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Episode 36
भैया ने जो उसकी मार लगाई वो किसी के कब्जे में नहीं आ रहे they...sharab की बोतल उन्होंने उसके सर पर फोड़ दी थी ..
नेक्स्ट कंटिन्यू.
मंत्रीओ के पकड़ने पर लड़ाई रुकी....
प्रकाश : पिता जी तुम नशे में टुन्न हो और तुम्हारी बेटी के साथ ये पंडित साला उनकी इज़्ज़त से खेल रहा .
लेकर जा inhe....pknm बीटा रुक जाओ... पंडित ने गन निकल ली थी प्रकाश को मरने के लिए पिता जी बिच में आगये तो वो रुक गया...
जा प्रकाश यहाँ se...na चाहते हुए भी भैया कमरे से हमें लेकर निकल गए....
पंडित कृष्णा नारायण मूर्ति चदानकया tha....pata नहीं क्या बात हुई उनकी जो पिता जी हम बहनो के सामने उसकी तारीफे करने lage..wo भी आया था घर..
पंडित कृष्णा : मुझसे गलती हो गयी देविओ मई नशे में था प्रकाश तुम से भी चमा छठा हों...
पिता जी के कहने पर हमने माफ़ कर diya...mujhe बाद में पता चला उसने पिता जी को पं बनने के ख्वाब दिखाए और पिता जी ने उससे हमारा सौदा कर दिया..
12तह हुआ तो पिता जी ने kaha...chalo अब तुम शहर jao..aur suno...tum दोनों को मेरे सपने को पूरा करना है...
माहि : क्या सपना है पिता जी आपका...
नरसिम्हा रओ : बेटी तुम्हे इस देश से सम्भिधान का खत्म करके हमारा कानून स्थापित करना है..
माहि : kaise....Pita जी...
नरसिम्हा : तुम्हे विषकन्या बनना होगा ...तुम दोनों शहर जाओ पड़े के साथ तुम्हारी ट्रेनिंग होगी और तुम बनोगी विष Kanya...prantu कभी भी अपने भाई को इस बारे में नहीं बताना तुम दोनों को तुम्हारी माँ की सौगंध....
मजबूरन हमें पिता जी को वचन देना पड़ा...
प्रकाश से हम पहली बार अलग हो रहे थे बंगलोरे हमारे गाओं से 3 k.m के फैसले पर था..
शहर में आकर हमें एक ाचा सा घर दिया गया यूनिवर्सिटी की जगह पहले हम आश्रम गए जो बन रहा था उसके निचे एक दुनिया आबाद थी हसीनाओं ki...waha हमारी ट्रेनिंग होने lagi....waha पहले हमें लड़ना सिखाया जाने लगा फिर गन्दी baten...waha वस्त्र हम बस नाम भर को pahente...andar से हम टूट गयी थी.... कॉलेज में हम दोनों बहने चुप चाप hi रहती किसी से कोई बात नहीं सिर्फ काम से Kam...pita जी मिलने ए तो हमने शिकायत की इस पर उन्होंने हमें hi डांटा....
इसी बिच कॉलेज में एक लड़का जिसका नाम डेविड था वो सुब्भो को पसंद आगया tha...lekin मई परिणाम को जानती थी इसलिए मैंने सुभो को समझाया लेकिन वो नहीं mani....pita जी को पता नहीं है इसलिए मैंने भी ये बात छुपा ली....
वो दिन भी आगया जब हमारी ट्रेनिंग पूरी हो gayi....ab हमें टास्क दिया जाना था उन मर्दो को फ़साने का जिनसे उनके पोलिटिकल बेनिफिट्स जुड़े थे....
उससे एक दिन पहले hi सुब्भो ने डेविड के साथ भागने का फैसला Kiya....Mai सुभो के साथ आयी स्टेशन पर....
इतने में डेविड भी agaya....use देखते hi सुब्भो उसके गले लग गयी....
चत्तत्त छत्त chatt....pandit कृष्णा नारायण मूर्ति तालियां बजता हुआ न जाने खा से agaya...aur मेरी जान हलक में आगयी.....
devidd.....ek लड़का सबको इग्नोर करता हुआ एक बैग लेकर आया जिसकी आँखों पर चस्मा tha....ise मैंने देखा था लेकिन याद नहीं आ रहा tha....kahan.
ये ले इसके बिना जाता भिक मांगनी पद जाती....
डेविड पंडित को देखकर चुप था.
डेविड : तू भाग यहाँ से...
ओह्ह इन लोगो के दर से कह रहा hai...usne मजाकिया लहजे में खा.
पंडित : मैंने सोंचा तुझे इसके साथ ऐश करने dun...iske साथ तू हमारा भी काम करेगी लेकिन tu..tu तो भाग रही hai...mujhe तो सब पता था तू किसके साथ उठती बैठती hai...aur तू इसका साथ देने यहाँ चली ayi....tujhe भी सजा milegi....dekh क्या रहे हो दोनों लड़को को मार दो इन दोनों को पकड़ कर अड्डे पर लाओ...
वेट वेट wait...dekho दोस्तों मई बस इसे बैग देने आया था ये मेरा कोई दोस्त बेस्ट नहीं hai....Mai इधर बैठा हों तुम जो चाहे इसके साथ Karo...apan तो शो देखेगा.
डेविड : तुझसे बदतर दोस्त किसी का नहीं हो सकता...
मुझे भी उससे नफरत हो गयी थी...
हां पता hai...Gunda भाई जल्दी से शो शुरू Karo..wo अपनी मस्ती में बेंच पर जाकर बैठ गया....
aaaaaaaaa.....gunde चीखते हुए डेविड को मरने आने लगे....
पंडित : ऐ सब ruko....pandit की आवाज़ पर सभी गुंडे रुक कर उसे देखने लगे....
पंडित : ता थैया ता थैया हो ....धूम तानना धूम तानना...
पंडित गेट हुए नाच रहा था उसके गुंडे उसे देख अपना सर खुजाने लगे और मेरी हसी छूट गयी....
कुछ देर बाद पंडित को होश आया....
पंडित : ये ...ये मई यहाँ कैसे....
गुंडा : महाराज आप नाच रहे ता थिया थैया करके...
तेरी तो sale....chatakkkk.... पंडित गुस्से में उसे थप्पड़ मर देता है...
पंडित : सेल पागल हो गया है मई nachunga...lekin मई यहाँ आया कैसे ..वो गहरी सोंचो में डूबता हुआ बोलै...
छोड़ दिया जाये या मार दिया जाये बोल तेरे साथ क्या सुलूक किया jaye...pandit गेट हुए फिर नाचने laga....nachte हुए वो एक काळा गुंडे के पास आया और पंडित ने उसके होंठो पर होंठ रख के उसे चूमने लगा....
पंडित : चीई...
गुंडा : महाराज क्या कर रहे हो मई लड़की नहीं हों....
दोनों को इस तरह देख मई मुश्किल से अपनी हसी दबा रही thi...wahi मई सोंच में पद गयी पंडित को आखिर हुआ क्या ...
पंडित : बकवास बंद कर मई तेरे काळा होंठो को चूमूंगा....
चटकककककक....
गुंडा : चूतिये तूने hi चूमे they...Gunda मरते हुए बोलै.
पंडित : तूने मुझे mara...Maro इस सेल ko...aur पंडित के गुंडे अपने गुंडे साथी को मरने लगे .....
रुक जाओ sab...jab वो गुंडा अधमरा हो गया तो पंडित ने उसे रोक दिया...
पंडित : दुश्मन मई तेरी दुश्मन तू मेरा ...मई नागिन तू sapera....nachte हुए पंडित फिर एक गुंडा के पास आया और उसकी धोती उतरने लगा ..
गुंडा : क्या कर रहे हो महाराज जैसे इसे मरवाया मुझे भी मरवाओगे...
पंडित : कालिया चरण उतरने दे न re...aur पंडित ने उसकी धोती खोल दी...
गुंडा : madarchod....aaaaa...dhammmm...
अगले hi पल वो लकड़ी की रोड पंडित के मुँह पर मरता है...
पंडित : aaaaaah...mar डाला re...sale तूने मुझे मारा ...मार डालो रे ise...pandit दर्द में चीखा.
वाकई गुंडों ने बेदिली से उसे भी अधमरा कर दिया....
पंडित : रुक jao.....uski आवाज़ पर गुंडे रुक गए....
पंडित : aaaja...aai बहार दिल hai..bekarar ..ो मेरे राजकुमार तेरे बिन रहा न जाये.... गेट हुए पंडित अपने एक गुंडे की गांड दबाने लगा...
गुंडा : क्या कर रहे ho...ab तुम मुझे मरवा डोज इससे ाचा है मई भाग जॉन...
पंडित सोंचो में गम था की गुंडा भागने laga....uske साथ hi आधे से ज्यादा गुंडे भाग गए....
पंडित : ये मुझे क्या हो गया है ..मारो इस सेल ko...sun...usne एक गुंडे को आवाज़ दी जो डेविड को मरने जा रहा था..
पंडित : क्या नाम है तेरा...
गुंडा : विरजू महाराज...
पंडित : जा मर उसे...
बिरजू: ऐसे नाही Jayeen....dhammmmmm.. अगले hi पल गुंडे ने लकड़ी की रोड पंडित के कंधो पर मरी ..
पंडित : आआआ ..aaaaaaaa....uski मार से पंडित दर्द में बिलबिलाने लगा...
जैसे hi वो डेविड को मरने वाले होते पंडित की आवाज़ पर रुक जाते है.
पंडित : aaaa...maro इस सेल को....
बिरजू : ये हम सबको मरवा देगा जान बचानी है तो भाग चलो....
बिरजू की बात सुन सभी गुंडे उसके साथ भाग लिए....
पंडित : कहा जा रहे हो मुझे छोड़ kar...tumhari जान ले लूंगा...
पंडित चीखता रह गया गुंडे भाग गए....
इतने में डेविड चलते हुए aya...pandit के पास....
पंडित : तूने क्या Kiya....ye कैसे किया...
डेविड : मेरी तरफ आँख उठा कर भी नहीं देख्नना ...वर्ण अगली बार तुझे ज़िंदा नहीं chhodunga...Mai सुब्भो से शादी करूँगा रोक सके तो रोक Lena...chal निकल ab...darte हुए पंडित भाग गया...
सुब्भो : कैसे किया तुमने ye...wo आकर डेविड के गले लग गयी ...ट्रैन ayi.aur वो दोनों चले गए ...
मैंने डेविड के दोस्त को देखा वो नहीं था .. मैंने सोंचा था उसे सुनौगी लेकिन वो था नहीं....
अगले दिन उनिवेर्सिटी में पिता जी और प्रकाश aye...unke एते hi टीचर्स ने क्लास खली करा ली ..
सिवाए एक के सब क्लास से निकल गए थे...
सोने दो न sir....uski आवाज़ पर मैंने उसे पीछे मुद के देखा वो वही था डेविड का dost...wo पीछे बैठता था मेरे क्लास का सबसे नालायक लड़का जो बस सोता रहता tha...ankho पर हर समय सुन ग्लासेज लगाए जिससे पता न चले की सो रहा है..
ऐ उठो मला साहब ए hai..sir उसे उठाते हुए बोले...
कुछ कहे बिना सर वापस हो गए लेकिन वो नहीं उठा मुझे दर था पिता जी ए तो इसे मरेंगे जरूर...
मई : भाग जाओ पिता जी मरेंगे...
चल ऋ ..और वो फिर आंखे बंद कर लिए.
माहि ....पिता जी गरजते हुए अंदर ए ..
वो मरते उससे पहले प्रकाश मेरे आगे आगये...
नरसिम्हा रओ : हैट जा मेरे सामने से...
प्रकाश : मई बात कर रहा हों na...bata दे माहि कहा गयी सुब्भो...
मई: भैय्या वो भाग गयी...
प्रकाश : कहा गयी...
मई : नहीं जानती भैया....
नरसिम्हा : जब तू नहीं जानती तो कैसे स्टेशन पर छोड़ने गयी...
मई : मई उसे वापस लेने गयी लेकिन वो नहीं आयी....
नरसिम्हा : झूट बोल रही है तू...
मई : मई सच कह रही हों...
saliii...pita जी मरने को हुए फिर भैया आगये...
मई : पिता जी अपने जैसा खा मैंने वैसा किया ..मई विष कन्या बन गयी hon...is बिच कैसे सुब्भो उस डेविड से प्यार करने लगी पता hi नहीं chala...pita जी द्वारा दिलाई गयी ट्रेनिंग मई उन्ही पर उसे कर रही थी...
प्रकाश : क्या boli...tu विष कन्या बन gayi...pita ji....gusse में भैया ने उनका गिरेवान पकड़ लिया...
नरसिम्हा : रुक जा बेटे मुझसे गलती हो गयी ...तू भी जनता है मई अपने सपने के लिए कितना सख्त hon...ijjat धन दौलत सब से बढ़कर हमारा सपना है हमारे liye...lakho बेटिओ को बचने के लिए मैंने अपनी दोनों बेटियां कुर्बान कर दी...
प्रकाश : मेरी बहन hi क्यों...
पिता जी देखो यहाँ कोई hai...ae चल उठ रे...
क्या यार सोने भी नहीं देते...
प्रकाश : सोने दे इसे भैरव...
भैया की बात सुन भैरव पीछे आगया..
प्रकाश : और tum...tumhe तो बाप कहते हुए भी शर्म आती है mujhe...tu भी किसी के साथ भाग जाना महा laxmi..kam से काम इस आदमी से तो बच जाएगी...
चटककककक..
पिता जी मरकर गुस्से में देखने लगे प्रकाश को...
नरसिम्हा : तू विष कन्या नहीं बनेगी लेकिन मुझे बता उस डेविड ने क्या जादू किया पंडित कृष्णा नारायण पर जो वो पागलो जैसी हरकते करने लगा...
हाय मेरी बन्नो मुझे याद कर rahi...itne में भैरव पिता जी के पास आकर उनसे लिपटने लगा..
भैरव : ऐ चल न कोचे में चले...
chatakkkkk....pita जी ने गुस्से में उसे एक तमाचा जड़ दिया..
भैरव : पहचाना नहीं मई डेविड हों.... हाहाहा...
पिता : devid...kaha है tu....dikhai क्यों नहीं दे रहा...
भैरव : अबे मई आत्मा हों इसके शरीर me..mere पीछे मत आना न मेरे बारे में बात करना वर्ण ...कहता हुआ भैरव गन गुंडे से छीन कर पिता जी पर तान देता है...
प्रकाश : क्या कर रहा bhairo...ruk जा...
ढाये... गोली पिता जी के कान के पास से निकल के दिवार में घुस gayi...pita जी का शरीर दर से थार थार कंपनी लगा...
भैरव : ये गोली तेरे सर में भी घुस सकती thi...chal अब निकल जल्दी से.
कोई बात किये बिना पिता जी प्रकाश का हाथ पकड़ ऐसे भागे जैसे हठी के सर से सींग...
सबके जाने के बाद वो उठे और मेरे सामने से गुज़रते हुए अपनी धुन में गाने lage..mere समय का फेमोस गण.
आशिक़ हूँ मैं कातिल भी हूँ
सबके दिलों में शामिल भी हूँ
दिल को चुराना नींदें उड़ाना
बस एहि मेरा कुसूर
वादों से अपने मुकरता नहीं
मरने से मैं कभी डरता नहीं
बादशाह ो बादशाह
बादशाह हे बादशाह
बादशाह ो बादशाह
मई उन्हें गेट जाता देखती रही...
मई : हे baadshah...usne मुझे मुड़कर देखा और मुस्कुरा दिया...
मई : तुमने अपने दोस्त को अकेला छोरा स्टेशन par....usne सुन कर भी अनसुना कर दिया...
कॉलेज से आकर मई देर रत तक वही गण सुनती rahi....sunte हुए मई अपने आप से hi बातें कर रही थी...
मई: वो कितना ढीट है ...पिता जी से भी नहीं Dara...mujhe तो कोई भाव hi नहीं देता...
मई खुद को आईने में देखने लगी.
आँखों में चणक सुर्ख गुलाबी rangat..mathe पर बिंदी .
मई : कितनी सुन्दर हों न मई.. हे baadshah....kya हो गया mujhe...Mai क्यों उसके बारे में इतना सोंच रही हों...
धम्मं धम्मं....
मई : इस वक्त कोण आया hoga...door बजने पर मई बुदबुदाई...
कोण hai....Maine दूर पर आकर पूछा.
छोटी malkin...sahab ने भेजा है...
मैंने दूर खोला और वो अंदर आया..
पिता जी ने अपने गुंडे द्वारा लत्तेर भेजा था जिसमे लिखा था...
महा अगर चाहती है तू विषकन्या न बने तो मालूम कर क्या जादू किया डेविड ne...pandit ने कहा उसका दोस्त भी था उससे राज़ उगलवा ..अगर तूने ऐस नहीं किया तो पंडित न तुझे छोड़ेगा न प्रकाश को....
