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- Dec 5, 2013
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रेतुर्न तो होम......
फलेश बैक
Dadaji—ruk जाओ ..और तुम अनिरुद्ध तुम्हे सिखाया था गरीबो का भल करना न की मजाक उड़ाना हमने तुम्हे उस वक़्त बी कहा था कभी खुद का बुरा वक़्त मत भूलना और सज तुम भूल गए की तुम खुद क्या थे वो राज के पिता थे जिन्होंने तुम्हे इस मुकाम पर पहुंचाया .........आज हम अचे मन से ह 5 साल बाफ हम हमारे पोते से मिले ह . हम चलते ह जाओ समझाओ खुदको.. और जिसकी वजह से ये हुवा.....
जब ऋचा और उसके पापा जाने के लिए मुड़े तब कृति ने ऋचा को रोका..
Kriti—kaha था कभी कभी जो दीखता ह वो होता नहीं ह ....ये तेरे लिए गिफ्ट ह इसे सिर्फ अकेले मई ढकना और डिस्ट्रॉय कर देना मेरी जिंदगी ह ye.....umid ह तुजे मेरी बाद बाद मई समाज आजाएगीइ पर है ढकने के बाद ....एक नयी शुरुवात करना bye........
अब अजैईईई.......
ऋचा सोच मई पड़ी बस चुप चाप अपने पापा के साथ बैठ गयी और अपने पापा की तरफ ढकने लगी
र डैड – घर चलके बात करेंगे पर बीटा अगर तुम्हारी दोस्त ने जो कहा ह उस पर धयान देना क्योकि तुमने आज बहुत गलत किया ह..
ऋचा बस सपने पापा के गले लग बैठी रही.... सायद वो बी गहरी सोच मई चली गयी और सोचने लगी.....
इन स्कूल......
मैं--- दादा जी ये ह ....
दादा जी--- कैसे हो कप्तान बीटा सहदेव के जाने के बाद कभी हम मिल नहीं पाए ....
क. अंकल--- दादाजी के पेअर चुकार आप मेरे पिता सामान ह बल्कि उसे भड़कर ह जरूर मज़बूरी होगी वर्ण ऐसा नहीं होता....
मैं--- दादाजी आप जानते हो...
दादाजी--- पुत्र कप्तान से ाचा नेक दिल विस्वास का रूप मैंने नहीं देखा ह ....अभी तुम्हे कुछ नहीं पता ह धीरे धीरे पता लग जायेगा......
मैं--- तीख ह दादाजी ये सुनील ह मेरा मित्र मेरा भाई ......और कप्तान अंकल का बीटा ह...
दादाजी---- फिर सुनील परिचय का मोहताज नहीं ह ..
सुनील--- दादाजी जिस प्रकार मेरे पिता रहे ह वैसे हे मैं राज की परछाई बनकर रहूँगा पिता जी ने मुझे सब बताया ह
Main—kya बताया ह ...
Dadaji---wo ये कहना चाहता ह की तुम्हारे बारे मई और अधिक परशान नहीं और ये प्यारी सी बछिया कौन ह ......
मैं --- ये मेरी दोस्त कृति ह....
कृति ने पाँव चुवे तोह दादाजी ने आश्रीवाद दिया और कहा खूब पढ़ो लिखो और हम चाहते ह आगे बी तुम राज के साथ जुडी रहो पढ़ाई पूरी करने के बाद जरूर मिलना ......और बीटा आँखों की सचाई कभी खोना mat.....khus रहो...
मैं--- और ये बदमाश मेरी बहन ह....
बिच मई हे मेरी बात काट के ....श्वेता दादाजी के पैरो को पकड़ रोने लगी...
श्वेता --- दादाजी क्या हम अछि बची नहीं ह ....हमारी तरफ देखिये ...
मैं तोह उसकी एक्टिंग ढक के हे ढंग रह गया tha....aur यही हाल सुनील का था वो बी मू फाडे उसे हे ढक रहा था.....
