Adultery Manhoos se mahan tak - Page 12 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 95



अगले दिन हम जब कॉलेज गए तो नोटिस बोर्ड पर कल क कम्पटीशन जितने वालों क नाम लिखे हुए थे रिसल्ट क साथ. मैं और मोहित मेरा नाम देख कर खुश हो गए . हमारा कॉलेज ओवरआल पहले no. पर hi रहा था. कल जितने वाले सभी प्लेयर्स को प्रोफ व् से कांटेक्ट करने को कहा गया था इस लिए मैं सीधा उनके ऑफिस में चला गया.

अमित : मई ी के इन सर?

प्रोफ व् : अरे आओ आओ अमित बहार क्यों खड़े हो? मैं तुम्हारा hi वेट कर रहा था.

मैं ऑफिस में अंदर चला गया उनके पास एक दो लड़के खड़े थे जिनको उन्होंने बहार भेज दिया.

प्रोफ व् : कोंग्रटुलतिओन्स बीटा कल तुमने बहुत ाचा खेला.

अमित : थैंक यू सर सब कोच साहब की ट्रेनिंग और आपका आशीर्वाद है.

प्रोफ व् : बीटा ये सब तुम्हारी म्हणत है. वैसे एक बात बताओ क्या तुम उस लड़के को पहले से जानते थे उस बॉयज कॉलेज वाले लड़के को?

अमित : जी नहीं सर मैंने तो कल उसे पहली बार hi देखा था.

प्रोफ व् : क्या उससे तुम्हारी कोई बात हुई थी मैच से पहले ?

अमित : नहीं सर

प्रोफ व् : तो उसने ऐसा क्यों किया? उसे देख कर hi लग रहा था क वो खेल नहीं रहा वो तुम्हे चोट पहुँचाने की कोशिश कर रहा था . मैंने इसकी शिकायत की थी उनके कॉलेज क प्रोफेस्सोर्स थे और प्रिंसिपल सर को भी बताया था. वैसे अब तुम्हारा घुटना कैसा है?

अमित : ठीक हूँ सर इतना तो चलता hi है. हल्का सा दर्द है 2-3 दिन में चला जायेगा.

प्रोफ व् : अब तुम जाओ जैसे hi प्रिंसिपल सर बुलाते हैं तुम सब ऑफिस में जाना उनके पास वो सब से मिलना चाहते हैं.

मैं सर से मिलके अपनी क्लास में चला आया. चंद्रकांता म क्लास ले रही थी तो उन्होंने मुझे अंदर घुसने hi नहीं दिया. मैं चुपचाप बहार इंतज़ार करने लगा बेल्ल बजने का.

बेल्ल बजते hi चंद्रकांता म गयी और मंजू म आ गयी उनके साथ hi मैं भी क्लास में आ गया. मैं घुटने में दर्द की वजह से थोड़ा आहिस्ता चल रहा था तो मंजू म ने मुझे गौर से देखा और इसकी वजह पूछी . मैंने बता दिया क कल मैच में थोड़ी चोट लगी थी. मम मुझसे और भी बात करना चाहती थी मगर हम क्लास में थे तो इस लिए उन्होंने बात वहीँ छोड़ दी. वो ज़रूर पूछना चाहती होंगी क कल तो मैं आराम से चल रहा था दिर आज कैसे मैं ऐसे चल रहा हूँ. कल तो मैंने पैन किलर खाई थी पर आज नहीं खायी थी इस लिए आज दर्द महसूस हो रहा था. मम का लेक्चर अभी आधा hi हुआ था क पेओन मुझे बुलाने आ गया. मम ने भी मुझे जाने की इजाज़त दे दी पर उनकी नज़रों में चिंता और नाराज़गी मुझे नज़र आ रही थी.

प्रिंसिपल सर क ऑफिस क बहार हमारे कॉलेज क वो सब स्टूडेंट्स मौजूद थे जो कल कम्पीटीशन्स जीत कर आये थे . बॉयज क साथ गर्ल्स भी थी और उनमे एक लड़की मेरी क्लास की भी थी. मुझे देख कर उसने मुझे विश किया. इस लड़की को मैंने क्लास में देखा तो कई बार था मगर कभी बात नहीं की . वैसे भी मैं क्लास में किसी से बात नहीं करता था. वो लड़की देखने में अछि खासी लम्बी छोड़ी थी और चेहरे सपाट था किसी पेशेवर की तरह . मगर चेहरे पर स्माइल थी और देखने में भी खूबसूरत थी हालाँकि उसके फीचर आम लड़कियों की तरह नाज़ुक नहीं लग रहे थे.

लड़की : hi कोंग्रटुलतिओन्स अमित तुमने गोल्ड मैडल जीता कल .

अमित : थैंक्स एंड सॉरी . क्या आप मुझे अपने बारे में बताएंगी? मुझे आपका नाम नहीं मालूम.

लड़की : मेरा नाम कल्पना है और मैं जुडो की प्लेयर हूँ कल मुझे भी गोल्ड मिला था. और तुम्हे सॉरी कहने की ज़रूरत नहीं है वे अरे क्लास मातेस . मुझे पता है तुम किसी से बात नहीं करते क्लास में.

अमित : कोंग्रटुलतिओन्स कल्पना सॉरी पर मैं किसी से बात इस लिए नहीं करता क यहाँ सब बड़े घरों क लोग हैं तो मैं थोड़ा उनसे दूर hi रहता हूँ क्या पता उन्हें मेरे साथ बैठने में कोई दिक्कत हो.

कल्पना : सब ऐसे नहीं होते. वो लोग जिन्हे पैसे का घमंड हो वो hi ऐसे होते हैं. वैसे अगर तुम्हे ऐतराज़ न हो तो क्या हम अचे दोस्त बन सकते हैं ? खिलाडी होने क नाते हमारे बिच दोस्ती होने तो लाज़मी है.

अमित : आप ऐसे पूछ कर मुझे शर्मिंदा कर रही हैं. हम आज से दोस्त hi हैं

हम दोनों ने हाथ मिलाया . हम बातें कर रहे थे क प्रिंसिपल सर बहार आ गए और सब को एक साथ खड़े कर क प्रिंसिपल सर प्रोफ व् और सब कोच आगे चेयर्स पर बैठ गए . सबकी ग्रुप फोटो ली गयी. प्रिंसिपल सर ने ओने बी ओने सब को आशीर्वाद दिया और कॉलेज का नाम ऐसे hi रोशन करने को कहा. उसके बाद मैं कल्पना से बात करता हुआ कैंटीन की तरफ hi जा रहा था क मुझे नेहा दीदी और राधा रस्ते में मिल गयी. दोनों क चेहरे पर टेंशन और गुस्सा था . मुझे देखते hi नेहा दीदी ने अपने चेहरे पर स्माइल लेन की ज़बरदस्ती कोशिश की

नेहा : कोंग्रटुलतिओन्स अमित तुम्हारा तो नाम आज नोटिस बोर्ड पर लगा हुआ है.

राधा : कोंग्रटुलतिओन्स अमित

अमित : थैंक्स दीदी एंड थैंक्स राधा इससे मिलो ये है कल्पना मेरी क्लास मात है और जुडो प्लेयर . इसने भी कल गोल्ड जीता है. और कल्पना ये है मेरी नेहा दीदी और ये है राधा मेरी ....

राधा : hi कल्पना कोंग्रटुलतिओन्स

कल्पना : थैंक्स राधा .

नेहा : कोंग्रटुलतिओन्स कल्पना . तुम्हे आज तक कभी इसके साथ देखा तो नहीं ?

कल्पना : थैंक्स दीदी . देखेंगी कहाँ से आपका ये भाई क्लास में किसी से बात hi नहीं करता . इसे तो मेरा नाम भी नहीं पता था वो तो आज मैंने hi इसे बुला लिया. ये तो लड़कियों से भी ज्यादा शर्मीला है.

कल्पना की इस बात से राधा और नेहा दीदी हसने लगी. तभी किसी ने कल्पना को आवाज़ दे दी और वो फिर मिलने का कह कर चली गयी.

अमित : बात क्या है दीदी आज आपके चेहरे पर फिर से टेंशन है. आपने वडा किया था क आप आज बताएंगी.

मेरी बात पर नेहा दीदी अपने हाथ की उंगलियां मसलने लगी और सोचने लगी क अब क्या जवाब दें तो राधा बोल पड़ी

राधा : आप बताएंगी या मैं hi बता दूँ?

नेहा : मैं बताती हूँ तुम चुप रहो.

राधा क चेहरे पर मुझे गुस्सा नज़र आ रहा था जैसे वो नेहा दीदी क मन करने पर नाराज़ हो रही हो.

नेहा : पहले प्रॉमिस करो मैं जो कहूँगी वो मानोगे.

अमित : ऐसी क्या बात जिसके लिए आप पहले प्रॉमिस मांग रही हैं. आप बताती क्यों नहीं ऐसे आप मेरी टेंशन बड़ा रही हैं.

नेहा : पहले प्रॉमिस कर फिर बताउंगी

अमित : ाचा ठीक है प्रॉमिस

नेहा : वो क्या है न तुम तो जानते hi हो अब लड़कियों क पीछे तो लड़के आते hi हैं आशिकी करने बस कुछ दिनों से ऐसे hi 2 लड़के हम दोनों क पीछे एते हैं जब हम कॉलेज अति है और वापिस पर भी.

राधा : दीदी आप साफ साफ बताइये क वो लड़के आपको तंग कर रहे हैं. मैं बताती हूँ अमित

नेहा : तुम चुप रहो राधा मैं बात कर रही हूँ न

नेहा दीदी और राधा की बात सुनते मेरा खून खोलने लगा था और गुस्से से मेरी मुठियाँ खिंच गयी.

अमित : राधा तुम बताओ क्या बात है ? कौन हैं वो लड़के और क्या किया है उन्होंने?

राधा : वो...

नेहा : राधा

अमित : दीदी अब आप नहीं बोलेंगी मुझे सुनने दीजिये राधा तुम बोलो

राधा : कुछ दिनों से 2 लड़के हमें कॉलेज में फ्रेंडशिप करने को कह रहे थे. वो दोनों हमसे अलग अलग अकेले में मिलते थे पर अब वो कॉलेज क बहार भी हमारा रास्ता रोकने लगे हैं. अब तो वो दोनों साथ में होते हैं और गंदे गंदे कमैंट्स करते हैं. परसों एक ने तो दीदी का हाथ पकड़ लिया था और आज भी उसने रास्ता रोक कर गंदे कमेंट किये मुझे तो बोलने में भी शर्म आ रही है.

अमित : इतना कुछ हो गया और मुझे किसी ने बताया तक नहीं. क्या मुझे आप अपना नहीं मानती ?

राधा : दीदी ने मन किया था मैं तो कब से कह रही थी क तुम्हे बता दूँ.

अमित : दीदी आप मुझे अपना नहीं मानती या अपने भाई पर भरोसा नहीं था ?

नेहा : ऐसे मत कहो भाई तेरे सिवा मेरा और है hi कौन जिसे भाई कहूं. मैं नहीं चाहती क तुम पर कोई आंच आये पहले भी तुम्हारे साथ इतना कुछ हो चूका है.

अमित : आपके साथ इतना कुछ हो गया मेरे होते हुए ये जान कर क्या अब मुझे ाचा लग रहा है? क्या अपने नहीं सोचा एक बार भी मेरे बारे में क जब मुझे पता चलेगा तो मुझ पर क्या बीतेगी? मुझे आपसे ये उम्मीद नहीं थी. राधा कौन हैं वो दोनों ? मुझे बताओ उनका नाम क्या है वो कौन सी क्लास में हैं.

राधा : वो दोनों फाइनल क स्टूडेंट्स हैं रिस्की और टोनी , मोंटी क साथी.

नेहा : देख अमित तू उन्हें कुछ नहीं कहेगा तूने वडा किया था तू मेरी बात मानेगा. तुमने उनसे लड़ाई झगड़ा किया तो वो फिर तुम्हारे साथ कुछ न कुछ करेंगे. हम उनकी शिकायत करते हैं प्रिंसिपल सर से तुम कुछ मत करना तुम्हे मेरी कसम.

अमित : दीदी !!!!!! आप ने मुझे कसम दे कर ाचा नहीं किया. वो घटिया लोग हैं प्रिंसिपल सर को शिकायत करने से कुछ नहीं होने वाला. लातों क भूत बातों से नहीं मानते . उनका इलाज मैं अचे से कर सकता हूँ.

नेहा : देख मैंने तुझे कसम दी है तू कुछ नहीं करेगा . तुमने उनसे झगड़ा किया तो मुझसे बात मत करना कभी.

अमित: दीदी आप उनको बचने क लिए मुझे कसम दे कर रोक रही हैं?

नेहा : नहीं भाई मैं तुझे रोक रही हूँ क्यूंकि मैं नहीं चाहती क मेरे भाई पर कोई एक आंच भी आये.

नेहा दीदी की आँखों में आंसू आ गए . मेरे लिए उनका प्यार देख कर मेरा भी मन भर आया और मैंने दीदी का हाथ अपने दोनों हाथो में थम कर उन्हें चुप करवाने की कोशिश की .

अमित : आप क्यों रो रही हैं? मैं उनसे लड़ाई झगड़ा न करूँ यही चाहती हैं न आप ? ठीक है मैं किसी से झगड़ा नहीं करूँगा. पर आप चुप हो जाइये. चलिए कैंटीन में चल कर कुछ कहते हैं आज तो पार्टी बनती है , आपका भाई जीत कर आया है.

मैं दोनों को साथ लेकर कैंटीन की तरफ बाद चला तो मेरी चल में बदलाव देख कर राधा ने मुझे रोका .

राधा : तुम ऐसे क्यों चल रहे हो? क्या हुआ है तुम्हे? कहीं चोट लगी है क्या? दिखाओ मुझे?

राधा क चेहरे ओर एक डैम चिंता क भाव उभर आये उसे मेरी बदली हुई चल से पता चल गया था. नेहा दीदी का इस तरफ ध्यान नहीं था और राधा क ऐसे बोलने से वो भी मेरी तरफ चिंता से देखने लगी.

अमित : कुछ नहीं वो मैच में थोड़ी सी चोट लग गयी थी घुटने पर ज्यादा कुछ नहीं है.

राधा : दिखाओ मुझे कितनी चोट लगी है . तुमने पट्टी करवाई क नहीं? डॉ को दिखाया था? दवा ली क नहीं?

महा : तुमने बताया क्यों नहीं क तुम्हे चोट लगी है ? चल दिखा हमें

अमित : दीदी ऐसा कुछ नहीं ज़रा स चोट है घुटने पर होने की वजह से मैं ज़रा आराम से चल रहा हूँ.

राधा : मुझे कुछ नहीं सुन्ना मुझे अपनी चोट दिखाओ

अमित : प्लीज राधा तरय तो अंडरस्टैंड यार मामूली स चोट है.

राधा : तो फिर तुमने बताया क्यों नहीं? मुझे तसल्ली नहीं होगी जब तक तुम नहीं दिखाओगे.

अमित : ाचा चलो पहले कैंटीन में चलते हैं . वहां बैठ कर बात करते हैं. वहीँ देख लेना चोट भी.

मैं दोनों क साथ कैंटीन की तरफ चल पड़ा तो इस बार राधा मेरी दायीं तरफ आ गयी क्यों की चोट दाएं घुटने में hi थी. राधा ने मेरी बाजु पकड़ ली मुझे सहारा देने क लिए. मैंने मन किया पर वो नहीं मणि. हम कैंटीन में पहुंचे तो मोहित और मीनल साथ बैठे हुए थे.

मोहित : अरे तुझे क्या हुआ जो इस बेचारी को की जान ले रहा है.

अमित : इसी से पूछ ले मैंने तो मन किया पर ये hi नहीं मन रही. अब तू hi बता क मेरे इतनी भी को चोट नहीं लगी. इसे मेरी तो समझ hi नहीं आ रही.

राधा : मोहित भैया तुम बताओ इसे ये चोट कैसे लगी और कितनी लगी है ये तो बता hi नहीं रहा.

मैंने मोहित को इशारा किया क कुछ ऐसा वैसा न बता दे जिससे मेरी दोनों बहने राइ का पहाड़ बना दें.

मोहित : डरने वाली कोई बात नहीं है वो कल मैच में उस लड़के ने जान बुझ कर इसके घुटने पर मर दिया था बस उसी का दर्द है

राधा : क्या ? जान बुझ कर मारा , पर उसने ऐसा क्यों किया?

अमित : कुछ नहीं ये तो ऐसे hi कह रहा है. गेम में ऐसा होता रहता है.

मैंने मोहित को टेबल की नीचे लात मरी. और आंखे दिखाई

मोहित : हाँ हाँ वो तो गेम में ऐसा हो जाता है तुम टेंशन मत लो

राधा : पर तुमने तो कहा उसने जान बुझ कर मारा

मोहित : वो उसने जितने क लिए ऐसा किया न. और कोई बात नहीं है.

राधा : मुझे अपनी चोट दिखाओ पहले मुझे अभी देखना है.

अमित : मैंने कहा न राधा क मामूली सी चोट है. वैसे भी मैं दिखा नहीं सकता

राधा : क्यों ?

अमित : क्यूंकि इस क लिए मुझे पेण्ट उतरनी पड़ेगी और तुम ये नहीं चाहोगी क सब मुझ पर हसन

मेरी बात से राधा शर्मा गयी. हम सब बातें कर रहे थे क रीमा भी कैंटीन में आ गयी. उसे देखते hi मैंने गुस्से से मुँह फेर लिया और जब वो हमारे पास आयी तो मैं फ़ोन का बहाना कर क बहार निकल गया. रीमा मुझे देखती रह गयी पर मैंने उसे नहीं देखा. मैं बहार फ़ोन को हाथ में पकडे खड़ा था तो रीमा वहां भी मेरे पीछे आ गयी.

रीमा : अमित क्या एक बार मुझसे बात भी नहीं करोगे ? काम से काम मुझे सच बताने का मौका तो दो.

अमित : अब और कौन सा सच बताना है ? और तुम सच बताओगी भी तो क्या? शुरू से तो झूठ बोल रही हो. मैं अछि तरह समझ गया हूँ क तुम भी अपने भाई क कहने पर hi मेरे साथ नाटक कर रही थी. ज़रूर उसी ने भेजा होगा फिर से कोई चल चलने क लिए. मगर उससे एक बात कह देना क लड़कियों को ढाल बना कर वॉर करना बंद कर दे . उसने जो पाप किये हैं उसकी सजा उसे मिल क रहेगी.

इतना कह कर मैं बिना उसकी बात सुने वहां से निकल गया. हालाँकि वो मुझे बार बार कहती रही क मैं एक बार उसकी बात तो सुनु . रीमा की आँखों में पानी और मायूसी थी उसके चेहरे की साडी रंगत उडी हुई थी जो मेरे दिल को झकझोर रही थी. पर राधा और नेहा दीदी ने जो आज मुझे बताया उसकी वजह से भी मेरा दिमाग ख़राब हो रहा था. मैं गुस्से में ग्राउंड में अकेला खली जगह पर बैठ गया और सोचने लगा क इस मोंटी को कैसे सबक सिखों. मेरी बहनो को परेशां करना शुरू कर दिया है इन लोगों ने अब तो कुछ न कुछ करना hi पड़ेगा. मैंने शालू को फ़ोन लगाया.

शालू : क्या बात है तुम तो स्टार बन गए हो आज तो हर तरफ तुम्हारे hi चर्चे हैं. कोंग्रटुलतिओन्स फॉर योर विक्ट्री . कहो आज हम गरीबों की यद् कैसे आ गयी.

अमित : थैंक्स शालू . मुझे तुमसे एक ज़रूरी काम है क्या तुम 2 मिनट्स बात कर सकती हो?

शालू : ऐसा कोण सा ज़रूरी काम आ गया ? बोलो मैं क्या कर सकती हूँ?

अमित : ये रॉकी और टोनी क बारे में जो कुछ भी जानती हो मुझे बताओ?

शालू : पर बात क्या है ?

अमित : वो बाद में पर मुझे अभी इनकी इनफार्मेशन चाहिए .

शालू : वो दोनों मोंटी क साथी हैं और उसी की तरह घटिया हैं. ये हर काम मोंटी क साथ मिल कर करते हैं. दोनों रोच फैमिलीज़ से हैं. मोंटी क साथ मिल कर ये लड़कियों को गड़ाए हैं और फिर एक साथ उनके मज़े लेते हैं.

अमित : ये दोनों कहाँ मिलेंगे ?

शालू ने मुझे उनके एड्रेस और उनके ठिकाने बता दिए. मैंने सब अपने दिमाग में बिठा किया.

शालू : तुम करने क्या वाले हो? बात क्या है ?

अमित : अभी तुम कुछ मत पूछो बस शांत रहना और किसी से इस बात का ज़िकर मत करना.

मैंने शालू से ज़रूरी इनफार्मेशन ले ली. नेहा दीदी ने मुझे कसम दी थी क मैं उन लोगों से झगड़ा न करूँ. मैं उनकी कसम तो नहीं तोड़ सकता पर जो उन लोगों ने किया है उसकी सजा देना भी तो ज़रूरी है. मैं अपने दिमाग में प्लान बनाने लगा क क्या करना है और कैसे. सब कुछ प्लान करने क बाद मैंने किसी को कॉल की.

अमित : hello भैया कैसे हो?

आदमी : मैं ठीक हूँ आज मेरी यद् कैसे आ गयी ? सब ठीक तो है न?

अमित : कुछ ठीक नहीं है भैया . यहाँ कुछ बदमाश मेरी बहनो को तंग कर रहे हैं कॉलेज में . मेरी बहिन ने मुझे कसम दे कर बांध दिया है ऐसे में मैंने आपको यद् किया अब आपको उन लोगों को ठीक करना होगा.

आदमी : क्या ???? तेरी बहनो को तंग कर रहे हैं . सहमत आयी है उन लोगों की. वो तेरी नहीं मेरी भी बहने हैं. बता क्या करना है?

अमित : आप किसी को साथ ले कर मेरे पास आ जाओ फिर मैं बताता हूँ क क्या करना है.

आदमी : ठीक है मैं आ रहा हूँ.

उसके बाद मैंने कॉल काट दी और अपने मन में फिर से प्लान क बारे में सोचने लगा. अब तो उन लोगों ने हद पर कर दी है . अगर अब भी इनको जवाब नहीं दिया तो क्या फायदा मेरे होने का. मोंटी अब तेरी लंका में आग लगने वाली है. जिन पेडों को तू इस्तेमाल करता है अब उनके पीटने का वक़्त आ गया. मन में अपनी प्लानिंग पर खुश होते हुए मैं वापिस आ गया . कॉलेज से वापिस आते हुए मीनल ने मुझसे रीमा क रिगार्डिंग बात की

मीनल : अमित ी थिंक तुम्हे एक बार रीमा से बात करनी चाहिए . मुझसे उसकी हालत देखि नहीं जा रही . बेचारी मुँह से मच नहीं कहती ओर उसकी आँखों में मायूसी कोई भी देख सकता है . ी थिंक शी इस इन लव विथ यू. मैं ये नहीं कहती क तुम सब कुछ भूल जाओ मोंटी और शीना ने जो भी किया पर हो सके तो एक बार उसकी बात ज़रूर सुन लो. जितना मैं उसके बारे में अभी तक जान पायी हूँ तो वो कहीं से भी उन लोगों जैसी नहीं है. इसके पीछे क्या राज़ है क उसने हमें अपने भाई बहनो क बारे में नहीं बताया ये तो उससे बात करने क बाद hi पता चलेगा न. मैंने तुम्हारे कहने क बाद उससे बात करना बंद कर दिया है. उसने मुझे कुछ नहीं बताया अपनी फॅमिली क बारे में पर ी थिंक वो तुम्हे सब कुछ बताना चाहती है प्लीज एक बार उससे बात करलो. हो सकता है वो सच में hi इनोसेंट हो और तुम उसके भाई की वजह से उस पर ज़ुल्म कर रहे हो.

अमित : तुम कैसे कह सकती हो क इसमें उन लोगों की कोई चल नहीं होगी. शिवानी भी तो इनोसेंट है लेकिन उसका भी तो उन लोगों ने इस्तेमाल किया न. तो मैं रीमा पर भरोसा कर क फिर एक बार किसी मुसीबत में फास जॉन. हो सकता है गली बार कोई मेरी मदद करने आगे न आये तो फिर मेरा क्या होगा? एंड फॉर योर काइंड इनफार्मेशन मोंटी क दोस्त राधा और नेहा दीदी को कुछ दिनों से परेशां कर रहे हैं मुझे आज hi पता चला और तुम कहती हो क ऐसे घटिया लोगों क साथ मैं किसी तरह की जान पहचान रखूं.

मोहित : ये क्या कह रहा है तू. वो सेल अब नेहा दीदी और राधा को परेशां करने लगे हैं. इनकी माँ की ..... इनका कुछ करना पड़ेगा भाई . तूने प्रिंसिपल से बात की?

अमित : नहीं प्रिंसिपल सर को इन सब बातों में लेन से कोई फायदा नहीं. अब जो करना है हमें करना है.

मोहित : जो भी करना है मैं तेरे साथ हूँ बस बता दे क करना क्या है?

अमित : अभी तू घर चल बाद में देखते हैं. और मीनल प्लीज तुम रीमा को मुझसे दूर hi रखना कहीं उसके भाई का गुस्सा उस पर न निकल जाये.

घर आकर हमने खाना खाया और अपने अपने कमरे में रेस्ट करने लगे. पर मुझे आज शिवानी से मिलना था. मैंने कपडे बदल लिए और T-shirt लोअर पेहेन कर शिवानी को फ़ोन किया. शिवानी भी घर पर खाना खा कर रेस्ट कर रही थी , उसने 20 मिनट्स में आने का कहा. ठीक 20 मिनट्स बाद शिवानी गेट पर थी . आज वो शार्ट स्कर्ट और टॉप में रही . स्कर्ट उसके घुटनो से ऊपर थी जिसकी वजह से उसकी गोरी टंगे नज़र आ रही थी और ड्राइविंग सीट पर बैठे होने क कारन उसकी जांघो का भी कुछ हिस्सा नज़र आ रहा था. शिवानी ने मुझे अपनी जांघों को घूरते देखा पर बिना कुछ कहे हल्का हल्का मुस्कुराती हुई गाड़ी चलने लगी. शिवानी उस दिन वाली जगह पर ले आयी और गाडी को एक जगह रोक दिया.

शिवानी : चलो अब तुम मेरी जगह पर आ जाओ और गाडी चलाओ

अमित : पर तुम तो जानती हो न मुझे अभी कण्ट्रोल करना नहीं अत.

शिवानी : उस दिन चलाई तो थी आज कोशिश करो चला लोगे तुम

अमित : मुझे पता है मुझसे नहीं होगा और मैं जनता हूँ तुम उस दिन की वजह से नाराज़ हो मुझसे इसी लिए ऐसा कह रही हो वर्ण मुझे अकेले चलने को नहीं कहती. ( मैंने जान बुझ कर ऐसा कहा क शिवानी उस दिन की तरह आज भी मेरी गॉड में बैठे )

रहने दो मई किसी और से सिख लूंगा अभी हम वापिस चलते हैं.

शिवानी : ये तुम कैसी बातें कर रहे हो ? मैंने उस दिन भी कहा था क मैं नाराज़ नहीं हूँ. अगर नाराज़ होती तो आज यहाँ आती? ाचा ठीक है मैं तुम्हे सिखाती हूँ तुम मेरी जगह पर आ कर बैठो.

अमित: नहीं रहने दो मुझसे नहीं होगा तुम वापिस चलो

शिवानी : चुप चाप जो कह रही हूँ वो करो वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. मैं माँ को बता दूंगी क तुम अब भी मुझसे गुस्सा हो और बस उन्हें दिखने क लिए ऊपर ऊपर दोस्त कहते हो.

मेरी चल काम कर गयी शिवानी खुद मुझे फाॅर्स कर रही थी तो मैं भला कैसे न मंटा. मुझे तो जल्दी से शिवानी को अपना बनाना था जिसकी शुरुआत यहीं से होनी थी. मगर शिवानी क दिल में भी कुछ तो था जो आज लॉन्ग स्कर्ट की जगह शार्ट स्कर्ट पेहेन कर आयी थी . शायद वो भी मज़े लेना चाहती थी मुझसे . वर्ण वो इतनी जल्दी तैयार नहीं होती और शायद आती hi नहीं. एक बार उसने जो इंकार किया था वो भी सिर्फ दिखने क लिए hi किया होगा. शिवानी क मन में क्या है ये अभी पता चला जायेगा . आज मैं भी तयारी क साथ आया था इसी लिए लूसे कपडे पहने थे क वो अछि तरह मुझे फील कर सके.

मैं अपनी जगह से उठ कर शिवानी की जगह पर आ गया और फिर शिवानी भी मेरी गॉड में बैठ गयी. आज न उसने मेरी टांगों क बीच बैठने की कोशिश की न hi मेरे घुटने पर बैठी बल्कि सीधा मेरी गॉड में hi बैठ गयी जिस वजह से उसके नरम नरम चूतड़ मेरी जाँघों पर आ गए. उसकी गांड से मेरा लैंड ज़रा सा hi फॉर था जो उसके हल्का सा पीछे खिसकते hi या मेरे लैंड क खड़े होते hi उसकी गांड से जा मिलेगा. शिवानी ने सेल्फ मर कर कार स्टार्ट की और मुझे सिखाते हुए गाड़ी चाल्ने लगी. मगर मुझे तो कार ड्राइव नहीं करनी थी मुझे तो शिवानी को ड्राइव करना था. शिवानी मुझे बताते हुए ड्राइव कर रही थी और मैंने अपने हाथ सरकते हुए उसके हाथों पर रख दिए. मेरे ऐसा करते hi शिवानी की बॉडी में हलचल हुई और उसकी बातें एक डैम से रुक गयी मगर उसने कुछ नहीं कहा. मैंने आगे हो कर अपना मुँह उसकी गर्दन पर रख दिया और उसक बदन की महक लेते हुए उसकी दर्दन से उसके जिस्म का कोमल एहसास महसूस करने लगा. शिवानी की बॉडी में भी तरंगे उठ रही थी और वो खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रही थी. अभी तक शिवानी ने कुछ भी रिएक्शन नहीं दिया था. कहने को तो इसे 50-50 चांस भी कहा जा सकता है पर मेरा दिल कह रहा था क शिवानी अंदर से तैयार हो कर hi आयी है इस सब क लिए. उसको भी पता होगा क मैंने फिर से ये सब करूँगा या फिर ये भी हो सकता है क उसने सोचा हो उस दिन गलती से हो गया होगा पर मैं ऐसा नहीं करूँगा. पर मैं अपने दिल की hi सुन रहा था . शिवानी की कोमल मुलायम स्किन का एहसास बहुत hi मज़ेदार था जिसे मैंने अपने होंठो से फील करने क लिए अपने होंठ उसकी गर्दन पर रख दिए. शिवानी क मुँह से एक सिसकी निकली जो इस बात का सिग्नल थी क उसे भी मज़ा आ रहा है. मैंने उसकी गर्दन पर अपने होंठ इधर उधर चलते हुए अपनी जीभ बहार निकल कर उसकी स्किन पर चलने लगा. शिवानी की आँखें मदहोशी में बंद हो गयी और उसका जिस्म लरजने लगा. उसे पता hi नहीं लगा क वो कब पूरी तरह पीछे होती हुई मेरे लैंड क ऊपर बैठ गयी और मेरे कंधे पर अपना सर गिरते हुए मेरे साथ चिपक गयी . गाडी एक जगह कड़ी हो चुकी थी और मैंने स्टेरिंग से हाथ हटा कर उसके पेट और जांघो पर रख दी . शिवानी की स्कर्ट थोड़ी ऊपर खिसक चुकी थी जिस वजह से उसकी आधी जांघें नंगी नज़र आ रही थी और जब मैंने वहां हाथ रखा तो उसकी मखमली जांघों का एहसास मुझे बहुत ाचा लगा. मेरा लैंड कब का खड़ा हो चूका था जो अब शिवानी क चूतड़ों में चुभ रहा था. शिवानी को भी उसका एहसास तो हो रहा होगा मगर वो तो किसी और hi दुनिया में खो गयी थी. मैंने शिवानी क कण की लो को होंठो में ले लिया और उसकी जांघों पर अपना हाथ चलने लगा साथ hi उसके पेट पर जो हाथ था उसको नीचे ले क जाता छूट क पास तक और ऊपर लेकर आता सके बूब्स क बॉटम तक. जांघों को मसलते हुए मैं अपना हाथ कभी बहार से कभी इनर तइस पर चलता और इसके साथ hi उसकी स्कर्ट को और ऊपर करने की कोशिश करता. शिवानी क मुँह से लगातार मादक सिसकियाँ निकल रही थी जो बता रही थी क शिवानी इस वक़्त सिर्फ मज़ा ले रही है और उसकी आग बाद चुकी है. शिवानी एक हाथ पीछे लेकर मेरे सर को अपनी गर्दन पर दबा रही थी और दूसरा हाथ अपने पेट पर चल रहे मेरे हाथ क ऊपर रख कर उसे डिश बता रही थी. मैंने उसकी जांघों पर हाथ चलते हुए जब इनर साइड पर चला रहा था तो हाथ को थोड़ा अंदर ले जाते हुए जांघों की जड़ों तक ले गया यानि की छूट क पास तक जिससे शिवानी की आग कुछ ज्यादा hi भड़की क उसने मेरा दूसरा हाथ खुद hi पकड़ कर अपने बूब्स पर रख दिया. शिवानी को तो एहसास भी न होगा क उसने क्या किया पर मैं शिवानी को काबू करने में कामयाब हो गया था. मैंने इसके एक दाएं स्तन को अपने हाथ में ले लिया. शिवानी का स्तन टाइट हो रहा था . शिवानी क बूब्स बड़े और आकर्षक थे उन्हें हलके हाथ से दबा कर मैं उनका अछि तरह से जायज़ा ले रहा था. शिवानी पहले भी सब कुछ करवा चुकी होगी ये तो मैं फोटो देखते hi समझ गया था इसी लिए ये सब करने में उसे कोई धक्का नहीं पहुंचेगा ये बात मैं अछि तरह समझ चूका था . इस लिए मैं अपना काम बिना किसी अफ़सोस क कर रहा था . जब शिवानी ने मेरे हाथ को अपने बूब्स दबाने से नहीं रोका तो मैंने अपना दूसरा हाथ भी उसके दूसरे स्तन पर रख दिया और उसके दोनों स्तनों को अपने हाथो से दबाने लगा. शिवानी अब और कण्ट्रोल नहीं कर प् रही थी और अब उसकी बंद ज़ुबान खुलने लगी.

शिवानी : ककक आह्ह्ह्हह आह्ह्ह्ह उम्म्म ओह्ह्ह्हह्हह उम्म्म्म क्या कर रहे हो तुम कक्कक्स तुम तो ड्राइविंग सिखने आये थे ककक उम्म्म्म ये क्याआ. कररररर रहे होऊ... तुम मुझे पगललललल कर रहे होऊ. रुक जाओ उम्मम्मम कक्कक्स मत करूऊओ मैंनमम्म उम्मम्मम ये क्या हो रहा हीी. ......

मैंने अपना काम जारी रखा शिवानी मुझे रुकने को कह तो रही थी मगर उसका जिस्म कुछ और hi कह रहा था. मैं लगातार अपना काम कर रहा था . मैंने एक और तीर चलते हुए अपना हाथ उसकी स्कर्ट में घुसकर पेंटी क ऊपर से उसकी छूट पर रख दिया. शिवानी की पेंटी गीली हो रही थी . मैंने अपनी उंगली से उसकी छूट पर से दबाव बनाना शुरू कर दिया जिस से उसका जिस्म कम्पनी लगा . शिवानी का एक उभर मेरे हाथ में था और दूजा वो खुद hi दबाने लगी साथ hi अपनी नंगी टैंगो को मेरी टैंगो पर रगड़ने लगी. मैंने उसकी स्कर्ट को दोनों हाथो से पकड़ कर उलट कर कमर तक कर दिया जिससे उसकी पेंटी मेरे सामने आ गयी. शिवानी की गोरी टांगों क ऊपर कासी हुई काली पेंटी बहुत खूबसूरत नज़ारा दे रही थी. मैंने अपनी उंगलियां उसकी पेंटी में दाल कर उसकी छूट पर चलने लगा. शिवानी की छूट क्लीन शेव थी . उसकी छूट की स्किन का नरम एहसास बता रहा था क वो अपनी छूट का खास ख्याल रखती होगी. शिवानी की छूट गीली थी और उसकी कमर जिस तरह हिलने लगी थी वो बता रही थी क जल्दी hi छूट में कैद पानी का बाँध टूटने वाला है.

शिवानी : आअह्ह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्हब उम्मम्मम कक्कक्स क्या कर रहे हो कक्कक्क्स उम्म्म्म ऊऊह्ह्ह्ह क्या जादू है तुम में उम्मम्मम ऐसे hi ऐसे hi करो कक्कक्स उम्मम्मम कॉमन फास्टर फास्टर उम्म्म्म डीपर फास्टर

शिवानी अपनी छूट में चल रही मेरी उंगली को और अंदर और तेज़ चलने को कह रही थी . मैं भी शिवानी क बूब्स मसलता हुआ उसकी छूट में तेज़ तेज़ उंगली चलने लगा. शिवानी से और ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं हुआ और उसका जिस्म अकड़ने लगा. शिवानी की कमर ऊपर उठी मेरी उंगली को और अंडर तक लेने क लिए और उसका जिस्म अकड़ कर झटके खाने लगा.

शिवानी : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह अघहहह आअह्ह्ह्ह ोुह्ह्ह्हब ुंकन्ना आईई कक्कक्स मैं गयी ी म सुंम्मिंग ी ऍम सुंम्मिंग आआआअह्हह्ह्ह्हह

शिवानी की छूट से गरम पानी की बरसात होने लगी और वो मेरी गॉड में निढाल हो कर पद गयी. एक बार फिर से शिवानी की ऑंखें बंद थी और वो ऐसे लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी मनो बहुत दूर से भाग कर आयी हो. शिवानी पूरी तरह से रिलैक्स हो गयी थी और उसे ज़रा भी एहसास नहीं था क वो कहाँ है और किस हालत में है. अब मैंने आगे बढ़ने का सोचा . शिवानी क पानी से उसकी पेंटी उसकी जांघें और मेरे हाथ क इलावा मेरा लोअर भी भीग गया था शायद काफी दिनों से पानी स्टॉक कर रखा होगा. मैंने उसके टॉप को उतरने क लिए जैसे hi हाथ लगाया तो मेरा फ़ोन बज उठा.

‘ ये भी साला अभी बजाना था पता नहीं कौन है. ‘ मन में बड़बड़ाते हुए मैंने मोबाइल देखा तो मेरा इरादा बदल गया और मैंने फ़ोन उठा लिया

आदमी : हम पहुँच गए हैं तुम कहाँ हो?

अमित : आप इस वक़्त कहाँ हैं?

आदमी : हम इस वक़्त क्सक्सक्सक्सक्स पर हैं.

अमित : आप वहीँ रुको मैं अभी आया.

मेरी बातचीत क दौरान शिवानी को भी होश आ गया था और वो अपनी हालत ठीक कर रही थी. मैंने कॉल ख़त्म होते hi शिवानी को देखा तो वो सर झुकाये अपनी हालत ठीक कर रही थी.

अमित : शिवानी ी ऍम सॉरी मुझसे फिर गलती हो गयी. पर क्या करूँ जब भी तुम पास आती हो मैं खुद को रोक नहीं पता काश तुम मेरे साथ मेरी क्लास में होती तो ......

शिवानी : तो ?

अमित : तो मैं अब तक अकेला नहीं होता. अब तक मैंने तुम्हे अपनी गफ बना लिया होता

शिवानी : तुम झूठ बोल रहे हो . तुम तो कहते हो तुम्हे इंटरेस्ट नहीं इन सब बातों में

अमित : जब मेनका विश्वामित्र जैसे तपस्वी की तपस्या भांग कर सकती है तो मैं तो एक मामूली सा इंसान हूँ. तुम तो स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा हो मैंने खुद को रोकने की कितनी कोशिश की पर तुम्हारे इस कयामती हुस्न ने मुझे तुम्हारा दीवाना बना hi दिया. तुम तो ऊपर वाले की बनायीं वो मूरत हो जो पत्थरों में भी जान दाल दे मैं तो इंसान हूँ.

अपनी तारीफ से भला कोण लड़की खुश नहीं होगी . शिवानी भी अंदर अंदर hi खुश हो रही थी और एक मुस्कान उसके चेहरे पर मैंने देख ली मगर शिवानी ने उस मुस्कान को छुपाते हुए कहा

शिवानी : तुम झूठ बोल रहे हो अगर ऐसा होता तो तुम पहले भी मेरे साथ प्यार कर सकते थे मगर तब तो तुम पर कोई असर नहीं हुआ था जबकि मैं खुद तुम्हे लाइन दे रही थी.

