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उसकी धड़कन तेज़ हो गयी मगर यह जान्ने के बाद भी की वह आदमी अपना जगह बदल कर उसकी नंगी गांड को देख रहा था अनीता को गुस्सा नहीं आया. वह जानती थी की वह इसीलिए वहां से जाना नहीं चाहता था और वहां खड़ा था.
अनीता को बस इस बात का ख्याल था की अगर वह आदमी अगर नहीं आता तो वह खुले में पेशाब नहीं करती और लाइन में लगी रहती. ऐसे में सच में शायद वह अपनी सलवार में hi पेशाब कर देती. उस आदमी ने एक तरह से उसकी मदद hi किया था वहां आकर और वह अब पेशाब करके बहोत रिलैक्स्ड फील कर रही थी.
इसके अलावा अनीता को इस बात की ख़ुशी थी की वह दूसरी तरफ मुंह करके पेशाब कर रही थी. अगर वह ढाबे के तरफ मुंह करके पेशान करती तो शायद वह आदमी उसकी छूट से निकलती हुयी पेशाब की धार और छूट देख लेता. इससे अच्छा हुआ की वह बस उसकी गांड hi देख पाया. अनीता यह सब सोचती हुयी उस आदमी के तरफ गयी.
वह चुप चाप थी. उसे पता था की वह उससे पूछेगी की वह जगह बदल कर उसकी तरफ क्यों देख रहा था तो वह ज़रूर कोई बहाना बनता और बात का बतंगड़ बनता और वह भी गंदे वर्ड्स इस्तेमाल करके. उसे लगा की इससे अच्छा था की वह जो हो गया उसके बारे में सोचे न. वह तो उसकी नंगी गांड देख चूका था तो बात को बढ़ने से जो हो चूका वह बदल थोड़े hi सकता था, उसकी नंगी गांड जो वह देख चूका था वह अनदेखा थोड़े hi हो जाता.
अनीता एहि सोचती हुयी चुप चाप उधर गयी तो वह आदमी bola,"Araam मिला तोहका मूतकार? बेवजह का चिंता कर रही थी. अब अच्छा लग रहा है न मूट निकल जाने से?"
अनीता इस बात का जवाब नहीं दी और न hi उसे शर्म आयी उसका बात सुनकर. हाँ उसे थोड़ा अजीब ज़रूर लग रहा था उसका ऐसे खुलकर बोलना मगर अब वह साथ में यह भी सोच रही थी की उसका बात करने का अंदाज़ hi वही है.
अगले पल जब अनीता खेत के किनारे पहुंची तो वह आदमी उसके तरफ हाथ बढ़ाया. अनीता उसका हाथ पकड़ कर ऊपर उठ गयी और उस आदमी से "थैंक यू" बोलकर उसके बगल से जाने लगी तो वह bola,"Are गोरी मेम रुको, अब हम मूट कर आता हूँ".
अनीता यह सुनकर बिना शर्म के उसके तरफ देखकर boli,"To यह मुझे बोलने की क्या ज़रुरत है. आप जाइये कीजिये."
यह बोलकर अनीता फिर से वहां से जाने लगी तो वह bola,"Are जिस तरह से तोहरे मोटे वक़त हम देख रहे थे, वैसे hi हमरा मोटे वक़्त तुम भी देखो."
अनीता यह सुनकर अजीब तरीके से उसे देखती हुयी boli,"main क्यों देखूं. मुझे कुछ नहीं देखना है".
वह आदमी यह सुनकर bola,"Are हमरा मूट नहीं देखने बोल रहा हूँ तोहका, कउनो इधर आये नहीं ु देखो"
अनीता यह सुनकर boli,"Par आप तो ऐसे hi कर सकते हैं. आप कीजिये मैं जा रही हूँ".
वह आदमी यह अनसुना करते हुए bola,"Tum रूककर देखो हम अभी मूट कर आता हूँ".
यह बोलकर वह आदमी नीचे उतारकर थोड़ा आगे चला गया, मगर अनीता जिधर पेशाब की उतना दूर नहीं गया. बस कुछ कदम आगे जाकर वह आदमी दूसरी तरफ मुंह करके पंत का ज़िप खोला और खड़ा होकर पेशाब करने लगा.
