Adultery Manhoos se mahan tak - Page 26 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery Manhoos se mahan tak

सॉरी भाई लोग अपडेट आज रेडी हुआ नहीं . कल अपडेट दूंगा
 
अपडेट 193



‘ कहाँ थे अब तक ? फ़ोन क्यों नहीं मिल रहा था तुम्हारा? कहाँ गए थे ? किसके साथ गए थे? तुम्हे किसी का कोई दर है क नहीं? आज hi यहाँ आये हो और आज hi ये हरकतें . इतना बड़ा हो गया है तू क किसी का कोई दर नहीं तुम्हे ? अगर यही सब करना है तो मैं भैया से बोल देती हूँ क तुम्हे वापिस गाओं बुला ले .

घर आते hi दिव्या मौसी मुझ पर बरस पड़ी समय 10 से ऊपर हो रहा था. मुझे यही दर था क मौसी गुस्सा करेंगी और आज वो सच में गुस्सा थी. एक तरह से मुझ पर गुस्सा करना छोड़ hi दिया था उन्होंने पर आज तो वो पूरी गुस्से में मेरी क्लास लगा रही थी और मेरा कॉलेज जाना तक बंद करवाने का कह दिया. रद्द एक तरफ कड़ी ख़ामोशी से सब देख रही थी. उसकी नज़रों में मेरी लिए हमदर्दी थी.

अमित : सॉरी मौसी वो मैं अपना बैग .......

दिव्या मौसी : बहाने किसी और क सामने बनाना. दूध पीती बची नहीं हूँ मैं जो तुम्हारी बातों में आ जाउंगी. बैग लेने क्या दूसरे देश चले गए थे ? और ऐसी कौन सी जगह थी जहाँ फ़ोन नहीं चलता? तुमने जान बुझ कर hi बंद किया होगा. अपनी तो कोई परवाह है नहीं तुझे , हम लोग hi पागल हैं जो तेरे लिए परेशां होते रहते हैं.

अमित : नहीं मौसी मैं .....

दिव्या मौसी : कुछ नहीं सुन्ना मुझे , चुपचाप बैठ इधर खाना तो खाया नहीं होगा तूने. तू क्या कड़ी देख रही है. चल बैठ तू भी .

दिव्या मौसी ने राधा को भी गुस्से में झिडकते हुए बैठने को कहा और खुद किचन में चली गयी. मुझे तो सफाई का मौका भी नहीं दिया उन्होंने. कुछ ज्यादा hi गुस्से में लग रही थी. राधा भी बिना कुछ बोले चुपचाप बैठ गयी और मैं भी बैठ गया.

राधा : धीमी आवाज़ में ) कहाँ थे तुम ? फ़ोन क्यों नहीं चल रहा था तुम्हारा? देखा माँ कितने गुस्से में हैं. कब से तुम्हारा hi इंतज़ार कर रही थी और यहीं बैठी थी तब से दरवाज़े पर नज़र रखे.

अमित : सॉरी वो मुझे खुद नहीं पता ये कैसे हुआ. मैं तो एक दोस्त से मिलने गया था वहीँ टाइम लग गया और वक़्त का पता hi नहीं चला.

राधा : ऐसा कौन सा दोस्त आ गया जिसके बारे में तूने मुझे भी नहीं बताया ?

अमित : मतलब ?

राधा : मतलब मोहित से बात हुई थी मेरी पर उसने बताया क तुम उसके पास नहीं गए और नीरज भैया ने भी तुम्हे स्टेडियम क बाद नहीं देखा, तो कहाँ थे तुम ?

‘ बंद करो अपनी बातें चुपचाप खाना खाओ .’

दिव्या मौसी ने हम दोनों क आगे खाने की प्लेट रखते हुए कहा. और फिर से किचन में चली गयी . उसके बाद राधा भी चुप हो गयी. हम दोनों ने खाना ख़तम किया और फिर मैं अपना बैग लेकर अपने कमरे में चला गया. इस दौरान दिव्या मौसी ने और कोई बात नहीं की और न hi मेरे पास बैठी. मुझे ाचा नहीं लग रहा था क मेरी वजह से वो नाराज़ हैं. मेरा दिल कर रहा था क मैं दिव्या मौसी से बात करूँ और उनकी मानों पर अभी वो इतने गुस्से में थी क मेरी बात सुनने को तैयार नहीं थी. मैं काफी देर तक मौसी को किस तरह मानों ये hi सोचता रहा.

उधर दिव्या बीएड पर करवटें बदल रही थी. आज अमित इतने दोनों बाद आया था और इस बात से वो अंदर से बहुत खुश थी. रत क खाने में स्पेशलय उसने हर चीज़ अमित की पसंद की बनाई थी. पर शाम को अमित का ऐसे घर देर से आना और बिना बताये गायब रहना फ़ोन को बंद कर क . ये दिव्या को ाचा नहीं लगा था. पिछले दोनों को कुछ हुआ था वो उससे पहले hi अमित क लिए दुखी थी ऊपर से आज फिर से उसका फ़ोन बंद होने से दिव्या क दिल में अंजना सा दर बैठ गया था. उसे दर था क कहीं अमित फिर से किसी मुश्किल में न हो. चाहे अमित ने बात छुपा दी थी पर उसे शक तो था hi क करिश्मा क घर उसके साथ ज़रूर कुछ हुआ है. और आज फिर से फ़ोन बंद होना दिव्या को डरा रहा था. वो अंदर hi अंदर अमित क लिए दरी हुई थी और जब अमित सामने आया तो वो अपनी उस बेचैनी को रोक न पायी जो गुस्से की शकल में बहार आयी. चाहे उसने अमित से गुस्से में बात की पर अपने कमरे में जाते hi दिव्या फिर से बेचैन हो उठी थी. उसे अब खुद पर hi गुस्सा आ रहा था क उसने कितना गुस्सा किया अमित पर. अमित जिस तरह से बिलकुल खामोश हो गया था और दुबारा अपनी सफाई देने की भी कोशिश नहीं की ये बात दिव्या को बेचैन कर रही थी. उसे अब दर लगने लगा क कहीं अमित उसकी इस हरकत से गुस्सा हो कर यहाँ से चला hi न जाये . अगर वो उससे नाराज़ हो गया तो वो क्या करेगी. ये बात मन में आते hi दिव्या बीएड से उठी और नंगे पाऊँ hi अमित क कमरे की तरफ दौड़ी उसे देखने क लिए वो क्या कर रहा है. दिव्या ने दरवाज़े पर आकर जैसे hi दरवाज़े पर हाथ रखा तो ज़रा सी आहत हुई. दिव्या ने धीरे धीरे सावधानी से कमरे में कदम रखे तो अमित को बीएड पर लेता हुआ पाकर उसे थोड़ी तसल्ली हुई. फिर भी बेचैन मन का चैन ढूंढती हुई वो अमित क करीब आ गयी. जो इस वक़्त करवट क बल लेता हुआ सो रहा था.

दिव्या : नाम ऑंखें ) क्यों करता है ऐसा ? बोल क्या मिलता है तुझे ऐसा कर क ? तुझे समझ नहीं आती क अगर तुझे कुछ हुआ तो मैं भी खुद को संभल नहीं पाऊँगी. तू बहुत बड़ा हो गया है न झूठ बोलने लगा है सब से. पर तेरी आँखों में इस दिन भी मैंने दर्द देखा था. तू मुझसे नहीं छुपा सकता खुद को. गुस्सा न करूँ तो क्या करूँ ? तुम्हारे साथ कुछ भी बुरा नहीं सेह सकती मैं. तुझे मेरा दर्द समझ नहीं आया न? मेरा गुस्सा hi देखता है तुझे प्यार नहीं. अगर तू मुझे छोड़ कर कहीं गया तो देख लेना अपनी इस मौसी को देखन को भी तरस जाओगे तुम. भगवन करे तुझे कभी कुछ न हो , तेरी हर बाला मुझ पर आये .

अमित को सोता हुआ पाकर दिव्या ने अपने मन का गुबार खुद hi बड़बड़ाते हुए निकल दिया. उसकी आँखों से अश्रु धरा लगातार बहती जा रही थी जिसकी 2 बूँदें अमित क चेहरे पर भी गिरी थी. जाने से पहले उसने झुक कर अमित का माथा चूमा पर उसकी नज़र नहीं पड़ी अमित की आँखों क कोने से बहते हुए उस पानी पर.

मौसी क आने की आहत से hi मैंने अपनी ऑंखें बंद कर ली थी. क्यूंकि मुझे दर था क मौसी क गुस्से का सामना मैं अभी नहीं कर सकता. ऐसे में मैं कुछ भी उनसे कहता तो वो सुनती hi नहीं . इस लिए मैं सोने की एक्टिंग करता रहा. पर जब मौसी की बातें मेरे कानो में पड़ी तो मुझे एहसास हुआ वो कितनी बेचैन थी मेरी वजह से उन्हें मेरी कितनी परवाह थी. एक बार तो मेरा दिल किया क मैं उठ के उनके गले लग जॉन पर उनकी बातों में छिपा दर्द महसूस कर क मैं भी अंदर से भर गया. मेरे लिए उनके दिल में कितना प्यार था ये मुझे पता चल रहा था. और जब मेरी आँखों पर पानी की वो 2 बूँदें गिरी तो मेरी आँखों का पानी भी बहार निकल गया. मौसी तो चली गयी पर मैं देर तक जगता रहा और मौसी की कही बातें मेरे दिमाग में घूमती रही. पता नहीं कब मेरी आँख लगी.

ख्वाब में भी मुझे दिव्या मौसी आंसू बहती हुई नज़र आयी तो तड़प कर मेरी आँख खुल गयी. मैं उठ कर सीधा मौसी क कमरे में गया . दिव्या मौसी अपने बीएड पर आराम से सो रही थी. मैंने उन्हें सोते हुए देखता रहा और उनकी रत की बातें मेरे दिमाग में घूमने लगी. दिव्या मौसी माँ की हम शक्ल थी इस लिए मैं उनको देख कर hi का को यद् कर लेता था या यूँ कहें दिव्या मौसी में hi माँ नज़र अति थी जिसे मैंने अपनी होश में देखा hi नहीं था. मैं मौसी क बीएड क पास ज़मीन पर बैठ गया और उनके पाऊँ पर अपना सर रख दिया. अभी कुछ देर पैर जो ख्वाब देखा था उससे मन कुछ ज्यादा hi विचलित था. इस लिए मैं सुकून से उनके पाऊँ पर सर रख कर वहीँ बैठ गया.

जैसे hi दिव्या मौसी को अपने पाऊँ पर किसी का एहसास हुआ तो उनकी आँख खुल गयी और जब उनकी नज़र मुझ पर पड़ी तो वो एक डैम झटके से बीएड से नीचे उतरी और मुझे गले से लगा लिया.

दिव्या मौसी : चिंता में ) क्या हुआ अमित तू यहाँ क्यों बैठा है? तेरी तबियत तो ठीक है न ? क्या हुआ है ?

अमित : कुछ नहीं मौसी मैं ठीक हूँ . मैं तो आपसे माफ़ी मांगने आया था. मैं सच कहता हूँ मौसी मैंने फ़ोन बंद नहीं किया था . वो शायद वहां सिग्नल नहीं आ रहा था इस लिए ऐसा हुआ. प्लीज आप मुझे माफ़ कर दो. मैं आपको परेशां नहीं करना चाहता था. वो बातों बातों में टाइम का पता hi नहीं चला . मैं आगे से ऐसा नहीं करूँगा. जहाँ भी जाऊंगा आप को बता कर जाऊंगा . प्लीज आप मुझसे नाराज़ मत होना.

मेरी बातें सुन कर दिव्या मौसी एक तक मुझे दिखती रही और उनकी आँखों में नमी सी आ गयी. मैंने उनकी आँख में आये पानी को देख कर अपने हाथ से उनकी आँख का वो कटरा हटाना चाहा तो मौसी ने फिर से मुझे का क गले से लगा लिया .

दिव्या मौसी : मैं तुझसे कभी नाराज़ हो hi नहीं सकती मेरे बेटे. मैं चहुँ तो भी ऐसा नहीं कर सकती. तू मेरा है मेरा. मैं तुझसे दूर नहीं रह सकती. तुझसे गुस्सा कर क मैं रत भर ठीक से सो नहीं पायी. मैं तुझसे बिलकुल नाराज़ नहीं हूँ. चल उठ ऊपर बीएड पर बैठ मैं तेरे लिए चाय बना क लई हूँ. और तू कब से यहाँ बैठा था हाँ ??

अमित : बस अभी कुछ देर पहले hi आया था मौसी . आप सो रही थी तो मैंने सोचा यहीं बैठ जाता हूँ.

दिव्या मौसी स तो ज़मीन पर बैठना ज़रूरी था क्या? यहाँ ऊपर भी तो बैठ सकता था.

अमित : मौसी वो कहते हैं न क माँ क पाऊँ में जन्नत होती है तो बस वहीँ बैठा था.

दिव्या मौसी ने मेरी इस बात पर मेरा माथा चूम लिया और पूरे चेहरे पर बहुत सरे किश कर दिए. उनकी ममता ज़ोरों से मुझ पर बरस रही थी जिससे मैं खुद को निहाल समझ रहा था.

दिव्या मौसी : तू इतना प्यार करता hi मुझसे हाँ मुआअह्ह्ह मुआअह मुहाहह ....... तू सच मेरा बीटा है . मेरी दामिनी का मेरा . मुआअह मुआअह मुआअह्ह्ह .....

मुझे चूमते चूमते मौसी की आँखों से फिर पानी बहने लगा पर इस बार ये दुःख क नहीं ख़ुशी क आंसू थे.

दिव्या मौसी : तू बैठ मैं तेरे लिए चाय बना कर लायी. इतना कह कर मौसी अपना चेहरा साफ़ करती हुई मुस्कुराती हुई किचन में चली गयी. मुझे अब सुकून था . दिव्या मौसी क चेहरे की मुस्कान ने मेरे दिल पर पड़ा बोझ एक पल में हटा दिया था. कुछ hi देर में मौसी हम दोनों क लिए चाय बना लायी और हमने साथ में चाय पि. फिर मैं फ्रेश हुआ और छत पर चला गए एक्सरसाइज करने. एक्सरसाइज कर क मैं नीचे आया तो मौसी नाहा चुकी थी . उनके गीले बल महक छोड़ रहे थे. दिव्या मौसी ने मुझे आते hi दूध का गिलास थमा दिया.

दिव्या मौसी : दूध पि कर उस राजकुमारी को भी उठा देना . मैंने आवाज़ दी थी मगर उठ hi नहीं रही . तब तक मैं नाश्ता देखती हूँ .

मैं भी सीधा राधा क कमरे में गया तो उसके मासूम चेहरे पर मनमोहक मुस्कान देख कर मैं वही जैम गया. ऐसा लग रहा था जैसे परियों की राजकुमारी सपने में hi ख्वाब देख कर मुस्कुरा रही हो और मुस्कान भी ऐसी क देखने वाला दुनिया भूल जाये. मैं कुछ देर राधा क मासूम चेहरे को देखता रहा . फिर खुद को होश में लेट हुए मैं उसके पास बीएड पर बैठा और उसे आवाज़ दी . मगर राधा ने कोई रिस्पांस नहीं दिया . तो मैंने उसके चेहरे पर हाथ रखा उसे उठाने क लिए . मगर मेरे हाथ रखते hi उसकी मुस्कान गहरी हो गयी. मैं समझ गया वो जाग रही है.

अमित : ाचा तो मैडम जान बुझ कर सोने की एक्टिंग कर रही है हाँ..

मेरे ऐसा कहती hi राधा ने अपनी ऑंखें खोली और मुस्कुराती हुई लेते लेते अंगड़ाई लेने लगी .

राधा : अंगड़ाई लेते हुए) उनननननममम ,, तुम्हे पहले भी कहा था न क जब तुम यहाँ होते हो तो तुम hi मुझे जगाया करो .

अमित : ो राजकुमारी जी मैं हमेशा तो साथ नहीं रहने वाला न. इस लिए ये आदत मत डालो वर्ण मौसी किसी दिन तुम्हारी पिटाई कर देंगी देख लेना.

राधा : माँ कुछ नहीं कहेंगी वो मुझसे बहुत प्यार करती हैं. और तुम ये कैसे कह सकते हो क तुम साथ नहीं रहने वाले हाँ ? मैं तुम्हे अपने से दूर कही जाने hi नहीं दूंगी.

अमित : कल को शादी हो जाएगी तो फिर ?? फिर तो तुम्हारी सास तुम्हे ठीक करेगी देख लेना.

राधा : मेरी सास मुझसे बहुत प्यार करती है वो मुझे कुछ नहीं कहेंगी .

अमित : क्या कहा ??

राधा : वो मैं मम मेरा मतलब है क मेरी सास मुझसे बहुत प्यार करेगी न माँ की तरह. पर तुम हमेशा ऐसे hi जगाना मुझे आई समझ. अब जातो मैं भी तैयार होती हूँ तुम भी तैयार हो जाओ.

अमित : हाँ हाँ हो जाओ तैयार ससुराल जा कर तुम्हे hi मुश्किल होगी. बेचारा तुम्हारा पति पता नहीं क्या करेगा

राधा : बाथरूम में जाते हुए ) अपनी खैर करो बच्चू ये काम साडी उम्र hi करना पड़ेगा तुम्हे बुद्धू राम . उउउउउउ

मुझे जीभ दिखा कर उसने दरवाज़ा बंद कर दिया पर उसकी इस बच्चों जैसी हरकत पर मुझे हंसी आ गयी. मैं अपने कमरे में वापिस आया और नाहा कर तैयार हो गया तब तक मौसी ने नाश्ता बना दिया था. राधा भी तैयार हो कर आ गयी और हम दोनों नाश्ता करने लगे.

दिव्या मौसी : कॉलेज से सीधा घर आना तुम दोनों . कल दीपावली है तो घर में थोड़ा बहुत सजावट का काम करना पड़ेगा . साफ़ सफाई मैं कर लूंगी .

अमित : कल दीपावली है , मैं तो भूल hi गया था.

राधा : तुम्हे कुछ याद भी रहता है बुद्धू राम .

दिव्या मौसी : राधा !!! ये क्या बात है ?

राधा : सॉरी माँ पर इसे कुछ यद् रहता भी है? बस घर से बहार पता नहीं किस किस से मिलता रहता है मगर घर का कुछ पता नहीं. माँ आज छुट्टी कर लेते हैं न . आप अकेली कैसे करोगी इतना काम .

अमित : हाँ मौसी आज हम छुट्टी कर लेते हैं. आप अकेले थक जाओगी.

दिव्या मौसी : अरे इतना भी काम नहीं है. साफ सफाई hi तो करनी है. तुम लोग जल्दी आ जाना फिर जो करना हो कर लेना. अब नाश्ता करो और निकलो.

हमने जल्दी से नाश्ता किया और कॉलेज क लिए निकल गए. जब हम कॉलेज पहुंचे तो वहां का भी आज नज़ारा बदला बदला सा था . बहार गेट से hi हलकी सजावट देखने को मिल गयी. कॉलेज क साथ स्टूडेंट्स भी आज अलग hi रंग में नज़र आ रहे थे. हाथों में किताब या बैग की जगह सब फ्री हैंड hi घूम रहे थे और ऐसे ऐसे कपडे पेहेन कर आये थे जैसे किसी फंक्शन में आये हों. मैं और राधा दोनों hi हैरान हो रहे थे सब देख कर क्यूंकि ज्यादातर स्टूडेंट्स बहार hi थे जैसे क्लास लगनी hi न हो. तभी पीछे से कल्पना की आवाज़ आयी.

कल्पना : आज जल्दी में हो क्या जो वेट भी नहीं किया ? वैसे आज लगता तो नहीं क पड़े होगी तो फिर जा कहाँ रहे हो ?

कल्पना क साथ इस समय नेहा दीदी भी थी . राधा दोनों से मिली . कल्पना ने मुझसे हाथ मिलाया और दीदी ने भी मुझे मॉर्निंग विश किया और राधा क चल दी. मुझे उनका कल वाला रवैया यद् आ गया और आज भी कुछ ऐसा hi था .

अमित : वैसे आज ये सब हो क्या रहा है?

कल्पना : देख नहीं रहे कल की दिवाली आज hi मन रहे हैं.

‘ इसी लिए तो सब पटाखा और फुलझड़ियां बन कर आयी हैं . देखो कोण कोण सा पटाखा फुट ता है’ ये मीनल थी मोहित क साथ जिसने आते hi ऐसी बात कर दी क एक बार तो कल्पना भी शर्मा गयी पर अगले hi पल उसने उसे चपत लगा दी.

कल्पना : कभी तो शर्म कर लिया कर. मन क तेरा बर्फ तेरे साथ hi रहता है पर सबके सामने तो मत बोलै कर

मीनल : एआईई मरती क्यों है ? तेरे पास नहीं है बर्फ तो मैं क्या करूँ. मैंने तो पहले भी कहा था तुम दोनों एक दूसरे की नैया पर लगा दो आआह्ह्ह

मीनल की बात पूरी होने से पहले hi कल्पना ने फिर से उसकी पीठ पर एक जमा दी पर मीनल फिर भी चुप नहीं हुई.

मीनल : देख क्या रहे हो बचाओ न मुझे इस ब्रूस ली से कैसे बर्फ हो आआह्ह माँ

मीनल ने मोहित की और देख कर मदद मांगी

कल्पना : हाँ हाँ बुला ले जिसे बुलाना है आज तो तू गयी

मोहित : न बाबा मैं तो नहीं पड़ने वाला लड़कियों की लड़ाई में

मीनल : अमित यार तुम hi सम्भालो अपनी इस जंगली बिल्ली को आह्हः माँ छोड़ मुझे अपने बराबर वाले से लड़ न . तू अमित क hi काबू में आ सकती है ये hi तुझे ठीक करेगा

कल्पना : तू ऐसे नहीं मानेगी .

कल्पना ने मीनल की बाजु मरोड़ दी मैंने मीनल को चीखते देखा तो कल्पना से उसको बचाने क लिए कल्पना को पीछे से पकड़ कर उसकी पकड़ से मीनल को आज़ाद करवा दिया .

मीनल : ( कल्पना की पकड़ से निकलते हुए ) पकड़ क रखना अपनी इस ब्रूस ली को . अब बोल अब दिख डैम, निकल कर दिखा अब इसकी पकड़ से . इसी लिए कहती हूँ ये hi तेरे लिए परफेक्ट है. एक तो भला करो ऊपर से मर खाओ. मेरी मन तो आज hi तुम भी दिवाली मन लो.

मीनल आँख दबा कर कालापन को कहा तो कल्पना मेरी बाँहों में कासी हुई hi उछाल कर उसे किक मरने की कोशिश करने लगी. मीनल जल्दी से भाग गयी. मैंने मीनल को छोड़ा तो वो वहां से बिलकुल भी नहीं हटी . जबकि पहले वो खुद को छुड़ाते की कोशिश कर रही थी पर उसने मेरी पकड़ से निकलने क लिए ज़ोर नहीं खाया था एक बार भी.

‘ क्या हो रहा है ये ? लगता है दिवाली की ख़ुशी में पटाखों की जगह मीनल को hi फोड़ने वाली है लेडी डॉन’ ये बात कही थी शालू ने . उसके साथ hi शीना शिवानी और रीना भी थी. सब की सब आज कमल की बन क आयी थी. आते hi सब बरी बरी से मिले.

कल्पना : आज तो पक्का फोड़ देती उस मीनल की बची को. कुछ ज्यादा hi बोलती है .

शीना : अरे अरे इतना गुस्सा ? चिल यार आज देखो कितना ाचा दिन है . आज तो एन्जॉय करना चाहिए पड़े तो आज होगी नहीं.

शिवानी : और क्या , बस वही सजावट और फिर कैंटीन की गपशप . टीचर भी यही कुछ करने वाले हैं आज . तुम लोग ये बुक्स क्यों लेकर आये हो ? तुमको पता नहीं था ?

मैंने मोहित ने और कल्पना ने न में गर्दन हिलाई.

शीना : हमारी hi गलती है , तुम लोग तो फर्स्ट ईयर में हो तुम्हे क्या पता होगा . एनीवे आज पड़े नहीं होगी बस अपनी क्लास और ब्लॉक को सजायेंगे कुछ इंटरेस्टेड स्टूडेंट्स और बाकि सब बस ऐश करेंगे .

शालू : चलो हम लोग भी कैंटीन hi चलते हैं और तो कुछ होने से रहा.

अमित : पर राधा नेहा दीदी मीनल तो क्लास लगाने गए हैं.

रीमा : उन्हें मैं बुला कर ले अति हूँ वर्ण वो वहीँ काम में फास जाएँगी

शीना : अब तक तो फास भी गयी होंगी . तुम रहने दो मैं hi ले क अति हूँ उन्हें. वो सब यहाँ नयी हैं तो कहीं उन्हें hi काम पर न लगा दें .

इतना कह शीना शिकवणी और शालू को साथ लेकर उनसब को लेने चली गयी और हम सब कैंटीन की तरफ चल दिए .

मोहित : यार तू कल भी नहीं आया . मैंने कहा था न माँ तुम्हे यद् कर रही है . वो कल भी तुम्हारा रास्ता देखती रही .

अमित : वो यार कल टाइम hi नहीं मिला तुझे पता hi है अब प्रैक्टिस पर भी ध्यान देना है

मोहित : पर घर आने में कितना टाइम लगेगा? चल आज hi चलते हैं वैसे भी यहाँ तो आज छुट्टी hi है.

मुझे समझ नहीं आ रहा था मोहित को कैसे मन करूँ तभी मुझे रीमा की बात यद् आ गयी.

अमित : यार आज तो रीमा की माँ से मिलना था मैंने. क्यों रीमा ? अब आंटी की तबियत कैसी है ?

रीमा : अब ठीक हैं . वो कल भी तुम्हारे बारे में पूछ रही थी.

अमित : चलो पहले आंटी से मिलते हैं फिर मैं तेरे ( मोहित ) घर अत हूँ. अंकल यहीं हैं न?.

मोहित : हाँ पापा यहीं हैं पर शायद ऑफिस में होंगे आज . कल दिवाली है न तो बिजी होंगे वो तो.

अमित : हम्म चल कोई बात नहीं .

हम कैंटीन पहुंचे तो उधर शीना सबको साथ ले आयी. सब कैंटीन में जाने लगे तो मैंने नेहा दीदी को रोक लिया.

अमित : दीदी मुझे आपसे बात करनी है.

नेहा दीदी : कहो.

अमित : दीदी आप मुझसे नाराज़ हैं ?

नेहा दीदी :..........

अमित : काम से काम से इतना तो बता दीजिये क किस बात से नाराज़ हैं आप ?

नेहा दीदी : तुझे क्या फरक पड़ता है मेरे नाराज़ होने से?

अमित : ये आप क्या कह रही हैं दीदी ? आप मेरी दीदी हो आप मुझसे नाराज़ होंगी तो क्या मुझे ाचा लगेगा?

नेहा दीदी : तो तुझे यद् है मैं तेरी बहिन हूँ .

अमित : ये आप कैसी बात कर रही हैं ? प्लीज बताइये आप किस बात से नाराज़ हैं ? मैंने क्या किया hi ऐसा ?

नेहा दीदी : खुद टेंशन लेकर बैठा रहता है तब तुझे यद् नहीं आती क मैं तेरी बहिन हूँ. काम से काम मुझसे बात तो कर सकता है न. तुमने कहा था न क तू मेरा भाई है और मुझे कोई भी बात करनी हो तो मैं तुमसे करूँ. तो क्या तू मुझसे बात नहीं कर सकता? तुझे एक बार भी ख्याल नहीं आया क मैं भी यहाँ हूँ इसी कॉलेज में ? तुम राधा से बात कर लेते हो रजनी दीदी से मिल लेते हो पर मैं नहीं दिखती तुझे ? मेरे लिए तू hi तो हो मेरा भाई मेरा दोस्त भी. फिर तू hi बता जब तुझे ऐसे हालत में देखूंगी तो क्या मुझे ाचा लगेगा? तू पुछले दिनों पता नहीं कहाँ कहाँ किन उलझनों में रहा . जब तेरी खबर नहीं मिल रही रही थी तब मुझ पर क्या बीत रही थी इसकी परवाह भी है तुझे ? बहिन बोलता है पर समझता नहीं है , है न ?

