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नेक्स्ट डे फ्री लेक्चर में मैं नीरज क साथ तकनीशियन से मिला और उसने हमें रिकॉर्डिंग्स दिखाई. ऑडिटोरियम वाला कैमरा तो बंद पड़ा था इस लिए मैंने स्टाफ रूम वाले कैमरा की रिकॉर्डिंग दिखने को कहा. स्टाफ रूम में कैमरा बहार की तरफ लगा हुआ था जो कॉरिडोर की रिकॉर्डिंग करता था. रिकॉर्डिंग चेक करते हुए मैंने जब मंजू मम क साथ शालू को बात करते हुए देखा तो मैं शॉकेड हो गया. शालू मम से बात कर रही थी और जाते हुए उनके हाथ में कुछ पकड़ा कर गयी .
अमित ( मन में) इस का मतलब शालू ने मेरी मदद की मगर वो तो उस दिन मोंटी क साथ कड़ी थी. अगर शालू ने मेरी मदद की है तो इसका मतलब वो मोंटी क साथ नहीं है. मगर उसने मेरी मदद क्यों की. मोंटी को शायद पता नहीं होगा क शालू ने मेरी मदद की है. जब उसे पता चलेगा तो वो शालू से इसका बदला लेगी . अगर मैं पता लगा सकता हूँ तो शायद मोंटी ने भी अब तक पता लगा लिया होगा. मुझे पता करना चाहिए . शालू ने मेरी मदद की है मैं उसे कुछ होने नहीं दे सकता.
अमित : भैया क्या ये वीडियो किसी ने पहले आ कर देखा है क्या ?
तकनीशियन : नहीं मुझसे तो किसी ने नहीं पूछा. ऐसा क्या है इसमें ?
अमित : भाई प्लीज आप वीडियो में से इतना हिसस डिलीट कर दीजिये
तकनीशियन : मैं ऐसा नहीं कर सकता अगर कल को किसी ने मांग ली तो मेरी नौकरी पर बात आ जाएगी.
अमित : ( नीरज से) भाई प्लीज आप इनसे कहिये क इतना हिस्सा डिलीट कर दें बस पांच मिनट की तो बात है .
नीरज : मगर इसकी ज़रूरत hi क्या है
अमित : भाई अगर ये वीडियो मोंटी ने चेक कर्ली तो शालू को खतरा होगा प्लीज उसने पता नहीं क्यों पर मेरी मदद की है और मेरा भी फ़र्ज़ है मैं भी उसकी मदद करूँ .
नीरज : ठीक है मैं कुछ करता हूँ.
नीरज ने मुझे बहार रुकने को कहा और खुद तकनीशियन से बात करने क लिए रुक गया. 5 मिनट्स बाद hi नीरज वापिस आया और हम खली क्लास रूम में बैठ कर बात करने लगे.
अमित : आपने देखा शालू मंजू मम को कुछ पकड़ा रही थी इसका मतलब यही है क उसी ने मेरी मदद की है. उसने मुझे बचा कर मुझ पर एहसान किया है और अब मैं उसे बचाऊंगा . मगर एक बात समझ में नहीं आ रही क अगर वो मेरा साथ दे रही थी तो वो मुझसे दूर क्यों भगति है और वो मोंटी का साथ क्यों दे रही है.
नीरज : मगर तू यकीन से कैसे कह सकता है क उसने तेरी मदद की है?
अमित : क्यूंकि मंजू मम ने hi मेरी बेगुनाहो वाली वीडियो प्रिंसिपल सर को दी थी मगर उन्होंने ये नहीं बताया क उनको ये वीडियो कहाँ से मिली. उन्होंने इतना hi कहा क किसी ने लिफाफे में डालकर उनके टेबल पर वो मेमोरी कार्ड रख दिया था .
नीरज : मगर मम ने क्यों नहीं बताया?
अमित : शायद वो नहीं चाहती थी क किसी को शालू क बारे में पता चले .
हम बातें कर रहे थे क नीरज क फ़ोन पर किसी का फ़ोन आया और बात करने क बाद उसने बताया क प्रिंसिपल सर ने मुझे ऑफिस में बुलाया है. हम दोनों प्रिंसिपल सर क ऑफिस पहुँच गए. सर ने नीरज को बहार hi रुकने को कहा. ऑफिस में शिवानी प्रोफ वरिंदर और एक अंकल आंटी भी मौजूद थे
प्रिंसिपल : आओ अमित बैठो इनसे मिलो ये शिवानी क पेरेंट्स हैं और ये तुमसे कुछ बात करना चाहते हैं. वैसे मैंने अपना स्टैंड क्लियर कर दिया है फिर भी मैनेजमेंट चाहती है क तुम्हे एक बार मैं इनसे मिलवा दूँ.
Shivani’s डैड: मेरी बेटी से जो भी गलती हुई है उसके लिए मुझे अफसोस है और तुम जो भी हर्जाना कहोगे मैं भरने क लिए तैयार हूँ. तुम अपनी कंप्लेंट वापिस लेलो
अमित (शिवानी का बाप लगता है घमंडी किस्म का आदमी है . इसी लिए अभी भी पैसों का घमंड दिखा रहा है. प्रिंसिपल सर ने क्लियर कर दिया है क वो अपने स्टैंड पर क्लियर हैं जैसे की प्रोफ वरिंदर ने बताया था. इसका मतलब है मैनेजमेंट सर पर प्रेशर दाल रही है और अगर मैंने कंप्लेंट वापिस नहीं ली तो शायद प्रिंसिपल मेरी hi साइड लेंगे और उनकी बात न मने जाने पर वो इस्तीफा दे देंगे. )
अमित : शायद आपकी नज़र में इज़्ज़त की कीमत चाँद सिक्के हैं अंकल इसी लिए आप ऐसा कह रहे हैं. अगर मैंने सच में शिवानी का रपे किया होता तो क्या आप तब भी ऐसा hi करते ? मतलब कुछ पैसों क लिए मामला रफा दफा कर देते?
Shivani’s डैड: ये क्या बकवास कर रहे हो.
अमित : ी ऍम सॉरी अंकल पर ये आप hi ने कहा. आपने मेरी इज़्ज़त की कीमत लगाने की कोशिश की. मैं ये साफ कह दूँ क मैं आपके जितना अमित तो नहीं पर मेरी भी अपनी इज़्ज़त है और इज़्ज़त हर इंसान की एक बराबर होती है जिसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती.
मेरी बात पर शिवानी क बाप की बोलती बंद हो गयी और प्रिंसिपल सर और प्रोफ वर्मा गर्व से मेरी तरफ देखने लगे.
Shivani’s माँ: बीटा मैं इनकी इस बात क लिए माफ़ी मांगती हूँ तुमसे . पर ज़रा सोचो मेरी बेटी की इस गलती की वजह से इसका करियर ख़राब हो जायेगा ऊपर से बदनामी अलग से होगी. मैं तुम्हारे आगे बाथ जोड़ती हूँ प्लीज तुम एक बार शिवानी को माफ़ कार्डो
मैंने आगे बाद कर आंटी क जुड़े हुए हाथ पकड़ लिए.
अमित : ये क्या आंटी एक तरफ आप मुझे बीटा भी कह रही हैं और हाथ भी जोड़ रही हैं क्या ये ाचा लगता है एक माँ अपने बेटे क आगे हाथ जोड़े. आप सचमुच बहुत अछि हैं और इज़्ज़त क्या है ये आप अछि तरह समझती हैं. मैं अपनी फॅमिली से बहुत प्यार करता हूँ ज़रा सोचिये अगर मैं बेगुनाह साबित न होता तो मेरी फॅमिली पर क्या गुज़रती ? वो तो शर्म से hi मर जाते क उनका बीटा एक रेपिस्ट है. आपकी बेटी बहुत भोली और नादाँ है . इसे नहीं पता क इसने क्या किया है. शायद इसने कभी परिवार की इज़्ज़त और अहमियत को नहीं समझा वर्ण ये ऐसा नहीं करती. हो सकता है ये किसी दबाव में ऐसा कर रही हो . मुझे इससे कोई शिकायत नहीं है भगवन ने मेरी मदद की इसी लिए मैं बच गया मेरी माँ की दुआओं ने मुझे बचा लिया. मैं आइल खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेना चाहता मगर ऊपर वाले से दुआ करूँगा क वो इसे इस बात का एहसास ज़रूर करवाए क इज़्ज़त हर किसी की उसकी जान से भी कीमती होती है. अगर मैं रेपिस्ट साबित हो जाता तो शायद मैं खुद को ख़तम कर लेता मगर ऐसा नहीं हुआ इस किये मैं इसे माफ़ करता हूँ.
प्रिंसिपल सर प्लीज आपसे मेरी रिक्वेस्ट है क आप शिवानी क खिलाफ कोई एक्शन न ले.
शिवानी शर्मिंदगी से सर झुकाये कड़ी थी. शिवानी क बाप क इम्प्रैशन से पता चल रहा था क उसकी दौलत का घमंड उसे कुछ भी फील करने माहि दे रहा है मगर शिवानी की माँ क चहरे पर करीतिग्य क भाव थे. मेरी बात ख़तम होते hi शिवानी की माँ ने मुझे गले लगा लिया.
Shivani’s माँ: थैंक यू वैरी मच बीटा . तुम सच में बहुत अचे हो तुम्हारे माँ बाप ने तुम्हे बहुत hi अचे संस्कार दिए हैं. तुम्हारे पास बहुत बड़ा दिल है इसी लिए तुमने इतनी आसानी से इसे माफ़ कर दिया. मैं तुम्हारा एहसान कैसे उतरूंगी.
अमित : आंटी अपने मेरे सर पर प्यार से हाथ रख दिया मेरे लिए इतना hi काफी है. और शिवानी तुम्हे बस इतना hi कहूंगा क अचे लोगों की सांगत में रहो वर्ण बुरे लोगों की सांगत एक दिन तुम्हे किसी न किसी मोड़ पर डूबा देगी. सर क्या मैं अब जा सकता हूँ?
