमेशा छिपा रहता था वो अब उसे इस सूट में नंगा प्रतीत हो रहा था. सूट सिलने वाली ने भी क्या कास क सिलाई की थी क कहीं से भी ज़रा सा भी कपडा ढलक नहीं रहा था. दिव्या ने जब अमित की अब्खें अपने जिस्म पर ऊपर से निचे जाती हुई देखि तो उसका मन मनो अंदर से नाचने hi लगा था. ये निश्चित तौर पर उसके इस जानलेवा हुस्न की तारीफ hi तो थी जो एक नौजवान लड़का उसके इस मायाजाल में तस्कर उसके तराशे हुए यकृति जिस्म को ऐसे ताड़ रहा रहा था.

‘ माँ आप इन कपड़ों में ??? व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज!!! आप बहुत अछि लग रही हो माँ ‘ राधा इतना कह कर दिव्या क गले लग गयी चेहेक्ति हुई . दिव्या भी मुस्कुरा दी पर उसका ध्यान अभी भी रद्द पर न हो कर अमित पर hi था. जैसे वो अपनी तारीफ उसके मुँह से सुन्ना चाहती हो.

‘ ाचा लगा तुम्हे ? ‘ दिव्या ने ये सवाल अमित को देखते हुए पूछा था पर राधा को लगा क शायद उससे पीछा गया है.

‘ माँ सच में आप न कमल की लग रही हो इन कपड़ों में . कोई देखेगा तो यही कहेगा क आप मेरी माँ न बड़ी बहिन हो.’ राधा ने फिर से दिव्या को गले लगते हुए ये कहा.

‘ चल झूठी , कोई अँधा hi होगा जो ऐसा कहेगा . चल अब अंदर आओ मैं खाना लगती हूँ तुम दोनों क लिए.’ दिव्या अभी भी जैसे इंतज़ार में थी क अमित कुछ कहे इस लिए वो अमित की तरफ hi देख रही थी. और हर पल उसका दिल अमित की छुपी से जैसे विचलित सा होने लगा था .

‘ वैसे माँ ये सूट वही है न जो अमित ने लेकर दिया था ? ‘ राधा क इस सवाल पर अमित की नज़र जैसे पहचानने की कोशिश करने लगी क क्या ये वाकई वही सूट है.

‘ और कहाँ से आएगा सूट? तुझे पता है न मैं सूट नहीं पहनती और न hi मेरे पास कोई है. मगर लगता है अमित को पसंद नहीं आया . मैं अभी बदल लेती हूँ ‘ दिव्या की जुबान पर आखिर उसके दिल की बेबसी आ hi गयी. और वो ऐसी बात कह बैठी क अमित को अब बोलना hi पड़ेगा.

‘ नहीं मौसी आप बहुत अछि लग रही हैं इस सूट में. बिलकुल वैसे hi जैसे उस दिन मैंने आपको उस फोटो में देखा था ‘ अमित जल्दी से बोल पड़ा . दिव्या अमित क मुँह से अपनी तारीफ सुनते hi ऐसे खुश हुई जैसे वो इसी क इंतज़ार में थी. उसके गाल शर्म से लाल हो गए .

‘ बस एक hi कमी है , उस फोटो में आप ने बिंदी और लिपस्टिक नहीं लगाई हुई थी वर्ण आज भी आप वैसी hi हैं .’ ये बात राधा ने कही थी और अमित ने भी हाँ में सर हिलाकर सहमति दी. दिव्या को जैसे ये अपने में कमी सी लगी . पर वो कुछ न कहती हुई बस किचन में चली गयी .

‘ क्या ज़रूरत थी बिंदिआ लिपस्टिक लगाने की , किसके लिए लगाई है आखिर ? कैसे सर हिला रहा था इस बात पर . खुद नहीं कह सकता था? मैं भी क्या सोचने लगी , तारीफ hi तो की है उसने. मुझे क्या ज़रूरत थी इसे पहनने की ? वैसे बुरा भी तो नहीं लग रहा . राधा भी कह रही है अछि लग रही हूँ और अमित भी कैसे ...... हे भगवन . कैसे घूर कर देख रहा था . शर्म नहीं आती ऐसे देखते हुए , मैं कोई उसकी प्रेमी..... मौसी हूँ , सिर्फ मौसी. ये मैं क्या सोचने लग जाती हूँ. पता नहीं क्या होता जा रहा है मुझे . अभी पहले सूट चेंज करती हूँ . खाना बनाने क बाद भी तो कर सकती हूँ . चलो बाद में कर लेती हूँ. ‘ दिव्या अपने मन में यही सब सोचती खाना बनाने लगी. अमित और राधा भी फ्रेश हुए और खाना खाने वापिस आ गए. अमित तो अभी भी दिव्या को लेकर मन hi मन उधेड़बुन में फसा था. जहाँ उसे पहले दर था दिव्या का अब उसका वो दर तो निकल गया था पर आज दिव्या का ये न्य रूप देख कर वो सोच में था. दिव्या सचमुच आज राधा की तरह hi लग रही थी. फरक था तो बस उनके सुहागन क वेश का. यानि उनका वो सिंगार जो वैसे तो नाम मात्रा था पर उसे वो एक शादीशुदा औरत बनता था.

खाने क टेबल पर अमित अपनी hi सोच में डूबा था क दिव्या खाने की थाली ले आयी. अमित की नज़र जैसे hi दिव्या पर पड़ी तो मनो एक बार फिर से उसे झटका लगा. किचन में काम करते हुए दिव्या ने दुपट्टा उतर दिया था और पसीना आने से उसका सूट कुछ गीला हो गया था और उसके बदन से पूरी तरह चिपक गया था. सूट क अंदर पहनी काली ब्रा भी अपना रंग दिखा रही थी. अमित की नज़र न चाहते हुए भी वहां अटक गयी. दिव्या थाली रख कर जब पीछे हटने लगी तो उसने अमित की नज़रों को पकड़ लिया . और उसकी नज़र का केन्डर अपने स्तनों को पाकर उसके अंदर सिहरन सी दौड़ गयी. दिव्या जल्दी से वापिस पलट गयी और तेज़ी से किचन में भाग गयी पर तब तक एक और धमाका अमित क दिल पर सॉरी लैंड पर हो गया था. वो था दिव्या क भीगे सूट में लिपटी पतली कमर और बाहर को निकली हुई गोलाकार गांड .

वहीँ दिव्या तेज़ कदमो से लगभग भगति हुई किचन में तो चली आयी पर उसकी धड़कने जैसे अभी भी भाग रही थी. अमित की नज़र जैसे उसे अभी भी अपनी छाती पर लगी महसूस हो रही थी और फिर से उसे अमित क हाथों का स्पर्श अपनी छाती पर महसूस होने लगा जो अभी कल रत hi उसे मिला था. दिव्या फिर से अपने दिल क हाथों मजबूर होने लगी. उसका दिमाग फिर से कमज़ोर पड़ने लगा. अगली बार रोटी देने जाते समय उसने दुपट्टा लेने की ज़ेहमत न की बल्कि अपनी कमीज को आगे से थोड़ा नीचे खिंच कर रोटी रखते समय और ज्यादा झुक कर अमित को अपने सारणी का नज़ारा दिखाने की कोशिश की. अमित की नज़र कमीज में से झांकते काली ब्रा में कैद सफ़ेद कबूतरों पर पड़ी तो खान कहते कहते उसे ठसका सा लगा

अमित : ाखुन ाखुन ाखुन .... ाखुन ाखुन ाखुन

दिव्या : क्या हुआ बीटा ? खाना अटक गया क्या ? लो पानी पियो.

दिव्या ने जल्दी से अमित को पानी दिया और वो पिने लगा . उसे कुछ आराम मिला पर उसकी इस हालत पर दिव्या अंदर hi अंदर खुश थी क्यूंकि वो जानती थी क अमित को क्या हुआ है. एक विजय मुस्कान उसके चेहरे पर थी.

दिव्या : ध्यान कहाँ था तुम्हारा? चलो आराम से खाना खाओ. खाना कहते समय इधर उधर मत देखा करो.

दिव्या ने इतना कहा और मुस्कुराते हुए अमित का सर सहलाते हुए वापिस किचन में चली गयी पर इस बार कमर कुछ ज्यादा hi लचक रही थी. दिव्या का मन अमित की हालत पर ऐसे नाच रहा था जैसे उसने कोई मैदान मर लिया हो. उसका दिमाग तो जैसे काम करना hi बंद कर चूका था. खाना खिलने क बहाने दिव्या ने आज कुछ ज्यादा hi चक्कर लगा दिए और हर बार अमित को जैसे क्लीन बोल्ड करने वाली बॉल hi फेंक रही थी मतलब अपनी बॉल्स दिखा रही थी. खाना ख़तम होते hi अमित ऐसे उठ कर रूम की तरफ भगा मनो जैसे कब से पेशाब लगी हो और रोक के बैठा हो . खाने क बाद रेस्ट करना सबकी रूटीन थी तो राधा भी अपने कमरे में थी मगर दिव्या का मन तो जैसे आज अभी अभी मिली जीत से इतना उत्साहित हो गया था क और आगे बढ़ना चाहता था. राधा क कमरे में जाते hi दिव्या अमित क कमरे में चली गयी जहाँ अमित बीएड पर बैठा कुछ सोच रहा था.

‘ क्या सोच रहे हो ? सब ठीक तो है न ? ‘ दिव्या ने अमित को सोच में डूबा देख सवाल किया तो अमित भी जैसे हड़बड़ा सा गया.

‘ हह हाँ मौसी मैं ठीक हूँ, आइये बैठिये ‘ अमित ने दिव्या को बैठने को कहा तो दिव्या भी वक़्त जाया किये बिना चप्पल उतर कर बीएड पर hi चढ़ कर अमित क साथ वैसे hi बैठ गयी जिसे वो बैठा था. बीएड से तक लगाए. अमित थोड़ा असहज होने लगा था जिसकी वजह दिव्या नहीं बल्कि उसका बदला हुआ रूप था जो अमित को उत्तेजित कर रहा था.

‘ तो बताओ क्या बात है? क्या सोच रहे थे ? ‘ दिव्या ने बात सवाल से hi शुरू की और खुद अमित क साथ सात कर बैठ गयी. कंधे से कंधे को मिलकर.

‘ क कुछ नहीं मौसी , कोई बात नहीं है ‘

‘ ऐसे कैसे बात नहीं है? कोई तो बात है जो तुम नहीं बता रहे. ाचा ये बताओ मैं कैसी लग रही हूँ? तुम्हे पता है न ये मैंने सिर्फ तुम्हारे लिए पहना है ताकि तुम्हे ाचा लगे. तुम्ही ने तो लेकर दिया था न ‘ दिव्या ने अपनी छाती को अकड़ कर ऊपर उठाते हुए जान बुझ कर अपना सूट दिखते हुए कहा. अमित की नज़र एक बार फिर से उन रसीले ामो पर चली गयी जहाँ वो नहीं देखना चाहता था .

‘ हह हाँ मौसी आप पर ये सूट बहुत जाँच रहा है ‘

‘ बस ? मतलब सिर्फ सूट hi ाचा लगा तुम्हे मैं नहीं ? ‘ दिव्या ने थोड़ा नाराज़गी जताते हुए ये कहा तो अमित जल्दी से बोल पड़ा

‘ मम मेरा मतलब था क आप इसमें बहुत अछि दिख रही हैं. कोई आपको देख कर ये कह hi नहीं सकता की आप राधा की माँ हैं . देखने वाला तो एहि समझेगा आप उसकी बहिन हो ‘ अमित ने जल्दी से ये सब एक सांस में कह दिया जिससे दिव्या को अंदर hi अंदर ख़ुशी हुई पर उसने ज़ाहिर नहीं किया .

‘ ये तो राधा ने भी खा था तुम उसकी hi बात रिपीट कर रहे हो . अगर सच में मैं अछि दिख रही हूँ तो कुछ अपनी तरफ से भी कहो न ‘ दिव्या ने जान बुझ कर अमित को छेड़ते हुए कह ताकि वो कुछ और खुल कर कहे , कुछ ऐसा जो वो उसके मुँह से सुन्ना चाहती थी .

‘ आप सच में बहुत खूबसूरत लग रही हैं. कोई भी आपको देख आपकी उम्र का अंदाज़ा नहीं लगा सकता. आप सदी में तो अछि दिखती hi हैं पर सूट में तो और भी अछि दिख रही हैं. आज से आप सूट hi पहना करो ‘ अमित ने दिव्या की तारीफ में ये सब बिना कुछ सोचे कहा था पर दिव्या पर तो कुछ और hi असर कर गयी ये बातें. उसे ऐसे लगा जैसे अमित कह रहा हो क तुम आज से सिर्फ सूट hi पहनना , मैं तुम्हे सूट में देखना चाहता हूँ

‘ इतनी अछि लग रही हूँ क्या मैं ? वैसे ऐसा क्या ाचा लगा तुम्हे मेरे सूट पहनने में ? ‘ दिव्या ने फिर से अपनी छाती को उभरते हुए कहा और अपना दुपट्टा भी थोड़ा नीचे सरका दिया. अमित की नज़र न चाहते हुए भी वहां चली गयी. जिसे देख कर दिव्या क होंठों पर मुस्कान आ गयी .

‘ वो आप न इसमें बहुत अछि लगती हो. साडी में तो आप थोड़ा भरी दिखती हैं मातुरे दिखती हैं पर इसमें बिलकुल जैसे कॉलेज स्टूडेंट जैसी. ‘

दिव्या का मन मयूर नाच उठा इस बात को सुनते hi .

‘ तुझे सच में ऐसी लगी मैं? अब से मैं ऐसे hi सूट पहना करुँगी. तुझे जैसे ाचा लगे मुझे बता दिया कर. और ऐसे न चुप न रहा कर मुझसे बात किया कर . तू चुप रहता है तो मुझे ाचा नहीं लगता . ‘ ये कहते कहते दिव्या ने अमित को अपनी बाँहों में भर लिया और अमित का सर अपनी छाती से लगा लिया. अमित का सर स्तनों पर लगते hi उसे ऐसे लगा जैसे कपड़ों क बिना hi अमित उसके कोमल स्तनों से जा लगा हो और एक सिसकी उसके मुँह से रुकते रुकते निकल गयी .

