अपडेट 198
‘ यहाँ कहाँ ले आयी हो मुझे ? ये तो कोई होटल नहीं है. ‘ शीना मुझे लेकर अपने एक फार्महाउस पर आ गयी थी. मैंने कार में बैठे बैठे hi शीना से पूछा
शीना : मैंने कब कहा था क हम होटल जा रहे हैं? मैंने तो बस इतना hi कहा था क हम साथ में सेलिब्रेट करेंगे. और मैं नहीं चाहती क कोई हमें डिस्टर्ब करे. आज की शाम सिर्फ मैं और तुम , तीसरा कोई नहीं . अब चलो अंदर मैंने सारा इंतज़ाम कर रखा है .
शीना कार से उतर कर अंदर की तरफ चल दी. मैं भी उसके पीछे पीछे उसकी बातों का मतलब समझने की कोशिश करता हुआ अंदर आ गया . अंदर आते hi मेरी नज़र हॉल की सजावट पर पड़ी. हर तरफ हार्ट शेप वाले बैलून्स और ग्रीटिंग कार्ड्स थे. गुलाब की पत्तियां और कांच क गिलासों में लगी कैंडल लाइट्स इस माध्यम रौशनी में बहुत hi खूबसूरत नज़ारा पेश कर रही थी. साँसों में घुलती वो इत्र की खुशबु मनो इस जगह को ख्वाबों की दुनिया बना रही थी. मैं ये सब देख रहा था और जैसे hi मेरी नज़र शीना पर पड़ी तो उसकी आँखों में भी अलग hi चमक थी . मुझे देख कर वो मुस्कुराई और मुझे बैठने का इशारा किया . मैं उसका इशारा समझ कर सोफे पर बैठ गया जिसके आगे कांच का टेबल पड़ा था और वो भी वैसे hi सजा हुआ था . शीना अंदर से एक बॉक्स ले आयी और टेबल पर रख दिया. बॉक्स ओपन किया तो उसमे एक छोटा सा केक था जो क हार्ट hi बना हुआ था .
अमित : तुमने इतना कुछ किया हुआ है. काम से काम अपने खास दोस्तों को तो बुला hi लेना चाहिए था.
शीना : ये सब खास तौर पर सिर्फ तुम्हारे लिए किया है मैंने. उस दिन मैंने केक तो कटा था पर मेरा बिलकुल भी मन नहीं था. पर आज मैं सही में अपना जन्मदिन मानना चाहती हूँ और इस बर्थडे को अपनी ज़िन्दगी का सबसे यादगार बर्थडे बनाना चाहती हूँ . इतना कह कर शीना ने एक कैंडल लाइट रोशन करते हुए हॉल की लाइट्स बुझा दी. अब सिर्फ आसपास लगी कैंडल लाइट्स की hi रौशनी थी. और इतनी रौशनी भी काफी थी शीना की खूबसूरती दिखने क लिए . शीना मेरे करीब बैठ गयी और फिर से मुझे देखा. हम दोनों इस वक़्त इतने करीब थे क दोनों का जिस्म टच कर रहा था और शीना क बदन से आ रही महक मेरी सांसों में घुल रही थी .
शीना : मैं चाहती हूँ तुम मेरे साथ इस केक को काटो.
मैंने शीना को hi देख रहा था और जैसे hi उसने ये कहा तो मैं थोड़ा हड़बड़ाया और शीना क हाथ पर अपना हाथ रख दिया जिसमे उसने छुरी पकड़ी थी. शीना ने आगे झुक कर फूल मरी और कैंडल बुझा दी.
अमित : हैप्पी बर्थडे तो यू , हैप्पी बर्थडे तो यू , हैप्पी बर्थडे तो शीना , हैप्पी बर्थडे तो यू .
शीना ने जैसे hi केक कटा तो मैंने ये गुनगुनाया जो हर कोई गुनगुनाता है बर्थडे पर. शीना ने केक का पीेछे मेरे मुँह में डाला और आधा खुद hi अपने मुँह में दाल लिया .
शीना : थैंक यू वैरी मच . तुम नहीं जानते मैं कितनी खुश हूँ क तुम आज मेरे साथ मेरा बर्थडे मन रहे हो .
अमित : इसमें थैंक्स की क्या ज़रूरत है ? वे अरे फ्रेंड्स न ,
शीना : तो लाओ मेरा गिफ्ट कहाँ है ?
अमित : ओह सॉरी यार मेरे दिमाग से एक डैम से निकल hi गया था. मैं कल पक्का तुम्हे तुम्हारा गिफ्ट दे दूंगा प्रॉमिस
शीना : ाचा hi तुम गिफ्ट नहीं बेकार आये . अब मैं अपनी मर्ज़ी का गिफ्ट लुंगी तुमसे . बोलो डोज न जो मैं मांगूंगी .
अमित : ok बताओ क्या चाहिए ?
शीना : ऐसे नहीं पहले वडा करो
अमित : ाचा वडा , अब तो बताओ क्या लेना है बर्थडे गिफ्ट पर
शीना : उम्र भर का साथ ,, अपनी आखरी साँस तक मैं सिर्फ तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ . सिर्फ तुम्हारी बन कर . मुझे अपने दिल में थोड़ी सी जगह दे दो मुझे और कुछ नहीं चाहिए .
शीना की ये बात सुन कर मैं झटके से खड़ा हो गया. मुझे तो उम्मीद hi नहीं थी वो मुझसे बर्थडे गिफ्ट में ये मांग लेगी.
अमित : ये तुम क्या कह रही हो शीना ? ये नहीं हो सकता . कभी भी नहीं .
शीना : क्यों नहीं हो सकता ? आखिर क्या कमी है मुझमे? तुम्हारे लिए मैंने खुद को बदल दिया वो सब छोड़ दिया जो तुम्हे पसंद नहीं था . अपने दोस्त छोड़ दिए यहाँ तक क अपने भाई को hi छोड़ दिया अब और क्या करूँ जिससे तुम्हे यकीन हो क मैं खुद को तुम्हारे लिए कितना बदल चुकी हूँ. तुम जो कहा मैं करुँगी कुछ भी कह कर देखो एक बार .