प्रिंसिपल सर : हाँ बीटा तुम जा सकते हो एंड ी प्राउड ऑफ़ यू माय सोन.
मैं सर से आज्ञा ले कर बहार आ गया शिवानी सर झुकाये कड़ी थी और शायद उसे एहसास हो रहा था क उसने मेरे साथ गलत किया है. मैं उसे माफ़ तो नहीं करना चाहता था मगर मैं ऐसा नहीं करता तो इससे कॉलेज को इतने अचे प्रिंसिपल और प्रोफ वर्मा से हाथ धोना पद सकता था जो मैं बिलकुल नहीं चाहता था. कहते हैं बुरे इंसान को मरने से बुराई नहीं मरती , मरना है तो बुराई को मारो और इसके लिए ज़रूरी है बुरे इंसान क साथ अच्छी की जाये ताकि वो आपके एहसानो क बोझ टेल डाब कर खुद hi बुराई छोड़ दे और मैंने ऐसा hi किया शिवानी को एक मौका देकर . अगर फिर भी वो नहीं सुधरी तो महात्मा गाँधी की तरह मैं दूसरा गाल आगे नहीं करूँगा.
नीरज बहार मेरा वेट कर रहा था उसने मुझसे पूछा तो मैंने सब बता दिया. उसके बाद मैंने अपने लेक्चर अटेंड किये और राधा नेहा दीदी क साथ छुट्टी क वक़्त मिला और फिर मोहित क साथ घर आ गया.
शाम को प्रैक्टिस क बाद जब मैं मंजू मम क घर ट्यूशन पड़ने गया तो मम ने कुछ देर मुझे पढ़ाया और फिर मुझे स्टडी करने का बोल कर अपने कमरे में चली गयी. कल से मंजू मम कुछ शांत सी लग रही थी जैसे वो किसी सोच में गम हो और आज कॉलेज में भी उनकी स्माइल कुछ फीकी थी मुझे लगा शायद कल मैंने जो कुछ भी कहा वो उन्हें ाचा न लगा हो. मैं मन hi मन सोच रहा था क मुझे उनसे माफ़ी मांग लेनी चाहिए . मैं अपनी सोच में डूबा था क मंजू म ने खांस कर मुझे होश में आने का इशारा किया.
मैंने जैसे hi मंजू म की तरफ देखा तो बस देखता hi रह गया . मुझे लगा मेरे सामने मंजू म नहीं कोई और hi कड़ी हो . ये मंजू म हो hi नहीं सकती ये तो कोई कॉलेज गोइंग लड़की है कितनी खूबसूरत है. मेरे सामने मंजू मम एक सलवार कमीज में कड़ी थी . सूट की फिटिंग इतनी टाइट थी क उनके जिस्म का एक एक हिस्सा क्लियर पता चल रहा था. उभरे हुए बड़े बड़े बूब्स सपाट पेट . ऐसे लग रहा था क पेट क ऊपर छाती वाला हिस्सा अलग से चिपका दिया हो. कमीज क नीचे सलवार थोड़ी खुली थी मगर उनकी ये सादगी उनके हुसैन को क़यामत बना रही थी. मेरा मुँह आश्चर्य से खुला हुआ था जिसे देख कर मम हसने लगी.
मंजू म: मुँह बंद कर लो नहीं तो माखी अंदर घुस जाएगी.
अमित : वो मैं वो .... वो .... आप ... आप सच मच बहुत खूबसूरत हैं जैसे कोई अप्सरा हो यू अरे सो ब्यूटीफुल
मंजू म : शर्म नहीं अति अपनी दीदी को ऐसे कहते हुए
अमित : ी ऍम सॉरी वो गलती से मुँह से निकल गया मगर आप सच में बहुत खूबसूरत हैं
मंजू म : ाचा बच्चू ! मेरे साथ hi फ़्लर्ट करने लगे . कॉलेज में कोई मिली नहीं तुम्हे जो मेरे साथ यहाँ फ़्लर्ट करने आ गए.
अमित : नहीं नहीं मैं कोई फ़्लर्ट नहीं कर रहा आप सच में बहुत खूबसूरत हैं . ऊपर वाले की नायब कारीगरी का नमूना हैं आप . आप इतनी सादगी में भी कमल लगती हैं अगर आप थोङा बन थान क रहें तो क़यामत hi आ जाये देखने वालों पर
मंजू म : मुझे तो लगता है क़यामत तुम पर आ गयी है जो ऐसी बातें कर रहे हो . मैं भला कहाँ से खूबसूरत दिखने लगी तुम्हे.
अमित : मेरी नज़र से देखिये आपको पता चल जायेगा. आप हमेशा ऐसे hi सूट पहना कीजिये . ऊपर वाले ने आपको इतनी हुसैन की नेमत बक्शी है और आप ने खुद को यूँ कैद कर रखा है तन्हाई क अंधेरों में. अगर आपने पहले hi खुद को संभल कर जीना सिख लिया होता तो आज आप इतनी अकेली नहीं होती. मैं चाहूंगा क आप आज से hi फिर से वही पहले वाली मंजू बन जाएँ मुझे पूरा विश्वास है आपकी ज़िन्दगी फिर से महकने लगेगी.
मेरी बातों पर मंजू म जो पहले शर्मा रही थी वो अब फिर से गंभीर हो गयी. और कुछ देर शांत रहने क बाद बोली
मंजू म : नहीं अमित मुझ में अब इतनी हिम्मत नहीं है क मैं फिर से ज़िन्दगी को नए सिरे जी सकूँ . मैंने इतने सक्षम खाये हैं क अब तन्हाई क अंधेरों में hi मुझे सुकून मिलता है. अकेले रहना से काम से काम किसी क छोड़ कर जाने का दर तो नहीं रहता दिल में.
मंजू मम ने बड़ी गंभीरता से इतनी गहरी बात कही थी . उनकी आँखों में फिर से पानी आने लगा और वो पलट कर वापिस अपने कमरे में जाने लगी तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया.
अमित : अगर आप किसी पर भरोसा hi नहीं करेंगी तो कोई अपनी वफादारी कैसे साबित करेगा. मन क आप क अपने आपको छोड़ कर चले गए पर क्या इसका मतलब ये है क आप किसी को अपना hi नहीं सकती? मैं आपको खुश देखना चाहता हूँ . मैं जनता हूँ आपकी मायूसी ने आपको अपने hi अंदर कहीं लाईड कर दिया है मगर मुझे वो पहले वाली मंजू चाहिए जो हस्ती खिल खिलाती थी और मैं उसे आपके अंदर से आज़ाद करवा कर रहूँगा. मैं जनता हूँ आप मुझ पर इतनी जल्दी यकीन नहीं करेंगी मगर मैं आपसे वडा करता हूँ मैं आपको कभी अकेला छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगा क्यूंकि अकेलापन और अपनों से जुदाई क्या होती है मैं अछि तरह जनता हूँ.
मंजू मम ख़ामोशी से मेरी बात सुनती हुई मेरी आँखों में देख रही थी. और फिर वो अचानक मेरे गले लग गयी और रोना शुरू कर दिया.
मंजू मम : मैं बहुत अकेली हूँ अमित बहुत अकेली हूँ मेरा कोई भी नहीं है . कोई नहीं है जिसके साथ मैं खुश हो सकूँ कोई नहीं है जिसके साथ मैं रो सकूँ. कभी बात करने को दिल करे तो ये खामोश दीवारों से hi बात कर लेती हूँ कभी रोना चहुँ तो खुद hi अपने आंसू पोंछने पड़ते हैं. कोई एक भी ऐसा नहीं जो मुझे अपने होने का एहसास दिलाये. मैं इस दुनिया में जैसे सजा काटने hi आयी हूँ जो शायद मेरी मौत क साथ hi ख़तम होगी
मैंने मम को पीछे किया और उनके मुँह पर हाथ रख लिया.
अमित : खामोश अगर कभी मरने की बात की तो. और ये क्या लगा रखा है क मैं अकेली हूँ मेरा कोई नहीं है . मैं क्या मर गया हूँ ? आपके सामने आपका भाई खड़ा है और आपका ये भाई आपको कभी अकेला छोड़ कर नहीं जायेगा अगर मौत भी आ गयी तो उसे ये कह कर वापिस भेज दूंगा क मेरी मंजू दीदी की आज्ञा क बिना मैं उसके साथ भी नहीं जाऊंगा.
मंजू म : ऐसा न कहो ऐसा न कहो अमित मैं पहले hi सबको खो चुकी हूँ अब तुम्हारे रूप में मुझे अपना भाई मिला है मैं तुम्हे कहीं नहीं जाने दूंगी .
अमित : तो आ गया यद् क मैं भाई हूँ . अभी तो कह रही थी क आपका कोई नहीं है तब कहाँ गया था ये भाई. तब तो जीते जी मर दिया था ये कह कर क मेरे सब अपने मर गए
मंजू म : एक लगाउंगी तुझे जो ऐसी बातें करेगा तो.
अमित : तो आप भी आज क बाद नहीं रोयेंगी वर्ण मैं आपकी छोटी काट दूंगा.
मंजू म : क्या कहा तू मेरी छोटी कटेगा ठहर मैं तुझे बताती हूँ.
मम ने मेरे पेट में झूठमूठ मरना शुरू कर दिया और मैं भी चिल्लाता हुआ एक्टिंग करने लगा. मम क चहरे पर फिर से हंसी आ गयी जिसे देख कर मुझे सुकून मिला.
मंजू म : तुम बैठो मैं चेंज कर क कॉफ़ी बना कर लती हूँ
अमित : बिलकुल नहीं. आप अब इन कपड़ो को चेंज माहि करेंगी. आप नहीं जानती आप इन कपड़ो में कितनी अछि लगती हैं. आज से आप यही कपडे पहना करो .