मई पंडित की शक्ति से परिचित थी इसलिए मैंने चुप चाप पिता जी की बात मैंने का फैसला kiya...aur जवाब लिखकर भेज दिया..
अगले दिन मई सबसे पीछे जाकर बैठने लगी....
ओह्ह hello कहा बैठ रही हो..
मई : क्यों तुमने ये सीट रिज़र्व कर राखी hai...Mai बैग टेबल पर रख कमर पर हाथ रखते हुए बोली...
ाचा मुझे डिस्टर्ब मत karna...aur उसने आंखे बंद कर li...pass में बैठते hi मैंने अपने पेअर उसके पेअर से लगाने शुरू कर दिए...
क्या कर रही है potti..pair हटा ऋ अपना.
मई : मुझे इस तरह कम्फर्ट मिल रहा है...
ाचा चल मुझे भी de...aur उसने सबके सामने अपना सर मेरे कंधे पर रख लिया...
ोये क्या कर रहे ho...dekho मम आगयी utho...us ढीट ने अपना सर नहीं हटाया वैसे hi बैठा रहा...
सबकी अटेंडेंस लगने लगी सब खड़े होकर अटेंडेंस दे रहे they...jaise hi मेरी बरी आयी मई कड़ी होने lagi..madam ने बैठे रहने का इशारा कर दिया...
मई : अटेंडेंस तो लगवा लो अपनी...
तुझे बोलै था डिस्टर्ब नहीं करने ka...chal उठ यहाँ se...us ज़ालिम ने धक्का देकर मुझे सीट से उठा Diya...uska ऐसा सख्त दिल देख मुझे रोना आगया वही मेरा दिल उसकी इन हरकतों पर उस पर न्योछावर हो रहा था....
रेसस्स में वो मुझे पेड़ के निचे बैठे मिले...
सॉरी न अब नहीं उठाउंगी... प्लीज सॉरी...
है devid...mujhe देख वो आसमान में देख बातें करने लगे ..
क्या bola...ye जो कड़ी hai...haa ...क्या कहा ....
मई : क्या हुआ ऐसे क्यों बातें कर rahe...asman में देख कर...
डेविड की आत्मा हवा में कड़ी दिख नहीं रही...
मई : kahan...mai सर खुजाते हुए बोली.
..
ाचा ये इसलिए आयी मेरे पास..
मई : क्या कह रहा है वो...
वो कह रहा है तू अपने पिता के कहने पर मुझे फ़साने ayi...devid की आत्मा का राज़ जानने के लिए...
मई : सच में डेविड hai...ab तो मुझे भी यकीं आगया था...
ठीक है डेविड मई देख lunga...tu जा...
है तो मैडम मेरे दोस्त का राज़ जानने आयी थी...
सॉरी ji...pita जी ने धमकी दी thi..aur मई रोने लगी...
रो या सर पीट मेरे अस्स पास मत दिख्यो...
मई : कितने पत्थर दिल हो रोटी हुई लड़की को छुपा भी नहीं सकते...
क्यों तू मेरी औरत है क्या...
मई : बना लो न....
चल ऋ...
मई : मई सच कह रही hon...jab से देखि तब से दीवानी हो गयी हों तुम्हारी....
मेरे से प्यार नको कर एड़ी ..कहते हुए वो आगे बढ़ गए...
मई : खाना तो खा lo....Mai आपके लिए लेकर आयी hon...Mai भागकर पास आकर बोली..
क्या बनाई....
मई : आलू के पराठे नारियल की chatni..mai टिफ़िन आगे करते हुए boli...tiffin लेकर वो वही पेड़ के निचे बैठ कर खाने lage...mai उन्हें खता निहारने लगी..
मई : सुन ग्लासेज हटा दो न... कहते हुए कोण पहनता है...
देख नहीं पायेगी...
मई : ऐसा भी क्या hai...kehte हुए मैंने हटा diye...aur वो मुझे देखने लगे...
वो नीली ankhe...uffff....Mai एक लम्हे भी उनकी तब न ला saki...maine वैसे hi सुन ग्लासेज लगा दिए...
मई : सारा खा लिया मेरे लिए कुछ नहीं छोड़ा...
तुझे बोलै था अहसान kar...tiffin मुझे देकर वो आगे बढ़ गए....
मुझे प्यार तो हो गया था लेकिन मुझे दर भी था अपने भाई का....
मई : नाम तो बता दो अपना नीली आँखों वाले...
कल जान लेगी...
कहकर वो आगे बढ़ गए....
agle.din मई बहुत सर संवर के कॉलेज ayi...har कोई मुझे देख कर आहें भर रहा था और मई उन्हें देखकर....
मई : यहाँ बैठ जॉन प्लीज डिस्टर्ब नहीं करुँगी...
चल बैठ Jaa..wo मुझे बिना देखे बोले..
मई : मुझे देख तो lo...mere कहने पर उन्होंने आंखे खोली...
क़ातिल लग रही है और उन्होंने अपना सर मेरा हाथ बिछा कर उस पर रख लिया...
अटेंडेंस लगने lagi...ki तभी मैडम ने मुझे पुकरा फिर उन्हें पुकारा...
समर ...
कुछ कहे बिना उन्होंने हाथ खड़ा कर दिया....
मई : आपका नाम समर है ...कितना प्यारा नाम hai..ha बचो वो तुम्हारे पापा मेरे समर जी थे...
डिस्टर्ब...
मई : सॉरी सॉरी....
अबे डिस्टर्ब करना ये बोल रहा हों...
और मई शुरू हो gayi..kaha से हो aap..kitni आगे है apki..shadi हो गयी kya..Maine एक साँस में कई सवाल कर डेल..
आज क्या बना कर layi...wo जवाब दिए बिना मुझसे खाने का पूछने लगे..
मई : इडली डोसा संवर..
टिफ़िन बैग से nikal.wo खाने लगे....
तू भी खा ले पॉटी फिर बोलेगी अकेले अकेले खा liya...wo पहली बार था जब हमने साथ में खाना खाया...
वो मेरे करीब आने लगे थे और मुझे भी उनसे मोहब्बत हो gayi...unki हरकतों को देख मुझे यकीं हो गया था जादू असल में डेविड के पास नहीं इनके पास hai...wo क्या था ये मई नहीं जान payi...Mai जितनी भोली बनती थी उनके सामने उतनी थी नहीं...
फिर एक दिन पिता जी का खत भी आगया था...
तूने अभी तक कोई खबर नहीं bheji..pandit को पहले से hi तेरे भाई पर गुस्सा hai...jald पता कर उसकी शक्ति का स्त्रोत नहीं तो वो प्रकाश को मर देगा तो मुझे दोष न देना...
उसी रत मैंने भाई की मोहब्बत में खत लिख कर समर जी के बारे में सब बता दिया....
अगले दिन जब मई कॉलेज आयी तब वो नहीं they....mai बार बार दूर को देखती सारा दिन हो गया लेकिन वो नहीं ए...
रत को पिता जी अपने गुंडों के साथ घर ए...
मुझे कार में बिठा कर वो ले चले अपने साथ...
वो मुझे पुलिस स्टेशन laye..andar आकर मैंने एक सेल में समर जी को बंधा dekha...unke जिस्म पर इतनी छोटे थी जिन्हे देख मेरी जान हलक में आगे...
मई : समर jiii....mai चीख पड़ी...
मेरी आवाज़ सुन कर उन्होंने आंखे kholi...fir ऐसे देखा जैसे मई बहुत बड़ी मुजरिम हों...
मई : समर जी को छोड़ दो पिता जी..
नरसिम्हा : इससे पूछ अपनी शक्ति का स्त्रोत बताये...
मई भागकर सेल के पास आकर कड़ी हो गयी...
मई : समर जी बता दो पिता जी आपको छोड़ देंगे...
समर : धोकेबाज़ .. उन्होंने बड़ी मुश्किल से शब्द मुँह से nikale...aur मई रट हुए कंपनी लगी...
नरसिम्हा : मारो इसे...
धम्म्म्म धम्म्म्म धम्म्म्म..
पुलिस वाले उन पर डंडे तोड़ने lage...jab वो पीटते पीटते बेहोश हो गए तब पुलिसवालो ने उनके घाव पर नमक मिर्च डालनी शुरू कर दी...
aaaaaaaaaa....wo बेहोशी से जाग कर दर्द में चीखने लगे...
मई : पिता jii...chhod दो इन्हे पिता ji....Mai आपके पेअर पड़ती हों...
aaaaaaa...andar वो चीख रहे थे बहार मई....
मई : पिता ji....aaaa....
पुलिस वाला : बता sale...tujhe छोड़ दूंगा...
समर : जनता तब भी तुझे नहीं batata...unka जवाब सुन मुझे धक्का laga...aur मुझे अपनी गलती का अहसास हो gaya...wo शक्ति सच में डेविड की थी...
मई : पिता जी मुझसे भूल हो गयी ..मई सूरे नहीं थी .. प्रकाश भैया की वजह से मैंने इनका नाम ले liya....pita जी इन्हे जाने दो ये निर्दोस है...
पोलिसवाले : सर जितना इसे मारा अचे से अचे क़ातिल भी सब उगल देते hai...mujhe लगता है ये सच कह रहा है...
नरसिम्हा : फिर इससे डेविड का पता पूछो...
मई : मई जानती हों पिता जी इन्हे जाने दो .
नरसिम्हा : चल बता...
मई : ऐसे नहीं पहले इन्हे जाने दो....
उसी रत पिता जी ने उन्हें गाड़ी में बिठाया और बंगलोरे की सरहद पर छोड़ दिया..
नरसिम्हा : चल जा और सुन जो तेरे साथ हुआ उसे उगलना नहीं वर्ण अगली बार ज़िंदा नहीं छोडूंगा..
वो बस में बैठ कर चले gaye...aur मैंने पिता जी को डेविड का एड्रेस दे दिया.....
पिता जी ने खुश होकर मुझे कार di...devid के पास जाने से पहले..
जब डेविड के पास वो गए तब उनका भी वही हाल हुआ जो पंडित का हुआ था...
लड़कियां जिस ज़िन्दगी के ख्वाहिश कर रही थी उस समय मई वो जी कर भी खुश नहीं थी ... मई अब काम कहती रातो को करबाते badalti..bar बार मुझे समर जी दिखाई देते.
कुछ दिनों बाद भाई ए ..
mahi....ye क्या हालत बना ली tune...kitni सुख गयी है tu...bhai को देख मई उनके गले लग गयी...
मई : भाई मुझे वो चाहिए मेरे समर जी वर्ण मई उनके बिना जी नहीं पाऊँगी...
मेरी तड़प देख भैया पिघल गए...
प्रकाश : मई उसे धुंध कर यहाँ वापस launga...kal hi कॉलेज से एड्रेस निकल कर उससे मिलने जाऊंगा...
हर दिन की तरह मई दूर को टाक रही थी की वो अंदर ए...
समर ji....sabki परवाह किये बिना मई भागकर उनके गले लग कर फुट फुट कर रोने लगी...
चल हैट ऋ धोकेबाज़...
वो मुझे धक्का देकर अंदर जाने lage...mai उनकी hi सीट पर बैठी थी ..मेरा बैग रखा देख उन्होंने उठा के फेक दिया....
ये देख मई पास आयी और उनका हाथ पकड़ कर खींचने लगी...
समर महा लक्समी तुम दोनों क्लास से बहार जाओ....
न चाहते हुए उन्हें भी मेरे साथ बहार आना पड़ा....
बहार मई उनका हाथ पकड़ खींचते हुए अपने साथ ले जाने लगी...
मई : देखो नहीं चले तो मई chikhungi...Mai सिर्फ बात करना चाहती हों सिर्फ एक baar...unhe मेरे आंसुओ पर दया agayi...aur वो मेरे साथ कार में आकर बैठ गए....
कॉलेज से मई एक माउंटेन पर उन्हें लेकर आयी....
कार से निकलकर वो माउंटेन देखने लगे....
मई : यहाँ से गिरने वालो की लाश का भी पता नहीं चलता होगा...
समर : यहाँ क्यों layi...kudne का प्लान है तो कूद जा.
मई : मई आपसे सच में बहुत प्यार करती हों....
समर : फिर से बोली तो निचे फेक दूंगा...
मई : मई सच कह रही हों समर जी मई बहुत प्यार करती हों आपसे...
चटकककक...
एक hi थप्पड़ से मई घूम कर जमीन पर गिर गयी....
और वो पैदल hi जाने लगे...
मई : मई जानती हों समर जी आप भी मुझसे प्यार करते हो... वर्ण मेरे लिए कभी नहीं एते...
वो नहीं रुके ...उन्हें जाता देख मेरे दिल का दर्द गीत बनकर बहार आने लगा...
मई : ओहो ooooo....Tu पागल प्रेमी आवारा ...दिल तेरी मोहबत का मारा.. तुझे पहचान लिया रे... अपना तुझे मान लिया रे तुझे पहचान लिया re...oye ोये.. छेद के मुझको मेरे दिल में प्यार जगाया तूने ..प्यार से थी अनजान मुझे ये प्यार सिखाया tune..oye ोये ..शीशा तोड़ो पत्थर तोड़ो दिल मेरा न तोड़ो ऐसे मोड़ पे लाके यूँ न प्यार का दमन छोड़ो तू पागल प्रेमी awara..mai उनके आगे आकर गए रही थी और वो बर्बर मुझे धक्का दे कर गिरा कर आगे बढ़ jate....unhe इस तरह देख मेरी आंखे भर आयी...
मई : अगर नहीं रुके तो यहाँ से कूद कर अपनी जान दे दूंगी समर ji.....bina देखे वो आगे बढ़ gaye...aur मई पेड़ की आड़ में आकर छुपकर उन्हें जाता देखने लगी..
मई : aaaaaaaaaa....mai ने एक चीख मरी जो माउंटेन में गूंजने lagi...unhone पीछे मुद के देखा मुझे न देख वो इधर उधर देखने Lage....Oho..ho..hooo...
प्रेम दीवानी तू जीती मैं तेरे प्यार से हारा... लौट के वापस आजा ऐसा होगा अब न दुबारा ऐसा होगा अब न दुबारा ...
समर jii......mai भागकर उनके गले आकर लग gayi....mere समर ji..badhawas होकर मई उन्हें चूमने लगी....
समर ': चल शादी कर लेते hai....aur उसी दिन हमने शादी कर ली....
मुझे लेकर समर जी हैदराबाद अपने घर aye...unka घर बहुत बड़ा था उतना hi बड़ा उनका pairwar...khan परिवार पुरे हैदराबाद में फेमोस था...
माँ आपकी बहु....
हमें देख उनकी पूरी फैमिली इकट्ठी हो गयी...
तूने शादी कर ली shehzade...tujhe पढ़ने के लिए भेजी थी Mai...fir उन्होंने मुझे देखा....
बहु को अंदर ले jao...wo शायद मेरी सासु माँ थी...
chatakkk...piche hi मुझे थप्पड़ की आवाज़ ayi...shayad समर जी को पड़ा था..
फिर क्या बात हुई उनकी मुझे नहीं पता...
मई अंदर आयी तो उनके घर की औरते मुझसे मेरी डिटेल पूछने लगी...
हमारे शहज़ादे देखो कितनी हसीं बीवी laye....ek ने कहा जो मेरी जेठानी थी...
क्यों हमारे समर क्या काम है किसी se.dusri ने खा.
हाय किसी की नज़र न lage...pyar से उन्होंने मेरा माथा चुम liya...devrani जी ये है तुम्हारे हुब्बी की छोटी भाभी और मई हों बड़ी bhabhi...aur ये हम सबके bache...Mai बस सर हिला रही थी...
सबसे बड़ी भाभी तुम्हारी हॉस्पिटल गयी है उनकी डिलीवरी होने वाली hai..unhi ने कहा...
क्या कर रही हो तुम बेटी के लिए कुछ खाने पिने का लेकर aao...fir कुछ देर में बहुत साडी चीज़े मेरे सामने थी....
वो ए तो वो भी मेरे साथ hi खाने lage....sabki मौजूदगी में मई पूछ भी नहीं सकती थी की उनकी माँ ने क्या कहा....
हमारी ख़ामोशी देख वो खुद hi चली गयी thi...siwaye बचो के जो अपने चाचू को छोड़ने का नाम नहीं ले रहे थे....
चाचू सना का भाई आएगा या बहन...
समर :नीमरा बीटा तुम्हारा भाई ayega...jo तुम्हे प्रोटेक्ट करेगा...
मई : क्या कहा माँ जी ने...
समर : वो तो मान गयी है लेकिन खान भाई आएंगे तब फैसला होगा असल में खान भाई ने अपने दोस्त को जबान दे दी है मेरे लिए उन्होंने अपने दोस्त की बेटी मांग li...usi को लेकर परेशां हों..
मई : शादी तो नहीं हुई फिर क्यों इतना सोंच रहे...
