Adultery Manhoos se mahan tak - Page 15 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 117



घर आते hi अंकल आंटी को साथ लिए मुझे अपने साथ बिठा कर चल दिए दिव्या मौसी क घर. मोहित दोपहर को मौसी से मिल आया था तो इस वक़्त उसने जाने से मन कर दिया क्यूंकि उसे मीनल से बात करनी थी फ़ोन पर . वैसे तो मैंने सोचा था क दिव्या मौसी क घर न जॉन पर अंकल आंटी को मन करता तो क्या कहता क मैं क्यों अपनी मौसी क घर नहीं जाना चाहता . इससे ये बात सबको पता चल सकती थी क मेरे और दिव्या मौसी क बीच सब ठीक नहीं है . खैर हम दिव्या मौसी क घर गए तो इस वक़्त वहां पर राधा दिव्या मौसी क इलावा रीता मौसी भी थी. अंकल आंटी को देख कर रीता मौसी बहुत खुश हुई . कितने सैलून बाद वो आज अंकल आंटी को अपने सामने देख रही थी. अंकल आंटी भी बहुत खुश थे उन्हें अपने सामने देख कर.

रीता मौसी : तुम दोनों को इतने सैलून बाद अपने सामने देख कर मुझे यकीन नहीं हो रहा क ये तुम दोनों hi हो. कितना प्यार था तुम दोनों का पवन और दामिनी क साथ .

बात करते करते रीता मौसी की आँखों में पानी आ गया . यही हल अंकल आंटी का भी था जो पुराणी बातों को यद् कर रहे थे रीता मौसी को देख कर

अंकल : आप को फिर से देख कर बहुत ख़ुशी हो रही है. लगता है अमित क रूप में पवन फिर से लौट आया है और फिर से वही पुराण समय भी.

आंटी : आप आज भी वैसी hi हैं दीदी काश दामिनी भी हमारे साथ होती.

रीता मौसी : काश ऐसा होता तो कितना ाचा होता.

आंटी : वैसे दिव्या कहाँ है मैं उसे देखना चाहती हूँ . दिव्या को देखना मतलब दामिनी को देखना , दोनों एक जैसी hi तो थी एक दूसरे की जान. मुझे जल्दी से उससे मिलवा दो .

रीता मौसी दोनों को अपने साथ अंदर ले गयी और मैं वहीँ हॉल में बैठ गया . मैं दिव्या मौसी क सामने जाना नहीं चाहता था. राधा जल्दी से अंकल आंटी क लिए पानी ले कर उनके पीछे गयी. अंदर क्या हो रहा है मैं देखना तो चाहता था मगर अंदर भी तो जाना नहीं था. कुछ देर बाद राधा कमरे से बहार आयी तो उसकी आँखों में नमी थी . मैंने अंदाज़ा लगा लिया क अंदर क्या चल रहा होगा. दिव्या मौसी को देख कर ज़रूर आंटी मेरी माँ की बात करते हुए खुद भी रो रही होंगी और उन्हें भी रुला रही होंगी .

राधा सीधा किचन में गयी और अपने चेहरे पर मणि मर कर मेरे पास आ गयी .

राधा : तुम यहाँ बहार क्यों बैठे हो अकेले ?

अमित : इतने लोग पहले hi अंदर बैठे हैं इस लिए मैं बहार hi बैठ गया . वैसे भी इतने सैलून बाद अंकल आंटी मौसी से मिल रहे हैं तो ढेर साडी बातें करेंगे . मेरा वहां क्या काम

राधा : मगर तुम्हे तो ाचा लगता है न अपने मम्मी पापा का बारे में सुन्ना , फिर यहाँ क्यों बैठे हो?

अमित : बताया तो है , अभी बड़ों को अकेले में बातें करने दो

राधा : ाचा मेरे साथ आओ ज़रा मेरे कमरे में , मुझे एक काम है.

राधा उठ कर अपने कमरे में चली गयी और मैं भी उसके पीछे पीछे हो लिया . अंदर आते hi राधा ने दरवाज़ा बंद कर लिए और मेरे गले लग कर रोने लगी.

राधा : रट हुए) ी ऍम सॉरी अमित ये सब मेरी वजह से हुआ

अमित: शॉकेड ) ये तुम क्या कह रही हो ? क्या हुआ है?

राधा : मुझे सब पता चल गया है माँ ने तुम्हारे साथ क्या किया. मैंने तुम्हारी और मौसी की बातें सुन ली थी. माँ को ऐसा नहीं करना चाहिए था. अपनी माँ की तरफ से मैं माफ़ी मांगती हूँ , मैं जानती हूँ तुम माँ से मिलना नहीं चाहते और इसी लिए अंदर नहीं जा रहे. मैं जानती हूँ तुम उनसे नाराज़ हो और इसी लिए अब यहाँ आना भी बंद कर डोज. पर इसमें मेरी क्या गलती है ? मुझे किस जुर्म की सजा मिलेगी?

राधा मेरे गले लगी ये सब कहती हुई तो रही थी और इसी वजह से मेरी भी ऑंखें छलक आयी थीं . राधा को दर था क कहीं मैं उनके घर आना hi बंद न कर दूँ पर ऐसा तो मैंने सोचा भी नहीं था. मैं तो बस दिव्या मौसी क सामने नहीं आना चाहता था जब तक क वो खुद न मुझे बुलाएँ. मगर राधा को ये दर था क कहीं मैं उनके घर आना hi बंद न कर दूँ.

अमित : ये तुम कैसी बातें कर रही हो ? किसने कहा मैं यहाँ आना बंद कर दूंगा? वो तुम्हारी माँ होने क साथ मेरी भी तो मौसी हैं . और मौसी का मतलब होता है माँ जैसी. मैं भला उनसे नाराज़ कैसे रह सकता हूँ. हाँ मेरा चेहरा देख कर अगर उन्हें ाचा नहीं लगता तो मैं उनके सामने आ कर उन्हें दुखी नहीं करना चाहता . और तुम क्यों रो रही हो? मैंने तुम्हे तो कुछ नहीं कहा. अब रोना बंद करो क्यूंकि तुम रट हुए बंदरिया लगती हो.

राधा : मैं जानती हूँ तुम मेरा दिल रखने क लिए ये सब कह रहे हो. तुम चाहो तो मुझे सजा दो मगर मुझे खुद से अलग मत करना . तुम्हारे सिवा और कौन है मेरा जिसे मैं जब चाहे पुकारूँ और वो मेरी मदद क लिए चला ए? प्लीज मुझे छोड़ कर मत जाना . माँ बुरी नहीं है वो भी तुम्हे चाहती है मगर वो गुस्सा क्यों करती है ये मुझे नहीं पता. पर अब मैं पता लगा क रहूंगी. वो क्या वजह है क वो तुम पर इतना गुस्सा करती हैं , मैं ज़रूर पता लगाउंगी.

अमित : रिलैक्स राधा , तुम किसी बात की चिंता मत करो. वक़्त क साथ सब ठीक हो जायेगा. मैं जनता हूँ एक दिन वो खुद मुझे इसकी वजह बताएंगी मगर मुझसे वडा करो तुम मौसी क साथ गुस्सा नहीं करोगी . वो तुमसे बहुत प्यार करती हैं अगर तुमने भी उनसे गुस्सा किया तो उनको ाचा नहीं लगेगा. आखिर और है hi कौन तुम्हारे इलावा जिससे वो बात कर सकें.

राधा : मैं उनसे गुस्सा कर क कहाँ जाउंगी. वो मेरे लिए सब कुछ हैं , माँ भी पापा भी सहेली भी बहिन भी. मगर तुम पर उनका बेवजह गुस्सा करना मुझे बिलकुल भी ाचा नहीं लगता. तुम वडा करो कुछ भी हो तुम मेरा साथ नहीं छोड़ोगे.

अमित : मैं तो हमेशा से तुम्हारे साथ था राधा . जब तुम मुझसे बात किये बिना वहां से चली अति थी तब भी मैं तुम्हारे साथ था. जब तुम मुझे कई कई महीने साल तक नज़र नहीं आती थी तब भी मैं तुम्हारे साथ था. मैंने हमेशा तुम्हे अपने पास महसूस किया है. तुम मेरी सबसे अछि दोस्त हो. मैंने हमेशा तुम्हे अपने पास महसूस करता रहा हूँ. मैं कभी तुम्हे अकेला नहीं छोडूंगा चाहे जो भी हो.

राधा : मुझे भी सब यद् है और सच बताऊँ तो मैं भी तुमसे ढेरों बातें करना चाहती थी मगर माँ की वजह से तुमसे दूर रहती थी और हर बार गाओं से आने क बाद कई कई दिन तक मैं अपनी उस मज़बूरी क लिए रोटी रहती थी . मैंने हुई कभी कोई दोस्त नहीं बनाया . मेरे लिए हमेशा से तुम hi मेरे दोस्त थे और आज भी हो. मैं बस कभी तुम्हे खोना नहीं चाहती. माँ पापा क बाद अगर मेरी ज़िन्दगी में मुझे कोई सबसे प्यारा है तो वो तुम हो.

मैंने राधा को खुद से अलग किया और उसकी आँखों से आंसू साफ करते हुए कहा

अमित : मैं कभी तुम्हे अकेला नहीं छोडूंगा ये मेरा वडा है. तुम जब भी मुझे पुकारोगी मैं चाहे इस दुनिया में हूँ या उस दुनिया में , मैं तुम्हारे लिए ज़रूर आऊंगा.

मैं पता नहीं किस रो में बेहटा हुआ ये सब कहे जा रहा था मुझे भी नहीं पता. राधा की आँखों में आंसू देख कर मेरा खुद पर hi काबू नहीं थी. पता नहीं मेरे साथ ऐसा क्यों होता है जब भी बात राधा की हो. रिश्ते में वो मेरी बहिन लगती थी पर एक अनजान सी कशिश मैंने शुरू से hi महसूस की है राधा को लेकर मेरे मन में. मैंने ज़ज़्बात में इतना कुछ कह तो दिया मगर शायद राधा को ये पसंद नहीं आया और उसने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया.

राधा : ख़बरदार फिर कभी ऐसी बात की तो. मुझे किसी और दुनिया का कुछ नहीं पता . मैं बस तुम्हे इसी दुनिया में इसी जनम में हमेशा अपने सामने देखना चाहती हूँ.

दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ से हम दोनों एक दूसरे से अलग हो गए . और बहार से आवाज़ आयी

रीता मौसी : राधा क्या तुम अंदर हो ? अमित कहाँ है दिखाई नहीं से रहा ?

राधा : आई मौसी अमित मेरे साथ hi है.

राधा ने जल्दी से दरवाज़ा खोला तो रीता मौसी सामने hi कड़ी थी और मुझे देख कर उनके चेहरे पर जो चिंता क भाव थे वो दूर हो गए.

रीता मौसी : तुम यहाँ हो ? मुझे लगा क तुम कहीं बहार तो नहीं चले गए. चलो राधा डिनर तैयार करें सब क लिए . और तुम जाओ अंदर जा कर बैठो , यहाँ क्या कर रहे हो?

रीता मौसी मुझे अंदर जाने का कह कर राधा को लेकर किचन में चली गयी . मैं भला कैसे अंदर जाता इस लिए मोबाइल पकड़ कर बैठ गया. मोबाइल चेक किया तो ज्योति क फ़ोन से कुछ मेस्सगेस आये हुए थे. मैंने उसे रिप्लाई किया. इसी बिच. मेरा फ़ोन बजने लगा. स्क्रीन पर नाम देख कर मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी.

अमित : hello , आ गयी यद् ?

मेघा : यद् तो तब करूँ अगर भूली हूँ तो. तुम्हारा एहसास तो हर वक़्त रहता है मुझे.

अमित: बड़ी रोमांटिक हो रही हो. वैसे मेरा एहसास कहाँ रहता है ? आगे या पीछे?

मेघा : मत पूछो कहाँ कहाँ रहता है. मेरा रोम रोम तुम्हे यद् कर क फड़कने लगता है. जिस्म क्या अब तो दिल में भी तुमने अपने नाम की मोहर लगा दी है.

अमित : लगता है बड़ी आग लगी हुई है तुम्हारे अंदर.

मेघा : आग क्यों न लगे? तुम्हारा ख्याल आते hi मैं गीली होने लगती हूँ . अब जल्दी से मिलो और मेरी आग बुझाओ.

अमित: ऐसे नहीं , पहले मेरा काम करो फिर मैं तुम्हारी आग ठंडी करूँगा.

मेघा : बड़े ज़ालिम हो , मैं खुद तुम्हारे आगे टंगे खोली बैठी हूँ और तुम हो क दूसरों की पीछे लगे हुए हो.

अमित: अब बातें hi बनाओगी या काम भी करोगी कोई .

मेघा : इसी लिए तो फ़ोन किया है.

अमित : क्या मतलब ?

मेघा : मतलब ये क मैंने रुपाली को मन लिया है और कल तुम्हे आना है मेरी आग बुझाने क लिए.

अमित : क्या ??? तुम सच कह रही हो ? क्या सच में रुपाली मन गयी ?मुझे यकीन नहीं हो रहा है.

मुझे सच में यकीन नहीं था क रुपाली मन जाएगी. पता नहीं मेघा ने ये कैसे किया पर ये एक मुश्किल काम था जो मेघा ने कर दिया . इससे ये साबित हो गया क मेघा मुझसे अपनी आग बुझाने क लिए कुछ भी कर सकती है.

मेघा : इसमें इतना हैरान होने वाली कौन सी बात है? तुम्हारे लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ. मैंने तुम्हारा काम कर दिया अब मुझे मेरा इनाम चाहिए.

अमित: तुमने मुझे बहुत बड़ी खुशखबरी सुनाई है. इसका इनाम तुम्हे ज़रूर मिलेगा. मगर तुमने ये किया कैसे ?

मेघा : उसे तो मन्ना hi था. साली मेरी पति की रखैल बानी फिरती है और ऐसे दिखती है जैसे बड़ी सटी सावित्री हो . बस इसी बात पर मन लिया उसे. मैंने तो कल hi बात कर दी थी मगर साली पहले मन नहीं रही थी इस लिए एक दिन वेट करनी पद गयी .

अमित : ग्रेट अब तो उसकी भी आग ठंडी कर दूंगा.

मेघा : अचे से करना ताकि उसके बाद उसकी छूट भोसड़ा बन जाये और फिर मेरा पति भी उससे दूर hi रहे. वैसे भी एक बार जिसके अंदर तुम्हारा लैंड चला जायेगा उस छूट में कोई और लैंड जगह बना hi नहीं पायेगा . क्यूंकि फिर छूट छूट नहीं रहती भोसड़ा बन जाती है. हे हे हे

अमित : तो फिर कहाँ मिलना है और कब

मेघा : मैं तुम्हे एड्रेस भेज देती हूँ अपने फ्लैट का . कल वहां आ जाना 11 बजे तक.

अमित : ठीक है मैं पहुँच जाऊंगा.

मेघा : मगर मुझे इसका इनाम चाहिए ये बात यद् रखना .

अमित : वैसे तुम्हे क्या चाहिए . तुम्हारे पास तो सब कुछ है.

मेघा: वो मैं बाद में बताउंगी .

अमित : ाचा ठीक है बता देना . अब मुझे जाना है मैं और बात नहीं कर सकता .

मेघा : ठीक है तो कल 11 बजे .

अमित : ok

उसके बाद मैंने फ़ोन काट दिया. रुपाली इतनी जल्दी मन जाएगी ये मुझे अंदाज़ा भी नहीं था. बल्कि मुझे तो लगा था और वो मानेगी hi नहीं . चलो जो भी है मेरे प्लान क लिए रुपाली का आना बहुत ज़रूरी था जो मैं करने वाला था. थोड़ी देर में रीता मौसी और राधा ने डिनर रेडी कर दिया और मैं अंकल आंटी क साथ हॉल में बैठ कर खाना खाने लगा. दिव्या मौसी रूम से बहार नहीं आयी या तो वो इतनी वीक थी क आ नहीं सकती थी या फिर वो मेरे सामने नहीं आना चाहती थी और मैं भी उनके सामने नहीं जाना चाहता था. खाना खाने क बाद अंकल आंटी एक बार फिर दिव्या मौसी से मिलने रूम में गए मगर मैं वहीँ बैठा रहा इस बार रीता मौसी ने ये बात नोट कर ली.

रीता मौसी : अमित , क्या बात है ? मैं देख रही हूँ तुम दिव्या क पास नहीं जा रहे . मैंने कहा था न क उससे नाराज़ मत हो . वो तुमसे बहुत प्यार करती है बीटा ऐसा मत करो उसके साथ. उसने बहुत दुःख देखे हैं , दामिनी क जाने क बाद तो उसने कभी है क देखा भी नहीं शायद . क्या तुम उसे और दुःख देना चाहते हो ?

अमित: मैं ऐसा क्यों चाहूंगा मौसी ? मगर मुझे देख कर उन्हें गुस्सा अत है और दुःख भी होता होगा अतीत की किसी घटना को यद् कर क. ऐसे में मैं उनके सामने जा कर उन्हें और दुखी नहीं करना चाहता.

रीता मौसी : घाव का इलाज करने क लिए उसे जब कुरेदा जाता है तो दर्द तो होता hi है न . दिव्या क दिल क ज़ख़्म बहुत पुराने हो चले हैं मगर आज भी जैसे ताज़ा हैं. तुम्हारे सामने आने से उसके वो घाव कुरेदे जा रहे हैं मगर तुम्हे hi उन घावों पर प्यार से मलहम भी लगाना है . इस लिए उससे दूर रहने की बजाये उसका सामना करो तभी तो उसके अंदर का दर्द बहार निकलेगा जिसे वो अंदर अंदर hi छुपाये जी रही है.

रीता मौसी क चेहरे पर इस समय बड़ी गंभीरता थी और शायद आँखों में नमी भी आने hi वाली थी क वो खुद को सँभालते हुए चली गयी . मैं रीता मौसी की बातों को सोचता रहा और फिर मुझे बाबा की बातें भी यद् आने लगी की कैसे दिव्या मौसी का मेरी माँ क साथ जुड़ाव था और बचपन में मुझे वो कितना प्यार करती थी. मुझे समझ नहीं आ रहा था क मैं क्या करूँ. एक तरफ दिल कहता क मुझे दिव्या मौसी क दिल में छिपे मेरे प्रति प्यार को बहार निकलना चाहिए दूसरी तरफ दिल कहता क वो मेरे सामने आने से दुखी होती हैं और मेरे पापा को गलत कहती हैं जो मुझे ाचा नहीं लगता था. मैं सोफे पर बैठा यही सोच रहा था क अंकल आंटी बहार आ गए और मैं रीता मौसी और राधा को bye कहता हुआ अंकल आंटी क साथ घर वापिस लौट आया.

बीएड पर लेता मैं रत भर रीता मौसी और बाबा की बातों को यद् कर क दिव्या मौसी क बारे में सोचता रहा. दिव्या मौसी ने चाहे कभी मेरी होश में मुझे प्यार नहीं किया हो मगर फिर भी मेरे दिल में उनके लिए कभी नफरत भरे ख्याल नहीं ए थे . इतना कुछ होने क बाद भी मैं छह कर भी उनसे नफरत नहीं कर प् रहा था . बल्कि मुझे खुद पर hi गिलटी महसूस हो रहा था क मैं उनकी बातों का बुरा मन कर उन्हें अकेला छोड़ कर चला आया जबकि राधा मेरे साथ कितना अपना पैन दिखती है. वो बेचारी मुझे अपनी ज़िन्दगी का एक हम हिस्सा मानती है और मैं उसे कभी समझ नहीं पाया . दूसरों को सहारा देने क चक्कर में उसे इग्नोर करता रहा जिसके लिए मैं hi एक मात्रा दोस्त हूँ. जो भी हो अब राधा को मैं अकेला नहीं रहने दूंगा चाहे मैं खुद उसके पास मौजूद रहूं या न मुझे उसको सेफ जोन में रखना होगा जिससे उसे कभी मेरी कमी महसूस न हो. ऐसे hi सोचते सोचते कब आँख लगी पता hi नहीं चला.

दूसरी तरफ रीता मौसी ने अमित की तरह दिव्या को भी झकझोरा और उसे उसकी गलती का एहसास भी दिलवाया क कैसे वो अमित क साथ गलत कर रही है. दोनों बहने एक hi कमरे में सो रही थी तो बातों क लिए इस काली रत क सन्नाटे में बहुत एकांत था अपनी बातों को खुल कर करने और समझने क लिए

रीता मौसी : दिव्या क्या तुम्हे नहीं लगता क तुम ज्यादती कर रही हो अमित क साथ? तुमने मुझे तो अपनी कसम देकर चुप करवा लिया पर क्या दामिनी को चुप करवा पाओगी ? तुम्हे अमित में पवन नज़र अत है क्यूंकि वो उसका पिता था मगर क्या तुम्हे दामिनी नज़र नहीं अति जिसने उसे पैदा किया . 9 महीने पेट में रखने वाली माँ का अधिकार बचे पर बाप से कहीं ज्यादा होता है , फिर भी तुम उसे उसके बाप की वजह से इतना दुःख देती हो. तुमने कभी ये सोचा है क दामिनी पर क्या बिट रही होगी ये देख कर क उसकी जान से प्यारी बहिन hi उसकी आखिरी निशानी उसके बेटे पर ऐसे ज़ुलम करती है. क्या जवाब डौगी अपने आप को बताओ मुझे? तुम्हारा दिल तो आज भी दामिनी का नाम लेकर धड़कता है फिर भी तुम अमित क साथ ऐसा करती हो. मैं नहीं जानती पवन ऐसा क्या किया क तुम उससे इतनी नफरत करने लगी क मरने क बाद भी उसे तुमने माफ़ नहीं किया ऊपर से उसकी सजा अमित को दे रही हो . जहाँ तक मैं जानती हूँ अमित में तो ऐसी एक भी बुराई नहीं है क कोई उससे नफ़रत करे . वो तो इतना प्यारा है क सब क दिल में जगह बना लेता है , देखा न कामिनी भी अब उसे कितना प्यार करती है. पर तुमने तो अपना दिल पत्थर का बना लिया है. कभी ऑंखें खोल कर देख एक माँ की नज़र से देख वो कितना प्यारा है. गौरी भाभी उस पर यूँ hi जान नहीं छिड़कती और सच कहूं तो मुझे लगता सब hi उसे प्यार करते हैं चाहे वो बड़े हो या हमारे बचे. तुमने देखा नहीं राधा ने किसी और को फ़ोन करने की बजाये अमित को फ़ोन किया. क्यूंकि उसे उस पर भरोसा है और तुमने उसके बारे में ऐसा सोचा? अब भी वक़्त है दिव्या ऑंखें खोल कर देख वो कितना ाचा है . उसे सिर्फ तेरा प्यार चाहिए. आज तो वो सिर्फ तेरे रूम में नहीं आया , सोच अगर उसने तेरे घर आना भी बंद कर दिया और राधा से भी नाता तोड़ लिया तो वो अकेली हो जाएगी. अपने लिए न सही राधा क लिए hi सोच.

रीता की एक एक बात दिव्या क दिल पर तीर की तरह चुभ रही थी. उससे अपने आंसू कण्ट्रोल नहीं हो रहे थे दामिनी का ख्याल आते hi. सच hi तो कहा था रीता दीदी ने, बचे पर माँ का हक़ बाप से भी ज्यादा होता है. शकल बाप से मिलने का मतलब ये तो नहीं क वो बाप जैसा hi होगा. जिस माँ ने 9 महीने अपने पेट में रख कर अपने खून से सींचा है और अपना दूध पीला कर बड़ा किया है क्या उसका कोई मोल नहीं? दामिनी को जवाब देने की बात पर तो दिव्या की आँखों क साथ साथ दिल भी रोने लगा था. दोनों बहनो में कितना प्यार था , यहाँ तक क उसके मरने क बाद भी आज तक वो उसे खुद से जुड़ नहीं कर पायी . जब अमित पैदा हुआ था तो किस तरह दिव्या उसे अपनी गॉड में ले लिया करती थी. दिव्या अमित को अपना बीटा hi मानती थी और राधा क होने क बाद तो जैसे दोनों बहनो ने फैसला hi कर लिया था क वो एक दूसरे क बच्चों को ले लेंगी . दामिनी ने राधा को अपनी बेटी बना लिया था और इसके लिए दोनों बहनो में गुप्त सहमति भी हो गयी थी क राधा की शादी अमित क साथ होगी. उसी अमित को आज दिव्या नफ़रत भरी नज़रों से देखने लगी थी. आखिर उसका कसूर hi क्या था. क्यों उसे उस जुर्म की सजा मिल रही थी जो उसने किया hi नहीं था. जो कुछ भी किया वो पवन ने किया था इसमें किसी और का दोष कैसे हो सकता है?

दिव्या : रट हुए ) मैं क्या करूँ दीदी मैं क्या करूँ? मैं खुद को रोक नहीं पति जब भी अमित को देखती हूँ मुझे पवन hi नज़र अत है.

रीता : तो तू उसके चेहरे को मत देख कर न, बल्कि मैं तो कहती हूँ क अगर देखना hi है तो उसकी आँखों में देख . तुझे वहां सिर्फ दामिनी hi नज़र आएगी मेरी बहिन. यद् नहीं उस दिन राधा क बर्थडे पर क्या हुआ था. सच सच बताना क्या तुम्हे उस दिन दामिनी का एहसास नहीं हुआ था. हम सब ने देखा था क तू कैसे रो रही थी और तेरे आंसू बता रहे थे क तू दामिनी क लिए रो रही है. फिर भी तुझे अमित में सिर्फ पवन नज़र अत है?

दिव्या : मैं खुद को बहुत समझती हूँ दीदी पर क्या करूँ. उसके बाप ने मेरे साथ जो किया है वो मैं भुला नहीं पाती .

रीता : तुमने तो मुझसे कसम देकर मेरा मुँह hi बंद कर दिया है. मगर इतना सुन ले क जब तक तू अपना दुःख किसी की बताएगी नहीं ये तुम्हे जीने नहीं देगा . और मेरी मान तो सब भुला कर अमित को गले से लगा ले तुझे सुकून मिलेगा वर्ण तू ऐसे hi आंसू बहती रहेगी.

दिव्या का चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था और रीता की बात भी सही थी क जब तक वो अमित को ऐसे दुःख देती रहेगी वो खुद भी दुखी रहेगी . कहीं न कहीं अमित दिव्या का भी बीटा था चाहे वो दत्तक पुत्र हो या फिर दामाद की शकल में.

अगले दिन सुबह मैं अपनी रूटीन से उठ कर ेष्वरसीसे करने क बाद मोहित क साथ कॉलेज जाने की बजाये अपनी बाइक पर गया .

मोहित : आज फिर बाइक पर ? आज कहाँ जाने का इरादा है ? मंडे से टेस्ट शुरू हैं थोड़ा उधर भी ध्यान दे ले भाई.

अमित: बस यार मुझे कहीं जाना पड़ेगा अगर फ़ोन आ गया तो इस लिए बाइक पर जा रहा हूँ.

मोहित : अबे मेरी कार भी तो है न तू कब तक ऐसे अकेला बाइक पर घूमता रहेगा . मेरी मन तो पापा ने उस दिन कार तेरे लिए सेलेक्ट की थी न वो hi लेले. तुझे अकेले hi जाना है तो कार से भी तो जा सकता है न.

अमित: अरे यार इतनी सी बात क लिए कार की क्या ज़रूरत है. तू चल मैं भी आ रहा हूँ.

हम अलग अलग अपनी अपनी सवारी पर कॉलेज क लिए निकल गए. चन्दर्कांता ने आज मुझे कुछ कहा तो नहीं पर उसका मेरी तरफ देखना ऐसा था क जैसे कह रही हो क बच्चू टेस्ट का रिजल्ट मेरा फैसला करने वाला है. मैं क्लास में रहूँगा या बहार जाऊंगा . उसे लगता होगा क मैं फ़ैल हो जाऊंगा क्यूंकि मैं क्लास में जो नहीं रहता. मगर उसे क्या पता क मंजू म ने मेरी स्टडी ुप्तो डेट राखी हुई है.

चन्दर्कांता का लेक्चर ख़तम होते hi साथ वाली रॉ में बैठी कल्पना बोल पड़ी.

कल्पना : कैसे हो?

अमित : मैं तो ाचा हूँ , तुम कैसी हो?

कल्पना : मैं भी ठीक हूँ वैसे मुझे तुमसे एक बात केहनी थी.

अमित : इसके लिए तुम्हे पूछने की ज़रूरत नहीं है.

कल्पना : थैंक्स

अमित : हम्म्म्म ???

कल्पना : तुम्हारी वजह से मुझे इतनी अछि फॅमिली जो मिल गयी. रीता मणि रजनी मौसी दिव्या मौसी तीनो hi बहुत प्यारी हैं और तुम्हारी माँ भी बहुत प्यारी हैं. अब तो मैंने सोच लिया है क तुम्हारे हैं भी जाउंगी किसी दिन कामिनी ममी और दीपिका ममी से मिलने . नेहा दीदी और राधा ने बताया क वो भी बहुत प्यारी हैं और तुम्हारा घर भी बहुत ाचा है. ऊपर से गाओं का माहौल भी देखने को मिलेगा.

अमित: तो ये बात है , वेलकम तुम जब चाहो चल सकती हो . मुझे ख़ुशी होगी तुम्हे अपने गाओं ले जाकर मगर एक शरत है मेरी.

कल्पना : कैसी शरत ?

अमित : तुम किसी क हाथ पाऊँ नहीं तोड़ेगी और मुझे कुछ नहीं कहोगी.

कल्पना : मैं क्या ऐसी लगती हूँ तुम्हे जो बिना वजह किसी पर भी हाथ उठा दूँ. और वैसे तुम्हे मैंने कब कुछ कहा जो तुम ऐसे कह रहे हो?

अमित: तुम्हारा क्या भरोसा कब गुस्से में आ कर मेरा नक्शा hi बिगड़ दो. मैं तो सेफ्टी क लिए बोल रहा हूँ.

कल्पना : ाचा तो ऐसा है? कोई बात नहीं सोचेंगे इसके बारे में.

मंजू म ने क्लास लेनी शुरू की तो हम भी चुपचाप पड़ने लगे. अभी मंजू म का लेक्चर कहतक भी नहीं हुआ था क मेरे फ़ोन पर कॉल आने लगी . मैंने देखा तो मेघा का फ़ोन था मैंने कॉल काट दी. अगले hi पल उसका मैसेज आ गया . उसने लिखा था क वो फ्लैट पर पहुँच गयी है रुपाली क साथ अब वो मेरे बारे में पूछ रही थी. मैंने मैसेज कर दिया क मैं आधे घंटे में पहुँच जाऊंगा. मंजू का लेक्चर ख़तम होते hi मैं कल्पना और मोहित क साथ कैंटीन जाने की बजाये बहार चला गया. कल्पना ने पूछा तो मैंने उसे ज़रूरी काम का बहाना बना दिया और जल्दी से बाइक लेकर निकल गया मेघा और रुपाली से मिलने . मैंने 20 मिनट्स में इस जगह पहुँच गया जो मेघा ने बताई थी. ये एक पॉश एरिया में बानी 4 मंज़िला ईमारत थी और हर एक मंज़िल का मालिक कोई अलग hi था जैसा क मैंने एंट्रेंस पर देखा था. गार्ड ने मुझे अंदर जाने से पहले रोक लिया तो मैंने मेघा से उसकी बात करवा दी. गार्ड ने मेघा से बात करते hi मुझे बिना एंट्री नोट किये अंदर जाने दिया .

मैं अभी बिल्डिंग में एंटर hi हो रहा था क राधा का फ़ोन आ गया.

ों कॉल

राधा : कहाँ पर हो?

अमित : कैसी हो राधा ? मैं ज़रा काम से बहार आया हूँ.

राधा : सच कह रहे हो ? या फिर माँ की नाराज़गी मुझ पर निकल रहे हो?

अमित: ये तुम कैसी बातें कर रही हो ? मैंने कहा न क मैं किसी से नाराज़ नहीं हूँ. और तुम से तो नाराज़ हो भी नहीं सकता मैं. मुझे अचानक काम पद गया इसी लिए आना पड़ा . मोहित ने बताया नहीं तुम्हे ?

राधा : मुझे लगा तुम जान बुझ कर गए हो.

अमित : ऐसा कभी सोचना भी मत . अगर फिर भी यकीन नहीं है तो मैं वापिस आ जाता हूँ. काम नहीं होता तो न सही मगर तुम्हे नाराज़ नहीं होने से सकता.

राधा : नहीं नहीं ऐसा मत करो. तुम अपना काम करो जो करने क लिए गए हो. वैसे मैंने सोचा आज तुम घर चले जाओगे तो एक बार तुमसे मिल लेती .

अमित : बस इतनी सी बात. मैं गाओं जाने से पहले तुम्हे मिलने आऊंगा , अब खुश?

राधा : खुश तब हूँगी जब तुम मिलने आओगे

अमित : फिर तो आना hi पड़ेगा चाहे दुनिआ इधर की उधर क्यों न हो जाये. वैसे तुम आज कॉलेज आयी तो घर पर कौन है मौसी क पास?

राधा : रीता मौसी हैं वैसे तो पर अब माँ पहले से कहीं अछि है. खुद देख लेना आ कर.

अमित : ठीक है राधा मैं ज़रा किसी से मिलने आया था तो उससे बात कर लूँ

राधा : ठीक है bye

अमित : bye

इसके बाद मैंने कॉल कट की और सामने लगी एक छोटी सी लिफ्ट में घुस कर टॉप फ्लोर पर चला गया. लिफ्ट क सामने hi एक छोटा सा कॉरिडोर और एक बड़ा सा दरवाज़ा था. बेल्ल बजाते hi दरवाज़ा अंदर से खुल गया और सामने मेघा कड़ी थी. मेघा ने इस वक़्त एक काले रंग का शार्ट ड्रेस पहना हुआ था जो देखने में भड़कीला था . यानि क टाइट फिटिंग जिसमे से उसके शरीर क अंगों की बनावट साफ नज़र आ रही थी. मेघा मोती तो नहीं थी मगर शरीर चर्बी से भरपूर था जैसे क पाकिस्तानी ड्रामा में अपने देखा होगा. बड़े बड़े चुके जो आधे बहार झलक रहे थे और खुले बल जो बड़े गले की इस ड्रेस में कन्धों को ढके हुए थे. शार्ट ड्रेस सिर्फ कूल्हों से कुछ नीचे तक hi था जिसने से उसकी गोरी मांसल जांघें अपना जलवा दिखा रही थी . चेहरे पर एक कामुक स्माइल लिए उसने मुझे अंदर आने का रास्ता दिया .

मेघा : देर करदी तुमने आने में ? आ जाओ अंदर.

मैं उसके पीछे पीछे अंदर आया तो अंदर से फ्लैट की साजो सजावट देख कर दिल खुश हो गया. किसी फ़िल्मी सन सा लग रहा था . हर चीज़ अपने आप में इस बात की गवाह थी क पैसों की यहाँ नदियां बहाई गयी हैं. मैं अभी छतो तरफ देख कर जायज़ा ले रहा था क मेघा ने दरवाज़ा बंद करते हुए मुझे पीछे से hi अपनी बाँहों में भर लिया .

मेघा : उम्म्म आ hi गए आखिर मैं कब से इंतज़ार में थी. आज तो वक़्त भी अपना है और जगह भी . आज मैं शाम तक तुम्हे नहीं छोड़ने वाली.

मेघा क बड़े बड़े रुई क गोले मेरी पीठ पर फ़ैल गए थे और उसके हाथ मेरे सीने पर चल रहे थे. मेरी गर्दन पर उसने अपने होंठ चिपका लिए और मुझे उत्तेजित करने की कोशिश करने लगी .

अमित : मगर वो कहा है जिसके लिए मुझे यहाँ बुलाया है?

मेघा : मैंने तो अपने लिए hi बुलाया है तुम्हे , तुम hi दूसरों को ढूंढते फिरते हो.

अमित : मज़ाक मत करो , क्या वो आयी नहीं ?

मेघा : अंदर है वो , मैंने कहा था न वो ऐसी नहीं है इस लिए शर्मा रही है. वो साथ नहीं देगी जो करना है तुम्हे खुद hi करना पड़ेगा.

अमित : ये तो वक़्त hi बताएगा क वो साथ देगी या नहीं. अब जल्दी से बुलाओ उसे .

मेघा : तुम्हे इतना यकीन है खुद पर? वैसे तो तुम्हारा हथियार देख कर कोई भी दीवानी हो जाएगी मगर ये कुछ अलग है . पता नहीं मेरे पति क साथ कैसे करती होगी . वो तो एक no. का ठरकी है.

अमित : वो सब तुम देख लेना अपनी आँखों से जब वो खुद मुझे करने को कहेगी

मेघा : तो हो जाये शरत ?

अमित : अगर ऐसा hi चाहती हो तो ठीक है . मगर शरत में क्या लगाओगी ? तुम्हारा तो सब मैं पहले hi बजा चूका हूँ.

मेघा : मेरी जान तुमने तो सिर्फ अभी रुपाली को hi देखा है. मेरी सब फ्रेंड्स एक से बढ़कर एक हैं. और अगर तुम कहो तो लड़कियों की भी लाइन लगा दूंगी . चली शरत ये है क अगर मैं जीती तो मेरे साथ चलना होगा जहाँ मैं कहूं और जितना टाइम भी हम वहां रहें तुम मेरी प्यास अचे से बुझाओगे. और अगर तुम जीते तो तुम्हे एक नै छूट मिलेगी . वो भी ऐसी क तुम यद् रखोगे.

