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- Dec 5, 2013
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Episode 37
रिया और ज़ोया बीएड पैर थीं और दोनो ने किसिंग चल रही थी
अचानक दरवाज़ी पैर नॉक हुआ.
ज़ोया. कोण है.
में हूँ.... ये आवाज़ कशी की थी...
रिया नंगी हे उठी और जा क्र दरवाज़ा खोल दिए.
कशी. ये क्या तुम दोनो मेरी बिना हे चालू हो गए.
ज़ोया. तुम लेट थय और में बोर हो रही थी.
कशी. ाचा किआ. तुम दोनो कंटिन्यू करो में फ्रेश हो क्र आता हूँ.
ज़ोया ने रिया को इशारा किआ और रिया ने कशी को बीएड पैर धक्का दे दिए. और ज़ोया उस क कपड़े उतरने लगी.
कशी. आरव मुझे फ्रेश तो हो जाने दो.
रिया इस क बढ़ टीनू एक साथ शावर लाइन गए.
ज़ोया ने कशी की पंत निचे की और रिया ने कशी का लुंड मुँह में ले लिए और चूसने लगी और ज़ोया कशी क फेस पैर बेथ गयी और कशी उसकी छूट को चाटने लगा.
बलराम हाउस.
विशाल प्रिय क घर आया.
विशाल. में गाओं जा रहा हूँ.
प्रिय. में भी तेरी साथ जाओं गई.
अरविन्द अभी घर पैर हे था.
अरविन्द. किसी हो विशाल.
विशाल. में ाचा हूँ जीजू आप किसी हो.
प्रिय. अरविन्द विशाल गाओं जा रहा है में भी उस क साथ चली जाओं कल वापस आ जाओं गई.
अरविन्द. ठीक है गोविन्द को ले क्र जाओ. पब्लिक ट्रांसपोर्ट पैर नहीं जाना.
विशाल. जीजू अगर आपको बुरा न लगी तो कार में ले जाओं. गोविन्द घर पैर काम भी करता हो गए.
अरविन्द. तुम्हें ड्राइविंग आती है.
विशाल. हाँ आती है.
अरविन्द. ठीक है तुम ले जाओ, लकिन कल हर हाल में प्रिय को वापस ले क्र आना.
विशाल. समझ गया जीजू.
अरविन्द. गोविन्द ब्लैक वाली कार की चाबी विशाल को दे दो.
विशाल. चलें प्रिय...
प्रिय. बस 10 मिनट में रेडी हो क्र आती हूँ.
प्रिय और विशाल गाओं क लिए निकल गए.
प्रिय. तू ने ड्राइविंग कब सीखी.
विशाल. मेरा एक दोस्त है कबीर उस ने सिखाया.
प्रिय. ये तो भट अछि बात है.
विशाल. अब बता प्लान क्या है.
प्रिय. हम सीधा हरिलाल क घर जाएं गए
विशाल. लकिन हरिलाल तो मुझ सी भट गुस्सा है.
प्रिय. इसी लिए तो हम पेहली हरिलाल क घर जा रही हैं.
विशाल. प्लान क्या है.
प्रिय. प्लान ये है क............
विशाल. ठीक हे में समझ गया.
प्रिय. अपनी सेक्स लाइफ क बारी में बता.
विशाल. यार ललिता ग और जूही ग क बारी में तो तू जानती हे है. उस क बढ़ कल रात एक डेट हुई मेरी.
प्रिय. वाओ किस क साथ.
विशाल. मेरी एक दोस्त है पल्लवी. हम क्लब में थय और उस ने ज़्यादा पी ली.
में उसको उस क घर चोर्ने गया और वहां सब हो गया.
प्रिय. तू प्यार करता है पल्लवी सी.
विशाल. नहीं यार. में एक किसान का बीटा हूँ और वो एक बिजनेसमैन की बेटी है. मेरी इतनी ओकात नहीं क में उस सी प्यार क्र सकूँ.
प्रिय. ऐसा नहीं सोचते. मुझे देख किसी ने सोचा था क में बलराम हाउस की बहु बनु गई.
विशाल. पल्लवी को एक बीमारी भी है.
प्रिय. किसी बीमारी.
विशाल. उस का बॉडी वेट बढ़ता जा रहा है. और वो कण्ट्रोल नहीं हो रहा.
प्रिय. ओह... ये तो प्रॉब्लम है.
