Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 11 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

अपडेट 97 - सरप्राइज

एक दिन कुछ ऐसा हुआ. संजना सान्वी को भाबी बुलाती थी. संजना और सान्वी में भी प्यार था. दोनों एक दूसरे को बहोत hi सपोर्ट करते थे. सान्वी उस्सको कोई किचन का काम नहीं करने देती. खुद सब करती थी. संजना के कपडे भी सान्वी hi वाशिंग मशीन में धोती और सूखने को भी डालती ऊपर छत पर. संजना के कपडे को स्त्री भी करती थी सान्वी. संजा को टिया, ब्रेकफास्ट, लुक डिनर सब सान्वी सर्वे करती थी वक़्त पर. संजना लाख काम करने को मांगती थी सान्वी से मगर वो कभी भी उस्सको कुछ भी नहीं करने देती थी. सान्वी संजना से कहती, “तुम अपने साहब के साथ मस्ती करो जब तक मैं काम निपटती हूँ, और दीप्ति का भी ख्याल रखो….” तो ऐसा रिश्ता और बॉन्डिंग थे दोनों के.

एक दिन कुछ ऐसा हुआ. चावला साहब के घर में बाथरूम को लेके एक रूल था हमेशा से. वो यह के बाथरूम कभी अंदर से लॉक नहीं होता था. लॉक था hi नहीं, सिर्फ दरवाज़ा था जो बांध होता था मगर कोई और भी उस दरवाज़े से बाथरूम के अंदर जा सकता था. उनके बाथरूम बहोत बड़ा था, एक बैडरूम के जितना बड़ा, क्यूंकि उसस्के अंदर शावर एक तरफ था, जकूज़ी था और बाथटब भी था…. दरवाज़े में इस लिए लॉक नहीं था क्यूंकि कोई हादसा पेश आने पर कोई भी बाहर से अंदर जा सकता… जैसे के किसी को दिल का दौड़ा पद गया और गिर्र कर बेहोश होगया अंदर को बाहर किसी को पता नहीं चलेगा तो अंदर जाकर पता कर सके के किआ माजरा है…. या कोई भी, किसी भी किस्सम का हादसा पेश आये तो बचाने के लिए बाहर से किसी का अंदर जाना आसान हो इस लिए दरवाज़े में लॉक नहीं था चावला साहब के घर में.

वो इस लिए के चावला साहब के फॅमिली में वैसा एक हादसा हुआ था और एक फॅमिली की सदस्य की मृत्यु हुई थी बाथरूम के अंदर और किसी को पता भी नहीं चला था. देर घंटे बाद जब वो सदस्य बाहर नहीं आरहे थे तब दरवाज़े को तोड़कर अंदर घुस्सना पड़ा और उस्सको डेड पाया गया बाथरूम के अंदर. तब से चावला साहब के घर में बाथरूम में कबि लॉक नहीं होता!!

तो एक दिन ऐसा हुआ के सान्वी नाहा रही थी दिन में अपने काम करने के बाद. चावला साहब और संजना दीप्ति के साथ लाउन्ज में थे के चावला साहब ने संजना से कहा, “तुम भी अंदर जाओ उसस्के साथ बाथ लेने मैं पीछे अत हूँ!!!” संजना खिल कर हँस्ते हुए राज़ी हुई… दीप्ति को अपने छोटे जेल में दाल दिया गेम के साथ और संजना एक शार्ट और एक ब्रा जैसी टॉप में अंदर गयी जब सान्वी बाथटब में रिलैक्स कर रही थी…. सान्वी ने उस्सको अंदर आते हुए देख कर कहा, “किआ हुआ?” तो संजना ने मुस्कुराते हुए कहा, “आज मैं अपने भाबी को नहाने आयी हूँ!!” सान्वी ने मुस्कुराते हुए कहा, “no, मैं खुद नाहा सकती हूँ जाओ यहाँ से तुम!” ठीक तभी पीछे से चावला साहब अंदर आये अपने बॉक्सर में!! सान्वी समझ गयी के दोनों मिले हुए हैं और नटखटी अंदाज़ में कहा, “ोफो किआ आप भी, जाइये नाह मुझको नहीं पसंद ऐसे!!”

चावला साहब संजना को देख रहे थे और संजना उनको, दोनों हंससने लगे और चावला साहब ने संजना से एक आंख मारा तो संजना झट से सान्वी के बाथटब में घुस गयी और सान्वी पर साबुन पानी चिराक्ने लगी और चावला साहब खड़े देखने लगे दोनों लेडीज को… सान्वी बिल्कुल नंगी थी और उसस्के बूब्स दिख रहे थे जिस्सको उस्सने अपने हाथों से ढाका था…. सान्वी ने भी संजना पर पानी फेंके, और उस्सकी टॉप गीली हो गयी तो उस्सने झट से वो ब्रा जैसी टॉप को उतार कर बैठ गयी पानी में सान्वी के बगल में, दोनों लेडीज के बूब्स नंगे थे और चावला साहब खड़ा देख रहा था तो सान्वी ने संजना से कहा, “बड़ी बेशरम है रे तू, उनके सामने ऐसे अपनी टॉप फेंक के बैठ गयी तुझे शर्म नहीं आती?” संजना ने कहा, “अरे भाबी, उंनसे किआ शर्म, उनको तो सब पता है सब देखा है उन्हों ने आप के भी तो साफ़ दिख रहे हैं देखो तो…” सान्वी ने कहा, “मैं तो फिर भी अपने हाथों से छुपा रही हूँ तू तो वैसे hi खुलम खुला सब दिखा रही है धत बेशरम कहीं की!”

तब तक चावला साहब ने अपना बॉक्सर निकला और एक कदम बाथटब के अंदर डाला तो सान्वी ने धीरे से चिल्लाते हुए कहा, “नहीं, आप मत आइये यहाँ मैं निकल रही हूँ….” मगर चावला साहब नंगे अंदर घुसे और अपने तन्ने हुए लुंड को सान्वी के मुंह के पास किया, मगर सान्वी ने संजना के चेहरे को देखा और हंससने लगी तो संजना ने चावला साहब के लुंड को अपने हाथों में लिया और अपने जीब को फेर्रा उसस्के ऊपर… सान्वी कसमसा सी गयी और संजना को उस तरह से उनके लिंग को चाटते हुए देख कर सान्वी के जिस्म में एक लेहेर सी daudi….usska चेहरा लाल हो गया, फिर भी वो टब से बाहर निकलने की कोशिश करने लगी मगर चावला साहब ने उसस्के काँधे पर हाथ रख कर रोका उस्सको…. और संजना ने उनके लुंड को मुंह में ले लिया, और सान्वी बैठी देखती रही, ज़ोरों से वो हांफने लगी थी संजना को देखते हुए तब चावला साहब ने संजना का एक हाथ अपने हाथ में लेकर सान्वी के बूब्स पर किया, सजाना समझ गयी और उस्सने एक हाथ से सान्वी के मुलायम बूब्स पर अपना हाथ फेर्रा और सहलाया, सान्वी ने उस्सको नहीं रोका बुसस सिहर गयी और चावला साहब के चेहरे में देखा जैसे नज़रों से उन् से पूछ रही थी के आप ने ऐसा क्यों किया…

संजना सान्वी के बूब्स सेहला रही थी और शामे टाइम चावला साहब के लुंड को मुंह में लिए हुए थी और तभी संजना ने सान्वी का एक हाथ अपने हाथ में लिया और उस्सको खुद अपने बूब पर किया….. तो अब दोनों औरतें एक दूसरे के बूब्स सेहला रहे थे, सान्वी ने अपनी ज़िन्दगी में अपनी माँ के इलावा किसी और औरत के बूब को कभी नहीं छुआ था आज पहली बार था के एक जवान लड़की की चूचियों को उस्सने हाथ लगाया था, एक अजीब से फीलिंग हुई थी, एक कशिश की तरह कुछ हुआ था जिस्म में और मैं के अंदर जो बयां से बाहर है…..

फिर चावला साहब ने अपने लुंड को सान्वी के तरफ किया तो संजना ने चूसना चोर्रा और सान्वी ने अपने मुंह में लिया उनके लिंग को, पहले सेहलायी, प्यार किया, छाता, संजना को देखा, मुस्कुरायी तब अपने मुंह में लिया और चुस्सने लगी…. तब तक संजना चावला साहब के जांघ पर अपने बूब को दबा कर रागढ रही थी, फिर अचानक संजना ने सान्वी के तरफ बढ़ते हुए, उसस्के बूब को सेक्लया और चुम्मा, फिर छठा और सान्वी के बूब को अपने मुंह में ले लिया संजना ने और सान्वी ने कुछ नहीं कहा बुसस चावला साहब को चुस्ती gayi…chawla साहब एहि देखना चाहता था के दोनों में कुछ होता है या नहीं और वो देख कर बहोत खुश हुआ के दोनों के बीच एक कम्प्लीसिटी है जो वो चाहता था हमेशा से… चावला साहब को बहोत मज़ा ारः था संजना को सान्वी के बूब को चूस्ते हुए देख कर और उस्सको अब छोड़ने को बड़ा मैं करने लगा था तो उस्सने सान्वी के मुंह से अपने लुंड निकला, संजना को झुकाया और पीछे के तरफ से उसस्के छूट के अंदर लुंड थुश दिया, संजना ने एक तड़पती आवाज़ में ऊफ्फ किया तो जल्दी से सान्वी ने संजना के चेहरे पर अपने हतेली को फेर्रा और उस्सने संजना को चूमा और अपने जीब को संजना के गालों पर फेर्रा…. चावला साहब ढके देने लगे संजना के अंदर, और संजना ने ज़ोर से सान्वी की बूब को हाथ से दबाया तब सान्वी ने भी संजना के बूब्स को थमा और सहलाने लगी….. ऐसा लग रहा था के संजना के तड़पने से सान्वी को तरस ारः था और वो संजना को कम्फर्ट कर रही थी उस्सको सहलाते और बहलाते हुए, जैसे एक बची को कोई कहता है, “ठीक है ठीक बुसस हो जाएगा फ़िक्र मत कर अभी हो जाएगा….” लगता था एक माँ अपनी बेटी को हौसला दे रही है किसी मुसीबत की घडी में….

