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- Dec 5, 2013
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अब तक आपने पढ़ा की विक्रम चारो लड़कियों शेखर और उसके चमचों को सबक सिखाता HAI......WAHIN दिग्विजय सपने में देखता है की विक्रम उसको मार देता HAI......AB आगे.......
CHAPTER - 1
( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट )
अपडेट- 30 :-
वाणी- papa........chillate हुए वाणी सतीश के गले लग कर रोने लगी.......
आज सतीश घर पर hi tha.abhi वो हॉल में बैठा लखन को कुछ समझा hi रहा था की वाणी स्कूल से वापस आयी और सामने hi अपने डैड को देख खुद को कण्ट्रोल नहीं कर पायी...
चिल्लाने की आवाज़ सुनकर अनुकृति जो किचन में thi,wo भी दौड़ते हुए बहार aayi....aur एक रूम जो हॉल के बाजू में hi tha,wahan से निकले गुलशन आहूजा.
अवंतिका और शनाया जो अपने आंसू दबाये हुए the,dadaji को देखते hi उनका कण्ट्रोल ख़त्म हो गया....
दादाजी- क्या हुआ bachon....tum तीनो रो क्यों रहे ho....DADAJI अवनि और शनाया के आंसू देखकर बौखला से गए the.ye पहली बार था जब उनकी पोतियां रो रही thi....same हालत सतीश की भी थी....
अवनि- दादाजी उसने हमें मारा.......
इतना hi काफी था दादाजी का दिमाग घूमने के liye.jinhe आज तक फूलों की तरह उन्होंने पाला tha,un पर किसीने हाथ उठाया ये सुनकर उनका दिमाग पहात जा रहा था...
दादाजी- सतीशःह्ह.
दादाजी इतने ज़ोर से चीखे की सामने बैठा सतीश कांप gaya.same हालत लखन की भी thi.dono hi दादाजी के ग़ुस्से को अछि तरह से जानते थे......
दादाजी- मेरी बच्चियां जिन्हे गुलाब से भी दूर रखा हमने ताकि उसके साथ के कांटे इन्हे न चुभ jaaye,jinhe डांटे का हक़ हमने इनके माँ बाप को भी नहीं दिया उन्हें किसीने मारा...
तुमने वादा किया था की हमारी पोतियों को कभी तकलीफ नहीं hogi.kya कहा था tumne,ki तुम्हारे नाम से पूरा मुंबई कांपता hai.....yahi है तुम्हारा रुतबा.....
सतीश दर दर के- यकीं कीजिये dadaji.jo भी मुझे जानता है ,मेरे परिवार से उलझने की गलती कभी नहीं करेगा.
दादाजी- अपनी बकवास अपने पास rakho.beta AVNI,SHANAYA VAANI...kisne हाथ उठाया तुमपर....
शनाया- उसका नाम विक्रम है dadaji.hamare क्लास में hi पढता है......
अवंतिका ने शनाया को dekha,SHANAYA ने उससे आँखों से hi चुप रहने का इशारा किया......
वाणी- हाँ dad,aur एक नहीं बोहोत बार मारा....
अब तोह सतीश और दादाजी का दिमाग पूरा hi घूम गया.
दादाजी- फ़िक्र न करो bacho.shaam तक उसकी लाश तुम्हारे सामने होगी..
अवंतिका- नहीं dadaji.mai नहीं चाहती की वो mare,usse उसका ऐटिटूड उसकी जान से ज़्यादा कीमती है. मई उससे अपने पैरों में गिरवाकर माफ़ी मंगवाना चाहती हूँ.....
दादाजी- waah,ye की न तूने मेरी पोती वाली बात......
दादाजी मोबाइल निकल कोई नंबर डायल करने लगे...
सतीश- प्ल्ज़ डैड ( सतीश भी गुलशन को डैड HI बुलाता है )
मुझे एक मौका dijiye...is लड़के को मई हैंडल करूँगा......
दादाजी- ठीक hai.shaam तक का वक़्त है तुम्हारे paas.shaam तक वो लड़का मुझे मेरी पोतियों के कदमो में चाहिए.
सतीश- मेरा वादा है aapse.shaam तक उसका घमंड और सर दोनों झुक कर यहीं पड़े होंगे.
बीटा VAANI,kaun है वो लड़का??? कहाँ रहता है???
वाणी- डैड उस रात हम एक पार्टी में गए थे जहाँ एक लड़के ने आपसे बत्तमीज़ी की thi.ye वही है.
सतीश शॉकेड होक- कौन, वो जयराज का लड़का.
वाणी- यस डैड.
डडजजई- ये मई क्या सुन रहा हूँ SATISH.us लड़के ने पहले भी बत्तमीज़ी की thi,aur वो अब तक ज़िंदा है.....
सतीश- dad,wo मटर कुछ और tha.aur उस बेइज़्ज़ती के बदले की एक किश्त में ले भी चूका hun....maine सोचा था धीरे धीरे इस मटर को niptaunga,par अब लगता है जल्दी hi सब ख़त्म करना होगा....
लखन शाम तक वो लड़का मुझे यहाँ मेरी बच्चियों के पैरों में chahiye....apne सबसे अचे बन्दों को pakdo.jo हिथयार लगे वो लो और jao.agar वो अपने घर में भी हो तोह भी उठा लेना और जो सामने आये उससे थोक dena.bhale वो जयराज या उसकी बीवी hi क्यों न हो......
लखन- आप फ़िक्र न करें maalik.kaam हो जाएगा..
धादाआककककककककक..............
अभी लखन दरवाज़े तक पहुंचा hi था की एक ज़ोरदार आवाज़ के साथ दरवाज़ा पूरा उखड गया और दो लोग उड़ते हुए सीधे लखन से takraaye.unke टकराने की फाॅर्स इतनी ज़्यादा थी की लखन भी उडाता हुआ सतीश से takraya.dono गिर पड़े......