‘ कक्कक्स ‘

‘ क्या हुआ मौसी ? ‘ अमित ने दिव्या की छाती से सर हटाने की कोशिश की ये पूछते हुए पर दिव्या ने उसे सर हटाने न दिया .

‘ कुछ नहीं तू बस ऐसे hi मेरे गले लगा रह . मुझे कितना ाचा लग रहा है तुम्हे नहीं पता . क्यों मुझसे दूर दूर रहता है तू? अपनी इस मौसी की परवाह नहीं है न तुझे ? ‘

‘ ऐसा क्यों कह रही हो मौसी ? आप तो मेरी माँ हो . आप में hi तो मैं माँ को देखता हूँ. आपसे दूर मैं भला कैसे रह सकता हूँ. ‘ अमित क दिल की बात ज़ुबान से निकली थी जिसने दिव्या क सोये हुए दिमाग को जगा दिया और उसका दिल जो उफान पर था एक डैम से बैठ गया और उसकी पकड़ कमज़ोर पद गयी .

‘ हाँ मैं तुम्हारी माँ हूँ , माँ हूँ तुम्हारी और तू मेरा बीटा है . ‘ ऐसा कहते हुए दिव्या का मन भर आया और ऑंखें भी. वो सब बातें एक बार में hi हवा हो गयी जो उसे अमित की तरफ खिंच रही थी . काम क ज्वर क ऊपर ममता भरी पद गयी और दिव्या एक माँ की तरह अमित को गले लगाए कुछ देर अपना मन हल्का करती रही और फिर उठ कर वापिस अपन कमरे में चली गयी .

स्टेडियम में आज नीरज भैया क साथ कुछ ज्यादा hi देर एक्सरसाइज कर ली थी मैंने . और फिर वहां से मंजू म क घर चला गया. कपड़ों से पसीने की स्मेल आने लगी थी इस लिए आते hi मम ने मुझे नहाने को कह दिया . मैं नाहा क बाथरूम से टॉवल लपेट कर बहार निकला तो मंजू म मुझे देख कर शर्माने लगी. मंजू म इस वक़्त बहुत hi प्यारी लग रही थी , मुझे उन पर बड़ा प्यार आया और मैंने आगे बढ़ कर उनका हाथ पकड़ कर झटका देते हुए अपनी बाँहों में खींच लिया

मंजू :मचलते हुए) क्या कर रहे हो , छोडो कोई आ जायेगा.

अमित : ुनहुन्न , आज मैं बहुत थक गया हूँ. सोच रहा हूँ थोड़ी सी थकावट उतर hi लूँ

मैंने मम को बाँहों में कस्ते हुए अपने हाथ उनकी कमर और चूतड़ों पर रगड़ने शुरू कर दिए .

मंजू : शरमाते हुए ) छोडो न , देखो शीना आती होगी और ऋतू भी आ सकती है.

अमित : शीना तो आज नहीं आने वाली रही बात ऋतू की तो उससे कैसा पर्दा . वैसे भी वो मेरी एक लौटी साली जो है. उम्मम्ममाआहहह

मैंने मंजू म क सुर्ख लबों को अपने होंठों में जकड लिया और उनका रास चुराने लगा.

मंजू : उम्मम्मम्माआहहह , गंदे ,, शर्म नहीं आती ? बड़े आये साली वाले . वो तो पहले hi तुम्हे खा जाने वाली नज़रों से देखती है. किसी दिन खा hi जाएगी. और तुम्हे कैसे पता शीना आज नहीं आएगी?

अमित : वो आज कॉलेज नहीं आयी थी न तो रीमा ने बताया क वो आज रेस्ट कर रही है.

मंजू : घबराते हुए ) क्या हुआ शीना को ? वो ठीक तो है न?

अमित : कुछ नहीं हुआ उसे , बस थोड़ा सा बुखार था तो इस लिए रेस्ट कर रही है.

मंजू : रुको मुझे उससे बात करनी है .

इतना कह कर मंजू म मेरी बाँहों से निकली और शीना को फ़ोन लगाने लगी.

‘ अचे भले मूड का कबाड़ा कर दिया . क्या ज़रूरत थी शीना क बारे में बोलने की ?’ मैं मन में खुद को hi कोसने लगा क्यूंकि मंजू म धीरे धीरे मूड में आने लगे थे. मंजू म शीना को फ़ोन लगा कर बात कर रही थी. उनकी पीठ मेरी तरफ थी. उनकी जान लेवा गांड देख कर मेरा मन फिर से कण्ट्रोल से बहार होने लगा. मैंने आगे बढ़ कर मम की गांड से अपना लैंड लगाया और दोनों हाथ आगे ले जा कर उनके बूब्स पकड़ लिए.

‘ आअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स ‘

शीना : .......

मंजू : कुछ नहीं वो मचार ने काट लिया था .

शीना को जवाब देते हुए मंजू म ने मुँह घुमा कर मुझे देखा और नखरा दिखती हुई मेरे हाथ पर चपत मरी जो उनके बूब्स पर था. मैंने भी उन्हें और तंग करते हुए एक हाथ नीचे ले जाकर उनकी छूट पर रख दिया. कपड़ों क ऊपर से hi मेरा हाथ वहां लगते hi मंजू म दोहरी होती हुई आगे को झुक गयी और फिर से सिस्का पड़ी पर इस बार मेरे लैंड पर उनकी गांड ज़ोर से डाब गयी.

‘ कक्कक्स मायआ’

शीना : .........

मंजू : कुछ नहीं मैं आअह्ह्ह्ह ठीक हूँ वो पाऊँ को ठोकर लग गयी.

मंजू म आगे को झुकी हुई थी और एक हाथ से पास पड़े टेबल का सहर लिया हुआ था जबकि मैं उनके पीछे गांड में लैंड रगड़ता एक हाथ से छूट और एक हाथ से गांड दबा रहा था . मंजू म से अपनी सिसकियाँ कण्ट्रोल नहीं हो रही थी.

शीना : ...........

मंजू : हाँ ममम मैं ठीक हूँ तुम अपना ख्याल रखना मैं बाद में बात करती हूँ.

इतना कह कर जल्दी जल्दी मंजू म ने फ़ोन बंद कर दिया और उठा कर सीधी होते हुए पलट गयी और मुझे थोड़ा गुस्से से देखने लगी. उनका चेहरा लाल हो रहा था

मंजू : कुछ ज्यादा hi गर्मी चढ़ी है न तुम्हे , अभी बताती हूँ.

इतना कह कर मंजू म मेरे ऊपर झपट पड़ी और मुझे किश करती हुई मुझे पीछे को धकेलने लगी. मेरे पाऊँ बीएड से टकराये और मैं बीएड पर गिरता चला गया. मंजू म भी मेरे ऊपर hi गिर पड़ी और फिर उन्होंने एक झटके से उठते हुए मेरा टॉवल भी खोल दिया. मेरा लैंड स्प्रिंग की तरह उछलता हुआ बहार आ गया.

मंजू : लैंड को देखते हुए ) ये हमेशा ऐसे hi रहता है क्या ? अभी इसे ठीक करती हूँ.

इतना कह कर मम ने अपनी सदी पेटीकोट कमर तक उठाया और पेंटी उतर कर बीएड पर घुटनो क बल मेरी कमर क ऊपर आते हुए मेरा लैंड हाथ से पकड़ कर अपनी छूट पर सेट किया . तभी बहार से बेल्ल बजने लगी .

मंजू : फ़्रस्ट्राटे) इस समय अब कौन आ गया ? बोलै था न मत करो . अब जल्दी कपडे पहनो.

मंजू म अब मूड में आयी थी और एक डैम से. ने आकर सरे मूड का सत्यानाश कर दिया. मुझे भी बहुत गुस्सा आ रहा था. मैंने जल्दी से अपने कपडे पहने और हॉल में आ गया. सामने मंजू क साथ रीना बैठी हुई बातें कर रही थी मुझे देखते hi वो खुश हो गयी और उठ कर मुझ से हाथ मिलाया.

रीना : कैसे हो ? तुम तो अपने आप न मिलते हो न फ़ोन करते हो. मैंने सोचा खुद hi तुमसे मिल लेती हूँ वर्ण पता नहीं तुम मिला या न मिलो.

अमित : अरे ऐसा क्यों कह रही हैं आप ? आप एक फ़ोन कर देती तो मैं आ जाता.

मेरे आते hi मंजू म किचन में चली गयी थी. अब हम दोनों सोफे पर बैठ कर बातें कर रहे थे.

रीना : मैंने सोचा तुम्हे डिस्टर्ब क्यों करना इस लिए यहीं आ गयी . इस वक़्त तुम यहीं मिलोगे पता था मुझे. वैसे मैं इस लिए भी आयी हूँ क मेरा जाने का इंतज़ाम हो गया है. नेक्स्ट वीक में शायद मेरी फ्लाइट हो जाये. तो जाने से पहले सोचा कुछ वक़्त अगर तुम मेरे साथ रह सको तो ???

अमित : मैं ?? मतलब मैं क्या करूँगा ?

रीना : मेरा सर ,, तुम्हे पता है न तुम अकेले hi मेरे दोस्त हो और तुम्हारे कहने से hi मैं बहार जा रही हूँ. अब क्या जाने की तयारी नहीं करवाओगे मेरे साथ?

अमित : तो आप शॉपिंग क लिए कह रही हैं. पर उसके लिए तो रीमा और शीना हैं न

रीना : मुँह बनाते हुए ) उनके साथ मैं अलग से कर लुंगी पर मैं तुम्हारे साथ भी करना चाहती हूँ. अगर तुम्हे नहीं आना तो ठीक है .

रीना ने उदास चेहरा बना लिया तो मैंने सोचा मेरे कहने से वो जाने क लिए मन गयी है तो मुझे भी उसकी बात माननी चाहिए .

अमित : ाचा ठीक है , कब चलना है ?

रीना : खुश होते हुए) अभी , चलो चलें.

मंजू : कहाँ जाने की तयारी हो रही है ?

मंजू म अंदर से कफ क कप्स ट्रे में लेकर आती हुई सवाल करने लगी .

रीना : बुआ मैं अमित को अपने साथ लेकर जा रही हूँ . मुझे कुछ काम है और शॉपिंग भी करनी है इसके साथ. फिर तो मैं इंग्लैंड चली जाउंगी .

मंजू म क चेहरे पर रीना की बात सुन कर थोड़ी उदासी आयी पर उन्होंने छुपा की और मेरी तरफ देखा. मैं समझ गया क वो क्या कहना चाहती हैं

मंजू : पर इसे तो अभी पड़ना है कुछ दिनों में इसके एग्जाम हैं

रीना : बुआ बस आज की hi तो बात है . प्लीज

मंजू : ाचा ठीक है ले जाना पर अभी कॉफ़ी तो पि लो.

मंजू म का भी मेरे जैसा हल था. दोनों गरम तो हो गए थे पर अब कुछ किया नहीं जा सकता था. बातें करते हुए जैसे hi हमारी कॉफ़ी ख़तम हुई तो रीना मुझे अपने साथ ले गयी शॉपिंग क लिए.

उधर करिश्मा अपने रूम में लैपटॉप ले कर बैठी थी वीडियोस को एडिट करने क लिए पर उन सब वीडियोस में जो धमाकेदार चुदाई थी उसे देख कर वो खुद गरम होने लगी थी. सब से खास था अमित का वो मुसल जो उसने कभी रियल में ऐसा आज तक नहीं देखा था. वैसे तो उसने अपनी सास और ननद क साथ अमित की रासलीला लाइव भी देखि थी पर दूर से लैंड क इतने अचे से दर्शन नहीं हुए थे जितने अब हो रहे थे. कब उसकी अपनी छूट गरम हो कर पानी बहाने लगी उसे खुद भी न पता चला. जैसे तैसे कर क उसने वीडियो एडिट की और फिर अपनी माँ को वो कार्ड वापिस देने से पहले वो साडी वीडियोस अपने पास कॉपी कर क रख ली. उसे खुद नहीं पता था क वो ये सब क्यों कर रही है. पर उसने वो सब ओने पास रख लिया शायद इस लिए क अभी दिन का समय था और वो ये सब अचे से नहीं देख सकती थी.

‘ इसकी तो माँ की ,,,,,,, साली हाथ धो कर पीछे hi पद गयी है. इसका कुछ करना पड़ेगा . अगर वो मैनेजर उसके पास पहुँच गया तो मैं तो गया . कुछ भी करो वो साला ज़िंदा नहीं पहुंचना चाहिए उसके पास वर्ण हम सब गए समझो और तुम भी भूल जाना फिर मंत्री बनने का सपना. ‘ बलजीत राइ गुस्से से आग बबूला हो रहा था जब उसे पता चला क पुलिस क लोग उसके आदमियों को मर कर उस मैनेजर को उठा कर ले गए हैं. उसके साथ इस वक़्त मला N.D. भी था.

N.D. : मैंने पहले hi कहा था साली को ख़तम करवा देते हैं पर तू hi नहीं मन रहा था. अब देख मैं क्या करता हूँ. वो वहां ज़िंदा नहीं पहुंचेगा.

तभी N.D. ने फ़ोन उठा कर अपने किसी आदमी को फ़ोन किया और उसे कुछ निर्देश दिए .

N.D. : इसका तो हो जायेगा पर अब उसका क्या करना है ? मैं तो कहता हूँ उसकी भी गेम बजा देते हैं . वर्ण फिर साली टांग अदाएगी.

बलजीत राइ : इसका भी अब कुछ करना hi पड़ेगा . मैंने सीधे तरीके से कोशिश की थी पर साली ने अपना इंतज़ाम कर रखा है . अब तेरे तरीके से hi काम करना पड़ेगा.

N.D. : कमीनी हंसी हस्ते हुए ) जो भी है साली माल एक no. है . साली को पुलिस की वर्दी में hi रगड़ने का अपना hi मज़ा आएगा. आज तक मैंने कोई पुलिस वाली नहीं रागादि और फिर ये तो आइटम hi ज़बरदस्त है.

