ATTITUDE.....( MAGIC + ROMANCE ) - Page 12 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

ATTITUDE.....( MAGIC + ROMANCE )

अब तक आपने पढ़ा की विक्रम क्यूरियस के लोगों को तोह बचा लेता है पर नाही अपने दोस्तों को बचा पाटा है और नाही HI खुदको

अब आगे:-

फाइनल CHAPTER

(एंगेल्स सैक्रिफाइस & डेविल्स डेमोलिशन)

अपडेट-91

प्लेनेट- एअर्थ

प्लेस-********

200 फ़ीट गहरा PAANI.....EK दायरे में बंधी हुई ये पानी की दुनिया पर उसके बावजूद इसके अंदर का दृश्य अंतहीन समंदर से बिलकुल अलग नहीं...

गहरा पर आँखों से देखा और इसकी खूबसूतरी का पूरा अवलोकन किया जा सके ऐसा पानी....

और उस पानी की सतह और गहरायी दोनों पर हज़ारों की तादाद में तैरती ख़ूबसूरत मछलियां जिनका ये साम्राज्य है....

मछलिया जब एक समूह एक ग्रुप में एक ले में तैरती HAIN,TOH वो नज़ारा देखने में अध्बुध लगता है.....

पर आज इन मछलियों को तैरते देख कुछ डाउट हो रहा hai,kyunki साड़ी मछलियां sidhe,yaa दाएं बाएं ना तैरकर ऊपर से सीधे निचे पानी के ताल की तरफ जा रही हैं और उससे भी अजीब ये है की वो वापस नहीं आ रही हैं....

तोह chaliye,hum भी एक डूबकी लगाएं और देखे की आखिर माजरा क्या hai..???ye मछलियां आखिर जा कहाँ रही हैं.....????

अरे ये kya!!!!!aisa तोह ना मैंने कभी देखा ना suna.....ek और अद्भुद घटना....

नहीं समझे doston,chaliye समझाता hun....saari मछलियां पानी के लास्ट पॉइंट जिसकी गहराई जैसा की मैंने बताया था की 200 फ़ीट hai,us जगह पर एक सर्किल बनाकर गोल गोल घूम रही हैं....

पर उनकी तादाद इतनी ज़्यादा है की ये दिख नहीं रहा की आखिर वो सब आखिर किस चीज़ की चक्कर लगा रहीं हैं....

की तभी............

उस झुण्ड में हल्का गैप आया जिस वजह से उनके आगे की चीज़ या फिर ये कहूं की आगे ध्यान की मुद्रा में बैठे एक इंसान का चेहरा दिख गया और ये इंसान और कोई नहीं विक्रम है......

अब आप सब के दिमाग में दो बातें आएँगी...

pehli,ki विक्रम पानी के 200 फ़ीट अंदर आखिर कर क्या रहा है और

dusri,VIKRAM जब सामने है तोह फिर मई कौन हूँ?????

तोह दोस्तों मई वो विक्रम हूँ जो मेरे सामने बैठा विक्रम कभी हुआ करता था....

अभी भी नहीं samjhe,mai विक्रम का वो अस्तित्व हूँ जो वो खो चूका hai...LORD ऑफ़ एंगेल्स.... जी हाँ doston,yahi है मेरा नाम और विक्रम की पहचान....

एक ऐसा नाम जिसने अपनी पहचान खो दी hai.....jis तरह आत्मा शरीर के बिना और शरीर आत्मा के बिना अधूरे रहते hain,waise hi मई और विक्रम भी एक दूसरे की बिना अधूरे हैं....

पर इसका ये मतलब नहीं है की विक्रम ने अपनी शक्तियां भी खो दी hai....ASMODEUS विक्रम से उसकी पोजीशन उसका पढ़ छीन सकता है पर उसकी खुदसे कमाई शक्ति & मोस्ट इम्पॉर्टन्टलय उसका ऐटिटूड नहीं....

विक्रम में आज भी इतनी ताक़त है की वो पुरे ब्रम्हांड को ख़त्म कर सकता है पर जिस अधिकार से वो ये कर सकता है वो अब ास्मोडियस की वजह से उससे दूर कड़ी है....

khair,ye कहानी तोह आफ्टरऑल विक्रम की hi hai...mai तोह बस हर दिन की तरह एक बार अपने मालिक को देखने आता हूँ...

अब जब मैंने उनके दर्शन कर लिए hain,toh अब मई वापस जाता hun...ab आप विक्रम के हवाले......

मेरी ऊर्जा जो की कभी मेरा नाम हुआ करती thi,wo मुझे देखकर गायब हो गयी....

यहाँ मेरी आँखें अब भी बंद thi..waise भी मुझे अब कोई भी naam,kisi भी काम से कोई मतलब नहीं रह गया था....

पर फिर भी अभी मेरी बंद आँखों के ऊपर मेरे माथे पर टेंशन और दर्द की सिलवटें उभर आयी थी और इसका कारण था की फ़िलहाल मेरे बंद आँखों के सामने एक फ़्लैश बैक सन चल रहा था...

चलिए ,मेरे साथ आप सब भी मुझे दिख रहे सन को देख लीजिये

फ़्लैश बैक सन:-

क्या hua,itni साधु जैसे शकल क्यों बनायीं हुई है तूने.......!!!????

अंजलि की बात का रोनित ने कोई जवाब नहीं दिया बस उससे एक तक देखने लगा.....

अंजलि- lo,ab मुझे घूरने laga....kuch बोलेगा भी!!!!

रोनित- कैसे कर लेती है तू???

अंजलि- क्या कर लेती हूँ मई???

रोनित- है कर अपने गम को कैसे छुपा लेती है तू????

रोनित की बात सुनकर अंजलि की झूटी हसी फीकी पढ़ gayi..ek पल के लिए उसकी असली उदासी उसके आँखों तक आयी पर उसने झट से खुदको कण्ट्रोल कर लिया...

पर ये कुछ सेकण्ड्स काफी थे रोनित को अंजलि के मन के भावों को उसके आँखें के ज़रिये पढ़ने के लिए....

रोनित- ANJU,mere सामने तोह कमसेकम प्रिटेंड करना chhod.......mai जानता हूँ की तू खुश नहीं है.....

रोनित की बात सुनकर अंजलि ने जो अपने आंसू दबा कर रखे the,wo आँखों की सलाखों को तोड़ बाहर आ गए....

रोनित ने अंजलि को झट से अपने गले लगा लिया....

अंजलि- 6 mahine...pure 6 महीने हो गए V.J को इस्ला

गए hue.....naa तोह वो अब तक लौटा है और नाही उसने कोई मेस्सगे दिया है...

उसके दिमाग तक भी मई नहीं पहुँच पा रही hun....aur उसके ऊपर नाही मई SHAILA,MOKALSAR और अक्षांत से कनेक्ट हो पा रही हूँ....

इतनी साड़ी निगेटिव्स का एक साथ होना कोई कोइंसिडेन्स तोह हो नहीं sakta....V.J ज़रूर कोई बड़ी मुसीबत में hai...aur हम दोनों उसकी कोई मदद भी नहीं कर पा रहे हैं....

रोनित- V.J से कनेक्ट ना हो पाना नार्मल hai..kyunki वो किसीको भी ऐसा करने से रोक सकता है..

पर SHAILA,MOKALSAR,AKSHAANT,in तीनो से तोह मैंने भी कई बार खुदको कनेक्ट करने की कोशिश की पर नहीं कर पाया....

और सबसे बड़ी बात की हम इस्ला और वारियर्स वर्ल्ड के लिए वर्ल्ड दूर भी ओपन नहीं कर पा रहे hain...ye कोई छोटी बात नहीं हो सकती...

ज़रूर कुछ बड़ा हुआ है और शायद इसीलिए hi V.J ने हमे अपने साथ जाने से मन किया था....

पर तभी रोनित को कुछ याद आया...

रोनित- ANJU,tune एक बात नोटिस की hai....???V.J के जाने के बाद फर्स्ट तीन महीने तक तोह उसके क्लोन का rawaiya,behaviour नार्मल था...

वो V.J की तरह hi बेहवे कर रहा tha,par फिर अचानक उसके नेचर me,ATTITUDE में हल्का चेंज आया है....

बाकी के घर वालों का तोह पता nahi,par मीनू आंटी ने भी इस बात पर गौर किया है...

V.J के क्लोन के अंदर V.J का कोई टैलेंट हो या ना ho,par उसका बेहेवियर तोह उसके गेन्स में होना चाहिए....

पर V.J का क्लोन कई बार आंटी से भी थोड़ा रौदे हो जाता hai..badhti उम्र का चेंज समझ कर आंटी ने तोह कुछ नहीं कहा पर जब मैंने उससे कोंफ्रोंट किया तोह उसने मेरी बातों को भी अवॉयड कर दिया...

ऐसा लग hi नहीं रहा है जैसे वो V.J का क्लोन है....

अंजलि- सिर्फ V.J का नहीं अवंतिका का क्लोन भी अवंतिका का क्लोन नहीं लग रहा है...

ओह शीट......

अंजलि ने अपने गम में बोल तोह दिया पर फिर उससे रीलीज़ हुआ की उसने क्या बोल दिया है...

दरअसल V.J ने सिर्फ अंजलि को बताया था की वो अवंतिका को भी साथ ले जा रहा है रोनित को नहीं...

और reason,RONIT भाई साहब का हाइपर behaviour...agar रोनित को ये बात पता होती तो वो भी साथ जाने की ज़िद करता...

रोनित- WHATTT!!!!jisse हम रेगुलरली मिलते हैं वो अवंतिका का क्लोन है और असली अवंतिका V.J के साथ गयी है....

इसकी ऐसी की taisi...itni बड़ी बात और तूने मुझसे छुपाई....

अंजलि- मुझसे V.J ने प्रॉमिस लिया था yaar....usse पता था की अगर तुझे ये बात पता होती की अवंतिका भी V.J के साथ जा रही hai,toh तू भी साथ जाने की ज़िद्द करता....

रोनित- हाँ toh,zaroor karta....wo उससे लेजा सकता है पर हमे nahi....waah....

अंजलि- yaar,tujhe तोह पता है ना की V.J कोई भी काम बिना कोई रीज़न के नहीं karta..AVANTIKA को साथ लेजाने में भी ज़रूर कोई न कोई रीज़न होगा...

रोनित- तोह तूने उससे रीज़न भी नहीं पूछा....????!!!!!

ANHALI-pucha tha,par उसने कहा की वापस आकर सब बता देगा....

रोनित- saala,wapas hi तोह नहीं आया ye.....ek second,tu अवंतिका के क्लोन के बारे में क्या कह रही थी????

अंजलि- अरे haan....V.J का क्लोन जैसे वीयर्ड बेहवे कर रहा है naa,thik वैसे hi अवंतिका की क्लोन भी कभी कभी अजीब बेहवे करती है...

हमारी अवंतिका कितनी कूल होकर आराम से बात करती hai,jabki उसकी क्लोन कभी कभी अपनी बातों में अग्रेसिव हो जाती है और सबसे बड़ी बात....

मैंने अवंतिका के क्लोन की आँखों में हमेशा एक ग़ुस्सा देखा hai,khaas कर उस वक़्त जब वो हम दोनों से बात कर रही होती है....

रोनित- अजीब hai..pehle V.J और अवंतिका अपने क्लोन्स पीछे छोड़ कर जाते hain,fir अचानक हमारा उनसे और वो जिस जगह गए hai,us जगह और वहां के लोगों से कांटेक्ट टूट जाता hai,fir वहां जाने का वर्ल्ड दूर भी नहीं खुलता और यहाँ उनके क्लोन्स भी उनसे अलग बेहवे करने लगते हैं....

साला ये चक्कर क्या hai,aur इससे सुलझाएं कैसे????

अंजलि- क्यों ना हम एक बार अवंतिका के क्लोन से बात करके देखें.....

रोनित- haan,ye सही rahega..chal चलते हैं.....

अंजलि और रोनित अवंतिका के घर निकल जाते hain..unke घर पहुँचते hi अवंतिका की माँ उन्हें बताती है की अवंतिका अपने कामे में है....

दोनों उसके कमरे की तरफ निकल पड़ते हैं.....

अंजलि- अवनि.......

रूम में पहुँचते hi दोनों की नज़र अवंतिका के क्लोन पर पड़ती है जो दरवाज़े की तरफ hi मुँह करके बैठी थी...

वहीँ अंजलि और रोनित को अपने सामने देख अवंतिका के क्लोन की आँखों में ग़ुस्सा दिखने लगता है जिससे वो छुपाने की कोशिश कर रही होती है पर इस बार अंजलि की hi तरह रोनित भी ये बात नोटिस कर लता है......

रोनित- कौन हो tum????aur V.J के घर पर जो क्लोन hai,wo कौन है????

इससे पहले की अंजलि कुछ kahe,RONIT अपने सवाल के तीर अवंतिका के ऊपर छोड़ देता है....

यूँ अचानक सवाल सुनकर अवंतिका की क्लोन हड़बड़ा जाती है पर फिर तुरंत खुदको नार्मल भी कर लेती है....

अवंतिका- क्या मतलब है tumhara...mai अवंतिका की क्लोन हूँ और V.J के घर पर V.J का क्लोन है.....

अवंतिका की क्लोन की बात सुनकर पहले तोह अंजलि और रोनित शॉकेड हो जाते है पर इस शॉक से उनका डाउट भी क्लियर हो जाता है की ना तोह उनके सामने कड़ी लड़की अवंतिका की असली क्लोन है और नाही V.J का क्लोन वो है जिससे V.J ने अपने पीछे यहाँ छोड़ा था....

रोनित- तूने खुद hi ये साबित कर दिया की तू अवंतिका की क्लोन नहीं है और अगर तू वो क्लोन नहीं है जिससे हमारे दोस्त ने बनाया था तोह V.J के घर पर जो है वो भी हमारे दोस्त का क्लोन नहीं हो सकता....

रोनित की बात सुनकर अवंतिका की क्लोन शॉकेड हो जाती है....

अवंतिका- ये तुम कैसे कह सकते हो???

अंजलि- एक तरह से क्लोन्स अपने असली रूप के यार फिर उस रूप को देने वाले के गुलाम होते हैं....

इसीलिए क्लोन्स कभी भी अपने असली रूप का या फिर उसका जिसने उससे रूप दिया ho,uska नाम नहीं लेते....

ख़ास कर किसी ऐसे के सामने जो उनकी असलियत जानते ho...par तुमने अभी विक्रम को V.J कहा.....

अपने मालिक का नाम लिया वो भी वो नाम जिससे उससे सिर्फ उसके दोस्त बुलाते हैं...

इसीलिए तुम अवंतिका की वो क्लोन तोह हो नहीं सकती जो V.J ने बनाया था और अगर तुम V.J की बनायीं क्लोन नहीं हो तोह खुद V.J का क्लोन भी कोई और है क्यूंकि अगर ऐसा नहीं होता तोह V.J का क्लोन तुम्हे पहचान लेता.....

1

कुछ पल तक अवंतिका की क्लोन रोनित और अंजलि को घूरती रही पर फिर.....

हहहहहहहहहहहह.........

वो क्लोन हसने लगी पर उसकी हसी सुन रोनित और अंजलि फिरसे चौंक गए और वो इसीलिए क्यूंकि अवंतिका की क्लोन के हस्ते वक़्त जो आवाज़ निकल रही थी वो किसी और लड़की की थी....

पर अभी उन दोनों को दो बार और चौंका बचा tha,kyunki अवंतिका के ठीक बाजू में एक काला साया उभरा और उस काले साये ने हौले हौले रूप लेना शुरू किया और आख़िरकार जब उस साये का रूप पूरा हुआ तोह वहां पर V.J का क्लोन खड़ा था...

अंजलि या रोनित कुछ कहते उससे पहले hi उन्हें अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा...

और वो इसलिलये क्यूंकि अवंतिका और V.J के क्लोन्स ने एक बार फिरसे अपना रूप बदलना शुरू किया या फिर ये कहूं की अब वो दोनों अपने असली रूप में आ रहे थे...

कुछ hi पलों में रोनित और अंजलि के सामने दो नए चेहरे खड़े थे....

अंजलि- कौन हो tum????aur V.J और अवंतिका कहाँ हैं???

1सत पर्सन- भुविका

2ंद पर्सन- बिल्जेबब

रोनित- अब्बे पौराणिक कथाओं से बहार फुंडकर कर आये हो kya???ye कैसे नाम रखे हैं तुम दोनों के तुम्हारे घर वालों ने...

बिल्जेबब- पौराणिक कथाएं हमारे बाद जन्मी हैं बच्चे....

रोनित- तू इतना डोकरा hai.....kya लगता है यार जो अभी तक जवान है.....

बिल्जेबब- लगता नहीं लगवाता hun..mout को gale...tum दोनों को भी वही लगवाने आया था पर अब योजना थोड़ी बदल गयी है...

तुझे बोलने का बोहोत शौक है naa,aaj के बाद तेरे मुँह में जुबां तोह होगी पर तू कुछ बोलेगा nahi....bas इस पल को याद कर कर के तड़पेगा....

भुविका- तेरे सामने आज तेरी प्रेमिका मारेगी और तू कुछ कर नहीं पायेगा....

BEELZEBUB-aur जब ऐसा होगा तब देखेंगे की तेरी जुबां कितनी चलती है...

बिल्जेबब और भुविका की बात सुनकर रोनित को ग़ुस्सा आ गया था पर इससे पहले की वो कुछ बोलता या करता...

अंजलि- V.J कहाँ है???

बिल्जेबब- फ़िलहाल ज़िंदा hain...par कब तक पता नहीं!!!!

रोनित- तुम जैसे लाखों को वो अपने मूठ में बहा de,itna दम है उसमे समझा चूतिये.....

रोनित की बात सुनकर बिल्जेबब को तोह ज़्यादा नहीं पर भुविका को ग़ुस्सा आ गया...

और अगले hi पल.........

अंजलि- अरे हम यहाँ कैसे????

रोनित भी इधर उधर देखने लगा.....

हुआ ये की भुविका ने अपने मन में एक सुनसान जगह का आवाहन किया और अगले hi पल चारों उस सुनसान जगह पर पहुँच चुके थे.....

भुविका- ये है तुम्हारी मरण भूमि....

बिना अपनी मर्ज़ी के भुविका का यूँ उन दोनों को एक नयी जगह पर ट्रांसपोर्ट करने से रोनित और अंजलि ये समझ गए थे की उन दोनों के सामने जो दो लोग खड़े hain,wo मामूली नहीं हैं...

दोनों ने hi तलवार का आवाहन किया और अगले hi पल.....

अह्हह्ह्ह्ह............

आह्ह्ह्हह.............

ये दोनों दर्द भरी आह रोनित और अंजलि के मुँह से निकली थी पर ये आह ना तोह भुविका के वार से निकली थी और नाही hi बिल्जेबब के वार से...

दरअसल आवाहन से प्रकट हुई रोनित और अंजलि के हाथ की तलवार अगले hi पल आग जैसी गर्म होकर गलने लगी...

यहाँ तक की तलवार की जिस मूट को अंजलि और रोनित पकडे हुए the,wo भी आग सी गर्म हो गयी जिस वजह से दोनों के हाथ से उनकी तलवार छूठ गयी और उनके मुँह से ाः निकल गयी.....

बिल्जेबब- क्या hua???baat नहीं bani...ek और बार कोशिश कर लो....

रोनित- तेरी तोह मई........

ये बोलकर रोनित तेज़ी से बिल्जेबब की तरफ आगे बढ़ा पर वो ज़्यादा आगे बढ़ नहीं पाया..

बिल्जेबब ने हवा रोनित के सामने उसके शरीर के साइज का hi एक एयर फाॅर्स खड़ा कर दिया जिसकी वजह से रोनित आगे नहीं बढ़ पा रहा था....

वहीँ अंजलि ने एक बार फिरसे एक तलवार का आवाहन किया पर इस बार उसने उससे हाथ में ना लेकर हवा के सहारे होल्ड किया और भुविका की तरफ छलांग लगा दी...

अंजलि को ऐसा करते देख भुविका के चेहरे पर एक ज़हरीली मुस्कान आ गयी...

भुविका ने भी बिल्जेबब की hi तरह हवा में सामने की तरफ एक तरंग छोड़ा जो सामने से तैरता हुआ आया अंजलि के शरीर से टकराया...

अंजलि का शरीर वापस पीछे की तरफ फेका गया पर अंजलि ने खुदको हवा में hi एडजस्ट कर लिया और कलाबाज़ी खाते हुए अपने पैरों पर लैंड हुई....

बिल्जेबब- तुम दोनों को खुश होना चाहिए की तुम्हारे जैसे साधारण तुच्छ लोगों को हम जैसे महा शक्तिशाली डेविल्स से लड़ने का मौका मिला.....

अंजलि- mahashaktishali!!!!tum दोनों के अंदर जो शक्तियां hain,ya तोह वो विक्रम की जागीर है यार फिर उसके भाई की....

रोनित- ये एक भीक hai...aur भीक में मिली शक्तियों का घमंड नहीं किया jaata....jab तक हमारा दोस्त वापस नहीं आ jaata,apni इस गलत फेहमी को जी लो...

उसके बाद मौका नहीं मिलेगा....

अंजलि और रोनित की बात सुनकर बिल्जेबब और भुविका को ग़ुस्सा आ गया....

बिल्जेबब एक सेकंड के सौवे हिस्से में रोनित के ठीक सामने पहुँच गया और....

रोणिततटत.........

ये आवाज़ अंजलि के मुँह से निकली thi....kaaran....!!!!

इससे पहले की रोनित कुछ समझ paata,BEELZEBUB ने एक पंच रोनित के पेट में मारा....

रोनित के मुँह से खून बाहर फेका गया जिससे देखकर अंजलि की चीख निकल गयी पर बिल्जेबब यही नहीं रूका....

रोनित के झुकने की वजह से उसका माथा बिल्जेबब के पेअर के सामने tha...BEELZEBUB ने अपने घुटने मोड़ते हुए रोनित के सेरीब्रम ( सर ) पर एक प्रहार किया...

रोनित के सर के नस इस टक्कर से हिल से gaye...RONIT के नाक से खून की पतली सी नदी बहने लगी....

रोणिततत.......

अंजलि की ये दर्द भरी चीख और तेज़ thi....par दर्द के साथ साथ अंजलि को नोहोत तेज़ ग़ुस्सा भी आया और जैसे hi उसने अपना सर सामने किया वो शॉकेड हो गयी..

kaaran,uske जस्ट सामने भुविका कड़ी थी जिसके चेहरे पर हैवानियत से भरी मुस्कान थी और अगले hi पल.....

अह्ह्ह्हह्हह.........

नाहीईई.........

दर्द भरी कराह अंजलि के मुँह से निकली thi..wajah,uske सीने के ठीक नीचे पेट जहाँ से शुरू होता है वहां से एक तलवार आर पार हो चुकी थी.....

ये एक मायावी तलवार थी जिससे भुविका ने बिना छुए इस्तेमाल किया था जिस वजह से अंजलि उससे देख नहीं पायी......

दूसरी आवाज़ रोनित के मुँह से निकली थी जो अपनी आधी खुली आधी बंद हो रही आँखों से अपने प्यार को मरते हुए देख रहा था....

अंजलि के अंदर तलवार ग़ुस्सा भुविका रोनित की तरफ बढ़ी पर....

बिल्जेबब- अपने मेहबूब को अपने आखों के सामने मरते देखने से बड़ी सजा और कुछ नहीं हो सकती....

रहने दे isse...maine कहा tha,baaki की ज़िन्दगी इससे बिना आवाज़ के आज के दिन को याद करके रो रो कर बितानी होगी...

ज़िन्दगी hi इसकी सजा है........

बिल्जेबब की बात वो आखरी आवाज़ थी जो रोनित के कानो ने सुनी....

इसके बाद रोनित की आँखें बंद होती चली गयी और उसका शरीर एक तरफ लुढ़कता चला गया..

वही उससे कुछ दूर पर अपने घुटनो के बल एक तलवार को अपने आर पार लिए बैठी अंजलि भी रोनित को देखते हुए एक तरफ लुढ़क गयी.....

रोनित से उलट अंजलि के आँखों में एक सुकून tha...sukoon की कमसेकम उसका प्यार सिर्फ बेहोश हुआ है मारा नहीं......

सुकून की अपने आखरी लम्हो में उसके आँखों के सामने उसका प्यार तोह है.....

एक खून की हिचकी लेते हुए अंजलि की आखें बंद हो गयी....

वहां अंजलि की आँखें बंद hui,yahan हमेशा की तरह मेरे सर में दर्द उठा और मेरी आखें खुल गयी.....

मुझे जिस मछलियों ने चारों तरफ से घेरा हुआ tha,mere आँख खुलते hi वो सब भाग गयीं.....

ठन्डे पानी के अंदर इस वक़्त मेरी आखें आग सी गर्म thi....pura पानी मेरे आँखों की गर्मी से गर्म होने लगा....

कुछ देर तक मई शुन्य में घूरता raha,fir अपनी आखें बंद की और जब दोबारा खोली तोह तोह सब ठीक था....

मैंने अपने शरीर को एक झटका दिया और अगले hi पल मेरा शरीर एक तेज़ तीर की स्पीड से पानी को चीरता हुआ बाहर आ गया..2 सेकंड और मेरे पेअर हरे हरे घास के ऊपर थे...

मई- ऐ zindagi,tu भी ज़्यादा जीकर

क्या करेगी?????

dekhna,ek दिन आएगा जब तू

भी तड़प तड़प कर मारेगी.........

मई गायब हो गया.......

प्लेस- ST,PETER'S COLLEGE,DELHI

सत PETER'S COLLEGE....ONE ऑफ़ थे फिनस्ट कॉलेज इन DELHI....MATHS,SCIENCE,COMMERCE,ARTS, यहाँ हर सब्जेक्ट का अलग अलग डिपार्टमेंट है....

और आज यहाँ पर हर सब्जेक्ट के एडमिशन और रेडमीशन का फाइनल डेट hai...commerce स्टूडेंट्स हो या आर्ट्स students,engineering सेक्टर हो या फिर मेडिकल फील्ड के students,sabhi आज यहाँ फॉर्म फइलल करने के लिए मौजूद हैं....

ST.PETERS की इंटरके में बना एक बड़ा सा लोहे का gate,jisse अभी होते हुए B.M.W से जैगुआर tak,AUDI से लेकर मस्टंग तक साड़ी ब्रांड्स की कार एंटर कर रही थी...

की तभी.........

अब्बे लोदु यही ROK........APNE अम्मा के घर तक छोड़ेगा क्या????

मेरी आवाज़ सुनकर ऑटो ड्राइवर जो कॉलेज गेट को क्रॉस करता हुआ आगे निकलने लगा tha,usne तुरंत ब्रेक मार दी.....

ऑटो ड्राइवर- क्या sahab,gaali तोह मत दो....

मई- aww,mere बाबू को बुरा लग gaya...aa,ek चुम्मी देता hun...saale BHOS******,auto को प्लेन बनाकर भगाये जा रहा hai,toh गाली नहीं तोह क्या तारीफ़ करू तेरी..

तेरे को बोलै तोह था की ST.PETER जाना hai,toh रोका काहे नहीं तू....???

ऑटो ड्राइवर- oh,toh आपको सत पीटर कॉलेज जाना tha,mujhe लगा आप सत पेटर्स चर्च बोल रहे ho,isiliye मई भगा रहा था....

मई- aisa..toh एक काम kar.pehle चर्च hi lele...par चर्च से थोड़ा पहले उतर dena..udhar तेरा मुरदुर कर dunga,fir चर्च में कॉनफीसिओं बॉक्स में जाकर गॉड से माफ़ी मांग लूंगा...

वैसे भी गॉड आज कल इंसानो से ज़्यादा शैतानो पर मेहरबान हैं......

चल चलें...

ऑटो ड्राइवर- क्या साहब आप bhi...ab उतरिये bhi,aapka कॉलेज आ गया है..

मई- ाचा हुआ बता diya....waise कितने हुए तेरे....???

ऑटो ड्राइवर- 150 रूपीस...

मई- कितना 150...सालों लूट मचा राखी है सब ne....isse ाचा तोह पैदल आ jaata....le पकड़ मेरा......

ऑटो ड्राइवर - क्या साहब????

मई- क्या क्या पकड़ता है tu....pakad मेरा पैसा जो अब तेरा हो गया है...

ये बोलकर मैंने ऑटो वाले को पैसे दिए और कॉलेज गेट की तरफ निकल पड़ा....

मई- तोह ये है ST.PETERS....ST स्टीफेंस जैसा hi है.....

मई इंटरके गेट के बीच खड़े हो एक अंगड़ाई ले कॉलेज को देखने लगा....

मई- लगता है दिल्ली के सारे रहिस लौंडे लौंडिया यहीं पढ़ते hain....saalon के बीच मई कहा फिट बैठता हूँ....

घंटा मई कहाँ फिट बैठता hun...saale ये सब मेरे साथ कौनसा फिट बैठते हैं...

अजीब चुतियापा hai...form सबमिशन का लास्ट डेट है और ये सब चुटी***** गैप मारने में बिजी हैं....

हाँ सालों के माप बाप ने फ़ोन में hi सब काम करवा दिया होगा गन्दुओं का...

कोई काम खुदसे नहीं hota.saale सुहागरात मानाने के लिए भी किसी और की मदद लेंगे क्या????

अरे भाड़ में जाएँ ये सब और मई इन छू*** के बारे में सोचकर क्यों अपना टाइम वास्ते कर रहा हूँ....

चल भाई V.J...jaldi से फॉर्म भर और कल्टी मार इधर se..itne सारे पैसे वाले भिखारियों को देखकर उलटी आ रही है मेरेको...

पोन्नपोणंण...............

मई आगे बढ़ने hi वाला था की मेरे पीछे से किसी ने कार हॉर्न ब्लो किया....

वैसे तोह गलती मेरी थी क्यूंकि मई इंटरके गेट के बीच में खड़ा था पर......

घंटा गलती मेरी थी....

मेरी marzi,mai जहाँ भी खड़ा रहूं....

मई- अब्बे chup......apne बाप के गए**** में जाकर बजा horn....ho सकता है तेरेको एक भाई का सुख मिल जाए....

मई पीछे पलट कर chillaya.....mere पीछे इस वक़्त एक रेड कलर की फेरारी कड़ी थी जिसके अंदर दो बन्दे बैठे हुए थे और फ़िलहाल उन दोनों के hi सर बाहर थे...

मैंने जो बोलै वो उन दोनों ने सुन लिया और मेरी बात सुनकर दोनों की hi सटक गयी....

1सत बाँदा- क्या बोलै बस*******........

अपने अपने साइड का दूर खोलते खोलते गाली देते देते दोनों बाहर आने के लिए हुए hi थे की मेरा हाथ उनकी कार के बोनेट के बीच में पड़ा और अगले hi पल

भाददददद.........

