Adultery Manhoos se mahan tak - Page 10 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 78



नेक्स्ट डे फ्री लेक्चर में मैं नीरज क साथ तकनीशियन से मिला और उसने हमें रिकॉर्डिंग्स दिखाई. ऑडिटोरियम वाला कैमरा तो बंद पड़ा था इस लिए मैंने स्टाफ रूम वाले कैमरा की रिकॉर्डिंग दिखने को कहा. स्टाफ रूम में कैमरा बहार की तरफ लगा हुआ था जो कॉरिडोर की रिकॉर्डिंग करता था. रिकॉर्डिंग चेक करते हुए मैंने जब मंजू मम क साथ शालू को बात करते हुए देखा तो मैं शॉकेड हो गया. शालू मम से बात कर रही थी और जाते हुए उनके हाथ में कुछ पकड़ा कर गयी .

अमित ( मन में) इस का मतलब शालू ने मेरी मदद की मगर वो तो उस दिन मोंटी क साथ कड़ी थी. अगर शालू ने मेरी मदद की है तो इसका मतलब वो मोंटी क साथ नहीं है. मगर उसने मेरी मदद क्यों की. मोंटी को शायद पता नहीं होगा क शालू ने मेरी मदद की है. जब उसे पता चलेगा तो वो शालू से इसका बदला लेगी . अगर मैं पता लगा सकता हूँ तो शायद मोंटी ने भी अब तक पता लगा लिया होगा. मुझे पता करना चाहिए . शालू ने मेरी मदद की है मैं उसे कुछ होने नहीं दे सकता.

अमित : भैया क्या ये वीडियो किसी ने पहले आ कर देखा है क्या ?

तकनीशियन : नहीं मुझसे तो किसी ने नहीं पूछा. ऐसा क्या है इसमें ?

अमित : भाई प्लीज आप वीडियो में से इतना हिसस डिलीट कर दीजिये

तकनीशियन : मैं ऐसा नहीं कर सकता अगर कल को किसी ने मांग ली तो मेरी नौकरी पर बात आ जाएगी.

अमित : ( नीरज से) भाई प्लीज आप इनसे कहिये क इतना हिस्सा डिलीट कर दें बस पांच मिनट की तो बात है .

नीरज : मगर इसकी ज़रूरत hi क्या है

अमित : भाई अगर ये वीडियो मोंटी ने चेक कर्ली तो शालू को खतरा होगा प्लीज उसने पता नहीं क्यों पर मेरी मदद की है और मेरा भी फ़र्ज़ है मैं भी उसकी मदद करूँ .

नीरज : ठीक है मैं कुछ करता हूँ.

नीरज ने मुझे बहार रुकने को कहा और खुद तकनीशियन से बात करने क लिए रुक गया. 5 मिनट्स बाद hi नीरज वापिस आया और हम खली क्लास रूम में बैठ कर बात करने लगे.

अमित : आपने देखा शालू मंजू मम को कुछ पकड़ा रही थी इसका मतलब यही है क उसी ने मेरी मदद की है. उसने मुझे बचा कर मुझ पर एहसान किया है और अब मैं उसे बचाऊंगा . मगर एक बात समझ में नहीं आ रही क अगर वो मेरा साथ दे रही थी तो वो मुझसे दूर क्यों भगति है और वो मोंटी का साथ क्यों दे रही है.

नीरज : मगर तू यकीन से कैसे कह सकता है क उसने तेरी मदद की है?

अमित : क्यूंकि मंजू मम ने hi मेरी बेगुनाहो वाली वीडियो प्रिंसिपल सर को दी थी मगर उन्होंने ये नहीं बताया क उनको ये वीडियो कहाँ से मिली. उन्होंने इतना hi कहा क किसी ने लिफाफे में डालकर उनके टेबल पर वो मेमोरी कार्ड रख दिया था .

नीरज : मगर मम ने क्यों नहीं बताया?

अमित : शायद वो नहीं चाहती थी क किसी को शालू क बारे में पता चले .

हम बातें कर रहे थे क नीरज क फ़ोन पर किसी का फ़ोन आया और बात करने क बाद उसने बताया क प्रिंसिपल सर ने मुझे ऑफिस में बुलाया है. हम दोनों प्रिंसिपल सर क ऑफिस पहुँच गए. सर ने नीरज को बहार hi रुकने को कहा. ऑफिस में शिवानी प्रोफ वरिंदर और एक अंकल आंटी भी मौजूद थे

प्रिंसिपल : आओ अमित बैठो इनसे मिलो ये शिवानी क पेरेंट्स हैं और ये तुमसे कुछ बात करना चाहते हैं. वैसे मैंने अपना स्टैंड क्लियर कर दिया है फिर भी मैनेजमेंट चाहती है क तुम्हे एक बार मैं इनसे मिलवा दूँ.

Shivani’s डैड: मेरी बेटी से जो भी गलती हुई है उसके लिए मुझे अफसोस है और तुम जो भी हर्जाना कहोगे मैं भरने क लिए तैयार हूँ. तुम अपनी कंप्लेंट वापिस लेलो

अमित (शिवानी का बाप लगता है घमंडी किस्म का आदमी है . इसी लिए अभी भी पैसों का घमंड दिखा रहा है. प्रिंसिपल सर ने क्लियर कर दिया है क वो अपने स्टैंड पर क्लियर हैं जैसे की प्रोफ वरिंदर ने बताया था. इसका मतलब है मैनेजमेंट सर पर प्रेशर दाल रही है और अगर मैंने कंप्लेंट वापिस नहीं ली तो शायद प्रिंसिपल मेरी hi साइड लेंगे और उनकी बात न मने जाने पर वो इस्तीफा दे देंगे. )

अमित : शायद आपकी नज़र में इज़्ज़त की कीमत चाँद सिक्के हैं अंकल इसी लिए आप ऐसा कह रहे हैं. अगर मैंने सच में शिवानी का रपे किया होता तो क्या आप तब भी ऐसा hi करते ? मतलब कुछ पैसों क लिए मामला रफा दफा कर देते?

Shivani’s डैड: ये क्या बकवास कर रहे हो.

अमित : ी ऍम सॉरी अंकल पर ये आप hi ने कहा. आपने मेरी इज़्ज़त की कीमत लगाने की कोशिश की. मैं ये साफ कह दूँ क मैं आपके जितना अमित तो नहीं पर मेरी भी अपनी इज़्ज़त है और इज़्ज़त हर इंसान की एक बराबर होती है जिसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती.

मेरी बात पर शिवानी क बाप की बोलती बंद हो गयी और प्रिंसिपल सर और प्रोफ वर्मा गर्व से मेरी तरफ देखने लगे.

Shivani’s माँ: बीटा मैं इनकी इस बात क लिए माफ़ी मांगती हूँ तुमसे . पर ज़रा सोचो मेरी बेटी की इस गलती की वजह से इसका करियर ख़राब हो जायेगा ऊपर से बदनामी अलग से होगी. मैं तुम्हारे आगे बाथ जोड़ती हूँ प्लीज तुम एक बार शिवानी को माफ़ कार्डो

मैंने आगे बाद कर आंटी क जुड़े हुए हाथ पकड़ लिए.

अमित : ये क्या आंटी एक तरफ आप मुझे बीटा भी कह रही हैं और हाथ भी जोड़ रही हैं क्या ये ाचा लगता है एक माँ अपने बेटे क आगे हाथ जोड़े. आप सचमुच बहुत अछि हैं और इज़्ज़त क्या है ये आप अछि तरह समझती हैं. मैं अपनी फॅमिली से बहुत प्यार करता हूँ ज़रा सोचिये अगर मैं बेगुनाह साबित न होता तो मेरी फॅमिली पर क्या गुज़रती ? वो तो शर्म से hi मर जाते क उनका बीटा एक रेपिस्ट है. आपकी बेटी बहुत भोली और नादाँ है . इसे नहीं पता क इसने क्या किया है. शायद इसने कभी परिवार की इज़्ज़त और अहमियत को नहीं समझा वर्ण ये ऐसा नहीं करती. हो सकता है ये किसी दबाव में ऐसा कर रही हो . मुझे इससे कोई शिकायत नहीं है भगवन ने मेरी मदद की इसी लिए मैं बच गया मेरी माँ की दुआओं ने मुझे बचा लिया. मैं आइल खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेना चाहता मगर ऊपर वाले से दुआ करूँगा क वो इसे इस बात का एहसास ज़रूर करवाए क इज़्ज़त हर किसी की उसकी जान से भी कीमती होती है. अगर मैं रेपिस्ट साबित हो जाता तो शायद मैं खुद को ख़तम कर लेता मगर ऐसा नहीं हुआ इस किये मैं इसे माफ़ करता हूँ.

प्रिंसिपल सर प्लीज आपसे मेरी रिक्वेस्ट है क आप शिवानी क खिलाफ कोई एक्शन न ले.

शिवानी शर्मिंदगी से सर झुकाये कड़ी थी. शिवानी क बाप क इम्प्रैशन से पता चल रहा था क उसकी दौलत का घमंड उसे कुछ भी फील करने माहि दे रहा है मगर शिवानी की माँ क चहरे पर करीतिग्य क भाव थे. मेरी बात ख़तम होते hi शिवानी की माँ ने मुझे गले लगा लिया.

Shivani’s माँ: थैंक यू वैरी मच बीटा . तुम सच में बहुत अचे हो तुम्हारे माँ बाप ने तुम्हे बहुत hi अचे संस्कार दिए हैं. तुम्हारे पास बहुत बड़ा दिल है इसी लिए तुमने इतनी आसानी से इसे माफ़ कर दिया. मैं तुम्हारा एहसान कैसे उतरूंगी.

अमित : आंटी अपने मेरे सर पर प्यार से हाथ रख दिया मेरे लिए इतना hi काफी है. और शिवानी तुम्हे बस इतना hi कहूंगा क अचे लोगों की सांगत में रहो वर्ण बुरे लोगों की सांगत एक दिन तुम्हे किसी न किसी मोड़ पर डूबा देगी. सर क्या मैं अब जा सकता हूँ?

प्रिंसिपल सर : हाँ बीटा तुम जा सकते हो एंड ी प्राउड ऑफ़ यू माय सोन.

मैं सर से आज्ञा ले कर बहार आ गया शिवानी सर झुकाये कड़ी थी और शायद उसे एहसास हो रहा था क उसने मेरे साथ गलत किया है. मैं उसे माफ़ तो नहीं करना चाहता था मगर मैं ऐसा नहीं करता तो इससे कॉलेज को इतने अचे प्रिंसिपल और प्रोफ वर्मा से हाथ धोना पद सकता था जो मैं बिलकुल नहीं चाहता था. कहते हैं बुरे इंसान को मरने से बुराई नहीं मरती , मरना है तो बुराई को मारो और इसके लिए ज़रूरी है बुरे इंसान क साथ अच्छी की जाये ताकि वो आपके एहसानो क बोझ टेल डाब कर खुद hi बुराई छोड़ दे और मैंने ऐसा hi किया शिवानी को एक मौका देकर . अगर फिर भी वो नहीं सुधरी तो महात्मा गाँधी की तरह मैं दूसरा गाल आगे नहीं करूँगा.

नीरज बहार मेरा वेट कर रहा था उसने मुझसे पूछा तो मैंने सब बता दिया. उसके बाद मैंने अपने लेक्चर अटेंड किये और राधा नेहा दीदी क साथ छुट्टी क वक़्त मिला और फिर मोहित क साथ घर आ गया.

शाम को प्रैक्टिस क बाद जब मैं मंजू मम क घर ट्यूशन पड़ने गया तो मम ने कुछ देर मुझे पढ़ाया और फिर मुझे स्टडी करने का बोल कर अपने कमरे में चली गयी. कल से मंजू मम कुछ शांत सी लग रही थी जैसे वो किसी सोच में गम हो और आज कॉलेज में भी उनकी स्माइल कुछ फीकी थी मुझे लगा शायद कल मैंने जो कुछ भी कहा वो उन्हें ाचा न लगा हो. मैं मन hi मन सोच रहा था क मुझे उनसे माफ़ी मांग लेनी चाहिए . मैं अपनी सोच में डूबा था क मंजू म ने खांस कर मुझे होश में आने का इशारा किया.

मैंने जैसे hi मंजू म की तरफ देखा तो बस देखता hi रह गया . मुझे लगा मेरे सामने मंजू म नहीं कोई और hi कड़ी हो . ये मंजू म हो hi नहीं सकती ये तो कोई कॉलेज गोइंग लड़की है कितनी खूबसूरत है. मेरे सामने मंजू मम एक सलवार कमीज में कड़ी थी . सूट की फिटिंग इतनी टाइट थी क उनके जिस्म का एक एक हिस्सा क्लियर पता चल रहा था. उभरे हुए बड़े बड़े बूब्स सपाट पेट . ऐसे लग रहा था क पेट क ऊपर छाती वाला हिस्सा अलग से चिपका दिया हो. कमीज क नीचे सलवार थोड़ी खुली थी मगर उनकी ये सादगी उनके हुसैन को क़यामत बना रही थी. मेरा मुँह आश्चर्य से खुला हुआ था जिसे देख कर मम हसने लगी.

मंजू म: मुँह बंद कर लो नहीं तो माखी अंदर घुस जाएगी.

अमित : वो मैं वो .... वो .... आप ... आप सच मच बहुत खूबसूरत हैं जैसे कोई अप्सरा हो यू अरे सो ब्यूटीफुल

मंजू म : शर्म नहीं अति अपनी दीदी को ऐसे कहते हुए

अमित : ी ऍम सॉरी वो गलती से मुँह से निकल गया मगर आप सच में बहुत खूबसूरत हैं

मंजू म : ाचा बच्चू ! मेरे साथ hi फ़्लर्ट करने लगे . कॉलेज में कोई मिली नहीं तुम्हे जो मेरे साथ यहाँ फ़्लर्ट करने आ गए.

अमित : नहीं नहीं मैं कोई फ़्लर्ट नहीं कर रहा आप सच में बहुत खूबसूरत हैं . ऊपर वाले की नायब कारीगरी का नमूना हैं आप . आप इतनी सादगी में भी कमल लगती हैं अगर आप थोङा बन थान क रहें तो क़यामत hi आ जाये देखने वालों पर

मंजू म : मुझे तो लगता है क़यामत तुम पर आ गयी है जो ऐसी बातें कर रहे हो . मैं भला कहाँ से खूबसूरत दिखने लगी तुम्हे.

अमित : मेरी नज़र से देखिये आपको पता चल जायेगा. आप हमेशा ऐसे hi सूट पहना कीजिये . ऊपर वाले ने आपको इतनी हुसैन की नेमत बक्शी है और आप ने खुद को यूँ कैद कर रखा है तन्हाई क अंधेरों में. अगर आपने पहले hi खुद को संभल कर जीना सिख लिया होता तो आज आप इतनी अकेली नहीं होती. मैं चाहूंगा क आप आज से hi फिर से वही पहले वाली मंजू बन जाएँ मुझे पूरा विश्वास है आपकी ज़िन्दगी फिर से महकने लगेगी.

मेरी बातों पर मंजू म जो पहले शर्मा रही थी वो अब फिर से गंभीर हो गयी. और कुछ देर शांत रहने क बाद बोली

मंजू म : नहीं अमित मुझ में अब इतनी हिम्मत नहीं है क मैं फिर से ज़िन्दगी को नए सिरे जी सकूँ . मैंने इतने सक्षम खाये हैं क अब तन्हाई क अंधेरों में hi मुझे सुकून मिलता है. अकेले रहना से काम से काम किसी क छोड़ कर जाने का दर तो नहीं रहता दिल में.

मंजू मम ने बड़ी गंभीरता से इतनी गहरी बात कही थी . उनकी आँखों में फिर से पानी आने लगा और वो पलट कर वापिस अपने कमरे में जाने लगी तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया.

अमित : अगर आप किसी पर भरोसा hi नहीं करेंगी तो कोई अपनी वफादारी कैसे साबित करेगा. मन क आप क अपने आपको छोड़ कर चले गए पर क्या इसका मतलब ये है क आप किसी को अपना hi नहीं सकती? मैं आपको खुश देखना चाहता हूँ . मैं जनता हूँ आपकी मायूसी ने आपको अपने hi अंदर कहीं लाईड कर दिया है मगर मुझे वो पहले वाली मंजू चाहिए जो हस्ती खिल खिलाती थी और मैं उसे आपके अंदर से आज़ाद करवा कर रहूँगा. मैं जनता हूँ आप मुझ पर इतनी जल्दी यकीन नहीं करेंगी मगर मैं आपसे वडा करता हूँ मैं आपको कभी अकेला छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगा क्यूंकि अकेलापन और अपनों से जुदाई क्या होती है मैं अछि तरह जनता हूँ.

मंजू मम ख़ामोशी से मेरी बात सुनती हुई मेरी आँखों में देख रही थी. और फिर वो अचानक मेरे गले लग गयी और रोना शुरू कर दिया.

मंजू मम : मैं बहुत अकेली हूँ अमित बहुत अकेली हूँ मेरा कोई भी नहीं है . कोई नहीं है जिसके साथ मैं खुश हो सकूँ कोई नहीं है जिसके साथ मैं रो सकूँ. कभी बात करने को दिल करे तो ये खामोश दीवारों से hi बात कर लेती हूँ कभी रोना चहुँ तो खुद hi अपने आंसू पोंछने पड़ते हैं. कोई एक भी ऐसा नहीं जो मुझे अपने होने का एहसास दिलाये. मैं इस दुनिया में जैसे सजा काटने hi आयी हूँ जो शायद मेरी मौत क साथ hi ख़तम होगी

मैंने मम को पीछे किया और उनके मुँह पर हाथ रख लिया.

अमित : खामोश अगर कभी मरने की बात की तो. और ये क्या लगा रखा है क मैं अकेली हूँ मेरा कोई नहीं है . मैं क्या मर गया हूँ ? आपके सामने आपका भाई खड़ा है और आपका ये भाई आपको कभी अकेला छोड़ कर नहीं जायेगा अगर मौत भी आ गयी तो उसे ये कह कर वापिस भेज दूंगा क मेरी मंजू दीदी की आज्ञा क बिना मैं उसके साथ भी नहीं जाऊंगा.

मंजू म : ऐसा न कहो ऐसा न कहो अमित मैं पहले hi सबको खो चुकी हूँ अब तुम्हारे रूप में मुझे अपना भाई मिला है मैं तुम्हे कहीं नहीं जाने दूंगी .

अमित : तो आ गया यद् क मैं भाई हूँ . अभी तो कह रही थी क आपका कोई नहीं है तब कहाँ गया था ये भाई. तब तो जीते जी मर दिया था ये कह कर क मेरे सब अपने मर गए

मंजू म : एक लगाउंगी तुझे जो ऐसी बातें करेगा तो.

अमित : तो आप भी आज क बाद नहीं रोयेंगी वर्ण मैं आपकी छोटी काट दूंगा.

मंजू म : क्या कहा तू मेरी छोटी कटेगा ठहर मैं तुझे बताती हूँ.

मम ने मेरे पेट में झूठमूठ मरना शुरू कर दिया और मैं भी चिल्लाता हुआ एक्टिंग करने लगा. मम क चहरे पर फिर से हंसी आ गयी जिसे देख कर मुझे सुकून मिला.

मंजू म : तुम बैठो मैं चेंज कर क कॉफ़ी बना कर लती हूँ

अमित : बिलकुल नहीं. आप अब इन कपड़ो को चेंज माहि करेंगी. आप नहीं जानती आप इन कपड़ो में कितनी अछि लगती हैं. आज से आप यही कपडे पहना करो .

मंजू म : तू फिर से शुरू हो गया. फॉर योर काइंड इनफार्मेशन मेरे पास सूट नहीं हैं और ये वाला सूट भी बहुत पुराण है देख नहीं रहे कितना टाइट हो रखा है. मैं इसे बदलने जा रही हूँ.

अमित : मैंने कहा न आप नहीं बदलेंगी ये सूट. मैं आपको ऐसे hi कपड़ो में देखना चाहता हूँ. वैसे आपकी फिटिंग आज भी वैसे hi है जैसे पहले थी सिर्फ आपको लग रहा है क ये टाइट है क्यूंकि आपको ढीली ढली सदी पहनने की आदत जो हो गयी है. रही बात कपड़ो की तो वो मेरी ज़िम्मेदारी है मैं देख लूंगा आपको बाद मेरे साथ चलना है.

मंजू म: मुझसे नहीं होगा

अमित : मैंने कहा न आपको बस मेरे साथ चलना है अब आप सोचिये क आप मेरी बात मानेंगी या नहीं और अगर आपने बात नहीं मणि तो मैं आपसे बात नहीं करूँगा.

मंजू म: तुम बात बात ओर ये इमोशनल ब्लैकमेलिंग क्यों करते हो? ाचा ठीक है मैं साथ चलूंगी जब तुम कहोगे मगर अभी तो मैं जा सकती हूँ न चेंज करने?

अमित : मैंने कहा आप मेरे साथ चलेंगी वो भी अभी.

मंजू म: नहीं मैं अभी नहीं जा सकती हम किसी और दिन चलेंगे न . हम संडे को चलेंगे तब हम दोनों hi फ्री होते हैं .

अमित : अभी इसी वक़्त और कोई बहाना नहीं.

मंजू म : तुम समझ नहीं रहे

अमित : तो मैं जॉन फिर

मंजू म: ाचा बाबा मगर ये सूट बहुत टाइट है मुझे इस सूट में बहार जाने में शर्म आएगी किसी ने देख लिया तो क्या सोचेगा ? मैं सदी पेहेन लेती हूँ .

अमित : यही तो वो बात है जिसकी वजह से हम अपने अरमान अपने सरे सपने अपने hi हाथो कतल कर देते हैं क ‘ कोई क्या सोचेगा?’ यहाँ हर किसी को अपनी लाइफ की टेंशन है किसी क पास इतना फालतू वक़्त माहि है क वो दूसरों को hi नोटिस करता रहे वो क्या कर रहा है. वैसे भी जिन लोगों में बातें बनानी होती हैं वो बात बना hi लेते है. आप किसी की ज़ुबान को नहीं रोक सकती . अपनी ज़िन्दगी अपनी मर्ज़ी से जीना सीखिए वर्ण ये दुनिया तो किसी को चैन से मरने भी नहीं देती उसमे भी दोष ढूंढ hi लेती है जीने की तो बात hi छोड़िये.

मंजू म: तुम इतनी समझदारी की बातें कैसे कर लेते हो अमित ? कहाँ से सीखा तुमने ये सब?

अमित : ज़िन्दगी से बड़ा कोई गुरु नहीं और मौत से बड़ा कोई सच नहीं होता मम . मैंने अब तक की ज़िन्दगी में बहुत कुछ देख लिया है यहाँ पर आपकी लाखों अच्छाइयों पर आपकी एक गलती भरी पड़ती है . लोग आपके सभी अचे काम भूल जाते हैं और यद् रखते हैं तो वो गलती जो अपने की थी. अब ये सब छोड़िये और चलिए मेरे साथ .

मंजू मम ख़ामोशी से कुछ देर मुझे देखती रही जैसे कुछ अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रही हों. और मैं भी मन hi मन अपनी ज़िन्दगी की फ्लैशबैक में चला गया था मगर मैं खुद को कण्ट्रोल कर क बहार जाने को पलट गया.

मंजू म : रुको मैं ज़रा कार की के लेलूं.

अमित : उसकी ज़रूरत नहीं है . हम मेरी गफ क साथ जायेंगे.

मंजू म: गफ क साथ ?

अमित : आप बस लॉक कीजिये और बहार चलिए.

मंजू मम मेरी बात का मतलब नहीं समझी वो यही सोच रही थी क मेरी कौन स गफ है और वो कहाँ ओर है जो अब हम उसके साथ जायेंगे . उन्होंने जल्दी से लॉक किया सब कुछ और बहार निकल आयी जहाँ मैं अपनी बुलेट मोड़ कर किक मरने hi वाला था.

मंजू म: कहाँ है तुम्हारी गफ और तुम ये बाइक को क्यों निकल रहे हो?

अमित : चुप चाप पीछे बैठ जाइये मम यही तो है मेरी गफ हम इसी क साथ जा रहे हैं.

मंजू म: क्या कहा बाइक पर no वे तुम इसे साइड लगाओ मैं कार निकलती हूँ.

अमित : मैंने कहा न चुप चाप बैठ जाइये

मंजू म : मगर मैं गिर जाउंगी मैं कभी बाइक पर नहीं बैठी.

अमित : क्या आपको मुझ पर भरोसा नहीं है?

मंजू म : तुम पर भरोसा न होता तो मैं तुम्हारे साथ आने को मानती hi नहीं. चलो ठीक है मगर पहले hi सुन लो अगर मुझे नीचे गिराया तो तेरी टंगे तोड़ दूंगी.

इतना कह कर मम मेरे पीछे बैठ गयी और एक हैट मेरी कमर पर रख कर दूसरा हाथ मेरे कंधे पर रख लिया. मैंने बाइक को किक मरी और हम निकल लिए .

मंजू म : अब कुछ बताओगे हम जा कहाँ रहे हैं ?

अमित : अभी पता चल जायेगा

मैंने बाइक की थोड़ी स्पीड बड़ाई तो मंजू म घबराने लगी और मुझे कास क पकड़ लिया . उनका हाथ मेरी छाती पर था और वो कास क मेरे साथ चिपक गयी जिससे मुझे अपनी पीठ पर उनके बड़े बड़े बूब्स की सॉफ्टनेस फील होने लगी

मंजू म : क्या कर रहे हो धीरे चलाओ मैं गिर जाउंगी प्लीज धीरे चलाओ

अमित : मुझ पर भरोसा है तो आराम से बैठिये मैं आपको गिरने नहीं दूंगा

मेरी बात सुन कर दोबारा मम ने मुझे धीरे चलने को नहीं कहा और धीरे धीरे रिलैक्स हो गयी जैसे उनको भी मेरी बात पर यकीन आ गया हो. हम जल्द hi एक मार्किट में पहुँच गए . अभी ज्यादा टाइम नहीं हुआ था इस लिए शॉप्स ओपन hi थी. मैं बाइक को पार्किंग एरिया में खड़ा कर क मम को लेकर एक बड़े से कपड़ों क शोरूम में ले आया जहाँ पर बहुत सरे नए नए सुइट्स डिस्प्ले में टंगे हुए थे. मम मुझे बार बार पूछ रही थी मैं यहाँ क्यों ले आया उनको मगर मैंने उन्हें चुप रहने को कहा.

काउंटर पर एक 2 सेल्स गर्ल थी जिसने हमारा वेलकम किया

सेल्स गर्ल : वेलकम मम वेलकम सर बताइये क्या पेश करूँ

अमित : मम क लिए पर्सनालिटी क हिसाब से नई डिज़ाइन क कॉटन सुइट्स दिखाइए

मंजू म मेरी तरफ ऑंखें निकल क देखने लगी जैसे मुझे मन कर रही हो मगर मैंने इशारे से चुप रहने को कहा.

सेल्स गर्ल ने दूसरी सेल्स गर्ल को भी साथ लिया और कुछ कॉटन सुइट्स दिखने लगी. मंजू मम ने मेरे इंसिस्ट करने पर सूट देखना शुरू किया. मम सुइट्स देखती हुई एक तरफ रखती जा रही थी मगर सेलेक्ट नहीं कर रही थी मुझे लगा मम जान भूख कर नहीं सेलेक्ट कर रही .

सेल्स गर्ल : ये देखिये मम ये नया कलेक्शन है आप पर परफेक्ट लगेगा . इसपर एम्ब्रॉयडरी है वो एंटीक है

मंजू म: मुझे इतना हैवी वर्क पसंद नहीं है.

सेल्स गर्ल : ये देखिये ये आज कल फैशन में है और इस पर ज्यादा वर्क भी नहीं है.

मंजू म : कोई और दिखाओ

अमित : ऐसा करो इसमें वाइट कलर दिखाओ विथ पिंक कॉम्बिनेशन

मम मेरी तरफ देखने लगी मगर मैंने उनकी तरफ नहीं देखा.

सेल्स गर्ल : ये देखिये मम वाइट सूट पर पिंक फ्लावर्स आप पर बहुत जंचेगा . आप बिलकुल गुलाब की तरह खिल जाएँगी

( सेल्स वाले भी बातों में कितने मास्टर होते हैं कस्टमर को चने क झाड़ पर चढ़ा देते है. और न चाहते हुए भी कस्टमर मजबूर हो जाता है उसे लेने क लिए. यही तो पहचान है एक अचे सेल्स मन की. और यकीनन ये सेल्स गर्ल भी माहिर थी इस कला में)

मैंने फोरम वो सूट पैक करने को बोलै.

मंजू म : बस हो गया अब चलें?

अमित : आपके पास स्काई ब्लू और ब्लैक में भी होगा कोई?

सेल्स गर्ल : जी सर जैसा आप कहें हमारे पास सब मिल जायेगा

मंजू म : मगर मुझे नहीं चाहिए और

सेल्स गर्ल : ले लीजिये न मम सर इतने प्यार से ले रहे हैं आपके लिए

मैंने सेल्स गर्ल क दिखाए हुए सुइट्स में से एक ब्लैक एक येलो एक स्कीबलुए कलर का सूट ले लिया . मैं हर सूट में मम को इमेजिन करता और फिर सेलेक्ट करता हालाँकि मैं रेड सूट भी लेना चाहता था पर मुझे पता था मम वो कलर नहीं पहनेंगी . खैर हमने 4 सूट ले लिए मम लगातार मन कर रही थी मगर मैं नहीं मन .

अमित : कितना बिल बना ?

सेल्स गर्ल : सर मैं पैक करवा देती हूँ बिल काउंटर पर hi बनेगा.

सेल्स गर्ल सूट पैक करवा कर काउंटर पर ले गयी.

मंजू म: ये सब क्या तमाशा लगा रखा है. मैं तो पर्स भी लेकर नहीं आयी.

अमित : आपसे किसी ने पैसे मांगे क्या? ये सब मेरी तरफ से आपके लिए तोहफा है और अब आप कुछ नहीं कहेंगी.

मैं काउंटर पर गया तो पता चला 11000 बिल बना था. मेरे पास इतना कॅश तो था नहीं पर एटीएम कार्ड ज़रूर था. मैंने अपना एटीएम कार्ड उसे दे दिया. शोरूम बड़ा था इस लिए स्वाइप मशीन की सुविधा भी थी . उन्होंने कार्ड स्वाइप किया और पेमेंट हो गयी. मैंने उनसे टेलर का पूछा तो उन्होंने बताया क उनका पक्का टेलर है जो उनके कस्टमर क लिए स्टिचिंग करता है . पास hi उसकी छोटी सी शॉप थी मैं मम को वहां ले गया और मम का नाप दिलवा कर हम फ्री हो गए.

मंजू म : अब बताओगे ये सब क्या है?

अमित : क्या है मतलब ? आज से आप साडी नहीं सूट पहनेंगी . आज से आप वही करेंगी जो मैं कहूंगा.

मंजू म : ाचा ! पर मैं ऐसा क्यों करूँ भला?

अमित : क्यूंकि मैं आपका भाई हूँ और मैं चाहता हूँ क आप ज़िन्दगी को खुल क जीना शुरू कर दें जैसे आप पहले थी मुझे वैसी hi मंजू को देखना है. मुझे वहीँ हंसती खेलती मंजू चाहिए जो मैंने उन तस्वीरों में देखि है.

मंजू म : तौबा मुझसे गलती हो गयी जो मैं वो एल्बम सामने hi रख कर भूल गयी . शुक्र है कुछ और तुम्हे पता नहीं चल गया पता नहीं क्या करते .

अमित : मतलब और भी कुछ है जो अपने मुझे बताया नहीं है. ये चीटिंग है मैंने आपको तो सब कुछ बताया था न.

मंजू म: अब और कोई ड्रामा नहीं चलो घर चलें देखो टाइम क्या हो गया है और मैंने खाना भी नहीं बनाया .

अमित : आपको ज़रूरत भी नहीं है .

मंजू म : तो क्या भूखी रहूंगी मैं आज?

अमित : बिलकुल नहीं . आज हम होटल में खाना खाएंगे .

मैं आज इतनी देर तक घर नहीं आया तो मोहित का मुझे फ़ोन आ गया मैंने उसे बता दिया क मैं डिनर कर क आऊंगा . मैं मम को लेकर एक नदिया से होटल छुम ढाबे में ले गया और वहां पर हम दोनों ने खाना खाया . ज़रूरत क लिए मैंने एटीएम से पैसे निकलवा लिए थे. खाना खाने क बाद हम घर क लिए निकल पड़े तो रस्ते में मैंने आइस क्रीम भी ले ली और हम कहते हुए आराम से घर जा रहे थे

अमित : कैसा लगा आज मेरे साथ वक़्त बिताना?

मंजू म : सच कहूं तो ऐसा लग रहा है जैसे मैं मैं नहीं हूँ कोई और हूँ. एक आरसे क बाद आज मैं इस तरह घर से बहार हूँ किसी क साथ वर्ण घर और किताबों क बीच मैं कहीं खो सी गयी थी . आज लग रहा जैसे मैं ज़िंदा हूँ मगर अभी दिल कह रहा है जैसे ये कोई ख्वाब है और नींद से जागते hi फिर से मैं अपने घर की चारदीवारी में अकेली रह जाउंगी.

अमित : अब ऐसे ख्वाब देखने की आदत दाल लीजिये मम . अब मैं आपको अकेला नहीं रहने दूंगा और एडवांस में सॉरी बोल देता हूँ अगर मेरी कोई बात अछि न लगे तो .

मंजू म: ये क्या बार बार मम कहता रहता है दीदी नहीं कह सकता ? और सॉरी कहने की कोई ज़रूरत नहीं है मुझे तुम्हारी कोई बात बुरी नहीं लगती . फिर से सॉरी कहा तो मर खाओगे.

बातें करते हुए मैंने एक बार फिर बाइक की स्पीड तेज़ करदी और मम ने घबरा कर मुझे दोनों बाजुओं से थम लिया

मंजू म : धीरे धीरे आराम से चल वर्ण मैं तेरी टंगे तोड़ दूंगी.

अमित : इसी लिए एडवांस में सॉरी बोलै था.

यूँ hi हम बातें करते घर आ गए . मम ने घर का लॉक खोला मगर अंदर जाने की बजाये मेरी तरफ देखने लगी

अमित : क्या हुआ अब आप अंदर क्यों नहीं जा रही ?

मंजू म: आज तुम्हारे साथ वक़्त कैसे बीत पैट hi नहीं चला और अब घर आकर फिर से दर लगाने लगा है क कहीं ये सपना hi न हो और मैं नींद से जग जॉन . मैं उस सपने को टूटने नहीं देना चाहती.

अमित : मैंने आपसे वडा किया है न क मैं आपको छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगा. आप आराम से अंदर जाइये और कल सुबह उठ कर देखना ये सपना नहीं हकीकत है फिर भी यकीन न आये तो कल हम फिर चलेंगे ऐसे बहार घूमने क लिए . अब आप जाइये मुझे भी देर हो रही है आंटी अंकल नाराज़ होंगे.

मंजू मम मेरे साइन से लग गयी और मुझे अपनी बाँहों में कास लिया जैसे छोटी बची करती है. उनकी ऑंखें ऐसे लग रही थी जैसे अभी आंसू बहा देंगी.

मंजू म : थैंक्स अमित मुझे कभी अकेला मत छोड़ना मुझे अब कोई और दर्द बर्दाश्त नहीं होगा प्लीज मुझे अकेला मत छोड़ना कभी.

अमित : अरे ये क्या आप बार बार बच्चों की तरह रोने लग जाती हैं. लगता है आप न खुद सोना चाहती हैं और न मुझे सोने देंगी तो कल की छुट्टी ले लेते हैं कॉलेज से .

मंजू म : क्या तुम मेरे घर नहीं रुक सकते ? मैं चाहती हूँ तुम हर वक़्त मेरे पास रही और मुझे भी ये तसल्ली रहे क मेरा भी कोई अपना मेरे पास है.

अमित : मैं तो हमेशा आपके पास hi हूँ आप जब कहेंगी मैं हाज़िर हो जाऊंगा फ़िलहाल मैं मोहित क घर रह रहा हूँ तो अभी मैं यहाँ नहीं आ सकता मगर वडा करता हूँ मैं आपके पास रहने ज़रूर आऊंगा . अब आप जाइये वर्ण रत यूँही खड़े खड़े गुज़र जाएगी और मेरी टंगे भी अब जवाब दे गयी हैं.

मंजू म : ठीक है गुड नाईट और ध्यान से जाना घर जा कर मुझे फ़ोन ज़रूर कर देना.

मैंने भी मम को गुड नाईट कहा और वापिस घर को निकल गया.

मंजू मम अपने बिस्तर पर लेती आज जो कुछ भी उसके बारे में सोचने लगी . कैसे उन्होंने आज इतने सैलून बाद अपने पुराने कपडे पहने जिसे वो कब की भूल चुकी थी. किस तरह अमित ने उनको ज़िद कर क कितने सरे सूट दिलवाये . जिन चीज़ों को वो कब का भूल चुकी थी अब वो साडी एक एक कर क अमित फिर से उनको करने क लिए मजबूर करता जा रहा था और ऐसा करना कहीं न कहीं मंजू क दिल में भी ज़िन्दगी को जीने की नयी उम्मीद पैदा करता जा रहा था. आज कितने सैलून बाद वो बाइक पर बैठी थी और उसकी जिस तरह अमित ने तारीफ की थी उससे मंजू क दिल में भी एक पल क लिए उमंगो क फूल खिल उठे थे. मंजू एक एक चीज़ को फ्लैशबैक कर क देख रही थी. कैसे अमित ने कितने अधिकार से आज उसके लिए खुद hi सूट सेलेक्ट किये और उसे सिलने क लिए भी दे दिया होटल में डिनर और फिर आइस क्रीम. आइस क्रीम खाना कभी उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी हुआ करता था . बचपन से hi उसका भाई उसे रोज़ आइस क्रीम खिलाया करता था मगर भाई क बाद तो उसने जैसे आइस क्रीम कभी खाई hi नहीं. और आज अमित जैसे उसके अतीत क सरे शोक साडी आदतें उसके अरमानों क बंद पड़े संदूक में से निकल कर उसके सामने रखता जा रहा था.

मंजू म : काश ये सपना कभी न टूटे

भगवन से यही प्रार्थना करती हुई वो खुली आँखों से सोने की कोशिश करने लगी.



उधर अमित 10:30 बजे घर पहुंचा और पहले मम को फ़ोन कर क अपने घर पहुँचने की रिपोर्ट दे दी और अपने कमरे में जाने लगा. मगर हल में रमा बैठी उसका इंतज़ार कर रही थी.
 
अपडेट 79



अमित : आप अभी तक जग रही हैं ?

आंटी : तुम्हारा hi इंतज़ार कर रही थी.

अमित : अंकल और मोहित कहाँ हैं ?

आंटी : राघव आउट िफ़ स्टेशन है और मोहित सो रहा है. इसी लिए मैं यहाँ बैठी तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी. आज राघव घर नहीं है तो आज तुम मेरे साथ मेरे रूम में रहोगे

आंटी इस वक़्त एक गाउन में थी और बात करते हुए आ कर मेरे गले लग गयी. आंटी की आँखों में गुलाबी डोरे थे जिससे ज़ाहिर था क उनके अंदर वासना की आग जल रही है और आज वो मुझसे अपनी आग बुझावना चाहती हैं . आंटी ने मेरे होंठों पर होंठ रख कर मुझ पर हमला कर दिया. मगर इस तरह हॉल में आंटी का ऐसे करना मुझे डरने पर मजबूर कर रहा था . इस लिए मैंने आंटी को खुद से दूर हटाया.

अमित : कण्ट्रोल कीजिये खुद पर अगर मोहित आ गया तो?

आंटी : उसकी चिंता मत करो मैंने उसके दूध में नींद की टेबलेट दाल दी थी.

