Anita Singh - Story of a Seductive Housewife - Page 6 - SexBaba
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Anita Singh - Story of a Seductive Housewife

अपडेट 45

अनीता रामु को अपनी कमर और नाभि देखते हुए देख ली थी मगर वो नार्मल कड़ी रही. रामु लिविंग रूम से होते हुए घर के बाहर निकल गया.

अनीता हरिया को देखती हुयी boli,"Main पैसे लेकर आती हूँ".

अनीता यह बोलकर बैडरूम में जाकर पैसे लेकर लिविंग रूम में आयी तो हरिया को स्टोर रूम से लिविंग रूम में आते हुए देखि.

हरिया उसे देखकर मुस्कुराते हुए अपना लुंड मसलकर bola,”yeh लीजिये मेमसाहब इसे पकड़ लीजिये".

अनीता हरिया के लुंड के तरफ देखकर उसका बात सुनी. अगले पल हरिया अपने दूसरे हाथ से कुछ पेपर्स देते हुए bola,"Ee बिल पकड़िए मेमसाहेब".

अनीता यह सुनकर उसका लुंड से नज़र हटाकर उसके हाथ में पकडे बिल को देखि तो हरिया bola,"Aur साथ में दुकान की एक कॉपी है उस पर आप सिग्न कर दीजिये मालिक को देना है”.

अनीता मुस्कुराती हुयी बिल ली तो हरिया मुस्कुराते हुए अपना लुंड मसलकर bola,"Aese मेमसाहेब आप कुछ और पकड़ना छह रही थी का?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी हरिया को देखकर boli,"Hariya जी आप भी न".

हरिया अपना लुंड मसलते हुए मुस्कुराने लगा तो अनीता उसके लुंड के तरफ एक नज़र डालकर अपनी गांड मटकती हुयी डाइनिंग टेबल के पास जाकर झुककर सिग्न करने लगी.

हरिया अनीता को गांड मटकते हुए चलते देखकर अपना लुंड मसलते रहा और अनीता जब सिग्न करके सीधा होने वाली थी की हरिया का मुंह साड़ी के ऊपर से hi अपनी गांड पर महसूस करके चौंक गयी मगर हरिया उसकी गांड पकडे हुए था तो अनीता को सीधा होने का मौक़ा नहीं मिला और वो वैसी hi झुकी रही.

हरिया उसकी गांड की दोनों भागो को पकड़ कर उसमे अपना मुंह रगड़ने लगा.

अनीता की सांस फिर तेज़ और छूट में हलचल होने lagi.Uski धड़कन भी तेज़ हो गयी और बदन में मस्ती की लहर फिर दौड़ने लगी.

वो वैसे hi झुकी हुयी दरवाज़े की तरफ देखि तो दरवाज़ा बांध दिखाई दिया.

हरिया उसकी गांड पर अपना मुंह रगड़ते hue,”ummmmmmmmm उम्मम्मम्मम्म उम्मम्मम्मम” करने लगा.

अनीता के साथ ऐसा पहली बार हुआ था की कोई उसकी गांड पर अपना मुंह रगड़ रहा हो भले hi वो साड़ी के ऊपर से hi ho.Agar अनीता नंगी होती तो हरिया का मुंह ठीक उसकी गांड की दरार में होता मगर फिर भी साड़ी के ऊपर से हरिया अपना नाक और मुंह उसकी दोनों गांड की भाग के बीच में hi रगड़ रहा tha.Anita की मुलायम गांड हरिया का मुंह रगड़ने से हिलने लगी थी.

हरिया मज़े se,”ummmmmmm उम्मम्मम्म उम्मम्मम्मम” करके उसकी गांड पर मुंह और नाक रगड़े जा रहा था. अनीता फिर से दरवाज़े की तरफ देखकर हरिया से boli,”Hariya जी क्या कर रहे हैं. रामु आ जायेगा” मगर हरिया नहीं ruka.Anita फिर वैसी hi झुकी रही और हरिया को उसकी गांड से खेलने दी.

हरिया अपना पकड़ उसकी गांड से ढीला करके उसकी गांड गूंथते हुए उसमे नाक और मुंह रगड़ने लगा मगर फिर भी अनीता सीढ़ी होने की कोशिश नहीं की.

हरिया बिना रुके उसकी गांड में लगातार मुंह और नाक साडी के ऊपर से hi घुसाने की कोशिश कर रहा था और रगड़ रहा tha,”ummmmmmm उम्मम्मम्मम्म ह्म्मम्म्म्म ह्म्मम्म्म्म उम्मम्मम्म”.

अनीता कुछ सेकण्ड्स बाद फिर boli,”Hariya जी क्या कर रहे हैं मुंह हटाइये वहां से. वहां कोई मुंह रगड़ता है क्या? छोड़िये"

और फिर अनीता कामुक तरीके से boli,"aaaaaahhhhhhhh उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ हरिया जी छोड़िये न रामु आ जायेगा aaaaahhhhh”,magar हरिया फिर भी अपना मुंह उसकी गांड से नहीं हटाया.

अनीता तेज़ी से सांस लेती हुयी वैसे hi झुकी रही और उसकी छूट में हलचल होने lagi.Uski अंग अंग मज़े में डूबने लगा और वक़्त के साथ सांस और तेज़ चलने लगी.

वो खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश में फिर कुछ सेकण्ड्स बाद boli,”Hariya जी हटाइये अपना मुंह मेरी बूम se,yeh गन्दा है”.

यह सुनकर हरिया अनीता की गांड में नाक रगड़ते हुए bola,”ummm बूम क्या होता है मेमसाहब? उम्म्म्म”.

अनीता वैसी hi झुकी हुयी boli,”wo मेरी अस्स पर से अपना मुंह हटाइये न. वहां मुंह नहीं रखनी chahiye,aaaaaahhhhhhh वो गन्दी जगह है और रामु भी कभी भी आ सकता है”.

हरिया एक बार फिर अनीता की गांड में मुंह और नायक रगड़ने laga,”ummmmmmm उनमममम” और फिर सिर्फ नाक रगड़ते हुए bola,”memsahab हमें अंग्रेजी नहीं आती”.

यह सुनकर अनीता की छूट फड़क gayee.Wo जानती थी की हरिया चाहता है की वो हिंदी में bole.Wo जोर से सांस लेकर boli,”please हरिया जी आप मेरी तरबूज से अपना मुंह हटाइये. रामु कभी भी आ सकता है आआअह्ह्ह्हह”.

हरिया यह सुनकर अपना मुंह अनीता की गांड से हटाकर उसकी गांड को पकड़ कर हिलाते हुए उसकी आँखों में देखा.

अनीता भी जब हरिया का मुंह अपनी गांड पर महसूस नहीं की तो गर्दन घुमाकर पीछे देखि तो दोनों की नज़रे मिली.

हरिया अनीता की आँखों में देखते हुए उसकी गांड हिलाते हुए bola,”memsaahab इसे गांड कहते हैं गांड”.

अनीता की छूट यह सुनकर फड़क गयी और सांस यह सुनकर फिर से तेज़ होने lagi.Wo सांस को कण्ट्रोल करती हुयी उसे देखकर boli,”Hariya जी रामु कभी भी आ सकता है”.

हरिया मुस्कुराते हुए अनीता की गांड हिलाते हुए bola,”memsahab एक बार आप अपनी गांड मेरी मुंह पर खुद से रगड़ दीजिये न”.

यह सुनते hi अनीता को अपनी बदन में करंट जैसा महसूस हुआ और उसकी दिल जोर से धड़क gayee.Saans तो ऐसे hi जोर से चल रही थी उसकी.

वो तेज़ सांस लेती हुयी boli,”nahin हरिया जी अगर आपको अच्छा लग रहा है तो जल्दी से आप खुद एक बार और मेरी बूम में अपना मुंह रगड़ लीजिये”.

अनीता को अपनी hi मुंह से यह बात सुनकर अजीब लगा मगर उसकी मज़े में इज़ाफ़ा हो गया.

यह बोलकर अनीता दरवाज़े की तरफ देखि तो हरिया bola,”are मेमसाहब रामु खुद आवाज़ dega,aayega नहीं. आप बस हमरे मुंह पर अपनी गांड अच्छे से हिलाकर रगड़ दीजिये फिर हम चला जाऊंगा”.

अनीता को न जाने क्यों हरिया के चले जाने का बात सुनकर अच्छा नहीं laga.Wo एक बार दरवाज़े की तरफ देखकर हरिया को देखती हुयी boli,”theek है हरिया जी” और हरिया मुस्कुराते हुए अनीता की गांड पर मुंह सत्ता दिया.

अनीता की छूट फड़क रही थी और थोड़ी गीली भी होने लगी thi.Wo जोर से सांस लेकर अपनी सांस को काबू की और फिर वैसे hi झुकी हुयी अपनी गांड हिलाकर हरिया के मुंह पर रगड़ने लगी.

जैसे hi वो अपनी गांड हिलाकर हरिया के मुंह पर रगड़ी अनीता की बदन में करंट जैसा महसूस हुआ और बदन में मज़ा hi मज़ा भर gaya.Mazaa आने के बावजूद भी वह खुद को कण्ट्रोल की और 5 सेकण्ड्स में hi अपनी गांड हिलना बांध करके boli,”bas हरिया जी अब हो गया”.

हरिया अपना मुंह उसकी गांड से हटते हुए bola,”memsaahab आपकी गांड जैसी सच में किसी की गांड नहीं. थोड़ा अच्छे से रगडिये न अपनी गांड”.

अनीता झुकी हुयी सामने hi देख रही थी और हरिया का बात सुन्न रही thi.Hariya का बात सुनने के बाद जब वो दुबारा हरिया का मुंह अपनी गांड पर महसूस की तो वो एक नज़र दरवाज़े के तरफ देखकर वापस अपनी गांड हिलाकर हरिया के मुंह पर रगड़ने लगी.

हरिया भी अपना सर हिलने लगा और “उम्मम्मम्म उनमममममम उम्मम्मम्म” करके अनीता की गांड पर मुंह रगड़ते raha.Anita थोड़ी देर दाया बाय गांड करके हरिया के मुंह पर रगड़ी फिर अपनी गांड ऊपर नीचे करने lagi.Wo अपनी गांड को हरिया के फ़ोरेहेअद से लेकर मुंह तक रगड़ने lagi.Uski छूट में हलचल हो रही थी ऐसा करने से और सांस धीरे धीरे और तेज़ हो रही thi.Maze का तो ठिकाना hi नहीं था और मज़े से उसका बुरा हाल था.

मज़ा आने के बावजूद अनीता होश नहीं खोई थी और थोड़ी देर के बाद गांड हिलती हुयी hi boli,”Hariya जी अब बहोत हो गया” मगर हरिया कुछ नहीं बोलै और बस “उम्मम्मम उम्मम्मम उम्मम्मम्म” किये अनीता की गांड में मुंह रगड़ रहा था.

अनीता भी जवाब नहीं मिलने पर अपनी गांड को वैसे hi हरिया की मुंह पर रगड़ती रही और फिर डाइनिंग टेबल को पकड़ कर अपनी गांड को और जोर से हरिया की मुंह की तरफ दबा कर गांड को गोल गोल हिलने lagi.Uski बदन में गर्मी बढ़ने लगी थी और अब वो भी धीरे धीरे होश खो रही थी और अपनी गांड हिलने में उसे मज़ा आ रहा था.

फिर वो वैसे hi टेबल पकड़ी हुयी गांड को ऊपर नीचे करने lagi.Hariya भी अपना मुंह उसकी गांड में सताए जैसे तैसे bola,”waah मेमसाहब सच में क्या ज़बरदस्त गांड है आपकी. ऐसे hi हिलाते rahiye,ummmmmmmm उम्मम्मम्म उम्मम्मम्म आआह्ह्ह्हह मेमसाहब हिलाइये अपनी बड़ी मुलायम गांड को”.

अनीता को मज़ा आ रहा था और यह सुनकर वह मुस्कुराती हुयी अपनी गांड को गोल गोल और ऊपर नीचे करके हरिया के मुंह पर और जोर से रगड़ने लगी की तभी दोनों को रामु का आवाज़ सुनाई diya,”are हरिया जल्दी karo,itna टाइम कहे लग रहा है”.

रामु की आवाज़ सुनते hi अनीता घबरा कर सीधे हो गई और हरिया भी खड़ा हो gaya.Ramu का आवाज़ बाहर से hi आ रही थी तो हरिया चिल्ला कर bola,”Are कहे गाला पहाड़ रहे हो. हम आ रहा हूँ न. तुम ठेले के पास hi रुको” और फिर हरिया अनीता को देखा तो दोनों की नज़रे मिली.

हरिया ऊपर से नीचे अनीता को देखकर bola,"Sasura कबाब में हड्डी हो गया साला वर्ण हम आज आपकी गांड से और खेलते मेमसाहब."

फिर हरिया अपना हाथ अनीता के पीछे लजाकर उसकी गांड पकड़ कर हिलाते हुए bola,"Sach में मेमसाहब बहोत hi अच्छी है आपकी गांड”.

अनीता जवाब में कुछ नहीं बोली बस हरिया को देखती हुई जोर से सांस लेकर खुद को कण्ट्रोल करके boli,"Hariya जी यह रहा बिल और पैसे" और अनीता अपनी हाथ में रखे पैसे और बिल को हरिया को दे दी.

हरिया उसकी खूबसूरत हाथ और पतली पतली उँगलियाँ देखा और फिर उसकी हाथ से पैसे और बिल लेकर दूसरा हाथ से अनीता की वही हाथ पकड़ कर अपने लुंड पर लेजाकर bola,”aaj फुर्सत नहीं मेमसाहब. कभी फुर्सत मिलेगा तो अपने लुंड से अच्छे से सेवा करूँगा आपकी. देखिये ससुरा हमरा लुंड कैसे आपकी सेवा करने के लिए तगड़ा होकर इंतज़ार कर रहा है”.

अनीता हरिया का लुंड पंत के ऊपर से देखि जहाँ उसका लुंड का उभार दिख रहा था और अपने हाथ में उसकी सख्ती महसूस करती हुयी उसे पंत के ऊपर सहलाने lagi.Sach में हरिया का लुंड बहोत सख्त और तगड़ा लग रहा था.

हरिया अनीता को देखते हुए bola,"Are मेमसाहब आराम से इसे बाहर निकलकर देखिये".

अनीता यह सुनकर हरिया को देखकर boli,"Hariya जी रामु बुला रहा है आपको".

हरिया अनीता को देखते हुए उसकी चूंकि दबाकर bola,"Are ु ससुरा आने से पहले एक बार और आवाज़ देगा. अभी ु बैठकर बीड़ी पी रहा होगा".

अनीता यह सुनकर एक बार दरवाज़े के तरफ देखि जो बांध था. अनीता फिर हरिया के लुंड के उभर के तरफ देखकर उसके पंत का ज़िप पकड़ कर नीचे करने लगी और ऐसा करते हुए वह वापस हरिया के आँखों में देखने लगी.

वह हरिया के आँखों में देखती हुयी उसका ज़िप खोलकर उसके पंत के अंदर हाथ घुसकर उसके अंडरवियर के ऊपर से उसका लुंड पकड़ ली और फिर उसके अंडरवियर के अंदर भी हाथ घुसकर उसका लुंड पकड़ ली.

हरिया का नंगा लुंड पर हाथ पड़ते hi अनीता की छूट में हलचल होने लगी. इतना मोटा और लम्बा लुंड पकड़ कर अनीता जैसी कामुक औरत की छूट में बेचैनी होना hi था. उसकी सांस और ज़्यादा तेज़ होने लगी और चूंकि ऊपर नीचे होने लगी जो हरिया अपने हाथ में महसूस कर रहा था.

अनीता की चूँचियों को ऊपर नीचे होता और उसकी सांस को तेज़ होते महसूस करके हरिया को समझ आ गया की ऐसा उसका लुंड पकड़ने से हुआ है.

अनीता धड़कते दिल और तेज़ सांस से हरिया का लुंड पकड़ कर बाहर निकल ली. अनीता ऐसा करते वक़्त हरिया के आँखों में देख रही थी और हरिया उसकी चूंकि दबा रहा था.

अनीता उसका लुंड निकलकर नज़र नीचे करके उसके लुंड को देखि तो उसकी दिल एक बार फिर धड़क गया. सच में हरिया का लुंड बहोत मोटा और लम्बा था और अनीता को उसके लुंड को अपनी हाथ में महसूस करके अच्छा लग रहा था. वह उसे पकड़ कर धीरे धीरे हिलने लगी.

कुछ सेकण्ड्स हरिया का लुंड हिलने के बाद अनीता boli,"Hariya जी अब हो गया. रामु फिर से आवाज़ देगा और कहीं अंदर न आ जाये".

हरिया यह सुनकर गहरा सांस लेकर अपना सर सहमति में हिलाया और फिर अनीता की दोनों चूँचियों को पकड़ कर जोर से बेरहमी से मसल दिया जिससे अनीता की मुंह से “सीईई आउच" निकल गया और न चाहते हुए भी उसकी बायीं हाथ हरिया के छाती पर चला गया और वह उसके छाती पर हाथ रखती हुयी ाःह भर di,"Aaaahh हरिया जी"

अनीता की आह सुनकर हरिया मुस्कुराया और अचानक से अनीता को पलट कर डाइनिंग टेबल पर झुका दिया और उसकी गांड पकड़ कर पीछे से उसकी गांड पर धक्के लगाने लगा.

अनीता उसके नंगे लुंड के धक्के को अपनी साड़ी से ढंकी गांड पर महसूस की मगर कुछ बोली नहीं और हरिया के हर धक्के पर “आआअह्ह्ह आआअह्ह्ह्ह” करने लगी.

हरिया का धक्का इतना जोरदार था की अनीता के मुंह से अपने आप “आअह्ह्ह” निकल जा रही thi.Hariya फिर अनीता की गांड छोर कर उसकी एक कन्धा पकड़ कर धक्के लगते रहा और दूसरा हाथ से उसकी नंगी कमर से लेकर उसकी नंगी पीठ पर हाथ फिरने लगा.

अनीता उसके हर धक्के पर बस झुकी हुयी "आआह्ह्ह्ह" कर रही थी.

हरिया उसकी नंगी पीठ पर हाथ फिरने के बाद नीचे हाथ लेकर गांड पर एक थप्पड़ मारा जिससे अनीता के मुंह से “आउच आअह्ह्ह हरिया जी” निकल गयी और वह डाइनिंग टेबल के दोनों तरफ पकड़ ली.

हरिया अनीता को डाइनिंग टेबल पकडे देख उसकी दूसरे कंधे पर हाथ लेजाकर उसकी दोनों कन्धा पकड़ कर जोर से दो बार धक्के लगाया और फिर कंधे पकडे हुए hi उसे ऊपर उठाया.

हरिया के ऊपर के तरफ उठाने से अनीता डाइनिंग टेबल छोर दी और हरिया के सामने सीढ़ी कड़ी हुयी अपनी कमर को आर्च करके गांड को थोड़ा पीछे के तरफ कर दी.

हरिया उसके पीछे खड़ा हुआ उसकी कंधो से हाथ नीचे लेजाकर उसकी दोनों चूँचियों को पकड़ कर उसे मसलते हुए दो जोरदार धक्के लगते हुए bola,"Ise कहते हैं थिकै मेमसाहब. ऐसे hi थिकै होती है".

वहीँ हरिया का बात सुनती हुयी उसके धक्के पर अनीता आहे भर्ती रही "आआह्ह्ह आआह्ह्ह"

हरिया वैसे hi अनीता की दोनों चूँचियों को मसलते हुए पीछे से धक्का लगते हुए bola,”memsahab हम बहोत ज़बरदस्त तरीके से ठुकाई करते हैं. पूरा रगड़ रगड़ कर ठुकाई करते हैं. कसम से आपने इतनी ज़बरदस्त ठुकाई कभी नहीं करवाई होगी. आपके जैसी खबसूरत और जवाब औरत को ऐसे hi ठुकाई की ज़रूरत है. बोलिये मेमसाहब हमसे ठुकवाइयेगा”.

अनीता वैसे hi हरिया के आगे उसके लुंड से गांड सताए कड़ी हुयी अपनी गांड पर उसके नंगे लुंड का धक्का महसूस करती हुयी उसका बात सुन्न रही थी.

उसकी सांस तेज़ी से चल रही थी और चूंकि ऊपर नीचे हो रही थी. उसकी चूंकि हरिया के हाथ में hi ऊपर नीचे हो रही थी और हरिया उसे मसल रहा था.

अनीता हरिया का बात सुनकर तेज़ सांस लेती हुयी बस “हाँ” में अपना सर हिलाई तो हरिया उसकी चूंकि जोर से दबाते हुए उसकी गांड पर धक्का लगते हुए bola,”munh से बोलिये न मेमसाहब. आप हमसे ठुकवाइयेगा? खुलकर बोलिये”.

अनीता वैसे hi ज़ोर का सांस लेती हुयी अपने होंठों पर ज़बान फिरकर सर हिलती हुयी बोली “हाँ हरिया जी”.

अनीता को यक़ीन नहीं हुआ की वह "हाँ" बोली मगर उसे अपनी जवाब का कोई पछतावा नहीं था. यह सुनकर हरिया मुस्कुराया और उसके पीछे से हटकर उसकी गांड पर एक थप्पड़ मारा जिससे अनीता “सीई आउच” की और घूमकर हरिया को देखने लगी. अनीता तेज़ सांस लेती हुयी हरिया को देख रही थी वहीँ हरिया भी पुरे हवस से अनीता को ऊपर से नीचे देखने लगा. अनीता चुप चाप कड़ी हुयी हरिया के हवस भरे नज़र को अपनी जिस्म पर रेंगने दे रही थी.

हरिया को यह सब अच्छा लग रहा था मगर वह भी जान रहा था की उसके पास टाइम नहीं है. वह अनीता को देखकर अपने जेब से एक कागज़ निकाल कर bola,”memsaahab हम आपको अपना लम्बर दे रहे हैं. कभी मौक़ा हो तो हमें याद कीजियेगा. जब जहां बोलेंगी हम आपकी अच्छे से सेवा करेंगे”.

अनीता हरिया को देखती हुयी उसका बात सुन्न रही थी. उसका बात सुनकर वह कागज़ पर उसके मोबाइल नंबर की तरफ देखि.

हरिया मुस्कुराते हुए bola,”lijiye मेमसाहब” तो अनीता वो कागज़ लेने के लिए अपनी हाथ बधाई मगर हरिया bola,"Are मेमसाहब हम भी बेकार में आपको परेशां कर रहे हैं. हम hi रख देते हैं कागज़".

अनीता यह सुनकर हरिया के तरफ देख hi रही थी की अगले पल वह कागज़ को मोड़ कर अपना हाथ अनीता की क्लीवेज के तरफ लेजाकर उसकी क्लीवेज में वह कागज़ घुसकर bola,"Lijiye मेमसाहब हम रख दिए".

अनीता को समझ नहीं आ रहा था की वह क्या करे या क्या बोले तो वह चुप थी. हरिया मुस्कुराते हुए “चलते हैं मेमसाहब” बोलकर दरवाज़े की तरफ जाने लगा तो अनीता आवाज़ में रान्दीपना लाकर boli,"Hariya जी एक मिनट".

हरिया यह सुनकर रुक कर अनीता को देखा तो वह दो कदम आगे बढ़कर उसका लुंड पकड़ कर हिलती हुयी boli,"Ise तो अंदर कर लीजिये".

अनीता यह बोलकर उसका लुंड पंत के अंदर करने लगी तो हरिया मुस्कुराते हुए bola,"Are मेमसाहब जब आप हैं तो हम अपना लौड़ा खुद अंदर करते हुए अच्छा नहीं लगेंगे. ी तो आपका ख़बसूरती का बेइज्जती होगा की आपके जैसी माल सामने होते हुए हम अपना लौड़ा अंदर कर रहे हैं".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी दाए हाथ से उसका लुंड अंदर करती हुयी बाए हाथ को हरिया के छाती पर रखकर अपनी चूँचियों को थोड़ा आगे करके रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी आप भी न बातें बनाने में माहिर हैं".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Are मेमसाहेब हम ठोकने में भी माहिर है".

अनीता यह सुनकर दाएं हाथ से उसका ज़िप लगाती हुयी बाए हाथ को उसके छाती पर फेरती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Jaiye हरिया जी जहाँ जा रहे हैं वहां कोई मिले तो उसकी ठुकाई कर दीजियेगा"

अनीता यह बोलकर खिलखिलाने lagi,"Hehehe" तो हरिया भी मुस्कुराते हुए अनीता की गांड पर एक थप्पड़ मार दिया जिससे अनीता खिलखिलाना बांध करके हरिया को देखती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में hi boli,"Ouch आअह्ह्ह हरिया जी उम्म्म".

हरिया उसको देखकर मुस्कुराया और bola,"Chalte हैं मेमसाहेब".

अनीता उसके छाती पर ऊँगली फेरती हुयी boli,"Theek है हरिया जी".

हरिया यह बोलकर वहां से जाने लगा और दरवाज़े के नज़दीक जाकर मुस्कुराते हुए अपना लुंड पंत के ऊपर से सहलाया तो अनीता उसे देखती हुयी अपनी चूँचियों के ऊपर का ब्लाउज ठीक करने लगी. हरिया अनीता की चूँचियों को एक बार देखा.

अनीता की चेहरे पर न hi मुस्कराहट थी और न hi gussa,thi तो बस एक चुनौती की bhao,jaise वो हरिया को जाताना चाहती हो की वो अगर एक दुमदार मर्द है तो वो भी काम नहीं और हरिया की सभी चुनौतियों के लिए तैयार है.

अपनी चूँचियों के ऊपर का ब्लाउज ठीक करते हुए अनीता की चेहरे पर एक गर्व की भाव thi,apni हुस्न और ख़ूबसूरती का garv.Hariya मुस्कुराते हुए उसकी चूँचियों को देखकर घर से निकल गया.

अनीता उसके पीछे पीछे मैं गेट बांध करने गयी और मैं गेट के पास जब वो पहुंची तो हरिया को ठेले पर पीछे बैठते देखि.

रामु जो ठेले की सीट पर बैठे हुए था वह हरिया को देखकर bola,”kitna देर लगा दिए हरिया” जिसे अनीता सुन्न ली.