वाणी- ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़.....
अनुकृति- jiiiiiiiiiiiiiii......sabhi भागते हुए सतीश के पास पहुंचके उससे उठाने lage.tabhi कोई अंदर आया जिससे सबसे पहले दादाजी ने देखा.....
दादाजी- कौन हो तुममममम....
??
दादाजी की आवाज़ सुन सभी ने सामने की तरफ देखा.
अवंतिका- वीककररायअम्म्मम्म!!!!!!
वहीँ दूसरी तरफ:-
निष्कलिका- क्या हुआ जान.....!!!!! आप कुछ परेशां दिख रहे हैं......!!!!!
दिग्विजय- haan.......nahi कुछ नहीं.....
निष्कलिका= आप भूल रहे हैं की अब हम दोनों एक hain.aapki परेशानी मुझसे छुप नहीं सकती......
निष्कलिका ने अपनी आँखें बंद की और दिग्विजय के सर पर हाथ rakha,DIGVIJAY के रात का सपना उसकी आँखों के आगे दिखने laga.jaise hi तलवार दिग्विजय के सीने में उत्तरी निष्कलिका की आँखें खुल gayi....uske चेहरे पर भी दर और परेशानी दिखने लगी......
निष्कलिका- इतनी बड़ी बात और आप मुझसे छुपा रहे थे.......
दिग्विजय- अरे घबरा क्यों रही ho.ye तोह महज़ एक सपना था..
निष्कलिका- nahi..ye एक दृष्टि ( विज़न ) hai.bhavishya की संभावना hai...isse हलके में नहीं लिया जा सकता..
दिग्विजय भी ये सब सुनके टेंशन में आ गया.....
दिग्विजय- तोह अब क्या करें?
?
निष्कलिका- फ़िक्र न karen.abhi निष्कलिका ज़िंदा hai.is संकट के समाधान के लिए हमें कवरी घाटी जाना होगा.....
दिग्विजय- कावरी घाटी!!!! अब ये क्या बाला है....
निष्कलिका- इसी गृह के उत्तरी छोर के अंत में है कावरी घाटी...
दिग्विजय- पर हम वहां क्यों जाएँ.
निष्कलिका- ये आपको वहां पहुंचके पता चल जाएगा........
निष्कलिका ने दिग्विजय का हाथ पकड़ा और दोनों अंतर ध्यान हो गए.....
बैक तो हीरो:-
दादाजी- कौन विक्रम??? कहीं ये वही तोह नहीं जिसकी अभी बात हो रही थी !!!!
सभी लड़कियों ने हाँ में गर्दन हिला दी.
दादाजी- बड़ी हिम्मत है तेरे में ladke.hamare बेटियों पर हाथ उठके हमारे घर आकर हमारे सामने खड़ा hai.tu आ तोह गया है पर अब ज़िंदा जायेगा नहीं.......
मई- ये तोह गलत है DADAJI.ghar आये मेहमान का कोई ऐसे स्वागत करता है क्या?
वैसे तुम्हारे जैसे घटिया इंसान को इतनी इज़्ज़त देकर दादाजी कहना ाचा तोह नहीं लगता पर क्या करूँ! आप आदमी भले hi बेकार ho,par मुझसे बड़े ho.agar आप आज मुझसे पीट भी गए ना तोह कसम से इज़्ज़त दे दे कर मरूंगा......
अवंतिका- तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे दादू से ऐसे बात करने की...
मई- darling,himaat तुमने अभी देखि hi कहाँ hai....!!!!!ek ट्रेलर थोड़ी देर पहले देखा tha,aur एक कुछ देर में देख लोगी......
अब तक सतीश और लखन भी उठ चुके थे.
सतीश- लड़कियों को मारकर अपने आप को सुरमा समझता है तू.
मई- लड़कियों ko.teri ये 3no चुहियों ने ये कहा की मैंने इन्हे मारा hai...abbe ch*****ye मोती budhi,us दिन पार्टी में भी इसने मुझपे हाथ उठाया tha.agar मई चाहता तोह इससे उस दिन hi दुनिया से उठा देता.
आज भी अगर मैंने इन्हे मारा होता तोह ये सब कबका नर्क सिधार चुकी hoti....mujhe समझ नहीं आता तू इतना बड़ा डॉन बन कैसे गया.
मेरे ये कहते hi सतीश का मुँह खुल gaya.jo बात आज तक पुलिस पता नहीं कर पायी थी वो मैंने ऐसे hi बता दिया tha.shock में सिर्फ वो hi नहीं उसकी biwi,aur लड़कियां भी thi.dadaji को तोह सब पता hi था.....
सतीश बात घूमते हुए- अपनी बकवास बंद kar.SHERA,BILAA,SATU,KALIYA...... कहाँ मर गए बे सबके सब.....
मई- कोई नहीं aayega.bahar पड़े हुए hain.mere जाते hi एम्बुलेंस तुरंत मंगवा liyo.zyada देर करेगा तोह कहीं तेरे आदमी लाइफ टाइम के लिए अपाहिज न रह जाएँ.
लखन- साले बोहोत बोल रहा है.
वहीँ साइड दीवाल पे दो तलवार तंगी thi....LAKHAN उसमे से एक खिसंह कर मेरी तरफ douda.wahin मई आराम से अपनी जगह खड़ा tha..LAKHAN ठीक मेरे सामने से दौड़ता हुआ मेरे पास आया और तलवार घुमा दी.
मई- मुँह बंद कर be....aur जो तू ढूंढ रहा hai,ye देख ये रही....