अमित : फिर भी मैं रिस्क नहीं लेना चाहता

आंटी : तो चलो मेरे साथ

आंटी मेरे हाथ पकड़ कर खींचती हुई मुझे अपने कमरे में ले गयी और अंदर जाते hi आंटी ने मुझ पर हमला कर दिया . किश करते हुए आंटी ने मेरे लोअर में हाथ दाल कर मेरा लैंड मसलना शुरू कर दिया. आंटी की गर्मी बढ़ती जा रही थी. आंटी घुटनो पर बैठ गयी और मेरा लोअर अंडरवियर क साथ नीचे खिंच कर मेरा लैंड मुँह में लेकर चूसने लगी . मैंने खड़े खड़े अपनी T-shirt उतर दी और आंटी को पकड़ कर उठाया . आंटी को मैंने कंधे से पकड़ कर उठाया और उनका गाउन खोल दिया. आंटी ने नीचे कुछ नहीं पहना था मैंने आंटी को किश करने लगा और आंटी उछाल कर मेरी कमर में अपनी दोनों टंगे कैंची की तरह फसकर मेरे ऊपर चढ़ गयी . मैंने आंटी को किश करते हुए दीवार से लगाया और खड़े खड़े अपना लैंड उनकी छूट में घुसा दिया. आंटी क मुँह से एक सिसकी निकली और मैंने धक्के मरने शुरू कर दिए.

मैंने आंटी को खड़े खड़े छोड़ रहा था और आंटी भी किसी जंगली बिल्ली की तरह मुझ पर हावी होने क लिए तेज़ी से खुद hi ऊपर निचे होने की कोशिश कर रही थी. आंटी का पानी निकलते hi मैंने उनको नीचे उतरा और अपने कपडे उतर कर आंटी को रूम में पड़े सोफे पर घुटनो पर झुका कर पीछे से धक्के मरने लगा . आंटी मस्ती के सिसकियाँ ले रही थी मैं उनकी कमर को पकड़ कर पूरे ज़ोर से धक्के मर रहा था. आंटी ने एक बार फिर से पानी छोड़ दिया और मैंने भी उनकी पीठ पर अपने वीर्य को निकल दिया. आंटी मस्ती में ऑंखें बंद कर क वहीँ लेट गयी और मैं अपने कपडे पहनने लगा आंटी मुझे उनके साथ hi सोने का कहने लगी मगर मैं उनको गुड नाईट कह कर बहार निकला. बहार निकलते hi मुझे ऐसा लगा जैसे अभी अभी कोई यहाँ से पीछे हटा है. मैं देखने क लिए किचन में गया तो वहां रानी बर्तन साफ़ कर रही थी. उसने घबरा कर मेरी तरफ देखा. उसके haw-bhaw से मैं समझ गया क यही हमे छुप कर देख रही थी . रानी भी सब देख कर गरम हो गयी थी और इस बेचारी को भी चुदाई की ज़रूरत थी. रानी अब आंटी क दर की वजह से किसी दूसरे क पास भी नहीं जा सकती थी और मुझसे भी सीधा नहीं कह प् रही थी. मुझे उसकी हालत पर तरस आ गया मगर अभी टाइम बहुत हो चूका था और मुझे सुबह जल्दी उठना भी था इस लिए मैं उसे ऐसे hi तरसता हुआ छोड़ कर चला गया.

‘शालू , तुम्हारा नाम शालू hi है न? तुम्हे प्रोफ वर्मा ने रूम no. क्सक्स में बुलाया है अभी इसी वक़्त’

शालू प्रोफ का मैसेज मिलते hi सेकंड फ्लोर पर लास्ट रूम में उनसे मिलने चली गयी.

शालू : तुम ? प्रोफ कहाँ हैं?

अमित : मैंने hi तुम्हे यहाँ बुलाया है.

शालू : किस लिए बुलाया है ? क्या फिर से मुझे कुछ सुनना चाहते हो या फिर गलियां देना चाहते हो?

मैंने आगे बाद कर शालू को गले लगा लिया . शालू मेरे ऐसा करते हैरान हो गयी उसे समझ नहीं आ रहा था क मैं ऐसा क्यों कर रहा हूँ.

अमित : मुझे माफ़ कर दो शालू मैंने तुम्हे गलत समझा . तुमने मेरी इतनी मदद की और मैं तुम्हे गलत समझ रहा था. तुमने मेरे लिए मोंटी से दुश्मनी मोल ले ली.

शालू : ये क्या बकवास कर रहे हो तुम्हारा दिमाग ख़राब हो गया है. मैं जा रही हूँ.

अमित : मुझे नहीं पता तुम किस लिए मोंटी का साथ देती हो मगर मैं तुम्हे वडा करता हूँ मैं तुम्हे उसके चंगुल से बचा कर रहूँगा.

शालू : पता नहीं क्या बाके जा रहे हो तुम . मैंने कोई मदद नहीं की तुम्हारी और न hi मैं किसी क चंगुल में फांसी हूँ

अमित : मैं जान गया हूँ क वो वीडियो प्रूफ तुमने hi मंजू मम को दिए थे. प्लीज भगवन क लिए मुझे बताओ क आखिर तुम मोंटी का साथ क्यों देती हो . वो कौन स वजह है क तुम उसके साथ रहती हो. तुम्हारी क्लास क लड़के लड़कियां तुम्हारे बारे में क्या क्या बातें बनाते हैं तुम आखिर किस वजह से उसका साथ नहीं छोड़ रही . मुझे बताओ मैं कसम खता हूँ मैं तुम्हारी मदद करूँगा चाहे कुछ भी करना पड़े.

मेरी बातों से शालू की आँखों में पानी आने लगा मगर अपने इमोटिकॉन्स को छुपाती हुई वो बोली.

शालू : तुम कुछ नहीं जानते मुझे किसी मदद की ज़रूरत नहीं है .

इतना कह कर शालू कमरे से बहार निकल गयी. मगर उसकी आँखों में एक पल क लिए आयी वो नमी इस बात की गवाह थी क वो मुझसे सच छुपा रही है. शालू ज़रूर किसी मज़बूरी में फांसी है और मुझे हर हल में उसकी मदद करनी hi चाहिए. शायद वो इतनी आसानी से मुझे कुछ बताएगी नहीं या फिर वो किसी पर विश्वास नहीं कर प् रही. शालू से कॉलेज क बहार मिलना होगा तभी वो मुझे कुछ बताएगी.

‘अरे भाई कहाँ गायब रहते हो? कॉलेज में होकर भी तुम्हारे दर्शन नहीं होते. मेरी दोस्त रोज़ तुमसे मिलने अति है और तुम हो क मर. इंडिया बने गायब रहते हो’

जैसे hi मैं मोहित क साथ कैंटीन में घुसा मीनल ने ये कह कर हमारा स्वागत किया. मीनल क साथ इस वक़्त उसकी खूबसूरत दोस्त रीमा बैठी थी जो आज एक अचे से स्टाइलिश सूट में थी. मुझे देखते hi उसके चहरे पर लाली आ गयी और उसने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका ली. आज सूट में रीमा उस दिन से भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी और उसकी ये सिंपल लुक मुझे बहुत प्यारी लग रही थी. मीनल रीमा की तरफ इशारा करते हुए बात कर रही थी जिससे मैं समझ गया क वो रीमा की टांग खींच रही है.

अमित : मैं तो यहीं रहता हूँ और वैसे भी कहते हैं न क ढूंढने वाले पत्थर में भी भगवन को ढूंढ लेते हैं मैं तो फिर कॉलेज में hi था. कोई दिल से कोशिश करे तो क्या नहीं मिलता

मैंने भी मीनल की टोन में बात को मज़ाक में लेते हुए कहा जिससे रीमा और भी शर्मा गयी . उसने एक बार नज़रें उठाकर मुझे देखा और फिर नीचे देखने लगी.

मीनल : तो जनाब अब भगवन समझने लगे गेन खुद को.

अमित : भगवन तो नहीं मगर इतनी सुन्दर अप्सराओं क पास बैठा हूँ तो काम से काम खुद को कोई छोटा मोटा देवता तो समझ hi सकता हूँ.

मेरी इस बात पर मीनल और रीमा दोनों hi हसने लगी. और रीमा से मेरी नज़र फिर एक बार मिली.

अमित : तो बताओ क्यों यद् किया जा रहा था मुझे?

मीनल : खुद hi पुछलो सामने बैठी है महारानी ये hi तुम्हे यद् कर रही थी.

अमित : मतलब तुम नहीं करती

मीनल : मेरे पास है न मोहित यद् करने क लिए मैं तुम्हे क्यों यद् करूँ. इसे hi ज़रूरत है जो अभी तक खली है.

मीनल की बात पर रीमा ने उसे चिकोटी कटी ये देख कर मुझे भी हसी आ गयी

अमित : तो बताइये रीमा जी आप ने कैसे यद् किया.

रीमा: कुछ नहीं वो बस मैं वो मैं मीनल क साथ रोज़ अति हूँ न कैंटीन तो आप आये नहीं दो दिन बस इसी लिए मैंने पूछ लिया था क कहीं आप बीमार तो नहीं . ये तो बस ऐसे hi बात बना रही है.

मीनल : ऐ झूठी अब झूठ क्यों बोल रही है ? दो दिन से पूछ पूछ कर सर खा गयी है क अमित कैंटीन में क्यों नहीं आ रहा . मैंने कहा भी वो कॉलेज में hi है बस कोई काम पद गया होगा फिर भी इसे तसल्ली नहीं हो रही थी. इसी लिए मोहित से मैंने कहा क वो तुम्हे कैंटीन में लेकर आये

मीनल की बात से रीमा की चोरी पकड़ गयी और वो अपने हाथो की उंगलियां मसलती हुई अपनी सीट से कड़ी हो कर जाने लगी तो मैंने हाथ पकड़ कर उसे वापिस बिठा लिया. एक बार फिर से उसके चहरे पर शर्म की लाली आ गयी.

अमित : इसमें इस तरह उठ कर जाने वाली क्या बात है? हम सब दोस्त हैं अगर वो मज़ाक कर रही है तो तुम भी मज़ाक कर सकती हो मगर ऐसे जाना गलत बात है. वैसे एक बात तो माननी पड़ेगी मीनल तुम्हारी दोस्त बहुत खूबसूरत है.

मीनल : क्यों उस दिन खूबसूरत नहीं लगी थी?

अमित : खूबसूरत तो उस दिन भी लगी थी मगर आज सूट में देख कर तो दिल खुश हो गया. वो कहते हैं न जिसे भगवन ने खूबसूरत बनाया हो उसे सजने सँवारने की ज़रूरत नहीं और जिसे उसने खूबसूरत माहि बनाया चाहे वो कितना भी सिंगार कर ले वो कभी सुन्दर नहीं दिख सकता. इस कॉलेज में मैंने बड़े घरों की फैशनेबुल लड़कियां बहुत देखि हैं मगर मेरी नज़र में सब फींकी हैं. जो रियल ब्यूटी है वो सिंपल सूट में भी क़यामत दिखाई देती है . जैसे ये ाँ नज़र आ रही है.

मेरे मुँह से अपनी तारीफ सुन कर रीमा की लाली का रंग और गहरा हो गया और वो शर्म से वहीँ पानी पानी होने लगी.

मीनल : ोये तेरा कहने का क्या मतलब है क मैं खूबसूरत नहीं हूँ?

अमित : मैंने ऐसा कब कहा ? तुम्हारी तारीफ तो मोहित hi कर सकता है अगर मैंने की तो बाद में ये मुझे मरेगा.

हमारी इस हंसी मज़ाक वाली बात में रीमा को थोड़ा कम्फर्टेबले किया.

अमित : राधा कहाँ है ? उसे भी साथ ले एते तुम लोग.

रीमा : वो लाइब्रेरी में पद रही है मैंने उसे पुछा था मगर उसने कहा क एक ज़रूरी लेसन तैयार करना है उसे.

लेक्चर की बेल्ल होने तक हम कैंटीन में साथ बैठे बातें करते रहे . रीमा बार बार मुझे देखती और नज़रें मिलते hi नीची कर लेती. खैर ऐसे रोज़ की तरह दिन निकल गया. शाम को मैं फिर से ट्यूशन पड़ने पहुँच गया. आज कॉलेज में मंजू मम के चाहते पर एक खास तरह की ख़ुशी झलक रही थी और उनकी मुस्कराहट भी उनकी ख़ुशी का परमं थी. जिससे ये साफ ज़ाहिर था क कल मेरे साथ बिताया वक़्त उनके दिल को कितना ाचा लगा था. कॉलेज में मैं मम से किसी भी तरह की बात नहीं करता था क कहीं कोई बात माँ बने वैसे भी मैं नहीं चाहता था क किसी को पता चले मैं उनके पास पड़ने अत हूँ मैंने मोहित को भी साफ मन कर दिया था इस बारे में किसी को बताने से.

मंजू म: आज तुम पूरे 10 मिनट्स लेट हो तुम्हे इसकी सजा मिलेगी.

मेरे अंदर आते hi मम ने गुस्से से ये कह कर मेरा स्वागत किया. मैं जनता था उनका गुस्सा बनावटी है . शायद वो मुझसे बात करने को उत्सुक होंगी इसी लिए मेरे लेट आने से नाराज़ हो रही हैं. मैं भी अपने कान पकड़ कर खड़ा हो गया.

अमित : सॉरी मम वो आज स्टेडियम में कोच साहब ने ज्यादा देर प्रैक्टिस करवाई हमसे.

मंजू म: सॉरी से काम नहीं चलेगा तुम्हे कोच साहब को बोलना चाहिए था तुम्हारी मम तुम्हारा इंतज़ार कर रही है. अब तो तुम्हे सजा भुगतनी पड़ेगी.

मैं अपने कण पकड़ कर उठक बैठक लगाने लगा

मंजू म: अरे अरे ये क्या कर रहे हो?

अमित : आप hi ने कहा सजा भगतनि पड़ेगी तो वही कर रहा हूँ.

मंजू म: छोडो अपने कण और बैठ जाओ चेयर पे . तुम्हारी सजा ये है क आज तुम 2 घंटे ट्यूशन पड़ोगे.

अमित ( अब समझा , बहाने से मुझे ज्यादा देर अपने पास रखना चाहती हैं . मैं भी इनको तंग करता हूँ)

अमित : पर मुझे तो आज जल्दी जाना है मम इन फैक्ट मेरे पास सिर्फ आधा घंटा है. मुझे मोहित की फॅमिली क साथ किसी फंक्शन में जाना है.

मेरी बात पर मम ने मुँह फुला लिया और गुस्से से बोली

मंजू म : तो आये hi क्यों थे जो इतनी जल्दी जाना था ? फ़ोन कर क बोल देते क नहीं आ सकते

अमित : वो क्या है न मैंने सोचा आपको खुद hi जा कर बता दूंगा तो आपको बुरा नहीं लगेगा.

मंजू म : कोई ज़रूरत नहीं मेरे बारे में इतना सोचने की मुझे बुरा नहीं लगता मैं कोई छोटी बची नहीं हूँ मुझे किसी बात से फरक नहीं पड़ता तुम जाओ मैं खुश हूँ अकेली.

ये कुछ ज्यादा hi हो गया . बेचारी मम पता नहीं सुबह से कैसे मेरा वेट कर रही होगी बात करने क लिए और मैंने उनको आते hi तंग करना शुरू कर दिया अब तो गुस्से में उनका मूड hi ख़राब हो गया है.

अमित : अजीब बहिन है जो छोटे भाई को घर से भगा रही है. घोर कलयुग है भाई अब तो बहनो क लिए भाई की कीमत कुछ नहीं रही. मैं इतना कह कर जाने की एक्टिंग करने लगा तो मम ने मुझे पीछे से का क गले लगा लिया और रोने लगी.

मंजू म : मैं तुम्हे कहीं नहीं जाने दूंगी . बहिन कहता है न मुझे तो तुझे अपनी बहिन का ख्याल नहीं अत कब से तुमसे बातें करने क लिए तड़प रही हूँ और तू है क आते hi जाने की बातें करने लगा. पता है कल रत से जब से तू गया है मैं बार बार भगवन से यही कह रही थी क तुझे फिर से वापिस मेरे पास भेज दे और तू कहता है मुझे तेरी परवाह नहीं. तेरे आने पहले तक मैंने किसी तरह खुद को समझा लिया था और अपनी तन्हाई योन से समझौता कर लिया था मगर तुमने फिर से मेरे अंदर उम्मीदों की लो जगा कर मुझे ऐसा बना दिया है क अब हर वक़्त तुमसे hi बातें करने को जी चाहता है. तू कैसे जा सकता है मुझे छोड़ कर ? तूने तो वडा किया था क कभी मुझे छोड़ेगा नहीं.

मंजू मम क आंसू मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहे थे मैंने तो मज़ाक किया था और वो इतना अधीर हो कर रोने लगी. मैंने पलट कर उनको गले लगा लिया.

अमित : ी ऍम सॉरी दीदी मैं तो बस मज़ाक कर रहा था मुझे नहीं पता था क आप इतनी कोमल हैं क मेरे ज़रा से मज़ाक पर रोने लग जाएँगी . मैं वाकई सजा का हक़दार हूँ आप मुझे जो चाहे सजा दीजिये मगर प्लीज चुप हो जाइये. मैं कहीं नहीं जाऊंगा आप जब तक कहेंगी मैं आपके पास hi रहूँगा.

मंजू म : तू सच कह रहा है?

मैं हाँ में गर्दन हिलायी तो मंजू म पीछे हैट कर अपने आंसू खुद hi साफ़ करने लगी.

मंजू म : तुझे सच में कहीं जाना तो नहीं हैं न?

अमित : नहीं दीदी मैं यही हूँ आपके पास और पूरे 2 घंटे मैं यहीं पर हूँ आपकी मर्ज़ी क बगैर कहीं नहीं जाऊंगा.

मंजू म : चल बैठ मैं तेरे लिए कॉफ़ी लती हूँ .

मैं बैठ गया और मम थोड़ी देर में कॉफ़ी ले आयी. कॉफ़ी पिने क वाद पहले मम ने मुझे पढ़ाया और फिर हम बातें करने बैठ गए.

मंजू म कल की बातें hi कर रही थी और बातें करती हुई चहक रही थी मैं उनके चहरे की मुस्करात देख कर खुश हो रहा था. शायद उनके मन में भी बदलाव आने लगा था मेरी वजह से और उन्होंने हसना शुरू कर दिया था. मैं 2 घंटे तक मम क पास hi रहा और जब मैंने जाने का बोलै तो फिर से उनकी मुस्कराहट गायब हो गयी. मगर कल आने का बोल कर मैं उनसे विदा लेकर घर आ गया.

घर पर डिनर क बाद मोहित को फिर से आंटी ने दूध में टेबलेट दाल कर सुला दिया और मैंने आंटी को उनके बीएड पर ठंडा किया. आज भी रानी छुप कर हमारी चुदाई देख रही थी और अपनी छूट मसल रही थी. खैर अगला दिन भी आ गया आज मैंने मोहित को बहाना बना कर अपनी बुलेट पर कॉलेज क लिए निकल गया और कॉलेज से थोड़ी दूर रस्ते में खड़ा हो गया इसी तरफ से शालू कॉलेज आती थी.

थोड़ी देर में hi शालू एक स्कूटी पर अति हुई दिखाई दी तो मैंने आगे बाद कर उसका रास्ता रोक लिया.

शालू: ये क्या हरकत है? मेरा रास्ता क्यों रोक रहे हो? हैट जाओ सामने से मुझे कॉलेज जाने में देर हो रही है.

अमित: आज तुम कॉलेज नहीं जाओगी. पहले मुझे मेरे सवालों क जवाब चाहिए.

मैंने उसके हाथ से एक्टिवा पकड़ी और उसे पीछे हटने को कहा मगर वो ज़ोर लगाने लगी

अमित: देखो सड़क पर तमाशा न करो चुप चाप पीछे बैठ जाओ मैं तुम्हे कोई नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा. अगर तुम चाहती हो क लोग मेरी सड़क पर धुलाई करें तो तुम शोर मचा सकती हो.

शालू चुपचाप पीछे हैट गयी. और मैं एक्टिवा चलकर उसे एक पार्क में ले गया. एक्टिवा को बहार खड़ा कर क मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे अंदर ले गया उसने कोई विरोध नहीं किया

अमित : अब मुझे सब सच सच बताओ अलसी कौन स मज़बूरी है जो तुम मोंटी से इतना डर्टी हो ? आखिर किस लिए तुम उसके हाथों की कठपुतली बानी हुई हो? मैं वडा करता हूँ किसी भी कीमत पर तुम्हे उससे बचाऊंगा. तुम मेरा ट्रस्ट करो मैं कसम खता हूँ. मैं जनता हूँ तुम एक बहुत hi अछि लड़की हो और मैं नहीं चांटा क मोंटी तुम्हारी ज़िन्दगी बर्बाद करे.

शालू: अब रह hi क्या गया है बर्बाद होने को. तुम कुछ नहीं कर सकते कोई मेरी मदद नहीं कर सकता. दुनिया में गरीब होना hi सबसे बड़ा गुनाह है . ये दुनिआ सिर्फ पैसे वालों की है हम लोगों का तो कोई वजूद hi नहीं है.

अमित : देखो शालू तुम्हे मुझ पर भरोसा करना होगा. चाहे कुछ भी हो जाये मैं तुम्हे उस मोंटी क हाथोस से बचा लूंगा तुम प्लीज मुझ पर एक बार भरोसा तो करो. तुम्हे तुम्हारी माँ की कसम तुम मुझे बताओ

शालू : नहीं अमित तुम इस सब में मत पदों वो बहुत hi गलत इंसान है और पैसे वाले बाप की औलाद है . तुम उसे नहीं जानते मैं जानती हूँ

अमित: अगर तुम्हारी नज़र में मेरी थोड़ी स भी कीमत है तो तुम्हे तुम्हारी फॅमिली का वास्ता मुझे सच बताओ मैं तुम्हे हर हल में बचाऊंगा

शालू: अब बचने को बचा hi क्या है. तुमने मुझे फॅमिली का वास्ता दिया न. मेरी माँ तो बहुत पहले hi चल बसी थी सिर्फ पिता जी हैं मेरे सर पर और कोई बहिन भाई नहीं है. इस लिए मेरे पापा hi मेरे लिए सब कुछ हैं. तुम्हे पता चल hi गया होगा क मेरे बारे में कॉलेज में क्या बातें होती हैं. सब यही कहते हैं न क मैं मोंटी की रखैल हूँ ? हाँ ये सच है मैं मोंटी और उसके दोस्तों की रखैल हूँ. वो जब चाहते हैं जैसे चाहते हैं मेरा इस्तेमाल करते हैं और मुझे उनकी बात माननी पड़ती है. कभी कभी वो नए नए दोस्तों को भी बुलाते हैं कभी होटल में कभी फार्म हाउस पर कभी कॉलेज में hi . मैं एक रंडी से ज्यादा कुछ नहीं कुछ नहीं मैं

शालू फुट फुट कर रोने लगी. उसके मुँह से ये सब सुन कर मेरा भी दिमाग ख़राब हो गया था. एक तरफ मुझे शालू क हाल पर रोना आ रहा था और दूसरी तरफ मुझे मोंटी पर इतना गुस्सा आ रहा था क अभी क अभी उसकी जान ले लूँ. मैंने शालू को गले लगाया और उसे हौसला देने लगा

अमित: मुझे सब कुछ बताओ ये सब कैसे हुआ? तुम कैसे उसके जल में फास गयी? क्या उसने तुम्हारे साथ ज़बरदस्ती की थी?

शालू : मेरे पापा मोंटी क पापा की फैक्ट्री में काम करते हैं. मैं स्टडी में अछि थी तो स्कालरशिप पर इस कॉलेज में आयी. एडमिशन करवाने पापा मेरे साथ ए थे तब मोंटी क साथ मेरी मुलाकात हुई पापा उसे जानते थे तो इस लिए उन्होंने मुझे भी मोंटी से मिलवाया और ये बताया क ये उनके मालिक का बीटा है. इस लिए मैं भी उसकी रेस्पेक्ट करने लगी. मोंटी रोज़ मुझसे मिलता मेरे साथ बातें करता और मुझे कैंटीन में ले जाता अपने पैसों से मुझे खिलता. मैं समझती थी क वो एक ाचा लड़का है. धीरे धीरे मैं उसे पसंद करने लगी. एक दिन उसने मुझे पर्पस कर दिया तब तक मेरे दिल पर उसकी एक अछि इमेज बन चुकी थी और मैंने भी हाँ कर दिया.

उसके बस वो अक्सर मुझे बहार ले जाने लगा कभी मूवी कभी पार्टी . मैं नादाँ उसकी चल को समझ नहीं प् रही थी. एक दिन प्यार की मदहोशी में मैं अपना सबकुछ उसे सौंप बैठी और उसने मेरी दौलत मेरी इज़्ज़त मुझसे ले ली. मैंने सोचा था क वो मुझसे सच्चा प्यार करता है जैसा की वो हमेशा कहता था मगर ये मेरी भूल थी. उसके बाद एक दिन वो मुझे अपने फार्महाउस पर ले गया जहाँ पर उसके दोस्त भी थे. मैंने उसे कहा की वो मुझे वापिस घर छोड़ दे मगर उसने कहा की पहले मेरे दोस्तों को खुश करो फिर चली जाना. मोंटी क मुँह से ये बात सुन कर मेरे पाऊँ क नीचे से ज़मीन निकल गयी. मैंने उसके मुँह पर थप्पड़ मर दिया और वहां से जाने लगी तो मोंटी बे मुझे मेरी वीडियो दिखाई जिसमे हम दोनों सेक्स कर रहे थे. उसने वीडियो वायरल करने की धमकी दी . मैं उसके हाथ जोड़ती रही मगर उसने मेरी एक न सुनी और उसके सब दोस्तों ने मिल कर मेरा रपे किया और उसकी भी वीडियो बनायीं. मैं उसी दिन आतम हत्या कर लेना चाहती थी मगर पापा की वजह से वो भी नहीं कर सकती थी. उसके बाद तो ये उनका जैसे रोज़ का hi काम हो गया. वो जब चाहते जहाँ चाहते मुझे बुलाते और मेरा जिस्म नोचते. धीरे धीरे मैंने भी मन को समझा लिया और उसने पैसे लेने लगी ताकि अपनी ज़रूरतों को पूरा कर सकूँ. मेरी स्टडी पर भी इसका असर पड़ा और अब मेरी एडमिशन भी ये लोग hi करवाते हैं मुझसे मज़े लेने क लिए. मगर मैं अपनी इस ज़िन्दगी से तंग आ चुकी हूँ बस पापा की वजह से अब तक ज़िंदा हूँ वर्ण कब की मर गयी होती

अमित : तुमने कभी कंप्लेंट करने की कोशिश क्यों नहीं की

शालू : बच्चों जैसे बात मत करो . इन पैसों वालों क आगे कानून भी अँधा हो जाता है ये पैसे से किसी को भी खरीद सकते हैं

अमित : तुमने ये शहर क्यों नहीं छोड़ दिया

शालू: मैंने पापा से कई बार कहा मगर वो यही कहते क हम जायेंगे कहाँ और खाएंगे क्या बस अपनी मजबूरियों की वजह से अपनी ये ज़िंदा लाश लिए फिर रही हूँ.

शालू की दर्द भरी दास्ताँ सुन कर मेरी आँखों में भी आंसू आ गए

शालू: तुम क्यों तो रहे हो? तुम्हे तो मेरी कहानी सुन्नी थी न बोलो कैसी लगी कहानी? पसंद आयी?

शालू क होंठो पर नकली मुस्कराहट थी और आँखों में आंसू. उसके इस व्यंग्य पर मुझसे और बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने उसे कास क गले लगा लिया

अमित : हे भगवन तू इतना कठोर कैसे हो सकता है. इस बेचारी पर तुझे कोई तरस नहीं आया? ो शालू तूने कितना सहा है काश क मजन वो सब बदल सकता जो तूने सहा है. काश मैं तेरे सरे दुःख दर्द अपने हिस्से ले पता. मगर मैं वडा करता हूँ मैं तुझे उस हरामी क चंगुल से ज़रूर बचाऊंगा और उसे इसकी सजा भी दूंगा. तुमने मुझे दोस्त कहा था न अब मैं दोस्ती का फ़र्ज़ ऐडा करूँगा

शालू : रहने दो अमित तुम एक अचे लड़के हो इसी लिए मैंने तुम्हारे साथ दोस्ती की थी इसी लिए मैंने तुम्हारी हेल्प की थी मगर मैं नहीं चाहती तुम किसी मुश्किल में फासो मेरी वजह से

अमित : तुम मेरी चिंता मत करो ये मेरा फ़र्ज़ है और कभी इससे पीछे नहीं हैट सकता.



शालू कितनी देर ऐसे hi मेरे गले लगी रही. उसके बाद ह्यूमेन कुछ देर और बातें की और शालू फॉर से मुझे स्माइल देती हुई अपने घर चली गयी और मैं कॉलेज चला गया
 
अपडेट 80

मैं जब कॉलेज पहुंचा तो फ्री लैक्टुरे था इस लिए मैं सीधा कैंटीन में hi चला गया. मोहित और मीनल क साथ रीमा भी बैठी थी मगर वो कुछ उदास दिख रही थी. मैंने जाते hi मोहित क कंधे पर हाथ रखा.

अमित : क्या चल रहा है?

मोहित: तू कहाँ था अब तक ? क्लास में भी नहीं आया?

मैंने देखा क मेरे एते hi रीमा क चेहरे पर ख़ुशी आ गयी थी और उसकी उदासी गायब हो गयी थी.

अमित : कुछ नहीं यार ज़रा एक काम था बस वही कर क आ रहा हूँ. तुम कैसी हो मीनल ?

मीनल : मैं तो ठीक हूँ मगर तुम्हारे न आने से किसी और की हालत ठीक नहीं थी.

मीनल बे बात करते हुए रीमा की तरफ इशारा किया.

रीमा : मुझे क्या हुआ भला मैं तो ठीक हूँ.

रीमा ने मीनल की बात का जैसे जवाब दिया उससे मोहित और मीनल दोनों hi उस पर हसने लगे और रीमा शर्मा गयी

अमित : अछि भली तो है इसे भला क्या होगा

मीनल : उनके आने से चेहरे पर आ जाती है ख़ुशी और वो समझते हैं मरीज़ का हल ाचा है.

तुम्हारे आने से पहले इसके थोबड़े पर 12 बजे हुए थे तुम आये हो तो इसने कोई बात की है

रीमा फिर से शर्माने लगी. मैंने गौर किया तो रीमा आज भी सूट पेहेन कर आयी थी. रीमा बार बार नज़र उठा कर मुझे देखती और मेरे साथ नज़र मिलते hi शर्मा कर नज़र झुका लेती.

अमित : वैसे रीमा मैं इतना भी बुरा नहीं हूँ क तुम मेरी तरफ देखती भी नहीं हो.

रीमा : मैंने ऐसा कब कहा वो तो ....

मीनल : के ों यार अब इतना भी मत शर्माओ वैसे तो हर वक़्त इसकी hi बात करती रहती हो और अब सामने बैठा है तो बात भी नहीं कर रही . मोहित क्यों न आज हम बहार चलें मूवी देखने?

मोहित: वैरी गुड आईडिया चलो चलते हैं.

अमित : तुम तीनो जाओ मुझे काम है

मीनल : चलो न यार तुम नहीं गए तो रीमा भी कैसे जाएगी. देखो उसका कितना दिल कर रहा है जाने का.

मोहित : चल न यार कभी बात मन भी लिया कर.

अब भला मैं अपने दोस्त को कैसे नाराज़ करता इस लिए मन गया. उसके बाद हम चारो एक hi कार में मूवी देखने गए. मोहित और मीनल लाइट्स बंद होते hi प्रेमी जोड़े का किरदार अछि तरह निभाने लगे यानि किसिंग करने लगे. जबकि रीमा उन दोनों की इस मस्ती को देख कर थोड़ा उनकंफर्टबले महसूस कर रही थी. अब पास बैठे जवान लड़का लड़की ऐसे दृश्य दिखाएँ तो उसका असर होना तो नेचुरल है. सिर्फ मोहित मीनल hi नहीं बल्कि इस समय और भी कपल्स यही सब कर रहे थे. रीमा खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश करती कभी उनकी तरफ देखती कभी मेरी तरफ और कभी मूवी की तरफ.

रीमा को इस तरफ उनकंफर्टबले देख कर मैंने उसको नार्मल करने क लिए उसका ध्यान दूसरी तरफ करने क लिए उसके हाथ पर अपना हाथ रखा तो मुझे महसूस हुआ क उसका जिस्म जैसे कम्प रहा है. रीमा ने मेरी तरफ निगाह उठा कर देखा तो मैंने उसे सहज रहने का इशारा किया. रीमा मेरी साइड को हो गयी और मेरे कंधे से चिपक गयी जैसे उसे दूसरों से दर हो. मैंने रीमा का हाथ ढीला छोड़ा मगर उसने अपने दोनों हाथो से मेरा हाथ थम लिया. उसके बाद लाइट्स ों होने तक रीमा ऐसे hi मेरे साथ चिपक कर बैठी रही. इंटरवल में मैंने मोहित से कहा क रीमा का तो ख्याल करो तो उसने साफ कहा दिया क मीनल की ख़ुशी क लिए वो ये सब कर रहा है. और इंटरवल क बाद भी वही सब होता रहा. वो दोनों चोंच लड़ते रहे और रीमा मेरे साथ चिपक कर बैठी रही. मूवी ख़तम होने क बाद जब हम बहार निकले तो रीमा ने आहिस्ता से मुझे थैंक्स कहा और मैंने बस इशारे से उसका अभिवादन किया.

कार में पिछली सीट पर बैठी मीनल पता नहीं रीमा से क्या बातें कर रही थी क वो बार बार शर्मा रही थी और उसका रंग लाल गुलाबी होता जा रहा था. खैर उनका लंच का प्रोग्राम भी था मगर टाइम ज्यादा हो रहा था तो कॉलेज जा कर मैंने अपनी बाइक उठायी और रीमा अपनी कार ले कर चली गयी मगर जाते जाते भी वो मुझे hi देखती रही. नेहा दीदी और राधा जा चुकी थी आज मैं उनसे नहीं मिला था पता नहीं वो क्या कहेंगी कल. उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ. शाम को जब ट्यूशन पर गया तो मंजू म भी नाराज़ हुई क्लास से गैर हाज़िर होने की वजह से मगर थोड़ी बहुत नाराज़गी क बाद फिर से मन गयी वो भी मुझसे ज्यादा देर गुस्से नहीं रह सकती थी. रत को फिर से आंटी ने चुदाई करने को कहा मगर मैंने मन कर दिया क्यूंकि मेरे दिमाग में शालू को मोंटी क चंगुल से बचने की बातें घूम रही थी.

मैं रत भर इस बारे में सोचता रहा मगर मुझे कोई भी सेफ रास्ता नहीं मिल रहा था. अगर मैं मोंटी सीधा मारपीट कर क उससे वीडियोस लेने की कोशिश करूँ तो हो सकता है वो मुझे कॉलेज से निकलवा दे या फिर अपने पैसों की ताकत से मुझे किसी मुसीबत में फसा दे इसके इलावा वो मेरी बहनो का जीना मुश्किल कर सकता है कॉलेज में. मुझे कोई तरकीब नहीं मिल प् रही थी मगर इतना ज़रूर था क उसके पास से वो वीडियोस मुझे दिमाग से निकलवाने होंगे.

‘तुम क्लास से गैर हाज़िर रहने की कोई खास वजह बता सकते हो मुझे? तुमने न मुझसे पूछा न एप्लीकेशन दी तुम खुद को समझते क्या हो? ये इनडिस्कॉपलीने मेरी क्लास में नहीं चलेगा. प्रिंसिपल और कुछ प्रोफ तुम्हारी सपोर्ट करते हैं इस वजह से हवा में मत ऊधो वर्ण एग्जाम देने से पहले तुम कॉलेज से बहार होंगे’

क्लास में अटेंडेंस लेते वक़्त चन्दर्कांता मम ने मुझे पूरी क्लास क सामने खड़ा कर क वार्निंग दी. पता नहीं मुझसे क्या खास दुश्मनी रखने लगी थी मम जबकि और भी स्टूडेंट क्लास से एब्सेंट होते थे मगर उन्हें कभी कुछ नहीं कहा. मैं सॉरी बोल कर अपनी सीट पर बैठने लगा तो मम ने मुझे खड़ा hi रहने को कहा लेक्चर ख़तम होने तक.

फ्री लैक्टुरे में हम कैंटीन में बैठे थे क नेहा दीदी और राधा कैंटीन में आयी और मुझे बहार बुला कर ले गयी.

नेहा दीदी : कल तुम कहाँ थे?

अमित : सॉरी दीदी वो कल मैं मोहित क साथ बहार गया था.

मैं देख रहा था क नेहा दीदी बात कर रही थी और राधा में मुँह दूसरी तरफ कर रखा था . शायद वो मुझसे नाराज़ थी.

नेहा दीदी : कहाँ गए थे ? तुम्हे नहीं पता क हम तुम्हे मिले बगैर जाते नहीं और कल हम कितनी देर तुम्हारा इंरज़र करते रहे.

अमित : सॉरी दीदी मेरी वजह से आप को इंतज़ार करना पड़ा मगर मैं क्या करता मोहित ने मेरी बात नहीं सुनी और मुझे उसके साथ जाना पड़ा

नेहा दीदी : मैंने पूछा कहाँ गए थे ?

अमित : वो मैं कल

राधा : मूवी देखने गए थे जनाब अपनी फ्रेंड्स क साथ मस्ती करने

राधा ने गुस्से ये कहा इसका मतलब उसने पता लगा लिया है अब तो कोई बहाना नहीं चलेगा . अब तो दांत खाने क लिए तयारी कर लेनी चाहिए

नेहा दीदी : अब बताओ कहाँ गए थे

अमित : सॉरी दीदी

नेहा दीदी : तुम हमें बता कर भी तो जा सकते थे न . हमें तुम्हारी फ़िक्र होती है अमित एक तो तुमने आते hi पंगे खड़े कर लिए हैं ऊपर इस तरह तुम बिना बताये गायब होते रहोगे तो हम पर क्या बीतेगी.

अमित : वो क्या है न दीदी मैं तो खुद आप लोगों क बिना कहीं जाना पसंद नहीं करता मगर कल क्लास में दिल नहीं लग रहा था और मोहित और मीनल में भी कहा क बहार चलते हैं तो मैं उनके फाॅर्स करने पर चल पड़ा. अगर आप लोग भी साथ होते तो मज़ा अत. मैंने उनसे पुछा भी था मगर उन्होंने कहा क राधा लाइब्रेरी में पद रही है तो हमने इसे डिस्टर्ब नहीं किया.

राधा : काम से काम बता कर तो जा सकते थे. मुझे कितना दर लग रहा था कल क कहीं फिर से तुम किसी मुसीबत में न फास गए हो.

नेहा दीदी : it’s ok राधा उसने बता दिया न अब दोस्तों की बात भी कभी कभी माननी पड़ती है. और अमित तुम भी ध्यान रखना आगे से ऐसी गलती नहीं होनी चाहिए पता है राधा कितनी नाराज़ है तुम से.

इतना कह कर नेहा दीदी ने मुझे राधा की तरफ इशारा किया उसे मानाने का जो इस वक़्त भी मुँह दूसरी तरफ किये गुस्से में कड़ी थी.

अमित : मैंने काम hi ऐसा किया है राधा को तो गुस्सा आएगा hi सब मेरी गलती है. मैं अभी राधा से माफ़ी मांगता हूँ.

मैं अपने दोनों कण पकड़ क राधा क सामने आ गया. मगर राधा ने फिर से दूसरी तरफ मुँह कर लिया. मैं फिर राधा क सामने आ गया और कण पकड़े हुए घुटनो पर बैठ गया. राधा ने खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश की मगर उसके चेहरे पर हंसी आ hi गयी.