इस आवाज़ के साथ उनकी फेरारी की मौत हो गयी....

बोनेट के बीच से होते हुए मेरा हाथ इंजन तक को चीरते हुए निकल गया....

वो तोह गनीमत है की उनकी कार का ओह सॉरी ी मैं उनकी लेट कार के सेफ्टी बलून्स तुरंत एक्टिवटे हो गए जिस वजह से उनका शरीर पीछे सीट्स से चिपक सा गया वर्ण उन दोनों को भी काफी सीरियस चोटें आती.....

जहाँ उन सेफ्टी बलून्स के पीछे दबे उन दो लड़कों के चेहरों पर दर के भाव the,wahin मेरे ाएस पास जितने भी स्टूडेंट्स the,wo भी काफी शॉकेड थे...

दरअसल उन सब ने बस उस आवाज़ को सुना था जो मेरे हाथों के उस कार के बोनेट पर लगने के बाद हुई thi..kisi ने भी उस पुरे इंसिडेंट को नहीं देखा था वर्ण उनके शॉक सदमे में कोवर्ट हो जाते...

सभी मेरे सामने कड़ी और शुड ी से पड़ी कार की तरफ लपके वहीँ मई अपनी मस्ती में कॉलेज के अंदर की तरफ निकल पड़ा....

मई थोड़ा आगे hi गया था की,

एक्सक्यूज़ में.....

आवाज़ मेरे पीछे से आयी thi..mai पलटा तोह देखा की एक सुखी कंकाल के ऊपर हलकी हलकी चमड़ी ओढ़े लड़का आँखों में मोठे मोठे लेन्सेस वाला चश्मा लगाए मुझे देख रहा था....

मई- bhai,mere पास खाने के लिए कुछ नहीं है...

मेरी बात उसके पल्ले नहीं पड़ी...

लड़का- khaana...!!!!mai तोह आपसे ये पूछना चाह रहा था की एडमिशन फॉर्म कहाँ सबमिट करना है???

मई- yahan.meri चड्डी के अंदर.... आ घुस जा.....

लड़का- व्हाट nonsense...ye कैसी बात कर रहे हैं aap???aapko किसी से बात करने का तरीका भी नहीं पता क्या???

मई- नहीं pata..ab ghusega.....abbe chu*****,mai क्या तेरेको यहाँ का पेओन दीखता हूँ जो मुझसे अड्रेस पूछ रहा है तू...

और वैसे bhi,tujhe कॉलेज में एडमिशन की nahi,hospital में एडमिट होने की ज़रुरत hai...saale,halki सी हवा चल गयी naa,toh उड़ जाएगा तू...

लड़का- मैंने आज तक तुम्हारे जैसे बत्तमीज़ लड़का नहीं देखा...

मई- और देखेगा भी nahi..mere जैसे पीेछे बार बार पैदा नहीं hote....aur वाह beta,bohot जल्दी आप से तुम में आ गया तू...

लड़का- तुम आप कहने के लायक नहीं हो...

मई- अब्बे तू भी तोह ज़िंदा कहलाने के लायक नहीं hai...fir भी ज़िंदा तोह है ना...

लड़का- तुमसे तोह बात करना hi बेकार है...

ये बोलकर वो दूसरी तरफ जाने लगा...

मई- ोये furfundi,us तरफ नहीं इस taraf..yahan हो रहे हैं फॉर्म सबमिट...

मैंने एक तरफ पॉइंट करते हुए उस बन्दे को बताया...

लड़का- जब पता था तोह सीधे सीधे बताया क्यों नहीं...

मई- में तेरी बॉडी चेक आउट कर रहा tha...yaar एक बात तोह bata,kitne सालों के उपवास के बाद ऐसी बॉडी banegi...ek बार मई भी तरय करूँगा....

उस लड़के ने एक बार मुझे घर कर dekha,aur फिर मेरे दिखाए रास्ते की तरफ चल पड़ा..

मई भी उसके पीछे पीछे चलने लगा.....

लड़का- ओह god...yahan तोह कितनी लम्बी लाइन hai....hamari बारी आने में तोह 2 घंटे से ज़्यादा लग जाएंगे...

मई- हमारी नहीं सिर्फ teri....mai तोह 2 मिनट में hi फॉर्म भर दूंगा...

लड़का- बोल तोह ऐसा रहा है जैसे करोड़ पति बाप का बीटा हो!!!!

मई- बाप के नाम और पैसों की ज़रुरत बिना रीढ़ की हड्डियों वाले बन्दों को होती hai...mujhe नहीं....

अपने पास हर चीज़ का जुगाड़ रहता है....

लड़का- कैसा जुगाड़....

मई- दिखा तोह दूँ पर फटेगी तोह नहीं तेरी....

लड़का- मई किसी से नहीं डरता....

मई- हाँ दीखता है...

ये बोलकर मैंने अपने बैग में हाथ डाला और अगले hi पल जब मेरा हाथ बाहर निकला तोह.....

मई- अब्बे chup.....chilla कर गेम मत ख़राब कर.....

कुछ देर लगा फिर धीरे धीरे वो लड़का नार्मल हो गया पर अभी भी वो बोहोत डरा हुआ था...

तोह हुआ ये की जैसे hi मैंने अपने बैग से अपना लेफ्ट हाथ बाहर निकला तोह मेरे हाथों में एक ब्लैक माम्बा था....( स्नेक )

और ब्लैक माम्बा को देखकर तोह अचे अचे दर जाते hain,fir मेरे सामने खड़ा लड़का तोह पहले से सूखा चुवारा था....

सांप को देखकर वो चिल्लाने hi वाला था पर मैंने उसके मुँह को अपने दूसरे हाथ से बंद कर दिया और कुछ देर बाद जब वो नार्मल हुआ तब मैंने अपना हाथ हटाया...

लड़का- ये तोह

मई- ब्लैक माम्बा है....

लड़के की ये नाम सुनकर और फैट गयी...

लड़का- पर ये तुम्हे काट क्यों नहीं रहा...

मई- मैंने इससे शादी कर ली hai....ab भला कोई अपने पति को काटता है क्या??

लड़का- तुम कोई भी बात का सीधा सीधा जवाब नहीं दे सकते क्या???

मई- nahi....abbe बैटरी कब से ये मुँह खोले हुए है ध्यान से dekh..iske दांत hi नहीं हैं तोह ये डसेगा कैसे...

उस लड़के ने जब ध्यान से देखा तोह पाया की मई सच बोल रहा हूँ...

लड़का- अरे haan.iske तोह दांत hi नहीं hain..par इससे यहाँ क्यों लाया है...????

मई- नागिन डांस करवाने....

ये बोलकर मैंने सांप को नीचे ज़मीं पर छोड़ दिया और अगले hi पल.....

मई- SAANP.........BHAAGO........

मेरी आवाज़ सुन सामने खड़े बन्दों की नज़र उनके तरफ आ रहे सांप पे पड़ी और उसके बाद क्या हुआ hoga,ye तोह आप सब जानते hi हैं....

सांप से ज़्यादा तोह वहां मौजूद स्टूडेंट्स टेढ़े मेढ़े होकर भागने लगे...1 मिनट से भी काम टाइम में पूरा एडमिशन काउंटर खाली हो गया....

सब के गायब होते hi मैंने सांप को भी गायब कर दिया....

मई- चलो bhai,mai चला एडमीशन karane...tu 2 घंटे बाद ायियो....

लड़का- bhai,mai भी चलूँ क्या???

मई- अब्बे मेरी शादी है क्या जो तू इनविटेशन देने पर hi aayega....chal....

मई और वो बाँदा एडमिशन कोउन्टर पर पहुंचे...

मई- sirji,ye मेरा फॉर्म और स्कालरशिप लेटर......

काउंटर वाले बन्दे ने पहले मेरा स्कालरशिप लेटर देखा....

कन्फर्म करने के बाद उसने मेरा एडमिशन फॉर्म ले लिया....

सर- तोह आप हैं नेशनल टोपर विक्रम जयराज सिंह......

मई- nahi,mai उसका हमशकल hun...usko मारकर उसकी जगह पढ़ने आया hun,free में...

मेरी बात सुनकर वो बाँदा है दिया...

सर- नीस सेंस ऑफ़ हुमूर....

अपना एडमिशन प्रोसेस कम्पलीट कर जब मई पलटा तोह मुझे हसी आ gayi...wo लड़का मुझे मुँह फाड़े देखे जा रहा था....

मई- इतनी गन्दी shakal,uspe मुँह फाड़ रखा है tune...aise hi मार दे yaar,dheere धीरे टार्चर ना कर....

लड़का- आप हैं नेशनल टोपर VIKRAM....aapne टॉप करने के बाद जितने भी इंटरव्यूज दिए hain,wo सब पढ़े है मैंने...

शायद आपकी फोटो भी देखि hai..par हमारी मुलाकात जिस तरह से hui,mai आपको पहचान hi नहीं paaya....hi,myself सुजीत नायर....

मई- वाह beta,aap से तुम, और फिर तुम से aap....aur मुझे पहचान कर क्या karega...APNI पहचान बना....

ये बोलकर मई आगे बढ़ गया और वो मुझे जाता देखता रह गया.....

प्लेस- होटल किसीने अनलिमिटेड

मैनेजर- हे u,mobile में घुसे रहने के पैसे मिलते है क्या tumhe...table no 4 अभी अभी ोकुप्य हुआ hai...jaao,aur आर्डर लो....

उस वेटर ने अपना मोबाइल जेब में डाला और टेबल no.4 की तरफ चल पड़ा.....

वेटर- गुड इवनिंग sir...good इवनिंग ma'aaaaaammmm...........tum............

वो लड़की भी वेटर को देखकर काफी शॉकेड हो गयी थी....

लड़का- दो ु क्नोव हिम????

पर उस लड़की ने अपने साथ आये लड़के की बात जैसे सुनी hi nahi..wo एक तक वेटर को देख रही थी......

जब लड़के ने देखा की उस लड़की ने उसकी बात नहीं सुनी तोह उसने उससे hilaya.....tab जाकर कहीं वो लड़की होश में आयी....

लड़की- विक्रम तुम....!!!!!

जी हाँ doston,ye वेटर और कोई नहीं मई hi था.....

और वो लड़की....

मई- hi SHAIFALI.......how अरे ु????

जी हाँ doston,ye हमारी कॉलेज की गेम क्वीन शैफाली hi थी जो अपने भाई के साथ यहाँ आयी हुई थी.....

शैफाली ने मेरे हाउ अरे ु के जवाब के बदले खुद hi सवाल पूछ लिया....

शैफाली- tum,waiter कैसे????

मई- अरे yaar,ye मेरा ड्रीम जॉब था जो फाइनली मुझे मिल गया....

मेरी बात सुनकर शैफाली का कजिन बरोथेर है दिया....

S/BROTHER- अरे yaar,uski फाइनेंसियल प्रॉब्लम होगी....

अपने भाई की बात सुनकर शैफाली ने उससे घूरकर देखा....

शैफाली- तुम्हारे डैड किस कंपनी के ब्रांच में सीनियर मैनेजर हैं???

S/BROTHER- जयराज स्टील.....

शैफाली- तुम्हे पता है ना की उनका बीटा मेरे साथ hi पढता है....

S/BROTHER- हाँ तोह???

शैफाली- मिलना चाहोगे उससे...???

S/BROTHER- ी वोउल्ड लव तू.....

शैफाली- तोह milo..tumhare सामने hi तोह खड़ा है....

शैफाली ने मेरी तरफ इशारा कर अपने भाई से ये बात कही और इसके बाद उसके भाई के चेहरे पर वही छू*** वाला रिएक्शन आ गया जिससे देखने से मुझे चिढ है....

शैफाली- यार V.J ये सब.....

मई- फिर कभी.......

मैंने शैफाली की बात बीच में hi काट दी.....

अभी हममे से कोई कुछ कहता उससे पहले hi मैनेजर आ गया...

मनगर- तू यहाँ खड़े खड़े क्या कर रहा hai????order लेने में इतना टाइम लगता है क्या???

मैनेजर की बात शैफाली को अछि नहीं lagi..wo कुछ कहने hi वाली थी की....

मई- sir.in में और आप में फर्क है naa.ye आपकी तरह लंगर में तोह खाते नहीं की जो मिल जाए फटाफट खा len...apni पसंद का खाना चॉइस करने में वक़्त तोह लगता hi है ना....

शहहहहह.........

मेरी बात सुनकर मैनेजर को ग़ुस्सा आ गया था और वो कुछ कहने के लिए अपना मुँह खोलने hi वाला था की मैंने अपनी एक उंगली उसके मुँह के सामने रख दी....

मई- अगर कोई बकवास की ना bhos****,toh ऐसी जगह मारूंगा की मूतने वाली जगह से तू हुग्ना भी स्टार्ट कर देगा और हगने वाली जगह से खाना....

ये जॉब मुझे इस रेस्टुरेंट के ओनर ने दी hai....tune नहीं इसीलिए अपनी अकड़ अपने नाजायज़ बाप के सामने दिखाना.....

ये बोलकर मई आगे बढ़ने लगा hi था की....

SHAIFALI-V.J......

उसकी आवाज़ सुनकर मई रूक गया....

शैफाली- ी ऍम रियली सॉरी अबाउट अंजलि...

अंजलि का नाम सुनकर मुझे फिरसे ग़ुस्सा आने लगा था पर मैंने कण्ट्रोल कर लिया....

मई- it's ok.....

शैफाली- बूत ी ऍम ग्लैड की रोनित बच गया एंड नाउ हे इस पर्फेक्ट्ली फाइन....

मई- हम्म्म.....

शैफाली- मुझे ये तोह नहीं पता की तुम ये सब क्यों कर रहे हो पर क्या तुम्हारी फॅमिली को पता है??

मई- nahi......aur हो सके तोह तुम बताना भी मत.....

शैफाली- रोनित को भी nahi....!!!after आल hi इस ुर बेस्ट फ्रेंड.....

मई- अब हम दोस्त नहीं रहे.....

आज के लिए इतना HI

आपका अपना V...J
 
अब तक आपने पढ़ा की कैसे अंजलि की जान जाती है वहीँ विक्रम का RAWAIYA,USKA बोल चाल पूरी तरीके से बदल चूका है.

अब आगे:-

फाइनल CHAPTER

(एंगेल्स सैक्रिफाइस & डेविल्स डेमोलिशन)

अपडेट- 92

प्लेनेट- ISLA/WARRIORS वर्ल्ड

PLACE-GRAH सेतु

एक वर्ष से ऊपर बीत चूका HAI...LORD ऑफ़ एंगेल्स हमारी मदद करने कब आएंगे....???

डिफेंडर- उन्होंने हमारी मदद तोह पहले hi कर दी hai,humare इस गृह सेतु को पूर्णतः सुरक्षित करके....

क्वीन अश्ली के सवाल का जवाब देते हुए डिफेंडर ने अपनी बात कही....

आज डिफेंडर सहित वारियर्स वर्ल्ड और इस्ला की समस्त प्रजा को गृह सेतु के अंदर चुप्पे 1 साल से ऊपर हो चूका था....

पर अभी तक किंग सोलोमन सहित जिन्होंने ने भी बिल्जेबब और भुविका को देखा और उनकी शक्ति को महसूस किया tha,unme से कोई भी उस वक़्त को नहीं भूल पाया था....

वहीँ इस्ला और वारियर्स वर्ल्ड की पूरी प्रजा इस बात से अब तक अनभिज्ञ थी की उन सब को यूँ अचानक गृह सेतु के अंदर क्यों लाया और रखा गया है..

उन्हें बस इतना पता था की उनके ग्रहों में कोई बोहोत बड़ी विपदा आयी हुई है और इसीलिए वो यहाँ हैं....

इस्ला और वारियर्स वर्ल्ड की प्रजा को अपने अपने महाराज और डिफेंडर पर भरोसा tha..wo जानते थे की डिफेंडर और उनके महाराज जो भी karenge,usme उन सब का हित hi होगा...

और जब उन्हें ये बात पता चली की किसी भी बड़ी विपदा के वक़्त उन सब को यहाँ रहने के लिए लार्ड ऑफ़ एंगेल्स ने कहा hai,toh वो सब निश्चिन्त हो गए..

पर क्यूंकि वो पिछले एक वर्ष से यहाँ the,isiliye उन सब को अपने अपने प्लैनेट्स की बोहोत याद आ रही thi,par सही समय आने तक वो सब कर भी क्या सकते थे...

हर रोज़ एक उम्मीद लिए वो पहले गॉड को याद करते फिर लार्ड ऑफ़ एंगेल्स को.....

गृह सेतु में मौजूद हर किसी के चेहरे और दिल में कई भाव आ जा रहे थे पर इन सब के बीच एक चेहरे पर कोई टेंशन नहीं थी और वो चेहरे या फिर ये कहूं की वो ख़ूबसूरत चेहरा था हमारी अलेसेन्द्र का....

अलेसेन्द्र को ये बात पता थी की बिल्जेबब उसका बीटा hai,aur कहीं न कहीं उससे इस बात का भी अंदेशा था की भविष्य में कभी न कभी उसकी और इस्ला की मुलाकात बिल्जेबब से दोबारा ज़रूर होगी और हुआ भी वही....

पर इससे पहले की बिल्जेबब कुछ करता डिफेंडर पुरे इस्ला वासियों को बचाकर गृह सेतु के अंदर ले आये थे और जब अलेसेन्द्र को डिफेंडर ने ये बताया की ऐसा करने के लिए विक्रम ने hi कहा tha,toh उतना जानना अलेसेन्द्र के लिए काफी था....

विक्रम का नाम सुनते hi अलेसेन्द्र निश्चिंत हो गयी thi....aur इतना लम्बा समय गुज़र जाने के बाद भी उसका भरोसा एक सेकंड के लिए भी टुटा नहीं था....

अपनी माँ के सवाल और डिफेंडर के जवाब के बाद उसने भी कुछ कहने के लिए अपने लाभ खोले....

अलेसेन्द्र- विक्रम ने सिर्फ गृह सेतु को hi सुरक्षित नहीं किया hai,balki यहाँ पर हमारे ज़रुरत के सभी चीज़ों का भी ध्यान रख उसका इंतज़ाम पहले hi कर दिया है....

MAA,FOUNTAIN ऑफ़ लाइट से हमारे वापसी में देरी पर भी आपने सवाल किया tha,jabki आपको पता था की मई किसके साथ गयी हूँ...

मई आपके या किसीके भी साथ असुरक्षित हो सकती थी किन्तु विक्रम के साथ नहीं....

जब बात विक्रम की हो तोह संदेह करना छोड़िये maa....unki सोच और समझ हम सब से कई गुना आगे की है...

किंग सोलोमन- अलेसेन्द्र बिलकुल सही कह रही hai....kintu मुझे एक बात समझ नहीं आ रही....????

अलेसेन्द्र- क्या???

किंग सोलोमन- यही की बिलेबुब और उस दूसरी लड़की ने हम सब का पीछा इतनी आसानी से छोड़ कैसे दिया!!!

अश्ली- मतलब???

किंग सोलोमन- हमारे कहने का तात्पर्य यह है की उन दोनों ने हम पर हमारे महल में आकर तोह आक्रमण kiya,par यहाँ नहीं...

उन दोनों ने गृह सेतु में घुसने की कोशिश तक नहीं ki...kya वो दोनों गृह सेतु के प्रवेश द्वार को नहीं ढूंढ पाए...!!!??

जहाँ किंग सोलोमन की बात को सुनकर सभी सोच में पद गए वहीँ डिफेंडर है दिए...

डिफेंडर को हस्ते देख सभी चौंक gaye....aur इससे पहले की कोई डिफेंडर से उनके हसने का कारण puchta,DEFENDER ने खुद hi बोलना शुरू किया.....

डिफेंडर- आपको ऐसा क्यों लग रहा है किंग सोलोमन की उन दोनों ने गृह सेतु के द्वार को तोड़ कर हम तक पहुंचना का प्रयास नहीं किया होगा....!!!!

डिफेंडर की बात सुन सभी फिरसे चौंक गए....

किंग सोलोमन- इसका मतलब उन दोनों को गृह सेतु का प्रवेश द्वार मिल गया था और उन्होंने गृह सेतु के द्वार को तोड़ने की कोशिश भी की thi,par कर नहीं पाए....!!!

डिफेंडर- हाँ....

किंग सोलोमन- kintu,hum सब तोह प्रवेश द्वार के काफी समीप हैं फिर हमे कुछ आभास क्यों नहीं हुआ????

डिफेंडर- क्यूंकि उन दोनों की समस्त शक्तियां मिलकर भी लार्ड ऑफ़ एंगेल्स द्वारा बनाये गए कवच को तोडना तोह door,usse हलकी सख्ती भी नहीं पहुंचा सकती...

उन दोनों के आक्रमण से गृह सेतु के बाहर के भूमि पर काफी कम्पन hue,par उसका ज़रा सा भी असर गृह सेतु के भीतर नहीं हुआ और नाही कुछ महसूस हुआ....

जहाँ सभी डिफेंडर की बात सुन और समझ सभी ने अपनी मुंडी हाँ में हिलायी वहीँ.......

लार्ड क्रूसेडर- गृह सेतु को तोह कोई हानि नहीं हुई पर मेरे पुत्र को तोह हुई है...

लार्ड क्रूसेडर की बात सुनकर सभी की नज़र मोकलसर की तरफ गयी जो एक जगह चुप चाप बैठा शुन्य को घर रहा था....

सभी उसकी मनोदशा समझते the,par वो कर भी क्या सकते थे....

सभी उसके पास चले gaye....QUEEN अश्ली ने मोकलसर के सर पर हाथ फेरा जिससे वो अपनी सोच से बाहर आ गया....

मोकलसर- अरे क्वीन aap..kuch काम था????

अश्ली- तुम मुझे माँ कह सकते हो पुत्र....

अश्ली की बात सुनकर एक पल के लिए मोकलसर भावुक हुआ पर उसने खुद को संभल लिया....

मोकलसर- मुझे इस योग्य समझने के लिए शुक्रिया क्वीन मेरा मतलब माँ.....

क्वीन अश्ली ने मोकलसर का माथा चूमा और...

अश्ली- putra,tum वारियर्स वर्ल्ड के युवराज ho...tumhe यूँ उदास होना शोभा नहीं deta....mai जानती हूँ की तुम अक्षांत और शैला को बोहोत याद करते ho,par फ़िलहाल कुछ किया भी तोह नहीं जा सकता....

अश्ली के मुँह से अक्षांत और शैला का नाम सुनकर मोकलसर का धराया जवाब दे gaya..uske आँखों से आंसू चालक गए...

मोकलसर- शैला मेरी बेहेन जैसी थी और अक्षांत भाई jaisa....aur आज दोनों hi इतने कष्ट में hain....aur मई उन्हें उनके कष्ट से निजात दिलाने के लिए कुछ भी नहीं कर पा रहा हूँ....

मोकलसर की बात सुनकर सब सिर्फ उदास hi नहीं शॉकेड भी हो गए....

किंग सोलोमन- तुम्हे कैसे पता की शैला और अक़सानत कष्ट में hai...ho सकता है की वो दोनों भी हमारी तरह कहीं छुप गए हों...

मोकलसर- ऐसा नहीं hai....wo दोनों अभी बोहोत कष्ट में हैं और इसका सिर्फ एक अर्थ हो सकता hai,aur वो ये की वो दोनों बिल्जेबब और भुविका की कैद में हैं...

अलेसेन्द्र- तुम ये कैसे कह सकते हो???

MOKALSAR-GLUTO में निष्कलिका से लड़ने के लिए जब विक्रम हम तीनो को ट्रेनिंग दे रहा tha,tab वो जानता था की निष्कलिका छल भी कर सकती hai,isiliye विक्रम ने हम तीनो को एक दूसरे से जोड़ दिया था....

युद्ध में हार शरीर के थकने या उससे चोट लगने से नहीं hoti,balki दिमाग के थकने से होती है इसीलिए विक्रम ने ऐसा किया था...

विक्रम चाहता था की जब एक की युद्ध नीति कमज़ोर pade,toh बाकी के दो उसके दिमाग में नए नए उपाय डालते रहें....

इसीलिए हम तीनो आज भी एक दूसरे से जुड़े हुए hain...GRAH सेतु के प्रवेश द्वार पर लगे कवच की वजह से मई उन दोनों से संपर्क तोह नहीं कर पा रहा hun,par एक दूसरे से जुड़े होने की वजह से मई उन दोनों को महसूस कर सकता हूँ.

और इस वजह से हर पल मेरे दिल में एक बेचैनी और उन समझा दर्द रहता hai..ye तभी हो सकता है जब उन दोनों को यातनाएं दी जा रही हो....

जहाँ मोकलसर अपनी बात कहकर चुप हो गया वहीँ बाकी सब उसकी बात सुनकर उदास हो गए...

सभी मोकलसर को सांत्वना देने में लग गए पर इस बीच अलेसेन्द्र की नज़र पीछे की तरफ गयी जहाँ डिफेंडर अकेले खड़े थे..

अलेसेन्द्र कोतुहल वाश ये जानने के लिए की डिफेंडर क्या कर रहे hain,unke पास चली गयी पर डिफेंडर के सामने पहुंचकर अलेसेन्द्र का एक्ससिटेमेंट शॉक में बदल गया...

और वो इसीलिए क्यूंकि डिफेंडर की इस वक़्त आँखें बंद थी और उनके चेहरे पर दो दो भाव एक साथ तैर रहे थे....

एक गम की और दूसरी ख़ुशी ki....kuch देर बाद जब डिफेंडर ने आखें खोली तोह अलेसेन्द्र को खुदको घूरते हुए पाया....

अलेसेन्द्र- कुछ हुआ है क्या डिफेंडर????

डिफेंडर कुछ वक़्त तक अलेसेन्द्र को देखते रहे और फिर उनके होंठ हिले....

डिफेंडर ने जो कहा उससे सुनकर अलेसेन्द्र के चेहरे पर भी वही दो भाव तैरने लगे जो कुछ देर पहले डिफेंडर के चेहरे पर थे.....

गम और ख़ुशी......

PLACE-ST.PETER'S कॉलेज

YAAR,IS दिमाग की सर्विसिंग कहाँ होती HAI....WAQT से पहले HI साला सठिया गया है.....

कॉलेज की शकल आज दूसरी बार देख रहा HUN,AUR अभी से बोर लगने लगा.....

KHAIR,AB मरने के कॉन्ट्रैक्ट पर खुद HI सिग्न किया HAI,MARANA तोह पड़ेगा HI.....

इस वक़्त मई कॉलेज के बाहर खड़ा tha....us छू**** फैकल्टी के बन्दे ने फिर से मुझे यहाँ बुलाया है जिससे मैंने अपना अड्मिशन फॉर्म और स्कालरशिप सर्टिफिकेट दिया था....

स्कालरशिप केरिटीफिकेटे के बदले कोई डॉक्यूमेंट पर सिग्न करना पड़ता hai,jispar वो गजनी की औलाद मेरे सिग्न लेना भूल गया था...

वही करने आया hun....saala एक सिग्न करने के लिए 10 कम दूर आना पढ़ रहा hai...reputation की तोह पूरी लग गयी है....

कैसी रेपुटेशन saale..tu कोई देश का P.M है क्या जो तेरी रेपुटेशन ख़राब हो जायेगी...

एक तोह साला जब से क्यूरियस को बचाकर खुद की मैंने लगायी है तबसे कोई बस मेरे अंदर हगने बैठा है जो मेरी हर baat,har सोच की लगता रहता है....

मई- bhos****,apne बाप का बाप बनाना बंद कर चुप चाप रहे kar....saale,mere अंदर रहकर मुझे hi ज्ञान च*** रहता है हमेशा....

अपने आप से भुनभुनाते हुए मई कॉलेज के अंदर चला gaya....admission डेट्स तोह ख़त्म हो चुके थे इसीलिए एडमिशन काउंटर बांध हो चूका था....

पर वो chu***ya जिसने मुझे बुलाया था वो एडमिशन काउंटर के बाजू वाले काउंटर पर बैठा हुआ था...

मई मन में- साला इस कॉलेज के काउंटर्स तोह रेलवे काउंटर्स की तरह hain...local टिकट का दरवाज़ा बंद हुआ पर उसके बाजू में रेसेर्वशन्स का चालु है....

अब्बे चुप चाप जाकर सिग्न कर और कल्टी maar.khaali पिली दिमाग का दही क्यों करते रहता है???

huga...fir से huga.......abbe चुप चाप रहे kar....jab देखो अपने मुँह का गुटर खोल देता है....

मई एक बार फिरसे अपने अंदर छुपे दूसरे छू***** को गाली देता हुआ काउंटर पर pahuncha,apne आप पर पूरा कण्ट्रोल करता हुआ चुप चाप उस च**** से जिस डॉक्यूमेंट पर सिग्न करना tha,wo लिया सिग्न किया और चुप चाप वहां से कल्टी हो गया....

मई- haash......kamsekam एक काम तोह nipta.....chalo अब यहाँ से कल्टी मारा जाए....

हे यू.......

मई अभी आगे बढ़ा hi था की मेरे पीछे से आयी इस आवाज़ ने मुझे पलटने पर मजबूर कर दिया....

और जैसे hi मई पीछे पलटा....

MAI-arre yaar.....ab ये साले चिन्दी फुदकेंगे और ऐसे ऐसे बकवास दिआलॉगस बोलेंगे की पक्का मुझे उलटी आएगी....

जहाँ मई अपने में फिरसे बुदबुदाने लगा वहीँ मुझे जिसने आवाज़ दी थी वो और उसके साथ कुछ और लड़के मेरी तरफ आने लगे...

बाकियों का तोह पता नहीं पर उन लड़कों में से दो को मई जानता हूँ...

घंटा जानता hun..bas देखा है बोल साले..

मई- तू फिर huga....par इस बार सही होगा ी मैं bola...haan देखा है...

ये वही दो बन्दे थे जिनकी फेरारी को केक समझ कर मैंने बीच से काट दिया था...

पर मई कॉलेज के बीच कोई सन नहीं चाहता था इसीलिए.....

1सत लड़का- अब्बे कहाँ भाग रहा hai????pakdo साले को...

हुआ ये की मई इस वक़्त कॉलेज के मैं गेट के पास hi था इसीलिए मैंने कॉलेज के बाहर की तरफ दौड़ लगा दी और वो सब भी चिल्लाते हुए मेरी पीछे भागने लगे...

जैसा की मैंने बताया था की एडमिशन क्लोज हो चुके थे और अभी कॉलेज भी स्टार्ट नहीं हुई थी इसीलिए बोहोत काम स्टूडेंट्स आये थे...

पर कुछ स्टूडेंट्स कुछ काम से आये थे और मई उनके सामने कुछ करना नहीं चाहता था इसीलिए मैंने कॉलेज के बाहर जाना ठीक समझा....