नेहा दीदी की बात सुन कर मुझे एहसास हुआ क मैंने उनकी तरफ तो धुन दिया hi नहीं था. ये मेरी गलती थी , वो सच में मुझे दिल से प्यार करती थी बहिन की तरह . और मेरी वजह से वो भी टेंशन में रही होंगी. दीदी क चेहरे पर उनकी वेदना नज़र आ रही थी.

अमित : मुझे माफ़ कर दो दीदी . मुझसे सच में गलती हो गयी. ी ऍम सॉरी दीदी . अपने छोटे भाई को एक बार माफ़ कर दो . मैं दोबारा ऐसा नहीं करूँगा .

मैंने दीदी क सामने हाथ जोड़ दिए तो दीदी ने मेरे हाथ को झटका और मुझे गले लगा की आया और अगले hi पल पीछे हो गयी. उनकी आँखों में भी नमी थी जिसे उन्होंने जल्दी से साफ किया.

नेहा दीदी : माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं है तुझे बस अपनी इस बहिन को भी यद् रखा कर . मैं तुझसे कुछ ज्यादा तो नहीं मांग रही न.

अमित : ऐसी गलती फिर नहीं हॉग दीदी . चलिए अब अंदर सब हमारा इंतज़ार कर रहे होंगे .

हम दोनों अंदर आ गए जहाँ सब हंसी मज़ाक में लगे थे. कैंटीन खचाखच भरी हुई थी.

शीना : तो आज क्या प्लान है ? लेक्चर तो फ्री hi रहेंगे क्यों न बहार चलें कहीं?

नेहा दीदी : मैं नहीं जा पाऊँगी , घर पर भी तो काम करना है . दिवाली की सजावट का

राधा : हाँ दीदी मुझे भी घर जान पड़ेगा माँ ने कहा था जल्दी आना

शालू : हाँ यार मुझे भी तो खुद hi करना है सब . और है hi कौन .

अमित : मेरे ख्याल से आज रहने दो . आज अपने अपने घर पर म्हणत करते हैं. साल बाद तो ये त्यौहार अत है .

शीना : अब तुम्हे क्या करना है घर पर ? तुम भी साफ सफाई करोगे क्या ?

शिवानी : बिलकुल , तुमने क्या करना है? चलो जिसे काम है वो काम कर ले और जिसे काम नहीं है वो हमारे साथ चले .

मीनल मोहित से बात करने लगी इस बारे में और कल्पना मेरी तरफ देख रही थी जैसे पूछ रही हो क क्या करना है .

अमित : सॉरी यार मैं तो नहीं चल सकता . आंटी ( रीमा की माँ ) जब से बीमार हैं मैं एक बार भी उनसे नहीं मिला. तो मैं आज उनसे मिलने जा रहा हूँ

कल्पना : मैं भी चलती हूँ , मैं भी तो नहीं मिली आंटी से .

मीनल : हाँ यार मैं भी नहीं गयी एक बार भी .

मीनल कल्पना की बात सुन कर नेहा दीदी और राधा भी तैयार हो गयी. रीमा मेरी तरफ देखने लगी. उसे तो उम्मीद नहीं थी क सब hi तैयार हो जायेंगे. खैर उसके बाद शीना ने भी प्रोग्राम कैंसिल कर दिया . शालू और शिवानी तो घर चल गए मगर हम सब मिल कर रीमा की माँ से मिलने क लिए निकल गए. राधा अभी मेरे साथ बाइक पर hi थी. जबकि बाकि सब कल्पना शीना और मोहित की कार में बैठ गए . रीमा हमें वहां ले गयी जहाँ रुपाली थी. ये हॉस्पिटल क साथ hi बने हुए फ्लैट थे जो शायद डॉ क लिए hi थे. रीमा क साथ hi हम इस शानदार फ्लैट में पहुंचे जहाँ इस वक़्त रुपाली और रीना दोनों hi मौजूद थे . दरवाज़ा रीना ने hi खोला . रीमा ने शायद पहले hi बता दिया था इस लिए वो ज्यादा चूंकि नहीं . पर मुझ देख कर उसने नाराज़गी दिखते हुए मुँह मोड़ लिया. ये बात सिर्फ हम दोनों क hi बीच थी क्यूंकि मैं सबसे पीछे था. सब लड़कियां बरी बरी से रीना से मिली. रीना भी उनसे मिल क खुश लग रही थी. रुपाली अंदर रूम में थी तो रीमा सबको वहीँ ले गयी. मैं भी पीछे पीछे अंदर जा hi रहा था क रीना ने मेरी बाजु पकड़ कर रोक लिया.

रीना : आप कहाँ चले महाराज ? कहीं गलती से तो इधर नहीं आ गए? वैसे आप जानते भी हैं मैं हूँ कौन ?

अमित : कैसी बातें कर रही हैं आप ? मैं आप से hi तो मिलाने आया हूँ.

रीना : झूठ मत बोलो , एक बार भी इतने दिनों में मुझसे फ़ोन कर क हलचल जाना ? मैं ज़िंदा हूँ भी क नहीं . फ़ोन करना तो दूर तुमने तो मेरा फ़ोन भी नहीं उठाया. कितने फ़ोन किये थे मैंने तुम्हे .

रीना की बात सही थी उसने कई बात फ़ोन किया था पर करिश्मा दीदी की सास और ननद क चक्कर में मैंने उनका फ़ोन उठाया hi नहीं था.

अमित : रीमा ने आपको बताय नहीं क मैं बहार था? वहां बहुत साडी उलझन हो गयी थी इसी लिए मैं थोड़ा डिस्टर्ब रहा. वर्ण मैं भला ऐसा कर सकता हूँ. मेरी वजह से आपको अगर बुरा लगा तो उसके लिए माफ़ी मांगता हूँ.

रीना : रहने दो माफ़ी मांगना , मुझे ाचा नहीं लगता तुम मुझसे माफ़ी मानगो. पर तुम्हे मेरी ज़रा सी भी परवाह नहीं है क्या ??

रीना ने ये सवाल मेरी आँखों में देखते हुए पूछा . मुझे समझ में नहीं आया क मैं क्या जवाब दूँ. क्यूंकि उनका ये सवाल न गुस्से से था न मज़ाक से.

अमित : आपको क्या लगता है ? क्या मैं आपकी परवाह नहीं करता ?

मैंने सवाल क बदले में सवाल hi कर दिया तो वो ख़ामोशी से मेरी आँखों में देखने लगी जैसे मेरी नज़रों में जवाब ढूंढ रही हो.

‘ अरे तुम अभी तक यहीं खड़े हो, हमें यहाँ लेकर खुद पीछे हो. आंटी बुला रहे हैं तुम्हे ‘ कल्पना ने रूम से बहार आते हुए पूछा तो हम दोनों hi थोड़ा हड़बड़ा गए.

अमित : वो मैं रीना जी से बात कर रहा था.

कल्पना: तो अंदर आ कर लो न बात. हम भी दीदी से बातें कर लेंगे.

रीना : हाँ क्यों नहीं चलो .

हम अंदर आये तो रुपाली बीएड पर hi तेल लगा कर बैठी थी बाकि सब उसके आसपास . मुझे देखते hi रुपाली क चेहरे पर रौनक आ गयी .

रुपाली : तुम आ गए , कब से रीमा से पूछ रही थी क अमित कहाँ है आया नहीं एक बार भी इतने दिन से .

अमित : सॉरी आंटी वो मैं बहार था किसी काम से .

रुपाली : जानती हूँ इसी लिए सॉरी की ज़रूरत नहीं है. तुम आ गए इतना hi बहुत है . अरे रीना सबके लिए खाने पीने को कुछ मंगवाओ.

रीना : अभी अत hi होगा माँ मैंने पहले hi आर्डर कर दिया था .

शीना : चलो दीदी मैं आपके साथ चलती हूँ.

रीना : अरे रहने दे न तुझे क्या पड़ी है . मैं कर लुंगी न सब.

नेहा दीदी : आप अकेली क्या क्या करेंगी ? हम सब मिल कर करते हैं .

रुपाली : तुम सब लोग हॉल में बैठो वहीँ बैठ कर आराम से खाना पीना हो जायेगा और बातें भी. मैं भी अति हूँ वहीँ. अमित ज़रा मेरी बात सुन्ना.

रुपाली ने सबको जाने का कहा और मुझे अपने पास बुला लिया. बाकि सब कमरे से बहार निकल गए तो रुपाली ने मुझे अपने पास बिठा लिया .

अमित : जी कहिये क्या बात है ? आप शायद किसी बात से परेशां हैं .

रुपाली : तुम्हे कैसे पता ?

अमित : आपके चहरे से hi लग रहा है. बताइये क्या बात है ?

रुपाली : हाँ मैं थोड़ा सा परेशां हूँ . देखो तुम्हारी बात मन कर मैंने बीमारी का बहाना तो बना लिया पर ऐसा कब तक चलेगा. वो अभी दूसरे शहर गया है तो मैं अब घर जाने का सोच रही हूँ पर वो फिर वापिस आएगा तब ? मुझे अपने से ज्यादा अपनी बच्चियों की चिंता है . मैंने उस कमीने की आँखों में हवस देखि है जब वो रीना की तरफ देखता है . मैं नहीं चाहती क मेरी तरह वो रीना की ज़िन्दगी भी बर्बाद करे. प्लीज कुछ करो .

अमित : क्या वो सच में इतना गिरा हुआ है जो अपनी बेटी जैसी भतीजी को hi ऐसी नज़र से देखता है ?

रुपाली : हाँ , तुम नहीं जानते वो कितना घटिया है . मैं चाहती हूँ क रीना की जल्द से जल्द शादी करदूँ और फिर उसके बाद रीमा क लिए भी कोई न कोई रास्ता ढूंढ लुंगी पर रीना मेरी बात hi नहीं सुन रही. तुम hi उससे बात करो न.

अमित : मैं उनसे क्या कहूं ? मैं भला क्या कर सकता हूँ?

रुपाली : तुम उसे समझाओ क वो शादी कर ले. और अगर वो अभी शादी नहीं करना चाहती तो लंदन चली जाये.

अमित : लंदन ??

रुपाली : हाँ लंदन , उसे हॉस्पिटल वाले कोर्स करने क लिए लंदन भेजना चाहते हैं. अगर वो बहार चली जाएगी तो साल छे महीने तो काम से काम वो इस नरक से दूर रहेगी न. यहाँ तो मुझे दर hi लगता रहता है कहीं किसी रोज़ वो शैतान मेरी बची को कहीं .....

अमित : खुद को सम्भालिये ऐसा नहीं होगा . पर आप रीना को बहार हो क्यों भेजना चाहती हैं ? मतलब क वहां पराये देश में अकेली ??

रुपाली : वो समझदार है और डॉ है . उसे वहां मुश्किल नहीं होगी. और वहां इसकी एक फ्रेंड भी है. तुम रीना को प्लीज मन लो तो मेरा आधा भर उतर जायेगा.

अमित : ठीक है मैं बात करता हूँ पर वो मने या न ये नहीं कह सकता .

रुपाली : बिलकुल मानेगी , वो तुम्हे बहुत मानती है . वो अक्सर तुम्हारी hi बातें करती है . इतने दिनों में हम दोनों hi तो होते थे यहाँ दिन भर. तो अक्सर तुम्हारी hi बातें होती थी. वो तुम्हे मन नहीं करेगी . मुझे तो वो मन कर चुकी है अब तुम hi मेरी उम्मीद हो .

अमित : ाचा ठीक है मैं बात कर क देखता हूँ .

उसके बाद रुपाली और मैं बहार आ गए . हॉल में तो पूरी महफ़िल जमी हुई थी. खाने पिने का सामान टेबल पर सजा बुआ था कुछ पिज़्ज़ाज़ कोल्ड ड्रिंक्स और स्नैक्स . सब मज़े से लगे थे . कल्पना मीनल तो तंग खींचने में लगे थे. रुपाली भी जाकर रीमा और राधा क बीच बैठ गयी. राधा क सर पर उन्होंने प्यार से हाथ फेरा और बातें करने लगी. मैं अपने लिए बैठने की जगह देख रहा था क रुपाली फिर से बोली .

रुपाली : रीना बीटा अमित क साथ जाकर ज़रा मिठाई तो लेकर आओ . आज सबका मुँह मीठा करवाते हैं. दिवाली तो कल है पर आज सब यहाँ हैं तो आज hi खुशियां मन लो.

मीनल : ये आप ने बिलकुल ठीक कहा आंटी जी . आज hi सेलिब्रेट कर लेते हैं . और आप भी न अब ठीक हैं तो घर वापिस चलिए कब तक यहाँ अकेले रहेंगे आप दोनों ?

शीना : कल नहीं आज hi घर ले के चलूंगी मैं दोनों को. आपके बिना घर में दिल नहीं लगता .

शीना उठ कर रुपाली क गले लग गयी और रुपाली ने भी उसे प्यार से गले लगा लिया . इधर रीना मुझे अपने साथ ले कर फ्लैट से बहार आ गयी .

रीना : तो क्या कह रही थी माँ तुमसे ?

अमित : आप लंदन क्यों नहीं जा रही ? जब आपको मौका मिल रहा है और आगे बढ़ने का तो क्यों खुद को यहाँ रोक रही हैं ?

रीना : मुझे लगा hi था माँ यही कहेंगी तुमसे. मैं नहीं जाने वाली लंदन . क्या करुँगी वहां जाकर? मेरा बिलकुल भी मन नहीं है .

अमित : ज़रा सोचिये तो , आप वहां से नए तरीके सीख कर आएँगी और यहाँ लोगों का और ाचा इलाज कर सकेंगी . आपका कितना नाम होगा. लोगों को विदेशों जैसी सर्विस यहाँ मिलेगी .

रीना : क्या मेरी पर्सनल लाइफ मटर नहीं करती ?? क्या मेरी अपनी ीचा क कोई मायने नहीं हैं?

अमित : आप ऐसा क्यों सोच रही हैं ? ज़रा ये भी तो सोचिये क कितने लोगों का इससे भला होगा. आखिर आपने लोगों की सेवा क लिए hi तो ये रास्ता चुना था न ?? तो अब आप खुद को क्यों रोक रही हैं?

रीना : मेरी आँखों में देखते हुए) इस लिए क मैं भी एक इंसान हूँ और मुझे दर्द होता है. मुझे भी प्यार चाहिए . और मैं डर्टी हूँ क अगर मैं लंदन चली गयी तो मैं वो खो दूंगी जो मेरी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी तमन्ना बन चूका है .

रीमा क शब्द उसके दिल से निकल रहे थे और उसकी नज़रों में जो कशिश इस वक़्त थी वो मुझे अपनी तरफ खिंच रही थी.

अमित : कुछ भी नहीं होगा ऐसा . आप ऐसे hi दर थी हैं, और आप कौन सा हमेशा क लिए जा रही हैं . कोर्स कर क आपको वापिस hi तो आना है न. इतने टाइम में क्या हो जायेगा?

रीना : ज़िन्दगी तो एक लम्हे में hi बदल जाती है . जैसे उस दिन तुम मुझे न बचते तो शायद मैं ज़िंदा hi न होती . ज़िन्दगी का कुछ भरोसा नहीं है. और वैसे भी उम्र भर इंतज़ार कर क अगर कुछ हासिल हुआ हो तो उसे ऐसे hi तो नहीं जाने दे सकते न ??

अमित : पता नहीं आप क्या क्या सोच रही हैं . ऐसा कुछ नहीं होता है. और वैसे भी जो इंसान क भाग्य में होता है वो उससे कोई नहीं छीन सकता .

रीना : भाग्य से hi तो दर लगता है . वो क hi मेरे हक़ में नहीं रहा

अमित : तौबा , आप तो फिलोसोफर हैं . मुझे और कोई बात नहीं सुन्नी . आंटी चाहती हैं क आप लंदन जाएँ तो आपको जाना चाहिए

रीना : तुम क्या चाहते हो ?

अमित : मैं भी यही चाहता हूँ . मैं चाहता हूँ आपका नाम हो और आप एक बहुत बड़ी दे बने.

रीना : इसके बदले में तुम मुझे क्या डोज ?

अमित : मैं क्या दे सकता हूँ ?

रीना : तुम hi दे सकते हो इसी लिए तुमसे पूछ रही हूँ . बोलो डोज ?

अमित : पर मेरे पास तो ऐसा कुछ है नहीं जो आपके काम का हो

रीना : वो मुझे पता है क क्या मेरे काम का है . घबराओ मत तुमसे पैसा जायदाद नहीं मांग रही . बस वो hi मांगूंगी जो तुम दे सकते हो . बोलो डोज ?

अमित : ाचा ठीक है अगर आप लंदन जाने को तैयार हैं तो मैं भी आपको इंकार नहीं करूँगा .

रीना : खुश होते हुए ) सचहहहह !!!!! तो वडा ?

रीना ने खुश हो कर अपना हाथ आगे कर दिया तो मैंने भी उससे हाथ मिला लिया .

अमित : पक्का वडा . अब तो कोई और बात नहीं है न ?

रीना : है एक ,, एक नहीं दो

अमित : अब क्या है ?

रीना : एक तो ये क तुम मुझे छोड़ने आओगे जब मैं लंदन जाउंगी. और दूसरा ये क मुझसे फ़ोन पर बात करते रहना होगा वर्ण मैं वापिस आ जाउंगी वहां से .

अमित : बस इतनी सी बात ये तो मैं कर सकता हूँ . मैंने सोचा पता नहीं क्या मांग लेंगी आप .

रीना : ये सिर्फ मेरे बहार जाने की फीस है समझे. और जो मैंने तुमसे वडा लिया है वो मैं आकर hi तुमसे लूंगी.

अमित : ाचा ठीक है .

बातें करते करते हम मिठाई की दुकान पर आ गए जो पास में hi थी और हम बात करते करते hi वहां आ गए थे. रीना क चेहरे पर ख़ुशी साफ झलक रही थी . मिठाई लेकर जब हम वापिस आ रहे थे रो रीना ने मेरा हाथ थम रखा था . वापिस एते hi रीना ने ख़ुशी से चेहेक्ते हुए सबका मुँह मीठा करवाया. उसकी बदली हुई रंगत देख कर रुपाली रीमा और शीना हैरान थे.

शीना : क्या बात है दीदी बड़ी चहक रही हैं आप ? अभी तो कुछ देर पहले ऐसे नहीं थी आप ? ऐसा क्या हो गया इतनी देर में?

रीना : कुछ नहीं , बस दिवाली है न खुशियों का त्यौहार तो इस लिए खुश हो और अब तू भी खुश हो ये ले

रीना ने अपने हाथ शीन क मुँह मिठाई भर दी. रुपाली की नज़र मुझ पर थी और वो इशारे से पूछ रही थी क क्या बात है . मैंने आँखों से इशारा कर दिया क सब ठीक है . रीना अब रुपाली क पास पहुंची और उसके मुँह में मिठाई डालते हुए बोली .

रीना : नहीं मणि न आप ? भेज क hi रही न मुझे . लो अब मुँह मीठा करो आप भी

रुपाली ये बात सुनते hi खुश हो गयी और रीना को गले से लगा लिया . अब जाकर कहीं रीमा और शीना को कुछ कुछ समझ आया.

रीमा : माँ दीदी क्या कह रही हैं ??

रुपाली : कुछ नहीं बीटा तेरी दीदी लंदन जा रही है . यही बता रही है .

रुपाली क इतना कहते hi रीना और रीमा दोनों ने मेरी तरफ देखा. रीना की आँखों में ख़ुशी थी और रीमा की आँखों में सवाल क मैंने क्या किया है इसमें . खैर बाकि सब हो हल्ला करने लगे और सब बरी बरी से रीना को बधाई देने लगे . रुपाली उठ कर मेरे पास आयी और खुद अपने हाथों से मेरे मुँह में मिठाई भर दी.

रुपाली : नाम आँखों से ) तुम्हारा शुक्रिया कैसे करूँ ? पता नहीं इतने एहसान कैसे उतरूंगी मैं .

अमित : ऐसा मत कहिये. मैंने तो कुछ भी नहीं किया . अब आप खुद को सम्भालिये और दिवाली इस बार डबल ख़ुशी से मनाइये .

घर पर दिव्या मौसी क साथ काम करवाना था इस लिए मैंने जल्दी hi चलने का कह दिया . हालाँकि रीना मुझे ज़ोर देती रही लंच करने को पर मैंने उसे समझा दिया क मैं क्यों जा रहा हूँ. और फिर राधा को लेकर मैं घर क लिए निकल गया. बाकि सब भी चल दिए अपने अपने तरीके से . शीना और रीमा तो वहीँ रुक गयी . रीमा मुझसे बात करने की कोशिश में थी पर यहाँ पॉसिबल नहीं था. खैर हम घर पहुंचे तो दिव्या मौसी की हालत देख कर राधा घबरा गयी .



राधा : मायआ!!!!! ये क्या हुआ है आपको???
 
अपडेट 194



राधा एक डैम से घबराकर चिल्लाई तो मैं भी भाग कर उसके पीछे पीछे अंदर आ गया . राधा में मौसी को सहारा देने की कोशिश की . क्यूंकि उनसे खड़ा नहीं हुआ जा रहा था. मौसी की ये हालत देख कर मैं भी टेंशन में आ गया. एक तरफ से राधा ने उनकी बाजु अपने कंधे पर रख कर उन्हें सहारा दिया तो दूसरी तरफ से मैंने उनकी बाजु अपने कंधे पर रख ली.

अमित : चिंता से ) ये आप को क्या हो गया मौसी ? आप की ये हालत कैसे हो गयी .

दिव्या मौसी : दर्द में ) आअह्ह्ह ककक वो मैं स्टूल पर चढ़ कर पंखा साफ कर रही थीइइइइइइ आअह्ह्ह निचे गिर गयी. मुझे बिठा दो मुझे खड़ा नहीं हुआ जा रहा है .

मौसी की हालत कुछ ज्यादा hi ख़राब थी . राधा बेचारी की तो आँखों में आंसू hi आ गए थे.

अमित : राधा तुम छोड़ दो और मौसी क रूम का दरवाज़ा खोलो .

मैंने राधा को निर्देश देते हुए एक हाथ मौसी की पीठ पर और दूसरा उनकी जांघों क पीछे रख कर उन्हें अपनी गॉड में उठा लिया. मौसी ने ने जल्दी से मेरे गले में बहन डाली गिरने क दर से. मैं उन्हें आराम से उनके रूम में ले गया और बिस्टेर पर लेता दिया. मौसी दर्द से हल्का हल्का कराह रही थी.

अमित : कब लगी थी चोट आपको ? कब हुआ था ये सब ?

दिव्या मौसी : बस अभी आधा घंटा पहले .

अमित : तो आपने फ़ोन क्यों नहीं किया हमें ?

दिव्या मौसी : किया था पर शायद तुम लोग क्लास में होंगे आअह्ह्ह्ह मा

राधा ने अपना फ़ोन चेक किया तो मौसी की मिस कॉल थी . तब हम बाइक से वापिस आ रहे थे शायद इसी लिए पता नहीं लगा. मैंने तुरंत रीना को फ़ोन कर क मौसी क बारे में बताया तो वो भी जल्दी hi आ गयी और मौसी को पैन किलर का इंजेक्शन दे दिया. साथ hi उसने तूने भी दी उनकी मालिश करने क लिए . रीना राधा की वजह से ज्यादा देर नहीं रुकी . मौसी को इंजेक्शन क बाद कुछ रिलीफ मिला था. मैं होटल से जाकर खाना ले आया . राधा अभी भी मौसी क पास बैठी थी . वो कुछ ज्यादा hi टेंशन ले रही थी. मैंने उसे खाना लगाने को कहा और खुद मौसी क पास बैठ गया .

अमित : क्या ज़रूरत थी आपको अकेले ये सब करने की ? मैं कह रहा था न रुकने का पर आप मानती कहाँ हैं किसी की. हमेशा अपनी hi मर्ज़ी करती हैं .

दिव्या मौसी : मैं कौन सा कोई मुश्किल काम कर रही थी वो तो अचानक स्टूल hi फिसल गया. तुम दोनों मेरी टेंशन मत को थोड़ा आराम करुँगी तो ठीक हो जाउंगी .

अमित : थोड़ा नहीं अब आराम hi करेंगी जब तक पूरी तरह ठीक नहीं हो जाती.

तभी राधा खाना प्लेट में दाल कर वहीँ ले आयी.

राधा : बिलकुल माँ अब तुम आराम करोगी जब तक आप ठीक नहीं हो जाती. चलो थोड़ा उठ कर बैठो मैं आपको खाना खिलाती हूँ .

दिव्या मौसी : तुम दोनों ऐसे hi टेंशन ले रहे हो. कुछ नहीं मुझे ज़रा सी मोच है. डॉ ने दवा दे दी है न अब ठीक हो जाउंगी मैं. ला मैं खाना खुद खा लुंगी .

राधा : बिलकुल नहीं . आप बैठो मैं खिलाती हूँ .

राधा ने अपने हाथों से मौसी को खाना खिलाया . फिर हम दोनों ने भी खाना खाया . फिर मैंने मौसी को लिटा दिया . राधा को मैंने आराम करने उसके कमरे में भेज दिया और खुद मौसी क पास बैठ गया . मैंने डॉ रीना की दी हुई तुबे ली और मौसी क पाऊँ क पास बैठ गया

दिव्या मौसी : ये क्या कर रहा है तू ?

अमित : आपके पाऊँ में मोच है न तो वहां मालिश कर रहा हूँ. इससे आप जल्दी ठीक हो जाएँगी .

दिव्या मौसी : नहीं तू रहने दे . राधा कर देगी .

अमित : मौसी राधा से नहीं होगा . वो खुद इतनी नाज़ुक है वो क्या मालिश करेगी . मुझ पर भरोसा रखिये मैं अछि तरह मालिश करनी जनता हूँ.

दिव्या मौसी : नहीं मुझे ाचा नहीं लगेगा तुमसे ऐसे काम करवाना तुम रहने दो .

अमित : ाचा तो ये बात है. शायद आप इस लिए मन कर रही हैं क्यूंकि मैं लड़का हूँ?

दिव्या मौसी : मर खायेगा मेरे हाथों से जो ऐसी बात सोची भी तो. तू मेरा बीटा है तेरे बारे में ऐसा सोचूंगी भला ?? चल करले मालिश .

मौसी की बात सुनते hi मैंने मुस्कुराते हुए उनके पाऊँ क पास आसान जमाया और उनका पाऊँ उठा कर अपनी जांघ पर रख लिया. मैंने मौसी को जान बुझ कर ऐसा कहा था वर्ण वो मानती hi नहीं और मेरी ट्रिक कामयाब रही. मैंने मौसी क पाऊँ क जोड़ और टखने पर क्रीम लगाने क बाद मालिश शुरू कर दी. मौसी ने सदी पहनी हुई थी . एक पाऊँ मेरे हाथों में था और दूसरा बीएड पर मालिश करने से धीरे धीरे उनकी सदी थोड़ी पीछे को सरक गयी और गोरी पिंडलियाँ निर्वस्त्र हो गयी. हालाँकि मेरा पूरा ध्यान उस वक़्त केवल अपने काम में था

अमित : कैसा लग रहा है मौसी ?

दिव्या मौसी : ाचा लग रहा है . मुझे नहीं पता था तू इतनी अछि मालिश कर लेता है .

अमित : वो अखाड़े में अक्सर किसी न किसी को मोच आ जाती है न कहीं तो ये सब सिखने को मिल hi जाता है . और मुझे तो उस्ताद जो ने अचे से सिखाया है. लो ये हो गयी आपके पाऊँ की मालिश और कहाँ आपको मोच है ? बताइये अभी मालिश किये देता हूँ .

दिव्या मौसी : नहीं नहीं बस इतना हो ठीक है. और कहीं नहीं है . अब तू आराम कर.