‘ लगता है कॉलेज में सर्कस होने वाली है इसी लिए सरे जोकर यहीं आ गए हैं’

‘और देखो साथ में बंदरिया भी है’

शीना और उसकी दोस्त इतना कहते हुए अपनी सहेलियों क साथ हमारा मज़ाक उड़ती हुई हमारे पास से निकल गयी. उनकी बात सुन कर मेरे तन बदन में आग लग गयी उसने हमारा मज़ाक उदय था. सबसे ज्यादा मुझे इस बात पर गुस्सा आया क उसने राधा और नेहा दीदी क बारे में बकवास की. गुस्से से मेरी मुठियाँ कस गयी और मैं शीना क पीछे जाने लगा तो राधा ने मेरी बाजु पकड़ ली.

राधा : नहीं अमित जाने दो उसे वो तो है hi घटिया तुम उसकी बात पर ध्यान मत दो.

अमित : मुझे अपनी परवाह नहीं मगर उसने तुम्हारे बारे में भी बकवास की है. मैं ये बर्दाश्त नहीं कर सकता

‘ ी ऍम सॉरी अमित तुम उनकी बात पर ध्यान मत दो वो जान बुझ कर तुम्हे उकसा रही हैं’

ये शिवानी थी जो शीना गैंग की hi मेम्बर थी और उनके पीछे पीछे hi आ रही थी. मगर उसकी इस बात से मैं पूरी तरह हैरान था. जिसने मुझे कॉलेज से निकलवाने क लिए इतनी गिरी हुई हरकत की वो मुझसे माफ़ी मांग रही है वो भी उसकी फ्रेंड्स की बातों पर. मगर उसकी आँखों में मुझे सचाई नज़र आयी . शिवानी इतना कह कर चली गयी मगर मेरे साथ राधा और नेहा दीदी को भी सोचने को मजबूर कर गयी.

नेहा दीदी: ये तो वही लड़की है न जिसने तुम्हे फ़साने की कोशिश की थी?

राधा : हाँ दीदी ये वही है मगर आज ये ऐसे माफ़ी क्यों मांग रही है ? कहीं फिर से कोई चल तो नहीं चल रही ? प्लीज तुम (अमित) इससे दूर रहना.

खैर इन सब बातों से राधा को अपना गुस्सा भी भूल गया और हम कैंटीन में सब क साथ बैठ कर बातें करते हुए खाने लगे. मुझे शिवानी का ये बदला हुआ रूप समझ नहीं आ रहा था पहले जो कुछ हो चूका है उसकी वजह से अब मैं हर बात पर 10 बार पहले सोचने लगा था. वैसे भी जिस पत्थर से एक बार ठोकर लग चुकी हो उससे दोबारा ठोकर खले वाला नादाँ नहीं बेवक़ूफ़ होता है.

छुट्टी क वक़्त जब हम कॉलेज से घर क लिए निकलने लगे तो पार्किंग में मुझे शिवानी फिर से मिल गयी. वो इस वक़्त अकेली थी और शायद मेरी hi वेट कर रही थी. जैसे hi मैं मोहित क साथ उसकी कार में बैठने लगा तो शिवानी ने मुझे बुलाया.

शिवानी: अमित प्लीज क्या एक मिनट मैं तुमसे बात कर सकती हूँ?

मैंने मोहित को जाने का इशारा किया और खुद उसके पास चला गया.

शिवानी: मैं अपने किये पर बहुत शर्मिंदा हूँ प्लीज क्या तुम मुझे दिल से माफ़ कर डोज?

अमित : मैं तुम्हे पहले hi माफ़ कर चूका हूँ तुम वो सब भूल जाओ और गलत लोगों से दूर रहो.

शिवानी : मुझे पता है तुमने अभी तक मुझे दिल से माफ़ नहीं किया है. मैंने काम hi ऐसा किया है . तुम चाहो तो मुझे कोई भी सजा दे सकते हो मैं मन नहीं करूंगी मगर प्लीज मुझे माफ़ कार्डो. उस दिन ऑफिस में जो कुछ तुमने कहा उसके बाद से मैं चैन से सो नहीं पति मेरी माँ ने भी मुझे बहुत खरी खोटी सुनाई. वो तो तुमसे इतनी इम्प्रेस हो गयी हैं क हर वक़्त तुम्हारा नाम ले कर मुझे समझती रहती हैं. मुझे अपनी गलती का एहसास है. इसी लिए मैं इस दिन से मोंटी से भी नहीं मिली. शीना मेरी बच्चों की दोस्त है मगर वो मोंटी जैसी नहीं है इसी लिए मैं उससे बात कर लेती हूँ अगर तुम कहोगे तो मैं उसे भी छोड़ दूंगी. प्लीज एक बार मुझे दिल से माफ़ कर दो जब तक तुम मुझे माफ़ नहीं करोगे मेरे दिल को चैन नहीं मिलेगा . मैं तुम्हारे पाऊँ पड़ती हूँ मुझे माफ़ कार्डो.

इतना कह कर सचमुच शिवानी आंसू बहती हुई मेरे पाऊँ में बैठ गयी. मुझे उस पर तरस आ गया, दिल कह रहा था क वो सच कह रही है मगर दिमाग अभी भी कह रहा था क ये कोई नयी चल भी हो सकती है. मगर इस वक़्त उसे ऐसे रट हुए देखना भी मुझे ाचा नहीं लग रहा था.

अमित : उठो निचे से और प्लीज रोना बंद करो तुम्हारे जैसी खूबसूरत लड़की रट हुए बिलकुल भी अछि नहीं लगती. मैंने कहा न मैं तुम्हे पहले hi माफ़ कर चूका हूँ. तुम्हारी तसल्ली क लिए मैं कसम खा कर कहता हूँ क मैं तुम्हे दिल से माफ़ करता हूँ.

शिवानी : थैंक यू थैंक यू सो मच

इतना कह कर शिवानी ने मुझे गले लगा लिया.

शिवानी : तुम नहीं जानते क मैं पल पल अपने आप को hi कोसती रहती थी. अब जा कर कहीं मैं चैन से सो पाऊँगी. और हाँ अब तुम्हे हमारे घर आना पड़ेगा. माँ तुमसे मिलना चाहती हैं उन्होंने स्पेशलय कहा है क जब तक तुम मुझे माफ़ नहीं करोगे और उनके साथ बैठ कर नाश्ता नहीं करोगे वो मुझे माफ़ नहीं करेंगी. अब प्लीज तुम मेरे घर चलो.

शिवानी की इस बात ने मुझे फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया कहीं ये कोई चल न हो. मगर शिवानी की हालत देख कर दिल उस पर यकीन करने को कह रहा था.

अमित : मैं तुम्हारे घर आऊंगा लेकिन फिर किसी दिन . तुम चाहो तो आंटी से मेरी बात करवा सकती हो.

मैंने ऐसा इस लिए कहा क पता तो चले क शिवानी सच बोल रही है या झूठ. शिवानी ने खुश होते हुए फ़ौरन अपना मोबाइल निकला और कॉल लगायी.

शिवानी : hello माँ ये लीजिये अमित से बात कीजिये

अमित : hello नमस्ते आंटी

Shivani’s माँ: जीते रहो बीटा. कैसे हो ? कब आ रहे हो घर ? मैं कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ? तुम आ रहे हो न? तुमने शिवानी को माफ़ कर दिया न? प्लीज वो नादाँ है उसे माफ़ कार्डो मैंने उसे समझा दिया है वो कभी ऐसी गलती नहीं करेगी दोबारा.

अमित : आंटी मैं ठीक हूँ और मुझे शिवानी से कोई गुस्सा नहीं है मैंने उसे माफ़ कर दिया है आप भी उसे माफ़ कर दीजिये और मैं आज नहीं आ सकता फिर किसी और दिन पक्का आऊंगा.

Shivani’s माँ: जब तक तुम मेरे पास नहीं आओगे मुझे यकीन कैसे होगा क तुमने शिवानी को माफ़ किया?

अमित : मैं वडा करता हूँ आंटी मैं ज़रूर आऊंगा मगर आज मुझे एक काम से कहीं जाना है प्लीज फिर किसी दिन मिलूंगा अब मैं चलता हूँ आंटी bye.

Shivani’s माँ: bye बीटा.

शिवानी : अब तो यकीन हो गया मेरी बात पर?

अमित : तुम ऐसा क्यों कह रही हो शिवानी , मैंने कहा न मैं आऊंगा किसी दिन अब तुम आराम से घर जाओ मैं किसी दिन तुम्हारे घर पक्का आऊंगा. अब चलता हूँ bye

शिवानी : bye

इसके साथ hi मैं मोहित क साथ कार में बैठ गया और शिवानी अपनी कार में बैठ गयी.

मोहित : अब क्या नया ड्रामा कर रही थी?

अमित : कुछ नहीं यार बेचारी माफ़ी मांग रही थी और घर बुला रही थी उसकी माँ मुझसे मिलना चाहती हैं.

मोहित : तूने क्या कहा? कहीं तू फिर से उसकी बातों में तो नहीं आ गया?

अमित : पता नहीं यार मुझे लगता है वो सच बोल रही है वर्ण वो अपनी माँ से मेरी बात नहीं करवाती. उसकी माँ से मैं ऑफिस में मिला था वो बहुत अछि हैं शायद शिवानी भी सुधर गयी है. अब चल

हम बातें करते हुए मीनल को साथ ले कर घर को निकल लिए. खाना खाने क बाद मैं अपने रूम में रेस्ट कर रहा था क मेरे मोबाइल पर कॉल आने लगा मैंने देखा तो नैना दीदी का था.

अमित : आज कैसे यद् आ गयी आपको?

नैना दीदी : मैं तो हर पल तुम्हे यद् करती हूँ एक तुम hi हो जो यद् नहीं करते

अमित : नीस पंच कहिये कैसे यद् किया.

नैना दीदी : बुद्धू ( जाने कब समझेगा)

अमित : क्या कहा?

नैना दीदी: कुछ नहीं , मैं तेरी वजह से प्रॉब्लम में फास गयी हूँ और अब मुझे तू hi इससे बहार निकल सकता है. तुझे मेरी मदद करनी होगी.

अमित : मेरी वजह से मुसीबत में हैं आप ? मैं कुछ समझा नहीं

नैना दीदी: उस दिन वो मेरी सहेली मिली थी न थिएटर में उसने सबको बता दिया है तुम्हारे बारे में और अब सब तुमसे मिलना चाहती हैं . कल सैटरडे है और कल तुम्हे हर हल में आना होगा वर्ण वो मेरा जीना हराम कर देंगी.

अमित : इसमें मुसीबत वाली कौन स बात है ?

नैना दीदी : मुसीबत ये है क वो मेरे बर्फ से मिलना चाहती हैं और तुम्हे मेरा बर्फ बन क आना है .

अमित : ये आप क्या कह रही हैं ? आप उस दिन सच बता देती तो आज ये मुसीबत न होती. अब भी आप उन्हें सच बता दो

नैना दीदी : तू क्या चाहता है क सरे कॉलेज में वो मुझे बहनजी कह कर मेरा मज़ाक उड़ाएं .

अमित : मुझे ये सब ठीक नहीं लग रहा है आप उनसे कह दो आपका बर्फ कहीं बहार गया हुआ है कोई बहाना बना दो

नैना दीदी : तुझे कल आना है तो आना है बस. मैं पहले भी उनसे 2 बार बहाना बना चुकी हूँ अब कल तुम न ए तो वो मेरा मज़ाक उड़ाना शुरू कर देंगी. अगर तुझे मेरी परवाह है तो आ जाना आगे तेरी मर्ज़ी.

इतना कह कर दीदी ने फ़ोन काट diya.ab ये नयी मुसीबत आ गयी मैं भला कैसे दीदी की फ्रेंड्स क सामने उन्हें अपनी गफ कह सकता हूँ . पता नहीं वो क्या क्या कहेंगी . मैं ये सोच सोच कर टेंशन में आ गया. अगर मैं नहीं गया तो दीदी का मज़ाक उदय जायेगा जो मुझे भी ाचा नहीं लगेगा अब मेरी जगह दीदी किसी और को भी नहीं ले क जा सकती. जो भी हो अब मुझे दीदी की मदद करनी होगी . एक्टिंग hi तो करनी है कौन सा कुछ करना है . यही सोच कर मैं कल जाने क लिए तैयार हो गया. उसके बाद मैंने रेस्ट की और फिर प्रैक्टिस क बाद मम क पास ट्यूशन पड़ने क लिए गया. आज भी मैंने आंटी को चुदाई क लिए मन कर दिया . अगला दिन सैटरडे था और आज मुझे नैना दीदी क पास जाना होगा इस लिए मैं आज घर से बुलेट से hi निकला और कॉलेज में अपना पहला लेक्चर अटेंड कर लिया ता की चन्दर्कांता मैडम से पन्गा न हो. मंजू म को मैंने बहार hi बता दिया क मुझे ज़रूरज काम से जाना है तो उन्होंने भी कुछ नहीं कहा. मैंने नेहा दीदी को भी मैसेज कर क बता दिया क मैं कहीं जा रहा हूँ ताकि वो और राधा भी टेंशन न ले. उसके बाद मैंने नैना दीदी से टाइम और एड्रेस पूछा और निकल गया उनसे मिलने.

नैना दीदी और करुणा दीदी दोनों गर्ल्स कॉलेज में पड़ती थी. कॉलेज में तो मैं जा नहीं सकता था इस लिए उन्होंने मुझे एक रेस्टोरेंट में बुलाया था. मैं ठीक टाइम पर रेस्टोरेंट में पहुँच गया. रेस्टोरेंट में नैना दीदी बहार hi मेरा वेट कर रही थी और आज पूरी पताका लग रही थी. मैं उन्हें देख कर एक बार उनकी खूबसूरती में खो गया. दीदी ने आज रेड T-shirt पहनी हुयी थी जिस पर हार्ट बना हुआ था. और उसके साथ hi स्किन्टिगत ब्लू जीन्स . दीदी की टाइट फिटिंग ड्रेस में उनकी पूरी बॉडी शेप पता चल रही थी. उनके बड़े बड़े बूब्स पतली कमर क ऊपर अलग hi नज़र आ रहे थे. गोर दूधिया रंग गोल चेहरे पर ब्लैक गॉगल्स पतली नाक गुलाबी गाल और पतले गुलाब की पंखुड़ियों से रसभरे पतले होंठ. लम्बी सुराही दर गर्दन कानो में झुमके T-shirt क बॉर्डर क नीचे से झांकती उनकी नाभि. मैं तो उनकी खूबसूरती को सर से पाऊँ तक देख देख कर फ्लैट होता जा रहा था. तभी दीदी ने मेरी आँखों क आगे चुटकी बजायी.

नैना दीदी: hello कहाँ खो गए ? बाइक से नीचे उतरो अंदर भी चलना है . तुम तो ऐसे देख रहे हो जैसे पहली बार देखा हो.

अमित : आप सच में बहुत खूबसूरत हैं

नैना दीदी : बलुशिंग) वो तो तुम्हे देख कर hi पता चल रहा है. और अब प्लीज मुझे आप या दीदी मत कहना . मुझसे सिर्फ मेरे नाम से hi बुलाना वर्ण उनको शक हो जायेगा. और हाँ तुम पर मेरे बर्फ हो इसका उनको तुम्हे यकीन दिलाना है इस लिए वो कुछ भी करने को कहें चुप चाप मन लेना मैं किसी बात का गुस्सा नहीं करुँगी चाहे कुछ भी हो. इस लिए तुम कुछ भी सोचना मत और डरना तो बिलकुल भी नहीं. अगर तुम आज फ़ैल हुए तो मैं तुम्हे माफ़ नहीं करुँगी. तुम्हे कुछ भी करने की आज़ादी है आज तुम भूल जाओ क हम भाई बहिन हैं आज मैं सिर्फ तुम्हारी गफ हूँ और तुम मेरे बर्फ.

अमित : पर दीदी

नैना दीदी : मैंने कहा न मुझे मेरे नाम से बुलाओ और आज मैं तुम्हारी गफ हूँ इस बात को ध्यान में रखो और एक बर्फ की तरह अब सारा दिन मेरे साथ रहना.

मैंने हाँ में सर हिलाते हुए बाइक को साइड स्टैंड पर लगाया और दीदी क साथ अंदर जाने लगा तो दीदी ने फिर से मुझे टोका.

नैना दीदी: बुद्धू ऐसे नहीं . एक बर्फ की तरह चलो नहीं तो वो समझ जाएँगी तुम एक्टिंग कर रहे हो.


दीदी मेरे साथ चिपक गयी और मेरा हाथ अपनी कमर पर रख दिया. कमर पर T-shirt और जीन्स क बीच थोड़ा गैप था जहाँ पर मेरा हाथ पड़ते hi मुझे उनकी बॉडी की सॉफ्टनेस फील हुई और मेरे अंदर एक झुरझुरी सी दौड़ गयी साथ में दीदी क जिस्म में भी एक कंपकंपी सी मैंने फील की. हम दोनों ऐसे hi एक दूसरे से चिपके स्माइल करते हुए अंदर चले गए.
 
अपडेट 81



‘वह क्या जोड़ी है , सच में यार तूने तो मैदान मर लिया ‘

जैसे hi हम अंदर गए एक टेबल क साथ घेरा बना कर बैठी लड़कियों क ग्रुप में से एक लड़की ने हमको देख कर कहा. मैंने गौर किया 5 लड़कियां वहां पर बैठी थी और सब की सब जीन्स टॉप में थी. उनमे से एक को मैं उस दिन दीदी क साथ थिएटर में मिला था बाकि 4 भी एक से एक सुन्दर थी और मॉडर्न भी. उनको देख कर hi मैं समझ गया क वाकई दीदी सही कह रही होगी ये लड़कियां खुद मॉडर्न हैं तो दीदी का जीना हराम कर hi सकती हैं.

नैना दीदी : मीट माय बर्फ अमित और अमित ये है मेरी फ्रेंड्स . रश्मि को तो तुम मिल hi चुके हो ये है ज्योति , अनु , प्रिय और गगन .

मैंने सब से हाथ मिलाया. दीदी की फ्रेंड्स मुझे घूर घूर कर देख रही थी.

ज्योति : मान गए यार नैना तेरा बर्फ वाकई में हीरो है बॉडी तो बिलकुल सलमान खान जैसी है और देखने में कितना क्यूट है. तेरी तो किस्मत खुल गयी.

नैना दीदी: बलुशिंग) नज़र मत लगा देना कहीं . इसी लिए मैं इसे नहीं बुला रही थी. अब देखो कैसे सब भूखी बिल्लिअन बन कर घूर रही हैं.

ज्योति : अब सामने इतना ाचा शिकार हो तो बिल्लिअन तो घूरेंगी hi . और तू ये मत भूल क यहाँ सब क पास बर्फ हैं फिर तू ऐसी बातें क्यों कर रही है.

नैना दीदी : इस लिए क मेरे बर्फ जैसा बर्फ किसी क पास नहीं है.

नैना दीदी मेरी बाजु को अपने साइन से कास क लगते हुए मेरे साथ चिपक कर बैठ गयी. मेरी बाजु पर उनके नरम स्तनों का एहसास मुझे अजीब लग रहा था एक तरफ तो मेरे अंदर काम वासना जग रही थी दूसरी तरफ मुझे ये बुरा भी लग रहा था क वो मेरी दीदी हैं.

अनु : ज़रा हमें भी तो बताओ ऐसा क्या खास है तुम्हारे बर्फ में जो हमारे बर्फ क पास नहीं है. क्या तुम्हारे बर्फ क पास 2 राकेट हैं?

गगन : हाँ बता न क्या खासियत है तेरे बर्फ की ? क्या ये ज्यादा देर तक घुड़ सवारी करवाता है?

नैना दीदी की फ्रेंड्स कोड वर्ड में जो बात कर रही थी उसका मतलब समझते hi मेरी हालत पतली हो गयी. एक बहिन से hi उसके भाई क बारे में ऐसी बातें पूछी जा रही थी . चाहे हम सब की नज़र में बर्फ गफ थे पर हम तो जानते थे क हम क्या हैं.

नैना दीदी : ये तुम कैसी बातें कर रही हो कुछ तो शर्म करो ऐसे इसके सामने hi तुम ये सब बातें करने लगी हो.

ज्योति : इसका मतलब अभी तक तुमने अमित को कुछ करने hi नहीं दिया है. तभी तो मैं सोचूं अभी तक तेरी चल क्यों नहीं बदली.

अनु : मुझे तो लगता है उसने अभी तक इसे अपने आम भी नहीं चुस्वाए देखो तो अभी तक इनमे कोई फरक नहीं पड़ा और यहाँ तो खरबूजे बने पड़े हैं.

मेरे सामने hi दीदी की फ्रेंड्स की ये सब बातें मुझे पानी पानी किये जा रही थी पता नहीं दीदी कैसे बर्दाश्त कर रही थी. मैं तो सोचता था क लड़के hi हरामी होते हैं मगर यहाँ तो लड़कियां भी किसी से काम नहीं . कैसे मेरे सामने hi सब कुछ खुल्लम खुल्ला बोल रही थी.

नैना दीदी : मेरा बर्फ है मैं क्यों बताऊँ इस की पर्सनल बातें और तुम अपने खरबूजे रखो अपने पास . हमें जब सही लगेगा तभी हम आगे बढ़ेंगे

मैं दीदी की बात सुन कर चौंक गया वो क्या कह रही हैं. दीदी ने मेरा हाथ दबा कर रिलैक्स रहने का इशारा किया.

गगन : तो इसका मतलब अभी तक तुमने कुछ नहीं करने दिया अमित को? मेरे बर्फ ने तो तीसरी डेट पर hi चाँद टारे दिखा दिए थे और तूने अभी तक टच भी नहीं करने दिया

ज्योति : हम्म्म मैं समझ गयी

नैना दीदी : क्या समझ गयी?

ज्योति : तुमने क्या सोचा किसी को भी बर्फ बना कर ले आएगी और हम मन लेंगे? तेरी बातों से साफ ज़ाहिर है क ये तेरा बर्फ नहीं है. तूने सिर्फ हमारी नज़रों में खुद को हमारे जैसी साबित करने क लिए ये झूठ बोलै है. ज़रूर ये तेरा कोई कजिन होगा या कोई कजिन का फ्रंड मगर बर्फ नहीं हो सकता ी ऍम दमन सूरे.

नैना दीदी : नहीं नहीं ये मेरा बर्फ hi है मैं सच कह रही हूँ.

अनु : तुम झूठ बोल रही हो , भला कौन इतने स्मार्ट बर्फ को खुद दे दूर रखता है. और अमित को देख कर लगता नहीं क इसमें कोई कमी होगी जो इसने अभी तक कुछ किया नहीं इस लिए साफ ज़ाहिर है क ये तेरा बर्फ नहीं है

दीदी की बाकि फ्रेंड्स भी हाँ में हाँ मिलाने लगी और दीदी का प्लान फ़ैल हो गया. अब तो दीदी गयी वो सब मिल कर दीदी को छेड़ेंगी और पहले से भी ज्यादा बुरी तरह से. मुझे लगा मुझे दीदी की मदद करनी चाहिए इस लिए मैं बीच में बोल पड़ा

अमित : सॉरी तो इंटरप्ट यू गर्ल्स पर आप सब गलत सोच रही हैं नैना दी....

ी मैं नैना दीवानी है मेरी मगर मैंने उसे वडा किया है क मैं शादी से पहले उसके साथ खुश नहीं करूँगा.

ज्योति : है है है .... नैना तेरी कोशिश अछि थी मगर हमें बेवक़ूफ़ बनाना आसान नहीं. देख इसने खुद hi साबित कर दिया क तू झूठ बोल रही है.

मैं और दीदी उसे हैरानी से देखने लगे.

ज्योति : आज कल कौन ऐसी बातें करता है क शादी तक कुछ नहीं करेंगे. जब जिसे जहाँ मौका मिलता है वो बिल्ली मर लेता है. अब वो ज़माना नहीं रहा क एक दूसरे को हाथ नहीं लगाना.

दूसरा इसकी ज़ुबान से तेरा नाम निकलते hi इसकी ज़ुबान फिसल गयी इसने तुझे नैना दी कहा मतलब ये तेरा कोई कजिन है.

ये तो साली बहुत तेज़ निकली एक झटके में hi पकड़ लिया . मैं तो उसको हैरानी से देखने लगा क खूबसूरत क साथ साथ तेज़ दिमाग भी है. नैना दीदी तो चारो खाने चित हो गयी थी मगर दीदी भी कहाँ हर मैंने वाली थी.

नैना दीदी : भाई होगा तेरा , तू क्या कोई जज है जो तू बोलेगी वो सब मानेंगे . ये मेरा बर्फ है और कोई कुछ भी कहता रहे इससे सचाई नहीं बदलेगी.

ज्योति : तो क्या तू ये प्रूफ कर सकती है?

नैना दीदी : बिलकुल

ज्योति : तो ठीक है चलो पार्क में

नैना दीदी : वहां जाने की क्या ज़रूरत है जो कहना है यहीं कहो

ज्योति : मेरी जान यहाँ क्या सबको लाइव शो दिखाना चाहती हो ? वैसे अगर दिखाना चाहो तो मुझे कोई ऐतराज़ नहीं. इन वेटर्स क भी मज़े हो जायेंगे

नैना दीदी : मतलब

अनु : मतलब क तुम्हे अपने बर्फ क साथ वो सब कर क दिखाना होगा जो हम कहेंगे. तभी हम मानेंगे वर्ण तू ये काबुल करेगी क ये तेरा भाई है.

नैना दीदी : ये मेरा बर्फ है

ज्योति : तो चलो फिर अभी पता चल जायेगा.

इतना कह कर वो सब कड़ी हो गयी मुझे भी खड़ा होना पड़ा. और सब बहार बहार आ गए दीदी की फ्रेंड्स अपने अपने पेअर क साथ एक्टिवा पर सवार हो गयी और दीदी मेरे पीछे बुलेट पर बैठ गयी. सब निकल पड़े पार्क की तरफ मैं उनके पीछे पीछे चल रहा था. मेरा दिमाग सोच सोच कर फटा जा रहा था क दीदी ने ये क्या मुसीबत गले दाल ली.

अमित : दीदी अब क्या होगा? आपको उन्हें सच बता देना चाहिए वर्ण पता नहीं वो क्या करने को कहेंगी.

नैना दीदी: ऐसा सोचना भी मत अब अगर मैं पीछे हैट गयी तो तू नहीं जनता ये सब मेरा क्या हल करेंगी. मुझे टॉयलेट तक साफ करवाएंगी. अब तो जो भी हो इन्हे प्रूफ कर क दिखाना hi होगा. तू सब भूल जा और जो वो कहें चुप चाप करते जाना और अपनी ज़ुबान पर कण्ट्रोल रखो अभी तुम्हारी hi गलती से उनको शक हो गया है.

हम सब जल्दी hi पार्क में पहुँच गए. पार्क काफी बड़ा था और इस समय वहां पर कोई भी नज़र नहीं आ रहा था मगर जैसे hi हम अंदर गए तो मुझे कहीं कहीं पेड़ की छाओं में कहीं झाड़ियों क पीछे कुछ कपल्स बैठे नज़र आये जिससे मुझे अंदाज़ा हो गया क यहाँ पर ये लड़कियां अपने बर्फ क साथ ये सब करने ज़रूर आती होंगी.

ज्योति : तो अब बोलो क्या तुम तैयार हो प्रूफ देने क लिए

नैना दीदी : तुम टाइम वास्ते कर रही हो जल्दी बोलो ताकि मैं तुम्हे गलत साबित कर सकूँ

अनु : वह इतना कॉन्फिडेंस. फिर तो इस बात पर शरत हो जनि चाहिए

नैना दीदी : कैसी शरत ?

ज्योति : अगर तुमने प्रूफ कर दिया तो तुम जो कहोगी मैं वो करुँगी और अगर तुमने प्रूफ नहीं किया तो अमित मेरा बर्फ बनेगा ( मैं जानती हूँ नैना तू कभी किसी लड़के क साथ वो सब नहीं कर सकती जो हम करती हैं इस लिए तुझे मैं हरा दूंगी और फिर अमित मेरा बर्फ बन जायेगा. हए क्या डैशिंग हीरो लगता है इसे तो मैं किसी कीमत पर भी अपना बना क रहूंगी )

नैना दीदी : मुझे मंज़ूर है ( ज्यादा से ज्यादा क्या कहेंगी किश करने को hi बोलेंगी . अमित को प्यार करने को तो मैं कब से मरी जा रही हूँ. मैं ये मौका हाथ से नहीं जाने दूंगी ऊपर से ज्योति से जो चाहे करवाउंगी . मेरे अमित पर नज़रें लगाए बैठी है देख ज़रा तेरा हल क्या करती हूँ )

मैं दोनों की बातें सुन कर सोच में पद गया पता नहीं अब ये क्या कहने वाली है . मगर ज्योति बे जिस तरह कहा क अमित मेरा बर्फ बनेगा तो मुझे लगा चलो ये भी अछि है और बोल्ड किस्म की लड़की है फ्री में मज़े करने को मिलेंगे )

ज्योति : गर्ल्स सब बरी बरी से नैना को टास्क दो और वही टास्क देना जो एक बर्फ गफ में होता है.

रश्मि : नैना किश हिम पतिओनटली ी वांनै सी हाउ हे किश यू .

रश्मि जो अब तक चुप थी अब बोली बोली तो पहली hi लाइन में बम फोड़ दिया. मैं नर्वस था और दीदी की तरफ देखा मगर दीदी तो नार्मल नज़र आ रही थी. दीदी ने भी मेरी तरफ देखा हम दोनों की नज़रें मिली तो दीदी ने मुझे आँखों से hi इशारा किया क मैं आगे बदन. मगर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी तो दीदी ने hi पहल की और मेरे सर क पीछे हाथ रख कर अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए. मेरी और दीदी की ऑंखें बंद हो गयी. मैं तो आनंद क सागर में गोते लगाने लगा . दीदी क गुलाबी होंठो का वो नरम एहसास अकल्पनीय था . दीदी ने अपने होंठो को थोड़ा खोल कर मेरा निचला होंठ पकड़ लिया और चूसने लगी. मैं जैसे नशे क सागर में डूबता गया और दीदी क माध भरे होंठो का रास चूसने लगा. दीदी क दोनों हाथ मेरे सर क पीछे आ गए और मेरे बालों में चलने लगे. मेरे भी हाथ दीदी क सर और पीठ को सहलाने लगे. हमें तो जैसे भूल hi गया क हम एक्टिंग कर रहे हैं और बिलकुल रियल लवर्स की तरह हम एक दूसरे क होंठ चूसने लगे कभी ऊपर वाला कभी निचे वाला. दीदी क होंठो में पता नहीं कितना रास था जो ख़तम hi नहीं हो रहा था. किश करते करते हमारी साँसे फूल गयी और हमारे जिस्म पूरी तरह से एक दूसरे क साथ रगड़ खाने लगे.

ज्योति : बस बस सारा दिन किश hi करना है क्या?

ज्योति की बात पर हम दोनों होश में ए और एक दूसरे क होंठो को आज़ाद किया . मेरी नज़र दीदी पर गयी तो उनका चेहरा लाल हो गया था और होंठ भी फूल गए थे शायद मैंने कुछ ज्यादा hi खिंच लिया था उनके होंठो को चूसते हुए. दीदी मुझसे नज़रें नहीं मिला रही थी अब उन्हें शर्म आने लगी थी. मैंने बाकियों को देखा तो उनके भी चेहरों पर लाली आ गयी थी.

रश्मि : वह यार क्या किश करता है तेरा बर्फ मुझे तो देख कर hi मज़ा आ गया काश तेरी जगह मैं होती.

प्रिय : हम्म पहला टास्क तो पूरा हुआ अब मैं एक टास्क देती हूँ. तुम ( अमित ) अगर वाकई में नैना क बर्फ हो तो तुम्हे इसका साइज पता hi होगा चलो हमें इसका पूरा फिगर बताओ और no चीटिंग . नैना तुम न बोलोगी न इशारा करोगी. तुम चाहो तो अपने हाथों से नाप ले सकते हो तुम्हे इसकी छूट है.

इसकी माँ की , ये क्या मुसीबत है मैं साइज कैसे बता सकता हूँ और हाथ से भी कौन सा मुझे पता चलेगा . हाथ लगाने से यद् आया मैं कैसे दीदी की बॉडी को ऐसे टच कर सकता हूँ. मैंने दीदी को देखा तो दीदी आँखें बंद कर क कड़ी थी जैसे वो तैया थी इस सब क लिए. मगर मेरी गांड फैट रही थी. मगर अभी जो मज़ा दीदी को किश करने से मिला था वो भी मैं भूल नहीं प् रहा था. दीदी की बंद ऑंखें देख कर मैं समझ गया क दीदी इसके लिए तैयार हैं ऐसे में मुझे भी ये करना hi होगा.

मैंने आगे बढ़कर दीदी क कंधो पर हाथ रखा तो दीदी का जिस्म विबरते होने लगा. शायद अभी जो किश हुआ था उस का भी असर था उन पर.

प्रिय : लगता है तुम्हे फिगर का साइज लेना नहीं अत. इसका मतलब तुमने कभी नैना को टच नहीं किया यानि क तुम इस के बर्फ नहीं हो.

प्रिय की बात सुनते hi मैंने जल्दी से हाथ निचे किये और दीदी क बूब्स पर रख दिए . एक पल क लिए तो ऐसे लगा जैसे रुई क गोलों पर हाथ रख दिया हो. मगर मैंने सिर्फ हाथ रखा उन्हें दबाया नहीं और मेरे इस तरह उन्हें टच करने से hi दीदी की साँसे तेज़ चलने लगी थी और बूब्स ऊपर नीचे होने लगे थे.

प्रिय : सिर्फ टच नहीं करना है इनका साइज लेने क लिए इन्हे बबना भी पड़ता है.

मैंने प्रिय की बात मानते हुए दीदी क बूब्स दबाने शुरू कर दिए और धीरे धीरे उनके बूब्स टाइट होने लगे . मुझे उनके आम दबाने में मज़ा आने लगा और मैं भूल गया क मुझे बाकि फिगर भी पता करना है .

प्रिय : सिर्फ एक hi जगह का साइज लेना है क्या ?

मैं प्रिय की बात मन कर आगे बड़ा और अपने हाथ निचे ले जाता हुआ दीदी की कमर का साइज लेने लगा . दीदी की फिगर ऐसे थी जैसे पेप्सी की बोतल हो ऊपर से उन्नत उभर निचे पतली कमर और फिर बहार को फैलती हुई कमर . दीदी क कमर पर हाथ आते hi उनकी वो नंगी कमर मेरे अंदर हलचल पैदा करने लगी . दीदी की स्किन बहुत hi सॉफ्ट थी . मेरा दिल नहीं हो रहा था वहां से हाथ हटाने को इस लिए मैं अपने हाथ टॉप क अंदर घुसाने लगा और दीदी भी दबी दबी सिसकियाँ लेने लगी. उसके बाद मैं अपने हाथ नीचे ले गया दीदी की साइड कमर से हाथ रगड़ता हुआ उनकी गांड पर ले गया. दीदी क जीन्स में कैसे हुए बड़े बड़े परफेक्ट फिगर क नितम्ब बड़े hi आकर्षक थे . परफेक्ट शेप में गोल और बहार को निकले हुए सॉफ्ट सॉफ्ट चूतड़ मुझे ललचा रहे थे और मैं उनके आमंत्रण में फास क उनको मसलने लगा जिसकी वजह से दीदी मेरे साथ चिपक गयी और मेरे गले में बहन दाल कर अपना सर मेरे कंधे पर टिका दिया. दीदी ने जिस तरह से समर्पण कर दिया था वो बता रहा था क दीदी होश में नहीं है.

प्रिय : बस बस अब क्या यही पर गिला करोगे उसे देख लिया हमने फिगर

मैं प्रिय की बात पर होश में आया और दीदी को आज़ाद किया मगर दीदी अभी भी मुझे से चिपक कर hi कड़ी थी. माइन उन्हें पीछे किया तो उन्होंने आंखे खोली. दीदी का चेहरा तो लाल था hi अब आँखों में भी लाल डोरे नज़र आने लगे.

गगन : अब मेरी टर्न है टास्क देने की . नैना तुम तैयार हो न ?

दीदी ने हाँ में सर हिला दिया

गगन : तो अब तुम अपने बर्फ क राकेट का साइज हमें बताओ और no चीटिंग

गगन की बात सुन कर मेरे कानो से धुआं निकलने लगा . मेरे राकेट का साइज पता करने का मतलब दीदी को मेरा लैंड पकड़ना होगा. ये तो कुछ ज्यादा hi हो रहा है. मगर पापी मन से ये भी आवाज़ आने लगी क जो होता है होने दे जब दीदी को कोई ऐतराज़ नहीं तो तू क्यों दर रहा है इस लिए मैंने भी मन पक्का कर लिया. दीदी भी गगन की बात से टेंशन में आ गयी क वो अपने hi भाई का लैंड कैसे पकड़े गई.

नैना दीदी : ये कुछ ज्यादा hi हो रहा है.

ज्योति : हर मन ले और अमित मुझे देदे

नैना दीदी : ये सिर्फ मेरा है

दीदी में जिस तरह से ‘ये सिर्फ मेरा है ‘ कहा मैं उन्हें देखती रह गया. वो बिलकुल एक प्रेमिका की तरह अपना हक्क साबित कर रही थी मुझ पर.

नैना दीदी मेरे पास आयी और मेरी बेल्ट और जेनस क बटन खोल कर ढीला कर क अपना हाथ अंदर दाल दिया . दीदी क हाथ जैसे hi अंडरवियर में घुस कर मेरे खड़े लैंड से टकराये तो उनके चेहरे पर आया गुस्सा एक पल में hi हवा हो गया और उसकी जगह शर्म और हाय की लाली ने लेली. दीदी क हाथ की मूवमेंट रुक गयी थी ऐसे में गगन ने फिर से होश दिलाते हुए उनसे साइज पूछा तो दीदी ऑंखें नीचे कर क मेरे लैंड को हाथ में ले कर अछि तरह नापने लगी . दीदी क सॉफ्ट सॉफ्ट हैंड्स में मेरा लैंड अकड़ कर लोहे जैसा सख्त हो गया. मैं तो हवा में hi उड़ने लगा था मैं कहीं चक्कर खा कर कहीं गिर न जॉन इस लिए मैंने दीदी क कंधो पर हाथ रख लिए. दीदी 2 मिनट्स तक अछि तरह दबा दबा कर मेरा लैंड मसलती रही . दीदी क द्वारा लैंड को मसाले जाने एक अलग hi अलौकिक आनंद की प्राप्ति मुझे हो रही थी जो मैं बयां नहीं कर सकता. दीदी ने भी जैसे साडी शर्म उतर कर फेंक दी थी और सच मच की गफ की तरह मेरा लैंड मसल रही थी.

दीदी ने मेरे अंडरवियर से हाथ निकला तो मैं होश में आया वर्ण मुझे लग रहा था क दीदी पानी निकल कर hi मानेंगी.

नैना दीदी : इतना लम्बा और इतना मोटा है . बोलो क्या तुम्हे भी लेना है ?

दीदी बे गुस्से दे ज्योति को अपने हाथ क इशारे से मेरे लैंड का साइज बताया .

ज्योति और बाकि सब भी दीदी क जवाब से हैरान हो गयी और उनके मुँह खुले क खुले रह गए.

ज्योति : तू झूठ बोल रही है इतना बड़ा कैसे हो सकता है . तू गलत बता रही है जान बुझ कर शायद तुमने पकड़ा hi नहीं.

अनु : मुझे भी ऐसे hi लगता है .

नैना दीदी : मैं क्यों झूठ बोलने लगी.

अनु : मैं नहीं मानती अगर सच में ऐसा है तो हमें उसे बहार निकल कर पकड़ क दिखा.

नैना दीदी : मैं क्यों बहार निकल कर दिखाऊं तुम लोग नज़र लगा डौगी

अनु : इसका मतलब तू झूठ बोल रही है. या तो दिखा या मन ले तू झूठी है

नैना दीदी : तुम लोग ऐसे नहीं मानोगी

नैना दीदी फिर से गुस्से में आ गयी मगर मैं इस मामले में ख़ामोशी से खड़ा था क्यूंकि जब बात अपने फायदे की हो रही हो तो चुप hi रहना चाहिए.