अमित : मुझे भूल जाओ बस इतना hi कर लो
शीना : नाम ऑंखें ) भूल जॉन ?? तुम्हे भूल जॉन ?? कितनी आसानी से कह दिया तुमने क भूल जाओ जैसे कोई छोटी सी बात हो. प्यार करती हूँ मैं तुमसे , कोई मज़ाक नहीं . आज तक मेरी ज़िन्दगी में एक भी ऐसा लड़का नहीं आया जो तुम जैसा हो . तुम्हे देखते hi मेरा दिल धड़कने लगा था पहले दिन से hi. जिस तरह तुमने मोंटी से बिना डरे पूरे कॉलेज क सामने उस पर हाथ उठा दिया था, सच कहूं तो उसी वक़्त मुझे तुमसे प्यार हो गया था . पर अपने झूठे घमंड की वजह से मैं तुम्हे अपने आगे झुकना चाहती थी. पर देखो हुआ क्या ,, मेरे दिल ने मुझे hi मजबूर कर दिया . जिस तरह तुमने मुझे उस दिन बचाया उसके बाद तो जैसे मैं मैं नहीं रही बस तुम्हारी हो गयी. बहुत लड़के मैंने देखे हैं जिनकी नज़र या मेरी दौलत या मेरे जिस्म पर hi रहती थी पर तुम पहले ऐसे शख्स दिखे जिसे न दौलत की भूख है न जिस्म की . धीरे धीरे कब तुम मेरी धड़कन बन गए मुझे खुद भी पता नहीं चला और अब तुम मुझे कह रहे हो क मैं अपनी धड़कन को भूल जॉन ? सीधा सीधा कहो न क मैं मर hi जॉन . अगर इसी से तुम्हे ख़ुशी मिलती है तो ठीक है मैं अभी खुद को ख़तम कर लेती हूँ .
इतना कह कर शीना ने टेबल से चाकू उठाया और अपनी कलाई पर लगाया . इससे पहले की वो कोई हरकत करती मैंने उसका हाथ पकड़ लिया हर चाकू छीन कर फेंक दिया .
अमित : ये क्या हरकत है ? दिमाग तो ठीक है तुम्हारा ? पागल हो गयी हो क्या ?
शीना : हाँ हाँ पागल हो गयी हूँ , तुम्हारे प्यार में पागल हो गयी हूँ . तुम्हारे सिवा और कुछ नहीं दीखता है मुझे . तुम कह रहे हो क तुम्हे भूल जॉन . ये हो नहीं सकता और तुम्हारे बगैर मैं अब रह नहीं सकती . इस लिए मुझे मर जाने दो
अमित : देखो शीना समझने की कोशिश करो , मैं तुम्हारे बारे में ऐसा नहीं सोचता.
शीना : क्या तुम किसी और से प्यार करते हो ? कौन है वो ?
अमित : देखो प्लीज ये सवाल मत पूछो. बस इतना hi कह देता हूँ क मेरी ज़िन्दगी में पहले से hi कोई है .
शीना की आँखों में पानी कुछ ज्यादा hi आ गया था जो पलकों की सीमाएं लांघ कर बहार आने लगा था. उसके चेहरे से ज़ाहिर हो रहा था क उसे बहुत दुःख पहुंचा है मेरी बात से.
शीना : क्या मुझे इतना भी हक़ नहीं क मैं उस खुशनसीब का नाम जान सकूँ ? मैं वडा करती हूँ मैं किसी से नहीं कहूँगी अगर तुम नहीं बताना चाहते किसी को तो . प्लीज ....
शीना की आँखों में याचना और दर्द देख कर मेरा मन पिघल गया और फिर उसे सच बताने से मुझे लगा वो बात को समझ जाएगी .
अमित : तुम उसे जानती हो , वो कोई और नहीं तुम्हारी बहिन रीमा है .
रीमा का नाम सुनते hi शीना की ऑंखें बड़ी हो गयी. पर दर्द अभी भी वैसे hi था चेहरे पर. फिर अचानक उसके होंठों पर मुस्कान आ गयी और वो खुद hi अपने आंसू पोछने लगी . मुझे शीना की इस हालत पर अफ़सोस भी हो रहा था क्यूंकि जाने अनजाने उसके इस दर्द की वजह मैं था .
शीना : तो फाइनली रीमा को वो मिल hi गया जो उसे मिलना चाहिए था .मैं बहुत खुश हूँ क रीमा को तुम मिले. वो सच में बहुत अछि लड़की है मुझसे कहीं अछि और प्यारी भी. रीमा रीना और चची ने बहुत दुःख देखें हैं . चाचा जी तो बचपन में hi चले गए थे मगर चची ने उन दोनों क लिए कितना कुछ सहा है . तुम उसे बहुत प्यार देना बहुत बहुत प्यार. इतना की उसके दिल में दर्द क लिए जगह hi न रहे . मेरा क्या है मैं कैसे भी कर क ज़िन्दगी बिता hi लुंगी .
इतना कहते कहते शीना की आँखों में फिर से पानी आ गया . मैंने आगे बढ़ कर उसके आंसू साफ करने की कोशिश की तो वो मेरे सीने से लग कर रोने लगी . मैंने उसे दूर हटाने की कोई कोशिश नहीं की बल्कि उसे सहलाते हुए चुप करवाने की कोशिश करने लगा .
अमित : शांत हो जाओ शीना , तुम बहुत अछि हो और खूबसूरत भी कितनी हो. देख लेना तुम्हे मुझसे भी कई गुना ाचा लड़का मिलेगा .
शीना : रट हुए ) मुझे पता था एक न एक दिन मुझे ऐसी hi कोई सजा मिलेगी मेरे और मेरी फॅमिली क बुरे कर्मो की . पर तुम ,,, वो तुम नहीं होने चाहिए थे. मुझे सब मंज़ूर था सिवाए तुम्हे खोने क. एक बार मुझे तुम्हारा प्यार मिल जाता फिर चाहे मौत भी आ जाती तो गम न था.