दिव्या अमित क सवाल से इस लिए हड़बड़ा गयी थी क्यूंकि उसको जहाँ चोट महसूस हो रही थी वो उस जगह पर अमित से मालिश नहीं करवा सकती थी. वहां पर तो सिर्फ एक औरत को hi वो छूने की इजाज़त दे सकती थी .

अमित : देख लो मौसी अगर कहीं भी कोई दर्द महसूस हो रहा है तो आप बता दो . मालिश कर क सब ठीक हो जायेगा.

दिव्या मौसी : मैंने कहा न मैं ठीक हूँ. अब तू भी आराम कर.

अमित : मैं यहीं आपके पास रुकता हूँ. आप आराम करो मैं भी कर लूंगा.

मौसी मुझे कहती रही पर मैं नहीं मन और वहीँ मौसी क पास बैठ गया. मौसी को दर्द में आराम था तो वो भी कुछ देर में सो गयी और मेरी भी बैठे बैठे आँख लग गयी. पता नहीं कितनी देर मैं ऐसे hi सोता रहा . मेरी आँख खुली मौसी की कराह सुन कर.

दिव्या मौसी : आआह्ह्ह्हह कक्कक्स उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़

मैंने ऑंखें खोल कर देखा तो मौसी बीएड पर छटपटा रही थी. दर्द से उनका बुरा हल था.

अमित : क्या हुआ मौसी ? क्या हो रहा है आपको ?

दिव्या मौसी : ड़ड़ड़ड़ड़ड़ बहुत दर्द आआअह्ह हो रहा है कक्कक्कक्स जल्दी कुछ करो.

अमित : कहाँ दर्द हो रहा है मौसी ? बताइये मुझे ?

दिव्या मौसी : मेरी कमर आअह्ह्ह्ह कोई दवा दे दो मुझे आअह्ह्ह

इंजेक्शन का असर शायद ख़तम हो गया था इस लिए मौसी को अब फिर से दर्द होने लगी थी . मैंने जल्दी से राधा को जगाया और रीना को फिर से फ़ोन किया. रीना ने बताया क वो ऑपरेशन करने जा रही हुई . इस लिए अभी नहीं आ पायेगी. उसने ये भी कहा क जो मेडिसिन उसने दी है वही दूँ. ज्यादा पैन किलर इंजेक्शन भी सही नहीं है . इस लिए उनकी मालिश करो. मैं फिर से मौसी क पास गया .

अमित : मौसी आप ये मेडिसिन खा लो और बताओ क दर्द कहाँ हैं ?

जैसे तैसे मौसी को सहारा देकर मैंने उन्हें मेडिसिन दी. और फिर से लिटा दिया .

दिव्या मौसी : आअह्ह्ह्ह माँ मर गयीईइ आअह्ह्ह

अमित : मौसी बताइये दर्द कहाँ है? मालिश करेंगे तो ठीक हो जाओगी आप .

राधा : माँ बोलो न दर्द कहाँ हो रहा है ?

दिव्या मौसी : बीटा किसी को बुला लाओ बहुत ड़ड़ड़ड़ड़ ाःह

अमित : मौसी बताइये तो सही कहाँ है दर्द? मैं कर देता हूँ न मालिश

दिव्या मौसी : आअह्ह्ह नहीं तुम नहीं राधा तुम कार्डो आह्हः तुम hi कार्डो .

मैं समझ गया क ज़रूर ऐसी जगह मौसी को दर्द है जहाँ वो मुझसे मालिश नहीं करवाना चाहती. इस लिए मैंने राधा को तुबे दी और रूम से बहार चला गया. राधा कुछ देर तक मौसी की मालिश करती रही. फिर उसने दरवाज़ा खोला तो मैं अंदर गया. मौसी ने अब अपने ऊपर एक चादर डाली हुई थी.

अमित : मौसी अब कैसा लग रहा है ?

दिव्या मौसी : अब कुछ ठीक है . तुम गए नहीं ? तुम्हे जाना नहीं था खेलने ?

अमित : आज मैं कहीं नहीं जा रहा मौसी . जब तक आप अछि नहीं हो जाती मैं आपको ऐसी हालत में छोड़ कर कैसे जा सकता हूँ .

दिव्या मौसी : मेरा प्यारा बीटा . आ बैठ मेरे पास . बैठे बिठाये तुम दोनों को मुसीबत में दाल दिया मैंने.

अमित : इसमें कैसी मुसीबत ? आप भी तो हमारे लिए ये सब करती न तो क्या हमारा फ़र्ज़ नहीं है आपकी देख भल करना.

राधा : बिलकुल माँ , आप तो रोज़ hi करती हो एक दिन मैं कर लुंगी तो क्या हो जायेगा ?

दिव्या मौसी : तुझे अत hi कहाँ है जो तू करेगी? तुम ऐसा करो अपनी मौसी को फ़ोन कर क यहाँ बुला लो वो संभल लेगी.

राधा : रहने दो माँ क्यों उनकी तकलीफ दे रही हो? मैं हूँ न मैं कर लुंगी सब काम .

दिव्या मौसी : पर तुम्हे खाना बनाना कहाँ अत है अभी

राधा : रोटी तो बना hi लेती हूँ न , सभी बहार से मंगवा लेंगे.

अमित : सभी क्या रोटी भी बहार से hi के अत हूँ मैं. तुम ऐसे hi चिंता कर रही हो .

राधा : नहीं रोटी मैं बना सकती हूँ बस तुम सबकी के आना.

अमित : ाचा ठीक है . फ़िलहाल अगर चाय कॉफ़ी कुछ बना सको तो बना दो.

राधा : मैं अभी बना कर लती हूँ.

राधा खुश होती जल्दी से किचन में चली गयी. मैं और मौसी बातें करने लगे. कुछ देर में hi राधा कॉफ़ी बना लायी

राधा : कैसी बानी है ?

अमित : मज़े लेते हुए ) हम्म्म ठीक थक है कामचलाऊ

मेरी बात सुन कर राधा का चेहरा उतर गया .

दिव्या मौसी : क्यों तंग कर रहा है मेरी बची को ? अछि तो बानी है. राधा कॉफ़ी बहुत hi अछि बानी है .

राधा : आप तो कहेंगी hi. मुझे पता है ख़राब hi बानी होगी .

राधा ने मुँह बना लिया तो मुझे हंसी आ गयी

अमित : जाते हुए ) देखो मौसी कैसी लग रही है राधा जैसे अभी तो पड़ेगी. मौसी ने बिलकुल ठीक कहा कॉफ़ी बहुत hi अछि बानी है. मैं तो बस मज़ाक कर रहा था .

राधा : नहीं तुम झूठ बोल रहे हो .

अमित : अरे नहीं बाबा सच में , कॉफ़ी बहुत अछि बानी है .

राधा : तो तुम मुझे उल्लू बना रहे थे?

अमित : मैं कहाँ उल्लू बना रहा था ? उल्लू तो मेक होता है न और तुम तो फीमेल हो.

राधा : ाचा अभी बताती हूँ तुम्हे

राधा मुझे मरने क लिए आगे बरही तो मैं उठ कर भगा.

दिव्या मौसी : अरे क्या कर रहे हो तुम दोनों . मत करो लग जाएगी

राधा : मैं छोडूंगी नहीं तुम्हे , तुम होंगे उल्लू गधे .

अमित : भागते हुए ) पहले पकड़ो तो सही.

मैं भागते हुए कमरे से निकल कर दूसरे कमरे में घुस गया . राधा मेरे पीछे लगी हुई थी पर मैं उसके काबू नहीं आ रहा था . जब मैंने देखा क वो थक गयी है तो मैं खुद hi रुक गया.

अमित : हहहह हहहह थक गयी ?

राधा : हहहहह हहहहहहह हहहहहहह नहीं हूहहह अभी बताती हूँ

राधा थक चुकी थी पर हर मैंने को तैयार नहीं थी . मैंने उसे और तंग करना ठीक नहीं समझा और वहीँ खड़ा रहा. पर राधा नहीं रुको वो तो भागते हुए मुझसे टकरा गयी . मैं उसके धक्के से थोड़ा सा पीछे हुआ तो मेरी टंगे बीएड से लग गयी और मैं पीछे को बीएड पर गिर गया और राधा मेरे ऊपर. मैं बीएड पर सीधा लेट गया और राधा मेरे साइन पर . हम दोनों को सांसे कुछ उखड़ी हुई थी तो हूँ वैसे hi कुछ देर पड़े रहे. जब हमारी सांसे कुछ संभाली तो मुझे अपने ऊपर राधा क नरम मुलायम जिस्म का एहसास हुआ. वो बहुत hi नाज़ुक कोमल थी और वैसे भी हलकी फिक्की काया की मालकिन थी. मुझे उसका ज़रा भी वज़न महसूस नहीं हो रहा था पर उसका नरम एहसास मुझे एक अलग hi फीलिंग दे रहा था. मैं आँखें बंद किये लेता था क मुझे एहसास हुआ मेरे हाथ राधा की पीठ पर चल रहे हैं. राधा अभी भी ख़ामोशी से मेरे ऊपर पसरी हुई थी . एक डैम से मैं होश में आया और मैंने रद्द को अपने ऊपर से पलटा दिया . क्यूंकि मुझे अपने दिल में हलचल महसूस हो रही थी. राधा को मैंने जैसे hi बीएड पर पलटाया तो वो बोल उठी .

राधा : क्या हुआ ??

अमित : कुछ नहीं , अब क्या मेरे ऊपर hi पड़ी रहोगी ? पता भी है कितनी मोती हो गयी हो तुम और भरी भी .

राधा : क्या कहा मोती ? तुम होंगे मोठे कद्दू सांड

राधा फिर से मेरे ऊपर को पलटी और मेरा गाला दबाने लगी . मैंने उसके हाथ अपने गले से हटते हुए पलट दिया और अब मैं उसके ऊपर था. अनजाने में एक और गलती मुझसे हो गयी. मैं राधा क ऊपर हुआ तो राधा की दोनों टांगों क बीच आ गया और ये पोजीशन ऐसी थी जैसे सेक्स क दौरान होती है. एक पल में hi मेरी धड़कने बढ़ गयी. राधा मेरे नीचे डाब सी गयी थी कहाँ वो बेचारी फूलों सी नाज़ुक कहाँ मैं एक फौलादी जिस्म का मालिक . राधा एक डैम से खामोश हो गयी . हम दोनों hi खामोश थे मगर हमारी धड़कने शोर कर रही थी. राधा और मेरी नज़रें मिली तो हम एक दूसरे को hi देखने लगे. मैं खुद को रोक नहीं प् रहा था . राधा क साथ अक्सर hi मैं अपने आपको ऐसी सिचुएशन में पता था जहाँ मैं किसी अदृश्य शक्ति क मायाजाल में फास जाता था. राधा भी कोई हरकत नहीं कर रही थी और न hi मैं . मुझे ऐसे लगा जैसे कोई चुम्बक मुझे खिंच रही है और मैं राधा क ऊपर झुकता चला गया . राधा क होंठ फफक रहे थे जो मुझे बुला रहे थे. अभी मैं उसके होंठों तक पहुँच hi रहा था क दिव्या मौसी की तेज आवाज़ हम दोनों क कानों में पड़ी और मैं होश में आया . एक डैम से मैं राधा क ऊपर उठा और बिना राधा की तरफ देखे जल्दी जल्दी कमरे से निकल कर दिव्या मौसी की तरफ दौड़ा.

अमित :( मन में ) बचा लिया भगवन वर्ण आज मुझसे बहुत बड़ी गलती हो जाती.

राधा अभी तक बीएड पर वैसे hi पड़ी थी. उसे तो समझ hi नहीं आ रहा था जो अभी दोनों क बीच हुआ. उसने भी वो खिचाव महसूस किया था जो अमित ने महसूस किया था. एक तरफ वो उस बात से दर रही थी जो होने जा रही थी वहीँ दूसरी तरफ उसका दिल ख़ुशी से झूम भी उठा जब अमित उसे किश करने वाला था पर ऐन मौके पर वो रुक गया और उसके सरे अरमान धरे क धरे रह गए .

राधा ( मन में ) क्या सचमुच वो मुझे ........ ,, फिर रुक क्यों गया ? मुझ पर है क्यों नहीं जताता ?? बुढ़ऊओऊ

खुद hi मन में सोचती वो मुस्कुरा उठी और अपनी धड़कनो को संभालती हुई उठ कर जल्दी से बाथरूम में घुस गयी और मुँह पर पानी मर कर अपनी हालत ठीक की .

अमित : क्या हुआ मौसी ? आप बुला रही थी ?

दिव्या मौसी : मैं यहाँ बिस्टेर पर पड़ी हूँ तुम लोग उधम मचा रहे हो. चलो बैठो यहाँ आराम से , और कहाँ है वो ? बुलाओ उसे भी .

अमित : अरे नहीं मौसी ऐसी कोई बात नहीं वो तो बस थोड़ा सा मज़ाक कर रहा था मैं.

दिव्या मौसी : पर वो है कहाँ ?

तभी राधा भी कमरे दाखिल हुई. उसने एक नज़र मुझे देखा और सीधा मौसी क पास आ गयी .

राधा : मैं तो यही हूँ माँ , मैं कहाँ जाउंगी ?

दिव्या मौसी : इतनी बड़ी हो गयी है फिर भी ज़रा सा मज़ाक नहीं समझती. ये तो तुझे जान बुझ कर छेड़ रहा था और तू लग गयी पीछे

राधा : माँ मैं खाने की तयारी करती हूँ . आप ने जो खाना है वो मंगवा लो.

इतना कह कर राधा रूम से बहार निकला गयी और जाते जाते तिरछी नज़रों से मुझे देख रही थी. मुझे लगा कहीं वो मुझसे नाराज़ तो नहीं पर मैं उससे इस बारे में बात करने की भी हिम्मत नहीं कर प् रहा था. खैर उसके बाद कुछ देर मैंने दिव्या मौसी से बातें की और फिर होटल से सभी लेने चला गया डिनर क लिए. इस दौरान मेरी मंजू म से भी फ़ोन पर बात हुई ुर रीमा से भी मैंने दोनों को बता दिया दिव्या मौसी क बारे में.

करते करते रत हो गयी राधा ने अपने हाथों से रोटियां बनाई और फिर हमने साथ में डिनर किया . राधा ने उस घटना क बाद से मुझसे बात नहीं की पर वो मुझे देख कर बार बार शर्मा रही थी. मुझसे भी बात करने की हिम्मत नहीं हो रही थी. खाने क बाद राधा ने किचन का काम ख़तम किया और फिर से मौसी क पास आ गयी.

राधा : माँ मैं तुम्हारे पास hi रूकती हूँ यहाँ .

दिव्या मौसी : अरे तुम दोनों आराम करो न . कोई ज़रूरत नहीं है मैं ठीक हूँ.

अमित : ज़रूरत है, और यहाँ मैं रुकता हूँ आपके पास. राधा आपको संभल नहीं पायेगी .

राधा : नहीं मैं भी रुकूंगी माँ क पास

अमित : मैंने कहा न , तुम मौसी को संभल नहीं पाओगी . तुम आराम करो वैसे भी इतना काम कर क थक गयी होगी.

शाम वाली घटना क बाद पहली बार हम दोनों ने सीधी बात की थी . और जब मैंने राधा को सख्ती से मन किया तो वो मेरी आँखों में देखती रही और फिर नज़रें झुका ली जैसे मेरा हुकुम मन लिया हो. हुकुम hi तो दिया था मैंने जिस तरह उसे देखते हुए मन किया.

दिव्या मौसी : अमित ठीक कह रहा है . तुम आराम करो. वैसे भी इतनी कोई खास ज़रूरत नहीं है. और अगर हुई भी तो तुम कहाँ दूर हो , यहीं बगल में hi तो हो. जाओ अब आराम करो.

राधा मौसी को गुड नाईट कह कर चली गयी . जाते जाते भी उसकी नज़रें मुझ पर hi थी. उसके बाद मैंने भी अपने रूम में जाकर कपडे चेंज किये और मौसी क पास आ गया. मौसी ने मुझे बीएड पर hi अपने साथ सोने को कह दिया. मैं भी उनकी बात कर उनके साथ hi पद गया. कुछ देर हम बातें करते रहे और फिर मेरी आँख लग गयी.

पता नहीं कितनी देर मैं सोया था पर मेरी नींद मौसी की कराह सुन कर टूटी. मैं झटके से उठा और मौसी की तरफ देखा . मौसी दर्द से बेहाल लग रही तो और बीएड पर छटपटा रही थी.

अमित : क्या हुआ मौसी ? क्या फिर से दर्द हो रहा है?

दिव्या मौसी : कराहते हुए ) आअह्ह्ह माआ मर्डर गयी माआ बहुत दर्द हो रहा है

अमित : कहाँ दर्द हो रहा है मौसी ? मैं डॉ को बुलाऊँ ?

दिव्या मौसी : कक कमर दर्द हो रहा है मा लगता है ये दर्द मेरी जान ले लेगा. उम्मम्मम माआ

अमित : मौसी मैं राधा को बुलाता हूँ वो अभी आपकी मालिश कर देगी

दिव्या मौसी : नहीं उससे नहीं होगी उफ्फफ्फ्फ़ उसे करनी नहीं अति . पहले भी उफ्फ्फ ठीक से नहीं की उसने . तू दीदी को बुला ले

अमित : इस वक़्त वो कैसे आएँगी ?

दिव्या मौसी : कैसे भी कर क उन्हें बुलाओ ये दर्द बर्दाश्त नहीं हो रही आअह्ह्ह

मैंने अपना मोबाइल निकल कर रीता मौसी को फ़ोन किया पर वो उठा नहीं रही थी . शायद उनका फ़ोन साइलेंट पर था

अमित : मौसी फ़ोन नहीं उठा रही हैं . मैं डॉ को बुलाता हूँ

दिव्या मौसी : नहीं रहने दे तू वो दवा दे दे मुझे

अमित : मौसी आप पहले भी कितनी बार दवा खा चुकी हैं . अब और मत लीजिये . मैं राधा को बुलाता हूँ .

दिव्या मणि : गुस्से से ) तुम्हे समझ नहीं अत क्या एक बार कक्कक्स

अमित : तो फिर मैं hi कर देता हूँ.

दिव्या मौसी : नहीं

अमित : क्यों नहीं मौसी ? क्या मैं आपका बीटा नहीं ? मैं आपको ऐसे तड़पते नहीं देख सकता.

मैंने तुबे उठाई और मौसी क पाऊँ की तरफ बैठ गया.

अमित : बताइये कहाँ दर्द हो रहा है .

दिव्या मौसी दर्द से बेहाल थी इस लिए उनहोंने भी मेरी बात मानते हुए मुझे पलट कर अपनी कमर पर हाथ रख कर बताया. चूँकि मौसी ने सदी पहनी हुई थी इस लिए उनके ब्लाउज और पेटीकोट क बीच उनकी कमर नंगी hi थी . मैंने क्रीम उनकी कमर पर लगाई और मालिश करने लगा . मगर मौसी को अभी भी दर्द हो रहा था .

अमित : मौसी और कहाँ दर्द है बताइये मुझे

दिव्या मौसी : आह्हः थोड़ा नीचे

मौसी ने नीचे खा तो मैंने उनकी सदी को नीचे करने लगा तो उनका पेटीकोट बंधा हुआ था. मैंने बिना पूछे मौसी क पेटीकोट क नाड़े की गाँठ साइड से ढीली कर दी. पेटीकोट ढीला होते hi मैंने अपनी उँगलियों को अंदर सरका दिया . मेरी उंगलियां मौसी की पेंटी से लगी तो मेरे अंदर हलचल सी हुई. मैंने खुद को काबू में रखते हुए मौसी की सदी और पेटीकोट पकड़ कर नीचे सरकाये तो उनकी काळा रंग की पेंटी नज़र आने लगी . मैंने पेंटी क इलास्टिक में उंगलियां फसे तो मौसी बोल पड़ी

दिव्या मौसी : ये क्या कर रहे हो ? ाःह

अमित : मौसी आपके कपडे नीचे करने होंगे तभी तो मालिश कर पाउँगा .

मौसी चुप हो गयी उन्हें पता था क ये ज़रूरी है पर नारी स्वाभाव की वजह से वो शायद शर्मा रही थी. मैंने पेंटी को थोड़ा नीचे सरकाया तो मौसी क दूधिया चूतड़ आधे मेरी आँखों क सामने निर्वस्त्र हो गए . मेरी धड़कन एक डैम से इतनी बाद गयी क मेरे कानो से धुआं निकलने लगा . मैंने अपनी ऑंखें बंद कर ली और क्रीम लगा कर उनके दोनों अधनंगे चूतड़ों पर मालिश करने लगा . दिव्या मौसी की स्किन इतनी मुलायम थी की न चाहते हुए भी मैं उत्तेजित होता जा रहा था. मेरे मज़बूरी हाथों की मालिश से दिव्या मौसी को आराम मिलना शुरू हो गया था जिसका सुबूत था उनकी दर्द भरी सिसकियों का बंद होना . कुछ देर मैंने ाची से उनके चूतड़ दबा दबा कर मालिश की जैसा की करना ज़रूरी था और इसका असर भी हुआ.

दिव्या मौसी : अब कुछ आराम मिला है ककक ऐसे hi करो थोड़ा और नीचे करो वहां दर्द है

अमित : क्या हिप्स क बल गिरी थी ?

दिव्या मौसी : हम्म्म वहीँ दर्द है ज्यादा ककक

मैंने अपने हाथ थोड़ा और नीचे सरका दिए और मौसी की सदी पेटीकोट क साथ पेंटी को भी और नीचे सरका दिया . अब मौसी क पूरे चूतड़ नंगे हो कर मेरे हाथों क नीचे थे. मैंने उनके कोमल मुलायम चूतड़ों को अपने हाथों की मुठियों में भर भर क भींचा और अचे से दबा कर मालिश की. मालिश करते करते मेरा अंगूठा उनके गुदा द्वार पर जा लगा तो मेरे अंदर झुरझुरी सी दौड़ गयी. मुझे करंट सा लगा. ऐसा hi कुछ मौसी की बॉडी में भी मुझे फील हुआ पर न वो कुछ बोली न मैंने रियेक्ट किया. मैंने अपनी ऑंखें बंद कर राखी थी. मगर लैंड था क साला बगावत पर उतर चूका था. लाख कोशिशों क बाद भी मैं कण्ट्रोल खोता जा रहा था. मुझे दर था क कहीं मैंने उन्हें नंगा देख लिया तो मैं खुद को रोक नहीं पाउँगा .

दिव्या मौसी : ककक अब आराम मिला है कुछ सीसीसी यहीं पर दर्द है ज्यादा .

अमित : घबराइए मत मौसी अभी सब ठीक हो जायेगा .

मैंने अचे से उनके दोनों नितम्ब दबा दबा कर मालिश की. पर इसके साथ कुछ और भी चाहिए था. जो ज़रूरी था. मैंने मौसी क नितम्ब अछि तरह से मालिश करने क बाद जब साइड होने लगा तो अनजाने में hi मेरी नज़र उनकी गोरी चमकदार गांड पर पद hi गयी. और वहीँ पर जिसे मुझ पर कोई सम्मोहन सा हो गया . उनकी गोरी गांड अब लाल हो चुकी थी और जैसे hi मेरी नज़र जांघों क जोड़ क नीचे गयी तो वहां पर कुछ काळा बाल दिखे जो उनकी योनि को ढके हुए थे और पेंटी भी जैसे एक दिवार बानी हुई थी मेरी नज़रों को रोकने क लिए .

दिव्या मौसी : रुक क्यों गए ?

अमित : मौसी मालिश हो गयी अब आप थोड़ा स्ट्रेचिंग कीजिये उससे आराम मिलेगा .

दिव्या मौसी : स्ट्रेचिंग?

फिर मैंने मौसी को बताया क कैसे वो घुटनो के बल हो कर अपने पाऊँ पीछे मोड़ कर पाऊँ पर हिप्स टिकाएं और आगे को झुकते हुए अपनी ऊपर की पूरी बॉडी अपनी टांगों पर दबाएं जिससे उनके हिप्स क मसल्स स्ट्रेच होंगे.

अमित : मौसी मैं उधर मुंह करता हूँ आप अपने कपडे ठीक कर लो और ये करो .

दिव्या मौसी का ध्यान अब अपने कपड़ों पर गया तो उन्होंने जल्दी से अपनी सदी ऊपर की और मेरी बताई हुई एक्सरसाइज की. उन्हें थोड़ा तकलीफ तो हुई पर फिर भी उन्होंने की.

दिव्या मौसी : तुम तो सच में जादूगर हो , अब ाचा लग रहा है. ऐसा लग रहा है जैसे कोई गाँठ पद गयी थी वहां जो अब खुल गयी है .

अमित : अगर आप पहले hi बता देती तो मैं पहले hi ठीक कर देता .

दिव्या मौसी : कैसे बताती ? अभी भी मुझे कितनी शर्म आ रही थी क क्या बताऊँ . ये बात किसी को मत बताना .

अमित : ये आप कैसी बात कर रही हैं मौसी . मैं भला ये बात किसी से कर सकता हूँ ? अब आराम से सो जाइये .

दिव्या मौसी : तुम भी सो जाओ . गुड नाईट

मौसी ने मेरे माथे को चूम कर गुड नाईट कहा और लेट गयी मैं भी उनके साथ लेट गया . और उनसे बातें करते करते मेरा बाबूराव भी सो गया था. इस लिए मैं भी सो गया.

अमित द्वारा मालिश करने से दिव्या को आराम तो मिला था मगर उसके अंदर कहीं आग भड़क गयी थी. अमित क मजबूत मरदाना हाथों की पकड़ अपने कूल्हों पर पाकर उसका तन मन रोमांच से भर गया था. पहले तो दर्द की वजह से उसका ध्यान इस तरफ नहीं गया था मगर बाद में जब कुछ ाचा फील हुआ तो अमित क हाथों का टच अपने नंगे कूल्हों पर उसे उत्तेजित करने लगा था. न चाहते हुए भी वो आज गरम होने लगी थी. उसकी छूट में आज कितने दिनों बाद फिर से गिला पैन आने लगा था . किसी तरह उसने खुद को कण्ट्रोल तो कर लिया था पर नींद में उसके ख्वाब उस पर हावी हो गए. अमित उसके साथ hi बिस्टेर पर लेता हुआ था और उसके मरदाना हाथों का एहसास उसे अभी भी अपने चूतड़ों पर हो रहा था. नींद में hi वो अमित क साथ जाने क्या क्या कर रही थी क वो बीएड पर पड़ी मचलने लगी . बार बार उसके हाथ खुद hi अपने स्तनों और छूट तक जा रहे थे. बीएड पर मचलते हुए वो अमित से जा चिपकी और फिर वो उससे चिपकती hi गयी. जब उसकी उत्तेजना चरम पर पहुंची तब अमित का एक घुटना उसकी दोनों जांघों क बीच था जिसे वो अपनी छोट पर कास रही थी. चरम पर पहुँचते hi वो झटके खाने लगी जिससे अमित की नींद उचट गयी और वो दिव्या को देखने लगा उसी वक़्त दिव्या की ऑंखें भी खुल गयी .
 
अपडेट 195



अमित : क्या हुआ मौसी ? आप ठीक तो हैं ?

दिव्या इस सवाल से हड़बड़ा गयी . उसे लगा जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो.

दिव्या (मन में ) हे भगवन कहीं अमित ने कुछ देख तो नहीं लिया ? अब क्या जवाब दूँ ? मुझे हो क्या गया है ?

अमित : मौसी ,, मौसी ,, क्या हुआ आप जवाब क्यों नहीं दे रही .

दिव्या मौसी : हह हाँ मैं ठीक हूँ . वो कमर में थोड़ा दर्द था इस लिए. मुझे ज़रा बाथरूम जाना है

दिव्या मौसी मुझसे नज़रें नहीं मिला रही थी. मैं उनकी हालत समझ रहा था .

अमित : चलिए मौसी मैं आपकी मदद करता हूँ .

दिव्या मौसी : नहीं तुम , तुम रहने दो .

अमित : मौसी आप को अभी चलने में दिक्कत हो सकती है . आप उठिये तो सही .

