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अपडेट 97 - सरप्राइज
एक दिन कुछ ऐसा हुआ. संजना सान्वी को भाबी बुलाती थी. संजना और सान्वी में भी प्यार था. दोनों एक दूसरे को बहोत hi सपोर्ट करते थे. सान्वी उस्सको कोई किचन का काम नहीं करने देती. खुद सब करती थी. संजना के कपडे भी सान्वी hi वाशिंग मशीन में धोती और सूखने को भी डालती ऊपर छत पर. संजना के कपडे को स्त्री भी करती थी सान्वी. संजा को टिया, ब्रेकफास्ट, लुक डिनर सब सान्वी सर्वे करती थी वक़्त पर. संजना लाख काम करने को मांगती थी सान्वी से मगर वो कभी भी उस्सको कुछ भी नहीं करने देती थी. सान्वी संजना से कहती, “तुम अपने साहब के साथ मस्ती करो जब तक मैं काम निपटती हूँ, और दीप्ति का भी ख्याल रखो….” तो ऐसा रिश्ता और बॉन्डिंग थे दोनों के.
एक दिन कुछ ऐसा हुआ. चावला साहब के घर में बाथरूम को लेके एक रूल था हमेशा से. वो यह के बाथरूम कभी अंदर से लॉक नहीं होता था. लॉक था hi नहीं, सिर्फ दरवाज़ा था जो बांध होता था मगर कोई और भी उस दरवाज़े से बाथरूम के अंदर जा सकता था. उनके बाथरूम बहोत बड़ा था, एक बैडरूम के जितना बड़ा, क्यूंकि उसस्के अंदर शावर एक तरफ था, जकूज़ी था और बाथटब भी था…. दरवाज़े में इस लिए लॉक नहीं था क्यूंकि कोई हादसा पेश आने पर कोई भी बाहर से अंदर जा सकता… जैसे के किसी को दिल का दौड़ा पद गया और गिर्र कर बेहोश होगया अंदर को बाहर किसी को पता नहीं चलेगा तो अंदर जाकर पता कर सके के किआ माजरा है…. या कोई भी, किसी भी किस्सम का हादसा पेश आये तो बचाने के लिए बाहर से किसी का अंदर जाना आसान हो इस लिए दरवाज़े में लॉक नहीं था चावला साहब के घर में.
वो इस लिए के चावला साहब के फॅमिली में वैसा एक हादसा हुआ था और एक फॅमिली की सदस्य की मृत्यु हुई थी बाथरूम के अंदर और किसी को पता भी नहीं चला था. देर घंटे बाद जब वो सदस्य बाहर नहीं आरहे थे तब दरवाज़े को तोड़कर अंदर घुस्सना पड़ा और उस्सको डेड पाया गया बाथरूम के अंदर. तब से चावला साहब के घर में बाथरूम में कबि लॉक नहीं होता!!
तो एक दिन ऐसा हुआ के सान्वी नाहा रही थी दिन में अपने काम करने के बाद. चावला साहब और संजना दीप्ति के साथ लाउन्ज में थे के चावला साहब ने संजना से कहा, “तुम भी अंदर जाओ उसस्के साथ बाथ लेने मैं पीछे अत हूँ!!!” संजना खिल कर हँस्ते हुए राज़ी हुई… दीप्ति को अपने छोटे जेल में दाल दिया गेम के साथ और संजना एक शार्ट और एक ब्रा जैसी टॉप में अंदर गयी जब सान्वी बाथटब में रिलैक्स कर रही थी…. सान्वी ने उस्सको अंदर आते हुए देख कर कहा, “किआ हुआ?” तो संजना ने मुस्कुराते हुए कहा, “आज मैं अपने भाबी को नहाने आयी हूँ!!” सान्वी ने मुस्कुराते हुए कहा, “no, मैं खुद नाहा सकती हूँ जाओ यहाँ से तुम!” ठीक तभी पीछे से चावला साहब अंदर आये अपने बॉक्सर में!! सान्वी समझ गयी के दोनों मिले हुए हैं और नटखटी अंदाज़ में कहा, “ोफो किआ आप भी, जाइये नाह मुझको नहीं पसंद ऐसे!!”