बलजीत राइ : अबे लोदी हर जगह लैंड से मत सोचा कर . वो कितनी बड़ी अफसर है पता है न. मज़े लेने की मत सोच बस उसका काम तमाम कर.

N.D. : काम तो उसका हुआ hi समझ. पर मैं एक बार उसके मज़े ज़रूर लूंगा और साली को अपने सब आदमियों से रंडी की तरह छुडवाउंगा फिर मुझे शांति आएगी.



दोनों टेंशन में भी अब ऐसे हसने लगे थे जैसे जो वो सोच रहे थे वो हो hi गया हो .
 
आज नहीं लिखा कुछ भी कल कोशिश रहेगी
 
भाई माफ़ी चाहता हूँ ज्यादा नहीं लिख पाया कल कोशिश करूँगा कम्पलीट करने की
 
अपडेट 201



‘ देख क्या रहे हो चलो मेरी हेल्प करो. बताओ कौन सा कलर ाचा रहेगा ? ‘ रीना मुझे अपने साथ एक मॉल में ले आयी थी जहाँ वो मुझे अपने लिए ड्रेस चोसे करने क लिए पूछ रही थी. विदेश में जाना था तो उस हिसाब से hi वीरेंद्र ड्रेस देख रही थी.

अमित : आप तो कोई भी कलर पहनो आप पर सब जंचता है. भगवन ने आपको इतना खूबसूरत बनाया है क हर रंग में आप अछि लगती हो.

रीना : मुस्कुराते हुए ) ज्यादा बातें मत बनाओ , चलो बताओ कौन सा कलर लूँ.

मुझे कोई इतना ज्यादा पता तो था नहीं पर फिर भी मैंने अपनी पसंद क तीन चार कलर क ड्रेस निकल दिए. रीना तो बस मुझे hi देख रही थी.

अमित : मेरे ख्याल से आप इन्हे तरय करो. आप पर अचे लगेंगे .

रीना : तुम्हारी पसंद क हैं अचे तो लगेंगे hi.

रीना ने वो सरे ड्रेस ऐसे hi पकड़ लिए और काउंटर की तरफ चल पड़ी.

अमित : काम से काम तरय तो के लीजिये. और ये क्या बात हुई क मैंने सेलेक्ट किये तो ले लिए काम से काम आज को भी तो पसंद आने चाहिए .

रीना : तुम न जो भी पसंद करते हो वो सब मुझे पसंद है . ी मैं हूँ दोनों की पसंद काफी मिलती है . अपने साइज क hi तो लिए हैं फिर भी तुम कहते हो तो एक बार पेहेन कर दिखा hi देती हूँ. चलो मेरे साथ .

रीना मुझे अपने साथ हाथ पकड़ कर खींचती हुई ट्रायल रूम की तरफ ले गयी. मैंने मन भी किया पर वो कहाँ मैंने वाली थी. खैर मुझे साडी ड्रेसेस पकड़ा कर वो एक को लेकर अंडे घुस गयी और चेंज कर क मेरे सामने आ गयी. रीना ने पहले एक सूट पहना हुआ था पर अब वो जीन और टॉप पहने मेरे सामने कड़ी थी. टॉप की फिटिंग स्किन टाइट थी जिसमे से उसके उभर अपनी पूरी गोलाई बता रहे थे. मेरा तो गाला hi खुश्क होने लगा और नज़र एक पल को वहीँ जैम सी गयी. एक तो रीना का गोरा रंग गुलाबी आभा बिखेरता था ऊपर से ऐसे कपडे पेहेन कर वो मुझ पर केहर ध रही थी.

अमित की नज़रों को अपनी छाती पर महसूस कर एक बार तो रीना शर्मा गयी पर उसके अंदर इस बात की ख़ुशी भी हो रही थी क अमित उसे ऐसे देख रहा है. वो यही तो चाहती थी क अमित उसे प्यार से देखे एक प्रेमी की तरह. कुछ पल रीना ने ऐसे hi रुक कर अमित की हालत को देखा और फिर खांस कर उसे होश में लायी

रीना : ाखुन ाखुन , कैसी लग रही हूँ ?

अमित : नज़रें चुराते हुए ) बब बहुत अछि .

रीना : मज़ा लेते हुए ) इधर देख कर बताओ न , वहां क्या देख रहे हो ?

मैंने फिर से रीना की तरफ देखा तो उसके मुस्कुराते हुए चेहरे पर मेरी नज़रें जैम गयी . हलके गुलाबी गाल और ग्रे आँखों में ख़ुशी की झलक. एक मासूमियत और कुदरती सुंदरता जो काम hi नज़र अति है दुनिया में. सच में रीमा रीना दोनों बहने में एक जैसी समानताएं थी और दोनों को ये सब मिला था अपनी माँ से.

रीना : ऐसे क्या देख रहे हो ? बताओ कैसी लग रही हूँ ?

अमित : बहुत hi खूबसूरत

मैं रीना को देखते हुए जैसे खो सा गया था और ये शब्द अपने आप hi उसकी सुंदरता की तारीफ में निकल गए. पर रीना के चेहरे पर लाली और बाद गयी और उसने नज़रें झुका ली. उसके ऐसे शरमाते hi मुझे थोड़ा होश आया.

अमित : आप पर ये कोड़े बहुत जाँच रहे हैं. लगता है वहां आप को वहां संभल कर रहना पड़ेगा .

रीना : छींकते हुए ) क्यों ?

अमित : अब आप इतनी सुन्दर लगेंगी तो लोग तो पीछे आएंगे hi न

रीना : तो तुम भी चलो न मेरे साथ . तुम्हारे साथ मुझे किसी का दर नहीं .

अमित : मैं भला कैसे जा सकता हूँ ? वैसे भी हो सकता है आपको वहां कोई सपनो का राजकुमार मिल जाये .

रीना : मुझे कोई विदेशी नहीं चाहिए आयी बात समझ में. मुझे तो अपने hi देस की मिटटी का शेर चाहिए जिसमे से गाओं की खुशबु आती हो.

ये बात रीना ने मेरी आँखों में देखते हुए कही.

अमित : कमल है , एक पड़ी लिखी डॉ होने क बाद भी आपको गाओं देहात का लड़का चाहिए ?

रीना : क्यों ? गाओं देहात वाले क्या किसी से कम हैं ? मैं तो कहती हूँ क गाओं वाले लड़कों का दिल ज्यादा ाचा होता है शहर में तो सब मतलबी hi मिलते हैं .

अमित : ाचा ! लोग तो हर जगह एक जिसे hi होते हैं क्या गाओ क्या शहर. वैसे आप इतने यकीन से कैसे कह सकती हैं क गाओं वाले लड़के ज्यादा अचे होते हैं ?

रीना : पर्सनल एक्सपीरियंस है .

अमित : ाचा ? तो कितने गाओं क लड़कों को जानती हैं आप ?

रीना : काम से काम एक को तो जानती हूँ. और उससे बेहतर मैंने न कभी कोई देखा है न hi कोई दिखेगा.

अमित : कौन है वो मुझे भी बताइये , वैसे आपने ये क्यों कहा क उससे बेहतर कोई नहीं मिलेगा?

रीना : मेरी आँखों में देखते हुए ) क्यूंकि मेरी नज़र में वो एक परफेक्ट पार्टनर है. और वक़्त आने पर सबसे पहले तुम्हे hi बताउंगी .

उसके बाद रीना ने फिर से चेंज किया और अपना पहले वाला सूट पेहेन लिया. फिर वो मुझे अपने साथ दूसरे स्टोर में ले आयी . यहाँ गेट्स क लिए कपडे थे . यहाँ से उसने मेरे लिए एक जैकेट ली . मैं मन करता रहा फिर भी उसने मेरे लिए वो ले ली और पेहेन कर दिखने को कहा. मैंने वहीँ उसके सामने वो पेहेन ली.

रीना : बहुत जाँच रही है तुम पर , इसे hi पेहेन कर आना जब मुझे छोड़ने आओगे .

अमित : इसकी क्या ज़रूरत थी वैसे ? आप ऐसे hi पैसे ख़राब कर रही हैं.

रीना : चुप , तुम्हारे साथ कुछ ख़राब नहीं होता मेरा और ये मैं दिल से देना चाहती थी. बहुत हैंडसम लग रहे हो.

जैकेट लेने क बाद वो मेरे लिए और भी कुछ लेना चाहती थी पर मैंने मन कर दिया. फिर उसके बाद वो मुझे साथ लिए एक होटल में आ गयी .

अमित : अब यहाँ क्या करना है ?

रीना : मैंने कहा न क आज मैं तुम्हारे साथ वक़्त बिताना चाहती हूँ इसके बाद टाइम नहीं मिलेगा और फिर मुझे बहार चले जाना है . अब चुप चाप मेरी बात मनो . आज हम साथ में डिनर करेंगे.

रीना की बात सुन क मुझे दिव्या मौसी का ख्याल आ गया . आज वो फिर से मेरे ऊपर गुस्सा करेंगी. खैर अब रीना को मन नहीं कर सकता था तो मैंने रीना को बिठा कर साइड में जा कर राधा को फ़ोन कर क बता दिया क मैं डिनर कर क आने वाला हूँ. वो नाराज़ होने लगी. मैंने उसे दिव्या मौसी को समझने को कह दिया और वापिस रीना क पास आ गया जहाँ उसने आर्डर दे दिया था . मैंने उसके सामने बैठा तो वो लगातार मुझे hi देखे जा रही थी. उसकी चेहरे पर एक खास तरह की स्माइल और ख़ुशी थी.

अमित : ऐसे क्या देख रही हैं ?

रीना : कुछ नहीं , बस सोच रही हूँ आज पहली बार तुम्हारे साथ ऐसे बहार डिनर करने आयी हूँ. कितना ाचा लग रहा है. इसके बाद पता नहीं कब हम साथ होंगे. कैसे मैं इतना वक़्त दूर रहूंगी तुमसे.

अमित : मुझ अकेले से थोड़ा दूर रहेंगी आपकी माँ और रीमा भी तो है .

रीना : हाँ वो तो है , एक बात मानोगे ?

अमित : आप कहिये ज़रूर मानूंगा

रीना : मेरे जाने क बाद माँ और रीमा का ख्याल रखना , उन्हें तुम्हारे भरोसे छोड़ कर जा रही हूँ मैं.

अमित : आप चिंता न करो, मेरे होते उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी.

रीना : तुम्हारे hi तो भरोसे जा रही हूँ. मुझे पता है तुम हमेशा मेरा और मेरे परिवार का ख्याल रखोगे . तुम मेरे लिए अब मेरी फॅमिली का hi तो हिस्सा हो.

मैंने मन में सोचा बात तो सही है. रीमा से शादी क बाद तो वैसे भी मैं आपकी फॅमिली का हिस्सा बन hi जाऊंगा. फिर वेटर खाना ले आया और हम खाना खाने लगे . खाना कहते हुए भी रीना मुझे hi देख रही थी जैसे आज वो आखिरी बार मुझसे मिल रही हो. मैं उनसे पूछता तो बस मुस्कुरा देती . डिनर क बाद हम वहां से निकले . रीना मुझे साथ ले कर मंजू म क घर वापिस आ गयी और यहाँ से मैं बाइक ले कर वापिस घर आ गया .

उधर सप ऋतू सिंह अपने घर बने ऑफिस में बैठी अपनी भेजी हुई पुलिस पार्टी क मैसेज का वेट कर रही थी क काम बना या नहीं तभी एक पुलिस वाला दौड़ता हुआ उसके पास आया.

‘ मैडम बहुत बुरी खबर है ‘ उस पुलिस वाले क चेहरे से hi ज़ाहिर था क खबर बुरी है. उसके अल्फ़ाज़ सुन कर ऋतू चौंक गयी.

ऋतू सिंह : क्या हुआ ? कौन सी बुरी खबर है ? क्या वो हाथ नहीं आया ?

‘ मैडम उसे तो हमारी टीम ने उठा लिया था. जैसा अपने कहा था उसकी सिक्योरिटी में कुछ लोग होंगे तो वैसा hi हुआ. पर हमारी टीम ने उन लोगों को एनकाउंटर में मर डाला और उसे उठा कर ला hi रहे थे क रस्ते में ‘ इतना बोल कर वो पोलिसवाले चुप हो गया

ऋतू सिंह : रस्ते में क्या ? क्या हुआ ?

‘ रेट में एक बेकाबू ट्रक ने हमारी दोनों गाड़ियों को उदा दिया. वो सब हॉस्पिटल में है और कुछ की हालत ज्यादा ख़राब है ‘ ये सुनते hi ऋतू सिंह गुस्से से आग बबूला हो गयी और अपनी सीट से कड़ी हो गयी .

ऋतू सिंह : क्या ????? ट्रक ने दोनों गाड़ियों को उदा दिया ?? बास्टर्ड,, ये कोई एक्सीडेंट नहीं ज़रूर ये सब जान बुझ कर किया गया है. कहाँ हैं वो लोग ?

‘ मैडम उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया है , फ़िलहाल उनकी कंडीशन की पूरी डिटेल नहीं है . पर एक और समस्या है ‘

ऋतू सिंह : बोलो

‘ मैडम आपने जैसे कहा था हमने वहां पर किसी को इन्फॉर्म नहीं किया था और अब वहां की पुलिस भी इस बात पर नाराज़ है और इस पर एक्शन लेने का कह रहे हैं ‘

ऋतू सिंह : वो मैं देख लुंगी, तुम लोग अभी एक और टीम लेकर हॉस्पिटल जाओ . वो लोग ज़रूर उसे मरवाने की कोशिश करेंगे. मुझे वो ज़िंदा चाहिए. और देखना अपने लोगों का सही से इलाज हो रहा है या नहीं. और उस ट्रक का पता लगाओ , जिसने भी ये किया है मैं उसे छोडूंगी नहीं . पुलिस पर हाथ डाला है न उन लोगों ने अब उन्हें दिखती हूँ पुलिस की ताकत .

ऋतू की बात सुनते hi वो पुलिस वाला फ़ौरन वापिस चला गया . ऋतू सिंह क माथे पर बल पद गए थे. अपने रिस्क पर एक तो उसने गुप्त तरीके से ये एक्शन करवाया था ऊपर से अब वो लोग अब हॉस्पिटल पहुँच गए थे. उनकी चिंता होने लगी थी ऋतू को आखिर वो उसका हुकम hi तो मन रहे थे. दूसरा उसे ये भी टेंशन थी क इतना रिस्क लेने क बाद भी पता नहीं वो मैनेजर ज़िंदा उसके हाथ आएगा भी या नहीं .