हुआ ये की लखन के तलवार ऊपर करते hi मई तेज़ी से आगे badha,uske हाथ से तलवार ली और अपनी जगह पर वापस खड़ा हो gaya.ye मैंने सेकंड के दुस्वे हिस्से से भी काम वक़्त में किया था.
लखन ने हाथ तोह घुमाया पर हाथ तोह खली हो चूका tha.wo कभी अपने हाथ को देखता तोह कभी मेरे हाथ को जिसमे उसकी थोड़ी देर पहले पकड़ी हुई तलवार thi......LAKHAN का शरीर इतना लम्बा चौड़ा था की उसके सामने क्या क्या हुआ ये पीछे खड़े किसीको भी दिखा नहीं था........
मई पुरे ग़ुस्से से- MA*****OD तूने hi मेरे डैड की गाडी ठोकी थी ना.... मैंने उसका कालर पकड़ा और उठा दिया.
मई- साले be*****od,ek नाले की औकाद नहीं होती की वो समंदर से takraaye..maine उससे पीछे फेक diya.wo उड़ता हुआ गया और सतीश के सामने एक कांच की टेबल thi,uspe gira.table टूट गया.
मई सतीश के पास pahuncha.uski पूरी फॅमिली उसके पास hi कड़ी थी और काफी दरी हुई थी.....
मई- तुझे मेरे डैड पे हमला नहीं करना चाहिए था.
आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह..........
अवंतिका के दादाजी ज़मीन पर गिर gaye.hua ये की मुझे सतीश के साथ बात करते देख दादाजी ने साइड से अपनी छड़ी मेरे ऊपर चला di,jo मैंने देख ली थी.
मैंने हाथ ऊपर कर चड्डी को पकड़ा और अपनी तरफ kheencha.dadaji मज़बूती से चड्डी पकडे हुए the.chaddi के साथ साथ वो भी खींचा गए और सीधे मेरी छाती से takraye....unhe ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी चट्टान से टकराये हैं......
अवंतिका - तुम्हे शर्म नहीं आती एक बुज़ुर्ग को मारते हुए.
मई- वाह रे buzurg.matlab वो मुझे मारने के लिए चांदी घुमा सकते hain,aadmi भेज सकते हैं पर हम कुछ नहीं कर sakte.bewakoof की तरह नहीं यार वो बड़े hain,hamari मार सकते hai,yahi बोलते rahen,kyun?
माफ़ करना madam,sharif हूँ ch****ya nahi.haan तोह मई कहाँ tha,arre घंटा कहाँ था
चाटककककहहह.. और हमारे सतीश भाईसाहब ज़मीन par.kaan sunn,hoth पहात gaye,aur गर्दन अकड़ गयी...
पर मई रुका nahi.peeche से उसकी गर्दन पकड़ी और उठा दिया .सामने दीवाल thi.wahin उससे उल्टा चिपका diya.maine उसका राइट हैंड पकड़ा हल्का पीछे झटका दिया....
KADAKK.......kandhe की जॉइंट हड्डी खिसक gayi..AAAHHHHHHHHAHHHHH.SATISH की एक दर्द नाक आवाज़ हर तरफ गूंज gayi.....par मेरे सर पर तोह खून सवार tha....abhi मैंने दूसरा हाथ पकड़ा hi था की मुझे अपने पैरों पर किसीके हाथ महसूस हुए.
ये सतीश की वाइफ थी जो भीगी आँखों से मेरे पेअर पकड़ मुझे देखि जा रही थी.
अनुकृति- प्ल्ज़ इन्हे छोड़ do.wo बस इतना hi बोल पायी और रो पड़ी..
उनके रोने से मेरे दिल में एक तीस सी uthi.shayad इसीलिए क्यूंकि मैंने उनकी आँखों में उनका करैक्टर देख लिया tha.is कमरे में एक वही थी जिनका दिल साफ़ tha.maine सतीश को छोड़ दिया....
साइड में नज़र घुमाई तोह सभी लड़कियों का वही हाल tha.dadaji तोह पथराई घबराई आँखों से मुझे देख रहे थे....
मई- सतीश सिर्फ आंटी की वजह से तू बच gaya.par दोबारा अगर मेरे डैड की तरफ देखा भी naa,toh ऊपर वाला भी तुझे मुझसे बचा नहीं पायेगा.
और तुम teeno,agar दोबारा कोई नौटंकी की naa,toh ये लड़कियों वाला टैग भी तुम्हे मुझसे बचा नहीं पायेगा....
मैंने सबकी तरफ एक बार घूर कर देखा और निकल गया.......
वहीँ दूसरी तरफ:-
दिग्विजय- ये कैसी जगह ले आयी मुझे!!!!!
इस वक़्त दिग्विजय और निष्कलिका खड़े थे कावरी घाटी के सरहद पर.....
कावरी घाटी- हर तरफ से sunsaan,daravani सी दिखने वाली ghati....sukhe पड़े पेड़ पर बोहोत ज़्यादा तादाद में, उभाड़ खाबड़ घुमावदार रास्ते जिनपर काली मिटटी जमी हुई thi..aur उन रास्तों के दोनों तरफ अंतहीन गहरी खाई.....
निष्कलिका- यही है कावरी घाटी......
दिग्विजय- पर हम यहाँ आये क्यों हैं???
निष्कलिका- आपके सपने को हक़ीक़त में बदलने से रोकने के लिए.....
दिग्विजय- मई कुछ समझा नहीं...!!!!
निष्कलिका - समझ jaoge.mere पीछे पीछे आओ....
दिग्विजय- जहाँ भी जाना है हम सीधे वहां नहीं पहुँच सकते kya!!!matlab अंतर ध्यान होकर या उड़ कर...
निष्कलिका- nahi.yahan हम कोई जादू नहीं कर सकते...
दिग्विजय- अरे ऐसे kaise.DIGVIJAY ने गायब होने के लिए अपनी आँखें बंद की..