चावला साहब संजना को देख रहे थे और संजना उनको, दोनों हंससने लगे और चावला साहब ने संजना से एक आंख मारा तो संजना झट से सान्वी के बाथटब में घुस गयी और सान्वी पर साबुन पानी चिराक्ने लगी और चावला साहब खड़े देखने लगे दोनों लेडीज को… सान्वी बिल्कुल नंगी थी और उसस्के बूब्स दिख रहे थे जिस्सको उस्सने अपने हाथों से ढाका था…. सान्वी ने भी संजना पर पानी फेंके, और उस्सकी टॉप गीली हो गयी तो उस्सने झट से वो ब्रा जैसी टॉप को उतार कर बैठ गयी पानी में सान्वी के बगल में, दोनों लेडीज के बूब्स नंगे थे और चावला साहब खड़ा देख रहा था तो सान्वी ने संजना से कहा, “बड़ी बेशरम है रे तू, उनके सामने ऐसे अपनी टॉप फेंक के बैठ गयी तुझे शर्म नहीं आती?” संजना ने कहा, “अरे भाबी, उंनसे किआ शर्म, उनको तो सब पता है सब देखा है उन्हों ने आप के भी तो साफ़ दिख रहे हैं देखो तो…” सान्वी ने कहा, “मैं तो फिर भी अपने हाथों से छुपा रही हूँ तू तो वैसे hi खुलम खुला सब दिखा रही है धत बेशरम कहीं की!”
तब तक चावला साहब ने अपना बॉक्सर निकला और एक कदम बाथटब के अंदर डाला तो सान्वी ने धीरे से चिल्लाते हुए कहा, “नहीं, आप मत आइये यहाँ मैं निकल रही हूँ….” मगर चावला साहब नंगे अंदर घुसे और अपने तन्ने हुए लुंड को सान्वी के मुंह के पास किया, मगर सान्वी ने संजना के चेहरे को देखा और हंससने लगी तो संजना ने चावला साहब के लुंड को अपने हाथों में लिया और अपने जीब को फेर्रा उसस्के ऊपर… सान्वी कसमसा सी गयी और संजना को उस तरह से उनके लिंग को चाटते हुए देख कर सान्वी के जिस्म में एक लेहेर सी daudi….usska चेहरा लाल हो गया, फिर भी वो टब से बाहर निकलने की कोशिश करने लगी मगर चावला साहब ने उसस्के काँधे पर हाथ रख कर रोका उस्सको…. और संजना ने उनके लुंड को मुंह में ले लिया, और सान्वी बैठी देखती रही, ज़ोरों से वो हांफने लगी थी संजना को देखते हुए तब चावला साहब ने संजना का एक हाथ अपने हाथ में लेकर सान्वी के बूब्स पर किया, सजाना समझ गयी और उस्सने एक हाथ से सान्वी के मुलायम बूब्स पर अपना हाथ फेर्रा और सहलाया, सान्वी ने उस्सको नहीं रोका बुसस सिहर गयी और चावला साहब के चेहरे में देखा जैसे नज़रों से उन् से पूछ रही थी के आप ने ऐसा क्यों किया…
संजना सान्वी के बूब्स सेहला रही थी और शामे टाइम चावला साहब के लुंड को मुंह में लिए हुए थी और तभी संजना ने सान्वी का एक हाथ अपने हाथ में लिया और उस्सको खुद अपने बूब पर किया….. तो अब दोनों औरतें एक दूसरे के बूब्स सेहला रहे थे, सान्वी ने अपनी ज़िन्दगी में अपनी माँ के इलावा किसी और औरत के बूब को कभी नहीं छुआ था आज पहली बार था के एक जवान लड़की की चूचियों को उस्सने हाथ लगाया था, एक अजीब से फीलिंग हुई थी, एक कशिश की तरह कुछ हुआ था जिस्म में और मैं के अंदर जो बयां से बाहर है…..