जब चावला साहब के ढके रफ़्तार पकड़ने लगे तो संजना वैसे hi झुकी हुई थी मगर उस्सकी तड़प और भी ज़्यादा बढ़ने लगी तो सान्वी उसस्के गालों को करेस करती गयी और शो चूमती गयी, और उसस्के बॉब्स को चुस्सने लगी सान्वी जिस को देख कर चावला साहब का उतेजिना और भी बढ़ गया और अब वो सान्वी के अंदर घुस्सना चाहता था तो उस्सको हाथ से इशारा किया पीछे मुड़कर झुकने को…… तो सान्वी ने वही किया, झुक गयी वो भी उनके लिंग के सामने और चावला साहब ने संजना की छूट से लिंग निकल कर सान्वी के अंदर डाला और ढाका देने लगे एक से बढ़कर एक ज़बरदस्त धक्के देते गए सान्वी के अंदर चावला साहब और संजना अब सान्वी के जिस्म को चाट और चूस रही थी और कुछ hi देर में चावला साहब ने अपने लुंड को बाहर खिंचा कहाणररते हुए और लुंड को हाथ में ज़ोर से थामे हुए तो जल्दी से दोनों औरतों ने लुंड को पकड़ा और वीर्य दोनों के बूब्स पर गिरे, दोनों लेडीज के उँगलियाँ उनके लुंड पर फेरर रहे the…aur दोनों एक दूसरे के चेहरे में देखते हुए मुस्कुरा रहे थे लुंड को करेस करते hue….ab सान्वी लुंड को मुंह में लेने जा रही थी तभी संजना ने भी मुंह झुकाया लुंड को लेने के लिए तो सान्वी रुक गयी, तब संजना को समझ में आया के सान्वी लुंड लेने जा रही थी तो उस्सने सान्वी से कहा, तुम लो,” मगर सान्वी ने कहा, “नहीं तुम लेलो…” तो चावला साहब ने कहा, “अरे तुम दोनों hi लेलो नाह एक ऊपर का हिस्सा लो एक बीच में लेलो फिर चेंज कर लेना….”

और दोनों ने वही किया हँस्ते हुए…..

फिर चावला साहब अब टब में बैठे दोनों को एक एक तरफ अपने बाहों में भर के और दोनों उनके गाल, गाला, मुंह चाटने और चुस्सने लगे……

तो बे कॉन्टिनोएड…………… (3100 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस )
 
अपडेट 98 चावला एंड सान्वी गेट ा शॉक

तो इस से अब यह साबित हुआ के सान्वी और संजना ने एक दूसरे के जिस्म को पहचान लिया. अस्सल में सान्वी अक्सर सोचा करती थी के चावला साहब क्यों संजना से पहले सेक्स कर बैठे थे उस से पहले. सान्वी सोचती रहती संजना की शादी से पहले के संजना में ऐसा किआ है के चावला साहब ने उस्सको घर की बहु के लिए चोसे किया था और खुद उसस्के साथ इश्क कर बैठे, ऐसा किआ है संजना में, एक दिन सान्वी ने गहराई में जाकर सोचा था के संजना का जिस्म कैसा होगा के चावला साहब उस पर लाटू हुए थे, तो कुछ हद तक अब सान्वी को पता चल गया जब दोनों औरतें नंगी हुए थे एक दूसरे के साथ चावला साहब से सेक्स करते हुए. सान्वी ने ऐसा कभी भी नहीं सोचा था के किसी दिन चावला साहब दोनों को एक साथ नंगा करेंगे, यह सान्वी के सोच के बिल्कुल बाहर था, मगर ऐसा लगा था के संजना को इस्सके पहले से खबर थी या संजना के लिए यह एक मामूली बात थी. ऐसा सान्वी को लगा था जिस वक़्त तीनों एक साथ थे. सान्वी को आज तक यह नहीं पता चला था के सान्वी कितने और लोगों के साथ सेक्स कर चुकी है यह बात सिर्फ चावला साहब को पता था और उन्हों ने सान्वी को इस बात के बारे में कुछ नहीं बताया था और संजना को भी बताने के लिए मन किया हुआ था.

तो उस बाथरूम वाले एनकाउंटर के बाद जब सान्वी और चावला साहब अकेले मिले तो सान्वी ने चावला साहब से कहा, “क्यों जी, आप ने ऐसा क्यों किया हम दोनों को एक साथ क्यों नंगा किये आप ने? मेरे जिस्म को कभी एक औरत ने वैसे नहीं छुआ था कभी, मुझे बहोत hi अजीब लग रहा था मगर वो संजना तो मज़े ले रही थी बहोत, उस्सकी आदत है किआ यह सब करने की?” चावला साहब ने हँस्ते हुए सान्वी को जवाब दिया था के संजना की कोई आदत नहीं वो सब करने की, सब कुछ चावला साहब ने खुद करना चाहा था और उसी ने संजना को बाथरूम के अंदर जाने के लिए कहा था और सब जो हुआ अपने आप हुआ था, किसी ने कुछ प्लान नहीं किया था.

चावला साहब उस वक़्त सान्वी को बाहों में भरके लाउन्ज में टीवी सेट के सामने बैठे हुए थे और अपने व्हिस्की सिप कर रहे थे और संजना दीप्ति को लेकर अपने पापा के यहाँ गयी हुई थी. शाम के 5 बजे हुए थे और इन् दोनों के सिवा घर में कोई भी नहीं था. सान्वी किचन से के काम ख़तम करके किचन वाले दरवाज़े को क्लोज किया, लॉक नहीं क्यूंकि वो दरवाज़ा दिन में कभी भी लॉक नहीं होता ताके कोई भी गेराज से अंदर आ सके कार रखने के बाद, गेराज और किचन को लिंक करने वाला दूर सिर्फ रात को लॉक होता है अंदर से जब घर के सब लोग घर में वापस आगये हो तब….

तो यह दोनों प्यार में डूबे आशिकों की तरह एक दूसरे के बाहों में मज़े से प्यार से बातें कर रहे थे. चावला साहब एक शार्ट में थे और सान्वी एक कासुअल ड्रेस में थी. वैसे संवी हमेशा साडी में रहती थिग हर में, मगर जब से संजना घर में आयी है और क्यूंकि वो ड्रेस और two-piece में रहती है तो सान्वी ने आदत दाल ली घर में वैसे ड्रेस पेहेन्ने की. साडी भी पहनती थी किसी दिन. मगर संजना को साडी पहने की आदत बिल्कुल भी नहीं थी. वो तो घर में अक्सर शॉट्स में भी रहती थी. मगर सान्वी कभी भी शार्ट नहीं पहनती थी.

जिस ड्रेस में इस वक़्त सान्वी थी वो ठीक उसस्के घुटनों तक रीच होते थे और छाती पर एक वक्त होने की वजह से उस्सकी क्लीवेज काफी नज़र आरहे थे और जब चावला साहब की बाहों में थी तो तक़रीबन उसस्के बूब्स बाहर निकलने जैसे नज़र आते थे. और चावला साहब का हाथ कभी उसस्के छाती पर या तो उसस्के घुटनों के ऊपर से डॉर्स के निचे उसस्के जाँघों पर फिररते नज़र आते थे.

चावला साहब ने सान्वी को चूमते हुए पूछा, “तुमको कैसा लगा था जब संजना ने तुम्हारे बूब को हाथ लगाया था?” सान्वी ने मुस्कुराते हुए जवाब में उंनसे सवाल किया, “आप बताइये आप को कैसा लगा था जब उस्सने मेरे बूब को छुआ था? आप तो बड़े मज़े से देख रहे थे हम दोनों को उस हाल में!” चावला साहब हँसे और कहा, “मुझे तो सच में बेहद मज़ा ारः था, और मुझे तो लगता था तुम एक दूसरे को किश करने वाले हो!” सान्वी ने कहा, “किश तो कई बार किया था संजना ने मुझे मेरे गालों पर और मेरे गर्दन पर भी किआ आप ने नहीं देखा था?”

चावला साहब ने कहा, “वो वाला किश नहीं पुगली, मैं असली वाला मुंह में मुंह वाला किश कह रहा हूँ!” तब सान्वी बोली, “मुझे तो लगता था के वो मुझे वैसे भी किश करने वाली है मुझे अजीब लग रहा था मगर आप साथ थे तो मुझे अच्छा लग रहा था की आप हो तो कुछ ग़लत तो नहीं होगा मेरे साथ!” चावला साहब ने कहा, “किआ ग़लत होता, अगर उस्सने तुमको किश भी किया होता तो किआ ग़लत होता बल्कि करना चाहिए था, सब कुछ वही कर रही थी तुम तो कुछ भी नहीं कर रही थी, बुसस उस्सको करने देती जा रही थी, क्यों तुमको वैसा मैं नहीं कर रहा था किआ?” सान्वी ने कुछ नटखटी ऐडा में कहा, 2नै, मुझे तो बुसस आप दिख रहे थे उस वक़्त, मैं आप को संजना के साथ देख रही थी खुद को भूल चुकी थी मैं…”

तब चावला साहब के मैं में एक और ख्याल आया के सान्वी, संजना और उनको शायद सेक्स करते हुए देखना पसंद करती है या देखना चाहती है…. तो चावला साहब ने सोचा के अब बीएड पर जब वो संजना के साथ सेक्स करेगा तो सान्वी के सामने करेगा और देखेगा के सान्वी कितना एन्जॉय करती है और किआ उन् दोनों को ज्वाइन करती है के नहीं!! और कभी उल्टा भी कर सकता है के जब वो सान्वी के बीएड पर उसस्के साथ सेक्स कर रहा होगा तब संजना को बुलाएगा ज्वाइन करने को, यह तो पक्का था के संजना ज़रूर ज्वाइन करेगी मगर बात सान्वी किट hi किआ वो वैसा एक्शन पसंद करेगी?

चावला साहब सान्वी को ज़्यादा ओपन करना चाहते थे सेक्स को लेकर, सान्वी को सेक्स की एब्स जैसे सीखा रहे थे, वो सान्वी को संजना तो नहीं बनाना चाहते थे मगर देखना चाहते थे किआ सान्वी में संजना की तरह कैपेसिटी है सेक्स को लेकर उतना आगे तक जाने के लिए…. दूसरे मर्दों के साथ तो सान्वी को कभी भी नहीं सोचा था उस्सने बल्कि जेलस थे सान्वी को लेकर के वो किसी और मर्द के साथ कभी भी जाए मगर संजना के साथ ज़रूर देखना पसंद करते थे सान्वी को….

सान्वी उंनसे से लिपटी हुई टी काउच पर बैठे हुए और उनके गर्दन पर किश किये जा रही थी बातें करते हुए. सेक्स तो नहीं करते क्यूंकि सेक्स करने के बाद बैठे थे वहां. और एक बहोत अजीब बात हुई जो किसी ने बिल्कुल नहीं सोचा था, चावला साहब या सान्वी ने भी बिल्कुल भी नहीं सोचा था के वैसा होगा कभी…… आरव की आवाज़ अचानक आयी किचन के तरफ से “भाबी?” !!!!

आरव उस वक़्त घर के अंदर कैसे आया? क्यों आया? किआ देखा उस्सने? कब से आया हुआ था घर में? घर के अंदर आने से पहले तो उस्सकी कार को गेट से अंदर आना चाहिए था और तब तक घर के अंदर से इन् दोनों को दिख जाता और दोनों अलग हो जाते, पहले आरव कार को पार्क करता गेराज में तब घर के अंदर अत तो फिर अभी कैसे वो घर के अंदर था?... अगले अपडेट में देखते हैं…..

तो बे कॉन्टिनोएड...….
 
अपडेट 99 बोथ ात लास्ट रेलिएवेद

तो कैसे आरव शाम के 5 बजे घर के अंदर था और उस्सने किआ देखा?

हुआ यह के आरव संजना को सरप्राइज करना चाहता था अर्ली ऑफिस वापस आकर. तो उस्सने कार को घर के बाहर जान बूझकर पार्क किया और आहिस्ते से गेराज वाले दूर से किचन में गया और किचन से लाउन्ज में, किचन का दूर दिन में अनलॉक रहता है हमेशा.