समर : तुम नहीं जानती हो हमारे यहाँ जबान की कितनी अहमियत hai...ek बार जबान दे दी तो फिर जान देकर भी वडा निभाते है...
मई : आपके पापा.
समर : वो भी ऐसे hi है..
खा कर मैंने बर्तन समेटे और पांच साल की नीमरा के हाथ भेज दिए...
खान भाई आगये सब लोग छुप जाओ... बचो शैतानी करना बंद कर do...awaze सुन कर समर जी उठने लगे...
समर : तुम यही रुको मई बात करके आता हों....
उनके जाते hi मई दरवाज़े की ऊँट से देखने लगी...
अरे सेहज़ादे तुम आगये मिलो अपने छोटे सेहज़ादे se..beta हुआ है तुम्हारी भाभी ko...wo बचा समर जी को दिखते हुए बोले...
खान भाई बड़े रोआबदार गोर से बहुत अछि पर्सनालिटी रखते थे बिलकुल समर जी की तरह..
वो बचे को लेकर खिलने लगे...
समर : हाय मेरी जान कितना खूबसूरत hai...tu भी छोटा और मई भी छोटा हम दोनों hi घर में छोटे..
खान भाई : शहज़ादे क्या नाम रखोगे अपने भतीजे का...
समर : शेह्ज़ादा ayan...kaisa है भाई...
बहुत acha..unhone कहा...
खान भाई दीदी नहीं आयी .समर जी की भाबी ने पूछा.
खान भाई : अरे वो हॉस्पिटल मई तो बचे को दिखने ले aya...tum बताओ शहज़ादे स्टडी कैसी चल रही और कब aye....bhabhi से कहकर उनोहने समर जी से पूछा...
समर : भाई मैंने शादी कर ली...
समर जी की बात सुनकर खान भाई को धक्का लगा...
देवर जी बचा मुझे दो मई इसे कपडे पहना कर लती हों...
खान भाई : क्यों किया तूने ये Samar...Maine जबान दी thi...teri शादी मेरे दोस्त की बेटी से होगी अब मई उसे क्या मुँह दिखाऊंगा...
समर : भाई सिचुएशन hi ऐसी आगे जो मुझे ये फैसला लेना pada...ap कहेंगे तो मई उससे भी शादी कर लूंगा...
और वो मान jayenge..khan भाई गरजते हुए बोले...
समर : आपको मुझसे एक बार पूछना चाहिए था...
खान भाई : क्या ...मुझे तेरी ज़िन्दगी का फैसला लेने हक़ नहीं है..
समर : bhai...mai कह रहा हों अपने गलती की मुझे न बता कर ...अगर बताते तो मई कभी न करता..
खान भाई समर जी के जवाब से बेहद गुस्से में आगये..
खान भाई : निकल जा यहाँ से इस घर के दरवाजे तुझ पर बंद हो गए है..
बीटा छोटा भाई है तेरा..
खान भाई : माँ इसने गलती की है...
कुछ कहे बिना उनोहने दूर को देखा जहाँ मई कड़ी थी ..फिर समर जी आगे बढ़ने लगे...
उन्हें बढ़ता देख मई भी पीछे जाने लगी...
खान भाई : रुक जाओ beti...hamare घर में बेटिओ को नहीं निकला जाता...
मई : मई उनके बिना नहीं जी sakti...aur मई आगे बढ़ गयी...
उस दिन वो हैदराबाद में अपने दोस्त के घर ruke...fir हम दोनों वापस बंगलोरे आगये ...मुझे दर था पिता जी ने देख लिया तो इन्हे मर देंगे मैंने उन्हें बहुत रोका वो नहीं मने फिर समर जी को देख न जाने मुझमे कहाँ से हिम्मत agayi...aur वो मुझे वापस ले ए...
भैया ने बताया वो कहाँ मुझसे मिलने आएंगे मई समर जी को लेकर वही agayi....sham के समय प्रकाश भैया ए...
मैंने झुककर आशीर्वाद लिया... उन्होंने हम दोनों को गले लगा लिया....
प्रकाश : पिता जी बहुत षड्यंत्रकारी है तुम दोनों यहाँ क्यों आगये ..तुम्हे देखेंगे तो मर देंगे..
मई : bhaiya...Mai बोलती की समर जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया...
समर : क्या चाहते है वो...
प्रकाश : जीजू आप नहीं जानते उन्हें अगर लोगो को पता चल गया मेरी दोनों बहनो ने कही और शादियां की तो उन्हें वोट नहीं मिलेंगे और वो आप दोनों को ढूंढ़कर मर देंगे...
समर : ये स्टडी कर रही है जब तक कम्पलीट नहीं हो जाती तब तक मई यहाँ से नहीं जाऊंगा...
भैया ने बहुत मनाया समर जी ने एक न mani....thak कर भैया को hi हार माननी पड़ी...
प्रकाश : अभी कहा रुके हो तुम दोनों...
मई : उसी घर में जहाँ मई रहती...
प्रकाश : pagal...agar पिता जी को पता चल जाता तूने सोंचा है क्या परिणाम होगा iska...bhaiya मरने को हुए लेकिन रुक गए....
प्रकाश : यहाँ से कुछ दूर एक पॉश इलाके में घर बन रहे है वही घर लेकर दूंगा वही रहना..
समर : ठीक है लेकिन पैसे मई दूंगा...
अगले दिन समर जी और भैया ने सोसाइटी में घर ख़रीदा समर जी के लाख रोकने पर भैया ने आधे पैसे diye...agle दिन हम शिफ्ट हो गए ..
भैया घर एते और घर के हालत बताते ..भैया बताते पंडित की पावर दिन पर दिन बढ़ रही उसका बाप कम बन गया और पिता जी होम मिनिस्टर बन गए भैया मला बन गए और भैरव भी मला बन gaya....mai भेस बदल कर कॉलेज जाती ...समर जी ने काम शुरू कर दिया था वो मुझे लेने और छोड़ने जाते थे मेरे लिए स्टडी उनोहने ओपन से सुरु कर दी thi...pita जी के गुंडों से तो मई बच जाती लेकिन टीचर्स के लिए समर जी ने कहा था की बस मई स्टडी करूँ अटेंडेंस न लगाऊं टीचर बिना बोले मुझे दे degi...Mai जो स्टडी करती वो रात में समर जी के साथ शेयर करती thi...zindagi बहुत खूबसूरत हो गयी थी मेरी..
मई भी प्रेग्नेंट हो gayi..samar जी अब मेरा बहुत ख्याल रखते थे....
एक दिन प्रकश के साथ सुब्भो घर आयी...
chatakkkkkk...mujhe देखते hi उसने थप्पड़ मर दिया....
मई : सुब्भो...
सुब्भो नहीं samantha...tumne छीन लिया use....mere टोनी को मुझसे...
मई : क्या कह रही है...
सामंथा : तुमने मेरा एड्रेस दिया hai...tumne मेरा एड्रेस दिया था उन्हें और पिता जी मेरा बचा उठा कर ले gaye..uski बात सुनकर मैंने उसे गले लगा लिया....
सामंथा : दीदी दूर हो जाओ मुझसे...
मई : डेविड की आत्मा से कहो न ढूंढ़ने को...
सामंथा : शट उप वो कोई जादू नहीं जानते...
क्या हो रहा hai..Samar जी काम से आगये they....unhe देख दीदी चुप हो गयी उनका रोना भी बंद हो गया...
डेविड को bulao...samar जी कुछ देर बाद बोले.
सामंथा : वो बहार है मई लेकर अति हों...
कुछ देर बाद डेविड सामंथा के साथ ए...
समर : तू सामंथा को लेकर मुंबई Jaa..andheri गली no 5 के कचरे के डब्बे में टोनी को rakha...flight से जा बचा लेगा उसे.....
डेविड सामंथा को लेकर उसी वक्त निकल गया...
मई : आपको कैसे पता ...अपने पूछा भी नहीं सामंथा सीधे हल बता दिया...
प्रकाश : जीजू क्या बात है...
समर : कुछ नहीं तुम्हारे बाप पर नज़र रखता हों उसी ने मुंबई टोनी को कचरे के डब्बे में डाला....
भैया ये सुन गुस्से में घर से निकल गए....
1 महीने बाद सामंथा फिर आयी...
सामंथा : हमने मुंबई की खाक छान ली लेकिन हमें बचा नहीं Mila...wo फुट फुट कर रोने लगी..
उसी समय भैया आगये.
प्रकाश : पिता जी को पता नहीं क्या हो गया 1 महीने से मुंबई की गलियों में टोनी को ढूंढ रहे है..
सामंथा ने खामोश बैठे समर जी के आगे अंचल फैला दिया...
सामंथा : समर जी मुझे मेरा बीटा दिला दो...
समर : वो वहां नहीं है जहाँ तुम्हारे बाप ने छोड़ा था... इतना यकीं है वो ज़िंदा है..
सामंथा : मुझे कुछ नहीं सुन्ना मुझे मेरा टोनी चाहिए....
समर : सेल साहब मई मुंबई जा रहा हों अपनी बहन का ख्याल रखना. .
उसी रत वो सामंथा डेविड के साथ निकल गए....
उनके जाने के 2 दिन बाद पिता जी और पंडित घर आगये और मुझे उठा कर घर ले gaye...mai चीखती रही लेकिन वो नहीं मने.....
नरसिम्हा : उस सेल डेविड ने पता नहीं क्या कर दिया मई पागलो की तरह मुंबई की खाक छान रहा tha....aur तूने इस मालिक के साथ मुँह कला कर लिया..
पंडित : इसे मई बहुत बड़ी रैंड बनाऊंगा ab...iske पेट फुला हुआ है साली उसका बीज अपने अंदर पाल रही है....
नरसिम्हा : घर चलकर इसका पेट चिर के बचा निकलूंगा...
मई : नहीं पिता ji...Aisa मत Karo...ye मेरे समर जी की निशानी hai...mujhe छोड़ दो..
मई रोटी पित्ती रही लेकिन पिता जी नहीं मने...
घर लेकर वो चाकू से मेरा पेट चिर रहे थे की प्रकाश भैया बिच में आगये ...
प्रकाश भैया ने चाकू छीन कर धक्का दे दिया....
प्रकाश : पागल हो गए हो tum...apni hi औलाद को मरने पर तुले हो...
नरसिम्हा : रंडी के बचे तू मेरा खून नहीं हो sakta...hat जा मेरे सामने से वर्ण तेरा गाला भी रेट दूंगा...
प्रकाश : अगर इसे कुछ हुआ तो कल अखबार की सुर्खिओ पर आपकी फोटो होगी और आपका सपना खाक में मिल jayega..iski पूरी सोसाइटी ने देखा है आपको इसे उठाते hue....kuch दिन रुक jao...bhaiya जो कह रहे थे उसका मतलब था अभी न मारो कुछ दिन रुक jao....fir मरना जिसे समझ कर मई टूट गयी...
नरसिम्हा : बंद कर दो इसे कमरे me....pita जी के कहने पर उनके गुंडों ने मुझे कमरे में बंद कर दिया...
रात को भैया खाना लेकर ए...
मई : नहीं खाना मुझे ले जाओ इसे धोकेबाज़ ...मुझे कुछ दिन बाद मरने का कह रहे थे...
प्रकाश : ओह मेरी pagal..tujhe बचने के लिए समय माँगा Maine...is बिच मई कैसे भी करके तुझे निकल दूंगा यहाँ से...
भैया की बात सुन मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ और मई उनके गले लग गयी.....
इसकी नौबत नहीं आयी अगले दिन सुबह सुबह गोलिओ की धड़धड़ से मेरी आंख khuli...Mai भाग कर चाट की ग्रिल पर से देखने लगी.
वो नीली आँखों वाले समर जी बेहद गुस्से में अंदर दाखिल हो रहे थे आज उनकी आँखों पर चस्मा नहीं गुस्सा था.....
उनके पीछे पिता जी का hi बॉडीगार्ड था जो पिता जी के लोगो को hi मार रहा tha....sab हैरत से उन्हें देख रहे थे.....
नरसिम्हा : मार डालो इन दोनों को ...पिता जी के गुंडे उनकी तरफ बढे की बॉडीगार्ड ने सबको भून डाला....
dhaye...sabko मरकर बॉडीगार्ड ने खुद को भी शूट कर लिया...
नरसिम्हा : तू मुझे जनता नहीं है...
समर :अब कुछ मत bol....unki आवाज़ गूंज रही थी पुरे हॉल में...
समर : अपने बारे में बता कर मेरे बारे में जानकर कोई रेस शुरू मत कर....
aaaaaaaaaaaa....
इतने में भैरव नाइफ लिए उनकी और बढ़ा पीछे से....
dhammmmm....hawa में जम्प करके उन्होंने चलते फैन को पकड़ कर घूम के भैरव के सर पर मारा ..
भैरव : अअअअअअअ.....
फिर लटक रहे तर से उन्होंने भैरव को बांधकर उल्टा लटका दिया....
भैरव : कोण है तू....
समर : जिसकी सोंच से दुनिया लरज़ उठती है...
भैरव : hahahaha....mai सोंच रहा हों तुझे कैसे तड़पा तड़पा के मरूंगा....
समर : तू मुझे marega.....mujhe मरने का सोंच कर hi तेरी ज़िन्दगी उलटी लटक gayi....unki आवाज़ से भैरव डरकर उन्हें देखने लगा...
अअअअअ....
धमममममममम.....
ग़ुस्से में उन्होंने भैरव के सर पर लात मरी और वो दिवार में जाकर लग कर बेहोश हो गया...
नरसिम्हा : इसकी बलि दे दे.... प्रकाश...
पिता जी की आवाज़ सुनकर वो जम्प लगा कर उनके सामने आकर खड़े हो गए....
समर : मेरे माँ बाप के हम चार बेटे है और तेरी बात मैंने वाला तेरा सिर्फ एक हम में से कोई एक मर भी गया तो फ़र्क़ नहीं padega...lekin तेरा मारा तो तेरी अर्थी को भी कोई कन्धा नहीं देगा...
पिता जी नजरे उठा कर समर जी को देखने की भी हिम्मत नहीं कर पा रहे थे...
समर ji....bhagte हुए आकर मई उनके गले लग गयी....
ससष्ठ ssshhh...pita जी मुझे डरते हुए अंदर जाने का कह रहे they...dar से उनकी आवाज़ नहीं निकल रही थी..
समर : sun....aaj के बाद मुझे दिखाई नहीं देना मेरी फॅमिली के आस पास भी नहीं तो तेरे साम्राज्य को मई आग लगा दूंगा...
नरसिम्हा : मेरी पहुंच दिल्ली तक है अगर एक टेलीफोन कर दिया तो तेरा खंडन मिट जायेगा...
समर : दिखा अपनी ताकत....
भागते हुए पिता जी टेलीफोन लेकर कॉल करने लगे...
नरसिम्हा : hello .कम साहब आर्मी भेजो मेरे घर ये मेरी बेटी को ली जा raha......kya ...ये आप क्या कह rahe....Mai नरसिम्हा बोल रहा हों...
समर : हैंड्सफ्री kar...taki सब तेरी औक़ात देखे...
पिता जी ने हैंड्सफ्री कर दिया...
दुबारा अगर तूने कॉल की तो तुझे जेल में डालकर रपे केस लगवा dunga...chal फ़ोन rakh...udhar से c.m की आवाज़ आयी..
फ़ोन रख कर पिता जी हैरत से देखने लगे ..
समर : और कोशिश कर....
पिता जी बार बार कॉल करने लगे सभी उन्हें गलियन देकर दूत कर कॉल कट रहे थे...
समर : sun...agar जीना चाहता है तो मुझे भूल Jaa....Mai यही रहूँगा अगर तूने मेरी माहि की तरफ आंख भी उठाई तो मई तुझे अँधा कर दूंगा...
मेरा हाथ पकड़ कर समर जी चलने lage...bahar निकलते हुए मई देख रही थी सरे बोडीगार्ड्स की लाशे पड़ी थी...
अब मुझे यकीं हो गया था वो शक्ति डेविड के पास नहीं मेरे समर जी के पास है...
तीन महीने बाद मेरी डिलीवरी हुई और अनुसुइया ayi...anusuiya बिलकुल समर जी की तरह थी वही नीली ankhe....jab से मई आयी थी तब से पिता जी की तरफ से कोई बात नहीं हुई थी....
एक दिन मेरी सासु माँ आयी समर जी को लेने के liye....unhone बहुत मनाया लेकिन समर जी ने जाने से इंकार कर दिया...
सेहज़ादे अपने भाई की न मेरी सोंच मई तेरे बिना कैसे जी रही हों चल घर chal...Tera भाई मन गया है वो बुला रहा है तुझे....
समर : माँ वो क्यों नहीं ए फिर...
माँ : वो बड़ा है बीटा ज़िद्द छोड़ दे उसने पला है तुझे...
समर : माँ ये बहुत सी उमीदे लेकर मेरे साथ आयी थी और भाई ने निकल दिया...
गलती हो गयी उससे..