अमित: वैसे दोनों hi सूरत में काम तो एक hi है और फायदा भी मेरा hi . चलो ठीक है मुझे शर्त मंज़ूर है . अब किसको लेन वाली हो ये तुम hi जानो. चलो अब उससे भी मिलवा दो.

मेघा : बड़ी जल्दी है उससे मिलने की ? बैठो मैं उसे लती हूँ बहार

मैं सोफे पर बैठ गया और मेघा अंदर चली गयी अपनी देवरानी यानि की रुपाली को बुलाने . मैं अभी सोफे पर बैठा सोच रहा था रुपाली क बारे में क मुझे उन दोनों की आहत महसूस हुई. मेरी पीठ उनकी तरफ थी .

मेघा : लो मिल लो मेरी प्यारी देवरानी से.

मैंने मेघा की आवाज़ सुन कर जब पलट कर देखा तो सामने रुपाली कड़ी थी मेघा क साथ. खुले घुंघराले बाल बड़ी बड़ी नीली ग्रे आँखें गोरा चमकदार चेहरा और गुलाब की पंखुड़ियों से होंठ. उसने इस वक़्त बढ़िए सी सलवार कमीज पहनी हुई थी जो डिज़ाइन दर और मॉडर्न थी. मैं तो उसकी खूबसूरती को hi देख रहा था. मगर मुझे सामने देख कर उसकी तो बोलती hi जैसे बंद हो गयी थी . रुपाली का मुँह खुला का खुला रह गया. उसे उम्मीद नहीं थी शायद मेरे यहाँ होने की

रुपाली : ये यहाँ क्या कर रहा है दीदी ?

मेघा : यही तो है मेरा खास दोस्त जिससे तुम्हे मिलवाना था.

रुपाली : दीदी आपका दिमाग तो ठीक है? ये आपके बेटे की उम्र का है और ऊपर से ये रमा का नोन है.

मेघा : तो क्या हुआ. बेटे की उम्र का है बीटा तो नहीं . रमा का नोन है तो क्या हुआ. उसके हस्बैंड से इसकी पार्टनरशिप है . कोई ऐरागैरा नहीं है. तुम डरो मत ये किसी से कुछ नहीं कहने वाला और वैसे भी ऐसा मर्द तुमने कभी देखा या सुना भी नहीं होगा. मेरी मनो तो एक बार तरय करलो सब कुछ भूल जाओगी .

रुपाली : ये आप कैसी बातें कर रही हैं ? आप सेक्स की आग में ये भी भूल गयी क अगर किसी को पता चला तो क्या होगा? और तुम , तुम्हे शर्म नहीं अति ऐसे गलत काम करते हुए? अपनी माँ की उम्र की औरत क साथ ऐसा गन्दा काम करते हुए तुम्हारी आत्मा ने तुम्हे धिक्कारा नहीं? ज़रूर तुम्हारे अंदर भी किसी ऐसे hi आदमी का खून होगा जो ये सब कर रहे हो.

रुपाली की ये बात सुन कर मेरा दिमाग एक सेकंड में ख़राब हो गया . उसने मेरे माँ बाप पर hi उंगली उठा दी थी. मैं तो ये सब सिर्फ इस लिए कर रहा था क मुझे शालू की मदद करने का यही रास्ता नज़र आया था. मगर मुझे रुपाली ने घटिया लोगों की केटेगरी में खड़ा कर दिया था ऊपर से मेरे खून पर hi बात कर दी. मन क मैं पहले भी मेघा क साथ कर चूका था मगर वो एक एक्सीडेंट था और दूसरी बार सिर्फ शालू क लिए. मेरा गुस्सा कण्ट्रोल से बहार होने लगा .

अमित: मन में ) खुद तो अपने भतीजे और उसके बाप से चुदवाती है और मुझे उपदेश दे रही है . मेरे माँ बाप पर उंगली उठाई तूने , देख आज तेरा क्या हल करता हूँ.

मेघा : रुपाली , मंद योर लैंग्वेज. तुम भी कोई सटी सावित्री नहीं हो , मेरे पति क साथ करते तुझे शर्म नहीं आती जो यहाँ उपदेश दे रही हो. चलो माफ़ी मानगो इससे और इसे खुश करो.

रुपाली : गुस्से में ) माफ़ी माय फुट. आपका दिमाग ख़राब हो गया है. सेक्स की आग में अंधी हो कर आप ये गन्दा खेल खेल रही हैं . मैं आपका साथ नहीं देने वाली . आपको मुबारक आपका ये यार , मैं चली.



रुपाली गुस्से से पेअर पटकती हुई चल दी
 
भाई लोगो यार सॉरी टाइम नहीं मिल पता घर पर काम चल रहा है तो उधर भी टाइम देना पड़ता है. फ़िलहाल अभी लिखने लगा हूँ अगर पूरा हो गया तो आज hi पोस्ट कर दूंगा वर्ण कल
 
अपडेट 118



रुपाली गुस्से से पेअर पटकती हुई चल दी

रुपाली को जाते देख मुझे मेरे प्लान पर पानी फिरता हुआ नज़र आया. मुझे कैसे भी कर क रुपाली को रोकना था क्यूंकि वो hi एक उम्मीद थी मेरे प्लान को सक्सेस होने में. इससे पहले क मैं रुपाली को आगे बाद क रोकता . जैसे hi रुपाली दरवाज़े क पास पहुंची मेघा ने उसे रोका

मेघा : इसका अंजाम जानती हो न ?

मेघा की बात सुन कर रुपाली क पाऊँ वहीँ जैम गए. उसका दरवाज़े का हैंडल खोलते हुए रुक गया . पता नहीं मेघा किस बारे में बात कर रही थी मगर रुपाली का ऐसे रुक जाना साफ बता रहा था क उसकी कोई कमज़ोरी मेघा क हाथ में है.

मेघा : मैंने तुम्हे कहा था न क मेरे दोस्त को खुश करो मैं तुम्हे कुछ नहीं करुँगी. मगर लगता है तुम्हे मेरी बात की परवाह नहीं. खुद तो मेरे पति से मज़े ले रही हो और मैंने एक बार मेरे दोस्त को खुश करने को कह दिया तो तुम्हे शराफत यद् आ गयी. चुप चाप इसे खुश करो वर्ण मुझे मज़बूरी में वो करना पड़ेगा जो तुम्हे ाचा नहीं लगेगा.

मेघा किस बारे में बात कर रही है ये तो मुझे नहीं पता था मगर मुझे अपना काम बनता नज़र आ रहा था. रुपाली मेघा की बात सुन कर पलट गयी. उसके चेहरे पर मज़बूरी और शर्मिंदगी क भाव थे. मुझे उसका इस तरह मज़बूरी में मेरे साथ कुछ करना मुझे ाचा तो नहीं लग रहा था पर एक तो उसने मुझे अभी अभी जो कहा था उसका गुस्सा मेरे ऊपर हावी था और दूसरा मुझे रुपाली से अपना काम भी करवाना था.

रुपाली : दीदी ये आप ठीक नहीं कर रही. आप जानती हैं न अपने हस्बैंड क बारे में फिर भी आप मेरे साथ ऐसा कर रही हैं.

मेघा : तुम जानती हो न मैंने तुम्हे हमेशा अपनी बहिन की तरह रखा है मगर आज तुमने जो कुछ कहा वो मुझे ाचा नहीं लगा. मैंने कुछ ऐसा तो नहीं कह दिया था जो तुम कर नहीं सकती . मेरे पति क साथ भी तो करती हो , इसके साथ कर लोगी तो क्या हो जायेगा? यकीन मनो एक बार अमित क साथ कर क देखो अगली बार खुद hi इसके नीचे लेटने को मरोगी.

रुपाली : आप इतनी कैसे गिर सकती हैं दीदी ? ज़रा उसकी और अपनी उम्र में फरक तो देखिये.

मेघा : मुझे भाषण मत दो इससे ज्यादा और एक शब्द भी और मत बोलना. एक बार इसे खुश कार्डो उसके बाद मैं तुम्हे फिर कभी नहीं कहूँगी.

मेघा ने रुपाली को चुप करवा दिया और उसे अपना आखिरी फैसला भी सुना दिया. रुपाली ने एक बार मेघा की तरफ देखा और मायूस हो कर नज़रें झुका कर कड़ी हो गयी. रुपाली क चेहरे पर ऐसे उदासी मुझे खाल रही थी मेरा दिल कह रहा था क मुझे रुपाली को जाने देना चाहिए पर मोंटी का वो लैपटॉप मेघा नहीं ला कर देगी . वो काम रुपाली hi कर सकती थी बिना किसी की नज़र में आये . वैसे भी रुपाली मोंटी से भी चुद रही थी तो मेरे दिमाग में ये भी था क अगर अपने भतीजे और जेठ से चुद सकती है तो मुझमे बुराई क्या है?

रुपाली अभी अपनी जगह पर hi कड़ी थी तो मैंने मेघा की तरफ देखा और उसे रुपाली की तरफ इशारा करते हुए कहा.

अमित : लगता है तुम्हारी देवरानी को मैं पसंद नहीं आया. अगर मोंटी की तरह मैं इसका भतीजा होता तो ये इतना टाइम न लगाती .

मेरे इतना कहते hi रुपाली को झटका लगा और उसने एक डैम अपनी नज़रें ऊपर कर क देखा. उसके चेहरे से साफ़ नज़र आ रहा था क वो दर गयी है जैसे मैंने मोंटी और भतीजा कहा.

मेघा : तुम चिंता मत करो ये बहुत समझदार है इसे पता है क अगर इसने तुम्हे खुश न किया तो अंजाम क्या होगा. क्यों रुपाली मैंने ठीक कहा न ?

रुपाली ने एक नज़र मेघा को देखा और और फिर मुझे देखने लगी. मैंने मेघा क पास जाकर उसको किश करते हुए उसकी गांड को मसलने शुरू कर दिया . मेघा भी मेरा साथ देने लगी और अपनी एक तंग उठा कर मेरी तंग से रगड़ने लगी .

मेघा : उम्म्म ककक क्या करते हो ? तुम तो जादूगर हो . आअह्ह्ह्ह ककक दोनों को संभल तो लोगे न? ऐसा न हो क मैं प्यासी रह जॉन

अमित : अभी तक मेरी ताकत का अंदाज़ा नहीं हुआ क्या? तुम दोनों को hi ठंडा कर क भेजूंगा आज . पहले तुम्हारी प्यास भुजङ्गा फिर तुम्हारी देवरानी की . बहुत बोलती है न ये , आज क बाद नहीं बोलेगी

मैंने वहीँ खड़े खड़े मेघा की गांड और उसके बड़े बड़े बूब्स दबाता गया. मेघा तो थी गरम औरत , जल्दी hi वो रंग में आ गयी और उसने मेरा लैंड पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया. रुपाली क सामने hi हम शुरू हो गए थे. वो बेचारी चुप चाप हमें देख रही थी . उसका मन तो नहीं था हमारा साथ देने का मगर वो मजबूर थी और खुद को रोकने क लिए वो हमारी तरफ देख hi नहीं रही थी. मगर मैं उसे ऐसे कैसे छोड़ सकता था . मेघा ने शरत भी तो लगाई थी . मैंने मेघा को इतना गरम कर दिया क उसने मुझे खुद से अलग किया और एक झटके में अपनी ओने पीेछे शार्ट ड्रेस उतर कर फेंक दी. ड्रेस क निकलते hi उसके बड़े बड़े वाटरमैलों जैसे चुके मेरे सामने आ गए जो इस वक़्त काली ब्रा में थे. ब्रा देख कर hi पता चल रहा था क ये विदेशी मेहेंगे ब्रांड की होगी. और छूट की जगह पर पेंटी जो देखने में पतली सी थी और पीछे से तो दोनों कूल्हों क बीच hi कहीं गायब थी.

मेघा : तो तुम्हे यहीं पर सब करना है ? आज छोडूंगी नहीं तुम्हे. उस दिन तो मौका सही नहीं था मगर आज पूरा वसूल करुँगी. इतना कह कर वो मुझ पर झपट पड़ी और वीलडली किश करने लगी. उसने खींच कर मेरी T-shirt उतर दी. अब ऊपर से मैं नंगा था . मेघा क जिस्म पर ब्रा और पेंटी थे मगर रुपाली वैसे hi कड़ी थी . मैंने तिरछी निगाह से देखा तो उसके गोर मुखड़े का रंग लाल गुलाबी होने लगा था और वो अपने हाथों की उँगलियों को मसल रही थी. मैंने मेघा की पीठ पर हाथ ले जाकर हुक खोल दिया और उसके दूध पानी क गुबारों की तरह उछालते हुए बहार आ गए. मेघा ने मेरी बेल्ट को खोलना शुरू किया तो मैंने उसे कहा .

अमित : अपनी देवरानी को साथ नहीं मिलाओगी?

मेघा : तुम्हारे लिए hi तो बुलाया है उसे

अमित : तो फिर जाओ उसको भी अपनी तरह बेपर्दा करो. मैं भी तो देखूं अंदर से कैसी है ये लाल मिर्च

मेरी बात मानते हुए मेघा अपनी गांड मटकती हुई रुपाली क पास चली गयी. रुपाली को मेघा को इस तरह अपने सामने नंगा देख कर शर्म आ रही थी शायद या फिर गुस्सा . उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया . मेघा ने रुपाली का हाथ पकड़ा और उसे लगभग खींचती हुई मेरी तरफ ले आयी. रुपाली विरोध तो कर रही थी मगर उसे पता था क अब उसके पास कोई ऑप्शन नहीं थी. रुपाली मेरे सामने कड़ी थी और उसके पीछे मेघा लगभग नंगी कड़ी थी. रुपाली मेरी तरफ नहीं देख रही थी मगर मेघा उसके साथ चिपक रही थी.

मेघा : देखो ज़रा इसे , इसकी छोड़ी छाती मजबूत गठीला बदन किसे पसंद नहीं होगा. ऊपर से ऐसा हथियार लिए फिरता है क कमर तोड़ देता है. चलो हाथ लगाकर ज़रा बहार निकालो उसे और खुद hi चेक करलो.

रुपाली वैसे hi कड़ी रही और कोई रिएक्शन नहीं दिया . मैंने अपना हाथ उसके कंधे पर रखा तो उसने मेरा हाथ झटक दिया और गुस्से से मेरी तरफ देखा.

अमित: मन में ) मुझे नखरे दिखा रही है और खुद भतीजे का लैंड कितने मज़े से ले रही थी पार्टी में hi. इसकी हेकड़ी तो निकल क रहूँगा .

अमित : ये तो मुझे हाथ hi नहीं लगाने दे रही . लगता है इसे मैं पसंद नहीं आ रहा अब तुम hi कुछ करो.

मेघा : एक बार तुम्हारा हथियार देख लेगी तो खुद hi मन जाएगी चलो जल्दी से इसे निकल कर दिखाओ.

अमित : ये काम तो तुम hi करो , मैं अपने हाथ से अपने कपडे नहीं निकलने वाला हाँ अगर ये (रुपाली) चाहे तो ये hi निकल दे.

मेघा : मैं hi निकल देती हूँ तभी इसे होश आएगा.

मेघा मेरे पास आ कर घुटनो पर बैठ गयी और मेरी बेल्ट और पेण्ट का बटन खोल कर उसने मेरी पेण्ट अंडरवियर क साथ घुटनो तक निचे खिंच दी. मेरा लैंड स्प्रिंग की तरह उछाल कर बहार आ गया. मेघा तो लैंड देख कर खुश हो गयी मगर रुपाली क हैरान परेशां ऑंखें बड़ी बड़ी कर क मेरे लैंड महाराज को देखने लगी. मुझे लगा क रुपाली मेरे लैंड को जितनी हैरानी से देख रही है इसका मतलब है क वो जल्दी hi इस मुसल को लेने क लिए तैयार हो जाएगी . मेघा ने चरण मेरा लैंड हाथ में पकड़ कर अपने होंठो में ले लिया. मैंने भी मस्ती में आकर रुपाली का हाथ पकड़ा तो एक बार फिर उसने मेरा हाथ झटक दिया .

मेघा : सारूउल सारूउप सारूउप उम्म्म आआह्ह्ह्ह कितना गरम है ये और सख्त तो इतना जैसे लोहे का बना हो. क्यों रुपाली अब क्या कहती हो? देखा है कभी ऐसा मुसल तुमने? जितना तगड़ा नज़र अत है न उससे कहीं ज्यादा परफॉर्म भी करता है ये. इसी लिए तो मैं इसकी दीवानी हो गयी हूँ . ले देखले तू भी एक बार इसे छू कर.

मेघा ने रुपाली का हाथ पकड़ कर मेरे लैंड पर रखने की कोशिश की तो उसने अपना हाथ छुड़ा लिया .

रुपाली : दीदी प्लीज मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हूँ मेरे साथ ऐसा मत कीजिये

मेघा : क्या कर रही हूँ मैं? मैं तुम्हारा भला hi कर रही हूँ. कहाँ उस बूढ़े से चुदवाती फिर रही हो . इस असली मर्द से एक बार सेक्स करलो सब भूल जाओगी. जब उसके साथ कर सकती हो तो इसके साथ क्यों नहीं ? वैसे भी इसके सामने वो कुछ भी नहीं . एक बार तरय तो करो फिर खुद hi मांगती फिरोगी इसे अपने अंदर लेने क लिए.

रुपाली ने तो हाथ नहीं लगाया मगर मेघा ने अपना काम शुरू कर दिया . वो किसी प्रोफेशनल रंडी की तरह मेरे लैंड को मुँह में ले क चूसने लगी . कभी वो सुपडे को होंठो में दबा कर वैक्यूम की तरह अंदर खींचती और जीभ से सुपडे को छेड़ती और कभी अपनी हलक तक लैंड को मुँह में ले लेती.

अमित : आआअह्ह्ह्हह कक्कक्स तुम कमल की हो मेघा . ऐसे तो रंडियां भी नहीं करती होंगी. कुछ अपनी देवरानी को भी सिखाओ

मेरे ऐसा कहने से रुपाली ने मुझे गुस्से से देखा और मैंने उसे स्माइल दी. मेघा तेज़ी से मेरे लैंड अपने गले तक अंदर बहार करने लगी. मैंने मस्ती में उसके सर को पकड़ कर धक्के लगाने शुरू कर दिए तो मेरा लैंड उसकी हलक तक जा लगा.

मेघा : ाख़ूऊन अखुनण अखुन्णन हा जाएं लोगे क्या अखुनण अखुनण

मेघा क गले में लैंड जा कर लगा था जिससे उसकी सांस अटक गयी और आँखों से पानी बहार आने लगा.

अमित : क्या करूँ कण्ट्रोल नहीं हो रहा . तुम तो आज मुझे पागल कर डौगी आज .

मेघा : अभी तो शुरुआत है आगे आगे देखो.

इतना कह कर मेघा कड़ी हुई रुपाली को गले लगा कर उसके होंठों को चूमने लगी. रुपाली उसे अपने से दूर हटाने की कोशिश करने लगी.

मेघा : अब ये सब ड्रामा छोड़ दो रुपाली मैं बार बार तुमसे बहस नहीं करना चाहती . मैं भी तुम्हारी तरह औरत hi हूँ फिर तुम्हे प्रॉब्लम क्या है.

रुपाली : आप ये क्यों कर रही हैं?

मेघा : बार बार ये बात करने की बजाये मेरा साथ दो , तुम्हे भी मज़ा आएगा. तुम्हे मेरा साथ देना hi होगा ये तुम भी जानती हो फिर क्यों टाइम और मूड ख़राब कर रही हो?

इससे पहले रुपाली कुछ कहती मेघा ने उसे बाँहों में भर कर किश करना शुरू कर दिया . रुपाली मेघा का साथ नहीं दे रही थी मगर मेघा भी कहाँ मैंने वाली थी उसने रुपाली को किश करते हुए उसके उरोज भी मसलने शुरू कर दिए . रुपाली ने अपनी ऑंखें बंद कर ली और सरेंडर कर दिया . मेघा अब और भी जोश में रुपाली को गर्म करने लगी. आखिर कब तक रुपाली खुद को रोकती . बूब्स मसाले जाने से शरीर में गर्मी तो आ hi जाती है. रुपाली क साथ भी ऐसा hi हुआ और वो अब मेघा का साथ देने लगी. रुपाली क हाथ भी मेघा क बूब्स पर आ गए. ये देख कर मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी. मेघा ने रुपाली की कमीज दोनों सिरों से पकड़ो और उसे उतरने लगी. थोड़े बहुत विरोध क बाद रुपाली की कमीज उसने जिस्म से अलग पड़ी थी. रुपाली अपनी छाती पर हाथ रख कर खुद को मुझसे छुपाने की कोशिश कर रही थी. रुपाली का पूरा जिस्म दूधिया रंग का सफ़ेद चमकदार था. मुझे मोंटी और उसके बाप पर रश्क होने लगा क सैलून को इतनी ज़बरदस्त आइटम घर पर hi मिली हुई है. जब इतनी सुन्दर औरत आँखों क सामने रहे तो मोंटी जैसे लोग कैसे उसे छोड़ सकते हैं . फ़िलहाल तो अब मैं भी आगे बाद कर उसे बाँहों में लेने को मचलने लगा. मेघा अब रुपाली को फिर से किश करती हुई उसके उरोज मसलते हुए ब्रा को निचे कर क बूब्स बहार निकल लिए . बूब्स बहार आते hi मैं उसके बूब्स की खूबसूरती में खो गया . क्या बूब्स थे, 38” क बूब्स पूरी गोलाई में जिस तरह तने हुए थे लग रहा था क उम्र का असर इन पर नहीं हुआ है. गोर सफ़ेद बूब्स क बीच गुलाबी निप्पल जो अभी पूरी तरह खड़े नहीं हुए थे. मेघा अब रुपाली क बूब्स दबती हुए उसके निप्पल पर जीभ भी चलने लगी थी. रुपाली क मुँह से सिसकियाँ छूटने लगी. हालाँकि वो मुँह बंद कर क इसे रोकने की कोशिश कर रही थी.

मैंने भी मौका सही जाना और घूम कर रुपाली को पीछे आ गया. मैंने पीछे से रुपाली क साथ चिपक गया और उसके खुले बल साइड में करते हुए उसकी गर्दन पर अपने होंठ रख दिए. मेरे ऐसा करते hi रुपाली ने मुझसे दूर होने की कोशिश की मगर मेघा ने उसे हिलने नहीं दिया और अपना काम जारी रखा.

मेघा : रिलैक्स रुपाली , एन्जॉय योरसेल्फ. बिलीव में हे इस मच बेटर थान बलजीत .

रुपाली को मैंने बाँहों में कास लिया और अपने हाथ आगे ले जाकर उसके नरम मुलायम बूब्स पकड़ कर मसलने शुरू कर दिए . मेरे हाथ लगते hi रुपाली क मुँह से फिर एक सिसकी निकलते निकलते डाब गयी . आगे मेघा और पीछे मैं . हम दोनों क बिच रुपाली फांसी हुई थी और हम तीनो hi ऊपर से नंगे थे. रुपाली को अपने नंगे जिस्म पर एक मर्द और औरत दोनों क नंगे जिस्मों की कोशिश अगर बर्दाश्त नहीं हो रही थी. न चाहते हुए भी वो अब साथ देने लगी थी. मैं रुपाली की गर्दन और कन्धों को चूमता हुआ अपना लैंड उसकी गांड पर रगड़ रहा था. रुपाली क जिस्म क बाकि हिस्सों की तरह उसके कूल्हे भी मुलायम थे जहाँ पर लैंड धंसता हुआ फील हो रहा था . मैंने एक हाथ से तो रुपाली का चेहरा घुमाया और उसके होंठ अपने होंठों में दबोच कर चूसने शुरू कर दिए. रुपाली वाकई कमल की थी. उसके होंठ चूसते हुए एक अलग hi मज़ा मिल रहा था. मैंने उसके होंठ चूसते हुए अपनी जीभ उसके मुँह में घुसाने की कोशिश की तो वो अपने दांत ज़ोर से बंद कर क मुझे ऐसा करने से रोकने लगी. इधर मैं उसे किश कर रहा था उधर से मेघा ने निचे बैठ कर उसकी सलवार निचे खिंच दी और पेंटी को भी पाऊँ तक खिंच दिया.

रुपाली ने जल्दी से मुझे खुद से अलग किया और अपनी सलवार ऊपर उठाने क लिए झुकी तो मेघा ने उसके हाथ पकड़ लिए.

मेघा : अब ये कपडे बाद में hi पहनना.

रुपाली : प्लीज दीदी ऐसा मत करिये .

मेघा : क्यों बार बार ऐसा कह रही हो ? किसी को कुछ नहीं पता चलेगा . चुपचाप खुद भी मज़े लो और इसे भी खुश करो.

मेघा ने रुपाली क पाऊँ में फांसी उसकी पेंटी और सलवार को अलग किया तो वो सर से पाऊँ तक पूरी नंगी हो गयी . बस एक ब्रा hi जिस्म पर बाकि थी जो नाम मात्रा थी क्यूंकि बूब्स तो ब्रा से बहार hi थे. मेघा ने रुपाली का हाथ पकड़ा और उसे अपने साथ ले कर रूम की तरफ चल दी . जाते जाते उसने मुझे इशारा कर दिया पीछे आने का. मैं तो बस रुपाली का फर्राटा हुआ जिस्म hi देख रहा था. उसका रंग इतना साफ़ और बेदाग था क हाथ लगाओ तो मैला हो जाये. चलते हुए उसकी 42” की गांड ऊपर निचे हो रही थी जिसे देखता हुआ मैं उन दोनों क पीछे पीछे रूम में चल दिया. रूम अंदर से काफी बड़ा और सुसज्जित था. किंग साइज बीएड और साइड में पड़े बिना बैक क सोफे. फ्लोर पर सुन्दर कालीन और दीवारें अलग अलग रंग और डिज़ाइन की. एक तरफ आत्ताच बाथरूम कपबोर्ड्स और बड़ी सी एलसीडी लग हुई थी. बीएड पर चढ़ते hi मेघा ने रुपाली को अपने ऊपर खिंच लिया और उसके खूबसूरत बेदाग जिस्म को चूमने चाटने लगी. मेघा क ऐसा करने से hi पता चल रहा था क वो ये सब पहले भी करती होगी. रुपाली उसको रिस्पांस नहीं दे रही थी मगर कोई भी औरत हो जब उसके अंगो को ऐसे सहलाया जायेगा तो उत्तेजना तो आएगी hi. मेघा रुपाली क ऊपर आ गयी और उसके बूब्स मसलते हुए अपना एक हाथ उसकी योनि पर ले गयी . जैसे hi मेघा ने रुपाली की योनि में उंगली डाली उसके शरीर को झटका लगा और उसने मेघा का हाथ पकड़ना चाहा मगर मेघा कहाँ रुकने वाली थी . वो तो कैसे इस सब का बहुत एक्सपीरियंस रखती थी. उसने रुपाली को काबू में कर क एक हाथ से उसका एक उरोज मसलना शुरू कर दिया और दूसरे को मुँह में लेकर चूसते हुआ छूट में उंगली करनी शुरू कर दी.

मैं तो मेघा का कायल हो गया, मुझे खुश करने क लिए वो रुपाली को कैसे गरम कर रही थी. अब मेरे लिए इतनी म्हणत कर रही है मेघा तो उसे इसका इनाम तो मिलना hi चाहिए न. मेघा घुटनो पर रुपाली क ऊपर झुकी हुई थी. जिससे उसके बड़े बड़े 44 साइज क कूल्हे जो गोर चिकने थे मेरे सामने थे. गांड का सुराख़ एक hi बार लैंड जाने की वजह से अभी ज्यादा नहीं खुला था मगर उसके नीचे उसकी छूट थी जो काफी खुली हुई थी मगर मेरे लैंड क लिए वो भी टाइट hi थी. मैं चुप चाप बीएड पर घुटनो क बल हो कर मेघा क पीछे आ गया और अपना लैंड उसकी छूट की फैंको में सेट कर क एक धक्का मारा . एक hi बार में आधा लैंड उसकी छूट में चला गया .

मेघा : आआआह्ह्ह्हह्ह मायआ बता तो देते डालने से पहले. उफ्फ्फफ्फ्फ़ अभी भी मेरी छूट तुम्हारे लैंड क काबिल नहीं हुई है.

अमित : इतना भी नखरा मत करो डार्लिंग , पता नहीं कितने लैंड तुम्हारी छूट में जा चुके होंगे.

मेघा : कक्कक्स आआअह्ह्ह लेकिन आज तक इतना बड़ा और मोटा लैंड नहीं गया था इस लिए दर्द होता है. उफ्फ्फफ्फ्फ़

मैंने अपना लैंड सुपडे तक बहार निकल कर एक और करारा धक्का मर दिया और लगभग पूरा लैंड उसकी छूट में समां गया . एक बार फिर से मेघा चीखी मगर मुझे उसकी परवाह नहीं थी क्यूंकि मैं जनता था उसे इतना भी दर्द नहीं हो रहा था जितनी वो एक्टिंग कर रही थी. मेघा छूट में लैंड जाने से रुपाली की तरफ से ध्यान हटा बैठी थी और रुपाली अब सिर्फ मुझे मेघा की छूट में लैंड पेलते देख रही थी. उसकी नज़र मेघा की छूट में अंदर बहार हो रहे मेरे लैंड पर hi थी . शायद वो ये सोच रही होगी की इतना बड़ा लैंड मेघा की छूट में चला कैसे गया . मैंने धक्के मरते हुए रुपाली की तरफ देख तो उसकी नज़र लैंड पर देख कर मैं रुक गया और मेघा क बाल पकड़ कर उसे थोड़ा पीछे खिंच कर रुपाली की छूट पर झुका दिया . मेघा जैसी औरत क लिए इशारा hi काफी था. अगले hi पल मेघा ने रुपाली की छूट चटनी शुरू कर दी. रुपाली की छूट गोरी गुलाबी थी और बालों का नमो निशान तक नहीं था. शायद मोंटी या उसके बाप क लिए साफ रखती होगी . एक तो सामने हो रही लाइव चुदाई ऊपर से छूट चूसै , रुपाली भी उत्तेजित हो गयी और खुद hi अपने बूब्स मसलते हुए ऑंखें बंद कर क अपनी छूट चूसै का मज़ा लेने लगी. उसके मुँह से बहुत हलकी हलकी सिसकियाँ निकल रही थी.

मैंने मेघा की कमर को थम कर तेज़ धक्के लगाने शुरू कर दिए और जल्दी hi मेघा की छूट जो पहले hi गरम थी उसका बांध टूट गया . मेघा निढाल हो कर गिर गयी और अपनी साँसे दुरुस्त करने लगी. रुपाली तो अभी भी ऑंखें बंद कर क अपने बूब्स मसल रही थी . मैं जल्दी से मेघा की जगह आ गया और रुपाली की छूट पर अपने होंठ लगा दिए. मैंने अपनी जीभ और एक हाथ से उंगली छूट में चलने लगा. रुपाली भी कितनी देर से गरम थी और मेरे ऐसा करते hi उसकी आग कण्ट्रोल से बहार होने लगी . रुपाली ने मेरा सर अपनी छूट पर दबाना शुरू कर दिया . मगर मैं उसका पानी निकलने से पहले वहां से हैट गया . मेरे पीछे हैट ते hi रुपाली ने खीज कर आँखें खोली तो मुझे अपनी छूट क पास देख कर उसे और भी गुस्सा आ गया मगर मैंने उसे एक स्माइल दी और अपने होंठों पर जीभ से उसकी छूट का पानी साफ किया . ये देख कर रुपाली को पता नहीं क्या हुआ क उसने मेरे बल पकड़ कर मेरा सर अपनी छूट पर दबा दिया .

रुपाली : पि हरामज़ादे पि चूस इसे कुत्ते, यही चाहता है न तू ले चूस इसे .

रुपाली फ़्रस्ट्राटे हो गयी थी क्यूंकि चरम पर पहुँच कर मैंने छूट चूसना बंद कर दिया था. रुपाली ने मेरा सर ज़बरदस्ती अपनी छूट पर लगाया तब भी मैंने छूट को टच नहीं किया और उसकी गिरफ्त से बहार हो गया. मैं रुपाली को अपना लैंड दिखता हुआ फिर से मेघा क पास चला गया और उसकी टंगे उठा कर एक बार फिर अपना लैंड एक hi झटके में उसकी छूट में घुसा दिया .

मेघा : आआआअह्ह्ह्हह माआआ क्या करते हो. अभी अभी तो मेरा हुआ है तुम फिर शुरू हो गए . थोड़ी देर आराम तो करने दो.

अमित: क्या करूँ तुम्हारी ये देवरानी तो कुछ करने नहीं देती तो फिर तुम पर hi चढ़ूंगा न.

मेघा : तुम उसको करो तो सही वो मन नहीं करेगी

अमित : तुम्हे ाचा नहीं लग रहा मेरा लैंड ? तो ठीक है मैं छोड़ देता हूँ.

मेघा : मैंने ऐसा कब कहा, वो तो मैं इस लिए कह रही थी क मच देर मेरी छूट को आराम मिल जाये.

अमित : तो ये बात है , ठीक है तुम्हारी छूट को आराम दे देता हूँ.

मैंने फिर से मेघा को कुटिया बनाया और उसकी छूट क पानी से गीला लैंड उसकी गांड क सुराख़ पर लगा दिया .

मेघा : नहीं वहां मत करो बहुत दर्द होता है. आआआअह्ह्ह्हह....

मेघा की परवाह न करते हुए मैंने लैंड को गांड में घुसा दिया और मेघा ज़ोर से चिल्ला उठी. मैंने उसके चीखने की कोई परवाह नहीं की और एक क बाद एक 3 धक्के मर कर जड़ तक लैंड उसकी गांड में घुसा दिया. गांड आज भी वैसे hi टाइट लग रही थी मगर आज खून नहीं निकला . मेघा की हालत फिर से पतली हो गयी.

मेघा : आआआईईई माआआ जानवर हो तुम माआआ कक्कक्कक्स फट्ट्ट्ट गयी मेरी आआआह्ह्ह्ह मायआ आराम से नहीं कर सकते थे. इतना बड़ा आआह्ह्ह्हह मुसल घुसा दिया.

अमित : तुम्हे भी तो ऐसी hi चुदाई पसंद है न डार्लिंग. खुद hi तो कह रही थी वाइल्ड चुदाई पसंद है तुम्हे अब लो मज़ा वाइल्ड चुदाई का.

मैंने लैंड को धीरे धीरे बहार निकला और फिर से एक तेज़ धक्का मर कर अंदर घुसा दिया मेघा फिर से चीखी

मेघा : आआह्ह्ह्ह आराम से करो थोड़ा वर्ण फिर से फट जाएगी मेरी. मैं दुबारा बीएड पर नहीं पड़ना चाहती.

मेघा को दर्द में देख कर रुपाली को शायद मज़ा आ रहा था मैंने उसका चेहरा देखा तो उस पर एक चमक आ गयी थी. रुपाली मेघा की गांड में घुसे हुए मेरे लैंड को देख रही थी और एक हाथ से अपनी छूट सेहला रही थी. मैंने मेघा की गांड में धक्के मर मर क अपने लैंड क लिए जगह बना ली और अब मेरा घोडा आराम से उस तंग गुफा में सफर कर रहा था. मेघा एक हाथ से अपनी छूट सेहला रही थी और मैं उसके दोनों चूतड़ों को थप्पड़ मर मर क लाल कर रहा था. कमरे में मेघा की चीखों क साथ थाप थाप की आवाज़ आ रही थी जो मेघा की बड़ी गांड क मेरी जाँघों से टकराने से पैदा हो रही थी. रुपाली का हाथ तेज़ी से अपना पानी निकलने क लिए चल रहा था मगर उससे पहले hi मेघा का एक बार फिर से पानी निकल गया. और वो फिर से धड़ाम से बीएड पर गिर गयी. इससे पहले क रुपाली का पानी निकलता मैंने उसका हाथ उसकी छूट से हटा लिया. रुपाली जो ऑंखें बंद कर क अपना पानी निकलने क करीब hi थी फिर से एक बार फ़्रस्ट्राटे हो गयी मेरे ऐसा करने से.

रुपाली : हरामज़ादे मैं तुझे ज़िंदा नहीं छोडूंगी.

रुपाली मुझे मरने को उठी तो मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ कर उसे घुमा कर अपने सीने से लगा लिया

रुपाली : छोड़ मुझे कुत्ते छोड़

अमित : बड़ी गर्मी है तुम्हारे अंदर? मगर ये ऐसे नहीं निकलेगी इसे तो मेरा हथियार hi निकलेगा.

रुपाली : छोड़ कुत्ते मैं तुझ जैसे घटिया आदमी को हाथ भी नहीं लगाने दूंगी.

अमित : छूट तो तुम्हारी मैं ले क रहूँगा चाहे मर्ज़ी से दो या मज़बूरी से . हाँ अगर तूने अपनी बकवास बंद नहीं की तो तेरी भी गांड फाड़ दूंगा , नज़ारा तो तुमने देख hi लिया होगा.

