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- Dec 5, 2013
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अपडेट 66
बिग मेघा अपडेट
इतस शो टाइम.....
फ्लेशबैक
सोनाली--- क्या उसके पास फ़ोन ह...
Deepika—ha वो मंडावा आगया ह ab.....aur फ़ोन बी रखता ह ..
सोनाली--- देखा फिर बी उसने बात नहीं करि अब तुम समझी .....की उसके दिमाग मई क्या चल रहा ह ..
दीपिका कई बार कॉल करती ह जो रिंग करती ह पर राज साल पिछ नहीं करता ह और फिर वो श्वेता को बी रिंग करती ह पर वो बी पिछ नहीं करती ह ..
Deepika—busy होंगे वपा कॉल बैक करेंगे
सोनाली--- हम्म्म ी होप जल्दी करे कॉल..
मंडावा----
मैं दंगल ढकने आगया था तोह शोर सरबे मई मुझे कुछ सुनाई नहीं diya....waise बी मेरी नज़र सिर्फ एक इंसान पे थी जिसे देख मेरे अंदर का निर्वाण जाग गया और निर्वाण सिर्फ तड़पता ह....
अब अजैईईई.....
सभी गाँव से ए हुवे भाइयो को स्वागत ह सबसे बड़े दंगल मई ....इस बार जीत की राशि बढ़ा दी गयी h.....Thakur साब की तरफ से जितने वाले को 11 लाख नगद पुरस्कार और महापंचायत की तरफ 1 लाख और हमारे मला श्री बृजमोहन जी की तरफ से 2 लाख रस नगद मिलेंगे और सभी भागलेने वाले पहलवानो को 21000 नगद मिलेगा....
पर मुझे इन सब मई दिलचस्बी नहीं थी मेरी नज़र तोह बस हरी सिंह पे हे थी और मेरे होतो पे कुटिल मुस्कान खुद बा खुद आरही थी .....
तभी अनाउंसमेंट हुवा अब हमारे आज के विशेष अतिति ह ....ठाकुर जगमाल सिंह ...मला श्री बृजमोहन और सप शिवानी जैस्वाल पधार रहे ह.....
फिर सभी आके मुख्या चेयर्स पर आकर बैठ गए मैं श्वेता और चचाई के साथ मेला घूमने चला गया जंहा श्वेता और छोटी चची अपने लिए सूंदर चुडिया ले रही थी ...
छोटी चची--- तेरी शादी मैं यही राजस्थान मई हे करवाउंगी....
श्वेता--- चची शादी तोह मैं कर लुंगी चाहे जंहा करवाओ पर शर्त एक हे मैं घर छोड़के नहीं जाउंगी वो हे ए मेरे साथ रहने वर्ण मैं आप सबके साथ और भाई के साथ खुस हु कौन पीला फोकट के झांझड़ ...
स चची--- हैट badmass...aisa बी होता ह क्या
Main—bi सुन्दर सुन्दर ड्रेस और चुडिया ढक रहा था .....और मेरा मन अतीत मई चला gaya......janha सिर्फ ऋचा की यदि थी
मैं--- ये तेरे लिए हे ली यार ढक ये बिंदी तुजपे बहुत सूंदर लगेगी इस लॉन्ग स्कर्ट और टॉप के साथ पहनना बिलकुल मेरी अनगर्ल बन jayegi...phir जब अपनी शादी होगी न मैं तेरे लिए दुनिया की सबसे सुन्दर शादी का जोड़ा तैयार करवाऊंगा सब ढकते रह जायेंगे... और तू सिर्फ मेरी होगी सिर्फ मेरी .....और हम यंहा हिमाचल की इन हसीं वादियों मई अपना एक ऐसा आशियाना बनाएंगे जंहा हमे कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा...
ऋचा--- सच मई यार कब होगी अपनी शादी .... जब मैं तुम्हारी बांहो मई हमेसा के लिए रहुंगीय
मैं--- जब मैं कुछ बन jaunga...aur मेरे जीवन का उद्देश्य पूरा कर लूंगा तब फिर पूरी जिंदगी सिर्फ तुम और मैं होंगे...
भाई भाई भाई ......
मैं श्वेता की आवाज सुन होश मई आया ...
Shweta—kab से आवाज लगा रही थी आपको कान्हा खो गए थे आप ...
मैं--- कुछ नहीं आप लोग घूमो मेले मई मैं अत हु ...
श्वेता कुछ बोलना चाहती थी पर मेरी सकल ढक कुछ बोली नहीं
फिर मैं थोड़ा दूर आगया और आँखों के कोने से निकलते एक आंसू को निकल फेंका और सोचने लगा उसके बारे मई की एक बार क्यों उसने मुझ पे विस्वास नहीं किया मैं सिर्फ तुम्हारा हे था ऋचा पर तूने हमारे प्यार पे एक बार यकीं नहीं किया सिर्फ गैरो पे यकीं किया आखिर क्यों हमदोनो तोह एक दूसरे को बेइंतिहा प्यार करते थे न फिर kyo....main काफी दिएर अकेला बैठा रहा ... ... एक ऑवर बाद जब दिल का दर्द काम हुवा तोह उठ के दंगल के पास आगया जंहा पहलवान अलग गांव के लड़ रहे थे ...... वंहा का महल बड़ा रोमांचक हो रहा रखा था भीमा चाचा के सामने तोह पहलवानो ने ु हे हार मानली थी क्योकि उन्हें पता था जीत नहीं पाएंगे तोह उधर हरी सिंह का बीटा हरेंद्र सिंह सामने वाले पहलवानो का कुछ न कुछ तोड़ रहा था जो खेल भावना के बिलकुल विरुद्ध था......
फिर भोजन के समय के लिए कुछ दिएर दंगल रुका हम सब घर आगये जिसमे मला और सप शिवानी बी साथ थी...
दादाजी--- बृजमोहन जी और सप साहिबा दंगल काफी शांति से चल रहा ह मुझे शंका ह आज बहुत बड़ा कुछ होने वाला ह तोह आप सुरक्षा इंतजाम करके रखिये
सप शिवानी--- मतलब
भीमा चाचा--- आज नारक बनेगा जंहा पापियों को तड़पाया जायेगा....
मला समाज गया था इसलिए वो चुप रहा फिर सबने अपना खाना ख़त्म किया और शिवानी बेचारी सोचती हे रह गयी.....
हम्म सब वापस दंगल मई आगये जंहा पहला मुक़ाबला भीमा चाचा और एक पहलवान के साथ huva.....bheema चाचा ने उसे थोड़ी सी मुश्किल से हरा दिया और दूसरी तरफ हरेंद्र सिंह ने सामने वाले पहलवान का कन्धा हे तोड़ दिया.....
दादाजी--- इतनी बार कहने पर बी हरी सिंह तेरा बीटा खेल भावना नहीं दिखा रहा h...aur इस बार बी उसने सामने वाले पहलवान का कन्धा तोड़ दिया ह जो खेल के नियमो के विपरीत ह मैं चुप हु तोह तुम कुछ बी करोगे काट के फेंक दूंगा समजा अबकी बार इसने ऐसा किया तोह...