नैना दीदी नीचे बैठ गयी और मेरी ज़िप को खोल ते हुए मेरी पेण्ट को और ढीला कर क नीचे खींच दिया और उसके साथ hi अंडरवियर भी. अंडरवियर नीचे होते hi मेरा लैंड स्प्रिंग की तरह उछलता हुआ दीदी क चेहरे क सामने नाचने लगा. दीदी की ऑंखें बड़ी हो गयी और मुँह खुला का खुला रह गया. यही हल बाकि सब का था. मेरा 8.5 इंच लम्बा 4 इंच मोटा लैंड सबके सामने नाचने लबा . लैंड 2.5 का मोटा सूपड़ा ऐसे लग रहा था मनो लैंड ने हेलमेट पहना हो. सब की नज़रें मेरे लैंड पर hi जैम गयी थी और ख़ामोशी सी छ गयी थी हर तरफ जिसे ज्योति ने hi ख़तम किया.

ज्योति: ये तो सचमुच का है ुंबलीवबले

अनु : मैंने आज तक सिर्फ मूवीज में hi ऐसा देखा है

गगन : क्या मैं इसे छू कर देख सकती हूँ

नैना दीदी : हो गया तुम सब का अब जाओ

ज्योति : ऐसे नहीं तू एक बार हमारे सामने इसे मुँह में ले पहले

नैना दीदी : बस और नहीं अब तुम्हे यकीन है तो भी ठीक नहीं है तो जाओ मुझे तुम लोगों दे सर्टिफिकेट नहीं चाहिए

मैं तो मन hi मन खुश हो रहा था क अब दीदी मेरा लैंड चूसेंगी मगर वो तो मन कर रही थी . मगर उनकी फ्रेंड्स की हालत देख कर मुझे अंदाज़ा हो गया क अगर मैं ज़रा सा भी इशारा करूँ तो कोई भी झट मन जाएगी चुदाई क लिए. इनमे ज्योति सबसे ज्यादा सेक्सी और स्मार्ट थी मेरा तो दिल कर रहा था अभी उसे पेल दूँ जैसे वो मुँह खोल कर लार टपका रही थी.

ज्योति : नैना अगर तू मुँह में नहीं लोगी तो मैं नहीं मानूंगी

नैना दीदी : तो मत मन इससे ज्यादा मैं नहीं करने वाली तुम लोगों क सामने . ये मेरा बर्फ है कोई खिलौना नहीं

दीदी ने मेरी अंडरवियर ऊपर कर दी और मैंने भी उनकी बात मानते हुए पेण्ट ऊपर कर क बांध ली. नैना दीदी की सब फ्रेंड्स का मुँह लटक गया जैसे उनकी पसंद की चीज़ किसी ने छीन ली हो. दीदी ने अपनी हालत ठीक की और मुझे बाज़ू से पकड़ कर खींचते हुए बहार ले आयी. उनके चहरे पर गुस्सा साफ दिख रहा था. मैंने भी चुपचाप बाइक स्टार्ट की और दीदी को पीछे बिठा कर चल पड़ा. हम दोनों hi चुप चाप थे और समझ नहीं आ रहा था क क्या बात करें कैसे करें क्यूंकि अभी जो कुछ भी हमारे बिच उस पार्क में हुआ था उसके बाद अब हम एक दूसरे से नज़रें मिलाने की भी हालत में नहीं थे . खैर मैं दीदी को लेकर उनके घर की तरफ चल पड़ा तो हमारे बिच की ख़ामोशी को दीदी ने hi तोडा

नैना दीदी : ी ऍम सॉरी अमित मेरी वजह से तुम्हे उनके सामने वो सब करना पड़ा . कैसे मज़े ले रही थी सब बीचेस एक एक को देख लुंगी . कैसे खा जाने वाली नज़रों से तुझे देख रही थी और वो अनु गगन और ज्योति तो लार टपका रही थी कुट्टी कामिनी जैसे तुझे खा hi जाएँगी. अगर तुझे हाथ भी लगाती तो मुँह तोड़ देती उनका . होती कौन है वो तुझे हाथ लगाने वाली तू सिर्फ मेरा है . आज क बाद कभी उनके सामने तुझे ले कर नहीं जाउंगी . अपने बर्फ को छोड़ कर तेरे hi पीछे पद जाएँगी सब की सब कामिनियाँ हैं . मैं hi पागल थी जो तुझे उनके सामने ले गयी.

दीदी की बातों से मुझे लगने लगा क उनके दिल में मेरे लिए कुछ और hi फीलिंग्स हैं जो बार बार ‘ तू सिर्फ मेरा है ‘ कह कर अपना अधिकार जाता रही थी. इस वक़्त दीदी गुस्से में थी और उन्हें शायद पता नहीं था वो क्या क्या बोल रही हैं . मैं उन्हें गुस्से में पहली बार देख रहा था.

अमित : जाने दो दीदी तुम क्यों मूड ख़राब कर रही हो मैंने तो पहले hi कहा था रहने दो.

नैना दीदी : ऐसे कैसे रहने देती . हमेशा अपने बर्फ क किस्से सुना सुना कर मुझे चिढ़ाती थी आज देखा कैसे सबकी जल गयी तुम्हे देख कर . अब कोई मेरे आगे अपने बर्फ का नाम भी नहीं लेंगी. उनको भी पता चल गया क मेरे बर्फ क आगे सब फ़ैल हैं.

अमित : पर दीदी मैं तो आपका ....

नैना दीदी : आज से तू मेरे बर्फ है समझा वैसे भी आज जो कुछ हमारे बीच हुआ है उसके बाद हम भाई बहिन रह hi कहाँ गए हैं. मैं कब से तुझे कहना चाहती थी मगर हिम्मत नहीं होती थी और आज सबकुछ अपने आप हो गया. जब से गाओं में तुम्हारे साथ वो हसीं पल बिताये हैं मैं एक दिन भी उन्हें यद् किये बिना नहीं सोई और शायद hi कभी ऐसा हुआ हो क तुम मेरे सपने में नहीं आये हो. मेरा हर दिन हर रत बस तुम्हे यद् करते hi गुज़रता है. मैं जानती हूँ क ये गलत है मगर मैं इस दिल क हाथों इतनी मजबूर हो गयी हूँ क अब मैं पीछे नहीं हैट सकती . मैं ये भी जानती हूँ क हम कभी एक नहीं हो सकते मगर क्या मुझे प्यार करने का भी अधिकार नहीं है तुम्हे ? मैंने आज तक किसी की तरफ नहीं देखा पता नहीं कैसे मैं तेरी और खींची चली आयी और अब हल ये है क अगर तुमने भी मुझे ठुकरा दिया तो मैं टूट जाउंगी . प्लीज मुझे अपने दिल में थोड़ी सी जगह देदो मैं तुमसे और कुछ नहीं मांगती प्लीज मुझे थोड़ा सा प्यार दे दो अमित

मैं दीदी की बात सुनते hi रुक गया और बाइक साइड में लगा ली. दीदी ने इतना कुछ कह दिया मुझे समझ नहीं आ रहा था मैं क्या जवाब दूँ. दीदी ने तो अपने दिल का हल बयां कर दिया मगर मेरा क्या? मैंने पहले hi इस प्यार में टूट कर बैठा था और सोच लिया था क दुबारा इस चक्कर में नहीं पडूंगा मगर यहाँ पर बात और थी. आज जो मुझसे प्यार का इज़हार कर रही थी वो मेरी अपनी थी मेरी बहन जिसके साथ मैं पहले इमोशनली आत्ताच था ऐसे में मैं कैसे उसे दुःख दे सकता था. कैसे मैं उनको इंकार कर देता और रोने क लिए छोड़ देता . उनकी एक एक बात सचाई से भरपूर उनके प्यार की गवाह थी मगर अपनी hi बहिन से प्यार करना कहाँ तक सही है. पार्क में चाहे मैं वासना वश वो सब एन्जॉय करने लगा था और शायद चुदाई का मौका मिलता तो वो भी कर देता मगर प्यार ? प्यार करना आसान होता है मगर प्यार में जब दर्द मिलता है तो वो इंसान को तोड़ कर रख देता है. मैं अपने प्यार को खो कर किस कदर टूट गया था ये मैं hi जनता हूँ अगर कामिनी ममी और दीपिका ममी उस वक़्त मुझे सहारा न देती तो शायद मैं आज इस जगह न होता और कहीं गलियों में अपने मुहब्बत की अर्थी काँधे पर लिए घूम रहा होता. कहते हैं न क प्यार का दर्द वही समझ सकता है जिसने खुद वो दर्द अपने दिल पर झेला हो. मैं नैना दीदी का दर्द अछि तरह समझ प् रहा था . मैं नहीं चाहता था क मैं उनका दिल तोड़ दूँ उन्हें इंकार कर क मगर मैं ये भी जनता था क बाद में जब मैं उनसे अलग हुआ तो वो और भी दुखी होंगी . मैंने फैसला किया क मैं एक बार उन्हें समझने की कोशिश करूँगा अगर मैं समझ गयी तो ठीक वर्ण उनकी बात को मन लूंगा. मुझे खामोश देख दीदी ने फिर से सवाल किया

नैना दीदी : तू कुछ बोलता क्यों नहीं ? कुछ तो बोल?

अमित : दीदी आप मुझसे बड़ी हैं और समझदार भी . मैं आपको क्या समझा सकता हूँ. मगर फिर भी इतना कहूंगा क आप जो चाहती हैं वो बाद में आपको और भी तकलीफ देगा. आप जानती हैं इस रिश्ते का कोई फ्यूचर नहीं ऐसे में जब मुझसे अलग होना पड़ेगा तो क्या आप खुद को संभल पाएंगी?

नैना दीदी : कल किसने देखा है अमित मैं आज की बात कर रही हूँ. मैंने कभी किसी से कोई रिश्ता नहीं रखा मुझे दर था कहीं मैं अपने परिवार की इज़्ज़त को डेग न लगा दूँ . तुम्हारे रूप में मुझे एक सच्चा साथी मिला है जो कभी मुझे चीट नहीं करेगा जिस पर मैं खुद से ज्यादा भरोसा कर सकती हूँ. और मैं कौन सा तुम्हे शादी करने को कह रही हूँ . मैं जानती हूँ ये पॉसिबल नहीं पर जब तक मेरी शादी नहीं हो जाती मैं चाहती हूँ क तुम मुझे इतना प्यार दो क मेरे सरे ख्वाब पूरे हो जाएँ . मुझे कैसा हस्बैंड मिलेगा वो मुझे प्यार करेगा या नहीं ? वो मुझे समझेगा या नहीं ? ये किसे पता है इस लिए मैं तुम्हारे साथ अपने सरे अरमान पूरे कर लेना चाहती हूँ. क्या तू मुझे थोड़ा सा प्यार नहीं दे सकता ? मैं वडा करती हूँ कभी तुम पर कोई रेस्ट्रिक्शन नहीं लगाउंगी , तू जैसे कहेगा मैं वैसे करुँगी , तू जब कहेगा तब hi तुझसे मिलूंगी . प्लीज मुझे थोड़ी सी जगह अपने दिल में देदो

नैना दीदी ने भरे गले से अपने इमोशंस मेरे सामने निकल कर रख दिए ऐसे में मेरा दिल भी पिघल गया और मैंने उनको गले लगा लिया. दीदी अंदर से भर चुकी थी और मुझसे ऐसे गले लग गयी जैसे छोटी बची रट हुए अपनी माँ से चिपक जाती है. मैं दीदी क सर और पीठ पर सहलाने लगा और उनको नार्मल करने लगा.

अमित : मुझे रोटी हुई गफ नहीं चाहिए . अगर मुझे बर्फ बनाना है तो मुझे हमेशा आपका हस्ता मुस्कुराता चेहरा नज़र आना चाहिए. वर्ण मैं फिर कभी आपको किश नहीं करूँगा.

वैसे आप बहुत स्वीट हैं. अभी तक मेरे होठों पर आपकी मीठे होंठों का टास्ते आ रहा है.

नैना दीदी : बदमाश अभी बताती हूँ तुझे

दीदी ने मेरे पेट में हलके हाथो से मरना शुरू कर दिया और मैं भी ऐसे एक्टिंग करने लगा जैसे बहुत ज़ोर से लग रहा हो.

अमित : अजीब गफ हो पहले hi दिन बर्फ को मरने लगी

नैना दीदी : मैं जो मर्ज़ी करूँ मेरा बर्फ है किसी क बाप का क्या जाता है.

अमित : बाप रे फिर तो आपसे बच कर रहना पड़ेगा इससे तो आपकी वो फ्रेंड्स hi अछि थी कैसे प्यार करने क लिए मरी जा रही थी और एक आप हो क मरना शुरू कर दिया.

नैना दीदी : क्या कहा मेरी फ्रेंड्स अछि हैं . उनका प्यार चाहिए तुम्हे . मैं तुम्हे उनके काबिल छोडूंगी तो प्यार करेंगी न

अमित : क्या करेंगी आप?

नैना दीदी : अभी बताती हूँ

इतना कहते hi दीदी ने मुझ पर हमला बोल दिया और मेरे होंठो को अपने होंठो में ले कर चुसंते हुए काटने लगी. दीदी का ये रूप देख कर मैं हैरान हो गया . ये तो ाचा हुआ क हम सुनसान गली में थे वर्ण सड़क पर hi तमाशा लग जाता और लोग हमारी रास लीला को अपने अपने मोबाइल में कैद कर रहे होते.

मेरी सांस फूलने लगी तो मैं दीदी को पीछे हटाया . दीदी की भी सांस उखड गयी थी और चेहरा लाल हो गया था.

अमित : बाप रे आप तो जंगली बिल्ली हैं . मेरी तो वाट लगा देंगी .

नैना दीदी : क्या कह रहा था तू .. प्यार करेगा उन कामिनियों से .

अमित : न बाबा न मुझे मरना नहीं है. वैसे आपको उनको गलियां दे रही हैं आपको तो उनको थैंक्स बोलना चाहिए.

नैना दीदी : वो क्यों

अमित : उनकी वजह से आप मुझसे खुल क बात कर पायी वर्ण आप कभी ये सब कह hi न पति

नैना दीदी : तुमने सच कहा मैं उन्हें थैंक्स कहूँगी और उनको पार्टी भी दूंगी

अमित : क्या मैं भी आ सकता हूँ पार्टी में?

नैना दीदी : मर खायेगा तू मेरे हाथो से चुप चाप घर चल .

मैंने बाइक स्ट्रेट की और दीदी गिर पीछे बैठ गयी मगर इस बार वो मुझसे गफ की तरह चिपक कर बैठी थी और उनके बूब्स मेरी पीठ पर दबे हुए थे. जो अपनी सॉफ्टनेस का एहसास मुझे करवा रहे थे.

अमित : दीदी मेरी पीठ पर कुछ चुभ रहा है

नैना दीदी : लगता है तुझे कुछ ज्यादा hi शरारत सूझ रही है.

अमित : जिसकी आप जैसी गफ हो उसे शरारत तो अपने आप hi आएगी.

नैना दीदी : अब घर चलने का इरादा है या नहीं

अमित : आप कहें तो कहीं और चलें

नैना दीदी : जहाँ तेरा दिल करे वहां ले चल आज मैं बहुत खुश हूँ . तूने आज मुझे वो ख़ुशी दी है क मैं बता नहीं सकती .

अमित : चलिए कोई बात नहीं फ़िलहाल आज हम घर चलते हैं फिर किसी दिन हम कहीं घूम कर आएंगे .

ऐसे hi बातें करते हुए हम घर पहुँच गए. लंच का टाइम हो रहा था रजनी मौसी खाना बना रही थी और मुझे घर पर देख कर वो बहुत खुश हुई. साथ में नैना दीदी क चहरे की रौनक देख कर भी उनको बहुत ख़ुशी हुई. मौसी ने अपने हाथो से मुझे खाना खिलाया . मैं जब तक घर में रहा नैना दीदी मेरे आसपास hi घूमती रही और मुझे आँखों आँखों में इशारे करती रही. दीदी आज बहुत खुश थी और उनसे ये ख़ुशी छुपाई नहीं जा रही थी मैं जल्दी से खाना खा कर निकल गया कहीं दीदी कोई हरकत न कर दें और मौसी को शक हो जाये.

मौसी क घर से मैं मोहित क घर आ गया और और फिर रूटीन से रत क बाद प्रैक्टिस और फिर ट्यूशन . शाम को मुझे विजय मां का फ़ोन आया पूछने क लिए मैं कितने बजे पहुँच रहा हूँ मगर मैंने बहाना कर दिया क मैं आज नहीं आ पाउँगा . मां मुझे फाॅर्स कर रहे थे मगर मैंने प्रोफ का नाम लेकर बहाना बना दिया.

मुझसे बात करने क बाद बाबा मेरे बार बार न आने का बहाना बनाना खटक रहा था इस लिए वो इस बारे में बात करने गौरी ममी क पास चले गए.



नोट : अब स्टोरी में थोड़ा अमित माँ बाप क बारे में जानने का वक़्त आ गया है मगर सब कुछ नहीं बताया जायेगा बाकि सब वक़्त क साथ....
 
भाई अपडेट लिख रहा हूँ थोड़ा देर से hi सही मगर अपडेट दे दूंगा आज रत hi
 
अपडेट 82



विजय : तुमने आखिर ऐसा क्या कह दिया है अमित से क वो घर hi नहीं आ रहा. जब भी घर आने का कहता हूँ कोई न कोई बहाना बना देता है . मैं जनता हूँ क वो झूठ बोल रहा है और वो तुम्हारी वजह से hi घर नहीं आ रहा . आखिर ऐसा क्या कह दिया तुमने उसे क वो अब घर नहीं अत?

गौरी : मैं उसके बारे में कोई बात नहीं करना चाहती . आप क आगे हाथ जोड़ती हूँ मुझसे उसकी कोई बात मत करा कीजिये आप.

विजय : समझ गया. जब खुद का बचा पैदा करने वाली हो तो अब तुम किसी और क बचे को प्यार क्यों करोगी ? मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी. अगर तुम इसी वजह से माँ बनना चाहती थी तो अच्छा था क तुम कभी माँ hi नहीं बनती. तुमने एक बार भी नहीं सोचा क तुम्हारे ऐसा करने से उस मासूम पर क्या बीतेगी? क्या जवाब डौगी लोगों को जब वो कहेंगे क अपना बचा होते hi तुमने उसे छोड़ दिया जिसने इतने साल तुम्हे ममता का सुख दिया? क्या जवाब दूंगा मैं अपनी उस बहिन को जान वो मुझसे पूछेगी क मैंने अपना बचा होते hi उसके बेटे को अपने घर से निकल दिया? कहाँ गयी तुम्हारी वो ममता जो एक पल उसके बिना नहीं रहती थी अब ऐसे कठोर बन कर उसे मजबूर कर रही हो क वो कभी इस घर में पाऊँ भी न रखे? वो जिसने आज तक कभी हमारा सर झुकने नहीं दिया , जिसने कभी हमें ये महसूस hi नहीं होने दिया क वास्तव में हम बे औलाद हैं तुमने उसके प्रति ऐसा कठोर रुख अपना लिया. अगर तुमने माँ बन कर यही कुछ करना था तो ाचा था क तुम कभी माँ नहीं बनती . यद् रखो अगर उसने इस घर का त्याग किया तो मैं भी तुम्हारा त्याग कर दूंगा.

गौरी : आप को क्या लगता है क मैं खुश हूँ? क्या मुझे ाचा लग रहा है ये सब ? मैं तो अपने पेट में पल रहे इस पाप को भी नहीं चाहती . हर पल ये मुझे इसी बात का एहसास दिलाता रहता है क ये पाप का बीज है और ये पाप मेरे साथ उसने किया है जिसे मैंने अपनी जान से ज्यादा चाहा. मैंने हमेशा उसे अपना बीटा hi मन है . भगवन जनता है चाहे मैंने उसे जनम नहीं दिया लेकिन उसे सेज बेटे की तरह hi पला है. मैं माँ बनना चाहती थी मगर इस कीमत पर नहीं. वो जब भी मेरे सामने आएगा मुझे उसका पाप hi दिखाई देगा इसी लिए मैंने उसे कह दिया था क कभी मुझे अपनी शक्ल न दिखाना. अगर आप चाहते हैं क वो यूँही मेरे सामने रहे तो मुझे आज्ञा दीजिये क मैं आत्महत्या करलूं क्यूंकि मैं इस पाप का बोझ अपनी आत्मा पर और सेहेन नहीं कर सकती .

विजय: कैसा पाप ? कौन सा पाप ? ज़रा इस बात को एक तरफ रख कर मुझे ये बताओ क क्या कभी अमित ने तुम्हे ज़िन्दगी में गलत नज़र से देखा था इससे पहले? क्या कभी उसकी नज़र में तुम्हे कभी कोई खोट नज़र आया था इससे पहले? क्या उसने कभी तुम्हे गलत तरीके से छूने की कोशिश की थी? तुम hi क्यों क्या उसने कभी किसी को भी गलत नज़र से देखा या छुआ था? अरे मैंने तो कभी पूरे गाओं में या उसके स्कूल में पड़ने वालों से भी ऐसी शिकायत नहीं सुनी क उसने किसी क साथ ऐसी कोई हरकत की हो. फिर तुमने कैसे उसे इतना गिरा हुआ मन लिया? उसकी शराफत की कस्मे तो सारा गाओं खता है और तुम्हे अपनी hi परवरिश पर भरोसा नहीं है.

विजय की ऐसी बातें सुन कर गौरी भी मजबूर हो गयी सोचने क लिए आखिर कभी अमित ने अपनी पूरी ज़िन्दगी में कभी ऐसी कोई हरकत नहीं की थी क जिससे ये लगे क उसमे रत्ती भर भी वासना का अंश मौजूद है. अमित तो हमेशा उसे माँ माँ कह कर सर आँखों पर बिठाता था. गौरी को अमित की साडी बातें यद् आने लगी क कैसे उसने कभी भी उसे ये महसूस नहीं होने दिया था क वो उसकी सगी औलाद नहीं है. बल्कि उसे तो ये पता भी नहीं था क वो उसका सागा बीटा नहीं है उसने खुद hi तो अपनी देवरानियों और ननदों को कसम दी थे क कभी अमित को पता नहीं चलना चाहिए क वो उसका बीटा नहीं है.

अतीत को यद् करते हुए गौरी की आँखों में भी पानी आने लगा और उसकी वो निर्मल ममता उसके गुस्से पर हावी होने लगी

विजय : तुम जिसे पाप का नाम दे रही हो वास्तव में ये वरदान है तुम्हारी भक्ति का.

गौरी विजय की बात पर चौंक गयी

विजय : हाँ यही सच है . तुमने सच्चे दिल से भगवन से माँगा था क तुम माँ बनना चाहती हो और उसने तुम्हे माँ बना भी दिया . तुम ये बात नहीं जानती क मैं तुम्हे माँ बनाने में असमर्थ हूँ. जब दीपिका क बाद कामिनी भी गर्भवती हुई तो मेरे भी दिल में आया क क्यों न मैं भी तुम्हे वहीँ ले कर जॉन और तुम भी डॉक्टरी इलाज से माँ बन जाऊ मगर तुमने ये कह कर साफ इंकार कर दिया क तुम्हे भगवन पर भरोसा है. पर मैं डॉ क पास गया था ये जानने क लिए कहीं कमी मुझ में hi तो नहीं. और पता है डॉ ने क्या कहा ? मैं कभी बाप नहीं बन सकता क्यूंकि मेरे वीर्य में कुछ कमी है जिसकी वजह से गर्भ ठहरने क बाद भी बचा सही सलामत पैदा नहीं हो सकता और इस उम्र में तो गर्भ ठहरने क भी चांस काम हैं. मैं तुम्हे ये सब बताना चाहता था पर तुम्हारे विश्वास क आगे मैं चुप रहा . और ये सोचा क बाद में मैं तुम्हे समझा बुझा कर डॉ क पास ले जाऊंगा . मगर भगवन ने तुम्हारे विश्वास क आगे झुकते हुए तुम्हे गर्भवती करने का दूसरा रास्ता निकल hi लिया. अमित ने तो कभी सोचा भी नहीं होगा क कभी वो तुम्हारे साथ ऐसा कर सकता है . उसने अपने दिल पर पत्थर रख कर कैसे ये सब किया होगा क्या तुमने कभी ये नहीं सोचा? उसने तो तुम्हारी जान बचने की कोशिश hi की थी न और तुमने उसे ऐसे सजा दी क जैसे उसने तुम्हारा बलात्कार कर दिया हो. ज़रा सोचो क क्या हमारा बीटा ऐसा घटिया काम कभी कर सकता है? उसके जैसा बीटा तो कई जन्मो क पुण्य कर्मो से मिलता है और तुम उसे ऐसे घृणा से देखने लगी हो. और तुम जिसे पाप का बीज समझ रही हो वो भगवन की दें है उसे उसका वरदान समझो. सोचो क हमारा बीटा कितना गुनी है उसके बीज से जो भी संतान होगी वो कितनी अछि होगी. उसने तो जाने अनजाने तुम्हे वो ख़ुशी दी है जो शायद तुम्हे कभी मिल hi नहीं पति. और फिर अगर हम डॉ से भी इलाज करवाते तो पता नहीं वो किस इंसान का बीज तुम्हारे अंदर डालते और वो कैसा होता . तब तुम उसे पाप नहीं कहती. तुम्हारे साथ जो भी हुआ है बेहोशी में हुआ है फिर तुम ऐसा क्यों सोचती हो क तुमने कोई पाप किया है. तुम्हे तो यही समझना चाहिए क वो सब डॉ ने किया है जैसा वो सबके साथ करते हैं. और अमित ने तो कोई पाप किया hi नहीं ज़रा ठन्डे दिमाग से सोचो एक बार क आखिर उसकी गलती hi क्या है? क्या अपनी माँ की जान बचाना उसका पाप है? मैं अब भी कहता हूँ गौरी उसने कोई पाप नहीं किया है और न hi तुमने . ये सब भगवन की hi मर्ज़ी है इस लिए जो भी हुआ है वो सब भूल जाओ वर्ण तुम अपना बीटा हमेशा क लिए खो डौगी और यद् रखना इस के लिए तुम खुद भी कभी खुद को माफ़ नहीं कर पाओगी.

विजय गौरी को इतना लम्बा छोड़ा भाषण दे कर कमरे से निकल कर अमित क कमरे में जा कर बैठ गया और उसके कमरे पड़ी उसकी यादों को देखता रहा. गौरी विजय की एक एक बात को मन क तराज़ू में टोल रही थी. और उसे ये एहसास होता जा रहा था क वास्तव में hi इस में अमित का कोई कसूर नहीं था. उसने तो ऐसा कुछ किया hi नहीं था कभी क उस पर कोई उंगली उठता वो खुद भी तो उसकी कस्मे खाने को तैयार रहती थी. आखिर माँ बनने की ज़िद उसने खुद hi तो की थी जब उसको उसके अपनों ने hi बाँझ होने का तना दिया था. भगवन ने भी उसकी ज़िद को पूरा करने क लिए अमित को माध्यम बना लिया क्यूंकि उसका अपना पति समर्थ नहीं था. विजय की एक एक बात सच थी अगर डॉ क पास से भी इलाज करवाते तो भी पैट नहीं किसका बचा होता और वो कैसा होता. अमित में इतनी अच्छाइयां हैं क गिनते गिनते थक जाओ ऐसे में उसकी औलाद तो वाकई में hi आदर्श hi होगी. ऐसे में उसके पेट में जो बीज है वो पाप कैसे हो सकता है वो उसकी निर्मल और अटूट भक्ति का hi आशीर्वाद है. अगर वो उस घटना को अपने दिलो दिमाग से निकल दे तो अमित ने कभी ऐसा कुछ किया hi नहीं क वो उस पर कभी गुस्सा हो. गौरी की आँखों में अपने आप पछतावे क आंसू बहने लगे . वो कितनी बड़ी गलती कर रही थी अपने hi हाथो अपने लाल को अपने से दूर कर रही थी. अपनी गलती का एहसास होते hi उसका दिल चखने पुकारने लगा और उसे कहने लगा क अभी वो दौड़ कर अमित क पास पहुँच जाये और उसे अपने पास ले आये . वो विजय से कहना चाहती थी क वो अभी जाये और उसके बेटे को कैसे भी कर क उसके पास ले आये मगर विजय तो कमरे से जा चूका था. गौरी अमित को इसी वक़्त देखना चाहती थी उसे महसूस करना चाहती थी इसी लिए वो दौड़ कर अमित क कमरे में गयी जहाँ उसका हर एक सामान पड़ा था जो वो इस्तेमाल करता था जहाँ वो इतने साल से रहता था. गौरी जब कमरे में पहुंची तो विजय को वहीँ पाकर उसकी आँखों से और भी आंसू बहने लगे. विजय गौरी की ये दशा देख कर समझ गया क उसे उसकी गलती का एहसास hi गया है. गौरी क मुँह से शब्द नहीं निकल रहे थे मगर विजय उसके बहते आंसुओं से उसकी करुणा और पश्चात्ताप की भाषा समझ रहा था. गौरी वजय क पैरों में गिर गयी और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी.

गौरी : मैं आपके पाऊँ पड़ती हूँ मेरे बेटे को कैसे भी कर क वापिस ले आइये मुझे बहुत बड़ी गलती हो गयी . वो मुझे कितना प्यार करता है और मैंने उसे न जाने क्या क्या कह दिया . मैं उससे माफ़ी मांगूंगी वो तो कितना ाचा है वो कोई पाप कैसे कर सकता है . उसने तो अपनी माँ की जान बचने क लिए ये सब किया था वो गलत कैसे हो सकता है . मैं आपके पाऊँ पड़ती हूँ मुझे मेरे बेटे क पास ले चलो मुझे उससे अभी मिलना है . मैं उसे देखना चाहती हूँ मैं अभी उसके पास जाना चाहती हूँ . मुझे कोई बचा माहि चाहिए मैं माँ नहीं बनना चाहती मुझे बस मेरा बीटा लौटा दो मैं आपके पाऊँ पड़ती हूँ.

विजय : धीरज रखो गौरी मैं कल सुबह hi जा कर उसे ले आऊंगा चाहे मुझे उसके पाऊँ क्यों न पड़ना पड़े . देख लेना जब उसे पता चलेगा क तुम उससे मिलना चाहती हो तो दौड़ता हुआ चला आएगा . अब तो बस ये रत जल्दी जल्दी ख़तम हो मैं दिन चढ़ते hi उसे लेने पहुँच जाऊंगा.

उधर शहर में आज अंकल घर और hi थे इस लिए रमा ने भी आज अमित क पास आना ठीक नहीं समझा वैसे भी उसने देख लिया था क अमित का मूड थोड़ा ऑफ है और ऐसा था भी. विजय से बात करने क बाद से अमित का मूड थोड़ा ऑफ hi था क्यूंकि उसे भी विजय से हर बार झूठ बोलना ाचा नहीं लग रहा था कितना प्यार करते थे वो अमित से. साडी रत अमित को अजीब अजीब बेचैनी भरे ख्याल आते रहे और वो चैन से सो नहीं पाया. जैसे तैसे कर क देर रत उसकी आंख लगी तो सुबह मोबाइल की रिंग टोन से hi उसका नींद खुली. उसने देखा तो नैना दीदी का hi फ़ोन था.

नैना दीदी : hello कहाँ घोड़े बेच कर सो रहे हो मर मैं कब से तुम्हे कॉल कर रही हूँ

अमित : गुड मॉर्निंग दीदी वो कल रत देर से सोया था न इस लिए आज देर से जगा अभी आपके फ़ोन से hi

नैना दीदी : बुद्धू अब तो दीदी कहना छोड़ दो. अब तो हम बर्फ गफ हैं न. वैसे तुम क्यों देर तक जागते रहे कहीं मेरे बारे में तो नहीं सोच रहे थे?

अमित : और किस क बारे में सोचूंगा . कल hi तो इतनी खूबसूरत लड़की ने मुझे पर्पस किया है बस उसकी क बारे में सोचते रत निकल गयी

नैना दीदी : सच !!! ो ी लव यू लव यू लव यू मममममुहाः . ी ऍम सो हैप्पी तुम नहीं जानते मैं कितनी खुश हूँ ये बात सुन कर . मैं तो कल साडी रत तुम्हारे hi सपने देखती रही और सुबह उठते hi पहले तुमसे बात करने को दिल हुआ . मैं रत भी तुमसे बात करना चाहती थी पर पता hi नहीं चला कब नींद आ गयी शायद कल जो कुछ हुई हुआ उसकी वजह से मैं ज्यादा थक गयी थी. ो बातों बातों में भूल hi गयी माँ ने तुम्हे अभी क अभी घर बुलाया है तुम इसी वक़्त चले आओ

अमित : क्या ? मगर ऐसी कौन सी इमरजेंसी आ गयी ? कल hi तो मिला था मैं मौसी से.

नैना दीदी : वो तो तुम्हे यहाँ आ कर hi पता चलेगा बच्चू आज तुम्हारी खैर नहीं.

अमित : क्या बात है ? दीदी प्लीज बताओ न

नैना दीदी : क्या कहा दीदी .. हँ जाओ मैं बात नहीं करती

इतना कह कर दीदी ने फ़ोन काट कर दिया. मैंने टाइम देख तो 8 बज चुके थे . पता नहीं मौसी को क्या काम पद गया जो इतनी सुबह फ़ौरन बुला रही हैं. मैंने मोबाइल देखा तो उस पर विजय मां रजनी मौसी और घर क no. से कितने hi कॉल्स आयी हुई थी. मैंने उन्हें बाद में फ़ोन करने का सोचा और जल्दी से तैयार हो कर नीचे आ गया. अंकल आंटी नीचे hi थे उन्होंने मुझसे इतनी सुबह बहार जाने की वजह पूछी तो मैंने बता दिया क मौसी ने ज़रूरी काम से बुलाया है तो उन्होंने भी मुझे नहीं रोका मगर मुझसे जाने से पहले आंटी ने जूस पीला कर hi भेजा. कुछ hi देर में मैं रजनी मौसी क घर क बहार था. मैंने जैसे hi बेल्ल बजायी तो दरवाज़ा नैना दीदी ने hi खोला . मुझे देखते hi उनके चहरे पर खुश हो गयी और उनके चहरे पर स्माइल आ गयी मगर अगले hi पल उन्होंने गुस्सा दिखते हुए मुँह फुला लिया.

अमित : ी ऍम सॉरी मुझसे गलती हो गयी मगर क्या करूँ आप बड़ी हैं न इस लिए आपका नाम लेना अजीब सा लगता है वैसे भी हमेशा से दीदी कहता आया हूँ तो मुँह से दीदी hi निकलता है मैं क्या करूँ. प्लीज मुझे माफ़ कर दो मैं आगे से कोशिश करूँगा क गलती न हो अब गुस्सा थूक दो. मेरी गफ क चहरे पर ये गुस्सा ाचा नहीं लगता.

मेरी बातों से एक बार दीदी क चहरे पर स्माइल आयी मगर उन्होंने उसे दबा लिया.

नैना दीदी : एक तो गलती करते हो ऊपर से मानना भी नहीं अत . कोई ऐसे मनाता है क्या गफ को?

अमित : सॉरी वो क्या है न मैंने कभी कोई गफ बनाई hi नहीं इसी लिए मुझे ये सब नहीं अत पर मैं धीरे धीरे सिख जाऊंगा. लो मैं कान पकड़ता हूँ प्लीज मुझे माफ़ कार्डो

नैना दीदी : ऐसे नहीं पहले अछि तरह से एक बर्फ की तरह मुझे मनाओ

अमित : ाचा तो ये बात है मतलब आपको सिर्फ बर्फ hi चाहिए तो ठीक है.

मैंने नैना दीदी को गले लगा लिया और उनकी गर्दन पर किश कर दिया . मेरे ऐसा करने से दीदी हड़बड़ा गयी क्यूंकि घर पर सब मौजूद थे. वो दर कर पीछे हैट गयी.

अमित : अब तो ठीक है न ? या फिर डायरेक्ट पार्क वाला किश चाहिए?

मैं इतना कह कर स्माइल करने लगा और नैना दीदी शर्मा कर अंदर भाग गयी. मुझे उनकी इस ऐडा पर हंसी आ गयी . मैं भी उनके पीछे अंदर आ गया और सामने का नज़ारा देखते hi मैं शॉकेड हो गया. सामने रजनी मौसी क साथ विजय मां और अजय मां बैठे थे और एक सोफे पर मौसा जी बैठे थे. मैंने सबके पाऊँ छुए विजय मां मुझे गले लगाया तो उनकी आँखों में पानी आ गया जिसे मौसी ने भी देख लिया.

रजनी मौसी : क्या बात है भैया आपकी आँखों में आंसू ?

मैंने भी देखा तो उनकी आँखों में पानी था जिसे वो साफ़ कर रहे थे.

विजय मां : वो क्या है न आज कितने दिनों बाद इससे मिल रहा हूँ बस खुद पर काबू नहीं रहा . चल बीटा घर चल तेरी माँ तुझे देखने क लिए तरस रही है . उसकी तो मुझसे भी बुरी हालत है. चल पहले उससे मिल ले

बाबा क मुँह से माँ क बारे में सुन कर मेरा दिल भी मचलने लगा माँ से मिलने क लिए . मुझे अपने कानो पर यकीन नहीं हो रहा था क वो मुझसे मिलना चाहती हैं इसका मतलब है उन्होंने मुझे माफ़ कर दिया . मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं सपना देख रहा हूँ जैसे मेरी विश पूरी हो गयी हो और मुझे फिर से मेरी माँ वापिस मिल रही है. मैं जल्दी से बाबा क साथ घर जाना चाहता था क माँ से मिल सकूँ

रजनी मौसी: ऐसे कैसे जाओगे पहले आराम से नाश्ता करो मैं जानती हूँ इतनी सुबह घर से निकले हो आप तो खाना भी नहीं खाया होगा.

विजय मां : इसे देख कर तो मेरी भूख hi मिट गयी है रज्जो तू नाश्ता रहने दे.

विजय मां प्यार से रजनी मौसी को रज्जो कहते हैं कभी कभी क्यूंकि एक वो hi हैं जो उनसे बड़े हैं. बाकि और कोई उन्हें इस नाम से बुलाता है या नहीं मैंने कभी नहीं सुना.

“ ऐसे कैसे भूख नहीं है मां जी , मैं खुद अपने हाथो से आपके लिए नाश्ता बना रही हूँ और मेरा प्यारा भाई भी तो खायेगा न मेरे हाथ से मैं बिना खाये किसी को नहीं जाने दूंगी”

किचन निधि दीदी ये कहते हुए बहार आयी . उनको पसीने में नहायी देख कर पता चल रहा था क वो किचन में काम करती हुई इधर आ गयी हैं. मैं तो ख़ुशी में मन hi मन नाच रहा था और अपनी उसी ख़ुशी में अभिभूत मैं निधि दीद क गले लग गया और उन्हें उठा कर घूमने लगा .

अमित :ो दीदी ो दीदी ी ऍम सो हैप्पी आप कितनी अछि हो आप मेरा कितना ख्याल रखती हो.

निधि दीदी : बस बस मुझे निचे उतर , गिरायेगा क्या ?

विजय मां मेरी इस ख़ुशी की वजह समझ रहे थे मगर बाकियों को अंदाज़ा नहीं था. उसी वक़्त कारन भैया भी वहां आ गए शायद वो हमारी बातें पहले hi सुन रहे थे

कारन : लगता है जन्मो से भूखा है जो खाने की बात पर इतना उछाल रहा है. हॉस्टल में खाना नहीं मिलता क्या .

रजनी मौसी : कारन ये क्या मज़ाक है

अमित : भैया ठीक hi तो कह रहे हैं मौसी . भला इतने प्यार से बना खाना हॉस्टल में कहाँ मिलेगा और भी मेरी प्यारी दीदी क प्यारे पाए हाथो से बना हुआ जिसमे सिर्फ इनका प्यार है.

मेरी बात पर निधि दीदी ने मुझे गले लगा लिया और मेरा माथा चूम लिया.

निधि दीदी : तू सच में कितना प्यारा है . मैं तुझे खुद अपने हाथो से खाना खिलाऊंगी आज .

