ATTITUDE.....( MAGIC + ROMANCE ) - Page 2 - SexBaba
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ATTITUDE.....( MAGIC + ROMANCE )

(अब तक आपने पढ़ा की कैसे जयराज ने मंगल और उसके आदमियों की पिटाई की और उन्हें जेल भिजवा diya.dusri तरफ तरफ ास्मोडियस ने अपने चरों डेविल्स को बता दिया की उनका मायाजाल उस ने hi तोडा hai.idhar जयराज के ब्रिज का काम और इनॉगरेशन भी hogaya.jairaj कुछ दिनों से किसी सोच में गम है पर मीनू के पूछने पर ताल देते hain.agle दिन सुबह जयराज और मीनू लॉन में बैठे थे की गेटकीपर ने आके बताया की बाबा विशाखत आये हुए हैं.......

अब आगे...........)

अपडेट 10 :-

बाबा विशाखत आएं है सुनकर जयराज और मीनू बोहोत खुश हो gaye......dono उन्हें अंदर बुलाने के लिए खुद hi गेट की और बढ़ gaye....BABA विशाखत वहीँ गेट पर खड़े थे.

JAIRAJ-GURUDEV हमे माफ़ कर dijiye.aapko इतनी देर यहाँ खड़ा रहना पड़ा....

बाबा विशाखत- कोई बात नहीं baccho.isme शमा मांगे जैसी कोई बात nahi.aur ये क्या आज तुम मुझे गुरु कह कर बुला रहे ho.pichli बार तोह बाबा कहा था ना.

मीनू - GURUDEV.tab की बात और thi.tab हम आपको सिर्फ एक सामान्य साधु समझते the.par अब हम जान गए है की

आप साधारण तोह हो नहीं sakte.jis तरह उस दिन आपने हमे हमारे अतीत के बारे में बताया, हमारे बचे का नाम रखा और उसका भविष्य bataya,wo कोई दिव्या आत्मा या कोई महापुरुष hi कर सकता hai.hamne पहले आपको गलत सम्ह्जा उसके लिए कृपा हमे माफ़ करें.

बाबा विशाखत- मैंने पहले भी कहा था पुत्री की इसमें शमा मांगे जैसा कुछ nahi.aur रही बात मेरे महापुरुष होने की, तोह मई बस एक साधारण मनुष्य हूँ जो वही कर रहा है जो उससे करने को कहा गया है.

मीनू- कहा गया है मतलब गुरुदेव!!!!! किसने क्या कहा है.....!!!!

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??

बाबा विशाखत- समाया आने पर सब जान जाओगी पुत्री.

जयराज- अरे minu,saari बात यही कर लोगी क्या या गुरुदेव को अंदर भी आने डौगी. गुरुदेव, कृपया अंदर चलकर हमारे घर को धन्य करें.

बाबा विशाखत- अवश्य putra.phir बाबा विशाखत , जयराज और मीनू अंदर की और चल diye.andar आते हुए बाबा विशाखत ने देखा की विक्रम वहां खेल रहा hai.wo नन्हे नन्हे कदमो से इधर उधर दौड़ रहा था और उसके पीछे सारे नौकर दौड़ रहे the.BABA विशाखत ये देखकर मुस्कुराते हुए उसी और बढ़ gaye.jairaj और मीनू भी बाबा को अपने बचे की तरफ जाता देख उनके पीछे हो liye....vikram अपनी hi धुन में दौड़ता हुआ बाबा विशाखत के पास आकर उनसे टकराने hi वाला था की बाबा विशाखत ने उससे गोद में उठा liya.vikram को गोद में उठाते hi बाबा विशाखत को ऐसा लगा जैसे समस्त ब्रम्हांड की ऊर्जा उनकी गोद में आ गयी ho.vikram भी बाबा विशाखत की गोद में आकर उनकी दाढ़ी से खेलने लगा जिससे देख मीनू जयराज और बाबा विशाखत भी मुस्कुराने लगे.

बाबा VISHAKT-apka नाम क्या है बीटा.

विक्रम- मेरा नाम विक्रम है.....

बाबा विशाखत- अरे WAAH,AAP तोह एक दम अछि और साफ़ हिंदी बोलते HO.BOHOT अचे.

कहा से सीखी???

विक्रम- मैंने!!!!! ाःह्ह्णण, क्या पता. अपने आप आ गयी.

बाबा विशाखत- अपने aap.ye तोह और भी अछि बात hai...BABA विशाखत बात तोह विक्रम से कर रहे the,par साथ साथ अपने मन में कुछ मंत्र भी बोल रहे the,jisse उनके हाथ से एक अदृश्य रौशनी निकल के विक्रम के अंदर जा रही थी. अब ये रौशनी क्या थी ये जानने के लिए chaliye,ek छोटे से फ्लैशबैक में जाते है

एक दिन PEHLE.....BABA विशाखत ध्यान में बैठे हुए थे की अचानक संत सेबेस्टियन उनके सामने प्रकट hue.par इससे बाबा विशाखत के ध्यान में कोई फर्क नहीं aaya.wo वैसे hi अपने ध्यान में मगन the.jairaj के घर से निकलने के बाद से hi बाबा विशाखत अंतर्ध्यान हो एक घने जंगल के बीच जाकर ध्यान मई बैठ गए the.abhi तक वो अपने ध्यान अवस्था से लौटे नहीं the.jab से उन्हें श्राप मिला था वो ध्यान में नहीं बैठे थे पर अब उनका मन अत्ति प्रस्सन tha.hota भी क्यों न नजाने कितने युगों के बाद श्राप मुक्त जो हुए the.unki शक्तियां उन्हें वापस मिल चुकी thi.unki पाँचों कुंडलियां जागृत हो चुकी thi.is वक़्त संत सेबेस्टियन उनके सामने खड़े हो मुस्कुरा रहे the.BABA विशाखत की ख़ुशी संत सेबेस्टियन से चुप्पी नहीं थी.

संत सेबेस्टियन- गुरु विशिष्ट. आँखें खोलिये.

संत सेबेस्टियन की आवाज़ बाबा विशाखत के कानों में hi नहीं उनके ह्रदय तक को पहुंच gayi.BABA विशाखत ने तुरंत आँखें खोल di.apne सामने गोड्स मैसेंजर को देख कर बाबा विशाखत अपने घुटनो पर बैठ गए...

बाबा विशाखत- आज मई धन्य हो गया जो स्वयं संत सेबेस्टियन ने मुझे दर्शन दिए.

संत सेबेस्टियन- ये आपका बड़प्पन है गुरु विशिष्ट जो आप ऐसा कह रहे hain.mai आज जिस स्थान पर हूँ वो मुझे किस्मत से मिली है पर आपने जो भी हासिल किया है वो सब आपकी म्हणत और कठोर तप से पाया है.

बाबा विशाखत- नहीं prabhu,aisa मत kahiye.mai एक tuch,paapi मनुष्य hun,aur आपके चरणों के धूल जितना भी योग्य nahi.aapse मात्र भेट होपाना किसीके भी जीवन को धन्य कर देगा...

संत सेबेस्टियन- प्रभु सिर्फ एक हैं गुरु VISHAKHT.hum सब तोह बस उनके आदेश को पूरा करने वाले भक्त hain.waise मई यहाँ तुम्हे कुछ बताने आया था...

बाबा विशाखत- जी महा गुरु. बोलिये.....

संत सेबेस्टियन- तुम्हे तोह पता hi होगा की कुछ महीने पहले जयराज पे हुम्ला हुआ था जिसमे विक्रम को भी नुक्सान पहुंचाने की कोशिश की गयी थी.

बाबा विशाखत- जी महा GURU.par मैंने उसी वक़्त विक्रम के आगे एक सुरखा कवच दाल दिया tha.(ji हाँ doston,ye बाबा विषाक्त hi थे जो ध्यान अवस्था में जयराज की लड़ाई देख रहे the.aur जब मंगल विक्रम को मारने के लिए उसके पास गया तोह बाबा विशाखत ने विक्रम के आगे एक सुरक्षा चक्र बना दिया था.

संत सेबेस्टियन- ये हमें पता hai.par भविष्य में ऐसा कभी न हो इसिलए हम यहाँ आये हैं

बाबा विशाखत- महा GURU.meri नज़र हर वक़्त विक्रम पर रहती hai.jab तक उससे उसकी शक्तियां नहीं मिल jaati,mai उससे कुछ भी नहीं होने दूंगा.

संत सेबेस्टियन- मुझे पता है की आप विक्रम को बचने में सक्षम hain.par ये कलयुग है गुरु VISHAKHT.aise बोहोत सी ताकतें जन्म ले चुकी हैं जो विक्रम को नुक्सान पहुंचा सकती hai.bhale hi तुमने विक्रम की शक्तियों को सुरक्षित छुपा दिया hai,par फिर भी उसका रूप और आकर्षण इंसानो से ज़्यादा प्रभावशाली hoga.ek खिचाव होगा usme,jo या तोह उसके दोस्तों की संख्या बढ़ाएगा या दुश्मनो ki.insaano के बीच कुछ ऐसे मायावी जीव घुस चुके हैं जिन्हे ास्मोडियस से ब्लैक मैजिक की एनर्जी मिली hai.kalyug में किसीके भी मनुष्य के अंदर से वाइट लाइट एनर्जी नहीं निकलती है पर विक्रम तोह खुद गॉड का अंश hai,ye एनर्जी तोह उसके सारे शरीर यहाँ तक के उसके खून में भी hai.un मायावी जीवो से ये चुप नहीं पायेगा और वो उससे नुक्सान पहुंचाने की कोशिश अवश्य करेंगे.

हो सकता है जब वो मायावी जीव विक्रम पर हुम्ला karen,aur तुम उससे बचालो तोह वो उससे तोह कुछ कर नहीं पाएंगे पर उस सुरक्षा जाल का शोर्थ जो की तुम ho,iska पता उन्हें चल जायेगा जो वो ास्मोडियस को ज़रूर batayenge.ASMODEUS ने विक्रम को चोट नहीं पहुंचाने का वादा किया है पर तुम्हे वो नहीं chhodega.aur ये हम नहीं चाहते....

बाबा विशाखत- तोह मेरे लिए क्या आज्ञा है गुरुदेव...

संत सेबेस्टियन- सर्वस्व सुरक्षा प्रजातनाम.....

ये मंत्र तुम विक्रम को अपने आलिंगन में लेकर

कहना. इससे ना सिर्फ एक सुरक्षा कवच विक्रम के शरीर के चारो और फैले जाएगा बल्कि विक्रम की शारीरिक शक्ति भी काफी बढ़ जाएगी. जब तक उसकी साड़ी शक्तियां उससे नहीं मिल जाती तब तक के लिए ये आवश्यक है.

बाबा विशाखत- किन्तु gurudev,chote मोठे झगडे, लड़ाईआं तोह आम बात है, ख़ास कर के लड़को के बीच me.toh क्या ऐसे में लोगों के बीच विक्रम के शक्तियों का उजागर होना ठीक hoga.aise में तोह विक्रम वक़्त से पहले hi सबकी नज़र में आजायेगा ख़ास कर के बुरी शक्तियों के.

संत सेबेस्टियन- आप निश्चिन्त रहें गुरु विशाखत.

जो सुरक्षा कवच विक्रम के शरीर में समायेगा वो तभी काम करेगा जब उसपे प्राण घाटी हुम्ला hoga.baaki समय वो विक्रम के अंदर hi rahega.aur रही शारीरिक शक्ति ki,toh वो विक्रम के पास होना अत्यंत ज़रूरी है...

बाबा विशाखत- जो आज्ञा महागुरु...

संत सेबेस्टियन- कल्याण हो...

और फिर संत सेबेस्टियन गायब हो गए....

बैक तो प्रेजेंट:-

विजयी भाव putra....thik है, जाओ आप khelo.vikram बाबा विशाखत की गोद से उतर कर फिर इधर उधर दौड़ने लग गया.

जयराज- गुरुदेव, हम अंदर chalen?uski आवश्यकता नहीं है putra.mujhe बस विक्रम से मिलना tha,jo मई मिल liya.ab मुझे इजाज़त दें.

मीनू- किन्तु गुरुवार, आप ने तोह कहा था की जब कोई संकट आएगा तब आप आएंगे. कृपा करके ये तोह बताइये की क्या संकट आने वाला है...!!!

बाबा विशाखत- संकट आने वाला है नहीं आने वाला tah.par अब चिंता की कोई आवश्यकता nahi.minu कुछ कहने वाली थी पर उससे पहले hi बाबा विशाखत bole,mujhe पता है आप दोनों के मन में कई सवाल होंगे, उन सभी सवालो पर विराम dijiye.sahi समय आने पर सारे जवाब आपको अपने आप मिल जायेंगे...

जयराज. जैसा आप ठीक समझे guruwar.kintu आप कुछ देर के लिए hi सही पर अंदर तोह aaiye.hume आपकी कुछ सेवा का अवसर दीजिये.

बाबा विशाखत- वो अवसर भी ज़रूर आएगा पुत्र पर अब्बी मुझे जाना hai.haan पर मई आप दोनों से कुछ वचन लेना चाहता हूँ.

JAIRAJ/MINU - कैसा वचन गुरुवार!!!!

बाबा विशाखत- ये तोह सही वक़्त आने पर hi पता chalega.par आपको वचन देना होगा की जो भी मई mangunga,aap मुझे देंगे.

JAIRAJ/MINU- हम वचन देते हैं gurudev.hame पता है आप जो भी मांगेगे उसमे भी कुछ ाचा hi होगा.

बाबा विशाखत- अत्ति उत्तम. आप दोनों की सोच और ह्रदय अति शुद्ध hai.prabhu आपकी साड़ी मनोकामनाएं पूरी kare.acha अब मई चलता hun.jairaj और मीनू ने बाबा विशाखत के चरम स्पर्श kiye.BABA विशाखत दोनों को फिर से आशीर्वाद देकर चले गए.....

दूसरी तरफ ास्मोडियस अपने दरबार में बैठ कुछ सोच रहा था.

ास्मोडियस- ( अपने मन में ).... मैंने गॉड से वादा तोह कर दिया की मई उनकी भेजी शक्ति का पता नहीं लगाऊंगा ना hi उसका कुछ नुक्सान karunga,par वो शक्ति सच में कितनी ताकतवर है इससे बिना जाने उसका सामना करना मूर्खता hogi.akhir कुछ सोच कर hi गॉड ने उस शक्ति का निर्माण किया hoga.par अब करा भी क्या जा सकता है !!! कोई ना कोई रास्ता तोह निकलना hi hoga.ASMODEUS ने अपनी आँखें बंद की और अपनी आतंरिक शक्ति को जगा कुछ ढूंढ़ने लगा और जल्द hi hi उससे एक हल मिल gaya.ASMODEUS के चेहरे पर एक मुस्कराहट आ gayi...wo तुरंत अपने महल से गायब हो गया और सीधे पहुंचा "थे वर्ल्ड ऑफ़ वारियर्स में" जिससे थे वर्ल्ड ऑफ़ पावर डायनामिक्स भी कहा जाता hai.......par ये क्या ये दुनिया तोह बिलकुल डरावनी दिख रही thi.jagah जगह लोगों को डेविल्स मार रहे the.bohot से घरों में आग लगी हुई thi.raaston में अधजले लाश बिछे हुए the,jinke पास भी डेविल्स खड़े the.shayad अभी अभी उनलोगों को इन डेविल्स ने खाया tha.mahoul बोहोत hi भयानक tha.log रो रहे थे पर उन डेविल्स पे इसका कोई असर नहीं हो रहा tha.....yahi हाल उस पूरी दुनिया का था. पर ये क्या इतने ख़राब माहौल में जिससे हेलल से काम नहीं कह सकते वहां थोड़ी थोड़ी दूर में बड़े बड़े बैनर्स बिना किसी सहारे के टंगे हुए the.ajib ये नहीं tha,ajib वो था जो बैनर पे लिखा हुआ tha.......banner पे लिखा था........

................ "ास्मोडियस रियल्म"..................

(क्यों आया है ास्मोडियस YAHAN,AUR क्यों लिखा है हर बैनर पे ास्मोडियस रियल्म

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?

क्या हल निकला है ास्मोडियस ने गॉड से टक्कर लेने का) जानने के लिए साथ बने रहें...

DOSTON,YAHAN से स्टोरी के प्लाट का काम KHATM.JITNI डिटेलिंग देनी THI,MAINE दे दी HAI...AB स्टोरी रफ़्तार PAKDEGI...TOH सीट बेल्ट बांधिए और चलिए हमारे स्टोरी के पहले CHAPTER की और जिसका नाम है.....

" .....( डेविल्स ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट ) ".......

आपका अपना V.J.....
 
अब तक आपने पढ़ा की बाबा विशाखत ने विक्रम के चरों तरफ सुरक्षा घेरा बना दिया और उसकी शारीरिक शक्तियां भी बढ़ा DI....DUSRI तरफ ास्मोडियस एक दूसरे गृह में पहुंचा जिससे थे वर्ल्ड ऑफ़ वारियर्स और थे वर्ल्ड ऑफ़ पावर डायनामिक्स भी कहा जाता है पर अब उसका नाम बदल के ास्मोडियस रियल्म हो चूका है....

अब आगे.....

ये कैसे हुआ जानने के लिए चलते है उस वक़्त में जब इस गृह का नाम वर्ल्ड ऑफ़ वारियर्स था....................

CHAPTER - 1

( डेविल्स ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट)

मेगा अपडेट..

अपडेट 11 - ( फर्स्ट फाइट ऑफ़ ास्मोडियस

मीटिंग फर्स्ट लव )

जब गॉड ने यूनिवर्स (ब्रम्हांड) का निर्माण किया तोह उससे कई साड़ी गैलेक्सीज में बाँट दिया और उन गैलेक्सीज में कई जीवन देई प्लैनेट्स बनाये जहाँ अलग अलग किस्म के जीव और इंसान रहने लगे, जिसमे से एक एअर्थ भी hai.waise तोह गॉड सभी ग्रहों से और उनमे रहने वाले जीवो से प्यार करते थे पर उनका लगाव धरती के प्रति ज़्यादा tha.iska कारण ये था की एअर्थ ब्रम्हांड के ठीक बीच मई थी. और सारे ब्रम्हांड के जीवन का श्रोत और एनर्जी एअर्थ से tha.ye बात किसी भी गृह के लोगों को नहीं पता thi.nahi किसी एंजेल ko.yahan तक की ास्मोडियस को भी nahi..PLANETS के साथ साथ उसकी सुरक्षा के लिए गॉड ने बनाया "डिफेंडर्स" ko.har गृह के लिए एक एक डिफेंडर बनाया गया जिसका काम होता था उस गृह का बैलेंस बनाये rakhna.DEFENDERS काफी शक्तिशाली होते थे. उनकी शक्ति का श्रोत उनके गृह होते the.jitna ताकतवर उनका गृह होता उतनी hi उनकी शक्ति बढ़ती thi.sabhi गृह एअर्थ की एनर्जी के वजह से ज़िंदा थे पर इसका ये मतलब नहीं था की वहां के लोग एअर्थ के लोगों से कमज़ोर the.balki कई ऐसे गृह थे जहाँ के इंसान और अन्य जीव शारीरिक और मानसिक शक्ति में एअर्थ के लोगों और जीवों से कहीं ज़्यादा आगे थे, जिनके बारे में आगे पता चलेगा. अभी चलते है

थे वर्ल्ड ऑफ़ वारियर्स :-

नाम से hi पता चलता है ये प्लेनेट वारियर्स के लिए जाना जाता hai.yahan का हर बचा बड़ा होकर वारियर hi बनता hai.prithvi के लोगों के मुकाबले यहाँ के लोग बड़े होते hai.inki हाइट 7 से लेकर 10 फ़ीट तक होती hai.yahan पर कोई शहर या गाओं नहीं hota.sirf कन्ट्रीज होती है जहाँ का शाशन राजा करते hain.aur साड़ी कन्ट्रीज मिल झूल कर रहती hai.ye गॉड के साथ साथ अपने डिफेंडर की भी पूजा करते hain.par अब उनका डिफेंडर गायब हो चूका hai.kaise, चलिए बताता हूँ.

जैसा की मैंने बताया था की डिफेंडर की शक्ति उसके गृह के ताकत के हिसाब से बढ़ती है. थे वर्ल्ड ऑफ़ वारियर्स एक बोहोत hi ताकतवर प्लेनेट tha.yahan के लोग हर तरह के युद्ध में पारंगत the.par फिर भी शांति से रहते the.inke ताकत के साथ साथ इनके डिफेंडर की ताकत भी बढ़ती gayi.jab ास्मोडियस को इस बात का पता चला तोह वो पहुँच गया डिफेंडर के सामने.

डिफेंडर्स अक्सर उनके गृह के सुनसान या ऐसी जगह रहते थे जहाँ कोई इंसान ना पहुँच sake.is वक़्त भी डिफेंडर एक घने जंगल के बीच बने एक झील के किनारे बैठा प्रकृति के सुंदरता को निहार रहा था.

अचानक उससे एक बोहोत hi बड़ी शक्ति का आभास hua.wo उसका पता karta,usse पहले hi उसके सामने धुआँ का गुब्बार सा उठा और जब धुआं हटा तोह उसके सामने ास्मोडियस tha.ab तक ास्मोडियस को गॉड ने निकल दिया tha.ye बात सभी डिफेंडर्स को पता थी.

डिफेंडर- क्या बात hai.aaj मुझसे मिलने थे ग्रेट ास्मोडियस खुद आये hain..ASMODEUS शांत hi खड़ा हो एक तुक डिफेंडर को घर रहा tha.aise ास्मोडियस को अपने तरफ देखते डिफेंडर हल्का सा दर गया पर दर को अपने चेहरे पर नहीं आने दिया.

डिफेंडर- क्या बात है ASMODEUS.itne chup!!aisa क्या सोच रहे ho.Bina किसी कारण तोह तुम मुझसे मिलने आओगे nahi.toh बताओ क्या कर सकता हूँ मई तुम्हारे लिए....

ास्मोडियस- मई सोच रहा हूँ की वक़्त के साथ कितना कुछ बदल जाता hai.kabhi तुम मेरे सामने आने से सम्मान से झुक जाय करते थे पर आज सम्मान तोह छोडो मई आप से तुम बन गया.

डिफेंडर- पहले की बात और थी ास्मोडियस , और ये तुम भी अछि तरह से जानते हो. मई जिसके सामने झुकता था वो एक एंजेल था और अब जो मेरे सामने है वो एक डेविल है.

और मई "आअह्हह्ह्ह्हह"...........

इससे आगे डिफेंडर कुछ कहता ामदेउस ने अपना हाथ आगे kiya.ASMODEUS के हाथ से एक रे निकल कर डिफेंडर पे पड़ी और उसकी चीख निकल gayi.wo उड़ता हुआ 20 फ़ीट दूर गिरा tha.par तुरंत खड़ा हो गया.

डिफेंडर- तुम अपनी हद पार कर रहे हो ASMODEUS.mat भूलो की तुम एक डिफेंडर के सामने खड़े ho.aakhri मौका दे रहा hun.lout जाओ वर्ण ाचा नहीं होगा...

ास्मोडियस- भूल तुम रहे हो की तुम ास्मोडियस के सामने खड़े ho.apni हद में raho,apna सर झुकाओ और मेरे गुलाम बन जाओ मई तुम्हारी ज़िन्दगी बक्श दूंगा.

डिफेंडर- तुम मुझे गुलाम बनाने आये ho.ha है है है

ये बोलकर तुमने अपनी मौत पक्की कर ली है ASMODEUS.ab तुम्हे मरना padega.ye बोलते hi डिफेंडर ने अपनी आँखें बंद की और एक मंत्र bola,uske हाथ में एक नीली रौशनी दिखने lagi.usne उससे ास्मोडियस के तरफ छोड़ diya.nili रौशनी ास्मोडियस के तरफ बढ़ गयी पर अस्मोदएस ने अपना हाथ आगे कर diya.wo नीली रौशनी ास्मोडियस के हाथों में समां gayi.ASMODEEUS ने कुछ मंत्र पढ़ा जिससे वही नीली रौशनी बहार आयी फिर ास्मोडियस ने अपने दूसरे हाथ को आगे किया और उस नीली रौशनी के ऊपर रख कुछ मंत्र कहा जिससे वो नीली रौशनी आसमानी हो गयी और डिफेंडर की तरफ तेज़ गति से चल दी.

डिफेंडर ने जब ये देखा तोह उसने अपनी आँखें बंद की और सर्वस्वा सुरक्षा जागनम kaha,issi के साथ एक सफ़ेद दीवाल सी उसके आगे कड़ी हो गयी. रौशनी उस दीवाल से टकराकर ख़त्म हो गयी...

ास्मोडियस ने जब अपना वार खली जाते देखा तोह अपने दोनों हाथों को ज़मीन में रख कुछ मंत्र kaha.dekhte hi देखते आस पास की ज़मीन हिलने लगी और उस जगह ब्लास्ट होने शुरू हो गए.

डिफेंडर जानता था की अगर उसने जल्दी से कुछ नहीं किया तोह वो उस ब्लास्ट के चपेट पे आजायेगा पर तकलीफ ये थी की ज़मीन हिलने की वजह से वो एक जगह खड़ा नहीं हो पा रहा tha.DEFENDER ने अपनी आँखें बंद की और अपने राइट हाथ को ज़मीन पे रखा और दबाने laga.achanak डिफेंडर के हाथ का आकर बढ़ने लगा और एक सफ़ेद रौशनी उसके पांचों उँगलियों से निकलने lagi.DEFENDER ने अपने उसी हाथ को उप्पर उठाया और ज़ोर से ज़मीं पर दे maara.DEFENDER के हाथों से रौशनी ज़मीं के अंदर चली गयी और ज़मीं का हिलना डुलना और ब्लास्ट होना बंद हो गए. ास्मोडियस चौक gaya.usse पता था की डिफेंडर काफी ताकतवर हो गया है पर ये नहीं सोचा था की उसके वार को डिफेंडर इतनी आसानी से तोड़ देगा.

डिफेंडर- बोहोत हुआ ASMODEUS.ab मेरी baari.DEFENDER ने अपनी आँख बंद की और कहा अनेकाम रूप VANSHAM..aur ये क्याआ, मंत्र बोलने के साथ hi डिफेंडर्स के कई हमशकल बन कर चरों तरफ फ़ैल गए.

ास्मोडियस एकदम शॉक हो gaya.abhi ास्मोडियस उस शॉक से बहार भी नहीं आया था की चारों तरफ से डिफेंडर और उसके सभी क्लोन्स ने एक शक्तिबीम उसके ऊपर छोड़ di.ASMODEUS इस हमले के लिए तैयार नहीं tha.SHAKTIBEAM आकर उससे लगी और ास्मोडियस दूर जाकर gira.ye वार बोहोत घातक tha.ASMODEUS का शरीर जगह जगह से फैट गया और ास्मोडियस का खून निकलने लगा.

डिफेंडर- अपनी हार स्वीकार करो ास्मोडियस, और जाओ यहाँ se.tumhe एक मौका और देता हूँ मई अपनी जान बचने का.

ास्मोडियस को बोहोत ज़्यादा दर्द हो रहा था पर उससे ग़ुस्सा भी बोहोत आ रहा tha..ASMODEUS मर सकता था पर वो हार मान ले, ये संभव ना tha.apni साड़ी ताकत लगाकर वो खड़ा hua.par ास्मोडियस ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा tha.ASMODEUS ने अपनी आँखें बंद ki,dhyaan एकाग्रित किया और मन में एक मंत्र कहा,

पिदमुक्तम.

देखते hi देखते ास्मोडियस के सारे घाव भर गए. अब वो पूरी तरह से ठीक था....

डिफेंडर- वाह क्या बात है ASMODEUS.itne दर्द में भी मन को एकाग्रह कर खुद को ठीक कर liya.ab क्या ख्याल है वापस जाओगे या और लड़ना है.

ास्मोडियस को समझ नहीं आ रहा था की असली डिफेंडर कौन है क्यूंकि ये साड़ी बातें सभी डिफेंडर्स के मुँह से एक साथ निकल रही थी.

ास्मोडियस ने कुछ सोचकर अपने हाथ फैलाये और धीरे धीरे आसमां में उठ gaya.DEFENDER भी सोच में पद गया की अब ये क्या कर रहा hai.phir ास्मोडियस ने सभी हमशकल डिफेंडर्स की तरफ देख कर कहा

" रूप बदलाम मायाजाल भंगम अभिज्ञाते.

ास्मोडियस के ऐसा बोलते hi उसके दोनों हाथों से रौशनी निकल के सभी डिफेंडर्स के ऊपर चली gayi,aur जो असली डिफेंडर था उसके पीछे उसकी परछाई दिखने लगी.....

डिफेंडर को पहले तोह कुछ समझ नहीं आया ,पर जब तक उससे समझ आया बोहोत देर हो चुकी थी

ास्मोडियस ने एक शक्ति गोला बनाकर उसकी और फेक दिया tha.DEFENDER निश्चिन्त खड़ा tha.usse पता नहीं था की ास्मोडियस ने उसके मायाजाल को पहचान लिया hai.wo गोला सीधा आके डिफेंडर को लगा और वो दूर उड़ता हुआ सीधे झरने में गिरा और उसके सारे हमशकल भी गायब हो gaye.Ab डिफेंडर दिख नहीं रहा था.

ास्मोडियस को लगा की डिफेंडर मूर्छित होकर पानी में डूब गया hai.par यहीं वो धोका खा gaya.DEFENDER को चोट तोह आयी थी पर वो मूर्छित नहीं हुआ था.

डिफेंडर तुरंत उड़ते हुए पानी से बहार आया और अब डिफेंडर हवा में खड़ा tha.usne तुरंत अपने दोनों हाथ एक साथ जोड़ें और एक प्राणघातम मंत्र याद कर अपने हाथ आगे कर diye.ek लाल बीम डिफेंडर के हाथों से निकली और ास्मोडियस के तरफ चल di.ASMODEUS ने ये देख तोह लिया पर थोड़ी देर हो गयी.

ास्मोडियस ने अपने हाथ आगे कर प्राण निष्प्रभावयन्ति मंत्र बोलै जिससे डिफेंडर का मंत्र काट जाए पर जब तक ास्मोडियस ने हाथ आगे किये तब तक वो बीम आके ास्मोडियस कप लग चुकी थी. ास्मोडियस वहीँ गिर gaya.usse असहनीय दर्द होने लगा. पुरे शरीर से खून निकल रहा tha.DEFENDER ास्मोडियस के पास आया और बोलै

डिफेंडर- मैंने तुम्हे मौका दिया था ास्मोडियस, पर तुम नहीं maane,ab bhugto.tum मरने वाले ho.yeh कहकर डिफेंडर पलट गया और वापस जाने लगा .अभी डिफेंडर कुछ hi दूर गया था की आवाज़ aayi....DEFENDERRRRRR..

डिफेंडर जब पीछे पलटा तोह स्तब्ध रह gaya,kyunki उसके सामने ास्मोडियस खड़ा था. ास्मोडियस खड़ा तोह था पर उसके पेअर कांप रहे the.haan पर खून निकलना बंद हो चूका था.

डिफेंडर- तुम खड़े कैसे हो और तुम्हारा खून निकलना भी बंद हो gaya.ye असंभव hai.ab तक तोह तुम्हे मर जाना चाहिए....

ास्मोडियस- HAHAHAHAHAHAH......abhi तुमने ास्मोडियस के बारे में जाना hi क्या hai.ASMODEUS को मारा नहीं जा sakta.ASMODEUS को सिर्फ गॉड मार सकते है या वो खुद अपने आप ko.aur गॉड, वो तोह मारेंगे नहीं.

पर तुम्हे मारा जा सकता hai.jab तक ये दर्द मुझे हो रहा है तब तक तुम ज़िंदा हो सिर्फ तब तक.