हरिया अनीता को गेट पर खड़ा देख लिया और उसे देखते हुए bola,”Woh मेमसाहब की मदद कर रहा tha,aur कोई चीज़ की ज़रुरत होने पर हमें बोलने के लिए बोल दिया है”.

यह बोलते हुए हरिया फिर अपना लुंड सेहला दिया अनीता को देखते hue.Anita उसके लुंड के तरफ देख रही थी की तभी रामु को अनीता की उपस्थिति का आभास हुआ और वो घूमकर गेट की तरफ देखा तो अनीता को कड़ी देखकर उसका दिल धड़क गया.

उसका नज़र अनीता की नाभि में लटकी बेल्ली रिंग पर फिर चला gaya.Usne सिर्फ फिल्मो में hi तीन चार बार बेल्ली रिंग देखा था और ऐसे अपने सामने किसी औरत को बेल्ली रिंग पहने देख उसे बहोत hi कामुक लग रहा था और न चाहते हुए भी उसकी नज़र अनीता की नाभि से लटकी 3 इनचेस की बेल्ली रिंग पर चला जा रहा था.

इतनी gori,mulayam,chikni और सपाट पेट के बीच नाभि में लटकी बेल्ली रिंग देखकर रामु को बहोत hi कामुक और आकर्षित लग रहा tha.Anita की नज़र फिर रामु के तरफ गयी तो वह उसे फिर अपनी नाभि पर देखते हुए pai.Wo वैसे hi कड़ी उसे देखती रही की तभी रामु भी उसके चेहरे पर देखा. दोनों की नज़र एक पल के लिए मिली फिर रामु सामने देखते हुए bola,”chalo हरिया”.

अनीता यह सुनकर दरवाज़े के पास से hi chillai,"Ek मिनट रुकिएगा".

अनीता की आवाज़ सुन्न दोनों उसके तरफ देखने लगे की तभी अनीता सीढ़ियों से नीचे उतारकर गार्डन के तरफ बढ़ी और दोनों को वह दिखाई देना बांध हो गयी तो दोनों का नज़र बहरी लोहे के गेट पर चला गया जहाँ से अनीता कुछ सेकण्ड्स बाद बाहर निकली. अनीता बाहर निकलने से पहले अपनी क्लीवेज से हरिया के नंबर लिखा हुआ पेपर हाथ में ले ली.

अनीता गेट से बाहर निकलकर गांड मटकती हुयी उनके ठेले के पास गयी और रामु और हरिया दोनों की तरफ 500-500 के नोट बढाती हुयी boli,”Mattress लाकर बीएड पर बिछाने के लिए थैंक यू”.

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,”are कोई बात नहीं मेमसाहब यह तो हमारा काम tha,isme पैसे की क्या बात है”.

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,”bas बख्सिश समझ कर रख लीजिये. आप दोनों ने अच्छे से सब सेट कर दिया तो बदले में बख्शीश तो मिलनी चाहिए न”.

हरिया एक नज़र रामु के तरफ देखा जो सीट पर hi बैठा घूमकर पीछे देख रहा था. हरिया उसको देखने के बाद उसे सहमति में इशारा किया और अनीता की हाथ से पैसा लेकर bola,”shukriya memsaahab,aur कोई सेवा की ज़रुरत हो तो हमें ज़रूर याद कीजियेगा”.

अनीता उसके बात को सुनकर मुस्कुराई की तभी हरिया के मोबाइल पर उसके मालिक का कॉल आ गया तो वो उससे बात करने लगा.

अनीता फिर रामु को देखकर थोड़ा आगे सीट के तरफ जाकर उसके तरफ पैसा बढाती हुयी boli,”aap भी लीजिये न”.

रामु अनीता को देखा और फिर उसकी हाथ की तरफ देखते हुए पैसा ले लिया. पैसा लेते हुए अनीता की हाथ को पहली बार वो छुआ tha.Itni मुलायम और खूबसूरत हाथ छूकर उसे एक अजीब सा एहसास हुआ और वो एक पल उसकी हाथ को देखते रहा. गोरा पतला और लम्बा हाथ और उसमे गोरी पतली पतली उँगलियों को देखकर रामु को अच्छा लगा.

वो फिर अनीता की चेहरे पर देखा तो अनीता मुस्कुरा दी.

रामु उसे देखते हुए bola,”Thenku मेमसाहेब” और अनीता की नाक में फिर रामु के मुंह से शराब की गंध घुस गई. वह पहले hi हरिया और रामु के मुंह से शराब की गंध महसूस मर चुकी थी.

रामु न चाहते हुए भी इतने नज़दीक से अनीता की नाभि को एक नज़र देख hi लिया और अनीता उसे अपनी नाभि देखते हुए देखि की तभी हरिया कॉल काटते हुए bola,”chalo रामु. मालिक बोल रहे हैं जल्दी karne,ab इससे जल्दी क्या होगा. चलो चलो”.

अनीता ठेले के पास से हैट गयी तो हरिया bola,"Chalte हैं मेमसाहेब. गद्दा को लेकर कउनो शिकायत होने पर ज़रूर बोलियेगा".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई और रामु ठेला चलने laga.Hariya पीछे बैठा अनीता को hi देख रहा था और उसे देखते हुए फिर से अपना लुंड पंत के ऊपर से सहलाने लगा. अनीता भी उसे hi देख रही थी और उसे लुंड सहलाता देख उसके लुंड को देखने लगी.

हरिया लुंड सहलाते हुए ठेला के पीछे बैठा अनीता को देखते हुए जा रहा था और अनीता भी कड़ी हुयी उसे जाता देख रही थी. थोड़ी दूर हरिया के जाने पर वो बगीचा में आकर मैं गेट बांध करके दौड़ कर बैडरूम में जाकर पेअर लटकाये हुए बीएड पर लेट गयी और तेज़ सांसें लेने लगी.
 
अपडेट 46

अनीता बिस्तर पर नीचे पेअर लटकाये हुए छत के तरफ देखती हुयी सोई थी और उसकी सांस जोर से चल रही थी. उसे बार बार हरिया की “ज़बरदस्त ठुकाई” वाली बात याद आ रही थी और कैसे वह पीछे से उसे धक्के लगा रहा था वह भी जोर जोर से.

हरिया का “ड्राई फ़क” उसे बार बार याद आ रही thi.Kaise हरिया जोरदार धक्के लगा रहा tha,kaise हरिया उसकी गांड में मुंह रगड़ रहा tha,aur तो और कैसे वह खुद भी उसके मुंह पर अपनी गांड रगड़ रही थी.

अनीता को अपनी गांड हिलाकर हरिया के मुंह में रगड़ने से शर्म तो नहीं आ रही थी मगर अनएक्सपेक्टेड और अजीब ज़रूर लग रहा था यह सोचकर की मर्दों के भी कैसे कैसे शौक़ होते hain.Anita मुस्कुरा दी यह सोचकर की वह खुद कैसे हरिया के मुंह पर अपनी गांड रगड़ रही थी और मुस्कुराती हुयी boli,"Main भी न क्या कर रही थी".

अनीता को फिर हरिया का नंगा लुंड याद आने लगा और वह उसका लुंड याद करती हुयी जोर से सांस लेकर खुद से boli,"Hariya जी का हथियार भी कितना लम्बा और मोटा है. इतना hi नहीं कितना तगड़ा भी है. मेरे हाथ में तो पूरा आता भी नहीं है और वह भी जब उनका पूरा सख्त भी नहीं हुआ था तो. पता नहीं पूरा सख्त होने पर और कितना बड़ा और मोटा होगा".

यह सोचते hi अनीता की छूट में एक अजीब सी हलचल होने लगी और छूट फड़कने लगी. उसकी गाला भी सूखने लगी थी तो वह अपना थूक घोंटकर अपनी होंठों पर ज़बान फिरै तो उसे कुछ ध्यान में आया.

वह जिस हाथ से हरिया का लुंड हिला रही थी वह हाथ को अपनी नाक के पास लेजाकर जोर से सांस लेकर सूंघी तो उसमे से अजीब सा गंध आया और उसे सूंघते hi उसकी छूट में फिर हलचल होने लगी. अनीता को वह गंध से परेशानी नहीं हुयी बल्कि वह एक बार और जोर का सांस ली और फिर ज़बान निकलकर अपनी हथेली पर फिरा दी.

ज़बान हथेली पर फिरते hi अनीता को मुंह में एक अजीब सा स्वाद गया मगर साथ में पुरे बदन में करंट जैसा लहर दौड़ गया और पुरे बदन में अजीब सी मस्ती भर गयी.

अनीता को फिर हरिया का लुंड याद आने लगा और उसके लुंड को याद करती हुयी अपनी ज़बान निकलकर अपनी हथेली चाटने लगी. ऐसा करने से उसकी छूट में बेचैनी होने लगी और अजीब सा मज़ा मिलने लगा.

वह अपनी हथेली पर ज़बान फिरती हुयी हरिया के लुंड को याद करने के बाद अपनी आंखें बांध करके हथेली पर वाइस hi ज़बान फिरती हुयी यह याद करने लगी की वही नंगे लुंड से हरिया कैसे उसकी गांड पर साड़ी के ऊपर से hi धक्के लगा रहा था, वह भी ज़ोर ज़ोर से.

वह हथेली चाट तो हुयी मैं hi मैं सोचने lagi,"Ummm हरिया जी भी न. कैसे अपना तगड़ा हथियार बाहर निकलकर मेरे पीछे धक्का लगा रहे थे, वह भी इतनी ज़ोर से. धक्के hi नहीं लगा रहे थे मेरी अस्स को थप्पड़ भी मार रहे थे. उम् हरिया जी भी न कुछ करने में झिझकते नहीं है."

यह सब सोचते हुए अनीता की बदन में फिर आग लगने लगी की तभी अचानक से उसका फ़ोन रिंग करने लगा. वह हड़बड़ा कर आँख खोली और अपनी हथेली चाटना बांध कर अपनी बिस्तर पर पड़े मोबाइल के तरफ देखि.

अनीता स्क्रीन पर देखि तो टेलीकॉम कंपनी का था. वह उसे देख कर फ़ोन फिर से वहीँ रख दी और एक गहरी सांस लेकर sochi,"Mujhe नाहा लेना चाहिए. हरिया जी ने तो पूरा मुझे गीला hi कर दिया है. बिना नहाये नहीं होगा. हरिया जी भी न कितना छेड़ते हैं मुझे. जब भी मिलते हैं मुझे गीला कर देते हैं."

अनीता को अपनी हथेली चाटने पर बुरा नहीं लगा आज लेकिन वह खुद को कण्ट्रोल करने का सोची और बहोत मुश्किल से वो खुद को कण्ट्रोल करके बिस्तर से उठी और आईने के पास जाकर साड़ी खोलने लगी.

साड़ी, पेटीकोट और ब्लाउज खोलने के बाद अनीता अपनी पीठ आईने के तरफ थोड़ा करके ब्रा का स्ट्राप खोली और ऐसा करते वक़्त उसकी नज़र अपनी छोटी पंतय से तीन चौथाई बाहर निकली गांड पर गयी. उसकी गांड थोड़ी पिंक थी.

अनीता अपनी ब्रा खोलकर अपनी पंतय नीचे सड़क दी और फिर अपनी नंगी गोरी गांड जो हल्का पिंक हो चुकी थी उसे देखकर sochi,"Hariya जी भी न. एक तो अपना तगड़ा हथियार बाहर निकलकर उससे मेरी अस्स पर धक्का लगा रहे थे ऊपर से मेरी अस्स पर थप्पड़ भी मार रहे थे. कितने हिम्मत वाले हैं हरिया जी, थोड़ा भी नहीं झिझकते हैं. मेरी अस्स को मसलने से मैं नहीं भरा तो मुझे स्पंक करने लगे. उम्म्म हरिया जी भी न".

अनीता अपनी गांड देखती हुयी याद करने लगी की कैसे हरिया रामु के होते हुए उसे मैट्रेस्स पर बैठकर ऊपर नीचे करने बोल रहा था और यह बोलते हुए अपने लुंड को सेहला रहा था.

यह याद आते hi वह फिर मुस्कुरा दी और सोचने lagi,"Hariya जी भी न. रामु के होते हुए भी अपना हथियार पर हाथ फेरना बांध नहीं कर रहे थे. हाँ ठीक है वह मुझे बताना चाहते हैं की उनके पास बहोत तगड़ा हथियार है लेकिन यह अकेले में भी तो कर सकते हैं और कर सकते हैं क्या करते hi हैं. अकेले में तो अपना हथियार hi बाहर निकल कर मुझे हाथ में दे देते हैं और आज तो उन्होंने मेरी अस्स पर कितने धक्के भी लगाए लेकिन फिर भी उनको रामु के होते हुए भी अपना हथियार पर हाथ फेरना hi था, दिखाना hi था मुझे की उनके पास कितना तगड़ा हथियार है. हरिया जी भी न हरिया जी hi रहेंगे, सच में".

अनीता यह सब सोचती हुयी अपनी छूट पर देखने लगी जगह उसकी छूट का रास लगा हुआ था. वह पिछले दिन के तरह आज भी उस पर हाथ फेरने लगी और उसका चिपचिपाहट महसूस की. अनीता एक पल आईने में अपनी छूट को देखि और फिर झुक कर पंतय उठाकर उसमे लगे रास को देखने लगी. कुछ सेकण्ड्स देखने के बाद वह बाकी कपडे भी उठाकर धोने के लिए वाशिंग मशीन में रख दी और खुद नहाने चली गयी.

अनीता नहाने के बाद लंच बना कर खा कर सो गयी. शाम में हमेशा के जैसी गार्डन में पानी डालने के बाद वह लिविंग रूम में बैठकर फैशन मैगज़ीन वगैरह पढ़ी और फिर रात में खा न बनाने के बाद नहाकर सलवार कमीज पेहेन कर वह अपने पति का इंतज़ार करने लगी. उसकी छूट में हरिया दिन में आग लगा दिया था और दिन में तो वह जैसे तैसे खुद को कण्ट्रोल कर ली मगर रात में उसकी आग फिर भड़कने लगी.

रात को खाना खाने के बाद राज लिविंग रूम में hi सोफे पर बैठा काम कर रहा था की तभी अनीता बैडरूम के दरवाज़े पर आई. राज को काम करता देख वह हाथ में कुछ पकड़ी हुयी चीज़ उसके तरफ फेंकी.

वह चीज़ राज के बदन पर hi गिरा तो वह उसे देखने के बाद मुस्कुराते हुए दरवाज़े के तरफ देखा तो अनीता अपनी दायी हाथ के पतली इंडेक्स फिंगर का नाख़ून अपनी दांतों के बीच दबाकर मुस्कुरा रही थी.

राज देखा की अनीता एक लिंगेरी पहनी हुयी थी जो उसकी जांघों तक थी. उसकी ऊपरी भाग का कपडा पारदर्शी था जिसमे से अनीता की चूँचियाँ दिख रही थी और उस पर उसकी निप्पल पोके कर रही है थी. राज समझ गया की वह पहनी हुयी ब्रा उसके तरफ फेंकी है. साथ में राज यह भी समझ गया की अनीता क्या चाहती है.

राज अपनी पत्नी को देखते रह गया. उसकी चेहरे पर कोई मेक उप नहीं था, बस होंठों पर लिप ग्लॉस और आँखों में काजल था मगर फिर भी वह बहोत hi खूबसूरत लग रही थी और लगे भी क्यों na,Anita थी hi इतनी खूबसूरत.

राज एक पल के लिए उसकी लिंगेरी पर पोके करती हुयी निप्पल्स को देखा और फिर उसकी चेहरे पर देखकर सोचने लगा की वह सच में कितना किस्मत वाला है की उसे अनीता जैसी बीवी मिली. सच में वह ख़ूबसूरती में किसी मॉडल से काम नहीं थी और उसकी बदन भी वैसा hi था, होरगलास फिगर का जिसमे उसकी गांड और चूँचियाँ बड़ी बड़ी थी तो कमर पतला और पेट एक दम सपाट.

राज सोचते रहा की उसकी बीवी सिर्फ बेहद hi खूबसूरत hi नहीं बल्कि सेक्सी भी है. मॉडर्न होने के साथ साथ संस्कारी भी. राज सोचने लगा की वह बहोत hi किस्मत वाला है की उसे अपनी बीवी में इतने सारे गुण मिले.

राज वैसे hi कुछ सेकण्ड्स तक अनीता को देखते रहा जो अपनी नाख़ून दांतो के बीच दबायी हुयी

दरवाज़े के पास कड़ी थी. राज उससे मुस्कुराते हुए इशारे से बोलै की वह 5 मिनट में बैडरूम में आएगा. अनीता उसका इशारा देखकर मुस्कुराई और फिर बैडरूम में चली गयी.

10 मिनट बाद राज बैडरूम में गया तो देखा अनीता पेट के बल लेती हुयी मोबाइल में कुछ पढ़ रही थी. उसके पीछे उसकी फुल बैकलेस लिंगेरी में पूरी गोरी पीठ लाइट के रौशनी में चमक रही थी.

राज फिर अपनी सेक्सी बीवी की गांड की उभर देखने लगा जो ऊपर के तरफ उठी हुयी थी. वह उसकी गांड और पीठ देखते हुए बीएड के पास जाकर उसके पास बैठ गया और उसकी टांगों पर हाथ फिरने लगा.

अनीता यह महसूस करके मोबाइल में देखती हुयी hi नखरे से boli,"Yaad आ गया की इस घर में कोई है भी".

राज अनीता की जांघ पर हाथ फिरने के बाद उसकी गांड पर हाथ फिरते हुए bola,"Jaan तुम भी न. मुझे पता है की मेरी एक प्यारी सी बहोत hi खूबसूरत बीवी है जिसे ढेर सारा प्यार चाहिए क्यूंकि वह दिन भर अकेले में बोर हो जाती है. और अब उसे ढेर सारा प्यार देने का वक़्त आ गया है".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराने लगी. उसकी बहोत साडी अच्छी बातों में से राज को यह भी बहोत अच्छा लगता था की अनीता ज़्यादा ड्रामा नहीं करती थी. बस कभी कभी थोड़ी नाराज़गी दिखती थी वह भी मज़ाक वाले लहजे में. राज को अनीता का यह गुण बहोत अच्छा लगता था और इस कारण से वह भी अनीता की इंडिपेंडेंस का रेस्पेक्ट करता था.

अनीता मुस्कुराती हुयी अपनी गांड पर अपने पति का हाथ महसूस करती हुयी हरिया के बारे में सोचने लगी और उसकी छूट फड़क गयी. उसका दिल करने लगा की राज उसकी गांड पर सिर्फ हाथ फेरे नहीं बल्कि उसे दबाये और मसले मगर ऐसा नहीं हुआ और राज उसकी गांड पर हाथ फेरने के बाद उसकी नंगी पीठ पर हाथ फेरने लगा.

अनीता अगले पल घूम गयी और राज के पंत के ऊपर से उसके लुंड पर हाथ रखकर सहलाने लगी. कुछ सेकंड बाद राज झुककर अनीता की होंठों को चूमने लगा तो अनीता भी साथ देने लगी.

थोड़ी देर चूमते हुए दोनों एक दूसरे का कपडा खोलने लगे और जब दोनों नंगे हो गए तो अनीता राज का लुंड चूसने लगी. लुंड चूसै के बाद राज अनीता की टांगें फैला कर उसकी छूट चाटने लगा तो अचानक से अनीता को हरिया का कप आइस क्रीम खाने का अंदाज़ याद आने लगा. वह हरिया का कप आइस क्रीम खाने का अंदाज़ याद करके अपने पति के ज़बान से छूट चटाई का मज़ा लेने लगी.

थोड़ी देर छूट चटाई के बाद राज अनीता की टांगों के बीच आने लगा तो अनीता अचानक से घूम गयी और फिर बहोत hi कामुक तरीके से अपनी गांड को ऊपर के तरफ करके राज से boli,"Jaan प्लीज फ़क में फ्रॉम बिहाइंड".

राज अनीता की गांड को ऊपर उठते हुए देख रहा था और जब वह उसे पीछे से छोड़ने के लिए बोली तो उसका लुंड झटका मारने लगा. उसका दिल भी थोड़ा धड़क गया यह सुनकर.

वह धड़कते दिल से अपनी बीवी की नंगी गोरी गांड देखने लगा. पतली कमर और बड़ी गांड होने के कारण अनीता की गांड वैसे पोजीशन में एक हार्ट का शेप में लग रहा था और एहि कारन था की राज का दिल धड़क रहा था.

अनीता ऐसे hi बहोत खूबसूरत और कामुक थी ऊपर से उसकी होरगलास फिगर में वह वैसे डोग्गिस्टीले में झुकती थी तो गांड का हार्ट शेप और फिर चुदाई के वक़्त उसकी मुलायम और बड़ी गांड को हिलते देख राज के लिए ज़्यादा देर टिकना मुश्किल होता था. एहि कारण था की वह अनीता को ज़्यादातर वक़्त मिशनरी में hi छोड़ना पसंद करता था.

लेकिन इसके बावजूद भी अनीता के कहने पर राज कभी कभी डोग्गिस्टीले में उसे छोड़ता था क्यूंकि वह अनीता की इच्छाओ का भी रेस्पेक्ट करता था. वहीँ अनीता भी समझती थी की राज के लिए उसे डोग्गिस्टीले में देर तक छोड़ना मुश्किल होता था तो वह भी ज़्यादा ज़िद्द नहीं करती थी और जब बहोत ज़्यादा मैं करता था तभी वह डोग्गिस्टीले में छोड़ने के लिए बोलती थी. दोनों पति पत्नी एक दूसरे को प्यार के साथ साथ इज़्ज़त भी करते थे.

राज अनीता की गांड को देखा और फिर आगे बढ़ कर उसकी रंगों के बीच छूट में लुंड घुसा कर छोड़ने लगा. चुदाई के वक़्त थप थप आवाज़ के साथ साथ अनीता की गांड भी हिल रही थी. कुछ सेकण्ड्स के चुदाई के बाद अनीता की कामुक ाँहें निकलने lagi,"Aaaaahhhh आआह्ह्ह्हह उम्मम्मम्म आअह्हह्ह्ह्हह".

वही राज भी अनीता की कमर पकडे छोड़ रहा था और इसके कारण हांफने भी लगा था. राज नहीं चाहता था की वह जल्दी झरे इसके लिए वह पूरा फोकस करके अपनी जवान और कामुक बीवी को छोड़ रहा था.

चुदाई का 5 मिनट हो गया था. अनीता को अच्छा लग रहा था डोग्गिस्टीले में चुड़ते वक़्त और उसे बार बार हरिया का उसे झुका कर उसकी दोनों चूँचियों को पकड़कर पीछे से जोर से धक्के लगाना याद आ रहा था. अनीता धीरे धीरे गरम हो रही थी और उसकी बदन की आग भड़क रही थी. पांच मिनट की चुदाई के बाद वह आहें भर्ती हुयी boli,"Aaahhhhh आआह्ह्ह्ह हर्डर राज प्लीज फ़क में हर्डर".

राज यह सुनकर और जोर से छोड़ने लगा. अनीता उसे ेन्सॉरगे करती rahi,"Yes जान ऐसे hi. आअह्ह्ह्ह कीप फूकिंग में".

राज का तेज़ धक्का के कारण अनीता की गांड और हिलने लगी थी और रूम में चुदाई की और अनीता की कामुक आवाज़ गूंजने के कारण राज के लिए संभालना मुश्किल हो गया और एक मिनट तक जोर से छोड़ने के बाद वह जहर गया.

झरने के बाद राज अनीता की छूट से अपना लुंड निकलकर उसके बगल में लेट गया वहीँ अनीता वैसे hi डोग्गिस्टीले में कुछ सेकण्ड्स तक आँख बांध किये ज़ोर से सांस लेती हुयी रुकी रही और उस पोज़ में उसकी छूट से राज का वीर्य गिरता रहा.

कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता वैसे hi पेट के बल लेट गयी ज़ोर से सांस लेते हुए. राज उसके तरफ घूमकर bola,"I ऍम सॉरी जान. ज़्यादा देर तक तुम्हे प्यार नहीं कर पाया".

अनीता यह सुनकर थोड़ी खिसक कर अपने पति से चिपक गयी और उसके गाल पर किश करके boli,"Koi बात नहीं जान. तुम थके हुए रहते हो".

राज यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता की गाल पर चूमकर bola,"Thank यू जान. यू अरे सिम्पली थे बेस्ट".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई तो राज bola,"Good नाईट".

अनीता जवाब mein,"Good नाईट" बोली फिर राज आँख बांध करके सोने लगा. वहीँ अनीता घूमकर सीधा लेट कर छत के तरफ देखती हुयी हरिया के जोर के धक्के के बारे में सोचने लगी की कैसे वह उसे झुककर उसकी चूँचियों को पकडे हुए पीछे से जोर के धक्के लगा रहा था. अनीता वैसे hi सोचती हुयी सो गयी.
 
अपडेट 47

अगला दिन संडे था. राज शाम को अनीता को बाहर घूमने ले गया. दोनों पति पत्नी घूमे फिर, अनीता बहोत साडी शॉपिंग की और फिर एक मेहेंगे रेस्टोरेंट में डिनर किया.

रात को 8:30 बजे घर लौट रहे थे तो रास्ता खली hi था मगर एक चौराहा पर आटोमेटिक सिग्नल होने के कारण कार रुक हुआ था. उस छोटे शहर में आटोमेटिक सिग्नल न के बराबर था मगर चौराहा होने के कारण लगाया गया था.

कार रुका तो अनीता कुछ सेकंड सामने देखने के बाद नज़र बाये तरफ की तो सड़क के किनारे बाद थोड़ा कच्चा जगह था जहाँ पेड़ लगा हुआ था उसके नीचे एक ठेला दिखाई दिया जिस पर चार मर्द बैठे हुए पत्ते खेल रहे थे. उसमे से एक आराम से पेअर फैलाये बैठा था और पीठ के तरफ एक पुराण मैला कुशिओं था, शायद सोफे का कुशिओं.

बाकी तीनो मर्द ऐसे hi नार्मल तरीके से बैठे हुए थे मगर वह एक मर्द आराम से कुशिओं पर पीठ किये दोनों हाथ को ठेले के रेलिंग पर फैलाये बैठा हुआ हाथ में पत्ता रखा हुआ था.

अनीता ध्यान से देखि तो वह दो लोगो को पहचान गयी. वह जो आराम से हाथ और पेअर फैलाये कुशिओं पर पीठ किये बैठा था वह हरिया था और दूसरा रामु था. उन दोनों को देखते hi अनीता का दिल थोड़ा धड़क गया और वह एक गहरी सांस ली.

अगले पल अनीता देखि की हरिया कुछ उठा रहा है और जब वह उसे मुंह के पास ले गया तो अनीता समझ गयी की वह शराब का बोतल था. अगले पल रामु उसके हाथ से बोतल लेकर वह भी पीने लगा और पीकर बोतल बाकी दो मर्दों के तरफ बढ़ा दिया. तब तक हरिया अपना एक पत्ता नीचे फ़ेंक चूका था और रामु भी बोतल बाकी दोनों के तरफ बढ़ा कर पत्ता नीचे फ़ेंक दिया.

अनीता समझ गयी की वह दोनों संडे का छुट्टी ऐसे hi गुज़रते होंगे. वह सोचने लगी की बाकी मज़दूरों के तरह सस्ती शराब पीना और पत्ते खेलना, हरिया के लिए भी दिल बहलाने और मनोरंजन का एहि साधन था. अनीता फिर तीसरे मर्द को पत्ता फेंकते हुए देखि की तभी कार आगे चलने लगा.

अनीता फिर आगे देखने लगी और गाडी में आगे बढ़ते हुए सोचने lagi,"Hariya जी भी न यहाँ भी अपना दबंगई दिखा रहे हैं. कैसे आराम से हाथ पेअर फैलाये हुए बैठे हैं. हरिया जी हैं तो मज़दूर लेकिन उनका बात hi अलग है. ग़रीब मज़दूर होने के बावजूद भी कितना कॉन्फिडेंस है उनमे और पुरे दबंग हैं".

अगले दिन मंडे को अनीता को बाजार जाना था. वह एक बैकलेस और डीप नैक ब्लाउज और साड़ी पेहेन कर तैयार होकर बाजार के लिए निकल गयी. ऑटो में कुछ ख़ास नहीं हुआ.

बाजार पहुँच कर वह एक नज़र पान दुकान के तरफ देखकर आस पास देखि और फिर सब्जी मंडी में चली गयी. सब्जीवाले के पास जाकर वह सब्जियों और उसके क्वांटिटी को बता दी तो सब्जी वाला सब्जियां चुनने और तौलने लगा. अनीता इस बीच एक दो बार आस पास नज़र दौड़ाई.

सब्जी लेने के बाद अनीता बाजार से निकली और एक नज़र फिर पान वाले के दूकान के तरफ देखकर चुप चाप ऑटो स्टैंड के तरफ जाने लगी. कुछ कदम चलने के बाद अनीता को एक आवाज़ सुनाई diya,"Waah मेमसाहब चलते वक़्त आपकी गांड क्या मस्त लगता है".

अनीता यह सुनकर घूमकर देखि तो हरिया था. अनीता जल्दी से आस पास देखि मगर कोई नहीं था तो वह मुस्कुरा कर boli,"Hariya जी आप?"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Haan मेमसाहेब हम. हमरे अलावा आपकी गांड का ऐसे खुल कर तारीफ करने का किस्मे हिम्मत है".

अनीता यह सुनकर अपनी आंखें बड़ी करके मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी आप भी न"

हरिया यह सुनकर आगे बढ़कर बाये हाथ में अनीता की हाथ से सब्जियों का थैला लेकर bola,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब हुंका आने में देरी हो गया और आपको ी थैला खुद उठाना पड़ा".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी इसमें माफ़ी मांगने की क्या बात है. आप भी तो काम करते हैं तो काम में बिजी रहे होंगे".

हरिया अगले पल अनीता की गांड पर दाया हाथ रखकर उस पर फिरने के बाद उसकी गांड दबा कर bola,"Aapka मदद करना भी तो काम है न मेमसाहेब".

फिर वह अनीता की चूँचियों को देखकर बेझिझक अपने होंठों पर ज़बान फिरकर bola,"Aur आपका मदद करना तो हमरे लिए बहोत ज़रूरी काम है".

अनीता हरिया को उसकी चूंकि देखते हुए देख चुकी थी. वह उसका बात सुनकर जोर का सांस लेकर अपनी चूँचियों को थोड़ा ऊपर करने के बाद boli,"Theek है हरिया जी देर से hi सही आप मेरी मदद करने आ तो गए हैं. अब आराम से ऑटो स्टैंड तक चलने में मेरी मदद कीजिये".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता की गांड दबाकर उसे थपथपाते हुआ bola,"Chaliye मेमसाहेब".

अनीता को न जाने क्यों हरिया का यह नया अंदाज़ जब वह उसकी गांड थप थपाकर चलने के लिए बोलता है अच्छा लगने लगा था. वह मुस्कुराकर boli,"Chaliye हरिया जी".

अनीता हरिया के साथ सीधा ऑटो स्टैंड जाने वाले रास्ते से नहीं गयी जिधर से जाने का वह सोच रही थी बल्कि उस पतले रास्ते से जाने लगी जिधर से हरिया चोर वाले इंसिडेंट के बाद से उसे ले जा रहा था क्यूंकि उधर सुननसँ रहता था. वह रास्ता लम्बा तो था मगर इससे उसे अनीता के साथ सुननसँ जगह में वक़्त बीतने और आइस क्रीम खाने का मौक़ा मिल जाता था.

अनीता गांड हिलती हुयी चल रही थी और हरिया उसकी गांड पर हाथ रखे फेर रहा था. चलते वक़्त हरिया उसकी गांड दबाकर bola,"Sach में मेमसाहेब चलते वक़्त आपकी ी गांड जैसा हिलता है ससुरा हमरा लौड़ा खड़ा होने लगता है".

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी आंखें बड़ी करके boli,"Hariya जी आप भी न".

हरिया अनीता की गांड दबाकर मुस्कुराते हुए bola,"Are मेमसाहेब हम सच बोल रहा हूँ. यक़ीन नहीं है तो आप हमरा लौड़ा छूकर देख लीजिये".

अनीता यह सुनकर आस पास देखती हुयी धीरे से boli,"Hariya जी आप भी न".

अनीता देखि की आस पास कोई नहीं है तो हरिया के चेहरे पर देखकर boli,"Koi ऐसे बोलता है क्या?"

हरिया अनीता को देखकर bola,"Are मेमसाहेब आपको देखकर हमरा मुंह से सच निकलता है. कउनो नहीं है आस पास. छूकर आराम से देखिये न हमरे लौड़ा को".

अनीता वैसे hi चलती हुयी हरिया के आँखों में देखती हुयी अपनी बायीं हाथ हरिया के पंत के ऊपर से उसके लुंड पर रखकर सहलाकर उसके लुंड को पंत के ऊपर से पकड़ कर उसे आगे पीछे की तो हरिया puchha,"Ab आप खुद बोलिये मेमसाहेब हम का झूठ बोल रहे थे. हमरा लौड़ा खड़ा हो रहा है न".

अनीता यह सुनकर चलती हुयी उसके लुंड सहलाती हुयी "हाँ" में सर हिलायी तो हरिया मुस्कुरा कर bola,"Memsaheb बाहर निकल कर देखिये न".

अनीता यह सुनकर एक पल सामने देखि और फिर हरिया को देखकर उसके लुंड को सहलाती हुयी boli,"Hariya जी चलिए आइस क्रीम कहते हैं".

हरिया अनीता की गांड को हिलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब खाना नहीं आपको चूसने का मैं है ऐसे बोलिये न".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर हरिया को देखकर boli,"Hariya जी आप भी न".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता उसके लुंड के तरफ देखकर उसे हिलती हुयी boli,"Haan हरिया जी मुझे चूसने का मैं है".

फिर वह हरिया के चेहरे पर देखके boli,"Ice क्रीम. आपको चाटने का मैं नहीं है क्या?"

हरिया यह सुनकर अनीता को ऊपर से नीचे देखकर उसकी गांड को हिलती हुए bola,"Memsaheb आप चटाइएगा तो हम ज़रूर चाटूँगा".

अनीता हरिया का लुंड हिलती हुयी boli,"Haan हरिया जी मैं चटवाउंगी आपको, आइस क्रीम".

हरिया अनीता की गांड दबाते हुए bola,"Theek है मेमसाहेब. हम भी आपको आज बहोत hi ख़ास तरीके से आइस क्रीम चुसवाऊँगा. आपको वैसे चूसने में बहोत मज़ा आएगा".

अनीता यह सुनकर हरिया को देखकर उसके लुंड को सहलाती हुयी मुस्कुराकर boli,"Hariya जी पता नहीं कौन सा ख़ास तरीके से मुझे आप आइस क्रीम खिलने का सोचने लगे".

हरिया अनीता की गांड को हिलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब खिलाएंगे नहीं, हम चुसाएँगे आपको".

अनीता यह सुनकर हरिया के लुंड को हिलती हुयी boli,"Theek है हरिया जी वही. पता नहीं कौन सा ख़ास तरीक़ा से आप चुसाईयेगा मुझे, आइस क्रीम".

हरिया अनीता की गांड दबाते हुए bola,"Are मेमसाहेब जब चुसाएँगे तो देख लीजियेगा की कितना ख़ास तरीक़ा है. हम तो ी कहूंगा की आप जैसी औरत को आइस क्रीम ऐसे hi चूसना चाहिए जैसे हम चूसने वाले हैं".

अनीता यह सुनकर हरिया को देखती हुयी उसका लुंड सहलाती हुयी boli,"Hariya जी मेरी जैसी औरत का मतलब?".

हरिया यह सुनकर अनीता को ऊपर से नीचे तक देखकर bola,"Matbal ी है मेमसाहेब की आप इतनी खबसूरत हैं".

फिर वह अनीता की चूँचियों को देखते हुए bola,"Aur आपका दिल इतना बड़ा और अच्छा है. और आप तो आइस क्रीम भी चूसने में माहिर हैं. कसम से मेमसाहेब आपके जैसा कोई चूस hi नहीं सकती. आप सबसे अलग और ख़ास औरत हैं. तो आपके जैसी सबसे अलग और ख़ास औरत जो चूसने में इतनी माहिर है उसका आइस क्रीम चूसने का अंदाज़ भी तो सबसे अलग होना चाहिए न".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी हरिया का लुंड को अच्छे से पकड़ कर हिलती हुयी boli,"Hariya जी आप भी न, बस घूम फिरकर तारीफ hi करने लगते हैं मेरी. अब मेरी तारीफ छोड़िये और चलिए अपने ख़ास तरीके से आइस क्रीम चूसिये मुझे".

हरिया यह सुनकर अनीता की गांड दबाते हुए bola,"Aese आप आइस क्रीम के अलावा कुछ और भी चूस सकती है अगर आपका मैं हो तो. वह चूसने से आपको ज़्यादा मज़ा आएगा".

अनीता यह सुनकर हरिया को देखती हुयी मुस्कुराई और उसके लुंड को हिलाकर उसके तरफ एक नज़र देखने के बाद हरिया को देखती हुयी मुस्कुराकर boli,"Hariya जी पता नहीं आप मुझे क्या चूसना छह रहे हैं लेकिन मुझे तो बस आइस क्रीम चुसनी है. इतनी गर्मी में तो आइस क्रीम जैसी ठंडी चीज़ hi चूसने में मज़ा आएगा".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Are मेमसाहेब जिस तरह से लोहा लोहे को काट ता है".

फिर हरिया अनीता की बदन को देखते हुए bola,"Usi तरह बदन की गर्मी भी गरम चीज़ से hi जाता है".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी आप तो बस बातें बनाते रहते हैं. अगर मैं चूसने में माहिर हूँ तो आप भी बात बनाने में माहिर हैं".

हरिया यह सुनकर है diya,"hahaha" तो अनीता भी खिलखिलाने lagi,"Hehehe".

हरिया अनीता को हस्ता हुआ देखकर bola,"Waah मेमसाहेब आप हस्ती हैं तो कितनी अच्छी लगती है".

अनीता यह सुनकर थोड़ा नखरे से puchhi,"To क्या बाकी टाइम अच्छी नहीं लगती हूँ?"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Are नहीं मेमसाहेब आप तो हर वक़्त अच्छी लगती हैं. आप है hi अच्छी. आपको देखकर तो हमरा लौड़ा खड़ा होने लगता है".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Hariya जी अब बहोत हो गयी मेरी तारीफ".

अनीता फिर उसके लुंड से हाथ हटाकर boli,"Chaliye आइस क्रीम चूसते और चाट ते हैं"

हरिया यह सुनकर अनीता की गांड मसलकर उसे थपथपाते हुए bola,"Chaliye मेमसाहेब".

अनीता अपनी गांड थप थपाये जाने पर हरिया को देखि तो मुस्कुरा दिया. अनीता भी मुस्कुराकर उसको देखती हुयी अपनी गांड की मटक और बढ़ा दी. हरिया अनीता की गांड की बढ़ती मटक को अपने हाथ पर महसूस किया वहीँ अनीता सामने देखकर चलने लगी.

कुछ सेकंड बाद हरिया अनीता की गांड से हाथ हटाकर चलने लगा. अनीता को हरिया का समझदार अच्छा लगा.

हरिया आइस क्रीम वाले के पास जाकर एक कप आइस क्रीम और एक आइस क्रीम बार ले लिए. क्यूंकि आइस क्रीम वाला बूढ़ा था तो हरिया उससे इज़्ज़त से बात किया और चुप चाप आइस क्रीम लेकर दोनों चल दिए.

अनीता हरिया के साथ उस गली में चली गयी जहाँ वह दोनों आइस क्रीम कहते the.Uss गली में वह पेड़ के पीछे पहुँच कर हरिया अनीता की गांड दबाते हुए bola,"baith जाइये मेमसाहब".

अनीता यह सुनकर वहां रखे एक पत्थर पर बैठ गयी और बैठकर हरिया जो उसके सामने hi खड़ा था उसको देखकर boli,"Main बैठ गयी हरिया ji.Ab बताइये आप मुझे वह कौन सा ख़ास तरीक़ा है आइस क्रीम खाने का जो आप बोल रहे थे".

यह सुनकर हरिया मुस्कुराते हुए bola,"Are मेमसाहेब खाने का नहीं, चूसने का तरीक़ा".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी आप भी न. आइस क्रीम पिघल रही है. अब बताइये भी आइस क्रीम चूसने का ख़ास तरीक़ा".

यह सुनकर हरिया मुस्कुराते हुए अपने हाथ से कप आइस क्रीम अनीता को देते हुए bola,"Ee पकड़िए मेमसाहब और ी अपना चूसने वाला आइस क्रीम हुंका दीजिये".

अनीता यह सुनकर हरिया के हाथ से उसका कप आइस क्रीम ले ली और खुद का स्टिक आइस क्रीम हरिया को दे di.Hariya स्टिक आइस क्रीम का पैकेट फाड़कर उसमे से आइस क्रीम निकलकर bola,"Waah मेमसाहब कितना अच्छा आइस क्रीम hai.Aapko चूसने में बहोत मज़ा आता होगा".

यह सुनकर अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी आप भी न, बस बातें बनाते हैं" और यह बोलकर वह खिलखिला दी "हहै".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Are मेमसाहब हम बात कहाँ बनता hun.Jo सच है वही बोलता हूँ".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Theek है हरिया ji.Ab आप मुझे आइस क्रीम खाने, मेरा मतलब है चूसने भी देंगे या इसे ऐसे hi पिघला देंगे बात करते हुए?".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Are मेमसाहब ी आइस क्रीम तो आपकी खूबसूरत मुंह में जा कर hi पिघलेगा जब इसे आप मज़े से चुसियेगा".

अनीता यह सुनकर मुस्कुरा दी की हरिया इसमें भी उसकी तारीफ hi कर रहा है उसकी मुंह को खूबसूरत बोलकर. अनीता इतने दिनों से हरिया से बात करके समझ गयी थी की हरिया लगभग हर बात में घूम फिरकर उसकी तारीफ hi करता है.

एक अनपढ़ या काम पढ़े लिखे मज़दूर को ऐसे बातें बनाना और कोई न कोई तरीके से लगभग हर बात में उसकी तारीफ करने का रास्ता निकल लेना यह देख अनीता हरिया से इम्प्रेस्सेड थी. उसे हरिया का अंदाज़ अच्छा और एंटरटेनिंग लगने लगा था.

हरिया यह बोलकर उस आइस क्रीम के स्टिक को अपने पंत में ज़िप के ऊपर सत्ता दिया और वैसे hi उसे ज़िप से सताए हुए बाये हाथ से पकड़ कर अनीता को bola,"yeh लीजिये मेमसाहब अब आप इसे चूसिये".

हरिया के पंत के ज़िप के तरफ अनीता dekhi.Uske ज़िप से आइस क्रीम का स्टिक सत्ता हुआ था जहाँ हरिया अपना बया हाथ रखे उसको पकडे हुए था और आइस क्रीम का ऊपरी भाग अनीता के तरफ पॉइंटेड था.

अनीता यह देखकर हरिया के तरफ वापस देखती हुयी मुस्कुराकर boli,"Hariya जी यह क्या hai?Aese आइस क्रीम चूसा जाता है क्या?"

हरिया मुस्कुराकर bola,"Haan मेमसाहब असली चूसै ऐसे hi होता hai.Aapko ऐसे hi ख़ास तरीके से चूसना चाहिए. ऐसे चूसेंगी तो आपको ज़्यादा मज़ा आएगा".
 
तेरे अरे सम रीडर्स हु नेवर कमेंट ों थे स्टोरी बूत स्टार्ट सेंडिंग पीएमएस व्हेन तेरे इस ा डिले इन उप्दतिंग थे स्टोरी. िफ़ पीपल don't इवन बोथेर तो व्रिठे ा फ्यू लाइन्स ों थे अपडेट थें what's थे पॉइंट ऑफ़ राइटिंग थे स्टोरी ों ा पब्लिक प्लेटफार्म.
 
अपडेट 48

हरिया उस आइस क्रीम के स्टिक को अपने पंत में ज़िप के ऊपर सत्ता दिया और वैसे hi उसे ज़िप से सताए हुए बाये हाथ से पकड़ कर अनीता को bola,"yeh लीजिये मेमसाहब अब आप इसे चूसिये".

हरिया के पंत के ज़िप के तरफ अनीता dekhi.Uske ज़िप से आइस क्रीम का स्टिक सत्ता हुआ था जहाँ हरिया अपना बया हाथ रखे उसको पकडे हुए था और आइस क्रीम का ऊपरी भाग अनीता के तरफ पॉइंटेड था.

अनीता यह देखकर हरिया के तरफ वापस देखती हुयी मुस्कुराकर boli,"Hariya जी यह क्या hai?Aese आइस क्रीम चूसा जाता है क्या?"

हरिया मुस्कुराकर bola,"Haan मेमसाहब असली चूसै ऐसे hi होता hai.Aapko ऐसे hi ख़ास तरीके से चूसना चाहिए. ऐसे चूसेंगी तो आपको ज़्यादा मज़ा आएगा".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Pata नहीं हरिया जी आपको यह नया आईडिया कहाँ से मिला हेहेहे."

अनीता हरिया को देखती हुयी चुलबुलापन से खिलखिला रही थी और खिलखिलाती हुयी hi अपनी बायीं चूंकि पर हाथ महसूस की और फिर उसकी चूंकि उस हाथ के मुट्ठी में दबने लगी.

अनीता अपनी चूंकि के तरफ देखि भी नहीं क्यूंकि उसे पता था की वह हाथ किसका है. वह बस खिलखिलाना बांध करके हरिया के तरफ देख रही थी.

हरिया अनीता की चूंकि दबाते हुए मुस्कुराकर bola,"Are मेमसाहब ी आईडिया आपको चूसते हुए देखकर hi आया है हुंका. आप इतना अच्छा चुस्ती है तो हम सोचे की आपको ख़ास तरीके से hi चूसना चाहिए. और चूसै का सबसे ख़ास तरीक़ा एहि है. आप चूसकर देखिये तो. आपको ऐसे चूसने में मज़ा आएगा."

अनीता यह सुनकर रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी आप भी न कैसे कैसे आईडिया लाते हैं."

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए अनीता की चूंकि दबाते हुए bola,"Memsaheb आप सबसे अलग और ख़ास हैं. आपके जैसी कोई नहीं. चूसने में तो आपका कउनो मुक़ाबला hi नहीं है. इस हिसाब से आपका चूसने का तरीक़ा भी तो सबसे अलग और ख़ास होना चाहिए"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी मुझे पता नहीं की चूसने में मेरा कोई मुक़ाबला है या नहीं लेकिन बात बनाने में आपका कोई मुक़ाबला नहीं है".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराने लगा तो अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Khair जब आप बोल रहे हैं तो मैं ऐसे चूसकर देखती हूँ. पता नहीं ऐसे क्या ख़ास है ऐसे चूसने में जो आपको लगता है मुझे ज़्यादा मज़ा मिलेगा".

हरिया यह सुनकर अनीता की चूंकि मसलते हुए मुस्कुराने लगा तो अनीता आइस क्रीम के तरफ देखकर अपनी ज़बान निकलकर उसके नोक पर फिरने लगी.

हरिया यह देखकर मुस्कुराते हुए bola,"Waah मेमसाहेब कितना अच्छा से इसके नोक पर आप ज़बान फिरा रही हैं"

अनीता यह सुनती हुई दो तीन बार आइस क्रीम के नोक पर अपनी ज़बान फिरने के बाद रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी आप भी न इसमें भी तारीफ करने लगे. वह तो हम बात करने में लगे थे और इधर आइस क्रीम का क्रीम निकलकर गिरने जा रहा था इसलिए मैं चाट गयी. और ऐसे भी इतनी गर्मी है की मुझे प्यास भी लगी है".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Theek किये मेमसाहेब."

फिर वह अनीता की चूंकि को दबाते हुए bola,"Aapka बदन बहोत गरम है मेमसाहेब और आपके जैसी गरम औरत को प्यास तो लग्न hi है. कउनो बात नहीं आप हमरे पंत के पास जो चीज़ है उसे चूसकर उसके अंदर का मलाई पीजिएगा तो आपका गर्मी और प्यास दोनों शांत हो जायेगा"

अनीता यह सुनकर बिना मुस्कुराये हरिया के पंत के तरफ देखने लगी. हरिया यह देखकर bola,"Munh खोलिये मेमसाहब और हुंका देखते हुए चूसिये".

अनीता यह सुनकर वापस हरिया के तरफ ऊपर सर करके देखि और बिना कुछ बोले अपनी मुंह खोल दी. अगले पल वह हरिया के आँखों में देखती हुयी अपनी चेहरे को सामने हरिया के तरफ ले gayi.Chehra थोड़ा सा सामने के तरफ करने के बाद वह आइस क्रीम को मुंह में लेकर हरिया को देख कर अपनी सर को आगे पीछे करके आइस क्रीम को चूसने लगी.

यह देखकर हरिया मुस्कुराते हुए bola,"Waah मेमसाहब कितना अच्छा से आप चुस्ती हैं"

अनीता तीन चार बार अपनी सर को आगे पीछे करके चूस चुकी thi.Hariya का बात सुनकर वह चूसना छोर हरिया को देखती हुयी खिलखिलाकर boli,"Hehehe हरिया जी आप भी न".

यह सुनकर हरिया मुस्कुरा दिया. अनीता भी उसे मुस्कुराती हुयी देखने लगी तो हरिया bola,"Aur चूसिये न मेमसाहेब".

अनीता यह सुनकर "हाँ हरिया जी" बोलकर वापस चेहरा सामने में तरफ बढ़ा कर आइस क्रीम मुंह में लेकर चेहरा आगे पीछे करके चूसने लगी.

हरिया यह देखकर bola,"Humka देखते हुए चूसिये मेमसाहेब".

अनीता यह सुनकर वापस आंखें ऊपर करके हरिया को देखती हुयी उस आइस क्रीम को मुंह में लेकर अपना सर आगे पीछे करती हुयी चूसने लगी.

हरिया बाये हाथ से स्टिक पकडे हुए था और दाए हाथ से अनीता की बायीं चूंकि मसलते हुए bola,"Haan मेमसाहेब ऐसे hi चूसिये. सच में मेमसाहेब आपको ऐसे चूसते हुए देखकर हुंका बहोत अच्छा लग रहा है".

अनीता यह सुनकर एक दो बार और चेहरा आगे पीछे करके आइस क्रीम चूसने के बाद उसे मुंह से निकलकर हरिया को देखते हुए अपनी होंठों पर ज़बान फिरकर उसके तरफ कप आइस क्रीम बढाकर रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Aap भी चाटिये न हरिया जी. पूरा पिघल रहा है".

हरिया यह सुनकर bola,"Haan मेमसाहेब. ी हमरा वाला आप चूसिये हम आपका वाला चाट ते हैं".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी यह तो मेरी आइस क्रीम है, आपका वाला कैसे हुआ. आपका तो यह कप वाला आइस क्रीम है".

हरिया मुस्कुराते हुए दाए हाथ से अनीता की चूंकि दबाते हुए बाये हाथ के अंगूठे और इंडेक्स फिंगर के बीच आइस क्रीम के स्टिक पकडे हुए बाकी तीन उँगलियों को अपने लुंड के उभर पर फिरते हुए bola,"Are मेमसाहेब तो वह चूसने वाला चीज़ जिसे आप चुसियेगा वह तो अभी हमरे हाथ में है और हम जो चाटेंगे वह आपके हाथ में".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी अपनी सर हिलाकर boli,"Hariya जी आप भी न. बस बातें बनाते हैं".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराने लगा तो अनीता उसको देखती हुयी दायी हाथ से उसके पंत से लगे स्टिक आइस क्रीम का स्टिक पकडकत boli,"Dijiye मैं आपका वाला खुद से पकड़ कर चुस्ती हूँ".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए अपने बाये हाथ से अनीता की हाथ पकड़ कर उसे अपने लुंड पर दबाते हुए bola,"Haan मेमसाहेब इसे अच्छे से पकड़ कर मज़े से चूसिये".

अनीता अपनी दायी हाथ का इंडेक्स फिंगर और अंगूठे के बीच आइस क्रीम का स्टिक पकड़ी हुयी अपनी बाकी तीन उँगलियों और हथेली के बीच हरिया का लुंड का उभर पंत के ऊपर से पकड़ ली.

वह हरिया को देखती हुयु बाये हाथ को उसके तरफ बढाती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी आप भी यह मेरा वाला चाटिये न".

अनीता के स्टिक आइस क्रीम पकड़ने से हरिया का बाय हाथ फ्री हो गया था. वह दया हाथ से अनीता की चूंकि दबाते हुए "हाँ मेमसाहेब दीजिये हम आपका चाट ते हैं" बोलकर बाये हाथ में वह कप आइस क्रीम ले लिया.

अनीता उसे कप आइस क्रीम लेता हुआ देख कर मुस्कुराई और अपनी बायीं हाथ जो फ्री हो गयी थी उसे हरिया के पंत के ऊपर लेजाकर उसके लुंड के उभर को अच्छे से पकड़ ली. अब सिचुएशन यह था की वह अपनी दायी हाथ के index,middle फिंगर और थंब से आइस क्रीम का स्टिक पकड़ी थी और उस हाथ के बाकी दो उँगलियों और हथेली और पूरी बायीं हाथ के बीच में हरिया का बड़ा और मोटा लुंड का जितना उभर आ सकता था उसे पकड़ ली.

अनीता को ऐसा करते देख हरिया का लुंड झटका मार दिया एक बार. अनीता उसके लुंड के तरफ देखि तो हरिया bola,"Memsaheb देखिये हमरा चूसने वाला चीज़ कैसे आपके चूसने का इंतज़ार कर रहा है".

अनीता यह सुनकर ऊपर के तरफ नज़र करके हरिया को देखती हुयी उसके लुंड को बाए हाथ से सहलाती हुयी boli,"Haan हरिया जी मैं चूस लेती हूँ. आइस क्रीम इंतज़ार में पिघलने वाला है और पिघल कर गिरे इससे पहले मैं इसे अच्छे से चूस लेती हूँ".

अनीता ये बोलकर हरिया को देखती हुयी अपनी मुंह खोलकर आइस क्रीम मुंह में लेकर सर आगे पीछे करके चूसने लगी.

हरिया अनीता को देखते हुए bola,"Haan मेमसाहेब अच्छे से चूसिये".

अनीता हरिया को देखती हुयी चुस्ती रही. हरिया भी नीचे के तरफ नज़र करके अनीता की आँखों में देखते हुए उसकी चूंकि दबाते हुए उसे चूसते हुए देखने लगा.

अगले कुछ सेकण्ड्स तक अनीता अपनी तीन उँगलियों को छोड़कर बाकी से हरिया का लुंड का उभर सहलाती हुयी उसके आँखों में देखती हुयी आइस क्रीम को चुस्ती रही और हरिया भी उसे देखते हुए उसकी चूंकि दबाते रहा.

कुछ सेकण्ड्स आइस क्रीम चूसने के बाद अनीता उसे मुंह से निकलकर अपनी ज़बान बाहर निकलकर उसके नोक पर फिरने लगी.

अनीता फिर आइस क्रीम के नोक को चाटना छोर कर हरिया को देखती हुयी अपनी हाथों में उसके लुंड के उभर को पकड़ी हुयी उसे सेहलती हुयी होंठों पर ज़बान फिरै तो हरिया मुस्कुरा कर bola,"Waah मेमसाहेब कितने अचे से चुस्ती हैं आप".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी आप भी न".

फिर वह रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Mere हाथ में तो जो चूसने वाला चीज़ है मैं उसे चूस रही हूँ, लेकिन आपके हाथ में जो चाटने वाली चीज़ है आप उसे चाट नहीं रहे हैं".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर दायी हाथ से अनीता की बायीं चूंकि को मसलते हुए puchha,"Kaun सा चीज़ मेमसाहेब? हमरे तो दोनों हाथ में कुछ न कुछ है".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Hariya जी मैं आइस क्रीम की बात कर रही हूँ".

हरिया अनीता की चूंकि को दबाते हुए bola,"Are मेमसाहेब लेकिन हमरे हाथ में तो आइस क्रीम के अलावा आपका यह संतरा भी है".

अनीता यह सुनकर अपनी आंखें बड़ी करके बिना शर्म के मुस्कुराती हुयी हरिया को देखती हुयी boli,"Hariya जी आप भी न".

फिर अगले पल अनीता आइस क्रीम के तरफ देखि तो एक बंध उसके नोक पर लटक रहा था. अनीता हरिया को देखती हुयी अपनी ज़बान निकलकर उस बंध को चाट गयी और फिर वैसे hi ज़बान निकलकर अपनी चेहरा और आगे करके हरिया के पंत के और करीब करके ज़बान को आइस क्रीम के नीचे वाले पोरशन से सत्ता दी.

ऐसा करने से अनीता की नाक में हरिया के पंत से आ रही बदबू जाने लगी और उसकी चीन में हरिया के लुंड के उभर का एक हिस्सा जो अनीता की हथेली के बहार था वह सत् गया.

अनीता अपनी ज़बान आइस क्रीम के नीचे वाले पोरशन से सटाकर वैसे hi ऊपर तक फिरने लगी. ऐसा करने से आइस क्रीम से लटक रहे थोड़े पानी को चाट गयी.

हरिया यह देखकर bola,"Waah मेमसाहेब सच में चूसने में तो आपका कोई मुक़ाबला नहीं है. पूरा माहिर हैं आप चूसने में"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी आप भी न. मेरी तारीफ करने और बात बनाने में लगे हैं. आपका बात सुनने के चक्कर में यह आइस क्रीम अभी पिघल कर गिर जाती. आप मेरा वाला चाटिये नहीं तो उसके अंदर का क्रीम भी न गिर जाये".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Are मेमसाहेब माफ़ कीजियेगा. हुंका समझ नहीं आ रहा था की ससुरा आइस क्रीम छाते या"

फिर वह अनीता की दायी चूंकि को दबाते हुए उसके तरफ आँखों से इशारा करके bola,"ye संतरा".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Ice क्रीम चाटिये हरिया जी. इतने दिनों से आप आइस क्रीम hi चाट रहे हैं तो वही चाटिये"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Theek है मेमसाहेब". यह बोलकर वह नीचे के तरफ नज़र किये अनीता की आँखों में देखते हुए कप आइस क्रीम को चाटने लगा.

अनीता यह देखकर अपनी चेहरा आगे करके आइस क्रीम को मुंह में लेकर चूसने लगी.

हरिया यह देखकर अपना कमर आगे पीछे करने लगा. अनीता भी उसके लुंड के उभर को अच्छे से पकड़ कर सेहला रही थी और आइस क्रीम चूस रही थी.

कुछ सेकण्ड्स बाद हरिया अनीता को देखकर एक बार कप आइस क्रीम चाटकर उसकी सबुनकजी दबाते हुए bola,"Sasura हमरा मैं ी संतरा को भी चाटने का हो रहा है".

अनीता यह सुनकर आइस क्रीम को मुंह से निकलकर हरिया को देखती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी आप भी न. संतरे तो आपने कितनी बार देखे होंगे. आपको पता hi होगा की संतरे छाते नहीं चूसे जाते हैं. उसे मुंह में लेकर उसके रास को चूसा जाता है".

अनीता यह बोलकर वापस आइस क्रीम को मुंह में लेकर चूसने लगी.

हरिया यह सुनकर अपना कमर हिलाते हुए कप आइस क्रीम को एक बार चाटकर bola,"Are मेमसाहेब तो हम भी आपका ी संतरा मुंह में लेकर चूस लेंगे".

अनीता यह सुनकर आइस क्रीम को मुंह से निकलकर हरिया को देखती हुयी आंखें बड़ी करके boli,"Hariya जी मैं तो संतरे की बात कर रही हूँ और आप हैं की".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराता हुआ bola,"Aur हम हैं की क्या मेमसाहेब?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Kuchh नहीं हरिया जी. आप चाटिये और मुझे चूसने दीजिये".

अनीता यह बोलकर वापस हरिया को देखती हुयी hi आइस क्रीम मुंह में लेकर चूसने लगी तो हरिया bola,"Aur हम हैं की आपकी चूंकि चूसने का बात कर रहे हैं".

अनीता यह सुनकर आइस क्रीम मुंह से निकलकर अपनी आँखें बड़ी करके बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी आप भी न".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए कप आइस क्रीम चाट ते हुए अनीता की चूंकि को जोर से दबा दिया. ऐसा होने से अनीता की मुंह से सिसकारी निकल gayi,"ssssiiiiiiiii" और वह बिना किसी गुस्से या शर्म के हरिया को देखती रही.

हरिया यह देखते हुए फिर से आइस क्रीम चाटने लगा तो अनीता रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Haan हरिया जी ऐसे hi चाटिये. आप hi ने कहा था की चूसना मेरा काम है और आपका काम चाटना है. तो चाटिये आप. चूसने के लिए कुछ नहीं मिलेगा आपको".

अनीता यह बोलकर वापस आइस क्रीम चूसने लगी.

हरिया यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता आइस क्रीम दो बार सर आगे पीछे करके चूसने के बाद उसे मुंह स्व निकलकर मुस्कुराती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Aur अगर आपको चूसने का मैं है तो मैं संतरे खरीद दूंगी. घर जा कर चूस लीजियेगा जितना चूसने का मैं हो".

अनीता यह बोलकर खिलखिलाने lagi,"Hehehe" तो हरिया मुस्कुराकर उसे हस्ते हुए देखने लगा की तभी.
 
अपडेट 49

अनीता यह बोलकर खिलखिलाने lagi,"Hehehe" तो हरिया मुस्कुराकर उसे हस्ते हुए देखने लगा की तभी अनीता की मोबाइल बजने लगी.

अनीता यह सुनकर अपनी बायीं हाथ से बैग से मोबाइल निकल कर स्क्रीन पर देखि तो सर हिलती हुयी boli,"Yeh टेलीकॉम कंपनी भी न दिन रात कॉल करते रहते हैं".

हरिया अनीता को देखते हुए कप आइस क्रीम चाटने लगा वहीँ अनीता अपनी मोबाइल बैग में रखने लगी तो हरिया आइस क्रीम चाटने के बाद bola,"Ee ससुरा लोग जब तब फ़ोन करते रहते हैं. ी भी नहीं समझते हैं की आप अभी चूसने का मज़ा ले रही हैं".

अनीता मोबाइल बैग में रखकर हरिया के तरफ देखकर अपनी आँखें बड़ी करके मुस्कुराती हुयी बायीं हाथ वापस उसके लुंड के उभर पर रखकर उसे मुट्ठी में भर कर अपनी इंडेक्स फिंगर और अंगूठे से आइस क्रीम का स्टिक पकड़ती हुयी boli,"Hariya जी अब उन्हें क्या पता की मैं क्या कर रही हूँ. आप भी न हेहेहे".

हरिया यह सुनकर मुस्कुरा दिया तो अनीता उसे देखती हुयी मुंह खोली और सर आगे करके आइस क्रीम को मुंह में लेकर चूसने लगी और साथ hi हरिया के लुंड के उभर को सहलाने लगी.

हरिया अपना कमर आगे पीछे करने लगा और करते हुए bola,"Ee भी बात सही है. ससुरा को का पता की अभी आप चूसकर अपना बदन का गर्मी और प्यास बुझा रही हैं"

अनीता हरिया को देखती हुयी आइस क्रीम को चूसने के बाद उसे मुंह से निकल कर अपनी होंठों पर ज़बान फिरकर boli,"Wahi तो हरिया जी".

फिर वह आइस क्रीम के टिप पर ज़बान फिरकर रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Unhe क्या पता की मैं अपनी प्यास बुझा रही हूँ".

हरिया आइस क्रीम चाटने के बाद bola,"Haan मेमसाहब लेकिन ससुरा ी का बात हुआ की जब तब करते रहे फ़ोन. आप को चूसते हुए डिस्टर्ब कर दिया ससुरा".

अनीता यह सुनकर कुछ बोली नहीं बस अपनी ज़बान आइस क्रीम के टिप से लेकर उसके नीचे तक फिरने लगी और ऐसा करने के लिए वह अपनी सर को आगे कर दी. जब उसकी ज़बान आइस क्रीम के नीचे भाग तक गयी तो उसकी नाक में हरिया के पंत से आ रही बदबू जाने लगी.

अनीता को यह बदबू समझ आ गया की हरिया के पसीने के साथ साथ उसके पेशाब की है. हरिया का पेशाब का बदबू सूंघते hi अनीता की बदन में एक अजीब सा मस्ती का लहर दौड़ने लगा और उसकी सांस तेज़ होने के साथ साथ धड़कन भी तेज़ हो गयी.

अनीता हरिया का लुंड सहलाती हुयी आइस क्रीम के निचले भाग के कोने को मुंह में ले ली और हरिया को देखती हुयी उसे चूसने लगी. ऐसा करने से अनीता की चीन हरिया के लुंड के एक भाग से सत् गयी और अनीता वैसे hi हरिया को देखती हुयी उसे चुस्ती रही.

अनीता को वैसे चुस्त देख हरिया के मुंह से "आअह्ह्ह" निकल गया और वह bola,"Aaahh मेमसाहेब सच में चूसने में आपका कउनो मुक़ाबला नहीं हैं. आप चूसने वाले चीज़ का नीचे वाला चीज़ को भी मुंह में लेकर चूस लेती हैं. ऐसे hi चूसते रहिये".

अनीता हरिया को देखती हुयी वैसे hi कुछ सेकण्ड्स तक चुस्ती रही और फिर उसे मुंह से निकल कर ज़बान को ऊपर तक लेजाकर आइस क्रीम को चाटने के बाद ठण्ड के कारण आइस क्रीम से होंठ हटाकर होंठों पर ज़बान फिरती हुयी हरिया को देखती हुयी उसके लुंड को सहलाती रही.

हरिया चुप चाप अनीता को देखते हुए आइस क्रीम के कप में ज़बान फिरते हुए एक जगह ज़बान हिलने लगा. अनीता यह देखकर रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी आप भी बहोत अच्छे से चाट ते हैं.".

अनीता यह बोलकर आइस क्रीम वापस मुंह में लेकर सर आगे पीछे करके चूसने लगी तो हरिया bola,"Memsaheb चाटने का चीज़ है तो अच्छे से चाटेंगे hi न हम. चाटना तो ऐसे चाहिए की उस चीज़ से ससुरा पानी निकल जाये. आप भी तो ऐसे चुस्ती हैं की ससुरा चूसने वाला चीज़ से मलाई निकल जाये".

अनीता अब तक चोको बार को चूस चूस कर उसका चॉकलेट लेयर खा चुकी थी और अब उसके अंदर का सफ़ेद लेयर दिख रहा था जिसे वह मुंह में लेकर चूस रही थी.

हरिया अनीता के आइस क्रीम के तरफ आँखों से इशारा करते हुए bola,"Dekhiye आप कैसे चूस चूस कर सादा और गधा क्रीम निकाल रही हैं".

अनीता यह सुनकर आइस क्रीम मुंह से निकल कर अपनी होंठों पर ज़बान फिरकर मुस्कुराती हुयी आइस क्रीम स्टिक पकडे हुए उसके लुंड को सहलाती हुयी boli,"Hariya जी अब इसके अंदर सफ़ेद क्रीम है तो चूसने से निकलेगी hi न. इसमें मैंने क्या ख़ास कर दिया. आप भी न हेहेहे".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए अपना कमर आगे कर दिया तो अनीता उसे देखती हुयी मुंह खोल दी और आइस क्रीम फिर से मुंह में लेकर चूसने लगी तो हरिया bola,"Haan मेमसाहेब ऐसे hi चूसिये".

अनीता हरिया को देखती हुयी उसके लुंड पर हाथ फिरती हुयी सर आगे पीछे करके आइस क्रीम चूस रही थी. हरिया आगे bola,"Kitna अच्छा चुस्ती हैं आप. एहि तो ख़ास है. क्रीम तो चूसने वाले चीज़ के अंदर रहता hi है मेमसाहेब लेकिन क्रीम कब और कितना निकले यह तो चूसै के अंदाज़ से hi होता है.".

अनीता यह सुनती हुयी आइस क्रीम मुंह से निकल कर वापस उस पर ज़बान रखके ऊपर से नीचे तक ज़बान फिरती हुयी निचले भाग को मुंह में लेकर चूसने लगी. ऐसे होने से एक बार फिर उसकी नाक में हरिया के पंत से आ रहे पेशाब का बदबू जाने लगी और चीन पर हरिया का लुंड का उभर महसूस हुआ.

वहीँ हरिया अनीता को ऐसे आइस क्रीम का निचला भाग चूसते हुए देख कर bola,"Waah मेमसाहेब आपका कोई जवाब नहीं".

अनीता उसे देखती हुयी वैसे hi उसके निचले भाग को मुंह में लेकर चूसने के बाद उसे बाहर निकल कर वापस ज़बान से चाट ते हुए ऊपर के तरफ ले गयी और आइस क्रीम के टिप को मुंह में लेकर वापस से उसे चूसने लगी.

हरिया अपना कमर वापस आगे पीछे करके अनीता को देखते हुए कप आइस क्रीम को चाट रहा था.

ठण्ड के कारण अनीता फिर से आइस क्रीम मुंह से निकाल कर अपनी होंठों पर ज़बान फिरकर हरिया के लुंड पर हाथ फेरती रही. इतने देर के बाद हरिया का लुंड खड़ा होने लगा था और उभर का अकार इतना बड़ा हो गया था की साफ़ साफे हरिया के पंत में उभर पता चल रहा था.

अनीता हरिया के लुंड के उभर पर हाथ फेरती हुयी उसे देख रही थी तो हरिया कप आइस क्रीम को नीचे उसके आँखों के पास करके bola,"Dekhiye मेमसाहेब कैसे हम चाट चाट कर पानी निकल दिया हूँ."

अनीता देखि की ज़्यादा तर आइस क्रीम पिघल चुकी थी. वह उसे देखने के बाद वापस ऊपर हरिया के तरफ देखती हुयी boli,"Haan हरिया जी आपने तो चाट चाट कर पानी निकल दिया है".

हरिया इतनी देर से अनीता की चूंकि भी दबा रहा था. वह उसकी चूंकि दबाते हुए puchha,"Humre चाटने से आपको मज़ा आया मेमसाहेब?".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी चाट आप रहे हैं तो आपको मज़ा आएगा न. मैं तो चूस रही हूँ".

अनीता यह बोलकर वापस आइस क्रीम मुंह में लेकर चूसने लगी तो हरिया कमर आगे पीछे करके bola,"Haan मेमसाहेब चाट तो हम रहे हैं. लेकिन जो चाट रहे हैं वह तो आपका चीज़ है न. मेरा मतलब की ी आइस क्रीम तो आप पकड़ी थी पहले".

अनीता यह सुनकर आइस क्रीम मुंह से निकलकर मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी वह तो थोड़ी देर के लिए पकड़ी थी मैं लेकिन इससे आपके चाटने पर मुझे मज़ा कैसे आएगा. हाँ आपको मज़ा आ रहा है चाटने से यह जानकार मुझे अच्छा लगेगा की आप को चाटने में मज़ा आ रहा है. लेकिन मज़ा तो आपको hi आ रहा होगा तो आप बताइये की आपको चाटने में मज़ा आ रहा है या नहीं".

हरिया यह सुनकर अनीता की चूंकि दबाते हुए मुस्कुराते हुए bola,"Haan मेमसाहेब बहोत मज़ा आ रहा है आपका चीज़ चाटने में.".

फिर वह नीचे आँखों से इशारा करते हुए puchha,"Aapke हाथ में जो चूसने वाला चीज़ है उसको चूसने में आपको मज़ा आ रहा है न मेमसाहेब?".

अनीता यह सुनकर हरिया के लुंड को देखकर उसे सहलाती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Haan हरिया जी मुझे भी चूसने में मज़ा आ रहा है".

अनीता यह बोलकर अपनी मुंह खोलकर हरिया को देखती हुयी आइस क्रीम को मुंह में लेकर चूसने लगी. हरिया अपना कमर आगे पीछे करते हुए bola,"Hum बोले थे न मेमसाहेब ऐसे आपको चूसने में मज़ा आएगा. असली चूसै ऐसे hi होती है"

अनीता यह सुनकर आइस क्रीम मुंह से निकाल कर boli,"Hariya जी आप भी चाटिये न".

हरिया यह सुनकर bola,"Haan मेमसाहेब. हम तो चाट चाट कर पानी निकल दिया हूँ. अब यह पानी पियूँगा हम. आप चूसिये".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी अपनी मुंह खोलकर आइस क्रीम चूसने लगी.

हरिया उसे देखते हुए कप को मुंह से लगाकर उसमे का पूरा पिघला हुआ आइस क्रीम पि गया.

अनीता उसे देखती हुयी उसके लुंड और आइस क्रीम को पकड़ी हुयी आइस क्रीम चूस रही थी. हरिया आइस क्रीम के कप से आइस क्रीम पीने के बाद थोड़ा बहोत उसमे लगे हुए आइस क्रीम पर ज़बान फिरकर चाट गया और कप को पास में फ़ेंक दिया.

अनीता जो आम तौर पर सफाई पसंद करती थी हुए किसी के इधर उधर कुछ फेंकने पर उसे अच्छा नहीं लगता था वह हरिया को कप फेंकता देख कुछ नहीं की और मुस्कुराकर boli,"Hariya जी आपने तो चाट चाट कर पूरा पानी निकल कर उसे पी गए".

हरिया अगले पल बाय हाथ जिसमे कप रखा था और जो कप फेंकने के बाद खली हो गया था उससे अनीता की दूसरी चूंकि पकड़ लिया और दोनों चूँचियों को मसलते हुए bola,"Haan मेमसाहेब. अब आप भी चूस चूस कर मलाई निकलकर पी जाइये. मुंह खोलिये"

अनीता यह सुनकर अपनी मुंह खोल दी तो हरिया अपना कमर आगे कर दिए और अनीता आइस क्रीम मुंह में लेकर चूसने लगी. अब हरिया का दोनों हाथ अनीता की दोनों चूँचियों को मसल रहा था और वह खुद कमर हिला रहा था. वहीँ अनीता अपनी दोनों हाथों से उसके लुंड और आइस क्रीम को पकड़ी हुयी आइस क्रीम चूस रही थी.

कुछ सेकण्ड्स ऐसा होने के बाद सामने का पूरा आइस क्रीम अनीता खा चुकी थी और ठण्ड के कारण आइस क्रीम से मुंह हटाई तो हरिया bola,"Waah मेमसाहेब आपने तो क्या मज़े से चूसा है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराने लगी और एक बार फिर आइस क्रीम मुंह में लेकर चूसने लगी. थोड़ा सा सफ़ेद क्रीम बचा था तो हरिया bola,"Memsaheb आप हुंका देखते हुए मुंह खोलिये".

अनीता आइस क्रीम को मुंह से निकल कर हरिया को देखती हुयी मुंह खोली तो हरिया bola,"Thoda ज़बान बाहर निकालिये मेमसाहेब".

अनीता बेझिजक अपनी ज़बान बाहर निकल दी तो हरिया कमर आगे करके आइस क्रीम के स्टिक के अगले भाग को उसकी ज़बान पर रख दिया और दाया हाथ उसकी चूंकि से हटाकर आइस क्रीम के स्टिक के निचे वाले भाग पर अपना अंगूठा और इंडेक्स फिंगर रखकर जो थोड़ा बहोत क्रीम लगा था उसे दोनों उँगलियों से ऊपर के तरफ पुश करने लगा.

अनीता अपनी ज़बान निकले हुए हरिया को देखती हुयी उसके लुंड को अचे से मुठी में भरकर हिलने लगी वही हरिया आइस क्रीम के स्टिक को पकडे हुए उस पर लगे थोड़ा बहोत क्रीम को उँगलियों से अनीता की मुंह के तरफ पुश करने लगा और आखिर में वह क्रीम अनीता की मुंह में पुश करने के बाद वह स्टिक पर अपने उँगलियों को आगे पीछे करते हुए बाकी क्रीम भी उसकी मुंह में दाल दिया.

अनीता चुप चाप मुंह खोली रही और हरिया वैसे hi अंदाज़ में स्टिक पर लगे बाकी के क्रीम उसकी मुंह में डालने के बाद अपना अंगूठा और इंडेक्स फिंगर अनीता की ज़बान के नोक पर पोंछने के बाद bola,"nigal जाइये पूरा मलाई मेमसाहेब. ी आप के चूसै का इनाम है. पी जाइये पूरा".

अनीता यह सुनकर अपनी मुंह बांध करके उसे पी गयी और फिर मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी आप भी न. आज आपने कैसे मुझसे नए तरीके से चुसवाया है, आइस क्रीम"

हरिया मुस्कुराते हुए bola,"Are मेमसाहेब असली मज़ा तो ऐसे चूसने में hi है. आपको मज़ा आया न चूसने में?"

अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Ab मैं क्या बोलूं हरिया जी. नया तरीक़ा था आइस क्रीम चूसने का. ठीक hi था. मुझे कुछ नया तरय करने को मिला".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर बाए हाथ से अनीता की दायी चूंकि मसलए हुए bola,"Humka पता था मेमसाहेब आपको मज़ा आएगा चूसने में. आप इतनी ख़ास हैं तो आपको ख़ास तरीके से चूसने में मज़ा आएगा ी हम जानते हैं".

अनीता यह सुनकर हरिया का लुंड पर हाथ फिरती हुयी hi मुस्कुराकर boli,"Hariya जी आप भी न सच में हेहेहे".

हरिया अनीता को खिलखिलाता देख मुस्कुराया और उसके मुंह के सामने अपने डेट हाथ का अंगूठा और इंडेक्स फिंगर रखकर bola,"Memsaheb चूसने के बाद जो भी मलाई निकले वह पूरा पी जाना चाहिए. थोड़ा सा मलाई हमरे ऊँगली पर लगा है. उसे चाट जाइये".

अनीता यह सुनकर खिलखिलाना बांध करके हरिया के उँगलियों को देखि और फिर ऊपर हरिया के तरफ देख कर मुंह खोल दी. हरिया अपने उँगलियों को अनीता की मुंह में डाला तो वह मुंह बांध करके हरिया के दोनों उँगलियों को चाटने लगी और साथ में उसका लुंड पर हाथ फेरती रही.

ऐसा करने से अनीता की मुंह में आइस क्रीम के स्वाद के अलावा एक अजीब सा स्वाद जा रहा था. अनीता की दिल धड़कने और सांस तेज़ होने लगी और वह कुछ सेकण्ड्स तक हरिया को देखती हुयी उसका उँगलियाँ चाटने के बाद अपनी मुंह खोलकर हरिया को दिखाई की वह सब क्रीम पी गयी है.

हरिया यह देखकर मुस्कुराकर bola,"Waah मेमसाहेब आप पूरा मलाई पी गयी. कसम से मेमसाहेब क्या चूसा है आपने. आपका चूसै देखकर"

अगले पल हरिया आँखों से अपने लुंड के तरफ इशारा करते हुए bola,"ee ससुरा हमरा लौड़ा खड़ा हो गया".

अनीता यह सुनकर अपनी आँखें बड़ी करके हरिया को देखती हुयी मुस्कुराकर boli,"Hariya जी आप भी न. फिर से शुरू हो गए"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए अनीता की चूंकि दबाते हुए bola,"Are मेमसाहेब आपको यक़ीन नहीं है तो हमरा लौड़ा को निकल कर देख लीजिये की कैसे आपका चूसै देखकर खुश होकर खड़ा हो गया है."

अनीता हरिया का लुंड पंत के ऊपर से hi सहलाती हुयी उसे देखती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी आप भी न. बस अपना हथियार दिखने का बहाना करते रहते हैं".

हरिया यह सुनकर अनीता की चूंकि को दबकाए bola,"Are मेमसाहेब हमरा लौड़ा तो आपके लिए hi है, आपकी सेवा के लिए तो आपको तो दिखाएंगे न की आपको सेवा के लिए हमरे पास का चीज़ है".

अनीता की सांस यह सुन्न कर तेज़ हो गयी और दिल धड़कने लगा. हरिया अनीता की चूँचियों के उठने बैठने के रफ़्तार से समझ गया की उसकी धड़कन और सांस तेज़ हैं.

वह अनीता की चूंकि दबाते हुए bola,"Nikal कर देख लीजिये मेमसाहेब की हमरा लौड़ा आपका चूसै देखकर कितना खुश है".

अनीता यह सुनकर हरिया के चेहरे से नज़र हटाकर सामने उसके पंत के तरफ देखि और फिर एक नज़र आस पास देखि तो हरिया bola,"Are मेमसाहेब इहाँ कउनो नहीं आता. आराम से देखिये हमरा लौड़ा. आपके लिए hi है".

अनीता यह सुनकर एक नज़र हरिया को देखि और फिर उसके लुंड के उभर के तरफ देखकर उसके पंत का ज़िप खोलती हुयी अपनी होंठों पर ज़बान फिरै.

हरिया अनीता को अपने होंठों पर ज़बान फिरते देख लिया. अनीता ज़िप खोलने के बाद अपनी दायी हाथ उसके अंदर करके उसके अंडरवियर के ऊपर से लुंड को पकड़ कर उसे दो तीन बार हिलाई. ऐसा करने से अनीता की सांस और तेज़ होने लगी.

अनीता अगले पल उसके अंडरवियर में हाथ घुसा दी और उसके नंगे लुंड को हाथ में पकड़ ली. नंगे लुंड का स्पर्श पाते hi अनीता की छूट में बेचैनी होने लगी. उसे ऐसा लगने लगा जैसे उसकी छूट में चींटिया रेंगे लगी हो. उसकी छूट इतनी देर की छेड़ छड़ से पहले hi गीली हो चुकी थी.

अनीता थूक घोंट कर हरिया का लुंड पकड़ी और उसे अंडरवियर से बाहर और फिर पंत से बाहर निकल ली. बाहर आते hi उसे देखकर अनीता की धड़कन और तेज़ होने लगी.

हरिया का मोटा लुंड आधा खड़ा था और उसके नोक पर थोड़ा सा पानी था जो शायद पंत में लगकर पोंछा गया था.

अनीता तेज़ सांस से उसके लुंड को देख रही थी वह भी इतने करीब से. पहली बार अनीता हरिया के लुंड को अपने चेहरे के इतने करीब से देख रही थी और तेज़ सांस होने से उसकी नाक में उसके लुंड से आ रहे pre-cum और पेशाब का मिलता जुलता गंध उसकी नाक में जा रही थी और ऐसा होने पर अनीता और जोर से सांस लेने लगी.

हरिया चुप चाप खड़ा अनीता को देखते हुए उसकी चूंकि दबा रहा था. वहीँ अनीता का ध्यान उसके लुंड पर था. वहां अब पूरा ख़ामोशी था. अनीता कुछ सेकण्ड्स हरिया के लुंड को देखि और फिर अपनी होंठ पर ज़बान फिरकर होंठ को दांत के बीच दबाकर अपनी हाथ आगे पीछे करके उसके लुंड को हिलने लगी.

कुछ सेकण्ड्स हिलने के बाद हरिया का लुंड थोड़ा खड़ा होने लगा और उसके नोक पर एक छोटा बंध प्रे छुम का फिर से आ गया.

अनीता उसके प्रे छुम को देखकर अपनी ज़बान पर एक बार होंठ फिरकर फिर से एक पल के लिए होंठ को दांत के बीच सबै तो हरिया bola,"Humra लौड़ा से भी मलाई निकलता है मेमसाहेब और ी आपके लिए hi है. अगर आपको प्यास लगा है तो इसे चूसकर उसके अंदर का मलाई आप पी सकती हैं."
 
अपडेट 50

अनीता जवाब में बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी मैं आइस क्रीम चूस ली अब मुझे और कुछ नहीं चूसना है हेहेहे".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Are मेमसाहेब देखिये न कैसे एक बंध आपको देखकर बाहर आ गया है. इसे hi चूस लीजिये"

अनीता यह सुनकर उसका लुंड हिलती हुयी boli,"Hariya जी लेट हो रहा है. हमें चलना चाहिए".

और फिर हरिया का लुंड एक आखरी बार हिलने के बाद उसे पंत में करने लगी तो हरिया अनीता की चूंकि दबाते हुए bola,"Theek है मेमसाहेब. जैसा आपका मर्ज़ी. लेकिन हम और हमरा लौड़ा आपका सेवा में हमेशा हाज़िर रहेंगे".

अनीता जवाब में कुछ नहीं बोली और उसका लुंड पंत में घुसकर उसका ज़िप लगाकर कड़ी हो गयी और हरिया के शर्ट से झांकते उसके सीने पर हाथ रखकर रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी आप भी न सिर्फ मेरी hi सेवा और मदद करना चाहते हैं. यह शहर में और कोई औरत नहीं है क्या सेवा करने के लिए? हम्म?"

हरिया यह सुनकर अपने हाय हाथ से अनीता की दायी गांड और दये हाथ से उसकी बायीं चूंकि दबोच कर दोनों को मसलते हुए bola,"Are मेमसाहेब सेवा उसी का करना चाहिए जिसे सेवा की ज़रूरत है".

फिर हरिया अनीता की बदन को देखने लगा और उसकी चूंकि को देखकर उसे दबाकर उसकी आँखों में देखकर bola,"aur जो उसके लायक है. आप इस शहर में नयी नयी हैं, कउनो जान पहचान का नहीं है आपका इहाँ तो हमरा फ़राज़ है न की आपकी सेवा और मदद करे ताकि आपको इहाँ अच्छा लगे नहीं तो आप सोचियेगा की इहाँ कुछो अच्छा hi नहीं है."

अनीता यह सुनकर उसका सीना सहलाती हुयी मुस्कुराकर boli,"To हरिया जी मुझे यहाँ अच्छा लगे इसकी ज़िम्मेदारी आप उठा लिए हैं?"

हरिया अनीता को गांड और चूंकि दबाते हुए bola,"Ee शहर का नागरिक हैं हम मेमसाहेब. और एक अच्छा नागरिक होने के कारण ी शहर का नाम अच्छा रखने का हमरा ज़िम्मेदारी है".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी अपनी सर हिलाकर हरिया के सीने को सहलाती हुयी boli,"Hariya जी आप भी न सच में. बातें बनाना तो कोई आपसे सीखे".

हरिया यह सुनकर अनीता की गांड और चूंकि को मसलते हुए bola,"Are मेमसाहेब सेवा करना भी कोई हमसे सीखे. हम ऐसा सेवा करते हैं जैसा कउनो कर नहीं पायेगा. हमसे सेवा करवाइये तो".

अनीता यह सुनकर हरिया के सीने पर ऊँगली फेरती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी आप तो हमेशा मेरी मदद करते hi रहते हैं. अब मुझे लेट हो रही है और आपको भी काम पर जाना होगा. चलिए ऑटो स्टैंड तक चलने में मेरी मदद कीजिये".

हरिया एक बार अनीता को फिर से ऊपर से नीचे तक देखकर उसकी चूंकि दबाकर बोलै," ठीक है मेमसाहेब चलिए".

हरिया फिर अनीता का सब्जी बैग उठा लिया और अनीता की गांड थप थपाकर bola,"Chaliye मेमसाहेब".

अनीता यह सुनकर हरिया को देखकर मुस्कुरायी और अपनी गांड मटकाकर चलने लगी तो हरिया उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए साथ में चलने लगा.

हरिया अनीता की मटकती गांड की थिरकन को अपने हाथ में महसूस करके bola,"Sach में मेमसाहेब चलते वक़्त ी आपकी गांड जब हिलती है तो हमरा लौड़ा खड़ा होने लगता है".

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी हरिया को देखकर boli,"Hariya जी आप भी न. बस भी कीजिये".

हरिया यह सुनकर मुस्कुराया और चलते हुए नज़र पीछे करके अनीता की गांड को देखने लगा और साथ hi उसकी गांड को दबाने लगा.

अनीता जब उसे अपनी गांड के तरफ नज़र ले जाते हुए देखि तो अपनी गांड की मटक बढ़ा दी और चेहरे पर एक गर्व के भाव से गांड मटकती हुयी चलने लगी. ऐसा कुछ सेकण्ड्स hi हुआ और थोड़ी दूर जाने के बाद हरिया अनीता की गांड से हाथ हटा लिया.

ऑटो स्टैंड पहुँचने के बाद हरिया अनीता को बैठा दिया. पहले से लोग बैठे थे तो उनके बीच बात नहीं हुआ मगर हरिया अनीता का सब्जी का थैला रखने के बाद उसकी चूंकि को देखा तो अनीता अपनी बायीं चूंकि के सामने अपनी हैंड बैग रख दी. हरिया यह देखकर अपना हाथ बढ़ा कर अनीता की चूंकि को एक बार दबा दिया. अनीता आँखों के कोने से अपनी दायी तरफ बैठे लोगो को देख रही थी जो अपने मोबाइल में बिजी थे.

अनीता फिर दये तरफ देखि तो हरिया उसकी आँखों में देखते हुए उसकी चूंकि को एक बार और दबाने के बाद हाथ हटाकर bola,"Chalte हैं मेमसाहेब".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Theek है. मेरी मदद करने के लिए थैंक यू".

हरिया यह सुनकर अपना सर हिलाया और वहां से जाने लगा. अनीता उसको जाते हुए देखने लगी. रास्ता क्रॉस करने से ठीक पहले एक आदमी को साइकिल से थोड़ा सा ठोकर लग गया, कोई सीरियस ठोकर नहीं बस हल्का सा तो यह देखकर हरिया साइकिल वाला को देखते हुए bola,"Abe ससुरा देख नहीं सकता का? लोगों के गांड में साइकिल घुसा देगा. चल निकल जल्दी नहीं तो तोहरे गांड में इहे साइकिल घुसा दूंगा".

अनीता की चेहरे पर न जाने क्यों यह सुनकर मुस्कराहट आ गयी. वह हरिया को देखते हुए सोचने lagi,"Hariya जी भी न जो मैं में आता हैं बोलने लगते हैं. कैसे दबंगई से साइकिल वाले को दांत रहे हैं. सच में हरिया जी भी न".

फिर अनीता गांड में घुसाने वाली बात से अनीता को ख्याल आया की हरिया कैसे उसकी गांड में एक दो बार ऊँगली घुसाने का कोशिश कर चूका है और यह याद आते hi वह मुस्कुराकर सोचने lagi,"Achha हुआ मैं आज साड़ी पहनी थी, नहीं तो हरिया जी मेरी अस्स में अपना ऊँगली ज़रूर घुसा देते आज".

यह सोचते hi अनीता मुस्कुराती हुयी sochi,"Chhi मैं भी न क्या क्या सोच रही हूँ".

अगले पल पैसेंजर और ऑटो वाला आ गया और ऑटो चलने लगी. कुछ सेकण्ड्स बाद राज का फ़ोन आया तो वह उससे बात करने लगी.

घर पहुँच कर अनीता फिर से नंगी होकर अपनी छूट और पंतय में लगे उसकी छूट की रास को देखने लगी. वह छेड़ चाँद से पूरी गीली हो चुकी थी. वह अपनी गीली छूट के ऊपर हाथ फेरकर उसपर लगे चिप छिपे रास को महसूस की और फिर घूमकर अपनी गांड को देखि जो बाकी दिनों के मुक़ाबले काम लाल था.

अनीता को अपनी गांड देखकर ऐसा लगा जैसे कुछ हुआ hi न हो क्यूंकि बाकी दिनों के मुक़ाबले वह बहोत काम लाल था.

अनीता अपनी गांड देखकर मुस्कुराकर boli,"Hariya जी तो आज मुझे ख़ास तरीके से आइस क्रीम खिलने, खिलने नहीं चूसने में लगे थे तो मेरी बूम बच गयी हेहेहे. और लेट से भी तो आये थे. अगर बाजार में टाइम पर आते तो बाजार में hi लाल कर दिए होते मेरी बूम को हेहेहे".

अनीता फिर अपनी गांड को एक नज़र देखकर वहां से गांड मटकती हुयी बाथरूम में जा कर नहाने लगी.

अगले 4 दिन कुछ ख़ास नहीं हुआ. सैटरडे सुबह ब्रेकफास्ट करने के बाद अनीता राज के साथ उसके कजिन के इंगेजमेंट के लिए चली गयी. रास्ता 7-8 घंटा का था. दोनों पति पत्नी सुबह 10 बजे निकले थे और शाम को 5 बजे पहुँच गए.

कार से तो 6 घंटा के आस पास hi लगता मगर दोनों रेस्टोरेंट में लंच के लिए रुके थे और थोड़ा एक दो जगह ऐसे hi गाडी रोककर फोटो वगैरह लिए थे तो 7-8 घंटा लग गया पहुँचने में.

गाओं पहुँचने के बाद अनीता को गन्ने के बहोत सारे खेत दिखाई दिया. अनीता आराम से गाडी में एक में बैठी हुयी बाहर देख रही थी.

जब राज अपने चाचा के घर पहुंचा तो गाडी का आवाज़ सुनकर उसके चाचा, चची और एक लड़का निकला. अनीता गाडी में बैठी हुयी देखि तो वह घर गाओं में सबसे अच्छा घर था. दो मंजिला घर था और अच्छे से पेंट किया हुआ था.

राज गाडी से उतर कर दूसरे तरफ जाकर दरवाज़ा खोला और अनीता के तरफ हाथ बढ़ाया तो अनीता उसका हाथ पकड़ कर उतर गयी.

राज अनीता के साथ आगे बढ़कर अपने चाचा का पेअर छूने के लिए झुका तो वह उसके पकड़ कर गले लगा लिए. अनीता देखि की दरवाज़े के पास hi कड़ी हुयी एक लड़की उसे देखकर मुस्कुरा रही थी. अनीता भी उसे देखकर मुस्कुरा दी.

राज अपने चाचा के गले लगने के बाद अपने चची के पेअर छूने के किये झुका तो वह भी उसे रोक कर उसके माथे को चूमकर boli,"Jeete रहो बीटा".

अगले पल वह लड़का आगे बढ़कर राज के पेअर छूने लगा तो राज उसे पकड़ कर रोक लिया. राज उसको देख कर bola,"Ankit तुम तो बड़े हो गए".

अंकित यह सुनकर मुस्कुराने लगा. अगले पल राज की चची boli,"Are हमलोग आपस में hi मिल रहे हैं और बहुत उधर अकेली कड़ी है. सोच रही होगी की उसे हम पूछ भी नहीं रहे".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Nahin आंटी वैसी कोई बात नहीं है" और वह आगे बढ़कर राज के चाचा के पेअर छुई तो राज के चची को अनीता की बैकलेस ब्लाउज में लगभग पूरी नंगी पीठ दिखाई दिया और यह देखकर वह एक पल के लिए उसकी गोरी पीठ देखती hi रह गयी फिर उसे ध्यान आया की अनीता एक बहोत hi पढ़ी लिखी, मॉडर्न ख्याल की शहरी औरत है और यह बात उसे राज के शादी से पहले hi पता हो गया था जब उसकी शादी अनीता से तय हुआ था.

राज की चची अनीता से सिर्फ एक बार उसकी शादी में मिली थी और उसके बाद दो सालो में कभी मुलाक़ात नहीं हुयी थी और फ़ोन पर बात चित भी नहीं होती थी. ऐसे में वह भूल चुकी थी की अनीता कितनी मॉडर्न है और फैशनेबुल कपडे पहनती है.

वहीँ राज के चाचा को भी यह दिखाई दिया मगर वह भी जानते थे की उनका भतीजा पढ़ा लिखा है और शहर में पला बढ़ा है तो उसकी बीवी तो मॉडर्न होगी hi तो वह भी उस पर ध्यान न देकर प्यार से अनीता के सर पर हाथ रखकर bole,"Jeeti रहो बहु. सदा सुहागन रहो".

अनीता फिर राज के चची के पेअर छूने लगी तो वह उसे पकड़ कर मुस्कुरा कर उसके माथे पर चुम कर boli,"Jeeti रहो बहु. सदा सुहागन रहो".

फिर वह अनीता की चीन को पकड़ के boli,"Sach में कितनी सुन्दर और प्यारी है तू बहु और साथ में संस्कारी भी. शहर में रहकर और मॉडर्न सोच होने के बावजूद भी अपने संस्कार नहीं भूली. राज सच में बड़ा किस्मत वाला है जिसे तेरी जैसी बीवी मिली".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराने लगी. अगले पल अनीता का ध्यान अंकित के तरफ गया तो वह मुस्कुरा कर bola,"Hello भाभी. ी ऍम अंकित. वेलकम".

यह सुनकर अनीता मुस्कुराकर अपनी हाथ आगे बढ़ा कर boli,"Thank यू अंकित. ी ऍम अनीता".

अंकित उम्मीद नहीं कर रहा था की अनीता हाथ बढ़ा देगी. वह घबराकर उससे हाथ मिलकर मुस्कुराने लगा.

अंकित की माँ अगले पल boli,"Chalo दोनों थक गए होंगे, आराम कर लो. सामान भीमा उतर देगा."

राज और अनीता दोनों अंदर जाने लगे वहीँ राज के चाचा अंकित से bole,"Zara देखो तो भीमा कहाँ है".

अंकित जवाब में bola,"Ji पिताजी".

अनीता दरवाज़े के पास गयी तो एक लड़की कड़ी मुस्कुरा रही थी और अनीता को देखते hi ख़ुशी से boli,"Hello भाभी. ी ऍम सो हैप्पी तो सी यू."

अनीता उस लड़की को देखके मुस्कुराकर boli,"Hello ब्यूटीफुल ब्राइड तो बे".

वह लड़की आगे बढ़ कर अनीता के गले लगी तो अनीता भी उससे गले लग गई. दोनों जब अलग हुए तो वह लड़की राज को देखकर boli,"Namaste राज भैया" और उसके पेअर छूने के लिए झुकी तो राज उसे पकड़ कर रोक लिया.

अगले पल उसकी माँ boli,"Chalo बहु. चलो राज बेटे".

फिर वह अपनी बेटी से boli,"Avantika बेटे भैया और भाभी को इनका कमरा दिखाओ मैं कुछ नाश्ते पानी का इंतज़ाम करती हूँ".

अनीता यह सुनकर boli,"Aunty आप परेशां मत होइए. कोई फॉर्मेलिटी की ज़रूरत नहीं है"

राज की चची यह सुनकर boli,"Are बहु ज़रूरत कैसे नहीं है. इतना लम्बा सफर तय करके आयी हो दोनों. तुम चलो मैं आती हूँ".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई और फिर अवंतिका के साथ जाने लगी. राज भी साथ में था.

अवंतिका चलती हुयी अनीता से ख़ुशी से बोलने lagi,"Bhabhi मैं बता नहीं सकती आपको देखकर मुझे कितनी ख़ुशी हो रही है. मैं तो सोची भी नहीं थी की आप आओगी. जब मुझे पता चला की आप आ रही हो तो ी वास् सो हैप्पी".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Tumhe ऐसा क्यों लगा की मैं नहीं आउंगी".

अवंतिका boli,"Bhabhi मैंने सुना है की आप कभी कोई गाओं नहीं गयी हो और ऊपर से आप इतनी मॉडर्न और सिटी गर्ल हो तो मुझे लगा की आप गाओं में तो आओगी नहीं".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"There इस फर्स्ट टाइम फॉर एवरीथिंग. Isn't आईटी?".

अवंतिका यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Yes भाभी".

फिर अवंतिका राज और अनीता को फर्स्ट फ्लोर पर एक कमरे में ले गयी और boli,"yeh रहा आप दोनों का कमरा. होप आप दोनों को पसंद आये".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Hope मतलब? इतना अच्छा तो है."

इतने में राज की चची अंकित के साथ कुछ स्नैक्स लेकर आई और रख कर अनीता और राज को खाने के लिए बोली तो अनीता उन्हें भी खाने के लिए बोली और फिर पांचो एक साथ स्नैक्स खाये.

शाम में 6:30 बजे के आस पास राज नाहा कर नीचे घर के बाहर वरण्डः में अपने चाचा के साथ बैठकर कल की मांगनी की तैयारियों के बारे में बात चित कर रहा था.

राज अपने चाचा के साथ बात कर hi रहा था की तभी उसके चाचा सामने देखकर bole,"Are भीमा कहाँ रह गए थे?".

भीमा यह सुनकर bola,"Are मालिक बस ू गाडी को धो रहे थे. कल मेहमान आने वाले हैं तो हम सोचे की गाडी चमकना चाहिए".

राज के चाचा सर हिलाकर bole,"Achha राज बेटे का सामान उनके गाडी से निकल कर ऊपर कमरे में रख दो".

भीमा यह सुनकर राज के तरफ देखकर bola,"Are राज बाबू आप हैं. नमस्ते. बहोत सालो बाद मिलना हुआ आपसे. कइसन हो? सब कुशल मंगल है तो"

राज यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Ji काका मैं अच्छा हूँ? आप कैसे हैं?"

भीमा यह सुनकर bola,"Haan हमहू ठीक हूँ".

राज जे चाचा bole,"Achha वह इनका सामान कमरे में रखकर आओ कुछ ज़रूरी बात करना है".

भीमा यह सुनकर bola,"Ji मालिक".

भीमा फिर राज के गाडी से दो सूटकेस निकल कर घर के अंदर चला गया और ऊपर जाकर उसके कमरे को खोलकर अंदर गया तो अचानक से रुक गया.
 
अपडेट 51

अनीता कमरे में नहाकर तैयार हो रही थी. वह एक साड़ी बैकलेस ब्लाउज के साथ पेहेन कर ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठकर अपनी साड़ी को ब्लाउज पर पिन कर रही थी.

वह ट्रेवल करते वक़्त सूटकेस के अलावा एक छोटा बैग में एक साड़ी या सलवार रखती थी ताकि कभी ज़रूरत पड़ने पर पूरा सूटकेस खोलने के बजाय बैग से निकल कर पेहेन ले.

एक औरत को देखकर भीमा अचानक से रुक गया. उसे लगा था की कमरे में कोई नहीं होगा क्यूंकि उसे यह ध्यान नहीं था की राज अपनी बीवी के साथ आया होगा.

वह अनीता की लगभग पूरी नंगी गोरी पीठ और उसकी नंगी पतली कमर को देखने लगा और उसका दिल धड़क गया. 2-3 सेकण्ड्स तक वह अनीता को देखते रहा.

वहीँ अनीता आईने में खुद की साड़ी पिन करने में लगी थी और दरवाज़ा खुलने पर उसे लगा की शायद राज होगा तो वह चुप चाप अपना काम करती रही.

2-3 सेकण्ड्स बाद अनीता आईने में ध्यान से देखि तो किसी और को देखकर वह वैसे hi बैठी हुयी थोड़ी सी घुमाकर नार्मल तरीके से उसे देखि और फिर उसके हाथो में अपनी सूटकेस देखकर समझ गयी की वह उसका सूटकेस रखने आया है.

अनीता देखि की वह आदमी लगभग 55-60 साल के बीच का होगा और उसका बाल कहीं कहीं से हल्का सफ़ेद हो चूका था. चेहरे पर हल्का दाढ़ी और मूंछ घाना था. वह एक कुरता और धोती पहने हुए था. गले में गमछा था.

अनीता समझ गयी की वह भीमा hi होगा जिसके बारे में वह नीचे सुनी थी की वह सूटकेस ऊपर पहुंचा देगा.

उसके ऐसे अचानक बिना नॉक किये आ जाने पर भी अनीता की चेहरे पर न hi गुस्सा था और न hi कोई सवाल लेकिन इससे पहले वह कुछ बोलती भीमा बोल pada,"Maaf कीजियेगा. वह हम राज बाबू का सामान रखने आये थे. हुंका लगा कउनो नहीं है कमरे में".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर भीमा को देखकर boli,"Koi बात नहीं. मैं उनकी वाइफ हूँ. आप सूटकेस रख दीजिये."

अनीता को मुस्कुराता देख भीमा को थोड़ा राहत मिला. उसे लगा की कहीं वह गुस्सा न हो जाये अचानक कमरे में घुसने से.

अनीता अपनी बात बोलकर वापस आईने में देख कर एक दूसरा पिन लेकर साड़ी को कंधे पर पिन करने की कोशिश करने लगी क्यूंकि पहला पिन टूट गया था.

भीमा वापस अनीता की गोरी नंगी पीठ देखने लगा और सोचने लगा की वह कितनी खूबसूरत है. उसे यक़ीन नहीं हो रहा था की उसके आँखों के सामने एक इतनी खूबसूरत और जवान औरत ऐसे छोटा ब्लाउज पहने ड्रेसिंग टेबल के पास बैठी हुयी अपनी गोरी पीठ की पूरी नुमाइश कर रही है. उसे लगने लगा जैसे कोई हीरोइन, कोई मॉडल उसके सामने बैठी है.

अनीता चुप चाप अपनी साड़ी पिन करने में लगी थी और भीमा का दिल धड़कने लगा उसे देखकर मगर फिर वह खुद को शांत किया और कमरे में देखकर puchha,"Bahurani ी सूटकेस कहा राखु हम?".

अनीता यह सुनकर अपनी साड़ी पिन करके कमरे में नज़र दौड़कर एक टेबल के तरफ इशारा करके boli,"Wahan रख दीजिये".

अनीता यह बोलकर वापस आईने में देखने लगी और भीमा उस टेबल के तरफ जाकर दोनों सूटकेस रखकर आईने में देखा. वहां से उसे अनीता की सामने का हिस्सा भी दिख रहा था और उसका नज़र जब अनीता की क्लीवेज पर पड़ा तो फिर से दिल धड़क गया. अनीता की क्लीवेज भी अच्छी खासी दिख रही थी उस ब्लाउज में.

भीमा उसकी क्लीवेज देखते रहा की तभी उसे एहसास हुआ की अनीता टेबल से उठ रही है तो वह bola,"Achha बहुरानी हम जाता हूँ. ु कल का बहोत तैयारी बाकी है. आपको कउनो चीज़ का ज़रूरत तो नहीं है?".

अनीता तब तक उठ चुकी थी. खड़े होने पर वह भीमा से लम्बी लग रही थी. अनीता जहाँ 5'6" की थी वहीँ भीमा 5'5" का लग रहा था. ऊपर से अनीता हील पहनी थी तो वह भीमा से लगभग 3 इंच लम्बी लग रही थी. भीमा भले hi हाइट में अनीता से काम था मगर उसका बदन चौड़ा था.

अनीता उठकर भीमा को देखकर मुस्कुराती हुयी boli,"Nahin अभी कुछ नहीं, मैं नीचे आंटी के पास जा रही हूँ".

भीमा यह सुनकर bola,"Theek है बहुरानी

हम भी नीचे hi जा रहा हूँ. आप चलिए हम कमरे को बांध कर देता हूँ".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Theek है काका. चलिए".

अनीता यह बोलकर कमरे से निकलने लगी तो भीमा bola,"Aese हमरा नाम भीमा है बहुरानी. अगर आपको कउनो चीज़ का ज़रूरत हो तो अंकित बिटवा नहीं तो हुंका बोलियेगा".

अनीता यह सुनकर मुस्कुरायी और सर हीलर कर गांड मटकती हुयी कमरे से बाहर निकल गयी. उसके पीछे भीमा भी बाहर आकर दरवाज़ा बांध कर दिया और बांध करके जब गैलरी से जाती हुयी अनीता को देखा तो उसका दिल धड़क गया.

अनीता की गोरी पीठ जो लगभग पूरी नंगी थी, उसके नीचे पतली गोरी नंगी कमर और फिर उसके नीचे बड़ी गांड को हिलता देख भीमा का दिल धड़कना hi था. इतनी जवान और लम्बी औरत को ऐसा बदन दिखाऊ कपडा पेहेन देख भीमा के बूढ़े लुंड में भी थोड़ा हलचल हो गया. उसे लग रहा था की वह कोई मॉडल या एक्ट्रेस को देख लिया है.

वह उस घर का बहोत पुराण नौकर था और उसे पता था की ऊपर सिर्फ अंकित और अवंतिका का कमरा था और दोनों उस वक़्त नीचे थे तो वह बेझिझक अनीता की गांड को देखने लगा और तब तक देखता रहा जब तक अनीता सीढ़ी से उतरने नहीं लगी.

अनीता के जाने के बाद वह धोती के ऊपर से अपना लुंड को थोड़ा एडजस्ट किया और कमरा बांध करके नीचे चला गया. नीचे आंगन में जाकर देखा की अनीता अवंतिका और उसकी माँ के साथ बैठी कुछ बातें कर रही थी. वह एक बार फिर अनीता की नंगी पीठ देखा और साइड से उसकी चूंकि की उभर देखा तो उसका दिल धड़क गया और खून भी थोड़ा गरम होने लगा. अनीता की चूंकि हद्द से ज़्यादा बड़ी तो नहीं थी मगर बड़ी ज़रूर थी. उसकी चूंकि का उभर एक नज़र देखने के बाद भीमा बाहर चला गया.

अगले दिन अवंतिका की सगाई हो गयी. सब कुछ अच्छे से हो गया. अनीता बहोत अच्छे से तैयार हुई थी और भीमा का नज़र उसी पर था और वह छुप छुप कर उसे hi देख रहा था. कभी वह उसकी गांड, तो कभी नंगी पीठ और कमर तो कभी चूँचियों की उभर और क्लीवेज देखता.

अनीता चलती हुयी एक बार उसे आँखों के कोने से अपनी गांड पर नज़र जमाये देख ली थी मगर वह कोई रिएक्शन नहीं दी और चेहरे पर नार्मल भाव के साथ जिधर जाना था जाती रही. उसके लिए मर्दों की गन्दी नज़र कोई नयी बात नहीं थी और उसे फ़र्क़ पड़ता भी नहीं था उससे.

एक दिन में hi अनीता अवंतिका, अंकित और उनकी माँ राधिका से घुल मिल गई थी. वह तीनो अनीता से एक बार उसकी शादी में hi मिले थे और अब दो साल बाद दूसरी बार मिल रहे थे.

राधिका को अनीता का पहनावा सही नहीं लग रहा था. वह समझती थी की वह शहर की मॉडर्न औरत है मगर फिर भी उसे लग रहा था की वह कुछ ज़्यादा hi बदन दिखाऊ तरीके से साड़ी पहनती है.

इसके बावजूद यह एक दिन में अनीता के साथ वक़्त बिताकर उससे बात चित करके अनीता इतनी पसंद आयी की वह उसके पहनावे को नज़रअंदाज़ कर दी. वह अपनी जेठानी से अनीता की बहोत तारीफ सुनी थी की उनकी बहु मॉडर्न होने के साथ कितनी मिलनसार और संस्कारो वाली है और राधिका को भी यह महसूस हुआ. इतनी खूबसूरत, पढ़ी लिखी और मॉडर्न होने के बावजूद भी उसके अंदर उसे ज़रा सा भी घमंड नहीं दिखा.

वह यह भी जानती थी की राज का परिवार उनसे हैसियत में बड़े थे और अनीता की फॅमिली राज के बराबर की हैसियत की थी जिसके कारण अनीता भी उनसे हैसियत में बड़ी थी मगर इसके बावजूद उसे अनीता में ज़रा भी घमंड नहीं दिखा. वह भी अनीता की सास की तरह उसे बहोत मैंने लगी थी और उसके पहनावे को नज़रअंदाज़ करने लगी थी

वहीँ अवंतिका और अंकित भी अनीता से घुल मिल गए थे. अवंतिका के मेक उप के लिए लोकल ब्यूटिशियन आयी थी मगर अनीता अपनी तरफ से भी ब्यूटी टिप्स दी जिससे अवंतिका के साथ वह ब्यूटिशियन भी इम्प्रेस हो गई. अवंतिका का मेक उप बहोत हद्द तक अनीता के इंस्ट्रक्शन पर hi हुआ.

दोपहर 3 बजे के आस पास मेहमान के जाने के बाद राज जाने के लिए राधिका से बोलै तो वह boli,"Beta इतने दिनों के बाद आये हो. चाचा चची को तो भूल hi गए हो. अब जब आये हो तो एक दिन रुक जाते. बहु भी पहली बार आयी है. एक दिन रुक जाते".

यह सुनकर अवंतिका boli,"Haan भैया प्लीज रुक जाइये न. भाभी से मुझे बहोत कुछ सीखना है. शी इस जस्ट तू गुड इन एवरीथिंग शी डस".

अनीता बगल में hi बैठी थी. वह अवंतिका का बात सुनकर मुस्कुरा कर boli,"Ohh अवंतिका प्लीज".

अगले पल राज मुस्कुराता हुआ bola,"Haan वह तो है. शी इस जस्ट तू गुड इन एवरीथिंग".

अनीता यह सुनकर मुस्कुरा कर अपने पति के तरफ देखकर सर हिलने लगी. अगले पल अंकित bola,"Haan भैया रुक जाइये न".

राज यह सुनकर अफ़सोस के साथ bola,"Chachi मेरे बस में होता तो एक दिन रुक जाता. मगर यह प्रोजेक्ट बहोत बड़ा है और कल कुछ इम्पोर्टेन्ट काम भी है".

राधिका यह सुनकर मायूसी से boli,"Theek है बीटा जैसे तुम्हे अच्छा लगे. काम भी ज़रूरी है".

अवंतिका यह सुनकर उदास होकर boli,"Ohh के ों भैया. एक दिन की तो बात है".

राज यह सुनकर उसे देखकर bola,"I क्नोव अवंतिका. मगर सच में बहोत इम्पोर्टेन्ट काम है कल".

अवंतिका जवाब में boli,"To आप भाभी को रहने दीजिये".

राधिका यह सुनकर boli,"Kya बोल रही है तू. और बहु जाएगी कैसे?".

जवाब में अंकित bola,"Are तो हमारे पास भी तो गाडी है. भीमा काका छोर देंगे".

इतने में राज के चाचा आँगन में आ गए और bole,"Kya भाई भीमा किसको छोड़ने जा रहा है".

जवाब में अवंतिका boli,"Bauji हम राज भैया को आज रुकने के लिए बोल रहे हैं मगर उनको कल ज़रूरी काम है. तो हम बोल रहे है की भाभी को रहने दीजिये. भीमा काका दो तीन दिन बाद उन्हें छोर देंगे".

राज के चाचा यह सुनकर bole,"Haan भीमा तो दो दिन बाद अंकित को कॉलेज हॉस्टल छोड़ने जायेगा hi. बहु साथ में चली जाएगी. अंकित को छोर कर भीमा बहु को उसके घर छोर देगा. या बहु को बाद में जाना हो तो बाद में भी भीमा छोर देगा मगर राज बीटा और बहु का क्या कहना है यह भी तो पूछो. बहु को पता नहीं गाओं में दो दिन रहना भी पसंद न आये".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Uncle वैसी बात नहीं है. लेकिन राज को कल काम है".

अवंतिका यह सुनकर नाराज़गी से boli,"Bhabhi मुझे लगा की आप हमारे इतने रिक्वेस्ट पर रुक जायेगा मगर आपको हमारे रिक्वेस्ट से कोई फ़र्क़ नहीं पद रहा है. लग रहा है आपको यहाँ अच्छा नहीं लगा".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Shut उप. ऐसी कोई बात नहीं है. सिचुएशन समझो".

अवंतिका अगले पल boli,"Kya सिचुएशन भाभी. आपको नहीं रहना तो कोई बात नहीं. मैं सोची थी की कुछ ब्यूटी टिप्स और ढेर साड़ी चीज़े आपसे सीखुंग, मगर आप तो रहना hi नहीं चाहती".

अनीता यह सुनकर थोड़ी अफ़सोस के साथ राज के तरफ देखि. राधिका अगले पल boli,"Koi बात नहीं बहु. बच्चे तो ज़िद्द करेंगे hi. तुम्हे जो अच्छा लगे करो".

राज यह सुनकर अनीता के तरफ देखा तो अनीता एक पल सोचने के बाद boli,"Theek है मैं रुक जाती हूँ".

यह सुनते hi अवंतिका अनीता को साइड से पकड़ कर boli,"Thank यू भाभी. यू अरे सो स्वीट".

अनीता मुस्कुरा दी अवंतिका के रिएक्शन पर. अंकित और राधिका भी खुश हो गए यह सुनकर.

राज यह सुनकर उठते हुए bola,"Main चलता हूँ अब. लम्बा सफर है".

राज के चाचा मुस्कुराते हुए bole,"Tum भी रुक जाते बीटा तो अच्छा होता लेकिन काम भी ज़रूरी है. शादी में कुछ दिन रुकने का कोशिश करना".

राज यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Koshish करूँगा चाचा जी लेकिन कुछ कह नहीं सकता".

फिर राज सबसे मिलकर चला गया और अनीता रुक गयी.

शाम में भीमा बाजार से सब्जियां लाकर किचन में रखकर छत पर जाने लगा तो राधिका boli,"Kaka ज़रा अवंतिका को आवाज़ लगा दीजियेगा की सब्जियां आ गयी है. आकर मेरा हाथ बता दे".

भीमा यह सुनकर "जी मालकिन" बोलकर ऊपर गया तो अवंतिका का कमरा पर नॉक किया मगर कोई रिस्पांस नहीं मिला. उसका ध्यान फिर उस गैलरी में आखरी कमरे पर गया जिसका दरवाज़ा थोड़ा खुला था और रौशनी आ रही थी. भीमा उधर गया तो कमरे से हसने की आवाज़ आ रही थी. वह दो लोगो की आवाज़ थी.

भीमा एक आवाज़ पहचान गया की वह अवंतिका का था हुए दूसरा भी वह पहचान रहा था मगर उसे यक़ीन नहीं हो रहा था. वह कमरे के पास जाकर नॉक किया तो अंदर से अवंतिका का आवाज़ aaya,"Kaun है?"

अगले पल भीमा bola,"Avantika बिटिया हम हूँ. भीमा काका. वह मालकिन तुमका बुला रही है रसोई घर में".

अवंतिका का आवाज़ aaya,"Achha ठीक है".

फिर वह boli,"Bhabhi आप आराम कीजिये. रात में बात करते हैं".

यह बात सुनकर और अगले पल भीमा को जो आवाज़ आयी वह सुनकर उसे पूरा यक़ीन हो गया की वह अनीता hi है.

अनीता अवंतिका से boli,"Ruko मैं भी चलती हूँ. यहाँ रह कर क्या करुँगी".

कुछ सेकण्ड्स बाद दरवाज़ा खुला तो भीमा साइड में खड़ा हुआ अवंतिका और फिर उसके पीछे अनीता को निकलते देखा. अनीता एक नज़र भीमा को देखि और फिर अपना कमरा बांध करने लगी तो भीमा bola,"Bahurani हम किये देता हूँ बांध. तुम जाओ".

अनीता यह सुनकर उसे देखकर मुस्कुराई और वह अवंतिका के पीछे पीछे जाने लगी. भीमा फिर से उसकी मटकती गांड और अधनंगी पीठ और कमर देखने लगा.

अनीता किचन में जा कर मदद करने की कोशिश की तो राधिका उसे मन करती हुयी boli,"Bahu हमें बड़े भाई साहब और दीदी से बात सुनवाने का मैं है क्या? वह क्या कहेंगे की मैं बहु को रोककर उससे काम करवा रही हूँ".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Aunty आप भी न. मुझे खाना बनाना अच्छा लगता है. मैं हेल्प कर देती हूँ".

अनीता के कहने पर भी राधिका नहीं मानी तो वह किचन के गेट के पास आंगन में एक टेबल पर बैठ गयी और उनसे बात करने लगी.

भीमा छत पर पहुँच कर अपने कमरे में आराम करने लगा. कुछ देर बाद अंकित छत पर सूखे कपडे उतरने आया तो भीमा कमरे से बाहर आकर puchha,"Ankit बिटवा राज बाबू चले गए मगर बहुरानी नहीं गयी. राज बाबू फिर आवेंगे का?"

अंकित यह सुनकर bola,"Nahin काका, हमने भाभी को दो दिन के लिए रोक लिया है. वह पहली बार आई है न इसलिए. दो दिन बाद आप मुझे हॉस्टल छोड़ने जायेंगे तो भाभी भी साथ में चलेगी. आप मुझे छोड़ने के बाद उनको घर छोड़ दीजियेगा".

भीमा का दिल यह सुनकर धड़कने लगा. वह एक गहरी सांस लिया और अंकित को देखकर सर हिलाते हुए bola,"Theek है बिटवा हम छोड़ देंगे बहुरानी को".

अंकित यह सुनकर मुस्कुराया और कपडे लेकर नीचे चला गया. भीमा फिर खैनी बनाते हुए कुछ सोच कर छत के बीच गया जहाँ से आँगन दीखता था तो उसे अनीता किचन के गेट के पास दिखाई दी. भीमा जहाँ खड़ा था वहां से अनीता साइड से दिख रही थी जिसके कारण उसकी चूंकि का उभर पता चल रहा था.

भीमा खैनी बनाते हुए अनीता की चूंकि को देखने लगा. कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता नीचे से ऊपर के तरफ देखि तो दोनों की नज़र मिली. भीमा बेझिजक उसे देखते रहा तो अनीता भी उसे देखने लगी. भीमा उसे देखते हुए खैनी मुंह में रखा तो अनीता उसे ऐसा करते हुए देखि और फिर किचन के तरफ देखकर मुस्करातू हुयी कुछ बोलने लगी.

भीमा उसे देखते हुए अपना लुंड धोती के ऊपर से मसलने लगा.
 
अपडेट 52

अनीता कुछ देर के बाद फिर ऊपर देखि तो भीमा को खुद की तरफ देखते हुए पायी. कुछ सेकण्ड्स तक वह उसको देखि और वह उसको hi देखते रहा. अनीता वापस किचन के तरफ देखती हुयी मुस्कुरा कर बात करने लगी.

ऐसा लगभग अगले 5 मिनट तक हुआ और इस 5 मिनट में अनीता 2-3 बार ऊपर छत के तरफ देखि और भीमा को खुद की तरफ देखते पायी मगर उसकी चेहरे पर कोई गुस्सा या मुस्कराहट नहीं थी.

5 मिनट बाद भीमा अगले 2 मिनट तक अनीता के ऊपर देखने का इंतज़ार किया मगर अनीता नहीं देखि तो भीमा वहां से चला गया. उसे ज़्यादा देर तक खड़े हुए लगातार अनीता को देखना सही नहीं लगा. भीमा के जाने के कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता वापस ऊपर देखि तो भीमा नहीं था और फिर वह भी ऊपर देखना बांध कर दी.

उस रात और कुछ नहीं हुआ. अगले दिन दोपहर के आस पास भीमा को अपने गाओं से खबर आया की उसके पिता का हालत ख़राब है तो वह अपने गाओं चला गया. शाम में राज के चाचा के पास खबर आया की भीमा अपने पिता को शहर हॉस्पिटल ले गया है तो उसके लिए वापस आना मुश्किल था.

2 दिन बाद सुबह में अंकित को अपने कॉलेज हॉस्टल जाना था क्यूंकि कॉलेज का सेशन स्टार्ट होने वाला था.

अगले दिन भी भीमा फ़ोन करके बोल दिया था की वह 2-3 दिन तक आ नहीं पायेगा. वह गाडी लेकर गया था. राज के चाचा बोल दिए उसे की वह अपने पिता का ख्याल रखे और आराम से 2-3 दिन बाद hi आये. भीमा उस घर का बहोत पुराण नौकर था इसलिए राज के चाचा उसे कुछ नहीं बोले की उसके बेटे को हॉस्टल जाना था और गाडी नहीं था.

हालांकि अंकित को 2 दिन बाद सुबह में जाना था मगर क्यूंकि गाडी अब थी नहीं तो बात हुआ की वह अगले दिन रात में hi बस से चला जायेगा.

अनीता भी बोली की वह भी अंकित के साथ चली जाएगी तो राधिका boli,"Bahu तू बस से कैसे जाएगी. हमें बड़े भाई साहब और दीदी से बात नहीं सुन्नी है. तू 3 दिन और रुक जा आराम से भीमा तुझे गाडी से पहुंचा देगा. अंकित को तो जाना है तो उसके पास कोई रास्ता नहीं है. तू तो रुक जा काम से काम".

राज के चाचा भी bola,"Haan बहु रुक जाओ. हमें भैया और भाभी से बात नहीं सुन्नी है. उन्हें पता चलेगा की तुम्हे बस से जाना पड़ा तो कितना बुरा लगेगा उनको और हम क्या कहेंगे".

अनीता यह सब सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Uncle यह तो इंटरसिटी एक बस है. इसमें क्या परेशानी होगी. और रही बात किसी के पता चलने की तो किसी को कुछ बोलने की ज़रूरत hi नहीं है की मैं कैसे वापस गयी. अंकल सिचुएशन hi ऐसा है की कोई कुछ नहीं कर सकता. आप जान बुझ कर मुझे बस में थोड़ी भेज रहे हैं".

राधिका यह सुनकर boli,"Lekin बहु 3 दिन और रुक जाओगी तो क्या हो जायेगा. यहाँ क्या इतना बुरा है की 3 दिन रुक नहीं सकती".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Aunty वैसी बात नहीं है. मुझे यहाँ कोई परेशानी नहीं है. मगर राज को खाने पीने में दिक्कत होता होगा. मैं खाना बनाने के लिए किसी को काम पर राखी नहीं हूँ. मुझे खुद खाना बनाना इतना अच्छा लगता है की किसी को राखी नहीं खाना बनाने के लिए".

राधिका यह सुनकर मुस्कुरा कर boli,"Theek है बहु जैसे तुम्हे अच्छा लगे. बस तुम्हे कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए".

अनीता यह सुनकर मुस्कुरा कर boli,"Aunty कोई परेशानी नहीं होगी".

राज के चाचा bole,"Bahu अगर जाना hi है तो गाओं के 2-3 लोगो के पास गाडी है. मैं पता करता हूँ अगर वह जाने के लिए तैयार है तो उसी में चले जाना"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Theek है अंकल, मगर कोई जाने के लिए तैयार नहीं होगा तो परेशान मत होइएगा".

शाम तक राज के चाचा पता कर चुके थे. अगले शाम में पास वाले गाओं में शादी थी तो सभी गाडी बुक हो चुके थे, लेकिन बस स्टैंड तक पहुँचाने के लिए एक गाडी मिल गया था.

अनीता को यह बात पता चला तो वह मुस्कुराकर boli,"Uncle कोई बात नहीं मैं अंकित के साथ बस में चली जाउंगी".

अगले दिन शाम में अनीता अंकित के साथ जाने के लिए निकल गयी. जाने से पहले राधिका अंकित से boli,"Achhe से जाना और भाभी को कोई परेशानी मत होने देना. भाभी तुमसे बड़ी हेयर और पढ़ी लिखी भी. दुनियादारी समझती है तो रास्ते में इनका बात मन्ना.".

अंकित यह सुनकर "हाँ" में सर हिलाया वहीँ अनीता भी मुस्कुरा दी.

बस स्टैंड पहुँचने पर अंकित टिकट काउंटर चला गया टिकट लेने वहीँ अनीता एक तरफ साइड में बैग्स के पास कड़ी हुयी राधिका से फ़ोन पर बात कर रही थी की वह लोग अच्छे से बस स्टैंड पहुँच गए हैं.

अनीता मुस्कुराती हुयी बात करती हुयी एक तरफ देखि तो एक आदमी उसे घूरते हुए दिखाई दिया. अनीता उसे देखि तो वह आदमी उसकी बदन पर नज़र दौड़ा कर उसकी आँखों में देखने लगा. अनीता देखि की उसका आँख थोड़ा लाल था.

अनीता उसके आँखों में एक पल देखने के बाद वापस सामने देखती हुयी मुस्कुरा कर फ़ोन पर बात करती रही.

कुछ देर बाद अनीता वापस उधर देखि तो वह आदमी को अभी भी उसकी बदन को घूरते हुए देखि. उसका नज़र उसकी गांड पर था. वह आदमी उसकी गांड देख रहा था तो अनीता एक नज़र उसके हुलिए पर डाली. वह आदमी काला था और लगभग 50 साल का लग रहा था. चेहरे पर हल्का खुरदुरा सफ़ेद दाढ़ी और मूंछ था. आँख लाल और चेहरे पर ज़रा भी मुस्कान नहीं था.

उसके शर्ट का ऊपर का दो बटन खुला था और उससे उसके सीने का बाल हल्का सा दिख रहा था और साथ hi सीने पैट लटका हुआ मोटा चैन दिखाई दे रहा था.

अनीता अंदाज़ा लगायी की उसका सीना थोड़ा मजबूत लग रहा था और कन्धा चौड़ा था. लम्बाई में भी लगभग 6 फ़ीट का लग रहा था वह. नीचे एक पंत पहने हुआ था और पेअर के पास एक बैग रखा हुआ था.

अनीता जब उसके हुलिए को देख रही थी तब वह वापस उसकी गांड से नज़र हटाकर उसकी आँखों में देखने लगा. अनीता एक पल उसे देखि और फिर फ़ोन को डिसकनेक्ट करके वापस सामने के तरफ देखने लगी.

लगभग एक मिनट बाद अनीता टिकट काउंटर के तरफ देखने के बाद वापस उस आदमी के तरफ देखि तो उसे अपनी चूंकि की उभर पर देखते हुए अपने ज़बान पर होंठ फिरते हुए देखि. अनीता यह देखकर वापस टिकट काउंटर के तरफ देखि तो अंकित टिकट लेकर आ रहा था.

अनीता अंकित को देखकर मुस्कुराई. अंकित भी उसके पास आकर मुस्कुराते हुए bola,"Bhabhi टिकट मिल गयी. चलिए बस में बैठते हैं".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"That's ग्रेट. चलो चलते हैं".

अंकित अनीता का सूटकेस पकड़ कर चलने लगा. अनीता एक नज़र उस आदमी के तरफ देखि जो उसे hi देख रहा था. दोनों की नज़र मिली और फिर अनीता चुप चाप अपनी गांड मटकती हुयी चलने लगी.

अनीता सफर में आराम के लिए एक पटियाला सलवार कमीज पहनी थी. पटियाला सलवार थोड़ा पारदर्शी था तो ध्यान से देखने पर सड़क के रौशनी में उसकी टांगों का शेप पता चल रहा था. ऊपर वह एक छोटा कमीज पहनी थी जो उसकी गांड के ठीक नीचे ख़तम हो जा रहा था.

कमीज का पीछे का हिस्सा में उसकी आधी पीठ तक सिर्फ स्ट्रिंग्स थे जिससे उसकी गोरी पीठ दिख रही थी. सामने भी थोड़ा गहरा गाला होने के कारण उसकी क्लीवेज थोड़ी दिख रही थी. वह हमेशा की तरह कोई दुपट्टा नहीं राखी थी.

वह आदमी अनीता के चलते वक़्त उसकी अधनंगी गोरी पीठ और मटकती गांड को देखकर अपने होंठों पर ज़बान फिराया.

अंकित बस के पास पहुँच कर bola,"Bhabhi यह टिकट लीजिये और आप बस में बैठिये, मैं सामान रखवा कर आता हूँ".

अनीता मुस्कुराकर अपना टिकट लेकर बस में चढ़ गयी. बस में जाकर देखि तो सबसे पीछे के सीट से एक सीट आगे डबल सीट के खिड़की के तरफ उसका सीट था. वह जाकर वहां बैठ गयी.

कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता की नाक में थोड़ा शराब की गंध गयी तो वह बाए तरफ देखि. अगले पल उसके बगल वाले सीट पर एक आदमी आकर उससे चिपक कर बैठ गया और इस हिसाब से बैठा की उसका कोहनी अनीता की बायीं चूंकि से सत् गया.

अनीता उसके बैठने पर उसके चेहरे पर देखि तो वह वही आदमी था जो बाहर उसे घर घर कर गन्दी नज़र से देख रहा था. वह वाक़ई में लम्बा चौड़ा था और अपनी चूंकि पर उसके कोहनी के प्रेशर से अनीता समझ गयी की वह आदमी मज़बूत था.

जैसा लम्बा चौड़ा वह था अनीता को लगा की वह जान बुझ कर उससे चिपक कर उसकी चूंकि पर कोहनी को नहीं सताया था बल्कि जगह की कमी के कारण वह वैसे बैठा था.

अनीता उसे देखि तो वह आदमी भी उसे देखा और फिर एक नज़र उसकी क्लीवेज के तरफ देखने के बाद जब वापस अनीता के तरफ देखा तो वह boli,"Yeh सीट रिजर्व्ड है. किसी और का सीट है यह".

वह आदमी यह सुनकर अनीता की आँखों में देखा और फिर एक नज़र उसकी क्लीवेज पर डालने के बाद उसकी आँखों में देखकर bola,"Pata है हुंका. तोहार साथ वह चिकना लड़का जो है ससुरा उसी का सीट होगा".

अनीता उसका भाषा सुन्न एक नज़र उसे देखती रही मगर फिर वह boli,"To फिर आप क्यों बैठ gaye?Aap अपने सीट पर जाइये"

वह आदमी यह सुनकर bola,"Hum इहाँ बैठ गए तो का hua?U लड़का हमरा सीट पर बैठ जायेगा".

फिर वह अनीता की चूँचियों को देखने लगा. अनीता उसे अपनी चूँचियों पर देखते हुए देखने लगी. यह सब कुछ सेकण्ड्स तक हुआ और वह आदमी फिर अनीता की आँखों में देखकर bola,"U बच्चा इहाँ बैठ कर का करेगा? हम इहाँ बैठूंगा तो सफर मज़ा से बीतेगा, हमरे लिए भी और तोहरे लिए भी".

अनीता यह सुनकर उसके आँखों में कुछ सेकण्ड्स तक देखती रही की तभी उसे आवाज़ सुनाई diya,"Uncle आप ग़लत जगह बैठ गए हैं. यह सीट मेरा है".

अनीता यह सुनकर उस आदमी के आँखों से नज़र हटाकर उसके बगल में देखि तो अंकित को वहां खड़ा पायी. इससे पहले की अनीता कुछ बोलती वह आदमी अंकित को देखकर उसके बाए गाल को जोर से पकड़ कर हिलाते हुए bola,"Haan हुंका पता है की तोहार सीट है. लेकिन इहाँ हम बैठा हूँ अब. तुम हमार सीट पर जाओ".

अंकित अपने गाल उतने जोर से दबा कर हिलाये जाने पर कराह उठा "आअह्ह्ह".

वह आदमी आगे के सीट के तरफ अपने आँखों से इशारा करते हुए bola,"U वाला सीट हमार है. जाओ जाकर बैठ जाओ".

अंकित इस बीच कराहते हुए एक बार bola,"aaaahh अंकल छोड़िये, अंकल आअह्ह्ह"

वह आदमी अंकित का बात नज़रअंदाज़ करते हुए अपना बात पूरा किया. अनीता को समझ नहीं आया की वह क्या करे. यह सब कुछ एक दो मिनट में hi हो गया था और अंकित और वह आदमी hi एक दूसरे से बात करते रहे जिसके कारण अनीता को कुछ बोलने या करने का मौक़ा नहीं मिला. वह भी बस थोड़ी परेशानी और हैरानी से उस आदमी को अंकित का गाल डिबेट हुए बोलते हुए सुन्न रही थी.

आखिर में वह आदमी अपना बात ख़तम करके अंकित का गाल छोड़ दिया और हल्का सा चुम्मा देने जैसा होंठ बनाकर उसका गाल थप तपता हुआ bola,"chalo बच्चा प्यार से बोल रहा हूँ हम ऊहां जाकर बैठ जाओ और इहाँ बड़ा लोग को बैठने दो".

यह बोलकर वह आदमी अनीता के तरफ देखा जो चुप चाप उसी को देख रही थी. अगले पल फिर से वह अंकित का बात suni,"Nahin अंकल मैं यहीं बैठूंगा. आप अपना सीट पर जाइये".

फिर वह अनीता के तरफ देखकर bola,"Bhabhi आप बोलिये न अंकल को यहाँ से जाने".

इससे पहले अनीता कुछ बोलती वह आदमी इस बार अंकित का दूसरा गाल पकड़ कर वैसे hi जोर से हिलाते हुए bola,"Tohaar का सीधा बात समझ में नहीं आवत है? चलो अच्छा बच्चा के तरह जाकर बैठो यहां".

अंकिता फिर से कराह utha,"aaahhh अंकल आअह्ह्ह छोड़िये मुझे आआअह्ह्ह भाभी".

अनीता इस बार उसका बात ख़तम होने पर boli,"Are यह क्या कर रहे हैं आप? कोई बच्चे के साथ ऐसे करता है क्या? आपसे कितना छोटा है यह और आप ऐसे उसका गाल जोर से पकडे हुए है. छोड़िये उसे".

वह आदमी यह सुनकर अनीता की तरफ देखने लगा और जब तक वह बोलती रही वह अंकित का गाल पकडे हुए अनीता को hi देखते रहा.

अनीता का बात ख़तम होने पर वह bola,"To हम भी तो यही बोल रहा हूँ की बच्चा है तो बच्चे के तरह रहे".

फिर वह अनीता की चूँचियों को देखकर उसकी आँखों में देखते हुए bola,"Aur बड़ा लोग को बड़ा लोग के तरह रहने दे. लेकिन ससुरा बड़ा बद्तमीज़ बच्चा है. समझ नहीं आ रहा है ी ससुरा को की बड़ा से कैसे बात करे".

अगले पल अंकित bola,"Uncle बदतमीज़ी तो आप कर रहे हैं मेरा सीट आअह्ह्ह्हह".

अंकित के बोलते हुए hi वह आदमी फिर से उसके गाल को जोर से दबा दिया. अनीता यह देखते hi उस आदमी से boli,"Are फिर से आप क्यों इसको तंग करने लगे. छोड़िये इसे. जब आप बोल hi रहे हैं यह बच्चा है तो बच्चा समझ कर छोर दीजिये".

वह आदमी अंकित का गाल पर प्रेशर काम करके अनीता को देखकर bola,"To बच्चा के तरह रहना चाहिए न. जब देख रहा है की बड़ा लोग साथ में बैठा है तो कहे बीच में टपक रहा है".

अगले पल वह अनीता की चूँचियों को देखने के बाद अपने कोहनी से उस पर प्रेशर बनाते हुए उसकी आँखों में देखते हुए bola,"ee ससुरा यहां हमरे सीट पर बैठ जायेगा तो का होगा?"

अंकित फिर से बोल pada,"Uncle मेरा सीट तो यह है...".

वह आदमी अंकित को देखकर फिर से अंकित का गाल अंगूठे और इंडेक्स फिंगर के बीच दबा दिया तो अनीता बीच में boli,"Ankit चुप भी करो. मैं बात कर रही हूँ न".

अंकित यह सुनकर चुप हो गया तो अनीता उस आदमी के तरफ देखकर boli,"Aap क्यों ज़िद्द कर रहे hain?Apne सीट पर चले जाइये".

वह आदमी यह सुनकर अनीता की चूंकि को देखकर उसकी आँखों में देखकर bola,"Zidd हम नहीं ी कर रहा है. ी इहाँ बैठ कर का करेगा? लम्बा सफर है हम इहाँ बैठूंगा तो अच्छे से बात चित करते हुए सफर काट जायेगा. ी बच्चा को देखो, अभी से कान में ईरफ़ोन ठूंस कर गाना सुन्न रहा है. ी पूरा रास्ता मोबाइल में hi घुसा रहेगा.".

अनीता यह सुनकर उसके आँखों में देखती हुयी boli,"To आपने मैं बना लिए है की आप एहि बैठेंगे?".

वह आदमी अनीता की चूँचियों को देखकर bola,"Haan ी जगह बच्चा लोग का बैठने का नहीं है. ी जगह एक मर्द का बैठने का है, हमरा जैसा मरद और ी ससुरा बच्चा को ी बात समझ नहीं आ रहा है".

अनीता यह सुनकर उसे देखकर boli,"Are तो ऐसे समझायेंगे तो कैसे समझेगा. आप समझा काम रहे हैं और इसे डरा ज़्यादा रहे हैं."

यह सुनकर पहली बार वह आदमी हलके से मुक्सुराय और उसके मुस्कराहट में एक गर्व था अपने दबंगई पर.

अनीता उसको मुस्कुराता देख उसके आँखों में देखकत boli,"Aap खुद को देखिये और इसे देखिये. आपके सामने तो सच में यह बच्चा hi है न. क्या आपको अपना ताक़त एक बच्चे पर इस्तेमाल करना अच्छा लग रहा है?"

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराते हुए अनीता की बदन को देखने लगा तो वह boli,"Ab छोर भी दीजिये इसके गाल को".

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराते हुए अंकित के गाल को छोड़कर bola,"Chalo अब अच्छा बच्चा के तरह जाओ यहां जाकर बैठो".

अंकित अगले पल अपना गाल सहलाते हुए bola,"Uncle यह ज़बरदस्ती.."

अंकित पूरा बोलता इससे पहले अनीता boli,"Ankit अब चुप भी करो और जाओ इनके सीट पर बैठ जाओ. बात बढ़ने से क्या फायदा".

अंकित अपना गाल सहलाते हुए bola,"Bhabhi आप तो समझो".

अनीता यह सुनकर boli,"Ankit मैं समझ रहीं हूँ तभी तो बोल रही हूँ".

अनीता जब यह बोल रही थी तब उसकी चूंकि पर उस आदमी का कोहनी सत्ता हुआ था. अनीता अपना बात जारी rakhi,"Yeh तो यहाँ से हटना नहीं छह रहे तो काम से काम तुम hi बात समझो. या फिर तुम ऐसे hi इनसे झमेला करते रहना छह रहे हो".

अंकित यह सुनकर अपना गाल सहलाते हुए "न" में सर हिलाया तो अनीता मुस्कुराकर थोड़ा प्यार से boli,"Baithna hi तो है. यहाँ बैठो या आगे क्या फ़र्क़ पड़ेगा. जाओ जाकर इनके सीट पर बैठ जाओ".

अंकित यह सुनकर अपना सर हिलाया और एक नज़र उस आदमी के तरफ देखा तो वह मुस्कुराकर उसके गाल को थपथपाते हुए bola,"Achha बच्चा हो गया तू अब. ऐसे hi पहले समझ जाता तो अच्छा होता".

अगले पल वह आदमी अपने सामने अपना हाथ आपस में जोड़ कर उँगलियों को एक साथ क्रैक करते हुए और अंगराई लेते हुए bola,"Ab जाओ और बड़ा लोग को आराम करने दो".

ऐसा करने से उसके कोहनी का प्रेशर अनीता की चूंकि पर बढ़ गया. अंकित उसका बात सुनकर अनीता को एक बार देखा तो अनीता अपनी आँखों से उसे अपने सीट पर जाने का इशारा की.
 
अपडेट 53

अंकित अनीता के इशारा करने पर वहां से आगे के तरफ जाने लगा. अनीता उसे देखती रही और साथ hi अपनी बायीं चूंकि पर उस आदमी के कोहनी का प्रेशर महसूस करती रही. अंकित वहाँ से 5-6 रौ आगे एक सीट पर जाकर बैठ गया.

उसके बैठने के बाद अनीता की कान में आवाज़ aayi,"Sasura बहोत ज़बान लड़ता है ी लड़का. बात को समझता नहीं है की बड़ा लोग कुछ बोले तो सुन्ना चाहिए".

अनीता यह सुनकर उसके तरफ देखकर boli,"Are आप ऐसे उसका सीट ले लीजियेगा तो वह क्या करेगा? ऊपर से आप उसके गाल को कितनी ज़ोर से मसल रहे थे."

यह सुनकर वह आदमी अनीता की चूँचियों को देखने लगा और देखने के बाद उसकी आँखों में देखकर bola,"Are तो ससुरा को समझना चाहिए न की बड़ा लोग जब साथ बैठा है तो बच्चा लोग को बीच में घुसना नहीं चाहिए."

अनीता यह सुनकर उसे देखती हुयी boli,"Yehi बात तो आप उसे प्यार से भी समझा सकते थे की आपको यहाँ बैठना है. ऐसे उसे डरने का या इतनी ज़ोर से गाल मसलना क्या ज़रूरी था?"

वह आदमी अनीता की चूंकि पर कोहनी का प्रेशर बनाते हुए bola,"Pura ज़रूरी था. ु ससुरा तोहार से भी तो ज़बान लड़ा रहा था. हम अइसन लौंडा लोग को ठीक करना जानता हूँ. बिना सख्ती दिखाए ससुरा लोग को बात समझ नहीं ात है. ी उम्र में सब ससुरा लोग हीरो बनता है. ससुरा लोग अभी दुनिया देखा नहीं है इसलिए समझ नहीं ात है की असली दुनिया में औरत लोग को हीरो नाही असली मरद का ज़रूरत होता है".

अनीता का दिल यह सुनकर धड़क गया और अगले पल वह उस आदमी को फिर से उसकी चूँचियों को घूरते हुए देखि और वह उसकी चूँचियों को गन्दी नज़र से देखने के बाद bola,"aur जब असली मरद कउनो जवान खबसूरत औरत के साथ बैठा हो तो ी ससुरा बच्चा लोगन को पतला गली से निकल लेना चाहिए"

अनीता का दिल यह सुनकर तेज़ी से धड़कने लगा. वह उसका बात सुनकर बिना कुछ बोले सामने देखने लगी. धीरे धीरे पैसेंजर्स आने लगे थे. कुछ सेकण्ड्स ऐसा hi चला की अनीता सामने देख रही थी और वह आदमी उसकी चूँचियों को ऊपर नीचे होता देख रहा था. अनीता एक बार आँखों के कोने से उसे देखि तो उसे अपनी चूँचियों पर नज़र गड़ाए पायी. वह चुप चाप सामने देखती रही.

वह आदमी एक मिनट बाद धीरे से puchha,"Aese टोका जाना कहाँ है?".

अनीता यह सुनकर उसे देखि और अपनी कान के पास का बाल पीछे करती हुयी boli,"Ji रैबरैली. आप कहाँ जायेंगे?"

वह आदमी अनीता की चूँचियों पर कोहनी से दबाओ बनाते हुए bola,"hum भी यहीं जाऊंगा. अच्छा है हम साथ बैठे हैं. हमरा इहाँ बैठने से हम दोनों का सफर अच्छा से और बहोत मज़े से बीतेगा. ु ससुरा इहाँ बैठकर का करता, बस मोबाइल में लगा रहता. हमरा जैसा मरद इहाँ बैठने से ी लम्बा सफर तोहरा भी अच्छे से मज़े से काट जायेगा".

वह आदमी यह बोलने के बाद अनीता की चूँचियों को देखने लगा. अनीता उसे अपनी चूँचियों पर नज़र गड़ाए देख वापस सामने देखने लगी. कुछ सेकण्ड्स बाद उसकी कान में धीरे से आवाज़ aaya,"Jhumka गिरा रे रैबरैली के बाजार में. जवानी चढ़ा रे, रैबरैली जाने वाले सफर में. है झुमका गिरा रे".

अनीता यह सुनकर बिना शर्म के उसके तरफ देखि तो वह आदमी मुस्कुरा दिया और उसकी चूँचियों को देखने लगा. अनीता एक नज़र उसे देखने के बाद वापस सामने देखने लगी. फिर और पैसेंजर्स चढ़ने लगे तो वह आदमी बस अपनी कोहनी से अनीता की बायीं चूंकि पर दबाओ बनाये रखा, कुछ बोलै नहीं.

अनीता भी चुप चाप बाकी पैसेंजर्स को चढ़ते हुए देखती रही. इसी बीच उसके व्हाट्सप्प पर अंकित का मैसेज aaya,"Bhabhi आप ठीक हो तो? वह आदमी बद्तमीज़ है. आप अच्छे से रहना".

अनीता यह पढ़कर जवाब में likhi,"Ankit मैं ठीक हूँ. थैंक यू फॉर बीइंग कंसर्नड, मगर कोई परेशानी नहीं है. होप तुम अच्छे हो. गाल ज़्यादा दर्द नहीं कर रहा है तो?".

अंकित जवाब में likha,"Nahin भाभी ठीक है. ी कैन टेक तहत मच".

अनीता जवाब में likhi,"Still यू shouldn't हैवे तालकेद बैक तो हिम लिखे तहत. वह तो अच्छा हुआ मेरी बात मान लिया वह और तुम्हे छोर दिया, नहीं तो पता नहीं क्या करता. ऐसे किसी से बेवजह का बहस नहीं करते. खासकर जब कोई बड़ा साथ हो बात करने के लिए".

अंकित जवाब में likha,"I ऍम सॉरी भाभी".

अनीता जवाब में likhi,"No नीड तो बे सॉरी. ी अंडरस्टैंड की टीनएज में जोश रहता है, बूत तुमको यह भी समझना है की वह आदमी एक लम्बा चौड़ा मर्द है. उसके सामने तुम बच्चे hi हो. सो यू नीड तो बे स्मार्ट एंड अंडरस्टैंड थे सिचुएशन एंड योर पोजीशन. नाउ फॉरगेट आईटी. एन्जॉय थे जर्नी".

जवाब में अंकित likha,"Ok भाभी".

अनीता जब मेस्सगेस टाइप कर रही थी तो वह आदमी का कोहनी अपनी चूंकि पर महसूस कर रही थी. वह जब स्क्रीन लॉक करके अपनी बायीं तरफ देखि तो वह आदमी को अपनी चूँचियों पर देखते हुए पायी और फिर बिना कुछ बोले वापस सामने देखने लगी.

कुछ देर बाद बस चलने लगा और बस का लाइट बांध हो गया. अनीता बहार देखने लगी. ऐसे बाहर देखने से खिड़की के शीशे में हल्का ध्यान से देखने से वह आदमी का चेहरा और नज़र दिख रहा था. अनीता देखि की वह आदमी कभी उसकी बदन को देख रहा था तो कभी सामने के तरफ.

कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता उसके मोबाइल के बजने का आवाज़ सुननकै उसके तरफ देखि तो वह हल्का मुस्कुरा कर उसे देखा और फिर फ़ोन उठाकर बात करने लगा. अनीता वापस बाहर देखने लगी. अगले 10 मिनट तक वह किसी से मोबाइल पर बात करता रहा और अनीता भी चुप चाप बाहर देखती रही.

10 मिनट बाद वह मोबाइल रखकर अनीता के तरफ चेहरा करके उसकी कान में धीरे से bola,"U जो पहाड़ है, इहाँ का बड़ा नामी पहाड़ है".

अनीता यह सुनकर उसके तरफ देखकर boli,"Achha. क्या नाम है इसका?".

वह आदमी जवाब में नाम बताया तो अनीता मुस्कुराकर boli,"Achha" और फिर खिड़की से देखने लगी.

अगले पल वह bola,"Aese दूर से देखने से छोटा लग रहा है. सामने से देखने पर बहोत ऊँचा और बड़ा है".

अनीता यह सुनकर उसके तरफ देखकर मुस्कुराई तो वह उसकी चूँचियों के तरफ इशारा करते हुए bola,"Tohaar पहाड़ के जैसा".

अनीता उसको साफ़ साफ़ अपनी चूँचियों के तरफ इशारा करते हुए उसकी तुलना उस पहाड़ से करते हुए देख ली. यह सुनकर उसे शर्म तो नहीं आया मगर वह एक बार आस पास देखकर धीरे से boli,"Kaisi बातें कर रहे हैं आप?"

वह आदमी थोड़ा दये अनीता के तरफ चेहरा करके धीरे से bola,"Are सच बोल रहा हूँ हम और का. तोहार ी सामने तो पहाड़ जैसा hi बड़ा और ऊँचा है".

अनीता का दिल यह सुनकर धड़क गया और बदन में एक अजीब सा मस्ती का लहर दौड़ने लगा मगर वह बिना कुछ बोले वापस खिड़की से बाहर देखने लगी और शीशे में उस आदमी को उसकी चूँचियों को देखते हुए पायी.

कुछ मिनट बाद वह आदमी bola,"Aese तुम कहाँ की हो? देखने से तो तुम इहाँ का नहीं लगती. शहरी मेम लगती हो"

अनीता यह सुनकर उसके तरफ देखकर boli,"Ji मैं यहाँ की नहीं हूँ.".

वह आदमी यह सुनकर puchha,"U तो तुम देखने से hi लगती हो की कउनो शहर की मेम हो. लेकिन कौन सा शहर?".

अनीता यह सुनकर boli,"Ji आप कुछ देर पहले hi मिले हैं और मुझसे पर्सनल सवाल करने लगे. मैं कहाँ की हूँ क्यों बताऊँ?"

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराया और उसकी चूँचियों को देखने लगा. उसका नज़र अपनी चूँचियों पर पड़ने पर अनीता बिना कुछ बोले बाहर देखने लगी.

कुछ सेकण्ड्स बाद वह bola,"Aese हम रैबरैली का हूँ. अगर तोहार झुमका गिर जायेगा तो हुंका कहना हम खोज दूंगा".

अनीता यह सुनकर उसके तरफ देखि तो वह मुस्कुरा दिया. अनीता एक ऐडा से boli,"Jhumka रैबरैली में नहीं, बरैली में गिरता है".

अनीता की बात सुनकर वह मुस्कुराकर bola,"Are तो का फरक पड़ता है, है तो दोनों में बरैली hi न."

फिर वह अनीता की चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करके bola,"Jaise ी दोनों पहाड़ नहीं है मगर है तो पहाड़ जैसा ऊँचा और बड़ा hi न".

अनीता फिर से उसको अपनी चूँचियों के तरफ इशारा करके उसे पहाड़ जैसा बड़ा और ऊँचा बोलते हुए देख ली मगर उसे शर्म ज़रा सा भी नहीं आया. वह बस उसका बात सुनकर चुप चाप बाहर देखने लगी.

कुछ देर बाद वह आदमी अनीता से फिर bola,"Aese तुम इधर कभी आयी हो या नहीं?"

अनीता यह सुनकर उसके तरफ देखकर "न" में सर हिलाकर boli,"Ji नहीं".

वह आदमी यह सुनकर bola,"Tab तो इधर के बारे में तोहार पता नहीं होगा. कउनो बात नहीं हम तोहका इधर रास्ते में जो ख़ास ख़ास जगह है ऊके बारे में बताऊंगा".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Theek है.". अनीता को भी लगा की काम से काम उसे इधर के बारे में कुछ जान्ने को तो मिलेगा तो वह उसका बात सुनकर मुस्कुराकर जवाब दी.

कुछ देर बाद वह आदमी एक तरफ दिखते हुए bola,"U दिख रहा है ु इहाँ का बहोत पुराण मंदिर है."

अनीता यह सुनकर शीशे से देखती हुयी boli,"Kidhar अँधेरा में कुछ समझ नहीं आ रहा है?"

अगले पल अनीता को अपनी दोनों चूँचियों के सामने उस आदमी का हाथ सत्ता हुआ महसूस हुआ और वह अपनी चूँचियों के तरफ देखि तो उसका हाथ hi था जो उसकी दोनों चूँचियों से सत्ता हुआ था और अगले पल वह आवाज़ suni,"Are ु देखो ु छोटा सा रौशनी आ रहा है".

अनीता समझ गयी की वह अपना हाथ बढाकर खिड़की के तरफ ऊँगली से इशारा करके उसे वह मंदिर दिखने का कोशिश कर रहा है. वह अपनी चूँचियों से नज़र हटाकर खिड़की से देखि तो एक रौशनी दिखती दिया और वह थोड़ा ध्यान से देखि तो उसे एक मंदिर दिखती दिया.

अगले पल वह आवाज़ suni,"Tohka दिखाई दिया?"

अनीता यह सुनकर खिड़की से देखती हुयी "हाँ" में सर हिलाकर boli,"haan".

अगले पल वह suni,"Eehan ी महीना में मेला भी लगता है. एक दो दिन में लगेगा".

अनीता यह सुनकर बाहर देखती हुई boli,"Achha".

अगले पल उसे सुनाई diya,"Ek और मंदिर है थोड़ा आगे यहां भी ी महीना में मेला लगता है. ु मेला देखने लायक होता है. ससुरा बहोत बड़ा जगह में लगता है".

अनीता यह सुनकर बाहर देखती हुयी boli,"Achha".

वह आदमी बिना कुछ बोले अपना हाथ खिड़की के तरफ से हटा लिया और फिर पहले के तरह अपना कोहनी अनीता की बायीं चूंकि से सताए रहा.

थोड़ी देर बाद अनीता खिड़की से देखती हुयी boli,"Wahi वह मेला है क्या?".

अनीता यह बोलने के बाद उसे एक नज़र देखकर वापस खिड़की के तरफ देखने लगी तो वह bola,"Haan वही है".

अनीता जवाब में boli,"Haan सच में बहोत बड़ा जगह में लगा हुआ है".

वह आदमी अगले पल bola,"Haan बहोत बड़ा जगह में फैला हुआ है, जैसे ी तोहार पहाड़ इतना फैला हुआ है".

अनीता का दिल यह सुनकर धड़क गया. वह समझ गयी की वह उसकी चूंकि का बात कर रहा है. वह बिना शर्म के उस आदमी के तरफ देखकर धीरे से boli,"Please ऐसी बातें मत कीजिये".

वह आदमी यह सुनकर अनीता की चूँचियों के तरफ देखा और उसकी चेहरे पर देखने लगा. अनीता भी बिना शर्म के उसे देख रही थी. अगले पल वह आदमी खिड़की के तरफ आँखों से इशारा करते हुए bola,"U देखो ु एक और पहाड़ है".

अनीता यह सुनकर खिड़की के तरफ देखि तो एक पहाड़ दिखाई दिया.

वह चुप चाप बाहर देखती रही. अगले कुछ मिनट ऐसे hi वह देखती रही और वह आदमी भी चुप कभी उसकी चूँचियों को तो कभी बाहर यो कभी सामने देखता.

कुछ मिनट बाद वह आदमी bola,"U देखो ु एक फैक्ट्री है. ु ससुरा कउनो बाहर का फैक्ट्री है, ु चिप्स बनता है न यही".

अनीता यह सुनकर उसके तरफ देखकर boli,"Haan".

फिर वह उसे उस कंपनी का नाम बता दी और बोलने लगी की वह और क्या क्या चीज़ बनता है. वह आदमी अनीता की बात सुनकर उसे देखते रहा. अनीता जब बात पूरी की तो वह आदमी हल्का मुस्कुरा कर bola,"Waah तोहार तो बहोतो कुछ मालूम है. ससुरा शहरी औरत सच में पढ़ लिखकर तेज़ हो जाती है".

फिर वह अनीता की बदन को वापस गंदे नज़र से देखने के बाद bola,"Jitna खबसूरत तुम हो उतना hi तेज़ भी. अच्छा है".

अनीता को न जाने क्यों उसका यह बात अच्छा लगा. वह उसका बात सुनकर मुस्कुराई और मैं hi मैं सोचने lagi,"Yeh आदमी जैसा भी है मगर काम से काम औरत को पढ़ा लिखा देख अप्प्रेसियते तो कर रहे है. सच में कोई इन्हे देख कर नहीं कह सकता की ऐसा सोच यह रख भी सकते हैं".

अनीता फिर बाहर देखने लगी. अगले एक घंटा तक ऐसे hi दोनों के बीच हलकी फुल्की बात चित होती रही और वह आदमी कभी अनीता को बाहर कुछ दिखने के बहाने उसकी चूँचियों से अपना हाथ सत्ता देता या कोहनी से दबाओ बनाये रखता. अनीता बिना कोई रिएक्शन के नार्मल तरीके से उससे बात करती रही.

बीच बीच में वह आदमी उसकी चूँचियों के बारे में भी बोल देता की पहाड़ के जैसा बड़ा और ऊँचा है तो अनीता बिना शर्म के उसे देखकर थोड़ी नाराज़गी से उसे वैसा नहीं बोलने के लिए बोलती.

डेढ़ घंटे बाद रात के 10 बजे बस एक ढाबा पर रुका. सब लोग उतरने लगे. अनीता की सीट पीछे थी तो वह इंतज़ार करने लगी सबके उतरने का. समीर का सीट आगे था मगर वह भी रुका हुआ था क्यूंकि वह अनीता के साथ उतरना चाहता था.

आखिरकार सब उतर गए तो अनीता उस आदमी से boli,"Ji मुझे उतरना है. प्लीज जगह दीजिये".

वह आदमी सीट पर hi बैठा हुआ थोड़ा पीछे के तरफ खिसक गया. अनीता यह देख कर puchhi,"Aapko नहीं उतरना है".

वह आदमी मुस्कुराते हुए bola,"Utarna है हुंका मगर लेडीज पहले".

अनीता यह सुनकर सोचने लगी की उतना जगह hi नहीं है की वह आराम से निकल पायेगी. वह सोचकर boli,"Ji जब आपको उतरना है तो उठिये न".

वह आदमी bola,"Are हम बोलै न की लेडीज पहले. तोहार उतरने के बाद हम उतरूंगा".

अनीता यह सुनकर उससे boli,"Lekin काम से काम मुझे सीट से निकलने का जगह तो दीजिये".

वह आदमी सीट पर थोड़ा पीछे हुए hi bola,"Are सामने जगह तो है. जाओ न तुम"

अनीता यह सुनकर समझ गयी की उससे बहस करके फायदा नहीं. बहोत ज़िद्दी था वह और अपनी hi मनमानी करेगा.

अनीता यह सोच hi रही थी की समीर उधर आकर bola,"Uncle आप हटेंगे नहीं तो भाभी कैसे निकलेगी?".

वह आदमी समीर का गाल पकड़ कर दबाते हुए हिलाकर bola,"Abe हम तोहरी भाभी से बात कर रहा हूँ न. जब बड़ा बात करे तो बीच में नहीं बोलना चाहिए अभी तक समझ नहीं आया तोहका".

समीर दर्द से कराह utha,"aaahhhh छोरो मुझे".

अनीता भी यह देखकर परेशां होकर boli,"Kya कर रहे हैं आप. छोड़िये".

वह आदमी यह सुनकर उसका गाल छोर दिया तो अनीता समीर से boli,"Sameer मैं बात कर रही थी न. क्यों बेवजह का तुम भी बेहेस करने आ गए."

समीर चुप चाप अपना गाल सहलाते हुए अनीता को देख रहा था. अनीता उससे boli,"Ab खड़े hi रहोगे या बाहर चलना भी hai.Chalo".

समीर चुप चाप घूम गया और दरवाज़े के तरफ चलने लगा. अनीता भी अपनी सीट से उठी और बाहर के तरफ जाने लगी तो उसको उतरने में मुश्किल हो रही थी. वह फिर साइड से कड़ी हो गयी जिससे उसकी गांड उस आदमी के तरफ हो जाये. वह जान रही थी की वह ऐसे hi बाहर निकल पायेगी और इसी कारण से वह आदमी अपने सीट से नहीं उठ रहा था ताकि वह उसकी गांड की उभर को देख सके.

अनीता चुप चाप उस आदमी के सामने से गुजरने लगी और वही हुआ जो वह सोच रही थी. उसकी गांड उस आदमी के मुंह से सत् गयी. यह होने के बावजूद भी वह चुप चाप वहां से निकलने का कोशिश करने लगी मगर अगले पल उसे अपनी गांड पर उस आदमी के चेहरे का प्रेशर महसूस हुआ और प्रेशर ऐसा था की वह उस आदमी के चेहरे और आगे की सीट के बीच अटक गयी.

अगले पल वह आदमी उसकी गांड पर धीरे धीरे अपना चेहरा रगड़ने लगा. ऐसा होने पर अनीता जल्दी से सामने के तरफ देखि जिधर समीर जा रहा था और उसे थोड़ी राहत महसूस हुयी जब समीर बिना पीछे देखे बस से उतर गया.

समीर के बस से उतरने के बाद अनीता बिना शर्म के पीछे गर्दन करके उस आदमी को देख कर boli,"Yeh क्या कर रहे हैं आप. छोड़िये मुझे जाना है".

वह आदमी उसकी बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया उल्टा वह अनीता की गांड की दोनों भागो को पकड़ कर उसे बाहर के तरफ खिंच कर उसके बीच दरार में अपना मुंह रगड़ने लगा.

यह होने से अनीता की पूरा बदन में करंट जैसा महसूस हुआ और दिल धड़कने लगा.

अनीता अगले पल मैं hi मैं sochi,"Inko कुछ बोलकर फायदा नहीं है. बस अपनी hi करते जायेंगे".

फिर वह कुछ सेकण्ड्स तक वैसे hi निकलने की कोशिश करती हुयी अपनी गांड दये बाये करने लगी मगर इससे वह निकल तो नहीं पा रही थी, उल्टा ऐसा करने से उसकी गांड उस आदमी के चेहरे पर रगड़ने लगी.

अनीता को जब यह एहसास हुआ की वह निकल तो नहीं पा रही है बल्कि उल्टा उस आदमी की चेहरे पर खुद अपनी गांड रगड़ रही है तो वह रुक गयी और सोचने लगी की तभी उसे कुछ ध्यान आया तो वह मुस्कुरा दी और मैं hi मैं sochi,"I होप थिस वर्क्स. आईटी शुड डेफिनिटेली वर्क".

अगले पल वह आगे की सीट को पकड़ ली और एक गहरी सांस लेने के बाद पूरा जोर लगा कर अपनी गांड को पीछे के तरफ धकेल दी. ऐसा करने से वह आदमी का सर झटके से पीछे सीट के तरफ हो गया और अनीता को जैसे hi एहसास हुआ की उस आदमी का चेहरा उसकी गांड से अलग हो गया है और इतना जगह है की वह निकल सकती है वह बाहर निकल आयी.

अनीता को ख़ुशी हुयी की उसका प्लान काम कर गया और आगे चलते हुए उसकी चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी यह सोच कर की वह आदमी सोचा भी नहीं होगा की वह ऐसा प्लान करके वहां से निकल जाएगी. अनीता को ज़रा भी शर्म नहीं आ रही थी की वह आदमी उसकी गांड पर चेहरा रगड़ रहा था और वह निकलने के लिए अपनी गांड पीछे के तरफ धकेल कर उस आदमी के चेहरे को पीछे कर दी ताकि वह बाहर निकल सके.

अनीता बस के दरवाज़े के तरफ जाती हुयी मुस्कुराती हुयी मैं hi मैं sochi,"Tit फॉर तात" और अपनी गांड की मटक बढ़ा दी. वह आदमी अनीता की मटकती गांड को देखने लगा.

अनीता गांड मटकती हुयी दरवाज़े तक पहुंची और चुप चाप बस से उतर गयी.

अनीता बस से उतारकर जल्दी से वाशरूम के तरफ गयी. उसे जोर से पेशाब लगी हुयी थी. वह वाशरूम के तरफ गयी तो 6-7 औरतों का लाइन लगा हुआ tha.Woh समझ गयी की इतनी देर वह रुक नहीं सकती इसलिए वह कोई और वाशरूम देखने लगी यह उम्मीद से की और भी वाशरूम होगा. वह ढाबे के ऊपर देखने लगी यह उम्मीद से की ढाबे पर रहने का भी इंतज़ाम होगा तो वाशरूम भी होगा. मगर ऊपर कोई कमरा नहीं था. वह बस एस्बेस्टस से ढाका हुआ ढाबा था. वह मैं hi मैं सोचने लगी की ड्राइवर को अच्छी जगह रोकना चाहिए था बस. अगर कमरा होता तो ज़रूरत पड़ने पर वह कमरा hi बुक कर लेती सिर्फ पेशाब करने के लिए, मगर कमरा भी नहीं था.

वह कुछ सोचकर गेट्स वाशरूम के तरफ जाने लगी तो वहां पर भी लाइन दिखा. वह लाइन के तरफ देख कर वापस घूमी की तभी वह आदमी भी वह लाइन के तरफ जाता दिखा.

वह एक नज़र उसको देखने के बाद आस पास देखने लगी. फिर वह कुछ सोचकर ढाबा के पीछे चली गयी. उधर अँधेरा था, कोई लाइट नहीं थी सिवाय चाँद के रौशनी के. वह पीछे जाकर ढाबे के दीवार के तरफ देखने लगी यह उम्मीद से की शायद पीछे कोई वाशरूम हो मगर उसे नहीं मिला तो उसकी मुंह से निकल gayi,"What थे हेलल!"

वह यह बोलकर पीछे घूमी तो चौंक गयी. उसकी दिल की धड़कन तेज़ हो गयी मगर फिर वह खुद को संभलकर कुछ बोलने वाली थी की तभी वह आदमी bola,"Are मेम इधर अँधेरे में का कर रही हो. किसको धुंध रही हो? ".

अनीता boli,"Ji कुछ भी नहीं".

अनीता को पेशाब लगा हुआ था तो वह उससे बेवजह का बात में उलझना नहीं छह रही थी. वह इतना बोलकर उधर से जाने वाली थी की वह आदमी puchha,"Kaa बात है? बहोत परेशां होकर घूम रही ho?Raat का वक़त है, कुछो चाहिए तो बोलो, हम दूंगा".

अनीता यह सुनकर उसके तरफ देखकर boli,"Ji?"

वह आदमी अनीता को ऊपर से नीचे देखकर अपने पंत के ऊपर से लुंड को सहलाते हुए धीरे से बोलै," तोहरा कुछो चाहिए तो बोलो , हम ज़रूर दूंगा".

अनीता यह सुनकर boli,"Ji नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए."

यह बोलकर अनीता उधर से जाने लगी तो वह आदमी bola,"Are मेमसाहब बोलकर तो देखो. तुम बाथरूम खोज रही थी."

अनीता यह सुनकर सोची की उसे वाशरूम तो मिल नहीं रहा शायद उससे बोलेगी तो शायद कोई रास्ता निकले.

अनीता उसका बात सुनकर boli,"Ji मैं वाशरूम hi खोज रही थी. मुझे जाना है. वह एक वाशरूम में तो बहोत भीड़ है".

वह आदमी यह सुनकर bola,"Lagta है बहोत जोर से लगा हुआ है तुमका इसलिए इंतज़ार नहीं कर रही".

अनीता तो बेशर्म औरत थी. उसका ऐसे बोलने से उसे ज़रा भी शर्म नहीं आई और वह पूछी," इधर और कोई वाशरूम नहीं है क्या?"

वह आदमी आस पास देखकर bola,"bathroom तो नहीं है मगर तोहका मूट लगा है तो उसका इंतज़ाम हम कर सकता हूँ".

यह सुनकर अनीता को शर्म तो नहीं आयी मगर इस तरीके से बोलने पर वह थोड़ा आश्चर्य ज़रूर की और उससे boli,"Yeh आप क्या बोल रहे हैं? कोई ऐसे बोलता है kya?Chhoriye मैं खुद hi देख लेती हूँ".

अनीता यह बोलकर वहां से जाने लगी तो वह आदमी bola,"Are तोहार जैसी गोरी मेम का तो ी हे नखरा है. साफ़ साफ़ कुछो बोलती नहीं बस नखरा करती हो"

यह सुनकर अनीता रूककर उसे देखने लगी और एक पल देखने के बाद थोड़ी नाराज़गी से boli,"Yeh सब आपके वजह से hi हुआ है. अगर आप मुझे बस में ऐसे नहीं रोकते तो मैं जल्दी से आकर वाशरूम चली जाती".

वह आदमी यह सुनकर bola,"To इसलिए तो हम मदद करना चाहता हूँ और पूछ रहा हूँ. अब ससुरा हम मूट को और का बोलूंगा? तुम नहीं बोलोगी तो हम कैसे इंतज़ाम करूँगा."

अनीता यह सुनकर नाराज़गी जताती हुयी boli,"Are तो इसके लिए क्या करना है यह बोलने की क्या ज़रूरत है. वाशरूम में जो मर्ज़ी मैं करुँगी".

वह आदमी यह सुनकर bola,"Tum समझ कहे नहीं रही हो. अगर तुमका हगना है तो पानी का भी तो इंतज़ाम करना होगा और अगर मूतना है तो बिना पानी का भी चल जायेगा. उसमे तो टोहता अंदर से खुद पानी निकलेगा. इसलिए हम पूछ रहा हूँ की मूतना है की हगना है तुमका".

अनीता का दिल यह सुनकर धड़कने लगा. यह सुनकर अनीता को उसके बोलने का अंदाज़ अच्छा तो नहीं लगा मगर उसके बात का लॉजिक को वह सही मानी.

यह सोचकर की उसके बात में लॉजिक है उसके कारण अनीता के लहजे से नाराज़गी तो जा चुकी थी मगर फिर भी वह थोड़े नखरे वाली ऐडा से boli,"To आप अलग तरीके से भी तो यह पूछ सकते है. लेकिन आप फिर से वैसे hi पूछ रहे हैं. कोई ऐसे बोलता है क्या?"

वह आदमी अनीता को ऊपर से नीचे तक देखकर उसके चेहरे पर देखकर bola,"Koi से हुंका का लेना देना. हम तो ऐसे hi बोलता हूँ. ससुरा सबका जैसे हम बात करूँगा तो हमरे और बाकी में का फरक होगा?"

अनीता को पता नहीं क्यों उसका यह बेबाक अंदाज़ अच्छा लगा. पहले ज़बरदस्ती उसके बगल में बैठ जाना , फिर उससे सारा रास्ता बात करने का कोशिश करना, बस से उतारते वक़्त उसकी गांड में खुल्लम खुल्ला अपना चेहरा रगड़ना और अब ऐसे बेबाकी से गन्दी बातें करना.

अनीता को उसका हिम्मत और दबंगई अच्छा लग रहा था और अब उसका यूँ उसकी मदद करने की कोशिश करने से अनीता थोड़ी प्रभावित हो रही थी. उसे लगा की जब उसके बोलने का अंदाज़ hi वैसा है तो बेवजह का क्या सोचना और बुरा मन्ना. उसे उसके भाषा पर ध्यान न देकर वह क्या कहना चाहता है वह समझना चाहिए और उसके साथ co-operate करना चाहिए ताकि वह उसकी मदद कर सके.

वह यह सुनकर उसे देख hi रही थी की तभी वह bola,"Ab बोलो भी की तुमका हगना है या मूतना है?".

अनीता यह सुनकर बिना शर्म के उसको देखती हुयी boli,"Ji वह du..dusra वाला".

यह सुनकर वह आदमी bola,"Mootna है तुमका?"

अनीता यह सुनकर आस पास देखि और फिर उसको देखकर "हाँ" में सर हिला दी.

वह आदमी यह सुनकर उससे bola,"Aao हमरे साथ" और वह अनीता की हाथ पकड़ कर उसे ढाबा के पीछे जिधर थोड़ा अँधेरा था उधर जाने लगा. अनीता आस पास एक बार देखि और फिर वह आदमी के हाथ में खुद का हाथ दिए hi उसके साथ चल दी. वह अपना हाथ उससे अलग करने की कोशिश नहीं की.

कुछ कदम चलने के बाद वह आदमी एक तरफ दिखते हुए bola,"Jao उधर मूट लो".

अनीता यह सुनकर उस तरफ देखि. जिस ज़मीन पर ढाबा बना था वह आस पास के खेतों से ऊँचा था. वह आदमी वह ढाबा के ज़मीन के किनारे के तरफ इशारा करते हुए अनीता को बोल रहा था.

उधर देखकर अनीता परेशां होकर boli,"Ji वहां कैसे कर सकती हूँ main?Yeh तो वाशरूम नहीं है".

वह आदमी यह सुनकर थोड़ा झुंझलाता हुआ bola,"Phir नखरा शुरू हो गया तोहार. ी सहर नहीं है. हाईवे है. तुमको बाथरूम चाहिए तो जाओ जाकर लाइन में लग जाओ."

अनीता को बहोत जोर से पेशाब लगी थी. उसके लिए ज़्यादा देर बर्दाश्त करना मुश्किल था ab.Woh परेशानी से आस पास देखने लगी.

वह आदमी यह देखकर bola,"Are कउनो नहीं hai.Tum जाओ और मज़े से मूट कर हल्का हो जाओ".

अनीता को उसके मुंह से ऐसे खुल्लम खुल्ला बात सुनकर थोड़ा अजीब लगा खासकर मज़े से मूतने और हल्का होने का बात. लेकिन अब वह उसका ऐसे बात करना उसका अंदाज़ समझ रही थी और बुरा नहीं मान रही थी और शर्म तो अनीता को ऐसे भी आती नहीं थी.

वह उसके बात का बिना बुरा माने बिना शर्म के उसको देखकर boli,"Nahin ऐसे खुले में मैं नहीं करुँगी".

वह आदमी यह सुनकर bola,"Achha जाओ उधर जाकर कर लो".

अनीता देखि तो वह आदमी उसी खेत के दूसरे तरफ इशारा कर रहा था. उधर कुछ पेड़ पौधे the.Uske लिए अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था. वह सोची की अब उसके पास और कोई रास्ता नहीं है. काम से काम उधर पेड़ पौधे के पीछे करेगी तो कोई देखेगा नहीं.

वह एक बार फिर आस पास देखि तो वह आदमी bola,"are कउनो नहीं है. तुम जाओ और आराम से मूतो".

अनीता यह सुनकर उसे देखकर बिना शर्म के boli,"maine ऐसे खुले में कभी नहीं किया है. अजीब लग रहा है".

वह आदमी यह सुनकर उसे देखकर bola,"U तो तोहार के देख के hi लग रहा है की तुम शहरी औरत हो और ऐसे खेत में कभी मुक्ति नहीं होगी. लेकिन सब चीज़ का पहला बार होता है. अब जाओ. इहाँ कड़ी रहोगी तो सलवार में hi मूट डौगी फिर हुंका hi बोलोगी तुम्हारे बैग से दूसरा सलवार लाने के लिए".

यह सुनकर अनीता को थोड़ा अजीब लगा और वह आश्चर्य से उसे देखती हुयी अपना मुंह थोड़ा खोल दी. एक तो यह सोच कर की उसको बोलने से कुछ फायदा नहीं और दूसरा की उसे ज़ोर से पेशाब लगा था एहि सोचकर अनीता उससे बेहेस नहीं करना चाहती थी.

वह बिना शर्म के उसे देखती हुयी boli,"Theek है आप भी जाइये अब यहाँ से".

वह आदमी यह सुनकर bola,"Are मेमसाहब हम चला जाऊंगा तो कोई आ जायेगा तो? हम इहाँ खड़ा होकर देखूंगा की कोई नहीं आये".

अनीता को यह तर्क बेतुका लगा. वह समझ रही थी की वह आदमी वहां से क्यों नहीं जाना छह रहा था. लेकिन वह अब बहस में वक़्त नहीं बीतने छह रही थी.

वह उससे boli,"To उधर जाकर खड़े रहिये. यहाँ nahin.Aur दूसरी तरफ देखिएगा".

वह आदमी यह सुनकर bola,"Achha ठीक है लेकिन तुम इतना ऊँचा से खेत में उतर जाओगी तो?"

अनीता यह सुनकर खेत के तरफ देखि तो वह थोड़ा नीचे था. उसे भी लगा की उसे उतरने में मुश्किल होगा. वह उधर देख hi रही थी की वह आदमी bola,"Chalo हम उतरने में मदद कर देते हैं".

यह बोलकर वह आदमी अनीता की हाथ को फिर पकड़कर bola,"Chalo हम उतरने में मदद करता हूँ".

यह बोलकर वह खेत के किनारे जाने लगा. अनीता भी कोई विरोध नहीं की और उसके साथ जाने लगी.

5-6 कदम चलने के बाद खेत का किनारा आ गया तो वह आदमी bola,"Hum तुमका पकडे हैं. तुम आराम से उतरो".

अनीता उसका हाथ पकड़ी हुयी नीचे उतर गयी और उसके तरफ देखकर boli,"Thank यू. अब आप उधर जाकर दूसरी तरफ देखकर खड़े रहिये".

वह आदमी जिधर अनीता इशारा कर रही थी उधर देखा. वह आदमी यह सुनकर अनीता से bola,"Theek है. अब तुम जाओ नहीं तो सलवार में hi मूट डौगी तो तुमको और हमको दोनों को परेशानी होगी".

अनीता यह सुनकर बिना जवाब दिए पेशाब करने के लिए पेड़ पौधों के तरफ चली गयी. उधर जाकर वह एक बार देखि तो वह आदमी दूसरी तरफ hi देख रहा था मगर फिर भी अनीता हिसाब लगा कर ऐसे जगह पर बैठी जहाँ वह आदमी उसको देख नहीं सकता था.

अनीता फिर अपनी इलास्टिक वाली सलवार को नीचे सड़क कर बैठ गयी और अगले पल उसकी छूट से तेज़ी से पेशाब की धार बहने लगी. पेशाब निकलते hi अनीता को राहत मिली.

वह आँख बांध करके खुद से boli,"Ohh गॉड फाइनली ी ऍम रेलिएवेद. व्हाट ा रिलीफ! " और यह बोलकर वह आँख खोल कर पेशाब करती रही. वह अब आस पास देखने लगी. उसको राहत तो मिली थी मगर यह सब अजीब लग रहा था. वह ज़िन्दगी में पहली बार खुले में पेशाब कर रही थी, वह भी खेत mein.Raat तो था मगर थोड़ा चाँद की रौशनी से उजाला था.

अनीता पेशाब करने के बाद बैग से टिश्यू पेपर निकाल कर अपनी छूट को साफ़ की और फिर उठकर अपनी पंतय और सलवार को ऊपर चढ़ा li.Woh सलवार पेहेन कर जैसे hi घूमी तो उसकी नज़र उस आदमी पर चली gayi.Woh उसी के तरफ देख रहा था. उसे देखते hi अनीता का दिल धड़क गया.

वह आदमी अपना जगह बदल चूका था और अनीता अंदाज़ा लगायी की वह ऐसा जगह खड़ा था जहाँ से वह सब देख सकता था. अनीता को पूरा यक़ीन था की वह आदमी उसकी नंगी गांड देख चूका है. जिस पोजीशन में वह खड़ा था अनीता को पूरा यक़ीन था की वह उसके उठने पर उसकी नंगी गांड देख लिया होगा.

अनीता उसे देखने लगी और वह आदमी भी उसे hi देख रहा था. दोनों की नज़र मिल चुकी थी.
 
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