जब मैं घर पहुंचा तो 10 बज चुके थे. बाइक की आवाज़ सुन कर दरवाज़ा राधा ने hi खोला. मैं अंदर आया तो दिव्या मौसी मुझे कहीं नज़र नहीं आयी .

अमित : धीमी आवाज़ में) मौसी कहाँ हैं ? कहीं वो नाराज़ तो नहीं हो गयी मुझसे ?

राधा : नाराज़गी दिखते हुए ) इतनी फ़िक्र है तो ऐसा करते hi क्यों हो ? ऐसे कौन से काम हैं जो शाम को गायब हो जाते हो ? किस्से मिलने जाते हो ?

राधा बेचारी मन से भरी हुई थी . वैसे तो उसे पता था क अमित का किसी क साथ कोई चक्कर नहीं पर इस तरह रोज़ रोज़ शाम क वक़्त गायब होना उसके कोमल मन में तीस पैदा कर रहा था .

अमित : अरे यार बताया था न दोस्त क साथ था. तुमने मौसी को समझा दिया था न ? कहीं ये न हो वो फिर से नाराज़ हो जाएँ. अगर ऐसा हुआ तो साडी ज़िम्मेदारी तुम्हारी होगी

राधा : कौन सा दोस्त है जिसके साथ हर बार गायब हो जाते हो? सब दोस्तों को मैं जानती हूँ तो ये कौन है ? कहीं ये दोस्त कोई लड़की तो नहीं ?

अमित : तुम भी न , ऐसा कुछ नहीं है .

राधा : तो कौन है वो ? मुझे सच सच बताओ .

अमित : ाचा ठीक है बताता हूँ पर पहले मुझे फ्रेश तो होने दो. और आवाज़ धीमी रखो कहीं मौसी ने सुन लिया तो मेरी बंद बज जाएगी .

राधा : कुछ नहीं कहेगी माँ मैंने बात कर की थी , वो सो रही है . सर में दर्द था तो जल्दी सो गयी हैं दवा खा कर. तुम जा कर फ्रेश हो लो मैं दूध लती हूँ.

मैं अपने कमरे में चला गया और राधा किचन में.

दिव्या इन दोनों की बातें दरवाज़े क पीछे से सुन रही थी. असल में न उसने कोई दवा की थी न hi उसे नींद आ रही थी . वो तो बेचारी अकेले बैठी अपनी hi हालत पर आंसू बहा रही थी. जब से वो अमित क कमरे से निकली थी तब से उसका मन इतना दुखी था जैसे उसकी ज़िन्दगी में जो ख़ुशी की नयी किरण नज़र आयी थी वो बुझ सी गयी हो. अमित क आने की आहत से hi वो अपने बिस्तर से उठ गयी थी पर अपने कमरे क दरवाज़े से बहार आने तक hi हिम्मत न जूता पायी. कैसी विडंबना थी क एक तरफ उसे उसका दिल अमित क पास ला रहा था जैसा प्यासा कुँए क पास अत है और दूसरी तरफ उसके दिमाग ने जैसे दिल की इस ख़ुशी को hi शर्मिंदा कर दिया था हवस का नाम देकर. अपनी अधूरी शादीशुदा ज़िन्दगी और अपने अधूरे नारीत्व की वेदना जो वो इतने सालो से दबाये हुए थी उसे अमित क पास आने से hi मनो हवा मिल गयी थी जैसे बुझती हुई शम्मा फड़फड़ाने लगती है. मगर आज उस एक शब्द ने उसे सपनो क आसमान से हकीकत की धरा पर ला पटका था. एक तरफ मन और एक तरफ समाज क कायदे जिसने हमेशा क लिए उसे बंदिनी hi बना दिया था अपने hi जिस्म क अंदर. अब भी बेचारी अपनी दशा पर रो रही थी अपने कमरे जो अँधेरे में डुबोये.

‘ तो बताओ मुझे किसके साथ थे ? कौन है वो लड़की ? ‘ राधा ने कमरे में आते hi टेबल पर दूध का गिलास रखा और अपनी कमर पर हाथ रख कर मुझसे ये सवाल किया. राधा क फेस एक्सप्रेशन देख कर मेरा दिल किया क उससे मज़ाक किया जाये .

अमित : चौंकते हुए ) तुम्हे कैसे पता चला वो लड़की थी? तुम मेरी जासूसी तो नहीं करवा रही थी?

राधा का तो मन hi भर गया ये सुनते की अमित किसी लड़की से मिल कर आ रहा है. पर उसके मन में अभी भी उम्मीद थी क शायद वो कोई कॉलेज की hi दोस्त हो.

राधा : कौन थी ?

बस इतना hi सवाल पूछ पायी राधा खुद को काबू करते हुए.

अमित : मैं क्यों बताऊँ? तुम मौसी को बता डौगी. वैसे अपने कॉलेज की नहीं थी वो. मेरी बहुत अछि दोस्त है . वो क्या है न उसको शॉपिंग करनी थी और मैं उसे शॉपिंग करवाने ले कर गया था . ये देखो ये जैकेट भी उसी ने दिया है मुझे . उसके बाद हम ने साथ में डिनर किया और फिर मैं वापिस आ गया .

मैंने अपनी बात ख़तम कर क जैसे हो राधा की तरफ देखा तो उसकी ऑंखें भीग गयी थी. मैंने जैसे hi उससे बात करनी चाही वो तेज़ कदमो से कमरे से निकल गयी . राधा का ऐसा रिएक्शन देख मुझे झटका लगा. मैंने तो बस उससे मज़ाक करने की कोशिश की थी मगर वो तो नाराज़ हो कर भाग गयी. मुझे भी एक पल में hi बुरा लगने लगा. राधा की आँखों आंसू आ गए थे मेरे एक छोटे से मज़ाक की वजह से. मैं फ़ौरन उसके पीछे भगा. मैं जब राधा क कमरे में गया तो बीएड पर उलटी लती थी तकिये में मुँह छुपाये.

अमित : राधा !!! राधा ,,,,,

मैंने राधा को आवाज़ दी पर उसने कोई जवाब न दिया. मैं उसके करीब जा कर बैठ गया और उसके कंधे पर हाथ रख कर उसे आवाज़ दी पर राधा ने कोई जवाब न दिया तो मैंने उसको पलट दिया. राधा का चेहरा आंसुओं से भीगा देख कर मेरा दिल बेचैन होने लगा.

अमित : राधा तुम रो रही हो ? ऐसा मैंने क्या कह दिया जो तुम ऐसे रोने लगी ? अरे पागल मैं तो मज़ाक कर रहा था . तुम ऐसे hi रोने लगी .

मैंने राधा क आंसू पोंछते हुए उसे कहा तो एक पल में राधा की ऑंखें बड़ी हो गयी और आंसू रुक गए .

राधा : तुम सच कह रहे हो ? वो मज़ाक था ?

अमित : हाँ भी और नहीं भी. तुम पहले चुप करो और अपनी हालत ठीक करो. देखो कैसी शकल बना ली है एक मिनट में.

राधा : पहले मुझे सच सच बताओ , तुम सच बोल रहे थे या मज़ाक कर रहे थे?

अमित : ाचा बताता हूँ , मैंने जो कहा वो सच था पर जो तुमने समझा वैसा नहीं है .

राधा : क्या मतलब ?

अमित : मतलब क मैं सच में लड़की से मिल कर आ रहा हूँ और वो कॉलेज की भी नहीं है . मगर तुम उसे जानती हो अछि तरह से और मिल भी चुकी हो

राधा : साफ साफ बताओ न कौन है वो

अमित : अरे यार वो अपनी डॉ रीना . रीमा की बड़ी बहिन , वो लंदन जा रही हैं न. तो उन्होंने कहा था क जाने से पहले वो एक बार मुझसे मिलना चाहती हैं. नेक्स्ट वीक में तो टाइम मिलने वाला नहीं था उन्हें इस लिए आज hi चले गए. और फिर उनके कहने पर डिनर भी कर लिया और कुछ नहीं. यकीन न हो तो लो उनसे बात कर लो

मैंने अपना मोबाइल राधा क हाथ में पकड़ा दिया. जिसे राधा ने साइड में रख दिया .

राधा : तो तुम जान बुझ कर मुझे बेवक़ूफ़ बना रहे थे ?

अमित : मैं कहाँ बना रहा था , वो तो तुम खुद hi पता नहीं क्या क्या सोचने लगी. मैंने तो सच hi बताया था .

राधा : आधा सच ,, पहले नहीं बता सकते थे क रीना दीदी क साथ थे ? वो लंदन जा रही हैं ये तो मुझे भी पता है. और तुम ऐसे बता रहे थे जैसे .....

अमित : जैसे क्या ? क्या सोचा था तुमने ? और रोने क्यों लगी थी ?

राधा : क्यूंकि ...... तुम बहुत गंदे हो . जान बुझ कर मुझे सताते हो . सब को सताने का ठेका ले रखा है तुमने. पहले माँ को परेशां कर रहे थे अब मेरे पीछे पद गए हो. देखना इस बार ममी जी से तुम्हारी शिकायत करुँगी फिर वो hi सीधा करेंगी तुम्हे .

राधा ने अपने दिल की बात को अपने होंठों तक आने से रोक लिया था . बेचारी छह कर भी अपने जज़्बात बयां नहीं कर पति थी. कैसे कहे क वो कितना चाहती है अमित को. बचपन से लेकर अब तक उसकी आँखों ने अमित क सिवा और कोई ख्वाब देखा hi नहीं था जिसकी वजह वो खुद भी नहीं जानती थी. उसकी धड़कन पर जैसे अमित का hi नाम लिखा था. पर कभी वो कह hi नहीं पायी. शर्मीला स्वभाव जो उसे अपनी माँ से hi मिला था एक बड़ी ज़ंजीर था जो उसके जज़्बातों को कभी ज़ुबान तक आने hi नहीं देता था. अंदर hi अंदर वो ये hi दुआ करती थी क काश अमित खुद महसूस करे उसके प्यार को और वैसा hi प्यार अमित क दिल में भी उसके लिए हो. अमित जिस तरह उसकी परवाह करता था वो तो इतने से hi खुश हो जाती थी.

अमित : एक तो खुद hi पता नहीं क्या क्या सोच लेती हो और ऊपर से मुझ पर इलज़ाम लगाती हो क मैं तंग करता हूँ . देखो ज़रा कैसी बन्दर जैसी शकल बना ली है .

राधा : क्या कहा ? बन्दर ? तुम हॉग बन्दर , बैल कहीं क .

अमित : ाचा तो मैं बैल हूँ ?

राधा : बैल नहीं सांड हो

अमित : सांड ?? कोई न कल hi चला जाऊंगा यहाँ से फिर देखती रहना . तंग करता हूँ न तुम्हे ? अब आऊंगा hi नहीं .

इतना कह कर मैं कमरे से जाने लगा तो राधा ने मेरा हाथ पकड़ लिया .

राधा : चले जाओगे ?? मुझे छोड़ कर चले जाओगे ? बस इतनी hi परवाह है मेरी ??

राधा एक पल में hi बिफर गयी थी अमित क आखिरी शब्द सुन कर . वो तो बेचारी अमित से शिकवा कर रही थी अपना गुस्सा दिखा रही थी पर यहाँ तो अमित ने जाने की बात कर क ऊपर से न आने की बात कर क राधा को जैसे तोड़ hi दिया . राधा क मुँह से अब अपनी माँ क लिए नहीं बल्कि अपने लिए शब्द निकले थे. वो शब्द जो इंदिरेक्ट्ली उसके प्यार से लबरेज़ थे

अमित : राधा !!!

राधा की आँखों में फिर से आंसू देख कर मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ. उसने जो कहा था वो सीधा मेरे दिल पर जा लगा और पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने राधा को अपने साइन से लगा लिया . राधा ने मेरे सीने में अपना चेहरा छुपा लिया और मेरी पीठ पर अपने हाथ कास लिए

अमित : रो मत राधा , क्या तुम बात बात पर रोने लग जाती हो . मैं कहीं नहीं जा रहा . ऐसा भला हो सकता है क मैं तुम्हे छोड़ कर कहीं चला जॉन ? मैं कहीं नहीं जाऊंगा. वो तो कल मैं गाओं जा रहा हूँ न इस लिए कहा था. क्या तुम भी बच्चों जैसे रोम लगती हो. मुझे तुम्हारी आँखों में आंसू बिलकुल भी अचे नहीं लगते . अगर ऐसे hi रोटी रहोगी न तो देख लेना एक दिन सच में दूर चला जाऊंगा फिर रोटी रहना .

राधा ने तुरंत अपने चेहरा ऊपर किया और मेरी आँखों में देखने लगी .

राधा : अगर तुम साथ देने का वडा करो तो मैं कभी नहीं रोउंगी. वडा करो कभी मुझसे दूर नहीं जाओगे . वडा करो हमेशा मेरे साथ रहोगे. वडा करो मुझे अपनी बनाओगे . वडा करो मेरी आखिरी साँस तक तुम मुझे अपने साथ रखोगे. मैं चाहती हूँ मेरी आखिरी सांस भी तुम्हारी बाँहों में निकले .

अमित : ऐसे क्या देख रही हो ? बोलो अब रोओगी?

राधा बेचारी ने इतना कुछ कह तो दिया था मगर ज़ुबान ने फिर से साथ न दिया बस ऑंखें hi थी जो बोल रही थी पर शायद अमित ने वो समझा hi नहीं. राधा क जज़्बात एक बार फिर बंद ज़ुबान में hi दिल की धड़कन ने चीख चीख कर कहे थे . और लैब तो जैसे सील hi गए थे.

राधा : नं नहीं मैं नहीं रोउंगी . पर तुम छोड़ कर तो नहीं जाओगे न ?

अमित : मैं कहाँ जा रहा हूँ ? वो तो कल सैटरडे है तो गाओं जा रहा हूँ. अब खुद को सम्भालो और खुद को थोड़ा स्ट्रांग भी करो. ऐसे कैसे ज़िन्दगी बिताओगी? बात बात पर रोने लगती हो.

