Angrakshak Parivar Ka .........MAHI - Page 25 - SexBaba
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Angrakshak Parivar Ka .........MAHI

अपडेट 34

PART - 7(बी)

Aryan-Deepti को 'तळतळा लोक' के द्वार पे छोड़कर स्त्री योद्धा वापस लौट गयी..... द्वार से दोनों अंदर प्रवेश किये तोह कोई नहीं दिखा सब तरफ नज़र करके आर्यन बोलै ," दीप्ति अपनी तलवार निकाल लो मुझे लगता है कोई हमको देख रहा है पर सामने नहीं आ रहा ".

आर्यन चिल्लाकर ," जोह भी तुम हो सामने आ जाओ इश्से पहले में मंतर पढ़कर तुमको बंधी बना लूँ ".

द्वार पे शंकर भगवन की "त्रिपुरान्तक अवतार" की मूर्ति बानी थी , आर्यन समझ गया की राजा माया भी शंकर भगवन के भकत है और यह लोक उन्होंने hi इनको दिया है ........

(* त्रिपुरान्तक अवतार लेकर भगवन शंकरजी ने तीन विशाल नगर को नष्ट किया था जोह माया ने बांये थे स्वर्गलोक और भू लोक के बिच तीन राक्षस भाइयों के लिए ...... माया भी वहीँ था पर विनाश के बाद शंकर भगवन ने अपने िश भक्त को फिर से जीवट कर तळतळा लोक का राजा बना दिया . )

आर्यन ने फिर आँख बांधकर भगवन भोलेनाथ का नाम लिया और मंतर पढता उससे पहले hi सामने राजशी वस्त्रों में वह प्रकट हो गए ," थारो वॉश महार्यं , तुमको मंतर पढ़ने की जरुरत नहीं है हम भी शिव भक्त हैं "........ यह राजा माया की आवाज थी इतनी मीठी जिसने सुनी वह इनके वश में हो जाये ......

आर्यन ने हाथ जोड़कर नमस्ते किया तोह दीप्ति ने भी उसका अनुसरण किया ...... " चमा चाहता हूँ महाराज , बस मुझसे कोई द्वार पे मोहर नहीं लिया प्रवेश पर तोह लगा हमारा उपहास उदा रहा है ".

राजा माया मुस्करा के ," कोई बात नहीं हमको hi विलम्ब हुआ आने में , कहो हम क्या मदद कर सकते हैं ?"

आर्यन ," आप तोह सर्व ज्ञानी हैं और आपके असर से कोण भला बचा है आजतक ".

राजा माया हसकर ," फिर तुमको शीर्घ hi 4तह पड़ाव तक जाना चाहिए"..... और एक पोर्टल सा रास्ता अपने हाथ से बना दिए ..... " यह भी हमारे लोक में है पर वहां तुम्हरी भी दिव्या तलवार की माया से तुमको पार पाना होगा ".

Aryan-Deepti ने आगे बढ़कर उनके प्यार चुहये तोह आशीर्वाद देते हुए बोले," सदैव खुश रहो और मेरी माया के असर से हमेशा दुर्र रहो" ...... है है है है ......

आर्यन भी मुस्करा ," महाराज आप की क्रिया भी एक कड़वा सच्च हैं िश जीवन का और में भी अछूता नहीं हूँ उससे ुष नश्वर संसार में आप तोह अन्तर्यामी हैं ".

राजा माया ," हाँ तुम हमारी अधरगनि रानी हेमा के उपासक लगते हो परन्तु पूरी तरह नहीं फिर भी वह सच्च तुम्हारा नहीं है , जल्दी hi अपने समय पे अपने आप पता चल जायेगा ...... महार्यं यह पतलोक तुम्हारे रुकने के लिए ठीक स्थान नहीं है इशलिये अपनी कर्मभूमि जल्दी कार्य पूर्ण करके लौट जायो ".

दोनों ने उनको प्रणाम किया और पोर्टल में एंटर किये जोह उनके पीछे बांध हो गया .......

तब एक दानव ने पुछा ," महाराज आप िश मनुष्य से इतना डर गए जबकि इसको हम में से कोई भी असुर या दानव हरा देता ".

राजा माया ने मुस्करा के कहा," इश्के हारने या मरने के बाद hi तोह इसका असली तांडव शुरू होता, तुम नहीं समझोगे इश्के पिछले जनम की पटरानी रतिदेवी जोह िश जनम में इसकी नानी माँ है उसको भगवन शिव का वरदान प्राप्त है अगर उसने आर्यन के मरने के बाद पुनर्जीवत मांग लिया तोह सबसे पहले यह पतलोक को hi तबाह करेगा ..... कभी कभी सबकुछ अनभिग बनकर सबकी भलाई और पतलोक का कल्याण देखना पड़ता है फिर धरतीपकड़ को भूल गए , उसको कोई पतलोक निवासी भी नहीं मार सकता न hi सारे 14 लोकों का कोई प्राणी पर िशने कैसे आसानी से मार दिया यह सोचते रहना ...... सच्च ये है यह एक तरह से देखा जाए तोह यह मनुष्य िंह 14 लोकों में से भी नहीं है समझे ".

सब हैरान hi थे यह फिर कहाँ से यानी दूसरी विश्व से पर ऐसा कैसे हो सकता है फिर सबको दिव्या तलवार का याद आया की वह भी िश दुनिया की नहीं है तोह ओह्ह्ह्हह्ह तभी यह यहाँ आया है उसके लिए .....

दुसरे ने पुछा ," महाराज फिर वह लड़की जिसको वह अर्धांगी बता रहा है ".

राजा माया हस्ते हुए ," वह भी एक दिव्या तलवार की माया hi है जिसको महार्यं जल्दी खोज लेगा बस जनम एक दिव्या कन्या के रूप में लिया है , उसको कोई नर छु भी नहीं सकता किसी भी लोक में ".

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दिव्या तलवार में िश बार बड़ा कम्पन हुआ और रौशनी भी चका चॉंद से तेज़ हुयी और अंदर धस गयी ...... ख़ज़ाने का विशाल ढेर भी खान खाना उठा और अपने तीनो फैन को उठा के विशाखा की 6 आंखें खुली नींद से ॉश्चारिये से यह कम्पन और तेज़ कैसा है ?

"विशाखा पुत्री अब िश तलवार का मोह छोड़ दो इश्क मालिक पतलोक में आ चूका है धरतीपकड़ को मिर्त्युदण्ड देकर , हो सके तोह अपने प्राण बचा लो".

विशाखा को अपने मस्तिक्ष में सुनाई दी यह चेतावनी चिंता से काम न थी की धरतीपकड़ को मिर्त्युदण्ड देने वाला िश दिव्या तलवार का मालिक है ..... नहीं यह सिर्फ मेरी तलवार है और इश्को भी मुझसे लगाव है . में भी तोह देखूं कोण मुझसे इश्से जुड़ा करता है .

'पतला लोक' कह लो या 'नाग लोक ' िश लोक की एक विशाल गुफा में जोह अब नंगीं विशाखा का आवास था िश दिव्या तलवार को पाकर ...... दिव्या तलवार ने विशाखा को अपने को छूने दिया उससे लगाव करने दिया इसके पीछे की मनसा तोह दिव्या तलवार hi बता सकती है पर आज उसको भी विशाखा एक ज़हरीली लालची नागिन लग रही थी जोह उसके मालिक के पास नहीं जाने देना चाहती है ....... यानी अब दिव्या तलवार भी चाहती थी की विशाखा का अंत जल्द से जल्द हो और वह अपने मालिक के हाथों की सोभा बढ़ए.

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पोर्टल के अंदर जाकर सामने उनको बस धरतीलोक जैसा नजारा नज़र आया , पेड़ पदों हरी घास , पसु पक्षी , नीला आकाश ...... दोनों आगे बढे तोह आर्यन ने कहा ," दीप्ति अब हम किसी मायावी दुनिया में हैं क्योंकि यहाँ सब कुछ अच्छा hi दिख रहा है धरती की तरह , 4तह पड़ाव को कैसे पार करना हैं तुमको कुछ अंदजा है ".

दीप्ति ने आर्यन की तरफ देखकर चलते हुए कहा ," हमको ऐसी जगह खोजनी है जोह वायु की विशाल शक्ति रखती हो यानि एयर पावर का स्रोहत हो पर पतलोक में जीवों को वायु की कहाँ अवसक्ता पड़ती है जबकि सब जगह वायु मंडल है ".

आर्यन ," हाँ यह बात भी सही है , वायु की शक्ति पतलोक में कैसे होगी पर नक़्शे में मैंने एक बड़ा बवंडर देखा था 4तह पड़ाव का संकेत ..... रुको अभी दिखता हूँ ".

(आर्यन ने अपने लैपटॉप पे पहले दीप्ति का नक्शा बांया फोटोशॉप से फिर जलमहल वाला भी ...... बिना को देकर एक स्पेशल डाई उसे कर 2.5 ×1.2 फट कपडे पे दोनों तरफ प्रिंट करवा पक्का कलर उसे कर आसानी से न मित्ये यहाँ आने से पहले साथ ले लिया था )

आर्यन ने अपने बैग से एक मोटा रुमाल जैसा कपडा निकाला 2 तेह किया हुआ फिर खोल के दीप्ति के सामने किये ," देखो यह है वह नक्शा जोह तुम्हारी पीठ पे मुझे सबसे पहले दिखा था और यह दूसरी साइड जब जल महल के पानी में दिखा ....... दोनों तरफ से कपड़े करो तोह पहले सिर्फ 5 पड़ाव दिखे पर पानी में 5 सिग्न (जल महल , जवालामुखी, चट्टान में गुफा , बवंडर, ....???........ ) उन्ह पड़ाव पे हैं ....... यह पतलोक में 4तह पड़ाव में वुयू का बवंडर है पर यह किसी घने जंगल के बिच कैसे हो सकता है?"

दीप्ति ," हो सकता है यह सामने जोह जंगल है इसी में वह बवंडर हो जिस तक हमको पहुंचना है ?"

आर्यन ," हुन्न पर यह कोई हमको फसाने की चाल भी हो सकती है यानि हमको वह दिखाया जा रहा जोह हम चाहते हैं ताकि हम अपनी मंजिल से भटक जाएँ या फिर सामने मंजिल है और हम बेकार में इश्को भ्रम समझे ".

दीप्ति ," बात तोह ठीक है आपकी , चलो पहले यह पता लग्न होगा की हम किसी मायाजाल में तो नहीं फसें हैं फिर ुष बवंडर के स्रोत को भी ढूंढ़ना होगा ".

दोनों ने सहमति जताते हुए एक दुसरे को चूमा और चरों तरफ निगाह रखते आगे बढे जोह सामने जंगल नज़र आ रहा िश मैदान के बाद पार करके ...... आर्यन को जंगल के बहार जोह सबसे ऊँचा पेड़ दिखा तोह ुष्पर चढ़ गया जब ऊपर पहुंच के देखा तोह उसको ॉश्चारिये हुआ की यह तो न ख़तम होने वाला दूर दूर तक जंगल hi लग रहा है फिर ुष बवंडर को कैसे खोजे , निचे उतर के दीप्ति को भी अपनी जिगशा प्रकट की .

अब दोनों के पास जंगल में एंटर करने के अल्वा कोई चारा न था , दोनों ने अपने बड़े बड़े कटरी नुमा खंजर निकाल लिए और िश जंगल में प्रवेश कर गए ...... जैसे जैसे जंगल घाना होता जा रहा था वैसे वैसे दोनों अपनी कटारी से झाड़ काट ते आगे बढ़ रहे थे ....... दोनों आँखों के इशारे इशारे में बात करते आगे बढ़ते गए पर 2 घंटे चलने के बाद भटकते हुए उनको कुछ नहीं मिला सिवा जंगली जानवर और पक्षिओं के जोह उनको देखकर दुर्र भाग जाते पुकारने पे भी नहीं रुकते .

( दोनों जानवरो और पक्षिओं की भासा में बात कर लेते थे )

दोनों ने कुछ डिअर विश्राम करने का सोचा तोह एक बड़े पेड़ के निच्चे बेथ सुस्ताने लगे , पानी पीकर कुछ फल खाये जोह साथ लाये थे और आधे घंटे आराम कर के आर्यन बोलै ," तुम यही रुको में एक बार पेड़ पे चढ़ के देखता हूँ ".

दीप्ति ," क्या िश बार में देखूं या दोनों चलें सायद कुछ और दिखे ".

दोनों फिर अपने बैग्स और अस्तर रखकर पेड़ पे चढ़ गए बस चरों और जंगल hi जंगल अब क्या करें ? दोनों हताश होकर निच्चे उतरने लगे तोह उनको 2 लोमड़ (जैकाल) दिखे जोह उनके बैग उठा के पेड़ के निच्चे से भागे ..... दोनों ने चिल्ला के उनकी लैंग्वेज में रुकने को कहा पर नहीं रुके अब दोनों अलग दिशा में थे तोह आर्यन ने दीप्ति को दुसरे की तरफ भागने को कहा और वह पहले के पीछे . सायद जानवरो से दोनों का लगाव उनको मारने से रोक रहा था नहीं तोह एक वार खेला ख़तम हो जाता .

आर्यन ने स्पीड बढ़ा के ुष लोमड़ को ुष पेड़ से 2 कम दूर पकड़ लिया जोह उसके छूटे hi गायब हो गया और बैग जमीन पे गिरा ....... उसको समझ में आ गया की उनको धोके से अलग किया गया है यानी दीप्ति मुसीबत में है ..... क्या जरुरत थी बैग के पीछे भागने की वह तेज़ी से वापस ुशी पेड़ पे पहुंचा क्योंकि दौड़ते हुए लोमड़ का पीछा करते अपनी कटारी से बड़े पेड़ों पे कट मारता आगे बढ़ा था पर दीप्ति का कोई अत पता न था उसने दीप्ति वाली डायरेक्शन पकड़ी और तेजी से असुरे करता की वह किस तरफ गयी है ...... दीप्ति ने कुछ झाड़ काटे थे आगे भागते हुए .

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उधर दीप्ति बड़ी तेज़ी से ुष लोमड़ के पीछे भागी पर वह उसको पकड़ नहीं पायी और रुकी तोह फिर बैग मोह में दबा के लोमड़ दिखा और भाग लिया फिर दीप्ति भागी पीछे उसकी भासा में बोलते हुए," रुक ऐसा क्यों कर रहा है तुझे खाने को कुछ दूंगी रुक जा ?"...... 5 मं बाद फिर वह नहीं ढूंढ पायी ..... फिर वह दिखा फिर भागी ऐसा करीब एक घंटे से ज्यादा हो गया पर अब दीप्ति को भी नहीं पता था की वह कहाँ है पर ुष पेड़ से बहोत दुर्र है जहाँ आर्यन वह अलग हुए थे ...... अरे बैग के लिए इतना भागने की क्या जरुरत थी पर खेल खेला जा चूका था दो प्रेमी िश जंगल में अलग अलग ......

दीप्ति अपनी सांस दुरुस्त करती वापस जाने का सोची तोह कटे हुए झाड़ जोह कई दिशा में उसके लोमड़ के पीछा करते बने थे उसको धीवधा में दाल दिए की अब क्या करे ...... ?

दीप्ति अभी सोच hi रही थी की किसी ने पीछे से उसके सर पर मारा तोह बेहोस हो गयी ...... तभी तीन चुड़ैलों ने दीप्ति को जहर लिया ....... सकल से दरवानी और बदसूरत सी देखकर hi उलटी , पिशाब और टट्टी तीनो आ जाये एक साथ में .

पहली चुडिअल ," में इश्को मालिक के पास ले जाती हूँ सायद कुवारी है बड़ा इनाम मिलेगा , तुम ुष आदमी को धोंड के वहीँ गुफा तक ले आयो , पहले तीनो उसका शारीरिक भोग करेंगे फिर उसको खून भी पीना है और ाँद ( टट्टे ) भी खाएंगे जोह मनुष्य के बहोत सवादिस्ट होते हैं विरए से भरे हुए "....... है है है है है ......

दोनों ने उसकी बात का समर्थन किया , इनकी सकल hi दरवानी नहीं थी सोच तोह और ज्यादा बेहिसी थी ...... पहली चुडिअल ," पर ुष मनुष्य को अपना रूप बदल के मोहजाल में फसा के लाना अगर मेरे से पहले तुम दोनों उसका भोग किया तोह दोनों को मालिक से बंदी बनवा दूंगी ".

यह वाली चुडिअल ज्यादा ताकतवर लग रही थी , उसके जाने के बाद दोनों ने रूप बदला एक रूपवती 21 साल की लड़की बन गयी और दूसरी काला खूंखार भेड़िया, वह सूंदर लड़की आगे भागी और भेड़िया पीछे पीछे ," बच्चो बच्चो ..... कोई है बच्चो "........

आर्यन भी आगे बढ़ता दीप्ति की तलाश में 5 कम आ गया होगा पर दीप्ति का कुछ पता नहीं लग रहा था बस वह सोच रहा था की कहीं दीप्ति मुसीबत में न हो ....... थोड़ा और आगे चलकर उसको एक लड़की की आवाज सुनी जोह बच्चो बच्चो चिल्ला रही थी ...... यह दीप्ति की आवाज तोह नहीं है फिर िश जंगल में कोण मुसीबत में है मुझे उसको बचाना चाहिए ...... वह आवाज की दिशा में दौड़ा तोह कुछ hi पलों में ुष लड़की को अपनी तरफ भागता देखा और एक काला भेड़िया पर अगले hi पल नज़ारा अलग दिखा आर्यन को एक चुड़ैल स्त्री का रूप धार दूसरी चुडिअल भेड़िया का रूप धारण कर उसकी तरफ आ रही थी .

आर्यन के मस्तिक में ," ओह यह दोनों रूप बदल के मुझे hi फसा रही हैं और दीप्ति का भी इनको गायत होगा मुझे इनका भेद जाना होगा "....... अपने दिमाग़ में प्लान बना वह तेजी से ुष लड़की के पास पहुंच के पकड़ लिया और अपने पीछे कर के ुष भेड़िये को एक ग़ुस्सा जड़ दिया जिससे वह दुर्र जाकर गिरा और बेहोश हो गया ......

वह सूंदर लड़की आर्यन से चिपट के रोने लगी तोह आर्यन भी नाटक करता हुआ ," डरो नहीं अब तुम सुरकषित हो , िश जंगल में क्या कर रही हो ? क्या तुम ने किसी लड़की को देखा ? "

वह सूंदर लड़की तोह आर्यन से लिपट उसके बदन की खुसबू और खून सूंघ रही थी रोने का नाटक करते हुए, अपने मैं में " बड़ा hi हटा कटा सूंदर मनुष्य है ,इसे तोह में अपने साथ रखूंगी कितना मासून है इसका विरए भी स्वादिस्ट होगा "..... यह सोच सोच के उसके मोह में पानी आ गया था ......

आर्यन जोह उसको असली रूप में देख सकता था उसको घिन आ रही थी उसकी दुर्गन्ध से जैसे सालों से नहीं न हो और घोस्ट खाकर कभी टूथब्रश न की हो ..... आर्यन ," देखो वह भेड़िया भाग गया अब बताओ कोण हो तुम यहाँ क्या कर रही हो ?"

सूंदर लड़की रोटी हुयी ," में अपनी दो बड़ी भें चाय , साया के साथ भटक गयी हूँ मेरा नाम माया है ....... वह दोनों पानी ढूंढने गयी थी मेरे पीछे वह भेड़िया पद गया ..... अब में कैसे ढून्ढ पाऊँगी उनको ?"

आर्यन मैं में यानी तीन चुडिअल हैं , अगर दीप्ति का पता लग्न है तोह इसकी दोनों बहेनो को भी मिलना पड़ेगा तभी पकड़ के इनको कैद करूँगा कहीं दीप्ति को नुक्सान न पहुंचा दें ...... " ठीक हैं हम मिलकर तुम्हारी दोनों बहेनो को ढूंढ़ते हैं और मेरी पत्नी दीप्ति को भी वह भी खो गयी है ".

माया ," ठीक है जैसा आप कहें पर आप शादी सुदा लगते नहीं हो बहोत सूंदर हो "...... और शर्मा गयी .....

आर्यन ," यह भें की लौड़ी मुझे चुटिया समझ रही है , टाइम आने दे तुझे अपने चुडिअल होने की आज ऐसी सजा दूंगा भूलेगी नहीं ".

दोनों आगे बढे तोह भेड़िया गायब हो गया था और माया अपने पीछे पीछे ुष गुफा की तरफ ले जा रही थी जहाँ उन्ह तीनो का मालिक था .

कुछ दूर जाकर उनको साया मिल गयी जोह अपनी छोटी भें से भी सूंदर रूप धारण कर ली थी , माया जलते हुए शिकार मैंने पत्या और आ गयी लार टपकते हुए ...... साया अपने मैं में ," क्या ललाम लाल घोस्ट है , कितना हस्त पुष्ट है और सूंदर सजीला भी ...... इसको खूब भोगूंगी खूब विरए और खून पियोगी , इसके टट्टे भी बड़े होंगे तोह स्वादिस्ट होंगे .

साया माया गले मिली फिर चाय की खोज में तीनो आगे बढे तोह कुछ दूरी पे वह एक सूंदर युवती का रूप धारण उनको मिली एक हाथ में जल का पात्र लिए हुए तीनो भेने गले मिलकर खुश हो रही थी की बड़ा हाथ मारा है ......

आर्यन भी मुस्करा के बोलै ," मैंने तुम तीनो से बदसूरत , बदबूदार और कुरूप चुडिअल नहीं देखि ..... hi hi hi hi hi hi ...... चलो तीनो मेरी पत्नी का पता बता दो जान से नहीं मरूंगा नहीं तोह कैद करके जीवन भर तड़पना पड़ेगा".

हस्ते हुए बात शुरू कर गुस्से से उनको चेतावनी दे डाली पर तीनो को जैसे लखवा मार गया हो , इश्को कैसे पता क्या हमें देख सकता है अबतक नाटक कर रहा था ........ ???

आर्यन ने एक मंतर पढ़ा तोह तीनो अपने असली रूप में आ गयी .

चाय ," ओह्ह तो तेरा पास शक्तियां भी हैं मगर तू नहीं जानता हम तीनो को कोई हरा नहीं सकता पहले हमने सोचा की तुझे अच्छे से भोग लेंगे या फिर हमेशा पास रखते मगर अब तेरे लहू से प्यास भुजा लेंगे ".

इसी के साथ तीनो ने आर्यन पे हमला कर दिया जिसको वह खड़ा हुआ मुस्कारते बस ऐसे hi नाकाम कर देता , हथियार , पत्थर , अंगारे , जेहेर सब वार किये पर ुष्पर कोई असर नहीं हुआ .......

आर्यन ने मंतर पढ़ा और तीनो की छोटी पकड़ ली और एक दुसरे में लपेट के बोलै ," अभी समय है बताओ दीप्ति कहाँ है नहीं तोह जितना में छोटी कसके घूंड ने लगा उतना hi दर्द होगा मौत से बदतर ".

दो ऐंठे मारते hi तीनो की भयनक चीखिआ गूंज गयी , आज सच्च में यमराज से पाला पड़ा था बस वह मनुष्य रूप धारण किये था ....... कोई मंतर , कोई अस्तर , कोई जादू काम नहीं कर पा रहा था ऊपर से छोटी इतने से तीनो की आत्मा सी काट रही थी जोह बहोत पीड़ा दायी होता है ......

तीनो ने जोर जोर से रोटी हुए अपने मालिक को पुकारा पर वह भी जैसे इनकी पुकार नहीं सुन पा रहा था ...... तीनो ने हार के आर्यन को बतया की दीप्ति गुफा में उनके मालिक के पास है .

आर्यन तीनो की छोटी से पकड़ के ुष गुफा की तरफ दौड़ा जहाँ दीप्ति थी .......

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उधर "वातासुर" राक्षश की गुफा में दीप्ति को हवा में उदा के जंगल से चाय नाम की चुडिअल ले गयी तोह दीप्ति को गुफा में होश आया उसके जाने के बाद ....... उसने देखा िश अँधेरी गुफा में एक हवन कुंड जल रहा है और बहोत बड़े आकर का राक्षस मंतर पढता आहुति दे रहा है ......

ज़मीन से उठकर दीप्ति ने चरों और गुफा में देखा तोह हड्डी और मार्श पड़ा था जिसकी बदबू असहनीय थी ..... दीप्ति चिल्लाकर ," कोण है तू दुष्ट जोह मुझे यहाँ लेकर आया है ?...... तू जानता नहीं है मेरे पति महार्यं को पता चला की तू मुझे यहाँ लाया है तोह मौत की भीख भी नहीं मांग पायेगा".

राक्षस वतासुर बस खाका लगा के हसने लगा ," है है है है है है ..... तू जितनी सूंदर है उतना hi तुझे भोग के बलि चढ़ाने में आनंद आएगा ...... तेरे पति को तोह मेरी तीन गुलाम हज़म भी कर गयी होंगी . अगर मेरी बात मानेगी तोह तुझे अपनी रानी बना के रखूँगा . मेरा नाम महँ असुर वातासुर है मुझे कोई हरा नहीं सकता ".

दीप्ति भी हसकर ," तुझ पे मुझे हसी आती है , तू कायर की औलाद hi होगा तू नहीं जानता अगर तुझे पता होता की धरतीपकड़ को मेरे पति महार्यं ने कितनी भयानक मौत दी थी कभी ऐसा सोचता भी नहीं ...... ठयऊ है तुझपर कायर कहीं का , मुझे छुआ भी तोह तड़प तड़प के मरेगा ".

राक्षस ," जबान संभल लड़की , में कुछ बोल नहीं रहा तोह बढ़ चढ़कर बोल रही है और धरतीपकड़ को कोई मनुष्य कभी नहीं मार सकता . मेरा अपमान करके तूने अपनी भी मौत बुला ली है तुझे तोह तड़पा तड़पा के मारूंगा ".

"" पहले अपनी िंह तीन चुड़ैल को तोह बचा ले जानत के पिस्सू फिर तेरी बारी ""

यह आवाज आर्यन की थी जिसने तीनो चुड़ैल को वातासुर के पैरों की तरफ उछाल दिया ....... तीनो चिल्लाकर अपने मालिक से उनको बचने की गुहार करने लगी ......

दीप्ति हस्ते हुए ," वातासुर जब गीदड़ की मौत आती है न तोह गाओं की तरफ भागता है पर तू निच्च तोह िश गुफा में छुपा बैठा है ".

वातासुर तोह अभी भी हैरान था की यह थुच सा मनुष्य गुफा के अंदर कैसे आ गया मेरा मंतर तोड़कर नहीं यह िंह तीनो बेवकूफ की वजह से हुआ होगा .....

दीप्ति जोह आर्यन को देखकर खुश हुयी दौड़ के ुष्पर छलांग लगा के गोदी चढ़कर चूमने लगी पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म माहि पुछःह पुछठ ..... ी लव यू माय डार्लिंग .....

आर्यन भी किसी का जवाब देते हुए ," तुम ठीक हो कहीं चोट तोह नहीं लगी ..... ी लव यू तू माय स्वीट हार्ट ".

दीप्ति हसकर ," हम वायु का बवंडर ढूंढ रहे थे यह खुद वातासुर मिल गया , यही बवंडर लाएगा बस इश्को उलझा के बवंडर बनवाओ फिर तुम निगल जाना तभी 4तह पड़ाव पार होगा".

वतासुर ने 2-3 मंतर पढ़ तीनो चुड़िआलों की छोटी खोलने चहई पर न खुली ...... बल्कि उनकी चीक पुकार और बढ़ गयी .......

वतासुर गुस्से से ," तोह तू मायावी शक्ति रखता है पर धरतीपकड़ को तू नहीं मार सकता मगर आज में तुझे मार के िश कन्या की बलि दूंगा अपने महाराज मयासुर को ...... है है है है है है ".

हसने के साथ गुफा में तेज तेज आंधी सी चलने लगी फिर बड़ी स्पीड से ुष अंधी में पत्थर , भले , तलवार , गदा आर्यन की तरह चोदे तोह उसने दीप्ति को पीछे कर अपना हाथ आगे कर गोल गोल घुमा के उसकी दिशा वतासुर की तरफ कर दी और धड़ाम धड़ाम ...... एक के बाद एक सारे वार वतासुर को लगे तोह वह भी दर्द से चीख पड़ा ..... अह्हह्ह्ह्ह

आर्यन हसकर ," अबे तू तोह धरतीपकड़ से भी गया गुजरा है कोई बड़ा तूफान भेज जिससे तेरा नाम यथार्थ हो वातासुर ..... hi hi hi hi hi hi ...... नपुंसक कहीं का लड़कियों को उतथा है धोके से "......

( वाट = वायु और असुर = राक्षस)

" वतासुर , अगर जान प्यारी हो तोह इश्से माफ़ी मांग लो यह साधारण पुरुष नहीं है िशने धरतीपकड़ को मारा है".

यह आवाज राजा माया की सुनाई दी थी वतासुर के मैं में , अब वह भी डर रहा था पर आर्यन ने िशबार उसको माँ भें की गाली देकर ललकारा तोह था तो राक्षस hi विनाश काले विपरीत भुधि .....

वतासुर ने अपना साइज बढ़ना शुरू किया तोह गुफा फढ़ता करीब 40फट ऊँचा हो गया फिर एक घेरि सांस ली जैसे साड़ी हवा hi अंदर खींच ली हो और फिर जोह हुआ एक बड़ा भयानक 1200km/hr की स्पीड वाले बवंडर को मोह से बहार निकाल आर्यन की तरफ दिशा दे दिया .......

आस पास के पेड़ पत्थर से लेकर धुल भी उसमे मिलती गयी तब आर्यन बोलै ," यह देखो हम िश जंगल में बवंडर कहाँ गलत जगह ढूंढ रहे थे पर दीप्ति डार्लिंग तुम बहोत इंटेलीजेंट हो तुम ने स्रोत के साथ इसको ढूंढ लिया ...... ी लव यू लोट ".

दीप्ति चिढ़कर ," यह बवंडर अभी दूर से hi मुझे उदा ले जा रहा है खींचता हुआ और आपको आशिकी सूज रही है कसकर पकड़ के रखो में ुध जाउंगी ".

आर्यन अपनी जगह से हिला भी नहीं, दीप्ति को गले लगाकर बोलै ," डरो मत मेरी पीठ पे चढ़कर लिपट जायो अभी वातासुर का भूत उतरता हूँ ".

दीप्ति उसकी पीठ पे चढ़ पेट पे टांग कास ली और हाथ गर्दन पे ," इश्को निगल के hi आप रोक सकते हो फिर मेरे मोह में दाल देना यह पवन देव की शक्ति है जोह िश राक्षश ने तपस्या से पायी थी ".

आर्यन ने आँख बांध कर हाथ जोड़कर मंतर पढ़ा तोह कमल कवच उसके और दीप्ति के चरों और बन गया फिर आर्यन ुष बवंडर की तरफ दौड़ लगा के उसमे कूद गया .......

वातासुर को आर्यन की मूर्खता पे हसी आ गयी यह दोनों तोह मौत के मोह में खुद समां गए ....... है है है है है है है ...... मुझे कोई नहीं हरा सकता .

अंदर बवंडर की छोटी तक पहुंच आर्यन ने आँख बांध करके मोह खोल जोह उसकी शक्ति पीनी शुरू की 5 सेकंड में सब जैसे शांत हो गया और आर्यन जमीन पे लैंड किया .....

बवंडर के ख़तम होते hi वतासुर भी नार्मल साइज का हो गया , उसकी तोह डर के hi चीख निकल गयी ...... एक मनुष्य उसकी पवन शक्ति hi पि गया और जिन्दा है यह क्यों है यह मनुष्य नहीं हो सकता न कोई देवता न राक्षस ऐसा कर सकता है .......

आर्यन ने दीप्ति को उतर के अपनी तलवार उसको देकर बोलै ," इसको सजा देने का टाइम आ गया दीप्ति डार्लिंग जाओ अपनी बेजिटि का बदला लो ".

दीप्ति भी गुस्से से तलवार लेकर वतासुर से जा भिड़ी . वतासुर भी वार कर रहा था पर दीप्ति पे जब कमल कवच की शील्ड थी क्या असर होता पर दीप्ति की तलवार के वार उसको घायल करने लगे ...... दीप्ति ने पत्र बदल के उसके ऊपर से छलांग लगा तलवार वतासुर की पीठ पे घुसेड़ के उसकी मोती गर्दन दबोच ली ," हरामीईईई तू मुझे भोगेगा , बदजात तू मुझे छु भी नहीं सकता "......

अह्ह्ह्हह मरररररररर गयाआआआ बचोऊ महाराज माया ........ पवन देव बचोओओओओओ मररररररर गयाआ माफ्फफ्फ्फ्फ़ कर दो ......

दीप्ति की पकड़ में वह गलता चला शरीर मीठी की तरह धुल होगा ...... इतना भीषण मंजर अपने मालिक का देख तीनो चुडिअल भी दररर के रू पड़ी की यह मनुष्य hi नहीं यह लड़की भी मायावी है बहोत शक्तिशाली ......

अपनी तलवार लिए दीप्ति आर्यन के गले लग गयी और आर्यन ने चूमते हुए ुष बवंडर की शक्ति उसके मोह में दाल दी जिसको झटका खाते हुए दीप्ति सेह गयी ....... 4 शक्तियां आजाद कर चुकी थी राजकुमारी दीप्ति अब तक आर्यन की 5 प्रिंसेसेस के लिए अभी पांचवी बाकी थी ..... ?

वातासुर के मरते hi रानी हेमा प्रकट हुयी जिहोने अपना हाथ तीनो चुड़िआलों की तरफ किया तोह तीनो सुन्दर लड़कियों में तब्दील हो गयी जोह राजशी पोषक पहनी थी ....... चाय, साया ,माया को देखकर आर्यन दीप्ति भी चौंक गए .

रानी हेमा ," धयानवाद महार्यं जोह तुम ने हमारी दत्तक पुत्रिओं को आजाद करवाया और दीप्ति ुष वातासुर कोई स्त्री hi मार सकती थी जिसको गन्दी नज़र से उसने देखा हो पर तुम्हारी शक्ति के सामने तोह वो चानन भर भी न टिका जबकि उससे महाराज माया भी डरते थे".

तीनो लड़कियां रानी हेमा के गले मिली और Aryan-Deepti ने उनके प्यार छूकर आशीर्वाद लिया ...... " महार्यं तुम्हे मेरा आशीर्वाद है तुम्हारी सब पत्नियां एक साथ हमेशा खुश रहेंगी वैसे एक- दो तोह यहाँ से ले जा सकते हो जिसमे पतलोक की भी शक्ति हो "...... hi hi hi hi hi

आर्यन भी मुस्करा के ," महारानी जी में जितनी है उन्ह से परेशां हूँ अप्प मेरी धुविद्या मत बढिये ...... ोुछ्ह "...... दीप्ति ने आर्यन की कमर में चुटकी काटी थी .

रानी हेमा हसकर ," मैंने कहा न तुम्हारी सब अर्धांगी तुमको और आपस में प्रेम करेंगी बस अपने कर्तव् की तरफ अग्रसर रहो ".

तीनो राजकुमारी चाय साया माया बड़ी हसरत से आर्यन को देख रही तोह रानी हेमा ने कहा ," तुम तीनो अपना मौका खो चुकी हो बस दोनों को धयानवाद दो की यह गलती से यहाँ आ गए नहीं तोह तीनो आजाद नहीं हो पाती ".

तीनो ने Aryan-Deepti से चमा मांगी वह सराफ की कारन डाइयाँ बानी और कुकरम वातासुर की शक्ति से करने लगी ..... तीनो ने आर्यन को गाला लगा एक बार गाल पे चूम के hi अलग किया , दीप्ति भी हसने लगी ....... रानी हेमा ने हाथ आगे किया तोह जंगल गायब हो गया और सामने रास्ता दिखने लगा .

रानी हेमा ," यह रास्ता तुम दोनों को 'म्हटला लोक' ले जायेगा जहाँ से तुम 'रसातल लोक' या 'पतला लोक' जा सकते हो बस अपनी मोहर साथ रखना अब ज्यादा संभल के जाना ".

तीनो राजकुमारी के साथ रानी हेमा चली गयी और Aryan-Deepti फिर एक बार चूमा छाती में लग गए .......

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राजा माया के राजमहल में जब रानी हेमा पहुंची तोह वह भी अपनी दत्तक पुत्रिओं को देखकर खुश हुए ...... अकेले में जब रानी हेमा ने कटाछ करके कहा," महाराज आपकी डबल माया भी महार्यं और दीप्ति को फसा न सकीय, चल से ज्यादा प्रेम में शक्ति होती है ".

राजा माया भी गहरी सांस लेकर ," वातासुर की शक्ति तोह उनको लेनी hi थी पर आर्यन ने बड़ी चतुराई से वातासुर को भी मरवा दिया दीप्ति से जबकि हम सोच रहे थे वह खुद मरेगा और हमारे जाल में फस जायेगा ".

रानी हेमा हसकर ," में अभी उससे मिली पर जोह चीज मैंने महसूस की उसको बस प्यार करना आता है और चल कपट उसको छु नहीं सकते आपकी मोहमाया तोह धरी hi रह गयी उसके सामने ...... मुझे ख़ुशी है वह मेरा सच्चा उपसक है कोई स्त्री निराश नहीं होगी उसके पास आकर ".

क्यों कहता है पतलोक में भी लोग मतलबी नहीं होते कुछ लोग चाहते थे की दिव्या तलवार यहीं रहे और आर्यन किसी भी नियम को तोड़कर कैद कर लिया जाये ..... पर क्या यह इतना आसान था सब कुछ जानते हुए भी राजा माया अपनी चाल चलना नहीं चुके . पर बाजी उनके हाथ से निकल गयी .

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आर्यन ने दीप्ति को अपनी पीठ पे बिठा लिया और चल दिया अपनी मंजिल की ओरे ......

दीप्ति ," माहि आप न बहोत अच्छे हो बस अपनी फ्लिर्टिंग अब बंद कर दो जब हम सब भेने आप की है सेवा करने के लिए फिर क्यों नयी लड़कियों और औरशन की तरफ अत्त्रक्टेड हो जाते हो ?"

आर्यन मुस्करा कर ," फ़्लर्ट में सिर्फ उससे करता हूँ जोह मेरी अपनी हो फिर तुम बताओ क्या मैंने तुम्हारे साथ कभी फ़्लर्ट किया बस तुमको देख के hi प्यार हो गया जैसे तुम्हारे बिना अधूरा हूँ पर क्या करता बोल नहीं पाया . तुम सुचित्रा मामीजी की छोटी भें थी जोह मुझे बीटा मानती हैं इशलिये तुमसे दुर्र भी चला गया . तुम्हारी सच्चाई जानकार भी डाउट में था की में क्या कर सकता हूँ. पर नादान था में की तुम्हारे रूप का hi नहीं तुम्हारे प्यार का जादू हो चूका था ...... वहां गाओं में रात में आँख खुल गयी सपनो में तुम्हारा उदास चेहरा देखकर जैसे मुझे बुला रही हो कब आओगे और मेरी किस्मत देखो सब रहे तुम्हारी hi तरफ बुला रही थी . अब देखो आज मुझसे खुद किस्मत कोण होगा की मेरी पीठ पे मेरी रूह , मेरे दिल की धड़कन जोह सबसे सूंदर और मनमोहक है जिसको बस प्यार hi प्यार करने का दिल करता है ...... ी लव यू दीप्ति फ्रॉम माय बॉटम ऑफ़ माय हार्ट ".