विशाल. पल्लवी की माँ ने मुझे बताया था क डॉक्टर्स ने कहा है क अगर उस्का बॉडीवेइट ऐसी हे बढ़ता रहा तो भट जल्दी उस क जिस्म क ऑर्गन्स काम करना चोर डैन गए.
प्रिय. पल्लवी ये जानती है क्या.
विशाल. नहीं पल्लवी ये नहीं जानती. उस की माँ ने मुझ सी रिक्वेस्ट की थी क पल्लवी की हर बात मानु.
प्रिय. तू ने ाचा किआ.
हम गाओं पोहंच गए और सीधा हरिलाल की हवेली चले गए.
प्रिय. Hi हरी अंकल.
हरिलाल. प्रिय किसी हो बीटा. बलराम केसा है.
प्रिय. भट अचे हैं. आपको भट यद् करते हैं.
हरिलाल. ज़रूर जाओं गए उस सी मिलने.
प्रिय. अंकल में आप सी मिलवाने किसी को ले क्र आई हूँ.
हरिलाल. कोण है.
प्रिय. विशाल अंदर आ जा.
हरिलाल विशाल को देख क्र गुस्सी में आ गया.
हरिलाल. इसी क्यों ले है यहाँ.
प्रिय. हरी अंकल इसी इस लिए ले हूँ क आपको पता चल स्काई क ये बेशक जितना भी पढ़ ले रही गए आपका नौकर हे.
विशाल हरिलाल क पाऊँ में बेथ गया.
विशाल. मुखिया ग दीदी ठीक कह रही है. हूँ तो में आपका नौकर हे.
हरिलाल. पहर मेरी इजाज़त क बगैर शहर क्यों गया.
विशाल हरिलाल क पाऊँ पाकर क्र बोलै.
गलती हो गयी मई बाप. माफ़ क्र दो. लकिन मेरी पढ़ने सी आपका हे फिडा है.
हरिलाल. मेरा फ़ायदा किसी.
विशाल. जब में शहर सी पढ़ क्र यहाँ ाक क्र आप क कहैतुन में खेती करूं गए.
नयी नयी मशीन लगा क्र काम करूं गए.
आपका हे फ़ायदा हो गए.
हरिलाल. कह तो तू ठीक रहा है.
चल ठीक है माफ़ की तुझे. तू प्रिय का भाई है और प्रिय मेरी दोस्त की बहु है. माफ़ किआ.
विशाल. शुकरिअ मुखिया ग.
प्रिय. हरी अंकल हम घर जा रही हैं सुबह वापस जाना है.
हरिलाल. ठीक है बीटा जाओ. और विशाल प्रिय को घर चोर क्र वापस आना तुझ सी कच बात करनी है.
विशाल. ग मुखिया ग.
प्रिय और विशाल ने कार हरिलाल की हवेली पैर हे चोरी और घर की तरफ निकल गए.
ंकितय
रेखा रॉकी क कमरे में उस को बुलाने गयी.
रेखा ने जैसी हे कमरे का दरवाज़ा खोला रॉकी ने उसको कमरे क अंदर खेंचा और दरवाज़ा बंद क्र दिए.
रेखा. क्या क्र रहा है रॉकी.
रॉकी ने रेखा क कन्धुन पैर हाथ रखे और उस को निचे बैठाया और अपनी पंत निचे क्र दिए.
चुसो.... रॉकी अपना लुंड रेखा क सामने निकल क्र बोलै.
रेखा. सब घर पैर हैं.
रॉकी. कोई नहीं आय है. तुम मुँह में लो.
रेखा ने रॉकी का लुंड पकड़ा और मुँह में ले क्र चूसने लगी.
रॉकी ने अपना हाथ रेखा क सर पैर रखा और अपनी कमर हिलने लगा और अपना लुंड रेखा क मुँह में घुसा क्र उसको छोड़ने लगा.
कच दिएर क बढ़ रॉकी ने अपने कपड़े उतर दिए और बीएड क ऊपर चला गया.
रेखा भी बीएड क ऊपर चली गयी.
रॉकी लेत गया और रेखा बीएड क ऊपर रॉकी क लुंड पैर झुक गयी और एक बार पहर रॉकी का लुंड चूसने लगी.
अब रॉकी ने रेखा क बाल पाकर रखे थय और उसका सर हिला क्र अपना लुंड चुसवा रहा था.
