Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 6 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

अपडेट 48 चावला साहब इन कंपनी ऑफ़ सान्वी

उधर काफी देर से चावला साहब संजना की फ़ोन तरय कर रही थी जिस वक़्त संजना अपने पापा के साथ हमबिस्तर थी. और कोई जवाब नाह मिलने पर चावला साहब ने एहि कहा खुद से, “आज संजना अपने पापा को वो ख़ुशी दे रही होगी जिस्का इंतज़ार आनंद ने 5 सैलून तक किया. कितना खुश हो रहा होगा आनंद! कितना मज़ा ारः होगा उस्सको उस बहोत hi ज़्यादा क्यूट संजना को छोड़ते हुए….. जब मुझको इतना मज़ा देती है संजना तो अपने बाप को कितना खुश करती आयी होगी पिछले 5 सालों से!.. और आज संजना ने अपनी योनि की गहराई की दर्शन करवाई होगी अपने पिता को, वह आनंद किआ किस्मत पाया है तुमने यार!”

यह सब बातें चावला साहब खुद से बड़बड़ाते हुए कह रहा था मगर उस्सको पता नहीं था सान्वी उसस्के पीछे कड़ी थी, और शुक्र है के सान्वी बुसस अभी अभी आयी थी उनके कमरे में तो सब बातें को नहीं सुना उस्सने और सान्वी ने पूछा, “कौन किस्को मज़ा देता होगा अब? किश के बारे में बड़बड़ा रहे हो आप? आप को चढ़ गयी किआ? हम्म आप ने आज 5 पेग्स ले लिया हैं अब बुसस!”

सच में चावला साहब को कुछ नशा सा होने लगा था और ेंखें मिस कर सान्वी के तरफ देखा अपने बीएड से और मुस्कुराते हुए थोड़ा लड़खड़ाते जुबां से कहा, “विवान नहीं आया अब तक किआ कितने बजे हैं अभी?” सान्वी उनके तरफ बढ़ते हुए कहा, कैसे आएगा जल्दी? अब तो अकेला है वो ऑफिस में आरव तो बाहर है तो सब कुछ उसी को करना पड़ता है रात के बारह बजने के बाद आएगा वो आज, फ़ोन किया था मुझे! वहीँ डिनर भी करेगा कहा था.”

चावला साहब सान्वी को ऊपर से निचे तक देखा. सान्वी अपनी निघ्त्य में थी मगर गाउन ऊपर पहनी हुई थी. वैसे तो हर सुबह को चावला साहब उस्सको वैसे hi ड्रेस में देखता है और यह नार्मल था दोनों के लिए. और चावला साहब अपने एक शार्ट पहने हुए थे और बिना शर्ट के थे, तो हालां के वो नशे में थे उस्सको याद आया के संजना की बनायी हुई लोवेबिते उसस्के चेस्ट पर अब भी मौजूद है तो जल्दी से अपने टीशर्ट को पेहेन लिया सान्वी के करीब आने से पहले.

सान्वी उसके करीब आकर बैठी बीएड पर और चावला साहब ने पूछा, “और दीप्ति सो गयी? आज मैं ने उस के साथ बिल्कुल नहीं खेला, बुसस एक बार आयी थी मेरे साथ फिर भाग गयी.” सान्वी उसस्के पास बैठ कर बोली, “बुसस अब गिलास दीजिये आप ने बहोत पी लिया है आज. अब आराम कीजिये आप. सोने का टाइम हो गया.!”

“कैसे सो जॉन भला? दिमाग़ में हलचल मची हुई है मेरा!” चावला ने कहा. तो सान्वी हैरत से उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “क्यों? किश बात की टेंशन है आप को अब? कैसे हलचल मची हुई है आप के दिमाग़ में” चावला साहब ने सोचा के वो यह किआ बोल गया सान्वी को, वो तो संजना को सोचते हुए दिमाग़ में हलचल की बात कर रहे थे, तो उस्सने बुसस सर झुका लिया सान्वी के सवाल पर. और सान्वी उनके पास बीएड पर बैठ के उनके सर को अपने हाथ से दबाते हुए कहा, “सर दुःख रहा है आप का? दबा दूँ?”

