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PART - 7(बी)
Aryan-Deepti को 'तळतळा लोक' के द्वार पे छोड़कर स्त्री योद्धा वापस लौट गयी..... द्वार से दोनों अंदर प्रवेश किये तोह कोई नहीं दिखा सब तरफ नज़र करके आर्यन बोलै ," दीप्ति अपनी तलवार निकाल लो मुझे लगता है कोई हमको देख रहा है पर सामने नहीं आ रहा ".
आर्यन चिल्लाकर ," जोह भी तुम हो सामने आ जाओ इश्से पहले में मंतर पढ़कर तुमको बंधी बना लूँ ".
द्वार पे शंकर भगवन की "त्रिपुरान्तक अवतार" की मूर्ति बानी थी , आर्यन समझ गया की राजा माया भी शंकर भगवन के भकत है और यह लोक उन्होंने hi इनको दिया है ........
(* त्रिपुरान्तक अवतार लेकर भगवन शंकरजी ने तीन विशाल नगर को नष्ट किया था जोह माया ने बांये थे स्वर्गलोक और भू लोक के बिच तीन राक्षस भाइयों के लिए ...... माया भी वहीँ था पर विनाश के बाद शंकर भगवन ने अपने िश भक्त को फिर से जीवट कर तळतळा लोक का राजा बना दिया . )
आर्यन ने फिर आँख बांधकर भगवन भोलेनाथ का नाम लिया और मंतर पढता उससे पहले hi सामने राजशी वस्त्रों में वह प्रकट हो गए ," थारो वॉश महार्यं , तुमको मंतर पढ़ने की जरुरत नहीं है हम भी शिव भक्त हैं "........ यह राजा माया की आवाज थी इतनी मीठी जिसने सुनी वह इनके वश में हो जाये ......
आर्यन ने हाथ जोड़कर नमस्ते किया तोह दीप्ति ने भी उसका अनुसरण किया ...... " चमा चाहता हूँ महाराज , बस मुझसे कोई द्वार पे मोहर नहीं लिया प्रवेश पर तोह लगा हमारा उपहास उदा रहा है ".
राजा माया मुस्करा के ," कोई बात नहीं हमको hi विलम्ब हुआ आने में , कहो हम क्या मदद कर सकते हैं ?"
आर्यन ," आप तोह सर्व ज्ञानी हैं और आपके असर से कोण भला बचा है आजतक ".
राजा माया हसकर ," फिर तुमको शीर्घ hi 4तह पड़ाव तक जाना चाहिए"..... और एक पोर्टल सा रास्ता अपने हाथ से बना दिए ..... " यह भी हमारे लोक में है पर वहां तुम्हरी भी दिव्या तलवार की माया से तुमको पार पाना होगा ".
Aryan-Deepti ने आगे बढ़कर उनके प्यार चुहये तोह आशीर्वाद देते हुए बोले," सदैव खुश रहो और मेरी माया के असर से हमेशा दुर्र रहो" ...... है है है है ......
आर्यन भी मुस्करा ," महाराज आप की क्रिया भी एक कड़वा सच्च हैं िश जीवन का और में भी अछूता नहीं हूँ उससे ुष नश्वर संसार में आप तोह अन्तर्यामी हैं ".
राजा माया ," हाँ तुम हमारी अधरगनि रानी हेमा के उपासक लगते हो परन्तु पूरी तरह नहीं फिर भी वह सच्च तुम्हारा नहीं है , जल्दी hi अपने समय पे अपने आप पता चल जायेगा ...... महार्यं यह पतलोक तुम्हारे रुकने के लिए ठीक स्थान नहीं है इशलिये अपनी कर्मभूमि जल्दी कार्य पूर्ण करके लौट जायो ".
दोनों ने उनको प्रणाम किया और पोर्टल में एंटर किये जोह उनके पीछे बांध हो गया .......
तब एक दानव ने पुछा ," महाराज आप िश मनुष्य से इतना डर गए जबकि इसको हम में से कोई भी असुर या दानव हरा देता ".
राजा माया ने मुस्करा के कहा," इश्के हारने या मरने के बाद hi तोह इसका असली तांडव शुरू होता, तुम नहीं समझोगे इश्के पिछले जनम की पटरानी रतिदेवी जोह िश जनम में इसकी नानी माँ है उसको भगवन शिव का वरदान प्राप्त है अगर उसने आर्यन के मरने के बाद पुनर्जीवत मांग लिया तोह सबसे पहले यह पतलोक को hi तबाह करेगा ..... कभी कभी सबकुछ अनभिग बनकर सबकी भलाई और पतलोक का कल्याण देखना पड़ता है फिर धरतीपकड़ को भूल गए , उसको कोई पतलोक निवासी भी नहीं मार सकता न hi सारे 14 लोकों का कोई प्राणी पर िशने कैसे आसानी से मार दिया यह सोचते रहना ...... सच्च ये है यह एक तरह से देखा जाए तोह यह मनुष्य िंह 14 लोकों में से भी नहीं है समझे ".
सब हैरान hi थे यह फिर कहाँ से यानी दूसरी विश्व से पर ऐसा कैसे हो सकता है फिर सबको दिव्या तलवार का याद आया की वह भी िश दुनिया की नहीं है तोह ओह्ह्ह्हह्ह तभी यह यहाँ आया है उसके लिए .....
दुसरे ने पुछा ," महाराज फिर वह लड़की जिसको वह अर्धांगी बता रहा है ".
राजा माया हस्ते हुए ," वह भी एक दिव्या तलवार की माया hi है जिसको महार्यं जल्दी खोज लेगा बस जनम एक दिव्या कन्या के रूप में लिया है , उसको कोई नर छु भी नहीं सकता किसी भी लोक में ".
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दिव्या तलवार में िश बार बड़ा कम्पन हुआ और रौशनी भी चका चॉंद से तेज़ हुयी और अंदर धस गयी ...... ख़ज़ाने का विशाल ढेर भी खान खाना उठा और अपने तीनो फैन को उठा के विशाखा की 6 आंखें खुली नींद से ॉश्चारिये से यह कम्पन और तेज़ कैसा है ?
"विशाखा पुत्री अब िश तलवार का मोह छोड़ दो इश्क मालिक पतलोक में आ चूका है धरतीपकड़ को मिर्त्युदण्ड देकर , हो सके तोह अपने प्राण बचा लो".
विशाखा को अपने मस्तिक्ष में सुनाई दी यह चेतावनी चिंता से काम न थी की धरतीपकड़ को मिर्त्युदण्ड देने वाला िश दिव्या तलवार का मालिक है ..... नहीं यह सिर्फ मेरी तलवार है और इश्को भी मुझसे लगाव है . में भी तोह देखूं कोण मुझसे इश्से जुड़ा करता है .
'पतला लोक' कह लो या 'नाग लोक ' िश लोक की एक विशाल गुफा में जोह अब नंगीं विशाखा का आवास था िश दिव्या तलवार को पाकर ...... दिव्या तलवार ने विशाखा को अपने को छूने दिया उससे लगाव करने दिया इसके पीछे की मनसा तोह दिव्या तलवार hi बता सकती है पर आज उसको भी विशाखा एक ज़हरीली लालची नागिन लग रही थी जोह उसके मालिक के पास नहीं जाने देना चाहती है ....... यानी अब दिव्या तलवार भी चाहती थी की विशाखा का अंत जल्द से जल्द हो और वह अपने मालिक के हाथों की सोभा बढ़ए.
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पोर्टल के अंदर जाकर सामने उनको बस धरतीलोक जैसा नजारा नज़र आया , पेड़ पदों हरी घास , पसु पक्षी , नीला आकाश ...... दोनों आगे बढे तोह आर्यन ने कहा ," दीप्ति अब हम किसी मायावी दुनिया में हैं क्योंकि यहाँ सब कुछ अच्छा hi दिख रहा है धरती की तरह , 4तह पड़ाव को कैसे पार करना हैं तुमको कुछ अंदजा है ".
दीप्ति ने आर्यन की तरफ देखकर चलते हुए कहा ," हमको ऐसी जगह खोजनी है जोह वायु की विशाल शक्ति रखती हो यानि एयर पावर का स्रोहत हो पर पतलोक में जीवों को वायु की कहाँ अवसक्ता पड़ती है जबकि सब जगह वायु मंडल है ".
आर्यन ," हाँ यह बात भी सही है , वायु की शक्ति पतलोक में कैसे होगी पर नक़्शे में मैंने एक बड़ा बवंडर देखा था 4तह पड़ाव का संकेत ..... रुको अभी दिखता हूँ ".
(आर्यन ने अपने लैपटॉप पे पहले दीप्ति का नक्शा बांया फोटोशॉप से फिर जलमहल वाला भी ...... बिना को देकर एक स्पेशल डाई उसे कर 2.5 ×1.2 फट कपडे पे दोनों तरफ प्रिंट करवा पक्का कलर उसे कर आसानी से न मित्ये यहाँ आने से पहले साथ ले लिया था )
आर्यन ने अपने बैग से एक मोटा रुमाल जैसा कपडा निकाला 2 तेह किया हुआ फिर खोल के दीप्ति के सामने किये ," देखो यह है वह नक्शा जोह तुम्हारी पीठ पे मुझे सबसे पहले दिखा था और यह दूसरी साइड जब जल महल के पानी में दिखा ....... दोनों तरफ से कपड़े करो तोह पहले सिर्फ 5 पड़ाव दिखे पर पानी में 5 सिग्न (जल महल , जवालामुखी, चट्टान में गुफा , बवंडर, ....???........ ) उन्ह पड़ाव पे हैं ....... यह पतलोक में 4तह पड़ाव में वुयू का बवंडर है पर यह किसी घने जंगल के बिच कैसे हो सकता है?"
दीप्ति ," हो सकता है यह सामने जोह जंगल है इसी में वह बवंडर हो जिस तक हमको पहुंचना है ?"
आर्यन ," हुन्न पर यह कोई हमको फसाने की चाल भी हो सकती है यानि हमको वह दिखाया जा रहा जोह हम चाहते हैं ताकि हम अपनी मंजिल से भटक जाएँ या फिर सामने मंजिल है और हम बेकार में इश्को भ्रम समझे ".
दीप्ति ," बात तोह ठीक है आपकी , चलो पहले यह पता लग्न होगा की हम किसी मायाजाल में तो नहीं फसें हैं फिर ुष बवंडर के स्रोत को भी ढूंढ़ना होगा ".
दोनों ने सहमति जताते हुए एक दुसरे को चूमा और चरों तरफ निगाह रखते आगे बढे जोह सामने जंगल नज़र आ रहा िश मैदान के बाद पार करके ...... आर्यन को जंगल के बहार जोह सबसे ऊँचा पेड़ दिखा तोह ुष्पर चढ़ गया जब ऊपर पहुंच के देखा तोह उसको ॉश्चारिये हुआ की यह तो न ख़तम होने वाला दूर दूर तक जंगल hi लग रहा है फिर ुष बवंडर को कैसे खोजे , निचे उतर के दीप्ति को भी अपनी जिगशा प्रकट की .
अब दोनों के पास जंगल में एंटर करने के अल्वा कोई चारा न था , दोनों ने अपने बड़े बड़े कटरी नुमा खंजर निकाल लिए और िश जंगल में प्रवेश कर गए ...... जैसे जैसे जंगल घाना होता जा रहा था वैसे वैसे दोनों अपनी कटारी से झाड़ काट ते आगे बढ़ रहे थे ....... दोनों आँखों के इशारे इशारे में बात करते आगे बढ़ते गए पर 2 घंटे चलने के बाद भटकते हुए उनको कुछ नहीं मिला सिवा जंगली जानवर और पक्षिओं के जोह उनको देखकर दुर्र भाग जाते पुकारने पे भी नहीं रुकते .
( दोनों जानवरो और पक्षिओं की भासा में बात कर लेते थे )
दोनों ने कुछ डिअर विश्राम करने का सोचा तोह एक बड़े पेड़ के निच्चे बेथ सुस्ताने लगे , पानी पीकर कुछ फल खाये जोह साथ लाये थे और आधे घंटे आराम कर के आर्यन बोलै ," तुम यही रुको में एक बार पेड़ पे चढ़ के देखता हूँ ".