राधा : मुझे परवाह नहीं है अपनी . मेरी परवाह करने क लिए हो न तुम.

अमित : मैं हमेशा थोड़ी रहूँगा

राधा : मेरे मुँह पर हाथ रखते हुए) ख़बरदार जो ऐसा कहा तो. तुमसे पहले भगवन मुझे उठा ले. तुम हो तो मैं हूँ वर्ण इस दुनिया की समझ मुझे नहीं है और न hi मैं समझना चाहती हूँ. बस तुम्हे hi मेरा ध्यान रखना होगा और साडी ज़िन्दगी. समझे ?

अमित : तुम न कभी कभी बिलकुल बच्चों कैसी बातें करती हो. चलो अब सो जाओ आराम से .

राधा : ुनहुन्न , तुम यहाँ मेरे पास बैठो. मुझे नींद नहीं आएगी.

अमित : मौसी ने देख लिया तो क्या सोचेंगी?

राधा : माँ तो सो गयी है . और तुम्हे कौन सा मैं साडी रत यहीं रुकने को कह रही हूँ. जब मैं सो जॉन तो चले जाना. बस थोड़ी देर मेरे पास बैठ जाओ .

अमित : ाचा , तो मतलब अब मैं लोरी सुनाऊँ? तुम्हे स्कूलों और खुद जागूँ ?

राधा : लोरी सुनाने की ज़रूरत नहीं है और न जागने की. चाहो तो तुम भी यहीं सो जाना.



राधा ने शरमाते हुए ये बात कही तो मुझे भी उसका चेहरा देख कर हंसी आ गयी. मैं उसकी बात मानते हुए उसके बीएड पर hi बैठ गया. राधा मेरे हाथ को दोनों हाथों में थामे आराम से लेट गयी और बार्न करते हुए मुझे देखती हुई सो गयी. कुछ hi देर में राधा नींद में चली गयी. उसके चेहरे पर एक असीम शांति और मुस्कान थी. मुझे बहार हॉल में एक आहत सुनाई दी तो मैंने ध्यान से राधा क हाथों से अपना हाथ खींचा और दबे पाऊँ कमरे से बहार निकला . मेरे और दिव्या मौसी क रूम क दरवाज़े बंद थे और हॉल में अँधेरा था. मगर एक कमरे क दरवाज़े क नीचे से रौशनी बहार आ रही थी. इस वक़्त इस कमरे में लाइट कैसे जल रही है ? मैं थोड़ा अलर्ट हुआ और उस दरवाज़े तक पहुंचा . दरवाज़ा लॉक नहीं था. मैंने दरवाज़े को ज़रा सा प्रेस किया और अंदर देखने लगा. अंदर दिव्या मौसी थी और माँ की तस्वीर को सीने से लगाए रो रही थी. राधा ने बताया था क मौसी दवा खा कर सो गयी हैं फिर वो इस वक़्त यहाँ कैसे ? और वो रो क्यों रही हैं? मुझे लगा शायद उनके रोने की वजह मैं हूँ. इस लिए मैं चुपचाप अपने कमरे में वापिस चला गया . मुझे नींद तो नहीं आ रही थी और बार बार दिव्या मौसी का hi ख्याल आ रहा था . सोचते सोचते पता नहीं कब मेरी आंख लग गयी.
 
भाई लोगो सॉरी, पर इतना फसा हूँ क वक़्त नहीं निकल प् रहा. पारसी तक घर पहुँच जाऊंगा और अपडेट देने की पूरी कोशिश रहेगी पारसी को hi
 
भाई लोगो आज घर तो पहुँच गया मगर लगता है साडी दुनिया hi हिमाचल को निकल पड़ी है रोड सभी ट्रैफिक फुल दिखा रही हैं. खैर घर पर हूँ और लिख रहा हूँ . आज अपडेट तो नहीं दे पाउँगा क्यूंकि अभी सन कम्पलीट नहीं हुआ पर कल पक्का मिल जायेगा अपडेट .
 
अपडेट 202



सुबह मैं जल्दी उठ कर एक्सरसाइज करने लगा. मैं जब वापिस नीचे आया तब मौसी उठी. उनकी आँखों से hi पता चल रहा था क वो रत ठीक से नहीं सोई हैं. वो नहाने चली गयी और मैंने राधा को जगाया . हमेशा की तरह उसके चेहरे पर मुस्कान थी मुझे अपने सामने देख कर. हमने साथ में चाय पि जो मौसी बना लायी थी पर मौसी हमारे साथ नहीं बैठी. मुझे ऐसे लग रहा था जैसे वो मेरे पास बैठना नहीं चाहती . कल रत मैंने उन्हें रट हुए देखा था पर मुझे समझ नहीं आ रहा था क मैं उनसे बात करूँ या न करूँ. और अगर करूँ तो कैसे करूँ . खैर मैं तैयार होने अपने कमरे में चला गया और राधा भी तैयार होने लगी. मैंने तैयार होने क बाद अपना फ़ोन चेक किया तो रीमा क बहुत सरे प्यार भरे मेस्सगेस आये हुए थे. साथी hi उसने लिख कर भेजा था क वो आज कॉलेज नहीं आएगी और मुझे भी 10 बजे उससे मिलने को कहा था. नाश्ता करने क बाद मैं राधा को लेकर कॉलेज चला गया . जैसे की रीमा ने बताया था वो कॉलेज नहीं आयी और न hi शीना. राधा ने फ़ोन पर पूछा तो रीमा ने बहाना बना दिया. पहला लेक्चर अटेंड करने क बाद मैं भी बहाना बना कर निकल गया . रीमा ने मुझे एक पार्क में मिलने का कहा था. जैसे hi मैं रीमा से मिलने पहुंचा तो रीमा को देखता hi रह गया . रीमा रेड सूट पेहेन कर आयी थी और उसने आज लिपस्टिक भी लगायी हुई थी. आँखों में काजल चेहरे पर भी हल्का मेकअप और बल भी आज खास तरीके से सेट किये हुए थे. कानो में लटकते झुमके और नक् में पड़ी नोज पिन , दोनों हाथों में लाल चूड़ियां और नेल्स पर भी लाल पोलिश . पाऊँ में आज शूज या सैंडिल की जगह एक खास किसम की जुटी. मैं रीमा को सर से पाऊँ तक ऐसे देख रहा था जैसे उसका अक्स अपने दिलो दिमाग में उतर रहा हूँ. मुझे तो खबर भी न लगी कब रीमा चल कर मेरे करीब आ गयी .

‘ अह्ह्हून अहहूँन्न ,, ‘ रीमा ने मेरे करीब आकर मुझे होश में लेन क लिए नकली खांसी खांसने लगी.

अमित : रीमा क्या सच में ये तुम हो ?

रीमा : शरमाते हुए ) हम्म्म

अमित : ऐसा लग रहा है कोई स्वप्न सुंदरी या जन्नत से कोई हूर मेरे सामने आ कर कड़ी हो गयी हो. आज तुमने ये सब ...??? तुम तो बिलकुल अलग लग रही हो . जैसे ,,, जैसे ,,,

रीमा : जैसे क्या ???

अमित : जैसे कोई दुल्हन

रीमा : आँखें नीचे करते हुए ) दुल्हन hi तो बनने वाली हूँ आज तुम्हारी हमेशा क लिए .

अमित : क्या मतलब ??

रीमा : आज मैं खुद को तुम्हे सौंप रही हूँ हमेशा क लिए . अब से मरते डैम तक मैं सिर्फ तुम्हारी hi रहूंगी और तुम मेरे.

अमित : तुम तो हमेशा क लिए मेरी hi हो और मैं तुम्हारा. पर इसके लिए वो सब करने की ज़रूरत तो नहीं . तुम एक बार फिर ......

रीमा: मेरे मुँह पर हाथ रखते हुए ) शहहह बस अब और नहीं . आज मैं तुम्हारे साथ अपनी ज़िन्दगी की नयी शुरुआत करने वाली हूँ . आज क बाद तुम ये यद् रखना क अब तुम पर मेरा भी हक़ है . चाहे कुछ भी हो जाये तुम कभी मुझे छोड़ोगे नहीं .

अमित : ये तुम क्या कह रही हो ? मैं तुम्हे कभी छोड़ सकता हूँ क्या ?

रीमा : ( मन में ) मैं जानती हूँ तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो और मैं भी तुम्हारे लिए अपनी जान भी दे सकती हूँ पर डर्टी हूँ क कहीं मेरा प्यार राधा क अटूट प्रेम क आगे फीका न पद जाये .

अमित : बताओ ? क्या मैं ऐसा कभी कर सकता हूँ क्या ?

रीमा : मैं जानती हूँ पर दुनिया से दर लगता है. इस लिए आज मैं हूँ दोनों क बीच वो रिश्ता कायम कर लेना चाहती हूँ जिससे हम दोनों कभी अलग न होने पाएं . अब चलें ?

अमित : पहले इन आँखों को अपना ये रूप देख तो लेने दो.

रीमा : शरमाते हुए ) अभी ये पूरा नहीं है , पूरा होने क बाद जितना चाहे देख लेना .

अमित : चौंकते हुए ) क्या ? अभी भी पूरा नहीं है ? तो और क्या करने वाली हो अभी ? क्या जान लेने का इरादा है ? एक तो पहले hi तुम्हे देख कर ये दिल नहीं संभल रहा और तुम कह रही हो क अभी और भी कुछ करना है . फिर तो पक्का मेरा आज hi ......

रीमा : मेरे होंठों पर हाथ रखते हुए ) शह्ह्ह्ह बार बार ऐसी बातें क्यों करते हो ? मैंने कहा न अभी कुछ रहता है और वो तुम करोगे. चलो अब जल्दी से दीदी ने फार्महाउस को रेडी करवा क रखा है हमारे लिए .

अमित : क्याआ ? तुमने रीना को सब बता दिया ?

रीमा : पागल हो क्या ??? दीदी को बता कर तो घर में भूचाल आ जायेगा . मैं शीना दीदी की बात कर रही हूँ .

अमित : तुमने शीना को क्यों बताया ?

रीमा : उन्होंने खुद hi कहा था , और वैसे भी जब उन्होंने खुद अपनी बात बता दी तो मैंने भी छुपाना ठीक नहीं समझा. वैसे भी वो एक दोस्त की तरह hi मेरी मदद कर रही हैं. अब ज्यादा बातें मत करो चलो .

अमित : जायेंगे कैसे ?

रीमा : तुम्हारी बाइक पे

अमित : किसी ने देख लिया तो ? तुम्हारी कार कहाँ है.

रीमा : मुझे शीना दीदी छोड़ कर गयी हैं अभी अभी. तुम्हारे आने तक वो यहीं थी. और मुझे बाद में वो लेने भी आ जाएँगी उधर से hi .

अमित : क्या ? शीना यहाँ थी? तो मुझसे मिली क्यों नहीं ? और अगर शीना क साथ hi आना था तो मैं सीधा वहीँ आ जाता .

रीमा : यहाँ इस लिए बुलाया है तुम्हे क्यूंकि मैं चाहती थी मैं तुम्हारे साथ तुम्हारी बाइक पर जॉन. और बाद में शीना दीदी इस लिए लेने आने वाली हैं क्यूंकि.......

रीमा बात करती करती शर्मा गयी

अमित : बात तो पूरी करो क्या क्यूंकि ??

रीमा : शरमाते हुए ) दीदी ने कहा था ,,,, क बाद में मुझसे,,,, बाइक पर बैठा नहीं जायेगा ,,, इस लिए वो लेने आएँगी.

अमित : क्यों नहीं बैठा जायेगा ?

रीमा : शरमाते हुए ) दीदी की जो उस दिन हालत हुई थी उन्होंने बताया मुझे . इस लिए वो कह रही थी की बाद में मेरे लिए मुश्किल होगा .

अमित : ाचा तो हम रहने देते हैं

रीमा : अब और कुछ कहा तो मैं बात नहीं करुँगी. अब चलो भी. यहाँ मेरी जान पर बानी है और तुम बातें hI नहीं छोड़ रहे

रीमा ने मेरा हाथ पकड़ कर खींचते हुए मुझे बहार की तरफ चलना शुरू किया तो मैं भी उसके साथ हस्ता हुआ चल पड़ा. रीमा की चूड़ियों की खान खान मुझे बहुत अछि लग रही थी. और साथ hi उसके चलने से पायल की आवाज़ भी आ रही थी. मैंने बहार आ कर बाइक को स्टैंड से निकला और स्टार्ट किया. रीमा झट से बाइक पर एक तरफ दोनों पाऊँ किये बैठ गयी और अपना डायन हाथ मेरे पेट पर रख दिया बिलकुल जैसे बीवी अपने पति क पीछे बैठती है. रीमा मेरे साथ सात कर बैठ गयी थी और उसकी एक साइड की चुकी मेरी पीठ पर टच हो गयी. मैंने जान बुझ कर रीमा को छेड़ा

अमित : आअह्ह्ह्ह मज़ा आ गया .. थोड़ा और चिपक कर बैठो न. ये कोमल सा एहसास बड़ा ाचा लग रहा है मुझे पीठ पर.

रीमा : पीठ पर हाथ से मरते हुए ) शर्म नहीं आती ? गंदे ,, चलो ज़रा फिर बताती हूँ तुम्हे . बड़ा मज़ा आ रहा है न ? आज तुम्हारी हालत न पतली कर दी तो कहना .

अमित : लगता है आज तुम्हारे इरादे ठीक नहीं . भगवन hi बचाये .