निष्कलिका- nahi...rook jaiye..par तब तक देर हो चुकी थी.
एक तेज़ बिजली चमकी और दिग्विजय को lagi.DIGVIJAY दूर फेका गया....
निष्कलिका- आप ठीक तोह हैं ना.
दिग्विजय- हाँ बस शरीर में एक अजीब सी जलन हो रही है.
NISHKALIKA-maine कहा था naa.yahan हम जादू नहीं कर सकते....
दिग्विजय- लेकिन क्यों???
निस्कालिका- आगे chaliye.pata चल जायेगा...
हम दोनों आगे की तरफ चल diye.par कुछ आगे जाने के बाद दिग्विजय चौंक गया....
दिग्विजय- ये सब क्या है.....!!!!
निष्कलिका- ये सब वो लोग हैं जिन्होंने यहाँ अपनी शक्ति आज़माने की कोशिश की थी...
एक्चुअली अभी जहाँ से दिग्विजय और निष्कलिका गुज़र रहे the,wahan ढेर सारे कंकाल पड़े थे.....
दिग्विजय फिर कुछ नहीं बोलै और चुप चाप निष्कलिका के पीछे पीछे चल दिया....
कुछ दूर जाने के बाद निष्कलिका रुक गयी....
निष्कलिका- हम पहुँच gaye.chaliye,hume अंदर जाना है.
निष्कलिका ने दिग्विजय का हाथ पकड़ा और अंदर की तरफ चल दी...
दिग्विजय ने सामने dekha.saamne एक गुफा थी जिसके अंदर से अलग अलग रंग की रौशनी आ रही thi.......is बार दिग्विजय ने कोई सवाल नहीं पूछा और चुप चाप निष्कलिका के साथ साथ अंदर चला गया...
पर अंदर का माहौल देखकर दिग्विजय की आँखें चौंधिया गयी....
दिग्विजय- क्या ये सब!!!!!!!!
निष्कलिका- आपने ठीक samjha.ye हीरे hi हैं.
दरअसल वहां का माहौल पूरा जादुई tha.pure गुफा में अलग अलग कोर्स के एक्चुअली हर कलर के हीरे जगमगा रहे the.par उससे भी अजीब ये था की सारे हीरे हवा में तैर रहे थे....
निष्कलिका- आपने सुना होगा की हीरों को तराशा जाता hai....par ये वो हीरे हैं जो हमे तरसेंगे....
दिग्विजय- मतलब!!!!!!
निष्कलिका- इस ब्रम्हांड में जितने भी मंत्र hai,jaadoo hai,shaktiyan hai.ye सारे हीरे उन सब के प्रतिक हैं.....
हमारे अंदर जितनी भी शक्ति hain,mantra hain,yudh कला hai,hume वो सब इनको सौपने होंगे.......
दिग्विजय- सौपने होंगे!!!! फिर हम तोह कमज़ोर हो जायेंगे....
निष्कलिका- haan.hamari हर युद्ध shaili,saari शक्ति इन हीरों में चली जाएगी जिससे ये हीरे 10 गुना तक निखार कर हमें वापस देंगे....
दिग्विजय- sach..toh अब तक तुम यहाँ क्यों नहीं आयी थी.....
निष्कलिका- मेरी अकेले की शक्ति इतनी प्रबल नहीं थी की यहाँ के ऊर्जा को बर्दाश्त कर sake.par आपकी और मेरी शक्ति मिलकर इतनी सक्षम है की हम साथ में यहाँ आ सकते hain.isiliye तोह मैंने अंदर आते वक़्त आपका हाथ पकड़ा था....
दिग्विजय- achaaa.toh अब!!!!
निष्कलिका- हमे एक दुसरे का हाथ पकड़ कर ध्यान में बैठ अपनी साड़ी शक्ति इन हीरों को देनी hongi....par एक बात बता dun,is गुफा का समय चक्र बाहरी दुनिया से बोहोत तेज़ चलता hai....yahan का 1 घंटा बाहरी दुनिया के 1 दिन के बराबर है......
दिग्विजय- चलो phir...fir हमे देर नहीं करनी चाहिए.
दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ कर ध्यान आसान में बैठ गए...
बैक तो हीरो:-
PEON-VIKRAM आपको परिणीपाल सर ने बुलाया है.....
studies,sports और मस्ती के बीच हमारे दिन बीतने lage.us दिन के बाद से अवंतिका और उसकी बहेनो ने कोई नया ड्रामा नहीं किया tha.hamare सामने उनका ग्रुप सर झुकार hi चलता था.
मई तोह ध्यान भी नहीं देता था पर ये रोनित महाशय और अंजलि मोहतरमा बीच बीच में उनको ऊँगली करते रहते the.fir एक दिन मैंने उन्हें डांटा तोह वो भी बंद हो गया.
ज़िन्दगी बैक तो नार्मल हो गयी थी पर जैसा की मैंने कहा था की जो नार्मल hi रहे वो हमारी ज़िन्दगी तोह हो नहीं sakti.shayad ये प्रिन्सी का बुलावा ऐसे hi किसी नए धमाके के लिए था..
मई- मई ी के इन सर.
प्रिन्सी- यस विक्रम के इन.
पर जैसे hi मैंने सामने देखा तोह मेरा दिमाग घूम gaya.saamne अवंतिका मैडम जो बैठी thi.wo भी मुझे फुल तू शॉक में देख रही थी पर मैंने उससे कम्पलीट इग्नोर मारा और सर के सामने खड़ा रहा....
प्रिन्सी- अरे बैठो यार....
मई वहीँ अवंतिका की साइड की चेयर में बैठ गया..
प्रिन्सी- मैंने तुम दोनों को इसीलिए बुलाया है की *****************************
MAI/AVANTIKA- वहहहहातटटटटटट?