अब किचन से लाउन्ज जॉइंट था, मगर एक लशप था और अक्सर सान्वी किचन से चावला साहब को अपने व्हिस्की सिप करते हुए देखते थे पहले सबको याद होगा, मगर वो हिस्सा जहाँ इस वक़्त यह दोनों बैठर हुए थे किचन से पीठ करता था, मतलब जब आरव किचन से लाउन्ज के तरफ बढे तो कुछ तो देखा उस्सने वो किआ था?

जो आरव को नज़र आया वो था काउच पीछे के तरफ से और ऊपर दो सर, एक चावला साहब के एक सान्वी के, और दोनों सर एक दूसरे से सट्टे हुए थे, तो वो आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता गया तो एक चीज़ जो उस्सको बहोत ताजुब लगा वो यह थी के सान्वी की ड्रेस काफी ऊपर तक उठी हुई थी और उस्सकी जाँघों को देखा आरव ने तभी उस्सने फुकरा था “भाबी” मगर उस्सने नाह सान्वी को किश करते देखा, नाह सान्वी को अपने बाप के बाहों में देखा, और नाह उस वक़्त चावला साहब के हाथ सान्वी के जाँघों पर tha..luckily उस वक़्त चावला साहब टेबल से अपना व्हिस्की का गिलास उठा रहे थे थोड़ा झुक कर, सान्वी का एक पाऊँ मुद्दे हुए थे काउच पर और एक पाऊँ जो निचे ज़मीन पर थी वो वाला आरव को दिखा जिस पर ड्रेस ऊपर उठे हुए थे, और वो उठे इस लिए थे क्यूंकि उस्सको कुछ देर पहले चावला साहब ने उठाया था अपने हाथ से सान्वी के जांघ को सहलाते हुए…..

जिस वक़्त आरव की आवाज़ इन् दोनों के कान में आये झट से सान्वी उठ कड़ी हुई दाएं के तरफ मूढ़ते हुए और चावला साहब के हाथ से व्हिस्की का गिलास करीबन छूटने को थे…. वो भी खड़ा हो गया और दोनों बिल्कुल हकबका गए आरव को घर के अंदर देख kar….Aarav को उन् दोनों के चेहरे के रंग को बदलते हुए देख कर अजीब लगा, और सान्वी कड़ी होकर अपनी ड्रेस को सीधा करने लगी उसस्के चेहरे में देखते हुए फिर अपने बाल को सवार और पूछा, “अरे आरव तुम कब आये और कार कहाँ है तुम्हारा?” आरव ने मुस्कुराते हुए, उस्सको और अपने पापा को देखते हुए कहा, “नहीं बुसस ऐसे hi मैं संजना को सरप्राइज करना चाहता था तो कार को रास्ते पर hi चोरर कर आया हूँ अभी वापस अंदर करूँगा, कहाँ है वो?” आरव बात करते वक़्त कभी अपने बाप को तो कभी सान्वी के चेहरे में देख रहा था और उस्सको लग रहा था जैसे दोनों उस से कुछ छुपा रहे थे या डर गए थे उसस्के अचानक आने से….

जब आरव ने उतना कहा तो सान्वी ने सिचुएशन को संभालते हुए उसस्के तरफ बढ़ते हुए कहा, “ोफो आरव तुमको नहीं पता के वो अपने पापा के यहाँ गयी हुई है, दीप्ति को भी साथ लगाई है! चलो कार को अंदर करो मैं तुम्हारे लिए कुछ फ्रेश पिने के लिए सर्वे करती हूँ…” और सान्वी मुड़कर चावला साहब को देखते हुए दांतों में जीब दबाती है…..

आरव ने कहा, “okay तो फिर मैं भी चला जाता हूँ उस्सको वही सरप्राइज देने….” तब संवी ने कहा, “अरे तो वो तो अपनी कार में गयी है और तुम अपने कार में जाओगे, वो थोड़ी देर में आने hi वाली है वापस, हो सकता है जब तुम वहां पहुंचो तो वो निकल गयी होगी, यहीं वेट करो नाह उस्का!” तब आरव ने कहा “okay तो फिर ठीक है मैं कार अंदर करता हूँ भाबी!” और वो चला गया कार को गेराज में अंदर करने को.

तब सान्वी ने धीरे से चावला साहब के तरफ बढ़ते हुए कहा, “ओह माय गॉड पता नहीं उस्सने किआ देखा और कैसे देखा हम दोनों को! पता नहीं कब से आया हुआ था?! मुझे घबराहट हो रही है!”

चावला साहब ने सान्वी को समझाते हुए और हौसला देते हुए कहा, “उसस्के बातों से बिल्कुल नहीं लगता के उस्सने कुछ ऐसा वैसा देखा, उल्टा हम दोनों उस्सको शक कराएंगे अगर हम ऐसे घबराये तो, उसस्के साथ बिल्कुल नार्मल बेहवे करो जैसे कुछ एब्नार्मल नहीं हुआ, उस से बातें करो मामूली तौर से और अगर कुछ देखा है तो खुद तुमसे कोई नाह कोई वैसा सवाल करेगा…. मैं भी घबरा गया अचानक उस्सकी आवाज़ पीछे सुनके, और मेरी समझ में नहीं आया के मैं उस्सको किआ कहूं…. हम सोच रहे थे हम घर में अकेले हैं इस लिए हम बिल्कुल खुलके एक दूसरे के साथ थे, ऐसा आज पहली बार हुआ, लगता के आज के बाद उस किचन के दरवाज़े को दिन में भी लॉक करना पड़ेगा नहीं तो एक दिन हम फंस सकते हैं!!”

तब सान्वी ने पूछा, “अगर उस्सने कुछ ज़्यादा देखा होगा जब मैं आप को चुम रही थी या जब आप मेरे जिस्म पर हाथ फेरर रहे थे और वो मुझसे कहे के उस्सने मुझको आप को किश करते हुए देखा तो किआ जवाब दूंगी आप बताइये?!”

चावला साहब ने कहा, “ऐसा कुछ नहीं पूछेगा वो मेरा यकीन करो, पूछना होता तो अभी इसी वक़्त पूछता, हैरान होता, उसस्के चेहरे का रंग बदल गया होता, या वो छुप कर और ज़्यादा देखने की कोशिश करता… उस्सने कुछ भी नहीं देखा मेरा यकीन करो तुम… और अगर उस्सने ऐसा कुछ कहा भी तब मेरे पास आना तुरंत उस्सको जवाब दिए बिना, तब मैं उस से बात करूँगा!”

सान्वी ने पूछा, “किआ बात करोगे तब आप उस से? बोलिये? उस्सको बताओगे के हमारे बीच ऐसा सम्बन्ध है? किआ सोचेगा वो मेरे बारे में तब के मैं एक गन्दी बहु हूँ आप की? हैं? बोलिये नाह!”

चावला साहब ने कहा, “आरी तुम इतना फ़िक्र क्यों कर रही हो जब कुछ हुआ hi नहीं? उस्सने तो कुछ नहीं पूछा अभी नाह? अगर वो पूछेगा तबकी तब देखेंगे अभी फ़िक्र करना बांध करो, देखो वो कार गेराज के अंदर कर चूका है अब अंदर आएगा जाओ तुम उस्सको कुछ खाने पिने को दो और पूछना कैसे आज इतना जल्दी आगया और विवान कब आएगा पूछो उस से!! जाओ जाओ!!”

सान्वी चली गयी किचन में और आरव का वेट किया और जब वो वापस अंदर आया तो सान्वी ने एक गहरी सांस लेते हुए, चावला साहब के तरफ एक बार देख कर आरव से कहा, “तो साहब आज इतनी जल्दी कैसे आगये हम्म? तुम्हारा भैया कब आएगा आज? वो भी आ रहे हैं?”

आरव ने मुस्कुराते हुए कहा, “आरी भाबी शादी जो कर लिया है अब तो जल्दी आना पढता है नाह? भैया भी तो ऐसे hi जल्दी आया करता था जब आप की नयी नयी शादी हुई थी याद है? हम्म मुझे तो सब याद है हेहेहे!” तब सान्वी को तस्सली हुई के शायद आरव ने उस्सको चावला साहब के ज़्यादा करीब नहीं देखा और कहा, “चल झूटा, तेरे भैया तो सिर्फ शादी के पहले हफ्ते अर्ली आये थे बाकी तो वो हमेशा देर रात को hi आते हैं!”

आरव जल्दी से ऊपर अपने कमरे में गया चेंज किया और एक टीशर्ट और शार्ट में वापस निचे आया और सान्वी के पास बैठ कर गप्पे मारने लगा अपने भाबी के साथ. चावला साहब लाउन्ज में व्हिस्की पिटे हुए दोनों के तरफ देख रहे थे और कभी कभी सान्वी उनके तरफ देखते हुए आरव से बातें किये जा रही थी. चावला साहब को सुनाई तो नहीं दे रहा था के किआ बातें हो रहे थे दोनों में मगर उस्सको दिख गया के सब नार्मल है आरव ने कुछ नहीं देखा था उन् दोनों के बीच.

तो बे कॉन्टिनोएड…………….
 
अपडेट 100 सान्वी एंड आरव

सान्वी ने आरव को जूस और कुछ खाने को सर्वे किया और डाइनिंग टेबल पर दोनों बैठे बात किये जा रहे थे और आरव ने कहा, “भाबी आप को ज़्यादा तर साडी में देखा है मैं ने कुछ दिनों से आप को ड्रेस या two-piece में देख रहा हूँ आप ऐसे ड्रेस में यंगर दीखते हो पता है?”

सान्वी खुले मुंह आरव को देखते हुए कहा, “सच? अरे तू कबसे मुझे ऐसे देखने लगा हम्म? किआ बात है संजना का खुमार चढ़ा हुआ है लगता है, उस्सको मिस कर रहा है बहोत ज़्यादा किआ? अति hi होगी थोड़ा साबरा करले नाह!”

आरव ने मुस्कुराते हुए कहा, “लो कल्लो बात मैं आप की बात कर रहा हूँ और आप संजना की बात कर रहे हो, क्यों भैया ने नहीं कहा के आप ज़्यादा यंग दीखते हो ऐसे ड्रेस में?” सान्वी ने चावला साहब को एक नज़र लाउन्ज के तरफ देखते हुए आरव को जवाब दिया, “तुम्हारे भैया को कब टाइम है मेरे तरफ देखने को आरव? वो तो मुझे तब देखेगा जब मैं चेंज कर चुकी हूँगी, वो तो मुझे सिर्फ निघ्त्य में hi देखता है, सुबह उठती हूँ तो उसी निघ्त्य में होती हूँ जो रात को पहनी थी और कब चेंज करती हूँ उस्सको कहाँ से पता? हाँ सिर्फ संदेस को देखता है मुझे दिन में वो!”

तो आरव ने कहा, “चलो कोई बात नहीं पापा तो देखते हैं नाह आप को. आप उसस्के बहोत क्लोज हो नाह?”

अब सान्वी का मैं खांका आरव के इस बात को सुनकर और एक लाली चा गयी उसस्के चेहरे पर और उसस्के समझ में नहीं आया के आरव को किआ जवाब दें. सान्वी ने चावला साहब को देखा लाउन्ज में और एक नकली मुस्कराहट में आरव से कहा, “ोफो तुम भी नाह पता नहीं किआ उठपटां बातें करते हो, जाओ अब अपना शावर लेलो संजना के आने से पहले!”