हरी singh—thakur जगमाल सिंह जी उम्र हो गयी ह पर तांव नहीं गया ह हमने भी चुडिया नहीं पहनी h...jo चुप रहेंगे .....जवाब हम बी देंगे..
दादाजी--- तू जवाब देगा अपनी हद मई रह वर्ण अब एक सब्द और तुजे इस दुनिया मई कोई नहीं बचा पायेगा
पर हरिसिंह को तोह मला और सप पास बैठा दिख रहे थे जिसे उसे पता था की वो बिच मई आजायेंगे और 100 बड़े लठैत जो लाया था तोह आज हवा मई था और उसने वो गलती कर हे थी जो नहीं करनी चाहिए थी...
हरी singh—sabke सामने जान से मरने की धमकी दे रहे हो muje..dum ह तोह मार के दिखाओ ...
मैं --- कब से यही ढक रहा था मुझे बिकुल नहीं पसंद था की कोई दादाजी ऐसे ऊँची आवाज मई बात करे मैं भाग के गया और कोई कुछ कर पता उसे पहले हे हरी सिंह को आगे गले के पास से पकड़ा और चेयर से से उठा के सामने ाखडे की तरफ फेंक दिया और वापस उसके पास गया उसे 2no हाथो से पकड़ के ऊँचा उठाया और जो ट्रॉफी पड़ी थी उस टेबल पे पटक दिया तब तक अस्सपस्स के पुलिस और गाँव वालो ने मुझे पकड़ लिया.....
Main---Kutte तेरी इतनी औकात जो तू दादाजी के सामने बोलै यही सबके सामने हे काट दूंगा समजा ...अब तुजे कोई नहीं बचा payega....cheerfaad कर दूंगा teri....teri हालत गली के कुत्ते से भी बुरी करूँगा यंहा सबके सामने कसम खता हु माँ भवानी की तेरी हालत तेरे गाँव वालो के लिए मिसाल होगी तेरे ये गाँव वाले और तेरी सतो पीडिया जब जब ठाकुर जगमाल सिंह का नाम सुनेगी वो दर से काँप uthenge...aur मैं जो बोलता हु वो करता हु....
हरेंद्र सिंह बी मेरी तरफ भाग के आया पर उसे गाँव वालो ने पकड़ लिया....
हरेंद्र सिंह--- तू नहीं बचेगा अब तुजे मैं अपने हाथो से मरूंगा...
Main—usai ढक के गीदड़ो की धमकी नहीं शेर की हुंकार ह ये ......
माहौल बहुत तंग हो गया था एक तरफ हरी सिंह के 100 लैटहैटो के साथ 300 गाँव वाले और थे तोह यंहा दादाजी के साथ मैं भीमा चाचा और मला और 1000 गाँव वाले खड़े the...aur सब एक दूसरे को घर कर ढक रहे थे...
सप शिवानी और मला ने समझाया तोह माहौल थोड़ा शांत हुवा पर सब एक दूसरे को हे ढक रहे थे और हरी सिंह मेरी तरफ ढक के पहचाने की कोसिस कर रहा था की ये कौन ह ....पर उसकी आँखों मई मुझे जान से मरने के इरादे साफ़ थे...
शाम के 5 बज गए थे हरी सिंह का दिमाग शांत हुवा तोह उसने इशारे से 100 लैटहैटो को मंदिर की तरफ भेज diya...as पैर प्लान हमने अपने 2 पहलवानो के साथ उसके खबरि को लेके मंदिर के रस्ते मई खड़ा कर दिया
अब आखिरी दंगल शुरू हुवा
जो भीमा chacha...aur हरेंद्र सिंह के बिच था...
हरेंद्र भीमा चाचा को घर कर बोलै आज तेरी हालत ऐसी करूँगा की तू दुबारा खड़ा नहीं होगा ....
B.chacha—dair किसकी ह अजा...
फिर दोनों आपस मई भीड़ गए हरेंद्र ने एक थपड कनपट्टी पे मारा चाचा के तोह चाचा ने जब दुबारा वो कनपटी पे मरने लगा तोह उसे झुक कर उसे पकड़ कर उठा के पटक diya....harendra टिल मिला के खड़ा हुवा और दुबारा एक दूसरे के हाथ मई हाथ फंसा के आगे पीछे ढाका देने लगे लगे फिर मौका मिलते हे हरेंद्र ने चाचा का बांये हाथ को छोड़कर ढाया हाथ को पीछे की तरफ मरोड़ दिया जिसे चाचा बिलबिला उठे और रेफरी ने वार्निंग दे दी दुबारा किया तोह हार जाओगे.. चाचा ने कुछ दिएर हाथ को तीख किया और फिर दुबारा आमने सामने हो गए पर दर्द से भीमा चाचा की ताकत काम हो गयी thi...isi का फायदा उठके ...हरेंद्र सिंह ने भीमा चाचा को फिरसे बांये हाथ को पकड़ के पीठके ऊपर लेके उठा के पटक दिया भीमा चाचा दर्द से पहले तड़प रहे थे और उसी हाथ को पकड़ के उठा के पटकने से दर्द से चीक निकल गयी...
हरी सिंह के गाँवों से ए लोग अपनी मूंछो पे तांव देके चिढ़ाने लगे तोह हरी सिंह बी तांव मई आगया
हरी सिंह --- है है है लगता ह मंडावा के खून मई दम नहीं ह .. रहा अब मूंछे ऊँची बस नाम की हे रह गयी h....ha है है
दादाजी--- बस गुसाई से उसे देख रहे थे ..
हरी सिंह— अगर ह किसी मई दम तोह जीने मरने का मैच होगा एक मौका और देता हु भीमा की जगह दूसरा पहलवान लड़ ले पर मैच हार जीत से नहीं एक की मौत से ख़त्म hoga...manjur ह ठाकुर...
दादाजी--- मुझे manjur....par जो पलटा उसको मैं खुद मारडुंगा.....
हरी singh—Toh भेज अपने पहलवान को देखता हु अब किस्मे जीने की छह नहीं ह
सप शिवानी--- नहीं ये नहीं हो सकता ह ...
दादाजी और हरी singh—Sp साहिबा आप मई से कोई बी बिच मई आया तोह पुलिस वालो की मौत जी जिम्मेदार आप होंगी .....तोह सोच के उठियेगा अब ये शान भान का दंगल ह
मला – शांत हो जाइये सप साहिबा अब आप और मैं कुछ नहीं कर सकते ह ये वर्चस्व की लड़ाई ह आपको पहले भोजन के वक़्त बी बताया था आप चाहकर बी कुछ नहीं कर सकती ह ठाकुर साब कभी गलत नहीं करते ह इस हरी सिंह के खिलाफ काफी शिकायत h....bus शांत रहिये ...ढकते जाइये आज का दंगल और आज का ये दिन आप जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगी ये मेरा वडा ह...