रुपाली : छोड़ हरामी , छोड़ मुझे

अमित : लगता है तुम ऐसे नहीं मानोगी

मैंने रुपाली क दोनों हाथ अपने एक हाथ में मजबूती से पकड़ लिए और उसे अपने कंधे पर उठा कर रूम से बहार निकल कर दूसरे रूम में ले गया. मेघा तो गांड मरवा कर मदहोश हुई पड़ी थी.

रुपाली को मैंने दूसरे रूम में ला कर बीएड पर पटक दिया . रुपाली ने छूट ते hi फिर से मुझ पर हमला करना चाहा तो मैंने उसे बीएड पर धक्का दे कर गिरा दिया और उसके हाथ पकड़ कर उसके ऊपर आ गया. वो लगातार मुझसे ज़ोर आजमाइश कर रही थी मगर मेरे सामने वो कहाँ टिकती. मगर इस सब में मैं उसकी टांगों क बीच आ गया और मेरा लैंड उसकी छूट पर जा लगा. छूट और लैंड क घर्षण से रुपाली शायद फिर से गरम होने लगी मगर वो अभी भी मुझे गुस्सा दिखा रही थी जबकि निचे से वो अपनी कमर हिला कर अपनी छूट मेरे लैंड पर रगड़ रही थी. मैंने उसे काबू कर क उसके होंठों पर अपने होंठ रख लिए और इसी बिच लैंड का सूपड़ा छूट क होंठों में फास गया फिर क्या था. जब लैंड निशाने पर आ hi गया था तो रुकने का क्या फायदा मैंने भी ज़ोर दिखते हुए ज़ोरदार धक्का मारा और लैंड उसकी तंग गुफा को खोलता हुआ 6 इंच तक एक hi बार में घुस गया

रुपाली : आआआआईईईई माआआ आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहार निकल हरामज़ादे मैं कोई रंडी नहीं हूँ बहार निकल इसे आआअह्ह्ह माआआ

रुपाली मुझसे छूटने को ज़ोर लगा रही थी और साथ hi साथ कराह रही थी. रुपाली अपने पाऊँ से मेरी गांड पर अपनी एड़ियां मर रही थी और मेरी गर्दन पर दांत गाड़ने की कोशिश कर रही थी. मेरी गर्दन पर जब उसने ज़ोर से कटा तो मुझे गुस्सा आ गया .

अमित : आआह्ह्ह्हह काट टी है कुटिया !! देख तेरा क्या हल करता हूँ . मैंने लैंड को सुपडे तक बहार खिंच और पूरे ज़ोर से अपनी कमर धकेलते हुए एक hi बार में जड़ तक लैंड रुपाली की छूट में घुसा दिया . ये धक्का इतना ज़ोरदार था क लैंड सीधा छूट को फाड़ता हुआ उसके गर्भाशय से जा टकराया. रुपाली मेघा जैसी नहीं थी और न hi उसकी छूट कोई ज्यादा ख़राब हालत में थी . इतना लैंड पहली बार उसके अंदर गया था तो वो भी इस दर्द को बर्दाश्त नहीं कर पायी और एक ज़ोरदार चीख उसकी हलक से निकली .

रुपाली : aaauiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaa aaaaaaaaaahhhhhhhhhh मर गयी छोड़ दो मुझे बहार निकालो इसे आआह्ह्ह्हह्ह मा मर गयी छोड़ दो मुझे

इस बार मैं पहले hi चौकन्ना था क कहीं फिर से वो दन्त न गदा दे . मैं थोड़ा ऊपर उठा हुआ था और रुपाली को ऐसे तड़पता हुआ देख कर मेरा गुस्सा थोड़ा ठंडा पड़ने लगा. रुपाली की आँखों में आंसू आ गए थे. छूट अपनी हद से ज्यादा खुल गयी थी और तेज़ दर्द उसे महसूस हो रहा था मगर लैंड कितना भी बड़ा क्यों न हो छूट की ये खासियत है क वो उसे अंदर ले hi लेती है. रुपाली तो वैसे भी एक मातुरे औरत थी हालाँकि देखने वो इतनी आगे की नहीं लगती थी.

अमित : अब बोल , क्या क्या बकवास कर रही थी . मुझे घटिया बोलै था न ? मेरे माँ बाप को गली दे रही थी? अब बताता हूँ तुझे.

रुपाली : मुझे जाने दो प्लीज छोड़ दो , मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है . मेरी फट गयी है प्लीज छोड़ दो

मैंने रुपाली की बात का कोई जवाब देने की बजाये लैंड को काम पे लगा दिया और लैंड को सुपडे तक खींच कर फिर से अंदर घुसा दिया . एक बार फिर से रुपाली करहि मगर मैंने परवाह नहीं की और लैंड को अंदर बहार करने लगा. लैंड बहुत कैसा कैसा अंदर बहार हो रहा था मगर जल्द hi छूट ने लैंड को एडजस्ट करना शुरू कर दिया और छूट में चिकनाहट आते hi लैंड रवानी से आने जाने लगा. अब रुपाली का विरोध काम हो गया था मगर मैं अपने काम में लगा रहा . हर धक्के क साथ रुपाली क गोर चुके पानी क गुब्बारों की तरह हिल रहे थे और उन पर गुलाबी निप्पल सर उठाये खड़े थे. मैंने रुपाली क हाथ छोड़ दिए और उसके बूब्स थम कर धक्के मरने लगा.

रुपाली भी अब रिलैक्स हो चुकी थी और शायद उसे मेरा इस तरह उसके बूब्स को मसलना और प्यार करना ाचा लगा हो इस लिए उसने मुझे नहीं रोका . मैंने रुपाली की गोरी चिकनी टैंगो को उठा कर अपने कन्धों पर रखा और उसके दोनों तरफ अपने हाथ बिस्टेर पर टिका कर उसके ऊपर झुकते हुए अपनी कमर को तेज़ी से हिलाते हुए धक्के मरने शुरू कर दिए . रुपाली जो दो बार पानी निकलते निकलते रह गयी थी अब वो फिर से चरम पर पहुँचने वाली थी. इस लिए वो भी अपनी कमर हिलने की कोशिश करने लगी. मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में लेने की कोशिश की तो उसने मेरे मुँह पर थप्पड़ मर दिया और मेरी गर्दन दोनों हाथों से पकड़ ली.

रुपाली : मर कुत्ते मर और ज़ोर से मर . और तेज़ कर न दिखा अपना ज़ोर मुझे .

मुझे रुपाली ने फिर से गुस्सा दिला दिया तो मैंने उसकी बाज़ू क निचे से हाथ निकल कर उसके कंधे पकड़ लिए और बीएड से निचे खिसक कर उसे अपनी गॉड में उठा कर खाद हो गया और खड़े खड़े उसकी छूट में ताबड़तोड़ धक्के मरने लगा. रुपाली की टंगे मेरे कन्धों इ थोड़ी खिसक कर बड़े बाज़ुओं में आ गयी थी और खुद को गिरने से बचने क लिए उसने मेरी गर्दन को पकड़ रखा था मगर इस सब में उसका जिस्म दोहरा हो गया था जिससे उसे दर्द भी हो रहा होगा. मगर मुझ पर तो जूनून सवार हो गया था . मैंने उसे ऐसे हवा में उछालते हुए छोड़ना शुरू कर दिया.

अमित : ले रंडी देख मेरी ताकत , यही चाहिए था न तुझे ? तू भी मेघा की तरह hi रंडी है मैं अचे से जनता हूँ. आज तेरी आग न ठंडी कर दी तो कहना.

रुपाली : आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह आआअह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह छोडो छोड़ दो मैं गयी मैं गयी आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

रुपाली जो इतनी देर से पानी नहीं निकल प् रही थी अब उसका बांध भी टूट गया और उसके पूरे जिस्म में झटके लगने लगे. उसकी छूट में मेरे लैंड पर गरम पानी का शावर ों हो गया ऐसे लग रहा था. पता नहीं कितना पानी जमा था उसकी छूट में जो बेहटा हुआ फर्श पर गिरने लगा और कुछ मेरी जांघों से लग कर मेरे पाऊँ तक आ गया . रुपाली मेरे साथ चिपक गयी मगर अभी मेरा कहाँ हुआ था . मैंने उसे दिवार से लगा लिया और धक्के मरने लगा . रुपाली को चाँद धक्कों क बाद hi जलन होने लगी और वो मुझे पीछे धकेलने की कोशिश करने लगी जिससे मुझे मज़ा नहीं आ रहा था तो मैंने उसे फिर से बिस्टेर पर पटक दिया और कुटिया बना दिया . मेरी आँखों क सामने रुपाली क गोल गोल बड़े गोर और मुलायम कूल्हे एते hi गांड मरने का मन होने लगा. लैंड तो पहले hi छूट क पानी से गीला था मैंने रुपाली को काबू कर क अपना लैंड एक हाथ से पकड़ा और गांड क सुराख़ से लगा दिया. गांड देख कर लग रहा था क ये भी पीछे से वर्जिन hi है तो मुझे और भी जोश आ गया. मैंने सूपड़ा सुराख़ पर जैसे hi लगाया तो रुपाली मेरा इरादा समझ कर मचलने लगी और मेरी पकड़ से छूटने की कोशिश करने लगी .

रुपाली : नहीं वहाँ नहीं प्लीज वहां नहीं . मैं मर जाउंगी , मैंने आज तक वहां नहीं किया है. प्लीज छोड़ दो तुम्हारा बहुत बड़ा है .

अमित : अब कभी ज़िन्दगी में दोबारा मुझे गली देने से पहले 100 बार सोचोगी.

मैंने इतना कह कर ज़ोर लगते हुए एक धक्का मर दिया जिससे सूपड़ा गांड क सुराख़ ने घुस गया.

रुपाली : aaaaaaiIiiiiiiiiiiiiiiiiii ..............

एक तेज़ चीख रुपाली क मुँह से निकली . कमरे शायद साउंड प्रूफ थे वर्ण मेघा रुपाली की चीख सुन कर ज़रूर चली आती.

रुपाली : प्लीज वहां मत करो मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा , भगवन क लिए छोड़ दो मुझे प्लीज ाआईईई आगे से करलो मैं मन नहीं करुँगी.

मुझे रुपाली पर पता नहीं क्यों तरस आ गया शायद मेघा जैसे उसको मजबूर कर रही थी मेरे लिए वो कहीं न कहीं मेरे दिल को भी खटक रहा था. मैंने रुपाली पर तरस कहते हुए उसकी गांड में फसा हुआ अपना लैंड बहार निकल लिया . रुपाली को जैसे hi मैंने छोड़ा वो बिस्टेर पर गिर गयी पलट कर अपनी गांड को चेक करने लगी क कहीं सच में फैट तो नहीं गयी मगर अभी ज्यादा कुछ तो हुआ hi नहीं था.

रुपाली : जानवर हो क्या ? यहाँ भी कोई करता है ?

अमित : ी ऍम सॉरी , आप इतनी खूबसूरत हैं क मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था .

मैं पता नहीं कैसे ये सब कह गया जिसकी मुझे उम्मीद न थी और न hi रुपाली को. वो हैरानी से मुझे देखने लगी . मेरा लैंड अभी भी खड़ा था मगर अब पता नहीं क्यों मेरा मन नहीं हो रहा था क रुपाली क साथ कुछ करूँ हालाँकि वो इतनी खूबसूरत थी क किसी का भी खुद पर कण्ट्रोल न रहे. मैं बीएड से निचे उतर गया और रुपाली हैरानी क आलम में मुझे ऐसे पीछे हैट ता देख रही थी. मैं रूम से बहार आ गया और थोड़ी देर वहीँ सोफे पर बैठ कर सोचने लगा क आखिर मुझे हो क्या रहा है. सेक्स का नशा धीरे धीरे जब उतर गया तो मुझे अपना प्लान यद् आया. मैंने साइड में पड़ी अपनी पेण्ट अंडरवियर उठा कर पहना और रुपाली क कपडे समेत कर वापिस उसके पास चला गया .

अमित : लीजिये अपने कपडे पहन लीजिये.

रुपाली को अपने नंगे बदन का एहसास हुआ तो उसने जल्दी से अपने कपडे पकड़ लिए और बाथरूम में जाने लगी. रुपाली को चलने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी तो मैंने उसे सहारा दे कर बाथरूम क दूर तक छोड़ दिया . मैं वहीँ बीएड पर बैठा उसका इंतज़ार करने लगा . 10 मिनट में hi रुपाली कपडे पहन कर अपना हुलिया ठीक कर क वापिस आ गयी

रुपाली : तुम कौन हो?

अमित : क्या मतलब ?

रुपाली : मैंने पूछा तुम कौन हो ? मुझे लगा था क तुम कोई घटिया इंसान हो जो इतनी उम्र की औरत क साथ ये सब कर रहे हो और मेरे साथ भी ऐसा है सब किया मगर ऐसे तुमने बिच में hi मुझे छोड़ दिया और अब इतना अचे से पेश आ रहे हो. ये तुम्हारा दूसरा रूप दिख रहा है मुझे. जो कुछ देखा है पहले उसे देख कर लगता है क तुम गलत इंसान हो मगर अब लग रहा है क तुम में कहीं अच्छी भी है .

अमित : मैं कौन हूँ ये सब छोड़िये . मगर आप क्या हैं? मेघा को ये तो पता है क आप उसके पति क साथ सेक्स करती हैं मगर जब उसे ये पता चला क आप उसके बेटे क साथ भी करती हैं तो क्या होगा?

मेरे इतना कहते hi रुपाली का रंग उड़ गया. वो हैरान परेशां मुझे देखने लगी

रुपाली : कक क कहना क्या चाहते हो तुम ? तुम्हारा दिमाग तो ठीक है?

मैंने अपने मोबाइल में वो रिकॉर्डिंग ों करदी जिसमे मोंटी उसकी चुदाई कर रहा था . वीडियो देखते hi जैसे काटो तो खून नहीं ऐसी हालत जो गयी रुपाली की . उसने मेरे हाथ से मोबाइल लेना चाहा तो मैंने हाथ खिंच लिया .

अमित : इसकी कॉपी भी है मेरे पास . मुझे तो बड़े बड़े भाषण दे रही थी अब ज़रा इस बारे में भी बताइये ये सब क्या है? खैर न भी बताओ तो कोई फरक नहीं पड़ता. मगर आप जो कुछ कर रही हैं क्या वो सही है? मेघा को गलत कहने से क्या आप सही हो गयी? मैं अगर बेटे की उम्र का हूँ तो मोंटी तो आपका भतीजा है बेटे सामान है फिर उसके साथ कैसे ?

रुपाली की आँखों में आंसू आ गए और वो रोने लगी . मुझे उसका रोना देखा नहीं जा रहा था. मैंने उन्हें चुप करवाया .

अमित : घबराइए मत मैं किसी को कुछ नहीं बताने वाला मगर इसके बदले में आपको मेरा एक काम करना होगा.

रुपाली : क्या चाहिए तुम्हे ? सब तो कर लिया है तुमने और अब क्या चाहते हो ?

अमित: मुझे मोंटी का लैपटॉप चाहिए , मैं वडा करता हूँ फिर कभी आपको तंग नहीं करूँगा और कभी शकल भी नहीं दिखाऊंगा और आपका ये वीडियो भी डिलीट कर दूंगा .

रुपाली : तुम्हे उसका लैपटॉप क्यों चाहिए ? मैं ऐसा नहीं कर सकती .

अमित : मेरी बात न मैंने का अंजाम सोच लीजिये . ये वीडियो मैं मेघा को दिखा दूंगा और फिर वो क्या करेगी ये मुझे नहीं पता .

रुपाली : तुम ऐसा क्यों कर रहे हो मेरे साथ. और मोंटी क लैपटॉप से तुम क्या करोगे?

अमित : वो मैं नहीं बता सकता बस इतना सुन लो क वो मुझे चाहिए हर हल में. मैं वडा करता हूँ मैं इस बारे में किसी को कुछ नहीं बताऊंगा .

रुपाली : अगर उसके बाद भी तुम्हे मुझे ब्लैकमेल किया तो ?

अमित: आप को मुझ पर भरोसा करना होगा. आप अपनी लाइफ में क्या करती हैं मुझे उससे कुछ लेना देना नहीं. न hi मुझे मेघा से कोई मतलब है. आप अपनी आग चाहे जेठ से ठंडी करवाओ चाहे भतीजे से या नौकरों से मुझे कोई मतलब नहीं मुझे बस मोंटी का लैपटॉप चाहिए .

रुपाली : मैं ऐसी नहीं हूँ

अमित : तो ये सब क्या है?

रुपाली : वो ..... ठीक है मैं लैपटॉप ला कर दूंगी मगर उसके बाद तुम्हे ये सब डिलीट करना होगा.

अमित : मैं कसम खाता हूँ मैं ये वीडियो उसी वक़्त डिलीट कर दूंगा .

उसके बाद मैंने रुपाली का फ़ोन no. लिया और रुपाली से मिल कर मेघा क पास आ गया जो अभी भी सो रही थी. मैंने उसे वैसे hi रहने दिया और वापिस आ गया.

मैंने रुपाली पर एक दांव खेला था , मुझे यकीन था क वो मेरी बात मानेगी क्यूंकि उसकी कमज़ोरी मेरे पास थी मगर पता नहीं कैसे मुझे उस पर तरस आ गया था उसकी गांड करते वक़्त तो मैंने उसे बीच में hi छोड़ दिया . उसके बाद मैं सीधा घर आ गया और लंच क बाद अपने रूम में लेट गया . मेरा पानी नहीं निकला था जिस वजह से मुझे अपने अंडकोष में दर्द महसूस होने लगी थी इस लिए मैंने सोचा आंटी क पास जाता हूँ मगर उससे पहले hi किचन में रानी मिल गयी जो मुझे आस भरी निगाहों से देख रही थी . बस फिर क्या था मैं रानी को अपने साथ ले गया रूम में और उसकी प्यास भी बुझा दी और अपनी भी आग ठंडी कर ली.

आज मुझे गाओं जाना था रेस्ट करने क बाद मैं तैयार हो गया और आंटी मोहित से मिलने क बाद मैं घर से निकल गया. पहले मैं मंजू म क पास गया उनसे मिलने क बाद मैं. राधा से मिलने उसके घर चला गया . मैंने पहले hi राधा को फ़ोन कर दिया था क मैं आ रहा हूँ. गेट राधा ने hi खोला और मुझे सामने देख कर वो बहुत खुश हुई.

राधा : तुम आ गए, मुझे लगा था तुम भूल जाओगे.

अमित : ऐसा भला हो सकता है क तुम कुछ कहो और मैं भूल जॉन?

राधा : बातें बनानी आ गयी हैं तुम्हे भी आओ अंदर आओ

अमित : मौसी कहाँ हैं?

राधा : का अपने कमरे में आराम कर रही है .

बातें करते हुए हूँ अंदर हॉल में आ गए. राधा ने मुझे सोफे पर बिठाया और मेरे लिए पानी लेने चली गयी .

राधा : कहाँ चले गए थे आज ? पता है मंडे को टेस्ट शुरू हैं.

अमित : हम्म पता है और मैंने तयारी भी कर ली है.

राधा : वह कमल है , मगर तुम तो कॉलेज से गायब रहते हो फिर पड़े कब करते हो?

अमित : करता हूँ रोज़ शाम को. वो छोडो कोई खास बात जिसके लिए तुमने मुझे बुलाया ?

राधा : क्यों मैं बिना काम क नहीं बुला सकती तुम्हे? जाओ मैं तुमसे बात नहीं करती

राधा ने मुँह फुला लिया तो मैं उसे मानाने लगा

अमित : सॉरी बाबा गलती हो गयी. तुम जब चाहे मुझे बुला सकती हो काम हो या न हो . वो तो मैं इस लिए पूछ रहा था क अगर काम है तो पहले कर देता हूँ फिर बाद में गाओं भी जाना है

राधा : कोई काम नहीं है मुझे. तुम्हे गाओं जाना है तो जाओ

अमित : इतना गुस्सा हो गयी हो क घर से जाने को कह रही हो

राधा : मैंने कब घर से जाने को कहा? वो तो तुम hi गाओं जाने की बात कर रहे हो

अमित : ाचा ये लो मैं कान पकड़ता हूँ प्लीज गुस्सा छोड़ दो.

राधा : फिर ऐसी बात hi क्यों करते हो?

अमित : हो जाती है गलती कभी कभी आओ बैठो और बताओ मुझे आज क्या क्या हुआ कॉलेज में.

राधा : वही तो बताना था तुम्हे मगर तुम सुनते कहाँ हो. आज नोटिस बोर्ड पर नोटिस लगा था क हमारी क्लास को 2 डेज ट्रिप पर जाना है टेस्ट्स क बाद नेक्स्ट वीक में फ्राइडे सैटरडे को. और सब का जाना कंपल्सरी है.

अमित : तो इसमें कोण सी बड़ी बात है?

राधा : ये कोई छोटी बात है? मैं आज तक कभी घर से बहार नहीं रही माँ क बगैर. ऊपर से कॉलेज क लड़के लड़कियों क साथ जाना मुझे ठीक नहीं लग रहा. मैंने मम से बात की थी क मैं नहीं जा सकती तो उन्होंने कहा क मुझे जाना hi होगा वर्ण असेसमेंट क मार्क्स नहीं मिलेंगे. मैं जाना नहीं चाहती ऐसे माँ को अकेला छोड़ कर तुम प्लीज कुछ करो न.

अमित : तो ये बात है. वैसे राधा इसमें इतनी कोई बड़ी बात भी नहीं है . वहां सब तुम्हारी क्लास क hi फ्रेंड्स होंगे न , ऊपर से टीचर भी साथ होंगे तो डरने वाली कोई बात है hi नहीं. मौसी की तुम चिंता न करो मैं रीता मौसी को कह दूंगा वो सब देख लेंगी. बात तुम्हारे मार्क्स की है. यहाँ एक no. से hi हर जित का फैसला हो जाता है. अगर तुम नहीं गयी तो तुम पीछे रह जाओगी

राधा : पर मेरा मन नहीं मन रहा जाने को अगर तुम साथ होते तो बात और थी मगर ऐसे अकेले मुझे दर लगता है. तुम तो जानते hi हो कॉलेज में वो बिगड़े घरों क बचे कैसे रहते हैं. और माँ भी इजाज़त नहीं देने वाली ऐसे मुझे कहीं जाने की

अमित : कुछ नहीं होगा तुम ऐसे hi चिंता कर रही हो. वैसे भी टीचर साथ होंगे . मौसी मन नहीं करेंगी तुम उनसे बात करो फिर भी वो न मने तो मैं रीता मौसी से कहूंगा वो मन लेंगी मौसी को.

राधा : मगर ...

अमित : अगर मगर छोडो, मीनल भी तो होगी न साथ में फिर चिंता क्यों ? और कोई बात हुई इसके इलावा

राधा : हम्म्म

अमित : क्या ?

राधा : कल्पना तुम्हारी बहुत तारीफ कर रही थी. कह रही थी क तुम्हारी वजह से उसे इतनी बड़ी फॅमिली मिल गयी . उसे बहुत ाचा लगा सब से मिल क. वो आज माँ क साथ भी घंटा भर बातें कर क गयी है. तुम सच में कितने अचे हो हर कोई तुम्हारी तारीफ करता है.

अमित : कोई ाचा नहीं हूँ मैं. देखा नहीं मौसी कैसे गुस्सा करती हैं मुझ पर

राधा मेरी इस बात पर मायूस सी हो गयी और ठन्डे लहजे में वो बोली

राधा : पता नहीं माँ क्यों तुम पर इतना गुस्सा करती हैं मगर वो तुम्हे प्यार भी करती हैं. तुम्हारे बचपन की कई फोटोज देखि हैं मैंने माँ क उस रूम में जो बंद रहता है.

अमित : शॉकेड ) क्याआ ?? तुम गयी थी उस कमरे में ? क्या क्या देखा तुमने वहां? वहां क्या क्या पड़ा है मेरी माँ को कौन कौन सी यद् है वहां ? मुझे सब बताओ.

मैं hi राधा से पूछ रहा था क मौसी अपने कमरे से बहार आ गयी .

दिव्या मौसी : राधा किस क साथ बातें कर रही हो इतनी देर से?

दिव्या मौसी बात करते करते जब हॉल में आयी तो मुझे सामने देख कर वहीँ रुक गयी . मैं मौसी की तरफ देखे बिना अपनी जगह से खड़ा हुआ और बहार निकल गया. राधा ने मुझे रोकने की कोशिश की मगर मैं नहीं रुका . मैं अभी बाइक स्टार्ट कर hi रहा था क राधा अंदर से भगति हुई आयी और मुझे एक लिफाफा दिया जिसमे कुछ पैक था.

राधा : इसे संभल कर रखना और सही सलामत वापिस कर देना.

अमित : क्या है इसमें ?

राधा : घर जा कर देखना.



मैंने राधा को bye किया और बाइक पर स्वर हो कर घर को निकल लिया.
 
आज अपडेट पोस्ट कर दूंगा भाई लोगो . थोड़ा सा रहता है अभी उसी पर काम कर रहा हूँ. क्या करूँ यार एक तो टाइम नहीं मिल प् रहा दूसरा थकावट भी हो जाती hi सारा दिन काम देखना पड़ता है
 
अपडेट 119



माँ आप उससे बात क्यों नहीं कर रही ? देखा न वो कैसे गया है . मुझे ाचा नहीं लगता उसकी आँखों में आंसू देख कर. वो दिल का बहुत ाचा है और बिना वजह उसे और खुद को दुःख दे रही हैं. आखिर बात क्या है आप बताती क्यों नहीं ? वो एल्बम आप खुद उसे दिखती तो उसे कितना ाचा लगता.

अमित क जाने क बाद राधा दिव्या से गिला कर रही थी . मगर दिव्या बिना कोई जवाब दिए अपने कमरे में चली गयी और दरवाज़ा बंद कर क अपने बीएड पर लेट कर चुपके चुपके आंसू बहाने लगी. वो अपनी बेटी की बात का क्या जवाब देती क वो ऐसा क्यों करती है. जिस राज़ को वो सब से छुपाये बैठी थी वो कैसे अपनी बेटी को बता देती. मगर उसे अब इस बात का एहसास ज़रूर हो गया था क उसकी बेटी अमित को बहुत मानती है और उस पर भरोसा करती है . यही नहीं उसकी बहने और परिवार में हर कोई अमित की अच्छी की hi बात करता है. वो था भी तो ाचा बस दिव्या को पवन hi नज़र अत था . दिव्या क दिल पर रीता की बातों ने गहरा असर किया था और अब वो वास्तव में hi अमित क साथ प्यार से पेश आना चाहती थी मगर उसे झिझक हो रही थी क वो आज तक जो अमित क साथ करती आई है क्या अमित उसे सब भुला कर इज़्ज़त दे पायेगा या नफरत करेगा. दिव्या क दिल में अब दामिनी को लेकर ये बात आने लगी थी क वो दामिनी क बेटे क साथ गलत कर रही है और अब वो अपनी भूल उद्धरण चाहती थी मगर ये इतना आसान नहीं था उसके लिए.

राधा बेचारी समझ नहीं प् रही थी क दिव्या क्यों अमित को प्यार नहीं करती ? क्यों वो उससे नफरत करती है. मगर इतना तो उसे अब समझ आ गया था क कहीं न कहीं उसकी माँ क दिल में अमित क लिए प्यार है . क्यूंकि दिव्या ने खुद कल उसे अपने उस सीक्रेट रूम में ले जाकर अमित क बचपन की तस्वीरें दिखाई थी और दामिनी से जुडी कई यादें उसे दिखाई थी. राधा ने सोच लिया था क वो अपनी माँ क दिल में छिपे अमित क लिए प्यार को बहार लाएगी और अमित को भी इस बारे में बताएगी मगर धीरे धीरे जिससे अमित को भी यकीन हो जाये क उसकी माँ अमित से नफरत नहीं करती बल्कि प्यार करती है.

शाम को अमित गाओं में जब घर पहुंचा तो गौरी उसे देख कर बहुत खुश हुई और उसे कास क अपने साइन से लगा लिया. गौरी का अब प्यार करने का अमित से गले मिलने का तरीका बदल चूका था . अब जब भी वो अमित को गले लगाती थी तो एक माँ की तरह नहीं बल्कि एक प्रेमिका की तरह गले लगाती थी जिस पर अभी अमित का ध्यान नहीं गया था. आज भी गौरी ने अमित को अपने बड़े बड़े उभारों में कास लिया . जैसे वो अपने उभर अमित क मुँह में hi देना छह रही हो. खैर अमित ने इसे माँ की ममता hi समझा मगर गौरी तो जैसे अपना सब कुछ अमित क आगे समर्पण करने को तैयार बैठी थी. गौरी ने अमित को आंगन में hi बिठा कर पानी पिलाया और उसे बताया क दीपिका और कामिनी अपने अपने कमरे में आराम कर रही हैं तो अमित पहले दीपिका से मिलने उसके कमरे में गया क्यूंकि अब वो जल्दी hi माँ बनने वाली थी.

दीपिका ममी : आ गए तुम? तुम्हे पता है न अब जल्दी hi तुम बाप बनने वाले हो फिर भी मुझसे दूर रहते हो .

अमित : गुस्सा क्यों होती हैं आप ? आपको पता है न मेरी मज़बूरी फिर भी ?

दीपिका ममी : गुस्सा नहीं हूँ पर इस दिल को कैसे समझों जो अब तुम्हे हर वक़्त अपने आसपास देखना चाहता है. आजकल दर्द रहने लगा है मुझे डॉ ने कहा है क अगले हफ्ते में किसी भी दिन मैं माँ बन सकती हूँ.

अमित : क्या सच में? फिर तो आपको बहुत संभल कर रहना चाहिए. मेरी मनो तो आप मेरे साथ hi शहर चलो इस बार. वहां हॉस्पिटल भी सब नज़दीक में हैं तो दिक्कत नहीं होगी .

दीपिका ममी : इतनी भी ज़रूरत नहीं है , यहाँ हैं न दीदी मेरा ख्याल रखने क लिए .

अमित : छोटे मां ख्याल तो रख रहे हैं न आपका ?

दीपिका ममी : क्यों नहीं रखेंगे ? पहली बार बाप बन रहे हैं ख्याल तो रखेंगे hi. मगर ये न अपने पापा को बड़ा यद् करता है. और इसके पापा क पास तो वक़्त hi नहीं है.

दीपिका ममी ने अपने पेट पर हाथ रखते हुए कहा तो मैं उनके पास बैठ गया और उनके पेट पर हाथ रख कर महसूस करने लगा तो ऐसा लगा जैसे अंदर बचे ने लात मरी हो .

दीपिका ममी : आह्हः देखा कैसे लत मर रहा है. उसे पता चल गया है क उसके पापा आये हैं.

मुझे ममी की बातें सुन कर और उनके पेट की हलचल महसूस कर क एक अलग hi एहसास हो रहा था एक अंजनी सी ख़ुशी दिल में उठ रही थी. मैंने झुक कर पेट पर किश किया और दीपिका ममी की आँखों में देखते हुए कहा.

अमित : मैं बहुत बहुत बहुत खुश हूँ. ये कैसा होगा मेरे जैसा या आपके जैसा ? बीटा होगा या बेटी ? जो भी हो मैं बहुत खुश हूँ.

दीपिका ममी ने मेरी आँखों पर आये ख़ुशी क आंसू साफ़ किये जिसका मुझे पता भी नहीं था क कब आ गए.

दीपिका ममी : बीटा hi होगा देख लेना और ये हम दोनों जैसा होगा. तुम्हारी आँखों में न ये आंसू मुझे अचे नहीं लगते . क्या कहेगा बीटा क पापा रो रहे हैं . उसे ाचा लगेगा क्या?

दीपिका ममी की ये बातें चाहे बे मतलब थी मगर दिल को बहुत सुकून देने वाली थी. मैंने ख़ुशी से उन्हें गले लगा लिया और उनके होंठों पर किश कर दी.

‘ अहम्म्म्म अहंमम अहम्म्म्म इजाज़त हो तो अंदर आ जाएँ ?’

दरवाज़े से आयी आवाज़ सुन कर हम दोनों ने किश तोड़ी और उधर देखा तो कामिनी ममी कड़ी थी जो हमें देख कर मुस्कुरा रही थी.

दीपिका ममी : क्या दीदी !! आपको भी पूछने की ज़रूरत है क्या?

कामिनी ममी : अब तुम दोनों एक दूसरे में इतना खोये थे तो मैंने पूछना hi बेहतर समझा.

दीपिका ममी : इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकते हम पता है न. वैसे आपका भी ये लास्ट वीक है तो आज आप भी पूरी कसार निकलोगी.

कामिनी ममी दीपिका ममी की फिरकी ले रही थी मगर अब दीपिका ममी ने hi उनको लपेट लिया था . कामिनी ममी हमारे पास आ कर कड़ी हो गयी और शर्माने लगी . उनका पेट भी अब काफी बहार निकल आया था . मैंने कामिनी ममी का हाथ पकड़ा और उन्हें अपनी गॉड में बिठा लिया .

कामिनी ममी : अरे अरे ये क्या कर रहे हो कोई देख लेगा?

अमित : क्यों अब क्या हुआ? मेरे पास आने में दर लगने लगा है क्या? ठीक है तो जाओ फिर

मैंने मुँह बनाते हुए कामिनी ममी को ढीला छोड़ दिया तो उन्होंने झट से मुझे अपनी बाँहों में कास लिया और खुद hi किश करने लगी

कामिनी ममी : तुम्हारे पास आने में दर क्यों लगेगा ? मैं तो ये कह रही थी क कहीं देवर जी आ गए तो? इसी लिए तुम दोनों को अलर्ट करने hi आयी थी.

दीपिका ममी : हम्म तो अब जल्दी से उठ जाओ वर्ण जहाँ बैठी हो न वहां से अभी झूला झूलने लगोगी आप .

दीपिका ममी ने मज़ा लेते हुए कहा तो कामिनी ममी ने भी वैसे hi जवाब दिया .

कामिनी ममी : आज तो जी भर क झूला झूलूँगी मैं आज और कल का hi तो दिन है उसके बाद तो मेरी भी छुट्टी हो जाएगी.

अमित : क्या ऐसे दीपिका ममी ठीक कह रही है आप अब उठ hi जाओ वर्ण मेरा मूड ख़राब होने वाला है फिर कहीं कोई गलती न हो जाये.

कामिनी ममी : अगर इतना hi मन हो रहा है तो चले अपने कमरे में ?

अमित : नहीं अभी नहीं , माँ को शक हो जायेगा. रत में hi ठीक है. वैसे भी अब मां लोग भी एते hi होंगे.

उसके बाद मैं कामिनी ममी दीपिका ममी क रूम से बहार आ गए . मैं घर आकर भूल hi गया था क राधा ने मुझे कुछ दिया है जो मैंने अपने बैग में दाल लिया था और घर एते hi सबसे मिलने क चक्कर में भूल गया. अँधेरा होने लगा था और तीनो मां भी वापिस घर आ गए . सब ने मिल कर खाना खाया. विजय मां और अजय मां ने कॉलेज क बारे में पूछा और मुझे कुछ और मुझे बताया की मेरे कहते में उन्होंने पैसे जमा करवा दिए हैं. बातें करते करते हमने खाना खाया और उसके बाद मैं अपने कमरे में चला गया.

कमरे में एते hi मैंने बैग खोल कर देखा तो राधा वाला लिफाफा सामने आ गया मैंने उत्सुकता से उसे खोला तो मेरी आँखों में आंसू आने शुरू हो गए. ये एक एल्बम था जिसमे मेरी माँ की तसवीरें थी. उनके बचपनों से ले कर जवानी तक सभी यादें . ज्यादातर तस्वीरों में दिव्या मौसी hi उनके साथ थी और कुछ में नाना नानी मां और मौसियां . मैं एक एक तस्वीर को गौर से देख रहा था . मुझे पता hi नहीं चल रहा था क मेरी आँखों से आंसू गिर रहे हैं. मैंने एक इस क फोटो को चूमा और दिल से राधा को शुक्रिया कहा क उसने मेरी माँ की इतनी यादें मुझे दे दी. माँ क साथ दिव्या मौसी को हर तस्वीर में इतना करीब और मुस्कुराते प्यार करते शरारत करते देख कर मुझे एहसास हो रहा था क मुझे जो कुछ भी उनके बारे में बारे गया है सब सच है. तस्वीरों में जैसे वो हस्ती मुस्कुराती नज़र आ रही थी असल ज़िन्दगी में मैंने कभी उन्हें ऐसा नहीं देखा था. बचपन से ले कर जवानी तक एते एते लास्ट में कुछ तस्वीरें मेरी भी थी माँ की गॉड में और कुछ में दिव्या मौसी की गॉड में भी बचा था. ज़ाहिर वो राधा hi होगी जो ज्यादातर मेरी माँ की गॉड में hi नज़र आ रही थी . एक तस्वीर में दिव्या मौसी ने मुझे ऊपर उठाया हुआ था और मेरी नक् से अपनी नाक रगड़ते हुए मुस्कुरा रही थी. इस तस्वीर क ऊपर कुछ निशान भी थे जैसे क तरल की कुछ बुँदे गिरी हों. मैं समझने की कोशिश करने लगा की ये क्या है. ये ज्यादा पुराण नहीं लग रहा था जबकि ऐसे निशान मैंने माँ की कुछ तस्वीरों में देखे थे जो पुराने लग रहे थे मगर ये वाले अलग थे जैसे क ये नए हों. मुझे उन निशानों क बारे में जो लग रहा था वो मुझे सही नहीं लग रहा था. मेरा दिल कह रहा था क ये ज़रूर आंसुओं क निशान हैं मगर दिमाग कह रहा था क मेरी तस्वीर पर ये नहीं हो सकते . क्यूंकि हो न हो ये निशाना जो माँ की तस्वीरों पर हैं वो दिव्या मौसी क आंसुओं से बने हो मगर मेरी तस्वीर पर वो क्यों आंसू बहाने लगी ? वो तो मुझे पसंद hi नहीं करती . या फिर हो सकता है इस पर कुछ गिर गया हो. मगर दिल थी कह रहा था क ये दिव्या मौसी क hi आंसू हैं . शायद वो मुझे भला बुरा बोलीं क बाद खुद hi रोई होंगी .