अमित : ऐसी बातें मत करो , देखो तुम बहुत अछि हो और तुम्हारे साथ ाचा hi होगा देख लेना .
शीना : अब और ाचा क्या हो होगा जब वो hi नहीं मिल जिसके लिए मैं सब छोड़ने को तैयार थी .
अमित : प्लीज शीना ऐसे मत कहो. मुझे ाचा नहीं लग रहा .
शीना : सीने से लगे हुए hi ) मेरी एक बात मानोगे ?? उसके बाद मैं कभी तुमसे कुछ नहीं मांगूंगी .
अमित : तुम जो कहोगी मैं करूँगा पर तुम ऐसे अब रोना बंद करो. मैं तुम्हे खुश देखना चाहता हूँ.
शीना ने अपना चेहरा पीछे किया और आंसू पांच कर मेरी आँखों में देखने लगी .
शीना : अगर तुम मुझे खुश देखना चाहते हो तो एक बार सिर्फ एक बार मुझे अपना प्यार दे दो . उसके बाद मैं कभी तुमसे कुछ नहीं मांगूंगी . मेरे दिल में सिर्फ तुम हो और कोई वो जगह नहीं ले सकता . और मैं चाहती हूँ क मेरी ज़िन्दगी का पहला वो पल सिर्फ तुम्हारे साथ हो जिसे मैं साडी उम्र यद् कर क जी सकूँ . क्या इतना कर सकते हो मेरे लिए ??
शीना ने आशा भरी निगाहों से मेरी आँखों में देखा . उसकी बात का मतलब मैं समझ रहा था पर वो जो मांग रही थी वो देना भी सही नहीं था.
अमित : तुम जानती हो तुम क्या करने को कह रही हो ? ये गलत है , मैं तुम्हारी ज़िन्दगी बर्बाद करना नहीं चाहता . और ज़रा सोचो क्या ये रीमा क साथ धोखा नहीं होगा ?
शीना : एक बार करने से धोखा तो नहीं होगा. और वैसे भी तो रीमा की बहिन होने क नाते कुछ हक़ तो मेरा भी होगा hi तुम पर . उसी रिश्ते से मुझे वो हक़ दे दो . अगर रीमा को कभी पता लगा भी तो साडी ज़िम्मेदारी मेरी होगी पर ऐसा मैं होने नहीं दूंगी . प्लीज मुझे इतना प्यार तो दे hi सकते हो न? मैं तुमसे कुछ ज्यादा तो नहीं मांग रही . सिर्फ एक बार मुझे अपना लो. उसके बाद चाहे तो कभी मुझे देखना भी मत. मैं उस एक पल को यद् कर क खुश रह लुंगी .
अमित : देखो शीना अगर हमारे बीच कुछ ऐसा हुआ तो मुझे दर है क फिर तुम किसी और को मन से अपना नहीं पाओगी .
शीना : ( मन में ) वो तो अब वैसे भी नहीं हो सकता. मेरे दिल में हमेशा तुम hi रहोगे.
शीना : कल किसने देखा है ? क्या पता किस्मत कहाँ ले जाये. मैं सिर्फ तुमसे आज मांग रही हूँ कल क्या होगा वो कोई नहीं जनता पर आज मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए अगर तुम्हारे दिल में मेरे लिए थोड़ी सी भी जगह है तो मुझे एक बार अपना प्यार दे दो तुम्हे रीमा की कसम .
शीना ने मुझे रीमा की hi कसम दे दी तो मैं हैरानी से उसकी आँखों में देखने लगा . शीना की आँखों में सिर्फ प्यार और याचना थी . वो एक निहायत hi खूबसूरत लड़की थी जो कभी हाई ऐटिटूड में रहती थी मगर अब वो बिलकुल बदल गयी थी. मुझे उसने दिल तोडना ाचा नहीं लग रहा था और अब तो उसने कसम hi दे डाली थी. शीना को जो चाहिए था उसकी कीमत शायद हम दोनों को hi चुकानी पद सकती थी पर उसे मैं और दुखी नहीं करना चाहता था.
अमित : अगर यही तुम्हारी मर्ज़ी है तो यही सही. पर इतना यद् रखना आज क बाद मैं तुम्हारी आँखों में आंसू न देखूं
शीना : खुश होते हुए ) मैं कभी तुम्हे निराश नहीं करुँगी . ी प्रॉमिस
अमित : और ये सिर्फ एक बार hi ok
शीना : मैं दोबारा कभी तुम्हे नहीं कहूँगी
शीना क चेहरे पर स्माइल आ गयी थी और आँखों में भी ख़ुशी थी. मैंने अपना एक हाथ उसकी गर्दन क पीछे रखा और अपने होंठ शीना क होंठों से मिला दिए. शीना ने तुरंत मेरे गले में बहन दाल दी और उचक कर मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड कर चूसने लगी. शीना मुझ पर हावी होने की कोशिश कर रही थी . वो मुझे जैसे पीछे को धकेल रही थी और में उसे रोके हुए था फिर उसने अपनी टंगे मेरी कमर पर बांध ली और मैंने भी उसे सहारा देते हुए अपनी गॉड में hi उठा लिया .
‘ उम्म्म उम्म्म. उम्म्म्म उम्म्म्म आआह्ह्ह्ह उम्म्म्म ी लव यू उम्म्म्म उम्म्म ी लव यू सो मच उम्म्म्म उम्म्म्म ी लव यू फ्रॉम बॉटम ऑफ़ माय हार्ट उम्म्म उम्म्म उम्म्म मेक में योर्स फॉरएवर उम्म्म्म उम्म्म्म ‘
शीना किश करते करते बीच में बोल रही थी. शीना ऐसे पेश आ रही थी जैसे ये आखिरी पल हो और उसके बाद जैसे हम मरने वाले हो . मेरे हाथ अब शीना की पीठ से नीचे उतर कर उसके नरम कूल्हों पर थे. बड़े घर की बेटी थी वो काम तो कभी किया नहीं होगा इस लिए कुछ ज्यादा hi सॉफ्ट लग रही थी और उसके नितम्भ बहुत नरम थे जो मुझे स्पंज का एहसास दे रहे थे . शीना क लॉन्ग गाउन में एक तरफ से कट था जिसकी वजह से उसकी एक तंग पूरी नंगी थी और मेरा एक हाथ अनायास hi उसकी नंगी जांघ पर चला गया. शीना की स्किन बहुत hi मुलायम और चिकनी थी जिसके ऊपर मेरा हाथ अपने आप फिसलने लगा . मैंने शीना को दीवार से लगे टेबल पर हल्का सा बिठाया और उसके हाथ दीवार से ग के किश तोड़ कर उसकी आँखों में देखा .