डिफेंडर बोखला गया tha.fir उसने सोचा की ास्मोडियस को मारा तोह नहीं जा सकता पर उससे ये दर्द तोह लगातार दिया जा सकता hai.aakhir दर्द की अत्यदीखता न सेह पाकर ास्मोडियस खुद को hi मार ले तोह .यही सोचकर डिफेंडर ने वही प्राणघाती मंत्र फिर से बोलकर ास्मोडियस के उप्पर छोड़ दिया पर ये क्या.....

बीम ास्मोडियस तक पहुँचने से पहले hi दम तोड़ दी.

डिफेंडर फिर चौंक गया.

हुआ ये था की जब ास्मोडियस खड़ा हो रहा था तब उसने बड़ी मुश्किल से एक मंत्र पढ़ा सर्वस्वा सुरक्षा JAAGNAM.Ab उसके चारो और एक मजबूत सुरक्षा कवच बन चूका था.....

ास्मोडियस - ज़्यादा चौंको मत DEFENDER.mene अपने चारो तरफ सुरक्षा कवच बना दी hai.ab तुम कुछ नहीं कर सकते......

अब डिफेंडर और परेशां हो गया की क्या किया jaaye.abhi वो सोच hi रहा था की उसके अंदर एक आवाज़ आयी...

पुत्र तुम उससे हरा नहीं PAOGE.WAISE भी अभी उसका समय नहीं AAYA.TUM ये स्थान और ते गृह छोड़कर चले जाओ और जब तक कहा न जाए वापस मत आना.

आवाज़ सुन के एक पल के लिए डिफेंडर चौंक गया पर फिर उसने कहा . संत सेबेस्टियन (जी हाँ दोस्तों ये संत सेबेस्टियन की hi आवाज़ थी) अगर मई चला गया तोह इस गृह का क्या होगा.

संत सेबेस्टियन- तुम्हारे जाने से इस गृह को हानि तोह पहुंचेगी पर अगर तुम नहीं गए तोह ये गृह hi नहीं रहेगा. अब तुम सोच लो तुम क्या चाहते हो.

डिफेंडर- गुरुदेव मई आपकी बात कैसे ताल सकता hun.jaisa आपने कहा है वैसा hi होगा. इसी के साथ संत सेबेस्टियन की आवाज़ आना बंद हो गयी.

डिफेंडर ने अपने सामने देखा. ास्मोडियस दर्द से तड़प रहा था फिर भी मुस्कुरा रहा tha.ab डिफेंडर का वहां पे कोई काम नहीं रह गया tha.DEFENDER गायब हो गया.

डिफेंडर के अचानक गायब होने से पहले तोह ास्मोडियस चौंका फिर उसके चेहरे में एक हलकी सी मुस्कान आ gayi.par दर्द ज़्यादा होने की वजह से ास्मोडियस बेहोश हो गया.......

एक दूसरे गृह में......

लड़की 1- माँ प्लीज मान जाइये naa.mai प्रॉमिस करती हूँ की मई लाइफ प्रोटेक्टर पेहेन कर जाउंगी.( एक ऐसा कपडा जो आप जैसा चाहो दिखने लगता है और इससे पेहेन्ने से किसी भी शत्रु का कोई भी वार बेअसर हो जाता है.

लड़की 2 - कोई ज़रुरत नहीं hai.aap सोच भी कैसे सकती हैं की हम आपको इस गृह से बहार जाने की अनुमति denge.humne आपको बोहोत मुश्किल से पाया hai.hum ये खतरा नहीं उठा सकते.

लड़की 1 - कैसा खतरा माँ!! आप भी जानती हैं मुझे कुछ नहीं hoga.agar आपने हमे जाने की परमिशन नहीं दी तोह हम कुछ भी नहीं खाएंगे...

इससे पहले की लड़की 2 कुछ कहती एक आवाज़ आई

ठीक है putri,tum चली जाओ.

ये आवाज़ थी किंग सोलोमन की, और जो दो लड़किया थी उनमे से एक थी किंग सोलोमन की वाइफ अश्ली और दूसरी थी उन दोनों की बेटी ALESANDRA.aur इस गृह का नाम है इस्ला जिससे फेयरी लैंड भी कहते हैं....

अलेक्सांद्र और अश्ली माँ बेटी ज़रूर थे पर दिखने में अश्ली अलेक्सांद्र से बस 4 साल hi बड़ी लगती hain.iski वजह है की इस्ला के राजघरों की लड़कियों की उम्र सिर्फ 21 साल तक hi बढ़ती hai.uske बाद वो हमेशा उतनी hi बड़ी लगती hain.ALESANDRA इस वक़्त 17 साल की है..

और अश्ली की उम्र 500 साल से ज़्यादा hai.yahan के लग 10000 सालों तक जीते hain.ASHLEY की कुंडली में संतान योग नहीं tha.unhone कड़े तप से गॉड को खुश किया और एक संतान की इच्छा जताई. गॉड ने उन्हें एक बेबी गर्ल का आशीर्वाद दिया और इस तरह अलेक्सांद्र का जन्म हुआ.

बैक तो थे स्टोरी

किंग सोलोमन -ठीक है पुत्री. तुम jao,par लाइफ प्रोटेक्टर पेहेन के hi जाना....

अलेक्सांद्र- थैंक्स पिताजी. फिर अपने डैड के गाल को चुम कर अपनी माँ को ठेंगा दिखाके अलेक्सांद्र अपने कमरे की और चली गयी. अपने कमरे में जाकर अलेक्सांद्र एक शेल्फ के पास gayi,wahan से उसने एक छोटा सा रोल्ड कपडा उठाया और उससे अपने साइन के ऊपर rakha.dekhte hi देखते अलेक्सांद्र के शरीर के ऊपर एक ड्रेस आ गयी जो की रॉयल लग रही thi.usne अपनी आँखें बंद की और कहा "वर्ल्डस ऑफ़ थे वारियर्स". और वो गायब हो गयी......

वहीँ नीचे

अश्ली- ये आपने क्या कर दिया. उससे अकेले जाने की परमिशन दे दी कही उससे कुछ हो गया तोह!

किंग सोलोमन- तुम फ़िक्र मत करो मई भी उसका पिता हूँ जब तक लाइफ प्रोटेक्टर उसके साथ है उसे कुछ नहीं होगा वैसे भी मेरी नज़र हमेशा उसके उप्पेर रहेगी..

दूसरी तरफ अस्मोदएस बेहोश पड़ा tha.usi वक्त उससे थोड़ी दूर आसमान में एक तीज रौशनी हुई और एक जगह सी खुल gyi.ye एक वर्ल्ड दूर था, और उसके बीच से एक बोहोत hi खूबसूरत लड़की धीरे धीरे नीचे उत्तरी, ये लड़की और कोई नई प्रिंसेस अलेक्सांद्र hi थी
 
अब तक आपने पढ़ा की कैसे ास्मोडियस और अलेक्सांद्र मिले और उनमे प्यार HUA.ASMODEUS अपने ास्मोडियस रियल्म में जाता है जहाँ वो लार्ड क्रूसेडर से बात कर रहा होता है की अचानक उसके सामने कोई प्रकट होता है और ास्मोडियस को थप्पड़ मार देता HAI.WAHIN अब अपना हीरो भी बड़ा हो सगुका है और 10तह में HAI.JAIRAJ भी अब एक सक्सेसफुल बिजनेसमैन बन चुके HAIN.....AB आगे....

CHAPTER-1

(डेविल्स ेंचन्त्मेन्त एंड थे हौली स्पिरिट)

अपडेट - 12

ास्मोडियस- इतने दिन बाद कोई अपने प्यार से ऐसे मिलता है क्या???

अलेक्सांद्र- प्यार?

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प्यार की बात तुम न hi करो तोह ठीक है ASMODEUS.is शब्द का मतलब hi नहीं जानते तुम....

ास्मोडियस- मई मतलब नहीं jaanta...ye ाचा है, तुमने मेरा साथ छोड़ा, खुदको और मुझको अकेला कर दिया और फिर भी मुझे झुट्टा बता रही हो....!!!

अलेक्सांद्र- मैंने तुम्हे chhoda,par क्यों छोड़ा ये नहीं बोलै tumne.tumne गलत रास्ता चुना है ASMODEUS.aur वो रास्ता तुम्हे मुझसे भी ज़्यादा प्यारा hai.isiliye हम अलग hue.par मैंने सोचा था की एक न एक दिन तुम बदल jaoge.issi प्लेनेट में हम पहली बार मिले the,yahin पर हमारे मोहोब्बत की शुरुआत हुई thi.par जब भी मई यहाँ का हाल देखती हूँ तोह ऐसा लगता है की ये सब इनके साथ नहीं तुम मेरे साथ कर रहे ho.mai इंतज़ार कर रही थी की तुम कब यहाँ आओ, यहाँ के हालत dekho.inki दर्द भरी चीखें सुनकर तुम्हे अपनी गलती का एहसास हो पर मई देख रही हूँ की अब भी कुछ नहीं badla.tum आज भी उतने hi निर्दयी ho.kya हासिल होता है इससे तुम्हे, और उसपे प्यार का दवा करते ho.koi भी जो प्यार में विश्वास रखता है ऐसे काम नहीं karta.ye कहते कहते अलेक्सांद्र की आँखों से आंसू निकल आये.....

अस्मोदएस - burai,nafrat, गलती, निर्दयिता, गुनाह....... ये सब क्या हैं माय फेयरी प्रिंसेस...

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? ये सब ास्मोडियस के hi रूप hain.mai सिर्फ एक शैतान नहीं hun,mai शैतानो का राजा हूँ. अस्मोदएस थे डेविल्स किंग.... फिर तुम मुझसे अच्छी की उम्मीद कैसे रख सकती ho.kya मैंने कभी तुम्हे डेविल बनाने ko,achai का जिसपे तुम्हे इतना यकीं है या फिर उस गॉड पे जिसके आगे तुम झुकती ho,jo मुझे मारना चाहता है, मैंने कभी छोड़ने को या यकीं ना करने को kaha.nahi naa,kyunki तुम मुझे ऐसी hi पसंद ho,toh तुम क्यों बदलना चाहती हो मुझे!!!!

अलेक्सांद्र - बोहोत शक्तिशाली समझते होना तुम खुद ko.itna शक्तिशाली जो खुद को गॉड के बराबर रखता है. तुम्हे लगता है गॉड तुम्हे मारना चाहते हैं, क्यों??? ास्मोडियस, अगर गॉड तुम्हे मारना चाहते तोह अब तक तुम ज़िंदा नहीं रहते.....

अस्मोदएस- हहहहहह!!!!! तुमने अभी तक सिर्फ ास्मोडियस की ताक़त के बारे में सुना है ALESANDRA,dekha nahi.warna ये सब नहीं कहती.....

अलेक्सांद्र- देखा तोह मैंने गॉड की ताक़त भी नहीं है ास्मोडियस. और नाही tumne,warna तुम ये नहीं kehte.khair जाने दो, तुम्हारे समझ में कुछ नहीं aayega,itna तोह मई जान hi चुकी हूँ. अब मई कोशिश भी नहीं karungi.bas कुछ माँगना चाहती हूँ tumse.de पाओगे?

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?

ास्मोडियस- मई तोह तुम्हारे कदमो में ये पूरा ब्रम्हांड रख सकता हूँ अलेक्सांद्र, पर मई जानता हूँ तुम कुछ ऐसा मांगोगी जो शायद मेरे लिए इससे भी मुश्किल होगा!!!! खैर, पहली बार तुमने कुछ ख्वाशीष जताई hai,bolo क्या चाहिए तुम्हे?

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अलेक्सांद्र- लार्ड क्रूसेडर और यहाँ के लोगों की आज़ादी.

वारियर्स वर्ल्ड के लोगों की वीरान आँखों में अलेक्सांद्र की बात सुन जैसे अचानक एक उम्मीद की चमक आ गयी.

ास्मोडियस हलकी मुस्कान के साथ, तुम एक शैतान से रेहम की उम्मीद रख रही हो ALESANDRA....LORD क्रूसेडर और यहाँ के लोगों को तोह अभी और तड़पना tha,phir भी सिर्फ तुम्हारे लिए मई इन सब का आज़ाद कर दूंगा............

मगर ......... मेरी एक शर्त है.........

लार्ड क्रूसेडर और वहां के सभी लोग जो अपनी आज़ादी की बात सुन खुश हो गए थे, ास्मोडियस के मुँह से शर्त शब्द सुन एक बार फिर सबकी उम्मीद टूटने लगी......

अलेक्सांद्र- अभी तोह तुम पुरे यूनिवर्स मेरे कदमो में रखने की बात कर रहे the.aur अब मेरी एक छोटी सी ख्वाहिश पे भी शर्त रख रहे हो!!!!!

ास्मोडियस- तुम्हारी हर ख्वाहिश ास्मोडियस के दिल के लिए हुक्म है जो हर हाल में पूरी hogi,par इस दिमाग का क्या करूँ!!!! इसकी भी इच्छाएं hai,jo पूरी करने के लिए मई बाध्य हूँ.

अलेक्सांद्र जानती थी की ास्मोडियस बिना अपनी शर्त मनवाये नहीं मानेगा

अलेक्सांद्र- बोलो क्या शर्त है?

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ास्मोडियस- मेरी शर्त लार्ड क्रूसेडर पूरी करेंगे.

लार्ड क्रूसेडर अचानक अपना नाम सुन हड़बड़ा गए..

लार्ड क्रूसेडर- मेरे पास है hi kya?mera परिवार, किंगडम सब कुछ तोह तुमने छीन लिया......

ास्मोडियस- hahahahaha.......itna कुछ होजाने के बाद भी तुम ास्मोडियस को काम आंक रहे हो. तुम ये भूल रहे हो की मुझसे तुम कुछ भी नहीं छुपा सकते..

लार्ड क्रूसेडर अब भी नहीं समझ पा रहे थे की ास्मोडियस उनसे किस चीज़ के बारे में बात कर रहा है नाही hi अलेक्सांद्र...!!!!!

लार्ड क्रूसेडर- मुझे सच में नहीं पता की तुम किस बारे में बात कर रहे हो?

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?

ास्मोडियस- hmmm....koi बात नहीं मई बता देता हूँ.

"थे लॉकेट ऑफ़ पावर" याद है,

वो मुझे dedo,mai तुम सबको आज़ाद कर दूंगा...

अलेक्सांद्र इसके बारे में कुछ नहीं जानती थी इसीलिए वो नार्मल hi रही पर लार्ड क्रूसेडर को ज़ोर का झटका laga.ASMODEUS के ज़ुल्म की वजह से उन्हें तोह याद hi नहीं रहा था की उनके पास लॉकेट ऑफ़ पावर भी है..

अलेक्सांद्र- ये लॉकेट ऑफ़ पावर क्या है?

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लार्ड क्रूसेडर- mu..mu....mujhe नहीं मालुम ये किसके बारे में बात कर रहा है....!!!!

ास्मोडियस- है है है है.. हमें तुमसे इसी जवाब की उम्मीद थी... तुम्हे क्या लगा की इतने वक़्त के बाद मई तुमसे तुम्हारी तबियत का हाल जान्ने आया हूँ. बिना कोई नाटक किये चुप चाप लॉकेट मेरे हाथों में dedo,mai तुम्हे और तुम्हारे प्लेनेट को आज़ाद कर dunga.warna तुम अचे से जानते हो ास्मोडियस दोबारा मौका नहीं देता....

एक तरफ लार्ड क्रूसेडर डरे हुए थे तोह दूसरी तरफ अलेक्सांद्र को कुछ समझ hi नहीं आ रहा था.

अलेक्सांद्र- कोई मुझे बताएगा की किस लॉकेट के बारे में बात हो रही hai,aur लार्ड क्रूसेडर, आप एक लॉकेट के लिए मन क्यों कर रहे हैं, जबकि उसके बदले आपकी और पुरे प्लेनेट के लोगों की जान बच सकती है.

ास्मोडियस- मई बताता हूँ लॉकेट ऑफ़ पावर है क्या!!

ये कोई साधारण लॉकेट नहीं hai.ye लॉकेट जिसके पास भी होता है उसके पावर को डबल कर देता है. सालों पहले लार्ड क्रूसेडर की बहादुरी से खुश होकर इस प्लेनेट के डिफेंडर ने लार्ड क्रूसेडर को वो लॉकेट दिया दिया tha.issi की वजह से ये प्लेनेट इतना शक्तिशाली tha,kyunki थे लॉकेट ऑफ़ पावर ना सिर्फ उससे धारण करने वाले की शक्ति बढ़ता है बल्कि उसके सहयोगिओं की bhi.tabhi यहाँ के वारियर्स भी काफी ताकतवर थे....

अलेक्सांद्र- अगर वो लॉकेट सचमे इतना ताकतवर है तोह लार्ड क्रूसेडर की इतनी बुरी हालत कैसे हो गयी???

ास्मोडियस- है है है है ..... मैंने कहा था न अलेक्सांद्र की तुम्हे अभी मेरी ताकत का अंदाज़ा नहीं है.. उस जैसे दस लॉकेट भी अगर लार्ड क्रूसेडर के पास हो तब भी वो ास्मोडियस को नहीं हरा sakte.aur वैसे भी अपने परिवार वालो को अपने आँखों के सामने मरते देखने के बाद खुद लार्ड क्रूसेडर को भी जीने की कोई इच्छा नहीं बची थी. पर dekho,jitni पनिशमेंट जितना टार्चर लार्ड क्रूसेडर को दिया जा चूका hai,utna किसी को भी दिया जाता तोह वो कबका मर चूका होता, पर लार्ड क्रूसेडर सिर्फ कमज़ोर hi हुए hain.agar आज भी सिर्फ एक दिन इन्हे पुनीश ना किया जाए तोह ये पहले जैसे हो jaayenge.wo लॉकेट लार्ड क्रूसेडर के किसी काम का नहीं पर जब वो मेरे पास आएगा तोह सोचो क्या hoga,meri ताकतों की कोई सीमा hi नहीं rahegi.mai वैसे भी महाशक्तिशाली हूँ, थे लॉकेट ऑफ़ पावर मिलने के बाद अजय बन जाऊंगा....

अलेक्सांद्र और लार्ड क्रूसेडर इस सोच मात्र से कांप गए थे.

अस्मोदएस- मई जानता हूँ आप दोनों क्या सोच रहे hain.par अब इस सोच का कुछ किया नहीं जा sakta.aur ALESANDRA,is मामले से दूर रहना क्यूंकि मई इसमें कुछ नहीं sununga,aur लार्ड CRUSEDAR,wo लॉकेट अभी मुझे दीजिये.

लार्ड क्रूसेडर- मई सच कहता hun,mere पास कोई ऐसा लॉकेट नहीं है...

अलेक्सांद्र- हाँ, ये सच hi तोह कह रहे hain.ye सालों से ऐसे hi तुम्हारे कारगर में पड़े hain.agar इनके पास कोई ऐसा लॉकेट होता तोह अब तक तुम्हारे सिपाहियों को मिल चूका होता...

अस्मोदएस- वो लॉकेट इस वक़्त लार्ड क्रूसेडर के पास hi hai,unke दिल के andar.wo लॉकेट तब hi बहार आएगा जब उसका मालिक उससे खुद बहार आने को कहेगा...

लार्ड क्रूसेडर ये सुनके चौंक gaye.wo नहीं जानते थे की ास्मोडियस को लॉकेट के बारे में इतना कुछ पता होगा!!!!!

ास्मोडियस- ज़्यादा चौंकिए मत लार्ड CRUSEDAR..maine पहले hi कहा था की ास्मोडियस से कुछ नहीं छुपता.... laayiye,LOCKET दीजिये.

लार्ड क्रूसेडर- मई मर जाऊंगा पर वो लॉकेट तुम्हे कभी नहीं दूंगा.

अस्मोदएस- हम्म. चलिए प्यार की भाषा तोह आप समझ नहीं पाए, अब ास्मोडियस की भाषा सुनिए...

ास्मोडियस ने अपना बायां हाथ सामने की और कर दिया, उसके हाथ से तेज़ बिजली निकली और वहां खड़े तीन लोगों पे padi,wo तीनो एक पल में hi राख बन गए.

NAHIIIIIIIIIII....... अलेक्सांद्र के मुँह से एक तेज़ चीख nikli,LORD क्रूसेडर तोह स्तब्ध खड़े रह गए....

अलेक्सांद्र- तुम्हारे अंदर ज़रा भी दया नहीं है क्या ASMODEUS.in लोगों ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा hai.inke पास वो लॉकेट थोड़ी न है जो तुम इन्हे मार रहे हो.

ास्मोडियस- जानता हूँ ALESANDRA.par ये भी जानता हूँ की लार्ड क्रूसेडर को अपनी जान की फ़िक्र नहीं hai,par अपने प्रजा की तोह है ना. लार्ड क्रूसेडर, अब मर्ज़ी तुम्हारी hai,ya तोह वो लॉकेट मुझे देदो या फिर इन सबको मरते हुए देखो. ये कहकर ास्मोडियस ने अपनी उँगलियों को हरकत di,uske हाथों में फिर बिजलियाँ दिखने लगी. वहां खड़े सभी वारियर्स वर्ल्ड के लोगों के आँखों में दहशत दिखने लगी और साथ में अलेक्सांद्र के आँखों में एक दर आने laga.ASMODUES ने अपने हाथ सामने किये hi था की......... रुक्खक्क जाऊओऊ......

एक आवाज़ aayi.ye आवाज़ थी लार्ड क्रूसेडर ki.jo अपने घुटनो पर हारे हुए से बैठे हुए थे..

लार्ड क्रूसेडर- ठीक hai.mai तुम्हे वो लॉकेट dunga.kripa करके मेरे लोगों को बक्श दो.... लार्ड क्रूसेडर ने अपने हाथ को अपने दिल में रख लॉकेट का आवाहन kiya,LORD क्रूसेडर का हाथ जो दिल के ऊपर था वो चमकने लगा, जब चमक काम हुई तोह उनके हाथ में थे लॉकेट ऑफ़ पावर tha.par अब भी लॉकेट काफी चमक रहा tha.is लॉकेट में एक वाइट कलर का स्टोन लगा हुआ था जिसमे से रौशनी निकल रही थी. ास्मोडियस की आँखें लॉकेट को देख कर चमक uthi.LORD क्रूसेडर ने अपना लॉकेट वाला हाथ ास्मोडियस के आगे कर दिया. अस्मोदएस ने भी अपना हाथ आगे kiya.wo लॉकेट उड़ता हुआ ास्मोडियस के हाथ में आ gaya.par ास्मोडियस के हाथ में आते hi वो लॉकेट का स्टोन सफ़ेद से काला हो गया जिससे देखके अलेक्सांद्र चौंक गयी.

अलेक्सांद्र- ये स्टोन का कलर कैसे चेंज हो गया???

ास्मोडियस- इस लॉकेट का स्टोन अपने मालिक की ताकत का प्रतिक भी है. लार्ड क्रूसेडर अच्छी के रस्ते पर थे इसीलिए ये सफ़ेद tha,ab ये ास्मोडियस की जागीर है जो काली शक्तियों का मालिक है इसीलिए अब इसका कलर काला है.

ास्मोडियस ने लॉकेट अपने दिल के ऊपर रखा. लॉकेट तुरंत ास्मोडियस के अंदर समां गया. ास्मोडियस की आँखें बंद हो gayi,wo हवा में उठने लगा, चरों तरफ तेज़ हवाएं बहने लगी, बदल गरजने लगे, ऐसा लग रहा था जैसे मानो अभी ये दुनिया ख़त्म हो jaayegi.fir धीरे धीरे ास्मोडियस वापस निचे उतरा. जैसे hi ास्मोडियस ने आँखें kholi,mausam अपने आप ठीक हो गया. ास्मोडियस को अपने अंदर बेशुमार ताकत महसूस हो रही थी. ास्मोडियस ने अपना एक हाथ ऊपर किया आँखें बंद की और मंत्र कहा, पुनर निर्माण भाव... कुछ hi पलों में पूरा वर्ल्ड ऑफ़ वारियर्स पहले जैसा हो gaya.lag hi नहीं रहा था की यहाँ कभी कुछ तबाही हुई थी.

किसीको यकीं hi नहीं हो रहा था की ऐसा भी हो सकता है..

अस्मोदएस- लार्ड क्रूसेडर, जो मैंने आपसे छिना है वो तोह मई नहीं लौटा sakta.par जितना कर सकता था कर दिया. इसका पुनर निर्माण तोह मैंने कर diya,par इसको पहले जैसा शक्तिशाली बनाना आपका काम hai.Ab आप निश्चिन्त रहें, ास्मोडियस कभी आपको या इस गृह को नुक्सान नहीं पहुंचाएगा. ास्मोडियस ने अपना हाथ आगे किया, उसके हाथ से नीली रौशनी निकली और लार्ड क्रूसेडर के अंदर चली gayi.dekhte hi देखते लार्ड क्रूसेडर वापस पहले जैसे स्वस्थ में आ गए और मज़बूत हो गए.

ASMODEUS-ab आपके शरीर में उतनी hi ताकत है जितनी इस लॉकेट की वजह से thi.apko अपने प्लेनेट को वापस शक्तिशाली बनने के लिए इसकी ज़रुरत पड़ेगी. अब खुश ALESANDRA.jitna तुमने माँगा tha,usse ज़्यादा hi दे दिया maine.aur फिर ास्मोडियस वहां से गायब हो गया और साथ hi सारे डेविल्स भी.

अलेक्सांद्र और लार्ड क्रूसेडर अब भी स्तब्ध खड़े the.unhe समझ नहीं आ रहा था की ास्मोडियस आखिर है क्या चीज़. कभी इतना बुरकर देता है की अच्छी पर तक से भरोसा उठ जाता है तोह कभी लगता है की इतना भी बुरा नहीं hai.....kuch देर तक दोनों ऐसे hi खड़े रहे.

लार्ड क्रूसेडर- शुक्रिया PRINCESS.is आवाज़ के साथ hi अलेक्सांद्र की तंत्र टूटी. आपकी वजह से hi आज ये प्लेनेट आज़ाद जो पाया है.

अलेक्सांद्र- कोई बात नहीं लार्ड CRUSEDAR.maine कुछ भी नहीं kiya.acha मुझे अब इजाज़त दे. अलेक्सांद्र अब भी थोड़ी बेचैन सी thi.Bina लार्ड क्रूसेडर की कोई बात सुने अलेक्सांद्र उसी वर्ल्ड गेट से वापस चली गयी.

वही दूसरी तरफ एअर्थ पर....

"मीनाक्षी मेन्शन".....

यही नाम है अपने हीरो के बंगलो का जो की मुंबई में hai.ye लगभग 16 हज़ार s/f में फैला एक शानदार ट्रिपलेक्स बुगलो hai.jisme कुल 10 बेडरूम्स हैं.2 हॉल्स hain,ek ग्राउंड फ्लोर पर और एक फर्स्ट फ्लोर par.ground फ्लोर पर 3 बेडरूम्स hai,hall का तोह बता hi चूका hun,ek छोटा सा मंदिर है ,एक मास्टर kitchen,uske पीछे स्टोर रूम hai.first फ्लोर पे भी 3 बेडरूम्स हैं जिसमे से एक विक्रम का है जो की एक मास्टर बैडरूम hai.2nd फ्लोर पर 4 बेडरूम्स हैं जिनमे से 2 को hi बेडरूम्स कहा जा सकता hai.baaki के दो का साइज थोड़ा ज़्यादा hi बड़ा hai.ek गयम के लिए इस्तेमाल होता है और दूसरा विक्रम & फ्रेंड्स के गेट टुगेदर के liye,aur एक इंडोर हीटिड स्विमिंग पूल भी है 2ंद फ्लोर pe.ghar के बहार लॉन है, जिसके बीच में गार्डन hai.bunglow के लेफ्ट साइड में स्विमिंग पूल hai.lawn के लेफ्ट साइड में सर्वेन्ट्स क्वाटर्स हैं .बंगलो के राइट साइड से होकर एक अंडरग्राउंड गेराज hai.bahar गेट पे 4 सिक्योरिटी गार्ड hain.pure बंगलो में कक्तव लगा हुआ है.

जैसा की मैंने बताया था की जयराज अब एक सक्सेसफुल बिजनेसमैन बन चुके हैं. इनकी कुल 12 सीमेंट की फैक्ट्रीज है जिनके डीलर्स लगभग पुरे देश में फैले हुए hain.waisa तोह इनके लगबघ हर बड़े शहर में ऑफिस हैं पर सबसे बड़ा ऑफिस यहीं मुंबई में hi है. डायमंड मार्किट में भी इनकी अछि खासी शेयर्स पड़ी हुई है और अब जयराज रियल एस्टेट और चैन ऑफ़ होटल्स बनाने में भी में भी अपना हाथ डालने का सोच रहे hain.ab ये सब कैसे हुआ, चलिए शार्ट में बता देता हूँ.

वैसे तोह जयराज हमेशा से hi एक बिजनेसमैन बनाना चाहते थे पर ढेंकानाल प्रोजेक्ट के बाद से hi उनकी ये सोच मज़बूत हो gayi.agle 2,3 टेंडर्स लेने के बाद जयराज के पास इतना पैसा हो चूका था की वो अपना कोई छोटा सा बिज़नेस स्टार्ट कर सकते the.unhone सीमेंट फैक्ट्री डालने की sochi,kyunki इसकी उनको अछि खौलेज thi.ek छोटे से शहर में एक बंद सीमेंट फैक्ट्री थी. जयराज ने उससे खरीद लिया और स्टार्ट कर diya.kuch hi वक़्त में जयराज के दिमाग और म्हणत से फैक्ट्री अछि चलने lagi.kaafi मुनाफा होने laga.dekhte hi देखते कुछ सालों में जयराज ने देश भर में कई सीमेंट फैक्ट्रीज

खोल दी. जयराज के कुछ फ्रेंड्स डायमंड का बिज़नेस करना चाहते थे पर कैपिटल की कमी की वजह से कर नहीं पा रहे थे. जयराज ने उनकी मदद करने का वादा कर दिया. जयराज के फ्रेंड्स भी स्वाभिमानी the.unhone जयराज से कहा की वो एक hi शर्त पे जयराज से पैसे लेंगे .उनकी कंपनी में जयराज के भी 25% शेयर्स हमेशा रहेंगे जो जयराज जब चाहे निकल सकते hain...JAIRAJ मान gaye.unke दोस्तों का डायमंड बिज़नेस भी चल पड़ा और वादे के मुताबिक उनकी कंपनी में 25 % शेयर्स जयराज के hain,aur इसी तरह आज जयराज इतने बड़े मुकाम में hai.par इतने बड़े मुकाम पर पहुँच ने के बावजूद जयराज एक सिंपल लाइफ जीते हैं. करोड़ों रूपए हर साल उनकी कंपनी की तरफ से मीनाक्षी वेलफेयर & चैरिटेबल ट्रस्ट जो की उन्ही का hi है में जाता है जहाँ ज़रुरत मांडो की मदत की जाती hai.in सब में जयराज की वाइफ मीनू ने उनका बोहित साथ दिया hai.minu ने जयराज के हर फैसले में उनका न सिर्फ सपोर्ट किया बल्कि खुद इन्वॉल्व होक उनका साथ भी diya.itne सालों में इन दोनों का प्यार एक दूसरे के लिए और गहरा गया है....