मंजू म : तू फिर से शुरू हो गया. फॉर योर काइंड इनफार्मेशन मेरे पास सूट नहीं हैं और ये वाला सूट भी बहुत पुराण है देख नहीं रहे कितना टाइट हो रखा है. मैं इसे बदलने जा रही हूँ.
अमित : मैंने कहा न आप नहीं बदलेंगी ये सूट. मैं आपको ऐसे hi कपड़ो में देखना चाहता हूँ. वैसे आपकी फिटिंग आज भी वैसे hi है जैसे पहले थी सिर्फ आपको लग रहा है क ये टाइट है क्यूंकि आपको ढीली ढली सदी पहनने की आदत जो हो गयी है. रही बात कपड़ो की तो वो मेरी ज़िम्मेदारी है मैं देख लूंगा आपको बाद मेरे साथ चलना है.
मंजू म: मुझसे नहीं होगा
अमित : मैंने कहा न आपको बस मेरे साथ चलना है अब आप सोचिये क आप मेरी बात मानेंगी या नहीं और अगर आपने बात नहीं मणि तो मैं आपसे बात नहीं करूँगा.
मंजू म: तुम बात बात ओर ये इमोशनल ब्लैकमेलिंग क्यों करते हो? ाचा ठीक है मैं साथ चलूंगी जब तुम कहोगे मगर अभी तो मैं जा सकती हूँ न चेंज करने?
अमित : मैंने कहा आप मेरे साथ चलेंगी वो भी अभी.
मंजू म: नहीं मैं अभी नहीं जा सकती हम किसी और दिन चलेंगे न . हम संडे को चलेंगे तब हम दोनों hi फ्री होते हैं .
अमित : अभी इसी वक़्त और कोई बहाना नहीं.
मंजू म : तुम समझ नहीं रहे
अमित : तो मैं जॉन फिर
मंजू म: ाचा बाबा मगर ये सूट बहुत टाइट है मुझे इस सूट में बहार जाने में शर्म आएगी किसी ने देख लिया तो क्या सोचेगा ? मैं सदी पेहेन लेती हूँ .
अमित : यही तो वो बात है जिसकी वजह से हम अपने अरमान अपने सरे सपने अपने hi हाथो कतल कर देते हैं क ‘ कोई क्या सोचेगा?’ यहाँ हर किसी को अपनी लाइफ की टेंशन है किसी क पास इतना फालतू वक़्त माहि है क वो दूसरों को hi नोटिस करता रहे वो क्या कर रहा है. वैसे भी जिन लोगों में बातें बनानी होती हैं वो बात बना hi लेते है. आप किसी की ज़ुबान को नहीं रोक सकती . अपनी ज़िन्दगी अपनी मर्ज़ी से जीना सीखिए वर्ण ये दुनिया तो किसी को चैन से मरने भी नहीं देती उसमे भी दोष ढूंढ hi लेती है जीने की तो बात hi छोड़िये.
मंजू म: तुम इतनी समझदारी की बातें कैसे कर लेते हो अमित ? कहाँ से सीखा तुमने ये सब?
अमित : ज़िन्दगी से बड़ा कोई गुरु नहीं और मौत से बड़ा कोई सच नहीं होता मम . मैंने अब तक की ज़िन्दगी में बहुत कुछ देख लिया है यहाँ पर आपकी लाखों अच्छाइयों पर आपकी एक गलती भरी पड़ती है . लोग आपके सभी अचे काम भूल जाते हैं और यद् रखते हैं तो वो गलती जो अपने की थी. अब ये सब छोड़िये और चलिए मेरे साथ .
मंजू मम ख़ामोशी से कुछ देर मुझे देखती रही जैसे कुछ अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रही हों. और मैं भी मन hi मन अपनी ज़िन्दगी की फ्लैशबैक में चला गया था मगर मैं खुद को कण्ट्रोल कर क बहार जाने को पलट गया.
मंजू म : रुको मैं ज़रा कार की के लेलूं.
अमित : उसकी ज़रूरत नहीं है . हम मेरी गफ क साथ जायेंगे.
मंजू म: गफ क साथ ?
अमित : आप बस लॉक कीजिये और बहार चलिए.
मंजू मम मेरी बात का मतलब नहीं समझी वो यही सोच रही थी क मेरी कौन स गफ है और वो कहाँ ओर है जो अब हम उसके साथ जायेंगे . उन्होंने जल्दी से लॉक किया सब कुछ और बहार निकल आयी जहाँ मैं अपनी बुलेट मोड़ कर किक मरने hi वाला था.
मंजू म: कहाँ है तुम्हारी गफ और तुम ये बाइक को क्यों निकल रहे हो?
अमित : चुप चाप पीछे बैठ जाइये मम यही तो है मेरी गफ हम इसी क साथ जा रहे हैं.
मंजू म: क्या कहा बाइक पर no वे तुम इसे साइड लगाओ मैं कार निकलती हूँ.
अमित : मैंने कहा न चुप चाप बैठ जाइये
मंजू म : मगर मैं गिर जाउंगी मैं कभी बाइक पर नहीं बैठी.
अमित : क्या आपको मुझ पर भरोसा नहीं है?
मंजू म : तुम पर भरोसा न होता तो मैं तुम्हारे साथ आने को मानती hi नहीं. चलो ठीक है मगर पहले hi सुन लो अगर मुझे नीचे गिराया तो तेरी टंगे तोड़ दूंगी.
इतना कह कर मम मेरे पीछे बैठ गयी और एक हैट मेरी कमर पर रख कर दूसरा हाथ मेरे कंधे पर रख लिया. मैंने बाइक को किक मरी और हम निकल लिए .
मंजू म : अब कुछ बताओगे हम जा कहाँ रहे हैं ?
अमित : अभी पता चल जायेगा
मैंने बाइक की थोड़ी स्पीड बड़ाई तो मंजू म घबराने लगी और मुझे कास क पकड़ लिया . उनका हाथ मेरी छाती पर था और वो कास क मेरे साथ चिपक गयी जिससे मुझे अपनी पीठ पर उनके बड़े बड़े बूब्स की सॉफ्टनेस फील होने लगी
मंजू म : क्या कर रहे हो धीरे चलाओ मैं गिर जाउंगी प्लीज धीरे चलाओ
अमित : मुझ पर भरोसा है तो आराम से बैठिये मैं आपको गिरने नहीं दूंगा
मेरी बात सुन कर दोबारा मम ने मुझे धीरे चलने को नहीं कहा और धीरे धीरे रिलैक्स हो गयी जैसे उनको भी मेरी बात पर यकीन आ गया हो. हम जल्द hi एक मार्किट में पहुँच गए . अभी ज्यादा टाइम नहीं हुआ था इस लिए शॉप्स ओपन hi थी. मैं बाइक को पार्किंग एरिया में खड़ा कर क मम को लेकर एक बड़े से कपड़ों क शोरूम में ले आया जहाँ पर बहुत सरे नए नए सुइट्स डिस्प्ले में टंगे हुए थे. मम मुझे बार बार पूछ रही थी मैं यहाँ क्यों ले आया उनको मगर मैंने उन्हें चुप रहने को कहा.
काउंटर पर एक 2 सेल्स गर्ल थी जिसने हमारा वेलकम किया
सेल्स गर्ल : वेलकम मम वेलकम सर बताइये क्या पेश करूँ
अमित : मम क लिए पर्सनालिटी क हिसाब से नई डिज़ाइन क कॉटन सुइट्स दिखाइए
मंजू म मेरी तरफ ऑंखें निकल क देखने लगी जैसे मुझे मन कर रही हो मगर मैंने इशारे से चुप रहने को कहा.
सेल्स गर्ल ने दूसरी सेल्स गर्ल को भी साथ लिया और कुछ कॉटन सुइट्स दिखने लगी. मंजू मम ने मेरे इंसिस्ट करने पर सूट देखना शुरू किया. मम सुइट्स देखती हुई एक तरफ रखती जा रही थी मगर सेलेक्ट नहीं कर रही थी मुझे लगा मम जान भूख कर नहीं सेलेक्ट कर रही .
सेल्स गर्ल : ये देखिये मम ये नया कलेक्शन है आप पर परफेक्ट लगेगा . इसपर एम्ब्रॉयडरी है वो एंटीक है
मंजू म: मुझे इतना हैवी वर्क पसंद नहीं है.
सेल्स गर्ल : ये देखिये ये आज कल फैशन में है और इस पर ज्यादा वर्क भी नहीं है.
मंजू म : कोई और दिखाओ
अमित : ऐसा करो इसमें वाइट कलर दिखाओ विथ पिंक कॉम्बिनेशन
मम मेरी तरफ देखने लगी मगर मैंने उनकी तरफ नहीं देखा.
सेल्स गर्ल : ये देखिये मम वाइट सूट पर पिंक फ्लावर्स आप पर बहुत जंचेगा . आप बिलकुल गुलाब की तरह खिल जाएँगी
( सेल्स वाले भी बातों में कितने मास्टर होते हैं कस्टमर को चने क झाड़ पर चढ़ा देते है. और न चाहते हुए भी कस्टमर मजबूर हो जाता है उसे लेने क लिए. यही तो पहचान है एक अचे सेल्स मन की. और यकीनन ये सेल्स गर्ल भी माहिर थी इस कला में)
मैंने फोरम वो सूट पैक करने को बोलै.
मंजू म : बस हो गया अब चलें?
अमित : आपके पास स्काई ब्लू और ब्लैक में भी होगा कोई?