दीप्ति तोह ख़ुशी से फूली न समां रही थी की आखिर उसके सपनो का राजकुमार उसका हमदम उसका पति माहि कितने प्यार से उसको अपने पीठ पे बिठाये ले जा रहा है काश यह पल यहीं रुक जाए .......

दीप्ति कई औरशन का आर्यन से रिलेशनशिप का पूछना चाहती थी पर वह अपने प्रेम को रुशवा नहीं करना चाहती थी पर आखिरी सवाल उसने कर hi डाला जोह आर्यन भी सुनकर जैसे बिदक hi तो गया ....... " क्या आप मेरी दोनों मम्मी को भी बच्चे देने वाले हो, मीणा दीदी ने बतया था ये hi एक रास्ता है उनका माँ बनने का फिर मेरी मामियों को भी ?"

आर्यन को झटका लगा पर मीणा ने यह क्या रायता पहला रखा है भला कोई अपनी सास को घरबवती करेगा उसकी बीवी को पता चले तोह क्या बीतेगी ...... आर्यन ने एक ठंडी सांस भरी फिर हर स्तब्ध तोलते हुए बोलै आखिर उसके प्रेम की परीक्षा की घडी थी .

आर्यन ," सच्च कहूं तोह दीप्ति ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा है , मीणा ने ऐसा क्यों कहा तुमसे में नहीं जानता पर हम इश्को रोक सकते हैं की ऐसा न हो . तुम्हारी मम्मी मेरी मम्मी हैं भला में क्यों उनके बारे में सोचूंगा रही माँ बनने की बात तोह वह मेडिकल ट्रीटमेंट से बन सकती है में पिक्चर में कहाँ आता हूँ पर हाँ तुमसे ढेर सारे बच्चे जरूर करूँगा इतना में चाहता हूँ ".

दीप्ति भी उसके जवाब से संतुस्ट होते हुए ," पर दीदी ( सुचित्रा ) को तोह आप ने वादा किया है न ?"

आर्यन जिस क्वेश्चन से बचना चाहता था वही सामने आ गया पर त्यार hi था जवाब ," सुचित्रा मामीजी को अपना मन था जब से उनसे मिला , एक विराणित थी उनकी लाइफ में जिसके लिए अपने प्रेम और अधिकार का वास्ता देकर मुझसे उन्होंने अपना प्यार मांग लिया और मुझे गलत नहीं लगा की में अपनी माँ सामान मामीजी का दिल तोड़ दूँ. अगर तुमको बुरा लगा तोह सॉरी बोल देता हूँ पर किसी की ख़ुशी के लिए मुझे कोई सजा भी तुम डौगी तो मंजूर है ".

दीप्ति ने आर्यन का गाल चूम के अपने तने हुए स्तन उसकी पीठ पे रगड़ के कहा ," मेरी दीदी का अधिकार आप पे पहले है और मेरी मम्मी के जीवन में खुशियां आये आपकी वजह से मुझे कोई ऐतराज नहीं बस मेरा और मेरी बहेनो (सौतन) को प्यार की कमी नहीं लगनी चाहिए...... प्यार में कोई सौदा नहीं होता काम या ज्यादा पर माहि तुम्हारा प्रेम hi हम सबकी जीने की वजह है ".

आर्यन थोड़ा सीरियस होकर ," दीप्ति सब अपनी लाइफ खुद चुन सकते हैं कैसे जीना है पर मुझे मेरी माँ (रति) ने बड़ा hi ऐसे किये की मुझे अपनों के लिए जीना है अपनों के लिए सबकुछ नौछावर तक कर देना है बस एहि मेरा सत्य है की मेरी माँ के लिए आर्यन उनके परिवार की एक ढाल है एक सुरक्षा है यानी बॉडीगार्ड ( अंगरक्षक ) बोल सकती हो जिसके साथ उनकी हर खुसी का धयान भी रखना है . अब में इतना आगे आ चूका हूँ की पीछे पलट के नहीं देख सकता इशलिये मैंने शादी करने से पहले hi तुमको सच्च बता दिया जवालामुखी से वापसी के समय की नए रिश्ते की शुरवात झूट से न हो ".

दीप्ति भी मचलते हुए ," आपको बुरा नहीं लग्न चाहिए जैसे आप हो, गलत तोह मैंने सबसे ज्यादा किया ...... जान बोझ के ऐसे आदमी से शादी की जिसके पहले से 5 आलरेडी बीवियां थी पर मेरा अँधा प्यार फिर भी मुझे वह hi चाहिए चाहे जान चली जाये . आज वही मेरा प्यार मेरी मौत को टालने के लिए पतलोक तक आ गया सिर्फ इशलिये की में ज़िंदा रहूं . माहि मैंने जनम 21 साल पहले लिया था पर जीने का अहसास ुशी दिन हुआ जिस दिन तुम मेरे ज़िंदगी में आये. एक हफ्ता मिला मुझे आपको छु कर प्यार करने का इतने काम समय में भी क्या कुछ नहीं दिया आपने . बस लालची hi है यह आपकी पत्नी जोह अपने साथ आपको भी मौत के मोह पे ले आयी और अपनी गीता दीदी को भी कैद करवा दी . हो सके तोह माफ़ कर देना आप सब मुझे ".

दीप्ति का रोना देखकर आर्यन रूककर उसको अपने सामने कर गोदी उठा के चूमता हुआ चुप करवा रहा था कुछ ज्यादा hi सेंटी हो गयी ....... िश एक हफ्ते में बस पतलोक में िंह दोनों प्रेमी ने सबसे ज्यादा टाइम गुजरा था , दोनों एक दुसरे को परख भी रहे थे और आत्मीयता भी बढ़ा रहे थे .

आर्यन ने मजाक करते हुए ," क्या मेरी रानी शैब्या ऐसा करोगी अपने हनीमून पे सोचो पतलोक तोह डेस्टिनेशन hi ख़तम हो जाएगी नेवली मैरिड कपल्स के लिए ....... देखो कितने सूंदर नजर्ये हैं कुछ किसी वीसी दो कुछ किसी वीसी लो असून तोह हम पार्थवी लोक पे भी बहा लेंगे ...... hi hi hi hi hi hi ".........

दीप्ति भी उसकी बात पे हस्ते हुए ," इससे बुरी हनीमून डेस्टिनेशन नहीं हो सकती ".

आर्यन ने दीप्ति के लबों को चूमा ," नहीं दीप्ति माय लव , हनीमून डेस्टिनेशन कोई भी हो बस हस्बैंड वाइफ में प्रेम होना चाहिए तोह नरक भी स्वर्ग hi लगेगा फिर अपने देश में तोह 90 % लोग बस अपने बैडरूम में hi हनीमून का मजा ले पाते हैं गरीबी की वजह से पर प्यार उनका सबसे सच्चा होता है क्योंकि प्यार के लिए दो आत्मा का मिलान मायने रखता है जगह नहीं ".

दीप्ति भी आर्यन का पूरा चेहरा चूम डाली ," आप इतनी अच्छी अच्छी बातें कैसे बना लेते हो , ी लव यू मुझे अपना बनने के लिए ".

आर्यन हसकर ,"मुझे सब प्यार hi करते हैं तोह बस प्यार hi देखता हूँ नहीं तोह नफरत से ज़िंदगी कांटे की तरह लगती है जोह मुझे बुरा hi बना देती है ".

Aryan-Deepti बहोत खुश थे पर दोनों का धयान न था अदृश्य रूप में कई नर और मादा दानव , राक्षस दूर से दोनों को मोह माया के मंतर मार के उकसा रहे थे पर कमल की शील्ड की वजह से बे असर .

2 घंटे बाद वह जिस द्वार पे खड़े थे वहां से तीन लोक को रास्ता जाता था पर पतलोक के हर लोक को जैसे जाना hi था ....... ???

आर्यन ," अब 5तह पड़ाव तो दिव्या तलवार की नजदीक hi होगा ?"

दीप्ति ," 5तह पड़ाव खुद दिव्या तलवार hi है पर क्या में उसकी बिजली की शक्ति (लाइटनिंग पावर ) झेल पाऊँगी ..... ?"

आर्यन ," क्यों नहीं तुम्हारा और तलवार का कनेक्शन है तभी उसका नक्शा तुम्हारी पीठ पे रहा अब दिमाग़ में ".

दोनों को बात करते एक तीसरा सख्स भी मोह छुपाये देख रहा था ..... ????

हार्ट हार्ट हार्ट
 
अपडेट - 34

PART - 7©

अब तक .......

2 घंटे बाद वह जिस द्वार पे खड़े थे वहां से तीन लोक को रास्ता जाता था पर पतलोक के हर लोक को जैसे जाना hi था ....... ???

आर्यन ," अब 5तह पड़ाव तो दिव्या तलवार की नजदीक hi होगा ?"

दीप्ति ," 5तह पड़ाव खुद दिव्या तलवार hi है पर क्या में उसकी बिजली की शक्ति (लाइटनिंग पावर) झेल पाऊँगी ..... ?"

आर्यन ," क्यों नहीं तुम्हारा और तलवार का गहरा कनेक्शन है तभी उसका नक्शा तुम्हारी पीठ पे रहा अब दिमाग़ में ".

दोनों को बात करते एक तीसरा सख्स भी मोह छुपाये देख रहा था ..... ????

अब आगे .........

ुष नकाबपोश (जोह नागदंश था तीसरा सख्स) ने जब अपना चेहरे से पर्दा हटा के दिखाया तोह Aryan-Deepti भी उसकी तरफ देखते हुए की यह क्यों है ?

नागदंश बोलै ," में नागदंश हूँ और तुम्हारे अगले पड़ाव में अड़चन न आये िश लिए यहाँ आया हूँ ".

Aryan-Deepti ुष अर्ध सर्प अर्ध मानव का सरीर लिए नागदंश को hi देख रहे थे जोह पल भर पहले मानव रूप hi लिए था और अब अपने असली रूप में आ गया . उसके चार पहन और विशाल शरीर उसके बलिष्ट होने का साबुत था .

आर्यन ने बगैर डरे हाथ जोड़कर नरम भाव से कहा ," आप का यह विशाल रूप देखकर हम अभिभूत हुए नागदंश जी , अगर आप दिव्या तलवार को खोजने में हमारी मदद करेंगे तोह हम दोनों आपके आभारी रहेंगे जिससे हमको आसानी hi होगी ".

दीप्ति ने भी जब हाथ जोड़कर उसका अभिवादन किया तोह नागदंश भी हैरान था यह मुझको देखकर डरने के बाजए इतना आदर दे रहे जबकि दोनों मिल कर पतलोक की एक प्रहरी दानव धरतीपकड़ और दुसरे शक्तिशाली दानव वातासुर को मार चुके हैं .

नागदंश थोड़ा रॉब से ," तुम दोनों जितने भोले बन रहे हो उतने लगते तोह नहीं और तुम्हारी बातों में में आने वाले भी नहीं , महाराज वासुकि का आदेश न होता तोह तुम दोनों को अभी अपने ज़हर से मार के निगल जाता ".

दीप्ति जोह उसकी बात सुनकर गुस्से में आयी तोह आर्यन ने उसका हाथ दबा के उसको शांत रहने को इशारा किया.

आर्यन बड़े धीरज से बोलै ," नागराज , हम बस ुष दिव्या तलवार को खोजने आये हैं अगर आप हमको दिशा बता देंगे तोह हम ुष और बढ़ जायेंगे".

नागदंश मैं में अभी इनके मजे लेता हूँ ये मुझसे डर रहे हैं ..... " ठीक है मेरे पीछे आयो कुछ चुना मत और न कुछ पूछना अभी पहले दो महँ लोक के बाद hi तीसरे 'नागलोक' तक हमको जाना होगा "...... अपना अर्ध सर्प- मनुष्य रूप धार के आगे चल दिया ...... Aryan-Deepti ने मुंडी हिलाई और उसके पीछे चल दिए.

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नागदंश

दीप्ति ने आर्यन के कान में बोलै ," यह हमको दिव्या तलवार तक ले जायेगा ऐसा लगता तोह नहीं पर हमको सतर्क रहना होगा . कुछ भी हो जाये, अगर में मारी भी गयी तब भी आप गुस्सा मत होना नहीं तोह आप सबकुछ खो देंगे , माहि में रहूं या न रहूं पर आपको वापस गीता दीदी के पास जाना है जोह ुष दिव्या तलवार को हासिल कर मुक्त हो जाएँगी कैद से ".

आर्यन भी फुसफुसा के उसका हाथ थाम के चलते हुए बोलै," मेरी जान से प्यारी दीप्ति अगर अब तुम साथ नहीं तोह चंदा रानी (गीता) भी नहीं चाहिए मुझे क्योंकि तुमको खो कर में उससे नज़र नहीं मिला पाउँगा जोह सिर्फ हमारी वजह से कैद हुयी और न hi अपनी माँ (रति) के सामने सर उठा पाउँगा , अगर मौत यहीं लिखी है तोह साथ hi मरेंगे या सब मिलकर जियेंगे ".

दीप्ति गदगद होती आर्यन का हाथ जोह थाम राखी थी चलते हुए चूमि ," आज आप ने बेमोल hi मुझे खरीद लिया, में कभी कभी िश हीं भावना से ग्रसित थी मैंने अपना प्यार आप पे थोपा है. गीता दीदी और अपनी उन्ह चरों बहेनो (5 आर्यन वीफेस) की तरह न भी सही उनके जैसा बनकर रहूंगी आप सब के साथ ".

आर्यन हसकर ," अपने को कमतर क्यों अंक रही हो जबकि सरीर के हर आंग का अपना महत्व है बस जिसको हम ज्यादा उपयोग करें वह ज्यादा प्यारा लगता है पर वाश्त्विकता कुछ अलग है. दीप्ति तुम अब हम सबकी जान और हमारे खानदान की पर्तिस्था हो फिर क्यों अपने को परायी करती हो. हर इंसान ने चले जाना अपना जीवन चाकर िश संसार में पूरा करके बस ले जाते हैं साथ तोह प्यार के यादें और अपने करम जोह कभी नष्ट नहीं होते , प्यार करना और निभाना भी एक करम है बस समझने का फेर है ".

दीप्ति ने अपनी जिज्ञासा खोल hi दी ," दिव्या तलवार या में ?"

आर्यन ने हसकर कहा ," दिव्या तलवार िश समय सबसे जरूरी है फिर उसकी वजह से मेरी जाने जिगर किसी ने कैद कर राखी है , मेरी रूह की गिनती लिखते हुए ".

दीप्ति भी बात का मतलब समझकर बस मुस्करा दी की बहोत खतरनाक आशिक़क़ हैं तभी हर कोई इनका मुरीद है.

( आर्यन ने गीता को अपनी जाने जिगर और दीप्ति को अपनी रूह कहा )

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नागदंश अपने साथ लिए Aryan-Deepti को 'म्हटला लोक ' ले गया और उधर िंह दोनों से पहले एक साक्ष पहुंच गया था 'नागलोक' जिसको 'पतला लोक' भी कहते हैं, और उसको देखकर hi सब विशाल सर्पो ने जिनके फैन 2 से 1000 तक थे अपनी पूछ में लपेट के बारी बारी से प्यार करना शुरू कर दिया ...... हज़रों साल से िश बेटी को पास से देखा hi नहीं बस कितनी योनि बदल बदल के अब मनुष्य योनि में पैदा हुयी पर पहले यहाँ न आ सकीय इतनी खतरनाक नाग्शक्ति का वार हुआ था .

कोई और मनुष्य होता तोह अभी तुरंत मारा जाता पर प्रभा को सूंदर युवती के रूप में देखकर सब दिलसे बहोत खुश हुए . आर्यन के बड़े गुरूजी ने अणि (रानी विजयलमक्शी) के कहने पे प्रभा को डायरेक्ट अपनी शक्ति से पतलोक भेज दिया था ताकि विशाखा कोई नुक्सान Aryan-Deepti को न पहुंचा सके दिव्या तलवार के समीप पहुंच ने पहले .

प्रभा भी रूट हुए बिफर hi गयी अपने बड़ो के सामने ," बस इतना hi प्यार है आप सबका की मुझे इतनी बड़ी सजा दी विशाखा दीदी ने और आप सब मूक दर्शक बने देखते रहे , मैंने hi नहीं विषदंश (विशाखा का प्रेमी नर सर्प) ने भी मुझसे प्यार किया पर मेरी अपनी hi सगी बड़ी भें विशाखा को लगता है मैंने उसके प्रेमी को चीन था ...... आप सब गवाह हो क्या मैंने उसका प्रेमी चीन , नहीं उसने खुद आप सबके सामने उसको छोड़ दिया और मुझे अपनाया उसकी निरकुलता के कारन , क्या हुआ आपके फैसले का जिसको उसने न मान कर मुझे hi दण्डित किया और विषदंश को मार के निगल गयी . एहि साजा है क्या प्रेम करने की पतलोक में ..... मुझे नाग्शक्ति से मार के ुष भें ने िश पतलोक से धरतीलोक पे फ़ेंक दिया ताकि कभी वापस न सकूँ मंतर भी तोह ऐसा hi पढ़ा था ुष विशाखा ने अपनी पायी हुयी काली सिद्धि के कारन, पर िश बार 84 लक्ष से ज्यादा योनि में जनम लेने के बाद िश मनुष्य योनि में आज में अपने बड़े भाई महार्यं की वजह से यहाँ कड़ी हुयी हूँ रोक सको तोह रोक लेना उसको, मेरे लिए िंह सात लोक को भी तभा करके जायेगा ..... में जीवट रहूंगी यह बताने के लिए कैसे 7 लोक नष्ट हो गए पर आप में से कोई देखने के लिए ज़िंदा न होगा अगर उसे दिव्या तलवार को ले जाने से रोका , वही दीप्ति भाभी के जीवन बचने की कुंजी है जबकि अब आप भी जानते हो वह hi दिव्या तलवार को धारण कर सकता है जोह उसने हज़रों साल पहले त्याग दी थी".

सब शर्म सार hi थे अपनी बेटी की कुरदन पुकार के साथ चेतावनी सुनकर पर कुछ तोह उनको करना होगा या फिर कुछ नहीं क्योंकि उनको आर्यन पे विश्वास हो चला था की िश विनाश को वही रोक सकता है . प्रभा तोह आज जैसे विनाश की चेतावनी लेकर आयी थी जबकि सब उसको हसमुख , चुबलि और प्यारी बेटी hi समझते थे .

(प्रभा 2 पहन वाली नागिन थी जोह सबसे काम उम्र यानी 1500 साल की आयु की थी जब मारी गयी .)

प्रभा ने गरज से hi बात आगे बधाई ," आज में यहाँ इन्साफ मांगने नहीं करने आयी हूँ , विशाखा को दंड देने और अपने बड़े भाई आर्यन का साथ देने बस ुष दिन की तरह आज भी आप सबको मूक दर्शक hi बने रहना होगा . आप सबकी एक hi पुत्री जीवट रहेगी या वह या में. पिछली बार िश पतलोक में विशाखा ने मेरा प्रेमी को मार के मुझे शक्तिहीन करके एक निम्न आत्मा की तरह नागलोक से बेदखल किया था...... पर आज में उसको अपने भाई, आर्यन, जिसको में दिलो जान से प्यार करती हूँ एक भाई के साथ प्रेमी की तरह भी , विशाखा को ऐसे नहीं मारने दूंगी . आर्यन को छूने से पहले मुझे मारना होगा अगर कोई बिच में आया तोह मुझे शेषनाग भगवन की कसम में आत्मदाह कर लुंगी अगर आर्यन को कुछ हुआ ".

(यह थी अणि की सबसे बड़ी चाल प्रभा को पतलोक भेजने पे उसको देखकर स्नेहभूति के कारन सब सक्तिसाली सर्प विशाखा की मदद नहीं करेंगे दूसरा प्रभा को उसकी पिछले जनम की शक्ति या नाग रूप मिल गया अपने बड़ो से वरदान में तोह विशाखा पे भरी पड़ेगी आखिर झक्मी और बदला लेने वाली नागिन जोह है जोह खतरनाक होती है और अपना बदला लेकर रहती है )

महाराज वासुकि ," बेटी तुम मनुष्य योनि में कभी विशाखा को हरा नहीं पाओगी, रही महार्यं की बात तोह उसकी नियति वह खुद hi चुनेगा , अगर तुम्हारा प्रेम सच्चा है तोह तुम अपनी खोयी हुयी शक्ति फिर पा सकोगी पर हमसे ज्यादा दुखी फिर कोई न होगा जैसे ुष दिन हुए थे एक बेटी को खोने के कारन".

( यहाँ सब महासर्प राजा वासुकि के खानदान से थे जोह यहाँ के महाराजा थे , विशाखा और प्रभा भी उनकी एक रानी की दो बेटियां थी )

महाराज वासुकि ने सब सर्पों और दानवों को मानसिक आदेश भेज दिया की Aryan-Deepti से कोई नहीं उलझे और नागदंश तुम भी वापस आ जायो उनको दोनों लोक के बाद यहीं नागलोक तक लाना .

*पतला लोक (7) = को अब नागलोक hi लिखूंगा ......

प्रभा फिर अपने जनम से लेकर अब तक की कहानी , आर्यन और उसकी तीन जुड़वाँ बहेनो को जनम से लेकर अब तक की कहानी सुनने लगी ...... सबने गौर किया की प्रभा खुश है मनुष्य योनि में जनम लेकर . उसकी नाग रानी माँ से लेकर बाकी सौतेली बहेनो के साथ सबकी hi सहनभूति उसके साथ थी पर विशाखा को क्यों रोके जोह जिद्दी होकर अपनी गुफा में भी किसी को भटकने भी नहीं देती थी जबसे दिव्या तलवार के साथ थी ...... जैसे कोई अपना hi उसको चीन लेगा ..... ?

राजा वासुकि ने पतलोक के 7 लोकों के स्वामी, राजा बलि महाराज से पुछा की क्या करें उनकी दोनों बेटी की ज़िंदगी डाव पे लगी है अगर महार्यं मारा गया तोह दीप्ति , प्रभा को भी विशाखा मार hi देगी ...... उधर रति देवी , महार्यं की माँ, ने अपना वरदान मांग लिया भगवन शिव संबु से तोह सब कुछ पतलोक का तभा हो जायेगा जिसको देवता भी आज तक नहीं कर पाए. महार्यं और ुष दिव्या तलवार का तांडव hi पूरा विश्व ख़तम कर देगा महाराज".

राजा बलि महाराज ने बड़े सैयाम से कहा ," धरम और नाये अपना राष्ट ढूंढ लेंगे पर अपनी कमजोर पुत्री (प्रभा) को मुक़ाबले के लिए उसकी नाग्शक्ति जरूर दे देना..... कभी कभी पुनर जनम hi सही इन्साफ करता है विधाता की क्रिया का फिर यहाँ तोह 6 हैं आर्यन के अंदर और एक एक, दीप्ति प्रभा में जोह सब पुनर जनम hi अधूरे करम पूरा करने के लिए hi आये हैं ..... उन्ह 8 आत्मा का पुनर प्रयाश है फिर से जनम लेकर यहाँ आना . हम सब मिलकर िश होनी को भला कैसे रोक सकेंगे जो लीला स्वयं प्रभु के आशीर्वाद से हो रही है ".

राजा वासुकि ने नागों के भगवन सेह्नाङ्ग का आह्वान किया तोह उन्होंने मुस्करा के कहा," समय सब ठीक करेगा बस अपनी दोनों पुत्री को जोड़ने की कोशिश करना जोह भी हारे".

अब राजा वासुकि भी कुछ कुछ समझ गए थे की आगे क्या करना है.....

पर आर्यन की वाट लगने वाली थी ..... आखिर रानी हेमा का भी ुष्पर आशीर्वाद था..... ????

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'म्हटला लोक' (5) के द्वार पे स्वर्ण मोहर दिखा कर जब नागदंश के साथ आगे बढे तोह उसने बतया की यह महँ नागस का लोक है, सब अपने परिवार बच्चों के साथ हसी खुशाल रहते हैं . कस्यप भगवन जोह भगवन भ्रमजी की पुतुर थे उनकी तीसरी बीवी कद्रू से 1000 से ज्यादा संतान थी जिसमे क्रोधवशा, कुहका, तक्षक, कालिया एंड सुषेणा सबसे शक्तिशाली नागस हैं .

आर्यन ने भी दीप्ति को बतया यहाँ के लोक की जवान नागिन धरतीलोक पे जाकर हस्तपुस्त नवयुवकों को अपने सम्मोहन जाल में फसा के यहाँ लाकर उनका भोग और शिकार भी करती हैं . दीप्ति भी मुस्करा के चिंता न करों मेरे होते हुए आप सुरकषित हो .

आर्यन (मैं में) सुरकषित का पता नहीं लाचार जरूर हूँ कितनी सूंदर सूंदर नशीली नागिन स्त्री रूप में मेरी लार टपकवा रही हैं ऊपर से पूरा बदन दिखा के ललचाती हैं , मीणा होती तोह खूब सेटिंग करवाती मेरी .

(मीणा को इशलिये सब बोलते थे की आर्यन के लुंड 'तोपची' का रिमोट उसके हाथ में है फिर वह हमेशा आर्यन के लिए नयी नयी छूट ढूंढ लेती थी ...... पर आर्यन कहाँ जानता था धरतीलोक पे अपने घर की नहीं बहार की चूतिए भी उसके लुंड के लिए पानी बहा रही हैं इंतज़ार में .)

यहाँ के दो विशाल नगर को पार करके अब तीनो 'रसातल लोक'(6) की तरफ बढ़ गए .

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िश लोक के सब दानवों एंड दैत्यों को राजा बलि महाराज और राजा वासुकि का सन्देश मिल गया था की Aryan-Deepti से दूर रहे उनको बगैर विहीन लोक से गुजरने दो .

यह "रसातल लोक" कस्यप जी की सबसे बड़ी पत्नी दिति की संतान 'दैत्यों' यानी दानव और राक्षस का लोक था जिनका पक्का बैर देवताओं से था जोह कस्यप जी की दूसरी पत्नी अदिति के पुत्र थे . देवता - असुरों की लड़ाई कालांतर से चली आ रही है . समुन्दर मंथन में बड़े होने के कारन राक्षसों को सारे अनमोल रतन प्राप्त हुए जिनकी रक्षा नाग करते हैं िश पतलोक में .

किसी देवता को भी यहाँ आने की मनाही है पर Aryan-Deepti बड़े मजे से घुमते दिख रहे थे पर दोनों सजग थे क्योंकि जहाँ इतने शक्तिशाली लोग हों वहां कुछ भी हो सकता है जबकि यह ठहरे दोनों मनुष्य उनके प्रिये भोजन जिनको चाहकर भी नहीं खा सकते . कई विशाल सूंदर नगर थे िश लोक में और सब राक्षस अपने परिवार के साथ यहाँ हसी खुसी रहते थे .

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थोड़ा दिव्या तलवार को भी देख लेते हैं ......



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दिव्या तलवार

दिव्या तलवार ने पतलोक में से 'नागलोक' को अलवर के विशाल दिव्या ख़ज़ाने के साथ सबसे उत्तम जगह चुना था छुपने के लिए ...... फिर विशाखा जैसी जेहेरली और शक्तिशाली नागिन उसके मोहजाल में आ गयी एक झलक पाकर hi ....... दिव्या तलवार को अब देवता , राक्षस या मानव के साथ साथ कोई नाग भी छु नहीं सकते थे . दिव्या तलवार के मायाजाल में सब नागलोक वासी फस गए थे . अपार खजाने , दिव्या तलवार के चर्चे पतलोक से धरतीलोक से ऊपर स्वर्गलोक तक थे पर उसको पाना जैसे असंभव था इतनी ज्यादा दिव्या शक्ति जोह िश भरमांड की नहीं है कोई झेल नहीं सकता था फिर धारण तोह कोण करे .

2500 साल पहले , महार्यं ( चौदर्य माधव सिंह के पूर्वज ) पिछले जनम में गरुड़ श्रीलतासँ (हेलमेट) की वजह से बस छु hi पाया था और 800 साल पहले, दीप्ति का पिछले जनम का प्रेमी राजपूत राजकुमार बस दिव्या तलवार के दर्शन hi कर पाया था जिसको विशाखा मार के निगल गयी .

दिव्या तलवार की शक्ति से नागलोक के वासियों की शक्ति भी बढ़ गयी थी और ाश्वैरये भी . मगर एक बात सब भूल गए की दिव्या तलवार का असली मालिक भी कभी ढूंढ़ता हुआ यहाँ नहीं आएगा क्या ?

वही हुआ जोह किसी ने सोचा भी न था , इतने पड़ाव , इतनी माया, एंटी बढ़ें पार करके भी कोई लेने आ जायेगा जबकि दिव्या तलवार ने सब रचा hi अपने मालिक के लिए था की वह यहाँ आये मुझे लेने.

दीप्ति के जनम के समय जब आर्यन में भी 6 आत्मा समां गयी वहीँ दीप्ति में दिव्या तलवार का अंश समां गया एक कुंजी के रूप में जिसकी शक्ति इतनी ज्यादा थी की रानी मिरदुला यदि पहले गर्भ गिरा देती तोह 21 साल निर्जीव न रहती पर हुआ वही जोह होना था जोह भविष्वाणी हुयी थी . दीप्ति का जनम दिव्या तलवार का मार्ग लिए और आर्यन का जनम हुआ ुष दिव्या तलवार के मालिक के रूप में धारण करने के लिए .

इसीलिए सब पतलोक के महाबली समझ गए दिव्या तलवार के मालिक और उसकी शक्तिशाली तलवार से दुर्र रहने में hi सबका कल्याण छुपा है . मगर अब पतलोक के लालचिओन को भी आखिरी वार्निंग मिल गयी थी दुर्र रहो Aryan-Deepti से ....... खासकर राजा माया को ......

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दोनों को बाकी दोनों लोक में घूमा कर जब नागदंश भी झाला गया की अब कुछ नहीं हो सकता तोह उनको 7तह लोक ...... ""नाग लोक "" के द्वार पे ले गया .....

सबसे अँधेरे जैसा लोक था जहाँ विशाल कई फैन वाले नाग अपने राजमहल जैसे बिल में रहते थे पर नागदंश खुश था अब Aryan-Deepti मरेंगे विशाखा के हाथ .......

( सब नागो को लगता की विशाखा में दिव्या तलवार की शक्तिअन आ गयी हैं)

नागदंश उन्दोनो से बोलै," अब तुम नागलोक में जाओ मुझे कुछ जरूरी काम है, आगे का रास्ता तुमको खुद खोजना होगा यहाँ से ".

Aryan-Deepti ने अपनी स्वर्ण मोहर द्वार सैनिक को दी और द्वार पे बने महँ शेषनाग भगवन की बानी मूर्ति को सर झुका प्रणाम करके पहला कदम नागलोक में रखा तोह पूरा नागलोक कांपने लगा जैसे भूकंप आ गया हो . बाकी के 6 लोकों में भी कम्पन महसूस हुए तोह डर सा हावी होने लगा क्या अब यह सब लोक भी सुरकिषत नहीं ?

आर्यन से दीप्ति ने लिपट के कहा ,"यह क्या हो रहा है?"...... आर्यन ने भी कुछ सोचकर अपनी लाल होती आँखों को बांध किया और जमीन पे बेथ के नागलोक की धरती पे अपना मस्तक टच किया .

सब कुछ शांत हो गया क्योंकि उसने शेषनाग भगवन का नाम ले माथा जमीन से लगया था पर द्वार पे सब नाग सैनिकों की पहात के हाथ में आ गयी यह किस मुशीबत (दिव्या तलवार) को अपनी ाँ समझने की गलती कर बैठे.

दिव्या तलवार अब उनको अपना काल नजर आ रही थी और उसका सो कॉल्ड मालिक , महार्यं, उसका क्रियावाहन करने वाला मगर बड़ों ने शान्ति से काम लेना hi ठीक समझा .

दीप्ति भी आर्यन के सामने बैठकर ," हमको तुरंत वहां जाना होगा अगर थंडर ( बिजली की शक्ति ) वहां गिरी तोह सबकुछ तभा हो जायेगा , जल्दी चलो माहि वक़त काम है ".

वहीँ उनके चरों तरफ नाग सैनिकों की संख्या बढ़ती जा रही थी और आर्यन ने खड़े होकर दीप्ति को अपनी पीठ पे बिठा के कहा ," तुम बस दिशा दिखायो में तेजी से बढ़ता हूँ बस कसके पकड़ना ".

पररहि से लेकर अब बाकी नागों ने उनको घेर के मारना चाहा आदेश के विरुद्ध भी पर आर्यन ने दीप्ति की दिखाई दिशा की तरफ 700 मीटर की जमीन पे बैठकर पूरी ताकत से लम्बी छलांग मारी फिर तोह जैसे एक के बाद एक छलांग मारता तेजी से दौड़ने लगा दीप्ति की बताई हुयी दिशा में ...... सारे नाग उनके पीछे भागे तोह नागदंश ने उनको रोक दिया की यह दोनों खुद अपनी मौत को गले लगाने गए हैं.

कुछ डिअर बाद जब एक बड़े से गोलाकार घड़े के पास पहुंचे तोह दीप्ति ने कहा ," बस यहाँ से निच्चे हमको एक गुफा जैसी ढूंढ़नी है ".

आर्यन ुष बड़े से गधे में निच्चे कूद गया ....... करीब 2 कम निच्चे एक समतल बड़ा सा लम्बा कॉरिडोर था जिसकी ऊंचाई भी बहोत ज्यादा थी मनो 10 पृथ्वीलोक के सबसे बड़े इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स को मिला दिया हो पर सुनसान सी यह जगह थी जहाँ बड़े बड़े सर्पों का आवास था...... आगे दीप्ति की बताई जगह पे आर्यन तेजी से दौड़ के रुका तोह द्वार पे सामने 10 सर्प योद्धा खड़े थे .

दीप्ति ," माहि , हम पहुंच गए िश गुफा के अंदर है दिव्या तलवार पर इनका क्या करना है ?"

आर्यन बोलै ," टाइम नहीं है , तुम बस ुष बिजली की शक्ति को झेल लेना फिर मुझे पकड़ लेना में झेल लूंगा ".

आर्यन ने उन्ह 10 नाग सैनिक पे मोह खोल के 100 से ज्यादा प्रेत छोड़ दिए उनके ऊपर ," इनकी पूँछ पे काट ते रहो बस मारना मत , मेरे अंदर जाते hi मेरे सरीर में समां जाना ".

( ** आर्यन प्रेतों को अपने सरीर में भर के लाया था जब कहीं किसी को पार करना हो पर वह िंह में hi उलझा रहे . वैसे भी पतलोक में प्रेतों की शक्ति 10 गुनी हो जाती है )

दीप्ति तोह इतने सारे प्रेतों को आर्यन के मोह से निकलते देखि तोह डर hi गयी ," यह कहाँ से आपके अंदर रहते हैं कितने डरवाने हैं".

आर्यन सीरियसली बोलै ," अगली बार दुसरे छेद से निकलूंगा दरोगी नहीं hi hi hi hi ..... अरे यार लेट हो रहे हैं इनको बिजी रखेंगे और बाकी सब नागों को भी जोह यहाँ आये तोह ".

दीप्ति ने उसके कान पे काटा ," पहले अंदर चलो कोई शील्ड सी लगी है िश गुफा के द्वार पे और प्रेतों को अब कभी अंदर नहीं रखना ".

( अभी दीप्ति को कहाँ पता था आर्यन के अंदर खुद 6 लोग रहते हैं , तब क्या होगा किसको प्यार करेगी ?)

10×5 म , के चोदे द्वार जैसे मुहाने से लग रहा था की कितनी विशाल गुफा होगी और इसकी सवामणी भी ...... आर्यन ने आँख बांध कर मंतर पढ़ के सारू की लोटस शील्ड दोनों के ऊपर कर आदर्श (इनविजिबल) होकर अंदर एंटर कर गया और विशाखा की शील्ड टूट गयी पर अब उसको भी डर पहली बार लगा की आज क्यों दिव्या तलवार उसकी नहीं सुनती और कैसे कोई गुफा के अंदर मेरी शील्ड तोड़कर आ गए .

"" क्यों है जिसको अपने प्राण भी प्यारे नहीं , मुझसे पूछे बगैर अंदर आने की चेस्टा करके तुम ने मृत्यु अपने माथे पे लिख ली है ""

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विशाखा

आर्यन ने अपनी कमल की शील्ड से दोनों को गायब कर लिया था और जोह दोनों ने सामने देखा वह अति डरवाना था , एक 3 पहन वाली करीब 80 फट से ज्यादा लम्बी और धड़ करीब 9फट से मोटा होगा , ऊपर तीन विशाल पहन के साथ ुनःपर चमकती मनइयन ( 3 गेम्स) उसकी विशालता और खूंखारता का भकान कर रही थी . अगले hi पल उसके पहन 3 सूंदर कमर के ऊपर नंगी स्त्री के धड़ में बदल गए फिर थोड़ी डिअर में नागिन के सर में .

दीप्ति ने आर्यन के कान में फुसफसा के कहा ," हमको पहले दिव्या तलवार तक पहुंचना है इश्को बाद में देखते हैं , यह विशाखा सच्च में इतनी बड़ी और दरवानी है ऊपर से नंगी आप अपनी आँख बंद रखना ".

विशाखा ने अपना मोह खोल चरों ों विष की फुंकार पहला के बोली," मानव गंध है पर कोनसी शक्ति से अदृश्य हो, तुम मुझसे ज्यादा डिअर चुप नहीं सकते और न बच सकते हो , भूल करदी यहाँ आकर ...... थोड़ी डिअर खेल लो पर बचोगे नहीं "....... है है है है है है ...... "बहोत दिन बाद सवादिस्ट भोजन करुँगी "....

विशाल गुफा में अंदर आकर Aryan-Deepti ने देखा तोह बस हर तरफ सोना hi सोना था , हीरे, पैन, रूबी , जवराहट , बड़ी बड़ी सोने की मूर्तियां भी थी 4-5 क्विंटल से लेकर 1 टन से ज्यादा वजह की होगी ...... कुछ राजा महाराजा महारानी की भी सोने की बड़ी बड़ी मूर्ति थी और भगवन की भी ......

दीप्ति ," आप इतनी डिअर से चुप हो जबकि हमको यहीं आना था लगता है आपको में अच्छी नहीं लगती जोह ुष नंगी नागिन के बारे में सोच रहे हो "...... बात उसकी सही थी 6 चूचे बड़े बड़े अभी चूस डाले अगर आर्यन का बस चले तो सारे मस्त थे जैसे दूध भरा हो .....

आर्यन भी आगे चलते हुए पलट के दीप्ति को देखा तोह कोई तंत्र मंतर या चल कपट का प्रभाव तोह नहीं था ुष पर ...... आर्यन ने एक घेरि सांस ली ," यहाँ तोह वायु भी न के सामान है पर इतनी अँधेरी विशाल गुफा पूरी रौशनी से चकचोँद है और खजाना ख़तम होने के नाम नहीं ले रहा है सुकर मनो मम्मी (सारू) की शील्ड की वजह से हम सुरक्षित हैं पर यह विशाखा पूरे िश गुफा नुमा महल में घूम घूम के िश खजाने को इधर उधर हिला के कान फोड़ डालेगी "...... दोनों उससे दुर्र रहकर आगे बढ़ रहे थे ......