वहीँ जयराज और मीनू ने विक्रम को भी बोहोत अचे संस्कार दिए hain.vikram एक डाउन तो एअर्थ लड़का hai.apne से बड़े हर किसी की रेस्पेक्ट करता hai.ameer गरीब में कोई फर्क नहीं karta.shant स्वाभाव का hai.waise तोह जयराज ने विक्रम को पैसे की वैल्यू करना बोहोत अचे से सिखाया है पर साथ में ये भी कहा है या ये कहा जाए आर्डर दिया है की विक्रम अपनी ज़िन्दगी खुल के jiye.jo करना है kare,puri दुनिया ghume.jis चीज़ पर भी विक्रम हाथ रख देता है जयराज उससे वो खरीद देता है भले hi उस चीज़ के कीमत कितनी भी ho.JAIRAJ का मानना है की जो ज़िन्दगी वो नहीं जी पाए वो उनका बीटा jiyega.apni भी और उनकी bhi.VILRAM ज़्यादा दोस्त नहीं banata.par जिन्हे भी बनता है उनके साथ काफी फ्रैंक रहता है. चलिए विक्रम के दोस्तों का भी इंट्रो दे देता hun.waise तोह विक्रम अपने स्कूल या यूँ कहूं बोहोत से स्कूलों में पॉपुलर hai,kyunki एक तोह वह पढाई में no. 1 hai.kafi साड़ी क्विज कम्पटीशन जीत चूका hai.uske ऊपर अपने स्कूल का स्टार बैट्समैन hai.dance कमल का करता hai.9th में यानी की पिछले साल का अन्तर स्कूल लेवल डांस चैंपियन hai.guitar बोहोत ाचा बजा लेता hai.jismani ताक़त तोह उससे गॉड गिफ्ट मिली hai.inshort विक्रम अपने उम्र का सुपरस्टार hai,aur सोने पे सुहागा सुपर रिच भी hai.toh ऐसे लड़के से कौन दोस्ती नहीं करना chahega.waise तोह विक्रम के काफी दोस्त हैं पर सबसे क्लोज सिर्फ दो hi फ्रेंड्स है.

रोनित सिंह बल, फादर्स नाम हरप्रीत सिंह BAL,MOTHERS नाम कविता सिंह बल

अंजलि रामनानी..... फादर्स नाम आकाश RAMNANI,MOTHERS नाम नेहा रामनानी

हरप्रीत सिंह बल और आकाश रामनानी बुसिनेस्स पार्टनर्स hai.ye दोनों जयराज के दोस्त hain.ye वही दोनों हैं जिनकी मदद जयराज ने डायमंड्स का बिज़नेस सेट करने के लिए की thi,aur एक तरह से उनका थर्ड पार्टनर भी है. हरप्रीत जयराज आकाश ये तीनो एक साथ मुंबई शिफ्ट हुए the.teeno की वीफेस भी एक दूसरे की बोहोत अछि फ्रेंड्स hai.teeno के बचे एक hi उम्र के hain.isiliye तीनो का एडमिशन इनके पेरेंट्स ने एक साथ एक hi स्कूल में करा diya.tab विक्रम अंजलि और रोनित क्लास 5तह में the.inke स्कूल का नाम है संत JOSEPH'S school....bachpan की दोस्तों धीरे धीरे मज़बूत होती गयी और अब ये एक दूसरे की जान hain.RONIT बोहोत बदमाश hai.Actually विक्रम भी काम नहीं hai.dono मिलकर कोई न कोई खिचड़ी पकाते hi रहते है पर क्यूंकि विक्रम हर चीज़ में आगे है इसीलिए वो कभी नहीं fasta.par रोनित ज़रूर फास जाता hai.wahin दूसरी तरफ अंजलि एक सिंपल और ब्यूटीफुल सी लड़की है. अंजलि पढाई में विक्रम के बाद सबसे आगे है और साथ में सिंगिंग में bhi........ab चलते हैं स्टोरी पे....

एक लड़का बीएड पर सोया हुआ hai.maasum सा chehra,aisa लग रहा है पुरे दुनिया की शांति इसीके चेहरे पर है.

अरे ये तोह अपना विक्रम hai.par ये क्या इसके चेहरे के एक्सप्रेशंस बार बार बदल क्यों रहे हैं. कभी हलकी सी स्माइल तोह कभी माथे पर शिकन ऐसा क्या देख रहा है ye.chaliye पता करते हैं!!!

विक्रम फ़िलहाल एक अजीब से सपनो के भवर में है जो दो हिस्सों में बता हुआ है. एक हिस्से में एक लड़की है जो गार्डन में चल रही hai.aur उसके पीछे पीछे विक्रम चल रहा hai.wo उससे आवाज़ दे रहा है पर वो तोह जैसे सुन hi नहीं rahi.uske पैरों के पायल की आवाज़ विक्रम के कानो में संगीत की तरह बज रहे हैं जिससे विक्रम नींद में भी मुस्कुरा रहा hai.thoda आगे जाकर वो लड़की मुड़ती है , विक्रम को लगता है की अब सामने वाले का चेहरा dikhega,par ये kya,sirf aankhe.saamne वाले की सिर्फ आँखें hi दिख रही है बाकि पूरा चेहरा धुंदला सा दिख रहा है. विक्रम उन आँखों में खो सा जाता hai.abhi और कुछ होता की अचानक दृश्य बदल जाता है

सपने का दूसरा हिस्सा विक्रम की आँखों के सामने hai.puri दुनिया जल रही hai.log चीख रहे हैं चिल्ला रहे hai.VIKRAM वहीँ मौजूद है पर कुछ कर नहीं पा रहा hai.saare लोग विक्रम के आगे आकर हाथ जोड़ रहे हैं, मदद की गुहार लगा रहे हैं पर विक्रम अपने जगह से हिल भी नहीं पा रहा है जिससे विक्रम के माथे पर नींद में भी शिकन आ रही है.

अचानक दृश्य काला पड़ने लगता है और दो सफ़ेद पुतलियां विक्रम को अपने सामने दिखती है. ये सफ़ेद पुतलियां आँखों की thi.wo इतनी बड़ी थी की सूरज भी उनके पीछे छुप जाता है. विक्रम को अपनी रिड की हड्डी में एक ठंडी लेहेर सी दौड़ती लगती hai.wo आँखें विक्रम के धीरे धीरे करीब आने लगती हैं, विक्रम को समझ नहीं आ रहा था की वो करे तोह करे क्या. वो आँखें विक्रम के एकदम करीब पहुँच जाती है. विक्रम भी एकटुक उन आँखों में देखने लगता है मानो उससे किसीने हिप्नोतिजे कर दिया हो. अचानक वो आँखें लाल होने लगती है और उनके बीच एक आग के लकीर पैदा होने लगती है. विक्रम थार थार कांपने लगता hai.isse आगे कुछ होता की एक आवाज़ आती है..........

विक्रम, डरो मत PUTRA,KOI भी तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ सकता....

आवाज़ के आते hi तुरंत दृश्य बंद हो जाता है.

इसी के साथ विक्रम की आँखें खुल जाती हैं.......

आज के लिए इतना HI...AAPKA अपना .....V.J....

 
अब तक आपने पढ़ा की अलेक्सांद्र ास्मोडियस से वारियर्स वर्ल्ड को छोड़ देने के लिए कहती है .ास्मोडियस मान तोह जाता है पर बदले में लार्ड क्रूसेडर से थे लॉकेट ऑफ़ पावर की डिमांड करता है. लॉकेट मिलते HI ास्मोडियस पुरे वारियर्स वर्ल्ड को पहले जैसा ठीक कर देता HAI.IDHAR अपना हीरो विक्रम सपने में दो अलग अलग दृश्य देख रहा है की किसी की आवाज़ से उठ जाता है. अब आगे.......

CHAPTER - 1

( डेविल्स ेंचन्त्मेन्त एंड थे हौली स्पिरिट )

( दोस्तों अब जहाँ जहाँ विक्रम होगा स्टोरी उसी की ज़ुबानी चलेगी )

अपडेट - 13

मई उठ कर बैठ गया. मेरा पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था. सर में भी हल्का हल्का दर्द tha,jo पहले कभी नहीं हुआ था .मई आगे और सोचता पर उससे पहले hi अलार्म ने अपना बेसुरा राग अलापना शुरू कर diya....time देखा तोह 5.30 बज चुके the.ye मेरा रोज़ का सचेडूले था, रोज़ 5.30 को उठकर फ्रेश हो मई जॉगिंग पर जाता tha.maine अपना सर झटका और चल पड़ा फ्रेश होने. फिर ट्रैक सूट पेहेन कर निचे हॉल में आ gaya.abhi तक कोई जाएगा नहीं tha.mai बहार aagaya.abhi गर्मी के मौसम की शुरुआत हो गयी थी इसीलिए सूरज महाराज हमसे पहले hi उठ चुके the.maine एक ज़ोर की अंगड़ाई ली और चल पड़ा थोड़ी दूर बने गार्डन की तरफ जो की हमारे एरिया का कॉमन गार्डन था. चलते चलते मेरे दिमाग में वही सपना घूम रहा tha,.aisa सपना मुझे पहली बार आया tha.mujhe उस लड़की की आँखें बार बार याद आ रही थी और उस के बाद का वो खौफनाक मंज़र और वो सफ़ेद पुतलियों वाली आँखें bhi.fir वो आवाज़ जिसने मेरा नाम पुकारा tha,aakhir ये सब था kya.science कहता है की हमारी सोच का कुछ हिस्सा हमारे दिमाग के पीछे वाले हिस्से जिससे मेडुला ोब्लागॅता भी कहते हैं वह बस जाता है जिससे सपनो का जन्म होता hai,par मैंने तोह कभी ऐसा सोचा hi नहीं फिर भी ऐसा सपना!!! मई ये सब सोचते सोचते कब गार्डन पोहोंच गया पता hi नहीं चला.

गार्डन पहुँचते hi मैंने अपने दिमाग को झटका और चल पड़ा जॉगिंग करने.

VICKY.....abhi एक राउंड hi कम्पलीट हुआ था की मुझे किसी ने पुकारा पर मई रुका नहीं.

रोनित - साले, कबसे आवाज़ डेरा हूँ बेहेरा हो गया है क्या.

मई - साले, जब जानता है मई जॉगिंग करते वक़्त नहीं रुकता तोह आवाज़ देता hi क्यों है!!!

रोनित- अब्बे, थोड़ा रूक जायेगा तोह कौन सी आफत आ जाएगी...

मई - अब्बे आफत से याद आया, अंजलि कहाँ है...

रोनित- ओह तेरी !!!! तेरे चक्कर में उससे उधर hi छोड़ दिया लगता है.

अभी दोनों में से कोई कुछ और कहता, उससे पहली hi मेरे पीठ में एक मुक्का pada,mere hi नहीं रोनित को भी.

आअह्ह्ह. ये आवाज़ मेरी नहीं रोनित की थी

हम दोनों hi रूक gaye.palat कर देखा तोह मुँह फुलाए अंजलि कड़ी थी और हमें घर रही थी....

रोनित- ोये, पागल हो गयी है kya.itne ज़ोर से कौन मरता है...

अंजलि- मई मरती हूँ ना. Saale,VICKY को देखा नहीं की भाग खड़ा हुआ और मुझे उधर hi छोड़ diya.Aur tu,kya बुला रहा था मुझे, आफत!!! अभी बताती हूँ आफत क्या होती है.

मई- रूक जा मेरी माँ, और सांस ले. ये आफत वर्ड भी इस रोनित का hai.wo हमेशा मेरे सामने तुझे आफत hi बुलाता है. आज मैंने बोल दिया.

एक तरफ ये सुनकर अंजलि का चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया वहीँ दूसरी तरफ रोनित का चेहरा पीला पद gaya.ye इनका हमेशा का था, जब भी विक्रम कहीं फास्ट था तोह रोनित को आगे कर देता था.

रोनित - कसम से अंजलि, ऐसा कुछ नहीं है. ये साला खुद को बचने के लिए हमको लड़ा रहा है.

मई- मई लड़ा रहा hun.acha बीटा बाप से होशियारी. तेरी साड़ी पोल पट्टी खोलूंगा ना तब तुझे समझ आएगा.

ये सुन रोनित का चेहरा पीले से काला पद गया. बेचारा दोनों तरफ से फास गया tha.RONIT को ऐसा देखकर अंजलि का ग़ुस्सा फुर्र जो गया और वो खिलखिला के है padi.ANJALI को हस्ते देख रोनित की जान में जान आयी.

अंजलि- तुम दोनों अपनी नौटंकी बंद karo.aur मुझे बेवकूफ बनाने की तोह सोचना भी मत.

मई धीरे से, अब बेवकूफ को बेवकूफ बनाने की क्या ज़रुरत!!!

अंजलि- क्या बोलै..

मई- कुछ नहीं, बस बच गए बोल रहा tha.ab तुम दोनों का हो गया हो तोह जॉगिंग करें.

अंजलि- हाँ तोह मैंने कब मन किया hai.tum.dono hi जब देखो मटरगश्ती में लग जाते ho.ye बोलते बोलते अंजलि दौड़ते हुए आगे बढ़ gayi.hum भी उसकी बात पे हस्ते हुए उसके पीछे पीछे जॉगिंग करने लगे

ाचा मैंने आपको बताया नहीं , मेरी रोनित की और अंजलि के बंग्लोव्स पाली हिल्स में वाकिंग डिस्टेंस पे hi hai.Mera घर पहले स्ट्रीट पर है, रोनित का दूसरे में और अंजलि का थर्ड स्ट्रीट में है इसीलिए हम तीनो hi हर दिन एक्सेप्ट संडे इसी गार्डन में जॉगिंग करने आते hai.school वगहैरा भी हम तीनो साथ hi जाते हैं..

हम जिस गार्डन में जॉगिंग करते हैं वो काफी बड़ा hai.ek राउंड hi लगभग 1 कम जितना बड़ा hai.ANJALI और रोनित तोह 2 राउंड्स लगते hi थक गए और जाकर एक बेंच पर बैठ gaye.par मई दौड़ता रहा. जब 5 राउंड्स ख़त्म हुए तोह मई भी जाकर उन्दोनो के पास बैठ gaya.ye मेरे रोज़ का था.

रोनित- साले मुझे समझ नहीं आता की तू लड़का है की ghoda.doudta hi चला जाता है.

अंजलि- हाँ यार. और अभी भी तेरे थोबड़े में कोई थकन नहीं दिख रही है. अब मई इन्हे क्या बताता, मुझे तोह खुद समझ नहीं आता की मई ऐसा क्यों hun.mujhe थकन तोह लगती है पर बोहोत kam.dus लोगों जितनी मेहनत तोह मई आराम से कर लेता हूँ. और उसके ऊपर मुझे कभी बुखार नहीं आता, नहीं ज़्यादा ठण्ड और गरम से कोई फर्क पड़ता hai.chot भी मुझे बड़ी मुश्किल से लगती है, और वो भी जल्दी ठीक हो जाती है.

मई- ऐसा कुछ नहीं है, वो क्या है ना तुम दोनों ठहरे आलसी तोह मई तोह तुम्हे ज़्यादा फिट लगूंगा hi ना..

RONIT/ANJALI- क्या कहा तूने, हम aalsi.abhi बताते hain.fir दोनों दौड़ पड़े मेरे पीछे मुझे पकड़ने. थोड़ी देर मई उन्हें दौड़ता लगा पर जब मैंने देखा की दोनों थक रहे हैं तोह खुदको उनके हवाले कर दिया.

रोनित- अब बोल कौन आलसी hai.ye बोलके दोनों ने मुझे मारना शुरू कर दिया.

मई- ाचा ाचा sorry.maaf कार्डों महात्माओ. तुम दोनों नहीं मई अलसी hun.ab खुश...

अंजलि- हाँ, अब आया न ऊंट पहाड़ के निचे...

मई- हाँ माते, आप जीते मई haara.ab घर चलें, आज वैसे भी रोनित का फवौरीते डे है...

रोनित को ये सुनके जैसे होश आया.

रोनित- सालों, तुम दोनों मुझे marwaoge.maine सोचा था थोड़ी देर जॉगिंग करूँगा फिर घर जा के 1 घंटा रेविसिओं करूँगा पर तुम दोनों के चक्कर में लेट हो गया.

अंजलि- कोई nai,waise एक घंटे में तू क्या कर लेगा जब पुरे साल में कुछ नहीं कर पाया.

मई- और नहीं तोह kya.zero को किसी के साथ भी मल्टीप्लय kar,answer जीरो hi होता hai.mere

ये बोलते hi अंजलि ज़ोर ज़ोर से हसने लगी और साथ में मई भी.

रोनित- हंस लो सालो हंस लो. एक दिन मेरा भी आएगा तब बताऊंगा.

मई- तब की तब dekhenge.abhi क्या करेगा वो बता..

रोनित- यार मेरा तोह दिमाग hi फ्यूज हो गया hai.samajh नहीं आ रहा है क्या करूँ...

रोनित की शकल रोनी सी हो गयी thi.mujhse ज़्यादा देखा नहीं गया...

मई- चल चल, ज़्यादा रो mat..ye le,maine अपने ट्रैक शर्ट की जेब से एक फोल्डेड पेपर निकला और रोनित को दे दिया.

मई- इसमें कुछ इम्प फ़ॉर्मूलास हैं और कुछ एक्वेशन्स हैं जो आ सकते है आज के पेपर me.rat liyo.paas हो जाएगा.( अब तक तोह आप समझ गए होंगे की आज हमारा मैथ्स का पेपर है, और हमारे रोनित भाई साब मैथ्स में सबसे आगे है पर पीछे से....)

रोनित- थैंक्स bhai.tu मेरा सबसे ाचा दोस्त है.

अंजलि- क्या बोलै और मई जो पिछले एक महीने से तुझे मैथ्स पढ़ा रही हूँ उसका क्या.

रोनित- अरे तू नाराज़ क्यों होती hai,tum दोनों hi मेरी जान हो.

मई- अपनी जान अपने पास रख और पास होकर बस एक पार्टी दे दियो समझा.

रोनित- साले मतलबी insaan.chal फिर भी ठीक hai,de दूंगा party,tum दोनों भी क्या याद करोगे की किस दिलदार से पाला पड़ा था.

मई- साला nautanki.fir कुछ और ऐसे hi बातें hui.thodi देर बाद एक दूसरे को bye बोलकर हम अपने अपने घर निकल गए.

जब मई घर पहुंचा तोह सामे हॉल पे मुझे मरथा आंटी साफ़ सफाई करती हुई दिखीं .(ये हमारी घर की हेड माइड hai.dil की बोहोत अछि हैं और मुझे अपना बीटा मानती हैं)

मई- गुड मॉर्निंग मरथा आंटी. हाउ अरे ु थिस मॉर्निंग...!!!

मरथा- ओह गुड मॉर्निंग विक्की बाबा. I'm अब्सोलुतेल्य फाइन. हम्म, ी मस्ट से, फिटनेस और डिसिप्लिन में आप बिलकुल आपके डैड पे गए हैं.

मई- ऑबविआ आंटी. लिखे फादर लिखे सोन.

माँ- सिर्फ डिसिप्लिन में नहीं मेरा बचा हर चीज़ मई अपने डैड जैसा है...

मैंने पलट कर देखा तोह माँ आ रही थी.

मई- गुड मॉर्निंग माँ

माँ- गुड मॉर्निंग बेटाजी.

मई- पापा के जैसा तोह मई hun.waise माँ एक बात पूछूं???

माँ- हाँ बेटाजी पूछो!!!

मई- आप ऐसा क्या लगते हो जो आज भी इतने यंग दीखते हो. ी मैं seriously,koi अगर हमे साथ में देखेगा तोह आपको मेरी बड़ी सिस्टर hi समझेगा.

माँ- मरथा मैंने कहा था न ये बिलकुल अपने डैड जैसा है. बेटाजी आपका ये चार्म मुझपे नहीं chalega.aise डायलॉग्स तेरे डैड के मुँह से बोहोत सुन चुकी हूँ मई.

मई- पर माँ डैड ने आपको अपनी बड़ी सिस्टर कब बोलै था??

पहले तोह माँ समझी नहीं पर जब समझी तोह मेरे कान पकड़ लिए

माँ- बदमाश, अपनी माँ की टांग खींचता है.

मई- आअह्ह्ह, पर माँ मेरे हाथ तोह ये रहे देखो, मई कैसे आपकी टांग खीचूंगा..

माँ और मरथा दोनों मेरी बात पर है पड़े.

मरथा- मम विक्की बाबा बोहोत नॉटी हैं और वित्तय bhi.aap इनसे बातों में नहीं जीत सकते.

मई- हाँ, वो तोह hai.Maine माँ को एक टाइट हुग किया, माँ ने मेरा माथा चुम लिया.

माँ- तोह बेटाजी, आज आपका लास्ट पेपर hai.jao तैयार होकर जल्दी से ब्रेकफास्ट करने आ जाओ.

मई- ok माँ. फिर मई सीधा अपने रूम gaya.shower लेके यूनिफार्म वगैरा पेहेन के सीधा नीचे हॉल में आगया. डाइनिंग टेबल पे डैड माँ दोनों बैठे थे.

मई- गुड मॉर्निंग डैड...

डैड- गुड मॉर्निंग चैम्प. सो वत्स उप? आल सेट, हाँ....

मई- यूप डैड, I'm आल रेडी....

डैड- आज मैथ्स का पेपर है ना.

मई- यस डैड. और आज लास्ट पेपर hai.fir HOLIDAYSSSSSSSSSS.......

डैड- वाओ. समबडी इस वैरी वैरी excited....chalo फिर ठीक hai,aap पेपर देकर आजाओ, फिर प्लान बनाते हैं की वकेशंस में कहा जाना है.

मई- ु र थे बेस्ट डैड. रोनित और अंजलि से भी बोल दूंगा.

माँ- तू नहीं भी बोलेगा तोह वो कौन सा तुझे अकेले कहीं जाने देंगे.

डैड- हाँ भाई ये भी hai.tum एक काम करना ,शाम में उन दोनों को भी बुला लेना फिर मिल कर डीडे करेंगे.

मई- ok डैड. अब तक मरथा आंटी ने भी नाश्ता लगा दिया था, तोह सब चुप चाप खाने लगे. माँ का ये रूल था की खाते वक़्त कोई बात नहीं करेगा.

ब्रेकफास्ट करके मई माँ डैड को bye बोल बहार निकल गया.

मई लॉन पहुंचा hi था की रोनित और अंजलि अंदर आते dikhe.mai उनकी तरफ hi चल दिया.

मई- तोह फिर. कुछ समझ आया.

रोनित- हाँ यार थोड़ा बोहोत तोह दिमाग में घुसा hai.ab देखते है क्या होता है.

अंजलि- ज़्यादा टेंशन न ले, पास हो जायेगा.

मेरा स्कूल मेरे घर से कुछ 8 कम दूर था. मई रोनित और अंजलि कार से एक साथ स्कूल जाते थे.

अभी हम बात hi कर रहे थे की मुझे गेट के बहार एक साधु बाबा दिखे जो हमारे सिक्योरिटी गार्ड से बात कर रहे थे. नजाने मेरा मन क्यों उनसे बात करने को हुआ.

मई- तुम दोनों ड्राइवर अंकल से कार निकलने को कहो, मई एक मं में आया. फिर मई सीधा उन बाबा की तरफ चल दिया. जब मई उनके पास पहुंचा तोह नजाने क्यों मेरा मन उनके पेअर चुने को किया. मैंने उनके पेअर छुए

बाबा- चिरंजीवी भाव, निर्भया भाव.

मई- कुछ चाहिए था बाबा आपको.

बाबा हलकी मुस्कान के साथ

बाबा- हाँ पुत्र, मुझे तुम्हारे माता पिता से मिलना था.

मई- माँ डैड से, आप उन्हें जानते हैं!!!

बाबा- बोहोत अचे से.

रोनित- वहां क्या कर रहा है. चल न लेट हो जायेंगे भाई.

मई- ठीक है बाबा. आप जाइये.

उन्होंने मेरे सर पर हाथ phera,aur अंदर चल दिए.

मई भी उनके पीछे पीछे अपनी कार के पास चल दिया.

रोनित- साले, हमेशा लेट करवाता है, वहां क्या घास चील रहा tha.ek तोह मैथ्स का पेपर है उसके ऊपर तू इधर उधर घूम रहा है.

मई- अब लेट नहीं हो रहा है kya.aur अपना मुँह बंद रखा कर, जब भी खोलता है मनहूस बातें hi निकलती hai.paper कहाँ से ाचा जायेगा तेरा.

अंजलि मेरी इस बात पे ज़ोर से है दी. रोनित मुँह बनाकर बैठ gaya.fir कुछ ख़ास नहीं हुआ हम तीनो अपने स्कूल के लिए निकल गए.

मेरे जाने के बाद

माँ डैड अपने रूम में थे की मरथा आंटी ने आकर बताया की कोई मिलने आया hai.mom डैड जब बहार आये तोह सामने वाले को देखकर शॉकेड हो गए और खुश भी.

डैड- गुरुदेव aap.ji हाँ ये और कोई नहीं बाबा विशाखत थे.

माँ डैड दोनों ने बाबा विशाखत के पेअर छुए.

माँ- हम धन्य हो गए गुरुदेव जो आपके दर्शन हुए. पर आपको हमारा पता कैसे मिला.

बाबा विशाखत माँ की बात सुन कर मुस्कुरा दिए.

बाबा विशाखत- मैंने आपका पता खोया hi कब था जो कुछ ढूंढ़ना padega.aur वैसे भी आज जयराज इस समाज के एक प्रसिद्ध और माननीय व्यक्ति hain.apka पता लगाना बोहोत आसान है.

मीनू- शमा करे maharaj.abhi तक आप खड़े hai.aayiye, बैठिये. तीनो जाकर सोफे पर बैठ गए.

माँ- क्या लेंगे गुरुदेव. नाश्ते का वक़्त hai.mai नाश्ता लगाती हूँ.

बाबा विशाखत- उसकी आवश्यकता नहीं है putri.meri क्षुधा (भूक) तोह विक्रम को देख कर hi मिट गयी.

डैड- जी gurudev.jaisa आपने कहा था हमारा पुत्र बिलकुल वैसे hi है.

बाबा विशाखत- मैंने कुछ और भी कहा tha.wo याद है..

माँ और डैड दोनों ने एक दूसरे को dekha,fir सामने बैठे गुरूजी जो.

Dad/mom- शमा करें गुरुदेव. पर कौन सी बात.

बाबा विशाखत- यही की जब भी सही वक़्त आएगा मई आपसे कुछ मांगूगा और आपने वडा किया था की आप देंगे.

DAD/MOM- हाँ हमें याद है गुरुदेव. बताइये क्या चाहिए आपको.

बाबा विशाखत- मुझे कुछ समय के लिए आपका पुत्र चाहिए.

डैड ये सुनके शॉकेड हो गए और माँ को तोह लगा की गुरुदेव ने उनसे उनकी जान hi मांग ली है.

बाबा विशाखत- घबराओ मत बचो. मुझे विक्रम कुछ hi दिनों के लिए चाहिए.

ये बात सुनकर माँ और डैड की सांस में सांस आयी

डैड- क्या मई पूछ सकता हूँ गुरुदेव की विक्रम hi क्यों!!!

बाबा विशाखत- पुत्र, सब तोह नहीं पर कुछ बातें मई बता देता हूँ. तुम जितना अजीब इस संसार को समझते हो ये उससे कई ज़्यादा अजीब है. भविष्य में ऐसी बोहोत सी चीज़े होंगी जिनसे तुम्हारे पुत्र की जान को खतरा होगा. और यकीं मानो अगर मैंने तुम्हारे पुत्र को उचित शिक्षा ना दी तोह उसकी मृत्यु निश्चित है. वो शिक्षा यहाँ सबके सामने खुले में नहीं दी जा सकती इसीलिए मुझे विक्रम को अपने साथ ले जाना होगा.

डैड तोह अभी भी सोच रहे थर पर माँ ने जब से मेरी जान को खतरा हो सकता है ये सुना था, उनकी हालत ख़राब हो गयी थी.

बाबा विशाखत- मीनू पुत्री, तुम्हे घबराने की आवश्यकता नहीं hai.tumhara पुत्र महा शक्तिशाली hai.bas उससे सही मार्गदर्शन की आवश्यकता hai.usse मेरे साथ भेज ने में hi उसका कल्याण hai.aage तुम दोनों की ीचा.

डैड कुछ देर तक सोचते रहे फिर कुछ फैसला कर बोले

डैड- गुरुदेव, हमारे लिए हमारे बचे की ज़िन्दगी से बढ़कर और कुछ nahi.agar आप के उससे लेजाने से वो सुरखित हो जायेगा तोह मुझे कोई दिक्कत नहीं है.

माँ- हाँ मुझे भी नहीं है बस मेरा बचा ठीक रहे.

वैसे गुरुदेव आप विक्रम को कब ले जाना चाहते hain.aur कब तक उससे रखेंगे

बाबा विशाखत- मई विक्रम को 2 दिन बाद लेने आऊंगा. 45 दिन विक्रम मेरे साथ रहेगा. फिर मई उससे यहीं छोड़ jaunga.par इस बात का ध्यान रहे की किसीको भी ये न बताया जाए की विक्रम कहाँ गया है.

डैड- ठीक है GURUDEV.jaisi आपकी ीचा.

बाबा विशाखत ने फिर माँ डैड से विदा लिया और चले गए पर मेरे माँ डैड को गहरी सोच में छोड़ गए.

दूसरी तरफ एक प्लेनेट जहाँ रोहणी और जीवन का नामो निशान तक नहीं है, हर तरफ सिर्फ काले गहरे खाई और बड़े बड़े चट्टान.....

अचानक एक रौशनी सी होती है और एक वर्ल्ड दूर बन जाता है और उससे बहार आता है एक काला साया जो धीरे धीरे एक बड़ी सी चट्टान के सामने आकर रुकता है...

वो काला साया अपने एक हाथ को आगे कर देता hai.uske हाथ से एक तेज़ रौशनी निकलती है और भूममममममम.......... चट्टान के टुकड़े टुकड़े हो जाते hain.par ये क्या चट्टान के टूटते hi अंदर एक रास्ता सा बन जाता hai.ye कोई गुफा सी लग रही थी जिससे चट्टान से ढाका गया था. वो काला साया गुफा के अंदर चला जाता hai.andar बिलकुल अँधेरा tha.par ऐसा लग रहा था जैसे काले साये को सब कुछ साफ़ साफ़ दिख रहा है. थोड़ी देर अंदर जाने के बाद काला साया रुक जाता hai.apne दोनों हाथ फैलता है और कहता है.

अदृश्य शक्तियम दृश्यम भाव

और इसी के साथ उसके हाथ से काले रेज़ निकलकर हर तरफ जाने लगते है.

धम्म्म्म..... आह्ह्हह्ह्ह्ह....

वो गुफा रौशनी से चमक उठता है सामने कोई दीवाल से टकराकर गिर जाता है.

हुआ ये की वो काली रेज़ एक जगह जाकर एक इनविजिबल फाॅर्स से टकराती hain.wo फाॅर्स सीधा जाकर दिवार से टकराता है और फिर दिखने लगता है....

अननोन- अस्मोदयस्सस्सस... तू तू tu...tum yahan....kaise?

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?

(जी हाँ दोस्तों, ये काला साया और कोई नहीं ास्मोडियस था)

ास्मोडियस- बोहोत घुमाया तुमने यार. वैसे अछि जगह है ये ास्मोडियस से छुपने की. पर हमेशा के लिए छुपा जा सके ऐसी कोई जगह इस ब्रम्हांड में नहीं है....

अननोन ने कुछ एनर्जी बॉल्स बनाकर ास्मोडियस के तरफ फेंके पर सब बेकार हो गए.

ास्मोडियस- इन सब का कोई फायदा नहीं hoga.aur अभी मेरे पास इन छोटी मोती चीज़ो पर वक़्त नहीं है बर्बाद करने के लिए. ास्मोडियस एक झटके में अननोन के पास पहुँच गया और उसके सर पर हाथ रख कर मंत्र कहा

सम्मोहित BHAVA.......Ek पिली रौशनी ास्मोडियस के हाथ से निकल कर सामने वाले के अंदर चली gayi.ab सामने वाला चुप चाप खड़ा था जैसे उसमे जान hi नहीं है.

ास्मोडियस- अब तुम मेरे गुलाम ho.jo मई कहूंगा तुम करोगे.

ास्मोडियस ने उस अननोन व्यक्ति को कुछ आदेश दिए.

अननोन- जो हुक्म मेरे मालिक. और वो अननोन गायब हो gaya,rah गया ास्मोडियस और उसकी भयानक hasi....ha है है है है है है है.............

आज के लिए इतना HI दोस्तों.

आपका अपना V.J............