दादाजी – जोर से निर्वाणा... ये मरना नहीं चाहिए ह इसकी चीक इसके बाप के कान मई तीर की तरह चुबनि चाइये... इसका बाप बिख मांगना चाहिए इसकी जिंदगी की .....
Main—Jo हुकुम......
और खुद गया दंगल mai...gusa आँखों मई पहले से हे सरे गाँव वाले कुंवर सा कुंवर सा के नारे लगा रहे the...aur मैं उसको सामने उसकी आँखों मई आंखे दाल के खड़े थे........ मैंने 2no हाथ सामने किये और जैसे हे उसने भी 2no हाथ मेरे हाथो मई डालने के लिए सामने किये मैं फुर्ती से साइड से निकल के उसके पीछे आगया और उसकी कमर को पकड़ के पूरी ताकत से ऊपर उठके पीछे फेंक दिया गिरा निचे और चीक निकल गयी उसकी... वो जैसे हे खड़ा हुवा मैंने भाग के गया उसके पेट से पकड़ के ऊँचा उठाया और अखाड़े से बहार फेंक दिया ....वो सीधा जेक पिछवाड़े के बल गिरा टेबल और खुर्सियो पर फिर से गांड फाड़ चिल्लाया मैं उसके पास फिर से भाग के गया और उसको पेअर से पकड़ के घसीट के अखाड़े मई लाया और सीधा खड़ा किया और उसका एक हाथ पकड़के अपनी पीठ पे उठा के दिया पूरी ताकत से धोभी पछाड़ उसका कन्धा हे टूट गया और चिल्लाने लगा पर मेरी आँखों मई तो खून सवार था मैंने फिर उसे खड़ा किया और कमर से पकड़के अपने पीछे उठा के फेंक दिया ऐसा कई बार किया .. सायद कन्धा गर्दन हाथ काफी जगह फ्रैक्चर आगया था और मू से खून निकल रहा था...
हरी सिंह--- छोड़ दो उसे वो हार गया ह....
मैं--- मेरे दादाजी के पैरो में गिर कर माफ़ी मांग फिर छोड़ दूंगा....
हरी सिंह मजबूर था क्योकि उसे नहीं पता था की कोई भीमा से ाचा पहलवान भी निकल जायेगा वर्ण वो कभी ऐसा चल के पंगे नहीं leta....usko लगा था भीमा से ाचा पहलवान कोई नहीं होगा ..
हरी singh----main हाथ जोड़ के माफ़ी मांगता हु apse...mere बेटे की जिंदगी भकस दो
दादाजी---- दफा हो जाओ अपनी सकल लेके... यंहा से ...तेरी औकात नहीं ह मेरे सामने खड़े रहने की....
सरे गाँव वाले हंस रहे थे ..जिसे वो अपमान का घुट पीकर रह गया..
फिर हरी सिंह अपने बेटे को लेके दंगल से थोड़ी दूर आगया
हरी singh—is अपमान का बदला जरूर लूंगा मई ठाकुर .....जरूर लूंगा बेशक मैं उतना ताकतवर नहीं हु पर तेरे पोते की जानकारी मई उसे दूंगा जो तेरे लादले बेटे सहदेव का वंश मिटाना छठा h.....harendra को बाद मई डॉ के पास ले जाऊंगा पहले मंदिर जाता हु आरती का समय कीच दिएर मई हो जायेगा तब वो लड़का वंहा आएगा तब उठा लूंगा usai....aur अपना बदला पूरा करूँगा... पता नहीं कौन ह वो छोकरा और आज ये कौन सा पोता आगया ठाकुर ka...baad मई सोचूंगा उसका बी पहले इसे निपटा लू..
इधर दंगल मई ...
दादाजी के नाम के जय करे लग रहे थे..
दादाजी--- मुझे खुसी ह मेरे 2 शेर मेरे 2 हाथ ह भगवन तुम दोनों की सदैव रक्षा करे..
बी chacha—babuji मैंने क्या किया ह सब राज ने किया ह...
Main—usne धोखा किया था वर्ण मेरे चाचा को हरा ले इतना दम किसी मई नहीं .....
फिर जब मुझे इनाम देने लगे तोह मैंने 11000 ऊपर के रख लिए और बाकि सब गाँवों के कल्याण के लिए दे दिए जिसे सब खुस हो गए
Main—dadaji चले हमे अभी 15 कम दूर मंदिर भी जाना ह और मैंने भीमा चाचा को इशारा कर दिया....
जो इशारा था अब दंगल के बहार दंगल का ...
और फिर मैं और दादाजी और 3 पहलवान सबको नमस्कार अलविदा करके निकल दिए मंदिर की तरफ .... आरती का समय भी हो गया था....
मंदिर से 8 कम पहले
मैं--- दादाजी आपको पता ह क्या करना ह आपका वो रूप देखना ह मुझे आप तयारी करके रखो उनके पुरे गाँव देखेंगे की आपसे उलझने का अंजाम क्या होता ह........
दादाजी--- तीख ह मैं अभी फ़ोन करके इंतेज़ाम करके रखता हु.....
फिर मैं चल दिया अपनी बाइक से मंदिर की तरफ जब 6 कम दूर रह गया था तब खबरि से फ़ोन करवा दिया
हरी सिंह--- सबको इशारा करता ह की सब तैयार रहे खबरि का फ़ोन आगया ह...
उसके पास एक झंडा था जिसके फहराने का मतलब था सीकर ारः h...aur खुद अपनी कार को रोड के बिच मई कड़ी करके खड़ा हो गया मैं सामने से अत दिखा तोह पहले शॉक हुवा और फिर मुस्कराने लगा मेरे पास एते हे ..
हरी सिंह--- ओह तोह तू ह वो लड़का जो ठाकुर के घर आया h...tabi मैं सोचु तू उसे दादा जी क्यों कह रहा था अब तोह सारा हिसाब तेरे से पहले पूरा करूँगा
मैं--- ाचा ऐसा क्या तोह करले पूरा लगता ह दिन वाली मार से तेरी अकाल नहीं खुली ह..... बाप बेटे की गांड कुटाई अचे से हो गयी पर छानने अभी कुलमुला रहे ह पिछवाड़े मई ..
हरी सिंह--- है है है मरेगा तोह तू सेल..
Main—pata ह मैं तुजे मरूंगा नहीं जब मैं ये बोल रहा था मेरी सर की नसे तन गयी थी और आंखे लाल होने लग गयी फिर मैं आगे बोलै मैं तेरे हाथ को पहले तोडूंगा फिर तेरी एक एक ऊँगली तोडूंगा ऐसे हे teri...sari हड़िया तोडूंगा phir....tere साडी उंगलिया हाथ और पेअर की काट दूंगा और सुन इतना हे नहीं फिर जइब काट दूंगा फिर तेरी आंखे फोड़ दूंगा ....और तेरे सरे आदमियों के साथ बी यही करूँगा. लोग थूकेंगे अरे इस बार तेरी आंखे नहीं फोड़ूंगा ताकि तू सब ढक सके सारा गाँव तुझ पे थूकेंगे.. हरी सिंह मौत तोह ु हे बदनाम ह दर्द तोह जिंदगी देती ह .....और कैसे देती ह ये तू देखेगा....