कारन को शायद मौसी का ऐसे डांटना ाचा नहीं लगा और वो बहार निकल गया.

रजनी मौसी : निधि नैना कहाँ है ?

निधि दीदी : वो मेरी मदद कर रही है माँ खाना बनाने में

रजनी मौसी : क्या कहा ? नैना वो भी किचन में ? ये चमत्कार कैसे हुआ ?

निधि दीदी : ये चमत्कार मेरे प्यारे भाई ( अमित ) की वजह से हुआ है . नैना कह रही है वो अमित क लिए अपने हाथो से खाना परोसेगी और मेरी मदद भी कर रही है.

रजनी मौसी : कमल है ! मैं रोज़ कहती रहती हूँ किचन में कुछ काम कर लिया कर कल को कहीं ससुराल में बातें न सुन्नी पड़ें मगर एक नहीं मानती मेरी और आज अमित क लिए खुद काम कर रही है बिना कहे. सच में ये सब अमित का hi जादू है . कितना प्यारा है मेरा बीटा.

मैं निधि दीदी की बात सुन कर दौड़ कर किचन में गे तो देखा नैना दीदी किचन में गैस पर परांठे सेक रही थी . T-shirt और खुले पाजामे में वो अपना काम करने में बिजी थी . पसीने की वजह से T-shirt उनकी बॉडी से चिपकी पड़ी थी. मैं दबे कदमो से उनके पीछे गया और उन्हें बाँहों में भर लिया.

अमित : तो मेरे लिए आप इतनी मेहनत कर रही हैं . ी ऍम सो लकी क मुझे इतना प्यार करने वाली गफ मिली है . आज खुद आप मेरे लिए खाना बना रही हो

मैं उनकी पसीने से भीगी गर्दन पर अपने होंठ रख दिए . मेरे ऐसा करने से उनके बदन में कम्पन सी हुई और एक सिसकी उनके मुँह से निकल गयी.

नैना दीदी : कक्कक्क्स हम्म्म सब घर में है कोई देख लेगा प्लीज .

दीदी की बात सही थी इसी लिए मैंने तुरंत उन्हें छोड़ दिया. एक किश उनके गाल पर कर क वापिस आ गया. हम सब ने मिल कर खाना खाया. खाना सच में टेस्टी था क्यूंकि इसमें दीदी ने अपना प्यार भी डाला था. खाने क बाद मैं विजय मां और अजय मां क साथ गाओं जाने के लिए उठ खड़ा हुआ. जब हम बहार जाने लगे तो नैना दीदी की आँखों में पानी आ गया और वो अपने कमरे में चली गयी. सब बहार दरवाज़े पर हमें छोड़ने आये मैं नैना दीदी से मिल कर आने का कह कर उनके कमरे में चला गया . दीदी बीएड पर सिरहाने को दबाये उलटी लती थी शायद रो रही थी .

अमित : तो मेरी प्यारी गफ रोटी भी है . मगर मुझे रोने वाली गफ नहीं चाहिए .

मेरी आवाज़ सुन कर दीदी एक डैम से कड़ी हो गयी और मेरे गले लग गयी

नैना दीदी : क्या तुम मेरे पास नहीं रह सकते ? सब कुछ तो वही है मगर कल से ऐसा लग रहा है जैसे सब कुछ बदल गया है. मेरा दिल तुमसे एक पल भी दूर नहीं जाना चाहता . ये मुझे क्या हो रहा है अमित प्लीज मत जाओ न.

अमित : खुद पर काबू रखो मेरी जान मैं तुम्हारे पास hi तो हूँ जब भी पुकारोगी मैं डोडा चला आऊंगा मगर मैं तुम्हे ऐसे रट हुए नहीं देखना चाहता. ज़रा सोचो अगर हमारे इस रिश्ते क बारे में किसी को पता चला तो फॅमिली पर इसका क्या असर होगा. तुम्हे खुद पर काबू रखना होगा प्यार में कभी दूरियां नहीं होती अगर दिल में पास होने क एहसास हो तो . वैसे भी रोज़ रोज़ मिलने में वो मज़ा नहीं अत जो कुछ दिनों क इंतज़ार क बाद मिलने में अत है. अगर तुम ऐसे hi तड़पोगी तो इससे तुम अपनी स्टडी में भी ध्यान नहीं दे पाओगी जो मैं नहीं चाहता. इस लिए अब है क मुझे विदा करो मैं वडा करता हूँ हम जल्द hi मिलेंगे और फिर मैं तुम्हे सारा दिन अपने साथ रखूँगा जो तुम कहोगी वो हम करेंगे मगर तुम्हे खुद को स्ट्रांग बनाना होगा मुझे वही हसने खेलने वाली नैना चाहिए.

नैना दीदी : तुम जो कहोगे मैं वो करुँगी बस मुझे खुद से जुड़ा मत करना .

अमित : वडा ! मैं कभी तुम्हे खुद से जुड़ा नहीं करूँगा और अब मुझे अपनी प्यारी प्यारी स्माइल दे कर विदा करो वर्ण मुझे ाचा नहीं लगेगा.

नैना दीदी मुस्कुराने लगी और मैंने उनके होंठो पर किश कर क उन्हें इनाम दिया. दीदी ने भी एक बार मुझे किश किया और फिर मुस्कुराती हुई मुझे बहार तक छोड़ने आयी. हम सब से विदा लेकर गाओं की तरफ चल दिए . बाबा मेरे साथ hi बाइक पर बैठ गए .

विजय मां : मैं आज बहुत खुश हूँ क तू आज घर चल रहा है. मैं जनता हूँ तुम माँ बेटे में ुंबन चल रही थी मगर घर जा कर देखना तुम्हारी माँ कैसे तुमसे मिलने क लिए तरस रही है. उसी ने तो मुझे भेजा है इतनी सुबह सुबह . वैसे एक बात मुझे तुमसे पूछनी है ?

अमित : क्या बाबा?

विजय मां : तुमने हमसे झूठ क्यों बोलै?

अमित : मैंने कौन सा झूठ बोलै ?

विजय मां : मैं अजय क साथ पहले तेरे हॉस्टल गया था और वहां से हमें पता चला क तू वहां रहता hi नहीं. तो कहाँ रह रहा है तू शहर में?

बाबा की बात पर मेरी बोलती बंद हो गयी अब मैं फस्स गया था आखिर मैं क्या जवाब दूँ. मगर फिर मैंने सोचा जो भी हो मुझे सच बता hi देना चाहिए क्यूंकि अब छुपाने से कोई फायदा नहीं.

अमित : मुझे माफ़ कर दीजिये बाबा मैंने आपसे ये बात छुपाई . असल में जब मैं हॉस्टल में रहने लगा तो मेरा एक दोस्त है मोहित मेरे साथ hi पड़ता है . छोटे मां भी उससे मिल चुके हैं और बड़ी मौसी भी. वो मुझे अपनी कसम देकर अपने घर ले गया . वो बोलै क मेरे होते तू हॉस्टल में नहीं रहेगा और हॉस्टल में खाना भी ाचा नहीं मिलता इस लिए वो ज़बरदस्ती मुझे अपने घर ले गया. बाबा उसके माता पिता भी बहुत अचे हैं मुझे बिलकुल अपने बेटे की तरह मानते हैं.

विजय मां : ये तो बहुत अछि बात है . कभी मौका मिला मैं उनसे ज़रूर मिलूंगा ऐसे लोग दुनिया में काम hi मिलते हैं.

अमित : बिलकुल बाबा वो भी आपसे मिलना चाहते हैं अंकल आंटी मुझे कई बार कह चुके हैं वो तो मुझे मौसी को भी घर बुलाने को कह रहे थे मगर मैं hi नहीं बुला रहा क्यूंकि अगर मौसी की पता चला क मैं उनके यहाँ रहता हूँ तो वो भी नाराज़ हो जाएँगी.

विजय मां : ाचा किया मगर मैं जल्द hi उनसे मिलने आऊंगा और तेरी माँ को भी साथ लाऊंगा.

हम ऐसे hi बातें करते हुए घर पहुँच गए आज लगभग एक महीने बाद मैं घर आया था. गाओं की मिटटी की खुशबु जैसे सांसों में रास घोल रही थी . हम जैसे hi घर में दाखिल हुए आँगन में बैठी हुई माँ दौड़ते हुए आकर मेरे गले लग गयी और अपनी ममता के स्नेह का लेप लगते हुए मेरे चहरे पर अनेको प्यार और ममता भरे चुम्बन अंकित कर दिए. माँ की आँखों से आंसू लगातार बहते जा रहे थे जिसकी वजह से मेरी भी आँखों में आंसू आ गए . आज कितने दिनों बाद मुझे वो ममता का सुख मिला था जिसे शायद मैं हमेशा क लिए खो चूका था. मेरा मन भर आया और मेरी ऑंखें छलकने लगी.

गौरी ममी: तू कहाँ चला गया था मेरे लाल अपनी माँ को छोड़ कर कहाँ चला गया था. मुझे माफ़ करदे मैंने तुझ पर इतना गुस्सा किया मुझे माफ़ करदे मैं तेरे बिना नहीं रह सकती मेरे लाल मुझे माफ़ करदे . अब मैं तुझे कहीं नहीं जाने दूंगी कहीं नहीं जाने दूंगी.

अमित : आपकी इसमें कोई गलती नहीं है माँ सब गलती मेरी है आप माफ़ी क्यों मांग रही हैं . मैं माफ़ी मांगता हूँ आप मुझे माफ़ कर दीजिये . ऐसा एक भी पल नहीं था जब मुझे आपकी यद् नहीं अति थी. मुझे लगा था मैंने दूसरी बार अपनी माँ को खो दिया . माँ मुझे माफ़ कर दो मैं कभी ऐसा कोई काम नहीं करूँगा क आपको दुःख पहुंचे प्लीज माँ मुझे माफ़ कर दीजिये .

विजय मां : अरे भाई इतने दिनों बात बीटा घर आया है और तुम हो की खुद भी रो रही हो और उसे भी रुका रही हो. देखो शहर का खाना खा खा कर कहीं कमज़ोर तो नहीं हो गया तेरा बीटा . इसकी खातिरदारी करो

गौरी ममी: आप चुप रहिये मुझे मेरे बेटे को जी भर क देखने तो दीजिये इतने दिनों बाद घर आया है.

विजय मां : लो भाई अब तो माँ बेटे क बीच लगता है आज किसी की नहीं चलने वाली बहु तुम hi ज़रा कुछ खाने पीने को ले आओ.

बाबा की बात सुनते hi मैंने नज़र उठा कर देखा तो दीपिका ममी और कामिनी ममी भी आँगन में कड़ी हमें देख रही थी और उनकी ऑंखें भी नाम थी. बाबा की बात सुनते hi दीपिका ममी किचन में जाने लगी तो कामिनी ममी ने उन्हें मन कर दिया और खुद चली गयी पानी लेन क लिए. दीपिका ममी का पेट काफी बहार निकल आया था. कामिनी ममी हमारे लिए पानी ले आयी और माँ ने अपने हाथो से मुझे पानी पिलाया . माँ तो मुझ से अलग hi नहीं हो रही थी और मुझे अपने से चिपकाए hi मेरे सर को पूछ करती हुई मुझे आँगन में पड़ी चारपाई पर ले कर बैठ गयी.

दीपिका ममी आस भरी नज़रों से मुझे देख रही थी मगर मुझसे बात करने की बजाये वो नाराज़गी दिखती हुई अपने कमरे में चली गयी. मैं समझ गया वो मुझसे नाराज़ हैं. तभी कामिनी ममी मेरी एक साइड में आकर बैठ गयी.

कामिनी ममी : तुम्हे क्या हमारी यद् नहीं आती ? आज महीने बाद तेरा चेहरा देख रही हूँ . काम से काम तुम्हे इतना तो ख्याल रखना चाहिए क दीपिका और मैं माँ बनने वाली हैं और तुम हो क ऐसे वक़्त में हमें छोड़ कर वहां बैठे हो.

कामिनी ममी क्या कहना चाहती हैं मैं अछि तरह समझ रहा था. वो मुझे इस बात का एहसास दिलवाना छह रही थी क जब औरत माँ बनने वाली हो तो उसे सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है उसके होने वाले बचे क बाप की. मुझे उनकी बातों में छिपी उनके दिल की हालत समझ में आ रही थी जो कोई और समझ नहीं प् रहा था.

गौरी ममी : अब आ गया है न अब मैं इसे कहीं नहीं जाने दूंगी.

कामिनी ममी : बिलकुल दीदी अब इसे आप कहीं मत जाने देना आप भी तो माँ बनने वाली हैं ऐसे में कोई तो हमारे पास रहना चाहिए और अमित से ज्यादा हमारे ख्याल कौन रख सकता है.

कामिनी ममी की इस बात से एक पल क लिए माँ चुप हो गयी और मुझे भी वो घटना यद् आ गयी जो हमारे बीच घाटी थी. मैंने माँ की तरफ देखा तो वो नज़रें नीची कर क बैठी थी. कामिनी ममी को भी एहसास हो गया क उन्होंने अनजाने में कौन स बात छेड़ दी है.

गौरी ममी : तू यहाँ बैठी क्या कर रही है चल कुछ खाने को लेकर आओ देखा नहीं कितना दुबला हो गया है मेरा बीटा .

मैं माँ की तरफ देखने लगा क कितने आराम से उन्होंने इस बात को ताल दिया. मुझे अपनी तरफ यूँ घूरता देख कर माँ ने कहा

गौरी ममी : ऐसे क्या देख रहा है देख क्या हालत हुई पड़ी है . हॉस्टल में ाचा खाना नहीं मिलता होगा न? मैंने तेरे लिए तेरी पसंद का सब बनाया है.

थोड़ी देर माँ मेरे साथ बातें करती रही और फिर वो भी किचन में चली गयी मेरे लिए कुछ खाने क लिए लेन. तभी मैं उठ कर दीपिका ममी से मिलने उनके कमरे में चला गया. ममी बीएड पर करवट क बल लेती हुई थी और मुझे देखते hi मुँह दूसरी तरफ कर लिया.

अमित : लगता है आप बहुत नाराज़ हैं मुझसे

दीपिका ममी : हँ .....

अमित : तौबा तौबा इतना गुस्सा . वैसे मैंने सुना है ऐसे हालत में प्रेग्नेंट लेडीज को गुस्सा नहीं करना चाहिए

दीपिका ममी : मुझसे बात मत करो , जिसने ये कहा क्या उसने ये नहीं बताया क प्रेग्नेंट लेडीज को ऐसी हालत में सबसे ज्यादा उसके बचे क बाप का साथ चाहिए होता है ? आज शकल दिखा रहे हो महीने बाद . क्या तुम्हे मेरा ख्याल नहीं अत और न hi मुझे फ़ोन करते हो अब आ गए हो मुँह उठा कर उपदेश देने

दीपिका ममी को ऐसे गुस्से में बात करते देख कर मुझे हंसी आ गयी क्यूंकि मैं जनता था वो मुझसे ज्यादा देर नाराज़ नहीं रह सकती बाद थोड़ी देर क लिया अपना गुस्सा निकल रही हैं . मैंने उनका गुस्सा ख़तम करने क लिए आगे बाद कर उनको गले लगा लिया . पहले तो वो मुझे खुद से दूर हटती रही और फिर मेरी पीठ पर हलके हाथो से मुक्के मरते हुए मेरे गले लग गयी और मेरी पीठ पर अपनी बहन कास ली.

दीपिका ममी : रट हुए) तुम्हे पता भी है तुम्हारे बगैर एक एक दिन कैसे गुज़रता है मेरा . हर वक़्त बस यही सोचती रहती थी क पता नहीं तुम क्या कर रहे होंगे क्या क्या सोच रहे होंगे . पता नहीं कभी तुम मेरे पास वापिस आओगे भी या नहीं ? कहीं तुम शहर जाकर मुझे भूल तो नहीं जाओगे ? पता नहीं कैसे कैसे ख्याल एते थे मेरे दिल में. मुझसे तुम इतना दूर क्यों चले गए? आखिर मेरा क्या कसूर है?

अमित : शह्ह्ह्हह्ह शांत शांत हो जाइये . मुझे माफ़ कर दीजिये आप तो जानती हैं माँ और मेरे बीच क्या कुछ हुआ बस उसी वजह से मेरी हिम्मत नहीं होती थी घर आने की. मगर अब सब ठीक है माँ ने शायद मुझे माफ़ कर दिया है अब मैं हर सैटरडे घर वापिस आ जाया करूँगा वापिस आपके पास.

दीपिका ममी ने मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और हम एक दूसरे को किश करने लगे. ये वही रास भरे होंठ थे जिनका रास मैंने सबसे पहले चखा था इन्हीं मदद भरे होठों ने hi मुझे मज़े की दुनिया का ये पहला chapter सिखाया था. मैं और दीपिका ममी एक दूसरे क होंठ चूसते हम भूल गए क हम घर में हैं और कोई भी यहाँ आ सकता है. हमारी किश किसी की आवाज़ से ख़तम हुई.

‘ आते hi शुरू हो गए तुम दोनों, कुछ तो शर्म करो सब घर पर hi हैं और तुम ( अमित ) तुम्हे बस छोटी hi दिखाई देती है . क्या मैं कुछ नहीं ?’

ये आवाज़ कामिनी ममी की थी जो दरवाज़े पर अपनी कमर पर हाथ रखे बड़ी ऐडा से बोलती हुई हमारी खिंचाई कर रही थी .

मैंने दीपिका ममी को छोड़ा और कामिनी ममी क पास जा कर उनके सर को पकड़ कर उनके होंठ चूसने शुरू कर दिए. वो मुझे खुद से दूर हटाने लगी . मैंने भी जल्दी hi किश ख़तम कर दी क कहीं कोई और न आ जाये.

दीपिका ममी : क्यों हो गयी न बोलती बंद ? अब बोलिये क्या बोल रही थी.

कामिनी ममी अपने होंठो पर हाथ रख कर शर्माने लग गयी.

दीपिका ममी : आये हाय देखो तो ज़रा कैसे शर्म आ रही है अब बन्नो को. आज तो मियां जी आ गए हैं मैं तो कुछ कर नहीं सकती लगता है आज आपकी hi टाँगे हवा में झूलेंगी. है है है

दीपिका ममी क उस मज़ाक से कामिनी ममी कमरे से बहार भाग गयी. दीपिका ममी उठ कर मेरे पास आयी और मुझे पीछे से गले लगा लिया.

दीपिका ममी: अब तुम्हे मेरा ख्याल रखना चाहिए . तुम्हे पता है डॉ ने कहा क अगले महीने में डिलीवरी हो सकती है.

मैंने पलट कर दीपिका ममी को गले लगा लिया. और उनका माथा चुम कर घुटनो पर बैठ गया. दीपिका ममी का पेट पूरा बहार को निकला हुआ था. मैंने उनके पेट पर किश किया.

अमित : चिंता मत करो जब तुम अपनी ऑंखें खोलोगे तो सबसे पहले मुझे hi अपने सामने पाओगे .

मेरी इस बात पर दीपिका ममी को बड़ा प्यार आया और वो मेरे सर पर हाथ रख कर मुझे अपने साथ लगाने लगी. उसके बाद मैं हम सब ने साथ बैठ कर खाना खाया. आज माँ क हाथो से बना खाना खा कर मज़ा आ गया . जाने कितनी hi देर बाद मैंने आज माँ क हाथ का खाना खाया था और उन्होंने भी मुझे दबा कर खिलाया. मुझे मेरी माँ वापिस मिल गयी मैं इसी बात से खुश था . खाना खाने क बाद बाबा बहार जाने लगे तो मैं उनके साथ hi बहार को निकल पड़ा . माँ मुझे रोकती रही मगर मैं उन्हें थोड़ी देर में आने का कह कर बहार निकल गया. बाबा शायद गाओं में hi किसी काम से निकले थे और मैं भी उनके साथ हो लिया.

विजय मां : तुम कहाँ जा रहे हो ? अपनी माँ क साथ बैठो और उससे बातें करो.

अमित : बाबा मुझे आपसे बहुत ज़रूरी बात करनी है.

विजय मां : बात तो घर में भी हो सकती है बीटा फिर बहार आकर क्यों बात कर रहे हो

अमित : असल में बाबा ये बात घर में नहीं हो सकती . मुझे पता है घर में कोई ये बात नहीं करने देगा मगर मुहे ये हर हल में जानना है.

विजय मां : ऐसी कौन स बात है और क्या जानना है तुम्हे?



अमित : बाबा जब से मैं शहर गया हूँ मुझे हर रत अपने माँ बाप सपने में नज़र एते हैं . मैं उनसे बात करने की कोशिश करता हूँ मगर वो मुझसे बात नहीं करते. प्लीज बाबा मुझे मेरे माँ बाप क बारे में जानना है. मैं जनता हूँ आपने hi सबको मन किया है इसी लिए कोई मुझे उनके बारे में नहीं बताता. प्लीज बाबा मुझे उनके बारे में बताइये मैं ये और बर्दाश्त नहीं कर प् रहा . प्लीज बाबा अगर आप मुझे प्यार जरते हैं तो मुझे उनके बारे में बताइये.
 
अपडेट 83



विजय : लगता है तूने अभी तक अपनी माँ की बातों को दिल से नहीं निकला .

अमित :नहीं बाबा वो बात नहीं है मैं तो माँ की किसी बात पर गुस्सा नहीं करता

विजय : हमारे hi प्यार में कोई कमी रह गयी जो तुझे आज अपने माँ बाप की यद् आने लगी है . मैंने तो सोचा था क तुम्हे कभी उनकी कमी महसूस नहीं होने दूंगा मगर मैं फ़ैल हो गया

अमित : आप ऐसी बातें क्यों कर रहे हैं बाबा . आपने जितना प्यार मुझे दिया है इतना तो शायद मेरे अपने माँ बाप भी न दे पते . आज तक मुझे कभी ऐसा लगा hi नहीं क मैं किसी और की औलाद हूँ मगर क्या करूँ बार बार मुझे ऐसे महसूस होता है जैसे मैं अपने जनम देने वाले माँ बाप क साथ अन्याय कर रहा हूँ. मैंने उनके लिए कभी कुछ नहीं किया न कभी उन्हें यद् किया शायद इसी लिए वो मेरे सपनो में आते हैं . क्या आप नहीं चाहते क मैं उन्हें यद् करूँ क्या आप नहीं चाहते मैं उनके लिए कुछ करूँ? क्या मुझे अपने जनम दाताओं को भूल जाना चाहिए? क्या इससे उनकी आत्माओं को दुःख नहीं होगा? वो मुझे आसमान से जब देखते होंगे तो क्या सोचते होंगे की मैंने उन्हें भुला दिया .

विजय मां: ऐसा मत कहो बीटा वो तुमसे बहुत प्यार करते थे वो कभी तुमसे नाराज़ नहीं हो सकते. तुम सही कहते हो तुम उनके बारे में पता होना चाहिए . हम अपनी खुदगर्ज़ी में ये भूल गए क तुम्हारे माँ बाप क प्रति भी तुम्हारा कोई फ़र्ज़ है. मैं आज तुम्हे उनके बारे में बताऊंगा मगर वडा करो उसके बाद तुम हमे खुद से दूर नहीं करोगे .

अमित : बाबा ये आप कैसी बातें कर रहे हैं क्या आपको ये लगता है क मैं आपको छोड़ कर कहीं और जाऊंगा? अगर आपको ऐसा लगता है तो आप मत बताइये मैं इंतज़ार कर लूंगा.

विजय मां : मेरे बेटे

बाबा ने मुझे कास क गले लगा लिया

विजय मां : आज मैं तुझे तेरे माँ बाप क बारे में बताता हूँ चल मेरे साथ.

बाबा मुझे अपने साथ खेतों में ले आये. अजय मां भी खेतों में थे मगर बाबा ने उन्हें कोई काम बता कर भेज दिया.

विजय मां : मुझे माफ़ करना बेटे मैं और गौरी तुझे अपना hi बीटा मन कर तुमसे तुम्हारे माँ बाप की बात छुपा रहे थे क कहीं तुम हमसे दूर न हो जाओ मगर मुझे लगता है तुम्हे भी हक़ उनके बारे में जानने का. अब तुम बड़े हो गए और समझदार भी इस लिए आज मैं तुम्हे सब बाटूंगा .

तुम्हारी माँ दामिनी और तुम्हारी मौसी दिव्या दोनों जुड़वाँ बहने थी . दोनों सबसे छोटी होने की वजह से सब की लाड़ली थी और नटखट भी. पिता जी तो उन्दोनो पर जान छिड़कते थे अगर माँ कभी उन्हें दांत भी देती तो वो माँ पर भी बरस पड़ते थे . और हमारी तो किसी की हिम्मत hi नहीं थी पिता जी की दोनों लाड़लियों को कुछ कहने की. बचपन से दोनों शरारती थी मगर सच कहूं तो हमारे घर की रौनक थी दोनों. दिव्या और दामिनी दोनों जैसे दो जिस्म एक जान थी. देखने वाले को तो पता hi नहीं चलता था क दिव्या कौन है और दामिनी कौन है. दिनों की जान एक दूसरे में बस्ती थी. सारा दिन शरारत करना सबको तंग करना और कभी दन्त पड़े तो पिता जी क पीछे छिप जाना बस ऐसी hi थी दोनों. तुमने कई बार सुना होगा तुम्हारी ऑंखें तुम्हारी माँ जैसी हैं ये बिलकुल सच है जब कभी शीशे में अपनी ऑंखें देखो तो एहसास करना क ये तुम्हारी माँ की ऑंखें हैं और वो आज भी तुम्हारी आँखों से सबको देखती है. बचपन से लेकर जवानी तक दिव्या और दामिनी दोनों एक साथ रही और जब तुम्हारी माँ की शादी हुई तो दिव्या जैसे टूट स गयी थी वो कभी दामिनी से अलग नहीं होना चाहती थी मगर एक दिन तो ये होना hi था.

तुम्हारे पापा का नाम पवन था और वो भी बहुत अचे थे . सबकी इज़्ज़त करते थे और सबको प्यार करते थे . तुम्हारी नेचर तुम्हारे माँ बाप पर hi गयी है और तुम्हारी शकल काफी हद तक तुम्हारे पिता जैसी है. दामिनी की शादी क बाद तुम्हारे पिता ने hi दिव्या क लिए रिश्ता ढून्ढ था . तुम्हारे मौसा उनके hi दूर क रिश्तेदार हैं. दिव्या इस वजह से मन गयी क चलो इसी बहाने से वो दामिनी क पास रहेगी क्यूंकि दोनों एक hi शहर में रहते थे.

अमित : बाबा क्या मेरे पिता जी क कोई भाई बेहेन नहीं थे ? मेरे दादा दादी या कोई और?

विजय मां: तुम्हारे पिता 4 भाई बहिन थे . तुम्हारे दादा ने 2 शादियां की थी पहली बीवी से उनके 2 बेटे थे और दूसरी से एक बीटा एक बेटी . तुम्हारे पिता उनकी दूसरी बीवी की संतान थे इस लिए उनके बड़े भाई उनसे प्यार नहीं करते थे और उनको सौतेला होने की वजह से नफरत करते थे. तुम्हारे दादा जी एक अमीर व्यक्ति थे . तुम्हारे पिता की शादी से पहले hi उनकी मौत हो गयी थी. और जब तुम्हारे पिता की शादी हुई तो बाद में उनके बड़े भाइयों ने उन्हें घर से बेदखल कर दिया. अभी शादी की मेहँदी भी तुम्हारी माँ क हाथो से नहीं उतरी थी क उन्हें घर से निकल दिया गया. पिता जी और मैं गए थे इस बात क लिए उन लोगों से झगड़ा करने मगर तुम्हारे पिता एक खुद्दार इंसान थे उन्होंने हमें ऐसा नहीं करने दिया और ये कहा क मुझे दौलत नहीं चाहिए अगर मैं काबिल हूँ तो खुद कमा सकता हूँ. पिता जी ने जब उन्हें अपने साथ घर चलने को कहा तो उन्होंने ये कहते हुए मन कर दिया क ससुराल में रहना दामाद को शोभा नहीं देता और वो अपने किराये क माकन में रहने लगे . दामिनी ने भी तुम्हारे पिता का hi साथ दिया और उसने भी मुश्किल वक़्त में उनका साथ नहीं छोड़ा. पिता जी ने कई बार मदद करने की कोशिश की मगर हर बार तुम्हारे पिता इंकार कर देते थे. तुम्हारे पिता बहुत मेहनती और तेज़ दिमाग वाले इंसान थे. उन्होंने अपनी सूझबूझ से कर्ज़ा ले कर अपना कारोबार शुरू किया और देखते hi देखते वो कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते गए. उधर तुम्हारे पिता क सौतेले भाई तुम्हारे दादा का कारोबार संभल नहीं पाए और जल्द hi वो डूब गए. जब वो करज़ई हो गए तो फिर तुम्हारे बाप क पास आये रट हुए माफ़ी मांगने . दामिनी तो चाहती थी क पवन उनकी मदद न करे और हमने भी रोका मगर तुम्हारे पिता पता नहीं किस मिटटी क बने थे जो इतना बुरा करने पर भी अपने भाइयों की मदद करने को राज़ी हो गए और उन्हें अपने पास काम पर रख लिया और रहने को घर भी दिया मगर वो लोग तो आस्तीन क सानो hi निकले तुम्हारे माता पिता क मरते hi साडी जायदाद सारा कारोबार हड़प लिया यहाँ तक की तुम्हारे माँ बाप की मौत पर भी कोई नहीं आया रोने बस एक बार शकल दिखा कर चले गए शमशान में अंतिम संस्कार पर. मेरा बस चले तो जान से मर दूँ उन लोगो को नरक में जायेंगे वो दोनों. हम लोगों ने भी कभी उनसे इस बारे में बात करने की कोशिश नहीं की क्यूंकि हमने भी अपने माँ बाप खो दिए थे और दुखों का पहाड़ हम पर टूटा था उन लोगों को तो पहले hi कोई सरोकार नहीं था तुम्हारे पिता से.

अमित : पर उनकी मौत हुई कैसे से थी ?

विजय मां: उस दिन तुम्हारा जन्म दिन था और माँ बाबू जी एक दूँ पहले hi तुम लोगों क पास चले गए थे. दामिनी ने मंदिर में पूजा रखवाई थी तुम्हारी लम्बी उम्र क लिए. शाम को घर पर पार्टी थी . हम सब भी जाने वाले थे मगर मुझे पिता जी ने मंदिर में पहले आने को बोलै था क्यूंकि तुम्हारे लिए उन्होंने सोने की चैन बनवायी थो जो मुझे लेन को बोलै था मंदिर में पूजा क वक़्त तुम्हे पहनाने क लिए. इस लिए मैं गौरी को लेकर पहले hi मंदिर पहुँच गया था. मगर वो लोग जब 2 घंटे बाद भी मंदिर नहीं पहुंचे तो मुझे चिंता होने लगी . मैं गौरी को वहीँ मंदिर में छोड़ कर तुम्हारे घर की तरफ निकला तो रस्ते में एक कार जल रही थी . मैंने गौर किया तो वो कार तुम्हारे पिता की hi थी लोग आसपास उस आग को बुझाने की कोशिश कर रहे थे . मैं तो ये दर्दनाक नज़ारा देख कर hi अपने होशी हवास खो बैठा . मैं दौड़ कर गाड़ी क पास जाने लगा तो लोगों ने मुझे दबोच लिया. मैं चिल्लाता रहा मगर किसी ने मुझे उनके पास नहीं जाने दिया. किसी को पता नहीं था क क्या हुआ है क्यों की उस सड़क पर आसपास कोई घर या दुकान नहीं थी . मैं बदहवास अपने सामने अपनों को यूँ जलते हुए देख रहा था क एक शख्स ने मेरे हाथ में तुम्हे सौंप दिया और कहा क एक ट्रक ने गाडी को टक्कर मर दी थी जिससे गाड़ी में आग लग गयी और तेरे माता पिता क साथ तेरे नाना नानी भी उस एक्सीडेंट में मरे गए. वो हादसा जब भी यद् करता हूँ रूह कांप जाती है ऐसा लगता है जैसे वो मंज़र अब भी मेरी आँखों क सामने हो .

अमित : रट हुए) शायद सब सही कहते हैं क मैं hi मनहूस हूँ जो मेरे जन्मदिन पर hi सब एक साथ भगवन को प्यारे हो गए.

विजय मां: ऐसा मत कहो मेरे बेटे कौन कहता है तुम मनहूस हो? तुम तो मेरी लाड़ली बहिन की अमानत हो उसकी आखिरी निशानी हो , हमारे घर की रौनक हो तुम. पता है जब भी मैं तुम लोगों से मिलने जाता या तुम्हारी माँ हमसे मिलने अति तो हमेशा वो तुम्हे मेरी गॉड में दाल देती थी और ये कहती थी क ये आपका hi बीटा है भैया . वो कहती क उसकी जो भी गली संतान होगी वो उसे मेरी झोली में दाल देगी क्यूंकि गौरी की सुनी गॉड उसे अछि नहीं लगती थी. मगर किसे पैट था वो हमेशा क लिए तुझे मेरी गॉड में दाल कर चली जाएगी.

अमित : अगर सब उस एक्सीडेंट में मर गए थो मैं कैसे बच गया ?

विजय मां : उस आदमी ने बताया था क तुम्हे तुम्हारी माँ ने अपनी गॉड में छुपाया हुआ था जिस वजह से तुम बच गए.

अमित : बाबा अपने मेरी बुआ क बारे में नहीं बताया ?

विजय मां : उसके बारे में न hi पूछो तो ाचा है. तुम्हारे बाप क सौतेले भाइयों का तो सबको पता था क वो कैसे हैं इस लिए उन्होंने जो किया उससे किसी को हैरानी नहीं हुई मगर तुम्हारी बुआ वो तो सगी बहिन थी . सगी छोटी बहिन जिस ओर पवन अपनी जान छिड़कता था. उसे बड़े भाई क साथ माँ बाप का प्यार भी देता था . उसकी हर ख्वाहिश पूरी करता था और दामिनी ने भी हमेशा उसे प्यार दिया एक बहिन एक सहेली एक माँ की तरह . और जानते हो उसने क्या किया? आखिरी बार देखने तक नहीं आयी वो अपने उस भाई को जो उस पर जान वार्ता था. और तो और कभी ये जानने की कोशिश भी नहीं की कोई ज़िंदा भी बचा या नहीं . एक बार भी हमसे मिलने की कोशिश नहीं की उसने. उसे तो मैं कभी माफ़ नहीं कर सकता . और तुमसे भी हाथ जोड़ कर विनती करता हूँ कभी भूले से भी उन घटिया लोगों को ढूंढ़ने की कोशिश मत करना. उन लोगों क लिए तो तुम पहले hi मर चुके हो बाकि तुम खुद समझदार हो अचे बुरे की पहचान कर सकते हो.

अपने माता पिता क बारे में जानकर मेरा दिल दर्द से भर गया था. कितनी दर्दनाक मौत मिली थी उनको वो भी मेरे जन्म दिन पर . एक hi झटके में हस्ता खेलता परिवार ख़तम हो गया. और मैं जिन अपनों क बारे में जानना चाहता था आज उनकी काली सचाई जानकर मेरे दिल में उन लोगों क प्रति नफरत भर गयी थी जिन्हे मैंने कभी देखा भी नहीं और न कभी देखना चाहूंगा. मेरी ऑंखें भीग गयी थी मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से रोने को कर रहा था. मैं अपने माँ बाप को देखना चाहता था काश क वो ज़िंदा होते काश क भगवन एक बार मुझे उनसे मिला दे काश मैं एक बार अपने माँ बाप को गले लगा सकूँ . मेरी आँखों से आंसू बहते जा रहे थे मेरी हालत देख कर बाबा ने मुझे गले लगा लिया.

विजय मां : खुद को सम्भालो मेरे बेटे खुद को सम्भालो . मैं इस लिए नहीं चाहता था क तुम्हे कभी उनके बारे में पता चले . ज़रा सोच तुझे रोटा हुआ देख कर क्या तुम्हारे माँ बाप को ाचा लग रहा होगा? दामिनी तो यही कहेगी न क मैंने उसके बेटे को रुला दिया.

अमित : मुझे एक बार मेरे माँ से मिला दो बाबा मुझे एक बार पिता जी को देखना है . बाबा भगवन क लिए मुझे एक बार उनसे मिला दो

विजय बाबा : बीटा जो चले गए अब उनसे कोई कैसे मिल सकता है? हम चाहे कितनी भी कोशिश करे उन तक तो हमारी आवाज़ भी नहीं पहुँच सकती. पर इतना यकीन रखो मेरे बेटे तुम अपने माता पिता की जीते जगती तस्वीर हो वो दोनों तुम्हारे अंदर hi हैं क्यूंकि तुम उनका hi अंश हो. इस लिए उन्हें अपने अंदर hi महसूस करो वो कहीं बहार नहीं हैं.

अमित : बाबा आपके पास उनकी तस्वीरें तो होगी न आप मुझे वो तो दिखा सकते हैं.

विजय मां: हमारे पास कुछ भी नहीं है बीटा. तुम्हारी माँ की हर एक यद् हर तस्वीर दिव्या अपने साथ ले गयी थी. दामिनी क जाने क बाद दिव्या की दुनिया जैसे उजाड़ गयी थी क्यूंकि दामिनी hi उसके लिए सब कुछ थी. इस लिए वो इस घर से दामिनी की हर एक तस्वीर हर एक यद् अपने पास ले गयी . हमारे पास क्या तुम्हे किसी क पास भी दामिनी की कोई तस्वीर कोई निशानी नहीं मिलेगी. तुम्हे वो सब दिव्या से hi मिल सकता है.

अमित : और वो तो मुझे कुछ देंगी नहीं वो टी मुझसे नफरत करती हैं. वो तो मेरी शकल तक नहीं देखना चाहती.

विजय मां : तुम दिव्या को नहीं जानते बीटा वो बहुत नाज़ुक है. दामिनी hi उसके लिए सब कुछ थी इस लिए उसके जाने क बाद दिव्या की दुनिया hi बदल गयी. उसने तो जैसे हसना hi छोड़ दिया. जिसकी हंसी कभी घर की रौनक हुआ करती थी अब वही हंसी शायद उसकी परछाई को भी नहीं सुनने को मिलती होगी. तुम नफरत की बात करते हो वो तो तुम पर जान छिड़कती थी . तुम नहीं जानते दिव्या हमेशा दामिनी से कहती थी क अमित उसका बीटा है और दामिनी ये कहती थी क राधा उसकी बेटी है. दामिनी कहती थी क वो राधा को अपने घर ले जाएगी जब वो बड़ी होगी तो दिव्या कहती थी तुम मेरी बेटी को अपना बना लेना मैं तुम्हारे बेटे को अपना बना लुंगी. दामिनी की अचानक मौत से वो टूट गयी थी उसके बाद तो जैसे उसने जीना hi छोड़ hi दिया था बीटा. वो तुमसे नफरत नहीं करती सिर्फ उसके दिल पर दामिनी की मौत का गम ज़हर बन कर जैम गया है जिसने तुम्हारे लिए उसके प्यार को कहीं दबा दिया है. तुम मनो या न मनो मुझे ऐसा लगता है क दिव्या को अगर कोई वापिस ला सकता है तो वो तुम hi हो क्यूंकि तुम दामिनी दामिनी की आखिरी निशानी हो सिर्फ तुम में hi दामिनी ज़िंदा है.

हम दोनों बहुत देर स बातें कर रहे थे इतने में अजय मां भी हमें आते हुए दिखाई दिए तो बाबा ने मुझे खुद को सँभालने को कहा. मैंने भी अपनी हालत ठीक की और बाबा क साथ वापिस घर आ गया. घर आ कर सब ने मिल कर खाना खाया . माँ प्यार से मुझे अपने हाथो से खाना खिला रही थी और उनका ये प्यार देख कर कुछ पल क लिए मैं अपने सब गम भूल गया. खाना खाने क बाद माँ मेरे साथ hi मेरे कमरे में आ गयी और मुझे अपनी गॉड में लिटा कर मुझसे मेरे कॉलेज क बारे में बातें करने लगी .