श्वेता--- दादाजी मेरा दादाजी को मैंने कभी देखा हे नहीं अगर वो होते तोह आप जैसे हे होते जो अपनी पोती की हर ीचा को पूरी karte....phir मेरी तरफ आंख मरकर दादाजी से बोली करते न दादाजी
Dadaji—utho बेटी है है है जरूर करते हम बी तुम्हरे दादाजी ह हम से कहो हम करेंगे तुम्हारी ीचा. पूरी आखिर तुम राज की बहन हो....
श्वेता --- पका न दादा जी
Dadaji—hamra वचन ह...
मैं – दादाजी...
दादाजी--- आप चुप रहे राज
श्वेता--- वह दादा जी मैं ह न मुझे ह न....
दादाजी--- आप यही चाहती ह न की आप राज के साथ रहे....
श्वेता – शॉक से है है कहके गर्दन ऊपर निचे करने लगी...
दादाजी --- मुस्करा बची हमने साडी जिंदगी आंखे पढ़ी ह और तुम्हरी आँखों मई तुम्हारे भाई के लिए प्रेम दीखता ह ...जाओ अपना सामान ले औ...
श्वेता मेरे और सुनील की तरफ जीब निकल के चली गयी और सब उसे ढक मुस्कराने लगे...
अस्स पास की भीड़ पूरी शॉक थी तभी काफी साडी गाड़िया और ayi..jismai हिमाचल के कम और होम मिनिस्टर और कमिश्नर थे उन सभी ने ग्रीट किया
मैं--- हहहह ये क्या ये सब दादाजी को जानते ह ....आखिर कैसे .....
सुनील श्वेता कृति सब शॉक थे बस अंकल मुस्करा रहे थे ..
दादाजी – ाचा लग रहा ह 15 साल बाद मिलके तोह अब कम बन हे गए ..
Cm—sab आपकी किरपा ह अपने हे हिमाचल को इतना डेवेलोप करवाया ह तोह मुझे बी प्रसाद के रूप मई कम की सीट मिल गयी..
दादाजी चलो खुसी की बात ह हमेसा खुस रहो तरक्की करो...
कम--- राज आपका पोता ह...
मेरी गांड फैट गयी की अब सब पता चल जायेगा मैं तरस भरी निघाओ से कम को ढकने लगा ..
दादाजी –है पर ये बात अभी खुद तक हे सीमित rakhe...aur आप कैसे जानते ह ..
ये फटी मेरी....
Cm—meri तरफ ढक कर राज ने रेसलिंग मई हमारा नाम इंडिया मई प्रसिद्ध किया था इसलिए हम मिले थे बहुत ाचा बचा ह..
दादाजी--- आप क्या समझते हमे पता नहीं ह हमे सब पता ह ....हम खुस ह की आप राज के राज को राज रखते h..phir मेरी तरफ मुड़कर आप क्या सोचते ह हमें पता नहीं ह....
सब ऐसे हे बात करते रहे फिर दादाजी और कप्तान अंकल गुरूजी से मिलने चले गए और हम चले गए सुनील के घर जंहा कृति रुक कर अगले दिन अपने घर जाने वाली thi......maine उसे कहा मेरे साथ घूमने चल तोह उसने कहा काबिल बांके आउंगी तेरी मदद करने मैंने उसे गले लगाया और कहा जब जरुरत हो याद karna.....muje...
आज घर पर सब मेरी और श्वेता की पसंद का बना हुवा था ...जंहा श्वेता बेहद खुस थी तोह सुनील मेरे समझने के बाद नार्मल huva...par श्वेता जो बरी बरी सबको चिड़ा रही थी उसकी खुसी मनो फुट फुट के बहार आरही थी उसने अपने पापा को बी बता दिया था की वो राज के साथ जा रही ह ..पहले तोह उसके पापा मम्मी ने मन किया पर इसके आगई किसकी चली थी जो आज चलती अंत मई है करनी padi....raat को सब कप्तान अंकल के पास हे रुके जंहा अंकल उल्टी ने दादाजी की खूब सेवा की.....