इतना बड़ा दिव्या खज़ाना देख कर अब समझ में आया की अलवर के राजमहल में वह दोनों तेहखने के हॉल भी छोटे hi पड़ेंगे इसको सामने में. ढेर हे ढेर थे तिलये जैसे सोने और जवराहट के .

दोनों जिसको गुफा समझ के घुसे थे वह किसी राजमहल से काम नहीं था जमीन के अंदर फिर चरों और फ्लूडलइट्स से ज्यादा रोशन प्रकाश जोह बाह्यमूल रत्नो से आ रहा था और ऐसा लग रहा था जैसे िश गुफा को तरशा गया हो , दीप्ति को अपना अलवर का राजमहल छोटा लग रहा था िश के आगे ..... निच्चे बस खजाना का hi ढेर पहला था जैसे विशाल पर्वतों का ढेर और घाटी हो बिच बिच में बने रस्ते थे जोह यहाँ की मालकिन की विशालता का गुणगान कर रहे थे और िश गुफा की छठ भी 300फट से ज्यादा ऊपर थी , सब सिथर अवं शांत सा था पर जैसे जैसे बगैर आवाज किये आर्यन की पीठ पे लड़ी दीप्ति आगे बढ़ते गए ुष उज्वलित safed-neeli प्रकाश की तरफ जोह उनके सीधे हाथ पे था , बस िश शांत माहौल में एक बिस्फोट की hi जरुरत थी और पकडे जाएँ.

अपने पास से गुजरती ुष खजाने को ऊपर से निच्चे किसी अनाज के ढेर की तरह खंगालती , फुंकरति विशाखा की दम को एक बार दीप्ति ने छु दिया (लोटस शील्ड से हाथ निकल के) जाहत से पलट के विष (स्नेक पाइजन) की बरसा हुयी विशाखा के तीनो मोह से एक साथ ...... साँपों की पूँछ बहोत सेंसिटिव होती है .

आर्यन उसके वार को बचता हुआ खजाने के अंदर घुसकर एक तरफ पिलर के पीछे हो गया ...... लोटस शील्ड पे विष पड़ता तोह आकर्ति जरूर दिखती चाहिए टूटे न .

विशाखा ," है है है है है , तोह तुम मादा हो जोह मेरी तलवार के लिए यहाँ आयी हो..... मतलब मुझसे सब कुछ झूट बोलै जा रहा था की कोई महार्यं नाम का आदमी आ रहा है तोह अपने पति को छुपा दी दीप्ति !!!!!! यही नाम है न तेरा ..... सामने आ जा स्त्री तुझे नहीं मरूंगी अगर तू निर्दोष है तोह गुलाम बना के रखेंगी पर मेरी तलवार और िश खोजने पे निगाह मत डालना ...... मैंने इसको अपने आप से भी ज्यादा प्यार दिया है ".

(विशाखा की आवाज भुरभुरा के आ रही थी जैसे किसी ने कोई रूई का फोया उसके मोह में थुश दिया हो दांत उखड़वाने के बाद , ऐसी ांसपसट आवाज )

आर्यन ने हाथ की ऊँगली से बाधिर वाली (म्यूट & डम्ब) सिग्न लैंग्वेज में दीप्ति को इशारा किया ," हमको बस तलवार पे फोकस करना है तुम बस शील्ड के अंदर रहो , तलवार से हमको 5तह पड़ाव भी क्रॉस करना है ".

दीप्ति भी आर्यन की चतुराई देखकर समझ गयी "मूरा पिया" बहोत ज्यादा बुद्धिमान है ........

( अजमेर और जयपुर में डिसेबल्ड के लिए स्पीच थेरेपी , वोकल थेरेपी , डिसेबिलिटी थेरेपी वाले कई इंस्टीटूट्स राजकुमारी दीप्ति सिंह के hi अंडर फ्री ऑफ़ कॉस्ट या मिनिमम फीस पे चलते थे मूक बधिरों के लिए जिसकी वह खुद हेड थी )

दीप्ति ने भी आर्यन की गर्दन से दोनों हाथ निकाल के आगे करके ऊँगली से इशारा किया," अब वही करते हैं"...... और उसका गाल चूम ली ......

हर सोच को तोड़ डाला सब बंधन को समझते हुए भी टूट के प्यार करता हमेशा बस माहि नजर आता है उसको ........ कोई कैसे इतना समझ सकता है मुझको जिसको मिले एक हफ्ता भी नहीं हुआ पर हर गुण का आपस में मिलान उसको आर्यन की दासी बनने के लिए प्रेरित करता पर वह हमेशा उसको अपने दिल की मलिका का दर्जा देता . सच्चे प्रेमी hi तोह थे दोनों पर साथी अभी हुए हैं.

एक और खजाने का बड़ा से ढेर क्रॉस करके सामने देख तोह एक बड़ी ऊजाषवी तलवार पूरी उज्वल रौशनी सी चमकती हुयी करीब 2फट जमीन से ऊपर इस्थिर थी और तभी विशाखा दूसरी साइड तलवार के आकर गरजी ," छुपकर भी मेरी तलवार को छु नहीं पयोगे , ऐसी मौत दूंगी अपने जनम पे तरशोगी अपने पति के साथ ".

नीली सफ़ेद रौशनी से नहीं दिव्या तलवार का वर्णन सब्दो में तोह दोनों नहीं कर पा रहे थे पर आर्यन को लगा उसने पहले भी पकड़ी है और एक फोटो सा दिमाग़ में आकर विलुप्त हो गया ..... कहाँ देखा है इसे , अरे हाँ दीप्ति की पीठ पे नक़्शे में देखा था .....

दीप्ति मैं में इसी के सपने माहि के धारण किये हुए न जाने कितनी बार देखे हैं, अद्वितीय हो तुम ......

दीप्ति ने ुष दिव्या तलवार को देखकर आर्यन की पीठ से उतर के बोलै

" सहायक सेठला जुंए हालसा ट्रूप !!!!! "

विचिरित भासा में सलोक सा पढ़ती दीप्ति को देख विशाखा को भी समझ में नहीं आया पर आर्यन को लगा उसने यह भासा पहले कहीं सुनी है सायद दिव्या तलवार की खोज करते नक़्शे में देखकर .

दीप्ति घुटने के बल बेथ अपना सर झुका के हाथ जोड़कर फिर से वही स्तब्ध धोराइ जिसका दिव्या तलवार पे भी असर हुआ , पांचवे पड़ाव पे अब दो निस्चल प्रेमी पहुंच hi तोह गए ...... सारे मायाजाल हैट गए थे और उधर गीता के साथ Arjun-Chetak भी आजाद हो गए.

समयचक्र खुलने के साथ सब रुक सा गया था बस Deepti-Aryan के अल्वा , सिर्फ वही सचेत थे पर अब दिव्या तलवार की रौशनी और ऊष्मा बढ़ने लगी .

दिव्या तलवार से निकलती बिजली कड़कड़ाती जिससे गुफा में बहनक आवाज गूंज गयी जोह पूरे नागलोक में सुनाई दी ......



अगले hi पल दिव्या तलवार की साड़ी बिजली की बड़ी बड़ी नीली सफ़ेद तरंगे चमक के साथ दीप्ति के अंदर समाती चली गयी जिसके झटकों से उसका जिस्म हवा में उठते लगा और उसका सरीर हर तरंग के साथ झटके खता हुआ कापने लगता ऊपर जाते हुए ......

आर्यन भी बेबस अपनी जान की दुर्गति hi देख सकता है मूक दर्शक बना काश में उसकी जगह होता , हर पड़ाव पे दीप्ति को तड़पना पड़ा मेरी पांचों (5) जानो ( प्रिंसेस ) की शक्ति के लिए . क्या हम बिना शक्ति के अच्छी लाइफ नहीं गुजर सकते हर किसी को पावर चाहिए किसी भी रूप में अच्छी या बुरी .

10 सेक् बाद दीप्ति और दिव्या तलवार जमीन की सतह से पैरेलल आमने सामने 80 फट से ऊपर उठने के बाद अपनी थंडर पावर दीप्ति के अंदर दाल , दिव्या तलवार अपनी जगह पे निच्चे आ गयी अपनी शक्ति उसके जिस्म में डालके और जब यह ख़तम हुआ तोह दीप्ति के नीरवजीव अचेत जैसी बॉडी 80 फट की ऊंचाई से बड़ी तेजी से निच्चे गिरने लगी पर आर्यन ने अपनी इनविजिबल शील्ड हटा कर दीप्ति को हवा में hi गपक लिया जिसको विशाखा अपने मोह में दबोच ने वाली थी लेकिन उसको वापस खींच लिया गया ....... उसकी पूछ पे किसी ने घातक वार किया और दबोच के दुर्र फेंख दिया , प्रभा आ चुकी थी िश गुफा में .....

थंडर पावर ट्रांसफर होते hi सबकुछ सामान्य हो चूका था 5तह पावर खुलने के कारन ....... दीप्ति के जनम का सबसे बड़ा मकसद पूरा हो चूका था , दिव्या तलवार का मालिक उसके सामने था ......

एक तरह जमीन पे बैठकर अपनी गॉड में लिए दीप्ति के सरीर को आर्यन ने उसका माथा टच किया और आँख बांध कर ली , बस नवाज hi चल रही थी दीप्ति की पर अगले 10 सेकंड में उसके नार्मल होने तक आर्यन अपने कितने जीवन मर्डर मर्डर के जिन्दा हुआ ....... प्यार hi दोनों में इतना ज्यादा था दीप्ति झेल गयी िश वार को भी इंदिरेक्ट्ली मीणा ने मदद की यह ुशी की शक्ति थी..... दीप्ति की आंखें खुली तोह आर्यन की आँखों से आंसूं की बूँद गिरी उसके माथे पे . बस दीवाना भर सा उसको चूमते जा रहा था की जैसे बरसो बाद मिला हो .....

दीप्ति ने उसकी आँखों को साफ़ करते हुए कहा हस्ते हुए कहा ," पूरा चेहरा गीला कर दिया चाट चाट के hi hi hi ..... मेरा माहि इतना कमजोर नहीं था की सिर्फ मेरे तड़पने या बेहोस होने से रू दे , आज का सबक याद रखना ...... आपको हमको नहीं अपने लक्ष्य को पाना है ..... हम 6 भेने (वीफेस) आते जाते रहेंगे पर आप को बहोत कार्य पूरे करने है ...... पहले िश विशाखा का कुछ करो अब दिव्या तलवार तोह है hi आपकी ".

आर्यन बस आसूं पहुंचता मुस्कारते हुए बोलै ," दीप्ति मेरी जान तू क्या है मेरे लिए कभी समझ नहीं पाओगी , आज तुझसे वादा है तू जीवन में नहीं तोह में भी नहीं ".

दीप्ति (मैं में) आपके बगैर हम दोनों का वजूद बना है जबकि आपने सबकुछ ख़तम hi तोह कर दिया ...... अब समय आ गया है सबको जल्दी तारने का (उद्धार करने) ...... दीप्ति भी आज दिव्या तलवार की hi मनसा सोच रही थी....

दीप्ति उसका गाल चूमकर बोली ," गीता दीदी की तरह में भी हूँ बस याद रखना में उनकी जगह कभी नहीं ले पाऊँगी माहि वह देवी हैं और थोड़ी नॉटी भी "...... एक दुसरे से गले शिकवे करते जैसे सब भूल hi गए .....

कुछ डिअर बाद जोर के आवाज से दोनों की तन्द्रा टूटी किश करते हुए ..... दोनों ने बगैर जगह देखे चूमा छाती शुरू कर दी थी पर सिद्धांत इतनी ज्यादा थी पिछले 15 मं से क्या हो रहा है दोनों को पता hi नहीं था ......

"भाई बचोओओओओ "..... इतनी तेज आवाज सुनकर दोनों सम्भले तोह देखा दूसरा hi युद्ध चालू हो गया था गुफा के दूसरी तरफ ...... 3 पहन वाली नागिन विशाखा दूसरी 2 पहन वाली नागिन से भिड़ी थी ...... "भाई मार दे इसे , माहि भैया मार डालो विशाखा को , में इश्को ज्यादा डिअर नहीं रोक सकती हूँ ".

आर्यन चीखते हुए बोलै ," प्रभा , तू यहाँ क्या कर रही है? ..... यहाँ आयी कैसे ? तूने ये कोनसा रूप ले लिया , दुर्र हैट जा यह बहोत खतरनाक है "......

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प्रभा ( नागिन रूप)

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थोड़ा पीछे चलते हैं ......

अपने माँ बाप और सब रिश्तेदारों की न कहने के बाद भी प्रभा जल्दी से सीदा Aryan-Deepti के पीछे hi विशाखा की गुफा के द्वार पे पहुंची hi थी की शेषनाग भगवन के आशीर्वाद से उसको नाग्शक्ति प्राप्त हो गयी ..... यानी नाग रूप.

प्रभा ने अपनी आंखें बांध करके दोनों हाथ जोड़कर भगवन भोलेनाथ जी फिर शेषनाग भगवन और अपने पिताजी महाराज, राजा वासुकि को िश्मरण करते हुए प्रणाम किया और जब उसकी आंखें खुली तोह 2 पहन वाली नागिन के रूप में 4 क्रोध से जलती आंखें उसकी प्रतिशोद की जौला का प्रतीक लग रही थी ......

गुफा में प्रभा के घुसते hi विशाखा को गायत हो गया ...... आशम्भव , यह नहीं हो सकता ? मेरी शक्ति को तोड़कर यह वापिस कैसे आ गयी ? ........ उसको प्रभा का जीवट होना ॉश्चारिये में दाल दिया .....

यह वही समय था जब सब रुक सा गया था पर कुछ डिअर सामान्य होते hi दोनों हिसस हिसाती एक दुसरे पे टूट पड़ी , इतना क्रोध था दोनों एक दुसरे पे अस्तर से वार करके अपने ज़हरीले विष वाले दांतों से एक दुसरे के सरीर को घायल भी कर रही थी ...... विशाखा के घाव जल्दी भरते तोह प्रभा की थोड़े विलम्ब से .

विशाखा सर्प भासा में ," हिस्स्स्स तू फिर से मारेगी , तुझे िश बार त्रिशंकु की तरह अंतरिक्ष में भेज दूंगी मार के , निच्च , पापिन, अपने hi दीदी के प्रेमी को अपने जाल में फसा लिया था तू ने...... नागलोक की नागिन के नाम पे तू बस कलंकनी है .... हिस्स्स्सस्स ".

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विशाखा

प्रभा भी गुस्से से फुंकारी ," हिस्स्स..... आपकी जैसी नागिन तोह पूरे भरमांड में न होगी , काली शक्तियां पाकर आपका दिल और मैं दोनों काला हो गया है ..... पिछली बार मार्के मैंने दंड झेल लिया िश बार नहीं , आप जब भी गलत थी और िश बार भी ..... हिस्स्स्सस्स ".

विशाखा ने जोरसे से जब कुंडली में लपेट पूँछ से पकड़ के प्रभा के पहन को गुफा की दिवार पे मारा तब आर्यन को याद करती अपने आप hi चिल्लाई उठाई ," भाई बचा ".........

विशाखा भी हैरान हो गयी यह किस भाई की बात कर रही है ........ जिसको मनुष्य की भासा में बुला रही है ...... ????

प्रभा तोह आर्यन की लाड़ली छोटी भें थी बहोत सरारती , सबको छेड़ती बड़े हो या छोटे फिर अपने बड़े भाई के पीछे चिप जाती," भाई बचा "...... ऐसा उसकी बचपन से आदत थी , सब डिमांड पूरी करवाती आर्यन से जब गाओं आती छुट्टिओं में ..... आर्यन भी कंधे पे बिठा के उसको घूमता था .

प्रभा की आवाज सुनकर आर्यन झट से उसकी तरफ पलटा ...... एहि गलती प्रभा से हुयी थी .......

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विशाखा ने प्रभा के मोह से सुना 'भाई' 'माहि भैया' ..... यानी यह महार्यं मर्द लेकर आया है प्रभा को, अब तू तोह गया. तुझे पहले देखकर सोचा अपना गुलाम बना के रखूंगी तुझे भोगूंगी पर नहीं तू िश प्रभा का भाई है िश जनम में तुझे कोई नहीं बचा सकता .......

डिअर हो चुकी थी आर्यन बगैर आदर्श शील्ड के था, खड़ा होते hi प्रभा की तरफ बढ़ा तोह ढेरी ढेरी सर से निचे पैरों तक पत्थर का बनता चला गया ....... प्रभा और दीप्ति के तोह प्राण hi सूख गए अपने भाई और पति को एक पत्थर का पुतला बना देखकर ......

अणि और दोनों गुरूजी ने प्रभा को नागलोक भेजकर , आर्यन को बचने का तोड़ निकला था वह फिर भी हो गया , विशाखा ने अपनी सम्मोहन शक्ति आर्यन से नजर मिलते hi इस्तेमाल कर दी ......

विशाखा का सम्मोहन शक्ति एक नर (मेल) पे hi काम करती थी जोह उसको गुलाम या पत्थर का बना देती थी उससे आंखें मिलते hi पर अब बहोत बड़ी समस्या हो गयी थी ुष पत्थर की मूर्ति बने आर्यन पर एक वार और उसकी मिर्त्यु हो जाती ........ दीप्ति या प्रभा विलाप भी न कर पायी थी और विशाखा की हसी जैसे कान पहाड़ रही थी ..... " है है है है ...... ले तेरा भाई और तू चोरनी तेरा पति तोह गया , इसे लाये थे मेरी तलवार को चुराने ...... है है है है है ...... "

तभी आर्यन की मूर्ति के सामने रानी हेमा के साथ उनकी तीनो दत्तक बेटियां साया, माया और चाय प्रकट होकर आ कड़ी हुईं और उनके आगे प्रभा और दीप्ति भी खड़े थे .

प्रभा जोह घायल थी , को शॉकेड देखकर विशाखा ने उसको आर्यन की तरफ उछाल दिया था पर वह खुद संभल के बाकी के साथ कड़ी हो गयी थी अब नार्मल मानव का रूप लिए .

विशाखा ने सबको नाग शक्ति से बाँध दिया और जब उसने तलवार से लिपटना चाहया तोह वह दुर्र हो गयी फिर किया तोह ऊपर .

दिव्या तलवार की ट्रस्टी देखकर विशाखा ने गुस्से से मूर्ति बांके खड़े आर्यन पे हमला कर दिया शास्त्रों से पर उसके पास जाते hi सास्तर गायब हो जाते ....... प्रभा ने चिल्ला के कहा ," विशाखा जान प्यारी है तोह भाग जा नहीं तोह हम hi तुझे मार देंगे ".

दीप्ति ," में सिर्फ आर्यन की वजह से चुप हूँ नहीं तोह तुझे मारने में छान भर की देरी न करती ".

रानी हेमा ," अपने घमंड में चूर होकर वही गलती कर रही जोह मेरी बेटियों ने की थी विशाखा , दिव्या तलवार सिर्फ महार्यं की है वह hi इसको धारण करने की शक्ति रखता है . अपना अंहकार छोड़कर अपनी जान बचा ले , बहोत बड़ी दिल है महार्यं का तुझे माफ़ कर देगा ".

विशाखा ने बारी बारी सबको देखा ," तू निच्च प्रभा मुझे उपदेश देगी , कामिनी तू ने यहाँ वापस आकर फिर से अपनी मौत लिख ली है , तुम चरों !!! पतलोक की होकर िश मनुष्य के लिए मुझसे लड़ने लगी भाग जायो नहीं तोह मारी जायेगी. और तू मानव लड़की मेरी तलवार वापस कर दे में तेरे पति को छोड़ दूंगी , जबसे तलवार ने तुझे छुए है मुझे पास भी आने नहीं दे रही है ".

नागलोक के सब महँ सर्प अपनी बेटी विशाखा की मूर्खता देख रहे थे और सबको लग गया आर्यन के हाथो मारी जाएगी और फिर हमको भी उससे लड़ना पड़ेगा चाहे मारे जाएँ.

प्रभा ने शेषनाग को याद करके अपना सर्प रूप धारण कर नाग्शक्ति से आजाद होते hi जब विष की फुंकार से हमला किया .....

विशाखा ने अपने को बचा के गुस्से से दीप्ति पे वार किया तोह दिव्या तलवार से शील्ड बना बिजली की वार से उसको रोक दिया दुर्र पहनकर .....

प्रभा ने तेजी से विशाखा को अपनी कुंडली में जकड़ा और चिल्ला के बोली ," दीप्ति भाभी ख़तम कर दो िश पागल , मगरूर नागिन को जिसको किसी के जीवन मरण से फर्क नहीं पड़ता , िशने मेरे प्रीतम विषदंश को मारा , मुझे मार के नागलोक से दुर्र कर दिया और आपके पिछले जनम के प्रेमी राजपूत राजकुमार को भी िशने मारा था जोह आपके कहने पे दिव्या तलवार लेने आया था ....... इश्को जीने का हक़ नहीं ".

रानी हेमा ," दीप्ति यह हम सबको मार के hi मानेगी इश्से पहले इसे ख़तम कर दो, मुझे लगता है महार्यं नहीं मारना चाहता पर तुमको कोण रोक लेगा ...... इश्को मार के hi अनेको की जान बच सकती है ".

दीप्ति ने गुस्से से विशाखा पे अपनी बिजली , पानी , हवा , पृथ्वी और आग की शक्तियों के सारे वार एक साथ कर दिए ..... विशाखा 5 शक्ति के वार एक के बाद एक झेल नहीं पायी और बेहोस हो गयी .

प्रभा जोश से बोली ," दीप्ति भाभी , भाई से दिव्या तलवार को टच कर दो ुष्पर से सैम मोहन जादू टूट जायेगा नहीं तोह किसी ने उसके पत्थर सरीर को खंडित कर दिया तोह जीवट नहीं बचेगा , में िश विशाखा को बाँध के रखती हूँ अपनी कुंडली में यह इतनी आसानी से नहीं मारेगी अभी सिर्फ घायल होकर बेहोश हुयी है ".

रानी हेमा ," दीप्ति पुत्री खुद को सम्भालो और प्रभा सही भूल रही है ऐसा hi करो , महार्यं अपनी शक्ति को पहचान लेगा ".

दीप्ति अभी भी गुस्से से ," यह प्रभा क्यों है ? माहि को भाई बोल रही है जबकि खुद नागिन है विशाखा के जैसी कहीं आप सब भी इसका मायाजाल तोह नहीं हो ?"

प्रभा ने अपने नागिन के सरीर की कुंडली में विशाखा को जकड लिया और बोली," पहले दिव्या तलवार का इस्तेमाल करो में सब बाद में बता दूंगी आपको गीता मौसी की कसम ".

दीप्ति भी कुछ सोचकर आगे बढ़कर दिव्या तलवार को दोनों हाथ में उठा के आर्यन की तरफ की तोह उससे सफ़ेद नीली रौशनी निकल तकराकी आर्यन से तोह उसका सरीर नार्मल होता चला गया पर दिव्या तलवार दीप्ति के हाथ से छिटक के दूर जमीन पे गिरी.

आर्यन भी वास्तिविक रूप में आ कर जब तलवार की तरफ दौड़ा क्योंकि अपने मालिक को छूकर hi उसको गायत हो गया कई बहरूपिया (5) मेरे मालिक पे कब्ज़ा कर लिए हैं ...... जबकि सच्च तोह यह था की उसका मालिक खुद महार्यं के सरीर में एक करियेदार था .

दिव्या तलवार ने जब आर्यन पर हमला करना चाहया तोह आर्यन ने अपनी कटारी निकाल के दीप्ति को पकड़ के उसकी गर्दन पे लगा दी........" *सहायक रुक जा नहीं तोह दीप्ति नहीं बचेगी "...... आर्यन को पता था तलवार की जान टूटे ( दीप्ती ) में है .

किसी को कुछ समझ hi नहीं आया पर दिव्या तलवार साइज में बड़ी होकर जमीन में धंसे लगी पर आर्यन ने एक हल्का कट दीप्ति की गर्दन पे कटारी से लगया तोह खून आने लगा उसकी गर्दन से ....... दीप्ति तोह अपने प्रीतम की बाँहों में शॉक hi थी और कट लगने के बाद भी दर्द न हुआ बस दुःख hi था ..... क्यों ? पर विश्वास था अपने प्रीतम पे की वह गलत नहीं करेगा ......

दिव्या तलवार झट से जमीन से बहार निकल दीप्ति को बचने के लिए आर्यन पे वार की तोह दीप्ति को साइड दाखिल दिया अंतिम चानन में ताकि दीप्ति के हाथ में आने की बाजए तलवार की मुठ आर्यन के हाथ में थी ........ बस एक बड़ा विस्फोट हुआ और सबकुछ ठहर गया....

विशाल गुफा िश समय अँधा कर देने वाली वाली चका चॉंद नीली सफ़ेद रौशनी से नाहा गयी थी सबकी आंखें बंद हो गयी ........ प्रकाश का तेज hi इतना ज्यादा था जैसे कई सूरज यही आ गए हो , दिव्या तलवार लिए आर्यन की बॉडी और तलवार में.

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आर्यन के हाथ में सहायक...

सहायक एहि नाम था ुष दिव्या तलवार का जोह अपने मालिक के सरीर में 5 अन्य आत्मा को महसूस की जब आर्यन को पत्थर से जीवित करि , उसको लगा उसके मालिक को कैद कर रखा है िश सरीर में पर एक hi स्पर्श में उसको आर्यन के अंदर सिर्फ अपना मालिक hi दिखा ......

2 सेक् बाद सब नार्मल होता चला गया विशाखा भी अब बड़ी प्रेम की नजरों से आर्यन को देख रही थी और जल्दी hi स्त्री का रूप धारण करके आगे बढ़ी आर्यन की तरफ .........

तभी प्रभा ने अपनी नाग शक्ति का खतरनाक वार ुष्पर किया और बाँध लिया फिर उधर दीप्ति ने अपनी कटारी जोरसे फेंकी और उसका सर काट गए ....... उसको नागिन का रूप प्रभा की नाग्शक्ति ने लेने नहीं दिया और स्त्री के रूप में दीप्ति ने मौत के घात उतार दिया .

विशाखा रौशनी की चमक और विस्फोट की आवाज से होश में आयी और जब आर्यन को दिव्या तलवार के साथ देखा तोह पल भर में ुष्पे लट्टू हो प्यार की नजरों से देखने लगी .....

प्रभा उसकी नजर पहचान गयी और दीप्ति भी उसको सबसे सुन्दर लड़की के रूप में देखकर बर्दास्त न कर सकीय .....

प्रभा के नाग्शक्ति वार ने बेबस और दीप्ति ने अपनी कटारी पे अपनी शक्ति जोड़कर वार किया कहछहःछः के साथ प्रेम होने से पहले hi प्राण पखेरू हो गए विशाखा के ......

पिछले जनम में प्रभा और अपने प्रेमी को मारा , दीप्ति के राजपूत राजकुमार प्रेमी को मारा और अब खुद जब दोनों के प्रेमी और पति पे नजर डाली मारी गयी.

आर्यन जोरसे चीखा ," यह तुम दोनों क्या किया उसको क्यों मार दिया ? "

रानी हेमा ," तुम दोनों ने सही किया नहीं तोह महार्यं को hi अपने प्रेम जाल में फसा के यहीं रख लेती ".

विशाखा के मरते hi नागलोक के सभी सर्प वहां आ गए ...... बड़ा hi बुरा अंत हुआ विशाखा का जिसको आर्यन ने नहीं दो लड़कियों ने मारा पुनर जनम लेकर .

राजा वासुकि ने अपनी आँखों की रौशनी में विशाखा के कटे सरीर को जला दिया तब विशाखा के मस्तक की तीनो मनिया हवा में उठकर एक हो गयी और उनके सामने आ गयी.... विशाखा का आत्मा रुपी प्रतिबिम्ब भी सबके सामने था.

विशाखा की 3 मणि ीखती होकर एक प्रतिबिम्ब जैसे आकर्ति के माथे पे लग गयी .......

राजा वासुकि ," महार्यं , तुम ने अपनी दिव्या तलवार पा ली है मगर तुम्हने अपने हाथो से विशाखा को नहीं मारा इशलिये हम भी तुमको चमा दान देते हैं , विशाखा की शक्ति िश तीन मुखी मणि में है और अब तुम्हारी एक बीवी को उसको ग्रह करना होगा ".

राजा वासुकि ने फिर विशाखा से पुछा ," बोलै पुत्री तुम्हारी आखिरी इच्छा क्या है?"

विशाखा रोटी हुए ," सबसे माफ़ी मांगती हूँ अपने बुरे कर्मो की ..... ( हाथ जोड़कर सर झुका ली )...... पिताजी महाराज, मुझे बस अब दिव्या तलवार के धारक के साथ रहना है उनका सुरक्षा कवच बनकर अगर इनकी कोई पत्नी मुझे माफ़ करके मेरे शक्ति अपना ले तोह मर्डर के भी में ुष दिव्या तलवार के साथ रहूंगी एहि मेरी आखिरी इच्छा है ".

राजा वासुकि ," पुत्री तुमको कोई नर (मेल) नहीं मार सकता था पर जब तुम्हने दो प्रेमिका के प्रेमी को चाहत की नजर से देखा तोह अपनी hi छोटी भें प्रभा और महार्यं की पत्नी दीप्ति से हारी hi नहीं मारी भी गयी ...... अब प्रभा या महार्यं की बाकी 6 पत्नियां निर्णय करेंगी तुमको कोण माफ़ करता है ".

आर्यन भी हाथ जोड़कर बोलै ," प्रणाम महाराज , में सबकी तरफ से माफ़ी मांगता हूँ बस मेरी छोटी भें प्रभा को िश नागिन योनि से मुक्ति दिला दिज्ये ".

राजा वासुकि मुस्करा के ," सब विधि का विधान है आर्यन जोह विशाखा को मौत उसकी छोटी भें से मिली जोह िश जनम में मनुष्य योनि में hi है पर सायद भगवन भोलेनाथ भी चाहते हैं की प्रभा के पास मनुष्य होने के साथ नागलोक की शक्तिअन भी हों , वह दोनों लोकों में रह सकती है और आगे तुम्हारी मदद भी करेगी ".

दीप्ति भी हाथ जोड़कर ," महाराज यानि प्रभा पिछले जनम में विशाखा की भें थी िश जनम में माहि की ..... फिर तो वह hi िश नाग शक्ति को झेल सकती है ".

राजा वासुकि भी हसकर ," प्रभा तुम कहोगी या में बोल दूँ अब सही समय है अपना सच्च बता दो ".

प्रभा शर्मा के अपनी माँ के गले लगकर बोली ," पिताजी महाराज मुझे मेरा प्यार hi काफी है और में विशाखा दीदी की शक्ति अपना लुंगी और अब उनको माफ़ करती हूँ ".

राजा वासुकि ने अपनी नाग शक्ति से प्रभा के अंदर जोह नागिन रूप में थी (2 पहन के साथ) विशाखा की शक्ति प्रवेश करवा दी ...... पल भर में प्रभा का रूप बदलता गया और अब वह 5 पहन वाली नागिन के रूप में विशाल आकर धारण किये थी जिसके 5 पहन पे 5 मणि थी .

तभी एक पहन एक दुसरे को छेड़ता " दीदी परेशां न करो ोुछ लगता है.... है है है है ......"

राजा वासुकि ," महार्यं, यह मेरी बेटी प्रभा भी तुमको प्रेमी की तरह प्यार करती है, तुमको अपनी और बहेनो के तरह इश्के साथ विवाह करके एक अनमोल शक्ति मिलेगी ........ अब तुमको जल्दी hi प्रभा से शादी करके मिलान करना होगा तभी यह दोनों बहने एक रूप धारण करके रह पाएंगी , तुम्हारा प्रेम hi इनको साथ रख पायेगा मगर विवाह के लिए फिर से एक बार नागलोक आना होगा".

रानी हेमा ," आर्यन , मेरी तीनो बेटी तुम्हारे साथ राजकुमारी दीप्ति की सेवक बनकर जाएँगी धरतीलोक क्योंकि यह भी तुम दोनों के सनिध में रहना चाहती हैं".

दीप्ति भी मुस्करा के ," इशलिये महारानी हेमाजी आप माहि को बोल रही थी की 3-4 यहाँ पतलोक की लड़कियां भी साथ ले जायो ".

आर्यन मैं में यह प्रभा ने सही टाइम पे वार किया अब गरिमा लड़ पड़ेगी मुझसे दोनों की बिलकुल नहीं बनती ...... गीता को क्या जवाब दूंगा पर अगले hi पल गीता भी वहां आ चुकी थी जोह उसके गले लग गयी ....... पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म ..... तुम ठीक यह हो ..... ?

अब क्या होगा ...... ?????

आर्यन बीटा अब तू गया ..... यह लड़कियां hi तुझे मार मार के गांजा कर देंगी ????

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गीता को कैद हुए यहाँ 36 घंटो से ज्यादा हो गए थे , दोनों घोड़े Arjun-Chetak को भी 'प्लांटस' ुष डिब्बे से 2 बार खिला दी थी और खुद भी खा ली थी ......

शुरू के 2 घंटे बहोत बोरिंग थे फिर उन्ह जिन्दा बचे विशाल पक्षिओं को आजाद करते हुए बोली ," भाग जाओ यहाँ से नहीं तोह अबकी बार मार hi डालूंगी ".

सब पक्षी इतनी तेजी से वहां से उदय जैसे कोई पक्षिमार शिकारी बन्दूक लिए खड़ा हो ....... ुष अदृश्य दिवार सब पार गए पर गीता या Arjun-Chetak ने कोशिश की तोह बिजली का करंट लगा .

गीता चिढ़कर ," मतलब हम तीनो hi कैद हैं चलो अब कुछ हमारे हाथ में नहीं , तुम लोग भी आँख खोलकर आराम करो में भी कुछ डिअर योग करती हूँ ऐसे तोह टाइम पास होने से रहा .....

समयचक्र की वजह से भारी दुनिया का टाइम िंह सबके लिए रुक गया था , Aryan-Deepti को भी हर लोक में घुमते हुए नागलोक तक ज्यादा hi टाइम लगा , दिव्या तलवार के पास जाकर जैसे hi बिजली की शक्ति दीप्ति में सामने लगी वैसे hi कैद में गीता , दिल्ली फार्महाउस में मीणा को , जाने को अमेरिका में , डॉली और सारू को फार्महाउस में तेज झटके लगे ....... पांचो बेहोस हो गयी कुछ सेकंड के लिए जबतक दीप्ति वहां नागलोक में आर्यन की गॉड में बेहोस थी .

5 प्रिंसेस की शक्ति खुल चुकी थी दिव्या तलवार की वजह से ...... सबके पास एक स्पेशल पावर एलिमेंट की शक्ति थी पर दीप्ति के पास 5 एलिमेंट्स की 1/5तह शक्ति थी जोह मिलकर इनके बराबर हो जाती है .

मीणा ने जब सारू की तरफ देखा तोह खिलखिला के हसकर गले मिली दोनों की आँखों में आंसूं थे ...... यानि दीप्ति की जान बच्च गयी थी .

पर अभी सबसे बड़ा झटका बाकी थी जोह 14 लोकों तक महसूस होने वाला था?????

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आर्यन के दिव्या तलवार पकड़ते hi बहोत तेज रौशनी हुयी और धमाके के साथ एक गोला दोनों के चरों तरफ बन गया जिससे सब 14 लोकों तक कम्पन पैदा हुआ , उत्तरी भारत में तोह भूकंप (अर्थक्वेक) के झटके महसूस हुए 2 सेक् तक ...... जिसका एपीसेंटर हिमालय के 380 कम निच्चे और रिक्टर स्केल पे 5.4 नापा गया बड़े गुरूजी की अवरोदक शक्ति की वजह से िश झटके की शक्ति काम हो गयी थी नहीं तोह परलय आ जाती .

रानी विजयलमक्शी , बड़े गुरूजी , निशांक गुरूजी ने भी हाथ जोड़कर भगवन शंकरजी को आँख बांध कर के नमन किया ....... आर्यन उनकी सोच से ज्यादा hi अपने कार्य को पूरा किया .

आर्यन को प्यार करने वाळिओं ने उसकी पूरी मदद की थी खासकर दीप्ति और प्रभा ने पर रानी हेमा के कारन कोई भी जादुई शक्ति उनके शिष्ये को नुक्सान नहीं पहुंचा पायी वार्ना विशाखा तोह आर्यन के पत्थर की मूर्ति बनते hi मार डालती जोह पूरे पतलोक को तबाही तक ले जाता ......

विशाखा के मरने और आर्यन को दिव्या तलवार हासिल करने के बाद पतलोक सुरकषित था अब उनकी यहाँ क्या जरुरत थी तोह सब महाबलिओं ने आर्यन, दीप्ति , प्रभा और गीता को आशीर्वाद देकर विदा किया ......

प्रभा कुछ दिन अपने पिछले जनम के माँ बाप के साथ बिताना चाहती थी इसे दो प्रोयोजन में सहायता मिलती , आर्यन की पत्नियां को प्रभा के लिए डिसिशन लेने में वक़त लग्न था और पूरा परिवार उसको आसानी से आर्यन की 7तह पत्नी एक्सेप्ट कर ले ........

आर्यन की 7तह बीवी प्रभा , जोह उसके चाचाजी की बेटी है पर साथ में नागलोक की शक्तिशाली नागिन भी जिसके पास अपनी बड़ी भें विशाखा की शक्ति भी है .

दोस्तों प्रभा के पास अब 5 मणि है 2 अपनी 3 विशाखा की पर यह दिव्या नागमणि नहीं है ...... वह सिर्फ भगवन शेषनाग के पास है तोह कंफ्यूज न हो . 5 मणि उसको 5 पहन के साथ 5 अलग अलग शक्तियां प्रदान करती हैं ...... वह शक्तियां वक़त आने पे जब प्रभा उसे करेगी तब विवरण आएगा.

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धयानवाद दोस्तों , Aryan-Deepti का episode जोह काफी लम्बा चला और ज्यादा दिन लिया अब पूरा हो चूका है .....

स्टोरी अब मैं स्ट्रीम की तरफ आगे बढ़ेगी....

कीप रीडिंग एंड पोस्टिंग योर व्यूज एंड कमैंट्स ों थे स्टोरी.
 
अपडेट - 34

PART - 8 ( लास्ट Part )

नागलोक ने सब लोकों के स्वामी के दर्शन और आशीर्वाद लेकर दीप्ति अपने साथ आर्यन और गीता को जब Arjun-Chetak के पास ले गयी जहाँ वह कैद हुए थे तब दोनों अपने अपने दोस्तों की तरफ दौड़ गए .......

अर्जुन को खूब सेहलते हुए आर्यन उसकी भासा में पूछ ने लगा की कैसा है ?क्या क्या हुआ? ..... वह भी जैसे हिन् हिन्ना के सब बता रहा था और गीता की इतनी तारीफ किया की वह आज से उसका गुलाम है बस मुझे रोकना मत अपनी मालकिन के सामने सर झुकने से .....