 
अब तक आपने पढ़ा की विक्रम और उसके दोस्तों का लास्ट पेपर है. विक्रम जब स्कूल जाने के लिए के लिए बाहर आता है तोह एक बाबा को देखकर उनके पास जाता है. बाबा विक्रम से मिलकर जयराज और मीनू से मिलते हैं और बताते हैं की वो विक्रम को एक महीने के लिए ले जाना चाहते हैं, जयराज और मोनू इस बात के लिए मान जाते हैं....

अब आगे....

CHAPTER- 1

( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त एंड थे हौली स्पिरिट )

अपडेट- 14

मई , रोनित और अंजलि कार में बैठ कर स्कूल के लिए निकल गए. रोनित और अंजलि एग्जाम के बारे में बात कर रहे थे, पर मेरा दिमाग उन बाबा के ऊपर अटका हुआ था जिनसे मई अभी अभी मिला था. पता नहीं क्यों, पर उनकी आवाज़ मुझे कहीं सुनी हुई लगी पर कहाँ सुनी है ये याद नहीं आ रहा tha.RONIT के हिलने से मुझे जैसे होश आया...

रोनित- साले, कब से आवाज़ दे रहा हूँ, बाजू में बैठा है फिर भी सुनाई नहीं डेरा tujhe.kahan खोया हुआ है??

अंजलि- हाँ विक्की. मई भी देख रही हूँ, जबसे हम घर से निकले हैं तुम तबसे hi कुछ सोच रहे हो.

मई- अरे कुछ नहीं यार वो मई पेपर के बारे में सोच रहा था.

रोनित- क्या बोलै, तू पेपर के बारे में सोच रहा था!!!!

साले, सेशन के स्टार्ट में hi तेरा पूरा सिलेबस पूरा हो चूका था, साले हर साल का तेरा यही रहता है, तेरे चक्कर में मेरा बाप मुझे हर दिन पेलता है, की विक्की को dekho,uske जैसा bano.aur तू

मई- बस कर मेरे baap.galti हो गयी जो पेपर के बारे में सोच liya.ab तोह पेपर लिखते वक़्त भी बिना सोचे लिख dunga.bas तू खा मत. मेरे ऐसे बोलने से दोनों मैं बात भूल hi गए और हम तीनो गप्पे मरने में लग गए. वैसे तोह मई इन दोनों से कभी कुछ नहीं छुपता था, पर ये बात बताना मुझे सही नहीं laga.ab बताता भी क्या, मुझे खुद कहाँ कुछ पता था. हलकी फुलकी नोक झोक करते करते कब हम स्कूल पोहोंच गए, पता hi नहीं चला.

ड्राइवर- विक्की बाबा, स्कूल आ गया.

ड्राइवर अंकल की बात से हमारा ध्यान बहार की तरफ गया.

हम स्कूल कंपाउंड के अंदर थे. क्यूंकि हमारा बोर्ड एग्जाम था इसीलिए कोई असेंबली नहीं लगती थी. हम सीधे पेपर देने पहुंचे. मेरा और रोनित का सेक्शन एक hi था, अंजलि का दूसरी क्लास में tha.hum उससे आल थे बेस्ट बोलके अपनी क्लास की और चल दिए. चलते चलते मैंने रोनित की तरफ देखा तोह मेरी हसी छूट gayi.uska चेहरा ऐसा हो रखा था जैसे अभी हार्ट अटैक आजायेगा.

रोनित- साले यहाँ मेरी फटी पड़ी है और तुझे हसी आ रही है.

पर मेरा हसना और बढ़ गया.

रोनित- अब और हँसा न तोह दांत तोड़ दूंगा, फिर देखता हूँ कैसे आता है फर्स्ट..

मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी हसी को कण्ट्रोल किया..

मई- ाचा बाबा सॉरी. और टेंशन न ले तेरा पेपर ाचा hi जायेगा.

रोनित- काश ऐसा hi हो..

ऐसे hi बातें करते हुए हमारा क्लास भी आ गया.

रोनित और मई जाकर अपनी अपनी सीट्स पर बैठ गए...

एग्जाम स्टार्ट होने की बेल्ल बजी और हम सारे स्टूडेंट्स शुरू हो गए chaapna.maine एक बार रोनित की तरफ देखा जो आँखें बंद कर, हाथ जोड़कर ऊपर वाले को याद कर रहा था. मेरी फिर एक बार हसी छूट gayi.par फिर याद आया की मई कहाँ बैठा hun.maine अपना सर झटका और लग गया पेपर सोल्वे करने.

ये तोह आप सबको पता है की मई पढ़ने में ाचा हूँ ,पर शुरू से ऐसा नहीं tha.mujhe स्कूल में पढ़ाया याद तोह सब हो जाता था पर मई रेविसे नहीं करता था जिसके चलते मेरे रिजल्ट्स एवरेज hi आते थे. पर माँ की एक बार दांत पड़ी और मैंने रेविसे करना शुरू किया और रिजल्ट ऐसा आया की फिर मई जो भी करता उसमे कड़ी प्रैक्टिस करता, और इसी तरह मई लगभग और चीज़ मई चैंपियन बन गया.

यहाँ एग्जाम हॉल में पुरे 3 घंटों की छपाई के बाद फाइनली हमारा एग्जाम ख़त्म hue.mera पेपर तोह मैंने 1.30 हरष में hi कम्पलीट कर ली थी पर मई बैठा raha.final बेल्ल बजी और एक ज़ोर की हूटिंग चारो तरफ से हुई. ये सारे स्टूडेंट्स थे जो शोर कर रहे the.ab आपको तोह पता hi होगा को jab10th का फाइनल एग्जाम ख़त्म होता है तोह कैसा लगता hai.mai भी बोहोत खुश tha.mai क्लास से बहार आया तोह रोनित खड़ा था वो भी एकदम खुश.

मेरे बहार आते hi साला मेरे ऊपर कूद गया.

मई- अब्बे हैट साले, मई वैसा नहीं हूँ.

रोनित- चुप be.aur थैंक्स यार तुम जो जो एक्वेशन्स बताये थे वही आये. मेरी तोह फट रही थी की साला नजाने क्या होगा पर अब तोह आराम से क्लियर हो जाऊंगा. YAHOOOOOOOOOO....

साला इतनी ज़ोर से चिल्लाया की सब हमें hi देखने lage.par भाड़ में जाए साले, अपने को क्या लेना देना kisise.mai और रोनित फिर मस्ती करते हुए बहार कैफेटेरिया की तरफ आ गए जहाँ अंजलि कुछ लड़कियों के साथ कड़ी thi.hume देखते hi उनको bye बोलकर अंजलि हमारे पास आ गयी

अंजलि- क्यों बे rotlu.bada खुश दिख रहा है..

रोनित- आज जो बोलना है बोलदे, आज सब माफ़ है, आज मई बोहोत खुश हूँ.

अंजलि- hmmm..matlab पास होजायेगा.

रोनित- बिलकुल. भले hi कितनी भी हार्ड चेकिंग ho.apun तोह निकल जायेगा बाबा.

मई- वाह, अब बना तू पक्का मुम्बइया. चल फिर बिंदु, िसिच ख़ुशी में अपुन दोनों को एक एक कोल्ड्रिंक पीला दाल.

रोनित- एक के बिंदु, 10 कोल्ड्रिंक खलास कर दाल, पूरा बिल अपुन देगा...

अंजलि- ewww.ye किस लैंग्वेज में बात कर रहे ho.mujhe नहीं करनी पार्टी तुम लोगों के साथ.

रोनित- ऐसा kya.chal फिर तू वान्टास की गोली ले...

अंजलि- क्या बोलै?

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!!!!

मई- अरे कुछ नहीं मेरी माँ. चल ना कैंटीन चल.

फिर हम तीनो कैंटीन की और बढ़ गए.

अंजलि- यार ये कैंटीन तोह भरा पड़ा है.

मई- अंजलि, रोनित तुम दोनों सीट का जुगाड़ करो मई कोल्ड्रिंक्स लेकर आता हूँ.

रोनित- आये आये कप्तान...

अंजलि- बस कर नौटंकी, और चल, कोई सीट देखते हैं.

रोनित- हाँ तू सिर्फ देखना, मई बैठ जाऊंगा.

मई- मई भी इनकी नौटंकी देखना छोड़ हस्ते हुए कोल्ड्रिंक्स लेने चला गया.

भीड़ बोहोत थी तोह कोल्ड्रिंक्स लेने में मुझे कुछ वक़्त laga.jab मई वापस आया तोह देखा की कैफेटेरिया खली पड़ा hai.mujhe थोड़ा शॉक लगा .नज़र घुमाई तोह देखा की सारे स्टूडेंट्स एक जगह घेर के खड़े हैं. मई भी उधर चल पड़ा. साइड से जगह बनाते हुए जब मई आगे पहुंचा तोह जो नज़ारा मेरे सामने आया उससे देख कर मेरा दिमाग ख़राब हो gaya.mere जबड़े भींच गए, आँखें लाल होगयी.

अंजलि निचे बैठी हुई थी वो भी सर से भीगी हुई और रोनित निचे गिरा हुआ था, उसके होंठ फैट गए थे और हल्का हल्का खून निकल रहा था. अंजलि उसी के पास बैठी रो रही thi.dono के पीछे 5 लड़के खड़े थे जो हंस रहे थे और एक सामने खड़ा था जो अपनी उँगलियों में चाबी घुमा रहा था.

1 लड़का- अब बोल साले क्या बोल रहा था. अब्बे CH*******YA...AAAAAHHHHHHHH और चक्कर खाके वो लड़का गिर pada.uska सर फैट गया था.

मेरा सब्र जवाब दे चूका था, अभी आगे वो कुछ बोलता उससे पहले hi मेरा हाथ चला और कोल्ड्रिंक की बोतल उसके सर पर लगी और वो ज़मीं पे था.

मेरे हाथ में टूटी हुई कोल्ड्रिंक पड़ी हुई थी.

वहां जितने स्टूडेंट्स खड़े थे, दर गए.

अंजलि ने जब मुझे देखा तोह आकर मेरे गले लग गयी और रोने लगी.

उस लड़के के जो 5 दोस्त खड़े थे वो भी थोड़ा दर गए the,par फिर उनमे से एक बोलै,

लड़का 2- अब्बे पागल हो गया है क्या. साले तुझे तोह मई......

चटकककहहह. एक थपड और बाँदा ज़मीं पे, और बेहोश. अभी बाकी के बचे 3 कुछ समझ पाते की मैंने एक को लाठ मारी और दो की गर्दन पकड़ ली और उठा दिया. रोनित और अंजलि दोनों मेरी ताकत देखकर शॉकेड हो गए. शॉकेड तोह खैर वहां खड़े सभी हो गए थे. रोनित जो अभी तक चुप चाप वैसे hi बैठा था, उसमे जैसे जोश भर गया...

रोनित- मार साले को V.J मार. किसी को छोड़ना मत.

जिससे मैंने लाठ मरी थी वो तोह सीधे जाकर एक दिवार से takraya.uski पसली चटक gayi.ab वो उठने की हालत में नहीं था. वहीँ जिन दो को मैंने उठाया था उन्हें सांस लेने में भी प्रॉब्लम हो रही थी. मैंने दोनों को टेबल पर पटक दिया, दोनों की हालत ख़राब हो gayi.phir भी मैंने एक को उठाया और एक थप्पड़ lagaya.ye मेरे पावर से बोहोत काम फाॅर्स का थप्पड़ था, ज़ोर से मारता सो साला निपट hi जाता..

मई- साले, तेरी इतनी हिम्मत की मेरे दोस्त पर हाथ uthaye.haan बीटा, आज चलकर तोह तू घर नहीं जाएगा. बता साले क्यों मारा था मेरे दोस्त को.

रोनित- मई बताता हूँ. यार हम लोग इधर टेबल ढूंढ़ने आये तोह इन लोगों ने अंजलि को देख कर उसपे गन्दा कमेंट kiya.saala मेरा दिमाग घूम gaya.diya एक के कान के niche.par ये ज़्यादा थे इसीलिए सालों ने पकड़ लिया और पीट दिया मुझे.

मई- अंजलि, तुम भीगी कैसे!!

अंजलि- इनमे से एक ने रोनित को थप्पड़ मारा .मई जब उसको मारने गयी तोह मेरा हाथ पकड़ के मेरे ऊपर पानी दाल दिया.

मेरा दिमाग और घूम गया.

मई- क्यों बे लड़की पे पानी डालेगा तू. रूक साले, आज तुझे डूबा डूबा के dhounga.us लड़के की तोह वैसे hi फटी पड़ी थी. मैंने जब उससे झिंझोड़ा यह साला और दर गया.

लड़का 3- भाई मैंने पानी नहीं डाला.

मई,- साले झूट बोलता है.

अंजलि- नहीं विक्की ये नहीं था, न hi इनमे से कोई. पता नहीं कहाँ गया.

हम यहाँ हैं....

आवाज़ सुनके हम पालते दो देखा एक लड़का कमर में हाथ रख हमें घूर रहा है. उसके साथ कुछ 7,8 लड़के और भी the.matlab यही था उन का leader.Bande की पर्सनालिटी लगभग मेरी जैसे hi थी बस हिघ्त में थोड़ा बड़ा था मुझसे.

लीडर- मई एक कॉल अटेंड करने बहार क्या गया, यहाँ तोह काण्ड हो गया.

उस लड़के को देखकर जिस लड़के को मैंने पकड़ा हुआ था, उसमे जोश आ गया.

लड़का 3- हाँ भाई, ये साला बोहोत उचक रहा hai...apne सारे लड़को को इसने पीट दिया.

मैंने उस लड़के को उठाया और उसी लीडर के तरफ फेक diya.wo उड़ता हुआ गया और उस लीडर के पेअर में गिरा.

उस लीडर ने कुछ इशारा किया तोह उसके पीछे के सारे बन्दे मेरे ऊपर झपटे. पर सिर्फ 1 मिनट में hi सारे ज़मीं पर थे. रोनित और अंजलि तोह मेरा ये रूप पहली बार देख रहे थे. उनके लिए तोह जैसे वो किसी और को hi देख रहे थे. यही हाल बाकी स्टूडेंट्स का भी था. अब स्कूल में मेरी इमेज एक सिंपल से लड़के की थी, तोह झटका तोह बनता hi है ना.

थोड़ा शॉकेड तोह उनका लीडर भी था पर फिर उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ gayi.wo चलते हुए मेरे सामने आया और खड़ा हो gaya.hum दोनों hi एक दूसरे को घूर रहे the.achanak उसने मुझे धक्का diya.ye उसने बोहोत तेज़ी से किया था. मुझे छोड़ किसी और को तोह उसका हाथ दिखा तक नहीं. मई भी लड़खड़ा कर थोड़ा पीछे हैट गया पर गिरा नहीं. मुझे ना गिरते देख वो थोड़ा ज़्यादा शॉकेड हो गया. शॉकेड तोह मई भी था क्यूंकि मुझे पीछे धक्का दे देना आसान नहीं था. पर उसकी इस हरकत से मेरा दिमाग ख़राब होने लगा. मई उसके पास गया और उसकी hi स्पीड से मैंने उससे ढाका दे diya.wo भी थोड़ा लड़खड़ा कर पीछे हो गया. हम दोनों एक दूसरे को घर रहे थे. मैंने अपनी मुठी भीची और पूरी ताकत से घुमा दी. उसी वक़्त उसने भी वैसा hi किया. हम दोनों के मुक्के टकराये. देखने वालों को तोह पता नहीं चला पर मुक्को के टकराते hi मुझे मेरे अंदर एक करंट दौड़ता हुआ सा लगा. मई छिटक कर दूर गिर गया. मेरा हाथ बोहोत दर्द कर रहा था, मैंने सामने देखा तोह उस लीडर की भी शामे हालत thi.haath पकडे गिरा हुआ था और आँखें हैरत से डूबी हुई थी..... उसने अपने चमचो को इशारा किया, वह सभी एक साथ मुझपे टूट पड़े, पर अब तक मई संभल चूका था. मैंने भी उनकी धुलाई शुरू कर दी पर सबको धीरे से hi मारा नहीं तोह साला कोई टपक जाता तोह एक अलग लफड़ा हो जाता. अभी तक जो भी हुआ था वहां खड़े सभी ने देखा था और सभी स्तब्ध खड़े the.mere दोनों दोस्त bhi.unke लिए तोह मई मई ना होकर कोई और hi बन चूका था. अभी मई उन सब लड़को को पीट hi रहा था की वहीँ पर खड़े किसीके हाथ पर एक अदृश्य आग का गोला दिखने लगा जिससे उसने मेरी तरफ फेक दिया. ये कारनामा और किसी ने नहीं उसी लीडर ने किया था. वो आग का गोला तेज़ी से मेरी और लपका पर मुझ तक पहुँचते hi उसका असर ख़त्म हो गया. वो लीडर इस बार कुछ ज़्यादा hi शॉकेड हो गया. इधर मैंने भी सब को धो डाला tha.kisi का हाथ टुटा था किसी का पेअर, कोई उल्टा पड़ा था. मैंने इधर उधर नज़र घुमाई तोह उनका लीडर मुझे कुछ दूर पे खड़ा दिखा. मई उसके पास जाने hi वाला था की एक आदमी aaya.ye वही इंविजिलेटर थे जो आज हमारे पेपर के टाइम हमारी क्लास में थे.

सर- ये क्या हो रहा है यहाँ. ये कैफेटेरिया किसने तोड़ दिया.

और इन लड़कों की ये हालत किसने की.

सभी ने मेरी तरफ इशारा कर दिया.

सर- तुम अपने आप को समझते क्या हो? गुंडागर्दी करने आते हो स्कूल की पढ़ने!

रोनित- एक मिनट सर. बिना असली बात जाने आप कैसे कुछ बोल सकते hain.aur तुम log,inhone पूछा और तुमने ऊँगली दिखा di.puri बात कौन batayega.haan.

सर- मई तुमसे बात नहीं कर रहा hun.ek तोह यहाँ तोड़ फोड़ कर दी इसने और ऊपर से तुम बेहेस कर रहे हो.

अंजलि भी अब भड़क गयी thi.ye दोनों ऐसे hi थे. अगर कोई मुझसे कुछ कह दे तोह ये उसपे छड़ जाते थे.

अंजलि- आप बोल hi क्यों रहे हैं सर. और एक बात बताइये आप हमारे स्कूल के टीचर हैं kya.aapko इस कैफेटेरिया से क्या लेना dena.aur उसके ऊपर बिना कुछ जाने सुना रहे hain.fir अंजलि ने क्या क्या हुआ था वो सब बता diya.ab तक हमारे प्रिंसिपल सर भी आ चुके थे, और साड़ी बातें भी सुन ली thi.pricipal सर मुझसे बोहोत प्यार करते the.kare भी क्यों ना इतनी ट्रॉफीज जो जीतवाई हैं स्कूल को मैंने...

प्रिंसिपल- विजय सर (इंविजिलेटर) जिससे आप गुंडा कह रहे hai,uska नाम है विक्रम जयराज सिंह...

कुछ याद आया....!!!!

विजय सर मेरा नाम सुन कर शॉकेड हो गए.

प्रिंसिपल- जी हाँ आप सही samjhe.he इस थे ब्राइटेस्ट स्टूडेंट इन थे हिस्ट्री ऑफ़ आवर स्कूल . जिसका एक्साम्प्ले आपके स्कूल के प्रिंसिपल भी आपके स्टूडेंट्स को दिया करते hain.jisse आप मुझे मिलवाने के किये कह रहे the.he इस थे ओने.....

विजय सर- सॉरी सर, ी मिसजजद थे व्होले सिचुएशन. विक्रम I'm रियली सॉरी 4 माय बेहेवियर.

मई- no सर. प्लीज डोंट से तहत. आईटी doesn't मटर िफ़ ु टीच इन आवर स्कूल और नॉट. ा टीचर इस ा टीचर, doesn't मटर व्हाट थे किर्लोवे वाटरस्टेन्सेस अरे. हमारी गलती हो या ना हो, आपको हमे डांटने का हक़ है. अंजलि, थॉट्स नॉट डी वे तो टॉक तो ा teacher.say सॉरी.

अंजलि- I'm रियली सॉरी सर. मुझे आपसे ऐसे बात नहीं करनी चाहिए थी.....

विजय सर- no,no इतस ok. वैसे भी जो इन्होने तुम्हारे साथ किया, तोह पनिशमेंट तोह इन्हे मिलनी hi चाहिए थी.

प्रिंसिपल- हाँ पर ये तरीका सही नहीं था. विक्रम तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं thi.tum मुझसे आकर कंप्लेंट भी कर सकते थे.

विक्रम- सॉरी सर. पर मई क्या करता, यहाँ सिचुएशन hi ऐसी हो गयी थी. अंजलि के ऊपर पानी डाला गया था, रोनित को थप्पड़ मारा गया था, मुझसे रहा नहीं गया.

प्रिंसिपल- समझ सकता हूँ विक्रम. पर एक बात हमेशा याद रखना, एंगर इस थे डायरेक्ट वे तो सेल्फ डिस्ट्रक्शन. कोई भी फैसला ठन्डे दिमाग से करना चाहिए.

वो लीडर अभी भी वहीँ खड़ा था और चुपचाप सब सुन रहा था, पर उसकी आँखें मेरे ऊपर पर तिकी थी जिनमे मेरे लिए अजीब से भाव थे.

प्रिंसिपल- अरे एक मं, ये सब स्टूडेंट्स तोह इस स्कूल के नहीं hain.ye यहाँ कर क्या रहे हैं. चंदू कॉल पुलिस इम्मेडिएटली.

उसकी कोई ज़रुरत नहीं है सर.....

ये आवाज़ थी उसी लीडर ki....jo चलते हुए हमारी तरफ hi आ रहा था.

रोनित- सर यही है इनका leader.issine सब स्टार्ट किया था.

प्रिंसिपल- हु थे हेलल अरे यू? तुम्हे इस स्कूल के अंदर किसने आने दिया. और हमारे स्कूल में आकर हमारे स्टूडेंट्स से hi फाइट करते हो.

लीडर- सिरजी.... बोहोत सुना था आपके स्कूल के हरियाली के बारे में, तोह आ गए. और कैसे आ गए मत सोचिये, क्यूंकि दिग्विजय सिंह बग्गा को कोई नहीं रोक सकता.

मुझे ग़ुस्सा तोह बोहोत आया पर सर की वजह से चुप खड़ा रहा.

प्रिंसिपल- ये किस टोन में बात कर रहे हो तुम. मैनर्स कहा हैं तुम्हारे. नाउ ी हैवे तो कॉल थे कॉप्स.

दिग्विजय- उससे कोई फायदा नहीं होगा सर. आप मेरे डैड को नहीं जानते. बलबीर सिंह बग्गा. नाम तोह सुना hi होगा. यहाँ के ंप हैं वो. पुलिस हमारा कुछ बिगड़ नहीं सकती. चलिए, अब चलता हूँ. आप चाहें तोह पुलिस को मेरा और मेरे डैड का नाम बता दीजियेगा. देखते हैं क्या होता है. फिर वो मेरी तरफ मुदा,

तोह विक्रम हाँ, चल आज तोह तू बच गया, पर ये हमारी आखरी मुलाकात नहीं hai.hum फिर milenge.intazar करना.

मई- इंतज़ार रहेगा.

मई सर की वजह से ज़्यादा तोह नहीं बोल सकता था.

वो निकल गया...

प्रिंसिपल- विक्रम बीटा. हो सके तोह अपने डैड से ये इंसिडेंट शेयर मत करना वर्ण वो एक्शन lenge.isse हमारे स्कूल की बदनामी होगी.

मई- डोंट वोर्री सर, मई डैड से कुछ नहीं कहूंगा.

विजय सर- ी मस्ट से विक्रम, यू हैवे ा गोल्डन हार्ट. बस अपनी सादगी कभी मत khona.yahi तुम्हे बाकियों से अलग बनती है.

मई- सूरे sir,I'll कीप तहत इन मंद.

प्रिंसिपल- ok थान lads.we हैवे तो जो. साल भर पढाई की है आप लोगों ने नाउ एन्जॉय योर वकेशंस.

हम तीनो एक साथ - वे विल सर.

फिर हम तीनो बहार की तरफ निकल गए, पर रोनित अभी भी ग़ुस्से में था..

मई- अब तुझे क्या हुआ.

रोनित- चुप बे. क्या ज़रुरत थी बोलने की की अंकल को नहीं बताएगा. उस साले दिग्विजय को बड़ा घमंड है अपने बाप पे, एक बार अंकल को पता चलेगा न तोह साले की पोस्ट hi नहीं रहेगी.

मई- ोये, उसके डैड के बारे में तोह कमसेकम तमीज़ से bol.bade हैं हमसे और एक देसिग्नेटेड पोजीशन में भी hain.aur रही बात डैड को न बताने की तोह वो मई वैसे भी नहीं karta.chhod ना यार बात बढ़ाके क्या fayda.ab अपना मूड ठीक कर. चल तुम दोनों को एक गुड न्यूज़ देता हूँ.

रोनित- नहीं सुननी तेरी कोई न्यूज़

मई- ाचा अंजलि इससे chhod,tu सुन. डैड बोल रहे थे की हम कोई जगह फाइनल करें वेकेशन में जाने के लिए.

अंजलि- सचहहहहहहह.

रोनित- क्या बात बोल दी भाई तूने मज़ा आगया.

मई- अब्बे तुझे तोह इंटरेस्ट नहीं था ना.

रोनित- अरे भाई तू जो जनता है मई कितना जोकि हूँ.

मई- नहीं मई बस ये जानता हूँ की तू कितना बड़ा गधा है.

अब तक हम बहार आ गए थे जहाँ हमारी कार कड़ी थी

रोनित- साले रुक तुझे बताता hun.mai भाग कर कार में बैठ गया और मेरे पीछे पीछे दोनों भी आ गए.

फिर ऐसे hi मस्ती करते करते और वकेशंस में कहाँ जाना है इसका प्लान बनाते बनाते हम घर की तरफ निकल पड़े.

अब मुझे क्या पता था की इधर माँ डैड ने मेरे लिया कुछ और hi सरप्राइज रेडी रखा है जिससे मेरी ज़िन्दगी hi बदल जतएगी......

दूसरी TARAF......MONSLICKEL प्लेनेट.

ास्मोडियस- बिल्जेबब......

एक धुआं हुआ और अपना सर झुके एक डेविल ास्मोडियस के सामने खड़ा था. (बिल्जेबब, ास्मोडियस का सबसे खतरनाक devil.iske अंदर हर तरह के ब्लैक मैजिक की ताक़त hai.aur साथ साथ इसकी स्पीड लाइट की स्पीड से भी ज़्यादा है. इसके ज़्यादातर स्पेल्स जान लेवा होते हैं...)

बिल्जेबब- HI हाईल DEVIL'S किंग.

ास्मोडियस- मई कुछ वक़्त के लिए ध्यान लगाने के लिए क्रॉस वर्ल्ड जा रहा हूँ. जब तक मई नहीं लौठता सब कुछ तुम्हारे आदेश पर चलेगा.

बिल्जेबब- आपने मुझे इस लायक समझा, मेरे लिए यही बोहोत है.

बिल्जेबब को आदेश देकर ास्मोडियस गायब हो गया.

दूसरी TARAF.........THE वर्ल्ड ऑफ़ वारियर्स में...

लार्ड क्रूसेडर अपने सिंघासन पर बैठे the.ab इस पुरे प्लेनेट का बस एक hi राजा था और वो थे लार्ड क्रूसेडर .इस वक़्त लार्ड क्रूसेडर अपने सेनापति से कुछ बात कर रहे थे की अचानक उनके दरबार के बीच में एक वर्ल्ड दूर खुला और कोई बहार आया जिससे देख कर सभी चौंक गए....

लार्ड क्रूसेडर- आआपपपपपपप!!!!!!!!!!!!

दोस्तों आज के लिए इतना HI

आपका APNA.........V.J ...........

 
अब तक आपने पढ़ा की विक्रम कैसे दिग्विजय के सारे चमचो की पिटाई करता है पर दिग्विजय से उसकी टक्कर बराबर की होती है. दिग्विजय विक्रम के ऊपर एक अदृश्य आग का गोला फेकता है जो विक्रम तक पहुँचने से पहले HI नष्ट हो जाता HAI...LORD क्रूसेडर के दरबार में अचानक कोई आता है जिससे देख कर हर कोई चौंक जाता है. अब आगे.......

CHAPTER- 1

( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त एंड थे हौली स्पिरिट )

अपडेट- 15

लार्ड क्रूसेडर- आप !!!!!!! पहले तोह सामने वाले को देख लार्ड क्रूसेडर एक झटके में खड़े हो गए पर फिर अपने घुटनो पर बैठ झुक गए.

सिर्फ वह hi नहीं दरबार में मौजूद हर साक्ष अपने घुटनो पर झुक gaya.jhukte क्यों नहीं आज नजाने कितने आरसे के बाद उनके सामने उनके गृह का डिफेंडर जो खड़ा था.

डिफेंडर- उठ जाइये लार्ड क्रूसेडर.

लार्ड क्रूसेडर खड़े हो गए और उन्ही के साथ बाकि के दरबारी भी.

लार्ड क्रूसेडर- डिफेंडर, आप हमे छोड़ कर कहाँ चले गए थे. आप नहीं जानते आपके जाने के बाद यहाँ हमारे साथ क्या क्या हुआ. मेरे पुरे परिवार को ास्मोडियस ने मरवा diya.is पुरे प्लेनेट पे कब्ज़ा कर लिया था उसने. ये बोलते बोलते लार्ड क्रूसेडर की आँखों में आंसू आ गए.

डिफेंडर- मई सब जानता हूँ लार्ड CRUSEDAR.par मई भी मजबूर था. मुझे आदेश मिले थे की मई यहाँ से दूर चला जॉन, वर्ण ये प्लेनेट hi नष्ट हो जायेगा. जानता हूँ आप सब लोगों ने बोहोत तकलीफें झेली हैं, पर यकीं मानिये अगर मई यहाँ रहता तोह जो आज बचा है वो भी नहीं रहता.

लार्ड क्रूसेडर- अगर आप कह रह हैं तोह ठीक hi होगा. वैसे भी जो हो चूका है उससे बदला तोह नहीं जा sakta.bas अपने भविष्य को hi सवार जा सकता hai.maine तोह अपना सब कुछ खो दिया बस ये गृह hi बचा hai,aur मई राजा हूँ तोह अपने कर्त्तव्य से मुँह भी नहीं मोड़ sakta.par डिफेंडर अब तोह मेरे पास थे लॉकेट ऑफ़ पावर भी नहीं hai,ASMODEUS उससे ले गया, अब हम पहले को तरह ताकतवर नहीं रहे. आप हमें एक और लॉकेट दे दीजिये.

डिफेंडर- मई जानता हूँ लार्ड क्रूसेडर की ास्मोडियस थे लॉकेट ऑफ़ पावर ले गया. पर मई आपको अभी ऐसी कोई पावर नहीं दे सकता.

लार्ड क्रूसेडर- पर क्यों DEFENDER.pehle भी तोह आपने hi दिया था.

डिफेंडर- हाँ दिया था, पर आप भूल रहे हैं की हर डिफेंडर की ताकत उसके गृह की ताकत से जुडी होती है.

और अभी हमारा गृह कमज़ोर hai,isilye मई कमज़ोर हूँ.

ऐसे में कोई भी पावर मई आपको या किसी को कैसे दे सकता हूँ....

लार्ड क्रूसेडर- फिर हम कैसे पहले जैसे ताकतवर बनेंगे डिफेंडर...

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??

डिफेंडर- लार्ड क्रूसेडर, मई देख रहा हूँ की ास्मोडियस ने सिर्फ आपके लोगों को hi नहीं मारा, बल्कि आपके आत्मविश्वास को भी मार दिया है. क्या लॉकेट ऑफ़ पावर आपके पास शुरू से था!!! नहीं ना, वो लॉकेट तोह आपकी बहादुरी और दूरदृष्टि से प्रभावित होकर मैंने आपको दिया tha.aapko शक्तिशाली होने की ज़रुरत नहीं hai,aap पहले से hi शक्तिशाली हैं, बस अपनी ताकत को अपने अंदर से बहार निकलना है. अब आप इस पुरे गृह के अकेले राजा है, तोह आप की सोच ko,apki तलवार की धार को पहले से 100 गुना ज़्यादा तेज़ होना hoga.ye मत भूलिए की आज भी आप इस ब्रम्हांड के सबसे ताकतवर प्लैनेट्स में से एक हैं.