अमित : तुम बहुत खूबसूरत हो शीना और बहुत अछि भी . मैं तुम्हे आज वो सब दूंगा जो तुम मुझसे चाहती हो . उम्म्म्म उम्म्म्म
मैंने शीना की गर्दन पर अपने होंठ रखे तो उसके मुँह से तेज़ सिसकी निकल गयी .
शीना : कक्कक्कक्स मेक में योर्स , ी ऍम आल योर्स मेक लव तो में उम्म्म्म ककक ओह्ह्ह्हह्ह
मैंने शीना की गर्दन पर किश करते हुए वहां डेंटन से हल्का सा काट लिया जिससे शीना और भी तेज़ सिसकी . शीना क कण की लौ को मैंने अपने होंठों में भर क चूसते हुए अपनी जीभ उसके कण पर चलाई. शीना और भी ज्यादा मचलने लगी
शीना : ओह्ह्ह्हह कक्कक्क्स ऐसा कभी कक्कक्क्स कभी नहीं हुआ मेरे साथ . उफ्फफ्फ्फ़ कक्कक्स उम्म्म्म लव में लव में
मैं उसकी गर्दन क दोनों तरफ किश कर रहा था. शीना कभी मेरे तो कभी अपने बाल सेहला रही थी. साथ hi वो मेरी गर्दन और पीठ पर भी सेहला रही थी . अपनी दोनों टंगे उसने मेरी कमर पर लपेटी हुई थी. धीरे धीरे शीना की सिसकियाँ बढ़ती जा रही थी. गर्दन पर किश करते हुए मैं उसकी चेस्ट पर आया और वहां भी चूमा उसके नीचे उसके ठोस उभर थे जैसे hi मैंने वहां हाथ रख कर उन्हें दबाया तो शीन ने मेरी T-shirt दोनों हाथों से नोच hi ली.
शीना : कक्कक्कक्स इन्हे प्यार करो कक्कक्स उम्म्म कब से तरस रहे हैं ये तुम्हारे लिए कक्कक्कक्स
शीना लगातार कुछ न कुछ बोले जा रही थी. मैंने उसके टाइट बूब्स मसलने शुरू कर दिए . शीना मेरे सर को अपने बूब्स पर ले जाने की कोशिश कर रही थी .
शीना : रूम में चलो कक्कक्क्स यहाँ नहीं होगा बीएड पर चलो कक्कक्क्स ले चलो मुझे
मैंने शीना की बात मानते हुए उसके जुलाहों क नीचे हाथ डाला और अपनी गॉड में उठाये उसे रूम की तरफ ले चला. जैसे hi मैंने दरवाज़ा खोला तो रूम भी महक रहा था और बीएड पर फूल बिखरे पड़े थे यानि शीना पहले hi सब सोच क बैठी थी . मैंने उसे आराम से बीएड पर लिटा दिया और उसके ऊपर आकर फिर से उसके बूब्स प्रेस करता हुआ उसे किश करने लगा . थोड़ी देर में hi शीना ने मुझे पलट दिया और मेरे ऊपर बैठ कर मुझे किश करने लगी .
शीना : आज मुझे इतना प्यार दो क मुझे ज़िन्दगी से कोई शिकायत न रहे मुझ में समां जाओ हमेशा हमेशा क लिए उम्म्म्म
किश करने क बाद शीना मेरे ऊपर सीधी बैठ गयी और अपना वो ओने पीेछे गाउन आराम से उतर का एक तरफ फेंक दिया . शीना क बेदाग हुसैन पर सिर्फ काली ब्रा और उसी क जैसी पेंटी थी. इस कासी हुई फैंसी बे में उसके बूब्स भरा आने को मचल रहे थे . अपना हाथ पीछे ले जा कर उसने अपनी ब्रा खोली और निकल कर एक तरफ फेंक दी. ब्रा निकलते hi उसके गोर सफ़ेद दूध मेरी आँखों क सामने आ गए . एक डैम गोर चुके और उनके ऊपर गुलाबी घेरे में किशमिश जैसे निप्पल . मेरे हाथ अपने आप उन ठोस स्तनों पर पहुँच गए . जैसे hi उन नंगे स्तनों को मैंने छुआ तो शीना क मुँह से फिर से सिसकी निकली साथ में मेरे जिस्म में भी मज़े की लहर दौड़ गयी. शीना मेरे ऊपर झुक गयी और किश करने लगी . मैंने उसके होंठो को चूसते हुए उसके बूब्स दोनों हाथों में पकड़ रखे थे और फिर उसे थोड़ा सा ऊपर को सरकते हुए मैंने उसके एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया .
शीना : उम्म्म उफ्फफ्फ्फ़ लव थम सूचक थम ओह्ह्ह्ह उम्मम्मम कक्कक्क्स
मैंने कुछ देर एक स्तन को चूसा और फिर दूसरे को भी चूसा. साथ hi एक हाथ से बूब मसलता रहा . शीना अपनी कमर को मेरे पेट पर रगड़ रही थी. शीना क स्तन अकड़ कर तन गए थे जिन्हे मैंने मैंने डेंटन में दबा दबा कर अपनी जीभ से कुरेदा . शीना अपनी कमर ज़ोर ज़ोर से मेरे पेट पर रगड़ रही थी और अचानक उसका जिस्म अकड़ कर झटके खाने लगा. वो कुछ ज्यादा hi उत्तेजित हो गयी थी और सिर्फ बूब्स की चूसै से hi चरम पर पहुँच गयी. झटके कहते हुए वो लम्बी लम्बी सांसे लेती मेरे ऊपर hi गिर गयी.