अनीता जैसे hi पेशाब की धार की आवाज़ सुनी उसकी नज़र उस आदमी के टैंगो के बीच से उसके सामने की ज़मीन पर पड़ी जहाँ पेशाब की धार गिरते हुए उसे दिखाई दिया.
अनीता जैसे hi पेशाब की धार देखि वह दूसरी तरफ घूम गयी और आस पास देखने लगी की कोई यह सब देख तो नहीं रहा है.
वह आदमी पेशाब करते हुए एक बार गर्दन घुमा कर अनीता के तरफ देखा तो उसे दूसरे तरफ देखते हुए पाया. वह अनीता की अध् नंगी पीठ देखने लगा जो चांदनी रौशनी में चमक रही thi.Woh देखकर वह आदमी एक बार अपने ज़बान पर होंठ फिराया.
कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता को आवाज़ सुनाई diya,"Kauno आ तो नहीं रहा?".
अनीता यह सुनकर boli,"Koi नहीं आ रहा hai.Aap जल्दी कीजिये प्लीज".
अनीता यह बोलकर चुप चाप कड़ी रही. कुछ सेकण्ड्स बाद अंकित का फ़ोन आने लगा. अनीता फ़ोन रिसीव की तो अंकित उससे पूछा की वह किधर है. अनीता उसको बोल दी की वह थोड़ी देर में आ रही है.
कॉल डिसकनेक्ट करने के बाद अनीता उससे boli,"please जल्दी कीजिये हमें लेट हो रही है".
यह सुनकर वह आदमी bola,"Haan हो गवा. ु रुमाल हुंका भी दो जिससे तुम अपना पेशाब साफ़ की".
यह सुनकर अनीता को अजीब लगा मगर आश्चर्य नहीं हुआ. वह आदमी इसी तरीके से बेबाक होकर उससे बातें कर रहा था. वह जानती थी की उससे वह कुछ भी बोलेगी तो वह अपना तरीक़ा बदलने वाला नहीं था तो वह बेवजह का उससे कुछ बोलकर बात का बतंगड़ नहीं बनाना छह रही थी.
अनीता अपनी बैग से टिश्यू पेपर निकाल कर उसके तरफ हाथ बढाती हुयी boli,"Yeh लीजिये और जल्दी कीजिये प्लीज".
वह आदमी यह सुनकर bola,"Are हम इधर से उधर कैसे आऊंगा. तुम आकर दो हुंका".
अनीता यह सुनकर मैं hi मैं boli,"Offo क्या मुसीबत है. कहाँ फँस गयी मैं".
अनीता उसका बात सुनकर मैं hi मैं यह बात बोलकर उसके तरफ घूमी तो उसका दिल धड़क गया. वह आदमी उसी के तरफ घुमा हुआ था और उसका पंत का ज़िप खुला हुआ था जिससे उसका लुंड पंत के बहार निकला हुआ था. अनीता की नज़र जैसे hi उसके लुंड पर पड़ी उसका दिल जोर से धड़क गया और वह एक नज़र उसके चेहरे पर देखि तो वह उसे hi देख रहा था.
अनीता उसके चेहरे पर एक नज़र देखकर फिर वापस घूम गयी और boli,"Yeh क्या कर रहे हैं आप?"
अनीता को अगला आवाज़ उस आदमी का सुनाई diya,"Kaa किये हम मतबल? पेशाब hi तो किया हूँ हम"
उसका जवाब सुन्न अनीता धीरे से boli,"Offo मैं क्या पूछ रही हूँ और यह क्या बोल रहा है. जान बूझकर ऐसा कर रहा है. मैं सीधा पूछती हूँ".
अनीता फिर boli,"Aap इधर क्यों घूमे?"
वह आदमी यह सुनकर bola,"Atna देर से जल्दी करने बोल रही थी तुम और अब खुद देर कर रही हो. अब रुमाल माँगा हूँ हम तोहार से तो उधर तो घूमूँगा न. तोहार से हम रुमाल कैसे लूंगा अगर इधर घूमूँगा नहीं तो".
अनीता समझ गयी की बेवजह का बहस करने से कुछ नहीं होगा. वह आदमी अगले पल bola,"jaldi दो हुंका रुमाल. हमरा पंत खुला हुआ है".