दीप्ति ," क्या िश बार में देखूं या दोनों चलें सायद कुछ और दिखे ".
दोनों फिर अपने बैग्स और अस्तर रखकर पेड़ पे चढ़ गए बस चरों और जंगल hi जंगल अब क्या करें ? दोनों हताश होकर निच्चे उतरने लगे तोह उनको 2 लोमड़ (जैकाल) दिखे जोह उनके बैग उठा के पेड़ के निच्चे से भागे ..... दोनों ने चिल्ला के उनकी लैंग्वेज में रुकने को कहा पर नहीं रुके अब दोनों अलग दिशा में थे तोह आर्यन ने दीप्ति को दुसरे की तरफ भागने को कहा और वह पहले के पीछे . सायद जानवरो से दोनों का लगाव उनको मारने से रोक रहा था नहीं तोह एक वार खेला ख़तम हो जाता .
आर्यन ने स्पीड बढ़ा के ुष लोमड़ को ुष पेड़ से 2 कम दूर पकड़ लिया जोह उसके छूटे hi गायब हो गया और बैग जमीन पे गिरा ....... उसको समझ में आ गया की उनको धोके से अलग किया गया है यानी दीप्ति मुसीबत में है ..... क्या जरुरत थी बैग के पीछे भागने की वह तेज़ी से वापस ुशी पेड़ पे पहुंचा क्योंकि दौड़ते हुए लोमड़ का पीछा करते अपनी कटारी से बड़े पेड़ों पे कट मारता आगे बढ़ा था पर दीप्ति का कोई अत पता न था उसने दीप्ति वाली डायरेक्शन पकड़ी और तेजी से असुरे करता की वह किस तरफ गयी है ...... दीप्ति ने कुछ झाड़ काटे थे आगे भागते हुए .
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उधर दीप्ति बड़ी तेज़ी से ुष लोमड़ के पीछे भागी पर वह उसको पकड़ नहीं पायी और रुकी तोह फिर बैग मोह में दबा के लोमड़ दिखा और भाग लिया फिर दीप्ति भागी पीछे उसकी भासा में बोलते हुए," रुक ऐसा क्यों कर रहा है तुझे खाने को कुछ दूंगी रुक जा ?"...... 5 मं बाद फिर वह नहीं ढूंढ पायी ..... फिर वह दिखा फिर भागी ऐसा करीब एक घंटे से ज्यादा हो गया पर अब दीप्ति को भी नहीं पता था की वह कहाँ है पर ुष पेड़ से बहोत दुर्र है जहाँ आर्यन वह अलग हुए थे ...... अरे बैग के लिए इतना भागने की क्या जरुरत थी पर खेल खेला जा चूका था दो प्रेमी िश जंगल में अलग अलग ......
दीप्ति अपनी सांस दुरुस्त करती वापस जाने का सोची तोह कटे हुए झाड़ जोह कई दिशा में उसके लोमड़ के पीछा करते बने थे उसको धीवधा में दाल दिए की अब क्या करे ...... ?
दीप्ति अभी सोच hi रही थी की किसी ने पीछे से उसके सर पर मारा तोह बेहोस हो गयी ...... तभी तीन चुड़ैलों ने दीप्ति को जहर लिया ....... सकल से दरवानी और बदसूरत सी देखकर hi उलटी , पिशाब और टट्टी तीनो आ जाये एक साथ में .
पहली चुडिअल ," में इश्को मालिक के पास ले जाती हूँ सायद कुवारी है बड़ा इनाम मिलेगा , तुम ुष आदमी को धोंड के वहीँ गुफा तक ले आयो , पहले तीनो उसका शारीरिक भोग करेंगे फिर उसको खून भी पीना है और ाँद ( टट्टे ) भी खाएंगे जोह मनुष्य के बहोत सवादिस्ट होते हैं विरए से भरे हुए "....... है है है है है ......
दोनों ने उसकी बात का समर्थन किया , इनकी सकल hi दरवानी नहीं थी सोच तोह और ज्यादा बेहिसी थी ...... पहली चुडिअल ," पर ुष मनुष्य को अपना रूप बदल के मोहजाल में फसा के लाना अगर मेरे से पहले तुम दोनों उसका भोग किया तोह दोनों को मालिक से बंदी बनवा दूंगी ".
यह वाली चुडिअल ज्यादा ताकतवर लग रही थी , उसके जाने के बाद दोनों ने रूप बदला एक रूपवती 21 साल की लड़की बन गयी और दूसरी काला खूंखार भेड़िया, वह सूंदर लड़की आगे भागी और भेड़िया पीछे पीछे ," बच्चो बच्चो ..... कोई है बच्चो "........
आर्यन भी आगे बढ़ता दीप्ति की तलाश में 5 कम आ गया होगा पर दीप्ति का कुछ पता नहीं लग रहा था बस वह सोच रहा था की कहीं दीप्ति मुसीबत में न हो ....... थोड़ा और आगे चलकर उसको एक लड़की की आवाज सुनी जोह बच्चो बच्चो चिल्ला रही थी ...... यह दीप्ति की आवाज तोह नहीं है फिर िश जंगल में कोण मुसीबत में है मुझे उसको बचाना चाहिए ...... वह आवाज की दिशा में दौड़ा तोह कुछ hi पलों में ुष लड़की को अपनी तरफ भागता देखा और एक काला भेड़िया पर अगले hi पल नज़ारा अलग दिखा आर्यन को एक चुड़ैल स्त्री का रूप धार दूसरी चुडिअल भेड़िया का रूप धारण कर उसकी तरफ आ रही थी .
आर्यन के मस्तिक में ," ओह यह दोनों रूप बदल के मुझे hi फसा रही हैं और दीप्ति का भी इनको गायत होगा मुझे इनका भेद जाना होगा "....... अपने दिमाग़ में प्लान बना वह तेजी से ुष लड़की के पास पहुंच के पकड़ लिया और अपने पीछे कर के ुष भेड़िये को एक ग़ुस्सा जड़ दिया जिससे वह दुर्र जाकर गिरा और बेहोश हो गया ......
वह सूंदर लड़की आर्यन से चिपट के रोने लगी तोह आर्यन भी नाटक करता हुआ ," डरो नहीं अब तुम सुरकषित हो , िश जंगल में क्या कर रही हो ? क्या तुम ने किसी लड़की को देखा ? "
वह सूंदर लड़की तोह आर्यन से लिपट उसके बदन की खुसबू और खून सूंघ रही थी रोने का नाटक करते हुए, अपने मैं में " बड़ा hi हटा कटा सूंदर मनुष्य है ,इसे तोह में अपने साथ रखूंगी कितना मासून है इसका विरए भी स्वादिस्ट होगा "..... यह सोच सोच के उसके मोह में पानी आ गया था ......
आर्यन जोह उसको असली रूप में देख सकता था उसको घिन आ रही थी उसकी दुर्गन्ध से जैसे सालों से नहीं न हो और घोस्ट खाकर कभी टूथब्रश न की हो ..... आर्यन ," देखो वह भेड़िया भाग गया अब बताओ कोण हो तुम यहाँ क्या कर रही हो ?"
सूंदर लड़की रोटी हुयी ," में अपनी दो बड़ी भें चाय , साया के साथ भटक गयी हूँ मेरा नाम माया है ....... वह दोनों पानी ढूंढने गयी थी मेरे पीछे वह भेड़िया पद गया ..... अब में कैसे ढून्ढ पाऊँगी उनको ?"
आर्यन मैं में यानी तीन चुडिअल हैं , अगर दीप्ति का पता लग्न है तोह इसकी दोनों बहेनो को भी मिलना पड़ेगा तभी पकड़ के इनको कैद करूँगा कहीं दीप्ति को नुक्सान न पहुंचा दें ...... " ठीक हैं हम मिलकर तुम्हारी दोनों बहेनो को ढूंढ़ते हैं और मेरी पत्नी दीप्ति को भी वह भी खो गयी है ".
माया ," ठीक है जैसा आप कहें पर आप शादी सुदा लगते नहीं हो बहोत सूंदर हो "...... और शर्मा गयी .....
आर्यन ," यह भें की लौड़ी मुझे चुटिया समझ रही है , टाइम आने दे तुझे अपने चुडिअल होने की आज ऐसी सजा दूंगा भूलेगी नहीं ".
दोनों आगे बढे तोह भेड़िया गायब हो गया था और माया अपने पीछे पीछे ुष गुफा की तरफ ले जा रही थी जहाँ उन्ह तीनो का मालिक था .
कुछ दूर जाकर उनको साया मिल गयी जोह अपनी छोटी भें से भी सूंदर रूप धारण कर ली थी , माया जलते हुए शिकार मैंने पत्या और आ गयी लार टपकते हुए ...... साया अपने मैं में ," क्या ललाम लाल घोस्ट है , कितना हस्त पुष्ट है और सूंदर सजीला भी ...... इसको खूब भोगूंगी खूब विरए और खून पियोगी , इसके टट्टे भी बड़े होंगे तोह स्वादिस्ट होंगे .
साया माया गले मिली फिर चाय की खोज में तीनो आगे बढे तोह कुछ दूरी पे वह एक सूंदर युवती का रूप धारण उनको मिली एक हाथ में जल का पात्र लिए हुए तीनो भेने गले मिलकर खुश हो रही थी की बड़ा हाथ मारा है ......
आर्यन भी मुस्करा के बोलै ," मैंने तुम तीनो से बदसूरत , बदबूदार और कुरूप चुडिअल नहीं देखि ..... hi hi hi hi hi hi ...... चलो तीनो मेरी पत्नी का पता बता दो जान से नहीं मरूंगा नहीं तोह कैद करके जीवन भर तड़पना पड़ेगा".
हस्ते हुए बात शुरू कर गुस्से से उनको चेतावनी दे डाली पर तीनो को जैसे लखवा मार गया हो , इश्को कैसे पता क्या हमें देख सकता है अबतक नाटक कर रहा था ........ ???
आर्यन ने एक मंतर पढ़ा तोह तीनो अपने असली रूप में आ गयी .
चाय ," ओह्ह तो तेरा पास शक्तियां भी हैं मगर तू नहीं जानता हम तीनो को कोई हरा नहीं सकता पहले हमने सोचा की तुझे अच्छे से भोग लेंगे या फिर हमेशा पास रखते मगर अब तेरे लहू से प्यास भुजा लेंगे ".
इसी के साथ तीनो ने आर्यन पे हमला कर दिया जिसको वह खड़ा हुआ मुस्कारते बस ऐसे hi नाकाम कर देता , हथियार , पत्थर , अंगारे , जेहेर सब वार किये पर ुष्पर कोई असर नहीं हुआ .......
आर्यन ने मंतर पढ़ा और तीनो की छोटी पकड़ ली और एक दुसरे में लपेट के बोलै ," अभी समय है बताओ दीप्ति कहाँ है नहीं तोह जितना में छोटी कसके घूंड ने लगा उतना hi दर्द होगा मौत से बदतर ".
दो ऐंठे मारते hi तीनो की भयनक चीखिआ गूंज गयी , आज सच्च में यमराज से पाला पड़ा था बस वह मनुष्य रूप धारण किये था ....... कोई मंतर , कोई अस्तर , कोई जादू काम नहीं कर पा रहा था ऊपर से छोटी इतने से तीनो की आत्मा सी काट रही थी जोह बहोत पीड़ा दायी होता है ......
तीनो ने जोर जोर से रोटी हुए अपने मालिक को पुकारा पर वह भी जैसे इनकी पुकार नहीं सुन पा रहा था ...... तीनो ने हार के आर्यन को बतया की दीप्ति गुफा में उनके मालिक के पास है .
आर्यन तीनो की छोटी से पकड़ के ुष गुफा की तरफ दौड़ा जहाँ दीप्ति थी .......
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उधर "वातासुर" राक्षश की गुफा में दीप्ति को हवा में उदा के जंगल से चाय नाम की चुडिअल ले गयी तोह दीप्ति को गुफा में होश आया उसके जाने के बाद ....... उसने देखा िश अँधेरी गुफा में एक हवन कुंड जल रहा है और बहोत बड़े आकर का राक्षस मंतर पढता आहुति दे रहा है ......