दिव्या मौसी बीएड से उतरने लगी तो उन्हें दर्द हुआ मैंने उन्हें सहारा दे कर खड़ा किया और वो धीरे धीरे बाथरूम तक गयी . मैं उन्हें बाथरूम में छोड़ कर बहार आ गया.

दिव्या ने बाथरूम में जा कर अपनी सदी उठा कर पेंटी को देखा तो पूरी तरह भीग चुकी थी. इतना ज्यादा पानी निकला था क अब झांगों में भी चिपचिप होने लगी थी.

दिव्या ( मन में ) ये मुझे क्या होने लगा है? मैं क्यों खुद को रोक नहीं प् रही? इतने सैलून से मुझे कभी जो महसूस नहीं हुआ वो क्यों अचानक होने लगा है? मेरे अंदर ये कैसी आग भड़कने लगी है? अमित क पास होने से hi मेरी ये हालत ख़राब होने लगी है . वो क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में ? मैं किसे नज़रें मिलों अब उससे ?

दीवार का सहारा लेकर किसी तरह दिव्या ने अपनी पेंटी निकल दी और पेशाब करने क बाद पानी से छूट को साफ़ कर क बहार आ गयी. दरवाज़े क बहार hi अमित खड़ा था एक बार फिर से दिव्या की नज़रें झुक गयी और अमित का सहारा ले कर वापिस बीएड पर कर लेट गयी. दिव्या ने जल्दी से ऑंखें बंद की और अमित की तरफ पीठ कर क लेट गयी ताकि अमित से नज़रें न मिलें.

मौसी को लिटाने क बाद मैं भी ऑंखें बंद कर क लेट गया. पर मौसी की तड़प मैं अछि तरह समझ रहा था. वो अकेली थी और उन्हें मौसा जी की ज़रूरत थी. मैं उनके बारे में सोचता हुआ सो गया और मेरी आंख सुबह hi खुली .

मैं जब उठा तो दिव्या मौसी अभी सो रही थी. मेरी नज़र उन पर पड़ी तो मेरा गाला सूखने लगा . मौसी की सदी अस्त व्यस्त हो चुकी थी. वो पेट क बल लेती हुई थी . एक तंग सीधी और एक घुटने से बेंड हो कर एक तरफ को फैली हुई थी. सदी घुटनो तक चड्ढी हुई थी जिससे उनकी गोरी टंगे नंगी मेरी आँखों क सामने थी. दिव्या मौसी क गोर गोर पाऊँ और उन पर पायल देख कर मेरी नज़र वहीँ जैम गयी. उनके पाऊँ पर किसी तरह का कोई निशान नहीं था जैसा की आम तौर पर कामकाजी घरेलु औरतों क होते हैं. बल्कि उनके पाऊँ तो लड़कियों की तरह कोमल थे. मैं अभी उनकी नंगी टांगों को निहार hi रहा था क उन्होंने करवट बदली और सीधी हो गयी. और फिर एक तंग को घुटना बेंड कर क उठाते हुए पाऊँ बीएड पर टिका दिया. इससे उनकी उस तंग से सदी और ज्यादा निचे को सरक कर जांघ तक आ गयी . दोनों टांगों में कुछ गैप था जिस वजह से मेरी नज़र उनकी सदी क अंदर तक चली गयी और वहां का नज़र तो जैसे जान लेवा hi था. मौसी की सदी इतनी ऊपर तक आ गयी थी क मेरी नज़र सीधा उनकी छूट तक चली गयी . मौसी ने पेंटी नहीं पहनी थी . पर मुझे अछि तरह यद् था क उन्होंने रत को पेंटी पहनी हुई थी . इसका मतलब था क वो जब बाथरूम में गयी थी तब उन्होंने अपनी पेंटी उतरी होगी . दिव्या मौसी की छूट पर काली काली झांटें थी. छूट का मुँह नज़र तो नहीं आ रहा था पर उनकी उजली गौरी जांघों को देख कर मेरा कण्ट्रोल खोने लगा. मैं अभी उनकी जांघों और छूट को देखने में लगा था क मेरा फ़ोन बजने लगा और मेरी तन्द्रा टूटी. मैंने जल्दी से अपना फ़ोन उठाया तो देखा ये दीपिका ममी का फ़ोन था. इतनी सुबह उनका फ़ोन देख कर मुझे चिंता हुई और मैंने जल्दी से फ़ोन पिक किया .

अमित : hello क्या हुआ ममी जी सब ठीक तो है ??

दीपिका म : कुछ ठीक नहीं है , काम से काम फ़ोन पर तो प्यार से बात कर लिया करो . ममी सबके सामने हूँ अकेले में तो बीवी की तरह बात किया करो.

अमित : ममी आप जानती हैं न मैं कहाँ हूँ

दीपिका म : ओह ाचा सॉरी सॉरी, कोई पास में है ? चलो कोई बात नहीं. मैंने इस लिए फ़ोन किया था क आज हमारे बेटे की पहली दिवाली है और तुम बहार हो. जल्दी घर आ जाओ , वर्ण मुझे ाचा नहीं लगेगा .

अमित : ठीक है मैं आता हूँ जल्दी . वैसे हैप्पी दिवाली

दीपिका म : तुम्हे भी दिवाली मुबारक .

उसके बाद मैंने फ़ोन रखा और उठ कर छत पर चला गया एक्ससरसीसे करने.

दिव्या की भी आंख कुछ देर में खुल गयी और जब उसकी नज़र अपनी सदी पर गयी जो जांघों तक चढ़ी हुई थी तो उसने जल्दी से अमित की और देखा पर वो तो बीएड पर नहीं था .

दिव्या : हे भगवन , कहीं अमित ने मुझे ऐसे देख तो नहीं किया ??

दिव्या खुद की हालत पर hi अफ़सोस कर रही थी और टेंशन में आ गयी थी. उसका दर्द अब पहले जितना नहीं था. अमित क हाथो से मालिश करवा कर एक बार में hi उसका काफी आराम मिला था. इससे पहले क अमित वापिस अत दिव्या ने खुद को संभाला और बाथरूम में जा कर खुद को ठीक कर क फ्रेश हुई.

एक्सरसाइज करने क बाद मैंने जब नीचे आया तो दिव्या मौसी किचन में जा रही थी.

अमित : ये क्या मौसी आप किचन में खान जा रही हैं?

दिव्या मौसी : तो क्या अब बिस्टेर पर hi पड़ी रहूं? तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए दूध गरम करती हूँ. अरे अरे ये क्या कर रहा है नीचे उतर मुझे

मैंने मौसी को ज़बरदस्ती अपनी गोद में उठाया और वापिस का कर बीएड पर लिटा दिया.

अमित : आप बस आराम करो और कुछ नहीं , समझी आप ? मैं आपके लिए चाय बना कर लता हूँ.

दिव्या मौसी : मैं कर लुंगी तुम ऐसे hi कक्कक्स

अमित : देखा , अभी आप को आराम की ज़रूरत है . आप आराम करिये बस . चाय बनानी अति है मुझे . आज आप अपने बेटे क हाथ की चाय पियो.

इतना कह कर मैं किचन में गया और चाय बनाने लगा. चाय बना कर मैं पहले दिव्या मौसी क पास गया .

अमित : लीजिये गरमा गरम स्पेशल चाय . पि कर देखिये.

दिव्या मौसी : तुम्हारे हाथ की बानी है , अछि hi होगी.

अमित : ऐसे नहीं चेक कर क बताइये .

दिव्या मौसी : सू कर क ) वह , ये तो वाकई में अछि बानी है. किसने सिखाई ?

अमित : बस माँ को देख क सिख गया. अब ज़रा मैं राधा को भी चाय दे कर अत हूँ.

दिव्या मौसी : हाँ हाँ उसे भी दे दे , महारानी अभी तक सो रही होगी.

मैंने राधा क रूम में गया तो राधा सपनो की दुनिया में खोयी हुई थी. हमेशा की तरह उसके चेहरे पर मनमोहक मुस्कान थी. मैंने उसके चेहरे को निहारा और चाय को साइड में रख कर उसे उठाने लगा.

अमित : उठिये राजकुमारी , आपके लिए चाय हाज़िर है .

राधा : ओह्ह्ह ...

राधा ने करवट बदल ली पर उठी नहीं . मैंने फिर उसे पकड़ कर हिलाया और फिर से उठाया तो इस बार उसने ऑंखें खोल की और मुझे सामने देख कर बस कुछ देर वैसे hi देखती रही.

अमित : ऐसे क्या देख रही हो ? उठो , देखो मैं चाय बना कर लाया हूँ तुम्हारे लिए .

इतना सुनते hi राधा एक डैम से उठी और हैरानी से कभी मुझे और कभी चाय का कप देखने लगी .

राधा : हैरानी से ) सच में तुमने चाय बनाई है ?

अमित : क्यों ? कोई शक है क्या ? चलो जल्दी से पि लो वर्ण ठंडी हो जाएगी .

राधा ने जल्दी से चाय का कप पकड़ा और अपने होंठो से लगा कर घूँट भरा .

राधा : उउउउउउ कितनी गरम है,

अमित : तो क्या ठंडी कर क लता . बताओ कैसी बानी है ?

राधा : उम्म्म बहुत अछि , अब अगर रोज़ ऐसे hi मुझे अपने हाथ की चाय पिलाओ तो मज़ा hi आ जाये.

अमित : ओह मुंगेरी लाल , साइट जागते सपने hi देखती रहती हो क्या? चलो चाय पीओ और फ्रेश हो कर मौसी क पास आ जाओ.

राधा : माँ उठ गयी ??

राधा चाय का कप हाथ में लिए मेरे साथ hi चली आयी.

दिव्या मौसी : राधा को देखते हुए ) शर्म करो , जो काम तुम्हे करना चाहिए वो ये कर रहा है और तुम आराम से सो रही हो .

राधा : तो क्या हुआ माँ ? मैंने भी तो कल इसके लिए बनाई थी न कॉफ़ी .

दिव्या मौसी : ये क्या अछि बात है लड़कों से घर का कम करवाया जाये ?

राधा : कभी ऐसी ज़रूरत आ भी तो सकती है न माँ. जैसे आप आज ठीक नहीं थी. ऐसे में थोड़ा बहुत काम तो आना hi चाहिए न मदद करने क लिए .

राधा ने मेरी तरफ देखते हुए कहा .

अमित : तुम मेरी छोडो और अपनी सोचो. देखो एक दिन क लिए भी मौसी बिस्टेर पर पद जाये तो तुम खाना तक नहीं बना सकती अपने लिए.

राधा : मैं सिख रही हूँ माँ से समझे , तुम अपनी सोचो अब से रोज़ चाय बना कर पिलानी पड़ेगी मुझे ऐसे hi .

अमित : मैं क्यों पिलाऊँ ?

दिव्या मौसी : ये क्या बात है राधा ?

राधा : आप बीच में मत पदों माँ , इसे इतना साथ तो देना होगा न मेरा . कौन सा ज्यादा मांग रही हूँ .

राधा ने इतना कहा और मुँह बना कर कमरे से निकल गयी. दिव्या अपनी बेटी की बातों का मतलब समझ रही थी जो अमित नहीं समझा था

दिव्या ( मन में ) देखो तो कैसे अभी से हक़ ज़माने लगी है ? जो बात हम बहनो क बीच थी वो तो मैं खुद hi भूल गयी थी. पता नहीं ये किसे इस बात को दिल में लिए बैठी है. मैं तो मन नहीं करुँगी पर तेरे पापा कभी नहीं मानेंगे .

अमित : मौसी ये कैसी बातें करती रहती है ? कभी कभी तो मुझे समझ hi नहीं आती .

दिव्या मौसी : तू उसे छोड़ , चल अब तैयार हो जा . तुझे गाओं भी तो जाना होगा न आज

अमित : वो तो जाना hi है पर मैं अकेला नहीं जाने वाला . आप भी तैयार हो जाओ .

दिव्या मौसी : नहीं नहीं , आज दिवाली है , आज क दिन तो घर hi रहना चाहिए .

अमित : वो भी तो आप hi का घर है न. आज आरव क पहली दिवाली है . मैं चाहता हूँ आप भी ख़ुशी क इस मौके पर साथ हो.

दिव्या मौसी : पर यहाँ ......

अमित : यहाँ अभी मैं और राधा थोड़ी बहुत सजावट कर देते हैं. आप साथ चल रही हैं तो चल रही हैं बस.

इतना कह कर मैं रूम से बहार निकल आया. और राधा को भी बता दिया. राधा तो ख़ुशी से उछाल पड़ी. फिर हम दोनों ने मिल कर जल्दी थोड़ी बहुत साफ सफाई की और मैं बाजार से कुछ सजावट का सामान ले आया और घर में थोड़ी बहुत सजावट कर दी. गाओं से माँ का फ़ोन भी आ चूका था. मैंने बाजार से नाश्ता ला कर जल्दी से मौसी और राधा क साथ नाश्ता किया . राधा और मौसी भी तैयार हो गए. अब मुश्किल ये थी क हम तीनो एक hi बाइक पर कैसे जाएँ और ये मुश्किल हल की निधि दीदी ने . हम जब तैयार हुए तो बहार क दरवाज़े पर किसी ने बेल्ल बजे. मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने निधि दीदी कड़ी थी. गुलाबी सूट में वो खुद hi गुलाब लग रही थी. एक बार तो उन्हें देख कर मैं उनकी कुदरती सुन्दर काया को देखता रह गया . मुझे अपनी तरफ गहरी नज़रों से देखता पाकर निधि दीदी क गाल शर्म से लाल हो गए .

निधि दीदी : शरमाते हुए ) ऐसे क्या देख रहे हो ?

अमित : आप बहुत प्यारी लग रही हो दीदी .

निधि दीदी : शरमाते हुए ) थैंक्स , हैप्पी दिवाली .

अमित : हैप्पी दिवाली दीदी .

निधि दीदी ने आगे बढ़ कर मुझे हुग किया . उनसे बहुत hi अछि खुशबु आ रही थी जो सीधा मेरे नथून से दिमाग में पहुँच गयी. और उन्हें हुग करते हुए मेरी बहन उनकी पीठ पर थोड़ी कास गयी. वैसा hi कुछ रिएक्शन दीदी का भी था

निधि ( मन में ) ी लव ु अमित , मुझे ऐसे hi हमेशा क लिए अपने अंदर समां लो .

‘ अरे दीदी आप ? हैप्पी दिवाली दीदी . आप ने तो कमल कर दिया ‘

राधा निधि दीदी को देख कर जल्दी से हमारी तरफ आयी तो मैं होश में आया और दीदी से दूर हाथ गया. राधा ने दीदी को गले लगाया

निधि दीदी : कैसी है मेरी गुड़िया ? मौसी कहाँ हैं ?

राधा : मैं ठीक हूँ दीदी , माँ अंदर है.

निधि दीदी राधा को साथ लिए अंदर दिव्या मौसी क पास चली आयी और मैं भी उनके पीछे पीछे वहां आ गया.

निधि दीदी : हैप्पी दिवाली मौसी hi , ये क्या आप लेती क्यों हुई हैं ?

दिव्या मौसी : हैप्पी दिवाली बीटा , कैसी हो ? आज तो बहुत प्यारी लग रही हो .

निधि दीदी : पहले ये बताइये आप बीएड पर इस वक़्त क्या कर रही हैं ? आपकी तबियत तो ठीक है न ?

राधा : दीदी माँ कल गिर गयी थी और चोट लग गयी . इसी लिए आराम कर रही हैं .

निधि दीदी : क्या ??? और तुम लोगों ने किसी को बताया भी नहीं ? हम लोग तो यहीं शहर में hi हैं हमें तो बता hi सकते थे. ये बहुत गलत बात है. आपके चोट कहाँ लगी है मौसी ? डॉ को दिखाया क नहीं ?

दिव्या मौसी : अरे मैं ठीक हूँ , इतनी भी चोट नहीं लगी . ज़रा स मोच थी बस. तू बता घर सब कैसे हैं दीदी और जीजा जी कैसे हैं ?

निधि दीदी : सब अचे हैं पर ये आप ने ठीक नहीं किया .

दिव्या मौसी : मैंने कहा न मामूली स मोच थी. और फिर अमित था तो यहाँ .

अमित : दीदी वैसे आप आयी कैसे हैं यहाँ पर ?

निधि दीदी : कार से क्यों ?

अमित : ये तो बहुत ाचा हुआ. अगर आप क पास टाइम हो तो क्या आप हमारे साथ गाओं चल सकती हैं ?

निधि दीदी : गाओं ? पर घर पे क्या ....... मैं माँ से बात करती हूँ.

अमित : वो मैं कर लेता हूँ. आप को कोई और काम तो नहीं है न ?

निधि दीदी : नहीं मैं तो यहाँ आप सब से hi मिलने आयी थी.

अमित : फिर आप हमारे साथ चल रही हैं गाओं. और अब आप कल hi वापिस आएँगी हम सब क साथ . मैं मौसी से मत कर लेता हूँ .

मैंने रजनी मौसी को फ़ोन कर क बता दिया क निधि दीदी हमारे साथ गाओं जा रही है. रजनी मौसी ने दिवाली की वजह से इंकार करना चाहा पर फिर मन गयी. और फिर हम निधि दीदी क साथ कार में गाओं चल दिए . निधि दीदी क चेहरे पर भी ख़ुशी छ गयी थी. और कार चलते हुए भी वो बार बार मुझे hi देख रही थी. खैर हम दोपहर क खाने से पहले घर पहुँच गए और मेरे साथ दिव्या मौसी निधि दीदी और राधा को देख के सब खुश हो गए . आज घर पर कमलेश मां ने अछि सजावट करवाई थी. सरे गाओं को मिठाई बनती थी मां ने . हम साथ में खाना खा रहे थे क बहार से किसी गाड़ी की आवाज़ आयी. तभी बहार का गेट खुला और राघव अंकल क साथ मोहित अंदर आते हुए दिखाई दिए. उनके पीछे पीछे रमा आंटी और करिश्मा दीदी भी थी .

विजय म : अरे राघव तुम यहाँ ? आओ आओ दिवाली मुबारक हो .

अंकल : आपको भी दिवाली की बहुत बहुत बधाई हो भाई साहब और भाभी आप सब को भी . कैसी हो दिव्या बहिन ?

राघव अंकल पहले बाबा से गले मिले और बरी बरी से सब का हलचल जाना . मैं तो आंटी और करिश्मा दीदी को देख कर hi सोच में पद गया था.

अंकल : और भाई कैसे हो मेरे शेर ? यार तुम तो दिखाई hi नहीं देते . तुम्हारी आंटी बता रही थी क तुम एक बार भी नहीं मिलने ए तो सोचा आज हम खुद hi तुम्हे पकड़ लेते हैं .

अमित : ऐसी कोई बात नहीं है अंकल , मोहित से तो रोज़ मिलता hi हूँ. वो क्या है न आज कल दिव्या मौसी क यहाँ हूँ और फिर डेली रूटीन से टाइम नहीं मिल पता .

अंकल : अरे भाई इतना भी बिजी मत रही क अपनों क लिए hi टाइम न हो . मुझे तुम से बहुत साडी बातें करनी है पर फिर किसी दिन . और कैसी हो राधा बेटी ? निधि बेटी से तो मुलाकात होती रहती है पर तुम्हे कितने दिनों बाद देख रहा हूँ .

अंकल बाकि सब से मिलने लगे. आंटी भी माँ और बाकि सब से मिल रही थी पर उनकी नज़र मुझे पर hi थी. करिश्मा दीदी नकली मुस्कान सजाये सब से मिल रही थी . मोहित भी मुझे गले लग कर मिला और बाकि सब से मिलने लगा. तभी आंटी मेरे पास आयी . इतने दिनों बाद आज हम दोनों एक दूसरे क सामने थे. आंटी मेरे पास आ कर कुछ देर ख़ामोशी से मेरी आँखों में देखती रही. उनकी आँखों में दर्द साफ नज़र आ रहा था.

आंटी : कैसे हो ?

अमित : मैं ठीक हूँ , आप कैसी हैं ?

आंटी : बस ज़िंदा हूँ . हो सके तो मुझे माफ़ कर देना .

उतना कह कर आंटी दिव्या मौसी की तरफ बढ़ गयी. पर उनकी आँखों में नमी उभर आयी थी जिसे देख कर मुझे भी बुरा लगा. तभी मेरी नज़र करिश्मा दीदी की तरफ गयी तो वो भी उदास नज़रों से मुझे hi देख रही थी. मैं चुपचाप नसें चुराता हुआ वहां से खिसकने लगा तो दीपिका म ने मुझे आवाज़ दे दी

दीपिका म : अमित ज़रा मेरी बात सुन्ना .

अमित : जी ममी जी

दीपिका म : पास आ कर ) देखो जो भी हुआ वो सब गलत फेहमी से हुआ . देखो दोनों माँ बेटी कितनी उदास हैं. क्या तुम्हे ाचा लग रहा है उन्हें ऐसे देखना? आज दिवाली है और खुशियों का दिन है. काम से काम आज तो उन्हें माफ़ कर क ख़ुशी दे सकते हो न ? आखिर वो तुम्हे कितना प्यार करते हैं .

अमित : आप क्या चाहती हैं क कल को कोई फिर से मुझ पर इलज़ाम लगाए मुझे बेइज़्ज़त करे ?

दीपिका म : क्या दूसरों क दर से तुम अपनों को छोड़ डोज ? देख नहीं रहे करिश्मा की आँखों में पछतावा है और रमा दीदी भी कितनी दुखी लग रही हैं . क्या तुम्हारे दिल में उन लोगों क लिए प्यार नहीं है ? तुम तो ऐसे नहीं थे जो दूसरों क दुःख की वजह बनो . मैं जानती हूँ तुम्हे दुःख पहुंचा है पर वो सब गलती से हुआ था. वो सब तुम्हे प्यार करते हैं और उन्हें भी तो खुशियां मिलनी चाहिए न. सोचो ज़रा उनके दिल पर क्या बीत रही होगी. एक तो उनकी बेटी की ज़िन्दगी में ये कैसा वक़्त आ गया है और तुम भी उनसे दूर हो गए हो. सोचो करिश्मा पर क्या बीत रही होगी . वो तो खुद से hi शर्मिंदा है और जो कुछ उसने झेला है उससे भी वो कितनी टूट चुकी होगी . आज का दिन खुशियों वाला दिन है ऐसे में क्या वो दोनों रोटी हुई अछि लग रही हैं ? बताओ

दीपिका ममी की एक एक बात सही थी. मैंने फैसला कर लिया क मैं उनके चेहरे पर भी ख़ुशी लाऊंगा .

अमित : आप ठीक कह रही हैं , मैं hi ज़िद कर रहा था दर की वजह से. पर जो मुझे इतना प्यार करते हैं , मैं उन्हें कैसे दुखी देख सकता हूँ. ममी मैं अभी आया

मैं जल्दी से सीढ़ियां चढ़ कर अपने कमरे में गया और अपनी अलमारी से वो मेमोरी कार्ड निकल कर ले आया जिसमे मैंने वो साडी रिकॉर्डिंग्स राखी थी जिनमे मैंने करिश्मा दीदी की सास और ननद की चुदाई की थी और राजीव की भी अपनी बहिन क साथ रिकॉर्डिंग थी . मैं वो कार्ड ले कर सीधा आंटी क पास गया . इस वक़्त वो दिव्या मौसी क साथ hi बैठी थी. मैंने आंटी को हाथ पकड़ कर खड़ा किया तो वो मुझे हैरानी से देखने लगी. बिना कुछ कहे मैंने उन्हें गले से लगा लिया . और उनके कण में बोलै .

अमित : हैप्पी दिवाली , मेरी तरफ से आपके और करिश्मा दीदी क लिए एक छोटा सा तोहफा.

इतना कह कर मैं उनसे अलग हुआ और उनके हाथ में वो मेमोरी कार्ड चुपके से पकड़ा दिया . आंटी क चेहरे पर एक डैम से मुस्कान आ गयी . और उन्होंने फिर से मुझे गले लगा लिया

आंटी : कण में ) तुमने मुझे माफ़ कर दिया ? मैं बहुत खुश हूँ . ी ऍम सो हैप्पी

अमित : देखिये सब देख रहे हैं खुद को कण्ट्रोल कीजिये. और अब आपके चेहरे पर ये उदासी नहीं दिखनी चाहिए

इतना कह कर मैं अलग हो गया

आंटी : आँखों से आंसू साफ़ करते हुए ) बिलकुल भी नहीं

‘ लगता है बड़ा प्यार है दोनों माँ बेटे में , मुझसे मेरा बीटा चीन मत लेना मैं पहले hi कह देती हूँ रमा हाँ ‘ माँ ने पास आते हुए कहा तो रमा आंटी को मज़ाक में ये कहा तो आंटी माँ क गले लग गयी.

आंटी : नहीं भाभी ये तो आप hi का बीटा है . और आप ने सच में अपने बेटे को बहुत ाचा बनाया है

करिश्मा दीदी क चेहरे पर हलकी मुस्कान आ गयी थी ये सब देख कर . एक बार फिर से हरि नज़रें मिली तो मैं सीधा उनके पास चला गया .

अमित : हो सके तो मुझे माफ़ कर देना दीदी. शायद आप को पता चल गया होगा क मैंने वो सब क्यों किया .

करिश्मा दीदी ने मेरी बात का जवाब देने की बजाये मुझे गले से लगा लिया . मैंने भी उनको अपनी बाँहों में भर लिया .

अमित : कण में ) आपने मुझे माफ़ कर दिया दीदी ?

करिश्मा दीदी : कण में ) माफ़ी तो मैं मांग रही थी न , बोल तूने अपनी इस बहिन को माफ़ कर दिया न ? बोल . अब तो नाराज़ नहीं है न अपनी बहिन से ?

अमित : मैं आपसे नाराज़ नहीं हूँ दीदी , और अब आप भी ऐसे उदास मत रहिये. जो हो गया उसे भूल जाइये . आइये मिल कर दिवाली मानते हैं.

करिश्मा दीदी : क्यों नहीं , सब से ज्यादा पटाखे मैं hi फोड़ूंगी. चलिए निधि दीदी आज साथ में दिवाली धमाके करते हैं

करिश्मा दीदी को एक डैम चेहेकता देख कर अंकल हैरान हो गए और पास आ कर मेरे कंधे पर हाथ रख दिया .

अंकल : थैंक यू मेरे बेटे , पता नहीं कैसे तुमने ये किया पर करिश्मा क चेहरे पर ये ख़ुशी देखने को मैं तरस गया था . थैंक यू वैरी मच

अमित : ये आप कैसी बातें कर रहे हैं अंकल बीटा भी बोलते हैं और थैंक्स भी कहते हैं. दीदी को मैं उदास नहीं रहने दूंगा. आप चिंता मत करो .

अंकल : शाबाश मेरे बेटे ी ऍम प्राउड ऑफ़ यू.

तभी कमलेश मां गाओं में मिठाई बाँट कर वापिस आ गए और वो भी गरम जोशी से अंकल से मिले. बस फिर शुरू हो गयी दिवाली सेलिब्रेशन . करिश्मा दीदी निधि दीदी और राधा क साथ लग गयी . माँ दिव्या मौसी और रमा आंटी क साथ थी दीपिका ममी क साथ कमलेश मां आरव को गॉड में खिला थे थे. बाबा अजय मां क साथ राघव अंकल को कंपनी दे रहे थे मैं मोहित को साथ लेकर राजू से मिलने निकल गया .

‘ ये पुलिस यहाँ किस लिए आयी है ? तुम लोग क्या झक मर रहे हो ? ऐसी छोटी मोती बातें तुम लोग खुद हैंडल किया करो , मेरे पास वक़्त नहीं है ‘ बलजीत राइ दूसरे शहर में अपने ऑफिस में था जब उसे खबर मिली क पुलिस उन्कोफिकर ऑफिस में आयी है. वैसे तो ऐसी छोटी बात उसके एम्प्लाइज खुद संभल लेते थे. पर आज पुलिस वाले उनकी कोई बात सुनने की बजाये सख्ती से पेश आ रहे थे .