डिफेंडर की बात सुनकर लार्ड क्रूसेडर और वह मौजूद सभी में जोश आ गया.

लार्ड क्रूसेडर- डिफेंडर, आपकी बातों ने हमारे अंदर सोये ताकत को आज फिर जगा दिया hai.hum अपने आप को पहले की तरह शक्तिशाली बना कर hi rahenge.par अगर ास्मोडियस ने फिर हुम्ला कर दिया toh....!!!!!kya आप फिर हमे छोड़ कर चले जायेंगे.... ास्मोडियस के फिर से हमले की बात सुनकर सभी के मनोबल फिर से टूटने lage.wo सब जानते थे, की वह किसी भी गृह तक को हरा सकते हैं पर ास्मोडियस के सामने वो एक पल भी नहीं टिकेंगे.

डिफेंडर- नहीं ऐसा नहीं होगा. ास्मोडियस अब दोबारा कभी हमपे हमला नहीं karega.usse आपसे जो चाहिए था वो मिल चूका hai.par इसका ये मतलब नहीं की अब कोई खतरा नहीं है. इस ब्रम्हांड में ऐसे कई जीव है, लोग हैं जो हमारे प्लेनेट पर आना chahenge,kyunki हमारे प्लेनेट में आज भी बोहोत से शक्ति श्रोत मौजूद हैं जो वो पाना चाहेंगे. इसीलिए आज से किसी भी गृह के लोगों का आना हमारे गृह पे वर्जित होगा.

लार्ड क्रूसेडर- पर डिफेंडर, इस्ला गृह तोह हमारा मित्र hai.ussi गृह की राजकुमारी अलेक्सांद्र ने हमें आज़ाद करवाया है.

डिफेंडर- आप ये भूल रहे है लार्ड क्रूसेडर की अलेक्सांद्र कौन है!!! ास्मोडियस का प्यार. और कोई भी चीज़ जो ास्मोडियस के करीब हो उससे दूर रहना hi हमारे लिए उचित होगा.

सेनापति- लार्ड क्रूसेडर, डिफेंडर सही कह रहे है. माना अलेक्सांद्र ने हमें आज़ाद करवाया है पर हैं तोह वो ास्मोडियस की करीबी hi. हमे उनसे दूर रहना चाहिए.....

सभी दरबारी- हाँ हम भी डिफेंडर से सहमत हैं.

लार्ड क्रूसेडर- ठीक है. जैसा आपको उचित लगे डिफेंडर.......

डिफेंडर ने अपने हाथ फैलाये, और कहा

संपूर्ण सुरक्षा कवच प्रकटम.........

डिफेंडर के दोनों हाथों से नीली रोशनियां निकली जो हर तरफ फैलने lagin.aur कुछ देर बाद गायब हो गयीं.

डिफेंडर- अब हमारा गृह सुरक्षित hai.ab कोई वर्ल्ड दूर के द्वारा भी हमारे प्लेनेट में प्रवेश नहीं कर पायेगा. लार्ड क्रूसेडर, आप मंत्रीगण और सेनापति के साथ मिलकर इससे पहले की तरह सशक्त बनाने की योजनाएं बनाये. आपको कभी भी मेरी आवश्यकता महसूस हो तोह मेरे नाम का ध्यान कीजियेगा, मई आ जाऊंगा.

लार्ड क्रूसेडर- जो आज्ञा डिफेंडर..

फिर डिफेंडर गायब हो गए. लार्ड क्रूसेडर सेनापति के साथ फिर विचार विमर्श में बिजी हो गए.

बैक तो हीरो:-

हम तीनो मेरी कार में बैठ घर की और निकल पड़े.

मई- अब्बे एक बात बता. लड़ाई के वक़्त तूने मुझे क्या कहकर बुलाया था!! हाँ, V.J... ये नामकरण मेरा कब हुआ.

अंजलि- हाँ, मैंने भी सुना tha,par उस वक़्त सिचुएशन ऐसी थी की मेरे दिमाग से निकल गया.

रोनित- अरे यार ये नाम तोह मेरे दिमाग में कब से था तेरे लिए. हमेशा सोचता था बाटूंगा तुम दोनों को, पर भूल जाता था. ाचा बताओ कैसा लगा नाम , V.J. कूल है ना.

अभी मई कुछ कहता की मुझसे पहले अंजलि बोल पड़ी..

अंजलि- हाँ बोहोत ाचा hai.claasy भी लगता है. तोह फिर दोने, आज से हम दोनों तुझे इसी नाम से पुकारेंगे...

अब मई क्या कहता. फैसला तोह दोनों महारथियों ने कर hi लिया tha.mai बस सर हिला के रह गया. बातों बातों में कब घर आ गया पता hi नहीं chala.mai कार से उतरा hi था की

रोनित- अब्बे सुन. हमने जहाँ वकेशंस में जाने का डीडे किया है अंकल आंटी को अभी मत बताना. हम दोनों शाम को आएंगे फिर मिल कर बताएँगे.

मई - चलो ठीक है fir.shaam को वेट करूँगा. चलो bye.

रोनित और अंजलि निकल गए. मई भी अंदर की तरफ चल पड़ा. अंदर आया तोह देखा डैड और माँ दोनों सोफे पर बैठकर कुछ बात कर रहे थे.

मई-- hi डैड, hi माँ. वत्स उप डैड! आज आप ऑफिस नहीं गए.

डैड- आ गया मेरा शेर. हाँ बीटा आज ज़्यादा कुछ काम नहीं था तोह रूक गया.

मई- डैड आप ना बीच बीच में ऐसे hi ऑफ ले लिया करो. माँ यहाँ अकेली रह जाती है.

मेरी इस बात पे डैड है दिए वही माँ ने मेरा माथा चुम लिया.

माँ- देखा जी, मेरे बेटे को मेरी कितनी फ़िक्र है....

डैड- हम्म, देख रहा हूँ हमारा बीटा वक़्त से पहले hi मातुरे हो गया है. अब तोह लगता है मुझे रिटायरमेंट ले लेनी चाहिए. बीटा तुम्हारे पेपर्स भी ख़त्म हो गए hain.tum कल से ऑफिस आना शुरू कार्डो, तोह मुझे भी छुट्टी मिले.

माँ- बड़े आये रिटायरमेंट waale.abhi मेरे बचे ने ठीक से दुनिया भी नहीं देखि और आप इससे काम पे लगाना चाहते ho.mera बचा कहीं नहीं jayega.aap भागिए ऑफिस..

डैड- अरे यार मई तोह मज़ाक कर रहा tha.ye चाहेगा तोह भी मई इससे ऑफिस आने नहीं dunga.abhi तोह इससे अपनी और मेरी दोनों की ज़िन्दगी जीनी है.

मई- ी लव यू डैड... ी लव ु माँ..

MOM/DAD- वे लव यू 2 सोन...

डैड- ाचा बीटा आपसे कुछ बात करनी थी. आप फ्रेश हो जाओ फिर लंच के बाद बात करते हैं...

मई- ok डैड. फिर मई अपने रूम गया, फ्रेश होकर निचे आया. हमने लंच किया फिर मई माँ और डैड वहीँ हॉल पे सोफे पर बैठ गए...

डैड- बीटा वो जो मैंने तुम्हे वकेशंस में घूमने जाने के लिए कहा था ना,

मई- डैड, उसके बारे में शाम को बताता हूँ ना. वो एक्चुअली रोनित और अंजलि दोनों शाम को आएंगे फिर हम तीनो मिलकर आपको बताएँगे.

डैड- बीटा पूरी बात तो सुनलो. बात ये है की अभी फ़िलहाल तुम वकेशंस के लिए नहीं जा सकते.

मई थोड़ा चौंका क्यूंकि फर्स्ट टाइम था जब हमारे वकेशंस का प्लान कैंसिल हो रहा था.

मई- क्या हुआ डैड. अन्य प्रॉब्लम!!!

माँ- बीटा एक्चुअली तुम्हे 1 महीने के लिए कहीं जाना है.

मई- एक महीने में लिए, कहाँ??

डैड- बीटा आज तुम्हारे स्कूल जाने के बाद घर पर हमारे गुरूजी आये थे.

मई- हाँ डैड, मैंने उनसे मिला था. वो गेट के बाहर hi खड़े the.maine hi उन्हें अंदर आप से मिलने भेजा tha.par पहले कभी मैंने उन्हें देखा नहीं. आप दोनों उन्हें कैसे जानते हैं.

माँ- बीटा हम उनसे पहली बार तुम्हारे नामकरण के दिन मिले थे. उन्होंने hi तुम्हारा नाम रखा था. जब हमने उन्हें दक्षिणा देने की बात की थी तोह उन्होंने कहा था की वो सही वक़्त पर मांग lenge.us दिन के बाद वो सीधे आज आये हैं और अपनी दक्षिणा मांगी जिसमे वो तुम्हे एक महीने के लिए अपने साथ ले जाना चाहते हैं.

मई- hmm.strange.kahan ले जाना चाहते हैं वो मुझे माँ.

माँ- वो तुम्हे कुछ सीखना चाहते hain.kya, ये उन्होंने हमें नहीं बताया.

मई- ठीक है माँ, डैड. मई चला जाऊंगा.

मेरा ये छोटा और सीधा सा जवाब सुनकर माँ डैड शॉकेड हो गए....!!!!!!

डैड- बीटा, तुमने एक भी सवाल नहीं किया की वो तुम्हे क्या सीखना चाहते हैं, कहाँ लेकर jayenge.tumhe कितने दिन रुकना padega.kya तुम्हारे मन में कोई सवाल नहीं है!!!

मई- सच कहूं डैड तोह हाँ, सवाल तोह बोहोत है. पर उससे पहले, बात आपकी और माँ की कमिटमेंट की है जो आपने गुरूजी से किया है. और आप दोनों कोई वडा करो और वो पूरा न हो ऐसा मई कैसे होने दे सकता हूँ. और वैसे भी आप मेरा नुक्सान थोड़ी ना chahoge.isme भी मेरा hi फ़ायदा होगा.

MOM/DAD मेरी बातों से काफी इमोशनल हो गए और मुझे गले लगा लिया.

डैड- अब मई निश्चिन्त hun.pata है बीटा, आज तुम जो इतनी सुलझी हुई बातें कर रहे हो, तुम ऐसे hi रहोगे इसके बारे में गुरूजी ने तुम्हारे नाम कारन में hi बता दिया था. आज तक उनकी बताई बात कभी गलत नहीं हुई. ये तुम्हारे लिए किसी ब्लेस्सिंग्स से काम नहीं है की वो खुद तुम्हे कुछ सीखना चाहते हैं. जो भी वो कहें, तुम पुरे दिल से करना. देखना जब तुम लौटोगे, तोह तुम्हारे अंदर ज्ञान का भंडार होगा.

मई- जी डैड. मई अपनी तरफ से पूरी कोशिश karunga.....ab मई भी काफी एक्ससिटेड था गुरूजी से सिखने के liye,kyuki डैड कभी किसीकी इतनी आसानी से तारीफ़ नहीं करते थे. किसीकी छोडो मई अपने स्कूल का टोपर हूँ, स्पोर्ट्स में भी आगे हूँ पर आज तक मेरी तक तारीफ़ नहीं की थी unhone..dad का मानना था की तारीफ़ से घमंड पैदा होता है जो टैलेंट को ख़त्म कर देता है.

माँ- बीटा एक बात और, तुम कहाँ और किसके साथ जा रहे हो ये रोनित और अंजलि को नहीं बता सकते.

अब ये सुनते hi मेरी फटी क्यूंकि दोनों hi मेरे लिए बोहोत पोस्सेसिवे हैं.

मई- पर माँ, उन्हें बिना बताये मई कैसे जा सकता hun.wo दोनों मुझे जाने hi नहीं देंगे.

माँ- बता दिया तोह भी कौन सा अकेले जाने देंगे. पर जो शिक्षा लेने तुम जा रहे हो, वो नहीं ले सकते. गुरूजी ने सिर्फ तुम्हे उनके साथ चलने को बोलै है.

मई- पर माँ, ये बात उनको कौन समझायेगा!!!

डैड- एक काम करो, उन्हें कॉल करके बुला लो. मई बात कर लूंगा.

मई- हाँ ये ठीक रहेगा. फिर मैंने दोनों को कॉल करके बुला लिया. थोड़ी देर में hi दोनों पोहोंच गए.

रोनित- यार इतनी जल्दी में क्यों बुला लिया, हम तोह वैसे भी शाम को आने वाले थे ना. अभी वो कुछ और बोलता उससे पहले hi उसकी नज़र सोफे पर बैठे माँ डैड पर padi.wo चुप हो गया.

अंजलि- hi आंटी, hi अंकल.

रोनित- hello अंकल, hello आंटी...

MOM/DAD- hello बच्चों. इधर आओ तुम दोनों से कुछ बात करनी है.

रोनित और अंजलि जाकर सोफे पर बैठ गए.

डैड- बीटा मुझे पता है तुम लोग वकेशंस में घूमने जाने के लिए बोहोत एक्ससिटेड हो. पर एक प्रॉब्लम हो गयी है. विक्की को कहीं जाना पद रहा है पर अकेले.

दोनों hi ये सुनके शॉकेड हो गए, होते भी क्यों ना, ये फर्स्ट टाइम था जब मई उन्हें छोड़ कर अकेले कहीं जाने वाला था.

अंजलि- क्या हुआ अंकल , एनीथिंग सीरियस....!!!!!

डैड- हाँ बीटा, विक्की तोह तुमसे कुछ छुपता nahi.tumhe तोह पता hi होगा की तुम्हारी आंटी और उनके रिलेटिव्स में कोई बातचीत नहीं hai.par तुम्हारी आंटी की एक रिश्तेदार है, जो विक्की से मिलना चाहती hai.mai तुम दोनों को भी साथ भेज देता पर उन्होंने विक्की को अकेले hi बुलाया hai.yahan तक की हमे भी नहीं.

अंजलि- इतस ok आंटी. विक्की चला जाएगा. हम फिर कभी साथ चले जायेंगे

रोनित बिलकुल चुप बैठा tha.mujhe पता था उससे ये सब ाचा नहीं लग रहा hai,kamina दोस्त काम भाई ज़्यादा tha.par कर भी क्या सकते hain.iske बाद कुछ ख़ास नहीं हुआ, दोनों हमे bye बोलकर निकल गए, मैंने रोनित से बात करने की कोशिश की पर साला पकोड़े जैसी शक्ल बना कर चुपचाप निकल गया. साले को शाम को भी कॉल किया बताने के लिए की मई परसो निकल रहा हूँ तोह क्यों ना कल पार्टी शरती की जाए पर था तोह अकाल का पैदल hi, बोलता है की जब वापस आऊंगा तब करेंगे पार्टी और पटक दिया फ़ोन.

अब मई भी क्या करता, दो, तीन, शुद्ध साहित्यिक भाषा में गाली दी और मुँह लटका कर अपने रूम आ गया. फिर अगले दिन कुछ खास नहीं हुआ. अंजलि सारा दिन मेरे साथ hi रही पर वो दूसरा नमूना गायब hi रहा और ना hi हम दोनों का कॉल उठाया.

अंजलि- तू तोह जानता है ना उससे. बिना सोचे समझे hi

फैसले ले लेता hai.tu टेंशन न ले, एक दो दिन में ठीक हो जाएगा.

मैंने भी मुंडी हिलाड़ी, और कर भी क्या सकता था.

रात में डिनर करके अंजलि भी चली गयी, मई भी रूम में आ gaya,aur ऐसे hi ये दिन भी निकल गया.

अब आया वो दिन जिस दिन से मेरी ज़िन्दगी बदलने वाली थी. मई सुबह utha,apna मॉर्निंग रूटीन कम्पलीट किया, साला जब से मेरा जाना तय हुआ है ये रोनित गार्डन भी नहीं आया. खैर मई घर आया फ्रेश होकर नाश्ते की टेबल पर बैठ गया.

डैड- तोह यंग बॉय, आल सेट.

मई- यूप डैड.

माँ- नर्वस!!!

मई- ा बिट.

डैड- यू don't हैवे तू. इससे एक एडवेंचर की तरह lo.aur वैसे भी तुम्हे तोह नयी नयी चीज़ें सीखना पसंद है naa.trust में इतस गॉन बे ा लाइफटाइम एक्सपीरियंस 4 ु.

मई- या, ी होप सो.

अभी हम बात hi कर रहे थे की गुरु विशाखत अंदर आये. हम तीनो hi उन्हें देखकर खड़े हो gaye.mom डैड और फिर मैंने बारी बारी उनके पेअर छुए.

बाबा विशाखत- तोह vikram.aap तैयार हैं

पता नहीं क्यों पर जब भी मई बाबा विशाखत की आवाज़ सुनता हूँ, लगता है जैसे भगवन उनके अंदर से मुझसे बात कर रहे हैं.

मई- जी गुरूजी. मई तैयार हूँ

बाबा विशाखत- तोह चलो fir.vilamb कर्मा उचित नहीं. जयराज, मीनू मई आप दोनों के दिल की व्यथा (हाल) समझता हूँ, पर विक्रम का मेरे साथ जाना आवश्यक hai.issime इसका कल्याण है. आप निश्चिन्त हो जाएँ.

डैड- जब तक आप हमारे बेटे के साथ हैं हमे कोई चिंता नहीं. विक्की, गुरुदेव जैसा कहें वैसा करना. तुम नहीं जानते की तुम कितने लकी हो.

मई- I'll dad.i promise.fir मैंने बारी बारी से माँ डैड के पेअर छुए.

डैड- मई ड्राइवर को बोल देता हूँ, आप जहाँ जाना चाहते हैं, वहां वो छोड़ देगा.

बाबा विशाखत- उसकी आवश्यकता नहीं है JAIRAJ.hum नहीं चाहते कोई भी हमारे साथ ho.aur अब तुम जो अपने पुत्र को खर्च के लिए पैसा देना चाहते हो, वो मत do.vikram को धन को आवश्यकता नहीं पड़ेगी.

डैड शॉकेड हो गए क्यूंकि वो अभी मुझे पैसे hi देने वाले थे.

डैड- पर गुरूजी

बाबा विशाखत- आप निश्चिन्त रहिये जयराज, हम आपके पुत्र का अचे से ख्याल रखेंगे. अब हम चलते hain.chalo विक्रम

मैंने अपना बैग लटकाया जिसमे मेरे कपडे वगैरा थे, माँ डैड से एक बार गले मिला और गुरूजी के पीछे पीछे निकल गया.

माँ की आँखों में आंसू the,pehli बार मुझसे अलग जो हो रहे थे, डैड भी साद थे पर माँ को समझा कर घर अंदर ले गए इधर मई गुरूजी के पीछे पीछे हो liya.ghar से बाहर निकल कर गुरूजी ने अपने कमंडल से पानी निकला आँख बंद ki,kuch बोलै और मेरे घर की तरफ वो पानी फेक diya...ab ये क्या था, सोचा गुरूजी से पुछु, पर फिर सोचा गुरूजी कुछ ऐसा बोलेंगे जो मेरे सर के ऊपर से जाएगा इसीलिए ये पूछने का आईडिया ड्राप कर मई गुरूजी के पीछे पीछे चल दिया.

देखते हैं, ये सफर विक्रम को कहाँ ले जाता है....

वहीँ दूसरी तरफ

दिग्विजय अपने घर पहुंचा जहाँ हॉल में hi उसके डैड अपने कुछ लोगों के साथ बैठे थे.

स्माल इंट्रो

बलबीर सिंह बग्गा- ंप....... ये एक नंबर का हरामी आदमी है. ड्रग्स, एस्कॉर्ट सर्विसेज, डायमंड स्मगलिंग, ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसा नजाने कितने hi गलत धंधो में इन्वोल्वेद hai.iski एक और आइडेंटिटी है जो फ़िलहाल एक सीक्रेट है जो सिर्फ इसके बेटे को पता है...

प्रीत बग्गा- बलबीरस वाइफ. ये अपने हस्बैंड से बिलकुल उलटी hain.ek शांत स्वाभाव की औरत जो भगवन में बड़ी आष्टा रखती है.

दिग्विजय सिंह बग्गा- ये अपने बाप की ज़ेरॉक्स कॉपी hai.iske सुपरनैचरल होने का कारण इसका बाप hi hai,par कैसे, ये बाद पे पता चलेगा..

बैक तो थे स्टोरी:-

दिग्विजय- डैड, मुझे आपसे कुछ बात करनी है.

बलबीर- अभी नहीं बीटा, देख नहीं रहे हो अभी थोड़ा उसी हूँ...

दिग्विजय- मीटिंग ओवर. आप सब बहार जाइये तुरंत, मुझे डैड से कुछ इम्पोर्टेन्ट डिस्कशन करना है....

वहां बैठे सभी बलबीर की तरफ देखे, जिसने उन्हें जाने का इशारा kiya.sabhi चुपचाप निकल गए...

बलबीर- देख रहा हूँ आज कल तुम कुछ ज़्यादा hi बत्तमीज़ होते जा रहे ho.ye मत भूलो की मई कौन hun.tumhari साड़ी अकड़ एक मं में निकल dunga.....samjhe....

अपने डैड की कड़क आवाज़ सुनकर एक पल के लिए दिग्विजय दर गया पर फिर संभल कर बोलै.....

दिग्विजय- I'm सॉरी डैड, पर मई क्या karta.baat hi इतनी इम्पोर्टेन्ट है की मई रूक नहीं sakta,jisse जानकार आप भी परेशां हो जायेंगे....

बलबीर- acha.chalo बताओ क्या बात hai.fir दिग्विजय ने बलबीर को कॉलेज में जो हुआ सब बता diya,jisse सुनकर बलबीर को यकीं hi नहीं हुआ. बलबीर ने दिग्विजय के सर के ऊपर हाथ रख कर मंत्र बोलै, "दृश्य प्रकाशनम" और बलबीर के आँखों के सामने कॉलेज में जो हुआ सब कुछ दिखने laga,jisse देखकर बलबीर शॉकेड हो गया और थोड़ा परेशां भी...

बलबीर- ये कैसे हो सकता hai.aisi कोई शक्ति हमारे आस पास है और हमे पता भी नहीं चला. क्या नाम है उस लड़का का???

दिग्विजय- विक्रम जयराज सिंह....

ये नाम सुनकर बलबीर फिरसे चौंक gaya,kyunki वो जयराज को बोहोत अचे से जानता था. उसने बोहोत बार जयराज को अपने साथ मिलाने की कोशिश की थी पर हमेशा नाकामियाब रहा था. वो सीधे टूर पर जयराज से पन्गा नहीं ले सकता था क्यूंकि जयराज का लिंक c.m के साथ था. और अपनी शक्ति का इस्तेमाल वो ऐसी बातों में करना नहीं चाहता था.

बलबीर- हम्म. मैंने सोचा था इस जयराज पे अपनी शक्ति का उपयोग नहीं करूँगा पर लगता है करना padega.par पहले पता तोह लगाऊं इसके घर में चल क्या रहा hai,aur इसके बेटे के पास शक्तियां कहाँ से आयीं.

बलबीर ने अपनी आँखें बंद की और मंत्र बोलै

शत्रु शक्तियम खोज आरम्भते...

बलबीर के हाथों से काली रेज़ निकली और तेज़ी से जयराज के घर की तरफ चल di.par जयराज के घर के सिमा पर पहुँचते hi वो रेज़ गायब हो gayin.ye सब हमारे बाबा विशाखत ने किया tha.unhone जयराज के घर से निकलते hi घर के बहार सुरक्षा कवच बना दिया था. उन्हें पता था की ऐसा कुछ ज़रूर होगा....

इधर बलबीर को तोह जैसे झटके पे झटके लग रहे the.usse समझ नहीं आ रहा था की ये सब हो क्या रहा hai.ek पल के लिए तोह उससे लगा की अभी जयराज और उसके बेटे को ख़त्म कर दे पर फिर उसने अपने दिमाग को शांत कर ठन्डे दिमाग से सोचा.

बलबीर- मुझे ग़ुस्से में कोई फैसला नहीं करना chahiye.ye कोई छोटी बात नहीं hai.par कुछ तोह करना पड़ेगा. पर क्या, बलबीर गहरे सोच में चला गया पर फिर अचानक जैसे उससे कुछ याद आया और उसकी आँखें चमक गयीं....

दिग्विजय मैंने तुम्हे बोहोत कुछ सिखाया है, काली शक्तियों से नवाज़ा hai,mujhe लगता था इतना काफी hoga,par अब लगता है तुम्हे बोहोत कुछ सीखना बाकी है.

दिग्विजय- जी dad.mai भी यही चाहता hun.mai उस विक्रम को ऐसा सबक सीखना चाहता हूँ जो वो ज़िन्दगी भर याद रखे.

बलबीर- पर ये आसान नहीं होगा बेटे. इसमें तुम्हारी जान भी जा सकती hai.kya तुम तैयार हो.

दिग्विजय- जी dad.aap जो बोलेंगे वो मई करूँगा....

बलबीर- ठीक है फिर. तुम्हे "मिर्रोर्स वर्ल्ड" जाना होगा.

फिर बलबीर दिग्विजय को बताता है की उससे क्या करना है.

दिग्विजय बलबीर से आशीर्वाद लेकर अपनी मंज़िल की तरफ निकल पड़ता है....

( दोस्तों, मिरर वर्ल्ड में हम हमारे स्टोरी के सेकंड CHAPTER में JAYENGE,JO की हमारी स्टोरी का सबसे रोमांचक PART होगा )

वहीँ दूसरी तरफ:-

संत सकिलिअ- अब क्या होगा. ास्मोडियस ने उससे अपने वश में कर लिया है और ऐसा मायाजाल उसके हर तरफ बिछा दिया है की हम उसके आसपास भी नहीं पहुँच sakte.ab हम क्या करें.

संत अल्फ़्रिक- सही वक़्त का इंतज़ार...........

दोस्तों आज के लिए इतना HI

आपका अपना V.J...............

 
अब तक आपने पढ़ा की डिफेंडर वर्ल्ड ऑफ़ वारियर्स के चारो तरफ सुरक्षा घेरा बना देता है और वर्ल्ड दूर के मैजिक को भी निष्प्रभाव कर देता है ताकि कोई उनके गृह में आ ना SAKE.....DUSRI तरफ विक्रम बाबा विशाखत के साथ अपनी यात्रा पे निकल पड़ता HAI....WAHI बलबीर दिग्विजय को मिर्रोर्स वर्ल्ड में भेज देता है. अब आगे......

CHAPTER- 1

( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त एंड थे हौली स्पिरिट )

अपडेट- 16

हमे चलते हुए काफी वक़्त हो गया था, इनफैक्ट हम पिछले 4 घंटों से चल रहे थे. मई भी चुप चाप बैग लटकाये गुरूजी के पीछे चल रहा था. मन में तोह कई बार आया की गुरूजी से पूछूं की हम जा कहाँ रहे hai,par फिर जाने दिया. पूछ लेने से कौन सा रास्ता छोटा हो jayega.jitna वक़्त लग्न है उतना तोह लगेगा hi.aur आखिर में तोह पता लग्न hi है की हम कहाँ जा रहे hai.isiliye चुप चाप चलता रहा. घडी देखा तोह पता चला हम घर से करीब 9 बजे निकले थे और अब 2 बज रहे the.matlab 5 घंटे हो गए थे हमे चलते hue.thakan तोह नहीं पर हाँ, भूक ज़रूर लग रही थी mujhe.ab मई सोच रहा था की गुरूजी से कैसे कहूं!!!!

गुरूजी आगे आगे चल रहे थे. अचानक चलते चलते वो रूक gaye.jab वो पालते तोह उनके चेहरे पर एक मुस्कान थी.

मई- क्या हुआ गुरुदेव. क्या मुझसे कोई गलती हो गयी.

बाबा विशाखत- नहीं पुत्र, मई बोहोत खुश hun.tum तुम्हारे पहले इम्तिहान में सफल हो गए.

मई- कैसा इम्तिहान गुरुदेव?

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बाबा विशाखत- जिज्ञासा और सैयाम पुत्र. हर मनुष्य के मन में जिज्ञासा और सैयाम दोनों होती है पर उसका उपयोग वो कैसे करता है, ये हुनर hi उसकी सफलता या असफलता निर्धारित करती hai.tumhare मन में भी ये जिज्ञासा थी की हम कहाँ जा रहे हैं. पर उसका आधा उत्तर तुमने खुद को hi दे दिया और आधा समय पर छोड़ diya.jo तुम्हारा खुदपे सैयाम दर्शाता है. ये दोनों गुण सलफता के पहले दो पायदान है जो तुमने आसानी से पार कर लिए.

मई- थैंक्स ऊप्स धन्यवाद गुरूजी.

बाबा विशाखत- इतस ok vikram.you कैन उसे इंग्लिश वेयर एवर यू वांट तो....

मई बाबा के मुँह से इतनी अछि अंग्रेजी सुनकर शॉकेड हो गया.

बाबा विशाखत- क्या हुआ vikram.itne हैरान क्यों ho.mai प्राचीन ज़रूर हूँ पर मेरी सोच और ज्ञान समय की सीमा में नहीं बंधा hai.aur वैसे भी बोहोत मौके मिलेंगे तुम्हे चौंकने के. तैयार रहो.

वैसे हम अभी कहाँ है???

मई- गुरूजी हम अभी मुंबई से जस्ट बहार......

.....OH.....MY.....GOD.......... व्हाट थे फ****

सॉरी गुरूजी वो मई, लेकिन ये सब, ी मैं इतस impossible..ye कैसे हो सकता है. अब दिमाग तोह घूमना hi था ना, क्यूंकि हम अभी मुंबई में नहीं थे, अरे मुंबई में छोडो हम तोह जिस रोड में खड़े थे अभी हम उस रोड में भी नहीं थे, उस रोड पर क्या किसी भी रोड पर नहीं the,hum अभी एक पहाड़ की छोटी पर थे. एक बोहोत बड़ा हरा भरा pahad.upar खुला आसमान, पक्षियां तोह हमसे थोड़ा निचे उड़ रही thi.hum उस पहाड़ के टॉप में रखे एक विशाल पत्थर के ऊपर खड़े the.mere कानों में पानी की हलकी हलकी आवाज़ आ रही थी, मतलब पास में hi कहीं झरना बह रहे tha.aur मेरा दिमाग यहाँ बिलकुल फ्यूज हो गया tha.mujhe तोह लग रहा था की मई कोई सपना देख रहा हूँ. मैंने अपने हाथ में चिंता तोह यकीं हुआ की ये सपना नहीं सच hai.mai बस इधर उधर देख रहा tha,ye सब सच है यही हज़म करने की कोशिश कर रहा tha,jab सामने देखा तोह बाबा विशाखत मुस्कुरा रहे the.zindagi में पहली बार मुझे थोड़ा सा दर लगा. अब लगता भी क्यों नहीं, ऐसा तोह सिर्फ मूवीज में देखा tha.sach में भी मैजिक जैसा कुछ होता hoga,ye यकीं करना थोड़ा मुश्किल था....

चलिए अपने हीरो को थोड़ा सुरप्रीसेड छोड़ते हैं और चलते है वर्ल्ड ऑफ़ वारियर्स में....

एक बड़े से मैदान में लार्ड क्रूसेडर खड़े the,unke साथ उनके सेनापति हेन्सबर्ग थे और उनके सामने हज़ारों के तादाद में सैनिक लड़ने की प्रैक्टिस कर रहे थे.

लार्ड क्रूसेडर- इतने में नहीं होगा हेन्सबर्ग. हमारे सैनिको का युद्ध स्टार काफी गिर गया है. ऐसे में तोह हम अपने आप को पहले जैसा शक्तिशाली कभी नहीं कर पाएंगे.

हेन्सबर्ग- हाँ माय किंग. इसकी चिंता तोह मुझे भी hai.par इसमें सैनिको का भी क्या दोष, इतने सालों तक गुलामी की hai,uska असर इन सब के शरीर पर भी हुआ hai.ye पहले से काफी कमज़ोर हो गए hain.in सब का आहार भी हमने बढ़ा दिया hai,par पता नहीं क्यों ये तंदरुस्त हो hi नहीं पा रहे हैं...!!!!

लार्ड क्रूसेडर- कोई तोह उपाय hoga,inhe पहले जैसा करने ka.bohot देर तक सोचने पर भी जब लार्ड क्रूसेडर को कुछ उपाए न sujha,toh आखिर में उन्होंने डिफेंडर से hi मदद लेने की सोची. लार्ड क्रूसेडर ने अपनी आँखें बंद कर डिफेंडर का आवाहन kiya.kuch hi देर में एक तेज़ गडग़हाट के साथ डिफेंडर उनके सामने था.

लार्ड क्रूसेडर डिफेंडर के सम्मान में झुक गए साथ hi हेन्सबर्ग और वहां मैदान पर खड़े सारे सैनिक भी.

डिफेंडर- उठ जाइये सभी लोग. और लार्ड क्रूसेडर आपके सैनिको को कोई भी आहार शरीर पे इसीलिए नहीं लग रहा है क्यूंकि डेविल्स ने इन सब को काइआ का रास पिलाया है ताकि ये विद्रोह करना भी चाहें तोह न कर पाएं.

लार्ड क्रूसेडर- kya,KAAIWA का ras.usse तोह इन सब का शरीर अंदर से पूरा खोकला हो चूका hoga.aur इसका तोह कोई इलाज भी नहीं है.

डिफेंडर- इलाज है. फिर डिफेंडर ने लार्ड क्रूसेडर को इलाज बताया और कहा.

डिफेंडर- जो मैंने बताया है, उसकी ज़रुरत सिर्फ आपके सैनिको को hi नहीं आपको भी hai.jab आप उससे प्राप्त करें तोह अपने सैनिकों के साथ खुद भी सेवन karen.isse आपकी शक्ति 10 गुना बढ़ जायेगी.

लार्ड क्रूसेडर- जो आज्ञा डिफेंडर...

फिर डिफेंडर गायब हो गया.....

बैक तो हीरो....

बाबा विशाखत- मैंने कहा था न putr.tumhe और भी मौके मिलेंगे चौंकने के.....

मई- आए आ आप कौन हैं. आप इंसान नहीं है क्या. कोई भूत हैं या एलियन. देखिये मई तोह एक बचा hun,mere पास कुछ भी नहीं hai.aise hi नजाने कितनी बकवास कर दी मैंने. बाबा विशाखत एक दम शांत मुद्रा में खड़े बस मुस्कुरा रहे the.jab मेरा बोलना ख़त्म नहीं हुआ तोह उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा.

बाबा विशाखत- शांत हो जाओ पुत्र. घबराओ mat.mai तुम्हे कोई नुक्सान नहीं pahunchaunga.mai समझता हूँ की तुम्हारे लिए ये सब नया है, तुम्हारे लिए क्या किसी भी धरती वासी के लिए ये एक चमत्कार है, पर यकीं maano,ye कुछ भी नहीं hai.is ब्रम्हांड में कुछ भी नामुमकिन नहीं है.

अब तक मई थोड़ा शांत हो गया था और मेरी क्यूरोसिटी लेवल भी काफी बढ़ गयी थी.

मई- गुरुदेव, धरती वासी matlab.kya धरती से बहार भी जीवन है?

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बाबा विशाखत- पुत्र आज का पहला सबक......

सवाल वही करो जो उसी वक़्त के लिए उपयोगी ho.aise सवाल का क्या अर्थ जिसका जवाब देर सवेर अपने आप तुम्हे मिल hi जायेगा.

मई- जी गुरुदेव.

बाबा विशाखत- एक बात बताओ putra.tum भगवन में मानते हो!!!

मई - जी gurudev.maanta हूँ.

बाबा विशाखत- और शैतान में!!!!

मई- क्या पता. मेरा मतलब मैंने कभी सोचा नहीं...

बाबा विशाखत - पुत्र, भगवन और शैतान एक hi सिक्के के दो पहलु hai.par दोनों में एक चीज़ सामान्य hai.wo है चमत्कार. चमत्कार से मेरा अर्थ जादू मंत्र नहीं है बल्कि सत्य और मिथ्या hai.Hum सभी के अंदर ये दोनों hi बास्ते hain.hum जिससे चुनते hain,wo जीत जाता है और दूसरा हार जाता hai.par इसका ये अर्थ नहीं की जो हारा वो ख़त्म हो गया hai.kyunki भगवन हो या शैतान ये हर मनुष्य में बराबर बातें हैं.

इस ब्रम्हांड में ऐसे बोहोत से राज़ है जिसके बारे में या तोह भगवन जानते है या फिर शैतान. ज़्यादातर इस ब्रम्हांड में बसने वाले लोग साधारण hain,jo अपना जीवन काल पूरा कर मृत्यु को प्राप्त करते hain.par कुछ ऐसे भी लोग हैं जो सभी लोगों से छुपकर उस परम पिता परमेश्वर का कार्य करते hain.aise hi लोग शैतान के पास भी होते हैं जो उसका साम्राज्य पुरे ब्रम्हांड में फैलाना चाहते hain.par दोनों तरफ के hi लोगों को सारे संसार से चुप कर ये कार्य करना पड़ता hai.aisa hi एक कार्य मुझे भी सौपा गया है, तुम्हे तैयार करने का.

मई- मुझे, पर मुझे hi क्यों gurudev.aur किस कार्य के लिए.!!!

बाबा विशाखत- एक बात बताओ putra.tum इस वर्ष किस कक्षा में जाओगे???

अब ये सवाल कहाँ से आ गया बीच में!!!

मई- 11तह में गुरुदेव..

बाबा विशाखत- कॉलेज में क्यों नहीं!!!

मई- उसके लिए तोह पहले 12तह क्लियर करना होगा naa.uske बाद जाऊंगा.

बाबा विशाखत- hmm.matlab जब उसका वक़्त आएगा तोह अपने आप चले जाओगे, यही ना!!!!

मई- jee,............OHHHHH तेरी, अब SAMJHA......waah गुरूजी का स्टाइल तोह गज़ब है. सवाल में hi जवाब. बोहोत बढ़िया. मई धीरे से है दिया जिससे देखकर गुरूजी भी है दिए.

बाबा विशाखत- तुम जानना नहीं चाहोगे हम कहाँ हैं???

साला पूछो तोह तकलीफ ना पूछो तोह भी taklif.par खुद hi बोल रहे हैं तोह पूछ लेता हूँ.

मई- जी gurudev.hum कहाँ है

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?

बाबा VISHAKHT-hum इस वक़्त जिस पहाड़ पर खड़े हैं वो कसौली शहर के उत्तरी छोर में स्तिथ hai.ye यहाँ का सबसे बड़ा पहाड़ hai.yahan तुम्हारी शीषका बिना किसी बाधा के हो sakegi.is पहाड़ के अंदर एक घाना जंगल है जहाँ से तुम्हारे खाने पीने की व्यवस्था आराम से हो जाएगी.

तुम्हारी शिक्षा एक महीने के लिए chalegi.tab तक के लिए यही तुम्हारा घर hai.Is एक महीने में तुम्हे 10 वर्ष के बराबर तक का ज्ञान milega.ab से तुम्हे बोहोत सी आश्चर्यजनक चीज़ें देखने को milengi,isiliye ज़्यादा चौंका मत.

मई- guruji,ab मुझे किसी बात पे आश्चर्य नहीं होगा.

बाबा विशाखत- अपनी दायीं और देखो.

मैंने जब अपने राइट साइड देखा तोह वाकई मेरी आँखें खुली रह गयी. मेरे सामने हवा में hi एक दरवाज़ा बन गया था और उसके अंदर से 3 लोग nikle.do आदमी थे और एक aurat.par तीनो उम्र में ज़्यादे बड़े नहीं लग रहे the.zyada से ज़्यादा 30 के दिख रहे the.wo तीनो हमारे पास आये और गुरूजी के आगे झुक gaye....guruji की आवाज़ से मेरी तंत्र टूटी....

बाबा विशाखत- उठो बच्चों. वो तीनो खड़े हो गए

विक्रम तुम तोह कह रहे थे तुम नहीं चौंकोगे.

अब मई क्या kehta.yahan तोह साला स्पेशल इफेक्ट्स की झड़ी लगी हुई थी.

बाबा विशाखत- putr.ye हैं अक्षांत, मोकलसर और सैला. तुम्हारी शिक्षा में इनकी एहम भूमिका होगी.

मई वैसे भी मैजिक देखकर काफी एक्ससिटेड हो गया था.

मई- गुरुदेव ,क्या मई भी मैजिक सीखूंगा.

बाबा विशाखत- हाँ भी और नहीं भी.

अब साला ये क्या जवाब hua.gurudev मुझे यूँ सोचता देख बोले,

बाबा विशाखत- मेरे कहने का अर्थ है की तुम फ़िलहाल जादू को रोकना sikhoge.karna nahi.fir भी कुछ चीज़ें तुम कर पाओगे जो जादू से काम भी नहीं होंगी.

अब मई क्या कहता ,जो मिले वो ठीक. पर फिर भी थोड़ा उदास हो गया.

बाबा विशाखत- उदास मत हो putr.ye शिस्क्षा तुम्हारी पूरी शिक्षा नहीं hai.aage चलकर टंगे बोहोत कुछ प्राप्त करना है.

पहले मई इन तीनो से तुम्हारी पहचान करा देता हूँ.

ये हैं अक्षांत. ये तुम्हारे पहले गुरु honge.pehla एक हफ्ता तुम इनसे sikhoge.ye तुम्हे ताकतवर और गति शील बनाएंगे. इनके प्रशिक्षण से तुम्हारी ताकत 10 हाथी के बराबर हो जाएगी और रफ़्तार इतनी तेज़ हो जाएगी की आँखों से तुम्हे देखना तक मुश्किल हो जायेगा.

ये हैं मोकलसर. ये तुम्हे ब्रम्हांड की साड़ी युद्ध शैली में माहिर banayenge.dusra हफ्ता तुम इनसे शिक्षा लोगे.

और ये हैं सैला. ये तुम्हे हवा और पानी दोनों में बराबर नियंत्रण करना sikhaengi.inse उचित शिक्षा लेकर तुम पानी में भी सांस ले सकोगे और बड़े से बड़े तूफान के बीच से भी आराम से निकल पाओगे.

और आखरी हफ्ते में तुम्हारी परीक्षा hogi,jisme फैसला होगा की तुम सफल हुए या नहीं.

मई- और गुरूजी, आप!!!! आप मुझे कुछ नहीं सिखाएंगे!!!!

बाबा विशाखत- बिलकुल सिखाऊंगा पुत्र. हर शाम को तुम्हारी प्रशिक्षण के बाद 2 घंटे तुम मेरे साथ bitaoge.jisme जो भी तुमने सीखा होगा मई उसकी बारीकियां तुम्हे bataunga.iske अलावा हर रोज़ प्रातः तुम मेरे साथ योग करोगे जिससे तुम्हारा मन और मस्तिष्क इतना शांत हो जायेगा की कोई भी प्रशिक्षण तुम बोहोत जल्दी hi सिख jaoge.mai तुम्हे इस ब्रम्हांड के हर विषय का ज्ञान भी दूंगा जो तुम्हारे लिए अति आवश्यक है.

मई- जो आज्ञा गुरुदेव...

बाबा विशाखत- आज का आधे से ज़्यादा पहर निकल चूका है इसीलिए आज हम विश्राम करेंगे. फिर गुरूजी ने अपने हाथ आगे किये. उनके हाथ से कुछ वाइट रेज़ निकली और सामने की खली जगह पर padi.dekhte hi देखते वहां 5 टेंट्स बन गयी.

बाबा विशाखत- जाओ तुम सब चाहो तोह आराम कर लो या फिर घूम aao.yahan देखने के लिए बोहोत कुछ है. मुझे एक आवशयक कार्य से जाना है. ये बोलकर बाबा गायब हो गए.

और हम भी चल दिए ghumne.raaste में मेरी उन तीनो से इंट्रो भी hui.unki भाषा भी थोड़ी प्राचीन थी पर साफ़ thi.aur एक बात जो मुझे पता चली की वो इस दुनिया के नहीं hai.kisi व्रीहाख नाम के गृह से हैं. अब मेरे लिए कुछ भी शॉकिंग नहीं tha.hum बात करते करते एक झरने के पास pahunche.Maine इतना सुन्दर नज़ारा पहले कभी नहीं देखा tha.hum सब वहीँ जगह देखकर बैठ गए और बातें करने lage.AKSHAANT और मोकलसर तोह शांत स्वाभाव के थे पर शैला बड़ी चुबुली thi.mujhe अंजलि की याद आ gayi.par कर भी क्या सकते hain.aise hi बातों में कब शाम हो गयी पता hi नहीं चला फिर हम वापस टेंट के पास आ गए. शाम का वक़्त और ऊपर से pahad,thand लगने लगी thi.MOKALSAR ने मैजिक से आग जला di.hum वहीँ बैठ गए. शैला ने भी कुछ बोलै और हाथ आगे kiye.saamne अलग अलग फ्रूट्स आ गए. हम उसी को खाकर कुछ देर बैठे rahe.fir अपने अपने टेंट में चले गए......

अब कल का इंतज़ार THA.MERI ट्रेनिंग का पहला दिन...............

वहीँ दूसरी तरफ........

दिग्विजय पहुंचा मिरर वर्ल्ड.............

दिग्विजय एक जगह के सामने खड़ा hua.us जगह ने दिग्विजय को अपने अंदर खिंच लिया. दिग्विजय जब अंदर पहुंचा तोह उसके सामने था एक लम्बा चौड़ा साया जो काले कपड़ो में घिरा हुआ tha.uske चेहरे पर मास्क tha.uski सिर्फ आँखें दिख रही थी... हाथों में तलवार जो तेज़ चमक रही थी.....

दिग्विजय एक पल के लिए तोह दर गया पर फिर हिम्मत जूता कर बोलै,

कौन हो तुम?

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साया- " अग्रसेन ".........थे सोर्ड लार्ड............

दोस्तों आज के लिए इतना HI

आपका अपना V.J...........

 
अब तक आपने पढ़ा की बाबा विशाखत विक्रम को लेकर कसौली के बहार स्तिथ एक पहाड़ में जाते है जहाँ उसकी ट्रेनिंग होने वाली THI.GURUJI तीन लोगों को विक्रम को सीखने की ज़िम्मेदारी देते HAIN....WAHIN दूसरी तरफ दिग्विजय पहुँचता है मिरर वर्ल्ड जहाँ वो किसी चीज़ के सामने खड़ा होता है जो उससे अंदर खींच लेती HAI.JAB दिग्विजय सामने देखता है तोह उसके सामने खड़ा था अग्रसेन. थे सोर्ड लार्ड.....

अब आगे........

CHAPTER- 1

( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त एंड थे हौली स्पिरिट & थे हौली स्पिरिट )

अपडेट- 17

दिग्विजय- अग्रसेन....... तोह मई क्या करूँ और मई यहाँ कैसे आ गया मई तोह ************* सामने खड़ा tha....yahan कैसे आ गया.

अग्रसेन- अपनी ज़ुबान को उसकी हद याद दिलाओ बालक. इतनी बातें अग्रसेन को सुनना पसंद नहीं.....

दिग्विजय- ओह hello, तुम मुझे बताओगे कितना बोलना है. तुम अभी मेरे बारे में जानते नहीं ho,warna यूँ भोंकते नहीं. अगर मई चहुँ आआह्ह्हह्ह्ह्ह...

इसी दर्द भरी आवाज़ के साथ दिग्विजय 20 मीटर दूर जा गिरा. दिग्विजय का सर घूम रहा tha.hoth पहात गए थे. उससे समझ नहीं आ रहा था की उससे कोई सिर्फ एक मुक्के से कैसे इतना घायल कर सकता है. ऐसा उसके लाइफ में पहले कभी नहीं हुआ था. दिग्विजय ने धीरे से सामने देखा तोह दूर अग्रसेन खड़ा था.

खसती PRAVATI.zakhm ठीक करने के लिए उसने मंत्र बोलै पर ये क्या कोई असर नहीं hua.DIGVIJAY को अब बोहोत ग़ुस्सा आ रहा था, उसने अपनी पूरी शक्ति समिति और एक झटके में खड़ा हुआ और दौड़ते हुए अग्रसेन के पास पहुंचा और पूरी ताकत से एक मुक्का मारा. मुक्का सीधा अग्रसेन के गाल में पड़ा और आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.... एक दर्द भरी आवाज़ चारो तरफ गूंज गयी.

पर ये क्या ये आवाज़ तोह दिग्विजय की थी, जो अपनी कलाई पकड़ कर नीचे बैठा तड़प रहा tha.DIGVIJAY को ऐसा लग रहा था जैसे उसने किसी के मुँह पे नहीं बल्कि चटान को मुक्का मारा है.

अग्रसेन- हो गया तुम्हारा. बालक तुम मेरे सामने एक कीड़े से बढ़कर कुछ नहीं. तुम अगर अपनी पूरी ताकत भी लगा दो तोह मेरा एक बाल तक नहीं तोड़ sakte.man तोह कर रहा है की तुम्हारे इस दुःसाहस के लिए तुम्हारे प्राण ले लूँ पर तुम्हे यहाँ ********** ने मेरे सामने पहुँचाया है. तुम्हे सीखना मेरा कर्त्तव्य hai.par दोबारा ऐसी गलती की तोह वो तुम्हारी अंतिम गलती होगी.

और एक बात, यहाँ तुम्हारा कोई भी जादू बेअसर hai.toh कोशिश भी मत karna.ab बोलो क्या विचार hai,sikhna है या वापस जाना है.

अब तक दिग्विजय का भी अकाल ठिकाने पर आ गया tha.usse लगने लगा था की वो सही जगह आया है और अब यहाँ से सीखकर वो विक्रम जैसे 10 पे भी भारी पड़ेगा.

दिग्विजय- मुझे माफ़ करे guruvar.mai अपने घमंड में अँधा हो गया tha.ab दोबारा ऐसी गलती नहीं होगी....

अग्रसेन- उचित है. """"धनुर""""................

एक ज़ोर की बिजली कड़की और एक हाथ कथा आदमी प्रकट हुआ. एक हाथ में धनुष, दूसरे कंधे में tarkash.par एक अजीब बात thi,wo ये की तरकश में एक भी तीर नहीं थी.....

अग्रसेन- ये धनुर hain.inke पहनावे से तुम्हे पता चल hi गया होगा की ये धनुष बाण की विद्या में माहिर hain.par सिर्फ बाण से नहीं ये किसी भी शहस्त्रा को तीर की तरह इस्तेमाल कर सकते hain.aaj से तुम इनसे शिक्षा लोगे जब तक ये तुम्हे इनके साड़ी विद्या नहीं सीखा dete.agar तुम इनके प्रशिक्षण में सफल रहे तोह आगे की शिक्षा मई तुम्हे dunga.varna तुम्हे वापस लौटना होगा.

दिग्विजय- जो आज्ञा guruwar....fir अग्रसेन गायब हो गए और रह गए दिग्विजय और धनुर.......

वहीँ दूसरी तरफ........

रात गहरा चूका था. विक्रम अपने टेंट में tha.baaki के तीनो एक टेंट के अंदर बैठ कुछ बात कर रहे थे.

क्या हुआ bacho.kis विषय में बात हो रही है!!!!

तीनो ने जब आवाज़ की और देखा तोह सामने बाबा विशाखत खड़े थे. बाबा को देख तीनो खड़े हो गए.

तीनो- नमस्कार गुरुदेव......

बाबा विशाखत- आयुष्मान bhava.tum लोगों ने जवाब नहीं diya.Kis विषय पर चर्चा हो रही थी!!!!!

तीनो ने एक दूसरे की तरफ देखा, अब किसीको तोह कहना hi था.

सैला- वो गुरुदेव, हम बस विक्रम की कल से शुरू होने वाली प्रशिक्षण की बात कर रहे थे.

बाबा विशाखत- hmm.par ये आधा सत्य hai.haina!!!!

अब तीनो जान चुके थे की बात को छुपाने का कोई मतलब नहीं था.

अक्षांत- जी gurudev.hum यही बात कर रहे थे की जिस विद्या को प्राप्त करने के लिए हमे नजाने कितने वर्ष लग gaye,jisse हम आज भी निखार रहे हैं, उस विद्या को आप उससे मात्र एक महीने में सीखना चाहते है. ये तोह असंभव है.

बाबा विशाखत- असंभव में hi संभव छुपा होता है बच्चों. विक्रम एक महीने में तुम सब की विद्या पूरी तरह सिखने में समर्थ है या नहीं, ये तुम तीनो खुद hi देख lena.chalo अब काफी रात हो चुकी है, अपने अपने पटवास (टेंट) में जाकर सो jao.kal प्रातः जल्दी उठना है.

तीनो- जी gurudev.shubh ratri.sabhi अपने अपने सोच में गम अपने टेंट्स में चले गए. बाबा विशाखत सभी की मनोदशा से भली भाली परिचित the.wo भी मुस्कुराते हुए अपने टेंट में चले गए. फिर कुछ खास नहीं हुआ और रात बीत गयी और फिर एक नयी सुबह का ाघस हुआ.

आखिर में वो दिन आ गया जब विक्रम की एक सिंपल से लड़के से इस ब्रम्हांड के सबसे बड़े योद्धा सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बनाने की शुरुआत होनी थी...

सुबह के चार बज रहे the.mai अपने टेंट में सोया हुआ था, इतने में मेरे नींद में hi एक आवाज़ aayi,UTH जाओ पुत्र, साधना का वक़्त हो रहा HAI.mai हड़बड़ा के उठ gaya.ass पास देखा तोह कोई नहीं था.

यहाँ वहां मत देखो पुत्र, मई तुम्हारे अंतर मन से जुड़ कर बात कर रहा hun.ab ज़्यादा सोचो मत, अपने नित्य करम कर झरने के पास आ जाना.

पर सोच तोह मई रहा था, क्यूंकि यही आवाज़ उस रात सपने में भी मैंने सुनी thi.iska मतलब गुरुदेव hi थे जो उस रात मेरे सपने में आये the.isiliye उनकी आवाज़ इतनी जानी पहचानी लगती thi.sawal तोह और भी बोहोत थे मेरे मन me,par फ़िलहाल वक़्त नहीं tha.mai फटाफट उठा, फ्रेश वगैराह हुआ, और चल पड़ा झरने की तरफ. वहां पहुंचा तोह देखा गुरुदेव ध्यान अवस्था में बैठे the.mai जैसे hi उनके करीब पहुंचा, उन्होंने आँखें खोल दी.

बाबा विशाखत- पुत्र, अब से हर रोज़ इसी समय में तुम्हे यहाँ आना होगा.

अभी मई कुछ कहता उससे पहले hi गुरूजी बोले

बाबा विशाखत- पुत्र, अपने मन और मस्तिष्क को विराम दो, मैंने कहा था ना ऐसे सवाल करने का क्या फायदा जिसका जवाब देर सावेर मिल hi jayega.ab समय व्यर्थ न करो, और यहाँ बैठो.

मैंने भी अपना सर झटका और बैठ गया.

बाबा विशाखत- ध्यान लगाने के बारे में क्या जानते हो!!!!

मई- ज़्यादा तोह नहीं gurudev.bas इतना hi की अपने मन से सारे विचार निकल do,man को खाली कर दो, अपने चित को एकाग्रित कर आंख बंद कर अपने इन्द्रयों को काबू करो.

बाबा विशाखत- अत्ति uttam.par तुम्हे कुछ और भी करना है.

मई- क्या गुरुदेव?

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बाबा विशाखत- तुम जब अपने चित को शांत करोगे, तोह तुम्हे हर तरफ या तोह अँधेरा दिखेगा या उजाला. दोनों hi सूरतों में तुम्हे एक रौशनी खोजनी है. जब तुम उस रौशनी के करीब पोहोंच जाओ तोह उससे महसूस करने की कोशिश करना.

अब ये क्या लॉजिक हुआ, अगर उजाला हुआ तोह और उजाला कहाँ से दिखेगा. पर अब गुरूजी को बोलूंगा तोह एक ऐसा लॉजिक फेकेंगे जो अपनी समझ से ऊपर होगा, इसीलिए जो आज्ञा गुरुदेव बोल दिया.

बाबा विशाखत- ठीक है पुत्र, अब तुम ध्यान अवस्था में बैठो और कोशिश करो.

पर हमारी बातों का हिस्सा सिर्फ हम नहीं थे, कोई और भी था जो ये सब सुन रहा था... ये कोई और नहीं मोकलसर tha,jo मेरे पीछे पीछे आ गया था और एक पेड़ के पीछे से सब देख और सुन रहा था.

इधर मई ध्यान अवस्था में बैठ gaya.ab एक क्वालिटी तोह बचपन से थी मुझमे की कोई भी काम जो मुझे दिया जाता था उससे मई पूरी लगन से करता tha.aur वैसे भी मेरा दिमाग शांत hi रहता tha.bhale hi ये ध्यान लगाने में मेरा फर्स्ट टाइम था पर नजाने क्यों ध्यान में बैठते hi मुझे ऐसा लगा जैसे ये मई सालों से करता आ रहा hun.mai अपने चित को शांत कर मन और मस्तिष्क को एकाग्रित करने में लग गया.

मुझे इतनी जल्दी अपनी आप को शांत कर ध्यान लगते देख गुरूजी के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान आ गयी.

बाबा विशाखत- ( अपने मन में, अत्ति उत्तम putr.mujhe गर्व है की मुझे तुम्हारा गुरु बनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.) पुत्र मोकलसर, तुम्हे छुपने की आवश्यकता नहीं है, तुम यहाँ आ सकते हो. गुरुदेव ने मंद तो मंद मोकलसर से ये बात कही.

मोकलसर भी तुरंत सामने आ गया.

मोकलसर- शमा करें गुरुदेव. मई तोह बस ऐसे hi देख रहा था.

बाबा विशाखत- पुत्र, मई जनता हूँ तुम क्या देख रहे the.tumhe अभी भी विक्रम के ऊपर संदेह है ना!!!!

मोकलसर- गुरुदेव, सच कहूं तोह है नहीं था. पर अब इससे देखकर लगता है की ज़रूर इसमें कुछ खास hai.mujhe ठीक से ध्यान लगाने में 1 महीने से ज़्यादा का वक़्त लगा था और ये पहली बार में hi ऐसे ध्यान में बैठा है जैसे नजाने कितने सालों से ध्यान करता आ रहा हो.

बाबा विशाखत- ये कुछ भी नहीं है putra.kuch समय दो, जो तुम देखोगे उसपे यकीं नहीं कर पाओगे.

मोकलसर- गुरुदेव, क्या मई भी यहीं पर ध्यान लगाने के लिए बैठ जाऊं.!!!!

बाबा विशाखत- अवश्य पुत्र. पर तुम ज़्यादा देर तक बैठ नहीं पाओगे.

मोकलसर- क्यों गुरुदेव?

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बाबा विशाखत- पता चल जायेगा. बैठ जाओ....

मोकलसर- धन्यवाद gurudev.aur मोकलसर वही मेरे पास ध्यान में बैठ गया.

इधर मई ध्यान में बैठा हुआ tha.mai पूरी तरह अपने अंदर खो सा गया tha.mujhe कुछ भी याद नहीं tha,yahan तक की माँ डैड भी nahi.is वक़्त मई एक शुन्य की स्तिथि में tha.mujhe आस पास सिर्फ रौशनी hi रौशनी दिख रही thi.meri इन्द्रियां कुछ खोज रही thi,kya, ये मई भी नहीं जानता tha.guzarte वक़्त के साथ साथ ऐसा लग रहा था जैसे मई अपने मंज़िल के करीब पहुँच रहा हूँ. ये दुनिया पूरी काल्पनिक थी फिर भी कितनी वास्तविक लग रही thi.meri इन्द्रियां उस रौशनी में देखने की कोशिश कर रही hi रही थी की अचानक उस रौशनी में भी कुछ चमका और मेरी इन्द्रियां उस और खींचती चली gayi.jaise जैसे मई उस चमकने वाली चीज़ के करीब जा रहा था मुझे अपने अंदर एक ऊर्जा सी महसूस हो रही thi...ye सब मेरे अंदर चल रहा tha.bahar क्या हो रहा था ये मुझे पता नहीं था.

मोकलसर को अभी ध्यान में बैठे 10 मं भी नहीं हुए थे की उससे गर्मी लगने lagi.ye बोहोत अजीब बात थी क्यूंकि यहाँ का मौसम बोहोत ठंडा था. थोड़ी देर में गर्मी और बढ़ गयी और मोकलसर के आँख बंद होने के बावजूद उसकी आँखों में रौशनी घुस कर चुभोने लगी. मोकलसर ने जब आँख खोलकर मेरी तरफ देखा तोह तुरंत आँखें बंद कर li.wo वैसे hi आँखें बंद कर उठा और दूसरी तरफ चल diya.thodi दूर पहुंचके उसने आँखें खोली तोह सामने का नज़ारा देखकर दांग रह gaya.mere पुरे शरीर से रौशनी निकल रही थी, और वो रौशनी बढ़ती hi जा रही thi....aas पास का पूरा इलाका मेरी उस रौशनी से चमक रहा था. मोकलसर के पास hi गुरूजी भी खड़े थे जो मुस्कुरा रहे थे.

इधर मई उस उजाले के पास pahuncha.ye कोई चीज़ नहीं थी कोई साया था जो सूर्य से भी तेज़ चमक रहा था फिर भी पानी की तरह शीतल tha.najaane उसमे कैसा सम्मोहन tha,mai एक तुक उसकी और देख रहा tha.tabhi उस साये ने कहा....

वाइट शैडो- क्या देख रहे हो VIKRAM.mai तुम्हारे अंदर hi हूँ, या ये कहूं की तुम और मई एक hi हैं.

मई- आप कौन हैं?

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वो साया मेरे करीब आया और बोलै...

वाइट शैडो- अपने आप को पहचानो VIKRAM.......aur ये बोलकर उसने मुझे chua.....mujhe एक तेज़ झटका लगा और एक पल के लिए मेरी आँखों के आगे पूरा ब्रम्हांड आ gaya.ye झटका सिर्फ मेरे अंदर नहीं लगा था, बल्कि बहार भी लगा था. यहाँ वाइट शैडो ने मुझे छुआ, और जो रौशनी मुझसे निकल रही थी, वो पहात गयी, जिसकी चपेट में गुरुदेव और मोकलसर भी आ गए और आस पास के सभी पेड़ भी. मोकलसर और गुरूजी को एक तेज़ झटका लगा और दोनों दूर फेका गए और सारे पेड़ पौधे जल कर रख हो gaye.guruji को तोह ज़्यादा चोट नहीं आयी पर मोकलसर

की हालत ख़राब हो gayi.uska शरीर जगह जगह से पहात गया था और खून निकल रहा था. गुरूजी तुरंत उठके उसके पास गए और उसके ऊपर हाथ रख मंत्र bole,KSHATI PRAVATI......dheere धीरे मोकलसर के सारे ज़ख्म भर गए पर वो अब भी काफी कमज़ोर दिख रहा था.

बाबा विशाखत- तुम्हे पूरा स्वस्थ होने में समय lagega.mai तुम्हे तुम्हारे घर भेज रहा hun.swastha होकर लौट आना.

अब मोकलसर भी क्या कहता, अभी तोह उसकी हालत सच में ख़राब थी.

मोकलसर- जैसा आप कहें गुरुदेव.....