दादाजी और अंकल मई एक ऑवर तक अकेले मई खूब बात हुवी फिर हम सब खाना खाके सो गए.....
पर दादाजी और अंकल मई बात जारी थी ..
दादाजी – किसी को पता तोह नहीं ह न की राज कौन ह ...
Uncle—nahi अभी तक किसी को नहीं बस अनिरुद्ध को मालूम ह
दादाजी--- वो कभी नहीं बताएगा ...वो जनता ह की उसके लिए हमने क्या किया ह
अंकल --- तोह मैं सबको इखट्टा करना शुरू kardu....kyoki राज का सामना इंडिया के नहीं दुनिया के बहुत ताकतवर लोगो से होगा तोह हमें बी तैयार रहना चाहिए...
दादाजी--- नहीं कप्तान दोस्त की खाल मई कौन भेड़िया ह पता नहीं ....पर जो बी ह उसे हम ढूंढ निकालेंगे... इसे लड़ाई अकेली लड़नी h......iska पहला पड़ाव शुरू होगा और वंहा से सुरु होगा जंहा सब बिच UTRAKHAND...janha हमला हुवा और जिसका अंत उप और ंप मई होगा वंही उस हर दरिंदे को मारा जायेगा चाहे वो दुनिया के किसी बी कौन मई क्यों न ho.....yahi मेरा बदला ह पर पहले मुझे मेरी बेतिया चाहिए अगर वो जिन्दा ह तोह सब बिछड़ गए थे उस हादसे मई....
अंकल--- बाबूजी आप ढुकि मत होईये ऊपरवाला जरूर मिलाएगा...
दादाजी--- उन्हें मिलवाना हे होगा कप्तान हजारो लोग मरे गए थे उस लड़ाई मई कितने हे लापता हुवे the...khun की नदिया बही थी पता हे नहीं चला था की इतने दुश्मन एक साथ कब एक हो गए सतर्क होते हुवे बी ....और सबसे बड़ी बात अली ने उस दिन अपना पूरा परिवार अगर राज को बचने नहीं लगाया होता तोह सायद आज राज बी जिन्दा नहीं होता ....आज तक ये बी नहीं पता की उसके परिवार मई कोई जिन्दा बचा ह क्या...
अंकल--- मैं लगता हु लोगो को जानकारी निकलने के लिए ...और विस्वास रखिये आपके आश्रीवाद से अब आपका बीटा कप्तान इस लायक बन गया ह की किसी को पता लगे बिना जानकारी निकल सकता ह .
Dadaji---thik ह तुम जानकरी निकल के रखो भविष्य मई राज के काम ayegi.......ab सजाओ और सुनील को तैयार करो बिज़नेस सिखाओ आगे बहुत काम ayega....kyoki राज के पास समय नहीं होगा तोह सब उसे हे संभालना ..
अंकल--- जी बाबूजी ....
मैं --- अंकल से बाइक के बारे मई बताने आया था दोनों की बाटे सुन ढक और गुसाई मई मेरी आँखों से आंसू निकलने लगे .मैं अपने कमरे मई आगया और सोचने लगा अगर वंहा मुझे जाना ह तोह तीख ह सुरुवात बी वंही से होगी और मुझे मदद बी chahiyegi.koun...koun...karega.ha ....वो करेगा मदद उसी से सुरुवात करूँगा .....
उत्तराखंड मैं ारः हु राज नहीं निर्वाण आरहा ह और निर्वाण सिर्फ तड़पता ह तड़पता ह रूह को ...
मेरी आँखों मई गुसा था अब मेरे सफर मई प्यार के लिए जगह नहीं थी ....... अब सिर्फ तांडव होगा मौत का तांडव.........
इन मॉर्निंग ..