पर भाग सिर्फ मई और मेरे पीछे वो लड़के hi नहीं रहे the,hum सब के पीछे कोई और भी था जो भागते भागते हमारे पास आ रहा था....

कॉलेज से बाहर निकल मई थोड़ी दूर तक भगा और फिर रूक gaya..ye एरिया थोड़ा सुनसान था...

वो लड़के भी भागते भागते मेरे पीछे पहुँच चुके थे....

1सत लड़का- तू वही है ना जिसने मेरी कार तोड़ी थी....!!!!!

मई- अब्बे BHOS****,agar सिर्फ शक है तोह इतने बन्दे क्या अपने बाप की शादी में नाचने के लिए लेके मेरे पीछे भाग रहा है क्या???....

2ंद लड़का- क्या बोलै बे स****

MMMMMM....MMMMMM........

चटाखहह.......

इससे पहले की उसकी गाली पूरी होती मैंने उसका मुँह दबा दिया tha..usse कुछ बोलै नहीं जा रहा था....

और इससे पहले की उसके फ्रंज कुछ करते मैंने जिसका मुँह दबाया tha,usse एक हल्का सा थप्पड़ maara....wo वहीँ गिर गया....

अब्बे lou**....zyada हाथ पेअर न चला diyo....mar वॉर ना जाये कोई कहीं???

ये आवाज़ फिर से मेरे अंदर से आयी थी...

मई खुद से- पता है be..apne बाप को मत सीखा....

मई यहाँ खुदसे खुदको गाली देने में बिजी था वहीँ मेरे सामने खड़े लड़के अपने फ्रेंड की हालत देखकर दर गए थे...

मई- मारा नहीं hai,sirf बेहोश hai..ab सुनो बे बगैर छिलके के mungfalliyon,bina कोई नया CH***PA किया यहाँ से निकल lo,warna सभी बेहोश हो गए तोह तुम सब को आवारा कुत्ते समझ कर म्युनिसिपेलिटी वाले ले जाएंगे....

और तू बे lo***e......agli बार मई जहाँ खड़ा dikhun,wahan हॉर्न ना bajaiyo....horn की आवाज़ से मुझे ग़ुस्सा आता hai....samjha...

उन में से दो लड़के मुझे मारने के लिए आगे बढे hi थे की जिस बन्दे से मैंने अपनी बात कही thi,usne उन दोनों को रोक दिया....

उससे वो सन याद आ गया था जब मैंने उसकी कार एक बार में बीच से काट दी thi....uske ऊपर अभी अभी उसके फर्न का जो हाल हुआ था उससे देखकर वो समझ गया था मुझसे भिड़कर उन सब hi नुक्सान होगा...

मई- अब्बे तुम च***** को समझदारी मार खाने के बाद hi क्यों आती hai...pehle hi समझ गया होता तोह तेरा फर्न ऐसे लावारिस की तरह पड़ा नहीं होता ना....

2ंद लड़का- अभी तोह हम जा रहे हैं बूत तू

मई- जानता नहीं की मैंने किस्से पन्गा लिया hai,yahi ना???

2ंद लड़का- nahi..tu जानता नहीं की तूने किस्से मारकर बेहोश किया hai...ye सेंट्रल मिनिस्टर का बीटा hai....iske बाप को जब पता चलेगा तोह वो तेरा जीना हराम कर देगा....

इस कॉलेज के साथ साथ इस शहर में भी तू अब चैन से जी नहीं पायेगा....

मई उसकी बात सुनकर है diya...aur करता भी kya,puri दुनिया का सुकून जिसकी वजह से कायम hai,ussike सुकून को ख़त्म करने की बात कर रहा था वो लड़का...

मई- चल निकल....

इससे ज़्यादा बोलने का मेरा मूड hi नहीं हुआ...

वो सब मुझे घूरते हुए अपने फर्न को उठाकर निकल गए पर तभी......

उन सब के मेरे सामने से हटते hi मेरे सामने एक नया चेहरा आ गया या फिर ये कहूं की एक ऐसा पुराण चेहरा जिससे मई जितनी बार भी देखता hun,toh ऐसा लगता है जैसे मई उससे पहली बार देख रहा हूँ....

MAI-AVANTIKA..............

ये नाम न सिर्फ मेरे मुँह से बल्कि मेरी आत्मा की गहरायी से भी निकली....

वहीँ अवंतिका एक स्टिल फेस लिए मुझे देखे जा रही thi...aur इससे पहले की मई कुछ कहता....

अवंतिका- कॉफ़ी house...mai वेट कर रही हूँ.....

ये बोलकर वो मुद गयी......

मई मन में- कॉफ़ी HOUSE......!!!!???abbe ये क्या कोई छोटा सा टाउन है जहाँ एक hi कॉफ़ी हाउस होगा????

इतनी छोटी सी गुत्थी तू समझ नहीं पाया तोह फिर तेरे लाइफ में जो इतने बड़े बड़े पज़ल्स hain,unhe कैसे सुलझाएगा.....???

तेरे कॉलेज के जस्ट साइड में hi तोह एक कॉफ़ी हाउस hai,wo उसी की बात कर रही थी...

मेरे अंदर बैठे च****** ने अपना बिना मुँह वाला मुँह फिरसे खोलकर अपनी बात कही....

मई- तोह सीधा सीधा भी तोह बोल सकती थी...

वैसे hi जैसे सीधे सीधे तूने अपना फैसला उससे सुनाया या फिर ये कहूं की थोप कर यहाँ चला आया...

अब मेरे अंदर से आयी इस आवाज़ का जवाब मेरे पास नहीं tha....saala बोल तोह सही रहा tha...mai चुप चाप कुछ सोचते हुए कुछ देर तक खड़ा raha,fir कॉफ़ी हाउस की तरफ निकल पड़ा....

इन कॉफ़ी हाउस....

व्हाट वोउल्ड ु लिखे तो हैवे MA'AM???

अवंतिका- ओने कैपेचीनो....

वेटर- सूरे ma'am....

वेटर अवंतिका से आर्डर लेकर चला gaya..is वक़्त अवंतिका का चेहरा एकदम स्टिल tha..koi एक्सप्रेशन nahi..par चेहरा जितना चुप tha,aakhen उतनी hi बातें कर रही थी...

dard,ghussa,shikayat सब कुछ था इस वक़्त अवंतिका के आँखों में पर इन सब से ऊपर थी yaad..un सारे लम्हो की याद जिसकी वजह से इस वक़्त अवंतिका यहाँ मौजूद थी....

कुछ ऐसी यादें भी उसके ज़हन में ताज़ा हो रही थी जिनका वो खुद हिस्सा नहीं थी....

ऐसी कौन सी याद तैर रही थी इस वक़्त अवंतिका के आँखों me,chaliye हम भी उन यादों को जी लेते हैं....

ा स्माल फ्लैशबैक:-

RONITTTTT...MERE BACCHE.......TUJHE होश आ गया........

ये बोलकर रोनित की माँ रोनित के गले लग गयी.....

ये वही सन है दोस्तों जब अपने हीरो ने रोनित को कोमा से बाहर लाया था और रोनित अंजलि का नाम लेते हुए या फिर ये कहूं की चिल्लाते हुए उठ गया था ...

रोनित के बाजू में hi उस वक़्त रोनित का हाथ पकडे आँखों को बंद किये हुए उसकी माँ बैठी हुई थी जो अपने बेटे को कोमा से बाहर आता देख उसके गले लग गयी थी....

वहीँ रोनित लम्बी लम्बी साँसों के बीच वापस खुदको नार्मल करने की कोशिश कर रहा था....

पर जैसे hi रोनित नार्मल hua,usse वो सब दोबारा याद आने laga...usse दोबारा एहसास होने लगा की अब उसकी अंजलि इस दुनिया में नहीं है...

और ये याद आते hi रोनित की आखों से आंसू की धार निकल पड़ी..

कुछ देर तक अपने बेटे के गले लगे रहने के बाद जब उसकी माँ उससे अलग हुई तोह उनकी नज़र उनके बेटे की आंसुओं पर गयी जिससे देखकर उनका दिल भी रो उठा....

रोनित- MOM,MOM,ANNJJUU...........

अपने रोने को कण्ट्रोल करते हुए रोनित ने अंजलि के बारे में जानना चाहा....

अंजलि का नाम सुनकर सविता आंटी की भी रुलाई फुट पड़ी....

R/MOM- हमारी अंजू उस एक्सीडेंट में नहीं बच पायी बीटा...

रोनित- एक्सीडेंट!!!!!!

पर इससे आगे रोनित कुछ नहीं bola...usne एक बार अपनी आखें बंद ki.uske सके दिमाग में आगे की बातें अपने आप घूम सी गयी...

वो समझ गया की भुविका और बिल्जेबब ने उन दोनों के साथ जो भी कियोस्क्से बाद में एक एक्सीडेंट का रूप दे दिया होगा....

रोनित झट से उठ कर बैठ गया...

R/MOM- अरे beta,abhi तू कमज़ोर hai....tu अभी आराम कर...

रोनित- नहीं mom,mai एकदम ठीक hun..ye देखिये.....

ये बोलकर रोनित तुरंत उठ बैठा...

इतने टाइम के बाद कोमा से बाहर आये बन्दे के शरीर को नार्मल होने में कुछ दिन लगते हैं पर रोनित को यूँ कम्पेलेतेलय फिट देख उसकी माँ पहले चौंकी पर वो खुश भी थी की उनका बीटा ठीक है....

रोनित- मई V.J के घर से आता हूँ माँ....

R/MOM- ठीक है पर ड्राइवर के साथ jaa..khud बाइक मत चलाइने लग jaana,kya पता कुछ कमज़ोरी अंदरूनी हो और बाइक चलते वक़्त बाहर आ जाये...

रोनित अपनी माँ से बेहेस नहीं करना चाहता था इसीलिए ok बोलकर बाहर निकल गया..

वहीँ सविता आंटी ने फ़ोन करके अपने हस्बैंड को और उसके बाद नेहा और विक्रम की माँ मीनू को ये खुश खबरि दे दी......

वहीँ दूसरी तरफ......

अवंतिका- V.JJJ...V...J......ye क्या हो gaya????ab क्या hoga??????plz ना V.J,hosh में आ जाओ ना....

अवंतिका रट रट मुझे हिलाये जा रही थी पर मेरी आखें बंद थी...

अवंतिका- एक तरफ तेरी बनायीं दुनिया को बनाये रखने वाला तेरा ये beta,aur दूसरी तरफ उसी दुनिया को ख़त्म करने वाला तेरा दूसरा बीटा......

और वो बीटा तेरे इस बेटे से जीत gaya.....!!!!yahi है तेरा nyaaya,tera insaaf,haan!!!!!

अवंतिका ऊपर आसमान की तरफ देखकर ये सब बोलती rahi....ab तक अवंतिका को सिर्फ रोना आ रहा tha,par अब उससे ग़ुस्सा भी आने लगा था....

उससे याद था की V.J ने कहा था की उसके बेहोश होते hi घर पर फ़ोन करदे पर वो ऐसा करना नहीं चाहती thi..kaaran,pehla तोह इससे उसके घर वाले बोहोत पैनिक हो जाते और dusra,usse पता था की V.J को कोई डॉक्टर तोह ठीक कर पाटा नहीं इसीलिए उसने वहीँ V.J के उठने का वेट करना hi सही समझा

अवंतिका- V.J,plz उठ जाओ naa...tum हार नहीं sakte...tumhe जीतना hi padega,mere लिए......

अवंतिका ने ये बात बोहोत ग़ुस्से में कही थी और तभी.........

कुछ हुआ जिससे देखकर अवंतिका भी चौंक गयी पर इससे पहले की वो रियेक्ट करती मेरी आँखें खुल चुकी थी.....

अवंतिका- V...J.........

ये कहकर अवंतिका मुझे बाहों में ले मेरे ऊपर लेट सी गयी.....

मई- घर चलें.....

मैंने लेते लेते बिना अवंतिका को हुग किये अपनी बात कही....

मेरी बात सुन अवंतिका जसिने मेरे गले के पास अपना सर रखा हुआ tha,usne सर उठाकर मुझे देखा...

वैसे तोह कोई आम दिन अवंतिका को मई इस तरह लगातार देख सकता था पर आज nahi..aaj मेरे सर में उसकी आँखों में दिख रही मोहोब्बत से दर्द उठने लगा था...

मैंने अवंतिका के दोनों बाज़ू पकडे और अगले hi पल हम दोनों अपने पैरों पर खड़े थे...

अवंतिका अब भी मेरी आँखों में देख रही थी पर मई अपनी नज़रें इधर उधर घुमा रहा था..

अवंतिका भी जानती थी की मई ऐसा क्यों कर रहा hun???wo जानती थी की मेरे दिमाग पर ास्मोडियस के खून ने कब्ज़ा कर लिया है...

अवंतिका- क्या अब तुम मुझसे प्यार नहीं करते????

एक sawal,is लड़की का एक सवाल और मेरा दिमाग और दिल दोनों हिल से गए....

मई- मई घर जा रहा hun,tum अपने घर चली जाओ...

अवंतिका- nahi...pehle मेरे सवाल का जवाब do...kya अब तुम मुझसे प्यार नहीं करते...

मई- मई जवाब देना ज़रूरी नहीं समझता...

मेरी बात सुनकर अवंतिका के चेहरे पर स्माइल आ गयी....

अवंतिका- मुझे जवाब मिल गया....

मैंने अवंतिका को घर कर देखा...

अवंतिका- ये लुक अपने दुश्मोनो के लिए बचा कर रखो...

मई- हो gaya..chalo,mai तुम्हे घर भेज देता हूँ....

अवंतिका- पहले मई तुम्हारे घर जाउंगी...

मई अवंतिका की बात सुनकर चौंक गया...

मई- kyun???mere घर क्यों??

अवंतिका- अब अपने ससुराल जाने के लिए क्या मुझे तुम्हारी परमिशन लेनी padegi...jaana है मतलब जाना है...

मैंने एक बार फिरसे अवंतिका को घर कर देखा फिर उससे लेकर गायब हो गया....

बिल्जेबब और भुविका जो मेरे और अवंतिका के रूप में यहाँ रह रहे the,aur जिन्हे हमारे वापस आने की भी जानकारी हो चुकी thi,wo गायब हो चुके थे....

ये वो आखरी बात थी जो मुझे बेहोश होने से पहले दिखी थी.....

khair,mai अवंतिका को लेकर सीधे अपने रूम में प्रकट hua...room में इसीलिए क्यूंकि बिल्जेबब यहीं से गायब हुआ था....

आज मई 1.50 साल बाद अपने घर अपने रूम में वापस आया था पर अब मुझे इस बात से भी फर्क नहीं पद रहा tha...aur हमारे घर वालों के लिए तोह हम कहीं गए hi नहीं थे...

मुझे रह रह कर हर चीज़ पर ग़ुस्सा आ रहा tha..mere अंदर चुप्पा मेरा अस्तित्व मुझे रोक रहा था पर जब भी वो ऐसा karta,mere दिमाग में दर्द होने लगता...

मेरा मन कर रहा था की सब कुछ जला कर ख़ाक कर dun....par पता नहीं कैसे मई ऐसा करने से खुद को रोक रहा था...

मई अपने बीएड पर सीधा लेट गया वहीँ अवंतिका वाल्स पर लगी पिक्टुरेस को देखने लगी....

उसी वक़्त नीचे....

मरथा- रोनित बाबा की वजह से आज बोहोत दिनों बाद आपको खुश देखकर बोहोत अच्छा लग रहा है मैडम...

माँ- हाँ MAARTHA...ANJALI के जाने के बाद तोह जैसे हमारे खुशियों को ग्रहण hi लग गया था..

पर आज कई दिनों बाद वापस खुशियों ने हमारे घरों का रूख किया hai....mere बच्चे को होश आ गया है और वो यहीं आ रहा है..

रोनित के होश में आने की खबर जैसे hi मीनू को mili,uska दिल ख़ुशी से झूम utha...usne ये बात तुरंत विक्रम को ( बिल्जेबब) और फिर जयराज को फ़ोन पर और यहाँ तक की घर के सभी नौकरों तक को बता दी और फिर रसोई में घुस खाने का कुछ पकने लगी..

क्यूंकि जब भी रोनित घर आता था तोह उससे कुछ खाने के लिए मांगता था और आज तोह वो सीधे 6 महीने के बाद उठ रहा tha..bhook तोह उससे ज़रूर लग रही होगी...

मीनू आज सच में बोहोत खुश थी पर वो ये नहीं जानती थी की उसकी ये ख़ुशी कुछ hi देर की मेहमान hai...thodi hi देर में वो गम जो वो कुछ देर पहले तक फील कर रही thi,wo और बढ़ जायेगी....

मीनू ख़ुशी ख़ुशी कोई डिश तैयार कर hi रही थी उससे लॉन में कार की हॉर्न सुनाई दी जिससे सुनकर वो समझ गयी की रोनित आ गया है.....

वो भागते हुए किचन से बाहर आयी तोह देखा की रोनित हॉल को पार कर ऊपर विक्रम के रूम की तरफ बढ़ चूका था..

पहले तोह उसका मन किया की वो उससे रोके पर फिर उससे लगा की इस वक़्त रोनित का विक्रम के पास रहना ज़्यादा ज़रूरी है..

kaaran,un सब के लिए तोह अंजलि को गए हुए 6 महीने बीत चुके hain,par रोनित के ज़हन में तोह ये हादसा एकदम फ्रेश है....

उस हादसे के बाद रोनित को अभी जो होश आया tha...yahi सोचकर मीनू वापस किचन की तरफ मुद गयी....

वहीँ ऊपर:-

अवंतिका- वैसे बचपन में तुम कुछ ज़्यादा hi क्यूट थे....

अवंतिका जो मेरी पिक्स चेक आउट कर रही thi,wo पलट कर मुझसे बोली...

वहीँ मुझे तोह ये समझ नहीं आ रहा था की अवंतिका मेरे घर रुकी hi क्यों hai...???wo अपने घर क्यों नहीं जा रही...

मुझे कुछ ना बोलते देख अवंतिका मेरे करीब आ gayi...mai उससे घर घर कर देखने लगा....

मुझे इस वक़्त अकेला रहना tha,par अवंतिका जा नहीं रही thi..mai उससे उल्टा सीधा कहना चाहता था पर पता नहीं कैसे पर मई उससे कुछ गलत बोल hi नहीं पा रहा था...

AVANTIKA-hum तोह पहले से hi आपके दिल में बेस हुए hain..aankhen बंद भी करेंगे तोह भी हम hi dikhenge....yun घर घर कर देखने की ज़रुरत नहीं है आपको....

WAAH,KYA बात HAI....!!!!YAHAN तोह इश्क़ की पतंगे उड़ाई जा रही HAI....KYUN!!!!

ये आवाज़ हम दोनों के पीछे दरवाज़े की तरफ से आयी थी जहाँ इस वक़्त रोनित खड़ा था...

इस वक़्त रोनित की आँखों में आंसू तोह थे hi,par उन आंसुओं से भरे आँखों में दर्द के साथ साथ बेइन्तेहाँ ग़ुस्सा भी दिख रहा था....

और इसीलिए hi अवंतिका मेरे साथ आयी thi..usse भी रोनित के बेहेवियर के बारे में पता था...

वो जानती थी की रोनित भी अभी अभी होश में आया hai,uske दिलो दिमाग में अंजलि की मौत एक दम फ्रेश होगी....

वो उठते hi सबसे पहले यहीं आएगा असली विक्रम से जवाब मांगने या फिर नकली विक्रम से बदला लेने के लिए....

अगर पुराण विक्रम होता तोह कोई टेंशन की बात नहीं थी पर अभी जो विक्रम की मेन्टल हालत hai,usme कुछ भी हो सकता था....

रोनित- मुझे तोह लगा था की मेरा यहाँ पर उसी नकली विक्रम से सामना होगा और मई अपना बदला ले lunga,par यहाँ तोह असली VIKRAM,LORD ऑफ़ एंगेल्स स्वयं विराजमान हैं....

अब्बे काहे का लार्ड ऑफ़ एंगेल्स है tu,jo अपनी दोस्त को नहीं बचा पाया वो पुरे यूनिवर्स को कैसे बचाएगा....???

अवंतिका की वजह से मेरा ग़ुस्सा अब तक कण्ट्रोल में था पर अंजलि की बात करके रोनित उस ग़ुस्से को हवा देने लगा था...

मेरी साँसे ग़ुस्से की अत्यधिकता की वजह से थोड़ी तेज़ तेज़ चलने लगी जिससे अवंतिका ने देख लिया..

उससे कुछ गलत होने की फीलिंग आने lagi....aur इसीलिए.....

अवंतिका- देखो RONIT,tum एक्चुअल बात नहीं jaante...V.J तोह.....

रोनित- तुझसे बात नहीं कर रहा हूँ mai...toh अपनी नाक बीच में लड़ाना बांध कर वर्ण

मई- वर्ण क्या भोस******.......

रोनित ने अवंतिका की बात बीच में काटी और मैंने रोनित की.....

मेरे मुँह से अपने लिए गाली सुनकर एक पल को तोह रोनित एकदम शॉकेड हो गया और जब उसने मेरी तरफ देखा तोह उसके मन में हल्का दर भी पैदा हो गया क्यूंकि इस वक़्त मेरी आखें ग़ुस्से की अधिकता से लाल हो चुकी थी..

वहीँ अवंतिका तोह मेरी आवाज़ और मेरा रूप देखकर हद से ज़्यादा घबरा गयी thi..wo जानती थी की अगर मई शांत नहीं हुआ तोह अंजाम कितना घातक हो सकता है....

पर अब शायद देर हो चुकी thi..jis ग़ुस्से को मई कबसे दबाये हुए tha,RONIT ने उससे धक्का दे दिया tha..ab बस उस ग़ुस्से को लावा बन फटने की देर थी....

अवंतिका- RONIT,tum जाओ यहाँ se....abhi तुम्हारा V.J के सामने रहना ठीक नहीं....

रोनित अब तक संभल चूका था...

रोनित- मई क्यों jaaun,aur मई नहीं डरता isse.aur tu,tujhe मैंने कहा ना की......

मममममममम.............

रोनित आगे कुछ कह नहीं पाया क्यूंकि मैंने उसका गाला पकड़ उससे हवा में उठा दिया था...

मई- क्या बोलै tu,tujhe दर नहीं लगता mujhse......jaanta है इसकी वजह क्या hai,wajah ये है की मैंने आज तक तुझे बचाया hai,maara नहीं....

तूने V.J का सॉफ्ट साइड देखा hai,uski ताक़त nahi....tere जैसे लाखों लौंडो को मई एक चुटकी में ख़त्म कर सकता हूँ....

और तू कहता है की तुझे दर नहीं lagta....rook zara.tujhe बताता हूँ की दर किस्से कहते हैं....

AVANTIKA-V.J.....uska गाला chhodo...usse सांस लेने में तकलीफ हो रही है....

अवंतिका सच कह रही thi..RONIT की आँखें बंद होने लगी thi....uska चेहरे खून जमने से लाल हो गया tha..par मैंने उससे छोड़ा नहीं...

अवंतिका- V.J..maine कहा छोडो उससे....

मई- छोड़ दूँ......

अवंतिका ने हाँ में अपना सर hilaya...aur अगले hi पल....

भाड़...............

रोनित का शरीर मेरे रूम के दरवाज़े को तोड़ता हुआ गैलरी से होकर नीचे हॉल की तरफ गिरने लगा...

मई- lo,chhod दिया.....

अवंतिका तोह मेरी हरकत देखकर जड़ सी हो गयी थी...

वहीँ नीचे....

माँ ने डैड को भी रोनित के ठीक होने के और घर आने के बारे में बता दिया tha..wahin सविता आंटी भी अपने बेटे के पीछे पीछे हमारे घर आ चुकी थी...

डैड और आंटी के आने के बाद तीनो मेरे रूम की तरफ बढे hi थे की उन्हें मेरे दूर के टूटने की आवाज़ सुनाई दी...

इससे पहले की वो कुछ सोचते या समझते...

सविता आंटी- रोनित.............

रोनित की बॉडी गैलरी से होती हुई नीचे गिरने लगी जिससे देखकर सविता आंटी के मुँह से अपने बेटे के नाम की चीख निकल गयी...

पर इससे पहले की उनमे से कोई कुछ karta,RONIT फ्लोर पर गिर चूका था....

दूर के टूटने और उसके बाद सविता आंटी की आवाज़ सुनकर नानू और नानी भी अपने रूम से बाहर आ गए थे....

और जब उन्होंने रोनित को ज़मीं पर पड़ा देखा तोह वो भी शॉकेड हो gaye..sabhi उसकी तरफ दौड़ पड़े...

रोनित का सर गैलरी से हल्का टकराया था जिस वजह से उसके सर से खून निकल रहा था पर वो अब भी होश में था....

R/MOM- मेरा baccha....ye क्या हो गया tujhe...tu निचे कैसे गिर गया....???

ये बोल रोनित के सर को अपनी गोद में लेकर सविता आंटी रोने लगी....

रोनित- V.J.... ने ....dhakka...diya....

मेरे गले को दबाने की वजह से रोनित को अभी भी बोलने में हलकी तकलीफ हो रही thi..usne अटक अटक कर अपनी बात कही पर उसकी बात सुनकर सभी शॉकेड हो गए....

DAD-VICKYYYYY..........

मई- बोलिये........

डैड ज़ोर से चीखे पर अगले hi पल मैंने उन्हें आराम से जवाब diya....mai ऊपर गैलरी में खड़ा था.....

डैड- ये रोनित क्या कह रहा है???

मई- वही जो आपने सुना....

मेरे जवाब को सुनकर डैड के साथ साथ माँ और आंटी भी शॉकेड हो गए....

डैड- तू होश में तोह है....

मई- सच बोलने वाला हर बाँदा क्या नशे में होता है....???

माँ- ये कैसे बात कर रहा है तू???

मई- मुँह से.....

ये बोलकर मई गैलरी से निचे कूद gaya..AVANTIKA भी मेरे पीछे hi thi...wo भी दौड़ती हुई नीचे आयी...

माँ अवंतिका को देखकर चौंकी क्यूंकि उन्होंने उससे घर आते वक़्त नहीं देखा था पर फ़िलहाल उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया...

माँ- तूने रोनित को निचे गिराया...

मई- nahi...maine तोह बा उससे उसके गर्दन से पकड़ कर उठाया और दरवाज़े पर फेक दिया..

पर ये इतना कमज़ोर निकला की अपना बैलेंस नहीं बना पाया और दरवाज़े को तोड़ गैलरी से होता हुआ नीचे गिर गया....

माँ- विक्की..........

ये बोलकर माँ ने अपना हाथ उठाया पर मुझे मार ना paayi...unke हाथ मेरे गाल पर पहुँचते पहुँचते रूक गए...

मई- क्या mom...sirf नीचे hi तोह गिरा hai..dekh lo,zinda hai,mara नहीं....

चटाखहह.......

ये थप्पड़ मेरे गाल पर माँ ने नहीं सविता आंटी ने मारा था पर अगले hi पल.....

आआआआ..............................

धदमममम..........

रोणिततत...................

तोह हुआ ये की सविता आंटी के मुझपर हाथ उठाते hi मेरा दिमाग घूम gaya.....maine अपना हाथ उन्हें मारने के लिए उठाया पर उन्हें मार नहीं पाया....

पर ग़ुस्सा कहीं तोह निकलना hi tha..agle hi पल मेरे साइड में पड़े सोफे को मैंने अपने एक हाथ से उठा लिया और रोनित के जस्ट साइड में पटक दिया....

सोफे इतने ज़ोर से फ्लोरसी टकराया था की सोफे के साथ वहां का फ्लोर भी टूट गया...

वहीँ आंटी को लगा की मैंने सोफे उनके बेटे के ऊपर पटक दिया है जिस वजह से उनकी चीख निकल gayi....par जब उन्होंने देखा की ऐसा नहीं है तोह उनकी जान में जान आयी...

मई- अगली बार मुझपे हाथ उठाने से पहले सोच लीजियेगा की कहीं उसके बाद आपका बीटा हमेशा के लिए hi ना कहीं उठ जाए....

माँ- निकल जा मेरे घर se..aur दोबारा मुझे अपनी शकल मत दिखाना....

अवंतिका- आंटी.....

अवंतिका आगे कुछ कहती उससे पहले hi माँ ने अपना हाथ ऊपर कर उससे कुछ भी कहने से रोक दिया....

मई- cool.....mai तोह अपनी शकल नहीं दिखाऊंगा पर आप भी कोशिश करना की मेरे सामने कभी ना आओ.....

ये बोल मई वापस अपने रूम की तरफ निकल pada....mere पीछे पीछे अवंतिका भी आ गयी...

अवंतिका- V.J ये क्या कर रहे हो.......???

मई- तुम घर जाओ ाव........

मेरे मुँह से ाव सुनकर अवंतिका शॉकेड हुई पर ख़ुशी से...

अवंतिका- मई सबको बता दूंगी की असली प्रॉब्लम क्या है????

अह्ह्ह्ह.........

ये आवाज़ अवंतिका के मुँह से निकली थी और वो इसीलिए क्यूंकि मैंने उससे दीवाल से सत्ता दिया था...

मई- मई खुद नहीं जानता की मई कब क्या कर dun.....isiliye मेरे सब्र का इम्तिहान मत लो....

तुम्हे जो बताना है वो batado,par अगर तुम्हे लगता है की ऐसा करने से सब ठीक हो जाएगा तोह तुम गलत हो.....

जो बचा hai,wo भी ख़त्म हो jaayega...aur तुम तोह जानती हो की V.J जो कहता है वो हो जाता है......

मुझे किसीकी ज़रुरत नहीं hai...aur मई अकेला hi रहना चाहता हूँ...

ये बोलकर मैंने एक ड्रावर से अपने 10तह और 12तह के मार्क शीट और साथ hi अपनी स्कालरशिप निकली जिसका अभी तक मैंने उसे नहीं किया था पर अब मुझे इसकी ज़रुरत थी.....

अवंतिका- और meri...kya तुम्हे मेरी भी ज़रुरत नहीं है....

मई- नहीं......

ये बोल मई आगे बढ़ gaya.....jab मई नीचे पहुंचा तोह वहां मेरे माँ डैड नाना naanu,aur आंटी सब अभी भी मौजूद थे...

मई- सिर्फ अपने डाक्यूमेंट्स लिए हैं और कुछ नहीं...

ये बोल मई आगे बढ़ gaya...naanu और नानी ने मुझे बोहोत रोकने की कोशिश की पर मई नहीं रुका...

मेरे घर से कदम बाहर निकलते hi दो लोग धम्म करके निचे गिर गए...

एक माँ और दूसरी अवनि......

इसके बाद मई किसीको नहीं dikha...AVANTIKA ने आज से पहले मुझे आखरी बार पेपर के टाइम देखा था...