?
NOOOOOOOOOOOOO..............
दोस्तों आज के लिए इतना HI....
आपका अपना V..J....
CHAPTER - 1
( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट )
अपडेट- 30 :-
वाणी- papa........chillate हुए वाणी सतीश के गले लग कर रोने लगी.......
आज सतीश घर पर hi tha.abhi वो हॉल में बैठा लखन को कुछ समझा hi रहा था की वाणी स्कूल से वापस आयी और सामने hi अपने डैड को देख खुद को कण्ट्रोल नहीं कर पायी...
चिल्लाने की आवाज़ सुनकर अनुकृति जो किचन में thi,wo भी दौड़ते हुए बहार aayi....aur एक रूम जो हॉल के बाजू में hi tha,wahan से निकले गुलशन आहूजा.
अवंतिका और शनाया जो अपने आंसू दबाये हुए the,dadaji को देखते hi उनका कण्ट्रोल ख़त्म हो गया....
दादाजी- क्या हुआ bachon....tum तीनो रो क्यों रहे ho....DADAJI अवनि और शनाया के आंसू देखकर बौखला से गए the.ye पहली बार था जब उनकी पोतियां रो रही thi....same हालत सतीश की भी थी....
अवनि- दादाजी उसने हमें मारा.......
इतना hi काफी था दादाजी का दिमाग घूमने के liye.jinhe आज तक फूलों की तरह उन्होंने पाला tha,un पर किसीने हाथ उठाया ये सुनकर उनका दिमाग पहात जा रहा था...
दादाजी- सतीशःह्ह.
दादाजी इतने ज़ोर से चीखे की सामने बैठा सतीश कांप gaya.same हालत लखन की भी thi.dono hi दादाजी के ग़ुस्से को अछि तरह से जानते थे......
दादाजी- मेरी बच्चियां जिन्हे गुलाब से भी दूर रखा हमने ताकि उसके साथ के कांटे इन्हे न चुभ jaaye,jinhe डांटे का हक़ हमने इनके माँ बाप को भी नहीं दिया उन्हें किसीने मारा...
तुमने वादा किया था की हमारी पोतियों को कभी तकलीफ नहीं hogi.kya कहा था tumne,ki तुम्हारे नाम से पूरा मुंबई कांपता hai.....yahi है तुम्हारा रुतबा.....
सतीश दर दर के- यकीं कीजिये dadaji.jo भी मुझे जानता है ,मेरे परिवार से उलझने की गलती कभी नहीं करेगा.
दादाजी- अपनी बकवास अपने पास rakho.beta AVNI,SHANAYA VAANI...kisne हाथ उठाया तुमपर....
शनाया- उसका नाम विक्रम है dadaji.hamare क्लास में hi पढता है......
अवंतिका ने शनाया को dekha,SHANAYA ने उससे आँखों से hi चुप रहने का इशारा किया......
वाणी- हाँ dad,aur एक नहीं बोहोत बार मारा....
अब तोह सतीश और दादाजी का दिमाग पूरा hi घूम गया.
दादाजी- फ़िक्र न करो bacho.shaam तक उसकी लाश तुम्हारे सामने होगी..
अवंतिका- नहीं dadaji.mai नहीं चाहती की वो mare,usse उसका ऐटिटूड उसकी जान से ज़्यादा कीमती है. मई उससे अपने पैरों में गिरवाकर माफ़ी मंगवाना चाहती हूँ.....
दादाजी- waah,ye की न तूने मेरी पोती वाली बात......
दादाजी मोबाइल निकल कोई नंबर डायल करने लगे...
सतीश- प्ल्ज़ डैड ( सतीश भी गुलशन को डैड HI बुलाता है )
मुझे एक मौका dijiye...is लड़के को मई हैंडल करूँगा......
दादाजी- ठीक hai.shaam तक का वक़्त है तुम्हारे paas.shaam तक वो लड़का मुझे मेरी पोतियों के कदमो में चाहिए.
सतीश- मेरा वादा है aapse.shaam तक उसका घमंड और सर दोनों झुक कर यहीं पड़े होंगे.
बीटा VAANI,kaun है वो लड़का??? कहाँ रहता है???
वाणी- डैड उस रात हम एक पार्टी में गए थे जहाँ एक लड़के ने आपसे बत्तमीज़ी की thi.ye वही है.
सतीश शॉकेड होक- कौन, वो जयराज का लड़का.
वाणी- यस डैड.
डडजजई- ये मई क्या सुन रहा हूँ SATISH.us लड़के ने पहले भी बत्तमीज़ी की thi,aur वो अब तक ज़िंदा है.....
सतीश- dad,wo मटर कुछ और tha.aur उस बेइज़्ज़ती के बदले की एक किश्त में ले भी चूका hun....maine सोचा था धीरे धीरे इस मटर को niptaunga,par अब लगता है जल्दी hi सब ख़त्म करना होगा....
लखन शाम तक वो लड़का मुझे यहाँ मेरी बच्चियों के पैरों में chahiye....apne सबसे अचे बन्दों को pakdo.jo हिथयार लगे वो लो और jao.agar वो अपने घर में भी हो तोह भी उठा लेना और जो सामने आये उससे थोक dena.bhale वो जयराज या उसकी बीवी hi क्यों न हो......
लखन- आप फ़िक्र न करें maalik.kaam हो जाएगा..
धादाआककककककककक..............
अभी लखन दरवाज़े तक पहुंचा hi था की एक ज़ोरदार आवाज़ के साथ दरवाज़ा पूरा उखड गया और दो लोग उड़ते हुए सीधे लखन से takraaye.unke टकराने की फाॅर्स इतनी ज़्यादा थी की लखन भी उडाता हुआ सतीश से takraya.dono गिर पड़े......
वाणी- ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़.....