अंकल आंटी ने मुझे गले लगाया मैं बी भावुक हो गया क्योकि उन्होंने मुझे माबाप की तरह प्यार किया ह...
अंकल – तुम्हरी बाइक वंहा पहुंच जाएगी जंहा तुम जाओगे ...
आंटी ने मुझे ी फ़ोन दिया ...और बोली की सबसे ये तुम्हारे पास रहना चाहिए ह ...और लास्ट जब मैं सुनील के गले लगा तोह मेरी आँखों मई आंसू थे...
सुनील--- तू कंही बी जा मेरी नज़र तुज पैट रहेगी मुझे पता ह तू मेरे बिना बेवकूफी जरूर करेगा....
मैं--- तुजे जल्दी हे बुला लूंगा भाई..
सुनील--- नहीं अब मैं खुद आऊंगा मुझे क्या करना ह पता चल गया ह बस कॉल करते rahna....ab तेरे पास फ़ोन ह ...और फिर श्वेता को गले लगा कर बहुत याद आएगी तेरी चुड़ैल लव ु .....मेरी प्यारी चुड़ैल...
श्वेता बी रोने लगी क्योकि एक भाई जो दूर हो रहा था उसे..
श्वेता--- सबके गले लगी ....और bye कहा...
मैंने सबकी ग्रुप फोटो ली .....
फिर उड़ चले हम मंडावा की तरफ ...
श्वेता जंहा दादाजी और भीमा चाचा की लाड़ली बन गयी थी और मैं गाँव जाने के लिए खुस था..
तोह वंही पर
निर्वाण को नहीं पता था की गाँव के बहार उसका बचपन का दुश्मन हरी सिंह भेड़िया बांके हाथ लगाए बैठा ह.......... पर अब राज वो राज नहीं रहा वो खुद चलती फिरती मौत ह जो अभी घायल शेर की तरह जिसका दिल टुटा और दिमाग मई बस प्रतिशोध की जवाला ह....
आज के लिए इतना हे...
रेतुर्न तो होम......
फलेश बैक
Dadaji—ruk जाओ ..और तुम अनिरुद्ध तुम्हे सिखाया था गरीबो का भल करना न की मजाक उड़ाना हमने तुम्हे उस वक़्त बी कहा था कभी खुद का बुरा वक़्त मत भूलना और सज तुम भूल गए की तुम खुद क्या थे वो राज के पिता थे जिन्होंने तुम्हे इस मुकाम पर पहुंचाया .........आज हम अचे मन से ह 5 साल बाफ हम हमारे पोते से मिले ह . हम चलते ह जाओ समझाओ खुदको.. और जिसकी वजह से ये हुवा.....
जब ऋचा और उसके पापा जाने के लिए मुड़े तब कृति ने ऋचा को रोका..
Kriti—kaha था कभी कभी जो दीखता ह वो होता नहीं ह ....ये तेरे लिए गिफ्ट ह इसे सिर्फ अकेले मई ढकना और डिस्ट्रॉय कर देना मेरी जिंदगी ह ye.....umid ह तुजे मेरी बाद बाद मई समाज आजाएगीइ पर है ढकने के बाद ....एक नयी शुरुवात करना bye........
अब अजैईईई.......
ऋचा सोच मई पड़ी बस चुप चाप अपने पापा के साथ बैठ गयी और अपने पापा की तरफ ढकने लगी
र डैड – घर चलके बात करेंगे पर बीटा अगर तुम्हारी दोस्त ने जो कहा ह उस पर धयान देना क्योकि तुमने आज बहुत गलत किया ह..
ऋचा बस सपने पापा के गले लग बैठी रही.... सायद वो बी गहरी सोच मई चली गयी और सोचने लगी.....
इन स्कूल......
मैं--- दादा जी ये ह ....
दादा जी--- कैसे हो कप्तान बीटा सहदेव के जाने के बाद कभी हम मिल नहीं पाए ....