जब सान्वी बैठी तो उस्सकी गाउन निघ्त्य से सरक कर एक तरफ हुई और उस्सकी जांघें साफ़ दिख रहे थे और क्यूंकि चावला साहब के सर झुके हुए थे तो उनकी नज़रें सान्वी की जाँघों पर टिक्के रहे कुछ देर तक और वो संजना की जाँघों को सोचने लगे….. जिस तरह से सान्वी ने उनके सर को थामा था चावला साहब के सर सान्वी के छाती पर डब्बे हुए थे और वो उस्सकी बूब्स को अपने गाल पर फील कर सकते थे और चावला साहब ने अपने एक हाथ को सान्वी के जांघ पर हलके से रखा, सान्वी ने देखा और फील किया मगर कुछ नहीं बोली वो उनके सर दबा रही थी…

और तब चावला साहब ने सर उठाते हुए संवी के गर्दन को चुम्मा, तो सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “किआ कर रहे हो आप पापा जी? आप को चढ़ गया है लेट जाईये आप ऐसे….. और सान्वी झुक कर चावला साहब को लेटने लगी जिस से उस्सकी पूरी क्लीवेज चावला साहब के ेंखों के सामने थे, लटके हुए बिना ब्रा के निघ्त्य के अंदर दोनों बूब्स साफ़ दिखाई दे रहे थे चावला साहब को और उस्का खड़ा होने लगा…..

जब सान्वी ने उनको लेता दिया और अब उठने लगी थी झुके हुए से तो चावला साहब ने जैसे बेखुदी में उसस्के बाहों को थाम कर अपने तरफ एक झटके से खींचा तो सान्वी उन् के ऊपर गिर्र पड़े बीएड पर hi…. तो सान्वी ने फिरसे हँस्ते हुए कहा, “ोफो आप ने क्यों खींचा मुझे, अब मैं जाती हूँ आप सो जाइए अब आप नशे में हो!” मगर चावला साहब ने कहा, “अब हुग नहीं लोगी? हम्म अब मुझे तुमको ज़ोर से हुग करने को मैं कर रहा है आवो नाह मेरी बाहों में एक ज़ोर का झप्पी दो मुझे!” तो सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “आप तो अब लेते हुए हो बीएड पर हुग तो हम खड़े होकर लेते हैं तो कैसे हुग करूँ आप को?”

चावला साहब ने उस्सकी जाँघों को देखते हुए कहा, बीएड पर hi हुग कर लेते हैं ाजाओ यहीं बीएड पर मेरे पास…..” सान्वी ने कुछ सोचते हुए कहा, “हम्म्म्म कैसे? विवान के आने का टाइम हो रहा है, आप को बिल्कुल चढ़ गया है पिता जी आप सो जाइये नाह!”

मगर चावला साहब ने ज़िद किया उस्सको हुग देने को पर पर लेते हुए hi.

तो सान्वी उनके बीएड के करीब गयी फिरसे, पता नहीं दिमाग़ में सान्वी किआ सोच रही थी, और जैसे hi उनके करीब हुए तो चावला साहब ने उस्का हाथ पाकर के ज़ोर से अपने ऊपर खींचा…. सान्वी की छाती उनके छाती पर दादी और चावला साहब ने उस्सको जाकर लिया बाहों में….. सान्वी उनके साँसों को अपने बूब पर फील कर रही थी और उस्सकी दिल की धड़कनें बढ़ने लगे…. फिर चावला साहब दिमाग़ में यह सोचते हुए के संजना उसस्के बाहों में हैं उस्सने अपने हाथ को सान्वी के पीठ पर फरते हुए उस्सकी नितम्बों पर हाथ किया और उस्सको अपने जिस्म पर कर लिया, मतलब अब सान्वी की जिस्म पुरे चावला साहब के जिस्म पर थे बीएड पर, चावला साहब अपने पीठ पर लेते हुए थे और सान्वी पथ के बल उनके ऊपर थे, तब तो सान्वी को पूरी तरह से अपने ससुर का तन्ना हुआ लुंड अपने जाँघों पर फील हुए और वो कांप उठी और चावला साहब उस्सकी गर्दन को चुम्मे जा रहे थे….. सान्वी की दिल की धड़कन बढ़ती गयी और उस्सने धीमी आवाज़ में कहा, “पापा जी आप किआ कर रहे हो, आप को चढ़ गया है चोररये नाह मुझे, विवान आने वाला है, दीप्ति भी मुझे बुला सकती है चोररये nah….tab तक सान्वी ने अपने नितम्बों पर चावला जी के हाथ को फरते हुए फील किया और सर को उठाकर उनके चेहरे में देखा के वो तो मस्त बेखुदी में जैसे सपनों की दुन्या में खोए हुए थे ेंखें बांध करके….

तो सान्वी उठ गयी उनके ऊपर से उनके बाहों को अपने ऊपर से अलग करते हुए…. अपने ड्रेस को अपने क्लीवेज पर बराबर करके ढांकते हुए सान्वी उनको देखे जा रही थी और तेज़ दिल के धड़कनों के साथ सान्वी ने खड़े होकर पूछा, “किआ संजना के साथ यह सब करते हो आप?”

तो बे कॉन्टिनोएड………………..
 