मैं अपनी माँ की तस्वीरों को देखने में ऐसा खोया था क मुझे होश hi नहीं रहा क कौन कब मेरे पास आया और मैं कब से ऐसे बैठा था.

‘ ऐसे आंसू बहाने से क्या दामिनी वापिस आ जाएगी ?’

मैंने सर उठा कर आवाज़ की तरफ देखा तो गौरी ममी मेरे सामने कड़ी थी. उनकी आँखों में भी आंसू थे शायद वो कुछ देर से मुझे ऐसे तस्वीरों में खोये आंसू बहते देख रही थी. मैंने जैसे hi उनकी तरफ देखा तो उन्होंने मुझे अपने गले से लगा लिया और मेरे सर को सहलाते हुए मुझे हौंसला देने लगी.

गौरी ममी : इसी लिए मैं सब को मन करती थी क कोई तुम्हारे सामने दामिनी की बात न करे. मैं तुम्हारी आँखों में आंसू नहीं देखना चाहती थी . मत रो मत रो तू रोयेगा तो तेरी माँ को भी दुःख होगा. तुझे दुखी देख कर न मुझे चैन आएगा और न दामिनी को. देख मेरा ाचा बीटा है न तो चुप हो जा.

अमित : माँ कितनी प्यारी थी न माँ, देखो दिव्या मौसी क साथ कितनी खुश दिखती है . मुझे तो कुछ भी यद् नहीं था उनके बारे में . चेहरा तक यद् नहीं था और आज इन तस्वीरों ओने उनको देख कर खुद को रोक नहीं प् रहा हूँ माँ. माँ मुझे कितना प्यार करती थी

गौरी ममी: दामिनी तुम्हे बहुत प्यार करती थी तुम तो उसकी धड़कन थे . देखो अपनी माँ की आँखों को . हैं न तुम जैसी.

अमित : नहीं माँ , मेरी ऑंखें माँ जैसी हैं जो मुझे उनसे मिली हैं.

गौरी ममी : वो हमेशा हमारे सामने रहती है जब भी हम तुम्हारी आँखों में देखते हैं. तुम उसकी जीती जागती यद् हो बीटा .

अमित : काश मैं माँ से मिल सकता .

गौरी ममी : तू तो कभी भी उससे मिल सकता है बीटा .

अमित : वो कैसे माँ?

गौरी ममी : क्या तुझे दिव्या में दामिनी नज़र नहीं अति? देख इस तस्वीर में भी . दिव्या दामिनी से ज्यादा तुम्हे प्यार करती थी और आज भी करती है.

अमित : पर मौसी तो मुझसे नफरत करती है

गौरी ममी : नहीं बीटा ऐसा नहीं है. वो तो राधा से भी ज्यादा तुम्हे प्यार करती है. पता नहीं वो तुम्हारे पापा से किस बात पर गुस्सा है ? मगर वो तुम्हे आज भी प्यार करती है मेरी बात यद् रखना.

हम दोनों बात कर रहे थे तो कामिनी ममी भी आ गयी तब तक मैं संभल चूका था . कामिनी ममी क आते hi गौरी ममी कड़ी हो गयी .

गौरी ममी : ाचा बीटा अब मैं चलती हूँ तेरे बाबा को भी देख लूँ ज़रा और देख अब तू कुछ नहीं सोचेगा इस बारे में . अब इसे बंद कर क अलमारी में रख दे.

गौरी ममी ने खुद hi मेरे हाथ से वो एल्बम ली और अलमारी में रख दी. उसके बाद वो कमरे से चली गयी और कमरे में अब मैं और कामिनी ममी hi रह गए . गौरी ममी क जाते hi कामिनी ममी ने मेरे साथ बैठ कर मुझे गले लगा लिया

कामिनी ममी : क्या हुआ ? आज माँ की यद् कैसे आ गयी? क्या दीदी से कोई भूल हो गयी ?

अमित : नहीं ऐसी बात नहीं है. वो राधा ने एल्बम दी थी माँ की तस्वीरों को देख कर मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था. आज पहली बार उनकी तस्वीरें देखि हैं तो आंसू रुक नहीं रहे.

कामिनी ममी : ाचा तो ये बात है, चल फिर निकल एल्बम दोनों साथ में देखते हैं.

अमित : पर आप तो यहाँ ......

कामिनी ममी : वो हम कल कर लेंगे आज हम दोनों साथ में एल्बम देखते हैं.

अमित : नहीं ममी जी , कल मुझे वापिस जाना है . मंडे से टेस्ट हैं मेरे. और उसके बाद तो आप कुछ कर नहीं पाएंगी . चलिए आज आपको आखिरी बार प्यार कर लेता हूँ उसके बाद तो मौका नहीं मिलने वाला.

कामिनी ममी : ऐसा क्यों कहते हो ? हम फिर प्यार करेंगे न हमारा बचा होने क बाद . बस तब तक रुकना पड़ेगा.

अमित : चलिए आज तो कर लीजिये

कामिनी ममी : नहीं रहने दो आज तुम्हारा मूड ठीक नहीं है.

अमित : नहीं अब ठीक है आप कपडे उतरिये

कामिनी ममी : बेशरम ऐसे कैसे बोलता है . खुद hi उतर ले.

उसके बाद मैंने कामिनी ममी क कपडे उतरे और अपने भी कपडे उतर कर शुरू हो गया . आज आखिरी बार था तो मैंने ममी क अंदर दो बार पानी निकला . थकावट क कारन मैं ऐसे hi नंगा सो गया सिर्फ एक अंडरवियर पेहेन कर. कामिनी ममी भी वैसे hi मेरे साथ सो गयी.

उधर बहार गौरी ने आज फिर कामिनी क साथ अमित काम क्रीड़ा देखि और अपनी छूट को खूब रगड़ा. गौरी सारा तमाशा देखते हुए फिर से गरम हो गयी हालाँकि पहले उसे लगा था क अमित का मूड ठीक नहीं है शायद वो न करे मगर उसे करता हुआ देख कर गौरी भी गरम हो गयी. अमित तो काम ख़तम कर क सो गया मगर थोड़ी देर बाद गौरी कमरे में आ गयी और आ कर कामिनी को जगाया.

गौरी : धीरे से ) कामिनी उठो,

कामिनी : नींद में ) क्या है दीदी सोने दीजिये न बहुत थक गयी हूँ मैं.

गौरी : अरे जल्दी कर उठ और अपने कमरे में जा . ऐसे hi सो गयी तो सुबह उठने में देर हो जाएगी कहीं किसी को पता चल गया तो?

कामिनी न चाहते हुए भी उठ गयी. वैसे तो वो जानती थी क अजय को तो सब पता hi है मगर फिर भी उठ गयी और अपनी हालत ठीक करती वो अपने कमरे में चली गयी. कामिनी क जाते hi गौरी कामिनी की जगह पर लेट गयी. गरम तो पहले से hi थी और इतने दिनों से उसकी काम वासना ने उसके दिलो दिमाग पर कब्ज़ा कर रखा था . वो अब अमित क साथ आगे बढ़ना चाहती थी. गौरी ने अमित को हिलाया उसे देखने क लिए मगर वो नहीं हिला. गौरी ने अपने ब्लाउज क ऊपर क 2 हुक खोल दिए जिससे उसके दूधिया आम आधे से ज्यादा बहार दिखाई देने लगे. सदी का पल्लू सामने से हटाने क बाद उसने अपनी गीली पेंटी भी उतर कर साइड में रख दी और अमित क नंगे सीने अपना सीना लगा कर उसे अपनी बाँहों में कास लिया . अमित तो नींद में hi था मगर गौरी उसको खुद से चिपका कर अपनी गर्मी को शांत करने की कोशिश कर रही थी. गौरी ने अमित का सर अपने कोमल मुलायम स्तनों में घुसा दिया और अपना हाथ निचे ले जाकर अमित क अंडरवियर में दाल दिया . दो बार कामिनी की छूट में गोते लगा कर अमित का लैंड आराम से सोया पड़ा था. छूट क पानी से लिथड़ा होने की वजह से अब भी कुछ चिकनाई लैंड पर मौजूद थी. गौरी क तो तन मन में झुरझुरी सी हुई लैंड को हाथ में लेते hi. गौरी तो अब जैसे अपने कपड़ों से आज़ाद होना चाहती थी ताकि खुल क अमित क साथ अपना जिस्म रगड़ सके मगर उसे दर भी था क कहीं अमित की आँख खुल गयी तो वो क्या जवाब देगी. इस लिए उसने अपनी सदी को खुद hi कमर तक ऊपर कर लिया और अपनी गौरी चिकनी नंगी जांघों में अमित की एक तंग को ले लिया और अपनी दायीं टांग अमित की ऊपर वाली तंग क साथ रगड़ती हुई इतना ज्यादा ऊपर उठा ली की अमित की कमर क पीछे से अपने पाऊँ को रगड़ती वो उसे पुश कर रही थी ताकि अमित का लैंड किसी तरह उसकी छूट में घुस जाये जो पता नहीं कब से पानी पे पानी बहा रही थी .

अमित क लैंड को गौरी खड़ा करने की कोशिश में खुद इतनी गरम हो गयी क अपने जिस्म को अमित क जिस्म से रगड़ते हुए उसका पानी निकल गया. झटके कहती हुई गौरी अमित क साथ इतनी ज़ोर से चिपक गयी जैसे उसे अपने अंदर hi समां लेगी.

गौरी : मन में ) आआअह्हह्ह्ह्ह ये आग मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही . तुम कब मेरी तरफ ध्यान डोज. अपनी दोनों ममियों को प्यार देते हो , मेरा तुम पर हक़ नहीं है क्या ? मुझे भी प्यार चाहिए , मेरी कोख में भी तो तुम्हारा hi बीज है.

ऐसे hi पानी निकल कर गौरी थक कर अमित क साथ सो गयी. उसने अपनी हालत को भी ठीक नहीं किया . अगली सुबह अमित क उठने से पहले उसका बाबूराव उठ गया शायद ये गौरी क हाथों का कमल था या सुबह की लघु शंका. अमित का लैंड जो अंडरवियर से बहार था जैसे hi अपनी औकात में आया तो उसका एहसास गौरी की छूट पर भी हो गया. गौरी जो सबसे पहले उठती थी घर में उसकी भी नींद जल्दी खुल गयी और लैंड क एहसास ने सुबह सुबह उसे गरम कर दिया . एक बार फिर से गौरी बहकाने लगी और उसने अमित को चूम कर उसका मुँह अपने स्तनों में लगा दिया . अपनी तंग को अमित की कमर पर चढ़ा कर उसने एक हाथ से लैंड को थमा और अपनी छूट का रास्ता दिखते हुए छूट की फैंको पर लगा दिया . अमित भी कच्ची नींद में था तो उसने भी बिना ऑंखें खोले कामिनी समझ कर गौरी को अपनी बाँहों में कास लिया और अपने लैंड को ऐसे आगे को पुश किया. लैंड का सूपड़ा छूट का द्वार खोलता हुआ अंदर घुस गया. गौरी का तो थे मन पुलकित हो उठा. उसने अपनी तरफ से भी कमर आगे को धकेली मगर लैंड उसकी छूट क हिसाब से मोटा था. वहीँ अमित को छूट की कसावट लैंड पर मज़ा दे रही थी उसे ये एहसास hi नहीं था कामिनी की छूट तो उसके लैंड की आदि हो चुकी है फिर ये टाइट छूट किसकी है . अमित ने आधी नींद में hi अपना हाथ गौरी की नंगी जांघ पर रखा और उस कोमल एहसास को महसूस करता हुआ वो अपना हाथ गौरी क नितम्भों तक ले गया. गौरी क बड़े बड़े मुलायम चूतड़ हाथ में आते hi वो उसे मसलने लगा . गौरी तो जैसे हवा में उड़ने लगी . एक तरफ जहाँ उसे अपनी छूट पर अपने सपनो क लैंड का एहसास हो रहा था वहीँ उसकी गांड को अमित क मजबूत हाथ मसल कर उसे और गरम कर रहे थे . ऊपर से अमित गौरी क लगभग नंगे स्तनों पर अपने होंठों से अपनी मोहर लगा रहा था. गौरी चरम की तरफ बढ़ने लगी उसकी छूट में 2 इंच लैंड घुसना hi उसे जैसे सब कुछ दे गया था. जल्दी hi गौरी की कमर झटके लेने लगी और उसकी छूट ने फिर से पानी छोड़ दिया. मगर अमित को जैसे कोई फरक नहीं पड़ा वो वैसे hi अपनी कमर को आगे ठेलते हुए लैंड को और अंदर करना छह रहा था मगर इस पोजीशन में ये पॉसिबल नहीं था ऊपर से गौरी भी अब ढीली पद गयी थी. अमित ने गौरी को अपने नीचे लेन क लिए पलटना चाहा तो गौरी को जैसे झटका लगा. उसे समझ आ गयी क अमित क्या करने वाला है. अगर अमित ऊपर आ गया तो वो गौरी को पहचान जायेगा . अभी तक तो अमित की ऑंखें बंद hi थी मगर इससे वो पूरी तरह से जाग जाता और ये गौरी क लिए मुश्किल भी था क्यूंकि उसे पता था अमित उसके बारे में ऐसा नहीं सोचता है. जल्दी से गौरी ने अमित को अपने से दूर हटाया और बिस्टेर से उठ गयी. मगर अमित इस से झुंझला गया क्यूंकि अब उसका लैंड छूट में घुसना चाहता था. अमित ने कामिनी समझ कर फिर से गौरी को दबोचने की कोशिश की मगर तब तक गौरी बीएड से उतर चुकी थी और रूम से बहार जाने को थी. कामिनी को बीएड पर न पाकर अमित ने आंख खोल कर देखा तो उसे गौरी कमरे से बहार जाती हुई दिखी. ये देख कर अमित को झटका लगा. उसे खुद पर गुस्सा आने लगा क वो नींद में क्या कर रहा था. अमित की नज़र अपने खड़े हुए लैंड पर गयी तो उसकी हवा टाइट हो गयी क्यूंकि लैंड तो अंडरवियर से बहार था. ऊपर से अमित क जिस्म पर और कोई कपडा भी नहीं था.

अमित : मन में ) ये क्या हो गया? कहीं माँ ने मुझे इस हालत में देख तो नहीं लिया? कहीं कामिनी ममी क साथ माँ ने मुझे देख तो नहीं लिया? हे भगवन ये क्या हो गया मुझसे. मगर कामिनी ममी कहाँ चली गयी? हे भगवन अब क्या होगा? माँ क्या कहेगी ? मैं उनका सामना कैसे करूँगा?

अमित यही सब सोच रहा था क उसकी नज़र बीएड पर पड़ी गौरी की पेंटी पर गयी . अमित ने पेंटी को पकड़ कर देखा और सोचने लगा

अमित : मन में ) कामिनी ममी ने तो पेंटी पहनी नहीं थी फिर ये पेंटी कहाँ से आयी ? ये किसकी है ? कहीं ये माँ ? नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता . हो सकता है कामिनी ममी ने उतर कर यहाँ पहले hi रख दी हो. अगर कहीं ये सच में माँ की ........

अमित : ये मैं क्या सोच रहा हूँ? ये माँ की नहीं हो सकती . ये ज़रूर कामिनी ममी की होगी . कहीं माँ ने ये पेंटी देख तो नहीं ली ? हे भगवन अब क्या होगा?

मैं ऐसे hi ख्याल मन में लिए डरता रहा और अपनी hi सोच में खोया हुआ बैठा था क माँ मेरे लिए चाय ले आयी .

गौरी ममी : अरे अभी तक उठा नहीं तू? आज नहाना नहीं है क्या ?

माँ को देख कर ऐसा लग hi नहीं रहा था क उन्होंने कुछ देखा हो. मुझे खुद पर hi शक होने लगा क मैंने जिसे देखा वो माँ hi थी या कामिनी ममी थी. खैर मैंने भी अपनी हालत का कण्ट्रोल करते हुए बदले जवाब दिया.

अमित : आज संडे है न माँ इसी लिए देर से उठा . अभी नाहा लूंगा.

गौरी : मन में ) झूट ! तुम चाहे देर से उठी तुम्हारा दोस्त तो मुझसे भी पहले उठ गया था और आज मेरे अंदर भी चला गया था काश क ये सुबह नहीं रत होती तो आज मिलान हो जाता.

अमित : क्या हुआ माँ आप चुप हो गयी? वैसे आप पहले भी आयी थी न कमरे में?

गौरी ममी : तू ये चाय पि तेरे बाबा को भी चाय देनी है अभी और नाहा कर जल्दी आजा नीचे फिर नाश्ता करना है .

गौरी ममी मेरी बात का जवाब दिए बगैर बात बदल कर निचे चली गयी . मुझे फिर से शक होने लगा क वो गौरी ममी hi थी जो कमरे में थी. इस बात का जवाब तो कामिनी ममी से hi पता चल सकता है . मैं चाय पि कर नाहा धो कर तैयार हो गया और नाश्ता करने नीचे चला आया . सबके साथ नाश्ता किया और बहुत साडी बातें हुई. मैंने बता दिया क मैं आज वापिस चला जाऊंगा तो इससे माँ नाराज़ होने लगी मगर मेरे टेस्ट की वजह से वो मन गयी. मैं कामिनी ममी से अकेले में बात करना छह रहा था मगर मौका नहीं मिल रहा था . नाश्ते क बाद जब मां लोग घर से बहार जाने लगे तो राजू आ गया .

राजू : शुक्र है तेरे भी दर्शन हुए. ये ले मुँह मीठा कर

राजू अपने साथ मिठाई का डिब्बा लाया था और एते hi मेरा मुँह मीठा करवाने लगा.

अमित: अबे ये किस ख़ुशी में ?

राजू : ये मेरी नौकरी लगने की ख़ुशी में. बहुत अछि नौकरी दी है साहब ने मुझे. बस बैठ कर सब पर नज़र रखनी होती है और सामान क आने जाने का हिसाब रिकॉर्ड करना होता है. पैसे भी बहुत हैं और तो और साहब कह रहे थे क रहने क लिए कंपनी का क्वार्टर भी मिलेगा. मेरी तो लाटरी लग गयी यार. सब तेरी वजह से है वर्ण मुझे कहाँ इतनी अछि नौकरी मिलती.

अमित: अरे इसमें मैंने क्या किया? ये तो अंकल को शुक्रिया कहना तुम. और हाँ ईमानदारी से काम करना कहीं मेरा नाम न ख़राब करना.

राजू : बिलकुल भी नहीं. वैसे साहब तुम्हे बहुत मानते हैं . मैंने देखा उन्होंने मुझे बाकि वर्कर्स क जैसे नहीं समझा . वो तो मुझसे बड़े अचे से मिलते हैं. मैं तुमसे मिलने उनके घर भी गया था मगर तुम थे hi नहीं . साहब ने बताया क तुम बड़े कॉलेज में पड़ते हो और बिजी रहते हो इस लिए दोबारा नहीं आया सोचा यहीं मिल लूंगा.

अमित : हाँ ये तो सही बात है क मैं बिजी रहता हूँ. और बता रेनू का क्या बना?

राजू : वो भी बताता हूँ चल मेरे साथ.

हम दोनों घर से निकले और राजू मुझे नदी किनारे ले आया .

अमित : अब बता भी क्या बात है?

राजू ने कास क मुझे गले लगा लिया . राजू की आँखों में पानी आ गया था. मुझे लगा कहीं कोई गड़बड़ तो नहीं हो गयी.

अमित : अरे हुआ क्या बता तो सही

राजू : ख़ुशी से चीखते हुए ) रेनू क बापू ने हाँ करदी .

अमित : क्या सच में !!!! इतनी ख़ुशी क बात तू रट हुए बता रहा है ?

राजू : रो कौन रहा है ? मैं तो खुश हूँ . ये सब तेरी वजह से हुआ है. रेनू बता रही थी क तेरे बाबा में उसके बापू से बात की थी तभी वो मने हैं शादी क लिए .

राजू क मुँह से बाबा क बारे में सुनते hi मुझे उन पर गर्व होने लगा . उन्होंने मेरी बात मन कर राजू और रेनू की शादी क लिए उसके बापू को मन लिया था .

अमित : तो अब आगे क्या ?

राजू : शादी अभी थोड़ा रुक कर करेंगे कुछ महीने. मैं बहुत खुश हूँ और पता है रेनू भी तुम्हे खुद मिलकर शुक्रिया कहना चाहती है .

अमित : उसे कहना इसकी ज़रूरत नहीं है. तुम दोनों मेरे दोस्त हो इतना तो मैं कर hi सकता हूँ.

राजू : मैंने तो प्लान बनाना भी शुरू कर दिया है. शादी क बाद कंपनी क क्वार्टर में hi रह लेंगे और रेनू को भी कोई छोटा मोटा काम दिलवा दूंगा दोनों कमाएंगे और अपना घर बना लेंगे.

अमित : अबे रुक रुक . तू इतनी दूर तक सोचे बैठा है ? पहले शादी तो हो जाने दे फिर सोचना आगे का.

हम दोनों काफी देर तक बातें करते रहे नदी किनारे फिर मुझे पूजा भाभी का फ़ोन आने लगा. मुझे यद् आया मैंने तो पूजा भाभी और आंटी से उन्हें वडा किया था क मैंने संडे को उनके पास आऊंगा. अब वडा किया था तो निभाना hi पड़ेगा . मैंने राजू को ज़रूरी काम का कह कर उससे विदा ली और पूजा भाभी क घर चला गया.

पूजा भाभी : आ गए देवर जी. फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे थे ? मुझे लगा क तुम नहीं आओगे.

अमित : ऐसे कैसे नहीं अत? आपको फिर से नाराज़ करना था क्या?

पूजा भाभी : चलो फिर चले बीएड रूम में? ससुर जी तो घर पर नहीं हैं .

अमित : और आंटी?

पूजा भाभी : माँ जी अपने कमरे में हैं . उन्होंने कहा है क हम दोनों आराम से करें वो हमें डिस्टर्ब नहीं करेंगी .

अमित : पर वो क्या करेंगी दूसरे रूम में ?

पूजा भाभी : और क्या करेंगी ? ताकझांक कर क उंगली करेंगी.

अमित : तो फिर उन्हें भी बुला लो . दोनों को एक साथ करता हूँ .

पूजा भाभी : वो नहीं मानेंगी.

अमित : चलो देखते हैं. ऐसे तो बेचारी तड़पती रहेंगी अकेले . एक साथ दोनों को शांत कर देता हूँ फिर उन्हें भी ाचा लगेगा .

पूजा भाभी : मुझे कोई ऐतराज़ नहीं वैसे भी अब पर्दा तो कोई है नहीं .

हम दोनों चल कर आंटी क रूम में आ गए . आंटी करवट क बल आँखें मूँद कर लेती हुई थी . उनकी बड़ी गांड बहार को उभरी हुई थी . मैंने जाते hi उनकी गांड को मसल दिया तो वो हड़बड़ा कर उठ गयी .

पूजा सास : कौन है

आंटी ने मुझे सामने देखा तो उनके चेहरे और स्माइल आ गयी .

पूजा सास : तो तुम हो , आखिर आ hi गए तुम.

अमित: मैं तो आ गया पर लगता है आपका मूड नहीं है .

पूजा सास : तो क्या तुम मेरे साथ भी करोगे?

अमित : अगर आपको ऐतराज़ न हो तो

पूजा सास : खुश होते हुए ) मुझे ऐतराज़ क्यों होगा मैं तो खुद तरस रही हूँ उस दिन से .

अमित : तो चलो फिर उतरो कपडे.

मेरे इतना कहती hi आंटी ने फ़ौरन अपने कपडे उतर दिए और पूजा भाभी क कपडे उतरने में मैंने उनका साथ दिया . उसके बाद मैं बरी बरी से पूजा भाभी और आंटी क बूब्स मसलने और चूसने लगा . पूजा भाभी को बीएड पर लिया कर मैंने आंटी को घोड़ी बना दिया और उन्हें पूजा भाभी की छूट चाटने को कहा. आंटी पूजा भाभी की छूट चाटने लगी और मैंने आंटी की छूट में अपना लैंड घुसा दिया . आंटी को शुरुआत क कुछ धक्कों में तकलीफ हुई मगर उसके बाद उसे मज़ा आने लगा और वो खुद अपनी कमर पीछे को धकेलते हुए मज़ा लेने लगी. आंटी का पानी निकलने क बाद मैं पूजा भाभी की टांगों क बीच आ गया . पूजा भाभी एक बार अपनी सास क मुँह में अपना पानी निकल चुकी थी इस लिए उनकी छूट गीली थी. मैंने भी एक hi धक्के में पूरा लैंड घुसा दिया . उनकी टैंगो को कन्धों पर रख कर मैंने ताबड़तोड़ धक्के मर कर उनकी चूलें हिला दी. मैं दोनों सास बहु को बरी बरी से अलग अलग पोजीशन में छोड़ता रहा और अपना पानी दोनों को पीला कर घर आ गया .

घर एते hi मुझे सुबह की बात यद् आ गयी . मैं कामिनी ममी क रूम में चला गया बात करने क लिए .

अमित : कैसी हैं आप ?

कामिनी ममी : मत पूछो. रत में तो तुमने अचे से रगड़ा है अभी तक जांघों में दर्द है.

अमित : मालिश कर दूँ?

कामिनी ममी : नहीं रहने दो ये दर्द भी ाचा लगता है. बताओ कैसे आना हुआ , कोई काम था क्या?

अमित : हम्म वैसे आओ मेरे कमरे से कब आयी थी मुझे तो यद् भी नहीं?

कामिनी ममी : यद् कहाँ होगा , तुम तो घोड़े बेच कर सो गए थे. शायद कल तुम कुछ ज्यादा hi थके हुए थे. मैं तो रत में hi आ गयी थी वापिस.

कामिनी ममी की बात सुनते hi मुझे झटका लगा .

अमित: मन में ) तो सुबह मैं किसके साथ कर रहा था

अमित: क्या सुबह आप आयी थी मेरे कमरे में?

कामिनी ममी : नहीं , मैं तो खुद देर से उठी आज . क्यों क्या हुआ ? क्या बात है ?

अमित : कुछ नहीं

अमित : मन में ) इसका मतलब सुबह मैं माँ क साथ वो सब कर रहा था? नहीं ये नहीं हो सकता . अगर वो माँ होती तो वो गुस्सा ज़रूर करती मगर उन्होंने तो कुछ भी नहीं कहा . उनके इलावा और तो कोई है भी नहीं जो मेरे कमरे में ए. ये तो बड़ी गलती हो गयी मुझसे इसका मतलब वो पेंटी भी माँ की थी ? ममी से पूछता हूँ.

अमित : आपने कल रत पेंटी कहाँ उतरी थी अपनी ?

कामिनी ममी : बलुशिंग ) बदमाश , तुझे शर्म है क नहीं ? तुम जब घर आये थे मैंने तो तभी अपनी पेंटी उतर दी थी यहीं अपने कमरे में. वर्ण सोच सोच कर वैसे hi गीली हो जाती.

ये सुन कर मुझे एक और झटका लगा. इसका मतलब था क वो पेंटी माँ की hi थी मगर उन्होंने मेरे बीएड पर अपनी पेंटी क्यों उतरी ? अगर मैं उनके साथ नींद में वो सब कर रहा था तो उन्होंने मुझे रोका क्यों नहीं? जहाँ तक मुझे यद् है मैंने तो कामिनी ममी समझ कर अपना लैंड भी छूट में घुसा दिया था तो इसका मतलब ...

ये सोचते सोचते मेरा दिमाग ख़राब होने लगा. मुझे खुद पर गुस्सा आ रहा था मगर साथ hi गौरी ममी पर भी हैरानी हो रही थी. मुझे ाचा नहीं लग रहा था तो मैंने जल्दी से वापिस शहर जाने का सोचा और अपने रूम. जाकर जल्दी से तयारी कर ली. राधा की दी हुई एल्बम भी मैंने अपने साथ रख ली . दोपहर का खाना खाने क बाद मैं वापिस शहर आने क लिए निकल रहा था तो गौरी ममी ने मुझे कास क गले से लगाया और मेरा चेहरा अपने स्तनों में दबा दिया . ये बात पहले मैंने कभी नोटिस नहीं की थी मगर अब मैंने इस बात पर ध्यान दिया तो मुझे शक होने लगा का वो जान बुझ कर ये सब कर रही हैं. खैर सब से मिल क मैं वापिस आ गया.

उधर मोंटी वापिस लौट आया था सारा इंतज़ाम करने क बाद . मोंटी और शीना क इलावा कोई नहीं जनता था क प्लान क्या है और मोंटी का असल प्लान तो शीना को भी नहीं पता था. वहीँ नीरज को उसके बॉयज कॉलेज वाले सोर्स ने बताया क मोंटी आज कल उनके कॉलेज क उन्ही लड़कों से मिल रहा है जिनके साथ नीरज का पहले भी झगड़ा हो चूका है. उसके दोस्त ने उसे ये भी कहा क हो सकता है वो अमित पर हमला करें . नीरज को अब पर चल गया था क मोंटी अमित पर हमला करवाने वाला है तो उसने अपने साथियों को अलर्ट कर दिया . नीरज को उसके सोर्स से कहीं भी अमित की कौसिन्स क साथ किसी तरह की हरकत होने की खबर नहीं मिली इस लिए उसका पूरा ध्यान अब अमित को बचने पर hi लग गया .

शिवानी हर रोज़ अब शीना क साथ hi रह कर सच जानने की कोशिश कर रही थी पर उसके हाथ भी कुछ नहीं आया और न hi शीना ने उसके सामने किसी का ज़िकर किया तो उसे भी लगा क शायद अभी मोंटी ऐसा कुछ नहीं करने वाला और हो सकता है क उनका प्लान बदल गया हो. शालू क भी हाथ कोई खबर नहीं लग पायी थी सिवाए इसके क मोंटी बॉयज हॉस्टल क उन लड़कों से मिल रहा है जो दंगा फसाद करते रहते हैं . जिसका इशारा अमित क साथ किसी संभावित झगडे की तरफ hi था.

उधर घर पर राधा और दिव्या दोनों अपनी अपनी जगह अमित क बारे में hi सोच रही थी. दिव्या जहाँ इस बात पर खुद पर hi नाराज़ हो रही थी क उसने अपनी जान से प्यारी बहिन क बेटे क साथ कभी ाचा सलूक नहीं किया वहीँ राधा ये सोच रही थी क वो कैसे अपनी माँ क दिल में अमित क लिए जो प्यार है उसे बहार लाये और उस बात का भी पता लगाए जिसकी वजह से दिव्या अमित क पापा से नफरत करती हैं.



मैं शाम तक मोहित क घर वापिस लौट आया . अंकल भी घर थे तो अंकल आंटी और मोहित क साथ बहुत साडी बातें हुई और ऐसे hi रत का खाना खा कर सो गए.
 
भाई आज अपडेट आ जायेगा रत तक
 
अपडेट 120



अगला दिन मंडे था और हमारे टेस्ट आज से शुरू हो रहे थे. सुबह कॉलेज जाने से पहले आंटी ने हम दोनों को बेस्ट ऑफ़ लक कहा और हम कॉलेज चले गए .

मोहित : तूने तयारी की है न टेस्ट की ?

अमित : हाँ तयारी तो की है , तू बता तेरा क्या हल है ?

मोहित : तुझे तो पता है यार मुझे मीनल का प्यार hi पड़ने से फुर्सत कहाँ मिलती है.

अमित : थोड़ा किताबें पद लिया कर नहीं तो चन्दर्कांता का पता है न फिर ?

मोहित : अरे वो तेरी दुश्मन है मेरी नहीं.

अमित : पर वार्निंग उसने सब को दी थी

मोहित : देख लेंगे वैसे इतना भी बुरा हल नहीं मेरा कोई .

ऐसे hi बातें करते हम मीनल को पिक कर क कॉलेज पहुंचे . मीनल ने भी हमें बेस्ट ऑफ़ लक कहा. कॉलेज में पहुंचे तो नेहा दीदी और राधा हमारा वेट कर रही थी. हमें देखते hi दोनों हमारे पास आ गयी

अमित : अरे दीदी आप लोग यहाँ ? टेस्ट देने नहीं जाना?

नेहा दीदी : जाना क्यों नहीं ? राधा कह रही थी अमित से मिल कर जायेंगे तो तेरा hi इंतज़ार कर रहे थे. तयारी तो की है न तूने ?

अमित : हाँ दीदी मैंने तयारी की है आराम से पास हो जाऊंगा.

नेहा दीदी : सिर्फ पास नहीं होना अचे मार्क्स भी लेन हैं. बेस्ट ऑफ़ लक फॉर टेस्ट.

अमित : आपको भी दीदी वैसे आप तो फर्स्ट hi आने वाली हैं इतना मुझे यकीन है.

राधा : बेस्ट ऑफ़ लक.

अमित : तुम्हे भी , एंड थैंक्स फॉर थे गिफ्ट. तूने मुझे वो दे दिया जिसकी मैं कोई कीमत नहीं चूका सकता. थैंक यू वैरी मच

राधा : ऐसा न कहो. वो तो तुम्हारा hi था. घर आना तुम्हे कुछ और भी दिखाउंगी मगर पहले टेस्ट आराम से हो जाने दो वर्ण तुम पड़े पर ध्यान नहीं दे पाओगे .

अमित : खुश होते हुए ) मैं आज hi आ जाता हूँ इतने दिन मुझसे वेट नहीं होगा

राधा : मैंने कहा न टेस्ट ख़तम होने क बाद .

नेहा दीदी : किस बारे में बात कर रहे हो तुम दोनों.

राधा : बस में बताती हूँ दीदी पहले क्लास में चलें ? पहले hi लेट हो गए हैं.

नेहा दीदी : हाँ चलो

अमित : राधा , थैंक यू वैरी मच

राधा : बेस्ट ऑफ़ लक , टेस्ट अचे से करना

मोहित और मीनल को भी नेहा दीदी और राधा बेस्ट ऑफ़ लक कहा इतने में कल्पना भी आ गयी और राधा नेहा दीदी और मीनल उसे भी बेस्ट ऑफ़ लक कह कर चली गयी.

कल्पना: क्या हाल है तुम दोनों का ? तयारी तो की है न टेस्ट की?

मोहित : पास हो जाऊंगा इतना पता है तुम अपनी बताओ

कल्पना: मेरी तो तयारी है. घर पर किताबों क इलावा और क्या करना होता है. और तुम?

अमित : मेरी भी तयारी है

कल्पना: मतलब किताबों में भी ध्यान देते हो. वैरी गुड , फिर तो चन्दर्कांता से बच hi जाओगे फिर भी ज़रूरत हो तो बताना ी विल हेल्प.

अमित : ज़रूर , बेस्ट ऑफ़ लक

कल्पना : यू तू

बातें करते हुए हम क्लास रूम में आ गए. टेस्ट क्लास में hi होने थे और फैकल्टी भी कॉलेज की hi थी तो सब नार्मल सा था. एक hi बेंच पर 2 -2 स्टूडेंट्स बैठ कर टेस्ट दे रहे थे . टीचर क्लास में स्टूडेंट्स क बिच घूमते रहते थे. 3 घंटे क टेस्ट क बाद हम क्लास से बहार निकले और अपने अपने टेस्ट क बारे में बात करने लगे. मोहित का टेस्ट ाचा हुआ था मगर बहुत ाचा नहीं , मैंने भी सरे क्वेश्चन आंसर किये थे. कल्पना भी बता रही थी क ाचा हुआ उसका टेस्ट . जब राधा मीनल और नेहा दीदी आयी तो उनके क्या कहने. स्कॉलर थी मेरी दोनों बहने तो वो 100 % मार्क्स लेने की प्लानिंग में थी. खैर इन बातों का डिटेल ज़रूरी नहीं .

टेस्ट क बाद नेक्स्ट टेस्ट की तयारी क लिए सब जल्दी निकल लिए घर को. आंटी को भी पता था हमारे टेस्ट चल रहे हैं तो वो भी हम दोनों को कोई काम नहीं कहती थी. शाम को स्टेडियम में प्रैक्टिस क लिए भी लड़के काम hi आये मगर मैंने फिर भी एक्ससरसीसे की क्यूंकि अगले महीने क कम्पटीशन क लिए कोच सर ने वारं किया था. ट्यूशन पड़ने मंजू म क घर गया तो वो भी टेस्ट चेक करने में बिजी थी फिर भी उन्होंने कुछ इम्पोर्टेन्ट क़ुएस्तिओन्स मार्क कर दिए मुझे. ऐसे मंडे से लगातार हर रोज़ हमारी रूटीन रही और लास्ट टेस्ट हमारा फ्राइडे को था. राधा मीनल और नेहा दीदी का एक सब्जेक्ट एक्स्ट्रा होने की वजह से उनको एक दिन और जाना था. मगर हम फ्राइडे को फ्री हो गए .