अमित : माँ मुझे आपसे कुछ कहना है

गौरी ममी : बोलो बीटा इसमें पूछने वाली क्या बात है

अमित : मैंने आपसे एक बात छुपाई है

गौरी ममी : कौन स बात

अमित : माँ मैं हॉस्टल में नहीं रहता

गौरी ममी : तो कहाँ रहता है तू?

अमित : माँ वो मेरा एक दोस्त है मोहित बहुत ाचा है वो जब उसे पता चला क मैं हॉस्टल में रहने वाला हूँ तो मुझे अपनी कसम देकर अपने घर ले गया. अंकल आंटी भी बहुत अचे हैं वो मुझे अपने बेटे की तरह hi मानते हैं .

गौरी ममी : तुम अपनी मुसिओं क पास भी तो रह सकते थे.

अमित : माँ मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता था वो तो मोहित मुझे अपनी कसम देकर ले गया. वैसे मैं गया था रजनी मौसी रीता मौसी और दिव्या मौसी क घर

गौरी ममी : मुझे सब पता है तेरी हैट बात की खबर रखती थी मैं. तू कब किसके घर गया. क्या तुमने किसी को बताया तू कहाँ रहता है?

अमित : नहीं बस आप और बाबा hi जानते हैं . मैं आपसे सच छुपाना नहीं चाहता था इस लिए सब बता दिया.

गौरी ममी: लगता है भले लोग हैं जिन्होंने तुम्हे अपने पास बेटे की तरह रखा हुआ है . मैं उनसे मिलना चाहूंगी .

अमित : तो चलिए आप कल hi मेरे साथ शहर मैं आपको उनसे मिलवा देता हूँ वो भी कितने खुश होंगे आपसे मिल कर. आंटी तो कितनी बार कह चुकी हैं आपसे मिलने को.

गौरी ममी: रुक जा कुछ दिन राधा का जन्मदिन आ रहा है मैं और तेरे बाबा दोनों आएंगे तब दिव्या क घर फिर मिला देना.

अमित : राधा का जन्मदिन आ गया मुझे तो यद् hi नहीं था. ाचा किया अपने यद् दिला दिया.

गौरी ममी : बुधवार को है यद् रखना और तुम भी आ जाना दिव्या क घर.

अमित : मैं ज़रूर आऊंगा.

हम बातें कर रहे थे क कामिनी ममी कमरे में आ गयी मगर मेरे साथ माँ को देख कर जैसे उनको झटका लगा और उनकी आँखों में मायूसी नज़र आने लगी.

गौरी ममी : अरे कामिनी तू इस वक़्त यहाँ?

कामिनी ममी : वो दीदी मैं पूछने आयी थी क क्या अमित दूध पियेगा? मगर आप यहाँ?

गौरी ममी : मैं आज अपने बेटे क साथ जी भर क बातें करना चाहती हूँ. आज मैं यही सोऊंगी.

कामिनी ममी : ठीक है मैं चलती हूँ.

मैं जनता था ममी इस वक़्त किस लिए आयी हैं . एक महीने से वो प्यार क लिए तड़प रही होंगी और कल सुबह मैं वापिस चला जाऊंगा तो ऐसी हालत में वो फिर तरसती रह जाएँगी. मुझे उनपर तरस आ रहा था इस लिए मैंने उन्हें रोक लिया.

अमित : ममी जी कितने दिन हो गए आपकी प्यार भरी बातें सुने इस लिए आज आप भी हमारे साथ hi सो जाइये बातें करते हुए साथ में सो जायेंगे.

कामिनी ममी : मैं कैसे ... माँ बेटे क बीच मैं क्या करुँगी?

गौरी ममी: अमित ने कहा न तो चुप चाप इधर आकर बैठ जा तू भी. क्या तू इसकी कुछ नहीं लगती? वैसे तो सारा दिन इसका नाम लेती रहती है अब सामने है तो भाग रही है . चल आजा यहीं बैठ जा कुछ नहीं कहेगा अजय.

माँ की बात सुन कर कामिनी ममी भी बीएड पर हमारे पास आकर बैठ गयी तो मैंने माँ की गॉड से सर उठा कर उनकी गॉड में रख लिया.

गौरी ममी : देखा कैसे तेरे आते hi मुझे छोड़ कर तेरी गॉड में जा लेता. बड़ा तेज़ है ये भी तुझे भी लपेट रहा है अपने प्या में.

कामिनी ममी : ये तो पहले hi मुझे लपेट चूका है .

गौरी ममी : क्या कहा?

कामिनी ममी : मतलब ये पहले hi मुझे अपने प्यार में लपेट चूका है . ये इतना प्यारा है क कोई इससे दूर रह hi नहीं सकता.

गौरी ममी : सही कहा तूने . तुम बातें करो मैं अभी दूध ले कर आयी

इतना कह कर माँ बहार निकल गयी तो मैंने कामिनी ममी का सर झुका कर उनकी गॉड में लेते हुए उनके होंठो पर किश करने लगा. कामिनी ममी मेरे प्यार करने से खुश हो रही थी. थोड़ी देर में hi माँ दूध ले आयी और मैंने पि लिया. उसके बाद माँ नींद आने तक बातें करती रही मैं आराम से लेता उनकी बातें सुनता रहा और पता नहीं कब मुझे भी नींद आ गयी.

मैं आराम से सोया पड़ा था क किसी क हिलने से मेरी जग खुली. मैंने देख माँ मेरी बगल में सोई पड़ी थी और कामिनी ममी मुझे हिला कर जगा रही थी . मैंने एक बार अछि तरह माँ को देखा और बिना कोई आवाज़ किये बिस्टेर से उतर गया. कमरे में जीरो वाट का बल्ब जल रहा था. मैं कामिनी ममी क साथ कमरे से निकल कर दूसरे कमरे में चला गया और अंदर जाते hi कामिनी ममी को किश करने लगा. कामिनी ममी भी कितने दिनों से प्यासी थी इसी लिए वो इस वक़्त तक जग कर वेट कर रही थी. मेरे किश करते hi वो भी मुझ पर टूट पड़ी . मैं किश करता हुआ साथ में उनके दूध मसल रहा था जिससे कामिनी ममी की गर्मी बढ़ती जा रही थी.

कामिनी ममी : अब जल्दी करो और बर्दाश्त नहीं हो रहा कितना अरसा हो गया है तुमने मुझे प्यार नहीं किया . जल्दी करो मेरी प्यास बुझा दो

मैंने भी देर करना उचित नहीं समझा क्यूंकि माँ मेरे बिस्टेर पर hi सो रही थी कहीं उनकी आँख खुल गयी और मुझे बिस्टेर पर न पाकर वो मुझे ढूंढ़ने निकल पड़ेंगी. मैंने जल्दी से ममी को घोड़ी बनाया और उनकी सदी कमर तक उठा कर उनकी पेंटी को उतर दिया . मैंने उनकी छूट में उंगली कर क चेक किया तो देखा उनकी छूट से पानी की नदी बह रही थी . जिससे पता चल रहा था क वो कब से मुझे प्यार करने का सोच सोच कर तरस रही होंगी. मैंने जल्दी से अपना लोअर और अंडरवियर झटके से नीचे किया और अपना काइंड जो पहले hi खड़ा हो चूका था उनकी छूट पर सेट किया और उनकी कमर पकड़ कर एक धक्का मर दिया. मेरा आधा लैंड छूट में घुस गया . लैंड अंदर जाते hi ममी ने मज़े से सिसकारी ली. मैंने लैंड थोड़ा बहार निकला और एक तेज़ धक्का मर कर पूरा लैंड जड़ तक अंदर घुसा दिया . ममी एक डैम आगे को गिरने को हुई मगर मैंने उन्हें थम लिया. ममी क पाऊँ की एड़ियां उठ गयी थी और शरीर कम्पनी लगा था. शायद इतने दिनों बाद चुदाई होने की वजह से छूट मेरे लैंड का आकर भूल गयी थी.

कामिनी ममी : आआह्ह्हह्ह्ह्ह धीरे आराम से कर कहीं मेरे मुँह से चीख निकल गयी तो दीदी जग जाएँगी आअह्ह्ह्हह कक्कक्स

मैंने उनकी बात मानते हुए लैंड आधे से ज्यादा बहार निकल लिए और फिर धीरे धीरे धक्के मरने लगा . मैं इस बात का पूरा ध्यान रख रहा था क मैं आराम से धक्के मरुँ और पूरा लैंड अंदर न घूसों. थोड़ी hi देर में ममी अपनी कमर को पीछे धकेलने लगी और मुझे तेज़ धक्के मरने को कहने लगी . मैंने उनके लटकते आम खींचते हुए तेज़ धक्के मरने शुरू कर दिए . ममी मस्ती में आ गयी थी और तेज़ सिसकियाँ लेती हुई चुदाई का मज़ा लेने लगी. छूट पर्याप्त मात्रा में गीली होने की वजह से फच फच .... की आवाज़ें कमरे में गूंजने लगी थी. ममी जायदा देर खुद को रोक नहीं पायी और झटके कहते हुए उनकी छूट ने पानी की बरसात कर दी. ममी की टंगे कम्पनी लगी थी इस लिए वो निचे गिरने को हुई तो मैंने उन्हें पकड़ कर बिस्तर पर चित लेता दिया. मैंने ममी की कमर बीएड क किनारे तक खींच कर घुटने मोड़ते हुए उनकी टंगे हवा में उठा कर अपना लैंड एक धक्के में hi जड़ तक अंदर घुसा दिया. कामिनी ममी ने कामुक आआअह्ह्ह्ह भरी और मैंने अपनी मशीन शुरू कर दी. मैं अपना पानी निकलने तक कामिनी ममी की इसी पोजीशन में चुदाई करता रहा. हम दोनों का पानी इस बार एक साथ निकला और मैं ममी क ऊपर hi देह गया.

कामिनी ममी : आअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स उम्म्म्म क्यों तड़पते हो इतना क्या तुम्हे मेरी यद् नहीं अति ? इतने दिन मुझसे इंतज़ार नहीं होता या मुझे भी अपने साथ ले जाओ

अमित : आपको तो पता है मैं माँ की नाराज़गी की वजह से नहीं अत था मगर अब आपको शिकायत का मौका नहीं दूंगा.

कामिनी ममी : सच कहती हूँ तुमसे दूर रहना मुझसे बर्दाश्त नहीं होता है . जैसे जैसे दिन हो रहे हैं पता नहीं क्यों मुझे हर वक़्त बस तुम्हारा hi इंतज़ार रहता है.

अमित : मैं समझ सकता हूँ ये सब इस वजह से हो रहा है ( मैंने ममी क पेट को सहलाया ) इस कंडीशन में ऐसा hi होता है. आप चिंता मत कीजिये अब से मैं हर शनिवार शाम को आपको घर पर hi मिला करूँगा. अब उठिये कहीं माँ जग गयी तो परेशां होगी.

मैंने ममी क ऊपर से उठ कर अपने कपडे ठीक किये और वापिस माँ क पास आ कर सो गया . कामिनी ममी अपने कमरे में चली गयी.

सुबह जब मैं उठा तो 6 बज चुके थे . मैं जल्दी से नाहा कर तैयार हो गया क्यूंकि मुझे कॉलेज जाना था. मैं तैयार हो कर नीचे आया तो माँ मुझे इतनी जल्दी तैयार देख कर पूछने लगी

गौरी ममी : इतनी सुबह कहाँ जा रहा है?

अमित : माँ भूल गयी आज कॉलेज जाना है.

गौरी ममी : पहले hi इतने दिनों बाद घर आया है और एते hi वापिस जाने की तयारी कर ली क्या तू मेरे पास नहीं रुक सकता?

अमित : आप कहती हैं तो कॉलेज नहीं जाता लो बैठ गया मैं आपके पास जब तक आप इज़ाज़त नहीं देंगी मैं कहीं नहीं जाऊंगा.

विजय मां : अरे भाग्यवान क्या इसे पल्लू से hi बाँध कर रखोगी अब ? कॉलेज नहीं जायेगा तो पड़ेगा कैसे ? वैसे भी आज की इसकी सुबह की प्रैक्टिस तो रह hi गयी होगी.

बाबा हम माँ बेटे की बात सुन कर अपने कमरे से ये बोलते हुए निकले

गौरी ममी : आप तो मेरे बेटे को मर कुटाई में लगा क रखना चाहते हो किसी को इसकी परवाह नहीं है अगर कहीं चोट वोट लग गयी तो ?

विजय मां : मेरा बीटा शेर है शेर इसे क्या हो सकता है तुम्हे नहीं देखा मैंने देखा है किस तरह इसने अखाड़े में उस पहलवान को उठा के पटक दिया था जो इससे उम्र और तजुरबे में भी बड़ा था.

गौरी ममी : अपनी बातें अपने पस hi रखिये मैं इसे नहीं भेजूंगी कहीं

विजय मां : करलो भाई मर्ज़ी बाद में मुझे मत कहना जब इसे कॉलेज वालों ने निकल दिया तो.

गौरी ममी : ठीक है ठीक है . चल बीटा पहले नाश्ता कर के फिर कहीं जाना. और कह देती हूँ बिना खाये बहार कदम भी रखा तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा देर होती है तो हो जाये

इतना कह कर माँ किचन में चली गयी. मैं माँ क इस प्यार पर खुश हो रहा था . कितना मिस किया था मैंने माँ को जब से वो मुझसे नाराज़ हुई थी उस यात्रा पर घाटी घटना क बाद . एक बार फिर वो मुझसे यद् आ गया जो मैं यद् नहीं करना चाहता था.

विजय मां : अब कहीं जा कर ये अपने पहले वाले रूप में वापिस आयी है वर्ण ये कहीं खो सी गयी थी . हर वक़्त बस चुप चाप सी रहने लगी थी. तुम hi इसकी ख़ुशी का असली कारन हो इसका हमेशा ख्याल रखा करो.

अमित : मैं हमेशा माँ का ख्याल रखूँगा बाबा

उसके बाद माँ ने मुझे जल्दी से नाश्ता बना कर दिया और मैं उनके पाऊँ छू कर बाबा से आशीर्वाद लेकर कामिनी ममी और दीपिका ममी से मिल कर कॉलेज क लिए निकल गया. अजय मां खेतों में जा चुके थे और कमलेश मां शायद घर नहीं थे. अभी ज्यादा डेट नहीं हुई थी इस लिए मैं कॉलेज में लेक्चर शुरू होने क वक़्त पहुँच गया मगर फिर भी 5 मिनट्स देर हो hi गयी.

पहला लेक्चर तो मेरी पक्की दुश्मन चन्दर्कांता मैडम का था सो उसने मुझे क्लास में घुसने भी नहीं दिया और मुझे बहार hi खड़े रहना पड़ा . जैसे रेज लेक्चर ख़तम हुआ तो सामने से आ रही मंजू मम का सुन्दर चमचमाता चेहरा देख कर साडी कसार निकल गयी. मंजू मम चिर परिचित अंदाज़ में साडी पहने एक हाथ में रजिस्टर और किताब पकड़े मुस्कुराती हुई हमारी क्लास की तरफ आ रही थी . मुझे यौम क्लास बहार देख कर वो सवालिया नज़रों से मुझे देखने लगी . मगर अगले hi पल क्लास से बहार अति चन्दर्कांता मैडम को देख कर वो नार्मल हो गयी.

चन्दर्कांता: हवा में उड़ना छोड़ दो मेरी क्लास में बैठना है तो खुद को ज़मीन पर रखो दिमाग पड़े में. वर्ण कॉलेज से बहार का रास्ता दिखा दूंगी.



मुझे उसकी बात पर गुस्सा तो बहुत आया मगर मैंने सॉरी बोल कर बार को वहीँ ख़तम करना ठीक समझा. चन्दर्कांता म क जाते मंजू म क्लास में आ गयी और मैं भी उनके पीछे पीछे क्लास में आकर मोहित क पास बैठ गया.
 
अपडेट 84



मंजू म का लेक्चर ख़तम होते hi अगला लेक्चर फ्री था इस लिए मैं मोहित क साथ कैंटीन की तरफ चल दिया. रस्ते में hi hi हमें मीनल और रीमा मिल गयी. वो भी हमसे मिलने कैंटीन में आ रही थी. रीमा हमेशा की तरह मुझे देख कर शर्माने लगी . हम जैसे hi कैंटीन में एंटर होने लगे तो अंदर दे मोंटी और शीना की हसने की आवाज़ें आने लगी.

रीमा : मीनल मुझे कुछ काम है मैं बाद में मिलती हूँ

मीनल : तुझे क्या हुआ अभी तो कह रही थी क कितने दिन हो गए अमित दे बात नहीं हुई और अभी अचानक तुझे काम यद् आ गया?

रीमा : तुम बैठ कर बातें करो मैं बाद में मिलती हूँ प्लीज.

जाते जाते रीमा ने मुझे ऐसे देखा जैसे माफ़ी मांग रही हो. खैर मैंने भी उसे मुस्कुरा कर जाने दिया .

मीनल : कमल है ये भी सैटरडे को भी सारा दिन यही बात करती रही क अमित कहाँ है और आज भी सुबह वे तुमसे मिलने को मरी जा रही थी अब एक डैम अचानक भाग गयी.

अमित : होगा कोई काम तुम उसे छोडो आओ हम बैठते हैं आराम से.

मोहित : हाँ चलो और मुझे भी बताओ कल ऐसे अचानक घर कैसे चले गए थे बिना किसी प्रोग्राम क.

मैं कैंटीन में बैठ कर मोहित और मीनल क साथ बातें करने लगा. मोंटी और शीना अपने दोस्तों क साथ बैठे थे . शिवानी भी शीना क साथ थी उसने एक बार मुझे देखा जैसे नज़रों से hi hello हए कह रही हो मैंने भी जवाब दिया. शालू इनके साथ कभी नहीं होती. मेरे दिमाग में अचानक शालू क बारे में वो सब यद् आ गया. मैं तो घर जा कर भूल hi गया था. मोंटी ने वो सब वीडियोस कहाँ रखो होंगी ? शालू को तो इस बारे में पता नहीं हो सकता वर्ण वो खुद hi निकल लेती . इस काम में शिवानी की मदद ली जा सकती है मगर अभी ये भी क्लियर नहीं क वो वाकई बदल गयी है या कोई ड्रामा कर रही है. इसका पता लगाने क लिए उससे दोस्ती करनी होगी . अगर मैं शिवानी को अपने जल में फसा लूँ तो ये काम हो सकता है. यही एक रास्ता मुझे नज़र आ रहा था शालू की मदद क लिए . इस पर अमल करने क लिए मुझे शिवानी से बात करनी शुरू करनी होगी वो भी शीना और मोंटी की नज़र में आये बगैर . शिवानी की माँ मुझसे मिलना चाहती है क्यों यहीं से शुरुआत करूँ.

मोहित : ोये किधर खो गया वो देख तुझे दीदी बुला रही है बहार.

मैं अपने ख्यालों दे बहार आया तो मोहित की बात को समझते हुए बहार देखा जहाँ नेहा दीदी कड़ी थी . मैं जल्दी से उठ कर उनके पास चला गया.

अमित : दीदी आप बहार क्यों कड़ी हैं अंदर आ जाती.

नेहा : मैं यहीं ठीक हूँ वैसे भी तेरे दोस्तों क सामने तेरी क्लास लगाना मुझे ठीक नहीं लगा

अमित : मैं समझा नहीं?

नेहा : समझा नहीं क बचे क्या हम तुम्हारी कुछ नहीं लगती ?तू सिर्फ नैना और निधि दीदी से hi मिलने जाता है. रजनी मौसी की तरह तेरी और भी दो मौसियां हैं और हम भी तेरी बहने हैं. तुझे तो जैसे किसी और की परवाह hi नहीं है. घर आना तो पता चलेगा तुझे करुणा भी गुस्से में है. वो तो तुम्हारा सर फोड़ देगी.

अमित : तो ये बात है . मगर दीदी आपको तो पता hi होगा कल बाबा ए थे तो मुझे जाना पड़ा मौसी क यहाँ वर्ण मैं तो कल आपके पास hi आने वाला था.

नेहा : तू सच कह रहा है ?

राधा : इसकी बैरन में मत आना दीदी ये झूठ बोल रहा है ता की हम इसे कुछ न कहें.

मैंने राधा की आवाज़ सुन कर उसकी तरफ देखा तो वो एक साइड में कड़ी गुस्से से मुझे देख रही थी. और मेरे देखती hi मुँह फेर लिया.

अमित : तो तुम भी यहीं हो?

राधा : शुक्र है तुम्हे दिखाई तो दी

अमित : वैसे तुम गुस्से में बिलकुल भी अछि नहीं लगती .

राधा : मुझसे तो बात hi मत करो तुम

अमित : दीदी मैं सच कह रहा हूँ गॉड प्रॉमिस मैं कल आप के hi पास आने वाला था. पिछले संडे मैं बड़ी मौसी क घर नाश्ता करने गया था और कल आपके यहाँ नाश्ता करने आने वाला था.

राधा : सबके घर जाने का पता है बस एक हमारा hi घर नज़र नहीं अत तुम्हे

अमित : जिस दिन मर कहानी होगी या गलियां सुनने का मन होगा तब ज़रूर आऊंगा दिव्या मौसी क पास

राधा : क्या कहा ? क्या मेरी माँ इतनी बुरी है ? जाओ मैं नहीं बात करती तुमसे.

अमित : अब ये तो सब जानते हैं क दिव्या मौसी मुझे पसंद नहीं करती . तो तुम hi बताओ मैं क्या करूँ?

राधा : तुम नहीं जानते माँ बहुत अछि हैं वो कभी किसी को कुछ नहीं कहता. तुम मेरे साथ चलो वो कुछ नहीं कहेंगी.

अमित : मैं जल्द hi तुंहरे घर आऊंगा प्रॉमिस करता हूँ मगर मौसी से मुझे तुम hi बचने .

राधा : तुम आओ तो सही माँ कुछ नहीं कहेंगी.

नेहा : बस हो गयी लड़ाई ख़तम ?

अमित : कैसी लड़ाई?

नेहा: ये महारानी आज तुमसे लड़ने hi तो आयी थी आज. तुम उस दिन भी कॉलेज नहीं आये और कल पता चला मां लोग भी आ कर चले गए बिना हम लोगों से मिले तो ये तुमसे नाराज़ थी. मुझे तो लगा था क आज महाभारत होगी मगर ये एक पल में hi सब भूल गयी.

राधा : क्या दीदी आप भी . मैं भला क्यों इससे लड़ूंगी. ये hi परवाह नहीं करता पर...

अमित : पर क्या?

राधा : कुछ नहीं

राधा शर्मा कर मुस्कुराने लगी. मुझे उसका ऐसा करना समझ नहीं आया . मगर ये ाचा हुआ क दोनों को जल्द hi समझा लिया वर्ण मैं तो फास गया था अब पता नहीं करुणा दीदी का गुस्सा कैसे उतरेगा वो तो इतनी जल्दी नहीं मैंने वाली. शायद नैना दीदी ने करुणा दीदी को इस दिन क बारे में बता दिया होगा अगर ऐसा हुआ तो मेरी सहमत आ जाएगी. मुझे नैना दीदी से बात कर क पूछ लेना चाहिए.

अमित : चाहिए अंदर बैठ कर बातें करते हैं

नेहा : नहीं हम यहीं ठीक हैं. और तू भी अंदर मत बैठ वो लोग अंदर hi बैठे हैं तू भी उनसे दूर hi रहा कर.

अमित : क्या दीदी आप भी , ऐसे दर क जीना भी कोई जीना है वैसे भी आप का भाई इतना तो मजबूत है hi क 8-10 लोगों पर अकेला hi भरी है.

नेहा : वो मुझे पता है पर ऐसे लोगो का क्या भरोसा खुद झगड़ा कर क इलज़ाम तेरे ऊपर दाल दें ऐसे में तुझ पर hi एक्शन होगा न .

राधा : दीदी ठीक कह रही है तुम उनका ताकत से तो मुकाबला कर सकते हो मगर देखा न पिछले बार क्या हुआ था. वो तो भला हो उसका जिसने तुम्हे बचा लिया. तुम उनसे दूर hi रहा करो बस वर्ण मैं तुमसे बात नहीं करुँगी.

अमित : तुम तो वैसे भी बात कहाँ करती हो जब देखो फ्री लेक्चर में भी लाइब्रेरी में किताबों में घुसी रहती हो.

राधा : तुम कहते हो तो आज से लाइब्रेरी जाना बंद कर दूंगी और फ्री लेक्चर में तुम्हारे साथ hi बैठ कर बातें किया करुँगी.

अमित : अरे नहीं नहीं मैं तो मज़ाक कर रहा था. मैं नहीं चाहता मेरी वजह से तुम्हारी पड़े पर असर पड़े वर्ण मौसी मुझे छोड़ेगी नहीं.

राधा : अब तो मैं रोज़ फ्री लेक्चर में तुम्हारे साथ hi बैठ कर बातें किया करुँगी और पड़े की टेंशन तुम मत लो वो मैं मैनेज कर लुंगी.

राधा की बातें सुन कर मैं हैरान हो रहा था क आज ये कैसी बातें कर रही है खैर ाचा है मैं राधा से बातें कर क मौसी क बारे में कुछ जानकारी जूता सकूंगा. लेक्चर की बेल्ल बजने तक मैं राधा और नेहा दीदी क साथ कैंटीन क बहार hi एक तरफ बैठ कर बातें करता रहा.

कॉलेज से छुट्टी होते hi मैं पार्किंग में चला गया क्यूंकि मुझे शिवानी से बात करनी थी. और शिवानी मुझे पार्किंग में मिल गयी.

अमित : hi शिवानी कैसी हो ?

शिवानी : मैं ठीक हूँ तुम बताओ कैसे हो ? आज मेरी यद् कैसे आ गयी?

अमित : अब तुम जैसी खूबसूरत लड़की को कोई कैसे भूल सकता है ?

शिवानी : क्या बात है ? आज बड़ी तारीफ हो रही है

अमित : अब सचाई ज़ुबान पर आ hi जाती है . तुम सच में बहुत खूबसूरत हो . वैसे मैं ये कहने आया था क अगर तुम्हारे पास टाइम हो तो मैं कल तुम्हारे घर आ सकता हूँ आंटी से मिलने अगर ऐतराज़ न हो तो.

शिवानी : सच !! तुम नहीं जानते मैं कितनी खुश हूँ . इसका मतलब तुमने मुझे माफ़ कर दिया . माँ तुम्हारे आने की बात पर कितनी खुश होगी. वो तो कब से रास्ता देख रही हैं क तुम कब आओगे. मैं बता नहीं सकती मुझे कितनी ख़ुशी हो रही है तुम्हारी ये बात सुन कर. मुझे तो लगा था तुम कभी मुझे माफ़ नहीं करोगे. मैं आज hi जा कर कल की तयारी करती हूँ. कल तुम भी कॉलेज से छुट्टी कर लेना मैं तो कल घर से hi नहीं निकलूंगी.

अमित : अरे अरे छुट्टी करने की ज़रूरत नहीं है हम आराम से छुट्टी क बाद चलेंगे न लंच आंटी क हाथ का करूँगा मैं कल.

शिवानी : बिलकुल नहीं . लंच भी करना है तो पहले hi आना होगा . तुम क्या सिर्फ खाना खा कर चले जाओगे ? माँ तुमसे कितनी बातें करना चाहती हैं और मैं भी.

अमित : चलो ठीक है मैं जल्दी आ जाऊंगा और देर तक बैठूंगा अब ठीक है न?

शिवानी बहुत खुश लग रही थी वो तो मुझे गले कहाँ छह रही थी मगर मैंने उससे हाथ मिला कर उससे विदा ली. उसके बाद मैं मोहित क घर चला गया. लंच करते आंटी को भी सब बताना पड़ा क कैसे मैं अचानक घर चला गया था. मैंने आंटी को बताया क थर्सडे को मेरे माँ बाबा आ रहे हैं तो आंटी बहुत खुश हुई और उन्होंने अंकल को फ़ोन कर क ये बात बता दी ता की वो भी उस दिन घर पर मौजूद रहें.

शाम को जब मैं नीरज क साथ प्रैक्टिस कर रहा था तो कोच साहब आ गए और सबको इकठा किया.

कोच : बॉयज ये फर्स्ट ईयर ईयर क लड़कों क लिए है सब ध्यान से सुने. नेक्स्ट वीक में तुम लोगो क कम्पटीशन होने जा रहे हैं बॉयज कॉलेज में . जो इस कम्पटीशन में जीतेंगे उनकी सिलेक्शन अन्तर कॉलेज क लिए होगी जो अक्टूबर में क्सक्सक्सक्सक्स शहर में है और उसके बाद दिसंबर में अन्तर यूनिवर्सिटी होगा . इस लिए अब सब तयारी कास लो . ये पहला कम्पटीशन सिर्फ शुरुआत है जिससे तुम लोगों की क्षमता चेक होगी. इस लिए अब तक तुम लोगों ने जितना भी सीखा है उस पर फोकस कर क तयारी करो. आपस में तो तुम लोग बहुत खेल लिए अब बरी है बहार वालों से खेलने की. यद् रहे हमारा कॉलेज हमेशा no. 1 रहा है और मैं आशा करता हूँ तुम लोग ये रिकॉर्ड ख़राब नहीं होने डोज.

कोच साहब की घोषणा क बाद सीनियर्स हमारे पास आ गए और समझने लगे.

नीरज : देख भाई तू किसी बात की टेंशन मत लेना ये सिर्फ एक क्लास टेस्ट क जैसे hi है. तू आराम से सब कर लेगा मैं जनता हूँ. बस तुम्हे थोड़ा होशिआर रहना होगा. क्यूंकि बॉयज कॉलेज वालों क साथ अपना 36 का आंकड़ा है और इस साल कम्पटीशन उनके कॉलेज में हैं तो वो ज़रूर गड़बड़ करने की कोशिश करेंगे. बाकि तेरे जोड़ का वहां एक भी नहीं होगा ये मैं दावे से कह सकता हूँ. तू बस रूल्स पर ध्यान दे.

अमित : अगर मुझसे कोई गलती हो गयी तो?

नीरज : मैंने क्या कहा वहां तेरे जोड़ का एक भी नहीं होगा मुझसे लिखवा ले फर्स्ट ईयर क्या किसी भी क्लास का वहां कोई ऐसा प्लेयर है hi नहीं जो तेरे सामने टिक सके . तू तो पहले सब सीखा हुआ है. यहाँ शहर में कोई ऐसा पहलवान होगा hi नहीं जो गाओं क अखाड़े की मिटटी में पके इस फौलाद जैसे शरीर को गिरा सके. तू देसी स्टाइल दे खेला है आज तक इस लिए तुझे इस इंग्लिश स्टाइल से थोड़ा कन्फूसिओं है पर तू चिंता मत कर मुझे पता है ये तू बाएं हाथ से hi कर लेगा. और चिंता मत कर मैं भी तेरे साथ चलूँगा न उधर.

कोच साहब क बताने क बाद अब हम 5 फर्स्ट ईयर क प्लेयर और भी ज्यादा जोश में तयारी करने लगे अगले वीक होने वाले कम्पटीशन क लिए. प्रैक्टिस क बाद मैं ट्यूशन क लिए गया तो मंजू मम आज सुबह की घटना क बारे में पूछने लगी तो मैंने उन्हें सब बता दिया. उन्हें भी चन्दर्कांता मम का ऐसा करना ाचा नहीं लगा मगर उन्होंने कुछ नहीं कहा. मम आज भी पुराणी साडी में मुझे पड़ा रही थी तो मुझे यद् आया क उस दिन जो सूट लिए थे वो मैं लेने तो गया hi नहीं.

अमित : चलो दीदी फटाफट तैयार हो जाओ हमें बहार चलना है.

मंजू म : मगर कहाँ जाना है पहले बताओ.

अमित : मैं भी भूल गया और अपने भी यद् नहीं दिलाया आप क सूट तैयार हो गए होंगे न टेलर क पास चलो चल क ले आते हैं.

मंजू म : कोई बात नहीं कल ले आएंगे.

अमित : कल नहीं आज और अभी आप जल्दी तैयार हो जाओ. और इस दिन वाला hi सूट पेहेन लेना सदी खोलने बांधने में दिक्कत होगी.

मंजू म : मैं समझी नहीं साडी क्यों खोलनी है?

अमित : दीदी सूट की फिटिंग वहीँ पर आप चेक कर लेना अगर कोई दिक्कत हुई तो ठीक करवा लेंगे नहीं तो फिर बार बार चक्कर लगाना पड़ेगा.

मंजू म: बात तो ठीक है तू बैठ मैं अभी आयी .

मंजू म थोड़ी देर में सूट पेहेन कर आ गयी. एक बार फिर मैं उनको उस टाइट फिटिंग वाले सूट में देखता रह गया. कितनी खूबसूरत लगती थी मम सूट में ऑंखें हैट टी hi नहीं थी उनसे.

मंजू म : अब चलें या यूँही देखते रहोगे?

मम की बात पर मैं झेंप गया और चुप चाप बहार निकल गया. मम दरवाज़े पर लॉक लगा कर मेरी बाइक की तरफ चल पड़ी जब की मैं उनकी कार क पास खड़ा था.

मंजू म : अब चलो भी वहां क्यों खड़े हो?

अमित : मुझे लगा आप कार पर चलेंगी, आप को तो दर लगता है न मेरे पीछे बाइक पर ?

मंजू म : अब नहीं लगता बल्कि मज़ा अत है मुझे पता है तुम मुझे गिरने नहीं डोज.

मम की बात सुन कर मुझे बहुत ाचा लगा अब वो मुझ पर पूरी तरह भरोसा करने लगी थी. मैंने मम को पीछे बिठाया और निकल पड़ा बुटीक की तरफ . टेलर ने सरे सूट तैयार कर दिए थे. मैंने मम को ट्रायल रूम में जाकर फिटिंग चेक करने को कहा. मम ने आधा घंटा लगाया और फिर से पहले वाला सूट पहन कर बहार आ गयी.

मंजू म : सब ठीक हैं बिलकुल सही फिटिंग है.

मैंने स्टिचिंग क पैसे दिए और मम को पीछे बिठा कर उनके घर की तरफ चल दिया.

मंजू म : कहाँ जा रहे हो?

अमित : आपके घर और कहाँ?

मंजू म : चलो न आज फिर बहार कहीं डिनर करते हैं. उस दिन बहुत मज़ा आया था तुम्हारे साथ . कल मेरा मेरा बड़ा मन था क मैं तुम्हारे साथ कहीं बहार जॉन पर फिर यद् आया क तुम घर गए होंगे.

अमित : आप मुझे एक बार फ़ोन करती मैं वापिस आ जाता.

मंजू म : तुम्हारी फॅमिली भी तो है उनको भी तो टाइम देना ज़रूरी है न. और वैसे भी मुझे तो तुम रोज़ hi मिलते हो.

अमित : चाहिए फॉर आज डिनर करते हैं किसी ाचा से होटल में. बताइये कहाँ चलेंगी?

मंजू म : जहाँ तुम्हे ठीक लगे मुझे यहाँ का कुछ भी नहीं पता.

मैं उन्हें ले कर एक ाचा से होटल में ले गया आज हम किसी दूसरे होटल में गए थे.

मंजू म : वैसे पिछली बार वाला होटल भी तो ाचा था तुम वहां क्यों नहीं गए?

अमित : नया भी तरय करना चाहिए न क्या पता इसका टास्ते ाचा हो . वैसे आपने नया सूट क्यों नहीं पहना ?

मंजू म : मैंने सोचा किसी खास मोके पर पहनूंगी जब हम कहीं बहार जायेंगे.

हमने खाना आर्डर किया और जब हम डिनर से फ्री होकर बहार निकले तो मैंने मम से खाने क बारे में पूछा

अमित : तो फिर कैसा रहा डिनर

मंजू म : तुमने साहिल कहा था यहाँ का खाना पिछली बार से ाचा था.

अमित : ज़िन्दगी भी ऐसी hi है मम हर बार अंजाम एक सा हो ये ज़रूरी नहीं. इस लिए ज़िन्दगी को एक जगह रुकने नहीं देना चाहिए . क्या पता अगले मोड़ पर खुशीआं भी मिल जाएँ. आपको अपनी ज़िन्दगी को फॉर से पहले की तरह जीना होगा अभी आपके सामने साडी उम्र पड़ी है.

मंजू मम ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया और चुप चाप पीछे बैठी रही . मैं समझ गया शायद वो मेरी बात से सोच में डूब गयी हैं इस लिए मैं उनका मूड ठीक करने क लिए उन्हें आइस क्रीम पार्लर ले गया और उन्हें अछि सी फ्रूट क्रीम खिलाई. क्रीम खा कर मम का मूड भी कुछ ठीक हो गया और वो फिर से हस्ते हुए बातें करने लगी. मम को घर छोड़ने क बाद मैं घर आ गया. रत को मैं सोया पड़ा था क मुझे अपने लैंड पर किसी तरह का दबाव महसूस हुआ तो में आंख खुल गयी. मैंने देखा आंटी मेरा लैंड चूस रही थी. मैंने आज भी आंटी को मन कर दिया था मगर उनसे अपने जिस्म की गर्मी बर्दाश्त नहीं हुई और वो इतनी रत को मेरे कमरे में चली आयी अपनी प्यास बुझाने.

अमित : आप इतनी रत को यहाँ ? मैंने मन किया था न.

आंटी : और कितना तड़पाओगे मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा प्लीज जल्दी से मुझे ठंडा कर दो.

आंटी इस वक़्त गाउन पहने हुए थी और उनके बाल बिखरे हुए थे. आँखों में वासना की लाली थी . कितने दिनों से मैं उनको मन कर रहा था और आज उनका सब्र जवाब दे गया. मैंने आंटी की बात को समझते हुए उनको पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया. आंटी क नरम गुलाबी होंठो का रास पिटे हुए मैंने उनको पलट कर अपने नीचे दबा लिया और उनके चुके दबाने लगा. आंटी मेरे ऐसा करते hi मुझे नाचने लगी उनके हाथ मेरी पीठ पर चल रहे थे और मेरी T-shirt को खींच कर उतरने लगी. मैंने उनका साथ देते हुए अपनी T-shirt उतर दी और उनका गाउन भी खोल दिया. आंटी पूरी तयारी क साथ आयी थी उन्होंने अंदर पेंटी या ब्रा नहीं पहनी थी. गाउन खुल ते hi उनके दूध से सफ़ेद चूचे मेरे सामने आ गए . मैंने उनका एक बूब मसल ते हुए दूसरे उभर का गुलाबी निप्पल अपने होंठो में पकड़ कर खींचना शुरू कर दिया. मैंने बरी बरी दोनों उभर चूस चूस कर लाल कर दिया. आंटी क गुलाबी निप्पल खड़े हो गए थे . मैं उनके बदन की महक को सांसो में भरता हुआ उनकी गहरी नाभि में जीभ से छेड़ छड़ करने क बाद उनकी गुलाबी छूट पर आ गया जो रास छोड़ रही थी. आंटी की छूट इतनी कासी हुई थी क लगता hi नहीं था क वो इतने बड़े बचो की माँ हो . मैंने एक बार जी भर क उनकी छूट को देखा और छूट की फैंको को अपने होंठो में दबा कर चूमने लगा. मैंने एक उंगली उनकी छूट में अंदर बहार करते हुए अपनी जीभ भी अंदर घुसाने लगा. आंटी मस्ती में अपने बाल खींचती हुई अपना सर बिस्तर पर दाएं बाएं पटक रही थी. आंटी क मुँह से निकल रही सिसकियों का शोर पूरे कमरे में सुनाई दे रहा था. आंटी कितने दिनों से प्यासी थी उंडे ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं हुआ और झटके लेते हुए उनका बदन अकड़ कर ढीला हो गया . आंटी की छूट का रास मेरे मुँह में भर गया. आंटी क ढीले पड़ते hi मैंने भी रहत की सांस ली वर्ण वो मेरा सर अपनी झंगो में दबाकर मेरी सांस बंद कर देती .

अमित : कैसा लग रहा है

आंटी : तुम बहुत ख़राब हो बिना कुछ किये पानी निकल दिया . मगर मैं इतनी जल्दी पीछा नहीं छोड़ने वाली .