समर : वो यहाँ ए गए तो मई चलूँगा ...वाकई आप यहाँ रहो अपनी पोती से मिलो...
एक हफ्ता सासु माँ रही उनके साथ से मुझे अहसास hi नहीं हुआ वो मेरी नहीं समर जी की माँ hai...pura दिन वो अनुसुइया को खिलाती उनकी आँखों का तारा थी वो....
एक वीक बाद वो चली गयी....
एक दिन मार्किट में मुझे प्रकश भैया मिल Gaye...unki भी विवाह हो गयी thi...unhe और अपनी भाभी को लेकर मई घर आयी....
मई : मिलो इससे माँ के नाम पर रखा इसका नाम अनुसुइया...
प्रकश : आठ मेरी लाड़ली...
नंदरानी : वो कहा आपके...
मई : काम पर गए है....
अकेली हो दर नहीं लगता..
मई : उनके होते मुझे कोई दर नहीं लगता सीता भाभी..
सीता : सुना है उनके पास शक्तिया है..
मई : नहीं भाभी ऐसा कुछ नहीं है...
प्रकश : तू बुआ बनने वाली है.
मई : सच में भैया..
भैया ने सर हिला Diya...aur मई भाभी के गले लग गयी..
दिन बीतने lage...anusuiya 1 साल से ज्यादा की हो गयी भैया छुपकर मुझसे मिलते रहते they...kabhi कभी सामंथा भी ati...mai उसे दिलसे देती...
समर जी के घर से भी खत एते कभी मेरी देवरानी खत लिखती कभी जेट जी कभी उनकी maa..Mai उन्हें खत लिख कर अपने बारे में बताती वो सब बुलाते लेकिन समर जी जाने का नाम नहीं लेते....
अनुसुइया तीन साल की हो गयी थी पिता जी ने हमें परेशां नहीं किया tha..ab मई उनकी तरफ से निचिंत हो गयी थी...
एक दिन समर जी न्यूज़ पेपर लेकर aye..usme मैंने पढ़ा पिता जी गृहमंत्री बन गए थे परन्तु उनकी सत्ता बंगलोरे से ख़त्म हो गयी उप में जैम गयी थी उनका मंत्री उप में कम बन गया था पिता जी केंद्र सर्कार में आगये they...fool पार्टी अब फेमोस होने लगी थी....
मई : ऐसा लग रहा है पिता जी बन जायेंगे p.m आने वाले समय me..mujhe दर लग रहा है...
समर : क्यों दर रही हो मई हों na...tum बस हमारे होने वाले बचे का ख्याल rakho...wo मेरे पेट पर हाथ रखते हुए बोले....
मई: ाचा बताये क्या होगा बेटी या बीटा..
समर : मुझे अब बीटा
chahiye....jise मई अपनी तरह बना sakun...jiski सोंच से दुनिया लरज़ उठे...
मई : क्या है वो Shakti...akhirkar मैंने पूछ hi लिया उनसे...
समर : telepathy...apne तक hi रखना इसे..
मई : तो आप सबको कण्ट्रोल कर रहे थे...
समर : हां..
मई : badmash....aur मई उन पर कूद कर उन्हें प्यार करने लगी....
सलिल के आने के बाद हमारा प्यार और बढ़ने लगा...
इसी तरह एक साल और बिट gaya...meri भाभी अति प्रकश के साथ वो बातों hi बातों में समर जी की शक्तिओ के बारे में पूछती जिसे मई ताल देती थी....
सीता : तुम बताती नहीं हो जबकि हम तुम्हे इतना प्यार करते..
मई : सच में भाभी समर जी अपना राज़ किसी को नहीं देते....
सीता : पूछ कर बताना zarur..Mai बस उत्सुक hon...vaise तो तुम से ज्यादा मई घृणा करती हों अपने ससुर से कुत्ता sala...janwar ..
मई : कैसा भी है मेरा बाप है...
प्रकश : सीता सही कह रही है माहि वो बहुत कुत्ता पापी hai...usne मुझे भैरव का p.a बना दिया hai....tu नहीं जानती जब समर जी ने तुझे बचाया उसके अगले वीक उसने मीटिंग राखी और पुलिस c.m मंत्री सबको बुलाया उनसे पूछा वो लोग क्यों सहायता के लिए नहीं ए ..तब सब ने खा उन्होंने ऐसा क्यों किया वो खुद नहीं जानते ...सब ने खा समर के पास कोई शक्ति है जो हमसे कुछ भी करा सकती hai...faisla हुआ जब तक समर की शक्तिओ का तोड़ नहीं मिल जाता तब तक उससे दूर hi raho...warna पिता जी तो अगले दिन hi मरने आ रहे they...wo बदले नहीं है समझ गयी...
मुझे बहुत अफ़सोस हुआ ये जानकर.
प्रकाश : तब से लेकर अब तक पिता जी किसी ऐसे को ढूंढ रहे जो जीजू को टक्कर दे sake...jis दिन मिल गया वो जीजू को छोड़ेंगे नहीं....
भाइयाँ की बातो से अहसास हुआ मेरा बाप दरिंदा है....
इसी बिच सोना का जन्म हुआ...7 सेल हो गयी थी समर जी अपने घर नहीं गए थे ..मई 1 मंथ की प्रेगनेंट भी थी..
उधर पिता जी p.m बन गए थे और भैरव c.m ... प्रकाश भैया अब भी मला hi थे...
पंडित के बारे में भैया बता रहे थे उसकी भी दो बेतिया पैदा हुई है वो चाहता तो पं बनता लेकिन उसने पिता जी को बनाया ...उसकी पावर p.m से भी ज्यादा बढ़ गयी थी...
उस दिन समर जी काम पर नहीं गए थे सर्दियों के मौसम में धुप सेक रहे थे पास आकर मई भी बैठ गयी...
मई : कितने खत एते है घर से चलते क्यों नहीं...
समर : मैंने शायद बहुत बड़ी गलती कर दी न जाकर..
मई : चलो न फिर चलते है..
समर : भैया का सामना कैसे karunga...wo नाराज़ थे और मैंने उन्हें मुड़कर भी नहीं देखा...
मई : हम माफ़ी मांग लेंगे जब बचो को देखेंगे तो सब भूल jayenge..unse कहना हमारे परिवार का सबसे छोटा शेह्ज़ादा ये है सलिल....
समर : हम्म ज़िन्दगी का कोई भरोसा नहीं मिल एते है....
उनकी बात सुनकर मैंने उन्हें चुम लिया...
समर : तुम बचो को स्कूल से लेकर आओ मई ...वह ले जाने के लिए कुछ सामान लेकर अत हों...
वो सामान लेने चले गए बचो लेकर मई सामान पैक करने लगी...
की इतने में भैया आगये भाभी के साथ...
कहा जा रही है...
मई: समर जी के घर...
प्रकश : कहा रहते है wo...tune कभी बताया नहीं...
मई : हैदराबाद में खान परिवार बहुत फेमस है वह..
प्रकश : है जनता हों उन्हें बहुत भले लोग hai...lekin तू नहीं जानती पिता जी के राइवल भी है वो लोग जब उन्हें ये पता चलेगा तू उस घर की बहू है तो वो पागल हो जायँगे.
मई : बताना नहीं...
सीता : हम लोगो ने आज तक उनसे कोई बात शेयर नहीं की tumhari...na हम उनसे बात करना पसंद करते hai...acha बताओ कब तक के लिए जा रही हो...
मई : पता नहीं भाभी....
सीता : अब बता भी दो समर जी की शक्तिओ का raz..kya पता फिर मिले भी या नहीं.
मई : भाभी सच ने नहीं जानती...
सीता : एक हम है जो अपने घर की बातें बताते है एक तुम हो जो छोटी सी बात नहीं batati...ham कोनसे किसी से कहने जा रहे.
प्रकाश : बता भी दो माहि ये बार बार मुझसे पूछती है ... क्यूरियस है जानने के लिए लेकिन भरोसे की है..
और मैंने अपनी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी गलती कर di...parinam सोंचे बिना..
मई : वो टेलिपाथी जानते है वो आवाज़ के जरिये किसी को भी कण्ट्रोल कर सकते है किसी के भी दिमाग में झांक सकते है..
सीता : वाओ नन्द ji...apko तो हीरो mile..ek मेरे है कालू लेकिन दिल के बहुत अचे..
मई : मेरे भाई को कला नहीं कहना मुझसे पूछे कितने सुन्दर है..
सीता : मजाक में बोली नन्द जी..
मई: किसी को बताना नहीं..
प्रकाश :भरोसा rakh...acha सुन होसियार रहना पिता जी बदले की आग में जल रहे hai...jiju पहले इंसान है जिसे वो नहीं झुका sake...pita जी को लगा जीजू के पास शक्तियां है इसलिए वो साधु जादूगरों को बुला रहे जीजू को ख़त्म करने के लिए...
मैंने हामी भरी...
रत को hi मई समर जी बचो को लिए निकल गए हैदराबाद के लिए...
हमें ए एक महीना हो गया मेरी नन्द जेठानी जेठ सभी ने हमारा बहुत अचे से स्वागत किया सब हमें बहुत प्यार करते सबसे ज्यादा बचो से...
अब मुझे कोई प्यार नहीं करते सब इसे karte...khan भाई का बीटा रट हुए bola..jis पर हम सब हसने लगे समर जी ने उसे बाँहों में भर लिया...
समर : अयन ये तुम्हारा भाई hai.tum बड़े हो तुम hi तो इसे प्यार karoge..salil बीटा यहाँ आओ...
सलिल : है पापा..
समर : bhai....hai ये तुम्हारा हमेशा साथ रहना...
2 महीने बाद हम वापस बंगलोरे agaye..bacho की छुट्टियां ख़त्म हो गयी thi.sab बहुत रोक रहे थे लेकिन समर जी ने समझाया अगली साल यही शिफ्ट हो जायेंगे जिस पर उन्होंने जाने दिया..
घर आकर हमें एक वीक हो गया था फिर हमारे ऊपर ग़म का पहाड़ टूट पड़ा...
एक सुबह समर जी का नौकर घर आया और समर जी को देख दहाड़े मर कर रोने लगा....
समर : क्या हुआ चाचा रो क्यों रहे...
सबको मार दिया छोटे सर्कार खान भाई को मार दिया बचो को भी नहीं छोड़ा उन ज़ालिमों ने...
समर: aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa...
मई : नाहीइइइइइइइ.....
समर जी और मई वही बेहोश हो गए...
रत को हम दोनों को होश aya...hamare बचे हमें रट हुए उठा रहे थे...
गुस्से में समर जी उठे...
मई : nahi...kaha जा रहे है aap...bhagkar मई उनके कदमो से लिपट गयी...
समर : तुम्हारा बाप मई उसे ज़िंदा नहीं छोडूंगा...
मई : वो आपको मर देगा समर ji...wo आपको मर dega...agar गए तो हमें लांग कर जाना hoga...Maine सलिल सोना को उनके कदमो पर रख दिया...
समर : mahi...unki गुस्से भरी आवाज़ सुन मई हैट गयी....
10 दिन बाद वो घर ए...
मई भागकर उनसे लिपट गयी...
मई : कहा से आ रहे है आप..
समर : दफना kar...wo अपने घर के लोगो के बारे में बता रहे थे...
समर : तुमने उन्हें बता दिया मेरे बारे में...
मई : मुझे माफ़ कर दो समर ji...mai उनके कदमो से लिपट गयी...
समर : पता नहीं वो कहा है तुम्हारा बाप भैरव पंडित Murthy..Mai उन सबके दिमागों में गया लेकिन सब Khali..Aisa तभी होता जब कोई मर जाये या बेहोश हो.....
मई : कुछ पता नहीं चला..
समर : आखिर में मई प्रकश के दिमाग में गया और उससे दिमाग के जरिये बात ki...wo एक जेल में बंद था..
प्रकश : प्रकश मुझे माफ़ कर दो जीजू मुझसे बहुत बड़ी गलती हो gayi..aud आपका परिवार उजाड़ गया ...ाःह ये मैंने क्या कर diya..jiju माफ़ कर दो...
समर: तुम यहाँ कैसे ए..
प्रकश : मई नहीं जनता था सीता विष कन्या hai...apka राज़ माहि से लेकर उसने पिता जी को बता diya...salo से पिता जी ऐसे लोगो को ढूंढ रहे थे जो आपको काबू कर sake...sadhu जादूगर सब ...सीता के बताने बाद बहुत ढूंढ़ने पर कोई आपके जैसा hi मिल गया जो टेलिपाथी जनता tha...usne hi सबको कहा बेहोश होकर छुपाने के लिए...
समर : तो तुम मेरे दिमाग में छुपे बैठे ho...bologe nahi...itna dar...Maine उसे बहुत उकसाया लेकिन वो बोलै नहीं...
प्रकाश : क्या हुआ जीजू...
समर : वो तीनो कहा है तुम जानते ho..Mai उन तक कैसे पहुंच सकता हों..
प्रकाश : नहीं जीजू ..मई नहीं जनता लेकिन इतना जनता हों.. पिता जी साधु से मिल ने के बाद कोई दवा कहते प्रति कल 9 baje...jawan रहने की...
समर: तुम जानते हो तुम कहा कैद हो..
प्रकाश : मुझे बेहोश करके लाये ये log...jiju मेरी बेटी को बचा लो....
समर : मई ढूंढूंगा उसे...
मई : अब क्या करेंगे आप...
समर : जा रहा हों ढूढ़ने जब तक तुम्हारे बाप को नहीं ढूंढ लेता तब तक मुझे चैन नहीं मिलेगा ...
वो चले गए ...उनके जाने के 5 दिन बाद अख़बार में खबर आयी p.m चेंज हो गया hai...pita जी के बारे में था वो मर गए है..
दसमे दिन समर जी वापस ए...
मई : पिता जी को अपने mara...wo मिले आपको...
समर : तुम्हारा बाप जानवर बन गया वो इंसानी मॉस खाने लगा था मैंने उसे पागल तो कर दिया लेकिन मर नहीं पाया उसे कहीं छुपा दिया गया hai....un दोनों का कोई पता नहीं चला अभी तक...
मई : मुझे एना के घर जाकर सोना पड़ता है न जाने कब कोण अजय आप यही rahe...meri बात उन्होंने mani...aur घर रहने लगे...
वो अब गहरी सोंचो में बैठ जाते दिन हो या रत उनकी आंखे बंद hi रहती असल में वो भैरव और पंडित को ढूंढ रहे थे..
फिर वो भयानक दिन भी आया...
मई: मई बचो को लेने जा रही hon...jald आजाऊंगी...
समर : जाओ मई साथ hon...koi खतरा दिखे तो उससे बात karna...jab भी मई घर से बहार जाती वो मुझे यही कहते थे...
सोसाइटी से निकलते वक्त मुझे सोसाइटी जाते हुए कार दिखी....
मई पागल हो गयी thi....tab सामंथा आयी..
jiju....didi कहा गयी....
samantha..unhone आंखे बंद किये hi कहा..
सामंथा : आप के परिवार का सुनकर बहुत दुःख हुआ jiju....meri बेटी हुई है टीना...
समर : कैसे कहां congra.aur समर जी के आंसू निकलने लगे...
सामंथा : जीजू मई मिठाई लायी thi...ye खा लो आप...
समर : तुम किसके सामने कड़ी हो पता है तुम्हे....
सामंथा : jiju......wo मेरी टीना और डेविड मो मर denge...bacha लो unhe...Mai आपके पेअर पढ़ती हों... jiju...unhone खा है अगर मई ये आपको खिला डॉन तो वो उन्हें छोर देंगे और दीदी आपके बचो को भी...
समर जी मुझे देख रहे थे उनकी आँखों में उदासी थी...
सामंथा : समर ji...mai अपने एक बेटे को पहले hi खो चुकी hon...bacha लो मेरे घर को समर जी .और मैंने हाथ जोड़ लिए.......
समर : अपनी दीदी और मेरे बचो का ख्याल रखना....
आगे बढ़कर मैंने लड्डू उन्हें खिला Diya..us वक्त दीदी मेरे हाथ कैंप रहे they...didi....
क्या कभी अम्बर से
सूर्य बिछड़ता है
दीपक जलता है..
कैसी है ये अनहोनी
हर आंक हुयी नाम
छोड़ गया जो तू
कैसे जियेंगे हम
दीदी आँखों में ांसो लिए उन्होंने मुस्कुराते हुए खा लिया..... डीडीई माफ़ कर दो मुझे....
जब मई घर आयी तब उन्हें कुंडे में फांसी पैट लटका गए थे पंडित के log..unki सांसे चल रही थी मुँह से खून निकल रहा था....
अपने समर जी को इस तरह देख मई उसी समय पागल हो गयी....
सामंथा ने मुझे होश में न देख सब बता दिया ...
मुझे होश नहीं फिर तुम्हारे पापा के साथ क्या hua....shayad वो ज़ालिम उनकी बॉडी भी ले गए थे...
सामंथा तुमने ये क्या कर Diya....maa फुट फुट रोने लगी....