हरी सिंह--- मैं तोह दर गया है है है....
Main—Hari सिंह निर्वाण कभी झूट नहीं बोलता..
हरी सिंह के एक इशारे से 4 तरफ से खूब सरे लोग आजाते ह ..
हरी सिंह--- ये ढक मेरी पावर....100 ताकतवर लठैत ह ...और मुझे डरने चला था जा रे सुखिया लेके आ इसे घसीट के मेरे पास
सुखिया आया भागता हुवा मेरे pass....usne लेथ घुमा के मेरी तरफ जैसे हे घुमाया मैंने अपना हाथ आगे कर दिया उसका लेथ टूट गया और फिर दूसरे हाथ का पंच पहले पेट मई और फिर दुबारा उसके जबड़े पे दिया हवा मई उड़ता हुवा जमीं पे गिरा......
मैं – बस यही ह तेरे लठैत जो इतने मई हे पसर गया ह तुजे पता ह मेरा परिवार ह ...और मेरा परिवार मेरी ताकत ह अब तुजे मैं दिखता हु ताकत मैं पूरा जोर लगा के चिल्लाया ..
दादा जीईईई ...........
2 मिनट हुवे कुछ नहीं हुवा तोह हरी सिंह जोर जोर से हसने लगा और बोलै क्या हुवा बचे बस निकल गयी हवा
मैं – मौत तेरे पीछे चलती हुवी आरही ह और तू मेरी तरफ ढक रहा ह..
हरिसिंह जैसे हे पीछे हे घुमा पीछे गाँव के लोग हाथ मई लेथ और डंडे उठाये भागे आरहे थे....
मैं दाए मुड़के dhek...hari सिंह ने गर्दन दये घुमाई तोह उसे आदमी हे आदमी दिखे जो उसकी तरफ हे आरहे
मैं बाये ढक अब हरी सिंह ने बाए देखा तोह उसकी फैट गयी इतने सरे आदमी ढक के ..उसके साथ वाले आदमी बी दर गए....
मैं अभी रूक अब मेरे पीछे जो तेरे आदमी खड़े ह न उन्हें बोल अपने पीछे देखे..
जैसे हे उन्हों ने पीछे देखा तो उनकी हालत ख़राब हो gayi...piche दादाजी भीमा चाचा और उनके पीछे भीड़ चली आरही थी...
मैं-- पता ह जंगल का राजा शेर होता ह और तू तोह जंगल की जगह शेर की मंध मई हे हाथ दाल दिया...
मैं--- छिलके चीयर डालो फाड़ डालो इनका वो हाल करना ह की इनकी पीडिया दुबारा गलत करने के बारे मई बी सो बार सोचे..... और मैं बी भाग के दी घुटने की हरी सिंह के सीने पे वो उड़ता हुवा खुद की कार से takraya...wo खड़ा होता उसे पहले हे उसको उसकी गर्दन से पकड़ के बोनट पे पटक diya...sala गिरा निचे ...उधर 300 गाँव वाले टूट पड़े उन 100 पर ..उनकी हड़िया पसलिया सब तोड़ दी ...इधर मैं हरी सिंह को घसीट के दादा जी आगे लाके पटक दिया ...
Dadaji—in सब को उठालो और ले औ हवेली पर फिर पलट कर भीमस इसे उठालो और इसके बेटे को बी ले चलो haveli.....oe..
फिर हम पहले हवेली की तरफ आगये मैं हरी सिंह को घसीट के हवेली के अंदर ला रहा tha...toh वंहा सुरेंद्र बबिता खड़े थे जो मुझे हे ढक रहे थे गाड़ियों की आवाज सुन बाकि सब बी बहार आगये छोटी chachi...badi चची .... बहार गए हुवे थे..
श्वेता-- सुरेंद्र और बबिता के पास jake...ye तुम बी हो सकते हो जितना दूर रहोगे उतना सेफ रहोगे .समजे क्योकि तुमने जो पास्ट मई किया ह तुम्हे उसका हिसाब देना ह तुम्हारा बी नंबर आएगा.......
मैं उसे घसीट के बेसमेंट मई ले गया जिसके पीछे दादाजी बी गुसाई मई आरहे थे ..
Dadi—bheema क्या हुवा ह
Bheema—maa सा डूंगरपुर के हरी सिंह ने बाबूजी की बेज़्ज़ती कर दी थी दंगल मई तोह राज उनके गाँव वालो समेत उसको उठा के लाया ह...
बड़ी चची--- बड़ा आया गाँव वालो को उठाने ...waaalaaa....aaa
बहुत सरे ट्रैक्टर्स की आवाज आने लगी थी जिसमे पीछे 100 गाँव वाले टूटी फूटी हालत मई पड़े हुवे थे 30 ट्रैक्टर ट्रॉलियां और बहुत साडी पिकप और कार्स मई आदमी बैठ के आरहे थे
सुरेंद्र बबिता और बड़ी चची का मू खुल हुवा था और उनके सरीर मई झुरझुरी दूध रही थी....
बेसमेंट मई
मैं नाम बता सिर्फ एक बार पूछूंगा ..
हरी सिंह--- मुझे नहीं पता
दादाजी--- ढक तेरी मेरी कोई दुश्मनी नहीं और तुजे पता था की मुझसे सीधे उलझना मतलब मौत ह फिर भी तूने ये किया तोह साफ़ ह किसी ने तोह करवाया हे होगा....
हरी सिंह चुप रहा
मैं--- तू अब तड़पाएगा और बहुत तड़पेगा फिर मैंने उसके पैरो मई 2 किल ठोके दी ताकि पेअर न हिला सके फिर उसके सामने बैठ कुर्सी पर उसकी उंगलिया कटी फिर 2no पेअर की काट दी ...तू बोलेगा तू नहीं बोलेगा तोह तेरी आत्मा से बुलवा लूंगा मैं ...
वो चिल्ल्ता रहा ......रुक जाओ पर मैं नहीं रुका ...
हरी सिंह--- उसका नाम
SR.VICTER ह
दिल्ली का डॉन ह बहुत बड़ा पुरे उत्तर भारत मई आर्म्स की सप्लाई करता था अब ये काम उनका बीटा JR.Victer करता ह कान्हा मिलेगा कुछ पता नहीं बस बोलै 50 कर मिलेंगे सहदेव के बेटे का पता लगाने के.. बहुत पैसा ह उनके पास बहुत पावर फुल ह वो ....
मैं---- वो होगा पावर वो होगा बड़ा डॉन वो होगा पैसे वाला पर इस बार उसका पूरा साम्राज्य मिटा दूंगा जिन हथियारों को वो बेचता ह उसी मई उसकी चिटा जलाऊंगा आग से खेलने का शोक ह न उसी आग मई जिन्दा जलूँगा मैं........
आज के लिए इतना हे ..
लाइक्स और कमैंट्स देना न भूले ...पिक्चर अभी बाकि ह....