मैंने बाइक को गैर डाला और हम चल पड़े. रीमा ने एक तंग पर दूसरी तंग चढ़ा दी और मेरे साथ पूरी तरह चिपक कर बैठ गयी . अब मेरी पीठ पर रीमा की दोनों चूचियां महसूस हो रही थी. मुझे मज़ा आ रहा था पर मैंने खुद को सँभालते हुए बाइक चलने पर hi ध्यान दिया. रीमा ने अपनी चुनरी से अपना चेहरा थोड़ा धक् लिया था. मैं भी बाइक को हवा में उडाता हुआ उसके 20 मिनट्स में hi फार्म हाउस पहुँच गया. फार्महाउस पर आज कोई नहीं था. रीमा ने पर्स में से के निकली और मैं गेट खोला. अंदर आ कर उसने दरवाज़ा खोला तो अंदर आज भी वैसा hi सजा हुआ था जैसा उस दिन सजा हुआ था जब मैं शीना क साथ आया था . अंदर की सजावट देख कर रीमा भी खुश हो गयी और जब उसने मेरी तरफ देखा तो मेरे साथ नज़रें मिलते hi शर्मा कर उसने नज़रें झुका ली. रीमा की खूबसूरती और इस्पात ऐसे शर्माना मेरे दिल को घायल कर रहा था. इस वक़्त यहाँ पर हम दोनों hi अकेले थे . मैंने रीमा की कमर में हाथ डाला और उसे अपनी तरफ खिंच कर खुद से सारा लिया .

रीमा : शरमाते हुए ) ये क्या कर रहे हो ?

अमित : वही जो करने हम यहाँ आये हैं. यही तो चाहती हो न तुम. आज तुम बहुत प्यारी लग रही हो रीमा . तुम सच में दुनिया की सब से प्यारी लड़की हो. ऊपर से आज तुम इन कपड़ो में तो और भी ज्यादा लेजर ढह रही हो . मुझसे अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा.

इतना कह कर मैंने रीमा क होंठों को चूमना चाहा तो उसने मेरे होंठों पर हाथ रख के मुझे पीछे किया .

रीमा : मैंने मन किया था न , अभी रुको थोड़ा. नहीं तो मेकअप ख़राब कर डोज

अमित : नाराज़ होते हुए ) क्या यार अब और कितना वेट करवाऊंगी? अगर तुम्हे यही सब करना है तो मैं वापिस जा रहा हूँ .

रीमा : ाचा !! जा कर तो दिखाओ ज़रा टंगे तोड़ दूंगी.

अमित : क्या यार न खुद कुछ कर रही हो न करने दे रही हो ऊपर से बीवियों की तरह हुकम चला रही हो .

रीमा : हाँ तो ,, बीवी hi तो बनूँगी तो हुकम क्यों न चलौं. अब चलो चुपचाप मेरे साथ.

रीमा ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने साथ अंदर ले गयी और सोफे पर बिठा दिया. मुझे बैठने का कह कर रीमा रूम में चली गयी. 10 मिनट बाद जब वो वापिस आयी तो उसने सर पर चुनती ली हुई थी जैसे दुल्हन क सर पर होती है . और साथ कुछ ज्वेलरी भी अब उसने दाल ली थी . रीमा चल कर मेरे पास आयी और नज़रें झुकाये कड़ी हो गयी.

अमित : ये सब क्या कर रही हो तुम ? मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा .

रीमा : मैं आज तुम्हे दिल से अपना पति स्वीकार करती हूँ. मैं ये सब हमारी शादी क बाद hi करना चाहती थी पर अब ,,,,,, देखो मैं तुम्हारे सामने दुल्हन बन कर कड़ी हूँ न. अब तुम मुझे अपनी पत्नी क रूप में स्वीकार कर लो .

अमित : ये तुम क्या कह रही हो ? अगर तुम ये सब शादी क बाद hi करना चाहती थी तो फिर इतनी जल्दी क्या पद गयी ? मेरी मनो अभी भी ये सब दिमाग से निकल दो. मैं शादी तो तुम्ही से करूँगा न. और मुझे नहीं लगता तुम्हारी माँ को कोई ऐतराज़ होगा .

रीमा : बात वो नहीं है . बस मुझे दर है , इस लिए मैं ये सब अभी चाहती हूँ. तुम्हे अपना पति बना कर hi मैं वो सब करना चाहती थी ताकि मन में कोई बात न रहे. प्लीज अब कोई और सवाल मत करना लो ये सिन्दूर और मेरी मांग भर दो.

रीमा ने अपनी हथेली आगे की जहाँ पर सिन्दूर की डिब्बी पड़ी थी. मैं रीमा की बात को समझ नहीं प् रहा था क आखिर उसे इतनी जल्दी क्यों है. पर उसकी बात मानते हुए मैंने थोड़ा सा सिन्दूर उसकी मांग में भर दिया.

अमित : मैं तुम्हे अपनी पत्नी स्वीकार करता हूँ. और वडा करता हूँ एक दिन दुनिया क सामने भी तुम्हारी मांग भरूंगा. पर तब तक तुम इसे छुपा कर रखना .

रीमा झुक कर मेरे पाऊँ छूने लगी तो मैंने उसे रोक दिया

अमित : इसकी ज़रूरत नहीं , वैसे भी एक चीज़ तो अभी बाकि है . मैंने तुम्हे मंगल सूत्र तो पहनाया नहीं . रुको.

मैंने अपने गले से चैन निकली और उसमे एक पंडाल डाला जो मैंने रीमा क लिए लिया था जब मैं करिश्मा दीदी क शहर गया था . चैन में पंडाल दाल कर मैंने उसे रीमा क गले में दाल दिया . रीमा बस मुझे देख hi रही थी. जैसे hi मैंने उसके गले में चैन को डाला तो उसकी ऑंखें भर आयी

अमित : ये क्या ? अब आँखों में आंसू किस लिए? मंगलसूत्र नहीं तो कोई बात नहीं ,, इसे hi मंगलसूत्र मन कर हमेशा अपने साथ रखना. वैसे भी मंगलसूत्र कहाँ पेहेन पति तुम. मैं आज भगवन को साक्षी मन कर तुम्हे अपनी पत्नी स्वीकार करता हूँ. क्या तुम मु......

मेरी बात पूरी होने से पहले hi रीमा ने मेरा मुँह अपने होंठों से बंद कर दिया . रीमा मेरे होंठों को ऐसे चबा रही थी जैसे खा hi जाएगी. वो कितनी एक्ससिटेड हो रही थी कितनी खुश थी ये उसके किश करने से hi पता चल रहा था. मैं भी रीमा का साथ देने लगा और उसकी कमर को थामे उसे किश करता रहा. हमारी ये किश तब तक चली जब तक की हमारी सांसें उखड नहीं गयी. जैसे hi हम अलग हुए रीमा क चेहरे पर मुस्कान थी पर नज़रें शर्म से झुकी हुई थी .

अमित : हहहह ,,,, क्या यार तुम तो बहुत गरम हो. मैंने तो सोचा hi नहीं था तुम इतनी गरम होगी. मेरी तो साँस hi रुकने वाली थी.

रीमा : तो क्या प्यार करना सिर्फ लड़कों को hi अत है? मैं तुम्हे कितना प्यार करती हूँ ये बता नहीं सकती.

अमित : फिर तो मेरी खैर नहीं , लगता है शादी क बाद तो मुझे बीएड से उतरने नहीं डौगी.

रीमा : मुझे मरते हुए ) गंदे !!! शर्म नहीं आती

अमित : ाचा !!! अभी जो किश कर रही थी वो क्या था ? अब मुझे शर्म समझा रही हो . अभी बताता हूँ तुम्हे.

मेरे इतना कहते रीमा पीछे हटने लगी पर मैंने जल्दी से उसे बाँहों में भर लिया

रीमा : छोडो ये क्या कर रहे हो ,,, रुक जाओ उम्म्म्म

रीमा की बात पूरी होने से पहले मैंने उसके होंठ लॉक कर दिए और वो भी मुझे किश करने लगी . मैंने रीमा को अपनी बाँहों में ऐसे hi ऊपर उठा लिया और वो भी मेरे गले में बहन दाल कर मेरे से पूरी तरह चिपक गयी थी. मैं उसे ऐसे hi बाँहों में उठाये बीएड की तरफ ले गया . रीमा क नाज़ुक कोमल होंठों को किश करते हुए मैं अपने कण्ट्रोल से hi हाथ धो बैठा और उस मीठे एहसास में खो सा गया. मुझे पता hi न चला कब रीमा मुझे पलट कर मेरे ऊपर आ चुकी थी. इस बार भी किश सांस की वजह से hi टूटी .

रीमा : हूहः हहहहह क्या ,,,,,, क्या कह रहे थे ह्म्म्मम्म?

रीमा अपनी सांसे संभालती मेरे पेट पर बैठी मेरी आँखों में देख कर सवाल कर रही थी और एक हाथ से अपने होंठ साफ़ कर रही थी . मुझसे तो अपनी सांस संभल hi नहीं रही थी. ऊपर से रीमा का ऐसा रूप मुझे पागल कर रहा था.

रीमा : अभी देखती हूँ कितना स्टैमिना है तुम में , बड़े पहलवान बने फिरते हो न .

इतना कह कर रीमा फिर से ऊपर टूट पड़ी. उसकी बातों से ज़ाहिर था क वो आज मेरी बुरी हालत करने वाली थी. आज मेरे साथ ये सब बड़ा अजीब हो रहा था .मैं सोच रहा था क रीमा का पहली बार है तो वो थोड़ा दरी घबराई होगी पर यहाँ तो अब वो अपनी अदाओं से मुझे hi डरा रही थी . खैर अब मैं तो चारो खाने चित होने वाला था. रीमा ने नशीली नज़रों देखती हुई फिर से मुझे किश करने लगी. पता नहीं क्या असर था रीमा में क मैं अपने आप पर hi काबू नहीं रख प् रहा था. एक बार फिर से रीमा मेरे होंठों से hi मेरी जान निकल रही थी और मैं बस उसकी गिरफ्त में खुद को कैद महसूस कर रहा था . मुझे ऐसे लग रहा था जैसे मैं अपने हाथ पाऊँ हिला नहीं प् रहा हूँ जैसे मेरी पूरी बॉडी को लकवा hi मर गया हो. बस चल रहे थे तो मेरे होंठ और दिल वो भी रीमा क इशारे पर . एक बार फिर से मेरी सांस रुकने लगी थी की रीमा ने मुझे सांस लेने की मोहलत दी. मुझे ऐसे लगा जैसे पानी में अंतिम गोटा लगा कर निकला हूँ. मगर इस बार रीमा ने ज्यादा वक़्त नहीं दिया और मेरे होंठों पर फिर से अपने होंठ रख दिए . इस बार एक अलग hi तरह का एहसास मुझे मिला जब उसने मेरे होंठों पर बड़े hi प्यार से अपने कोमल होंठ रखे और छोटे छोटे मगर बड़े hi प्यार से किश किये. वो होंठों को कैद करने की बजाये बस चूम रही थी . उसके इस तरह चूमने से मनो मेरे जिस्म में भी ऊर्जा आने लगी और मेरे हाथ हरकत करते हुए रीमा को सहलाने लगे. फिर रीमा ने अपनी जीभ निकल कर मेरे होंठों पर फिराई और मैंने उसकी जीभ को अपने होंठों में पकड़ कर चूसना शुरू कर दिया . रीमा ने भी अपनी जीभ मेरे मुँह में दाल दी और मेरी जीभ से खेलने लगी . अब तो ऐसे लग रहा था जैसे होंठ की तरह हम दोनों की जीभ भी एक दूसरे को चुम रही थी प्यार कर रही थी . मेरे हाथ अब रीमा क कोमल जिस्म से फिसल ते हुए उसके गोल नितम्बों पर पहुँच गए और उन सॉफ्ट बॉल्स को दबाते हुए मैं ऑंखें मूंदे बस इस अलौकिक आनंद की दुनिया में सैर कर रहा था . रीमा मेरे ऊपर पूरी तरह लेट गयी थी . मैंने उसे पलट कर अपने नीचे कर दिया और उसके होंठों को चूमते हुए उसकी गर्दन पर पहुँच गया. रीमा मस्ती में आँखें बंद किये मेरे बालों में हाथ चला रही थी . उसके मुँह से इस वक़्त सिर्फ सिसकियाँ hi निकल रही थी. मेरे दोनों हाथ चलते चलते अब रीमा क ठोस उभारों पर आ गए थे और उन सख्त अनारों को अपनी हथेली में दबोचे मैं अब उसके कान की लौ को अपने डेंटन में दबा कर अपनी जीब से उसको छेड़ रहा था.

रीमा : कक्कक्क्स उम्म्म्म ये क्या कर रहे हो ककक उम्म्म्म

रीमा पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी. उसकी ज़िन्दगी का ये पहला मौका था मगर मैं इस सब में पक्का खिलाडी बन चूका था . मैंने रीमा की गर्दन पर अपने होंठों से छाप लगते हुए उसके सीने तक आ गया और कपड़ों क ऊपर से hi रीमा क एक स्तन पर अपने होंठ दबा दिए तो रीमा क हाथों की पकड़ मुझ पर सख्त हो गयी और उसका बदन अकड़ सा गया . रीमा की उँगलियों में मेरे बल खिंच गए थे. मुझे दर्द हुआ पर मैंने आराम से उसका हाथ अपने बालों से अलग किया और उसके पेट की तरफ बढ़ा. मैंने कमीज क पल्लू को हटा कर उसके नंगे पेट पर जब अपने होंठ रखे तो रीमा का पेट में कम्पन सी हुई .

रीमा : ये क्याआ कक्कक्स जादू कर रहे हो उम्म्म मम मुझे कक कुछ हो रहा है.