शीना : हहहहहह हैहहहहह हहहहह उम्म्म्म हहहह
मैंने शीना को बीएड पर पलट दिया और उठ कर बैठ गया . शीना की ऑंखें बंद थी और काबू कभी सांसे ले रही थी. मैंने अपने कपडे निकले और उसकी टंगे खोल कर बीच में आ गया. शीना की पेंटी गीली हो चुकी थी . मैंने आराम से दोनों तरफ से पकड़ कर उसकी पेंटी को उतर दिया . शीना अब पूरी तरह मेरे सामने ने पर्दा थी. उसकी कंचन काया मेरी आँखों क सामने थी . पता नहीं वो क्या लगाती थी पर उसकी पूरी बॉडी ग्लो कर रही थी. मैंने उसकी छूट को देखा जहाँ पर बालों का नामोनिशान नहीं था . छूट भी बाकि हिस्सों की तरह दूध सी सफ़ेद थी और छूट क होंठ गुलाबी थे जो आपस में मिले हुए थे . गीले हो कर वो और भी चमक रहे थे. मैंने अपनी उँगलियों से उसे ज़रा सा खोला तो अंदर का गुलाबी भाग बता रहा था क वो अभी तक कुंवारी है. उसका शुरू से जो रूप मैंने देखा था उस हिसाब से मुझे लगा नहीं था क वो अभी तक कुंवारी होगी पर वो थी. मुझे इस बात पर हैरानी हुई.
शीना : क्या देख रहे हो ? यही न क मैं कुंवारी हूँ या नहीं ? मैंने आज तक किसी लड़के को हाथ तक नहीं लगाने दिया लोग चाहे जो मर्जी सोचते रहें पर मैं चाहती थी क मुझे वो hi हाथ लगाए जो मेरा प्यार हो . और वो तुम हो .
अमित : अभी भी सोच लो क हम जो .......
शीना : शह्ह्ह्हह्ह , और कोई बात नहीं . मुझे सिर्फ प्यार करो प्यार . इतना क फिर मौत भी आ जाये तो गम न हो .
अमित : ऐसे मत कहो , मैं चाहता हूँ तुम एक अछि ज़िन्दगी जियो . हमेशा हस्ती मुस्कुराती हुई .
शीना : मेरी हंसी मेरी मुस्कराहट सब तुम्हारे हाथ में है अब बातें मत करो .
शीना ने मुझे अपने ऊपर खींचने की कोशिश की पर मैं आगे नहीं हुआ. उसने मेरी आँखों में सवालिया नज़रों से देखा और मैंने उसे एक स्माइल दी . अगले hi पल मैं उसकी छूट क ऊपर झुकता चला गया .
शीना : नहीं वहां नहीं आआआहहहहहहह कक्कक्कक्स मम्माआआआआ ये क्याआआअह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह
शीना ने मुझे रोकने की कोशिश की पर मैं नहीं रुका और उसकी छूट की फैंको को अपने होंठों में कैद कर लिया . शीना एक डैम से मचल उठी और ज़ोर ज़ोर से सिसकने लगी . मैंने अपनी जीभ छूट में घुसाने की कोशिश की और आधी उंगली छूट क अंदर बहार करता उसकी छूट को जीभ से कुरेदने लगा.
शीना : उफ्फ्फफ्फ्फ़ मैं कक्कक्स पगलललल कक्कक्क्स उम्म्म ये क्याआ करररररर रहे होओओओओ ऊऊह्ह्ह्ह कक्कक्क्स
शीना मेरे सर को कभी हटाने की कोशिश करती कभी खुद hi छूट पर दबा देती. वो जल बिन मचलती की तरह तड़प रही थी . एक बार फिर से उसकी छूट फड़कने लगी . वो अपनी कमर उठा उठा कर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी. वो खुद को ज्यादा देर रोक नहीं पायी और फिर से झाड़ गयी.
शीना : आआह्ह्ह्हह्ह ववक्कक्स ी म सुंम्मिंग आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स मैं गयी ाःह मर गईइइइइइइइइ आअह्ह्ह्हह
शीना की छूट का गरम पानी मेरे मुँह पर गिरने लगा. ऐसे जैसे अंदर से प्रेशर से कोई नल खुल गया हो . एक बार फिर से शीना बेहाल होती लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी और ऑंखें बंद किये मदहोश हो गयी. मैंने उसकी छूट को साफ किया और उसकी टाँगें उठा कर बीच में अपनी पोजीशन ली. शीना को तो कोई होश hi नहीं थी. मैंने अपना लैंड छूट पर लगाया और सुपडे को छूट पर रगड़ने लगा. शीना की कुंवारी छूट क लिए मेरा लैंड झेलना बहुत मुश्किल होने वाला था इस लिए मैं जल्दी नहीं कर रहा था . मैंने कुछ देर जब छूट पर लैंड रगड़ता रहा और अंदर नहीं किया तो शीना ने आँखें खोली और मेरी आँखों में देखने लगी .
शीना : रुक क्यों गए ? मुझे अपनी बना लो न .
अमित : तुम्हे दर्द होगा
शीना : मेरे दर्द की परवाह मत करो . ये वो दर्द है जो उम्र भर साथ रहता है दिल की गहराई में छुपा हुआ. अब और इंतज़ार मत करवाओ. मेरी सांसों पर अपना नाम लिख दो
शीना की प्यार भरी बातें मुझ पर असर कर रही थी और मैं न चाहते हुए भी उसके प्यार क आगे झुकता जा रहा था. मैंने शीना क ऊपर झुकते हुए अपने लैंड को दबाया और एक रुकावट क बाद सूपड़ा छूट को फैलते हुए अंदर घुस गया.