या फिर ये कहूं की सिर्फ उसीने hi मुझे देखा था क्यूंकि मई लास्ट में कॉलेज आता था वो भी हूडि से सर को धक् कर और पेपर्स सबसे पहले देकर चला जाता था....

लास्ट पेपर....

अवंतिका- hi....

आखरी पेपर के वक़्त अवंतिका मुझसे पहले पेपर देकर बाहर hi मेरा वेट कर रही थी....

जैसे hi मई बाहर aaya,mujhe अपनेसामने वो कड़ी दिखी....

AVANTIKA-ek बात पूछूं???

पर मई अब भी खामोश hi था.....

अवंतिका- तुमने उस दिन कहा की तुम्हे मेरी भी ज़रुरत नहीं hai..kya इससे मई ये समझूँ की तुम्हे अब मुझसे मोहोब्बत भी नहीं है....

मई- मई मुंबई छोड़कर जा रहा हूँ....

अवंतिका- ये मेरे सवाल का जवाब नहीं hai....bas इतना बताओ की क्या तुम अब भी मुझे प्यार करते हो????

मैंने हर तरफ नज़ारे ghumayi,koi भी हमारे आस पास नहीं था....

मैंने एक बार अवंतिका की तरफ dekha,kuch कहने के लिए मेरे होंठ हिले भी पर मई कुछ कह नहीं पाया और अगले hi पल मई गायब हो चूका था.....

MA'AM योर कैपेचीनो.......

वेटर के आवाज़ से अवंतिका होश में या ये कहूं अपनी यादों से बाहर आयी...

उसका चेहरा मुरझाया हुआ था पर सिर्फ एक पल के liye..jaise hi उसकी नज़र सामने gayi,uski मुस्कान वापस आ गयी क्यूंकि उसके सामने मई खड़ा था.....

किसी पता था तुझसे मोहोब्बत हो जायेगी....

हमे तोह बस तेरा मुस्कुराना पसंद था....

कुछ देर तक उससे मुस्कुराते हुए देखने के बाद मई उसके सामने चेयर पर आकर बैठ गया ुर उसके बोलने का इंतज़ार करने लगा पर वो मुझे एक तक देखती रही....

मई- तुम मेरा पीछा क्यों कर रही हो????

आखिर में जब वो कुछ नहीं बोली तोह मई hi बोल उठा....

अवंतिका- तुम्हे कैसे पता की मई तुम्हारा पीछा कर रहा हूँ....???

मई- मई किसीको कर सकूँ या ना कर sakun,par तुम्हे महसूस कर सकता हूँ AV....aur मई तुम्हे पीछे 1 महीने से अपने आस पास महसूस कर रहा हूँ....

dekho,mai वापस नहीं जाने waala..isiliye अगर तुम मुझे वापस लेजाने के लिए यहाँ आयी हो तोह ये जान लो की इससे कोई फायदा नहीं होगा...

अवंतिका- मई तोह बस अपने सवाल का जवाब लेने आयी हूँ....

मई- कौन सा सवाल???

अवंतिका- इतनी जल्दी भूल gaye..wahi सवाल जो मैंने हमारी पिछली मुलाकात के वक़्त पूछा tha....tum मुझसे प्यार करते हो की नहीं????

मई- तुम?????

अवंतिका मई तोह करती हूँ तुमसे pyar..tum अपना बताओ....

पर मैंने कुछ नहीं कहा और उठ कर जाने लगा..

अवंतिका- जब तक मुझे जवाब नहीं मिल jaata,mai भी यहीं रहूंगी.....

अवंतिका की बात सुनकर मेरे कदम रूक गए......

मई- प्यार में ज़बरदस्ती नहीं होती ाव....

अवंतिका- पर इंतज़ार तोह होता है naa.mai वही कर रही hun....jitna वक़्त लेना है ले lo,yahan से भी कहीं और जाना चाहते हो तोह चले jao,par जब भी पलट कर dekhoge,apni ाव को अपने पीछे खड़ा पाओगे...

अवंतिका के बात सुन दर्द और तड़प की एक ऐसी लहार दौड़ी मेरे दिल और दिमाग में की मई और रूक ना पाया और कैफ़े से बाहर निकल गया.....

अवंतिका- मंज़िले भी उसकी थी...

रास्ता भी उसका था...

एक मई hi अकेली थी....

काफिला भी उसका था....

साथ साथ चलने की

सोच भी उसकी थी....

फिर रास्ता बदलने का

फैसला भी उसका था....

आज क्यों अकेली हूँ!!!

दिल सवाल करता है...

लोग तोह उसके थे HI,

क्या खुदा भी उसका था...

आज के लिए इतना HI........

आपका अपना V.J........
 
थैंक्स 4 थे रिव्यु बरोथेर... बोहोत कुछ ुनफोल्ड होना बाकी है और वो धीरे धीरे हो भी जायेगा... आप भूल रहे हों बरोथेर की जानवर कितना भी खतरनाक क्यों ना ho,apne बनाने वाले को कभी कुछ नहीं करता या ये कहूं कर सकता... मैंने पहले भी बताया है की भुविका और बिल्जेबब की साड़ी शक्ति या तोह विक्रम की या फिर ास्मोडियस की जागीर है... तोह वो कैसे उनसे भीड़ सकते hain..aage के सफर के लिए साथ बने रहिये
 
थैंक्स बरोथेर... और आपने बिलकुल ठीक कहा की कहीं न कहीं उस स्टोरी के उपदटेस में hi आगे की होने वाली चीज़ों का हिंट छुपा हुआ है ओर उससे इस तरह दिखाया गया है की जब तक वो हो ना जाए, तब तक दिमाग में क्लिक नहीं karta....aur कुछ चीज़े मैंने अधूरी छिड़ी हैं, पर ुंजा बाकी का हिस्सा भी मैंने कहीं न कहीं दिखाया है पर वो क्या hai,ye अभी डिस्क्लोसे नहीं हुआ hai...padhte jaayiye,bohot मज़ा आने waala.hai
 
थैंक्स बरोथेर.. chaliye,aapke सवाल को एक सवाल से सुलझाते हैं... सवाल ये है की विक्रम हो या उसका भाई ास्मोडियस, दोनों को ताकत किस्से मिली hai???GOD se.....GOD की दी हुई ताकत को ये दोनों कैसे बाँध सकते हैं.... इन दोनों की hi ताकत उस नदी के पानी की तरह है जिससे रोका नहीं जा sakta,bas उसका रास्ता बदला जा सकता hai.aur वही ास्मोडियस ने किया है...
 
अब तक आपने पढ़ा की कैसे विक्रम मुंबई से दिल्ली पहुँचता है वहीँ अवंतिका भी विक्रम के पीछे पीछे दिल्ली पहुँच जाती है:-

अब आगे:-

फाइनल CHAPTER

(एंगेल्स सैक्रिफाइस & डेविल्स डेमोलिशन)

अपडेट-93

प्लेनेट- मांसलिकेल

प्लेस- पैलेस हॉल

HI हाईल फादर.....

HI हाईल डेविल लार्ड.....

पर ास्मोडियस जो की इस वक़्त अपनी राजगद्दी में बैठा आँखें बंद किये कुछ सोच रहा tha,usne बिल्जेबब और भुविका के जेस्चर में कुछ नहीं kaha,yahan तक की उसने अपनी आखें भी नहीं खोली.....

भुविका और ख़ास कर बिल्जेबब ये सब देख कर बोहोत शॉकेड हो gaye....aisa पहले कभी नहीं हुआ था....

जो ास्मोडियस एक पक्षी के उड़ने से पहले hi बता देता हो की वो पक्षी की उड़ान की मंज़िल क्या hai,aur उस उड़ान के दौरान वो कितने बार अपनी पंख fadfadaayega,uska यूँ ऐसे सोच में गुम होना की उनके गेस्टुरेस का जवाब देना तोह दूर उनकी मौजूदगी का एहसास तक ना hona,ye बोहोत बड़ी बात थी....

बिल्जेबब और भुविका ने एक बार एक दूसरे की तरफ dekha,fir बिल्जेबब डरते डरते ास्मोडियस के थोड़ा और करीब गया और....

बिल्जेबब- फादर........

इस बार ास्मोडियस ने बिल्जेबब की आवाज़ सुनकर अपनी आखें खोली......

ास्मोडियस- क्या तुम्हे पता नहीं है की तुम्हारे या किसी के भी यहाँ आने से पहले hi मुझे पता रहता है की वो आ रहा है...

फिर तुम्हे दो बार मुझे पुकारने की ज़रुरत क्यों पड़ी....????

बिल्जेबब- माफ़ कीजियेगा FATHER...par जब हमारे पुकारने पर भी आपने अपनी आखें नहीं खोली तोह मुझे दूसरी बार आपको पुकारना पड़ा...

ास्मोडियस- मैंने अपनी आखें नहीं खोली क्यूंकि मुझे ऐसा करना ज़रूरी नहीं लगा....

ास्मोडियस की आवाज़ में इस बात को बोलते वक़्त हलकी सख्ती आ गयी थी जिससे सुनकर बिल्जेबब की रीढ़ की हड्डी में सार्ड लेहेर सी दौड़ गयी....

अब उसमे इतनी हिम्मत नहीं बची थी की वो उस बारे में बात कर सके जिस वजह से वो अपने फादर के सामने प्रकट हुआ था...

पर भुविका की बात अलग thi...usse तोह अपनी बात ास्मोडियस के सामने रखनी hi थी पर उससे पहले....

भुविका- हमारी गलतियों को माफ़ कीजिये डेविल लार्ड...

ास्मोडियस ने एक बार घर कर भुविका को देखा....

ास्मोडियस- अपने आने का कारण बताओ भुविका......

भुविका- आप से क्या छुपा है डेविल LORD.....?????aapne जैसा kaha,waisa हो gaya...aapke खून के असर से विक्रम का व्यक्तित्व बदल गया....

और इस वजह से उसका ohda,uski पहचान उससे अलग हो gayi....ab वो लार्ड ऑफ़ एंगेल्स नहीं raha....uske परिवार वालों ने भी उससे खुद से दूर कर दिया....

अंजलि के रूप में उसके दिमाग के साथ साथ उसके ह्रदय को भी आघात पहुंच चूका hai...aur उसका सबसे घनिष्ट मित्र भी अब उसका मित्र नहीं रहा....

पर इन सब का फायदा क्या hua????jahan एक तरफ आपके खून की वजह से उसको नुक्सान hua,wahin एक फायदा भी हुआ है...

उससे किसी की फ़िक्र hi नहीं rahi...wo तोह अपनी ज़िन्दगी में मस्त hai....aise में मेरा बदला अधूरा hi रह गया ना...

ास्मोडियस- क्या करना चाहती हो तुम????

भुविका- मई विक्रम को ख़त्म करना चाहती हूँ....

ास्मोडियस- हहहहहहआ.......................

भुविका की बात सुनकर ास्मोडियस ज़ोर ज़ोर से हसने laga.....wahin भुविका और बिल्जेबब को ास्मोडियस का हसने का कारण समझ नहीं आया.....

और जैसे hi ास्मोडियस की हसी रुकी.....

बिलजुबूब- FATHER,kya भुविका ने कुछ गलत कह diya....???VIKRAM अब वो नहीं रहे जो कभी हुआ करते the....ab तोह हम उनसे लड़ सकते हैं ना!!!!

ास्मोडियस- बिलकुल लड़ सकते हो....

ास्मोडियस की बात सुनकर भुविका और बिल्जेबब खुश हो गए.....

ास्मोडियस- murkhon,khush होने से पहले मेरी पूरी बात तोह सुन लेते....

मैंने कहा की तुम दोनों विक्रम से लड़ सकते ho,ye नहीं कहा की तुम दोनों मिलकर भी उससे जीत सकते हो!!!!

BHUVIKA/BEELZEBUB- मतलब!!!!

ास्मोडियस- hmm....kisi वृक्ष की ताकत किसपर निर्भर करती है....????

बिल्जेबब- उसकी जड़ों पर.....

ास्मोडियस- और क्या उसकी जड़ें दिखती हैं....???

BEELZEBUB-nahi....

ास्मोडियस- पर बिना देखे एक सीख ज़रूर दे जाती hain...aur वो ये की शत्रु से लड़ने के लिए ठीक एक वृक्ष की तरह उसकी वो ताकतें जो दिखती hain,unke बारे में जानना ज़रूरी होता है...

पर शत्रु से जितने के लिए ठीक उस वृक्ष की जड़ों की तरह उसकी वो ताकतें जो नहीं दिखती hain,unke बारे में जानना ज़रूरी होता है....

ास्मोडियस की बातें भुविका और बिल्जेबब को सुनाई तोह दे रही thi,par उन्हें समझ कुछ नहीं आ रहा था....

वो दोनों अपने अपने आखों में सवाल लिए ास्मोडियस को देख रहे थे.....

ास्मोडियस- जब मेरे कथन का अर्थ तक तुम दोनों नहीं समझ sake,toh उस कथन के पीछे छुपे सत्य को कैसे समझ पाओगे...

फ़िलहाल के लिए इतना समझ लो की तुम दोनों विक्रम से दूर raho....issi में तुम दोनों की भलाई है....

ास्मोडियस की बात सुनकर बिल्जेबब और भुविका उदास हो गए पर तभी भुविका के मन में एक नया ख्याल आया...

भुविका- डेविल LORD,agar हम विक्रम को नहीं मार सकते तोह कमसेकम हमे उसकी mohobbat,uski प्रेमिका अवंतिका को मारने की तोह अनुमति दीजिये....

भुविका की बात सुनकर ास्मोडियस के फेस पर एक अजीब एक्सप्रेशन आया जिससे ना तोह भुविका समझ पायी और नाही बिल्जेबब.....

ास्मोडियस कुछ देर तक भुविका को देखता रहा और......

ास्मोडियस- ठीक hai...par तभी जब........

इसके बाद ास्मोडियस ने भुविका और बिल्जेबब को कुछ बताया जिससे सुनकर भुविका और बिल्जेबब को कुछ समझ तोह नहीं आया पर उन्होंने ास्मोडियस से कुछ नहीं कहा...

दोनों ने ास्मोडियस के सामने अपना सर झुकाया और गायब होकर एक दूसरी जगह पहुंचे....

नवदुम....

कॉग्निजेंट...

बिल्जेबब और भुविका ने ये स्पेल एक साथ बोलै और दोबारा गायब हो गए....

प्लेनेट- एअर्थ

प्लेस- सत PETERS,PRINCIPALS ऑफिस

व्हाट ा प्लेअसेन्ट सरप्राइज SIR.....WELCOME...PLZ हैवे ा सीट.....

सुबह का वक़्त hai.....ST.PETER के प्रिंसिपल अभी जस्ट ऑफिस पहुंचे hi थे की उनके पीछे पीछे दिल्ली के सेंट्रल मिनिस्टर आ पहुंचे जो की सत पीटर के चीफ ट्रस्टी भी थे जिन्हे देखकर पहले तोह प्रिंसिपल चौंके पर फिर नार्मल हो उन्हें बैठने को कहा....

प्रिंसिपल- क्या लेंगे सर आप???

सेंट्रल मं- ये ladka...isse यहाँ bulayiye,abhi.....

सेंट्रल मिनिस्टर ने अपने मोबाइल के दिसलपले को प्रिंसिपल की तरफ कर अपनी बात कही....

ये फोटो विक्रम की hi थी जो विक्रम से भिड़ने आये लड़कों में से एक ने खिंच ली थी और जब सेंट्रल मिनिस्टर ने विक्रम के हुलिए के बारे में उन सब से पूछा तोह जिस बन्दे ने विक्रम की पिछ क्लिक थी उससे उसने सेंट्रल मिनिस्टर को दिखाया....

उसने उन्हें ये भी बताया की ये फोटो जिसकी hai,wo अभी कॉलेज में नया नया आया है...

वहीँ प्रिंसिपल चौंके पर उनके चौंकने की वजह सेंट्रल मिनिस्टर के मोबाइल में दिख रही फोटो नहीं बल्कि सेंट्रल मिनिस्टर का रवैया था...

वो इस वक़्त ग़ुस्से में लग रहे थे....

NOTE:-CENTRAL मिनिस्टर और प्रिंसिपल का ज़्यादा रोल नहीं है इसीलिए उन्हें नाम नहीं दिया गया है....

प्रिंसिपल- इस एव्री थिंग ok sir....???aap ग़ुस्से में लग रहे हैं...

CEN.MIN- इससे bulayiye,sab पता चल jaayega....aur haan,isne अभी अभी एडमिशन लिया है तोह इससे नई एडमिशंस की लिस्ट में चेक कीजिये...

प्रिंसिपल ने अपने एक स्टाफ मेंबर को बुलाया और मेरा इन्फो निकलने के लिए कहा...

कुछ hi देर में वो स्टाफ मेंबर विक्रम के डिटेल्स लेकर लौटा जिससे प्रिंसिपल देखकर चौंक गए पर उन्होंने मिनिस्टर से कुछ नहीं कहा...

विक्रम के डिटेल्स में उसका नंबर भी था जिससे प्रिंसिपल ने डायल कर दिया....

प्लेस- करोल BAGH,DELHI....

HMM...TOH ये है KAROLBAGH.....THIK HI HAI....CHAL BETA,KAAM पर लग जा.....

ये बोल मई एक कपडे की शॉप की तरफ चल पड़ा...

कल से मेरा कॉलेज शुरू होने वाला था इसीलिए आज मैंने कुछ शॉपिंग करने की sochi..ab मेरे वॉलेट में ज़्यादा पैसे तोह थे nahi,isilye कैरोल बाघ आ गया..

सुना है यहाँ सस्ते में अचे कपडे मिलते हैं..

मई- सुन bhai,kuch स्किन टाइट टी शर्ट्स दिखा...

मैंने उस शॉप के सेल्स मन से कहा....

सेल्स मन ने एक बाद एक कई साड़ी टी शर्ट्स मेरे सामने रखना शुरू किया....

मई- बस bhai..kapde का पहाड़ बनाएगा kya???waise क्या रेंज है इनकी...???

सेल्स मन- बोहोत सस्ती है sir..plain वाली 250 और प्रिंटेड वाली 500 की हैं....

मई- ाचा एक बात bata..agar मई ये पलाइन वाली टी शर्ट्स ले लूँ और फिर इनपर प्रिंट करके तुझे वापस 400 में dun,toh लेगा???

सेल्स मन- क्या sir,aap भी....

मई- मई भी kya???mai मज़ाक थोड़ी न कर रहा hun..dekh,500 में तोह तू उन्हें भी बेचेगा naa.toh कमा लिया ने तेरे सेठ ने 100 रूपीस पैर टी शर्ट....

सेल्स मन- sir,aisa नहीं होता है....

मई- हाँ भाई,200 से 250 रूपीस पैर टी शर्ट कमिशन मिलता है tumhe,toh 100 में कैसे posayega..kyun???

मेरी बात सुनकर सेल्स मन हड़बड़ा गया....

उसके हड़बड़ाने पर मई भी हस्ता हुआ टी शर्ट्स सेलेक्ट करने लगा....

मई- ये 2 पलाइन वाली और ये 3 प्रिंटेड वाली पैक कर de...par sun,sab मिलकर 1600 hi दूंगा...

सेल्स मन- sir,sabhi का मिलाकर टोटल 2000 हो रहा है..400 रूपीस कैसे काम कर सकता hun....????aap एक काम कीजिये 1900 दे दीजिये...

मई- अरे waah..pure 100 रूपीस discount...itne में तोह मेरा पूरा महीना चल jaayega,kyun????

तू एक काम कर रहने de..yahan पर शॉप्स की कमी थोड़ी ना hai...kahin और से ले लूंगा...

ये बोलकर मई पलटा hi था की....

सेल्स मन- सर सर sir......ek काम कीजिये,1700 से दीजिये....

मई- 1600 से एक रुपैया ज़्यादा नहीं dunga...dena है तोह de,warna मई चला...

सेल्स मन- ठीक है सर....1600 hi दे डजीजिये...

मई मन में- साला हम दुनिया को बनाते हैं और ये हमे बनाने निकला था....

बन गयी तेरी duniya....saale,malls में जाकर लेविस और स्पीकर के कपड़ों पर ऐसे मोल भाव कर के dekh...thenga भी ना मिलेगा तेरेको...

पर वहां जाकर जो रेट में मिले ,कपडे उठाकर ले आओगे पर छोटी छोटी दुकानों में जाकर तुम्हारा गणित बाहर आ जाता है क्यों????

saale,mall के शो रूम वाले बन्दे तुम्हारे पैसों से बंग्लोव्स बनाते हैं पर ये बेचारे बस अपना घर चलते हैं..

लेकिन तुम्हे kya,rahis और रहिस हो तोह हों पर गरीब गरीब hi रहना chahiye,haina!!!

ये साली वही मनहूस तीखी और कड़वी आवाज़ थी जो मेरे हर काम के बाद अपना मुँह फाड़ती थी पर अब क्या bolun,sach तोह कड़वा hi होता है ना....

मैंने चुप चाप पेमेंट की और शॉपिंग बैग पकड़ बाहर निकल आया की तभी....

भाग भाग आया शेर आया शेर आया...

मेरे शेर की रिंगटोन ी मैं मेरे मोबाइल की रिंगटोन बज uthi...display पर जो नंबर फ़्लैश हो रहा tha,wo अननोन tha..khair,maine कॉल पिक किया....

मई- hello,vicky थिस साइड....

आवाज़- मर विक्रम जयराज SINGH......this इस प्रिंसिपल कालिंग ऑफ़ ST.PETERS....can यू के तो थे कॉलेज एंड मीट में राइट नाउ....???

मई- सूरे sir...on माय वे....

प्रिंसिपल- गुड...

ये कहकर प्रिंसिपल ने फ़ोन काट दिया....

मई- अब इससे मुझसे क्या काम पद gaya....????par जाना तोह पड़ेगा hi..chal beta,chala जाए....

वहीँ मेरे बाजू में एक स्टाल लगा था जिसके पीछे की जगह खाली thi..mai वहीँ पीछे की तरफ चला गया और अगले hi पल मई गायब हो चूका था......

PLACE-ST.STEPHENS.COLLEGE कैंटीन

हे SHAIFALI...HEY रोनित......

RONIT/SHAIFALI- हे शनाया

शैफाली- हे अवंतिका ....

शनाया को तोह दोनों ने ग्रीट किया था पर अवंतिका को ग्रीट करने वाली आवाज़ सिर्फ शैफाली की थी....

शनाया ने तोह नहीं पर अवंतिका ने इस बात को नोट किया था पर वो ऐसा hi कुछ एक्सपेक्ट कर रही थी....

सुबह का वक़्त hai....ST सपफेस में भी फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स के एडमिशंस और सीनियर्स के रेडमीशन प्रोसेस शुरू हो गए हैं और रोनित और शैफाली इसीलिए hi यहाँ आये हुए हैं पर अवंतिका का यहाँ के आने का रीज़न कुछ और है..

वो यहाँ अपना ट्रांसफर सर्टिफिकेट कलेक्ट करने आयी hai..wo भी अब दिल्ली में विक्रम के साथ hi पढ़ने का मन बना चुकी है...

अवंतिका ने वहां एडमिशन के लिए अप्लाई भी कर दिया hai..par अभी तक उसका तक यहाँ से निकला नहीं tha...par आज उससे वो मिलने वाला था....

अवंतिका- मई प्रिन्सी से मिलकर आती हूँ...

अवंतिका जाने को हुई पर शनाया ने उसका हाथ पकड़ लिया...

शनाया- यार थोड़ा रूक naa.fir चली jaana...kaun सा थोड़ी देर में तेरा T.C रूक जाएगा या सत पेटर्स में एडमिशन कैंसिल हो जाएगा...

अवंतिका T.C ले रही है ये सुनकर रोनित chownka,aur सत PETER....!!!!!ye नाम भी उसके लिए नया था....

रोनित- ST.PETER...koi नया कॉलेज खुला है क्या???

शनाया- नया kahan???ST पीटर तोह बोहोत पुराण कॉलेज है

रोनित- strange!!!!pehle कभी नाम तक नहीं सुना...

शनाया- कहाँ से sunega...ye कॉलेज मुंबई का थोड़ी ना hai,DELHI का है....

शनाया की बात सुनकर रोनित सॉलिड chownka..usne अवंतिका की तरफ देखा जो उसकी hi तरफ देख रही थी....

रोनित को अंदाज़ा हो गया था की अवंतिका दिल्ली जा रही ,तोह V.J भी डेफिनाटेली वहीँ hoga....wo इस बारे में अवंतिका से बात करना चाहता था पर फ़िलहाल वो चुप hi रहा...

V.J के घर छोड़ देने के बाद सबसे अजीब मंद सेट रोनित का hi हुआ tha...kabhi कभी वो V.J के बारे में सोचकर ग़ुस्सा हो जाता tha,toh कभी कभी अपने दोस्त और अपनी दोस्ती को याद करके इमोशनल....

और अपने घर वालों की हालत देखकर उससे खुदपर भी ग़ुस्सा आता tha..wo सोचता था की अगर उस दिन उसने V.J का नाम नहीं लिया होता तोह सब कुछ नार्मल hi रहता...

पर जो हो चूका tha,ho chuka...beeta वक़्त ना कभी बदला है और ना कभी बदलेगा...

शनाया- yaar,ye V.J कहाँ गायब हो गया hai...abhi तक वापस नहीं aaya....aur उसने एक्साम्स भी नहीं दिए......

शनाया की आवाज़ सुनकर रोनित अपने ख्यालों से बाहर आया....

शनाया को रोनित ने विक्रम के बारे में ये बताया था की विक्रम अपने किसी रिलेटिव के पास U.S गया है और कुछ महीने वहीँ रहेगा....

शनाया ने सोचा की अंजलि की मौत की वजह से विक्रम ने ऐसा फैसला लिया हो....

शनाया की बात का रोनित कुछ जवाब देता उससे पहले.....

अवंतिका- किसने कहा की V.J ने पेपर्स नहीं diye..usne सब पेपर्स दिए हैं और वो भी कॉलेज आकर....

अवंतिका की बात सुनकर रोनित सॉलिड chownka...par अगर वो अवंतिका से अभी कुछ पूछता तोह शनाया को शॉक लगता की रोनित को विक्रम के बारे में कैसे कुछ नहीं पता इसीलिए वो चुप रहा.....

शनाया- what!!!V.J पेपर देने आया और हमसे मिला तक नहीं....

अवंतिका ने शनाया के सवाल पर कुछ नहीं kaha..wo चुप रही पर तभी उसकी नज़र शैफाली पर गयी जिसकी आँखों में इस वक़्त बेचैनी साफ़ दिख रही थी.....

दरसल वो सोच रही थी वो उन सबको बताये की नहीं की वो विक्रम से मिल चुकी है..... और इसी सोच ने उससे बेचैन कर रखा था...

अवंतिका- क्या हुआ babes...tu कुछ तेनसेद लग रही है.....!!!!

जैसे hi अवंतिका ने शैफाली से सवाल kiya,SHAIFALI ने अवंतिका की तरफ देखा....

और उसी वक़्त अवंतिका का हाथ शैफाली के हाथ के ऊपर आया और तभी......

अवंतिका के मन में 440 वाल्ट का झटका laga....par ऊपर से वो खुदको नार्मल hi बनाये हुए थी.....

शैफाली- कुछ नहीं yaar..wo थोड़ा हेड अचे थे......

शैफाली ने तोह अपना जवाब दे diya,par अब अवंतिका को वहां एक पल भी रूकना मुश्किल लग रहा था इसीलिए.....

अवंतिका- यार मई प्रिन्सी के ऑफिस से आती हूँ....

ये बोल अवंतिका उठ कर चली gayi....wahin अवंतिका के निकलने के कुछ सेकण्ड्स बाद.....

रोनित- मई ज़रा वाशरूम से आया....

ये बोल रोनित तुरंत उठा और अवंतिका के पीछे हो लिया....

अवंतिका धीरे धीरे चल रही thi..actually वो कुछ सोचे जा रही थी की तभी.......

रोनित- अवनि.......

आवाज़ सुनकर अवंतिका अपने ख्यालों से बाहर आयी और जब उसने पलट कर देखा तोह अपने सामें रोनित को खड़ा पाया.....

अवंतिका- क्या हुआ???

अवंतिका ने सीधे सपाट लैंग्वेज में रोनित से पूछा.....??

रोनित- V.J कहाँ hai????kya वो दिल्ली में hi है....!!!!

अवंतिका- तुम क्यों पूछ रहे ho???V.J कहीं भी rahe,jiya या mare,tumhe उससे क्या???

अवंतिका की बात सुनकर रोनित को ग़ुस्सा आ gaya.wo कुछ कहने के लिए अपना मुँह खोल hi रहा था की....

AVANTIKA-kuch भी बोलने से पहले उसके नतीजे के बारे में सोच लेना चाहिए मर रोनित....

और अपनी अकड़ अपने पास hi रखो तोह बेहतर hoga...us दिन तुम्हारी बातें मैंने सिर्फ इसीलिए सुनी क्यूंकि मई नहीं चाहती थी की मेरे बोलने पर और प्रोब्लेम्स क्रिएट हो..

पर वो तोह वैसे भी क्रिएट हो gayi...aur reason,tumhari बेवकूफी ...होश में आने के बाद जब तुम V.J के घर के लिए निकले the,toh रास्ते में क्या तुमने एक बार भी ये सोचा की तुम अचानक होश में आये कैसे???

nahi,tum क्यों sochoge..tumhe तोह तुम्हारे हर सवाल के जवाब की उम्मीद V.J से रहती है ना....1.5 साल..1.5 साल के बाद तुम V.J को देख रहे थे....

पर तुम्हे इस बात की ख़ुशी नहीं थी की V.J तुम्हारे पास वापस आ गया hai,is बात का दुःख था की अंजलि नहीं रही और उसका दोष भी तुमने V.J के ऊपर दाल दिया...

तुमने तोह ये जानने तक की कोशिश नहीं की 1.5 साल तक वो कहाँ tha.uski जगह उसका बहरूपिया कैसे यहाँ रहने लगा था...??

V.J के मुँह से अपने लिए गाली सुनकर तुम चौंके थे naa,par क्या तुमने ये सोचा की ऐसा क्यों hua??kyun V.J इतना बदला बदला साउंड कर रहा है....

तुम्हारी G.F होने से पहले अंजलि V.J की बेस्ट फ्रेंड thi..kya तुम ये बात भूल गए थे की V.J ने hi तुम दोनों को मिलाया tha....tum क्यों याद rakhoge,PYAR दोस्ती पर भारी जो पढ़ गया था....

रोनित- V.J ने भी तोह मुझपर तुम्हारी वजह से हाथ उठाया था...???

रोनित की बात सुनकर अवंतिका के चेहरे पर एक फीकी सी मुस्कान आ गयी...