अनीता भी सोची की जल्दी से जल्दी वह टिश्यू पेपर देकर बात को ख़तम करे. वह वापस घूमी मगर उसके लुंड के तरफ नहीं देखि. वह उसके चेहरे के तरफ देखि और फिर थोड़ा आगे बढ़कर खेत के किनारे पहुँच कर boli,"Ab मैं नीचे कैसे aaun?Agar मैं नहीं रहती तो क्या करते आप? बिना टिश्यू पेपर का hi काम चलते. अभी भी वही कीजिये. मैं उधर नहीं आ सकती".
यह सुनकर वह आदमी bola,"Ruko हम hi उधर आता हूँ. तोहार इतना नखरा है ससुरा".
अनीता यह सुनकर उसके तरफ देखती रही और वह आदमी चलने लगा. उसके चलते वक़्त अनीता की नज़र थोड़ा नीचे गया तो देखि की वह लुंड बाहर किये hi चल रहा था जिससे उसका बड़ा और मोटा लुंड हिल रहा था.
अनीता उसका लुंड को हिलते हुए देख तुरंत दूसरे तरफ घूम गयी और सोचने lagi,"Main भी न, क्या ज़रूरत थी नीचे देखने की. लेकिन मुझे क्या पता की वह ज़िप नहीं लगाया है और वैसे hi आने लगेगा. कोई ऐसे करता है क्या?"
फिर अनीता उसके लुंड के बारे में सोचने lagi,"Kaise बाहर निकल कर आराम से चल रहे हैं. और है भी कितना मोटा और बड़ा की सामने लटक कर चलने पर हिल रहा है. ऐसा लग रहा था की कोई काला सांप उनके पंत से बाहर निकल कर देख रहा हो".
यह सोचकर अनीता का गाला सूखने लगा और वह खुद की थूक को घोंट कर अपनी होंठों पर ज़बान फिरकर खुद को शांत करने का कोशिश करती हुयी मैं hi मैं boli,"Main भी क्या क्या सोच रही हूँ".
अनीता इतना सोच hi रही थी की उसे कोई उधर आते हुए दिखाई दिया और वह घबराकर उस आदमी के तरफ देखकर खेत के किनारे जाकर धीरे से boli,"Koi आ रहा है".
वह आदमी यह सुनते hi अनीता का हाथ पकड़ लिया और अनीता भी उसका हाथ पकडे नीचे उतर गयी. वह आदमी अनीता का हाथ पकडे एक पेड़ के पीछे ले गया और अनीता भी चुप चाप साथ में चली गई.
अनीता भले hi बेशर्म औरत थी मगर ऐसा नहीं था की उसे एक आदमी के साथ ऐसे ढाबे के पीछे खेत में कोई देखे और वह भी जब उसका लुंड खुले में था और उसे कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ता. वह अकेली रहती या वह आदमी पंत पहने हुए रहता तो शायद उसे कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ता. लेकिन दोनों में से कोई भी बात नहीं थी इसलिए वह वहां से हट कर छुप गयी उस आदमी के साथ.
पेड़ के पीछे जाने के बाद अनीता का ध्यान उधर आये एक आदमी के तरफ गया जो वहां खेत के किनारे दूसरे तरफ घूमकर पेशाब करने लगा. ऐसा होते hi अनीता उधर से नज़र हटा ली और नीचे के तरफ साइड में देखि तो उस आदमी का लुंड दिखा जो अभी भी पंत के बाहर था. उसका लुंड इतने करीब से देखने से उसकी दिल की धड़कन तेज़ हो गयी और छूट में हलचल होने लगी.
अनीता उसका लुंड एक पल के लिए देखने के बाद खुद को सँभालने के लिए वहां से नज़र हटाकर सोचने lagi,"Abhi तक पंत नहीं पहना यह आदमी. पता नहीं ऐसे कैसे अभी तक पंत खोलकर hi हैं".
अनीता फिर सोची की वह उसे टिश्यू पेपर दी hi नहीं लुंड साफ़ करने के लिए तो वह अपना लुंड कैसे पंत में डालता और टिश्यू पेपर देने से पहले hi वह दूसरा आदमी आ गया था तो उन्हें इधर आना पड़ा. अनीता को लगा की वह टिश्यू पेपर दे देगी उसे तो वह अपना लुंड साफ़ करके पंत में दाल लेगा.