अर्जुन (आर्यन का परम मित्र और घोडा) ," आर्यन भाई तू नहीं जानता एक समय ऐसा आया हम दोनों भाई मर्डर hi गए थे पर गीता दीदी मुझे ज्यादा पसंद नहीं करती है तेरा मुझसे लगाव की वजह से पर भाई यह गीता दीदी लड़की नहीं है देवी है साले उन्ह पक्षिओं की माँ छोड़ दी सिर्फ इशलिये की हमारी सुरक्षा के लिए तू बोल के गया था ..... आर्यन भाई सच्च बोलता हूँ 36 घंटे से ज्यादा तेरी चंदा रानी के साथ थे हम दोनों पर एक बड़े भें की तरह हमको कुछ नहीं होने दिया..... तू सही था एहि hi तेरी सच्ची जीवनसाथी है और निडर भी ".

उधर चेतक भी दीप्ति से गीता की तारीफ कर रहा था पर लास्ट में बोलै," राजकुमारी जी में आपका सेवक हूँ पर मेरे िश जीवन पे गीता देवी का नाम लिखा है आज से उनका गुलाम हूँ अगर कोई गुस्ताकी हो जाये तोह माफ़ कर देना".

गीता जोह पिछले 20 मं से यह सब देख रही थी की दोनों को अपने घोड़े की चिंता है जबकि में भी मरने वाली थी , वो तोह अच्छा हुआ मुझे बड़े गुरूजी की बात याद है की मेरे अंदर धरती माँ की शक्ति है ..... अभी बताती हूँ .....

देखते देखते दीप्ति और आर्यन अपने घोड़े के साथ जमीन के 10 फट वर्ग आकर के टुकड़े पे हवा में 50 फट ऊपर थे ..... दोनों घोड़ो की हवा खुसकाक हो गयी पर Aryan-Deepti के साथ चाय साया माया भी हसने लगी जोह कई साल डाइयाँ का श्राप झेल के अब एक स्त्री के रूप में धरतीलोक जा रही थी दीप्ति की बॉडीगार्ड बनकर .

Aryan-Deepti दोनों नीचे कूद गए और गीता के पास जाकर उसको चूम ने लगे , गीता भी हसकर दोनों घोड़ो को जमीन पे ले आयी .....

गीता ," िंह दोनों को उन्ह विशाल पक्षिओं के सामने देखते फिर जब वह चले भी गए बस मेरे पास hi रहते की कहीं कोई मार डालेगा पर अब देखो अपने मालिकों से शिकयत कर रहे हैं ".

दीप्ति हस्ते हुए ," दीदी , यह दोनों आपका सुक्रिया और तारीफ कर रहे थे ...... आप के दोनों गुलाम हो गए हैं बस इतना hi बता रहे थे ".

आर्यन ने गीता का गाल चूमा ," चंदा रानी है hi लाखो में एक , सब की बहोत केयर करती है तभी तोह मेरी जाने जिगर है "....... पूछह पूछह चुम्म्म्म चुम्म्म्म मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह ..... गीता के लबो को चूसते हुए आर्यन ने बता दिया की वह कितना बेकरार रहा था उससे दुर्र होकर .

प्रेमिका अपने प्रेमी की बेकरारी बस चूमने से जान लेती है तोह गीता क्यों पीछे रहती , उसको किसी की पर्व hi कब होती थी जब आर्यन को चूमना हो ...... दोनों बाँहों का हार आर्यन के गले में दाल के झूलती हुयी उछाल के अपनी टांगें उसके कमर में लपेट ली .

अगले 10 मं तक दोनों जोश से एक दुसरे की लार तक का स्वाद ले डाले पर दोनों हटने को तैयार नहीं थे ...... दीप्ति के लिए कुछ नया नहीं था वहीँ अर्जुन भी आर्यन को ऐसा करते बहोत खुश का गव्हा पहले पे भी था .

साया , चाय और माया के लिए एक अद्भुत प्रेमी जोड़े वाला दृश्य था , कितनी सिद्दत से एक दुसरे को चूम रहे हैं. तीनो महार्यं नाम के िश मानव पे पहले hi फ़िदा थी और बड़ी मिन्नतें अपनी माँ रानी हेमा से करके दीप्ति के साथ आयी थी . रानी हेमा से आर्यन की कई प्रेमिका और होने वाली बीवियां का सुनकर उनको भी प्यार मिलने की सम्भावना लगी .

दीप्ति ने आर्यन के कंधे पे हाथ रख तोह उसने किश तोड़कर उसकी ओरे देखा पर गीता को अच्छा न लगा किश तोडना वह फिर से उसके चेहरे को सीधा कर उसके लिप्स चूसने लगी .

दीप्ति भी हसकर साइड होकर Arjun-Chetak को तैयार करने लगी चलने के लिए. आर्यन ने 5 मं वीलडली किश करके गीता की छूट का पानी निकाल के झाड़ा तब वह संतुस्ट हुयी ...... इतनी मस्त किसिंग ने उसको चरमोत्कर्ष तक पहुंचा दिया जोह अब तक सबसे सेंसुअल और इरोटिक किसिंग था .

गीता को अपनी hi गॉड में लेजाकर अर्जुन पे बिठा दिया और दीप्ति को चेतक पे उसका गाल चूमकर ..... दीप्ति स्माइल से ," दीदी का धयान रखो वह बहोत मिस की हैं आपको ".

आर्यन भी हसकर ," तुम्हारा भी जल्दी रखूँगा अलवर पहुंचकर ".... है है है है ..... तोह उसका इशारा समझ के शर्माने लगी .

आर्यन ," राजकुमारी जी आप तीनो हवा में सैर करती आगे बढ़ेंगी या में अपनी छोटी भें अणि को बुलं वह आपको सीधा वही महल में ले जाएगी पल भर में ".

साया स्माइल के साथ ," महार्यं , हम तीनो दीप्ति के साथ hi रहेंगे जहाँ यह वहां हम . फिर तुम जानते हो हम में दानवो की कई शक्तियां हैं हम आसानी से हवा में तुम्हारे साथ सफर करेंगे ".

आर्यन भी मुस्करा दिया ..... गीता ," िंह तीनो के पास दानव शक्ति है पर लग तोह इतनी सूंदर रही हैं ".

माया ," गीता , हम अपने कुकर्मो की सजा भुगत चुके हैं श्राप के कारन और Aryan-Deepti ने हमको आजाद कार्य बस अब इनकी दासियाँ हैं ".

गीता ," अच्छा तोह दासियाँ hi रहना , मालकिन बनने के सपने मत देखो.... पक्का तुम आर्यन की चाहत में साथ आयी हो पर याद रहे मेरी और मीणा की अनुमति के बिना तुम छु भी नहीं पाओगी आर्यन को . बस चल कपट मत करना तुमको भी प्यार दे देगा मेरा माहि ..... पूछ पूछ ..... ी लव यू माहि ".

Aryan-Deepti भी चुप्प hi रहे की गीता की बात काटना अभी ठीक नहीं पर तीनो भेने भी ॉश्चारिये चकित थी यह लड़की तोह 1 मिनट में उनका चिट्टा खोल दी .

आर्यन ने कहा ," चलो चलते हैं अभी पहुंचे में टाइम लगेगा "....... दोनों घोड़े अपनी मध्यम रफ़्तार में दौड़े लगे और तीनो भेने उनके ऊपर हवा में तरिति आगे बढ़ रही थी जोह कोई बड़ी बात नहीं थी .

एक घंटे बाद घोड़ो को विश्राम देना का बोलकर सब सुस्ताने लगे तब दीप्ति ने कहा की ," वैसे माहि आप हमको दिव्या तलवार ( सहायक) की शक्ति से वापस ले जा सकते हो ".

आर्यन मुस्करा दिया और गीता भी भोंचक्की से दीप्ति को देखने लगी ..... गीता ," आर्यन वह तलवार अब कहाँ है जिसके लिए इतने पापड़ बेले".

आर्यन ने अपने सीना को निर्वस्त्र कर एक हाथ रखा तोह सहायक का टैटू जैसा नक्शा चमकने लगा जोह दीप्ति की पीठ पे था ........

गीता ," मतलब अब नक्शा तुम्हारे सीने पे , हटो इसे यहाँ से यह मेरी सर रखकर सूने और चूमने की जगह है मुझे तुम्हारे निप्पल किश करने में मजा आता ".

बाकि चरों लड़कियां जहाँ अवाक थी वहीँ आर्यन शर्मा के ," अच्छा अच्छा हटा लूंगा जब वह दिव्या खज़ांने वापस रख दूंगा ".

गीता," क्या मतलब ? "

दीप्ति में बताती हूँ माहि भी पूरा सच्च नहीं जानता ....... आपको दिव्या तलवार की स्टोरी बताती हूँ जितनी मुझे पता है .......

दिव्या तलवार की कहानी .......

" यहाँ से अरबों प्रकाश वर्ष दुर्र एक दुसरे भरमांड में एक बहोत बड़ा ग्रह है पृथ्वी जैसा , जहाँ िश दिव्या तलवार, जिसका नाम 'सहायक' है, का जनम हुआ यानी वहां बनायीं गयी फिर कई दिव्या शक्तियां कई महाबलिओं ने िश में डाली ....... शक्तियां इतनी ज्यादा हो गयी थी की कोई इश्को उठा hi नहीं पता तोह धारण कैसे करे.

हज़रों साल बीतने के बाद जब कोई इश्के काबिल न पैदा हुआ तोह वहां के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति जोह हमारे अलवर के राजगुरुजी जैसे थे , सबकी इच्छा के लिए टप्प किया और भगवन से िश सहायक का धारक माँगा ...... वहां की महारानी ने कुछ साल बाद एक असाधारण बालक को जनम दिया ...... वह लड़का आगे चलके सबसे शक्तिशाली योद्धा बना और वहां का राजकुमार .

जब काली शक्तियों ने ुष ग्रह पे हमला किया और युद्ध हुआ तोह सहायक को धारण करने की बात आयी क्योंकि राजकुमार अभी उम्र में छोटा था पर उसने सबकी इच्छा के विरोध जाकर सहायक को बड़ी आसानी से धारण कर लिया और साड़ी बुरी शक्तियों को हरा दिया ...... पूरे ग्रह पे शान्ति की स्थापना की ..... कई सो साल बीतने के बाद राजकुमार को जिससे प्यार हुआ वह लड़की खुद काली शक्तियों की बेटी थी . उसका मकसद hi सहायक को पाना था राजकुमार को प्रेम जाल में फसा के .

राजकुमार ने ुष लड़की से विवाह भी किया पर जब एक दिन अकेले में उसने सहायक को धारण करने की कोशिश की तोह मारी गयी उसको छूकर hi. राजकुमार उसकी मौत बर्दास्त न कर पाया उसने बिना किसी की सुने सहायक को दोषी मान के इतने विहग से फेंका की वह भरमांड में खो गयी .

दुःख से व्यवथित राजकुमार ने अपने देह hi त्याग दिया पर जब सबने ुष लड़की को दोषी मान कर भला बुरा कहने लगे तोह राजकुमार जोह एक आत्मा बनकर hi ुष ग्रह पर था अपने आप को रोक न सा अपने प्यार की बुराई सुनकर और उसने अपनी सबसे बड़ी शक्ति से वह ग्रह को जीवन से वंचित कर दिया ..... यानी सब सूछम आत्मा से हो गए हैं न कोई जीवन है बस हर तरफ वीराना हो गया .......

उसके बाद क्या हुआ मुझे पता नहीं है पर सहायक कैसे धरती पे प्रकट हुयी यह भी नहीं पता .

पर सहायक आजतक अपने स्वामी को याद करती थी एक दिन वह जरूर आएगा , उसने कई हज़ार साल धरती पे उतार चढ़ाव देखे ....... कोई भी योद्धा इसकी शक्ति महसूस तोह करता पर छु न सका .

फिर आपके पूर्वज महार्यं ने भी बस छु hi लिया था पर धारण वह भी न कर सका क्योंकि उन्ह में भी इतनी शक्ति नहीं थी . दिव्या तलवार जब अलवर में आयी तोह दिव्या ख़ज़ाने के साथ खुद को स्थापित कर ली ...... कोई उसके तेज के कारन पास hi नहीं पहुंच सकता था तोह छु कैसे पता ......

महार्यं के मरने के बाद से भविष्वाणी हुयी थी की वह फिर जनम लेगा और यह दिव्या तलवार के लिए एक रास्ता था ुष मंज़िल की तरफ जहाँ वह अपने मालिक से मिल सकती है अगर कोई उसको वहां पहुंचा सके .

दिव्या तलवार ने अपनी शक्ति से अलग अलग पड़ाव तय करते हुए वहां ुस्तक पहुंचे की बाधा बना दी ताकि उसको सच्चा योद्धा hi पा सके जोह उसको महार्यं hi लगा था जब पुनर जनम लेगा .

वही हुआ जिस रात माहि ने आपकी हवेली में जनम लिया ुशी रात दिव्या तलवार के अंश के साथ मैंने जनम लिया ...... दिव्या तलवार की शक्ति मेरे अंदर थी और बड़े होने पे नक़्शे के साथ मेरे प्रेमी की यादें भी बनती गयी , मुझे माहि के साथ मिलने में दिव्या तलवार का hi हाथ है . बाकी सब आपको पता है ".

दीप्ति के चुप होते hi सबके मैं में उथल पथल थी तब साया ने कहा ," यानि वह सहायक का दुसरे ग्रह (प्लेनेट) का राजकुमार फिर से 2500 साल पहले महार्यं के रूप में पैदा हुआ फिर अब 21 साल पहले माहि के रूप में पुनर जनम ? "

दीप्ति ," मुझे बस लगता है की माहि और ुष राजकुमार कोई तोह कनेक्शन है मगर पूरी जानकारी मुझे भी नहीं है , यह सब बस सपनो में hi देखा है और वह राजकुमार का चेहरा धुंदला होता था ".

गीता ," नहीं नहीं !!! ...... दीप्ति ऐसा नहीं है, माहि ुष राजकुमार का नहीं हमारे पूर्वज महार्यं का अवतार है सब परिवार वाले जानते तुम माँ ( रति ) से पूछ लेना या बाबा ( राजवीर ) से . हैं न आर्यन , तुम क्या सोच रहे हो ".

आर्यन सीरियस टोन में ," सोच रहा हूँ आखिर मेरा िश तलवार पे क्या हक़ है जबकि यह दीप्ति की hi तोह है जिसकी जान इससे जुडी थी , दूसरा खजाना अलवर राज्य का है जिस्मे गीता के पुरखो का भी हिस्सा है ..... रही कहानी की बात जोह बात लाखों हज़रों साल पुराणी है उसकी पूरी सच्चाई कोण जानता होगा स्तब्ध बी स्तब्ध करेक्ट हो यानी कुछ जोड़ा गया हो या कुछ हत्या गया हो . में महार्यं का अवतार हूँ मुझे ऐसा नहीं लगता पर हाँ हो सकता है हम एक दुसरे से मिलते जुलते हैं , देखने से , कार्यो से या अपने परिवार से सदैव प्रेम करने से . कुछ शक्तियां पायी हैं मैंने और स्पेशल विद्यां मैंने सीखी हैं पर अणि तोह देखो मुझसे भी शक्तिशाली है , मीणा बहोत पावरफुल है इवन दीप्ति तोह मुझसे भी दो कदम आगे है और तुम गीता तुम्हारे पास तोह धर्तीमैया की पावर है तोह बाकी सब मुझसे भी शक्तिशाली हो फिर यह तीनो भेने साया माया चाय भी तोह स्पेशल है इनके माता पिता तोह कितने शक्तिशाली हैं जिनकी इनके अंदर भी अपर शक्ति है".

गीता थोड़ा चिढ़कर ," वह सब छोड़ तू पहले वह ससुरी सहायक को बहार निकाल सबकी माँ छोड़ डाली िश तलवार ने तोह दिमाग़ ख़राब करके ".

गीता अपने चिर परचित अंदाज़ में तोह आर्यन मुस्करा के ," चंदा रानी तेरे मोह से गाली नहीं प्यार अच्छा लगता है , ले देख तू भी ".

आर्यन ने खड़े होकर आँख बांध करके सहायक को याद किया तोह उसके हाथ में नीली -सफ़ेद रौशनी के साथ प्रकट हो गयी ...... पहले भी सबने देखा था पर अब उनको सच्च में विश्वास नहीं हो रहा था की यह वही दिव्या तलवार है जोह इतनी शक्तिशाली है .

अपने मालिक के हाथ का दोबारा स्पर्श पाकर जैसे खुश होती हुयी ने अपना तेज नार्मल कर अपनी सुंदरता की तारीफ करवा hi डाली .......

दीप्ति ," देखा दीदी , अब बोलो जिसको कोई साधारण मानव क्या कोई पतलोक से लेकर धरतीलोक तक छु ना सका वही है यह और माहि इसका मालिक है पर कैसे अभी जवाब नहीं है मेरे पास ".

गीता ," यह तलवार क्या क्या कर सकती है".

दीप्ति ," यह अलौकिक है , कोई अस्तर सास्तर कोई भी शक्ति िश तलवार के वार के आगे फ़ैल हैं , एक hi वार में समूचे देश का ग्रह को पल भर में ख़तम कर सकती है ...... 5 शक्तियां जोह आप पांचो को मिली है वह िशिकी वजह से हैं. इश्कि वजह से hi मुझमे 5 एलिमेंट्स की पावर है और प्रभा को विशाखा की शक्ति इसी तलवार की वजह से मिली है क्योंकि वह सहायक के धारक के पास hi हमेशा रहना चाहती है ".

आर्यन सब सुनता हुआ ुष दिव्या तलवार को अलग अलग दिशा में चलते हुए उसकी तेज़ी और संतुलन नाप रहा था पर इतनी परफेक्ट तलवार नहीं हो सकती , एवरीथिंग इस सुपरबलय बैलेंस्ड विथ वेट एंड शार्पनेस .

प्रभा और विशाखा का नाम सुनकर चौंक गया और तलवार को गायब कर के पलटा तोह गीता गुस्से से देखती हुयी आर्यन के थप्पड़ जड़ दी ...... दीप्ति को भी अहसास हुआ की उसको प्रभा का नाम नहीं लेना चाहिए था .

गीता उसका गाला पकड़ के ," तुझे हम बीवियां या तेरी रखीअलिअन पूरी नहीं पड़ती जोह अब नगीनो और रक्षाशनिओं को अपनी बीवी बनने के सोच रहा है ...... एक बात कान खोल के सुन ले मुझे अपनी सौतन के बिच कोई नागिन और राक्षश ने चाहिए नहीं तोह तेरा लौड़ा काट के तवृ hi गांड में घुसेड़ दूंगी "......

दीप्ति कुछ बोलती तोह हाथ दिखा के उसको चुप्प करा दी ," तू चुप रह छोटी तू िंह मर्दों को नहीं जानती , साली छूट तोह रण्डिओं की भी देखकर यह लौड़ा खड़ा कर लें ".

आर्यन भी हसकर गीता को गॉड में उठा लिया ," चलो चलते हैं लेट हो रहा है ".

गीता उसको खूब गाली देती रही अर्जुन पे बैठकर पर आर्यन उसको चूमता रहा और गुलगुली कर देता ....... दीप्ति को भी बुरा लगा की उसकी वजह से आर्यन को गीता ने थप्पड़ मारा और इतनी गन्दी गलियां बाकि ...... कुछ भी हो माहि हमारा पति है फिर प्रभा को उसने तोह नहीं कहा बीवी बनने को वहां उन्होंने सहारत hi ऐसी रख दी ...... फिर पूरे पतलोक घुमते हुए किसी औरत को नहीं देखा बस वह hi उसको ललचा रही थी .

तीनो दानव भेने समझ गयी यह गीता नाम की लड़की तोह चलती फिरती आग है , महार्यं को ऐसे कण्ट्रोल करती है जैसे वह इसका गुलाम है , ऐसी भी पत्नी होती है क्या ? ....... पर सच्च hi था आर्यन बचपन से गीता के प्रेम में गुलाम था .

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राजा रघुभार सिंह अपने कक्ष में आये तोह मिरदुला अब बैठी हुयी थी .....

"कहने को बहोत कुछ है ' मिर्दु ' ( रानी मिरदुला ) पर सही समय आने में कुछ वक़त है ".

रानी मिरदुला जोह अपने बड़े भाई के कक्ष में थी जब अणि का मंतर ख़तम हुआ ...... राजा रघुभार सिंह को अंदजा हो गया किसी ने सुप्तचेतना मंतर से सबको सुला दिया था इसका मतलब आर्यन , दीप्ति को लेकर दिव्या तलवार की खोज में निकला है . बहोत सतर्कता से काम लेना होगा किसी भी हाल में वह दिव्या तलवार राजपूताना से नहीं जानी चाहिए .

रानी मिरदुला ," भैया , हम आपको एक बात बताना चाहते हैं पर िश से दीप्ति आर्यन के विवाह पे असर नहीं होना चाहिए ".

राजा रघुभार सिंह के भी कान सतर्क हो गए की 21 साल से मूर्छित अवस्था में पड़ी मेरी छोटी भें कोण से राज से पर्दा हटना चाहती है ...... " तुमको कब से मेरी आज्ञा की जरुरत पड़ने लगी , तू तोह मेरी सबसे लाड़ली भें है तेरे से मेरा क्या छुपा है आजतक ".

रानी मिरदुला थोड़ा सीरियस होकर ," माहि मेरे पिछले जनम का बीटा है तब वह महार्यं , माहिया कह लता था और मेरा नाम लक्ष्मी था ........ पिछले जनम में अगर दिव्या तलवार उसके पास होती तोह कभी हारता नहीं न hi मारा जाता पर िश जनम उसको दिव्या तलवार मिलेगी तोह वह अजीत हो जायेगा बस आपको िश दिव्या तलवार का मोह छोड़ना होगा मेरे बेटे के लिए बस इतनी सी इल्तजा है िश छोटी भें की "....... और उसने आँखों में आंसूं लेकर अपनी झोली पहला दी सरीर की ......

राजा रघुभार सिंह भी आंखें फाड़े अपनी भें को देखने लगे की जोह सपना देखा , जोह क़ुरबानी दी , जोह पाप भी दोनों ने किया सिर्फ दिव्या तलवार और ख़ज़ाने को पाने के लिए सब वर्थ जाने के लिए कह रही है .

राजा रघुभार सिंह ," मिर्दु तुम भूल रही हो हम दोनों ने िश घडी के लिए अपने जीवन डाव पे लगा दिए ...... तुमको दोनों पुत्रियां दी अपनी सगी छोटी भें के साथ अनैतिक समभंद बना के समाज से परए ताकि तुम्हारा ाहौदा ऊपर रहे और दीप्ति को पैदा करने लिए हम दोनों ने कितने कष्ट उठाये ...... भविष्वाणी की लिए hi तोह तुमने अपनी जान डाव पे लगा दी और मैंने सिंघासन छोड़कर तपस्या करके खुद को िश काबिल बांया ...... अब िश आखिरी घडी पे कह रही हो की अचानक से आर्यन तुम्हारे पिछले जनम का बीटा है इशलिये दिव्या तलवार उसको मिले ...... नहीं यह नहीं होगा , दिव्या तलवार को हम धारण करके यहीं राजपूताना में रखेंगे और अब तुम भी बिच में मत पदों ...... दीप्ति खुद वह दिव्या तलवार यहीं अलवर में रखेगी , हमारी बिरदारी की शान होगी वह . Aryan-Deepti शादी करें हमको कोई फर्क नहीं पड़ता पर दिव्या तलवार को हम कहीं जाने नहीं देंगे यह हमारा आखिरी फैसला है . अब तुम जा सकती हो , बस अपना मोह बांध रखना ".

रानी मिरदुला भी जानती थी उसके बड़े भैया कितने शक्तिशाली ववक्तित्व के राजा रहें हैं और सब दोनों ने hi तोह किया है पर पुत्र मोह ने उसको पीछे कदम उठाने पे मजबूर कर दिया . वह आंसूं पहुंच के अपने कक्ष की तरफ बढ़ गयी तोह दो काली शक्तियां उसपे निगरानी के लिए रघुभार ने लगाई .

समयचक्र के अनुसार 12 बजे दोपहर के समय तक दीप्ति के पास टाइम है ...... तभी जैसे पूरी धरती हिलने लगी जैसे बड़ा भूकंप आया हो ...... रघुभार को भी अंदजा था यानि सुबह घडी नजदीक आ रही है .

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अलवर के राजगुरुजी अपनी साधना में लीं सब के जनकल्याण के लिए प्राथना कर रहे थे तभी बड़े Guruji(Vishaal पेड़) की आवाज सुनाई दी ," वॉश , तुम्हारी म्हणत और लगन ने Aryan-Deepti को अपने कार्य में सफल बांया है ....... जल्दी hi तुम को जंगल में हमारे सामने आना होंगे , दोनों रघुभार और जबर नहीं मानेगे आसानी से ...... दिव्या तलवार को पाने के चक्कर में गलत कदम hi उठेंगे बस तुम धरिये से काम लेना ".

राजगुरुजी हाथ जोड़कर ," जैसे आप केहन गुरूजी , आपके दर्शन करने में अतिसर्गः hi आऊंगा . धयानवाद निशांक गुरूजी अपने मेरी इच्छा राखी ".

राजगुरुजी बड़ी खुसी से अपनी सवेरे की पूजा में लग गए ....... उनको बस राजा त्रिभुवन सिंह की चिंता थी की वह दिव्या तलवार या खजाने के लालच में न पड़े . दीप्ति अकेली सक्षम है और समझदार भी वह लालच में नहीं आने वाली .

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उधर अमेरिका में जाने हॉल जब होश में आयी तोह देवी के साथ मंजू और जाने की मदर मारिए हॉल भी उसके रूम में थी ....... देवी ने रूट हुए जाने को गले लगा के चूमा और मारिए भी रू रही थी उसकी बेटी को क्या हुआ था अचानक हवा में उठ गयी थी और झटके खाकर गिरी और बेहोश हो गयी ...... डॉक्टर को भी फ़ोन किया लगा किसी ने कोई जादू मंतर किया है .

जाने ने तीनो को चुप करा के समझाया की सब ठीक है उसके साथ पहले भी हुआ है , अब कोई दिक्कत नहीं है . डॉक्टर को भी वापिस भेज दिया तब मीणा ने एक मंतर जाने के मैं में कहा मानसिक संपर्क करके की इसका उपयोग करो सबको कुछ याद नहीं रहेगा .

जाने भी मैं में ," मीणा मुझे जल्दी लेने भेजो आर्यन को मेरा यहाँ मैं नहीं लगता प्लीज में तुम सबसे दुर्र नहीं रह सकती ".

मीणा ," बस एक वीक और इंतज़ार करो फिर आर्यन और गीता दोनों वहां आएंगे तुमको लेने , बस कल आर्यन की सबसे फ़ोन पे बात करा देना इनको अच्छा लगेगा ".

जाने ने मंतर पढ़ के सबकी उसके हवा में उठकर झटके खाने की मेमोरी हटा दी , अब उसके अंदर भी एक स्पेशल पावर थी आखिर 3रद प्रिंसेस जोह थी मगर अब उसको अपने पिछले जनम का अधूरा काम पूरा करना था आर्यन के साथ मिलकर आखिर उसके प्रिंस की आत्मा भी आर्यन के अंदर थी .

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दिल्ली में फार्महाउस पे मीणा की शील्ड थी तोह किसी को सारू , मीणा और डॉली के हवा में उड़ते सरीर के बाद शक्ति प्राप्त होने के झटकों का पता न चला पर जब भूकंप के झटके आये तोह सब जाग गए और निच्चे उतर के गार्डन में पहुंचे ......

निर्मला ( आर्यन की चची ) को देखकर सब बहोत खुश हुए और गले मिले , सबको मीणा ने बतया की उत्तरी भारत में अर्थक्वेक आया है ........ न्यूज़ में आ रहा है .

रति ने पुछा ," आर्यन तोह ठीक है न, उसको फ़ोन मिला अभी ".

मीणा ," नानी माँ 4:10 मं हुए हैं वह सू रहा होगा सुबह बात कर लेना, अब आप ठीक हो ?"...... उनको गले लगा कान में बोली जल्दी आकर आपके पास hi रहेगा अब शांत हो जायो .

गरिमा ," अणि दीदी और प्रभा नहीं दिख रही दोनों कहाँ हैं ?"

मीणा ," अणि उसको अपने साथ अपने ऑफिस ले गयी है , उसका वहां लक्ज़री सुईठे जोह है दोनों पक्का कोई कम्पटीशन कर रही होंगी ...... है है है है ".

रति ," मुझसे भी नहीं मिली प्रभा , आने दे उसके कान खींच ने पड़ेंगे बड़ी हो गयी तोह अपनी नानी को भूल गयी ".

सारू हसकर बोली ," माँ तू प्रभा के कान को छूने भी नहीं वाली बस अपने से चिपका के रखेगी जैसे गीता को रखती थी ....... चलो अब सब अंदर और बिना बेटी सबके लिए कॉफ़ी का अरेंजमेंट कर अभी जल्दी नींद नहीं आएगी ".

सब अंदर चल दिए तब निर्मला ने सारू का हाथ पकड़ के रोक लिया ," दीदी एक बात बोलनी है ".

सारू हसकर उसको गले लगायी जोह उससे भी 3 इंच लम्भी थी और उसके पेट पे हाथ फेर के बोली ," दिवार के भी कान होते हैं, मेरा आशीर्वाद तेरे साथ है बस खुश रह "........

जेठानी ने इशारे में hi सबकुछ अपनी देवरानी को समझा के प्यार से पुचकार भी दिया इसीलिए सारू को सब पसंद करते थे की वह गलती से पहले आदमी की सोच देखकर बात करती थी , ना की अपराधी बना के सवाल करे .

अपने पति राज को भी समझे थी मंजू ना समझ है पर तुम तोह सब अच्छे से जानते हो ुष बेवकूफ औरत को फिर से प्यार हो गया तुम्हारे बेटे से. पर वह भी ुष दिन टेश में सारू को भी कटघरे में खड़ा कर दिया पर वह सुन्न ली मगर अपनी माँ , रतिदेवी का अपमान सहन न कर पायी और अपनी पति को थप्पड़ मार दी . सायद सारू के लिए उसकी माँ के 100 खून भी माफ़ क्योंकि इतना प्यार करती थी अपनी माँ से .

निर्मला सुबकते हुए बहोत कुछ बोलना चाहती थी पर इतना hi कहा की," आर्यन के ऊपर खतरा है संजय बहोत गन्दा प्लान बना रहा है" .

सारू ," बस चुप रह और खेल देख वह खुद अपने hi मोह पे थूकने वाला है उसको पता भी नहीं चलेगा . चल अंदर तेरे लिए खुश खबरि है पर प्रभा hi आकर बटेगी बस शांत रह बच्चे पे ध्यान दे ".

दोनों अंदर आये फिर सब ने निर्मला को घेर लिया अपने प्रसूनो से साउथ अफ्रीका में सब कैसे हैं ..... वेगरा वेगरा .....

सबसे अच्छी बात निर्मला सबको खुलकर आंसर दे रही थी जोह बहोत काम होता था ...... आर्मी ब्रिगेडियर की एकलौती बेटी थी और डबल माँ इंग्लिश , हट सबसे ज्यादा थी औरतें में पर मॉडल फिगर था जवानी में पर कुछ हद तक अभी भी मेन्टेन ..... कबड्डी , स्विमिंग , लॉन्ग जम्प , हाई जम्प , ट्रिपल जम्प चैंपियन थी यूनिवर्सिटी तक फिर शादी हुयी अपने पसंद के लड़के से पर था गाओं का संजय सिंह , अपने दो बड़े भाई की तरह इंजीनियर . अपने ज़माने की तेज और फरहत लड़की पर गाओं के ससुराल में उसको दो hi लोग पसंद आये अपने जेजटजी राज सिंह और सबसे छोटी जेठानी सारू .

दोनों उसको छोटी भें की तरह प्यार करते थे और पूरा रेस्पेक्ट देते थे .

बाकी सबसे काम hi बात चीत होती पर आर्यन ने आकर उसको सब सपने पूरे करने के अरमान जगा दिया ...... मेरा भी ऐसा hi बीटा होता तोह उसको यह सिखाती यह करती पर जब बेटी हुयी तब खुश hi हुयी, आर्यन भी चालू था अपनी चची का दूध पीटा पर प्यार hi इतना करती थी आर्यन से की कभी वह उससे अलग था hi नहीं .

प्रभा पॉलवॉल्ट में साउथ अफ्रीका को इंटरनेशनल लेवल पे रेप्रेसएंट कर चुकी थी अच्छी एथलिट थी अपनी माँ निर्मला के कारन . जब उसने एहि मनसा आर्यन के लिए जताई थी कॉलेज टाइम में तोह रति ने साफ़ मन कर दिया की वह कोई स्पोर्ट्स पर्सन नहीं बनेगा.

लेकिन निर्मला जोह सोच रही थी की ओलिंपिक में प्रभा मैडल जीते अब कहाँ होने वाला था ...... प्रभा जोह अब खुद रियल रूप में 20 फट की ऊँची 5 पहन वाली नागिन बन सकती है उसके लिए 5 मीटर कूदना क्या मुश्किल होगा ...... पर अब उसको यह स्पोर्ट्स छोड़ना होगा आर्यन और अणि की तरह .

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उधर ुशी रस्ते से वापस आते हुए आर्यन ने गीता को मन लिया तोह खूब खिला खिला के हस्ते हुए आर्यन से मजाक कर रही थी बाकी सब चुप hi थे .

गीता हसकर ," इतना सनता क्यों है भाई कोई मर्डर गया क्या ...... है है है है ...... यह मेरा लवर है और मेरा यही स्टाइल है प्यार करने का भी कोई जले या चिड़े पर एक टाइम था में इसको जान से मारने की कोशिश की पर यह मरता hi नहीं था ...... अब तोह मुझे भी लग रहा है दूसरे भरमांड के राजकुमार की शक्ति है इसके अंदर ..... hi hi hi hi ".

आर्यन ने उसकी एक चूची दबा के कान काटा ," उसकी तोह पता नहीं पर तेरे लिए स्पेशल शक्ति है मेरे पास "..... और उसको अपनी गॉड में चढ़ा लिया तोह गीता को उसका हार्ड लुंड अपनी ड्रेस के निच्चे गांड की दरार से छूट तक फील हुआ .....

गीता हसकर ," सुधर जा कही भी सुरो हो जाता है ..... hi hi hi hi hi ".

दीप्ति ने अपनी ख़ामोशी तूड़ी ," कभी माहि ने आपको मारा ..... ी मैं .... यू अंडरस्टैंड न ".

गीता हसकर ," बस एक बार मारा था में फर्श पे पड़ी थी , अरे तू टेंशन न ले हमको आपस में लड़ना मन्ना आता है बस तू संभल के रहना बहोत जालिम है प्यार प्यार से दबोच लेगा फिर तू चिक्ति रह यह न रुकेगा ..... है है है ".

दीप्ति ," दीदी आप भी कुछ तोह शर्म करो और भी लोग साथ हैं और यह दोनों घोड़े भी हमारी बातें सुनकर समझ लेते हैं ".

आर्यन ," हम पहुंचने वाले हैं पहले भगवन शंकरजी के दर्शन कर खजाना को वहां पहुंचा देता हूँ फिर राजमहल चलते हैं ".

तीनो के साथ दानव भेने भी शंकर भगवन के ुष प्राचीन मंदिर के दर्शन किये जोह गुफा से निकल के बाड़ा आता था ....... अब भी समय रुका हुआ था जब गुफा से बहार निकले तोह सुबह के 4 hi बजे थे ...... दिव्या तलवार की माया शक्ति यहाँ ख़तम हुयी .

आर्यन ने दिव्या तलवार को याद करके शिवलिंग के सामने रख दी ...... चमत्कार hi हो गया पूरा मंदिर फिर से नयी जगमगत से चमकने लगा और जोह रोड से रास्ता था वहां बिलकुल साफ़ सुथरा हो गया .

अभी अँधेरा था पर सुबह पक्का भीड़ ीखता होने वाली थी ...... सहायक को आदेश देकर जब आर्यन ने दिव्या ख़ज़ाने वापस पहुँचने का कहा तोह 2 सेक् बाद भी दिव्या तलवार गायब हो वापस आ गयी .

सबने फिर से भगवन के आगे शीर्ष झुका दिया और अब राजमहल की तरफ बढ़ने लगे 10 मं बाद तभी 4 कार उनके आगे आकर रुकी यह आर्यन की टीम वाले थे ...... जोह मीणा ने कॉल करके भेजी थी .

तीनो दानव कन्या, दीप्ति की तरह योद्धा ड्रेस में थी , आर्यन ने अर्जुन को गीता के साथ फार्महाउस भेज दिया अपने टीम के साथ..... साया , चाय और माया भी साथ थी .

दीप्ति आगे बैठी थी और आर्यन पीछे चेतक पे , जैसे जैसे आगे बढ़ रहे थे अलवर के राजमहल की तरफ वैसे वैसे hi दिल में एक आनंद सा भरता जा रहा था दीप्ति के . अपने रोक न पायी और अपने प्रीतम की तरफ सर घुमा के उसके लिप्स चूम ली ......" ी लव यू माहि , में आज कितनी खुश हूँ बता नहीं सकती ".

आर्यन ने उसका के गाल पे काटा ," पता है इतनी हिम्मत तुम में नहीं सबके सामने चूम के बता पाओ कितनी खुश हो , मेरी चंदा रानी होती तोह सबके सामने चूम लेती ".

दीप्ति शर्मा के ," किश में भी कर सकती हूँ पर कुछ मर्यादा मैंने अपने लोगों की भी रखनी है , आप चाहिए तोह सजा दे सकते हो ".

आर्यन ने उसका सर चूम के कहा ," इशलिये मुझे सपनो में याद करती थी यह आएगा तोह में सजा मागूंगी ..... मैडम प्यार और शादी की है कभी तुम्हारा सर झुकने नहीं दूंगा बस कुछ दिन और तुमको दुर्र रहना होगा हमारे जन्मदिन तक फिर पूरा प्यार करूँगा ".

दोनों चेतक पे बैठे अंदर राजमहल की तरफ चलते hi जा रहे थे जोह सैनिक देखता बस सर झुका के घुटने के बल हो जाता , इतनी सुबह राजकुमारी जी और नए होने वाले कुंवरजी कहाँ से आ रहे हैं ? पर पूछे क्यों ?

पहले गेट से hi सूचना पहुंच गयी थी की राजकुमारी जी और कुंवरजी दोनों राजमहल के मुख द्वार पे पहुंच रहे हैं .

पूरे राजमहल के गनमैन लोग के साथ राजा त्रिभुवन सिंह , राजा जबर सिंह , राजा रघुभार सिंह , राजगुरुजी के साथ दीप्ति की दोनों रानी माँ , रानी मिरदुला और जबर सिंह की तीनो रानियां थी .......

सब के दिल में खुसी हुयी जब चेतक अपनी मटक मटक चाल में Aryan-Deepti को द्वार तक लाया ......

आर्यन उतर के निचे घुटने पे बेथ गया तोह शरमाते हुए दीप्ति उसके लेफ्ट घुटने पे प्यार रख के उत्तरी ...... आर्यन ने खड़े होकर उसका हाथ पकड़ के कहा ," राजा साहब राजकुमारी दीप्ति जी का जीवन सुरकषित है मैंने अपना वादा पूरा किया ".