सेल्स गर्ल : जी सर जैसा आप कहें हमारे पास सब मिल जायेगा
मंजू म : मगर मुझे नहीं चाहिए और
सेल्स गर्ल : ले लीजिये न मम सर इतने प्यार से ले रहे हैं आपके लिए
मैंने सेल्स गर्ल क दिखाए हुए सुइट्स में से एक ब्लैक एक येलो एक स्कीबलुए कलर का सूट ले लिया . मैं हर सूट में मम को इमेजिन करता और फिर सेलेक्ट करता हालाँकि मैं रेड सूट भी लेना चाहता था पर मुझे पता था मम वो कलर नहीं पहनेंगी . खैर हमने 4 सूट ले लिए मम लगातार मन कर रही थी मगर मैं नहीं मन .
अमित : कितना बिल बना ?
सेल्स गर्ल : सर मैं पैक करवा देती हूँ बिल काउंटर पर hi बनेगा.
सेल्स गर्ल सूट पैक करवा कर काउंटर पर ले गयी.
मंजू म: ये सब क्या तमाशा लगा रखा है. मैं तो पर्स भी लेकर नहीं आयी.
अमित : आपसे किसी ने पैसे मांगे क्या? ये सब मेरी तरफ से आपके लिए तोहफा है और अब आप कुछ नहीं कहेंगी.
मैं काउंटर पर गया तो पता चला 11000 बिल बना था. मेरे पास इतना कॅश तो था नहीं पर एटीएम कार्ड ज़रूर था. मैंने अपना एटीएम कार्ड उसे दे दिया. शोरूम बड़ा था इस लिए स्वाइप मशीन की सुविधा भी थी . उन्होंने कार्ड स्वाइप किया और पेमेंट हो गयी. मैंने उनसे टेलर का पूछा तो उन्होंने बताया क उनका पक्का टेलर है जो उनके कस्टमर क लिए स्टिचिंग करता है . पास hi उसकी छोटी सी शॉप थी मैं मम को वहां ले गया और मम का नाप दिलवा कर हम फ्री हो गए.
मंजू म : अब बताओगे ये सब क्या है?
अमित : क्या है मतलब ? आज से आप साडी नहीं सूट पहनेंगी . आज से आप वही करेंगी जो मैं कहूंगा.
मंजू म : ाचा ! पर मैं ऐसा क्यों करूँ भला?
अमित : क्यूंकि मैं आपका भाई हूँ और मैं चाहता हूँ क आप ज़िन्दगी को खुल क जीना शुरू कर दें जैसे आप पहले थी मुझे वैसी hi मंजू को देखना है. मुझे वहीँ हंसती खेलती मंजू चाहिए जो मैंने उन तस्वीरों में देखि है.
मंजू म : तौबा मुझसे गलती हो गयी जो मैं वो एल्बम सामने hi रख कर भूल गयी . शुक्र है कुछ और तुम्हे पता नहीं चल गया पता नहीं क्या करते .
अमित : मतलब और भी कुछ है जो अपने मुझे बताया नहीं है. ये चीटिंग है मैंने आपको तो सब कुछ बताया था न.
मंजू म: अब और कोई ड्रामा नहीं चलो घर चलें देखो टाइम क्या हो गया है और मैंने खाना भी नहीं बनाया .
अमित : आपको ज़रूरत भी नहीं है .
मंजू म : तो क्या भूखी रहूंगी मैं आज?
अमित : बिलकुल नहीं . आज हम होटल में खाना खाएंगे .
मैं आज इतनी देर तक घर नहीं आया तो मोहित का मुझे फ़ोन आ गया मैंने उसे बता दिया क मैं डिनर कर क आऊंगा . मैं मम को लेकर एक नदिया से होटल छुम ढाबे में ले गया और वहां पर हम दोनों ने खाना खाया . ज़रूरत क लिए मैंने एटीएम से पैसे निकलवा लिए थे. खाना खाने क बाद हम घर क लिए निकल पड़े तो रस्ते में मैंने आइस क्रीम भी ले ली और हम कहते हुए आराम से घर जा रहे थे
अमित : कैसा लगा आज मेरे साथ वक़्त बिताना?
मंजू म : सच कहूं तो ऐसा लग रहा है जैसे मैं मैं नहीं हूँ कोई और हूँ. एक आरसे क बाद आज मैं इस तरह घर से बहार हूँ किसी क साथ वर्ण घर और किताबों क बीच मैं कहीं खो सी गयी थी . आज लग रहा जैसे मैं ज़िंदा हूँ मगर अभी दिल कह रहा है जैसे ये कोई ख्वाब है और नींद से जागते hi फिर से मैं अपने घर की चारदीवारी में अकेली रह जाउंगी.
अमित : अब ऐसे ख्वाब देखने की आदत दाल लीजिये मम . अब मैं आपको अकेला नहीं रहने दूंगा और एडवांस में सॉरी बोल देता हूँ अगर मेरी कोई बात अछि न लगे तो .
मंजू म: ये क्या बार बार मम कहता रहता है दीदी नहीं कह सकता ? और सॉरी कहने की कोई ज़रूरत नहीं है मुझे तुम्हारी कोई बात बुरी नहीं लगती . फिर से सॉरी कहा तो मर खाओगे.
बातें करते हुए मैंने एक बार फिर बाइक की स्पीड तेज़ करदी और मम ने घबरा कर मुझे दोनों बाजुओं से थम लिया
मंजू म : धीरे धीरे आराम से चल वर्ण मैं तेरी टंगे तोड़ दूंगी.
अमित : इसी लिए एडवांस में सॉरी बोलै था.
यूँ hi हम बातें करते घर आ गए . मम ने घर का लॉक खोला मगर अंदर जाने की बजाये मेरी तरफ देखने लगी
अमित : क्या हुआ अब आप अंदर क्यों नहीं जा रही ?
मंजू म: आज तुम्हारे साथ वक़्त कैसे बीत पैट hi नहीं चला और अब घर आकर फिर से दर लगाने लगा है क कहीं ये सपना hi न हो और मैं नींद से जग जॉन . मैं उस सपने को टूटने नहीं देना चाहती.
अमित : मैंने आपसे वडा किया है न क मैं आपको छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगा. आप आराम से अंदर जाइये और कल सुबह उठ कर देखना ये सपना नहीं हकीकत है फिर भी यकीन न आये तो कल हम फिर चलेंगे ऐसे बहार घूमने क लिए . अब आप जाइये मुझे भी देर हो रही है आंटी अंकल नाराज़ होंगे.
मंजू मम मेरे साइन से लग गयी और मुझे अपनी बाँहों में कास लिया जैसे छोटी बची करती है. उनकी ऑंखें ऐसे लग रही थी जैसे अभी आंसू बहा देंगी.
मंजू म : थैंक्स अमित मुझे कभी अकेला मत छोड़ना मुझे अब कोई और दर्द बर्दाश्त नहीं होगा प्लीज मुझे अकेला मत छोड़ना कभी.
अमित : अरे ये क्या आप बार बार बच्चों की तरह रोने लग जाती हैं. लगता है आप न खुद सोना चाहती हैं और न मुझे सोने देंगी तो कल की छुट्टी ले लेते हैं कॉलेज से .
मंजू म : क्या तुम मेरे घर नहीं रुक सकते ? मैं चाहती हूँ तुम हर वक़्त मेरे पास रही और मुझे भी ये तसल्ली रहे क मेरा भी कोई अपना मेरे पास है.
अमित : मैं तो हमेशा आपके पास hi हूँ आप जब कहेंगी मैं हाज़िर हो जाऊंगा फ़िलहाल मैं मोहित क घर रह रहा हूँ तो अभी मैं यहाँ नहीं आ सकता मगर वडा करता हूँ मैं आपके पास रहने ज़रूर आऊंगा . अब आप जाइये वर्ण रत यूँही खड़े खड़े गुज़र जाएगी और मेरी टंगे भी अब जवाब दे गयी हैं.
मंजू म : ठीक है गुड नाईट और ध्यान से जाना घर जा कर मुझे फ़ोन ज़रूर कर देना.
मैंने भी मम को गुड नाईट कहा और वापिस घर को निकल गया.
मंजू मम अपने बिस्तर पर लेती आज जो कुछ भी उसके बारे में सोचने लगी . कैसे उन्होंने आज इतने सैलून बाद अपने पुराने कपडे पहने जिसे वो कब की भूल चुकी थी. किस तरह अमित ने उनको ज़िद कर क कितने सरे सूट दिलवाये . जिन चीज़ों को वो कब का भूल चुकी थी अब वो साडी एक एक कर क अमित फिर से उनको करने क लिए मजबूर करता जा रहा था और ऐसा करना कहीं न कहीं मंजू क दिल में भी ज़िन्दगी को जीने की नयी उम्मीद पैदा करता जा रहा था. आज कितने सैलून बाद वो बाइक पर बैठी थी और उसकी जिस तरह अमित ने तारीफ की थी उससे मंजू क दिल में भी एक पल क लिए उमंगो क फूल खिल उठे थे. मंजू एक एक चीज़ को फ्लैशबैक कर क देख रही थी. कैसे अमित ने कितने अधिकार से आज उसके लिए खुद hi सूट सेलेक्ट किये और उसे सिलने क लिए भी दे दिया होटल में डिनर और फिर आइस क्रीम. आइस क्रीम खाना कभी उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी हुआ करता था . बचपन से hi उसका भाई उसे रोज़ आइस क्रीम खिलाया करता था मगर भाई क बाद तो उसने जैसे आइस क्रीम कभी खाई hi नहीं. और आज अमित जैसे उसके अतीत क सरे शोक साडी आदतें उसके अरमानों क बंद पड़े संदूक में से निकल कर उसके सामने रखता जा रहा था.
मंजू म : काश ये सपना कभी न टूटे
भगवन से यही प्रार्थना करती हुई वो खुली आँखों से सोने की कोशिश करने लगी.
उधर अमित 10:30 बजे घर पहुंचा और पहले मम को फ़ोन कर क अपने घर पहुँचने की रिपोर्ट दे दी और अपने कमरे में जाने लगा. मगर हल में रमा बैठी उसका इंतज़ार कर रही थी.