फ्राइडे को टेस्ट क बाद मैं कल्पना और मोहित क्लास रूम से बहार निकल कर बातें करने लगे.

मोहित : फाइनली हम इस टेस्ट क चक्कर से आज फ्री हो गए . इतने दिनों से पद पद क दिमाग ख़राब हो गया था. चलो आज पार्टी करते हैं

कल्पना : पार्टी आज कैसे कर सकते हैं ? अभी मीनल राधा और नेहा दीदी का टेस्ट पड़ा है न. उनके बिना ाचा नहीं लगेगा

अमित : कल्पना सही कह रही है. सब साथ होंगे तो मज़ा आएगा. मीनल को पता चल तो तेरा क्या होगा?

मोहित : मैं तो भूल hi गया था वर्ण मीनल गुस्सा हो जाती .

हम बातें कर रहे थे क नीरज हमारे पास आया और मुझे साइड में बुलाया

अमित: क्या बात है भैया मुझे यहाँ क्यों बुलाया ? आप वहीँ आ जाते .

नीरज : अकेले में बात करना ज़रूरी था.

अमित : बात क्या है?

नीरज : देख मैं ये पहले hi बता देना चाहता था फिर सोचा टेस्ट की टेंशन होगी पहले hi ऊपर से मैं एक और टेंशन दे देता तो पड़े कहाँ होती. मुझे मेरे बॉयज हॉस्टल वाले दोस्त ने बताया है क मोंटी उन्ही लोगों क साथ मिलकर तुम पर हमला कर सकता है जिन्होंने मुझ पर हमला किया था. वैसे तो मैं रोज़ कॉलेज क बाहर चेक करता था और मेरे दोस्त भी नज़र रख रहे थे फिर भी तुम थोड़ा अलर्ट रहना. और मुझ से इन टच रहना.

अमित : मुझे अपनी परवाह नहीं है भाई बस मेरी बहनो पर कोई बात नहीं आणि चाहिए .

मोंटी : don’t वोर्री उन्हें कुछ नहीं होगा . मैं और मेरे दोस्त नज़र रखते हैं . वैसे ये तुमने ाचा किया जो उनके लिए कार का इंतज़ाम कर दिया .

अमित : मुझे यही ठीक लगा . वैसे भी कल्पना जुडो एक्सपर्ट है तो वो संभल सकती है .

मोहित: तो मुझे बाहर रख रहे हो आप दोनों इन बातों से

मोहित हमारे पास खड़ा सब सुन रहा था और हमें पता भी नहीं था . उसे बुरा लगा क नीरज और मैं उसे शामिल किये बगैर ये सब डिसकस कर रहे थे.

अमित : अरे तुझमे और मुझ में कोई फरक है क्या? हम दोनों एक hi तो हैं. वो तो कल्पना की वजह से तुम्हे वहीँ छोड़ दिया था.

नीरज : सही कहा , ाचा अब मैं चलता हूँ आज कहीं जाना है. तुम अपना ध्यान रखना . Ok bye

नीरज वहां से चला गया और हम दोनों वापिस कल्पना क पास आ गए .

कल्पना : तो क्या कह रहे थे नीरज भैया. ज़रूर कोई खास बात है जो सेक्रेटली कर थे . मुझे बता सकते हो अगर बताना चाहो तो

अमित : ो प्लीज , तुम मेरी दोस्त hi तुमसे पर्दा कैसा . हाँ मगर राधा और दीदी को मत बताना . नीरज भैया कह रहे थे क मोंटी और उसके कुछ दोस्त जो दूसरे कॉलेज से हैं वो मुझ से झगड़ा कर सकते हैं ऐसा उन्हें पता चला है.

कल्पना : गुस्से में ) हाथ लगा कर तो देखें फिर बताती हूँ उनको.

अमित : ो मेरी शेरनी रिलैक्स . कुछ नहीं होता ऐसा वैसा . तुम बस राधा और नेहा दीदी का ध्यान रखना .

कल्पना : उनकी तुम टेंशन न लो वो मैं देख लुंगी. मगर इस बार अगर उन कुत्तों ने तुम्हे हाथ भी लगाया तो ये उनकी आखिरी गलती होगी

अमित : ो लेडी डॉन ज़रा ठण्ड रखो . कुछ नहीं होता मुझे . वैसे तुम मेरी इतनी चिंता न किया करो वर्ण किसी दिन मुश्किल हो जाएगी

कल्पना : वो क्यों होगी भला

मोहित : क्यूंकि इतना सोचोगी तो प्यार कर बैठोगी. वैसे तुम दोनों की जोड़ी भी अछि रहेगी. दोनों स्पोर्ट्स चैंपियन एक पहलवान दूसरा जुडो फाइटर .

कल्पना : यू मजनू कहीं क जाओ अपनी सम्भालो जा कर मुझे नहीं होता कुछ भी. ी लव स्पोर्ट्स ओनली .

मोहित : ओनली स्पोर्ट्स या स्पोर्ट्समैन

कल्पना : लगता है तुम मेरे हाथों से पीटना चाहते हो.

‘ क्या हुआ इस बेचारे को क्यों पीटने वाली हो तुम ‘

मीनल ये कहते हुए हमारे पास आ गयी और उसके साथ राधा और नेहा दीदी भी थी.

कल्पना : संभल कर रखो अपने इस मजनू को . बिना बात ये बातें बनता रहता है.

मीनल : क्यों क्या हुआ ? क्या किया है इसने?

कल्पना : ये तेरा मजनू मेरी और अमित की जोड़ी बना रहा है. बोल रहा था क तुम दोनों स्पोर्ट्स में हो तो दोनों की जोड़ी ठीक रहेगी.

मीनल : वैसे आईडिया बुरा नहीं है . दोनों hi सिंगल हो तो ये इसने ठीक hi कहा

कल्पना : तू भी शुरू हो गयी इसके साथ

राधा : कल्पना तुम बिलकुल भी तरस मत खाना मैं तुम्हारे साथ हूँ.

कल्पना मीनल और मोहित तो मज़ाक में बात कर रहे थे मगर राधा क इम्प्रैशन देख कर लग रहा था क उसे गुस्सा आ गया था इस बात पर गिर भी वो छुपाने की कोशिश कर रही थी.

नेहा दीदी : वैसे इतनी भी गलत बात नहीं कही है मोहित ने. कल्पना भी देखने में अछि है और नेचर भी कितना ाचा है. अगर दोनों एक दूसरे को पसंद करते हो तो मुझे कोई ऐतराज़ नहीं.

राधा : कॉलेज में पड़ने आते हैं या ये सब करने ? आप रोकने की बजाये खुद इसे बढ़ावा दे रही हैं.

मीनल : कॉमन राधा , अमित इतना हैंडसम है यार काम से काम एक गफ तो होनी hi चाहिए न इसकी और फिर अपनी कल्पना भी तो सिंगल है.

अमित : न भाई मुझे अपने हाथ पाऊँ नहीं तुड़वाने इस लेडी डॉन से.

कल्पना : गुस्सा दिखते हुए ) मैं क्या इतनी बुरी हूँ? ठीक है जाओ मैं तुमसे बात नहीं करती .

मोहित : मैंने कहा था न कल्पना अमित को पसंद करती है.

राधा / कल्पना : मोहित

राधा और कल्पना दोनों ने गुस्सा दिखते हुए मोहित को देखा तो उसने फ़ौरन अपने कान पकड़ लिए . कुछ देर और बातों क बाद हम वापिस घर की तरफ निकल पड़े. कल हम लोगों का टेस्ट नहीं था तो राधा और नेहा दीदी क कॉलेज आने क बारे में मुझे टेंशन थी जिसे कल्पना ने hi हल कर दिया ये कह कर क वो दोनों को ऐसे पिक और ड्राप कर लेगी. कल्पना सच में दिल की बहुत अछि थी. खैर हम हस्ते खेलते ऐसे hi घर आ गए. टेस्ट ख़तम हो जाने से ऐसा लग रहा था जैसे बहुत बड़ा बोझ दिल से उतर गया हो. खाना खा कर मैं चैन की नींद सोया. आज बहुत दिनों बाद सुकून महसूस हो रहा था . मंडे से लगातार टेस्ट देने में दिमाग ख़राब हो रहा था पद पद क.

शाम को आंटी ने hi मुझे जगाया और फिर चाय पिने क बाद मैं स्टेडियम चला गया . आज मैं टेंशन फ्री और रिलैक्स महसूस कर रहा था . मगर मोंटी क बारे में मैं ढील नहीं छोड़ना चाहता था. नीरज की कही हुई बातें मेरे दिमाग में थी. कुछ सोचते हुए मैंने शिवानी को फ़ोन लगा दिया .

शिवानी : आज कैसे यद् आ गयी जनाब ? आप तो भूल hi गए थे मुझे.

अमित : तुम्हे कोई भूल सकता है भला? तुम तो खुद hi मुझसे मिल नहीं रही .

शिवानी : वह वह ! एक तो जनाब का हुकम मनो और ऊपर से बातें भी सुनो. मैं तो शीना क साथ रहती हूँ ज्यादा वक़्त क कुछ पता चले आखिर क्या इरादा है मोंटी का. और तुम ताने दे रहे हो.

अमित: अरे यार मज़ाक कर रहा था. वैसे कुछ बात हुई इस बारे में?

शिवानी : नहीं , मुझे लगता है क अभी शायद ये ऐसा कुछ नहीं करने वाले वर्ण कोई न कोई बात तो ज़रूर होती .

अमित : हम्म तो फिर मुझसे कब मिलने आपगी?

शिवानी : तुम हुकम करो मैं अभी आ जाउंगी.

अमित : नहीं , जब तुम्हे ठीक लगे तुम मुझे बता देना.

शिवानी : मैं तो कब से मिलना छह रही हूँ. उस दिन क बाद दोबारा टाइम hi नहीं मिला. पता भी है कितना यद् करती हूँ मैं तुम्हे और एक तुम हो क यद् भी नहीं करते .

अमित : ऐसा बिलकुल भी नहीं है. तुम मेरी बहुत अछि दोस्त हो . तुम्हारी जगह स्पेशल है.

शिवानी : पता है मुझे कितनी स्पेशल हूँ , एक बार भी खुद से फ़ोन या मैसेज नहीं करते.

अमित: वो तो इस लिए नहीं करता क कहीं तुम शीना क आसपास हो और मेरा फ़ोन आ जाये तो कहीं तुम पंगे न फास जाओ .

शिवानी : बात तो तुम्हारी सही है मगर , चलो कोई बात नहीं . मैं तुमसे मिलना चाहती हूँ . जैसे hi मौका मिला मैं फ़ोन करुँगी , तुम आगे न?

अमित : तुम बुलाओ और मैं न आऊं ? ऐसा भला hi सकता है ?

शिवानी : ठीक है तो जल्दी मिलते हैं.

अमित : ज़रूर , ाचा अब मुझे जाना है फिर बात होगी .

शिवानी : ok bye

अमित : bye

उसके बाद मैंने अगला फ़ोन अपने दूसरे खबरि को किया .

अमित : hello कैसी हो मैडम ?

शालू : तो आ गयी जनाब हमारी यद् ? वैसे आज खूब हंसी मज़ाक कर रहे थे. क्या बात थी?

अमित : तो तुम देख रही थी.

शालू : तुमने मिलने को मन किया है पर दूर से तो देख सकती हूँ न.

अमित : चिंता मत करो जल्दी hi तुम भी हम सब क साथ रहा करोगी

शालू : क्या सच में ऐसा होगा?

अमित : बहुत जल्द होगा

शालू : अगर ऐसा हो गया तो मुझे नहीं पता मैं क्या करुँगी , कहीं ख़ुशी से मर hi न जणू.

अमित : ये मरने की बात कहाँ से आ गयी ? मुर्दा शालू मेरे किस काम की? मुझे तो ज़िंदा शालू चाहिए , मुझे हस्ती खेलती हुई दोस्त चाहिए न की रोने धोने वाली.

शालू : तुम जैसी कहोगे वैसी शालू तुम्हे मिलेगी. बल्कि अब से मेरी ज़िन्दगी तुम्हारी कर्ज़दार है. मैं ये एहसान कभी चूका नहीं पाऊँगी

अमित : दोस्तों में कभी एहसान नहीं होते . वैसे भी अभी काम पूरा कहाँ हुआ है. ाचा मैंने तुम्हे एक काम दिया था उसका क्या बना ?

शालू : हाँ मैं भी तुम्हे फ़ोन करने hi वाली थी . मोंटी क पास मैंने 2-3 बार बॉयज कॉलेज वाले लड़कों को देखा है और तुम्हारा नाम लेते हुए भी. वो ज़रूर तुम्हारे खिलाफ कुछ करने वाले हैं. तुम संभल कर रहना वो लोग लड़ाई झगड़ा कर सकते हैं.

अमित : don’t वोर्री मैं उनके लिए तैयार हूँ. तुम बस ये बताओ क वो मेरी कौसिन्स को तो परेशां नहीं करने वाले न?

शालू : ऐसा कुछ तो मैंने नहीं सुना.

अमित: अछि बात है, मगर तुम नज़र रखना अगर कुछ भी पता चले तो बताना

शालू : ठीक है मगर मुझ तुम्हारी फ़िक्र है तुम भी अपना ख्याल रखना. वैसे क्या तुम मुझे कॉलेज क बहार भी नहीं मिल सकते ?

अमित: ऐसी बात नहीं है, मैं बस अब तुमसे उसी दिन मिलूंगा जिस दिन मैं तुम्हे मोंटी से आज़ाद कर दूंगा.

शालू : भगवन करे ऐसा जल्दी हो , तुम नहीं जानते मैं तुमसे मिलने को कितना तरसती हूँ. तुम hi सच्चे दोस्त हो मेरी ज़िन्दगी में.

अमित : ट्रस्ट में ऐसा जल्दी होगा. अब मैं रखता हूँ मुझे कहीं जाना है.

शालू : ठीक है bye

इसके बाद मैंने फ़ोन काट दिया और मंजू म क घर पहुँच गया. जब से टेस्ट शुरू हुए थे वो भी बिजी हो गयी थी. घर पर बस टेस्ट चेक करने बैठी रहती थी या मेरी मदद कर देती . आज भी मंजू म घर क कपड़ों में बैठी टेस्ट चेक कर रही थी. मैं आज फ्री हो गया था तो मेरी नज़र अब मम पर पड़ी. वो बेचारी मुझसे प्यार करती थी और मैंने एक hi बार उन्हें अपना प्यार दिया था जबकि वो और चाहती थी. मुझे आज उन्हें ऐसे बिजी देख कर विचार आने लगा क क्यों न उन्हें भी थोड़ा स्ट्रेस रिलीफ दिया जाये .

मंजू म सोफे पर पाऊँ समेत कर बैठी अपनी hi धुन में मगन टेस्ट चेक कर रही थी. उन्होंने हे ट्रॉउज़र और शर्ट पहना हुआ था जो आम तौर पर घर में लड़कियां फ्री रहने की हालत में पहनती हैं शायद ये ज्यादा रिलैक्स लगता होगा. एक पतली डंडी वाला चश्मा उन्होंने लगाया हुआ था जो वो अपने रीडिंग टाइम में hi लगाती थी. ये उनकी पर्सनालिटी पर सूट करता था. मैं मंजू म की बगल में आ कर बैठ गया मगर उन्होंने सिंपल hello गए क इलावा खास ध्यान नहीं दिया. मैं खुद hi उनके पास से उठा और किचन में जा कर कॉफ़ी बना लाया मगर मम अभी भी अपने काम में बिजी थी. मैंने कॉफ़ी को टेबल पर रखा और अंसवेरशीट्स उनके हाथ से पकड़ कर एक साइड में रख दी.

मंजू म : क्या कर रहे बाबा , मुझे टेस्ट चेक करने हैं .

अमित: बस बहुत हो गया काम , पहले कॉफ़ी पियो और अभी थोड़ा रेस्ट करना उसके बाद जो मर्ज़ी करना. ऐसे लगातार काम करने से आपकी सेहत ख़राब हो जाएगी.

मैंने बात करते हुए उनका चश्मा उतर कर साइड में रख दिया.

मंजू म : तुम्हारे टेस्ट ख़तम हो गए हैं न इसी लिए ऐसा कह रहे हो. वर्ण इतने दिन तुम भी किताबों में hi गम थे.

अमित: हम्म मंटा हूँ पर अब मैं बहार आ गया हूँ न किताबों से तो आपको भी बहार आना होगा इन मार्क्स शीट्स से. वैसे आप आज बहुत क्यूट लग रही हो.

मंजू म : बलुशिंग ) ऐसा कुछ नहीं है. मैं रोज़ hi ऐसी होती हूँ . लगता है आज तुम अलग मूड में हो जो मुझ पर नज़र पड़ी है तुम्हारी.

अमित : ये भी सही है. आज मैं अचे मूड में हूँ और सोच रहा हूँ क आज कुछ कर hi दूँ.

मंजू म : क्या ?

मैंने कोई जवाब देने की बजाये अपने होंठ मंजू म क होंठो पर रख दिए और उनके नाज़ुक कोमल होंठों का मधु रास चुराने लगा. मंजू म ने भी बिना किसी रोक टोक क मेरे होंठों को चूसकर पूरा साथ दिया . इतने दिनों बाद आज मैं मंजू म क इतना करीब था और उनके होंठो को चूमते हुए मैं एक्ससिटेड होने लगा. हम दोनों की किश तब टूटी जब हमारी साँसे उखाड़ने लगी .

अमित : उफ्फ्फफ्फ्फ़ .. मज़ा आ गया . आप बहुत मीठी हो. अब तो ये कॉफ़ी भी फीकी लगेगी.

मंजू म मेरी बात सुन कर शर्मा गयी . सांस फूलने से उनका भी सीना ऊपर निचे हो रहा था. और शर्म से गाल लाल हो गए थे.

मंजू म: अब कॉफ़ी पिलो वर्ण वो ठंडी हो जाएगी.

अमित : तो क्या हुआ कॉफ़ी ठंडी हो गयी तो? आप हो न मेरे पास कॉफ़ी से भी हॉट.

मंजू म फिर से शर्म से लाल होने लगी. कॉफ़ी पिटे hi मम कप उठा कर किचन में गयी तो मैं भी उनके पीछे पीछे चला गया. वो अभी कप रख hi रही थी क मैंने उन्हें पीछे से अपनी बाँहों में भर लिया .

मंजू म : धीमी आवाज़ में ) ये क्या कर रहे हो?

अमित : कुछ नहीं , आपको प्यार कर रहा हूँ . आपको कोई ऐतराज़ है क्या?

मंजू म : मुझे टेस्ट चेक करने हैं .

मैंने मंजू म की गर्दन पर अपने होंठ रख कर उन्हें किश किया तो उनकी बॉडी में सिहरन सी हुई .

मंजू म: आह्ह्ह्ह कक्कक्कक्स मत करो वर्ण मैं खुद को रोक नहीं पाऊँगी

अमित : रुकना भी कौन छठा है.

मैंने अपने हाथ मम क पेट पर कास लिए और और उनकी गर्दन कण और कन्धों पर किश करने लगा. मंजू म मदहोश होने लगी और उनकी साँसे तेज़ चलने लगी.

मंजू म : उफ्फफ्फ्फ़ कक्कक्स उम्म्म मुझे क्यों तड़पते हो इतना. कक्कक्स एक hi बार मुझे प्यार करने क बाद तुमने दोबारा कुछ किया क्यों नहीं . मैं कितना तड़पती हूँ मेरे दिल से पूछो

अमित : मुझे पता है आप कितना तड़पती हैं . मगर देर बाद करने में मज़ा भी तो उतना hi अत है न. आज आपकी साडी तड़प ख़त्म कर दूंगा मैं .

मम पलट कर मेरे गले लग गयी और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर किश करने लगी. मैंने भी उनका साथ देते हुए अपने हाथ उनके हिप्स पर रखे और उनकी गांड को मसलते हुए मैंने ऊपर उठा लिया . मम ने फ़ौरन मेरी कमर पर अपनी टंगे लपेट ली और मेरी गॉड में चढ़ गयी. मैं उन्हें किश करता हुआ ऐसे hi गॉड में लिए उनके बीएड रूम में आ गया . मेरे हाथ उनके नरम कूल्हों पर थे जिन्हे मसलने में बड़ा hi मज़ा आ रहा था. थोड़ी देर में hi मेरा लैंड खड़ा हो चूका था और लोअर क बीच में से hi मम की छूट पर ठोकर मर रहा था.

मंजू म : मेक लव तो में , ी लव यू अमित . प्लीज मुझे हमेशा क लिए अपने साथ रख लो न. आअह्ह्ह ककक उम्म्म्म किस्स्स में यस उम्मम्मम मुआअह्ह्ह

मैंने मम को दीवार क साथ लगाकर किश करने लगा और उनके नरम रुई क गोले जैसे स्तनों को मसलने लगा. मम भी मेरे बालों और पीठ पर हाथ चला रही थी .

अमित : मैं तो आपके पास hi हूँ, मैं आपको कभी खुद से दूर नहीं करूँगा. ी लव यू 2

हम दोनों की धड़कने तेज़ चल रही थी और सांस बीच बीच में उखाड़ने लग जाती किश करते हुए . मगर दोनों में से कोई भी रुकने को तैयार नहीं था. मम ने मेरी T-shirt को उतरना चाहा तो मैंने भी उनका साथ दिया और उन्होंने मेरी T-shirt उतर दी. मेरी T-shirt उतारते hi मैंने उन्हें बीएड पर लिटाया और उनकी कमीज क बटन खोल कर उसे उतर दिया मम ने खुद hi अपने तन से कमीज को अलग किया . अब मम क स्तनों पर एक काली ब्रा थी और नीचे लोअर. मैंने उनके पाऊँ पकड़ कर ऊपर उठा दिए तो उनके गोर गोर पाऊँ मेरे सामने आ गए जिनमे मेरी पहनाई हुई पायल आज भी थी. मैंने उनके पाऊँ और पायल को चूमा

अमित : ये पायल आपने उतरी नहीं ?

मंजू म : कैसे उतर देती ? इतने प्यार से तुमने पहनाई थी. मैंने इसे कभी भी उतर नहीं सकती.

अमित : मुझे आपके सुन्दर पाऊँ में ये पायल बहुत hi प्यारी लगती है .

मंजू म : जो जो तुम्हे पसंद है मैं वो सब करुँगी. तुम जैसे चाहो वैसे मैं बन कर रहूंगी.

अमित : आप बस खुश रहा करो मुझे और कुछ नहीं चाहिए.

मंजू म : तुम कितने अचे हो मेरा इतना ख्याल रखते हो. मैं भी तुम्हारा पूरा ख्याल रखूंगी

मैंने मंजू म का ट्रॉउज़र पकड़ कर उतर दिया , मम ने कमर उठा कर मेरा साथ दिया. अब मम क जिस्म पर ब्रा और पेंटी थी. मैं उनके पाऊँ से किश करना शुरू हुआ और धीरे धीरे उनकी जांघों तक आ गया. मंजू म की जांघें थिरकने लगी. मुझे उनके जांघों को किश करने में मज़ा आ रहा था. किश करते हुए मैं जांघों की जड़ों तक आ पहुंचा और मम की पेंटी को पकड़ कर निकल दिया . मम की छूट क पास एक भी बल नहीं था . उनकी गोरी चिकनी गुलाबी छूट पानी की बूंदे बहा रही थी. मैंने बिना देर किये अपने होंठ छूट से लगा दिए और उन्हें किश करने लगा

मंजू म : आआआह्ह्ह्ह वक्क्क्क उम्मम्मम्म तुम मुझे पागल कर डोज. आआअह्ह्ह्ह माआ कक्ककक्कक्स उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़

मैंने छूट को चूमता हुआ अपनी जीभ से उसे कुरेद रहा था और मम मस्ती मेरा सर अपनी छूट पर दबा रही थी. मम ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पायी और 5 मिनट्स से भी पहले उनकी छूट ने पानी छोड़ दिया. मम का सर जिस्म पसीने में भीग गया और कम्पनी लगा. साँसे ऐसे चढ़ गयी जैसे भाग कर आयी हो कहीं से. मैं उनका पानी निकलने क बाद ऊपर उठा और अपना ट्रॉउज़र अंडरवियर उतर कर मम की टांगों क बीच में आया तो उन्होंने मुझे रोक दिया .

मंजू म : रुको.

अमित : क्या हुआ?

मंजू म : सारा कुछ तुम hi करोगे क्या? मैं भी तुम्हे ऐसे hi प्यार करना चाहती हूँ.

मैं समझ गया मम किस बारे में बात कर रही हैं. मगर वो ये सब कर पाएंगी ये मुझे नहीं लगा.

अमित : अरे यू सूरे ? आप ने कभी किया है पहले?

मंजू म : नहीं , मगर आज तरय करुँगी. जब तुम मेरे साथ वो सब कर सकते हो तो मैं क्यों नहीं? मैं भी तुम्हे उतना मज़ा देना चाहती हूँ जितना तुम मुझे देते हो . आखिर दोनों का प्यार एक बराबर होना चाहिए न .

मैंने मम क बगल में लेट गया और मम उठ कर बैठ गयी . मम ने मेरे खड़े हुए लैंड को देखा तो वो हैरानी से देखने लगी.

मंजू म : ये तो बहुत बड़ा है , ये कैसे गया था मेरे अंदर? तभी मेरी जान निकल गयी थी उस दिन. ये तो किसी भी एंगल से नार्मल नहीं लगता.

अमित : जैसा भी है एहि है मेरे पास और आप तो ले भी चुकी हैं. अगर दर लग रहा है तो रहने दीजिये

मंजू म : कैसे रहने दूँ? ये अब मेरा है . इसे तो मैं प्यार करुँगी .

इतना कह कर मंजू म ने मेरा झूलता हुआ लैंड दोनों हाथों में पकड़ लिया और उसे दबा दबा कर चेक करने लगी. फिर उन्होंने झुक कर लैंड क सुपडे पर अपने होंठ रख दिए और एक किश किया. मेरी रिड की हड्डी तक मुझे सिहरन महसूस हुई और मेरे मुँह से सिसकी निकल गयी .

अमित : आआह्ह्ह्हह कक्कक्स आप ये क्या कर रही हैं.

मंजू म : क्यों ाचा नहीं लगा तुम्हे?

अमित : मैं बता नहीं सकता क कैसा लगा . बड़ा मज़ा आया

मंजू म : तो फिर मज़े लो चुपचाप.

इतना कह कर फिर से मंजू म ने लैंड क सुपडे पर होंठ रखे और सुपडे को मुँह में ले लिया. मेरी तो जान hi निकल गयी. मंजू म कभी ऐसा करेंगी मैंने सोचा तक नहीं था. वो इतनी प्यारी और सिंपल थी क ऐसा कुछ मैं सोच भी नहीं सकता था शायद इसी लिए मुझे इतनी एक्ससिटेमेंट हो रही थी. मम लैंड क सुपडे को बार बार मुँह में लेती और बहार निकल देती . मुझे इतना मज़ा आ रहा था क खुद बा खुद मेरी कमर उठने लगी और मेरे हाथ उनके सर पर पहुँच गए. मगर मैंने उन्हें दबाया नहीं. मम ने एक हाथ से मेरा लैंड पकड़ा हुआ था और दूसरे से अंडकोषों को सेहला रही थी .

अमित : उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ये क्या कर रही हैं आप ? मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा

मंजू म अपनी धुन में लगी हुई थी और अब तो सुपडे से भी 2 इंच आगे तक वो मेरा लैंड मुँह में ले रही थी . मम ये पहली बार कर रही थी इस लिए उन्हें अचे से करना नहीं आ रहा था मगर कहते हैं न कोई काम दिल से करो तो खुद hi ाचा हो जाता है. इस लिए मुझे भी मज़ा आ रहा था मगर अब मम थक गयी थी.

मंजू म : ुगफ्फफ्फ मैं तो थक गयी. कितना टाइम लगता है तुम्हे?

अमित : अभी बताता हूँ.

मैंने मम को पलट दिया और खुद उनके ऊपर चढ़ गया. मम ने टंगे फैला के मुझे जगह दी और मैंने लैंड को छूट पर सेट कर क धक्का मारा . सुपडे से 2 इंच आगे तक लैंड छूट में चला गया .

मंजू म : आअह्हह्ह्ह्ह कक्कक्क्स धीरे , दर्द होता है . बहुत बड़ा है ये.

अमित : चिंता मत कीजिये आपको ज्यादा दर्द नहीं होगा. पहली बार में hi दर्द होता है अब तो ये चला hi जायेगा आराम से.

मैंने लैंड को थोड़ा सा बहार खिंचा और मम क बूब्स दबाते हुए एक और धक्का मारा. इस बार लैंड आधे से ज्यादा अंदर चला गया. मम ने होंठ भींच लिए जैसे उन्हें दर्द हो रहा हो. आज दूसरी बार hi तो वो मेरा लैंड ले रही थी इस लिए दर्द लाज़मी था. मैंने झुक कर उनके बूब्स मसलने शुरू कर दिए और एक को मुँह में ले कर ुबके निप्पल को होंठों में दबा कर पिने लगा. मम क मुँह से सिसकी निकलने लगी तो मैंने धक्के मरने शुरू कर दिए.

मंजू म : आआह्ह्ह्ह उम्म्म्म ऐसे hi उम्म्म्म मज़ा आ रहा है. कक्कक्क्स उफ्फफ्फ्फ़ और करो तेज़ करो मज़ा आ रहा है. तुम कितने अचे हो. मैंने साडी ज़िन्दगी अकेले गुज़र दी काश तुम पहले मुझे मिले होते .

अमित : अब मिल गया हूँ न अब कभी आप अकेले नहीं रहेंगी .

मैं अपनी कमर तेज़ तेज़ चलने लगा और मम ने मेरी पीठ पर बहन कास कर मुझे अपने साथ लगा लिया . उनके उरोज मेरी छाती क नीचे डाब गए. मम ने अपनी टंगे मेरी कमर पर लपेट कर मुझे कास लिया. मैंने धक्के मरते हुए आखिरी हिस्सा भी पूरा अंदर कर दिया मगर मम तो मज़े में खोयी थी शायद उन्हें ज्यादा दर्द नहीं हुआ था इस बार. मम भी अपनी कमर उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी.

मंजू म : आअह्ह्ह्ह आआह्ह और तेज़ करो उम्म्म आह्ह्ह्ह कक्कक्क्स और तेज़ मुझे कुछ हो रहा है ी ऍम गोइंग तो छुम ी ऍम क्युम्मिंग ी ऍम क्युम्मिंग .

मंजू म का जिस्म झटके लेने लगा और मुझे अपने लैंड पर उनका गरम पानी महसूस होने लगा. मैंने धक्के मरने कुछ देर क लिए रोक लिए ताकि वो इस पल का पूरा मज़ा ले सकें.

अमित : कैसा लगा?

मंजू म : मंद ब्लोइंग. मगर तुम्हारा अभी तक हुआ नहीं. चलो अब मैं करती हूँ.

मम ने मुझे पलट दिया और खुद मेरे ऊपर आ गयी . मेरी कमर क दोनों तरफ घुटने रख कर उन्होंने एक हाथ से लैंड पकड़ा और छूट पर सेट कर क धीरे धीरे नीचे बैठ गयी .

मंजू म : उफ्फ्फ्फ़ कितना बड़ा है ये. जान निकल जाती है अंदर लेने में.

अमित : मज़ा भी तो देता है न.

मंजू म : बहुत , जितना बड़ा है उतना hi ज्यादा दमदार भी है बिलकुल तुम्हारी तरह . उफ्फ्फफ्फ्फ़ न करो बाबा मैं खुद कर रही हूँ न

मैंने कमर उठा कर धक्का मारा तो मम ने मुझे ऐसा करने से मन किया. पूरा लैंड लेने क बाद मम अब ऊपर नीचे होने लगी. धीरे धीरे उनके जिस्म में फिर से गर्मी बाद गयी और वो तेज़ी से ऊपर निचे होने लगी . मगर वो उन चीज़ों में इनएक्सपेरिएंस्ड थी तो जल्दी hi थक गयी.

मंजू म : आअह्ह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ अब तुम करो मैं थक गयी हूँ .

मैंने जल्दी से उन्हें अपने ऊपर से उतरा और घुटनो पर झुका दिया . पीछे से मैंने घुटनो पर होते हुए छूट पर लैंड सेट किया और एक ज़ोरदार धक्का मर दिया. एक hi बार में पूरा लैंड छूट में उतर गया . इस पोजीशन में पहली बार मैंने उनके अंदर लैंड घुसाया था शायद उन्हें इस पोजीशन में दर्द हुआ और उनके मुँह से हलकी चीख निकल गयी .

मंजू म : आआअह्ह्ह्हह मर गयी माआआ धीरे , एक hi बार में क्यों घुसा देते हो आअह्ह्ह्ह मार डोज क्या???? कक्कक्कक्स आअह्ह्ह्ह

अमित : सॉरी वो गलती से हो गया

मैं वहीँ रुक गया और उनकी पीठ पर हाथ फिरने लगा.

मंजू म : करो न अब रुक क्यों गए हो. जल्दी करो.

मैंने उनकी बात सुनते hi अपनी कमर चलनी शुरू कर दी और धक्के मरने लगा. मंजू म फिर से जोश में आ गयी और खुद hi अपनी कमर पीछे को धकेलने लगी. थप थप थप की आवाज़ कमरे में गूंजने लगी . मम क बेहद सुन्दर गोल आकर क चूतड़ मेरे धक्कों से थिरक रहे थे जो मुझे बहुत अचे लग रहे थे मैंने उनके दोनों चूतड़ों को हाथ में थाम कर मसलना शुरू कर दिया. दोनों चूतड़ों क बीच मम की गांड का छोटा सा गुलाबी सुराख़ जो उनकी गोरी रंगत की वजह से लाल गुलाबी नज़र आ रहा था मुझे आकर्षित करने लगा. मैंने धक्के मरते हुए अपनी एक उंगली थूक लगाकर उस छोटे से सुराख़ में डालने की कोशिश की तो मम एक डैम से रुक गयी और अपनी गांड टाइट कर ली

मंजू म : ये क्या कर रहे हो ? प्लीज वहां मत करो कुछ भी , अजीब सा लगता है.

अमित : मैं क्या करूँ आप आगे पीछे दोनों तरफ से इतनी सुन्दर हैं क मैं खुद को रोक नहीं प् रहा.

मंजू म : कहीं तुम वहां भी करने का तो नहीं सोच रहे ?

अमित : वैसे आप यहाँ से इतनी सुन्दर हैं क मन तो यही कर रहा है

मंजू म : नहीं वहां नहीं , वहां कौन करता है भला

अमित : आप एक बार करेंगी तो आप को भी मज़ा आएगा . मुझसे तो कण्ट्रोल नहीं हो रहा. प्लीज यहाँ भी करने दीजिये न.

मंजू म : तुम्हारा बहुत बड़ा है वहां कैसे जायेगा ये ?

अमित : चला जायेगा बस आप थोड़ी सी हिम्मत रखेंगी तो

मंजू म : प्लीज वहां रहने दो मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगी .

अमित : क्या मेरे लिए इतना भी नहीं करेंगी ?

मंजू म : तुम्हारे लिए तो मैं जान भी दे सकती हूँ. ठीक है करलो अगर इतना hi दिल है तुम्हारा तो

मम मेरे लिए कहने पर मन तो गयी पर वो दिल से तैयार नहीं थी और मैं ऐसे नहीं करना चाहता था.

अमित : नहीं ऐसे नहीं. जब आप इसके लिए तैयार होंगी तब hi करेंगे

इतना कह कर मैंने तेज़ धक् मरने शुरू कर दिए . मम फिर से झड़ने क लिए तैयार थी और अब मैं भी अपना पानी निकालना चाहता था . मैंने पूरा ज़ोर दिखाना शुरू कर दिया और मम और ज्यादा बर्दाश्त न करती हुई झड़ने लगी.

मंजू म : आआह्ह्ह आआह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह मैं गयी मैं गयी आअह्ह्ह और तेज़ करो मायआ आआअह्ह्ह्ह

मैं भी होने hi वाला था तो मैंने भी जल्दी जल्दी धक्के मर कर लैंड छूट से बहार निकल कर मम की कमर क ऊपर अपना पानी निकालना शुरू कर दिया. मम बिस्टेर पर औंधें मुँह गिर कर अपनी साँसे ठीक करने लगी और मैं भी उनकी बगल में लेट गया . हम दोनों पसीने में नाहा गए थे . दोनों hi सुकून से ऑंखें बंद किये कुछ देर पड़े रहे .

मंजू म : अमित क्या हम कभी एक साथ नहीं रह सकते ? मैं जानती हूँ ये आसान तो नहीं पर मुझे अब अकेले रहना ाचा नहीं लगता. मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ.

अमित : थोड़ा सबर रखिये , मैं तो आपके पास hi हूँ मगर अभी एक साथ रहना मुश्किल है. आप जानती हैं न मेरी फॅमिली इसी शहर में है और फिर अंकल आंटी भी मुझे घर से कहीं और रहने नहीं देंगे.