दोनों ने झुकार सबको हाथ जोड़कर प्रणाम किया ...... दोनों रानी माँ दीप्ति से रट हुए लिपट गयी वहीँ रानी मिरदुला ने आगे बढ़कर रोटी हुए आर्यन को गले लगा लिया .

िश मिलाप को देखकर जहाँ सबकी आँखों में आसूं थे पर दो साक्ष अभी भी ुष चीज को ढूंढ रहे थे जिसको देखने लिए खड़े थे ....... पर बुराई को दिखती कहाँ है सहायक ?

सहायक , एहि नाम है ुष दिव्या तलवार का जिसको पतलोक की तरह यह राजपूताना वाले भी अपनी शान समझते थे ...... ?

हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट
 
अपडेट - 35

PART - 1 ( राजवंश)

इंट्रोडक्शन.......

राजा योगराज सिंह (डेड) ..... दीप्ति के पिता

रानी सुमति (डेड).... त्रिभुवन मदर

रानी मृदुला ...... आगे 55 यरस , दीप्ति की माँ अब 38 यरस की लगती है ठीक होने के बाद . 21 साल निर्जीव अवस्था में थीं .

राजा त्रिभुवन सिंह .... आगे 45 यरस

रानी संगीता सिंह .... आगे 43 यरस

रानी जमुना सिंह .... आगे 39 यरस

.....िंह तीनो ने दीप्ति को अपना वररिस बांया गॉड लेकर , अभी तक निस्तान हैं.

राजकुमारी सुचित्रा सिंह , 36 यरस .... रानी मृदुला की पहली बेटी .

राजकुमारी दीप्ति सिंह* आगे 21 यरस .... रानी मृदुला की दूसरी बेटी ... इसकी और आर्यन की शामे बिरथ डेट और आगे है . ( राजा त्रिभुवन सिंह ने इसको गॉड लेकर अपनी बेटी और उतरा अधिकारी बना लिया है इसिलए यह इनको और दोनों रानियां को पापा मम्मी hi बोलती है )

राजगुरु जी = राजा त्रिभुवन सिंह के राज्य के राजगुरु , आगे 90 यरस.

राजा रघुभार सिंह , रानी मिरदुला के बड़े भाई, और राजपूताना शाही ( रॉयल) कौंसिल के एक्स हेड , अभी सन्यासी हो गए हैं. आगे 70 यरस .

राजा जबर सिंह , राजा रघुभार सिंह का बीटा ..... प्रेजेंट कौंसिल हेड, आगे 47 यरस , 3 बीवियां हैं पर अभी तक निशांतन है ..... बहोत घंडी और लालची है.

रानी कावेरी ...... आगे 44 यरस

रानी जौला ...... आगे 37 यरस

रानी पुष्प ..... आगे 32 यरस

राजा रघुभार सिंह की दो छोटी बेटियां भी जल्दी आने वाली हैं स्टोरी में .....

रानी मंदाकनी ....... आगे 37 यरस , 2 बचो की माँ है , पति से अलग दिल्ली में रहती है .

रानी लीलावती , आगे 28 यरस , विधवा है और एक तीन साल की बेटी है ...... अपनी रियासत की महारानी है जोह राजदरबार चलती है पर उसके खिलाफ भी उसका मंत्री मंडल है जोह राजा जबर सिंह के डर से कुछ नहीं कर सकता .

फिगर 36 -28- 38 hi होगा पर हट 6'3" थी अपने बाप राजा रघुभार सिंह भी एक इंच लम्बी ...... पहली नज़र में hi अपनी ममेरी भें ,दीप्ति के फिएंसी, आर्यन को दिल दे बैठी .

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अब आगे........

नीला ने आर्यन के रूम गीता को दिया फार्महाउस पे और तीनो दानव भेने ( साया, चाय & माया) एक hi डबल बैडरूम में सू गयी ..... अर्जुन की जॉकी और ट्रेनर उसकी खातिरदारी में लग गए आखिर बहोत लम्बा सफर और टेंशन झेल के आया था .

उधर राजमहल के द्वार पे सबसे मिलकर आर्यन जब चेतक को उसके अस्तबल में ले गया तोह वहां एक जवान घोड़ी देखकर चेतक की आँखों में चमक आ गयी ......

आर्यन उसकी भासा में बोलै ," यह तेरी पहली गर्लफ्रेंड मेरी तरफ से पर ध्यान रखना , तेरा ट्रेनर तेरी मदद करेगा नहीं तोह जोश में पागल मत हो जाना ".

चेतक भी खुश होता हुआ ," में आज से गीता दीदी की तरह तेरा भी गुलाम हो गया सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप ....... सच्चा राजपूत है तू अपने वाडे का पक्का है ...... मरते दम तक तेरी सेवा करूँगा पर राजकुमारी hi मेरी मालकिन रहेंगी ".

" अरे भाई चाट मत ..... hi hi hi hi ..... मैंने तोह तुझे पहली बार में दोस्त बना लिया था और हम आगे भी दोस्त hi रहेंगे चल ऐश कर मिलते हैं जल्दी hi अर्जुन भी यहाँ रहेगा कुछ दिन तेरे साथ "...... आर्यन ने उसकी गर्दन और सर सेहलते हुए उसके ट्रेनर को समझा तो वह भी कुंवरजी की पास सर झुकए सुनता रहा .

आर्यन राजमहल के राजदरबार में पहुंचा तोह सब घर के hi बैठे थे और दीप्ति भी उनको पतलोक के किस्से सुनाये में लगी थी पर जब 2 दानव (धरतीपकड़ और वातासुर ) और एक 3 पहन वाली नागिन ( विशाखा) को मारने की बात बताई तोह सबकी डर से रूह hi कांप गयी की Aryan-Deepti कहाँ तक पहुंच गए दिव्या तलवार के लिए पतलोक के नागलोक तक .

आर्यन जब सबके पास पहुंचा तोह दीप्ति ने अपना सर धक् लिया चुनरी से जोह अब ड्रेस चेंज कर राजकुमारी की ड्रेस में थी . आर्यन को अपने सिंघासन पे उसको बैठे को कहा खड़े होकर .......

आर्यन मुस्करा ," नहीं दीप्ति , तुम भले hi मेरी पत्नी बनोगी विवाह के बाद पर तुम्हारा जोह स्थान है वह वही रहना चाहिए ....... तुम राजकुमारी हो , कल महारानी भी बनोगी िश राज्य की तोह कोई तुम्हारी जगह नहीं ले सकता में भी नहीं. हाँ मेरे साथ मेरे घर में तुम मेरी बीवी की तरह hi रहोगी वहां खूब सेवा करना हम सबकी क्यों गुरूजी मैंने सही कहा न ".

राजगुरुजी ," पुत्र आर्यन , यह तुम दोनों के बिच की बात है पर तुमको राजकुमारी का साथ देना hi होगा और जब जरुरत होगी उसके साथ राज सिंघासन पे बैठना होगा . तुम अपनी जिम्मेदारी दीप्ति को दे सकते हो पर यहूदा नहीं . फिर उसकी शक्ति तुमसे hi दिखेगी ".

आर्यन भी उनकी बात मानते हुए हाथ जोड़कर बोलै ," जैसा आप केहन गुरूजी पर में सिर्फ दीप्ति के लिए यहाँ आया था और अब हमारे रिश्ते को आप सब का आशीर्वाद है तोह वापस जाना चाहूंगा मेरे घरवाले भी मेरी प्रतीक्षा कर रहे होंगे ".

दीप्ति ने तुनक के सबके सामने उसका हाथ पकड़ा और अपने सिंघासन पे जबरदस्ती बिठा के कहा ," आप अभी कहीं जा रहे हैं क्यों पिताजी महाराज ".

राजा त्रिभुवन के साथ बाकी सब भी हसने लगे ," कुंवरजी आप हमारी विनती तोह ठुकरा सकते हो पर राजकुमारी से नहीं जीत पयोगे तर्क में फिर कल hi रात तोह आपके घरवाले गए हैं यहाँ से और अब यह भी आपका परिवार hi है अगर आप अपना मानते हो तोह ".

तभी दीप्ति की दासियाँ सबके लिए कॉफ़ी और कई तरह के स्नैक्स लेकर आयी ...... दीप्ति खुद अपने हाथ से आर्यन को सर्वे की तोह उसने भी अपने हाथ से सबके सामने खिलाया तोह शर्मा के खा ली .

आर्यन ने सबकी तरफ बारी बारी देखा तोह जबर सिंह की बेचैनी देखकर मैं में हँसा और रघुभार सिंह भी दिखा ख़ुशी रहे थे चेहरे से पर तनाव बहोत था ........ दीप्ति की कहानी ने hi उनकी सोच को भी तोड़ दिया था यानी स्वेछा से hi आर्यन, दिव्या तलवार को दे सकता है उसका या दीप्ति का मुकाबला करना प्राण घातक होगा .

रानी मिरदुला ," आर्यन , वहां नागलोक में तुमको ुष नागिन ने पत्थर में बदल दिया था kya?......yeh दीप्ति बोल रही थी ".

आर्यन ," हाँ माजी बस उसकी सैम मोहन शक्ति में फस गया था तब दीप्ति ने दिव्या तलवार को उठा के उसकी शक्ति से मुझे नार्मल किया था नहीं तोह वहीँ मारा जाता ".

रानी मिरदुला कड़ी होकर आर्यन को गले से लगा ली ," ऐसा नहीं बोलना कभी , मारे तेरे दुश्मन तुम तोह लाखो में मेरे एक बीटा है ".

आर्यन भी उनका माथा चूम के बोलै ," माजी थक गया हूँ और दीप्ति भी थक गयी हो गयी वहां हम 40 घंटे से ज्यादा थे पर समय यहाँ के लिए रुका हुआ था ....... बस थोड़ा बहोत आराम किया था ".

राजगुरुजी ," सही बात है , तुम दोनों आराम करो और आर्यन यह राज्य तुम्हारा हमेशा ऋणी रहेगा जिसकी राजकुमारी के प्राण तुमने अपनी परवा किये बिना बच्ये हैं ".

आर्यन भी मुस्करा के ," गुरूजी , इतना तोह मेरा कर्त्तव्य था ".

रानी मिरदुला जब आर्यन को उसके कक्ष में आराम करने को बोली तोह जबर सिंह से रुका न गया ," कुंवरजी वह दिव्या तलवार और ख़ज़ाने का क्या हुआ ".

आर्यन ने मुस्करा के दीप्ति को देखा तोह वह भी मुस्करा दी ...... " राजा शभ वह दोनों तोह इसी राजमहल में हैं , राजकुमारी के पास ".

आर्यन ने जैसे बम hi फोड़ दिया था यह कहकर , कहाँ , कैसे , किधर हैं .... सबके सवाल थे .

दीप्ति मुस्करा के राजा त्रिभुवन सिंह की तरफ देखकर बोली ," पिताजी महाराज खज़ांने अपनी जगह तेहखने में आ चूका है पर सहायक ने अपनी जगह अलग चुनी है ".

राजा त्रिभुवन सिंह ," सच्च , क्या यह सच्च है पुत्री की दिव्या खज़ाना हमारे तेहखने में वापस आ गया ..... हे भगवन तेरा लाख लाख सुकुर है . अपने सुना गुरूजी , छोटी माँ , मामाजी , जबर सिंह जी आपने सुना राजकुमारी ने क्या कहा ....... मुझे विश्वास नहीं हो रहा है ".

एहि हालत सबकी थी पर रघुभार सिंह आर्यन दीप्ति को मुस्कारते देख रहे थे....... जब सब शांत हुए तब दीप्ति ने कहा ," सहायक , एहि नाम hi दिव्या तलवार का उसने अपने वररिस को चुन लिया है और अब ुशी के पास रहेगी ".

जबर सिंह ,"इसका मतलब क्या है राजकुमारी ?"

दीप्ति पलट के ," मतलब ये डॉ सा ( बड़े भैया ) उसने माहि को अपना वररिस चुना है अब मेरे पीठ का नक्शा गायब होकर इनके सीने पे आ गया यानी अपने मालिक के पास ".

जबर सिंह ने अपने बाप की तरफ देखा तोह उन्हों ने हाथ उठाकर चुप रहने को कहा और आर्यन से बोले ," कुंवरजी क्या हम उसको एक झलक देख सकते हैं ".

आर्यन ने दीप्ति की तरफ देखा तोह उसने हाँ में सर हिलाया ...... तब आर्यन ने जोह बोलै उसको सुनकर रघुभार सिंह भी लज्जित हो गए .

आर्यन ," राजा रघुभार सिंह जी , आप सब देख सकते हैं पर अगर कोई भी काली शक्ति यहाँ है और किसी के मैं में लालच तोह वह उसको देखकर hi भसम हो जायेगा उसकी तेज रौशनी में, इशलिये वह दिव्या तलवार है आप कहे तोह में उसका आह्वान करता हूँ पर अपने गुलामो को हटा लीजिए नहीं तोह उनके साथ आप भी मारे जायेंगे ".

सब जैसे चौंक hi गए पर रघुभार सिंह जानते थे आर्यन की शक्ति बहोत ज्यादा है और अब दिव्या तलवार जब खुद उसके पास है तोह कोई हरा नहीं सकता .

जबर सिंह फिर से बोलै ," तुम हमको डरा रहे हो यह मत भूलो की वह अलवर राज्य की सम्पति है दिव्या ख़ज़ाने की तरह ".

दीप्ति बिच में बोल पड़ी ," आप भी मत भूलिए की खुद स्वयंवर जीत के अब महार्यं सिंह hi ुष गद्दी का वररिस है "...... उष्ण राज सिंघासन की तरफ इशारा किया जिसपे राजा त्रिभुवन सिंह बैठे थे .

राजा जबर सिंह भी किलास के ," दिव्या तलवार फिर तुम्हारी होनी चाहिए न राजकुमारी जैसे दिव्या खज़ाना भी तुम्हारा है ....... मेरे यह कहने का मतलब था ".

दीप्ति ," ठीक है फिर माहि दिखा hi दो सहायक को िंह सबको जब मौत का वरदान अपने मोह से मांग रहे हैं ".

राजा रघुभार सिंह ," नहीं , कोई जरुरत नहीं है , तुम ठीक कहती हो पुत्री महार्यं सिंह hi उसका वररिस है और रहेगा . जबर अपने लालच में प्राण क्यों गवना चाहते हो जोह इतनी पवित्र शक्ति है . माफ़ करना आर्यन हम भी लालची हो गए थे और में सबसे चमा मांगता हूँ की मैंने उसको पाने की चेस्टा की ".

रघुभार सिंह ने आँख बांध कर अपने काली शक्ति के योद्धा और सैनिक वहां से मंतर पढ़कर गायब कर दिए ....... उठकर और सर झुका के वह राजदरबार से बहार जाने लगे तब आर्यन ने उनको पुकारा ," राजा रघुभार सिंह जी , आप एक बार अपने राजपूताना की शान को नहीं देखना चाहेंगे किसी को कोई छाती नहीं होगी ".

आर्यन ने सहायक पुकारा तोह neeli-safed रौशनी से नहीं दिव्या तलवार ने पूरे राजदरबार को चकचोँद कर दिया पर अगले hi सेकंड वह काम तेज में थी ...... सब विश्मये से आर्यन के हाथ में दिव्या तलवार को देखकर जैसे भावुक hi हो गए ......

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दीप्ति ," मांजी यह दिव्या तलवार कभी अलवर की थी hi नहीं न hi धरतीलोक की है यह दूसरे भरमांड से आयी है और पतलोक तक इसका जाना सिर्फ माहि को बुलाने का मकसद था , इसको धारण करना तोह दुर्र इश्को छु भी नहीं सका कोई आजतक 14 लोक में . माहि hi इसका मालिक है जिसको यह ढूंढ रही थी जबकि आप सब उनको वारिस समझ रहे थे . माहि के अल्वा कोई इश्कि शक्ति झेल hi नहीं पायेगा".

राजगुरुजी ," रघुभार तुम तोह इतने धीरवान और समझदार राजा रहे हो क्या कभी कोई नियति बदल सकता है ..... हम सब भाग्यसाली है की Aryan-Deepti के कारन हमको इतनी दिव्या शक्ति के दर्शन हुए जोह किसी को नसीब न होगये , हमारे पुरखो को भी आज नाज होगा दोनों पर ".

आर्यन ," आप बेफिक्र रहिये राजा रघुभार सिंह जी , सहायक मेरे एक हाथ में और दूसरे हाथ में दीप्ति का हाथ पकड़ के हमेशा राजपूताना की शान रहेगी जबतक जीवित हूँ पर कोई देख नहीं पायेगा यह आप भी अब जान गए हैं ".

सबने आर्यन के सीधे हाथ में दीप्ति का हाथ थामे देखा दुसरे में दिव्या तलवार को तोह नतमस्तक होकर प्रणाम किया फिर तेजी से रौशनी फैलती सहायक गायब हो गयी.

रघुभार सिंह की आँखों में पश्चाताप के आंसूं थे , सही टाइम पे बुराई का रास्ता छोड़कर अच्छे को गले लगया पर जबर सिंह पे नज़र पड़ी तोह वह बेहोस था , उसकी रानियों ने उसको उठाया पर वह हिल भी नहीं पा रहा था.

आर्यन ने आगे बढ़कर कहा ," एक मं महारानी जी मुझे देखने दिज्ये वह बस अचेत हुए हैं ".

आर्यन ने जबर सिंह के सर पे हाथ रखकर मंतर पढ़ा तोह उसकी आंखें खुल गयी पर डर अभी भी रहा था .

आर्यन ," घाबरिये नहीं , अब ठीक हैं थोड़ा विश्राम करेंगे तोह जल्दी ठीक हो जायेंगे ".

राजगुरुजी ने जब राजा त्रिभुवन सिंह की तरफ देखा तोह वह बिलकुल ठीक था यानी उसको अब कोई लालच नहीं था . उसने पहले hi आर्यन को अपना दामाद मान लिया था .

सबने आर्यन का बहोत आभार प्रकट किया और आशीर्वाद दिया .

आर्यन ," में आपसे एक बात कहना चाहता हूँ बस विनती hi है , दीप्ति को में सच्चे दिलसे प्यार करता हूँ वह बात अलग है की मेरी कई पत्नी हैं उनके hi बराबर. में कभी राज सिंघासन नहीं संभल पाउँगा हाँ हम दोनों अलवर के राजकुमार और राजकुमारी hi रहेंगे जब तक राजा त्रिभुवन सिंह जी जीवित रहेंगे , दिव्या खज़ाना यहीं अलवर में hi रहेगा और दिव्या तलवार भी ुष ख़ज़ाने की रक्षा करेगी पर मुझे जरुरत होगी तोह मेरे पास स्वयं आ जाएगी . बस यह विनती आप सब मान लीजिए , मेरे ऊपर मेरे परिवार की hi बहोत जिम्मेदारी हैं . दीप्ति जब चाहेगी में इश्के साथ आऊंगा जितने दिन कहोगे रहूँगा पर मुझे बांधो मत िश राजगद्दी से ".

आर्यन अब सबसे इज्जाजत मांग रानी मिरदुला और दीप्ति के साथ उनके कक्ष में आराम करने चला गया .......

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सब सकते में hi थे की आर्यन ने सब पाकर भी वापस कर दिया , दिव्या खज़ाना और दिव्या तलवार भी .......

राजगुरुजी ," तुम कुछ कहना चाहोगे रघुभार या त्रिभुवन या जबर तुम hi कुछ कहो की आर्यन क्यों सब यहीं छोड़ रहा है ...... सायद तुम समझ hi नहीं पाए वह सिर्फ दीप्ति को लेने आया था तुमने स्वयंवर करवाया वह भी जीत लिया , दिव्या तलवार और ख़ज़ाने माँगा वह भी ले आया और बगैर कोई लालच किये तुमको दे दिया ....... उसको असली खज़ाना बस दीप्ति लगी वह तुम सब से मांग लिया . किस्मत वाले हो जोह ऐसा दामाद मिला है ".

राजा त्रिभुवन ," गुरूजी हम शर्मिंदा होने के अल्वा कर hi क्या सकते है , उसको देखकर hi लगता है जैसे हम कंगाल और छोटे दिल वाले छोटी सोच के लालची लोग हैं . मैंने भी गीता को मारने में उसके चाचा मां का साथ दिया था पर फिर भी उसने दीप्ति को अपनया और उसकी जान बचाई ".

रघुभार सिंह ," जबर हम सबसे बहोत बड़ी भूल हुयी है , तुम भी सब भुला के नयी शुरवात करो जिस ख़ज़ाने और तलवार के लिए सब किया अब यहीं है . आज अलवर राज्य सबसे धनि और शक्तिशाली है पर ुष आर्यन के सामने हम कंगाल hi निकले . उसके पास अपने परिवार और प्यार की दौलत है ".

जबर सिंह ," में तोह मौत hi देख लिया था तलवार का इतना तेज , जब देख hi नहीं सकते उसको धारण कैसे कर पायेगा कोई और आर्यन जोह धारण कर सकता है उसको उसकी शक्ति का जरा भी लालच नहीं ".

राजगुरुजी ," भविष्वाणी एहि थी की दिव्या तलवार का वारिस सब ठीक कर देगा और त्रिभुवन मुझे लगता है दीप्ति भी अब राजगद्दी की तरफ नहीं देखेगी , उसको अपना साथी और जीवन का मार्ग मिल गया है बस दोनों की शादी धूम धाम से करना ".

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आर्यन के बाजु लेती रानी मिरदुला अपने स्तन से उसको दूध पीला रही थी दीप्ति के अपने कक्ष में जाने के बाद ......

डबल ममता का जादू था की दोनों बच्चे अलग अलग जनम के उसके साथ थे ....... मगर वह तोह उसको दूध पिलाते हुए पुरनी रासलीला को याद करने लगी जब 'काले योद्धा' ( महार्यं) ने उसकी जान बचा के अपनी औरत बांया था ....... क्या रौंध रौंध के छोड़ा था ुष अस्तबल में . 2 साल बाद पता चला की जिस काले योद्धा से छुड़वा रही थी जिसकी लुगाई थी वह उसका सागा बीटा है जोह बचपन में बेदखल कर बेच दिया गया था .

"अह्हह्ह्ह्ह काआत मत ......" आर्यन ने उसकी दूध ख़तम होने के बाद चूची को काटा तोह होश में आयी ...... छूट तोह पिण्या hi गयी थी पर आज एक फिर जानूं सवार हो गया की रौंध दाल मुझे , दिला मुझे याद में तेरी लुगाई थी .

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रानी मिरदुला

झट से खुली चोली में hi मिरदुला आर्यन को सीधा कर उसके ऊपर लिअत के उसके होंठो से अपने होंठ टच करके बोली ," माहि आज मुझे फिर वही पहले मिलान का पल याद दिला दे ".

आर्यन मुस्करा ke,"matlab क्या याद दिलं".

मृदुला ने उसके होंठ पे काटा ," एहि मादरचोद अपनी िश लुगाई को कितनी बुरी तरह छोड़ता था ".

आर्यन की तोह सिटी पित्ती गम हो गयी यह क्या बोल रही है मेरी मैया ......

मिरदुला ने उसका गाल अपनी जीभ से चाट के कहा ," इतना काला भूसंद जैसा था पिछले जनम में और अब तोह लड़कियां भी तेरी सुंदरता के सामने फीकी हैं , तू ने ग्रह की कोई औरत नहीं छोड़ी थी जोह तेरे निच्चे न आयी हो तेरे काले मुसल लौड़े की आग भुजने . तू शर्मा मत में फिर से तुझसे वही प्यार पाना चाहती हूँ , माना अब गलत है पर मुझे वही तेरा जंगली पाना चाहिए ".

फिर अगले 10 मं चूम चूम के आर्यन को विश्वास दिलवाई की वह उसकी ख़ास लुगाई थी वह बात अलग है बाद में पता चला की तू hi मेरा सागा बीटा है पर हम दोनों का रिश्ता वही रहा .

आर्यन भी अपनी सोच में यानी में पिछले जनम में भी मादरचोद , भेनचोद सब था . अब क्या बोलूं मगर मैया को कुछ तोह समझाना पड़ेगा.

आर्यन ," मैया मेरे एक बात सुन ले फिर जोह तू बोले , देख मेरे कई शादियां होंगी और मेरे कई औरशन से समभंद है ".

मिरदुला ने आर्यन का गाल काटा ," मुझे मीणा ने सब बता दिया है तभी तोह और आग भड़क गयी है फिर मेरा सबसे पहला हक़ है तेरे पर . तुझे यहाँ मेरी 5 बहुओं को भी अपना बीज से हरा करना है सब पता है . सुचित्रा तोह तेरे आगे पीछे घूमती है उसको भी खुश किया न ".

आर्यन आंखें बंद कर सब सुनता रहा की यह मीणा भी न क्या क्या गुल खिला के गयी है साला क्या इज्जत रह जाएगी मेरी.....

रानी मिरदुला ने अपनी चोली उतर के साइड में राखी और आर्यन का बनियान उतरने लगी तोह उसने भी मदद की , दोनों हाथ से उसके गाल सेहला के बोली ," माहि , तू हमेशा कड़क , गुस्सेवाला और जानवर की तरह बिस्तर में अपनी लुगाई को पेलने वाला मर्द था अब भी वही है बस थोड़ा शर्मीला हो गया है ..... िश अलवर राज्य की सबसे बड़ी रानी यानि मुझसे शुरुवात कर बाकी सबका नंबर भी आएगा, तू चिंता मत कर बस ऊँगली रख दियो वह टांग खोले अगले पल तेरे बिस्तर पे होगी ".

आर्यन ," पर दीप्ति को बुरा लगेगा ".

आर्यन का हाथ अपने दोनों चूची पे रखते हुयी ," दबा इन्हे , रानियों और राजकुमारियों का काम होता अपने राजा , अपने मर्द की सेवा करना जब वह चाहे और दीप्ति भी एक राजकुमारी है उसको कोई परेशानी नहीं होगी बस उसके साथ उसका पति जब बिस्टेर में हो सिर्फ उसका हो, बाकी तोह आती जाती रहती हैं ".

आर्यन ," पर ...... अह्हह्ह्ह्ह कान क्यों उमेठ रही है ".

मिरदुला गुस्से से ," हरामी , मादरचोद अपने तीनो खानदान की हर औरत को पेल दिया , कितने के पेट पहला के बच्चे निकाल दिया अब मुझे उपदेश दे रहा है ...... मेरा तेरे िश लौड़े पे सबसे ज्यादा हक़ है ........ हे राम यह क्या है .... "

जैसे hi लोअर में आर्यन का खड़ा लौड़ा तोपची पकड़ी तोह उसकी सांस hi अटक गयी , यह तोह कोई मोठे खम्बे जितना मोटा है और इतना लम्बा ....... आर्यन ने हस्ते हुए उसे आँख मार के अपने निच्चे गिरया और अपनी लोटस शील्ड लगा दी .......

" आज देख तू चिक्ति रहेगी पर कोई रेहम नहीं करूँगा , मेरी मैया को मादरचोद बीटा उसको रौदने वाला चाहिए ". ........ उसका गाल , माथा हूंठ सब जगह से चाटने चूमने लगा दोनों ठोस चूची दबाते हुए .

अपने खड़े लुंड के उभर को उसके राजशी गहरे के ऊपर से hi योनि प्रदेश पे रगड़ा तोह गैन गण hi गयी .......

" पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह ...... बहोत मीठी है मेरी नशीली मैया ....... "

उसका घागरे का नाडा खोल अपने प्यार से उतर उसकी पेंटी को झट से निकल के अपने आप को नंगा करने लगा तोह आँख बंद करके मिरदुला मुस्कारते हुए सोचने लगी आज भी नहीं बदला बस पहले से हर तरफ से बड़ा और सुन्दर हो गया है.

कितना हासपुस्त बाक़ा जवान है मेरा बीटा कोई औरत या लड़की बच hi नहीं सकती इसको एक बार देखकर ......

अपने पेट पे आर्यन की जीभ का स्पर्श पाकर हसने लगी ," hi hi hi ..... गुदगुदी हो रही है अह्हह्ह्ह्ह क्या कर रहा है अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मरररररररर गईइइइइइइ ...... चाट ले सब तेरे hi है बस में siiiiiiiiiii रुक जायआ नहीं मानेगा ....... "

महार्यं मादरचोद था पर मिरदुला कहाँ जानती थी की आर्यन महा मादरचोद है िश जनम में ...... चूस चाट के hi औरत की जान ले लेता है, उसका सुन्दर रूप की झलक hi एक औरत को उसका गुलाम बना देती है.

विशाखा जैसी शक्तिशाली नागिन उसको दिव्या तलवार को धारण किये देखकर एक स्त्री का रूप बदल के उसकी तरफ बढ़ी की आर्यन उसको अपना लेगा पर प्रभा और दीप्ति ने वहीँ मार गिरया उसको ताकि यह रंडी नागिन अगर आर्यन को पा ली तोह गुलाम बना लेगी फिर हम सबका क्या होगा .

विशाखा जितनी ज्यादा निर्दयी थी उससे ज्यादा खूबसूरत तोह पुरे पतलोक में कोई मादा न होगी ....... तीन तोह दीप्ति के साथ आ गयी पतलोक की दानव कन्या आर्यन की खूबसूरती और दिलेरी पे फिदा होकर और तीन अटाला lol की रानियां खुद आर्यन से मिलने आने वाली थी .......

अपनी जीभ का जादू अपनी मैया मिरदुला के योनि कुंड में दिखते हुए दो बार झाड़ चूका था पर इतने स्वादिस्ट रास की गागर को क्यों पृथक के अपने लबों से. मिरदुला ने हारकर उसके बड़े बालों को खींच के उसका सर उठाया तोह देखकर उसको भी हसी आ गयी ...... पूरा चेहरा उसके चुतरस से सना था .

आर्यन भी हस्ता हुआ उसकी तरफ बढ़ा तोह बीएड पे सीधे बैठकर मिरदुला ने अपने घाघरे से उसका चेहरा साफ़ किया और पुचकार के बोली ," माहि तू पहले से भी ज्यादा प्यारे है रे ".

आर्यन ने अपनी माँ के नितम्बों को थाम के अपनी गॉड में बिठा के पोजीशन चेंज की खुद बिस्तर के सिरहाने से तक लगा के बेथ गया ," मैया , मुझे कुछ पिछले याद नहीं है पर में इतना जानता हूँ तुजसे बहोत प्यार करता हूँ. बस अब तू ुष जनम को भूल के अपनी नयी यादें मेरे साथ बना , चल दूध पीला कमल hi हो गया तुझे दूध कैसे उतर आया है ?"........ अपना मोह उसकी चूची से लगा अपना फेवरेट काम करने लगा ......

अपनी चुत्तड़ के बिच उसका विशाल लिंग महसूस करके भी मिरदुला अपने लाडले को दूध पिलाने लगी उसके बालों में हाथ फेर के ," तुझे तोह दूध पीला दिया तेरी बेटी महिमा को भी , अब अपनी छोटी बेटी दीप्ति को कैसे दूध पिलाऊँ शर्म आती है ...... उसको मेरा दूध भी नसीब नहीं हुआ ".

आर्यन भी मोह उठाकर ," महिमा ने पि लिया तेरा दूध ..... वाओ , that's माय बेबी मेरे लिए दूध तैयार रखती है ..... दीप्ति को अपने पास सुला के एक बार अपनी चूची उसके मोह से लगा देना वह खुद डेली तेरे पास आएगी पर मेरा हक़ सबसे ज्यादा है "....... फिर से चूची पीने लगा तोह अब अपने और उसके पेट की बिच हाथ हाथ दाल के लौड़े को छूट की फांक के बिच लगा के सिसक गयी ," बहोत मोटा और लम्बा है आज मर्डर hi जाउंगी पर लुंगी जरूर , सारू को भी पता चले पहले मेरी कूख से जनमा था मेरा हक़ ज्यादा है ".

आर्यन भी सुनकर अनजान बनता 10 मिनट मैं से चूची पीने के बाद बोलै ," चल पहले तेरी आग भुजा देता हूँ पर तू झेल नहीं पायेगी इशलिये थोड़ा अंदर दाल के hi करूँगा "...... पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह ......

मीणा ने सच्च hi कहा था मिरदुला से बस उसको चूची पीला देना कभी मन नहीं करेगा पूरा दिलसे प्यार करेगा फिर आप के जीवन और तन्न पे उसका अधिकार है आप मन hi नहीं कर पयोगी ......

मिरदुला ने जब गोरा चिट्टा 'तोपची' हाथो में थमा तोह गर्वः से फूली न समायी , यह महार्यं से भी अच्छा माहि का रूप और हथियार है ...... आज िश राजघराने की छूट पे माहि की मोहर लगेगी जोह हमेशा रहेगी .

आर्यन ने उसके सिंगार टेबल से तेल लेकर दोनों के ांगों की मालिश करके उसकी छूट को खोलने लगा अपनी उंगलिओं से सहलाते हुए ....... जब मिरदुला ने इशारा किया तोह एक झटके में आधा अंदर उतार के रुका तोह वह चीख भी न पायी 5 सेक् तक....... पर मोह से थूक और आँखों से पानी आ गया ...... जितना जोश था जितना कॉन्फिडेंस था सब धराशाही हो गया आखिर वह भूल रही थी की न माहि और न hi खुद वह पिछले जनम में हैं .

हज़ारों बार महार्यं से चूड़ी होगी पर उसका लुंड जहाँ 10 इंच लम्बा था 3 इंच मोटा वहीँ िश जनम में राजा योगराज उसके पति का 6 इंच 2 इंच मोटा था , बड़े भाई राजा रघुभार सिंह का 8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा था ...... मगर आज छूट में 11 इंच से ज्यादा लम्बा और मोटाई 5 इंच से थोड़ी काम होगी ...... यह लौड़ा नहीं था जोह छूट में गया यह तोह किसे ने मोटा पाइप ठूस दिया है पर इतना सकत और गरम है .......

आर्यन ने उसके कान चूसते हुए एक हाथ से छूट का दाना सेहला रहा था दुसरे से उसकी चूची के चूचक .....

" मारर दाल हरामी , मादरचोद , कीड़े पड़ेंगे ..... मुझे रंडी समजह लिया है ahhhhhhhhhh मररररर गयी भगवान् बचा ले इससे तोह में बांज hi भली थी कुत्ते ने पहाड़ दी ...... "

आर्यन भी मुस्करा के पूछह पुछ्ह "अभी कहाँ फटती है मैया ये ले"......... और एक बार और धक्का मारा हल्का सा तोह लुंड 2 इंच बहार निकल 4 इंच और ज्यादा अंदर गया ....... बस प्राण निकलते लगे मिरदुला को पर आर्यन ने उसके लिप्स चूसते हुए अपने धक्के मारने स्टार्ट कर दिए .....

मिरदुला बस एक निरि बकरी सी दबी बस किसी तरह लुंड निकले छूट से दुआ करती ...... मगर उसकी छूट 10 मं में hi 2 बार और पानी बहा दी ......

आर्यन ने छूट से लुंड बहार निकल मिरदुला को पलट के निच्चे दबोच के फिर से किल्ला थोक दिया ..... ठप्प्प ठप्प्प थप्प्प्प ...... की आवाज ने जैसे बिस्टेर पे भूकंप ला दी हो .......

आर्यन गुर्रा के ," मैयाआ तू तोह बहोत कमजोर निकली पर तेरी छूट मजबूत है , तूने hi मुझे मादरचोद बना दिया फिर से , यह ले ......"

20 मं तक बेरहमी से छोड़ने के कारन मिरदुला बेहोस होकर पास्ट हो गयी वह 8 बार झड़ी थी पर आर्यन के टट्टे अब जाकर ठन्डे हुए पूरा खाली करके ......

आर्यन ने लुंड बहार खींचा और मिरदुला को सीधा अपने ऊपर लिटा लिया जोह बेहोश जैसी hi थी ...... दोनों सू गए ....

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पुराण जंगल.......

रानी विजयलक्ष्मी ( अणि ) , रानी पद्मा ( सारू ) और राजकुमारी मीनालोचनि (मीणा) के सामने बड़े गुरूजी और निशांक गुरूजी विरजामन थे ......

अणि गुस्से से ," भाई को उनको माफ़ नहीं करना चाहिए था , वह दोनों धूर्त हैं और त्रिभुवन को भी साथ मिला लेंगे ".

निशांक गुरूजी ने मुस्करा के अपना कटकाच रखा ," आर्यन वहां भी स्त्री ( दीप्ति ) के मोहजाल में है ".

सारू ," नहीं आर्यन कभी किसी का दिल नहीं दुखता इसीलिए गीता को साथ लेकर नहीं गया क्योंकि वह गुस्से में सबको मार देती ...... फिर दीप्ति भी अपने परिवार से प्यार करती है , उसको हक़ है अपनों को आर्यन से बचने का ".

मीणा मुस्करा के ," मुझे अभी तक समझ नहीं आ रहा की आप सब यह बात से खुश हो की मेरा भाई दिव्या तलवार को ले आया की इसी बात से दुखी की उसने दीप्ति के घरवालों को नहीं मारा ..... याद रहे वह कभी किसी के साथ गलत नहीं करता बस एक मौका उनको भी दिया है , आगे उनकी मर्जी ".

निशांक गुरूजी ," मीणा बेटी , वह वहां भोग विलास में लग जायेगा फिर तुम भी तोह एंटी स्त्रीओं को राजी hi कर के आयी हो उसके लिए ".

निशांक गुरूजी की बात पर न मीणा न सारू कुछ बोल सकते थे पर वह अपनी बढ़ी मुस्कान पे इत्र भी ना पाए थे की अणि (व्) ने कहा ," निशांक , आर्यन का यह सच्च हर कोई जानता है फिर पिछले जनम में तोह तुम्हारी 2 सगी बहेनो से महार्यं ने शादी की जबकि वह रखीअल भी रह सकती थी तोह स्त्रीओं के और उनके वरन किये पुरुष का सम्मान करना भी सीखो , आर्यन तुम्हारा गुरु भाई है उससे मजाक का रिश्ता हो सकता है पर हम में से किसी से नहीं फिर उसपर हमारे सामने कटकच करके हमारे hi प्रेम को गाली जैसा महसूस होता है. कल जब आर्यन के साथ होंगे तब भी एहि बोलोगे ".

पहली बार बड़े गुरूजी के चेहरे पे मुस्कान आयी तोह बोलने से न रुके ," हम समय से भी लड़ सकते हैं अगर सच्चा प्रेम साथ हो फिर आर्यन को प्रेम करना hi आता है ...... दीप्ति ने जोह कहानी सुनाई थी वह आधी सच्च hi है और पूरी आर्यन के जन्मदिन से पहले बाटूंगा. आर्यन हमारी सोच से परे हो चला है , वह क्या सोचता है क्या करने वाला है अब कुछ दिनों से बदल गया है यह तुम सब भी महसूस कर सकते हो....... अभी उससे सब दुर्र रहो यानी उसकी सोच से , जिस तरह उसने पूरे पतलोक को अपना मुरीद बना लिया अब डरने की भी बात है. दिव्या तलवार यानी सहायक तक मेरी शक्ति भी काम नहीं करेगी ( वैसे ुष में मेरे भी एक शक्ति है , बस मैं में hi कह पाए ) ".