नेक्स्ट डे फ्री लेक्चर में मैं नीरज क साथ तकनीशियन से मिला और उसने हमें रिकॉर्डिंग्स दिखाई. ऑडिटोरियम वाला कैमरा तो बंद पड़ा था इस लिए मैंने स्टाफ रूम वाले कैमरा की रिकॉर्डिंग दिखने को कहा. स्टाफ रूम में कैमरा बहार की तरफ लगा हुआ था जो कॉरिडोर की रिकॉर्डिंग करता था. रिकॉर्डिंग चेक करते हुए मैंने जब मंजू मम क साथ शालू को बात करते हुए देखा तो मैं शॉकेड हो गया. शालू मम से बात कर रही थी और जाते हुए उनके हाथ में कुछ पकड़ा कर गयी .
अमित ( मन में) इस का मतलब शालू ने मेरी मदद की मगर वो तो उस दिन मोंटी क साथ कड़ी थी. अगर शालू ने मेरी मदद की है तो इसका मतलब वो मोंटी क साथ नहीं है. मगर उसने मेरी मदद क्यों की. मोंटी को शायद पता नहीं होगा क शालू ने मेरी मदद की है. जब उसे पता चलेगा तो वो शालू से इसका बदला लेगी . अगर मैं पता लगा सकता हूँ तो शायद मोंटी ने भी अब तक पता लगा लिया होगा. मुझे पता करना चाहिए . शालू ने मेरी मदद की है मैं उसे कुछ होने नहीं दे सकता.
अमित : भैया क्या ये वीडियो किसी ने पहले आ कर देखा है क्या ?
तकनीशियन : नहीं मुझसे तो किसी ने नहीं पूछा. ऐसा क्या है इसमें ?
अमित : भाई प्लीज आप वीडियो में से इतना हिसस डिलीट कर दीजिये
तकनीशियन : मैं ऐसा नहीं कर सकता अगर कल को किसी ने मांग ली तो मेरी नौकरी पर बात आ जाएगी.
अमित : ( नीरज से) भाई प्लीज आप इनसे कहिये क इतना हिस्सा डिलीट कर दें बस पांच मिनट की तो बात है .
नीरज : मगर इसकी ज़रूरत hi क्या है
अमित : भाई अगर ये वीडियो मोंटी ने चेक कर्ली तो शालू को खतरा होगा प्लीज उसने पता नहीं क्यों पर मेरी मदद की है और मेरा भी फ़र्ज़ है मैं भी उसकी मदद करूँ .
नीरज : ठीक है मैं कुछ करता हूँ.
नीरज ने मुझे बहार रुकने को कहा और खुद तकनीशियन से बात करने क लिए रुक गया. 5 मिनट्स बाद hi नीरज वापिस आया और हम खली क्लास रूम में बैठ कर बात करने लगे.
अमित : आपने देखा शालू मंजू मम को कुछ पकड़ा रही थी इसका मतलब यही है क उसी ने मेरी मदद की है. उसने मुझे बचा कर मुझ पर एहसान किया है और अब मैं उसे बचाऊंगा . मगर एक बात समझ में नहीं आ रही क अगर वो मेरा साथ दे रही थी तो वो मुझसे दूर क्यों भगति है और वो मोंटी का साथ क्यों दे रही है.
नीरज : मगर तू यकीन से कैसे कह सकता है क उसने तेरी मदद की है?
अमित : क्यूंकि मंजू मम ने hi मेरी बेगुनाहो वाली वीडियो प्रिंसिपल सर को दी थी मगर उन्होंने ये नहीं बताया क उनको ये वीडियो कहाँ से मिली. उन्होंने इतना hi कहा क किसी ने लिफाफे में डालकर उनके टेबल पर वो मेमोरी कार्ड रख दिया था .
नीरज : मगर मम ने क्यों नहीं बताया?
अमित : शायद वो नहीं चाहती थी क किसी को शालू क बारे में पता चले .
हम बातें कर रहे थे क नीरज क फ़ोन पर किसी का फ़ोन आया और बात करने क बाद उसने बताया क प्रिंसिपल सर ने मुझे ऑफिस में बुलाया है. हम दोनों प्रिंसिपल सर क ऑफिस पहुँच गए. सर ने नीरज को बहार hi रुकने को कहा. ऑफिस में शिवानी प्रोफ वरिंदर और एक अंकल आंटी भी मौजूद थे
प्रिंसिपल : आओ अमित बैठो इनसे मिलो ये शिवानी क पेरेंट्स हैं और ये तुमसे कुछ बात करना चाहते हैं. वैसे मैंने अपना स्टैंड क्लियर कर दिया है फिर भी मैनेजमेंट चाहती है क तुम्हे एक बार मैं इनसे मिलवा दूँ.
Shivani’s डैड: मेरी बेटी से जो भी गलती हुई है उसके लिए मुझे अफसोस है और तुम जो भी हर्जाना कहोगे मैं भरने क लिए तैयार हूँ. तुम अपनी कंप्लेंट वापिस लेलो
अमित (शिवानी का बाप लगता है घमंडी किस्म का आदमी है . इसी लिए अभी भी पैसों का घमंड दिखा रहा है. प्रिंसिपल सर ने क्लियर कर दिया है क वो अपने स्टैंड पर क्लियर हैं जैसे की प्रोफ वरिंदर ने बताया था. इसका मतलब है मैनेजमेंट सर पर प्रेशर दाल रही है और अगर मैंने कंप्लेंट वापिस नहीं ली तो शायद प्रिंसिपल मेरी hi साइड लेंगे और उनकी बात न मने जाने पर वो इस्तीफा दे देंगे. )
अमित : शायद आपकी नज़र में इज़्ज़त की कीमत चाँद सिक्के हैं अंकल इसी लिए आप ऐसा कह रहे हैं. अगर मैंने सच में शिवानी का रपे किया होता तो क्या आप तब भी ऐसा hi करते ? मतलब कुछ पैसों क लिए मामला रफा दफा कर देते?
Shivani’s डैड: ये क्या बकवास कर रहे हो.
अमित : ी ऍम सॉरी अंकल पर ये आप hi ने कहा. आपने मेरी इज़्ज़त की कीमत लगाने की कोशिश की. मैं ये साफ कह दूँ क मैं आपके जितना अमित तो नहीं पर मेरी भी अपनी इज़्ज़त है और इज़्ज़त हर इंसान की एक बराबर होती है जिसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती.
मेरी बात पर शिवानी क बाप की बोलती बंद हो गयी और प्रिंसिपल सर और प्रोफ वर्मा गर्व से मेरी तरफ देखने लगे.
Shivani’s माँ: बीटा मैं इनकी इस बात क लिए माफ़ी मांगती हूँ तुमसे . पर ज़रा सोचो मेरी बेटी की इस गलती की वजह से इसका करियर ख़राब हो जायेगा ऊपर से बदनामी अलग से होगी. मैं तुम्हारे आगे बाथ जोड़ती हूँ प्लीज तुम एक बार शिवानी को माफ़ कार्डो
मैंने आगे बाद कर आंटी क जुड़े हुए हाथ पकड़ लिए.
अमित : ये क्या आंटी एक तरफ आप मुझे बीटा भी कह रही हैं और हाथ भी जोड़ रही हैं क्या ये ाचा लगता है एक माँ अपने बेटे क आगे हाथ जोड़े. आप सचमुच बहुत अछि हैं और इज़्ज़त क्या है ये आप अछि तरह समझती हैं. मैं अपनी फॅमिली से बहुत प्यार करता हूँ ज़रा सोचिये अगर मैं बेगुनाह साबित न होता तो मेरी फॅमिली पर क्या गुज़रती ? वो तो शर्म से hi मर जाते क उनका बीटा एक रेपिस्ट है. आपकी बेटी बहुत भोली और नादाँ है . इसे नहीं पता क इसने क्या किया है. शायद इसने कभी परिवार की इज़्ज़त और अहमियत को नहीं समझा वर्ण ये ऐसा नहीं करती. हो सकता है ये किसी दबाव में ऐसा कर रही हो . मुझे इससे कोई शिकायत नहीं है भगवन ने मेरी मदद की इसी लिए मैं बच गया मेरी माँ की दुआओं ने मुझे बचा लिया. मैं आइल खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेना चाहता मगर ऊपर वाले से दुआ करूँगा क वो इसे इस बात का एहसास ज़रूर करवाए क इज़्ज़त हर किसी की उसकी जान से भी कीमती होती है. अगर मैं रेपिस्ट साबित हो जाता तो शायद मैं खुद को ख़तम कर लेता मगर ऐसा नहीं हुआ इस किये मैं इसे माफ़ करता हूँ.
प्रिंसिपल सर प्लीज आपसे मेरी रिक्वेस्ट है क आप शिवानी क खिलाफ कोई एक्शन न ले.
शिवानी शर्मिंदगी से सर झुकाये कड़ी थी. शिवानी क बाप क इम्प्रैशन से पता चल रहा था क उसकी दौलत का घमंड उसे कुछ भी फील करने माहि दे रहा है मगर शिवानी की माँ क चहरे पर करीतिग्य क भाव थे. मेरी बात ख़तम होते hi शिवानी की माँ ने मुझे गले लगा लिया.
Shivani’s माँ: थैंक यू वैरी मच बीटा . तुम सच में बहुत अचे हो तुम्हारे माँ बाप ने तुम्हे बहुत hi अचे संस्कार दिए हैं. तुम्हारे पास बहुत बड़ा दिल है इसी लिए तुमने इतनी आसानी से इसे माफ़ कर दिया. मैं तुम्हारा एहसान कैसे उतरूंगी.
अमित : आंटी अपने मेरे सर पर प्यार से हाथ रख दिया मेरे लिए इतना hi काफी है. और शिवानी तुम्हे बस इतना hi कहूंगा क अचे लोगों की सांगत में रहो वर्ण बुरे लोगों की सांगत एक दिन तुम्हे किसी न किसी मोड़ पर डूबा देगी. सर क्या मैं अब जा सकता हूँ?