अपडेट 49 बिटवीन सान्वी एंड चावला साहब

तो सान्वी उठ गयी उनके ऊपर से उनके बाहों को अपने ऊपर से अलग करते हुए…. अपने ड्रेस को अपने क्लीवेज पर बराबर करके ढांकते हुए सान्वी उनको देखे जा रही थी और तेज़ दिल के धड़कनों के साथ सान्वी ने खड़े होकर पूछा, “किआ संजना के साथ यह सब करते हो आप?”

अब आगे………….

यह सवाल किया था सान्वी ने चावला साहब से मगर उनको नशे में समझ कर वो वहां से निकल गयी मगर अपने कमरे में जाकर अपने ससुर के उस हरकत के बारे में सोचती रही. सान्वी ने उन् के खड़े हुए लिंग को अपने जिस्म पर अच्ची तरह से महसूस किया था मगर किआ यह पहली बार हुआ था? या अक्सर होता अयाह है? क्यों उस दिन बाथरूम के पास उनको टॉवल देने गयी थी तो क्यों उनके छाती के बालों से खेल रही थी? कैसा रिश्ता रहा है इन् दोनों के बीच पिछले 5 सालों में?

यह तो सबको अब पता चल चूका है के दीप्ति के पैदा होते वक़्त कैसे चावला साहब ने खुद सान्वी को गॉड में उठाकर कार में दाल कर हॉस्पिटल लगाए थे और दीप्ति ने अपना सर बाहर निकाल लिया था फिर भी वहां भी कार से सान्वी को गॉड में उठाकर दीप्ति के सर के समेत सान्वी को हॉस्पिटल के अंदर ले गए थे चावला साहब. तो इस से रिश्ता कितन ज़्यादा बढ़ता है और बॉन्डिंग कितनी करीब वाला हो जाता है ऐसे हालातों से?! नैचुरली क्लोसनेस्स बहोत ज़्यादा बढ़ जाती है और एक रेस्पेक्ट भी ज़्यादा बढ़ती है और ऐसे नाज़ुक मौके पर कोई भी किसी के करीब होते हैं तो रिश्ता करीबी का और बढ़ता hi है. दिल की गहराई तक ऐसे लोग आजाते हैं बिना बुलाये hi. यह अपने आप होता है.

तो आज इस अपडेट में चलो सान्वी और चावला साहब का hi ज़िक्र करें.

नहीं इन् दोनों में अभी तक कोई भी नाजाइज़ रिश्ता नहीं बने हैं. दीप्ति की पैदाइश के दिन से सान्वी के दिल में चावला साहब के लिए इज़त बहोत ज़्यादा बढ़ गयी. वो उनको अपने बाप से ज़्यादा इज़त करने लगी. जब एक बाप की उम्र का आदमी आप को गॉड में एक बच्ची की तरह उठाकर हॉस्पिटल लेजाता है हु भी जब आप की जनम लेने वाला बचा आप के कक से बाहर निकल रहा होता है तो उस इंसान के लिए इज़त अपने आप बढ़ जाती है.

उसस्के बाद चावला साहब हर रोज़ हॉस्पिटल जाता सान्वी को देखने और बची को गॉड में खिलाने के लिए. ज़्यादा नहीं 3 दिन रही थी हॉस्पिटल में सान्वी. सान्वी का पति भी ऑफ़ कोर्स जाते थे मगर बिज़नेस वाले लोग ख़ास कर जो हेड होते हैं उनके अपने अलग किस्सम के टेंशन होते हैं. क्यूंकि विवान को पता था के उसस्के पिता सब देख भाल कर रहे हैं सान्वी की तो वो ज़्यादा तवज्जो अपने बिज़नेस पर देता और बाप पर सान्वी का ख्याल चोरर देता. तो सिर्फ सुबह को काम पर जाने से पहले चला जाता था सान्वी को देखने मगर शाम को चावला साहब जाया करते थे, मतलब चावला साहब सुबह और शाम दोनों जाते थे.

सान्वी अपने ससुर को उस कदर केयर करते हुए देख कर खुद बा खुद उन् के तरफ झुकती गयी.

घर आने के बाद एक नई बोर्न बेबी का ख्याल कैसे रखना यह सब सान्वी को नहीं पता था हर बार चावला साहब से पूछती थी यह कैसे करें वो कैसे करें बची यह कर रही है बची वो कर रही है…. दीप्ति की पहले तीन महीने को समझ लें के उस्सको चावला साहब ने पोसा…. सान्वी को कुछ नहीं पता था.. यहाँ तक के बची को अपने दूध पिलाने को भी सान्वी झिझक रही थी, डर रही थी और चावला साहब ने उस्सको समझाया था के अपना दूध पिलाना बची के लिए बहोत इम्पोर्टेन्ट होता है. वार्ना सान्वी तो बोतल वाली दूध पिलाने जा रही थी बची को. चावला साहब ने समझाया सान्वी को के कैसे अपने दूध को बची को पिलाये….