निशांक गुरूजी थोड़ा गंभीर होकर बोले ," में जितना जानता हूँ वह बस मुस्कारते रहेगा और पता भी नहीं चलेगा कब जीत गया पर ऐसा hi वह मुस्कारते हुआ मारा भी गया था कोई दुःख नहीं था उसके चेहरे पे जीवन हमेशा हसकर जीना चाहिए मौत तोह सबको आणि hi है और गम कभी ख़तम नहीं होने वाले ऐसी उसकी सोच हमेशा रही है ".

सारू भी समर्थन करते हुए ," में उसको खुश रखने की कोशिश करुँगी पर अब राज भी उसके खिलाफ हो गया , में कभी आर्यन को पितृ हत्या करते नहीं देख सकती ? "

बड़े गुरूजी ," ढेर रखो पुत्री पद्मदेवी ( सारू ) ...... तुम सिर्फ यह देख रही हो राज सिंह ( आर्यन के डैडी) खिलाफ हैं पर उससे पहले िंह अलवर वालों का हाल देखो , वह खिलाफ नहीं उसको मारने की चेष्टा भी करते पर देखो दम दबा के बिल्ली बन गए उसके सामने ...... क्यों ? हमको दीप्ति कारन लग रही है मगर सच्च उसके अंदर है जोह हम देख नहीं पा रहे ".

राजकुमारी मीनालोचनि ( मीणा ) अपने सिंघासन से कड़ी होकर बोली ," अब मुझे आएगा दिज्ये जाने की ".

सबको हाथ जोड़कर वह गायब हो गयी तब अणि (व्) ने कहा ," मीणा दीदी भाई के साथ hi होंगी चाहिए वह सही करे या गलत ...... जल्दी hi यह रघुभार और जबर दोनों अपना असली चेहरा जरूर दिखा देंगे और उनको मौत में hi दूंगी चाहिए भाई को ठीक लगे या बुरा ".

वह भी बड़े गुरूजी को हाथ जोड़कर गायब हो गयी ...... रानी पद्मदेवी ( सारू ) ने खड़े होकर दोनों हाथ जोड़कर कहा ," गुरूजी आप की क्या इच्छा है वही होगा ".

बड़े गुरूजी ने आशीर्वाद के लिए हाथ उठाकर कहा ," तुम hi आर्यन की इच्छा जान सकती हो वह तुमसे कभी अलग नहीं है पर उसके लिए भी समय है ...... उसको सब अपने प्रेम के जाल में बाँध के रखो वह कभी गलत नहीं करेगा ...... "..... उसके बाद सारू भी चली गयी .

बड़े गुरूजी ," निशांक अब समय नजदीक आ रहा है तुम्हारी कृपा दृष्टि रति पे रेहनी चाहिए उसकी जान को खतरा अपनों से hi है ".

निशांक गुरूजी ," जो आएगा गुरुदेव ".

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सारू भी वहां से विलुपत होकर अपने रूम में पहुंची तोह अणि और मीणा उसका का hi वेट कर रही थी ......

मीणा ," सारू मम्मी , सब ठीक होगा बस आर्यन को वहां माँ का प्यार मिल जाये तोह गीता की तरह दीप्ति भी सब मानेगी ....... यह सब राजपूत रानियां बहोत शक्तिशाली पवित्र स्त्रीयां हैं यह आर्यन को पावरफुल hi करेंगी , फिर श्राप भी तोह उनकी गॉड नहीं भर पाया ".

सारू हसकर ," तू इतना सीरियस क्यों हो गयी देखना तुझे hi बुलेगा बस फ़ोन की डिअर है ".

अणि ," मैंने प्रभा को हिमाचल भेजा है जोतिर्मठ में जहाँ कोई नेटवर्क नहीं है ऐसा सबको बोलना है ..... वह पागल लड़की भाई से शादी की खुसी में अपने मायके नागलोक में चुप्प के बैठी है ...... आने दो ुष झेरली नागिन के सारे पहन काट देती हूँ "....... सारू और मीणा हसने लगे .......

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लंदन ...... 1पं

एक पब के प्राइवेट सेक्शन में 3 आदमी दारु पीकर ताली थे तब एक साक्ष जोह बोलै उसको सुनकर बाकी दोनों का नशा hi उतर गया .......

"भाई मेरी बीवी प्रेग्नेंट है और उसके पेट में आर्यन का बच्चा है जिसका सेक्स चेक करके पता चला है बीटा है ...... बस मुझे बदला चाहिए कैसे वह मेरे साथ ऐसे कैसे विश्वास घात कर सकता है ?"

दोनों साक्ष की तोह जबान hi सूख गयी की क्या जवाब दें ...... ????

सवाल अनेक थे पर जवाब मांगने की हिम्मत hi नहीं हो रही थी ...... आर्यन तीनो को अपना असली दुश्मन दिख रहा था .....???

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हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट
 
नेक्स्ट अपडेट आज रात ..... 11पं

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कीप रीडिंग एंड पोस्टिंग योर व्यूज एंड कमैंट्स ों थे स्टोरी.

धयानवाद नमस्कार
 
धयानवाद दोस्तों .....

अब मत बोलना की अपडेट नहीं देते .....

भाई बेरोजगार हूँ आजकल, अपडेट hi लिखता हूँ और पोस्ट करता हूँ बस जल्दी hi कहीं से कॉल आएगी तोह पेस काम हो जायेगा. स्टोरी पूरी पॉट करूँगा आप सबके लिए बस टाइम मिलता रहे .



रानी मिरदुला
 
अपडेट -35

PART -2 (राजवंश)

जोधपुर में अपने आलीशान हवेली में अपने बिस्तर पे सूती रानी लीलावती का सुबह 6 बजे मोबाइल रिंग हुआ ...... 4 घंटी जाने के बाद जब मोबाइल पर दूसरी तरफ से आवाज सुनी तोह जहाँ पहले गुस्सा था वहीँ नीड ुध गयी खबर सुनते hi .......

अंगड़ाई लेती हुयी िश टांड की हट के जैसे औरत के चेहरे की मुस्कान कुछ और hi कह रही थी ...... जोधपुर की एक बड़ी मथावपूर्ण रियासत की रानी थी पर अब उसको आर्यन चाहिए तोह चाहिए...... चाहिए उसकी ममेरी भें दीप्ति का होने वाला पति हो फिर आर्यन की तोह कई बीवियां होंगी , शादी से पहले मुझे यह आदमी अपने निचे चाहिए जैसे एक जिद्द hi बना ली हो अपनी .

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रानी लीलावती

राजा रघुभार सिंह की सबसे छोटी औलाद , लीला में एक भी शौक लड़की वाला कभी नहीं था ....... शूटिंग, हॉर्स राइडिंग, हिल क्लाइम्बिंग , फ़ास्ट कार रेसिंग, रेसलिंग , हंटिंग , के अल्वा न जाने क्या क्या ...... 7 साल पहले एक राजकुमार पसंद आया शादी की 4 साल बाद एक बेटी पैदा हुयी फिर एक प्लेन क्रैश में 2 साल पहले पति मारा गया ..... एक hi बार खूब रोई पर फिर पलट के नहीं देखि जिंदगी आगे बढ़ा रियासत की बागडोर खुद संभाली ...... रियासत के कई मर्दों की निगाह ुष्पर थी खासकर ठाकुर सूरज सिंह की जोह उसके पति का चचेरा भाई था और भाभी पे लट्टू . राजदरबार में महा मंत्री भी था , लीला ने उसको ख़ास लिफ्ट तोह नहीं दी थी पर दुर्र भी नहीं किया . उसको पता था मर्द को बस दुर्र से थोड़ी खुसबू देकर भी अपना काम निकल लेगी . उसकी फ्लिर्टिंग को मंद नहीं करती थी पर उसको भी एक मजबूत शहर के जरुरत थी रियासत चलने में .

दीप्ति के स्वयंवर में इन्वितेद थी तोह गयी पर वहां बहोत सारे राज्यों से लेकर राजकुमारों की निगाह ुष्पर थी पर लीला को ऐसा मर्द चाहिए था जिसकी आँखों में देखने के लिए उसको खुद सर उठा के नज़र मिलनी पड़े .

एक नीली आँखों वाला हीरो जैसा ,7फट के करीब हट , अपनी महंगी कार में स्वयंवर के लिए योद्धा की लाइन की तरह जाते देखा ...... कितना हैंडसम था छूट hi पिण्या गयी एक बार देखकर. बाल काले और फेस फीचर्स देख के तोह लग गया इंडियन hi है ...... उसकी असिस्टेंट को अपने पास बुलाया जिसका नाम बिना था .

पता चला यह इंडिया की बड़ी बिज़नेस वुमन रतिदेवी का बीटा महार्यं सिंह है यहाँ दीप्ति के लिए स्वयंवर में लड़ने आया है ..... बिना को अपना कार्ड देकर बोली ," इसको बोलो मुझसे मिले ".

बिना ने लीला की डिटेल्स निकली और मीणा को शेयर की यह राजा जबर सिंह की छोटी भें है आर्यन पे फ़िदा है . आर्यन को लीलावती के बारे में पहले hi पता था , उसने स्टेट में 2 ंप की सीट नेक्स्ट इलेक्शन में एक दीप्ति के खानदान में सुचित्रा सिंह के लिए और दूसरी राजा जबर सिंह के खानदान में रानी लीलावती के लिए hi मांगी थी कम शभ से.

रानी लीलावती के बारे में सब जानकार आर्यन को भी हैरानी हुयी की जबर सिंह इसका सागा भाई है जबकि उसकी जगह यह राजगद्दी के ज्यादा लायक है ...... क्यों हरा पायेगा िंह दोनों राजकुमारी को इलेक्शन में बस सही काम पे लग्न होगा जानता के लिए .

आर्यन का स्वयंवर जीतना , दीप्ति के लिए प्यार बस लीला की आर्यन को पाने के लिए प्यास बढ़ा रहा था ...... गीता का राजदरबार में सबको जलील करना और आर्यन के घर के औरशन से मिलकर तसली हुयी की यह मर्द स्पेशल है और मेरी बाँहों में सिर्फ अगर कोई होगा तोह यह hi होगा आखिर थी तोह राजपूताना बाला , वह भी जिद्दी .

उधर आर्यन को भी पता था बस एक मुलाकात में hi लीला उसके निच्चे होगी क्या जानदार औरत है

( यह पहले की सोच थी जबर सिंह की मारने के लिए पर अब आर्यन का दिल लीला के लिए साफ़ था और रिएक्ट से भरा )...... मीणा उधर पहले hi िश शिकार को ताड़ ली थी और उससे प्यार से भी 2-3 बार बातिओं बातिओं में इशारा कर दिया की दीप्ति से कमिटमेंट होने के बाद भी अवेलेबल है .

वह बिना को पहला खुला ऑफर दी थी लीला किम्मत तू बोल मुझे यह चाहिए ...... आर्यन जहाँ लीला की तरफ सोच समझ के 10 की स्पीड से बढ़ रहा था वहीँ लीला तोह 100 की स्पीड पकड़ राखी थी उसको पाने के लिए .

लीला को मीणा ने एक बात कहै की आपकी बेटी को साथ रखना जल्दी hi वह पापा ढूंढ देगी ...... बात उसको पसंद नहीं आयी पर आर्यन की भें थी कुछ कड़वा बोलकर बात ख़तम नहीं करना चाहती थी .

आज बिना का hi फ़ोन था की Aryan-Deepti वापस आ गए हैं ुष श्राप को तोड़कर ....... फ्रेश होकर लीला सबसे पहले अपनी बेटी के रूम में गयी जोह सू रही थी , रौशनी नाम था , बस तीन साल की राजकुमारी थी 4 दासियाँ थी उसकी केयर और पालन पोषण के लिए पर माँ का प्यार काम hi मिलता था आखिर राजकुमारी की तरह बड़ी की जा रही थी ...... लीला बिजी hi होती थी अपने एडवेंचर्स और रियासत के कामो में .

रूम में घुसते hi बगैर किसी से बात किये रौशनी को उठा ली अपनी गॉड में और अपने सुईठे में ले गयी ...... 4 नौकरानी बस उसके पीछे दौड़ के उसकी इंस्ट्रक्शंस पूरा कर रही थी.

लीला को याद था आर्यन को बच्चों से बहोत प्यार है यानी यह मेरी बेटी hi ुष तक मुझे जल्दी पहुंचने में सहायता करेगी .

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अलवर राजमहल......

दीप्ति लंच टाइम पे दाल बल लेकर पहुंची फार्महाउस और गीता के साथ तीनो दानव बहेनो को भी ले गयी राजमहल ...... जहाँ उनका राजशी स्वागत हुआ और दीप्ति ने तीनो को अपनी स्पेशल फ्रेंड्स जैसी भें कहकर मिलवाया . उनको राजमहल में विप कक्ष जोह सबसे आलीशान था रहने को दिया . दीप्ति थी hi इतनी दिलवाली और वह जानती थी तीनो उससे भी बड़ी राजकुमारिया हैं अपने लोक की .

रानी जमुना के साथ रानी पुष्प भी 4 चक्कर लगा चुकी थी रानी मिरदुला के कक्ष का पर दासी ने बतया वह सू रही हैं और जगाने को मन किया है. दोनों को बस आर्यन से मिलने की बेचैनी थी फिर राजगुरुजी से भी पूछ लिया था की वह माँ बन पाएंगी अब श्राप से मुकुट होकर . गुरूजी ने इशारा किया सब तुम सबकी इच्छा है माँ बनना है की नहीं .

सुचित्रा सिंह की तरफ जब रानी जमुना का ध्यान गया की आर्यन के साथ रात को वह गयी थी अभी तक नहीं लौटी आखिर कर क्या रही है ....... उसने पहले फ़ोन मिलाया तोह उसने बतया की वह फार्महाउस में है .

रानी जमुना ने उसको अलवर के अपने रिसोर्ट पे आने को सुचित्रा को कहा की उसको बहोत जरूरी बात करनी है आर्यन के बारे में ....... अपने साथ जबर सिंह की सबसे छोटी रानी ,पुष्प को लेकर अपने रिसॉर्ट्स पे पहुंची जोह राजमहल से 20 कम दुर्र था .

रात में सुचित्रा सिंह की बंद बजा दी आर्यन ने छोड़ छोड़कर , उसको भी ऐसी चुदाई की जरुरत थी ...... दारू के नशे से दर्द का असर तोह काम हो गया था पर नीला ने उसको स्पेशल मस्सगे देकर बिलकुल फिट कर दिया . नीला उसके साथ अपनी सिक्योरिटी लेकर खुद रिसॉर्ट्स में पहुंची.

दोपहर के 3 बजे थे पर औरशन की लंच पार्टी जैसा माहौल था , नीला को भी अपने साथ बिठा के सुचित्रा ने कहा," यह आर्यन की स्पेशल फ्रेंड और डॉ अंजू की बॉडीगार्ड के साथ असिस्टेंट भी है. आर्मी में कमांडो रह चुकी है अब आर्यन की फॅमिली की सिक्योरिटी देखती है ".

ड्रिंक्स , स्नैक्स होने के बाद नीला जब बहार चली गयी तब रानी जमुना ने कहा ," देखो सुचित्रा , में घुमा फिरा के बात नहीं करुँगी पर बात यह की दीप्ति बेटी के प्राण का संकट मिट चूका है और अब हमारा खंडन से श्राप मिट चूका है . तुम हमारी नानन्द हो तोह बात यह है की अब हम सब रानियां , माँ बन सकती हैं ऐसा गुरूजी ने कहा है पर तुम्हारे दोनों बड़े भाई यानि राणा सा और राजा जबर सिंह जी कभी बाप नहीं बन सकते ".

धमाका सा किया था पर रानी पुष्प ने भी सहमति जाता दी ," दीदी ठीक कह रही हैं दोनों की हम सब रानियों के अल्वा कई और औरत भी माँ नहीं बानी है जितनी िंह दोनों के संपर्क में आयी या बिस्टेर ले लेती ...... अब आप hi कोई सलाह दे सकती हो ".

सुचित्रा ने एक बड़ा पेग पिया और बात किदार जा रही है उसको पहले जान्ने का सोचा ," आप यह सब मुझे क्यों बता रही हो , कुछ तोह आप दोनों ने निर्णय लिया है ".

रानी जमुना ने सीरियस होकर जवाब दिया ," हमारे खानदान की तरह एक और खंडन है जिनके घर में पूरी पीढ़ी में औलाद तोह हुयी पर लड़का एक hi हुआ और ुष लड़के ने जवान होकर अपने खानदान की कई औरत को बीटा भी दिया है ...... वह hi हम सबको माँ बना सकता है अगर तुम हमारा साथ दो तो ".

सुचित्रा अपनी चेयर से कड़ी होकर बोली ," ारयणणणणणण , आप दोनों आर्यन की बात कर रही हो है न ?"

दोनों चुप्प रही तोह अपने सर को दोनों हाथो से पकड़ के सुचित्रा बोली," दीप्ति का प्यार है वह , उसकी शादी उससे होने वाली है ...... आप ऐसा सोच भी कैसे सकती हो , क्या रिश्ता रह जायेगा फिर कोई जवाब है अपनी बेटी के लिए अगर उसको पता चला तोह ".

रानी जमुना ने सुचित्रा का हाथ पकड़ के कहा ," बहोत सोच समझ के हम सबने फैसला किया है , कोई मौज मस्ती के लिए नहीं सिर्फ बांज का कलंक मिट सकता है आर्यन की वजह से और अभी दीप्ति का विवाह नहीं हुआ है तोह ऐसा मौका कभी नहीं मिलेगा एक बार आर्यन से शादी हो गयी तोह नामुकिन होगा ...... अब सब तुम्हारे हाथ में है सुचित्रा की हमको िश श्रापित बांज के तमगे से मुक्ति दिला दो नहीं तोह जीवन इसी दुःख में काट hi लेंगे ".

सुचित्रा को समझ hi नहीं आ रहा था की क्या तर्क दे वह खुद िश रह पे कल रात पहला कदम राखी थी और 2-3 दिन आर्यन यहीं है तोह जितना टाइम उसके साथ बिता के पूरा प्यार लेगी ....... मगर िंह दोनों की बातों से यह लग रहा है की यह बता नहीं रही बस फैसला कर चुकी हैं मगर मुझे िश राज से क्यों जोड़ रही हैं कुछ तोह बहोत बड़ा पेंच है जोह मालूम करना होगा .

रानी पुष्प ," सुचित्रा दीदी , आपको क्या कहूं में तोह गरीब परिवार से हूँ पर जबसे आर्यन के दोनों बच्चों, महिमा और राहुल को देखा है हमारे अंदर की औरत की माँ बनने की इच्छा बहोत ज्यादा बढ़ गयी है ...... अब दिन रात हर गाड़ी वैसे hi बच्चे हो ऐसा दिल में अरमान रहता है फिर राजगुरुजी ने भी इशारे से कहा की यह हम पे निर्भर है की कैसे माँ बने यानि वह संकेत दे दिए हैं की आर्यन hi हमे यह सुख दे सकता है . अगर दुसरे कोई और पुरुष हुआ तब भी बच्चा तोह आर्यन जैसे नहीं होगा एक पूर्ण असाधारण पुरुष ".

जमुना ने जब एक सिप वाइन का लेकर एक सिगरेट सुलगाई तोह सुचित्रा ने भी एक सिगरेट मोह से लगाई तोह लाइटर पुष्प ने जला के आग उसकी तरफ की .

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एक लम्बा काश लेकर जमुना ने कहा," सूचि , हम भी तुम्हारी तरह माँ बन सकते हैं बस आर्यन को राजी करना होगा और मुझे इतना तोह विश्वास है वह तुम्हारी बात नहीं टलेगा . मैंने कल रात hi तुम दोनों को महल की छठ पे देखा था फिर तुम फार्महाउस चली गयी . मुझे खुसी है तुम ने सही मर्द का चुनाव किया है , दीप्ति को नयी जिंदगी देने और उसके जीवन में आर्यन का प्यार भरने में तुम्हारा hi सबसे ज्यादा हाथ है . तुम उसको बीटा जैसा मानती हो और अगर तुम चाहोगी तोह हम सब भी अपनी गॉड में एक राजकुमार या राजकुमारी खिला पाएंगे और अलवर के साथ प्रतापगढ़ का भी राजवंश आगे बढ़ेगा . आर्यन शूरवीर है , अपनी स्त्री को भरपूर प्यार करने वाला मर्द है यह हम सब जानते हैं . उसने अपनी खानदान में खुशियां बांटी है हमको भी अगर वह प्यार मिल जाये तोह जीवन की खुशियां बढ़ जाएँगी और तुम्हारे आगे हम पांचो को सर हमेशा झुकेंगे " .

सिगरेट ख़तम होने तक सुचित्रा के दिमाग़ में कई विचार आये और गए पर एक फैसला करके उसने कहा ," में झूट नहीं बोलूंगी पर मुझे जीवन के िश पड़ाव में प्यार हुआ जब आर्यन को रूपा भाभी की हवेली में पहली बार देखा ........ उसकी तरफ खींचती चली गयी फिर बीटा का मान रखते हुए भी में उससे औरत मर्द का रिश्ता बना hi लिया और उसके प्यार में टूट कर दिल लगा लिया ...... कल रात hi में पहली बार मिलान की आर्यन के साथ और मेरी नाश नाश में वह उतर गया. हाँ में उससे प्यार करती हूँ और उसके बच्चे को जनम भी दूंगी अगर प्रेग्नेंट हुयी तोह. मुझे किसी का डर नहीं है फिर न hi अपने पति सहदेव का जोह बस नाम का पति मन है. में आर्यन से आपकी बात करुँगी पर आपको मेरी नहीं मीणा की जरुरत है . वह बोलेगी तोह आर्यन कभी मन नहीं करेगा बस यह बात राज hi रखना नहीं तोह आप भी जानती हो जमुना भाभी , राजपूत की मर्दानगी पे बात आयी तोह खून खराबा हो जायेगा और आर्यन का कोई कुछ बिगाड़ नहीं पायेगा पर अपना सर्वनाश आप दोनों के झूटी शान वाले पति जरूर करवा लेंगे ".

रानी पुष्प ने सुचित्रा का हाथ दबा के कहा ," बस यह समझो दीदी , हम तीनो में कभी यह बात hi नहीं हुयी िश बारे में ".

सुचित्रा ने एक घेरि सांस लेकर एक टांग पे दूसरी टांग चढ़ा के वाइन पिटे हुए कहा ," आप दोनों का तोह पता है की आप राजी हो मगर बड़ी 3 भभीसा भी तैयार हैं क्या ?"

रानी जमुना ," सूचि हम सब एक कस्ती के सवार हैं फिर महिमा बेटी का जादू hi ऐसा है की हम पांचो उसको अपने स्तनपान करा चुके हैं , वैसी hi बेटी चाहिए या बीटा अब फरक नहीं पड़ता ".

सुचित्रा ," फिर आप मीणा को रेडी करो वह सब संभल लेगी ".

जमुना ने मुस्करा के कहा ," हम दोनों ुशी की वजह से यहाँ हैं वह पहले hi इशारा कर दी थी और सच्च बोलूं तोह ुष लड़की ने हमारा दुःख सबसे पहले देखा और मार्ग भी दिखा दिया ".

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राजमहल .......

राजकुमारी दीप्ति के कक्ष में गीता का सर दीप्ति की गॉड में रखा था ....... दोनों ने पतलोक की घटना पे डिस्कशन किया फिर फ़ोन पे सबसे बातें की वीडियो कॉल मिलकर .......

दीप्ति ," दीदी , आप मुझे भी साथ ले चलेंगी न दिल्ली जब वापस जाओगी यहाँ से ".

गीता उसकी गोरी उंगलिओं से खेल रही तोह एक हाथ अपने मोह के पास लेकर उसकी ऊँगली पे काटी ...... "ोुछः क्या कर रही हो दीदी ...... ? "

गीता हसकर ," तू वहां क्या करेगी फिर में और आर्यन गाओं जायेंगे उसके बाद अपने चाचा मां का भी हिसाब किताब करना है ....... गाओं में धुप में काली पद जाएगी फिर तुझे आदत नहीं "....... वह दीप्ति को चिड़ा रही थी .

दीप्ति ," नहीं नहीं दीदी , में ठीक से रहूंगी और आप दोनों को डिसट्रब नहीं करुँगी बस अपने साथ ले चलो . मेरा यहाँ मैं नहीं लगेगा प्लीज दीदी ले चलो न प्लीज "...... बिचारि की प्यार भरी रिक्वेस्ट सुनकर गीता ने उसके सर पे हाथ लगा के निच्चे झुका के उसका गाल चूमा .

"ठीक है चलना पर तुझे बहार ज्यादा नहीं ले जा सकते नहीं तोह मेरे जगह वह तुझे गोरी चिकनी लड़की को सब मालकिन बना लेंगे ..... है है है है ....... आर्यन कहाँ है कहीं फिर से सुचित्रा के पास तोह नहीं भाग गया "...... गीता ने जब पुछा तोह दीप्ति तोह साथ जाने की वजह से खुश होते हुए बोली ," वह माँ के रूम में सू रहे हैं ".

गीता (मैं में) साला इश्कि माँ तोह नहीं छोड़ने लगा भरोसा नहीं है उसका कुछ भी ........ " अरे तू भी तो थकी थी तू नहीं सोई अपनी माँ के पास , ध्यान रखना यह आर्यन बहोत हरामी है पक्का तेरी माँ की चूचियां पि रहा होगा ...... वैसे कोनसी माँ के पास है छोटी रानी या बड़ी रानी के ?"

दीप्ति चिढ़कर ," की दीदी आप बिलकुल शर्म नहीं करती , वह मिरदुला माँ को माजी बोलते हैं उनके साथ हैं वह भी बीटा मानती हैं उनको . दोनों मम्मी के पास क्यों सोयेंगे ?"

गीता हसकर ," है है है है ...... मेरी बन्नो रानी , में जब तीन साल की तब यह दो दिन का भी नहीं था हरामी ...... मेरी माँ की चूची से दूध पि रहा था साला आज तक पीटा है ....... तू अभी उसको नहीं जानती कुत्ता एक नंबर का चूचिचोर है ....... पक्का धार लिया होगा तेरी सगी माँ की चूची को इशलिये "चूचीधार" बोलती हूँ में . हमारे घर की कोई औरत नहीं छोड़ी साले ने सबका दूध पीया है तभी तोह इतना सूंदर और तगड़ा है ".

दीप्ति हसकर ," कुछ भी आप नहीं सुधुरोगी , कभी सूचि दीदी , कभी मेरी माँ कभी अपनी माँ के लिए बोलती रहती हो ....... इतना गाली क्यों देती हो आप उन्हें, याद है जब आपने थप्पड़ मारा तोह मुझे बहोत बुरा लगा पर वह फिर भी आपको प्यार करते हुए मन रहे थे ".

गीता हसकर ," इधर आ लिअत जा तुझे एक बात बताती हूँ , यह आर्यन न बहोत बड़ा नौटंकी है ...... लड़कियां और औरतें ईशपर ऐसे फ़िदा नहीं हो जाती , जादूगर है पक्का ...... अब प्रभा को देख चुहिया सी है अभी साली की चूची गांड भी ठीक से बड़ी नहीं हुयी चली है आर्यन को पति बनाने , एक बार आर्यन का तोपची उसकी छूट में घुसा न फिर कुटिया की पिल्ली नागिन का कोई सा भी रूप ले ले पहली बार में hi बेहोश पड़ी होगी या हॉस्पिटल में ....... "

दीप्ति की तोह बोलती hi बंद हो गयी इतनी गन्दी गन्दी बातें सुनकर फिर आर्यन का लुंड याद आते जूहझुरी से दौड़ गयी कितना मजा आया था वहां रानी स्वर्णलता के महल में 'अटाला लोक' में ...... कितना गरम और बड़ा था , कितना जूस निकला था .

गीता उसके सरीर की झुरझुरी को महसूस कर चुकी थी क्योंकि उसको बाँहों में लपेटी हुयी थी ...... दीप्ति की बंद आंखें देखर उसकी एक चूची और चूतड़ दबा दी ...... "अह्हह्ह्ह्ह सीईई दीदी क्या करती हो ".

गीता आँख दिखा के ," सच्च सच्च बता तू पतलोक में 36 घंटे से ज्यादा आर्यन के साथ थी , कहाँ कहाँ घुसवा तोपची ....... साली मुझसे झूट बोली तोह अभी नंगा करके चेक करुँगी ".

दीप्ति भी उसकी गाली सुनकर डर गयी , टपक से बोली ," सॉरी दीदी मैंने कुछ ऐसा वैसा नहीं किया आपकी कसम बस एक बार वहां की औरशन ने उनकी गर्मी बढ़ा दी थी तोह शांत किया था उनको बस इतना hi "........ सर झुका के शर्म से चेहरा छुपा लिया .

गीता हसकर ," हे हे हे हे ....... एक नंबर की फत्तू है तू , अरे मेरी लाड़ली भें जब में बहार वालो को मन नहीं करती तुझे तोह अपनी जान मान लिया है मैंने , तुझे सब छूट है वैसे बता क्या क्या किया मुझसे क्यों शर्माना हम दोनों भेने भी हैं सौतें भी और सहेली भी फिर बस हम में कलर का फर्क है दोनों बिलकुल एक जैसी ..... पूछह पूछह ".

दीप्ति भी गीता की बात सुनकर की दीदी मुझे कितना मानती हैं आज पहली बार दिलसे गीता का गाल चूम ली ," आप मेरी सबसे अच्छी दीदी हो "........ फिर शरमाते छेड़ते हुए दीप्ति ने बतया की वहां ओरल सेक्स की एक बार और किस्सेस बहोत बार पर अपनी हद पार नहीं की .

गीता ," चल ुष लफंदर को भी देखते हैं क्या गुल खिला रहा है "...... फिर आर्यन को कॉल मिले तोह 2 बार रिंग जाने के बाद उसने उठाया ," मादरचोद किस की छूट में घुसा हुआ है , जल्दी से जल्दी दीप्ति के कक्ष में आ वार्ना वहीँ आकर गांड पहाड़ दूंगी तेरी और ुष कुटिया की भी ......... " ...... कॉल कट जोर जोरसे हसने लगी और दीप्ति मोह फाड़े देख रही थी गीता क्या क्या बोल देती है बिना कुछ परवा किये . उधर आर्यन की भी गांड पहात गयी कहीं यहीं न जाए दीप्ति को लेकर .

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आर्यन की नींद करीब 1 बजे खुली तोह देखा उसकी मैया मिरदुला उसके ऊपर सोई हुयी है नंग धड़ंग ...... सुबह का चुदाई सेशन याद करते hi उसका लुंड फिर अंगड़ाई लेने लगा ...... अपनी एक हाथ से मिरदुला की कमर सेहला और दुसरे से उसके गालों पे खुले पड़े भूरे काले केशों को हत्या ....... सुंदरता की अप्रतिम देवी के सामान चेहरे का नूर बता रहा था मिरदुला कितनी सूंदर है .

हर अंग परफेक्ट किसी युवती की तरह बस अणि ने उसका फेस थोड़ा मातुरे यानी 40 साल की औरत का बना दिया था पर बॉडी ढकी रहती है तोह उतना दिखेगा नहीं पर पारखी ठरकी तोह मस्त फिगर वाली 70 साल की बुद्धि पे भी नजर मारने न चुके यहाँ तोह रूप की देवी थी मिरदुला .

अपनी नाक रगड़ के आर्यन के सीने पे थोड़ी कुनमुना के फेस टर्न कर दूसरा गाल सीने पे रखकर सूई रही ...... आर्यन भी उसको डिसट्रब न करते हुए फिर से ऐसे hi सू गया .

4 बजे गीता के फ़ोन से दोनों की आँख खुली तोह आर्यन ने मुस्करा के मिरदुला को चुप्प रहने का कहकर गलती करते हुए स्पीकर ों कर कॉल अटेंड किया ...... hello hi बोलै था फिर तोह जोह गीता ने उसकी माँ भें hi नहीं उसकी मैया की भी कर दी ....... कॉल कट होने के बाद दोनों के चेहरे सफ़ेद पद गए......

आर्यन अपनी गॉड में मिरदुला को भरने लगा तोह गुस्से से बोली ," िश पागल लड़की को जरा भी तमीज नहीं किस्से क्या बात करनी है , ुष दिन राजदरबार में भी अंत शांत बोली पर अपने साथ अन्याय के लिए मान लिया पर अभी उसने मुझे तोह जैसे बाजारू औरत समझ लिया माहि और तू चुप चाप सुनता रहा ....... याद है कोई जबान खोलती थी लौड़ा निकाल सबके सामने ऐसी कुटिया के मोह में मूट देता था अब क्या हुआ तुझे बस ऐसे hi लम्बा मोटा लौड़ा लेकर मर्द बना फिरता है ...... दुर्र हैट मुझसे ".

आर्यन की भी वाट लग गयी थी एक तोह उसकी यह मैया डबल साइडेड मेमोरी चिप लिए घूम रही थी और उधर गीता कहीं भी कुछ भी बक देती थी ....... घर , खंडन या गाओं में सब गीता उर्फ़ चंडी देवी को जानते थे पर यहाँ बात अलग है . िंह रजवाड़ों के अलग उसूल और नियम होते हैं अपने खिलाफ उठी जुबान hi नहीं गर्दन काट देते हैं .

आर्यन से अलग होकर बीएड से कड़ी होकर स्नानग्रह में मिरदुला चली गयी , उसकी छूट से निकला खून और मिला जुला मिलान रास भी सूख चूका था पर दर्द तोह जैसे उसकी चाल में बिलकुल न था और उसके नितम्बों की थिरकन जैसे आर्यन का दिल hi घायल कर दी ....... बहनचोद िश गांड का किला फ़तेह न किया तोह जीवन में लौड़ा वाला होना बेकार है .

आर्यन ने अपने सेलफोन से पहले बिना को कॉल किया फिर दीप्ति को कॉल करके बोलै में बाथ लेकर चाय पे मिलता हूँ . उसके बाद एक टॉवल लपेट फ़ोन पे आधे घंटे लगा रहा बातें करने में दिल्ली. फिर अमेरिका में सबसे बात किया थोड़ी डिअर की रात को कॉल करेगा .

मिरदुला त्यार हो चुकी थी आर्यन के फ़ोन पे बात करते हुए और अपने कक्ष से जाने लगी पूरी महारानी वाले गेट उप में तब आर्यन ने कहा ," मैया अगर तू ने मेरी गीता को कुछ कहा तोह में यहाँ से ुशी वक़्त चला जाऊंगा , उसकी तरफ से हाथ जोड़कर में माफ़ी मांगता हूँ प्यार चुकार" .

आर्यन उसके नजदीक जाकर हाथ जोड़कर झुकार उसके प्यार चुकार स्नानग्रह में चला गया मिरदुला को हक्का बक्का ऐसे hi शॉक में खड़ा छोड़कर . मिरदुला भी वापस आकर अपने बिस्तर पे बैठकर सोचती रह गयी की अब क्या करे .

तभी कक्ष के द्वार पे दासी ने नॉक किया की एक जरूरी सूचना देनी थी ..... अंदर आकर उसने बतया की रानी लीलावती जी आयी हैं आपसे मिलना छाती हैं .

रानी मिरदुला बोली में खुद चलती हूँ (अपने मैं में) माहि को बहोत कुछ सीखना पड़ेगा नहीं तोह इतनी पत्नियां और औरतें इसको दबा के रखेंगी ......

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शाम 5 बजे शाही भोजन भवन में राजशी पोषक में राजा त्रिभुवन सिंह के पूरे परिवार वाले को साथ राजा जबर सिंह के परिवार वाले करीबी रिस्तेदार भी इवनिंग टिया और स्नैक्स के लिए इन्वितेद थे ........ राजगुरुजी और रघुभार सिंह आज सुबह से ुष प्राचीन शिव मंदिर में थे जहाँ आर्यन दिव्या तलवार सबसे पहले रखा था . सुबह से hi बहोत भीड़ थी की पुराण शिव मंदिर मिला है जोह कितना भाव और सुन्दर है .

आर्यन के लिए रानी मिरदुला ने शाही पोषक रखवा दी तोह पहन लिया था पर दीप्ति और गीता एक सी शाही पोषक में सूंदर लग रही थी जैसे ब्लैक & वाइट कॉपी हो ...... अब तोह आदत होने लगी थी सबको दोनों हंसकाल को साथ देखकर.

राजकुमार दीप्ति ने दुर्र देश से आयी अपनी तीनो सहेली राजकुमारी साया , चाय और माया से सबको मिलवा तोह उनका भी स्वागत हुआ . सुचित्रा सबसे पहले आर्यन से गले मिली जब अंदर आया , गीता सबके सामने उसके पास जाकर गले मिली और गाल चूम के कान में बोली और हसकर दीप्ति के पास चली गयी .

फिर महारानी मिरदुला ने कहा ," आर्यन इनसे मिलो यह हैं दीप्ति की बड़ी दीदी यानी ममेरी भें और ****** रियासत की रानी लीलावती राठौर और वह उसकी बेटी राजकुमारी रौशनी".

आर्यन तोह देखते hi पहचान गया था िश 6'3" फट लम्बी सूंदर अप्सरा लीला को पर सबके सामने हाथ जोड़कर उनको नमस्ते किया फिर उसकी गॉड में ुष मासूम से छूती राजकुमारी रौशनी को हाथ दिखया के बोलै ," में हूँ आर्यन और प्यार से मुझे सब माहि बुलाते हैं, आपका क्या नाम है बेबी बार्बी डॉल ?"

रौशनी ने सबकी तरफ देखा फिर अपनी मम्मी की तरफ देखि तोह उसने कहा ," आंसर हिम बीटा ".

आवाज कड़क hi थी तोह पलट के आर्यन की तरफ देखि तब आर्यन ने कहा की ," मई ी , में गॉड में ले लूँ ".

लीला ," व्हाई नॉट , बीटा अंकल के साथ खेलो ".

आर्यन ने हाथ आगे किये तोह बिचारि दरी सी बच्ची उसकी गॉड में आ गयी पर आर्यन ने प्यार से उसका गाल चूम के कहा ," पहले कुछ खाते हैं फिर खेलने चलेंगे उसके बाद खिलोने फिर ढेर साड़ी चॉकलेट और झूला भी झूलेंगे ".

आर्यन का इतना प्यार और मीठी आवाज सुनकर रौशनी भी अब उससे बातें करने लगी ...... एक बात सबने नोट की आर्यन का धयान किसी की तरफ नहीं था बस ुष नयी फ्रेंड रौशनी बेबी के साथ hi लगा था अपने हाथ से कहिल्या ...... टिया पार्टी का लंच से भी ज्यादा डिशेस होंगी पर आर्यन और रौशनी वह hi खायी जोह रौशनी को पसंद आयी .

आर्यन ने मजाक में कहा ," रानी शैब्या , आपकी बेटी राजकुमारी रौशनी इतनी स्वीट है की हमेशा अपने पास रखूं वैसे यह कॉलेज क्यों नहीं जाती जबकि इश्को 1 स्टैण्डर्ड में होना चाहिए ".

लीला भी मुस्करा के ," पहली बात कुंवरजी में आपकी बड़ी साली लगती हूँ तोह नाम भी ले सकते हो ी don't मंद और यह सिर्फ 3 साल की है तोह अगले साल जाएगी बस डॉक्टर्स बोलते हैं इसकी हट भी आपकी मेरी तरह ज्यादा hi होगी ".