अमित : ये तो मेरा दिल hi जनता है का मैं उस पर कितना जुल्म कर क उसे रोक रहा था . मगर अब जब मेरे दिल ने तुम्हारे दिल को पहचान लिया है तो ये मेरी भी नहीं मन रहा और तुम्हारे पास आते hi ये मेरे कण्ट्रोल से बहार जो जाता है.

शिवानी : मैं कैसे विश्वास करूँ क तुम सच बोल रहे हो?

अमित : ठीक है तो तुम अपने दिल से पूछो क वो क्या कहता है अगर वो कहे क मैं गलत हूँ या झूठा हूँ तो तुम मुझे बोल देना मैं कभी दोबारा तुम्हारे पास भी नहीं आऊंगा.

शिवानी : बड़े तेज़ हो तुम . तुम जानते हो मेरा दिल तो तुम्हारी hi साइड लेगा इस लिए ऐसी बातें कर रहे हो.

शिवानी की बात से मैं खुश हो गया मतलब वो भी मुझे पसंद करती है. पसंद करती है ये तो मुझे पहले hi पता था मगर इस नज़र से भी करती है ये अब पता चल गया .

अमित : क्या कहा ? इसका मतलब तुम भी मुझे चाहती हो ? मतलब तुम जैसी परियों की रानी मुझ जैसे मामूली आदमी को पसंद कर सकती है मुझे तो यकीन नहिभो रहा .

शिवानी : तुम कोई मामूली नहीं हो. तुम क्या हो ये मैं अछि तरह जानती हूँ . काश क तुम मुझे पहले मिले होते तो मैं तुम्हारे कदमो में जान तक लुटा देती. अगर तुम मुझे पहल मिल जाते तो मैं कभी किसी की तरफ देखती भी नहीं

अमित : अब तो मिल गया हूँ न तो अब क्या इरादा हज?

शिवानी : इरादा तो नेक है पर इस रिश्ते का अंजाम क्या होगा?

अमित : कल की चिंता क्यों करती हो ? हम आज साथ हैं क्या ये काम है ? मैं तुम्हे किसी भी चीज़ क लिए फाॅर्स नहीं करूँगा टेक योर टाइम . तुम्हे ठीक लगे तो हम आगे बढ़ेंगे वर्ण नहीं. और अंजाम की परवाह करने से क्या होगा किसी को अपने अंजाम पर इख़्तियार नहीं होता ये तो सब ऊपर वाले क हाथ में है. मैं चाहता हूँ तुम ठन्डे दिमाग से सोच कर मुझे अपना फैसला बताओ इस लिए आज क लिए इतना बहुत है अब हम चलते हैं तुम मुझे घर छोड़ दो.



शिवानी कुछ कहना चाहती थी मगर वो चुप रह गयी शायद उसे भी अपनी ये हालत सही नहीं लग रही होगी और एक डैम से आगे बढ़ना भी आसान नहीं होता. बेशक शिवानी मॉडर्न थी पर उसकी माँ से मिलने क बाद मुझे इतना तो पता चल गया था क वो बहार से कुछ और अंदर से कुछ और है. शिवानी कार से बहार निकली और अपने कपडे ठीक करने लगी मैं भी ड्राइवर सीट से उठ कर दूसरी सीट पर आ गया और शिवानी गाड़ी चलते हुए मुझे घर क बहार ड्राप कर क चली गयी. मैंने अपनी बाइक निकली और उस तरफ चल दिया जहाँ मुझे अपने साथियों से मिलना था. मैंने मंजू म को फ़ोन पर बता दिया क आज मैं नहीं आ पाउँगा . वो मुझसे नाराज़ हुई क्यूंकि वो मेरी चोट की वजह से पहले hi मुझ पर गुस्सा थी अब मेरे न आने से वो और नज़र hi रही थी . मैंने उनको बताने क बाद अपने साथियों क पास पहुँच गया.
 
90% लिख लिया है जैसे hi कम्पलीट होगा पोस्ट कर दूंगा भाई सॉरी फॉर लेट
 
अपडेट 97



अंकल आज घर लौट आये थे और हम सब में मिल कर डिनर किया. डिनर करते वक़्त अंकल ने संडे को हमारे गाओं जाने की बात कही तो मैं हैरान हो गया और खुश भी .

अंकल : अमित कल तुम घर नहीं जाओगे

अमित : कोई काम था अंकल ? कल शनिवार है माँ मेरा इंतज़ार कर रही होगी घर आने का . पिछली बार भी मैं गाओं नहीं गया था.

अंकल : मैं इस लिए कह रहा हूँ क परसों हम सब तुम्हारे साथ गाओं चलेंगे.

अंकल क इतना कहते hi मैं ख़ुशी से उछाल पड़ा. आंटी को शायद पहले hi अंकल बता चुके थे और वो मुस्कुरा रही थी . मगर मोहित को अभी अभी पता चला था तो वो भी हैरान हो रहा था

अमित : ो अंकल मैं बहुत खुश हूँ. बाबा कितने खुश होंगे आपको देख कर सब खुश होंगे जब आपको देखेंगे

अंकल : मैं खुद सब से मिलने को कितना उत्सुक हूँ मैं समझा नहीं सकता. कितने साल बाद मैं वहां जा रहा हूँ. आखिरी बार जब गया था तो तू गॉड में था भाभी की

आंटी : मैं भी कामिनी को देखना चाहती हूँ और तेरी छोटी ममी को भी मिल लुंगी सुना है तेरी बहुत बनती है उससे . जब हम गए थे तब तो शादी नहीं हुई थी कमलेश की.

अमित : सब आपको देख कर बहुत खुश होंगे. छोटी ममी भी बहुत अछि हैं और मुझे बहुत प्यार करती हैं.

अंकल ने तो इतनी अछि खबर सुनाई थी क मैं अंदर से नाचने लगा था. मैंने सोचा क क्यों न सरप्राइज दिया जाये अंकल आंटी क बारे में घर पर न बता कर . कुछ न कुछ बहाना बना दूंगा कल का माँ थोड़ी देर क लिए नाराज़ होंगी पर इस सरप्राइज से खुश भी होंगी.

मैं बहुत खुश था और पता नहीं क्या क्या प्लान बना रहा था. रत को सब क सोने क बाद आंटी मेरे पास आ गयी.

आंटी: खुश तो हो न ? हम सब साथ में गाओं जा रहे हैं.

मैंने बीएड से उठ कर आंटी को अपनी बाँहों में उठा लिया और घूमने लगा

अमित: खुश तो इतना हूँ क बात नहीं सकता . ऐसा लग रहा है जैसे बरसों बाद मैं अपने माता पिता क साथ अपने नाना घर जा रहा हूँ. आज तक जिसे अपना समझता था आज वो घर मुझे मेरा ननिहाल लगने लगा है. सब कितने खुश होंगे अंकल और आप को वहां देख कर.

आंटी : फिर तो आज मुझे इसका इनाम मिलना चाहिए क्यूंकि मेरा भी कुछ हिस्सा है इस ख़ुशी में. राघव को मैंने hi तो मनाया है परसों क लिए वर्ण अभी वो और लटका देते.

अमित : आपको आज इतना पूरा दूंगा क आप खुश हो जाएँगी.

इतना कह कर मैंने आंटी को किश करना शुरू कर दिया और देखते देखते हम दोनों नंगे हो गए. मैंने अपनी ख़ुशी आंटी क अंदर ट्रांसफर कर क आंटी को अपनी ख़ुशी का एहसास करवाया और उन्हें उनका इनाम दिया. रत भर आंटी उछलती रही कभी मेरे ऊपर बैठ कर कभी मेरी गॉड में हवा में झूलती कभी घोड़ी बन कर तेज़ दौड़ती और कभी मैं उनकी टांगो को उठाकर उन्हें आसमान में उडाता. आंटी की जैम कर चुदाई कर क मैंने उनका सारा पानी निकल दिया और वो 3 बजे क बाद सहारा लेती हुई अपने कमरे तक वापिस गयी मगर उनके चेहरे पर भी उनके अंदर की ख़ुशी साफ़ झलक रही थी. मैंने भी आंटी को खुश करता हुआ उनके साथ ख़ुशी बाँट ता हुआ आराम से सो गया. अगली सुबह मैं एक्ससरसीसे करने क लिए जा नहीं पाया क्यूंकि मेरी आँख hi नहीं खुली थी टाइम से मगर जब तैयार हो के नीचे आया तो मेरे चेहरे पर आज बाकि दी ो से ज्यादा रौनक थी.

अंकल: क्या बात है आज इतनी देर उठे. और लगता है आज कुछ खास बात है जो सुबह सुबह इतने खुश दिखाई दे रहे हो.

अंकल बैठ कर अख़बार पद रहे थे और चाय पिटे हुए उन्होंने मुझे देख कर ये बात कही. मैं सीधा उनके पास गया और उनके पाऊँ छू कर उनको गले लगा लिया.

अमित : ये ख़ुशी आपकी वजह से hi है अंकल. कल आप मेरे साथ गाओं चल रहे हैं बस इसी बात से खुश हो रहा हूँ.

अंकल : मैं भी बहुत खुश हूँ . तेरे साथ फिर से उस घर में जाना मेरे लिए भी एक अलग hi ख़ुशी पैदा कर रहा है. और लगता है तेरी आंटी भी कुछ ज्यादा hi खुश है जो अभी तक सो रही है.

बात करते हुए अंकल का इशारा आंटी की तरफ था जो हमारी तरफ hi आ रही थी . वो अभी तक रत वाले कपड़ो में hi थी यानि क गाउन में और उनके चेहरे से लग रहा था क वो अभी उठी हैं. उनके हाथ में जूस और चाय का कप था

आंटी : आपको तो बस बातें बनाना अत है. आज ज़रा देर से आँख क्या खुली आप मेरा मज़ाक उड़ने लगे. लो अमित तुम जूस पियो तुम्हारे अंकल को तो एक hi काम है

अंकल : अरे गुस्सा क्यों होती है मैडम मैं तो बस इस लिए कह रहा था क रोज़ आप सब से पहले उठ जाती हैं मगर आज आप लेट हो गयी देखिये आपका लाडला भी आ गया.

मोहित : गुड मॉर्निंग माँ गुड मॉर्निंग डैड. ये क्या माँ आप आज अभी तक तैयार नहीं हुई?

आंटी : कुछ नहीं बीटा आज आँख ज़रा देर से खुली. रत को सर में दर्द था तो देर से सोई थी. तुम बैठो मैं नाश्ते क बोलती हूँ.

रत की मज़ेदार चुदाई से आंटी का बदन अभी तक उसके नशे में था और वो खुद को सँभालने की कोशिश कर रही थी. खैर हम दोनों ने नाश्ता किया और कॉलेज चले गए. आज चंद्रकांता म ने मुझे क्लास में बैठ ने दिया पर उसकी आँखों में गुस्सा में देख सकता था. उसके बाद मंजू म का लेक्चर लगा कर हम कैंटीन में चले गए. कैंटीन में बैठ कर बातें कर रहे थे क मेरी दो ो बहने राधा और नेहा दीदी चेहेक्ति हुई हमारे पास आ गयी.

मोहित : लगता है आज कुछ खास बात है जो आप दोनों इतनी खुश नज़र आ रही हैं.

राधा : बात hi ऐसी है

अमित : ऐसा क्या हो गया?

राधा : तुम लोगों को नहीं पता ? वो लड़के जो हमें परेशां करते थे उनका एक्सीडेंट हो गया है अब तो हम लोगों को कोई परेशां नहीं करेगा. बस इसी वजह से हम खुश हैं

मोहित : फिर तो उस एक्सीडेंट करने वाले क नाम पर पार्टी होनी चाहिए

मैं मोहित की इस बात से राधा से नज़रें चुराने लगा जैसे मोहित ने मेरा hi नाम ले दिया हो . मेरी इस हरकत से राधा फिर मुझे घूर कर देखने लगी.

नेहा : है तो वैसे ये गलत पर फिर भी हमारे लिए ये ाचा है क अब हम बिना दर क आ जा सकती हैं.

राधा : वैसे मुझे लगता है जिसने ये एक्सीडेंट किया है मैं उसे जानती हूँ

मैं राधा की तरफ हैरानी से देखने लगा क वो क्या कहना चाहती है.

नेहा : तू जानती है तो बताया क्यों नहीं अभी तक?

राधा : बस कन्फर्म करना था और अब हो गया है

मीनल : ाचा हमें भी बताओ कौन है वो ?

राधा : और कौन होगा जो दूसरों क लिए अपनी जान खतरे में डालेगा. एक hi तो है जिससे हमारी टेंशन देखि नहीं जाती. मैं तो कल hi समझ गयी थी और आज कन्फर्म हो गया

राधा की बात का मतलब समझ कर नेहा दीदी मेरी तरफ देखने लगी. मीनल मोहित अभी भी राधा की तरफ देख रहे थे.

नेहा : अमित तुमने किया ये सब? मैंने तुम्हे मन किया था कुछ भी करने से फिर क्यों तुमने ? तुमने मेरी कसम की भी परवाह नहीं की?

नेहा दीदी की बात पर मोहित और मीनल मेरी तरफ देखने लगे. सब से ज्यादा तो मोहित हैरान हो रहा था.

मोहित : इसका मतलब तू हॉस्पिटल नहीं गया था तू यही सब करने गया था और तूने मुझे बताया तक नहीं.

अमित : दीदी मैंने कुछ नहीं किया . मैं आपकी कसम कभी तोड़ सकता हूँ क्या? मगर आपने कैसे सोच लिया क कोई आपको परेशां करेगा और मैं उसे कुछ भी नहीं कहूंगा? ये सब मैंने नहीं किया पर हाँ इसके पीछे मेरा हाथ ज़रूर है. ये सब मेरे दोस्त ने किया है और वो भी आपको अपनी बहिन मंटा है. वो दो ो घटिया थे पता नहीं कितनी लड़कियों की ज़िन्दगी बर्बाद की थी उन्होंने और अब वो आप दोनों क पीछे लग गए थे. मैं कैसे आओ दोनों को कुछ होने देता. कोई कुछ भी कहता वो लोग पीछे नहीं हैट ते. इस किये मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था. आपने अपनी कसम देकर मेरे हाथ बांध दिए थे इस लिए मैंने उनके साथ कुछ नहीं किया मगर अपने आँखों क सामने ये सब करवाया . आप दोनों मेरी जान हो और मैं कैसे आप पर कोई आंच आने दे सकता हूँ. आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है किसी को कुछ पता नहीं चलेगा ये बस एक एक्सीडेंट hi है. और हाँ आगे से कभी मुझे कभी कसम देकर रोकने की कोशिश मत करियेगा . मैं आपका भाई हूँ मेरे होते कोई आपके साथ बदतमीज़ी कर जाये ये मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता.

मेरी बातों से जहाँ मोहित और मीनल हैरान हो रहे थे वही नेहा दीदी की आँखों से आंसू बहने लगे और राधा भी बस मुझे देखती हुई कहीं खो सी गयी थी. मेरे बात ख़तम करते hi नेहा दीदी अपनी सीट से उठी और रोटी हुई मेरे गले लग गयी

नेहा : तू इतना प्यार करता है मुझसे ? तू सच मच मेरा भाई है. तू मेरी इतनी परवाह करता है. अगर तुझे कुछ हो जाता तो? मैं नहीं चाहती थी क तुम्हे कुछ हो. तू hi तो एक मेरा भाई है अगर तुम्हे कुछ हो गया तो मैं किसे अपना भाई कहूँगी.

अमित : दीदी आप ने ये नहीं सोचा क मेरे होते आप क साथ कुछ हुआ तो क्या मैं ज़िंदा रह पाउँगा? भाई तो होते hi अपनी बहनो की रक्षा क लिए हैं आप ये बात क्यों भूल गयी थी? आगे से अगर कभी आपने मुझे कसम दे कर रोकने की कोशिश की तो मैं आपसे कभी बात नहीं करूँगा.

नेहा : मैं ऐसा कभी नहीं करुँगी . मैं तुझे कभी नाराज़ नहीं होने दूँगी. मगर तू भी यद् रख क तेरे बिना तेरी ये बहिन भी ज़िंदा नहीं रहना चाहेगी.

मैंने नेहा दीदी को चुप करवाया और उनके आंसू पोंछे. हमारे आसपास की टेबल पर बैठे स्टूडेंट्स हमें hi देख रहे थे मगर किसी को पता नहीं था क बात क्या है.

मोहित : पर तूने ये सब किया कैसे और तेरा कौन सा दोस्त था इसमें? मैंने तुझे कहाँ था न क मुझे साथ रखना फिर भी तूने मुझे बताया नहीं . मैं तुझसे बहुत नाराज़ हूँ तूने साबित कर दिया क तू मुझे अपना दोस्त नहीं मंटा.

अमित : तू मार खायेगा मेरे हाथो से ऐसी बात दोबार की तो. तुझ पर तो मैं ऑंखें बंद कर क विश्वास करता हूँ. मैं इसमें तुम्हे इस लिए शामिल नहीं करना चाहता था क मैं नहीं चाहता था क किसी को तेरे बारे में पता चले. ये सब मेरे गाओं क दोस्तों ने किया है और किसी को कभी कुछ पता नहीं चलेगा तुम लोग भी ये बात भूल जाओ.

मोहित : पर ये सब किया कैसे ?

अमित : मैंने कहा न भूल जाओ . इसके बारे में कोई किसी से बात नहीं करेगा वर्ण किसी को शक हो सकता है.

राधा कब से मेरा hi चेहरा देख रही थी और कब मैं चुप हुआ तो मेरी आँखों में देख रही थी. मेरी उससे नज़र मिली तो उसकी आँखों में अपने लिए कृतग्यता क भाव देख कर मुझे ाचा लगा नगर उसकी नज़रें और भी कुछ कह रही थी जो मैं समझा नहीं या समझना नहीं चाहता था . राधा ने मेरा हाथ अपने हाथों में थम लिया और कहा

राधा : तुम इतना प्यार करते हो हमें ?

राधा ने बस इतना hi कहा था मगर मुझे लगा जैसे वो ये अपने बारे में कह रही हो. वो लगातार मेरी आँखों में देख रही थी और ऐसे लग रहा था जैसे वो अपने अंदर क जज़्बात रोक नहीं प् रही थी. मैं भी उसकी आँखों में देखता खो सा गया था क मीनल ने हमें जगाया.

मीनल : चलो इस ख़ुशी में पार्टी करते हैं . अमित ने जो भी किया है उसे देख कर मुझे जलन होने लगी है तुम दोनों से. काश में मेरा भाई होता.

मोहित : ो मैडम वो देवर है तुम्हारा रिश्ता मत बदलो वर्ण मैं भी तुम्हारा भाई बन जाऊंगा

मोहित की इस बात पर हम सब हसने लगे. उसके बाद हमने मिल कर कैंटीन पार्टी की और बेल्ल बजने से पहले बहार निकला गए मगर जब तक हम वहां रहे नेहा दीदी और राधा बस मुझे hi देखती रही मगर दोनों की नज़रों क भाव अलग अलग थे. कैंटीन से निकल कर जब हम क्लास की तरफ जाने लगे तो नीरज ने मुझे रोक लिया और मोहित की जाने दिया.

नीरज : ये सब क्या है? तुमने डरा भैया को गाओं से बुला किया क्या मैं नहीं था यहाँ पर तुम्हारी मदद क लिए?

अमित : ये तुम क्या कह रहे हो ? डरा भैया तो वैसे hi आये थे. और मैंने कौन सी मदद मांगी किसी से?

नीरज : ज्यादा बनो मत. मैंने पता लगा लिया है सारा. कल सुबह भैया हमारे hi घर आये थे. उन्होंने छुपाने की कोशिश तो की मगर मैंने पकड़ लिया अब तू भी सीधा सीधा बता दे सब कुछ . मैं जनता हूँ टोनी और रॉकी क एक्सीडेंट क पीछे तुम और डरा भैया का हाथ है.

नीरज की बातों से साफ़ ज़ाहिर था क डरा भैया ने इसे बताया नहीं होगा कुछ भी बस इसे सही hi होगा और आज टोनी और रॉकी क एक्सीडेंट क बारे में सुनकर उसे लगा होगा क हमने ये किया. खैर नीरज अपना भाई है तो इसे नाराज़ भी करना सही नहीं इस लिए बता hi देना ठीक है.

अमित : हाँ इसके पूछे हम hi हैं. उन दोनों ने नेहा दीदी और राधा को परेशां कर रखा था तो उन्हें सजा तो मिलनी hi थी.

नीरज : क्या ??? तुमने मुझे क्यों नहीं बताया ? उन लोगों को मैं अपने हाथों से सजा देता. इसके पीछे ज़रूर मोंटी भी होगा उसे क्यों छोड़ दिया?

अमित : वहां पर ये 2 hi थे अगर मोंटी भी होता तो उसका भी यही हल होता.

नीरज : पर तुम लोगों ने एक्सीडेंट क्यों करवाया उनका. उनको तो अपने हाथो से ऐसी सजा देनी चाहिए थी क दोबारा ऐसी हरकत करने क्या सोचने की भी हिम्मत न करते.

अमित : आपको क्या लगता है हमने क्या किया है?

नीरज : मतलब एक्सीडेंट नहीं है ये ? मुझे बताओ क्या किया है ?

अमित : उनके इतनी आसान सजा कैसे दे सकता था मैं इसी लिए तो भैया को बुलाया था.

फ़्लैश बैक:-

डरा : आ गया छोटे . अब बता क्या बात है और कौन हैं वो लोग.

अमित : भैया वो लोग अपने कॉलेज क hi हैं . अमीर घरों क बिगड़े शहज़ादे जो लड़कियों की इज़्ज़त को अपने पाऊँ क नीचे रखते हैं. कुछ दिनों से नेहा दीदी और राधा को रस्ते में रोकते हैं और परेशां करते हैं. पहले भी कई लड़कियों को ख़राब कर चुके हैं. इन लोगों का अपना गैंग है ये सब किसी न किसी लड़की को अपने जाल में फसा कर उसके साथ वीडियो बनाते हैं और फिर उसे जानवरों की तरह मिल कर नोचते हैं. मेरी बहनो क साथ भी ये लोग ऐसा hi कुछ करना चाहते हैं. मैं तो इन्हे अपने हाथो से सजा देना चाहता था पर दीदी ने कसम देकर मेरे हाथ बांध दिए हैं वर्ण आपको कभी नहीं बुलाता.

डरा : ये तूने ाचा किया भाई क मुझे बता दिया . वो मेरी भी बहने हैं और ऐसे गन्दी नाली क कीड़ों को सजा देने में मुझे भी ख़ुशी होगी. जो लड़कियों औरतों की इज़्ज़त नहीं करते वो समाज क नाम पर कलंक है और ऐसी गन्दगी को साफ़ करना तो पुण्य का काम है.

लड़का : अपना ठीक कहा डरा भैया ऐसी गन्दी औलादों को पैदा करने वाले उनके माँ बाप को भी सजा देनी चाहिए ताकि ऐसे कीड़े पैदा hi न हों.

डरा : अमित ये अपना भाई hi है ‘ कालू ‘ नाम है इसका. इसकी बहिन क साथ ज़बरदस्ती कर क कतल कर दिया था कुछ बदमाशों ने . इसे जब बात पता चली तो ये मुझसे भी ज्यादा गुस्से में आ गया था यहाँ आने क लिए. इसे हर बदमाश में वो लोग hi नज़र आये हैं जिसने इसकी बहिन क साथ वो सब किया था.

कालू : भैया आज भी मेरी आँखों क सामने मेरी बहिन का वो चेहरा घूमता रहता है. मैं इन लोगों को जान से मर दूंगा.

अमित : जान कर बहुत दुःख हुआ भैया. एक भाई की तड़प मैं अछि तरह समझ सकता हूँ. पर भैया हमें उन लोगों को जान से नहीं मरना है. जान से मारा तो ये उनके लिए मुक्ति होगी. मैं तो उन्हें ऐसे सजा देना चाहता हूँ क वो जब तक ज़िंदा रहें ये बात यद् रखें क कभी किसी की इज़्ज़त क साथ नहीं खेलना है.

डरा : अमित ठीक कह रहा है. मर क तो सेल आज़ाद हो जायेंगे. उन्हें तो उम्र भर की सजा देनी चाहिए. वैसे तूने क्या सोचा है.

अमित : वो लोग शाम को फार्म हाउस में इकठे होते हैं मौज मस्ती क लिए बस वहीँ पर उन लोगों को पकड़ना है.

फिर मैं डरा और कालू को उस फार्म हाउस पर ले गया जहाँ का पता शालू ने बताया था. अँधेरा हो रहा था. हमने अछि तरह आसपास का जायज़ा लिया . शहर से बहार होने क कारन ये सुनसान जगह थी. सिर्फ एक गार्ड गेट पर खड़ा था . फार्म हाउस क अंदर 2 कार्स कड़ी थी. कालू ने सावधानी से गार्ड को मर कर बेहोश कर दिया और उसको उसके केबिन में hi बांध कर सुला दिया. मुझे पता था क यहाँ कक्तव कामर्स हो सकते हैं इस किये मैंने डरा और कालू को चेहरा ढकने को कहा और अपना भी चेहरा धक् लिया वैसे भी अँधेरा था तो ज्यादा पता नहीं लग सकता था. अंदर ये लोग क्या करते हैं इस लिए ज़ाहिर है क अंदर कामर्स नहीं होंगे. मैंने बहार लगे 3 कामर्स को तोड़ दिया. हम सावधानी से संसार घुसे तो टोनी और रॉकी अंदर सुता लगा रहे थे . स्मेल से लगा क चरस पि रहे हैं. उनके साथ 2 लड़कियां भी थी . हमारा अंदर आने का किसी को पता नहीं चला शायद नशे की वजह से. डरा और कालू ने दोनों को धार दबोचा और उनके चेहरे पर नकाब दाल दिए. उन लड़कियों को मैंने एक कमरे में बंद कर दिया और उनसे उनके मोबाइल ले लिए . उसके बाद डरा और कालू ने जैम कर दोनों की पोटैटो की जैसे पंचिंग बैग पर बॉक्सर प्रैक्टिस करते हैं. थोड़ी hi देर में दोनों की हालत पतली हो गयी. उसके बाद मैंने कालू को समझाया क इनके साथ क्या करना है. कालू ने दोनों को नंगा किया और मैं रिकॉर्डिंग करने लगा. पहले टोनी से रॉकी की गांड मरवाई फिर रॉकी से टोनी की. दोनों पहले मन कर रहे थे फिर मर खा कर मन गए. इतने से हमें कहा चैन अत. ये तो बस वीडियो रिकॉर्ड क लिए था. उसके बाद कालू ने अपना लैंड बहार निकल लिया. टोनी और रॉकी क लैंड तो मामूली से थे असली लैंड तो कालू का था जब वो टोनी की गांड में घुसा तो उसकी चीख से दीवारें भी कम्पनी लगी. यही हल रॉकी क साथ भी हुआ.

अमित ( आवाज़ बदल कर ) तुम लोगों को लड़कियों की वीडियो बनाने का बहुत शोक हैं न अब तुम दोनों की वीडियो हमारे पास है. और कान खोल कर सुन लो कभी भी किसी भी लड़की क साथ तुम लोगों ने कोई गलत हरकत की तो यद् रखना ये वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो जाएगी. और अगली बार अगर मुझे आना पड़ा तो गड रखना किसी और लड़की क साथ क्या तुम शादी कर क अपनी बीविओं क साथ भी करने क लायक नहीं रहोगे. यद् रखना मेरी नज़र तुम लोगों पर hi रहेगी अगर किसी भी लड़की ने कभी भी तुम लोगों की शिकायत की तो तुम लोगों की वो आखिरी गलती होगी.

दोनों की गांड लहू लोहान हो गयी थी मगर इससे भी कालू को चैन नहीं मिला वो तो वहशी हो गया था जैसे उसकी बहिन से रपे इन दोनों ने किया हो. पास hi में बेयर की बोतले पड़ी थी जिनको दोनों की गांड में घुसने क बाद कालू ने जोर से लात मर कर दबाते हुए तोड़ दिया. टोनी और रॉकी तो पहले hi अधमरे हो चुके थे और इस सब क बाद तो वो जैसे कोमा में hi चले गए. उसके बाद हम लोगों ने उन लड़कियों को कमरे से बहार निकल कर उन्हें भगा दिया. वो तो टोनी और रॉकी की चीखें सुनकर जैसे पहले hi दर से कांप रही थी . हमारे दरवाज़ा खोलते hi वो बहार को भाग गयी. जाते जाते हमने गार्ड क हाथ पैन खोल दिए ताकि वो होश में आते hi उन दोनों को हॉस्पिटल पहुंचा दे. ये सब करते हमें काफी समय लग गया था. आधी रत तक हम वहीँ थे उसके बाद हम कुछ देर एकांत में बैठ कर बातें करते रहे . कालू तो आज इतना खुश था जैसे अपनी बहिन क हत्यारों को सजा देकर आया हो. जब आसमान रंग बदलने लगा तो मैं दोनों को शुक्रिया ऐडा कर क घर चला गया.

नीरज : तो ये सब किया उन लोगों क साथ. बिलकुल ठीक किया. साले किसी को बता भी नहीं पाएंगे क क्या हुआ है उनके साथ. मगर मैं नाराज़ हूँ तुझसे छोटे भाई . अगली बार अगर मुझे साथ न लिया तो देख लेना . अभी मोंटी तो बाकि है न

अमित : ठीक है भाई मैं तो बस इस लिए आपको नहीं साथ ले जाना चाहता था क अगर किसी को पता भी चल जाये तो और कोई न फसे. डरा भैया को तो कोई जनता नहीं मगर आप तो कॉलेज में hi हैं इसी लिए तो मैंने मोहित को भी नहीं बताया था.

नीरज : दोस्ती यारी क आगे कुछ नहीं देखा जाता भाई. तूने मेरे लिए इतना कुछ किया तो मैं नहीं कर सकता ? अगली बार ध्यान रखना .

नीरज क कहने पर मैंने उसे वो रिकॉर्डिंग दिखाई जो मैंने उन दोनों की गांड मरवाई क समय बनाई थी. नीरज वीडियो देख कर खुश हो गया और मेरी पीठ थप थपै.

उसके बाद हमने कुछ देर और बात की और गाला लेक्चर लगाने अपनी अपनी क्लास में चले गए. छुट्टी क वक़्त जाते जाते नेहा दीदी ने मुझे कल घर आने को कहा तो मैंने बता दिया क मैं कल गाओं जा रहा हूँ तो फिर किसी दिन मिलूंगा . मगर दीदी ने बताया क मंडे को राखी है तो मुझे राखी बढ़ाने आना hi पड़ेगा . राधा भी मुझे घर आने का कह रही थी मगर उसने राखी की बात नहीं कही. उसके बाद हम लोग घर आ गए. घर आकर मोहित भी मेरे पीछे पद गया तो उसे भी साडी नट बता ी पड़ी. जिसे सुनकर वो भी बहुत खुश हुआ और उसको वीडियो भी दिखाई मैंने. आज शिवानी क साथ मुझे फाइनल करना था इस लिए खाना खाने क बाद जब सब अपने अपने कमरों में रेस्ट करने गए तो मैंने शिवानी को फ़ोन कर क आज ड्राइविंग का पूछा तो वो चहकते हुए फ़ौरन आने का बोली. मैंने मन में सोचा लगता है क ये भी मेरे साथ आगे बढ़ने क लिए तैयार है क्यूंकि उसे पता था आज बात आखिरी स्टेप पर hi रुकेगी. मैंने जल्दी से कपडे चेंज किये और शिवानी का इंतज़ार करने लगा.



दूसरी तरफ मोंटी बौखलाया हुआ था क्यूंकि उसे कोई वीडियो नहीं मिली थी कक्तव से वो अपने सब साथियों की इकठ्ठा कर क उन लोगों को निर्देश दे रहा था क वो पता करें कौन है इस सब क पीछे. उसे दर भी लग रहा था क कहीं गाला no. उसका hi न हो तो उसने अकेला रहने की बजाये हर वक़्त अपने साथियों को अपने साथ रखने का फैसला लिया. उन लोगों ने गार्ड से भी पूछा पर कुछ हासिल नहीं हुआ . मगर गार्ड से उसे लड़कियों क बारे में पता चला तो उसने उन लड़कियों को बुलवा कर पूछताछ की पर उससे भी कुछ हासिल नहीं हुआ . शीना मोंटी को बेचैन देख कर उसके पास आयी और उससे वजह पूछी तो मोंटी ने उसे बस इतना hi कहा क किसी ने टोनी और रॉकी पर हमला किया है . इसके इलावा उसने कुछ नहीं बताया क्यूंकि वो अपने साथियों क साथ मिलकर जो लड़कियों क साथ गन्दा खेल खेलता था इस बारे में शीना को कुछ पता माहि था. वो तो बस यही सोचती थी क मोंटी की स्मार्टनेस और पैसे की वजह से लड़कियां खुद उसके पीछे पड़ी रहती हैं. जबकि सचाई कुछ और थी. शीना भी परेशां थी मोंटी को इस हालत में देख कर इस लिए उसने अपनी तरफ से भी पता लगाना शुरू कर दिया क इसके पीछे वजह क्या है. ऐसा कौन सा दुश्मन है जो मोंटी क दोस्तों पर हमला कर सकता है. उसका पहला शक अमित पर hi गया क्यूंकि कॉलेज में एक वही था जिसने मोंटी पर हाथ डाला था. हो न हो इसके पीछे अमित hi हो सकता है ये सोच कर उसने अपनी सहेलियों से भी पता लगाने की कोशिश की और उन लड़कियों से भी जो मोंटी और उसके दोस्तों क साथ इन्वॉल्व रहती थी.
 
अपडेट 98



मोबाइल पर शिवानी की कॉल देखते hi मैं गेट क बहार पहुँच गया जहाँ शिवानी की कार कड़ी थी. मैं दरवाज़ा खोल कर जैसे अंदर बैठा तो शिवानी को देख कर कुछ पल मैं उसकी खूबसूरती को निहारता रहा. शिवानी क बाल ऐसे लग रहे थे जैसे अभी अभी नाहा कर आयी हो और उसकी वो स्लीवलेस टॉप में से झांकती हुई बगलें. शिवानी का रंग तो पहले hi गोरा था ऊपर से आज वो वाइट टॉप और रेड लॉन्ग स्कर्ट में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी. शिवानी का चेहरा निखारा निखरा लग रहा था . मेरा दिल चाहा क अभी उसे चूम लूँ मगर मैंने खुद को काबू में रखा . शिवानी मुझे स्माइल दे रही थी और शर्मा भी रही थी . जैसे मैं उसको घूर रहा था ऐसे तो कोई भी लड़की शर्मा hi जाएगी. शिवानी आज मुझसे बात करने में शर्मा रही थी इस लिए चुपचाप वो मुझे ले कर उसी जगह पहुँच गयी जहाँ हम ड्राइविंग करने जाते थे. शिवानी क इस तरह बार बार शर्माने से मैं समझ गया क वो क्यों शर्मा रही है तो मैंने सोचा क्यों न शिवानी का थोड़ा मज़ा लिया जाये उसे थोड़ा तड़पाया जाये . वो तो सोच कर आयी होगी क मैं रोज़ की तरह उससे छेड़ छड़ करूँगा पर मैं आज उसे तड़पना चाहता था ताकि वो खुद hi मुझे कहे कुछ करने को.

शिवानी : चलो अब तुम गाडी चलाओ

शिवजी जे गाड़ी रोकते हुए कहा और अपनी सीट से उठ कर कड़ी हो गयी. मैं अपनी सीट से उठ कर ड्राइविंग सीट पर बैठ गया और दरवाज़ा बंद कर दिया जबकि शिवानी वहीँ कड़ी थी इस इंतज़ार में क मैं उसे फिर गॉड में बिठाऊंगा. मगर मेरे दरवाज़ा बंद कर लेने से शिवानी का चेहरा उदास हो गया और वो बहन अपनी जगह पर कड़ी रही

अमित : क्या हुआ तुम बहार क्यों कड़ी हो? आओ अंदर आ कर बैठो.

मैंने बाजु वाली सीट की तरफ इशारा करते हुए कहा तो शिवानी ने एक बार मुझे नाराज़गी से देखा और चल कर दूसरी तरफ आयी और सीट पर बैठ गयी. मैंने गाड़ी को स्टार्ट किया मगर शिवानी मेरी तरफ नहीं देख रही थी. उसके चेहरे पर नाराज़गी थी. मैं उसे और सतना चाहता था ता की वो खुद तड़प कर मेरी गॉड में आ कर बैठ जाये. मैंने अब तक जो समझा था उसका इस्तेमाल करते हुए गाड़ी को धीरे धीरे आगे बढ़ाना शुरू किया. शिवानी मेरी तरफ नहीं देख रही थी शायद उसे मुझ से ऐसी उम्मीद नहीं थी और अब उसे मुझ पर गुस्सा आ रहा होगा.

अमित : मैं ठीक से तो चला रहा हूँ न?

शिवानी : ठीक है

अमित : क्या हुआ तुम मेरी तरफ देख भी नहीं रही ज़रा मेरी तरफ देख कर बात करो न

शिवानी : तुम अपना ध्यान ड्राइविंग पर रखो

शिवानी तो नाराज़ होने लगी अगर ज्यादा नाराज़ हो गयी तो कहीं मामला बिगड़ hi न जाये ये सोच कर मैंने जान बुझ कर गाडी की रेस एक डैम से तेज़ कर दी और स्टेरिंग थोड़ा सा दौर बाएं टर्न किया तो शिवानी ने मुझे फ़ौरन ब्रेक लगाने को कहा

शिवानी : ब्रेक लगाओ !! ये क्या कर रहे थे तुम ?

अमित : सॉरी मुझे पता नहीं चला कब ये सब हो गया

शिवानी : अभी गाडी थोक देते. अब ध्यान से चलना

अमित : मुझसे नहीं होगा ऐसे. मैंने सोचा था क मैं चला सकता हूँ पर अब लगता है क नहीं . तुम खुद hi चलना सिखाओ रोज़ की तरह

शिवानी : चला तो रहे हो बस थोड़ा ध्यान दो

अमित : ऐसे नहीं तुम मेरी जगह पर आ जाओ वर्ण फिर से गलती हो जाएगी.

शिवानी तो कब से यही चाहती थी मगर अब वो गुस्सा थी थोड़ा तो नखरे करने लगी

शिवानी : नहीं मैं यहीं ठीक हूँ तुम खुद hi चलाओ वैसे भी अब तुम्हे पता चल गया है क कैसे चलते हैं.

शिवानी मेरी तरफ देख कर बात नहीं कर रही थी. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा

अमित : सॉरी बाबा गलती हो गयी मुझे लगा था क मैं चला लूंगा पर मैं माहि चला सकता तुम्हारे बगैर . जब तुम साथ रहती हो तो सब कुछ अचे से होता है अब तुम दूर बैठी हो तो सब गलत हो रहा है.

शिवानी : ड्राइविंग अकेले hi करनी पड़ती है, ऐसे कोई साथ नहीं बैठता . और वाइस भी मैं यहीं ओर हूँ दूर कहाँ हूँ?

अमित : ऐसे नहीं जैसे रोज़ मुझे सिखाती हो वैसे वर्ण मैं गाडी नहीं चलौंग

इतना कह कर मैं गाडी से नीचे उतर गया और मुझे ऐसे कर्त ा देख कर शिवानी भी बहार आ गयी.

शिवानी : ाचा ठीक है अब बैठो अपनी जगह पर . मैं सिखाती हूँ तुम्हे.

