Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 3 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

अपडेट 19 बोथ स्टिल टुगेदर

तो उन्हों ने संजना के छाती पर अपना चेहरा किये हुए बड़े नरमी से अपने जीब को बाहर किया और संजना के नरम बूब पर फेर्रा और जैसे hi उसस्के जीब ने वहां छुवा तो संजना उनके सर को थामे हुए गर्दन को ऊपर उठाया और उस्सकी आह निकल गयी…..

अब आगे……..

संजना की नरम, नाज़ुक बूब चावला साहब के मुंह में था और संजना की गर्दन ऊपर छत के तरफ उठे हुए ेंख मुंढे हुए धीमी आवाज़ में ‘आआह्ह्ह’ किये जा रही थी और चावला साहब की नज़रें संजना के चेहरे पर था उस्सकी बूब चूस्ते हुए. संजन की मुठी में चावला साहब के सर के बाल भरे हुए थे उस वक़्त. संजना चावला साहब की जीब अपने नाज़ुक निप्पल पर उस्सकी रागढ फील करते हुए और ज़ोर से उनके बालों को अपनी मुठी में जकरा और ज़्यादा ज़ोर से “आआह्ह्ह्हह सष्स्स्सस्शःशशशह” करती गयी. चावला साहिब का दूसरा हाथ उस्सकी दूसरे बूब को मसल रहा था और संजना बेहाल होती जा रही थी बीएड पर.

कुछ पल बाद चावला साहब ने मसलते हुए बूब को चोरर कर उस हाथ को संजना के जाँघों के बीच किया और धीरे से संजना की योनि पर लगाया जिस से संजना ने ेंखें खोल दी और फिर से कहा, “उफ़ वहां मत छुवो नाह बहोत सेंसिटिव है वहां प्लीज,” तो चावला साहिब बिना कुछ कहे दूसरी बूब को मुहं में लेकर चुस्सने लगा और संजना ने फिर से ेंखें मुंध लिए उस्सकी बूब की सूचक को फील करते हुए. और चावला साहब ने अपने लुंड को उस्सकी घुटने के थोड़ा ऊपर दबाया और रगड़ा…. क्यूंकि वो बूब चूस रहा था तो उस्का लुंड वहीँ रीच होता था उस वक़्त, तो वहीँ रगड़ा और फिरसे संजना ने ेंखें खोल के देखा और एक हाथ से उनके लुंड को सहलाया अपने घुटनों पर दबाते हुए, जैसे संजना उनको हेल्प कर रही थी.

बूब को खूब चुस्सने के बाद चावला साहब संजना के ऊपर चढ़ गया कम्प्लीटली, तो संजना ने कहा, “हम्म्म आप भारी हो, मैं आप का वज़न नहीं सपोर्ट कर पाउंगी हम्म्म!” तो चावला साहिब ने कहा, “वेट मैं अपने बाज़ुओं पर अपना वेट सपोर्ट करूँगा और तुमको भारी नहीं फील होगा.” तो उन्हों ने संजना के दोनों कांधों के तरफ एक एक बाज़ू को किया और अपने केहुनी पर सपोर्ट करते हुए अपने लुंड को संजना के छूट के ऊपर रगड़ना शुरू किया, आहिस्ते आहिस्ते शुरू करते धीरे धीरे रफ़्तार बढ़ता गया रागढ की. संजना उसस्के निचे एक छोटी सी डॉल दिख राकी थी उस वक़्त. जानवरों की मिसाल ली जाये तो समझ लीजिये के ऐसा लगता था एक हाथी एक खरगोश के ऊपर चढ़ा हुआ है. मगर संजना की बदन, उस्सकी बूब्स और जांघें बिल्कुल फिट दिख रहे थे किसी भी आदमी से सेक्स के लिए. उस्सकी बॉडी सेक्सुअली बिल्कुल फिट दिख रही थी हालां के कोमल और नाज़ुक नज़र अति थी संजना मगर नंगी देखि जाए तो कुछ और थी उस्का जिस्म.

और चावला साहब रगड़ते हुए एकांत बार अपने लुंड को फिसलते हुए संजना की जाँघों के बीच कुछ इस तरीके से करते के लुंड छूट के द्वार के तरफ लेजाते तो झट से संजना अपने दोनों जाघों को एक साथ सत्ता देती ताके लुंड छूट के अंदर ना जाये….. जब चौथी बार ऐसा हुआ तो संजना ने बड़े प्यार और आराम से उसी बचपने आवाज़ में चावला साहिब के पीठ पर अपने बाहों को किये और अपनी उँगलियों को वहां फ्रेटी हुए कहा, “अंदर मत जाने दो नाह प्लीज, ऐसे hi रगड़ते हुए ऊपर ऊपर तो आप कर सकते हो मुझे पता है.” चावला साहिब की सांसें बढ़ रहे थे, दिल का धड़कन तेज़ होता जा रहा था मगर उस्सने फिर सोचा ‘इस लड़की को कैसे पता है के ऊपर ऊपर रगड़ते हुए झरर सकता हूँ? ‘िस्सने ज़रूर पहले यह सब किया हुआ है, यह बहोत चालू चीज़ है!’

चावला साहिब हांफने लगा था और उसस्के पसीने छूटने लगे थे तो संजना अपने कलाई से उनके पसीने पांच रहे थे उनके चेहरे में बड़े प्यार से देखते हुए. जितना रागढ का रफ़्तार बढ़ता गया उतना hi चावला साहिब का हांफना भी. और संजना उनके निचे लेती हुई उनके चेहरे में देखे जा रही थी और अपने बाहों के उन् के पीठ पर किये हुए उनको अपने छाती पर ज़ोरों से दबा रही थी उन् के पीठ पर कलाई को फरते हुए. संजना इस कोशिश में थी के चावला साहिब को बहोत ज़्यादा प्यार करें के वो जल्दी से प्लीज हो जाये और झरर जाये. जिस जगह लुंड रागढ रहा था वह संजना के जांघें और छूट की शुरुवाती निचे के हिस्सा लाल हो गया था और संजना को उस जगह पर बहोत गर्मी महसूस हो रही थी….

जब संजना ने देखा के ज़्यादा टाइम हो गया और उंनका नहीं झरर रहा है तो कहा, “मैं पथ के बल सोती हूँ आप पीछे में रगड़ो ज़्यादा क्विकली हो जाएगा हम्म?” तो अब चावला साहिब को जैसे पूरा यकीन हो गया के यह लड़की बहोत कुछ जानती है, िस्सने सब कुछ किया हुआ है पहले भी. खैर, चावला साहिब का लुंड फनफना रहा था, जमके खड़ा था और घुस्सने के लिए बिल्कुल तैयार था मगर संजना वर्जिन थी तो चावला साहिब तरस खा रहा था उस पर. सोच रहा था के खुद को सच में वो ऊपर से hi करके खुद को प्लीज तो कर hi सकता है, और उनको कोई जल्दी भी नहीं थी संजना की छूट के अंदर अभी घुसने को. चावला साहिब यह भी सोच रहा था के अगर उसस्के बेटे के साथ सच में इस्सकी शादी हुई तो वर्जिन तो अपने बेटे के लिए संजना को रखना होगा. उस्सने सोचा शादी के बाद भी इस्सकी छूट मार सकता है कभी भी, तो अभी ऊपर से hi काम चला लेने में किआ हर्ज है.

और चावला साहिब उठे, तो संजना अपनी पथ के बल लेट गयी. चावला साहिब उस्सकी गांड देखते हुए खुद से कहा यह एक 18 साल की लड़की की गांड इतनी बड़ी कैसे हैं? जब संजना कपड़ों में होती है तो कोई भी नहीं कह सकता के इतनी खूब सूरत गांड की मालकिन है यह. चावला साहिब भूके भेड़ए की तरह संजना की गांड को मसलते हुए उनको चुम्मा और अपने जीब फेर्रा जिस से संजना सेहम सी गयी और गर्दन घुमा कर उनको देखने लगी…. गोरी गोरी उभरे हुए गांड, चिकनी बिल्कुल बिना किसी दाग के, चावला साहिब के जी में आया के संजना की गांड hi मार ले…. मगर फिर सोचा के नहीं उस्सको ज़्यादा दर्द होगा, चिल्लायेगी, तो उसस्के ऊपर चढ़ा और गांड के बीच ो बीच, दोनों हिस्सों के बीच में लुंड रखा और संजना के गर्दन के पीछे छत्ते चूस्ते हुए लुंड रगड़ने लगा गांड के ऊपर, और इस बार बिल्कुल देर नहीं हुआ क्यूंकि साहब संजना की बेदाग़ पीठ और उस्सकी कर्व्स को ध्यान से देखते हुए कर रहा था, इतनी चिकनी और मस्त बॉडी थी के जल्द hi उनके दिमाग़ के न्यूरॉन्स ने स्पर्म को लुंड के तरफ भेज दिया, और कहाँरते हुए चावला साहिब ने तड़पते आवाज़ में, “ायघघघघघघघ, स्सश्श्श्श्श्श्श्श ऊऊफफफफफ” करते हुए अपने वीर्य की पिचकारी संजना के गांड से होते हुए उस्सकी पीठ पर यहाँ तक के गर्दन और सर के बालों पर भी पहुँचाया!! संजना मूढ़ कर देखने लगी थी जिस वक़्त चावला साहिब तड़पने लगे थे और संजना को समझ में आगया के वो झाररने लगे हैं तो जिस दम संजना मुड़कर देख रही थी एक कटरा वीर्य की उस्सकी गाल पर पड़े!! उस्सने अपने हाथ को गाल पर फेर्रा और चावला साहिब की उस कतरे वीर्य को अपने दो उँगलियों में मिस्सते हुए एक नटखटी मुस्कराहट के साथ चावला साहिब के ेंखों में देखते हुए कहा, “हम्म्म मैं प्यासी नहीं हूँ जो आप अपने पानी मेरे चेहरे तक कर रहे हो आप! नॉटी मन!” चावला साहिब बहोत ज़्यादा हांफ रहे थे और कुछ जवाब नहीं दे पाया, लेता रहा कुछ देर संजना के पीठ पर, और संजना ने कहा, अब आप हत्तीए भी मैं आप के उस मॉन्स्टर को देखना चाहती हूँ के उलटी करने के बाद किस्सा दीखता है हीहीहीहीहीही”

तो चावला साहिब जल्दी से अपने पीठ के बल लुढ़क गया और संजना बैठ कर उनके लुंड को अपने हाथ में लेकर एक खिलोने की तरह जैसे एक्सामिने करने लगी, थोड़ा मुस्कुराते, थोड़ा होठों को दांतों में दबाते, कभी चावला साहिब के चेहरे में देखते तो कभी उनके लुंड को देखते, संजना एक बची की तरह बेहवे कर रही थी. तब चावला साहिब ने कहा, “लेलो नाह मुंह में इस्को!” और संजना ने कहा, “इसी का तो इंतज़ार कर रही हूँ के आप इस्को मुहं में लेने को कहो क्यों नहीं कह रहे थे आप?” और उस्सने लुंड को मुंह में लेते हुए चावला साहिब के चेहरे में देखने लगी उनके लुंड को चूस्ते और चाटते hue…..Chawla साहिब जैसे सातवां आसमान पर था, तृप्ति आवाज़ में “aaaaaaaaaahhhhhh” करते हुए.

संजना ने चुस्सने के बाद लुंड को हाथ में कुछ देर लिए रखा उस्सको मुरझाते हुए देखने के लिए, जैसे जैसे वो मुरझाता गया वैसे वैसे संजना के चेहरे पर मुस्कान बढ़ती गयी लुंड को जैसे निहारते हुए. और संजना ने वो किया जो चावला साहिब ने बिल्कुल नहीं सोचा था वो करेगी… संजना ने लुंड को अपने चूचियों पर रगड़ा काफी देर तक कुछ जिस्मानी एहसास को फील करते हुए… सजाना उस दौरान अपनी ेंखने मुंध ली थी और अपने चूचियों पर लुंड को रगड़ते गयी काफी देर तक और चावला साहिब उस्सको हैरान देखता रहा बिना कुछ कहे. फिर कुछ देर बाद संजना ने उस मुरझाए हुए लुंड को किश किया, प्यार किया और थोड़ा अपने मुंह में लिया फिर चावला साहिब को दिखते हुए कहा, “देखो अब तो इस्को पूरा मुंह में ले सकती हूँ, क्यूंकि अब छोटा हो गया है हीहीहीहीहीहीहीही” उस्सकी इन् अदाओं पर चावला साहिब फ़िदा थे.

तो बे कॉन्टिनोएड…………………… (1571 वर्ड्स)
 
अपडेट 20 चावला साहब स्टिल ात हेर प्लेस

सजाना उस दौरान अपनी ेंखने मुंध ली थी और अपने चूचियों पर लुंड को रगड़ती गयी काफी देर तक और चावला साहिब उस्सको हैरान देखता रहा बिना कुछ कहे. फिर कुछ देर बाद संजना ने उस मुरझाए हुए लुंड को किश किया, प्यार किया और थोड़ा अपने मुंह में लिया फिर चावला साहिब को दिखते हुए कहा, “देखो अब तो इस्को पूरा मुंह में ले सकती हूँ, क्यूंकि अब छोटा हो गया है हीहीहीहीहीहीहीही” उस्सकी इन् अदाओं पर चावला साहिब फ़िदा थे.

अब आगे…………..

संजना की उन् बचकानी हरकतों को देख कर चावला साहब हैरान थे. और बहोत hi प्यार ारः था ुसस्पर. कभी कभी उस पर शक कर रहे थे चावला साहब तो कभी कभी उनको नादाँ समझ रहे थे. उनके समझ में नहीं ारः था के किआ सोचे संजना के बारे में. इतनी सी लड़की और इतना प्यार करना जानती है और अदा तो ऐसे पायी है के किसी भी मर्द को दीवाना बना दे. जिस तरह से संजना ने उनको चूसा, और किआ किआ किया उसस्के लिंग के साथ सब चावला साहिब को सोचने पर मजबूर कर रहे थे के संजना ने यह सब कुछ पहले भी किया हुआ है या अक्सर करती है, मगर खुद अपने सोच को शक सोचकर बात को भूला देते थे.

कुछ देर तक दोनों बिस्तर पर वैसे hi नंगे पुंज लेते रहे. उस दौरान संजना उनके लिंग पर अपने गाल लगा कर जैसे प्यार से रेस्ट कर रही थी जिस से धीरे धीरे चावला साहिब का फिरसे खड़ा होने लगा था और संजना वही अपनी हीहीहीहीहीहीही करते हुए अपने ऊँगली से उस पर पॉइंट करते हुए दिखा रही थी चावला साहिब को.

तो चावला साहिब ने मुस्कुराते हुए उस से कहा, “वो फिर से तैयार हो गया है खुश करो उसे!” तब संजना ने छोटे चोरते थपड मारते हुए खड़े लिंग पर बचपने आवाज़ में डेंटन को दबाते हुए कहा, “नै, अब नै, यह बहोत शैतान है, (और लिंग से बात करते हुए कहाः) “ेय आराम करो अब मैं नै प्यार करती तुमको अब बहोत कर लिया तुझ से प्यार तू अब सजा!” चावला साहिब हंस पड़े संजना को अपने लिंग से बात करते हुए देख कर.

तब संजना उनके छाती तक गए और अपने सर को उनके सीने पर रख कर पुछा, “किआ आप अभी इसी वक़्त फिरसे कर सकते हो किआ?” तो चावला साहिब ने पुछा, “क्यों तुम और करना चाहती हो? और मज़ा चाहिए तुझे मेरी पारी?” संजना ने जवाब दिया, “नहीं नहीं मैं तो इस लिए पूछ रही हूँ के आप का वो फिर से मोटा और लम्बा हो गया यह आप ने जान बुझके किया नाह?” चावला साहिब फिर से हँसे और कहा, “मैं ने कुछ नहीं किया वो तो तुमने खुद किया उस पर अपने प्यारी नरम गाल जो लगा कर लेती हुई थी, उस्सको तेरे बॉडी की हर्र हिस्से से प्यार हो गया है, तो वो तुम्हारे छुवन से फिर जाग गया और उस्सको मन किया” तो संजना ने सिर्फ अपना मुंह बनके और नाक को थेड़ा करके अपने जीब थोड़ा सा बाहर निकाल कर चावला साहिब को मोचक किया और बीएड से उतर गयी अपना ड्रेस पहने को.

और बिना पंतय के सिर्फ ब्रा और ड्रेस पहना उस्सने क्यूंकि उस्सकी पंतय तो चावला साहिब के पंत की पॉकेट में जो था. तब चावला साहिब ने अपना पंत लिया पेहेन्ने को और पहले अपना अंडरवियर पहने जा रहा था तो झट से संजना ने उस्का अंडरवियर ले लिया और कहा, “यह तो मेरा गिफ्ट है आप भी बिना अंडरवियर के hi पंत पहनिए, मैं इस्को बड़े पैर से संभाल कर रखूगी” चावला साहिब बहोत खुश हुए के संजना ने उस्का अंडरवियर लिया रखने को तोहफे के तौर पर. उस्सने सोचा था वो नहीं लेगी मगर उस्सने लिया तब चावला साहिब अपना पंत पेहेनते हुए पुछा, “और अगर तेरे पापा ने देखा और पुछा किस्सका अंडरवियर है तो किआ कहोगी?” तो संजना ने हँस्ते हुए कहा, “कहदूंगी के चावला साहिब का है और मुझको तोहफे में दिया हीहीहीहीहीहीहीही” चावला साहिब हंस पड़े और फिर भी पूछा, “यह कह पाओगी अपने पिता से?”