तो आरव ने कहा, क्यों तुम और पापा क्लोज नहीं हो किआ? तुम दोनों दिन भर अकेले रहते हो इतने सालों से मुझे पता है तुम और पापा कितने क्लोज हो और भैया अक्सर कहता रहता है नाह के पापा आप के दूसरे हस्बैंड है और मैं तीसरा हाहाहा! भैया भी नाह आप को चीयर करने के लिए हम दोनों को आप के ख्याल के लिए चोरर देता है और आप भी किआ करती हम से hi ज़्यादा क्लोज होना पारा, याद है मैं कितना दूर भागता था आप से शुरू में भाबी?! हहहहहए!”

तब सान्वी का मैं फिर से हल्का हुआ और कहा, “हाँ तू तो इतना शर्मीला था और 6 महीने लगे थे मुझे तुम्हारे क्लोज आने ko…mujhse एक बात भी नहीं करता था तू!!! यह बता तू संजना से कैसे क्लोज हुआ? मुझे फ़िक्र था के तू उस से भी शरमाएगा हम्म?!”

आरव ने कहा, “संजना?! हम्म वो तो इतनी ओपन है के खुद वही मेरे इतने क्लोज हुए के मुझे उस से बिल्कुल भी देर नहीं लगी क्लोज होने में और इतनी खूबसूरत और चुलबुली है के बहोत आसान था उसस्के करीब जाना, याद है पहला दिन मांगनी वाली, उसी शाम को मैं उसस्के करीब हो गया था…. बहोत इजी था मेरे liye…ussko किश भी कर लिया था उसी रोज़ दीद यू क्नोव तहत हेहेहे!”

सान्वी ने सरप्राइज लुक देते हुए उस से कहा, “अच्छा? रियली? वह बीटा तू तो छुपा रुस्तम निकला रे!”

आरव ने हँस्ते हुए कहा, यह सब आप की मेहेरबानी थी भाबी, आप ने मुझको लड़कियों से बात करने की और क्लोज होने की हिम्मत दिलाई थी. अगर आप इस घर में नहीं होते और मेरे करीब नहीं आते तो मैं शायद कभी भी संजना के करीब नहीं हो पता…. उस के तरफ बढ़ने के लिए मैं हर बार आप को सोच रहा था के किश तरह से आप से पहली बार बात किया था किश तरह से आप मुझसे बातें किया करती थी… और आप के साथ रहने के बाद मुझे लड़कियों के बारे में ज़्यादा पता चला था, तो संजना के करीब होने की वजह आप हो भाबी थैंक यू वैरी मच मुझको ऐसा बनाना के लिए….”

सान्वी मुस्कुरा रही टी उन् दिनों को याद करते हुए जीन दिनों वो नयी नयी शादी करके इस घर में आयी थी और किश तरह से वो आरव के करीब होने की कोशिश किया करती थी.

जब आरव सान्वी को थैंक यू बोल रहा था तो उस्सने सान्वी के दोनों हाथों को अपने हाथ में लेकर कहा था; ठीक उसी वक़्त चावला साहब किचन में आये थे आइस कुबेस लेने के लिए और झट से सान्वी ने अपना हाथ खींचा था आरव के हाथ से और चावला साहब ने देखा था. वैसा पहले भी बहोत बार हुए थे जब चावला साहब ने आरव को या तो सान्वी के काँधे पर हाथ रखे हुए देखा था या उसस्के हाथ थामे हुए. सान्वी और आरव की दोस्ती गहरी थी और बहोत बनता था दोनों में यह चावला साहब को पता था के दोनों अच्छे दोस्त थे और वो खुश था उस से. मगर अभी जिस तरह से चावला साहब ने सान्वी को अपने हाथ को आरव के हाथों से खींचता हुआ देखा तो उस्सको थोड़ा सा उत्पातां लगा. मगर उस ने कुछ नहीं कहा और वापस लाउन्ज में चले गए और सान्वी उस्सको नज़रों से फॉलो करती गयी जब तक वो काउच पर वापस जा कर बैठे. और बैठते वक़्त चावला साहब ने मुड़कर वापस सान्वी को देखा और दोनों के नज़रें मिले. आरव भी देख रहा था के सान्वी उसस्के पापा को देख रहे हैं तो पूछा, “किआ हुआ? पापा आप से नाराज़ है किआ?”

तो सान्वी ने हैरान होते हुए आरव से पूछा, “क्यों? नहीं तो? ऐसा क्यों पूछा तुमने आरव?” तो आरव ने कहा, “नहीं मुझे अजीब लगा के वो यहाँ आया, आइस क्यूब लिए और बिना कुछ कहे वापस चले गए आप से कुछ तो हमेशा कहता रहता है वो! और आप भी उनको यहाँ से जाते हुए घुर्र रही हो जैसे कुछ हुआ है आप दोनों के बीच! कोई प्रॉब्लम हुई किआ भाबी?”

सान्वी ने सोचा के उस्सकी ऐसे व्योहार से वो खुद शक पैदा कर रही है आरव के मैं में तो उस से कहा, “अरे तू भी पता नहीं किआ किआ सोच रहा है ऐसा कुछ भी तो नहीं हुआ, मैं यह देख रही थी के वो कितने पी रहे हैं मैं उस्सको ज़्यादा से ज़्यादा 4 पेग पिने को देती हूँ और अब इस लिए के तुझसे बात कर रही हूँ तो वो छुप छुप के 5 या 6 पेग्स पी लिए होंगे वही देख रही थी मैं!!”

तब आरव ने कहा, “ओह यह बात है आप उसस्के ड्रिंक्स को कण्ट्रोल करते हो और आज उस्सको मौका मिल गया ज़्यादा पीने को हाहाहाहा!! उस्सने मौके का फायदा उठाया हाहाहा!”

सान्वी ने भी हँस्ते हुए कहा, “हाँ अब आयी बात समझ में बुद्धू!”

तब आरव ने धीरे से कहा, “भाबी मुझे आप से एक बहोत प्राइवेट बात करनी है, बात संजना के बारे में है मगर प्लीज इस्को सीक्रेट रखना यह सिर्फ मेरे और आप के बीच रेहनी चाहिए, पहले आप प्रॉमिस करो के आप इस बात को कभी भी संजना से नहीं करोगी, प्रॉमिस?”

यह सुनकर सान्वी को जैसे एक झटका लगा और आरव के चेहरे में गंभीरता से देखते हुए और हैरान नज़रों से देखते हुए कहा, “okay प्रॉमिस करती हूँ के किसी से कुछ नहीं कहूँगी बोल किआ बात है आरव?!”

आरव ने कहा, “देखो भाबी मुझे एक्सपीरियंस नहीं है इस लिए पूछ रहा हूँ तो सवाल आप से करता हूँ फिर बताऊंगा के असली सवाल किआ है, आप मुझे यह बताइये के किआ कभी आप के जिस्म पर ऐसे निशाँ किया है भैया ने लव मेकिंग के वक़्त जो खुद आप को नहीं पता चले या भैया को भी नहीं पता चले के जिस्म के किश जगह पर निशाँ हुआ हो? ी मैं लोवेबिट्स भाबी!”

तो बे कॉन्टिनोएड………… (4000 वर्ड्स फ्रॉम लास्ट 3 उपदटेस)
 
हाँ आप ने पिछले अपडेट पर कमेंट किया और यहाँ में ने दो और अपडेट कर दिए वो बी सान्वी और चावला के बीस ह hi, क्यों एन्जॉय क्या नाह भाई? हम्म आप सोच रहे हो के चावला कौन है वो जो सान्वी से प्यार करता है या वो जो संजना से प्यार करता hai...ab उन्हों ने खुद तो बताया नाह अभी अभी अपडेट mein...wo सान्वी से प्यार करते थे शुरू से मगर बीच में संजना मिल गयी जो इतना चुलबुली और मासूमियत से भरी थी के चावला साहिब उस पर मोहित होते गए और इश्क कर नैथे और बाई तो सब आप ने पढ़ hi लिया है :डी

थैंक्स अगेन फॉर रीडिंग एंड रेप्लयिन्ग भाई
 
अपडेट 101 संजना केस बैक

आरव ने कहा, “देखो भाबी मुझे एक्सपीरियंस नहीं है इस लिए पूछ रहा हूँ तो सवाल आप से करता हूँ फिर बताऊंगा के असली सवाल किआ है, आप मुझे यह बताइये के किआ कभी आप के जिस्म पर ऐसे निशाँ किया है भैया ने लव मेकिंग के वक़्त जो खुद आप को नहीं पता चले या भैया को भी नहीं पता चले के जिस्म के किश जगह पर निशाँ हुआ हो? ी मैं लोवेबिट्स भाबी!”

अब आगे………

यह सुनकर सान्वी को एक और झटका लगा और सोचने लगी आरव ऐसा क्यों पूछ रहा है, किआ हुआ होगा वो ठीक से नहीं समझी के आरव कहना किआ चाहता है तो उस्सने फिर से सवाल रिपीट करने को कहा. तो आरव ने सीधा सीधा कहा, “भाबी कल रात को मैं ने संजना के गर्दन के पीछे वाले हिस्से पर एक लोवेबिते जैसा गहरा निशाँ देखा, और जहाँ तक मुझे याद है मैं ने उस्सको उस जगह पर लोवेबिते के निशाँ नहीं किये थे तो इसी लिए पूछ रहा हूँ के कहीं मुझसे hi तो नहीं हुआ होगा मगर मुझे होश hi नहीं? इस बारे में आप क्लियर कर सकते हो किआ प्लीज?”

सान्वी ने फील किया के उस्का गाला सुख गया और पानी पिने का मैं किया, शॉक लगा था उस्सको आरव के इस सवाल से और सोचने लगी के संजना को बचाना होगा तो उस्सने आरव से कहा, “हम्म्म तो किआ तुम अभी से hi संजना पर शक करने लगे आरव? हम्म्म?”

आरव ने ब्लश करते हुए सान्वी के दोनों हाथों को अपने हाथों में पकारके कहा, “नहीं भाबी शक बिल्कुल नहीं है, मैं बुसस यह समझना चाहता हूँ के किआ मुझसे hi हुआ है वो और बिल्कुल भी होश नहीं इसी लिए तो आप से पूछ रही हूँ किआ आप और भैया में ऐसा हुआ है कभी?”