रीमा की उत्तेजना लगते बढ़ती जा रही थी. मगर मैं खुद को कण्ट्रोल में रख कर अब सिर्फ रीमा को मज़ा देने में लगा था. रीमा की गोरी दूध सी सफ़ेद स्किन लाल गुलाबी रंगत ले रही थी. मैंने अपने हाथ रीमा की सलवार क नाड़े पर रखे और रीमा की तरफ देखा. रीमा ने मेरे रुकने पर ऑंखें खोल कर मुझे देखा. मैंने नज़रों से hi उससे इजाज़त मांगी जिसका जवाब रीमा ने पलकों को झुका कर दिया . अगले hi पल मैंने नाडा खिंच दिया और सलवार ढीली हो गयी. मैंने सलवार को नीचे किया तो रीमा की रेड पेंटी मेरी आँखों क सामने थी. मैंने आराम से रीमा की सलवार नीचे करनी शुरू की जिसमे रीमा ने कमर उठा कर मेरा साथ दिया. सलवार को पाऊँ से निकल कर मैंने एक तरफ फेंक दिया. रीमा की गोरी चिकनी जांघें मेरी नज़रों क सामने थी. आज तक मैंने जितना क साथ भी सेक्स किया था उनमे से रीमा सबसे खूबसूरत और जवान थी. मैंने झुक कर रीमा क पीरों पर किश की और उन्हें चूमते हुए मैं ऊपर बढ़ने लगा. पहले टांगों और फिर जांघों से किश करते हुए मैं उसकी लाल पेंटी तो पहुँच गया . रीमा पाऊँ से ूँ रगड़ कर अपनी बेचैनी बर्दाश्त करने की कोशिश कर रही थी. रीमा की दोनों जांघें आपस में चिपकी हुई थी. मैंने उसकी जांघों को अलग किया तो उसकी लाल पेंटी क बीच में एक गहरा लाल घेरा बना हुआ था जो उसके छूट रास से बना था . मैंने पेंटी को दोनों तेग से पकड़ा और रीमा की तरफ देखते हुए पेंटी को भी धीरे धीरे उतरने लगा. पेंटी उतारते hi रीमा ने अपने हाथ अपनी छूट क सामने रख दिए. जैसे वो मुझसे छुपाना चाहती हो.

अमित : हाथ हटाओ

रीमा : ुँहुँणन

अमित : अब मुझसे छुपाओगी ? भूल गयी अब से सब कुछ मेरा है . अगर मेरी चीज़ मुझसे छुपाओगी तो मैं नाराज़ हो जाऊंगा.

रीमा : शर्म नहीं अति मुझे नंगी कर दोउ और अभी तक खुद कपड़ों में हो.

अमित : ऐसी बात है तो ये लो .

इतना कह कर मैंने अपनी T-shirt और पेण्ट उतर दी . अब मैं सिर्फ अंडरवियर में था. मैंने रीमा क हाथ उसकी छूट पर से हटाए तो सामने का नज़ारा देख कर मेरी पलकें झपकना भूल गयी. रीमा की छूट ऐसे थी जैसे वहां की स्किन को किसी पतली चीज़ से अंदर को दबा दिया गया हो. छूट क होंठ बिलकुल आपस में जुड़े हुए थे. बालों का कहीं कोई नामोनिशान तक न था. छूट देख कर hi पर चल रहा था क थान आज तक रीमा ने कोई छेड़छाड़ नहीं की है .

मुझे ऐसे घूरता पाकर रीमा शर्म से मरी जा रही थी और पलट कर छूट को छुपाने की कोशिश की . मगर मैंने उसे पलटने नहीं दिया. घुटनो से दोनों टांगों को मोड़ कर फैलते हुए मैंने रीमा की छूट पर झुक कर पास से उसे देखा . सच में बहुत hi प्यारी थी रीमा की छूट बिलकुल उनतोच. मैंने और करीब से देखने की कोशिश की तो एक मधुर सुगंध मेरे नथुनों से मेरे मस्तिष्क तक पहुँच गयी. रीमा की छूट से आ रही वो सुगंध जैसे नशा सी बन कर छ गयी मेरे दिमाग पे. और मेरे होंठ छूट की फांकों से जा लगे.

रीमा : आअह्हह्ह्ह्ह कक्ककक्कक्स उम्मम्मम न करो वहां कक्कक्क्स उनमममम

रीमा का जिस्म कम्पनी सा लगा और वो तड़प कर मचलने लगी . वो मेरे सर को अपनी छूट से दूर करने की कोशिश करने लगी मगर मैं तो जैसे किसी जादू में कैद सा हो गया था. मैं अपनी जीभ को लगातार अंदर घुसाने की कोशिश कर रहा था पर छूट तो ऐसे बंद थी जैसे फेविकोल लगा कर बंद किया हो. मैंने उँगलियों से छूट को खोलने की कोशिश की तो थोड़ा सा hi खोल पाया और इतने में hi अंदर की गुलाबी स्किन नज़र आने लगी. मैंने तुरंत अपनी जीभ अंदर घुसाई जो थोड़ी सी hi अंदर घुसी.

रीमा : कक्कक्कक्स आह्ह्ह्हह्ह उम्म्म्म न कककक करो आआआह्ह्ह्ह माआआआ

मैंने अपनी जीभ से छेड़ते हुए अपनी एक उंगली अंदर घुसाने की कोशिश की मगर छूट कुछ ज्यादा hi टाइट थी. रीमा की सिसकियाँ लगते बढ़ती जा रही थी. वो खुद को रोक न सकीय और छूट क अंदर से अमृत वर्षा शुरू हो गयी. मैंने छूट से बहाने वाला सारा अमृत चूस लिया. रीमा की साँसों का शोर कमरे में गूँज रहा था. उसने मेरे सर क बाल लग भाग नोच hi डाले थे. पर अब वो शांत हो रही थी. मैं उसके पास hi लेट गया . कुछ देर तक रीमा लम्बी लम्बी सांसे लेती एकदम शांत हो गयी. जब वो पूरी तरह शांत हुई तो उसने मेरी तरफ देखा. मैं उसे hi देख रहा था.

रीमा : ऐसे क्या देख रहे हो ? रुक क्यों गए ??

अमित : मज़ा आया न ,, अब कपडे पेहेन लो.

रीमा मेरी बात सुन कर झटके से उठ गयी.

रीमा : क्या मतलब ? तुमने वडा किया था न अब मुकर क्यों रहे हो?

अमित : रीमा मैं तुम्हे दर्द नहीं देना चाहता , तुम बर्दाश्त नहीं कर पाओगी .

रीमा : ज्यादा बातें मत बनाओ . मैं कुछ नहीं सुनने वाली . अपना हक़ तो मैं ले कर रहूंगी . और कुछ नहीं होता मुझे . बची नहीं हूँ मैं.

रीमा ने झट से उठाते हुए मेरे अंडरवियर को दोनों साइड से पकड़ा और खिंच कर उतर दिया . अंडरवियर उतारते hi मेरा लैंड स्प्रिंग की तरह उछलता हुआ सामने आ गया . एक बार तो रीमा की ऑंखें बड़ी हो गयी. जैसे अजूबा देख लिया हो .

अमित : देखा न ,,, इसी लिए कह रहा हूँ रहने दो. तुम झेल नहीं पाओगी.

रीमा : शह्ह्ह्ह , क्यों नहीं झेल पाऊँगी ? मन क थोड़ा एब्नार्मल है . पर जैसा भी है मेरा है. अब इसी से तो साडी ज़िन्दगी प्यार करना है मुझे. दीदी ने सही कहा था इंसान का नहीं है ये. पर जैसा भी है मेरा है. मैं भी तो देखूं ऐसी क्या बात है जो सब इतनी तारीफ करते हैं इसकी.

रीमा की बातें सुन कर मैं हैरान हो रहा था. वो ये सब मुझे समझने क लिए कह रही थी या दिखावा कर रही थी. जबकि मैं जनता था उसके बस में नहीं था इस मुसल को बर्दाश्त करना. अभी मैं रीमा की बातों पर सोच hi रहा था क रीमा ने मेरे लैंड को अपने दोनों हाथों में थम लिया. उसके दोनों हाथों की मुट्ठियों से भी लैंड बहार था. रीमा जैसे लैंड की लम्बाई नाप रही थी.

रीमा : बाप रे ,,, ये तो यहाँ तक पहुँच जायेगा.

रीमा ने अपने पेट पर हाथ रख कर बताते हुए कहा तो मुझे हंसी आ गयी

अमित : इसी लिए कहा न रहने दो. तुम्हे बहुत दर्द होगा .

रीमा : अब एक बार और बोलै न तो देख लेना , ये मुझे कुछ नहीं कहेगा , मुझे डराओ मत , समझे.

रीमा ने अपने नाज़ुक हाथों से मेरे लैंड को अछि तरह दबा दबा कर देखा और मेरी तरफ देखते हुए मेरे लैंड पर झुक गयी

अमित : अरे अरे ये क्याआआआआ

मेरी बात पूरी होने से पहले hi रीमा ने अपने नाज़ुक होंठ सुपडे पर रख दिए और चूम लिया.

रीमा : उम्म्म तो क्या सिर्फ तुम hi सब कर सकते हो? मैं भी तुम्हे वैसे hi प्यार करुँगी जैसे तुमने किया है.

इतना कह कर रीमा ने अपने होंठ खोलते हुए सुपडे को होंठों में कैद कर लिया और अंदर से जीभ से टच करने लगी. मैं तो हवा में उड़ने लगा. रीमा ऐसा कुछ करेगी मने सपने में भी नहीं सोचा था. रीमा अपनी हरकतों से मुझे हैरान कर रही थी. मुझसे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था. मैं बीएड पर छटपटाने लगा . अपने आप मेरी कमर ऊपर उठ गयी. रीमा ने एक हाथ से मेरे लैंड को पकड़ा और दूसरे हाथ से बॉल्स को पकड़ कर सहलाया तो एक झुरझुरी सी मेरी बस बस में दौड़ गयी. रीमा की हर ऐडा मुझे पागल कर रही थी.

अमित : अह्ह्ह्ह रिमाआ कक्कक्स ये क्याआ कररर रही होओओओ

रीमा : उम्म्म उम्म्म्म उम्म्म

मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मुझे लगा कहीं मैं रीमा क गले में hi लैंड न ठूस दूँ . इस लिए मैंने तुरंत रीमा को पीछे हटा दिया. रीमा मेरे ऐसा करने से मेरी तरफ देखने लगी .

रीमा : क्या हुआ ? ाचा नहीं लगा तुम्हे ?

अमित : हहहह , ये सब कहाँ से सीखा तुमने ? हहह तुम तो ऐसी बिलकुल नहीं दिखती और ये सब .

रीमा : तुम्हे ाचा नहीं लगा क्या ?? पता है मैंने कितनी पोर्न मूवीज देखि ये सब सिखने क लिए ताकि मैं भी तुम्हे उतना प्यार कर सकूँ जितना तुम मुझसे करोगे .

अमित : तुम्हे ये सब करने की ज़रूरत नहीं है.

रीमा : क्यों नहीं है? आखिर हम दोनों एक हैं न ,, तो फिर तुम करो और मैं न करूँ ये क्या बात हुई. वैसे मैंने अचे से किया न ?

अमित : ाचा ?? बहुत ाचा किया , थोड़ी देर और करती तो मैं खुद को रोक नहीं पता.

रीमा : तो रोका क्यों ? अब मैं रुकने नहीं वाली

इतना कह कर रीमा ने अपनी कमीज उतर दी और फिर अपनी रेड ब्रा भी खुद hi अपने जिस्म से अलग कर दी. ब्रा उतारते hi रीमा क 34 साइज क ठोस अनार मेरे सामने आ गए. बिलकुल दूध से सफ़ेद और उनके ऊपर गुलाबी रंगत का घेरा जिसके बीच किशमिश क जैसे नोकीले गुलाबी निप्पल थे . हम दोनों अब पूरी तरह नंगे हो चुके थे. मैं रीमा क स्तन देख hi रहा था क रीमा मेरे ऊपर गिरती चली गयी और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर फिर से किश करने लगी. उसने खुद hi मेरा हाथ पकड़ कर अपने स्तन पर रख दिया. उफ्फ्फ्फ़ क्या कोमल एहसास था. मेरे हाथ स्तनों पर लगते hi जैसे ऑटोमेटिकली चलने लगे . मैं टेनिस बॉल की तरह उसके स्तनों को दबाता हुआ उसके लबों का रास पि रहा था. और मेरा लैंड हम दोनों क जिस्म क बीच पीस रहा था. रीमा अपनी छूट को मेरे लैंड पर रगड़ने की कोशिश कर रही थी. रीमा ने एक हाथ नीचे ले जा कर मेरा लैंड पकड़ कर खुद hi छूट पर लगाया और मेरी कमर पर सीधा बैठ कर मेरी आँखों में देखने लगी .

अमित : रीमा तुम समझ क्यों नहीं रही , तुम्हे......

रीमा : शहहहहह ,,, एक लफ्ज़ भी और नहीं. तुम्हे मेरे दर्द की परवाह है मेरी फीलिंग्स की नहीं ? उफ्फ्फफ्फ्फ़ कितना बड़ा है ये अंदर कैसे जायेगा उफ्फ्फ्फ़ आईई मायआ

रीमा ने लैंड को छूट पर सेट कर क नीचे बैठने की कोशिश की तो उसे दर्द होने लगा जबकि सूपड़ा अभी छूट की फांकों पर hi फसा हुआ था.

अमित : मैंने कहा न तुम नहीं ले पाओगी .

रीमा: मैंने कहा न आज मैं इसे ले क hi रहूंगी चाहे कुछ भी हो जाये .

रीमा ने फिर से कोशिश की पर जैसे hi लैंड छूट में घुसने लगता तो उसे दर्द होता और वो रुक जाती.

अमित : हटो तुम , तुम नहीं के पाओगी.

मैंने रीमा को पलट कर नीचे कर दिया और खुद उसके ऊपर आ गया. रीमा मेरी आँखों में देख कर जानने की कोशिश कर रही थी क मैं क्या करने वाला हूँ. मैं रीमा की टांगों क बीच बैठ गया और सुपडे पर थूक लगा कर लैंड को फिर से छूट पर सेट किया और एक हाथ से लैंड पकडे हुआ एक हाथ रीमा की बगल में रख कर उसके ऊपर झुक गया. मैं जनता था रीमा को बहुत दर्द होगा और वो चिल्लायेगी इस लिए उसके ऊपर आ गया था. मैंने रीमा की आँखों में देखा तो ो भी मेरी आँखों में देख रही थी मगर उसकी आँखों में किसी तरह का दर नहीं था वो बड़े प्यार से मुझे देख रही थी.

अमित : दर्द होगा बर्दाश्त कर लेना .

रीमा : कुछ नहीं होगा मुझे , तुम बस आज मेरे अंदर समां जाओ .