ज़मीन से उठकर दीप्ति ने चरों और गुफा में देखा तोह हड्डी और मार्श पड़ा था जिसकी बदबू असहनीय थी ..... दीप्ति चिल्लाकर ," कोण है तू दुष्ट जोह मुझे यहाँ लेकर आया है ?...... तू जानता नहीं है मेरे पति महार्यं को पता चला की तू मुझे यहाँ लाया है तोह मौत की भीख भी नहीं मांग पायेगा".
राक्षस वतासुर बस खाका लगा के हसने लगा ," है है है है है है ..... तू जितनी सूंदर है उतना hi तुझे भोग के बलि चढ़ाने में आनंद आएगा ...... तेरे पति को तोह मेरी तीन गुलाम हज़म भी कर गयी होंगी . अगर मेरी बात मानेगी तोह तुझे अपनी रानी बना के रखूँगा . मेरा नाम महँ असुर वातासुर है मुझे कोई हरा नहीं सकता ".
दीप्ति भी हसकर ," तुझ पे मुझे हसी आती है , तू कायर की औलाद hi होगा तू नहीं जानता अगर तुझे पता होता की धरतीपकड़ को मेरे पति महार्यं ने कितनी भयानक मौत दी थी कभी ऐसा सोचता भी नहीं ...... ठयऊ है तुझपर कायर कहीं का , मुझे छुआ भी तोह तड़प तड़प के मरेगा ".
राक्षस ," जबान संभल लड़की , में कुछ बोल नहीं रहा तोह बढ़ चढ़कर बोल रही है और धरतीपकड़ को कोई मनुष्य कभी नहीं मार सकता . मेरा अपमान करके तूने अपनी भी मौत बुला ली है तुझे तोह तड़पा तड़पा के मारूंगा ".
"" पहले अपनी िंह तीन चुड़ैल को तोह बचा ले जानत के पिस्सू फिर तेरी बारी ""
यह आवाज आर्यन की थी जिसने तीनो चुड़ैल को वातासुर के पैरों की तरफ उछाल दिया ....... तीनो चिल्लाकर अपने मालिक से उनको बचने की गुहार करने लगी ......
दीप्ति हस्ते हुए ," वातासुर जब गीदड़ की मौत आती है न तोह गाओं की तरफ भागता है पर तू निच्च तोह िश गुफा में छुपा बैठा है ".
वातासुर तोह अभी भी हैरान था की यह थुच सा मनुष्य गुफा के अंदर कैसे आ गया मेरा मंतर तोड़कर नहीं यह िंह तीनो बेवकूफ की वजह से हुआ होगा .....
दीप्ति जोह आर्यन को देखकर खुश हुयी दौड़ के ुष्पर छलांग लगा के गोदी चढ़कर चूमने लगी पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म माहि पुछःह पुछठ ..... ी लव यू माय डार्लिंग .....
आर्यन भी किसी का जवाब देते हुए ," तुम ठीक हो कहीं चोट तोह नहीं लगी ..... ी लव यू तू माय स्वीट हार्ट ".
दीप्ति हसकर ," हम वायु का बवंडर ढूंढ रहे थे यह खुद वातासुर मिल गया , यही बवंडर लाएगा बस इश्को उलझा के बवंडर बनवाओ फिर तुम निगल जाना तभी 4तह पड़ाव पार होगा".
वतासुर ने 2-3 मंतर पढ़ तीनो चुड़िआलों की छोटी खोलने चहई पर न खुली ...... बल्कि उनकी चीक पुकार और बढ़ गयी .......
वतासुर गुस्से से ," तोह तू मायावी शक्ति रखता है पर धरतीपकड़ को तू नहीं मार सकता मगर आज में तुझे मार के िश कन्या की बलि दूंगा अपने महाराज मयासुर को ...... है है है है है है ".
हसने के साथ गुफा में तेज तेज आंधी सी चलने लगी फिर बड़ी स्पीड से ुष अंधी में पत्थर , भले , तलवार , गदा आर्यन की तरह चोदे तोह उसने दीप्ति को पीछे कर अपना हाथ आगे कर गोल गोल घुमा के उसकी दिशा वतासुर की तरफ कर दी और धड़ाम धड़ाम ...... एक के बाद एक सारे वार वतासुर को लगे तोह वह भी दर्द से चीख पड़ा ..... अह्हह्ह्ह्ह
आर्यन हसकर ," अबे तू तोह धरतीपकड़ से भी गया गुजरा है कोई बड़ा तूफान भेज जिससे तेरा नाम यथार्थ हो वातासुर ..... hi hi hi hi hi hi ...... नपुंसक कहीं का लड़कियों को उतथा है धोके से "......
( वाट = वायु और असुर = राक्षस)
" वतासुर , अगर जान प्यारी हो तोह इश्से माफ़ी मांग लो यह साधारण पुरुष नहीं है िशने धरतीपकड़ को मारा है".
यह आवाज राजा माया की सुनाई दी थी वतासुर के मैं में , अब वह भी डर रहा था पर आर्यन ने िशबार उसको माँ भें की गाली देकर ललकारा तोह था तो राक्षस hi विनाश काले विपरीत भुधि .....
वतासुर ने अपना साइज बढ़ना शुरू किया तोह गुफा फढ़ता करीब 40फट ऊँचा हो गया फिर एक घेरि सांस ली जैसे साड़ी हवा hi अंदर खींच ली हो और फिर जोह हुआ एक बड़ा भयानक 1200km/hr की स्पीड वाले बवंडर को मोह से बहार निकाल आर्यन की तरफ दिशा दे दिया .......
आस पास के पेड़ पत्थर से लेकर धुल भी उसमे मिलती गयी तब आर्यन बोलै ," यह देखो हम िश जंगल में बवंडर कहाँ गलत जगह ढूंढ रहे थे पर दीप्ति डार्लिंग तुम बहोत इंटेलीजेंट हो तुम ने स्रोत के साथ इसको ढूंढ लिया ...... ी लव यू लोट ".
दीप्ति चिढ़कर ," यह बवंडर अभी दूर से hi मुझे उदा ले जा रहा है खींचता हुआ और आपको आशिकी सूज रही है कसकर पकड़ के रखो में ुध जाउंगी ".
आर्यन अपनी जगह से हिला भी नहीं, दीप्ति को गले लगाकर बोलै ," डरो मत मेरी पीठ पे चढ़कर लिपट जायो अभी वातासुर का भूत उतरता हूँ ".
दीप्ति उसकी पीठ पे चढ़ पेट पे टांग कास ली और हाथ गर्दन पे ," इश्को निगल के hi आप रोक सकते हो फिर मेरे मोह में दाल देना यह पवन देव की शक्ति है जोह िश राक्षश ने तपस्या से पायी थी ".
आर्यन ने आँख बांध कर हाथ जोड़कर मंतर पढ़ा तोह कमल कवच उसके और दीप्ति के चरों और बन गया फिर आर्यन ुष बवंडर की तरफ दौड़ लगा के उसमे कूद गया .......
वातासुर को आर्यन की मूर्खता पे हसी आ गयी यह दोनों तोह मौत के मोह में खुद समां गए ....... है है है है है है है ...... मुझे कोई नहीं हरा सकता .
अंदर बवंडर की छोटी तक पहुंच आर्यन ने आँख बांध करके मोह खोल जोह उसकी शक्ति पीनी शुरू की 5 सेकंड में सब जैसे शांत हो गया और आर्यन जमीन पे लैंड किया .....
बवंडर के ख़तम होते hi वतासुर भी नार्मल साइज का हो गया , उसकी तोह डर के hi चीख निकल गयी ...... एक मनुष्य उसकी पवन शक्ति hi पि गया और जिन्दा है यह क्यों है यह मनुष्य नहीं हो सकता न कोई देवता न राक्षस ऐसा कर सकता है .......
आर्यन ने दीप्ति को उतर के अपनी तलवार उसको देकर बोलै ," इसको सजा देने का टाइम आ गया दीप्ति डार्लिंग जाओ अपनी बेजिटि का बदला लो ".
दीप्ति भी गुस्से से तलवार लेकर वतासुर से जा भिड़ी . वतासुर भी वार कर रहा था पर दीप्ति पे जब कमल कवच की शील्ड थी क्या असर होता पर दीप्ति की तलवार के वार उसको घायल करने लगे ...... दीप्ति ने पत्र बदल के उसके ऊपर से छलांग लगा तलवार वतासुर की पीठ पे घुसेड़ के उसकी मोती गर्दन दबोच ली ," हरामीईईई तू मुझे भोगेगा , बदजात तू मुझे छु भी नहीं सकता "......
अह्ह्ह्हह मरररररररर गयाआआआ बचोऊ महाराज माया ........ पवन देव बचोओओओओओ मररररररर गयाआ माफ्फफ्फ्फ्फ़ कर दो ......
दीप्ति की पकड़ में वह गलता चला शरीर मीठी की तरह धुल होगा ...... इतना भीषण मंजर अपने मालिक का देख तीनो चुडिअल भी दररर के रू पड़ी की यह मनुष्य hi नहीं यह लड़की भी मायावी है बहोत शक्तिशाली ......
अपनी तलवार लिए दीप्ति आर्यन के गले लग गयी और आर्यन ने चूमते हुए ुष बवंडर की शक्ति उसके मोह में दाल दी जिसको झटका खाते हुए दीप्ति सेह गयी ....... 4 शक्तियां आजाद कर चुकी थी राजकुमारी दीप्ति अब तक आर्यन की 5 प्रिंसेसेस के लिए अभी पांचवी बाकी थी ..... ?
वातासुर के मरते hi रानी हेमा प्रकट हुयी जिहोने अपना हाथ तीनो चुड़िआलों की तरफ किया तोह तीनो सुन्दर लड़कियों में तब्दील हो गयी जोह राजशी पोषक पहनी थी ....... चाय, साया ,माया को देखकर आर्यन दीप्ति भी चौंक गए .
रानी हेमा ," धयानवाद महार्यं जोह तुम ने हमारी दत्तक पुत्रिओं को आजाद करवाया और दीप्ति ुष वातासुर कोई स्त्री hi मार सकती थी जिसको गन्दी नज़र से उसने देखा हो पर तुम्हारी शक्ति के सामने तोह वो चानन भर भी न टिका जबकि उससे महाराज माया भी डरते थे".
तीनो लड़कियां रानी हेमा के गले मिली और Aryan-Deepti ने उनके प्यार छूकर आशीर्वाद लिया ...... " महार्यं तुम्हे मेरा आशीर्वाद है तुम्हारी सब पत्नियां एक साथ हमेशा खुश रहेंगी वैसे एक- दो तोह यहाँ से ले जा सकते हो जिसमे पतलोक की भी शक्ति हो "...... hi hi hi hi hi
आर्यन भी मुस्करा के ," महारानी जी में जितनी है उन्ह से परेशां हूँ अप्प मेरी धुविद्या मत बढिये ...... ोुछ्ह "...... दीप्ति ने आर्यन की कमर में चुटकी काटी थी .
रानी हेमा हसकर ," मैंने कहा न तुम्हारी सब अर्धांगी तुमको और आपस में प्रेम करेंगी बस अपने कर्तव् की तरफ अग्रसर रहो ".
तीनो राजकुमारी चाय साया माया बड़ी हसरत से आर्यन को देख रही तोह रानी हेमा ने कहा ," तुम तीनो अपना मौका खो चुकी हो बस दोनों को धयानवाद दो की यह गलती से यहाँ आ गए नहीं तोह तीनो आजाद नहीं हो पाती ".
तीनो ने Aryan-Deepti से चमा मांगी वह सराफ की कारन डाइयाँ बानी और कुकरम वातासुर की शक्ति से करने लगी ..... तीनो ने आर्यन को गाला लगा एक बार गाल पे चूम के hi अलग किया , दीप्ति भी हसने लगी ....... रानी हेमा ने हाथ आगे किया तोह जंगल गायब हो गया और सामने रास्ता दिखने लगा .