प्रिंसिपल सर : हाँ बीटा तुम जा सकते हो एंड ी प्राउड ऑफ़ यू माय सोन.
मैं सर से आज्ञा ले कर बहार आ गया शिवानी सर झुकाये कड़ी थी और शायद उसे एहसास हो रहा था क उसने मेरे साथ गलत किया है. मैं उसे माफ़ तो नहीं करना चाहता था मगर मैं ऐसा नहीं करता तो इससे कॉलेज को इतने अचे प्रिंसिपल और प्रोफ वर्मा से हाथ धोना पद सकता था जो मैं बिलकुल नहीं चाहता था. कहते हैं बुरे इंसान को मरने से बुराई नहीं मरती , मरना है तो बुराई को मारो और इसके लिए ज़रूरी है बुरे इंसान क साथ अच्छी की जाये ताकि वो आपके एहसानो क बोझ टेल डाब कर खुद hi बुराई छोड़ दे और मैंने ऐसा hi किया शिवानी को एक मौका देकर . अगर फिर भी वो नहीं सुधरी तो महात्मा गाँधी की तरह मैं दूसरा गाल आगे नहीं करूँगा.
नीरज बहार मेरा वेट कर रहा था उसने मुझसे पूछा तो मैंने सब बता दिया. उसके बाद मैंने अपने लेक्चर अटेंड किये और राधा नेहा दीदी क साथ छुट्टी क वक़्त मिला और फिर मोहित क साथ घर आ गया.
शाम को प्रैक्टिस क बाद जब मैं मंजू मम क घर ट्यूशन पड़ने गया तो मम ने कुछ देर मुझे पढ़ाया और फिर मुझे स्टडी करने का बोल कर अपने कमरे में चली गयी. कल से मंजू मम कुछ शांत सी लग रही थी जैसे वो किसी सोच में गम हो और आज कॉलेज में भी उनकी स्माइल कुछ फीकी थी मुझे लगा शायद कल मैंने जो कुछ भी कहा वो उन्हें ाचा न लगा हो. मैं मन hi मन सोच रहा था क मुझे उनसे माफ़ी मांग लेनी चाहिए . मैं अपनी सोच में डूबा था क मंजू म ने खांस कर मुझे होश में आने का इशारा किया.
मैंने जैसे hi मंजू म की तरफ देखा तो बस देखता hi रह गया . मुझे लगा मेरे सामने मंजू म नहीं कोई और hi कड़ी हो . ये मंजू म हो hi नहीं सकती ये तो कोई कॉलेज गोइंग लड़की है कितनी खूबसूरत है. मेरे सामने मंजू मम एक सलवार कमीज में कड़ी थी . सूट की फिटिंग इतनी टाइट थी क उनके जिस्म का एक एक हिस्सा क्लियर पता चल रहा था. उभरे हुए बड़े बड़े बूब्स सपाट पेट . ऐसे लग रहा था क पेट क ऊपर छाती वाला हिस्सा अलग से चिपका दिया हो. कमीज क नीचे सलवार थोड़ी खुली थी मगर उनकी ये सादगी उनके हुसैन को क़यामत बना रही थी. मेरा मुँह आश्चर्य से खुला हुआ था जिसे देख कर मम हसने लगी.
मंजू म: मुँह बंद कर लो नहीं तो माखी अंदर घुस जाएगी.
अमित : वो मैं वो .... वो .... आप ... आप सच मच बहुत खूबसूरत हैं जैसे कोई अप्सरा हो यू अरे सो ब्यूटीफुल
मंजू म : शर्म नहीं अति अपनी दीदी को ऐसे कहते हुए
अमित : ी ऍम सॉरी वो गलती से मुँह से निकल गया मगर आप सच में बहुत खूबसूरत हैं
मंजू म : ाचा बच्चू ! मेरे साथ hi फ़्लर्ट करने लगे . कॉलेज में कोई मिली नहीं तुम्हे जो मेरे साथ यहाँ फ़्लर्ट करने आ गए.
अमित : नहीं नहीं मैं कोई फ़्लर्ट नहीं कर रहा आप सच में बहुत खूबसूरत हैं . ऊपर वाले की नायब कारीगरी का नमूना हैं आप . आप इतनी सादगी में भी कमल लगती हैं अगर आप थोङा बन थान क रहें तो क़यामत hi आ जाये देखने वालों पर
मंजू म : मुझे तो लगता है क़यामत तुम पर आ गयी है जो ऐसी बातें कर रहे हो . मैं भला कहाँ से खूबसूरत दिखने लगी तुम्हे.
अमित : मेरी नज़र से देखिये आपको पता चल जायेगा. आप हमेशा ऐसे hi सूट पहना कीजिये . ऊपर वाले ने आपको इतनी हुसैन की नेमत बक्शी है और आप ने खुद को यूँ कैद कर रखा है तन्हाई क अंधेरों में. अगर आपने पहले hi खुद को संभल कर जीना सिख लिया होता तो आज आप इतनी अकेली नहीं होती. मैं चाहूंगा क आप आज से hi फिर से वही पहले वाली मंजू बन जाएँ मुझे पूरा विश्वास है आपकी ज़िन्दगी फिर से महकने लगेगी.
मेरी बातों पर मंजू म जो पहले शर्मा रही थी वो अब फिर से गंभीर हो गयी. और कुछ देर शांत रहने क बाद बोली
मंजू म : नहीं अमित मुझ में अब इतनी हिम्मत नहीं है क मैं फिर से ज़िन्दगी को नए सिरे जी सकूँ . मैंने इतने सक्षम खाये हैं क अब तन्हाई क अंधेरों में hi मुझे सुकून मिलता है. अकेले रहना से काम से काम किसी क छोड़ कर जाने का दर तो नहीं रहता दिल में.
मंजू मम ने बड़ी गंभीरता से इतनी गहरी बात कही थी . उनकी आँखों में फिर से पानी आने लगा और वो पलट कर वापिस अपने कमरे में जाने लगी तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया.
अमित : अगर आप किसी पर भरोसा hi नहीं करेंगी तो कोई अपनी वफादारी कैसे साबित करेगा. मन क आप क अपने आपको छोड़ कर चले गए पर क्या इसका मतलब ये है क आप किसी को अपना hi नहीं सकती? मैं आपको खुश देखना चाहता हूँ . मैं जनता हूँ आपकी मायूसी ने आपको अपने hi अंदर कहीं लाईड कर दिया है मगर मुझे वो पहले वाली मंजू चाहिए जो हस्ती खिल खिलाती थी और मैं उसे आपके अंदर से आज़ाद करवा कर रहूँगा. मैं जनता हूँ आप मुझ पर इतनी जल्दी यकीन नहीं करेंगी मगर मैं आपसे वडा करता हूँ मैं आपको कभी अकेला छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगा क्यूंकि अकेलापन और अपनों से जुदाई क्या होती है मैं अछि तरह जनता हूँ.
मंजू मम ख़ामोशी से मेरी बात सुनती हुई मेरी आँखों में देख रही थी. और फिर वो अचानक मेरे गले लग गयी और रोना शुरू कर दिया.
मंजू मम : मैं बहुत अकेली हूँ अमित बहुत अकेली हूँ मेरा कोई भी नहीं है . कोई नहीं है जिसके साथ मैं खुश हो सकूँ कोई नहीं है जिसके साथ मैं रो सकूँ. कभी बात करने को दिल करे तो ये खामोश दीवारों से hi बात कर लेती हूँ कभी रोना चहुँ तो खुद hi अपने आंसू पोंछने पड़ते हैं. कोई एक भी ऐसा नहीं जो मुझे अपने होने का एहसास दिलाये. मैं इस दुनिया में जैसे सजा काटने hi आयी हूँ जो शायद मेरी मौत क साथ hi ख़तम होगी
मैंने मम को पीछे किया और उनके मुँह पर हाथ रख लिया.
अमित : खामोश अगर कभी मरने की बात की तो. और ये क्या लगा रखा है क मैं अकेली हूँ मेरा कोई नहीं है . मैं क्या मर गया हूँ ? आपके सामने आपका भाई खड़ा है और आपका ये भाई आपको कभी अकेला छोड़ कर नहीं जायेगा अगर मौत भी आ गयी तो उसे ये कह कर वापिस भेज दूंगा क मेरी मंजू दीदी की आज्ञा क बिना मैं उसके साथ भी नहीं जाऊंगा.
मंजू म : ऐसा न कहो ऐसा न कहो अमित मैं पहले hi सबको खो चुकी हूँ अब तुम्हारे रूप में मुझे अपना भाई मिला है मैं तुम्हे कहीं नहीं जाने दूंगी .
अमित : तो आ गया यद् क मैं भाई हूँ . अभी तो कह रही थी क आपका कोई नहीं है तब कहाँ गया था ये भाई. तब तो जीते जी मर दिया था ये कह कर क मेरे सब अपने मर गए
मंजू म : एक लगाउंगी तुझे जो ऐसी बातें करेगा तो.
अमित : तो आप भी आज क बाद नहीं रोयेंगी वर्ण मैं आपकी छोटी काट दूंगा.
मंजू म : क्या कहा तू मेरी छोटी कटेगा ठहर मैं तुझे बताती हूँ.
मम ने मेरे पेट में झूठमूठ मरना शुरू कर दिया और मैं भी चिल्लाता हुआ एक्टिंग करने लगा. मम क चहरे पर फिर से हंसी आ गयी जिसे देख कर मुझे सुकून मिला.
मंजू म : तुम बैठो मैं चेंज कर क कॉफ़ी बना कर लती हूँ
अमित : बिलकुल नहीं. आप अब इन कपड़ो को चेंज माहि करेंगी. आप नहीं जानती आप इन कपड़ो में कितनी अछि लगती हैं. आज से आप यही कपडे पहना करो .