भैया ने जो उसकी मार लगाई वो किसी के कब्जे में नहीं आ रहे they...sharab की बोतल उन्होंने उसके सर पर फोड़ दी थी ..
नेक्स्ट कंटिन्यू.
मंत्रीओ के पकड़ने पर लड़ाई रुकी....
प्रकाश : पिता जी तुम नशे में टुन्न हो और तुम्हारी बेटी के साथ ये पंडित साला उनकी इज़्ज़त से खेल रहा .
लेकर जा inhe....pknm बीटा रुक जाओ... पंडित ने गन निकल ली थी प्रकाश को मरने के लिए पिता जी बिच में आगये तो वो रुक गया...
जा प्रकाश यहाँ se...na चाहते हुए भी भैया कमरे से हमें लेकर निकल गए....
पंडित कृष्णा नारायण मूर्ति चदानकया tha....pata नहीं क्या बात हुई उनकी जो पिता जी हम बहनो के सामने उसकी तारीफे करने lage..wo भी आया था घर..
पंडित कृष्णा : मुझसे गलती हो गयी देविओ मई नशे में था प्रकाश तुम से भी चमा छठा हों...
पिता जी के कहने पर हमने माफ़ कर diya...mujhe बाद में पता चला उसने पिता जी को पं बनने के ख्वाब दिखाए और पिता जी ने उससे हमारा सौदा कर दिया..
12तह हुआ तो पिता जी ने kaha...chalo अब तुम शहर jao..aur suno...tum दोनों को मेरे सपने को पूरा करना है...
माहि : क्या सपना है पिता जी आपका...
नरसिम्हा रओ : बेटी तुम्हे इस देश से सम्भिधान का खत्म करके हमारा कानून स्थापित करना है..
माहि : kaise....Pita जी...
नरसिम्हा : तुम्हे विषकन्या बनना होगा ...तुम दोनों शहर जाओ पड़े के साथ तुम्हारी ट्रेनिंग होगी और तुम बनोगी विष Kanya...prantu कभी भी अपने भाई को इस बारे में नहीं बताना तुम दोनों को तुम्हारी माँ की सौगंध....
मजबूरन हमें पिता जी को वचन देना पड़ा...
प्रकाश से हम पहली बार अलग हो रहे थे बंगलोरे हमारे गाओं से 3 k.m के फैसले पर था..
शहर में आकर हमें एक ाचा सा घर दिया गया यूनिवर्सिटी की जगह पहले हम आश्रम गए जो बन रहा था उसके निचे एक दुनिया आबाद थी हसीनाओं ki...waha हमारी ट्रेनिंग होने lagi....waha पहले हमें लड़ना सिखाया जाने लगा फिर गन्दी baten...waha वस्त्र हम बस नाम भर को pahente...andar से हम टूट गयी थी.... कॉलेज में हम दोनों बहने चुप चाप hi रहती किसी से कोई बात नहीं सिर्फ काम से Kam...pita जी मिलने ए तो हमने शिकायत की इस पर उन्होंने हमें hi डांटा....
इसी बिच कॉलेज में एक लड़का जिसका नाम डेविड था वो सुब्भो को पसंद आगया tha...lekin मई परिणाम को जानती थी इसलिए मैंने सुभो को समझाया लेकिन वो नहीं mani....pita जी को पता नहीं है इसलिए मैंने भी ये बात छुपा ली....
वो दिन भी आगया जब हमारी ट्रेनिंग पूरी हो gayi....ab हमें टास्क दिया जाना था उन मर्दो को फ़साने का जिनसे उनके पोलिटिकल बेनिफिट्स जुड़े थे....
उससे एक दिन पहले hi सुब्भो ने डेविड के साथ भागने का फैसला Kiya....Mai सुभो के साथ आयी स्टेशन पर....
इतने में डेविड भी agaya....use देखते hi सुब्भो उसके गले लग गयी....
चत्तत्त छत्त chatt....pandit कृष्णा नारायण मूर्ति तालियां बजता हुआ न जाने खा से agaya...aur मेरी जान हलक में आगयी.....
devidd.....ek लड़का सबको इग्नोर करता हुआ एक बैग लेकर आया जिसकी आँखों पर चस्मा tha....ise मैंने देखा था लेकिन याद नहीं आ रहा tha....kahan.
ये ले इसके बिना जाता भिक मांगनी पद जाती....
डेविड पंडित को देखकर चुप था.
डेविड : तू भाग यहाँ से...
ओह्ह इन लोगो के दर से कह रहा hai...usne मजाकिया लहजे में खा.
पंडित : मैंने सोंचा तुझे इसके साथ ऐश करने dun...iske साथ तू हमारा भी काम करेगी लेकिन tu..tu तो भाग रही hai...mujhe तो सब पता था तू किसके साथ उठती बैठती hai...aur तू इसका साथ देने यहाँ चली ayi....tujhe भी सजा milegi....dekh क्या रहे हो दोनों लड़को को मार दो इन दोनों को पकड़ कर अड्डे पर लाओ...
वेट वेट wait...dekho दोस्तों मई बस इसे बैग देने आया था ये मेरा कोई दोस्त बेस्ट नहीं hai....Mai इधर बैठा हों तुम जो चाहे इसके साथ Karo...apan तो शो देखेगा.
डेविड : तुझसे बदतर दोस्त किसी का नहीं हो सकता...
मुझे भी उससे नफरत हो गयी थी...
हां पता hai...Gunda भाई जल्दी से शो शुरू Karo..wo अपनी मस्ती में बेंच पर जाकर बैठ गया....
aaaaaaaaa.....gunde चीखते हुए डेविड को मरने आने लगे....
पंडित : ऐ सब ruko....pandit की आवाज़ पर सभी गुंडे रुक कर उसे देखने लगे....
पंडित : ता थैया ता थैया हो ....धूम तानना धूम तानना...
पंडित गेट हुए नाच रहा था उसके गुंडे उसे देख अपना सर खुजाने लगे और मेरी हसी छूट गयी....
कुछ देर बाद पंडित को होश आया....
पंडित : ये ...ये मई यहाँ कैसे....
गुंडा : महाराज आप नाच रहे ता थिया थैया करके...
तेरी तो sale....chatakkkk.... पंडित गुस्से में उसे थप्पड़ मर देता है...
पंडित : सेल पागल हो गया है मई nachunga...lekin मई यहाँ आया कैसे ..वो गहरी सोंचो में डूबता हुआ बोलै...
छोड़ दिया जाये या मार दिया जाये बोल तेरे साथ क्या सुलूक किया jaye...pandit गेट हुए फिर नाचने laga....nachte हुए वो एक काळा गुंडे के पास आया और पंडित ने उसके होंठो पर होंठ रख के उसे चूमने लगा....
पंडित : चीई...
गुंडा : महाराज क्या कर रहे हो मई लड़की नहीं हों....
दोनों को इस तरह देख मई मुश्किल से अपनी हसी दबा रही thi...wahi मई सोंच में पद गयी पंडित को आखिर हुआ क्या ...
पंडित : बकवास बंद कर मई तेरे काळा होंठो को चूमूंगा....
चटकककककक....
गुंडा : चूतिये तूने hi चूमे they...Gunda मरते हुए बोलै.
पंडित : तूने मुझे mara...Maro इस सेल ko...aur पंडित के गुंडे अपने गुंडे साथी को मरने लगे .....
रुक जाओ sab...jab वो गुंडा अधमरा हो गया तो पंडित ने उसे रोक दिया...
पंडित : दुश्मन मई तेरी दुश्मन तू मेरा ...मई नागिन तू sapera....nachte हुए पंडित फिर एक गुंडा के पास आया और उसकी धोती उतरने लगा ..
गुंडा : क्या कर रहे हो महाराज जैसे इसे मरवाया मुझे भी मरवाओगे...
पंडित : कालिया चरण उतरने दे न re...aur पंडित ने उसकी धोती खोल दी...
गुंडा : madarchod....aaaaa...dhammmm...
अगले hi पल वो लकड़ी की रोड पंडित के मुँह पर मरता है...
पंडित : aaaaaah...mar डाला re...sale तूने मुझे मारा ...मार डालो रे ise...pandit दर्द में चीखा.
वाकई गुंडों ने बेदिली से उसे भी अधमरा कर दिया....
पंडित : रुक jao.....uski आवाज़ पर गुंडे रुक गए....
पंडित : aaaja...aai बहार दिल hai..bekarar ..ो मेरे राजकुमार तेरे बिन रहा न जाये.... गेट हुए पंडित अपने एक गुंडे की गांड दबाने लगा...
गुंडा : क्या कर रहे ho...ab तुम मुझे मरवा डोज इससे ाचा है मई भाग जॉन...
पंडित सोंचो में गम था की गुंडा भागने laga....uske साथ hi आधे से ज्यादा गुंडे भाग गए....
पंडित : ये मुझे क्या हो गया है ..मारो इस सेल ko...sun...usne एक गुंडे को आवाज़ दी जो डेविड को मरने जा रहा था..
पंडित : क्या नाम है तेरा...
गुंडा : विरजू महाराज...
पंडित : जा मर उसे...
बिरजू: ऐसे नाही Jayeen....dhammmmmm.. अगले hi पल गुंडे ने लकड़ी की रोड पंडित के कंधो पर मरी ..
पंडित : आआआ ..aaaaaaaa....uski मार से पंडित दर्द में बिलबिलाने लगा...
जैसे hi वो डेविड को मरने वाले होते पंडित की आवाज़ पर रुक जाते है.
पंडित : aaaa...maro इस सेल को....
बिरजू : ये हम सबको मरवा देगा जान बचानी है तो भाग चलो....
बिरजू की बात सुन सभी गुंडे उसके साथ भाग लिए....
पंडित : कहा जा रहे हो मुझे छोड़ kar...tumhari जान ले लूंगा...
पंडित चीखता रह गया गुंडे भाग गए....
इतने में डेविड चलते हुए aya...pandit के पास....
पंडित : तूने क्या Kiya....ye कैसे किया...
डेविड : मेरी तरफ आँख उठा कर भी नहीं देख्नना ...वर्ण अगली बार तुझे ज़िंदा नहीं chhodunga...Mai सुब्भो से शादी करूँगा रोक सके तो रोक Lena...chal निकल ab...darte हुए पंडित भाग गया...
सुब्भो : कैसे किया तुमने ye...wo आकर डेविड के गले लग गयी ...ट्रैन ayi.aur वो दोनों चले गए ...
मैंने डेविड के दोस्त को देखा वो नहीं था .. मैंने सोंचा था उसे सुनौगी लेकिन वो था नहीं....
अगले दिन उनिवेर्सिटी में पिता जी और प्रकाश aye...unke एते hi टीचर्स ने क्लास खली करा ली ..
सिवाए एक के सब क्लास से निकल गए थे...
सोने दो न sir....uski आवाज़ पर मैंने उसे पीछे मुद के देखा वो वही था डेविड का dost...wo पीछे बैठता था मेरे क्लास का सबसे नालायक लड़का जो बस सोता रहता tha...ankho पर हर समय सुन ग्लासेज लगाए जिससे पता न चले की सो रहा है..
ऐ उठो मला साहब ए hai..sir उसे उठाते हुए बोले...
कुछ कहे बिना सर वापस हो गए लेकिन वो नहीं उठा मुझे दर था पिता जी ए तो इसे मरेंगे जरूर...
मई : भाग जाओ पिता जी मरेंगे...
चल ऋ ..और वो फिर आंखे बंद कर लिए.
माहि ....पिता जी गरजते हुए अंदर ए ..
वो मरते उससे पहले प्रकाश मेरे आगे आगये...
नरसिम्हा रओ : हैट जा मेरे सामने से...
प्रकाश : मई बात कर रहा हों na...bata दे माहि कहा गयी सुब्भो...
मई: भैय्या वो भाग गयी...
प्रकाश : कहा गयी...
मई : नहीं जानती भैया....
नरसिम्हा : जब तू नहीं जानती तो कैसे स्टेशन पर छोड़ने गयी...
मई : मई उसे वापस लेने गयी लेकिन वो नहीं आयी....
नरसिम्हा : झूट बोल रही है तू...
मई : मई सच कह रही हों...
saliii...pita जी मरने को हुए फिर भैया आगये...
मई : पिता जी अपने जैसा खा मैंने वैसा किया ..मई विष कन्या बन गयी hon...is बिच कैसे सुब्भो उस डेविड से प्यार करने लगी पता hi नहीं chala...pita जी द्वारा दिलाई गयी ट्रेनिंग मई उन्ही पर उसे कर रही थी...
प्रकाश : क्या boli...tu विष कन्या बन gayi...pita ji....gusse में भैया ने उनका गिरेवान पकड़ लिया...
नरसिम्हा : रुक जा बेटे मुझसे गलती हो गयी ...तू भी जनता है मई अपने सपने के लिए कितना सख्त hon...ijjat धन दौलत सब से बढ़कर हमारा सपना है हमारे liye...lakho बेटिओ को बचने के लिए मैंने अपनी दोनों बेटियां कुर्बान कर दी...
प्रकाश : मेरी बहन hi क्यों...
पिता जी देखो यहाँ कोई hai...ae चल उठ रे...
क्या यार सोने भी नहीं देते...
प्रकाश : सोने दे इसे भैरव...
भैया की बात सुन भैरव पीछे आगया..
प्रकाश : और tum...tumhe तो बाप कहते हुए भी शर्म आती है mujhe...tu भी किसी के साथ भाग जाना महा laxmi..kam से काम इस आदमी से तो बच जाएगी...
चटककककक..
पिता जी मरकर गुस्से में देखने लगे प्रकाश को...
नरसिम्हा : तू विष कन्या नहीं बनेगी लेकिन मुझे बता उस डेविड ने क्या जादू किया पंडित कृष्णा नारायण पर जो वो पागलो जैसी हरकते करने लगा...
हाय मेरी बन्नो मुझे याद कर rahi...itne में भैरव पिता जी के पास आकर उनसे लिपटने लगा..
भैरव : ऐ चल न कोचे में चले...
chatakkkkk....pita जी ने गुस्से में उसे एक तमाचा जड़ दिया..
भैरव : पहचाना नहीं मई डेविड हों.... हाहाहा...
पिता : devid...kaha है tu....dikhai क्यों नहीं दे रहा...
भैरव : अबे मई आत्मा हों इसके शरीर me..mere पीछे मत आना न मेरे बारे में बात करना वर्ण ...कहता हुआ भैरव गन गुंडे से छीन कर पिता जी पर तान देता है...
प्रकाश : क्या कर रहा bhairo...ruk जा...
ढाये... गोली पिता जी के कान के पास से निकल के दिवार में घुस gayi...pita जी का शरीर दर से थार थार कंपनी लगा...
भैरव : ये गोली तेरे सर में भी घुस सकती thi...chal अब निकल जल्दी से.
कोई बात किये बिना पिता जी प्रकाश का हाथ पकड़ ऐसे भागे जैसे हठी के सर से सींग...
सबके जाने के बाद वो उठे और मेरे सामने से गुज़रते हुए अपनी धुन में गाने lage..mere समय का फेमोस गण.
आशिक़ हूँ मैं कातिल भी हूँ
सबके दिलों में शामिल भी हूँ
दिल को चुराना नींदें उड़ाना
बस एहि मेरा कुसूर
वादों से अपने मुकरता नहीं
मरने से मैं कभी डरता नहीं
बादशाह ो बादशाह
बादशाह हे बादशाह
बादशाह ो बादशाह
मई उन्हें गेट जाता देखती रही...
मई : हे baadshah...usne मुझे मुड़कर देखा और मुस्कुरा दिया...
मई : तुमने अपने दोस्त को अकेला छोरा स्टेशन par....usne सुन कर भी अनसुना कर दिया...
कॉलेज से आकर मई देर रत तक वही गण सुनती rahi....sunte हुए मई अपने आप से hi बातें कर रही थी...
मई: वो कितना ढीट है ...पिता जी से भी नहीं Dara...mujhe तो कोई भाव hi नहीं देता...
मई खुद को आईने में देखने लगी.
आँखों में चणक सुर्ख गुलाबी rangat..mathe पर बिंदी .
मई : कितनी सुन्दर हों न मई.. हे baadshah....kya हो गया mujhe...Mai क्यों उसके बारे में इतना सोंच रही हों...
धम्मं धम्मं....
मई : इस वक्त कोण आया hoga...door बजने पर मई बुदबुदाई...
कोण hai....Maine दूर पर आकर पूछा.
छोटी malkin...sahab ने भेजा है...
मैंने दूर खोला और वो अंदर आया..
पिता जी ने अपने गुंडे द्वारा लत्तेर भेजा था जिसमे लिखा था...
महा अगर चाहती है तू विषकन्या न बने तो मालूम कर क्या जादू किया डेविड ne...pandit ने कहा उसका दोस्त भी था उससे राज़ उगलवा ..अगर तूने ऐस नहीं किया तो पंडित न तुझे छोड़ेगा न प्रकाश को....