क. अंकल--- दादाजी के पेअर चुकार आप मेरे पिता सामान ह बल्कि उसे भड़कर ह जरूर मज़बूरी होगी वर्ण ऐसा नहीं होता....
मैं--- दादाजी आप जानते हो...
दादाजी--- पुत्र कप्तान से ाचा नेक दिल विस्वास का रूप मैंने नहीं देखा ह ....अभी तुम्हे कुछ नहीं पता ह धीरे धीरे पता लग जायेगा......
मैं--- तीख ह दादाजी ये सुनील ह मेरा मित्र मेरा भाई ......और कप्तान अंकल का बीटा ह...
दादाजी---- फिर सुनील परिचय का मोहताज नहीं ह ..
सुनील--- दादाजी जिस प्रकार मेरे पिता रहे ह वैसे हे मैं राज की परछाई बनकर रहूँगा पिता जी ने मुझे सब बताया ह
Main—kya बताया ह ...
Dadaji---wo ये कहना चाहता ह की तुम्हारे बारे मई और अधिक परशान नहीं और ये प्यारी सी बछिया कौन ह ......
मैं --- ये मेरी दोस्त कृति ह....
कृति ने पाँव चुवे तोह दादाजी ने आश्रीवाद दिया और कहा खूब पढ़ो लिखो और हम चाहते ह आगे बी तुम राज के साथ जुडी रहो पढ़ाई पूरी करने के बाद जरूर मिलना ......और बीटा आँखों की सचाई कभी खोना mat.....khus रहो...
मैं--- और ये बदमाश मेरी बहन ह....
बिच मई हे मेरी बात काट के ....श्वेता दादाजी के पैरो को पकड़ रोने लगी...
श्वेता --- दादाजी क्या हम अछि बची नहीं ह ....हमारी तरफ देखिये ...
मैं तोह उसकी एक्टिंग ढक के हे ढंग रह गया tha....aur यही हाल सुनील का था वो बी मू फाडे उसे हे ढक रहा था.....
श्वेता--- दादाजी मेरा दादाजी को मैंने कभी देखा हे नहीं अगर वो होते तोह आप जैसे हे होते जो अपनी पोती की हर ीचा को पूरी karte....phir मेरी तरफ आंख मरकर दादाजी से बोली करते न दादाजी
Dadaji—utho बेटी है है है जरूर करते हम बी तुम्हरे दादाजी ह हम से कहो हम करेंगे तुम्हारी ीचा. पूरी आखिर तुम राज की बहन हो....
श्वेता --- पका न दादा जी
Dadaji—hamra वचन ह...
मैं – दादाजी...
दादाजी--- आप चुप रहे राज
श्वेता--- वह दादा जी मैं ह न मुझे ह न....
दादाजी--- आप यही चाहती ह न की आप राज के साथ रहे....
श्वेता – शॉक से है है कहके गर्दन ऊपर निचे करने लगी...
दादाजी --- मुस्करा बची हमने साडी जिंदगी आंखे पढ़ी ह और तुम्हरी आँखों मई तुम्हारे भाई के लिए प्रेम दीखता ह ...जाओ अपना सामान ले औ...
श्वेता मेरे और सुनील की तरफ जीब निकल के चली गयी और सब उसे ढक मुस्कराने लगे...
अस्स पास की भीड़ पूरी शॉक थी तभी काफी साडी गाड़िया और ayi..jismai हिमाचल के कम और होम मिनिस्टर और कमिश्नर थे उन सभी ने ग्रीट किया
मैं--- हहहह ये क्या ये सब दादाजी को जानते ह ....आखिर कैसे .....
सुनील श्वेता कृति सब शॉक थे बस अंकल मुस्करा रहे थे ..
दादाजी – ाचा लग रहा ह 15 साल बाद मिलके तोह अब कम बन हे गए ..
Cm—sab आपकी किरपा ह अपने हे हिमाचल को इतना डेवेलोप करवाया ह तोह मुझे बी प्रसाद के रूप मई कम की सीट मिल गयी..
दादाजी चलो खुसी की बात ह हमेसा खुस रहो तरक्की करो...
कम--- राज आपका पोता ह...
मेरी गांड फैट गयी की अब सब पता चल जायेगा मैं तरस भरी निघाओ से कम को ढकने लगा ..
दादाजी –है पर ये बात अभी खुद तक हे सीमित rakhe...aur आप कैसे जानते ह ..
ये फटी मेरी....
Cm—meri तरफ ढक कर राज ने रेसलिंग मई हमारा नाम इंडिया मई प्रसिद्ध किया था इसलिए हम मिले थे बहुत ाचा बचा ह..
दादाजी--- आप क्या समझते हमे पता नहीं ह हमे सब पता ह ....हम खुस ह की आप राज के राज को राज रखते h..phir मेरी तरफ मुड़कर आप क्या सोचते ह हमें पता नहीं ह....
सब ऐसे हे बात करते रहे फिर दादाजी और कप्तान अंकल गुरूजी से मिलने चले गए और हम चले गए सुनील के घर जंहा कृति रुक कर अगले दिन अपने घर जाने वाली thi......maine उसे कहा मेरे साथ घूमने चल तोह उसने कहा काबिल बांके आउंगी तेरी मदद करने मैंने उसे गले लगाया और कहा जब जरुरत हो याद karna.....muje...
आज घर पर सब मेरी और श्वेता की पसंद का बना हुवा था ...जंहा श्वेता बेहद खुस थी तोह सुनील मेरे समझने के बाद नार्मल huva...par श्वेता जो बरी बरी सबको चिड़ा रही थी उसकी खुसी मनो फुट फुट के बहार आरही थी उसने अपने पापा को बी बता दिया था की वो राज के साथ जा रही ह ..पहले तोह उसके पापा मम्मी ने मन किया पर इसके आगई किसकी चली थी जो आज चलती अंत मई है करनी padi....raat को सब कप्तान अंकल के पास हे रुके जंहा अंकल उल्टी ने दादाजी की खूब सेवा की.....
दादाजी और अंकल मई एक ऑवर तक अकेले मई खूब बात हुवी फिर हम सब खाना खाके सो गए.....
पर दादाजी और अंकल मई बात जारी थी ..
दादाजी – किसी को पता तोह नहीं ह न की राज कौन ह ...
Uncle—nahi अभी तक किसी को नहीं बस अनिरुद्ध को मालूम ह
दादाजी--- वो कभी नहीं बताएगा ...वो जनता ह की उसके लिए हमने क्या किया ह
अंकल --- तोह मैं सबको इखट्टा करना शुरू kardu....kyoki राज का सामना इंडिया के नहीं दुनिया के बहुत ताकतवर लोगो से होगा तोह हमें बी तैयार रहना चाहिए...
दादाजी--- नहीं कप्तान दोस्त की खाल मई कौन भेड़िया ह पता नहीं ....पर जो बी ह उसे हम ढूंढ निकालेंगे... इसे लड़ाई अकेली लड़नी h......iska पहला पड़ाव शुरू होगा और वंहा से सुरु होगा जंहा सब बिच UTRAKHAND...janha हमला हुवा और जिसका अंत उप और ंप मई होगा वंही उस हर दरिंदे को मारा जायेगा चाहे वो दुनिया के किसी बी कौन मई क्यों न ho.....yahi मेरा बदला ह पर पहले मुझे मेरी बेतिया चाहिए अगर वो जिन्दा ह तोह सब बिछड़ गए थे उस हादसे मई....
अंकल--- बाबूजी आप ढुकि मत होईये ऊपरवाला जरूर मिलाएगा...