एम्प्लोयी: सर वो लोग कोई बात सुनने को तैयार hi नहीं हैं . अपने शहर की पुलिस तो ऐसी हरकत hi नहीं . ये लोग क्सक्सक्स शहर से आये हैं. और हमारी कंपनी क उस प्लांट क मैनेजर क बारे में पूछ रहे हैं. कह रहे हैं क वो उन्हें लेकर hi जायेंगे .

बलजीत राइ : गुर्राकर ) अपनी औकात से बहार जा रही है वो सप . पुलिस वालों से कह दो क वो जिसकी तलाश में यहाँ आये हैं वो यहाँ नहीं है. उसे ढूंढना है तो उसके घर जाएँ वर्ण ाचा नहीं होगा . अगर न मने तो वकील कहाँ मर गए हैं उनको भेजो उनसे बात करने क लिए वो खुद समझा लेंगे

एम्प्लोयी बलजीत राइ का जवाब सुन कर वापिस चला गया . बलजीत राइ क साथ उसकी पर्सनल सेक्रेटरी बैठी थी . जो इस मामले को जानती थी .

सेक्रेटरी: अब क्या होगा सर ? पुलिस तो आज यहाँ भी पहुँच गयी .

बलजीत राइ : तो क्या हुआ , मेरा कुछ नहीं उखड सकती ये पुलिस. अंदाज़ा तो मुझे कल hi हो गया था जब पुलिस ने उधर फैक्ट्री में दस्तक दी थी. इसी लिए तो मैंने मैनेजर को और उसकी फॅमिली को गायब करवा दिया.

सेक्रेटरी: पर सर इतनी हिम्मत किसकी हो गयी क आपके खिलाफ एक्शन ले.

बलजीत राइ : उसको भी उसकी औकात दिखानी पड़ेगी , बहुत उछाल रही है साली . वो हल करूँगा क कोठे की रंडी भी उस पर थूक क जाएगी. गलत इनाम से पन्गा ले लिया है उसने. चल शुरू हो जा दिमाग बहुत गरम हो गया है जल्दी से ठंडा कर मुझे.

बलजीत की बात सुनते hi उसकी सेक्रेटरी घुटनो पर नीचे बैठ गयी और बलजीत राइ की पेण्ट की ज़िप खोल कर अपना काम करने लगी .



उधर सप ऋतू सिंह कल से परेशां थी. कल मैनेजर को उठाने क लिए जो पुलिस टीम गयी थी उसे मैनेजर नहीं मिला था न घर पर न फैक्ट्री में. और दोबारा जब पुलिस ने उसके घर पर दबिश की तो उसकी फॅमिली भी गायब थी. ऋतू सिंह समझ गयी थी क उसे बचने की कोशिश की गयी है. पहले तो फैक्ट्री वाले स्टाफ की तरफ से किसी तरह का सपोर्ट नहीं मिल रहा था पर किसी तरह उसने पता लगवाया क वो मैनेजर दूसरे शहर में है मीटिंग की वजह से तो उसने वहां क लिए भी पुलिस पार्टी भेज दी. मगर वहां भी पुलिस को कुछ नहीं मिला. ऋतू को इतना तो क्लियर हो गया था क इसमें बलजीत राइ उस मैनेजर को बचा रहा है . पर क्यों ? इस बात का जवाब शायद इस केस से जुड़ा हो इस लिए ऋतू और भी ज्यादा सोच में पद गयी . क्यूंकि बलजीत राइ जैसे बड़े आदमी से टकराना आसान नहीं था. पर ऋतू सिंह ने अमित से वडा किया था इस लिए वो भी अपनी जगह पर दत्त गयी और पुलिस तंत्र का पूरी तरह इस्तेमाल करने लगी अपना वडा निभाने क लिए.
 
फ्रेंड्स मैंने नेक्स्ट कमेंट में क्लियर कर दिया था क मैं बंद नहीं कर रहा कहानी . चिल करो यार, अपन स्टोरी तो अपने हिसाब से hi लिखेंगे. इतनी जल्दी नहीं मैं गुस्सा करता. वो तो भाई को आराम से जवाब दिया था. अगला अपडेट पड़ने क बाद सुग्गेस्टिव देना . मैं थोड़ा राइटिंग स्टाइल बदल रहा हूँ. आज की लीव लगा दो भाई
 
अपडेट 196



‘ क्या यार तुम लोग कब से फ़ोन पे hi लगे हो. अगर फ़ोन पे hi बात करना था तो मुझे क्यों साथ में ले आये ? ाचा खासा रेनू की तरफ जाने को प्रोग्राम बनाया , कहाँ फास गया तुम लोगों क झमेले में. खुद तो मज़े से लगे हो इधर मुझे लटकाया हुआ है. ‘ राजू बड़बड़ा रहा था क्यूंकि पिछले एक घंटे से मैं और मोहित फ़ोन पर hi लगे हुए थे. मोहित मीनल से बात कर रहा था और मैंने एक एक कर क सब से बात की . दिवाली की शुभकामनाएं देने क लिए फ़ोन आ रहे थे.

अमित : गुस्सा क्यों करता है यार ? तेरे सामने hi देख दिवाली की वजह से सबके फ़ोन आ रहे हैं चल अब गुस्सा थूक घर चलते हैं. चल यार तू ( मोहित )भी बात ख़तम कर बाकि कल कर लेना .

मोहित ने मीनल को bye कहा और हम लोग घर को वापिस लौट आये. राजू तो अंकल को देख कर हेसिटते हो रहा था पर अंकल ने उसे कहा क यहाँ वो मालिक नहीं हैं इस लिए शर्माओ मत. निधि दीदी और राधा ने करिश्मा दीदी को साथ ले कर घर में सब तरफ दिए रोशन कर दिए थे और अँधेरा होते होते घर जगमग करने लगा. वैसे तो मां ने लाइटिंग भी करवा राखी थी. गाओं क कई लोग इस मौके पर बधाई देने भी ए थे पर अब शाम क समय हर कोई अपने घर में था दिवाली मानाने क लिए. शाम को पूजा क बाद सब ने मिलकर पटाखे चलाये. सब क चेहरों पर ख़ुशी थी.

‘ ाचा भाई साहब अब इजाज़त दो हम अब चलते हैं ‘ अंकल ने खड़े होते हुए बाबा से वापिस जाने की इजाज़त मांगी.

विजय म : अरे अब कहाँ जाना है तुमने ? देखो क्या टाइम हो गया है . तुम सब आज रत यहीं रुको . सुबह चले जाना .

अंकल : ज़रूरी न होता तो ऐसा hi करता. अब क्या है न सुबह मुझे ज़रूरी काम से कहीं जाना है. अगर यहाँ रुक गए तो फिर मुश्किल हो जाएगी .

गौरी म : तो क्या हुआ , देर hi हो जाएगी कोई आफत तो नहीं आ जाएगी . रोज़ रोज़ तो तुम लोग आने से रहे . अब आये हो तो रुक जाओ. वैसे भी दिवाली है ख़ुशी का माहौल है अपनों क साथ hi तो ाचा लगता है.

अंकल : भाभी मज़बूरी है वर्ण मैं भी रुकना चाहता था.

गौरी म : ठीक अगर तुझे इतनी hi जल्दी है तो तू अकेला चला जा. रमा और बच्चों को यहीं छोड़ दे.

अंकल : अगर रमा यहाँ रुकना चाहे तो मैं मन नहीं करूँगा .

आंटी : भाभी मन तो मेरा भी रुकने का है पर यहाँ से फिर वापिस कैसे जायेंगे ?

गौरी म : निधि आयी है न कार ले कर . सब साथ में चले जाना

आंटी : पर हम सब एक कार में किसे आएंगे ? दिव्या और राधा भी तो है और फिर अमित भी तो साथ में है. सबका मुश्किल होगा . इस बार माफ़ कार्डो भाभी अगली बार पक्का हम आपके बस रहेंगे. कामिनी भाभी आप भी मेरी बात सुन लो. दीपिका क टाइम तो हमें मौका नहीं दिया आप लोगों ने पर इस बार आपकी देख भल हम करेंगे पहले hi कह देती हूँ .

कामिनी ममी आंटी की बात पर शर्मा गयी. अंकल आंटी फिर सब से मिले और जाने को तैयार हो गए.

‘ घर कब आओगे ? अब तो नाराज़ नहीं हो न मुझसे ? ‘ आंटी सब से मिलने क बाद मेरे पास आयी धीरे से मुझ से पूछा .

अमित : जल्द hi आऊंगा . और मैं आप से नाराज़ नहीं हूँ. जो हुआ उसे भूल जाइये.

आंटी ने मुझे गले लगाया और स्माइल देती हुई कार की तरफ बाद गयी.

‘ टाइम निकल कर मुझसे मिलना कल तो मैं बहार जा रहा हूँ 1-2 दिन क लिए पर जब भी टाइम मिले मुझसे मिलना ज़रूर . मुझे तुमसे ज़रूरी बात करनी है . ठीक है ? ‘ अंकल ने भी बहार निकलते हुए मुझे गले लगाया और ये बात कही. मैंने अंकल को हामी भर दी. फिर मोहित भी मुझसे गले मिला. करिश्मा दीदी निधि दीदी और राधा क साथ hi थी . जब वो कार में बैठने लगी तो पलट कर मेरी तरफ आयी और आते hi मेरे गले लग गयी.

करिश्मा दीदी : थैंक्स ,, थैंक्स फॉर एवरीथिंग . जल्दी घर आना मैं इंतज़ार करुँगी .

करिश्मा दीदी ख़ुशी से मुझसे देखती हुई वापिस कार में बैठ गयी और वो सब वापिस चल दिए. हम सब वापिस अंदर आ गए. खान पीना तो हो चूका था. आज इतना मीठा खाया था क पेट सबका भरा हुआ था. कुछ देर सब मिल कर बातें करते रहे और फिर माँ ने सबको सोने को कह दिया . ऊपर क कमरों में एक कमरा निधि दीदी को दे दिया गया और एक दिव्या मौसी को . राधा ने तो उनके साथ hi सोना था या फिर निधि दीदी क साथ. मैं भी अपने कमरे में चला गया. माँ ने सबको सोने से पहले दूध दिया . मैं दूध पि कर अपने बिस्तर पर लेता hi था क मुझे दिव्या मौसी का ख्याल आया. आज सारा दिन मैं इतना बिजी रहा क उनकी चोट क बारे में एक बार भी नहीं पूछा. मैं तुरंत अपने बिस्टेर से उठा और दिव्य मौसी क कमरे में गया . दिव्या मौसी अकेली hi थी अपने कमरे में .

अमित : मौसी आप अकेली ? राधा कहाँ है ?

दिव्या मौसी : निधि क साथ है. तुम सोये नहीं अभी तक ?

अमित : बस सोने hi जा रहा था क आपका ख्याल आ गया. आज सारा दिन मैंने एक बार भी आपसे आपकी चोट का नहीं पूछा. अब कैसी है आपकी चोट ?

दिव्या मौसी : ठीक है , मुझे खुद hi ध्यान नहीं रहा क मुझे चोट लगी है . कक्कक्स

बात करते करते जब मौसी बीएड पर बैठी तो एक डैम से उनके मुँह से सिसकी निकल गयी.

अमित : क्या हुआ मौसी ? आपको दर्द हो रही है क्या ?

दिव्या मौसी : अरे वो बस बैठी तो एक डैम से थोड़ा सा दर्द हुआ. सारा दिन निकल गया और देखो अब साइन क टाइम फिर से ...

अमित : आप लेटिए मौसी मैं अभी तेल लता हूँ और आपकी मालिश कर देता हूँ.

अमित क मुँह से मालिश का नाम सुनते hi दिव्या की आँखों क सामने रत वाला मंज़र आ गया . कैसे अमित ने रत को उसके नंगे कूल्हों पर मालिश की थी और फिर रत जो वो कैसे कामाग्नि में जल उठी थी. वो सब यद् आते hi दिव्या की धड़कने एक डैम से बढ़ गयी.

दिव्या मौसी : नहीं नहीं मैं ठीक हूँ. ये तो ज़रा स दर्द है . अब मैं ठीक हूँ तुम आराम करो.

अमित : पर आपको तो दर्द हो रही है. ऐसे में कल की तरह फिर आपको तकलीफ हुई तो?

दिव्या मौसी: मैंने कहा न मैं ठीक हूँ. तुम आराम से सो जाओ जाकर .

अमित : समझ गया, आप कल रत मेरे हाथों की मालिश से नाराज़ हैं न? मैं माँ को बुला देता हूँ.

‘ ये मैं कर रही हूँ ? मेरी वजह से अमित मायूस हो रहा है. इसमें उसकी क्या गलती थी . उलट मेरी तकलीफ hi तो दूर की थी इसने. वो तो मैं खुद hi ..... नहीं नहीं मैं अमित को मायूस नहीं होने दूंगी. ‘ अमित को मायूस हो कर जाता देख दिव्या को ाचा नहीं लगा तो उसने रोक दिया.

दिव्या : भाभी को अगर पता चल गया तो वो नाराज़ होंगी क मैंने उन्हें क्यों नहीं बताया . और फिर मैं तुमसे नाराज़ थोड़ा hi हूँ. तुमने तो जो भी किया मेरे अचे क लिए hi तो किया था. आओ यहाँ बैठो. कहीं जाने की ज़रूरत नहीं. अगर मालिश करनी hi है तो वो तुम भी तो कर hi सकते हो .

अमित : पर आप ...

दिव्या : मैंने कहा न , मैं नाराज़ नहीं हूँ. तुम कोई गैर थोड़ा hi हो . तुम तो मेरे अपने बेटे हो. ाचा कर लो मालिश पर पहले दरवाज़ा बंद कर दो किसी ने देखा तो क्या कहेगा.

अमित : मैं माँ को बुला देता हूँ मौसी या फिर दीदी को

दिव्या : निधि एक लड़की है , उससे कहाँ होगी ऐसी मालिश. अब तुम्हे मालिश करनी है तो ठीक वर्ण मुझसे तो ज़रूरत नहीं है. थोड़ा सा hi तो दर्द है सेह लुंगी.

दिव्या का मन अब अंदर से छह रहा था क अमित कल की तरह अपने मजबूत हाथों से उसकी रगड़ कर मालिश करे. इसी लिए निधि का नाम उसने तुरंत ख़ारिज कर दिया. गौरी या किसी और का तो वो पहले hi मन कर चुकी थी. दिव्या को खुद समझ नहीं आ रही थी क वो कैसे ऐसी बातें कर रही है .

अमित : आप को बुरा तो नहीं लगेगा न?

दिव्या : मैंने कहा न , तुम मेरे बेटे हो तुम्हारी कोई बात मुझे कैसे बुरी लग सकती है . चलो अब दरवाज़ा लगा दो और बड़ी लाइट बंद कर दो.

दिव्या मौसी की बात सुन कर मैं तुरंत कमरे से बहार निकला और अपने कमरे से तेल की बोतल ले आया हो खास तौर पर मैं मालिश क लिए hi इस्तेमाल करता था . कमरे में आते hi मैंने दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया और बड़ी लाइट बंद कर क छोटी लाइट जला दी. दिव्या मौसी बीएड पर बेडशीट लिए पड़ी थी जो उनके पेट तक थी. मैं उनके पास जा कर बीएड पर बैठ गया . जैसे hi मैंने उनके ऊपर से बेडशीट हटाने की कोशिश की तो मौसी ने मेरा हाथ पकड़ लिया .

दिव्या : नहीं , इसे ऐसे hi रहने दो. मैं करवट बदलती हूँ . तुम चादर में हाथ दाल कर मालिश करना . और देखो चादर मत निकलना .

मैंने मौसी की बात मानते हुए ‘ जी ‘ कहा और मौसी करवट बदल पर उल्टा लेट गयी. मैंने एक तरफ से चादर को थोड़ा सा उठाया और अपने हाथ पर तेल लगा कर मौसी की कमर क पास रखा . मौसी की कमर पर कोई कपडा नहीं था. मौसी सदी को शायद थोड़ा नीचे सरका लिया था. मैंने पहले उनकी कमर पर एक हाथ से तेल लगाया और मालिश करने लगा .

दिव्या क अंदर हलचल तेज़ हो गयी थी अमित का हाथ अपनी नंगी कमर पर पड़ते hi . कल रत दर्द में होने की वजह से उसका ध्यान अमित क स्पर्श पर उतना नहीं था पर आज उसे कल की तरह ज्यादा दर्द नहीं था इस लिए लिए अमित का स्पर्श अपनी नंगी कमर पर महसूस होते hi वो मचल उठी थी.

अमित : मौसी कैसा लग रहा है ?

दिव्या : तू बस करता रह कक्कक्क्स

मैंने कमर से हाथ थोड़ा सा नीचे को खिसकाया तो मौसी क मुँह से सिसकी निकली पर ये कल की तरह दर्द वाली नहीं लग रही थी. मौसी ने चादर न हटाने को कहा था इस लिए मैं एक हाथ से hi कर रहा था . अब मेरे हाथ मौसी क नंगे कूल्हों पर आ गए थे . मुझे लगा था क मौसी ने सदी को थोड़ा नीचे किया होगा पर यहाँ तो आधे कूल्हों तक मेरा हाथ जा रहा था और अभी तक मेरे हाथ से कपडा टच नहीं हुआ था. मौसी क कूल्हे पर हाथ रख कर जब मैंने उसे हाथ में पकड़ कर दबाया तो मौसी सिसक उठी .

दिव्या : उफ्फ्फ्फ़ वक्क्क्कक्स आराम से कक्ककक्कक्स

दिव्या क बदन में सनसनी दौड़ गयी थी नंगे कूल्हों पर अमित का हाथ पड़ते hi . उसके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी पर दर्द क साथ उसके मज़ा भी आ रहा था उसे और एक बार फिर से वो गरम होने लगी थी. अपनी होंठों को डेंटन में दबाये वो अपनी आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही थी.

मैंने मौसी क कूल्हों पर एक hi हाथ से बरी बरी से मालिश कर रहा था जिससे मुझे थोड़ी दिक्कत भी थी मगर मैंने चादर नहीं हटाई ताकि वो गुस्सा न करे. तभी मौसी का बयां कुल्हा दबाते हुए मेरा हाथ थोड़ा सा फिसल कर नीचे को हो गया और मेरी उंगलियां गीली चिंकी जगह से टकराई जहाँ बल थे. मेरा शरीर कम्प गया क्यूंकि वो बाल कहाँ क थे मैं समझ गया था . मेरे साथ hi मौसी क जिस्म ने भी झटका खाया और एक तेज़ सिसकी उनके मुँह से निकली.

दिव्या : उउइइइइइइ. कक्कक्कक्स ूमममममम

दिव्या का बदन एक डैम से झटका है गया जब उसे अमित की उंगली अपनी छूट पर महसूस हुई. वो थोड़ा सा ऊपर को खिसकी पर इससे वो अमित उंगली और भी ज्यादा छूट पर रगड़ गयी. पर अगले hi पल अमित का हाथ वहां से हैट गया . इस एक पल में hi दिव्या को ऐसे लगा जैसे वो चरम पर पहुँच गयी हो. उसका बदन अकड़ गया था. दिव्या तो क पल में hi होश हवा बैठी थी पर जब अमित की कोई हरकत न हुई तो उसका ध्यान इस बात पर गया क अमित का हाथ अब उसके शरीर पर नहीं था . दिव्या जैसे हवा में उड़ती उड़ती ज़मीन पर आ गिरी हो . वो एक डैम से फ़्रस्ट्राटे हो गयी .

दिव्या : क्या हुआ तुम रुक क्यों गए ? करो न .

मैं तो सोच रहा था क मौसी गुस्सा करेंगी पर उनका ये जवाब सुन कर मैं हैरान हुआ.

अमित : मौसी वो इस तरह से मुझे मालिश करने में परेशानी हो रही है. अगर दोनों हाथों से करूँगा तो अचे से कर पाउँगा .

दिव्या : तो दोनों हाथों से कर न .

अमित : पर मौसी इसके लिए मुझे चादर हटानी पड़ेगी .

दिव्या : तो हटा ले

दिव्या को यद् hi नहीं रहा क उसने खुद hi मन किया था अमित को चादर हटाने से और अब खुद hi चादर हटाने को कह रही थी.

मैंने मौसी क कहने पर चादर को हटा दिया. हालाँकि कमरे में छोटी लाइट जल रही थी पर इसमें भी मैं मौसी क गोर चूतड़ देख प् रहा था. मैंने जानबूझ कर नहीं देखा था पर चादर हटते हुए मेरी नज़र उनके गोर रंग पर पड़ी तो नज़रें जैसे वहीँ जैम गयी. मैं जैसे शुन्य में hi चला गया था . तभी मौसी की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी .

दिव्या : रुक क्यों गए करो न

अमित : जज जी जी मौसी .

मैं मौसी की आवाज़ सुन कर हड़बड़ा गया था जैसे मेरी चोरी पकड़ी गयी हो . मैंने जैसे hi अपने दोनों हाथ मौसी क नरम चूतड़ों पर रखे तो मेरे जिस्म में कपकपी छोड़ गयी. मेरे हाथ कम्पनी लगे थे और मौसी क चूतड़ों में भी मुझे कम्पन महसूस हुई. पता नहीं उनके चूतड़ हिले थे या मेरे hi हाथ कम्पनी से ऐसा लगा . पर उनको छूने का एहसास मुझे मदहोश कर रहा था. मैंने मौसी क चूतड़ों पर हाथ ऐसे रखे थे जैसे उन्हें दबाने की बजाये सेहला रहा हूँ .

दिव्या : कक करो भी रर रु रुक क्यों गए ??

दिव्या क जिस्म में भी इस वक़्त वहीँ कम्पन हो रही थी जो अमित क जिस्म में थी. दिव्या की ज़ुबान खुद उसका hi साथ नहीं दे रही थी . अपने नंगे चूतड़ों पर अमित क हाथों का प्यार भरा एहसास जैसे उसके मन की तारों को छेड़ रहा था जिसका असर दोनों जांघों क जोड़ में कहीं अंदर तक महसूस हो रहा था. अमित क हाथों में कहीं भी ज़ोर नहीं था . वो तो जैसे आज एक प्रेमी की तरह दिव्या क कोमल जिस्म की खूबसूरती की तारीफ कर रहा था उसकी पूजा कर रहा था. और इसी एहसास को तो दिव्या ने न जाने कितनी बार अपने सपनो में महसूस किया था. अमित क हलके हाथों से सहलाने पर भी दिव्या क मुँह से सिसकियाँ निकालनी शुरू हो गयी जिसे वो अपने होंठ दांतो टेल दबा कर रोकने की कोशिश कर रही थी . दिव्या क जिस्म में अब रिएक्शन शुरू हो गया था . उसकी बहन अपने आप बीएड पर मचलने लगी . कभी वो बेडशीट को मुट्ठियों में कास लेती कभी छोड़ देती. अमित क हाथ जैसे आज उसकी दबी हुई काम ीचा को जगा रहे थे. दिव्या ऑंखें बंद किये आनंद क सागर में डूबती जा रही थी. उसकी टांगों में भी जब काम ज्वर का असर हुआ तो एक तंग ऊपर की तरफ सरक गयी जिससे उसकी कमर थोड़ी सी ऊपर को सर्कि और वो धमाका हो गया जिसकी दोनों को hi उम्मीद न थी. अमित भी अपने आप पर काबू नहीं रख प् रहा था और इस रिएक्शन में उसकी एक हाथ की दो उंगली सरक कर छूट की फांकों में 1 इंच तक सरक गयी. उसके साथ hi दिव्या का जिस्म अकड़ गया और योनकुंड से पानी का बांध टूट गया.

दिव्या: कक्ककक्कक्स आअह्हह्ह्ह्ह आअह्हह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह

दिव्या का जिस्म अकड़ कर झटके खाने लगा और वो ऐसे कम्पनी लगी जैसे उसे वाइब्रेशन मोड पर लगा दिया गया हो. अमित की उँगलियों पर जब वो गरम पानी लगा तो उसे भी झटका लगा. दिव्या तो जैसे बेहोश hi हो गयी और कुछ पता नहीं चला क वो कहाँ है और क्या हो रहा है. उसे बस दरवाज़े की आवाज़ hi सुनाई दी थी पर उसकी अपनी ऑंखें बंद हो चुकी थी. जिस्म ऐसे मदहोश हो चूका था मनो किसी ने नशा खिला दिया हो.

दिव्या मौसी की मालिश करते करते अनजाने में मेरी उंगलियां उनकी छूट में सरक गयी और एक डैम से उनकी पूरी बॉडी अकड़ कर झटके खाने लगी. मेरी उँगलियों पर जब गरम तरल का एहसास हुआ तो मैं समझ गया ये पानी उनके अंदर से हो आ रहा है. मुझसे अनजाने में बहुत बड़ी गलती हो गयी थी. इससे पहले की मौसी मुझे गुस्से में आकर कुछ कहती और सरे घर को पता चलता मैं फ़ौरन उनके कमरे से निकल भगा और अपने कमरे में आकर सीधा बीएड पर आ गिरा. मेरा दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था मनो 10 कम दौड़ कर आया हूँ. मैं पूरा पसीने में भीग चूका था. मैं खुद कोस रहा था क ये मुझसे क्या हो गया. क्यों मैं खुद को रोक नहीं प् रहा था. अब मुझे दर लगने लगा क पता नहीं मौसी क्या कहेंगी . वो पहले hi हमेशा मुझसे गुस्सा रहती थी अभी जो कुछ हुआ था उसके बाद तो वो मुझे मर hi डालेंगी. वो मेरे बारे में क्या सोचेंगी . मैं अपने hi मन में पता नहीं क्या क्या सोचने लगा . मुझसे हिम्मत नहीं हो रही थी क मैं अपने बिस्तर उठ कर बहार भी निकलूं. बहुत देर तक मैं खुद को कोस्टा रहा और पता नहीं कब मेरी आँख लग गयी.



उधर निधि देर तक राधा से बातें करती रही. दोनों की बातें कैसी भी हो रही थी पर उनकी बातों में सिर्फ अमित hi था. असल में निधि राधा से अमित क बारे में hi जानने की कोशिश कर रही थी क्यूंकि कॉलेज में तो राधा अमित क साथ hi होती थी. दोनों देर तक बातें करती हुई सो गयी . पर रत में अचानक निधि की नींद खुली तो वो उठ कर अमित को देखने चली गयी. और जब उसने अमित को अपने बिस्तर पर सोता हुआ पाया तो वो खुद को रोक न पायी और उसके साथ hi लेट गयी. अमित शायद सपने में दर रहा था जिससे उसका जिस्म थोड़ा कम्प रहा था निधि ने उसे जल्दी से अपनी बाँहों में भर लिया. जिससे अमित कुछ शांत हो गया. पर अगले hi पल उसने निधि को अपनी आगोश में ले लिया. निधि की तो मनो मुराद hi पूरी हो गयी. पर वो यहीं नहीं रुका जल्दी hi उसने निधि को बाँहों में कास लिया और उसके होंठ निधि क नाज़ुक कोमल अछूते होंठों पर जा लगे. निधि का पूरा जिस्म कम्प गया. पर उसने रत्ती भर भी कोशिश न की खुद को अलग करने की. वो तो मनो निर्जीव hi हो गयी थी. पर जब अमित ने उसके होंठों को चूसना शुरू किया तो निधि स्वतः hi उसके होंठों का अनुसरण करने लगी . दोनों करवट क बल लेते हुए थे. अमित का एक हाथ सरकता हुआ उसकी पीठ से कमर तक आया और फिर उसके नरम कूल्हों पर. कूल्हों पर आते hi उसकी पकड़ मजबूत हो गयी और निधि की भी जांघ ऊपर उठ कर अमित की जांघ पर चढ़ गयी. निधि की ज़िन्दगी का ये पहला एहसास था जिसमे वो इतनी उत्तेजना महसूस कर रही थी पर इसमें सिर्फ और सिर्फ उसे प्यार का hi एहसास हो रहा था. वो प्यार जिसके लिए वो कब से तड़प रही थी. निधि अमित क साथ और ज्यादा चिपकती हुई उसके ऊपर hi चढ़ जाना चाहती थी और फिर उसे एक बड़ी और सख्त चीज़ का एहसास अपने यौनांग पर हुआ. निधि बादलों में उड़ती हुई अब खुद hi अमित क होंठ चूस रही थी और उसका हाथ अमित क सर क पीछे था. उसे ज़रा भी होश नहीं था वो कहाँ है और किस सिचुएशन में . अमित का एक हाथ उसके कूल्हों को दबा रहा था . और फिर उसे अपने कोमल अछूते स्तनों पर जैसे hi अमित का दूसरा हाथ महसूस हुआ उसका पूरा बदन सूखे पत्ते की तरह फड़फड़ाने लगा. और इसी क साथ उसकी पेंटी गीली हो गयी.
 