मैं सीट पर बैठ गया और शिवानी बिना किसी बात की परवाह क सीधा मेरी गॉड में मेरे लैंड पर बैठ गयी हालाँकि अभी महाराज सोये पड़े थे मगर अब जल्दी शिवानी का कोमल एहसास उसे जगा देगा. शिवानी क गॉड में बैठ ते hi मैंने दूर बंद किया और स्टेरिंग ओर हाथ रखने की बजाये अपने दोनों बाजु शिवानी पर कास कर उसे अपने साथ लगा लिया. शिवानी क बालों से आ रही खुशबु मेरी साँसों में घुल कर मेरे दिमाग पर असर दिखने लगी और मैं मदहोश होने लगा. शिवानी भी जैसे जानती थी क मैं ऐसा hi कुछ करूँगा पर इतनी जल्दी ये उसे नहीं लगा था. जो भी था शिवानी तो मेरे साथ आगे बढ़ने का सोच कर hi आयी थी तो मेरे ऐसा करते hi उसने खुद को ढीला छोड़ दिया और अपना सुर पीछे को करते हुए मेरे सीने पर गिर गयी. शिवानी क मुँह से एक सिसकी निकली. मैंने शिवानी क बदन की महक लेते हुए उसकी गर्दन पर किश किया जिससे शिवानी मचल गयी. फिर मैंने उसके गालों को चूमा और अपने हाथ उसके बदन पर चलने लगा. शिवानी मेरी आगोश में मचलने लगी और इस हलचल में लैंड महाराज अपनी निद्रा से जाग गए और शिवानी क कोमल एहसास को फील करते हुए उसके चूतड़ों पर अपनी स्टम्प लगाने को उठ गए. शिवानी तो जैसे सब कुछ भूल कर मदहोशी में मेरे हाथों का खिलौना बन गयी थी. मैंने उसका चेहरा अपनी तरफ घूमते हुए उसके नरम होंठो पर अपने होंठ रख दिए . शिवानी क होंठ बहुत hi कोमल और रास भरे थे और उसके होंठो का सारा रास अब मैं निचोड़ने वाला था. मैंने उसके ऊपर वाले होंठ को अपने होंठो में कैद कर लिया और चूसने लगा. शिवानी पहले तो रिस्पांस नहीं दे रही थी मगर फिर उसने भी मेरे नीचे वाले होंठ को अपने होंठो में कस्ते हुए अंदर खींचना शुरू कर दिया. कभी ऊपर वाला तो कभी नीचे वाला हम दो ो एक दूसरे क होंठो को चूस रहे थे और फील हमारी जीब भी इस लड़ाई में कूद पड़ी. दांतो का पिंजरा खोलते हुए जीभ किसी सर्प की तरह एक दूसरे क मुँह में घुस कर जीभ को गले लगा रही थी चूम रही थी और दोनों की जीब का आपस में मिलाप होने लगा. मगर होंठो को तो जैसे जीब का ऐसा करना ाचा नहीं लगा और जब दूसरे की जीब उनकी सीमा में घुसती तो वो उसे दबोच लेते और वापिस जाने से रोकने की कोशिश करते . हम दोनों क होंठ और जीभ ऐसे hi मिलान और तकरार में लगे थे क इस बीच मेरे हाथ शिवानी क नाज़ुक अंगों का जायज़ा लेने लगे. मैंने अपने दोनों हाथ शिवानी क उभारों पर कस्ते हुए उसके ठोस उन्नत उभर पकड़ कर दबाने शुरू कर दिए. शिवानी क हाथ मेरे हाथों पर hi कास गए थे शायद वो मेरे हाथों को सपोर्ट कर रहे थे क आज किसी भी कीमत पर क़िला फ़तेह होने तक मैदान से पीछे नहीं हटना है. शिवानी अपनी गांड को सर उठा रहे लैंड ओर रगड़ने लगी जैसे उसे उकसा रही हो क आज किले का दरवाज़ा तुम्हे हर हल में भेदना है कहीं पीठ न दिखा देना. मेरा लैंड भी कहाँ काम था वो तो टॉप था इस लिए वो भी पूरी जान लगा कर अकड़ गया और कपडे फाड़ कर बहार आने को तैयार हो गया. शिवानी की साँसे तेज़ तेज़ चल रही थी और उसका सीना बार बार ऊपर उठ रहा था जिसे काबू करने क लिए मैंने अपने दोनों हाथों से उसके स्तन दबा रखे थे. मैंने अपना एक हाथ नीचे ले जा कर शिवानी की स्कर्ट ऊपर उठा ी शुरू की और उसकी जाँघों तक स्कर्ट क ऊपर उठाते hi उसकी गोरी मखमली जांघें मेरे सामने आ गयी. मैंने अपना हाथ उसकी माखन जैसी जांघों पर चलना शुरू कार्ड दिया तो शिवानी का एक चूचक मेरा हाथ हटने से नाराज़ होने लगा जिसे खुद शिवानी ने समझाया और अपने हाथ से खुद hi उसे दबाने लगी. मैंने उसकी जाँघों को मसलते हुए अपना हाथ जाँघों की जड़ों में उसके अनमोल खजाने वाली कोठरी क दरवाज़े पर ले जा कर दस्तक दी. एक बार दिर शिवानी क मुँह से एक तेज़ सिसकी निकली और उसने घुटने जोड़ कर ऊपर उठाने की कोशिश की. मगर मैं उसे अपनी टांगों की मदद से काबू किये हुए था. शिवानी की पेंटी गीली हो रही थी जिसे मैंने अपनी उँगलियों से छेड़ते हुए छूट को पेंटी क ऊपर से दबा दिया. शिवानी कुछ ज्यादा hi मचलने लगी और मैंने उसकी गर्दन पर किश करते हुए अपने दांत गदा दिए मगर शिवानी को दर्द की जगह मज़ा आया और उसके मुँह से फिर तेज़ सिसकी निकली. सीट पर बैठे बैठे और कुछ करना आसान नहीं था इस लिए मैंने कार का दरवाज़ा खोलने लगा तो शिवानी ने मेरे हाथ को रोक दिया और निचे से कोई बटन दबाते हुए सीट को पीछे गिरा दिया. अब मैं सीट पर बैठा बैठा लेट गया था और शिवानी मेरे ऊपर थी. शिवानी ने करवट बदली और पलट कर मेरे ऊपर दोनों घुटनो को साइड में करते हुए बैठ गयी.

पहले शिवानी क साथ जो भी कर रहा था मैं कर रहा था मगर अब शिवानी कमांड अपने हाथ में लेने वाली थी. शिवानी की आँखों में गुलाबी डोरे नज़र आ रहे थे और चेहरा गुलाबी से लाल होने लगा था. शिवानी ने एक बार मेरी आँखों में देखा और फिर मुझ पर हमला कर दिया. वो जंगली बिल्ली की तरह मुझ पर झपट पड़ी और मेरे होंठो को किश करते हुए काटने लगी. मुझे होंठों पर दर्द हुआ पर शिवानी ने प्यार से उस दर्द पर मलहम भी लगाया. शिवानी की छूट मेरे लैंड क निशाने पर थी और लैंड अब शिवानी की छूट पर दस्तक दे कर बता रहा था क इस किले दरवाज़ा खोल दो वर्ण वो उदा देगा. शिवानी जोश में मुझे किश करती हुई मेरे कपडे नोचने लगी मुझे तो लगा क ये मेरी T-shirt फाड़ देगी इस लिए मैंने उसे उतरने में hi भलाई समझी और थोड़ा ऊपर को उठ कर अपनी T-shirt निकलने में शिवानी की मदद की. मेरी T-shirt क उतारते hi शिवानी मेरी छोड़ी छाती को जी भर कर देखने लगी और अपने हाथ मेरी छाती पर चलते हुए मेरे मसल्स को फील करने लगी. अछि तरह जायज़ा लेने क बाद शिवानी मेरे चेहरे गर्दन को चूमती हुई छाती पर जगह जगह अपनी छाप लगाने लगी. मेरे छोटे छोटे निप्पल्स को अपने डेंटन में दबाकर शिवानी ने मुझे आह भरने पर मजबूर कर दिया . शिवानी तो जैसे आज मुझे नए नए chapter पड़ने वाली थी. कहाँ मैं उसे अपने जाल में फसा रहा था और अब लग रहा था क मैंने उसके जाल में फास रहा हूँ. मेरी छाती से लेकर कमर तक शिवानी मुझे चूमती रही और मैं बस आह्हः निकलता रहा. जब शिवानी रुक कर सीधी हुई तो मैंने भी उसका टॉप एक झटके में निकल दिया. टॉप क निकलते hi रेड ब्रा में कैद शिवानी क दूधिया उभर मेरे सामने आ गए. मैं तो एक पल क लिए उनकी खूबसूरती में hi खो गया. इमेजिन कीजिये दूध सा गोरा बदन और ऊपर से रेड ब्राइडल कलर की फैंसी ब्रा जैसे किसी ने मलाई क ऊपर सिन्दूर दाल दिया हो. शिवानी मेरी हालत देख कर शर्मा गयी . मैंने अपने हाथ उन खूबसूरत सफ़ेद कबूतरों पर रख दिए जो अभी लाल पिंजरे में कैद थे. लाल रंग यानि खतरे की निशानी और मैं उन कबूतरों को भला खतरे में कैसे देख सकता था. मैंने जल्दी उनको पिंजरे से आज़ाद करने क लिए शिवानी को अपने ऊपर झुका कर पीछे से उसकी ब्रा की हुक खोल दी और दोनों कबूतर फड़फड़ाते हुए आज़ाद हो गए. शिवानी क बूब्स बहुत hi कमल क थे बिलकुल मलाई क जैसे और उनके ऊपर गुलाबी निप्पल. ब्रा खुलते hi रबड़ की तरह उछालते कूदते वो बहार निकल आये थे. शिवानी ने मेरी छाती पर लेट कर उन्हें मेरी नज़रों क सामने आने से रोका . शिवानी को अब शर्म महसूस हो रही थी. हालाँकि वो मॉडर्न लड़की थी मगर फिर भी उसमे शर्म बाकि थी जो इस बात की गवाह थी क वो ऊपर से कैसी भी दिखती हो अंदर से वो भी संस्कारी है और अपनी माँ पर गयी है. शिवानी ने खुद को मेरी छाती में छुपा दिया तो मैंने उसकी मुलायम पीठ पर अपने हाथ चलते हुए उसके नरम एहसास का मज़ा लेने लगा. शिवानी मेरी छाती से जोंक की तरह चिपक गयी थी और ऊपर नहीं उठ रही थी तो मैंने अपने हाथ उसके बड़े बड़े नितम्बो पर ले जाकर उन्हें अपने हाथों में कास कर मसल दिया. शिवानी की स्किन बहुत सॉफ्ट थी मगर उसके नितम्ब बिलकुल भी ढीले नहीं थे . मुझे उसके दोनों चूतड़ मसलने में मज़ा आ रहा था मगर शिवानी की तो जैसे जान निकल रही थी उसकी गरमी और भी बढ़ने लगी थी . चूतड़ों को ज़ोर से मसलने पर शिवानी एक डैम से सीधी हो गयी और मेरी चल कामयाब हो गयी. शिवानी क दोनों कबूतर फिर से मेरी आँखों क सामने आ गए. मैंने तुरंत उनको अपने हाथों में पकड़ लिया कहीं फिर से वो छुप न जाएँ. मेरे ऐसा करते hi शिवानी फिर से सिसक उठी और मेरे हाथ पकड़ लिए . मगर अब तो मेरी पकड़ मज़बूरी हो चुकी थी अब भला मैंने कैसे जाने देता उनको अपनी पकड़ से बहार. शिवानी की आँखें मज़े और मस्ती में बंद हो गयी . मैंने शिवानी क उरोज मसलते हुए उसे अपने ऊपर झुकाने लगा और शिवानी भी झुकती गयी जिससे उसके बूब्स लटकते ामो की तरह मेरे चेहरे क पास आ गए और मैंने लपक कर एक चूचक क निप्पल को अपने मुँह में ले लिया. शिवानी ने मेरे सर क बाल अपने हाथों में पकड़ लिए और एक तेज़ सिसकी ली. मैं शिवानी का चुका अपने हाथों से मसल रहा था और दूसरे को अपने मुँह में ज्यादा से ज्यादा भर कर चूसने की कोशिश कर रहा था. शिवानी क निप्पल कड़े होने लगे और मटर क डेन क सामान वो निप्पल अब अपना आकर बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे मगर ज्यादा फरक नज़र नहीं आया पर पहले से ज्यादा तीखे लगने लगे. शिवानी क रसीले आम चूसने में बड़ा hi मज़ा आ रहा था और शिवानी इस मज़े क समुन्दर में डूबती जा रही थी. एक दूध को अछि तरह चूस कर लाल करने क बाद मैंने दूसरे को चूसना शुरू कर दिया. शिवानी लगातार अपनी कमर हिलती हुई अपनी छूट मेरे लैंड पर रगड़ती जा रही थी. मैंने शिवानी को अपने साथ चिपका कर पलट दिया और उसकी टांगों को खोल कर उसकी स्कर्ट ऊपर उठाते हुए बीच में बैठ गया और उसकी टाँगे घुटनो से मोड़ कर फैला दी.

शिवानी की गोरी दूधिया मांसल जांघें मेरे सामने थी. शिवानी की बॉडी बिलकुल किसी मॉडल की तरह फिट थी उसकी लम्बी मजबूर गोरी टांगें और मांसल जाँघे मुझे मजबूर कर रही थी उन्हें चूमने को . सबसे पहले मैंने शिवानी क पाऊँ को उसके फैंसी संदेल से आज़ाद किया और उनके नाज़ुक मुलायम गोर पाऊँ मेरे हाथों में आ गए. मैंने उसके गोर गोर पाऊँ को चुम कर उसे बता दिया क उसके पाऊँ कितने खूबसूरत हैं. फिर उसकी गोरी पिंडलियों को चूमते हुए मैं उसकी जाँघों तक आ गया. उफ्फ्फ क्या मुलायम स्किन थी शिवानी की दिल कर रहा था क खा hi जॉन पर खुद पर कण्ट्रोल करते हुए मैंने ज्यादा जोर से अपने दांत उन पर नहीं गड़ाए. शिवानी मेरी हर एक हरकत पर एक सिसकी निकल देती. हम दो ो सब कुछ ख़ामोशी से करते जा रहे थे जैसे बोलने से कहीं ये सपना टूट hi न जाये. शिवानी की स्कर्ट पूरी तरह से फोल्ड हो कर कमर पर आ गयी थी. और उसकी रेड पेंटी मेरी आँखों क सामने आ गयी. मैंने देर न करते हुए दोनों तरफ से पेंटी को पकड़ कर खींच दिया और शिवानी ने भी अपनी कमर उठा कर मेरी मदद की पेंटी उतरने में. पेंटी उतारते hi शिवानी की गुलाबी चिकनी मुलायम छूट जो उसके बदन की तरह खूबसूरत थी बल्कि इस मामले में 21 hi थी . मैंने कुछ देर उसकी छूट को निहारता रहा शिवानी ने शर्मा कर अपनी टंगे मोड़ कर आपस में जोड़ ली और छूट को छुपाने की कोशिश की . मैंने टांगों को खोला तो उसने अपने हाथ छूट पर रख दिए. मैंने अपना सर उसकी जांघों में लहराते हुए उसके हाथ हटाने की कोशिश की तो उसने ज़ोर से से अपने हाथ कूट पर दबा दिए . मैंने उसके हाथों पर किश किया और उसे एहसास दिलाया क मैं उसे सिर्फ प्यार hi दूंगा कोई ज़बरदस्ती नहीं. शिवानी ने भी मेरे किश करने पर अपने हाथ ढीले छोड़ दिए और मैंने उसके हाथ हटा कर उसकी गोरी चिकनी गुलाबी फैंको वाली छूट को फिर से निहारा.

शिवानी की छूट खुली हुई थी मगर ज्यादा नहीं. लगता है ज्यादा म्हणत नहीं हुई अभी इस पर. छूट पर एक भी बल नहीं था जिसकी वजह या तो उसका अपनी छूट का खास ध्यान रखना या फिर आज क लिए उसकी खास तयारी हो सकता है. शिवानी की छूट को मैंने अपनी उंगली से खोलने की कोशिश की तो उसके अंदर का लाल गुलाबी हिस्सा नज़र आने लगा. शिवानी की छूट अंदर से काफी गीली थी . मैंने उसकी छूट पर झुकते हुए उसकी गुलाबी फांकों को अपने होंठो में भर कर किश करने की कोशिश की और उसके दाने को अपनी जीभ से टटोलने लगा.

शिवानी को जैसे तेज़ झटका लगा और उसका पूरा बदन हिल गया. शिवानी ने मेरा सर अपनी जाँघों में कास लिया और मेरे सर अपने हाथों से अपनी छूट पर इस तरह दबाने लगी जैसे मुझे छूट क अंदर hi घुसा लेगी.

‘ ाः आअह्ह्ह्हह कक्कक्स उम्म्म आअह्ह्ह ओह्ह्ह ये क्या कर रहे हो कक्कक्कक्स उम्म्म्म रुक जाओ आअह्ह्ह्ह ऐसे hi आआह्ह्ह्हह ककक ी म सुंम्मिंग ाः और तेज़ और तेज़ आअह्ह्ह्ह ‘ मैंने अभी थोड़ी देर hi उसकी छूट क दाने को अपनी जीभ से छेड़ा था क उसका जिस्म अकड़ गया और एक डैम से वो तन कर झटके कहती हुई फिर से ढीली हो गयी. शिवानी की छूट ने मेरे मून पर अपने पानी की बरसात कर दी. मैं अपना सर पीछे तो हटा लेता पर शिवानी की जाँघों ने मुझे ऐसा शिकंजा कैसा क मैं पीछे हैट hi नहीं पाया और उसका पानी पिटे हुए मैंने उसकी पकड़ ढीली होने का इंतज़ार किया.

शिवानी की धड़कन इतनी तेज़ थी जैसे कहीं से भाग कर आयी हो और उसका बदन भी पसीने से भीग गया था . लम्बी लम्बी सांसे लेती हुई जब वो थोड़ा संभाली तो मैं उसके ऊपर आ कर उसके बूब्स मसलते हुए उसे किश करने लगा. शिवानी की आँखें इस वक़्त नशे में डूबी लग रही थी. मेरे किश करते hi वो मुझे किश करने लगी और हम दोनों एक दूसरे से चिपक गए . कोई 5 मिनट्स में शिवानी फिर से गरम हो गयी और इस बार मुझे पलट कर खुद मेरे ऊपर आ गयी. शिवानी ने मेरा लोअर खींच कर उतर दिया और साथ hi अंडरवियर भी. अंडरवियर उतारते hi मेरा लैंड कोबरा की तरह फन फैला कर खड़ा हो गया. शिवानी एक तक मेरे लैंड को देखती रही जैसे अजूबा देख लिया हो. मैंने शिवानी को अपने लैंड को घूरता हुआ पाया तो मैंने उसका एक हाथ पकड़ कर अपने लैंड पर रख दिया. शिवानी ने डरते डरते मेरा कोबरा को अपने हाथ ने पकड़ लिया. शिवानी ने आज तक शायद इतना बड़ा लैंड देखा नहीं होगा इसी लिए अपनी आखेनों क सामने खड़े मेरे लैंड को देख कर उस पर यकीन नहीं कर प् रही थी. मेरे सख्त हो चुके लैंड को पकड़ कर दबाने की कोशिश कर रही थी पर वो तो लोहे की रोड जैसा सख्त था उसके नाज़ुक हाथों से कहाँ डाब सकता था. शिवानी क हाथ मेरा लैंड कहाँ आने वाला था वो तो उसके दोनों हाथ लगाने पर भी बहार hi रहता. शिवानी भी शायद उसकी लम्बाई जानना चाहती थी इस लिए उसने हाथों को लगा कर मेरा लैंड पकड़ा मगर फिर भी सूपड़ा बहार hi रहा. मैंने शिवानी क सर को दबाते हुए अपने लैंड पर झुकाया तो वो मेरा इरादा समझ गयी मगर वो न में सर हिला रही थी. मैंने उसकी आँखों में देखते हुए उसे इशारे से लैंड को प्यार करने को कहा तो उसने डरते डरते सुपडे पर अपने नाज़ुक होंठ रख कर एक किश कर सिया. नमो मुलायम होंठो में उसे मेरे सुपडे का एहसास शायद ाचा लगा और उसने अपना मुँह खोलते हुए सूपड़ा मुँह में भर लिया. शिवानी क ऐसा करते hi मेरी मज़े से आह्हः निकल गयी. शिवानी ने मेरी तरफ देखा और फिर से मेरा लैंड मुँह से बहार निकल कर दोबारा सुपडे को मुँह में लिया. शिवानी 5-6 बार ऐसा किया और इतने के hi मेरा मज़े क मरे बुरा हल हो गया मैं अपनी कमर उठाने लगा . मेरा दिल छह रहा था क शिवानी मेरे लैंड को और अंदर ले पर वो दर रही थी. मेरी तड़प को समझते हुए शिवानी ने मेरा लैंड अपने मुँह में और अंदर लेने की कोशिश की तो आधा लैंड अंदर जाते hi उसकी ऑंखें बाहर आने लगी ौस सांस अटकने लगी. उसे ज़ोर का ठसका लगा और फिर से लैंड बहार निकल दिया. मेरा लैंड शिवानी क थूक से भीग गया था. शिवानी लैंड को हाथ से सहलाते हुए सीधी हो गयी मतलब अब वो छोड़ना चाहती थी तो मैंने उसे फिर से पलट कर अपने नीचे ले लिया. शिवानी ने अपनी टाँगे फैला कर मुझे जगह दी. मैं पूरी तरह नंगा था जबकि शिवानी क बदन पर अभी स्कर्ट थी. मैंने उसकी स्कर्ट भी खींच कर उतर दी अब हम दोनों पूरे मादरजात नंगे थे. मैंने शिवानी क थूक से भीगा हुआ अपना लैंड शिवानी की छूट पर सेट किया. एक बार तो उसकी छूट मेरे लैंड क सुपडे क नीचे छिप गयी. मैंने एक हाथ से अपना लैंड पकड़ कर छूट की फांकों में फसाया . शिवानी क चेहरे पर दर क भाव थे उसे दर था क इतना बड़ा लैंड उसकी छूट में जायेगा कैसे कहीं उसकी छूट फैट hi न जाये.

शिवानी : प्लीज आराम से करना तुम्हारा बहुत बड़ा है मैं इसे झेल नहीं पाऊँगी

पहली बार शिवानी ने मुझसे बात की वो भी दर की वजह से

अमित: चिंता मत करो मैं तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगा . तुम सिर्फ प्यार करने क लिए बानी हो मैं तुम्हे दर्द नहीं दे सकता बस थोड़ी हिम्मत रखना.

शिवानी ने हाँ में गर्दन हिलायी और मैंने लैंड को ज़ोर लगते हुए छूट में घुसाने लगा. छूट पहले hi खुली हुई थी इस लिए थोड़ी रुकावट क साथ सूपड़ा छूट में चला गया मगर इससे शिवानी क जबड़े कास गए. उसे दर्द हो रहा था और वो दर्द को बर्दाश्त करने की पूरी कोशिश कर रही थी. छूट लैंड पर पूरी कास गयी थी. मैंने शिवानी ओर झुकते हुए उसके होंठ अपने होंठो में कास लिए और उसके बूब्स मसलते हुए अपने लैंड को अंदर पुश करने लगा. धीरे धीरे सर्कार हुआ मेरा लैंड छूट में घुसने लगा . ये बिलकुल ऐसा था जैसे बड़े पाऊँ को छोटे जुटे में ज़बरदस्ती घुसना . शिवानी की छूट लगातार कस्ती जा रही थी मगर मैं नहीं रुक रहा था. शिवानी का जिस्म ठंडा पड़ता जा रहा था और वो दर्द को बर्दाश्त करती हुई मेरी पीठ पर अपने नाख़ून चुभती जा रही थी. धीरे धीरे सर्कार मेरा लैंड 6 इंच तक जा कर रुक गया जैसे आगे का रास्ता बंद हो. इसका मतलब था क आज तक छूट ने यहीं तक लैंड लिया है. शिवानी की बर्दाश्त भी जवाब दे गयी थी. उसका बदन पसीने से भीग गया था. मैंने लैंड को वहीँ पर रोक दिया और उसको किश करते हुए उसके बूब्स मसलने लगा. छूट में फसा हुआ लैंड ऐसे लग रहा हो जैसे उसे जकड कर उसका जूस निकलने की कोशिश हो रही हो. वैसे हो तो कुछ ऐसा hi रहा था आखिर में लैंड से जूस तो निकलना hi था.

मैंने शिवानी को कुछ देर आराम दिया और फिर आराम से लैंड को थोड़ा थोड़ा करके बहार निकला और फिर से धीरे धीरे अंदर करने लगा. अभी मैं उतने hi लैंड से शिवानी की छूट में हलके हलके धक्के लगाने लगा ताकि उसे दर्द न हो और लैंड क हिसाब से छूट भी फ़ैल जाये. मेरे इस तरह हलके हलके धक्कों से छूट में लुब्रीकेंट आ गया और लैंड जो पहले फास फास क जा रहा था अब वो आराम से अंदर जाने लगा. शिवानी को कुछ रहत मिली तो उसकी पकड़ मेरी पीठ पर नरम पद गयी और सिसकियाँ लेने लगी. मैंने धक्के लगते हुए उसके रसीले आमों का रास पीना शुरू कर दिया. शिवानी ने अपनी टंगे मेरी कमर क इर्द गिर्द रख ली. शिवानी को मज़ा लेते देख कर मैंने धक्कों की स्पीड बड़ा दी तो शिवानी जोश में आ गयी

शिकवणी : आअह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह आह्हः आअह्ह्ह उम्म्म्म आअह्ह्ह्हह कक्कक्स ऐसे hi उम्म्म तुमने कितने प्यारे हो कक्कक्स आअह्ह्ह आअह्ह्ह मुझे हमेशा ऐसे hi प्यार करना आज से मैं तुम्हारी हूँ आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्हह तुम पहले क्यों नहीं मिले मुझे तुम कितने अचे हो कक्कक्स उम्म्म ऐसे hi और तेज़ करो उम्म्म्म तुम्हारा कितना सख्त और बड़ा है आअह्ह्ह आआह्ह्ह्ह ऐसे लग रहा है जैसे कोई मोटा डंडा अंदर घुसा दिया हो. ककक आआह्ह्ह्हह और तेज़ आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह आआआआअह्ह ी म सुंम्मिंग ी म कुम्म्म्मिंग फ़क में फ़क में हर्डर फ़क में डीपर

एक बार फिर से शिवानी का जिस्म अकड़ गया और उसकी छूट ने मेरे लैंड क ऊपर गरम पानी की बरसात कर दी. मेरा लैंड अभी भी 2.5 इंच बहार था मुझे ये मौका सही लगा और उसका पानी निकलते hi मैंने लैंड को सुपडे तक बहार खिंच कर पूरे ज़ोर से जड़ तक अंदर घुसा दिया. शिकवणी जो मज़े में आसमान में उड़ रही थी एक डैम से धरती ओर आ गिरी और उसकी मज़े की सिसकियों की जगह दर्द भरी कराह निकल गयी. छूट अपनी सीमा से ज्यादा खुल गयी उसने आज अपनी कैपेसिटी से ज्यादा बड़ा लैंड ले लिया था. मेरा लैंड तो लोहे का खूंटा था जो उसकी छूट को पुराने कपडे की तरह चीरता हुआ पूरा अंदर घुस गया. शिवानी को तो अंदाज़ा भी नहीं था क मैं ऐसा भी कर सकता हूँ. असल में मैं खुद को रोक नहीं प् रहा था क्यूंकि पूरा लैंड घुसा कर hi तो चुदाई का असली मज़ा अत है और मैं दिल पर पत्थर रख कर शिवानी क लिए रुका हुआ था. मगर उसका पानी निकलते hi मैंने भी पूरा लैंड घुसा दिया.

शिवानी : aaaaaaaaaiiiiiiiiiiiii मममममममअअअअअअअअ मररररररर गयीईइ निकालो निकालो बहार मैं मर जाउंगी प्लीज बहार निकालो इसे आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआआआ तुमने मेरी छूट फाड़ दी आआआआह्ह्ह्हह्ह ममअअअअअ प्लीज बहार निकला लो मैं मर जाउंगी.

मैंने शिवानी को तड़पते हुए देखा तो उसकी तड़प मिटने क लिए मैंने झुक कर उसको किश करना शुरू कर दिया और उसके बूब्स मसलने लगा. शिवानी की छूट बहुत ज्यादा कासी हुई थी लैंड पर जिससे मैं अंदाज़ा लगा सकता था क उसे कितना दर्द हो रहा होगा. मैंने उसे अपने प्यार से इस दर्द पर काबू पाने का होंसला दिया. थोड़ी देर में शिवानी की दर्द भरी चीखें सिसकियों में बदल गयी . शिवानी को शांत देख कर मैंने अपनी कमर को हिलना शुरू किया एक बार फिर से शिवानी को दर्द महसूस हुआ पर इस बार उसने दर्द को बर्दाश्त करने की कोशिश की. मैं लैंड को ज्यादा बहार निकलने की बजाये वहीँ पर अपनी कमर गोल गोल कभी आगे पीछे घूमने लगा जिसे शिवानी की छूट में फसे हुए लैंड को थोड़ी रहत मिली. फिर मैंने धीरे धीरे थोड़ा थोड़ा लैंड अंदर बहार करना शुरू कर दिया और देखते देखते शिवानी का दर्द ख़तम होता गया और वो मज़े से अपनी कमर हिलने लगी. मैंने जब उसको मज़ा लेते देखा तो अपने लैंड को सुपडे तक बहार निकल कर अंदर बहार करने लगा. शिवानी एक बार फिर से मज़े की वादियों में पहुँच गयी और मुझे और तेज़ धक्के मरने को कहने लगी.

शिवानी : हम्म्म ाःह ओह्ह्ह ककक और तेज़ करो हम्म्म यस डीपर उम्म्म हर्डर फ़क में फ़क में ी लव यू उम्म्म्म फास्टर फास्टर

मैंने शिकवणी को और तेज़ धक्के मरने शुरू कर दिए अब मेरा भी लैंड फटने को तैयार था और मैं फुल स्पीड से छूट गाड़ने वाले धक्के मरने लगा. शिवानी का भी होने वाला था इस लिए वो भी मुझे और उकसा रही थी और उस बार हम दोनों एक साथ झड़े. शिवानी की छूट का गरम पानी लैंड पर पड़ते hi लैंड ने भी छूट को अपने गरम पानी से भर दिया. अंतिम धक्का मैंने पूरे ज़ोर से मर कर अपने पाऊँ कार क देश बोर्ड से फसा कर पूरा ज़ोर लगते हुए अपना लैंड छूट क अंतिम छोर तक ऐसे धकेल दिया जैसे लैंड क साथ मैं भी अंदर घुस जाऊंगा. हम दो ो क जिस्म अकड़ गए और झटके लेते हुए हूँ शांत हो गए. मैं शिवानी क ऊपर hi गिर गया. दोनों क जिस्म पसीने में पूरी तरह भीग गए थे. दोनों की धड़कने एक सामान गारी से चल रही थी. शिवानी ने मुझे अपनी बाँहों में कैसा हुआ था और टांगों से भी मेरी कमर को अपने साथ कैसा हुआ था.

जब हम दोनों की साँसे संभाली तो मुझे होश आया . मैंने शिवानी की गर्दन को चूमते हुए उसे होश में लेन की कोशिश की

अमित : शिकवणी तुम्हे ज्यादा दर्द तो नहीं हुआ ?

शिवानी : ुंनहुन्न

अमित : क्या तुम्हे ाचा लगा मेरा प्यार करना?

शिवानी : हम्म्म

अमित : तुम्हे को शिकायत तो नहीं मुझसे ? मैंने बिना तुम्हारी मर्ज़ी जाने ये सब ...

शिवानी : shhhhhhhhhhhh कुछ मत कहो. तुमने कुछ भी नहीं किया. मैं भी चाहती थी क तुम मुझे प्यार करो. काश क तुम पहले मेरी ज़िन्दगी में आये होते. तुम बहुत अचे हो मैं बहुत खुश हूँ क तुमने मुझे इस काबिल समझा क मुझे अपना प्यार दिया . मेरी आत्मा पर एक बोझ सा था जो आज उतर गया और अब ऐसा लग रहा है जैसे मैं अब फ्री हूँ.

अमित : तुम ऐसा क्यों कह रही हो? मैंने तो पहले hi सब कुछ भुला दिया था और तुम्हे माफ़ कर दिया था.

शिवानी : पता है तुम बहुत अचे हो पर फिर भी मुझे गिलटी फील होता था. मैंने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया था पर ये भी सच है क मैं ऐसा करना नहीं चाहती थी पर ...

अमित : पर तुम मजबूर हो गयी थी प्यार में

मेरे इतना कहते hi शिवानी शॉकेड हो गयी और मेरी तरफ सवालिया नज़रों से देखने लगी.

अमित : ऐसे क्या देख रही हो? बताओ मैंने सच कहा न?

शिवानी : तुम किस बारे में बात कर रहे हो?

अमित : मुझे पता है तुम मोंटी से प्यार करती हो , उसकी फोटो मैंने देखि थी तुम्हारे रूम में. अब मुझे सब बताओ , मैं तुम्हारे मुँह से सुन्ना चाहता हूँ.

शिवानी की आँखों में आंसू आ गए वो रोने लगी तो मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया.

अमित : रो मत शिवानी इसमें तुम्हारा कोई कसूर नहीं है. ये तो किसी क भी साथ हो सकता है और तुमने कौन सा कोई जुर्म किया है. मगर मैं इस बात से हैरान हूँ क तुम जैसे इतनी अचे दिल वाली लड़की मोंटी जैसे लड़के क प्यार में कैसे पद गयी. तुम तो शीना की दोस्त हो न फिर ये सब कैसे हुआ?

शिवानी :( सिसकते हुए) मैं स्कूल क दिनों से उसे प्यार करती हूँ. मुझे तो पता भी नहीं क कब मैं उसे चाहने लगी थी. शीना और मैं एक hi क्लास में थे मोंटी हमसे 3 साल सीनियर था और शुरू से हैंडसम था . शीना का भाई होने की वजह से अक्सर उससे मिलना होता रहता था पता नहीं कब मैं उसे पसंद करने लगी. स्कूल ख़तम होते होते वो गलत सांगत में पड़ने लगा और कई बार फ़ैल हुआ जिसकी वजह से हम अब एक क्लास में हैं. मैंने उसके सिवा किसी को नहीं चाहा हालाँकि कई लड़कों ने मुझे पर्पस भी किये मगर मेरा दिल सर्फ उसी को चाहता था. मुझे मेरी फ्रेंड्स भी अक्सर कहती थी क वो ाचा लड़का नहीं ओर इस दिल को कौन समझाए ये तो उसी का हो चूका था. और मैंने उसे पाने क लिए हर मुमकिन कोशिश की यहाँ तक क उसको अपना सब कुछ सौंप दिया . मुझे लगा था क वो भी मुझे प्यार करने लगेगा पर उसने कभी मुझे प्यार नहीं किया. तुम्हे फ़साने क लिए भी मैं इसी लिए तैयार हो गयी थी पर जब बाद में माँ ने मुझे मेरी गलती का एहसास दिलवाया और उन्होंने तुमसे मिलने क बाद मुझे बताया क तुम कितने अचे तो मेरा नजरिया बदल गया. मुझे एहसास हो गया क मैं अपनी इच्छा पूरी करने क लिए किस हद तक गिर गयी थी . मुझे सही और गलत का फरक भूल गया था मगर तुम्हारी वजह से मुझे एहसास हुआ क मैं गलत कर रही हूँ. ये एक तरफ़ा प्यार था जिसका कोई वजूद नहीं होता. उसने कभी मुझे नहीं चाहा और मैंने उसके लिए सब कुछ लिटा दिया.

शिकवणी अपनी कहानी बताते बताते फिर से रोने लगी. उसके अंदर बहुत दर्द भरा हुआ था जो किसी को भी पता नहीं था और वो बेचारी अपने प्यार की खातिर गलत रस्ते पर चल पड़ी थी. मुझे खुद पर गिलटी फील होने लगा क मैंने उसे गलत समझ लिया था . मुझे लगा था क शायद ये भी मोंटी जैसी है जो उसके और उसके दोस्तों क साथ मौज मस्ती करती है. मगर यहाँ तो मामला प्यार का निकला. मैंने जाने अनजाने शिवानी क साथ गलत कर दिया था.

अमित : रो मत शिवानी . प्यार है hi ऐसी बीमारी क इंसान को ाचा बुरा नज़र नहीं अत उसे बस दीखता है तो अपना प्यार और अपना यार . लोग अपनों तक धोखा दे देते हैं मैं तो फिर पराया था. मुझे तुम्हारे लिए बहुत अफ़सोस है क तुम एक ऐसे गलत इंसान से दिल लगा बैठी जो प्यार क्या किसी की नफरत क काबिल भी नहीं है. तुम मोंटी क बारे में क्या क्या जानती हो?

शिवानी : यही क वो अमीर घर का बिगड़ हुआ लड़का है और बहुत सी लड़कियों क साथ उसके रिलेशन हैं.

अमित : क्या शीना को उसके बारे में पता है ? क्या शीना तुम्हारे प्यार क बारे में जानती है?

शिवानी : नहीं शीना को मैंने कभी नहीं बताया . मुझे लगा क कहीं मोंटी इस बात से नाराज़ न हो जाये. और मोंटी क बारे में भी वो इतना hi जानती है जितना क मैं.

अमित : शालू क बारे में तुम क्या जानती हो?

शिवानी : शालू क बारे में तुम क्यों पूछ रहे हो?

अमित : पहले तुम बताओ फिर मैं बताऊंगा

शिवानी : शालू फर्स्ट ईयर में मोंटी क साथ जुडी थी . वो एक no. की चालू लड़की है. पैसे देख कर उसने मोंटी को अपने चलकर में फसा लिया और अब उसके दोस्तों क साथ भी उसका चक्कर है. मेरा बस चले तो उसकी जान लेलूं पर अब क्या अब तो मैंने मोंटी को भी भुला दिया है.

अमित : तुम कुछ नहीं जानती शालू क बारे में . शालू एक गरीब घर की खुद्दार और इनोसेंट लड़की थी जिसकी ज़िन्दगी बर्बाद करदी उस मोंटी ने.

फिर मैंने शिवानी को शालू क बारे में सब कुछ बताया जो शिवानी या किसी को भी पता नहीं था. सचाई सुनते hi शिवानी की आँखों में एक बार फिर से आंसू आ गए.

शिवानी : बेचारी शालू क साथ इतना कुछ हो गया और मैं समझती रही क वो गलत लड़की है. मैं कितनी गलत थी जो मोंटी की बातों को hi सच मानती थी. शालू बेचारी क्या से क्या बन गयी मुहे नफरत होने लगी है मोंटी से. शीना को भी इस बाटे में नहीं पैट होगा वर्ण वो ज़रूर शालू की मदद करती

अमित : वो भला क्यों मदद करने लगी शालू की. वो तो मोंटी की बहिन है न. जैसा भाई वैसी बहिन.

शिवानी : नहीं शीना ऐसे नहीं है. मन क वो घमंडी है और मोंटी क जैसे दूसरों पर हुकम चलती है मगर वो ऐसी घटिया बिलकुल भी नहीं है.

अमित : उसकी छोडो तुम ये बताओ क तुम शालू की कोई मदद कर सकती हो क्या?

शिवानी : मैं तो उसकी मदद करना चाहूंगी ओर मैं क्या कर सकती हूँ इसमें?

अमित : मोंटी ने जो उसकी वीडियोस बना कर राखी हैं वो कहाँ हैं क्या ये तुम पता लगा सकती हो? एक बार वो सब हमारे हाथ में आ जाये टी उसके बाद शालू को मैं यहाँ से कहीं दूर भेज दूंगा जहाँ पर वो नए सिरे से अपनी ज़िन्दगी की शुरुआत कर सके.

शिवानी : मोंटी अपने सीक्रेट्स किसी को बताता कहाँ है. अगर वो बताता होता तो क्या मुझे पता नहीं होता ये सब. वैसे वो तो फार्म हाउस ओर hi होता है जो शहर क बहार है. अपने दोस्तों क साथ वो वहीँ पर मौज मस्ती करता है. ऐसी चीज़ें वहीँ ार होंगी.

अमित : वहां पर होती तो शालू वो सब हासिल कर सकती थी ज़रूर कोई और जगह होगी तुम मुझे उसके बारे में बताओ.

शिवानी : ऐसी तो कोई जगह मुझे नहीं मालूम. हाँ शायद शीना को पता हो क मोंटी कहाँ जाता है या उसका और कौन सा ठिकाना है.

अमित : ठीक है तो अब ये तुम्हारे जिम्मे है तुम मुझे पता लगा कर दो मिन्टी क सीक्रेट ठिकाने का . बाकि सब मैं देख लूँगा.

शिवानी : मैं पूरी कोशिश करुँगी. एंड थैंक्स अमित तुमने मुझे आज सचाई बता कर मोंटी का असली चेहरा मेरे सामने ला दिया. मैंने जिसे प्यार करती रही वो तो प्यार क काबिल hi नहीं है. अब तो मुझे उससे नफरत होने लगी है और खुद से भी क मैंने उसे अपना सबकुछ सौंप दिया. शिवानी फिर से रोने लगी तो मैंने उसे गले लगा लिया

अमित : बस बस तुमने तो वही किया जो प्यार करने वाले अक्सर करते हैं. गलत तो वो है जिसने प्यार क नाम पर मासूम ज़िन्दगियों को बर्बाद किया है. और प्लीज तुम मुझे भी माफ़ कर देना . मैंने तुम्हारे साथ ....

शिकवणी ने मेरी बात पूरी गॉन से पहले मेरे मुँह पर हाथ रख दिया.

शिवानी : तुमने कुछ नहीं किया. तुमने तो मुझे वो प्यार दिया है जो मुझे कभी नहीं मिला. मोंटी क साथ मुझे कभी ऐसा एहसास नहीं हुआ था जो आज तुम्हारे साथ हुआ है. मैं जानती हूँ क मैं तुम्हारे काबिल नहीं हूँ पर हो सके तो अपने दिल में थोड़ी सी जगह मुझे ज़रूर देना. उसके बदले में तुम जो भी कहोगे मैं कर गुज़रूंगी . तुम प्यार की कीमत जानते हो मैंने तुम्हारी धड़कनो से फील किया है. ज़रूर तुमने भी किसी से प्यार किया होगा वर्ण तुम कभी मेरा दर्द समझ नहीं पते. मैंने तुम्हे अपने बारे में बता दिया अगर तुम चाहो तो मुझे अपने बारे में बता सकते हो मुझे ख़ुशी होगी.