रानी हेमा ," यह रास्ता तुम दोनों को 'म्हटला लोक' ले जायेगा जहाँ से तुम 'रसातल लोक' या 'पतला लोक' जा सकते हो बस अपनी मोहर साथ रखना अब ज्यादा संभल के जाना ".
तीनो राजकुमारी के साथ रानी हेमा चली गयी और Aryan-Deepti फिर एक बार चूमा छाती में लग गए .......
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राजा माया के राजमहल में जब रानी हेमा पहुंची तोह वह भी अपनी दत्तक पुत्रिओं को देखकर खुश हुए ...... अकेले में जब रानी हेमा ने कटाछ करके कहा," महाराज आपकी डबल माया भी महार्यं और दीप्ति को फसा न सकीय, चल से ज्यादा प्रेम में शक्ति होती है ".
राजा माया भी गहरी सांस लेकर ," वातासुर की शक्ति तोह उनको लेनी hi थी पर आर्यन ने बड़ी चतुराई से वातासुर को भी मरवा दिया दीप्ति से जबकि हम सोच रहे थे वह खुद मरेगा और हमारे जाल में फस जायेगा ".
रानी हेमा हसकर ," में अभी उससे मिली पर जोह चीज मैंने महसूस की उसको बस प्यार करना आता है और चल कपट उसको छु नहीं सकते आपकी मोहमाया तोह धरी hi रह गयी उसके सामने ...... मुझे ख़ुशी है वह मेरा सच्चा उपसक है कोई स्त्री निराश नहीं होगी उसके पास आकर ".
क्यों कहता है पतलोक में भी लोग मतलबी नहीं होते कुछ लोग चाहते थे की दिव्या तलवार यहीं रहे और आर्यन किसी भी नियम को तोड़कर कैद कर लिया जाये ..... पर क्या यह इतना आसान था सब कुछ जानते हुए भी राजा माया अपनी चाल चलना नहीं चुके . पर बाजी उनके हाथ से निकल गयी .
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आर्यन ने दीप्ति को अपनी पीठ पे बिठा लिया और चल दिया अपनी मंजिल की ओरे ......
दीप्ति ," माहि आप न बहोत अच्छे हो बस अपनी फ्लिर्टिंग अब बंद कर दो जब हम सब भेने आप की है सेवा करने के लिए फिर क्यों नयी लड़कियों और औरशन की तरफ अत्त्रक्टेड हो जाते हो ?"
आर्यन मुस्करा कर ," फ़्लर्ट में सिर्फ उससे करता हूँ जोह मेरी अपनी हो फिर तुम बताओ क्या मैंने तुम्हारे साथ कभी फ़्लर्ट किया बस तुमको देख के hi प्यार हो गया जैसे तुम्हारे बिना अधूरा हूँ पर क्या करता बोल नहीं पाया . तुम सुचित्रा मामीजी की छोटी भें थी जोह मुझे बीटा मानती हैं इशलिये तुमसे दुर्र भी चला गया . तुम्हारी सच्चाई जानकार भी डाउट में था की में क्या कर सकता हूँ. पर नादान था में की तुम्हारे रूप का hi नहीं तुम्हारे प्यार का जादू हो चूका था ...... वहां गाओं में रात में आँख खुल गयी सपनो में तुम्हारा उदास चेहरा देखकर जैसे मुझे बुला रही हो कब आओगे और मेरी किस्मत देखो सब रहे तुम्हारी hi तरफ बुला रही थी . अब देखो आज मुझसे खुद किस्मत कोण होगा की मेरी पीठ पे मेरी रूह , मेरे दिल की धड़कन जोह सबसे सूंदर और मनमोहक है जिसको बस प्यार hi प्यार करने का दिल करता है ...... ी लव यू दीप्ति फ्रॉम माय बॉटम ऑफ़ माय हार्ट ".
दीप्ति तोह ख़ुशी से फूली न समां रही थी की आखिर उसके सपनो का राजकुमार उसका हमदम उसका पति माहि कितने प्यार से उसको अपने पीठ पे बिठाये ले जा रहा है काश यह पल यहीं रुक जाए .......
दीप्ति कई औरशन का आर्यन से रिलेशनशिप का पूछना चाहती थी पर वह अपने प्रेम को रुशवा नहीं करना चाहती थी पर आखिरी सवाल उसने कर hi डाला जोह आर्यन भी सुनकर जैसे बिदक hi तो गया ....... " क्या आप मेरी दोनों मम्मी को भी बच्चे देने वाले हो, मीणा दीदी ने बतया था ये hi एक रास्ता है उनका माँ बनने का फिर मेरी मामियों को भी ?"
आर्यन को झटका लगा पर मीणा ने यह क्या रायता पहला रखा है भला कोई अपनी सास को घरबवती करेगा उसकी बीवी को पता चले तोह क्या बीतेगी ...... आर्यन ने एक ठंडी सांस भरी फिर हर स्तब्ध तोलते हुए बोलै आखिर उसके प्रेम की परीक्षा की घडी थी .
आर्यन ," सच्च कहूं तोह दीप्ति ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा है , मीणा ने ऐसा क्यों कहा तुमसे में नहीं जानता पर हम इश्को रोक सकते हैं की ऐसा न हो . तुम्हारी मम्मी मेरी मम्मी हैं भला में क्यों उनके बारे में सोचूंगा रही माँ बनने की बात तोह वह मेडिकल ट्रीटमेंट से बन सकती है में पिक्चर में कहाँ आता हूँ पर हाँ तुमसे ढेर सारे बच्चे जरूर करूँगा इतना में चाहता हूँ ".
दीप्ति भी उसके जवाब से संतुस्ट होते हुए ," पर दीदी ( सुचित्रा ) को तोह आप ने वादा किया है न ?"
आर्यन जिस क्वेश्चन से बचना चाहता था वही सामने आ गया पर त्यार hi था जवाब ," सुचित्रा मामीजी को अपना मन था जब से उनसे मिला , एक विराणित थी उनकी लाइफ में जिसके लिए अपने प्रेम और अधिकार का वास्ता देकर मुझसे उन्होंने अपना प्यार मांग लिया और मुझे गलत नहीं लगा की में अपनी माँ सामान मामीजी का दिल तोड़ दूँ. अगर तुमको बुरा लगा तोह सॉरी बोल देता हूँ पर किसी की ख़ुशी के लिए मुझे कोई सजा भी तुम डौगी तो मंजूर है ".
दीप्ति ने आर्यन का गाल चूम के अपने तने हुए स्तन उसकी पीठ पे रगड़ के कहा ," मेरी दीदी का अधिकार आप पे पहले है और मेरी मम्मी के जीवन में खुशियां आये आपकी वजह से मुझे कोई ऐतराज नहीं बस मेरा और मेरी बहेनो (सौतन) को प्यार की कमी नहीं लगनी चाहिए...... प्यार में कोई सौदा नहीं होता काम या ज्यादा पर माहि तुम्हारा प्रेम hi हम सबकी जीने की वजह है ".
आर्यन थोड़ा सीरियस होकर ," दीप्ति सब अपनी लाइफ खुद चुन सकते हैं कैसे जीना है पर मुझे मेरी माँ (रति) ने बड़ा hi ऐसे किये की मुझे अपनों के लिए जीना है अपनों के लिए सबकुछ नौछावर तक कर देना है बस एहि मेरा सत्य है की मेरी माँ के लिए आर्यन उनके परिवार की एक ढाल है एक सुरक्षा है यानी बॉडीगार्ड ( अंगरक्षक ) बोल सकती हो जिसके साथ उनकी हर खुसी का धयान भी रखना है . अब में इतना आगे आ चूका हूँ की पीछे पलट के नहीं देख सकता इशलिये मैंने शादी करने से पहले hi तुमको सच्च बता दिया जवालामुखी से वापसी के समय की नए रिश्ते की शुरवात झूट से न हो ".
दीप्ति भी मचलते हुए ," आपको बुरा नहीं लग्न चाहिए जैसे आप हो, गलत तोह मैंने सबसे ज्यादा किया ...... जान बोझ के ऐसे आदमी से शादी की जिसके पहले से 5 आलरेडी बीवियां थी पर मेरा अँधा प्यार फिर भी मुझे वह hi चाहिए चाहे जान चली जाये . आज वही मेरा प्यार मेरी मौत को टालने के लिए पतलोक तक आ गया सिर्फ इशलिये की में ज़िंदा रहूं . माहि मैंने जनम 21 साल पहले लिया था पर जीने का अहसास ुशी दिन हुआ जिस दिन तुम मेरे ज़िंदगी में आये. एक हफ्ता मिला मुझे आपको छु कर प्यार करने का इतने काम समय में भी क्या कुछ नहीं दिया आपने . बस लालची hi है यह आपकी पत्नी जोह अपने साथ आपको भी मौत के मोह पे ले आयी और अपनी गीता दीदी को भी कैद करवा दी . हो सके तोह माफ़ कर देना आप सब मुझे ".
दीप्ति का रोना देखकर आर्यन रूककर उसको अपने सामने कर गोदी उठा के चूमता हुआ चुप करवा रहा था कुछ ज्यादा hi सेंटी हो गयी ....... िश एक हफ्ते में बस पतलोक में िंह दोनों प्रेमी ने सबसे ज्यादा टाइम गुजरा था , दोनों एक दुसरे को परख भी रहे थे और आत्मीयता भी बढ़ा रहे थे .
आर्यन ने मजाक करते हुए ," क्या मेरी रानी शैब्या ऐसा करोगी अपने हनीमून पे सोचो पतलोक तोह डेस्टिनेशन hi ख़तम हो जाएगी नेवली मैरिड कपल्स के लिए ....... देखो कितने सूंदर नजर्ये हैं कुछ किसी वीसी दो कुछ किसी वीसी लो असून तोह हम पार्थवी लोक पे भी बहा लेंगे ...... hi hi hi hi hi hi ".........
दीप्ति भी उसकी बात पे हस्ते हुए ," इससे बुरी हनीमून डेस्टिनेशन नहीं हो सकती ".
आर्यन ने दीप्ति के लबों को चूमा ," नहीं दीप्ति माय लव , हनीमून डेस्टिनेशन कोई भी हो बस हस्बैंड वाइफ में प्रेम होना चाहिए तोह नरक भी स्वर्ग hi लगेगा फिर अपने देश में तोह 90 % लोग बस अपने बैडरूम में hi हनीमून का मजा ले पाते हैं गरीबी की वजह से पर प्यार उनका सबसे सच्चा होता है क्योंकि प्यार के लिए दो आत्मा का मिलान मायने रखता है जगह नहीं ".
दीप्ति भी आर्यन का पूरा चेहरा चूम डाली ," आप इतनी अच्छी अच्छी बातें कैसे बना लेते हो , ी लव यू मुझे अपना बनने के लिए ".
आर्यन हसकर ,"मुझे सब प्यार hi करते हैं तोह बस प्यार hi देखता हूँ नहीं तोह नफरत से ज़िंदगी कांटे की तरह लगती है जोह मुझे बुरा hi बना देती है ".
Aryan-Deepti बहोत खुश थे पर दोनों का धयान न था अदृश्य रूप में कई नर और मादा दानव , राक्षस दूर से दोनों को मोह माया के मंतर मार के उकसा रहे थे पर कमल की शील्ड की वजह से बे असर .
2 घंटे बाद वह जिस द्वार पे खड़े थे वहां से तीन लोक को रास्ता जाता था पर पतलोक के हर लोक को जैसे जाना hi था ....... ???
आर्यन ," अब 5तह पड़ाव तो दिव्या तलवार की नजदीक hi होगा ?"
दीप्ति ," 5तह पड़ाव खुद दिव्या तलवार hi है पर क्या में उसकी बिजली की शक्ति (लाइटनिंग पावर ) झेल पाऊँगी ..... ?"
आर्यन ," क्यों नहीं तुम्हारा और तलवार का कनेक्शन है तभी उसका नक्शा तुम्हारी पीठ पे रहा अब दिमाग़ में ".
दोनों को बात करते एक तीसरा सख्स भी मोह छुपाये देख रहा था ..... ????