आंटी उठ कर घुटनो क बल बैठ गयी और मेरे लैंड को दोनों हाथो में पकड़ कर उस पर झुकते हुए आधा लैंड मुँह में ले कर चूसने लगी. आंटी किसी पोर्नस्टार की तरह अपने गले की गहराई तक लैंड अंदर ले जाती और मेरी तरफ देख ते हुए एक ऐडा से धीरे लैंड बहार निकल कर अपनी जीभ सुपडे पर फिरती. मुझे आंटी की ये ऐडा बहुत पसंद आ रही थी. आंटी जब मेरे लैंड पर झुकती तो मेरी भी कमर अपने आप उठ जाती और मैं उनका सर अपने लैंड पर दबा कर अपना लैंड और ज्यादा उनके गले में उतरने लगता. आंटी की सेक्सी अदाओं से मुझसे भी अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था इस लिए मैंने उनको पकड़ कर चित लेता दिया और उनकी टंगे उठा कर अपना लैंड उनकी छूट पर सेट कर एक करारा धक्का मर दिया जिससे एक बार में hi लैंड 7 इंच तक छूट में घुस गया.

आआआहहहहहहहहह ‘ आंटी क मुँह से एक तेज़ सिसकी निकली मगर मैंने परवाह न करते हुए लैंड सुपडे तक बहार निकला और फिर से ज़ोरदार धक्का मरते हुए जड़ तक घुसा दिया.

आआअह्हह्ह्ह्हह माआआआआ मर गयी ‘ आंटी इतना hi कह पायी और मैंने शुरू कर दिया ताबड़ तोड़ चुदाई का खेल. आंटी का जिस्म जवान लड़कियों की तरह स्लिम फिट था जिस वजह से उनको मर्ज़ी से जैसे मर्ज़ी फोल्ड करते हुए छोड़ने में बड़ा मज़ा आता था . मैंने आंटी क पाऊँ उनके सर की तरफ दबा कर बीएड से लगा दिए. आंटी का पूरा जिस्म फोल्ड हो गया था. और उनके चेहरे पर दर्द की लकीरें उभर आयी थी मगर उन्होंने में मुझे एक बार भी नहीं रोका . मैं पूरा ज़ोर लगा कर धक्का मर रहा था जिससे उनकी बॉडी मेरे धक्कों की ले में हिल रही थी. आंटी का फिर से पानी निकल गया और मैंने उनको पलट कर घुटनो पर कर दिया. एक हाथ से उनके बल खींचते हुए मैंने उनकी छूट में लैंड घुसा कर ज़ोरदार धक्का करने शुरू कर दिए और एक हाथ से थप्पड़ मर कर उनके चूतड़ लाल करने लगा. कमरे में आंटी की सिसकियों क साथ ‘ फच फच फच’ की आवाज़ें भी गूँज रही थी. मैं बेरहमी से आंटी की छूट में ज़ोरदार प्रहार करता हुआ उनकी छूट में पानी निकल कर उनके ऊपर hi पर गया . मेरे साथ hi आंटी का भी फिर से पानी निकल गया. आंटी बीएड पर ऐसे hi उलटी लेट गयी और मैं भी उनकी छूट से लैंड निकले बगैर उनके ऊपर hi लेते लेते कब सो गया मुझे भी पता नहीं चला.

अगले दिन मुझे शिवानी क घर जाना था लंच पर इस लिए मैं आज बाइक पर hi कॉलेज गया और मोहित को मैंने पहले hi बता दिया था. मोहित बे मुझे कहा क ये ट्रैप भी हो सकता है मगर मैंने शालू क लिए ये रिस्क भी लेना मंज़ूर किया. शिवानी का सुबह hi मुझे फ़ोन आ गया और वो मुझसे आने का वक़्त पूछने लगी . मैंने उसे बता दिया क मैं 12 बजे तक आ जाऊंगा . वो मुझे और जल्दी आने को कह रही थी मगर मैंने साफ कर दिया क मैं इससे पहले नहीं आ पाउँगा फिर भी कोशिश करुँगी. उसने मुझे अपना एड्रेस समझा दिया. कॉलेज में मैंने पहले दोनों लेक्चर अटेंड किये और फ्री लेक्चर में सबसे मिलने क बाद कॉलेज से निकल गया. आज भी रीमा मुझसे बात करना चाहती थी मगर मैं जल्दी hi निकल गया उनके पास से.

मैं 12 बजे से कुछ देर पहले hi शिवानी क बताये हुए एड्रेस पर पहुँच गया. ये एक आलिशान बांग्ला था जो पॉश इलाके में बना हुआ था . हालाँकि मोहित का बांग्ला भी कुछ काम नहीं था पर शिवानी क बंगले को देखने से hi पता चल रहा था क हर चीज़ पर पैसा पानी की तरह बहाया गया है. मेरा दिल अंदर दे धड़क रहा था कहीं मैं किसी मुसीबत में न फास जॉन मगर भगवन का नाम ले कर मैंने गेट क साथ लगी बेल्ल बजायी. अंदर से एक सिक्योरिटी गार्ड बहार आया और उसने मुझसे मेरे हरे में पूछा और ये भी क मैं किस्से मिलने आया हूँ और किस काम से . मैंने उसे बताया क मुझे मैडम ने बुलाया है तुम उनसे कहो क अमित आया है. सिक्योरिटी गार्ड ने इण्टरकॉम पर मेरे बारे में बताया और उधर से बात सुनते hi उसने गेट खोल कर मुझे अंदर आने दिया. मैं अभी अंदर जा कर खड़ा हु हुआ था क शिवानी दौड़ती हुई आयी और मेरे गले लग गयी.

शिवानी : ी ऍम सो हैप्पी ी चैंट बिलीव क तुम आज मेरे घर पर हो. ी ऍम सो हैप्पी . यहाँ खड़े क्या कर रहे हो चलो जल्दी अंदर चलो माँ कब से तुम्हारी वेट कर रही हैं.



शिवानी खूबसूरत तो थी hi और आज इस ड्रेस में और भी ज्यादा कमल लग रही थी. उसने एक रेड गाउन जैसी ड्रेस पहनी हुयी थी जिसके एक शोल्डर पर पट्टी थी और दूसरा शोल्डर बिलकुल नग्न था. ड्रेस पूरी फिटिंग की थी जिसकी वजह दे उसके बड़े बड़े आम उसके यौवन क शिखर पर होने का परमं थे. नीचे स्पॉट पेट और उभरे हुए कूल्हे जो बड़े तरबूज की तरह गोलाकार बहार को उभरे हुए थे. ड्रेस में से बहार झांकती नंगी टाँगें जो कभी जलवा दिखती और कभी छिप जाती. मैं तो शिवानी क रूप यौवन में hi कनॉट जा रहा था. उसके गले लगता hi उसके जिस्म से आती मादक खुशबु मेरी सांसों में घुल गयी थी . और उसकी वो रेशनी ज़ुल्फ़ें जो खुल कर उसके कंधो पर बिखरी हुयी थी गले मिलते वक्त उन्होंने मेरे चेहरे पर भी अपना साया कर दिया था. शिवानी मेरा हाथ पकड़ कर खींचती हुई हस्ती खिलखिलाती मुझे अंदर लिए जा रही थी. एक बड़ा सा लॉन पर करने क बाद घर क अंदर जाने वाले बड़े से खूबसूरत लकड़ी क दरवाज़े क ठीक पहले पत्थर से सजी कुछ सीढ़ियां थी. जैसे hi हम उन पर चढ़ कर दरवाज़े पर गए तो दरवाज़ा अपने आप खुल गया.
 
अपडेट 85



दरवाज़ा खुलते hi सामने आंटी खड़े थे मैं खुद कर उनके पाऊँ चुने लगा तो उन्होंने मुझे गले लगा लिया.

आंटी स : जीते रहो बीटा कैसे हो ? कब से तुम्हारी रह देख रहे थे हम

अमित : मैं ठीक हूँ आंटी और मैंने तो बताया था क 12 बजे तक आऊंगा.

शिवानी : बताया था मैंने माँ को मगर ये तो बार बार पूछी जा रही थी क अभी तक आया नहीं अमित क्या बात है . ऐसे लगता है जैसे इन्हे ज्यादा जल्दी थी तुमसे मिलने की.

आंटी स : तुम तो चुप hi रहो सुबह से बार बार कभी मोबाइल तो कभी गेट पर hi नज़र लगाए बैठी हो. कितनी बार सिक्योरिटी गार्ड दे जाकर पूछ चुकी हो . आओ अमित तुम अंदर आओ इसकी हैट मत सुनो

शिवानी का बांग्ला जितना बहार से सुन्दर था उतना hi आलिशान अंदर से भी था. आंटी ने मुझे सोफे पर बिठाया और नौकरानी को आवाज़ दी. नौकरानी मेरे लिए जूस ले आयी. शिवानी मेरे साथ hi सोफे पर बैठ गयी और साथ वाली सिंगल चेयर पर आंटी .

आंटी स : मैं बहुत खुश हूँ बीटा क तुम हमारे घर आये. वर्ण मैं समझती तुमने शिवानी को माफ़ नहीं किया. बीटा ये हमारी इकलौती बेटी है इस लिए लाड़ली होने की वजह से थोड़ा शरारती भी मगर इसने जो कुछ भी किया उसकी वजह से मेरा सर शर्म से झुक गया था. मगर तुमने उस दिन जिस तरह मुझे माँ कह कर इसकी गलती माफ़ करदी मैं बता नहीं सकती मुझे कितनी ख़ुशी मिली थी. काश मेरा भी तुम्हारे जैसा बीटा होता . धन्य है वो माँ जिसने तुम जैसे बेटे को जनम दिया.

अमित : मैं आपका बीटा hi तो हूँ माँ जी . बच्चों की गलतियों से पेरेंट्स को शर्मिंदगी होती है पर माँ जी गलतियां भी तो बचे hi करते हैं न. शिवानी से भी गलती हो गयी. मैं जनता हूँ ये गलत नहीं है और गलत हो भी नहीं सकती क्यूंकि जिसकी आप जैसी माँ हो वो भला गलत कैसे हो सकती है. मुझे यकीन है शिवानी समझ गयी होगी क उसने क्या किया है और आगे से ये कोई गलती नहीं करेगी.

मैंने शिवानी की तरफ देखा तो उसने शर्मिंदगी से सर झुकाया हुआ था.

अमित : लो देखो खुद मुझे यहाँ बुलाया है और कैसे चुप चाप बैठी है. क्या फ्रेंड्स की घर बुला कर ऐसे hi सेवा की जाती है.

शिवानी ने मेरी बात सुनते hi मेरी तरफ देखा तो उसकी आँखों में आंसू थे

अमित : अरे ये क्या तुम रो रही हो? लगता है मेरा आना तुम्हे ाचा नहीं लगा . ाचा आंटी मैं चलता हूँ मैं तो वो हसने खेलने वाली अपनी दोस्त से मिलने आया था मगर लगता है वो मुझसे मिलना नहीं चाहती.

मैं इतना कह कर खड़ा हो गया तो शिवानी ने जल्दी से मेरी बाजु पकड़ कर मुझे खींच कर वापिस बिठा दिया .

शिवानी : जा कर दिखाओ फिर बताती हूँ तुम्हे.

अमित : देखिये आंटी आपकी बेटी मुझे धमकी दे रही है.

आंटी स : बिलकुल ठीक कर रही है मेरी बेटी . तुम कहीं नहीं जा सकते आज. इतने दिनों से तुम्हारा इंतज़ार कर रही हैं हम माँ बेटी और तुम ऐसे जाने की बात कर रहे हो.

शिवानी : देखो न माँ खुद hi मुझे अपनी दोस्त कहता है और खुद hi ऐसे दिल दुखने वाली बात करता है. मैं तुम्हे कहीं नहीं जाने दूंगी . आज तक मुझे तुम्हारे जैसा इतनी अछि सोच वाला एक भी दोस्त नहीं मिला था और अब मिला है मैं तुम्हे मुझसे मेरा दोस्त छीन ने नहीं दूंगी. माँ आप ने जो कुछ बनाया है सब ले आओ मैं इसे अपने हाथों से खिलाऊंगी.

शिवानी का ये रूप मुझे सोचने पर मजबूर कर रहा था . क्या ये वही लड़की है जिसने मुझे कॉलेज में बदनाम करने की कोशिश की . क्या ये वही लड़की है जो मोंटी और शीना क सिरफिरे गैंग की मेंबर है. आंटी की नेचर इतनी अछि है तो ज़रूर शिवानी क अंदर भी उन्ही क गन होंगे तो फिर इसने वो सब क्यों किया . ज़रूर इसके पीछे भी कोई न कोई वजह होगी मुझे उसका पता लगाना चाहिए. शिवानी की बात सुन कर आंटी किचन में चली गयी और मैं रह गया अकेला शिवानी क साथ.

अमित : मेरी एक बार का सच सच जवाब डौगी?

शिवानी : पूछो जो भी पूछना है.

अमित : तुम्हे देख कर मैं हैरान हूँ. अभी जो तुम्हारा रूप मैं देख रहा हूँ वो बिलकुल अलग है. तुम बिलकुल आंटी क जैसी लग रही हो तो फिर कॉलेज में तुम वो सब कैसे

शिवानी : वो तुम नहीं समझोगे अमित वो मेरी भूल थी मगर अब मुझे समझ आ गया है क मैं अपनी ख़ुशी की छह में गलत रस्ते पर चल पड़ी थी और ये रास्ता सिवाए बर्बादी क और कहीं नहीं ले जायेगा. मैं बहुत शर्मिंदा हूँ क मैंने तुम्हारे साथ इतना गलत किया. मगर तुमने मुझे इस तरह माफ़ कर क मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया. पापा में हमेशा मुझे हर बात पर सपोर्ट किया मेरी हर जैज़ नाजायज़ विश पूरी की जिस वजह से मुझे सही गलत का भी ध्यान नहीं रहा और मैं इतनी बड़ी गलती कर बैठी अपने उसी घमंड में . उस दिन ऑफिस में जो कुछ हुआ उसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया और माँ ने भी मुझे इसके लिए बहुत डांटा . तुम चाहते तो मुझे कॉलेज से निकलवा भी सकते थे. पता है मोंटी शीना और मेरे बाकि फ्रेंड्स ने कितनी कोशिश की मगर प्रिंसिपल सर किसी की भी बात नहीं मन रहे थे. मगर तुम्हारे कहने से उन्होंने मुझे माफ़ कर दिया. उस दिन मुझे एहसास हुआ क तुम कितने अचे हो और मैं तुम्हारे साथ कितना गलत कर रही थी. मैं शीना को नहीं छोड़ सकती क्यूंकि वो मेरी बचपन की दोस्त है . इस लिए मैं कॉलेज में तुम से दूर रहती हूँ . पर अगर तुम कहोगे तो मैं उसे भी छोड़ दूंगी. मैं तुमसे एक hi रिक्वेस्ट करती हूँ क मेरी उस गलती को दिल से निकल कर फिर से मुझे अपनी दोस्त बना लो. मैं तुम्हारे जैसा दोस्त नहीं खोना चाहती. और माँ भी तुम्हे कितना मानती है वो तो तुम्हे अपना बीटा समझने लगी है अगर तुम नहीं आते तो वो भी मुझसे नाराज़ hi रहती.

अमित : शिवानी मैं नहीं चाहता तुम मेरी वजह से अपने बचपन की दोस्त को छोडो . दोस्तों की एहमियत मैं जनता हूँ. मैं तो चाहूंगा क तुम उसके साथ रहो और उसे भी सही रास्ता दिखाओ . और हाँ तुम मेरी दोस्त हो और हमेशा रहोगी .

शिवानी : ो अमित ी ऍम सो हैप्पी सो हैप्पी

शिवानी बे मुझे गले लगा लिया . इतने में आंटी भी आ गए.

आंटी स : बस बस मैं घर पर hi हूँ . आराम से बैठो. देख लिया अमित ये कैसी है कभी कुछ तो कभी कुछ. अभी रो रही थी अभी कैसे खुश है. मैं जानती थी मेरी बेटी गलत नहीं हो सकती मगर पता नहीं कैसे ये वो सब गलत कर गयी . पर लगता है मेरी बेटी मुझे वापिस मिल गयी है और ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है. थैंक यू वैरी मच बीटा.

अमित : आंटी ये आप बार बार मुझे थैंक यू मत कहा कीजिये . क्या माँ भी बच्चों को थैंक्स कहती है कभी.

आंटी. स : ठीक है बीटा नहीं कहती. अब खाना खाओ मैंने स्पेशलय तुम्हारे लिए अपने हाथों से बनाया है.

आंटी कितना कुछ खाने को ले आयी थी और फॉर ज़बरदस्ती मुझे खिलने लगी. शिवानी भी आंटी क साथ मिलकर मुझे खिला खिला कर मरने पर टूल गयी. आंटी और शिवानी ने मेरे गले तक पेट भर दिया था क अब सांस भी आसानी से नहीं आ रही थी.

आंटी स : बीटा अब कुछ मीठा ले कर आती हूँ फिर उसके बाद कॉफ़ी पिटे हैं.

अमित : बस बस आंटी जी और जगह नहीं है प्लीज अब मुझे जाने दीजिये कहीं मेरा पेट न फट जाये.

आंटी स : ऐसे कैसे जाने दूँ आज आये हो पता नहीं फिर कब आओगे . ाचा ऐसा करो तुम कुछ देर आराम करलो तब तक मैं ये सब साफ करवाती हूँ. शिवानी तुम अमित को अपना कमरा दिखा दो तब तक

शिवानी : चलो अमित मैं तुम्हे अपना कमरा दिखती हूँ.

शिवानी मुझे अपने कमरे में ले गयी. उसका कमरा किसी राज कुमारी की तरह सजा हुआ था. बीएड की साइड में एक बड़ा सा टेडी बेयर पड़ा हुआ था. शिवानी ने मुझे बीएड पर बिठाया और अपनी बातें करने लगी अपनी पुराणी और बचपन की तस्वीरें दिखने लगी. तभी आंटी बे उसे बहार से आवाज़ दी तो वो बहार चली गयी. एल्बम देखते हुए एक तस्वीर नीचे गिर गयी जो शायद किसी और तस्वीर क पीछे छिपी हुई थी जब मेरी नज़र उस पर पड़ी तो मैं एक पल की चौंक .

अमित : ( तो ये बात है लगता है इसी लिए शिवानी में वो सब किया होगा . देखते हैं क इसके पीछे कितनी गहराई है )

मैंने फिर से तस्वीर छुपा दी और एल्बम को देखने लगा. उसके बाद शिवानी फिर से मेरे पास आ गयी और बातें करते हुए अपनी यादें मुझसे शेयर करने लगी. मेरी नज़र जब घडी पर गयी तो पता चल क 3 बज चुके थे और मैंने वापिस भी जाना था. मैंने शिवानी को वापिस जाने का कहा तो शिवानी बे आंटी को आवाज़ लगा दी . आंटी मुझे रुकने को कहने लगी मगर मैंने बता दिया क मुझे प्रैक्टिस पर जाना होता है. तब जा कर आंटी ने मेरी बात मणि और फिर कॉफ़ी लेने चली गयी. मैं क्या सोच कर आया था और क्या क्या हो रहा था. बातों बातों में मैं तो भूल hi गया क मुझे शालू की मदद करनी है तो शिवानी को इसके लिए राज़ी करना होगा. एक बार तो मुझे लगा था क शिवानी इतनी अछि है क उससे सीधे बात कर लूँ मगर उस तस्वीर को देखने क बाद मुझे लगा क ऐसे बात नहीं बनेगी इसके लिए तो शिवानी क करीब जाना hi पड़ेगा.

शिवानी : पता hi नहीं चला कैसे वक़्त गुज़र गया. और तुम्हारे जाने का टाइम भी हो गया. क्या तुम रुक नहीं सकते कुछ देर और ? आज छुट्टी करलो न . कितना ाचा लग रहा है तुम्हारे साथ बात कर क.

अमित : नहीं मैं छुट्टी नहीं कर सकता अगले हफ्ते कम्पटीशन भी है न.

शिवानी: कॉलेज में तुम से मिल नहीं सकती वैसे तुम मिलने आओगे नहीं तो कैसे मिलूंगी मैं तुमसे?

अमित : एक काम हो सकता है अगर तुम्हे ऐतराज़ न हो तो?

शिवानी : तुम बताओ मैं वो करुँगी

अमित : ज्यादा कुछ नहीं है. तुम्हे कार चलनी आती है मगर मुझे नहीं आती तो क्या तुम मुझे कार चलना सीखा डौगी ? अगर ऐतराज़ न हो तो?

शिवानी : ये तुम कैसी बातें कर रहे हो. मुझे तो ख़ुशी होगी इसी बहाने तुमसे मिलने का मौका तो मिलेगा और बातें भी होती रहेंगी.

अमित : तो कब से टाइम होगा तुम्हारे पास?

शिवानी : जब तुम कहो अन्य्तिमे फॉर यू

अमित : ठीक है तो आफ्टर कॉलेज या फिर इवनिंग 7 बजे क बाद

शिवानी : ठीक है जब भी तुम्हे ठीक लगे तब बता देना मैं आ जाउंगी.

आंटी कॉफ़ी ले आये और फिर मैंने आंटी क हाथ की कॉफ़ी पिने क बाद उनसे विदा ली . आंटी ने मुझे फिर आने का कहा . शिवानी मुझे बहार तक छोड़ने आयी. उसके बाद मैं घर आ गया और कुछ देर आराम कर्क कॉलेज चला गया प्रक्टिस क लिए. आज हम सब ने कुछ ज्यादा hi म्हणत की और मंजू मम क घर मैं आधा घंटा देरी से पहुंचा.

मंजू म : मिल गया टाइम ? मैंने तो सोचा था जनाब आज आएंगे hi नहीं.

अमित : वो क्या है न अगले हफ्ते कम्पटीशन हैं तो अब हम लोग ज्यादा म्हणत करने लगे हैं.

मंजू म : नज़र आ रहा . देखो कपडे अभी तक गीले हैं तुम्हारे . और पसीने की बदबू आ रही है जाओ पहले नाहा लो जा कर.

अमित : मगर फिर भी तो यही कपडे पेहेन्ने पड़ेंगे

मंजू म : तुम ऐसा करो कल अपने कुछ कपडे यहाँ लेते आना जब भी तुम यहाँ आओ पहले नाहा लिया करो और फिर पड़े.

अमित : नहीं मैं ऐसे hi ठीक हूँ इससे आपको तंगी होगी.

मंजू म : ( मेरा कान पकड़ते हुए) क्या कहा ? मुझे तंगी होगी? क्या भाई की वजह से बहिन को तंगी हो सकती है. तूने ऐसा कहा भी कैसे

अमित : सॉरी सॉरी गलती हो गयी मेरे कान छोड़िये आआआआ दर्द हो रहा है प्लीज दीदी.

मंजू म : दुबारा ऐसी बात की तो देख लेना चल जल्दी जा कर नाहा ले मैं टॉवल देती हूँ.

मम क घर में नीचे क दोनों कमरों में आत्ताच बाथरूम थे . मैं दूसरे कमरे में चला गया जो खली रहता था. अपने कपडे निकल कर बीएड पर रखे और टॉवल ले कर नहाने चला गया. अछि तरह खुद को साफ करने क बाद जब मैं टॉवल बांध कर बाथरूम से बाहर निकला तो मेरे कपडे बीएड पर नहीं थे. मैंने मम को आवाज़ दी .

मंजू म : क्या है क्यों चिल्ला रहे हो?

मम बोलती हुई जैसे hi अंदर आयी मैं सिर्फ टॉवल लपेटे सामने अधनंगी हालत में खड़ा था. मम एक पल क लिए शांत हो गयी और उनकी नज़र मेरी बॉडी का अवलोकन करने लगी. बड़े मजबूत कंधे छोड़ी छाती भरी भरकम काया जो कपड़ो क बहार से शायद अछि तरह पता नहीं चलती थी. पेट मुस्कले तो नहीं थे मगर पेट सख्त था उसके नीचे टॉवल जो आगे पीछे दोनों साइड से उभरा हुआ था . मजबूत पाठों और दमदार हथ्यार क कारन और फिर मोठे ताज़े गोश्त से भरपूर पहलवानी जांघें. मम मुझे गहरी नज़र से देख रही थी और कमर क नीचे एक बार उनकी नज़र भी ठहर गयी थी . मैंने खुद को छुपाने की एक्टिंग करते हुए कहा.

अमित : मेरे कपडे कहाँ गए अब मैं क्या पहनूंगा.

मंजू म : वो वो कपडे गंदे थे मैंने उन्हें मशीन से निकल कर तंग दिया है पंखे क नीचे. थोड़ी देर में hi सुख जायेंगे तो पहन लेना.

अमित : तब तक क्या मैं ऐसे hi नंगा रहूं?

मंजू म: कुछ नहीं होता आराम से बैठ जाओ कोई नहीं अत यहाँ ज्यादा नखरे न दिखाओ. मैं तब तक कुछ खाने को बनती हूँ. कॉफ़ी पियोगे तुम ?

अमित : पि लूंगा मगर जल्दी मुझे कुछ पहनने को भी दीजिये

मंजू म : ोये होये तो बन्नो को शर्म आ रही है बिना कपड़ो क . अब तो तुम्हे ऐसे hi रखूंगी बड़ा तीस मर खान समझते हो न खुद को अब आया ुण्ठ पहाड़ क नीचे हे हे हे

अमित : ाचा आपको हंसी आ रही है अगर मैंने कुछ किया न तो फिर बोलोगी मुझे

मंजू म : क्या कर लेगा तू ? अब तो मैं तुम्हे कपडे नहीं देने वाली तुझे जो करना है करले.

अमित : मैं कह देता हूँ मुझे तंग मत कीजिये वर्ण ाचा नहीं होगा.

मंजू म : तो मुन्ने राजा को गुस्सा भी अत है. छू छू छू छू बेचारा बिना कपड़ो क घर कैसे जायेगा शर्म आ रही मुन्ने को

मंजू म मेरा मज़ाक उदा रही थी मैंने भी सोच लिया क अभी मम की बोलती बंद करता हूँ. मैं मम की तरफ बड़ा तो वो मुझे ठेंगा दिखती हुई भाग गयी. मैं भी उनको पकड़ने क लिए उनके पीछे भगा . वो दौड़ती हुई अपने कमरे में चली गयी . मैं भी उनके पीछे उनके कमरे में चला गया आगे बीएड पर चढ़ने क लिए जैसे उन्होंने पाऊँ उठाया मैंने उन्हें पीछे से दबोच लिया . मगर मैं बैलेंस नहीं बना पाया और मम को साथ लिए बीएड पर गिर गया. मम मेरे निचे डाब गयी थी. मैंने उनके पेट गुदगुदी करने लगा

अमित : अब बताइये क्या बोल रही थी. मैं मुन्ना हूँ ? मुझे नंगा भेजेंगी घर ?

मंजू म : हे हे हे छोडो हे हे हे बस भी करो है है है बस बस है है है है और नहीं सॉरी सॉरी रुक जाओ बस बस

अमित : अब लोगी पन्गा मुझसे ?

मैंने मम को ढीला छोड़ते हुए ये पुछा तो मन फिर से मेरी पकड़ से निकलने की कोशिश करते हुए बोली .

मंजू म : तुम अभी बचे हो और बच्चों को चड्डी में hi रखा जाता है मुन्ना

मम फिर से मेरा मज़ाक उड़ने लगी तो मैं फिर उनपर टूट पड़ा और उनको दबोचने की कोशिश की तो मम अपना बचाव करती हुई पलट गयी . उन्होंने अपनी एक पाऊँ मेरे पेट पे रख कर मुझे पीछे धकलने की कोशिश की . मैंने उनके दोनों बाजु पकड़ लिए थे मगर उनके पाऊँ की वजह से मैं उन्हें काबू नहीं कर प् रहा था . उनके पाऊँ को हटाने क लिए मैंने अपनी बॉडी तेज़ी से इस तरह झटका क उनका पाऊँ फिसल कर साइड में निकल गया जिससे मैंने उनकी दोनों टैंगो क बीच में आ गया. मैंने उनको पूरी तरह काबू करने क लिए उनके ऊपर लेट गया और उनके हाथ ऊपर को सीधे करते हुए बीएड पर दबा दिए. अब वो हिल भी नहीं प् रही थी.

अमित : अब बोलिये क्या बोल रही थी.

मंजू म : यही की तू ऐसे hi ाचा लगता है

अमित : आपने कुछ और कहा था

मंजू म : और क्या कहा था मैंने

अमित : अपने मुझे बचा कहा था

मंजू म : मैंने तो इतना कहा था क बचो को चड्डी में रखा जाता है.

अमित : मतलब आपने मुझे बचा कहा था . इस लिए अब माफ़ी मानगो

मंजू म : मैं क्यों मांगू माफ़ी मैंने कौन सा झूठ कहा था.

अमित : लगता है ऐसे नहीं मानेंगी आप

मैंने मम क दोनों हाथ अपने एक हाथ से पकडे और एक हाथ से उनके पेट में फिर से गुदगुदी करने लगा.

मंजू म : है है है एआइइइइ छोडो हटो है है है छोड़ूऊओ है है है बस बस बस्सस मुन्न्ना नहीं तो तेरी चड्डी उतर जाएगी

मम मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी क उनका एक हाथ मेरे हाथ से फिसल गया और वो भी मेरे पेट पर गुदगुदी करने लगी. मैंने जल्दी से उनका हाथ पकड़ने की कोशिश की तो मम ने अपनी दोनों टंगे मेरी कमर पर बांध कर मुझसे ज़ोर आज़माइश शुरू कर दी. भला वो नाज़ुक बदन मेरे जैसे भरी भरकम शरीर वाले पहलवान क साथ कैसे कुश्ती कर सकती थी मगर मैं भी उनको ज्यादा ज़ोर से नहीं दबा रहा था बल्कि मैं तो मज़ा ले रहा था उन्हें तंग कर क. मैंने अपने घुटने बीएड पर टिका कर ऊपर उठने की कोशिश की तो मम बे अपनी टैंगो से मुझे ज़ोर लगा कर उठने नहीं दिया

मंजू म : बड़े आये पहलवान मैं भी तो देखूं कितना डैम है तुम में

अमित : ाचा मुझे चैलेंज कर रही हैं ये लो

मैंने अपनी कमर से उनकी कमर को दबाते हुए उनके दोनों हाथ पकड़े हुए ऐसे hi उठने की कोशिश की . इस सब में मुझे यद् hi नहीं था क मेरा टॉवल कब का मेरा साथ छोड़ चूका है और इस तरह दबाने से मेरा लैंड मम की छूट क मुँह पर लग चूका था. मेरे इस तरह दे दबाव देने से मेरा लैंड जो क इस तरह की रगड़े से खड़ा हो चूका था मम की छूट पर डाब गया और कपडे फाड़ कर अंदर घुसने को होने लगा. मैं मम को पकडे हुए सीधा बैठ गया और मम ऐसे hi मेरी कमर पर टंगे कैंची शेप में कैसे हुए मेरे लैंड पर यानि मेरी गॉड में बैठ गयी.

अमित : अब बोलो और देखना है डैम .

मम को शायद अब अपने नीचे मेरा लैंड चुभने लगा था . जिसका एहसास होते hi उनकी साडी हंसी ऐसे गायब हो गयी जैसे गधे क सर से सींग .

मंजू म : मुझे नीचे उतरो अमित

अमित : बस हो गयी बोलती बंद ? अब नहीं देखना ज़ोर?

मंजू म : नहीं बस अब मुझे छोडो तुम्हारे कपडे सुख गए होंगे प्लीज मुझे छोडो

मम क इस तरह सीरियस होते hi मैं चौंक गया और उन्हें तुरंत छोड़ दिया. मम जल्दी से एक साइड को पलटी और उठ कर जाने से पहले मेरी टैंगो क बीच में देखा. उनकी नज़र का पीछे करते हुए जब मैंने नीचे देखा तो मैं भी हैरान हो गया. टॉवल खुल चूका था और लैंड महाराज चड्डी में से टॉप की तरह सर उठाये अपनी मौजूदगी का एहसास करवा रहे थे. मैंने जल्दी से टॉवल की तरफ नज़र दौड़ाई तब तक मम कमरे से जा चुकी थी. मैंने टॉवल उठा कर लपेट लिया. मुझे खुद पर शर्मिंदगी होने लगी की मम क्या सोचेगी मैंने ये क्या गलती करदी . मुझे खुद पर काबू रखना चाहिए था अब मैं उनका सामना कैसे करूँगा? कहीं वो बुरा hi न मन जाये? जो भी हुआ अनजाने में हुआ इसमें मेरी कोई गलती नहीं है . मुझे माफ़ी मांग लेनी कहहिये . वो ज़रूर माफ़ कर देंगी . अगर उन्होंने गुस्सा किया तो मैं कल से नहीं आऊंगा. मुझे उनसे बात करनी चाहिए. मैं कमरे से बहार निकले तो मम मुझे कहीं नज़र नहीं आयी मैं दूसरे कमरे में गया और फिर गेस्ट रूम में मगर वो कहीं नहीं थी . मुझे लगा मम मुझसे नाराज़ हो गयी हैं. मैं खुद को कोसने लगा और जाकर दूसरे रूम में बैठ गया. मैंने सर झुकाये बैठा सोच रहा था क मम कमरे में आयी

मंजू म : अब क्या यूँही बैठे रहोगे ? ये लो कपडे पेहेन लो . पहनने लायक हो गए हैं. जल्दी करो कॉफ़ी तैयार है

मैंने नज़र उठा कर मम की तरफ देखा तो वो नार्मल लग रही थी मगर मेरी नज़रों में इतनी गंभीरता देख कर मम वहीँ रुक गयी

अमित : ी ऍम सॉरी मम मुझसे गलती हो गयी

मंजू म : गलती पहले तो नहीं हुई थी मगर अब कर रहे हो. मैं तुम्हे एक बहिन की तरह ट्रीट कर रही थी और तुमने मुझे मम कहना शुरू कर दिया. ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जिसकी वजह से तुम माफ़ी मानगो . हंसी मज़ाक में तो ये सब हो जाता है . वैसे भी मुझे ाचा लगा तुम्हारे साथ छेड़खानी करना . मुझे मेरा बचपन यद् आ गया. अगर तुमने कोई ऐसी वैसी बे की या ये रोने धोने वाली शकल बनाई तो कह देती हूँ पहले hi . यहाँ से चड्डी में hi घर भेजूंगी हाँ.

अमित : आपको बुरा नहीं लगा ?

मंजू म : बुरा तो अब लग रहा है तेरी ये रोनी सूरत देख कर . लगता है आज तू मर खा क रहेगा मेरे हाथों से.

मम मुझे मरने की एक्टिंग करते हुए आगे बड़ी तो मैं झटके से खड़ा हो गया. और हाथ जोड़ने लगा . मम ने कपडे मेरे ऊपर फेंके और जल्दी बहार आने को कहा. मैं तो सोच रहा था क मम गुस्सा होंगी पर उन्होंने साफ कर दिया क उन्हें गुस्सा नहीं आया शायद अब वो मुझे दिल से hi भाई मन बैठी थी मगर फिर भी मुझे ाचा नहीं लग रहा जिस तरह मेरा लैंड पूरा खड़ा था ज़ाहिर है उनको भी उसकी चुभन महसूस हुई होगी . खैर मम ने बात को ख़तम कर दिया और मैंने भी सोच लिया क ऐसी गलती दोबारा नहीं होने dunga.main कपडे पेहेन कर बहार आ गया और मम क साथ कॉफ़ी पीने लगा .

मंजू म : जल्दी कॉफ़ी ख़तम करो और किताब खोलो . आज तो पड़े बीच में hi रह गयी .

अमित : आज रहने देते हैं न दीदी मुझे ज़रा एक काम है

मंजू म : मैंने कहा न मुझे बुरा नहीं लगा तो फिर तुम क्यों उसी बात को लेकर मूड ऑफ कर रहे हो ?

अमित : वो बात नहीं है . असल में कल मेरी कजिन का बर्थडे है तो मैंने अभी तक उसके लिए कोई गिफ्ट नहीं लिया . अब अगर देर की तो फिर मार्किट भी बंद हो जाएगी

मंजू म : पहले क्यों नहीं बताया ? रुको मैं अभी आयी.

मम इतना कह कर अपने रूम में चली गयी और मैं सोचने लगा क मम क्या करने गयी हैं. मैं बैठा सोच hi रहा था क मैं येलो सूट पहने मेरे सामने आ कर कड़ी हो गयी. ये उन सुइट्स में दे था जो मैंने मम को दिलवाये थे. मम उस येलो सूट में बहुत hi खूबसूरत लग रही थी बिलकुल फूलों की तरह मम इस येलो कलर में अपनी कंचन काया की छटा बिखेर रही थी. मुझे ये समझ नहीं आ रहा था क सूट मम पर जाँच रहा है या मम सूट पर . स्टिचिंग करने वाले में भी क्या कारीगरी दिखाई थी . बिलकुल सही नाप का स्टिच किया था . सफ़ेद सलवार येलो कमीज का ये कॉम्बिनेशन मम क दूधियाँ रंग पर सोने पर सुंहगे जैसा लग रहा था. मम कब से मेरे सामने कड़ी थी और मैं उन्हें सर से पाऊँ तक आँखें फाड़े देख रहा था.

मंजू म : क्या हुआ ाचा नहीं लगा क्या?

अमित : ब्यूटीफुल ऐसे लग रहा है जैसे सूरज की उजली किरण जैसे खिलता हुआ पीला गुलाब आप तो इंद्र लोक दे उतरी कोई अप्सरा लग रही हैं.

मंजू म : ( बलुशिंग ) बस बस इतनी भी तारीफ मत करो . ये तारीफ अपनी गफ क लिए बचा कर रखो

अमित : गफ तो जब होगी तब होगी मगर ये तारीफ सिर्फ आपके लिए है

मंजू म : क्यों क्या तुम्हारी गफ नहीं है? इतने हैंडसम हो इतने समझदार हो फिर भी गफ नहीं ? स्ट्रेंज

अमित : काश क आप जैसी कोई मिल जाती तो ज़रूर गफ बना लेता .

मंजू म : क्या कहा ?

Amit(Ye मैं क्या बोल गया भावनाओं में . अब तो मम ज़रूर गुस्सा करेंगी ) मेरे कहने का मतलब था मुझे गफ बनाने में इंटरेस्ट नहीं.

मंजू म : तो मैं धुन्द देती हूँ अपने छोटे भाई क लिए एक प्यारी सी गफ.

अमित : रहने दीजिये आप जैसी कोई और नहीं बनाई होगी भगवन ने

( फिर से ज़ुबान फिसल गयी)

मंजू म : लगता है तुम्हारा इलाज करना hi पड़ेगा . चलो अब जल्दी करो . अब तुम्हे देर नहीं हो रही ?

अमित : हाँ हाँ वो मैं चलता हूँ . ाचा bye मम

मंजू म : ऐ कहाँ जा रहे हो ? मुझे भी साथ लेकर जाओ .

अमित : आप कहाँ जाएँगी ?

मंजू म : तुम्हे अपनी कजिन क लिए गिफ्ट लेना है न ?

अमित : जी

मंजू म : तो तुम्हे कैसे पता चलेगा लड़कियों को क्या पसंद है क्या नहीं. मैं तुम्हारी मदद करुँगी गिफ्ट लेने में इसी लिए तो ये नया सूट पहना और तुम बुद्धू राम इतना भी नहीं समझे . चलो अब और ये बार बार मम कहना बंद करो. मम सिर्फ कॉलेज में

अमित : जी समझ गया

मैं मंजू म क इस रवैये से मन hi मन खुश हुआ और जो थोड़ी बहुत आत्मगलानी हो रही थी वो भी दूर हो गयी. मैं बहार निकल कर खड़ा हो गया क पूछ लूँ बाइक पर जाना है या कार से. मम लॉक लगा कर मेरी तरफ पलटी तो मेरा मतलब समझ कर बोली

मंजू म : जो मज़ा बाइक पर अत है वो कार में नहीं अत इस लिए बिना कहे बाइक निकल लिया करो.

और ये पीछे रानी क्यों लिखा रखा है तूने बाइक के

अमित : क्यूंकि एहि मेरी गफ है और मैं इसी क साथ खुश हूँ

मंजू म : तो रोमांस भी इसी क साथ करने का इरादा है क्या? वैसे मैंने तो नहीं सुना क साइंस में इतनी तरक्की भी कर ली हो . हे हे हे

मैं मम की बात से झेंप गया . मैंने जल्दी से बाइक स्टार्ट की और मम को पीछे बिठा कर निकल पड़ा. मैं सीधा मॉल में hi गया क्यूंकि मंद में कोई आईडिया नहीं था क क्या लेना है ऐसे में मॉल hi बेटर ऑप्शन थी जहाँ बहुत साडी अलग अलग किस्म की दुकाने एक hi छत क नीचे मिल जाती हैं. मम मुझे एक सुपर स्टोर में ले गयी ये एक बहुत बड़ा सेक्शन था जिसमे हर चीज़ मौजूद थी . लेडीज सेक्शन में मम नए फैशन क ब्रांडेड टॉप देखने लगी तो मैंने उन्हें रोका

मंजू म : क्या हुआ ?

अमित : वो मेरी कजिन सिंपल कपडे पहनती है मतलब सुइट्स hi तो वो ये सब नहीं पहनेगी

मंजू म : पहले क्यों नहीं बताया . चलो कुछ और देखते हैं.

मम घूमते हुए एक सेक्शन में रुक गयी जहाँ पर बहुत hi सुन्दर हैंड बैग टंगे हुए थे . मम उनमे से बैग देखने लगी और एक बैग पसंद कर लिया.

मंजू म : ये कैसा रहेगा ? कॉलेज गोइंग है न ? उस हिसाब से ये परफेक्ट रहेगा अगर नहीं है तो बता दो ?

अमित : जी वो अपने hi कॉलेज में है

मंजू म : ाचा ाचा उसे तो मैंने देखा है कॉलेज में शी इस रियली ब्यूटीफुल बहुत सिंपल और क्यूट स है वो . तुम ये बैग उसे गिफ्ट दे दो कॉलेज में उसके काम आएगा सिंपल भी है और ये ब्रांड भी ाचा है .

हममे वो बैग ले लिया मगर मम ने उसके पैसे खुद पाय किये ये कह कर क ये मेरी तरफ से है. अगर ये मम की तरफ से है तो मेरी तरफ से क्या हुआ. मैं सोचने लगा क राधा को क्या दिया जा सकता है .

( यही सही रहेगा उसे इसकी ज़रूरत है )

मैं मन को साथ ले कर इलेक्ट्रॉनिक सेक्शन में चला गया और एक नई ब्रांडेड मोबाइल राधा क लिए ले लिया

मंजू म : गिफ्ट ले तो लिया था न फिर इसकी क्या ज़रूरत थी

अमित : वो तो आपकी तरफ से हुआ न. ये मेरी तरफ से . वैसे भी उसके पास मोबाइल नहीं है और कॉलेज में तो सबके पास रहता है इससे उसको बहुत फायदा होगा.

मंजू म : क्या ? उसके पास अभी तक मोबाइल नहीं था. लगता है वो अभी तक कॉलेज लाइफ में आयी hi नहीं है. बहुत इनोसेंट लगती है वर्ण ये सब तो स्कूल में hi शुरू हो जाता है.

अमित : वो ऐसी hi है . बहुत इनोसेंट और क्यूट भगवन करे उसे किसी की नज़र न लगे . वो हमेशा खुश रहे

मंजू म : लगता है तुम्हे बहुत प्यारी है वो फिर तो वो सचमुच अछि होगी वर्ण तुम ऐसे तारीफ नहीं करते . मुझे मिलवाना उससे कल.

अमित : जैसा आप कहें . ये गिफ्ट आप खुद hi दे देना.

मंजू म : नहीं कॉलेज में ये सब ाचा नहीं लगता . तुम खुद hi दे देना .

हम शॉपिंग क बाद फिर एक साथ डिनर करने क बाद hi घर आये . मम को जैसे मेरे साथ रहना ाचा लगाने लगा था. और जब उन्हें छोड़ कर घर जाने लगा तो उनके चेहरे पर फिर उदासी छ गयी.

अमित : अब क्या हुआ

मंजू म : आज तुम जा रहे हो कल तुम बर्थडे में बिजी होंगे . उसका मतलब परसों तक वेट करना होगा?

अमित : कल मिलूंगा न कॉलेज में

मंजू म : क्या तुम कल नहीं आ सकते ?

अमित : परसों फिर से साथ में डिनर करने जायेंगे ठीक है ?

मंजू म : ठीक है . अपनी कजिन को मेरी तरफ से गुड विशेष देना .

अमित : कल खुद hi दे देना



मैं bye bye करता हुआ घर की तरफ निकल गया.
 
अपडेट 86



घर आते hi आंटी ने नाराज़ होने लगी की मैं रोज़ hi डिनर बहार करने लगा हूँ

आंटी : तुम मेरी किसी बात पर नाराज़ हो ? अगर हो तो बता दो. मगर मुझे ाचा नहीं लगता क तुम अब ज़्यादा समय बहार hi रहने लगो हो और मेरे पास बैठते भी नहीं

अमित : ऐसा नहीं है आंटी वो मैं ट्यूशन में कई बार लेट हो जाता हूँ तो मम ज़बरदस्ती खाना खिला कर भेजती है

आंटी : है कौन ये तुम्हारी ट्यूशन वाली मम जो इतनी खातिरदारी करने लगी है. क्या मुझसे भी अछि है जो तुम अब उसके पास hi ज्यादा टाइम लगते हो?

अमित : ये आप कैसी बात कर रही हैं आंटी ? वो मेरी कॉलेज प्रोफेसर हैं और वो मुझे अपने छोटा भाई मानती हैं. पर मुझे लग रहा है आपको जलन हो रही है

आंटी : जलन क्यों न हो ? पहले तुम मुझे गफ की तरह प्यार करते थे और अब तुम ऐसे पीछा छुड़ाते हो जैसे मैं कोई अजनबी हूँ. ज़रूर मुझमे में hi कोई कमी है तभी रागभाव भी मेरे पास नहीं आते और अब तुम भी वही कर रहे हो.

आंटी मुझसे गिला कर रही थी. इस वक़्त आंटी और मैं हॉल में अकेले hi थे. मुझसे आंटी की ये दशा देखि नहीं जा रही थी तो मैंने आंटी को गले से लगा लिया.

अमित : आपने ये सोचा भी कैसे क मैं आपसे पीछा छुड़ा रहा हूँ. आप तो कुदरत की कारीगिरी का वो करिश्मा हो क जिसको प् कर कोई भी खुद को किस्मत वाला समझेगा. मैं प्रैक्टिस और ट्यूशन में लेट हो जाता हूँ इस लिए आपको वक़्त नहीं दे पता मगर मेरे दिल में आपकी जो जगह है वो अब भी वही है. पता है रमा अगले हफ्ते मेरा कम्पटीशन है और मुझे ताकत बचा कर रखनी है इसी लिए मैं तुम्हारे साथ प्यार नहीं कर रहा फिर भी अगर तुम कहोगी तो मैं तैयार हूँ. चलो चलते हैं तुम्हारे कमरे में.

आंटी : तुम सच कह रहे हो? और मैं क्या क्या सोच रही थी. मैं hi पागल थी जो कुछ भी सोचे जा रही थी. इतनी सी बात तुम पहले hi बता देते . इतना तो मैं खुद पर कण्ट्रोल कर hi सकती हूँ.

अमित : ो माय डार्लिंग तुम कितनी अछि हो

मैंने आंटी क होंठो पर अपने होंठ चिपका दिए और किश करने लगा. आंटी भी मेरा साथ देने लगी . कुछ गिरने की आवाज़ से मैंने किश करना बंद कर दिया. मैंने आवाज़ की दिशा में देखा तो रानी जल्दी से किचन में घुस गयी.

आंटी : क्या हुआ?

अमित : कुछ नहीं

आंटी : टेंशन मत लो तुम्हारे अंकल कल या परसों आएंगे और मोहित भी अभी घर नहीं है. वैसे ये गिफ्ट किस क लिए लाये हो?

अमित : कल मेरी कजिन का बर्थडे है उसके लिए hi लाया हूँ

आंटी : इसका मतलब कल तुम बर्थडे पार्टी में बिजी रहने वाले हो. और दो दो गिफ्ट लगता है तुम अपनी इस कजिन क काफी क्लोज हो.

अमित : मैं सब क साथ hi क्लोज हूँ कोई किसी क साथ अलग नहीं. वैसे मोहित कहाँ है

आंटी : वो अपने किसी दोस्त से मिलने गया है उसका फ़ोन आया था.

आंटी को एक बार फिर से किश कर क मैं अपने कमरे में चला गया और कल क बारे में सोचने लगा . तभी नैना दीदी का फ़ोन आ गया

नैना : लगता है तुम्हे मेरी यद् नहीं अति ? मिलना तो दूर एक फ़ोन तक नहीं करते खुद से

अमित : न hi न hello डायरेक्ट ताने. क्या किसी से मिलकर hi प्यार का सबूत दिया जा सकता है? क्या फ़ोन करने से hi पता चलता है कोई कितना यद् करता है? मेरे से पूछिए क ये आपको यद् करता है क नहीं ? और आप हो क मुझे ये सब सुना रही हो.

नैना : ी ऍम सॉरी पर मैं क्या करूँ मेरा दिल नहीं लगता किसी काम में तुम्हारे बगैर . हर वक़्त बस तुमसे बात करने को तुम्हे देखने को तुम्हे गले लगाने को hi दिल करता है

अमित : किश करने को दिल नहीं करता ?

नैना : शरमाते हुए) हैट बदमाश मज़े ले रहे हो . अब कोई किश विस्स नहीं मिलने वाली

अमित : सोच लो अगर किश नहीं करोगी तो मैं मिलने भी नहीं आऊंगा

नैना : बदमाश मुझे ब्लैकमेल कर रहा है. कल मिल तो सही फिर बताती हूँ तुझे

अमित : कल कहाँ ?

नैना : तुझे किसी ने बताया नहीं अभी तक ? कल राधा का बर्थडे है और मौसी में सबको इन्विते किया है घर पर शाम को पार्टी है.

अमित : बर्थडे का तो मुझे पता है मगर ये पार्टी का किसी ने नहीं बोलै. मैं तो बस इतना जनता हूँ क कल माँ और बाबा भी आने वाले हैं.

नैना : तो फिर तुम्हे भी आना पड़ेगा मैं तुम्हारा वेट करुँगी. मुझसे तो इंतज़ार करना मुश्किल हो रहा है संडे क बाद कल तुम्हे देखूंगी कितने दिन हो गए.

अमित : लो अभी तो 2 hi दिन हुए हैं और आप कह रही हैं कितने दिन हो गए.

नैना : तुम चुप रहो . तुम्हे क्या पता मुझ पर क्या बिट रही है . एक एक दिन साल जितना बड़ा लगता है.

अमित : यद् आया ! आपने करुणा दीदी को क्या बताया था ? नेहा दीदी कह रही थी क वो मुझ पर नाराज़ हैं क मैं आपसे मिलने गया था और उनसे नहीं मिलता.

नैना : ज्यादा कुछ नहीं मैंने तो बस इतना hi कहा था क मैं तुम्हे बर्फ बना कर अपनी फ्रेंड्स क साथ मिलाने ले गयी थी.

अमित : हो गया कल्याण

नैना : क्या हुआ?

अमित : आपको क्या ज़रूरत थी ये सब बताने की?

नैना : वो मेरी बीट फ्रेंड है इस लिए बता दिया

अमित : अब वो मेरी जान ले लेंगी और पता नहीं क्या क्या कहेंगी.

नैना : तुम उसकी टेंशन मत लो मैं उसे देख लुंगी .

थोड़ी देर नैना दीदी से बात करने क बाद मैंने कॉल कट कर दी. तभी मोहित मेरे रूम में आ गया.

मोहित : अबे कहाँ गायब रहता है ? तुझे अपने साथ लेकर जाना था और तू है क इतना लेट आने लगा है. कैसा रहा आज शिवानी क साथ तूने बताया नहीं?

अमित : सब ठीक रहा आंटी से मिला वो बहुत अछि हैं और मुझे लगता है शिवानी भी दिल की अछि है मगर उसने मोंटी और शीना क कहने पर वो सब क्यों किया ये समझ नहीं आ रही.

मोहित : तूने क्या सोचा है अब क्या करना है. कहीं फिर से किसी पंगे में न फास जाना

अमित : वो ऐसा नहीं करेगी इतना तो मुझे यकीन है. वो सब छोड़ कल राधा का बर्थडे है और मैं सोच रहा हूँ कल एक छोटी स सरप्राइज पार्टी रखते हैं कॉलेज क बहार. तू क्या कहता है?

मोहित : ये तो बहुत अछि बात है .

अमित : तो ऐसा कर तू मीनल को बता दे कल हमने सरप्राइज देना है राधा को इस बात का ध्यान रखें और जो भी राधा की और उसकी फ्रेंड्स हैं उनको भी इन्विते कर ले कल.

मोहित : मैं अभी उसे बताता हूँ और सरप्राइज रखने का भी कह दूंगा. वैसे पिछले बार जहाँ गए थे वही रेस्टोरेंट सही रहेगा तुम क्या कहते हो?

अमित : हाँ वो hi ठीक है . कल थर्ड लेक्चर में चलेंगे तू पहले निकल जाना केक का देख लेना.

मोहित : तू टेंशन न ले अब मैं भी चलता हूँ मीनल से बात कर लूँ तू भी रेस्ट कर. गुड नाईट

अगले दिन सुबह मैं कॉलेज क गेट पर खड़ा हो कर राधा और नेहा दीदी का इंतज़ार करने लगा तभी वो दोनों आ गयी. मुझे यूँ खड़े इंतज़ार करता देख कर राधुसकुरा रही थी तो नेहा दीदी हैरान हो रही थी.

नेहा : तू यहाँ क्या कर रहा है गेट पर खड़ा हो कर?

अमित : आप का hi इंतज़ार कर रहा था.

नेहा : क्या बात है? कोई काम था क्या? फ़ोन कर लेता

राधा आज खिली खिली लग रही थी आज उसका जन्मदिन जो था. आज वो पिंक सूट पेहेन कर आयी थी और बिलकुल पिंक रोज की तरह लग रही थी. क्यूंकि उसका दूधिया रंग भी शर्माने से पिंक hi लग रहा था. राधा बार बार मुझे देख कर नज़रें झुका लेती और मुस्कुराने लगती जैसे उसे पता था की मैं उसको बर्थडे विश करने क लिए hi यहाँ खड़ा उनका इंतज़ार कर रहा था.

अमित : वो दीदी आपसे एक काम था ज़रा इधर आएँगी.

राधा मेरी इस बात से हैरान हो कर मुझे देखने लगी. और मैं नेहा दीदी को साइड में ले गया.

नेहा : क्या बात है?

अमित : दीदी आपको तो पता hi होगा राधा का आज बर्थडे है. मैं सोच रहा हूँ उसे एक सरप्राइज पार्टी देते हैं. मैंने सब अर्रंगेमेन्ट्स कर लिए हैं आप थर्ड लेक्चर में उसे लेकर कैंटीन में आ जाना बस और हाँ उसे पता न चले क मुझे पता है उसके बर्थडे का.

नेहा : मगर तू उसे अभी विश तो कर सकता है न उसे बुरा लगेगा अगर तूने विश नहीं किया तो.

अमित : ज़रा सोचिये जब उसे सरप्राइज पार्टी दूंगा तो वो कितना खुश होगी

नेहा : बात तो तेरी सही है. राधा ने शायद किसी को बताया भी नहीं होगा क उसका बर्थडे है आज बेचारी कभी मानती भी तो नहीं अपना बर्थडे.

अमित : इसी लिए तो मैं ये सब कर रहा हूँ. अब आपको कैसे भी कर क राधा को ले के आना है.

नेहा : ठीक है .

नेहा दीदी राधा क साथ चली गयी और मैं अपनी क्लास की तरफ. राधा को अब मुझ पर गुस्सा आ रहा होगा क मैंने उसे विश नहीं किया मगर जब सरप्राइज पार्टी देखेगी तो उसका गुस्सा फुर्र्र हो जायेगा. यही सोचता हुआ मैं क्लास में चला गया. चंद्रकांता मम क्लास में आ गयी और मैं हमेशा की तरह मोहित क साथ लास्ट बेंच पर बैठा था.

चंद्रकांता : यू स्टैंड उप . मैंने तुमसे hi कहा है.

चंद्रकांता म ने मुझे खड़ा होने क लिए कह दिया . मैं परेशां हो गया क अब मैंने क्या कर दिया अब ये किस बात पर गुस्सा है.

चंद्रकांता : तुम यहाँ पड़ने आते हो या आशिकी करने ?

अमित : मैंने क्या किया मम?

चंद्रकांता : क्या किया? गेट पर लड़की को रोक कर क्या बातें कर रहे थे तुम ? यहाँ पड़ने आते हो तो पड़े पर ध्यान दो. हर बार प्रिंसिपल तुम्हे बचने नहीं आएंगे

अमित : मम वो मेरी

चंद्रकांता : चुपचाप मेरी बात सुनो मेरी बात अभी ख़तम नहीं हुई. पहले भी तुमने उस लड़की क साथ बदतमीज़ी की थी . अब अगर कोई ऐसी वैसी तुम्हारे खिलाफ कंप्लेंट आयी तो कॉलेज से बहार जाओगे सीधा अब बैठ जाओ

अमित : मम वो मेरी

चंद्रकांता : तुमने सुना नहीं चुपचाप बैठ जाओ

‘इसकी माँ की ‘ मन में गलियां देता हुआ मैं अपनी जगह पर बैठ गया .

मोहित : क्या चक्कर है भाई कोण थी वो ?

अमित : कुछ नहीं यार नेहा दीदी से बात कर रहा था राधा की बर्थडे पार्टी क बारे में

मोहित : ये मैडम को प्रॉब्लम क्या है तुमसे . तूने बताया क्यों नहीं वो तेरी कजिन है

अमित : मौका hi कहाँ दिया मुझे कुछ बोलने का. चल अब चुप बैठ कहीं बहार न निकल दे.

जैसे तैसे चंद्रकांता का लेक्चर ख़तम हुआ और मंजू म क्लास में चली आयी. हमेशा की तरह मुस्कुराती हुई . उनकी मुस्कराहट देख कर मैं चंद्रकांता म क साथ हुई कड़वाहट भूल गया. मंजू म आते hi पहले मेरी तरफ ज़रूर देखती थी और आँखों से hi इशारा कर दिया करती थी मगर इस तरह क किसी को पता भी न चले. मम का लेक्चर ख़तम होने से पहले hi पेओन प्रिंसिपल क मैसेज लेकर आ गया और मम लेक्चर बीच में hi छोड़ कर चली गयी. मैं मोहित को लेकर कैंटीन की तरफ चल दिया. लेक्चर की बेल्ल बजते hi मीनल रीमा और राधा कैंटीन में आती हुई नज़र आयी. राधा क चहरे पर गुस्सा और नाराज़गी साग झलक रहे थे. मुझे कैंटीन में बैठा देख कर वो लाइब्रेरी जाने का बोलने लगी मगर मीनल उसे जाने नहीं दे रही थी तभी नेहा दीदी भी आ गयी.

मीनल : तो चलो अब वेट किस का है?

मोहित : चलो चलो बस नेहा दीदी का hi इंतज़ार था

राधा : कहाँ जाना है ? मुझे कहीं नहीं जाना मैं लाइब्रेरी जा रही हूँ.

नेहा : तू कहीं नहीं जा रही. चुप चाप हमारे साथ चल तू भी .

राधा : दीदी आप भी ? आपको तो पता है न ? मेरा मूड ठीक नहीं है. आपको जाना है तो जाओ.

अमित : ये क्या राधा ? आज मेरे दोस्त का बर्थडे और तुम ऐसे मन कर रही हो. तुम्हे भी साथ चलना होगा वर्ण मैं कभी तुमसे बात नहीं करूँगा.

मैंने बात करते हुए मोहित क कंधे पर हाथ रख कर उसे खुद से चिपका लिया . राधा ये समझी शायद मोहित का बर्थडे है.

राधा : ( दूसरों का बर्थडे यद् है और मेरा नहीं. सुबह से एक बार भी विश नहीं की . ऊपर से धमकी देता है क बात नहीं करूँगा. तुम्हे तो मैं देख लुंगी. मगर अब क्या करूँ अगर मैंने मन किया तो इसकी इंसल्ट हो जाएगी. हाँ कर देती हूँ बाद में देखा जायेगा ) ठीक है . हैप्पी बर्थडे मोहित पर मेरे पास कोई गिफ्ट नहीं है. मुझे पता नहीं था मैं कल ले आउंगी.

मोहित राधा की बात पर हसने लगा मगर मैंने उसके पेट में कोहनी मर कर उसे कण्ट्रोल करने को कहा.

मोहित : कोई बात नहीं गिफ्ट ज़रूरी नहीं होता. ज़रूरी होता है सेलिब्रेशन में शामिल होना. अब चलो जल्दी वर्ण देर हो जाएगी.

हम सब पार्किंग की तरफ चल दिए. राधा मेरी तरफ देख भी नहीं रही थी और मैं मन hi मन है रहा था. राधा नेहा दीदी को लेकर मीनल और मोहित क साथ उसकी कार में बैठ गयी. और मैं अकेला रह गया रीमा क साथ . रीमा रोज़ की तरह आज भी सिंपल वाइट सूट में बहुत खूबसूरत दिख रही थी. कंधे से थोड़ा नीचे तक खुले कर्ली बाल जो हलके ब्रोनिश लुक देते थे. रीमा बार बार मुस्कुराती हुई मुझे कनखियों से देख रही थी .

रीमा : आप बहुत ध्यान रखते हैं अपनी कौसिन्स का . राधा को जब जब पता चलेगा क उसके बर्थडे की पार्टी है तो कितनी खुश होगी वो .

अमित : मुझे उसके चहरे पर वही ख़ुशी तो देखनी है . उस ख़ुशी की कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती जब आपको अनएक्सपेक्टेड कुछ ाचा मिलता है तो आपके चहरे पर जो उस वक़्त ख़ुशी होती है उसका तो वर्णन भी नहीं किया जा सकता. वैसे हम दोनों शामे hi बैच में हैं तो फॉर्मेलिटी बंद कर देनी चाहिए वर्ण ऐसे लगता है क जैसे अजनबी हो. तुम मुझे आप मत कहा करो सीधा तुम hi कहो

रीमा : जैसे आप को ठीक लगे मतलब तुमको

अमित : वैसे एक बात तो माननी पड़ेगी तुम इस वाइट सूट में बिलकुल अप्सरा लग रही हो. तुम पर कॉलेज क सब लड़के मरते होंगे . कितने पर्पस आ गए अब तक?

रीमा : ( दूसरों की मुझे परवाह नहीं मैं तो बस तुम्हे पाना चाहती हूँ ) बलुशिंग . वो तो लड़कों का काम hi है जहाँ कोई लड़की देखि उसके पीछे लग जाते हैं. मैं कोई उतनी भी सुन्दर नहीं जितनी तुम तारीफ कर रहे हो. राधा तो मुझसे भी सुन्दर है. वैसे थैंक्स तारीफ क लिए

अमित : हर सुन्दर लड़की खुद को काम और दूसरों का ज्यादा सुन्दर समझती है जब तक की उसमे घमंड न हो. और तुमने राधा की तारीफ कर क ये बता दिया क तुम में घमंड नहीं है. ये अछि बात है. मैं खुश हूँ क मुझे एक अछि दोस्त मिली है तुम्हारे रूप में

रीमा : थैंक्स तुमने मुझे इस काबिल समझा. वैसे एक बात पूछूं अगर बुरा न मनो तो?

अमित : अगर दोस्त ऐसे तकल्लुफ करेंगे तो बुरा तो लगेगा hi. तुम सीधा सवाल पूछो ऐसे फॉर्मेलिटी मत करो

रीमा : तुमने कोई गफ नहीं बनाई अभी तक ? मेरे मतलब है मैंने कभी तुम्हे किसी क साथ देखा नहीं और मीनल भी बता रही थी क तुमने गफ नहीं बनाई. इसकी कोई खास वजह?

अमित : मुझे इंटरेस्ट नहीं इन सब बातों में. वैसे भी यहाँ पर लोग चार दिन की चांदनी वाला रिश्ता hi रखते हैं. प्यार भरी बातें की मज़े लिए और आगे हुए. मैं तो सच्चे प्यार में यकीन रखता हूँ जो कहीं नज़र नहीं अत.

रीमा : ( मैं भी तो ऐसा hi इंसान ढून्ढ रही थी जो प्यार को समझे , लगता है तुम hi मेरी मंज़िल हो . इसी लिए तुम्हे देखते hi मैं तुम पर फ़िदा हो गयी थी ) इंसान जिसे बहार ढून्ढ रहा होता है कई बार वो उसकी बगल में hi होता है बस उसे एहसास नहीं होता . क्या पता आपको सच्चा प्यार आपके आसपास hi मिल जाये.

रीमा की बात सुन कर जब मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मेरी hi तरफ देख रही थी मगर ड्राइविंग करने की वजह से वो जल्दी hi सामने देखने लगी. रीमा की आँखों में कुछ था जो वो कहना चाहती थी मगर कहते कहते रुक गयी. मुझे भी एहसास होने लगा क वो किस तरफ इशारा कर रही है. मगर मैं उसे दुःख नहीं देना चाहता था .

अमित : प्यार ख़ुशी दे या न दे गम ज़रूर देता है . इस किये इससे तो बच कर hi रहना चाहिए

रीमा : प्यार तो एक जुआ है साहब किसके हिस्से में क्या आया ये तक़दीर की बात है. मगर मैं तो कहूँगी एक बार ज़िन्दगी में प्यार ज़रूर करना चाहिए. मरते वक़्त ये तो पछतावा न हो क खुदा की सबसे अनमोल चीज़ को हमने महसूस hi नहीं किया.

रीमा की इतनी गहरी बात सुन कर मैं सोच में पद गया. रीमा जितनी खूबसूरत थी उससे कहीं ज्यादा उसके शब्दों में गहराई थी. रीमा की एक एक बात सही थी मगर मैं तो अपने हिस्से का जुआ खेल चूका था और उस जुए ने मुझे उम्र भर का दर्द भी दे दिया था. एक एक मेरी आँखों क आगे मंजरी का चेहरा घूमने लगा और मुझे रीमा में भी मंजरी नज़र आने लगी. इससे पहले क मैं उसकी तरफ हाथ बढ़ता रीमा ने गाडी रोक दी और मैं भी होश में आ गया.

रीमा : लीजिये पहुँच गए.

मैं रीमा क साथ गाड़ी से उतर गया मोहित की कार सामने कड़ी थी और वो लोग शायद अंदर जा चुके थे. इस लिए मैं भी अंदर चला गया. मोहित ने पहले hi रेस्टोरेंट वाले से सेटिंग कर क राखी थी . 2 टेबल को जोड़ कर उन्होंने पार्टी क लिए जगह बना राखी थी. मोहित ने वेटर को इशारा किया तो वो केक ले आया . केक के ऊपर अपना नाम देख कर राधा ख़ुशी से उछाल पड़ी.

राधा : ये सब मेरे लिए है ? तुम लोगों को पता था क आज मेरा बर्थडे है? मैंने तो किसी को बताया नहीं था फिर किसे ?

नेहा : तुम्हे क्या लगा था क अमित को यद् नहीं है तुम्हारा बर्थडे ? ये सब इसी का प्लान था और सुबह ये मुझे ये hi सब बता रहा था.

नेहा दीदी क बात से राधा की आँखों में ख़ुशी क आंसू आ गए और वो अपनी चेयर से उठ कर मेरे पास गयी . मैं भी अपनी जगह से खड़ा हो गया.

अमित : हैप्पी बर्थडे राधा. तुमने सोचा भी कैसे क मैं तुम्हारा बर्थडे भूल जाऊंगा. आज से पहले कभी मुझे मौका नहीं मिलता था इस लिए मैं कभी तुम्हारे साथ तुम्हारा बर्थडे मन नहीं प्या मगर आज तो हम साथ हैं न.

राधा ने मुझे कस क गले लगा लिया. उसकी आँखों में ख़ुशी क आंसू थे . राधा को इतना खुश देख कर मेरे दिल को भी बहुत ख़ुशी मिल रही थी. राधा सब के सामने मुझे ऐसे लिपटी पड़ी थी जैसे पेड़ क साथ वाईल चिपकी रहती है. हम दोनों ऐसे गले लगे हुए थे जैसे क दो प्रेमी बरसों बाद मिले हों.

राधा : थैंक यू थैंक यू वैरी मच . आज तक मुझे इतनी ख़ुशी कभी नहीं हुई. थैंक यू वैरी वैरी मच . तुम बहुत अचे हो मुझे तो लगा था क तुम्हे यद् भी नहीं होगा मगर तुमने मेरे लिए ये सब किया. मैं बहुत बहुत बहुत खुश हूँ.

मीनल : बस भी करो मैडम अब केक कटगी या हम खुद hi निपट लें

मीनल की बात सुन कर राधा मुझसे अलग हुई सुर साथ में hi शर्माने लगी क अभी अभी वो कैसे मेरे साथ गले लगी हुई थी. राधा का ऐसे शर्माना और मुझे देख देख कर मुस्कुराना मुझे बहुत ाचा लगता था. सच में कितनी क्यूट थी राधा बिलकुल मासूम बची की तरह उसकी हंसी दिल में उतर जाती थी .

राधा ने केक क ऊपर लगी कैंडल बुझाई और केक काटने क बाद पहला पीेछे मेरे मुँह में डाला . राधा क चहरे पर एक अलग hi नूर नज़र आ रहा था मैंने भी एक टुकड़ा उठा कर राधा क मुँह में डाला तो राधा ने मेरी उंगली पर हल्का सा बाईट कर दिया. बरी बरी से सबने राधा का मुँह मीठा करवाया और फिर गिफ्ट देने लगे . मोहित और मीनल क साथ रीमा ने भी राधा को गिफ्ट दिया .

राधा : इसकी क्या ज़रूरत थी मैंने तो आप लोगों को बोलै भी नहीं था. इतनी जल्दी अपने कैसे ये सब?

मीनल : तो क्या हुआ ? मोहित ने मुझे रत को hi बता दिया था. इस लिए मैंने रीमा को भी बता दिया और रीमा मेरे और अपने लिए भी गिफ्ट ले आयी

मीनल की बात सुन कर मैं राधा रीमा की तरफ देखने लगे .

रीमा : ऐसे क्या देख रही हो ? मैं क्या अपनी फ्रेंड को गिफ्ट भी नहीं दे सकती? वो बात अलग है क जायदा समय माहि मिला वर्ण कुछ ाचा सा प्लान कर क लती.

रीमा ने राधा क लिए गिफ्ट ला कर मेरे राधा क मन में अपनी जगह पक्की कर ली थी.

नेहा : भाई मैं तो बाद में hi दूंगी वो घर पर रख है .

राधा : मैंने आपसे माँगा है क्या?

नेहा : गिफ्ट मांगे नहीं जाते राधा की बची . मैंने पहले hi ले रखा है वो शाम को तुम्हे मिल जायेगा.

मैंने मोहित को इशारा किया और वो अपनी कार की डिक्की से गिफ्ट निकल कर ले आया . मैंने दोनों गिफ्ट राधा को दे दिए.

राधा : इसकी क्या ज़रूरत थी तुमने पहले hi इतना सब किया है . अब ये गिफ्ट ?

अमित : चुप चाप रखलो मैंने तुम्हारे लिए hi लिए हैं

बैग वाला गिफ्ट थोड़ा बड़ा दिख रहा था इस लिए राधा ने मुझसे पूछा

राधा : इसमें क्या है?

अमित : खुद hi देख लो

राधा ने जल्दी से व्रैप खोल दिया तो बिच में सुन्दर सा लेथरे का बैग देख कर वो खुश हो गयी . लड़कियों को इन सब चीज़ों की खास समझ होती है इस लिए मीनल रीमा और नेहा दीदी भी बैग को चेक करने लगीं.

मीनल : बैग तो बहुत ाचा है और इसे कॉलेज में भी उसे कर सकते हैं बहार भी . ज्यादा बड़ा भी नहीं और छोटा भी नहीं. क्वालिटी भी अछि है.

रीमा : और देखो ये ब्रांड भी कितना फेमस है लाठर क्वालिटी में ये no.1 है.

नेहा : तुम्हे इतनी समझ कहाँ से आ गयी लड़कियों क बारे में ? सच सच बताओ कहाँ से लिया ये?

अमित : दीदी आम खाने चाहिए पेड़ नहीं पूछना चाहिए. मैंने कितनी म्हणत से ये ढून्ढ कर लिया है वो आपको नज़र नहीं आया .

राधा : थैंक्स अगेन मुझे ये बहुत पसंद आया अब से मैंने यही बैग लेकर कॉलेज आया करुँगी.

अमित : बार बार थैंक्स मत बोलो अब दूसरा गिफ्ट भी खोलो

राधा ने दूसरा गिफ्ट भी ओपन किया तो उसमे ब्रांडेड मोबाइल देख कर वी मेरी तरफ देखने लगी.

अमित : क्या हुआ ? ऐसे क्या देख रही हो?

राधा : ये तो बहुत मेहेंगा होगा न ? तुमने क्यों लिया इतना मेहेंगा ? मुझे इसकी ज़रूरत नहीं है ये मैं नहीं लुंगी.

अमित : गिफ्ट देने वाले की नियत देखि जाती है कीमत नहीं . अगर तुमने इंकार किया तो फिर मुझसे बात मत करना कभी. और तुम्हे इसकी कितनी ज़रूरत है ये मुझे पता है.

राधा : मगर मैं माँ को क्या कहूँगी?

अमित : अभी मौसी को मत दिखाना बाद में कह देना क मां ने दिया है. मेरा नाम लोगी तो वो कभी नहीं मानेंगी और बैग का भी मत बताना.

राधा की आँखों में जो ख़ुशी जो प्यार आज मैं अपने लिए देख रहा था उससे मुझे क अजीब सा सुकून मिल रहा था जो बयां नहीं किया जा सकता. खैर उसके बाद बाकि गिफ्ट भी राधा ने ओपन किये मीनल और रीमा क गिफ्ट में ब्रेसलेट और वाच थी . मोहित क गिफ्ट में शोपीस था . उसके बाद हमने पिज़्ज़ा नूडल कोल्डड्रिंक का मज़ा लिया. बिल पाय करने क टाइम जब मैं काउंटर पर गया तो राधा नेहा दीदी को लेकर मेरे पास आ गयी.

राधा : अमित ये लो पैसे हमारे पास अभी इतने है हैं बाकि बाद में दे दूंगी मैं.

अमित : तुम खुद को समझती क्या हो?

राधा : क्या हुआ? ऐसे क्यों कह रहे हो?

अमित : क्या ये पार्टी तुमने राखी थी ? क्या तुमने सबको बुलाया था? अपने पैसे अपने पास रख वर्ण लगाऊंगा एक कण क निचे बड़ी आये पैसे वाली. ये सब मेरी ज़िम्मेदारी है.

राधा : पर तुम भी तो अपनी पॉकेट मनी से hi डोज न ? तुम्हे मुश्किल होगी

अमित : ज्यादा दिमाग मत चलाओ अपना . मेरे पास मेरी पॉकेट मनी ऐसे hi पड़ी रहती है मैंने कौन सा खरच करनी होती है. अब अपने पैसे अपने पास रखो वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.

राधा ने पैसे वापिस रख लिए. उसके बाद हम सब कॉलेज वापिस आ गए . छुट्टी का टाइम हो रहा था इस लिए सीधा पार्किंग से रीमा हमें ड्राप करने क बाद bye bye करती निकल गयी. राधा और नेहा दीदी भी जब वापिस जाने लगे तो राधा ने मुझे पास बुलाया .

राधा : शाम को घर जल्दी आ जाना . माँ ने सबको 6 बजे का बोलै है. बड़े मां और ममी शायद आ भी चुके होंगे.

अमित : मगर मुझे तो किसी ने नहीं बुलाया . और तुम जानती हो मौसी मुझे पसंद नहीं करती ऐसे में मैं नहीं चाहता क तुम्हारी पार्टी का मज़ा किरकिरा हो. मेरी वजह से सबका मज़ा मैं ख़राब नहीं होने दूंगा. मैंने इसी लिए यहाँ कर ली न पार्टी . तुम मेरी चिंता मत करो

राधा : मुझे कुछ नहीं सुन्ना अगर तुम न आये तो मैं भी केक नहीं काटूंगी कह देती हूँ पहले hi. फिर देते रहना सबको जवाब खुद hi.

अमित : ाचा मेरी माँ मैं आ जाऊंगा मगर मौसी ने कुछ कहा तो फिर मैं वापिस आ जाऊंगा .

राधा : माँ कुछ नहीं कहेगी मुझे पता है. एंड थैंक्स अगेन

अमित : मरूंगा अब अगर फिर थैंक्स बोलै तो

राधा : सॉरी .

उसके बाद राधा और नेहा दीदी स्कूटी पर निकल गयी मैं भी मोहित और मीनल क साथ चल दिया. आज शाम को मैंने प्रैक्टिस से छुट्टी कर ली और तैयार हो कर सीधा दिव्या मौसी क घर की तरफ निकल लिया. मैं जान बुझ कर थोड़ा देरी से गया ताकि सब तयारी हो जाये मौसी का क्या पता है मुझे देख कर गरम hi न हो जाएँ. बाबा और माँ से मेरी बात हो गयी थी वो आ चुके थे और नैना दीदी ने भी बता दिया था क वो भी पहुँच गए हैं. रीता मौसी भी करुणा और नेहा दीदी संग पहुँच चुकी थी गाओं से सिर्फ बाबा और माँ hi ए थे दीपिका ममी और कामिनी ममी की प्रेगनेंसी की वजह से. मोहित को साथ ले जाना मुझे ठीक नहीं लगा क्यूंकि एक तो ये सिर्फ फॅमिली गाथेरिंग थी दूसरा पता नहीं था मौसी कैसे बेहवे करेंगी ऐसे में कहीं बेइज़्ज़ती न हो जाये. खैर मैं 7 बजे से कुछ देर पहले मौसी क घर पहुँच गया. मैंने जैसे hi बेल्ल बजे तो दरवाज़ा राधा ने खोला. राधा इस वक़्त रेड सूट में थी और गुलाब की तरह महक रही थी. वैसे तो वो पहले hi बहुत खूबसूरत थी मगर हल्का सा मेकअप करने क कारन वो और भी हसीं लग रही थी. काजल लगे होने क कारन उसकी वो हिरणी जैसी ऑंखें अपनी नज़र क एक वॉर से hi कतल कर देने क लिए काफी थी. कानो में झुमके गलों पर हलकी लाली गले में नेकलेस एक छोटी सी बिंदी माथे पर जैसे उसकी शोभा बड़ा रही थी.

राधा : कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ और तुम अब आ रहे हो. अब यही खड़े रहोगे क्या जल्दी अंदर चलो सब इंतज़ार कर रहे हैं.

अमित : तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो राधा . एक कला टीका लगा लो कहीं तुम्हे मेरी नज़र न लग जाये.

राधा मेरे मुँह से अपनी तारीफ सुन कर शर्मा गयी और उसके गलों की लाली और भी गहरी हो गयी.

राधा : तुम्हारी नज़र भला कैसे लग सकती है मुझे ? तुम तो .....

दिव्या मौसी : कौन है बहार ? इतना टाइम क्यों लगा रही हो चलो जल्दी आ कर केक काटो.



दिव्या मौसी की आवाज़ सुनते hi राधा मेरा हाथ पकड़ कर खींचते हुए अंदर ले गयी जहाँ सब मौजूद थे और टेबल पर केक सजा हुआ था. सबसे आगे दिव्या मौसी hi कड़ी थी और मुझे देखते hi उनके चहरे पर गुस्सा आ गया.
 
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