शीना : आईईईई उम्मम्मम मममममम
शीना को दर्द तो हुआ पर उसने अपने होंठ ज़ोर से बंद कर लिए ताकि उसकी दर्द भरी आवाज़ सुन कर मैं रुक न जॉन. पर मैं फिर भी रुक गया क्यूंकि मैं उसे ज्यादा दर्द नहीं देना चाहता था. अभी तो सिर्फ सूपड़ा hi अंदर घुसा था क उसका दर्द से बुरा हल होने लगा था. मैंने अपने हाथ उसके ठोस स्तनों पर रखे और उन्हें थोड़ा ज़ोर से मसलने लगा ताकि उसका ध्यान छूट क दर्द से हैट जाये .
शीना : कक्कक्क्स उफ्फ्फफ्फ्फ़ उम्मम्मम कक्कक्क्स आराम से कक्कक्स
मैंने कुछ देर उसके बूब्स मसाले और वैसे hi रुका रहा. फिर मैंने झुक कर शीना क होंठ अपने होंठों में जकड लिए और अपनी कमर को आगे ठेलते हुए एक धक्का लगा दिया. इससे मेरा लैंड शीना क कुंवारेपन का दरवाज़ा तोड़ता हुआ अंदर घुस गया . शीना एक डैम से कम्प गयी और उसके नाख़ून मेरी पीठ पर ग्रह गए . होंठ मेरे होंठों में बंद होने से वो चीख तो न पायी पर वो दर्द से बेहाल हो गयी थी . मैं फिर से रुक गया और उसके बूब्स मसलने लगा. कुछ देर तक मैं उसे नार्मल करने की कोशिश करता रहा. और जब शीना की पकड़ मुझ पर ढीली हुई तो मैंने अपना लैंड ज़रा सा पीछे खिंचा. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी रबड़ क छल्ले में लैंड को ज़ोर से फंसा दिया हो. अभी सिर्फ 4 इंच hi लैंड छूट में घुसा था पर इतना भी उस कोरी छूट क लिए बहुत था. मैं धीरे धीरे लैंड को अंदर बहार कर रहा था. जब शीना का तड़पना काम हुआ तो मैंने उसके होंठ आज़ाद कर दिए
अमित : तुम ठीक तो हो शीना
शीना : दर्द में भी मुस्कुराते हुए ) हम्म्म्म , मैं ठीक हूँ कक्कक्स पहली बार है न इस लिए . तुम रुकना मत जब तक पूरी तरह मेरे अंदर समां नहीं जाते कक्कक्स
अमित : पर तुम झेल नहीं पाओगी
शीना : पता नहीं दुबारा ये वक़्त मेरे नसीब में हो या न हो .
शीना ने ये बात मेरी आँखों में देखते हुए कही. उसकी आँखों में जो दर्द था वो जिस्म से ज्यादा दिल का था. और मैं उसके उस दर्द को महसूस करता बस उसे वो देना चाहता था जो वो मुझसे चाहती थी . मैंने अपना दिल मजबूत किया और अपनी गति बढ़ाते हुए बीच में लैंड को गहरा धक्का लगा कर और अंदर पेलने लगा. साथ hi मैं उसके स्तनों का ज़ोर से मर्दन कर रहा था. ऐसे करते करते कब मेरे अंडकोष उसके चूतड़ों से जा लगे मुझे भी पता न चला पर इस आखरी धक्के में एक बार फिर से शीना ने तड़प कर मुझे अपने साथ कास लिया था.
शीना : आआआहहह माआआ आआअह्ह्ह्ह
अमित : बस हो गया शीना अब और दर्द नहीं होगा .
मैंने उसके सर को सहलाते हुए कहा. शीना दर्द में थी पर फिर भी हिम्मत दिखती हुई मुझे चूमने लगी. और फिर खुद hi उसने मुझे धक्के मरने का इशारा करते हुए अपनी कमर हिलाई
शीना : अब रुको नहीं कक्कक्स मैं अब ठीक हूंणंन्न ुण्णं उन्न्नन उन्न्नन ाःह आअह्ह्ह आअह्ह्ह ाःह
मैंने उसी बात सुनते hi अपनी कमर चलनी शुरू कर दी और उसे चूमने लगा . मैं पूरी कोशिश कर रहा था क उसे किसी तरह की कमी महसूस न हो . इस लिए उसे चिंता हुआ प्यार से कर रहा था. जल्दी hi शीना का जिस्म फिर से अकड़ गया और मुझे अपने लैंड पर उसकी छूट का गरम पानी महसूस हुआ . वो फिर एक बार बेहाल होती ऑंखें मूँद कर लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी . और मैंने उसे इस पल को एन्जॉय करने दिया. जैसे hi वो नार्मल हुई तो मेरी आँखों में देखते हुए मुझे किश करने लगी .
शीना : उम्म्म्म उम्म्म्म उम्मम्माह्ह्ह ककक उम्म्म्म उम्म्म्म ी लव यू ,,, ी लव यू उम्मम्मम ी लव यू अमित ी लव यू उम्म्म्म
बार बार ी लव यू कहती वो मुझे किश कर रही थी . मैंने फिर से अपनी कमर हिलनी शुरू कर दी और कुछ hi धक्कों में शीना अपनी कमर हिलने लगी . मैं सीधा हुआ और शीना की टंगे अपने कंधो पर रख कर धक्के मरने लगा . शीना मज़े में अब खुद hi अपने बूब्स मसलती अपने बल नोचती मज़े से कमर उठा रही थी.
शीना : आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह आह्हः आआह्ह्ह उम्म्म्म आआअह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ उम्म्म आआअह्ह्ह ी लव यू अमित ी लव यू आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह उम्म्म्म ज़ोर से करो आआह्ह्ह आआह्ह्ह
मैं शीना की टैंगो को चूमता हुआ अपनी कमर तेज़ चला रहा था . शीना मज़े में थी और अब मैं भी करीब था. शीना का एक बार फिर से पानी निकला और मैंने भी लैंड को छूट से बहार निकल कर उसके पेट क ऊपर hi अपना पानी निकलना शुरू कर दिया. लैंड की पिचकारियां उसके स्तनों तक जा कर गिर रही थी. जैसे hi मैं शांत हुआ तो उसकी बगल में बीएड पर लेट गया . हम दोनों की सांसे तेज़ी से चल रही थी. कुछ देर बाद जब मेरी सांसे नार्मल हुई तो मैंने उठा कर शीना की तरफ देखा वो ऑंखें बंद किये पड़ी थी. उसे अब दर्द होने वाला था जो उससे बर्दाश्त करना मुश्किल होने वाला था. मैंने उसकी छूट को देखा तो वो लाल हो चुकी थी. किनारों पर अभी खून लगा हुआ था और बेडशीट पर भी लाल घेरा बना हुआ था. मैं बीएड से उठा और कमरे क आत्ताच बाथरूम में घुस गया . मैंने गीज़र चला कर गर्म पानी किया और पहले अपना लैंड साफ किया फिर बाथटब में गरम पानी भर दिया. शीना अभी भी वैसे hi पड़ी थी . मैंने उसकी जांघों क नीचे अपनी बांह डाली और दूसरी उसकी पीठ क नीचे . शीना ने आँखें खोल कर मुझे एक बार देखा. मैंने उसे अपनी गॉड में उठा लिया तो उसने जल्दी से मेरे गले में बाँहों दाल ली. उसे गॉड में लिए मैं बाथरूम में आया और उसे आराम से बाथटब में लिटा दिया .
शीना : आअह्ह्ह कक्कक्क्स उईईई
शीना गरम पानी लगती hi ज़रा सा सिसकी पर जल्दी hi वो नार्मल होने लगी. मैंने उसकी छूट पर हाथ रखा तो वो फिर से सिसकी . उसे दर्द हो रहा था पर उसने मुझे रोका नहीं बल्कि मुझे चुपचाप देखती रही. मैंने उसकी छूट को अचे से मसल कर साफ किया और अंदर भी अपनी उंगली दाल कर सफाई की कोशिश की .
अमित : यहाँ पर कोई पैन किलर है क्या ??
शीना : मेरे पर्स में होगी .
अमित : चौंकते हुए ) सब पहले से hi सोच रखा था तुमने ??
शीना : शरमाते हुए ) हम्म्म ,
मैं वापिस हॉल में गया और उसका पर्स उठा कर उसने से पैन किलर ला कर उसे पानी क साथ दी.
शीना : थैंक्स , तुम सच में बहुत अचे हो बहुत केयरिंग हो . ी लव यू .
अमित : और तुम बहुत प्यारी खूबसूरत और हिम्मत वाली हो. अब यहाँ रेस्ट करो तुम्हारा दर्द जल्दी ठीक हो जायेगा .
मैं सिर्फ मुस्कुरा दिया . शीना ने दवा खा ली और मैं उसे वहीँ छोड़ कर वापिस कमरे में आ कर अपने कपडे पहन लिए. कुछ देर बाद मैं वापिस बाथरूम में गया तो शीना ऑंखें बंद किये लेती हुई थी. अब उसके चेहरे पर कहीं भी दर्द की शिकन तक न थी. मैंने कुछ देर उसका खूबसूरत चेहरे देखा और दिल में उसके बारे में सोचने लगा. कितनी पागल थी वो जो इतना कुछ कर गयी उस प्यार क लिए जो उसका कभी हो hi नहीं सकता. पर मेरे दिल में कहीं ये बात भी आ रही थी क मुझे उसे सहारा देना होगा ताकि वो आगे बढ़ सके और अपनी ज़िन्दगी ख़ुशी से जी सके .
अमित : अब कैसा लग रहा है ?
शीना : अब ठीक हूँ , ये क्या तुम ,,,, तुमने कपडे क्यों पेहेन लिए ??
अमित : तो क्या अब बिना कपड़ों क hi रहूँगा ?
शीना : काम से काम आज की रत तो मेरे साथ रुक सकते हो न
अमित : नहीं, मुझे जाना होगा . मौसी इंतज़ार कर रही होंगी. वैसे भी अब तुम्हे रेस्ट की ज़रूरत है.
शीना मेरी बात का मतलब समझ कर शर्मा गयी.
शीना : बिना कुछ किये भी तो रह सकते हैं न ? और अगर तुम चाहो तो मैं मन नहीं करुँगी .
अमित : हालत देखि है अपनी ? वैसे भी अब घर जाना hi ठीक है . वर्ण कोई बात बन जाएगी . देखो शीना तुम बहुत प्यारी हो इसी लिए मैंने तुम्हे अपना दोस्त मन था . मैं ये सब तुम्हारे साथ करना नहीं चाहता था. जितना दर्द तुम्हे हो रहा है उतना hi मेरे दिल में भी दर्द है. मैं कभी तुम्हे वो जगह नहीं दे सकूंगा जो रीमा की है . इस लिए तुम्हे आगे बढ़ाना चाहिए. हम एक नहीं हो सकते.
शीना : हो तो गए हैं ? मैंने तुम्हे अपने अंदर तक समां लिया है और अब तुम्हे कभी अपने से बहार नहीं जाने दूंगी. मेरे दिल मेरी रूह में तुम समां चुके हो . जहाँ से तुम्हे कोई नहीं निकल सकता . तुम खुद भी नहीं . रीमा की जगह मैं लेना भी नहीं चाहती बल्कि मैं खुश हूँ उसके लिए. पर थोड़ी सी जगह तो तुम्हारे दिल में मिल सकती है न ? मैं दूर से hi तुम्हे देख कर खुश रह लुंगी बस कभी मुझसे गलत मत समझना मैं दिल से तुम्हे चाहती हूँ.
शीना की भावनाओं को मैं अचे से समझ रहा था पर अफ़सोस मैं मजबूर था. मैंने आगे बढ़ कर उसे सहारा देते हुए उठाया और वापिस कमरे में ले आया. फिर उसे टॉवल से साफ कर क कपडे पहनाये. दवा का असर था शायद क उसे उतना दर्द अभी नहीं हो रहा था.
अमित : अब चलें ?
शीना : रुको अभी , मैंने हूँ दोनों क लिए डिनर का इंतज़ाम किया हुआ है. साथ में डिनर तो कर सकते हैं न ?? प्लीज
अमित : तुम न ,, ये बार बार प्लीज क्यों कहती हो ? अब इतना तो हक़ से भी कह सकती हो तुम. बैठो यहाँ मैं लगता हूँ खाना
शीना : मुस्कुराते हुए ) थैंक्स , मैं कर लुंगी
अमित : कहा न बैठो तो बैठो , एक बार में समझ नहीं अत ?
शीना मुझे देखते हुए मुस्कुरा रही थी और मैंने जल्दी से किचन में से हम दोनों क लिए खाना लगा दिया. फिर हम ने साथ में खाना खाया. शीना ने खुद मुझे अपने हाथों से खाना खिलाया और मैंने भी वैसा hi किया. शीना बहुत खुश लग रही थी. और उसे मैं खुश देखना hi छह रहा था. फिर हम दोनों वहां से निकले पर तब तक 10-30 से ऊपर टीम हो चूका था. मैंने मोबाइल चेक किया तो राधा और दिव्या मौसी क बहुत सरे मिस कॉल्स थे . साथ में रीमा की भी. मुझे तो यद् hi नहीं रहा क मैंने राधा को बताया नहीं था क मैं कब तक वापिस आऊंगा . अब फिर से मेरी वाट लगने वाली थी. शीना ने मुझे दिव्या मौसी क घर क बहार ड्राप किया और जाने से पहले एक बार फिर से मुझे किश किया. उसने फिर से मुझे ी लव यू कहा पर मैंने फिर से कोई जवाब न दिया . आखिर देता भी तो क्या . झूठी तसल्ली ???
शीना क जाते hi मैंने दरवाज़े की बेल्ल बजायी तो दरवाज़ा राधा ने hi खोला. जैसे वो दरवाज़े क पीछे hi बैठी थी मेरे इंतज़ार में.
राधा : कहाँ थे अब तक ? काम से काम फ़ोन तो उठा सकते थे ? एक बार बता hi देते कब आ रहे हो ? हर बार ऐसे hi परेशां कर देते हो . तुम्हे हमारी परवाह है क नहीं ?
अमित : सॉरी सॉरी वो क्या है न मैंने फ़ोन साइलेंट किया हुआ था और दिमाग से hi निकल गया . मैंने कहा तो था क मैं खाना खा कर hi आऊंगा . अब गुस्सा मत करो .
राधा : मुँह फूलते हुए ) क्यों न करूँ गुस्सा ? बहार वालों क लिए वक़्त है, और मेरे लिए ???
अमित : सॉरी बाबा , गलती हो गयी. अब माफ़ कार्डो न ,
‘ ये कोई वक़्त है घर आने का ? कहाँ थे अब तक ? ‘ ये आवाज़ दिव्या मौसी की थी जो सामने कड़ी थी और मुझे hi देख रही थी. उनकी आवाज़ में गुस्सा था. मैं तो वैसे hi उनके सामने आने से बचना चाहता था . पर अब वो खुद सामने कड़ी थी और गुस्से में. मुझे कल रत वाली बात यद् आ गयी. मैंने अपनी नज़रें निचे कर ली और कोई जवाब नहीं दिया .
दिव्या : चुप क्यों हो ? बोलते क्यों नहीं ?
राधा : माँ मैंने बताया तो था आपको क ये ......
दिव्या : तुम चुप रहो , मैं इससे बात कर रही हूँ . बीच में मत बोलो . बोलते क्यों नहीं ?
अमित : सॉरी मौसी
मैंने इतना hi कहा पर अपना सर नहीं उठाया.
दिव्या : चलो जाओ अब अपने कमरे में .
मौसी क इतना कहते hi मैं बिना सर उठाये सीधा अपने कमरे में गया और दरवाज़ा बंद कर क अपने बीएड पर लेट गया.
दिव्या का मन भी कल रत से शांत न था और सुबह से अमित का वो नज़रें चुराना उसको इग्नोर करना. दिव्या को ाचा नहीं लग रहा था. एक तरफ उसका दिल गदगद हो उठा था अमित क स्पर्श से . वो स्पर्श जिसे वो अब तक केवल सपनो में महसूस करती आयी थी और हकीकत में वो सपनो से भी कहीं बेहतर था. पर उसका दिमाग उसे इसके लिए गलत ठहरा रहा था. पर कहते हैं न अक्सर इंसान दिल से हर जाता है . वही हल दिव्या का था. वो बार बार अपने दिल क आगे हर जाती थी. आखिर बरसों से प्यासी और व्यथित जो थी. जिसे वो प्यार नहीं मिला था जो उसे चाहिए था. अमित का सारा दिन घर से बहार रहना और इतनी देर से आना. दिव्या को लग रहा था क कहीं अमित कल रत की वजह से खुद को दोष तो नहीं दे रहा. कहीं वो उससे दूर तो नहीं भाग रहा . ये सब सोचते हुए दिव्या अंदर hi अंदर घबरा रही थी क कहीं अमित उससे दूर न चला जाये . और जब उसने दिव्या क कॉल्स भी अटेंड न किये तो उसे और भी बुरा लगा. पर अब जिस तरह से उसने दिव्या की किसी बात का कोई जवाब न दिया और न hi कोई सफाई दी एक बार फिर से ये बात दिव्या को अंदर से तोड़ रही थी. दिव्या चाहती थी अमित उसकी आँखों में देखे उससे बात कर पर ऐसा हुआ नहीं. उल्टा वो फिर एक बार गुस्से से पेश आयी थी. अब वो अपने कमरे में खुद को hi दोष दे रही थी और उसका दिल उसे अमित क पास जाने और उससे माफ़ी मांगने को कहने लगा था . असल में उसका दिल कल की तरह फिर एक बार उसका वो स्पर्श चाहता था. पर दिव्या को तो कुछ समझ hi नहीं आ रहा था. काफी देर तक वो ऐसे hi अपने कमरे में कभी बीएड पर लेट जाती और कभी उठ कर चलने लगती. जब चैन न पड़ा तो वो अपने कमरे से बहार निकली और अमित क कमरे में घुस गयी. घडी पर वक़्त 12 से ऊपर हो रहा था