मई पंडित की शक्ति से परिचित थी इसलिए मैंने चुप चाप पिता जी की बात मैंने का फैसला kiya...aur जवाब लिखकर भेज दिया..
अगले दिन मई सबसे पीछे जाकर बैठने लगी....
ओह्ह hello कहा बैठ रही हो..
मई : क्यों तुमने ये सीट रिज़र्व कर राखी hai...Mai बैग टेबल पर रख कमर पर हाथ रखते हुए बोली...
ाचा मुझे डिस्टर्ब मत karna...aur उसने आंखे बंद कर li...pass में बैठते hi मैंने अपने पेअर उसके पेअर से लगाने शुरू कर दिए...
क्या कर रही है potti..pair हटा ऋ अपना.
मई : मुझे इस तरह कम्फर्ट मिल रहा है...
ाचा चल मुझे भी de...aur उसने सबके सामने अपना सर मेरे कंधे पर रख लिया...
ोये क्या कर रहे ho...dekho मम आगयी utho...us ढीट ने अपना सर नहीं हटाया वैसे hi बैठा रहा...
सबकी अटेंडेंस लगने लगी सब खड़े होकर अटेंडेंस दे रहे they...jaise hi मेरी बरी आयी मई कड़ी होने lagi..madam ने बैठे रहने का इशारा कर दिया...
मई : अटेंडेंस तो लगवा लो अपनी...
तुझे बोलै था डिस्टर्ब नहीं करने ka...chal उठ यहाँ se...us ज़ालिम ने धक्का देकर मुझे सीट से उठा Diya...uska ऐसा सख्त दिल देख मुझे रोना आगया वही मेरा दिल उसकी इन हरकतों पर उस पर न्योछावर हो रहा था....
रेसस्स में वो मुझे पेड़ के निचे बैठे मिले...
सॉरी न अब नहीं उठाउंगी... प्लीज सॉरी...
है devid...mujhe देख वो आसमान में देख बातें करने लगे ..
क्या bola...ye जो कड़ी hai...haa ...क्या कहा ....
मई : क्या हुआ ऐसे क्यों बातें कर rahe...asman में देख कर...
डेविड की आत्मा हवा में कड़ी दिख नहीं रही...
मई : kahan...mai सर खुजाते हुए बोली.
..
ाचा ये इसलिए आयी मेरे पास..
मई : क्या कह रहा है वो...
वो कह रहा है तू अपने पिता के कहने पर मुझे फ़साने ayi...devid की आत्मा का राज़ जानने के लिए...
मई : सच में डेविड hai...ab तो मुझे भी यकीं आगया था...
ठीक है डेविड मई देख lunga...tu जा...
है तो मैडम मेरे दोस्त का राज़ जानने आयी थी...
सॉरी ji...pita जी ने धमकी दी thi..aur मई रोने लगी...
रो या सर पीट मेरे अस्स पास मत दिख्यो...
मई : कितने पत्थर दिल हो रोटी हुई लड़की को छुपा भी नहीं सकते...
क्यों तू मेरी औरत है क्या...
मई : बना लो न....
चल ऋ...
मई : मई सच कह रही hon...jab से देखि तब से दीवानी हो गयी हों तुम्हारी....
मेरे से प्यार नको कर एड़ी ..कहते हुए वो आगे बढ़ गए...
मई : खाना तो खा lo....Mai आपके लिए लेकर आयी hon...Mai भागकर पास आकर बोली..
क्या बनाई....
मई : आलू के पराठे नारियल की chatni..mai टिफ़िन आगे करते हुए boli...tiffin लेकर वो वही पेड़ के निचे बैठ कर खाने lage...mai उन्हें खता निहारने लगी..
मई : सुन ग्लासेज हटा दो न... कहते हुए कोण पहनता है...
देख नहीं पायेगी...
मई : ऐसा भी क्या hai...kehte हुए मैंने हटा diye...aur वो मुझे देखने लगे...
वो नीली ankhe...uffff....Mai एक लम्हे भी उनकी तब न ला saki...maine वैसे hi सुन ग्लासेज लगा दिए...
मई : सारा खा लिया मेरे लिए कुछ नहीं छोड़ा...
तुझे बोलै था अहसान kar...tiffin मुझे देकर वो आगे बढ़ गए....
मुझे प्यार तो हो गया था लेकिन मुझे दर भी था अपने भाई का....
मई : नाम तो बता दो अपना नीली आँखों वाले...
कल जान लेगी...
कहकर वो आगे बढ़ गए....
agle.din मई बहुत सर संवर के कॉलेज ayi...har कोई मुझे देख कर आहें भर रहा था और मई उन्हें देखकर....
मई : यहाँ बैठ जॉन प्लीज डिस्टर्ब नहीं करुँगी...
चल बैठ Jaa..wo मुझे बिना देखे बोले..
मई : मुझे देख तो lo...mere कहने पर उन्होंने आंखे खोली...
क़ातिल लग रही है और उन्होंने अपना सर मेरा हाथ बिछा कर उस पर रख लिया...
अटेंडेंस लगने lagi...ki तभी मैडम ने मुझे पुकरा फिर उन्हें पुकारा...
समर ...
कुछ कहे बिना उन्होंने हाथ खड़ा कर दिया....
मई : आपका नाम समर है ...कितना प्यारा नाम hai..ha बचो वो तुम्हारे पापा मेरे समर जी थे...
डिस्टर्ब...
मई : सॉरी सॉरी....
अबे डिस्टर्ब करना ये बोल रहा हों...
और मई शुरू हो gayi..kaha से हो aap..kitni आगे है apki..shadi हो गयी kya..Maine एक साँस में कई सवाल कर डेल..
आज क्या बना कर layi...wo जवाब दिए बिना मुझसे खाने का पूछने लगे..
मई : इडली डोसा संवर..
टिफ़िन बैग से nikal.wo खाने लगे....
तू भी खा ले पॉटी फिर बोलेगी अकेले अकेले खा liya...wo पहली बार था जब हमने साथ में खाना खाया...
वो मेरे करीब आने लगे थे और मुझे भी उनसे मोहब्बत हो gayi...unki हरकतों को देख मुझे यकीं हो गया था जादू असल में डेविड के पास नहीं इनके पास hai...wo क्या था ये मई नहीं जान payi...Mai जितनी भोली बनती थी उनके सामने उतनी थी नहीं...
फिर एक दिन पिता जी का खत भी आगया था...
तूने अभी तक कोई खबर नहीं bheji..pandit को पहले से hi तेरे भाई पर गुस्सा hai...jald पता कर उसकी शक्ति का स्त्रोत नहीं तो वो प्रकाश को मर देगा तो मुझे दोष न देना...
उसी रत मैंने भाई की मोहब्बत में खत लिख कर समर जी के बारे में सब बता दिया....
अगले दिन जब मई कॉलेज आयी तब वो नहीं they....mai बार बार दूर को देखती सारा दिन हो गया लेकिन वो नहीं ए...
रत को पिता जी अपने गुंडों के साथ घर ए...
मुझे कार में बिठा कर वो ले चले अपने साथ...
वो मुझे पुलिस स्टेशन laye..andar आकर मैंने एक सेल में समर जी को बंधा dekha...unke जिस्म पर इतनी छोटे थी जिन्हे देख मेरी जान हलक में आगे...
मई : समर jiii....mai चीख पड़ी...
मेरी आवाज़ सुन कर उन्होंने आंखे kholi...fir ऐसे देखा जैसे मई बहुत बड़ी मुजरिम हों...
मई : समर जी को छोड़ दो पिता जी..
नरसिम्हा : इससे पूछ अपनी शक्ति का स्त्रोत बताये...
मई भागकर सेल के पास आकर कड़ी हो गयी...
मई : समर जी बता दो पिता जी आपको छोड़ देंगे...
समर : धोकेबाज़ .. उन्होंने बड़ी मुश्किल से शब्द मुँह से nikale...aur मई रट हुए कंपनी लगी...
नरसिम्हा : मारो इसे...
धम्म्म्म धम्म्म्म धम्म्म्म..
पुलिस वाले उन पर डंडे तोड़ने lage...jab वो पीटते पीटते बेहोश हो गए तब पुलिसवालो ने उनके घाव पर नमक मिर्च डालनी शुरू कर दी...
aaaaaaaaaa....wo बेहोशी से जाग कर दर्द में चीखने लगे...
मई : पिता jii...chhod दो इन्हे पिता ji....Mai आपके पेअर पड़ती हों...
aaaaaaa...andar वो चीख रहे थे बहार मई....
मई : पिता ji....aaaa....
पुलिस वाला : बता sale...tujhe छोड़ दूंगा...
समर : जनता तब भी तुझे नहीं batata...unka जवाब सुन मुझे धक्का laga...aur मुझे अपनी गलती का अहसास हो gaya...wo शक्ति सच में डेविड की थी...
मई : पिता जी मुझसे भूल हो गयी ..मई सूरे नहीं थी .. प्रकाश भैया की वजह से मैंने इनका नाम ले liya....pita जी इन्हे जाने दो ये निर्दोस है...
पोलिसवाले : सर जितना इसे मारा अचे से अचे क़ातिल भी सब उगल देते hai...mujhe लगता है ये सच कह रहा है...
नरसिम्हा : फिर इससे डेविड का पता पूछो...
मई : मई जानती हों पिता जी इन्हे जाने दो .
नरसिम्हा : चल बता...
मई : ऐसे नहीं पहले इन्हे जाने दो....
उसी रत पिता जी ने उन्हें गाड़ी में बिठाया और बंगलोरे की सरहद पर छोड़ दिया..
नरसिम्हा : चल जा और सुन जो तेरे साथ हुआ उसे उगलना नहीं वर्ण अगली बार ज़िंदा नहीं छोडूंगा..
वो बस में बैठ कर चले gaye...aur मैंने पिता जी को डेविड का एड्रेस दे दिया.....
पिता जी ने खुश होकर मुझे कार di...devid के पास जाने से पहले..
जब डेविड के पास वो गए तब उनका भी वही हाल हुआ जो पंडित का हुआ था...
लड़कियां जिस ज़िन्दगी के ख्वाहिश कर रही थी उस समय मई वो जी कर भी खुश नहीं थी ... मई अब काम कहती रातो को करबाते badalti..bar बार मुझे समर जी दिखाई देते.
कुछ दिनों बाद भाई ए ..
mahi....ye क्या हालत बना ली tune...kitni सुख गयी है tu...bhai को देख मई उनके गले लग गयी...
मई : भाई मुझे वो चाहिए मेरे समर जी वर्ण मई उनके बिना जी नहीं पाऊँगी...
मेरी तड़प देख भैया पिघल गए...
प्रकाश : मई उसे धुंध कर यहाँ वापस launga...kal hi कॉलेज से एड्रेस निकल कर उससे मिलने जाऊंगा...
हर दिन की तरह मई दूर को टाक रही थी की वो अंदर ए...
समर ji....sabki परवाह किये बिना मई भागकर उनके गले लग कर फुट फुट कर रोने लगी...
चल हैट ऋ धोकेबाज़...
वो मुझे धक्का देकर अंदर जाने lage...mai उनकी hi सीट पर बैठी थी ..मेरा बैग रखा देख उन्होंने उठा के फेक दिया....
ये देख मई पास आयी और उनका हाथ पकड़ कर खींचने लगी...
समर महा लक्समी तुम दोनों क्लास से बहार जाओ....
न चाहते हुए उन्हें भी मेरे साथ बहार आना पड़ा....
बहार मई उनका हाथ पकड़ खींचते हुए अपने साथ ले जाने लगी...
मई : देखो नहीं चले तो मई chikhungi...Mai सिर्फ बात करना चाहती हों सिर्फ एक baar...unhe मेरे आंसुओ पर दया agayi...aur वो मेरे साथ कार में आकर बैठ गए....
कॉलेज से मई एक माउंटेन पर उन्हें लेकर आयी....
कार से निकलकर वो माउंटेन देखने लगे....
मई : यहाँ से गिरने वालो की लाश का भी पता नहीं चलता होगा...
समर : यहाँ क्यों layi...kudne का प्लान है तो कूद जा.
मई : मई आपसे सच में बहुत प्यार करती हों....
समर : फिर से बोली तो निचे फेक दूंगा...
मई : मई सच कह रही हों समर जी मई बहुत प्यार करती हों आपसे...
चटकककक...
एक hi थप्पड़ से मई घूम कर जमीन पर गिर गयी....
और वो पैदल hi जाने लगे...
मई : मई जानती हों समर जी आप भी मुझसे प्यार करते हो... वर्ण मेरे लिए कभी नहीं एते...
वो नहीं रुके ...उन्हें जाता देख मेरे दिल का दर्द गीत बनकर बहार आने लगा...
मई : ओहो ooooo....Tu पागल प्रेमी आवारा ...दिल तेरी मोहबत का मारा.. तुझे पहचान लिया रे... अपना तुझे मान लिया रे तुझे पहचान लिया re...oye ोये.. छेद के मुझको मेरे दिल में प्यार जगाया तूने ..प्यार से थी अनजान मुझे ये प्यार सिखाया tune..oye ोये ..शीशा तोड़ो पत्थर तोड़ो दिल मेरा न तोड़ो ऐसे मोड़ पे लाके यूँ न प्यार का दमन छोड़ो तू पागल प्रेमी awara..mai उनके आगे आकर गए रही थी और वो बर्बर मुझे धक्का दे कर गिरा कर आगे बढ़ jate....unhe इस तरह देख मेरी आंखे भर आयी...
मई : अगर नहीं रुके तो यहाँ से कूद कर अपनी जान दे दूंगी समर ji.....bina देखे वो आगे बढ़ gaye...aur मई पेड़ की आड़ में आकर छुपकर उन्हें जाता देखने लगी..
मई : aaaaaaaaaa....mai ने एक चीख मरी जो माउंटेन में गूंजने lagi...unhone पीछे मुद के देखा मुझे न देख वो इधर उधर देखने Lage....Oho..ho..hooo...
प्रेम दीवानी तू जीती मैं तेरे प्यार से हारा... लौट के वापस आजा ऐसा होगा अब न दुबारा ऐसा होगा अब न दुबारा ...
समर jii......mai भागकर उनके गले आकर लग gayi....mere समर ji..badhawas होकर मई उन्हें चूमने लगी....
समर ': चल शादी कर लेते hai....aur उसी दिन हमने शादी कर ली....
मुझे लेकर समर जी हैदराबाद अपने घर aye...unka घर बहुत बड़ा था उतना hi बड़ा उनका pairwar...khan परिवार पुरे हैदराबाद में फेमोस था...
माँ आपकी बहु....
हमें देख उनकी पूरी फैमिली इकट्ठी हो गयी...
तूने शादी कर ली shehzade...tujhe पढ़ने के लिए भेजी थी Mai...fir उन्होंने मुझे देखा....
बहु को अंदर ले jao...wo शायद मेरी सासु माँ थी...
chatakkk...piche hi मुझे थप्पड़ की आवाज़ ayi...shayad समर जी को पड़ा था..
फिर क्या बात हुई उनकी मुझे नहीं पता...
मई अंदर आयी तो उनके घर की औरते मुझसे मेरी डिटेल पूछने लगी...
हमारे शहज़ादे देखो कितनी हसीं बीवी laye....ek ने कहा जो मेरी जेठानी थी...
क्यों हमारे समर क्या काम है किसी se.dusri ने खा.
हाय किसी की नज़र न lage...pyar से उन्होंने मेरा माथा चुम liya...devrani जी ये है तुम्हारे हुब्बी की छोटी भाभी और मई हों बड़ी bhabhi...aur ये हम सबके bache...Mai बस सर हिला रही थी...
सबसे बड़ी भाभी तुम्हारी हॉस्पिटल गयी है उनकी डिलीवरी होने वाली hai..unhi ने कहा...
क्या कर रही हो तुम बेटी के लिए कुछ खाने पिने का लेकर aao...fir कुछ देर में बहुत साडी चीज़े मेरे सामने थी....
वो ए तो वो भी मेरे साथ hi खाने lage....sabki मौजूदगी में मई पूछ भी नहीं सकती थी की उनकी माँ ने क्या कहा....
हमारी ख़ामोशी देख वो खुद hi चली गयी thi...siwaye बचो के जो अपने चाचू को छोड़ने का नाम नहीं ले रहे थे....
चाचू सना का भाई आएगा या बहन...
समर :नीमरा बीटा तुम्हारा भाई ayega...jo तुम्हे प्रोटेक्ट करेगा...
मई : क्या कहा माँ जी ने...
समर : वो तो मान गयी है लेकिन खान भाई आएंगे तब फैसला होगा असल में खान भाई ने अपने दोस्त को जबान दे दी है मेरे लिए उन्होंने अपने दोस्त की बेटी मांग li...usi को लेकर परेशां हों..
मई : शादी तो नहीं हुई फिर क्यों इतना सोंच रहे...
समर : तुम नहीं जानती हो हमारे यहाँ जबान की कितनी अहमियत hai...ek बार जबान दे दी तो फिर जान देकर भी वडा निभाते है...