अवंतिका- क्या kaha!!!!V.J ने तुमपर हाथ उठाया tha....agar V.J सच में तुमपर हाथ उठता तोह क्या तुम ज़िंदा रहते....!!!!

उस कंडीशन में जिस कंडीशन से V.J गुज़र रहा hai,usme उसने तुम्हे ज़िंदा छोड़ दिया यही बताता है की तुम उसके लिए क्या हो या फिर ये कहूं की क्या थे....

और रही बात मेरे लिए तुमपर हाथ उठाने की तोह बात मेरी या तुम्हारी नहीं सही और गलत की है..

इतने सालों में तुम इतना तोह V.J को समझते hi होंगे ना की वो हर फैसला रिश्तों के आधार पर नहीं बल्कि सही और गलत के आधार पर लेता है....

अगर उसके माँ या डैड भी कुछ गलत कहें या करें तोह वो उनका तक साथ न दे तोह फिर तुम्हारी हैसियत hi क्या है....???

haan,V.J प्यार करता है mujhse....par उसकी हालत की वजह से मुझसे भी दूर भागता है वो....

पर उससे कोई फर्क नहीं padta...kyunki मई भी बेइंतहा प्यार करती हूँ usse..junoon की आखरी हद तक चाहती हूँ उससे..

इतना प्यार की अगर खुदा भी आकर मुझे उसके खिलाफ कुछ कहे तोह मई खुदा को छोड़ दूंगी पर V.J को नहीं...

और रिश्ते ऐसे hi विश्वास की नीव पर टिकते है RONIT..wo विश्वास जो तुम्हारे दिल में कभी ठीक से पनप hi नहीं सका...

और जानते हो kyun,kyunki तुम स्वार्थी ho...sirf अपने बारे में सोचते ho..tumhe अपना गम तोह dikha,par V.J का दर्द नहीं...

इतने दिनों से जो दर्द का गुब्बार अवंतिका के अंदर पनप रहा tha,aansuon और कड़े लफ़्ज़ों का रूप लेकर वो निकल चूका था....

अब अवंतिका का प्रिन्सी के ऑफिस में जाने का मूड नहीं tha...aankhon में आंसुओं का समंदर लिए अवंतिका कॉलेज से बहार निकल गयी....

वहीँ रोनित के दिमाग ने सुनामी का रूप ले लिया tha...AVANTIKA की एक एक बात उसके अंदर तीर की तरह अब तक चुभ रही थी.....

उससे हर वो चीज़ याद आ रही थी जो अब तक हुई thi...aur अवंतिका की V.J की हालत वाली बात उससे पांच नहीं रही थी....

उससे ये तोह पता नहीं चला की V.J को हुआ क्या है पर वो इतना ज़रूर समझ चूका था की जो भी हुआ hai,wo कोई छोटी बात तोह हो नहीं सकती....

आज उससे अपने दोस्त की बोहोत याद आ रही thi...wo उसके पैरों में गिरकर माफ़ी माँगना चाहता tha...uske गले लग रोना चाहता था...

आज रोनित को वैसा hi लाचारी फील हो रहा था जैसा अंजलि को नहीं बचा पाने के वक़्त उसने महसूस किया था.....

ऐसी hi कई बातें उसके दिमाग में आ जा रहे थे पर अचानक एक थॉट उसके मन में अचानक उभरा जिसके उभरते hi उसके दर्द से भरे चेहरे पर ख़ुशी की एक झलक दिखने lagi....aur वो थॉट था....

रोनित- तू मेरे साथ नहीं है मेरे दोस्त पर आज अवंतिका के चेहरे पर मुझे तेरी झलक दिखी और उसकी बातों में वही चीज़ झलक रहा था जो तेरी बातों में हमेशा झलकता hai...ATTITUDE.....

प्लेस- सत PETER.PRINCI ऑफिस

क्या नाम लिया आपने अभी फ़ोन पर???

प्रिंसिपल- विक्रम जयराज सिंह.....

विक्रम से बात करते वक़्त जब प्रिन्सी ने उसका पूरा नाम liya,toh मिनिस्टर शॉकेड हो गया....

CENT.MIN- कहीं ये वही जयराज सिंह का बीटा नहीं जो.....

प्रिन्सी- यस sir..ye वही hai..ye देखिये...

सेंट्रल मिनिस्टर की बात आधी में hi काटकर प्रिन्सी ने मेरे डाक्यूमेंट्स उसके सामने कर दिए..

कुछ देर पहले प्रिन्सी सर जिस वजह से चौंके the,ussi वजह से सेंट्रल मिनिस्टर भी चौंक गया...

और वो वजह ये थी की मेरे डाक्यूमेंट्स में मेरे फोटो के बाजू मेर मेरे डैड की फोटो अटेस्टेड थी....

पर प्रिन्सी और मिनिस्टर के चौंकने में फर्क tha..jahan प्रिन्सी मेरी असलियत जानकार खुश था वहीँ मिनिस्टर की फैट चुकी थी..

वो मेरे डैड और उनकी पावर को अछि तरह जानता tha....usse पता था की अगर डैड चाहें तोह उसकी पोजीशन एक दिन में छीन सकती है...

जिस ग़ुस्से के साथ वो आया tha,wo ग़ुस्सा हवा हो चूका tha....wo कुछ कहने hi वाला था के तभी.....

मई ी के इन सर......

ये आवाज़ मेरी थी जिससे सुनकर मिनिस्टर और प्रिन्सी की नज़र मेरी तरफ गयी...

PRINCI-come son..bohot जल्दी आ गए आप???

मई- मई यहीं पास में hi था....

प्रिन्सी- इनसे milo..ye यहाँ के सेंट्रल मिनसिटेर hain..yahi तुमसे मिलना चाहते थे.....

मई मन में---- इसकी माँ ka...gay तोह नहीं है ये छू**** जो मुझसे मिलना चाहता hai..saale ने कोई बकवास की तोह यही पेल दूंगा...

प्रिन्सी ने तोह अपनी बात कह दी पर अब मिनिस्टर को समझ नहीं आ रहा था की वो बात को कैसे घुमाये पर तभी उससे मेरे डाक्यूमेंट्स में लिखे मेरे मार्क्स के बारे में ख्याल आया...

CENT.MIN- हम तोह बस नेशनल टोपर से मिलना चाहते the...hume गर्व है बीटा आप pe....aur हमे भरोसा है की एक दिन आप हमारे देश का नाम पुरे विश्व में रोशन करोगे...

मिनिस्टर की बात सुन प्रिन्सी मन hi मन हसने laga.wo समझ गया था की मिनिस्टर ने क्यों अपनी चाल और सुर बदली है....

मई मन में- अब्बे मई कोई वोट बैंक हूँ जो डीएलओगे चिपकाए जा रहा है...

मई- मई निकलूं....

ना थैंक्स, ना कोई और gesture,meri सीधी सपाट बात सुनकर प्रिन्सी और मिनिस्टर दोनों शॉकेड हो गए पर वो कर भी क्या सकते थे....

सेण्ट मं- ठीक है beta...kabhi घर आना....

अब मेरा दिमाग इसकी मीठी मीठी बातों से घूमने लगा tha..maine कुछ कहा नहीं बस छुपा चाप निकल गया...

मेरे जाते hi मिनिस्टर ने अपना फ़ोन निकला और एक नंबर डायल करने लगा......

प्लेस- मीनाक्षी मेन्शन

एव्री थिंग इस FINE..ABHI तोह घबराने की कोई ज़रुरत नहीं है पर इस बात का ध्यान रखिये की ये खाना ठीक टाइम से खाएं और मोस्ट इम्पॉर्टन्टलय खुश RAHEN....YAHI इनका इलाज है.....

ये बोल जयराज के फॅमिली डॉक्टर चले गए...

इस वक़्त तीनो परिवार मीनू के बैडरूम में मौजूद hai..sabhi के आँखें हलकी हलकी नुम है....

पर इन सब में दो आँखें ऐसी भी हैं जिनमे सिर्फ गम नहीं बेबसी भी है और वो आँखें है जयराज की.....

और हो भी क्यों naa,unke सामने बीएड पर उनकी पत्नी लेती या फिर ये कहूं पड़ी हुई hai...MINU के हाथों में ड्रिप चढ़ी हुई थी...

जब से विक्रम घर छोड़ कर गया है तभी से मीनू ने खाना पीना छोड़ दिया hai..khushi तोह जैसे उसकी ज़िन्दगी से चली hi गयी है....

घर में बात चीत भी ना के बराबर hi होती hai...yahan तक की जयराज और मीनू भी एक दूसरे से बोहोत काम बोलते हैं...

दुःख सिर्फ इन दोनों का hi सबसे ज़्यादा नहीं tha,inse भी बड़ा सदमा लगा था नेहा को...

अपनी बेटी की मौत के बाद से hi वो पूरी चुप हो गयी thi.......us वक़्त मीनू अपनी पूरी शिद्दत से नेहा को उस असहनीय दर्द से निकलने की कोशिश में लगी हुई थी...

और ऐसा hi कुछ जयराज आकाश के लिए कर रहे थे....

पर जबसे मीनू की तबियत बिगड़ी hai,NEHA और आकाश नेअपने गम को साइड में रख मीनू और जयराज के गम को काम करने की कोशिश की पर कामियाब नहीं हुईं....

अभी अभी डॉक्टर ने जो कहा वो सबने suna,aur सबने अपनी अपनी प्रतिक्रिया भी दी सिवाए जयराज के....

उनकी आँखों में एक शिकायत सी thi.wo चुप चाप बस खड़े रहे....

हरप्रीत- यार JAIRAJ,tu भी तोह कुछ bol...hamari बात तोह भाभी सिर्फ सुनेगी पर मानेगी नहीं....

जयराज- सबको अपने फैसले खुद लेने का हक़ है HARPREET....jiske गम में इनका ये हाल hai,usse घर से जाने के लिए भी तोह इन्होने hi बोलै था...

जयराज की बात सुनकर मीनू के आँखों से आंसू निकल aaye....uske पास बोलने की शक्ति ज़्यादा नहीं बची थी पर फिर भी उसके लैब हिले......

मीनू- उसने भी तोह.....

पर मीनू कुछ आगे बोल नहीं पायी क्यूंकि जयराज ने अपना हाथ सामने कर उससे बोलने से रोक दिया था...

जयराज- क्या से ज़रूरी सवाल क्यों होता hai???kya तुमने जानने की कोशिश की की उसने ऐसा क्यों kiya????nahi...

क्यों उसने अपने उस दोस्त पर हाथ उठाया जिसके लिए वो हस्ते हस्ते अपनी जान तक दे सकता था...

एक second,ek सेकंड में तुम्हारे मुँह से निकल गया की चला jaa...chala तोह gaya...ho तोह गयी तुम्हारी ख्वाहिश पूरी...

अपनी शिकायत की भड़ास बहार करते करते जयराज की आखें भी जवाब दे गयी वहीँ वहां मौजूद सभी की आखें भी भीग चुकी थी.....

जयराज रूम से बाहर जाने के लिए निकले hi थे की उनका मोबाइल रिंग hua.....ye कॉल और किसीका नहीं उसी सेंट्रल मिनिस्टर का था जो कुछ देर पहले विक्रम से मिला था...

जयराज- hello.ji बताईये कैसे याद किया???

सेण्ट मं- जयराज जी हम आपसे बोहोत नाराज़ hain...aapne बताया भी नहीं की आपका बीटा यहाँ दिल्ली में है और हमारे hi कॉलेज में पढ़ने आ रहा है...

मिनिस्टर की बात सुनकर जयराज को शॉक लगा पर ये शॉक उस शॉक की तरह था जो डॉक्टर्स रुके हुए हार्ट बीट को वापस धड़कने के लिए देते हैं....

विक्रम के घर छोड़कर जाने के बाद से hi जयराज अपने बेटे को ट्रैक करने की कोशिश कर रहे थे पर वो नाकामियाब रहे थे..

उनका बीटा कैसा hoga,kis हाल में hoga,ye ख्याल जयराज को अंदर hi अंदर तड़पाये जा रहा था...

पर आज मिनिस्टर के थ्रू अपने बेटे की लोकेशन जानकार उनके दिल को सुकून सा आ गया था...

वहीँ मोबाइल के दूसरी तरफ खड़ा मिनिस्टर hello hello रिपीट किये जा रहा था...

कुछ देर तक अपने अंदर आये ख़ुशी के तूफ़ान को महसूस करने के बाद जयराज को मिनिस्टर की आवाज़ सुनाई दी...

जयराज- हाँ hello...haan,wo एक्चुअली नेटवर्क प्रॉब्लम hai....mai दिल्ली आ रहा hun,wahin आ कर आपसे मिलता हूँ...

जयराज से ये सुन की वो खुद दिल्ली आ रहा hai,MINISTER बोहोत खुश हो गया....

वहीँ मीनू और कमरे में मौजूद बाकी के लोगों ने जयराज के चेहरे पर आयी अचानक ख़ुशी को नोटिस किया था.

विक्रम के जाने के बाद उन सब ने पहले बार जयराज के चेहरे पर ये ख़ुशी देखि थी और इसकी वजह जानना चाहते थे....

थोड़ी फॉर्मल बातें कर जयराज ने कॉल कट किया और जब अपनी पूरी फॅमिली की तरफ देखा तोह उन सब को खुद को घूरता पाया....

जयराज- हमारा बीटा दिल्ली में है........

सीधा saada,simple सा जवाब पर जिससे सुनते hi सभी एक चेरे खिल uthe...yahan तक के रोनित की माँ सविता की भी...

भले जो भी हुआ ho,unke लिए विक्रम रोनित से काम नहीं tha..wo भी उसके चले जाने से बोहोत दुखी thi....par आज उन सब के दुखों के सागर को जैसे किनारा मिल गया था....

वहीँ मीनू तोह जैसे कुछ बोलने की हालत में hi नहीं thi...aansu तोह उसके पहले भी निकल रहे थे पर अब जो आंसू उसकी आँखों में तैर रहे थे उनमे ऐसी ताकत थी जिसने उसके शरीर की साड़ी कमज़ोरी को जैसे ख़त्म सा कर दिया था....

आँखों में आंसू पर चेहरे पर मुस्कान लिए वो अपने पति की तरफ देख रही thi...aur जयराज भी आज विक्रम के जाने के बाद पहली बार अपनी पत्नी को प्यार भरी नज़रों से देख रहे थे...

मीनू- मुझे मेरे बेटे के पास ले चलिए....

नानाजी- पर beta....abhi तुम बोहोत कमज़ोर ho....tum रेस्ट karo,JAIRAJ ले आएगा हमारे बेटे को....

पर अगले hi पल जो हुआ उससे देख कर सभी शॉकेड हो गए...

मीनू जो कमज़ोरी की वजह से ठीक से बैठ भी नहीं पा रही thi,wo अपने पैरों पर कड़ी हो चुकी थी...

मीनू- मई ठीक hun...aur मेरा इलाज ना hi रेस्ट hai,naahi medicine,mera इलाज मेरा बीटा hai...usse dekhungi,toh साड़ी कमज़ोरी ख़त्म हो जायेगी....

मीनू की आवाज़ में एक ताकत सी आ गयी thi...ye एक माँ की ताकत thi.aisi ताकत जिसके आगे खुदा भी नतमस्तक होता है...

जयराज- chalo,apne बेटे को घर ले आएं....

प्लेस- हेवन

इतनी SHAKTIYAN,FIR भी कैसी लाचारी है जो हम कुछ कर भी नहीं पा रहे हैं....

सत सेबेस्टियन ने अपनी उदासी बोल कर बयां की वहीँ सत अल्फ़्रिक और सत सकिलिअ ने खामोश रहकर....

पर सत सेबेस्टियन के लैब फिर हिले.....

सत सेबेस्टियन- ास्मोडियस ने हर गलत कार्य को इतने सही ढंग से किया है की उसके असफल होने का कारण hi नहीं बनता.....

दोनों भाईओं की शक्तियां बराबर hai,par इस्तेमाल करने का ढंग एक दूसरे से कितना अलग...

असफलता और सफलता का निर्णय खेल के बीच में नहीं किया जाता PUTRA....AUR अभी ये खेल ख़त्म नहीं हुआ....

एक तेज़ prakash,jo पुरे हेवन में फैले चूका था और उस प्रकाश में एक ऐसी ऊर्जा थी जिसके सामने पुरे ब्रम्हांड में जितने भी सूर्य hain,unki सम्मिलित ऊर्जा भी फीकी लगे...

और लगे भी क्यों naa,ye ऊर्जा गॉड की जो थी जिनकी ऊर्जा और आवाज़ को विक्रम के पैदा होने के बाद आज पहली बार GOD'S मेसेंजर्स देख और सुन रहे थे....

उस प्रकाश के फैलते और आवाज़ के गूंजते hi तीनो सेंटस अपने घुटनो पर बैठ चुके थे....

गॉड- एक बंद घडी भी दिन में दो बार सही वक़्त दिखती hai...aur वक़्त से एक सिख मिलती है और वो ये की वक़्त हर किसको बराबर hi मिला है पर फिर भी हर व्यक्ति का सही वक़्त दूसरे से अलग होता है....

तुम्हारा दायित्व है विक्रम की अनुपस्तिथि में सारे एंगेल्स का मार्ग दर्शन karna..tum बस उसी पर अपना ध्यान केंद्रित करो....

जो हो रहा hai,aur जो होने वाला hai,uski चिंता तभी होनी चाहिए जब उसमे बदलाव लाया जा sake..par तुम तीनो इसमें समर्थ नहीं हो तोह फिर सोचकर क्या लाभ....

और वैसे bhi,ye लड़ाई दोनों भाइयों के शक्तियों की नहीं बल्कि दोनों की सोच और सच की है....

एक ( विक्रम ) सच को अपनी सोच बनाकर चलता है तोह वहीँ दूसरा ( ास्मोडियस ) अपनी सोच को सच बनाकर चलता है.....

जिसका सच और सोच मिलकर एक हो JAAYENGE,WO जीत जाएगा......

आज के लिए इतना HI.....

आपका अपना V...J.........
 
अब तक आपने पढ़ा की जयराज एंड फॅमिली को पता चल जाता है की विक्रम दिल्ली में है वहीँ गॉड गोड्स मैसेंजर से विक्रम और ास्मोडियस के बारे में बात करते हैं

अब आगे:-

फाइनल CHAPTER

(एंगेल्स सैक्रिफाइस & डेविल्स डेमोलिशन)

अपडेट-94

PLANET-EARTH

PLACE-MINAKSHI मेन्शन

AUNTY,BHOOK लग रही है......

..............................

HELLO,KYA HUA???BHOOT देख लिया क्या!!!!

सेंट्रल मिनिस्टर से बात ख़त्म होने और फिर अपने बेटे से मिलने के एक्ससिटेमेंट से बाहर आने के बाद जैसे hi मीनू और जयराज के साथ तीनो फॅमिली बहार हॉल में जाने के लिए hue,thik उसी वक़्त रोनित कमरे में एंटर हुआ और अपनी बात कही....

रोनित के होश में आने और फिर उसके और विक्रम के बीच जो हुआ उसके बाद से रोनित ने किसी से भी ढंग से बात नहीं की थी....

वो गुमसुम और खामोश सा हो गया tha...sabhi उससे चेअर उप करने की कोशिश में लगे रहते थे पर उसके बेहेवियर में कोई बदलाव नहीं आया था....

मीनू को पता था की उसकी बनायीं डिशेस रोनित को हमेशा से hi बोहोत पसंद thi,isiliye वो उसके लिए कुछ न कुछ बनती रहती थी पर रोनित ने उससे भी खाना बंद कर दिया था...

पर आज इतने टाइम के बाद रोनित ने सामने से मीनू को खाने के लिए कहा ये सुन और देखकर तीनो फैमिलीज़ शॉकेड से चुप हो गए थे...

पर जल्दी hi सब अपने अपने शॉक से बाहर आ गए और ऐसा होते hi शॉक की जगह ख़ुशी ने या फिर ये कहूं की डबल ख़ुशी ने ले ली...

एक ख़ुशी तोह उन्हें पहले hi विक्रम की लोकेशन के बारे में जानकार हो चुकी थी और दूसरी रोनित को बैक तो नार्मल देखकर हो रही थी....

सब बोहोत खुश थे पर फिर अचानक सबके मनमे एक थॉट आया जिसके आते hi सब थोड़े नर्वस हो गए...

सब ये सोचकर नर्वस फील करने लगे की जब रोनित को विक्रम के बारे में पता चलेगा तोह वो कैसे रियेक्ट करेगा....???!!!!

लास्ट टाइम जब वो दोनों आमने सामने the,tab जो हुआ या फिर ये कहूं की जो सबने ासुमे किया उससे याद कर उनके ज़हन में ऐसा थॉट आना नार्मल था...

ये तोह थे पूरी फॅमिली मेंबर्स के thought,ab जानते हैं की उनके सामने खड़े रोनित के दिमाग में क्या चल रहा है...!!!

मीनाक्षी मेन्शन आने से पहले रोनित ने रास्ते में hi ये तय कर लिया था की अब वो नार्मल रहेगा..

जो हुआ उससे ना तोह वो बदल सकता है और नाही उसके बारे में कुछ कर सकता है तोह कमसेकम नार्मल होकर वो अपनी फॅमिली को कुछ ख़ुशी दो दे hi सकता है...

रोनित ने ये भी सोच लिया था की कैसे भी करके वो विक्रम के पास जाएगा और उससे माफ़ी मांग कर घर वापस ले आएगा..

अवंतिका की बातों से और ख़ास कर ये जानकार की अवंतिका दिल्ली पढ़ने जा रही है रोनित को ये कन्फर्म सा लगने लगा था की हो ना हो V.J भी दिल्ली में hi है...

वो जानता था की पूरी फॅमिली को इस वक़्त विक्रम की कितनी ज़रुरत है.....

पर अब जब रोनित विक्रम के mom,dad और अपने बाकी फॅमिली मेंबर्स को देख रहा tha,toh सबके चेहरे पर आते कई सारे अलग अलग एक्सप्रेशंस को देखकर उससे डाउट हुआ...

अब रोनित जितना भी इम्पुल्सिवे क्यों ना ho,usse ट्रैन तोह V.J ने hi किया था और इसी वजह से hi उसने और अंजलि ने V.J और अवंतिका का रूप लिए हुए भुविका और बिल्जेबब जैसे बेहद शक्तिशाली डेविल्स को भी ताड़ लिया था तोह फिर नार्मल ह्यूमन बैंग्स को रीड करना तोह रोनित के लिए मामूली बात थी....

रोनित सिचुएशन को फिगर आउट कर hi रहा था की.....

मीनू- आज कितने दिनों के बाद मेरे बचे ने कुछ खाने की ज़िद्द की hai....chal तू मेरे saath,aaj तेरे लिए तेरी साड़ी फवुते डिशेस में बनाउंगी और तुझे खाना पड़ेगा....

मीनू ने रोनित के गाल को सहलाते हुए अपनी बात कही और उससे कंधे से पकड़कर आगे बढ़ने को हुई पर रोनित आगे नहीं बढ़ा और.....

RONIT-pehle ये बताइये की यहाँ चल क्या रहा tha???aap इतने दिनों के बाद अपने पैरों में कड़ी hain,fresh लग रही hain,baaki सब भी काफी एक्ससिटेड दिख रहे हैं....

मीनू- तू भी क्या क्या सोचने लग जाता hai...aaj कितने दिनों के बाद तू वापस पहले जैसा लग रहा hai...aaj तेरी आवाज़ सुनकर ऐसा लगा जैसे हमारा बीटा हमे वापस मिल गया है...

जहाँ मीनू की बात को तीनो फैमिलीज़ ने सपोर्ट किया वहीँ रोनित को पता था की सब झूठ बोल रहे थे और जब मीनू ने अपनी आखरी बात कही तोह अचानक रोनित के दिमाग की बत्ती जाली....

रोनित मन में- हमारा बीटा हमे वापस मिल गया HAI.....ye मेरी बात कर रहे हैं या विक्रम........

विक्रम नाम के दिमाग में गूंजते hi रोनित को अपने सारे क्वेश्चन के आंसर मिल गए...

इतने दिनों के बाद यूँ अचानक मीनू आंटी का फ्रेश lagna,saare घरवालों की आँखों में भी ख़ुशी jhalakna,ye तोह सिर्फ तभी हो सकता है जब सबको विक्रम के बारे में कुछ पता चला हो....

थ्योरी का लॉजिक क्लियर होते hi रोनित को अपने यार की और याद आने lagi..usse वो साड़ी बातें भी याद आने लगी जो विक्रम उससे ट्रेनिंग देते वक़्त बताया करता था....

उससे याद था की विक्रम ने एक बार उससे कहा था की कभी कभी झूठ के पीछे hi सच चुप्पा हुआ होता hai....bas देखने की नज़र चाहिए....

और अभी भी वही hua...MINU आंटी ने झूठ कहा पर उस झूठ में उनका सच भी कहीं न कहीं शामिल था जिससे रोनित ने समझ लिया और......

रोनित- V.J......aap सबको V.J के बारे में कुछ पता चला है ना....

रोनित की बात सुनकर सभी हड़बड़ा गए....

पर इससे पहले की कोई और या मीनू कुछ कहती

रोनित- AUNTY.....aapko मेरी kasam...yahi बात है ना....

अपनी कसम देकर रोनित ने मीनू को सच बताने में मजबूर कर दिया था...

मीनू- हाँ beta....VICKY के बारे में हमे पता चला है और मई और तेरे अंकल उससे लेने hi जा रहे थे...

मीनू की बात सुनकर रोनित की ख़ुशी का ठिकाना न रहा पर साथ hi वो नाराज़ भी था...

रोनित- तोह आप सब मुझसे इतनी बड़ी बात चुप्पा क्यों रहे थे???

मीनू- बीटा वो लास्ट टाइम जो तेरे और विक्की के बीच हुआ तोह....

मीनू अपनी बात पूरी करती उससे पहले hi.....

रोनित- भाई है वो मेरा.....

रोनित ने ये बात थोड़ी लाउड बोली थी पर उसकी बात सुनकर जहाँ सब थोड़े शॉकेड के साथ साथ बोहोत खुश भी थे....

रोनित- आप ऐसा सोच भी कैसे सकती हैं aunty...!!!maana की मैंने आपकी कोख से जनम नहीं लिया hai,V.J का सिबलिंग नहीं हूँ मई पर ना आप कहीं से भी मेरी माँ से काम हैं और V.J.....

वो तोह मेरे सेज भाई से भी बढ़कर hai....uske लिए तोह मई हस्ते हस्ते जान दे भी सकता हूँ और ले भी सकता हूँ....

हम दोनों के बीच झगडे हों या फिर कुछ भी ho,isse हमारा रिश्ता तोह नहीं बदल जाएगा ना...

mom,kya आप V.J से नाराज़ हैं.....???

रोनित ने अपनी माँ से ये बात पूछी....

R/MOM- मई क्यों नाराज़ rahungi...jaise वो तेरा भाई है वैसे hi मेरा भी बीटा hai...aur अपने बेटे से भी भला कोई माँ नाराज़ होती है क्या???

रोनित- exactly.....aunty,u हर्ट में....

ये बोलते वक़्त रोनित के आँखों में पानी आ गया जिससे देख मीनू ने झट से रोनित को गले से लगा लिया...

मीनू- सॉरी beta...really sorry.....mai भूल गयी थी की तुम दोनों अलग अलग होकर भी एक हो....

रोनित मीनू से अलग हुआ और......

रोनित- इतस ok aunty....par अब जब मुझे असल बात का पता चल चूका hai,toh मेरी भूक भी बढ़ चुकी है...

रोनित की बात सुनकर सभी है दिए...

मीनू- तू baith,mai कुछ बना कर लाती हुन्न...

मीनू आगे बढ़ने को हुई पर रोनित ने उन्हें फिरसे रोक दिया....

रोनित- मुझे खाने की भूक नहीं है aunty,apne भाई से मिलने ki,usse घर वापस लाने की भूक है.....

रोनित की बात सुनकर मीनू ने प्यार से उसके गाल को सहलाया hi था की......

रोनित- आप दिल्ली जा रहे हैं ना V.J को लाने?????

रोनित की इस बात को सुनकर सभी बोहोत ज़्यादा शॉकेड हो गए....

जयराज- तुझे कैसे पता की विक्की दिल्ली में है????

मीनू- और बीटा अगर तुझे पहले से पता था तोह हमे बताया क्यों नहीं!!!???

रोनित- aunty,mujhe आज hi पता चला है की V.J दिल्ली में है...

जयराज- पर तुझे किसने बताया???

रोनित- बस पता चल गया.....

रोनित ने ये नहीं बताया की अवनि के थ्रू उससे V.J की लोकेशन मिली है वर्ण सब अवनि से नाराज़ होते की उसने उन्हें पहले क्यों नहीं बताया....

ये सब chhodiye,ye बताईये की दिल्ली के लिए कब निकलना है....???

जयराज- कब kya???abhi निकलते hain....par बीटा मई सोच रहा हूँ की कहीं तुम्हे देखकर विक्की........

जयराज की बात ख़त्म होने से पहले hi....

रोनित- फिरसे नाराज़ ना हो jaaye,yahi ना!!!

रोनित ने जयराज की बात पूरी की...

जयराज ने कुछ नहीं कहा बस रोनित की तरफ देखने लगे....

रोनित- होने दो naaraz....mai मन lunga....par मई जाऊंगा मतलब jaaunga..chaahiye तोह आप दोनों रूक jaao,mai उससे लेकर आता हूँ....

जयराज ने अपनी बीवी की तरफ dekha..MINU ने भी अपनी पलकें हाँ में हिला दी...

जयराज- ठीक है fir...hum तीनो चलते हैं....

बाकी सब- और हम!!!!!

जयराज- सबका जाना ठीक नहीं hai...hum तीनो hi जाते हैं और उससे लेकर आते हैं...

पर सभी आने की ज़िद्द करने lage.JAIRAJ ने सभी को बड़ी मुश्किल से मनाया.....

पर जब सब बड़े बात कर रहे थे तब रोनित के दिमाग में कुछ आया और वो बाहर आ gaya...usne अपना मोबाइल निकला और एक नंबर डायल किया...

रिंग हुई और जब कुछ देर बाद कॉल रइवे हुआ तोह.....

रोनित- hello अवनि.....

जी हाँ doston,RONIT ने अवंतिका को फ़ोन किया tha...kyun,chaliye पता करते हैं...

अवंतिका- hmm.bolo....

अवंतिका ने सीधे सपाट तरीके से पूछा...

रोनित- सॉरी AVNI....maine जैसा तुम्हारे और V.J के साथ बेहवे kiya,mujhe नहीं करना चाहिए tha...i'am रियली सॉरी....

अपनी बात बोलते वक़्त रोनित का गाला भर गया था जिससे अवंतिका ने साफ़ महसूस किया था....

अवंतिका- इतस ok....

अवंतिका ने इस बार सोफ़्त्ल्य कहा...