अनुकृति- jiiiiiiiiiiiiiii......sabhi भागते हुए सतीश के पास पहुंचके उससे उठाने lage.tabhi कोई अंदर आया जिससे सबसे पहले दादाजी ने देखा.....
दादाजी- कौन हो तुममममम....
??
दादाजी की आवाज़ सुन सभी ने सामने की तरफ देखा.
अवंतिका- वीककररायअम्म्मम्म!!!!!!
वहीँ दूसरी तरफ:-
निष्कलिका- क्या हुआ जान.....!!!!! आप कुछ परेशां दिख रहे हैं......!!!!!
दिग्विजय- haan.......nahi कुछ नहीं.....
निष्कलिका= आप भूल रहे हैं की अब हम दोनों एक hain.aapki परेशानी मुझसे छुप नहीं सकती......
निष्कलिका ने अपनी आँखें बंद की और दिग्विजय के सर पर हाथ rakha,DIGVIJAY के रात का सपना उसकी आँखों के आगे दिखने laga.jaise hi तलवार दिग्विजय के सीने में उत्तरी निष्कलिका की आँखें खुल gayi....uske चेहरे पर भी दर और परेशानी दिखने लगी......
निष्कलिका- इतनी बड़ी बात और आप मुझसे छुपा रहे थे.......
दिग्विजय- अरे घबरा क्यों रही ho.ye तोह महज़ एक सपना था..
निष्कलिका- nahi..ye एक दृष्टि ( विज़न ) hai.bhavishya की संभावना hai...isse हलके में नहीं लिया जा सकता..
दिग्विजय भी ये सब सुनके टेंशन में आ गया.....
दिग्विजय- तोह अब क्या करें?
?
निष्कलिका- फ़िक्र न karen.abhi निष्कलिका ज़िंदा hai.is संकट के समाधान के लिए हमें कवरी घाटी जाना होगा.....
दिग्विजय- कावरी घाटी!!!! अब ये क्या बाला है....
निष्कलिका- इसी गृह के उत्तरी छोर के अंत में है कावरी घाटी...
दिग्विजय- पर हम वहां क्यों जाएँ.
निष्कलिका- ये आपको वहां पहुंचके पता चल जाएगा........
निष्कलिका ने दिग्विजय का हाथ पकड़ा और दोनों अंतर ध्यान हो गए.....
बैक तो हीरो:-
दादाजी- कौन विक्रम??? कहीं ये वही तोह नहीं जिसकी अभी बात हो रही थी !!!!
सभी लड़कियों ने हाँ में गर्दन हिला दी.
दादाजी- बड़ी हिम्मत है तेरे में ladke.hamare बेटियों पर हाथ उठके हमारे घर आकर हमारे सामने खड़ा hai.tu आ तोह गया है पर अब ज़िंदा जायेगा नहीं.......
मई- ये तोह गलत है DADAJI.ghar आये मेहमान का कोई ऐसे स्वागत करता है क्या?
वैसे तुम्हारे जैसे घटिया इंसान को इतनी इज़्ज़त देकर दादाजी कहना ाचा तोह नहीं लगता पर क्या करूँ! आप आदमी भले hi बेकार ho,par मुझसे बड़े ho.agar आप आज मुझसे पीट भी गए ना तोह कसम से इज़्ज़त दे दे कर मरूंगा......
अवंतिका- तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे दादू से ऐसे बात करने की...
मई- darling,himaat तुमने अभी देखि hi कहाँ hai....!!!!!ek ट्रेलर थोड़ी देर पहले देखा tha,aur एक कुछ देर में देख लोगी......
अब तक सतीश और लखन भी उठ चुके थे.
सतीश- लड़कियों को मारकर अपने आप को सुरमा समझता है तू.
मई- लड़कियों ko.teri ये 3no चुहियों ने ये कहा की मैंने इन्हे मारा hai...abbe ch*****ye मोती budhi,us दिन पार्टी में भी इसने मुझपे हाथ उठाया tha.agar मई चाहता तोह इससे उस दिन hi दुनिया से उठा देता.
आज भी अगर मैंने इन्हे मारा होता तोह ये सब कबका नर्क सिधार चुकी hoti....mujhe समझ नहीं आता तू इतना बड़ा डॉन बन कैसे गया.
मेरे ये कहते hi सतीश का मुँह खुल gaya.jo बात आज तक पुलिस पता नहीं कर पायी थी वो मैंने ऐसे hi बता दिया tha.shock में सिर्फ वो hi नहीं उसकी biwi,aur लड़कियां भी thi.dadaji को तोह सब पता hi था.....
सतीश बात घूमते हुए- अपनी बकवास बंद kar.SHERA,BILAA,SATU,KALIYA...... कहाँ मर गए बे सबके सब.....
मई- कोई नहीं aayega.bahar पड़े हुए hain.mere जाते hi एम्बुलेंस तुरंत मंगवा liyo.zyada देर करेगा तोह कहीं तेरे आदमी लाइफ टाइम के लिए अपाहिज न रह जाएँ.
लखन- साले बोहोत बोल रहा है.
वहीँ साइड दीवाल पे दो तलवार तंगी thi....LAKHAN उसमे से एक खिसंह कर मेरी तरफ douda.wahin मई आराम से अपनी जगह खड़ा tha..LAKHAN ठीक मेरे सामने से दौड़ता हुआ मेरे पास आया और तलवार घुमा दी.
मई- मुँह बंद कर be....aur जो तू ढूंढ रहा hai,ye देख ये रही....
हुआ ये की लखन के तलवार ऊपर करते hi मई तेज़ी से आगे badha,uske हाथ से तलवार ली और अपनी जगह पर वापस खड़ा हो gaya.ye मैंने सेकंड के दुस्वे हिस्से से भी काम वक़्त में किया था.