हार्ट हार्ट हार्ट
PART - 7(बी)
Aryan-Deepti को 'तळतळा लोक' के द्वार पे छोड़कर स्त्री योद्धा वापस लौट गयी..... द्वार से दोनों अंदर प्रवेश किये तोह कोई नहीं दिखा सब तरफ नज़र करके आर्यन बोलै ," दीप्ति अपनी तलवार निकाल लो मुझे लगता है कोई हमको देख रहा है पर सामने नहीं आ रहा ".
आर्यन चिल्लाकर ," जोह भी तुम हो सामने आ जाओ इश्से पहले में मंतर पढ़कर तुमको बंधी बना लूँ ".
द्वार पे शंकर भगवन की "त्रिपुरान्तक अवतार" की मूर्ति बानी थी , आर्यन समझ गया की राजा माया भी शंकर भगवन के भकत है और यह लोक उन्होंने hi इनको दिया है ........
(* त्रिपुरान्तक अवतार लेकर भगवन शंकरजी ने तीन विशाल नगर को नष्ट किया था जोह माया ने बांये थे स्वर्गलोक और भू लोक के बिच तीन राक्षस भाइयों के लिए ...... माया भी वहीँ था पर विनाश के बाद शंकर भगवन ने अपने िश भक्त को फिर से जीवट कर तळतळा लोक का राजा बना दिया . )
आर्यन ने फिर आँख बांधकर भगवन भोलेनाथ का नाम लिया और मंतर पढता उससे पहले hi सामने राजशी वस्त्रों में वह प्रकट हो गए ," थारो वॉश महार्यं , तुमको मंतर पढ़ने की जरुरत नहीं है हम भी शिव भक्त हैं "........ यह राजा माया की आवाज थी इतनी मीठी जिसने सुनी वह इनके वश में हो जाये ......
आर्यन ने हाथ जोड़कर नमस्ते किया तोह दीप्ति ने भी उसका अनुसरण किया ...... " चमा चाहता हूँ महाराज , बस मुझसे कोई द्वार पे मोहर नहीं लिया प्रवेश पर तोह लगा हमारा उपहास उदा रहा है ".
राजा माया मुस्करा के ," कोई बात नहीं हमको hi विलम्ब हुआ आने में , कहो हम क्या मदद कर सकते हैं ?"
आर्यन ," आप तोह सर्व ज्ञानी हैं और आपके असर से कोण भला बचा है आजतक ".
राजा माया हसकर ," फिर तुमको शीर्घ hi 4तह पड़ाव तक जाना चाहिए"..... और एक पोर्टल सा रास्ता अपने हाथ से बना दिए ..... " यह भी हमारे लोक में है पर वहां तुम्हरी भी दिव्या तलवार की माया से तुमको पार पाना होगा ".
Aryan-Deepti ने आगे बढ़कर उनके प्यार चुहये तोह आशीर्वाद देते हुए बोले," सदैव खुश रहो और मेरी माया के असर से हमेशा दुर्र रहो" ...... है है है है ......
आर्यन भी मुस्करा ," महाराज आप की क्रिया भी एक कड़वा सच्च हैं िश जीवन का और में भी अछूता नहीं हूँ उससे ुष नश्वर संसार में आप तोह अन्तर्यामी हैं ".
राजा माया ," हाँ तुम हमारी अधरगनि रानी हेमा के उपासक लगते हो परन्तु पूरी तरह नहीं फिर भी वह सच्च तुम्हारा नहीं है , जल्दी hi अपने समय पे अपने आप पता चल जायेगा ...... महार्यं यह पतलोक तुम्हारे रुकने के लिए ठीक स्थान नहीं है इशलिये अपनी कर्मभूमि जल्दी कार्य पूर्ण करके लौट जायो ".
दोनों ने उनको प्रणाम किया और पोर्टल में एंटर किये जोह उनके पीछे बांध हो गया .......
तब एक दानव ने पुछा ," महाराज आप िश मनुष्य से इतना डर गए जबकि इसको हम में से कोई भी असुर या दानव हरा देता ".
राजा माया ने मुस्करा के कहा," इश्के हारने या मरने के बाद hi तोह इसका असली तांडव शुरू होता, तुम नहीं समझोगे इश्के पिछले जनम की पटरानी रतिदेवी जोह िश जनम में इसकी नानी माँ है उसको भगवन शिव का वरदान प्राप्त है अगर उसने आर्यन के मरने के बाद पुनर्जीवत मांग लिया तोह सबसे पहले यह पतलोक को hi तबाह करेगा ..... कभी कभी सबकुछ अनभिग बनकर सबकी भलाई और पतलोक का कल्याण देखना पड़ता है फिर धरतीपकड़ को भूल गए , उसको कोई पतलोक निवासी भी नहीं मार सकता न hi सारे 14 लोकों का कोई प्राणी पर िशने कैसे आसानी से मार दिया यह सोचते रहना ...... सच्च ये है यह एक तरह से देखा जाए तोह यह मनुष्य िंह 14 लोकों में से भी नहीं है समझे ".
सब हैरान hi थे यह फिर कहाँ से यानी दूसरी विश्व से पर ऐसा कैसे हो सकता है फिर सबको दिव्या तलवार का याद आया की वह भी िश दुनिया की नहीं है तोह ओह्ह्ह्हह्ह तभी यह यहाँ आया है उसके लिए .....
दुसरे ने पुछा ," महाराज फिर वह लड़की जिसको वह अर्धांगी बता रहा है ".
राजा माया हस्ते हुए ," वह भी एक दिव्या तलवार की माया hi है जिसको महार्यं जल्दी खोज लेगा बस जनम एक दिव्या कन्या के रूप में लिया है , उसको कोई नर छु भी नहीं सकता किसी भी लोक में ".
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दिव्या तलवार में िश बार बड़ा कम्पन हुआ और रौशनी भी चका चॉंद से तेज़ हुयी और अंदर धस गयी ...... ख़ज़ाने का विशाल ढेर भी खान खाना उठा और अपने तीनो फैन को उठा के विशाखा की 6 आंखें खुली नींद से ॉश्चारिये से यह कम्पन और तेज़ कैसा है ?
"विशाखा पुत्री अब िश तलवार का मोह छोड़ दो इश्क मालिक पतलोक में आ चूका है धरतीपकड़ को मिर्त्युदण्ड देकर , हो सके तोह अपने प्राण बचा लो".
विशाखा को अपने मस्तिक्ष में सुनाई दी यह चेतावनी चिंता से काम न थी की धरतीपकड़ को मिर्त्युदण्ड देने वाला िश दिव्या तलवार का मालिक है ..... नहीं यह सिर्फ मेरी तलवार है और इश्को भी मुझसे लगाव है . में भी तोह देखूं कोण मुझसे इश्से जुड़ा करता है .
'पतला लोक' कह लो या 'नाग लोक ' िश लोक की एक विशाल गुफा में जोह अब नंगीं विशाखा का आवास था िश दिव्या तलवार को पाकर ...... दिव्या तलवार ने विशाखा को अपने को छूने दिया उससे लगाव करने दिया इसके पीछे की मनसा तोह दिव्या तलवार hi बता सकती है पर आज उसको भी विशाखा एक ज़हरीली लालची नागिन लग रही थी जोह उसके मालिक के पास नहीं जाने देना चाहती है ....... यानी अब दिव्या तलवार भी चाहती थी की विशाखा का अंत जल्द से जल्द हो और वह अपने मालिक के हाथों की सोभा बढ़ए.
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पोर्टल के अंदर जाकर सामने उनको बस धरतीलोक जैसा नजारा नज़र आया , पेड़ पदों हरी घास , पसु पक्षी , नीला आकाश ...... दोनों आगे बढे तोह आर्यन ने कहा ," दीप्ति अब हम किसी मायावी दुनिया में हैं क्योंकि यहाँ सब कुछ अच्छा hi दिख रहा है धरती की तरह , 4तह पड़ाव को कैसे पार करना हैं तुमको कुछ अंदजा है ".
दीप्ति ने आर्यन की तरफ देखकर चलते हुए कहा ," हमको ऐसी जगह खोजनी है जोह वायु की विशाल शक्ति रखती हो यानि एयर पावर का स्रोहत हो पर पतलोक में जीवों को वायु की कहाँ अवसक्ता पड़ती है जबकि सब जगह वायु मंडल है ".
आर्यन ," हाँ यह बात भी सही है , वायु की शक्ति पतलोक में कैसे होगी पर नक़्शे में मैंने एक बड़ा बवंडर देखा था 4तह पड़ाव का संकेत ..... रुको अभी दिखता हूँ ".
(आर्यन ने अपने लैपटॉप पे पहले दीप्ति का नक्शा बांया फोटोशॉप से फिर जलमहल वाला भी ...... बिना को देकर एक स्पेशल डाई उसे कर 2.5 ×1.2 फट कपडे पे दोनों तरफ प्रिंट करवा पक्का कलर उसे कर आसानी से न मित्ये यहाँ आने से पहले साथ ले लिया था )
आर्यन ने अपने बैग से एक मोटा रुमाल जैसा कपडा निकाला 2 तेह किया हुआ फिर खोल के दीप्ति के सामने किये ," देखो यह है वह नक्शा जोह तुम्हारी पीठ पे मुझे सबसे पहले दिखा था और यह दूसरी साइड जब जल महल के पानी में दिखा ....... दोनों तरफ से कपड़े करो तोह पहले सिर्फ 5 पड़ाव दिखे पर पानी में 5 सिग्न (जल महल , जवालामुखी, चट्टान में गुफा , बवंडर, ....???........ ) उन्ह पड़ाव पे हैं ....... यह पतलोक में 4तह पड़ाव में वुयू का बवंडर है पर यह किसी घने जंगल के बिच कैसे हो सकता है?"
दीप्ति ," हो सकता है यह सामने जोह जंगल है इसी में वह बवंडर हो जिस तक हमको पहुंचना है ?"
आर्यन ," हुन्न पर यह कोई हमको फसाने की चाल भी हो सकती है यानि हमको वह दिखाया जा रहा जोह हम चाहते हैं ताकि हम अपनी मंजिल से भटक जाएँ या फिर सामने मंजिल है और हम बेकार में इश्को भ्रम समझे ".
दीप्ति ," बात तोह ठीक है आपकी , चलो पहले यह पता लग्न होगा की हम किसी मायाजाल में तो नहीं फसें हैं फिर ुष बवंडर के स्रोत को भी ढूंढ़ना होगा ".
दोनों ने सहमति जताते हुए एक दुसरे को चूमा और चरों तरफ निगाह रखते आगे बढे जोह सामने जंगल नज़र आ रहा िश मैदान के बाद पार करके ...... आर्यन को जंगल के बहार जोह सबसे ऊँचा पेड़ दिखा तोह ुष्पर चढ़ गया जब ऊपर पहुंच के देखा तोह उसको ॉश्चारिये हुआ की यह तो न ख़तम होने वाला दूर दूर तक जंगल hi लग रहा है फिर ुष बवंडर को कैसे खोजे , निचे उतर के दीप्ति को भी अपनी जिगशा प्रकट की .
अब दोनों के पास जंगल में एंटर करने के अल्वा कोई चारा न था , दोनों ने अपने बड़े बड़े कटरी नुमा खंजर निकाल लिए और िश जंगल में प्रवेश कर गए ...... जैसे जैसे जंगल घाना होता जा रहा था वैसे वैसे दोनों अपनी कटारी से झाड़ काट ते आगे बढ़ रहे थे ....... दोनों आँखों के इशारे इशारे में बात करते आगे बढ़ते गए पर 2 घंटे चलने के बाद भटकते हुए उनको कुछ नहीं मिला सिवा जंगली जानवर और पक्षिओं के जोह उनको देखकर दुर्र भाग जाते पुकारने पे भी नहीं रुकते .
( दोनों जानवरो और पक्षिओं की भासा में बात कर लेते थे )
दोनों ने कुछ डिअर विश्राम करने का सोचा तोह एक बड़े पेड़ के निच्चे बेथ सुस्ताने लगे , पानी पीकर कुछ फल खाये जोह साथ लाये थे और आधे घंटे आराम कर के आर्यन बोलै ," तुम यही रुको में एक बार पेड़ पे चढ़ के देखता हूँ ".