तो सान्वी को झूट बोलना पड़ा संजना को बचने के लिए वो बोली, “ोफो आरव हाँ ऐसा होता है हमारे साथ भी कई बार हुआ है, लव मेकिंग के दौरान हमको होश नहीं रहता है, हम एक एक्सटेसी के दौर से गुज़रते हैं जिस दौरान हम अपने होश को बिल्कुल खो देते हैं, उस हालत में तुमने भी संजना को वहां किश किया होगा और तुमको याद hi नहीं….. एक बात बताऊँ, मैं एक रात तो तुम्हारे भैया से झगड़ पारी थी क्यूंकि उसस्के काँधे पर लाल निशाँ थे…. मैं ने उस से कहा के वो किसी लड़की से मिला था उस दिन, उस्सने मुझे लाख समझाया के वो निशाँ कल रात को मैं ने खुद किया था उसस्के काँधे पर मगर मुझको बिल्कुल भी नहीं याद ारः था….. मैं ने खामखां उसस्के साथ झड़गड़ा किया और कुछ दिन बाद जब हम लव मेकिंग कर रहे थे तो मैं ने वैसा hi किया तो तुरंत तुम्हारे भाई ने मुझको रोका और कहा, ”हाँ देखो देखो एक्साक्ट्ली ऐसा किया था तुमने उस रात को वही निशाँ हुआ था यहीं मेरे काँधे पर अब यकीन आया तुझे?” तो मैं बहोत शर्मिंदा हुई, तो वैसे hi तुमने भी किया होगा आरव!!”

आरव ने सब सुनने के बाद कहा, “ओह थें ी ऍम सॉरी भाबी इस्सके मतलब है के मैं ने hi संजना के गर्दन पर चूस के वैसा निशान किया होगा और मुझे याद hi नहीं, मैं भी नाह पता नहीं किआ सोचने लगा था….”

सान्वी को तो अस्सल में समझ में आगयी थी के किआ बात हुई होगी मगर इस वक़्त संजना को बचाना था तो झूट बोलना ज़रूरी था…. फिर भी सान्वी ने आरव से पूछा, तो तुमको कैसे और कब नज़र आया वो निशाँ?” आरव ने कहा, “कल रात को, कमरे में लाइट ों था और उस्सने जैसे निघ्त्य पहनी और अपने बाल को पीछे से आगे कर रही थी बीएड पर बैठ कर और मैं खड़ा था तो मुझे दिखा….” सान्वी ने पूछा, “तो उस वक़्त तुमने संजना से नहीं पूछा?”

आरव ने कहा, “नाह भाबी बिल्कुल नहीं पूछा मैं ने क्यूंकि ी वास् नॉट सूरे के वो मेरा hi किया हुआ था के नहीं, अगर पूछता भी तो किआ पूछता, ऐसा लगता के मैं उस पर तोहमत लगा रहा हूँ नाह? इसी लिए उस से कुछ नहीं पूछा, और अब तो तय हो गया आप ने क्लियर कर दिया के वो मेरा hi किया हुआ होगा! थैंक्स भाबी!”

और अचानक आरव ने थोड़ा नॉटी होते हुए सान्वी से कहा, “वैसे आप की गर्दन पर कुछ नज़र नहीं अत देखूं तो?” और खड़े होकर सान्वी के बालों को उठाते हुए उसस्के गर्दन के निचे देखा!” सान्वी ने उस्सको हलके हलके छोटे छोटे थपड मारा चावला साहब के तरफ लाउन्ज में देखते हुए और देखा के चावला साहब उन् दोनों के तरफ hi देख रहे थे!!

आरव ने वैसे करते हुए सान्वी के बालों को जब ऊपर किया तो उसस्के क्लीवेज काफी ज़्यादा दिखे आरव को, फिर उस्सने बालों को निचे करते हुए अपने नाक को बालों से लगाकर कहा, “कौन सी शैम्पू उसे करती हो आप मजेदार खुंभु आरही है आप के बालों से”

तब तक क्यों के सान्वी ने देखा के चावला साहब उन् दोनों के तरफग hi देख रहे हैं सान्वी कड़ी हो गयी और अपने बालों को आरव के हाथ से खींचते हुए कहा, “क्यों? तुमको नहीं पता खुद तो बाथरूम में मेरे शैम्पू चुराकर बाल धोते हॉप अपनी! चोरर कहीं का हट यहाँ से, देख तेरा पापा इधर hi देख रहे हैं चल जा अब!”

इस से पहले के आरव कुछ कहता, गेट पर संजना अपनी कार अंदर लाते हुए ज़ोर से हॉंक करते हुए आ रही थी, “पीप, पीएएएएप पिप पिप पीप पीईप!!” जैसे कोई बरात निकल रहा हो!!! सब को पता चल गया के वो वापस आगयी, और सान्वी ने आरव से कहा, “देख तेरी रानी आगयी जा संभल अब हेहेहे” ा ुर आरव झपट कर बाहर गयी अपनी संजना का स्वागत करने…..

तब तक सान्वी चावला साहब के पास गए जो बाहर संजना को hi देख रहे थे और सान्वी ने सीरियस होकर उंनसे कहा, “आप नाह किसी दिन हम सबको बड़ी प्रॉब्लम में दाल डोज!!” चावला साहब उस्सको हैरानी से देखते हुए कहा, “क्यों? अब मैं ने किआ कर दिया भला?”

सान्वी ने अपने दांतों को दबाते हुए कहा, “आरव ने संजना के गर्दन पर पीछे लोवेबिट्स देखे हैं और उस्सको पता है के वो उस्का किया हुआ नहीं है!! आप क्यों संजना के जिस्म पर वैसे निशाँ करते हो? अब उस्सकी शादी हो चुकी है वैसे निशाँ नहीं करना है अब आप को समझे आप?!! … आप के जिस्म पर वो निशान करे या मैं निशाँ बनाऊं तो ठीक है मगर आप को नाह मेरे जिस्म पर और ना hi संजना के जिस्म पर कोई वैसा निशाँ बनाना है समझे आप!!”

चावला साहब व्हिस्की का गिलास ख़तम करते हुए, किचन के उस दरवाज़े के तरफ देखते हुए कहता है, “शहहह बोलना बांध करो, जाओ दीप्ति को लेलो उसस्के हाथ से वह दोनों अंदर आरहे हैं!!”

तो बे कॉन्टिनोएड इन नेक्स्ट अपडेट…….
 
अपडेट 102 सान्वी & चावला टॉक अबाउट आरव

सान्वी ने जल्दी से जाकर दीप्ति को अपने गॉड में लिया और दीप्ति ने ज़ोर से कहा, “मम्मी चची ने मुझे आइस क्रीम खिलाई वोओओओ और कार हवा से बातें करती आयी vvvrrrrrrrrrrr! दादू दादू चची गाड़ी तेज़ चलती है vrrrrrrrrrrrrrrr!!”

संजना ने ऊपर जाते जाते कहा, “हाँ दीप्ति अब मेरा चुगली कर तू!”

तो सब हंससने लगे और चावला साहब संजना को ऊपर जाते हुए देख रहे थे वो एक जीन्स और टॉप में थी और क्यूंकि वो स्तैर चढ़ रही थी तो उस्सकी गांड उस जीन में हिचकोले खाते हुए जा रही थी और चावला साहब वही देख रहे थे और सान्वी ने उस्सको मारते हुए कहा, “किआ देख रहे हो आप बुसस भी करो उसस्के पिछवाड़े को देखना!” दीप्ति ने सुना और कहा, “किआ पिछवारा मम्मी?” तो सान्वी ने जल्दी से दीप्ति के मुंह पर अपना हाथ दबाया! और चावला साहब हंससने लगा और कहा, “देखा बच्चो के सामने इसी लिए अनाप शनाप नहीं कहना चाहिए सब कुछ रिकॉर्ड करते हैं यह!!”

जब संजना और आरव अपने कमरे के अंदर चले गए तो चावला साहब ने कहा, “हाँ तो किआ कह रही थी तुम? संजना के गले में लोवेबिट्स देखा सर्व ने तो किआ हुआ?!”

सान्वी ने दीप्ति को काउच पर रख के चावला के साथ किचन में गयी और समझायी के आरव ने संजना के गर्दन पर पीछे के तरफ नीचाँ देखा और उस्सको शक है के वो निशान उस्का बनाया हुआ नहीं है! एहि बात वो मुझसे कर रहा था और पूछ रहा था के किआ यह मुमकिन है के उसी को याद नाह हो के उस्सने किया होगा?!!”

चावला साहब कुछ देर सोचने के बाद पूछा, “तो तुमने किआ कहा उस्सको?”

सान्वी: “और किआ कह सकती थी, झूट बोलना पड़ा के सेक्स के दौरान याद नहीं रहता के कहाँ कहाँ किश करते हैं जिस्म पर तो ऐसा होता है अक्सर, तो वो मान गया के उसी ने किया होगा, मगर असली बात तो यह है के उस्सने नहीं किया था नाह!!”

चावला साहब: “उस्सने तुमसे सेक्स के बारे में बात किया? और तुमने सेक्स के बारे में उस से बात किया?”

सान्वी: “ोफो आप भी नाह!! सेक्स वर्ड hi उसे नहीं किया हमने लव मेकिंग वर्ड उसे किया और गर्दन पर निशाँ की बात आयी तो कैसे समझती मैं उस्सको भला?”

चावला: “मैं ने वहां से देखा उस्सने तुम्हारा हाथ पकड़ा था फिर आखिर में उस्सने तुम्हारे बालों को भी उठाया था और किआ किआ करता है वो तेरे साथ हँ?”

सान्वी: “शट उप जी! किआ कह रहे हो आप? वो बुसस थोड़ा नॉटी है, मुझसे मज़ाक करता रहता है अक्सर ऐसी वैसी कोई बात नहीं जो आप सोच रहे हो हाँ कह देती हूँ खबरदार फिर कभी उसस्के साथ मुझको लेकर आप ने कोई ऐसी वैसी बात किये तो!!”

जब चावला साहब ने देखा के सान्वी थोड़ा खफा सी हो गयी तो हँस्ते हुए कहा, “अरे मैं तो मज़ाक कर रह था मुझे पता है वो ऐसा नहीं hai…magar सोचा अगर वो भी वैसा हुआ तो? तब किआ करोगी तुम?!”

सान्वी ने उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “हम्म्म? तब? तब किआ करुँगी मैं? पता नहीं? किआ करुँगी? मगर वो वैसा क्यों होने लगा जब पिछले 5 सैलून में वैसा नहीं था तो?”

चावला साहब ने कहा, “5 साल पहले उस्सने सेक्स टास्ते नहीं किया था कभी, अब एक वाइफ है, और अब उस्सको पता चल चूका है के सेक्स किआ होता है, सेक्स की लाज़त मिल गयी है उस्सको अब तो अब तुमको बी देख कर उसस्के मैं में कुछ तो अत होगा मेरी जान?!”

सान्वी ने मुंह बनाते हुए कहा, “देखिये आप मुझे बेहक़ाइये मत, मैं नहीं समझती के आरव के मैं में मेरे लिए ऐसे वैसे खयालात आते होंगे आप बुसस कीजिये ऐसे बातें करना!”

चावला ने कहा, “अच्छा पिछले 5 सालों में जब जब तुम उसस्के करीब गयी हो तुमको कभी नहीं लगा के वो तुम्हारे ज़्यादा करीब आने की कोशिश किया हो? किआ तुमने कभी फील नहीं किया के वो तुमसे आकर्षित कुआ हो?”

सान्वी: “नहीं, कभी भी नहीं. बल्कि मेरा और उस्का माँ बेटे के जैसे रिश्ता रहा है… वो मुझको बहुत मंटा है और अपने सभी प्रोब्लेम्स शेयर करता आया है हमेशा से…. हम करीब ज़रूर हैं मगर दो अच्छे दोस्त की तरह और कुछ नहीं!”