फिर गुरूजी ने उससे वर्ल्ड दूर से वापस भेज diya,wahan जो सब कुछ जल चूका था, सबको ठीक कर दिया और मेरे पास आ गए क्यूंकि मई भी वाइट शैडो के छूटे hi झटके से बेहोश हो गया था.

गुरूजी ने मेरे सिरपर हाथ रखा "चेतना प्रयागच्छति...."

मसिने धीरे से अपनी आँखें खोली.

मई - मुझे क्या हुआ था गुरुदेव.

बाबा विशाखत- कुछ नहीं पुत्र. और जो तुमने ध्यान अवस्था में देखा फ़िलहाल उसके बारे में भूल jao.sirf अपने प्रशिक्षण में ध्यान दो.

एक तोह मुझे समझ नहीं आता की गुरूजी को पहले से सब कुछ कैसे पता चल जाता है और ऊपर से बोलते है की कुछ पूछूं भी naa,yahan तक की सोचूं भी naa.arre यार इंसान हूँ रोबोट नहीं. सोच तोह आ hi जाती है naa.khair बोलके तोह कुछ फायदा नहीं, जैसा बोलते हैं करते जारा hun.waise भी गुरूजी ने बोलै तोह है hi, सही वक़्त पर सब पता चल hi जाएगा. फिर मई और गुरुदेव टेंट्स के पास आ gaye,jahan अक्षांत और शैला खड़े थे......

दोनों- सुप्रभात गुरुदेव, सुप्रभात विक्रम........

बाबा विशाखत- सुप्रभात बच्चों....

मई- सुप्रभात......

बाबा विशाखत- अक्षांत तुम विक्रम का प्रशिक्षण आरम्भ karo.aur ध्यान रहे कोई रिहायत nahi.kadi म्हणत करना इससे.

अक्षांत- जो आज्ञा गुरुदेव.

बाबा विशाखत- शैला तुम भी विक्रम के प्रशिक्षण की तयारी karo.wo साड़ी विद्याओं का अभ्यास करो जो तुम विक्रम को सीखने वाली हो.

शैला- को आज्ञा गुरुदेव. पर ये मोकलसर कहीं दिखाई नहीं दे रहा है.

बाबा विशाखत- मैंने उससे कुछ महत्वपूर्ण कार्य से भेजा है.

बाबा विशाखत- विक्रम. मनुष्य या तोह दिमाग से सोचता है या फिर हृदय se.isse उससे सफलता तोह मिलती है पर उसकी एक सीमा होती hai,jisse तुम विज्ञानं या साइंस कहते ho.agar तुम मस्तिष्क और ह्रदय को एक कर के सोचो तोह तुम इन सीमाओं को तोड़ आगे बढ़ jaoge.tumhari सीमा तुम खुद तय करोगे. जिस तरह तुमने आज ध्यान लगाया है उसी तरह दिमाग और ह्रदय को जोड़कर अभ्यास karna.parinaam वो आएगा जो तुमने सोचा भी नहीं होगा.....

विक्रम- इस सीख के लिए धन्यवाद gurudev.mai याद रखूँगा.

फिर मई और अक्षांत चल दिए पहाड़ की दूसरी और...

अक्षांत- विक्रम, हमे यहाँ से पहाड़ के अंडर से होते हुए दूसरी तरफ जाना hai.andaza lagao,kitna वक़्त लगेगा..

मई- कमसेकम 30 मिनट.....

अक्षांत- ठीक है, तोह दौड़ना शुरू करो.

अब मई क्या बोलता दौड़ना शुरू कर diya.mai एक टी शर्ट और लोअर में था, इसीलिए रनिंग करना आसान था मेरे liye.mai शुरू हो gaya.ab मुझे थकन तोह आसानी से लगती नहीं thi.mai नज़ारों की तरफ देखते हुए दौड़ते जा रहा था की अचानक मुझे लगा की कोई मेरे बाजु से निकला hai.maine जब सामने देखा तोह कोई नहीं tha.maine दिमाग झटका और दौड़ते हुए पहाड़ की दूसरी और पोहोंच gaya.mai जैसे hi वह पहुंचा मुझे एक झटका laga,kyunki अक्षांत वहां पहले से hi खड़े थे और मुस्कुरा थे.

अक्षांत- क्या हुआ, इतने हैरान क्यों खड़े ho.waise मानना पड़ेगा तुम 20 मिनट में hi पहुंच गए और तुम्हारी सांसें भी दुरुस्त हैं.

मई- वैसे आपको पहुंचे हुए कितना वक़्त हुआ.

अक्षांत- करीब 19 मिनट....

मई- क्या!!!!!

अक्षांत- क्यों यकीं नहीं है. विक्रम विश्वास करना sikho.khud pe,khud के रफ़्तार se.jab तक तुम्हारा दिमाग ये नहीं मानेगा की तुम तेज़ हो तुम तेज़ नहीं दौड़ पाओगे.

अब चलो मई टेंट के पास खड़ा hun.tum आओ मेरे peeche.par इस बार खुद पर यकीं karna.jitna दृढ निश्चय उतनी tezi..aur अगले hi पल अक्षांत दौड़ पड़े और मई तोह देखता hi रह गया क्यूंकि 2 सेकंड में hi वो मेरी आँखों से ओझल हो चुके थे.

मई- लग गए beta...aur तू अपने आप को चैंपियन समझ रहा tha.chal फोकस kar.maine भी दो तीन लम्बी साँसें ली और दौड़ना शुरू kiya.is बार मई इधर उधर नहीं देख रहा tha.bas सीधे देखकर दौड़ रहा tha.kuch hi देर में मई टेंट के सामने था.

अक्षांत- हम्म.15 min.achi बात है पर ये काफी नहीं है vikram.aise तोह तुम्हे सिखने में सालों लग जायेंगे.

सैला भी वहीँ कड़ी थी जो धीरे धीरे है रही thi.mujhe ये ाचा नहीं लगा क्यूंकि उसकी हसी मज़ाक उड़ने वाली हसी थी.

अक्षांत- मई तुम्हारा प्रशिक्षण आगे तब तक नहीं बढ़ाऊंगा जब तक की तुम्हारी गति नहीं बढ़ jaati.tumhe 5 मिनट के अंदर पर्वत के इस छोर से उस छोर और फिर वापस आना hai.jab तुम इतने तेज़ हो जाओगे फिर आगे का सोचेंगे.

सैला- अरे अक्षांत, ये क्या कर रहे हो, बचा है थोड़ी तोह दया करो.....

अक्षांत- अब गुरूजी ने hi कहा है इससे एक हफ्ते में तैयार karo.aise करेगा तोह कहाँ से सिख पायेगा.

सैला- विक्रम तुम ना एक काम करो, घर लौट जाओ और वहीँ प्रैक्टिस karo.jab कुछ काम बनाने लगे तोह आ jana.ye बोलकर दोनों hi हसने lage.mujhe बोहोत बुरा लग रहा था पर मई बोल भी क्या सकता था. पर वो दोनों अचानक चुप हो gaye.maine पलट कर देखा तोह गुरूजी आ रहे थे.

बाबा विशाखत- इधर आओ विक्रम.

मई उनकी तरफ चला गया.

बाबा विशाखत- पुत्र, तुम्हारे पैरों की गति काम नहीं है तुम्हारे सोच की है. मैंने तुम्हे कहा था ना की सिर्फ दिमाग से या ह्रदय से सोचोगे तोह एक सीमा में बांध jaoge.apne ह्रदय को अपने मष्तिष्क से jodo.thik वैसे hi जैसे सुबह ध्यान के वक़्त कर रहे the.fir कोशिश करो.

मई- जो आज्ञा गुरुदेव. मैंने गुरुदेव से आशीर्वाद लिया और वापस उन दोनों के सामने आ गया.

मई- ठीक है अक्षांत ji....aage की शीसखा तभी होगी जब मई आपकी इस चुनौती पे खरा उतरूंगा. शैला अभी भी मुस्कुरा रही थी.

मई पलटा, अपनी आँखें बंद ki,aur अपने दिमाग और दिल को खली kiya.ab मेरा ध्यान फिरसे सुण्या मई पहुँच गया था. मुझे मेरे शरीर में एक सरसराहट सी महसूस हो रही थी, मेरा खून मेरे अंदर 100 गुना तेज़ी से बह रहा tha.maine एक झटके में अपनी आँखें खोली और दौड़ लगा di.mere दौड़ते hi शैला और अक्षांत के मुँह खुले के खुले रह gaye.kyunki कुछ hi पल में मई उनकी नज़र से गायब हो चूका था. वो दोनों शॉक में बैठे the.kuch देर बाद उनके कानो में एक आवाज़ aayi.ek पल के लिए उन्हें होश आया पर सामने वाले को देख कर वो फिर उसी शॉक में चले gaye,kyunki उनके सामने और कोई नहीं मई खड़ा था.

मई- क्या हुआ अक्षांतजी, शैलजी, मई hi हूँ विक्रम.

मई अपनी घडी देखते हुए,

मई- अक्षांतजी, आपने मुझे 5 मिनट का समय दिया tha.maine 3 मिनट में hi पूरी कर di.ab तोह मई आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार हूँ ना.

अक्षांत और शैला को विश्वास hi नहीं हो रहा था की जो उन्होंने कहा था मैंने कर dikhaya.wo दोनों hi कुछ कहने की हालत में नहीं थे.

मई- अक्षांत जी, शैला जी, शक्तिशाली होने का ये मतलब तोह नहीं की आप सामने वाले का मज़ाक udayen.ye हक़ उपरवाले ने किसीको नहीं दिया hai.ho सके तोह इस बात का ध्यान रखियेगा.

अक्षांत और शैला दोनों को hi अपनी गलती का एहसास हो चूका था.

अक्षांत- मुझे माफ़ कार्डो vikram.mai आज के दिन को एक सबक के रूप में लूंगा.

सैला- मुझे भी शमा करना vikram.mai घमंड में आकर कुछ ज़्यादा hi बोल गयी...

मई- शमा मत mangiye.aap मुझसे बड़े hain,aur मेरे गुरु bhi.apko आपकी भूल दिखी यहीं बोहोत है.

ाचा अब ट्रेनिंग ी मैं प्रशिक्षण शुरू karen.abhi तोह मुझे बोहोत कुछ सीखना है....

अक्षांत- bilkul.ab तोह मई तुम्हे वो सब भी सिखाऊंगा जिसमे मई खुद पूरी तरह से माहिर नहीं hin.sirf जानता hun.mujhe यकीं है तुम वो सब भी कर लोगे.

शैला- हाँ, और अब मई भी कठिन अभ्यास karungi.taaki तुम्हे कठिन प्रशिक्षण दे सकूँ.

मई भी उनकी बात सुन मुस्कुरा दिया.

गुरूजी अपने टेंट में ध्यान अवस्था में बैठे हुए थे, पर सब कुछ देख रहे थे.

अक्षांत- तुम्हारी गति तेज़ हो गयी है पर इतने से भी काम नहीं chalega.ab से हर दिन तुम कमसेकम 10 बार इसी तरह doudoge.mujhe यकीं है तुम मुझसे भी तेज़ दौड़ सकते ho.chalo फिर हम दोनों दौड़ते हुए उसी दूसरे छोर पर चलते hain.wahin पर तुम्हारी आगे की प्रशिक्षण hogi.bina देरी के हम दोनों ने दौड़ लगा di.mujhe तोह ऐसा लग रहा था जैसे मई उड़ रहा हूँ. अक्षांत पहले पहुंचे, उसके कुछ पल बाद मई भी पहुँच गया.

अक्षांत- बोहोत अचे विक्रम. लेकिन तेज़ी सिर्फ दौड़ने में hi नहीं होती युद्ध में भी होती hai.koi भी शास्त्र तुम्हारे हाथ में हो, तुम्हारी ताकत और तेज़ी उससे खतरनाक बनती है..

अक्षांत ने अपने हाथ आगे किये, तोह सामने ज़मीं पर कुछ भाले के आकर के वेपन्स आ गए. अक्षांत ने एक भला उठाया और वहीँ दूर में पड़े एक चट्टान के ऊपर फेक diya.DHADAMMMMMMM.....ek ज़ोर के आवाज़ के साथ चटान के टुकड़े टुकड़े हो gaye.mai तोह साला हिल गया इतनी ताकत देखकर.

अक्षांत- अब तुम कोशिश karo.aur ध्यान रहे तुम्हारे पुरे शरीर ki,aatma की शक्ति तुम्हे अपनी भुजाओ में लानी है उसके बाद प्रहार karo.aur एक baat,apni ताकत पर भरोसा karo.koi संकोच nahi,jitni प्रबल तुम्हारी आत्मा की ीचा होगी, उतनी hi तुम्हारे भुजाओं में ताकत आएगी...

मैंने भी एक भला उठाया ,अपने मन को शांत kiya,aur भाले को एक चट्टान की तरफ फेक diya.bhala उस चट्टान से टकराया और गिर gaya.chattan टूटा तोह nahi,par हाँ उसमे दरार ज़रूर आ गयी.

अक्षांत- बोहोत ache.pehli बार में hi तुम्हारे प्रहार में शक्ति thi.par इतने से कुछ नहीं होगा विक्रम. तुम्हे बोहोत कुछ सीखना है और वक़्त काम hai.fir कोशिश करो.

पुत्र अपने हृदय को अपने मस्तिष्क से जोड़ो, मई अभी भला उठाने hi वाला था की गुरूजी की आवाज़ मेरे दिमाग में गुंजी.

मैंने भला उठाया, अपनी आँखें बंद और अपने मन ko,dimag jo.khula छोड़ diya.mujhe ऐसा लगा जैसे मेरे अंदर कुछ जुड़ रहा hai.asim शक्ति का एहसास हुआ मुझे अपने andar.maine आंखें खोली, भाले पर अपनी पकड़ सख्त की और पूरी ताकत से भाले को चट्टान के ऊपर फेक दिया.

BOOOOOOMMMMMMM......ek ज़ोरदार धमाका hua.....aur वो चट्टान चूर चूर हो गया.

अक्षांत- adhbhut.waah मज़ा आ gaya.maine आज तक किसीको इतनी जल्दी इतना सब सीखते नहीं देखा. देखना एक दिन तुम्हारा नाम पुरे ब्रम्हांड jaanega.mujhe बोहोत गर्व महसूस हो रहा है की मई तुम्हारा गुरु hun....chalo मैंने सोचा था पहला दिन कुछ हल्का hi sikhaunga,par अब नहीं, ये सब अभ्यास तुम्हारे लिए नहीं hain.ab मई भी देखना चाहता हूँ की तुम्हारे ताकत की हद क्या है.

अक्षांत ने मेरा हाथ पकड़ा और हम गायब होकर उस पहाड़ के बीच में आ गए जहाँ काफी घाना जंगे था.

AKSHAANT-Aaj बाकी का अभ्यास हम यहीं करेंगे. अक्षांत ने आँख बंदकर कुछ कहा और अपने हाथ फैला दिए और अगले hi पल वहां का माहौल hi बदल गया....................

वहीँ दूसरी तरफ.....

दिग्विजय और धनुर एक खली मैदान में खड़े the.is मैदान का कोई अंत नहीं दिख रहा था. दिग्विजय तोह बस इधर उधर देख रहा था.....

धनुर- ये िल्लुसिओं वर्ल्ड hai.(bhram की दुनिया)

यहाँ जो कुछ भी होता है उससे असली दुनिया में कोई फर्क नहीं padta.chalo शुरू करते हैं.

धनुर ने अपना हाथ आगे किये, तुरंत सामने एक बोहोत बड़ी दीवाल बन gayi........is दीवाल की लम्बाई और चौड़ाई कमसे काम 500 फ़ीट की होगी.

तीर प्रकटम..... धनुर के ऐसा बोलते उसके हाथों में तीर आ गया.

शास्त्र YAMAKAM.........aise बोलते hi वो तीर डबल हो गए.

धनुर- किसी भी शाश्त्र का उपयोग करने के लिए उस शहस्त्रा को अपनी शरीर की ऊर्जा से जोड़ो. धनुर ने तीर को अपने मष्तिष्क से लगाया और कहा.....

पूर्वापरी BHAVATI......DHANUR के इस मंत्र को बोलते hi वो तीर चमकने लगा. धनुर ने अपना धनुष nikala,teer चढ़ाया और सामने दीवाल की तरफ छोड़ diya.teer के धनुष से निकलते hi एक तेज़ गड़गड़ाहट हुई, और जैसे hi तीर दीवाल से टकराई एक भयंकर ब्लास्ट हुआ और वो दीवाल पूरी मिटटी हो गयी.

दिग्विजय तोह फ्रीज हो गया ये देखकर........

धनुर- उस दीवाल के देहने का कारण तीर नहीं है, मेरा शक्ति श्रोत है, मेरे अंदर की ऊर्जा है जो किसी भी शाश्त्र को शक्ति देती है. तुम्हे आज से इसी मंत्र का उच्चारण करते हुए अपने शाश्त्रो के साथ अभ्यास करना hai.tumhe जो भी चाहिए होगा ,तुम्हारे बोलने मात्र से तुम्हारे सामने उपस्थित हो jayega.jis दिन तुम अपने अंदर के ऊर्जा को सही शक्ति डोज और उस शक्ति को अपने शाश्त्रो से जोड़ने में कामियाब hoge,tumahre प्रशिक्षण का पहला चरण पूरा hoga.ab मई चलता हूँ, जब भी मेरी आवश्यकता ho,mujhe आवाज़ dena,mai आ जाऊंगा.

ये बोलके धनुर गायब हो gaya.aur दिग्विजय लग गया अपने प्रैक्टिस में.....

वहीँ दूर एक अज्ञात गृह में........

एक ज़ोर का धमाका हुआ और उस धमाके की रौशनी के बीच से एक काला साया बहार aaya.ye साया और कोई नहीं ास्मोडियस था और इस गृह का hi नाम था थे क्रॉस वर्ल्ड....

ास्मोडियस धीरे धीरे चलते हुए एक गुफा के अंदर जा रहा tha.us गुफा में से रौशनी आ रही थी और कुछ लोगों के गाने की आवाज़ भी.... ास्मोडियस उस गुफा के अंदर चला gaya.andar 7 लोग जो सर से लेकर पाऊँ तक काले कपड़ो में ढके हुए the,wo गोला बनाकर बैठे हुए थे और कुछ गए रहे the.un सातों के बीच में एक क्यूब रखा हुआ था जिसमे से रौशनी आ रही थी जो पुरे गुफा को रोशन करे हुए थी.

ास्मोडियस चलते हुए उनके बीच में से क्यूब के पास पहुँच गया. उन सातों ने जब ास्मोडियस को देखा तोह उसके कदमो में झुक गए...

ास्मोडियस- खड़े हो जाओ मेरे "ब्लैक अपोस्टल्स".....

दोस्तों ये सातों है ास्मोडियस के ब्लैक APOSTLES....jo नजाने कितनी सदियों से इस गृह पर रहकर उस क्यूब की रक्षा करते हैं. ये सातों एक चैन में बैठ कर ब्लैक मैजिक का गाना गाते रहते hain.is गाने से पुरे ब्रम्हांड की बुराई निकल कर ास्मोडियस के अंदर समाती रहती hai.issi वजह से ास्मोडियस की ताकत हर पल बढ़ती जाती है.

ास्मोडियस- अपोस्टल्स, तुम सभी इस गृह के हर तरफ फैले जाओ और इस गृह को इनविजिबल कर do.koi भी एंजेल न देख पाए की ये प्लेनेट कहा है और यहाँ क्या हो रहा है.

सारे अपोस्टल्स सर झुककर बहार निकल गए. ास्मोडियस ने गुफा को बंद कर दिया और उस क्यूब के सामने ध्यान में बैठ गया.......

दोस्तों, आज के लिए इतना HI

आपका अपना V.J...........

 
अब तक आपने पढ़ा की एक तरफ विक्रम की और दुरसी तरफ दिग्विजय की ट्रेनिंग शुरू हो चुकी HAI.VIKRAM हर चीज़ जल्दी से सिख रहा HAI.WAHIN दूसरी तरफ ास्मोडियस क्रॉस वर्ल्ड में पहुँच गया है और ध्यान में बैठ चूका है.

अब आगे.........

CHAPTER 1

( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त एंड थे हौली स्पिरिट )

अपडेट - 18

मई सोच रहा था की क्या मैजिक की दुनिया में कोई दायरा कोई सीमा है भी या nahi.kyunki मेरे सामने का नज़ारा hi कुछ ऐसा था. जहाँ अभी बस 1 मिनट पहले हरा भरा घाना जंगल था , अब वहां एक बड़ा विशाल मैदान tha.par उससे भी अजीब ये था की ये मैदान पुरे पहाड़ से कमसे काम 10 गुना बड़ा दिख रहा था और ऊपर आसमान भी नीला न होक सप्तरंगी tha.mai बस इधर उधर देख रहा था.

अक्षांत- ज़्यादा चौंको मत विक्रम. ये सब काल्पनिक है. ये पूरी जगह मेरे दिमाग की उपज है .अब यहाँ हम कुछ भी karen,koi फर्क नहीं padega.ab तुम्हारा प्रशिक्षण और कठिन होने वाला hai.ho सकता है इससे तुम्हे चोट pahunche,tumhe पीड़ा भी हो.

क्या तुम तैयार हो!!!!

मई- बिलकुल. मैंने ये बोहोत एक्ससिटेड होकर बोलै था जिससे देखकर अक्षांत के चेहरे पर एक स्माइल आ गयी.

अक्षांत- ठीक है fir.ye बताओ इस मैदान में तुम्हे क्या दिख रहा है!!!

मई- कुछ जगह सीमेंट की बानी hai,aur कुछ जगह रथ ki.par रेट और सीमेंट बार बार अपनी जगह बदल रहे hain.aur ये maidan,wastavik जगह से भी बड़ा है.

अक्षांत- hmm,aur कुछ.

मैंने एक बार ध्यान से हर तरफ dekha.arre ये क्या, जब भी रथ और सीमेंट अपनी जगह बदल रही है, ज़मीं के अंदर से कुछ हल्का सा बहार निकल रहा hai.maine ये बात अक्षांत को बताई.

AKSHAANT-hmm.is मैदान को "मतिभ्रम" मैदान कहते है.10000 वीरों मेसे 10 hi ऐसे होते है जो इस चुनौती को पार कर पाते हैं.

जो हल्का सा बहार निकल रहा है, वो एक रूपांतरण यन्त्र hai.wahi रेट और सीमेंट की जगह बदल रहा hai.sirf इतना hi नहीं, अगर रेट और सीमेंट के जगह बदलने के वक़्त कोई उसके ऊपर से गुज़रे तोह ये यंत्र किसी भी चीज़ का आकर ले सकती है, जो गुजरने वाले की जान भी ले सकता है.

तुम्हारी चुनौती ये है की इस मैदान में जितने भी रथ और सीमेंट वाली जगह दिख रहे hain,tumhe उनके ऊपर से होते हुए यहाँ आना है.

मई- बस, ये तोह आसान है.

अक्षांत- मुस्कुराते हुए, देखते हैं, तुम्हे दो बातों का ख्याल रखना है. पहला, जब तुम रेट के ऊपर से गुज़रो, तोह तुम्हे अपना वज़न हल्का रखना है, वर्ण रेट तुम्हे अपने अंदर खींच legi,aur जब सीमेंट के ऊपर से गुज़रो, तोह अपना वज़न बढाकर सीमेंट पे दाल कर niklo.warna सीमेंट भी तुम्हे अपने अंदर खींच legi.apne आप को हल्का करने के लिए तुम्हे अपनी इन्द्रियों को काबू कर अपने पेअर के सारे वज़न को अपने ऊपरी शरीर में डालना होगा और ज़्यादा करने के लिए अपने रक्त प्रवाह को 1000 गुना तक बढ़ाना होगा जिससे तुम्हारे शरीर के हर हिस्से में भार pade,ye भी तुम अपनी इच्छा शक्ति से hi कर paoge.apne दिमाग को पूरी तरह शांत rakhna,aur हाँ सबसे महत्वपूर्ण बात, अगर तुम्हारे रथ और सीमेंट के ऊपर से निकलते वक़्त, उनकी जगह badle,toh सावधान rehna.kyunki फिर तुम्हारा सामना रूपांतरण यन्त्र से hoga,aur वो किसका रूप धारण कर तुमसे लाडे, ये सिर्फ वही जानता है.

अब मेरी phati.saala ये तोह पक्का था की ऐसे hi तोह ये मई पार नहीं कर paunga.par सुबह के मेरे प्रशिक्षण से मुझे कुछ हौसला था.

मई- ठीक है गुरूजी... मई तैयार hun.par एक बात बताइये, इस प्रशिक्षण का अंत कैसे होगा.

अक्षांत- दो तरीके hain.pehla, बिना किसी रुकावट के तुम्हे इन सब के ऊपर से कुल 5 चक्कर लगाने hain.aur दूसरा, अगर तुम्हारा सामना किसी भी रूपांतरण यन्त्र से हुआ, तोह बस एक बार उससे हराना hai.ye कर लो और आज का प्रशिक्षण समाप्त...

लम्बी सांस छोड़ते हुए, मई- ठीक है गुरूजी, मई तैयार हूँ. मैंने चारो तरफ देखा, और दौड़ लगा दी.....

वहीँ दूसरी तरफ...........

दिग्विजय खड़ा सोच रहा था की शुरुआत कैसे करे!!!!

दिग्विजय- मई भी धनुष बाण से शुरू करता हूँ.

धनुष तीर प्रकटम.

और सामे एक धनुष और तीर आ गया. दिग्विजय ने प्रत्यंचा chadaya,diwal की तरफ देखा और kaha,SHASHTRA यमकम, पर कुछ नहीं hua.teer अभी भी सिंगल hi tha.par दिग्विजय ने ज़्यादा सोचा nahi,apni आँखें बंद की और धनुर द्वारा बोलै गया मंत्र दोहराया, पूर्वापरी भवति.... तीर चमका पर बोहोत हल्का सा. दिग्विजय ने तीर दीवाल की और कर छोड़ diya.teer जाकर दीवाल के बीच में टकराया और गिर gaya.deewar वैसी hi कड़ी थी.

दिग्विजय- साला, ये तोह कुछ भी नहीं hua.ab क्या करूँ, हाँ, कोई दूसरा शाश्त्र तरय करता hun...GADA PRAKATAM.....aur दिग्विजय के हाथ में गदा आ गया.

अब देखता हूँ, ये दीवाल कैसे नहीं टूटती......!!!!!!

और फिर दिग्विजय लग गया अपना शक्ति प्रदर्शन करने में. पूर्वापरी भवति, गदा हल्का सा hi chamka,DIGVIJAY ने पूरी ताकत के साथ गदा दीवाल की तरफ फेक दिया, गदा दीवाल से टकराया, पर उससे कुछ फर्क नहीं pada.ab दिग्विजय को फ़्रस्ट्रेटीओं होने lagi.fir क्या था, सारे शास्त्र तरय कर डाले. शूल, फरसा, चन्द्रहास, वज्रा, और नजाने क्या kya.par दीवाल को कोई फर्क नहीं पड़ा. दिग्विजय फ़्रस्ट्राटे होकर वहीँ बैठ गया सुर धनुर को याद kiya.turant वहां धनुर प्रकट हुए.

धनुर- क्या हुआ balak.itne में hi हार मान gaye.mujhe नहीं लगता तुमसे कुछ हो पायेगा, तुम्हे अपने घर लौट जाना चाहिए.

दिग्विजय- ये तोह हो नहीं sakta.mai बिना सीखे कहीं नहीं जा रहा.

धनुर- तोह फिर बैठ क्यों गए.

दिग्विजय- तोह और क्या karun.kabse कोशिश कर रहा हूँ, पर कुछ हो hi नहीं रहा.

धनुर- तोह निराश होकर बैठ जाओगे!!! तुम्हे क्या लगा, यहाँ कोई द्रव मिलेगा जो तुम पीकर शक्तिशाली बन jaoge.kadi मेहनत करनी padegi.sabse पहले तोह ये भ्रम मिटादो की तुम्हे कुछ भी आता hai.apne मन को खली kardo.yaad रहे एक खली क्षार( गिलास) को hi भरा जा सकता है, भरे हुए को nahi...mantra तब काम नहीं करते जब हम उनका उच्चारण करते hain,balki तब काम करते हैं जब हमारा पूरा शरीर हमारी आत्मा उस मंत्र का आवाहन करती hai.apne पुरे शरीर की अपनी आत्मा की ताकत को अपने मंत्र में दाल दी, और फिर मंत्र का उच्चारण करो.

दिग्विजय- धन्यवाद guruvar.ab मई ऐसा hi karunga.fir दिग्विजय ने अपने दोनों हाथ जोड़े, अपने दिमाग को शांत kiya,apna एक हाथ आगे किया.... धनुष तीर प्रकटम...... धनुष में तीर chadhaya,SHASHTRA YAMAKAM.is बार तीर दो hogaye.DIGVIJAY ने तीर अपने माथे से लगाया, पूर्वापरी BHAVATI....Is बार तीर थोड़ा तेज़ चमकने लगा, 

दिग्विजय ने तीर दीवाल की तरफ छोड़ diya.teer के दीवाल पे लगते hi एक ज़ोर की आवाज़ हुई.

दीवाल टूटी तोह नहीं पर उसमे दादर पद गयी.

धनुर- अत्ति उत्तम putr.bas इसी तरह अभ्यास करते रहो जब तक ये दीवाल टूट नहीं jaati.aur धनुर गायब हो गए

एक बात बता dun,diwar पर दरार नहीं डालनी थी, पूरा तोडना tha.isiliye हर प्रहार के बाद अगर दिवार को कुछ नुक्सान भी होता तोह वो फिर से ठीक हो जाती.

पर अब दिग्विजय में भी कॉन्फिडेंस आ गया tha.pure जोश से वो लग गया अपना टारगेट पूरा करने में

बैक तो हीरो.......

मैंने एक लम्बी सांस ली और पूरी ताकत से दौड़ लगा di.meri स्पीड काफी तेज़ thi.sabse पहले मेरा सामना रेट से हुआ पर मई ये भूल गया की मुझे अपना वज़न काम करना है और जैसे hi मेरा पेअर रेट में gaya,.....................mai सीधा अंदर, और मई गिरता hi चला गया..... धूब्बब्ब......

अह्हह्ह्ह्ह....... मैंने आँखें खोली तोह देखा मई अक्षांत जी के सामने गिरा पड़ा था.

मई- मई तोह रेट के अंदर घुस गया tha....mai यहाँ कैसे पहुंचा......

अक्षांत- जब भी तुम रेट या सीमेंट में समां जाओगे वो तुम्हे अपने अंदर खींच कर वापस यही शुरुआत में गिरा देंगी.....

अब ये एक नयी musibat.matlab जितने बार भी मई ये मैदान पार कर लूँ, अगर एक बार भी मई कहीं फसा तोह फिरसे शुरुआत करनी padegi....saala कौन कहता है, I.A.S क्लियर करना सबसे मुश्किल hai.saalon ये तरय करके dekho,pata chalega.ab ऐसे वाहियाद तर्क से कोई मतलब तोह निकलना नहीं था, तोह मई लग गया अपनी ट्रेनिंग में.

इस बार मैंने सीमेंट की तरफ से जाने की सोची, और लगा दी doud.is बार मुझे याद था की मुझे अपना वज़न बढ़ाना hai.maine अपने दिमाग को अपने शरीर के ऊर्जा से जोड़ना शुरू kiya,par ये सब बोहोत hi ज़्यादा मुश्किल tha.ek तोह तेज़ दौड़ना और उसपे दिमाग पे नियंत्रण कर अपना वज़न घटना और badhana,aur इन सब के लिए मेरे पास बस 1 या दो सेकंड का hi वक़्त था....

जब मई सीमेंट के करीब पहुंचा तोह मुझे लगा की मेरा शरीर भरी हो रहा hai.mai सीमेंट के ऊपर से होते हुए आगे निकल gaya.meri ख़ुशी का ठिकाना नहीं tha.abhi मई कुछ और सोचता की धाममममममम.

मैंने आँखें खोली तोह मई अक्षांतजी के सामने गिरा पड़ा था.