अनीता यह सोच hi रही थी की वह आदमी का आवाज़ suni,"Sasura सबको मूट लगा है".
अनीता यह सुनकर उसके तरफ टिश्यू पेपर बढाती हुयी धीरे से boli,"Yeh लीजिये आप साफ़ कर लीजिये".
यह सुनकर वह आदमी उसके तरफ आँखों में देखकर धीरे से bola,"kaa?"
अनीता यह सुनकर धीरे से boli,"Wahi जो आप साफ़ करना चाहते थे".
वह आदमी अगले पल bola,"Achha मूट?".
अनीता इस बार बिना कोई प्रतिक्रिया दिए उसके आँखों में देखती हुयी अपना सर "हाँ" में हिला दी.
यह सुनकर वह आदमी धीरे से bola,"Tum hi साफ़ कर दो".
अनीता यह सुनकर अपनी आंखें बड़ी करके बिना शर्म के उसके आँखों में देखती हुयी धीरे से boli,"Kaisi बात कर रहे हैं आप? प्लीज यह सब मत बोलिये. यह लीजिये खुद साफ़ कीजिये".
वह आदमी अगले पल अनीता की गांड पर अपना बाय हाथ रखकर उसे मुट्ठी में भरने का नाकाम कोशिश करके उसे दबाते हुए bola,"Are कर डौगी तो का हो जायेगा. खुद का तो मूट तो तुम साफ़ की".
उसका कठोर हाथ अपनी गांड पर पड़ते hi अनीता की बदन में एक अजीब सा सनसनी फैल गया मगर वह वैसे hi बिना शर्म के उसे देखती हुयी boli,"To आप भी अपना साफ़ कीजिये. मैं क्यों करू? और अपना हाथ हटाइये वहां से".
वह आदमी उसकी गांड पर हाथ फेरते रहा और अनीता की बात सुनकर वैसे hi उसकी गांड दबाते हुए bola,"Are तो बोलो तो बदले में हम भी तोहरा साफ़ कर देता हूँ".
अनीता यह सुनकर फिर से उसके तरफ देखती हुयी अपनी आँखें बड़ी करके boli,"Please ऐसी बात मत कीजिये".
फिर वह उस दूसरे आदमी के तरफ देखि जो पेशाब कर चूका था और अपना ज़िप लगा रहा था. हालांकि उसका पीठ अनीता के तरफ था मगर वह समझ सकती थी की वह पेशाब करने के बाद ज़िप लगा रहा था.
वह देखकर अनीता बेशर्मी से उस आदमी से boli,"Dekhiye वह भी तो साफ़ नहीं किया. आप को भी साफ़ नहीं करना है तो मत कीजिये. मैं नहीं करुँगी".
फिर वह देखि की वह आदमी वापस जाने लगा तो अनीता boli,"Main जा रही हूँ. यह लीजिये टिश्यू पेपर. साफ़ करना है तो कीजिये नहीं तो मत कीजिये. मैं चली".
यह बोलकर अनीता उसका दया हाथ पकड़ कर उसमे टिश्यू पेपर दी और वहां से जाने लगी तो वह आदमी बाये हाथ से उसकी गांड की एक भाग को जोर से पकड़ कर रोकने का कोशिश करते हुए bola,"Are ी का बात हुआ".
उसके कोशिश के बावजूद अनीता की बड़ी गांड उसके हाथ में नहीं समां पायी जिसे वह पकड़ कर उसे रोक सकता था. अनीता थोड़ी आगे बढ़ गयी तो वह उसका उसकी गांड को पकड़ कर नाकाम कोशिश पर मुस्कुरा दी की उसकी बड़ी गांड उसके हाथ के पकड़ में नहीं आयी.
वह आदमी अनीता को मुस्कुराता हुआ नहीं देख सका क्यूंकि वह आगे बढ़ चुकी थी और उसकी पीठ उसके तरफ था. अनीता उसके नाकाम कोशिश पर मुस्कुराती हुयी अपनी गांड की नाटक बढाकर चलने लगी जिसे देखकर वह आदमी अपने लुंड को टिश्यू पेपर से साफ़ करते हुए सहलाने लगा और अनीता की अधनंगी पीठ और मटकती बड़ी गांड को देखकर होंठों पर ज़बान फिरा दिया.