बिग मेघा अपडेट
इतस शो टाइम.....
फ्लेशबैक
सोनाली--- क्या उसके पास फ़ोन ह...
Deepika—ha वो मंडावा आगया ह ab.....aur फ़ोन बी रखता ह ..
सोनाली--- देखा फिर बी उसने बात नहीं करि अब तुम समझी .....की उसके दिमाग मई क्या चल रहा ह ..
दीपिका कई बार कॉल करती ह जो रिंग करती ह पर राज साल पिछ नहीं करता ह और फिर वो श्वेता को बी रिंग करती ह पर वो बी पिछ नहीं करती ह ..
Deepika—busy होंगे वपा कॉल बैक करेंगे
सोनाली--- हम्म्म ी होप जल्दी करे कॉल..
मंडावा----
मैं दंगल ढकने आगया था तोह शोर सरबे मई मुझे कुछ सुनाई नहीं diya....waise बी मेरी नज़र सिर्फ एक इंसान पे थी जिसे देख मेरे अंदर का निर्वाण जाग गया और निर्वाण सिर्फ तड़पता ह....
अब अजैईईई.....
सभी गाँव से ए हुवे भाइयो को स्वागत ह सबसे बड़े दंगल मई ....इस बार जीत की राशि बढ़ा दी गयी h.....Thakur साब की तरफ से जितने वाले को 11 लाख नगद पुरस्कार और महापंचायत की तरफ 1 लाख और हमारे मला श्री बृजमोहन जी की तरफ से 2 लाख रस नगद मिलेंगे और सभी भागलेने वाले पहलवानो को 21000 नगद मिलेगा....
पर मुझे इन सब मई दिलचस्बी नहीं थी मेरी नज़र तोह बस हरी सिंह पे हे थी और मेरे होतो पे कुटिल मुस्कान खुद बा खुद आरही थी .....
तभी अनाउंसमेंट हुवा अब हमारे आज के विशेष अतिति ह ....ठाकुर जगमाल सिंह ...मला श्री बृजमोहन और सप शिवानी जैस्वाल पधार रहे ह.....
फिर सभी आके मुख्या चेयर्स पर आकर बैठ गए मैं श्वेता और चचाई के साथ मेला घूमने चला गया जंहा श्वेता और छोटी चची अपने लिए सूंदर चुडिया ले रही थी ...
छोटी चची--- तेरी शादी मैं यही राजस्थान मई हे करवाउंगी....
श्वेता--- चची शादी तोह मैं कर लुंगी चाहे जंहा करवाओ पर शर्त एक हे मैं घर छोड़के नहीं जाउंगी वो हे ए मेरे साथ रहने वर्ण मैं आप सबके साथ और भाई के साथ खुस हु कौन पीला फोकट के झांझड़ ...
स चची--- हैट badmass...aisa बी होता ह क्या
Main—bi सुन्दर सुन्दर ड्रेस और चुडिया ढक रहा था .....और मेरा मन अतीत मई चला gaya......janha सिर्फ ऋचा की यदि थी
मैं--- ये तेरे लिए हे ली यार ढक ये बिंदी तुजपे बहुत सूंदर लगेगी इस लॉन्ग स्कर्ट और टॉप के साथ पहनना बिलकुल मेरी अनगर्ल बन jayegi...phir जब अपनी शादी होगी न मैं तेरे लिए दुनिया की सबसे सुन्दर शादी का जोड़ा तैयार करवाऊंगा सब ढकते रह जायेंगे... और तू सिर्फ मेरी होगी सिर्फ मेरी .....और हम यंहा हिमाचल की इन हसीं वादियों मई अपना एक ऐसा आशियाना बनाएंगे जंहा हमे कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा...
ऋचा--- सच मई यार कब होगी अपनी शादी .... जब मैं तुम्हारी बांहो मई हमेसा के लिए रहुंगीय
मैं--- जब मैं कुछ बन jaunga...aur मेरे जीवन का उद्देश्य पूरा कर लूंगा तब फिर पूरी जिंदगी सिर्फ तुम और मैं होंगे...
भाई भाई भाई ......
मैं श्वेता की आवाज सुन होश मई आया ...
Shweta—kab से आवाज लगा रही थी आपको कान्हा खो गए थे आप ...
मैं--- कुछ नहीं आप लोग घूमो मेले मई मैं अत हु ...
श्वेता कुछ बोलना चाहती थी पर मेरी सकल ढक कुछ बोली नहीं
फिर मैं थोड़ा दूर आगया और आँखों के कोने से निकलते एक आंसू को निकल फेंका और सोचने लगा उसके बारे मई की एक बार क्यों उसने मुझ पे विस्वास नहीं किया मैं सिर्फ तुम्हारा हे था ऋचा पर तूने हमारे प्यार पे एक बार यकीं नहीं किया सिर्फ गैरो पे यकीं किया आखिर क्यों हमदोनो तोह एक दूसरे को बेइंतिहा प्यार करते थे न फिर kyo....main काफी दिएर अकेला बैठा रहा ... ... एक ऑवर बाद जब दिल का दर्द काम हुवा तोह उठ के दंगल के पास आगया जंहा पहलवान अलग गांव के लड़ रहे थे ...... वंहा का महल बड़ा रोमांचक हो रहा रखा था भीमा चाचा के सामने तोह पहलवानो ने ु हे हार मानली थी क्योकि उन्हें पता था जीत नहीं पाएंगे तोह उधर हरी सिंह का बीटा हरेंद्र सिंह सामने वाले पहलवानो का कुछ न कुछ तोड़ रहा था जो खेल भावना के बिलकुल विरुद्ध था......
फिर भोजन के समय के लिए कुछ दिएर दंगल रुका हम सब घर आगये जिसमे मला और सप शिवानी बी साथ थी...
दादाजी--- बृजमोहन जी और सप साहिबा दंगल काफी शांति से चल रहा ह मुझे शंका ह आज बहुत बड़ा कुछ होने वाला ह तोह आप सुरक्षा इंतजाम करके रखिये
सप शिवानी--- मतलब
भीमा चाचा--- आज नारक बनेगा जंहा पापियों को तड़पाया जायेगा....
मला समाज गया था इसलिए वो चुप रहा फिर सबने अपना खाना ख़त्म किया और शिवानी बेचारी सोचती हे रह गयी.....
हम्म सब वापस दंगल मई आगये जंहा पहला मुक़ाबला भीमा चाचा और एक पहलवान के साथ huva.....bheema चाचा ने उसे थोड़ी सी मुश्किल से हरा दिया और दूसरी तरफ हरेंद्र सिंह ने सामने वाले पहलवान का कन्धा हे तोड़ दिया.....
दादाजी--- इतनी बार कहने पर बी हरी सिंह तेरा बीटा खेल भावना नहीं दिखा रहा h...aur इस बार बी उसने सामने वाले पहलवान का कन्धा तोड़ दिया ह जो खेल के नियमो के विपरीत ह मैं चुप हु तोह तुम कुछ बी करोगे काट के फेंक दूंगा समजा अबकी बार इसने ऐसा किया तोह...