रोनित- तुम्हारी एक हेल्प चाहिए???!!!

AVANTIKA-V.J दिल्ली में hi है kya,yahi पूछना चाहते हो naa....haan,wo वहीँ है...

रोनित- ये मुझे पता है AVNI...darasal mai,MINU आंटी और जयराज अंकल दिल्ली जा रहे hain...hume ये तोह पता है की V.J दिल्ली में hai,par इतनी बड़ी दिल्ली में उससे हम ढूंढेंगे कहाँ???

तुमसे यही जानना था की क्या तुम बता सकती हो की V.J कहाँ मिल सकता है???

रोनित की बात सुनकर अवंतिका के चेहरे पर स्माइल आ गयी...

फिर अवंतिका ने रोनित को एक अड्रेस दिया जिससे सुनाने के बाद.....

रोनित- पर वहां वो क्या करता है???

अवंतिका- jao,jab देखोगे तोह पता चल jaayega....aur haan,THANK यू.....

अवंतिका के मुँह से थैंक यू सुनकर रोनित को अजीब लगा..

रोनित- हेल्प तोह तुमने मेरी की hai..thanks तोह मुझे बोलना chahiye...tum क्यों बोल रही हो....????

AVANTIKA-agar वापसी में V.J भी तुम्हारे साथ aaya,toh bataungi....all थे बेस्ट....

रोनित ने अजीब सा फेस बनाते हुए फ़ोन हैंग उप किया.....

रोनित- V.J की सांगत में ये भी उसी की तरह हो गयी hai....EK पहेली........

रोनित जब हॉल में आया तब तक मटर सोल्वे हो चूका tha....gharwaale नहीं जाने के लिए तैयार हो गए the....par सबने मीनू और जयराज से प्रॉमिस लिया की कैसे भी करके वो विक्रम को घर वापस लेकर hi आएं...

सबसे प्रॉमिस करके RONIT,MINU और जयराज एयरपोर्ट की तरफ निकल पड़े....

वहीँ दूसरी तरफ......

अवंतिका- प्ल्ज़ GOD,jaisa मई सोच रही hun,kaash वैसा hi हो....

प्रेजेंट येत फ़्लैश बैक:-

प्लेनेट- ग्लूटो

प्लेस- पैलेस हॉल

आज आखिर मुलाकात हो HI गयी हमारी....

शैला जो की अपने राज सिंघासन में बैठी हुई thi,wo अचानक गूंजे इस तेज़ आवाज़ से चौंक उठी....

शैला ने अपने सामने देखा जहाँ इस वक़्त एक काली आकृति हवा में तैर सी रही थी...

शैला- कौन हो tum...saamne आओ...

उस काली आकृति ने धीरे धीरे एक रूप लेना शुरू किया और कुछ hi पलों बाद शैला के सामने एक बेहद hi ख़ूबसूरत लड़की कड़ी थी जिसके लिबास हलके स्वेत और हलके काले थे...

लड़की- लो ,मई सामने आ gayi..ab!!!!

शैला- सवाल अब भी नहीं badla....kaun हो तुम???

लड़की- भुविका.....

शैला- और इस तरह बीच दरबार में आने का क्या अर्थ है???

भुविका- मई यहाँ तुम्हे तुम्हारी औकाद याद दिलाने आयी हूँ....

भुविका की बात सुनकर शैला और वहां मौजूद सभी सभा सादों को ग़ुस्सा आ गया...

मंत्री- हमारी रानी का अपमान करने की तुम........

अह्ह्ह्ह.......

इससे आगे वो कुछ कह नहीं पाया क्यूंकि उसकी बात पूरी होने से पहले hi उसका शरीर हवा में उठ गया और फिर तेज़ी से वापस ज़मीं पर गिरा जिस वजह से उसके मुँह से कराह सी फूटी....

ये देख सारे सभा साद थोड़े दर से गए वहीँ शैला का क्रोध काफी बढ़ गया...

शैला- तुझे तेरा अंत यहाँ खींच लाया है....

ये बोल शैला ने मियां से अपनी तलवार खींची और भुविका की तरफ छलांग लगा दी.....

शैला का शरीर हवा को चीरता हुआ आगे बढ़ने laga...talwar के मूठ पर अपने हाथ सख्त कर शैला भुविका के सर के ऊपर पहुँच चुकी थी....

जहाँ शैला ने पुरे वेघ से अपनी तलवार घुमाई वहीँ भुविका चुप चाप शैला को घूरती हुई कड़ी रही और तभी.......

शैला का मुँह आश्चर्यता की अधिकता से खुल gaya...wo कभी अपने हाथ को देखती तोह कभी उसके शरीर को...

हाथ इसीलिए क्यूंकि उसके हाथ से उसकी तलवार गायब हो चुकी थी और शरीर को इसीलिए क्यूंकि उसका शरीर हवा में रूक सा गया था या फिर ये कहूं की उसके शरीर को हवा में hi बाँध सा दिया गया था....

भुविका ने अपने हाथ आगे किये और अगले hi पल.....

mmmmmm...mmmm...............

ये आवाज़ शैला के मुँह से निकल रही थी और wajah!!!!!BHUVIKA के हाथ आगे करते hi शैला का शरीर एक झटके से आगे की तरफ गिरा पर गिरने से पहले hi शैला की गर्दन भुविका के हाथों में फास चुकी थी...

भुविका हल्का सा hi प्रेशर लगाए हुए थी पर शैला के लिए ये भी बोहोत ज़्यादा था....

उसका दम घुटने लगा...

शैला ने बोहोत हाथ पेअर चलाये पर भुविका की पकड़ से आज़ाद नहीं हो पायी...

और जब भी शैला अपने घुटने या हाथ से भुविका पे प्रहार karti,uske हाथ और पेअर भुविका को छूने से पहले hi रूक जाते या फिर ये कहूं की उन्हें कोई अदृश्य ताकत रोक देती....

वहीँ जो कुछ भी हो रहा था उससे देखकर किसी भी सभासद की हिम्मत नहीं हो रही थी भुविका के सामने आने की....

कुछ पल के संघर्ष के बाद शैला का चेहरा लाल पड़ने laga.uske अंग ढीले पड़ने lage..uski आँखें बंद होनी लगी पर तभी.....

भुविका ने अपने हाथ को जिससे उसने शैला का गाला दबाया हुआ था उससे झटका दिया और अगले hi पल शैला का शरीर उड़ता हुआ पीछे की तरफ गया और.....

भाड़.........

ये आवाज़ शैला के शरीर के उसके सिंघासन से टकराने की वजह से आयी थी....

अपने hi सिंघासन से टकराने के बाद शैला का शरीर सामने बने सीढ़ियों से लुढ़कता हुआ नीचे फर्श पर गिर गया....

शैला कोई कमसीन नाज़ुक लड़की तोह थी नहीं जो एक टकराव की क्षति भी ना झेल पाए....

पर भुविका ने जो उसका गाला दबाया था उसकी वजह से उससे सेंस में आने में थोड़ा वक़्त लगा....

इस बीच भुविका ने कुछ नहीं kiya.wo चुप चाप कड़ी rahi....kuch देर बाद जब शैला को कुछ ठीक लगा तोह वो एक झटके में कड़ी हो गयी...

भुविका- तेरी हिम्मत कैसे हुई उस सिंघासन में बैठने की जिसपर सिर्फ मेरी दीदी का हक़ था है और हमेशा रहेगा...

भुविका की बात शैला के दिमाग के ऊपर से gayi...darasal उसने कभी भी भुविका को पहले देखा नहीं था..

उस दिन जब निष्कलिका मर रही thi,us दिन शैला का पूरा फोकस निष्कलिका के ऊपर hi था इसीलिए उस दिन भी उसने भुविका पर गौर नहीं किया था....

शैला- तुम्हारी बहिन????

भुविका- निष्कलिका.......

निष्कलिका का नाम सुन शैला को झटका laga....usne कभी नहीं सोचा था की निष्कलिका की कोई बेहेन भी होगी ुर वो भी इतनी ताकतवर....

भुविका- मेरी बेहेन को मारकर तूने ाचा नहीं किया SHAILA.....par फ़िक्र मत kar,NISHKALIKA ना सही पर उसकी बेहेन तुझे तेरे अपराध का दंड देगी.....

शैला- निष्कलिका एक बुरी श......

ahhhhh.........mmmmmmm

शैला अपनी बात ख़त्म करे उससे पहले hi भुविका ने अपना हाथ आगे किया और अगले hi पल शैला के शरीर को बिजली का एक तेज़ झटका लगा..

बिल्जी का झटके से शैला का शरीर सीधा हो अकड़ सा गया और तभी भुविका ने फिर अपना एक हाथ आगे किया...

भुविका के ऐसा करते hi शैला का शरीर तेज़ी से आगे बढ़ने लगा और अगले hi पल शैला की गर्दन एक बार फिरसे भुविका के उँगलियों की गिरफ्त में थी...

भुविका- मेरी बेहेन के बारे में कुछ भी गलत बोलने का सोचना भी नहीं ladki....teri तोह इतनी भी हैसियत नहीं की उसका या मेरा नाम तक ले सके.....

जहाँ भुविका अपना ज़हर उगल रही थी वहीँ शैला का दम घुटने लग गया tha...SHAILA को लगने लगा था की उसका आखरी समय आ गया है....

भुविका की अपार शक्ति को भी महसूस कर रही थी शैला ....

शैला के इस सोच को कहीं न कहीं भुविका ने भी पढ़ लिया....

भुविका- मई तुझे मारूंगी nahii......mout तोह तेरे लिए बोहोत छोटी सजा hogi...pal भर में hi तेरे सारे कष्टों से तुझे निजात मिल जाएगा....

और मई ऐसा होने नहीं dungi..tujhe तोह मई पल पल maarungi....jaanti है कैसे???

जिस ग्लूटो की तू रानी बनकर घूमती है naa,ab तू इसी ग्लूटो में एक गुलाम बनकर रहेगी...

जिस महल में तू शान से सर उठाकर घूमती है उसी महल के सारे फर्श सर झुकार dhoyegi...aaj और अभी से तू मेरी गुलाम है...

भुविका ने अपनी उँगलियों की पकड़ काफी काम कर दी थी ताकि शैला होश में रहे और उसकी बात सुन सके फिर भी उसकी पकड़ शैला के नज़रिये से सख्त hi थी...

भुविका की बात सुनकर शैला ने कहा....

शैला- ऐसा होने से पहले मई खुद अपनी जान दे dungi....SHAILA को मौत मंज़ूर hai,gulaami नहीं....

भुविका- और इसीलिए तुझे मौत नहीं मिल sakti..tujhe वही मिलेगा जिससे तुझे बोहोत ज़्यादा तकलीफ ho...aur वो है गुलामी...

जिस महल की तू रानी थी आज से तू उसी महल की नौकर है....

शैला- ऐसा कभी भी नहीं होगा....

छोड़ दे उससे.....

भुविका कुछ कहती उससे पहले hi ये आवाज़ पुरे सभा में गूंज उठी....

जहाँ भुविका ने सामने देखा तोह उसके चेहरे पर एक खतरनाक मुस्कान नाच उठी वहीँ शैला का लाल हुआ चेरा पीला पढ़ गया....

भुविका- क्या बात hai???RAANI से अपनी बात मनवाने के लिए मई तोह प्यादो का इस्तेमाल करने की सोच रही thi,par यहाँ तोह इस्तेमाल होने के लिए खुद सामने से चल कर राजा आ गया...

आओ AKSHAANT,aao........aaj तुम्हे देख तुम्हारी प्रियतमा से ज़्यादा ख़ुशी मुझे हो रही है.....

अक्षांत- मैंने कहा छोडो उससे....

ये बोल अक्षांत ने अपने दोनों हाथ को जोड़ आगे झटका diya..AKSHAANT के हाथों से एक करंट रे निकली और भुविका की तरफ लपक पड़ी पर इससे पहले की वो रे भुविका को छू भी पाती.....

अह्हह्ह्ह्ह........

ये आवाज़ अक्षांत के मुँह से निकली thi...wajah,uska छोड़ा गया रे भुविका के पास पहुंचकर मूड गया और डबल तेज़ी से अक्षांत को जाकर लगा....

अक्षांत ने ऐसा कुछ होने की उम्मीद नहीं की thi...ray के लगते hi उससे एक झटका लगा और वो निचे गिर गया पर अगले hi पल वो वापस खड़ा हो गया और अपने अगले वार के लिए अपने हाथ आगे कर दिए पर उससे पहले...

भुविका- मई तुम्हारे साथ ज़रूर खेलती पर मेरे पास वक़्त नहीं है...

सतभयाती गति......

स्टॉप मूवमेंट......

भुविका के ये स्पेल बोलते hi अक्षांत का शरीर हल्का हवा में उठ सीधा होकर अकड़ gaya....ab कुछ करना तोह दूर अक्षांत ना हिल पा रहा था और नाही कुछ बोल पा रहा था...

अपना काम ख़त्म कर भुविका ने शैला को नीचे उतरा और उसके चेहरा को अक्षांत की तरफ kiya....AKSHAANT की हालत देख कर शैला की आखें भीग गयीं....

भुविका- सुना है प्यार करने वाले अपने प्यार की जान बचने के लिए कुछ भी कर गुज़रते hain...unhe किसी भी बात की फ़िक्र नहीं होती....

इस बात को आज़माने का वक़्त आ गया hai...ab अगर तूने मेरी बात नहीं मानी तोह....

ये बोलकर भुविका ने अपने हाथ की उँगलियों को हल्का घुमाया और....

MMMMMMM....MMMMMMMM......

ये घुटी घुटी सी आवाज़ अक्षांत के गले से निकलने lagi.wo बोल तोह नहीं पा रहा था पर उसके आँखों ने बेइंतहां दर्द आराम से देखा जा सकता था...

शैला ने जब ये देखा तोह वो भाग कर अक्षांत की तरफ गयी पर इससे पहले की अक्षांत के पास pahunchti,AKSHAANt के चारो तरफ आग की लपटे उठ गयीं जिसने ना सिर्फ शैला का रास्ता रोका पर उन लपटों में से कुछ लपटों ने एक फाॅर्स का रूप लिया और शैला को धक्का देकर वापस भुविका के पैरों के पास गिरा दिया.....

भुविका- तू कभी भी उसके पास नहीं पहुँच paayegi.wo तेरे आखों के सामने रहेगा पर फिर भी तू उससे छू भी नहीं पाएगी...

आज से और अभी से इस महल में एक भी नौकर काम नहीं karega..yahan का सारा काम तू karegi....aur अगर तूने ऐसा नहीं किया तोह अक्षांत जान से जाएगा और उसके बाद तेरी पूरी प्रजा मारेगी.....

शैला ने कुछ नहीं कहा बस उसकी आँखों से आंसू निकलने लगे....

भुविका- DEVIL'S......haazir हो........

भुविका के आवाज़ देते hi उसके सामने सैकड़ों की संख्या में डेविल्स प्रकट होने लगे जो उसके सामने अपना सर झुकाये खड़े थे....

सारे सभा साद अब भी वहां मौजूद थे और बोहोत दर्फे हुए थे....

भुविका- इस गृह में आज से अँधेरे का राज hoga...is गृह के सारे हिस्सों के गृह द्वार बंद कर do...meri बेहेन के राज के वक़्त जैसा चलता tha,aaj से यहाँ पुनः वैसा hi चलेगा...

जहाँ डेविल्स ने अपना सर झुकाया और गायब हो गए वहीँ सारे सभासद भी हाँ में मुंडी हिलाते हुए बाहर की तरफ तेज़ी से निकल गए....

भुविका- naukraani,gulaam इतने महंगे वस्त्र नहीं पेहेनते....

भुविका ने अपना हाथ घुमाया और अगले hi पल शैला के शरीर के शाही वस्त्र गायब हो चुके थे और उनकी जगह एक फटा सा कपडा उसका पहना लिबास बन चूका था....

शैला अब भी हलके हलके आंसू बहा रही थी....

भुविका- इतनी देर हो गयी तेरे साथ इतना कुछ हो gaya...naa तोह तूने अपने भगवान् को याद किया और नाही उसके बेटे को...

भुविका की बात सुन शैला ने जलती हुई आँखों से उसकी तरफ देखा.

भुविका- वैसे इसका कोई लाभ होता nahi..kyunki तेरी मदद करने कोई नहीं आएगा...

भुविका की बात सुनकर इस बार शैलके चेहरे पर ग़ुस्से के साथ साथ एक स्माइल भी आ गयी थी....

शैला- याद उन्हें किया जाता है जिससे हम भूल चुके hon....jo हमारे राग राग में hain,unhe क्या याद करना....

आज बेशक तूने मुझे हरा दिया hai,par इस जीत को अपना सम्पूर्ण विजय समझने की गलती मत करना....

मुझे ये तोह नहीं पता की विक्रम अब तक क्यों नहीं आया पर इतना मालुम है की वो आएगा ज़रूर....

और जिस दिन ऐसा hoga,us दिन मई देखूंगी की तू कितनी ताकतवर hai...uski एक झलक तुझे तेरे अस्तित्व पर शक करने पर अगर मजबूर ना कर दे तोह मेरा नाम भी शैला नहीं...

MMMM........MMMMMMM......MMMMMM.....

शैला की बात सुनकर भुविका को क्रोध आया पर उससे पता था की शैला को अगर तकलीफ पहुचानी है तोह दर्द अक्षांत को देना होगा...

और इसीलिए भुविका ने अक्षांत को देख अपनी उँगलियाँ घुमाई जिससे अक्षांत के अकड़े शरीर में दरार सी पड़ने लगी और ऐसे में उससे बोहोत ज़्यादा दर्द फील होने लगा...

अक्षांत की हालत देख शैला की hasi,uska ग़ुस्सा सब गायब हो गए और वो फिर एक असहाये की तरह आंसू टपकाने लगी....

भुविका- ये बेबसी hi तेरी असली पहचान hai..isse मत भूला कर tu....filhal के लिए मुझे जाना होगा पर जब मई वापस आऊं तोह मुझे मेरा महल साफ़ सुथरा चाहिए वर्ण तेरे आशिक़ की मई हालत ख़राब कर दूंगी....

महल तोह पूरा साफ़ hi था और इससे पहले की शैला भुविका की बात का मतलब समझ paati,usse सब समझ आ गया...

तोह हुआ ये की अपनी बात कह भुविका ने...

कालूसां.....

डर्ट........

भुविका के स्पेल बोलते hi पुरे महल का फर्श गन्दा होकर काला पद गया.....

शैला को देख भुविका ने एक ज़हरीली मुस्कान दी और गायब हो गयी....

शैला ने अपनी नाम आखों को बंद किया और....

शैला- इतना कुछ हो गया और तुम नहीं aaye...kahan हो tum???jahan भी ho,jaldi आओ VIKRAMMMMMMMMMM...............

और मेरी आँख खुल gayi......matab फ्लैशबैक ख़त्म प्रेजेंट CHALU.....maine अपने आस पास dekha...fir वही 200 फ़ीट गहरा पानी जिसके सतह पर मई बैठा हुआ tha,chaaron तरफ मछलियां जो मेरे आँख खुलते hi भाग कड़ी हुईं.....

जो सन अभी चल रहा tha,wo मई पहले भी कई बार देख चूका हूँ पर आज मुझे शैला का दर्द अपने अंदर तक महसूस हो रहा था....

khair,mai अपना आसान छोड़ खड़ा हुआ और अपने पैरों को सतह पर जमा खुदको हल्का पुश किया और अगले hi पल मेरा शरीर पानी को चीरता हुआ बाहर निकल आया...

मई- साली इस झंड ज़िन्दगी की पनौती ख़त्म hi नहीं होती...

तभी मेरे अंदर से आवाज़ आयी....

साले ज़िन्दगी तोह मेरी झंड हो राखी hai..tere जैसा पनौती जो मुझे लग रखा है....

मई अपने आप में बुदबुदा hi रहा था की मेरे अंदर के च****** ने हुग्ना शुरू कर diya....ab इससे बहस करना मेरे बस की ना है इसीलिए मई चुप चाप गायब हो गया.....

प्लेस- दिल्ली

ये कस्टम वाले भी NAA..AISE चेक करते हैं जैसे हम आतंकवादी है...

और असली आतंकवादी आराम से घुस जाते HAIN.....CHALIJE JI,AB कहाँ CHALEN???KAHA है हमारा बीटा????

शाम के करीब 7 बज रहे थे जब जयराज की चार्टर्ड प्लेन दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड hui...par क्यूंकि जयराज एंड कंपनी खुदकी प्लेन में आये थे इसीलिए दोबारा उन्हें कस्टम्स से होकर गुज़ारना पड़ा जिस वजह से उन सब को चेक आउट कर बहार आने में थोड़ा एक्स्ट्रा टाइम लग गया.....

मीनू अपने बेटे से मिलने के liye,usse गले लगाने के liye,usse वापस घर लेजाने के लिए इतनी एक्ससिटेड थी की ये सब फॉर्मलिटीज करते करते उन्हें ग़ुस्सा आ रहा था जिस वजह से वो अपना फ़्रस्ट्रेशन निकल रही थी....

पर आखिर में अपना सवाल पूछ जब मीनू ने अपने हस्बैंड की तरफ देखा तोह जयराज को कन्फ्यूज्ड सा पाया.....

मीनू- क्या hua???kya सोच रहे हैं आप???

जयराज- यही सोच रहा हूँ की अब जाएँ kahan???hum यहाँ आ तोह गए हैं पर मुझे ये नहीं पता की हमारा बीटा रहता कहाँ हैं या वो मिलेगा कहाँ???

मीनू- kya????aapko पता नहीं की विक्की कहाँ रहता hai???par आपने तोह फ़ोन पर उसके बारे में पूरी बात की थी ना....!!!!

जयराज- फ़ोन पर सिर्फ ये पता चला था की हमारा बीटा यहाँ दिल्ली में hai..aur कुछ नहीं...

अपने बेटे से मिलने के एक्ससिटेमेंट में हम बिना उसके रेजिडेंस के बारे में जाने hi यहाँ आ गए...

मैंने अपने कुछ लोगों को विक्की की पिक्स सेंड की हैं और पता लगाने के लिए कहा है पर इतने शार्ट पीरियड में विक्की की एक्सएक्ट लोकेशन मिलना इम्पॉसिबल है...

मीनू- तोह अब????

मीनू ने ये बात बोहोत hi उदास लहजे में कही थी....

पर इससे पहले की जयराज कुछ कहते.....

रोनित- तोह अब ये की हम जाते हैं और V.J से मिलते हैं....

रोनित की बात सुनकर जयराज और मीनू सवाल और कन्फूसिओं भरी नज़रों से रोनित की तरफ देखने लगे...

रोनित- मुझे पता है की V.J कहाँ मिलेगा...

DONO-SACH!!!!!par तुझे कैसे पता????

रोनित- वैसे hi जैसे इस बात का पता था की V.J दिल्ली में hai....ab बाकी की बातें छोड़िये और जल्दी chaliye,mujhe अपने भाई से मिलना है....

जयराज के दिल्ली में भी ऑफिसेस और होटल्स थे जहाँ से उन्हें लेने के लिए कार आयी हुई थी....

RONIT,JAIRAJ और मीनू ख़ुशी ख़ुशी कार में बैठ गए...

RONIT-HOTEL किसीने UNLIMITED...yahi ले चल भाई....

रोनित के मुँह से इस जगह का नाम सुन जयराज और मीनू हैरान से हो गए...

मीनू- मेरा बीटा वहां क्या कर रहा hai...kya वहीँ रेहता है वो????

रोनित- कोई आईडिया नहीं है aunty..aur हमे इस होटल के रिसेप्शन पर नहीं बल्कि होटल के अंदर बने रेस्टुरेंट में जाना है...

रोनित की बात सुनकर मीनू और जयराज को फिर झटका लगा....

पर इससे पहले की वो कुछ कहते....

रोनित- मुझे भी कोई आईडिया नहीं hai..mujhe बस इतना पता है की अगर हमे V.J अभी कहीं मिल सकता है तोह वो इस होटल के इसी रेस्टुरेंट में hi मिल सकता है....

फिर किसीने कुछ नहीं कहा और उनकी कार अपने डेस्टिनेशन की तरफ चल पड़ी.....

प्लेस- होटल किसीने अनलिमिटेड

हेरे वे GO......THATS ुर एपीटिट फिलर....

चिकन SALAD,CASSEROLE,THE यौम फिश PIE,TAGINE & ात लास्ट माय पर्स. फव. LASAGNE....WILL तहत बे आल....????

रात के 8 बज रहे हैं जो की मेरे जॉब हॉर्स का वक़्त hai.ek मातुरे कपल जिनका आर्डर मई जस्ट लेकर आया tha,usse सर्वे करते हुए मैंने अपनी बात कही....

आदमी- no यंग lad...that विल बे all...but ी मस्ट say,u हैवे ा वैरी चार्मिंग personality...tumhe देख कर कोई नहीं कह सकता की तुम एक वेटर हो....

मई मन में- तुझे देखकर भी कोई नहीं बोल सकता की तेरे जेब में पैसे hain...saale सब च****** hi क्यों मिलते हैं mujhe...abbe खाना khaa,aur ठूसना है तोह bata,laa देता hun,nigal और निकल.....

अंदर एक आग जो उबाल सी मार रही थी पर वहीँ मेरा चेहरा जिसपे मई एक झूठी स्माइल लिए अपने सामने बैठे महानुभाव CH***e को देख रहा था....

मई- थैंक्स 4 थे कॉम्पिलमेंट सर.....

आदमी- यू क्नोव what??today इस योर लकी day...mai भी एक रेस्टुरेन्ट्स का चैन खोलने वाला हूँ....& ी हैवे ान ऑफर 4 यू....

यू ज्वाइन माय रेस्टुरेंट एंड तहत तू नॉट अस ा वेटर बूत अस थे मैनेजर ऑफ़ ओने ऑफ़ माय रेस्टुरेंट....

उस बन्दे ने अपनी बात ख़त्म की hi थी की उसकी वाइफ उससे बोली....

वाइफ- अरे बिना क्वालिफिकेशन या इंटरव्यू लिए इतनी बड़ी पोस्ट आप इससे कैसे दे सकते hain....????ek बार मिलकर ऐसे डिशन्स नहीं लिए जाते.....

मई मन me-ghante का बड़ा post...saali बोल तोह ऐसे रही है जैसे नासा में एस्ट्रोनोट के लिए सिलेक्शन की बात हो रही है....

आदमी- मुझे बन्दे की परख है माय स्वीट wife..tention मत lo,i क्नोव हे विल दो fine...kyun यंग boy,what दो यू say???ye तुम्हारे लिए एक लाइफ चेंजिंग ओप्पोर्तुनिटी hai..INTERESTED?????

नॉट इंटेरेस्टेड............

ये आवाज़ V.J की नहीं thi,ye उसके पीछे से आयी थी.... जहाँ वो हस्बैंड वाइफ ने पलट कर आवाज़ के दिशा में देखने लगे वहीँ मेरा दिल धक् कर गया....

जस्बातों के समंदर मेरे अंदर तूफान उठाने lage...pair हलके हलके कांपने lage.....palatne की हिम्मत नहीं हो रही थी पर पलटना तोह था hi और मई धीरे धीरे पलटा.....

और पलटने के बाद जो मैंने देखा उससे देख मेरे दिल की धड़कन एक सेकंड के लिए रूक सी गयी......

आज करीब 7 महीने बाद मई अपने माँ और डैड को देख रहा tha....par मेरी धड़कन के स्किप करने का रीज़न बस माँ डैड को देखना नहीं था बल्कि उनकी कंडीशन को देखने की वजह से था...

बोथ वेरे लुकिंग टेर्रिबली wiery.....dad की दाढ़ी निकल आयी thi,aakhen जिनमे इस वक़्त ग़ुस्सा और दर्द का मिला जुला एक्सप्रेशन tha,uski वो चमक जो हर वक़्त रहती thi,wo कहीं खो सा गयी थी....

और mom........unke बारे में क्या bataun????pura शरीर कमज़ोर पढ़ चूका tha...najaane वो कैसे अपने पैरों पर कड़ी thi....???chehra भी पूरा सूख चूका tha...aur इस वक़्त तोह उनकी हालत और खराब दिख रही थी....

आँखों में आंसू के समंदर लिए उनकी बॉडी शॉक से कांप रही thi..aisa hi शॉक डैड को भी लगा था और वो भी हलके हलके कांप रहे थे

SHOCK.....REASON...........apne बेटे को वाइट यूनिफार्म में एक वेटर के रूप में देखने का शॉक......

मेरे डैड के जिनके खुद के नजाने कितने होटल्स hain,unka बीटा एक होटल के रेस्टुरेंट में काम कर रहा है इस बात का शॉक.....

इंडिया के लीडिंग इंडस्ट्रियलिस्ट का बीटा पिछले 7 महीनो से गरीबी की ज़िन्दगी गुज़र रहा hai,is बात का शॉक......

जैसे hi मई palta,mere वेटर के गेटउप को देख कर डैड और माँ की आँखें शॉक और दर्द की अधिकता से पत्र सी गयी थी...

माँ तोह वैसी hi रही पर डैड जल्दी से होश में आ gaye....aur होश में आते hi उनके जबड़े भींच गए....

साला इतनी ताकत की पूरी दुनिया को एक झटके में ख़त्म कर सकता hun,par डैड को ग़ुस्से में देख मेरी अंदर तक से फैट गयी..... तभी तोह कहते हैं की........

बाप बाप होता है.....

डैड तेज़ी से आगे बढे और........

चटाख.............

मुझे कोई फर्क तोह नहीं पड़ा पर मेरा एक गाल लाल हो गया...

मेरे दिमाग में ग़ुस्से का एक तूफ़ान सा उठा पर एक अदृश्य चीज़ से टकराकर वो तूफान ख़त्म होने लगा....

जहाँ थप्पड़ पड़ने के बाद मई अपने hi मानसिक हालत को समझने की कोशिश में लगा हुआ tha....wahin ज़िन्दगी में पहली बार मुझपर हाथ उठाने के बाद डैड के आंसू जो उनकी आँखों में रुके हुए the,wo छलक पड़े.....

डैड- खुदको ऐसी हालत में दिखने से ाचा तोह तू पहले हमे मार देता तोह ठीक रहता...

डैड इससे आगे कुछ नहीं कह पाए और उनकी नज़र घूमकर उस आदमी पे ठैरी जिसने मुझे जॉब ऑफर की थी....

वो आदमी भी डैड को आँखें फाड़े देख रहा tha...same हालत उसकी बीवी की भी थी....

अब ऐसा कौन सा बिजनेसमैन होगा जो जयराज सिंह को नहीं जानता ho....aur जयराज सिंह को अपनी आँखों के सामने देखना वो भी इस तरह से किसी के लिए भी शॉकिंग था....

शॉक सिर्फ उस आदमी को नहीं लगा tha...restuarant में आये सभी कस्टमर्स जिनकी संख्या ज़्यादा नहीं thi,wo भी काफी शॉकेड होकर जो हो रहा था वो देख रहे थे...

डैड- आप मेरे बेटे को जॉब देंगे????

ये जानकार की मई जयराज सिंह का बीटा hun,us आदमी की जितनी बची thi,wo हवा भी निकल गयी....

आदमी- सर वो.......

पर इससे आगे वो कुछ कह नहीं paaya.dad ने अपना हाथ आगे कर उससे बोलने से रोक दिया....

कुछ देर तक उस बन्दे को घूरने के बाद डैड मेरी तरफ वापस मुड़े hi थे की....

आंटी..............

इस आवाज़ से जहाँ डैड तुरंत पालते वहीँ मेरे दिमाग की नसे फटने lagi..REASON,MOM फैंट होकर नीचे गिरने hi वाली थी की रोनित जो की माँ से थोड़ा पीछे खड़ा tha,usne ये होते हुए देख लिया और तेज़ी से आगे आया..

इससे पहले की माँ नीचे girti,RONIT ने उन्हें थाम liya....RONIT ने माँ को गिरने से बचा तोह लिया था पर माँ बेहोश हो चुकी थी.

माँ बोहोत ज़्यादा वीकनेस के बावजूद यहाँ तक मेरी खातिर आयी थी पर कमज़ोरी उनपर हावी होती जा रही थी और जब उन्होंने मुझे वेटर के कपड़ो में देखा तोह उन्हें मेंटली एक तेज़ झटका लगा...

कुछ देर तक तोह वो शॉक की वजह से स्तभ्द सी कड़ी रही पर जैसे hi वो वापस रियलिटी में aayi,behosh हो गयीं....

RONIT.....resturant में कदम रखते hi सबसे पहले मुझपर नज़र रोनित की hi गयी थी...

और उससे मुझे ऐसे देखकर जो तकलीफ हुई thi,wo अगर माँ डैड से ज़्यादा नहीं थी तोह काम भी नहीं थी....

जहाँ माँ डैड मेरे पास आ गए थे वहां वो जड़ सा होकर दूर खड़ा रह गया था पर जब डैड ने मुझे थप्पड़ मारा तब वो वापस होश में आया था...

वो मेरे पास आने hi वाला था पर इससे पहले hi माँ गिरने लगी जिससे उसने ना सिर्फ देख लिया बल्कि माँ को फर्श पर गिरने से पहले बचा भी लिया.....

इस वक़्त रोनित माँ के सर को अपनी गोद में रखकर रो रहा था .डैड ने डॉक्टर को कॉल करने के लिए अपना मोबाइल निकला hi था की....

मेरे हाथों से एक अदृश्य रे निकली और माँ के सर में समां gayi....aisa होते hi माँ के शरीर को एक झटका लगा और उनकी आँखें खुल गयी....

उनकी बेहोशी hi nahi,unke शरीर की साड़ी कमज़ोरी भी ख़त्म हो चुकी thi...jahan माँ को होश में आते देख डैड ने कॉल काट दिया वहीँ रोनित मेरी तरफ देखने लगा....

उससे पता चल चूका था की ये मैंने किया है....

उठते hi माँ की नज़र मुझपर gayi....mom झट से उठकर कड़ी हो gayin..yun स्पीड से माँ को उठते देख डैड शॉकेड हो गए...

MOM-apni माँ के गले नहीं लगेगा....

7 महीनो के बाद आज माँ की आवाज़ सुन रहा tha..dilon की गहरायी को एक सुकून सा मिल गया था...

मई धीरे धीरे आगे badha..kuch था जो मुझे रोक रहा था और कुछ था जो उससे रोक रहा था जो मुझे रोक रहा था....

मई माँ के ठीक सामने खड़ा हो gaya...is वक़्त मेरा चेहरा भाव शुन्य tha....mai बस एक तक अपनी कॉम को देखे जा रहा था...

मुझे समझ hi नहीं आ रहा था की मई क्या karun???unke गले लग jaaun,unke पैरों में गिर jaaun,ya फिर एक बार फिरसे गायब हो जाऊं...

मेरे अंदर का छुपा शैतान मुझे गायब होने के लिए कह रहा था पर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे उस शैतान पर एक लगाम hai...mai उसकी बात मानने से मन कर सकता हूँ और.......

मई मन में- NAHI....MAI कहीं नहीं जाऊंगा......

मेरे ऐसा बोलते hi मेरे अंदर हो रही हलचल जैसे शांत सी हो गयी....

मई- माँ.......

मेरे इतना कहने की देर thi....mom झट से मेरे गले लग गयी और तेज़ रोने lagi...waise तोह मेरे घर छोड़ने के बाद से hi माँ काफी रोयीं थी पर आज उनके रोने में एक सुकून था...

कुछ देर बाद उनकी रुलाई सिसकने में बदल गयी और जब उनके अंदर का गुबार निकल गया तोह....

माँ- ये कपडे nikal.....mai तुझे एक सेकंड के लिए भी इन कपड़ों में नहीं देख सकती....

मई- माँ मई....

माँ- क्या mom???maine कहा naa...nikal मतलब निकल.....

अभी मई कुछ कहता उससे पहले hi....

डैड- अरे अपने होटल के रेस्टुअरंत का ड्रेस कोड hi तोह पहना hai..isme क्या गलत hai..pehenane दो....

डैड जो की मेरे और माँ के गले मिलने के बाद hi हमसे थोड़ा दूर होकर किसी से फ़ोन में बात करने लग गए the,mom की बात सुन हमारे पास आये और अपनी बात कही...

पर उनकी बात का मतलब हममे से किसी को समझ नहीं आया और इससे पहले की कोई उनसे कुछ पूछता....

डैड- आइये सर....

रेस्टुरेंट के एंट्रेंस से एक आदमी आ रहा था जिससे देखकर डैड ने ये कहा...

माँ और रोनित के लिए तोह वो बाँदा नया था पर मेरे लिए nahi...wo आदमी और कोई नहीं इस होटल का मालिक था....

ओनर- ये लीजिये सर.....

उस ओनर ने कुछ कागज़ात डैड की तरफ बढ़ा दिए....

डैड- पेमेंट हो चूका है....

ओनर- haan,mai चेक कर चूका hun..aaj से ये होटल और ये रेस्टुरेंट आपका....

डैड- मेरा नहीं मेरे बेटे का...

ये बोल डैड ने वो पेपर्स मेरी तरफ बढ़ा दिए जिससे मैंने होल्ड कर लिया...

क्ष ओनर- कॉंग्रट्स सोन....

ये बोल ओनर निकल gaya.....saare कस्टमर्स तोह पहले hi जा चुके थे और आज के लिए रेस्टुरेंट को क्लोज भी कर दिया गया tha...is वक़्त रेस्टुरेंट में हमारे अलावा और कोई नहीं था....

माँ और रोनित पहले तोह थोड़ा सुरप्रीसेड हुए पर फिर खुश हो गए....

डैड- अब तोह कोई शिकवा नहीं है naa..ye होटल तोह इसीका hai..aur अपने hi होटल में काम करने में कैसी शर्म....

माँ डैड के गले लग gayi....aaj मेरे घर छोड़ने के बाद फर्स्ट टाइम दोनों ने वही पुराने ढंग से एक दूसरे को हुग किया था...

एक मुक्कम्मल जोड़े की तरह.......

इन सब के बीच रोनित के तक मेरी तरफ देख रहा tha..dekh तोह मई भी उसकी तरफ देख रहा था पर मैंने उससे ये ज़ाहिर नहीं होने दिया...

पर इस बात को डैड ने नोटिस कर लिया और उन्होंने धीरे से माँ के कान में कुछ कहा....

माँ- तुम दोनों के बीच उस दिन क्या हुआ था ये हम नहीं जानते और जानना भी नहीं chaahte...hum दोनों बाहर जा रहे हैं...

तुम दोनों अपने डिफरेंसेस ख़त्म करो और जब भी तुम दोनों बाहर आओ तोह मुझे पहले की तरह अपने दोनों बेटे एक साथ चाहिए....

ये बोल माँ और डैड बाहर निकल गए और रह गए सिर्फ मई और रोनित.....

जहाँ मुझे अपनी तरफ ना देखता देख रोनित को लग रहा था की मई अब भी उससे नाराज़ हूँ वहीँ मुझे एक बेचैनी सी हो रही थी....

मई रोनित की taklif,uski तड़प महसूस कर पा रहा tha...mai उससे बात करना चाह रहा था पर मेरे अंदर मौजूद शैतान मुझे ऐसा करने से रोक रहा था....

मैंने एक बार रोनित की तरफ देखा और उसकी साइड से होता हुआ आगे निकलने लगा पर तभी......

रोनित.........

बिना देखे मई

चल सकता हूँ

अगर तू साथ है....

गिर भी गया तोह

संभल सकता हूँ

अगर तू साथ है....

एक तेरी ज़िन्दगी से

कितनी hi ज़िंदगियाँ

बसी है

सब खुश हैं

जो तेरे चेहरे पर

हसी है

मेरे कलेजे में भी

ठंडक पद जायेगी

अगर तू साथ है....

ये ज़िन्दगी मौत से भी

लड़ जायेगी

अगर तू साथ है....

मेरे ख्यालों में

यादों के पहरे हैं

ज़ख्म भर hi नहीं रहे,

चोट hi इतने गहरे हैं

मुझे हारने वालो को

मई भी हरा दूंगा,

अगर तू साथ है....

मेरे दुश्मनो को उनकी

औकाद दिखा दूंगा,

अगर तू साथ है....

बोहोत तकलीफ में हूँ यार

अब और बर्दाश्त नहीं होता

आँखें hi पढ़ ले dost,zuban

से और दरख्वास्त नहीं होता

और कुछ नहीं तोह कमसेकम

अपने गम hi बाँट लूंगा

अगर तू साथ है....

दर्द में hi sahi,jaise भी हो

ये ज़िन्दगी काट लूंगा

अगर तू साथ है....

मई- मई साथ HUN......CHAL.........

मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाया पर रोनित ने मेरा हाथ हटा आगे बढ़ा और कसके मेरे गले लग गया....

मई मन me-GHANTE की काली शक्तियों.... बिना वज़न की दोस्ती भी भारी पद गयी.......

आज के लिए इतना HI.........

आपका अपना V...J........
 
94 उपदटेस में हम कहानी के आखरी chapter तक पहुँच चुके hain.pichle 4 उपदटेस में 7 महीने आगे आ चुके hain..ghar छोड़ कर v.j अब वापस जा रहा hai...aur कितना aage...is कहानी का कोई अपडेट बिना वजह नहीं hai..bas अनीलीज़े करने की ज़रुरत hai...par अफ़सोस ऐसा बोहोत काम होता hai..khair,sage के उपदटेस में आप सब समझ जाएंगे...
 
अब तक आपने पढ़ा की किस तरह शैला और अक्षांत अपने HI महल में कैद हो जाते हैं वहीँ विक्रम अपने माँ डैड और रोनित के साथ वापस जाने के लिए रेडी हो जाता है....

फाइनल CHAPTER

(एंगेल्स सैक्रिफाइस & डेविल्स डेमोलिशन)

अपडेट-95

प्लेनेट- एअर्थ

PLACE-MINAKSHI मेन्शन

माँ DAD........YE क्या तरीका HAI....AAP दोनों एक साथ दो दो बातें भूल गए....

मेरी बात सुनकर माँ और डैड जो की अभी भी आधे नींद में hi the,wo अपनी आधी खुली आँखों से एक दूसरे की तरफ देखने lage...ab जब एक दूसरे से कोई जवाब नहीं मिला तोह....

डैड- क्या tarika???aur कौन सी दो बात?

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


मई- पहली बात की अब मई कोई छोटा बच्चा नहीं रहा और दूसरी ये की अब आप दोनों मेरे बचपन के टाइम जैसे जवान नहीं रहे...

आप दोनों ने पूरी रात यूँ आधे बैठे आधे लेते पोजीशन में गुज़र di...aise में तोह आपकी बॉडी अकड़ जायेगी....

माँ- ऐसा कुछ nahi.......ahhhh......

माँ के मुँह से एक कराह निकल gayi..wajah...jaise hi वो उठने को हुईं तोह उनकी कमर जो रात भर वीयर्ड पोजीशन में रहने की वजह से अकड़ गयी thi,usme पैन हुआ....

मैंने माँ को सहारा देकर उठाया और जब डैड की तरफ देखा तोह मुझे हसी आ गयी पर मई हँसा नहीं....

डैड भी अपने कमर को अपने हाथों से प्रेस कर रहे थे पर मुझे खुदकी तरफ देखता देख उन्होंने अपने हाथ हटा लिए....

मई- dad,dard है तोह hai..chupaane से क्या faayda...aap दोनों आराम से यहीं सो jaayiye..mai चला गयम....

दादा और माँ कुछ कहना चाहते थे पर मैंने दोनों को बोलने नहीं diya...maine माँ को अपने बीएड पर सुला diya..dad तोह आलरेडी बीएड पर hi थे वो भी माँ के साइड में ठीक से लेट गए...

मैंने दोनों को वार्निंग दिया की आज वो दोनों सिर्फ रेस्ट karenge....mom के लिए no किचन और डैड के लिए no office....ye बोल मई रूम से निकल गया और चल पड़ा गयम की तरफ....

चलिए जब तक मई गयम में पहुँचता hun,aap सबको बता देता हूँ की कल मेरे और रोनित के होटल से जो की अब हमारा hi था, निकलने के बाद क्या क्या हुआ???

ा स्माल फ्लैशबैक फ्रॉम यस्टरडे टिल नाउ....

मुझे और रोनित को साथ साथ बाहर आते देख माँ डैड खुश हो gaye..jahan माँ ने बारी बारी से मेरा और रोनित का माथा चूमा वहीँ डैड ने हम दोनों को हुग किया....

एक घंटे की ड्राइव के बाद हम एयरपोर्ट में the....is दौरान माँ डैड ने मुझसे मेरे पिछले 7 महीनो की एक्टिविटी के बारे में सब कुछ पूछा..

उन्हें ये तोह पता चल गया था की मई कहाँ जॉब करता tha,wo ये जानना चाहते थे की मई रहता कहाँ tha...travel कैसे करता था वगैरह वगैरह...

मैंने उन्हें बस इतना कहा की मुझे एक क्वार्टर सस्ते में मिल गया था और मई पैदल या ऑटो से ट्रेवल करता था...

मेरी बात सुनकर माँ डैड एक बार फिरसे साद हो गए पर मुझसे दोबारा मिलने और अपने साथ वापस ले जाने की ख़ुशी के सामने उनकी उदासी ज़्यादा देर तक टिक नहीं पायी....

माँ डैड को तोह मैंने झूठ बोलकर तर्क दिया था पर रोनित को ये पता था की मई झूठ बोल रहा हूँ....

वो जानता था की ना मुझे रहने के लिए जगह चाहिए और नाही मुझे ट्रैवेलिंग करने के लिए किसी चीज़ की ज़रुरत है...

उससे ये भी अंदाज़ा हो गया था ये जो जॉब मई कर रहा था वो मेरा एक कवर hi था...

कवर जिससे मई सबके नज़र में नार्मल दिख सकता tha....par दो सवाल ऐसे थे जो रोनित के ज़हन में लगातार चल रहे थे....

पहला तोह यही की अवंतिका ने उससे थैंक्स क्यों कहा और वजह पूछने पर ये शर्त क्यों राखी की अगर वो V.J को साथ लाने में कामियाब रहे तब वो उसके कहे थैंक्स का रीज़न बताएगी...

और दूसरा sawal....!!!!wo आप कुछ देर बाद रोनित की ज़ुबानी hi सुन लीजियेगा.....

khair,airport पहुँच अपनी प्लेन में बैठ हम सब वापस मुंबई आ gaye..ghar पहुँचते पहुँचते हमे रात के 1 बज गए थे पर.....

जैसे hi हम चारों हॉल में ghuse,hamari तीनो फॅमिली हमे वहां हमारे इंतज़ार में बैठी मिली....

NAANU,NAANI,meri गुड़िया AASHI,MAMA ,MAAMI,sabhi वहां मौजूद थे....

मेरा दिल इतने दिनों बाद डबको देख कर बोहोत खुश था पर दिमाग को काबू पाने की कोशिश में इमोशंस पर भी काबू पाना होता hai,is वजह से मई नार्मल hi रहा...

मिला मई सबसे बूत normally....mujhe ऐसे देख सबको थोड़ा दुःख तोह हुआ पर माँ डैड की hi तरह मेरे वापस आने की ख़ुशी उस दुःख से कहीं ऊपर थी...

जब सविता आंटी मेरे पास आयीं तोह मई थोड़ा नर्वस हुआ tha..REASON....last टाइम जो मैंने उनके बेटे के साथ किया था और उसके बाद जो हरकत की थी वो आज भी मेरे ज़हन में ताज़ा थी...

एक तोह वैसे hi मेरा दिमाग थोड़ा आउट ऑफ़ कण्ट्रोल था उसपर आंटी का मेरे सामने aana,mujhe समझ में hi नहीं आ रहा था की मई कैसे रियेक्ट करूँ पर......

इसकी ज़रुरत hi नहीं padi....mere पास आकर सविता आंटी ने मेरा माथा चूमा और मुझे गले लगा liya...mai उनका pyar,mujhe गले लगते hi उनके निकलने वाले आंसुओं को महसूस कर सकता था....

मैंने कुछ कहा तोह नहीं पर वो उन दो लोगों में से एक थी जिन्हे देखकर मई मुस्कुराया tha....aur मुझे मुस्कुराता देख मेरे सारे घरवाले बोहोत खुश हुए थे....

जैसा की मैंने बताया की सविता आंटी उन दो लोगों में से एक थी जिन्हे देख मई मुस्कुराया था....

उनके अलावा नेहा आंटी (ANJALI'S माँ) जब मेरे पास आयीं तोह मैंने सामने से उन्हें गले लगा लिया tha....unke दर्द सा दर्द और किसीको ना था...

कहीं ना कहीं उनकी हालत का ज़िम्मेदार मई भी tha....itna तेज़ दिमाग होकर भी मई ास्मोडियस से एक बाज़ी हार गया था....

हारा मई और सजा मेरी दोस्त को mili..mere पुरे परिवार को mili.....khair,NEHA आंटी और हरप्रीत अंकल से मिलने के बाद मई अपने रूम में चला गया.....

जहाँ सभी घरवाले मुझे नोर्मल्ली देख रहे the,wahin R0NIT मात्रा hi ऐसा था जो मेरे सारे हाव भाव को ध्यान से नोट कर रहा था...

सबसे मिलते वक़्त रोनित मेरे चेहरे को गौर से देख रहा tha....usse अंदाज़ा हो रहा था की मई खुदको कण्ट्रोल कर रहा हूँ....

पर kyun,ye वो समझ नहीं पा रहा था पर एक नतीजे पर वो कन्फर्म हो गया था और वो ये की मेरे साथ कुछ बोहोत बुरा हुआ है...

कुछ ऐसा जो उसने कभी सोचा नहीं tha....aur उससे ये भी पता था की मुझसे वो कुछ पता नहीं कर पायेगा पर उसके ज़हन में एक चेहरा घूम रहा था जो उससे साड़ी सचाई बता सकता tha...AVANTIKA........

यहाँ मई अपने रूम्स में तंगी मेरी रोनित और अंजलि की फोटोज देख hi रहा था की माँ और डैड मेरे पासाये...

दोनों ने ज़िद्द की की आज वो मेरे साथ soyenge....maine मन किया पर वो दोनों नहीं maane....aakhir में हार मान मई बीएड पर लेट गया....

जहाँ डैड मेरे राइट साइड बीएड पर सिरहाने में बैठ मेरा सर सहलाने लगे वहीँ माँ मेरे पेअर के पास बैठ कर मेरे पेअर दबाने लगीं....

मैंने दोनों को ये सब ना करने देने लिए उठना चाहा पर पहले तोह डैड ने मेरे सर पर हाथ रख मुझे उठने नहीं दिया पर फिर भी मई जब ना माना तोह माँ ने अपनी कसम दे दी...

मैंने एक लम्बी सांस छोड़ी और चुपचाप लेट gaya...pichle 7 महीनो से मई रात को सोया नहीं tha..har रात मई एक जगह जाकर ध्यान में बैठता था पर आज ऐसा पॉसीबल नहीं था....

दूसरी तरफ माँ डैड का यूँ केयर मेरे दिमाग के अंदर खलबली सा मचने लगा और खुदको कण्ट्रोल में रखने के लिए मई लेते लेते hi ध्यान अवस्था में चला गया....

हर दिन की तरह सुबह के 4 बजे मेरा ध्यान टूट gaya..par जब मैंने अपने लेफ्ट राइट देखा तोह फिर एक जस्बातों का समंदर मेरे अंदर उठा पर मैंने खुदको कण्ट्रोल कर लिया...

एक साइड डैड मेरे सर पर हाथ रखे रखे बैठे बैठे hi सो गए थे वहीँ दूसरी तरफ माँ तोह बीएड पर थी hi नहीं...

वो बीएड के नीचे बैठ मेरे पैरों को दबाते दबाते मेरे पैरों के ऊपर hi सो गयी थी....

मैंने उन दोनों को उठाने का सोचा पर फिर मई रूक gaya..agar अभी मई दोनों को उठता तोह फिर मई जहाँ जाने वाला था वहां जा नहीं पाटा....

इसीलिए मई उसी पोजीशन से लेते लेते गायब हो gaya.....jis काम से गया था वो किया और फिर वापस जैसे लेता हुआ था उसी पोजीशन में आकर लेट गया....

मैंने माँ डैड दोनों को हल्का हल्का hilaya,wo दोनों जिस पोजीशन में सोये the,usme उनकी नींद वैसे hi कच्ची thi,mere हिलने से दोनों की नींद टूट गयी और उसके बाद का कन्वर्सेशन मई बता चूका हूँ....

फ्लैशबैक एंड्स:-

तुझे कबसे इन सबकी ज़रुरत पड़ने लगी.......

मई- लीडरों की बस्ती में कोई तोह फिट होना चाहिए ना....

मुझे गयम में आये एक घंटा हो गया tha...mai वेट लिफ्टिंग कर hi रहा था की इतने में मेरे पीछे से ये आवाज़ aayi...ye और कोई नहीं रोनित था.....

रोनित- saale,ledra होगा तू?

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


....तभी तोह अपनी हड्डियां मज़बूत करने के लिए तुझे गिम्मिन्ग की ज़रुरत पद रही है....

मई- बीटा जो गयम हम करते हैं वो सिर्फ हम hi कर सकते hain....thik वैसे hi जैसे तेरी बकवास सिर्फ तू hi कर सकता है....

रोनित- घंटे का तुम hi कर सकते ho..jo तू कर रहा है वो तोह हर कोई करता है....

मई- पानी में लाठ और हवा में बात सोच समझ कर करना चाहिए baalak....ek काम kar,isse सिर्फ एक बार उठा के दिखा....

मैंने अपने वेट लिफ्टर जिससे मई बेंच प्रेस मार राग tha,uski तरफ इशारा कर रोनित से कहा....

मेरे ऐसा कहने का रीज़न जानने के लिए रोनित भी क्यूरियस tha.usse अचे से पता था की मई कोई बात बेवजह नहीं कहता...

अपने हाथ को झटकते हुए रोनित वेट लिफ्टर के पास आया और बेंच पर लेट gaya....agle hi पल........

mmmmmm....mmmmmmm.....mmmmmmm...

पहले थोड़ा फिर थोड़ा ज़्यादा और फिर रोनित ने अपनी पूरी ताकत लगा दी पर फिर भी वो वेट लिफ्टर को उठा नहीं पाया....

एक मिनट तक अपनी पूरी जान लगाने के बाद रोनित थक हार कर सीधा खड़ा हो गया...

कमर पर haath,chehre पर थकान और आँखों में अविश्वास लिए वो मेरी तरफ देख रहा था....

मई- अपनी सदी हुई शकल को और कितना ख़राब karega.....nikal यहाँ se,mujhe गयम करना है....

पर रोनित गया nahi,wahin खड़ा रहा और....

रोनित- पहले ये बता की इससे मई लिफ्ट क्यों नहीं कर paaya...weight तोह बस 200 कग hi दिखा रहा hai...itna तोह मई अपनी एक ऊँगली से उठा सकता हूँ फिर अपनी पूरी ताकत लगाकर भी मई इससे कैसे नहीं उठा पाया....

मई- ohho...scientist को थ्योरी जानना है ताकि कोई नया इन्वेंशन कर sake....abbe,jab मैंने कहा की तेरे बस की ना है तोह चुप चाप मान लेना चाहिए ना...

पर nahi,hum तोह अपनी डेढ़ होशियारी दिखा के rahenge...kyunki कुछ सीखे ना सीखे पर अपनी बैल बुद्धि दिखाना तोह हमने पैदा होते साथ सिख लिया tha..kyun?

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


वैसे तोह मेरी बात सुनकर रोनित को ग़ुस्सा होना चाहिए tha,par हुआ ulta..maine जिस तरीके से अपनी शकल बना बना कर बातें कही थी उससे सुनकर रोनित की हसी छूट गयी और उससे हस्ता देख मई और चिढ गया....

मई- hihihihihi....hihihihihi.....daant निपोरना हो गया हो तोह निकल अब.....

रोनित- पहले ये बता की मई इससे उठा क्यों नहीं पाया वर्ण मई नहीं जाने वाला...

मैंने पहले कुछ देर रोनित को घर कर देखता रहा पर साले पर मेरे घूरने का कोई असर नहीं पड़ा इसीलिए......

मई- यूनिवर्स में जितने भी हैवी मेटल्स hain,maine उन सब के वज़न को एक इनविजिबल एनर्जी में बदल कर इस वेट लिफ्टर में दाल दिया hai....abhi इसका वज़न किसी प्लेनेट के वज़न से भी ज़्यादा है.....

ये बोलकर मैंने एक झटके में उस वेट लिफ्टर को उठा लिया....

मई तोह वापस वेट लिफ्ट करने में लग गया पर मेरी बात सुनकर रोनित का मुँह खुल्ला का खुल्ला रह गया.....

रोनित- अगर इसका वेट ीनता ज़्यादा है तोह फ्लोर पर कोई असर क्यों नहीं हो रहा hai..itne वज़न के साथ तोह यहाँ की पूरी ज़मीन यहाँ तक की जहाँ तक इसका इम्पैक्ट hoga,wahan तक की ज़मीन धस जानी चाहिए....

मई- इसके अंदर जो वेट एनर्जी मैंने डाली hai,wo तभी असर में आती है जब इससे उठाया जाता hai.zameen पर आते hi इसका वेट नार्मल हो जाता है....

रोनित- WOWW.....AMAZING भाई.....

मई- काश मई भी तेरे बारे में ऐसा कुछ कभी कह paata....hamesha बैल बुद्धि का बैल बुद्धि hi रहेगा....

रोनित इस बार भी मेरी बात पर है दिया और हस्ते हस्ते बाहर निकल गया......

जहाँ मई वापस गयम करने में लग गया वहीँ रोनित बाइक लेकर कहीं निकल गया....

प्लेस- आहूजा मेन्शन

गुड मॉर्निंग माँ......

गुड मॉर्निंग BETA.....kya बात hai,aaj कल तू बोहोत जल्दी उठ जाती hai.....!!!!!tune जॉगिंग भी स्टार्ट करदी है.....

सुबह का वक़्त hai.....subha जल्दी उठ अवंतिका कुछ देर तक रूम में रही जैसे वो हर रोज़ रहती hai,uske बाद

घर से बाहर आ जॉगिंग पर निकल गयी और जस्ट लौटी थी......

अवंतिका हॉल में पहुंची hi थी की उसकी माँ की नज़र उसपर पढ़ गयी......

अवंतिका- तोह ये तोह अछि बात है ना माँ.....

A/MOM- बोहोत अछि बात है beta..mai तोह इसीलिए पूछ रही हूँ क्यूंकि पहले तू ऐसी नहीं थी फिर अचानक यूँ चेंज!!!!!

अवंतिका- ओफ्फो mom...pehle मई हेल्थ कौन्सियस नहीं thi...ab hun,simple.....

थोड़ा सा हेल्थ कौन्सियस अपनी बेहेन को भी बना दे.....

ये आवाज़ शनाया की माँ का था जो अवंतिका की तरफ आ रही थी......

अवंतिका- शनाया को क्या hua???achi खासी फिट तोह है....

S/MOM- कहाँ से फिट है....

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


?एक तोह लेट उठती hai,uspar घर का खाना तोह जैसे मैडम को पसंद hi नहीं hai..baahar का hi खाती hai..aise में तोह उसकी तबियत बिगड़ जायेगी....

अवंतिका- कुछ नहीं होगा usse...wo बाहर का ज़रूर खाती है पर ुनिगिनिक नहीं khaati....acha mom,mai थोड़ा बाहर टहल रही हूँ....

A/MOM- अरे अब कहाँ चली....

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


?अभी तोह जॉगिंग करके आयी है....

अवंतिका- वो एक्चुअली माँ टारगेट कैलोरीज बुरण करने के लिए थोड़ा और चलना padega...mai आती हूँ...

ये बोल बिना किसीकी कोई बात सुने अवंतिका फटाफट घर से बाहर निकल gayi...abhi अवंतिका ने अपने घर के गेट से कदम बाहर निकले hi थे की.......

HI अवनि........

अवंतिका का फेस इस आवाज़ की तरफ hi था जो की और किसीका नहीं रोनित की tha....RONIT को अपने सामने देख अवंतिका के चेहरे पर स्माइल आ गयी....

अवंतिका- सो मिशन accomplished,right!!!tum V.J को वापस ले hi आये.....

रोनित- तुम्हे कैसे पता???

अवंतिका- V.J जितना तोह nahi,par जानती तोह मई भी तुम्हे अचे से hi hun....V.J अगर नहीं आया होता तोह तुम यहाँ मेरे पास वो भी सुबह सुबह नहीं आये होते.....

रोनित- मतलब!!!!

अवंतिका- मेरे थैंक यू कहने का रीज़न जानने आये हो ना...

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


?!!!!!

रोनित- haan...par साथ में मई कुछ और भी जसिके बारे में मुझे जानना है.....

अवंतिका- hmm....thik hai...waise तुमसे ज़्यादा इस पल का मैंने इंतज़ार किया है...

रोनित - waqt!!!!kaisa वक़्त?

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


अवंतिका- तुम्हे सच बताने का और......

रोनित- और!!!!

अवंतिका- तुम्हे मेरा एक काम करना hai..actually मेरा नहीं जो काम तुम्हे करना है वो V.J का है और वो काम बोहोत ज़रूरी है.....

रोनित- मई कुछ समझा नहीं.....

अवंतिका- सब समझ jaaoge.....chalo,walk पर चलते हैं.....

रोनित ने अपनी बाइक वहीँ साइड में स्टैंड कर दी और फिर वो और अवंतिका पैदल hi आगे बढ़ने लगे.....

कुछ देर तक दोनों के बीच ख़ामोशी rahi..jahan अवंतिका ये सोच रही थी की क्या उससे रोनित को सब कुछ बताना चाहिए क्यूंकि वो जानती थी की V.J के साथ जो हुआ वो सुनकर रोनित को बोहोत ज़्यादा तकलीफ होगी...

वहीँ रोनित के दिमाग में V.J के गायब होने के बाद के सभी लम्हे एक के बाद घूमने लगे the...wo जानना चाहता था की लार्ड ऑफ़ एंगेल्स होने के बावजूद V.J के साथ ऐसा क्या हुआ जो वो उनकी मदद के लिए नहीं आ पाया.....

रोनित ने अवंतिका की तरफ देखा तोह उससे गहरी सोच में डूबा पाया....

रोनित- AVNI,mujhe सब कुछ जानना hai,sab कुछ....

अवंतिका कुछ देर तक रोनित को देखती रही फिर....

अवंतिका- इससे तुम्हे तकलीफ हो सकती hai..bohot तकलीफ.....

रोनित- जो तकलीफ मई महसूस कर चूका hun,usse ज़्यादा तोह नहीं होगी ना....

अवंतिका ने एक गहरी सांस ली और रोनित को सब कुछ शुरू से बताना शुरू किया....

कैसे वो विक्रम और अलेसेन्द्र फाउंटेन ऑफ़ लाइट के सामने gaye..wahan कैसे पहली बार विक्रम का सामना उसके भाई ास्मोडियस और भतीजे बिल्जेबब से हुआ....

किस तरह V.J ज़ख़्मी हो मौत के कगार तक पहुँच गया tha..kaise सिटिवशं को और मुश्किल बनाने के लिए ास्मोडियस ने अवंतिका के शरीर में ज़हर छोड़ा...

किस तरह V.J की जान bachi..bhavishyavani का milna,uske बाद उन दोनों का क्यूरियस pahunchna....COURIOUS का श्राप और कैसे V.J ने क्यूरियस वासियों को श्राप मुक्त किया...

ास्मोडियस का plan....kaise परिवर्तक का िस्मतेमाल कर ास्मोडियस ने क्यूरियस के समय चक्र को पुरे ब्रम्हांड से तेज़ कर दिया..

अवंतिका ने रोनित को बताया की कैसे ास्मोडियस ने कौरीन फल के अंदर अपना खून मिलाया और जैसे hi विक्रम ने उस फल का सेवन kiya,uski पहचान उससे अलग हो गयी.......

विक्रम की हालत और उस हालत के सच को जानकार रोनित एक जगह बैठ gaya....jaise अवंतिका ने कहा tha,usse बोहोत तकलीफ होने लगी....

विक्रम ने इतना कुछ सहा वो भी अकेले ये सोचकर hi उसका दर्द बढ़ता जा रहा था...

अवंतिका ने भी उससे कुछ देर रोने diya....kuch देर बाद जब रोनित की तकलीफ कुछ काम हुई तोह.....

रोनित- V.J अपने होश में hi नहीं था और इसीलिए उसने मुझपर उस दिन हाथ उठाया था.....

अवंतिका- galat....itna कुछ होने के बाद भी विक्रम ने अपने होश को किसी तरह संभल कर रखा था....

ास्मोडियस के खून की वजह से विक्रम को तुरंत पूरा बदल जाना चाहिए tha..usse भी पाप के रास्ते में निकल जाना चाहिए था पर विक्रम ने किसी तरह ऐसा होने नहीं दिया..

जिस दिन उसने तुमपर हाथ उठाया tha,ussi दिन या फिर ये कहूं उससे कुछ देर पहले hi उससे उसकी पहचान छीनी thi....PAAP उसके सर पर हावी था...

इतने ख़राब कंडीशन में होने के बावजूद उसने किसी तरह अपना दिमाग चलाया...

तुम्हे maarna,uthakar रूम से बाहर फेक dena,ye उसका प्लान tha....wo चाहता था की पुरे घरवालों को पता चले की उसने तुम्हारे साथ ऐसा किया है.....

जिससे घरवाले उसपे नाराज़ हों और वो घर छोड़कर चला jaaye....kyunki वो जानता था की अगर वो घर पर रहा तोह ज़रूर घरवालों के साथ कुछ गलत कर देगा इसीलिए उसने ये फैसला लिया.....

और जैसा वो चाहता tha,thik वैसा hi hua....aunty ने उससे घर से निकल जाने के लिए कहा जिससे उसने एक सेकंड में मान लिया और चला गया.....

रोनित- मेरे भाई के साथ इतना कुछ हो गया और मुझे खबर तक nahi.....isiliye वो दिल्ली........

रोनित अपनी आगे की बात कहते कहते रूक gaya...usse अपना वो सवाल याद आ गया जो वो अवंतिका से कल से पूछना चाहता था....

रोनित- मुझे एक बात समझ नहीं आयी....

अवंतिका- कौन सी बात???

रोनित- उससे पहले ये बताओ की क्या V.J ठीक हो गया hai..i मैं ास्मोडियस का खून क्या अब उसके अंदर नहीं है...

अवंतिका- hai...ASMODEUS का खून अब भी V.J के अंदर है....

रोनित- अगर V.J इसीलिए हम सब से दूर गया था ताकि उसकी वजह से हममे से किसी को नुक्सान नहीं पहुंचे तोह फिर हमे उसका पता चल कैसे गया???

ी मैं ये सच है की उसने खुद हमे अपने बारे में नहीं बताया पर ये भी एक सच है की अगर V.J नहीं चाहता की हम उससे मिलें तोह दुनिया में ऐसी कोई ताकत नहीं है जो हमे उससे मिला दे....

या तोह वो हमारे ुस्तक पहुँचने से पहले hi गायब हो जाता और इन फर्स्ट place,wo ऐसा कुछ करता की हम तक उसकी खबर पहुँचती hi नहीं.....

रोनित की बात सुनकर अवंतिका के चेहरे पर स्माइल आ गयी.....

अवंतिका- ी मस्ट say,tumhara दिमाग काफी चलने लगा है....

अवंतिका ने तर्रीफ़ की पर रोनित का मुँह बन गया....

RONIT-waah,ek तरफ तुम हो जो मेरे दिमाग की तारीफ़ कर रही हो और एक तरफ वो खड़ूस V.J है जिसने मुझे यहाँ आने से पहले बैल बुद्धि के नाम से सम्मानित किया है.....

रोनित की बात सुन अवंतिका खिलखिला कर है पड़ी.....

अवंतिका- मैंने कहा ना की अभी वो ास्मोडियस के खून के प्रभाव से बाहर नहीं आया है....

रोनित- फिर.....

अवंतिका- इसीलिए मैंने तुमसे कहा था की अगर तुम V.J को वापस लाने में कामियाब हुए तोह मई तुम्हे अपने थैंक्स कहने की वजह बताउंगी.....

V.J घर छोड़ कर इसीलिए गया था क्यूंकि उसके अंदर का शैतान उस वक़्त उसपर हावी था जिससे सबसे ज़्यादा नुक्सान V.J के घरवालों को मतलब तुम सब को होता पर...

V.J का तुम्हारे साथ यहाँ आने का मतलब है की उसने अपने अंदर के शैतान को कुछ हद तक काबू में करना सिख लिया है....

और ऐसी हालत में अब बाहर वालों को V.J के अंदर छुपे शैतान से खतरा hai,gharwaalon को नहीं....

घरवालों की वजह से वो खुदको कण्ट्रोल में रख पायेगा और इसलिए V.J तुमसब के साथ वापस आ गया....

इसीलिए मैंने तुम्हे थैंक्स कहा था क्यूंकि V.J के वापस आने का मतलब है वो पहले से ठीक है....

रोनित- ठीक hai,perfect nahi...aur मई V.J को पहले की तरह परफेक्ट देखना चाहता हूँ....

AVANTIKA-sirf तुम nahi,pura यूनिवर्स उससे ठीक देखना चाहता है क्यूंकि यूनिवर्स में शान्ति बनाये rakhna,ye V.J की ज़िम्मेदारी है जिससे वो पिछले 7 महीनो से नहीं कर पा रहा है.....

रोनित- पर ये होगा कैसे?

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


अवंतिका- उसी तरीके या फिर ये कहूं की उसी चीज़ के पास जाकर जिससे V.J की हालत सुधरी है.....

रोनित- मतलब!!!!

अवंतिका- मैंने तुमसे कहा था ना की तुम्हे V.J का एक काम करना hai...ye वही काम है जिसके पुरे होने से शायद हमे V.J को ठीक करने का कोई आईडिया मिल sake....par....

रोनित- par!!!par क्या?

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


अवंतिका- पर इसमें बोहोत खतरा hai...tumhari जान भी जा सकती है....

RONIT-ANJU के रूप में मेरी जान पहले hi जा चुकी hai..ab बस मेरे पास मेरा भाई hi तोह बचा hai,uske लिए अगर ये धड़कन बंद भी हो जाए तोह कोई गम नहीं....

अवंतिका कुछ देर तक रोनित को देखती रही फिर......

अवंतिका- हमे कहीं जाना hoga....par वहां से आने में वक़्त लग सकता है इसीलिए पहले अपने अपने घर चलते hain..ghar वालों से कुछ बहाना बनाकर तुम्हारे घर के पास जो गार्डन है वहां 10 बजे मिलते हैं.....

रोनित- कूल.....

बात करते करते अवंतिका और रोनित घूमते हुए वापस अवंतिका के घर के सामने पहुँच चुके थे......

अवंतिका को bye और 10 बजे मिलने का बोल रोनित अपने बाइक में बैठ अपने घर निकल गया और अवंतिका अपने.....

10 ऍम इन गार्डन:-

रोनित- तोह अब?

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


अवंतिका- सेक्रिला..... हमे वहां जाना होगा....

सेक्रिला फारेस्ट का नाम सुनकर रोनित को शॉक लगा....

रोनित कुछ कहने hi वाला था की....

अवंतिका- सब बताउंगी पर वहां pahunchkar...SECRILLA के सरहद के सामने की जगह याद है तुम्हे....

रोनित- हाँ...

अवंतिका- उसी जगह पहुँचने के लिए दूर खोलो.....

रोनित को अवंतिका की ये बात भी समझ नहीं aayi...par सेक्रिला पहुँचने तक के लिए उसने कुछ भी पूछना ठीक नहीं समझा और.....

अगले hi पल रोनित का एक हाथ हवा में था जिससे एक रे nikli..ray अवंतिका और रोनित के सामने गोल गोल घूमने लगी और देखते hi देखते उस रे ने एक मैजिकल दूर का रूप ले लिया जिसके दूसरी तरफ सेक्रिला की वही सरहद थी जहाँ उन्हें जाना था....

अवंतिका और रोनित उस दूर से होते हुए दूसरी तरफ

चले gaye..unke क्रॉस करते hi दूर बंद हो गया....

रोनित- अब तोह बताओ की हम यहाँ क्यों आये हैं और जब हमे सेक्रिला जाना है तोह तुमने मुझे यहाँ फारेस्ट के बाहर क्यों दूर की ओपनिंग रखने के लिए कहा?

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


अवंतिका- V.J के ठीक होने का सलूशन हमे सेक्रिला के अंदर hi मिलेगा.....

रोनित- यहाँ कैसे?

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


अवंतिका- मर्सिए रिवर याद hai.....V.J पिछले 7 महीनो से मर्सिए रिवर के अंदर घंटों तक ध्यान अवस्था में बैठता है...

और मुझे लगता है की मर्सिए रिवर के पानी से hi V.J अपने अंदर के शैतान ko,negetive एनर्जी को कण्ट्रोल करने में कामियाब हुआ hai.....samjhe.....!!!!

रोनित- कुछ कुछ?

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


AVANTIKA-baaki का भी समझ jaaoge.uske लिए हमे मेरिसा रिवर के पास जाना होगा....

पर उससे पहले हमे हमारे सामने जो सेक्रिला की सरहद hai,uske प्रॉब्लम को सोल्वे करना पड़ेगा.....

रोनित- यहाँ कैसी प्रॉब्लम?

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


अवंतिका- उसी प्रॉब्लम की वजह से hi तोह मैंने तुम्हे सेक्रिला के अंदर दूर की ओपनिंग रखने से रोका था.....

दरअसल भुविका और बिल्जेबब ने इस फारेस्ट की सरहद के चारो तरफ अपनी शक्ति तरंगे फैलाई हुई है....

जैसे hi हमने सरहद क्रॉस kiya,unhe पता चल जाएगा.....

भुविका और बिल्जेबब का नाम सुनकर पहले तोह रोनित को बेहद ग़ुस्सा आया पर कुछ hi पल बाद उसका ग़ुस्सा टेंशन में बदल गया....

भले hi रोनित बिल्जेबब और भुविका से बदला लेना चाहता ho,par वो ये भी जानता था की वो इस लायक नहीं है....

अपने जोश के चक्कर में पिछली बार उसने अपनी मोहोब्बत खो दी thi.RONIT सोच रहा था की अगर इस बार भी उसने पिछले बार जैसा रियेक्ट किया तोह शायद इस बार अवंतिका भी ना बच पाए.....

और वो अपने जैसी हालत अपने भाई का कैसे होने दे सकता था और इसीलिए.....

रोनित- वो दोनों बोहोत खतरनाक हैं AVNI...hume वापस जाना chahiye....hum कोई और तरीका ढूंढ लेंगे....

रोनित की बात सुनकर अवंतिका के चेहरे पर स्माइल आ गयी....

अवंतिका- क्या hua,dar गए....

रोनित- haan,dar गया पर अपने लिए नहीं V.J के liye..maine तोह अपना प्यार खो दिया पर अगर तुम्हे कुछ हो गया तोह मई V.J को क्या मुँह दिखाऊंगा.....

अवंतिका- तुम्हारी यही प्रॉब्लम hai...tum अपनी समझदारी हमेशा गलत वक़्त पर दिखते हो.....

रोनित- मतलब???

अवंतिका- मतलब ये समझदारी तुम्हे अंजलि के वक़्त दिखानी thi...aur जहाँ तक मेरा सवाल hai,BHUVIKA और बिल्जेबब मेरा कुछ नहीं बिगड़ सकते.....

रोनित को अवंतिका की बातों का मतलब समझ नहीं paaya..wo इससे फिगर आउट करने की कोशिश कर hi रहा था की.......

रोनित- अवनि..............

रोनित के मुँह से अवंतिका के नाम की चीख निकल गयी और wajah....AVANTIKA ने एक दम कसुआलय चलते हुए सेक्रिला के सरहद को क्रॉस कर दिया था.....

अवंतिका- क्या hua??chilla क्यों रहा hai???tere सामने hi तोह हूँ.....

अभी रोनित कुछ कहता उससे पहले hi......un दोनों के चारों तरफ तेज़ हवा चलने lagi....ab तक जहाँ अछि खासी धुप खिली हुई thi,wahan अब हल्का अँधेरा छाने laga...aur तभी...........

दो तेज़ बिजली अवंतिका से कुछ दूर सामने गिरी जिससे दो काले धुंए के गुबार उठे और जब वो गुब्बार चाटें तोह रोनित और अवंतिका के सामने बिल्जेबब और भुविका खड़े थे.....

उन दोनों को अपने सामने देख जहाँ अवंतिका नार्मल hi रही वहीँ रोनित के मन में दर ने घर कर लिया....

वो तेज़ी से आगे आया और अवंतिका के सामने खड़ा हो गया पर अवंतिका ने उससे कंधे से पकड़ साइड में कर दिया....

भुविका- सोचा नहीं था की इतनी जल्दी तुझे मारने का मौका मिलेगा....

अवंतिका- सीधे मुझसे रिक्वेस्ट कर leti,mai पहले hi तेरे सामने आ जाती.....

आपको याद होगा दोस्तों के भुविका ने ास्मोडियस से अवंतिका को मारने की बात कही थी और ास्मोडियस ने उसे कुछ कहा था जिसके बाद भुविका और बिल्जेबब गायब होकर कहीं पहुंचे थे और एक स्पेल बोलै था....

वो दोनों यहीं आये the..ASMODEUS ने उनसे कहा था की एक ना एक दिन अवंतिका यहाँ ज़रूर आएगी और जब ऐसा हो तब वो अवंतिका को मार सकते हैं....

इसीलिए बिल्जेबब और भुविका यहाँ आये थे ताकि इस जगह को अपनी शक्ति तरंगो से बाँध सके जिससे जब भी अवंतिका यहाँ आये तोह उन्हें पता चल जाए.....

BHUVIKA-naa तेरे पास कोई शक्ति है और ना hi कोई और taakat...fir भी इतना घमंड...

बिल्जेबब- पर कुछ hi शानो बाद जब तू ज़मीं पर गिरी मौत के कगार पर hogi,tab तेरी साथ साथ तेरा घमंड भी ख़त्म हो जाएगा....

अवंतिका- तूने ठीक कहा भुविका की मेरे पास कोई शक्ति नहीं hai,par मुझे किसी taakat,kisi शक्ति की ज़रुरत भी नहीं hai,jaanti है kyun,kyunki मई खुद एक शक्ति हूँ....

ऐसी शक्ति जिससे टकराने की औकाद तेरे बस की नहीं है.....

और BEELZEBUB,jab तेरा बाप मुझे नहीं मार सकता तोह तू किस खेत की मूली है....

अपने फादर के बारे में सुन बिल्जेबब को ग़ुस्सा आ gaya....uske हाथ में करंट रेज़ दिखने लगे पर इससे पहले की वो उन रेज़ को अवंतिका पर छोड़ता....

रोनित- तुम दोनों को जो करना है मेरे साथ करो पर अवंतिका को छोड़ दो....

रोनित की आवाज़ में एक लाचारी थी जिससे महसूस कर भुविका और बिल्जेबब है दिए.....

भुविका- तेरी आवाज़ में एक अकड़ हुआ करती thi,wo कहाँ गयी?

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


बिल्जेबब- लगता है इसकी प्रेमिका के साथ साथ इसकी अकड़ ने भी दम तोड़ दिया....

भुविका और बिल्जेबब की बात सुनकर रोनित को बोहोत तेज़ ग़ुस्सा आया पर अवंतिका की खातिर वो अपने ग़ुस्से को पि गया....

अवंतिका- इससे pyar,fikr कहते हैं नालायकों पर तुम्हारे जैसे गवार ये नहीं समझ sakte...aur जिस अकड़ की तुम बात कर रहे हो naa,chalo,tumhe उससे भी मिला देते हैं.....

अवंतिका की बात सुन रोनित कुछ कहने hi वाला था की.......

अवंतिका ने अपना एक हाथ रोनित के सर पर रखा और अगले hi पल अवंतिका की आखें बंद हो गयी....

शक्तियम स्थानन्तरं

पावर ट्रांसफर

अवंतिका के मुँह से स्पेल सुन रोनित को झटका लगा पर इससे पहले की वो कोई प्रतिक्रिया दे पाटा

अह्ह्ह्ह.......

रोनित के मुँह से एक हलकी कराह फूटी और अगले hi पल उसका शरीर विबरते होने लगा....

जैसे hi रोनित का शरीर विबरते होने laga,AVANTIKA ने अपना हाथ उसके सर से हटा लिया और अपनी आँखें खोल दी.....

अवंतिका के हाथ हटते hi रोनित के विब्रेशन्स ख़त्म हो गए पर......

रोनित- ये सब अभी क्या हुआ....

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


?और मुझे मेरा शरीर इतना भारी भारी सा क्यों लग रहा है...

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


?

अवंतिका रोनित के कान में- अभी के लिए इतना जान लो की तुम्हारे अंदर इन दोनों से कई गुना ज़्यादा शक्तियां हैं...

पर सिर्फ कुछ hi मिनट्स के liye....isiliye जो भी ग़ुस्सा तुम्हारे अंदर इन दोनों के लिए hai,wo इन दोनों पर निकल do....par याद रहे ,इन्हे जान से नहीं मारना hai.....abhi इसका वक़्त नहीं आया.....

जहाँ रोनित आखों में हैरत लिए अवंतिका को देखे जा रहा था वहीँ बिल्जेबब और भुविका आराम से खड़े थे....

उन्हें लगा की अवंतिका कुछ भी करले पर उन दोनों का कुछ बिगड़ नहीं सकती.....

AVANTIKA-tumhe सब पता चल जाएगा पर अभी तुम्हारे पास ज़्यादा वक़्त नहीं hai..tumhare अंदर की शक्ति को तुम ज़्यादा देर तक कण्ट्रोल नहीं कर पाओगे इसीलिए वक़्त रहते उनका इस्तेमाल कर लो.....

अब रोनित ने भी बाकी की बताओं को बाद के लिए ताल दिया और भुविका और बिल्जेबब की तरफ पलटा.....

पर इस बार रोनित के चेहरे पर बेबसी नहीं बाकि आत्मविश्वास था......

रोनित- बोहोत ताकत है ना तुम दोनों के andar...chalo,aaj तुम दोनों को मई तुम्हारी औकाद दिखता हूँ.....

बिल्जेबब- arre,iski अकड़ तोह वापस आ gayai..lagta hai.....AHHHHHHHHHH........

इससे आगे बिल्जेबब कुछ कह नहीं paaya....toh हुआ ये की रोनित ने घर कर बिल्जेबब को dekha....RONIT के आँखों से एक अदृश्य पर बोहोत hi स्ट्रांग रे निकली और बिल्जेबब की तरफ बढ़ी...

बिल्जेबब तोह रोनित को बोहोत लिघ्टलय ले रहा था इसीलिए उसने ज़्यादा ध्यान नहीं और....

उन अदृश्य रेज़ ने बिल्जेबब को लपेट liya....aisa होते hi बिल्जेबब के शरीर को एक तेज़ झटका लगा और वो तड़पने लगा....

बिल्जेबब से भुविका जुडी हुई thi....BEELZEBUB के दर्द से उससे भी तकलीफ हुई पर खुद को कण्ट्रोल में रख भुविका ने एक अनेर्ग्य बीम रोनित के ऊपर छोड़ा....

उस एनर्जी बीम की स्पीड और ताकत बोहोत ज़्यादा thi..isse पहले की रोनित कुछ करता....

बूम......

वो बीम रोनित के चेस्ट के बीच टकराया और ऐसा होते hi एक तेज़ धमाका हुआ.....

धमाका देख भुविका के चेहरे पर एक स्माइल आ गयी पर अगले hi पल.....

धमाके से फैला धुआं तुरंत गायब हो गया और जब विज़न क्लियर हुआ तोह सामने का नज़ारा देख भुविका की आँखें हैरत से फैले गयी....

रोनित और उसके पीछे अवंतिका आराम से मुस्कुराते हुए खड़े the....us एनर्जी बीम से उन दोनों को कोई नुक्सान नहीं हुआ था....

भुविका ने ज़मीं और हवा का आवाहन किया और दोनों की शक्ति से एक रे बनाकर रोनित के ऊपर छोड़ दिया...

भुविका के लास्ट प्रहार से रोनित को अपने अंदर की शक्तियों का नॉलेज हो गया tha....isiliye इस बार जब भुविका ने उसपर वार किया तोह रोनित ने बस अपना हाथ आगे किया और भुविका की तरफ चलने लगा....

भुविका के छोड़ा गए रे ने जैसे hi रोनित के हथेली से chua,wo गायब हो गया...

ज़मीं पर पड़ा बिलजुबूब और उसके बाजू में कड़ी भुविका ये सब देख चौंक गए.....

रोनित- बस इतना hi दम hai....bohot घमंड है ना तुम दोनों को अपनी शक्तियों par,ye देखो,

आवर्त शक्तियंम....

लॉक थे पावर्स.....

रोनित के स्पेल बोलने के बाद कुछ नहीं हुआ और ऐसा होते देख भुविका हसने lagi....BEELZEBUB भी अब खड़ा हो चूका था और उसके चेहरे पर भी खिल्ली उड़ने वाली हसी थी.....

पर अगले hi पल.......

भुविका और उसके साथ बेल्ज़ुबूब के चेहरे के एक्सप्रेशंस बदल चुके the..hasi की जगह शॉक ने ले ली thi.....wahin अब रोनित के चेहरे पर मुस्कराहट थी.....

तोह हुआ ये की बिल्जेबब ने हस्ते हस्ते hi एक स्पेल बोल अपना हाथ आगे किया पर कुछ भी नहीं हुआ....

बिल्जेबब के स्पेल ने काम hi नहीं kiya....BEELZEBUB के बाद भुविका ने भी एक घातक स्पेल उच्चरित कर अपना हाथ आगे किया पर बिल्जेबब की hi तरह भुविका का स्पेल भी काम नहीं किया....

जहाँ ये देख वो दोनों शॉक में थे वहीँ रोनित और अवंतिका के चेहरे पर स्माइल थी.....

अवंतिका- तुम्हारे पास ज़्यादा वक़्त नहीं है RONIT...jaldi करो....

रोनित को भी अपना शरीर वापस हल्का हल्का विबरते होते महसूस हो चूका था इसीलिए....

रोनित ने अपने दोनों हाथ आगे किये और

उदवहनी विभाड़ा

रोप ऑफ़ पैन

रोनित के हाथ से दो चमकते हुए रोप की शकल लिए रेज़ निकले और अगले hi पल उन रेज़ ने बिल्जेबब और भुविका को लपेट लिया और ऐसा होते hi.....

अह्ह्ह्ह.......

अह्ह्ह्हह........

बिल्जेबब और भुविका के मुँह से बेहद दर्द भरी चीखें गूंजने lagi...ye चीखें इतनी ज़्यादा तेज़ थी की पूरा सेक्रिला फारेस्ट उन दोनों की आवाज़ को महसूस कर रहा था.....

रोनित- जानते हो ये कैसा दर्द है जो तुम दोनों महसूस कर रहे ho....???ye दर्द उन लोगों का है जिन्हे तुम दोनों ने आज तक मारा है या तड़पाया है....

तुम दोनों वही दर्द महसूस कर रहे हो जो तुमने निर्दोष लोगों को दिया है.....

बिल्जेबब और भुविका दोनों hi रोनित की आवाज़ सुन तोह रहे थे पर उन दोनों की समझने की शक्ति लगभग ख़त्म हो गयी थी...

उन दोनों की शक्ति बांध ज़रूर गयी थी पर थी तोह वो उन दोनों के पास hi...dard की अत्यधिकता से भुविका और बिल्जेबब के शरीर जगह जगह से फैट रहे थे पर उनकी शक्तियों की वजह से उनके शरीर वापस ठीक भी हो जा रहे थे....

शरीर के फटने और फिर वापस ठीक होने की क्रिया के बीच बिल्जेबब और भुविका का दर्द इतना ज़्यादा था की उन दोनों की आखें बंद होने लगी.....

वहीँ उन दोनों के सामने खड़े रोनित की बॉडी भी अब बोहोत ज़्यादा विबरते कर रही thi...RONIT के सर पर बेहोशी छाने लगी थी पर रोनित खुदको संभाले हुआ था..

वो जानता था की उसका स्पेल तब तक hi काम करेगा जब तक रोनित होश में है....

तभी............

एक साथ दो चीज़ें हुई......

पहली- बिल्जेबब और भुविका के शरीर को एक तेज़ झटका लगा और दोनों गायब हो गए...

दूसरी- उन दोनों के गायब होने के अगले hi पल रोनित भी बेहोश होकर गिरने लगा...

पर उसके नीचे गिरने से पहले hi अवंतिका ने रोनित के सर के नीचे अपना हाथ रख दिया....

उसके बाद अवंतिका ने अपना दूसरा हाथ रोनित के सर के ऊपर rakha...RONIT के सर से होते हुए वो शक्तियां जो अवंतिका ने उससे दी thi,wo वापस अवंतिका में समां गयीं....

कुछ देर तक रोनित बेहोश hi रहा पर फिर धीरे धीरे उसकी आँखें खुल गयी...

होश में लौटने के बाद भी रोनित को कुछ देर लगा अपनी सिचुएशन को समझने में और जब रोनित ने अवंतिका को देखा तोह उसके दिमाग में कुछ देर पहले हुई साड़ी घटनाएं घूमी और वो एक झटके में खड़ा हो गया....

कुछ देर तक रोनित एक तक अवंतिका को देखता raha..uski आँखों में बोहोत से सवाल आ जा रहे थे...

वहीँ अवंतिका भी रोनित की हालत समझ रही थी पर वो चुप thi..RONIT के बोलने का इंतज़ार कर रही थी.....

कुछ देर तक अवंतिका को देखने के बाद रोनित के होंठ हिले......

रोनित- कौन हो तुम?

nbnQxGxaAfwHAzhfSeLZ.png


अवंतिका- मई अवंतिका hi हूँ रोनित.....

रोनित- फिर तुम्हारे अंदर इतनी शक्तियां.........

पर इससे आगे रोनित कुछ बोल नहीं paaya...bolna छोडो उसका तोह दिमाग hi फ्यूज हो चूका था.....

रोनित के सवाल ख़त्म होने से पहले hi अवंतिका के बाजू में तीन तेज़ रोशनियां हुई और जब वो रोशनियां काम हुई तोह वहां पर तीनो GOD'S मैसेंजर खड़े थे....

AVANTIKA-MAAYA वाक्यं

मैजिकल वर्ड्स

इस स्पेल का उसे पहले भी हो चूका hai...ek बार सत सेबेस्टियन के द्वारा और एक बार विक्रम dwara..is स्पेल को अपने सीक्रेट्स कहने से पहले बोलै जाता hai...isse कोई भी बाहर का बाँदा उस सीक्रेट बात को चाह कर भी सुन नहीं पाटा..

रोनित तीनो मेसेंजर्स को देख hi रहा था की........

सत सेबेस्टियन- अभी के लिए अवंतिका HI हैं हमारी.............

..........लार्ड ऑफ़ एंगेल्स...........

आज के लिए इतना HI......

आपका अपना V...J........
 
थैंक्स 4 सो मच अप्प्रेसिअशन brother.....every अपडेट तहत ी व्रिठे इस प्रीमेडिटेटेड... इतस काइंड ऑफ़ ा लिंक तहत इस ुसेड तो ुनफोल्ड थे नेक्स्ट update....some अरे ok एंड सम अरे गुड बूत एव्री अपडेट इस वैरी इम्प अस no उपदटेस अरे जस्ट तो इनक्रीस numbers....and िफ़ ु हैवे लिकेड थिस अपडेट, ु अरे गोइंग तो लव थे नेक्स्ट ओने बिकॉज़ नेक्स्ट ओने इस ा थ्रिल राइड एंड ी एक्सपेक्ट एव्री ओने तो बुखले उप तेरे सीट्स एंड एन्जॉय थे ride...thanks वन्स अगेन brother...be अलोंग...
 
Back
Top