मई : आपके पापा.
समर : वो भी ऐसे hi है..
खा कर मैंने बर्तन समेटे और पांच साल की नीमरा के हाथ भेज दिए...
खान भाई आगये सब लोग छुप जाओ... बचो शैतानी करना बंद कर do...awaze सुन कर समर जी उठने लगे...
समर : तुम यही रुको मई बात करके आता हों....
उनके जाते hi मई दरवाज़े की ऊँट से देखने लगी...
अरे सेहज़ादे तुम आगये मिलो अपने छोटे सेहज़ादे se..beta हुआ है तुम्हारी भाभी ko...wo बचा समर जी को दिखते हुए बोले...
खान भाई बड़े रोआबदार गोर से बहुत अछि पर्सनालिटी रखते थे बिलकुल समर जी की तरह..
वो बचे को लेकर खिलने लगे...
समर : हाय मेरी जान कितना खूबसूरत hai...tu भी छोटा और मई भी छोटा हम दोनों hi घर में छोटे..
खान भाई : शहज़ादे क्या नाम रखोगे अपने भतीजे का...
समर : शेह्ज़ादा ayan...kaisa है भाई...
बहुत acha..unhone कहा...
खान भाई दीदी नहीं आयी .समर जी की भाबी ने पूछा.
खान भाई : अरे वो हॉस्पिटल मई तो बचे को दिखने ले aya...tum बताओ शहज़ादे स्टडी कैसी चल रही और कब aye....bhabhi से कहकर उनोहने समर जी से पूछा...
समर : भाई मैंने शादी कर ली...
समर जी की बात सुनकर खान भाई को धक्का लगा...
देवर जी बचा मुझे दो मई इसे कपडे पहना कर लती हों...
खान भाई : क्यों किया तूने ये Samar...Maine जबान दी thi...teri शादी मेरे दोस्त की बेटी से होगी अब मई उसे क्या मुँह दिखाऊंगा...
समर : भाई सिचुएशन hi ऐसी आगे जो मुझे ये फैसला लेना pada...ap कहेंगे तो मई उससे भी शादी कर लूंगा...
और वो मान jayenge..khan भाई गरजते हुए बोले...
समर : आपको मुझसे एक बार पूछना चाहिए था...
खान भाई : क्या ...मुझे तेरी ज़िन्दगी का फैसला लेने हक़ नहीं है..
समर : bhai...mai कह रहा हों अपने गलती की मुझे न बता कर ...अगर बताते तो मई कभी न करता..
खान भाई समर जी के जवाब से बेहद गुस्से में आगये..
खान भाई : निकल जा यहाँ से इस घर के दरवाजे तुझ पर बंद हो गए है..
बीटा छोटा भाई है तेरा..
खान भाई : माँ इसने गलती की है...
कुछ कहे बिना उनोहने दूर को देखा जहाँ मई कड़ी थी ..फिर समर जी आगे बढ़ने लगे...
उन्हें बढ़ता देख मई भी पीछे जाने लगी...
खान भाई : रुक जाओ beti...hamare घर में बेटिओ को नहीं निकला जाता...
मई : मई उनके बिना नहीं जी sakti...aur मई आगे बढ़ गयी...
उस दिन वो हैदराबाद में अपने दोस्त के घर ruke...fir हम दोनों वापस बंगलोरे आगये ...मुझे दर था पिता जी ने देख लिया तो इन्हे मर देंगे मैंने उन्हें बहुत रोका वो नहीं मने फिर समर जी को देख न जाने मुझमे कहाँ से हिम्मत agayi...aur वो मुझे वापस ले ए...
भैया ने बताया वो कहाँ मुझसे मिलने आएंगे मई समर जी को लेकर वही agayi....sham के समय प्रकाश भैया ए...
मैंने झुककर आशीर्वाद लिया... उन्होंने हम दोनों को गले लगा लिया....
प्रकाश : पिता जी बहुत षड्यंत्रकारी है तुम दोनों यहाँ क्यों आगये ..तुम्हे देखेंगे तो मर देंगे..
मई : bhaiya...Mai बोलती की समर जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया...
समर : क्या चाहते है वो...
प्रकाश : जीजू आप नहीं जानते उन्हें अगर लोगो को पता चल गया मेरी दोनों बहनो ने कही और शादियां की तो उन्हें वोट नहीं मिलेंगे और वो आप दोनों को ढूंढ़कर मर देंगे...
समर : ये स्टडी कर रही है जब तक कम्पलीट नहीं हो जाती तब तक मई यहाँ से नहीं जाऊंगा...
भैया ने बहुत मनाया समर जी ने एक न mani....thak कर भैया को hi हार माननी पड़ी...
प्रकाश : अभी कहा रुके हो तुम दोनों...
मई : उसी घर में जहाँ मई रहती...
प्रकाश : pagal...agar पिता जी को पता चल जाता तूने सोंचा है क्या परिणाम होगा iska...bhaiya मरने को हुए लेकिन रुक गए....
प्रकाश : यहाँ से कुछ दूर एक पॉश इलाके में घर बन रहे है वही घर लेकर दूंगा वही रहना..
समर : ठीक है लेकिन पैसे मई दूंगा...
अगले दिन समर जी और भैया ने सोसाइटी में घर ख़रीदा समर जी के लाख रोकने पर भैया ने आधे पैसे diye...agle दिन हम शिफ्ट हो गए ..
भैया घर एते और घर के हालत बताते ..भैया बताते पंडित की पावर दिन पर दिन बढ़ रही उसका बाप कम बन गया और पिता जी होम मिनिस्टर बन गए भैया मला बन गए और भैरव भी मला बन gaya....mai भेस बदल कर कॉलेज जाती ...समर जी ने काम शुरू कर दिया था वो मुझे लेने और छोड़ने जाते थे मेरे लिए स्टडी उनोहने ओपन से सुरु कर दी thi...pita जी के गुंडों से तो मई बच जाती लेकिन टीचर्स के लिए समर जी ने कहा था की बस मई स्टडी करूँ अटेंडेंस न लगाऊं टीचर बिना बोले मुझे दे degi...Mai जो स्टडी करती वो रात में समर जी के साथ शेयर करती thi...zindagi बहुत खूबसूरत हो गयी थी मेरी..
मई भी प्रेग्नेंट हो gayi..samar जी अब मेरा बहुत ख्याल रखते थे....
एक दिन प्रकश के साथ सुब्भो घर आयी...
chatakkkkkk...mujhe देखते hi उसने थप्पड़ मर दिया....
मई : सुब्भो...
सुब्भो नहीं samantha...tumne छीन लिया use....mere टोनी को मुझसे...
मई : क्या कह रही है...
सामंथा : तुमने मेरा एड्रेस दिया hai...tumne मेरा एड्रेस दिया था उन्हें और पिता जी मेरा बचा उठा कर ले gaye..uski बात सुनकर मैंने उसे गले लगा लिया....
सामंथा : दीदी दूर हो जाओ मुझसे...
मई : डेविड की आत्मा से कहो न ढूंढ़ने को...
सामंथा : शट उप वो कोई जादू नहीं जानते...
क्या हो रहा hai..Samar जी काम से आगये they....unhe देख दीदी चुप हो गयी उनका रोना भी बंद हो गया...
डेविड को bulao...samar जी कुछ देर बाद बोले.
सामंथा : वो बहार है मई लेकर अति हों...
कुछ देर बाद डेविड सामंथा के साथ ए...
समर : तू सामंथा को लेकर मुंबई Jaa..andheri गली no 5 के कचरे के डब्बे में टोनी को rakha...flight से जा बचा लेगा उसे.....
डेविड सामंथा को लेकर उसी वक्त निकल गया...
मई : आपको कैसे पता ...अपने पूछा भी नहीं सामंथा सीधे हल बता दिया...
प्रकाश : जीजू क्या बात है...
समर : कुछ नहीं तुम्हारे बाप पर नज़र रखता हों उसी ने मुंबई टोनी को कचरे के डब्बे में डाला....
भैया ये सुन गुस्से में घर से निकल गए....
1 महीने बाद सामंथा फिर आयी...
सामंथा : हमने मुंबई की खाक छान ली लेकिन हमें बचा नहीं Mila...wo फुट फुट कर रोने लगी..
उसी समय भैया आगये.
प्रकाश : पिता जी को पता नहीं क्या हो गया 1 महीने से मुंबई की गलियों में टोनी को ढूंढ रहे है..
सामंथा ने खामोश बैठे समर जी के आगे अंचल फैला दिया...
सामंथा : समर जी मुझे मेरा बीटा दिला दो...
समर : वो वहां नहीं है जहाँ तुम्हारे बाप ने छोड़ा था... इतना यकीं है वो ज़िंदा है..
सामंथा : मुझे कुछ नहीं सुन्ना मुझे मेरा टोनी चाहिए....
समर : सेल साहब मई मुंबई जा रहा हों अपनी बहन का ख्याल रखना. .
उसी रत वो सामंथा डेविड के साथ निकल गए....
उनके जाने के 2 दिन बाद पिता जी और पंडित घर आगये और मुझे उठा कर घर ले gaye...mai चीखती रही लेकिन वो नहीं मने.....
नरसिम्हा : उस सेल डेविड ने पता नहीं क्या कर दिया मई पागलो की तरह मुंबई की खाक छान रहा tha....aur तूने इस मालिक के साथ मुँह कला कर लिया..
पंडित : इसे मई बहुत बड़ी रैंड बनाऊंगा ab...iske पेट फुला हुआ है साली उसका बीज अपने अंदर पाल रही है....
नरसिम्हा : घर चलकर इसका पेट चिर के बचा निकलूंगा...
मई : नहीं पिता ji...Aisa मत Karo...ye मेरे समर जी की निशानी hai...mujhe छोड़ दो..
मई रोटी पित्ती रही लेकिन पिता जी नहीं मने...
घर लेकर वो चाकू से मेरा पेट चिर रहे थे की प्रकाश भैया बिच में आगये ...
प्रकाश भैया ने चाकू छीन कर धक्का दे दिया....
प्रकाश : पागल हो गए हो tum...apni hi औलाद को मरने पर तुले हो...
नरसिम्हा : रंडी के बचे तू मेरा खून नहीं हो sakta...hat जा मेरे सामने से वर्ण तेरा गाला भी रेट दूंगा...
प्रकाश : अगर इसे कुछ हुआ तो कल अखबार की सुर्खिओ पर आपकी फोटो होगी और आपका सपना खाक में मिल jayega..iski पूरी सोसाइटी ने देखा है आपको इसे उठाते hue....kuch दिन रुक jao...bhaiya जो कह रहे थे उसका मतलब था अभी न मारो कुछ दिन रुक jao....fir मरना जिसे समझ कर मई टूट गयी...
नरसिम्हा : बंद कर दो इसे कमरे me....pita जी के कहने पर उनके गुंडों ने मुझे कमरे में बंद कर दिया...
रात को भैया खाना लेकर ए...
मई : नहीं खाना मुझे ले जाओ इसे धोकेबाज़ ...मुझे कुछ दिन बाद मरने का कह रहे थे...
प्रकाश : ओह मेरी pagal..tujhe बचने के लिए समय माँगा Maine...is बिच मई कैसे भी करके तुझे निकल दूंगा यहाँ से...
भैया की बात सुन मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ और मई उनके गले लग गयी.....
इसकी नौबत नहीं आयी अगले दिन सुबह सुबह गोलिओ की धड़धड़ से मेरी आंख khuli...Mai भाग कर चाट की ग्रिल पर से देखने लगी.
वो नीली आँखों वाले समर जी बेहद गुस्से में अंदर दाखिल हो रहे थे आज उनकी आँखों पर चस्मा नहीं गुस्सा था.....
उनके पीछे पिता जी का hi बॉडीगार्ड था जो पिता जी के लोगो को hi मार रहा tha....sab हैरत से उन्हें देख रहे थे.....
नरसिम्हा : मार डालो इन दोनों को ...पिता जी के गुंडे उनकी तरफ बढे की बॉडीगार्ड ने सबको भून डाला....
dhaye...sabko मरकर बॉडीगार्ड ने खुद को भी शूट कर लिया...
नरसिम्हा : तू मुझे जनता नहीं है...
समर :अब कुछ मत bol....unki आवाज़ गूंज रही थी पुरे हॉल में...
समर : अपने बारे में बता कर मेरे बारे में जानकर कोई रेस शुरू मत कर....
aaaaaaaaaaaa....
इतने में भैरव नाइफ लिए उनकी और बढ़ा पीछे से....
dhammmmm....hawa में जम्प करके उन्होंने चलते फैन को पकड़ कर घूम के भैरव के सर पर मारा ..
भैरव : अअअअअअअ.....
फिर लटक रहे तर से उन्होंने भैरव को बांधकर उल्टा लटका दिया....
भैरव : कोण है तू....
समर : जिसकी सोंच से दुनिया लरज़ उठती है...
भैरव : hahahaha....mai सोंच रहा हों तुझे कैसे तड़पा तड़पा के मरूंगा....
समर : तू मुझे marega.....mujhe मरने का सोंच कर hi तेरी ज़िन्दगी उलटी लटक gayi....unki आवाज़ से भैरव डरकर उन्हें देखने लगा...
अअअअअ....
धमममममममम.....
ग़ुस्से में उन्होंने भैरव के सर पर लात मरी और वो दिवार में जाकर लग कर बेहोश हो गया...
नरसिम्हा : इसकी बलि दे दे.... प्रकाश...
पिता जी की आवाज़ सुनकर वो जम्प लगा कर उनके सामने आकर खड़े हो गए....
समर : मेरे माँ बाप के हम चार बेटे है और तेरी बात मैंने वाला तेरा सिर्फ एक हम में से कोई एक मर भी गया तो फ़र्क़ नहीं padega...lekin तेरा मारा तो तेरी अर्थी को भी कोई कन्धा नहीं देगा...
पिता जी नजरे उठा कर समर जी को देखने की भी हिम्मत नहीं कर पा रहे थे...
समर ji....bhagte हुए आकर मई उनके गले लग गयी....
ससष्ठ ssshhh...pita जी मुझे डरते हुए अंदर जाने का कह रहे they...dar से उनकी आवाज़ नहीं निकल रही थी..
समर : sun....aaj के बाद मुझे दिखाई नहीं देना मेरी फॅमिली के आस पास भी नहीं तो तेरे साम्राज्य को मई आग लगा दूंगा...
नरसिम्हा : मेरी पहुंच दिल्ली तक है अगर एक टेलीफोन कर दिया तो तेरा खंडन मिट जायेगा...
समर : दिखा अपनी ताकत....
भागते हुए पिता जी टेलीफोन लेकर कॉल करने लगे...
नरसिम्हा : hello .कम साहब आर्मी भेजो मेरे घर ये मेरी बेटी को ली जा raha......kya ...ये आप क्या कह rahe....Mai नरसिम्हा बोल रहा हों...
समर : हैंड्सफ्री kar...taki सब तेरी औक़ात देखे...
पिता जी ने हैंड्सफ्री कर दिया...
दुबारा अगर तूने कॉल की तो तुझे जेल में डालकर रपे केस लगवा dunga...chal फ़ोन rakh...udhar से c.m की आवाज़ आयी..
फ़ोन रख कर पिता जी हैरत से देखने लगे ..
समर : और कोशिश कर....
पिता जी बार बार कॉल करने लगे सभी उन्हें गलियन देकर दूत कर कॉल कट रहे थे...
समर : sun...agar जीना चाहता है तो मुझे भूल Jaa....Mai यही रहूँगा अगर तूने मेरी माहि की तरफ आंख भी उठाई तो मई तुझे अँधा कर दूंगा...
मेरा हाथ पकड़ कर समर जी चलने lage...bahar निकलते हुए मई देख रही थी सरे बोडीगार्ड्स की लाशे पड़ी थी...
अब मुझे यकीं हो गया था वो शक्ति डेविड के पास नहीं मेरे समर जी के पास है...
तीन महीने बाद मेरी डिलीवरी हुई और अनुसुइया ayi...anusuiya बिलकुल समर जी की तरह थी वही नीली ankhe....jab से मई आयी थी तब से पिता जी की तरफ से कोई बात नहीं हुई थी....
एक दिन मेरी सासु माँ आयी समर जी को लेने के liye....unhone बहुत मनाया लेकिन समर जी ने जाने से इंकार कर दिया...
सेहज़ादे अपने भाई की न मेरी सोंच मई तेरे बिना कैसे जी रही हों चल घर chal...Tera भाई मन गया है वो बुला रहा है तुझे....
समर : माँ वो क्यों नहीं ए फिर...
माँ : वो बड़ा है बीटा ज़िद्द छोड़ दे उसने पला है तुझे...
समर : माँ ये बहुत सी उमीदे लेकर मेरे साथ आयी थी और भाई ने निकल दिया...
गलती हो गयी उससे..