आज अपडेट दूंगा भाई पक्का, थोड़ा सा काम बाकि है अभी
 
अपडेट 197



दिव्या मौसी पूरी नंगी मेरे आगे घोड़ी बानी हुई थी और मैं उनके चूतड़ों को मसल रहा था. मेरा लैंड उत्तेजना से फटने को था . मैंने मौसी की कमर सहलाते हुए उनके चूतड़ों को दबाया और घुटने मोड़ कर अपना लैंड छूट पर सेट कर क ज़ोर से धक्का मर दिया. मौसी ज़ोर से चिल्लाई और पलट कर गुस्से में मुझे थप्पड़ मरने लगी .

दिव्या : हरामज़ादे मनहूस कहीं क दिखा दिया न अपना असली चेहरा. चत्ताआक चाताआयककक

मैं एक डैम से गड़बड़ के उठा और अपने आसपास देखा तो मैं अपने बिस्तर पर hi तह. मैंने कमरे में नज़र दौड़ाई तो पता चला मैं यहाँ अकेला hi हूँ.

‘ हे भगवन ये सपना था? ऐसा लग रहा था जैसे सब असलियत में हो रहा है. ये कैसा सपना था. मैं मौसी क साथ ,,,,,, नहीं नहीं ये गलत है . मैं ऐसा कैसे सोच सकता हूँ? मौसी सच में मेरी जान ले लेगी. ऐसा नहीं हो सकता. वो मेरी माँ hi तो हैं. पर को रत मैंने ..... हे भगवन मौसी कल रत वाली मेरी हरकत पर क्या सोच रही होंगी ? कहीं वो मेरी शिकायत तो नहीं कर देंगी ? मुझे मौसी से माफ़ी मांगनी होगी . पर मैं उनसे बात कैसे करूँ ? क्या कहूंगा उनसे ? नहीं , मुझे खामोश hi रहना चाहिए. अगर मौसी कुछ कहेंगी तो उनके पाऊँ पकड़ कर माफ़ी मांग लूंगा. पर कहीं मौसी ने माँ को बता दिया तो? नहीं मौसी ऐसा नहीं कर सकती. पर उन्हें गुस्सा भी जल्दी आ जाता है ? अब क्या होगा ?

मैं खुद से hi बातें कर रहा था. मेरे दिल की धड़कने बरही हुई थी सपने की वजह से . मैंने समय देखा तो अभी ज्यादा नहीं हुआ था. पर हमें शहर जाना था और फिर कॉलेज इस लिए मैं जल्दी से उठा और नाहा कर तैयार होने लगा. पर मेरे दिमाग में सिर्फ दिव्या मौसी hi थी .

उधर दूसरे कमरे में निधि भी उठ गयी थी . आज एक नई सुबह एक नया एहसास था निधि क लिए . उठते hi वो रत का मंज़र यद् करने लगी. किस तरह वो अमित की बाँहों में थी और वो उसे प्यार कर रहा था. ज़िन्दगी में पहली बार निधि खुद को रोक न पति और वो चरम तक पहुँच गयी थी. वो सब यद् करते निधि खुद hi शर्माने लगी. निधि चरम पर पहुँचने क बाद अपनी गीली पेंटी क साथ वापिस आ गयी थी और पेंटी बदल कर फिर से सो गयी थी उस सुखद एहसास क साथ . निधि का उठने का मन तो नहीं हो रहा था पर ऑफिस और अमित राधा को कॉलेज भी छोड़ना था इस लिए वो जल्दी से उठी और चीयर होने लगी .

मैं तैयार हो कर निधि दीदी को देखने क लिए उनके कमरे में गया . क्यूंकि उनके बगैर तो जाना पॉसिबल नहीं था. मैं अपने hi ख्यालों में खोया बिना दस्तक दिए दरवाज़ा खोल कर जैसे hi अंदर घुसा तो मुझे झटका लगा. अंदर निधि दीदी सलवार पहने खैर थी. वो अपनी कमीज को पहनने क लिए अभी बीएड से उठा hi रही थी. उनके गोर जिस्म पर काली ब्रा जानलेवा लग रही थी. निधि दीदी की परफेक्ट फिगर इस तरह अधनंगी देख कर मुझे झटका लगा. मुझे समझ hi नहीं आया क मैं क्या करूँ क्या नहीं . और तभी निधि दीदी की नज़र भी मेरी तरफ पड़ी. एक पल को तो वो भी दर गयी पर जल्दी hi खुद ो संभल लिया .

निधि : ा ा अमित तुम यहाँ ा ा ऐसे अचानक !!!!

निधि दीदी की आवाज़ सुन कर मुझे कुछ होश आयी और मैंने देखा निधि दीदी अपने आप को कमीज से धक् रही थी. मुझे अपनी इस हरकत पर शर्म आ गयी और मैं एक डैम से पलट गया .

अमित : स सॉरी दीदी. मैं आ आपको बुलाने आया था . मुझसे गलती हो गयी मैंने दरवाज़ा नॉक नहीं किया . मुझे माफ़ कर दो दीदी

निधि चाहे अमित से दिलोजान से मुहब्बत करने लगी थी और उसे अपना पति भी मानती थी. पर थी तो एक लड़की hi . वो इस तरह अमित क अचानक आ जाने से घबरा गयी थी पर जल्दी hi उसे सब समझ आ गया. उसे अमित की नज़रें अपने ऊपर देख कर ाचा भी लग रहा था पर अब अमित का सॉरी बोलना उसे बुरा लग रहा था.

निधि : नहीं ऐसा मत कहो इसमें तुम्हारी क्या गलती है ? मुझे दरवाज़ा बंद करना चाहिए था. असल में वो राधा अभी थोड़ी देर पहले hi अपने कमरे में गयी है न तो इस लिए दरवाज़ा खुला था. तुम प्लीज ऐसा मत सोचो और यहाँ आओ मेरे पास

अमित : नहीं दीदी मैं नीचे चलता हूँ . आप तैयार हो कर नीचे आ जाना. दीदी सच में मैंने ये जानबूझ कर नहीं किया . प्लीज मुझे गलत मत समझना.

इतना कह कर मैं कमरे से बहार निकला और सीधा नीचे आ गया. क्यूंकि दिव्या मौसी क सामने जाने की तो हिम्मत hi नहीं हो रही थी मुझसे. माँ किचन में थी . शायद हम लोगों क लिए कुछ बना रही थी . मैं उनके पास किचन में hi चला गया और जाये hi उनके गले लग कर उनसे मिला.

गौरी : तैयार हो गया बीटा ?

अमित : आप सुबह सुबह क्या कर रही हैं? आपको पता है न नाश्ता नहीं कर पाएंगे हम. वर्ण लेट हो जायेंगे .

गौरी : सब पता है मुझे. पर ज़रा ये भी तो सोच क घर की बेटियों को क्या ऐसे hi भेज दूँ? राधा तो तेरे साथ कॉलेज चली जाएगी और निधि ऑफिस. और नाश्ता कोई भी नहीं कर पायेगा . इस लिए परांठे बना रही हूँ . जल्दी खा कर निकल जाना मन नहीं करुँगी पर बिना खाये नहीं जाने दूंगी .

अमित : जैसी आपकी मर्ज़ी . पहले आप मुझे देदो .

माँ ने मुझे खाना दिया और मैं बहार बैठ कर खाने लगा .

‘ अकेले hi शुरू हो गए ? रुक नहीं सकते थे मेरे लिए मतलब हमारे लिए ? और आज तुम मुझे उठाने भी नहीं आये .’ राधा मेरे साथ आ कर बैठ गयी और शिकायत करने लगी. पर साथ hi साथ बिना किसी लग लपेट के मेरी थाली से hi खुद पारी था खाने लगी . दिव्या मौसी और निधि दीदी भी आ कर हमारे पास बैठ गए. मेरी तो हिम्मत नहीं हो रही थी मैं दोनों की तरफ देखूं इस लिए नज़रें झुका ली .

‘ अरे राधा बेटी मैं ला रही हूँ न तेरे लिए खाना , तुम क्यों जूठा खा रही थी उसका ? ‘ माँ ने खाने की दो प्लेट्स हाथ में पकडे आते हुए कहा.

राधा : ये कौन सा कोई बहार वाला है ममी जी. और वैसे भी ऐसे कुछ जूठा नहीं होता.

दिव्या : सख्ती से ) ये क्या हरकत है राधा ? आ रहा है न तेरा खाना . फिर क्यों उसका खाना ले रही है ?

दिव्या अंदर से परेशां थी . कल रत जो भी हुआ था उसके बाद दिव्या का दिल दिमाग उसे एक पल भी आराम से बैठने नहीं दे रहा था. उसे अमित पर तो गुस्सा नहीं था क्यूंकि वो जानती थी क उसने कुछ भी जान बुझ कर नहीं किया . पर वो खुद से ज़रूर गुस्सा थी क वो खुद को रोक क्यों नहीं पायी . नजाने अमित क्या सोच रहा होगा उसके बारे में उसके मन में यही सवाल था. और अब जिस तरह अमित उससे नज़रें चुरा रहा था उससे तो उसका मन और भी व्यथित हो रहा था इस लिए राधा क इस तरह अमित की रोटी उठा लेने से वो थोड़ा नाराज़ होने लगी अपनी बेटी पर .

दिव्या क बगल में बैठी निधि भी बस अमित को hi देख रही थी. अमित को झुकी नज़रें उसके दिल को चोट पहुंचा रही थी. उसे बहुत बुरा लग रहा . अमित उसका प्यार था और अब उसकी की वजह से वो खुद से शर्मिंदा महसूस कर रहा था .

गौरी : अरे दिव्या क्यों बेचारी को दन्त टी है? ठीक hi तो कहा उसने . अमित कोई पराया थोड़ी है. मज़ार hi कर रही है वो अमित क साथ. करने दे हंसी मज़ाक बच्चों को. तुम खाना खाओ लो निधि तुम भी खाना शुरू करो.

माँ खाने की प्लेट रख कर किचन में चली गयी . राधा दिव्या मौसी की दन्त क बाद और कुछ नहीं बोली. खाना खाने क दौरान मैंने अपनी नज़रें नीचे hi राखी. जैसे hi खाना ख़तम हुआ माँ ने चाय दी और फिर हम निकल लिए शहर क लिए . दीदी ने पहले मौसी को घर ड्राप किया . मैं अपनी बाइक से जाना चाहता था पर दीदी ने कहा क वो हम दोनों को कॉलेज ड्राप करना चाहती है. फिर हम कॉलेज पहुँच गए. जैसे hi हम कार से उतर कर अंदर जाने लगे तो दीदी ने मुझे आवाज़ दी.

अमित : जी दीदी कहिये

निधि : देख तेरा ऐसे उदास चेहरा मुझे ाचा नहीं लग रहा . उसने तेरी गलती थोड़ा थी. वो तो अचानक हो गया था वैसे भी मुझे बिलकुल बुरा नहीं लगा. तुम तो मेरे अपने हो न . पर अब तुम ऐसे उदास चेहरा बना कर मुझे दुखी कर रहे हो. क्या तुम चाहते हो क मैं दुखी हो जॉन ?

अमित : नहीं दीदी मैं भला ऐसा क्यों चाहूंगा. मैं तो चाहता हूँ क दुनिया की हर ख़ुशी आपको नसीब हो .

निधि : तो कुछ भी मत सोच , जो भी सुबह हुआ उसे भूल जा. मैं तुमसे बिलकुल भी नाराज़ नहीं . उम्म्माह ....

दीदी ने मुझे गलों पर किश कर दिया. मैंने उनकी तरफ देखा तो वो शर्मा गयी . और फिर हाथ हिलाते हुए चल दी. राधा ने भी शायद दीदी की वो हरकत देख ली थी और मुस्कुरा रही थी . मैंने उसे ऐसे मुस्कुराते हुए देखा तो पूछा

अमित : तुम क्यों ऐसे है रही हो ?

राधा : देख रही हूँ दीदी आज भी तुम्हे छोटा बचा hi समझती हैं. वैसे दीदी कह क्या रही थी?

अमित : कुछ नहीं बस ऐसे hi बात कर रही थी.

उसके बाद बाकि सब भी आ गए और हम अपनी अपनी क्लास में चले गए . कैंटीन में फ्री लेक्चर में वही रोज़ की गपशप हुई. उसके बाद जैसे hi हम वापिस क्लास में जाने लगे तो शीना ने मुझे अकेले में रोक लिया .

अमित : क्या बात है ?

शीना : आज शाम तुम मेरे साथ बिताने वाले हो यद् है न ?

अमित : मैंने कब कहा आज शाम का ?

शीना : भूल गए तुम्हे वडा किया था ? अब मुकर नहीं सकते .

अमित : पर आज ...... तुमने बाकि किसी को तो कहा नहीं

शीना : बाकि सब क साथ मैं सेलिब्रेट कर चुकी हूँ. बस तुम नहीं थे. इस लिए आज तुम्हारे साथ मैं बर्थडे सेलिब्रेट करना चाहती हूँ . इसी लिए किसी क सामने बात नहीं की. और तुम भी मत करना. सिर्फ तुम और मैं hi होंगे बस.

अमित : पर मैं .....

शीना: देखो अगर मुझे अपना कुछ मानते हो तो इंकार मत करना वर्ण ...

अमित : ाचा ठीक है . पर जाना कहाँ है ?

शीना : वो तुम्हे पता चल जायेगा शाम को. तुम बुआ क पास आज मत जाना

अमित : नहीं मैं छुट्टी नहीं कर सकता पहले hi बहुत नुकसान हो गया है पड़े का .

शीना : ाचा ठीक है , ऐसा करते हैं फिर मैं बुआ क घर क बहार से hi तुम्हे अपने साथ ले जाउंगी. तुम घर मत जाना वापिस. और डिनर आज मेरे साथ hi होगा पहले hi कह देती हूँ.

अमित : ाचा ठीक है. अब चले क्लास में ?

शीना : शरमाते हुए ) तुम जाओ मुझे कुछ काम है .

मैं वापिस अपनी क्लास में चला गया. मेरी समझ में एक बात नहीं आ रही थी क शीना मुझे अकेले को hi क्यों पार्टी देने की बात कर रही है . जबकि इसमें किसी और क शामिल होने से कोई फरक तो पड़ने वाला नहीं था. खैर उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ और लेक्चर ख़तम होने क बाद हम सब उकठा हुए छुट्टी क वक़्त . शीना पहले hi जा चुकी थी रीमा ने hi बताया.

कल्पना : तुम आज कैसे आये थे ?

अमित : दीदी क साथ कार पर

कल्पना : खुश होते हुए ) तो फिर आज मेरे साथ hi चलो तुम.

मोहित : आज तू मेरे साथ चल, माँ का फ़ोन आया था क तुम्हे साथ लेकर आऊं .

मोहित की बात सुन कर कल्पना और राधा दोनों क चेहरे पर भाव कुछ बदले और मेरी तरफ देखने लगी. मुझे भी दिव्या मौसी क सामने जाने में झिझक हो रही थी इस लिए मैंने मोहित की बात को तुरंत मन लिया .

अमित : चल ठीक है आज तुम्हारे साथ hi चलता हूँ. राधा तुम कल्पना क साथ घर जाओ. मैं देर से आऊंगा .

राधा : पर कल hi तो मिले थे सब . और देर क्यों हो जाएगी ?

अमित : वो आंटी को कोई काम है . फिर मैं वहीँ से स्टेडियम और ट्यूशन चला जाऊंगा . शायद वापिस आने में मुझे दी हो जाये क्यूंकि एक और भी काम है .

राधा : मुँह बनाते हुए ) और क्या काम है अब ?

अमित : वो आ कर बताऊंगा , मौसी से कहना मैं खाना खा कर hi आऊंगा . मुझे देर हो सकती है .

राधा : बेमन से ) जल्दी आना

रीमा की नज़र भी मुझ पर hi थी और आँखों में सवाल . खैर मैं मोहित और कल्पना क साथ चल दिया और राधा नेहा दीदी कल्पना क साथ . जब हम घर पहुंचे तो मुझे देख कर आंटी क चाहे मरे पर एक डैम से रौनक आ गयी. करिश्मा दीदी उस वक़्त शायद अपने कमरे में थी. आंटी ने मुझे देखते हुए आगे बढ़ कर मुझे गले लगा लिया .

आंटी : खुश होते हुए ) तुम आ गए ? कितने दिनों बाद तुम यहाँ आये हो . मैं बता नहीं सकती मुझे कितनी ख़ुशी हो रही है . आओ बैठो मैं अभी खाना लगवाती हूँ उसके बाद तुमसे बहुत सी बातें करनी है. राणीइइइइइइ

रमा आंटी क भाव सच में ऐसे थे जैसे मैं बरसों बाद आया हूँ. उनकी आँखों में ख़ुशी साफ़ झलक रही थी. वो रानी को आवाज़ देती हुई किचन में चली गयी. आंटी कुछ ज़ोर से आवाज़ दे रही थी जो शायद करिश्मा दीदी को भी सुन गयी और वो कमरे से बहार निकल आयी. मुझे सामने देख एक बार तो वो हैरान hi हो गयी और फिर तेज़ कदमो से चल कर मेरे पास आते hi मुझे गले लगा लिया. तब तक मोहित ऊपर कमरे में चला गया था अपना बैग रखने.

करिश्मा: खुश होते हुए ) तुमने सच में मुझे माफ़ कर दिया . थैंक यू , थैंक यू वैरी मच

अमित : आप फिर से वही सब कहने लगी. मैंने पहले भी कहा था ऐसा मत सोचिये आप. आइये बैठिये यहाँ मेरे पास.

मैंने करिश्मा दीदी को पास में बिठाया उधर से आंटी भी आ गयी.

रमा : देखा करिश्मा , मैंने कहा था न अमित दिल का बहुत ाचा है . वो ज़रूर माफ़ कर देगा. देखो आ hi गया न. तुम नहीं जानते अमित तुम्हारे जाने क बाद से करिश्मा और मेरा क्या हल था . मैं तो दुखी थी hi ये बेचारी तो हर वक़्त रोटी रहती थी कमरे में दरवाज़ा बंद किये.

मैंने आंटी की बात सुन कर करिश्मा दीदी की तरफ देखा तो उन्होंने नज़रें झुका ली .

अमित : क्या ये सच है दीदी ? मेरी वजह से आपका घर टूट गया इस लिए ........

करिश्मा ( बीच में ) मुझे उसका कोई दुःख नहीं है. जो हुआ ाचा hi हुआ. अफ़सोस तो इस बात का है क इतने सैलून तक मैं उन घटिया लोगों में रही. पर मेरे रोने की वजह मेरी वो गलती थी जो मैंने बिना सचाई जाने कर दी. मैं जब भी वो यद् करती हूँ मुझे खुद पर गुस्सा आ जाता है

अमित : दीदी आप मेरी बहिन हैं और भाई बहिन में तो ये सब चलता है न. बड़ी बहिन ने छोटे भाई पर हाथ उठा भी दिया तो क्या हुआ . मुझे आप पर ज़रा भी गुस्सा नहीं था बल्कि गलत तो मैं hi था आपने तो जो किया सही किया .

करिश्मा: नहीं तुम गलत नहीं थे . किसी टूटे हुए को सहारा दे कर संभालना गलत नहीं होता. दुनिया की नज़र में छे ये गलत हो पर इंसानियत की नज़र से देखा जाये तो किसी का तमाशा बनते हुए देखने से ाचा है आगे बाद कर उसका सहारा बनना. तुम्हारी इज़्ज़त मेरे दिल में और भी बढ़ गयी है मेरे भाई. तुम सच में बहुत अचे हो.

अमित : पर मुझे अफ़सोस है क आप का घर टूट गया .

करिश्मा : स्टॉप थिस टॉपिक. मैं वो सब भूल जाना चाहती हूँ. माँ हमेशा कहती थी पर मैं कभी फैसला hi नहीं कर पायी. और तुमने एक बार में hi मुझे उस नरक से आज़ादी दिला दी.

रमा : चलो छोडो अब उन बातों को . खाने का वक़्त है और अमित आज इतने दिनों बाद आया है. अब ख़ुशी ख़ुशी खाना खाओ.

आंटी ने हमारे बातें करते करते खाना लगा भी दिया था और उधर से मोहित भी निचे अत हुआ दिखाई दिया तो हमने बातें बदल दी. सब ने मिल कर खाना खाया उसके बाद मोहित बहन बना कर अपने कमरे में चला गया .

अमित : दीदी आपने आगे का क्या सोचा है ?

करिश्मा : फ़िलहाल मैं कुछ भी सोचना नहीं चाहती.

रमा : तेरे अंकल ने तो खुद hi कह दिया है क करिश्मा अब वहां नहीं जाएगी. डाइवोर्स क लिए अधिवक्ता पेपर रेडी कर रहा है. अगर वो लोग आराम से मन गए तो ठीक वर्ण ये केस करने का बोल रहे हैं .

अमित : तो आपका ये फाइनल फैसला है ?

करिश्मा : हम्म्म

रमा : मैं तो कब से कह रही थी . इसने hi फैसला देर से लिया .

करिश्मा : छोडो न माँ , वो तो पापा की वजह से मैं ..... सोचा था शायद एक दिन सुधर जायेंगे पर वो लोग तो .....

अमित : जो हो गया अब उसे भुला कर नई लाइफ शुरू करिये दीदी. अभी आपकी उम्र hi क्या है. आपको एक से एक ाचा लड़का मिल जायेगा.

करिश्मा : मुझे नहीं करनी शादी. एक बार जो नरक देख लिया है उसे अब दुबारा नहीं देख सकती .

करिश्मा दीदी की बात से रमा आंटी क माथे पर बल पद गए.

रमा : ये तुम क्या कह रही हो बेटी. तो क्या तुम साडी उम्र अकेली रहना चाहती हो ?

करिश्मा : तो क्या हुआ माँ, किसी क साथ रह कर दुखी होने से तो ाचा है अकेले रहना. मैंने सोच लिया है पापा क साथ ऑफिस जाना शुरू कर दूंगी . निधि दीदी भी हैं वहां तो दिल लग जायेगा. मैं आप पर बोझ नहीं बनूँगी माँ

करिश्मा दीदी की आखिरी बात पर आंटी तड़प उठी.

रमा : ये तुम क्या कह रही हो मेरी बची. ऐसा मत कहो. तुम कभी बोझ हो सकती हो भला . जो तुम्हारा दिल करे वो करो. मैं तुम्हे मन नहीं करुँगी. पर एक बार इस बारे में ठन्डे दिमाग से सोचना ज़रूर. चाहे तो अपनी पसंद का कोई लड़का देख लेना मैं तेरे पापा को मन लुंगी वो मन नहीं करेंगे. मैं ये सब इस लिए कह रही हूँ बीटा क इंसान को कोई न कोई अपना चाहिए hi होता है जिसके साथ वो अपना मन हल्का कर सके. इंसान की ज़रूरतें सिर्फ ऐशो आराम की चीज़ों से तो पूरी नहीं होती .

आंटी की बात सुन कर करिश्मा दीदी उनकी तरफ देखने लगी. आंटी का इशारा किस तरफ था ये मैं भी समझ रहा था.

करिश्मा: माँ प्लीज कोई और बात करो. अभी मुझे किसी की ज़रूरत नहीं है. जो ज़ख़्म मेरे दिल ने खाये हैं उसके बाद तो नफरत सी हो गयी है. आप कोई और बात करो.

अमित : ाचा ये बताइये क कल हमारे साथ दिवाली मन कर कैसा लगा ?

करिश्मा: ी वास् हैप्पी , जब यहाँ से गए थी तो एक उम्मीद ले कर गयी थी क तुम से बात हो जाये और तुमने तो हम दोनों को दिवाली का इतना ाचा तोहफा दे दिया. वैसे तो इस बार दिवाली मेरे लिए काली दिवाली थी पर तुमने खुशियों से भर दी.

मैं वहां जब तक रुका हम तीनो साथ में बैठ के बातें करते रहे. उसके बाद मैं मोहित क साथ स्टेडियम चला गया. स्टेडियम में प्रैक्टिस करने क बाद नीरज भैया ने मुझे मंजू म क घर ड्राप कर दिया . मुझे देखते hi मंजू म ने मुझे बाँहों में भर लिया .

मंजू : आ गए तुम , दो दिन तुम नहीं आये तो ऐसा लग रहा था जैसे पता नहीं कितने महीने हो गए हो. सोचा था दिवाली साथ में मनाएंगे पर ....

अमित : अरे आज सुबह hi तो क्लास में मिले थे फिर इतनी बेकरारी ? और मैंने बताया था न परसों मौसी को चोट लग गयी थी. वर्ण मैं आपसे मिल कर hi गाओं जाता कल.

मंजू : चलो कोई बात नहीं , और तुम क्या कह रहे थे क क्लास में मिले थे हाँ ?? वहां मैं तुम्हारी टीचर हूँ . वहां थोड़ी मैं तुम्हे वैसे मिल सकती हूँ

अमित : ाचा तो कैसे मिलना चाहती हैं आप ?

मंजू : बताऊँ ?? उम्मम्मम उम्मम्मम उम्मम्मम

मंजू म मुझ पर झपट पड़ी और मेरे होंठो पर अपने होंठ रख किश करते हुए मेरे साथ hi चिपक गयी और मुझे वहीँ दीवार क साथ लगा दिया . हम अभी दरवाज़े क पास hi थे और दोनों hi भूल गए क हमने दरवाज़ा लॉक नहीं किया था नहीं किया था अभी

‘ वह वह वह क्या सन है यार मज़ा आ गया , तुम दोनों तो किसी इंग्लिश मूवी क सन की तरह कर रहे हो यार . सो रोमांटिक ‘ ये आवाज़ ऋतू सिंह की थी जो अपनी पुलिस यूनिफार्म में हमारे पास hi कड़ी थी . हम दोनों hi उसकी आवाज़ सुन कर चौंके. ऋतू से नज़रें मिलते hi हम दोनों क चेहरे पर स्माइल आ गयी पर मंजू म की हालत ख़राब हो गयी.

मंजू : तत्तत तुम यय यहाँ कक कैसे ? मैं वो हम

ऋतू सिंह : रिलैक्स डार्लिंग रिलैक्स , मैं कोई परायी हूँ क्या ? वैसे तुझे इतना तो यद् रखना चाहिए न क दरवाज़ा भी बंद करना है. मौका देखा नहीं क हो गयी शुरू . इंग्लिश पड़ते पड़ते लगता है खुद hi अँगरेज़ बन गयी है. देखो तो कैसे भूखी बिल्ली की तरह खा रही थी.

मंजू म तो ऋतू की ये बात सुन कर शर्म से पानी पानी हो गयी और जल्दी से अंदर को भाग गयी .

ऋतू सिंह : क्यों जी , काम से कम आप hi कण्ट्रोल कर लेते. ाजो भी गर्मी लगी थी क्या .

अमित : गर्मी तो नहीं लगी पर प्यास ज़रूर लगा दी है आपकी बहिन ने. अब वो भाग गयी है तो आप hi प्यास बुझा दीजिये .

ऋतू सिंह : ाचा !! कुछ ज्यादा hi नहीं बोलने लगे तुम . रुको अभी बताती हूँ .