15 मिनट लुंड चूसने क बढ़ रॉकी झड़ने लगा.
रॉकी ने सारा माल रेखा क मुँह में हे निकल दिए.
रेखा उठी और खुद को ठीक किआ और कमरे सी बहार चली गयी.
डैड तुझे बुला रही हैं. रेखा कमरे सी बहार जाते हुए बोली.
रॉकी ने भी कपड़े पहने और निचे चला गया.
विलेज.
प्रिय की माँ और बाप ने जब प्रिय और विशाल दोनो को एक साथ देखा तो हरण रह गए.
पद्मा. मेरी बचे.... वो रो पररि.
विशाल और प्रिय ने उसको गल्ले लगाया.
भूषण. तू क्यों आया है. हरिलाल तुझे मर डेल गए.
प्रिय. हरी अंकल ने इसको माफ़ क्र दिए है.
भूषण. सच....
प्रिय. हाँ सच.
भूषण. किसी...
प्रिय. में न्य हरी अंकल को कहा है क विशाल पढ़ क्र वापस आय गए और यहाँ हे काम करे गए.
भूषण. लकिन क्यों प्रिय. में न्य इसको यहाँ सी दूर भेजा था.
प्रिय. आप परेशान मत हो और हम पैर भरोसा रखो.
विशाल. हाँ बाबा आप को परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है.
में वापस जा रहा हूँ हरिलाल ने मुझे बुलाया है.
भूषण. अपना दहन रखना.
हरिलाल की हवेली.
विशाल आया तो हरिलाल हवेली पैर नहीं था.
कामिनी. इधर आ.
विशाल. ग मालकिन.
कामिनी. तू शहर में क्या करता है.
विशाल. मालकिन पढ़ता हूँ. साथ छोटे मोठे काम करता हूँ.
कामिनी. एक बात यद् रखना. तू जितना भी पढ़ ले रही गए तू कुत्ता हे.
विशाल. मालकिन कुत्ता भट वफादार होता है. और मालिक का काम भी करता है.
कामिनी. तू मेरा वफादार है.
विशाल. मालकिन आप आज़मा लो. और मालकिन कुत्ता मालिक को सकूं भी दे सकता है जब मालिक परेशान हो.
कामिनी. तो बता मेरा कुत्ता मेरी लिए क्या क्र सकता है.
विशाल. जो मालकिन बोले गई करूं गए.
कामिनी. और सुकून किसी दे गए.
विशाल. मालकिन पाऊँ दबा दूँ आप क. विशाल ने कामिनी क पाऊँ पैर हाथ रखा और दबाने लगा.
हरिलाल अंदर आया और बोलै.
यही ओकात है तेरी. हमारे पाऊँ में कभी भूलना मत
विशाल. किसी भूल सकता हूँ मालिक...
मेरी जगह तो यहाँ हे है. विशाल अपना हाथ कामिनी क पाऊँ से उसकी टांगून की तरफ लेजाते हुए बोलै.
कामिनी को विशाल का हाथ अपनी टांगून पैर महसूस हो रहा था. लकिन वो हाथ हरिलाल नहीं देख पा रहा था.
कामिनी. बस क्र.
विशाल. मालकिन जब मुखिया ग घर न हों तो बताना अचे सी मस्सगे करूं गए आप क पाऊँ का.
मुखिया ग क सामने अचे सी मस्सगे किआ तो शायद उनको बुरा लगी.
विशाल ने धीमी सी आवाज़ में कामिनी को बोलै जो हरिलाल नहीं सुन पाया.
हरिलाल. में न्य तुझे इस लिए बुलाया था क जल्दी सी पढ़ाई पूरी क्र क वापस आ और काम संभल.
विशाल. मालिक जैसी हे पढ़ाई खत्म हो गई में आ जाओं गए
हरिलाल. अगर पेसुं की ज़रूरत हो तो बताना. तू मेरा पढ़ा लिखा नौकर बन ने वाला है.
विशाल. ग मालिक.
विशाल वापस घर चला गया.
प्रिय. क्यों बुलाया था हरिलाल ने.
विशाल. कह रहा था क अगर पेसय चाहिए हों तो बताना.
प्रिय. हमारा पहला काम तो हो गया. अब बस तुझे हरिलाल को ये यकीन दिलाना है तू उसका वफादार है.
विशाल. बस तू बताती जा क्या करना है और पहर देख.