मंजू म : जानती हूँ पर इस दिल को कैसे समझों जो हर वक़्त तुम्हारी बाँहों में रहने को मचलता रहता है.

अमित : आप ऐसा मत सोचा कीजिये . मैं तो आपके पास hi हूँ रोज़ तो मिलते हैं हम.

मंजू म : रोज़ तो मिलते हो पर देखो न आज कितने दिनों बाद तुम मुझे प्यार कर रहे हो.

अमित : तो आप ऐसा प्यार रोज़ चाहती हैं?

मंजू म : मेरा कहने का वो मतलब नहीं था. रोज़ तो नहीं पर कभी कभी तो कर hi सकते हैं न . हाँ मैं तुम्हारी बाँहों में हर रत सोना चाहती हूँ. जानते हो उस दिन तुम्हारी बाँहों में सोने क बाद अब मुझे अकेले में अचे से नींद भी नहीं अति

अमित : हम्म्म तो ये बात है. फिर तो आपको मुश्किल होगी. वैसे अगर मैं ऐसे hi आपके पास रहूँगा तो सोने भी नहीं दूंगा. और आपको कॉलेज भी जाना होता है .

मंजू म : मैं सब कुछ छोड़ दूंगी अगर तुम कहो तो

अमित: मैंने कहा न अभी हम साथ नहीं रह पाएंगे . और आप को मेरे लिए कुछ छोड़ने की ज़रूरत नहीं है .

मंजू म : मुझे बस तुम्हारा प्यार चाहिए और किसी चीज़ की मुझे ज़रूरत है है. काश क मैं हमेशा तुम्हारी बाँहों में रह सकूँ

हम दोनों ऐसे hi काफी देर तक एक दूसरे की बाँहों में लेते रहे और फिर आंटी क फ़ोन आने क बाद मैं मंजू म से विदा ले कर घर आ गया. खाना खाने क बाद मैं अपने कमरे में आराम कर रहा था क करुणा दीदी का फ़ोन आने लगा . मुझे फ़ोन देखते hi ये आ गया क दीदी मुझसे नाराज़ होंगी मैं इतने दिनों से उनसे मिला भी नहीं था और फ़ोन पर भी बात नहीं हुई थी.

अमित : hello दीदी कैसी हैं आप?

करुणा दीदी : बात मत कर मुझसे , मैं नाराज़ हूँ तुमसे. एक बार भी फ़ोन किया तुमने मुझे हर बार बहाना बना देते हो .

अमित : दीदी आप तो जानती होंगी क टेस्ट हो रहे थे कॉलेज में .

करुणा दीदी : फ़ोन तो कर hi सकते थे एक. बताया दीदी ने टेस्ट हो रहे हैं इसी लिए मैंने तुम्हे पहले फ़ोन नहीं किया . अब कल तुम्हारा कोई टेस्ट नहीं है मुझे पता है इस लिए अब कोई बहाना नहीं चलेगा . मैं कल कॉलेज क बहार तुम्हारा वेट करुँगी . अब अगर कोई बहाना बनाया तो फिर कभी मुझसे बात मत करना.

दीदी ने तो सीधा वार्निंग दे दी थी . वाइस भी मैं 3 बार उनको ताल चूका था अब तो उनकी बात माननी होगी. क्या किस्मत लई थी अपनी hi बहने मुझे उनके साथ ये सब करने को कह रही थी . खैर अब और इंकार करने का तो सवाल hi नहीं था. मैंने भी सोच लिया क कल तो वैसे भी फ्री हूँ तो चल पड़ता हूँ.

अमित : ठीक है मैं कल आ जाऊंगा .

करुणा दीदी : सच !! मैं कल कॉलेज क बहार hi मिलूंगी तुम्हे 9 बजे सुबह. तुम टाइम पर आ जाना तभी टाइम पर वापिस आ पाएंगे. मैं नैना दीदी को बोल दूंगी .

करुणा दीदी की बातों से hi पता चल रहा था क वो कितनी खुश हैं . पता नहीं क्या भूत सवार था उन पर भी जो इतनी उतावली हो रही थी.

अमित : हाँ मैं टाइम पर आ जाऊंगा अभी आप आराम करो .

करुणा दीदी : ी लव यू मुहाः गुड नाईट. तुम आराम करो और मुझे भी कल क लिए तयारी करनी है bye .

दीदी ने फ़ोन काट दिया. मैं समझ गया क वो क्या तयारी करने की बात कर रही हैं. मैं फ़ोन साइड में रख कर आराम करने लगा क 5 मिनट बाद hi नैना दीदी का फ़ोन आ गया.

नैना दीदी : तो कल करुणा को टाइम दिया है जनाब ने. और मेरा क्या ? एक बार कर क भूल गए ? पता है कितना तड़प रही हूँ मैं उस दिन क बाद से

अमित : तो आपको बता दिया करुणा दीदी ने. अब आप hi बताइये मैं क्या करूँ? वो कब से पीछे पड़ी हैं अब कितनी देर उनको मन करूँ ? आज hi टेस्ट ख़तम हुए हैं आप को तो पता hi है न सब.

नैना दीदी : वो तो पता है पर मैं क्या करूँ ? क्या मुझे ज़रूरत नहीं है तुम्हारी? ाचा छोडो , कल करुणा क साथ जा रहे हो तो मुझे भी अब बताओ कब मिल रहे हो?

अमित : मैं तो आपके पास hi हूँ. जब कहेंगी मिलने आ जाऊंगा.

नैना दीदी : ऐसे नहीं , मेरा मतलब है क जैसे उस दिन तुमने किया था वैसे.

अमित : वो भी जल्दी hi मिल लेंगे जैसे hi टाइम मिलेगा.

नैना दीदी : बहाने मत बनाओ , मुझे फिर से वो सब करना है. अगर बहार नहीं तो घर hi आ जाओ . अब तो सब हो hi चूका है.

अमित : आप खुद hi देखिये टाइम कहाँ होता है मेरे पास . पर मैं कह रहा हूँ न मैं जल्दी hi मिलूंगा.

नैना दीदी : ठीक है अभी तो करुणा से मिल लो बेचारी कब से तरस रही है मगर जल्दी मुझे से मिलना पड़ेगा वर्ण मैं माँ से शिकायत करुँगी तुम्हारी क तुम मिलते नहीं हो मुझसे.

अमित : मैंने कहाँ न मैं जल्दी hi मिलूंगा आप सबर रखिये .

नैना दीदी : ाचा ठीक है अब रखती हूँ तुम भी आराम करो. ी लव यू मुआअह

अमित : लव यू तू

उसके बाद दीदी ने फ़ोन काट दिया . मैं आराम से सोने की तयारी करने लगा . मेरी आँख जाने कब लगी पर रत में आंटी ने मुझे आ कर जहा दिया.

अमित : क्या हुआ आंटी आप इस वक़्त? सब ठीक तो है न?

आंटी : सब ठीक है , ऐसे क्यों पूछ रहे हो? मैं की पहली बार आयी हूँ?

अमित: नहीं वो बस ऐसे hi पूछा था.

आंटी : मैं और तेरे अंकल कल जा रहे हैं करिश्मा से मिलने . 2-3 दिन लग जायेंगे हमें . मैं वहां रह कर सब देख कर आउंगी अगर वो हमारे साथ वापिस न आयी तो. तेरे अंकल गए थे लेने मगर वो नहीं आयी इस लिए मैं जा रही हूँ . मुझे पता है इन्होने चलने को तो कहा नहीं होगा उससे . इस लिए इस बार मैं खुद जा रही हूँ.

अमित : अछि बात है वो आप से खुल कर बात कर लेंगी . मगर ये तो आप सुबह भी बता सकती थी.

आंटी : मैं ये बताने क लिए नहीं आयी बुद्धू . तुम्हे पता नहीं कितने दिन हो गए तुमने मुझे प्यार नहीं किया. तुम लोगों क टेस्ट थे तो मैंने भी कण्ट्रोल किया मगर आज नहीं. फिर कल से 2-4 दिन तो नहीं मिल पाएंगे न.

मैं शाम को मंजू म क साथ चुदाई कर चूका था और अब आराम करना चाहता था मगर अब आंटी की बात भी माननी ज़रूरी थी इतने दिन से उन्होंने मुझे एक बार भी नहीं कहा था. आंटी इस वक़्त गाउन में थी मैंने उन्हें अपने ऊपर खिंच लिया और थोड़ी देर में hi हमारे कपडे हमारा साथ छोड़ चुके थे. आंटी इतने दिनों से प्यासी थी तो कमांड उन्होंने अपने हाथों में ले ली और खुद hi मेरे ऊपर आ कर उछलने लगी. दो बार आंटी का पानी निकलने क बाद मैंने आंटी को घोड़ी बना लिया और उनकी गांड जो मुझे पसंद थी मैंने उसमे अपना खूंटा गाड़ दिया.

आंटी : आआह्ह्ह्हह्ह माआआ इसी क पीछे क्यों पड़े रहते हो? तुम्हारा इतना बड़ा आगे लेने में पसीने छूट जाते हैं और तुम हो क पीछे भी घुसा देते हो अअअअअअअ कक्ककक्कक्स

अमित : क्या करूँ रमा तुम्हारी गांड देखता हूँ तो खुद को रोक नहीं पता

आंटी : अब रुक क्यों गए हो ? करो जो करना है मगर आराम से करना कल सफर लम्बा है .

अमित : ठीक है आराम से hi करूँगा.

मैंने आंटी क गोल शेप क कूल्हे पकड़ लिए और तेज़ तेज़ धक्के मरने लगा . रत 2 बजे तक आंटी मेरे पास रही और मैंने तबियत से आगे पीछे दोनों तरफ से उनकी ठुकाई की. आंटी को सफर करना था इसी लिए गांड ज़रा आराम से मरी वर्ण उन से बैठा नहीं जाता. खैर उसके बाद आंटी वापिस चली गयी अपने रूम में और मैं भी सो गया .

अगली सुबह मैं अलार्म की वजह से उठ तो गया मगर नींद पूरी नहीं हुई थी फिर भी मैं रनिंग और एक्सरसाइज क लिए चला गया. आज स्टेडियम में रत को हुई हलकी बूंदा बंदी की वजह से कुछ नमी थी तो मैं रनिंग की बजाये एक्सरसाइज करने लगा. ये मोहित क घर क पास वाली ग्राउंड hi थी जहाँ अक्सर सुबह कुछ लोग एक्सरसाइज वगैरह करने आते थे . मैं सुबह यहीं अत था क्यूंकि ये नज़दीक थी कॉलेज क मुकाबले. मैं एक्सरसाइज कर रहा था तो मेरी नज़र एक औरत पर गयी . जो देखने में तो मंजू म जितनी hi लग रही थी मगर चेहरे पर काफी रोअब था. काले ट्रैक सूट में कानो में हेड फ़ोन लगाए वो रनिंग कर रही थी. नमी क कारन और कोई रनिंग नहीं कर रहा था बाद इक्का दुक्का hi लोग थे . सुबह का ठंडा मौसम था और बदल अभी भी बने हुए थे. मैं आराम से एक्सरसाइज कर रहा था वो मेरे पास से गुज़री तो न चाहते हुए भी मेरी नज़र उस पर चली गयी . कद काठी लम्बी और मजबूत थी काम से काम 5’10” हैघट तो होगी hi रंग भी साफ़ था और देखने फिर थी . ज़रा सा भी कहीं से फैट नज़र नहीं आ रहा था. मेरे पास से वो गुज़र गयी मगर मैं उसे देखता hi रह गया. जब दोबारा पास से गुजरने लगी तो इस बार उसमें भी मुझे देखा. वो रनिंग कर रही थी और मैं पुश यूपीएस . इस लेडी को मैंने पहले कभी नहीं देखा था शायद किसी की मेहमान थी या नयी आयी थी यहाँ पर . तीसरे चक्कर में मेरे से थोड़ा आगे जाते hi वो फिसल गयी शायद उसके पाऊँ में मोच आ गयी जिसकी वजह से वो कड़ी नहीं हो प् रही थी. उसकी कराहने की आवाज़ सुन कर मैं दौड़ कर उसके पास गया .

अमित : क्या हुआ ? आप गिर गयी क्या ? कहाँ चोट लगी है ?

लेडी : देख नहीं रहे क पैन फिसल गया है . लगता है मोच आ गयी है पाऊँ में .

अमित : लाइए मैं देखता हूँ .

मैंने उसका शू उतरा और उसकी जुराब उतरने लगा तो उसने मुझे रोक दिया

लेडी : ये क्या कर रहे हो ?

अमित : देखिये मुझे देखने दीजिये अगर कहीं मोच आ गयी तो मैं अभी ठीक कर देता हूँ . आप बस चुप रहिये .

मैंने उसकी जुराब उतरी और उसका गोरा पाऊँ मेरे हाथ में था. पाऊँ में नेल पोलिश नहीं थी इसका मतलब ये हाउस वाइफ नहीं हो सकती . खैर मैंने उसके पाऊँ को थोड़ा चेक किया और उसे थोड़ा घुमा कर उसकी मोच निकलने की कोशिश की जिससे उसको कुछ दर्द हुआ.

अमित : अब ज़रा खड़े हो क देखिये .

मैंने सहारा देकर उसे खड़ा किया तो उससे खड़ा नहीं हुआ जा रहा था.

अमित : देखिये मोच अब नहीं है शायद गिरने से मास फैट गया होगा थोड़ा . आप इसकी टकोर कर लीजियेगा घर जा कर. वैसे आप आयी कैसे हैं ? कोई है आपके साथ?

लेडी : मैं गाड़ी में आयी हूँ.

अमित: चलिए मैं आपको वहां तक सहारा दे देता हूँ .

लेडी : कोई ज़रूरत नहीं मैं चली जाउंगी.

उसने अपना शू पहना और उठ कर जाने लगी मगर कहाँ चल पति फिर वहीँ कराहती हुई बैठ गयी . ग्राउंड में और कोई था भी नहीं जिसको बुलाती . मुझे तो उसकी बातों से लग रहा था क ये कोई नक् छड़ी घमंडी है . इस लिए मैं उससे दूर hi गया मगर उसकी हालत देख कर मुझे उस पर तरस आ गया. मैंने उसे बिना कुछ कहे एक हाथ उसकी पीठ पर दूसरा उसकी जाँघों क नीचे से दाल कर उसे अपनी गॉड में उठा लिया .

लेडी : हाउ डरे यू ? नीचे उतरो मुझे

अमित : देखिये आप से चला नहीं जायेगा मैं आपको अपनी गाडी तक छोड़ देता हूँ .

लेडी : मैं खुद चली जाउंगी मुझे नीचे उतरो .

मैंने उसकी परवाह नहीं की और उसे पार्किंग की तरफ ले गया वहां पर 2 कार्स कड़ी थी. एक तो वाइट कलर की लम्बी सी कार थी और एक जीप टाइप जिसके साथ एक पुलिस वाला खड़ा था और गाड़ी पर भी पुलिस लिखा था. मैं उस लेडी को वाइट कार क पास ले गया और जैसे उसे ज़मीन पर खड़ा किया उसने खींच कर एक चांटा मेरे मुँह पर दे मारा. उसका हाथ भरी था मेरे मुँह पर ऐसे लगा जैसे उसकी उंगलियां hi छाप गयी हों.

लेडी : खुद को समझता क्या है हाँ ? कोई भी लड़की औरत देखि और लाइन मरना शुरू कर दिया . कहाँ ले जा रहा था मुझे ? सब समझती हूँ मैं. साला देखने में तो शरीफ लगता है और ये हरकतें .

इतने में गाड़ी में बैठा पुलिस वाला हमारे पास भागता हुआ आया.

पुलिस वाला : क्या हुआ मैडम ?

लेडी : डाली पकड़ क इसे गाड़ी में . इस मजनू की औलाद को ठीक करते हैं .

मेरी तो गांड hi फैट गयी ये साला हो क्या रहा है. एक तो मदद करो ऊपर से ये इनाम. और तो और साला ये पुलिस वाला भी उसका साथी निकला . मुझे लगा क मैं तो गया .

अमित: ये आप क्या कह रही हैं ? मैं तो आपकी मदद कर रहा था और आप मुझ पर इल्जाम लगा रही हैं.

लेडी : सब जानती हूँ , बेवक़ूफ़ समझा है क्या मुझे? सब देख रही थी मैं कब से तू मुझे ताड़ रहा था. और अब बहाने से अपनी कार में बिठा कर ले जा रहा था.

अमित : क्या ? मेरी कार ? मैंने सोचा ये आपकी कार है. आपने hi तो कहा था क आप गाडी में आयी हैं .

उस पुलिस वाले ने मुझे पकड़ लिए और अपनी गाडी की तरफ तरफ खींचने लगा मगर मैं अपनी जगह से हिला नहीं तभी एक आदमी जो अंदर ग्राउंड में hi था वो आया और पूछने लगा.

आदमी : क्या हुआ मैडम कोई बात है क्या?

लेडी : कुछ नहीं आप जाओ वे विल हैंडल

वो आदमी उस वाइट कार में बैठ कर चला गया तो वो लेडी ये देखती रह गयी.

लेडी : तो वो कार तुम्हारी नहीं थी.

अमित: मैं तो बाइक पर अत हूँ यहाँ और मेरे पास कोई कार नहीं है . मैं एक स्टूडेंट हूँ मैडम और स्पोर्ट्स में हूँ तो मैं ऐसे घटिया काम नहीं करता . आप पता नहीं क्या क्या इल्जाम लगा रही थी मुझ पर .

लेडी : ठीक है ठीक है. स्टूडेंट हो पड़े पर hi ध्यान दो. लड़कियों औरतों को घूरने से ाचा है अपने काम पर फोकस करो.

पुलिस वाला : इसका क्या करना है मैडम?

लेडी : जाने दो इसे. और अगर दोबारा कभी मैंने तुम्हे किसी लड़की या औरत को घिरते देखा तो अगली बार छोडूंगी नहीं. अब जाओ यहाँ से.



वो दोनों गाड़ी में बैठ कर चले गए मगर मेरा दिमाग ख़राब कर दिया था उस लेडी ने. पता नहीं कौन थी पर बिना वजह से मेरी बंद बजा कर चली गयी. ाचा हुआ वो कार वाला आदमी आ या वर्ण पता नहीं मेरा क्या होता. खैर मैं भी वहां से घर वापिस आ गया .
 
भाई अपडेट शुरू किया है पर टाइम नहीं मिल प् रहा कल रत तक अगर पूरा हुआ तो अपडेट दे दूंगा. गुस्सा नै करना भाई लोग मज़बूरी है. काम ख़तम होने क बजाये बढ़ता जा रहा है.
 
अपडेट 121



घर आने क बाद भी मेरा मूड ख़राब था और उस लेडी की वजह से पर कर भी क्या सकता था. मैंने तो अपनी तरफ से मदद hi की थी मगर शायद वो लेडी कुछ ज्यादा hi नकचढ़ी और घमंडी थी. साथ में पुलिस वाला गार्ड था तो मतलब वो कोई अफसर हो सकती है या उसके हस्बैंड होंगे पुलिस में. खैर आज करुणा दीदी से मिलने जाना था तो मैं जल्दी से तैयार हो गया. नीचे आया तो देखा अंकल आंटी भी तैयार hi थे.

अमित : गुड मॉर्निंग अंकल गुड मॉर्निंग आंटी . आप तो आज जल्दी तैयार हो गए .

अंकल : क्या बताऊँ बीटा हुकुम मन्ना पड़ता है. तुम्हारी आंटी का बस चलता तो रत में hi चल पड़ती मुझे ले क. बेटी से मिलने को इसे कुछ ज्यादा hi जल्दी है.

आंटी : क्यों न हो? खुद तो मिल लेते हो और मैंने साल भर से देखा नहीं है उसे. सफर भी तो लम्बा है टाइम से निकलेंगे तो टाइम पर पहुँच पाएंगे.

अंकल : मोहित नहीं आया अभी तक ? तुम कहाँ जा रहे हो तैयार हो कर. मैंने तो सुना था तुम्हारे टेस्ट ख़तम हो गए हैं.

अमित: वो आज मौसी क यहाँ जाना है एक काम है दीदी को.

अंकल : अछि बात है. तुम कार ले जाना . वैसे अभी तक कार चलनी सीखी या नहीं ?

अमित : जी अंकल थोड़ी बहुत आ गयी है.

अंकल : अरे अभी तक नहीं सीखी तुमने . मोहित से कहा नहीं तुमने?

अमित : जी अंकल वो टाइम hi नहीं मिल पता है न तो इस लिए .

अंकल : तुम्हारे लिए कार बुक की हुई है पता है न तुम्हे. बीटा मैं चाहता हूँ तुम भी कार में चलो. आखिर ये सब तुम्हारा और मोहित का hi तो है. जैसा मोहित है वैसे hi तुम हो मेरे लिए .

‘ बिलकुल सही पापा, ये पता नहीं कब समझेगा’

मोहित बात करता हुआ हमारे पास आ गया.

अंकल : ाचा हुआ तुम आ गए . मैं और तुम्हारी माँ जा रहे हैं तो पीछे से घर का ख्याल रखना और फैक्ट्री में भी चक्कर लगा लेना. मैंने मैनेजर को सब समझा दिया है फिर भी तुम ध्यान रखना अगर कोई भी ज़रूरत पड़े तो मुझे फ़ोन ज़रूर करना.

मोहित : जी पापा मैं ख्याल रखूँगा. वैसे कब तक वापिस आएंगे आप दोनों?

अंकल : बीटा 2 दिन तो लग hi जायेंगे आने जाने में. बाकि तुम्हारी माँ जाने .

ऐसे hi बातें करते हुए हमने नाश्ता किया उसके बाद मैं मौसी क घर जाने का कह कर निकल गया . मोहित भी साथ आना चाहता था मगर मैंने उसे बहाना बना दिया. मैं जल्दी से बाइक पर बैठ कर गर्ल्स कॉलेज की तरफ निकल पड़ा. कॉलेज क पहुंचा तो देखा करुणा दीदी गेट क पास hi कड़ी मेरा इंतज़ार कर रही थी मुझे देखते hi वो मेरे पास चली आयी. करुणा दीदी आज जीन टॉप की बजाये सूट में थी जो मेरे लिए सरप्राइज से काम नहीं था. जैसे भी था वो बहुत खूबसूरत लग रही थी . हाथ में अपना बैग थामे वो तेज़ कदमो से चलती हुई मेरे पास आयी और बाइक क पीछे बैठ गयी.

करुणा दीदी : जल्दी चलो अब खड़े क्यों हो?

करुणा दीदी ने न कोई hello hi की न कोई और बात बस सीधा आ कर बैठ गयी और चलने को कहने लगी . मैंने भी अभी चलना hi बेहतर समझा और बाइक आगे बड़ा दी.

करुणा दीदी : लेट क्यों हो गए? 10 मिनट्स से फैट पर कड़ी तुम्हारा रास्ता देख रही थी मैं. पता है कैसे हर लड़की घर कर देखती जाती है मनो सबको पता हो कहाँ जा रही हूँ मैं. और एक तुम हो क मज़े से आ रहे हो.

अमित: दीदी अब इतना टाइम तो लग hi जाता है ट्रैफिक में .

करुणा दीदी : पहले नहीं निकल सकते थे थोड़ा ? ऊपर से नैना दीदी भी क्लास क लिए चली गयी मुझे अकेला छोड़ कर.

अमित : तो वो भी थी आपके साथ?

करुणा दीदी : और नहीं तो क्या? वो तो साथ हो आने को तैयार थी . मैंने hi मन किया उनको.

अमित : पर आज आप सूट में कैसे ?

करुणा दीदी : एक तो माँ मन करती जीन्स पहनने को ऊपर से दीदी ने बताया था क बाद में दिक्कत होती है जीन्स से.

अमित : बाद में कब ?

करुणा दीदी : बुद्धू इतना भी नहीं समझते ? पहली बार में दर्द होता है न तो टाइट कपड़ों से ज्यादा तकलीफ होती है.

अमित : ाचा तो ये बात है . इसका मतलब इस दिन दीदी को भी दर्द हुआ होगा?

करुणा दीदी : इसी लिए तो मुझे उन्होंने अडवीसे किया.

अमित : वैसे आप दोनों में सब ओपन है ? मतलब आप एक दूसरे से हर बात करती हैं?

करुणा दीदी : हाँ हम दोनों सहेलियों की तरह रहती हैं. अब बातें बंद करो और जल्दी चलो.

मैंने बाइक की स्पीड बड़ा दी और पहुँच गया फ्लैट पर जिसकी चाबी अभी तक मैंने अपने पास hi राखी हुई थी . दीदी फ्लैट को अछि तरह देखने लगी और बहुत खुश भी थी . उन्हें फ्लैट पसंद आ रहा था.

करुणा दीदी : वैसे ये फ्लैट किसका है? लगता तो नहीं कोई यहाँ रहता होगा . वैसे हर चीज़ है यहाँ पर .

अमित : ये फ्लैट मेरे एक दोस्त का है. वो खुद यहाँ नहीं रहता हाँ कभी कोई रिश्तेदार वगैरह आये तो यहीं पर ठहराते हैं वो .

करुणा दीदी : मोहित का है क्या ?

करुणा दीदी तो सीधे मोहित पर पहुँच गयी . वो सिर्फ मोहित क बारे में hi तो जानती थी इसी लिए ऐसा अंदाज़ा लगाया होगा क्यूंकि वो लोग पैसे वाले हैं . मगर मैं नहीं चाहता था क मोहित कभी ज़िकर हो नहीं तो कभी मेरी पोल खुल भी सकती थी.

अमित : नहीं ये मेरा एक और दोस्त है कॉलेज में उसका है. वैसे जल्दी में मैं कुछ ला नहीं सका आप बैठो मैं कुछ खाने पिने को ले कर अत हूँ

करुणा दीदी : तुम कहाँ जा रहे हो ? रहने दो किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है. वैसे भी यहाँ खाने नहीं आयी मैं और नाश्ता किया हुआ है घर से.

अमित : जैसी आपकी मर्ज़ी पर क्या मैं एक बात पूछ सकता हूँ ?

करुणा दीदी : पूछो

अमित : आप ने मेरे साथ ये सब करने का क्यों सोचा ? आप को तो कोई भी ाचा लड़का मिल जाता फिर मैं hi क्यों ?

करुणा दीदी : तुमने दीदी से भी पूछा था न ? मेरा भी वही जवाब है जो उनका था .

अमित : मैंने आपका जवाब पूछा है . ज़रूरी नहीं क जो दीदी सोचती हैं वो आप भी सोचती हो

करुणा दीदी : नहीं ऐसा नहीं है. मुझे किसी पर भरोसा नहीं . वैसे तो कई बार लड़कों ने परपोज़ किया है मगर मैंने कभी किसी को हाँ नहीं कहा. यहाँ पर सब मज़ा लेने क लिए hi फ्रेंडशिप करते हैं और मैं ऐसा कर क अपनी फॅमिली को बदनाम नहीं करना चाहती . मुझे तुम पर भरोसा है क तुम मेरे साथ कुछ गलत नहीं करोगे . वैसे भी तुम में वो हर खूबी है जो एक लड़की लड़के में ढूंढती है. मैं तो कब से तुम्हे ये बताना चाहती थी मगर नैना दीदी ने पहले hi अपने दिल की बात कह दी तुमसे. पहले तो मुझे ाचा नहीं लगा था क दीदी भी तुम्हे पसंद करती हैं मगर फिर सोचा देखा जाये तो हम में फरक hi क्या है . वैसे भी हम दोनों बेस्ट फ्रेंड्स हैं तो तुम्हे हम शेयर तो कर hi सकते हैं. अब अगर सवाल ख़तम हो गए हो तो प्यार करें.

अमित : मैं कैसे भाई हूँ जो अपनी बहनो क साथ ये सब ?....

करुणा दीदी : ऐसा मत सोचो . हम तो खुश हैं क हमें तुम जैसा भाई मिला है जो हमारी ख़ुशी का ख्याल रखता है. ज़रा सोचो अगर हमारे साथ कोई दूसरा लड़का करता और फिर हमारा फायदा उठता तो क्या तुम्हे वो ाचा लगता ? थोड़ी देर क लिए तुम भूल जाओ क हमारा कोई रिश्ता भी है बस एक प्रेमी की तरह मुझे प्यार करो. मैं कब से इस पल क लिए तड़प रही हूँ.

करुणा दीदी बातें बातें करते करते मेरे इतना करीब आ गयी क उनका जिस्म मेरे साथ टच होने लगा. उनका सीना ऊपर नीचे हो रहा था जो उनके अंदर मचलते जज़्बातों को बयां कर रहा था. मैंने उनको और ज्यादा इंतज़ार नहीं करवाया और उन्हें अपनी बाँहों में भर कर उनके गुलाब की पंखुड़ियों से नाज़ुक होंठों को अपने होंठो में कैद कर लिया . करुणा दीदी ने मुझे अपने साथ कसने की कोशिश की और किश करने में मेरा साथ देने लगी. हम दोनों की ऑंखें इस मधुर मिलान में अपने आप बंद हो गयी. करुणा दीदी धीरे धीरे मुझ पर हावी होने लगी और उनका किश करना वाइल्ड होने लगा. मगर जल्दी hi हमारी साँसे ुनखड़ने लगी तो हमारे होंठ अलग हुए . मैंने ऑंखें खोल कर दीदी को देखा तो उनका चेहरा लाल हो गया था. उन्होंने भी अपनी ऑंखें खोल कर मुझे देखा तो मुझे ऐसा लगा जैसे दीदी ने कोई नशा किया हो . उनकी ऑंखें इस वक़्त इतनी नशीली और लाल हो रही थी क मैंने उनकी आँखों में hi देखने लगा. इस बार दीदी ने खुद hi मुझे किश करना शुरू कर दिया . मैंने दीदी को बाँहों में भर लिया और उन्हें ऊपर उठा लिया. दीदी ने भी ज़मीन से ऊपर उठते hi अपने पाऊँ मेरी कमर पर लपेट लिए. मैंने उन्हें ऐसे hi फूलों की तरह उठाये बैडरूम में ले चला.

बैडरूम में आते hi मैंने दीदी को बीएड पर लिटा दिया और खुद उनके ऊपर लेट गया. दीदी जोंक की तरह मेरे साथ चिपकी हुई थी उनके हाथ मेरी पीठ पर और पाऊँ मेरी कमर में लिपटे हुए थे . मैंने किश तोड़ी और दीदी की आँखों में देखने लगा जहाँ इस वक़्त नशे क इलावा और कुछ नहीं था. दीदी की आँखों में देखते हुए मुझे भी नशा होने लगा और मैंने उनकी आँखों पर किश किया . दीदी ने ऑंखें बंद कर ली और उनके चेहरे पर स्माइल थी. मैंने आँखों पर किश करने क बाद उनके माथे गालों और थोड़ी को चूमते हुए उनकी गर्दन पर किश करने लगा. गर्दन पर मेरे होंठ लगते hi करुणा दीदी क मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी.

करुणा दीदी : आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स उम्म्म्म ये क्या जादू कर रहे हो तुम कक्कक्क्स उम्म्म्म ी लव यू अमित . मेक लव तो में . उम्मम्मम कक्कक्स ऐसे hi प्यार करो मुझे . तुमने मुझे बहुत इंतज़ार करवाया है . कक्कक्क्स

अमित : आप बहुत मीठी हैं दीदी . मेरा दिल कर रहा है आपको पूरा का पूरा खा जॉन

करुणा दीदी : कक्कक्स आजझठ तो रोका किसने है खा जाओ मुझे . मैं अब तुम्हारी हूँ सिर्फ तुम्हारी .

मैंने दीदी क गले से चुनरी निकल कर एक साइड गिरा दी और उनकी गर्दन पर किश करने लगा. दीदी भी मुझे जहाँ उनके होंठ लगते किश करने की कोशिश करती . दीदी मेरे नीचे मसल मचल रही थी . दीदी से शायद मेरा ऐसे धीरे धीरे प्यार करना बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने ने मुझे पलट दिया और खुद मेरे ऊपर आ गयी. दीदी ने घुटने मेरी कमर क दोनों तरफ लगाए और मेरे लैंड क पास बैठ गयी . मेरी T-shirt को किनारे से पकड़ कर दीदी ऊपर को उठाने लगी तो मैंने खुद hi थोड़ा सा ऊपर हो कर उनकी मदद की मेरी T-shirt उतरने में. T-shirt क उतारते hi दीदी मेरी छोड़ी चाहती और मसल्स पर हाथ लगा कर जायज़ा लेने लगी.

अमित : ऐसे क्या देख रही हैं आप ?

करुणा दीदी : बिलकुल हीरो जैसे बॉडी बनाई है तुमने बल्कि उस से भी ज्यादा . बहुत म्हणत की होगी न ऐसा बनने में? पता है लड़कियां करती हैं ऐसे लड़कों पर, अगर कहीं तुम मेरे कॉलेज की लड़कियों क हाथ लग जाओ तो तुम्हारा रपे hi कर देंगी वो. लेकिन तुम सिर्फ मेरे हो .

अमित : मैं आप hi का हूँ दीदी. आप बहुत सुन्दर हैं , आप जैसी लड़की तो किस्मत से मिलती है . मुझे कभी कभी लगता है भगवन ने मुझे कितना खुश किस्मत बनाया है क आप और नैना दीदी जैसी सुन्दर अप्सराएं मुझे प्यार करती हैं और मैं कितना बदकिस्मत भी हूँ क आप मेरी बहने हैं और छह कर भी हम एक नहीं हो सकते .

करुणा दीदी : ऐसा क्यों सोचता है पागल. मैं और दीदी तुम्हारी hi तो हैं. दीदी का तो पता नहीं पर मैं हमेशा तुमसे प्यार करती रहूंगी चाहे शादी किसी से भी हो.

इतना कह कर दीदी मेरे ऊपर झुकी और मेरी छाती पर किश करने लगी और साथ hi उन्होंने मेरे एक निप्पल को अपने होंठों में पकड़ कर चूसा तो मेरे जिस्म एक सिहरन सी हुई और मेरा शरीर सूखे पत्ते की तरह कर्ज गया . ये एक नया एहसास था जो आज पहली बार मुझे हुआ था . न चाहते हुए भी मेरे मुँह से सिसकी निकल गयी .

अमित : आह्हः कक्कक्स दीदी क्या कर रही हो आप ??

करुणा दीदी : क्यों ाचा नहीं लगा क्या ?

अमित : अजीब सा लग रहा है. ाचा भी लग रहा है मगर ये फीलिंग अजीब सी है.

करुणा दीदी : अगर ाचा लग रहा है तो चुप चाप मज़ा लो और मुझे मेरा काम करने दो. पता है इतने दिन तुमने मुझे वेट करवाई है . मैंने जो कुछ भी मूवीज में देखा है आज मैं वो सब करने वाली हूँ

इतना कह कर करुणा दीदी फिर से मेरे निप्पल्स को काटने और चूसने लगी. अब मुझे एहसास हो रहा था क जब मैं किसी लड़की क साथ ऐसे करता हूँ तो उसे कैसे लगता होगा . मुझे अजीब भी लग रहा था और मज़ा भी आ रहा था . मैंने करुणा दीदी को रोकने की कोशिश की मगर वो तो सुनने को तैयार नहीं थी. मैंने उन्हें पलट कर अपने नीचे कर दिया और उनकी कमीज पकड़ कर उतरने लगा जिसमे उन्होंने मेरी मदद की. उसके बाद मैंने उनकी सलवार भी उतर दी . अब दीदी मेरे सामने बीएड पर बस ब्रा और पेंटी में थी. उनका वो संगमरर का तराशा हुआ दूध सा सफ़ेद बदन किसी मूरत से काम नहीं था. किसी काल्पनिक अप्सरा क बदन की खूबसूरती जैसे किसी ने मूरत में उतर दी हो. मैंने एक नज़र उनके बदन को देखा तो वो शर्म से अपना बदन ऐंठने लगी. मैंने उनको ऐसा करने से रोकने क लिए उनके पाऊँ पकड़ कर उनको अपनी तरफ खींचा तो उन्होंने अपने हाथों से अपना चेहरा धक् लिया .

अमित : आप कितनी खूबसूरत हो दीदी .

करुणा दीदी : ऐसे मत देखो मुझे शर्म आ रही है.

अमित: अब हमारे बीच शर्म की जगह hi कहाँ बची है दीदी.