लखन ने हाथ तोह घुमाया पर हाथ तोह खली हो चूका tha.wo कभी अपने हाथ को देखता तोह कभी मेरे हाथ को जिसमे उसकी थोड़ी देर पहले पकड़ी हुई तलवार thi......LAKHAN का शरीर इतना लम्बा चौड़ा था की उसके सामने क्या क्या हुआ ये पीछे खड़े किसीको भी दिखा नहीं था........
मई पुरे ग़ुस्से से- MA*****OD तूने hi मेरे डैड की गाडी ठोकी थी ना.... मैंने उसका कालर पकड़ा और उठा दिया.
मई- साले be*****od,ek नाले की औकाद नहीं होती की वो समंदर से takraaye..maine उससे पीछे फेक diya.wo उड़ता हुआ गया और सतीश के सामने एक कांच की टेबल thi,uspe gira.table टूट गया.
मई सतीश के पास pahuncha.uski पूरी फॅमिली उसके पास hi कड़ी थी और काफी दरी हुई थी.....
मई- तुझे मेरे डैड पे हमला नहीं करना चाहिए था.
आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह..........
अवंतिका के दादाजी ज़मीन पर गिर gaye.hua ये की मुझे सतीश के साथ बात करते देख दादाजी ने साइड से अपनी छड़ी मेरे ऊपर चला di,jo मैंने देख ली थी.
मैंने हाथ ऊपर कर चड्डी को पकड़ा और अपनी तरफ kheencha.dadaji मज़बूती से चड्डी पकडे हुए the.chaddi के साथ साथ वो भी खींचा गए और सीधे मेरी छाती से takraye....unhe ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी चट्टान से टकराये हैं......
अवंतिका - तुम्हे शर्म नहीं आती एक बुज़ुर्ग को मारते हुए.
मई- वाह रे buzurg.matlab वो मुझे मारने के लिए चांदी घुमा सकते hain,aadmi भेज सकते हैं पर हम कुछ नहीं कर sakte.bewakoof की तरह नहीं यार वो बड़े hain,hamari मार सकते hai,yahi बोलते rahen,kyun?
माफ़ करना madam,sharif हूँ ch****ya nahi.haan तोह मई कहाँ tha,arre घंटा कहाँ था
चाटककककहहह.. और हमारे सतीश भाईसाहब ज़मीन par.kaan sunn,hoth पहात gaye,aur गर्दन अकड़ गयी...
पर मई रुका nahi.peeche से उसकी गर्दन पकड़ी और उठा दिया .सामने दीवाल thi.wahin उससे उल्टा चिपका diya.maine उसका राइट हैंड पकड़ा हल्का पीछे झटका दिया....
KADAKK.......kandhe की जॉइंट हड्डी खिसक gayi..AAAHHHHHHHHAHHHHH.SATISH की एक दर्द नाक आवाज़ हर तरफ गूंज gayi.....par मेरे सर पर तोह खून सवार tha....abhi मैंने दूसरा हाथ पकड़ा hi था की मुझे अपने पैरों पर किसीके हाथ महसूस हुए.
ये सतीश की वाइफ थी जो भीगी आँखों से मेरे पेअर पकड़ मुझे देखि जा रही थी.
अनुकृति- प्ल्ज़ इन्हे छोड़ do.wo बस इतना hi बोल पायी और रो पड़ी..
उनके रोने से मेरे दिल में एक तीस सी uthi.shayad इसीलिए क्यूंकि मैंने उनकी आँखों में उनका करैक्टर देख लिया tha.is कमरे में एक वही थी जिनका दिल साफ़ tha.maine सतीश को छोड़ दिया....
साइड में नज़र घुमाई तोह सभी लड़कियों का वही हाल tha.dadaji तोह पथराई घबराई आँखों से मुझे देख रहे थे....
मई- सतीश सिर्फ आंटी की वजह से तू बच gaya.par दोबारा अगर मेरे डैड की तरफ देखा भी naa,toh ऊपर वाला भी तुझे मुझसे बचा नहीं पायेगा.
और तुम teeno,agar दोबारा कोई नौटंकी की naa,toh ये लड़कियों वाला टैग भी तुम्हे मुझसे बचा नहीं पायेगा....
मैंने सबकी तरफ एक बार घूर कर देखा और निकल गया.......
वहीँ दूसरी तरफ:-
दिग्विजय- ये कैसी जगह ले आयी मुझे!!!!!
इस वक़्त दिग्विजय और निष्कलिका खड़े थे कावरी घाटी के सरहद पर.....
कावरी घाटी- हर तरफ से sunsaan,daravani सी दिखने वाली ghati....sukhe पड़े पेड़ पर बोहोत ज़्यादा तादाद में, उभाड़ खाबड़ घुमावदार रास्ते जिनपर काली मिटटी जमी हुई thi..aur उन रास्तों के दोनों तरफ अंतहीन गहरी खाई.....
निष्कलिका- यही है कावरी घाटी......
दिग्विजय- पर हम यहाँ आये क्यों हैं???
निष्कलिका- आपके सपने को हक़ीक़त में बदलने से रोकने के लिए.....
दिग्विजय- मई कुछ समझा नहीं...!!!!
निष्कलिका - समझ jaoge.mere पीछे पीछे आओ....
दिग्विजय- जहाँ भी जाना है हम सीधे वहां नहीं पहुँच सकते kya!!!matlab अंतर ध्यान होकर या उड़ कर...
निष्कलिका- nahi.yahan हम कोई जादू नहीं कर सकते...
दिग्विजय- अरे ऐसे kaise.DIGVIJAY ने गायब होने के लिए अपनी आँखें बंद की..
निष्कलिका- nahi...rook jaiye..par तब तक देर हो चुकी थी.