मुझे शिवानी की ऐसी बातों पर बहुत प्यार आया और मैंने उसे अपनी बाँहों में कास लिया एक बार गिर से हमारे होंठ जुड़ गए. शिवानी ने मुझे आज मंजरी की यद् दिला दी. आज कितने दिनों क बाद किसी ने मेरे दिल क ज़ख्मो पर हाथ रख दिया था और मैं अपने दर्द को शिवानी क साथ बाँटने लगा.

अमित : मैं भी तुम्हारी तरह बाद नसीब हूँ शिवानी फरक बस इतना है क मुझे प्यार तो मिला मगर किस्मत ने उसे मुझसे चीन लिया. वो एक एक्सीडेंट में मरी गयी और मुझे उम्र भर रोने क लिए अकेला छोड़ गयी.

शिवानी : कितनी किस्मत वाली थी वो जिसे तुम्हारा प्यार मिला. मगर भगवन भी शायद सच्चे प्यार को परवान नहीं करता. आज से मैं तुम्हे वो प्यार दूँगी जो तुम्हे सरे दर्द भुला देगा . मैं उसकी जगह तो नहीं ले सकती पर मैं चाहूंगी क तुम्हारे दिल क एक छोटे से कोने में मुझे थोड़ी सी जगह मिल जाये. तुम्हारे अंदर जो प्यार है उसका एक छोटा सा अंश hi मुझे मिल जाये.

अमित : वो तो तुम ले चुकी हो

शिवानी : मतलब ?

अमित : अभी थोड़ी देर पहले मेरे प्यार का अंश तुमने अपने अंदर लिया तो है

शिकवणी : ?????

शिकवणी पहले सोचने लगी मगर जब उसे समझ आया क मैं उसकी छूट में छजोड़ए अपने लैंड क अमृत की बात कर रहा हूँ तो वो मुझे मरने लगी.

शिवानी : बदमाश कहीं क. गंदे जाओ मैं तुमसे बात नहीं करती . पता है क्या हल कर दिया है तुमने मेरा . अभी भी दर्द हो रहा है.

अमित : तो फिर से एक बार करते हैं न सारा दर्द दूर हो जायेगा.

शिवानी : बिलकुल नहीं मुझे मरना नहीं है. इतना बड़ा हथियार लिए फिरते हो मुझे तो लगा था क आज मैं मर hi जाउंगी पता नहीं बच कैसे गयी.

अमित : मैं तुम्हे कुछ होने थोड़ी देता. चलो न फिर से एक बार करते हैं मेरा अभी दिल नहीं भरा.

शिवानी : मुझे माफ़ करो मैं और नहीं झेल पाऊँगी.

अमित : तुम्हे मज़ा नहीं आया मेरे साथ ?

शिवानी : मज़ा तो बहुत आया . ऐसा लग रहा था जैसे मैं स्वर्ग में हूँ. मगर क्या करूँ तुम्हारा ये झेलते हुए मेरा बुरा हाल हो गया है . आज माफ़ कार्डो अगली बार जो कहोगे मैं करुँगी.

अमित : पक्का?

शिवानी : अब क्या लिख कर दूँ? हटो अब देर हो रही है घर भी जाना है. उठो अब मुझे कपडे पहनने दो.



मैंने फिर से शिवानी को एक बार किश किया और उसने भी मुझे ोूरे दिल से रिस्पांस दिया. फिर हमने अपनी हालत ठीक की और कपडे पेहेन कर वापिस चल पड़े. शिवानी मुझे घर ड्राप करने क बाद चली गयी.
 
अपडेट 99



‘कहाँ गायब हो जाते हो बिना बताये ? आज स्टेडियम नहीं जाना था क्या ? ‘

अंदर आते hi आंटी ने मुझसे सवाल किया.

अमित: एक दोस्त से मिलने गया था तो वहीँ देर हो गयी. अब तो टाइम भी बहुत हो गया है इस लिए अब वहां जाने का कोई फायदा नहीं.

आंटी : ऐसा कौन सा दोस्त है क अकेले hi मिलने जाते हो जिसे ? मोहित भी अभी निकला है उसे भी नहीं पता तुम्हारे उस दोस्त क बारे में. बैठो मैं कुछ लती हूँ तुम्हारे लिए.

आंटी मेरे लिए जूस ले आयी . मैं जूस पि कर आंटी को ट्यूशन का बता कर मंजू म क घर क लिए निकल गया. आंटी को कुछ न कुछ तो बताना पड़ेगा वर्ण वो मुझ पर शक करेंगी . चलो अगली बार कोई ाचा सा बहन बना कर कुछ बात दूंगा. मंजू म क घर पहुंचा तो मम भी मुझे देख कर खुश हो गयी और हैरान भी

मंजू म : तुम तो आज गाओं जाने वाले थे ?

अमित : लगता है आपको ख़ुशी नहीं हुई मेरे आने से

मंजू म : एक लगाउंगी तुझे. मैं कितनी खुश हूँ ये तुझे कैसे पता चलेगा? मैं तो बस पूछ रही हूँ. मेरा बस चले तो तुझे अपने पास hi रख लूँ .

अमित : ाचा ! तो क्या करेंगी मुझे अपने पास रख कर?

मंजू म: तुझसे बर्तन साफ करवाउंगी झाड़ू पोछा करवाउंगी और कपडे धुलवाउंगी.

अमित : तौबा तो आओ मुझे नौकर बना कर रखना चाहती हैं फिर तो मुझे भाग जाना चाहिए.

मंजू म : ज्यादा होशिआर मत बनो . मैं क्या तुमसे काम करवाउंगी? तुम तो मेरे भाई हो मेरे लिए तुम hi तो हो मेरे अपने . मैं बस तुम्हे हमेशा अपने पास देखना चाहती हूँ. तेरी वजह से hi तो अब जीने को दिल करने लगा है.

अमित : देख लेना मैं आपको हमेशा क लिए अपने पास hi रख लूंगा फिर हमेशा देखती रहना मुझे .

मंजू म : आज तो कपडे ठीक लग रहे हैं . गए नहीं क्या प्रैक्टिस करने ?

अमित : जी आज एक काम था तो वहीँ देर हो गयी इसी लिए सीधा आपके पास चला आया

मंजू म : ये तो ाचा किया . वैसे गाओं जाना कैसे कैंसिल हो गया?

अमित : कैंसिल नहीं हुआ कल जा रहा हूँ और मोहित की फॅमिली भी साथ चल रही है.

मंजू म : ये तो अछि बात है वो लोग तुम्हारी फॅमिली से मिल लेंगे. मुझे नहीं मिलाओगे अपनी फॅमिली से?

अमित : आप भी चलो साथ . कल तो वैसे भी संडे है.

मंजू म : नहीं अभी तुम उनको ले कर जाओ गली बार मुझे ले जाना.

अमित : जैसा आप कहें.

मंजू म : बैठो मैं कॉफ़ी बना कर ले.

कॉफ़ी पिने क बाद मम ने मुझे पढ़ाया और कुछ देर इधर उधर की बातें करने क बाद मैं घर क लिए निकल गया. घर लौट ते अँधेरा हो रहा था. रस्ते में सुनसान सड़क पर चलते हुए मुझे किसी क करवाने की आवाज़ आयी तो मैंने बाइक रोक ली. सड़क से हैट कर झाड़ियों क बीच से आवाज़ आ रही थी मगर अँधेरे क कारन नज़र नहीं आ रहा था. मैंने मोबाइल की टोर्च जगा कर उधर देखा तो एक आदमी लहू लोहान पड़ा था. मैं उसको चेक किया तो उसकी नब्ज़ बहुत धीमी चल रही थी. वो बस दर्द से कराह रहा था और जिस्म से लगातार लहू बेहटा जा रहा था. उसे देख कर लग रहा था क ये ज्यादा देर ज़िंदा नहीं रहेगी. उसके जिस्म पर बहुत सरे काटने क ज़ख़्म थे जैसे तेज़ धार हथियारों से उसे काट गया हो. उसकी आँखें बंद थी मैंने उसे जल्दी से उठाया और सड़क पर ले आया . उसकी ऐसे हालत में बाइक पर ले जाना मुश्किल था मैं उस उठाकर सड़क क बीच खड़ा हो गया पीछे से एक कार आ रही थी जो मेरे बीच में खड़े होने क कारन रुक गयी. मैं जल्दी से कार की तरफ भगा और बिना उनसे पूछे कार का पिछले दरवाज़ा खोला और उस आदमी को सीट पर दाल कर उसके साथ hi बैठ गया

अमित : प्लीज जल्दी से हॉस्पिटल चलिए वर्ण ये आदमी मर जायेगा.

लेडीज : तुम ऐसे कैसे मेरी कार ....

अमित : मैंने कहा हॉस्पिटल चलिए वर्ण ये आदमी मर जायेगा. आपकी कार किसी की जान से ज्यादा इम्पोर्टेन्ट नहीं है

मैंने तो देखा भी नहीं था क गाडी कौन चला रहा है और कितने लोग हैं बस उस आदमी को बचने क इलावा मुझे कुछ और नज़र नहीं आया. कार चलने वाली कोई लड़की थी जिस पर मैंने ध्यान नहीं दिया था और वो अकेली थी. शायद मुझे इस हालत में देख कर वो दर गयी होगी. कोई भी दर जायेगा जब ऐसे सुनसान रस्ते पर अचानक कोई आपके सामने ऐसे आ जाये. एक तो वो आदमी लहू लोहान हुआ पड़ा था ऊपर से मैं भी उसके खून से रंग गया था. उसने जब मुझसे सवाल करने की कोशिश तो मुझे उस पर गुस्सा आ गया कैसे लोग हैं जो किसी मरते हुए को बचने क बजाये अपनी कार की परवाह करते हैं. क्या ये सब किसी की जान से मेहेंगा है? वो औरत शायद मेरे इस तरह गुस्से से बोलने से दर गयी और चुपचाप कार चलने लगी.

अमित : थोड़ा तेज़ चलाओ इसकी साँसे धीमी हो रही हैं.

मेरे कहते hi वो कार को फुल स्पीड से चलने लगी और साथ hi अपने पर्स से मोबाइल निकल कर उसने एक फ़ोन किया. मुझे इस वक़्त सिर्फ उस आदमी की टेंशन थी और मैं उसके ज़ख्मो से निकल रहे खून को रोकने की कोशिश कर रहा था. थोड़ी देर में हम एक हॉस्पिटल क सामने थे गाडी रुकते hi दो लोग भागते हुए स्ट्रेचर ले आये ए और उस आदमी को स्ट्रेचर पर दाल कर हॉस्पिटल क अंदर ले गए मैं भी उनके साथ hi अंदर भगा और वो लड़की भी साथ hi थी. वो दोनों जो हॉस्पिटल क hi मुलाज़िम लग रहे थे सीधा उस आदमी को ऑपरेशन थिएटर ले गए मुझे बहार रोक दिया गया मगर एक डॉ और वो लड़की दोनों अंदर चले गए. मैं हैरान था क वो लड़की कैसे अंदर चली गयी जबकि मुझे बहार रोक दिया. मैं बहार hi बैठा रहा . मुझे चिंता हो रही थी पता नहीं वो आदमी बचेगा या नहीं. मोहित का फ़ोन आया तो मैंने उसे बता दिया क मुझे देर हो जाएगी . मैं बहार बैठा इंतज़ार कर रहा था क ऑपरेशन थिएटर का दरवाज़ा खुला और एक नर्स मेरे पास आयी.

नर्स : आप उस मरीज क साथ हैं ? उसका खून बहुत बह गया है और ब्लड की ज़रूरत है . हमारे पास ब्लड अवेलेबल नहीं है आप को ब्लड अर्रंगे करना होगा .

अमित : आप मेरा ले लीजिये पर उसे बचा लीजिये.

नर्स : आप मेरे साथ आइये हम आपका ब्लड ग्रुप चेक कर लेते हैं अगर मैच हो गया तो आप hi का ले लेंगे.

मैं नर्स क साथ गया पहले उन्होंने मेरा ब्लड टेस्ट लिया. ब्लड मैच होने क बाद मेरा ब्लड उस आदमी को चढ़ाया गया. मैं फिर से बहार बैठ कर डॉ से उसकी हालत क बारे में जानने को बैठा था. दो घंटे इंतज़ार क बाद ऑपरेशन थिएटर का दरवाज़ा खुला और अंदर से डॉ और वो लड़की बहार निकले. दोनों क मुँह पर मास्क लगे हुए थे.

डॉ : देखो तुम्हारे पेशेंट की हालत क्रिटिकल है . हम जो कर सकते थे हमने कर दिया आगे जो भगवन की मर्ज़ी. तुम उसके क्या लगते हो और उसके साथ क्या हुआ है? देखने से तो लग रहा है क उसको जान से मरने की कोशिश की गयी है.

अमित : देखिये मुझे नहीं पता वो कौन है . मैं तो रस्ते से जा रहा था क उसकी कराने की आवाज़ सुन कर रुक गया. जब मैंने उसकी हालत देखि तो मैं उसे जल्दी से उठा कर ले आया ताकि उसकी जान बच सके.

मेरा जवाब सुन कर वो लड़की ऑंखें बड़ी कर क मुझे देखने लगी. वो शायद हैरान हो रही थी.

डॉ : तो तुम उसे नहीं जानते. देखो ये एक पुलिस केस है तुम्हे अपने बयां देने होंगे पुलिस को वर्ण पुलिस हमें परेशां करेगी.

अमित : ठीक है डॉ बस आप उसे बचा लीजिये पता नहीं उसकी फॅमिली कहाँ है ? वो भी चिंता कर रहे होंगे.

डॉ : ये तो उसके होश में आने क बस hi पता चलेगा अगर वो बच पाया तो. उसके पास से कोई प्रूफ नहीं मिला वर्ण कुछ पता चल जाता. तुम वहां बैठो हम अभी पुलिस को इन्फॉर्म करते हैं.

मुझे एक तरफ बैठने का कह कर डॉ चला गया पर वो लड़की मेरे पास आ गयी.

लड़की : तो तुम बिना जान पहचान क किसी को भी ऐसे उठा कर हॉस्पिटल ले एते हो? तुम्हे पब्लिक सर्विस का शोक है ? तुम्हे दर नहीं लगता किसी दिन खुद फास गए तो? और ये ाचा तरीका है किसी को भी ज़बरदस्ती रोक कर उसकी गाडी इस्तेमाल करने का. मुझे तो लगा था क तुम मुझे किडनैप करने वाले हो.

अमित : माफ़ कीजियेगा पर उस वक़्त मुझे और कुछ समझ hi नहीं आया. अगर मेरे पास कार होती तो मैं उसे अपनी कार में ले अत. बाइक से उसे लाना मुश्किल था तो मैंने गाड़ी रुकवाने का सोच कर सड़क पर आ गया . किस्मत से आप hi सबसे पहले मिली. अगर मेरे पास कोई और रास्ता होता तो मैं आपको परेशां नहीं करता. मेरी वजह से आपको जो परेशानी हुई उसके लिए मुझे माफ़ कर दीजिये. मैं आपका आभारी हूँ क आपने मेरी मदद की वर्ण वो आदमी अब तक मर चूका होता.

लड़की : तुम्हे माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं है. तुमने तो उसकी जान बचने क लिए ये सब किया. मैं खुश हूँ मुझे भी आज किसी की मदद करने का मौका मिला. मैं पेशे से डॉ हूँ लोगो की जान बचाना हमारा काम भी है और फ़र्ज़ भी मगर तुमने जो किया आज क ज़माने में कौन किसी की मदद करता है. मगर तुम्हे देख कर लगता है क दुनिया में इंसानियत अभी ज़िंदा है. वैसे आज मत भाग जाना पिछली बार जैसे.

अमित : पिछली बार ? आप कब की बात कर रही हैं?

डॉ ल : लगता है तुमने अभी तक पहचाना नहीं. तुम पहले भी एक बार एक लड़के को लेकर ए थे यहाँ जिसे काफी चोट आयी थी और तुम्हे भी. मैंने hi उस दिन तुम्हारी पट्टी की थी क्या तुमने मुझे पहचाना नहीं?

डॉ उस दिन की बात कर रही थी जब मैं नीरज को लेकर आया था हॉस्पिटल में. मैंने तो पहचाना hi नहीं था. इसका मतलब ये वही हॉस्पिटल है.

अमित : तो आप ने उस दिन मेरी पत्तियां की थी ? थैंक यू वैरी मच पर मैं आपको कैसे पहचानूंगा न उस दिन मैंने आपका चेहरा देखा था न आज

डॉ ल : ो सॉरी , अब ठीक है.

डॉ ने अपने चेहरे पर लगा नकाब नीचे किया तो मैं उन्हें देखता रह गया . वो तो किसी भी एंगल से डॉ नहीं लग रही थी. उसका चेहरा बहुत hi चमकदार था . गोरा रंग बड़ी बड़ी ग्रे ऑंखें तीखे नैन नक्श ग्लोइंग स्किन घुंगराले बाल, मनमोहक मुस्कान , गुलाब की पंखुड़ियों से कुदरती रंगत लिए गुलाबी होंठ और मोतियों से चमकदार दन्त जो स्माइल करते वक्त होंठो क पीछे से झलक दिखा रहे थे. ये तो कॉलेज गोइंग लड़की लग रही थी. एक डैम से पतली हिरणी जैसी हाइट भी ठीक थी और सिंपल सा सूट पहने जो ये बता रहा था क इनको सिंपल रहना hi पसंद है. होंठो पर न कोई लिपस्टिक थी न गले में कोई मंगल सूत्र जिसका मतलब था क अभी इनकी शादी नहीं हुई होगी. मैं तो सर से पाऊँ तक डॉ को देखते हुए उनके बारे में अपने मन में hi अंदाज़ा लगता जा रहा था और साथ उनकी खूबसूरती का कायल भी होता जा रहा था.

डॉ ल : क्या हुआ कहाँ खो गए? वैसे मेरा नाम रीना है . तुम्हारा क्या नाम है?

अमित : जी मेरा नाम अमित है. वैसे एक बात कहूं बुरा तो नहीं मानेंगी?

रीना : कहो मैं क्यों बुरा मानूंगी

अमित : आप बहुत खूबसूरत हैं. आप को देख कर लगता नहीं क आप डॉ हैं . आप तो बिलकुल कॉलेज गर्ल लग रही हैं.

रीना : है है है . थैंक्स फॉर थे कॉम्पलिमेंट . वैसे तुम ऐसा कह सकते हो क्यूंकि मुझे अभी M.B.B.S. किये कुछ hi देर हुई है और सीधा मैं यहाँ आ गयी. पिछले साल तक मैं भी स्टूडेंट hi थी. तुम ने किस चीज़ में पड़े की है.

अमित : जी मैं तो अभी पड़े कर रहा हूँ फर्स्ट ईयर में हूँ.

रीना : शॉकेड ) क्याआ ? सच में ? मैं तो समझी थी की तुम ...

रीना क चेहरे क भाव बदल गए थे मेरे मुँह से ऐसा सुन कर जैसे उसे इसकी उम्मीद नहीं थी. और वो बात करती करती बीच में hi चुप हो गयी

अमित : आपने क्या समझा था?

रीना : तुम्हे देख कर कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता क तुम अभी स्टूडेंट हो. मेरा मतलब है क तुम्हारी बॉडी देख कर तो लगता है क तुम्हारी आगे 25-26 की होगी पर मैं गलत थी.

( मैंने तो सोचा था क मेरी आगे का होगा पहली बार कोई लड़का ाचा लगा और वो भी छोटा निकला )

अमित : जी वो मैं रेसलिंग का प्लेयर हो तुन उसकी वजह से ऐसा दीखता हूँ.

रीना : तुमने काफी म्हणत से ऐसी बॉडी बनाई है बिलकुल हीरो जैसे बॉडी है और यकीनन ताकत भी बहुत होगी.

अमित : जी वो तो सब खेल की वजह से है. वैसे आप इतनी रत को कहाँ जा रही थी अकेली ?

रीना : मैं हॉस्पिटल से घर hi जा रही थी क तुम मिल गए रस्ते में. वैसे ाचा hi हुआ. पिछली बार तो तुम गायब hi हो गए थे. मुझे बहुत बुरा लगा था क तुम दुबारा आये hi नहीं.

अमित : वो क्या है न मुझे दर था कहीं कोई पुलिस क चक्कर में मेरा नाम न आये . इससे मेरी फॅमिली नाराज़ हो जाती और मेरी पड़े छूट जाती . पहले hi मुश्किल से उन्होंने परमिशन दी है यहाँ शहर में रह कर पड़ने की.

रीना : तो तुम गाओं से हो? तभी मैं सोचूं क ये कौन है जो ऐसे दूसरों की मदद कर रहा है. शहर में तो कोई किसी की मदद नहीं करता.

अमित : ये तो अपने अपने विचार हैं. जो अचे हैं वो हर जगह hi अचे हैं क्या शहर क्या गाओं. आप अपनी hi तरफ देख लीजिये. आप भी तो शहर में रहती हैं फिर भी आप मदद करना अपना फ़र्ज़ समझती हैं. और सब कुछ होते हुए भी इतनी सिंपल रहती हैं मतलब आपको धन दौलत का मोह नहीं है. जितना खूबसूरत आपको ऊपर वाले ने बनाया है उतना hi खूबसूरत आपका दिल भी है. जिस किसी से भी आपकी शादी होगी वो ज़रूर बड़े नसीब वाला होगा. कहाँ मिलता है ऐसा खूबसूरती और खूबसीरति का संगम ऊपर से इतनी समझदार भी.

मेरे मुँह से अपनी इतनी तारीफ सुन कर एक पल क लिए टी डॉ मेरी तरफ देखती रह गयी और फिर मुस्कुराते हुए शर्माने लगी.

रीना : थैंक्स . वैसे मैं इतनी भी अछि नहीं हूँ

अमित : हीरे को अपनी वैल्यू कहाँ पता होती है. आप क्या हैं ज़रा मेरी नज़र से देखिये. एक बात कहना चाहूंगा आप ऐसे अकेले में इतनी देर से मत निकला कीजिये , क्या पता कौन इस हीरे को चुराने क लिए टाक में बैठा हो?

एक बार फिर से रीना शर्माने लगी और उसके गाल लाल हो गए. इतने में दूसरे डॉ आ गए और उनके साथ एक पुलिस वाला भी. डॉ रीना फिर से मास्क लगा कर कमरे से बहार निकला गयी और पुलिस वाले मुझसे सवाल जवाब करने लगे. मैंने पुलिस को अपना बयां दिया और उनसे आज्ञा लेकर बहार निकल रहा था क मुझे डॉ रीना ने आवाज़ दी.

रीना : कहाँ जा रहे हो?

अमित : जी टाइम बहुत हो गया है अब वापिस घर भी तो जाना है न.

रीना : जाओगे कैसे ? तुम्हारी बाइक तो उधर hi कड़ी होगी न? मैं तुम्हे वहां तक छोड़ दूंगी मुझे भी अब घर hi जाना है. वैसे अगर तुम्हारे पास टाइम हो तो क्या हम एक कप कॉफ़ी पि सकते हैं?

अमित : अरे इसमें आप पूछ क्यों रही हैं? आप हुकम कीजिये मैं आपकी बात कैसे मोड़ सकता हूँ? वैसे भी आप जैसी लड़की क साथ बैठ कर कॉफ़ी पिने को कौन मन कर सकता है.

एक बार फिर से डॉ रीना क चेहरे पर लाली आ गयी.

रीना : फ़्लर्ट कर रहे हो मेरे साथ? मैं तुमसे बड़ी हूँ अंदाज़ा भी है तुम्हे?

अमित : वैसे उम्र कौन देखता है ? आप hi तो कह रही थी क मैं 25-26 का लगता हूँ और आप मुझे 17-18 की लगती हैं तो फिर उम्र कहाँ से आ गयी बीच. अगर कोई हमें साथ देखेगा तो पक्का मुझे आपका बर्फ hi समझेगा.

इस बार तो रीना का चेहरा ऐसे लाल हो गया क मनो शर्म से ज़मीन में गड जाएगी .

रीना : कुछ भी ..... आओ चलें वर्ण यहीं रत हो जाएगी.

मैंने सोचा क डॉ बहार लेकर जाएगी पर वो मुझे अपने ऑफिस में लेकर गयी और 2 कप कॉफ़ी आर्डर कर दी.

रीना : ऐसे क्या देख रहे हो?

अमित : मुझे लगा था क आप बहार चलेंगी कॉफ़ी पिने.

रीना : इतना भी ज्यादा मत सोचो मैं तुम्हारी गफ नहीं हूँ. ज़रा अपने कपडे देखो खून से भरे हुए हैं ऐसी हालत में जाओगे तो लोग क्या कहेंगे?

अमित : मतलब अगर मैंने अचे कपडे पहने होते तो आप मेरे साथ बहार चलती कॉफ़ी पिने , ये तो गड़बड़ हो गयी

रीना : किसने कहा मैं तुम्हारे साथ बहार जा रही हूँ कॉफ़ी पिने. यहाँ पर भी अछि कॉफ़ी मिलती है.

अमित : मतलब आप मेरे साथ बहार नहीं जाना चाहती . हफ़्फ़्फ़ अपनी तो किस्मत hi ख़राब है . कोई लड़की पसंद hi नहीं करती .

रीना : झूठ मत बोलो . तुम्हारी पर्सनालिटी देख कर तो लगता है तुम्हारे पीछे लड़कियों की लाइन लगती होगी . लड़कियां तो ढूंढती हैं तुम्हारे जैसे हैंडसम लड़के.

अमित : मैं ऐसी लड़कियों को पसंद नहीं करता जो किसी क भी पीछे पद जाएँ. मेरी नज़र में तो वही लकी सब से सुन्दर है जो सिंपल और सधी पसंद हो जैसी की आप. अफ़सोस क ऐसी लड़कियां बहुत काम हैं दुनिया में और जो किस्मत से मिल hi गयी उसने भी रिजेक्ट कर दिया.

रीना : किसने कर दिया ?

अमित : आपने

मेरी इस बात से डॉ रीना हड़बड़ा गयी उसे मुझसे इस बात की उम्मीद नहीं थी. मुझे भी लगा क मैं कुछ ज्यादा hi बोल गया मैं तो बस उनके साथ हंसी मज़ाक कर रहा था. हम दोनों hi चुप थे क बहार से एक लड़का कॉफ़ी ले आया और हम चुप चाप कॉफ़ी पिने लगे . कॉफ़ी पिटे पिटे रीना कई बार मुझे नज़र उठा कर देखती पर मेरे साथ नज़र मिलते hi नज़रें नीची कर लेती. कॉफ़ी पिने क बाद हम बहार आ गए और डॉ रीना ने मुझे अपनी कार में बिठा लिया . हम वापिस उसी जगह पहुँच गए जहाँ मेरी बाइक कड़ी थी.

अमित: ी ऍम सॉरी मेरी वजह से आपकी कार .....

रीना : इतस ok ये तो साफ हो जायेगा तुम इसकी चिंता मत करो

अमित : और एक बात. प्लीज मेरी बातों का बुरा मत मानियेगा मेरे कहने का वो मतलब नहीं था.

रीना : तो क्या मतलब था?

अमित : जी मैं वो .....

रीना : मैं मज़ाक कर रही हूँ. मुझे तुम्हारी कोई बात बुरी नहीं लगी और हाँ गली बार कॉफ़ी तुम्हारी तरफ से होगी जहाँ तुम चाहो.

इतना कह कर डॉ रीना मुस्कुराने लगी मुझे उनकी आँखों में अलग hi चमक दिखी पर उनके इस तरह क जवाब से मैं भी एक बार हड़बड़ा गया . मैं तो सोच रहा था क डॉ कहीं गुस्सा न कर क बैठी हो पर ये तो नेचर से भी अछि हैं जो इतनी आसानी से बात को ताल दिया. मेरे उतारते hi डॉ रीना हस्ती मुस्कुराती मुझे bye कर क गाड़ी चलती हुई निकल गयी. मैं भी खड़ा कुछ देर डॉ क बारे में सोचता रहा और फिर अपनी बाइक ले कर घर आ गया . घर देरी से आने की वजह से आंटी हॉल में hi बैठी मेरा वेट कर रही थी और अंकल भी साथ में बैठे थे. मैं जब अंदर आया तो मेरे कपड़ो को खून से सना देख कर दोनों hi घबरा गए.

अंकल : ये क्या हुआ तुम्हे मेरे बेटे.

आंटी : तुम्हे क्या हुआ ? कहाँ थे तुम ? ठीक तो हो तुम ? दिखाओ मुझे कहाँ चोट लगी है?

आंटी तो कुछ ज्यादा hi घबरा गयी और भाग कर मेरे गले लग गयी और पहलों की तरह मेरे कपडे उठा कर देखने की कोशिश करने लगी.

अमित : मैं ठीक हूँ आंटी मुझे कुछ नहीं हुआ. ये खून मेरा नहीं है ये किसी और का है.

अंकल : किसी और का है ? किसका है हे ये खून?

फिर मैंने दोनों को साडी बात बताई तो दोनों रिलैक्स हुए.

अंकल : बीटा ऐसे बिना जान पहचान क किसी क मामले में मत पड़ा करो. शहर में इसी लिए कोई किसी की मदद नहीं करता क बाद में या तो पुलिस का चक्कर पद हटा है या फिर दुश्मनी हो जाती है लोगों से. काम तो ये बदमाशों का hi होगा सोचो जिन लोगों ने उस आदमी को मारा होगा उन्हें जब पता चलेगा क किसने उसे बचाया तो वो तुम्हारे भी दुश्मन बन जायेंगे न.

अमित : अंकल अगर ऐसा सोच कर हर कोई अपनी ऑंखें बंद कर लेगा तो इंसानियत ख़तम हो जाएगी दुनिया से फिर हम में और जानवरों में क्या फरक रहेगा. वैसे जानवर भी इंसान से अचे हैं वो भी एक दूसरे की मदद करते हैं ये बस इंसान hi है जो बिना मतलब क किसी की मदद करने से गुरेज़ करता है.

अंकल : तुम ठीक कहते हो बीटा पर मैंने तुम्हे ज़माने की सचाई hi तो बताई है. ये hi आज क ज़माने की हकीकत है. मुझे ख़ुशी है क तुम्हारे विचार इतने अचे हैं. तुम बिलकुल अपने माँ बाप जैसे हो . दोनों क विचार ऐसे hi थे. हर किसी की मदद कर देते थे मगर उनकी इसी बात का लोग गलत फायदा भी उठाते थे.

अमित : वो तो अपना अपना करम है न अंकल. जो जैसे करेगा वैसा भरेगा. अगर दूसरों की दग़ाबाज़ी देख कर अचे लोग मदद करना बंद कर देंगे तो अच्छी कहाँ रहेगी अंकल.

आंटी : अब बातें बंद करो. देखो कितना टाइम हो गया है. अभी तक खाना भी नहीं खाया होगा. जाओ अब ये गंदे कपडे बदल कर जल्दी फ्रेश हो कर आओ मैं खाना लगाती हूँ.

उसके बाद मैंने अपने कपडे बदले और डिनर किया. उसके बाद अंकल आंटी अपने कमरों में चले गए और मैं अपने कमरे में . अंकल क सोने क बाद आंटी मेरे पास आ गयी. वो मुझसे नाराज़ हो रही थी क मैं बिना वजह ऐसे जोखिम क्यों लेता हूँ अगर मुझे कभी कुछ हो गया तो. मुझे आंटी का अपने प्रति इतनी परवाह करना ाचा लगा . मैंने उन्हें समझाया क आप चिंता न करो मुझे कुछ नहीं होगा. आंटी को मानाने क बाद एक बार मैंने उन्हें अछि तरह प्यार किया और उन्हें तृप्त कर दिया. वो भी खुश होती गुड नाईट किश दे कर अपने कमरे में चले गयी. कल सुबह मुझे गाओं जाना था इस लिए जल्दी सो गया.

उधर डॉ रीना आज अपने बिस्तर पर करवटें बदल रही थी. वो बार बार अमित की बातों को यद् कर क मुस्कुरा जाती. आज तक उनकी लाइफ में ऐसी बातें उनके साथ किसी ने नहीं की थी . खूबसूरत होने की वजह से शुरू से hi लड़के उनके पीछे पड़े रहते थे और पता नहीं कैसी कैसी बातें कर क उन्हें इम्प्रेस करने की कोशिश करते थे मगर रीना को कभी भी इंटरेस्ट नहीं था ऐसी बातो में . पहले पड़े में लगी रही डॉ बनने का सपना जो पूरा करना था और उसके बाद उसे कोई ऐसा लड़का मिला hi नहीं जिसको देख कर उसका दिल धड़कने लगे. अमित को जब पहली बार देखा था तो उसी दिन उसकी बॉडी और इनोसेंट चेहरा देख कर वो उसके दिल में उतर गया था. मगर बिना बात किये वो भाग गया था . रोज़ भगवन से प्रार्थना करती थी क वो फिर से उस लड़के से उसे मिला दे. आज जब उसे अमित फिर मिला तो पहले एक बार वो समझी क अमित भी गुंडा या बदमाश है जिस तरह वो खून से लथपथ आदमी को लिए उसके सामने आ खड़ा हुआ था और गुस्से से उसे गाड़ी चलने को कहा जैसे उसे किडनैप hi कर लेगा. पर बाद में सचाई पता चलने पर अमित की जगह और भी बाद गयी थी उसके दिल में. रीना तो अमित से अपने की दिल की बात करने का सोच रही थी क उसकी फर्स्ट ईयर में होने से उसे फिर एक बार धक्का लगा था क्यूंकि वो उससे उम्र में छोटा है मगर जब अमित ने कहा क उम्र कौन देखता है और जिस तरह उसने प्यार भाई बातें की फ़्लर्ट किया रीना क दिल में फिर से उम्मीद जग उठी क अमित को तो उम्र की कोई परवाह नहीं है. और जिस तरह उसने उसके साथ बातें की है उसका मतलब है क वो उसे पसंद करता है. किस तरह उसने उसकी खूबसूरती की तारीफ की थी किस तरह उसकी सादगी की तारीफ की थी जबकि आज कल तो लोग फैशन और स्टाइल देखते हैं. रीना को तो बुल्कुल भी ऐसी बनावटी चीज़ें पसंद नहीं थी और आज उसे अपने जैसा hi एक साथी मिल गया था. रीना बार बार से को यद् करती करवटें बदलती रही और अपने तकिये को अमित मन कर अपने साइन से लगा लिया उसी क मीठे मीठे सपने देखती हुई सो गयी.

अगली सुबह मैं जल्दी उठ गया आज गाओं जाना था तो मुझे जल्दी थी सबसे मिलने की मैं जल्दी से तैयार हुआ और मोहित को भी जगा दिया. मोहित तो नाराज़ हो रहा था क उसकी नींद ख़राब कर दी मैंने पर फिर गेन जाने की बात पर उठ कर तैयार होने लगा . आंटी योग कर रही थी तो मैंने उन्हें भी जल्दी करने को कहा . अंकल भी मुझे देखते hi अपने कमरे में चले गए तैयार होने . नाश्ता करने क बाद हम 8 बजे तक घर से निकल पड़े . हम चारो कार में गाओं जा रहे थे. घर ओर मैंने किसी को नहीं बताया था ताकि उन्हें सरप्राइज दे सकूँ . अंकल आंटी को भी मैंने बता दिया. 9 बजे से पहले हम गाओ पहुँच गए थे रस्ते में अंकल ने कुछ फ्रूट्स वगैरह ले लिए थे . गाओं में एंटर होते hi अंकल अपनी यादें ताज़ा करते हुए अपनी बातें बताने लगे क कैसे वो पहले यहाँ ए थे . जब हम घर पहुंचे तो तीनो मां अभी घर पर नाश्ता कर रहे थे. अंकल आंटी अभी बहार hi थे क मैं भाग कर अंदर चला गया. मुझे सामने देख कर गौरी ममी की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने मुझे गले लगा लिया.

गौरी ममी : आ गया मेरा बचा . कहाँ रह गया था तू ? तुझे नहीं पता क तेरी माँ घर पर तेरा इंतज़ार कर रही है और तू है क घर आने का नाम hi नहीं लेता. मैं कल से तेरा रास्ता देख रही हूँ. कल क्यों नहीं आया?

अभी माँ मुझे गले लगा कर hi कड़ी थी क अंकल आंटी और मोहित बहार से चलते हुए आँगन में आ गए. अंकल आंटी को देखते hi विजय मां उठ कर अंकल का स्वागत करने क लिए उनकी तरफ चल दिए साथ hi अजय मां और कमलेश मां भी उनकी तरफ चल दिए. बरी बरी से तीनो मां अंकल से गले मिले और पुराणी यादें ताज़ा करने लगे . इधर गौरी मनाई कामिनी ममी और दीपिका ममी भी आंटी से गले मिली और उनसे बातें करने लगी. दीपिका ममी आंटी से पहली बार मिल रही थी जबकि कामिनी ममी तो पहले से hi जानती थी. मोहित को भी सबने आशीर्वाद दिया. सब एक साथ बैठ कर पुराने दिनों को यद् करने लगे . गौरी ममी ने दीपिका ममी और कामिनी ममी को आंटी क पास बिठाया और खुद रसोई में जा कर सबके लिए चाय नाश्ते का इंतज़ाम करने लगी. ब्रेकफास्ट तो हम घर से कर क hi निकले थे इस लिए सिर्फ चाय और हल्का फुल्का साथ में कुछ खा लिया. उसके बाद तीनो मां अंकल को लेकर एक तरफ बैठ गए और तीनो ममियां आंटी को लेकर बैठ गयी. मोहित खून बोर न हो इस लिए मैं उसे अपने साथ ले कर बहार निकल गया गाओं खेत दिखने क लिए. मोहित को मैंने अपने खेत और बगीचे दिखाए . राजू भी मुझे गाओं में मिल गया पहले तो वो मुझसे लड़ने लगा क मैं उसे भूल hi गया हूँ. बात उसकी सही थी क मैं उससे मुला hi नहीं था इतने दिनों से. मैंने उसे माफ़ी मांगी और उसे समझाया क किस तरह मैं बिजी रहता हूँ तो वो भी थोड़ी देर में मन गया . फिर हम तीनो साथ मिल कर घूमते हुए नदी की तरफ चल दिए . मोहित तो नदी का नाम सुनते hi उसमे स्विमिंग करने को मचलने लगा. हम तीनो नदी में नहाते हुए हंसी मज़ाक करते रहे. नदी से नाहा कर हम वापिस लौटने लगे तो रस्ते में मुझे पूजा भाभी मिल गयी. मुझे देखते hi उन्होंने गुस्से से नज़रें फेर ली मैं समझ गया क भाभी मुझसे नाराज़ हैं मैं दोबारा उनसे मिला hi नहीं और न कभी बात की. क्या करूँ वक़्त hi नहीं मिलता पर भाभी की नाराज़गी भी दूर करनी hi होगी उनके लिए वक़्त निकलना hi होगा.

उसके बाद मैं मोहित को डरा भैया क घर ले कर गया . मोहित बड़ी गरम जोशी से डरा भैया से मिला और मैंने भी फिर से एक बार डरा भैया का शुक्रिया ऐडा किया. दोपहर तक हम बहार hi घूमते रहे और लंच क टाइम घर आ गए.

इधर हमारे पीछे लेडीज में कुछ खास बातें हो रही थी.

रमा : कामिनी कैसी है तू ? इतने सैलून बाद देख रही हूँ मगर आज भी बिलकुल वैसी hi हो.

कामिनी : आप भी तो बिलकुल वैसी hi हैं जैसे उम्र का कोई असर हुआ hi नहीं आप पर. मोहित को देख कर उसे कोई आपका बीटा कह hi नहीं सकता.

रमा : मेरी छोडो तुम तो आज भी लगता है खूब खत कबड्डी खेलती हो अजय भैया क साथ तभी तो ये ऐसा हो गया है.

रमा कामिनी ममी क उभरे हुए पेट को देख कर समझ गयी थी क वो पेट से हैं.

कामिनी : क्या दीदी कुछ भी कहती हो आप . वो तो इसके पापा ने hi देर करदी वर्ण अब तक घर में 2-3 बालक तो कर hi लिए होते.

( कामिनी का इशारा अमित की तरफ था जिसे दीपिका अछि तरह समझ गयी और दोनों एक दूसरे की आँखों में देखती हुई मुस्कुराने लगी )

रमा : तो क्या हुआ देर आये दुरुस्त आये. वैसे मेरी इस छोटी बहिन से भी तो मिलवाओ मुझे इससे तो आज पहली बार मिल रही हूँ . लगता ये भी कमलेश भैया क साथ खूब म्हणत कर रही है.