इतना कह कर मैं दीदी क ऊपर लेट गया और उनके हाथ हटा कर उनके होंठो का रास पिने लगा. दीदी भी बिल्ली की तरह मुझ पर हमला कर रही थी . होंठों का रास पिने क बाद मैं नीचे बड़ा और दीदी की उन्नत छातियों पर अपने हाथ कास लिए . क्या नरम एहसास था ब्रा में कैद दीदी क उन्नत उभर मुझे उन्हें मसलने और प्यार करने को उत्साहित कर रहे थे. मैंने दीदी की ब्रा को खींच कर उसमे से उनके डोरे मुलायम उन्नत दूध क कलश बहार निकल लिए. क्या बताऊँ क्या बूब्स थे . काम से काम 36 क तो होंगे ऊपर से गुलाबी घेरे में शूल की तरह उभरे हुए गुलाबी निप्पल प्यार करने क लिए बुला रहे थे. मैंने भी उनका निमंत्रण स्वीकार किया और एक निप्पल को अपने होंठों में कैद करने क बाद दूसरे उभर को हाथों में लेकर मसलने लगा. दीदी मेरे नीचे मचलने लगी , उनके मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी और मेरे सर क बल नोचने लगी

करुणा दीदी : उफ्फ्फ ये क्या ये क्या कर रहे हो तुम उम्मम्मम कक्कक्क्स आआह्ह्ह आह्हः खा जाओ खा जाओ इन्हे ये तुम्हारे लिए hi हैं आअह्ह्ह्ह सीसीसी आराम से करो दर्द होता है आअह्ह्ह कक्कक्कक्स उनममम

दीदी मेरे बल नोचते हुए मेरे सर को खुद hi दबाने लगी अपनी छाती पर. मैंने एक स्तन को अछि तरह चूमने क बाद दूसरे को मुँह में भर लिया , दीदी ने हाथ बड़ा कर मेरी बेल्ट खोलनी शुरू कर दी. मैं स्तन पैन करने क बाद नीचे बढ़ने लगा तो दीदी ने फिर से पलट कर मुझे निचे गिरा दिया और मेरी जीन्स उतरने लगी . मैंने भी कमर उठा कर उनकी मदद की . दीदी ने जीन्स क साथ hi मेरा अंडरवियर भी खिंच कर उतर दिया . लैंड बहार एते hi क़ुतुब मीनार की तरह छत की तरफ मुँह किये खड़ा हो गया और अकड़न की वजह से झूलने लगा. लैंड पर नसें उभर आयी थी . लैंड को देख कर दीदी एक पल क लिए स्टेचू बन गयी और उनका मुँह खुला का खुला रह गया.

करुणा दीदी : ये इतना बड़ा और मोटा कैसे किया तुमने ? दीदी सच hi कह रही थी क ये नार्मल बिलकुल भी नहीं है .

अमित: दर लग रहा है क्या ? अगर दर लग रहा है तो रहने देते हैं .

करुणा दीदी ने मेरी ये बात सुनते hi मेरा लैंड अपने दोनों हाथों में पकड़ लिया

करुणा दीदी : ऐसे कैसे रहने दूँ , अगर दीदी ले सकती है तो मैं भी ले सकती हूँ. बस ये सोच रही हूँ क ये इतना बड़ा कैसे है. वैसे मेरी फ्रेंड्स कहती हैं क जितना बड़ा हो उतना मज़ा भी देता है और दीदी ने बताया था क ये दमदार भी बहुत है . ये अब मेरा है और मैंने इसे अंदर ले क रहूंगी.

दीदी ने मेरे लैंड को दोनों हाथों में कास क उसका जायज़ा लेना शुरू कर दिया . लैंड दोनों हाथों की मुठियों से भी बहार था. लैंड को पकड़ पकड़ कर देखने क बाद दीदी ने झुक कर सुपडे पर अपने होंठ रख दिए मैं तो उन्हें देखता hi रह गया . मज़े क मरे मेरे मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी.

अमित : आह्हः कक्कक्क्स दीदी ये क्या कर रही हो अआप ?

करुणा दीदी : प्यार कर रही हूँ और क्या ? ये अब मेरा है इसे मैं प्यार करुँगी. मैंने मूवीज में देखा है ऐसा करते हुए .

इतना कह कर दीदी ने सूपड़ा मुँह में ले लिया और सुपडे से थोड़ा और निचे तक अंदर बाहर कर क लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी. दीदी सच में कमल कर रही थी . वो ये सब करेंगी मैंने सोचा भी नहीं था. जो भी हो मैं मज़े की वादियों में खोता जा रहा था . मेरे हाथ अपने आप दीदी क सर पर चले गए और कमर उठा कर मैं और ज्यादा लैंड उनके मुँह में घुसाने की कोशिश करने लगा. दीदी को पूरा मुँह खोलना पद रहा था मेरा लैंड अंदर लेने क लिए और उनके गाल फूले हुए नज़र आ रहे थे . जब लैंड आधा उनके मुँह में गया तो उन्होंने तुरंत अपना सर ऊपर खींचना चाहा मगर मैंने उनका सर दबा रखा था तो उन्होंने मेरी बॉल्स दबा दी जिससे मुझे दर्द हुआ और मेरी पकड़ उन पर ढीली पद गयी . मैं दर्द से कराह उठा . दीदी ऐसा करेंगी मुझे अंदाज़ा नहीं था

अमित : आआअह्हह्ह्ह्ह क्या कर रही हैं आप?

करुणा दीदी : अखुनण अखुनन अखुनण तुम क्या कर रहे हो ? जान लोगे क्या मेरी अखुनण अखुनण

दीदी क मुँह से लार टपक रही थी और आँखों में भी पानी आ गया था शायद लैंड कुछ ज्यादा hi अंदर घुस गया था.

करुणा दीदी : पहली बार मैं ये कर रही हूँ. एक तो ये ितं बड़ा है ऊपर से तुम इसे मेरे गले में घुसाए जा रहे हो , जान लोगे क्या मेरी ?

अमित : सॉरी दी मुझे पता hi नहीं चला , मज़े में मैं सब भूल गया था

करुणा दीदी : it’s ok

मैंने दीदी को बीएड पर लिया दिया और खुद उनकी टांगों क बीच आ गया .

अमित: अब आप आराम करो और मैं आपको मज़े देता हूँ.

इतना कह कर मैंने दीदी की जांघों को चूमना शुरू कर दिया . केले क तने क जैसी सख्त और मुलायम जांघें दूध सी सफ़ेद थी . स्किन माखन की तरह थी जिस पर मेरी ज़ुबान फिसल रही थी . जांघों को चूमते हुए मैंने जांघों क जोड़ तक पहुँच गया जहाँ पर उनकी काले रंगी की पेंटी उनके अनमोल खजाने को छुपाये हुए थी. मैंने पेंटी क इलास्टिक को दोनों हाथों से पकड़ कर पेंटी को खींचना शुरू किया तो दीदी ने अपनी कमर उठा कर मेरा साथ दिया . पेंटी उतारते hi दीदी बाल वहीँ योनि मेरी आँखों क सामने आ गयी . एक डैम साफा चक गुलाबी फांकों वाला योन कुंड किसी भी मुर्दे को ज़िंदा करने क लिए काफी था. दोनों फबके आपस में ऐसे जुडी हुई थी मनो एक पतली सी लकीर हो और उन पर शबनम की कुछ बुँदे बता रही थी क इस द्वार क पीछे अमृत कुंड है. मैंने बिना देर किये अपने होंठ छूट क होंठों पर रख दिए और किश करना शुरू कर दिया .

करुणा दीदी : आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स उम्म्म्म आआह्ह्ह्ह उम्म्म्म आआह्ह्ह्हह क्या कर रहे हो आआह्ह्ह्हह खा जाओ कक्ककक्कक्स आआह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है आआह्ह्ह्ह कक्कक्स

दीदी मज़े में अपना बदन ऐंठने लगी और मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी. मैंने किश करते हुए अपनी जीव को छूट में घुसना शुरू किया तो 2 मिनट्स में hi दीदी क योनकुंड का बांध टूट गया और अमृत मेरे मुँह में आने लगा . शायद दीदी पहले सी कुछ ज्यादा hi गरम थी इस लिए जल्दी hi पानी छोड़ दिया मगर मैंने भी एक बूँद भी जाया नहीं होने दी और सारा रास निचोड़ लिया . दीदी का बदन अकड़ कर झटके खता hi ढीला पड़ने लगा.

दीदी क शांत होते hi मैं उनकी छूट से ऊपर उठा और घुटनो पर हो कर अपनी पोजीशन ले ली. जब मैंने लैंड का सूपड़ा छूट पर रखा तो मुझे एहसास हुआ क करुणा दीदी की छूट का मुँह कुछ ज्यादा hi संकरा था लैंड क मुकाबले. शायद करुणा दीदी की छूट नैना दीदी से भी छोटी थी. मुझे लगा क दीदी से दर्द बर्दाश्त नहीं होगा इस लिए मैं रुक गया और दीदी की तरफ देखने लगा. दीदी मज़े से ऑंखें बंद किये अपने स्खलन का मज़ा ले रही थी . जब मैं कुछ देर कुछ भी नहीं किया तो दीदी ने ऑंखें खोल कर मुझे देखा

करुणा दीदी : क्या हुआ ? रुक क्यों गए ? करो न आगे .

अमित : कैसे करूँ? आपकी बहुत छोटी है , आपको बहुत दर्द होगा. ये ऐसे अंदर नहीं जाने वाला . अगर मैंने ज़ोर लगाया तो कहीं कुछ हो न जाये.

मैंने अपनी टेंशन बताते हुए कहा मगर दीदी को तो जैसे कोई फरक hi नहीं पड़ा.

करुणा दीदी : कुछ नहीं होता . बहार से छोटी लग रही है अंदर से छोटी नहीं होती. मुझे पता है मेरी नैना दीदी से कुछ छोटी है मगर इसका मतलब ये नहीं क ये अंदर नहीं जायेगा. एक मिनट रुको.

करुणा दीदी उठके बहार गयी और अपना पर्स उठा कर ले आयी . पर्स में से उन्होंने ने एक क्रीम निकली और मेरे लैंड पर मलने लगी. मैं चुपचाप दीदी को देखने लगा. लैंड पर क्रीम लगाने क बाद दीदी ने अपनी छूट पर भी क्रीम लगाई और फिर से मेरे आगे टाँगें खोल कर लेट गयी.

करुणा दीदी : मुझे पता था ये आसानी से नहीं जाने वाला दीदी ने बताया था इस लिए ये क्रीम ले कर आयी थी . अब घुसाओ और बिलकुल भी डरना मत. पहली बार तो दर्द होता hi है मुझे भी होगा मगर तुम रुकना नहीं. मैं ये दर्द फील करना चाहती हूँ.

मैंने लैंड को छूट पर सेट किया और एक हाथ से पकडे हुए hi दबाव देना शुरू किया . छूट लैंड क मुकाबले कुछ ज्यादा hi टाइट थी तो लैंड घुसाने में खासी म्हणत करनी पद रही थी. दीदी क चेहरे पर दर्द की लकीरें साफ नज़र आने लगी. उनके जबड़े कास गए थे और मैं भी दबाव बढ़ाया जा रहा था. आखिर कर लैंड क दबाव क आगे छोट क किले का दरवाज़ा टूट गया और लैंड का सूपड़ा छूट की फैंको को फैलता हुआ अंदर घुस गया . पुक की आवाज़ से सूपड़ा छूट की फैंको को उनकी सीमा से अधिक फैलता हुआ अंदर घुसा तो दीदी क लाख कोशिश क बाद भी उनके मुँह से चीख निकल hi गयी

करुणा दीदी : aaaaaaaaaaaahhhhhhh माआआआआ मर गयी .

दीदी को बहुत दर्द हो रहा था जिसका मुझे भी अंदाजा था क्यूंकि खुद मुझे भी लैंड पर छूट का दबाव साफ़ पता चल रहा था. मैंने अपने हाथ दीदी क उभारों पर रखे और फिर से एक धक्का पेल दिया इस बार लैंड थोड़ा सा और अंदर गया और आगे किसी चीज़ से लग कर रुक गया . मैं समझ गया क आगे दीदी क कुंवारेपन की दीवार है. इसके टूट ते hi दीदी लड़की से औरत बन जाएगी. मैंने थोड़ा सा लैंड पीछे खींचा और एक और धक्का पेल दिया . इधर दीवार तोड़ता हुआ लैंड अंदर घुसा और उधर दीदी की चीखों ने कमरे में भूचाल ला दिया

करुणा दीदी : आआआअह्ह्ह्हह माआआ निकालो बहार आआअह्ह्ह्हह मैं मर जाउंगी निकालो इसे प्लीज बहार निकालो मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा बहार निकालो इसे आआआअह्ह्ह्ह माआआ उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ आआआईइइइइइइइ ऐसा लग रहा है किसी ने खंजर घुसा कर मुझे नीचे से चीयर दिया है.

अमित : बस हो गया दीदी थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो अब और दर्द नहीं होगा

करुणा दीदी : निकालो बहार आआह्ह्ह्हह ाआईईई मुझे नहीं लेना निकालो इसे

मैं दीदी क स्तन मसल रहा था और साथ hi बरी बरी से उन्हें चूम भी रहा था . कुछ देर मैंने अपना लैंड वही रहने दिया और बिलकुल भी हिलजुल नहीं की. दीदी कुछ देर दर्द से तड़पती रही और फिर उनकी चीखें सिसकियों में बदलने लगी. जब मैंने देखा क दीदी अब कुछ शांत हैं तो मैंने लैंड को थोड़ा सा बहार निकलने की कोशिश की तो दीदी को फिर से दर्द होने लगा और वो मुझे ऐसा करने से रोकने लगी .

करुणा दीदी : मत हिलो प्लीज दर्द हो रहा है.

अमित : बस थोड़ा सा हिला रहा हूँ अंदर नहीं करूँगा आप चिंता मत करो .

मैंने करुणा दीदी क होंठों को अपने होंठों में कस्ते हुए अपने लैंड को हिलना शुरू किया . शुरू शुरू में लैंड दस्ते हुए धीरे धीरे अंदर बहार हो रहा था मगर कुछ हलके धक्कों क बाद छूट में कुछ जगह बानी तो लैंड आराम से अंदर बहार होने लगा. दीदी क होंठ बंद होने की वजह से उनकी आवाज़ बहार नहीं आ रही थी पर थोड़ी देर में वो नार्मल होने लगी तो मैंने उतने hi लैंड से अब आराम से धक्के मरते हुए उनके होंठों को आज़ाद कर दिया .

करुणा दीदी : आआह्ह्ह ककक उम्म्म आआह्ह्ह अब ाचा लग रहा है . ऐसे hi करो मज़ा आ रहा है उम्म्म सच कह रही थी दीदी उम्मम्मम आआअह्ह्ह्हह

अमित : अब दर्द तो नहीं हो रहा ?

करुणा दीदी : हो रहा है मगर उतना नहीं है . अब दर्द से ज्यादा मज़ा मिल रहा है ऐसे hi करो उम्म्म्म

मैंने धीरे धीरे धक्कों की स्पीड बड़ा डी दीदी मुझे बेतहाशा चूमने लगी . मैंने जैसे hi स्पीड तेज़ की तो करुणा दीदी की सिसकारियां तेज़ होने लगी और उनका जिस्म अकड़ने लगा एक बार फिर से उनकी छूट ने पानी छोड़ दिया . मैंने उनको झड़ने दिया और खुद रुक गया छूट में उतना hi लैंड घुसाए. जब दीदी शांत हुई तो मैंने अपना लैंड बहार निकल लिया. दीदी की छूट से पानी और खून मिक्स हो कर बहार निकल रहा था. छूट जो थोड़ी देर पहली एक लकीर सी नज़र आ रही थी अब वो खुल चुकी थी और छूट क किनारे भी चिर जाने से खून वहां भी लगा हुआ था. खून की कुछ बूंदे बेडशीट पर भी पड़ी हुई थी. मैं पास बैठा बस दीदी को देख रहा था . आज उनका पहली बार था तो मैंने उनको ज्यादा तंग करना ठीक नहीं समझा और उनके पास hi लेट गया . हम दोनों ऐसे hi कुछ देर लेते रहे और फिर दीदी ने उठने की कोशिश की तो उन्हें दर्द होने लगा.

करुणा दीदी : आअह्ह्ह्हह आईई मा मर गयी

अमित : आप लेती रहिये थोड़ी देर आपको दर्द होगा . मैं आपके लिए पैन किलर लता हूँ

करुणा दीदी : पहले मुझे बाथरूम लेकर चलो वर्ण बीएड गीला हो जायेगा

मैंने दीदी की बात समझते हुए उन्हें अपनी बाँहों में उठाया और बाथरूम ले गया . दीदी को बाथरूम करते हुए जलन हो रही थी और पेशाब भी रुक रुक कर आ रहा था. पेशाब क साथ कुछ खून भी निकला पर वो मामूली सा था. उसके बाद मैंने दीदी को पानी से अछि तरह साफ किया और टॉवल से सूखने क बाद वापिस बैडरूम में ले आया. दीदी चुपचाप बस मुझे देखे जा रही थी क मैं क्या कर रहा हूँ.

अमित : अब आप आराम कीजिये मैं आपके लिए पैन किलर और कुछ खाने को लता हूँ.

करुणा दीदी : रहने दो मेरे पर्स में हैं पैन किलर. मैं लेकर आयी थी. और तुम रुक क्यों गए तुम्हारा तो हुआ नहीं न?

अमित : आज आपका पहली बार था अगर मैं और करता तो आपको और दर्द होता . मेरा क्या है फिर कभी कर लूंगा आके साथ. पर मैं आपको दर्द नहीं देना चाहता.

करुणा दीदी : तुम सच में कितने अचे हो , ी ऍम हैप्पी क मैंने अपनी लाइफ का ये सुनेहरा पल तुम्हारे साथ शेयर किया . ी लव यू मच मुझे हमेशा ऐसे hi प्यार करना .

अमित : हमेशा करुणा दी. अब आप दवा खा कर आराम कीजिये मैं खाने को लता हूँ कुछ .

करुणा दीदी : नहीं कुछ नहीं चाहिए मुझे बस पैन किलर दो फिर मुझे नैना दीदी लेने आ जाएँगी उन्हें फ़ोन कर दो. खाने की ज़रूरत नहीं बस अब आराम भी उनके घर जा कर hi करुँगी.

अमित : मगर ऐसी हालत में?

करुणा दीदी : वो सब छोड़ मुझे टेबलेट दो और दीदी को फ़ोन करो. मैंने उन्हें कहा था वो आ जाएँगी अभी.

मैंने दीदी को टेबलेट दी और नैना दीदी को फ़ोन कर दिया . कोई 20-25 मिनट बाद दरवाज़े पर दस्तक हुई तो मैंने उठ कर दरवाज़ा खोला तब तक हम दोनों hi कपडे पहन चुके थे. दरवाज़ा खोला तो सामने नैना दीदी कड़ी थी . नैना दीदी ने आगे बाद कर मुझे गले लगा लिया और किश करने लगी . कुछ देर मुझे किश करने क बाद उन्होंने छोड़ा.

नैना दीदी : अब तो तुमसे मिलने क लिए भी वजह ढूंढनी पड़ती है. और तुम ( करुणा दीदी ) हो गयी खुश ? कैसा लग रहा है अब ? ज्यादा दर्द तो नहीं न?

करुणा दीदी : नहीं अब कुछ ठीक हूँ पैन किलर ली है मैंने.

नैना दीदी : बहुत दर्द देता है ये , इतना बड़ा दंड निचे लटकते घूमता है. पता नहीं तुमने ले कैसे लिया तुम्हारी तो नीचे से और भी छोटी है.

करुणा दीदी : आप सही कहती हो दीदी एक बार मुझे लगा था क मैं बचूंगी नहीं पर शुक्र है क ज़िंदा हूँ.

नैना दीदी : दर्द hi दिया इसने या कुछ मज़ा भी आया?

करुणा दीदी : आया न दीदी बहुत मज़ा आया मगर बाद में फिर से दर्द होने लगा

नैना दीदी : मेरे साथ चल मैंने तेरे लिए खास इंतज़ाम रखा है घर पर . तेरा सारा दर्द ख़तम हो जायेगा.

अमित : आप दोनों कुछ खाएंगी नहीं क्या?

नैना दीदी : खाउंगी न मगर आज नहीं , आज करुणा को संभालना है मगर अगली बार मैं छोडूंगी नहीं.

नैना दीदी की बात का मतलब समझ कर मैं झेंप गया और करुणा दीदी मुस्कुराने लगी.

करुणा दीदी : चलें दीदी ? वर्ण पैन किलर का असर ख़त्म होते hi फिर से दर्द होने लगेगा.

नैना दीदी : हाँ चलो

करुणा दीदी की हालत अब पहले से अछि थी मगर वो धीरे धीरे चल रख थी और उनकी चल कुछ बदल गयी थी. जाते जाते दोनों ने बरी बरी मुझे गले लगा कर किश किया . नैना दीदी ने तो मेरा लैंड hi मसल दिया . मैंने दोनों को बहार तक छोड़ा और फिर अपनी बाइक लेकर कॉलेज आ गया. टेस्ट ख़तम होने hi वाला था . मोहित भी कॉलेज में hi था शायद मीनल क लिए hi आया था वो.

मोहित : आ गया तू ? मुझे तो लगा था आज तू नहीं आएगा यहाँ

अमित : आज राधा क साथ मौसी क घर जाना है तो इस लिए सोचा साथ में hi चलता हूँ.

मोहित : ये ाचा किया वैसे आज मैं मीनल को घर ले कर जाने वाला हूँ. माँ डैड घर नहीं हैं तो सोचा आज साथ में रहते हैं कुछ देर.

अमित : तो शादी से पहले hi ये सब चल रहा है तुम दोनों का

मोहित : अब शादी तो हमने साथ में hi करनी है तो फिर दर कैसा. लो वो लोग भी आ गए.

टेस्ट ख़तम हो गया था और सब स्टूडेंट्स बहार आने लगे थे. मीनल राधा साथ में आ रही थी और कुछ hi दुरी पर नेहा दीदी भी आती हुई नज़र आ गयी . पीछे से कल्पना भी हमारे पास आ कर कड़ी हो गयी .

कल्पना : तो तुम दोनों भी आये हो ? मैंने कहा तो था क मैं ले जाउंगी दोनों को फिर भी तुम आ गए?

अमित : वो आज राधा ने घर आने को कहा था तो सोचा साथ में hi चलता हूँ.

इतने में राधा मीनल और नेहा दीदी हमारे पास आ गए.

अमित: कैसा रहा टेस्ट ?

राधा : ाचा था

नेहा दीदी : मेरा भी ाचा गया

मीनल : मेरा भी ठीक गया . अब क्या प्रोग्राम है ?

मोहित : किसी रेस्टोरेंट में चल क कुछ कहते हैं फिर घर.

कल्पना : हाँ ये ठीक रहेगा

राधा : मगर देर हो जाएगी तो माँ नाराज़ होगी

कल्पना : वो मैं देख लुंगी आंटी कुछ नहीं कहेंगी वैसे भी अमित भी तो जा रहा है न साथ तो वो नाराज़ क्यों होंगी ?

राधा : क्या सच में तुम मेरे साथ चलोगे घर ?

राधा क चेहरे पर ख़ुशी आ गयी थी कल्पना की बात सुनते hi.

अमित : तुमने hi तो कहा था आने को अब भला मैं इंकार कैसे कर सकता हूँ

कल्पना: वह जनाब , मैं बुलाती हूँ तो तुम्हारे पास टाइम नहीं होता .

अमित : ऐसा नहीं है , आज गाओं जाना है तो इस लिए सोचा राधा क घर से hi सीधा गाओं चला जाऊंगा .

मोहित : चलो दोस्तों बाकि बातें बाद में अब चलते हैं यहाँ से.

उसके बाद हम सब रेस्टोरेंट गए जहाँ सुन ने बातें करते हुए थोड़ा बहुत खाना खाया . उसके बाद मोहित मीनल को ले कर निकल गया . कल्पना नेहा दीदी और राधा को लेकर कार से जाने लगी तो मुझे बाइक स्टार्ट करते देख कर राधा रुक गयी

राधा : तुम बाइक से अकेले जाओगे ?

अमित: और कौन आएगा मेरे साथ?

राधा : कल्पना ऐसा करते हैं तुम नेहा दीदी को घर ले जाओ मैं अमित क साथ बाइक पर चली जाती हूँ तुम्हारा भी टाइम बच जायेगा .

नेहा दीदी : राधा ठीक कह रही है . वैसे तुम हमारे घर कब आओगे? माँ यद् कर रही थी तुम्हे.

अमित : गाओं से वापिस आने क बाद आऊंगा न दीदी . मौसी से कहना मैं जल्दी आऊंगा.

कल्पना: ाचा तो तुम दोनों जाओ मैं भी देखती हूँ आंटी से मिलने आ जाउंगी राधा क घर .

कल्पना नेहा दीदी को बिठा कर निकल पड़ी और मैंने भी इधर बाइक स्टार्ट की तो राधा मेरे पीछे बैठ गयी . राधा बहुत खुश नज़र आ रही थी . मैंने राधा क बैठते hi बाइक आगे बड़ा दी.

अमित : तुम कार में आराम से बैठ कर जा सकती थी अब बाइक पर धुल मिटटी से परेशां होना पड़ेगा

राधा : कुछ नहीं होता मुझे , पहले भी तो अति थी न स्कूटी पर . रोज़ तो कार में जाती हूँ आज तुम्हारे पीछे बैठने का मौका मिला है तो कैसे जाने देती. कुछ देर और बातें कर लेंगे. वैसे तुम्हे वो गिफ्ट कैसा लगा था ?

अमित : मैं बता नहीं सकता मुझे कितनी ख़ुशी मिली उससे. ी रियली थैंक यू राधा इससे ाचा और क्या हो सकता था. क्या तुम और भी फोटोज का सकती हो मेरे लिए .

राधा : कोशिश करुँगी पर पक्का नहीं कह सकती .

राधा ( मन में ) तुम्हे कैसे बताऊँ क माँ ने hi खुद वो एल्बम दी थी मुझे तुम्हे देने क लिए. मुझे तो वो कुछ लेने नहीं देंगी वहां से.

अमित : मौसी मुझे तो कभी देंगी नहीं तुम्हे hi कुछ करना पड़ेगा

राधा : ऐसा नहीं है अमित , न तुम्हे भी दिखा देंगी अगर तुम उनसे प्यार से कहोगे तो. वो तुम्हे बहुत प्यार करती हैं बस ऊपर ऊपर से गुस्सा करती हैं. तुम कोशिश करो उनसे बात करने की.

अमित : नहीं मुझसे नहीं होगा. वो मेरी शकल देखते hi गुस्से में आ जाती हैं.

हम लोग बातें करते हुए घर पहुँच गए. मैं अंदर जाने से झिझक रहा था तो राधा मेरा हाथ पकड़ कर खींचती हुई मुझे अंदर ले गयी . दिव्या मौसी ने दरवाज़ा खोला तो एक बार मुझे देख कर वो ठिठक गयी और मैं भी उनसे नज़रें चुराने लगा. मौसी अंदर चली गयी तो मैं भी राधा क साथ अंदर आ गया. मैंने मौसी की तरफ नहीं देखा और न hi उनसे कुछ कहा बस हाथ जोड़ दिए थे. दिव्या मौसी अपने कमरे में चली गयी और मैं राधा क साथ हॉल में hi बैठ गया. राधा खुद hi मेरे लिए पानी ले आयी और चाय का पूछने लगी तो मैंने मन कर दिया. दिव्या मौसी अपने कमरे से बहार नहीं आयी और न hi मैं उनकी तरफ गया . मैं और राधा कुछ देर बातें करते रहे इतने में कल्पना भी आ गयी .

कल्पना : मैं लेट तो नहीं हुई ज्यादा ?

राधा : बिलकुल नहीं आओ बैठो

कल्पना : आंटी नज़र नहीं आ रहे ?

राधा : माँ अंदर आराम कर रही है

कल्पना : मैं अभी आंटी से मिलकर आयी .

कल्पना दिव्या मौसी से मिलने उनके रूम में चली गयी और पीछे हम दोनों hi रह गए

राधा : तुम माँ से बात नहीं करोगे ?

अमित : तुमने देखा नहीं क वो मुझे देखना भी पसंद नहीं करती. अगर तुम साथ न होती तो शायद दरवाज़े से hi वापिस भेज देती.

राधा : ऐसा नहीं है अमित . बिलीव में वो तुमसे बहुत प्यार करती हैं अब मैं तुम्हे कैसे समझों

राधा ( मन में ) माँ तो खुद दुखी होती हैं तुम्हारे साथ ऐसा कर क. पर नहीं क्या राज़ वो अपने साइन में दबाये बैठी हैं. प्लीज तुम उनसे बात कर क उनको समझने की कोशिश तो करो.

अमित : क्या करूँ राधा मैं कितना भी कोशिश क्यों न करूँ जब भी वो सामने आती हैं तो उनको देख कर हिम्मत नहीं होती

कल्पना : किसकी हिम्मत नहीं होती और किस बात क लिए हिम्मत चाहिए ज़रा मुझे भी बताओ. आप दोनों बहार बैठे और आंटी को अंदर छोड़ दिया अकेले बोर होने क लिए

कल्पना दिव्या मौसी क रूम से बहार आयी तो दिव्या मौसी भी कल्पना क साथ hi बहार आयी थी . मैंने दिव्या मौसी को देखा तो वो भी मुझे hi देख रही थी . एक पल क लिए हमारी नज़रें मिली तो मैंने जल्दी से मुँह फेर लिया और अपनी जगह से खड़ा हो कर बहार जाने लगा.

‘ कहाँ जा रहे हो ? चुप चाप बैठो यहाँ मैं कुछ खाने को बनती हूँ ‘

ये आवाज़ दिव्या मौसी की थी जिन्होंने मुझे बहार जाता देख कर पीछे से आवाज़ लगायी. मैंने पलट कर देखा तो उनके चेहरे पर गुस्सा नहीं था. मुझे समझ नहीं आया क वो किस मूड में हैं क्यूंकि उनके चेहरे से न गुस्सा नज़र आ रहा था न ख़ुशी .

दिव्या मौसी : सुना नहीं तुमने चलो बैठो दोनों क साथ . मैं कुछ खाने को बनती हूँ.

दिव्या मौसी ने फिर से मुझे बैठने को कहा तो मैं आर्डर मंटा हुआ चुपचाप राधा क पास चला गया. राधा क होंठों पर दबी दबी मुस्कान थी जैसे वो अंदर से खुश हो रही हो जबकि कल्पना चुपचाप देख रही थी. दिव्या मौसी किचन में चली गयी और मैं सोफे पर बैठ गया

कल्पना : ये क्या सन है मुझे भी तो बताओ. आंटी तुम्हे ऐसे बैठने को बोल रही हैं और तुम भी चुप हो बात क्या है?

राधा : ऐसा कुछ नहीं है . एक तो ये अत काम है ऊपर से जल्दी होती है इसे जाने की . माँ ने आज खीर बना क राखी है इसके लिए और ये बिना कहते भाग रहा था

मैं राधा की बात सुन कर शॉकेड हो गया.

राधा : ऐसे क्या देख रहे हो? अभी तुम्हारे सामने आ जायेगा सब कुछ .

कल्पना : वो खीर बनायीं है आंटी ने , मज़ा आएगा . बहुत दिन हुए खीर खाये .

राधा : तुम दोनों बैठो मैं ज़रा देख कर आयी माँ को ज़रूरत तो नहीं.

राधा किचन में चली गयी और मैं अभी भी जो उसने कहा उसके बारे में hi सोच रहा था. दिव्या मौसी तो मुझसे हमेशा गुस्सा रहती हैं फिर वो भला मेरे लिए खीर क्यों बनाएंगी?

कल्पना : तुम क्यों चुप हो ? लगता है कोई बात तो है जो तुम बता नहीं रहे.

अमित : नहीं ऐसा कुछ नहीं है . दरअसल मुझे गाओं क लिए निकलना है तो मैं जल्दी निकलना चाहता था.

कल्पना : अभी कोई ज्यादा टाइम तो नहीं हुआ ी वैसे. और बताओ टेस्ट तो ख़त्म हो गए अब आगे क्या सन है?

अमित : अब बस स्टेडियम में प्रैक्टिस और क्या. अब तो कम्पटीशन आने वाले हैं हमारे पास तीन हफ्ते hi तो हैं बस

कल्पना : या यू अरे राइट. वैसे अब तो टेस्ट हो गए तो क्या तुम मेरे घर आ सकते हो किसी दिन. मैं तुम्हे पापा से मिलवाना चाहती हूँ .

अमित : पापा से ? मगर वो क्यों?

कल्पना : अरे वैसे hi मिलवा ा है और कुछ नहीं. मैंने तुम्हारे बारे में बताया था तो कह रहे थे क मैं किसी दिन तुम्हे घर पर ले के आऊं. वो भी स्पोर्ट्स को पसंद करते हैं इस लिए . वैसे भी आज तक किसी लड़के की मैंने तारीफ जो नहीं की तो इस लिए तुमसे मिलना चाहते हैं.

अमित : ठीक है किसी दिन मिल लेंगे फ़िलहाल तो गाओं जाना है आज.

हम बातें कर रहे थे क राधा हमारे लिए खीर ले आयी और साथ में गरमा गरम माल पड़े भी थे . एक निवाला कहते hi मेरी तो रूह खुश हो गयी. आज तक इतने टेस्टी खीर माल पड़े मैंने कभी नहीं खाये थे. मुझे बचपन से hi खीर माल पड़े बहुत पसंद थे. देखते hi देखते मैंने कटोरी खली करदी जबकि कल्पना और राधा मुझे देख रही थी.

अमित : ऐसे क्या देख रही हो तुम दोनों?

कल्पना : देख रही हूँ क तुम कुछ ज्यादा hi भूखे थे शायद ?

राधा : ऐसा नहीं है , असल में ये अमित की फेवरेट आइटम है इस लिए ऐसे खा रहा है और मेरी माँ से अचे खीर मालपूड़े और कोई नहीं बना सकता.

अमित : राधा प्लीज यार क्या और मिलेगा मुझे.

राधा : ज़रूर , मैं अभी लायी .

राधा उठ कर किचन में गयी तो दिव्या मौसी दरवाज़े पर hi कड़ी शायद देख रही थी.

राधा : माँ आपकी आँखों में आंसू ?

दिव्या : कुछ नहीं वो आँख में कुछ चला गया था. क्या कह रहा है वो ?

राधा : इसे बहुत पसंद आयी खीर और पड़े

दिव्या : आएँगी उसकी पसंद क जो हैं. बोल दे उसे खाने है और तो खा ले.

राधा : आप सुन रही थी न सब वो क्या कह रहा है ? लाइए मैं उसे देकर आती हूँ.

राधा जानती थी क उसकी माँ अमित को अंदर से कितना चाहती है बस ऊपर से दिखती नहीं है. राधा जल्दी से अमित क लिए खीर और पड़े ले गयी और दिव्या फिर से दरवाज़े क पीछे से देखने लगी.

इधर मैं खीर और पड़े क सवाद में इतना खो गया था क मैं पेट भरने तक खरा रहा और फिर भी नियत नहीं भरी. कल्पना को भी स्वादिष्ट लगा था तो वो भी खा गयी . कल्पना तो मेरा मज़ाक बना रही थी जबकि राधा खुश थी मुझे ऐसे देख कर. हम दोनों अभी खा hi रहे थे क मेरा फ़ोन बजने लगा. मैंने देखा तो कामिनी ममी का फ़ोन था. मैंने फ़ोन उठाया

कामिनी ममी : अमित कहाँ हो जल्दी आओ दीपिका की तबियत बिगड़ रही है . उसे शहर ले कर जाना पड़ेगा डॉक्टर क पास

अमित: मैं अभी आया

दीपिका ममी की तबियत क बारे में सुनते hi मेरा दिमाग घूम गया. वो अब माँ बनने क करीब थी और अचानक उनकी तबियत बिगड़ गयी . मेरे पाऊँ क नीचे से ज़मीन निकल गयी. मैंने और कोई बात नहीं सुनी और फ़ोन काट कर जल्दी से उठ गया . मेरे चेहरे पर परेशानी देख कर राधा और कल्पना भी परेशां होने लगी .

राधा : क्या हुआ ? किसका फ़ोन था?

अमित : दीपिका ममी की तबियत बिगड़ गयी है उन्हें हॉस्पिटल ले जाना पड़ेगा. मैं अभी मोहित को फ़ोन करता हूँ.

मैंने जेब से फ़ोन निकला मोहित को कॉल करने क लिए .

कल्पना : मोहित को क्यों कॉल कर रहे हो?

अमित : ममी को गाओं से कार में लाना पड़ेगा न

कल्पना : तो इसके लिए उसे फ़ोन करने की क्या ज़रूरत है? मेरे पास भी तो कार है चलो मैं चलती हूँ तुम्हारे साथ.

अमित: मगर तुम कैसे ......

कल्पना : टाइम वास्ते मत करो , पता नहीं मोहित भी कहीं बिजी हुआ तो ? या ऐसे भी मुझे कोई खास काम तो है नहीं चलो अब जल्दी.

कल्पना की बात सही थी मोहित तो आज मीनल क साथ था तो मैंने कल्पना की बात मन्ना hi ठीक समझा . दिव्या मौसी ने भी शायद हमारी बात सुन ली थी और वो भी हमारे पास आ गयी थी.

दिव्या मौसी : दोनों ध्यान से जाना

कल्पना : don’t वोर्री आंटी जी कुछ नहीं होगा.



कल्पना को दिव्या मौसी ने आशीर्वाद दिया और हम दोनों जल्दी से कार में बैठ कर गाओं क लिए निकल पड़े.
 
अपडेट 122



कल्पना ने हालत को देखते हुए गाडी को फुल स्पीड में चलाया , मैं रास्ता बताता गया और जल्द hi हम घर पहुँच गए. मुझे दीपिका ममी की बहुत फ़िक्र हो रही थी और दिल में अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे. कल्पना ने मेरी हालत को समझते हुए मुझे होंसला रखने को कहा. जैसे hi हम घर पहुंचे तो बाबा अजय मां और कमलेश मां भी घर पर hi थे गाओं का छोटा डॉ दीपिका ममी को चेक कर रहा था. कामिनी ममी और गौरी ममी भी टेंशन में थी. मैं भागता हुआ सीधा दीपिका ममी क कमरे में गया जहाँ तीनो ममी और कमलेश मां डॉ क साथ मौजूद थे. दीपिका ममी दर्द से कराह रही थी और डॉ उनका निरिक्षण कर रहा था. मुझे आया देख कर दीपिका ममी क चेहरे पर दर्द में भी एक पल क लिए ख़ुशी क भाव ए मगर वो फिर से कराहने लगी.