हरी singh—thakur जगमाल सिंह जी उम्र हो गयी ह पर तांव नहीं गया ह हमने भी चुडिया नहीं पहनी h...jo चुप रहेंगे .....जवाब हम बी देंगे..
दादाजी--- तू जवाब देगा अपनी हद मई रह वर्ण अब एक सब्द और तुजे इस दुनिया मई कोई नहीं बचा पायेगा
पर हरिसिंह को तोह मला और सप पास बैठा दिख रहे थे जिसे उसे पता था की वो बिच मई आजायेंगे और 100 बड़े लठैत जो लाया था तोह आज हवा मई था और उसने वो गलती कर हे थी जो नहीं करनी चाहिए थी...
हरी singh—sabke सामने जान से मरने की धमकी दे रहे हो muje..dum ह तोह मार के दिखाओ ...
मैं --- कब से यही ढक रहा था मुझे बिकुल नहीं पसंद था की कोई दादाजी ऐसे ऊँची आवाज मई बात करे मैं भाग के गया और कोई कुछ कर पता उसे पहले हे हरी सिंह को आगे गले के पास से पकड़ा और चेयर से से उठा के सामने ाखडे की तरफ फेंक दिया और वापस उसके पास गया उसे 2no हाथो से पकड़ के ऊँचा उठाया और जो ट्रॉफी पड़ी थी उस टेबल पे पटक दिया तब तक अस्सपस्स के पुलिस और गाँव वालो ने मुझे पकड़ लिया.....
Main---Kutte तेरी इतनी औकात जो तू दादाजी के सामने बोलै यही सबके सामने हे काट दूंगा समजा ...अब तुजे कोई नहीं बचा payega....cheerfaad कर दूंगा teri....teri हालत गली के कुत्ते से भी बुरी करूँगा यंहा सबके सामने कसम खता हु माँ भवानी की तेरी हालत तेरे गाँव वालो के लिए मिसाल होगी तेरे ये गाँव वाले और तेरी सतो पीडिया जब जब ठाकुर जगमाल सिंह का नाम सुनेगी वो दर से काँप uthenge...aur मैं जो बोलता हु वो करता हु....
हरेंद्र सिंह बी मेरी तरफ भाग के आया पर उसे गाँव वालो ने पकड़ लिया....
हरेंद्र सिंह--- तू नहीं बचेगा अब तुजे मैं अपने हाथो से मरूंगा...
Main—usai ढक के गीदड़ो की धमकी नहीं शेर की हुंकार ह ये ......
माहौल बहुत तंग हो गया था एक तरफ हरी सिंह के 100 लैटहैटो के साथ 300 गाँव वाले और थे तोह यंहा दादाजी के साथ मैं भीमा चाचा और मला और 1000 गाँव वाले खड़े the...aur सब एक दूसरे को घर कर ढक रहे थे...
सप शिवानी और मला ने समझाया तोह माहौल थोड़ा शांत हुवा पर सब एक दूसरे को हे ढक रहे थे और हरी सिंह मेरी तरफ ढक के पहचाने की कोसिस कर रहा था की ये कौन ह ....पर उसकी आँखों मई मुझे जान से मरने के इरादे साफ़ थे...
शाम के 5 बज गए थे हरी सिंह का दिमाग शांत हुवा तोह उसने इशारे से 100 लैटहैटो को मंदिर की तरफ भेज diya...as पैर प्लान हमने अपने 2 पहलवानो के साथ उसके खबरि को लेके मंदिर के रस्ते मई खड़ा कर दिया
अब आखिरी दंगल शुरू हुवा
जो भीमा chacha...aur हरेंद्र सिंह के बिच था...
हरेंद्र भीमा चाचा को घर कर बोलै आज तेरी हालत ऐसी करूँगा की तू दुबारा खड़ा नहीं होगा ....
B.chacha—dair किसकी ह अजा...
फिर दोनों आपस मई भीड़ गए हरेंद्र ने एक थपड कनपट्टी पे मारा चाचा के तोह चाचा ने जब दुबारा वो कनपटी पे मरने लगा तोह उसे झुक कर उसे पकड़ कर उठा के पटक diya....harendra टिल मिला के खड़ा हुवा और दुबारा एक दूसरे के हाथ मई हाथ फंसा के आगे पीछे ढाका देने लगे लगे फिर मौका मिलते हे हरेंद्र ने चाचा का बांये हाथ को छोड़कर ढाया हाथ को पीछे की तरफ मरोड़ दिया जिसे चाचा बिलबिला उठे और रेफरी ने वार्निंग दे दी दुबारा किया तोह हार जाओगे.. चाचा ने कुछ दिएर हाथ को तीख किया और फिर दुबारा आमने सामने हो गए पर दर्द से भीमा चाचा की ताकत काम हो गयी thi...isi का फायदा उठके ...हरेंद्र सिंह ने भीमा चाचा को फिरसे बांये हाथ को पकड़ के पीठके ऊपर लेके उठा के पटक दिया भीमा चाचा दर्द से पहले तड़प रहे थे और उसी हाथ को पकड़ के उठा के पटकने से दर्द से चीक निकल गयी...
हरी सिंह के गाँवों से ए लोग अपनी मूंछो पे तांव देके चिढ़ाने लगे तोह हरी सिंह बी तांव मई आगया
हरी सिंह --- है है है लगता ह मंडावा के खून मई दम नहीं ह .. रहा अब मूंछे ऊँची बस नाम की हे रह गयी h....ha है है
दादाजी--- बस गुसाई से उसे देख रहे थे ..
हरी सिंह— अगर ह किसी मई दम तोह जीने मरने का मैच होगा एक मौका और देता हु भीमा की जगह दूसरा पहलवान लड़ ले पर मैच हार जीत से नहीं एक की मौत से ख़त्म hoga...manjur ह ठाकुर...
दादाजी--- मुझे manjur....par जो पलटा उसको मैं खुद मारडुंगा.....
हरी singh—Toh भेज अपने पहलवान को देखता हु अब किस्मे जीने की छह नहीं ह
सप शिवानी--- नहीं ये नहीं हो सकता ह ...
दादाजी और हरी singh—Sp साहिबा आप मई से कोई बी बिच मई आया तोह पुलिस वालो की मौत जी जिम्मेदार आप होंगी .....तोह सोच के उठियेगा अब ये शान भान का दंगल ह
मला – शांत हो जाइये सप साहिबा अब आप और मैं कुछ नहीं कर सकते ह ये वर्चस्व की लड़ाई ह आपको पहले भोजन के वक़्त बी बताया था आप चाहकर बी कुछ नहीं कर सकती ह ठाकुर साब कभी गलत नहीं करते ह इस हरी सिंह के खिलाफ काफी शिकायत h....bus शांत रहिये ...ढकते जाइये आज का दंगल और आज का ये दिन आप जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगी ये मेरा वडा ह...