रिया और ज़ोया बीएड पैर थीं और दोनो ने किसिंग चल रही थी
अचानक दरवाज़ी पैर नॉक हुआ.
ज़ोया. कोण है.
में हूँ.... ये आवाज़ कशी की थी...
रिया नंगी हे उठी और जा क्र दरवाज़ा खोल दिए.
कशी. ये क्या तुम दोनो मेरी बिना हे चालू हो गए.
ज़ोया. तुम लेट थय और में बोर हो रही थी.
कशी. ाचा किआ. तुम दोनो कंटिन्यू करो में फ्रेश हो क्र आता हूँ.
ज़ोया ने रिया को इशारा किआ और रिया ने कशी को बीएड पैर धक्का दे दिए. और ज़ोया उस क कपड़े उतरने लगी.
कशी. आरव मुझे फ्रेश तो हो जाने दो.
रिया इस क बढ़ टीनू एक साथ शावर लाइन गए.
ज़ोया ने कशी की पंत निचे की और रिया ने कशी का लुंड मुँह में ले लिए और चूसने लगी और ज़ोया कशी क फेस पैर बेथ गयी और कशी उसकी छूट को चाटने लगा.
बलराम हाउस.
विशाल प्रिय क घर आया.
विशाल. में गाओं जा रहा हूँ.
प्रिय. में भी तेरी साथ जाओं गई.
अरविन्द अभी घर पैर हे था.
अरविन्द. किसी हो विशाल.
विशाल. में ाचा हूँ जीजू आप किसी हो.
प्रिय. अरविन्द विशाल गाओं जा रहा है में भी उस क साथ चली जाओं कल वापस आ जाओं गई.
अरविन्द. ठीक है गोविन्द को ले क्र जाओ. पब्लिक ट्रांसपोर्ट पैर नहीं जाना.
विशाल. जीजू अगर आपको बुरा न लगी तो कार में ले जाओं. गोविन्द घर पैर काम भी करता हो गए.
अरविन्द. तुम्हें ड्राइविंग आती है.
विशाल. हाँ आती है.
अरविन्द. ठीक है तुम ले जाओ, लकिन कल हर हाल में प्रिय को वापस ले क्र आना.
विशाल. समझ गया जीजू.
अरविन्द. गोविन्द ब्लैक वाली कार की चाबी विशाल को दे दो.
विशाल. चलें प्रिय...
प्रिय. बस 10 मिनट में रेडी हो क्र आती हूँ.
प्रिय और विशाल गाओं क लिए निकल गए.
प्रिय. तू ने ड्राइविंग कब सीखी.
विशाल. मेरा एक दोस्त है कबीर उस ने सिखाया.
प्रिय. ये तो भट अछि बात है.
विशाल. अब बता प्लान क्या है.
प्रिय. हम सीधा हरिलाल क घर जाएं गए
विशाल. लकिन हरिलाल तो मुझ सी भट गुस्सा है.
प्रिय. इसी लिए तो हम पेहली हरिलाल क घर जा रही हैं.
विशाल. प्लान क्या है.
प्रिय. प्लान ये है क............
विशाल. ठीक हे में समझ गया.
प्रिय. अपनी सेक्स लाइफ क बारी में बता.
विशाल. यार ललिता ग और जूही ग क बारी में तो तू जानती हे है. उस क बढ़ कल रात एक डेट हुई मेरी.
प्रिय. वाओ किस क साथ.
विशाल. मेरी एक दोस्त है पल्लवी. हम क्लब में थय और उस ने ज़्यादा पी ली.
में उसको उस क घर चोर्ने गया और वहां सब हो गया.
प्रिय. तू प्यार करता है पल्लवी सी.
विशाल. नहीं यार. में एक किसान का बीटा हूँ और वो एक बिजनेसमैन की बेटी है. मेरी इतनी ओकात नहीं क में उस सी प्यार क्र सकूँ.
प्रिय. ऐसा नहीं सोचते. मुझे देख किसी ने सोचा था क में बलराम हाउस की बहु बनु गई.
विशाल. पल्लवी को एक बीमारी भी है.
प्रिय. किसी बीमारी.
विशाल. उस का बॉडी वेट बढ़ता जा रहा है. और वो कण्ट्रोल नहीं हो रहा.
प्रिय. ओह... ये तो प्रॉब्लम है.