फिर चावला साहब ने अपने लुंड को सान्वी के तरफ किया तो संजना ने चूसना चोर्रा और सान्वी ने अपने मुंह में लिया उनके लिंग को, पहले सेहलायी, प्यार किया, छाता, संजना को देखा, मुस्कुरायी तब अपने मुंह में लिया और चुस्सने लगी…. तब तक संजना चावला साहब के जांघ पर अपने बूब को दबा कर रागढ रही थी, फिर अचानक संजना ने सान्वी के तरफ बढ़ते हुए, उसस्के बूब को सेक्लया और चुम्मा, फिर छठा और सान्वी के बूब को अपने मुंह में ले लिया संजना ने और सान्वी ने कुछ नहीं कहा बुसस चावला साहब को चुस्ती gayi…chawla साहब एहि देखना चाहता था के दोनों में कुछ होता है या नहीं और वो देख कर बहोत खुश हुआ के दोनों के बीच एक कम्प्लीसिटी है जो वो चाहता था हमेशा से… चावला साहब को बहोत मज़ा ारः था संजना को सान्वी के बूब को चूस्ते हुए देख कर और उस्सको अब छोड़ने को बड़ा मैं करने लगा था तो उस्सने सान्वी के मुंह से अपने लुंड निकला, संजना को झुकाया और पीछे के तरफ से उसस्के छूट के अंदर लुंड थुश दिया, संजना ने एक तड़पती आवाज़ में ऊफ्फ किया तो जल्दी से सान्वी ने संजना के चेहरे पर अपने हतेली को फेर्रा और उस्सने संजना को चूमा और अपने जीब को संजना के गालों पर फेर्रा…. चावला साहब ढके देने लगे संजना के अंदर, और संजना ने ज़ोर से सान्वी की बूब को हाथ से दबाया तब सान्वी ने भी संजना के बूब्स को थमा और सहलाने लगी….. ऐसा लग रहा था के संजना के तड़पने से सान्वी को तरस ारः था और वो संजना को कम्फर्ट कर रही थी उस्सको सहलाते और बहलाते हुए, जैसे एक बची को कोई कहता है, “ठीक है ठीक बुसस हो जाएगा फ़िक्र मत कर अभी हो जाएगा….” लगता था एक माँ अपनी बेटी को हौसला दे रही है किसी मुसीबत की घडी में….
जब चावला साहब के ढके रफ़्तार पकड़ने लगे तो संजना वैसे hi झुकी हुई थी मगर उस्सकी तड़प और भी ज़्यादा बढ़ने लगी तो सान्वी उसस्के गालों को करेस करती गयी और शो चूमती गयी, और उसस्के बॉब्स को चुस्सने लगी सान्वी जिस को देख कर चावला साहब का उतेजिना और भी बढ़ गया और अब वो सान्वी के अंदर घुस्सना चाहता था तो उस्सको हाथ से इशारा किया पीछे मुड़कर झुकने को…… तो सान्वी ने वही किया, झुक गयी वो भी उनके लिंग के सामने और चावला साहब ने संजना की छूट से लिंग निकल कर सान्वी के अंदर डाला और ढाका देने लगे एक से बढ़कर एक ज़बरदस्त धक्के देते गए सान्वी के अंदर चावला साहब और संजना अब सान्वी के जिस्म को चाट और चूस रही थी और कुछ hi देर में चावला साहब ने अपने लुंड को बाहर खिंचा कहाणररते हुए और लुंड को हाथ में ज़ोर से थामे हुए तो जल्दी से दोनों औरतों ने लुंड को पकड़ा और वीर्य दोनों के बूब्स पर गिरे, दोनों लेडीज के उँगलियाँ उनके लुंड पर फेरर रहे the…aur दोनों एक दूसरे के चेहरे में देखते हुए मुस्कुरा रहे थे लुंड को करेस करते hue….ab सान्वी लुंड को मुंह में लेने जा रही थी तभी संजना ने भी मुंह झुकाया लुंड को लेने के लिए तो सान्वी रुक गयी, तब संजना को समझ में आया के सान्वी लुंड लेने जा रही थी तो उस्सने सान्वी से कहा, तुम लो,” मगर सान्वी ने कहा, “नहीं तुम लेलो…” तो चावला साहब ने कहा, “अरे तुम दोनों hi लेलो नाह एक ऊपर का हिस्सा लो एक बीच में लेलो फिर चेंज कर लेना….”
और दोनों ने वही किया हँस्ते हुए…..