दीप्ति ," क्या िश बार में देखूं या दोनों चलें सायद कुछ और दिखे ".
दोनों फिर अपने बैग्स और अस्तर रखकर पेड़ पे चढ़ गए बस चरों और जंगल hi जंगल अब क्या करें ? दोनों हताश होकर निच्चे उतरने लगे तोह उनको 2 लोमड़ (जैकाल) दिखे जोह उनके बैग उठा के पेड़ के निच्चे से भागे ..... दोनों ने चिल्ला के उनकी लैंग्वेज में रुकने को कहा पर नहीं रुके अब दोनों अलग दिशा में थे तोह आर्यन ने दीप्ति को दुसरे की तरफ भागने को कहा और वह पहले के पीछे . सायद जानवरो से दोनों का लगाव उनको मारने से रोक रहा था नहीं तोह एक वार खेला ख़तम हो जाता .
आर्यन ने स्पीड बढ़ा के ुष लोमड़ को ुष पेड़ से 2 कम दूर पकड़ लिया जोह उसके छूटे hi गायब हो गया और बैग जमीन पे गिरा ....... उसको समझ में आ गया की उनको धोके से अलग किया गया है यानी दीप्ति मुसीबत में है ..... क्या जरुरत थी बैग के पीछे भागने की वह तेज़ी से वापस ुशी पेड़ पे पहुंचा क्योंकि दौड़ते हुए लोमड़ का पीछा करते अपनी कटारी से बड़े पेड़ों पे कट मारता आगे बढ़ा था पर दीप्ति का कोई अत पता न था उसने दीप्ति वाली डायरेक्शन पकड़ी और तेजी से असुरे करता की वह किस तरफ गयी है ...... दीप्ति ने कुछ झाड़ काटे थे आगे भागते हुए .
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उधर दीप्ति बड़ी तेज़ी से ुष लोमड़ के पीछे भागी पर वह उसको पकड़ नहीं पायी और रुकी तोह फिर बैग मोह में दबा के लोमड़ दिखा और भाग लिया फिर दीप्ति भागी पीछे उसकी भासा में बोलते हुए," रुक ऐसा क्यों कर रहा है तुझे खाने को कुछ दूंगी रुक जा ?"...... 5 मं बाद फिर वह नहीं ढूंढ पायी ..... फिर वह दिखा फिर भागी ऐसा करीब एक घंटे से ज्यादा हो गया पर अब दीप्ति को भी नहीं पता था की वह कहाँ है पर ुष पेड़ से बहोत दुर्र है जहाँ आर्यन वह अलग हुए थे ...... अरे बैग के लिए इतना भागने की क्या जरुरत थी पर खेल खेला जा चूका था दो प्रेमी िश जंगल में अलग अलग ......
दीप्ति अपनी सांस दुरुस्त करती वापस जाने का सोची तोह कटे हुए झाड़ जोह कई दिशा में उसके लोमड़ के पीछा करते बने थे उसको धीवधा में दाल दिए की अब क्या करे ...... ?
दीप्ति अभी सोच hi रही थी की किसी ने पीछे से उसके सर पर मारा तोह बेहोस हो गयी ...... तभी तीन चुड़ैलों ने दीप्ति को जहर लिया ....... सकल से दरवानी और बदसूरत सी देखकर hi उलटी , पिशाब और टट्टी तीनो आ जाये एक साथ में .
पहली चुडिअल ," में इश्को मालिक के पास ले जाती हूँ सायद कुवारी है बड़ा इनाम मिलेगा , तुम ुष आदमी को धोंड के वहीँ गुफा तक ले आयो , पहले तीनो उसका शारीरिक भोग करेंगे फिर उसको खून भी पीना है और ाँद ( टट्टे ) भी खाएंगे जोह मनुष्य के बहोत सवादिस्ट होते हैं विरए से भरे हुए "....... है है है है है ......
दोनों ने उसकी बात का समर्थन किया , इनकी सकल hi दरवानी नहीं थी सोच तोह और ज्यादा बेहिसी थी ...... पहली चुडिअल ," पर ुष मनुष्य को अपना रूप बदल के मोहजाल में फसा के लाना अगर मेरे से पहले तुम दोनों उसका भोग किया तोह दोनों को मालिक से बंदी बनवा दूंगी ".
यह वाली चुडिअल ज्यादा ताकतवर लग रही थी , उसके जाने के बाद दोनों ने रूप बदला एक रूपवती 21 साल की लड़की बन गयी और दूसरी काला खूंखार भेड़िया, वह सूंदर लड़की आगे भागी और भेड़िया पीछे पीछे ," बच्चो बच्चो ..... कोई है बच्चो "........
आर्यन भी आगे बढ़ता दीप्ति की तलाश में 5 कम आ गया होगा पर दीप्ति का कुछ पता नहीं लग रहा था बस वह सोच रहा था की कहीं दीप्ति मुसीबत में न हो ....... थोड़ा और आगे चलकर उसको एक लड़की की आवाज सुनी जोह बच्चो बच्चो चिल्ला रही थी ...... यह दीप्ति की आवाज तोह नहीं है फिर िश जंगल में कोण मुसीबत में है मुझे उसको बचाना चाहिए ...... वह आवाज की दिशा में दौड़ा तोह कुछ hi पलों में ुष लड़की को अपनी तरफ भागता देखा और एक काला भेड़िया पर अगले hi पल नज़ारा अलग दिखा आर्यन को एक चुड़ैल स्त्री का रूप धार दूसरी चुडिअल भेड़िया का रूप धारण कर उसकी तरफ आ रही थी .
आर्यन के मस्तिक में ," ओह यह दोनों रूप बदल के मुझे hi फसा रही हैं और दीप्ति का भी इनको गायत होगा मुझे इनका भेद जाना होगा "....... अपने दिमाग़ में प्लान बना वह तेजी से ुष लड़की के पास पहुंच के पकड़ लिया और अपने पीछे कर के ुष भेड़िये को एक ग़ुस्सा जड़ दिया जिससे वह दुर्र जाकर गिरा और बेहोश हो गया ......
वह सूंदर लड़की आर्यन से चिपट के रोने लगी तोह आर्यन भी नाटक करता हुआ ," डरो नहीं अब तुम सुरकषित हो , िश जंगल में क्या कर रही हो ? क्या तुम ने किसी लड़की को देखा ? "
वह सूंदर लड़की तोह आर्यन से लिपट उसके बदन की खुसबू और खून सूंघ रही थी रोने का नाटक करते हुए, अपने मैं में " बड़ा hi हटा कटा सूंदर मनुष्य है ,इसे तोह में अपने साथ रखूंगी कितना मासून है इसका विरए भी स्वादिस्ट होगा "..... यह सोच सोच के उसके मोह में पानी आ गया था ......
आर्यन जोह उसको असली रूप में देख सकता था उसको घिन आ रही थी उसकी दुर्गन्ध से जैसे सालों से नहीं न हो और घोस्ट खाकर कभी टूथब्रश न की हो ..... आर्यन ," देखो वह भेड़िया भाग गया अब बताओ कोण हो तुम यहाँ क्या कर रही हो ?"
सूंदर लड़की रोटी हुयी ," में अपनी दो बड़ी भें चाय , साया के साथ भटक गयी हूँ मेरा नाम माया है ....... वह दोनों पानी ढूंढने गयी थी मेरे पीछे वह भेड़िया पद गया ..... अब में कैसे ढून्ढ पाऊँगी उनको ?"
आर्यन मैं में यानी तीन चुडिअल हैं , अगर दीप्ति का पता लग्न है तोह इसकी दोनों बहेनो को भी मिलना पड़ेगा तभी पकड़ के इनको कैद करूँगा कहीं दीप्ति को नुक्सान न पहुंचा दें ...... " ठीक हैं हम मिलकर तुम्हारी दोनों बहेनो को ढूंढ़ते हैं और मेरी पत्नी दीप्ति को भी वह भी खो गयी है ".
माया ," ठीक है जैसा आप कहें पर आप शादी सुदा लगते नहीं हो बहोत सूंदर हो "...... और शर्मा गयी .....
आर्यन ," यह भें की लौड़ी मुझे चुटिया समझ रही है , टाइम आने दे तुझे अपने चुडिअल होने की आज ऐसी सजा दूंगा भूलेगी नहीं ".
दोनों आगे बढे तोह भेड़िया गायब हो गया था और माया अपने पीछे पीछे ुष गुफा की तरफ ले जा रही थी जहाँ उन्ह तीनो का मालिक था .
कुछ दूर जाकर उनको साया मिल गयी जोह अपनी छोटी भें से भी सूंदर रूप धारण कर ली थी , माया जलते हुए शिकार मैंने पत्या और आ गयी लार टपकते हुए ...... साया अपने मैं में ," क्या ललाम लाल घोस्ट है , कितना हस्त पुष्ट है और सूंदर सजीला भी ...... इसको खूब भोगूंगी खूब विरए और खून पियोगी , इसके टट्टे भी बड़े होंगे तोह स्वादिस्ट होंगे .
साया माया गले मिली फिर चाय की खोज में तीनो आगे बढे तोह कुछ दूरी पे वह एक सूंदर युवती का रूप धारण उनको मिली एक हाथ में जल का पात्र लिए हुए तीनो भेने गले मिलकर खुश हो रही थी की बड़ा हाथ मारा है ......
आर्यन भी मुस्करा के बोलै ," मैंने तुम तीनो से बदसूरत , बदबूदार और कुरूप चुडिअल नहीं देखि ..... hi hi hi hi hi hi ...... चलो तीनो मेरी पत्नी का पता बता दो जान से नहीं मरूंगा नहीं तोह कैद करके जीवन भर तड़पना पड़ेगा".
हस्ते हुए बात शुरू कर गुस्से से उनको चेतावनी दे डाली पर तीनो को जैसे लखवा मार गया हो , इश्को कैसे पता क्या हमें देख सकता है अबतक नाटक कर रहा था ........ ???
आर्यन ने एक मंतर पढ़ा तोह तीनो अपने असली रूप में आ गयी .
चाय ," ओह्ह तो तेरा पास शक्तियां भी हैं मगर तू नहीं जानता हम तीनो को कोई हरा नहीं सकता पहले हमने सोचा की तुझे अच्छे से भोग लेंगे या फिर हमेशा पास रखते मगर अब तेरे लहू से प्यास भुजा लेंगे ".
इसी के साथ तीनो ने आर्यन पे हमला कर दिया जिसको वह खड़ा हुआ मुस्कारते बस ऐसे hi नाकाम कर देता , हथियार , पत्थर , अंगारे , जेहेर सब वार किये पर ुष्पर कोई असर नहीं हुआ .......
आर्यन ने मंतर पढ़ा और तीनो की छोटी पकड़ ली और एक दुसरे में लपेट के बोलै ," अभी समय है बताओ दीप्ति कहाँ है नहीं तोह जितना में छोटी कसके घूंड ने लगा उतना hi दर्द होगा मौत से बदतर ".
दो ऐंठे मारते hi तीनो की भयनक चीखिआ गूंज गयी , आज सच्च में यमराज से पाला पड़ा था बस वह मनुष्य रूप धारण किये था ....... कोई मंतर , कोई अस्तर , कोई जादू काम नहीं कर पा रहा था ऊपर से छोटी इतने से तीनो की आत्मा सी काट रही थी जोह बहोत पीड़ा दायी होता है ......
तीनो ने जोर जोर से रोटी हुए अपने मालिक को पुकारा पर वह भी जैसे इनकी पुकार नहीं सुन पा रहा था ...... तीनो ने हार के आर्यन को बतया की दीप्ति गुफा में उनके मालिक के पास है .
आर्यन तीनो की छोटी से पकड़ के ुष गुफा की तरफ दौड़ा जहाँ दीप्ति थी .......
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उधर "वातासुर" राक्षश की गुफा में दीप्ति को हवा में उदा के जंगल से चाय नाम की चुडिअल ले गयी तोह दीप्ति को गुफा में होश आया उसके जाने के बाद ....... उसने देखा िश अँधेरी गुफा में एक हवन कुंड जल रहा है और बहोत बड़े आकर का राक्षस मंतर पढता आहुति दे रहा है ......