डॉ : देखिये भाई साहब उन्हें हॉस्पिटल ले जाइये जल्द से जल्द. ये मेरे बस क बहार है.

इतना कह कर डॉ उठ गया और कमलेश मां उससे बात करते हुए बहार निकल गए.

गौरी ममी : तुम आ गए अमित , देख छोटी की क्या हालत हो रही है . कल से इसे दर्द हो रही थी और आज तू कुछ ज्यादा hi बाद गयी है.

अमित : आप ने मुझे पहले क्यों नहीं बताया .

कामिनी ममी : तुम्हारे टेस्ट चल रहे थे न इस लिए नहीं बताया था. अब तुम आ गए हो तो मैं ठीक हो जाउंगी.

अमित : चलिए अब पहले हॉस्पिटल चलते हैं बाकि बातें बाद में

गौरी ममी : बीटा ऐसे कैसे ले के जायेंगे ? कार या एम्बुलेंस चाहिए

कल्पना : कार बहार कड़ी है आप जल्दी कीजिये . नमस्ते आंटी

गौरी ममी : बीटा तुम यहाँ ?

कल्पना : जब आपका फ़ोन आया था तो मैं और अमित राधा क घर hi थे . मेरे प् कार थी तो हम साथ चले आये

गौरी ममी : ये ाचा किया चलो अब जल्दी करो

मैंने गौरी ममी की मदद से दीपिका ममी को कार में बैठाया . बाबा और कमलेश मां अजय मां कल्पना को देख रहे थे और उसकी बड़ी कार को भी. दीपिका ममी क साथ गौरी ममी पीछे की सीट पर बैठ गयी. गौरी ममी ने मुझे आगे बैठने को कहा और कमलेश मां और बाबा को बाइक पर पीछे आने को कहा. कामिनी ममी भी पेट सी थी तो उन्हें घर hi रुकने को कहा और उनके साथ अजय मां रुके. कल्पना ने संभल कर चलते हुए जल्दी से शहर में उस हॉस्पिटल तक पहुंचा दिया जहाँ पर ममी पहले भी डॉ क पास चेकउप क लिए आती थी. दीपिका ममी से दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था , डॉ ने जल्दी से उन्हें िक में दाल दिया .

डॉ : आप सब बहार बैठिये हम आपको बताते हैं और आप में से प्लीज कोई एक जाकर फॉर्म भर दीजिये.

मैं लगातार टेंशन में था क्यूंकि दीपिका ममी मेरे hi बचे की तो माँ बनने वाली थी. ये एक अलग सी फीलिंग थी पर मुझे दीपिका ममी को दर्द में देख कर ाचा नहीं लग रहा था . कल्पना मुझे होंसला देती हुई फॉर्म भरने क लिए ले गयी . जब फॉर्म भर कर वापिस आये तब तक मां भी आ चुके थे और रजनी मौसी रीता मौसी और दिव्या मौसी क फ़ोन भी आ रहे थे . कुछ देर बाद डॉ बहार आया तो सब ने उसे घेर लिया

डॉ : देखिये घबराइए मत हम संभल लेंगे , असल में बचा टाइम से 2 दिन ऊपर हो गया है तो अब जल्दी से ऑपरेशन करना पड़ेगा वर्ण माँ बचे दोनों की जान खतरे में पद जाएगी .

कमलेश : डॉ प्लीज कैसे भी कर क बचे को बचा लीजिये

मुझे मां की ये बात सुन कर गुस्सा चढ़ गया. उन्हें सिर्फ बचे की पड़ी थी और ममी की कोई परवाह नहीं थी मगर मैंने उन्हें क्या क्या कहता

अमित : डॉ प्लीज माँ और बचा दोनों को बचा लीजिये. दोनों hi हमारे लिए ज़रूरी हैं .

डॉ : ी विल दो माय बेस्ट भगवन पर भरोसा रखिये . मई ी लीव नाउ एक्सक्यूज़ में

डॉ हमें छोड़ कर निकल लिए शायद ऑपरेशन की तयारी करनी थी उन्हें. गौरी ममी मुझे hi देख रही थी और मैं बस दीपिका ममी क बारे में hi सोच रहा था. कल्पना भी मेरे साथ बैठी थी . थोड़ी देर में hi ऑपरेशन शुरू हो गया . ऑपरेशन कोई 2-3 घंटे चला और तब तक हम बहार hi बेचैन खड़े रहे. ऑपरेशन पूरा होने से पहले रजनी मौसी निधि दीदी रीता मौसी नेहा दीदी और दिव्या मौसी राधा को लेकर हॉस्पिटल पहुँच गयी.

रजनी मौसी : कैसी है दीपिका ?

गौरी ममी : ऑपरेशन चल रहा है अंदर .

रीता मौसी : भगवन सब ठीक करेगा. इतने सैलून बाद हमारे घर में खुशियां आने वाली हैं , सब ाचा hi होगा.

दिव्या मौसी : भगवन सब ठीक करेगा दीदी.

नेहा दीदी तो कल्पना को जानती थी और उन्होंने निधि दीदी को भी कल्पना से मिलवा दिया. मुझे टेंशन में देख कर निधि दीदी मेरे पास आ गयी और मुझे होंसला देने लगी.

निधि दीदी : तुझे क्या हुआ ? इतनी टेंशन में क्यों हो? देखना सब ठीक होगा और जल्द hi ममी एक सुन्दर से बेटे को जन्म देगी . इतने टेंशन मत लो डॉ हैं न यहाँ पर. तू ऐसे बिलकुल भी ाचा नहीं लगता . वैसे ये लड़की तेरी गफ है क्या ? देखने में अछि है और नेचर की भी ठीक लग रही है ?

अमित : नहीं दीदी वो जस्ट मेरी फ्रेंड है . हम दोनों एक hi क्लास में हैं और आप आयी मुझे ाचा लगा. नैना दीदी और कारन भैया नहीं ए ?

निधि दीदी : नैना करुणा क साथ है घर पर. करुणा को चोट लग गयी थी तो वो नैना क पास hi आराम कर रही है और कारन अपने फ्रेंड्स क साथ कहीं गया हुआ था इस लिए मैं माँ को ले आयी. वैसे अगर तू कहे तो मैं बात करूँ कल्पना से अगर तू शर्मा रहा है तो?

अमित : क्या दीदी आप भी , वो मेरी अछि दोस्त है बस.

निधि दीदी : तू ाचा है और तेरी दोस्त भी अछि है. अगर मेरे प्यारे भाई को अछि गफ मिलेगी तो मुझे भी ाचा लगेगा. ाचा अब टेंशन छोड़ सब यहीं हैं और देख लेना सब ाचा hi होगा.

निधि दीदी सबसे अछि थी क्यूंकि वो सबसे बड़े थी और सब से ज्यादा समझदार भी थी. मुझे उनका यही केयर करना ाचा लगता था. दीदी ने अपनी बातों से मेरा मूड कुछ ठीक कर दिया था. आख़िरकार डॉ ऑपरेशन रूम से बहार आया और उसने सबको खुशखबरी सुनाई

अमित : डॉ जल्दी बताइये ममी कैसी है

कमलेश मां : क्या हुआ बीटा या बेटी ?

डॉ : रीलैक्स सब ठीक है , मुबारक हो लड़का हुआ है और दोनों माँ बीटा ठीक हैं .

डॉ क ऐसा कहते Hi मेरी ख़ुशी का ठिकाना न रहा . मेरा दिल किया क अभी डॉ को उठा कर नाचने लागूं और ऐसा hi कुछ हल मां का भी था . बाकि सब क चेहरों पर भी ख़ुशी झलक रही थी.

कमलेश मां : सुना भैया सुना भाभी मैं बाप बन गया . दीपिका ने बेटे को जनम दिया है. हमारे वारिस को जनम दिया है. मैं बाप बन गया .

निधि दीदी जो मेरे पास कड़ी थी मुझे पता hi नहीं चला कब मैं उन्हें ख़ुशी से उठा कर झूमने लगा .

निधि दीदी : अरे बस बस गिरायेगा क्या मुझे? सबसे ज्यादा ख़ुशी तो तुझे हो रही है.

अमित : बात hi ख़ुशी की है न दीदी. हमारे घर नंगा मेहमान आ गया .

गौरी ममी : और ये सब तेरी वजह से hi हुआ है.

रजनी मौसी : क्या मतलब ?

गौरी ममी : मेरा मतलब है अमित ने सच्चे दिल से जो दुआएं मांगी थी न उसी की वजह से दीपिका माँ बानी है और देख लेना कामिनी भी जल्दी hi एक सुन्दर से बेटे को जनम देगी.

रीता मौसी : ये आपने सही कहा भाभी अमित को भी बधाई देनी चाहिए इसके लिए. कामिनी भाभी तो बहुत खुश हैं और ज़रूर वो भी बेटे को hi जनम देंगी.

रीता मौसी ने बात करते हुए आँखों hi आँखों में मुझे इशारा किया जिसका मतलब मैं समझ रहा था . मैंने दीपिका ममी से मिलने का पूछा तो डॉ ने बताया क अभी वो बेहोश हैं और एक घंटे क बाद उन्हें होश आएगा और लड़के को भी एहतियात क तौर पर मशीन में रखा गया था. हर कोई इस मोके पर खुश था इतने सैलून बाद हो घर में कोई बचा पैदा हुआ था और देखा जाये तो मां लोगों में पहली औलाद थी . चाहे वो बचा मेरा था पर दुनिया की नज़र में तो मां का hi था न. मां सब से ज्यादा खुश थे और तीनो मौसियां भी काम नहीं थी. हमारी ख़ुशी में कल्पना भी शरीक हुई और राधा क साथ उसने भी मुझे मुबारकबाद दी. मां और बाबा जल्दी से मिठाई लेन क लिए चले गए और जैसे hi दीपिका ममी को होश आया तो नर्स ने हमें मिलने की इजाज़त दे दी. सबसे पहले गौरी ममी और रजनी मौसी गयी और उसके बाद रीता मौसी क साथ दिव्या मौसी . फिर निधि दीदी क साथ मैं भी अंदर गया . दीपिका ममी बीएड पर लेती थी और उनकी ऑंखें अभी भी बेहोशी जैसी hi थी. बॉडी पर हॉस्पिटल क कपडे थे. मुझे देखते hi दीपिका ममी क चेहरे पर ख़ुशी आ गयी और आँखों में आंसू.

अमित : अरे अरे आप रो क्यों रही हैं ? आप को तो खुश होना चाहिए . आज आप माँ बन गयी हैं .

दीपिका ममी : ये तो ख़ुशी क आंसू हैं. मैं आज बहुत खुश हूँ . ऐसा लग रहा है जैसे ज़िन्दगी क सरे दुःख आज दूर हो गए. और ये सब तेरी ...

दीपिका ममी भावनाओं में बहकर कुछ कहने वाली थी मगर फिर उन्हें निधि दीदी का ख्याल आया और उन्होंने कहते कहते बात बदल दी

दीपिका ममी : ये सब तेरी दुआओं की वजह से हुआ है.

निधि दीदी : बड़ी ममी भी यही कह रहीं थी ममी जी क ये सब इसकी दुआओं की वजह से हुआ है. सच में कितना ाचा है मेरा छोटा भाई हर कोई इसकी तारीफ करता है. वैसे खान है हमारा छोटा भाई?

दीपिका ममी : नर्स लेने गयी है अभी आती hi होगी.

इतने में नर्स बचे को ले आयी और दीपिका ममी ने बचे को गॉड में ले लिया और फिर से उनकी आँखों में आंसू आ गए . दीपिका ममी बच्चे को बेतहाशा चूमने लगी. और फिर भरी आँखों से मुझे देखने लगी .

निधि दीदी : लाओ ममी मैं भी ज़रा देखूं अपने भाई को.

दीपिका ममी : बुरा न मन्ना निधि पर मैं चाहती हूँ क पहली बार इसे अमित hi अपनी गॉड में ले. मैं चाहती हूँ मेरा बचा अमित क जैसा hi बने .

निधि दीदी : ये तो आपने बहुत अछि बात कही ममी जी. देख क्या रहा है चल पकड़

निधि दीदी ने मुझे आगे करते हुए कहा. मैंने जैसे hi बचे को अपनी गॉड में लिया तो उसे देख कर मेरी आँखों में आंसू आ गए. कितना छोटा सा और रुई की तरह कोमल था . ऑंखें बंद किये वो कितना मासूम सा लग रहा था. मेरा रोम रोम पुलकित हो उठा था . एक ऐसी ख़ुशी का एहसास मुझे अपने अंदर हो रहा था जो कभी नहीं हुआ था. मेरी आँखों में आंसू देख कर निधि दीदी ने मेरे आंसू साफ किये.

निधि दीदी : रोटा क्यों है भाई? देख अब ये तेरा छोटा भाई है तो इसे अपने जैसा बनाना तुम.

मैंने बचे को चुम लिया और अपने सीने से लगते हुए कहा .

अमित : मैं इसे अपने जैसा बनाऊंगा दीदी . इसे कभी किसी चीज़ की कमी नहीं होने दूंगा.

इतने में कमलेश मां भी अंदर आ गए और बचे को अपनी गॉड में ले लिया. मैं खुद को सँभालते हुए बहार चला गया और सब लोग बरी बरी से अंदर जा कर बचे को देखने लगे जबकि मैं भी क तरफ जा कर अपने आप को सँभालने की कोशिश करने लगा . राधा और कल्पना मेरे पास आ गयी .

राधा : क्या हुआ तुम यहाँ अकेले क्यों खड़े हो ?

अमित : कुछ नहीं बस ऐसे hi. सब कितने खुश हैं न? इतने सैलून बाद घर में बचे की किलकारियां गूंजेंगी .

राधा : सही कहा , मां ममी कितने खुश हैं.

कल्पना : क्या यार तुम लोग भी कितने साद बातें कर रहे हो. आज ख़ुशी का मौका है अब तो पार्टी होनी चाहिए .

अमित : हाँ बिलकुल , पर पहले ममी और बचा घर आ जाएँ फिर.

गौरी ममी : ये लो मुँह मीठा करो और बचे का नाम क्या रखना है वो सोचो .

गौरी ममी मिठाई का डिब्बा ले कर हमारे पास आ गयी थी और मुझे देखते हुए बचे का नाम नहीं रखने को कह रही थी.

सब अपनी तरफ से नाम सुग्गेस्ट करने लगे . हर कोई खुश था और ख़ुशी बर्दाश्त से बहार थी आज. नैना दीदी करुणा दीदी का भी फ़ोन आया और उन्होंने मुझसे भी बात की इसके इलावा मोहित से भी मेरी बात हुई फ़ोन पर . कुछ देर बाद कल्पना वापिस चली गयी क्यूंकि टाइम बहुत हो रहा था. उसके भी घर से शायद फ़ोन आ गया था. जाते जाते उसने कह दिया क किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो तो मैं उसे फ़ोन कर सकता हूँ.

हॉस्पिटल स्टाफ ने बताया क दीपिका ममी को रूम में शिफ्ट कर दिया जायेगा और रत में उनके साथ कोई एक जान रुक सकता है. क्यूंकि रूम में एक एक्स्ट्रा छोटा बीएड था जिस पर एक hi आदमी सो सकता था. रत रुकने की ज़िम्मेदारी गौरी ममी ने अपने ऊपर ले ली . मगर हॉस्पिटल में सिर्फ औरतों को अकेले छोड़ने को कोई राज़ी नहीं था. इस लिए गौरी नमी ने मुझे अपने साथ रुकने को कह दिया. इतनी रत को गाओं जाना सही न था तो बाबा और कमलेश मां दिव्या मौसी और राधा क साथ उनके घर चले गए . रीता मौसी और रजनी मौसी भी नेहा दीदी और निधि क साथ घर चली गयी. रत का खाना दिव्या मौसी क घर से hi आने वाला था. कुछ देर में hi सब वापिस चले गए और रत का खाना ले कर कमलेश मां एक बार फिर वापिस आये . मैंने दीपिका ममी और गौरी ममी ने खाना खाया और मां वापिस चले गए . अब रत को सोने का मसला था . रूम में एक hi एक्स्ट्रा बीएड था और वो भी छोटा था . जब रत को डॉ चक्कर लगा कर चले गए और दीपिका ममी भी दवा क असर से सो गयी तो मैंने गौरी ममी को बीएड पर सो जाने को कहा.

अमित : माँ आप बीएड पर सो जाओ और मैं नीचे लेट जाता हूँ

गौरी ममी : ऐसे कैसे तू जमीन पर पेट जायेगा . चल यहाँ चुप चाप लेट जा. हम दोनों साथ में लेट जाते हैं . करवट क बल लेटेंगे तो जगह बन जाएगी.

अमित : नहीं माँ ऐसे मुश्किल होगी . दोनों को hi नींद नहीं आएगी आप आराम करो मैं नीचे सौता हूँ

गौरी ममी: तो ठीक है मैं नीचे सो जाती हूँ मगर तुझे मैं नीचे नहीं सोने दूँगी

अमित : ाचा ठीक है मैं ऊपर hi सो जाता हूँ मगर आप भी नीचे नहीं सोयेंगी

गौरी ममी : ठीक है चल अब लेट जा

अमित : आप लेटिए मैं ज़रा बहार एक चक्कर लगा कर आया .

गौरी ममी : कहाँ जा रहा है?

अमित : ऐसे hi ज़रा सैर कर क आया .

गौरी ममी : जल्दी आना

मैं रूम से बहार निकल गया और सैर करता हुआ हॉस्पिटल से बहार चला आया . असल में मैं बहार इस लिए आया था क मैं ये खुश खबरि मंजू मम को देना चाहता था. मैंने सबको बता दिया था लेकिन उनसे बात नहीं हुई थी जबकि मोहित क मम्मी पापा का भी फ़ोन आ गया था . मैंने मंजू मम को फ़ोन किया तो 2-3 बेल्ल क बाद मम ने फ़ोन उठा लिया.

मंजू म : आ गयी यद् ? मुझे तो लगा था भूल गए ? आज जाने से पहले मिले भी नहीं और न hi फ़ोन किया सारा दिन.

अमित : अरे रुकिए रुकिए एक साथ इतने सवाल ? मैं गया hi कहाँ ? मैं तो यहीं हूँ . और रही बात यद् आने की तो आपको भूल hi नहीं सकता कभी. अब मेरी बात सुनिए . एक खुश खबरि है मेरे पास

मंजू म : तुम यहीं हो और मिलने भी नहीं ए ? कैसी खुश खबरि है जल्दी बताओ?

अमित : मेरी छोटी ममी को बीटा हुआ है और उनके साथ hi यहाँ हॉस्पिटल में हूँ मैं .

मंजू म : ये तो बहुत अछि खुश खबरि है कोंग्रटुलतिओन्स. मैं अभी आती हूँ मुझे हॉस्पिटल का पता बताओ.

अमित: नहीं अभी कहाँ आएँगी आप ? आप कल आना आराम से. मैं आपको एड्रेस भेज देता हूँ.

मंजू म : तुम वहां अकेले हो ? मैं आ जाती हूँ न तुम्हारी ममी की देख भल हो जाएगी.

अमित : नहीं माँ है मेरे साथ यहाँ . आप बस अभी आराम करो थकी होंगी आप टेस्ट चेक कर क.

मंजू म : ठीक है , कल संडे है और कल मुझे कोई काम भी नहीं तो मैं कल आ रही हूँ तुमसे मिलने . इसी बहाने तुम्हारी फॅमिली से भी मिल लुंगी.

अमित : ठीक है . अब आराम कीजिये गुड नाईट

मंजू म : गुड नाईट ी लव यू सो मच मुआअह

अमित : लव यू 2 गुड नाईट

उसके बाद मैं वापिस रूम में आ गया . गौरी ममी करवट क बल लेती हुई थी और दीपिका ममी भी सो रही थी. मैंने ज़ीरो का बल्ब ों किया और बड़ी लाइट बंद कर दी

गौरी ममी : तुम आ गए ? आ जाओ यहाँ मेरे पास.

मैं अपने जुटे उतर कर गौरी ममी क साथ लेट गया. मैंने उनकी तरफ अपनी पीठ की तो वो बोली

गौरी ममी : मुझसे नाराज़ हो क्या ?

अमित : नहीं तो आप ऐसा क्यों कह रही हैं?

गौरी ममी : फिर मेरी तरफ मुँह करो न . वैसे भी मुझे अभी नींद नहीं आ रही कुछ देर तुमसे बात करने को मन है.

मैंने करवट बदली और अब मेरा फेस गौरी ममी की तरफ था .

अमित: कहिये क्या बात करनी है?

गौरी ममी : दीपिका का बीटा कितना प्यारा है न ?

अमित : जी वो बहुत प्यारा है . बिलकुल ममी पर गया है .

गौरी ममी : मुझे तो वो तुम जैसा लग रहा है.

माँ की ये बात सुनते hi मैं शॉकेड हो गया. मुझे दर लगने लगा कहीं माँ को कुछ पता तो नहीं चल गया.

अमित: नहीं आपको गलती हो रही है . वो मुझ जैसा क्यों दिखेगा ?

गौरी ममी : वो इस लिए क दीपिका तुम्हे hi यद् करती रहती थी न , तो बचा भी तुम्हारे जैसा है. वैसे मैं चाहती हूँ मेरा बचा भी तुम्हारे जैसा hi हो.

गौरी ममी की इस बात से मैं हिल गया. क्यूंकि जिस बात को मैं जानते हुए भी अनजान बन रहा था और भूल जाना चाहता था आज वही बात वो खुद बोल रही थी . हम दोनों hi जानते थे क उनके पेट में मेरा बचा है और ये गलत भी था मगर उन्होंने बचा गिराने की बजाये रखा था और अब उनका ये जवाब बहुत कुछ कह रहा था.

अमित : मुझे नींद आ रही है माँ आज कुछ ज्यादा hi थक गया हूँ आप भी सो जाइये .

गौरी ममी : ठीक है अगर तुझे बात नहीं करनी तो सो जा.

मैं बात को बढ़ाना नहीं चाहता था इस लिए बिना जवाब दिए ऑंखें बंद कर क सोने की कोशिश करने लगा मगर मुझे नींद नहीं आ रही थी. फिर मेरे दिमाग में दीपिका ममी की कही हुई बातें घूमने लगी क माँ भी मुझसे वैसा hi प्यार चाहती हैं जैसा मैं दीपिका ममी और कामिनी ममी से करता हूँ और उस दिन माँ क साथ अनजाने में हुई घटना यद् आने लगी. अभी की बातों को जोड़ कर मुझे शक होने लगा कहीं सच में माँ मुझसे वो सब तो नहीं चाहती ? ये बात मेरे दिमाग में आते hi मेरा दिमाग घूमने लगा. मैं कैसे उनके साथ वो सब कर सकता हूँ. उन्होंने बचपन से मुझे अपने बेटे की तरह पला था और सच बात ये भी थी क मेरे माता पिता क बारे में पता चलने से पहले तक मैं उन्हें अपनी माँ मंटा था. अनजाने में उनकी जान बचने की खातिर मैंने उनके साथ शारीरिक सम्बन्ध बना ज़रूर लिए थे पर ये भी मेरी आत्मा पर एक बोझ की तरह था. ऐसे में उनके साथ सब कुछ जानते बुझते मैं कैसे कर सकता था. मैं ऑंखें बंद किये यही सब सोचता रहा. हम दोनों एक दूसरे से सत्कार लेते हुए थे जिससे मुझे उनका कोमल बदन अपने साथ सत्ता हुआ महसूस हो रहा था. उनके बड़े बड़े उभर मेरे साइन से लग हुए थे और उनकी सांसों की महक मेरी सांसों में घुल रही थी. रूम में एक होने की वजह से थोड़ी ठंडक भी थी . मैं सोचते सोचते पर नहीं कब सो गया और फिर मेरी बात बचे क रोने की आवाज़ से खुली . मैंने जैसे hi आँखें खोली तो मैं देख कर हैरान रह गया. गौरी ममी की सदी का पल्लू उनके साइन से हटा हुआ था और ब्लाउज क ऊपर क 2 बटन खुले हुए थे जिसमे से उनके स्तन आधे से ज्यादा नुमाया हो रहे थे और मेरे चेहरे क इतने करीब थे जैसे मेरा चेहरा वहीँ पर रहा हो रत भर. मैंने देखा तो वो आराम से सो रही थी. मैंने उठने की कोशिश की तो मुझे अपने ऊपर उनकी तंग महसूस हुई. मैंने उनकी तंग को हटाने की कोशिश की तो मुझे एक और झटका लगा. उनकी सदी उनकी कमर तक छड़ी हुई थी और मेरा हाथ अब उनकी नंगी जांघ पर था. मैंने कंपते हाथों से उनकी तंग को अपने ऊपर से हटाया और जैसे hi पलट कर बीएड से निचे खिसका तो देखा दीपिका ममी बचे को सीने से लगाए उसे दूध पीला रही थी. मुझे देखते hi उनके चेहरे पर शरारती स्माइल आ गयी . उन्हें देख कर लग रहा था जैसे वो पहले से hi सब माजरा देख रही हो.

दीपिका ममी : उठ गए जनाब ? देखो तुम्हारे बेटे ने सुबह सुबह जगह दिया . वैसे दोनों बाप बेटे एक जैसे hi हो. ये भी अपनी माँ क साइन से मुँह लगाए हुए था और इसके पापा भी.

अमित : ये .. ये .. ये आप क्या कह रही हैं

दीपिका ममी : ये आप आप क्या लगा रखा है? यहाँ और कौन है ? तुम मैं और हमारा बीटा hi तो हैं. दीदी तो सो रही हैं. आओ तुम भी अपने बेटे को प्यार कर लो.

अमित : धीरे बोलिये अगर माँ ने सुन लिया तो?

दीपिका ममी : तो क्या ? देखा नहीं वो भी तुम्हे अपना दूध पिलाना चाहती हैं और तुम हो क उन्हें सत्ता रहे हो. ये कोई अछि बात है क्या? तुमसे ाचा तो तुम्हारा बीटा है अपना हक़ कैसे लिया जाता है इससे पूछो .

अमित: ये आप कैसी बातें कर रही हैं?

दीपिका ममी : बिलकुल ठीक कह रही हूँ मैं. मैंने पहले भी तुमसे कहा था मगर तुम जान बुझ कर समझना नहीं चाहते . अब अपनी आँखों से देख कर भी यकीन नहीं हो रहा क्या? मेरी बात मनो और समझने की कोशिश करो दीदी की तड़प को. वो तुमसे प्यार चाहती हैं . मत भूलो क उनके पेट में भी तुम्हारा hi बचा है जिसे तुम्हारी ज़रूरत है.

अमित : नहीं ये गलत है , माँ नींद में ऐसे सो रही है और कुछ नहीं है . आप यूँ hi बातें बना रही हैं.

दीपिका ममी : तुम कब समझोगे? दीदी कब से तड़प रही हैं तुम्हारे प्यार क लिए. अपने दिल से पूछो क्या तुम्हे महसूस नहीं हो रहा उनका प्यार? उनकी तड़प ?

अमित : मैंने पहले भी कहा था मुझे इस बारे में बात नहीं करनी . आप कुछ लेंगी ? मैं बहार से ले अत हूँ.

दीपिका ममी : नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए और तुम भी आराम से बैठ जाओ अभी टाइम hi क्या हुआ है .

अमित : नहीं मैं ज़रा बहार से घूम कर अत हूँ.

इतना कह कर मैं रूम से बहार निकल गया और मेरे जाते hi दीपिका ने गौरी को आवाज़ दी

दीपिका : दीदी उठ जाइये अमित बहार गया है. मैं जानती हूँ आप भी जग रही हैं.

दीपिका कनिटने कहते hi गौरी ने भी ऑंखें खोल ली.

गौरी : तुम्हे पता था मैं कह रही हूँ ?

दीपिका : मैं उससे बात करते हुए आपको भी देख रही थी.

गौरी : तुझे क्या ज़रूरत थी उससे ये सब कहने की? चला गया न गुस्सा हो कर .

दीपिका : कहीं नहीं गया है अभी आ जायेगा वापिस . और मैं बात नहीं करुँगी तो कौन करेगा ? कब तक ऐसे hi आप तड़पती रहेंगी ?

गौरी : पर उसे दुखी कर क मुझे भी ाचा नहीं लगता

दीपिका : आप चिंता मत करो अब तो उसे मन कर hi रहूंगी मैं आपके लिए.

गौरी : वो नहीं मानेगा छोटी

दीपिका : उसे मन्ना होगा दीदी वो सब आप मुझ पर छोड़ दीजिये. बस जब तक हम यहाँ हैं आप ऐसे hi अमित क साथ सोया करो और उसे अपने जलवे दिखाओ.

इधर मैं बहार घूमता हुआ माँ और दीपिका ममी की बातों क बारे में hi सोच रहा था. कुछ देर बहार घूम कर वापिस आया तो देखा माँ जग चुकी थी और फ्रेश भी हो ली थी.

गौरी ममी : कहाँ चला गया था सुबह सुबह?

अमित : वो बहार टहलने गया था. आप सो रही थी तो जगाया नहीं.

गौरी ममी : ाचा फ़ोन कर क देख कोई आ रहा है क नहीं ? नाश्ता भी तो करवाना है दीपिका को

इतने में दरवाज़ा खुला और बाबा क साथ कमलेश मां भी आ गए. वो हमारे लिए नाश्ता लाये थे . हम सब ने मिलकर नाश्ता किया और उसके बाद मां ने मुझे और ममी को मौसी क घर जा कर फ्रेश होने को कहा . रजनी मौसी आने वाली थी तो माँ भी मेरे साथ दिव्या मौसी क घर क लिए निकल पड़ी. मैं माँ को दिव्या मौसी क घर छोड़ कर मोहित क घर चला गया क्यूंकि मेरे कपडे वगैरह सब वहीँ तो थे. मोहित मुझे देख कर खुश हुआ और मुझे गले लगा कर बधाई दी. मैं नाहा धो कर तैयार हुआ और रानी ने हम दोनों को नाश्ता करवा दिया . उसके बाद हम दोनों हॉस्पिटल चले गए. कुछ देर सब से मिलने क बाद मोहित फैक्ट्री का जायज़ा लेने चला गया . अब हॉस्पिटल में दीपिका ममी क पास मैं रजनी मौसी बाबा कमलेश मां और कारन भैया थे जो रजनी मौसी क साथ hi आये थे . बाबा ये कह कर गई क लिए निकल गए क वो गाओं से गौरी ममी क लिए कपडे ले आएंगे . उसके बाद कारन भैया को भी काम जाना था तो वो भी निकल लिए. दोपहर का खाना रीता मौसी क यहाँ से आना था और गौरी ममी दिव्या मौसी क यहाँ रुक कर कुछ देर आराम कर क दोपहर तक आने वाली थी .

कोई 12 बजे क करीब मुझे मंजू म की कॉल आयी

मंजू म : hello कहाँ पर हो तुम ?

अमित : जी मैं हॉस्पिटल में हूँ

मंजू म : ाचा मैं घर से निकल रही हूँ

अमित : ठीक है मैं आपका इंतज़ार कर रहा हूँ .

इतना कह कर मम ने फ़ोन काट दिया और इधर नैना दीदी और करुणा दीदी दोनों मुस्कुराती हुई आ गयी. नैना दीदी ने ख़ुशी से कमलेश मां और ममी को बधाई दी जबकि करुणा दीदी आज बदली बदली लग रही थी. हमेशा मुस्कुराती शरारत करने वाली करुणा दीदी आज शर्मा रही थी और चुप चुप सी थी . मुझे देख कर वो बार बार शर्मा रही थी. दोनों दीपिका ममी क पास बैठ गयी और बचे क साथ प्यार करने लगी. कुछ देर बातें करने क बाद नैना दीदी रजनी मौसी से कहने लगी.

नैना दीदी : माँ आप कहें तो करुणा को एक बार डॉ से चेक करवा लूँ वैसे तो अब ठीक है पर फिर भी एक बार दिखा लेते हैं.

रजनी मौसी : हाँ ये ठीक है. हॉस्पिटल में तो बैठे hi हैं जाओ दिखा आओ डॉ को.

कमलेश मां : क्या हुआ है करुणा को?

नैना दीदी : कुछ नहीं मां की कल थोड़ी तबियत ख़राब हो गयी थी इसकी कॉलेज में. चलो करुणा हम डॉ को चेक करवा लेते हैं. माँ क्या हम अमित को साथ ले जाएँ? हमें तो पता नहीं चलेगा .

रजनी मौसी : हाँ ले जाओ अकेली कहाँ परेशां होती फिरोगे तुम दोनों.

नैना दीदी और करुणा दीदी क चेहरे पर स्माइल आए गयी और मुझे अपने साथ ले कर वो रूम से बहार आ गयी मगर डॉ से मिलने की बजाये मुझे ले कर छत की तरफ चल दी

अमित : हम लोग किधर जा रहे हैं ?

नैना दीदी : कहीं नहीं , बस अकेले में बात करने की जगह ढून्ढ रही हूँ अब सब के सामने तो बात नहीं होगी न.

नैना दीदी मुझे और करुणा दीदी को लेकर छत पर आ गयी जहाँ कोई भी नहीं था . सच में ये बिलकुल सेफ जगह थी अकेले मिलने क लिए . ऊपर जाते hi दीदी ने मुझे गले लगा लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए. मैं दीदी का साथ देते हुए उन्हें किश करने लगा और जैसे hi हमारी सांसे उखड़ी तो हम दोनों अलग हुए. हम दोनों hi हांफ रहे थे.

नैना दीदी : इतने दिनों क बाद आज मौका मिला है. अब करुणा से भी मिल लो. पता नहीं क्या हो गया है इसे कल से कुछ बदली बदली सी लग रही है.

अमित : सच में ? मुझे तो वही हंसने मुस्कुराने वाली दीदी पसंद है जो सबको अपनी शर्तों से हसती रहती है.

करुणा दीदी : मैं कहाँ बदली हूँ ? वैसी hi तो हूँ

अमित : बिलकुल नहीं, आज आप चुप चुप हैं जबकि पहले आप एक मिनट भी चुप नहीं रहती थी. आज आपने किसी से कोई हंसी मज़ाक तक नहीं किया .

करुणा दीदी : वो तो तुम्हारे सामने मुझे अपने आप शर्म सी आ रही है पता नहीं क्यों .

अमित : पर मुझे ाचा नहीं लग रहा. मुझे पहली वाली करुणा hi चाहिए. अगर आप ऐसा करेंगी तो मैं आपसे बात नहीं करूँगा .

करुणा दीदी : नहीं नहीं ऐसा मत करना अब तो मैं तुमसे दूर नहीं रह सकती प्लीज ऐसा मत करना .

अमित : आप को हो क्या गया है? मेरी करुणा दीदी तो हक़ से मुझसे कुछ भी मांग लेती थी और आप सॉरी बोल रही हो. ऐसे बिलकुल नहीं चलेगा मुझे मेरी करुणा दीदी वापिस दो.

नैना दीदी : सही कहा, ऐसा लग रहा है ये कोई और hi करुणा है.

करुणा दीदी : मैं तो बस वो , ठीक है मैं अब से नहीं शर्माउंगी और अगर तूने मुझसे बात न की तो तेरा खून पि जाउंगी देख लेना.

इतना कह कर दीदी मुझ पे झपट पड़ी और मेरे होंठों पर किश करते हुए मेरे बल नोचने लगी. एक मिनट में hi दीदी अपने पुराने रूप में वापिस आ गयी जो मुझे ाचा लग रहा था . किश तोड़ कर मैंने उनकी खुद से अलग किया.

अमित : अब बताओ आपकी तबियत ठीक तो है न?

करुणा दीदी : हम्म बिलकुल ठीक हूँ बस कल बुरी हालत थी इसी लिए नहीं आयी थी मैं कल हॉस्पिटल.

अमित : आज कैसी है

करुणा दीदी : आज तो फिर से करने क लिए रेडी हूँ चाहो तो अभी कर क देख लो.

नैना दीदी : ो कण्ट्रोल कर कण्ट्रोल देख ज़रा हम हैं कहाँ पर. चलो अब नीचे चलते हैं . मैं बस तेरी बात करवाने hi तुम दोनों को यहाँ लायी थी . मुझे भी ाचा नहीं लग रहा था तेरा चुप रहना.

करुणा दीदी : पता दीदी यू और माय बेस्ट फ्रेंड. ी लव यू

नैना दीदी : में तू अब चलो.

जाते जाते दोनों ने फिर से एक बार मुझे किश किया और फिर हम वापिस दीपिका ममी क रूम में आ गए .

थोड़ी देर हम सब बातों में लगे हुए थे क मेरा फ़ोन फिर से बजा . मैंने देखा तो मंजू मम का hi फ़ोन था .

मंजू म : मैं हॉस्पिटल में पहुँच गयी हूँ , तुम कहाँ हो ?

अमित : आप रुकिए मैं अभी अत हूँ आपको लेने



इतना कह कर मैंने फ़ोन काट दिया और सब को बता कर मंजू म को लेने क लिए चला गया.
 
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