दीपिका : मैं आपसे पहली बार मिल रही हूँ तो क्या हुआ दीदी इसके पापा ( अमित )ने मुझे आपके बारे में पहले hi बता दिया था. और आप बिलकुल वैसी hi हैं जैसा उन्होंने बताया था बल्कि उससे भी ज्यादा hi हैं. दीदी ने सच कहा आप को देख कर कोई नहीं कह सकता क आप क बचे इतने बड़े होंगे.

( दीपिका तो अमित और रमा क बीच क रिश्ते क बारे में सब जानती थी इस लिए वो उसी नज़र से रमा को देख रही थी और इस बात से हैरान थी क रमा वाकई में इतनी फिट है क वो तो लगती hi नहीं क उसके बचे इतने बड़े हो सकते हैं . रमा वाकई में बहुत खूबसूरत थी और अमित ने जितना बताया था वो काम hi था इस हिसाब से)

रमा : वह वह ये तो बहुत अछि बातें करती है . कामिनी तुम्हारी देवरानी तो बहुत अछि है ये टी सबका दिल लगा कर रखती होगी.

गौरी : तुमने ठीक कहा रमा ये इस घर की जान है . ये सब का ख्याल रखती है. अमित तो इसी की ज्यादा सुनता है.

दीपिका : इस घर की असली जान तो अमित है . और वो मुझसे ज्यादा आपकी परवाह करता है दीदी. वैसे रमा दीदी अमित आपकी बहुत तारीफ करता है आज कल ऐसा कौन सा जादू कर दिया है आपने उसपर?

रमा : ऐसा कुछ नहीं है वो है hi इतना प्यारा अपने आप hi प्यार करने को दिल करता है.

गौरी / कामिनी / दीपिका : सही कहा



तीनो क एक साथ बोलने बार सब हसने लगी . चारो अमित क साथ सम्बन्ध बना चुकी थी मगर एक को छोड़ कर तीनो उसे दिलो जान से प्रेमिका की तरह चाहती थी और वो एक भी अब कहीं न कहीं अमित को और ज्यादा चाहने लगी थी इस बात की समझ अभी उसे भी नहीं आ रही थी क ऐसा क्यों हो रहा है.
 
भाई अपडेट आज बिजी होने की वजह से लिख नहीं पाया पर लिख रहा हूँ हाफ अभी किया है पूरा अगर कर पाया तो कर दूंगा अपडेट सुबह से पहले वर्ण कल
 
अपडेट 100



दोपहर को सब ने मिलकर खाना खाया. सब खुश थे अंकल आंटी क आने से और पुराणी बातों में hi लगे हुए थे मैं और मोहित तो बस सबकी सुन रहे थे और दीपिका ममी भी मेरी तरह बस अनजान सी बातों को ध्यान से सुन रही थी. खाने क बाद अंकल आंटी विजय मां और गौरी ममी को लेकर उनके कमरे में चले गए . अंकल ने मुझे और मोहित को भी कुछ देर बाद अपने पास बुला लिया. मुझे नहीं पता था क वो लोग क्या बातें कर रहे हैं पर मेरे सामने अंकल ने बाबा को बता दिया क उन्होंने अपना बिज़नेस और प्रॉपर्टी मेरे और मोहित क नाम आधी आधी कर दी है. इस पर बाबा अंकल को मन करने लगे . बाबा ने कहा की उनका सब कुछ मेरा hi है तो ये सब करने की ज़रूरत माहि है पर अंकल ने उनको समझाया क ये सब मेरे पापा क साथ हिस्सेदारी में hi था इस लिए उनका बीटा होने क कारन इस पर मेरा हल है. अंकल आंटी को तो मैं पहले hi कह चूका था क मैं माँ बाबा से पूछे बिना ये नहीं ले सकता तो अंकल आंटी मेरे माता पिता का वास्ता देकर बाबा को मानाने लगे आखिर बाबा को हाँ करनी पड़ी. बाबा ने अंकल की बहुत तारीफ की क उन्होंने अपनी दोस्ती का सही हक़ ऐडा किया है. उसके बाद अंकल आंटी ने जाने की इजाज़त मांगी पर माँ बाबा उन्हें रोकना चाहते थे. आंटी ने बताया क कल राखी है और मोहित को अपनी बहिन क पास राखी बढ़ाने जाना है क्यूंकि इस बार वो नहीं आ रही इस लिए उन्हें जा कर तयारी करनी है तो माँ बाबा भी मन गए. शाम होने से पहले वो लोग वापिस चले गए जब की मैं घर पर hi रुक गया क्यों की कल राखी थी और मेरी तीनो मौसियां मां को राखी बांधने आने वाली थी साथ में मेरी बहने भी आएँगी. अंकल आंटी क जाने क बाद दीपिका ममी ने मुझे अपने कमरे में बुलाया. तीनो मां भी इस वक़्त घर से बहार निकल गए थे गाओं में hi आने साथियों से मिलने. मैं ममी से मिलने उनके कमरे में गया तो उन्होंने आते hi मुझे गले लगा लिया.

दीपिका ममी : क्यों तड़पते हो मुझे इतना ? तुम्हे ज़रा भी मेरा ख्याल माहि अत ? कितने कितने दिन तक तुम्हारा चेहरा भी देखना नसीब नहीं होता . मेरा नहीं तो काम से काम अपने बचे का hi ख्याल करलो. मेरे साथ ये भी तुम्हे बहुत यद् करता है.

अमित : तुम तो जानती हो दीपिका क शहर में वहां तीनो मौसियां हैं और फिर मेरी बड़ी बहने भी मुझे बुलाती रहती हैं मैं खुद मजबूर हो करा हूँ वर्ण मैं तो खुद तुमसे मिलने को तड़पता रहता हूँ.

दीपिका ममी : झूठे ! पता है कितना तड़पते हो तुम और क्यों नहीं आते यहाँ पर. रमा दीदी को देख कर hi मैं समझ गयी थी तुम्हारी अचे से सेवा हो रही है शहर में इसी लिए तुम यहाँ नहीं आते क्यूंकि अब तो मैं तुम्हारी वैसी सेवा कर नहीं सकती न. वैसे रमा दीदी बिक्लुल भी इतनी उम्र की नहीं लगती

अमित : लगता है जलन होने लगी है तुमको उनसे. वैसे मैं चाहता हूँ तुम भी खुद को उनकी तरह मैंटेन करना शुरू कर दो. पता है वो रोज़ योग केटी हैं इसी लिए तो इतनी फिट हैं.

दीपिका ममी : एक बार ये थोड़ा सँभालने लायक हो जाये तो मैं भी खुद को फिट कर लुंगी आखिर मैं भी तो अपनी सौतें को दिखाऊं क मैं भी काम नहीं.

अमित : तुम तो लाखों में एक हो इसी लिए तो मैं सबसे ज्यादा प्यार तुम्हे hi करता हूँ.

इतना कह कर मैंने दीपिका ममी क होंठो का रास पीना शुरू कर दिया तभी मुझे बहार से किसी क आने की आहत हुई तो मैं एक डैम से ममी से दूर हो गया और ममी ने भी खुद को संभल लिया .

गौरी ममी : अरे तुम यहाँ हो ? मैं तुम्हे सरे घर में ढूंढ रही हूँ.

दीपिका ममी : क्या दीदी आप भी ! इतने दिनों बाद आया है ये क्या मैं थोड़ी देर इसे अपने पास बिठा भी माहि सकती?

गौरी ममी : बिठाया कहाँ है तूने तो खड़ा कर क रखा है इसे. तुझे जो प्यार करना है कमलेश से कर लेना इसे रहने दे ये अभी छोटा है.

गौरी ममी की बात सुन कर एक बार तो मैं और दीपिका ममी दोनों hi शॉकेड हो गए क ये क्या कह रही हैं माँ

दीपिका ममी : वो अपनी जगह हैं ये अपनी जगह है . क्या आप बड़े भैया और अमित को एक सा प्यार करती हैं?

दीपिका ममी ने गौरी ममी को उसी भाषा में जवाब दे दिया तो इस बार मैं दीपिका ममी को हैरानी से देखने लगा क ये क्या बोल रही हैं. मगर गौरी ममी इस बात पर गुस्सा करने की बजाये एक और वॉर कर दिया.

गौरी ममी : मैं इसकी माँ हूँ और इसे वही प्यार देती हूँ पर शायद तुम कुछ ज्यादा hi प्यार लुटा रही हो . देवर जी ध्यान नहीं रखते क्या?

इस बार तो गौरी की बात ने ओपन वॉर कर दी थी जिस बात की उम्मीद हो नहीं थी मुझे.

दीपिका ममी : माँ बनने वाली हूँ न तो खुद को कण्ट्रोल नहीं कर प् रही इसी लिए तो इसे प्यार कर रही थी आखिर इसकी दुआओं से hi तो माँ बन रही हूँ.

दीपिका ममी ने ये क्या कह दिया कहीं गौरी ममी उनका मतलब समझ गयी तो क्या होगा ? मेरी हवा टाइट होने लगी वहीँ गौरी ममी की आँखें भी बड़ी बड़ी हो गयी और उन्होंने बड़ी गंभीरता से एक बार हम दोनों को देखा.

गौरी ममी : तुम कहना क्या चाहती हो ? क्या अमित की वजह से तुम माँ बानी हो?

इस बार गौरी ममी ने डायरेक्ट सवाल कर दिया था . मुझे दर लगने लगा क कहीं अब मामला बिगड़ न जाये .

दीपिका ममी : सच्चे दिल से मांगी दुआ भगवन जल्दी सुनता है न दीदी. और इस घर में सब से छोटा तो ये hi है और सच्चा कितना है आप भी जानती हैं. इसी की दुआओं से मैं कामिनी दीदी और आप माँ बन रही हैं

दीपिका ममी ने इंदिरेक्ट गौरी ममी को क्लीन बोल्ड कर दिया था क्यूंकि उन्हें अछि तरह पर था क गौरी ममी भी मेरी वजह से प्रेग्नेंट हैं. पैट नहीं गौरी ममी ने इस बात का क्या मतलब समझा पर वो दीपिका ममी की बात पर एक पल क लिए चुप हुई फिर मुस्कुराते हुए बोली .

गौरी ममी : तुम सच कहती हो हम इतने सैलून से जिस ख़ुशी को तरस रहे थे वो हमें इसकी दुआओं से hi मिली है. भगवन हमसे पहले इसकी सुनता है और सुने भी क्यों न ? इसका दिल इतना साफ है क जिसमे रत्ती भर भी खोट नहीं. काश ये मेरी कोख से पेड हुआ होता?

दीपिका ममी : भगवन पर भरोसा रखो दीदी क्या पता आप की कोख से छोटा अमित पैदा हो मेरा मतलब है क आप को भी बीटा हो अमित जैसा हो .

दीपिका ममी ने डिरेस्ट बोल दिया था अब पता नहीं उन्होंने जान बुझ कर बोलै या गलती से उनकी ज़ुबान फिसल गयी पर उसके बाद गौरी ममी मुझे अपने पीछे आने का कह कर निकल गयी. उनके जाते hi मैंने दीपिका ममी को घूर कर देखा तो उन्होंने अपने सर पर हाथ मारा जैसे बता रही हो क गलती से मुँह से निकल गया . मैं भी कमरे से जल्दी निकल गया और गौरी मनाई क पीछे पीछे उनके कमरे में आ गया. मैं उनके पास बैठ कर अभी बात करने hi वाला था क कामिनी ममी ने आ कर खाना बनाने का पूछा तो गौरी ममी उठ कर उनके साथ खाना बनाने चली गयी. कुछ देर में hi तीनो मां भी आ गए और रत का खाना खाने क बाद कल क दिन क बारे में बात करने लगे. कल राखी थी तो कल मौसियां को क्या देना उस पर हो विचार हो रहा था . मेरी भी तो बहने मुझे राखी बांधेंगी मुझे भी उन्हें कुछ न कुछ देना होगा और मैंने तो कुछ लिया भी नहीं था. चलो कोई बात नहीं कॅश hi दे दूंगा. बातें करने क बाद सब अपने अपने कमरों में चले गए. गौरी ममी मेरे कमरे में मेरे पास आ गयी और मेरे साथ hi बीएड पर बैठ गयी.

गौरी ममी : लगता है तुझे अपनी माँ का बिलकुल भी ख्याल नहीं है . बाकि सब क लिए टाइम है बस मेरे लिए hi नहीं.

अमित : ऐसा क्यों कह रही हो माँ ? आप के लिए hi तो अत हूँ घर. जब आप मुझसे बात नहीं करती थी तो मेरा भी घर आने को मन नहीं होता था. घर अत हूँ तो आप क लिए और आप फिर भी ऐसा कह रही हैं.

गौरी ममी : उस बात को यद् मत किया कर. मैं उसे यद् नहीं करना चाहती . अगर तू सच में इतना प्यार करता है मुझसे तो मेरे पास क्यों नहीं बैठ ता. मुझे तो लगता है तू दीपिका को ज्यादा hi प्यार करने लगा है .

अमित : अगर आप को ऐसा लगता है तो मैं उनको बोल दूंगा क मैं आपके पास नहीं आऊंगा आपको अगर मुझसे मिलना है तो पहले माँ से परमिशन ले.

गौरी ममी : उसकी कोई ज़रूरत नहीं है. तू बस मुझे प्यार किया कर . तू सामने नहीं होता मैं तुझे देखने को तरसती रहती हूँ. हर वक़्त बस तुम्हारा hi ख्याल रहता है और तुम हो की घर आने का नाम hi नहीं लेते.

अमित : माँ पिछली बार आपने hi तो मौसी को कह दिया था मुझे वहां रुकने को वर्ण मैं तो आ जाता अब इसमें मेरी क्या गलती है मैंने तो आपकी hi बात मणि.

गौरी ममी : मैंने कहाँ कहा था वो तो तेरे बाबा hi अपनी बहनो की बात नहीं टालते. कोई कुछ भी कहे तू घर आ जाया कर बस. मेरा दिल कितना तड़पता है तुझे देखने को ये मैं hi जानती हूँ.

इतना कह कर गौरी ममी ने मुझे कास क अपने साइन से लगा लिया सच में उनका दिल मेरे लिए प्यार से भरा हुआ था. हमेशा उन्होंने ने मुझे इतना प्यार दिया क मुझे कभी लगा hi नहीं क मैं उनका बीटा नहीं हूँ. गौरी ममी तो मुझे अपने सीने से कास क लगाए हुए थी क इतने में कामिनी ममी आ गयी.

कामिनी ममी : ाह्ममम अहहह्म्म ... मैंने डिस्टर्ब तो नहीं किया?

कामिनी ममी की आवाज़ सुन कर जैसे हम दोनों नींद से जागे और गौरी ममी ने एक डैम से मुझे खुद से जुड़ा किया. मेरी सांस जो ममी की छाती में दबे होने से अटकी हुई थी वो फिर से चल पड़ी. हमने कामिनी ममी की तरफ देखा तो वो हमें देख कर मुस्कुरा रही थी.

कामिनी ममी: अरे अरे आप रुक क्यों गयी दीदी ? मैं वापिस चली जाती हूँ आप कंटिन्यू करो

गौरी ममी : ज्यादा बातें न बना . पहले नहीं पता था क माँ बेटे को डिस्टर्ब न करूँ अब आ गयी है तो बैठ जा इधर hi.

कामिनी ममी : वैसे दीदी अमित अब बड़ा हो गया है

गौरी ममी : क्या मतलब ?

कामिनी ममी : मतलब दीदी छाती से लगाने क लिए जल्द hi नंगे मेहमान आने वाले हैं अब अमित को आज़ाद कर दीजिये .

कामिनी ममी ने इंदिरेक्ट्ली गौरी ममी को बहुत बड़ी बात कह दी थी जिसे सुन कर गौरी ममी हड़बड़ा गयी.

गौरी ममी: तात तट तुझे क्या ? मेरा बीटा है और इसे प्यार करने क लिए मुझे किसी की परमिशन नहीं चाहिए.

कामिनी ममी : अब क्या सारा प्यार आप hi करेंगी ? यद् है न मैंने कहा था क इस बार अमित क पास मैं सोऊंगी .

गौरी ममी : तू भी यहीं सजा पर मैं इसे छोड़ कर नहीं जाने वाली .

कामिनी ममी : दीदी ये गलत है आपने वडा किया था

अमित : माँ ने वडा किया है तो उनका बीटा उनका वडा ज़रूर पूरा करेगा . माँ आप जाओ आज बाबा क पास मैं आपका वडा टूटने नहीं दूंगा

गौरी ममी : पर

अमित : आपने वडा किया था न ? अब मुझे पूरा करने दीजिये. वैसे भी कल राखी हैं मैं तो यही हूँ.

गौरी ममी : ाचा ठीक है पर यद् रखना अगली बार तू सिर्फ मेरे साथ hi रहेगा.

गौरी ममी नाराज़गी दिखती कामिनी ममी को गुस्से से देखती चली गयी. मगर कामिनी ममी उनके ऐसा करने से हसने लगी क्यों की गौरी ममी छोटे बच्चों की तरह कर रही थी.

कामिनी ममी : तो सुना है शहर में भी झंडे गाड़ कर आये हो कुश्ती में . तुम्हे तो आज इनाम देना बनता है . बोलो क्या चाहिए?

अमित : मुझे तो आप hi चाहिए पूरी की पूरी

कामिनी ममी : वो तो बिना कहे hi मैं तुम्हारी हूँ. पर तुम्हे इनाम तो मैं ज़रूर दूँगी. आज पीछे से करते हैं .

कामिनी ममी की बात का मतलब समझ कर मैं खुश हो गया और एक हाथ उनकी गांड पर ले जाकर मैंने उनकी गांड को मसल दिया.

कामिनी ममी : आआह्ह्ह्हह ककक रुको अभी . पहले सबको सुला दूँ फिर आती हूँ. तुम्हारे लिए गरम दूध लेकर आयी . आज मुझे सोने मत देना .

इतना कह कर कामिनी ममी नशीली ऐडा से देखती हुई वापिस चली गयी.

गौरी : ऐ जी . सुनते हो . नाराज़ हो क्या मुझसे ? 4 महीने होने को आये आप मुझे हाथ भी नहीं लगा रहे. मैंने क्या कर दिया है ऐसा जिसकी मुझे सजा दे रहे हो आप? पहले तो हफ्ते में एक आध बार प्यार कर लेते थे अब तो महीनो हो गए. अगर आप उस बात से नाराज़ हैं तो ......

विजय : ये तुम कैसी बातें कर रही हो ? उसमे तुम्हारी क्या गलती थी जो मैं तुमसे नाराज़ होऊंगा. वो सब भगवन की मर्ज़ी थी न तुम गलत थी न अमित. रही बात प्यार करने की तो मैं हमेशा करता रहूँगा तुमसे बस अब वो सब करने को दिल नहीं करता मगर उसकी भी वजह है.

गौरी : अगर आप नाराज़ नहीं तो इसकी क्या वजह है?

विजय : देखो गौरी अब इस उम्र में ये सब मुझे ाचा नहीं लगता पहले भी तुम्हारी ख़ुशी क लिए मैं तुम्हारे साथ कभी कभार कर लिया करता था मगर सचाई तो ये है इस उम्र में लोग सन्यास ले लेते हैं. दूसरी वजह ये है क मैं नहीं चाहता तुम्हारे पेट में जो बचा पल रहा है उसमे कोई कमी रह जाये.

गौरी : ???????

विजय : मैं ठीक कह रहा हूँ. इतने साल से मैं तुम्हे माँ नहीं बना पाया और डॉ ने भी तो बताया क मेरे बीज में hi कमी है. ऐसे में अगर तुम्हारे अंदर मेरा पानी गिरेगा तो हो सकता उसका गलत असर पद जाये और दोनों क पानी ( अमित और विजय ) मिलने से बचे क विकास में कोई कमी आ जाये. क्या तुम चाहोगी क तुम्हारे बचे में किसी तरह की कोई कमी हो ? इसी लिए मैं तुम्हारे साथ वो सब नहीं करना चाहता जब तक क तुम माँ नहीं बन जाती.

गौरी को विजय की ये तर्क पूर्ण बातें सही लगी . उसे भी सही लगा क विजय का पानी अगर अमित क पानी से मिल गया तो सच में hi कहीं बचे में कमी न रह जाये . इतने सैलून बाद वो माँ बनने वाली थी तो भला वो ये रिस्क कैसे ले सकती थी. मगर ये भी सच था क वो प्यार क लिए कब से तरस रही थी और जब से गौरी को गर्भ ठहरा था तब से उसके अंदर बदलाव आने शुरू हो गए थे. गौरी को अब पति क प्यार की ज्यादा ज़रूरत महसूस होने लगी थी ये बात वो खुद भी नहीं समझ प् रही थी. जब से अमित क साथ उसने नाराज़गी ख़तम की थी तब से उसका दिल अमित क पास रहने को hi करता था मगर उसके शहर में रहने क कारन वो मजबूर थी. इसी लिए तो जब वो अत तो गौरी उसके साथ hi रहना चाहती थी हर पल पर आज कामिनी ने जब उसे वेड का यद् करवा कर खुद अमित क साथ रुक गयी तो गौरी को मन hi मन उस पर बड़ा गुस्सा आया था . अमित ने खुद hi वडा पूरा करने की बात की तो गौरी मन मर क रह गयी . गौरी पहले से भी ज्यादा अमित क पास रहने की कोशिश करने लगी थी इसे शायद वो अपनी ममता या प्रायश्चित समझ रही हो पर कहीं न कहीं इसका सम्बन्ध गौरी क पेट में पलने वाले अमित क बीज से भी था. हो भी क्यों न जिसके बीज से फसल बन रही थी उसका असर तो होगा hi. जो बचा अंदर तैयार हो रहा था वो अपने बाप का प्यार भी चाहता था माँ क साथ. न चाहते हुए भी गौरी अमित की तरफ उसी तरह खींची चली जा रही थी जैसे एक गर्भवती औरत अपने पति की तरफ . फरक बस इतना था क उसे इस बात का एहसास नहीं हो प् रहा था. इसी लिए तो आज भी जब उस इ अमित को गले लगाया था तो अनजाने में hi उसे अपनी छाती से कास क लगा लिया था और इस बात से उसे कितना सुख मिला था. दीपिका क साथ भी बात करते हुए उसे उसकी बातों पर गुस्सा आने की बजाये अमित का नाम लेकर की गयी दीपिका की बातें कहीं न कहीं अछि hi लगी थी. विजय से आगे और कोई बात न करते हुए वो भी आराम से बीएड पर लेट गयी. विजय ने बीएड क सुर्नामे पड़ा दूध का गिलास उठा कर पि लिया और गौरी को भी पीने को कहा पर उसने बाद में पिने का कहा. विजय को दूध पिटे hi बहुत ज़ोरों की नींद आ गयी और उसने गौरी को बत्ती बुझाने का कह दिया. गौरी ने दूध पिने की बजाये लाइट बुझा दी और अपनी जगह लेट गयी. गौरी क मन में बेचैनी सी हो रही थी और उसका दिल बार बार अमित क पास जाने को हो रहा था पर आज तो कामिनी अमित क पास सोने वाली थी. जाने कितनी देर तक गौरी करवट बदलती रही अँधेरे में. जब आधी रत बीत जाने पर भी उसे नींद नहीं आयी तो उसने थान लिया क कामिनी कुछ भी कहे पर वो अमित क पास hi सोयेगी. अमित को सीने से लगा कर hi उसे नींद आएगी बस यही सोच कर वो बिना आवाज़ किये दरवाज़ा लगाती हुई अमित क कमरे की तरफ बाद चली.

‘ आआह्ह्ह्हह माआआआ कितना बड़ा है ये मुसल जाएं hi ले लेता है. कक्कक्क्स आआअह्ह्ह्ह ज़रा धीरे दाल अभी ये इसे झेलने क काबिल नहीं हुई है उईईईईई माआआ ‘

कामिनी बीएड पर हाथ रख कर घोड़ी बानी हुई थी और अमित पीछे से उसकी गांड में अपना मुसल तेल से भिगो कर धीरे धीरे अंदर दाल रहा था. पहले भी वो कामिनी की गांड मर चूका था पर कामिनी की बात सही थी क उसकी गांड अभी अमित का लैंड झेलने क काबिल नहीं हुई थी. अमित ने मन भी किया था पर कामिनी तो जैसे जिस पर hi अदि थी आज उसे इनाम देने को. 2 बार छूट का पानी निकलने क बाद अब अमित कामिनी की गांड मर रहा था. कमरे में फैली दूधिया रौशनी के कामिनी का गोरा बदन दमक रहा था. दोनों आराम से बिना किसी टेंशन क अपना खेल मस्ती से खेल रहे थे क्यूंकि किसी की भी परवाह नहीं थी. कामिनी सबको दूध में नींद की गोलियां मिला कर दे आयी थी और सब लोग कब क सो चुके थे पूरे घर में इस वक़्त अँधेरा था सिर्फ अमित क कमरे को छोड़ कर जहाँ इस वक़्त दो ो क बिच ज़बरदस्त मैच चल रहा था और दोनों एक दूसरे पर जीत हासिल करने क लिए लगे हुए थे.

अमित : मैंने तो पहले hi कहा था क रहने दो पर तुम हो क मानती नहीं. अब तुम्हारे पेट में मेरा बचा है उसकी भी तो परवाह करनी है न.

कामिनी : वो मुझे तुमसे ज्यादा परवाह है उसकी. दीपिका ने कहा था क अभी 15-20 दिन मैं और कर सकती हूँ तुम्हारे साथ . बस ज्यादा ज़ोर से झटके नहीं मरना. वैसे क्या ऐसा नहीं हो सकता क तुम कुछ दिन कॉलेज से छुट्टी ले कर घर hi रहलो या फिर मुझे अपने साथ शहर ले चलो. मैं चाहती हूँ क ये 15-20 दिन मैं रोज़ तुम्हारे साथ प्यार करूँ उसके बाद तो 6-7 महीने मुझे इसके लिए तड़पना पड़ेगा. आअह्ह्ह्ह माआ ये हर बार पहले से बड़ा hi लगता है क्या करते हो कक्कक्क्स .

अमित : ये तो वैसे hi है तुम ज्यादा टाइट हो रही हो. खुद पर कण्ट्रोल करना सीखो जैसे दीपिका ने किया हुआ है. तुम्हे पता है न क मैं ऐसा नहीं कर सकता और शहर कैसे लेकर जॉन तुम्हे दीपिका भी तो अभी टाइम आने वाला होगा ऐसे में तुम्हे यहीं रहना होगा.

कामिनी : आअह्ह्ह्ह उम्मम्मम कक्कक्क्स मुझे उतना प्यार कहाँ दिया तुमने . दीपिका को तो खूब प्यार किया है तुमने मेरी बरी तो तुम पहले दीदी की वजह से हम दोनों से दूर हो गए थे और उसके बाद कॉलेज. मेरे साथ तुम इंसाफ नहीं कर रहे . क्या मैं तुम्हे दीपिका से काम प्यार करती हूँ ?

अमित : ऐसी बात नहीं है . मुझे पता है तुम भी मुझे उतना hi प्यार करती हो और मुझे इस बात पर कोई शक नहीं है. पर मेरी भी तो मज़बूरी समझो थोड़ी सी. तुम चिंता न करो अगली बार तुम्हे भी दीपिका क बराबर hi प्यार करूँगा ये वडा है तुमसे अब खुश.

कामिनी : हम्म्म अब ज़रा ज़ोर से करो कक्कक्स अब तो पूरा चला गया है आअह्ह्ह्हह ऐसे hi शाबाश उम्मम्मम आआअह्ह्ह

दो ो मस्त हो कर चुदाई करने लगे इस बात से बेखबर क उनकी बातें कोई और भी सुन रहा है.

‘आइये दीदी कितने दिनों बाद आयी हैं आप , वह आज तो नैना भी साथ में है . ‘

रजनी मौसी और नैना दीदी क घर में प्रवेश करते hi गौरी ममी उनका स्वागत करने लगी.

‘ हम भी हैं भाई लाइन में ‘

ये आवाज़ सुनती hi पीछे देखा तो रीता मौसी भी आ गयी थी और उनके साथ बहा दीदी और करुणा दीदी भी थी और उनके पीछे दिव्या मौसी और राधा भी.

आज राखी थी तो सब टाइम से तैयार हो गए थे क्यूंकि आज तीनो बहने राखी बांधने आने वाली थी. तीनो मां भी घर पर hi थे और इस वक़्त सब आँगन में बैठ कर जैसे अपनी बहनो का hi इंतज़ार कर रहे थे. सबके आते hi घर का माहौल hi बदल गया , सब एक दूसरे से गले मिलने लगे . आज सब ने अचे कपडे पहने थे और खास तैयार हुए थे. हमारी तरह मौसियां और मेरी बहने भी खास तौर पर तैयार हो कर hi आई थी. मैंने आगे बाद कर रजनी मौसी क पाऊँ छुए और उन्होंने ने मुझे आशीर्वाद दिया फिर रीता मौसी क पाऊँ छूने लगा तो उन्होंने मुझे झुकते हुए hi अपने सीने से लगा लिया और मेरा मुँह उनकी बड़ी नदी छातियों में समां गया. रीता मौसी ने अछि तरह मेरा चेहरा अपनी छातियों में दबाकर रगड़ा. रीता मौसी ने मुझे अपनी छाती से रगड़ कर छोड़ दिया और मेरे पथ पर किश की . ये सब मौसी ने इतनी जल्दी किया था क किसी ने नोटिस भी नहीं किया होगा पर मैं उनके ऐसा करने से अंदर तक हिल गया था . मैंने जब रीता मौसी की तरफ देखा तो वो एक कामुक मुस्कान दे रही थी.

रीता मौसी : कितना प्यारा लग रहा है मेरा बीटा . उसके दूँ क बाद तू आया क्यों नहीं ?

अमित : आपको तो पता है मौसी संडे को घर भी तो आना होता है.

रीता मौसी क बाद मैंने दिव्या मौसी क पाऊँ छूने की कोशिश की तो वो बिना आशीर्वाद दिए आगे बाद गयी. पर मैंने उनके इस बर्ताव पर गुस्सा नहीं किया. पिच hi राधा कड़ी थी उसने भी अपनी माँ का ये सलूक देख लिया था और उसने जल्दी से मेरा हाथ थम क्या क कहीं मैं उसकी माँ की इस रवैये पर गुस्सा न हो जॉन

राधा : कैसे हो ?

अमित : मैं ठीक हूँ वैसे आज तुम बहुत प्यारी लग रही हो.

राधा इस वक्त पिंक सूट में बहुत hi प्यारी लग रही थी और उसका गोरा गुलाबी रंग भी जैसे सूट से मैच हो रहा था. मेरे मुँह से तारीफ सुन कर उसके चेहरे पर लाली कुछ ज्यादा हो बाद गयी और वो शर्मा गयी.

नैना : हम भी यहीं है एक नज़र हम पर भी तो मार्लो.

मैंने नैना दीदी की आवाज़ सुन कर उनकी तरफ देखा तो वो अपनी कमर पथ रख कर नकली गुस्सा दिखा रही थी. उनके साथ करुणा दीदी भी वैसे hi कड़ी थी.

अमित : आप वहां क्या कर रही हैं क्या मुझसे नहीं मिलेंगी ?

मैं नैना और करुणा दीदी से मिलने क लिए आगे बड़ा तो हाथ मिलाने की बजाये नैना दीदी ने मुझे गले लगा लिया. देखने वाले सोच रहे होंगे क भाई बहिन में कितना प्यार है मगर नाना दीदी तो लवर की तरह मुझसे मिल रही थी इतने दिनों बाद हम मिले थे तो वो अपना प्यार ज़ाहिर करती हुई मुझसे ऐसे चिपक रही थी जैसे सांप चन्दन से लिपट ते हैं. नैना दीदी ने ऐसे मुझे ऐसे कास क गले लगाया क मुझे अपने सीने पर उनके नरम मुलायम बूब्स अछि तरह मुझे अपने सीने पर महसूस हो रहे थे. दीदी ने मेरे कण की लो को चूम लिया जिससे मेरे शरीर में सिहरन सी दौड़ गयी.

नैना दीदी : तुम्हे ज़रा भी मेरा ख्याल नहीं अत कितना तड़पते हो? आज मैं तुम्हे नहीं छोड़ने वाली.

करुणा दीदी : दीदी मुझे भी तो मिलने दो अपने भाई से क सारा प्यार आप hi दिखाएंगी

करुणा दीदी की बात सुन कर नैना दीदी ने मुझे छोड़ा और फिर नैना दीदी की तरह hi करुणा दीदी भी मुझसे लिपट गयी और मेरी गर्दन पर किस करती हुई बोली

करुणा दीदी : आज राखी पर मुझे तुमसे स्पेशल गिफ्ट चाहिए . तुम्हारा प्यार

इतना कह कर करुणा दीदी पीछे हैट गयी मगर मुझे दोनों ने सोच में दाल दिया था क ये दोनों करना क्या चाहती हैं . सबके होते हुए भी ये दोनों इस तरह मुझसे चिपक रही हैं और उनके कहने का क्या अर्थ है ? मैं सोच hi रहा था क नेहा दीदी भी आगे आयी और मुझसे गले लग कर मिली मगर वो एक बहिन की तरह hi मुझे गले मिली.

नेहा दीदी : कैसा है मेरा प्यारा भाई ? चल आ तेरी आरती उतरूं आज तो तेरा दिन है.

उसके बाद मेरी तीनो मौसियां ने तीनो मां को एक साथ बिठा लिया और उनको तिलक लगा कर राखी बांधने लगी. मुझे भी मौसी ने साथ hi बैठने को कहा और नेहा दीदी ने मुहे तिलक लगा कर राखी बंधी और मुँह मीठा करवाया.

रजनी मौसी : नैना तुम भी बांधो राखी और ये निधि की भी बांध देना . वो तो आ नहीं पायी ार उसने अपने भाई क लिए स्पेशल राखी भेजी है.

अमित : ये क्या मौसी काम से काम आज तो आ जाती दीदी.

रजनी मौसी : बीटा उसका तो बड़ा दिल था पर ऑफिस में कोई ज़रूरी काम था इस लिए नहीं आ सकीय . उसने मुझे तुझसे सॉरी बोलने को कहा था वो तुम्हे बहुत प्यार करती है. चल नैना बांधो राखी.

नैना दीदी : हम दोनों अपने भाई अपने तरीके से स्पेशल राखी बांधेंगी क्यों करुणा ?

करुणा दीदी : और नहीं तो क्या , आज स्पेशल दिन है तो ये भी स्पेशल होना चाहिए.

नैना दीदी : चलो अमित हम तुम्हे तुम्हारे कमरे में hi राखी बांधेंगी चलो

इतना कह कर बड़ी चालाकी से दोनों मुझे खींचती हुई मेरे कमरे में ले आयी और पलंग पर बिठा दिया. करुणा दीदी दरवाज़े पर कड़ी हो गयी और नैना दीदी ने मुझ पर झपट पड़ी.

नैना दीदी : अब तुम मेरे भाई नहीं मेरे बर्फ हो तो मैं कैसे राखी बांध सकती हूँ तुम्हे मगर आज मौका मिला है तो फायदा उठाना बनता hi है.

इतना कह कर नैना दीदी ने मेरा सर दोनों हाथों से पकड़ा और अपने होंठ मेरे होंठों से लगाकर किश करने लगी. नैना दीदी मुझ पर हावी हो रही थी वो तो जंगली बिल्ली की तरह मुझ पर टूट पड़ी थी . किश करते हुए मुझे बीएड पर गिरा कर मेरे ऊपर चढ़ गयी. मैं भी उनका साथ देने लगा और मेरे हाथ अपने आप उनके बदन पर रेंगने लगे. मैंने दोनों हाथों से उनके नरम मुलायम चूतड़ दबाने शुरू कर दिए. नैना दीदी क होंठो का रास पिटे पिटे मैंने तो मदहोश हो गया था. दरवाज़े पर करुणा दीदी कड़ी थी निगरानी क लिए शायद दोनों पहले hi प्लान कर क आयी थे ये सब. 10 मिनट्स तक ज़बरदस्त तरीके से किश करने क बाद करुणा दीदी ने नैना दीदी को मेरे ऊपर से हटा दिया.

करुणा दीदी : अब मेरी बरी है आप ध्यान रखो.

नैना दीदी का चेहरा देखने लायक था उनके चेहरे पर एक एक गुस्सा आ गया था जैसे उनसे उनकी मन पसंद चीज़ चीन ली हो करुणा दीदी ने. पर अगले hi पल वो उठ कर दरवाज़े पर चली गयी. मैं अभी उठने hi लगा था क करुणा दीदी मेरे ऊपर गिर पड़ी और नैना दीदी की तरह वो भी मुझे वाइल्ड किश करने लगी साथ hi वो मेरी कमर क दो ो तरफ घुटने कर क अपनी छूट मेरे लैंड क ऊपर रगड़ने लगी. मैं भी उनका साथ देने लगा और उनकी गांड मसलने लगा. मेरा एक हाथ करुणा दीदी ने खुद hi पकड़ा कर अपने बूब्स पर रख दिया . वो मुझसे अपने बूब्स मसलवाना चाहती थी तो मैं भला कैसे उनको इंकार करता आज तो वैसे भी राखी है . मैंने अपनी बड़ी बहिन को खुश करने क लिए उसके कच्चे आम मसलने शुरू कर दिए.

नैना दीदी : जल्दी करो नेहा आ रही है

नैना दीदी की बात सुनते hi करुणा दीदी झट से मेरे ऊपर से उठ गयी और हम दोनों ने अपनी हालत ठीक की. नेहा दीदी कमरे में आ गयी. उनके सामने नैना दीदी ने मुझे तिलक लगाया और एक फ्रेंडशिप बंद मुझे बांध दिया . करुणा दीदी ने भी ऐसा hi किया .

नेहा दीदी : ये क्या तुम दोनों ने राखी क्यों नहीं बंधी ?

नैना दीदी : वो सब ओल्ड फैशन है . हम नए ज़माने की हैं तो हम अपने तरीके से ये बांध दिया है. वैसे भी अमित हमारा भाई काम दोस्त ज्यादा है क्यों करुणा

करुणा दीदी : बिलकुल ठीक कहा दीदी आपने . मैं तो अमित को अपना बर्फ बना कर अपनी सहेलियों से मिलवाउंगी देख लेना कैसे जलती हैं सब इसे देख कर, बिलकुल हीरो लगता है ये

नेहा दीदी : ये तुम क्या कह रही हो ? वो हमारा भाई है.

नैना दीदी : भाई है तो क्या हुआ ? इसकी सहेलियों को थोड़ा hi पता होगा ये . अमित की पर्सनालिटी को देख कर सब जलेंगी करुणा से. मैं खुद ऐसा hi करने वाली हूँ. वैसे भी हमारा जो रिश्ता है वो तो वैसे hi रहेगा . इससे करुणा अपनी सहेलियों में फेमस हो जाएगी और क्या पता हमारे भाई क लिए कोई गफ hi मिल जाये.

करुणा दीदी : इसे तो सब से खूबसूरत लड़की मिलेगी देख लेना. चल अब हमारा गिफ्ट कहाँ हैं दो हमें जल्दी.

नेहा दीदी : काम से काम मुँह तो मीठा करवा दो इसका .

नैना दीदी : वो तो हमने करवा भी दिया

नेहा दीदी : कब करवाया?

नैना दीदी : मेरा मतलब है हमारा भाई इतना स्वीट है क इसे मीठे की क्या ज़रूरत है.

नेहा दीदी : ऐसा नहीं होता . जाओ करुणा मिठाई ले कर आओ.

राधा : मैं ले आयी हूँ

दरवाज़े पर राधा कड़ी थी मिठाई का डिब्बा लिए. राधा चल कर हमारे पास आयी तो नेहा दीदी ने उसके हाथ से डिब्बा ले कर मुझे मिठाई खिलाई उसके साथ hi नैना दीदी और करुणा दीदी ने भी मेरा मुँह मीठा करवाया. राधा अभी भी पीछे कड़ी थी . मैंने उसकी तरफ देखा ये जानने क लिए क्या वो मुझे राखी बंधेगी. आज तक उसने मुझे कभी राखी माहि बंधी थी क्यूंकि दिव्या मौसी तो उसे मेरे पास छोड़ टी hi नहीं थी.

नेहा दीदी : राधा तू नहीं बंधेगी राखी?

राधा : मैंने कहाँ बंधी है आज तक इसे राखी.

नेहा दीदी : आज बांध दे फिर . वैसे भी हम दोनों का ये कितना ख्याल रखता है.

राधा : मैं माँ से पूछ कर आती हूँ

राधा तो जैसे मुझे राखी बांधने की बात से hi नाराज़ हो गयी थी मगर उसने कुछ कहा नहीं और बहाना बना कर निचे चली गयी. अगर वो मुझे राखी बांधने नहीं आयी थी तो वो मेरे कमरे में क्यों आयी थी ? क्या वो मुझे भाई नहीं मानती या फिर वो मौसी की वजह से मुझे राखी नहीं बांधना चाहती? मैं ये सोचने लगा तो फिर एक बार करुणा दीदी बोली

करुणा दीदी : अब हमें हमारा गिफ्ट दो

मैंने अपनी जेब से 500-500 क नोट निकले और तीनो को एक एक दे दिया.