मंजू म : तू फिर से शुरू हो गया. फॉर योर काइंड इनफार्मेशन मेरे पास सूट नहीं हैं और ये वाला सूट भी बहुत पुराण है देख नहीं रहे कितना टाइट हो रखा है. मैं इसे बदलने जा रही हूँ.
अमित : मैंने कहा न आप नहीं बदलेंगी ये सूट. मैं आपको ऐसे hi कपड़ो में देखना चाहता हूँ. वैसे आपकी फिटिंग आज भी वैसे hi है जैसे पहले थी सिर्फ आपको लग रहा है क ये टाइट है क्यूंकि आपको ढीली ढली सदी पहनने की आदत जो हो गयी है. रही बात कपड़ो की तो वो मेरी ज़िम्मेदारी है मैं देख लूंगा आपको बाद मेरे साथ चलना है.
मंजू म: मुझसे नहीं होगा
अमित : मैंने कहा न आपको बस मेरे साथ चलना है अब आप सोचिये क आप मेरी बात मानेंगी या नहीं और अगर आपने बात नहीं मणि तो मैं आपसे बात नहीं करूँगा.
मंजू म: तुम बात बात ओर ये इमोशनल ब्लैकमेलिंग क्यों करते हो? ाचा ठीक है मैं साथ चलूंगी जब तुम कहोगे मगर अभी तो मैं जा सकती हूँ न चेंज करने?
अमित : मैंने कहा आप मेरे साथ चलेंगी वो भी अभी.
मंजू म: नहीं मैं अभी नहीं जा सकती हम किसी और दिन चलेंगे न . हम संडे को चलेंगे तब हम दोनों hi फ्री होते हैं .
अमित : अभी इसी वक़्त और कोई बहाना नहीं.
मंजू म : तुम समझ नहीं रहे
अमित : तो मैं जॉन फिर
मंजू म: ाचा बाबा मगर ये सूट बहुत टाइट है मुझे इस सूट में बहार जाने में शर्म आएगी किसी ने देख लिया तो क्या सोचेगा ? मैं सदी पेहेन लेती हूँ .
अमित : यही तो वो बात है जिसकी वजह से हम अपने अरमान अपने सरे सपने अपने hi हाथो कतल कर देते हैं क ‘ कोई क्या सोचेगा?’ यहाँ हर किसी को अपनी लाइफ की टेंशन है किसी क पास इतना फालतू वक़्त माहि है क वो दूसरों को hi नोटिस करता रहे वो क्या कर रहा है. वैसे भी जिन लोगों में बातें बनानी होती हैं वो बात बना hi लेते है. आप किसी की ज़ुबान को नहीं रोक सकती . अपनी ज़िन्दगी अपनी मर्ज़ी से जीना सीखिए वर्ण ये दुनिया तो किसी को चैन से मरने भी नहीं देती उसमे भी दोष ढूंढ hi लेती है जीने की तो बात hi छोड़िये.
मंजू म: तुम इतनी समझदारी की बातें कैसे कर लेते हो अमित ? कहाँ से सीखा तुमने ये सब?
अमित : ज़िन्दगी से बड़ा कोई गुरु नहीं और मौत से बड़ा कोई सच नहीं होता मम . मैंने अब तक की ज़िन्दगी में बहुत कुछ देख लिया है यहाँ पर आपकी लाखों अच्छाइयों पर आपकी एक गलती भरी पड़ती है . लोग आपके सभी अचे काम भूल जाते हैं और यद् रखते हैं तो वो गलती जो अपने की थी. अब ये सब छोड़िये और चलिए मेरे साथ .
मंजू मम ख़ामोशी से कुछ देर मुझे देखती रही जैसे कुछ अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रही हों. और मैं भी मन hi मन अपनी ज़िन्दगी की फ्लैशबैक में चला गया था मगर मैं खुद को कण्ट्रोल कर क बहार जाने को पलट गया.
मंजू म : रुको मैं ज़रा कार की के लेलूं.
अमित : उसकी ज़रूरत नहीं है . हम मेरी गफ क साथ जायेंगे.
मंजू म: गफ क साथ ?
अमित : आप बस लॉक कीजिये और बहार चलिए.
मंजू मम मेरी बात का मतलब नहीं समझी वो यही सोच रही थी क मेरी कौन स गफ है और वो कहाँ ओर है जो अब हम उसके साथ जायेंगे . उन्होंने जल्दी से लॉक किया सब कुछ और बहार निकल आयी जहाँ मैं अपनी बुलेट मोड़ कर किक मरने hi वाला था.
मंजू म: कहाँ है तुम्हारी गफ और तुम ये बाइक को क्यों निकल रहे हो?
अमित : चुप चाप पीछे बैठ जाइये मम यही तो है मेरी गफ हम इसी क साथ जा रहे हैं.
मंजू म: क्या कहा बाइक पर no वे तुम इसे साइड लगाओ मैं कार निकलती हूँ.
अमित : मैंने कहा न चुप चाप बैठ जाइये
मंजू म : मगर मैं गिर जाउंगी मैं कभी बाइक पर नहीं बैठी.
अमित : क्या आपको मुझ पर भरोसा नहीं है?
मंजू म : तुम पर भरोसा न होता तो मैं तुम्हारे साथ आने को मानती hi नहीं. चलो ठीक है मगर पहले hi सुन लो अगर मुझे नीचे गिराया तो तेरी टंगे तोड़ दूंगी.
इतना कह कर मम मेरे पीछे बैठ गयी और एक हैट मेरी कमर पर रख कर दूसरा हाथ मेरे कंधे पर रख लिया. मैंने बाइक को किक मरी और हम निकल लिए .
मंजू म : अब कुछ बताओगे हम जा कहाँ रहे हैं ?
अमित : अभी पता चल जायेगा
मैंने बाइक की थोड़ी स्पीड बड़ाई तो मंजू म घबराने लगी और मुझे कास क पकड़ लिया . उनका हाथ मेरी छाती पर था और वो कास क मेरे साथ चिपक गयी जिससे मुझे अपनी पीठ पर उनके बड़े बड़े बूब्स की सॉफ्टनेस फील होने लगी
मंजू म : क्या कर रहे हो धीरे चलाओ मैं गिर जाउंगी प्लीज धीरे चलाओ
अमित : मुझ पर भरोसा है तो आराम से बैठिये मैं आपको गिरने नहीं दूंगा
मेरी बात सुन कर दोबारा मम ने मुझे धीरे चलने को नहीं कहा और धीरे धीरे रिलैक्स हो गयी जैसे उनको भी मेरी बात पर यकीन आ गया हो. हम जल्द hi एक मार्किट में पहुँच गए . अभी ज्यादा टाइम नहीं हुआ था इस लिए शॉप्स ओपन hi थी. मैं बाइक को पार्किंग एरिया में खड़ा कर क मम को लेकर एक बड़े से कपड़ों क शोरूम में ले आया जहाँ पर बहुत सरे नए नए सुइट्स डिस्प्ले में टंगे हुए थे. मम मुझे बार बार पूछ रही थी मैं यहाँ क्यों ले आया उनको मगर मैंने उन्हें चुप रहने को कहा.
काउंटर पर एक 2 सेल्स गर्ल थी जिसने हमारा वेलकम किया
सेल्स गर्ल : वेलकम मम वेलकम सर बताइये क्या पेश करूँ
अमित : मम क लिए पर्सनालिटी क हिसाब से नई डिज़ाइन क कॉटन सुइट्स दिखाइए
मंजू म मेरी तरफ ऑंखें निकल क देखने लगी जैसे मुझे मन कर रही हो मगर मैंने इशारे से चुप रहने को कहा.
सेल्स गर्ल ने दूसरी सेल्स गर्ल को भी साथ लिया और कुछ कॉटन सुइट्स दिखने लगी. मंजू मम ने मेरे इंसिस्ट करने पर सूट देखना शुरू किया. मम सुइट्स देखती हुई एक तरफ रखती जा रही थी मगर सेलेक्ट नहीं कर रही थी मुझे लगा मम जान भूख कर नहीं सेलेक्ट कर रही .
सेल्स गर्ल : ये देखिये मम ये नया कलेक्शन है आप पर परफेक्ट लगेगा . इसपर एम्ब्रॉयडरी है वो एंटीक है
मंजू म: मुझे इतना हैवी वर्क पसंद नहीं है.
सेल्स गर्ल : ये देखिये ये आज कल फैशन में है और इस पर ज्यादा वर्क भी नहीं है.
मंजू म : कोई और दिखाओ
अमित : ऐसा करो इसमें वाइट कलर दिखाओ विथ पिंक कॉम्बिनेशन
मम मेरी तरफ देखने लगी मगर मैंने उनकी तरफ नहीं देखा.
सेल्स गर्ल : ये देखिये मम वाइट सूट पर पिंक फ्लावर्स आप पर बहुत जंचेगा . आप बिलकुल गुलाब की तरह खिल जाएँगी
( सेल्स वाले भी बातों में कितने मास्टर होते हैं कस्टमर को चने क झाड़ पर चढ़ा देते है. और न चाहते हुए भी कस्टमर मजबूर हो जाता है उसे लेने क लिए. यही तो पहचान है एक अचे सेल्स मन की. और यकीनन ये सेल्स गर्ल भी माहिर थी इस कला में)
मैंने फोरम वो सूट पैक करने को बोलै.
मंजू म : बस हो गया अब चलें?
अमित : आपके पास स्काई ब्लू और ब्लैक में भी होगा कोई?