फिर चावला साहब अब टब में बैठे दोनों को एक एक तरफ अपने बाहों में भर के और दोनों उनके गाल, गाला, मुंह चाटने और चुस्सने लगे……
तो बे कॉन्टिनोएड…………… (3100 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस )
एक दिन कुछ ऐसा हुआ. संजना सान्वी को भाबी बुलाती थी. संजना और सान्वी में भी प्यार था. दोनों एक दूसरे को बहोत hi सपोर्ट करते थे. सान्वी उस्सको कोई किचन का काम नहीं करने देती. खुद सब करती थी. संजना के कपडे भी सान्वी hi वाशिंग मशीन में धोती और सूखने को भी डालती ऊपर छत पर. संजना के कपडे को स्त्री भी करती थी सान्वी. संजा को टिया, ब्रेकफास्ट, लुक डिनर सब सान्वी सर्वे करती थी वक़्त पर. संजना लाख काम करने को मांगती थी सान्वी से मगर वो कभी भी उस्सको कुछ भी नहीं करने देती थी. सान्वी संजना से कहती, “तुम अपने साहब के साथ मस्ती करो जब तक मैं काम निपटती हूँ, और दीप्ति का भी ख्याल रखो….” तो ऐसा रिश्ता और बॉन्डिंग थे दोनों के.
एक दिन कुछ ऐसा हुआ. चावला साहब के घर में बाथरूम को लेके एक रूल था हमेशा से. वो यह के बाथरूम कभी अंदर से लॉक नहीं होता था. लॉक था hi नहीं, सिर्फ दरवाज़ा था जो बांध होता था मगर कोई और भी उस दरवाज़े से बाथरूम के अंदर जा सकता था. उनके बाथरूम बहोत बड़ा था, एक बैडरूम के जितना बड़ा, क्यूंकि उसस्के अंदर शावर एक तरफ था, जकूज़ी था और बाथटब भी था…. दरवाज़े में इस लिए लॉक नहीं था क्यूंकि कोई हादसा पेश आने पर कोई भी बाहर से अंदर जा सकता… जैसे के किसी को दिल का दौड़ा पद गया और गिर्र कर बेहोश होगया अंदर को बाहर किसी को पता नहीं चलेगा तो अंदर जाकर पता कर सके के किआ माजरा है…. या कोई भी, किसी भी किस्सम का हादसा पेश आये तो बचाने के लिए बाहर से किसी का अंदर जाना आसान हो इस लिए दरवाज़े में लॉक नहीं था चावला साहब के घर में.
वो इस लिए के चावला साहब के फॅमिली में वैसा एक हादसा हुआ था और एक फॅमिली की सदस्य की मृत्यु हुई थी बाथरूम के अंदर और किसी को पता भी नहीं चला था. देर घंटे बाद जब वो सदस्य बाहर नहीं आरहे थे तब दरवाज़े को तोड़कर अंदर घुस्सना पड़ा और उस्सको डेड पाया गया बाथरूम के अंदर. तब से चावला साहब के घर में बाथरूम में कबि लॉक नहीं होता!!
तो एक दिन ऐसा हुआ के सान्वी नाहा रही थी दिन में अपने काम करने के बाद. चावला साहब और संजना दीप्ति के साथ लाउन्ज में थे के चावला साहब ने संजना से कहा, “तुम भी अंदर जाओ उसस्के साथ बाथ लेने मैं पीछे अत हूँ!!!” संजना खिल कर हँस्ते हुए राज़ी हुई… दीप्ति को अपने छोटे जेल में दाल दिया गेम के साथ और संजना एक शार्ट और एक ब्रा जैसी टॉप में अंदर गयी जब सान्वी बाथटब में रिलैक्स कर रही थी…. सान्वी ने उस्सको अंदर आते हुए देख कर कहा, “किआ हुआ?” तो संजना ने मुस्कुराते हुए कहा, “आज मैं अपने भाबी को नहाने आयी हूँ!!” सान्वी ने मुस्कुराते हुए कहा, “no, मैं खुद नाहा सकती हूँ जाओ यहाँ से तुम!” ठीक तभी पीछे से चावला साहब अंदर आये अपने बॉक्सर में!! सान्वी समझ गयी के दोनों मिले हुए हैं और नटखटी अंदाज़ में कहा, “ोफो किआ आप भी, जाइये नाह मुझको नहीं पसंद ऐसे!!”