नैना दीदी : मुझे पैसे नहीं चाहिए

अमित : तो क्या चाहिए?

नैना दीदी : वो तू जब घर आएगा तो बता दूंगी

करुणा दीदी : मुझे भी नहीं चाहिए पैसे . मैं भी वही गिफ्ट लूंगी जो नैना दीदी लेने वाली हैं.

इतना कह कर करुणा दीदी ने मेरे लैंड की तरफ देखा तो मैं उनकी बात का मतलब समझ कर हैरान हो गया.

नेहा दीदी : मुझे भी ये नहीं चाहिए.

अमित : आप तो रख लो इसे

नेहा दीदी : मुझे तो तूने पहले इतना ाचा गिफ्ट दे दिया है.

करुणा / नैना : कैसा गिफ्ट?

नेहा दीदी : इतना प्यार जो करता है मेरा भाई मुझे उसके आगे सब गिफ्ट फ़ैल हैं.

अमित : दीदी अगर आप ये नहीं रखेंगी तो मुझे ाचा नहीं लगेगा प्लीज रख लो इसे और आप दोनों भी छुओ चाप रख लो वर्ण कोई गिफ्ट नहीं मिलने वाला.

तीनो ने मेरी बात मानते हुए पैसे रख लिए. नैना और करुणा दीदी नीचे चली गयी शायद वो नेहा दीदी की वजह से गयी होंगी. दोनों क जाते hi नेहा दीदी ने मुझे गले लगा लिया. नेहा दीदी हिचकियाँ लेने लगी और मुझे अपनी गर्दन क पास गीला गीला महसूस हुआ. मुझे समझने में देर नहीं लगी क दीदी रो रही है मैंने उनको खुद से अलग किया और देखा तो वो सचमुच रो रही थी. मैंने उनके आंसू पोछते हुए पुछा.

अमित : आप रो क्यों रहीं हैं दीदी ? क्या मुझसे कोई गलती हो गयी? प्लीज चुप हो जाइये , मुझे बताइये बात क्या है.

नेहा दीदी : तू इतना प्यार करता है मुझसे . तू मेरी माँ क पेट से पैदा क्यों नहीं हुआ? मैं कितनी खुशनसीब हूँ क मुझे तेरे जैसा भाई मिला. भगवन हर जनम में मुझे तेरी बहिन hi बनाये.

अमित : दीदी प्लीज रोना बंद करो मुझे आपकी आँखों में आंसू बिलकुल भी अचे नहीं लगते. प्लीज आप रोना बंद करो. मैं आपका भाई hi हूँ तो क्या हुआ हम दोनों एक माँ क पेट से नहीं पैदा हुए? हम दोनों की माँ तो एक पेट से पैदा हुई थी न. इस नाते हमारा खून का रिश्ता हुआ न? अब बताइये आपको रोना क्यों आ रहा है?

नेहा दीदी : तेरा प्यार देख कर रोना आ रहा है. तुमने कैसे मेरे लिए उन बदमाशों को सजा दी. ऐसा भाई तो हर बहिन चाहती है .

अमित : बस इतनी सी बात पर आप रो रही हैं. आपने मुझे रोका नहीं होता तो उन दोनों को घसीट कर लता आपके पैरों पर गिर कर माफ़ी मांगने क लिए. अब आओ चुप रहिये आपकी आँखों क ये आंसू मुझे बहुत दुःख देते हैं इसी लिए तो मैंने उन लोगों को सीधा किया. अब आप क्या चाहती हैं क्या मैं खुद को भी सजा दूँ क्यूंकि आज मेरी वजह से इन आँखों में आंसू हैं?

नेहा दीदी : चुप मर खायेगा मेरे से. ये तो ख़ुशी क आंसू हैं. तू हर जनम में मेरा भाई hi बनना.

अमित : मैं तो इस जनम में भी आपका भाई hi हूँ . चलिए नीचे चलते हैं.

उसके बाद सब ने मिल कर खाना खाया . आज तो घर में खुशियों का माहौल था. गौरी ममी और कामिनी ममी तो किचन में लगी हुई थी बाकि सब मिलकर हसीं मज़ाक कर रहे थे . सुबह का नाश्ता खा कर बड़े लोग अपनी महफ़िल जमा कर बैठ गए और मैं अपनी बहनो क साथ मेरे कमरे में. राधा तो काम hi बात करती थी वो बस मुझे hi देखती रहती और जब मेरी नज़र उससे मिलती तो वो शर्मा कर नज़रें झुका लेती. नैना और करुणा दीदी तो खूब मज़ाक कर रही थी जबकि नेहा दीदी भी आदत क अनुसार काम hi बोल रही थी मगर वो मेरे साथ hi बैठी रही जैसे वो मुझे खुद से अलग नहीं करना चाहती हो.

दोपहर का खाना खाने क बाद दिव्या मौसी ने वापिस जाने का कहा तो मां उन्हें शाम तक रुकने को कहने लगे मगर वो नहीं मन रही थी तो मैंने भी कहा क मैं भी शहर चलता हूँ उनके साथ क्यूंकि मैंने निधि दीदी की भेजी हुई राखी नहीं बंधवाई थी . मैं उनके hi हाथों राखी बंधवाना चाहता था वैसे भी मंजू म से आज मिलना ज़रूरी था. उन्होंने चाहे मुझे ाँ फ़ोन नहीं किया था पर उनको मेरा इंतज़ार तो होगा hi. मेरे जाने की बात से रजनी मौसी रीता मौसी नैना करुणा नेहा सब तैयार हो गए जाने क लिए और फिर मां उनकी बात मानते हुए हम लोगो को बस में बिठाने ले गए.

दोपहर जा वक़्त था पर राखी की वजह से बस में भीड़ हो गयी . हर कोई राखी बांधने और बंधवाने आ जा रहा था. लेडीज को देख कर कुछ आदमी अपनी जगह से खड़े हो गए कंडक्टर ने भी हमारी मदद की. हम लोग 8 थे और सीट्स 6 थी. मैंने बाकियों को बैठने को कहा और उनके पास खड़ा हो गया. अब किसी एक को खड़ा होना था तो दिव्या मौसी कड़ी होने लगी . रीता मौसी बे उन्हें रोक दिया.

रीता मौसी : दिव्या तू यहाँ बैठ मैं कड़ी हो जाती हूँ.

दिव्या मौसी : नहीं दीदी आप बैठो मैं हूँ न

नैना दीदी : आप दोनों बैठिये मैं कड़ी हो जाती हूँ

रीता मौसी : तुम चुप रहो . लड़कियों का ऐसे खड़ा होना ठीक नहीं. दिव्या तुम बैठ जाओ दीदी क साथ मैं कड़ी हो जाती हूँ अमित क साथ . अगर मैं थक गयी तो तुम्हे बता दूंगी.

मेरे साथ खड़ा रहना दिव्या मौसी को वैसे भी मंज़ूर कहाँ होता इस लिए वो बात मन कर बैठ गयी. रीता मौसी मेरे आगे कड़ी हो गयी और बस चल पड़ी. बस में भीड़ की वजह से जगह काम थी तो मैं न चाहते हुए भी मौसी क साथ चिपक गया. बस क सफर में काम से काम एक घंटा तो लग्न hi था क्यूंकि हर स्टॉप पर तो रूकती है बस. मौसी पहले आधी तिरछी कड़ी थी और जब बस चल पड़ी तो वो मेरी तरफ पीठ कर क कड़ी हो गयी. उनके आगे दायीं तरफ आगे पीछे 3-3 वाली सीट्स पर सब बैठी थी. पहले सीट पर नैना करुणा और नेहा दीदी पीछे वाली पर रजनी मौसी राधा और दिव्या मौसी . मैं छत पर लगी रोड पकड़ कर खड़ा था क मुझे अपने लैंड पर दबाव महसूस हुआ. मैंने नीचे देखा तो मौसी की गांड मेरे लैंड पर लगी हुई थी. मैंने मौसी को देखा तो वो आगे झुक कर रजनी मौसी और दिव्या मौसी से बात कर रही थी. मैंने खुद को पीछे करने की कोशिश की मगर पीछे भी जगह कहाँ थी. मौसी कभी एक पाऊँ पर अपना वजन डालती कभी दूसरे पर . उनके ऐसा करने से उनके चूतड़ हिलते और मेरे लैंड पर उनकी रगड़ लगने से मेरा लैंड अपनी औकात पर आने लगा. मौसी की गांड नरम थी और मेरा लैंड उनकी गांड से पहले भी मिल चूका था कपड़ों क ऊपर से hi इस लिए जल्दी hi वो खड़ा हो कर फिर से उनकी गांड से hello हए करने लगा.

रीता मौसी आराम से बातें कर रही थी जैसे उन्हें किसी बात की न परवाह थी न उन्हें मेरे लैंड का एहसास था. मौसी की गांड बार बार मेरे लैंड पर दबाव कभी काम करती कभी ज्यादा. मेरा लैंड पूरी तरह अकड़ गया था और कपडे फाड़ कर बहार आना चाहता था . न चाहते हुए भी मुझ पर नशा हावी होने लगा और मैंने अपनी तरफ से उनकी गांड पर दबाव देना शुरू कर दिया. रीता मौसी अभी भी झुकी हुई थी. मैंने ये सब पहले भी उनके साथ कर चूका था इस लिए मुझे पता था क वो गुस्सा नहीं होंगी तो मैंने अपनी कमर को धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू किया . इस बार रीता मौसी ने पीछे मुद कर मुझे देखा . उनके चेहरे पर मुस्कान थी जैसे वो एन्जॉय कर रही थी मेरे साथ . रीता मौसी ने मेरी आँखों में देखते हुए अपनी गांड मेरे लैंड पर दबायी . मुझे उनका इशारा मिल गया था . तभी बस ने ब्रेक लगायी और मैंने ज़ोर से अपना लैंड मौसी की गांड पर दबा दिया. मौसी ने खुद को संभाला और बस में और कुछ लोग चढ़ गए.

बस तो पहले hi भरी हुई थी . लोग खुद को एडजस्ट करते हुए जगह बनाने लगे और हमारी बायीं तरफ एक अधेड़ उम्र की औरत आ कर कड़ी हो गयी . उसने हमारी तरफ पीठ कर ली अब अब दोनों पूरे कवर हो गए थे. रीता मौसी थोड़ी झुकी होने क कारन उनकी गांड अछि तरह से बहार निकली हुई थी. अब मैंने भी बिना किसी क दर का मोके का फायदा उठाने की सोची क्यूंकि मौसी तो पहले hi सिग्नल दे चुकी थी. मैंने दाएं हाथ से रोड पकड़ा हुआ था और बयां हाथ मैंने नीचे ले जा कर रीता मौसी की कमर पर रख दिया. मौसी ने एक बार मुद कर मुझे देखा और थोड़ा और झुक गयी. मैंने मौसी सदी में से नंगे पेट पर अपना हाथ फिराया तो मौसी का नरम मिलायम पेट संकुचित सा हुआ. मैं मौसी क पेट पर हाथ फिरने लगा , क्या सॉफ्ट सॉफ्ट स्किन थी मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैंने पेट पर हाथ चलते हुए एक उंगली उनकी नाभि में घुसाई तो उन्होंने मुश्किल से अपने मुँह से निकल रही सिसकारी को रोका. फिर मैंने अपना हाथ उनके बड़े बड़े नरम चूतड़ पर रख दिया और एक बार मसल भी दिया. बड़े स्पंज से चूतड़ दबने का बाद फिर अपनी शकल में आ गए. मुझे उनके चूतड़ दबाने में इतना मज़ा आया क मैं बार बार उनके चूतड़ hi मसलने लगा जबकि मौसी अपनी गांड ऊपर निचे कर क मेरे लैंड पर रगड़ने लगी. हम दोनों की गर्मी बढ़ती जा रही थी. रीता मौसी रंग में आ गयी थी और अपनी गांड मेरे लैंड पर दबती ऊपर निचे करती रगड़ने लगी . आसपास क्या हो रहा है हमें कोई परवाह नहीं थी. मौसी कितना गरम हो गयी क उनकी थिरकन से मैं समझ गया क उनका काम होने वाला है. मैं भी उनको देखते हुए जोश में आ गया और मेरा हाथ कब उनके पेट को सहलाता हुआ उनके बड़े ामो तक पहुँच गया मुझे पता भी नहीं चला. ब्लाउज में कैसे हुए उनके बड़े बड़े नरम कबूतर मेरे हाथ में आ गए. ये तो ाचा था क मेरे हाथ क ऊपर उनकी सदी का पल्लू था. मगर मेरे ऐसा करने से मौसी खुद को रोक नहीं पायी और झटके लेते हुए उनका पानी निकलने लगा. अनजाने में hi उनके मुँह से सिसकी निकल गयी. मैंने जल्दी से अपना हाथ उनके बूब्स से हटा लिया.

रजनी मौसी : क्या हुआ रीता ? थक गयी हो क्या ?

रीता मौसी : नं नहीं दीद दीदी वो वो बस भीड़ की वजह से गर्मी लग रही है. देखो कितना पसीना आ रहा है.

दिव्या मौसी : दीदी आप मेरी जगह पर बैठ जाइये.

रीता मौसी : नहीं तुम बैठो अब तो बस पहुँचने वाले हैं

रीता मौसी खुद को सँभालने की पूरी कोशिश कर रही थी मगर पानी निकलने क बाद ुंकलनसे खड़ा नहीं हुआ जा रहा था. ऊपर से उनकी पेंटी और जंघे भी चिपचिप कर रही होंगी . रीता मौसी खुद को जैसे तैसे संभल रही थी उतने में बस रुक गयी. मैंने बहार देखा तो हम शहर पहुँच गए थे. सफर में एक घंटा लगने वाला था और मौसी क साथ मुझे पता hi नहीं लगा कब सफर ख़तम हो गया. एक एक कर क सब बस से उतरने लगे. बस से निकलते hi रीता मौसी पहले वाशरूम को भागी. किसी क्या मालूम क वो इतनी तेज़ी से क्यों गयी हैं ये तो बस मैं hi जनता था.

रजनी मौसी : अमित तुम हमारे साथ hi चलो घर.

अमित : मौसी जी आप चलिए मैं मोहित क घर से बाइक लेकर अत हूँ. निधि दीदी से राखी जो बंधवानी है.

रजनी मौसी : तो तूने बंधवाई नहीं राखी? चलो खुद hi बंधवा लेना आ कर. दिव्या तुम भी चलो हमारे साथ.

दिव्या मौसी : दीदी अभी घर जाना फिर किसी दिन आउंगी . आप भी चलिए हमारे साथ

रजनी मौसी : तुम्हे तो पता hi है कारन निधि और तेरे जीजा को भी देखना है .

इतने में रीता मौसी आ गयी

रजनी मौसी : तुम कहाँ भाग गयी थी ?

रीता मौसी : बस में खड़े खड़े बुरा हल हो गया था इस लिए वाशरूम गयी थी.

रीता मौसी ने चोर निगाह से मुझे एक बार देखा.

दिव्या मौसी : ाचा दीदी मैं चलती हूँ. चलो राधा

राधा एक बार सब से मिली और मुझे भी गहरी नज़रों से देखती हुई मौसी क साथ चली गयी.

रीता मौसी : तू तो आज हमारे साथ hi चल

करुणा दीदी : हाँ आज तू हमारे साथ hi चल.

अमित : मौसी अभी तो मैं घर जा रहा हूँ बाइक लेने फिर एक दो काम हैं और फिर निधि दीदी से रखीं बंधवानी है तो आज नहीं आ पौंग

रीता मौसी : दिन में न सही रत में तो आ सकता है न.

मौसी ने रत का ज़िकर करते हुए खास किस्म से आँखों से इशारा किया. मैं उनका मतलब समझ रहा था.

नैना दीदी : आज राटा ये हमारे यहाँ रुकेगा मौसी . दीदी से राखी बंधवाने आएगा तो हम क्या इसे ऐसे hi जाने देंगे.

रीता मौसी : ाचा ठीक है पर जल्दी hi तुम्हे हमारे घर आना होगा समझे! मैं तुम्हारा इंतज़ार करुँगी. इतना कह कर रीता मौसी नेहा दीदी और करुणा दीदी सब से मिल कर चले गए और फिर रजनी मौसी और नैना दीदी भी मुझे जल्दी आने का बोल कर निकल गए. मैं सीधा ऑटो पकड़ क मोहित क घर पहुंचा और आंटी को बता कर बाइक ले कर निकल गया अपनी मंज़िल की और.



भाई लोगो सभी रीडर क लिए एक खास रिक्वेस्ट है. अगर स्टोरी आपको पसंद आ रही है तो जवाब ज़रूर देना. मैं मंटा हूँ मैंने स्टोरी क स्टार्ट में आस्पेक्ट ‘ मैं मेरी फॅमिली और मेरा गाओं ‘ से लिया है क्यूंकि वो मुझे भी बहुत पसंद थी. मगर क्या मैं उसकी कॉपी लिख रहा हूँ ? अगर ये कॉपी hi लग रही है आपको तो प्लीज बताना . मैंने कोशिश की थी इसे अछि तरह पेश करने की अभी भी हमारे भाई इसे कॉपी पेस्ट hi कह रहे हैं.
 
अपडेट 101



उधर हमारे गाओं से निकलने क बाद घर पर भी बहुत कुछ हुआ. खाना खाने क बाद जब चाय वगैरह पि कर तीनो मां घर से निकल गए तो गौरी ममी ने दीपिका ममी और कामिनी ममी को अपने कमरे में बुलाया.

कामिनी : आपने बुलाया था दीदी ?

दीपिका : कुछ काम था दीदी ? क्या बात है ?

गौरी : ( गुस्से में ) ये सब क्या चल रहा है इस घर में? कब से ये गन्दा काम खेल खेला जा रहा है सबकी आँखों में धुल झोंक कर .

गौरी की बात और गुस्सा देख कर दो ो से हम गयी. आज तक दो ो में से किसी ने भी गौरी को इस रूप में नहीं देखा था न hi कभी उसकी ऊँची आवाज़ सुनी थी. पर आज एक नयी गौरी उनके सामने कड़ी थी जिसकी आँखें अंगारे बरसा रही थी. कामिनी तो दर से कम्पनी लगी उसे दर लगने लगा था क कहीं गौरी को उसके और अमित क बारे में पता तो नहीं चल गया. दीपिका शांत थी बस उसे थोड़ा दर ज़रूर था इस बात से क गौरी गुस्से में पता नहीं क्या कर बैठेगी.

गौरी : चुप क्यों हो तुम दोनों ? मुझे जवाब चाहिए. आखिर चल क्या रहा है इस घर में ?

कामिनी : आप किस बारे में बात कर रही हैं दीदी ?

गौरी : ाचा तो तुम चाहती हो मैं अपनी ज़ुबान से बोलूं. तो सुन मैं तुम्हारे और अमित क बीच चल रहे वासना क गंदे नाच की बात कर रही हूँ. अब बता ये सब क्या चल रहा है इस घर में. कब से ये सब हो रहा है? तुम दोनों को ज़रा भी शर्म नहीं आयी जो अपने पतियों क होते उसके साथ . छीन !! मुझे तो सोच क भी शर्म आ रही है. बचा है वो तुम दोनों का . माँ बेटे जैसा रिश्ता है उसके साथ फिर भी तुम दोनों. इतनी hi आग थी तो कोई बराबर का ढूंढ लेती वैसे क्या कमी रह गयी थी तुम दोनों क पतियों में जो उसके साथ मुँह कला किया. और वो भी उतना घटिया निकला. मैंने तो एक बार उसे माफ़ कर दिया था अनजाने में हुई गलती क कारन पर अब पता चला वो तो है hi ऐसा . मुझे जवाब चाहिए .

गौरी क इतना कहते hi जैसे बम दूर गया था. कामिनी ने तो रोना शुरू कर दिया. गौरी क जले कटे शब्दों ने उसके मन को तर तर कर दिया था. कामिनी तो एक पति व्रत औरत थी जिसने इतना सब होने क बाद भी अपने पति क साथ धोखा नहीं किया था. वो तो उसकी माँ बनने की चाहत ने उससे ये सब करवा दिया और वैसे भी अजय को तो सब पता hi था. दीपिका को भी दुःख हो रहा था. उसे अपने से ज्यादा अमित क लिए दुःख हो रहा था क गौरी उसे क्या समझ रही है जबकि उस की इसमें कोई भी गलती नहीं है. अमित ने तो उन दोनों पर एहसान किया था.

गौरी : अब मगर मच क आंसू मत बहाओ मुझे जवाब चाहिए. आखिर क्यों किया तुमने दोनों ने ये सब?

कामिनी तो रोये जा रही थी उससे तो कुछ बोले नहीं बन प् रहा था. मगर दीपिका शांत हो गयी थी जैसे उसे पहले hi पता था क ये सब होने वाला है. कामिनी को रोटा हुआ देख कर दीपिका से और बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने आगे बाद कर कामिनी को चुप करवाने की कोशिश की और उसे गले से लगा लिया.

दीपिका : शांत हो जाओ दीदी आप रो क्यों रही हैं. मैं बात करती हूँ न. दीदी को अभी कुछ पता नहीं है. आप चुप हो जाइये

गौरी : क्या पता नहीं है मुझे? क्या अब भी कोई बहाना बचा है तेरे पास? मैंने सब अपनी आँखों से देखा है. मुझे सच सुनने है कोई झूठ या बहाना नहीं.

दीपिका : सच सुन पाएंगी आप? क्यूंकि सच तो आपसे बर्दाश्त hi नहीं होता है. आप सच सुनाने को कह तो देती हैं और जब सच सामने अत है तो आप आप से बहार हो जाती हैं.

गौरी : तुम कहना क्या चाहती हो? साफ साफ बात करो ये पहेलियाँ न बुझाओ

दीपिका : आज अगर आप सच सुन्ना hi चाहती हैं तो तैयार हो जाइये

कामिनी : दीपिका नहीं

दीपिका : आप चुप रहिये दीदी आज इन्हे सच पता चलना hi चाहिए वर्ण ये हमेशा हम को और उस मासूम को गलत hi कहती रहेंगी

गौरी : वह ! मासूम !!

गौरी ने जैसे टैंक किया अमित को मासूम कहने पर

दीपिका : आप सच जानना चाहती हैं न तो पहले कसम खाइये क आप सच सुनने क बाद कोई गलत हरकत नहीं करेंगी.

गौरी : मैं क्यों ऐसा करने लगी?

दीपिका : आप कसम खाइये

गौरी : ठीक है मैं कसम कहती हूँ.

दीपिका : तो सुनिए. आप ने कल रत जो देखा वो कोई गन्दा खेल नहीं था वो प्यार था.

गौरी हैरान हो गयी दीपिका की इस बात पर . उसने तो सोचा था क वो अकेली जग रही है घर में ओर दीपिका ने उसे देख लिया था. मतलब दीपिका भी जग रही थी.

गौरी : प्यार कह कर प्यार का नाम बदनाम मत करो . वो सिर्फ वासना का खेल था.

दीपिका : अगर दीदी में वासना होती तो वो बहुत पहले hi ये सब किसी क भी साथ कर चुकी होती. आप ने क्या कहा था ‘ मुँह काला’ . हाँ तो वो मुँह कला किसी क भी साथ कर चुकी होती. मगर नहीं वो भी आप की तरह hi पति व्रत हैं. इसी लिए तो आज तक कभी किसी गैर मर्द की तरफ आँख उठा कर नहीं देखा.

गौरी : तुम कहना क्या चाहती हो की अजय में कोई कमी है? अगर ऐसा होता ते ये शादी क बाद प्रेग्नेंट कैसे हुई थी?

दीपिका : प्रेग्नेंट ? तो उसके बाद क्यों नहीं हुई?

मैं बत्ती हूँ जो आपको नहीं पता

कामिनी : दीपिका

दीपिका : आप चुप रहिये आज दीदी को सच बताना hi होगा. तो सुनिए दीदी क कामिनी दीदी दोबारा प्रेग्नेंट क्यों नहीं हुई थी. क्यों ये इतने साल अमित से नफरत करती रही.

उसके बाद दीपिका ने गौरी को कामिनी की साडी कहानी सुना दी अजय क नामर्द होने से लेकर अमित द्वारा प्रेग्नेंट होने तक. गौरी को अजय की सचाई नहीं पता थी और जब उसे पता चला क कैसे कामिनी इतने सैलून से सुहागन होते हुए भी विधवा की ज़िन्दगी जीती रही तो गौरी की आँखों से आंसू बहने लगे. कामिनी ने अमित क साथ सम्बन्ध क्यों बनाये तो उसे अमित का भी इसमें दोष नज़र नहीं आया. गौरी का दिल हमदर्दी से भर गया था ऐसे उसने आंसू बहा रही कामिनी को गले लगा लिया.

गौरी : तू क्या मुझे अपनी बहिन नहीं मानती जो इतने सैलून तक अपने अंदर ये ज़ख़्म छुपाये मर मर क जीती रही. तूने इतना सहा और कभी किसी को ज़ाहिर नहीं होने दिया . कितनी तकलीफ सही तूने और सी तक न की. मुझे माफ़ कर दे मेरी बहिन मैंने तुम्हे गलत समझा.

कामिनी रोये जा रही थी और गौरी उसे चुप करवाने की कोशिश के रही थी.

दीपिका : दीदी की सुन ली अब मेरी भी सुन लीजिये .

उसके बाद दीपिका ने गौरी को अपनी साडी कहानी बताई क कैसे वो मरने जा रही थी और कमलेश ने उसके साथ क्या कुछ किया कैसे अमित ने उसे सहारा दिया और अब वो उसे hi अपना पति मानती है.

दीपिका : मुझे कोई अफ़सोस नहीं है जो भी मैंने किया. मैं अमित से दिलो जान से मुहब्बत करती हूँ और अगर आप कहेंगी तो मैं घर भी छोड़ दूंगी हमेशा हमेशा क लिए पर मैं ये नहीं सुन सकती क अमित गलत है. उसने तो इस घर को जोड़ कर रखने क लिए हम सब की ख़ुशी क लिए सब किया. उसके प्यार और बलिदान को गाली देना मतलब भगवन को गली देना. मैं जानती हूँ आओ मुझे गलत समझेंगी पर मुझे उससे कोई फरक नहीं पड़ता मेरे लिए कमलेश उसी दिन पति नहीं रहा जब उसने मुझे मरने क लिए छोड़ दिया था . मेरे लिए मेरा पति अमित है और मैं हमेशा उसे प्यार करुँगी. मेरे पेट में उसी क प्यार की निशानी है और यकीनन कामिनी दीदी भी उसे वैसा hi प्यार करती हैं अब आप अपना फैसला सुना दीजिये.

गौरी : मुझे माफ़ कर दे छोटी. मैं बड़ी हो कर भी समझ नहीं पायी और तूने सब से छोटी हो कर भी सब समझ लिया. मैंने गुस्से में बहुत कुछ कह दिया तुम दोनों को मुझे माफ़ कार्डो. अमित को मैं गलत समझ रही थी पर अब सचाई सुन कर उसकी इज़्ज़त और भी बाद गयी है मेरे दिल में. उसने तुम दोनों को वो ख़ुशी दी है जिसकी तुम हक़दार थी. मेरा बीटा सच में बहुत ाचा है.

दीपिका : वो बहुत ाचा है दीदी. और देखना हमारे बचे भी उसके जैसे hi होंगे.

गौरी : काश उसने मेरे पेट से जनम लिया होता काश वो मेरा बीटा होता.

दीपिका : तो क्या हुआ उसने आपके पेट से जनम नहीं लिया तो भगवन ने चाहा तो आप की कोख से छोटा अमित जनम लेगा.

गौरी : ये तुम क्या कह रही हो?

दीपिका : मुझे सब पता है दीदी. अमित ने मुझे सब बता दिया था. आप नहीं जानती यात्रा से आने क बाद जब वो घर छोड़ कर चला जाना चाहता था. पता नहीं आपने उसे क्या कहा था पर वो पूरी तरह टूट गया था. अगर वो मजबूत न होता तो शायद आत्महत्या भी कर सकता था. मैंने उसे कैसे अपनी कसम दे कर रोका था ये मैं hi जानती हूँ. अगर वो चला जाता तो मैं भी ज़िंदा न रहती. उसने मुझे सब बताया था दीदी . जो भी हुआ था वो सिर्फ एक्सीडेंट था उसने कुछ भी जान बुझ कर नहीं किया था. पर आपने तो उसकी एक न सुनी . उसके बाद तो जैसे वो हमसे भी दूर होता गया. शुक्र है क आपने उसे माफ़ कर दिया वर्ण वो तो इस घर से नाता तोड़ चूका था.

गौरी : मुझसे गलती हो गयी थी छोटी मैं समझ hi नहीं पायी. पर मेरी वजह से वो घर छोड़ने वाला था ? अगर ऐसा हो जाता तो मैं कभी खुद को माफ़ नहीं करती.

दीपिका : अब सब ठीक है बस अब किसी की नज़र न लगे हमारे घर को. आप ने हम दोनों को माफ़ तो जार दिया है न?

गौरी : हाँ बिलकुल और तुम दो ो भी मुझे माफ़ कर दो. मैं तुम्हारी बड़ी बहिन हूँ न ? क्या तुम अपनी बड़ी बहिन को माफ़ नहीं करोगी?

कामिनी : ऐसा मत कहो दीदी . आप अपनी जगह सही थी अब आप ने हमें माफ़ कर क हमें नै ज़िन्दगी दी है.

गौरी : आने दो उसे शहर से वापिस. कान पकड़ कर तुम दोनों क पास hi बिठा दूंगी और कब तक दिल न भरे उसे वापिस मत जाने देना.

दीपिका : दीदी वैसे सच सच बताना क्या आपका दिल नहीं करता क अमित आपके पास रहे आपसे प्यार करे?

गौरी : मेरा दिल क्यों नहीं चाहेगा ? हर माँ अपने बेटे से प्यार करना चाहती है.

दीपिका : ऐसे नहीं . जैसे कामिनी दीदी और मैं करती हूँ

गौरी : ये तू क्या कह रही है दीपिका .

दीपिका : दीदी आपकी तरह हमने भी उसे बीटा hi समझा है हमेशा. पर अब उसे प्रेमिका की तरह प्यार करती हैं. आपने देख न दीदी किस तरह अमित से प्यार करती हैं. ये सब इस लिए क्यूंकि हमारे पेट में जो उसका अंश पल रहा है वो हमें उससे दूर रहने hi नहीं देता. हर वक़्त बस यही दिल करता है क वो पास रहे और प्यार करे. क्या आपके साथ ऐसा नहीं होता? आपके पेट में भी तो उसी का अंश है.

गौरी : नहीं मैं उसकी माँ हूँ और उसे बेटे की तरह hi प्यार करती हूँ.

कामिनी : दीदी दीपिका ठीक कह रही है. मैंने भी कई बार कोशिश की है क मैं उससे दूर रहूं पर खुद को रोक नहीं पति.

दीपिका : ऐसा इस लिए होता है क्यूंकि जब औरत पेट से हो जाती है तो उसकी कोख में जिस मदद का बीज होता है फिर हर वक़्त उसे उसी की तालाब रहती है. ये साइंस भी कहती है. आप मनो या न मनो पर कभी खुद से अकेले में ुए सवाल ज़रूर करना आपको जवाब मिल जायेगा.

गौरी : तुम अपना ज्ञान अपने पास रखो. वो मेरा बीटा है और बीटा hi रहेगा.

इसके बाद तीनो इधर उधर की बातें करती रही. दीपिका क मन से आज कितना बड़ा बोझ उतर गया था और कामिनी को भी अब किसी बात का दर नहीं था . मगर गौरी को तो जैसे दीपिका ने सोचने क लिए मजबूर कर दिया था. पिछले कई दिनों से जब से उसने अमित को माफ़ किया था. उसे हर वक़्त अमित की यद् आती रहती थी हर वक़्त उसका दिल अमित को देखने को होता था. वो तो समझती थी क ये उसका पश्चात्ताप है मगर आज दीपिका ने बताया था क ये सब उस बचे की वजह से है जो उसके पेट में पल रहा है जिसका बाप अमित है. गौरी जब अकेली अपने बीएड पर लेती थी तो रह रह कर दीपिका की बातें उसके दिमाग में घूमने लगती. गौरी खुद को समझने की कोशिश करती क अमित उसका बीटा है पर फिर दीपिका hi जैसे तारक करने लगी उसके दिमाग में क वो तो दामिनी का बीटा है तुमने तो बस पला है . गौरी जब ऑंखें बंद करती तो उसे रत का मंज़र यद् आने लगता जब अमित कामिनी को नंगी कर घोड़ी बना कर छोड़ रहा था. कामिनी की गांड में घुस रहा वो मोटा डंडा गौरी की आँखों क सामने नाचने लगा. कितना बड़ा था वो और कैसे कामिनी उसे अंदर ले रही थी. विजय क इलावा गौरी ने किसी मर्द का लैंड बही देखा था और विजय का लैंड अमित क लैंड से छोटा और पतला था. इतना बड़ा लैंड उसकी छूट में कैसे गया होगा ये बात सोचते hi उसका हाथ अपनी छूट पर चला गया होगा और मुँह से एक ऐसी की निकल गयी.

गौरी : उफ्फ्फ ये मैं क्या सोच रही हूँ. वो मेरा बीटा है . नहीं गौरी ये पाओ है . हे भगवन तू hi बचा मुझे मैं कहीं बहक न जॉन.

मोहित क घर से बाइक लेकर मैं सीधा मंजू म क घर पर गया. 4 बजने वाले थे इस टाइम तक तो शायद वो घर पर आ चुकी होंगी. घर क बहार कार कड़ी थी यानि क मम घर पर hi हैं. मैंने बाइक साइड में लगाई और बेल्ल बजायी मगर दरवाज़ा नहीं खुला . मैंने 3-4 बार बेल्ल बजायी तो अंदर से आवाज़ आयी रुको मैं आ रही हूँ. मम इतनी देर क्यों लगा रही हैं मैं ये सोचने लगा. तभी दरवाज़े क पीछे से मम की आवाज़ आयी.

मंजू म : कौन है ?

अमित : आपका भाई

मेरे इतना कहते hi झटके से दरवाज़ा खुला और मम ने मुझे गले लगा लिया. मम का बदन गिला था और उन्होंने गाउन पहना हुआ था यानि क मम बाथरूम में नाहा रही होंगी इसी लिए इतनी देर लग गयी. मैं मम क बदन से उठ रही खुशबु को अपनी साँसों में भर रहा था क मुझे एहसास हुआ मम रो रही हैं. ये क्या मम रोने क्यों लगी. मैंने मम को खुद से अलग करने की कोशिश की तो उन्होंने और भी कास क मुझे जकड लिया. मैंने मम क सर पर हाथ रखा और उनसे पूछा

अमित : आप रो रही हैं ? क्या हुआ आप रो क्यों रही हैं? क्या मुझसे कोई गलती हो गयी ?

मंजू म : कुछ मत कहो बस चुप रहो

हम दरवाज़े पर खड़े थे और मम इस तरह गाउन में भीगे बदन क साथ मुझसे चिपकी कड़ी थी अगर ऐसी हालत में कोई हमें देख लेता तो गलत समझ लेता इस लिए मैंने ऐसे hi मम को गले लगाए थोड़ा ऊपर उठा लिया और घर क अंदर आ कर दरवाज़े को लत मर कर बंद कर दिया. मम अभी भी वैसे hi मेरे साथ चिपकी हुई थी . बिलकुल किसी छोटी बची की तरह वो मेरे गले में बहन दाल कर लटकी हुई थी. मैं उन्हें ऐसे hi उठाये उनके कमरे में ले गया और बीएड पर बिठा दिया. मम अभी भी मुझे छोड़ नहीं रही थी पर मैंने उनकी बाँहों को अपने गले से जुड़ा किया.

अमित : बात क्या है आप रो क्यों रही हैं?

मंजू म : तुम्हे नहीं पता मैं क्यों रो रही हूँ? मैं सुबह से तुम्हारी रह देख रही हूँ. मैं तो कॉलेज भी आज देर से गयी थी तुम्हारा इंतज़ार करने क बाद सोचा शायद तुम कॉलेज में मिलोगे पर तुम वहां भी नहीं दिखे. तुम्हे पता नहीं आज राखी है और तुम मुझे भूल कर बहार घूम रहे हो.

अमित : तो इस बात पर आप नाराज़ हैं मगर इसमें रोने वाली क्या बात हुई ? मैं तो गाओं था और आज मेरी मौसियां और कौसिन्स सब आयी थी राखी बांधने बस इसी लिए देर हो गयी. अभी मैं शहर पहुंचा हूँ और सीधा आपके पास आ गया.

मंजू म: मुझे लगा तुम मुझे भूल गए. आज सुबह से भैया की कितनी यद् आ रही थी . मैंने तो सोचा था आज मैं छुट्टी करुँगी और सारा दिन तुम्हारे साथ रहूंगी और तुम हो क अब आ रहे हो.

अमित : आप एक बार मुझे फ़ोन hi कर देती तो मैं सुबह hi आ जाता

मंजू म : मुझे लगा तुम अपनी कौसिन्स से राखी बंधवा कर आ जाओगे इसी लिए नहीं किया वैसे भी मुझे देखना था क तुम्हे यद् रहता है या नहीं.

अमित : तो आप मुझे परखना चाहती थी . फिर क्या पता लगा?

मंजू म : यही क तुम बहुत प्यारे हो और मेरी परवाह करते हो. तुम बुल्कुल मेरे भैया जैसे हो . मेरा दिल कह रहा था क तुम ज़रूर आओगे पर जैसे जैसे टाइम बिट रहा था मुझे दर लग रहा था क कहीं तुम मुझे भूल hi न जाओ. अगर तुम आज न आते तो मेरा दिल टूट जाता .

अमित : आपने सोचा भी कैसे क मैं नहीं आऊंगा. आपको दीदी ऐसे hi नहीं कहता मैं. आप बहुत प्यारी हैं और मुझे आज पता चला क आप अभी भी छोटी बची hi हैं. कैसे मेरे गले लग कर झूल रही थी.

मंजू म : हैट बदमाश , वो तो ....

अमित : वो तो क्या?

मंजू म : मर खायेगा. तू बैठ मैं राखी ले कर आती हूँ.

अमित : वैसे आप नाहा रही थी शायद .

मंजू म ने मेरी बात सुन कर खुद को ऐसे देखा जैसे कोई चीज़ रह गयी हो जिससे पता चल गया मुझे.

अमित : आपके पास से खुशबु आ रही है और अभी भी बल गीले हैं उसी से पता चला. वैसे ये गाउन आप पर जाँच रहा है. पैसे वसूल हो गए.

मंजू म : तू बाज़ नहीं आएगा ?

इतना कह कर मम रूम से निकल गयी कुछ लेन तो मैं भी उठ कर गेस्ट रूम में आ गया. थोड़ी देर में मंजू म एक थाली में तिलक और राखी सजा कर ले आयी और मिठाई का डिब्बा भी. मंजू म ने तिलक लगा कर मुझे राखी बंधी उनकी आँखों में फिर से पानी आ गया वो जब मुझे मिठाई खिलने लगी तो मैंने उनके हाथ से बर्फी का टुकड़ा लेकर उनके होंठो पर लगा दिया

अमित : पहले आप

मंजू म ने बिना विरोध मुँह खोल लिया और बर्फी मुँह ने दाल कर रट हुए मेरे गले लग गयी

मंजू म : भैया !!! तुम मुझे छोड़ कर क्यों चले गए ? तुम्हे अपनी मंजू पर ज़रा तरस नहीं आया ? तुम्हारे बगैर मैं कैसे रहूंगी कभी नहीं सोचा तुमने ? मेरे लिए तो मेरे माँ बाप सब कुछ तुम hi थे . फिर क्यों मुझे अकेला छोड़ दिया?

इतना कह कर मम मेरे गले लगी फुट फुट कर रोने लगी. मैं उन्हें गले से लगाए चुप करवाने लगा . पता नहीं क्यों पर मेरा दिल भी भर आया और अपने आप मेरी आँखों से आंसू बहने लगे. हम दोनों hi एक दूसरे से गले लगे रो रहे थे . मुझे समझ नहीं आ रहा था क मैं खुद को क्यों रोक नहीं प् रहा हूँ. मंजू म का रोना मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. हम दोनों कुछ देर ऐसे hi रट रहे फिर मैंने खुद को सँभालते हुए मम को खुद से अलग किया . मम का चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था. मैंने उनके आंसू पोंछे और उन्हें चुप करवाने लगा . मम मेरी आँखों में आंसू देख कर मेरे आंसू पूछने लगी और मेरे चेहरे पर अनेको चुम्बन देने शुरू कर दिए. मंजू म अपने आप में नहीं थी उनको इस तरह दीवाना वॉर चूमते हुए देख कर मैं भी उन्हें चूमने लगा. इस चुम्बन में कोई वासना नहीं थी बस निर्मल प्रेम था जो क्या था मैं भी नहीं समझ प् रहा था बस हम दोनों एक दूसरे को चुम रहे थे.

अमित : आप इस तरह क्यों रो रही हैं ? राखी क दिन भी कोई बहिन रोटी है क्या? मैं हूँ न आपके साथ फिर आप क्यों रो रही हैं? मैंने आपसे कहा था क आप कभी रोयेंगी नहीं और आप फिर ....

मंजू म : मुझे रोने दो , आज मुझे रो लेने दो ये आंसू बह जाने दो. कितने बरसों से ये मेरे अंदर हैं.

अमित : मगर आप रो क्यों रही हैं?

मंजू म : आज मुझे भैया की बहुत यद् आ रही है. वो भी ऐसे hi करते थे. राखी पर हर बार मेरे हाथ की मिठाई खाने से पहले वो मुझे खिलाया लेते थे. तुमने आज वही किया जो वो करते थे. मुझे एक पल को लगा क मेरे सामने मेरे भैया hi हैं. तुम बिलकुल मेरे भैया जैसे हो.

अमित : तो क्या आपको ऐसे रुकते थे जैसे आज आप रो रही हैं? उन्हें कैसा लग रहा होगा ? वो तो मुझ पर गुस्सा कर रहे होंगे मैंने राखी वाले दिन उनकी बहिन को रुला दिया.

मंजू म : वो तुम पर गुस्सा क्यों होंगे? वो तो खुश होंगे . तुम्हारी वजह से उनकी छोटी मंजू खुश रहने लगी है. लो पहले मुँह मुठा करो.

मंजू म ने अपने हाथो से मुझे मिठाई खिलाई और मैंने उनका हाथ चुम लिया. फिर मैंने अपनी जेब से पैसे निकल कर उन्हें दिए. उन्होंने मेरे हाथ से ऐसे पैसे झपटे जैसे बचे करते हैं. मैं हैरान हो गया. भला उनके पास क्या कमी थी फिर उन्होंने ऐसा क्यों किया. मैं हैरानी से उन्हें देखने लगा.

मंजू म : ऐसे क्या देख रहे हो? ये मेरे हैं. भैया जब मुझे पैसे देते थे तो मैं ऐसे hi करती थी.

अमित : अब समझा , वाकई में आज भी आप छोटी बची hi हैं.

मंजू म : तुमने मुझे मेरे बचपन क दिन यद् दिला दिए हैं वर्ण मैं तो खुद को भूल hi गयी थी.

अमित : ऐसे hi रहा कीजिये आप मुझे बहुत ाचा लगता है आपको ऐसे देख कर.

मंजू म : ऐसे hi रहूंगी पर तुम्हे भी हमेशा ऐसे hi मेरे साथ रहना होगा.

अमित : मैं हमेशा आपके साथ hi हूँ. वैसे आज कॉफ़ी नहीं पिलायेंगी ?

मंजू म : पहले क्यों नहीं कहा . मैं तो भूल hi गयी थी. बैठो मैं अभी लायी.

मंजू म कॉफ़ी बनाने किचन में चली गयी. हम दोनों ने साथ में बैठ कर कॉफ़ी पि. मम आज मेरे साथ वक़्त बिताना चाहती थी मगर मैंने उन्हें बताया की अभी मुझे निधि दीदी से राखी बंधवानी है तो वो मन गयी और मैं 2 घंटे उनके साथ बिताने क बाद उनसे विदा ले कर निकल गया रजनी मौसी क घर की तरफ.

मैं हॉस्पिटल क पास से निकल रहा था क मुझे यद् आया उस दिन मैं एक आदमी को यहाँ छोड़ कर गया तो सोचा उसका हल चल पूछता चलूँ. मैंने बहार से थोड़े से फ्रूट लिए और हॉस्पिटल में चला गया. मैं पहले िक की तरफ गया पर वहां वो आदमी नहीं था. मैंने नर्स से पूछा तो उसने मुझे बताया क उस आदमी को रूम में शिफ्ट कर दिया गया है. मैं उससे रूम का पूछ कर उस तरफ चल दिया . रूम में गया तो देखा वो आदमी बीएड पर लेता हुआ था और उससे कई जगह पर पत्तियां की हुई थी यहाँ तक की उसका चेहरा भी ठीक से पहचान पाना मुश्किल था. मुझे सामने देख कर वो हैरानी से देखने लगा.

अमित : कैसे हैं आप ? आप मुझे नहीं जानते . मेरा नाम अमित है और मैं hi आपको यहाँ ले कर आया था जब आप रोड क पास लागु लोहान पड़े थे.

आदमी : तुमने मुझे बचाया ?

अमित : जी मैं कौन होता हूँ बचने वाला ये तो भगवन की माया है जिसने उस दिन समय पर मुझे आपके पास भेज दिया. वैसे आपको बचाया तो डॉ ने हैं मैं तो बस यहाँ लेकर आया था.

‘ बिलकुल गलत , डॉ तो तब hi कुछ कर सकते हैं जब मरीज उनके सामने हो और मरीज को तुम hi बचा कर लाये थे डॉ क पास. ‘

मैंने आवाज़ की तरफ मुद कर देखा तो सामने डॉ रीना कड़ी थी दरवाज़े पर मुस्कुराती हुई.

अमित : अरे आप ! आइये डॉ मैं देखने आया था क अब इनकी तबियत कैसी है.

डॉ रीना : पहले से काफी बेहतर हैं. अगर ये आपको न उस दिन टाइम पर लता तो आप बच माहि सकते थे. 2 मिनट्स की भी देरी आपकी जान ले लेती.

अमित : मैंने तो बस आपको झाड़ियों से बहार निकला था . आपको हॉस्पिटल लेन वाली ुए hi थी और इन्होने ने आपका इलाज भी किया.

डॉ रीना : मैंने तो बस गाड़ी चलाई वो भी दर दर क. मगर जान तो तुमने बचाई है. वर्ण कौन ऐसे किसी की मदद करता है बिना जान पहचान.

अमित : आपने भी तो वही किया.

आदमी : बस बस मैं समझ गया.

हम दोनों एक दूसरे को क्रेडिट देने क लिए बहस कर रहे थे इतने में वो आदमी हमारी बातों से सब समझ गया क मामला क्या हुआ था.

आदमी : आप दोनों ने hi मेरी जान बचाई है. और मैं आप दोनों का एहसान मंद हूँ. डॉ आपने मुझे हॉस्पिटल लेकर आने में मदद की और मेरा इलाज भी किया ये आपका मुझ पर क़र्ज़ है. और छोटे भाई तुमने बिना जान पहचान बिना स्वार्थ क बिना किसी बात की परवाह किये मेरी मदद की जो आज क ज़माने कोई नहीं करता . मेरी ये जान तुम्हारी अमानत है. कभी ज़िन्दगी में मौका मिला तो मैं अपनी जान देकर भी तुम्हारा एहसान चुकाऊंगा. वैसे मेरा नाम...

वो आदमी अभी अपनी बात पूरी करने hi वाला था क पुलिस इंस्पेक्टेड रूम में आ गया जिसे देख कर वो चुप हो गया. मैं भी पुलिस वाले को देख कर वो फ्रूट उस आदमी क पास रख कर उसे शुभकामनाएं देकर बहार निकल गया.

डॉ रीना : कहाँ जा रहे हो ?

अमित : वापिस . बस उसे देखने आया था.

डॉ रीना : वैसे आज तो तुम हैंडसम लग रहे हो तो आज हम चल सकते हैं.

अमित : कहाँ ?

डॉ रीना : भूल गए हमारी ‘ कॉफ़ी’

अमित : अरे हाँ . चलिए चलते हैं .

डॉ रीना : एक मिनट रुको मैं अभी आयी .

डॉ रीना खुश होती हुई अपने ऑफिस में गयी और अपना पर्स साथ लिए आ गयी. अब उनके कपड़ों पर वो डॉ वाला कोट नहीं था.

डॉ रीना : चलें ?

अमित : चलिए.

हम दोनों हॉस्पिटल से बहार आने लगे तो पीछे से एक नर्स भगति हुई आयी.

नर्स : डॉ डॉ रीना रुकिए प्लीज

डॉ रीना : क्या हुआ ?

नर्स : वो डॉ साहब ने कहा है क वो दूसरे डॉ जो आने वाले थे वो नहीं आ रहे इस लिए ऑपरेशन थिएटर में आपकी ज़रूरत है.

नर्स की बात सुनते hi डॉ रीना का चेहरा उतर गया. उनकी शकल ऐसे हो गयी थी जैसे उनके प्लान पर किसे ने पानी फेर दिया हो.

अमित : कोई बात नहीं लगता है आज हमारी किस्मत में कॉफ़ी नहीं है. बेटर लक नेक्स्ट टाइम . आप अपनी ड्यूटी पूरी कीजिये किसी को आपकी ज़रूरत है. मेरा क्या है मैं फिर आ जाऊंगा.

डॉ रीना : सॉरी ! पर वडा करो तुम आओगे .

अमित : प्रॉमिस . अब आप जाइये और उस मरीज की जान बचाइए मैं फिर आऊंगा.

डॉ रीना ने खुद hi हाथ आगे कर क मुझसे से हाथ मिलाया और अंदर चली गयी. मैंने बाइक स्टार्ट की और रजनी मौसी क घर को निकल गया. थोड़ी देर में hi मैं रजनी मौसी क घर पहुँच गया. निधि दीदी ऑफिस से आ चुकी थी और इस वक़्त किचन में मौसी क साथ कुछ बना रही थी. नैना दीदी ने दरवाज़ा खोला और मुझे सामने देख कर खुश हो गयी. जैसे hi मैं अंदर आया तो उन्होंने दरवाज़ा बंद करते hi मुझे गले खा लिया और जल्दी से मेरे होंठो पर एक किश कर दिया. मैं उनकी इस हरकत से हैरान हो गया.

अमित : क्या करती हो दीदी ? अभी कोई देख लेता तो ?

नैना दीदी : तुझे कितनी बार कहा है क मुझे दीदी मत कहा कर. वैसे तू क्यों दर रहा है. माँ और दीदी किचन में हैं कारन बहार दोस्तों क साथ है और पापा देर से आएंगे आज .

अमित : फिर भी ज़रा संभल कर रहो करो आप. अगर किसी को पता चल गया तो क्या होगा आप सोच कर देखिये.

नैना दीदी : तू ऐसे hi डरता रहता है. लड़की मैं हूँ और लड़कियों कैसे दर तू रहा है.

अमित : ठीक है चलो पहले दीदी से मिल लूँ .

मैं सीधा किचन में चला गया रजनी मौसी ने मुझे देख लिया था तो मैंने उन्हें चिप रहने का इशारा किया. निधि दीदी की बैक मेरी तरफ थी . मैं दबे पाऊँ गया और निधि दीदी की आँखों पर अपने हाथ रख लिए.

निधि दीदी : तू आ गया मैं कब से तेरी वेट कर रही थी.

इतना कह कर दीदी पलट गयी और मुझे गले लगा लिया. मैं हैरान हो रहा था क दीदी को कैसे पता चल गया.

अमित : आपको कैसे पता चला क ये मैं hi हूँ?

निधि दीदी : इस लिए क मुझे पता था क मेरा छोटा भाई मुझसे राखी बंधवाने आने वाला है. वैसे भी ऐसा मेरे साथ कोई नहीं करता और तेरा एहसास तो मैं ऑंखें बंद कर क भी पहचान लेती हूँ. इतना प्यार तो मैं कारन से भी नहीं करती जितना तुमसे करती हूँ. चल आ पहले तुझे राखी बन्धन. तूने नैना से क्यों नहीं बंधवाई राखी ? मैंने तेरे लिए hi तो भेजी थी.

अमित : साल बाद तो एक दिन अत है बहिन भाई का और उस दिन भी आप अपने इस भाई क लिए वक़्त नहीं निकल पायी.

निधि दीदी : क्या करूँ भाई ऑफिस वालों ने मेरी लीव एक्सेप्ट नहीं की. वैसे मुझे भी बड़ा अफ़सोस हो रहा था इस बात पर क आज मैं तेरे पास नहीं आ सकीय . तूने ाचा किया जो चला आया.

रजनी मौसी : चल अब उसे राखी बांध दे कब तक यही खड़े रखोगी इसे.

निधि दीदी मुझे लेकर हॉल में आ गयी और फिर मेरे लिए राखी टिका और मिठाई ला कर मुझे राखी बंधी. मुँह मीठा करने क बाद मैंने दीदी को 500 का नोट दिया

निधि दीदी : ये क्या ? तू अभी छोटा है पैसे तो मुझे तुझे देने चाहिए और तू मुझे दे रहा है .

अमित : तो क्या हुआ मैं छोटा हूँ तो. आज राखी है और आज बहनो को भाई गिफ्ट देते हैं. इस लिए आप चुप चाप रख लीजिये वर्ण मैं आपसे बात नहीं करूँगा.

निधि दीदी : ाचा बाबा ले रख लिए अब खुश. बहुत बड़ा हो गया है न तू जो ऐसे बातें करने लगा है. एक कारन है जिसे हमारी परवाह hi नहीं होती. अभी तक उसे मैं राखी नहीं बांध पायी .

नैना दीदी : मैंने भी कहाँ बंधी है दीदी . पता नहीं कहाँ गायब रहता है. सुबह उठ नहीं रहा था और जब वापिस आये तो घर से गायब.

निधि दीदी : चलो कोई बात नहीं ये है न मेरा प्यारा भाई. हमेशा से ये मुझे प्यार करता है .

रजनी मौसी : ये प्यार करता है या तुम ? बचपन में इसे अपनी गोदी में ले कर बैठ जाया करती थी. दामिनी की गॉड से उठा कर अपनी गॉड में लेकर बैठ जाती थी. किसी को हाथ भी नहीं लगाने देती थी. सब तुझे दादी अम्मा खेत थे इसी बात पर.

अमित : क्या सच में मौसी ? दीदी मुझे गॉड में लेकर बैठ जाती थी?

रजनी मौसी : और नहीं तो क्या? इतना प्यार तो इसने कारन से भी नहीं किया जितना तुझसे करती है.

रजनी मौसी क मुँह से निधि दीदी की ये बात सुन कर मुझे निधि दीदी और भी प्यारी लगने लगी उनकी इज़्ज़त मेरे मन में और भी बाद गयी. वहीँ निधि दीदी शर्मा रही थी जैसे उनकी कोई चोरी पकड़ी गयी हो.

अमित : क्या आप सच में मुझे कारन भैया से ज्यादा प्यार करती हैं?

निधि दीदी : वो भी मेरा भाई है और तुम भी ओर ये भी सच है क मैं बचपन से hi तुझे ज़्यादा प्यार करती हूँ इसकी क्या वजह है मैं नहीं जानती पर ये सच है.

‘ तो इसी को बांधो राखी मेरी ज़रूरत hi क्या है , मैं खाना खा कर आया हूँ मेरे लिए कुछ मत बनाना.’

कारन पता नहीं कब अंदर आया था और हमारी बातें सुन रहा था और शायद उसे गुस्सा आ गया था निधि दीदी की बात पर इसी लिए वो ता किया लहजे में बोलता हुआ अपने कमरे में चला गया.

रजनी मौसी और निधि दीदी उसके पीछे उसके कमरे में चली गयी उसे समझने क लिए. दोनों ने काफी मनाया पर कारन नहीं मन और कमरे से बहार नहीं आया जिस वजह से निधि दीदी का मूड कुछ ख़राब सा हो गया पर मेरे लिए वो फिर भी चेहरे पर मुस्कराहट सजाये थी. मौसा जी कुछ लेट आये और फिर सब ने मिल कर डिनर किया. मैंने घर वापिस जाने की इजाज़त मांगी तो नैना दीदी सबसे पहले मुझे रोकने को तैयार कड़ी थी और फिर निधि दीदी और मौसी क कहने पर मुझे रुकना hi पड़ा. कुछ देर मैंने निधि दीदी क साथ बैठ कर बातें की फिर सब अपने अपने कमरों में सोने चले गए. नैना दीदी जल्दी सोने चली गयी थी तो मैं भी आराम से अपने कमरे में जा कर लेट गया.

मैं आराम से सोया हुआ था क किसी ने मुझे जगाया . मैंने उठ कर देखा तो नैना दीदी मेरे पास बैठी थी. इस वक़्त वो नाईट सूट में थी. एक ढीली से पिंक T-shirt और पजामा पहने हुआ.

अमित : क्या हुआ इस वक़्त आप मेरे कमरे में?

नैना दीदी : तुम तो घोड़े बेच कर सो रहे हो कब से जगा रही हूँ तुम्हे.

अमित : कोई काम था क्या?

नैना दीदी : मुझे मेरा गिफ्ट चाहिए

अमित : इस वक़्त ?

नैना दीदी : यही सही वक़्त है

अमित : पर इस वक़्त मैं आपको कहाँ से गिफ्ट ला कर दूँ अब तो कल hi मिलेगा

नैना दीदी : कहीं जाने की ज़रूरत नहीं है मेरा गिफ्ट तो तुम हो

अमित : मैं समझा नहीं

नैना दीदी : मुझे आज तुम्हारा प्यार चाहिए. तुम मुझसे मिलने नहीं आते और मैं तरसती रहती हूँ मगर आज सही मौका है. इस वक़्त कोई डिस्टर्ब करने वाला भी नहीं है. आज मुझे वो प्यार चाहिए जिसे पाकर मुझे अपने औरत होने का एहसास हो.

अमित : मैं समझा नहीं . आप क्या पता नहीं क आप लड़की हैं फिर और क्या चाहिए?

नैना दीदी : ज्यादा बनो मत. मैंने लड़की नहीं औरत कहा है. मुझे वो एहसास चाहिए जब लड़की पहली बार औरत बनती है.

अमित : ये आप क्या कह रही हैं? ये सब तो शादी क बाद hi होता है और आप जानती हैं हमारा क्या रिश्ता है फिर भी आप ये सब

नैना दीदी : कौन से ज़माने की बात कर रहे हो. आज कल तो सब लड़कियां अपने बर्फ क साथ ये सब शादी से पहले hi कर लेती हैं. क्या पता कैसा पति मिलेगा इस लिए अपनी मर्ज़ी से अपने प्यार क साथ वो अनमोल एहसास पाना कोई गलत नहीं. मेरी सब सहेलियां अपने बर्फ क साथ वो सब कर चुकी हैं बल्कि वो तो जब मौका मिले तब कर लेती हैं और कितना एन्जॉय करती हैं. मुझे भी वो सब तुम्हारे साथ करना है.

अमित : पर...

नैना दीदी : तुम मुझसे प्यार करते हो क नहीं ?

अमित : क्या आप को इस बात पर कोई शक है?

नैना दीदी : तो आज मुझे प्यार करो . मुझे वो दो जो मैं चाहती हूँ. तुम किसी बात की चिंता मत करो कुछ नहीं होगा.

अमित : अगर आपकी यही मर्ज़ी है तो ठीक है.

इतना कह कर मैंने नैना दीदी क होंठो पर अपने होंठ रख दिए और वो भी मेरा साथ देते हुए मेरे होंठ चूसने लगी. किश करते हुए मेरे हाथ दीदी की छाती पर चले गए . उनके नमो मुलायम कच्चे आम हाथ में आते hi मुझे एहसास हो गया क T-shirt क अंदर उन्होंने कुछ नहीं पहना है. किश करते हुए मैंने उनके बूब्स दबाने शुरू कर दिए तो नैना दीदी जैसे एक्शन में आ गयी. उनका किश करना तेज़ होता गया वो मुझ पर हावी होने को कोशिश करने लगी. धीरे धीरे दीदी क वो रुई जैसे मुलायम बूब्स अब टाइट होने लगे. मैंने दीदी की T-shirt को पकड़ कर उतर दिया. एक पल क लिए हम अलग हुए . जीरो बल्ब की रौशनी में भी उनके वो गोर स्तन मुझे अपनी और खींच रहे थे. क्या बूब्स थे! बिलकुल गोल नरम मुलायम और उनके ऊपर वो छोटे छोटे पिंक निप्पल जो सर उठा रहे थे . निप्पल क आसपास गुलाबी घेरा बूब्स को चार चाँद लगा रहा था. मुझे अपने बूब्स को घूरता हुआ देख कर दीदी शर्मा गयी. मैंने उनके एक उभर को हाथों में थमा और दूसरे पर झुक कर उसे अपने मुँह में के लिया. दीदी क मुँह से एक मादक सिसकी निकल गयी और वो पीछे को गिरती चली गयी . मैं भी उनके बूब्स चुस्त दबाता उनके ऊपर hi गिर गया. मैंने एक चुके को अछि तरह चूस कर लाल कर दिया. निप्पल को होंठो में पकड़ कर खींचने से वो पहले से बड़ा लगने लगा . एक को प्यार करने से कहीं दूसरा न रूठ जाये तो मैंने दूसरे को भी उसी तरह मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया. थोड़ी देर में hi दोनों स्तन एक जैसे लगने लगे . दीदी तो इतनी देर से बस मस्ती में अंगड़ाइयां लेती मेरा सर अपनी छाती ओर दबा रही थी और सिसकियाँ ले रही थी. दोनों स्तनों को प्यार करने क बाद मैं उनके पेट से किश करता हुआ उनकी नाभि तक आ गया. चिकना सपाट पेट और उसके ऊपर वो छोटी सी नाभि बहुत प्यारी लग रही थी मैंने उसे भी प्यार से चूम कर खुश किया. उसके बाद मैंने दीदी क लोअर को दोनों सौदे से पकड़ा और नीचे उतरने लगा . दीदी ने कमर ऊपर करके मुझे ऐसा करने दिया . लोअर क उतारते hi दीदी की गोरी माध मस्त टाँगें मेरे सामने थी. दीदी क जिस्म पर एक छोटी सी पिंक पेंटी क इलावा अब कुछ नहीं था. मेरे सामने दीदी का गोरा नंगा जिस्म मेरे खून की गर्मी बढ़ाने लगा. दीदी तो अपनी आँखें बंद कर क पड़ी थी मगर मुझे हरकत न करता देख कर वो समझ गयी क मैं उन्हें ऐसे ताड़ रहा हूँ तो वो शर्म से दोहरी होने लगी. मैंने उनके दोनों पेअर पकड़ लिए और उनकी टांगो को फोल्ड होने से रोका. दीदी ने ज्यादा ज़ोर नहीं लगे. मैंने दीदी क दोनों पेअर ऊपर उठा कर जोड़ते हुए उनके गोर मुलायम पैरों पर किश किया. दीदी क मुँह से फिर सिसकी निकली. पैरों को किश करते हुए मैं नीचे आने लगा और उनकी गोरी चिकनी पिंडलियों को चूमते चाट ते हुए उनकी जांघों तक आ गया. दीदी की जांघें मुझे बहुत अछि लग रही थी और मैंने उनकी जांघों को मसलना चूमना काटना शुरू कर दिया. क्या जांघें थी दीदी की दिल कर रहा था क खा hi जॉन. जांघों से आगे उनका अनमोल खजाना था जो उन्होंने अब तक किसी को देखने भी नहीं दिया था और आज वो मुझे सौंपना चाहती थी. बस एक पिंक पतली सी दीवार क पीछे वो खज़ाना मेरा इंतज़ार कर रहा था. मैंने पेंटी क ऊपर से hi उनकी छूट पर किश कर दिया. एक बार फिर से दीदी ने मादक सिसकी ली और उनका बदन ऐंठे लगा पर मैंने ऐसा होने नहीं दिया. वो अपनी टंगे समेटना चाहती थी पर बीच में मैं था. मैं उनकी पेंटी को दोनों हाथों से पकड़ कर जब उतरने लगा तो एक बार उन्होंने मुझे रोका पर फिर अपना हाथ हटा लिया. मैंने आराम से उनकी पेंटी उतर दी और पेंटी क उतारते hi उनकी गोरी चिकनी छूट जिसके होंठो गुलाबी आभा लिए हुए थे मेरे सामने आ गयी. मैं दीदी की छूट को देखता hi रह गया. ये दूसरी कुंवारी छूट थी जो मैं आज देख रहा था. छूट क होंठ आपस में जुड़े हुए थे जो इस बात का परमं रहे क आज तक इस पर कोई म्हणत नहीं हुई है. एक बंद लकीर सी नज़र आ रही थी जांघों की जड़ों में बस. छूट क होंठ ऐसे बंद थे जैसे गुलाब क फूल की पत्तियां खिलने से पहले आपस में जुडी होती हैं. दीदी चाहती थी क आज मैं उनको काली से फूल बना दूँ पर उनकी छूट को देख कर मुझे दर लगने लगा था. मेरा मुसल उनकी औकात से बहार था. मैं जनता था जब मेरा लैंड इस छूट में जायेगा तो दीदी 2 दिन बीएड से उठ नहीं पायेगी और शायद वो दर्द को बर्दाश्त नहीं न कर पाएं ऐसे में उनकी चीख सुन कर अगर कोई जग गया तो बहुत बड़ी मुसीबत हो जाएगी. मैं छूट को देख कर अपनी सोच में डूबा था तो दीदी ने शर्मा कर अपने हाथ अपनी छूट पर रख लिए.

नैना दीदी : ऐसे मत देखो मुझ शर्म आ रही है.

अमित : अभी तो आप सब कुछ करने को कह रही थी और अभी आप शर्मा रही हैं.

नैना दीदी : ऐसे घूरोगे तो शर्म तो आएगी hi न अब क्या मैं बेशरम बन जॉन.

अमित : अगर आप ऐसे शरमाओगी तो मैं प्यार कैसे करूँगा आप को?

नैना दीदी : तो प्यार करो न ऐसे घूर घूर क तो मत देखो

अमित : ठीक है अब सिर्फ प्यार करूँगा

इतना कह कर मैंने दीदी की टांगों को खोल कर बेंड करते हुए उनके घुटने उनकी छाती से लगा दिए और उनके हाथ छूट से हटा कर उनकी छूट को एक नज़र देखने क बाद अपने होंठ उन नाज़ुक गुलाबी होंठो पर रख दिए. छूट की गुलाबी फैंको पर मेरे होंठ लगते hi नैना दीदी क जिस्म में कम्पन हुई . एक तेज़ सिसकारी उनके होंठो से निकल गयी. ‘ कक्कक्कक्स आआआअह्ह्ह ‘ मैंने छूट क होंठो को अपने होंठो में भरने की पूरी कोशिश की पर कामयाब नहीं हो ोा रहा था. मैंने अपने होंठ हटा कर उँगलियों से छूट को खोलने की कोशिश की तो अंदर का हिस्सा जो कहीं ज्यादा पिंक था मुझे नज़र आने लगा. मैंने अपनी जीब उस गुलाबी हिस्से से लगाई और छेड़ छड़ करने लगा. दीदी तो जैसे वाइब्रेशन मोड पर लग गयी और लगातार कम्पनी लगी. छूट में हल्का सा उभरता उनका वो छोटा सा भाग जो हर लड़की औरत का सबसे संवेदनशील हिस्सा होता है मैंने उसे भी छोड़ना शुरू कर दिया और अपने होंठो में भी दबाने की कोशिश करने लगा. दीदी अपना सर इधर उधर पटकती कभी मेरा सर अपनी छूट पर दबती कभी मेरे बाल नोचती . उनसे ये सब बर्दाश्त नहिभो रहा था. मैंने अपनी एक उंगली छूट को फैलते हुए अंदर करने की कोशिश करने लगा पर छूट बहुत टाइट थी जिसकी वजह से आधी उंगली hi बड़ी मुश्किल से अंदर जा पायी. मैं ऊंटनी hi उंगली को अंदर बहार करने लगा और साथ hi साथ छूट क डेन को छेड़ते हुए जीब से कुरेदने लगा . दीदी क साथ ये सब पहली बार हो रहा था इस लिए वो ज्यादा देर खुद को रोक नहीं ऑटो और मेरा सर अपनी छूट पर दबती हुई चीखती हुई झाड़ गयी. मेरे मुँह में उनकी छूट का कामर्स आने लगा जिसे मैंने पि लिया और उनका बदन धीरे धीरे झटके खता फिर से शांत हो गया. मैंने छूट को अछि तरह से चाटने क बाद अपना मुँह साफ किया और उनके साथ लेट गया. दीदी तो आँखें बाद किये अभी भी उस चरम सुख क एहसास में डूबी थी मैंने उनको अपने सीने से लगा लिया. और वो भी किसी मासूम बची की तरह मेरे साथ लिपट गयी. कुछ देर बाद जब वो नार्मल हुई तो बोली

नैना दीदी : बस ? अभी तो तुमने कुछ किया भी नहीं और ऐसे लेट गए

अमित : किया तो है. आपको मज़ा नहीं आया क्या ?

नैना दीदी : मज़ा तो बहुत आया पर अभी पूरा कहाँ हुआ है? वैसे तुमने ये सब कहाँ से सीखा?

अमित : बस पोर्न देख कर सब सीखा है . वही तो किया मैंने अभी जो उसमे दिखते हैं. और इससे ज्यादा मैं नहीं करने वाला

दीदी मेरी बात सुनते hi उठ कर बैठ गयी. और नाराज़ होते हुए बोली

नैना दीदी : ये क्या बात हुई? मैंने कहा था मुझे औरत बना दो और तुम बस ऐसे hi निपट रहे हो.

अमित : ये सही जगह और सही समय नहीं है. अगर मैंने अभी किया तो सब को पता चल जायेगा. एक तो आप से वो दर्द बर्दाश्त नहीं होगा दूसरा आपकी हालत से सब को पता चल जायेगा.

नैना दीदी : ऐसा कुछ नहीं होगा. मैं बर्दाश्त कर लुंगी. पहली बार में दर्द होता hi गई और मैं उसके लिए तैयार हूँ.

अमित : मन क आप तैयार हैं पर अपनी सहेली तैयार नहीं है.

नैना दीदी : कौन सी सहेली ?

मैंने दीदी की छूट पर हाथ रख दिया तो वो शर्मा गयी और मेरा हाथ वहां से हटा लिया.

नैना दीदी : गंदे ! वो भी तैयार है . मैं तुमसे बड़ी हूँ और सब कुछ अछि तरह जानती हूँ.

अमित : मन क आप बड़ी हैं पर आपकी सहेली बहुत छोटी है. वो मेरे दोस्त को बर्दाश्त नहीं कर पायेगी क्यूंकि वो आपकी सहेली से बहुत बड़ा है.

मैंने अपने लैंड पर हाथ रखते हुए कहा

नैना दीदी : कुछ नहीं होगा तुम डरो मत कभी न कभी तो ये होना hi होता है.

अमित : दीदी समझने की कोशिश करो. आप दर्द बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी. मन लो आप दर्द झेल भी ले पर उसके बाद जो आपकी हालत होगी वो सब बयां कर देगी. मौसी सब समझ जाएँगी क क्या हुआ है. आप दो दिन बीएड से उठ भी नहीं पाएंगी उस क बाद क्या होगा?

नैना दीदी : तुम मुझे डरा रहे हो पर मैं डरने वाली नहीं. मुझे हर हल में ये करना है

अमित : ठीक है मैं वडा करता हूँ क मैं आपको वो प्यार भी दूंगा पर यहाँ नहीं. हम कहीं और वो सब करेंगे अकेले में जहाँ कोई न हो और न किसी क दर हो. हम सारा दिन साथ रहेंगे और दिल खोल कर प्यार करेंगे.

नैना दीदी : पक्का ऐसा करोगे न ? मुझे बहाना नहीं चाहिए और जल्दी ये सब करना है .

अमित : मैं वडा करता हूँ जल्दी मैं आपको प्यार दूंगा .



उसके बाद दीदी मेरी छाती पर सर रख कर मुझसे प्यार भरी बातें करती रही और ऐसे हमारी आंख लग गयी .
 
भाई लोगो अपडेट तैयार कर रहा हूँ पूरा होते hi अपडेट कर दूंगा
 
अपडेट 102



सुबह मेरी नींद जल्दी खुल गयी आदत अनुसार. मैंने देखा तो नैना दीदी अभी भी वैसे hi मेरे ऊपर पड़ी हुई थी. उनकी एक बाजु और एक तंग मेरे ऊपर थी जैसे मुझे पकड़ क रखा हो कहीं मैं भाग न जॉन. अभी सुबह क 6 बजे थे इतनी जल्दी घर वेक शायद उठे नहीं होंगे पर अगर कोई उठ कर इस तरफ आ गया तो हम तो गए काम से. दीदी पूरी नंगी वैसे hi पड़ी हुई थी. मैंने धीरे से उनकी बाजु और तंग को हटा कर उठ गया. मैंने एक नज़र दीदी पर मरी तो वो इस वक़्त कितनी मासूम और खूबसूरत लग रही थी. सुबह क उजाले में उनका जिस्म और भी दिलकश लग रहा था. मुझे उनपर बहुत प्यार आ रहा था मैंने झुक कर उनके होंठो को चूम लिया और साथ hi एक हाथ से उनके रुई से कोमल बूब्स को प्यार से सहलाया. दीदी ने हलकी सी अंगड़ाई ली और उनके चेहरे ओर एक मुस्कान आ गयी . शायद नींद में hi कोई सपना देख रही होंगी. मैंने उनके बूब्स को बरी बरी चूमा और उन्हें उठाने की कोशिश की.

अमित : दीदी उठिये सुबह हो गयी है

नैना दीदी : सोने दो न क्यों तंग कर रहे हो

लगता है दीदी ऐसे नहीं उठेंगी. मैंने दीदी की छूट में अपनी आधी उंगली घुसा दी तो एक डैम से दीदी उठ बैठी

नैना दीदी : आआह्ह्ह ककक ये क्या कर रहे हो? चैन से सोने भी नहीं देते. कितना ाचा सपना देख रही थी

अमित : वो सब छोडो पहले कपडे पहन लो और अपने कमरे में जाओ . कहीं मौसी आ गयी तो पकडे जायेंगे . वैसे सपने में क्या देख रही थी जो इतना मुस्कुरा रही थी?

नैना दीदी : सपने में तुम मुझे प्यार कर रहे थे और हम दोनों ...

अमित : हम दोनों क्या?

नैना दीदी : बस प्यार कर रहे थे

अमित : वो तो अभी भी कर सकते हैं आपने कौन सा कपडे पहने हैं

मेरे इतना कहते hi उन्हें अपने नंगे पैन का एहसास हुआ तो जल्दी से उन्होंने अपने कपडे पहनना शुरू कर दिया. दीदी को इस तरह जल्द बजी करते देख मुझे हंसी आ गयी

नैना दीदी : हसो मत बेशरम कहीं क, मुझे बता नहीं सकते थे ? खुद तो कपडे पहन रखे हैं और मुझे नंगा कर दिया

अमित : तो मैं पहना भी देता हूँ कपडे आप कष्ट क्यों कर रही हैं?

नैना दीदी : बड़े आये कपडे पहनाने वाले , पहले क्यों नहीं पहना दिए?

अमित : सोचा तो था पर जब आपके संगमरमर से तराशे हुए जिस्म पर नज़र पड़ी तो इरादा बदल गया

मेरी बात ओर नैना दीदी शर्मा गयी. मगर उन्हें अभी अपनी नींद पूरी करनी थी तो मुझे किश करने क बाद वो अपने कमरे में चली गयी और जाते जाते मुझे मेरा वडा भी यद् दिला गयी. मैं बाथरूम जा कर फ्रेश हुआ और नीचे आ गया. निधि दीदी किचन में चाय बना रही थी . मैं किचन से आती आवाज़ सुन कर वहां गया तो मौसी की जगह दीदी को देख कर एक पल को हैरान हुआ

निधि दीदी : उठ गया भाई गुड मॉर्निंग. चल बैठ मैं तेरे लिए चाय लती हूँ.

अमित : गुड मॉर्निंग दीदी आप इतनी सुबह उठ जाती हैं ? मौसी कहाँ हैं ?

निधि दीदी : माँ नाहा रही है और मैं भी अभी उठी हूँ . पापा भी जग रहे हैं सोचा चाय बना लूँ वो दोनों तो लेट hi उठेंगे.

उसके बाद मैंने दीदी क हाथ की चाय पि. इतने में मौसी भी आ गयी. मैंने चाय पि कर जाने की इजाज़त मांगी पर मौसी नाश्ता कर क जाने को कहने लगी . नाश्ते का अभी वक़्त कहाँ था . मैं बहाना बना कर वहां से निकल आया और सीधा मोहित क घर आ गया. आंटी अपनी रूटीन क मुताबिक योग कर रही थी. अंकल कहीं नज़र माहि आये मतलब वो घर नहीं होंगे और मोहित का भी पता नहीं था क वो आया है क नहीं. मैं आंटी क पास hi चला गया.

अमित : गुड मॉर्निंग आंटी

आंटी ने मुझे गुस्से से देखा

आंटी : कितनी बार कहा है अकेले में मुझे नाम से पुकारा करो.

अमित : पर हम अकेले कहाँ हैं ? मोहित और अंकल

आंटी : तुम्हारे अंकल कल रत को hi चले गए थे ज़रूरी काम से और मोहित शाम को आएगा.

अमित : इसका मतलब कल रत आओ अकेली थी घर पर?

आंटी : और नहीं तो क्या. इतना ाचा मौका था सोचा था खुल क मज़ा करेंगे और तुम आये hi नहीं.

अमित : मुझे पहले पता होता तो मैं बहाना बना कर चला अत. खैर कोई बात नहीं वैसे अकेले तो हम अब भी हैं तो क्या कहती हो?

मेरे इतना कहते hi आंटी दौड़ कर मेरी तरफ आयी और उछाल कर मेरी गॉड में चढ़ गयी. आंटी में अपनी लेग्स मेरी कमर पर लपेट ली और मुझे किश करने लगी. मैं भी कल रत से गरम था तो आंटी को ऐसे hi किश करता हुआ अपने रूम में ले गया और बीएड पर गिरा कर अपने कपडे उतर दिए. मेरे से पहले आंटी ने भी अपने कपडे उतर दिए और पूरी नंगी हो गयी. मैं उन पर टूट पड़ा और शुरू हो गयी हमारी खाट कबड्डी. मैंने सुबह सुबह जैम कर आंटी की चुदाई की और बीएड को हिला कर रख दिया. आंटी सवेरे सर अपनी धुआंधार चुदाई से खुश हो गयी . हम दोनों साथ में hi नहाये और नहाते हुए भी रोमांस किया. मोहित तो आज था माहि इस लिए मैं नाश्ता करने क बाद अपनी बाइक से hi कॉलेज चला गया . आज नोटिस बोर्ड पर स्टूडेंट्स को देख कर मैं उधर गया तो पता चला टेस्ट शुरू होने वाले हैं अभी 10 दिन बाकि थे . एग्जाम तो दिसंबर में होते हैं फिर ये टेस्ट का क्या चक्कर है ये मुझे पता नहीं था चलो किसी से पूछ लेंगे.

आज मोहित क न होने से मैं अकेला बैठा था तो आज फिर कल्पना मेरे साइड वाली रॉ में आ कर बैठ गयी.

कल्पना : कैसे हो ?

अमित : मैं ठीक हूँ तुम कैसी हो?

कल्पना : मैं भी अछि हूँ . तुम आज अकेले ?

अमित : हाँ वो मोहित कल अपनी सिस्टर क पास गया था आज आया नहीं.

कल्पना : वैसे तुम कैंटीन में किस क साथ बैठे होते हो?

अमित : तुम मेरी जासूसी करती हो?

कल्पना : है है है नीस जोके , मैंने कैंटीन में एक दो बार देखा है तुम्हे . तुम्हारे साथ तुम्हारी कौसिन्स क इलावा एक और लड़की होती है.

अमित : ाचा वो . वो मीनल है मोहित की गफ कोई खास बात?

कल्पना : ( खुश होते हुए ) मुझे लगा hi था क कुछ ऐसा hi होगा. वैसे तुमने कोई गफ नहीं बनाई? तुम्हे तो को भी आसानी से हाँ कर देगी

अमित : मुझे कोई क्यों पसंद करेगी. वैसे भी ये सब कर क क्या मिलेगा मुझे अपनी गेम पर ध्यान देना है.

कल्पना : गेम तो मैं भी खेलती हूँ. पर कभी कभी दिल तो करता है न कोई हो जिसके साथ तुम अकेले में टाइम स्पेंट कर सको.

अमित : लगता है तुम्हे किसी की तलाश है जो तुम ऐसी बातें कर रही हो.

कल्पना : अरे नहीं ऐसी बात नहीं है . वो तो बस वैसे hi. वैसे मुझे कोई पसंद क्यों करेगा. एक तो गेम की वजह से मैं बाकि लड़कियों की तरह नहीं हूँ दूसरा लड़के पहले hi दर जाते हैं क कहीं जुडो का इस्तेमाल उन पर hi न हो जाये.

अमित : ये तो सही कहा तुमने . सलामत रहेंगे तो और भी मिल जाएगी पर अगर तुमने थोबड़ा hi बिगड़ दिया तो शादी क लिए भी कोई नहीं मिलेगी.