ज़मीन से उठकर दीप्ति ने चरों और गुफा में देखा तोह हड्डी और मार्श पड़ा था जिसकी बदबू असहनीय थी ..... दीप्ति चिल्लाकर ," कोण है तू दुष्ट जोह मुझे यहाँ लेकर आया है ?...... तू जानता नहीं है मेरे पति महार्यं को पता चला की तू मुझे यहाँ लाया है तोह मौत की भीख भी नहीं मांग पायेगा".
राक्षस वतासुर बस खाका लगा के हसने लगा ," है है है है है है ..... तू जितनी सूंदर है उतना hi तुझे भोग के बलि चढ़ाने में आनंद आएगा ...... तेरे पति को तोह मेरी तीन गुलाम हज़म भी कर गयी होंगी . अगर मेरी बात मानेगी तोह तुझे अपनी रानी बना के रखूँगा . मेरा नाम महँ असुर वातासुर है मुझे कोई हरा नहीं सकता ".
दीप्ति भी हसकर ," तुझ पे मुझे हसी आती है , तू कायर की औलाद hi होगा तू नहीं जानता अगर तुझे पता होता की धरतीपकड़ को मेरे पति महार्यं ने कितनी भयानक मौत दी थी कभी ऐसा सोचता भी नहीं ...... ठयऊ है तुझपर कायर कहीं का , मुझे छुआ भी तोह तड़प तड़प के मरेगा ".
राक्षस ," जबान संभल लड़की , में कुछ बोल नहीं रहा तोह बढ़ चढ़कर बोल रही है और धरतीपकड़ को कोई मनुष्य कभी नहीं मार सकता . मेरा अपमान करके तूने अपनी भी मौत बुला ली है तुझे तोह तड़पा तड़पा के मारूंगा ".
"" पहले अपनी िंह तीन चुड़ैल को तोह बचा ले जानत के पिस्सू फिर तेरी बारी ""
यह आवाज आर्यन की थी जिसने तीनो चुड़ैल को वातासुर के पैरों की तरफ उछाल दिया ....... तीनो चिल्लाकर अपने मालिक से उनको बचने की गुहार करने लगी ......
दीप्ति हस्ते हुए ," वातासुर जब गीदड़ की मौत आती है न तोह गाओं की तरफ भागता है पर तू निच्च तोह िश गुफा में छुपा बैठा है ".
वातासुर तोह अभी भी हैरान था की यह थुच सा मनुष्य गुफा के अंदर कैसे आ गया मेरा मंतर तोड़कर नहीं यह िंह तीनो बेवकूफ की वजह से हुआ होगा .....
दीप्ति जोह आर्यन को देखकर खुश हुयी दौड़ के ुष्पर छलांग लगा के गोदी चढ़कर चूमने लगी पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म माहि पुछःह पुछठ ..... ी लव यू माय डार्लिंग .....
आर्यन भी किसी का जवाब देते हुए ," तुम ठीक हो कहीं चोट तोह नहीं लगी ..... ी लव यू तू माय स्वीट हार्ट ".
दीप्ति हसकर ," हम वायु का बवंडर ढूंढ रहे थे यह खुद वातासुर मिल गया , यही बवंडर लाएगा बस इश्को उलझा के बवंडर बनवाओ फिर तुम निगल जाना तभी 4तह पड़ाव पार होगा".
वतासुर ने 2-3 मंतर पढ़ तीनो चुड़िआलों की छोटी खोलने चहई पर न खुली ...... बल्कि उनकी चीक पुकार और बढ़ गयी .......
वतासुर गुस्से से ," तोह तू मायावी शक्ति रखता है पर धरतीपकड़ को तू नहीं मार सकता मगर आज में तुझे मार के िश कन्या की बलि दूंगा अपने महाराज मयासुर को ...... है है है है है है ".
हसने के साथ गुफा में तेज तेज आंधी सी चलने लगी फिर बड़ी स्पीड से ुष अंधी में पत्थर , भले , तलवार , गदा आर्यन की तरह चोदे तोह उसने दीप्ति को पीछे कर अपना हाथ आगे कर गोल गोल घुमा के उसकी दिशा वतासुर की तरफ कर दी और धड़ाम धड़ाम ...... एक के बाद एक सारे वार वतासुर को लगे तोह वह भी दर्द से चीख पड़ा ..... अह्हह्ह्ह्ह
आर्यन हसकर ," अबे तू तोह धरतीपकड़ से भी गया गुजरा है कोई बड़ा तूफान भेज जिससे तेरा नाम यथार्थ हो वातासुर ..... hi hi hi hi hi hi ...... नपुंसक कहीं का लड़कियों को उतथा है धोके से "......
( वाट = वायु और असुर = राक्षस)
" वतासुर , अगर जान प्यारी हो तोह इश्से माफ़ी मांग लो यह साधारण पुरुष नहीं है िशने धरतीपकड़ को मारा है".
यह आवाज राजा माया की सुनाई दी थी वतासुर के मैं में , अब वह भी डर रहा था पर आर्यन ने िशबार उसको माँ भें की गाली देकर ललकारा तोह था तो राक्षस hi विनाश काले विपरीत भुधि .....
वतासुर ने अपना साइज बढ़ना शुरू किया तोह गुफा फढ़ता करीब 40फट ऊँचा हो गया फिर एक घेरि सांस ली जैसे साड़ी हवा hi अंदर खींच ली हो और फिर जोह हुआ एक बड़ा भयानक 1200km/hr की स्पीड वाले बवंडर को मोह से बहार निकाल आर्यन की तरफ दिशा दे दिया .......
आस पास के पेड़ पत्थर से लेकर धुल भी उसमे मिलती गयी तब आर्यन बोलै ," यह देखो हम िश जंगल में बवंडर कहाँ गलत जगह ढूंढ रहे थे पर दीप्ति डार्लिंग तुम बहोत इंटेलीजेंट हो तुम ने स्रोत के साथ इसको ढूंढ लिया ...... ी लव यू लोट ".
दीप्ति चिढ़कर ," यह बवंडर अभी दूर से hi मुझे उदा ले जा रहा है खींचता हुआ और आपको आशिकी सूज रही है कसकर पकड़ के रखो में ुध जाउंगी ".
आर्यन अपनी जगह से हिला भी नहीं, दीप्ति को गले लगाकर बोलै ," डरो मत मेरी पीठ पे चढ़कर लिपट जायो अभी वातासुर का भूत उतरता हूँ ".
दीप्ति उसकी पीठ पे चढ़ पेट पे टांग कास ली और हाथ गर्दन पे ," इश्को निगल के hi आप रोक सकते हो फिर मेरे मोह में दाल देना यह पवन देव की शक्ति है जोह िश राक्षश ने तपस्या से पायी थी ".
आर्यन ने आँख बांध कर हाथ जोड़कर मंतर पढ़ा तोह कमल कवच उसके और दीप्ति के चरों और बन गया फिर आर्यन ुष बवंडर की तरफ दौड़ लगा के उसमे कूद गया .......
वातासुर को आर्यन की मूर्खता पे हसी आ गयी यह दोनों तोह मौत के मोह में खुद समां गए ....... है है है है है है है ...... मुझे कोई नहीं हरा सकता .
अंदर बवंडर की छोटी तक पहुंच आर्यन ने आँख बांध करके मोह खोल जोह उसकी शक्ति पीनी शुरू की 5 सेकंड में सब जैसे शांत हो गया और आर्यन जमीन पे लैंड किया .....
बवंडर के ख़तम होते hi वतासुर भी नार्मल साइज का हो गया , उसकी तोह डर के hi चीख निकल गयी ...... एक मनुष्य उसकी पवन शक्ति hi पि गया और जिन्दा है यह क्यों है यह मनुष्य नहीं हो सकता न कोई देवता न राक्षस ऐसा कर सकता है .......
आर्यन ने दीप्ति को उतर के अपनी तलवार उसको देकर बोलै ," इसको सजा देने का टाइम आ गया दीप्ति डार्लिंग जाओ अपनी बेजिटि का बदला लो ".
दीप्ति भी गुस्से से तलवार लेकर वतासुर से जा भिड़ी . वतासुर भी वार कर रहा था पर दीप्ति पे जब कमल कवच की शील्ड थी क्या असर होता पर दीप्ति की तलवार के वार उसको घायल करने लगे ...... दीप्ति ने पत्र बदल के उसके ऊपर से छलांग लगा तलवार वतासुर की पीठ पे घुसेड़ के उसकी मोती गर्दन दबोच ली ," हरामीईईई तू मुझे भोगेगा , बदजात तू मुझे छु भी नहीं सकता "......
अह्ह्ह्हह मरररररररर गयाआआआ बचोऊ महाराज माया ........ पवन देव बचोओओओओओ मररररररर गयाआ माफ्फफ्फ्फ्फ़ कर दो ......
दीप्ति की पकड़ में वह गलता चला शरीर मीठी की तरह धुल होगा ...... इतना भीषण मंजर अपने मालिक का देख तीनो चुडिअल भी दररर के रू पड़ी की यह मनुष्य hi नहीं यह लड़की भी मायावी है बहोत शक्तिशाली ......
अपनी तलवार लिए दीप्ति आर्यन के गले लग गयी और आर्यन ने चूमते हुए ुष बवंडर की शक्ति उसके मोह में दाल दी जिसको झटका खाते हुए दीप्ति सेह गयी ....... 4 शक्तियां आजाद कर चुकी थी राजकुमारी दीप्ति अब तक आर्यन की 5 प्रिंसेसेस के लिए अभी पांचवी बाकी थी ..... ?
वातासुर के मरते hi रानी हेमा प्रकट हुयी जिहोने अपना हाथ तीनो चुड़िआलों की तरफ किया तोह तीनो सुन्दर लड़कियों में तब्दील हो गयी जोह राजशी पोषक पहनी थी ....... चाय, साया ,माया को देखकर आर्यन दीप्ति भी चौंक गए .
रानी हेमा ," धयानवाद महार्यं जोह तुम ने हमारी दत्तक पुत्रिओं को आजाद करवाया और दीप्ति ुष वातासुर कोई स्त्री hi मार सकती थी जिसको गन्दी नज़र से उसने देखा हो पर तुम्हारी शक्ति के सामने तोह वो चानन भर भी न टिका जबकि उससे महाराज माया भी डरते थे".
तीनो लड़कियां रानी हेमा के गले मिली और Aryan-Deepti ने उनके प्यार छूकर आशीर्वाद लिया ...... " महार्यं तुम्हे मेरा आशीर्वाद है तुम्हारी सब पत्नियां एक साथ हमेशा खुश रहेंगी वैसे एक- दो तोह यहाँ से ले जा सकते हो जिसमे पतलोक की भी शक्ति हो "...... hi hi hi hi hi
आर्यन भी मुस्करा के ," महारानी जी में जितनी है उन्ह से परेशां हूँ अप्प मेरी धुविद्या मत बढिये ...... ोुछ्ह "...... दीप्ति ने आर्यन की कमर में चुटकी काटी थी .
रानी हेमा हसकर ," मैंने कहा न तुम्हारी सब अर्धांगी तुमको और आपस में प्रेम करेंगी बस अपने कर्तव् की तरफ अग्रसर रहो ".
तीनो राजकुमारी चाय साया माया बड़ी हसरत से आर्यन को देख रही तोह रानी हेमा ने कहा ," तुम तीनो अपना मौका खो चुकी हो बस दोनों को धयानवाद दो की यह गलती से यहाँ आ गए नहीं तोह तीनो आजाद नहीं हो पाती ".
तीनो ने Aryan-Deepti से चमा मांगी वह सराफ की कारन डाइयाँ बानी और कुकरम वातासुर की शक्ति से करने लगी ..... तीनो ने आर्यन को गाला लगा एक बार गाल पे चूम के hi अलग किया , दीप्ति भी हसने लगी ....... रानी हेमा ने हाथ आगे किया तोह जंगल गायब हो गया और सामने रास्ता दिखने लगा .
रानी हेमा ," यह रास्ता तुम दोनों को 'म्हटला लोक' ले जायेगा जहाँ से तुम 'रसातल लोक' या 'पतला लोक' जा सकते हो बस अपनी मोहर साथ रखना अब ज्यादा संभल के जाना ".
तीनो राजकुमारी के साथ रानी हेमा चली गयी और Aryan-Deepti फिर एक बार चूमा छाती में लग गए .......
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राजा माया के राजमहल में जब रानी हेमा पहुंची तोह वह भी अपनी दत्तक पुत्रिओं को देखकर खुश हुए ...... अकेले में जब रानी हेमा ने कटाछ करके कहा," महाराज आपकी डबल माया भी महार्यं और दीप्ति को फसा न सकीय, चल से ज्यादा प्रेम में शक्ति होती है ".
राजा माया भी गहरी सांस लेकर ," वातासुर की शक्ति तोह उनको लेनी hi थी पर आर्यन ने बड़ी चतुराई से वातासुर को भी मरवा दिया दीप्ति से जबकि हम सोच रहे थे वह खुद मरेगा और हमारे जाल में फस जायेगा ".
रानी हेमा हसकर ," में अभी उससे मिली पर जोह चीज मैंने महसूस की उसको बस प्यार करना आता है और चल कपट उसको छु नहीं सकते आपकी मोहमाया तोह धरी hi रह गयी उसके सामने ...... मुझे ख़ुशी है वह मेरा सच्चा उपसक है कोई स्त्री निराश नहीं होगी उसके पास आकर ".
क्यों कहता है पतलोक में भी लोग मतलबी नहीं होते कुछ लोग चाहते थे की दिव्या तलवार यहीं रहे और आर्यन किसी भी नियम को तोड़कर कैद कर लिया जाये ..... पर क्या यह इतना आसान था सब कुछ जानते हुए भी राजा माया अपनी चाल चलना नहीं चुके . पर बाजी उनके हाथ से निकल गयी .
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आर्यन ने दीप्ति को अपनी पीठ पे बिठा लिया और चल दिया अपनी मंजिल की ओरे ......
दीप्ति ," माहि आप न बहोत अच्छे हो बस अपनी फ्लिर्टिंग अब बंद कर दो जब हम सब भेने आप की है सेवा करने के लिए फिर क्यों नयी लड़कियों और औरशन की तरफ अत्त्रक्टेड हो जाते हो ?"
आर्यन मुस्करा कर ," फ़्लर्ट में सिर्फ उससे करता हूँ जोह मेरी अपनी हो फिर तुम बताओ क्या मैंने तुम्हारे साथ कभी फ़्लर्ट किया बस तुमको देख के hi प्यार हो गया जैसे तुम्हारे बिना अधूरा हूँ पर क्या करता बोल नहीं पाया . तुम सुचित्रा मामीजी की छोटी भें थी जोह मुझे बीटा मानती हैं इशलिये तुमसे दुर्र भी चला गया . तुम्हारी सच्चाई जानकार भी डाउट में था की में क्या कर सकता हूँ. पर नादान था में की तुम्हारे रूप का hi नहीं तुम्हारे प्यार का जादू हो चूका था ...... वहां गाओं में रात में आँख खुल गयी सपनो में तुम्हारा उदास चेहरा देखकर जैसे मुझे बुला रही हो कब आओगे और मेरी किस्मत देखो सब रहे तुम्हारी hi तरफ बुला रही थी . अब देखो आज मुझसे खुद किस्मत कोण होगा की मेरी पीठ पे मेरी रूह , मेरे दिल की धड़कन जोह सबसे सूंदर और मनमोहक है जिसको बस प्यार hi प्यार करने का दिल करता है ...... ी लव यू दीप्ति फ्रॉम माय बॉटम ऑफ़ माय हार्ट ".
दीप्ति तोह ख़ुशी से फूली न समां रही थी की आखिर उसके सपनो का राजकुमार उसका हमदम उसका पति माहि कितने प्यार से उसको अपने पीठ पे बिठाये ले जा रहा है काश यह पल यहीं रुक जाए .......
दीप्ति कई औरशन का आर्यन से रिलेशनशिप का पूछना चाहती थी पर वह अपने प्रेम को रुशवा नहीं करना चाहती थी पर आखिरी सवाल उसने कर hi डाला जोह आर्यन भी सुनकर जैसे बिदक hi तो गया ....... " क्या आप मेरी दोनों मम्मी को भी बच्चे देने वाले हो, मीणा दीदी ने बतया था ये hi एक रास्ता है उनका माँ बनने का फिर मेरी मामियों को भी ?"
आर्यन को झटका लगा पर मीणा ने यह क्या रायता पहला रखा है भला कोई अपनी सास को घरबवती करेगा उसकी बीवी को पता चले तोह क्या बीतेगी ...... आर्यन ने एक ठंडी सांस भरी फिर हर स्तब्ध तोलते हुए बोलै आखिर उसके प्रेम की परीक्षा की घडी थी .
आर्यन ," सच्च कहूं तोह दीप्ति ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा है , मीणा ने ऐसा क्यों कहा तुमसे में नहीं जानता पर हम इश्को रोक सकते हैं की ऐसा न हो . तुम्हारी मम्मी मेरी मम्मी हैं भला में क्यों उनके बारे में सोचूंगा रही माँ बनने की बात तोह वह मेडिकल ट्रीटमेंट से बन सकती है में पिक्चर में कहाँ आता हूँ पर हाँ तुमसे ढेर सारे बच्चे जरूर करूँगा इतना में चाहता हूँ ".
दीप्ति भी उसके जवाब से संतुस्ट होते हुए ," पर दीदी ( सुचित्रा ) को तोह आप ने वादा किया है न ?"
आर्यन जिस क्वेश्चन से बचना चाहता था वही सामने आ गया पर त्यार hi था जवाब ," सुचित्रा मामीजी को अपना मन था जब से उनसे मिला , एक विराणित थी उनकी लाइफ में जिसके लिए अपने प्रेम और अधिकार का वास्ता देकर मुझसे उन्होंने अपना प्यार मांग लिया और मुझे गलत नहीं लगा की में अपनी माँ सामान मामीजी का दिल तोड़ दूँ. अगर तुमको बुरा लगा तोह सॉरी बोल देता हूँ पर किसी की ख़ुशी के लिए मुझे कोई सजा भी तुम डौगी तो मंजूर है ".
दीप्ति ने आर्यन का गाल चूम के अपने तने हुए स्तन उसकी पीठ पे रगड़ के कहा ," मेरी दीदी का अधिकार आप पे पहले है और मेरी मम्मी के जीवन में खुशियां आये आपकी वजह से मुझे कोई ऐतराज नहीं बस मेरा और मेरी बहेनो (सौतन) को प्यार की कमी नहीं लगनी चाहिए...... प्यार में कोई सौदा नहीं होता काम या ज्यादा पर माहि तुम्हारा प्रेम hi हम सबकी जीने की वजह है ".
आर्यन थोड़ा सीरियस होकर ," दीप्ति सब अपनी लाइफ खुद चुन सकते हैं कैसे जीना है पर मुझे मेरी माँ (रति) ने बड़ा hi ऐसे किये की मुझे अपनों के लिए जीना है अपनों के लिए सबकुछ नौछावर तक कर देना है बस एहि मेरा सत्य है की मेरी माँ के लिए आर्यन उनके परिवार की एक ढाल है एक सुरक्षा है यानी बॉडीगार्ड ( अंगरक्षक ) बोल सकती हो जिसके साथ उनकी हर खुसी का धयान भी रखना है . अब में इतना आगे आ चूका हूँ की पीछे पलट के नहीं देख सकता इशलिये मैंने शादी करने से पहले hi तुमको सच्च बता दिया जवालामुखी से वापसी के समय की नए रिश्ते की शुरवात झूट से न हो ".
दीप्ति भी मचलते हुए ," आपको बुरा नहीं लग्न चाहिए जैसे आप हो, गलत तोह मैंने सबसे ज्यादा किया ...... जान बोझ के ऐसे आदमी से शादी की जिसके पहले से 5 आलरेडी बीवियां थी पर मेरा अँधा प्यार फिर भी मुझे वह hi चाहिए चाहे जान चली जाये . आज वही मेरा प्यार मेरी मौत को टालने के लिए पतलोक तक आ गया सिर्फ इशलिये की में ज़िंदा रहूं . माहि मैंने जनम 21 साल पहले लिया था पर जीने का अहसास ुशी दिन हुआ जिस दिन तुम मेरे ज़िंदगी में आये. एक हफ्ता मिला मुझे आपको छु कर प्यार करने का इतने काम समय में भी क्या कुछ नहीं दिया आपने . बस लालची hi है यह आपकी पत्नी जोह अपने साथ आपको भी मौत के मोह पे ले आयी और अपनी गीता दीदी को भी कैद करवा दी . हो सके तोह माफ़ कर देना आप सब मुझे ".
दीप्ति का रोना देखकर आर्यन रूककर उसको अपने सामने कर गोदी उठा के चूमता हुआ चुप करवा रहा था कुछ ज्यादा hi सेंटी हो गयी ....... िश एक हफ्ते में बस पतलोक में िंह दोनों प्रेमी ने सबसे ज्यादा टाइम गुजरा था , दोनों एक दुसरे को परख भी रहे थे और आत्मीयता भी बढ़ा रहे थे .
आर्यन ने मजाक करते हुए ," क्या मेरी रानी शैब्या ऐसा करोगी अपने हनीमून पे सोचो पतलोक तोह डेस्टिनेशन hi ख़तम हो जाएगी नेवली मैरिड कपल्स के लिए ....... देखो कितने सूंदर नजर्ये हैं कुछ किसी वीसी दो कुछ किसी वीसी लो असून तोह हम पार्थवी लोक पे भी बहा लेंगे ...... hi hi hi hi hi hi ".........
दीप्ति भी उसकी बात पे हस्ते हुए ," इससे बुरी हनीमून डेस्टिनेशन नहीं हो सकती ".
आर्यन ने दीप्ति के लबों को चूमा ," नहीं दीप्ति माय लव , हनीमून डेस्टिनेशन कोई भी हो बस हस्बैंड वाइफ में प्रेम होना चाहिए तोह नरक भी स्वर्ग hi लगेगा फिर अपने देश में तोह 90 % लोग बस अपने बैडरूम में hi हनीमून का मजा ले पाते हैं गरीबी की वजह से पर प्यार उनका सबसे सच्चा होता है क्योंकि प्यार के लिए दो आत्मा का मिलान मायने रखता है जगह नहीं ".
दीप्ति भी आर्यन का पूरा चेहरा चूम डाली ," आप इतनी अच्छी अच्छी बातें कैसे बना लेते हो , ी लव यू मुझे अपना बनने के लिए ".
आर्यन हसकर ,"मुझे सब प्यार hi करते हैं तोह बस प्यार hi देखता हूँ नहीं तोह नफरत से ज़िंदगी कांटे की तरह लगती है जोह मुझे बुरा hi बना देती है ".
Aryan-Deepti बहोत खुश थे पर दोनों का धयान न था अदृश्य रूप में कई नर और मादा दानव , राक्षस दूर से दोनों को मोह माया के मंतर मार के उकसा रहे थे पर कमल की शील्ड की वजह से बे असर .
2 घंटे बाद वह जिस द्वार पे खड़े थे वहां से तीन लोक को रास्ता जाता था पर पतलोक के हर लोक को जैसे जाना hi था ....... ???
आर्यन ," अब 5तह पड़ाव तो दिव्या तलवार की नजदीक hi होगा ?"
दीप्ति ," 5तह पड़ाव खुद दिव्या तलवार hi है पर क्या में उसकी बिजली की शक्ति (लाइटनिंग पावर ) झेल पाऊँगी ..... ?"
आर्यन ," क्यों नहीं तुम्हारा और तलवार का कनेक्शन है तभी उसका नक्शा तुम्हारी पीठ पे रहा अब दिमाग़ में ".
दोनों को बात करते एक तीसरा सख्स भी मोह छुपाये देख रहा था ..... ????
हार्ट हार्ट हार्ट