आर्यन ने सबकी तरफ देखा तोह उसको अब लगा की पिछले 30 मं से वह सबको इग्नोर किये बैठा बस रौशनी में hi लगा था बच्चा बने दोनों डिज्नीलैंड तक घूम आये बातों में .

आर्यन मुस्करा ," सॉरी , वह क्या है न मुझे बच्चे बहोत पसंद हैं और में उनके साथ खो जाता हूँ तोह माफ़ कीजिएगा ".

राजा जबर सिंह ," कुंवरजी अब आपकी शादी होने वाली है आगे बच्चे भी होंगे उनको खूब लाड करियेगा दुसरे के बच्चों ....... "

रानी लीलावती चिल्लाई ," भाहियाआ ....... "..... सब हैरान hi रह गए पर सबको जबर की बात पसंद नहीं की दुसरे के बच्चे .......

आर्यन की गॉड में रौशनी रोने लगी तोह आर्यन एक्सक्यूज़ में बोलकर रौशनी को बहार ले गया राजमहल के गर्दन में ......

उधर जैसे लीला गुस्से से उबाल hi रही थी , दीप्ति उसके पास आयी तोह गीता ने कहते हुए बोलै ," दीदी आप शांत हो जाओ , आर्यन से बच्चे बहोत जल्दी घुल मिल जाते हैं या यह कह लो वह खुद बच्चा बन जानता है जबकि 7 फट लम्बा है ".

लीला थोड़ा शांत होकर बोली ," भैया , एक बात याद रखो आप की उम्र 50 को होने को आयी आप ने जब मुझे और दीदी को भी लाड नहीं किया जब हम छोटे थे तोह बच्चों के बारे में क्या समझोगे फिर खुद के तोह हुए नहीं सायद यही सोच के कारन "....... और उठकर वहां से बहार चली गयी तोह दीप्ति भी उसके पीछे और गीता ने एक सैंडविच और दो जूस की बोतल उठाकर के एक दासी को कहा तू हम सबके लिए वहीँ ले आ जहाँ आर्यन और रौशनी होंगे अब वहीँ पिकनिक मन लेंगे ".

राजा त्रिभुवन भी कुछ बोल नहीं पाए पर अब निस्तान का दुःख दिल कचोट hi डाला पर जबर सिंह को लगा की उसकी छोटी भें उसके ाँद चील के मिर्ची नमक लगा दिया हो .

रानी मिरदुला ने सबको देखा तब तीनो दानव बहेनो को भी अपने कक्ष में विश्राम का बोली पर उन्होंने भी बहार जाने की इच्छा जताई तोह लीला का देवर जोह उन तीनो को ताड़ रहा जबसे आया था बोलै ," में आपको राजमहल घूमता हुयी राजकुमारी जी ".

मिरदुला ने गार्ड्स को बुला के कहा कोई अंदर न आये ....... मिरदुला को भी लग गया अब समय आ गया है की बागडोर उसको खुद सम्भालनि होंगी ...... " जबर , तू एक नंबर का मुर्ख है , मैं तोह कर रहा जुटती निकल के मार मार के तेरा मोह लाल कर दूँ ....... 2 साल नहीं हुए लीला के पति को मरे , सबने बतया की कितना डैम है उसमे सबकुछ खुद संभल रही है तेरे से मदद तक नहीं मांगी और त्रिभुवन तू भी इसके जैसा हो गया मन्ना मुझे श्राप मिला तोह 21 साल मिर्त्यु सैया पे थी ताकि हमारा खानदान हमारा नाम कभी न मिटे पर दोनों बहियों ने कभी लीला की बेटी को गले लगया जानते हो वह उसको मनहूस समझती है उसके पति को खा गयी ...... पर आज आर्यन को उसकी बेटी को प्यार और दुलार देते देख उसकी भी ममता जाग गयी ".

त्रिभुवन सिंह अपनी गलती मान के कुछ बोलना चाहता था पर जबर था hi जबर कहा रोक पता ," आज हमारी hi भें हमारी मर्दानगी को ललकार दी और यह सब िंह बाँझ बीवियों की वजह से हुआ ...... चैनलों ......."

चटक....... चटक ..... चटक ..... और दे घूंसे और दे लात ...... 5 मं तक मार मार के अधमरा hi करके पीछे हटी चंडी का रूप धारण किये महारानी मिरदुला और दिवार से तलवार निकल जब आगे बढ़ी तोह जबर की तीनो रानियों ने उसके प्यार पकड़ लिए ," माफ़ कार्डो दीदी , माफ़ कार्डो आपको आपके बच्चों की कसम इन्हे माफ़ कर दो "....... रोटी बिलखती तीनो तो देख तलवार तेजी से फ़ेंक के मारी जोह जबर सिंह के कालर को पार कर फर्श में गड गयी ....... हिल भी नहीं पा रहा था जबर सिंह .....

महारानी मिरदुला ," थू ..... है तुझपर जबर , साला नामर्द कहीं का , िंह सटी सावित्री बीवियों को बाँझ बोलता है ..... अब तू देख तीनो माँ बनेगी पर बीज तेरे जैसे गन्दी नाली के कीड़े की सोच रखने वाला का न होगा . याद रख आज से एक महीने बाद यह तीनो माँ बनने की खुश खबरि तुझे देंगी बस देखता जा यह मिरदुला का वादा है "...... वहां से गुस्से में वह बहार चली गयी .

सच्च में वही 21 साल पुराणी महारानी मिरदुला , राजपूताना की महारानी ,दोनों भाइयों के साथ उनकी बीवियों को फिर नजर आयी....... सिर्फ रानी पुष्प को छोड़कर जिसकी शादी बाद में हुयी थी .

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उधर आर्यन की पीठ पे बैठी रौशनी उसकी शाही शेरवानी का कालर पकड़ के राजमहल के उद्यान में घोडा बना के दिशा दिखा कभी इधर चलती कभी उधर ..... आर्यन भी कभी घोड़े की तरह हिन् हीनता कभी उससे अगले आदेश का पूछता ," किदार चालू राजकुमारीजी ".

जब दीप्ति के साथ वहां लीला पहुंची तोह सामने का दृश्य देखकर उसकी आँखों में आंसूं आ गए , ऐसा hi उसका पति करता था ठाकुर धर्मवीर सिंह जोह अब िश दुनिया में नहीं था .

दीप्ति भी अपनी िश बड़ी दीदी के गले लग उसको चुप करने लगी ," दीदी , आप तोह बहोत स्ट्रांग हो , आप क्यों चिंता करती हो फिर डॉ सा तोह कुछ भी बोल देते हैं उनकी बात का क्या बुरा मान न ".

लीला अपने आंसूं पहुंचते हुए ," तू अपने ुष डॉ सा को नहीं जानती , उसके लिए सबकुछ उसकी पावर है जबकि वह लायक hi नहीं था ...... खैर छोड़ तू बहोत लकी है की आर्यन जैसा जीवनसाथी मिला ".

गीता पीछे से बोली ," आप भी लकी हो ऐसा जीजा मिला , आप तोह उसकी बातों में नहीं आओगी पर आपकी बेटी आ गयी वह देखो दोनों अंगूर खा रहे हैं ".

लीला भी गीता की गले लगा के ," छोटा जीजा है तोह गॉड में बिठा लुंगी आखिर आधी घरवाली हूँ ..... hi hi hi hi ".

गीता भी छेड़ते हुए ," हम दोनों अभी से उसकी गॉड में बैठने से डरते हैं , वैसे इतने बड़ी साइज की आप hi हो जोह उसको गॉड में बिठा लो ".

लीला ," क्यों नाप लिया का तुम दोनों ने ".

दीप्ति ," दीदी , क्या बोल रही हो ?"

गीता आँख मार के ," यह छोटी तोह कुलफा चूस के क्रीम खा आयी है आप hi पूछो ..... है है है है है ..... "

वह भाग ली आर्यन रौशनी की तरफ पर इधर दीप्ति चिल्लाकर ," दीदी दीदी करती रही पर पीछे से लीला ने उसको पकड़ा था....

लीला ," अब सच्च बताएगी या तेरी हंसकाल सौतन से पूछों ?"

दीप्ति भी इत्र के ," उन्ही से पूछो वह hi आपकी टक्कर की हैं बिलकुल बेशर्म ..... hi hi hi hi ...... "...... दीप्ति भी वहां पहुंची तोह गीता के आगे रौशनी बैठी थी आर्यन की पीठ पे .

लीला ने देखा की दासी ने आवाज लगाई ," रानी सा वह बड़ी मैडम गीता जी ने यह सब मगवाया है ".

लीला ने डिशेस देखकर कहा अभी यहीं लगा दे और चेयर्स भी मगवा ले पर चीख के साथ हूटिंग की आवाज सुनकर धयान ुष तरफ गया तोह देखा अब आर्यन की पीठ पे पहले रौशनी फिर गीता और दीप्ति बैठे हैं पर वह बड़े मजे से बगैर ड्रेस की परवा किये उनको सवारी करवा रहा है ......

एक बार रौशनी ने अपनी माँ लीला की तरफ इशारा किया तोह आर्यन उनको वहां ले आया तब रौशनी बोली ," अब आप दोनों मौसीजी उतरो अब मेरी मुम्मा और में सवारी करेंगे ..... आयो मुम्मा ".

बेटी ने वह बोलै जोह लीला भी सोच के आयी थी पर अब उसको आर्यन अपने से दुर्र नजर आ रहा था , आर्यन दीप्ति गीता तीनो उसको रेस्पेक्ट देते हैं सिर्फ अपनी चाहत के लिए गलत नहीं कर पाऊँगी .

लीला ," बीटा मौसाजी थक गए होंगे कल ाको रियल घोड़े पे घूमा देंगे ..... और आप कुंवरजी एक बच्ची के लिए पूरी शेरवानी खराब कर दी ".

आर्यन बस मुस्करा के बोलै ," कल हम चेतक की सवारी करेंगे और उससे दोस्ती भी ".

रौशनी आर्यन की पीठ से उतर के उसके सामने आयी और बोली ," यू अरे थे बेस्ट फ्रेंड आफ्टर माय डैडी , लव यू माहि " ..... उसके गाल पे किश की ....... आर्यन ने भी उसको गले लगा के अपनी आँखों से आंसूं पहुंच लिए ," लव यू प्रिंसेस".

अपनी आंखें पहुंच के लीला भी रौशनी को अपनी गॉड में अंदर ले गयी वाशरूम की तरफ .

आर्यन मुस्करा के ," बस मुझे उसका दुःख देखा नहीं गया तोह उसके साथ बिजी हो गया , सॉरी आप सबकी टिया पार्टी बिगाड़ दी ".

दीप्ति ," नहीं माहि , ी ऍम प्राउड ों यू . वह बहोत खुश है ".

गीता ने टूट मारा ," बेटी तोह इससे चिपकी रहेगी बस उसकी माँ लट्टू है आर्यन पर ..... है है है है ".

पहली बार गीता पर आर्यन और दीप्ति एक साथ चिल्ला दिए ," गीता ...... डीडीईई ".

लीला वापस आते हुए ," क्या हुआ ऐसे क्यों चिल्ला रहे हो ".

गीता हसकर," कुछ नहीं दीदी , वह आर्यन ने बोलै लीला जी को एक नेचुरल बोन्साई का स्पेशल पेड़ दिखाना है जोह खाश उसके hi निच्चे है तोह दीप्ति मन कर रही है की मेरी दीदी को कोई इंटरेस्ट नहीं ".

लीला मुस्करा के ,"मुझे और मेरी दीदी को बॉटनी में बहोत इंटरेस्ट था फिर बागवानी में कई पदों के नाम हम अपने पुरजों पे रखे हैं ..... में देखना चाहूंगी अगर दामादजी को परेशानी न हो , क्यों दीप्ति तुमको कोई ऐतराज तोह नहीं ?"

दीप्ति ," कैसी बात बोल रही हो दीदी , आप को किसी की परमिशन की जरुरत नहीं ".

गीता ," दीदी आप घूम के आयो फिर कही भर चलते हैं यहाँ माहौल थोड़ा बोरिंग है और आर्यन में कुछ कासुअल भिजवाती हूँ यह ड्रेस थोड़ी भरी है और गन्दी भी हो गयी है ".

दीप्ति का हाथ पकड़ गीता खींचते ले गयी पर जब लीला ने पलट के देखा तोह आर्यन अपनी गॉड में बिठा के रौशनी को जूस पीला रहा था और रुमाल से उसका मोह भी साफ़ करता . सच्च hi था मुश्किल से 1 घंटे में उसकी बेटी और आर्यन कितने घुलमिल गए .

लीला ," फिर कुछ हमको भी दिखा दो यार जोह गीता ने कहा वैसे मेरी आगे इतनी भी नहीं है तोह नाम से भी बोलोगे तोह चलेगा ".

आर्यन भी मुस्कान के साथ लीला की तरफ नजर मिला के बोलै ," आप बड़ी हैं हमसे सब अधिकार है आपको बस आदेश दिज्ये ".

नीली आँखों वाले ने एक डायरेक्ट नज़र देखकर hi घायल कर दिया ....... न स्तब्ध मोह से फूटा बस लैब hi थार था के हार मान गए की आज हमसे न होगा कोई और युक्ति से जवाब दो ..... पर जवाब तोह ुष घेरि नज़र को खड़े होते सख्त निप्पल दे रहे थे या फिर योनि मुख से टपकती लार जैसे हम भी आज दिल से खुश हैं ...... बगैर कोई जवाब दिए लीला अपनी फूलती साँसों को संभालती वापस दौड़ गयी और शलेट की सीट पे बैठी मूट दी झड़ते हुए...... इतना शक्तिशाली मर्द सिर्फ एक निगाह ने उसका सबकुछ चीन लिया .

ओह माय गॉड , दीप्ति और गीता इसके साथ कैसे रह पाती हैं , में हार गयी आर्यन अब मुझसे न होगा .

10 मं बाद खुद को दुरुस्त करके बहार आयी तोह कोई नहीं था तब दासी ने बतया की कुंवरजी के साथ राजकुमारी रौशनी भी आपका वेट कर रहे हैं पार्किंग में .

लीला राजमहल में अपने कक्ष में जाकर दीप्ति से पूछी क्या प्लान है तोह उसने बताया की हम अपने पहाड़ी वाले रिसॉर्ट्स पे जा रहे हैं आपके देवर ठाकुर सूरज सिंह की तरफ से पार्टी है.

लीला तैयार होकर आयी तोह रानी पुष्प उसका hi वेट कर रही तब उसने बतया बाकी सब जा चुके हैं बस में hi तुम्हारा वेट कर रही थी ...... दोनों रोल्स रोये में बैठकर 3 सिक्योरिटी कार्स के साथ यहाँ 35 कम दूर ारवाली की पहाड़ी पे बने अलवर राज्य के शाही रिसोर्ट पे पहुंचे ......

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लीला

पूरा रिसोर्ट सजा था और लीला अपने (मैं में) देवर को अपने लिए दीवानपन देख , कमीना सबको बता के hi मानेगा बेवकूफ. साले में तुझे दिखा के आर्यन को जला के अपनी तरफ आकर्षित करने लायी थी . अब मुझसे नहीं होगा अगर आर्यन मिलेगा तोह बोल दूंगी की में यहाँ क्यों आयी हूँ .

रानी पुष्प तोह अंदर चली गयी पर सबको साइड में रुकने का बोल के लीला एक पहाड़ी की एज पे दोनों प्यार रखकर बोली," अब में तुमको धोका नहीं दे सकती मुझे आर्यन नहीं मिलेगा ....... " ...... वह 3000फट की उचाई से छलांग मार दी पर कोई उसके सरीर को रोक के गिरने से रोक के अपनी बाँहों में ले लिया ......

ुष साक्ष ने उसके लबों को चूसते हुए कहा," मरने से पहले इच्छा पूरी कर लो और रौशनी को हमको छोटा भाई भें देना hi होगा मिस लीलावती ..... पुछःह पुछठ पुछःह "........

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दिल्ली , अनीसा कंपनी हेड ऑफिस, 5 पं ......

मीणा और सारू दनदन्ति हुयी अणि के ऑफिस जोह 32 फ्लोर पे था घुसी दोनों गुस्से में थी तोह अणि ने अपनी टीम वालों को भार जाने को कहा .....

मीणा गुस्से से ," हमने डीडे किया था की दीप्ति के परिवार वालों पर कोई अपनी शक्ति उसे नहीं करेगा कभी न कभी अपनी अकड़ से वह मारे hi जानेवाले हैं ...... कमसे काम ुष लड़की का तोह सोचो अणि जोह अपने परिवार वालों से कितना प्यार करती है ...... मुझे यह तोह नहीं लग रहा है की गीता के लिए आर्यन सबकुछ बारबारद कर सकता है पर अब दीप्ति के लिए पक्का कर देगा ..... तुमको अंदाज़ा भी है वह लड़की दीप्ति उसके लिए क्या बन गयी है ...... हम सब सेज खून वाली पावरफुल कोई एंटर तक नहीं कर पायी पर दीप्ति ने जोह उसका साथ दिया आज आर्यन हमारे सामने है जोह हम में से कोई नहीं कर पता. गुरूजी सब सही बोलते हैं पर में अपने भाई को नहीं खू सकती किसी भी कीमत पर क्या जरुरत थी ुष मिरदुला को हमारी नानी माँ जैसी बनने की , अणि यह बहोत गन्दा खेल होने वाला है जोह तूने खेला है ".

सारू कुछ बोलना चाहती थी पर मीणा ने हाथ दिखा के उनको चुप करा के कहा ," तू खेल िश खेल को तुझे नहीं पता एक बेटे के लिए तूने दो माँ सामने कड़ी कर दी हैं और जोरसे क्यों नहीं बोलती चुन के दिखा ....... आर्यन कभी भी रति नानी माँ से अलग नहीं कर पायेगी , चलो मम्मी अब हम इश्के साथ नहीं".

मीणा और सारू वहां से फार्महाउस जाकर कल सुबह अलवर जाने की तयारी करने लगये .

अणि अपने ऑफिस में बहार दिल्ली का पोल्लुशण अपनी विंडो से देखती फूँक मारी तोह जैसे तेज हवा से सारा गर्ध मिटटी साफ़ होकर बारिश होने लगी .....

अणि कुटिल मुस्कान लिए ," माँ को माँ hi हरा सकती है ?"

हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट
 
अपडेट -35 हार्ट हार्ट हार्ट

PART - 3 (राजवंश)

महारानी मिरदुला गुस्से में राजा जबर सिंह , अपने भतीजे को खूब खरी खोटी सुनती बुरी तरह से पीट दी उसके अपनी तीनो रानियों को सबके सामने बाँझ कहने पर .

महारानी मिरदुला ने अलवर राज्य को बुलंदी पे पहुंचा था अपने जम्ने में . तेज तर्रार , निडर और सबको अपने प्यारों के निच्चे रखने वाली महारानी हुआ करती थी . बड़े बड़े राजा भी उससे डरते थे ...... रॉयल राजपूताना कौंसिल की चेयरपर्सन बानी तोह बड़े भाई रघुभार सिंह ने उसका पूरा साथ दिया . दीप्ति के जनम के लिए अपनी बलि तक दे डाली दिव्या तलवार के लिए पर अगर 21 साल होश में होती तोह यह टुच्चे से राजपूत लफंदर राजकुमार , त्रिभुवन और जबर को कभी राजा न बनने देती .

अणि ने मिरदुला को 18 साल की लड़की से 38-40 साल की महिला में ट्रांसफॉर्म किया ताकि किसी को साख न हो की इतनी जवान कैसे हो गयी आर्यन के ट्रीटमेंट करने से पर एक चीज उसने ऐड कर दी मिरदुला का आर्यन के लिए अटूट चाहत जोह पहले से थी उसको ज्यादा बढ़ा दिया गुस्से के साथ .

( आर्यन इशलिये मन किया था अणि के लिए नहीं तू अपनी शक्ति मत उसे कर मिरदुला मैया पे पर सारू , मीणा ने उसको मन लिया और अणि भी ऐसा मौका कहाँ चूकती है )

मिरदुला गुस्से से दनदन्ति जबर को पीटने के बाद टिया पार्टी से राजमहल के बहार एक तरफ बढ़ चली उसके पीछे 2 दासी और 4 सैनिक थे ....... राजमहल के उत्तरी चोर पे हरे भरे पेड़ों और बगीचे के बिच राजगुरुजी का आशाराम जैसे एक कुत्तिया बानी थी जिसमे 4 कक्ष थे उनके और सिस्यों के लिए , वह यहीं रुकते जब राजमहल में होते .

सबको बहार रुकने का बोलकर वह एक सीसीए से पूछकर अंदर गयी तोह राजगुरुजी और रघुभार सिंह अपनी ध्यान मुद्रा में बैठे थे पर मिरदुला के अंदर आते hi दोनों की आँख खुल गयी .

महारानी मिरदुला गुस्से से ," भैया आप ने किन दो बेवकूफ को राजा बना दिया हमारे दो राज्य का , एक नीरा मूरख है और दूसरा काम अकाल ....... इनसे बस ायसि करवा लो . में यह बताने आयी थी मुझे दोनों को राजा के पढ़ से हटाना है नहीं यह दोनों नपुंसक पूरे खंडन का नाम मिटटी में मिला देंगे".

रघुभार सिंह भी अपनी छोटी भें का वही तेवर देखकर खुश थे की यह अब लगाम लगा के रखेगी परिवार पे पर गंभीर होकर बोले ," कभी कभी फैसले परस्तिथि वस् लेने पड़ते हैं फिर दोनों ने कुछ अच्छा नहीं किया तोह बिगाड़ा भी नहीं है मिर्दु ........ क्यों गुरूजी ?"

मिरदुला ने राजगुरुजी को हाथ जोड़कर सर झुका के अभिवादन किया और उनके चरण छुई पास जाकर वहीँ एक आसान पे बेथ गयी , तब राजगुरुजी बड़ी धीरता से बोले ," महारानी , तुमको अभी थोड़ा मैं शांत करके विश्राम करना चाहिए . समय के प्रव्हा में तुमको अंकोलित होना पड़ेगा फिर नयी पीढ़ी अब बागडोर सँभालने के काबिल होने लगी है ".

मिरदुला भी शांत होकर ," चमा करें गुरूजी पर अपने राज्य और प्रजा को मैंने हमेशा सर्वोपरि ऊपर रखा है बस आज कुछ बातें कुचन्ति तोह रहा न गया".

राजगुरुजी ने स्नेह से कहा ," तुम्हारे जीवन के 21 साल का त्याग कोई समझ नहीं पायेगा पुत्री पर सच्च में तुम एक मजबूत स्तम्भ hi हो दोनों राजघराने का फिर मेरे विचार से तुमको अपने बच्चों और परिवार के साथ ज्यादा वकत बिताना चाहिए . राजकुमारी दीप्ति , बिलकुल तुम्हारी छवि hi है, उसको क्रोध और घमंड लेश मटर नहीं है . उसके हाथ में राजघराने की जिम्मेदारी सही से निर्वाह होगी फिर आर्यन उसको बहोत प्यार करता है वह दोनों तुम्हारी शान hi बढ़ेंगे ".

मिरदुला थोड़ा सोचकर बोली ," जबर की बात पे गुस्सा आ गया था तोह खुद को रोक न सकीय उसको दंडित करने से ". ( सच्च में तो गुस्सा गीता पे था फिर आर्यन की धमकी की वह चला जायेगा पर निकला जबर सिंह पे )

रघुभार सिंह ," पर वह तोह तुम्हारा लाडला भतीजा है , उसपर कभी में क्रोध करता तोह तुम रोक देती थी ...... आज ऐसा क्या हुआ ".

मिरदुला थोड़ा लज्जित होकर बोली ," 21 साल वक्त के थपेड़ों ने उसकी सोच बदल दी है जोह अपनी पत्नियों के साथ अपनी छोटी भें लीला को भी सबके सामने बेइजत करने वाले शब्दों का उपयोग किया . किसी औरत को बांज कहना सबसे बड़ा अपराध है और अगर यह बात पति hi बोले तोह महा पाप ...... दूसरा लीला की बेटी दुसरे के बच्चों में कैसे गिनी जा सकती है क्या उसमें हमारा खून नहीं है ".

दोनों समझ गए थे जबर सिंह अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा , मिरदुला ने दोनों को पूरा वाकया बता दिया की कैसे सब हुआ . दोनों समझ गए बाकी कोई जबर सिंह को टोक नहीं सकता पर मिरदुला को उसको मारना नहीं चाहिए था , वह दोगला सांप है पलट के वार जरूर करेगा .

राजगुरुजी कुछ सोचकर ," रघुभार , बात अब गंभीर है क्योंकि दीप्ति को श्राप से मुक्ति मिली और आर्यन का दिव्या तलवार को हासिल करने के बाद दोनों राजघराने अब रानियों की गॉड में वररिस भी देखना चाहेंगे फिर रानी मिरदुला ने जबर सिंह के साथ त्रिभुवन की भी मर्दानगी भी ललकार सी दी है ".

रघुभार सिंह ," गुरूजी , अब उन्ह रानियों को निर्णय लेने दिया जाये फिर हम क्यों होते है िश होनी को रोक पाए , हमारे Ved-purano से लेकर शाश्त्रो में लिखा है की जब जब राजवंश को आगे बढ़ने की बात आयी तोह कोई शूरवीर या दिव्या मनुष्य ने सिर्फ कर्तव्य के लिए फल भी झोली में डाला है ".

राजगुरुजी ," पुत्री , तुम से तो ऊपर कोई भी नहीं है और न कोई तुम्हारी बात ताल सकता है बस अहसास रहे की हम सब राजगद्दी और िश राज्य से बंधे हैं फिर उसके लिए कुछ कड़वे सत्य को भी राज hi रखना होगा ".

रानी मिरदुला भी अब दोनों की बातों का अर्थ समझ गयी थी ....... यानी तीनो को आर्यन hi दोनों राज्य का अंगरक्षक और योद्धा दिख रहा था जोह जरुरत पे अपनों को हमेशा खुशियां देने के साथ रक्षा भी करेगा .

राजपरिवार में कोई भी इनकी बात नहीं स्वीकारता की आर्यन hi इनका वंश आगे बढ़ेगा जोह यह तीनो पहले भी कर चुके हैं .

रघुभार सिंह अपने टाइम के शक्तिशाली राजा थे...... पहली बार मिरदुला की एक औलाद के लिए दोनों ने समाज के संस्कार व् नियम टूडे पर दूसरी बार भविष्वाणी और दिव्या तलवार के लिए ऐसा किया और दीप्ति का जनम हुआ . यानी दोनों बेटियां रघुभार सिंह से मिरदुला को मिली जोह दोनों को गलत नहीं लगा राजपरिवार के लिए . राजगुरुजी को भी दोनों ने सत्य दीप्ति के जनम पे बता दिया जिसको उन्होंने भी सही तेरा दिया .

राजा रघुभार सिंह ने ऐसे hi कई दुसरे राज्य की राजकुमारी और रानियों को भी अनजाने में प्रसाद दिए थे अपनी जवानी के टाइम में , थे भी रंगीन मिज़ाज के .......

मिरदुला के लिए आर्यन उसके पिछले जनम का "महार्यं" था जिसकी 100 से ज्यादा पत्नियां थी और ना जाने कितनी रखैल , उसको भी याद नहीं होगा कहाँ किसका प्यार भरी कर दिया था आधे से ज्यादा बच्चों का बाप था अपने खानदान में और बहार न जाने कितने पर वह 2500 साल पुराणी बात है.

राजगुरुजी भी जानते थे आर्यन hi दोनों राजघराने का वंश आगे बढ़ेगा फिर कितना बड़ा दिव्या पुरुष है जोह धरती पे हज़रों साल बाद जनम लिया है ...... यानी तीनो की एक तरह से मौन सहमति थी राजवंश को आगे बढ़ने में . मिरदुला को िश कार्य के लिए बागडोर अपने हाथ में लेनी थी वहीँ राजगुरुजी और रघुभार सिंह को आशीर्वाद देना था . दोनों ने आज रात hi एक हवं भी किया 5 रानियों को संतान सुख के लिए .

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उधर रिसोर्ट , 7पं....

अपने को दोषी मान कर लीला ने पहाड़ी से छलांग लगा दी की वह अपने स्वरगवसि पति से बेवफि करके अपनी छोटी भें के होने वाले पति आर्यन को पाने यहाँ तक आ गयी अपनी सगी बेटी रौशनी को चारा बना के .

जब आँख खुली तोह आर्यन उसके लबों को चूम रहा था , एक हाथ से पहाड़ी की चट्टान के खुदरे कटान को पकडे और दुसरे से लीला को थामे था कमर में बाहिएँ लपेटा हुआ अपने से चिपकाये .

आर्यन ,"मरने से पहले इच्छा पूरी कर लो और रौशनी को हमको छोटा भाई भें देना hi होगा मिस लीलावती ..... पुछःह पुछठ पुछःह ".........

लीला अभी तक संभल भी नहीं पायी थी पर आर्यन ने उसको पलट के एक हाथ से अपनी पीठ पे चढ़ा के कहा ," कसकर पकड़ लो नहीं तोह रौशनी और में तुमसे कभी बात नहीं करेंगे , सुसाइड तोह मचार भी नहीं करता जबकि तुम तोह राजपूताना शेरनी हो ".

अपनी टांगें आर्यन की कमर पे लपेट ली और भायें गर्दन पे ," ारयणणणणणण , प्लीज .......ुहममममम "....... रू पड़ी ....

आर्यन ने उसको डपट दिया ,"चुप एक दम चुप , एक झाप्पड़ दूंगा तोह अकाल ठिकाने आएगी बस कसकर पकड़ के रख ..... मोटी तू कितनी भरी है हमको 2000 फट से ज्यादा ऊपर चढ़ना है बस कसके पकड़ ".

आर्यन का िश तरह तू तड़क के डाटने से सच्च में लीला को डरा hi दिया तब अहसास हुआ वह हलके अँधेरे में पहाड़ी से निच्चे लटक रहे ....... वह भी माउंटेन क्लीम्बर्स थी पर आज बिना गियर्स और इक्विपमेंट्स के ऐसी खतरनाक जगह पर अगले 2 मं में कमल hi हो गया ......

अँधेरे में शार्प ेद्गेस को पकड़ बना किसी कुशल बन्दर की तरह उछलता कूदता आर्यन अपनी पीठ पे लीला को चिपकाये ऊपर पहुंच गया ," चलो उतरो और मूड ठीक करो , कैसी साली मिली है पहली बार में hi जान देने लगी इससे अच्छा किसी के काम आकर मरती "..... और आँख मार दी ...... लीला अभी भी शॉक में थी पिछले 10 मं में क्या से क्या हो गया उसको समझ hi नहीं आ रहा था बस कुछ सुजा नहीं तोह फिर से रोने लगी .

आर्यन आगे बढ़कर उसको अपने बाँहों में ले गले से लगा के उसको चुप करवाता हुआ एक बड़े पेड़ की तरफ ले गया वहीँ दूसरी तरफ पार्किंग थी कार्स और सिक्योरिटी गार्ड्स भी ज्यादा थे कोई उनको ऐसे देख सकता था .

आर्यन ," रानी साहिबा आप मुझे मारवोगी अगर किसी ने देख लिया तोह मुझे पीट देंगे की मैंने आपको रुलाया है ".

अपने रुमाल उसको देते हुए बोलै ," आपका मोबाइल और पर्स नहीं बचा सका माफ़ कर देना "...... फिर थोड़ी दूर जाकर उसका मोबाइल और पर्स उठा लाया जोह कूदने से पहले वहीँ किनारे पे उसके हाथ से चूत गए थे ....... वापस करते हुए उसकी खूब चिद्या .

लीला भी रूट हुए हसकर ," आज तुम न होते तोह रौशनी का क्या होता , में बहोत बुरी हूँ ".

आर्यन हसकर ," मुझे बुरी सालियान भी पसंद हैं ....... है है है है ...... चलो थोड़ा अपने आप को सम्भालो रौशनी को पता चल जायेगा की तुम रोई हो ....... ुष बच्ची का दिमाग़ अभी से 5th-6th क्लास के बच्चों जितना काम करता है . हमेशा याद रखो पहली रौशनी फिर तुम हो उसके बाद कोई भी आंतु जांच आशिके के बारे में सोचना ".

10 मं बात करके सच्च में लीला अब नार्मल हो गयी थी आर्यन की बातें , मस्ती और मजाक सुनकर पर हर दूसरी लाइन में रौशनी का नाम लेता ताकि कभी ऐसी सिचुएशन hi न आये .

फिर दोनों पार्टी में रिसॉर्ट्स में पहुंचे तोह रौशनी अभी दीप्ति और गीता के साथ hi गेट पे मिल गयी , आर्यन को अपनी मम्मी के साथ देखकर दौड़ के आर्यन से लिपट गयी ," माहि अंकल , आप कहाँ थे ?"

आर्यन ने उसको उठा के गॉड में लिया और उसके गाल पे किश करके कहा ," आपकी मुम्मा को लेने गए थे "...... फिर रौशनी को लीला की गॉड में दिया और बोलै ," मुम्मा मिस यू बार्बी डॉल ".

लीला भी भावुक होकर अपनी बेटी को चूमती हुयी प्यार करने लगी ...... आर्यन गीता दीप्ति के पास पहुंचा तोह दीप्ति ने कहा ," यह आपकी ड्रेस को क्या हुआ गन्दी कैसे हो गयी ".

आर्यन ने नीला को पास बुला के कहा ," कोई ड्रेस पड़ी है कार में मेरी "...... नीला ने कहा ," सर में अभी लायी , आप फ्रेश हो जायो ".

गीता मुस्करा के ," दीप्ति बेबी , अपनी भें लीला की ड्रेस देखि शी इस सुच ा स्मोकिंग हॉट क्यों आर्यन उसकी भी डर्टी कर दी क्या ? "

आर्यन मुस्करा के ," बाद में बाटूंगा तुम दोनों भी उससे कुछ मत पूछना, चलो यहाँ क्या कर रही हो और पार्टी के होस्ट कहाँ हैं ?"

गीता मुस्करा के आँख मार के बोली ," आज लगता है दीप्ति के यहाँ आर्यन को छोड़कर कोई मर्द जिन्दा नहीं बचेगा ..... है है है है ".

आर्यन भी हसकर बोलै ," लगता है सूरज सिंह गया जाओ दीप्ति डार्लिंग बचो उसे वह तीनो खा न जाएँ ..... है है है है ".

दीप्ति भी सर झुका के है दी , तीनो दानव लड़कियों के पीछे सूरज सिंह hi नहीं दीप्ति के कई रिस्तेदार कौसिन्स रजवाड़े लगे थे इम्प्रेस करने में . तीनो की ड्रेस तोह हॉट थी hi फिर दानव शक्ति सबको उनकी तरफ खींच रहा था . बस Aryan-Deepti की वजह से रुकी थी नहीं तोह सब जवान पुरष इतने ताजा मार्श लग रहे थे मौका मिले और चाट कर जाएँ दावत समझ के .

नीला एक नहीं दो ड्रेस लेकर आयी एक आर्यन के लिए और अपनी एक ड्रेस लीला के लिए क्योंकि दोनों की बॉडी एक जैसी थी ....... उसने भी चेंज करना सही समझा ....... आर्यन एक रूम में गया ड्रेस चेंज करने और लीला अपनी बेटी के साथ दीप्ति गीता को ले गयी ड्रेस चेंज करने लेडीज रूम की तरफ .

रानी पुष्प बिचारि अकेली बस सबको देख रही थी , उसके 2 सिक्योरिटी गार्ड बहार थे और उसके साथ उसकी खास दासी भी थी जिसके साथ वह एक टेबल पे बैठी थी . दूर से आर्यन को देखकर अपनी ख़ास दासी के साथ मौका देख रही थी कब अकेले में बात हो .

आर्यन को अकेले जाता देख उसके पीछे पहुंच गयी रूम तक और दासी को बोली," तू निघा रखना कोई इधर आये कॉल कर देना समझी ".

रानी जमुना ने स्पेशलय उसको पार्टी में भेजा ," तू जवान है पुष्प हम सब में फिर किसी को तोह बात करनी होगी आर्यन से , तू मौका देखकर तरय करना अगर तुझसे बात नहीं बानी तोह फिर मुझे मोर्चा संभालना पड़ेगा ज्यादा दिन नहीं है रुकेगा आर्यन यहाँ ".

आर्यन ने कपडे उतार दिए तभी दूर पे नॉक हुआ पक्का गीता होगी अभी मजे लेता हूँ सिर्फ अंडरवियर बनियान में जाकर लाइट ऑफ किया .

दूर ढेरी से अनलॉक करके दूर के साइड में चुप गया पर पुष्प अंदर आकर अँधेरा देखि और लाइट ों करती किसी ने पीछे से दबोच लिया और उसकी एक चूची दबा दी आर्यन झट से अलग हो गया सॉरी ....... क्योंकि जिसको वह अँधेरे में गीता समझा वह कोई और थी पर ड्रेस और मेक उप उसने भी गीता दीप्ति जैसा किया हुआ था क्योंकि तीनो साथ hi त्यार हुयी थी .

पुष्प भी अब लाइट के स्विच से हाथ हटा के आर्यन की तरफ पलट के उसको बाँहों में कास ली ," जब शुरू किया है तोह पूरा भी करो , इतनी बेरुखी क्यों कुंवरजी ?"

आर्यन ने उसको अलग करते हुए लाइट जला के कहा ," रानी साइबा मैंने सोचा , दीप्ति या गीता मेरे से मजाक कर रही हैं तोह में भी उनको चिढ़ाने लगा था बस एहि गलती हो गयी , सॉरी माफ़ कर दिज्ये पहली गलती समझ कर ".

रानी पुष्प ने लाइट में आर्यन की बॉडी को सिर्फ िन्नेर्स में देखा तोह ख़ुशी से बाँचिएन खिल गयी पर आर्यन ने टॉवल लपेट के बोलै ," आप बैठिये में रेडी होकर आता हूँ ".

पुष्प ने दूर लॉक करके पलट के कहा," मुझे अभी भी वैसा दर्द चाहिए जोह अनजाने में दिया था ....... आर्यन में यहाँ रानी की हैसियत से नहीं एक दासी की हैसियत से आयीं हूँ , तुम ने दीप्ति को श्राप से मुकुट किया , अलवर राज्य को भी दिव्या तलवार और खज़ाना देकर , महारानी मिरदुला को भी फिर जीवन देकर पर एक श्राप रह गया हम रानियों पर जिसकी मुक्ति की प्रतीक्षा हम सब आज तक कर रहे हैं . राजगुरुजी से सलाह मशवरा करके hi में यहाँ तक इतनी दृढ़ता और बेशर्मी से कहने आयी हूँ".

आर्यन भी उसकी बात का कुछ कुछ अर्थ समझ रहा था तोह बोलै ," आप बोलिये , मुझसे बड़ी हैं में हर मदद करूँगा . जितनी रेस्पेक्ट में दीप्ति की दोनों मम्मी की करता हूँ उतनी आप तीनो की भी ".

पुष्प ने एक घेरि सांस लेकर कहा ," क्या में बेथ सकती हूँ "..... आर्यन ने उनको बैठने को कहा और अपने पुराने कपडे दाल के उसके पास बेथ गया .

पुष्प ," बात यह की आर्यन हमारे खानदान पे निस्तान का श्राप hi है िश पीढ़ी में राजगद्दी पे बैठे लोगों के लिए . दोनों दीदी अपने खानदान में चली गयी शादी करके उनके बच्चे हुए . सुचित्रा दीदी को भी बेटी हुयी पर हम में से किसी को नहीं हुआ . अब श्राप मिट चूका है तोह अब तुमको hi मुक्ति दिलानी होगी सबको "....... अपनी बात एक hi सांस में कह दी फिर सर उठा के देखि तोह आर्यन शर्मा रहा था .

पुष्प ," कुछ तोह बोलो ".

आर्यन भी झिझक के साथ बोलै ," में दीप्ति से शादी करके जल्द से जल्द उसको प्रेग्नेंट करने की कोशिश करूँगा ताकि आप सबको भी नाती और राजगद्दी का वररिस मिल जाये पर दीप्ति को आप रेडी करना जल्दी बच्चे के लिए ".

पुष्प अपना सर पकड़ के (मैं में) बोली ," यह नीरा चुटिया है या एक्टिंग कर रहा , में अपने प्यार भरी करने की बात कर रही हूँ यह दीप्ति की बात कर रहा है ....... पार्टी के बाद बात करती हूँ ".

आर्यन से फ़ोन नंबर लेकर बोली ," आप मुझे पार्टी के बाद कॉल करना तब में डिटेल में बाटूंगी अब रेडी हो जायो पार्टी में सब आप को hi ढूंढें गए ".

आर्यन रेडी होकर आया तोह गीता उसकी तरफ hi आ रही थी फिर दीप्ति , लीला ने भी ज्वाइन किया . रौशनी अब अपनी गवर्नेस के साथ थी .

लेडीज के लिए एक साइड और गेट्स के लिए एक साइड टेबल्स लगी थी जिन्हपर पर सब बैठे ड्रिंक्स और पार्टी का मजा ले रहे थे ...... एक फट ऊँचा डांसिंग स्टेज बना था दज और लाइट्स से पार्टी की रौनक दिखती थी. सब राजशाही अर्रंगेमेन्ट्स था.

आर्यन का सब मर्दों ने कुंवरजी कहकर स्वागत किया . फिर राजघराने के मेहमान और राजा त्रिभुवन सिंह भी सबके साथ आये और राजा जबर सिंह भी था अपनी बाकी दो रानियों के साथ .

मिरदुला के साथ सुचित्रा और रूबी भी आये थे . पार्टी शुरू हुयी खाना ड्रिंक्स का दौर चालू हुआ . 9 बजे तक सबसे मिलना मिलाना खन्ना होता रहा फिर दोनों राजा निकल गए अपनी रानियों के साथ . सुचित्रा और पुष्प रुक गयी , रूबी को मिरदुला अपने साथ ले गयी उसकी तबियत ठीक नहीं थी पर असली वजह वह आर्यन से कटरा रही थी अपनी हरकत के कारन उसकी सही क्लास लगाई थी कल नीला ने पर आर्यन ने उससे अभी बात भी नहीं की .

फिर सबने Aryan-Deepti को डांस के लिए कहा तोह दोनों ने एक सांग में डांस किया फिर गीता ने भी दोनों के साथ डांस किया . सब जानते थे गीता , राजकुमारी दीप्ति की हंसकाल , होने वाली बड़ी सौतन है .

फिर आर्यन ने सबके सामने जाकर लीला को डांस के लिए कहा तोह वह भी रेडी हो गयी ....... एक इंग्लिश डांस सांग पे दोनों की अच्छी टोनिंग और रदम देकर सब ने बहोत ताली बजे . लीला अब नार्मल थी और बहोत खुश भी .

सुचित्रा ने पुष्प को भी आर्यन के साथ एक डांस के लिए भेजा तोह दोनों ने रोमांटिक सांग पे अच्छा डांस किया. लास्ट में सुचित्रा को भी आर्यन खींच लिया डांस स्टेज पे .

अब बारी आयी साया चाय माया की जिनको दीप्ति गीता ने आर्यन के साथ भेजा बारी बारी जोह पिछले एक घंटे से तीनो ने स्टेप्स जैसे याद कर लिए हो डांस के ....... तीनो ने बहोत hi सेंसुअल डांस किया बारी बारी आर्यन के साथ, सब ने बहोत हूटिंग की .

सूरज सिंह ने आर्यन के कान में कहा की उसको भी तीनो लड़कियां पसंद हैं पर भाव नहीं दे रही जबकि मैंने सब अर्रंगेमेन्ट्स किया है .

आर्यन ने साया को पास बुला के कहा ," राजकुमारी साया , यह रानी लीला के देवर है ठाकुर सूरज सिंह और आपके साथ डांस करना चाहते हैं . आज इनकी तरफ से hi पार्टी है ".

साया भी हसकर ," फिर तोह मेजबान की रिक्वेस्ट माननी पड़ेगी ".

आर्यन ने सूरज सिंह के कान में कहा," आप बड़े हैं ठाकुर शभ , पर िंह की मर्यादा का भी ख्याल रखियेगा ".

राजा सूरज सिंह ," आप बेफिक्रे रहिये कुंवरजी , हम औरशन, लड़कियों का पूरा सम्मान करते हैं आप भाभी से पूछ लेना ".

आर्यन भी मुस्करा दिया पहले साया फिर चाय माया ने भी बारी बारी डांस किया सूरज सिंह के साथ , बाकी रजवाड़े भी तरय मारे पर तीनो ने साफ़ मन कर दिया .

सब जाने लगे तोह आर्यन को सूरज ने रोक लिया की अभी मर्दों की पार्टी बाकी है कुंवरजी ...... आर्यन ने भी उसकी बात राखी और Deepti-Geeta से परमिशन मांगी तोह दोनों ने राजमहल आकर सीधा उनके पास आने को कहा . लीला भी अपनी बेटी के साथ गीता, दीप्ति , पुष्प भी चली गयी . सुचित्रा को आर्यन ने कान में कह कर रोक लिया की मेरे साथ चलना अभी नीला यहीं होगी आप उसके साथ आराम करो . सुचित्रा भी मुस्करा के हाँ करके दीप्ति को बोल दी में आर्यन के साथ hi आउंगी नहीं तोह सब उसको रात भर पकडे रहेंगे .

आर्यन को सब ने घेर लिया फिर मर्दों की बातें और ड्रिंक्स का दौर चला , सूरज सिंह ने तीनो बहेनो के बारे में अपनी इच्छा बताई की उसको बहोत पसंद है कैसे भी दोस्ती करवा दो ....... आर्यन बोल दिया तीनो लड़कियां आम लड़कियां नहीं है फुल्ली त्रिनेड और चलती फिरती दानव कन्या की तरह hi समझो . देखकर कदम बढ़ना कहीं जान पे न बन आये कच्चा चबा डालेंगी फिर याद रहए तीनो दीप्ति की फ्रेंड हैं कोई जोर जबरदस्ती नहीं .

( आर्यन ने एक तरह से सच्च hi कहा था फिर यहाँ कोण जानता था वह तीनो क्यों है )

सब समझ गए की ठीक hi बोल रहा है आर्यन फिर राजकुमारी दीप्ति की फ्रेंड पे हाथ डालना अपनी मौत को गले लगाने वाली बात है ...... अब स्टेज पे छोटे कपड़ों वाली डांसर्स सब मर्दों को रिझा रही थी तोह आर्यन ने इज्जाजत मांगी. सूरज ने रोकना चाहा तब दीप्ति का एक कजिन बोलै ," ठाकुर शभ , कुंवरजी नहीं मानेगे कल रात भी राजकुमारी का डर बता के भाग लिए ".

आर्यन भी मुस्करा कर ," भाई बात यह है , मुझे शादी करनी है और गीता दीप्ति को भनक भी लगी तोह मेरी बंद बजा देंगी ऊपर से उनकी जासूस वह बॉडीगार्ड मेरे लिए hi रुकी है . वैसे आप लोग एन्जॉय करो हमको माफ़ करो ".

सब हसने लगे तब दुसरे सख्स ने कहा ," बात कुंवरजी की ठीक भी है , राजकुमारी को कैसे पसंद आएगा की उनका मंगेतर कहीं मोह मारे. आप बेफिक्र जाएँ कुंवरजी ".

आर्यन सब बड़ो को नमस्ते और हम उम्र से हाथ मिला के बहार आया तोह नीला ने उसको बता दिया की सुचित्रा कार में है वह यहाँ रुकना नहीं चाहती , आर्यन को भी ठीक लगा .

आर्यन अपनी कार में पहुंचा तोह नीला ड्राइविंग सीट संभाली और आर्यन पीछे सीट पे सुचित्रा के साथ बैठा ....... उसकी सिक्योरिटी साथ थी 3 और गाड़ियों में .

सुचित्रा ने बिना नीला की शर्म किये उसकी गॉड में चढ़ गयी और आर्यन के लबों से लबों को जोड़ चूमा छाती करने लगी ....... दोनों ने ड्रिंक्स कर राखी थी दोनों जोश में थे , आर्यन ने उसकी पार्टी गाउन जैसा ड्रेस से ब्रा का कप निच्चे करके चूची निकाल के चूसनी शुरू कर दी और उसके गुदाज चूतड़ मसलने लगा ....... सुचित्रा सीसैट हुए ...... " सीईइईसीईई ारयणणणणणण पूछह पूछह , ी लव यू जान हनननननन आईसीएएएएए hiiiiiiiiiiii ....... "...... उसके चेहरा चूची पे दबती वह अपनी छूट कपड़ों के ऊपर से उसके लुंड के उभर पे रगड़ रही थी .

सुचित्रा जोश में आर्यन के बालों में उंगलियन घुमा रही थी ," नीला पहले फार्महाउस ले चल फिर राजमहल जायेंगे ...... siiiiiiiiii अह्हह्ह्ह्ह काट मत और जोरसे चूस न ....... मैं तड़प रही हूँ".

आर्यन ने नीला की तरफ चूची से मोह उठा के देखा," पहले फार्महाउस ले चल और यह शटर बंद कर दे नहीं तोह हमरे लाइव शोज देखकर तू पक्का एक्सीडेंट कर देगी ".

नीला ने मुस्करा के ड्राइविंग सीट और पिछली सीट के बिच शटर बंद किया और 2 मं में hi दोनों नंगे होकर 69 पोजीशन में आ गए बेताबी ज्यादा थी आज दोनों को ...... आर्यन के मोह से छूट भिड़ाये सूचि उसके लुंड की तरफ उसके ऊपर लेती दोनों हाथो में लुंड थामे हिलाते हुए टोपे को चूसती चाटने लगी ..... "सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप मुहह्ह्ह्ह पुछःह पुछठ ..... बहोत बड़ा है कैसे अंदर गया कल यह मेरा बहोत गरम है ..... अह्हह्ह्ह्ह सीईई ारयणणणणणण आईसीईई hi चाटट्ट्ट जब से उठी हूँ दर्द होने के बाद भी बहोत पानी छोड़ रही है मेरी छूट अह्ह्ह्हहजजज खायआ जायआ ...... "

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सुचित्रा सिंह

पुछःह पहुछठ चुम्म्म्म चुम्म्म्म चुम्म्म्म मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह बस हलके कार में बजते सांग्स में दोनों जैसे एक दुसरे के अंग खाने के लिए उतरो थे .

" पूछह पूछह ी लव यू सूचि डार्लिंग सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप बहोत मीठी हो आप मामीजी पूछह चुम्म्म्म ".......

दोनों जल्दी से पुराणी पोजीशन में आ गए , आर्यन की गॉड में बैठकर सूचि ने अपना थूक हाथ से पूरे लुंड पे लगया स्पेशल कश्मीरी सेब जैसे सुपडे पे तोह आर्यन ने अपने थूक को उसकी मुनिया पे रगड़ के ऊँगली दाल अंदर तक गीला और चिकना कर दिया , रास बहती मुनिया को चिकना कर दोनों हाथ से सूचि के बड़े बड़े 38 के साइज के नितम्ब थम के लुंड की सीध में किया .

सूची ने एक हाथ उसकी गर्दन से सहारा लेकर दुसरे से लुंड को पोल की तरह सीधा रख के उसपे हो हो हो करती बैठती चली गयी पर दर्द से बुरा हाल होते हुए भी आधा लुंड अंदर लेकर रुक गयी ....... ahhhhhhhhhh माआआआआ मरररररररर गईइइइइइइ अब और नहीं जायेगा रे ...... इतना बड़ा भी कोई लुँड्ड़डडडड रखता है ....... सीईइईसीईई भगवन बचा ले ajjjjjjjjjj ...... "

आर्यन ने एक हाथ से सूचि के सर को पकड़ उसके अधरों को चूस डाला ताकि आवाज काम हो और दुसरे से उनके मखमली चूतड़ को पकड़ के अपने आधे अंदर छूट चीरे लुंड पे बैठने में हेल्प की सहारा देकर .

साला िश आसान में कोई भी औरत आर्यन के लुंड पे बैठी कुटिया की तरह आवाज निकलती थी बस भोंकती नहीं थी पर कूँ कूँ करती थी...... मिमयाती थी...... किसी लण्डी कुटिया की तरह जबकि सूचि का तोह अभी दूसरा hi दिन था आर्यन के साथ .

2 मं लगे पूरा लुंड लीलने में पर बहोत पक्के िर्रादे की थी सुचित्रा मामीजी पूरा छूट तक 11 इंच से भी लम्बा और 5 इंच के करीब मोटा लुंड उतर के अपनी गांड आर्यन के तटों तक सत्ता दी .

किसिंग रुकी तो अह्हह्ह्ह्ह सीईईई सीईई की आवाज करके बोली," बसससससस हिलना मत मुझे दारू पीला और सिगरेट भी पीला . अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहोत्तत्तत मोटा है तेरा खूंटा साला पेट तक पहाड़ जाता हैईईईई ."

आर्यन उसके कान चूमते हुए ," सूचि डार्लिंग , पहले छोड़ने का काम करते हैं न बाद में दारू पी लेना पुछःह पुछठ" .

सुचित्रा दर्द से भरी गुस्से में बोली," भोस्ड छोड़ मेरी छूट चिरई हुयी है दर्द से बुरा हाल है तू बाद का बोल रहा है , पहले दारू पीला अह्ह्ह्ह साले हरामीईईई तेरा लुंड भी हाथी के साइज का है नहीं तोह िश दर्द से मर्डर जाउंगी ".

आर्यन ने शटर पे तप करके बोलै ," नीला कुछ पीने को है कार में ".

नीला ने शटर खोल के मुस्करा के बियर की 2 कैन पकड़ी ," अभी यह hi है , स्कॉच की बोतल खोलने पड़ेगी पेग बनने के लिए पीना भी मुश्किल होगा ऐसे ".

सुचित्रा ," अह्हह्ह्ह्ह , हिलललललल मत और तू गाडी संभल के चला पहले hi छूट में हाथी का लुंड फसा है siiiiiiiiiii मरररररर hi देगा किसी दिन ....... बियर खोल यह hi काफी है . एक सिगरेट भी जला ले".

बियर कैन अपने मोह में लगा के आर्यन ने घूँट भरी तो सूचि चीड़ गयी पर तभी आर्यन ने कैन हटा के अपने लिप्स उसके लिप्स से जोड़कर अंदर ठंडी बियर भरी तो खुसी से दोनों हाथ उसकी गर्दन पे लपेट के पीने लगी .

आर्यन एक एक घूँट भरके के बराबर सूचि को बियर पीला रहा था और एक हाथ उसके निप्पल्स और चूतड़ दबा रहा था. कोई हल्का जर्क भी कार में लगता तोह खड़ा लुंड का अहसास अपने पेट के अंदर तक टकरा के करता . नीला ने एक सिगरेट जलाकर बोली ," मैडम आपकी सिगरेट ...... "

सूचि ने सर मोड़कर सिगरेट ली और आर्यन की तरफ की तोह न में सर हिला दिया," तू सिगरेट नहीं पीटा ?"

आर्यन हसकर ," में दारू भी नहीं पीटा , दोनों जेहेर हैं बस शो ऑफ करने के लिए और पार्टनर को दर्द काम करने के लिए दारू पिता हूँ, आप भी मत पिया करो ".

2 काश लेकर सुचित्रा ने सिगरेट वापस नीला को देकर बोली ," थोड़ा आराम से चला कार हमको थोड़ा टाइम लगेगा ".

नीला ," don't वोर्री यू बोथ एन्जॉय , कोई डिसट्रब नहीं करेगा जब तक में हूँ "...... शटर बंद कर दिया .

सूचि ने गरम गरम लुंड छूट में लिए ठंडी बियर पेट में भर के धीरे धीरे अपनी मस्तानी गांड को थोड़ी हरकत दी तो आर्यन ने एक हाथ से उसकी कमर थाम के उसको ऊपर निच्चे लुंड पे होने में हेल्प की और किश करता हुआ उसकी चूची और चूतड़ सेहला रहा था . दर्द अब थोड़ा काम था पर तीस सी होती हिलने में .

थोड़ी डिअर लगी पर अब मस्ती के जोश में लुंड पे सूचि कूद रही थी और आर्यन उसके चूतड़ को थाम के मसलते हुए उसको चुदाई की मास्टरनी बना रहा था , दोनों बाहिएँ आर्यन की गर्दन में लपेट सर पीछे किये सूचि जोरसे हुंकारती कराहती िश चुदाई का मजा ले रही थी . नीला से उसकी शर्म कल रात hi मिट गयी फिर सुबह उसकी छूट के देखभाल और मस्सगे ने एक विश्वास पात्र लेडी नीला को सूचि के लिए बना दिया था .

सूचि ," अह्ह्ह्हह ....... ारयणणणणणण ...... हॉँण्णन छोड़ मुझे जोरसे हॉँण्णन छोड़ मुझे........ सीईईई हम्म्म्म मेरी पहाड़ दे ...... आज छोड़ते हुए मार दाल ...... में जन्नत में हूँ रे ....... मुझे ऐसे hi प्यार कर मेरे निप्पल चूस अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ....... पुछठ पुछःह ऐसे hi मेरी जान ....... क्या हथियार है तेरा siiiiiiiiiii में हवा में ुध रही हूंणणन्न ...... "

कार के गिलास बांध पूरी दुनिया की बेपरवा किये चुदाई का माहौल गरम था , नीला की छूट भी ड्राइविंग करते हुए गीली होकर झाड़ चुकी थी पर सूचि पे दारु और चुदाई का नशा था तोह लम्बी तिकी....... पहले चरमोत्कर्ष को पाकर 15 मं में झाड़ गयी ......

आर्यन ने एक बार सूचि के झड़ते hi उसको 2 मं आराम करने दिया पर छूट में लुंड ऐसे hi रखे उसको घुमा के अपने सीने से उसकी पीठ लगा के सीट पे थोड़ा आगे होकर अपनी कमर बेंड की उसके हाथ सीट रेस्ट पे रखवा निचे से छोड़ने लगा ...... दोनों चूचियों को दबाते हुए , सूचि का सर आर्यन के सीने और गर्दन पे इधर उधर हिल रहा था मजे में .

थप्प्प्प थप्प्प्प पहछहः पहछहः थप्प्प्प थप्प्प्प थप्प्प्प पहछहः पहछहः थप्प्प्प पहछहः का मधुर संगीत कार में और सूचि की मस्ती भरी ाहिएँ और कंठ से निकलती गलियां माहौल बहोत छोड़ू बना दी ....... लुंड निच्चे से पिस्टन की तरह जा रहा था और सूचि अब डरा झाड़ के उसके सीने से सर लगा के अपनी चूची दबती बस मस्ती सी चिल्लाती पर आर्यन जोर जोरसे पेल रहा था .

10 मं बाद सीट पे अपने आगे त्रिची लिटा के पीछे से लुंड दाल के फिर सत्ता सात आर्यन पेलने लगा ..... "अह्ह्ह्हह सूचीइइइइइ डार्लिंग मेरा लुंड तेरी छूट का दीवाना हो गया है , ी लव यू माय कुटी मामीजी पूछह पुछठ ...... माखन है आपकी छूट अह्ह्ह्हह मजा आ रहा है ".

एक और बार इसी पोजीशन में झाड़ गयी तोह बोली ," अह्ह्ह्ह आर्यन रेहम कर यार पोजीशन बदल मेरी कमर में लचक आ जाएगी अह्ह्ह्हह बस रुक न ....... थोड़ा आराम तो दे छूट को सुन्न पद गयी है siiiiiiiiiii मरररररर जाउंगी ऐसे तोह चुद चुद कर ".

आर्यन भी रुकर अपना लुंड निकला जोह पूरा छूट रास और चुदाई के बने झाग से गीला हो और ज्यादा टाइट और बड़ा लग रहा था .

बियर की दूसरी कैन से एक चुस्की लेकर कैन सूचि के मोह से लगा एक सिप उसको भी पिलाया पर दोनों को पसीना आ गया था पूरा एक चलने के कारन .

आर्यन ने कैन ख़तम करके फिर पूरी सीट पे सूचि को लिटा के उसकी कच्ची से अपना लुंड और उसकी छूट साफ़ कर घुटनो पे होकर अब सीढ़ी पीठ के बल लेती सूचि की छूट पे लुंड से तीन चार थपकी सी देकर उसकी क्लीट पे टोपा रगड़ता रहा की कब सूचि इशारा देगी .

सूचि ने भी अपनी सांस दुरसत कर लुंड को छूट में डालने को बोली," अब कर दे अंदर अह्ह्ह्ह बस पूरा काम करके हटना अह्ह्ह्हह मुझे जल्द से जल्द तेरा बीज बोना है...... मायआ ुर्घह्ह कुट्टीयिययी पहाड़ड़ड़ड़ड़ दी आराम से ".

आर्यन ने पूरा लुंड दो बार में थोक के सूचि के ऊपर झुक उसकी खुली चूची को पकड़ के निप्पल चूसते हुए हलके धक्कों से शुरुवात कर धीरे धीरे स्पीड पकड़ लिया ......

"अह्ह्ह्हह ारयणणणणणण....... हॉँण्णन छोड़ मुझे जोरसे हॉँण्णन छोड़ मुझे सीईईई हम्म्म्म" .

दोनों टांगें चौड़ी करके आर्यन की कमर पे लपेट डीप पावरफुल स्ट्रोक का मजा लेने लगी . दोनों हाथ उसकी गर्दन और पीठ पे लपेट बिच बिच में अपनी कमर भी उठके पूरी गहराई तक लुंड की चोट रइवे करती .

आर्यन तो जैसे बुलेट ट्रैन hi चला दिया था , स्पीड से निच्चे लगते स्ट्रोक उसकी कमर की रफ़्तार सूचि की गांड को सीट में ज्यादा धंसती जैसे आज कार की सीट की टेस्टिंग हो कितने हैवी स्ट्रोक झेल सकती है . तूफानी धक्कों ने जैसा 10 मं में hi सूचि को सितारों और आस्मां की सीआर करा दी ...... अपना hi मजा है कार में चुदाई का ऐसा सूचि को लग रहा था ऊपर से नीला दोनों की चुदाई की आवाजें सुन रही है एक सरूर और जोश चढ़ा रहा था उसकी उपस्थिति .

अलवर की बड़ी राजकुमार , सड़क पे चलती कार में अपने नए आशिक़ से छुड़वा रही है . उसको ऐसा लग रहा था उसका बॉयफ्रेंड उसको घरवालों से छिपा के चलती कार में छोड़ रहा हो .

आर्यन," मामीजी में आने वाला हूँ अह्ह्ह मामी पुछःह पुछठ ी लव यू मेरी जान ी लव यू यह लो बहोत आग है आपकी छूट में ....... " ...... चुम्म्म चुम्म्म्म्म .......

सुचित्रा भी हुंकारते हुए ,"हानंन्न में भी ारयणणणणणण...... में भीई ........ भर दे अह्ह्ह्हह मेरे कुंवरजी ....... मेरे बालममममम ....... अह्ह्ह्हह ....... हॉँण्णन में गईइइइइइइ ......... अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह maaaaaaaaaaa अह्हह्ह्ह्ह ........ "

फट्ट्ट्ट फैट थप्प्प्प थप्प्प्प पहछहः पहछहः थप्प्प्प की आवाज जभी शांत हुयी जब दोनों झाड़ के शांत हुए , आर्यन ने बहोत माल भरा उसकी छूट में जोह अब सीट को भी भिगो रहा था .

एक घंटे का यह तूफानी चुदाई ने दोनों को तृप्त कर दिया. अगले 10 मं बस दोनों चूमते रहे जैसे एक दुसरे को पुचकार के hi बात बता रहे हो दोनों को कितना मजा आया .

आर्यन ने शटर पे तप किया तोह नीला ने खोला ," यार कब तक कार फार्महाउस में गोल गोल घूमेगी कार , चल पार्किंग में लगा हम भी कपडे पहनते हैं ".

आर्यन और सूचि में कपडे पहने नीला ने कार पार्किंग में लगाई ....... आर्यन ने सेलफोन देखा 3-4 मिस कॉल थी . आर्यन ," नीला हम राजमहल जायेंगे थोड़ी डिअर में तुम भी फ्रेश हो जायो ".

आर्यन निचे उतरा तोह सीट पे बैठे हुए दोनों हाथ सूचि ने आर्यन की तरफ करके इशारा किया मुझे गॉड में लेकर चल ...... आर्यन भी मुस्करा कर ," चलो आपको बबल बाथ देता हूँ ".

रूम में जाकर आर्यन ने बाथ लेकर वापस चलने का कहा तोह सूचि ने जिद्द करके पहले बबल बाथ में छुड़वाई फिर बीएड पे आर्यन का बीज एक बार और छूट में भर के संतुस्ट हुयी. उसने कहा वह कही नहीं जा रही है यहीं रुकेगी वैसे भी उसकी हालत देखकर कोई भी पहचान लेगा की बुरी तरह छुड़वा के आयी है और आर्यन भी बदनाम होगा .

आर्यन के सीने पे लेती हुयी बोली ," बस 10 मं और फिर तुम चले जाना "....... उसके सीने पे किश करने लगी .

आर्यन ने नीला को कॉल करके दो लार्ज पेग लाने को कहा ....... अपनी बड़ी ऊँगली के नेल से उसके राइट निप्पल से कहलती हुयी बोली," अगर में कुछ मांगू तोह डोज , वैसे कोई जबरदस्ती नहीं है बस रिक्वेस्ट है ".

आर्यन ने उसके सर पे चूमा ," में जानता हूँ आप रूबी की बात कर रही हो मैंने बात क्यों नहीं की ....... अभी कुछ दिन उसको इग्नोर करूँगा ..... डरा उसको नीला ने कल hi दिया था , चिंता मत करो किसी ने उसको हाथ तक नहीं लगया है. बस मेरी छोटी भें हाथ से बहार चली गयी थी अब उसको पता होना चाहिए की उसका एक आर्यन नाम का बड़ा भाई भी है जोह उसकी केयर भी करता है और प्यार भी पर उनदिससीप्लीनेड बिहेवियर और जोह बड़ों का रेस्पेक्ट न करे उसको पसंद नहीं करता ".

सुचित्रा बहोत खुश हुयी की आर्यन को रूबी की परवा है और उसको प्रोटेक्ट करेगा ...... मुस्करा के," पर अब ुष रिश्ते से तुम उसके भाई नहीं लगते , दीप्ति के हस्बैंड बनने वाले हो तोह मौसाजी और मेरे रिलेशन से वह तुम्हारी बेटी है ".

आर्यन भी आँख मार के ," उसकी बातें सुनोगी तोह वह आपकी सौतन बनने की तयारी करे बैठी थी बूत don't वोर्री वह अच्छी लड़की है इंटेलीजेंट भी बहोत सक्सेसफुल होगी आपकी तरह ".

सुचित्रा ," रूबी की बात नहीं मुझे मेरी भाभी पुष्प की बात करनी है वह आज तुमसे अकेले मिली और तुमने उनको लल्लू बना दिया ".

आर्यन छोङकर ," मैंने ऐसा कुछ नहीं किया प्यार से बात की बस एक गलती हो गयी वह मैंने गलती से उनको गीता समझ के दबोच लिया था पर झट से अलग होकर माफ़ी मांग ली बस इतना hi हुआ ".

सूचि ने आर्यन के सीने पे किश किया," आर्यन तुम एक शानदार असली मर्द हो , तुम औरत की नज़र झट से पढ़ सकते हो इतना में दावे से कह सकती हूँ . पुष्प क्यों तुम्हारे पास आयी यह भी समझ गए होगये . वह कोई ऐसी वैसी औरत नहीं है बहोत सुशिल और खानदानी है उसकी भी ज़िंदगी में कमी है और वह वही थोड़ी लोक लाज छोड़कर तुमसे मिली थी. आगे तुम शमझ्दार हो फैसला तुमको hi करना है में फाॅर्स नहीं करुँगी पर एक मैसेज मुझे तुमको देना था बता दिया ".

आर्यन उसके बाल सहलाता खामोश hi रहा पर अभी वह ुष तरफ नहीं सोचना चाहता था . नीला ने नॉक किया तोह सूचि ने आर्यन को ब्लैंकेट ऊपर डालने को कहा ...... आर्यन भी मुस्करा के ब्लैंकेट दोनों के ऊपर डाला ," के इन नीला डार्लिंग ".

नीला भी मुस्कारते हुए ट्रे लेकर आयी तोह स्कॉच की बोतल के साथ आइस कुबेस गिलास और स्नैक्स भी था . उसने टेबल पे रखकर पेग बांये तोह आर्यन बोलै तुम नहीं लोगी . उसने कहा वह साथ चलेगी राजमहल तोह ड्राइव करना है .

आर्यन बोलै ," नीला तुम अब आराम करो सूचि मामीजी यहीं रुकेंगी मुझे जाना होगा नहीं तोह गीता दीप्ति यहीं न आ जाएँ ".

सुचित्रा ने पेग पीते हुए ," जैसे तुम दोनों से डरते हो इशलिये कह रहे हो ...... है है है है है ...... वैसे सही है ".

आर्यन ने अपना गिलास एक सिप में ख़तम किया और ब्लैंकेट से नुदे hi बहार निकल के बाथरूम की तरफ चलते हुए कहा," वह दोनों मेरी जान और धड़कन हैं फिर उनसे डरने का भी अलग hi मजा है"...... और आँख मार के अंदर फ्रेश होने चला गया .

सुचित्रा ने नीला को रोक लिया की तू भी पेग बना ले यार तुझसे क्या छुपा है मेरा , वैसे भी ी ट्रस्ट यू अस माय मिरर.

नीला भी अपना पेग बना के चियर्स करके सोफे पे बैठी ," मैडम कल आपको स्पेशल आयल मस्सगे दूंगी फिर आप स्टीम बाथ लेना आपकी बॉडी ज्यादा रिलैक्स फील होगी ".

सूचि भी हसकर ," तू ने सब देखा है अंदर तक चीयर देता है घायल करके पर मजा भी दर्द में hi आता है इतना बड़ा किसी मर्द का न होगा ".

नीला ," कुछ ब्लैक रेसेस में होते हैं, हूजे डाँग, पर इतना स्टैमिना और तिघटनेस मेन्टेन करना सेक्स में मुश्किल है फिर आर्यन सर स्पेशल हैं यह आप भी जानती हैं , एक बार इनसे मस्सगे करवाना आपको अलग hi सुख मिलेगा ".

सूचि आँख मार के ," यानी तू करा चुकी है फिर भी वर्जिन है ".

नीला भी स्माइल से ," नहीं करवाई कभी मैंने , बिना मैडम बता रही थी , विर्जिनिटी भी जल्दी ब्रेक होगी सर जब फ्री होंगे ".

सुचित्रा जोरसे हसने लगी ," आल थे बेस्ट , यू विल बे लकी गर्ल ".

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आर्यन ने सिक्योरिटी टीम को वहीँ फार्महाउस पे रहने को बोलै और खुद अर्जुन से मिलकर निकल गया राजमहल के लिए ...... उसने फ़ोन पे मिस कॉल no पे कॉल करके बात की ड्राइव करते हुए .

रात का 1 से ऊपर बज गया था उसको एंटर करते hi पुष्प मिल गयी जोह उसका hi वेट कर रही थी ...... आर्यन ने विश किया तोह उसने कहा की आपने कॉल hi नहीं उठाया अभी सुचित्रा दीदी से बात हुयी की आप आ रहे हो .

आर्यन ," हाँ लेट हो गया फिर ड्राइव कर रहा था कहिये ".

पुष्प ," यहाँ नहीं 10 मं बाद राजमहल की छत्त पे मिलो".

आर्यन ," ठीक है में चेंज करके आता हूँ "...... आर्यन सीधा मिरदुला के कक्ष में पहुंचा क्योंकि उसने उसका सम्मान अपने कक्ष में hi रखवा लिया था आज सुबह hi.

बहार दासी भी उसका वेट कर रही थी जिसने बतया की महारानी जी आपका वेट कर्कटे सो गयीं . आर्यन ने उसको जाने को कहा तोह देखा मिरदुला सो रही थी बीएड पे .

आर्यन उसके पास गया और उसके गाल पे किश करके अपनी ड्रेस चेंज करके एक लोअर और t-shirt डाला और निकल गया टेरेस पे . मिरदुला जाग hi रही थी पर सूने का नाटक करती रही पता नहीं कहाँ गया होगा अपनी मैया की तोह फ़िक्र hi नहीं है इश्को .

आर्यन जब छत्त पे पहुंचा तोह एक दससी ने कहाँ रानी सा ुष घुमड़ के पास है आपका hi इंतज़ार कर रही हैं . वहां पहुंचा तोह पुष्प hi थी पर दूर अँधेरा में एक साया और नज़र आया पर वह सतर्क था .

आर्यन ," जी कहिये आप ने कैसे याद किया ".

पुष्प भी जैसे सब प्लान करके आयी थी ," आप कुछ लेंगे कुंवरजी ".

आर्यन ," अभी डेढ़ बज रहा है आपको भी सोना होगा , बतिये किस लिए आपने बुलाया था ".

अब पुष्प को भी समझ नहीं आ रहा था क्या कहे ...... पर कुछ सोचकर उसने आगे आकर आर्यन का हाथ अपने हाथ में थाम के कहा ," सच्च कहूं तोह मुझे आप बहोत अच्छे लगे , में भी आपसे दोस्ती करना चाहती हूँ ".

आर्यन ने भी उसके पकड़े हुए हाथ पे हाथ रखा और कहा ," आप महारानी हैं और में िश खानदान का होने वाला दामाद फिर कैसे दोस्ती हो सकती है हमारे बिच ".

पुष्प थोड़ा करीब आकर आर्यन का हाथ अपने गाल के पास लाकर टच करते हुयी बोली ," में दीप्ति की भाभी हूँ ुष नाते आपकी सलज हुयी फिर सलज नन्दोई में मजाक का रिश्ता नहीं होता क्या फिर आप पर हमारा भी हक़ है रिश्ता निभाने का तोह दोस्ती भी हो सकती है की नहीं ".

आर्यन भी ुष अँधेरे वाले साक्ष की तरफ त्रिची निघा से देखकर बोलै," हाँ ुष रिश्ते से दोस्ती हो सकती है , मजाक की बात तोह वह गलती से मैंने अनजाने में hi कर दिया और फिर आपके साथ डांस भी किया था तोह आपको अब क्या शिकयत है ".

पुष्प खुश होती हुयी ," क्या में अपने नए दोस्त के गले नहीं लग सकती "..... और यह बात बोल आर्यन को बाँहों में भर ली तोह आर्यन ने भी उसको सीने से लगा लिया अपनी आगोश में ......

आर्यन ने झुकार कान में कहा ," अब ठीक हैं न आप पर दोस्ती में कहीं और भी बहोत कुछ माँगना चाहा रही हैं किसी को गवाह बनते हुए ".

पुष्प चूँकि तोह आर्यन ने उसको बाँहों में पकड़ के रखते हुए कहा ," मैंने आपकी दोस्ती कबूल की है पर साबुत के टूर पे आपको नाम बताना होगा नहीं हमारी दोस्ती ख़तम ".

आर्यन ुष साये को कल रात भी देखा था जब सुचित्रा के साथ था और आज भी पर कद से पह्नवे से अंदाज़ा था यह कोई सी महारानी hi है जिसने चेहरा ढाका था कल की तरह .

पुष्प डरते हुए ," आप को गलत फेमहि हुयी है ऐसा कुछ नहीं है कुंवरजी ".

आर्यन ने फुसफुसा के कहा ," फिर दोस्ती ख़तम प्यारी पुष्प भाभीजी और उसके कान की lol चूम लिया "...... अपनी भाव को कस्ते हुए झाड़ गयी उसकी गीली मुनिया ," अह्हह्ह्ह्ह सीईईई कुंवरजी ..... जमुना दीदी "....... हनननननननन ..... " वह जमुना दीदी हैं उनको सब पता है वह भी दोस्ती करना चाहती हैं आपसे ".

आर्यन ने एक हाथ पुष्प के गोल पुष्ट सीधे नितम्ब को अपने पंजो में गहरे के ऊपर से दबोच के पहले उसके गाल चूमते हुए उसके लरजते होंठों को चूसने लगा ........ पुष्प तोह कामवहल हो गयी , बस आर्यन की बाँहों में झूलती वह उससे अपने लबों को चूसने दे रही थी पर जब आर्यन ने जीभ दाल के उसकी जीभ को छेड़ा तोह खुद चूसने लगी ...... अपने पंजों पे उचकती तोह आर्यन ने उसके चूतड़ को थाम के उठा के चूमने लगा .

वहीँ दूर कड़ी जमुना तोह हक्की बक्की रह गयी उसकी देवरानी मोर्चा मार गयी उससे पहले ....... कल उसकी नानन्द सुचित्रा आज सबसे छोटी देवरानी पुष्प दोनों क्या किस्मत वाली हैं में hi निरि बेवकूफ हूँ जब नदी में तैरना hi है तोह क्यों घेरे दुसरे से नपवा रही हूँ. ऐसा तोह सब गंगा नाहा जाएँगी में बस देखती रहूंगी .

आर्यन की गॉड में छड़ी पुष्प 10 मं बाद कमर तक नंगी अपनी 34 साइज की चूचियां चूस्वा रही थी पिछले 5 मं से और 2 बार झाड़ गयी थी ...... आर्यन ने प्यार से उसको सेहला के कहा ," अब हमारी दोस्ती हो गयी है में रात में आऊंगा यहीं पूरी दोस्ती करने 3 बजे आप इंतज़ाम रखना पुष्प भाभी आप बहोत सुन्दर हो बस किसी दुसरे की बातों के बहकावे में मत आना नहीं तोह आप जैसी साफ़ दिल की औरत का कोई फायदा hi उठेगा ...... ".

पुष्प तोह इतनी कुश हुयी की आर्यन को जाने hi नहीं देना चाहती थी पर उसने वादा किया में जरूर आऊंगा .

पुष्प जवान सपनो के घोड़े से उतरने को त्यार नहीं थी वहीँ जमुना अब कुछ ठान चुकी थी अगली बार नहीं तोह कभी नहीं ....... आर्यन भी समझ गया था िश रात की सुबह नहीं ?

उधर दीप्ति गीता जैसे गुस्से में बीएड पे लेती आर्यन को सबक सीखने की ठान ली थी की बहोत बिगड़ गया है ...... ????

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रानी पुष्प

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