मैं रीमा की बात सुन कर उसकी तरफ देख कर सोचने लगा . की वो किस हद तक मुझे चाहती है जो उसे दर्द की परवाह नहीं है जबकि मैं अंदर से दर रहा था आने वाले पल क बारे में सोच कर . रीमा ने फिर से सर हिला कर मुझे आगे बढ़ने को कहा तो मैंने लैंड पर दबाव देते हुए छूट का बंद दरवाज़ा खोलने की कोशिश की . दबाव बढ़ते बढ़ते छूट की फांके फैलने लगी और सूपड़ा बीच में फास्ट hi लैंड को सही निशाना मिल गया. अगले hi पल मैंने कमर को हल्का सा झटका दिया और लैंड छूट का किला भेदता हुआ अंदर घुस गया.

रीमा: hmmmmmmmmmm hmmmmmmmmmm

रीमा ने अपने होंठ खुद hi दबा लिए और दर्द को बर्दाश्त करते हुए उसने अपने मुँह से चीख बहार न आने दी. पर उसकी आँखों से आंसू बह निकले थे . रीमा की टाइट छूट में लैंड घुसते हुए मुझे खुद पसीना आ गया था. मैंने रीमा का चेहरा देखा तो वो दर्द को बर्दाश्त करती हुई मेरी आँखों में देख कर फिर से मुस्कुराई मगर उसकी मुस्कराहट क पीछे का दर्द मैं महसूस कर रहा था .

अमित : रीमा तुम ठीक तो हो ? मैं बहार निकल लूँ ?

रीमा : ुँहुँणन , रुको मत जब तक पूरी तरह मुझ में समां नहीं जाते .

रीमा ने ये शब्द बड़ी हिम्मत और मुश्किल से कहे थे पर वो छह रही थी क मैं पूरा लैंड घुसा दूँ जबकि मैं ऐसा नहीं चाहता था. मैंने रीमा पर झुकते हुए उसके होंठ को अपने होंठों में कास लिया . रीमा ने फ़ौरन मेरी पीठ पर अपने हाथ कास लिए . लैंड छूट में ऐसे फसा हुआ था जैसे किसी ने जमीन में किल्ला थोक दिया हो. बिलकुल भी हिलने की जगह नहीं पर मुझे आगे बढ़ना था. मैंने फिर से हल्का धक्का दे कर लैंड को और अंदर घुसाने क लिए ज़ोर लगाया और इस बार लैंड सुपडे क साथ 2 इंच और अंदर घुस गया . इस झटके क साथ hi रीमा ने मेरी पीठ पर अपने नाख़ून गाथा दिए . रीमा को बहुत दर्द हो रहा था. मैं उसे चूमते हुए वहीँ रुक गया और उसे नार्मल करने की कोशिश करने लगा. साथ hi मैंने रीमा क स्तनों का मर्दन शुरू कर दिया . कुछ पल रीमा का जिस्म ऐंठा रहा . मगर जल्दी hi वो नार्मल हो गयी. बड़ा होंसला था रीमा में .

रीमा : उम्म्म्म अब रुक ... रुकना नहीं. कक्कक्स एक hi बार में दे दो सारा दर्द उनममम

अमित : पागल हो क्या ? इससे आगे मैं नहीं करने वाला . तुम्हे इतना दर्द हो रहा है और मुझे आगे बढ़ने को कह रही हो . बस इससे आगे नहीं करूँगा .

इतना कह कर मैंने रीमा क होंठ कैद कर लिए और उसके स्तनों को दबाने लगा . मुझे अपने लैंड पर लिक्विड सा फील हो रहा था मैं समझ गया ये ज़रूर रीमा क कुंवारेपन का खून होगा. मैंने रीमा अपने साथ लगते हुए धीरे धीरे अपनी कमर हिलनी शुरू की. पहले पहले लैंड मुश्किल से हिल रहा था मगर कुछ hi देर में लैंड की जगह बन गयी और मैं रीमा को उतने hi लैंड से पेलने लगा. लगभग आधा लैंड छूट क अंदर था . रीमा थोड़ा नार्मल होकर अब आराम से लैंड को झेल रही थी. कुछ hi देर में रीमा खुद अपनी कमर उठाने लगी .

रीमा : ी लव यू उम्म्म्म करते रही कक्कक्क्स उम्म्म्म ी लव यू उम्म्म्म मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ सिर्फ तुम्हारी उम्म्म उम्म्माःह्ह्ह उम्म्म

रीमा लगातार मुझे किश करती जा रही थी और अपनी कमर उठा उठा कर लैंड को अंदर लेने की कोशिश कर रही थी . अचानक रीमा ने मुझे पलट दिया और ऐसे hi मेरे साथ चिपकी हुई मेरी ऊपर आ गयी. लैंड अभी भी छूट में था . मैं रीमा की इस हरकत को अभी समझा भी न था क रीमा सीधी हो कर लैंड क ऊपर बैठ गयी .

रीमा : मैं जानती हूँ तुम ऐसे नहीं मानोगे. अब मुझे खुद hi ये करना पड़ेगा . ाआईईईईई ममममायआ

रीमा अचानक से नीचे हुई और लैंड जो आधा hi छूट में था वो एक डैम से रीमा क बैठ जाने से लगभग पूरा अंदर चला गया. रीमा का बदन अकड़ गया उसकी आवाज़ जैसे अब गले में hi रुक गयी थी . मैंने जल्दी से रीमा को अपने ऊपर लिया कर अपने सीने से लगा लिया और उसे मसलते हुए उसका दर्द काम करने की कोशिश करने लगा .

अमित : पागल हो तुम ? ये क्या कर दिया .

रीमा : कक्कक्क्स आअह्ह्ह्हह देखा मम मैंने अह्ह्ह्ह कहा था न कक्कक्स ममम कुछ नहीं होगा मुझे आइइइइइ माआ

अमित : चुप ,, चुप बड़ी आयी कुछ नहीं होगा .

मैंने रीमा को पलट कर नीचे किया और उसके ऊपर से हटने की कोशिश की तो रीमा ने मुझे अपने साथ कास लिया .

रीमा : नं नहीं , कुछ देर ऐसे hi मेरे ऊपर रहो अह्ह्ह्हह

मैं रीमा की बात मानते हुए वैसे hi रहा और रीमा को सेहला कर उसका दर्द काम करने की कोशिश करता रहा. मेरा अब चुदाई से मन बिलकुल हैट गया था. मुझे तो बस रीमा क दर्द से बुरा लग रहा था. लैंड बुरी तरह छूट की गरम भट्टी में फसा हुआ था. जो उसकी गरमी को काम होने नहीं दे रही थी . कुछ देर बाद जब रीमा कुछ नार्मल हुई तो उसकी पकड़ मुझ पर कमज़ोर पद गयी.

रीमा : अब मैं ठीक हूँ , तुम करो .

मैंने एक नज़र रीमा को देखा और अपनी कमर हिलनी शुरू कर दी . धीरे धीरे रीमा का दर्द ख़तम हो गया और उसे अब ाचा लगने लगा.

रीमा : उम्म्म ी लव यू अमित अब मुझे बिलकुल भी उम्म्म्म दर्द नहीं हो रहा . और तेज़ करो उम्म्म

रीमा ने में होंठ चूमते हुए मस्ती में सिसकते हुए कहा. रीमा अपनी कमर उछलने लगी थी. जल्दी hi रीमा की सिसकियाँ तेज़ होती गयी और उसका बदन अकड़ गया . रीमा की छूट से गर्म पानी बहने लगा और उसने मुझे अपने हाथों और टांगों से पूरी तरह शिकंजे में कास लिया . रीमा की छूट ने भी मेरे लैंड को का लिया था . मैं भी खुद को और रोक नहीं पाया और रीमा क अंदर अपना पानी छोड़ दिया. हम दोनों की साँसों का शोर पूरे कमरे में सुनाई दे रहा था. पता नहीं कितनी देर मैं रीमा क ऊपर ऐसे hi पड़ा रहा . कुछ देर बाद मैं रीमा क ऊपर से साइड में पलट गया. रीमा ऑंखें बंद किये आराम कर रही थी. मैंने उठ कर रीमा की छूट देखि तो वहां पर खून क निशान थे जो सुख चूका था. साथ hi अंदर से सफ़ेद वीर्य रिस के बहार आ रहा था. रीमा की छूट जहाँ पहले एक लकीर जैसी नज़र आती थी अब वहां आधा इंच खुला सुराख़ था. माइन छूट को गौर से देखा तो उसके किनारे चिर गए थे. मैं जल्दी से उठा और बाथ टब में गरम पानी भर दिया. मैंने वापिस आकर रीमा को बाँहों में उठाया तो उसने अपनी ऑंखें खोल कर मुझे बड़े प्यार से देखा .

रीमा : कहाँ ले जा रहे हो ?

अमित : तुम्हारे दर्द का इलाज करने.

रीमा : किसने कहा मुझे इलाज की ज़रूरत है ? मैं तो कब से इस दर्द का इंतज़ार कर रही थी. और इतना भी दर्द नहीं हो रहा मुझे.

अमित : ाचा ?? तो ठीक है ज़रा अपने पाऊँ पर कड़ी हो क तो दिखाओ.

मैंने रीमा को ज़मीन पर खड़े होने को कहा तो पाऊँ नीचे रखते hi रीमा दर्द से कराह उठी .

रीमा : एआईईईई मायआ

अमित : हम्म अब पता चला ? अब चुप चल जो मैं करता हूँ करने दो.

मैंने रीमा को बाथ टब में लिटा दिया . गरम पानी छूट क ज़ख़्म पर लगते hi तुम करहि पर फिर उसे ाचा लगने लगा. इतने में मैंने रीमा को पैन किलर ला कर दे दी . और रीमा क पास hi बैठ गया. रीमा भी बस मेरी तरफ देखती और कभी मुस्कुराती कभी शर्माती .

अमित : अब कैसा लग रहा है ?

रीमा : अब ठीक लग रहा है .

अमित : किसने कहा था वो सब करने को? अब पता चला कितन दर्द होता है .

रीमा : इतना भी दर्द नहीं है. मुझे तो बस तुम्हारा प्यार hi फील हो रहा था . वैसे भी वो इतना भी खतरनाक नहीं है जितना सुना है. बल्कि बहुत hi प्यारा है. मैं तो हमेशा प्यार करुँगी उससे .

अमित : ाचा !!! बड़ा प्यार आ रहा है. पहले तो कह रही थी एक बार hi करना है और अब ...

रीमा : मेरा मतलब था क शादी क बाद प्यार करुँगी हमेशा. तब तक अब कुछ नहीं करेंगे हम.

अमित : अब तो मुझसे दूर रहा नहीं जायेगा .

रीमा : कहा न , नहीं तो नहीं . वैसे भी तुम्हे कौन सा कमी है . जिससे चाहे कर लेना.

अमित : कैसी लड़की हो यार . पहली लड़की देख रहा हूँ जो अपने बर्फ को शेयर कर रही है दूसरी लड़कियों क साथ .

रीमा : ये सब शादी तक क लिए है सिर्फ , समझे. ताकि तुम तर्ज़ न. शादी क बाद नहीं.

अभी मैं और बात करता उससे पहले मेर फ़ोन बजने लगा. मैंने रूम में आकर देखा तो राधा की कॉल आ रही थी मैंने उसे बहाना बना दिया और कल्पना क साथ घर जाने को कह दिया . कुछ देर बाद रीमा को भी मैं रूम में ले आया . उसको क्रीम लगाने क बाद मैंने उसे कपडे पहनाये और खुद भी पेहेन लिए . फिर रीमा ने खुद hi शीना को कॉल कर दी और वो कुछ देर में आ गयी . आते hi शीना की नज़र जब मुझसे मिली तो वो एक तक मुझे देखने लगी . मेरी नज़रें अपने आप झुक गयी पर शीना मुस्कुर दी.

शीना : भगवन करे तुम दोनों हमेशा साथ रहो और खुश रहो.

रीमा : थैंक्स दी , आपने हमारे लिए इतना अब किया .

शीना : इसमें थैंक्स कैसा , तुमने मुझे माफ़ कर दिया इतना सब होने क बाद . उसके आगे तो ये सब कुछ भी नहीं. एंड थैंक्स अमित , मैं ये तो नहीं कह सकती क मैं तुम्हे भूल जाउंगी क्यूंकि ऐसा कभी नहीं हो सकता. पर मैं रीमा क रस्ते में कभी नहीं आउंगी. हाँ इतना ज़रूर यद् रखना क अब मैं तुम्हारी बड़ी साली भी हूँ .

शीना की बात पर रीमा मुस्कुराने लगी .

रीमा : दीदी मेरी तरफ से पूरी छूट है. वैसे भी मैं अब शादी क बाद hi हाथ लगाने दूँगी . तब तक आप चाहें तो ......

अमित : ये क्या कह रही हो रीमा ?? कुछ तो सोचो . शीना ी रेस्पेक्ट यू . मैं सच में तुम्हारी दिल से इज़्ज़त करता हूँ. और तुम हमेशा मेरी अछि दोस्त रहोगी .

शीना : जानती हूँ और तुम भी हमेशा मेरे सबसे अचे दोस्त रहोगे. तुम दोनों बैठो मैं खाना लगाती हूँ. आते वक़्त मैं लेकर आयी थी .

उसके बाद शीन ने खाना लगाया और हम तीनो ने मिल कर लंच किया. फिर मैं रीमा से एक बार गले लग क मिला और शीना से भी हाथ मिला कर वापिस आ गया .



उधर एक्सीडेंट में मैनेजर नहीं बच पाया था जिस वजह से ऋतू सिंह बहुत निराश थी मगर उसे अब पूरा शक था क बलजीत राइ इसमें शामिल है वर्ण ये सब नहीं होता . ऋतू सिंह ने अब ठान लिया था क वो अब सरे उलझे हुए तार सुलझाएगी और पक्के सबूत ढूंढ कर hi बलजीत राइ पर हाथ डालेगी . मगर मॉर्निंग से ये नहीं पता था क अब उसके पीछे मला नारायण दस् पे चूका है. बलजीत राइ अब पीछे हैट गया था और अब खेल नारायण दस खेलने वाला था . जिसके लिए उसने अपने कुछ लोग भेज दिए थे मगर एक फरक था . बलजीत राइ जहाँ कमीने दिमाग से काम लेता था वहां नरयंड दस ताकत से काम लेता था .
 
कल अपडेट दूंगा भाई लोगो
 
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