दादाजी--- उन्हें मिलवाना हे होगा कप्तान हजारो लोग मरे गए थे उस लड़ाई मई कितने हे लापता हुवे the...khun की नदिया बही थी पता हे नहीं चला था की इतने दुश्मन एक साथ कब एक हो गए सतर्क होते हुवे बी ....और सबसे बड़ी बात अली ने उस दिन अपना पूरा परिवार अगर राज को बचने नहीं लगाया होता तोह सायद आज राज बी जिन्दा नहीं होता ....आज तक ये बी नहीं पता की उसके परिवार मई कोई जिन्दा बचा ह क्या...
अंकल--- मैं लगता हु लोगो को जानकारी निकलने के लिए ...और विस्वास रखिये आपके आश्रीवाद से अब आपका बीटा कप्तान इस लायक बन गया ह की किसी को पता लगे बिना जानकारी निकल सकता ह .
Dadaji---thik ह तुम जानकरी निकल के रखो भविष्य मई राज के काम ayegi.......ab सजाओ और सुनील को तैयार करो बिज़नेस सिखाओ आगे बहुत काम ayega....kyoki राज के पास समय नहीं होगा तोह सब उसे हे संभालना ..
अंकल--- जी बाबूजी ....
मैं --- अंकल से बाइक के बारे मई बताने आया था दोनों की बाटे सुन ढक और गुसाई मई मेरी आँखों से आंसू निकलने लगे .मैं अपने कमरे मई आगया और सोचने लगा अगर वंहा मुझे जाना ह तोह तीख ह सुरुवात बी वंही से होगी और मुझे मदद बी chahiyegi.koun...koun...karega.ha ....वो करेगा मदद उसी से सुरुवात करूँगा .....
उत्तराखंड मैं ारः हु राज नहीं निर्वाण आरहा ह और निर्वाण सिर्फ तड़पता ह तड़पता ह रूह को ...
मेरी आँखों मई गुसा था अब मेरे सफर मई प्यार के लिए जगह नहीं थी ....... अब सिर्फ तांडव होगा मौत का तांडव.........
इन मॉर्निंग ..
अंकल आंटी ने मुझे गले लगाया मैं बी भावुक हो गया क्योकि उन्होंने मुझे माबाप की तरह प्यार किया ह...
अंकल – तुम्हरी बाइक वंहा पहुंच जाएगी जंहा तुम जाओगे ...
आंटी ने मुझे ी फ़ोन दिया ...और बोली की सबसे ये तुम्हारे पास रहना चाहिए ह ...और लास्ट जब मैं सुनील के गले लगा तोह मेरी आँखों मई आंसू थे...
सुनील--- तू कंही बी जा मेरी नज़र तुज पैट रहेगी मुझे पता ह तू मेरे बिना बेवकूफी जरूर करेगा....
मैं--- तुजे जल्दी हे बुला लूंगा भाई..
सुनील--- नहीं अब मैं खुद आऊंगा मुझे क्या करना ह पता चल गया ह बस कॉल करते rahna....ab तेरे पास फ़ोन ह ...और फिर श्वेता को गले लगा कर बहुत याद आएगी तेरी चुड़ैल लव ु .....मेरी प्यारी चुड़ैल...
श्वेता बी रोने लगी क्योकि एक भाई जो दूर हो रहा था उसे..
श्वेता--- सबके गले लगी ....और bye कहा...
मैंने सबकी ग्रुप फोटो ली .....
फिर उड़ चले हम मंडावा की तरफ ...
श्वेता जंहा दादाजी और भीमा चाचा की लाड़ली बन गयी थी और मैं गाँव जाने के लिए खुस था..
तोह वंही पर
निर्वाण को नहीं पता था की गाँव के बहार उसका बचपन का दुश्मन हरी सिंह भेड़िया बांके हाथ लगाए बैठा ह.......... पर अब राज वो राज नहीं रहा वो खुद चलती फिरती मौत ह जो अभी घायल शेर की तरह जिसका दिल टुटा और दिमाग मई बस प्रतिशोध की जवाला ह....
आज के लिए इतना हे...