चावला: “तो क्यों तुम बार बार मुझको देख रही थी जब भी वो तुमसे ज़्यादा क्लोज हो रहा था, जब भी वो तुम्हारा हाथ पकार्टा तुम मुझको देखती थी, जब भी वो तुम्हारे ज़्यादा करीब होता तुमसे छूटा तो तुम वापस मुझको लाउन्ज में देख रही थी क्यों?”

संवी: “इसी लिए!! इसी लिए आप को देख रही थी क्यूंकि आप ठरकी हो और इसी लिए देख रही थी के कहीं आप वो नाह सोचो जो मेरे और आप के बीच है कहीं आरव के साथ भी मेरा वैसा कुछ नहीं है मुझे पता था आप कुछ वैसा hi सोचोगे मुझे उसस्के साथी उतना करीब देख कर!!”

चावला साहब: “मतलब मानती हो के ऐसा कुछ हो भी सकता है तुम्हारे बीच भी?!”

सान्वी कुछ नाराज़ होते हुए कहा, “ोफो आप भी किश बात को लेकर बैठ गए हो उफ्फ्फ!!! किआ इस बात को लेकर हम अब झगड़ा करेंगे? बोलिये! और आप ने कितना पिया? 4 पेग से ज़्यादा पिए नाह आप ने? आप को चढ़ गया है जाइये अपने कमरे में अब मुझको मेरे बाकी के काम करने दीजिये, दीप्ति को नहलाना है उस्सको खिलाना है और बहोत सारे काम करनी है मुझे जाइये आप!!”

चावला: “ाचा अब मुझको पुश कर रही हो ठीक है चला जाता हूँ फिर मनाने को मत आना मेरे paas…main चला!”

वो चले गए तो सान्वी ने अपने माथे को थामकर बड़बड़ायी, “उफ्फ्फ यह मर्द भी नाह सब एक जैसे होते हैं इनको... तब सान्वी ने दीप्ति को गॉड में उठाया और अपने कमरे के तरफ चली गयी ऊपर. और जब आरव के कमरे के पास से गुज़री तो अंदर से जो आवाज़ें आ रही थी उस्सने सान्वी के कदम को रोक दिए….. सान्वी ने दीप्ति के मुंह पर हाथ रख कर अपने कान को आरव के कमरे से लगाते हुए सुना और यह आवाज़ें सुनी उस्सने – “आआआह्ह्ह्ह स्स्स्सह्ह्हह्ह ाआरररावववव उफ्फ्फफ्फ्फ़ और तेज़, और तेज़ करो नाह आरव ह्म्मम्म्म्म – और आरव की आवाज़… एसससस बेबी एसससस….. आआह्ह्ह्ह्ग्घ वोऊ बहुत मजा ारः है बेबी फफ्फहहहहहहहहह”

सान्वी को बहोत गरम फील हुआ और एकांत बूंद पसीने के भी टपके उसस्के माथे से…… वो अंदर अपने कमरे में गयी और दीप्ति को गेम हाथ में थमा कर फिर गयी संजना के कमरे के पास कान लगायी और सुनती गयी दोनों को सेक्स करते हुए और खुद अपने बूब्स को अपने हाथों से दबाने लगी और अपने जीब को अपने होंठों पर फर्टी गयी… कमरे के अंदर संजना चिल्ला रही थी कहाँरते और तड़पते हुए और सान्वी को करने का बहोत ज़ोर से मैं किया और वो चावला साहब की कंपनी को विश करने लगी और जल्दी से निचे उनके कमरे के तरफ भागी…..

तो बे कॉन्टिनोएड……………….
 
अपडेट 103 सान्वी थिंकिंग ऑफ़ ओल्ड डेज

… कमरे के अंदर संजना चिल्ला रही थी कहाँरते और तड़पते हुए और सान्वी को करने का बहोत ज़ोर से मैं किया और वो चावला साहब की कंपनी को विश करने लगी और जल्दी से निचे उनके कमरे के तरफ भागी…..

अब आगे……

जब सान्वी चावला साहब के कमरे में गयी तो वो तो जैसे बेहोश पड़ा हुआ था नाशी में धुत बिल्कुल बेखबर! सान्वी के समझ में आगया के वो कुछ नहीं कर पाएगा उस हालत में, तो वो लाचार वापस गयी अपने कमरे में और दीप्ति को नहलाते वक़्त खुद को ठन्डे पानी से फ्रेश किया जिस्म की आग बुझाने के लिए!!

कुछ देर बाद सान्वी अपने कमरे में लेती हुई चावला साहब के बातों को सोच रही थी के उस्सने कहा था के अब क्यूंकि आरव शादी कर चूका है और अब सेक्स से वाकिफ है तो उसस्के मैं में भी सान्वी को लेकर उस तरह के ख्याल आ सकते हैं जैसे चावला साहब के मैं में होते हैं. ऐसे बातों को सोचते हुए सान्वी को कुछ हो रहा था…. वो आरव के बारे में कुछ ज़्यादा hi सोच रही थी और उन् दिनों को याद किया जब वो नयी नयी इस घर में आयी थी तो आरव कितना दूर दूर रहता था उस से.

शादी के पहले हफ्ते में hi विवान ने सान्वी को समझा दिया थे के आरव बहोत शर्मीला है और क्यूंकि तीन मर्दों के बीच घर में पला बारे हुआ है वो लड़कियों से बहोत शर्माता है और उस्सको कुछ वक़्त लग सकता है उस से दोस्ती करने की. विवान और चावला साहब दोनों ने hi संवी से कहा थे के खुद उसी को आरव के तरफ जाना होगा वार्ना वो ऐसे hi दूर दूर रहेगा. तब सान्वी ने कहा था वो सब संभल लेगी अकेले hi.

डिनर के वक़्त जब सान्वी सर्वे करती थी शादी के पहले तीन हफ्ते में आरव कभी उन् सब के साथ खाने को नहीं बैठता था. उस्सको शर्म अति थी सान्वी के सामने बैठ कर डिनर करने को. तो चावला साहब उस्का खाना उसस्के रूम में लेजाते थे, और बाकी के विवान, चावला और सान्वी डाइनिंग टेबल पर खाते थे किचन के पास.

तीन हफ़्तों के बाद सान्वी ने चावला साहब से कहा के वो खुद आरव का खाना देने जाएगी उसस्के कमरे में हर रोज़. और तभी उस के करीब होने की कोशिश करेगी. और उन् दिनों विवान लेट आने लगे थे. सिर्फ शादी के पहले हफते विवान घर 5 या 5.30 को वापस आजाते थे, उसस्के बाद पिछले 5 सैलून में विवान हमेशा 10 बजने के बाद घर वापस आये, और महीने में 15 दिन तो रात के 12 बजने के बाद hi घर वापस आते थे.

सान्वी ने चावला साहब के बातों से मुतालिक वैसे कुछ लम्हों को सोचा आरव को लेकर जहाँ वो आरव के कुछ ज़्यादा करीब हुए थे मगर उस वक़्त कोई ऐसी वैसी ख्याल नहीं थे मैं में उसस्के तरफ से तो सोचने लगी किआ आरव उस्सको किसी और तरह से पास होने की कोशिश करता था उन् दिनों को?

तो सान्वी खुद फ़्लैश बैक में गयी आरव को याद करते हुए…. उस्सने याद किया और सभी उन् दिनों के दृष्ट सान्वी के सामने एक मूवी की तरह साफ़ दिखने लगे जैसे एक फिल्म देख रही थी.

जब पहली बार सान्वी आरव के लिए खाना लेकर गयी थी उसस्के कमरे में देने तो आरव उस्सको देख कर घबरा गया और अपने चेहरे को एक तरफ कर लिया था. सान्वी ने मुस्कुराते हुए उसस्के प्लेट को टेबल रख कर कहा, “तुम्हारा खाना आरव, खालो गरम है.” आरव बीएड पर बैठे हुए दीवार के तरफ देख रहा था. सान्वी कुछ देर वहीँ कड़ी रही उस्सको देखते हुए और मुस्कुरायी उसस्के व्योहार को देख कर. सान्वी ने सोचा कुछ देर उस से बात करना चाहिए उस्सको खुलने के लिए तो सान्वी उसस्के पास जाकर बैठी उसस्के बीएड पर.

जैसे वो बैठी आरव ने अब पीठ घुमा लिया संवी से और निचे बीएड को देखने लगा. सावी आरव से सिर्फ 3 साल बड़ी थी. चावला साहब कैग हर में डिनर रात के 8 से 9 बजे तक होता है. यह टाइम फिक्स था डिनर के लिए उस घर में. उस वक़्त सान्वी को यह नहीं पता था के निचे दिंनिंग रूम में चावला साहब और विवबान किआ बातें कर रहे थे. उन् दोनों में यह बात हो रहे थे.

चावला साहब ने विवान से कहा, “तेरी पत्नी नयी है इस घर में, वो आरव कहीं उस्सको तंग नाह करें, तुमको देखना चाहिए जब सान्वी उस के साथ हो तो कहीं दोनों में कुछ गड़बड़ नाह हो, दोनों के आगे में ज़्यादा फरक नहीं अचे दोस्त भी बन सकते हैं दोनों अगर सान्वी ने उस्सको उस काबिल समझा तो…”

तो विवान ने जवाब में यह कहा था, “मेरी सान्वी से इस बारे में बाप हो चुकी है डैड, सान्वी को मैं ने ग्रीन लाइट दे दिया है वो जैसे चाहे आरव के करीब हो सकती है, रिजल्ट यह आना चाहिए के आरव और वो नार्मल हम लोगों की तरह घुल मिल जाए, सान्वी ने कहा है के वो सब संभल लेगी.”

चावला साहब ने कहा था, “अरे तुम सान्वी से बहोत बड़े और ज़्यादा मातुरे हो, और आरव में एक छोटा बचा का दिमाग़ है अभी, और जवान भी है मैं इस लिए कह रहा हूँ के अगर दोनों कुछ ज़्यादा hi करीब हो गए तो फिर मत कहना के तेरी वाइफ का उस के साथ चाकर चल रहा है!! दोनों करीब शामे आगे के हैं, एक जवान लड़का और एक जवान लड़की ऐसे अकेले साथ रहे तो धीरे धीरे कुछ भी हो सकता है नाह?!”

मगर विवान ने यह कहकर अपने बाप को ताल दिया था, “अरे डैड आप क्यों ओल्ड फाशिवेद लोगों की तरह बात करने लगे हो? हम मॉडर्न लोग हैं और देवर भाबी में रिश्ता क्लोसनेस्स का hi होता है, आप क्यों इतने दूर का सोचने लगे हो? अब आरव शर्माता है और दूर रहता है सान्वी से तो उस्सको बजी ाचा नहीं लगता वो चाहती है हम सब एक फॅमिली की तरह मिल जल के रहे तो आरव के करीब होने की कोशिश तो करना hi चाहिए नाह उस्सको, अगर आरव पर hi छोड़ा गया तो वो तो कभी भी नहीं आएगा सान्वी के करीब…. ऐसा कुछ नहीं होगा जो आप सोच रहे हो, मैं सान्वी को जानता हूँ, वो सब संभाल लेगी आप फ़िक्र नाह करें!”

तब चावला साहब ने कहा था, “okay फिर जैसा तुम ठीक समझो, सान्वी काफी देर से उसस्के कमरे में गयी है, पता नहीं किआ कर रही होगी!!”

विवान ने सिर्फ अपना सर हिलाया था अपने बाप के उस बात पर उस वक़्त.

उधर आरव के कमरे में सान्वी उसस्के बीएड पर उसस्के पास बैठ कर हँस्ते हुए आरव से कहा, “अरे क्यों पीठ कर लिया मुझसे? मैं किआ कोई भूत हूँ?”

आरव ने कोई जवाब नहीं दिया तो सान्वी ने उसस्के काँधे पर अपना हाथ रख कर कहा, “आरव खाना खालो नाह, या मैं खिलौन तुमको हम्म?”

आरव ने सान्वी का हाथ अपने काँधे से हटाते हुए एक तरफ देखते हुए कहा, “नहीं तुम मत छुवो मुझे, अपना हाथ मत रखो मुझ पर!”

सान्वी ज़ोर से हँस्ते हुए उस पर उसस्के पीछे के तरफ से अपने बाहों को दाल कर कहा, “क्यों? लो मैं ने अब अपने बाहों को तुम्हारे ऊपर कर लिया किआ होगा? तुम मैले हो जाओगे किआ?” आरव कांपने लगा था और सिकुड़ गया था सान्वी के छूने से…. जब उस्सको उस तरह से कांटे हुए देखा तो सान्वी ने सोचा उस्सको कोई प्रॉब्लम है, वो सोचने लगी के क्यों आरव वैसा बेहवे कर रहा है.

संवी उस वक़्त कमरे से निकल गयी और गहरी सोच में पद गयी के आरव का किआ प्रॉब्लम है लड़कियों से भला?!!

उस रात को जब कोई आधे घंटा बाद सान्वी आरव के कमरे से बाहर निकली तो चावला साहब जैसे उस्का वेट कर रहे थे, विवान अपने कमरे में जा चूका था. तो सान्वी जब किचन में आयी तो चावला साहब ने पूछा, “किआ कर रही थी इतने देर तक आरव के पास? कुछ कहा उस्सने किआ?” तो सान्वी ने मुस्कुराते हुए कहा, “नहीं सिर्फ कहा के मैं उस्सको हाथ नाह लगाऊं, वो कांपने लगा जब मैं ने अपना हाथ उसस्के काँधे पर रखा तो ऐसा क्यों पिता जी? आरव को किसी बात का डर है या कुछ हुआ है उसस्के साथ बचपन में जिस की वजह से वो ऐसा बेहवे करता है?”

चावला साहब ने सिर्फ यह जवाब दिया था उस दिन सान्वी को, “कुछ नहीं हुआ उससे वो बुसस बहोत शर्मीला है! और इतने देर उसस्के पास रुकने की ज़रूरत नहीं उस्सकी आदतों को मत बिगाड़ देना तुम!”

सान्वी के समझ में नहीं आयी के चावला साहब ने वैसा क्यों कहा था….. बाद में सान्वी ने अपने कमरे में विवान से कहा था के उस्सको लगता है के आरव को अफेक्शन की ज़रूरत है शायद, या इमोशनल सपोर्ट चाहिए उस्सको.

तो बे कॉन्टिनोएड…………
 
अपडेट 104 सान्वी टैक्स केयर ऑफ़ आरव

उस दिन के बाद सान्वी आरव को हर रोज़ डिनर सर्वे करने जाती, हुए सुबह को उसस्के कमरे में hi उस्सको ब्रेकफास्ट सर्वे करती और कोई 30 मिनट्स उस के साथ रहती.

चावला साहब जैसे उतावले होते के इतनी देर तक वो किआ करती रहती है आरव के कमरे में, मगर यह उन् दिनों सान्वी को पता नहीं था.

सान्वी धीरे धीरे आरव के करीब होती गयी और धीरे धीरे दिन बा दिन आरव उस से एक दो बात करने लगे थे. सान्वी उस से पूछता, “खाना कैसा बना है? तुमको पसंद आया?” तो आरव अपना तुम्ब्सप करके सान्वी को दिखता और कहता, “स्वादिष्ट है, मस्त”

और अब कोई दो महीनों के बाद जब सान्वी उस्सको छूटा तो वो उस्का हाथ नहीं हटाता था. तो एक रोज़ सान्वी ने आरव का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा, “तुम मुझसे घबराते हो किआ आरव?” तो आरव ने सान्वी का हाथ अपने हाथ में बहोत ज़ोर से पाकर कर कहा था, “नहीं अब नहीं!” तो हँस्ते हुए सान्वी ने कहा, “हम्म अब नहीं इस्सके मतलब इस से पहले तुम मुझसे घबराते थे मगर क्यों?” तो आरव ने जवाब यह दिया था, “क्यूंकि तुम बहोत खूबसूरत हो और हॉट हो!”

सान्वी ने ज़ोर से हँस्ते हुए उस्सको रिप्लाई किया था. इतनी ज़ोर से हंसी थी के चावला साहब ने निचे से सुना था और अपने कमरे में विवान ने भी सुना था सान्वी की हंसी.

और हँस्ते हुए सान्वी ने आरव से कहा था, “तुम तो मेरा कॉम्पलिमेंट कर रहे हो, तो मेरा खूबसूरत और हॉट होना तुमको क्यों घबराता है?” तब आरव ने यह जवाब दिया था, “मुझे घबराहट इस बात से है के कहीं मुझको तुमसे प्यार नाह हो जाए!!”

सान्वी ने मुस्कुराते हुए उस्सको कहा था, “भाबी से प्यार? करो प्यार मुझसे आरव इस में कोई बुराई नहीं मगर यह प्यार एक देवर और भाबी वाला प्यार होना चाहिए नाह?”

आरव ने कहा था, “मैं तुमको किश करूँ?” सान्वी का चेहरे लाल हो गया था और फिर भी उस्सने अपने गाल आरव के होंठों तक लगाई थी तो आरव ने कहा, “नहीं यहाँ नहीं होंठों पर!”

सान्वी ने फिर मुस्कुराते हुए कहा, “आरव वैसा किश देवर भाबी में नहीं किया जाता है. मेरे गाल पर मुझे किश कर सकते हो, देखो मैं तुमको किश करती हूँ…” और सान्वी ने आरव के दोनों गालों पर किश किया. तब आरव ने ज़ोर से सान्वी को बाहों में भर लिया था और धीरे से कहा था, “भैया को तो तुम होंठों पर किश करती हो तो मुझे क्यों नहीं मैं किआ इतना बुरा हूँ!”

सान्वी ने खुद को उसस्के बाहों में रहने दिया था कुछ देर और प्यार से उस्सको जवाब दिया था, “आरव तुम्हारे भैया मेरे हस्बैंड है, मेरी उस से शादी हुई है तो उस्का हक़ बनता है वैसे किश करना उससे, जब तुम्हारी शादी हो जाएगी तो तुम भी अपने दुल्हन को वैसे किश करना मुझे नहीं!”

आरव ने ज़िद किया, “नहीं मुझे अभी तुमको वैसे किश करना वार्ना मैं तुमसे बात नहीं करूँगा खाना भी नहीं खाऊंगा, तुम मेरे कमरे में मत आना!”

सान्वी ने तब कहा, “okay लो, मैं अपने होंठों से तुम्हारे होंठों को चूमती हूँ मगर यह बात तुम किसी से भी नहीं कहोगे okay?”

आरव ने कहा, “नहीं कहूंगा यह हमारा सीक्रेट है!” सान्वी मुस्कुरायी और अपने होंठों को आरव के होंठों से छुआ बस लिघ्टलय चूमा आरव के होंठों को एक सेकंड के लिए. तो आरव बहोत खुश हुआ और कहा, “अब हर रोज़ मुझे एक किसी देना ऐसे hi खाने से पहले और कमरे से जाने के बाद!”

यह सिलसिला 3 महीनों तक चला. हर बार जब सान्वी उसस्के कमरे में जाती तो उसस्के होंठों को किश करती, खाना खिलाती, और वापस लौटने से पहले फिर अपने होंठों को उसस्के होंठों से छूती बुसस.

आरव उस वक़्त 18 साल का था और ऑफिस ट्रेनिंग वालों के साथ रहता था. उन् दिनों चावला साहब भी ऑफिस जाया करते थे, हर रोज़ नहीं हफ्ते में दो या कभी 3 दिन…. तो आरव कभी उनके साथ जाते तो कभी विवान के साथ; और कभी जाते hi नहीं ज़िद करता के घर पर रहेगा. तो उस दिन वो घर पर रहता सान्वी के साथ. सान्वी तब माँ नहीं बानी थी….

तो एक रोज़, जिस दिन दोनों चावला और विवान को ऑफिस जाना था आरव ने कहा के वो नहीं जाएगा. चावला साहब उस पर चिल्लाया के “नहीं जाएगा तो काम कैसे सीखेगा, सब कुछ सीखना चाहिए तब कंपनी का सीईओ बनेगा, अभी बहोत निचे काम कर रहा है जूनियर्स के निचे!!” मगर सान्वी ने आरव को सपोर्ट करते हुए चावला साहब से कहा, “आ पुस पर बहोत चिल्लाते हो उसी का नतीजा है के वो इतना घबराता है, विवान भी उस्सको डांटता रहता है हर वक़्त, आप दोनों की वजा से hi वो ऐसा है, उस्सको प्यार की ज़रूरत है, कोमलता से बात कीजिये नाह उसस्के साथ!”

चावला साहब ने कहा, “तुम इस्को बिगाड़ रही हो सान्वी, इस्सकी आदतें ख़राब कर रही हो, यह बहोत धित है शुरू से hi!!”

इतना कहकर वो चले गए और उनके जाने के बाद आरव बहोत खुश होकर सान्वी को ज़ोर से बाहों में भरके किश किया और कहा, “आज हम दोनों अकेले साथ रहेंगे मज़ा आएगा!”

सान्वी ने कहा, “हम्म्म नॉटी बॉय…. मुझे तो बहोत काम करनी है मैं तुम्हारे साथ कितना रह सकती हूँ?”

आरव ने कहा, “मैं तुम्हारे साथ साथ रहूँगा जब काम करोगी और काम एन्ड हुआ तो दोनों साथ ऊपर मज़ा करेंगे okay?”

सान्वी ने कहा, “किआ मज़ा करेंगे आरव?”

आरव ने कहा, “जब ऊपर जाएंगे तब बताऊंगा.”

और दिन के कोई 11 बजे तक आरव सान्वी के साथ साथ रहा घर के सभी कामों को करते हुए और जब सान्वी ने सब काम पूरा कर लिया तो कहा, “अब मैं नहाने जा रही हूँ तुम यहीं वेट करो फिर मिलते हैं!”

तो आरव ने कहा, “मैं तुम्हारे रूम मैं वेट करूँगा और हम वहीँ रहेंगे शाम तक okay?” सान्वी ने उसस्के गाल पर अपने हाथ प्यार से फरते हुए कहा, “ाचा ठीक है आओ मेरे साथ!”

सान्वी के कमरे में hi उस्सकी बाथरूम थी तो वो चली गयी अंदर नहाने और आरव उस्सकी वेट करने लगी उसी के कमरे में.