उसकी धड़कन तेज़ हो गयी मगर यह जान्ने के बाद भी की वह आदमी अपना जगह बदल कर उसकी नंगी गांड को देख रहा था अनीता को गुस्सा नहीं आया. वह जानती थी की वह इसीलिए वहां से जाना नहीं चाहता था और वहां खड़ा था.
अनीता को बस इस बात का ख्याल था की अगर वह आदमी अगर नहीं आता तो वह खुले में पेशाब नहीं करती और लाइन में लगी रहती. ऐसे में सच में शायद वह अपनी सलवार में hi पेशाब कर देती. उस आदमी ने एक तरह से उसकी मदद hi किया था वहां आकर और वह अब पेशाब करके बहोत रिलैक्स्ड फील कर रही थी.
इसके अलावा अनीता को इस बात की ख़ुशी थी की वह दूसरी तरफ मुंह करके पेशाब कर रही थी. अगर वह ढाबे के तरफ मुंह करके पेशान करती तो शायद वह आदमी उसकी छूट से निकलती हुयी पेशाब की धार और छूट देख लेता. इससे अच्छा हुआ की वह बस उसकी गांड hi देख पाया. अनीता यह सब सोचती हुयी उस आदमी के तरफ गयी.
वह चुप चाप थी. उसे पता था की वह उससे पूछेगी की वह जगह बदल कर उसकी तरफ क्यों देख रहा था तो वह ज़रूर कोई बहाना बनता और बात का बतंगड़ बनता और वह भी गंदे वर्ड्स इस्तेमाल करके. उसे लगा की इससे अच्छा था की वह जो हो गया उसके बारे में सोचे न. वह तो उसकी नंगी गांड देख चूका था तो बात को बढ़ने से जो हो चूका वह बदल थोड़े hi सकता था, उसकी नंगी गांड जो वह देख चूका था वह अनदेखा थोड़े hi हो जाता.
अनीता एहि सोचती हुयी चुप चाप उधर गयी तो वह आदमी bola,"Araam मिला तोहका मूतकार? बेवजह का चिंता कर रही थी. अब अच्छा लग रहा है न मूट निकल जाने से?"
अनीता इस बात का जवाब नहीं दी और न hi उसे शर्म आयी उसका बात सुनकर. हाँ उसे थोड़ा अजीब ज़रूर लग रहा था उसका ऐसे खुलकर बोलना मगर अब वह साथ में यह भी सोच रही थी की उसका बात करने का अंदाज़ hi वही है.
अगले पल जब अनीता खेत के किनारे पहुंची तो वह आदमी उसके तरफ हाथ बढ़ाया. अनीता उसका हाथ पकड़ कर ऊपर उठ गयी और उस आदमी से "थैंक यू" बोलकर उसके बगल से जाने लगी तो वह bola,"Are गोरी मेम रुको, अब हम मूट कर आता हूँ".
अनीता यह सुनकर बिना शर्म के उसके तरफ देखकर boli,"To यह मुझे बोलने की क्या ज़रुरत है. आप जाइये कीजिये."
यह बोलकर अनीता फिर से वहां से जाने लगी तो वह bola,"Are जिस तरह से तोहरे मोटे वक़त हम देख रहे थे, वैसे hi हमरा मोटे वक़्त तुम भी देखो."
अनीता यह सुनकर अजीब तरीके से उसे देखती हुयी boli,"main क्यों देखूं. मुझे कुछ नहीं देखना है".
वह आदमी यह सुनकर bola,"Are हमरा मूट नहीं देखने बोल रहा हूँ तोहका, कउनो इधर आये नहीं ु देखो"
अनीता यह सुनकर boli,"Par आप तो ऐसे hi कर सकते हैं. आप कीजिये मैं जा रही हूँ".
वह आदमी यह अनसुना करते हुए bola,"Tum रूककर देखो हम अभी मूट कर आता हूँ".
यह बोलकर वह आदमी नीचे उतारकर थोड़ा आगे चला गया, मगर अनीता जिधर पेशाब की उतना दूर नहीं गया. बस कुछ कदम आगे जाकर वह आदमी दूसरी तरफ मुंह करके पंत का ज़िप खोला और खड़ा होकर पेशाब करने लगा.