विशाल. पल्लवी की माँ ने मुझे बताया था क डॉक्टर्स ने कहा है क अगर उस्का बॉडीवेइट ऐसी हे बढ़ता रहा तो भट जल्दी उस क जिस्म क ऑर्गन्स काम करना चोर डैन गए.
प्रिय. पल्लवी ये जानती है क्या.
विशाल. नहीं पल्लवी ये नहीं जानती. उस की माँ ने मुझ सी रिक्वेस्ट की थी क पल्लवी की हर बात मानु.
प्रिय. तू ने ाचा किआ.
हम गाओं पोहंच गए और सीधा हरिलाल की हवेली चले गए.
प्रिय. Hi हरी अंकल.
हरिलाल. प्रिय किसी हो बीटा. बलराम केसा है.
प्रिय. भट अचे हैं. आपको भट यद् करते हैं.
हरिलाल. ज़रूर जाओं गए उस सी मिलने.
प्रिय. अंकल में आप सी मिलवाने किसी को ले क्र आई हूँ.
हरिलाल. कोण है.
प्रिय. विशाल अंदर आ जा.
हरिलाल विशाल को देख क्र गुस्सी में आ गया.
हरिलाल. इसी क्यों ले है यहाँ.
प्रिय. हरी अंकल इसी इस लिए ले हूँ क आपको पता चल स्काई क ये बेशक जितना भी पढ़ ले रही गए आपका नौकर हे.
विशाल हरिलाल क पाऊँ में बेथ गया.
विशाल. मुखिया ग दीदी ठीक कह रही है. हूँ तो में आपका नौकर हे.
हरिलाल. पहर मेरी इजाज़त क बगैर शहर क्यों गया.
विशाल हरिलाल क पाऊँ पाकर क्र बोलै.
गलती हो गयी मई बाप. माफ़ क्र दो. लकिन मेरी पढ़ने सी आपका हे फिडा है.
हरिलाल. मेरा फ़ायदा किसी.
विशाल. जब में शहर सी पढ़ क्र यहाँ ाक क्र आप क कहैतुन में खेती करूं गए.
नयी नयी मशीन लगा क्र काम करूं गए.
आपका हे फ़ायदा हो गए.
हरिलाल. कह तो तू ठीक रहा है.
चल ठीक है माफ़ की तुझे. तू प्रिय का भाई है और प्रिय मेरी दोस्त की बहु है. माफ़ किआ.
विशाल. शुकरिअ मुखिया ग.
प्रिय. हरी अंकल हम घर जा रही हैं सुबह वापस जाना है.
हरिलाल. ठीक है बीटा जाओ. और विशाल प्रिय को घर चोर क्र वापस आना तुझ सी कच बात करनी है.
विशाल. ग मुखिया ग.
प्रिय और विशाल ने कार हरिलाल की हवेली पैर हे चोरी और घर की तरफ निकल गए.
ंकितय
रेखा रॉकी क कमरे में उस को बुलाने गयी.
रेखा ने जैसी हे कमरे का दरवाज़ा खोला रॉकी ने उसको कमरे क अंदर खेंचा और दरवाज़ा बंद क्र दिए.
रेखा. क्या क्र रहा है रॉकी.
रॉकी ने रेखा क कन्धुन पैर हाथ रखे और उस को निचे बैठाया और अपनी पंत निचे क्र दिए.
चुसो.... रॉकी अपना लुंड रेखा क सामने निकल क्र बोलै.
रेखा. सब घर पैर हैं.
रॉकी. कोई नहीं आय है. तुम मुँह में लो.
रेखा ने रॉकी का लुंड पकड़ा और मुँह में ले क्र चूसने लगी.
रॉकी ने अपना हाथ रेखा क सर पैर रखा और अपनी कमर हिलने लगा और अपना लुंड रेखा क मुँह में घुसा क्र उसको छोड़ने लगा.
कच दिएर क बढ़ रॉकी ने अपने कपड़े उतर दिए और बीएड क ऊपर चला गया.
रेखा भी बीएड क ऊपर चली गयी.
रॉकी लेत गया और रेखा बीएड क ऊपर रॉकी क लुंड पैर झुक गयी और एक बार पहर रॉकी का लुंड चूसने लगी.
अब रॉकी ने रेखा क बाल पाकर रखे थय और उसका सर हिला क्र अपना लुंड चुसवा रहा था.
15 मिनट लुंड चूसने क बढ़ रॉकी झड़ने लगा.
रॉकी ने सारा माल रेखा क मुँह में हे निकल दिए.
रेखा उठी और खुद को ठीक किआ और कमरे सी बहार चली गयी.
डैड तुझे बुला रही हैं. रेखा कमरे सी बहार जाते हुए बोली.
रॉकी ने भी कपड़े पहने और निचे चला गया.
विलेज.
प्रिय की माँ और बाप ने जब प्रिय और विशाल दोनो को एक साथ देखा तो हरण रह गए.
पद्मा. मेरी बचे.... वो रो पररि.
विशाल और प्रिय ने उसको गल्ले लगाया.
भूषण. तू क्यों आया है. हरिलाल तुझे मर डेल गए.
प्रिय. हरी अंकल ने इसको माफ़ क्र दिए है.
भूषण. सच....
प्रिय. हाँ सच.
भूषण. किसी...
प्रिय. में न्य हरी अंकल को कहा है क विशाल पढ़ क्र वापस आय गए और यहाँ हे काम करे गए.
भूषण. लकिन क्यों प्रिय. में न्य इसको यहाँ सी दूर भेजा था.
प्रिय. आप परेशान मत हो और हम पैर भरोसा रखो.
विशाल. हाँ बाबा आप को परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है.
में वापस जा रहा हूँ हरिलाल ने मुझे बुलाया है.
भूषण. अपना दहन रखना.
हरिलाल की हवेली.
विशाल आया तो हरिलाल हवेली पैर नहीं था.
कामिनी. इधर आ.
विशाल. ग मालकिन.
कामिनी. तू शहर में क्या करता है.
विशाल. मालकिन पढ़ता हूँ. साथ छोटे मोठे काम करता हूँ.
कामिनी. एक बात यद् रखना. तू जितना भी पढ़ ले रही गए तू कुत्ता हे.
विशाल. मालकिन कुत्ता भट वफादार होता है. और मालिक का काम भी करता है.
कामिनी. तू मेरा वफादार है.
विशाल. मालकिन आप आज़मा लो. और मालकिन कुत्ता मालिक को सकूं भी दे सकता है जब मालिक परेशान हो.
कामिनी. तो बता मेरा कुत्ता मेरी लिए क्या क्र सकता है.
विशाल. जो मालकिन बोले गई करूं गए.
कामिनी. और सुकून किसी दे गए.
विशाल. मालकिन पाऊँ दबा दूँ आप क. विशाल ने कामिनी क पाऊँ पैर हाथ रखा और दबाने लगा.
हरिलाल अंदर आया और बोलै.
यही ओकात है तेरी. हमारे पाऊँ में कभी भूलना मत
विशाल. किसी भूल सकता हूँ मालिक...
मेरी जगह तो यहाँ हे है. विशाल अपना हाथ कामिनी क पाऊँ से उसकी टांगून की तरफ लेजाते हुए बोलै.
कामिनी को विशाल का हाथ अपनी टांगून पैर महसूस हो रहा था. लकिन वो हाथ हरिलाल नहीं देख पा रहा था.
कामिनी. बस क्र.
विशाल. मालकिन जब मुखिया ग घर न हों तो बताना अचे सी मस्सगे करूं गए आप क पाऊँ का.
मुखिया ग क सामने अचे सी मस्सगे किआ तो शायद उनको बुरा लगी.
विशाल ने धीमी सी आवाज़ में कामिनी को बोलै जो हरिलाल नहीं सुन पाया.
हरिलाल. में न्य तुझे इस लिए बुलाया था क जल्दी सी पढ़ाई पूरी क्र क वापस आ और काम संभल.
विशाल. मालिक जैसी हे पढ़ाई खत्म हो गई में आ जाओं गए
हरिलाल. अगर पेसुं की ज़रूरत हो तो बताना. तू मेरा पढ़ा लिखा नौकर बन ने वाला है.
विशाल. ग मालिक.
विशाल वापस घर चला गया.
प्रिय. क्यों बुलाया था हरिलाल ने.
विशाल. कह रहा था क अगर पेसय चाहिए हों तो बताना.
प्रिय. हमारा पहला काम तो हो गया. अब बस तुझे हरिलाल को ये यकीन दिलाना है तू उसका वफादार है.
विशाल. बस तू बताती जा क्या करना है और पहर देख.