और जब सान्वी नाहा कर बाहर आयी, तो अपनी पेट्टी कोट और चोली में थी, साडी बीएड पर पड़ी हुई थी जिस्सको आरव एक्सामिने कर रहा था रह रह कर, उसस्के ब्लाउज कुछ पानी के बूंदों से यहाँ वहां भीगे हुए थे और उसस्के बालों से पानी कहीं कहीं टपक रहे थे और पेट्टी कोट पर भी कहीं कहीं पानी के कुछ कतरों जैसा दिख रहे थे….. आरव खुले मुंह सान्वी को देखता रहा, और सान्वी मुस्कुराते हुए उसस्के पास आती है साडी लेने के लिए तो आरव उस से कहता है, “वाओ भाबी बहोत hi सेक्सी दिख रही हो…. देखो कितने जगह पर भीगी हुई हो, लाओ मैं पांच देता हूँ!”

सान्वी ने हँस्ते हुए उस से कहा, “अरे नहीं यह कॉटन मटेरियल है अपने आप सुख जाएगा,” सान्वी अपने सर के बालों में टॉवल रब करती जा रही थी और जब झुकी अपनी साडी को बीएड से लेने के लिए तो उस्सकी ब्लाउज से उस्सकी क्लीवेज बहोत खूबसूरत दिख रहे थे और क्लीवेज पर भी चाँद पानी के बूँदें थे जिस्सको आरव देखते हुए उत्तेजित हुआ मगर कुछ नहीं कहा सान्वी से मगर उस्का खड़ा हो गया था उस वक़्त, और जब सान्वी ने साड़ी को हाथ में लिया तो आरव ने उस्का हाथ थाम लिया और कहा, “नहीं, मत पहनो साडी को ऐसे hi बहोत अच्छी दिख रही हो मेरे साथ ऐसे hi रहो नाह कोई तो नहीं है घर में…….”

श बे कॉन्टिनोएड……………
 
अपडेट 105 सान्वी सुप्पोर्टस एंड हेल्प्स आरव

सान्वी अपने सर के बालों में टॉवल रब करती जा रही थी और जब झुकी अपनी साडी को बीएड से लेने के लिए तो उस्सकी ब्लाउज से उस्सकी क्लीवेज बहोत खूबसूरत दिख रहे थे और क्लीवेज पर भी चाँद पानी के बूँदें थे जिस्सको आरव देखते हुए उत्तेजित हुआ मगर कुछ नहीं कहा सान्वी से मगर उस्का खड़ा हो गया था उस वक़्त, और जब सान्वी ने साड़ी को हाथ में लिया तो आरव ने उस्का हाथ थाम लिया और कहा, “नहीं, मत पहनो साडी को ऐसे hi बहोत अच्छी दिख रही हो मेरे साथ ऐसे hi रहो नाह कोई तो नहीं है घर में…….”

अब आगे…………….

सान्वी के समझ में नहीं आयी के वो अब किआ करें जब आरव ने वैसा कहा तो. सान्वी उस्सको फुल सपोर्ट करने की कोशिश कर रही थी शुरू से, वो बात तो करने लगा था सान्वी से और अब उतना चुप नहीं रहता था, भागता नहीं था उस से, 3 महीने गुज़र चुके थे जब से सान्वी ने उस से एप्रोच किया था मगर आरव बिल्कुल नार्मल नहीं बेहवे करता था अब भी, एक मेंटली रिटार्डेड बचे की तरह थे उसस्के व्योहार. सान्वी कभी कभी सोचती कहीं वो नाटक तो नहीं करता, कहीं उसस्के करीब होने के लिए वो जान बुझ कर वैसा तो नहीं कर रहा था, सान्वी को ऐसे सोचने पर उसस्के व्योहार ने मजबूर किया था. फिर भी सान्वी उस्सको मेंटली और ज़्यादा डिसटूएब नहीं करना चाहती थी, वो नहीं चाहती थी के इतने म्हणत से जो उस्सने उस्सको अपने थोड़ा करीब किया है वो पानी में चला जाए, तो सान्वी ने कोमलता और प्यार से बात किये उसस्के साथ, सान्वी ने कहा,

“आरव किआ ाचा लगेगा मैं घर में ऐसे पेट्टी कोट और ब्लाउज में रहूं तो? हम्म बिल्कुल भी ाचा नहीं लगेगा, साडी पेहेन लुंगी तो ज़्यादा खूबसूरत नहीं लगूंगी? तुम को साडी नहीं पसंद आरव?”

मगर आरव जैसे के उसस्के बाप ने कहा धित था तो अपने बात पर ऐडा रहा, कहा, “हाँ घर के अंदर ऐसे रह सकती हो, कौन देखेगा, साडी मुझे पसंद है मगर इस वक़्त तुमइसे hi बेहतर लग रही हो तो ऐसे hi रहो नाह अब तो किचन में भी नहीं जाना इसी रूम में रहेंगे नाह!”

सान्वी बीएड पर बैठ गयी अपन बल सूखते हुए और आरव मुस्कुराकर देखते हुए कहा, “okay बाबा ठीक है ऐसे hi रहती हूँ कुछ देर तुम्हारे ख़ुशी के लिए अब खुश?”

जब हु बैठ गयी तो आरव पोजीशन लेकर उस्सकी चूचियों पर नज़र दौड़ा रहा था, बैठने से तो क्लीवेज और भी ज़्यादा दिख रहे थे, और सान्वी बिल्कुल ख्याल नहीं कर रही थी के आरव उस्सकी क्लीवेज के लिए उस्सको वैसे रहने के लिए कह रहा था, वो अनजाने में आरव को उत्तेजित कर रही थी वो सान्वी को नहीं पता था. सान्वी उस्सको नार्मल करने की कोशिश में लगी हुई थी और चाहती थी के आरव बिल्कुल नार्मल हो जाए सभी लोगों की तरह. सान्वी को लगा था के अफेक्शन नाह मिलने के कारण वो वैसा था, दो मर्दों के बीच वो पीस गया था बाप और बड़े भाई दोनों उस्सको बहोत डोमिनाते करते थे घर में, माँ और बेहेन का प्यार नहीं मिला था उस्सको इस लिए सान्वी ने सोचा एक महिला का प्यार और अपनापन पाकर आरव ठीक हो जाएगा.

अस्सल में हुआ भी एहि था, सान्वी ने hi आरव को नार्मल किया था मगर किश किश स्तिथि से गुज़र कर उस्सने आरव को नार्मल किया था वो देखना है अब.

सान्वी जब बीएड पर बैठी बाल सूखा रही थी तो आरव बीएड पर उसस्के पीछे गया और घुटनों के बल होकर पीछे से सान्वी के काँधे से अपने दोनों बाहों को करके उस्सको जकरा और एक बचे की तरह कहता गया, “मैं ने तुमको पाकर लिया मैं ने तुमको पाकर लिया हे! हे!”

सान्वी ने पलट कर उसस्के गालों पर चीते छोटे तापस मारते हुए कहा, “नॉटी बॉय मैं बाल सूखा रही हूँ नाह अभी अब कैसे करुँगी?! हत्तो मेरे पीठ से मुझको निचे गिरा डोज ऐसे!”

सान्वी के कमर से लेकर ऊपर ब्लाउज तक उस्सकी नंगी हिस्से पर आरव का हाथ लगा हुआ था और हलके से उसस्के हाथ को फेर्रा उन् जगहों पर जिस्सको संवी ने महसूस किया और उस्सको वैसे करने से मन किया… उस्सकी कमर बहोत गोरी और खूबसूरत दिख रहे थे और कोई भी मर्द अगर उस्सको उस वक़्त वैसे छूटा तो सान्वी को उसी पल बीएड पर लेता देता और सेक्स करता…. मगर इस वक़्त सान्वी समझ रही थी जैसे कोई एक बचे के साथ खेलता है कुछ वैसा था. और आरव संवी के सार्क इ ुइपर से तो उस्सकी क्लीवेज को hi निहारते जा रहा था, सान्वी के हाथ के मूवमेंट्स से जब वो बाल में टॉवल रागढ रही थी तो उस्सकी बूब्स हिल रहे थे जिस्का आरव लुत्फ़ उठा रहा था.

और हुआ यह के सान्वी ने अपने पीठ पर थोड़ा कमर के निचे आरव के लुंड को दबते हुए फील किया, उस्सको पता चला के आरव खड़ा हो गया है….. तो सान्वी समझ गयी के उस्सको वैसे देख कर, उस्सको छह कर hi आरव खड़ा हुआ है और अब सोचने लगी के अगर उस्सने अचानक कुछ किया या बुरा भला कहा आरव को तो वो उस्सको दुःख पहुंचाएगी और उस्सको ढाका लगेगा और उसस्के ठीक होने के प्रोग्रेस में बाधा आएगी, तो सोचा के नरमी से इस्को सुलझाया जाए… सान्वी कुछ देर वैसे hi बैठी रही और फील किया के आरव अपने लुंड को उसस्के कमर पर पीछे के तरफ दबा रहा है बार बार और आरव के दोनों हाथ उस्सकी कमा रके नंगी हिस्सों पर थे, सान्वी सोच में डूबी हुई थी के आरव ने सान्वी के गर्दन पर किश किया, और एक बार किया फिर तीसरी बार किया और निचे लुंड दबाते जा रहा था जैसे रगड़ने लगा हो अपने कमर को हिलाते hue…..to झट से सान्वी कड़ी हो गयी बीएड से और मूढ़ कर आरव को देखा और उसस्के शार्ट में उस जगह को देखा और पाया के उसस्के शार्ट उस जगह पर फुल्ला हुआ है, मतलब अरब का इरेक्शन नज़र ारः था…..

सान्वी ने अपने दोनों हाथों को कमर पर रख कर आरव के चेहरे में देखते हुए कहा, “तुम यह किआ कर रहे थे बताओ मुझे!” तो आरव एक कुसूरवार बचे की तरह सर झुकाये बीएड पर बैठ गया और सान्वी से नज़रें चुराने लगा. सान्वी ने दोबारा पूछा के वो किआ कर रहा था मगर आरव बीएड पर अपनी नज़रें गड़ाए बैठा रहा और सान्वी के तरफ देखा भी नहीं….. और तब सान्वी ने फिर उसस्के शार्ट पर देखा के अब वो पहला नहीं है मतलब ेरक्शन ग़ायब हो गया था….. और सान्वी ने देखा के आरव कुछ कांपने लगा था उसस्के डांटने se!!phir अचानक आरव झट से धड़पते हुए बीएड से उतरा और दौड़ते हुए टॉयलेट के तरफ जाने लगा तो सान्वी ने ज़ोर से पूछा, “किआ हुआ? कहाँ जा रहा है अब आरव?” तो आरव बोलते हुए गया, “ज़ोर से सुसु आयी है!” और सान्वी ने सांस चोररटे हुए कहा, “अरे यह तो अभी यहीं मुठ देता अगर मैं और दांती तो!!” किआ अपने बाप और भाई के डांटने से भी ऐसा होता है उसस्के साथ?!” सान्वी ने सोचा आरव को साइकोलॉजिकल प्रोब्लेम्स है…..

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 
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