अनीता जैसे hi पेशाब की धार की आवाज़ सुनी उसकी नज़र उस आदमी के टैंगो के बीच से उसके सामने की ज़मीन पर पड़ी जहाँ पेशाब की धार गिरते हुए उसे दिखाई दिया.
अनीता जैसे hi पेशाब की धार देखि वह दूसरी तरफ घूम गयी और आस पास देखने लगी की कोई यह सब देख तो नहीं रहा है.
वह आदमी पेशाब करते हुए एक बार गर्दन घुमा कर अनीता के तरफ देखा तो उसे दूसरे तरफ देखते हुए पाया. वह अनीता की अध् नंगी पीठ देखने लगा जो चांदनी रौशनी में चमक रही thi.Woh देखकर वह आदमी एक बार अपने ज़बान पर होंठ फिराया.
कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता को आवाज़ सुनाई diya,"Kauno आ तो नहीं रहा?".
अनीता यह सुनकर boli,"Koi नहीं आ रहा hai.Aap जल्दी कीजिये प्लीज".
अनीता यह बोलकर चुप चाप कड़ी रही. कुछ सेकण्ड्स बाद अंकित का फ़ोन आने लगा. अनीता फ़ोन रिसीव की तो अंकित उससे पूछा की वह किधर है. अनीता उसको बोल दी की वह थोड़ी देर में आ रही है.
कॉल डिसकनेक्ट करने के बाद अनीता उससे boli,"please जल्दी कीजिये हमें लेट हो रही है".
यह सुनकर वह आदमी bola,"Haan हो गवा. ु रुमाल हुंका भी दो जिससे तुम अपना पेशाब साफ़ की".
यह सुनकर अनीता को अजीब लगा मगर आश्चर्य नहीं हुआ. वह आदमी इसी तरीके से बेबाक होकर उससे बातें कर रहा था. वह जानती थी की उससे वह कुछ भी बोलेगी तो वह अपना तरीक़ा बदलने वाला नहीं था तो वह बेवजह का उससे कुछ बोलकर बात का बतंगड़ नहीं बनाना छह रही थी.
अनीता अपनी बैग से टिश्यू पेपर निकाल कर उसके तरफ हाथ बढाती हुयी boli,"Yeh लीजिये और जल्दी कीजिये प्लीज".
वह आदमी यह सुनकर bola,"Are हम इधर से उधर कैसे आऊंगा. तुम आकर दो हुंका".
अनीता यह सुनकर मैं hi मैं boli,"Offo क्या मुसीबत है. कहाँ फँस गयी मैं".
अनीता उसका बात सुनकर मैं hi मैं यह बात बोलकर उसके तरफ घूमी तो उसका दिल धड़क गया. वह आदमी उसी के तरफ घुमा हुआ था और उसका पंत का ज़िप खुला हुआ था जिससे उसका लुंड पंत के बहार निकला हुआ था. अनीता की नज़र जैसे hi उसके लुंड पर पड़ी उसका दिल जोर से धड़क गया और वह एक नज़र उसके चेहरे पर देखि तो वह उसे hi देख रहा था.
अनीता उसके चेहरे पर एक नज़र देखकर फिर वापस घूम गयी और boli,"Yeh क्या कर रहे हैं आप?"
अनीता को अगला आवाज़ उस आदमी का सुनाई diya,"Kaa किये हम मतबल? पेशाब hi तो किया हूँ हम"
उसका जवाब सुन्न अनीता धीरे से boli,"Offo मैं क्या पूछ रही हूँ और यह क्या बोल रहा है. जान बूझकर ऐसा कर रहा है. मैं सीधा पूछती हूँ".
अनीता फिर boli,"Aap इधर क्यों घूमे?"
वह आदमी यह सुनकर bola,"Atna देर से जल्दी करने बोल रही थी तुम और अब खुद देर कर रही हो. अब रुमाल माँगा हूँ हम तोहार से तो उधर तो घूमूँगा न. तोहार से हम रुमाल कैसे लूंगा अगर इधर घूमूँगा नहीं तो".
अनीता समझ गयी की बेवजह का बहस करने से कुछ नहीं होगा. वह आदमी अगले पल bola,"jaldi दो हुंका रुमाल. हमरा पंत खुला हुआ है".