एक तेज़ बिजली चमकी और दिग्विजय को lagi.DIGVIJAY दूर फेका गया....
निष्कलिका- आप ठीक तोह हैं ना.
दिग्विजय- हाँ बस शरीर में एक अजीब सी जलन हो रही है.
NISHKALIKA-maine कहा था naa.yahan हम जादू नहीं कर सकते....
दिग्विजय- लेकिन क्यों???
निस्कालिका- आगे chaliye.pata चल जायेगा...
हम दोनों आगे की तरफ चल diye.par कुछ आगे जाने के बाद दिग्विजय चौंक गया....
दिग्विजय- ये सब क्या है.....!!!!
निष्कलिका- ये सब वो लोग हैं जिन्होंने यहाँ अपनी शक्ति आज़माने की कोशिश की थी...
एक्चुअली अभी जहाँ से दिग्विजय और निष्कलिका गुज़र रहे the,wahan ढेर सारे कंकाल पड़े थे.....
दिग्विजय फिर कुछ नहीं बोलै और चुप चाप निष्कलिका के पीछे पीछे चल दिया....
कुछ दूर जाने के बाद निष्कलिका रुक गयी....
निष्कलिका- हम पहुँच gaye.chaliye,hume अंदर जाना है.
निष्कलिका ने दिग्विजय का हाथ पकड़ा और अंदर की तरफ चल दी...
दिग्विजय ने सामने dekha.saamne एक गुफा थी जिसके अंदर से अलग अलग रंग की रौशनी आ रही thi.......is बार दिग्विजय ने कोई सवाल नहीं पूछा और चुप चाप निष्कलिका के साथ साथ अंदर चला गया...
पर अंदर का माहौल देखकर दिग्विजय की आँखें चौंधिया गयी....
दिग्विजय- क्या ये सब!!!!!!!!
निष्कलिका- आपने ठीक samjha.ye हीरे hi हैं.
दरअसल वहां का माहौल पूरा जादुई tha.pure गुफा में अलग अलग कोर्स के एक्चुअली हर कलर के हीरे जगमगा रहे the.par उससे भी अजीब ये था की सारे हीरे हवा में तैर रहे थे....
निष्कलिका- आपने सुना होगा की हीरों को तराशा जाता hai....par ये वो हीरे हैं जो हमे तरसेंगे....
दिग्विजय- मतलब!!!!!!
निष्कलिका- इस ब्रम्हांड में जितने भी मंत्र hai,jaadoo hai,shaktiyan hai.ye सारे हीरे उन सब के प्रतिक हैं.....
हमारे अंदर जितनी भी शक्ति hain,mantra hain,yudh कला hai,hume वो सब इनको सौपने होंगे.......
दिग्विजय- सौपने होंगे!!!! फिर हम तोह कमज़ोर हो जायेंगे....
निष्कलिका- haan.hamari हर युद्ध shaili,saari शक्ति इन हीरों में चली जाएगी जिससे ये हीरे 10 गुना तक निखार कर हमें वापस देंगे....
दिग्विजय- sach..toh अब तक तुम यहाँ क्यों नहीं आयी थी.....
निष्कलिका- मेरी अकेले की शक्ति इतनी प्रबल नहीं थी की यहाँ के ऊर्जा को बर्दाश्त कर sake.par आपकी और मेरी शक्ति मिलकर इतनी सक्षम है की हम साथ में यहाँ आ सकते hain.isiliye तोह मैंने अंदर आते वक़्त आपका हाथ पकड़ा था....
दिग्विजय- achaaa.toh अब!!!!
निष्कलिका- हमे एक दुसरे का हाथ पकड़ कर ध्यान में बैठ अपनी साड़ी शक्ति इन हीरों को देनी hongi....par एक बात बता dun,is गुफा का समय चक्र बाहरी दुनिया से बोहोत तेज़ चलता hai....yahan का 1 घंटा बाहरी दुनिया के 1 दिन के बराबर है......
दिग्विजय- चलो phir...fir हमे देर नहीं करनी चाहिए.
दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ कर ध्यान आसान में बैठ गए...
बैक तो हीरो:-
PEON-VIKRAM आपको परिणीपाल सर ने बुलाया है.....
studies,sports और मस्ती के बीच हमारे दिन बीतने lage.us दिन के बाद से अवंतिका और उसकी बहेनो ने कोई नया ड्रामा नहीं किया tha.hamare सामने उनका ग्रुप सर झुकार hi चलता था.
मई तोह ध्यान भी नहीं देता था पर ये रोनित महाशय और अंजलि मोहतरमा बीच बीच में उनको ऊँगली करते रहते the.fir एक दिन मैंने उन्हें डांटा तोह वो भी बंद हो गया.
ज़िन्दगी बैक तो नार्मल हो गयी थी पर जैसा की मैंने कहा था की जो नार्मल hi रहे वो हमारी ज़िन्दगी तोह हो नहीं sakti.shayad ये प्रिन्सी का बुलावा ऐसे hi किसी नए धमाके के लिए था..
मई- मई ी के इन सर.
प्रिन्सी- यस विक्रम के इन.
पर जैसे hi मैंने सामने देखा तोह मेरा दिमाग घूम gaya.saamne अवंतिका मैडम जो बैठी thi.wo भी मुझे फुल तू शॉक में देख रही थी पर मैंने उससे कम्पलीट इग्नोर मारा और सर के सामने खड़ा रहा....
प्रिन्सी- अरे बैठो यार....
मई वहीँ अवंतिका की साइड की चेयर में बैठ गया..
प्रिन्सी- मैंने तुम दोनों को इसीलिए बुलाया है की *****************************
MAI/AVANTIKA- वहहहहातटटटटटट?
?
NOOOOOOOOOOOOO..............
दोस्तों आज के लिए इतना HI....
आपका अपना V..J....