तब संजना ने डर्रावनि चेहरा बना कर कहा, “अरे नहीं रे बाबा मुझको मार डालेगा वो अगर इस्सकी भनक भी लगी अगर उस्सको तो!” फिर तुरंत हँस्ते हुए कहा, “और अगर आप से मैं यह कहूं के पापा कुछ नहीं बोलेगा तो?!” चावला साहिब तब थोड़ा हैरान होते हुए कहा, “कुछ नहीं बोलेगा? मेरा अंडरवियर तुम्हारे पास देख कर कुछ नहीं बोलेगा वो?” तब तक संजना किसी और कमरे में जा चुकी थी अंडरवियर को छुपाने या रखने को.

सनजा बाहर नहीं आयी थी के दो ट्रक फार्महाउस के बाहर हॉर्न करने लगे! और कई सारे लोग उन् ट्रकों को घेरे हुए खड़े थे. ड्राइवर उन् में से कुछ लोगों से बातें कमर रहे थे अंदर से चावला साहिब ने देखा. तो धडपडाते हुए बाहर गए उन् लोगों से मिलने और समझाने के किआ करना है कहाँ टेंट लगाना है और कैसे किआ करना है. कोई 20/25 लोग थे कुल मिलकर. और वह सब शाम तक और कल का दिन भी यहाँ काम करने वाले थे.

अंदर से संजना झांक कर देखती रही थी कुछ देर तक. वो सोच रही थी के बाहर जाएँ या नहीं. कुछ देर वेट किया और जब चावला साहिब नहीं लौटे तो संजना बाहर गयी. वो अंदर कपडे बदल रही थी, और बाहर इस साडी में निकली और कुछ ऐसी दिख रही थी, और सारे मर्दों के नज़र उस पर ठीके रहे, चावला साहिब नहीं समझ रहे थे के सब किआ देख रहे हैं क्यूंकि वो संजना से पीठ किया हुआ था और जब मुदा तो संजना ऐसे कड़ी थी:

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पहली बार चावला साहिब ने उस्सको साडी में देखा, उस्सकी गोरी कमर, नबी से लेकर ऊपर चोली की शुरुवात तक इतनी गोरी और बेदाग थे के उस्सको चूमने को मैं कर रहा था, तब चावला साहिब ने सोचा के सभी ट्रक के मर्द और नौजवान उसी के जिस्म को देख रहे हैं तो चावला साहिब ने संजना को अंदर वापस जाने को कहा, मगर संजना ने नखरें करते हुए कहा के वो वहीँ रहेगी, मगर चावला साहिब ने उसस्के काँधे पर हाथ रखा और उस से बातें करते चलते हुए अंदर लगाया संजना को.

अंदर जाकर संजना को अपने गॉड में बिठाया चावला साहब ने और कहा के कुछ शरबत वग़ैरा तैयार करें उन् आदमियों के लिए और वो कैटरिंग लोगों को फ़ोन करके खाने के लिए मंगवा रहे हैं. तभी चावला साहिब का फ़ोन बजा और सान्वी की फ़ोन थी. तो चावला साहिब ने उठाया संजना के सामने और आहिस्ते से उस से कहा, “मेरी बड़ी बहु का है” तो संजना ने कहा, “मैं बात करुँगी, और ज़िद करने लगी एक छोटी बच्ची की तरह जिस्सको सान्वी ने सुन्न लिया और पुछा, “कौन बच्ची आप के पास ज़िद कर रही है? संजना की कोई छोटी बेहेन है किआ पिता जी?” संजना ने भी सुना क्यूंकि मोबाइल लाउड स्पीकर पर था! तो उनको सुनकर संजना ने दांतों में जीब दबाते हुए चावला साहिब को देखा.

चावला साहिब ने सान्वी से कहा, “अरे नहीं एहि तो संजना है!”

सान्वी: “व्हाट? उस्सकी आवाज़ इतनी छोटी बच्ची जैसी है और वो आप के इतने करीब है के इतना ज़िद कर रही है मुझसे बात करने के लिए?! मुझे नहीं पता था के आप उसस्के इतने करीब हो!”

चवा साहिब: “अरे मैं ने कहा था नाह तुमसे के मेरे फार्महाउस में रहते हैं इस्सके पिता वग़ैरा वग़ैरा!”

सान्वी: “अचछह ok, मुझे दो मैं उस से बात करूँ तो ज़रा, आप ने मुझे वहां लेजाना सही नहीं समझा पता नहीं क्यों?”

चावला साहिब हाथ के इशारे से संजना से कहा के कुछ इधर उधर के बात नाह करे और जल्दी से काट दें फ़ोन को और उस्सको अपना मोबाइल थमा दिया.

संजना ने फ़ोन लिया और अपनी धीमी आवाज़ में कहा “hello, मैं संजना हूँ”

सान्वी को उस्सकी आवाज़ बहोत पसंद आयी और उसस्पी प्यार आगया. तो कहा, “hi, तुम्हारी आवाज़ कितनी प्यारी है पिता जी ने कल कहा था तुम्हारे बारे में बहोत सारे बेटे किये थे हम ने!”

संजना चावला साहिब के तरफ देखते हुए अपना जीब अब भी दांतों में दबाते हुए सुन रही थी मोबाइल पर. लगता था के उस्सने या दोनों ने कोई चोरी किया हो और दन्त पड़ने वाला है, कुछ ऐसा बेहवे कर रही थी संजना. और जवाब में सान्वी को सिर्फ “जी” कहा.

सान्वी ने कहा, “अरे सिर्फ जी? मुझसे बात तो करो थोड़ा सा. हम तुमको देखने आरहे हैं वीकेंड में पता है नाह तुमको.?”

संजना ने फिर कहा, “जी”

सान्वी ने फिर से कहा, “किआ जी जी लगा रखा है कुछ तो बोलो!”

तो सनजन ने यह कहकर चावला साहिब को फ़ोन थमा कर भाग गयी, “जी मुझे शरबत बनाना है आदमियों के लिए मैं किचन में जा रही हूँ आप बात कीजिये”

और फिर सान्वी ने कहा, “पिता जी आप भी आज सुबह बिना अपने दोनों बेटों मिले hi निकल पड़े, आप ने तो इन् से बात करि hi नहीं के लड़की देखने जाना है?! कब बताओगे आरव को? मैं बोल्डन किआ? और संजना की फोटो दिखदूं आरव को?”

तो बे कॉन्टिनोएड………………….
 
अपडेट 21 चावला साहिब रिटर्न्स आफ्टर ा डे स्पेंट विथ हेर

चावला साहिब ने अपनी बहु को कोई जवाब नहीं दिया उसस्के सवाल का, बल्कि उसने बात बदल कर दूसरी बातें करने लगे और कहा के बहोत काम है शाम को घर आकर बात करेगा.

इधर सनजना ने शरबत बनायी और ट्रे में लेकर बाहर उन् आदमियों को देने जा रही तो चावला साहिब ने उस्सको रोकते हुवे कहा के बोतल में भर कर उन् लोगों को शेयर किया जाएगा वह लोग खुद अपने आप में बाँट कर पिलएंगे. एकांत प्लास्टिक वाले बोतल में शरबत भरे गए और चावला साहिब खुद उन् आदमियों को बाहर देने गए. उन मर्दों में से लगभग सभी के नज़रें संजना को hi ढूंढ रहे थे, सबके नज़र घर के दरवाज़े पर थे यह देखते हुए के कहीं संजना उनको नज़र न आजाये. फिर कैटरिंग वाले वन ए खाने का सामान लेकर तो चावला साहिब ने एक टेबल लगा दिया बाहर जहाँ टेंट लगने वाला था ताके सब खाने के वक़्त बैठ कर वहीँ खाना खाएं. संजना घर के अंदर से बाहर का नज़ारा झांक रही थी रह रह कर.

एक बार वैसे hi संजना खिरकी के पास घर के अंदर hi से खिरकी का पर्दा हत्ता कर देख रही थी और वहां के कुछ आदमी उस्सको देखने लगे खिरकी पर, तो चावला साहिब उन् आदमियों के नज़रें फॉलो करते हुए मुड़के देखा के संजना खिरकी के पास कड़ी बाहर देख रही थी तो तुरंत अंदर गया उसस्के पास. कुछ खाने पिने को लेकर गया, और अंदर जाते hi कहा “चलो अब खाना खालो सुबह से भूकी हो नाह? ावो कहते हैं दोनों मिलकर.”

टेबल पर वो बैठे खाना खाने को, तो संजना उनके गॉड में आकर बैठी एक बच्ची की तरह और कहा, “हम्म्म आज आप मुझको अपने हाथों से खिलाओ अब!” एक तो उन्हों ने अंडरवियर नहीं पहना हुआ था, ऊपर से संजना की गद्रे बदन, नितम्बों का वो नरम हिस्सा उसस्के लिंग को बेकाबू करने लगे…. संजना ने भी फील किया और बड़े आसानी से बिना झिझक कह दिया, “आप का वो बदमाश बिना अंडरवियर के मेरे को बहोत फील हो रहा है, अभी थोड़ा बड़ा होने लगा है, अब वो शैतानी करेगा नाह?” चावला साहिब ने संजना का मुंह चुम लिया जब उस्सने इतने भोलेपन से वो कहा तो.

फिर चावला साहिब अपने हाटों से संजना को खिलाने लगे और एक निवाला अपने मुंह में लेते तो एक निवाला संजना के मुंह में डालते. ऐसे करते करते एक बार चावला साहिब ने एक निवाला जो अपने मुंह में ले चुके थे उस निवाले को अपने मुंह से संजना के मुंह तक लगाए और संजना ने मुंह खोला और उस निवाले को चावला साहिब के मुंह से लिए अपने मुंह में. चावला साहिब बेहद खुश हुए. फिर थोड़ी देर बार एक निवाला जो चावला साहिब ने संजना के मुंह में दाल दिया था, संजना ने चावला साहिब को अपने मुंह खोलने को कहा, तो अपने मुंह का निवाला उस्सने चावला साहिब के मुंह में डाला….. उसस्के बाद हर एक दूसरे के मुंह से निवाला खाया दोनों ने जब तक खाना ख़तम नहीं हुआ. चावला साहिब बहोत hi खुश थे और संजना भी. संजना ने कहा, “किसी का झूठा खाने से प्यार बढ़ता है यह सच है नाह? हमारा प्यार बहोत बढ़ेगा अब.” यह सुनकर चावला साहिब मुस्कुरा दिए.

और जो लोग टेंट बना रहे थे उन् में एकांत आदमियों को बाहर से खिरकी के तरफ से नज़र आगया के संजना चावला साहिब के गॉड में बैठी हुई है और गांड हिल्ला रही है जैसे चावला साहिब के लुंड को मस्सल रही है अपनी गांड से. बाहर टेंट में बात फेल गयी और बारी बरी करके तक़रीबन सब ने देखा और तबसे अंदर नज़र किसी नाह किसी तरह रखते रहे बाहर वाले आदमी लोग. और अंदर खाना खाने के बाद चावला साहिब ने संजना को एक लम्बा वाला किश किया मुंह में एक दूसरे के जीब चूस्ते हुए. यह तो बाहर वालों ने सब देखा. एक एक करके देखने आये.

बाहर के आदमी लोग सोच रहे थे यह उस्सकी बेटी है और बाप बेटी में चक्कर हैं. उणमें से कोई भी चावला साहिब को नहीं जानता था. ड्राइवर भी नहीं जानते थे. वो तो कंपनी वालों से कांटेक्ट था उनको तो मैनेजर्स ने भेजे थे ड्राइवर और आदमियों को.

फिर कुछ देर बाद चावला साहिब ने संजना को गॉड में उठाते हुए बैडरूम के अंदर चले गए और फिर से इश्क फ़रमाया दोनों ने एक बार फिर बिल्कुल नंगे होकर…. शुक्र है के बाहर वाले आदमियों ने यह सब नहीं देखा…. इस बार चावला साहिब ने पीछे नहीं संजना के आगे करा, उस्सकी योनि के ऊपर अपने लिंग रागढ कर वीर्य चोर्रा, संजना ने खूब मदद किया उस्सको चूस कर, रगड़ते वक़्त सेहला कर और चावला साहिब के जीब चूस कर और अपने चूचियों को खूब चुस्सवा कर. संजना भी झररि और चावला साहिब को भी झर्राया संजना ने और झाररने के बाद उनके लिंग को चूसा और छठा भी संजना ने.

और जब दूँ बैडरूम के अंदर बीएड पर hi लेते हुए थे नंगे तो संजना के पिता की आवाज़ सुनाई दिए उन् आदमियों से बात करते hue…..Sanjana धडपडाये हुए, हड़बड़ाए हुए कपडे पहनी, और चावला साहिब bhi….ussne पहले पहना और हॉल में चला गया देखने के आनंद किश तरफ है, शुक्र है के वो बाहर hi रुक गए थे आदमियों को काम करते हुए देखने के लिए वार्ना आज सब उसस्के सामने आजाता! उसस्के आने का वक़्त तो नहीं था पर उस्सने लीव लेकर आया काम से क्यों के वह लोग उनके यहाँ टेंट डालने को आये थे.

और जब संजना अपने कमरे से बाहर निकले तो चावला साहिब ने उस्सको अंदर hi रुकने को कहा और बाहर गया आनंद से मिलने को. संजना का दिल बड़े ज़ोरों से धारक रहा था तो उस्सने चावला साहिब से पूछा, “किआ कहोगे पापा से अंदर किआ कर रहे थे? मुझसे पूछा तो वही जवाब देना चाहिए दोनों को! जल्दी बोलो किआ बोलना है?!” तो चावला साहिब ने कह, “अरे हम खाना खा रहे थे और किआ? और खाते वक़्त बातें कर रहे थे बुसस एहि!” तो संजा ने मुंह बनाते हुए कहा, “ok ठीक है जी”

चावला साहिब आनंद से मिले और उस्सको कोई 1 लाख रूपए दिया बाकी के एक्सपेंसेस के लिए और कहा किसी चीज़ की कमी नहीं होनी चाहिए. टेंट और डोरशंस उस्सकी ज़िम्मेदारी थी उस ने कंपनी को पेमेंट कर दिया था. ये 1 लाख आनंद को दिया के अगर किसी तरह के एक्सपेंस हुए सगाई के लिए तो वो इस्तेमाल करें. वह आदमी लोग चावला साहिब को घुर्र रहे थे क्यों के सब ने उनको संजना को किश करते हुए देखा था. और सब को पता थे के उसस्के बाद दोनों रूम के अंदर थे तो आपस में सब ने एहि बात किये थे के अंदर चुदाई हो रही है. सब लोग एहि बात कह रहे थे के इतनी जवान और खूबसूरत लड़की इस आदमी को कैसे मिला… फिर खुद आपस में इन्ही लोगों ने कहा के अमीरज़ादा है बहोत पैसे वाला है इसी लिए उस्सको इतनी खूबसूरत लड़की मिली छोड़ने को.

शाम के 5 बजे काम अधूरा चोरर कर सब लोग चले गए क्यूंकि उन् लोगों का काम का टाइम ओवर होता है 5 बजे कम्पनी का उसूल था. दूसरे दिन या तीसरे दिन तक काम चालु रहेगा सब ने एहि कहा वापस जाने से पहले.

अब आनंद ने वही पिने का प्रोग्राम फिरसे बनाया मगर अब चावला साहिब ने मन किया ड्राइविंग के बहाना करके. उस दिन तो संजना को अकेले में लेना था इस लिए आनंद के साथ पिया था पर आज तो दो बार कर लिया था तो पिने की ज़रुरत नहीं थीउ उस्सको देसी थर्रा….. तो चावला साहिब ने घर वापस जाने का फैसला किया और कहा के वो अब जा रहे हैं कल शायद नहीं आ पाएगा मगर वह लोग काम करने ज़रूर आएंगे.

जब चावला साहिब जाने को तैयार हुए तो संजना रोने लगी. एक कोने में कड़ी रो रही थी. चावला साहिब उंनसे मिलने गए तो अपने बाहों को चावला साहिब के गले में दाल कर उनको जाकर के रोने लगी. आनंद उस वक़्त अपने पिने का सामन खरीदने चला गया था. तो चावला साहिब सजाना को दिलाशा दिलाते उसस्के गालों, पेशानी को, होंठों को चरों तरफ चूमता गया उस्सको छुप करते हुए. संजना एक बची की तरह रो रही थी. बहोत इमोशनल भी थी वो. बिचरने का दर्द हो रहा था उस्सको, बहोत लगाव हो गया था दिन भर साथ रहकर चावला साहिब के. और संजना ने वो किया उसस्के जाने से पहले जिस्का चावला साहिब बिल्कुल, इंतज़ार hi नहीं था उस्सने बिल्कुल नहीं सोचा था संजना वैसा करेगी.

संजना उसी कोने में कड़ी जहाँ चावला साहिब के बाहों में थी, वो वहां अपने घुटनों पर आयी और चावला साहिब के ज़िप डाउन करके उनके लिंग को अपने मुंह में ले लिया. चावला साहिब हकबका गए. वो बाहर देखने लगे के कहीं आनंद ना अजय. क्यों के अंडरवियर नहीं पहने थे तो आसानी से लिंग संजना के हाथ आगया और उस्सने चुस्सना शुरू किया घुटनों के बल होकर और लुंड बिल्कुल तैयार खड़ा हो गया…. चाट रही थी, चूस रही थी, सेहला रही थी, बॉल को भी चाट और एक एक अंडे को चूस रही थी सहलाते हुए, सब कुछ कर रही थी चावला साहिब को खुश करने के लिए और अपने कलाई में लुंड को लेकर मुठ मारने वाले एक्शन करने लगी जीब लुंड के चढ़ पर रगड़ते हुए, और अपने उसी बचपने आवाज़ में कहा, “मैं चाहती हूँ के जाते जाते आप इस्को मेरा एक आखरी टच को याद करे घर jaakar…pura रास्ता आप को एहि याद रहेगा और घर जाने पर भी मुझको यह करते हुए याद करोगे, और यह मोटा शैतान भी खुश होगा और मुझे याद करेगा. इसी लिए यह कर रही हूँ ह्म्म्मम्म” चावला साहिब जैसे बिल्कुल पिघल गए संजना को सुनकर.

पूरा रास्ता वापस घर को ड्राइव करते वक़्त चावला साहिब संजना की जीब को अपने लिंग पर महसूस करता गया अपने घर तक!!

तो बे कॉन्टिनोएड…………………….
 
अपडेट 22 हे अन्नोउंसेस इंगेजमेंट ऑफ़ हिज सोन आरव

पूरा रास्ता आप को एहि याद रहेगा और घर जाने पर भी मुझको यह करते हुए याद करोगे, और यह मोटा शैतान भी खुश होगा और मुझे याद करेगा. इसी लिए यह कर रही हूँ ह्म्म्मम्म” चावला साहिब जैसे बिल्कुल पिघल गए संजना को सुनकर.

पूरा रास्ता वापस घर को ड्राइव करते वक़्त चावला साहिब संजना की जीब को अपने लिंग पर महसूस करता गया अपने घर तक!!

अब आगे……….

घर वापस पहुंचे तो दोनों बेटे घर पर थे. तो तुरंत कुछ नहीं कहा क्यूंकि वो संजना का खुमार नहीं गया था तब तक. वो नहाने को गए. और हमेशा की तरह सान्वी उनके टॉवल और कपडे रखने गए उनके लिए. दोनों बेटे अपने अपने लैपटॉप पर बिजी थे तो किसी को किसी बात का तब तक पता नहीं चला था के नयी बहु धुंडी गयी के छोटे बेटे के लिए. सिर्फ सान्वी जानती थी. हाँ तो जब बाथरूम के पास सान्वी गयी कपडे लेकर तो चावला साहिब अपने बॉक्सर में थे और सान्वी मुस्कुराते हुए उनके काफी करीब जाकर कहा, “नयी बहु से मिलकर आरहे हो जी आप. हम्म अब एक और मिल गयी आप को घर में हैं?” इतना कहकर वो जल्दी से वहां से निकल पारी हँस्ते हुए. चावला साहिब समझने की कोशिश करता रहा के किआ मतलब थी सान्वी की!

वापस अपने कमरे में नहाने के बाद चावला साहिब संजना के कुछ तस्वीरों को देखने लगे जो इस बार खींचे थे. उन् में से कुछ ऐसे थे जो चावला साहिब को दीवाना बना रहे थे, और तुरंत संजना से मिलने के लिए उतावला कर रहे थे:

यह बीएड पर सेक्स से पहले लिए थे

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और यह कुछ पिक्स देख रहे थे चावला साहिब

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लास्ट वाला फोटो देख कर चावला साहिब ने फोटो पर उस्सकी जाँघों को चूमा और अपना जेब फेर्रा तस्वीर पर. और बाकी के फोटोज पर जहाँ जहाँ संजना की चिकनी स्किन दिख रहे हैं किश किया, उस्सकी कांधों पर, इमेजिन किया के वो पिली ड्रेस की स्ट्राप हत्ता कर संजना की शोल्डर को लीक कर रहे हैं….. यह सब करते वक़्त उंनका खड़ा हो गया, सिर्फ बॉक्सर में थे नहाने का बाद अपने कमरे में और अचानक तभी सान्वी अंदर दाखिल हुई!

जल्दी से चावला साहिब ने अपना पीठ किया सान्वी से मगर सान्वी ने उनके हाथ में नॉबिले देख लिया था और जल्दी से उनके करीब आये और पीछे से उनके कांधों पर चेहरा करते हुए कहा, “क्यों पिता जी इतना ग़ौर से किआ देख रहे हो आप के मेरे अंदर आने से आप चिहुंक गए ज़रा देखूं तो मैं भी!” चावला साहिब ने जल्दी से मोबाइल को स्विच ऑफ करते हुए कहा, “अरे नहीं इस्को चार्ज करना है बैटरी बिल्कू लौ हो गया है!” सान्वी उनके पीठ पर सट्टे हुए थे हालां के वो सिर्फ एक बॉक्सर में थे, और आगे तो लिंग खड़ा हुआ था तो चावला साहिब नहीं समझ रहे थे के अब आगे कैसे बढ़ें! तो सान्वी ने कहा, “हम्म्म आप की परफ्यूम तो जान लेवा है कितना महक रहे हो आप जनाब, किसी का क़त्ल करने का इरादा तो नहीं!” चावला साहिब ने झूट मुठ के नाराज़ होते हुए कहा, “तुम मुझको चेररणा बंद करो, बड़ी नटखट हो तुम भी, दीप्ति की तरह मत बेहवे करो, चलो हत्तो, अरे इस्सके चार्जर किधर रखा था!!!!” मुस्कुराते हुए सान्वी एक तरफ होती है और उंनसे कहा, “इस्सकी चार्जर तो वो रहा आप के तकिये के पास सुबह में ने आप के बीएड करते वक़्त वहीँ रख दिया था ताके आप को आसानी से मिल जाये पर आप को कुछ दीखता hi नहीं कहाँ खोये हुए हो आप पिता जी? छोटी बहु का जादू बड़े ज़ोर का है लगता है, इसी लिए मुझे वहां लेजाने से इंकार किया था आप ने नाह?”

चावला साहिब थोड़ा नर्वस दिखने लगे और कहा, “ोफो तुम भी नाह पता नहीं किआ अनाप शनाप बक्ति रहती हो, चलो भूक लगी है खाना पडोसो उन् दोनों से सब कुछ कहना है अब!” सान्वी नहीं जा रही थी बल्कि क्रॉस्ड आर्म्स करके अपने ससुर को मुस्कुराते हुए देखि जा रही थी. तो जब चावला साहिब ने देखा के वो वहीँ कड़ी है तो कहा, “अब निकलो भी मुझे कपडे पहना है!” तो संवी ने हँस्ते हुए कहा, “क्यों? मेरे सामने आप ने कभी कपडे नहीं पहने किआ? छ्हम्म? बताये तो ज़रा?! मैं ने तो आप को सभी कपडे बदलते हुए भी देखा है कई बार!”

चावला साहिब ने कहा, “हाँ मेरी माँ, तुम इस घर की माँ हो एहि कहा था संजना से भी, चलो मेरी माँ मैं अत हूँ!” सान्वी तुरंत थोड़ा हैरान होकर बोली, “अच्छा जी मेरे बारे में उस नयी होने वाली दुल्हन से शिकायत भी कर डेल आप ने? और किआ कहा आप ने मेरे बारे में उस्सको बताओ!” चावला साहिब ने फिर सोचा यह कहकर ग़लती कर दिया उन्हों ने तो फिर कहा, “नहीं ऐसे hi जब तुमने फ़ोन किया था तब संजना ने पूछा था तुम्हारे बारे में तो मैं ने कहा के तुम पूरा घर का ख्याल रखती हो, सबका देख भाल करती हो एक घर की माँ की तरह, बुसस वही!” और यह कहते हुए सान्वी कमरे से निकली, “ठीक है मैं खुद पता लगा लुंगी संजना से मिलने के बाद.” और हँस्ते हुए गयी खाना पडोसने और सब को डाइनिंग टेबल पर बुलाया उस्सने.

कुछ देर बाद सान्वी, उस्का पति विवान, बेटी दीप्ति, और चावला साहब डाइनिंग टेबल पर नज़र आये खाना खाने के लिए. मगर आरव नहीं दिख रहे थे तो चावला साहिब ने कहा, “और वो कहाँ है अब? ग़ुस्सा रहता है मोबाइल या लैपटॉप पर, बुलाओ उससे भी बहु!” तो सान्वी ने आवाज़ दी, “आरव खाना सर्वे हो चूका है ाजाओ!” उस्सने न जवाब दिया नाह वहां आये. तो चावला साहिब ने कहा, “अपने कानों में ईरफ़ोन ठुस्सा होगा तो कहाँ से तुम्हारी आवाज़ सुनेगा वो! जाओ उसस्के कमरे में उस्सको उठा के लावो!” विवान ने भी सान्वी को जाकर आरव को लेन के लिए कहा. तो वो जाने लगी आरव के कमरे के तरफ जब दीप्ति ने कहा, “मम्मी मैं भी चाचा को लाऊंगी वेट कालो मुझे!!” मगर सान्वी ने इशारे से विवान को दीप्ति को अपने पास रुके रखने को कहा.

अब आरव के कमरे में.

सान्वी अंदर दाखिल हुई, आरव के कान में कोई ईरफ़ोन नहीं था फिर भी वो लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था. सान्वी उसस्के पास बैठ गयी बीएड पर और फिर भी उस्का कोई रिएक्शन नहीं था क्यूंकि सान्वी की आदत है वहां जाना, बैठना. सान्वी उस्सको देखती रही कुछ देर फिर उसस्के कान में ज़ोर से चिल्ला कर बोली, “बेहरे को किआ तुम?” तब आरव ने कहा, “अरे किआ भाबी तुम भी नाह बच्चो जैसी हरकत करती हो, मैं एक बहोत इम्पोर्टेन्ट काम कर रहा हूँ कनाडा जाना है मुझे!” सान्वी ने उसस्के काँधे पर अपना थोड़ी रखते हुए पूछा, “अच्छा कब कनाडा जा रहे हो तुम?” तो आरव बोलै, नेक्स्ट वीक ों ट्यूसडे. सब फाइनल हो गया है. सान्वी ने कहा, चल खाना सर्वे कर दिया है सब तेरा वेट कर रहे हैं मैं ने तुम्मो आवाज़ भी दिया तुम बेहरे बने बैठे हो यहाँ, अब उठ भी! चल पिता जी तुमको शॉकिंग न्यूज़ देने वाला है कनाडा जाने वाले!” और उसस्के बाहों में बाहें दाल कर सान्वी और वो दोनों निचे गए टेबल के पास.

खाना कहते वक़्त चावला साहिब ने कहा, “अगले संडे को तेरा मांगनी है आरव. मैं ने लड़की देख लिया सब बात पक्की कर लिया, संडे को हम सब को वहां जाकर तेरा सगाई करेंगे!” यह सुनकर आरव का मुंह एक निवाले के साथ खुला रह गया अपने बाप को देखते फिर सान्वी को देखते हुए! और उस्सने सान्वी से इशारे से कहा के पापा को मन करें! सान्वी ने नाह में सर हिलाया. चावला साहिब ने देखा के आरव नाह कहने के लिए सान्वी को इशारा कर रहा है तो बोलै, “कोई कुछ नहीं कहेगा इस बारे में I’ve गिवेन माय वर्ड्स एंड एवरीथिंग है बीन डीडेड सो आईटी विल बे दोने that’s आल!”

तब विवान ने कहा, “बूत डैड किआ आप को पता है के अगले हफ्ते आरव कनाडा जा रहा है 3 महीनों के लिए?” आरव खुश हुआ के उसस्के बड़े भाई ने कुछ तो कहा जिस से मांगनी रुक सके! मगर चावला साहिब ने डेट और दिन पूछा के कब आरव जा रहा है, और जब उनको मालूम हुआ के मांगनी के 3 दिन बाद तो कहा, “हाँ तो अच्छी बात है मांगनी हो जाएगी तब जाना है नाह उस्सको no प्रॉब्लम इन तहत!” आरव के चेहरे में बिल्कुल भी ख़ुशी नहीं था वो कैसे भी करके इंकार करने की कोशिश में लगा हुआ था.

डिनर के बाद आरव अपनी भाबी और भैया के कमरे में गया और शिकायत करने लगा के उस्सको नहीं करनी कोई मांगनी वांगनी मगर जब सान्वी ने उस्सको संजना की तस्वीर दिखाई तो वो खामोश होगया और शर्माते हुए हाँ कहकर भाग गया. अपनी भाबी से संजना की फोटो अपने मोबाइल पर खुद सेंड किया और अपने कमरे में जाकर संजना को जी भरके देखने लगा.

विवान मोबाइल पर संजना की तस्वीर देखते हुए सान्वी से कहा, “बहोत hi खूबसूरत है, ज़्यादा यंग नहीं लग रही है फोटो में?” तो सान्वी ने कहा, उस्सकी आवाज़ तो नहीं सुन्ना है आप ने, बिल्कुल बच्ची की आवाज़ है, दुलार से बात करती है, पिता जी उसस्के दीवाने हो गए हैं लगता है हाहाहाहा! वो कैसे भी करके उस्सको अपने बहु बनाकर hi दम लेगा. उनकी किसी नौकर की बेटी है, जिस्सको पिता जी ने शायद कोई फार्महाउस गिफ्ट किये थे…. पता है आप को!” तो विवान ने कहा, अरे हाँ तो वो आनंद बेवड़ा की बेटी होगी उसी को पापा ने फार्महाउस गिफ्ट किया है.!!”

तो सान्वी बोली, “हाँ हाँ एहि नाम कहा था पिता जी ने. तो किआ आप संजना को जानते हो? मिली हो उस से कभी?” विवान ने कहा, “याद नहीं शायद मैं बचा था 12/15 साल का तो वो छोटी बच्ची थी, मुझे याद नहीं बिल्कुल.” तो सान्वी ने कहा, अच्छा है वो 18 साल की है और हमारा आरव 26. जोड़ी अचछी रहेगी. आरव भी तो हैंडसम है. मगर सोचती हूँ आरव कैसे एप्रोच करेगा संजना से भला वो इतना शर्मीला है के लड़कियों से दूर भागता है….”

विवान ने कहा, “तुम एहि समझो, एक बार वो इस घर में अजय तो देखना आरव उसस्के पल्लू में ग़ुस्सा रहेगा, जैसे तुम्हारे साथ किया करता था जब तुम्हारी आदत हो गयी थी उससे. अब भी तुम्हारे बिना कुछ नहीं करता लगता है तुम मेरी नहीं उस्सकी बीवी हो!” सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “और पिताजी के बारे में नहीं बोलोगे? के मैं उस्सकी बीवी ज़्यादा लगती हूँ तुम्हारी नहीं हाहाहाहा! कई बार यह कहा है तुमने मुझे! हाँ मैं तीन तीन मर्दों की बीवी हूँ इस घर में! चलो एक और आएगी तो मेरा काम आसान होगा वो बांटेगी आधा काम मेरा तब!” विवान ने कहा, “वो तो आरव की बीवी होगी, पर पिता जी बीवी तो तुम्ही रहोगी नाह? हाहाहाहा!” सान्वी ने कहा, “क्यों? संजना नहीं बनेगी पिताजी की बीवी? सिर्फ मैं hi सब काम करुँगी तीनों के लिए? संजना वैसे पिता जी के बहोत क्लोज लगे मुझे जिस तरह से उंनसे नखरें करके बात करती थी, सामने देखूंगी तब पता चलेगा, ठीक है संडे को सब पता लुंगी मैं!”

तो बे कॉन्टिनोएड………………… (1852 वर्ड्स)
 
अपडेट 23 ात होम विथ सान्वी

सान्वी ने कहा, “क्यों? संजना नहीं बनेगी पिताजी की बीवी? सिर्फ मैं hi सब काम करुँगी तीनों के लिए? संजना वैसे पिता जी के बहोत क्लोज लगे मुझे जिस तरह से उंनसे नखरें करके बात करती थी, सामने देखूंगी तब पता चलेगा, ठीक है संडे को सब पता लगा लुंगी मैं!”

अब आगे……

दूसरे दिन सुबह सुबह चावला साहिब लाउन्ज में इधर से उधर चल रहे थे और कुछ परेशां दिख रहे थे. अस्सल में बात ये थी के वो सोच रहा था के संजना के यहाँ लोग टेंट बनाएंगे, और अन्तर डेकोरेशन वाले भी होंगे और संजना घर पर अकेली होगी और आज वो वहां नहीं जाने वाला है. तो ये सब सोच कर वो बेचैन थे.

सान्वी किचन में चाय बनाते वक़्त उनको देख रही थी और समझ रही थी के चावला साहिब परेशान है. सान्वी भी एहि सोच रही थी के वह चिंता कर रहे होंगे संजना के बारे में सोच कर. और फिर चावला साहिब ने एक सिगरेट जलाया और धुआं चोररटे हुए लाउन्ज नाप रहे थे अपने क़दमों से. तो सान्वी उनके पास आयी और कहा, “पिता जी मैं ने आप से कहा है नाह के घर के अंदर सिगरेट मत पिया कीजिये आप के इस धुंए को हम सब स्मोक करते हैं ख़ास कर दीप्ति के लिए यह अच्छी बात नहीं है और आप तो हमेशा बाहर जाकर पीते हो तो आज अंदर hi क्यों सुलगा लिया? ऐसी किआ परेशानी है भला?”

संवी सुबह सुबह इस वक़्त हमेशा अपनी निघ्त्य में होती है मगर गाउन निघ्त्य के ऊपर होती है हमेशा. थोड़ा सा हलके से उसकी क्लीवेज दिख रहे थे और निघ्त्य की ऊपरी हिस्सा और एक तरफ के स्ट्राप भी. चावला साहिब की नज़र सीधे उसी पर पड़े जब सान्वी सामने आयी तो, और वो देख कर चावला साहिब को संजना hi याद आयी के उसने उस्सको अभी तक निघ्त्य में नहीं देखा है. और सान्वी अपने ससुर की नज़र को अपने क्लीवेज पर देख कर थोड़ी सी मुस्काई और कहा, “आप बहार जा कर पियो यह कैंसर की पाइजन को! पता नहीं कब आप इससे पीना चोररोगे थक गयी हूँ समझते समझाते मैं!” तो चावला साहिब हड़बड़ाते हुए तेरास पर चला गया. इधर सान्वी अपने खुद के गिरेहबान में झाँक कर अपनी खुद की क्लीवेज को देखा यह देखने के लिए चावला साहिब को कितना नज़र आया. और खुद मुस्कुराते हुए किचन के तरफ जाते हुए खुद से कहा, “उनकी ठरकी नज़रें दौड़ते hi रहते हैं मुझपर, वो समझते हैं मैं नहीं समझती, पता नहीं संजना को भी ऐसे देखते होंगे या नहीं…..!”

चावला साहिब धडपडाते हुए वापस अंदर गए अपने कमरे के तरफ और वो देख कर सान्वी भी उनके पीछे गए देखने के अचानक किआ हो गया के वो सिगरेट को बाहर रख कर अंदर गए. जब सान्वी उनके कमरे में अंदर घुस्सने hi वाली थी तो चावला साहिब निकल रहे थे मोबाइल हाथ में लिए, और दोनों एक दूसरे से पूरी तरह से ज़ोर से टकराये, इतनी ज़ोर से के सान्वी गिररने लगी और झट से चावला साहिब को उससे थामना पारा. उस एक्शन के दौरान सान्वी की ऊपर की गाउन बिल्कुल कंधे से सरक गए और निचे वाले हिस्से पर उस्सकी गोरी जांघें दिखने लगे और ऊपर काँधे पर उसकी निघ्त्य की पतली स्ट्राप और फुल क्लीवेज बाहर दिख रहे थे. सान्वी उनके बाहों में थी और उस्सकी पेयर में चोट भी लग गयी दरवाज़े से टकरा कर, और वो दर्द में तड़पने लगी एक पाऊँ को ऊपर उठाये हुए. चावला साहिब ने सान्वी को अपने बाहों में थामा हुआ था और उस्सकी नज़रें सीधे सान्वी की जाँघों पर थे उस वक़्त जो सान्वी ने अच्छी तरह से देखा मगर पाऊँ में दर्द इतनी हो रही थी के उस्सकी तवज्जो ज़्यादा पाऊँ पर थी. सान्वी के दोनों हाथ उस लम्हे को चावला साहिब के कांडों पर थे देखने से लगता था दोनों किश कर रहे हैं.

और चावला साहिब ने उस्सको थामे हुए hi पुछा, “कहाँ चोट लगी दिखा!” और सान्वी रोनी सूरत में तृप्ति आवाज़ से कहा, “निचे एंकल की हड्डी पर हम्म्म उफ़ दुःख रहा है, देखो चिल भी गया हम्म्म्म” उस वक़्त कोई भी नहीं जागे थे सब गहरे नींद में थे अपने अपने कमरे में. जिस तरह से सान्वी ने बचपने आवाज़ में दर्द में तड़पते हुए वो सब कहा वो बिल्कुल संजना की अदायें थी और चावला साहिब को लगा के वो बिल्कुल संजना को अपने बाहों में थामे हुए हैं उस वक़्त. उस्का मैं कर रहा था के सान्वी को जाकर के ज़ोर से किश करें उसी वक़्त. क्यूंकि उस लम्हे को वो बिल्कुल सान्वी नहीं दिख रही थी बल्कि चावला साहिब के लिए वो बिल्कुल hi संजना थी! मगर खुद को संभालते हुए उन्हों ने झुक कर कहा, “देखूं तो कहाँ चिल गयी है!” और जब वो झुके तो सान्वी की जाँघों से होते हुए निचे तक नज़र गए उनकी क्यूंकि जांघें बिल्कुल नज़र आरहे थे जबकि गाउन पूरी तरह से सरक के एक तरफ हो गया था, चावला साहिब ने उस्सकी गोरी जाँघों को इस तरह से देखा के मानों अब दबोच लेगा!!

सान्वी झुकी थी अपने हाथ को उनके काँधे पर सहारा लेते हुए और चावला साहिब ने सान्वी की एक पाऊँ को हाथ में ऊपर उठाया देखने के लिए के कहाँ चाओत लगी. सच में एंकल की हड्डी हलके से चिल गयी थी और हलके से स्किन के अंदर से थोड़ा सा खून निकल आये थे. जब चावला साहिब उस पर अपने हाथ फेरर रहे थे जैसे उस्सको आराम देने के लिए तो सान्वी ने तब भी अपने ऊपर वाले ड्रेस को नहीं सीधा किया जांघें तब भी बिल्कुल बाहर थे, ऐसा लग रहा था के जान बुझ कर सान्वी ने अपने जिस्म को अपने ससुर के सामने ेक्सीबित कर रही थी. जब चावला साहिब उस्सकी एंकल को थामे हुए था तो उसस्के बाज़ू सान्वी के जाँघों पर hi सट्टे हुए थे. चावला साहिब सब महसूस कर रहे थे उस वक़्त. यह सब कुछ बुसस कोई 20/25 सेकण्ड्स में hi हुआ मगर लम्बा लग रहा था दोनों को.

तो चावला साहिब ने सान्वी को सहारा देकर लाउन्ज में एक सोफे पर बिठाया और एंटी पैन वाला स्प्रे लाने गया अंदर. सान्वी को बहोत दर्द हो रहा था. अब एंकल है hi एक ऐसी जगह जहाँ चोट लगे तो ज़्यादा hi दुखता है और एक महिला को लगे तो दर्द ज़्यादा फील होता है सच में. चावला साहिब स्प्रे लेकर आया और सान्वी की एंकल को निचे बैठ कर अपने गॉड में रख कर उस पर स्प्रे लगाया. जिस वक़्त सान्वी की एंकल उन् के गॉड में थे तो पाऊँ बिल्कुल चावला साहिब के लिंग पर थे, सान्वी जैसे जान बूझकर अपने पाऊँ को वहां दबा रही थी दर्द में तड़पते हुए. चावला साहिब ने अपने लुंड में हरकत महसूस किया उस्सकी छुवन से.

सान्वी को पता चल रहा था या नहीं यह वही जाने के उस्का पाऊँ चावला साहिब के लुंड पर दबा हुआ है!! स्प्रे लगा तो जलन सी हुई सान्वी को और वो तक़रीबन चिल्लाई और झुक कर चावला साहिब के सर के बालों को अपने मुठी में जकरते हुए बचपने आवाज़ में कहा, “हम्म्म जल रही है उफ्फ्फ्फ़!” तो चावला साहिब ने उस जगह पर फूँक मारा अपने मुंह से. उस वक़्त सान्वी बैठी हुई थी मगर बिल्कुल झुकी हुई थी निचे के तरफ जिस से उस्सकी बूब्स बिना ब्रा के निघ्त्य से जैसे बाहर निकलने के लिए बेताब थे और चावला साहिब के मुंह के बिल्कुल पास थे…. चावला साहिब को सान्वी की पूरी बूब्स नज़र आये यहाँ तक के उस्सकी निप्पल्स भी!! चावला साहिब का खड़ा हो गया और लुंड पर सान्वी का पाऊँ था तो झट से चावला साहिब खड़े हुए और कहा, “मुझे एक ज़रूरी फ़ोन करना है इसी लिए मोबाइल लेने गया था अंदर और मुझे किआ पता था के तुम पीछे आ रही हो!” चावला साहिब को एक तरफ होकर अपने लिंग को पंत के अंदर सीधा करना पारा, उस्सने सान्वी से उस वक़्त अपना पीठ करके बात किये. तब भी सान्वी की जांघें नज़र आरहे थे क्यूंकि वो बैठी हुई थी और एक पाऊँ को ऊपर तो एक को निचे किये हुई थी. चावला साहिब ने कहा, “तुम उस जगह पर धीरे धीरे अपना हाथ मलते रहो दर्द कम हो जाएगा.”

मगर सान्वी ने वही दर्द भरे आवाज़ में कहा, “आप कार्डो नाह पिता जी मुझसे नहीं होगा, मैं हाथ नहीं लगाउंगी वहां मुझे दर्द हो रहा है!” चावला साहिब ने मुड़कर उसस्के चेहरे में देखा और फिर बैठ गया कुछ इस तरह के उस्का लिंग सान्वी को नहीं दिखे और उसस्के एंकल पर आहिस्ते आहिस्ते अपने हाथ से फरते हुए स्प्रे की लिक्विड को मल्ला. सान्वी बड़े प्यार से उनको देख रही थी और कहा, “आप कितना ख्याल करते हो मेरा, मुझे लगा मैं एक बच्ची हूँ और और आप मुझे मरहम लगा रहे हो मेरे घाव पर हम्म्म” चावला साहिब नार्मल नहीं थे सान्वी को उस हालत में सेक्सी देखते हुए और वो वहां से जल्द से जल्द बाहर जाना चाहते थे, उस को डर था के वो सान्वी को बाँहों में लेकर कहीं किश नाह कर दें!! उठने से पहले चावला साहिब ने सान्वी की जाँघों पर अपने हाथों से उस्सकी ड्रेस को ठीक किया उसस्के जिस्म को ढांकते हुए और बाहर चले गए.

तो बे कॉन्टिनोएड इन नेक्स्ट अपडेट इम्मेडिएटली…………… (1523 वर्ड्स)
 
अपडेट 24 चावला साहिब वरीड फॉर संजना

चावला साहिब फ़ोन करने जा रहे थे और एक दूसरा सिगरेट जलाया. और उसस्के ेंखों के सामने सान्वी की बूब्स, निप्पल और जांघें नज़र आरहे थे उस वक़्त. वो मुम्बर डायल करने hi जा रहे थे के सान्वी भी टेरेस पर आयी एक पाऊँ से लंगड़ी की तरह चलते हुए. उस्सको वहां देख कर चावला साहिब ने कहा, “मुझे एक फ़ोन करना है रुको यहाँ क्यों आयी?” तो सान्वी ने बड़े प्यार से उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “आप मुहको एक हुग कीजिये आप पे बहोत प्यार ारः है आप ने मेरे कितना ख्याल रखा आप बड़े केयरिंग हो पिता जी!” चावला साहिब यह कहते हुए उस्सको बाँहों में लेकर एक हुग किया, “ोफो तुम भी नाह बिल्कुल एक छोटी सी बच्ची बन जाती हो कभी कभी , बिल्कुल दीप्ति बन जाती हो, वो बिल्कुल तुम पर hi गयी है!” तो ज़ोर से उनके गले लगते हुए सान्वी ने कहा, “आप मेरे पिता हो, ससुर हो पति भी हो यह आप के बेटे hi कहते है हाहाहा!! तीन पति हैं मेरे इस घर में, मैं सब का ख्याल रखती हूँ और आप मेरा ख्याल रखते हो, जिस तरह से आप ने मुझे अभी सहारा दिया और स्प्रे किया और दर्द को भगाया तो आप पर बहोत प्यार आया. इस लिए आप को हुग करने को मैं किया तो आप से गले मिलने आगयी!” चावला साहिब ने कहा, “हाँ हाँ ठीक है अब मुझे फ़ोन करने दो बाबा!”

मगर सान्वी उनके गले से लगे hi रहे अपने बाहों को उनके कमर पर कस्सके पकड़े हुए, अपने सर को उनके सीने से लगाए हुए और कहा, “मुझे अब भी याद है जब दीप्ति पैदा होने वाली थी घर में कोई भी नहीं था तो आप ने किश तरह से मुझे अपने गॉड में उठाकर घर से बाहर कार में लेकर हॉस्पिटल गए थे, किश तरह से रास्ते भर आप मेरा ख्याल करते हुए ड्राइव कर रहे थे, और दीप्ति ने अपना सर बाहर निकाल लिया था कार में hi याद है नाह आप को? वो दिन मैं ज़िन्दगी भर कभी नहीं भूल पाऊँगी. वो एक ऐसा दिन था जो पति को भी नहीं हासिल होता और आप को वो मौका मिला था….. कितना प्यार करते हो आप हमसे मुझको अच्छी तरह से पता है जी!” चावला साहिब ने कहा, “अरे मेरी माँ इस बात को तुमने 1000 बार से ज़्यादा किया है अभी क्यों फिर से कह रही हो, मैं ने सिर्फ अपना फ़र्ज़ निभाया था उस दिन! अब मैं फ़ोन करूँ किआ? तुम जाओ किचन में मुझे प्यास लगी है और एक गरमा गरम चाय लाओ मेरे लिए!” तब सान्वी ने उन् को चोररटे हुए कहा, “जी अभी लायी” और मुस्कुराते हुए किचन के तरफ गयी!

चावला साहिब को तो कोई और फ़िक्र था जिस्सको वो निपटना छठा था. उस्सने संजना को फ़ोन किया और धीरे से बात किया ताके सान्वी को सुनाई नाह दे! सुबह के 6 बजे थे और संजना तो उस वक़्त नींद में होगी मगर चावला साहिब को यह फ़ोन करना बहोत hi ज़रूरी था. 5 बार फ़ोन करने के बाद संजना ने उठाया और निबद्ध भरी आवाज़ में में कहा, “हम्म्म्म क्यों जगाया मुझे आप ने इस वक़्त मुझे और सोना है अभी हम्म्म्म!!” चावला साहिब ने कहा, “अरे बहोत hi ज़रूरी बात है तुम अपने पापा को जल्दी से फ़ोन दो क्विक बे फ़ास्ट!!” संजना ने एक अंगराई लेते हुए पूछा, “क्यों पापा को क्यों? पता नहीं वो काम के लिए निकल गए या अभी यहीं है ठहरो देखती हूँ! आप नॉटी हो मुझको सोने भी नहीं देते हम्म्म्म!!!” चावला साहिब ने कहा, “नहीं वो अभी नहीं गए होंगे उस्सने कहा था के 7 बजे घर से निकलता है जल्दी फ़ोन दो उससे!”

संजना कमरे से निकली और अपने पापा को फ़ोन दिया जो उस वक़्त घर के पीछे वाले बगीचे में थे. “पापा चावला साहिब का फ़ोन है आप के लिए मुहको जगा दिया आप उनको अपना नंबर दे दीजिये ताके वो आप को खुद फ़ोन करे अगर बात करनी हो तो, सिर्फ मेरा नंबर लिया था उस्सने भी! मुझको नींद आरही है पापा जल्दी से बात करके ख़तम करो हम्म्म्म!!”

चावला साहिब ने सब सुना जो कुछ संजना ने अपने बाप से कहा. तो जब आनंद ने hello साहिब जी?” कहा तो तुरंत सब से पहले चावला साहिब ने कहा, “अबे तुम्हारे पास भी मोबाइल है मुझे नहीं पता था! तो मुझे अपना नंबर दे जल्दी और संजना को वापस सोने के लिए भेजदे बेचारी अब भी नींद में है!”

आनंद: “हाँ साहिब, वो एक पुअरना वाला मोबाइल है यह संजना ने hi लेने को कहा ताके वो मुझसे कांटेक्ट में रह सके काम पर जॉन तो. हाँ तो नंबर लिखये!”

और संजना अपने मोबाइल वापस लेकर चली गयी वापस सोने. तो अब आनंद चावला साहिब का फ़ोन का इंतज़ार करने लगे मगर चावला साहिब ने फिरसे संजना को hi फ़ोन किया. वीडियो कॉल किया वाट्सअप पर! संजना ने उनको देखते हुए कहा, “ोफो आप भी नाह पापा से बात करने वाले थे तो फिर मुझे क्यों वीडियो कॉल किया अब?” चावला साहिब ने कहा, “आरी पुगली तुमको निघ्त्य में जो देखना था, फुल दिखा किसी दिखती हो जल्दी कर तेरे पापा से बात करनी है अभी.” तो संजना ने फ़ोन को दूर करते हुए खुद को दिखाया चावला साहिब को. वो एक छोटी सी निघ्त्य में थी ब्लैक कलर की जिस में उस्सकी गोर गोर तंग, जांघ, बूब्स, शोल्डर सब बहोत अच्छी तरह दिख रहे थे… चावला साहिब का तन्न के खड़ा हो गया और कहा, “ज़रा सा काँधे से स्ट्राप को सरका के बूब दिखा तो!” संजना बीएड पर बैठ गयी और अपने एक स्ट्राप को उतर कर अपने बूब चावला साहिब को दिखाते हुए कहा, “अब बुसस आप तो देखते हो जब आते हो तो अब क्यों देखना है आप को, मुझे नींद आरही है सोने दो नाह प्लीज ह्म्म्मम्म!” चावला साहिब घर के अंदर झांकते हुए के कहीं सान्वी तो नहीं आरही है और धीरे से पूछा, “अरे तो तुम अपने पापा के सामने ऐसे गयी थी अभी फ़ोन देने को?” संजना ने एक अंगराई लेते हुए कहा, “हाँ! उस्सको पता है मैं ऐसी निघ्त्य में हूँ, अरे उसी ने तो ख़रीदा है यह मेरे लिए! हम्म्म्म अब जाओ मुझे सोना है!” चावला साहिब कुछ परेशान दिखे और संजना को सोने को कहा, फिर आनंद को फ़ोन लगाया.

आनंद घर के पीछे वाले बग़ीचे में से फ़ोन लिया और कहा, “हाँ साहिब बोलिये किआ बात है?”

चावला: “आनंद आज तू काम पर मत जा, वह लोग तेरे घर पर काम करने आएंगे, सब सुपरवाइज़ करना मैं नहीं आ पाउँगा आज.”

आनंद: “अरे नहीं साहिब यह आप किआ कह रहे हो, अभी पिछले हफते hi लफड़ा हुआ एब्सेंस की वजा से कंपनी में 3 लोगों को काम से बाहर निकला गया. अभी काम में बहोत सख्ती चल रही है साहिब, कंपनी को लोस्स हुआ और प्रोडक्टिविटी को लेकर बहोत लफड़ा हुआ है मैं एब्सेंट नहीं हो सकता. मामूली कर्मचारी हूँ साहिब, नौकरी से हाथ धोना नाह पद जाये!”

चावला: “तू मुझे कंपनी का नाम बता मैं बात करता हूँ. कोई तुझे कुछ नहीं कहेगा मैं सब का बाप हूँ कौन सा कंपनी है वो बता मुझे और वहां का फ़ोन नंबर दे मुझे!”

आनंद: “अरे नहीं मालिक आप कुछ मत करो वह लोग बहोत कड़क हैं, मैं आप को नहीं देने वाला नंबर और नाम. मुझे वहां टिक्के रहना है साहिब बहोत जद्दो जहद के बाद वहां नौकरी मिली है मुझे. अच्छा सैलरी है साहिब आप को तो पता है मैं आधा ऐसा शराब में उडाता हूँ, संजना की देख भाल के लिया बाकी बचता हूँ यह नौकरी गयी तो मैं किआ करूँगा साहिब! नहीं आप कुछ मत कीजिये सर जी!”

चावला: “अरे तो तू किआ बीमार नहीं हो सकता किआ? फ़ोन करके बोल के तुझे बुखार है और काम पर मत जा आज!”

आनंद नहीं रुकना चाहता था घर पे तो फ़ोन काट दिया और साइलेंट पर कर दिया. चावला साहिब फ़ोन करता रहा मगर उस्सने नहीं लिया. तब तक सान्वी चाय लेकर आयी और अपने ससुर को बड़े प्यार से देखते हुए चाय दिया और उनको पिटे हुए देखती रही बड़े प्यार से उनके सामने खड़े होकर. अब भी उस्सकी क्लीवेज निखार कर दिख रही थी चावला साहिब को. मगर उनको तो संजना की फ़िक्र हो रही थी. वो चाय पिटे हुए सोच रहा था किस तरह से कल वह ट्रक वाले संजना को घुर्र रहे थे और आज अगर वो अकेली होगी और बाहर आयी उन् लोगों से बात किये तो पता नहीं कौन किआ करेगा उसस्के साथ. चावला साहिब सोच रहा था के संजना इतनी चुलबुली और चैलचाल है के किसी से भी बात करेगी और वह लोग उस्सकी अदाओं पर फ़िदा होकर उसस्के घर के अंदर ग़ुस्से और कुछ हुआ तो??! यह सब चावला साहिब को बहोत परेशान कर रहा था. वो सिर्फ यह सोच रहा था के जिस तरह से आसानी से उस्सने संजना को पा लिया तो कोई भी उस्सको उसी के घर में छोड़ सकता है…. उस्सको एक बेचैनी ने घेरर रखा था और सान्वी उनके परेशानी को देख सकती थी.

संवी ने कहा, “आप इतने परेशान क्यों हो रहे हो? किश से फ़ोन पर बात कर रहे थे आप पिता जी? किआ हुवा किआ है बताओ मुझे आप!”

चावला साहिब ने बहाना बनाते हुए कहा, “अरे नहीं वहां आनंद के यहाँ (उस्सने जान बूझकर संजना का नाम नहीं लिया सान्वी के सामने) वह लोग टेंट लगाने और अन्तर décor वाले जाएंगे, बहोत काम है वहां और मैं आज नहीं जा रहा हूँ तो आनंद को घर पर रहने को बोलै ताके वो सुपरवाइज़ कर सके सब कुछ मगर साला काम पर जाना चाहता है!”

तो सान्वी ने कहा, “तो आप चले जाओ खुद अपनी चाहती संजना के पास आज भी!”

चावला साहिब ने अपने नज़रें चुराते हुए कहा, “हम्म वही सोच रहा हूँ के आज फिर जाना hi पड़ेगा मुझे!”

सान्वी बोली, “कमाल है और हाँ कह रहे हो आप? अरे हमारे साथ भी तो कुछ वक़्त बिताओ आप पिता जी? जबसे संजना मिली है आप तो हमारे तरफ देखते भी नहीं, हम किआ ग़ायब हो गए हैं अब?”

चावला साहिब ने कुछ सीरियस होते हुए कहा, “इसी लिए, इसी लिए मैं आज नहीं जाना चाहता था क्यूंकि तुम एहि कहोगी मुझे इसी लिए!!”

तब सान्वी ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे बाप रे आप तो सीरियस हो गए! अरे आप जाओ नाह, मैं ने मन थोड़ा hi किया है आप को, और फिर मांगनी करना है सब अच्छा से होना चाहिए नाह, वैसे आप ने किन्न किन्न लोगों को बुलाया है पिता जी?”

चावला साहिब ने कहा, “यहाँ से किसी को बी नहीं बिल्कुल भी नहीं. मैं नहीं छठा के प्रेस वाले, मीडिया वाले इस बात को उछाले अभी. शादी होगी तब सबको बताऊंगा अभी सिर्फ उधर के गाँव वाले प्रेजेंट होंगे और हम सब बुसस!!”

सान्वी ने फिर कहा, “हाँ ये भी ठीक है, तो अच्छा आप आज दिन के दो पेहेर में उधर चले जाना. अभी तो कुछ वक़्त घर पर रहो. दीप्ति आप को कितना मिस कर रही थी दो दिन से. उसस्के साथ दो पेहेर तक घर पर hi रहो और अपने ऑफिस वालों के काम भी तो देखो आप को पता भी नहीं के आरव को कनाडा जाना है क्यूंकि आप ने तीन दिन से ऑफिस का कोई भी काम नहीं देखा, सब विवान पर चोरर रखे हो आप ने.”

चावला साहिब ने कहा, “हाँ ठीक कह रही हो, आज ऑनलाइन जाकर सब चेक करता हूँ के किश प्रोजेक्ट के लिए आरव कनाडा जा रहा है.”

दिन के 10 बजने को थे और चावला साहिब का दिमाग़ सिर्फ संजना के घर पर था और संजना को सोच रहा था. उस्सने अचानक सोचा के संजना ने कोई फ़ोन भी नहीं किया और खुद से कहा के वो अभी तक सो रही होगी किआ? फिर कहा के वह ट्रक वाले तो बहोत शोर मचा रहे होंगे तो संजना की नींद तो टूट गयी होगी. फिर सोचा के जिस निघ्त्य में वो थी कहीं कोई उस्सको उस में न देखें और उस पर टूट पड़े!! बहोत फ़िक्र हो रहा था उनको, बल्कि जलन कहना चाहिए.

तो उस्सने फ़ोन किया, वीडियो कॉल किया जान बूझकर यह देखने के लिए के वो कहाँ है और कैसे ड्रेस्ड हैं! चार बार फ़ोन बजा मगर संजना नहीं ले रही थी. चावला साहिब अपने लैपटॉप पर ऑनलाइन ऑफिस के काम को देखते हुए और कुछ ऑर्डर्स पास करफ़्ते हुए संजना को कॉल करे जा रहे थे मगर वो नहीं ले रही थी. तो तरह तरह के खयालात आरहे थे उनके दिमाग़ में. सोच रहे थे कहीं वो किसी के साथ बीएड पर तो नहीं है, कोई उसस्के साथ सेक्स तो नहीं कर रहा, कहीं किसी का लुंड उसस्के मुंह में तो नहीं इस वक़्त इसी लिए वो फ़ोन नहीं ले रही है….. जान बूझकर संजना ने कहीं मोबाइल को साइलेंट पर नहीं किया हुआ है ताके कोई उस्सको डिस्टर्ब नाह करे…. किआ हो रहा होगा उस वक़्त संजना के साथ यह सब सोचकर चावला साहिब पागल हो रहे थे.

कोई 40 बार फ़ोन किया उस्सको 10 बजे से 11 बजे तक मगर संजना ने फ़ोन नहीं उठाया तो अब चावला साहिब को यकीन होने लगा के वो छुड़वा hi रही होगी किसी से!!

ग़ुस्सा करने लगा और सोचा के तुरंत अब वहां जाएगा और कुछ देखा तो संजना को थपड मार मार के उस्का गाल लाल कर देगा! और कोई सगाई कुछ नहीं करेगा!

और उस्सने सान्वी से कहा के अब वो जा रहा है संजना के यहाँ. ठीक तभी संजना के तरफ से वीडियो कॉल ारः था!! तो चावला साहिब धडपडाये हुए अपने कमरे के अंदर गए और दरवाज़ा को लॉक कर दिया. सान्वी ने सोचा कोई ऑफिस का फोएन आगया अचानक इस लिए वो वापस अपने कमरे में घुस गए और वो अपने कामों में लग गयी.

चावला साहिब ने कॉल ों किया तो देखा संजना एक खूबसूरत मुस्कराहट के साथ अपने होंठों को गोआल करके किश कर रहे हैं चावला साहिब को और उसस्के बाल भीगे हुए हैं! चावला साहिब पिघल गए और आराम से पूछा, “तुम थी कहाँ मैं ने 40 बार फ़ोन किया तुमको!”

संजना ने अपने चंचल, चुलबुली आवाज़ में कहा, “मैं नहाने गयी थी, अभी फ्रेश हूँ, परफ्यूम भी लगाया है आप ाजाओ मुझको अपने बाहों में लेकर सूंघो मुझे हीहीहीही”

चावला साहिब ने पूछा, “तेरे पापा काम पर गए हैं या घर पर hi है?”

संजना ने रिप्लाई किया, “आज वो लेट गए, कोई 10.30 बजे के करीब. वो उन् लोगों का वेट कर रहे थे, उन् लोगों को पता नहीं किआ किआ बताया तब काम पर गए वो. मैं तब उठी थी सोकर ुर मोबाइल तो साइलेंट पर था और मैं नहाने चली गयी वापस आयी तो देखा आप ने इतने सारे कॉल किये हैं तो आपको खुद कॉल किया हम्म्म ठीक किया नाह जी?”

चावला साहिब को थोड़ा सुकून मिला और कहा, “तुम बाहर गयी थी उन् लोगों से मिलने को?”

संजना: “नहीं बिल्कुल बाहर नहीं गयी हूँ मैं तो नहाने को गयी थी क्यों? कितना शोर मचा रहे हैं वह लोग उफ़!”

चावला: “ज़रा अपनी ड्रेस दिखाओ ठीक से!”

संजना ने मोबाइल को दूर करते हुए दिखाया और चावला साहिब ने कहा, “तुम ने शार्ट पहना हुआ है? तुम्हारी जांघें बिल्कुल दिख रहे है और वो ब्लाउज भी कितनी ट्रांसपेरेंट हैं के तुम्हारे ब्रा साफ़ दिख रहे हैं, जाओ बदलो और एक सवार कमीज पहनों!”

संजना: “ोफो!! आप भी नाह, मैं ने तो यह आप के लिए पहना है आप hi तो कहते हो मेरी जांघें आप को बहोत पसंद हैं और मुझको ऐसे hi सेक्सी देखना चाहते हो आप!”

तो चावला साहिब ने नरमी से कहा, “बेबी अभी मैं वहां नहीं हूँ नाह? तुमको शरबत बना कर उन् लोगों को देना है, तुम बाहर जाओगी तो वह लोग तुमको वैसे देखेंगे तो ठीक लगेगा किआ? इस लिए अभी सवार पहेँलो और उन् लोगों को शरबत दो, मैं कोई देर घंटा में वहां अत हूँ तब मेरे लिए ड्रेस पेहेनना तुम okay? समझ गयी मेरी डार्लिंग बेबी?”

संजना ने नखरें करते हुए कहा, “नहीं आप अभी तुरंत आइये यहाँ मैं आप का वेट करुँगी तब शरबत वारबत देंगे उन् लोगों को!”

चावला साहिब खुश हुए मगर कहा, “नहीं अभी तुरंत नहीं आ सकता क्यूंकि ऑफिस का कुछ काम निपटना है. देर घंटे लग जाएंगे एते आते! तुम वो करो जो मैं ने कहा अभी. निकलने से पहले तुमको बताता हूँ. आधे घंटे का काम है मुझे और दो घंटे तो ड्राइव करना तुम्हारे पास आने के लिए!”

संजना ने okay कहा और किश किया उनको और चावला साहिब ने कॉल को एन्ड किया और वापस अपने काम में लग गए लैपटॉप पर.

तो बे कॉन्टिनोएड…………………. ( 4586 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस!!)
 
अपडेट 25 चावला साहब ात Sanjana’s अगेन


चावला साहिब ड्राइव करते वक़्त संजना को टेक्स्ट मैसेज सेंड करके बोलता है के वो आरहे हैं.

उधर संजना ने पढ़कर तुरंत रिप्लाई किया, “ेआगेरली वेटिंग फॉर यू, जल्दी आइये मैं अकेली हूँ मुउउउउआआआह” चावला साहिब ड्राइव करते हुए hi पढ़कर हंस्ता है और मोबाइल को किश करके फ़ास्ट ड्राइव करते हुए आगे बढ़ता है.

2 घंटे से पहले hi रीच हो जाते हैं वहां. और आते hi देखते हैं के टेंट खड़ा हो चूका है ऊपर सफ़ेद रंग के तारपोलिन लगा दिया गया है और टेंट के अंदर सारे आदमी मौजूद हैं सब हलचल में में है कोई यह काम कर रहा कोई वो, डेकोरेशन वाले भी सब बहोत मसरूफ थे, जल्दी जल्दी काम चल रहा था.

फिर उन् आदमियों में से एक चीफ जैसा था जो उन् अद्द्मियों को आर्डर दे रहा थे तो चावला साहिब उन् से मिला बात करने को और बताने को किश किश जगह किआ लगा बाकी है और किआ करना चाहिए.

संजना उस वक़्त द्वार पर खड़े देख रहे थे चावला साहिब को क्यूंकि उस्सको बेसब्री से उंनका इंतज़ार था. और बाकी के मर्द और लड़के काम रोक कर संजना के तरफ सब देखने लगे. संजना ने एक बिल्कुल छोटी सी ड्रेस पहनी थी चावला साहिब के लिए, उस्सने शार्ट निकल दिया था चेंज करके एक ड्रेस पहनी हुई थी और उस्सकी टांगें, ख़ास कर जांघें इतने दिख रहे थे जैसे इस फोटो में:

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और सबके नज़रें उसस्के जाँघों पर hi थे, कोई कोई तो अपने नज़रों से मानलो उस्सकी ड्रेस को उअप्र उठा भी रहे थे उस्सको निहारते हुए. ड्रेस पर बूब से लेकर निचे तक बटन्स थे यह ख़ास कर ड्रेस चूसे किया था संजना ने चावला साहिब के लिए ताके उनको आसानी हो इश्क फरमाने के वक़्त. क्लीवेज तो अगर वो झुकी तो जैसे बूब्स बाहर आजाएंगे. चावला साहिब ने देखा के सभी नज़रें संजना पर हैं यहाँ तक के जिस चीफ से वो बात कर रहे थे वो भी संजना को घुर्र रहा था. इस से पहले के चावला साहिब संजना को अंदर जाने को कहता वह सोचने लगे के उसस्के आने से पहले पता नहीं कितनी बार वो ऐसे बाहर निकली होगी. उस्सने सोचा के इन्ही लोगों से पूछकर पता करें.

तो चावला साहिब ने उस आदमी से पुछा, “आप लोगों को जूस वग़ैरा दिया गया पिने को?” तो आदमी ने कहा “हाँ उस लड़की ने कुछ देर पहले दिया था और कैटरिंग वाले खाने का सामान भी दे गए.” चावला साहिब का मैं खांका और सोचने लगे के अब कैसे पता करें के किआ संजना उसी ड्रेस में थी जब जूस देने आयी थी!

वो संजना से मिलने गया, तो संजना ने अपने बाहें खोल्दिए, और तब चावला साहिब पीछे मुड़कर सबको देखते हुए संजना से धीरे से कहा, “यहाँ नहीं, यहाँ नहीं, अभी नहीं, बाद में मिलता हूँ यह अंदर रखो,” कहकर उस्सको कुछ दिया संभालने के लिए. मगर संजना एक बच्ची की तरह अपने टांगों को निचे जम्में पर पीटते हुए नखरों से कहा, “नै नै मुझे आप पहले हुग करो और एक किसी दो!” और खुद अपने बाहों को चावला साहिब के गले में दाल दिया और उनको गालों पर किश किया खुद उन् आदमियों के तरफ देखते हुए. जबरन चावला साहिब को उसस्के कमर और पीठ पर अपने बाहों को करना पारा और उसस्के गाल पर किश किया और कहा, “अब तुम अंदर जाओ, इस्को खोलके देखो यह किआ है, तुम्हारे लिए गिफ्ट लाया हूँ, तब तक मैं इन् लोगों से कुछ काम के बातें करके अत हूँ.”

गिफ्ट सुनकर संजना उछलते हुए अंदर के तरफ जाने लगी. और चावला साहिब उन् लोगों के तरफ दोबारा गए. उन् सब ने देखा किश तरह से संजना ने चावला साहिब को किश किया और उनको कस्सके बाहों में भरा था. इस बार चावला साहिब ने एक मामूली कर्मचारी से बात किये. उसने पूछा, “कितने देर हुए तुम लोगों को जूस पिए? और भेजवॉन किआ?” तो उस आदमी ने कहा, “नहीं साहिब अभी आधा घंटे पहले hi तो उस मेम साब ने लाया था देखो बोतल में अब भी बाकी हैं सब के पास.” तो चावला साहब ने कहा, “ाचा तो नहाने से पहले hi दिया था किआ? इसी ड्रेस में थी जब जूस दिया तुम लोगों को?” तो आदमी ने कहा “हाँ साहब इसी ड्रेस में थी जिस में अभी है! – वो उस चीफ से बहोत बातें कर रही थी और चीफ घर के अंदर भी गए थे उस से बातें करते हुए हमारे लिए और बोतल के जूस लेन के लिए.”

यह सुनकर चावला साहब परेशान हो गए और उसस्के दिमाग़ में गंदे गंदे ख्याल आने लगे के चीफ ने ज़रूर छुवा होगा संजना को तो अब उनके पास गया बात करने एक तरफ उस्सको बुलाकर. चावला साहब ने पूछा, “किआ आप को पता है के यह टेंट वग़ैरा किश लिए लगाया जाए रहा है?” तो उस आदमी ने कहा, “हाँ पूजा हवन के लिए और गाओं वालों को खाना खिलाना है इसी लिए नाह?” यह सुनकर चावला साहब चिहुंके और पुछा, “किश ने बताया आप को?” आदमी ने जवाब दिया, “उस लड़की ने. बहोत दुलारी है आप की लगता है मैं ने देखा कितना प्यार करती है आप से और कितना लाड़ली है आप की है नाह साब?” चावला साहब हैरान थे के क्यों संजना ने उस आदमी से झूट कहा और क्यों नहीं कहा के खुद की मांगनी होने वाली है! और आदमी से फिर पुछा, “कितने बोतल जूस दिए गए आप लोगों को कम तो नहीं पड़े सब के लिए जूस?” तो आदमी ने कहा, “नहीं ठीक है अंदर बाउल में और हैं अगर ज़रुरत पड़े तो भर लेंगे!”

अब चावला साहब को पता चल गया के यह आदमी किचन तक गया था अंदर संजना के साथ और उस्का माथा गरम होने लगा. तो उस अद्द्मी से कुछ ज़्यादा जान्ने के लिए चावला साहब ने कहा, “किसी लगी आप को संजना? बहोत प्यारी है नाह? आप को अगर पता है के अंदर बाउल में जूस है तो मतलब आप उस के साथ अंदर गए थे और बात चीत भी किये होंगे उस से तो किसी लगी आप को? बहोत सारे बातें करती है नाह?” तो आदमी ने कहा, “अरे साहब यह तो एक फ़िल्मी हीरोइन की जैसी है, बहोत अच्छी और प्यारी है. मगर ज़्यादा बात तो नहीं करती मगर नटखट जरूर है यह लड़की.” चावला साहब ने अपने पेशानी पर हाथ फरते हुए पुछा, “अच्छा और कितने देरर थे आप उसस्के साथ अंदर?” “जब तक सब जूस नहीं बना लिया साहब, बेचारी अकेली घबरा रही थी के कुछ गड़बड़ नाह हो जाये तो मैं मदद के लिए गया, और एक दो लड़के भी गए थे बाद में जब मैं बाहर जूस बाँट रहा था.” आदमी ने जवाब दिया.

चावला साहब अब सोचने लगा के कल पता नहीं सबने किआ किआ देखा था उन् दोनों के बीच और पता नहीं कौन कौन लड़के अंदर गए थे और किआ किया होगा या किआ बात किये होंगे सब ने संजना के साथ, मौके का अच्छा फायदा उठाया होगा लड़कों ने संजना के साथ, ऐसा सोच रहे थे चावला साहब और धडपडाते हुए अंदर गया खुद संजना से पूछने के लिए.

संजना बहुत खुश थी अपनी गिफ्ट पाकर और बैठी थी ऐसे गिफ्ट को ओपन करके अपने गिफ्ट के पास.

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चावला साहब उनके लिए मेकअप का सेट लाया था जो अब संजना तरय कर रही थी. चावला साहब संजना के हाथ पाकर कर उस्सको बैडरूम में लगाया और उस्सको बीएड पर बिठा कर पुछा, “तुमने इन् लोगों को घर के अंदर क्यों घुस्सने भी दिया?” तो संजना अपने बाहों को उन् के गले में डालते हुए बिल्कुल बचकानी हरकतों से कहा, “आप जेलस भी होते hi जी? मैं किआ करती जूस के लिए वह लोग आगये. मैं ने तो नहीं बुलाया किसी को अंदर!”

चावला साहब थोड़ा सा ग़ुस्सा होते हुए कहा, “मुझसे तो फ़ोन पर तुमने कहा के तुम नहीं डौगी जूस उन् लोगों को और कहा के मेरे आने के बाद दिया जाएगा तो क्यों दिया, और वो भी इस ड्रेस में कितनी छोटी है, तुम्हारे जांघें सब बाहर है यह क्लीवेज देखो, सब नज़र आरहे हैं, सब ठरकी मर्द हैं सब तुमको देख रहे हैं बताओ किश किश ने तुमको हाथ लगाया तुमको अकेले पाकर अंदर यहाँ?” संजना हंस पारी और कहा, “लो कल्लो बात आप भी नाह किआ किआ सोचने लगते हो जी, इतना जलन मुझको लेकर तो अपने बेटे के साथ मुझको कैसे अकेली चोररोगे भला हम्म? बोलो बोलो?!”

चावला साहब ने मुंह बनाते हुए कहा, “वो बिल्कुल अलग बात है, वो मेरा बीटा है उसस्के लिए hi तुमको को सेलेक्ट किया तो उस्का हक़ बनता है मगर मुझको अभी यह बताओ के किश किश ने तुमको छुवा और कहाँ कहाँ छुवा और किआ किआ किया उन् लोगों ने?” संजना ने नखरें वाली अदाओं में कहा, “सब ने छुवा मुझे हर जगह छुवा, मेरे बूब्स को मसले, मेर जाँघों पर हाथ फ्री सबने मिलकर, मेरे ड्रेस को ऊपर उठाया यहाँ तक के मेरे पंतय दिखने लगे, ऊपर बूब्स पर बटन खोल दिए एक ने और बूब्स को किश करते हुए मेरे ब्रा की स्ट्राप को निचे किये, मैं होश खोने लगी और खुद को समर्पण कर दिया उन् लोगों को और बहोत मस्ती किये हम सब ने! अब आप खुश?? हम्म्म?”

चावला साहब का मुंह खुला रहा संजना के चेहरे में देखते हुए और उस्सकी बोलती बिल्कुल बंद हो गए और जैसे गंगा बन गया कुछ देर के लिए!

तब संजना ने जोरर से हँस्ते हुए कहा, “हीहीहीहीहीहीही कैसा लगा मेरा झूठा सेक्सी डायलॉग? आप की बोलती बंद हो गयी हीहीहीहीहीहीही!!”

चावला साहब ने उस्सको बाहों में कस्सके जाकर के कहा “तुमको मज़ाक सूझ रहा है मेरी जान निकल रही है, तुम इतनी नॉटी हो मैं ने बिल्कुल नहीं सोचा था.” और संजना के मुंह को अपने मुंह में लेकर एक ज़बरदस्त वाला किश करने लगा.

तो बे कॉन्टिनोएड……………….. (1612 वर्ड्स)
 
अपडेट 26 चावला साहब एन्जॉयस मोरे विथ संजना

चावला साहब ने संजना को किश करते हुए अपने हाथ से उसस्के ड्रेस के बटन्स को खोले और उसस्के बूब्स को मसलने लगे और ग़ौर से देखते गए के कहीं उसस्के छाती पर कोई किश का निशाँ नाह दिखे. उनको अब भी शक था के किसी न किसी ने उस्सको ज़रूर छुवा होगा.

मगर संजना अपनी अदाओं से उनको इस तरह अपने बाहों में जकरा और प्यार किया के चावला साहब को कुछ और सोचने का मौका hi नहीं मिला.

जब चावला साहब ने संजना की ड्रेस के बटन खोले थे किश के दौरान और अब किश के बाद तो उसस्के छाती पर आधा बूब्स तो बाहर थे और थोड़ा ब्रा के अंदर दिख रहे थे तो संजना ने चावला साहब के सर को अपने छाती पर दबाते हुए उनके सर के बालों में अपने उँगलियों को फरते हुए पुछा, “आप ने मुझको कितना मिस किया बताइए” तो चावला साहब उस्सकी बूब पर अपने जीब फरते हुए कहा, “और तुम बताओ के तुमने कितना मिस किया मुझको?” तो संजना बोली, “मैं तो आप hi को याद करती रही जबसे उठी हूँ बीएड से, नहाते वक़्त भी आप को याद किये जा रही थी के काश आप उस वक़्त मेरे साथ होते!”

तो अब चावला साहब ने संजना की ड्रेस को पूरा निकाल दिया, ब्रा भी निकल फेंका और सिर्फ पंतय में उस्सको बीएड पर बिठाया आउट अपने कपडे भी उतार दिए और सिर्फ अपने अंडरवियर में बैठे दोनों बीएड पर और चावला साहब ने पूछा, “अच्छा मुझे ये डिटेल में बताओ के जब मैं ने तुमको फ़ोन करके कहा के देर घंटे में आऊंगा इधर तब से अब तक तुमने किआ किया? तुम ने तो एक शार्ट पहनी हुई थी और एक सेक्सी टॉप जिस में तुम्हारा ब्रा दिख रहे थे और मैं ने तुमको बाहर जाने से मन किया था उस ड्रेस में और एक सलवार कमीज़ पेहेन्ने को कहा था तो तुमने यह छोटी सी ड्रेस कब पहना और क्यों बाहर गए थे इस ड्रेस में? सब बताओ मुझे डिटेल्स में!”

संजना ने अपनी बचकानी हरकतों और दुलार वाले अदाओं में कहा, “ोफो जी आप भी किआ किआ सोचते और पूछते हो. सुनों जब आप से फ़ोन पर बात कर रही थी तो सोच लिया था के इस ड्रेस को पहनुंगी आप के लिए क्यूंकि आप को बहोत ख़ुशी होगी जबकि आप ने कई बार कहा था के मेरे सेक्सी तइस आप को बहुत पसंद है. तो फ़ोन पर बात करने के बाद मैं कुछ देर यहीं बैठी रही इसी बीएड से आप से बात किया था. तब मैं सलवार कमीज़ ढूंढ़ने गयी पहने के लिए, यह देखो अब भी यहीं चेयर पर पारी हुई है, तो इस्को पहले तरय किया मगर तक़रीबन एक साल इस्को नहीं पहनी हूँ तो टाइट हो गयी है, पेहेनके दिखाऊं किआ? तो इसी लिए इस्को निकल दिया और यह वाला ड्रेस जो अभी आप ने उतरे मुझ पर से इस्को ले लिया हाथ में आप को याद करते हुए के आप इस्को ज़रूर बहोत पसंद करोगे. तो इस्को पहना hi था के किसी ने दरवाज़ा खटखटाया. तो अब किआ करती ड्रेस उतारती किआ? ऐसे hi चली गयी देखने के कौन किआ कह रहा है, एक तो वह लोग बहोत शोर मचा रहे थे, जब मैं दरवाज़े के पास गयी तो वो आदमी जो उन् सब को आर्डर दे रहे हैं दरवाज़े पर खड़े थे और मुझसे कहा के कैटरिंग वालों ने खाने का सामान दे दिया और मुझको अंदर रखने को कहा.”

तो चावला साहब ने संजना की बयान को बीच में रोकते हुए कहा, “तो तुम इस कपडे में बाहर क्यों गयी थी भला?” तब संजना ने कहा, “ोफो बिच में रोक दिया पूरी बात तो सुनने नाह आप! तो जब उस आदमी ने इतने सारे सामान अंदर रखने को कहा तो मैं कैसे सब उठाती भला? उसी को अंदर रखना पड़ा नाह सब? तो मैं ने उनको सब अंदर मेज़ पर रखने को कहा क्यूंकि उस्सने कहा वो अभी नहीं खाएंगे थोड़ी देर बाद वापस खाना लेने आएंगे. तो दो तीन और लड़के आये उनकी हेल्प करने सब कुछ अंदर रखने के लिए. तो मैं ने रखने दिया.”

तो चावला साहब ने पूछा, “उस वक़्त तुम कहाँ कड़ी थी जब वह सामान रख रहे थे?” संजना बोली, “वहीँ दरवाज़े के पास!” चावला साहब ने पूछा, “उन् सब के नज़र ज़रूर तुम पर थे है के नहीं सच बताओ, तुम्हारे जाँघों और छाती को नहीं देख रहे थे सब के सब, तुम इतनी हॉट और सेक्सी दिख रही हो उस छोटी से ड्रेस में सब मर्द तुमको hi देख रहे होंगे बोलो बोलो!!”

संजना ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ तीनों लड़के सीधे मेरे टांगों को टाक रहे थे मैं ने देखा और मैं तो आप को याद कर रही थी के अगर यह लोग देख रहे हैं तो आप कितने खुश होंगे, तभी मुझे समझ में आगया के यह ड्रेस बिल्कुल फिट है आप को खुश करने के लिए. तो इसी में रह गयी आप के आने तक.”

चावला साहब ने सवाल जारी रखा, “तो तुम क्यों गयी थी बाहर जूस देने के लिए?” संजना ने कहा, “अरे तभी, जब खाने का सामान रख रहे थे मैं ने पूछ लिया किआ जूस भेजूं तो सब ने कहा हाँ. तो मैं जूस बनाना को चली गयी किचन में!” चावला साहब ने पूछा, “उन् सब को घर के अंदर हॉल में चोरर कर तुम किचन में चली गयी जूस बनाने?” संजना ने भोलेपन में कहा, “हाँ वहां से देख रही थी के एक एक करके सब बाहर निकल रहे हैं उनके सरदार के इलावा जो मुझको किचन में देख रहे थे. तो मैं ने सोचा उस्सको कुछ कहना है तो किचन से पूछा के किआ उनको कुछ चाहिए!”

चावला: “और उस्सने किआ कहा?”

संजना; “उस्सने मेरे तरफ चलते हुए पूछा, के किआ वो मेरा मदद कर सकते हैं जूस को लेजाने में?”

चावला: “फिर?”

संजना: “मैं ने कहा के नहीं मैं दे दूंगी थोड़ी देर में.

चावला: “तो किआ वो बाहर चला गया तब?

इस सवाल पर संजना थोड़ी देर रुकी और सोचने लगी कुछ पल केलिए. तो चावला साहब ने पूछा, “क्यों? किआ हुआ? किआ सोचने लगी बोलो किआ वो आदमी तब बाहर गया के तुम्हारे और करीब अत गया क्यूंकि तुमने कहा के वो तुम्हारे तरफ एते हुए बात कर रहा था और वो अकेला था सब बाहर चले गए थे बोलो!”

संजना ने मुस्कुराते हुए उसी बलोलेपन ऐडा में कहा, “अरे नहीं बाबा वो वहीँ से मूढ़ गए और बाहर चले गए. और जब मैं ने जूस तैयार कर लिया, बोतल में डाला तब दो बोतल लेकर बाहर गयी देने के लिए फिर उसस्के बाद वो दोबारा अंदर आया बोतल लेने के लिए क्यों के 10 बोतल हैं और मैं अपने हाथों में सिर्फ दो hi ला जा सकती थी नाह तो वो बाकी के बोतल लेने आये थे बुसस एहि फिर मैं अंदर hi रही. जब तक आप आये”

चावला साहब ने फिर पूछा, “और जब तुम बाहर गए बोतल देने के लिए तो सब ने काम रुक कर तुमको देखना शुरू किया होगा और तुमको अच्छी तरह से पता चला होगा, है के नहीं?”

संजना: “हाँ मुझे मालूम है के सब मुझ hi को देख रहे थे ऊपर से निहचे तक और मैं तो आप को सोच रही थी के आप कितना देखोगे मुझे अगर इन् लोगों को इतनी अच्छी दिख रही हूँ तो आप बिल्कुल पसंद करोगी मुझे इस ड्रेस में!”

बुसस इतनी सी कन्वर्सेशन के बाद चावला साहब को उनकी भोलेपन पर बहोत ज़्यादा प्यार आगया और संजना को अपने बाहों में भर लिया और उस्सकी बूब्स चावला साहब के नंगे छाती पर कुचलने लगे और दोनों एक दूसरे के मुंह को अपने मुंह में लेकर बीएड पर लेट गए.

चावला साहब ने वक़्त नाह गवाते हुए जल्दी से संजना की पंतय निकाल फेंके और अपना अंडरवियर भी, फिर संजना ने उनके तन्ने हुए लुंड देख कर उस्सको अपने दोनों हाथों में भरके झट से अपने मुंह में लेकर चावला साहब को चुस्सने लगी. ऐसा लगता था संजना को उस्का इंतज़ार था के कब लुंड उसस्के मुंह में आये और वो चुस्सना शुरू करे. चावला साहब लेते थे मगर उठकर अपने घुटनों के बल हुए बीएड के ऊपर hi और संजना ने लुंड को नहीं चोर्रा मुंह में hi लिए हुए वो पथ के बल हुई उनको चूस्ते हुए. चावला साहब को बेहद मज़ा आने लगा था और उंनका लुंड तो मानलो के फनफना रहे थे संजना के भूके मुंह के अंदर.

सब कुछ बहोत तेज़ी के साथ हो रहा था, दोनों जैसे बहोत जल्दी में थे, इस्सके बुसस इंतज़ार था दोनों तरफ से, और जल्दी से चावला साहब ने संजना के कमर के निचे अपना हाथ करते हुए उस्सको फिरसे पीठ पर लेटाया और उसस्के दोनों पाऊँ को फैला कर अपने लुंड उसस्के नरम पुसी के पंखुरियों के बीच रघड़ने लगा, छूट गीली थी इस लिए बहोत आसानी से चावला साहब का लुंड फिसलते हुए तेज़ी से अत जाता रहा. उस दौरान संजना की ेंखें जैसे नशीले हो गए और थोड़ा ऊपर और थोड़ा निचे देख रही थी ऐसा लगने लगा था….. और उस्सकी बाहें चावला साहब के कांधों से होकर उसस्के पथ पर फैले हुए थे और उनके पतली पतली उँगलियाँ चावला साहब के पीठ को सेहला रहे थे.

लुंड रगड़ते हुए चावला साहब ने कहा, “आज अंदर डालने को मैं कर रहा है डालूं किआ बेबी?!” संजना ने कुछ नहीं कहा बुसस गहरी सांसें लेती जा रही थी थोड़ा हांफते हुए. तो चावला साहब ने फिरसे पूछा “अंदर ग़ुस्सा दूँ किआ?” तब संजना ने उसस्के छाती पर अपना दांत गड़ाते हुए और उस हिस्से को चूस्ते हुए धीमी आवाज़ में हांफते हुए जवाब दिया, “मुझे नहीं पता आप जानों!!” मगर तब तक चावला साहब और संजना दोनों ओर्गास्म को रीच हो चुके थे और संजना तृप्ति आवाज़ में चिल्लाई, “आआआअह्ह्ह्हह बस्स्स बस्सस करो रगड़ना मेरा हो गया मैं बिल्कुल भीग गयी हूँ निचे पानी बहने लगे हैं उफ्फफ्फ्फ़ इस्स्स्सह्शशशशशश ओह माय गुआयद!!!” इतना hi कहा के चावला साहब ने अपने लुंड को हाथ में पाकर कर अपना पिचकारी चोर्रा वीर्य का संजना के पथ के ऊपर, जो नाभि के बीच ो बीच थोड़ा सा जामा हुए और बाकी संजना के चूचियों पर और चेहरे तक पहुचे!! चावला साहब भी कहार्टे हुए गहरी आवाज़ में, “आअह्ह्ह्ह एससससससस मज़ाआ आगया बेबी!!!!”

फिर बिना कुछ कहे संजना खुद लुंड को उनके हाथ से अपने हाथ में लिया और बाकी के बचे वीर्य को जीब से छाता और मुंह में लुंड को लेकर चुस्सने लगी जिस से चावला साहब तरप उठे और “उफ्फफ्फ्फ़ हाआआ ऐसे hi बेबी!!” कहा उन्हों ने.

और दोनों एक दूसरे को बाहों में लिए नंगे बिस्तर पर पाए गए किश करते हुए गहरा वाले!!

तो बे कॉन्टिनोएड……………….
 
अपडेट 27 Sanjana’s इंगेजमेंट

उस दिन चावला साहब वहां से रात को 8 बजे निकले. संजना की एक अंगूठी की मेज़रमेंट लिया अपने साथ, मागणी की अंगूठी खरीदने के लिए. आनंद से भी मिले थोड़ा सा पिया भी, और संजना के साथ और वक़्त गुज़ारे प्यार में डूबे दोनों जब आनंद पिने गए थे. और चावला साहब ने संजना से कहा के बुसस कुछ दिनों में वो उसस्के बेटे की मांगितर बन जाएगी. और हँस्ते हुए संजना ने कहा हाँ उनके ेंखों की गहराई में देखते हुए.

बेहरे हाल चावला साहब घर वापस आये और दूसरे दिन सान्वी के साथ जेवेल्लेर्स के यहाँ गए और संजना की मांगनी की अंगूठी ख़रीदे. और संजना के लिए एक बहोत hi खूबसूरत मांगनी वाली ड्रेस भी सेलेक्ट किया सान्वी ने जो चावला साहब सान्वी के साथ संजना को देने गए. सान्वी संजना से मिलकर बहोत खुश हुई मगर वो संजना और चावला साहब के अपनापन को ग़ौर से देख रही थी जब भी यह दोनों आपस में बात करते या अकेले होते बस कुछ hi देर के लिए. सान्वी ने नोट किया के दोनों में बहोत hi क्लोसनेस्स हैं जैसे के दोनों एक दूसरे को बहोत सालों से जानते हैं. सान्वी को शक हुआ के कहीं सच में चावला साहब बचपन से hi संजना से मिलते तो नहीं रहे थे इतने दिनों से!!

आखिर में मांगी का दिन दिन आया अगले संडे को. दोनों घरों के तरफ से सब तैयार हो गए थे. फ़ोन के ज़रिए चावला साहब उधर संजना के यहाँ की सभी तैयारियां भी सुपरवाइज़ कर रहे थे आनंद से बात करके. उधर आनंद ने सभी गाओं वालों को बुला लिए थे और उस गाओं के लोगों को भी जहाँ से चावला साहब बिलोंग करते थे. उन् सब लोगों को पता चल चूका था के पुराने हवेली वाले ज़मींदार के बेटे से संजना की मांगनी होने जा रही है.

थे इंगेजमेंट डे

सगाई के दिन के लिए चावला साहब ने अपने ऑफिस से 10 यंग गर्ल्स को बुलाये थे और सभी को एक hi तरह की ड्रेस दिए जो सफ़ेद रंग के थे और सब होस्ट्स दिख रहे थे और सबको कुछ न कुछ ट्रे, बुके, सामान लेजाना था संजना के लिए. बाकी सब एक मिनी वन में गए संजना के घर मांगनी की रसाम के लिए, और चावला साहब एंड फॅमिली अपने कार में, दो कार गए थे एक में सान्वी, चावला साहब और दीप्ति और दोनों भाई पीछे एक दूसरे कार में आरहे थे. मतलब कुल मिलके तीन व्हीकल्स थे. मिनी वन में वह 10 लड़कियां थे.

टेंट में लोग भरे हुए थे और एक पोडियम के जैसा बना हुआ था जहाँ आरव और संजना के लिए सीट थे. वहां के लोगों ने भी इंतज़ाम किये हुए थे और कुछ लड़कियां आये आरव को पोडियम पर लेजाकर बिठाने के लिए. तब संजना घर के अंदर थी. उसस्के पापा टेटंट और घर के अंदर आते जाते हुए दिखाई दे रहे थे. चावला साहब उन् से मिले और पूछा के संजना तैयार हुई या नहीं और संजना से मिलना चाहते थे. तो आनंद ने उनको अंदर जाकर संजना से मिलने को कहा, मगर सान्वी ने कहा, “क्यों पिता जी आप क्यों जाओगे लड़की के कमरे में उनम से मिलने, हमको जाना है, मैं और एक दो लड़कियों को लेकर जाती हूँ देखने को के तैयार हुई या नहीं.”

चावला साहब संजना को उस ड्रेस में देखने को बेताब थे और वो रह रह कर आरव को देख रहा था और देखना चाहता था उस्सको कितना पसंद आएगी संजना.

और कोई 20 मिनट के बाद सान्वी संजना का हाथ थामे हुए घर से निकल के पोडियम के तरफ चलते दिखाई दिए चावला साहब को. घर के दरवाज़े से निकलते hi सब से पहले संजना ने चावला साहब के तरफ देखा और सान्वी को हैरानी हुई के आरव को देखने के बजाये वो चावला साहब को देख रही है, और सान्वी ने यह भी देखा के किश तरह प्यार भरी नज़रों से चावला साहब भी संजना को देख रहे थे. संजना उस ड्रेस में ऐसी दिख रही थी:

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चावला साहब की नज़रें नहीं हट रहे थे संजना पर से…. और सान्वी खूब देख रही थी अपने ससुर को. और जिस वक़्त संजना पोडियम पर गयी आरव के पास, तो आरव खड़ा हुआ संजना को झुक कर “hi hello” करने के लिए और उसस्के बगल वाले सीट पर सान्वी ने उससे बिठाया. जैसे hi संजना बैठ गयी लोगों ने ताली बजाये. एक पारी लग रही थी वो उस वक़्त, या एक प्रिंसेस जिस्सको ताज पहनना बाकी था. और आरव जैसे एक प्रिंस बैठा था अपने प्रिंसेस के बगल में. संजना ने एक दो झलक आरव को देखा मगर हर वक़्त उस्सकी नज़रें चावला साहब पर ठीके रहते थे जो सान्वी को अच्छा नहीं लगा. सान्वी एक कोने में कड़ी सिर्फ संजना और चावला साहब के नज़रों को और दोनों के बेहेवियर को ऑब्सेर्वे कर रही थी. चावला साहब अपने आरव को बी देख रहा था. वो तो ठहरा बहोत शर्मीला सर झुकाये बैठा था, मगर जिस वक़्त उस्सने सर उठाकर संजना को देखा तो आरव के चेहरे में एक चमक था जो चावला साहब को दिखा और अच्छा लगा. वो एहि चाहता था के आरव पसंद करे और हाँ करे.

तो कुछ देर बाद चावला साहब पोडियम के तरफ बढे, और सान्वी हैरत से देखने लगी के वो क्यों वहां जा रहे हैं, तो चावला साहब आरव से पूछने गया, “क्यों कैसा लगा मेरी पसंद तुमको सोन?” संजना यह सुनकर मुस्कुरा दिए और निचे वाला होंठ को डेंटन में दबाये आरव को देखा, जिस ने अपने पापा को कहा, “सुपर्ब डैड फैंटास्टिक, थैंक्स”

अब जहाँ से सान्वी देख रही थी, कुछ सुन तो नहीं पा रही थी मगर उस्सने देखा के उसस्के ससुर ने आरव से कुछ कहा और उस वक़्त संजना अपने दांत में होंठ दबा रही थी मुस्कुराते हुए और आरव को देखा चावला साहब को देखने के बाद. उसस्के बाद सान्वी ने नोट किया के संजना की नज़रें सिर्फ और सिर्फ चावला साहब पर hi टिक्के रहे और उधर चावला साहब भी सिर्फ संजना को hi देखते जा रहे थे. उस्सने सोचा के ऐसा क्यों था. सान्वी सोचने लगी के किआ दोनों इतने करीब हैं, इतने प्यार हैं दोनों में, इतने करीब से एक दूसरे को जानते हैं दोनों!

अंगूठी पहनाने का रसम ऐडा किया गया और एकांत केक खाने और खिलने की रसम और पता नहीं किआ किआ किया गया. बाप, और गाओं वाले गए पोडियम पर गिफ्ट देने दोनों लड़का और लड़की को. कोई कॅश देते एनवलप में तो कोई फूल, तो कोई पैक्ड ड्रेसेस ेट्स.

खाना पीना सर्वे हुआ. आरव ने सान्वी के ज़ोर देने पर संजना से एक दो बात किये वहीँ पोडियम पर. संजना खिल रही थी एक फूल की तरह, हंससमुख तो थी hi, एक बार भी वो बिना मुस्कान के नहीं दिखे थे.

और सान्वी ने एक प्लान बनाया. उस्सने अपने पति से कहकर प्लान किया के सब एन्ड होने के बाद वह सब घर वापस जाएंगे मगर आरव को यहीं चोरर जाएंगे संजना के साथ और वो रात को डिनर करके वापस आएगा तो एक कार उसस्के लिए यहीं चोरर जाएंगे. विवान ने कहा हाँ आईडिया ठीक है वही करना चाहिए ताके दोनों एक दूसरे को जान पहचान सके. और संजना के पापा से भी यह बात कहा सान्वी ने और उस्सको कोई ऐतराज़ नहीं था. मगर यह बात चावला साहब को नहीं बताया गया था.

जब इंगेजमेंट ख़तम हुई तो सब जाने के लिए तैयार हुए और चावला साहब ने अपने तरफ से खुद सोचा था के वो यहीं रहेंगे संजना के साथ बाकी सब घर वापस जाएंगे. वो संजना को अपने बाहों में भरना चाहता था उस ड्रेस में. उसको किश करना चाहता था उस्सको महसूस करना चाहता था, उसस्के खुशभू सूंघना चाहता था. मगर उस्सको ज़ोर का झटका लगा जब सान्वी ने कहा के आरव यहीं रहेगा और डिनर करके वापस आएगा और हम सब वापस जा रहे हैं एक कार को आरव के लिए चोरर कर जाएंगे!!

उधर संजना बी चावला साहब के बाहों में जाने के लिए तड़प रही थी उस्सने भी सोचा था के रसम के बाद चावला साहब रहेंगे और रात को डिनर के बाद जाएंगे और संजना ने सोचा था के जब उस्का पापा पी कर सो जाएगा तो वो चावला साहब से इश्क फर्माएगी अपने बैडरूम में…. चावला साहब ने उस से कहा था के उस ड्रेस को एक एक करके वो उतरेगा उसस्के जिस्म से और संजना इस इंतज़ार में थी. मगर सब उल्टा हुआ तो संजना को भी झटका लगा!!

जाने का टाइम हुआ, सब अतीती चले गए तो सान्वी ने अपने ससुर से कहा, “चलिए चलिए पिता जी इन् दोनों को अब बात करने दो, दोनों को एक दूसरे से जान पहचान करने दो, हम वापस चलते हैं.” चावला साहब का मैं भारी था और उस्का जाने का बिल्कुल भी मैं नहीं था मगर कुछ भी नहीं कर पाया मजबूरन उस्सको वापस जाना पारा….. मगर उस्सने संजना को आशीर्वाद देने के बहाने उसस्के पास गया, और उस्सको ज़ोर से सीने से लगाया. संजना के ेंख भर आये क्यूंकि उस्सको भी पता चल चूका था के अब वह दोनों नहीं मिल पाएंगे आज की रात. संजना ने चावला साहब के गाल पर किश किये और सान्वी हैरानी से देखती रही और ज़्यादा हैरान हुई जब चावला साहब ने भी संजना के दोनों गालों को किश किया और हुग तो ऐसे किये बिल्कुल एक दूसरे से चिपके हुए फुल बॉडी तो बॉडी!! सान्वी को वो ठीक नहीं लगा… और क्यों के आरव वहीँ था तो चावला साहब ने अपने बेटे से कहा, “हम दोनों एक दूसरे को बहोत अच्छी तरह से पहले से जानते हैं और यह मेरी बेटी की तरह है और ऐसे किश करने की आदत हैं हमारे मिलने पर.” आरव ने बुसस कहा, “इतस okay डैड ी अंडरस्टैंड नाह!”

और आखिर में बिचारणा पड़ा चावला साहब और संजना को और रह गयी संजना अब आरव के साथ. शाम के 4 बजे थे और रात के 9 बजे तक उस्सको संजना के साथ रहना था! यह सोचके संजना खुद सोचने लगी के किआ करुँगी इतने देर तक इस्सके साथ मैं?! यह तो बोर होगा!” और उधर चावला साहब कार में वापस जाते हुए एहि सोच रहा था के 5 घंटों तक आरव संजना के साथ गुज़रेगा!! कैसे हैंडल करेगी संजना उस्सको!!”

तो बे कॉन्टिनोएड……………….. (1696 वर्ड्स)
 
अपडेट 28 संजना विथ आरव part 1

सब चले गए तो संजना और आरव कुछ बैठे रहे उसी पोसियम पर क्यूंकि जो लोग देर से आये थे वह लोग अब भी बैठर हुए थे टेंट में और संजना के पापा ने दोनों से कहा कुछ देर और वेट करने को, बाकी के लोग अंदर टेंट में चेयर्स वग़ैरा उठा रहे थे कुछ लोग डेकोरेशन भी ुज़ारने लगे थे. आनंद, संजना के पिता को पीना का बहुत मैं कर रहा था, वो अच्छे कपड़ों में था और वैसे रघु के यहाँ नहीं जाना चाहता था. उसस्के एकांत दोस्त लोग उस्का मदद कर रहे थे टेंट में दीदार उधर के सामान को ठिकाने लगाने में.

आरव थोड़ा झिझकते हुए संजना के तरफ देख रहा था मगर बोल कुछ नहीं रहा था और संजना वहां बैठे बैठे बोर हो चुकी थी और अपने पापा को आवाज़ देकर कहा, “पापा मैं थक गयी हूँ यहाँ बैठे बैठे मुझे अब अंदर जाना है, कितनी देर और बैठी रहूंगी ऐसे हम्म्म्म!!” तो उस वक़्त आरव ने संजना की उन् नखरों भरी अदाओं से अपने पापा से बात करते हुए देखा तो समझ गया के यह लड़की अपने पापा की दुलारी होगी इसी लिए एक बच्ची की तरह बात कर रही है. आरव को थोड़ा बच्चपन लगा संजना की हरकतों में.

संजना भी खुद आरव से बात नहीं कर रही थी इधर उधर देख रही थी. तो आखिर में आनंद ने संजना को घर में जाने की अनुमति देदी. जल्दी से संजना उठी और पोडियम से उतरके घर के दरवाज़े के तरफ जाने लगी, एक दो कदम चली थी के मूढ़ के देखा के आरव तो वहीँ बैठा हुआ है तो वापस गयी और आरव का हाथ पाकर के मुस्कुराते हुए उसस्के चेहरे में देखते हुए कहा, “अरे चलो तुम किआ यहीं अकेले बैठे रहोगे? अंदर चलो नाह घर में!” तो आरव खड़ा हुआ यह कहते धीरे से, “मैं ने तो सोचा तुम मुझे वहीँ चोरर कर चली जाओगी और मुझे तुम्हारे पापा से बात करनी होगी.”

चलते हुए संजना आरव का हाथ थामे घर के तरफ बढ़ रही थी और आरव से कहा, “पापा से किआ बात करते तुम, उस्सकी ड्रिंक करने का टाइम हो गया है अभी देखना किश रफ़्तार से वो यहाँ से भाग कर पिने जाएगा हीहीहीही” आरव संजना को हँस्ते देख कर खुद मुस्कुराते हुए कहा, “तो हर रोज़ तुम ऐसे अकेली होती हो जब वो पिने जाता है?”

संजना: “हाँ और नहीं तो किश के साथ रहूंगी?”

आरव: “नहीं ऐसे hi पूछ रहा था हाँ ok तुमको आदत होगयी होगी अकेले रहना नाह?”

तब तक घर के अंदर दाखिल होते हुए संजना ने आरव को लाउन्ज में बैठने को कहा एक सोफे पर और कहा, “मैं बुसस एक मिनट में इस ड्रेस को चेंज करके आती हूँ यह बहोत डिस्टर्ब कर रही है मुझे बिल्कुल आदत नहीं मुझे ऐसे ड्रेस में रहने की!” तो आरव ने कहा, “अरे नहीं ऐसे hi रहो नाह बहोत अच्छी लग रही हो इस में तुम!” तो संजना वहीँ उसस्के पास खड़े होकर कुछ सोचा फिर कहा, किआ तुम कुछ पियोगे मेरा तो गाला सुख रहा है कुछ लॉन किआ तुम्हारे लिए?” तो आरव हाँ ने हाँ में सर हिलाया. और संजना ने पूछा, “किआ लोगे?”

आरव: “जो भी है”

संजना: “किआ है:

आरव: “मुझे कैसे पता?”

संजना: “तो मुझे कैसे पता होगा?”

आरव: “व्हाट?”

संजना: “मैं भी तो तुम्हारे साथ पोडियम पर बैठी थी तो मुझे कैसे पता होगा के किआ है पीने के लिए?”

आरव संजना के चेहरे में देखते हुए सोचता है के किआ इस लड़की का दिमाग़ तो ठीक है, मैं एक स्ट्रेंजर हूँ इस घर में इस्को मुझे कुछ देना चाहिए था पिने के लिए और यह मुझसे क्यों ऐसे सवाल कर रही है?!

फिर संजना ने “हीहीहीही करते हुए कहा, “अरे बाबा मैं मज़ाक कर रही हूँ वेट कुछ लाती हूँ, किआ लॉन चिल्ड या नार्मल?”

आरव ने कहा, “कुछ भी चलेगा.”

जब तक संजना किचन में थी आरव घर के चरों तरफ देख रहा था, फिर उठकर खिरकी से बाहर भी देखने लगा के लोग टेंट को तोड़ रहे थे और जहाँ पर वो था कुछ ज़्यादा उजाला हो गया जहाँ टेंट से परपॉलिन हटाया गया, और आरव देख रहा था कितना बड़ा ज़मीन है, कितना स्पेस है और वो चल कर पीछे के तरफ भी गया घर के और एक दरवाज़े से बाहर भी निकल गया और देखा पीछे एक बड़ा सा बगीचा है, बड़े बड़े पेयर पौधे, फूल वग़ैरा सब हैं. हु जैसे उस जगह का मुआएना कर रहा था.

तब तक संजना लाउन्ज में आयी पीने के लिए कुछ लेकर तो देखा आरव वहां नहीं है तो बाहर झाँकने पर देखा के उधर भी नहीं है तो ज़ोर से कहा, “hello किधर हो तुम? भाग गए किआ मिस्टर? मांगनी तोड़ दिया किआ? मैं नहीं पसंद आयी किआ तुमको hello मिस्टर चावला वेयर अरे यू मन?” और पीछे से उस के तरफ बढ़ते हुए आरव ने कहा, “यहाँ हूँ क्यों मांगनी तोड़ने का इरादा भी हो गया किआ तुम्हारा?” तब संजना ने हँस्ते हुए कहा, “हीहीहीही नहीं मैं तो ऐसे hi कह रही क्यूंकि तुम अचानक ग़ायब हो गए, किआ कर रहे थे पीछे टॉयलेट उस तरफ है!” मुस्कुराते हुए आरव ने कहा, “नहीं मैं पीछे के बाग़ीचे को देख रहा था कितना बड़ा ज़मीन है, इस फार्महाउस को पापा ने क्यों गिफ्ट किया तुम्हारे पापा को?”

तब संजना आरव को घुररते हुए कहा, “क्यों तुम इस्को वापस लोगे किआ मेरे पापा से? मैं नहीं लेने दूंगी यह अब हमारा है हाँ!”

तो आरव ने मुस्कुराते हुए धीरे से कहा, “नहीं मैं बस सोच रहा था!”

संजना बोली, “किआ सोच रहे थे के इतने ज़मीन में कितना पैसा मिल जाएगा? बिज़नेस मन हो नाह बोलो एहि एस्टीमेट कर रहे थे तुम नाह?”

तो आरव ने कहा, “बिल्कुल नहीं मुझे यह जगह बहोत पसंद है सोच रहा हूँ शहर की जगह क्यों डैड यहीं नहीं रह गए थे!”

संजना बोली, “यहाँ क्यों रहते? उस्सकी तो बड़ी सी हवेली थी उस गाओं में वो तुमको नहीं पता किआ?”

आरव चरों तरफ घर के अंदर नज़रें दौड़ाते हुए कहा, “इस फार्महाउस को रेनोवेट करके एक बहोत प्यारा सा आइडियल मकान बनाया जा सकता है, थोड़ा ओल्ड है मगर इस्को फुल नई लुक दिया जा सकता है. काफी बड़ा है और एक जॉइंट फॅमिली भी रह सकते हैं यहाँ नाह?”

संजना बोली, “hello, तुम किआ कह रहे हो? मेरे घर का सौदा करने आये हो किआ तुम?”

तब आरव बैठ गया और संजना के हाथ से गिलास लिया जूस पिने को और कहा, “और किआ करूँ तुम तो मुझसे बात hi नहीं कर रही मैं किश से बात करूँ तो घर का मुआएना करने लगा.”

संजना उसस्के के पास बैठकर बोली, “मैं बात नहीं कर रही हूँ तुमसे? संजना बात नहीं कर रही है यह तो न्यूज़ है डिअर, कब से इतना बक बक किये जा रही हूँ और तुम कह रहे हो के मैं बात नहीं कर रही हूँ?!”

तब आरव ने हँस्ते हुए कहा, “हम्म मैं तुमको बात करते हुए सुन्ना चाहता हूँ इसी लिए यह सब कहा ताके तुम और बोलो, तुम्हारी आवाज़ बहोत खूब सूरत है, सुने में ाचा लगता है जब तुम बोलती हो तो!”

यह सुनकर संजना चुप हो गयी और धीमी आवाज़ में कहा, “हम्म अच्छा तो तुम डिप्लोमेसी उसे कर रहे हो, मगर यह सब तुम मत कहो यह तुम्हारे पापा कहते हैं मुझसे!”

आरव ने पूछा, “किआ कहते है डैड तुम्हें?”

संजना ने मुस्कुराते हुए चावला साहब को ध्यान में लाते हुए कहा, “एहि के मेरी आवाज़ उनको पसंद है के मैं हमेशा ऐसे hi बोलता रहूं के मैं ऐसी हूँ वैसी हूँ ेट्स ेट्स!”

आरव ने संजना के चेहरे में देखते हुए पूछा, “अच्छा तुम डैड को कब से जानती हो?”

संजना ने झट से कहा, “जनम जनम से हीहीहीही!”

आरव ने कहा, “ल ो ल”

फिर संजना ने कहा, “मेरा मतलब है जब मेरा जनम हुआ तब से जानती हूँ तुम्हारे डैड को, क्यों पूछ रहे हो?”

आरव ने कहा, “ऐसे hi, क्यूंकि तुम ने कितना कुछ कहा डैड के बारे में ऐसा लगा के तुम उस्सको पिछले 18 साल से जानती हो, तुम 18 की hi हो नाह?”

तो संजना ने कहा, 18 साल से hi जानती हूँ उनको मैं. मेरे बिरथ के बाद उन्हों ने मुझको एक नेकलेस गिफ्ट किया था दिखाऊं तुमको?”

आरव ने कहा, “दिखाओ!”

तो संजना धडपडाते अपने कमरे में गयी और एक बॉक्स लेकर वापस आयी और उस में से नेकलेस निकाल कर आरव को दिया देखने के लिए. आरव ने उस नेकलेस को हाथ में लिए ऊपर के तरफ करके देखते हुए मोठे मोठे ेंखों से कहा, “अरे बाप रे, यह तो कम से कम 50 लाख का माल है! यह डैड ने तुमो गिफ्ट किया था जब तुम बेबी थी तब? क्यों? इतना महंगा गिफ्ट तुमको क्यों दिया था उस्सने?”

संजना ने नेकलेस वापस लेते हुए कहा, “मेरे पापा तुम्हारे पापा के बहोत वफादार नौकर हुआ करते थे, इस लिए जब तुम्हारे डैड सब बेच बाच कर शहर जाने लगे तो पापा को यह फार्म हाउस दिया और मेरे पैदा होने पर यह नेकलेस, बुसस एहि दो चीज़ तो दिए पापा के 45 साल की वफादारी की तो कौन सी बड़ी बात है? और तुम मिस्टर सब कुछ सिर्फ पैसों से मैसूर करने वाले मेरे लिए यह नेकलेस का कोई मॉल नहीं किआ 50 लाख का दाम लगा दिया मैं तो करोड़ों में भी न दूँ किसी को यह!” फिर मुंह बनाते हुए संजना ने कहा, “मेरे लिए तो यह अनमोल है और इस्सके इमोशनल वैल्यू है मेरे लिए, जब से होश संभाला तब से इस से प्यार है मुझे. यह मेरे लिए नेकलेस नहीं कुछ और है.!”

आरव ने कहा, “ऐसे नेकलेस तो रानी महारानियों के गले में दीखते थे पुराने ज़माने में लगता है शाह जहाँ की ज़माने की है पता नहीं डैड को कहाँ से मिला होगा यह! मैं ने तो 50 लाख एस्टीमेट किया शायद यह करोड़ का भी हो! इस्को बैंक की लाकर में रखना चाहिए, तुम्हारे घर में चोर नहीं ग़ुस्ता? अगर किसी चोर को पता चला तो उदा लेगा इस्को!”

संजना डर सी गयी के इतनी कीमती चीज़ है उसस्के पास. और सोचने लगी के सच में अगर यह इतनी कीमती है तो क्यों चावला साहब ने उस्सको यह गिफ्ट किया था?

बाहर दोनों ने देखा के टेंट निचे हो चुके थे और संजना का बाप नहीं दिख रहे थे तो आरव ने पूछा के वो कहाँ गए. संजना ने कहा, “दारू पिने गया है रघु के यहाँ, किआ तुम पिटे हो?” तो आरव ने कहा, “हाँ कभी कभी व्हिस्की या वाइन पिता हूँ मगर किसी ोक्सासिओं पर सिर्फ आदत तो नहीं है.”

संजना ने फिर से कहा के वो अपनी ड्रेस चेंज करने जा रही है और चली भी गयी अपनी नेकलेस की बॉक्स लेकर, आरव को अकेला लाउन्ज में बिठा कर.

अपने कमरे के अंदर संजना चावला साहब को याद कर रही थी कपडे बदलते वक़्त के उनको कितनी छह थी संजना के जिस्म से इन् कपड़ों को उतारने की, और सोच रही थी के अगर अभी वो होते तो उसस्के साथ अपने बिस्तर पर होती इस वक़्त. फिर सोचा के आरव कहीं उसस्के कमरे मैं ना आ टपके. फिर सोचा के अगर आरव उसस्के कमरे में ए तो किआ होगा?! मगर आरव कहाँ आने वाला था वहां वो तो लाउन्ज में इधर उधर देख रहा था.

जब संजना कपडे बदल कर लाउन्ज में वापस आयी तो आरव ने उस्सको देखा और देखता रह गया. वो बहोत hi प्यारी लग रही थी और बेहद खूब सूरत एक आर्डिनरी ड्रेस में. आरव ने उस्सको अपने पास बैठने को कहा, वो बैठी तो आरव ने उस्का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा, “तुम बहोत खूब सूरत हो. खुशनसीब हूँ के मेरे डैड ने तुमको मेरे लिए पसंद किया!” संजना ने उस वक़्त अपना सर झुका लिए और धीमी आवाज़ में कहा, “मैं उस्सकी पसंद हूँ तुम्हारी तो नहीं! तुमने तो मुझको नहीं पसंद किया क्यों?” आरव ने कहा, “लो अब कर लेता हूँ. तुम मुझे मिली hi कहाँ थी जो मैं तुमको पसंद करता, वैसे तुम्हारी तस्वीर भाबी के मोबाइल पर देखते hi पसंद कर लिया था, वार्ना मैं तो शादी के नाम से भागता था!”

तब संजना नार्मल होते हुए बोली, “अच्छा, तो मतलब तुम्हारे पापा अगर मुझको पसंद नहीं करते तो तुम मुझको नाह देखने आते नाह सगाई होती और नाह हम एक दूसरे को जानते, है नाह?”

आरव ने कहा, “हाँ बिल्कुल”

संजना ने कहा, “एनीवे, अब जैसे जिस्सको जिस से मिलना होता है वो वैसे hi मिलते हैं, सो आईटी इस लिखे थिस”

तब आरव ने कहा, “मैं 3 महीनों के लिए कनाडा जा रहा हूँ तुम्को पता है?”

तो बे कॉन्टिनोएड इम्मेडिएटली इन थे नेक्स्ट पोस्ट.......
 
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