चावला साहब संजना को देख रहे थे और संजना उनको, दोनों हंससने लगे और चावला साहब ने संजना से एक आंख मारा तो संजना झट से सान्वी के बाथटब में घुस गयी और सान्वी पर साबुन पानी चिराक्ने लगी और चावला साहब खड़े देखने लगे दोनों लेडीज को… सान्वी बिल्कुल नंगी थी और उसस्के बूब्स दिख रहे थे जिस्सको उस्सने अपने हाथों से ढाका था…. सान्वी ने भी संजना पर पानी फेंके, और उस्सकी टॉप गीली हो गयी तो उस्सने झट से वो ब्रा जैसी टॉप को उतार कर बैठ गयी पानी में सान्वी के बगल में, दोनों लेडीज के बूब्स नंगे थे और चावला साहब खड़ा देख रहा था तो सान्वी ने संजना से कहा, “बड़ी बेशरम है रे तू, उनके सामने ऐसे अपनी टॉप फेंक के बैठ गयी तुझे शर्म नहीं आती?” संजना ने कहा, “अरे भाबी, उंनसे किआ शर्म, उनको तो सब पता है सब देखा है उन्हों ने आप के भी तो साफ़ दिख रहे हैं देखो तो…” सान्वी ने कहा, “मैं तो फिर भी अपने हाथों से छुपा रही हूँ तू तो वैसे hi खुलम खुला सब दिखा रही है धत बेशरम कहीं की!”
तब तक चावला साहब ने अपना बॉक्सर निकला और एक कदम बाथटब के अंदर डाला तो सान्वी ने धीरे से चिल्लाते हुए कहा, “नहीं, आप मत आइये यहाँ मैं निकल रही हूँ….” मगर चावला साहब नंगे अंदर घुसे और अपने तन्ने हुए लुंड को सान्वी के मुंह के पास किया, मगर सान्वी ने संजना के चेहरे को देखा और हंससने लगी तो संजना ने चावला साहब के लुंड को अपने हाथों में लिया और अपने जीब को फेर्रा उसस्के ऊपर… सान्वी कसमसा सी गयी और संजना को उस तरह से उनके लिंग को चाटते हुए देख कर सान्वी के जिस्म में एक लेहेर सी daudi….usska चेहरा लाल हो गया, फिर भी वो टब से बाहर निकलने की कोशिश करने लगी मगर चावला साहब ने उसस्के काँधे पर हाथ रख कर रोका उस्सको…. और संजना ने उनके लुंड को मुंह में ले लिया, और सान्वी बैठी देखती रही, ज़ोरों से वो हांफने लगी थी संजना को देखते हुए तब चावला साहब ने संजना का एक हाथ अपने हाथ में लेकर सान्वी के बूब्स पर किया, सजाना समझ गयी और उस्सने एक हाथ से सान्वी के मुलायम बूब्स पर अपना हाथ फेर्रा और सहलाया, सान्वी ने उस्सको नहीं रोका बुसस सिहर गयी और चावला साहब के चेहरे में देखा जैसे नज़रों से उन् से पूछ रही थी के आप ने ऐसा क्यों किया…
संजना सान्वी के बूब्स सेहला रही थी और शामे टाइम चावला साहब के लुंड को मुंह में लिए हुए थी और तभी संजना ने सान्वी का एक हाथ अपने हाथ में लिया और उस्सको खुद अपने बूब पर किया….. तो अब दोनों औरतें एक दूसरे के बूब्स सेहला रहे थे, सान्वी ने अपनी ज़िन्दगी में अपनी माँ के इलावा किसी और औरत के बूब को कभी नहीं छुआ था आज पहली बार था के एक जवान लड़की की चूचियों को उस्सने हाथ लगाया था, एक अजीब से फीलिंग हुई थी, एक कशिश की तरह कुछ हुआ था जिस्म में और मैं के अंदर जो बयां से बाहर है…..