अक्षांत- बोहोत अचे vikram.tum अपना वज़न बढ़ने में कामियाब रहे. पर तुम ये भूल गए की जिस रफ़्तार से तुम दौड़ रहे हो तुम्हे मुश्किल से 1 पल लगेगा रेट के ऊपर से गुजरने me,natija, तुम अपना वज़न काम नहीं कर पाए और रेट के अंदर समां गए...... यही तुम्हारी परीक्षा है VIKRAM...vijeta वो नहीं होता जिसमे अधिक शक्ति होती है, विजेता वो होता है जिसमे अपनी शक्ति का उचुत इस्तेमाल करने का दिमाग और हुनर होता है.

यहाँ तुम्हे जितने चाहो उतने मौके मिलेंगे अपनी गलती को सुधरने के, पर असली युद्ध में सिर्फ ek.shatru तुम्हारे सुविधा के हिसाब से तुमपे आक्रमण नहीं karega.isiliye तुम्हे हर तरह की चुनौती के लिए तैयार रहना chahiye.ab उठो, जितना गिरना पड़े giro.giro,fir उठो, गिरो ,फिर utho,aur तब तक उठो जब तक तुम्हारा लक्ष्य पूरा नहीं हो jaata.Khud पर भरोसा rakho,aur अपना लक्ष्य पूरा करो.

अब मैंने भी ठान लिया था, की चाहे जितना वक़्त लगे, जब तक ये टास्क पूरा नहीं करूँगा, चैन से नहीं बैठूंगा...

फिर क्या था, मई उठा, और लग गया doudne.pehle 10,12 बार तक का गिरना मुझे याद रहा पर फिर मैंने गिनना छोड़ diya.mai लगभग 3 घंटे से दौड़ रहा था, पर अभी तक एक चक्कर भी पूरा नहीं कर पाया tha.halki हलकी थकन भी अब मुझे लगने लगी thi....par मई लगा हुआ tha...aise hi एक बार फिर रथ में फसकर मई अक्षांतजी के सामने gira.mai उठकर फिर दौड़ने hi वाला था की....

अक्षांत- रुको विक्रम......

विक्रम- जी गुरूजी......

अक्षांत- पहले भोजन कर lo..fir प्रयास करना.....

मई- एक दो बार और कोशिश कर लेता हूँ गुरूजी

अक्षांत- विवेक से काम लो VIKRAM.khali पेट तुम एकाग्र नहीं रह पाओगे......

सुबह से लगा हुआ tha,Ab भूक तोह मुझे भी लगी thi........MAI- जैसा आप कहें गुरूजी. फिर हमने लंच किया और मई लग गया अपनी ट्रेनिंग me...mai दिन भर लगा raha.ek बार तोह पूरा चक्कर भी बिना कहीं फसे पूरा भी कर लिया था पर फिर दूसरे राउंड में सीमेंट में फास गया और वापस स्टार्टिंग लाइन pe...ab शाम ढल चुकी thi,par मई सब कुछ भूल कर लगा हुआ था.

अक्षांत- रूक जाओ VIKRAM......aaj के लिए इतना काफी hai.kal दोबारा प्रयास करना.

मई- पर गुरूजी, अभी तक मई सफल नहीं हुआ हूँ.

अक्षांत- जानता हूँ विक्रम. पर मैंने ये तोह नहीं कहा था की ये विनियोग ( टास्क ) तुम्हे आज hi पूरा करना है. कल तारो ताज़ा होकर फिर से प्रयत्न karna.waise भी तुम कहो या न कहो, साफ़ दिख रहा है की तुम काफी थक चुके ho.sharir और मस्तिष्क दोनों को आराम देना भी अति आवश्यक है..

मई- ठीक है गुरूजी. जैसा आप कहें....

वैसे गुरूजी की बात सच थी, ज़िन्दगी में पहली बार मई थका हुआ tha,wo भी बुरी तरीके से....

अक्षांतजी ने कुछ मंत्र padhe.wo जगह फिरसे जंगल में बदल gayi.AKSHAANTJI आगे चल दिए...

मई भी गुरूजी के पीछे पीछे चल diya.....par मई काफी उदास tha.ye पहली बार था जब मई कोई टास्क में फ़ैल हुआ tha.....ye बात अक्षांतजी ने शायद नोटिस कर ली....

अक्षांत- विक्रम, एक बात याद रखना. ज़िन्दगी में जीतना जितना आवश्यक है, हारना भी उतना hi महत्वपूर्ण hai...agar तुम हारोगे नहीं तोह खुदको अजय मानने lagoge.aur निश्चित hi एक न एक दिन बोहोत बुरी तरह हारोगे जो तुम्हारे मनोबल को पूरी तरह तोड़ dega.haarne से हमारे अंदर की उदारता जीवित रहती hai.parajay हमे और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता hai.isiliye निराश न ho.isse हार नहीं एक और मौका समझो पुनः जीतने ka.waise एक बात bataun,shayad तुम्हारा मनोबल तुरंत hi लौट आये...

मई- कौन सी बात गुरुदेव?

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अक्षांत- तुमने आज मैदान का एक चक्कर सफलतापूर्वक पूरा किया है. मुझे ये करने में 6 महीने लगे थे.

मई- क्या!!!! नहीं guruji.bas आप मुझे खुश करने के किये ये कह रहे हैं....

अक्षांत- नहीं विक्रम. प्रशिक्षण के मामले में मई कभी झूठ नहीं बोलता.

सच में ये बात सुनके मई बोहोत खुश हो gaya.mai और अक्षांतजी फिर पहाड़ी की छोटी की तरफ चल दिए.....

शाम ढल रही thi.hamare ऊपर पहुँचने तक अँधेरा हो चूका tha.tents के सामने hi शैला आग जलाकर बैठी हुई thi.gurudev कहीं नज़र नहीं आ रहे the....hum शैला के पास जा कर बैठ gaye.....meri हालत पूरी पतली हो गयी thi.mujhse तोह बैठा भी नहीं जा रहा था. शैला को मेरी हालत देखकर हसी आ गयी.....

शैला- वाह, क्या लग रहे हो VIKRAM.......ekdum तारो ताज़ा..

मई- ऐसा लग रहा है जैसे 7 जन्मो का काम एक दिन में कर दिया है मैंने..

मेरी इस बात पे शैला और अक्षांत दोनों hi है दिए.

अक्षांत- विक्रम तुम जाकर कुछ देर आराम karo.mai भोजन तुम्हारे पटवास में hi ले आता हूँ.

मई- थैंक यू guruji.....mai जैसे तैसे उठकर अपने टेंट में पहुंचा और फ्लैट हो गया.

SHAILA-toh, कैसा रहा फिर आज का प्रशिक्षण..!!!!

अक्षांत- बोहोत ाचा...

शैला- क्या करवाया फिर आज....

अक्षांत- मतिभ्रम वसुमती.....

अक्षांत के ऐसा बोलते hi शैला की ऑंखें फटी की फटी रह गयी....

शैला- क्या!!!! तुम पागल हो गए हो kya.maana की विक्रम थोड़ा अलग है, तेज़ hai,par इसका ये अर्थ तोह नहीं की उससे इतना कठिन कार्य दिया jaaye,wo भी पहले hi दिन. मतिभ्रम वसुमती तोह बल छल प्रशिक्षण का चौथा स्तर (लेवल) hai.wahan तक पहुँचने के लिए hi तुम्हे 5 वर्ष लग गए the.aur पार करने में 3 वर्ष.4 बार तोह तुम्हारी जान जाते जाते बची थी और तुम पहले hi दिन उससे ......

अक्षांत- शांत शैला शांत. मुझे पता है बल छल क्या चीज़ hai.par तुम hi बताओ, हमारे पास चारा hi क्या hai.mere पास सिर्फ एक हफ्ता है उससे निपुण बनाने के लिए. और बात सिर्फ इतनी hi नहीं है, पता नहीं मुझे ऐसा लगता है जैसे विक्रम ये नामुमकिन कार्य भी कर lega.uski ऊर्जा मैंने महसूस की है शैला, और यकीं मानो मैंने ऐसा पहले कभी महसूस नहीं kiya.pata है विक्रम ने मैदान का एक चक्कर पूरा भी कर लिया.

शैला- adbhut.......ye तोह कमल हो गया.

अक्षांत- haan.aur मुझे लगता है विक्रम इस चुनौती को भी पार लेगा.

शैला- क्या उसका मुकाबला रूपांतरण यन्त्र से हुआ?

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अक्षांत- nahi,abhi nahi.tumhe तोह पता है रूपांतरण यन्त्र कैसे काम करता hai.par मुझे लगता है कल मुकाबला ज़रूर होगा.....

शैला- मई भी कल चलूंगी तुम दोनों के साथ....

अक्षांत- ठीक है. तुम baitho.mai विक्रम को भोजन देकर आया.

अक्षांत ने मुझे आकर jagaya.uske हाथ में खाना tha.mera बदन बोहोत दुःख रहा tha.mai जैसे तैसे उठा और भोजन किया, और वापस लेट gaya.abhi मुझे लेते कुछ hi देर हुए था की गुरुदेव अंदर आये.

वहीँ दूसरी तरफ:-

दिग्विजय को अभ्यास करते हुए पुरे 3 दिन हो गए the....ek बात बताना तोह मई भूल hi गया, मिरर वर्ल्ड में न भूक लगती है, न प्यास इसीलिए दिग्विजय भी नहीं थका tha.wo बस लगातार उस दीवाल को भेदने की कोशिश करता रहा और काफी हद तक कामियाब भी हुआ tha.uske कुछ वार से वो दीवाल कई बार आधी से ज़्यादा टूटी thi,par फिरसे जुड़ जाती थी.....

दिग्विजय- साला ये दीवाल भी अम्बुजा सीमेंट से तोह नहीं बना hai,toottha hi nahi....abhi दिग्विजय कोई और प्रयास करता की वहां धनुर प्रकट हुए.....

धनुर को देखकर दिग्विजय ने उन्हें नमन किया.

धनुर- अत्ति उत्तम putra.tumhara prayas,tumhari दृढ़ता सराहनीय है.

दिग्विजय- किन्तु guruwar,abhi तक मई सफल नहीं हुआ हूँ.

धनुर- पर तुमने हार नहीं maani.yahi एक महँ योद्धा की निशानी hai.tumhe पता है तुमसे गलती कहाँ हो रही है!!!

दिग्विजय- नहीं गुरुवार....

धनुर- तुम वार तोह पुरे मन से कर रहे ho,kintu तुम्हारे शाश्त्रो में से ऊर्जा काम निकल रही रही hai.koi भी प्रहार करने से पहले अपने शाश्त्र को अपनी ताकत do.aisa समझो की तुम उस दीवाल पे कोई शाश्त्र से नहीं बल्कि अपने शरीर से वार कर रहे ho.ab पुनः प्रयास करो.......

दिग्विजय ने फिरसे तीर धनुष का आवाहन किया.

तीर को अपने माथे में रख कर कहा शाश्त्र YAMAKAM.teer के डबल होते hi दिग्विजय ने अपनी आँखें बंद की और अपने पुरे शरीर की ऊर्जा अपने हाथों को देने लगा.

पूर्वापरी भवति.
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मंत्र के साथ तीर दीवाल की तरफ तीव्र गति से बढ़ गया और बोओओओओओमममममम............

एक ज़ोर का धमाका hua,aur पूरा दीवाल नष्ट हो गया.

धनुर- अत्ति उत्तम पुत्र.......

तुमने अपने शिक्षा का पहला चरण पूरा kiya.dusra चरण आरम्भ करें.

दिग्विजय- जी गुरुवार......

धनुर- अस्त्र और शाश्त्र में क्या फर्क है....

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दिग्विजय- शास्त्र वो हथियार है जो हम अपने हाथों से चलते hain.astra को हम मन्त्रों की शक्ति से इस्तेमाल करते हैं...

धनुर- अत्ति uttam.aur ऐसे कौन से अस्त्र हैं जो अत्ति शक्तिशाली hain.hum उन्हें हर रोज़ देखते भी हैं पर उनकी शक्ति को महसूस नहीं कर पाते.

दिग्विजय- शमा करें guruwar.mujhe नहीं पता......

धनुर- धरती और aakash......inse ज़्यादा शक्ति हमें कोई नहीं दे sakta.yahi है तुम्हारे प्रशिक्षण का दूसरा charan.tumhe किसी भी शाश्त्र का इस्तेमाल करते वक़्त उससे धरती या आकाश के शक्ति के साथ जोड़कर प्रहार करना सीखना hai.is विद्या से तुम्हारे वार को रोकना लगभग असंभव हो jayega.kintu याद रहे जितनी प्रबल तुम्हारी ीचा शक्ति होगी उतनी hi शक्ति तुम धरती से या आकाश से ले सकते हो.

धरती से शक्ति लेने के लिए तुम्हे " धरतीयम निरवधायती" इस मंत्र का आवाहन करना है......

और आकाश से शक्ति लेने के लिए " गगनम निरवधायती" इस मंत्र का आवाहन करना है.......

चलो पहले ध्यान अवस्ता में बैठ कर इन दोनों मंत्रो का आवाहन karo.jab तुम्हे लगे की तुम इनका इस्तेमाल अब अपने शास्त्रों के साथ कर सकते हो तब अभ्यास आरम्भ करना....

दिग्विजय भी धनुर का आशीर्वाद लेकर बैठ गया ध्यान लगाने.........

बैक तो हीरो:-

अभी मुझे लेते कुछ hi वक़्त हुआ था की गुरुदेव अंदर aaye.......unke हाथ में कुछ था.

मई- नमस्कार गुरुदेव....

बाबा विशाखत- चिरंजीवी भाव.......

ये लो putra.isse पी jao.tumhari साड़ी थकावट दूर हो जाएगी.

मई बिना कोई सवाल पूछे गुरुदेव जो ड्रिंक जैसा कुछ लाये थे, पी गया...

बाबा विशाखत- कुछ hi देर में तुम हल्का महसूस karoge.putra तुमने आज बोहोत ाचा अभ्यास kiya.mai तुमसे बोहोत प्रस्सन हूँ इसीलिए तुम्हे कुछ देना चाहता हूँ..

मई- क्या गुरुदेव?

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?

गुरुदेव ने अपना दाया हाथ आगे किया. एक बुक प्रकट हुआ.

बाबा विशाखत- ये लो putr.ye किताब rakho.bhavishya में ये तुम्हारे बोहोत काम aayegi.ab तुम आराम karo.meri बिना कोई बात सुने गुरुदेव बहार चले गए..

बुक काफी मोती थी और बड़ी bhi.maine बुक के ऊपर नज़र डाली जहाँ उसका नाम लिखा था

"शास्त्र" (सुपरगुप्त)........

"वेपन्स" (वैरी सीक्रेट).......

दोस्तों, आज के लिए इतना HI.......

आपका अपना V.J............

 
अब तक आपने पढ़ा की विक्रम ने अपने ट्रेनिंग का दूसरा चरण स्टार्ट कर दिया HAI,WAHIN दिग्विजय ने भी अपना पहला टास्क पूरा कर लिया HAI.BABA विशाखत रात को विक्रम के कमरे में आते हैं और उससे एक किताब देते हैं जिसका नाम है शाश्त्र सुपरगुप्त....

अब आगे........

CHAPTER -1

( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट )

अपडेट- 19

मई वापस स्टार्टिंग लाइन पे गिरा हुआ tha.mere सामने अक्षांतजी और शैला खड़े the.ek तरफ जहाँ अक्षांतजी के चेहरे पे मुस्कराहट थी वहीँ दूसरी तरफ शैला के चेहरे पे अविश्वास और प्रशंशा के भाव थे और होते भी क्यों ना आज मैंने पुरे मैदान के दो चक्कर सफलतापूर्वक पार जो कर लिए the.abhi मेरी ट्रेनिंग को स्टार्ट हुए सिर्फ एक घंटा hi हुआ था और मैंने ये कर दिखाया tha.yahi नहीं आज सुबह की शुरुआत भी मेरी अछि रही थी

आज सुबह:-

गुरुदेव- putra....kal रात जो मैंने तुम्हे द्रव दिया था, अब वो तुम्हे नहीं milega.tum देख hi रहे हो पहली बार कल तुम्हे इतनी थकन और दर्द महसूस hui.ye तोह बस शुरुआत hai,aage और भी कठिनाई आएगी.

मई तोह ये सुनकर hi थोड़ा नर्वस हो गया था की कल रात वाला ड्रिंक फिरसे नहीं milega,kyunki वो ड्रिंक वाकई कमल का tha.usse पीने के कुछ hi मिनटों में मुझे ाचा लगने लगा tha.maine सोचा था की अब कोई टेंशन नहीं hogi,chaahe जितनी भी हार्ड ट्रेनिंग ho,jam के म्हणत करूँगा और रात को वो ड्रिंक पीलूँगा जिससे साड़ी thakan,saara दर्द मिट jaayega.par बाबा ने तोह वो ड्रिंक देने से hi मन कर दिया इसीलिए मई निराश हो गया था.

बाबा विशाखत- मायूस न हो putra.aagar तुम लगातार उस द्रव का सेवन करोगे तोह उसके आदि हो jaoge,jo अछि बात नहीं hai.waise भी ये तोह बस प्रशिक्षण hai,asli युद्ध में तुम्हे विश्राम करने का वक़्त hi नहीं milega,fir कैसे तुम अपनी थकन मिटाओगे और

दर्द सहोगे!!!!

मई- इसका कोई उपाय गुरुदेव!!!

बाबा विशाखत- योग पुत्र yog....yog और ध्यान से न सिर्फ हमारे दिमाग का विकास होता है बल्कि योग हमारे हर दुःख का निवारण भी hai....aaj मई तुम्हे यही सिखाऊंगा......

आज जब तुम ध्यान अवस्था में अपने चित को फिरसे उस रौशनी के करीब ले jao,tab अपने इन्द्रियों को अपने शरीर से जोड़ने की कोशिश karna,isse तुम्हारी कोशिकाओं को मज़बूती milegi.jitna तुम उस रौशनी के समीप rahoge,tumhari आतंरिक शक्ति का विकास hoga.isse तुम अधिक से अधिक परिश्रम बिना किसी थकावट के कर पाओगे और दर्द का एहसास भी काम हो जायेगा.

जैसा गुरुदेव ने कहा था मैंने वैसा hi kiya.jab मेरा ध्यान टुटा तोह मुझे कल के मुकाबले आज अपने अंदर कुछ ज़्यादा hi ताकत और ऊर्जा महसूस हो रही थी और ये मेरे आज सुबह के रनिंग प्रैक्टिस में दिख भी gayi.aaj मई अक्षांतजी के बराबर तेज़ दौड़ रहा tha.ye देखकर अक्षांतजी भी काफी सरप्राइज हो गए the.fir मई और अक्षांतजी निकल पड़े अपने प्रशिक्षण वाली जगह की aur.raaste में हमे शैला दिखी जो अपना अभ्यास कर रही thi.hume जाता देख वो भी हमारे साथ चल पड़ी........

वहां पहुंचकर अक्षांतजी ने कल वाला माहौल बन दिया और मई लग गया अपनी ट्रेनिंग me.kuch देर तक तोह मेरा कल जैसा hi हाल raha,par आज मेरी सोचने समझने और फैसले लेने की शक्ति में भी तेज़ी आयी thi.dekhte hi देखते 1 घंटे में hi मैंने 2 चक्कर सफलता पूर्वक मार लिए पर इसी ख़ुशी में अपना कंसंट्रेशन लेवल खो दिया और DHAAAMMMMMMMM....cement में फस गया और बैक तो स्टार्ट...

बैक तो प्रेजेंट:-

शैला- क्या बात है विक्रम!!! कल जब अक्षांत ने बताया था की तुमने एक चक्कर पूरा कर लिया है तोह मुझे यकीं hi नहीं हुआ tha.par आज तोह तुमने एक नहीं दो दो चक्कर पुरे कर लिए...

अक्षांत- हाँ, पर अपनी एकाग्रता खो di.VIKRAM,utsah अछि बात hai,par उसका भी एक सही वक़्त होता hai.tumhara लक्ष्य 2,3,4 चक्कर नहीं पुरे 5 चक्कर पूरा करना hai.tabhi तुम्हारी जीत hogi.usse पहले उत्साह से भरकर अपनी एकाग्रता खोना सही नहीं है.

मुझे भी अपनी भूल का एहसास हो गया था.

मई- माफ़ करें guruji.ab मई ध्यान दूंगा.

अक्षांत- कोई बात nahi.jao पुनः कोशिश करो.

इसी के साथ मई लग गया firse.wahin शैला बोहोत उत्साहित होकर मुझे देख रही thi.meri स्पीड देखकर वो बार बार शॉक हो जाती थी.

शैला- इसकी गति समय के साथ बढ़ती hi जा रही है.

अक्षांत- haan,mujhe अंदर से आभास हो रहा है की ये एक दिन ब्रम्हांड में सबसे गतिशील होगा.

शैला- sirf,utna hi nahi.muhje लगता है की ये हर विद्या सिखने के काबिल है.

अक्षांत- hmm.,dekhte हैं.

इधर मई पुरे जोश के साथ दौड़े जा रहा था इस बार भी मैंने 2 राउंड्स आराम से पार कर liye.3rd भी कम्पलीट होने hi वाला था की लास्ट रथ के में फास गया.

मैंने अपनी आँखें बंद ki.pura मैदान मुझे दिखने laga.ye भी एक गिफ्ट था जो मुझे ध्यान में बैठने से मिला tha.mai हर जगह को जो पहले से देख चूका hun,usse ध्यान की अवस्था में न सिर्फ देख सकता था बल्कि उस स्थान में कब क्या होता है वो भी समझ सकता tha.abhi मई वही कर रहा था.

ये सब मई स्टार्टिंग पॉइंट पर hi कर रहा tha,jahan अक्षांत और शैला दोनों खड़े the.abhi दोनों कुछ कहते उससे पहले hi मैंने आखें खोल दी और लगा दी daud.maine कहाँ गलती की hai,wo सब मुझे पता चल चूका था...

मेरी गति और भी तेज़ हो चुकी thi.....meri रफ़्तार देख शैला और अक्षांत स्तब्ध रह gaye.abhi दोनों और कुछ समझ paate,usse पहले hi मैंने 4 राउंड्स पार कर लिए थे............ ये मेरा आखरी राउंड tha.akshaant और शैला दोनों की hi आँखों में विस्मय और प्रसन्नता के भाव the.mai अपने टारगेट को पूरा करने के बोहोत hi करीब tha.bas एक सीमेंट ट्रैप और एक रथ ट्रैप उसके बाद मेरा टारगेट पूरा.

इस ख़ुशी में mai,yahan तक की अक्षांत और शैला भी असली प्रॉब्लम भूल चुके थे.

''रूपांतरण यन्त्र''

ये मेरा आखरी हर्डल था. मैंने बड़ी आसानी से सीमेंट ट्रैप पार कर लिया और रथ ट्रैप की और बढ़ा. रथ के ऊपर अपना वज़न काम रख के पार होने hi वाला था की BOOOOOMMMMMM...ek ज़ोर का धमाका हुआ.

धमाका इतना बड़ा था की ऊपर जो काल्पनिक आकाश बना था वो तक हिल गया.....

मई उड़ता हुआ एक सीमेंट ट्रैप के ऊपर में gira.us ट्रैप ने मुझे अपने अंदर खींच लिया और मई वापस स्टार्टिंग पॉइंट me.akshaant और शैला तोह धमाके के बाद जो सामने आया उससे hi फटी आँखों से देख रहे थे.

इधर मुझे काफी चोट आयी thi.mai गिरते hi बेहोश हो गया था पर क्यूंकि मेरे सेल्स काफी एक्टिव हो चुके the,mujhe कुछ hi पलों में होश आ gaya.....maine अपने आप को स्टार्टिंग पॉइंट में देखा तोह मई फिरसे निराश हो gaya.maine आजु बाजू देखा तोह अक्षांत और शैला खड़े the.maine उन्हें आवाज़ दी पर वो तोह एक तक सामने देख रहे the.maine उनकी नज़र का पीछा किया और सामने देखा तोह मेरी हालत उन दोनों से भी खराब हो गयी......

मई- ओह्ह्ह्ह TERIKI.......ye कहाँ से आया!!!

तब मुझे रूपांतरण यन्त्र याद आया.

मई- ये क्या रूप ले लिया isne.isse लड़ना पड़ेगा mujhe..........maine अक्षांत की तरफ देखा तोह पाया की दोनों hi मुझे देख रहे hain...wo भी तरस भरी नज़रों से.....

मई- क्या मुझे इससे लड़ना पड़ेगा?

अक्षांत ने बस हाँ में मुंडी हिलाड़ी....

मई- ये क्या मज़ाक hai.nahi लड़ना मुझे इससे.

अक्षांत- तुम पीछे नहीं हैट सकते VIKRAM.jab तक तुम इससे नहीं ladte,hum इस मायावी दुनिया से बहार नहीं जा सकते.

अब ये क्या बकर है yaar.isse लड़ने के बाद बचूंगा hi कहाँ जो बहार niklunga!!!!ajeeb परेशानी thi.par टेंशन में सिर्फ मई hi नहीं tha.ye दोनों भी थे.

अक्षांत ने भी ये चक्रव्यून तोडा tha.RUPANTARAN यन्त्र का सामना किया tha.par यन्त्र ने आज तक जब भी रूप बदला था तोह किसी सांड का या किसी गेंदे ka,kabhi किसी छोटे दानव का तोह कभी ज़्यादा से ज़्यादा डेविल्स ka.par अभी जो हमारे सामने था ऐसा कभी किसी मतिभ्रम मैदान में नहीं हुआ था.

इस वक़्त हमारे सामने एक 100 फ़ीट से ज़्यादा लम्बा सांप था.
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जिसके फन से लार जैसा कुछ निकल कर गिर रहा tha.jahan जहाँ वो लार गिर रहा था उस जगह से धुंआ निकल रहा था.........

वहीँ दूसरी तरफ:-

2 पहर और बीत चुके थे. पहले पहर में दिग्विजय ने धरतीयम निरवधायती मंत्र का आवाहन किया था और दूसरे पहर में गगनम निरवधायती ka....DIGVIJAY को अपने अंदर धरती और आकाश दोनों की hi शक्तियों का आभास हो रहा tha.jab उससे लगा की अब वो तैयार है तोह उसने अपनी आँखें खोल दी....

दिग्विजय- अब मुझे अपनी शक्ति परखनी chahiye.dekhun तोह ये दोनों मंत्र कितने ताकतवर हैं......

युद्ध VISPRADHA.....DIGVIJAY के ये बोलते hi वहां 10 रानशूर ( वारियर्स ) प्रकट hue.....hathe कथे 6.5 फ़ीट के ranshoor.sabhi के एक हाथ में तलवार और दूसरे में अलग अलग हथियार the.wo सभी दिग्विजय की तरफ बढ़ने lage.DIGVIJAY भी तैयार था.

दिग्विजय ने अपने हाथ आगे kiye.uske हाथ में एक तलवार चमकने lagi.DIGVIJAY ने धरती का आवाहन किया और कहा PRATIGHAATH.........MITTI के रंग की रौशनी निकली और सभी वारियर्स पे padi.ek ज़ोर का ब्लास्ट हुआ और वो रौशनी सभी के शरीर के आर पार हो gayi.sabhi वारियर्स गिर गए.

दिग्विजय की ख़ुशी का ठिकाना नहीं tha.par ये ख़ुशी ज़्यादा देर तक नहीं तिकी क्यूंकि वारियर्स फिरसे खड़े हो गए और इस बार उनकी लम्बाई और ज़्यादा हो gayi.wo सब एक साथ मिलकर दिग्विजय पर आक्रमण करने lage.DIGVIJAY भी काम नहीं tha.uski तलवार अकेले hi सभी वारियर्स के प्रहार को रोक रही thi.par दिग्विजय खुद अटैक नहीं कर प् रहा था.

वारियर्स की स्पीड इतनी ज़्यादा थी की दिग्विजय को वक़्त hi नहीं मिल रहा था अटैक करने का... अचानक वारियर्स की स्पीड और बढ़ gayi.ab दिग्विजय के लिए ये अटैक रोकना मुश्किल हो गया tha.achanak एक वारियर जिसके एक हाथ में गदा था दिग्विजय के पीठ पर laga.DIGVIJAY उड़ते हुए दूर जा गिरा.

दिग्विजय ने जब सामने देखा तोह सभी वारियर्स उसकी तरफ आ रहे थे..

दिग्विजय- साला ये तोह रुकने का नाम hi नहीं ले रहे hain.aisa hi चलता रहा तोह ये सब तोह मेरी चटनी hi बना denge.kya करूँ!!!!!!! haan.......DIGVIJAY ने आकाश का आवाहन किया और कहा PRATIGHATH....DIGVIJAY के हाथों से बिजली निकली और सभी वारियर्स पे padi.bijli सभीके सीने के आर पार हो gayi.sabhi वारियर्स गिर गए.

दिग्विजय- HAAASHHHH...bach gaya.par ये शांति बस कुछ पल के लिए hi thi.sabhi वारियर्स फिरसे खड़े हो gaye.is बार वो सब और लम्बे चौड़े हो गए the.ab दिग्विजय की fati.warrior ने दिग्विजय पर हुम्ला करना शुरू कर दिया tha.is बार वो सब और तेज़ हो गए the.DIGVIJAY उनके हमले संभल नहीं पा रहा था......

AHHHHHHH.ek वारियर ने तलवार चलाई जो सीधे दिग्विजय के दाएं कंधें पर लगी और दिगिजे की चीख निकल gayi....par वारियर्स यहीं पर नहीं रुके और लगातार दिग्विजय पर हमला करते रहे.

कुछ hi देर में दिग्विजय की हालत पतली हो gayi.sharir का ऐसा कोई हिस्सा नहीं बचा था जहाँ उसपे वार नहीं हुआ tha.har जगह से खून निकल रहा tha.DIGVIJAY को अपना अंत सामने दिख रहा tha.itne में एक वारियर ने अपनी तलवार चलाई जिसका निशाना दिग्विजय की गर्दन thi.DIGVIJAY के पास इतनी शक्ति नहीं बची थी की उस वार को रोक paaye.wo चुपचाप पड़ा रहा.

KADKADKADKADDDDDD......ek ज़ोरदार आवाज़ एक साथ बिजली कड़की और सभी वारियर्स पे padi.sabhi वारियर्स राख बन गए.

एक और बार बिजली कड़की और उसके बीच से धनुर निकले और दिग्विजय के सामने खड़े हो gaye.isse आगे दिग्विजय नहीं देख पाया और बेहोश हो गया.........

वहीँ दूसरी तरफ:-

''धवलगढ़''................. याद है की nahi.........arre अपने हीरो की माँ मीनाक्षी जजी का माइका..........

सुबह के 4 बज रहे हैं........

एक आलिशान महल जैसे घर के एक बैडरूम में एक लड़की सोई हुई hai.uske चेहरे पे एक हलकी सी मुस्कराहट है जो कामदेव तक का दिल चुरा le....itni खूबसूरत लड़की जिसकी तारीफ़ के लिए शायद कोई shayri,koi कविता या कोई गीत hi नहीं बानी......

पर ये मुस्कुरा क्यों रही hai.chaliye इसके सपने को भी देख लेते hain.wo लड़की एक खूबसूरत गार्डन में है और बस चली जा रही hai.....achanak उससे कोई पीछे से आवाज़ देता hai.par ये क्या वो लड़की पलट hi नहीं पा रही hai.wo बोहोत कोशिश करती है पर पलट नहीं paati.usse लग रहा था जैसे उससे कोई रोक रहा है पलटने se.itne में एक आवाज़ उसके कानो में पड़ती है.

पुत्री, अभी सही समय नहीं आया है तेरा उससे मिलने का.......

इस आवाज़ के साथ उस लड़की की आँखें खुल जाती hai.......wo उठ के बैठ जाती है.

उस लड़की का नाम है

''अवंतिका''

आज के लिए इतना HI

आपका अपना V.J.............
 
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