अनीता भी सोची की जल्दी से जल्दी वह टिश्यू पेपर देकर बात को ख़तम करे. वह वापस घूमी मगर उसके लुंड के तरफ नहीं देखि. वह उसके चेहरे के तरफ देखि और फिर थोड़ा आगे बढ़कर खेत के किनारे पहुँच कर boli,"Ab मैं नीचे कैसे aaun?Agar मैं नहीं रहती तो क्या करते आप? बिना टिश्यू पेपर का hi काम चलते. अभी भी वही कीजिये. मैं उधर नहीं आ सकती".
यह सुनकर वह आदमी bola,"Ruko हम hi उधर आता हूँ. तोहार इतना नखरा है ससुरा".
अनीता यह सुनकर उसके तरफ देखती रही और वह आदमी चलने लगा. उसके चलते वक़्त अनीता की नज़र थोड़ा नीचे गया तो देखि की वह लुंड बाहर किये hi चल रहा था जिससे उसका बड़ा और मोटा लुंड हिल रहा था.
अनीता उसका लुंड को हिलते हुए देख तुरंत दूसरे तरफ घूम गयी और सोचने lagi,"Main भी न, क्या ज़रूरत थी नीचे देखने की. लेकिन मुझे क्या पता की वह ज़िप नहीं लगाया है और वैसे hi आने लगेगा. कोई ऐसे करता है क्या?"
फिर अनीता उसके लुंड के बारे में सोचने lagi,"Kaise बाहर निकल कर आराम से चल रहे हैं. और है भी कितना मोटा और बड़ा की सामने लटक कर चलने पर हिल रहा है. ऐसा लग रहा था की कोई काला सांप उनके पंत से बाहर निकल कर देख रहा हो".
यह सोचकर अनीता का गाला सूखने लगा और वह खुद की थूक को घोंट कर अपनी होंठों पर ज़बान फिरकर खुद को शांत करने का कोशिश करती हुयी मैं hi मैं boli,"Main भी क्या क्या सोच रही हूँ".
अनीता इतना सोच hi रही थी की उसे कोई उधर आते हुए दिखाई दिया और वह घबराकर उस आदमी के तरफ देखकर खेत के किनारे जाकर धीरे से boli,"Koi आ रहा है".
वह आदमी यह सुनते hi अनीता का हाथ पकड़ लिया और अनीता भी उसका हाथ पकडे नीचे उतर गयी. वह आदमी अनीता का हाथ पकडे एक पेड़ के पीछे ले गया और अनीता भी चुप चाप साथ में चली गई.
अनीता भले hi बेशर्म औरत थी मगर ऐसा नहीं था की उसे एक आदमी के साथ ऐसे ढाबे के पीछे खेत में कोई देखे और वह भी जब उसका लुंड खुले में था और उसे कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ता. वह अकेली रहती या वह आदमी पंत पहने हुए रहता तो शायद उसे कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ता. लेकिन दोनों में से कोई भी बात नहीं थी इसलिए वह वहां से हट कर छुप गयी उस आदमी के साथ.
पेड़ के पीछे जाने के बाद अनीता का ध्यान उधर आये एक आदमी के तरफ गया जो वहां खेत के किनारे दूसरे तरफ घूमकर पेशाब करने लगा. ऐसा होते hi अनीता उधर से नज़र हटा ली और नीचे के तरफ साइड में देखि तो उस आदमी का लुंड दिखा जो अभी भी पंत के बाहर था. उसका लुंड इतने करीब से देखने से उसकी दिल की धड़कन तेज़ हो गयी और छूट में हलचल होने लगी.
अनीता उसका लुंड एक पल के लिए देखने के बाद खुद को सँभालने के लिए वहां से नज़र हटाकर सोचने lagi,"Abhi तक पंत नहीं पहना यह आदमी. पता नहीं ऐसे कैसे अभी तक पंत खोलकर hi हैं".
अनीता फिर सोची की वह उसे टिश्यू पेपर दी hi नहीं लुंड साफ़ करने के लिए तो वह अपना लुंड कैसे पंत में डालता और टिश्यू पेपर देने से पहले hi वह दूसरा आदमी आ गया था तो उन्हें इधर आना पड़ा. अनीता को लगा की वह टिश्यू पेपर दे देगी उसे तो वह अपना लुंड साफ़ करके पंत में दाल लेगा.