दादाजी – जोर से निर्वाणा... ये मरना नहीं चाहिए ह इसकी चीक इसके बाप के कान मई तीर की तरह चुबनि चाइये... इसका बाप बिख मांगना चाहिए इसकी जिंदगी की .....
Main—Jo हुकुम......
और खुद गया दंगल mai...gusa आँखों मई पहले से हे सरे गाँव वाले कुंवर सा कुंवर सा के नारे लगा रहे the...aur मैं उसको सामने उसकी आँखों मई आंखे दाल के खड़े थे........ मैंने 2no हाथ सामने किये और जैसे हे उसने भी 2no हाथ मेरे हाथो मई डालने के लिए सामने किये मैं फुर्ती से साइड से निकल के उसके पीछे आगया और उसकी कमर को पकड़ के पूरी ताकत से ऊपर उठके पीछे फेंक दिया गिरा निचे और चीक निकल गयी उसकी... वो जैसे हे खड़ा हुवा मैंने भाग के गया उसके पेट से पकड़ के ऊँचा उठाया और अखाड़े से बहार फेंक दिया ....वो सीधा जेक पिछवाड़े के बल गिरा टेबल और खुर्सियो पर फिर से गांड फाड़ चिल्लाया मैं उसके पास फिर से भाग के गया और उसको पेअर से पकड़ के घसीट के अखाड़े मई लाया और सीधा खड़ा किया और उसका एक हाथ पकड़के अपनी पीठ पे उठा के दिया पूरी ताकत से धोभी पछाड़ उसका कन्धा हे टूट गया और चिल्लाने लगा पर मेरी आँखों मई तो खून सवार था मैंने फिर उसे खड़ा किया और कमर से पकड़के अपने पीछे उठा के फेंक दिया ऐसा कई बार किया .. सायद कन्धा गर्दन हाथ काफी जगह फ्रैक्चर आगया था और मू से खून निकल रहा था...
हरी सिंह--- छोड़ दो उसे वो हार गया ह....
मैं--- मेरे दादाजी के पैरो में गिर कर माफ़ी मांग फिर छोड़ दूंगा....
हरी सिंह मजबूर था क्योकि उसे नहीं पता था की कोई भीमा से ाचा पहलवान भी निकल जायेगा वर्ण वो कभी ऐसा चल के पंगे नहीं leta....usko लगा था भीमा से ाचा पहलवान कोई नहीं होगा ..
हरी singh----main हाथ जोड़ के माफ़ी मांगता हु apse...mere बेटे की जिंदगी भकस दो
दादाजी---- दफा हो जाओ अपनी सकल लेके... यंहा से ...तेरी औकात नहीं ह मेरे सामने खड़े रहने की....
सरे गाँव वाले हंस रहे थे ..जिसे वो अपमान का घुट पीकर रह गया..
फिर हरी सिंह अपने बेटे को लेके दंगल से थोड़ी दूर आगया
हरी singh—is अपमान का बदला जरूर लूंगा मई ठाकुर .....जरूर लूंगा बेशक मैं उतना ताकतवर नहीं हु पर तेरे पोते की जानकारी मई उसे दूंगा जो तेरे लादले बेटे सहदेव का वंश मिटाना छठा h.....harendra को बाद मई डॉ के पास ले जाऊंगा पहले मंदिर जाता हु आरती का समय कीच दिएर मई हो जायेगा तब वो लड़का वंहा आएगा तब उठा लूंगा usai....aur अपना बदला पूरा करूँगा... पता नहीं कौन ह वो छोकरा और आज ये कौन सा पोता आगया ठाकुर ka...baad मई सोचूंगा उसका बी पहले इसे निपटा लू..
इधर दंगल मई ...
दादाजी के नाम के जय करे लग रहे थे..
दादाजी--- मुझे खुसी ह मेरे 2 शेर मेरे 2 हाथ ह भगवन तुम दोनों की सदैव रक्षा करे..
बी chacha—babuji मैंने क्या किया ह सब राज ने किया ह...
Main—usne धोखा किया था वर्ण मेरे चाचा को हरा ले इतना दम किसी मई नहीं .....
फिर जब मुझे इनाम देने लगे तोह मैंने 11000 ऊपर के रख लिए और बाकि सब गाँवों के कल्याण के लिए दे दिए जिसे सब खुस हो गए
Main—dadaji चले हमे अभी 15 कम दूर मंदिर भी जाना ह और मैंने भीमा चाचा को इशारा कर दिया....
जो इशारा था अब दंगल के बहार दंगल का ...
और फिर मैं और दादाजी और 3 पहलवान सबको नमस्कार अलविदा करके निकल दिए मंदिर की तरफ .... आरती का समय भी हो गया था....
मंदिर से 8 कम पहले
मैं--- दादाजी आपको पता ह क्या करना ह आपका वो रूप देखना ह मुझे आप तयारी करके रखो उनके पुरे गाँव देखेंगे की आपसे उलझने का अंजाम क्या होता ह........
दादाजी--- तीख ह मैं अभी फ़ोन करके इंतेज़ाम करके रखता हु.....
फिर मैं चल दिया अपनी बाइक से मंदिर की तरफ जब 6 कम दूर रह गया था तब खबरि से फ़ोन करवा दिया
हरी सिंह--- सबको इशारा करता ह की सब तैयार रहे खबरि का फ़ोन आगया ह...
उसके पास एक झंडा था जिसके फहराने का मतलब था सीकर ारः h...aur खुद अपनी कार को रोड के बिच मई कड़ी करके खड़ा हो गया मैं सामने से अत दिखा तोह पहले शॉक हुवा और फिर मुस्कराने लगा मेरे पास एते हे ..
हरी सिंह--- ओह तोह तू ह वो लड़का जो ठाकुर के घर आया h...tabi मैं सोचु तू उसे दादा जी क्यों कह रहा था अब तोह सारा हिसाब तेरे से पहले पूरा करूँगा
मैं--- ाचा ऐसा क्या तोह करले पूरा लगता ह दिन वाली मार से तेरी अकाल नहीं खुली ह..... बाप बेटे की गांड कुटाई अचे से हो गयी पर छानने अभी कुलमुला रहे ह पिछवाड़े मई ..
हरी सिंह--- है है है मरेगा तोह तू सेल..
Main—pata ह मैं तुजे मरूंगा नहीं जब मैं ये बोल रहा था मेरी सर की नसे तन गयी थी और आंखे लाल होने लग गयी फिर मैं आगे बोलै मैं तेरे हाथ को पहले तोडूंगा फिर तेरी एक एक ऊँगली तोडूंगा ऐसे हे teri...sari हड़िया तोडूंगा phir....tere साडी उंगलिया हाथ और पेअर की काट दूंगा और सुन इतना हे नहीं फिर जइब काट दूंगा फिर तेरी आंखे फोड़ दूंगा ....और तेरे सरे आदमियों के साथ बी यही करूँगा. लोग थूकेंगे अरे इस बार तेरी आंखे नहीं फोड़ूंगा ताकि तू सब ढक सके सारा गाँव तुझ पे थूकेंगे.. हरी सिंह मौत तोह ु हे बदनाम ह दर्द तोह जिंदगी देती ह .....और कैसे देती ह ये तू देखेगा....
हरी सिंह--- मैं तोह दर गया है है है....
Main—Hari सिंह निर्वाण कभी झूट नहीं बोलता..
हरी सिंह के एक इशारे से 4 तरफ से खूब सरे लोग आजाते ह ..
हरी सिंह--- ये ढक मेरी पावर....100 ताकतवर लठैत ह ...और मुझे डरने चला था जा रे सुखिया लेके आ इसे घसीट के मेरे पास
सुखिया आया भागता हुवा मेरे pass....usne लेथ घुमा के मेरी तरफ जैसे हे घुमाया मैंने अपना हाथ आगे कर दिया उसका लेथ टूट गया और फिर दूसरे हाथ का पंच पहले पेट मई और फिर दुबारा उसके जबड़े पे दिया हवा मई उड़ता हुवा जमीं पे गिरा......
मैं – बस यही ह तेरे लठैत जो इतने मई हे पसर गया ह तुजे पता ह मेरा परिवार ह ...और मेरा परिवार मेरी ताकत ह अब तुजे मैं दिखता हु ताकत मैं पूरा जोर लगा के चिल्लाया ..
दादा जीईईई ...........
2 मिनट हुवे कुछ नहीं हुवा तोह हरी सिंह जोर जोर से हसने लगा और बोलै क्या हुवा बचे बस निकल गयी हवा
मैं – मौत तेरे पीछे चलती हुवी आरही ह और तू मेरी तरफ ढक रहा ह..
हरिसिंह जैसे हे पीछे हे घुमा पीछे गाँव के लोग हाथ मई लेथ और डंडे उठाये भागे आरहे थे....
मैं दाए मुड़के dhek...hari सिंह ने गर्दन दये घुमाई तोह उसे आदमी हे आदमी दिखे जो उसकी तरफ हे आरहे
मैं बाये ढक अब हरी सिंह ने बाए देखा तोह उसकी फैट गयी इतने सरे आदमी ढक के ..उसके साथ वाले आदमी बी दर गए....
मैं अभी रूक अब मेरे पीछे जो तेरे आदमी खड़े ह न उन्हें बोल अपने पीछे देखे..
जैसे हे उन्हों ने पीछे देखा तो उनकी हालत ख़राब हो gayi...piche दादाजी भीमा चाचा और उनके पीछे भीड़ चली आरही थी...
मैं-- पता ह जंगल का राजा शेर होता ह और तू तोह जंगल की जगह शेर की मंध मई हे हाथ दाल दिया...
मैं--- छिलके चीयर डालो फाड़ डालो इनका वो हाल करना ह की इनकी पीडिया दुबारा गलत करने के बारे मई बी सो बार सोचे..... और मैं बी भाग के दी घुटने की हरी सिंह के सीने पे वो उड़ता हुवा खुद की कार से takraya...wo खड़ा होता उसे पहले हे उसको उसकी गर्दन से पकड़ के बोनट पे पटक diya...sala गिरा निचे ...उधर 300 गाँव वाले टूट पड़े उन 100 पर ..उनकी हड़िया पसलिया सब तोड़ दी ...इधर मैं हरी सिंह को घसीट के दादा जी आगे लाके पटक दिया ...
Dadaji—in सब को उठालो और ले औ हवेली पर फिर पलट कर भीमस इसे उठालो और इसके बेटे को बी ले चलो haveli.....oe..
फिर हम पहले हवेली की तरफ आगये मैं हरी सिंह को घसीट के हवेली के अंदर ला रहा tha...toh वंहा सुरेंद्र बबिता खड़े थे जो मुझे हे ढक रहे थे गाड़ियों की आवाज सुन बाकि सब बी बहार आगये छोटी chachi...badi चची .... बहार गए हुवे थे..
श्वेता-- सुरेंद्र और बबिता के पास jake...ye तुम बी हो सकते हो जितना दूर रहोगे उतना सेफ रहोगे .समजे क्योकि तुमने जो पास्ट मई किया ह तुम्हे उसका हिसाब देना ह तुम्हारा बी नंबर आएगा.......
मैं उसे घसीट के बेसमेंट मई ले गया जिसके पीछे दादाजी बी गुसाई मई आरहे थे ..
Dadi—bheema क्या हुवा ह
Bheema—maa सा डूंगरपुर के हरी सिंह ने बाबूजी की बेज़्ज़ती कर दी थी दंगल मई तोह राज उनके गाँव वालो समेत उसको उठा के लाया ह...
बड़ी चची--- बड़ा आया गाँव वालो को उठाने ...waaalaaa....aaa
बहुत सरे ट्रैक्टर्स की आवाज आने लगी थी जिसमे पीछे 100 गाँव वाले टूटी फूटी हालत मई पड़े हुवे थे 30 ट्रैक्टर ट्रॉलियां और बहुत साडी पिकप और कार्स मई आदमी बैठ के आरहे थे
सुरेंद्र बबिता और बड़ी चची का मू खुल हुवा था और उनके सरीर मई झुरझुरी दूध रही थी....
बेसमेंट मई
मैं नाम बता सिर्फ एक बार पूछूंगा ..
हरी सिंह--- मुझे नहीं पता
दादाजी--- ढक तेरी मेरी कोई दुश्मनी नहीं और तुजे पता था की मुझसे सीधे उलझना मतलब मौत ह फिर भी तूने ये किया तोह साफ़ ह किसी ने तोह करवाया हे होगा....
हरी सिंह चुप रहा
मैं--- तू अब तड़पाएगा और बहुत तड़पेगा फिर मैंने उसके पैरो मई 2 किल ठोके दी ताकि पेअर न हिला सके फिर उसके सामने बैठ कुर्सी पर उसकी उंगलिया कटी फिर 2no पेअर की काट दी ...तू बोलेगा तू नहीं बोलेगा तोह तेरी आत्मा से बुलवा लूंगा मैं ...
वो चिल्ल्ता रहा ......रुक जाओ पर मैं नहीं रुका ...
हरी सिंह--- उसका नाम
SR.VICTER ह
दिल्ली का डॉन ह बहुत बड़ा पुरे उत्तर भारत मई आर्म्स की सप्लाई करता था अब ये काम उनका बीटा JR.Victer करता ह कान्हा मिलेगा कुछ पता नहीं बस बोलै 50 कर मिलेंगे सहदेव के बेटे का पता लगाने के.. बहुत पैसा ह उनके पास बहुत पावर फुल ह वो ....
मैं---- वो होगा पावर वो होगा बड़ा डॉन वो होगा पैसे वाला पर इस बार उसका पूरा साम्राज्य मिटा दूंगा जिन हथियारों को वो बेचता ह उसी मई उसकी चिटा जलाऊंगा आग से खेलने का शोक ह न उसी आग मई जिन्दा जलूँगा मैं........
आज के लिए इतना हे ..
लाइक्स और कमैंट्स देना न भूले ...पिक्चर अभी बाकि ह....