फिर चावला साहब ने अपने लुंड को सान्वी के तरफ किया तो संजना ने चूसना चोर्रा और सान्वी ने अपने मुंह में लिया उनके लिंग को, पहले सेहलायी, प्यार किया, छाता, संजना को देखा, मुस्कुरायी तब अपने मुंह में लिया और चुस्सने लगी…. तब तक संजना चावला साहब के जांघ पर अपने बूब को दबा कर रागढ रही थी, फिर अचानक संजना ने सान्वी के तरफ बढ़ते हुए, उसस्के बूब को सेक्लया और चुम्मा, फिर छठा और सान्वी के बूब को अपने मुंह में ले लिया संजना ने और सान्वी ने कुछ नहीं कहा बुसस चावला साहब को चुस्ती gayi…chawla साहब एहि देखना चाहता था के दोनों में कुछ होता है या नहीं और वो देख कर बहोत खुश हुआ के दोनों के बीच एक कम्प्लीसिटी है जो वो चाहता था हमेशा से… चावला साहब को बहोत मज़ा ारः था संजना को सान्वी के बूब को चूस्ते हुए देख कर और उस्सको अब छोड़ने को बड़ा मैं करने लगा था तो उस्सने सान्वी के मुंह से अपने लुंड निकला, संजना को झुकाया और पीछे के तरफ से उसस्के छूट के अंदर लुंड थुश दिया, संजना ने एक तड़पती आवाज़ में ऊफ्फ किया तो जल्दी से सान्वी ने संजना के चेहरे पर अपने हतेली को फेर्रा और उस्सने संजना को चूमा और अपने जीब को संजना के गालों पर फेर्रा…. चावला साहब ढके देने लगे संजना के अंदर, और संजना ने ज़ोर से सान्वी की बूब को हाथ से दबाया तब सान्वी ने भी संजना के बूब्स को थमा और सहलाने लगी….. ऐसा लग रहा था के संजना के तड़पने से सान्वी को तरस ारः था और वो संजना को कम्फर्ट कर रही थी उस्सको सहलाते और बहलाते हुए, जैसे एक बची को कोई कहता है, “ठीक है ठीक बुसस हो जाएगा फ़िक्र मत कर अभी हो जाएगा….” लगता था एक माँ अपनी बेटी को हौसला दे रही है किसी मुसीबत की घडी में….
जब चावला साहब के ढके रफ़्तार पकड़ने लगे तो संजना वैसे hi झुकी हुई थी मगर उस्सकी तड़प और भी ज़्यादा बढ़ने लगी तो सान्वी उसस्के गालों को करेस करती गयी और शो चूमती गयी, और उसस्के बॉब्स को चुस्सने लगी सान्वी जिस को देख कर चावला साहब का उतेजिना और भी बढ़ गया और अब वो सान्वी के अंदर घुस्सना चाहता था तो उस्सको हाथ से इशारा किया पीछे मुड़कर झुकने को…… तो सान्वी ने वही किया, झुक गयी वो भी उनके लिंग के सामने और चावला साहब ने संजना की छूट से लिंग निकल कर सान्वी के अंदर डाला और ढाका देने लगे एक से बढ़कर एक ज़बरदस्त धक्के देते गए सान्वी के अंदर चावला साहब और संजना अब सान्वी के जिस्म को चाट और चूस रही थी और कुछ hi देर में चावला साहब ने अपने लुंड को बाहर खिंचा कहाणररते हुए और लुंड को हाथ में ज़ोर से थामे हुए तो जल्दी से दोनों औरतों ने लुंड को पकड़ा और वीर्य दोनों के बूब्स पर गिरे, दोनों लेडीज के उँगलियाँ उनके लुंड पर फेरर रहे the…aur दोनों एक दूसरे के चेहरे में देखते हुए मुस्कुरा रहे थे लुंड को करेस करते hue….ab सान्वी लुंड को मुंह में लेने जा रही थी तभी संजना ने भी मुंह झुकाया लुंड को लेने के लिए तो सान्वी रुक गयी, तब संजना को समझ में आया के सान्वी लुंड लेने जा रही थी तो उस्सने सान्वी से कहा, तुम लो,” मगर सान्वी ने कहा, “नहीं तुम लेलो…” तो चावला साहब ने कहा, “अरे तुम दोनों hi लेलो नाह एक ऊपर का हिस्सा लो एक बीच में लेलो फिर चेंज कर लेना….”
और दोनों ने वही किया हँस्ते हुए…..
फिर चावला साहब अब टब में बैठे दोनों को एक एक तरफ अपने बाहों में भर के और दोनों उनके गाल, गाला, मुंह चाटने और चुस्सने लगे……
तो बे कॉन्टिनोएड…………… (3100 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस )