Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम) - Page 4 - SexBaba
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Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम)

Update 022 -

कुछ देर तक यूँ ही सोचने के बाद मेरे दिल ने मुझे जो जबाब दिया वही जबाब मैं श्रेया को देते हुए बोली

निशा- रवि के लिए... और चूँकि अब रवि और रश्मि दोस्त हैं और रश्मि मेरी भी दोस्त है तो उसके लिए। इसके अलाबा तुम सभी लडकियों के लिए।

श्रेया- मतलब

निशा- मतलब यह है कि मेरा मानना है कि जैसे लडकों को हर काम करने की आजादी है, बैसे ही हम लडकियों को भी आजादी मिलनी चाहिए। अगर कोई लड़का एक ही समय में दो लडकियों को चीट कर सकता है, तो लडकियों को भी यह अधिकार क्यों नहीं मिलता। लोग हमेशा लडकियों को ही गलत क्यों समझते हैं। लडकियाँ क्यों अपनी इज्जत के लिए डरतीं है। अरे जब लडकों को मजे लेने का अधिकार है, तो लडकियों को भी होना चाहिए ना। पर जब कोई लड़की ऐसा कुछ करती है, तो गगन जैसे लडके उसका फायदा उठाकर उसे ब्लैकमेल करते हैं और उसे समाज का डर दिखाकर दबाने की कोशिश करते हैं।

मेरी बात सुनकर वहाँ बैठी एक लड़की बोली

लड़की- अरे वाह तुम हमारी मदद करना चाहती हो या हमें गलत रास्ते पर ले जाना चाहती हो

निशा- मैं किसी को भी कोई गलत रास्ते पर नहीं ले जा रही और ना ही समाज को बदल रही हूँ। मैं बस सबकी सोच के बारे में बता रही हूँ। मैं चाहती हूँ कि हर लड़की के अंदर यह बात हो कि अगर वो किसी के साथ फिजीकल हुई है, तो उसने कुछ भी गलत नहीं किया। यह सब तो बस नैचुरल है, इसमें डरने या शर्माने जैसे कोई बात नहीं है। जैसे किसी लडके को कोई सुंदर लड़की देखकर एक अट्रेक्शन फील होता है, बैसे हम लडकियों को भी हैंडसम लडकों को देखकर अट्रैक्शन होता है। जैसे कोई लड़का किसी लड़की को पटाखा, बाम्ब, हॉट, सैक्सी जैसे कमेंटस करता है, तो बैसे ही हम लडकियों को भी लडकों के ऊपर कमेंटस करने का मन करता है। तुम लोगों का तो पता नहीं पर मैं जरूर अपने कॉलेज में हैंडसम लडके को देखकर सीटी मार देती हूँ।

इतना बोलकर मैने सच में सीटी बजा दी। जिसे सुनकर सभी लोग हंसने लगे। तभी रश्मि बोली

रश्मि- तो पक्का कॉलेज के सभी लडके तुम्हें गुण्डी बुलाते होंगे

निशा- बुलाते रहें…. किसे फर्क पडता है। देखो जब तक हम डरेंगे, तब तक दूसरे लोग हमें डराऐंगे। लेकिन जब हम खुलकर सामना करेंगे तो वो लोग डर कर भाग जाऐंगे।

रश्मि- हाँ हाँ हम समझ गये कि तुम यह सब हम सभी लडकियों के लिए कर रही हो। बस इतना ही ना या कोई और बात है।

निशा- देखो मैं शायद इन सबमें बिल्कुल भी इन्बॉल्ब नहीं होती, अगर गगन भी मेरे साथ वो सब करने की कोशिश नहीं करता

मेरी बात सुनकर बाकि लडकियों के साथ साथ रवि भी हैरान था। क्योंकि मैंने इसके बारे में उसे कुछ नहीं बताया था।

निशा- कुछ दिनों पहले शाम को मैं किसी काम से जा रही थी, तभी अचानक गगन मुझे मिला वो मुझे एक बार में ले गया था। बैसे तो मैं उसके साथ जाना नहीं चाहती थी पर वो कुछ दिनों से लगातार मुझे मैसेज कॉल बगैरह कर रहा था। उस सबके बारे में रवि जानता है। इसलिए मैंने सोचा कि उसके इरादे जानने के लिए उसके साथ जाकर देखना चाहिए। बार में उसने धोखे से मेरी ड्रिंक में नशे की गोलियाँ डाल दी। जो मैंने देख ली थीं। इसलिए मैंने उस ड्रिंक को उसके ऊपर ही गिरा दिया और ऐसे दिखाया कि मुझ पर गलती से गिर गया है। फिर जब वो बॉथरूम में कपडे साफ करने गया तो मैने उसके मोबाईल में एक स्पाईबेयर इंस्टॉल कर दिया और वहाँ से निकल गई। फिर अपने होटल पहूँचकर जब मैने उसके मोबाईल को हैक किया तो मुझे सब कुछ पता चल गया।

मेरी बात सुनकर अचानक से श्रेया ने कहा

श्रेया- ओह माई गॉड….. इसका मतलब है कि तुमने उसका मोबाईल हैक कर लिया है। जिस कारण तुम इतना सब कुछ जानती हो।

श्रेया की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए कहा

निशा- जी हाँ मिस श्रेया

मेरी बात सुनकर श्रेया थोडा हैरान होते हुए बोली

श्रेया- पर यह इम्पॉसिबल है... किसी के भी मोबाईल को पूरी तरह से हैक करना इतना आसान नहीं है। यह काम तो बस कुछ गिनती के लोग ही कर सकते हैं।

श्रेया की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए उसे बडे ध्यान से देखा और बोली

निशा- ओह… तो इसका मतलब है कि तुम भी कम्प्यूटर साईंस में इंट्रेस्ट रखती हो। वैरी गुड… बैसे यह काफी मजेदार काम है। पर हैकिंग बगैरह करने में जरा साबधान रहना, क्योंकि यह इल्लीगल है। एक मिनट तुम्हारे हाथ पर यह टैटू...

मैं श्रेया से बात ही कर रही थी कि तभी मेरी नजर श्रेया के बाऐं हाथ की कलाई पर बने एक टैटू पर गई जो एक हार्ट बीट का सिंबल था। उस टैटू को देखकर मुझे कुछ याद आया और मैं उसके पास जाकर अपना हाथ आगे बडाते हुए बोली

निशा- हाय मिस हार्ट क्वीन… नाईस टू मूट यू……..

मेरी इस हरकत से एक पल के लिए तो श्रेया पूरी तरह से हैरान रह गई पर फिर जल्द ही वो अपने आप को कंट्रोल करके बोली

श्रेया- त तुम मेरे इस नाम के बारे में कैसे जानती हो और आखिर तुम हो कौन…..

मैंने श्रेया के सबाल को पूरी तरह से इग्नोर करते हुए मुस्कुराकर कहा

निशा- लगता है अपनी मास्टर से मिलकर तुम्हें बिल्कुल भी खुशी नहीं हुई

इतना बोलकर मैंने अपनी गर्दन के पीछे बने एक ड्रेगन के टैटू को उसे दिखाया, तो बो हैरान होते हुए बोली

श्रेया- ड ड्रेगन हार्ट

यह नाम सुनकर बाकि लडकियों के साथ साथ रवि भी बुरी तरह से चौंक गया और बोला

रवि- ड्रेगन हार्ट… वो फेमस हैकर जिसने चायना की नाक में दम किया हुआ है और जो कई बार हमारे देश को साईबर अटैक से बचा चुकी है। क्या तुम उसी ड्रैगन हार्ट की बात कर रही हो श्रेया

रवि की बात सुनकर श्रेया ने थोडा चिढते हुए कहा

श्रेया- हाँ डफर.. मैं उसी की बात कर रही हूँ

लेकिन अपनी बात खत्म करते ही श्रेया अचानक से खुश होते हुए खडी हो गई और मेरे गले गलते हुए बोली।

श्रेया - ओह माय गॉड मुझे तो यकीन नहीं हो रहा कि कभी अपने मास्टर से मिलूँगी। पर तुम तो एक लड़की हो। मैंने तो सोचा था कि ड्रेगन हार्ट कोई लड़का होगा, वो भी 35-40 साल का

निशा- 35-40 साल के लडके नहीं होते डफर… वो आदमी होते हैं।

मेरी बात सुनकर श्रेया लापरवाही से बोली

श्रेया- जो भी हो.. पर मुझे तो यकीन नहीं हो रहा कि द ग्रेट ड्रेगन हार्ट आज मेरे सामने खडी हुई है। तुम तो बहुत ज्यादा खूबसूरत हो

इतना बोलकर श्रेया ने तुरंत मेरे गाल पर किस कर लिया, जिसे देखकर रवि बुरी तरह से भडक गया और हमारे पास आकर श्रेया को अलग करते हुए बोला

रवि- एक मिनट… एक मिटन यह सब आखिर चल क्या रहा है। श्रेया तुम ऐसे कैसे मेरी बेस्ट फ्रेंड को किस कर सकती हो…. वो पूरी तरह से स्ट्रेट है… लैस्वीयन नहीं।

रवि की बात सुनकर श्रेया थोडा चिढकर बोली

श्रेया- डफर मैं भी स्ट्रेट हूँ… तभी तो यहाँ तुम लोगों के साथ हूँ, खैर छोडो तुम नहीं समझोगे

रवि थोडा कन्फ्यूज होते हुए बोला

रवि- अब कुछ समझाओगी… तो समझ में आये ना। बैसे भी तुम दोनों आज पहली बार मिली हो, लेकिन ऐसे गले मिल रही हो जैसे वर्षों की बिछडी दोस्त हो, और तुम एक दूसरे को हार्ट क्वीन ड्रेगन हार्ट इन सब नामों से क्यों बुला रही हो

श्रेया- डफर तेरी हॉफ गर्लफ्रेंड मेरी बहुत पुरानी ऑनलाईन फ्रेंड और मेरी गुरु है। हम दोनों की शर्त लगी थी कि अगर कभी आमने सामने आये तो कौन एक दूसरे को पहले पहचानेगा। शर्त हारने बाला दूसरे को सबके सामने किस करेगा। बस इतनी सी बात है।

रवि- ऐसे कैसे दोस्ती की… जब तुम्हें पता ही नहीं कि सामने बाल लड़का है या लड़की और सपना तुम्हारी गुरु है, इससे तुम्हारा क्या मतलब है।

श्रेया- रवि तुम पक्का डफर ही हो। इसके सामने बेबकूफों जैसे सबाल पूछकर अपनी इज्जत का कचरा क्यों कर रहे हो। मेरी ऑनलाईन आई डी क्वीन हार्ट है। अब मेरी आई डी में क्वीन शब्द है तो उससे क्लीयर होता है कि में लड़की हूँ, पर सपना की आई डी ड्रैगन हार्ट है। इसमें जैंडर क्लीयर नहीं हो रहा है। ऑनलाईन फ्रेंड होने के कारण हम लोग कभी एक दूसरे से मिले नहीं हैं और ना ही हमारी कभी कॉल पर बात हुई है। रही बात गुरु की तो इसने मुझे हैकिंग करना सिखाया है। इसलिए यह मेरी गरू भी है।

श्रेया की बात सुनकर रवि वोला

रवि- ओह तो ये बात है। मतलब सपना वो ड्रेगन हार्ट नहीं है, जिसके बारे में मैं अभी बोल रहा था

श्रेया- डफर ऐ वही है

अब चौंकने की बारी रवि की थी। वो बडी मुश्किल से अपने इमोशंन को कंट्रोल करते हुए बोला

रवि- क्या.... सपना ही वो फेमस हैकर द ड्रैगन हार्ट है। पर इसने तो मुझे अभी तक इस बारे में कुछ भी नहीं बताया

श्रेया- यह बात क्या ढोल नगाडे के साथ बताने की है। बो तो हमारी शर्त के कारण सपना ने एक्साईटेड होकर मेरा नाम ले लिया और अपने बारे में भी बता दिया। बर्ना सारी जिंदगी तुम्हें इस बारे में कुछ भी पता नहीं चलता

श्रेया की बात सुनकर रवि मुझसे बोला

रवि- मतलब तुम सारी सारी रात जागकर यह सब फालतू के काम करती हो और मुझसे बोल रही थी कि तुम वर्क फ्राम होम करती हो

निशा- मैं रोज रोज थोडे ही यह सब करती फिरूंगी। रात में मैं बाकई में अपनी जॉब का काम करती हूँ।

मेरे इतना बोलते ही एक बार फिर श्रेया ने मुझे हग कर लिया, तो रवि फिर से उसे मुझसे अलग करने की कोशिश करते हुए बोला

रवि- यह तुम आखिर कर क्या रही हो। बार बार इसे हग क्यों कर रही हो। अभी अभी तो तुम बोल रही थी कि तुम स्ट्रेट हो, तो फिर क्या है यह सब

श्रेया- हूँ तो मैं स्ट्रेट ही… पर इसके लिए तो लैस्वियन बनने के लिए भी तैयार हूँ, और तुम हम दोनों के बीच क्यों आ रहे हो बार बार, यह मेरी तुमसे पहले की दोस्त है, तुम तो अभी कुछ दिन पहले ही दोस्त बने हो। इसलिए हम दोनों के बीच आने की कोशिश मत करो

इतना बोलकर श्रेया ने एक बार फिर मेरे गालों पर किस कर दिया। जिसके बाद हम दोनों के साथ साथ बाकी लडकियाँ भी जोर जोर से हंसने लगीं। श्रेया की इन हरकतों से रवि काफी ज्यादा चिढ रहा था। पर बेचारा कुछ कर भी नहीं सकता था। कुछ देर बाद जब सब शांत हुए तो श्रेया बोली

श्रेया- सॉरी रवि मैं तो बस मजाक कर रही थी। बैसे हाँ एक जरूरी बात मुझे तुम सबसे कहनी है। अब जब हम दोनों का राज तुम सबको पता चल ही गया है। तो मैं उम्मीद करती हूँ कि हम दोनों के बारे में तुम लोग किसी को कुछ नहीं बताओगे। क्योंकि एक हैकर की लाईफ कभी भी आसान नहीं होती है। हमारी सबसे बडी ताकत हमारी पहचान ही होती है। अगर सबको हमारी असली पहचान पता चल जाए, तो हमें बहुत ज्यादा प्राब्लम हो सकती है।

श्रेया की बात सुनकर पूजा बोली

पूजा- तुम लोग चिंता मत करो, हम किसी को कुछ नहीं बताऐंगे। बैसे भी हम सब अब दोस्त हैं, तो दोस्ती के लिए इतना तो बनता ही है।

पूजा की बात खत्म होते ही रश्मि थोडा सीरियस होते हुए बोली

रश्मि- अगर सबका हो गया हो, तो क्य अब मैन टॉपिक पर आ जाऐं।

निशा- हाँ हो गया बाबा। बैसे भी जो हुआ अच्छा ही हुआ, क्योंकि यह शायद हमारा एक दूसरे पर विश्वास बडाने के लिए जरूरी था। मुझे अभी अभी पता चला है कि श्रेया मेरी बहुत पूरानी दोस्त है, जिसे मैंने अभी तक देखा भी नहीं था। अगर देखा होता तो रवि की हॉफ गर्लफ्रेंड बनने से अच्छा मैं श्रेया की फुल गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड बन जाती तो कितना मजा आया। यार श्रेया तू कितनी हॉट है… अब तो मेरा भी मन तुझे किस करने का कर रहा है।

इससे पहले मैं श्रेया को किस करती, रवि हमारे बीच में आ गया। और बोला

रवि- मैडम यह सब बाद में… पहले अपने टॉपिक पर बात कर लें। बाकि लोगों को भी जाना है

रवि की बात सुनकर सपना शरारती अंदाज में बोली

श्रेया- ओके सपना… यहाँ से फ्री होकर तुम मेरे साथ मेरे घर चलना, वहाँ हम बंद कमरे में आपस में ढेर सारी बातें करेंगे।

श्रेया की बात सुनकर रवि एक बार फिरसे चिढते हुए बोला

रवि- वो सीधा यहाँ से अपने होटल रूम में जाऐगी। अगर तुम्हें कुछ बात करनी है तो कल दिन में ही होगी, वो भी मेरे सामने… तुम उससे अकेले में कोई बात नहीं कर सकती हो। क्योंकि मुझे तुमपर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है। पता नहीं तुम अकेले में क्या क्या करो उसके साथ

सभी लोगों को साफ साफ समझ आ रहा था कि मेरी और श्रेया के एक दूसरे के पास जाने से रवि को काफी चिढ हो रही थी। पर हम दोनों तो बस रवि के साथ मस्ती कर रहे थे। जिस कारण रवि की हरकत पर एक बार फिर सभी लोग हंसने लगे। सबके शांत होते ही मैं बोली

निशा- अरे यार चिल रवि…. हम लोग तो बस आपस में मस्ती कर रहे हैं। हाँ तो मैं कह रही थी कि श्रेया मेरी पहले से ही दोस्त है और रवि भी मेरा बेस्ट फ्रेंड है, इसके अलावा अब तो रश्मि भी मेरी अच्छी दोस्त है। साथ ही साथ पूजा और रिया से भी मेरी दोस्ती हो ही गई है। इसलिए बाकी बाचे तुम लोग भी आज से मेरे अच्छे दोस्त हो। अब मेरे ख्याल से किसी को इस बात पर कोई शक नहीं होना चाहिए कि मैं क्यों तुम सबकी हेल्प कर रही हूँ। रही बात कि मुझे यह सब कैसे पता और ये बीडियो मेरे पास कैसे आये तो यह सब भी अब तक तुम सबको क्लीयर हो गया होगा। मैंने बस गगन का मोबाईल हैक किया है। और हाँ गगन के बारे में मैंने कुछ और भी पता किया है।

इसके बाद मैंने गगन की सारी डिटेल उन सबको बता दी। जिसे सुनकर सब लोग हैरान थे। सिवाय रवि और श्रेया के, क्योंकि वो लोग पहले से ही यह सब जानते थे।

कहानी जारी ....
 
Update 023 -

गगन के बारे में सब कुछ बताने के बाद जब मैं चुप हुई तो रिया बोली

रिया- सपना जब तुमने गगन का मोबाईल हैक कर ही लिया है, तो तुमने उसके मोबाईल से हमारे बीडियो डिलीट क्यों नहीं किये। अगर तुम वो बीडियो डिलीट कर देती, तो इस मीटिंग की जरूरत ही नहीं होती और हम लोग आजाद होते।

निशा- हाँ मैं ऐसा कर सकती थी और अब भी कर सकती हूँ। पर मैने नहीं किया तो उसके पीछे कोई ना कोई कारण तो होगा ही ना। सबसे पहला कारण तो यह है कि मुझे नहीं पता कि उसने उन बीडियो की कोई कॉपी तैयार की है या नहीं। क्योंकि अगर उसकी जगह मैं होती तो उन सभी बीडियो को अपने कम्प्यूटर में सेब करती या फिर पैन ड्राईब बगैरह में कॉपी करके रखती

पूजा- मुझे पूरा यकीन है कि गगन के पास उन बीडियो की कोई कॉपी नहीं है। क्योंकि वो इतना टेक फ्रेंडली नहीं है और ना ही उसे कम्प्यूटर चलाना आता है। इसके अलाबा वो अपने गलत कामों में किसी दोस्त को भी सामिल नहीं करता है। वो सारे काम अकेले ही करना पसंद करता है। मैं यह सब इतने यकीन के साथ इसलिए कह रही हूँ। क्योंकि मैंने और रिया ने जितना उसके साथ समय बिताया है। शायद ही किसी दूसरे ने बिताया होगा।

निशा- चलो हम तुम्हारी बात को ही सही मानकर चलते हैं। तो अब बात आती है दूसरे कारण की और वो कारण यह है कि अगर मैं यहाँ तुम सबको नहीं बुलाती और यह सब नहीं बताती, तो तुम लोगों को पता कैसे चलता कि अब तुम लोगों के बीडियो और फोटो उसके पास नहीं है। और अगर मैं उन्हें डिलीट करने के बाद तुमसे कहती तो तुम लोग शायद मेरी बात पर यकीन भी नहीं करते। और अगर यकीन करते भी, तो ज्यादातर लोग अपना अपना पल्ला झाड कर अलग हो जाते, और गगन को सबक सिखाने में हमारा साथ नहीं देते और ना ही मुझे तुम्हारी पर्सनल प्राव्लम पता चलती और ना उसका समाधान निकलता।

मेरी बात सही थी। इसलिए सब मेरी बात पर एग्री हो गए। फिर मैं बोली

निशा- तीसरा और सबसे आखिरी कारण, और वो यह है कि जब तुम लोग इतने दिनों से ब्लैकमेल होकर गगन के इशारों पर नाच रही हो, तो भला मैं क्यों फ्री में तुम लोगों की मदद करूँ

मेरी इस बात पर सभी की आँखें हैरानी में फटी रह गई। वो सभी लोग जो मुझे अब तक अपना अच्छा दोस्त मान चुके थे, अब वो मेरी बात सुनकर मुझे हैरानी से देख रहे थे। श्रेया, रश्मि और रवि को तो जैसे मेरी बात पर यकीन ही नहीं हो रहा था कि मैं ऐसा कुछ भी बोल सकती हूँ। पर मैंने उनकी हैरानी पर कोई ध्यान नहीं दिया और बोली

निशा- तुम सबको गगन से हमेशा के लिए आजादी की कीमत तो देनी ही होगी। बोलो मंजूर है या नहीं

मेरी बात सुनकर सभी लडकियाँ आपस में बातें करने लगीं और रवि मेरे पास आकर गुस्से में बोला

रवि- यह सब क्या है सपना। तुम तो बोल रही थी कि तुम सबकी हेल्प करना चाहती हो। लेकिन तुम तो उन्हें ब्लैकमेल करके पैसे माँग रही हो। फिर तुममें और गगन में क्या अंतर है। मुझे नहीं पता था कि तुम ऐसी हो। अगर पता होता तो मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं देता और ना ही कभी तुमसे दोस्ती करता।

रवि की बात सुनकर मैं उसे समझाते हुए बोली

निशा- रवि प्लीज तुम कुछ देर शांत रहो। हम इस बारे में बाद में डिस्कस करेंगे।

इतना बोलकर मैं फिर से सभी लडकियों को ध्यान से देखने लगी। रश्मि का चेहरा तो डर के कारण पीला पड चुका था। क्योंकि वो एक मिडिल क्लास फैमिली से थी और ब्लैकमेलिंग के पैसे देने की स्थिती में तो बिल्कुल भी नहीं थी। कुछ देर आपस में बात करने के बाद श्रेया बोली

श्रेया- जितना मैं अपनी दोस्त ड्रेगन हार्ट को जानती हूँ, वो किसी की मजबूरी का कभी फायदा नहीं उठाती है। पर इस समय सपना के मन में क्या चल रहा है, मैं नहीं जानती। लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि तुम जो भी कर रही हो, वो शायद हम सबके लिए सही है। बैसे तो हम में से कुछ लडकियों ने पहले ही गगन को पैसे देकर सारा मैटर खत्म कर लिया था। जिसके बाद गगन ने कभी दोबारा हमसे कांटेक्ट नहीं किया है। पर अब जब हमें पता चल गया है कि उसके पास अभी भी हमारे बीडियो हैं, तो हम कोई रिस्क नहीं ले सकते। मैं यह भी जानती हूँ कि कुछ लडकियां पैसे नहीं दे सकती। इसलिए तुम सभी के लिए एक साथ कीमत बोल दो। हम 3-4 लडकियाँ जो पैसे दे सकती हैँ मिलकर पैसे दे देंगी। बाकि लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। हमें बाकी लडकियों के ब्लैकमेल होने के बारे में पता नहीं था, बर्ना हम उनकी हेल्प पहले ही कर देते।

श्रेया की बात सुनकर मैंने अपने बैग में से कुछ पेपर स्लिप निकाली और सबको दो दो स्लिप दे दी, यहाँ तक कि रवि को भी दो स्लिप देने के बाद मैंने अपने पास भी दो स्लिप रख लीं, और एक बड़ा सा लिफाफा निकालकर टेबिल पर रखते हुए बोली

निशा- तुम सब हैरान हो ना कि मैं तुमसे पैसे माँग रही हूँ। शायद तुम मुझे भी गगन की कैटेगिरी में रख रही होगी। केवल श्रेया को छोडकर तुममें से हर कोई मेरी बात सुनकर मुझे गलत समझने लगा है। यहाँ तक कि रवि भी मुझे गलत समझ रहा है। पर मुझे इससे कोई फर्क नहीं पडता। मायने केवल यह रखता है कि हम एक दूसरे पर कितना यकीन करते हैं। खैर छोडो यह सब, पर एक बात बताओ किसी ने अब तक यह क्यों नहीं पूछा कि मैंने यह पेपर स्लिप तुम सबको क्यों दी हैं।

फिर मैं गुस्से में रवि को घूरते हुए बोली

निशा- रवि कम से कम तुम ही पूछ लेते। क्योंकि बाकि लोगों का तो समझ आता है कि मैं उन्हें ब्लैकमेल कर रही हूँ। पर तुम्हें तो नहीं किया ना, तुम्हारा तो इन सबसे कुछ लेना देना भी नहीं है।

असल में रवि की बातों से मैं थोडा हर्ट हो गई थी। मुझे लगा था कि रवि तो कम से कम मुझे समझेगा, पर उसने जो शब्द कहे बो मुझे बुरी तरह चुभ गए थे। मेरी बात सुनकर श्रेया को छोडकर बाकी सबने अपना चेहरा शर्म से झुका लिया। शायद श्रेया समझ गई थी कि मैं अब आगे क्या कहना चाहती हूँ और क्या करने बाली हूँ। मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि पहली ही मुलाकात में वो मुझे इतनी अच्छी तरह समझने लगेगी। पर फिर मुझे याद आया कि पिछले दो सालों से श्रेया मेरी सबसे अच्छी दोस्त रही है। हम दोनों घंटों एक दूसरे से चैटिंग करते थे, बस एक दूसके के फैमिली बैकग्राऊंड के बारे में हमने कभी बात नहीं की थी। सबको खामोश देखकर मैं बोली

निशा- ज्यादा परेशना होने की जरूरत नहीं है। मुझे तुम लोगों से कुछ नहीं चाहिए। अगर चाहिए होता तो यह बीडियो तुम्हारे मोबाईल पर भेजकर एक एक करके पहले ही पैसे माँग लिए होते और किसी को कुछ पता भी नहीं चलता। पर फिर भी तुम सभी को कीमत तो देनी होगी, लेकिन मुझे नहीं बल्कि अपनी उन तीन क्लासमेट्स की फैमिली को कीमत देनी होगी। जिन्होंने गगन की ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर सुसाईड़ कर लिया। मैंने तुम सबको दो दो पेपर स्लिप दी हैं। तुम सभी लोग अपने अपने दिल से जो कुछ भी उन तीनों लडकियों की फैमली को देना चाहो, वो इन पेपर्स स्लिप पर लिख दो। हम एक एक पेपर स्लिप इस लिफाफे में रखेंगे और दूसरी तुम्हारे पास रहेगी। जो तुम्हें याद दिलाएगी कि तुम्हें किसी के लिए कुछ करना है।

इतना बोलने के बाद मैंने एक नजर सब पर डाली और दोबारा बोलना शुरू किया

निशा- गगन को सबक सिखाने के बाद हम सभी लोग इस लिफाफे को खोलकर सबकी स्लिप के अनुसार पैसे कलेक्ट करके उन तीनों लडकियों की फैमिली को दे देंगे। किसी पर कोई दबाब नहीं है। जिसकी जितनी क्षमता हो वो लिख सकता है और एक दूसरे को बताने की भी कोई जरूरत भी नहीं है। हमारे यह सब करने से बो बापिस तो नहीं आयेंगी, पर हम उनकी फैमिली को कुछ सपोर्ट तो कर ही सकते हैं।

इतना बोलकर मैंने उन सभी को सुसाईड करने बाली तीनों लडकियों की फैमिली के बारे में बताया। जिसे सुनकर सबकी आँखों में आँशू आ गए थे। पर यह पता नहीं की बो मुझे गलत समझने के कारण पश्चाताप के आंशू थे, या फिर अपनी उन तीनो फ्रेंडस और उनकी फैमिली के लिए थे। सब लोग मेरी बात सुनने के बाद इमोशनल होकर खडे थे। इसलिए मैंने ही सबसे पहले अपनी दोनों स्लिप पर कुछ लिखा और एक अपने पर्स में रखने के बाद दूसरी स्लिप को फोल्ड करके उसपर अपना नाम लिखकर लिफाफे में डाल दिया।

मेरा ऐसा करते ही श्रेया ने भी अपनी स्लीप उस लिफाफे में अपना नाम लिख कर डाल दी और दूसरी अपने पर्स में रख ली। जिसके बाद एक एक करके सभी लोगों ने वही किया। जब सबने अपनी अपनी स्लिप लिफाफे में डाल दी तो मैंने उसे गम की सहायता से चिपका दिया और उस लिफाफे को रवि को देते हुए कहा।

निशा- इसे संभाल कर रखना। जब यह सब खत्म हो जाऐगा तो हम इसे खोलकर उन तीनों लडकियों की फैमिली की हेल्प करने जाऐंगे।

मेरी बात सुनकर रवि को आज पूरे दिन की मेरी हरकतें याद आने लगी थी। आखिरकार उसे समझ में आ ही गया था कि क्यों मैं उन तीनों लडकियों के घर पर गई थी। उसे अपने कहे शब्दों पर और मुझपर शक करने के कारण शर्म आ रही थी। इसलिए वो मेरे पास आकर बोला

रवि- सॉरी सपना मैं वो सब कहना नहीं चाहता था। पर पता नहीं कैसे

रवि की बात सुनकर मैंने उससे कहा

निशा- कोई बात नहीं रवि। मुझे तुम्हारी बात को कोई बुरा नहीं लगा। तुम्हें पता है कि बुरा कब लगता है। जब हम किसी से कोई उम्मीद करते हैं। मैंने अपनी जिंदगी में एक बात सीखी है कि किसी से कोई उम्मीद मत रखो। शायद इसीलिए मुझे तुम्हारी बात का कोई बुरा नहीं लगा। इसलिए तुम टेंशन मत लो, तुमने जो कहा था, उससे हमारी दोस्ती पर कोई असर नहीं पडेगा। हम हमेशा अच्छे दोस्त बन कर रहेंगे। और हाँ अब शायद तुम्हें मेरी बात समझ आ गई होगी कि मैंने क्यों कहा था कि हमारा आगे चलकर कोई फ्यूचर नहीं है। क्योंकि हम दोनों के ही नेचर एक दूसरे से बहुत अलग हैं। इसलिए हम अच्छे दोस्त तो हो सकते हैं पर लवर्स नहीं हो सकते। सो जस्ट चिल यार

मैंने यह सब मुस्कुराकर कहा था पर शायद रवि को मेरी बातों और शब्दों से यह एहसास हो गया था कि शब्दों की चुभन कितना दर्द देती है। बाकी लडकियाँ भी मुझे गलत समझने के लिए मन ही मन खुद को कोस रहीं थीं। पर उनमें से किसी की कोई गलती नहीं थी। वो सब अपने पुराने एक्सपीरियंस की बजह से ही मुझ पर शक कर रहीं थी। मैं माहौल को थोडा हल्का फुल्का बनाने के लिए श्रेया के पास गई और उसके गाल पर किस करते हुए बोली

निशा- थैंक्यू मेरी जान... मुझे समझने के लिए...

मेरी इस हरकत पर श्रेया मुस्कुराकर बोली

श्रेया- अगर अगली बार तुमने मुझे किस किया, तो मैं सच में भूल जाऊँगी कि मैं एक लड़की हूँ और तुम्हें प्रपोज कर दूँगी।

निशा- हऐ तेरी जैसी हसीना प्रपोज करे तो कौन कम्बख्त मना करेगी।

हालाँकि रवि को हमारी इन बातों से चिढ हो रही थी पर अब उसकी हिम्मत नहीं हुई हम दोनों को रोकने की। लेकिन बाकि लडकियाँ हमारी कैमिस्ट्री इंजाय कर रही थी। माहौल ठीक होने पर मैंने सबसे कहा

निशा- देखो आधा काम तो हो गया। हम एक दूसरे को जान भी गए और तुम सबकी प्राब्लम कल पूरी तरह से खत्म भी हो जाऐगी। कल इसलिए क्योंकि गगन को सबक सिखाने के लिए मैंने अपना पहला दांव चल दिया है। मैं चाहती हूँ कि आज रात वो थोडा परेशान रहे। कल उसके मोबाईल से सारे फोटो और बीडियो डिलीट करके मैं उसे दूसरा झटका दूँगी। तुम लोग आज से और अभी से फ्री हो। अब गगन को सबक सिखाने के लिए किसी पर कोई दबाब नहीं है। मेरा सबसे बड़ा उद्देश उन तीन लडकियों की फैमिली को सपोर्ट करने का था, जो अब पूरा हो गया है। इसलिए जिसके अंदर अब भी थोडा बहुत डर हो, बो जा सकती है। क्योंकि इसके बाद अब हम गगन को सबक सिखाने का अपना प्लान डिस्कस करने बाले हैं।

मेरी बात सुनकर सभी लोग खामोशी से अपनी अपनी जगह बैठकर सोचने लगे। कुछ देर सोचने के बाद पूजा बोली

पूजा- सॉरी सपना हमने तुम्हें गलत समझा।

निशा- भूल जाओ उस बात को। मैंने कहा ना कि मुझे बुरा नहीं लगा। हम सब दोस्त है और दोस्ती में सॉरी और थैंक्स के लिए कोई जगह नहीं होती

श्रेया- मुझे भी सॉरी कहना है। असल में तुमने जो आज किया वो हम सबको पहले ही करना चाहिए था। हममें से किसी पर भी उन तीनों के सुसाईड के बाद कोई फर्क नहीं पडा था। तब तक नहीं जब तक कि तुमने हमें उनके बारे में नहीं बताया।

मैंने श्रेया को हग किया और बोली

निशा- अभी भी ज्यादा देर नहीं हुई है मेरी जान। हम अब भी उन तीनों की फैमिली के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। इसलिए सॉरी बोलने की जरूरत नहीं है। हाँ अगर फिर भी सॉरी फील कर रही हो, या तुम्में से कोई और भी ऐसा ही फील कर रहा हो। तो कभी कभी उन तीनों के घर जाकर उनकी फैमिली से मिल लिया करो। सिर्फ पैसा ही सब कुछ नहीं होता। कभी कभी इमोशनल सपोर्ट भी बहुत जरूरी होता। शायद तुम सबसे मिलक उनके माता पिता को अपनी लडकियों के उनके साथ होने का एहसास हो।

श्रेया- हाँ तुम सही कह रही हो। हम सब ऐसा ही करेंगे। हम लोग जरूर उन तीनों के घऱ पर जाया करेंगे। और हाँ हममें से कोई भी कहीं नहीं जा रहा है। हम सब मिलकर गगन को सबक सिखाना चाहते हैं। इसलिए जल्दी से अपना प्लान हमें बताओ।

श्रेया की बात सुनकर मैंने एक लम्बी सांस ली और फिर आपने आगे के प्लान के बारे में सोचने लगी।

कहानी जारी है .......
 
Update 024 -

कुछ देर तक यूँ ही अपने प्लान के बारे में सोचने के बाद मैंने बोलना शुरू किया

निशा- मेरा प्लान एक दम सिंपिल है। सबसे पहले हमें गगन को मैंटली डिस्टर्व करना है। और जिसके बाद उसके काले कारनामे पुलिस को बताने हैं। मैंटली डिस्टर्व होने के कारण वो जरूर कुछ गलत हरकत करेगा। इसी बीच जब पुलिस को उसके काले कारनामे पता चलेंगे, तो पुलिस भी उसके पीछे पड जाऐगे। जिसके बाद दो कंडीशन बन सकतीं हैं। पहली यह कि बो डरकर यहाँ से कहीं दूर भाग जाऐ और दूसरी पुलिस उसे गिरफ्तार करके उसके बाप के साथ ही जेल में डाल दे।

पूजा- ये भला कौन सी सजा हुई। उस कमीने के लिए, इतनी छोटी सजा। उसे तो मर जाना चाहिए

पूजा की बात सुनकर मैं उसे समझाते हुए बोली

निशा- हम कोई क्रिमनल नहीं हैं पूजा। बल्कि वो क्रिमनल है। हम कानून के दायरे में रहकर ही काम करेंगे। याद रखना एक बार गलत कदम उठाने के बाद बापसी का कोई रास्ता नहीं होता है। उसे हम सजा जरूर देंगे, पर ऐसी सजा जिससे बो सारी जिंदगी वो लडकियों से दूर भागे। किसी की जान लेना किसी समस्या का हल नहीं है। बैसे भी ड्रग सप्लाई करने पर वो सारी जिंदगी जेल में सडेगा। इसलिए तुम उसकी सजा जितनी छोटी समझ रही हो, उतनी छोटी नहीं है। अगर हमने उसकी जान ली, तो एक बार में ही बो आजाद हो जाऐगा। जबकि मैं चाहती हूँ कि बो सारी जिंदगी घुट घुट कर मरे।

रिया- पर हम यह सब करेंगे कैसे। किसी को मैंटली डिस्टर्व करना कोई बच्चों का खेल तो है नहीं

निशा- पर हमें बच्चों का खेल ही तो खेलना है

रिया- हमें तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा कि तुम क्या कह रही हो।

निशा- चलो ठीक है प्रैक्टीकल करके समझाती हूँ। मुझे यह बताओ कि तुम सब में ऐसा कौन है, जिसके पास हम सभी के नम्बर हैं।

मेरी बात सुनकर सभी ने अपने हाथ उठा दिए, पर तभी श्रेया बोली

श्रेया- हम सबके पास तुम्हें छोडकर सबके नम्बर हैं।

श्रेया की बात सुनकर मैंने रवि को देखा। उसने भी अपना हाथ उठाया था तो मैं बोली

निशा- रवि के पास मेरा भी नम्बर है। तो रवि तुम चैटिंग एप पर अभी एक ग्रुप बनाओ जिसमें तुम हम सबको एड करोगे।

मेरी बात सुनकर रवि ने तुरंत ही चैटिंग एप पर एक ग्रुप बना दिया और सबको एड कर लिया। जिसके बाद मैं बोली

निशा- अब से हम अपना काम खत्म होने तक इस ग्रुप की हेल्प से ही एक दूसरे से बातें करेंगे। मेरा मतलब है कि सभी एक साथ इकट्ठा तभी होंगे जब कोई जरूरी डिस्कस करना हो। बरना 2-3 लडकियों से ज्यादा कभी साथ मत रहना। और हाँ ग्रुप के काँटेक्ट लिस्ट में जो नम्बर तुम्हारे फोन में सेब नहीं है, वो मेरा है। इसलिए अगर चाहो तो उसे सेव कर सकती हो। मैं भी तुम सबके नम्बर सेव कर लूँगी।

इतना बोलकर मैंने उस ग्रुप पर वह सेंड कर दिया जिसे मैंने आज ही एडिट करके बनाया था। जैसे ही सबने वो बीडियो देखा, तो उनकी आँखें हैरानी से फटी रह गईं। उन्हें तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनकी मरी हुई फ्रेंड उस बीडियो में है। कुछ लडकियों को तो वो बीडियो देखकर डर भी लग रहा था। उनके रियेक्शन देखकर मैं बोली

निशा- अब समझ में आया कि गगन को कैसे मैंटली टार्चर करना है। हम उन तीनों लडकियों को फिर से जिंदा करेंगे।

मेरी बात सुनकर पूजा हैरान होते हुए बोली

पूजा- पर कैसे

निशा- तुम लोग उन तीनों को ज्यादा बेहतर तरीके से जानती थी। तो तुम्हें पता होगा कि उन्हें क्या अच्छा लगता था और क्या बुरा। खाने में क्या अच्छा लगता था, कपडे कैसे पहनती थीं। कौन से गाने सुनना पसंद था। बगैरह बगैरह... हमें बस इतना करना है कि तुममें से कोई भी तीन लडकियां अब से उन तीनों की तरह ही कपडे पहनकर और तैयार होकर गगन के सामने जाऐंगी। और बाकि लडकियाँ उन तीनों से रिलेटेड कोई ना कोई सामन, कपडा या खाने पीने का कोई सामान चुपके से गगन की गाडी या बैग में रखने का काम करेंगी।

मेरी बात खत्म होते ही रश्मि ने कहा

रश्मि- पर यह सब करने से होगा क्या

निशा- असल में हमें बस ऐसा माहौल क्रिएट करना है, जिसमें गगन को हर जगह उन तीनों लडकियों के होने का एहसास हो। ताकि गगन को यकीन हो जाए की उन तीनों लडकियों की आत्मा गगन को परेशान कर रही हैं। जिस कारण गगन धीरे धीरे मेंटली डिस्टर्व होने लगेगा। अगर एक बार उसे इस बात पर यकीन हो जाऐ कि वो तीनों लडकियाँ उससे अपना बदला लेना चाहती हैं। तो फिर गगन जिंदगी भर किसी भी लड़की के पास जाने में डरेगा। यह सब होने के बाद हम पुलिस को उसकी सारी जानकारी दे देंगे। बाकी सब तुम मुझ पर छोड दो। उसे जो भी सजा मिलेगी उससे पहले हम उसे इतना डरा देंगे की वो जिंदा रहने से अच्छा मरना पसंद करेगा।

अब मेरा प्लान सभी को अच्छी तरह से समझ में आ गया था और सभी लोग मुझसे सहमत भी हो गए थे। जिसके बाद मैं फिर बोली

निशा- मैंने जो बीडियो तुम्हें भेजा है वो मैं पहले ही गगन के मोबाईल में स्टोर कर चुकी हूँ और अब तक वो उसे देखकर डिलीट भी कर चुका होगा। शायद अभी उसे यह सब कोई मजाक लगे। पर कल जब उसके मोबाईल से सभी के बीडियो और फोटो डिलीट होने के बाद यह बीडियों बापिस उसके मोबाईल में आयेगा, तो फिर उसके डरने की शुरूआत हो जाऐगी। वो जितनी बार बीडियो डिलीट करेगा मैं उतनी बार उसके मोबाईल में यह बापिस डाल दूँगी। बाकि का काम तुम लोगों को करना है।

मेरी बात खत्म होते ही श्रेया कहा

श्रेया- अरे तुम उसकी फिक्र मत करो… हम लोग तो उसे इतना डरा देंगे की वो अपने पेंट में ही सूसू कर देगा।

उसकी बात सुनकर सभी लोग हंसने लगे। फिर कुछ देर और डिस्कस करने के बाद सभी लोग वहाँ से निकल गए। मैं और रवि भी सबके जाने के बाद उस फार्म हाऊस को अच्छी तरह लॉक करके वहाँ से चले गए। रास्ते में हमारे बीच कोई बात नहीं हुई। ना तो मेरा कोई बात करने का मन था और ना ही रवि कि मुझसे बात करने की हिम्मत हुई। रास्ते में मैंने मोबाईल में समय देखा तो 7 बजकर 30 मिनट हो गए थे। इसलिए मैंने रवि को पुलिस हैडक्वाटर पर चलने के लिए बोल दिया। मेरी बात सुनकर पहले तो बो हैरान हुआ पर उसकी हिम्मत नहीं हुई मुझसे कुछ भी पूछने की, इसलिए उसने चुप रहना ही ठीक समझा।

पुलिस हैडक्वाटर पर पहुँचने के बाद मैं उसकी गाडी से नीचे उतर गई और उसे वहाँ से जाने के लिए बोल दिया। रवि के जाते ही मैंने अली ट्रेलर से अपनी यूनिफार्म ली और ऑटो करके अपने होटल बापिस आ गई। अपने रूम में पहुँचकर मैने सबसे पहले अपना लैपटॉप ऑन करके गगन का मोबाईल चैक किया। जैसा कि मुझे उम्मीद थी। गगन ने वो बीडियो डिलीट कर दिया था। इसलिए मैंने उसके मैबाईल में वो बीडियो फिर से ट्रांशफर कर दिया और बदले में उसके मोबाईल से कुछ लडकियों के बीडियो परमानेंट डिलीट कर दिये।

इसके बाद मैंने अपना लैपटॉप बंद कर दिया और असलम के मैसेज का इंतजार करने लगी। कुछ ही देर बाद उसका मैसेज भी आ गया। उसने मुझे ठीक 9 बजे एक रेस्टोरेंट में मिलने के लिए बुलाया था और यूनिफार्म पहनकर आने के लिए बोला था। इसलिए मैं जल्दी से बाथरूम में घुस गई। मैं 9 बजे से थोडे पहले ही रेस्टोरेंट पहूँच चुकी थी और अपने लिए सूप आर्डर कर चुकी थी। जब तक असलम आया मैं अपना सूप लगभग खतम कर चुकी थी।

हाँलाकि मुझे अब भी थोडी भूख का एहसास हो रहा था। पर मैं जानती थी कि ज्यादा पेट भरा होने पर चुदाई में प्राव्लम होगी। इसीलिए मैं पिछले कुछ दिनों से दिन में तो भरपेट खाना खाती थी, पर रात में केवल सूप ही ले रही थी। असलम के आते ही मैंने अपना पेमेंट किया और उसके साथ बाहर निकल गई। असलम मुझे सिटी से बाहर एक फार्म हाऊस पर ले गया। फार्म हाऊस के बाहर अच्छा खासा पुलिस का पहरा था। इसलिए असलम ने फार्म हाऊस के बाहर ही गाडी रोक दी और किसी को फोन करने लगा। थोडी ही देर बाद एक पुलिस ऑफिसर वहाँ आया और मुझे साथ चलने का इशारा किया। इसलिए मैं चुपचाप गाडी से उतर कर उसके साथ चलने लगी।

मैंने इस समय पुलिस यूनिफार्म पहनी हुई थी। जो एकदम मुझे फिट आई थी। वो कुछ इस तरह से सिली गई थी जिसमें मेरे बूब्स और मेरी गाँड साफ साफ उफरी हुई दिखाई दे रही थी। उस यूनिफार्म में तीन स्टार लगे थे। जो इंस्पेक्टर रेंक के ऑफिसर के होते हैं। कमर पर ब्राऊन कलर का चमडे का बैल्ट, पैरों में ब्राऊन शू और सिर पर कैप। कोई भी मुझे देखकर यह नहीं कह सकता था कि मैं पुलिस ऑफिसर नहीं हूँ।

चूँकि मैं पुलिस यूनिफार्म में थी, तो मैकअप बगैरह करने का तो सबाल ही नहीं उठता। पर फिर भी बिना मेकअप के मैं कुछ ज्यादा ही खूबसूरत दिखाई दे रही थी। वो ऑफिसर मुझे फार्म हाऊस के एक आलीशान कमरे में ले गया और मुझे वहीं छोडकर बाहर निकल गया। मैं वहीँ सोफे पर बैठकर इंतजार करने लगी। कुछ देर बाद ही मुझे पुलिस बैन आने की आबाज सुनाई दी। मैं समझ गई की डिजीपी सर आ गए हैं। इसलिए मैंने सोचा की क्यों ना किसी पुलिस ऑफिसर की तरह ही उनका स्वागत करूँ।

जैसे ही वो अंदर आए तो मैंने किसी पुलिस ऑफिसर की तरह अटेंसन की पॉजीशन में खडी होकर उन्हें सैलूट किया। डीजीपी हरीश तोमर जो करीब 45-46 साल के थे और काफी ज्यादा फिट होने के साथ साथ हैंडसम भी थे। मेरी इस हरकत से काफी इंप्रेश हुए और मेरे पास बैठते हुए बोले

हरीश- नाम क्या है तुम्हारा

निशा- जी… सर सपना

हरीश- अरे तुम खडी क्यों हो…. एकदम रिलेक्स होकर बैठ जाओ।

उनकी बात सुनकर मैंने अपनी कैप उतार दी और उनके पास ही सोफे पर बैठ गई। आज मैंने पुलिस आफिसर की तरह ही बालों पर जूढा बांधा हुआ था। जिस कारण जैसे ही मैंने अपनी कैप उतारी तो मेरे बालों की एक लट सरककर मेरे गालों पर आ गई। जिसे मैं जैसे ही अपने एक हाथ से अपने कान के पीछे करने लगी तो हरीश सर बोले

हरीश- अरे रहने दो…. अच्छी लग रही है, बैसे भी तुम बहुत खूबसूरत हो

हरीश सर का कॉम्प्लीमेंट मिलकर मैंने मुस्कुराकर कहा

निशा- थैंक्स सर

हरीश- कब से कर रही हो यह काम

मैं जानती थी कि मुझसे यह सबाल जरूर पूछा जाऐगा। इसलिए मैं पहले से ही जबाब तैयार करके आई थी। मैंने मंत्री जी को जो कहानी सुनाई थी वही कहानी हरीश सर को सुनाने का मेरा प्लान था। इसलिए मैं बोली

निशा- सर मैं पहली बार ही आई हूँ

हरीश- मतलब वर्जिन हो

निशा- नहीं सर… मैंने अपने बॉयफ्रेंड के साथ एक दो बार वो सब पहले भी किया है

हरीश- तो फिर यह सब क्यों कर रही हो

निशा- वो सर… असल में मुझे अपने पिता के इलाज के लिए पैसे चाहिए थे। जब किसी ने कोई मदद नहीं की तो मैंने यह रास्ता अपना लिया।

हरीश- अगर ऐसा है, तो मैं तुम्हारी हेल्प कर देता हूँ। ऐ सब करने की कोई जरूरत नहीं है। मैं कोई दूसरा इंतजाम कर लूँगा

निशा- कोई बात नहीं सर। मुझे अपने डिसीजन पर कोई अफसोस नहीं है। अगर आप उस तरह से मेरी कोई मदद करेंगे तो मुझे लगेगा कि आप मुझे भीख दे रहे हैं। जो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा। सर बैसे तो मैं दिल्ली में जॉब करती हूँ। पर फिलहाल इस पूरे महिने छुट्टी पर हूँ। तो अगर आप मेरी मदद करना ही चाहते हैं, तो अगली बार भी मुझे ही मौका दीजिये आपकी सेवा का।

हरीश सर मेरी बातों से काफी इम्प्रेस हो गए थे। इसलिए वो खुश होते हुए बोले

हरीश- जरूर तुम काफी खूबसूरत हो। मैं अगली बार भी तुम्हें ही बुलाऊँगा। पर अगली बार तुम्हें मेरे पास साडी पहनकर और पूरा मेकअप करके आना होगा।

निशा- जी सर

हरीश- अच्छा क्या तुम ड्रिंक करती हो

निशा- कभी कभार दोस्तों के साथ 1-2 पैग लिए हैं

हरीश- तो आज मुझे ही अपना दोस्त मान कर मेरे साथ पी लो

निशा- जी सर… जैसा आप कहें

मेरा जबाब सुनकर हरीश सर ने टेबिल पर रखी एक रिंग बजाई। जिसके बाद एक नौकर लगभग भागता हुआ अंदर आया जिसे देखकर हरीश सर बोले

हरीश- अरे भाई कुछ खाने पीने का इंतजाम करो। मैडम कितनी दूर से मुझसे मिलने आई हैं।

हरीश सर की बात सुनकर वो भागता हुआ वहाँ से चला गया और तुरंत ही एक मंहगी शराब की बोतल और कुछ स्नैक्स बगैरह लेकर आया। इसके बाद वो हम दोनों के लिए पैग तैयार करके वहाँ से चला गया। उसके जाते ही हम दोनों ने अपने अपने पैग उठाऐ और पीना शुरू कर दिया। जिसके बाद हम दोनों यूँ ही आपस में बातें करने लगे। जब हमारी ड्रिंक खत्म हो गई तो मैंने एक बार फिर दोनों के लिए बना दिए। दूसरा पैग खतम होते ही हरीश सर ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मुझे किस करने लगे। मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी।

कुछ देर मुझे यूँ ही किस करने के बाद उन्होंने मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिये। मैंने शर्ट के अंदर मात्र कैमिसोल पहना हुआ था। जिस कारण जैसे ही मेरी शर्ट के सारे बटन खुले हरीश सर ने अपना एक हाथ मेरी कैमिसोल के अंदर डाल कर मेरे बूब्स को सहलाना शुरू कर दिया। जिस कारण मेरे शरीर में भी उत्तेजना बडने लगी और मैंने भी अपने एक हाथ से उनके लण्ड को पैंट के ऊपर से ही सहलाना शूरू कर दिया। जो अब तक पूरी तरह से कडक हो गया था।

कहानी जारी है .......
 
Update 025 -

कुछ देर एक दूसरे को सहलाने के बाद हम दोनों ने एक दूससे के कपडे उतारने शुरू कर दिए। एक दूसरे को पूरा नंगा करने के बाद हरीश सर ने मुझे अपनी बाहों में भर कर विस्तर पर लेटा दिया और फिर उस हॉल को अंदर से अच्छी तरह से लॉक कर लिया। फिर वो मेरे पास आये और मेरे पूरे बदन को चूमने और सहलाने लगे। मैं भी उनका पूरा साथ देते हुए इंजॉय कर रही थी। मेरे अंदर से अब तक सारी झिझक खत्म हो गई थी और अब में सेक्स का पूरा मजा लेने लगी थी।

कुछ देर बाद मैंने उन्हें बिस्तर पर पीठ के बल लेटा दिया और उन्हें ब्लोजॉव देने लगी। मेरे ब्लोजॉब देने से हरीश सर काफी खुश हुए और मजे लेने लगे। कुछ देर ब्लोजॉब का मजा लेने के बाद उन्होंने मुझे बापिस से पीठ के बल लेटा दिया और मेरे ऊपर चड कर एक ही झटके में अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में घुसा दिया। यूँ अचानक हुए हमले के लिए मैं बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। जिस कारण मेरे मूँह से एक हल्कि सी चीख निकल गई

निशा- अआआआहहहहहहह….

मेरे यूँ चीखने से हरीश सर को लगा कि मैं सच में बस एक दो बार ही चुदी हूँ। इसलिए वो खुश होते हुए पूरे मन से मेरी चुदाई करने लगे। हरीश सर का लण्ड अच्छा खासा बडा और मौटा था। जिस कारण मुझे उनसे चुदने में बडा मजा आ रहा था। इसलिए जल्द ही मेरी चूत पानी छोडने लगी। जिस कारण उनका लण्ड आसानी से मेरी चूत के अंदर बाहर होने लगा और अब मैं भी अपनी कमर हिला हिला कर उनका पूरा साथ देने लगी। कुछ देर यूँ ही चुदाई करवाने के बाद मैंने करवट लेकर हरीश सर को अपने नीचे कर दिया और खुद उनके ऊपर जाकर उन्हें मजे देने लगी।

कुछ देर इसी पोजीशन में चुदाई करवाने के बाद एक बार फिर हरीश सर ने पोजीशन चेंज कर दी और मुझे अपने नीचे करके मेरी चुदाई करने लगे। इसी तरह से हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे को भरपूर मजा देते रहे। इस दौरान में 3-4 बार अपना पानी छोड चुकी थी। आखिर कार हरीश सर ने भी अपनी स्पीड बड़ा दी और अपना पानी मेरी चूत के अंदर छोड दिया। जिसके बाद वो कुछ देर तक यूँ ही मेरे ऊपर लेटकर मुझे चूमते रहे। फिर जब हम दोनों कुछ नार्मल हुए तो हरीश सर मुझसे अलग होकर मेरे बगल में लेट गए और बोले

हरीश- थैंक्स सपना। आज तुमने बाकई में मुझे भऱपूर मजा दिया है और मेरा पूरा साथ दिया है। मुझे ऐसा लगा ही नहीं कि मैं किसी कॉलगर्ल के साथ चुदाई कर रहा हूँ। बल्कि मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे मैं अपनी पत्नि या गर्लफ्रेंड के साथ ये सब कर रहा हूँ। तुमसे पहले जितनी भी लडकियां आईं हैं, मुझे उनको अलग से इंस्ट्रक्शन देने पडते थे। जिस कारण मुझे कभी भी उतना मजा नहीं आया। कभी कभी तो मुझे ऐसा लगता था कि मैं सामने बाले के साथ रेप कर रहा हूँ। पर तुम सबसे अलग हो। तुम जानती हो कि सामने बाले को कैसे खुश करना है।

हरीश सर की बात सुनकर मैं मुस्कुराकर बोली

निशा- सर औरों का तो मैं नहीं कह सकती, पर जब मैंने इस काम को करने का डिसाईड किया था, तभी सोच लिया था कि इस काम को किसी मजबूरी की तरह नहीं करूंगी, बल्कि पूरे मजे लेकर करूँगी। आखिर जैसे मर्दों को मजे लेने का अधिकार है, वैसे ही हम लडकियों को भी मजे लेने का पूरा अधिकार है

हरीश– सही कहा तुमने, लडकियों को भी मजे लने का पूरा अधिकार है और ये बात भी सही है कि अगर किसी काम को मजे लेकर करो तो वो काम बाकई में शानदार होता है। बैसे पता नहीं तुम मेरे बारे में क्या सोचती होगी

मैंने हरीश सर की इस बात पर कुछ भी नहीं कहा और चुपचाप लेटी रही। तो वो बोले

हरीश- तुम्हें लगता होगा की मैं एक अय्यास पुलिस ऑफिसर हूँ। जो अपनी पत्नि को धोखा दे रहा है। पर ऐसा नहीं है। मेरी पत्नि की मौत 20 साल पहले ही हो चुकी है। मेरी बेटी के पैदा होने के समय ही उसकी मौत हो गई थी। हमारी लव मैरिज थी इसलिए उसकी मौत के बाद मैंने दूसरी शादी नहीं की और हर तरह से अपनी बेटी श्रेया का ध्यान रखा है। साथ ही साथ उसे अच्छी से अच्छी परवरिस देने की पूरी कोशिश की है। पत्नि के मरने के बाद मेरे जीवन के केवल दो उद्देश रह गए थे। पहला इमानदारी से अपनी नौकरी करना और दूसरा श्रेया की परिवारिस कर उसकी जिंदगी संबारना। जिस कारण में एक के बाद एक प्रमोशन लेता गया और इस मुकाम पर पहूँच गया। पर एक समय ऐसा आया की मेरे शरीर को भी वासना ने घेरना शुरू कर दिया। लेकिन मैं दूसरी शादी करके अपने बेटी के लिए सौतेली माँ नहीं लाना चाहता था। इसलिए मैंने अपनी वासना को शांत करने के लिए यह रास्ता अपनाया। पर यह भी मैं मुश्किल से 2-3 महिने में 1 बार ही करता हूँ।

हरीश सर की बात सुनकर मैंने उन्हें समझाते हुए कहा

निशा- सर इसमें आपको शर्मिदा होने की कोई जरूरत नहीं है। जैसे हमारे शरीर को जिंदा रहने के लिए खाना और पानी की जरूरत होती है। ठीक बैसे ही सेक्स की भी जरूरत होती है। यह तो एक दम नैचुरल है। जब आपने कभी भी किसी के साथ कुछ गलत नहीं किया है, तो आपको अपने आपको दोषी मानने की कोई जरूरत नहीं है। आपने अब तक जिन लडकियों के साथ भी सेक्स किया है, वो सब आपने उनकी मर्जी से और उनकी पूरी कीमत देकर ही तो किया है। वर्ना आपकी जगह कोई और होता तो अपनी पोजीशन का फायदा उठाकर रोज एक नई लड़की को अपने विस्तर पर सजा सकता था। वो भी बिना उसकी मर्ज के और बिना कुछ दिये। मेरा मानना है कि आपने अपनी बेटी श्रेया के लिए जो कुछ भी किया है और अपनी पत्नि के साथ जो ईमानदारी दिखाई है। वो कोई और नहीं कर सकता है। मेरी नजर में तो आपकी इज्जत और भी ज्यादा बड गई है।

मेरी बात सुनकर हरीश सर काफी ज्यादा खुश हो गए थे। इसलिए वो बोले

हरीश- तुम सच कह रही हो... तुम्हें बाकई में ऐसा लगता है कि मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है।

निशा- हाँ सर मुझे सच में ऐसा लगता है।

हरीश- अच्छा छोडो यह सब और यह बताओ कि तुम कितनी पडी लिखी हो

निशा- मैंने बस हायर सेकण्डरी क्लीयर किया है। लेकिन मुझे साईक्लॉजी पढ़ना पसंद है तो सोच रही हूँ की साईक्लॉजी की डिग्री कर लूँ।

हरीश- क्यों क्या फैमिली में कोई काउंसलर है या किसी साईक्लाजिस्ट के यहाँ जॉब बगैरह करती हो।

निशा- अरे नहीं सर.. ऐसा कुछ भी नहीं है। बस साईक्लाजी मुझे पसंद है और हाँ मैं कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग की फील्ड में जॉब भी करती हूँ।

हरीश- अरे यार ये साईक्लाजी और कम्प्यूटर दोनों का कॉमबिनेशन मुझे कुछ समझ नहीं आया

निशा- असल में कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग मेरा शौक है। मैने यूं ही ऑनलाईन सीख लिया था। तो बस जॉब मिल गई

हरीश- मतलब साफ्टवेयर बगैरह बनाती हो

निशा- नहीं सर किसी के साफ्टवेयर का पोस्टमार्डम करती हूँ। यानि उसमें कमियां निकालती हूँ और उन्हें सही करने का तरीका भी बताती हूँ। एक तरीके से आप बोल सकते हैं कि मैं हैकिंग जैसा ही कुछ काम करती हूँ। पर लीगल तरीके से

मेरी बात सुनकर हरीश सर कुछ सोचदे हुए बोले

हरीश- ओह अच्छा हैकिंग… बैसे मेरी बेटी श्रेया को भी काफी शौक है हैकिंग करने का। वो इंडिया के टॉप हैकर से इसकी ट्रेनिंग भी ले रही है। क्या नाम बताया था उसने…

इतना बोलकर जैसे ही हरीश सर सोचने लगे तो मैंने कहा

निशा- ड्रेगन हार्ट

मेरी बात सुनकर हरीश सर को तुरंत उसका नाम याद आ गया और बोले

हरीश- हाँ हाँ यही…. पर तुम्हें कैसे पता

मैंने हरीश सर के सबाल को सुना। इस वक्त मेरे दिमाग में पूजा की बातें गूंज रहीं थी जिसमें वो कह रही थी कि गगन जैसे आदमी को जिंदा रहने का कोई अधिकार नहीं है। उसकी बात सुनकर मैं भी अपना मन बना चुकी थी। पर मैं यह सब लीगल तरीके से करना चाहती थी। जिसके लिए मुझे हरीश सर को शीशे में उतारना जरूरी था। इसलिए मैंने उन्हें अपने बारे में बताने का फैसला किया और मुस्कुराते हुए उनसे बोली

निशा- आप इस वक्त ड्रेगन हार्ट के साथ ही हैं सर

मेरी बात सुनकर हरीश सर तुरंत उठ कर बैठ गए और हैरानी से मुझे देखते हुए बोले

हरीश- तुम मजाक कर रही हो ना

निशा- नहीं सर मैं सच बोल रही हूँ। मुझे नहीं पता था कि मैं जिस श्रेया से मिलने यहाँ भोपाल आई हूँ, वो अपकी बेटी है। क्योंकि उसने अपनी फैमिली के बारे में मुझे कभी भी कुछ नहीं बताया था।

हरीश- पर तुम तो किसी भी ऐंगल से हैकर नहीं लगती हो

उनकी बात सुनकर मैं हंसते हुए बोली

निशा- सर अब हैकर के अलग से सींग थोडे ही लगे होते हैं।

मेरी बाता सुनकर हरीश सर थोडा झेंपते हुए बोले

हरीश- हाँ यह बात भी सही है, पर तुम.. ओफ् ये क्या हो गया। तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया इस बारे में….

हरीश सर की बात सुनकर मैं समझ गई कि इस वक्त उनके दिमाग में क्या चल रहा है। इसलिए मैं उन्हें रिलेक्स करते हुए बोली

निशा- सर आप चिंता मत करो… मैं इस सब के बारे में श्रेया से कुछ भी नहीं कहूँगी और मैं उम्मीद करती हूँ कि आप भी मेरे इस सच को श्रेया से नहीं कहेंगे। वो एक बहुत अच्छी लड़की है। उसके जैसी दोस्त तो किस्मत से मिलती है।

मेरी बात सुनकर जब हरीश सर थोडा रिलेक्स हुए तो मैं फिर से बोली

निशा- सर क्या मैं आप पर यकीन कर सकती हूँ कि आप मेरा यह राज अपने तक ही रखेंगे

मेरी बात सुनकर हरीश सर मुझे घूरते हुए बोले

हरीश- शक करने की बजह

निशा- दो बजह हैं सर। पहली तो आपको पता चल गया है कि मैं एक हैकर हूँ। अगर आपने किसी और को बता दिया कि मैं ही ड्रेगन हार्ट हूँ, तो मैं मुसीबत में पड जाऊँगी। क्योंकि मैंने चायना बालों की नाक में दम कर रखा है और कई इंडियन साईट को साईबर अटैक से बचाया भी है। चायना और दुश्मन देशों के कई ऐजेंट हमारे देश में मेरी तलाश कर रहे हैं। अगर मेरा राज खुल गया तो मेरी जान भी जा सकती है।

मेरी बात सुनकर हरीश सर थोडा सीरियस होते हुए बोले

हरीश- मैं अपनी बेटी श्रेया की कसम खाता हूँ कि मैं तुम्हारा राज केवल अपने तक ही रखूँगा। लेकिन मुझपर शक करने की दूसरी बजह क्या है…

हरीश सर की बात सुनकर मैं कुछ देर खामोश रही और फिर एक गहरी साँस छोडते हुए बोली

निशा- कोई बाप नहीं चाहता कि उसकी बेटी किसी कॉलगर्ल की दोस्त बनकर रहे। इसलिए हो सकता है कि आप श्रेया को मेरे कॉलगर्ल होने के बारे में बता दें। जिससे हमारी दोस्ती भी खत्म हो जाऐ। अगर ऐसा कुछ है तो आप बता दें सर, मैं खुद ही उससे दूर हो जाऊंगी और कभी भी उससे नहीं मिलूंगी। पर प्लीज उसे मेरा यह राज मत बताना।

मेरी बात सुनकर हरीश सर मुस्कुराते हुए बोले

हरीश- यकीन करो मेरा… मुझे इससे कोई प्राब्लम नहीं है। बैसे भी तुम कोई पैदाईसी कॉलगर्ल तो हो नहीं। किसी मजबूरी में ही यह काम कर रही हो। तो मैं तुम्हारे बारे में कोई गलत राय कैसे बना सकता हूँ। मैं तो बस इसलिए थोडा परेशान हो गया था कि कहीं तुम मेरे बारे में उसे ना बता दो

निशा- लेकिन ऐसा करने पर मुझे अपना राज भी उसे बताना पडेगा। जो मैं नहीं करना चाहती।

मेरी बात सुनकर हरीश सर मुस्कुराते हुए बोले

हरीश- हुम्म…. मतलब कि हम दोनों की एक ही मजबूरी है और एक ही सॉल्यूसन है। तुम मेरी तरफ से बेफिक्र रहो, मैं बादा करता हूँ कि मैं श्रेया और तुम्हारी दोस्ती के बीच कभी नहीं आऊँगा।

निशा- तो फिर मैं भी आपसे वादा करती हूँ कि मैं अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाईफ अलग रखूँगी। पर इस सब में मेरा नुकशान हो गया सर

हरीश- क्या

निशा- अब यह सब जानने के बाद आप अगली बार मेरी जगह किसी और को बुलाऐंगे

मेरी बात सुनकर हरीश सर तुरंत बोले

हरीश- अरे नहीं नहीं… ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। मैं अगली क्या अब से हर बार केबल तुम्हें ही बुलाऊँगा। तुम्हारे साथ मुझे पूरी संतुष्टि मिली है। जो कोई और लड़की नहीं दे सकती। इसके अलावा मेरा एक और फायदा है

निशा- क्या सर

हरीश- देखो श्रेया अब बडी हो गई है। जब वो बच्ची थी तो बात अलग थी, वो अपनी हर बात मुझसे शेयर करती थी। पर अब वो जबान हो गई है। इसलिए अपनी हर बात वो मुझसे शेयर नहीं कर सकती है। पर तुम उसकी दोस्त हो, तुम उसके दिल की बात पता करते मुझे बता सकती हो। वो क्या चाहती है, किसी लडके को पसंद करती है, या उसे कोई प्राब्लम है। यह सब तुम मुझे बता सकती हो। एक तरह से तुम मेरी और श्रेया दोनों की दोस्त बनकर हमें एक दूसरे से जोड सकती हो।

इस बार हरीश सर की बात सुनकर मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गई थी। इसलिए मैं बोले

निशा- हाँ यह बात तो है सर। मैं ऐसा कर सकती हूँ। पर आप ऐसा क्यों चाहते हैं।

हरीश- अभी कुछ दिन पहले ही उसने बैंक से 20 लाख रुपये निकाले थे। पर किस काम के लिए निकाले थे, यह उसने मुझे नहीं बताया है। मैं उसपर कोई दबाब नहीं बनाना चाहता और ना ही उसे अपने हिसाब से कंट्रोल करना चाहता हूँ। उसे जो अच्छा लगे वो कर सकती है। बस मैं यह नहीं चाहता कि वो कोई गलत रास्ता अपना ले, या किसी मुसीबत में पडे।

निशा- ठीक है सर मैं इस बात का ध्यना रखूँगी।

मेरी बात सुनकर हरीश सर खुश हो गए और मुझे किस करने के बाद बापिस सोफे पर बैठकर अपने लिए ड्रिंक बनाने लगे। तो मैं भी जाकर उनकी गोद मैं बैठ गई। जिसके बाद हरीश सर ने मेरे लिए भी एक पैग दिया।

कहानी जारी है ......
 
Update 026 -

हम दोनों अपने पैग को इंजॉय ही कर रहे थे कि तभी हरीश सर बोले

हरीश- अच्छा तो यह बताओ कि तुम दिल्ली से यहाँ भोपाल कैसे आई

निशा- अरे आपको अभी तो बताया था कि मैं यहाँ श्रेया से मिलने आई थी।

हरीश- तो फिर इस काम में कैसे पड गई।

निशा- अरे सर वो मुझे अपने साईक्लाजी के प्रोजेक्ट के लिए कॉलगर्ल की साईक्लाजी पर एक रिपोर्ट तैयार करनी थी। दिल्ली में यह सब करने में थोडी प्राब्लम हो रही थी तो मैंने सोचा दिल्ली से बाहर किसी जगह जाकर ट्राई करती हूँ। श्रेया से चैटिंग हुई तो वो मिलने के लिए बोल रही थी। इसलिए मैं यहाँ आ गई। सोचा श्रेया से मिलने के साथ साथ यह काम भी हो जायेगा। यहाँ आकर मेरी मुलाकात असलम से हुई उसने मेरे प्रोजेक्ट में बहुत हेल्प की थी। इसी दौरान उसने मुझे यह काम करने का ऑफर दिया। मुझे अपने पापा के ऑपरेशन के लिए बैसे भी पैसे जरूरत थी। इसलिए मैंने सोचा की हर किसी के सामने हाथ फैलाने से अच्छा है कि कुछ दिन यह काम करके पापा के इलाज के लिए पैसे इकट्ठे कर लूं। यहाँ मुझे कोई जानता भी नहीं है तो बदनामी का भी कोई डर नहीं है और असलम ने अच्छे पैसों का ऑफर भी दिया था। मैं पहले भी अपने बॉय फ्रेंड के साथ यह कर चूकी हूँ तो मैंने असलम को हाँ कर दी।

हरीश- हूँ... तो यहाँ से जाने के बाद यह काम बंद कर दोगी

निशा- पता नहीं मैंने इस बारे में कुछ सोचा नहीं है। पर अगर आप कभी कहोगे तो जरूर आ जाऊंगी।

हरीश- श्रेया से मुलाकात हुई

निशा- हाँ सर

हरीश- अच्छा एक बात बताओ क्या तुम्हें पता है कि श्रेया किसी से प्यार बगैरह करती है क्या

निशा- नहीं मुझे उसने इस बारे में कुछ भी नहीं बताया

मेरी बात सुनकर हरीश सर थोडा परेशान होते हुए बोले

हरीश- तो फिर उसने इतने सारे पैसे आखिर खर्च कहां कर दिए। कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

हरीश सर की बात सुनकर मैंने थोडा परेशान होेने का नाटक करते हुए कहा

निशा- पता नहीं सर आपको यह सब बताना ठीक होगा या नहीं, पर एक प्रॉब्लम तो है

हरीश- क्या... जल्दी बताओ

निशा- सर असल में कुछ समय पहले श्रेया की दोस्ती एक लडके से हुई तो थी। पर वो लड़का ठीक नहीं था। उसने श्रेया को ड्रिंक में ड्रग मिलाकर पिलाने की कोशिश की थी। श्रेया ने मुझसे चैट पर इसके बारे में बताया तो मैंने उसे वो ड्रिंक पीने से मना कर दिया और वहाँ से चले जाने के लिए बोल दिया था। जिसके बाद श्रेया ने उस लडके से सारे कांटेक्ट खत्म कर दिये थे। पर बाद में पता चला कि उस लडके ने कई लडकियों को वो ड्रग देकर उनके गंदे गंदे बीडियो बनाये हैं और उन्हें ब्लैकमेल करता है। जिनमें से कुछ श्रेया की फ्रेंडस् भी हैं। श्रेया ने मुझे यह भी बताया था कि उसकी तीन क्लासमेटस ने उस लडके के ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर सुसाईड भी कर लिया था। क्योंकि जो लड़कियाँ उसे पैसे नहीं दे पातीं थीं, वो उन लडकियों को कॉलगर्ल का काम करने के लिए मजबूर करता था। शायद श्रेया ने अपनी कुछ फ्रेंडस् की हेल्प करने के लिए वो पैसे उस लडके को दिए हैं।

मेरी बात सुनकर हरीश सर गुस्से से बौखलाते हुए बोले

हरीश- कौन है बो कमीना

हरीश सर का गुस्सा देख कर मैंने थोडा परेशान होने का नाटक करते हुए उन्हें गगन के बारे में सब कुछ बता दिया, और एक दो लडकियों के बीडियो भी उन्हें दिखाये। जिन्हें देखकर उनका चेहरा गुस्से से लाल हो गया और वो बोले

हरीश- अब वो लड़का कल का सूरज नहीं देख पायेगा। लेकिन श्रेया ने यह सब मुझे क्यों नहीं बताया

निशा- शायद इसलिए कहीं आप गुस्से में उस लडके को गोली ही ना मार दें। वो नहीं चाहती थी कि आप अपनी मेहनत से कमाई सारी इज्जत गवा दें। प्लीज सर गुस्से में कोई गलत कदम मत उठाईये। मेरे पास एक प्लान है, फिलहाल मैं श्रेया और उसकी फ्रेंडस् के साथ उसी प्लान पर काम कर रही हूँ।

मेरी बात सुनकर हरीश सर ने शक भरी निगाह से मुझे देखते हुए कहा

हरीश- मुझे तुम्हारा पूरा प्लान जानना है, अभी और इसी वक्त

हरीश सर की बात सुनकर मैंने शार्ट में उन्हें अपना पूरा प्लान बता दिया, जिसे सुनकर वो बोले

हरीश- लेकिन सब खेल की आखिर क्या जरूरत क्या है। मैं कल ही पुलिस बालों को भेजकर उसे उठवा लेता हूँ। चार डण्डे पडेंगे तो वो सब सच बोल देगा। उसके खिलाफ यह बीडियो ही काफी है सजा दिलाने के लिए

निशा- सर यह बीडियो मैं आपको नहीं दे सकती। मैंने उन सभी लडकियों से वादा किया है कि मैं इन वीडियो को हमेशा के लिए डिलीट कर दूँगी। बैसे भी मैं गगन के मोबाईल से इन सभी वीडियो को पहले ही डिलीट कर चुकी हूँ।

हरीश- पर क्यों

निशा- सर आप तो जानते ही हैं पुलिस के काम करने का तरीका। अगर आप इन बीडियो के आधार पर उसे गिरफ्तार करेंगे, तो मिडिया तक भी यह बात पहुंच ही जायेगी कि आपने किस अपराध में उसे अंदर किया है। फिर मीडिया गगन के कॉलेज की लडकियों की जासूसी में लग जायेगी और हो सकता है किसी ना किसी लड़की के बारे में पता भी कर ले। जिस कारण इन बीडियो के लीक होने का भी डर रहेगा और इस सब में उन लडकियों की काफी बदनामी होगी। आप समझ रहे हैं ना मैं क्या कहना चाहती हूँ।

हरीश- तो क्या उस कमीने को आजाद छोड दूँ

निशा- नहीं सर... पहले हम लोग उसे मेंटली टॉर्चर करेंगे। उसके बाद जैसे ही मुझे पक्की जानकारी मिलेगी कि उसके पास स्मगलिंग की ड्रग आ चुकी है, तो आप एक्टिव हो जाना और ड्रग के साथ उसे रंगे हाथ पकडकर अंदर कर देना। इससे लडकियों की बदनामी भी नहीं होगी और उसे सजा भी मिल जाऐगी।

मेरी बात सुनकर हरीश सर सोचते हुए बोले

हरीश- हूँ... प्लान तो अच्छा है। लेकिन उस कमीने को जिंदा रहने का कोई अधिकार नहीं है

निशा- सर गिरफ्तारी के दौरान इन्काउंटर भी तो हो सकता है ना।

मैंने यह कहते हुए हरीश सर को सरारत से आँख मार दी। जिसे देखकर वो भी मेरा इशारा समझ गए और मुस्कुराकर बोले

हरीश- मतलब तुमने उसके इन्काऊँटर का प्लान भी पहले ही बना लिया था।

निशा- नहीं सर प्लान तो बस ड्रग की जानकारी देकर पकडवाने का था। पर उम्मीद थी कि गिरफ्तारी के दौरान उसका इन्काऊंटर हो जाये। इसीलिए तो उसे मेंटली परेशान किया जा रहा है। ताकि वो पुलिस को देखकर कोई गलत कदम उठाए और मजबूरी में उसका इन्काऊंटर करना पडे। पर हमारा प्लान फुलप्रूफ नहीं था, इसलिए अगर वो गिरफ्तार भी हो जाता तो सारी जिंदगी उन मरी हुई लडकियों की आत्मा से डर डर कर जीता रहता। हाँलाकि वो सभी लडकियां तो उसे जान से मारना चाहती हैं। लेकिन बडी मुश्किल से मैंने और श्रेया ने उन सभी को कानून हाथ में ना लेने के लिए समझाया है।

हरीश- हूँ.... चलो अच्छा ही हुआ जो मुझे इस बारे में सब पता चल गया। अब तुम्हारा अधूरा प्लान फुल प्रूफ हो गया है। बैसे तुम्हारा दिमाग काफी तेज चलता है। तुम पुलिस फोर्स ज्वाईन क्यों नहीं कर लेती।

निशा- सर मैंने इसके बारे में कभी सोचा नहीं है।

फिर मैं अपने टैटू की तरफ इशारा करते हुए बोली

निशा- बैसे भी मैंने सुना है कि जिन लोगों की बॉडी पर टैटू बना होता है। उनका पुलिस फोर्स या आर्मी में सिलेक्शन नहीं हो सकता है। इसलिए आगे चलकर भी इस बारे में सोचने का सबाल ही नहीं उठता है।

हरीश- ऐसा कोई नियम नहीं है…. असल में पुलिस फोर्स या आर्मी में अनुशासन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसलिए कुछ अधिकारियों का मानना है कि जो लडके लडकियाँ अपनी बॉडी पर टैटू बगैरह बनवाते हैं, उन्हें अनुशासित करना थोडा मुश्किल होता है। लेकिन जब किसी स्टेट का डी.जी.पी. डायरेक्ट किसी की ज्वाईनिंग की सिफारिस करे, तो कोई भी अधिकारी कुछ नहीं कर सकता। बैसे भी मेरे पास किसी भी व्यक्ति को बिना किसी एग्जामा और फिजीकल टेस्ट के डायरेक्ट पुलिस फोर्स में ज्वाईन करवाने की पॉवर है। इसलिए अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें ज्वाईन करवा सकता हूँ। मुझे पुरा यकीन है कि तुम स्पेशल ऑफिर के रूप में अंडर कवर रहकर शानदार काम करोगी।

मुझे हरीश सर से ऐसे किसी ऑफर की कोई उम्मीद नहीं थी। इसलिए मैं उनकी बात सुनकर हैरान रह गई। इस वक्त मेरे पास उन्हें जबाब देने के लिए कोई शब्द ही नहीं थे। शायद वो मेरे प्राब्लम समझ गये थे। इसलिए बोले

हरीश- कोई जल्दी नहीं है। अच्छे से सोचकर बता देना। देखा अभी अभी नई गवर्मेंट बनी है और मेरी सी.एम. से अच्छी खासी बाऊंडिंग है, तो अगले 4-5 सालों तक मैं पक्का यहाँ का डी.जी.पी. रहने ही बाला हूँ। इस दौरान अगर कभी भी तुम्हारा मन पुलिस फोर्स ज्वाईन करने का हो, तो मुझे बता देना। मैं तुम्हे सब इंस्पेक्टर की पोस्ट पर डायरेक्ट ज्वाईन करवा दूँगा और ट्रेनिंग के बाद तुम्हें दिल्ली में ही कोई अंडर कवर मिशन भी दिलवा दूंगा। 1 साल के अंदर 2-3 अंडर कवर मिशन सक्सेसफुल करने पर तुम्हारा प्रमोशन हो जायेगा। यानि अगले 2 साल से पहले तुम उसी वर्दी में मेरे सामने खडी होगी जो तुम यहाँ पहनकर आई थी।

हरीश सर की बात सुनकर मैं सोचते हुए बोली

निशा- ठीक है सर मैं सोचकर आपको बता दूँगी।

हरीश- बैसे अगर तुम चाहो तो मुझे सर की जगह अंकल कहकर भी बुला सकती हो

हरीश सर की बात सुनकर मैं थोडा हैरान होते हुए बोली

निशा- आर यू श्योर सर… जिस लड़की के साथ आपने बेड शेयर किया है, वो आपको अंकल कहे

मेरी बात सुनकर हरीश सर मुस्कुराकर बोले

हरीश- तुम श्रेया की दोस्त हो और उसकी दोस्तों के लिए इतना सब कर रही हो तो तुम्हारे लिए मेरे मन में इज्जत कफी ज्यादा बड गई है। अगर तुम मुझे अंकल कहोगी तो मुझे कोई प्राब्लम नहीं है। लेकिन अंकल कहने के बाद भी तुम्हें विस्तर पर कोई राहत नहीं मिलेगी।

यह कहते हुए उन्होंने मेरे बूब्स को हल्के से सहला दिया। तो मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा

निशा- मैं राहत चाहती भी नहीं हूँ। बैसे भी मुझे खुलकर सेक्स करना पसंद है अंकल… बैसे क्या अब यूँ ही बातें करते हुए सारी रात बिताने का इरादा है या...

हरीश- या....

निशा- कुछ और भी करने का इरादा है। बैसे मुझे लगता है कि हमने पर्याप्त रेस्ट ले लिया है

हरीश- इरादा तो बहुत कुछ करने का है। बैसे भी यह रेस्ट मेरे लिए नहीं बल्कि तुम्हारे लिए था

इतना बोलकर एक बार फिर हरीश अंकल मुझपर टूट पडे। मैं तो पहले से ही तैयार थी, इसिलए मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी। कुछ देर की मस्ती के बाद हरीश सर मुझे विस्तर पर ले गए और एक बार फिर चुदाई का खेल शुरू हो गया। लेकिन इस बार उन्होंने मुझे कुतिया बनाकर पीछे से मेरी चुदाई करना शूरू कर दी थी। कुछ देर मेरी चूत मारने के बाद उन्होंने अपना लण्ड बाहर निकाला और मेरी गाँड में घुसा कर मेरी गाँड मारने लगे। पिछले कुछ दिनों में मेरी इतनी बार गाँड मारी जा चुकी थी कि अब मुझे गाँड मरवाने में कोई दिक्कत नहीं होती थी।

बल्कि मुझे अब इसमें भी मजा आने लगा था। इसलिए अब इस बात से कोई फर्क नहीं पडता था कि लण्ड मेरी चूत में घुसाया जा रहा है या गाँड में या फिर मेरे मूंह में। मुझे तो बस लण्ड लेने से मतलब होता था। काफी देर तक मेरी गाँड की धज्जियां उडाने के बाद हरीश अंकल ने मेरी गाँड को भी अपने बीर्य से भऱ दिया और मुझसे अलग होकर बगल में लेट गए। मैं भी लम्बी लम्बी सांसे लेकर खुद को नियंत्रित कर रही थी। कुछ देर रेस्ट करने के बाद हरीश सर बोले

हरीश- सपना अब मुझे जाना होगा। श्रेया घऱ पर अकेली है। तुम चाहो तो रात में यहीँ रुककर रेस्ट कर सकती हो और अगर अभी जाना चाहो तो भी कोई प्राब्लम नहीं है। मैं ड्यूटी ऑफीसर को बोल देता हूँ वो तुम्हें होटल तक छोड देगा।

निशा- जी सर

इसके बाद हरीश सर ने अपने कपडे पहन कर मुझे 500-500 की दो गड्यियाँ देते हुए बोले

हरीश- असलम से जो तय हुआ था वो मैंने उसके पास भिजवा दिया था। यह पैसे अलग से हैं। इनके बारे में उसे कुछ बताने की जरूरत नहीं है। वर्ना इनमें भी वो कमीशन माँगने लगेगा और हाँ अपना कांटेक्ट नम्बर भी मुझे दे दो। बाद में काम आयेगा

हरीश अंकल की बात सुनकर मैंने उन्हें अपना कांटेक्ट नम्बर दे दिया। जिसके बाद उन्होंने मेरे नम्बर पर एक रिंग कर दी और मेरा नम्बर अपने मोबाईल में सेब करते हुए वहाँ से चले गए। उनके जाने के बाद मैंने भी हरीश सर का नम्बर अपने मोबाईल में सेव कर लिया। फिर कुछ देर यूँ ही लेटे रहने के बाद मैंने भी अपने कपडे पहने और बाहर आकर ड्यूटी ऑफीसर को ढूडने लगी। उस फार्म हाऊस पर एक सब इंसपेक्टर और चार सिपाही ड्यूटी पर थे।

जिनमें से दो फार्म हाऊस के बाहर पहरा दे रहे थे और दो सिपाही और सब इंस्पेक्टर फार्म हाऊस के अंदर थे। जब मैं उनके पास पहूँची तो देखा वो ड्रिंक करने की पूरी ब्यवस्था बना कर बैठे हुए थे। उन्हें देखकर मैं समझ गई की हरीश सर के रहते वो ड्रिंक करने की गलती नहीं कर सकते थे। अब जब वो चले गए हैं। तो उन्हें लगा होगा कि मैं सुबह ही यहाँ से जाऊंगी। इसलिए वो अपना मूढ बना रहे हैं। लेकिन जैसे ही उन्होंने मुझे देखा तो सब इंसपेक्टर वोला

सब इंसपेक्टर- तुम अगर चाहो तो आज रात उसी रूम में रेस्ट कर सकती हो। मैं सुबह तुम्हें छोड दूँगा और अगर अभी चलना है तो कोई बात नहीं हम लोग कुछ देर बाद अपना प्रोग्राम बना लेंगे

मुझे लगा कि यह सभी लोग ड्यूटी करते करते थक गए होंगे, तो क्यों ना इन्हें मजे करने दूँ। बैसे भी होटल जाकर भी तो मुझे सोना ही है। इसलिए मैं बोली

निशा- नहीं नहीं तुम लोग कन्टीन्यू करो मैं रूम में ही हूँ। तुम लोगों का हो जाऐ तो बोल देना

इतना बोलकर जैसे ही मैं जाने लगी तो सब इंसपेक्टर बोला

सब इंसपेक्टर- मैडम अगर बुरा ना माने तो, हमारे साथ भी 1-2 पैग लीजिएगा। आप के साथ पैग लेकर हमारा मूढ भी बन जाऐगा

मुझे उसके कहने का मतलब तो समझ में नहीं आया पर मैने मन ही मन सोचा की एक पैग और लेने में कोई बुराई नहीं है। बैसे भी अब तो सोना ही है। थोडी और पी लूँगी तो अच्छी नींद भी आ जाऐगी। इसलिए मैं भी उनके साथ बैठ गई।

कहानी जारी है ....
 
Update 027 -

हमारे पैग तैयार होने के बाद सभी लोगो ने एक दूसरे को चियर्स बोला और ड्रिंक करने लगे। मैं तो पहले ही काफी पी चुकी थी इसलिए आराम से धीरे धीरे शिप कर रही थी। पर वो लोग तो काफी देर से अपना मूढ बनाकर हरीश अंकल के जाने का इंतजार कर रहे थे। इसलिए एक बार में ही उन तीनों ने अपने अपने गिलास खाली कर दिऐ। जिसके बाद वे तीनों एक के बाद एक करीब 3-4 पैग पी गए। जिस कारण उन्हें पर्याप्त नशा हो गया था। जैसे ही मेरा पैग खत्म हुआ तो मैं सोने के लिए कमरे में बापिस चली गई।

मेरी यूनीफार्म एकदम टाईट फिटिंग की होने के कारण उसे पहनकर सोना बिल्कुल भी कंफर्टेबल नहीं था। जिस कारण मैंने अपनी यूनिफार्म उतार दी और मात्र कैमिसोल और पेंटी मैं ही विस्तर पर लेट गई और कंबल ओढ कर सोने की कोशिश करने लगी। पर इस सब में मुझसे एक गलती हो गई थी, असल में मैं रूम को अंदर से लॉक करना भूल गई थी। जिस कारण मेरे लेटते के कुछ देर बाद वो सब इंसपेक्टर अंदर आकर मेरे पास बैठ गया और मुझसे बोला

सब इंसपेक्टर- मैडम बुरा ना मानो तो एक बात कहूँ

निशा- हूँ

सब इंसपेक्टर- रात का 1 बज रहा है। अपने होटल जाकर क्या करोगी। बैसे भी काफी रात बाकी है

निशा- तो

सब इंसपेक्टर- मेरा मतलब है कि हमें भी मौका दो आपको खुश करने का

उसकी बातों का मतलब मैं अच्छी तरह से समझ रही थी और वो नशे की हालत में भी था। मैंने सोचा कि अगर मना किया तो पता नहीं ऐ मुझसे जबरदस्ती ना करने लगे। जिस कारण मैंने उसके साथ मजे करने का फैसला कर लिया। पर मैं फ्री में उसे यह मौका नहीं देना चाहती थी। इसलिए मैं बोली

निशा- मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा कि तुम क्या कहना चाहते हो

सब इंसपेक्टर- अरे मैडम हम जानते हैं कि आप कोई पुलिस बगैरह तो हो नहीं। यहाँ पर तो केवल सहाब का विस्तर गर्म करने आई हो। अब साहब अपना काम करके चले गये हैं। तो क्यों ना मौके का फायदा उठाकर हम भी थोडा मजा ले लें। आप चिंता मत करो हम पेमेंट कर देंगे आपको

निशा- तुम्हें मेरी रेट पता है

सब इंसपेक्टर- सहाब ने बुलाया है तो 2-3 हजार बाली तो होगी नहीं, इसलिए आप ही बोल दो

निशा- मैं एक राऊंड का 50 हजार लेती हूँ

मेरी बात सुनकर वो सब इंस्पेक्टर अपना सर पकडते हुए बोला

सब इंसपेक्टर- अरे बाप रे यह तो बहुत ज्यादा है। इतना तो हमारे एक महिने की सैलरी होती है। कुछ एडजस्ट कर लो… हम पूरे 5 आदमी हैं, बैसे भी सहाब से तो अच्छा खासा कमा ही लिया होगा। हमारी फीस को बोनस समझ लेना

निशा- अच्छा तो तुम्हीं बता दो कितना दोगे

सब इंसपेक्टर- हम सभी का मिलाकर 50 हजार ले लेना

निशा- एक काम करो जाकर थोडी सी ड्रिंक और कर लो। जिससे तुम्हें जल्दी नींद आ जाऐगी। क्यों फालतू में पैसे खर्च कर रहे हो।

सब इंसपेक्टर- अरे मैडम आप तो नाराज हो गई। समझो जरा हम छोटे मोटे लोग हैं। सहाब के फार्म हाऊस पर ड्यूटी करते हैं। एक्सट्रा इंकम तो होती नहीं है हमारी। और फिर घऱ भी चलाना पडता है।

उस सब इंस्पेक्टर की बात सुनकर मैंने थोडा सोचते हुए कहा

निशा- चलो ठीक है… सबका मिलाकर पूरे 1 लाख दे देना

सब इंसपेक्टर- मैडम यह भी बहुत ज्यादा हैं

निशा- देखो सर ने पहले ही मेरी बुरी तरह से बैंड बजा दी है। जिस कारण मैं बहुत थक गई हूँ और नींद भी आ रही है। अगर तुम मुझे ज्यादा परेशान करोगे तो मैं उनसे तुम्हारी शिकायत कर दूँगी।

सब इंसपेक्टर- ओह सॉरी सॉरी मैम मैं जाता हूँ। आप आराम से सो जाओ

इतना बोलकर वो वहाँ से जाने लगा पर तभी अचानक से मेरे पास बापिस आकर वोला

सब इंसपेक्टर- अच्छा मैं क्या बोल रहा था मैडम कि अगर हम पूरे 1 लाख दें तो क्या फिर हम दो दो राउँड लगा सकते हैं

उसकी बात सुनकर मैंने सोचा की ऐ सभी लोग पहले से ही काफी नशे में हैं। ज्यादा देर टिकेंगे भी नहीं और दूसरा राऊँड लगाने की स्थिती में भी नहीं रहेगे। तो इससे अच्छा है कि हाँ बोल देती हूँ। अभी तो काफी रात बाकी है। बैसे भी मैं यहाँ भोपाल में मजे लेने के लिए ही तो रूकी हूँ और फिर पास आते पैसों को ठुकराना भी ठीक नहीं है। इसलिए मैंने कहा

निशा- हाँ ठीक है कर लेना

मेरी बात सुनकर वो खुश होकर बोला

सब इंसपेक्टर- एक मिनट मैम आप सोना मत मैं बस एक बार सबसे बात करते आपको बताता हूँ

इतना बोलकर वो लडखडाते कदमों से बाहर निकल गया। करीब 10 मिनट बाद बो फिर से बापिस आया और एक प्लास्टिक थैली में मुझे पैसे देते हुए बोला

सब इंसपेक्टर- ये लो मैडम आपकी फीस। अब तो हम कर सकते हैं ना

मैंने उस सब इंसपेक्टर से पैसों बाली थैली ले ली। मैने उसे खोलकर देखा तो उसमें 500 और 2000 के नोट रखे हुए थे। साफ साफ समझ में आ रहा था कि ये सब इंसपेक्टर सभी से पैसे कलेक्ट करके लाया है। इसलिए मैने उन्हें गिनने की भी कोशिश नहीं की और उस थैली को बंद करके अपन कपडों के पास रख दिया। उसके बाद उस सब इंसपेक्टर को अपने ऊपर खिंच लिया। मेरे ऊपर आते ही वो सब इंसपेक्टर मुझ पर भूखे भेडिए की तरह टूट पडा और मुझे किस करने लगा।

मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी। कुछ देर मुझे किस करने के बाद उसने अपने सारे कपडे निकाल दिए और कंबल हटाकर मेरे भी बाकी कपडे निकाल दिए और मुझे चूमने और सहलाने लगा। मैं भी तो यहाँ भोपाल में पूरे 1 महीने तक जी भरकर चुदाई करवाने के लिए ही रुकी हुई थी। इसलिए मैं भी उसका पूरा साथ देकर मजे ले रही थी। कुछ देर मुझे चूमने और सहलाने के बाद ही उसने मेरी चुदाई शुरू कर दी, मैं भी पूरे मजे लेकर अपनी चुदाई करवा रही थी और उसे भी पूरा मजा दे रही थी। करीब आधा घण्टे की चुदाई के बाद उसने अपना पानी छोड दिया और मुझसे अलग होकर बाहर निकल गया।

उस सब इंस्पेक्टर के जाते ही एक सिपाही अंदर आया और जल्दी से अपने कपडे उतार कर मेरे ऊपर चड गया। उस सिपाही ने तो फोरप्ले भी नहीं किया सीधा अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा दिया और धक्के लगाने लगा। मुझे लगा की यह बाहर इंतजार करते करते ही काफी ज्यादा एक्साईटेड हो गया होगा। इसलिए उसने फोरप्ले में समय खराब करने से अच्छा डायरेक्त चुदाई करना ही ठीक समझा। उसके हटते ही दूसरा सिपाही अंदर आया और मुझे कुतिया बनने का इसारा किया। इसलिए मैं भी चुप चाप कुतिया बन कर खडी हो गई। इससे पहले मैं कुछ समझ पाती उसने मेरी गाँड में अपना लण्ड घुसाकर मेरी गाँड मारनी शूरू कर दी।

तो मैं भी मजे लेकर अपनी गाँड मरवाने लगी। जैसे ही यह सिपाही गया तो एक साथ दो सिपाही अंदर आ गए। एक ने पीछे से मेरी गाँड मारनी शुरू कर दी और दूसरा मेरे मूँह में लण्ड देकर मजे से अपना लण्ड चुसवाने लगा। उन दोनों के जाने के बाद फिर से सब इंसपेक्टर अंदर आकर मेरी गाँड मारने लगा था। हालाँकि मैंने इसकी उम्मीद तो नहीं की थी, पर मैं पहले ही दूसरे राउंड के लिए भी हाँ बोल चुकी थी। इसलिए मैं उसे मना भी नहीं कर सकती थी। इस तरह उन सभी ने दूसरी बार भी मेरे साथ जमकर चुदाई की। सभी के फ्री होते होते सुबह के 6 बज चुके थे। इसलिए चुदाई खत्म होते ही मैं फ्रेस होने बाथरूम में घुस गई।

करीब 7 बजे मैं पुलिस बैन से अपने होटल के बाहर उतरी और सीधे अपने रूम मैं जाकर कपडे चेंज करके कंबल ओड कर सो गई। आज मैं कुछ ज्यादा ही थक गई थी और रात में ड्रिंक भी ज्यादा कर ली थी। इस कारण मैं दोपहर 2 बजे तक सोती रही। जब मैं जागी तो सबसे पहले मैंने अपना मोबाईल चैक किया तो उसमें गगन, श्रेया और रवि के मिस कॉल डले हुए थे। मैंने सबसे पहले श्रेया को कॉल किया और उससे बातें करने लगी। श्रेया ने आज अपने दोस्तों के साथ मिलकर गगन को परेशान करने के लिए जो प्लान बनाया था उसके बारे में वो मुझे बता रही थी।

सारी बात बताने के बाद उसने मुझसे मिलने के लिए कहा तो मैं भी तुरंत तैयार हो गई। और उसे अपने होटल पर आने के लिए बोल दिया। फिर मैंने गगन को कॉल किया तो वो भी मुझसे मिलना चाहता था। पर मैं पहले ही श्रेया को हाँ बोल चुकी थी। तभी मेरे दिमाग में आईडिया आया कि क्यों ना गगन से मिलने के बहाने इसके घर जाकर कुछ छानबीन की जाऐ और इसे थोडा डराया जाये। इसलिए मैंने उसे रात में मिलने के लिए हाँ बोल दिया। गगन का फोन कट करने के बाद जब मैंने रवि को कॉल किया तो वो भी मुझसे मिलना चाहता था।

लेकिन मैं पहले से ही श्रेया और गगन से मिलने का अपना प्लान बना चुकी थी। इसलिए मैंने उससे मिलने से मना कर दिया, बैसे भी मैं खुद भी फिलहाल उससे मिलना नहीं चाहती थी। मेरे मना करने पर वो काफी निराश हुआ पर मैं इसमें कुछ नहीं कर सकती थी। मैं चाहती थी कि उसे अपनी गलती का एहसास हो ताकि दोवारा वो कोई गलती ना करे। बैसे भी मेरा उसके साथ कोई अफेयर करने का इरादा तो था नहीं। अगर हम बार बार यूँ ही मिलते रहे तो बाद में रवि को मुझसे दूर होने में प्राब्लम होगी। इससे अच्छा तो यही था कि मैं अभी से उससे दूरी बना कर चलूँ।

आज पूरा दिन मेरा श्रेया के साथ घूमने फिरने का इरादा था। इसलिए उसके आने से पहले मैंने अपने लिए एक कॉफी आर्डर कर दी और गगन का फोन हैक करके चैक करने लगी। जैसा की मैंने सोचा था उसने दूसरी बार भी वो हॉरर बीडियो डिलीट कर दिया था। इसलिए मैंने उसके मोबाईल से सारा डेटा परमानेंट डिलीट करके फिर से वो हॉरर बीडियो उसके मोबाईल में डाल दी। तब तक मेरी कॉफी भी आ गई थी। कॉफी हमेशा की तरह रघु ही लाया था। लेकिन इस बार वो मुझसे नजरे चुरा रहा था। तो मैंने कॉफी का सिप लेते हुए उससे पूछा

निशा- क्या हुआ रघु कोई प्राब्लम है क्या, तुमने आज एक बार भी मेरी तरफ नहीं देखा

मेरी बात सुनकर रघु थोडा हडबडाते हुए बोला

रघु- सॉरी मैडम मुझे नहीं पता था कि आप पुलिस इंस्पेक्टर हैं। वर्ना मैं ऐसी बैसी कोई हरकत नहीं करता

रघु की बात सुनकर मुझे याद आया कि मैं कल अपने होटल रूम से पुलिस यूनिफार्म में गई थी और सुबह बापिस भी उसी यूनिफार्म में आई थी। जिस कारण शायद होटल स्टॉफ मुझे पुलिस इंस्पेक्टर समझ रहा है। मैंने सोचा चलो अच्छा ही है। बैसे भी सारी रात मैं होटल से बाहर रहती हूँ तो ये होटल बाले पता नहीं मेरे बारे में क्या क्या सोचते होंगे। इसलिए हो सकता है कि अब शायद उन्हें लगे कि मैं अपनी पुलिस ड्यूटी पर जाती हूँ और ये लोग मुझे पुलिस ऑफिसर समझ कर मुझे थोडा ज्यादा मुझे रिस्पॉंन्स देना शुरू कर दे। इसलिए मैं बोली

निशा- हाँ तो क्या हुआ... क्या पुलिस ऑफिसर इंसान नहीं होते... या फिर पुलिस बालों के दिल नहीं होता। देखो रघु अगर मुझे तुम्हारी हरकतों से कोई प्राब्लम होती तो तुम्हें लगता है कि तुम यहाँ होते। अब तक जेल में डण्डे खा रहे होते। अरे यार मैंने तुमसे कहा तो था कि मैं तुम्हें पसंद करती हूँ। तुम कितने ज्यादा हैंडसम हो यार। इसीलिए तो मैंने खुद तुम्हें अपनी मर्जी से ब्लोजॉब दिया था। भूल गए क्या

रघु- पर आप पुलिस ऑफिसर हैं और मैं मामूली सा होटल स्टॉफ, मैं और आप एक साथ कैसे हो सकते हैं।

निशा- कैसे क्या… फिलहाल हम अपनी दोस्ती को सीक्रेट रखेंगे। बाद में देखेंगे क्या हो सकता है। हाँ यह बात अलग है कि मैं खुबसुरत नहीं हूँ या तुम्हें कोई दूसरी लडकी पसंद है। अगर ऐसा है तो मैं तुम्हें कुछ नहीं कहूँगी

मेरी बात सुनकर रघु तुरंत बोला

रघु- अरे मैंम आप ये क्या कह रहीं हैं। आप तो बहुत ज्यादा खूबसूरत हैं और मुझे आपके अलावा कोई दूसरी लड़की भी पसंद नहीं है।

निशा- तो फिर मुझसे दूर क्यों खडे हो, मेरे पास आयो ना। मुझे तुम्हें किस करने का मन कर रहा है।

मेरी बात सुनकर रघु डरते हुए मेरे पास आया। तब तक मेरी कॉफी भी खत्म हो चुकी थी। इसलिए मैंने खडे होकर उसको किस करना शुरू कर दिया। तो बो भी मेरा साथ देने लगा। कुछ देर किस करने के बाद मैंने कहा

निशा- अच्छा रघु होटल में किस किस को पता है कि मैं पुलिस ऑफिसर हूँ

मेरी बात सुनकर रघु सोचते हुए बोला

रघु- सबको पता चल गया है

निशा- ओह सिट यार... कल मुझे अर्जेंट मीटिंग के लिए जाना था, इसलिए यूनिफार्म में ही चली गई।

रघु- पर हुआ क्या….. आप इतनी टेंशन में क्यों हैं

निशा- अरे यार रघु मैं यहाँ एक सीक्रेट ऑपरेशन पूरा करने के लिए आई थी। मतलब मैं एक अंडर कबर पुलिस ऑफिसर हूँ। इसलिए तुम्हें मेरा एक काम करना होगा

रघु- क्या

निशा- स्टॉफ में सबको समझा देना कि मैं पुलिस ऑफिसर हूँ यह बात वो भूलकर भी किसी को ना बताऐं। वर्ना अगर मेरा ऑपरेशन फेल हो गया तो यहाँ भोपाल में आतंकवादी हमला भी हो सकता है। तुम समझ रहे हो ना मेरी बात

मेरी बात सुनकर रघु काफी ज्यादा डर गया था, इसलिए वो बोला

रघु- ज जी मैम मैं समझ गया... मैं सबको अच्छी तरह समझा दूँगा

निशा- अच्छा तुम्हारी ड्यूटी कब खत्म होती है

रघु- ज जी शाम को 7 बजे ड्यूटी खत्म हो जाती है। उसके बाद मैं यहीँ होटल में अपने रूम में आराम करता हूँ।

निशा- मतलब अगर मुझे रात में कभी कहीं जाने के लिए तुम्हारे हेल्प चाहिए हो, तो तुम मेरे साथ जा सकते हो ना।

रघु- हाँ हाँ मैम जा सकते हैं। मेरी खुद की बाईक यहाँ रखी हुई है, हम उससे कहीं भी जा सकते हैं। या आप कहें तो होटल बाले अपने गैस्ट के लिए कार सर्विस भी देते हैं। हम होटल की किसी कार को अपने साथ ले जा सकते हैं।

रघु की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- यह तो अच्छी बात है। एक काम करते हैं आज रात ही मुझे एक जरूरी मिशन को पूरा करना है। इसलिए आज रात में तुम मेरी बताई जगह पर कार लेकर आ जाना। बैसे तुम्हें कार चलाना तो आता है ना।

रघु- ज जी मैम सहाब

रघु की बात सुनकर मैं उससे थोडा चिढते हुए बोली

निशा- अरे यार कितनी बार कहा है कि तुम मुझे मैम सहाब मत कहा करो, मेरा नाम सपना है।

रघु- ज जी सपना जी

निशा- हुम्म….. ये ठीक है। हाँ तो मैं कह रही थी कि तुम खुद ही कार लेकर आ जाना। ड्रायबर को अपने साथ लाने की कोई जरूरत नहीं है और हाँ यह बात टॉप सीक्रेट है। स्टॉफ में भी किसी को पता नहीं चलना चाहिए। अगर कोई पूछे तो बोल देना मुझे अपने किसी रिलेटिव से मिलने भोपाल से बाहर जाना है और हाँ कार का जो भी रेंट हो वो मेरे बिल में एड करवा देना।

रघु- ज जी सपना जी। बैसे कार का हम लोग कोई एक्सट्रा बिल नहीं लेते हैं, बस ड्रायबर का चार्ज और पैट्रोल का जो खर्चा होता है वही अपने कस्टमर से लेते हैं।

निशा- यह तो अच्छी बात है। अच्छा मेरे कपडों का क्या हुआ

रघु- बो आज लाऊँड्री से आ जाऐंगे

निशा- ठीक है तो अभी तुम जाओ मेरी एक दोस्त मुझसे मिलने आने बाली है। मैं शाम को तुम्हें कॉल कर दूँगी। तुम कार लेकर आ जाना।

मेरी बात सुनकर रघु वहाँ से चला गया।

कहानी जारी है ....
 
Update 028-

रघू के जाने के बाद मैं भी बाथरूम में घुस गई। जब तक मैं तैयार हुई, तब तक श्रेया भी वहीँ आ गई थी और आते ही मुझ पर भडक उठी

श्रेया- सपना धोखेबाज झूठी इंसान… यह तुमने मेरे साथ ठीक नहीं किया

श्रेया को यूँ गुस्से में देखकर मैंने उससे कहा

सपना- अरे बाबा… आखिर हुआ क्या जो इतना भडक रही हो

श्रेया- तुम एक पुलिस इंसपेक्टर हो और मुझे बताया भी नहीं

श्रेया की बात सुनकर मैंने अपना सर पीट लिया, और मन ही मन सोचने लगी कि अब इसने मुझे कब यूनिफार्म में देख लिया। इसलिए मैंने उससे पूछा

निशा- तुम्हें किसने बताया

श्रेया- मैं आज सुबह जब जॉगिंग करने गई थी तो मैंने तुम्हें एक पुलिस बैन में यूनिफार्म पहने देखा था।

श्रेया की बात सुनकर मैं उसे समझाते हुए बोली

निशा- अरे बाबा… वो तो सब एक नाटक था। मैं पुलिस में नहीं हूँ मेरी जान

श्रेया को मेरी बात पर बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा था। इसलिए वो बोली

श्रेया- नहीं…. तुम झूठ बोल रही हो

निशा- मैं कसम खाती हूँ मेरी माँ। मैं सच बोल रही हूँ

श्रेया- तो वो पुलिस यूनिफार्म

निशा- अरे यार बताया ना कि वो तो बस यूँ ही। तुम तो जनती हो ना मेरा काम। पुलिस डिपार्टमेंट को किसी काम से एक हैकर की जरूरत थी। इसलिए उन्होंने मुझसे कांटेक्ट किया था। काम थोडा सीक्रेट था इसलिए डिपार्टमेंट के बडे ऑफिसर नहीं चाहते थे कि किसी को पता चले की वो किसी हैकर की हेल्प ले रहे हैं। इसलिए उन्होंने मुझे पुलिस यूनिफार्म में मिलने के लिए बुलाया था। ताकि डिपार्टमेंट के ज्यादातर लोगों को लगे कि में पुलिस ऑफिसर हूँ और किसी दूसरे काम से मिलने आई हूँ।

मेरी बात सुनकर श्रेया थोडा सोचते हुए बोली

श्रेया- तो फिर यह सब नाटक करने की क्या जरूरत थी। मुझसे बोल देती… मेरे पापा...

उसकी बात पूरी होने से पहले ही मैंने कहा

निशा- यहाँ के डी.जी.पी हैं। मैं जानती हूँ उन्हें

मेरी बात सुनकर श्रेया हैरान होते हुए बोली

श्रेया- व्हॉट….. पर कैसे

निशा- अरे बाबा…. उन्हीं के कहने पर यह नाटक किया था मैंने।

श्रेया- क्या मतलब तुम मेरे पापा को पहले से जानती हो.... हे भगवान कहीं तुमने उन्हें गगन बाले मैटर के बारे में तो नहीं बता दिया

निशा- हाँ भी और नहीं भी

श्रेया- मतलब

निशा- मैं तुझे सब समझाती हूँ। पहले तू शांत होकर बैठ जा और टेंशन मत ले। इतनी बेबकूफ नहीं हूँ मैं जितना तू समझ रही है।

मेरी बात सुनकर श्रेया चुपचाप मेरे साथ सोफे पर बैठ गई। जिसके बाद मैंने रूम सर्विस पर कॉल करके अपने और उसके लिए कॉफी ऑर्डर कर दी। इसके बाद मैं श्रेया तो पानी की बोतल देती हुई बोली

निशा- चल पहले पानी पी ले। तब तक कॉफी आती है। फिर मैं तसल्ली से तुझे पूरी बात बताती हूँ।

श्रेया ने मेरी बात का कोई जबाब नहीं दिया और चुपचाप मुझसे पानी को बोतल लेकर दो घूँट पानी पीने के बाद बोतल को बापिस रख दी। कुछ ही देर बाद रघू 2 कॉफी वहां रख कर चला गया। उसके जाते ही मैंने रूम अंदर से लॉक किया और कॉफी सिप करते हुए बोली

निशा- तुम्हारे पापा ने किसी दूसरे काम के लिए मुझे बुलाया था। मुझे नहीं पता थी कि तुम उनकी बेटी हो। नॉर्मल बातें होने पर मुझे पता चला कि उनकी लड़की का नाम श्रेया है और वो ड्रेगन हार्ट यानि मुझसे हैकिंग सीख रही है और तुमसे ही उन्हें मेरे बारे में पता चला था। इसलिए उन्होंने अपने ऑफीसियल काम के लिए मुझे बुलाया था। तब जाकर मुझे पता चला कि उनकी बेटी और कोई नहीं बल्कि तुम हो। हमारी बस तुम्हारे बारे में कुछ नार्मल बाते हुईँ थी। उन्होंने मुझे तुम्हारी माँ के बारे में भी बताया था। बो बाकई में तुम्हारी बहुत ज्यादा फिक्र करते हैं और बहुत प्यार करते हैं।

मेरी बात सुनकर श्रेया खुश होते हुए बोली

श्रेया- हाँ मुझे पता है। लेकिन तुम बातों को गोल गोल मत घुमाओ और सीधे मुद्दे पर आओ

श्रेया की बात सुनकर मैंने अपनी कॉफी शिप करते हुए कहा

निशा- तुम्हारी दोस्त होने के नाते वो जानना चाहते थे कि तुम किसी प्राब्लम में तो नहीं हो या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड बगैरह तो नहीं है। तो मैंने उनसे मना कर दिया

श्रेया- पर क्यों…. बो यह सब क्यों पूछ रहे थे

निशा- तुमने कुछ दिन पहले 20 लाख रूपये बैंक से निकाले हैं। बेबकूफ इतनी बडी रकम बैंक से निकालने के बाद तुम कैसे उम्मीद कर सकती हो कि उन्हें कुछ पता नहीं चलेगा

मेरी बात सुनकर वो थोडा हैरान होते हुए बोली

श्रेया- व्हॉट…. तो क्या वो मेरी जासूसी करवा रहे हैं

निशा- नहीं ऐसा कुछ नहीं है। बस वो परेशान थे कि तुम्हें अचानक इतने पैसों की क्या जरूरत पड गई और तुमने उन्हें कुछ बताया भी तो नहीं था।

मेरी बात सुनकर श्रेया मुझे घूरते हुए बोली

श्रेया- तो फिर तुमने उनसे क्या कहा

निशा- मैंने गगन के बारे में उन्हें सब कुछ बता दिया

श्रेया- क्या..... ओह शिट… अरे डफर ये क्या किया तुमने...

निशा- अरे पहले पूरी बात तो सुन लो मेरी माँ, हर वक्त घोडे पर क्यों सबार रहती है।

मेरी बात सुनकर श्रेया चिढते हुए बोली

श्रेया- तो फिर तुम एक बार में ही पूरी बात नहीं बता सकती क्या। भला ऐसे सस्पेंस बनाकर कौन बात करता है। अब बताओ भी आखिर क्या कहा तुमने उनसे

निशा- मैंने तुम्हारे और गगन के बारे में उन्हें कुछ भी नहीं बताया है। मैंने बस गगन के बारे में बताया है कि वो कैसे लडकियों को ड्रग देकर उनके बीडियो बनाता है और फिर उन्हें ब्लैकमेल करता है। उसके बाद मैंने कहा कि गगन ने तुम्हारी कुछ फ्रेंडस के साथ भी ऐसा किया था। जिस कारण तुमने शायद अपनी फ्रेंडस की हेल्प करने के लिए वो पैसे निकाले थे।

मेरी पूरी बात सुनकर श्रेया अपने सीने पर हाथ रखते हुए बोली

श्रेया- थैंक्स गॉड मैं बच गई, वर्ना पापा तो कहीं ना कहीं पक्का मेरी शादी करवाकर मुझे अपने से दूर ही कर देते।

श्रेया की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए कहा

निशा- तुम्हारे पापा गगन से काफी ज्यादा नाराज हैं। बो तो तुरंत ही उसे उठवाने बाले थे। पर मैंने कहा कि अगर अभी आपने उसे उठवा लिया और गलती से किसी लड़की का कोई बीडियो लीक हो गया या गगन की करतूत मीडिया को पता चल गई, तो लडकियों की काफी बदनामी होगी। इसलिए जैसे ही मुझे उसके पास ड्रग होने की जानकारी मिलेगी तो आप उसे ड्रग स्मगलिंग के केस में अंदर कर देना।

श्रेया- पर यह सब उन्हें बताने की जरूरत क्या थी

निशा- ताकि उसका हमेशा के लिए ही किस्सा खत्म हो जाए

श्रेया- मतलब

निशा- मतलब इनकाऊंटर.... अब पुलिस और क्रिमनलस की बीच यह सब तो नॉर्मल है ना

यह बोल कर मैंने श्रेया को आँख मार दी। जिसे देखकर श्रेया मेरा सारा प्लान समझ गई और बोली

श्रेया- ओह माय गॉड... तुम कितनी शातिर लड़की हो.... एक मिनट…. हे भगवान यानि कल तुमने पूजा को और हम सबको उसे जान से मारने बाली बात पर इसीलिए रोका था ताकि तुम उसका इनकाऊंटर करवा सको। यानि तुम पहले से ही यह सारा प्लॉन बना चुकी थी।

श्रेया की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- हाँ…. बस इस बीच एक बात बदल गई कि मुझे पहले यह नहीं पता था कि तुम डी.जी.पी. की बेटी हो। इसलिए अब मेरा प्लान थोडा ईजी हो गया है। क्योंकि अब हमें उसके इन्काऊंटर के लिए कुछ एक्सट्रा करने की जरूरत नहीं हैं।

श्रेया- मतलब कि अब हमें उसे मेंटली डिस्टर्व करने की कोई जरूरत नहीं है।

निशा- हाँ

श्रेया- लेकिन मुझे तो अब इस काम में बहुत मजा आ रहा है। अभी कुछ दिन और उसे डराते हैं ना।

निशा- हाँ हाँ ठीक है, हम ऐसा ही करेंगे। अब चलो कहीं घूमने चलते हैं। बाकी बातें रास्ते में कर लेंगे

श्रेया तो पहले से ही चलने के लिए तैयार थी। इसलिए हम दोनों श्रेया की कार से घूमने निकल गए। उस पूरे दिन मैं श्रेया के साथ घूमती रही और उससे ढेर सारी बातें की। और शाम को हमने एक साथ रेस्टोरेंट में हल्का फुल्का डिनर भी किया। जिसके बाद बो मुझे होटल बापिस छोड कर चली गई। श्रेया के जाने के बाद मैं अपने होटल रूम में आ गई और बॉस के द्वारा भेजी गई लिस्ट चेक करने लगी। क्यों कि इस मौज मस्ती के बीच मुझे ऑफिस का काम तो करना ही था।

सारी लिस्ट अच्छी तरह से चैक करने के बाद मैंने अपने साभी कामों को पूरा करने का एक पूरा प्रोग्राम सेट कर लिया। ताकि मैं जल्दी से जल्दी अपना काम फिनिश करके अपनी छुट्टियों के मजे ले सकूँ। सबसे पहले मैंने कल एक बार उसी गवर्मेंट ऑफिस में जाकर अपने काम का फीडबैक लेने का प्लान बनाया था। ताकि मुझे कंफर्म हो जाऐ कि मैंने जो सॉलूशन उन्हें दिया था, वो सक्सेशफुल रहा या नहीं। उसके बाद कल ही मैं अपनी अगली लोकेशन पर जाकर वहाँ की प्राब्म भी सॉल्ब करूँगी।

यह सब काम खत्म होने का बाद मैंने अपना वह बैग खोला जिसमें मैंने अब तक कॉलगर्ल बनकर जो भी पैसे कमाए थे वो रखे हुए थे। बो सारे पैसे मैंने विस्तर पर डाल दिये और गिनने लगी। जव मैंने सारे पैसे गिने तो वो पूरे 8 लाख 30 हजार रूपये थे। उनके अलावा 2 सोने की चैन, 2 सोने के कंगन, 1 सोने का नेकलेश सेट, 5 सोने की की अंगूठियाँ थीं, जो भिखारी अपने थैले में छोड गए थे। इसके अलाबा रघु की दी गई सोने की चैन और डायमंड पेंडेंट भी था।

इन सब की कीमत कम से कम 5 लाख तो होगी ही। इसके साथ साथ शैलेन्द्र यादव के द्वारा करवाई गई शॉपिंग जिसमें 1 मोबाईल और ब्रांडेड कपडों के साथ साथ बाकी सामान भी था। जिनकी कुल कीमत करीब 2 लाख के आसपास होगी। यानि पिछले 5-6 दिनों में मैंने 15 लाख से ज्यादा कमाए थे। यह सब कुछ ज्यादा ही था। क्योंकि इतने पैसे तो मेरे और मेरे पति अमन दोनों की एक साल की कमाई से भी ज्यादा थे और अभी तो पूरे 27 दिन बाकी थे मेरे पास।

मैंने सारे पैसे संभाल कर बैग में बापिस रख दिए फिर रघु की दी हुई चैन को पहन लिया। क्योंकि वो मुझे पसंद आ गई थी। बाकी की सारी ज्वैलरी मैंने बेचने का फैसला कर लिया था। इसलिए मैंने वो अलग निकाल कर रख दी। ताकि कल उन्हें किसी बडे ज्वैलर के पास बेच सकूँ। जब तक ये सारे काम खत्म हुए, तब तक गगन का फोन भी मेरे पास आ गया था। तो मैंने उसका फोन रिशीव कर उसे एक बार फिर उसी बियरबार में मिलने के लिए बुला लिया, जिसमें हम पहले मिले थे। इसके बाद मैं तैयार होने के लिए बाथरूम में घुस गई। करीब 1 घंटे बाद मैं गगन के साथ उसी बियरबार में बैठी थी। कुछ देर नॉर्मल बातें करने के बाद मैंने गगन से कहा

निशा- यार गगन आज तो मेरा किसी के साथ हुकअप करने का मन कर रहा है

मेरी बात सुनकर गगन हंसते हुए बोला

गगन- तुम बडे शहर की लडकियाँ भी ना, कितनी ज्यादा ओपन माईंड होती हो।

निशा- हाँ तो इसमें बुरा क्या है। जैसे लडकों को वो सब करने का मन होता है। बैसे लडकियों का भी होता है। बस कुछ लडकियाँ शर्म के कारण यह बात मन ही मन में रखतीं है और कुछ बोल देतीं हैं। बैसे भी छोटी सी जिंदगी है उसपर भी समाज के बनाए नियम कायदे। जब तक लडकियों का मजे लेने का समय आता है। तब तक घऱ बाले उसकी शादी करवा देते हैं। बस फिर क्या अगले साल बच्चा और सारी जवानी की माँ बहन हो जाती है।

मेरी बात सुनकर गगन फिर से हंसने लगा और बोला

गगन- बात तो सही है। तो एक काम करो रवि को कॉल कर लो

निशा- अरे यार उसका और रश्मि का पैचअप हो गया है। अब मैं उन दोनों के बीच कबाब में हड्डी बनना नहीं चाहती। एक काम करते हैं तुम्हारे साथ ही हुकअप कर लेती हूँ

मेरी बात सुनकर गगन हैरान रह गया था। उसे उम्मीद ही नहीं थी कि मैं उससे यह सब बोलूँगी, इसलिए वो हकलाकर बोला

गगन- म मेरे साथ

निशा- हाँ…. कोई प्राब्लम है क्या.... अगर कोई प्राब्लम हो तो बात नहीं, मैं किसी और को देख लूँगी। कोई ना कोई बंदा तो मिल ही जाऐगा

मेरी बात सुनकर गगन तुरंत बोला

गगन- न नहीं नहीं ये बात नहीं है… मैं तैयार हूँ। वो तो तुमने यूँ अचानाक पूछ लिया… इसलिए मै हैरान रह गया था

गगन की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- बहुत बडिया… तो फिर चलो इसी बात पर एक एक जाम और हो जाए। तुम रुको मैं खुद लेकर आती हूँ

मेरी बात सुनकर गगन ने कहा

गगन- अरे तुम क्यों परेशान हो रही हो… वेटर से मंगवा लेते हैं ना

निशा- अरे मैं लाती हूँ ना… अब जब हम हुकअप करने ही बाले हैं तो थोडी बहुत फीलिंग बडाने के लिए कुछ एक्सट्रा करना तो बनता है।

इतना बोलकर मैंने उसे आँख मार दी और मुश्कुराकर काऊंटर की तरफ बड गई। गगन हैरानी से मुझे जाते हुए देख रहा था। काऊँटर पर जाकर मैंने दो पैग का आर्डर किया और फिर एक गिलास में दो गोलियाँ डाल दीं। जो तुरंत ही घुल गईँ। जिसके बाद मैं उन दोनों गिलास को लेकर गगन के सामने बैठ गई और वो ड्रग बाला गिलास उसकी तरफ खिसकार दूसरा गिलास एक ही बार में पूरा पी गई। गगन ने मुझे हैरान होकर देखा और फिर उसने भी अपना गिलास एक ही बार में पूरा खत्म कर दिया। जैसे ही गगन का गिलास खाली हुआ तो मैं बोली

निशा- तो फिर चलो तुम्हारे घर चलते हैं

मेरी बात सुनकर गगन थोडा परेशान होते हुए बोला

गगन- पर मेरे घऱ क्यों… कहीं होटल में चलते हैं ना

निशा- घर चलने में क्या प्राब्लम है तुम्हें। ओह अच्छा मम्मी पापा हैं ना

गगन- अरे नहीं ये बात नहीं है। मेरे माता-पिता की डेथ तो बहुत पहले हो गई है

निशा- तो क्या बीबी का डर है.... अरे तुमने बताया नहीं तुम्हारी शादी हो गई है

गगन- अरे नहीं….. मैं अकेला ही रहता हूँ

निशा- तो चलो ना तुम्हारे घऱ चलते है। होटल बगैरह में मुझे जाना पसंद नहीं है। बैसे भी आजकल होटल में स्पाई कैमरा छिपाकर बीडियो बना लेते हैं। मैं यह सब लफडे में नहीं पडना चाहती। मुझे साथ ले जाना है तो अपने घऱ ले चलो बर्ना टाटा बाय बाय

मेरी बात सुनकर गगन आखिरकार बोला

गगन- ठीक है बाबा…. मेरे घर चलते हैं।

इतना बोलकर वो खड़ा हो गया और काउँटर की तरफ बड गया, बिल का पेमेंट करने के बाद हम दोनों गगन के घर पर जा पहूँचे। जैसे ही हम बैडरूम के अंदर पहूँचे, तो हम दोनों ही एक दूसरे पर टूट पडे। कुछ ही देर में हम दोनों के कपडे नीचे जमीन पर पडे हुए थे और हम दोनों बिना कपडों के एक दूसरे को सहला रहे थे। कुछ देर तक एक दूसरे को सहलाने के बाद गगन ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे ऊपर सबार हो गया। हम दोनों को ही हल्का हल्का नशा था और दोनों ही वसना की आग में बुरी तरह जल रहे थे।

जिस कारण कुछ ही देर में मेरी चुदाई शुरू हो गई। मैं भी गगन का भऱपूर साथ दे रही और खुद भी मजे ले रही थी। करीब 30-35 मिनट की चुदाई के बाद गगन मुझसे अलग होकर मेरे बगल में लेट गया और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा। मैं भी उसके बगल में लेटी अपने आप को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी। करीब 10 मिनट बाद ही गगन ने हिलना डूलना बिल्कुल बंद कर दिया और अपनी आँखें बंद किये लेटा रहा।

कहानी जारी है ......
 
Update 029 -

जैसे ही मुझे एहसास हुआ कि गगन गहरी नींद में सो चुका है। तो मैंने उसे अच्छी तरह से हिला डुला कर जगाने की कोशिश की, पर वो तो इतनी गहरी नींद में सो चुका था कि अब वो सुबह से पहले जागने बाला नहीं था। चाहे सुनामी ही क्यों ना आ जाए। जिसे देखकर मेरे चेहरे पुर मुस्कान आ गई। असल में मैंने गगन की ड्रिंक में हाई पावर की नींद की गोली मिला दी थी। जिसका असर कुछ देर बाद होता था। ताकि किसी को कोई शक ना हो।

गगन के गहरी नींद मैं जाने के बाद मैं बिस्तर से उठ कर खडी हो गई और अपने सारे कपडे संभाल कर एक टेबिल पर ऱख दिये। मुझे अभी यहाँ से जाने की कोई जल्दी नहीं थी। क्योंकि अभी मात्र रात के 10 बजे थे। और मेरे पास काफी समय था। गगन के घऱ में कुछ खास सामान नहीं था और ना ही उसके घऱ में मुझे कोई ड्रग बगैरह मिला। जिस कारण मेरा मूड पूरी तरह से खराब हो गया था। इतनी मेहनत की और कोई सबूत नहीं मिला। तभी मेरी नजर गगन के बेडरूम में टंगी एक पिक्चर फ्रेम पर पडी।

जिसमें उसके माता-पिता और उसकी फोटो लगी हुई थी। मैं जाकर उसे देखने लगी। तभी पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने उस पिक्चर फ्रेम को दीवार से निकाल दिया। जैसे ही मैंने उसे हटाया तो मैं हैरान रह गई। क्योंकि उसके पीछे एक बडा सा लॉकर रखा हुआ था। जिसमें लॉक लगा हुआ था। मैंने तुरंत गगन के कपडों को चेक किया तो मुझे उसकी चाबियाँ मिल गई। जिसके बाद मैंने फटाफट उस लॉकर को खोल दिया। उसके अंदर ढेर सारे पैसे, एक डायरी और कुछ ड्रग के पैकेटस् रखे हुए थे।

मैंने उस डायरी को खोल कर देखा तो उसमें उन सभी लडकियों के नाम और उनसे लिए गए पैसों की डिटेल लिखी हुई थी। इसके अलावा उसमें कुछ दूसरे लोगों की भी डिटेल थी। मैंने तुरंत अपने मोबाईल से उन सभी लोगों की डिटेल की पिक्चर ले ली और लडकियों के डिटेल बाले पेजों को उस डायरी से निकाल कर अपने हैंड बैग में ऱख लिया। ताकि बाद में जब पुलिस यहाँ छापा मारे तो उन्हें इस डायरी में लडकियों की डिटेल ना मिले।

ये सब काम खत्म करने के बाद मैंने गगन के कवर्ड में से एक खाली बैग उठाया और उसमें सारे पैसे रखने के बाद मैंने ड्रग के कुछ पैकेट भी अपने पास रख लिये। ताकि मैं डीजीपी सर को उसे चैक करवाने के लिए दे सकूँ। फिर मैंने उस लॉकर को फिर से अच्छी तरह से लॉक कर दिया और वो पिक्चर फ्रेम भी वापिस लगा दी। यह सब काम खत्म करने के बाद मैंने अपने हैंड बैग से एक प्लास्टिक बॉटल निकाली, जिसमें खून की तरह दिखने बाला लिक्विड भरा हुआ था।

मैंने उस बाटल को खोला और बैग से एक ब्रस निकाल कर घऱ की अलग अलग दीवारों पर धमकियाँ और डरावने सिंबल बना दिए। इसके बाद मैंने उस बचे हुए लिक्विड को भी घर के अंदर अलग अलग जगह पर फैला दिया। यह सारे काम खत्म करने के बाद मैं गगन के पास बापिस आ गई और उसे नफऱत भरी नजरों से देखते हुए मैंने उसके चेहरे पर थूक दिया। अभी मेरा काम खत्म नहीं हुआ था। अभी तो गगन को सबसे बड़ा झटका देना बाकी था। इसलिए मैंने अपने हैँड बैग से एक इंजेक्शन के साथ साथ लिक्विड और एक सर्जीकल ब्लेड निकाला।

जिसके बाद मैंने उस लिक्विड को इंजेक्शन में भर कर गगन के लण्ड के ऊपर इंजेक्ट कर दिया। इंजेक्शन लगने से गगन थोडा हिला डूला पर फिर एकदम शांत हो गया। फिर मैंने 5 मिनट इंतजार करने के बाद सर्जीकल ब्लेट उठाया और सावधानी से गगन के लण्ड की खाल उतारने लगी। पर मैंने जो इंजेक्शन उसे लगाया था उसके कारण गगन को इसका बिल्कुल भी एहसास नहीं हो रहा था।

अब मैं कोई डॉक्टर तो थी नहीं जिस कारण उसके लण्ड की खाल उतारने में थोडा बहुत खून भी निकल रहा था पर मुझे उसकी बिल्कुल भी परवाह नहीं थी। सारी खाल उतारने के बाद मैंने कॉटन से उसके लण्ड को अच्छे से साफ किया और फिर उसपर थोडा सा एंटीसेप्टिक लिक्विड भी लगा दिया ताकि खुन निकलना बंद हो जाए। मैं नहीं चाहती थी कि ज्यादा खून निकलने से उसकी मौत हो जाऐ और मैं अनजाने में ही सही एक कातिल बन जाऊँ।

एंटीसेप्टिक लिक्विड के कारण जल्द ही उसके लण्ड से खून निकलना बंद हो गया। जिसके बाद मैंने अपने मोबाईल में गगन के कुछ फोटा निकाले और घऱ की उन दीवालों के भी फोटो निकाल लिए, जिनपर मैंने धमकियाँ लिखीं थी और फिर फर्स पर जहाँ मैंने खुन गिरा दिया था उसकी फोटो भी मैने निकाल ली। यह सारे काम खत्म करने के बाद मैंने रघु को कॉल करके गगन के घऱ का एड्रेश दे दिया और सारा कचडा एक प्लास्टिक पॉलीथीन में ऱख दिया ताकि यहाँ से जाने के बाद मैं उसे रास्ते में कहीं फेंक सकूँ।

जिसके बाद मैं बाथरूम में जाकर अपने आपको अच्छे से साफ करने लगी। क्योंकि गगन का वीर्य मेरी चूत से निकल कर मेरी जांघों तक आ गया था और वो खून की तरह दिखने बाले लिक्विड के साथ साथ गगन का कुछ खून भी मेरे ऊपर लग गया था। हाँलाकि मुझे इसका अंदाजा पहले से ही था। इसीलिए मैंने अब तक अपने कपडे नहीं पहने थे। अपने आपको अच्छी तरह से साफ करने के बाद मैंने गगन को एक कंबल ओडा दिया और फिर अपने कपडे पहनने के बाद मैं पैसों से भरा बैग और कचडे बाली पॉलीथीन लेकर गगन के घऱ से बाहर निकल गई।

गगन के घऱ के मैन डोर में ऑटो मैटिक लॉक लगा हुआ था। जिस कारण जैसे ही मैंने गेट बंद किया तो वो अंदर से लॉक हो गया। फिर मैं गगन के घऱ से निकल कर कुछ दूरी पर जाकर खडी हो गई। पास में ही एक डस्टबिन था, जिसमें मैंने वो कचडे बाली पॉलीथीन डाल दी। कुछ देर इंतजार करने बाद रघु भी कार लेकर वहाँ आ गया। जिसके बाद मैंने वो बैग उस कार में रख दिया और रघू के साथ आगे बाली सीट पर बैठ गई। मैंने मोबाईल में समय देखा तो रात के 12 बज चुके थे। इसलिए मैंने रघू को इंदौर हाईवे पर उस ढावे पर चलने के लिए कहा। जहाँ गगन को पार्सल लेने जाना था।

हम दोनों रात करीब 1 बजे से कुछ पहले ही वहाँ पहूंच गए थे। मैंने रघू को ढावे से थोडी दूरी पर अँधेरे में ही गाडी रोकने के लिए बोल दिया था और रघु को उस ट्रक की सारी डिटेल और पार्सल कोड बता कर वो पार्सल लाने के लिए बोल दिया था, साथ ही उसे मूँह ढंकने के लिए भी बोल दिया था। ताकि कोई उसे पहचान ना पाए। कुछ ही देर वाद वो गत्ते से बने दो बडे बडे पार्सल लेकर आया, जो कुछ ज्यादा ही भारी लग रहे थे। रघु ने वो दोनों पार्सल भी गाडी की पिछली सीट पर रख दिए।

इसके बाद रघु ने ड्रायबिंग सीट पर बैठ कर गाडी बापिस होटल की तरफ मोड दी। करीब 1 घंटे बाद हम दोनों मेरे होटल रूम में थे। रघु ने सारा सामान खुद ही मेरे रूम में पहुँचा दिया था और कार की चावियाँ भी बापिस जमा कर दीं थी। रघु जैसे ही जाने लगा तो मैंने उसका हाथ पकड कर उसे रोक लिया और उसे अपनी बाहों में भऱ कर किस कर लिया। रघु तो कब से इसी पल का इंतजार कर रहा था। इसलिए उसने भी मुझे अपनी बाहों में लेकर किस करना और मेरे शरीर को सहलाना शुरू कर दिया। कुछ देर यूँ ही एक दूसरे का साथ देने के बाद रघु जैसे ही मेरे कपडे उतारने लगा तो मैं बोली

निशा- अरे बाबा पहले रूम तो लॉक कर दो।

मेरी बात सुनकर रघु ने तुरंत ही रूम लॉक कर दिया और बापिस मुझ पर टूट पडा। अब हम दोनों की एक दूसरे के कपडे उतारने में लगे हुए थे। कुछ ही देर बाद हम दोनों बिना कपडों के बिस्तर पर एक दूसरे को चूमने और सहलाने में बिजी थी। तभी रघू की नजर उस सोने की चेन पर गई जो उसने मुझे दी थी। वो चेन मुझे पहने हुए देखकर वो काफी खुश हुआ और फिरसे मुझे चुमने लगा। हमारा यह खेल काफी देर तक चलता रहा। जिसके रघु ने आखिरकार अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा ही दिया।

रघु का लण्ड बाकई में काफी बड़ा और मोटा था। जिस कारण इतनी बार चुदने के बाद भी मुझे उसका लण्ड अपनी चूत के अंदर लेने में दर्द का एहसास हो रहा था। पर मुझे काफी मजा भी आ रहा था। रघु करीब एक घंटे तक धुआँधार तरीके से मेरी चुदाई करता रहा और फिर उसने मेरी चूत में ही अपना पानी निकला दिया और मेरे बगल में लेट गया। इतनी लम्बी चुदाई से मैं अब काफी थक गई थी। इसलिए मैंने कंबल को हम दोनों के ऊपर डाला और रघु से लिपट कर सो गई।

सुबह करीब 5-6 बजे एक बार फिर रघू ने मुझे चूमना और सहलाना शुरू कर दिया जिस कारण मेरी आँख खुल गई। पर मैंने रघु को वो सब करने से नहीं रोका और उसे चुपचाप मजे लेने दिए। कुछ देर बाद उसने एक बार फिर मेरी चुदाई शुरू कर दी थी। पर इस बार मुझे ज्यादा दर्द नहीं हुआ। जिस कारण मैं भी उसका पूरा साथ देने लगी। काफी देर तक चुदाई करने के बाद उसने फिर से मेरे अंदर ही अपना पानी निकाल दिया और फिर अपने कपडे पहनकर मेरे रूम से बाहर चला गया।

उसके जाते ही मैं अपना रूम अंदर से लॉक करके फिर से सो गई। सुबह करीब 9 बजे जब मैं दोबारा जागी तो तुरंत बाथरूम में घुस गई। नहा कर रेडी होने के बाद मैंने रूम सर्विस को कॉल करके अपने लिए कॉफी और नास्ता आर्डर कर दिया और सोफे पर बैठ कर कल रात गगन के घऱ खींचे गए फोटो चैक करने लगी। कुछ देर बाद ही रघू मेरे लिए नाश्ता और कॉफी रख कर चला गया।

मैं अपनी कॉफी और नास्ता इंजॉय कर ही रही थी कि तभी रघु मेरे कपडे जो मैंने लाऊँड्री के पास धुलने भेजे थे वोलेकर आ गया और फिर मेरे रूम की साफ सफाई करने लगा तो मैंने उसे विस्तर की बैडसीट और कम्बल भी चेंज करने के लिए भी बोल दिया। क्योंकि हमारी चुदाई के कारण वो अब काफी गंदे हो गए थे। रूम की अच्छी तरह से साफ सफाई करने के बाद रघू ने बेडसीट और कंबल भी चेंज कर दिऐ। तब तक मेरा नाश्ता भी खत्म हो गया था। इसलिए वो जैसे ही कचडा और गंदे कपडे लेकर वहाँ से जाने लगा तो मैंने उससे पूछा

निशा- अरे रघू मैं पूछ रही थी कि क्या मैं होटल की कार खुद ड्राईव करके कहीं ले जा सकती हूँ क्या

मेरी बात सुनकर रघु तुरंत बोला

रघु- हाँ हाँ सपना जी…. आप चाहें तो ले जा सकती हैं। लेकिन उसके लिए आपको अपने ड्रायविंग लायसेंस की एक कॉपी जमा करनी होगी

हाँलाकि मेरे पास ड्रायविंग लायसेंस तो था, पर मैं होटल बालों को अपना असली नाम नहीं बताना चाहती थी। बैसे भी होटल रूम मेरी कम्पनी के नाम पर बुक था। ना की मेरे नाम पर। इसलिए मैं बोली

निशा- ओह सिट यार… वो तो मैं लेकर ही नहीं आई हूँ। चलो कोई बात नहीं मैं ऑटो बगैरह से चली जाऊँगी। क्योंकि दिन में तो तुम मेरे साथ जा नहीं सकते हो।

मेरी बात सुनकर रघु तुरंत बोला

रघु- नहीं नहीं सपना जी… ऐसी बात नहीं है। अगर आप कहेंगी तो मैं छुट्टी ले लूँगा

निशा- एक दो दिन की बात हो तो मैं बोल भी देती, पर मुझे कुछ दिनों तक लगातार अलग जगह काम पर जाना है। मैं नहीं चाहती कि तुम मेरी बजह से अपनी नौकरी खतरे में डालो। किसी और ड्रायबर को मैं ले जाना नहीं चाहती। तुम समझ रहे हो ना मेरी प्राब्लम। मेरा काम ही कुछ ऐसा है कि मैं किसी दूसरे को बता नहीं सकती। वो तो मैं तुम्हें पसंद करती हूँ इसलिए तुम्हें कुछ भी बताने में कोई भी प्राब्लम नहीं है।

मेरी बात सुनकर रघु कुछ सोचते हुए बोला

रघु- आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। मेरा एक दोस्त है जो डुप्लीकेट डॉक्यूमेंट बना सकता है। आप अपनी डिटेल मुझे दे दो। मैं आपके डुप्लीकेट डॉक्यूमेंट उससे बनबा दूँगा, और ज्यादा समय भी नहीं लगेगा।

रघु की बात सुनकर मैंने उसे अपना नकली नाम और बाकी सारी नकली डिटेल दे दी और अपने मोबाईल से अपना एक सिंपिल फोटो भी उसके मोबाईल पर ट्रांशफर कर दिया। रघू के जाने के बाद मैंने रूम अंदर से लॉक किया और वो दोनों पार्सल खोल कर देखने लगी। जो हम रात में लाऐ थे। मैंने सबसे पहले बड़ा बॉक्स खोलकर देखा। असल में मैं जानना चाहती थी कि आखिर उन बॉक्स में ऐसा क्या है। जिस कारण इसका बजन इतना ज्यादा है।

जैसे ही मैंने उस बॉक्स को खोला तो मैं हैरान ही रह गई। उस गत्ते के बाक्स के अंदर एक प्लास्टिक का मजबूत बाक्स था। जब मैंने उसे खोला तो वो पूरा का पूरा सोने के बिस्किट से भरा हुआ था। इतना ज्यादा सोना देखकर तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गई। मुझे समझ मैं ही नहीं आ रहा था कि मैं उस सोने का मैं क्या करूँ। इसी उधेडबुन में मैंने दूसरे बॉक्स को खोलना भी शुरू कर दिया। जो आकार में थोडा छोटा और बजन में भी हल्का था। पहले बाक्स की तरह ही उसके अंदर भी एक प्लास्टिक का मजबूत बाक्स था।

जब मैंने उसे खोला तो उसमें ढेर सारे चमकते हुए हीरे भरे हुए। इतना सारा सोना और हीरे देखकर तो मैं जैसे पूरी तरह से ब्लैंक हो गई थी। मेरे सोचने समझने की क्षमता अब पूरी तरह से खत्म हो गई थी। मेरा पूरा शऱीर डर के कारण काँप रहा था। क्योंकि वो सारा सामन करोडों रूपयों का था। जिसकी मैंने बिल्कुल भी उम्मीद नहीं की थी। मैं तो अनजाने में ही इस सब में पड गई थी। यह सारा सोना और ये हीरे जिसके भी थे वो पक्का शरीफ आदमी तो था नहीं। अगर किसी को गलती से भनक भी लग गई कि यह सब मेरे पास है या इसे गायब करने में मेरा हाथ है, तो पक्का वो लोग मेरी जान के पीछ पड जाऐंगे।

कहानी जारी है ......
 
Update 030 -

मैंने काँपते हाथों से दोनों बाक्स को बंद कर दिया और उन्हें अपने बिस्तर के नीचे खाली जगह में छिपा दिया। इस वक्त मेरा पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था और डर के कारण मेरी हालत भी खराब थी। इसलिए मैं विस्तर पर लगभग गिर पडी और उन सबके बारे में सोचने लगी। काफी देर सोचने के बाद जब मुझे यकीन हो गया कि मैंने वो सामान लाने में ऐसा कोई भी सबूत नहीं छोडा है, जिससे वो लोग मेरे पीछे पड सकें। तो मैं थोडा रिलेक्स हुई। पर दो इंसान थे जिनके जरिये बो लोग मुझ तक पहूँच सकते थे।

पहला रघु जिसे इस सामान के बारे में कुछ भी पता नहीं था और ना ही उसे कोई पहचान सकता था। क्योंकि जब बो पार्सल लेने गया तो उसने मेरे कहने पर अपना चेहरा ढंक लिया था। इसलिए फिलहाल उससे मुझे कोई खतरा नहीं था और दूसरा इंसान था गगन। क्योंकि कल रात मैं गगन के साथ थी। उसके साथ मैंने जो हरकत की थी उससे जरूर बो मेरा दुश्मन बन गया होगा और जब उसे पार्सल गायब होने के बारे में पता चलेगा तो पक्का वो मेरी जान के पीछे पड जायेगा।

हाँलाकि कुछ दिनों तक तो वो कुछ भी करने की हालत में ही नहीं होगा। लेकिन जैसे ही पार्सल गायब होने के की बात उसकी गैंग को पता चलेगी, तो बो लोग गगन के पीछे पडेंगे और गगन पक्का मेरे पीछे पड जायेगा। इसलिए किसी भी तरह गगन का माईंड डायवर्ट करना पडेगा। पर कैसे यह मेरी समझ में नहीं आ रहा था। इसलिए मैंने शाम को हरीश अंकल से मिलने का फैसला किया। ताकि गगन को हमेशा हमेशा के लिऐ खामोश किया जा सके।

बैसे भी मैंने गगन के घर पर ड्रग के पैकेट तो देख ही लिए थे। जो उसे जेल के अंदर डालने के लिए पर्याप्त थे। तभी मुझे उस ड्रग पैकेट की याद आई जो मैं गगन के यहाँ से लाई थी। उसकी याद आते ही मैंने तुरंत गगन के घर से लाऐ गए बैग को उठा लिया और उसमें से एक ड्रग का पैकेट निकलकर अपने हैंड बैग में रख लिया, ताकि मैं वो पैकेट हरीश अंकल को दे सकूँ। इसके बाद मैंने बैग के सारे पैसे बिस्तर पर गिरा दिए और उन्हें गिनने लगी। वो पूरे 85 लाख रूपये थे।

इतने सारे पैसे देखकर तो मैं पागल ही हो गई थी। आज तो मेरे हाथ में सच में खजाना ही लग गया था। पहले तो करोडों रूपये का सोना और हीरे ऊपर से लाखों रूपये। पर मेरा इन सभी पैसों को अपने पास रखने का कोई इरादा नहीं था। क्योंकि इनमें से कुछ पैसे उन लडकियों के भी थे, जिन्हें गगन ब्लैकमेल करता था। जिस कारण मैंने उन लडकियों के पैसे बापिस करने का फैसला कल रात को ही कर लिया था। इसलिए मैंने उन लडकियों के नाम बाली लिस्ट निकाली और उनके पैसे काऊंट करने लगी।

उस लिस्ट के अनुसार करीब 42 लाख रूपये उन लडकियों से गगन ने या तो लिए थे या उन्हें कॉलगर्ल बनाकर कमाए थे। इसलिए मैंने उन पैसों मैं से पूरे 45 लाख रूपये बापिस उस बैग में रख दिए ताकि सभी लडकियों के पैसे देने के बाद जो पैसे बचें उनमें से 1 – 1 लाख रूपये उन मरी हुई लडकियों के घऱ बालों को अलग से दे सकूँ। बाकी के 40 लाख रूपये मैंने अपने पैसों के साथ अलग रख दिए। अब मेरे पास करीब 55 लाख रूपये कैश और करोड़ों का सोना और हीरे थे। इतने सारे पैसों से तो मैं सारी जिंदगी किसी महारानी की तरह ऐश से गुजार सकती थी।

भोपाल आना मेरे लिए सच में बहुत लकी रहा था। पहला तो मैंने यहाँ आकर जी भर कर मजे लिए थे, ऊपर से इतना सारा पैसा भी मुझे मिल गया था कि मैं अपने सारे सपने पूरे कर सकती थी। अब तो मुझे और मेरे पति अमन को कहीं नौकरी करने की जरूरत भी नहीं थी। हम अपनी खुद की एक आई.टी. कम्पनी खडी कर सकते थे। पर अमन के बारे में सोचते ही मेरा चेहरा उदास हो गया। क्योंकि शादी के 3 साल बाद भी मुझे मेरे पति से बो प्यार और इज्जत नहीं मिली थी जो मुझे इन कुछ दिनों में यहाँ मिली थी। इसके अलावा अमन मुझे फिजीकली भी सैटिस्फाई नहीं कर पाता था और हमेशा मुझे अपने से छोटा दिखाने की कोशिश करता रहता था।

मैं अब तक इतने सारे लोगों के साथ चुदाई कर चुकी थी तो मुझे पक्का यकीन था कि अब अमन मेरी वासना की आग कभी भी शांत नहीं कर पायेगा। बैसे भी अब जब मेरे पास इतना सारा पैसा था तो मैं क्यों भला उस कमजोर इंसान के साथ अपना जीवन वर्बाद करूँ। इससे अच्छा तो यह है कि उससे तलाक लेकर नये सिरे से और नई पहचान के साथ अपनी जिंदगी शुरू करूँ। पर इसके लिए मुझे पहले अमन के बापिस आने का इंतजार करना था। तब तक तो मुझे जैसा चल रहा है बैसे चलने देना होगा।

पर इतने सारे पैसे, सोने के बिस्किट और हीरे मैं अपने घऱ भी नहीं ले जा सकती थी। क्योंकि अगर अमन ने इन्हें देख लिया तो मैं उसे क्या जबाब दूँगी और मैं इन्हें यहाँ होटल रूम में भी तो नहीं रख सकती थी। मुझे इन सबको कहीं ना कहीं सुरक्षित तो रखना ही होगा। पर कहाँ बस यही समझ में नहीं आ रहा था। जब काफी देर मुझे कोई उपाय समझ नहीं आया तो मैंने सोचा कि जब तक इन सबको सुरक्षित रखने की कोई जगह नहीं मिल जाती तब तक क्यों ना यहीँ भोपाल में किसी बैंक के लॉकर में यह सारा सोना और हीरे रख दूँ।

साथ ही साथ मैं एक नया बैंक अकॉऊंट खुलवाकर उसमें सारा कैस भी जमा कर दूँगी। ताकि इन्हें फिलहाल संभालने की जिम्मेदारी नहीं रहेगी। फिलहाल यही तरीका मुझे सबसे ठीक लग रहा था। इसलिए मैंने अपने हिस्से के सारे पैसे एक बैग में डाले और रघु के आने का इंतजार करने लगी। करीब आधे घंटे बाद ही रघु मेरे डुप्लीकेट डाक्यूमेंट लेकर आ गया था। रघु के आने से पहले ही मैंने बो दोनों बाक्स के पार्सल बापिस से पैक कर दिये थे। इसलिए ऱघू के बापिस आते ही मैंने वो दोनों पार्सल बापिस से गाडी में रखने के लिए बोल दिया और पैसों बाला बैग और एक खाली बैग लेकर मैंने रूम को लॉक किया और रघू के पीछे पीछे जाने लगी।

सारा सामान गाडी के अंदर रखने के बाद मैंने रघू से कार की चाबियाँ ली और होटल से निकल गई। मैं सबसे पहले एक सुनसान इलाके में पहूँची जहाँ मैंने उन दोनों बाक्स में से सोना और हीरे अपने साथ लाए खाली बैग में सिफ्ट किया। फिर बो दोनों बाक्स को उस सुनसान इलाके में झाडियों के पीछे फेंक दिया। ताकि उन बाक्स की सहायता से कोई मुझ तक ना पहूँच सके। इसके अलावा गगन के घर से लाया बैग भी मैंने बहीँ झाडियों में फेंक दिया था। क्योंकि यहाँ आने से पहले मैं उन लडकियों के सारे पैसे किसी दूसरे बैग में सिफ्ट कर चुकी थी।

जब मैंने मॉल से शॉपिंग की थी, तो उस समय मैंने 3 बैग भी खरीदे। क्योंकि मैं अपने साथ केवल 1 ही बैग लेकर आई थी। शॉपिंग करने के बाद मुझे बो सारे कपडे रखने के लिए 2 और बैग की जरूरत थी। पर जब कोई चीज फ्री में मिल रही तो तो 2 की जगह 3 लेने में कोई बुराई नहीं होती। यही सोचकर मैंन वहाँ से 3 बैग और ले लिए थे। जो आज मेरे बहुत काम आ रहे थे। यह सारा काम खत्म करके, मैं सीधा इण्डिया के सबसे बडे प्रायवेट बैंक की भोपाल ब्रांच में पहूँची। जहाँ जाने के लिए मैंने गूगल मैप का यूज किया था। उस बैंक की सबसे बडी खासीयत यह थी कि वो बैंक अपने कस्टमर कि डिटेल किसी के साथ भी शेयर नहीं करता है।

यहाँ तक कि गवर्मेंट के साथ भी नहीं और वहाँ लॉकर भी आसानी से मिल जाता था। जो दूसरे बैंकों से काफी बडे होते थे। वो सारा सोना और हीरे रखने के लिए मुझे कम से कम 2-3 बडे बडे लॉकर की आवश्यकता पडने बाली थी। कार को पार्क करके मैंने दोनों बैग निकाले जो काफी ज्यादा भारी थे। लेकिन मेरे दोनों बैग में ब्हील लगे हुई थे। जिस कारण उन्हें बैंक के अंदर ले जाने में मुजे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पडी। मैं सीधा बैंक मैनेजर के केबिन में पहूँच गई और उन्हें अपना अकॉऊँट खोलने और लॉकर लेने के बारे में बात करने लगी।

मैं काफी बड़ा अमाऊंट जमा कर रही थी। इसलिए मैनेजर ने जल्दी से सारी प्रासेस पूरी करवा दी। पर लॉकर लेने से पहले मैं एक बार उसकी साईज देखना चाहती थी। इसलिए मैनेजर से कहकर मैंने एक बार लॉकर रूम में जाकर लॉकर को चैक किया। मेरे सामान के हिसाब से मुझे 2 बडे साईज के लॉकर पर्याप्त लगे इसलिए मैंने दो बडे साईज के लॉकर बुक करने के लिए बोल दिया। जिसके बाद मैनेजर ने तुरंत ही मेरा अकांउंट एक्टीबेट कर दिया था। जिसके साथ उसने मुझे चैकबुक के साथ साथ एक डेबिड कार्ड और एक क्रेडिट कार्ड भी दे दिया था, साथ ही साथ उसने मुझे लॉकर के टोकन कार्ड के साथ साथ उनकी चबियाँ भी दे दीं थी।

करीब 1 घंटे बाद मैं उस बैंक से दोनों खाली बैग लेकर बाहर निकल आई और दोनों खाली बैग को कार की पिछली सीट पर रखकर मैं ड्रायबिगं सीट पर बैठ गई। बैसे तो आज मेरा प्लान बॉस के दिये कामों को पूरा करने का था। पर मैंने अपने वो सारे प्लान एक दिन के लिए आगे बड़ा दिए थे। आज मैं गगन से रिलेटेड सारे मैटर को खत्म करने के मूड में थी। ताकि मैं फ्री माईँड से अपने सारे काम कर सकूँ। इसलिए मैंने कार मैं बैठ कर हरीश अंकल को कॉल किया और उनसे अर्जेंट मिलने की बात कही, तो उन्होंने मुझे सीधे पुलिस हैडक्वाटर बुला लिया।

करीब आधे घंटे बाद मैं हरीश अंकल के सामने बैठी थी। मैंने उनके सामने गगन के घर से लाये एक ड्रग के पैकेट को रख दिया और उनके मोबाईल पर गगन के लॉकर में मिली डायरी के फोटो भी भेज दिये थे। जिन्हें देखकर डीजीपी सर हैरान थे। क्योंकि उन्हें यह सब काम इतनी जल्दी होने की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। डीजीपी सर ने मुझसे गगन के घर की सारी डिटले ली और तुरंत उस एरिया के थाना इंचार्ज को गगन को जिंदा या मुर्दा पकडने के आर्डर दे दिया।

जिसे सुनकर मैं समझ गई कि उन्होंने इनडायरेक्ट गगन का इनकाऊंटर करने का आर्डर दे दिया है। यह सब काम खत्म होने के बाद मैं वहाँ से निकल गई और रास्ते में चैटिंग एप के ग्रुप पर सभी लोगों को अर्जेंट 1 घंटे में रवि के फार्म हाऊस पर मिलने के लिए बोल दिया। मेरे मैसेज करने के तुरंत बाद ही रवि का मेरे पास कॉल आया। वो मुझे रिसीव करने मेरे होटल आने बाला था, लेकिन मैं उसे होटल आने से मना कर दिया और मैंने खुद ही वहाँ जाने की बात कहकर फोन कट कर दिया। इसके बाद मैंने अपने होटल रूम में खाली बैग रख दिए। जिनके अंदर मैं पैसे और सोना बैंक में जमा करने ले गई थी। इसके बाद मैंने वहाँ रखा पैसों से भरा बैग उठाया, जो कि अपने दोस्तों को बापिस करना था।