मेरी इस बात पर कल्पना हसने लगी

कल्पना : नीस जोके. पर सच्ची यार कोई पार्टनर तो होना चाहिए कभी कभी मुझे भी बोरिंग सा लगने लगता है. सिर्फ गेम प्रैक्टिस और किताबें. लाइफ जैसे रुक स गयी है.

अमित : वैसे एक बात कहूं अपने लिए कोई ाचा सा लड़का देख लो या फिर अचे दोस्त बना लो जिनके साथ तुम हंसी मज़ाक कर सको. इससे मन हल्का रहता है और लाइफ भी बोरिंग नहीं लगती.

कल्पना : तुम से ाचा तो मुझे क्लास में कोई नज़र नहीं अत इन फैक्ट कॉलेज में भी नहीं होगा.

अमित : रुको रुको कहीं ये न कह देना क शहर में hi नहीं होगा. इतनी तारीफ मत करो मैं इतना भी ाचा नहीं. वैसे तुम जब कभी बोर फील करो तो आ जाया करो मैं फ्री लेक्चर में कैंटीन में hi होता हूँ.

कल्पना : वैसे कॉलेज क बहार अगर मिलना हो तो ? मेरा मतलब है घर पर कभी बोर फील करूँ तो कैसे मिल सकते हैं ? तुम्हारे पास टाइम होता है या नहीं?

अमित : टाइम होता नहीं निकलना पड़ता है. वैसे मैं शाम को स्टेडियम में होता हूँ उसके बाद ट्यूशन फिर घर . संडे को गाओं . बस यही रूटीन है. फिर भी अगर तुम कभी मिलना चाहो तो बता देना फ़ोन तो है hi तुम्हारे पास भी.

कल्पना : थैंक्स तुमने इतना कह दिया मुझे ाचा लगा. पर फ़ोन पर न मिलने का बहाना न बना देना .

अमित : तुम मेरी दोस्त हो और दोस्तों क लिए मैं टाइम निकल hi लेता हूँ. वैसे ये टेस्ट का क्या चक्कर है तुम्हे कुछ पता है?

कल्पना : हाँ मैंने पैट किया है सितम्बर टेस्ट लेते हैं ये सब स्टूडेंट्स की प्रोग्रेस देखने क लिए. इसी लिए तो रिजल्ट्स अचे रहते हैं हर साल. वैसे इतनी भी टेंशन वाली कोई बात नहीं है.

हमारे बातें करते करते चंद्रकांता आ गयी. वैसे तो 2 मिनट्स लेट आने पर मुझे क्लास से निकल दिया था और खुद आज लेट है. उसके बाद कोई खास बात माहि हुई. चंद्रकांता क बाद मंजू म लेक्चर लेने आ गयी. वो हमेशा की तरह मुझे मुस्कुरा कर देख रही थी पर आज उनकी स्माइल और भी ज्यादा प्यारी थी. गाला लेक्चर फ्री था तो मैं कैंटीन की तरफ चल दिया पीछे से कल्पना भी मेरे साथ आ गयी. मोहित तो आज आया नहीं था मैंने सोचा आज शायद मीनल भी नहीं आयी होगी पर कुछ hi देर में वो आ गयी और उसके साथ hi राधा और नेहा दीदी भी. मैंने मीनल को भुई कल्पना से इंट्रोडस किया राधा और नेहा दीदी तो पहले hi उसे मिल चुकी थी.

अमित : मीनल आज तुम कैसे आयी कॉलेज? मुझे लगा था क आज तुम नहीं आओगी.

मीनल : आज एक सहेली क साथ आ गयी थी. सोचा तो था क छुट्टी कर लूँ मगर एक ज़रूरी लेक्चर था तो आना पड़ा.

राधा : वैसे आज तुम अचे लग रहे हो

अमित : था का तुम भी अछि लग रही हो.

मीनल : यार रिज़ तो ऐसे hi होते हो आज क्या खास बात है मुझे भी बता दो.

मीनल की इस बात पर राधा को शर्म आ गयी. उसके बाद हमने बेल्ल बजने तक साथ में बैठ कर हंसी मज़ाक किया और खा पि कर अपनी अपनी क्लास में चले गए. बाकि क लेक्चर कल्पना मेरे साथ hi बैठी रही मोहित की तरह. छुट्टी क वक़्त भी कल्पना मेरे साथ hi पार्किंग तक आयी और उसके बाद अपनी कार में बैठ कर चली गयी. घर आ कर मैंने खाना खा कर अपने कमरे में रेस्ट करने की सोची तो शिवानी का फ़ोन आ गया.

शिवानी : में कहाँ हो ? कितने बजे लेने आऊं तुम्हे ?

अमित : लगता है तुम्हे मेरी यद् सत्ता रही है जो इतनी जल्दी फ़ोन कर दिया.

शिवानी : जाओ मत आओ मैं भी आराम से सो जाती हूँ मुझे क्या मैंने तो तुम्हारे hi काम से फ़ोन किया था.

अमित : मेरे काम से ?

शिवानी : तुमने मुझे जो काम दिया था वो हो गया है.

अमित : कौन सा काम?

शिवानी : भूल गए ? मोंटी क सीक्रेट ऑफिस का

अमित : क्या ?? तुम्हे पता चल गया ? जल्दी बताओ

शिवानी : ऐसे नहीं , मिलोगे तो बताउंगी

अमित : तो जल्दी आ जाओ मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हूँ.

मैंने फ़ोन रख कर जल्दी से कपडे बदले और शिवानी का बेसब्री से इंतज़ार करने लगा. मुझे उम्मीद नहीं थी क इतनी जल्दी शिवानी मोंटी क बारे में पता लगा लेगी. उसने ये सब कैसे किया होगा पर जैसे भी किया मुझे उम्मीद की किरण नज़र आने लगी क अब जल्दी hi मैं शालू को आज़ाद करवा दूंगा. 15 मिनट्स बाद hi मेरा मोबाइल बजा और मैं सीधा गेट क बहार शिवानी की कार में था.

अमित : अब जल्दी बताओ कहाँ है वो जगह .

शिवानी : इतनी जल्दी क्या है ? क्या मुझसे बात माहि करोगे? इतने दिन बाद मिल रहे हो न hello न hi . क्या सिर्फ मतलब तक hi सीमित है हमारा रिश्ता?

अमित : ये तुम कैसी बातें कर रही हो? तुम्हे क्या लगता है ? क्या मैंने मोंटी का पता लगाने क लिए तुमसे दोस्ती की है? अगर तुम ऐसा सोचती हो तो ठीक है मुझे कुछ नहीं जानना मैं खुद hi कर लूंगा पता.

शिवानी : सॉरी सॉरी तुम तो गुस्सा हो गए मैं तो बस मज़ाक कर रही थी. ाचा अब पहले पता बताऊँ या ड्राइविंग करने चलें?

अमित : रहने दो कुछ भी नहीं करना न कुछ जानना है

शिवानी : सॉरी बाबा अब गुस्सा थूक भी दो लो मैं कण पकड़ती हूँ दोबारा ऐसी गलती नहीं होगी.

अमित : यद् रखना दोबारा फिर कभी ऐसी बात की तो मैं तुमसे बात नहीं करूँगा.

शिवानी : गलती से भी नहीं करुँगी. चलो अब वहीँ चल क बात करते हैं.

शिवानी कार उसी जगह पर ले गयी जहाँ हम रोज़ जाते थे ड्राइविंग करने.

शिवानी : चलो अब अपनी जगह पर आओ

अमित : पहले वो जगह तो बताओ

शिवानी : बताती हूँ पहले तुम यहाँ आओ

मैं अपनी जगह से उठ कर ड्राइविंग सीट पर आया तो शिवानी मेरी तरफ मुँह कर क मेरी गॉड में बैठ गयी और मेरे गले में बहन दाल ली.

शिवानी : तो तुम्हे गुस्सा भी अत है ? आज पहले मैं तुम्हारे गुस्से का hi इलाज करती हूँ.

इतना कह कर शिवानी ने अपने नरम मुलायम होंठ मेरे होंठो से जोड़ दिए और किश करते हुए कभी मेरा ऊपर वाला और कभी निचे वाला होंठ चूसने लगी. मैं भी शिवानी का साथ देने लगा और उसकी पीठ सहलाते हुए अपने हाथ उसकी गांड पर ले गया. शिवानी आज भी स्कर्ट में थी इस लिए उसके नमो मुलायम नितम्भ मेरे हाथों में आ गए. किसी स्पंज की तरह उसके चूतड़ मेरे दबाने से डाब जाते और छोड़ते hi थिरकते हुए अपने आकर में वापिस आ जाते. हम 10 मिनट्स एक दूसरे को यूँ hi किश करते रहे फिर शिवानी ने hi किश को ख़तम किया.

शिवानी : अब तो नाराज़ नहीं हो न?

अमित : तुमसे नाराज़ भला hi सकता हूँ? पर तुम भी ऐसी बात न किया करो मुझे ाचा नहीं लगता.

शिवानी : आखिरी गलती समझ कर माफ़ कार्डो.

अमित : वैसे ये तुम हर बार स्कर्ट पेहेन कर क्यों अति हो?

शिवानी : तुम्हारे लिए hi स्कर्ट पहन कर आती हूँ.

अमित : मेरे लिए?

शिवानी : तुम्हे ाचा लगता है न मेरी टैंगो को सहलाना . इसी लिए ऐसी खुली स्कर्ट पहन कर आती थी ताकि तुम्हे परेशानी न हो.

अमित : तो ये सब तुमने पहले hi सोच रखा था.

शिवानी : सोचा तो नहीं था पर जब तुमने मुझे टच करना शुरू किया तो मैं न चाहते हुए भी तुम्हारे बारे में सोचने लगी और फिर तुम्हारी अछइयां तुम्हारी पर्सनालिटी कब मेरे दिलो दिमाग में समां गयी मुझे पता भी माहि चला और बस मैं अपना सब हर गयी तुम्हारे आगे .

अमित : उस दिन तुम्हे बुरा तो नहीं लगा था न? ी मैं मैंने कुछ गलत .....

शिवानी : बिलकुल भी नहीं. सच कहूं तो तुम्हारे साथ hi मुझे प्यार का वो एहसास हुआ जो मैं हमेशा से चाहती थी पर इतना दर्द होगा ये सोचा नहीं था. इतना दर्द तो पहली बार भी नहीं हुआ था. पता है कितनी मुश्किल से मैं गाडी चला कर घर गयी. ये तो ाचा हुआ माँ डैड घर नहीं थे. साडी रत और गाला सारा दिन मैं अपने रूम से बहार नहीं निकली. माँ ने पूछा तो मैंने बीमार होने का बहाना बना दिया.

अमित : सॉरी शिवानी मैं तुम्हे इतना दर्द नहीं देना चाहता था.

शिवानी : सॉरी बोलने की ज़रूरत नहीं है. मैं तो बार बार वो दर्द लेना चाहूंगी. तुमने मुझे मज़ा भी तो कितना दिया था

अमित : तो क्या ख्याल है फिर से हो जाये

शिवानी : माफ़ करो बाबा अभी तो थोड़ा आराम मिला है . वैसे अगर तुम करना चाहो तो मैं तैयार हूँ.

अमित : नहीं मैं मज़ाक कर रहा था. रोज़ रोज़ करने से तुम्हारी वो ढीली हो जाएगी फिर अपने पति को क्या दिखाओगी?

शिवानी मेरी बात सुन कर एक पल क लिए सीरियस हो गयी.

शिवानी : प्लीज अमित दोबारा ये बात मत करना . मैं तुम्हारे साथ प्यार क पल खुल क जीना चाहती हूँ बिना किसी परवाह क. मैं जानती हूँ मेरा फ्यूचर तुम्हारे साथ नहीं है पर मैं इस बारे में सोचना भी नहीं चाहती. मैं जब तक तुम्हारे साथ हूँ मैं बस तुम्हारा प्यार अपने अंदर तक फील करना चाहती हूँ.

शिवानी को सीरियस होता देख मैंने माहौल को हल्का करने क लिए बात को हसी में ताल दिया .

अमित : कपडे उतरेगी तभी तो अंदर तक फील करोगी न , ये तो कब से तैयार है.

मैंने अपने लैंड की तरफ इशारा करते हुआ कहा तो शिवानी शर्मा गयी और मेरे पेट पर मुक्का मर दिया.

शिवानी : गंदे इंसान बस एक hi काम अत है तुम्हे. वैसे ये अब मेरा है मेरा जब दिल करेगा मैं इसे अंदर ले लुंगी तुम्हे कहने की ज़रूरत नहीं है. और हाँ अगली बार कार में नहीं. हम कहीं ऐसी जगह पर करेंगे जहाँ हमें किसी की कोई टेंशन न हो और खुल क मज़ा ले सकें.

अमित : ठीक है . अब बताओ क्या पता चला है.

शिवानी : शीना ने बताया है क उनका एक फ्लैट है क्सक्सक्सक्स अपार्टमेंट्स नाम की बिल्डिंग में. मोंटी ने उसे hi अपना ऑफिस बनाया हुआ है. वहां वो अकेला hi जाता है और आज कल वो फार्म हाउस भी नहीं जा रहा .

अमित : शीना ने तुम्हे क्यों बताया ? तुमने उससे पूछा था या उसने खुद बताया?

शिवानी : उससे क्या फरक पड़ता है?

अमित : बहुत फरक पड़ता है. अगर उसने खुद बताया है तो इसका मतलब ये भी हो सकता है क वो जाल बिछा रहे हों . उन्हें हमारे बारे में पता चल गया हो. अगर तुमने पूछा है तो कल को कुछ भी हुआ तो शक तुम पर hi जायेगा. अब बताओ तुम्हे कैसे पता चला था?

शिवानी : कल राखी थी तो मैं शीना से मिलने चली गयी थी. मोंटी घर नहीं था . शीना ने उसे राखी बांधनी थी और वो उसका वेट कर रही थी मगर वो नहीं आ रहा था. तब उसने मोंटी से पुछा क वो कहाँ है तो उसने शीना को बताया क वो अपने ऑफिस में है. मुझे लगा क उसका ऑफिस उसकी किसी फैक्ट्री में होगा मगर शीना ने कहा क वो क्सक्सक्स अपार्टमेंट्स बिल्डिंग में जा रही है मोंटी से मिलने

अमित : तुम्हे उसका पूरा एड्रेस पता है.

शिवानी : हाँ फ्लैट no. क्सक्स , क्सक्सक्सक्स अपार्टमेंट्स . तुम कहो तो मैं खुद ले चलती हूँ वहां.

अमित : नहीं मैं खुद देख लूंगा. अब जब मोंटी कॉलेज में होगा तो मैं वहां जाऊंगा.

शिकवणी : ठीक है अगर वो कल कॉलेज आया तो मैं तुम्हे बता दूंगी.

अमित : था का शिवानी तुमने आज मेरी बहुत बड़ी मदद की है.

शिवानी : तुम्हारे लिए कुछ भी करुँगी. तुम शालू की मदद कर क ाचा काम कर रहे हो . मैं खुश हूँ क मैं किसी काम आ सकीय.

उसके बाद मैंने शिवानी से आज सीरियसली थोड़ा बहुत कार चलना सीखा. फिर वो मुझे घर ड्राप कर क चली गयी और मैं बाइक ले कर स्टेडियम चला गया. आज कोच साहब ने मेरी क्लास ली मेरी छुट्टियों की वजह से. उसके बाद मैं ट्यूशन पर गया पर कोई खास बात नहीं हुई बस रोज़ की तरह पड़े और कुछ इधर उधर की बातें. आज थोड़ा लेट हो गया था तो मैं सीधा घर चला गया . मोहित भी वापिस आ गया था अंकल घर नहीं थे . हम तीनो ने साथ में डिनर किआ

अमित : कैसा रहा टूर ? दीदी कैसी हैं?

मोहित : क्या बताऊँ यार एक तो इतना लम्बा सफर ऊपर से वहां कोई है भी नहीं जिसके साथ टाइम पास कर सकूँ मैं तो बोर हो गया था.

अमित : क्यों ? जीजा जी नहीं थे क्या वहां?

मोहित : वो तो अपने काम में hi बिजी थे और घर में और कोई है नहीं सिवाए दीदी खड़ूस सास और ननद क.

अमित : तू दीदी को यहीं ले अत इसी बहाने मैं भी मिल लेता.

मोहित : मैंने तो बहुत कहा था पर वो मणि hi नहीं. माँ दीदी काफी बदल गयी है

आंटी : वो कैसे?

मोहित : वो न पहले की तरह हस्ती हैं न कोई बात करती हैं न बहार कहीं जाती हैं. यहाँ कितनी मस्ती किया करती थी और अब तो जैसे वो कुछ और hi बन गयी हैं

आंटी : शादी क बाद फरक तो आ hi जाता है अब उसपर ज़िम्मेदारियाँ भी तो आ गयी हैं

मोहित : पर मुझे दीदी ऐसे बिलकुल भी अछि नहीं लग रही. उनको वो हमेशा मुस्कुराने वाला चेहरा अब मायूस रहता है. अभी 2 साल हुए हैं शादी को और ऐसी हालत बना ली है

आंटी : मैं बात करुँगी उससे तू चिंता मत कर. अब आराम से अपने कमरे में जाओ सो जाओ तुम थके होंगे सफर से.

उसके बाद हम अपने अपने कमरों में चले गए. मोहित थका हुआ था तो वो सोने चला गया और मैं भी अपने बीएड लेट कर मोंटी क ऑफिस में घुसने और वो वीडियो ढूंढने क बारे में सोचने लगा. मोंटी ने ज़रूर अपने उस सीक्रेट ऑफिस की सिक्योरिटी का भी इंतज़ाम किया होगा और फिर पता नहीं वो उसने कहाँ और कैसे छुपे हो. कंप्यूटर लैपटॉप की मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है ऐसे में मुझे किसी की मदद लेनी पड़ेगी और इस काम क लिए कोई भरोसेमंद इंसान hi चाहिए. नीरज और मोहित क इलावा मैं किसी पर भरोसा नहीं कर सकता पर इससे शालू का राज़ भी खुल सकता है. पर उससे पहले वो वीडियो हासिल करना ज़रूरी है. शिवानी की मदद भी तो ली जा सकती है इसमें. पर वो लड़की है और क्या पता अगर मोंटी को पता चल गया तो कहीं वो शिवानी क साथ कुछ गलत न कर दे. वैसे भी शिवानी का मोंटी क पास रह कर उस पर नज़र रखना भी ज़रूरी है. सब कुछ सोच विचार करने क बाद मुझे मोहित hi सही शख्स लगा जिसकी मदद ली जा सकती है.

मैं अपने मन में प्लान बना रहा था और रत को आंटी मेरे पास आ गयी पर आज वो थोड़ी टेंशन में लग रही थी.

अमित : क्या बात है आज आप कुछ परेशां लग रही हैं?

आंटी : तुमने सुना न मोहित ने क्या कहा . मेरी हस्ती खेलती फूलों जैसी प्यारी बची जिसे हमने इतने लाड से पला है वो आज किस हल में है. जब से सुना है मेरे मन में बेचैनी बाद गयी है. शक तो मुझे भी था क कुछ बात ज़रूर है पर अब मोहित की बातों से ताक़ीन हो गया. वो इतना प्यार करती है मोहित से फिर भी वो राखी बांधने नहीं आयी. ऊपर से अब वो फ़ोन पर भी काम hi बात करती है . मेरा दिल कह रहा था क वो कुछ छुपा रही है और अब यकीन हो गया है. मोहित क सामने तो मैंने बात को ताल दिया पर ये बात मुझे परेशां कर रही है. उसके ससुराल वाले ज़रूर उसे परेशां कर रहे होंगे या फिर दामाद जी क साथ कोई अन्नान न हो.

अमित : इतना परेशां मत होइए आप जो सोच रही हैं वो गलत भी तो हो सकता है? आप ऐसा करिये उन्हें यहाँ बुला लीजिये कोई बहाना बना कर.

आंटी : वो नहीं आएगी . उसे आना होता तो अभी मोहित क साथ भी आ सकती थी.

अमित : अगर वो नहीं आ रही तो आप चली जाइये. आपको वहां जा कर अछि तरह पता चल जायेगा.

आंटी : तुम ठीक कहते हो . राघव को साथ लेकर जाती हूँ अगर कोई बात लगी तो उसे साथ hi ले आउंगी . पिछले साल राखी पर hi आयी थी उसके बाद अभी तक नहीं आयी . जब भी आने का कहती हूँ तो कोई न कोई बहाना बना देती है. मुझे पहले hi समझ जाना चाहिए था क कोई गड़बड़ है. कैसी माँ हूँ मैं क अपनी बेटी की तकलीफ को समझ hi न पायी.

अमित : आप ऐसा मत सोचो . हो सकता है बात कुछ और hi हो . जहाँ तक मैं जनता हूँ आप एक अछि बीवी और एक अछि माँ दोनों hi हो.

आंटी आज चिंतित थी तो ऐसे में उनका मन कहाँ करता चुदाई को पर आज उन्हें मानसिक तनाव से बचने क लिए इमोशनल सपोर्ट की ज़रूरत थी यानि आज उन्हें अंकल क साथ की ज़रूरत थी और वो घर नहीं थे तो मैंने hi आंटी को वो सपोर्ट देने का सोचा. मैंने आंटी का हाथ पकड़ कर अपने साथ बीएड पर सुला लिया वो मन कर रही थी पर मैंने उनकी नहीं सुनी और उनको अपने साथ लेता लिया. आंटी ने भी ज्यादा विरोध नहीं किया और मेरे कंधे पर सर रख कर मेरे साथ चिपक कर लेट गयी. वो देर तक अपनी बेटी क बारे में बातें करती रही और मेरी छाती पर हाथ रखे वो ऐसे hi सो गयी. मुझे भी आंटी की टेंशन देख कर मोहित की सिस्टर क बारे में टेंशन हो रही थी. सुबह मेरी आंख खुली तो आंटी वैसे hi मेरे साथ लगी सो रही थी मैंने उनके माथे पर किश कर क उन्हें जगाया.

आंटी : मैं यहीं सो गयी थी?

अमित : तो क्या हुआ ? हमेशा अपने कमरे में सोती हो आज मेरे साथ मेरे कमरे में सो गयी. वैसे अब कैसा लग रहा है?

आंटी : अब ाचा लग रहा है . थैंक्स, कल रत तो मुझे शायद नींद hi न आती पर तुमने अपनी बाँहों में ले कर मुझे वो सहारा दिया जो राघव को देना चाहिए था.

अमित : अंकल भी आपसे बहुत प्यार करते हैं आप उनको कपड़े मत करो . उन्हें जब पता चलेगा तो वो दौड़े चले आएंगे. अब आप भी उठिये और मैं भी ज़रा एक्ससरसीसे कर क अत हूँ. और हाँ अब आप ज्यादा सोचिये मत , सचाई क्या है ये तो वहां जा कर hi पता चलेगी ऐसे सोचते रहने से कुछ नहीं होगा.

इतना कह कर मैं रेडी हुआ और एक्ससरसीसे करने चला गया. नाश्ता करने क बाद हम कॉलेज चले गए. मैं क्लास जाने की बजाये मोहित को साइड में ले गया.

मोहित : क्या बात है क्लास में क्यों नहीं चल रहे हम ? चंद्रकांता से फिर पन्गा लेना है क्या ?

अमित : वो छोड़ मुझे तुझसे एक ज़रूरी काम है.

मोहित : बोल क्या काम है?

अमित : यार वो साला मोंटी तुझे पारा है न कैसे मेरे से दुश्मनी निकल रहा है ? मुझे किसी ने बताया है क उसके ोास कुछ है जिसकी वजह से वो कुछ लड़कियों को ब्लैकमेल कर क मेरे खिलाफ या मेरी कौसिन्स क खिलाफ फिर से कुछ कुछ करने वाला है.

मोहित : उसकी माँ की ... तू बता क्या करना है सेल को छोड़ेंगे नहीं

अमित : मुझे एक दोस्त ने उसके ऑफिस का पैट दिया है जहाँ उसने वो वीडियोस राखी हुई हैं . अब साला कंप्यूटर तो मेरे को अत नहीं है वर्ण मैं अकेला चला जाता . तू चलेगा मेरे साथ? तुझे तो कंप्यूटर अत है न.

मोहित : ये कैसी बातें कर रहा है तू. मैंने पहले भी कहा था न क मुझे साथ रखना और फिर तू अकेला जाने का सोच रहा था. चल अब कहाँ चलना है.

अमित : इसमें रिस्क भी हो सकता है सोच ले

मोहित : दोस्ती का पता मुश्किलों में hi तो चलता है. और हम दोस्त नहीं भाई हैं समझा. अब चल

अमित : रुक जा पहले पता तो करलूं क मोंटी कहाँ है . उसके कॉलेज में आते hi हम चले जायेंगे.

मोहित : किस्से पता करेगा ?

अमित : तू एक मिनट रुक मुझे पहले पट करने दे

मैंने शिवानी को फ़ोन किया तो उसने उठाया hi नहीं. मैंने 2-3 बार कॉल किया पर वो काट रही थी. फिर 5 मिनट्स बाद hi उसकी वापिस कॉल आ गयी

शिवानी : क्या बात है ? मैं शीना क साथ थी.

अमित : मोंटी कहाँ है?

शिवानी : वो अभी आया नहीं है

अमित : उसके आते hi मुझे कॉल करना फिर मैं उसके ऑफिस जाऊंगा

शिवानी : ठीक है अगर कॉल न कर सकीय तो मैसेज करुँगी . Ok bye

मोहित : किसको फ़ोन कर रहे हो?

अमित : शिवानी को

मोंटी : क्या ??? तेरा दिमाग तो ख़राब नहीं ? वो तो मोंटी क साथ है और तू उस पर विश्वास कर रहा है. कहीं फिर से किसी चल में फसा दिया तो?

अमित : नहीं वो ऐसी नहीं है. वो दिल की वही है और वो दिल से मेरा साथ दे रही है मुझे उस पर पूरा भरोसा है.

मोहित : चल देख लेते हैं वो सच बोल रही है या झूठ.

हम इंतज़ार करने लगे और कोई 15 मिनट्स बाद hi मेरे मोबाइल की टोन बजी . मैंने देखा तो शिवानी का मैसेज था. मोंटी कॉलेज में आ चूका था . मैसेज पड़ते hi मैं मोहित क साथ निकल गया. थोड़ी देर में hi मोहित उस पते पर ले आया जो शिवानी ने बताया था. ये एक बहुत बड़ी बिल्डिंग थी. एंट्री ओर hi सिक्योरिटी गार्ड्स खड़े थे जो अजनबियों को बिना एंट्री अंदर नहीं जाने देते थे. मैं सोचने लगा क इन्हे क्या जवाब दूँ तो मोहित ने hi उनसे बात की और एक पता बता कर वहां अपनी एंट्री कर दी.

अमित : ये किसका पता बता दिया तुमने?

मोहित : यार ये बिना एंट्री क जाने नहीं देते और चिंता मत कर हमारे फैक्ट्री मैनेजर का फ्लैट भी यहीं है उसी का एड्रेस दिया है मैंने.

अमित : ये तो ाचा हुआ . चल अब जल्दी से उसका ऑफिस देखने

मोहित : पर यार यहाँ तो ऑफिस है hi नहीं कोई. ज़रूर उसका फ्लैट hi होगा . सोचने साला कोई पन्गा न हो?

अमित : तू चुप चल बस

फिर हम शिवानी क बताये एड्रेस पर पहुंचे तो ये गलत hi था और बंद पड़ा हुआ था.

मोहित : मैंने कहा था न यहाँ ऑफिस नहीं है

अमित : वो छोड़ अब इसे कैसे खोले ये तो बंद लग रहा है

मोहित : तो क्या हम यहाँ चोरी करने आये हैं?

अमित : चोरी नहीं है बस हम मदद कर रहे हैं.

मोहित : बात तो एक hi हुई न. बंद पड़े फ्लैट में इस तरह घुसना चोरी hi कही जाएगी. और किसी को पता चल गया तो गए काम से.

अमित : वो बाद में देखेंगे पहले इसे कैसे खोलना है?

मोहित : अब मैं क्या बताऊँ मैंने कभी चोरी थोड़ा की है. चाबी क बगैर तो खुलेगा नहीं .इसे तो तोडना hi पड़ेगा .

बंद दरवाज़ा तोडना कोई आसान तो होता नहीं ये कौन सा कोई मूवी है क एक लात मरी और दरवाज़ा खुल गया. पर करना तो कुछ पड़ेगा hi. ऐसे में C.I.D वाले कमिश्नर साहब की बात यद् आ गयी. ‘ दया , तोड़ दो दरवाज़ा ‘ बस फिर क्या था मैंने 2 कदम पीछे हैट कर ज़ोर से कंधे से झटका मारा पर साला दरवाज़ा खुला hi नहीं. भेनचोद पता नहीं डे कैसे खोलता है दरवाज़े को. मैंने हिम्मत से काम लेते हुए 2-3 बार तरय किया और अपना पूरा ज़ोर लगा दिया लास्ट में दरवाज़ा लोच वाली जगह से थोड़ा उखड गया और खुल गया. मैंने और मोहित ने मुँह पर रुमाल बांध लिए क्यूंकि अंदर कक्तव लगे हो सकते थे . मोंटी जैसा शातिर इंसान लापरवाही तो करेगा नहीं. हम दोनों अंदर घुस गए और तलाशी लेने लगे. फ्लैट को देख कर लग रहा था क जैसे यहाँ मोंटी क इलावा कोई और अत जाता नहीं होगा. सब कुछ बिलकुल सही सलामत अपनी जगह पर था. हम दोनों सब कुछ चेक करने लगे. फ्लैट कुछ ज्यादा चीज़ें नहीं थी बस एक कप्बोर्ड hi था सामान रखने या छुपाने क लिए और वो भी हमने चेक कर लिया पर साला कुछ मिला नहीं. न कोई कंप्यूटर न लैपटॉप . 2 घंटे अछि तरह जांचने क बाद भी जब कुछ हाथ न आया तो मैं सर पर हाथ रख बैठ गया.

मोहित : कहा था न तुझे क ये चल हो सकती है अब देख हम चोर भी बन गए और काम भी नहीं हुआ.

अमित : वक बार फिर से चेक करते हैं यार शायद कोई चीज़ मिल hi जाये.

हमने फिर से तलाश की मगर कुछ न मिला सिवाए एक लैपटॉप चार्जर और दवर क.

मोहित : ये चार्जर hi किला है जो लैपटॉप का है. इसका मतलब है यहाँ लैपटॉप भी होना चाहिए था पर वो नहीं है . यानि वो मोंटी अपने साथ ले गया होगा.

अमित : उसी में होगी वो वीडियोस. साला फिर बच गया. ये क्या है ?

मोहित : ये कक्तव की वीडियो रिकॉर्डिंग करता है.

अमित : इसका क्या करना है?

मोहित : इसे साथ ले चलते हैं क्या पता इससे कुछ नज़र आ जाये. वैसे भी इसमें हमारी रिकॉर्डिंग आ गयी होगी तो इसे ऐसे hi छोड़ नहीं सकते.

उसके बाद हम दो ो सावधानी से वो दवर ले कर फ्लैट का दरवाज़ा वापिस पहले की तरह जोड़ते हुए निकल गए. आज कुछ हाथ नहीं आया, मोंटी पहले hi वो लैपटॉप अपने साथ ले गया. ये च हुआ मोहित को उस दवर का फंक्शन पैट था . मैं तो कभी जान hi नहीं पता . शायद इससे कुछ पता चल सके. पता नहीं मोहित फ्लैट की हालत देख कर क्या समझेगा ? वैसे तो ऐसे केस में लोग चोरी hi समझते हैं पर चोरी तो हमने कुछ किया नहीं. और अब तो वीडियो भी कोई नहीं छोडो थी पीछे जिससे हम पर कोई शक हो. वहां सीधा हम वापिस कॉलेज आ गए और जा कर कैंटीन में बैठ गए. मैं तू और शीना भी अपने साथियों क साथ वहीँ पर थे. मोंटी ने एक नज़र मुझे घूर कर देखा पर शीना तो कितनी देर तक मुझे देखती रही. जब तक हम कैंटीन में रहे शीना की नज़र मुझ पर hi थी. एक काम तो ाचा हो गया क मोंटी ने हमें कॉलेज में hi देख किया जिससे वो हम पर शक नहीं करेगा.

छुट्टी होने पर मीनल राधा और नेहा दीदी हमसे सवाल करने लगी क हम कहाँ थे आज जो कैंटीन में नहीं मिले फ्री लेक्चर में. मैंने बहाना बना दिया क प्रोफ ने हमें बुलाया था किसी काम से. उसके बाद हूँ हम अपने अपने घर चले गए. दोपहर क खाने क बाद जब मोहित और मैं अपने कमरे में रेस्ट कर रहे थे तो मैंने शिवानी को फ़ोन कर क बुला लिया और उसके आते hi हम ड्राइविंग सिखने चले गए.

अमित : तुमने तो कहा था क वो उसका ऑफिस है पर वहां तो कुछ भी माहि है. मुझे वहां कुछ भी नहीं मिला.

शिवानी : ऐसा कैसे हो सकता है? मोंटी घर ओर तो कोई ऐसी चीज़ नहीं रखने वाला. और कहाँ रख सकता है वो ? तुमने अचे से देखा था न?

अमित : बार बार चेक किया यार पर कुछ नहीं मिला.

शिवानी : ये तो प्रॉब्लम हो गयी. कहाँ रख सकता है वो ?

अमित : तुम फिर से कुछ और पता लगाने की कोशिश करो और हाँ कुछ भी सीधा मत पूछना बस शीना क साथ रहो और बातों बातों में इनफार्मेशन निकलवाओ . हो सकता है कोई और भी जगह हो.

शिवानी : मैं कोशिश करुँगी. पर तुम अंदर कैसे गए थे

अमित : और कैसे जाता ? दरवाज़ा तोड़ कर hi घुसा था.

शिवानी : किसी ने देखा तो नहीं?

अमित : नहीं. तुम उसकी चिंता मत करो मैंने सब कुछ ध्यान से hi किया था.

शिवानी : फिर भी मुझे चिंता हो रही है कहीं तुम ओर कोई बात न आ जाये वो पहले hi बौखलाया हुआ है टोनी और रॉकी पर हुए हमले की वजह से .

अमित : तुम मेरी इतना चिंता मत करो मुझे कुछ नहीं होगा.

शिवानी : कैसे न करूँ चिंता ? तुम्हे कुछ हो गया तो ? मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगी.

अमित : इतना प्यार करने लगी हो ?

शिवानी : मैं नहीं जानती कितना पर इतना पता है क मैं बस तुम्हे खोना नहीं चाहती.

अमित : इतना प्यार मत करो शिवानी वर्ण कल बिछड़ते हुए बहुत तकलीफ होगी.

शिवानी : कितनी बार कहा है ऐसी बातें मत किया करो. जब तक भी हमारा साथ है मैं इसे अपने दिल अपनी रूह में समां लेना चाहती हूँ ताकि कभी मुझे तुमसे दूर जाने पर भी तुम्हारी कमी न महसूस हो.

शिवानी की आवाज़ भरी हो गयी और उसकी ऑंखें भी नाम होने लगी तो मैंने उसे अपने गले से लगा लिया. कुछ देर उसे गले लगाए रखा और किश भी किया. फिर उससे कुछ देर कार चलना सीखा और फिर घर आ गए. शाम को स्टेडियम और दिर मंजू म क पास ट्यूशन पड़ने क बाद मैं घर वापिस जा रहा था क दिमाग में वो हॉस्पिटल वाले आदमी का ख्याल आ गया और मैं हॉस्पिटल को चला गया. हॉस्पिटल जा कर मैं सीधा उसके रूम में गया पर ये क्या ? वहां पर तो कोई औरत पड़ी हुई थी. मुझे इस तरह रूम में अउ देख कर उसके साथ वाले मुझे घूर घूर कर देखने लगे.

अमित : सॉरी मैं शायद गलत रूम में आ गया.

इतना कह कर मैं बहार निकल आया . मैंने कमरा no. चेक किया तो वो बिलकुल सही था फिर गलती कैसे हो सकती है. अगर ये औरत यहाँ है तो वो आदमी कहाँ गया? चलो डॉ से पता करता हूँ. मैं डॉ रीना क ऑफिस में गया तो वो भी वहां नहीं थी. मैंने नर्स से पुछा तो उसने बताया क डॉ की शिफ्ट ख़तम हो गयी थी तो वो घर चली गयी. फिर मैंने उस आदमी क बारे में पुछा तो नर्स ने बताया क वो आदमी बिना बताये रत में hi निकल गया. इस बात ओर डॉ भी नाराज़ हैं क्यूंकि पुलिस को उससे पूछताछ करनी थी. अब ये साला क्या चक्कर है ? खैर मुझे क्या ? मेरा कौन सा उससे कोई लेना देना था. मैं वहां से वापिस घर चला गया. घर जा कर देखा तो अंकल भी आ चुके थे शायद न्यू ने hi बुलाया होगा . सब ने साथ में डिनर किया और फिर अपने अपने कमरों में चले गए. मैं बीएड पर आराम से लेता था क नैना दीदी का फ़ोन आ गया.

नैना : तुम्हे अपने आप यद् नहीं रहता न ?

अमित : न hello न hi सीधा लड़ाई

नैना दीदी : तुम हो hi इसी लायक. तुम वडा कर क गए थे क तुम जल्द hi मुझे प्यार करोगे और 2 दिन हो गए तुम नहीं ए. यही है तुम्हारा वडा?

अमित : ाचा तो इस बात पर आप नाराज़ हो रही हैं. वैसे अगर मैं सिर्फ लड़ाई झगडे क hi लायक हूँ तो प्यार कैसे करेंगी ?

नैना दीदी : ज्यादा बनो मत . मैं कितना तड़प रही हूँ और तुम हो की बातें बना रहे हो. लगता है तुम मुझे प्यार करते hi नहीं

अमित : फिर वही बात , मैंने कहा था न ऐसा फिर मत कहना

नैना दीदी : तो क्या करूँ ? मैं तड़प रही हूँ और तुम्हे मेरा ख्याल hi नहीं.

अमित : आपका ख्याल न होता तो उसी दिन वो सब कर देता और अब तक सबको पता चल गया होता क आपके साथ क्या हुआ है. आप थोड़ा सबर रखिये मैं 1-2 दिन में इंतज़ाम कर क आपको फ़ोन करता हूँ.

नैना दीदी : इसमें इंतज़ाम क्या करना है ? किसी होटल में चलते हैं न.

अमित : नहीं , मैं ऐसा नहीं करने वाला अगर किसी ने देख लिया तो बदनामी होगी आपकी. वैसे व् होटल में ऐसे जाने वाली लड़कियों को लोग गलत समझ लेते हैं और क्या पता अगर पुलिस आ गयी तो या किसी ने आप को वहां देख लिया तो? मुझे थोड़ा वक़्त दीजिये मैं सब कुछ आराम से पूरी सावधानी क साथ करूँगा.

नैना दीदी : जो भी करना है जल्दी करो अब मुझसे इंतज़ार नहीं होता. जबसे तुमने वहां प्यार किया है मुझे रत को नींद hi नहीं अति

अमित : ाचा तो इसका मतलब आपकी सहेली फिर मुझसे प्यार करना चाहती है . कहो तो अभी आ जॉन वही प्यार करने?

नैना दीदी : ( शर्मा कर ) धत्त , इस बार मेरी सहेली तुम्हारे दोस्त को बिना प्यार किये जाने नहीं देगी अगर फिर से तुमने उसे तड़पाया तो वो बुरा मन जाएगी. उस दिन से वो बार बार रोटी है और मुझसे कहती है क मैं तुमसे कहूं क तुम अपने दोस्त से कहो क वो उसे प्यार करे.

अमित : तो ये बात है. आपकी सहेली इतनी उदास हो रही है. अपनी सहेली से कहिये जल्द hi मेरा दोस्त उससे प्यार करेगा और उसे काली से फूल न देगा. पर बाद में मत कहना क उसकी शकल बिगड़ दी.

नैना दीदी : मेरी सहेली तो कब से तैयार है फूल बनने क लिए तुम hi देर कर रहे हो.

अमित : इंतज़ार का दाल मीठा होता है . मैं आपकी सहेली को फुर्सत से प्यार करना चाहता हूँ ताकि वो साडी ज़िन्दगी उस पल को यद् रखे.

नैना दीदी : तो जल्दी करो न , कहीं मेरी सहेली इंतज़ार में hi रो रो क डैम न तोड़ दे.

अमित : मैं ऐसा नहीं होने दूंगा. वडा रहा गाओं जाने से पहले पहले आपको काली से फूल बना कर hi जाऊंगा.



उसके बाद हमने कुछ देर और इधर उधर की बातें की और गुड नाईट किश देकर सो गए. नैना दीदी से वडा किया था अब निभाना भी पड़ेगा और उसके लिए जगह का इंतज़ाम करना होगा. जगह का इंतज़ाम कैसे करूँ ? मोहित से कहूंगा तो वो पीछे पद जायेगा. नीरज से कह नहीं सकता. फिर किस्से ?? यही सोचते सोचते मैं सो गया.
 
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