समर : वो यहाँ ए गए तो मई चलूँगा ...वाकई आप यहाँ रहो अपनी पोती से मिलो...
एक हफ्ता सासु माँ रही उनके साथ से मुझे अहसास hi नहीं हुआ वो मेरी नहीं समर जी की माँ hai...pura दिन वो अनुसुइया को खिलाती उनकी आँखों का तारा थी वो....
एक वीक बाद वो चली गयी....
एक दिन मार्किट में मुझे प्रकश भैया मिल Gaye...unki भी विवाह हो गयी thi...unhe और अपनी भाभी को लेकर मई घर आयी....
मई : मिलो इससे माँ के नाम पर रखा इसका नाम अनुसुइया...
प्रकश : आठ मेरी लाड़ली...
नंदरानी : वो कहा आपके...
मई : काम पर गए है....
अकेली हो दर नहीं लगता..
मई : उनके होते मुझे कोई दर नहीं लगता सीता भाभी..
सीता : सुना है उनके पास शक्तिया है..
मई : नहीं भाभी ऐसा कुछ नहीं है...
प्रकश : तू बुआ बनने वाली है.
मई : सच में भैया..
भैया ने सर हिला Diya...aur मई भाभी के गले लग गयी..
दिन बीतने lage...anusuiya 1 साल से ज्यादा की हो गयी भैया छुपकर मुझसे मिलते रहते they...kabhi कभी सामंथा भी ati...mai उसे दिलसे देती...
समर जी के घर से भी खत एते कभी मेरी देवरानी खत लिखती कभी जेट जी कभी उनकी maa..Mai उन्हें खत लिख कर अपने बारे में बताती वो सब बुलाते लेकिन समर जी जाने का नाम नहीं लेते....
अनुसुइया तीन साल की हो गयी थी पिता जी ने हमें परेशां नहीं किया tha..ab मई उनकी तरफ से निचिंत हो गयी थी...
एक दिन समर जी न्यूज़ पेपर लेकर aye..usme मैंने पढ़ा पिता जी गृहमंत्री बन गए थे परन्तु उनकी सत्ता बंगलोरे से ख़त्म हो गयी उप में जैम गयी थी उनका मंत्री उप में कम बन गया था पिता जी केंद्र सर्कार में आगये they...fool पार्टी अब फेमोस होने लगी थी....
मई : ऐसा लग रहा है पिता जी बन जायेंगे p.m आने वाले समय me..mujhe दर लग रहा है...
समर : क्यों दर रही हो मई हों na...tum बस हमारे होने वाले बचे का ख्याल rakho...wo मेरे पेट पर हाथ रखते हुए बोले....
मई: ाचा बताये क्या होगा बेटी या बीटा..
समर : मुझे अब बीटा
chahiye....jise मई अपनी तरह बना sakun...jiski सोंच से दुनिया लरज़ उठे...
मई : क्या है वो Shakti...akhirkar मैंने पूछ hi लिया उनसे...
समर : telepathy...apne तक hi रखना इसे..
मई : तो आप सबको कण्ट्रोल कर रहे थे...
समर : हां..
मई : badmash....aur मई उन पर कूद कर उन्हें प्यार करने लगी....
सलिल के आने के बाद हमारा प्यार और बढ़ने लगा...
इसी तरह एक साल और बिट gaya...meri भाभी अति प्रकश के साथ वो बातों hi बातों में समर जी की शक्तिओ के बारे में पूछती जिसे मई ताल देती थी....
सीता : तुम बताती नहीं हो जबकि हम तुम्हे इतना प्यार करते..
मई : सच में भाभी समर जी अपना राज़ किसी को नहीं देते....
सीता : पूछ कर बताना zarur..Mai बस उत्सुक hon...vaise तो तुम से ज्यादा मई घृणा करती हों अपने ससुर से कुत्ता sala...janwar ..
मई : कैसा भी है मेरा बाप है...
प्रकश : सीता सही कह रही है माहि वो बहुत कुत्ता पापी hai...usne मुझे भैरव का p.a बना दिया hai....tu नहीं जानती जब समर जी ने तुझे बचाया उसके अगले वीक उसने मीटिंग राखी और पुलिस c.m मंत्री सबको बुलाया उनसे पूछा वो लोग क्यों सहायता के लिए नहीं ए ..तब सब ने खा उन्होंने ऐसा क्यों किया वो खुद नहीं जानते ...सब ने खा समर के पास कोई शक्ति है जो हमसे कुछ भी करा सकती hai...faisla हुआ जब तक समर की शक्तिओ का तोड़ नहीं मिल जाता तब तक उससे दूर hi raho...warna पिता जी तो अगले दिन hi मरने आ रहे they...wo बदले नहीं है समझ गयी...
मुझे बहुत अफ़सोस हुआ ये जानकर.
प्रकाश : तब से लेकर अब तक पिता जी किसी ऐसे को ढूंढ रहे जो जीजू को टक्कर दे sake...jis दिन मिल गया वो जीजू को छोड़ेंगे नहीं....
भाइयाँ की बातो से अहसास हुआ मेरा बाप दरिंदा है....
इसी बिच सोना का जन्म हुआ...7 सेल हो गयी थी समर जी अपने घर नहीं गए थे ..मई 1 मंथ की प्रेगनेंट भी थी..
उधर पिता जी p.m बन गए थे और भैरव c.m ... प्रकाश भैया अब भी मला hi थे...
पंडित के बारे में भैया बता रहे थे उसकी भी दो बेतिया पैदा हुई है वो चाहता तो पं बनता लेकिन उसने पिता जी को बनाया ...उसकी पावर p.m से भी ज्यादा बढ़ गयी थी...
उस दिन समर जी काम पर नहीं गए थे सर्दियों के मौसम में धुप सेक रहे थे पास आकर मई भी बैठ गयी...
मई : कितने खत एते है घर से चलते क्यों नहीं...
समर : मैंने शायद बहुत बड़ी गलती कर दी न जाकर..
मई : चलो न फिर चलते है..
समर : भैया का सामना कैसे karunga...wo नाराज़ थे और मैंने उन्हें मुड़कर भी नहीं देखा...
मई : हम माफ़ी मांग लेंगे जब बचो को देखेंगे तो सब भूल jayenge..unse कहना हमारे परिवार का सबसे छोटा शेह्ज़ादा ये है सलिल....
समर : हम्म ज़िन्दगी का कोई भरोसा नहीं मिल एते है....
उनकी बात सुनकर मैंने उन्हें चुम लिया...
समर : तुम बचो को स्कूल से लेकर आओ मई ...वह ले जाने के लिए कुछ सामान लेकर अत हों...
वो सामान लेने चले गए बचो लेकर मई सामान पैक करने लगी...
की इतने में भैया आगये भाभी के साथ...
कहा जा रही है...
मई: समर जी के घर...
प्रकश : कहा रहते है wo...tune कभी बताया नहीं...
मई : हैदराबाद में खान परिवार बहुत फेमस है वह..
प्रकश : है जनता हों उन्हें बहुत भले लोग hai...lekin तू नहीं जानती पिता जी के राइवल भी है वो लोग जब उन्हें ये पता चलेगा तू उस घर की बहू है तो वो पागल हो जायँगे.
मई : बताना नहीं...
सीता : हम लोगो ने आज तक उनसे कोई बात शेयर नहीं की tumhari...na हम उनसे बात करना पसंद करते hai...acha बताओ कब तक के लिए जा रही हो...
मई : पता नहीं भाभी....
सीता : अब बता भी दो समर जी की शक्तिओ का raz..kya पता फिर मिले भी या नहीं.
मई : भाभी सच ने नहीं जानती...
सीता : एक हम है जो अपने घर की बातें बताते है एक तुम हो जो छोटी सी बात नहीं batati...ham कोनसे किसी से कहने जा रहे.
प्रकाश : बता भी दो माहि ये बार बार मुझसे पूछती है ... क्यूरियस है जानने के लिए लेकिन भरोसे की है..
और मैंने अपनी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी गलती कर di...parinam सोंचे बिना..
मई : वो टेलिपाथी जानते है वो आवाज़ के जरिये किसी को भी कण्ट्रोल कर सकते है किसी के भी दिमाग में झांक सकते है..
सीता : वाओ नन्द ji...apko तो हीरो mile..ek मेरे है कालू लेकिन दिल के बहुत अचे..
मई : मेरे भाई को कला नहीं कहना मुझसे पूछे कितने सुन्दर है..
सीता : मजाक में बोली नन्द जी..
मई: किसी को बताना नहीं..
प्रकाश :भरोसा rakh...acha सुन होसियार रहना पिता जी बदले की आग में जल रहे hai...jiju पहले इंसान है जिसे वो नहीं झुका sake...pita जी को लगा जीजू के पास शक्तियां है इसलिए वो साधु जादूगरों को बुला रहे जीजू को ख़त्म करने के लिए...
मैंने हामी भरी...
रत को hi मई समर जी बचो को लिए निकल गए हैदराबाद के लिए...
हमें ए एक महीना हो गया मेरी नन्द जेठानी जेठ सभी ने हमारा बहुत अचे से स्वागत किया सब हमें बहुत प्यार करते सबसे ज्यादा बचो से...
अब मुझे कोई प्यार नहीं करते सब इसे karte...khan भाई का बीटा रट हुए bola..jis पर हम सब हसने लगे समर जी ने उसे बाँहों में भर लिया...
समर : अयन ये तुम्हारा भाई hai.tum बड़े हो तुम hi तो इसे प्यार karoge..salil बीटा यहाँ आओ...
सलिल : है पापा..
समर : bhai....hai ये तुम्हारा हमेशा साथ रहना...
2 महीने बाद हम वापस बंगलोरे agaye..bacho की छुट्टियां ख़त्म हो गयी thi.sab बहुत रोक रहे थे लेकिन समर जी ने समझाया अगली साल यही शिफ्ट हो जायेंगे जिस पर उन्होंने जाने दिया..
घर आकर हमें एक वीक हो गया था फिर हमारे ऊपर ग़म का पहाड़ टूट पड़ा...
एक सुबह समर जी का नौकर घर आया और समर जी को देख दहाड़े मर कर रोने लगा....
समर : क्या हुआ चाचा रो क्यों रहे...
सबको मार दिया छोटे सर्कार खान भाई को मार दिया बचो को भी नहीं छोड़ा उन ज़ालिमों ने...
समर: aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa...
मई : नाहीइइइइइइइ.....
समर जी और मई वही बेहोश हो गए...
रत को हम दोनों को होश aya...hamare बचे हमें रट हुए उठा रहे थे...
गुस्से में समर जी उठे...
मई : nahi...kaha जा रहे है aap...bhagkar मई उनके कदमो से लिपट गयी...
समर : तुम्हारा बाप मई उसे ज़िंदा नहीं छोडूंगा...
मई : वो आपको मर देगा समर ji...wo आपको मर dega...agar गए तो हमें लांग कर जाना hoga...Maine सलिल सोना को उनके कदमो पर रख दिया...
समर : mahi...unki गुस्से भरी आवाज़ सुन मई हैट गयी....
10 दिन बाद वो घर ए...
मई भागकर उनसे लिपट गयी...
मई : कहा से आ रहे है आप..
समर : दफना kar...wo अपने घर के लोगो के बारे में बता रहे थे...
समर : तुमने उन्हें बता दिया मेरे बारे में...
मई : मुझे माफ़ कर दो समर ji...mai उनके कदमो से लिपट गयी...
समर : पता नहीं वो कहा है तुम्हारा बाप भैरव पंडित Murthy..Mai उन सबके दिमागों में गया लेकिन सब Khali..Aisa तभी होता जब कोई मर जाये या बेहोश हो.....
मई : कुछ पता नहीं चला..
समर : आखिर में मई प्रकश के दिमाग में गया और उससे दिमाग के जरिये बात ki...wo एक जेल में बंद था..
प्रकश : प्रकश मुझे माफ़ कर दो जीजू मुझसे बहुत बड़ी गलती हो gayi..aud आपका परिवार उजाड़ गया ...ाःह ये मैंने क्या कर diya..jiju माफ़ कर दो...
समर: तुम यहाँ कैसे ए..
प्रकश : मई नहीं जनता था सीता विष कन्या hai...apka राज़ माहि से लेकर उसने पिता जी को बता diya...salo से पिता जी ऐसे लोगो को ढूंढ रहे थे जो आपको काबू कर sake...sadhu जादूगर सब ...सीता के बताने बाद बहुत ढूंढ़ने पर कोई आपके जैसा hi मिल गया जो टेलिपाथी जनता tha...usne hi सबको कहा बेहोश होकर छुपाने के लिए...
समर : तो तुम मेरे दिमाग में छुपे बैठे ho...bologe nahi...itna dar...Maine उसे बहुत उकसाया लेकिन वो बोलै नहीं...
प्रकाश : क्या हुआ जीजू...
समर : वो तीनो कहा है तुम जानते ho..Mai उन तक कैसे पहुंच सकता हों..
प्रकाश : नहीं जीजू ..मई नहीं जनता लेकिन इतना जनता हों.. पिता जी साधु से मिल ने के बाद कोई दवा कहते प्रति कल 9 baje...jawan रहने की...
समर: तुम जानते हो तुम कहा कैद हो..
प्रकाश : मुझे बेहोश करके लाये ये log...jiju मेरी बेटी को बचा लो....
समर : मई ढूंढूंगा उसे...
मई : अब क्या करेंगे आप...
समर : जा रहा हों ढूढ़ने जब तक तुम्हारे बाप को नहीं ढूंढ लेता तब तक मुझे चैन नहीं मिलेगा ...
वो चले गए ...उनके जाने के 5 दिन बाद अख़बार में खबर आयी p.m चेंज हो गया hai...pita जी के बारे में था वो मर गए है..
दसमे दिन समर जी वापस ए...
मई : पिता जी को अपने mara...wo मिले आपको...
समर : तुम्हारा बाप जानवर बन गया वो इंसानी मॉस खाने लगा था मैंने उसे पागल तो कर दिया लेकिन मर नहीं पाया उसे कहीं छुपा दिया गया hai....un दोनों का कोई पता नहीं चला अभी तक...
मई : मुझे एना के घर जाकर सोना पड़ता है न जाने कब कोण अजय आप यही rahe...meri बात उन्होंने mani...aur घर रहने लगे...
वो अब गहरी सोंचो में बैठ जाते दिन हो या रत उनकी आंखे बंद hi रहती असल में वो भैरव और पंडित को ढूंढ रहे थे..
फिर वो भयानक दिन भी आया...
मई: मई बचो को लेने जा रही hon...jald आजाऊंगी...
समर : जाओ मई साथ hon...koi खतरा दिखे तो उससे बात karna...jab भी मई घर से बहार जाती वो मुझे यही कहते थे...
सोसाइटी से निकलते वक्त मुझे सोसाइटी जाते हुए कार दिखी....
मई पागल हो गयी thi....tab सामंथा आयी..
jiju....didi कहा गयी....
samantha..unhone आंखे बंद किये hi कहा..
सामंथा : आप के परिवार का सुनकर बहुत दुःख हुआ jiju....meri बेटी हुई है टीना...
समर : कैसे कहां congra.aur समर जी के आंसू निकलने लगे...
सामंथा : जीजू मई मिठाई लायी thi...ye खा लो आप...
समर : तुम किसके सामने कड़ी हो पता है तुम्हे....
सामंथा : jiju......wo मेरी टीना और डेविड मो मर denge...bacha लो unhe...Mai आपके पेअर पढ़ती हों... jiju...unhone खा है अगर मई ये आपको खिला डॉन तो वो उन्हें छोर देंगे और दीदी आपके बचो को भी...
समर जी मुझे देख रहे थे उनकी आँखों में उदासी थी...
सामंथा : समर ji...mai अपने एक बेटे को पहले hi खो चुकी hon...bacha लो मेरे घर को समर जी .और मैंने हाथ जोड़ लिए.......
समर : अपनी दीदी और मेरे बचो का ख्याल रखना....
आगे बढ़कर मैंने लड्डू उन्हें खिला Diya..us वक्त दीदी मेरे हाथ कैंप रहे they...didi....
क्या कभी अम्बर से
सूर्य बिछड़ता है
दीपक जलता है..
कैसी है ये अनहोनी
हर आंक हुयी नाम
छोड़ गया जो तू
कैसे जियेंगे हम
दीदी आँखों में ांसो लिए उन्होंने मुस्कुराते हुए खा लिया..... डीडीई माफ़ कर दो मुझे....
जब मई घर आयी तब उन्हें कुंडे में फांसी पैट लटका गए थे पंडित के log..unki सांसे चल रही थी मुँह से खून निकल रहा था....
अपने समर जी को इस तरह देख मई उसी समय पागल हो गयी....
सामंथा ने मुझे होश में न देख सब बता दिया ...
मुझे होश नहीं फिर तुम्हारे पापा के साथ क्या hua....shayad वो ज़ालिम उनकी बॉडी भी ले गए थे...
सामंथा तुमने ये क्या कर Diya....maa फुट फुट रोने लगी....