इतना कह कर ऋतू सिंह ने अपने हाथ से मेरे सर क बल पकड़ कर मेरा सर झुकाया और अपने होंठों में मेरे होंठ पकड़ लिए. ऋतू ने मेरे बाल इतने जोर से खींचे थे की मुझे दर्द भी हुआ मगर उसका इस तरह किश करना एक अलग hi मज़ा भी दे रहा था. पुलिस की इतनी बड़ी अफसर यूनिफार्म में मुझे ऐसे किश कर रही थी. ऋतू की ऑंखें बंद थी वो इस किश को एन्जॉय कर रही थी. तभी मेरा अपना डायन हाथ अपने आप उसके लेफ्ट बूब पर चला गया और मैंने उसे ज़ोर से दबा दिया. ऋतू की ऑंखें एक डैम से खुल गयी और वो झटके से पीछे हो गयी.

ऋतू सिंह : होंठो को साफ करते हुए ) जानवर !! इतनी ज़ोर से क्यों दबाया ? दीखता नहीं यूनिफार्म में हूँ.

अमित : तो मेरे बल इतनी ज़ोर से क्यों खींचे हाँ ? मुझे क्या दर्द नहीं होता ?

ऋतू सिंह : भूल गए मुझे कितना दर्द दिया था? ये तो कुछ भी नहीं .

अमित : लगता है फिर से दर्द देना पड़ेगा

‘ शर्म नहीं अति तुझे ? दरवाज़े पर दस्तक नहीं दे सकती थी ? ‘ मंजू म वापिस अति हुई बोली . उनकी आवाज़ सुनते hi ऋतू उनकी तरफ हो गयी.

ऋतू सिंह : ाचा मैं दस्तक देती खुले दरवाज़े पर ? अगर मेरी जगह कोई और ऐसे आ जाता तो ? कुछ तो कण्ट्रोल रखा कर. वैसे तेरा भी क्या कसूर जब बर्फ इतना हैंडसम हो तो कण्ट्रोल कैसे होगा.

मंजू : शरमाते हुए ) चुप कर ,, शर्म नहीं अति तुझे ये सब बोलते हुए .

ऋतू सिंह : लो करलो बात ,, खुद चाहे खुल्लम खुला सब कर ले और हम बात भी न करें . वैसे अगर तुझे बुरा न लगे तो क्या मैं भी कुछ कर लूँ इसके साथ ? आफ्टर आल ी ऍम थे ओनली साआली

ऋतू ने बड़ी ऐडा से शरारत में ये बात कही तो मंजू म ने उसे चपत लगा दी.

मंजू : लगता है तू ऐसे नहीं मांगी ,, जा कर ले जो करना है बाद में मत कहना क चाल बिगड़ दी.

मैं तो मंजू म की बात सुन कर हैरान हो गया. ऐसी बात वो भी कर सकती हैं मैं ये सोच भी नहीं सकता था. मगर ऋतू तो पूरा मज़ा ले रही थी उनकी बातों का.

ऋतू सिंह : मेरी तरफ देखते हुए ) तो क्या कहते हो जीजा जी ,, आधी घरवाली की चल बिगाड़ोगे ??

मैं ऋतू की बात पर हड़बड़ा गया और ऋतू हसने लगी

ऋतू सिंह : है है है ,,, लगता है जीजा जी दर गए . क्यों डैम नहीं है क्या ?

मंजू : क्यों तंग करती है उसे? चल आ बैठ ,, कैसे आना हुआ आज ?

मंजू म ऋतू का हाथ पकड़ कर उसे सोफे पर अपने साथ लेकर बैठ गयी. मैं भी उनके साथ hi उधर आ कर बैठ गया.

ऋतू सिंह: एक्चुअली मैं अमित से hi बात करने आयी हूँ.

मैं ऋतू की बात सुन कर चौंका.

मंजू : क्या बात है ?

ऋतू सिंह: वो मैनेजर और उसकी फॅमिली अंडरग्राउंड हो गए हैं. फ़ोन भी बंद हैं. मैं लगातार कोशिश कर रही हूँ पर कुछ पता नहीं चल रहा. ऊपर से मेरा ट्रांसफर आर्डर आ गया है.

अमित : चौंकते हुए ) क्या? तो क्या आप....

ऋतू सिंह : मैं फ़िलहाल तो कहीं नहीं जा रही क्यूंकि विक्रम सर ने मेरा ट्रांसफर रुकवा दिया है होम मिनिस्ट्री से बात कर क. मगर इससे एक बात तो साफ़ है क इसके पीछे बलजीत राइ है वर्ण इतनी जल्दी ऐसा कोई आर्डर तो नहीं आने वाला था. मुझे पहले hi शक था इस बात का.

मंजू : प्लीज ऋतू तुम उससे मत उलझो वो बहुत खतरनाक है

ऋतू सिंह : मैंने ये वर्दी किसी से डरने क लिए नहीं पहनी है. Don’t वोर्री मुझे दर्जन या रोकना इतना आसान नहीं और फिर विक्रम सर है न मेरी मदद क लिए

मंजू : मुझे बहुत दर लग रहा है ऋतू प्लीज तुम अपना ध्यान रखना .

ऋतू सिंह : don’t वोर्री , उस मैनेजर को तो मैं ढून्ढ कर hi रहूंगी . चाहे वो कहीं भी छुपा हो . एनीवे यार तुम ज़रा कॉफ़ी तो पीला दो मुझे , तेरे हाथ की कॉफ़ी लिए कितने दिन हो गए

मंजू : मैं अभी लती हूँ तुम बातें करो.

मंजू म किचन में चले गए पर उनके चेहरे पर परेशानी साफ़ नज़र आ रही थी .

ऋतू सिंह : हे तुम क्यों चुप हो गए ? Don’t वोर्री मैं कोई मामूली पुलिस वाली तो नहीं जो कोई भी डरा धमका लेगा. उन लोगों को अभी कानून की ताकत का अंदाज़ा नहीं. वैसे एक बात तो है , बलजीत राइ का इतना इंटरेस्ट देख कर मुझे लगता है जैसे वो इस बारे में ज़रूर जनता है . बस एक बार वो मैनेजर हाथ आ जाये तो सब पता चल जायेगा .

अमित : देखिये आप अपना ध्यान रखियेगा , कहीं मेरी वजह से आप पर न कोई आंच आ जाये

ऋतू सिंह : मुस्कुराते हुए ) सड़के जवान , इतना प्यार हो गया अपनी साली से ? काश बीच में मंजू न होती न तो तुम्हे हमेशा क लिए अपने पास hi बंद कर क रख लेती. टेंशन न लो , बहुत सख्त जान हूँ मैं . उन लोगों को दादी नानी सब यद् दिलवा दूंगी.

ऋतू सिंह वाकई में एक दलेर अफसर थी जो परवाह नहीं करती थी किसी की. मंजू म थोड़ी देर में कॉफ़ी ले आयी . बातों का सिलसिला ऐसे hi चलता रहा . फिर ऋतू सिंह दोबारा मिलने का कह कर चली गयी. तभी मेरे मोबाइल पर शीना का फ़ोन आने लगा . मैं तो भूल hi गया था क उसने मुझे शाम को अपने साथ चलने का कहा था

शीना : कहाँ हो ? अभी तक फ्री नहीं हुए क्या ? मैं कब से वेट कर रही हूँ .

अमित : बस हो गया , कहाँ हो तुम ?

शीना : बुआ क घर से बहार तो निकलो. पास में hi हूँ . आ जाओ

मैं मंजू म से इजाज़त ले कर निकला. मंजू म ने मुझे घर ड्राप करने का कहा भी पर मैंने मन कर दिया . उसके बाद जैसे hi मैं घर से कुछ दूर निकला तो शीना की कार पीछे से मेरे बराबर आ कर कड़ी हो गयी . ये शीना hi थी .

शीना : आओ बैठो कार में

मैं कार में बैठा और जैसे hi शीना की तरफ देखा तो मैं देखता रह गया . क्या लग रही थी वो , ऐसा लग रहा था जैसे कहीं की राजकुमारी हो . एक ओने पीेछे ब्लैक लॉन्ग गाउन पहने बालों को अचे से सजाये मेकअप कर क वो सच में आज बहुत हसीं लग रही थी . काळा रंग क गाउन में गोरा रंग जैसे और भी गोरा लग रहा था आज

शीना : शरमाते हुए ) ऐसे क्या देख रहे हो ? पहले नहीं देखा क्या ?

अमित : नहीं वो ऐसा नहीं मैं तो बस .. यू अरे लुकिंग वैरी ब्यूटीफुल.

शीना : शर्म से मुस्कुराते हुए ) थैंक्स . शुक्र है तुम्हारी नज़र मुझ पर पड़ी तो.

इतना कह कर शीना ने कार आगे बढ़ा दी.

अमित : हम जा कहाँ रहे हैं ?

शीना : जहाँ हम दोनों को कोई डिस्टर्ब न करे . ी वांट तो मेक थिस इवनिंग स्पेशल.



शीना ने बस इतना hi कहा . मुझे उसकी बात का मतलब तो समझ न आया पर इतना तो समझ आ गया क उसके इरादे कुछ और hi थे आज .
 
अपडेट 198



‘ यहाँ कहाँ ले आयी हो मुझे ? ये तो कोई होटल नहीं है. ‘ शीना मुझे लेकर अपने एक फार्महाउस पर आ गयी थी. मैंने कार में बैठे बैठे hi शीना से पूछा

शीना : मैंने कब कहा था क हम होटल जा रहे हैं? मैंने तो बस इतना hi कहा था क हम साथ में सेलिब्रेट करेंगे. और मैं नहीं चाहती क कोई हमें डिस्टर्ब करे. आज की शाम सिर्फ मैं और तुम , तीसरा कोई नहीं . अब चलो अंदर मैंने सारा इंतज़ाम कर रखा है .

शीना कार से उतर कर अंदर की तरफ चल दी. मैं भी उसके पीछे पीछे उसकी बातों का मतलब समझने की कोशिश करता हुआ अंदर आ गया . अंदर आते hi मेरी नज़र हॉल की सजावट पर पड़ी. हर तरफ हार्ट शेप वाले बैलून्स और ग्रीटिंग कार्ड्स थे. गुलाब की पत्तियां और कांच क गिलासों में लगी कैंडल लाइट्स इस माध्यम रौशनी में बहुत hi खूबसूरत नज़ारा पेश कर रही थी. साँसों में घुलती वो इत्र की खुशबु मनो इस जगह को ख्वाबों की दुनिया बना रही थी. मैं ये सब देख रहा था और जैसे hi मेरी नज़र शीना पर पड़ी तो उसकी आँखों में भी अलग hi चमक थी . मुझे देख कर वो मुस्कुराई और मुझे बैठने का इशारा किया . मैं उसका इशारा समझ कर सोफे पर बैठ गया जिसके आगे कांच का टेबल पड़ा था और वो भी वैसे hi सजा हुआ था . शीना अंदर से एक बॉक्स ले आयी और टेबल पर रख दिया. बॉक्स ओपन किया तो उसमे एक छोटा सा केक था जो क हार्ट hi बना हुआ था .

अमित : तुमने इतना कुछ किया हुआ है. काम से काम अपने खास दोस्तों को तो बुला hi लेना चाहिए था.

शीना : ये सब खास तौर पर सिर्फ तुम्हारे लिए किया है मैंने. उस दिन मैंने केक तो कटा था पर मेरा बिलकुल भी मन नहीं था. पर आज मैं सही में अपना जन्मदिन मानना चाहती हूँ और इस बर्थडे को अपनी ज़िन्दगी का सबसे यादगार बर्थडे बनाना चाहती हूँ . इतना कह कर शीना ने एक कैंडल लाइट रोशन करते हुए हॉल की लाइट्स बुझा दी. अब सिर्फ आसपास लगी कैंडल लाइट्स की hi रौशनी थी. और इतनी रौशनी भी काफी थी शीना की खूबसूरती दिखने क लिए . शीना मेरे करीब बैठ गयी और फिर से मुझे देखा. हम दोनों इस वक़्त इतने करीब थे क दोनों का जिस्म टच कर रहा था और शीना क बदन से आ रही महक मेरी सांसों में घुल रही थी .

शीना : मैं चाहती हूँ तुम मेरे साथ इस केक को काटो.

मैंने शीना को hi देख रहा था और जैसे hi उसने ये कहा तो मैं थोड़ा हड़बड़ाया और शीना क हाथ पर अपना हाथ रख दिया जिसमे उसने छुरी पकड़ी थी. शीना ने आगे झुक कर फूल मरी और कैंडल बुझा दी.

अमित : हैप्पी बर्थडे तो यू , हैप्पी बर्थडे तो यू , हैप्पी बर्थडे तो शीना , हैप्पी बर्थडे तो यू .

शीना ने जैसे hi केक कटा तो मैंने ये गुनगुनाया जो हर कोई गुनगुनाता है बर्थडे पर. शीना ने केक का पीेछे मेरे मुँह में डाला और आधा खुद hi अपने मुँह में दाल लिया .

शीना : थैंक यू वैरी मच . तुम नहीं जानते मैं कितनी खुश हूँ क तुम आज मेरे साथ मेरा बर्थडे मन रहे हो .

अमित : इसमें थैंक्स की क्या ज़रूरत है ? वे अरे फ्रेंड्स न ,

शीना : तो लाओ मेरा गिफ्ट कहाँ है ?

अमित : ओह सॉरी यार मेरे दिमाग से एक डैम से निकल hi गया था. मैं कल पक्का तुम्हे तुम्हारा गिफ्ट दे दूंगा प्रॉमिस

शीना : ाचा hi तुम गिफ्ट नहीं बेकार आये . अब मैं अपनी मर्ज़ी का गिफ्ट लुंगी तुमसे . बोलो डोज न जो मैं मांगूंगी .

अमित : ok बताओ क्या चाहिए ?

शीना : ऐसे नहीं पहले वडा करो

अमित : ाचा वडा , अब तो बताओ क्या लेना है बर्थडे गिफ्ट पर

शीना : उम्र भर का साथ ,, अपनी आखरी साँस तक मैं सिर्फ तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ . सिर्फ तुम्हारी बन कर . मुझे अपने दिल में थोड़ी सी जगह दे दो मुझे और कुछ नहीं चाहिए .

शीना की ये बात सुन कर मैं झटके से खड़ा हो गया. मुझे तो उम्मीद hi नहीं थी वो मुझसे बर्थडे गिफ्ट में ये मांग लेगी.

अमित : ये तुम क्या कह रही हो शीना ? ये नहीं हो सकता . कभी भी नहीं .

शीना : क्यों नहीं हो सकता ? आखिर क्या कमी है मुझमे? तुम्हारे लिए मैंने खुद को बदल दिया वो सब छोड़ दिया जो तुम्हे पसंद नहीं था . अपने दोस्त छोड़ दिए यहाँ तक क अपने भाई को hi छोड़ दिया अब और क्या करूँ जिससे तुम्हे यकीन हो क मैं खुद को तुम्हारे लिए कितना बदल चुकी हूँ. तुम जो कहा मैं करुँगी कुछ भी कह कर देखो एक बार .

अमित : मुझे भूल जाओ बस इतना hi कर लो

शीना : नाम ऑंखें ) भूल जॉन ?? तुम्हे भूल जॉन ?? कितनी आसानी से कह दिया तुमने क भूल जाओ जैसे कोई छोटी सी बात हो. प्यार करती हूँ मैं तुमसे , कोई मज़ाक नहीं . आज तक मेरी ज़िन्दगी में एक भी ऐसा लड़का नहीं आया जो तुम जैसा हो . तुम्हे देखते hi मेरा दिल धड़कने लगा था पहले दिन से hi. जिस तरह तुमने मोंटी से बिना डरे पूरे कॉलेज क सामने उस पर हाथ उठा दिया था, सच कहूं तो उसी वक़्त मुझे तुमसे प्यार हो गया था . पर अपने झूठे घमंड की वजह से मैं तुम्हे अपने आगे झुकना चाहती थी. पर देखो हुआ क्या ,, मेरे दिल ने मुझे hi मजबूर कर दिया . जिस तरह तुमने मुझे उस दिन बचाया उसके बाद तो जैसे मैं मैं नहीं रही बस तुम्हारी हो गयी. बहुत लड़के मैंने देखे हैं जिनकी नज़र या मेरी दौलत या मेरे जिस्म पर hi रहती थी पर तुम पहले ऐसे शख्स दिखे जिसे न दौलत की भूख है न जिस्म की . धीरे धीरे कब तुम मेरी धड़कन बन गए मुझे खुद भी पता नहीं चला और अब तुम मुझे कह रहे हो क मैं अपनी धड़कन को भूल जॉन ? सीधा सीधा कहो न क मैं मर hi जॉन . अगर इसी से तुम्हे ख़ुशी मिलती है तो ठीक है मैं अभी खुद को ख़तम कर लेती हूँ .

इतना कह कर शीना ने टेबल से चाकू उठाया और अपनी कलाई पर लगाया . इससे पहले की वो कोई हरकत करती मैंने उसका हाथ पकड़ लिया हर चाकू छीन कर फेंक दिया .

अमित : ये क्या हरकत है ? दिमाग तो ठीक है तुम्हारा ? पागल हो गयी हो क्या ?

शीना : हाँ हाँ पागल हो गयी हूँ , तुम्हारे प्यार में पागल हो गयी हूँ . तुम्हारे सिवा और कुछ नहीं दीखता है मुझे . तुम कह रहे हो क तुम्हे भूल जॉन . ये हो नहीं सकता और तुम्हारे बगैर मैं अब रह नहीं सकती . इस लिए मुझे मर जाने दो

अमित : देखो शीना समझने की कोशिश करो , मैं तुम्हारे बारे में ऐसा नहीं सोचता.

शीना : क्या तुम किसी और से प्यार करते हो ? कौन है वो ?

अमित : देखो प्लीज ये सवाल मत पूछो. बस इतना hi कह देता हूँ क मेरी ज़िन्दगी में पहले से hi कोई है .

शीना की आँखों में पानी कुछ ज्यादा hi आ गया था जो पलकों की सीमाएं लांघ कर बहार आने लगा था. उसके चेहरे से ज़ाहिर हो रहा था क उसे बहुत दुःख पहुंचा है मेरी बात से.

शीना : क्या मुझे इतना भी हक़ नहीं क मैं उस खुशनसीब का नाम जान सकूँ ? मैं वडा करती हूँ मैं किसी से नहीं कहूँगी अगर तुम नहीं बताना चाहते किसी को तो . प्लीज ....

शीना की आँखों में याचना और दर्द देख कर मेरा मन पिघल गया और फिर उसे सच बताने से मुझे लगा वो बात को समझ जाएगी .

अमित : तुम उसे जानती हो , वो कोई और नहीं तुम्हारी बहिन रीमा है .

रीमा का नाम सुनते hi शीना की ऑंखें बड़ी हो गयी. पर दर्द अभी भी वैसे hi था चेहरे पर. फिर अचानक उसके होंठों पर मुस्कान आ गयी और वो खुद hi अपने आंसू पोछने लगी . मुझे शीना की इस हालत पर अफ़सोस भी हो रहा था क्यूंकि जाने अनजाने उसके इस दर्द की वजह मैं था .

शीना : तो फाइनली रीमा को वो मिल hi गया जो उसे मिलना चाहिए था .मैं बहुत खुश हूँ क रीमा को तुम मिले. वो सच में बहुत अछि लड़की है मुझसे कहीं अछि और प्यारी भी. रीमा रीना और चची ने बहुत दुःख देखें हैं . चाचा जी तो बचपन में hi चले गए थे मगर चची ने उन दोनों क लिए कितना कुछ सहा है . तुम उसे बहुत प्यार देना बहुत बहुत प्यार. इतना की उसके दिल में दर्द क लिए जगह hi न रहे . मेरा क्या है मैं कैसे भी कर क ज़िन्दगी बिता hi लुंगी .

इतना कहते कहते शीना की आँखों में फिर से पानी आ गया . मैंने आगे बढ़ कर उसके आंसू साफ करने की कोशिश की तो वो मेरे सीने से लग कर रोने लगी . मैंने उसे दूर हटाने की कोई कोशिश नहीं की बल्कि उसे सहलाते हुए चुप करवाने की कोशिश करने लगा .

अमित : शांत हो जाओ शीना , तुम बहुत अछि हो और खूबसूरत भी कितनी हो. देख लेना तुम्हे मुझसे भी कई गुना ाचा लड़का मिलेगा .

शीना : रट हुए ) मुझे पता था एक न एक दिन मुझे ऐसी hi कोई सजा मिलेगी मेरे और मेरी फॅमिली क बुरे कर्मो की . पर तुम ,,, वो तुम नहीं होने चाहिए थे. मुझे सब मंज़ूर था सिवाए तुम्हे खोने क. एक बार मुझे तुम्हारा प्यार मिल जाता फिर चाहे मौत भी आ जाती तो गम न था.

अमित : ऐसी बातें मत करो , देखो तुम बहुत अछि हो और तुम्हारे साथ ाचा hi होगा देख लेना .

शीना : अब और ाचा क्या हो होगा जब वो hi नहीं मिल जिसके लिए मैं सब छोड़ने को तैयार थी .

अमित : प्लीज शीना ऐसे मत कहो. मुझे ाचा नहीं लग रहा .

शीना : सीने से लगे हुए hi ) मेरी एक बात मानोगे ?? उसके बाद मैं कभी तुमसे कुछ नहीं मांगूंगी .

अमित : तुम जो कहोगी मैं करूँगा पर तुम ऐसे अब रोना बंद करो. मैं तुम्हे खुश देखना चाहता हूँ.

शीना ने अपना चेहरा पीछे किया और आंसू पांच कर मेरी आँखों में देखने लगी .

शीना : अगर तुम मुझे खुश देखना चाहते हो तो एक बार सिर्फ एक बार मुझे अपना प्यार दे दो . उसके बाद मैं कभी तुमसे कुछ नहीं मांगूंगी . मेरे दिल में सिर्फ तुम हो और कोई वो जगह नहीं ले सकता . और मैं चाहती हूँ क मेरी ज़िन्दगी का पहला वो पल सिर्फ तुम्हारे साथ हो जिसे मैं साडी उम्र यद् कर क जी सकूँ . क्या इतना कर सकते हो मेरे लिए ??

शीना ने आशा भरी निगाहों से मेरी आँखों में देखा . उसकी बात का मतलब मैं समझ रहा था पर वो जो मांग रही थी वो देना भी सही नहीं था.

अमित : तुम जानती हो तुम क्या करने को कह रही हो ? ये गलत है , मैं तुम्हारी ज़िन्दगी बर्बाद करना नहीं चाहता . और ज़रा सोचो क्या ये रीमा क साथ धोखा नहीं होगा ?

शीना : एक बार करने से धोखा तो नहीं होगा. और वैसे भी तो रीमा की बहिन होने क नाते कुछ हक़ तो मेरा भी होगा hi तुम पर . उसी रिश्ते से मुझे वो हक़ दे दो . अगर रीमा को कभी पता लगा भी तो साडी ज़िम्मेदारी मेरी होगी पर ऐसा मैं होने नहीं दूंगी . प्लीज मुझे इतना प्यार तो दे hi सकते हो न? मैं तुमसे कुछ ज्यादा तो नहीं मांग रही . सिर्फ एक बार मुझे अपना लो. उसके बाद चाहे तो कभी मुझे देखना भी मत. मैं उस एक पल को यद् कर क खुश रह लुंगी .

अमित : देखो शीना अगर हमारे बीच कुछ ऐसा हुआ तो मुझे दर है क फिर तुम किसी और को मन से अपना नहीं पाओगी .

शीना : ( मन में ) वो तो अब वैसे भी नहीं हो सकता. मेरे दिल में हमेशा तुम hi रहोगे.

शीना : कल किसने देखा है ? क्या पता किस्मत कहाँ ले जाये. मैं सिर्फ तुमसे आज मांग रही हूँ कल क्या होगा वो कोई नहीं जनता पर आज मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए अगर तुम्हारे दिल में मेरे लिए थोड़ी सी भी जगह है तो मुझे एक बार अपना प्यार दे दो तुम्हे रीमा की कसम .

शीना ने मुझे रीमा की hi कसम दे दी तो मैं हैरानी से उसकी आँखों में देखने लगा . शीना की आँखों में सिर्फ प्यार और याचना थी . वो एक निहायत hi खूबसूरत लड़की थी जो कभी हाई ऐटिटूड में रहती थी मगर अब वो बिलकुल बदल गयी थी. मुझे उसने दिल तोडना ाचा नहीं लग रहा था और अब तो उसने कसम hi दे डाली थी. शीना को जो चाहिए था उसकी कीमत शायद हम दोनों को hi चुकानी पद सकती थी पर उसे मैं और दुखी नहीं करना चाहता था.

अमित : अगर यही तुम्हारी मर्ज़ी है तो यही सही. पर इतना यद् रखना आज क बाद मैं तुम्हारी आँखों में आंसू न देखूं

शीना : खुश होते हुए ) मैं कभी तुम्हे निराश नहीं करुँगी . ी प्रॉमिस

अमित : और ये सिर्फ एक बार hi ok

शीना : मैं दोबारा कभी तुम्हे नहीं कहूँगी

शीना क चेहरे पर स्माइल आ गयी थी और आँखों में भी ख़ुशी थी. मैंने अपना एक हाथ उसकी गर्दन क पीछे रखा और अपने होंठ शीना क होंठों से मिला दिए. शीना ने तुरंत मेरे गले में बहन दाल दी और उचक कर मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड कर चूसने लगी. शीना मुझ पर हावी होने की कोशिश कर रही थी . वो मुझे जैसे पीछे को धकेल रही थी और में उसे रोके हुए था फिर उसने अपनी टंगे मेरी कमर पर बांध ली और मैंने भी उसे सहारा देते हुए अपनी गॉड में hi उठा लिया .

‘ उम्म्म उम्म्म. उम्म्म्म उम्म्म्म आआह्ह्ह्ह उम्म्म्म ी लव यू उम्म्म्म उम्म्म ी लव यू सो मच उम्म्म्म उम्म्म्म ी लव यू फ्रॉम बॉटम ऑफ़ माय हार्ट उम्म्म उम्म्म उम्म्म मेक में योर्स फॉरएवर उम्म्म्म उम्म्म्म ‘

शीना किश करते करते बीच में बोल रही थी. शीना ऐसे पेश आ रही थी जैसे ये आखिरी पल हो और उसके बाद जैसे हम मरने वाले हो . मेरे हाथ अब शीना की पीठ से नीचे उतर कर उसके नरम कूल्हों पर थे. बड़े घर की बेटी थी वो काम तो कभी किया नहीं होगा इस लिए कुछ ज्यादा hi सॉफ्ट लग रही थी और उसके नितम्भ बहुत नरम थे जो मुझे स्पंज का एहसास दे रहे थे . शीना क लॉन्ग गाउन में एक तरफ से कट था जिसकी वजह से उसकी एक तंग पूरी नंगी थी और मेरा एक हाथ अनायास hi उसकी नंगी जांघ पर चला गया. शीना की स्किन बहुत hi मुलायम और चिकनी थी जिसके ऊपर मेरा हाथ अपने आप फिसलने लगा . मैंने शीना को दीवार से लगे टेबल पर हल्का सा बिठाया और उसके हाथ दीवार से ग के किश तोड़ कर उसकी आँखों में देखा .

अमित : तुम बहुत खूबसूरत हो शीना और बहुत अछि भी . मैं तुम्हे आज वो सब दूंगा जो तुम मुझसे चाहती हो . उम्म्म्म उम्म्म्म

मैंने शीना की गर्दन पर अपने होंठ रखे तो उसके मुँह से तेज़ सिसकी निकल गयी .