अनीता यह सोच hi रही थी की वह आदमी का आवाज़ suni,"Sasura सबको मूट लगा है".
अनीता यह सुनकर उसके तरफ टिश्यू पेपर बढाती हुयी धीरे से boli,"Yeh लीजिये आप साफ़ कर लीजिये".
यह सुनकर वह आदमी उसके तरफ आँखों में देखकर धीरे से bola,"kaa?"
अनीता यह सुनकर धीरे से boli,"Wahi जो आप साफ़ करना चाहते थे".
वह आदमी अगले पल bola,"Achha मूट?".
अनीता इस बार बिना कोई प्रतिक्रिया दिए उसके आँखों में देखती हुयी अपना सर "हाँ" में हिला दी.
यह सुनकर वह आदमी धीरे से bola,"Tum hi साफ़ कर दो".
अनीता यह सुनकर अपनी आंखें बड़ी करके बिना शर्म के उसके आँखों में देखती हुयी धीरे से boli,"Kaisi बात कर रहे हैं आप? प्लीज यह सब मत बोलिये. यह लीजिये खुद साफ़ कीजिये".
वह आदमी अगले पल अनीता की गांड पर अपना बाय हाथ रखकर उसे मुट्ठी में भरने का नाकाम कोशिश करके उसे दबाते हुए bola,"Are कर डौगी तो का हो जायेगा. खुद का तो मूट तो तुम साफ़ की".
उसका कठोर हाथ अपनी गांड पर पड़ते hi अनीता की बदन में एक अजीब सा सनसनी फैल गया मगर वह वैसे hi बिना शर्म के उसे देखती हुयी boli,"To आप भी अपना साफ़ कीजिये. मैं क्यों करू? और अपना हाथ हटाइये वहां से".
वह आदमी उसकी गांड पर हाथ फेरते रहा और अनीता की बात सुनकर वैसे hi उसकी गांड दबाते हुए bola,"Are तो बोलो तो बदले में हम भी तोहरा साफ़ कर देता हूँ".
अनीता यह सुनकर फिर से उसके तरफ देखती हुयी अपनी आँखें बड़ी करके boli,"Please ऐसी बात मत कीजिये".
फिर वह उस दूसरे आदमी के तरफ देखि जो पेशाब कर चूका था और अपना ज़िप लगा रहा था. हालांकि उसका पीठ अनीता के तरफ था मगर वह समझ सकती थी की वह पेशाब करने के बाद ज़िप लगा रहा था.
वह देखकर अनीता बेशर्मी से उस आदमी से boli,"Dekhiye वह भी तो साफ़ नहीं किया. आप को भी साफ़ नहीं करना है तो मत कीजिये. मैं नहीं करुँगी".
फिर वह देखि की वह आदमी वापस जाने लगा तो अनीता boli,"Main जा रही हूँ. यह लीजिये टिश्यू पेपर. साफ़ करना है तो कीजिये नहीं तो मत कीजिये. मैं चली".
यह बोलकर अनीता उसका दया हाथ पकड़ कर उसमे टिश्यू पेपर दी और वहां से जाने लगी तो वह आदमी बाये हाथ से उसकी गांड की एक भाग को जोर से पकड़ कर रोकने का कोशिश करते हुए bola,"Are ी का बात हुआ".
उसके कोशिश के बावजूद अनीता की बड़ी गांड उसके हाथ में नहीं समां पायी जिसे वह पकड़ कर उसे रोक सकता था. अनीता थोड़ी आगे बढ़ गयी तो वह उसका उसकी गांड को पकड़ कर नाकाम कोशिश पर मुस्कुरा दी की उसकी बड़ी गांड उसके हाथ के पकड़ में नहीं आयी.
वह आदमी अनीता को मुस्कुराता हुआ नहीं देख सका क्यूंकि वह आगे बढ़ चुकी थी और उसकी पीठ उसके तरफ था. अनीता उसके नाकाम कोशिश पर मुस्कुराती हुयी अपनी गांड की नाटक बढाकर चलने लगी जिसे देखकर वह आदमी अपने लुंड को टिश्यू पेपर से साफ़ करते हुए सहलाने लगा और अनीता की अधनंगी पीठ और मटकती बड़ी गांड को देखकर होंठों पर ज़बान फिरा दिया.