सेल्स गर्ल : जी सर जैसा आप कहें हमारे पास सब मिल जायेगा
मंजू म : मगर मुझे नहीं चाहिए और
सेल्स गर्ल : ले लीजिये न मम सर इतने प्यार से ले रहे हैं आपके लिए
मैंने सेल्स गर्ल क दिखाए हुए सुइट्स में से एक ब्लैक एक येलो एक स्कीबलुए कलर का सूट ले लिया . मैं हर सूट में मम को इमेजिन करता और फिर सेलेक्ट करता हालाँकि मैं रेड सूट भी लेना चाहता था पर मुझे पता था मम वो कलर नहीं पहनेंगी . खैर हमने 4 सूट ले लिए मम लगातार मन कर रही थी मगर मैं नहीं मन .
अमित : कितना बिल बना ?
सेल्स गर्ल : सर मैं पैक करवा देती हूँ बिल काउंटर पर hi बनेगा.
सेल्स गर्ल सूट पैक करवा कर काउंटर पर ले गयी.
मंजू म: ये सब क्या तमाशा लगा रखा है. मैं तो पर्स भी लेकर नहीं आयी.
अमित : आपसे किसी ने पैसे मांगे क्या? ये सब मेरी तरफ से आपके लिए तोहफा है और अब आप कुछ नहीं कहेंगी.
मैं काउंटर पर गया तो पता चला 11000 बिल बना था. मेरे पास इतना कॅश तो था नहीं पर एटीएम कार्ड ज़रूर था. मैंने अपना एटीएम कार्ड उसे दे दिया. शोरूम बड़ा था इस लिए स्वाइप मशीन की सुविधा भी थी . उन्होंने कार्ड स्वाइप किया और पेमेंट हो गयी. मैंने उनसे टेलर का पूछा तो उन्होंने बताया क उनका पक्का टेलर है जो उनके कस्टमर क लिए स्टिचिंग करता है . पास hi उसकी छोटी सी शॉप थी मैं मम को वहां ले गया और मम का नाप दिलवा कर हम फ्री हो गए.
मंजू म : अब बताओगे ये सब क्या है?
अमित : क्या है मतलब ? आज से आप साडी नहीं सूट पहनेंगी . आज से आप वही करेंगी जो मैं कहूंगा.
मंजू म : ाचा ! पर मैं ऐसा क्यों करूँ भला?
अमित : क्यूंकि मैं आपका भाई हूँ और मैं चाहता हूँ क आप ज़िन्दगी को खुल क जीना शुरू कर दें जैसे आप पहले थी मुझे वैसी hi मंजू को देखना है. मुझे वहीँ हंसती खेलती मंजू चाहिए जो मैंने उन तस्वीरों में देखि है.
मंजू म : तौबा मुझसे गलती हो गयी जो मैं वो एल्बम सामने hi रख कर भूल गयी . शुक्र है कुछ और तुम्हे पता नहीं चल गया पता नहीं क्या करते .
अमित : मतलब और भी कुछ है जो अपने मुझे बताया नहीं है. ये चीटिंग है मैंने आपको तो सब कुछ बताया था न.
मंजू म: अब और कोई ड्रामा नहीं चलो घर चलें देखो टाइम क्या हो गया है और मैंने खाना भी नहीं बनाया .
अमित : आपको ज़रूरत भी नहीं है .
मंजू म : तो क्या भूखी रहूंगी मैं आज?
अमित : बिलकुल नहीं . आज हम होटल में खाना खाएंगे .
मैं आज इतनी देर तक घर नहीं आया तो मोहित का मुझे फ़ोन आ गया मैंने उसे बता दिया क मैं डिनर कर क आऊंगा . मैं मम को लेकर एक नदिया से होटल छुम ढाबे में ले गया और वहां पर हम दोनों ने खाना खाया . ज़रूरत क लिए मैंने एटीएम से पैसे निकलवा लिए थे. खाना खाने क बाद हम घर क लिए निकल पड़े तो रस्ते में मैंने आइस क्रीम भी ले ली और हम कहते हुए आराम से घर जा रहे थे
अमित : कैसा लगा आज मेरे साथ वक़्त बिताना?
मंजू म : सच कहूं तो ऐसा लग रहा है जैसे मैं मैं नहीं हूँ कोई और हूँ. एक आरसे क बाद आज मैं इस तरह घर से बहार हूँ किसी क साथ वर्ण घर और किताबों क बीच मैं कहीं खो सी गयी थी . आज लग रहा जैसे मैं ज़िंदा हूँ मगर अभी दिल कह रहा है जैसे ये कोई ख्वाब है और नींद से जागते hi फिर से मैं अपने घर की चारदीवारी में अकेली रह जाउंगी.
अमित : अब ऐसे ख्वाब देखने की आदत दाल लीजिये मम . अब मैं आपको अकेला नहीं रहने दूंगा और एडवांस में सॉरी बोल देता हूँ अगर मेरी कोई बात अछि न लगे तो .
मंजू म: ये क्या बार बार मम कहता रहता है दीदी नहीं कह सकता ? और सॉरी कहने की कोई ज़रूरत नहीं है मुझे तुम्हारी कोई बात बुरी नहीं लगती . फिर से सॉरी कहा तो मर खाओगे.
बातें करते हुए मैंने एक बार फिर बाइक की स्पीड तेज़ करदी और मम ने घबरा कर मुझे दोनों बाजुओं से थम लिया
मंजू म : धीरे धीरे आराम से चल वर्ण मैं तेरी टंगे तोड़ दूंगी.
अमित : इसी लिए एडवांस में सॉरी बोलै था.
यूँ hi हम बातें करते घर आ गए . मम ने घर का लॉक खोला मगर अंदर जाने की बजाये मेरी तरफ देखने लगी
अमित : क्या हुआ अब आप अंदर क्यों नहीं जा रही ?
मंजू म: आज तुम्हारे साथ वक़्त कैसे बीत पैट hi नहीं चला और अब घर आकर फिर से दर लगाने लगा है क कहीं ये सपना hi न हो और मैं नींद से जग जॉन . मैं उस सपने को टूटने नहीं देना चाहती.
अमित : मैंने आपसे वडा किया है न क मैं आपको छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगा. आप आराम से अंदर जाइये और कल सुबह उठ कर देखना ये सपना नहीं हकीकत है फिर भी यकीन न आये तो कल हम फिर चलेंगे ऐसे बहार घूमने क लिए . अब आप जाइये मुझे भी देर हो रही है आंटी अंकल नाराज़ होंगे.
मंजू मम मेरे साइन से लग गयी और मुझे अपनी बाँहों में कास लिया जैसे छोटी बची करती है. उनकी ऑंखें ऐसे लग रही थी जैसे अभी आंसू बहा देंगी.
मंजू म : थैंक्स अमित मुझे कभी अकेला मत छोड़ना मुझे अब कोई और दर्द बर्दाश्त नहीं होगा प्लीज मुझे अकेला मत छोड़ना कभी.
अमित : अरे ये क्या आप बार बार बच्चों की तरह रोने लग जाती हैं. लगता है आप न खुद सोना चाहती हैं और न मुझे सोने देंगी तो कल की छुट्टी ले लेते हैं कॉलेज से .
मंजू म : क्या तुम मेरे घर नहीं रुक सकते ? मैं चाहती हूँ तुम हर वक़्त मेरे पास रही और मुझे भी ये तसल्ली रहे क मेरा भी कोई अपना मेरे पास है.
अमित : मैं तो हमेशा आपके पास hi हूँ आप जब कहेंगी मैं हाज़िर हो जाऊंगा फ़िलहाल मैं मोहित क घर रह रहा हूँ तो अभी मैं यहाँ नहीं आ सकता मगर वडा करता हूँ मैं आपके पास रहने ज़रूर आऊंगा . अब आप जाइये वर्ण रत यूँही खड़े खड़े गुज़र जाएगी और मेरी टंगे भी अब जवाब दे गयी हैं.
मंजू म : ठीक है गुड नाईट और ध्यान से जाना घर जा कर मुझे फ़ोन ज़रूर कर देना.
मैंने भी मम को गुड नाईट कहा और वापिस घर को निकल गया.
मंजू मम अपने बिस्तर पर लेती आज जो कुछ भी उसके बारे में सोचने लगी . कैसे उन्होंने आज इतने सैलून बाद अपने पुराने कपडे पहने जिसे वो कब की भूल चुकी थी. किस तरह अमित ने उनको ज़िद कर क कितने सरे सूट दिलवाये . जिन चीज़ों को वो कब का भूल चुकी थी अब वो साडी एक एक कर क अमित फिर से उनको करने क लिए मजबूर करता जा रहा था और ऐसा करना कहीं न कहीं मंजू क दिल में भी ज़िन्दगी को जीने की नयी उम्मीद पैदा करता जा रहा था. आज कितने सैलून बाद वो बाइक पर बैठी थी और उसकी जिस तरह अमित ने तारीफ की थी उससे मंजू क दिल में भी एक पल क लिए उमंगो क फूल खिल उठे थे. मंजू एक एक चीज़ को फ्लैशबैक कर क देख रही थी. कैसे अमित ने कितने अधिकार से आज उसके लिए खुद hi सूट सेलेक्ट किये और उसे सिलने क लिए भी दे दिया होटल में डिनर और फिर आइस क्रीम. आइस क्रीम खाना कभी उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी हुआ करता था . बचपन से hi उसका भाई उसे रोज़ आइस क्रीम खिलाया करता था मगर भाई क बाद तो उसने जैसे आइस क्रीम कभी खाई hi नहीं. और आज अमित जैसे उसके अतीत क सरे शोक साडी आदतें उसके अरमानों क बंद पड़े संदूक में से निकल कर उसके सामने रखता जा रहा था.
मंजू म : काश ये सपना कभी न टूटे
भगवन से यही प्रार्थना करती हुई वो खुली आँखों से सोने की कोशिश करने लगी.
उधर अमित 10:30 बजे घर पहुंचा और पहले मम को फ़ोन कर क अपने घर पहुँचने की रिपोर्ट दे दी और अपने कमरे में जाने लगा. मगर हल में रमा बैठी उसका इंतज़ार कर रही थी.