शीना : कक्कक्कक्स मेक में योर्स , ी ऍम आल योर्स मेक लव तो में उम्म्म्म ककक ओह्ह्ह्हह्ह

मैंने शीना की गर्दन पर किश करते हुए वहां डेंटन से हल्का सा काट लिया जिससे शीना और भी तेज़ सिसकी . शीना क कण की लौ को मैंने अपने होंठों में भर क चूसते हुए अपनी जीभ उसके कण पर चलाई. शीना और भी ज्यादा मचलने लगी

शीना : ओह्ह्ह्हह कक्कक्क्स ऐसा कभी कक्कक्क्स कभी नहीं हुआ मेरे साथ . उफ्फफ्फ्फ़ कक्कक्स उम्म्म्म लव में लव में

मैं उसकी गर्दन क दोनों तरफ किश कर रहा था. शीना कभी मेरे तो कभी अपने बाल सेहला रही थी. साथ hi वो मेरी गर्दन और पीठ पर भी सेहला रही थी . अपनी दोनों टंगे उसने मेरी कमर पर लपेटी हुई थी. धीरे धीरे शीना की सिसकियाँ बढ़ती जा रही थी. गर्दन पर किश करते हुए मैं उसकी चेस्ट पर आया और वहां भी चूमा उसके नीचे उसके ठोस उभर थे जैसे hi मैंने वहां हाथ रख कर उन्हें दबाया तो शीन ने मेरी T-shirt दोनों हाथों से नोच hi ली.

शीना : कक्कक्कक्स इन्हे प्यार करो कक्कक्स उम्म्म कब से तरस रहे हैं ये तुम्हारे लिए कक्कक्कक्स

शीना लगातार कुछ न कुछ बोले जा रही थी. मैंने उसके टाइट बूब्स मसलने शुरू कर दिए . शीना मेरे सर को अपने बूब्स पर ले जाने की कोशिश कर रही थी .

शीना : रूम में चलो कक्कक्क्स यहाँ नहीं होगा बीएड पर चलो कक्कक्क्स ले चलो मुझे

मैंने शीना की बात मानते हुए उसके जुलाहों क नीचे हाथ डाला और अपनी गॉड में उठाये उसे रूम की तरफ ले चला. जैसे hi मैंने दरवाज़ा खोला तो रूम भी महक रहा था और बीएड पर फूल बिखरे पड़े थे यानि शीना पहले hi सब सोच क बैठी थी . मैंने उसे आराम से बीएड पर लिटा दिया और उसके ऊपर आकर फिर से उसके बूब्स प्रेस करता हुआ उसे किश करने लगा . थोड़ी देर में hi शीना ने मुझे पलट दिया और मेरे ऊपर बैठ कर मुझे किश करने लगी .

शीना : आज मुझे इतना प्यार दो क मुझे ज़िन्दगी से कोई शिकायत न रहे मुझ में समां जाओ हमेशा हमेशा क लिए उम्म्म्म

किश करने क बाद शीना मेरे ऊपर सीधी बैठ गयी और अपना वो ओने पीेछे गाउन आराम से उतर का एक तरफ फेंक दिया . शीना क बेदाग हुसैन पर सिर्फ काली ब्रा और उसी क जैसी पेंटी थी. इस कासी हुई फैंसी बे में उसके बूब्स भरा आने को मचल रहे थे . अपना हाथ पीछे ले जा कर उसने अपनी ब्रा खोली और निकल कर एक तरफ फेंक दी. ब्रा निकलते hi उसके गोर सफ़ेद दूध मेरी आँखों क सामने आ गए . एक डैम गोर चुके और उनके ऊपर गुलाबी घेरे में किशमिश जैसे निप्पल . मेरे हाथ अपने आप उन ठोस स्तनों पर पहुँच गए . जैसे hi उन नंगे स्तनों को मैंने छुआ तो शीना क मुँह से फिर से सिसकी निकली साथ में मेरे जिस्म में भी मज़े की लहर दौड़ गयी. शीना मेरे ऊपर झुक गयी और किश करने लगी . मैंने उसके होंठो को चूसते हुए उसके बूब्स दोनों हाथों में पकड़ रखे थे और फिर उसे थोड़ा सा ऊपर को सरकते हुए मैंने उसके एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया .

शीना : उम्म्म उफ्फफ्फ्फ़ लव थम सूचक थम ओह्ह्ह्ह उम्मम्मम कक्कक्क्स

मैंने कुछ देर एक स्तन को चूसा और फिर दूसरे को भी चूसा. साथ hi एक हाथ से बूब मसलता रहा . शीना अपनी कमर को मेरे पेट पर रगड़ रही थी. शीना क स्तन अकड़ कर तन गए थे जिन्हे मैंने मैंने डेंटन में दबा दबा कर अपनी जीभ से कुरेदा . शीना अपनी कमर ज़ोर ज़ोर से मेरे पेट पर रगड़ रही थी और अचानक उसका जिस्म अकड़ कर झटके खाने लगा. वो कुछ ज्यादा hi उत्तेजित हो गयी थी और सिर्फ बूब्स की चूसै से hi चरम पर पहुँच गयी. झटके कहते हुए वो लम्बी लम्बी सांसे लेती मेरे ऊपर hi गिर गयी.

शीना : हहहहहह हैहहहहह हहहहह उम्म्म्म हहहह

मैंने शीना को बीएड पर पलट दिया और उठ कर बैठ गया . शीना की ऑंखें बंद थी और काबू कभी सांसे ले रही थी. मैंने अपने कपडे निकले और उसकी टंगे खोल कर बीच में आ गया. शीना की पेंटी गीली हो चुकी थी . मैंने आराम से दोनों तरफ से पकड़ कर उसकी पेंटी को उतर दिया . शीना अब पूरी तरह मेरे सामने ने पर्दा थी. उसकी कंचन काया मेरी आँखों क सामने थी . पता नहीं वो क्या लगाती थी पर उसकी पूरी बॉडी ग्लो कर रही थी. मैंने उसकी छूट को देखा जहाँ पर बालों का नामोनिशान नहीं था . छूट भी बाकि हिस्सों की तरह दूध सी सफ़ेद थी और छूट क होंठ गुलाबी थे जो आपस में मिले हुए थे . गीले हो कर वो और भी चमक रहे थे. मैंने अपनी उँगलियों से उसे ज़रा सा खोला तो अंदर का गुलाबी भाग बता रहा था क वो अभी तक कुंवारी है. उसका शुरू से जो रूप मैंने देखा था उस हिसाब से मुझे लगा नहीं था क वो अभी तक कुंवारी होगी पर वो थी. मुझे इस बात पर हैरानी हुई.

शीना : क्या देख रहे हो ? यही न क मैं कुंवारी हूँ या नहीं ? मैंने आज तक किसी लड़के को हाथ तक नहीं लगाने दिया लोग चाहे जो मर्जी सोचते रहें पर मैं चाहती थी क मुझे वो hi हाथ लगाए जो मेरा प्यार हो . और वो तुम हो .

अमित : अभी भी सोच लो क हम जो .......

शीना : शह्ह्ह्हह्ह , और कोई बात नहीं . मुझे सिर्फ प्यार करो प्यार . इतना क फिर मौत भी आ जाये तो गम न हो .

अमित : ऐसे मत कहो , मैं चाहता हूँ तुम एक अछि ज़िन्दगी जियो . हमेशा हस्ती मुस्कुराती हुई .

शीना : मेरी हंसी मेरी मुस्कराहट सब तुम्हारे हाथ में है अब बातें मत करो .

शीना ने मुझे अपने ऊपर खींचने की कोशिश की पर मैं आगे नहीं हुआ. उसने मेरी आँखों में सवालिया नज़रों से देखा और मैंने उसे एक स्माइल दी . अगले hi पल मैं उसकी छूट क ऊपर झुकता चला गया .

शीना : नहीं वहां नहीं आआआहहहहहहह कक्कक्कक्स मम्माआआआआ ये क्याआआअह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह

शीना ने मुझे रोकने की कोशिश की पर मैं नहीं रुका और उसकी छूट की फैंको को अपने होंठों में कैद कर लिया . शीना एक डैम से मचल उठी और ज़ोर ज़ोर से सिसकने लगी . मैंने अपनी जीभ छूट में घुसाने की कोशिश की और आधी उंगली छूट क अंदर बहार करता उसकी छूट को जीभ से कुरेदने लगा.

शीना : उफ्फ्फफ्फ्फ़ मैं कक्कक्स पगलललल कक्कक्क्स उम्म्म ये क्याआ करररररर रहे होओओओओ ऊऊह्ह्ह्ह कक्कक्क्स

शीना मेरे सर को कभी हटाने की कोशिश करती कभी खुद hi छूट पर दबा देती. वो जल बिन मचलती की तरह तड़प रही थी . एक बार फिर से उसकी छूट फड़कने लगी . वो अपनी कमर उठा उठा कर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी. वो खुद को ज्यादा देर रोक नहीं पायी और फिर से झाड़ गयी.

शीना : आआह्ह्ह्हह्ह ववक्कक्स ी म सुंम्मिंग आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स मैं गयी ाःह मर गईइइइइइइइइ आअह्ह्ह्हह

शीना की छूट का गरम पानी मेरे मुँह पर गिरने लगा. ऐसे जैसे अंदर से प्रेशर से कोई नल खुल गया हो . एक बार फिर से शीना बेहाल होती लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी और ऑंखें बंद किये मदहोश हो गयी. मैंने उसकी छूट को साफ किया और उसकी टाँगें उठा कर बीच में अपनी पोजीशन ली. शीना को तो कोई होश hi नहीं थी. मैंने अपना लैंड छूट पर लगाया और सुपडे को छूट पर रगड़ने लगा. शीना की कुंवारी छूट क लिए मेरा लैंड झेलना बहुत मुश्किल होने वाला था इस लिए मैं जल्दी नहीं कर रहा था . मैंने कुछ देर जब छूट पर लैंड रगड़ता रहा और अंदर नहीं किया तो शीना ने आँखें खोली और मेरी आँखों में देखने लगी .

शीना : रुक क्यों गए ? मुझे अपनी बना लो न .

अमित : तुम्हे दर्द होगा

शीना : मेरे दर्द की परवाह मत करो . ये वो दर्द है जो उम्र भर साथ रहता है दिल की गहराई में छुपा हुआ. अब और इंतज़ार मत करवाओ. मेरी सांसों पर अपना नाम लिख दो

शीना की प्यार भरी बातें मुझ पर असर कर रही थी और मैं न चाहते हुए भी उसके प्यार क आगे झुकता जा रहा था. मैंने शीना क ऊपर झुकते हुए अपने लैंड को दबाया और एक रुकावट क बाद सूपड़ा छूट को फैलते हुए अंदर घुस गया.

शीना : आईईईई उम्मम्मम मममममम

शीना को दर्द तो हुआ पर उसने अपने होंठ ज़ोर से बंद कर लिए ताकि उसकी दर्द भरी आवाज़ सुन कर मैं रुक न जॉन. पर मैं फिर भी रुक गया क्यूंकि मैं उसे ज्यादा दर्द नहीं देना चाहता था. अभी तो सिर्फ सूपड़ा hi अंदर घुसा था क उसका दर्द से बुरा हल होने लगा था. मैंने अपने हाथ उसके ठोस स्तनों पर रखे और उन्हें थोड़ा ज़ोर से मसलने लगा ताकि उसका ध्यान छूट क दर्द से हैट जाये .

शीना : कक्कक्क्स उफ्फ्फफ्फ्फ़ उम्मम्मम कक्कक्क्स आराम से कक्कक्स

मैंने कुछ देर उसके बूब्स मसाले और वैसे hi रुका रहा. फिर मैंने झुक कर शीना क होंठ अपने होंठों में जकड लिए और अपनी कमर को आगे ठेलते हुए एक धक्का लगा दिया. इससे मेरा लैंड शीना क कुंवारेपन का दरवाज़ा तोड़ता हुआ अंदर घुस गया . शीना एक डैम से कम्प गयी और उसके नाख़ून मेरी पीठ पर ग्रह गए . होंठ मेरे होंठों में बंद होने से वो चीख तो न पायी पर वो दर्द से बेहाल हो गयी थी . मैं फिर से रुक गया और उसके बूब्स मसलने लगा. कुछ देर तक मैं उसे नार्मल करने की कोशिश करता रहा. और जब शीना की पकड़ मुझ पर ढीली हुई तो मैंने अपना लैंड ज़रा सा पीछे खिंचा. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी रबड़ क छल्ले में लैंड को ज़ोर से फंसा दिया हो. अभी सिर्फ 4 इंच hi लैंड छूट में घुसा था पर इतना भी उस कोरी छूट क लिए बहुत था. मैं धीरे धीरे लैंड को अंदर बहार कर रहा था. जब शीना का तड़पना काम हुआ तो मैंने उसके होंठ आज़ाद कर दिए

अमित : तुम ठीक तो हो शीना

शीना : दर्द में भी मुस्कुराते हुए ) हम्म्म्म , मैं ठीक हूँ कक्कक्स पहली बार है न इस लिए . तुम रुकना मत जब तक पूरी तरह मेरे अंदर समां नहीं जाते कक्कक्स

अमित : पर तुम झेल नहीं पाओगी

शीना : पता नहीं दुबारा ये वक़्त मेरे नसीब में हो या न हो .

शीना ने ये बात मेरी आँखों में देखते हुए कही. उसकी आँखों में जो दर्द था वो जिस्म से ज्यादा दिल का था. और मैं उसके उस दर्द को महसूस करता बस उसे वो देना चाहता था जो वो मुझसे चाहती थी . मैंने अपना दिल मजबूत किया और अपनी गति बढ़ाते हुए बीच में लैंड को गहरा धक्का लगा कर और अंदर पेलने लगा. साथ hi मैं उसके स्तनों का ज़ोर से मर्दन कर रहा था. ऐसे करते करते कब मेरे अंडकोष उसके चूतड़ों से जा लगे मुझे भी पता न चला पर इस आखरी धक्के में एक बार फिर से शीना ने तड़प कर मुझे अपने साथ कास लिया था.

शीना : आआआहहह माआआ आआअह्ह्ह्ह

अमित : बस हो गया शीना अब और दर्द नहीं होगा .

मैंने उसके सर को सहलाते हुए कहा. शीना दर्द में थी पर फिर भी हिम्मत दिखती हुई मुझे चूमने लगी. और फिर खुद hi उसने मुझे धक्के मरने का इशारा करते हुए अपनी कमर हिलाई

शीना : अब रुको नहीं कक्कक्स मैं अब ठीक हूंणंन्न ुण्णं उन्न्नन उन्न्नन ाःह आअह्ह्ह आअह्ह्ह ाःह

मैंने उसी बात सुनते hi अपनी कमर चलनी शुरू कर दी और उसे चूमने लगा . मैं पूरी कोशिश कर रहा था क उसे किसी तरह की कमी महसूस न हो . इस लिए उसे चिंता हुआ प्यार से कर रहा था. जल्दी hi शीना का जिस्म फिर से अकड़ गया और मुझे अपने लैंड पर उसकी छूट का गरम पानी महसूस हुआ . वो फिर एक बार बेहाल होती ऑंखें मूँद कर लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी . और मैंने उसे इस पल को एन्जॉय करने दिया. जैसे hi वो नार्मल हुई तो मेरी आँखों में देखते हुए मुझे किश करने लगी .

शीना : उम्म्म्म उम्म्म्म उम्मम्माह्ह्ह ककक उम्म्म्म उम्म्म्म ी लव यू ,,, ी लव यू उम्मम्मम ी लव यू अमित ी लव यू उम्म्म्म

बार बार ी लव यू कहती वो मुझे किश कर रही थी . मैंने फिर से अपनी कमर हिलनी शुरू कर दी और कुछ hi धक्कों में शीना अपनी कमर हिलने लगी . मैं सीधा हुआ और शीना की टंगे अपने कंधो पर रख कर धक्के मरने लगा . शीना मज़े में अब खुद hi अपने बूब्स मसलती अपने बल नोचती मज़े से कमर उठा रही थी.

शीना : आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह आह्हः आआह्ह्ह उम्म्म्म आआअह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ उम्म्म आआअह्ह्ह ी लव यू अमित ी लव यू आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह उम्म्म्म ज़ोर से करो आआह्ह्ह आआह्ह्ह

मैं शीना की टैंगो को चूमता हुआ अपनी कमर तेज़ चला रहा था . शीना मज़े में थी और अब मैं भी करीब था. शीना का एक बार फिर से पानी निकला और मैंने भी लैंड को छूट से बहार निकल कर उसके पेट क ऊपर hi अपना पानी निकलना शुरू कर दिया. लैंड की पिचकारियां उसके स्तनों तक जा कर गिर रही थी. जैसे hi मैं शांत हुआ तो उसकी बगल में बीएड पर लेट गया . हम दोनों की सांसे तेज़ी से चल रही थी. कुछ देर बाद जब मेरी सांसे नार्मल हुई तो मैंने उठा कर शीना की तरफ देखा वो ऑंखें बंद किये पड़ी थी. उसे अब दर्द होने वाला था जो उससे बर्दाश्त करना मुश्किल होने वाला था. मैंने उसकी छूट को देखा तो वो लाल हो चुकी थी. किनारों पर अभी खून लगा हुआ था और बेडशीट पर भी लाल घेरा बना हुआ था. मैं बीएड से उठा और कमरे क आत्ताच बाथरूम में घुस गया . मैंने गीज़र चला कर गर्म पानी किया और पहले अपना लैंड साफ किया फिर बाथटब में गरम पानी भर दिया. शीना अभी भी वैसे hi पड़ी थी . मैंने उसकी जांघों क नीचे अपनी बांह डाली और दूसरी उसकी पीठ क नीचे . शीना ने आँखें खोल कर मुझे एक बार देखा. मैंने उसे अपनी गॉड में उठा लिया तो उसने जल्दी से मेरे गले में बाँहों दाल ली. उसे गॉड में लिए मैं बाथरूम में आया और उसे आराम से बाथटब में लिटा दिया .

शीना : आअह्ह्ह कक्कक्क्स उईईई

शीना गरम पानी लगती hi ज़रा सा सिसकी पर जल्दी hi वो नार्मल होने लगी. मैंने उसकी छूट पर हाथ रखा तो वो फिर से सिसकी . उसे दर्द हो रहा था पर उसने मुझे रोका नहीं बल्कि मुझे चुपचाप देखती रही. मैंने उसकी छूट को अचे से मसल कर साफ किया और अंदर भी अपनी उंगली दाल कर सफाई की कोशिश की .

अमित : यहाँ पर कोई पैन किलर है क्या ??

शीना : मेरे पर्स में होगी .

अमित : चौंकते हुए ) सब पहले से hi सोच रखा था तुमने ??

शीना : शरमाते हुए ) हम्म्म ,

मैं वापिस हॉल में गया और उसका पर्स उठा कर उसने से पैन किलर ला कर उसे पानी क साथ दी.

शीना : थैंक्स , तुम सच में बहुत अचे हो बहुत केयरिंग हो . ी लव यू .

अमित : और तुम बहुत प्यारी खूबसूरत और हिम्मत वाली हो. अब यहाँ रेस्ट करो तुम्हारा दर्द जल्दी ठीक हो जायेगा .

मैं सिर्फ मुस्कुरा दिया . शीना ने दवा खा ली और मैं उसे वहीँ छोड़ कर वापिस कमरे में आ कर अपने कपडे पहन लिए. कुछ देर बाद मैं वापिस बाथरूम में गया तो शीना ऑंखें बंद किये लेती हुई थी. अब उसके चेहरे पर कहीं भी दर्द की शिकन तक न थी. मैंने कुछ देर उसका खूबसूरत चेहरे देखा और दिल में उसके बारे में सोचने लगा. कितनी पागल थी वो जो इतना कुछ कर गयी उस प्यार क लिए जो उसका कभी हो hi नहीं सकता. पर मेरे दिल में कहीं ये बात भी आ रही थी क मुझे उसे सहारा देना होगा ताकि वो आगे बढ़ सके और अपनी ज़िन्दगी ख़ुशी से जी सके .

अमित : अब कैसा लग रहा है ?

शीना : अब ठीक हूँ , ये क्या तुम ,,,, तुमने कपडे क्यों पेहेन लिए ??

अमित : तो क्या अब बिना कपड़ों क hi रहूँगा ?

शीना : काम से काम आज की रत तो मेरे साथ रुक सकते हो न

अमित : नहीं, मुझे जाना होगा . मौसी इंतज़ार कर रही होंगी. वैसे भी अब तुम्हे रेस्ट की ज़रूरत है.

शीना मेरी बात का मतलब समझ कर शर्मा गयी.

शीना : बिना कुछ किये भी तो रह सकते हैं न ? और अगर तुम चाहो तो मैं मन नहीं करुँगी .

अमित : हालत देखि है अपनी ? वैसे भी अब घर जाना hi ठीक है . वर्ण कोई बात बन जाएगी . देखो शीना तुम बहुत प्यारी हो इसी लिए मैंने तुम्हे अपना दोस्त मन था . मैं ये सब तुम्हारे साथ करना नहीं चाहता था. जितना दर्द तुम्हे हो रहा है उतना hi मेरे दिल में भी दर्द है. मैं कभी तुम्हे वो जगह नहीं दे सकूंगा जो रीमा की है . इस लिए तुम्हे आगे बढ़ाना चाहिए. हम एक नहीं हो सकते.

शीना : हो तो गए हैं ? मैंने तुम्हे अपने अंदर तक समां लिया है और अब तुम्हे कभी अपने से बहार नहीं जाने दूंगी. मेरे दिल मेरी रूह में तुम समां चुके हो . जहाँ से तुम्हे कोई नहीं निकल सकता . तुम खुद भी नहीं . रीमा की जगह मैं लेना भी नहीं चाहती बल्कि मैं खुश हूँ उसके लिए. पर थोड़ी सी जगह तो तुम्हारे दिल में मिल सकती है न ? मैं दूर से hi तुम्हे देख कर खुश रह लुंगी बस कभी मुझसे गलत मत समझना मैं दिल से तुम्हे चाहती हूँ.

शीना की भावनाओं को मैं अचे से समझ रहा था पर अफ़सोस मैं मजबूर था. मैंने आगे बढ़ कर उसे सहारा देते हुए उठाया और वापिस कमरे में ले आया. फिर उसे टॉवल से साफ कर क कपडे पहनाये. दवा का असर था शायद क उसे उतना दर्द अभी नहीं हो रहा था.

अमित : अब चलें ?

शीना : रुको अभी , मैंने हूँ दोनों क लिए डिनर का इंतज़ाम किया हुआ है. साथ में डिनर तो कर सकते हैं न ?? प्लीज

अमित : तुम न ,, ये बार बार प्लीज क्यों कहती हो ? अब इतना तो हक़ से भी कह सकती हो तुम. बैठो यहाँ मैं लगता हूँ खाना

शीना : मुस्कुराते हुए ) थैंक्स , मैं कर लुंगी

अमित : कहा न बैठो तो बैठो , एक बार में समझ नहीं अत ?

शीना मुझे देखते हुए मुस्कुरा रही थी और मैंने जल्दी से किचन में से हम दोनों क लिए खाना लगा दिया. फिर हम ने साथ में खाना खाया. शीना ने खुद मुझे अपने हाथों से खाना खिलाया और मैंने भी वैसा hi किया. शीना बहुत खुश लग रही थी. और उसे मैं खुश देखना hi छह रहा था. फिर हम दोनों वहां से निकले पर तब तक 10-30 से ऊपर टीम हो चूका था. मैंने मोबाइल चेक किया तो राधा और दिव्या मौसी क बहुत सरे मिस कॉल्स थे . साथ में रीमा की भी. मुझे तो यद् hi नहीं रहा क मैंने राधा को बताया नहीं था क मैं कब तक वापिस आऊंगा . अब फिर से मेरी वाट लगने वाली थी. शीना ने मुझे दिव्या मौसी क घर क बहार ड्राप किया और जाने से पहले एक बार फिर से मुझे किश किया. उसने फिर से मुझे ी लव यू कहा पर मैंने फिर से कोई जवाब न दिया . आखिर देता भी तो क्या . झूठी तसल्ली ???

शीना क जाते hi मैंने दरवाज़े की बेल्ल बजायी तो दरवाज़ा राधा ने hi खोला. जैसे वो दरवाज़े क पीछे hi बैठी थी मेरे इंतज़ार में.

राधा : कहाँ थे अब तक ? काम से काम फ़ोन तो उठा सकते थे ? एक बार बता hi देते कब आ रहे हो ? हर बार ऐसे hi परेशां कर देते हो . तुम्हे हमारी परवाह है क नहीं ?

अमित : सॉरी सॉरी वो क्या है न मैंने फ़ोन साइलेंट किया हुआ था और दिमाग से hi निकल गया . मैंने कहा तो था क मैं खाना खा कर hi आऊंगा . अब गुस्सा मत करो .

राधा : मुँह फूलते हुए ) क्यों न करूँ गुस्सा ? बहार वालों क लिए वक़्त है, और मेरे लिए ???

अमित : सॉरी बाबा , गलती हो गयी. अब माफ़ कार्डो न ,

‘ ये कोई वक़्त है घर आने का ? कहाँ थे अब तक ? ‘ ये आवाज़ दिव्या मौसी की थी जो सामने कड़ी थी और मुझे hi देख रही थी. उनकी आवाज़ में गुस्सा था. मैं तो वैसे hi उनके सामने आने से बचना चाहता था . पर अब वो खुद सामने कड़ी थी और गुस्से में. मुझे कल रत वाली बात यद् आ गयी. मैंने अपनी नज़रें निचे कर ली और कोई जवाब नहीं दिया .

दिव्या : चुप क्यों हो ? बोलते क्यों नहीं ?

राधा : माँ मैंने बताया तो था आपको क ये ......

दिव्या : तुम चुप रहो , मैं इससे बात कर रही हूँ . बीच में मत बोलो . बोलते क्यों नहीं ?

अमित : सॉरी मौसी

मैंने इतना hi कहा पर अपना सर नहीं उठाया.

दिव्या : चलो जाओ अब अपने कमरे में .

मौसी क इतना कहते hi मैं बिना सर उठाये सीधा अपने कमरे में गया और दरवाज़ा बंद कर क अपने बीएड पर लेट गया.



दिव्या का मन भी कल रत से शांत न था और सुबह से अमित का वो नज़रें चुराना उसको इग्नोर करना. दिव्या को ाचा नहीं लग रहा था. एक तरफ उसका दिल गदगद हो उठा था अमित क स्पर्श से . वो स्पर्श जिसे वो अब तक केवल सपनो में महसूस करती आयी थी और हकीकत में वो सपनो से भी कहीं बेहतर था. पर उसका दिमाग उसे इसके लिए गलत ठहरा रहा था. पर कहते हैं न अक्सर इंसान दिल से हर जाता है . वही हल दिव्या का था. वो बार बार अपने दिल क आगे हर जाती थी. आखिर बरसों से प्यासी और व्यथित जो थी. जिसे वो प्यार नहीं मिला था जो उसे चाहिए था. अमित का सारा दिन घर से बहार रहना और इतनी देर से आना. दिव्या को लग रहा था क कहीं अमित कल रत की वजह से खुद को दोष तो नहीं दे रहा. कहीं वो उससे दूर तो नहीं भाग रहा . ये सब सोचते हुए दिव्या अंदर hi अंदर घबरा रही थी क कहीं अमित उससे दूर न चला जाये . और जब उसने दिव्या क कॉल्स भी अटेंड न किये तो उसे और भी बुरा लगा. पर अब जिस तरह से उसने दिव्या की किसी बात का कोई जवाब न दिया और न hi कोई सफाई दी एक बार फिर से ये बात दिव्या को अंदर से तोड़ रही थी. दिव्या चाहती थी अमित उसकी आँखों में देखे उससे बात कर पर ऐसा हुआ नहीं. उल्टा वो फिर एक बार गुस्से से पेश आयी थी. अब वो अपने कमरे में खुद को hi दोष दे रही थी और उसका दिल उसे अमित क पास जाने और उससे माफ़ी मांगने को कहने लगा था . असल में उसका दिल कल की तरह फिर एक बार उसका वो स्पर्श चाहता था. पर दिव्या को तो कुछ समझ hi नहीं आ रहा था. काफी देर तक वो ऐसे hi अपने कमरे में कभी बीएड पर लेट जाती और कभी उठ कर चलने लगती. जब चैन न पड़ा तो वो अपने कमरे से बहार निकली और अमित क कमरे में घुस गयी. घडी पर वक़्त 12 से ऊपर हो रहा था
 
भाई लोगो थोड़ा टाइम और लगेगा अभी लिख hi रहा हूँ काफी देर से
 
Back
Top