इसके बाद मैं बापिस से कार में बैठकर रवि के फार्म हाऊस की तरफ निकल गई। चूँकि मुझे भूख लग रही थी इसलिए रास्ते में रुककर मैंने एक रेस्टोरेंट में खाना भी खाया था। जिस कारण मैं बाकी लोगों से थोडा लेट हो गई थी। मैं जब वहाँ पहूंची तब तक सभी लोग वहाँ पहूँच चुके थे। इससे पहले कोई कुछ कहता मैंने अपने साथ लाये बैग को टेबिल पर रख दिया और बोली

निशा- जो भी कहना या पूछना है वो सब बाद में पहले मेरी बात ध्यान से सुनो। कल मुझे गगन की कॉल आई थी, वो मुझसे मिलना चाहता था, इसलिए मैं कल रात उसके घर गई थी। जहाँ मैंने उसे धोखे से नींद की गोली खिला दी थी। उसके सोने के बाद मैंने उसके घर की तलाशी ली तो मुझे उसके घर में एक सीक्रेट लॉकर मिला, जिसमें ढेर सारे पैसे, काफी सारा ड्रग और एक डायरी मिली। जिसमें तुम सभी लडकियों के नाम और तुमसे लिए गए पैसे लिखे हुए थे। मैंने तुम लोगों के नाम बाले सारे पेज उस डायरी से निकाल लिए हैं और वहाँ रखे सारे पैसे इस बैग में है।

इसके बाद मैंने अपने बैग से डायरी के बो पेज निकाल कर रवि को दे दिये और बोली

निशा- रवि प्लीज इस लिस्ट के हिसाब से सभी को उनके पैसे बापिस कर दो और जो पैसे बच जाऐँ उन्हें अपने पास रखना, ताकि जब हम सब लोग उन तीनों लडकियों के घर बालों के लिए पैसे कलेक्ट करें तो उनके साथ साथ यह पैसे भी उनके घर बालों को दे सकें। हालाँकि मुझे पहले ही पता था कि सभी लडकियों को पैसे देने के बाद कुल 3 लाख रूपये बचने बाले थे। पर मैंने ऐसा जताने की कोशिश की थी जैसे मुझे नहीं पता इस बैग में कितने पैसे हैं।

मेरी बात सुनकर सभी लोग हैरान थे। उनमें से किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी कि मैं यह सब कर सकती हूँ। इसलिए पूजा बोली

पूजा- पर हम सब तुम्हारा साथ अपने पैसे बापिस लेने के लिए नहीं दे रहे हैं। हम सब तो बस गगन को सजा देना चाहते हैं। इसलिए तुम्हारे साथ हैं।

पूजा की बात सुनकर मैंने मुस्कुराकर कहा

निशा- मुझे पता है। पर गगन को सजा मिल चुकी है। कुछ ही देर में पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेगी। मैंने उसकी सारी डिटेल पुलिस को दे दी है। तुम लोगों का सारा डाटा मैं पहले ही परमानेंट डिलीट कर चुकी हूँ। दुनिया का कोई भी एक्सपर्ट अब बो डाटा रिकवर नहीं कर सकता। यहाँ तक की मैंने अपने पास मौजूद सारा डाटा भी डिलीट कर दिया है और गगन की डायरी से भी तुम लोगों के नाम हटा दिये गये हैं। तो अब तुम सब आजाद हो।

मेरी बात सुनकर श्रेया बीच में ही बोल पडी

श्रेया- यह सब तो ठीक है। हमें पहले ही यकीन था कि तुमने जो कहा था वो तुम जरूर करोगी। पर हम सब मिलकर गगन को सजा देने बाले थे ना। उसका क्या….

निशा- तुम सबके बदले मैं खुद उसे इतनी बडी सजा दे चुकी हूँ कि वो सारी जिंदगी भूल नहीं पायेगा।

मेरी बात सुनकर श्रेया थोडा हैरान होते हुए बोली

श्रेया- क्या…. तुम उसे पहले ही सजा दे चुकी हो…. पर तुमने उसे आखिर ऐसी कौन सी सजा दी है, जो वो सारी जिंदगी नहीं भूल पाऐगा

श्रेया की बात सुनकर मैंने रवि की तरफ देखते हुए कहा

निशा- प्लीज रवि क्या तुम कुछ देर के लिए बाहर जाओगे। मुझे कुछ ऐसी बातें इन सबको बतानी है, जो मैं तुम्हारे सामने नहीं बता सकती। आई होप तुम बुरा नहीं मानोगे। इट्स ऑनली गर्लस् टॉक

मेरी बात सुनकर रवि ने कुछ भी नहीं कहा और चुपचाप उस हॉल से बाहर निकल गया।

कहानी जारी है......
 
Update 031 -

रवि के बाहर जाते ही मैंने गगन के घर खींचे फोटो अपने मोबाईल में ओपन किये और श्रेया को अपना मोबाईल पकडा दिया। उन फोटो को देखकर श्रेया बुरी तरह से हैरान रह गई। उससे तो कुछ बोलते ही नहीं बन रहा था। सारे फोटो देखने के बाद उसने मेरा मोबाईल दूसरी लड़की को पास कर दिया। इस प्राकर एक एक करके सभी लडकियों ने बो फोटो देखे। सभी की हालत श्रेया की तरह ही थी। आखिरकार श्रेया ने सबसे पहले अपने आप को संभाला और बोली

श्रेया- क्या यह सब सच है। तुमने सच में गगन के साथ वो सब किया है।

निशा- हाँ और मैंने तुम लोगों को दिखाने के लिए ही ऐ सारे फोटो खींचे थे। अब इनकी कोई जरूरत नहीं है। इसलिए मैं इन्हें डीलीट कर रही हूँ।

इतना बोलकर मैंने उन सभी फोटो को डिलीट कर दिया और फिर बोली

निशा- क्या इससे बडी सजा किसी लडके को मिल सकती है

मेरे सबाल पर सभी ने ना में अपनी गर्दन हिला दी।

निशा- तो अब हमारा मिशन कम्प्लीट हुआ। अब से सब अपनी अपनी जिंदगी जीने के लिए आजाद हैं।

मैं यह सब बोल ही रही थी कि तभी मेरे पास हरीश अंकल का कॉल आया तो मैं तुरंत उनका कॉल रिसीव करते हुए बाहर निकल गई। मुझे बाहर फोन पर बात करता हुआ देख गगन अंदर हॉल में चला गया। कुछ देर बाद जब मैं अंदर आई तो बोली

निशा- एक बुरी खबर है। गगन पुलिस के हाथों से बच कर निकल गया है। पर पुलिस ने अलर्ट भेज दिया है। हर जगह उसकी तलास की जा रही है। जल्द ही पुलिस उसको पकड लेगी। लेकिन जब तक वो पकडा नहीं जाता, तब तक सभी लोग थोडा अलर्ट रहना। क्योंकि फिलहाल उसकी मानसिक स्थिती ठीक नहीं है। बैसे तो बो जिस हालत में है उसमें वो ज्यादा भाग नहीं सकता और वो काफी ज्यादा दर्द में भी होगा।

इतना बोलकर मैंने कुछ देर सोचा और फिर बोली

निशा- गाईज ध्यान रखना अगर गगन कहीं पर भी हम में से किसी को भी दिखाई दे, तो जितनी जल्दी हो सके भागर उससे दूर चले जाना और तुरंत पुलिस को और हममें से किसी को भी इन्फार्म कर देना। ताकि बाकी लोग अलर्ट हो सकें। लेकिन अगर उससे दूर भागने का मौका ना मिले, तो डरने की जरूरत नहीं है। उससे नॉर्मल तरीके से बात करना बिल्कुल बैसे जैसे तुम लोग कुछ दिन पहले करते थे। यानि उसे पता नहीं चलता चाहिए कि सारे बीडियो डिलीट होने बाली बात तुम्हें पता है और उसकी सारी सच्चाई तुम जानती हो और हाँ पैनिक मत होना। असल में वो तुम्हारे पीछे नहीं बल्कि मेरी तलाश में होगा। क्योंकि वो अपनी इस हालत का जिम्मेदार केवल मुझे मान रहा होगा।

मेरी बात सुनकर श्रेया बोली

श्रेया- यार सपना हम लोगों के चक्कर में तुम मुशीबत में पड गई हो।

निशा- कोई बात नहीं दोस्तों के लिए इतना तो चलता है। बैसे अगर गगन तुम लोगों को कहीं मिले और मेरे बारे में पूछे, तो तुम लोग मुझे पहचानने से साफ इंकार कर देना। खासकर रश्मि और रवि तुम दोनों। क्योंकि वो पहले ही हम तीनों को एक साथ देख चुका है। इसलिए तुम्हें बस ऐसा दिखाना है कि तुम लोग मुझे नहीं जानते और मैं बस उसकी इमेजिनेशन हूँ। और हाँ जब तक कि वो पकडा नहीं जाता तब तक तुम लोग मुझसे मिलने की कोशिश मत करना। इसलिए अब मैं यहाँ से जा रही हूँ। मेरे जाने के कुछ देर बाद ही तुम लोग यहाँ से निकलना और अकेले मत जाना। जो लोग ऑटो बगैरह से आये हैं उन्हें रवि और श्रेया घर छोड देंगे।

मेरी बात सुनकर श्रेया ने कहा

श्रेया- पर सपना तुम? तुम हम सबसे ज्यादा खतरे में हो। रुको मैं पापा से बात करके तुम्हारे लिए सिक्योरिटी की इंतजाम करवाती हूँ।

श्रेया की बात सुनकर मैं उसे समझाते हुए बोली

निशा- मेरी फिक्र मत करो और मुझे किसी सिक्योरिटी की आवश्यकता नहीं है। अगर मेरे आस पास पुलिस हुई तो गगन अपना टारगेट चेंज करके मेरी जगह रश्मि या रवि के पीछे जा सकता है। इससे अच्छा तो यही है कि वो मेरे पीछे आये ताकि में समय रहते पुलिस को इन्फार्म कर दूँ और उसका ध्यान तुम लोगों की तरफ भी नहीं जाऐगा।

इतना बोलकर मैं वहाँ से निकल गई। वहाँ से जाने के बाद मैं अकेले ही उस दिन भोपाल में अलग अलग जगह पर घूमती रही ताकि अगर गगन मेरी तलास कर रहा हो तो मुझे अकेला देखकर मेरे सामने आये, पर वो नहीं आया। आखिरकार रात करीब 9 बजे मैं अपने होटल पहूँच गई। खाना मैं पहले ही बाहर खाकर आई थी। इसलिए मैंने अपने कपडे चेंज किये और रघू को कॉल करके अपने पास बुला लिया। बैसे भी मेरा आज का पूरा दिन भागदौड और टेंशन में निकला था। इसलिए मैं अब रघू के साथ इंजॉय करके अपने आप को रिलेक्स करना चाहती थी।

रघू भी शायद मेरे ही कॉल का ही इंतजार कर रहा था। मेरे कॉल करने के कुछ ही देर वाद वो मेरे रूम में आ गया। उसके आते ही मैंने अपना रूम अंदर से लॉक किया और फिर हम दोनों एक दूसरे पर टूट पडे। एक दूसरे को पूरी तरह से सेटिस्फाई करने और थकाने के बाद हम दोनों ही एक दूसरे की बाहों में सो गए। पिछली रात की तरह इस बार भी सुबह सुबह एक दूसरे को सेटिसफाई करने के बाद रघू मेरे रूम से चला गयाष जिसके बाद मैं कुछ देर और रेस्ट करती रही।

अब चूँकि मैं गगन के डर से यूँ ही अपने होटल रूम के अंदर बंद नहीं रह सकती थी। इसलिए मैंने बॉस के दिए पेंडिंग कामों को निपटाने का प्लान बनाया और फिर तुरंत तैयार होकर बाथरूम में घुस गई। तैयार होने के बाद मैंने कॉफी और नास्ता रूम में ही मंगवा लिया था। जिसे खत्म करने के बाद मैंने होटल के काऊंटर से कार की चाबी ली और अपने काम पर निकल गई। अगले दो दिनों तक मैंने बॉस की दी गई लिस्ट के हिसाब से भोपाल के करीब करीब आधे से ज्यादा काम खत्म कर दिए थे।

अब ज्यादातर काम भोपाल से बाहर की लोकेशन के थे। जो भोपाल से ज्यादा दूर नहीं थे। इसलिए मैंने अगले दिन से भोपाल से बाहर की लोकेशन पर विजिट करने का प्लान बनाया था। बाकि लोकल के कामों को मैंने बाद के लिए पेंडिंग डाल दिया था। असल में मैंने सोचा था कि जिस दिन भी आऊटर लोकेशन से जल्दी फ्री हो जाऊंगी, उस दिन लोकल के काम देख लूँगी। इसलिए आज के सारे काम खत्म कर के मैं होटल बापिस जा रही थी। शाम के करीब 6 बजे का समय था। तभी मेरे नये मोबाईल के चैटिंग एप पर एक मैसेज आया।

मैंने अपनी कार साईड में रोकी और चैटिंग एप को ओपन करके देखने लगी, तो उसमें पूजा का मैसेज था। उसने एक फोटो शेयर की थी। जिसमें किसी लड़की के पीछे जाते एक लडके पर मेरी नजर पडी। वो कोई और नहीं बल्कि गगन था। जो काफी कमजोर दिखाई दे रहा था। अभी मैं फोटो देख ही रही थी कि तभी एक के बाद एक मैसेज आने शुरू हो गए, मैंने देखा कुछ और लडकियों ने भी फोटो में गगन को देख लिया था और वो लोकेशन पूछ रही थी। तभी पूजा का फिर से मैसेज आया जिसमें लिखा था।

“बडा तालाब पर रश्मि और रवि का पीछा कर रहा है।”

रश्मि और रवि के साथ होने की बात से मुझे पता नहीं क्यों पर थोडा दूख हुआ, लेकिन अगले ही पल मैं नॉर्मल हो गई और तुरंत हरीष अंकल को गगन की लोकेशन बताकर अपनी कार बड़ा तालाब की तरफ मोड दी। मुझे पक्का यकीन था कि गगन उन दोनों से मेरे बारे में जरूर पूछेगा। अगर उन दोनों ने कुछ नहीं बताया तो वो कुछ उल्टा सीधा भी कर सकता था। इसलिए गगन को किसी भी तरह अपनी तरफ डायवर्ट करना होगा। बड़ा तालाब मेरी लोकेशन से काभी दूर था। इसलिए मैंने अपनी कार की स्पीड बड़ा दी थी।

मेरे वहाँ पहूँचने पहले ही श्रेया और बाकी की लडकियाँ भी वहाँ आ गई थी। बड़ा तालाब पर पहूँचकर मैंने अपनी कार पार्क की और पूजा की तरफ बड गई। मैंने पूजा को कॉल करके पहले ही उसकी लोकेशन पूछ ली थी। इसलिए मुझे उसे ढूँडने में ज्यादा प्राब्लम नहीं हुई। पूजा के पास जाकर मैंने वाकी लोगों को वहाँ से तुरंत जाने के लिए बोल दिया। पर वो लोग वहाँ से जाना नहीं चाहते थे। इसलिए आखिरकार मैं उन्हें दो दो के ग्रुप में दूर से नजर रखने की बोलकर पैदल ही रवि और रश्मि की तरफ बड गई।

मैं रवि और रश्मि से थोडी दूरी पर एक पानी पूडी बाले की दुकान पर खडी होकर पानी पूडी खाने लगी। रवि और रश्मि ने मुझे वहाँ देख लिया था। लेकिन मैंने उन्हें अपने पास ना आने का इशारा किया और पानी पूडी खाने लगी। उन दोनों को भी गगन के उनके आस पास होने की बात पता चल गई थी। इसलिए पहले तो वो वहाँ से निकलने की फिराक में थे। पर मुझे वहाँ देखकर वो दोनों रुक गए। मैं पूरा यकीन था कि इतनी भीड में गगन कोई गलत हरकत नहीं करेगा।

लेकिन पुलिस के आने के बाद वो अपने बचाव में कुछ भी कर सकता था। इसलिए मैं गगन का ध्यान अपनी तरफ खींचकर उसे भीड भाड से दूर ले जाना चाहती थी। लेकिन शायद गगन ने मुझे देखा ही नहीं और वो मौका देखकर रवि और रश्मि के पास जा पहूँचा। मुझे उन लोगों की बातें साफ साफ सुनाई नहीं दे रही थी। इसलिए आखिरकार मैंने उनके पास जाने का फैसला कर लिया और वहाँ से निकलने के बहाने रवि से टकरा गई और पलट कर बोली

निशा- यू ईडियट शर्म नहीं आती किसी लड़की को छेडते हुए

मेरी बात सुनकर रवि और रश्मि शायद मेरा प्लान समझ गए थे। इसलिए रश्मि हमारे प्लान के अनुसार मुझे ना पहचानने का नाटक करते हुए बोली

रश्मि- ये हैलो मैडम तुम जो भी हो, देख कर नहीं चल सकती क्या। वाह जी वाह क्या जामाना आ गया है। एक तो खुद लडके से टकराओ और फिर खुद ही छेडने का इल्जाम लगाओ

रश्मि की बात सुनकर मैं गुस्से से चिढने का नाटक करते हुए बोली

निशा- ये मिस…. व्हॉट एवर जो भी तुम्हारा नाम है। मुझे कोई शौक नहीं है लडको से टकराने का। बैसे तुम्हें इतना क्यों बुरा लग रहा है। ये क्या तुम्हारा बॉयफ्रेंड है।

रश्मि- हाँ है तो.... क्या करोगी अब तुम

निशा- कुछ भी तो नहीं….. मुझे क्या…. तुम किसी को भी बॉयफ्रेंड बनाओ। बैसे च्वॉईस अच्छी है। इतना बोलकर मैंने रश्मि को आंख मार दी और रवि की गाँड पर एक थप्पड लगा कर जैसे ही वहाँ से जाने लगी तो रश्मि बोली

रश्मि- ओह मिस ईडियट… तुम्हें शर्म नहीं आती किसी शरीफ लडके को छेडते हुए

निशा- नहीं... लेकिन अगर तुम्हें आती है तो तुम शर्माती रहो मैं तो चली

इससे पहले मैं वहाँ से जाती गगन बीच में बोल पडा

गगन- यह क्या नौटंकी लगा रखी है तुम लोगों ने। मेरे सामने ऐसे नाटक क्यों कर रहे हो जैसे एक दूसरे को जानते ही नहीं हो। रवि मैं इसी लड़की के बारे में पूछ रहा था तुमसे

गगन की बात सुनकर रवि थोडा कन्फ्यूज होते हुए बोला

रवि- पर मैं नहीं जानता हूँ कि यह लडकी कौन है

रवि की बात सुनकर गगन झल्लाते हुए बोला

गगन- बकवाश मत करो। पिछले हफ्ते ही तुमने मुझे और रश्मि को इसे अपनी गर्लफ्रेंड बताया था।

गगन की बात सुनकर रश्मि हैरान होने का नाटक करते हुए बोली

रश्मि- गर्लफ्रेंड.... रवि ये गगन क्या बकवास कर रहा है। क्या तुम मुझे चीट कर रहे हो

इससे पहले रवि कुछ कहता मैं बीच में बोल पडी

निशा- ओह हैलो…. मैं नहीं जानती तुम लोगों को। अपने फालतू के ड्रामे में मुझे शामिल मत करो

मेरी बात खत्म होते ही रवि रश्मि के गाल पर अपना हाथ रखते हुए प्यार से बोला

रवि- अरे जानू ऐसा कुछ भी नहीं है। कसम से मैं इस लडकी को नहीं जानता हूँ। पता नहीं गगन ऐसा क्यों बोल रहा है।

रवि की बात सुनकर गगन थोडा चिढते हुए बोला

गगन- तुम रश्मि को जानू क्यों बोल रहे हो। तुम्हारा तो ब्रेकअप हो गया था ना। रश्मि अब मेरी गर्लफ्रेंड है।

गगन की बात सुनकर रश्मि उसे गुस्से से डाँटते हुए बोली

रश्मि- गगन लगता है तुम्हारी सटक गई है। यह क्या अनाप सनाप बक रहे हो। हमारा ब्रेकअप कब हुआ और मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड कब बन गई। छी….. मैं तो तुम्हें केबल अपना दोस्त समझती थी। पर तुम मेंरे बारे में ऐसी फीलिंग रखते हो, यह मुझे पता नहीं था। अगर पता होता तो तुमसे दोस्ती ही नहीं करती।

अब तक गगन का दिमाग पूरी तरह से खराब हो चुका था। वो गुस्से से चीखते हुए बोला

गगन- बकवास कर रही हो तुम

रवि- बकवास रश्मि नहीं तुम कर रहे हो। मुझे तो तुम पर पहले से ही शक था कि तुम रश्मि पर गंदी नजर रखते हो और आज सबके सामने प्रूफ भी हो गया।

इससे पहले गगन कुछ कहता और करता, पता नहीं श्रेया कहां से वहाँ आकर कुद पडी। उसके साथ पूजा भी थी और वो हमारे पास आकर बोली

श्रेया- हाय लव वर्डस... ओह गगन भी यहाँ पर है... क्या बात है रश्मि…. तुम अपने बॉयफ्रेंड के साथ टाईम स्पेंड करते वक्त अपने दोस्त को भी बॉडीगार्ड की तरह अपने साथ लाती हो।

रश्मि- अरे नहीं यार पता नहीं यह कहाँ से आ गया। जब भी मैं और रवि अकेले में टाईम स्पेंड करने का प्रोग्राम बनाते हैं, तो यह बीच में आ टपकता है। और आज तो पता नहीं इसे क्या हो गया है। बडी अजीब अजीब बातें कर रहा है। बोल रहा है कि ये लड़की रवि की गर्लफ्रेंड है और मैं इस गगन की

रश्मि की बात सुनकर श्रेया हैरानी से मुझे देखते हुए बोली

श्रेया- ये लड़की... ये कौन है। बैसे देखने में तो काफी खूबसूरत है

रवि- पता नहीं…. मैं इसे नहीं जानता

श्रेया- गगन लगता है तुम्हारी सटक गई है। किसी भी राह चलती लड़की को इसकी गर्लफ्रेंड बना दोगे क्या। बैसे तुम और रश्मि कब रिलेशन में आ गए।

रश्मि- पागल है क्या श्रेया…. मैं और इस गगन के साथ रिलेशन में, यह तो सपने में भी नहीं हो सकता

रश्मि की बात सुनकर मुझे और गगन को छोडकर बाकी सभी लोग हंसने लगे। हमारी बातों से गगन का दिमाग पूरी तरह से खराब हो रहा था।

कहानी जारी है.....
 
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