अब उन् दिनों जब जान सान्वी दीप्ति बेबी को अपना दूध पिलाती थी तो कई बार ऐसा हुआ था के अचानक चावला साहब सान्वी के सामने आजाते जिस दौरान सान्वी की निप्पल बची के मुंह में हो तो जल्दी से सान्वी दुपटे से अपने सीने को ढांकती थी… ऐसे मौके कोई 200 बार से ज़्यादा हुए होंगे जब तक दीप्ति दो साल की नहीं हुई… दो साल के बाद सान्वी ने उस्सको अपना दूध पिलाना बांध किया था वो भी चावला साहब से पूछ कर.

मगर उन् दो सालों में एकांत बार कुछ ऐसा भी हुआ था, वो यह के एक बार सान्वी दीप्ति को दूध पीला रही थी, उसस्के पास उस वक़्त दुपट्टा नहीं था, चावला साहब दीप्ति से खेलने के लिए सान्वी के कमरे में गए, दिन भर में बीसों बार जाते थे बची को लेने के लिए, तो सान्वी को पीठ करना पड़ा उंनसे मगर चावला साहब फिर भी नहीं रुके सान्वी के सामने आगये, सान्वी शर्मायी और अपने बालों को अपने छाती पर किया नज़रें झुकाये हुए तो चावला साब पास बैठ गए, वो बीएड पर बैठी थी, बैठ कर चावला साहब ने कहा “इस में छुपाना किआ है भला? यह तो नेचुरल है, भगवान् की दें है एक बच्चे के लिए, छुपाना बेकार है, मैं तो दीप्ति बेबी से खेल कर रहूँगा हेहेहे”

तो सान्वी ने कहा, “रुकिए नाह अभी इस्सकी प्यास नहीं बुझी है” चावला साहब ने कहा, “अरे तो पिने दो मैं ने कब मन किया है, वो पीती रहे मैं इस्सके मुंह से दूध छींटा हूँ!!” और चावला साहब ने दीप्ति के गाल पर अपने हाथ फरते हुए उसस्के साथ खेलना शुरू किया, अब सान्वी कितना छुपा सकती थी उसस्के बूब्स तो साफ़ दिख रहे थे और दीप्ति के मुंह में उसस्के निप्पल थे, सान्वी ने तब कुछ नहीं किया अपने होंठों को दांतों में दबाये दीप्ति के दादा को उस से खेलते हुए देख रही the,aur चावला साहब का हाथ उसस्के बूब को छुआ… सान्वी ने कुछ नहीं कहा नाह कुछ किया, और जैसे बची से दूध छींटे हुए चावला साहब ने कहा, “बुसस बुसस आप दूदू पीना बुसस अब दादा के साथ खेलने जाना है,“ ऐसा कहते हुए चावला साहब ने सान्वी के बूब को अपने हाथ से पाकर कर दीप्ति के मुंह से निकला… सान्वी ने करने दिया सिर्फ एक तरफ देखती रही. मतलब सान्वी ने अपने ससुर को अपने बूब को छूने दिया था….. ऐसा एक बार नहीं कई बार हुए थे उन् दो सालों में.

चावला साहब जान बुझ कर उसी वक़्त जाते थे दीप्ति को लेने जिस वक़्त सान्वी उसकको पिलाती थी…. और कभी कभी तो ऐसा लगता था के सान्वी जान बुझ कर उसी वक़्त बची को पिलाती थी जब उस्सको पता होता था के चावला साहब बची को लेने आएगा…….

तो बे कॉन्टिनोएड इन थे नेक्स्ट पोस्ट इम्मेडिएटली……
 
अपडेट 50 अबाउट बोथ ऑफ़ थम कॉन्टिनोएड....

और तब से सान्वी को आदत हो गयी थी के उसस्के ससुर उसस्के बूब को बची के मुंह से लेकर अलग करेगा, और वो करने देती थी, कभी नहीं टोकती थी चावला साहब को तो उस्सको आदत होने लगी हमेशा वैसा करने की.

और दूसरी आदत यह हुई थी के जब कभी दीप्ति सान्वी के गॉड में या बाहों में होती थी और चावला साहब दीप्ति को सान्वी के हाथ से अपने पास लेते थे तो अपने हाथ को सान्वी के बूब्स पर ज़रूर दबाते थे बची को लेते वक़्त. सान्वी सिर्फ मुस्कुराती थी जब भी वो होता था, बल्कि सान्वी को जब भी बची को ससुर के हवाले करना होता था तो उस्सको पता चल जाता था के ससुर अपने हाथ को उसस्के बूब्स पर दबाएगा बची को लेते वक़्त. वो थोड़ा हस्ती, होठ को दांतों में दबाती मगर बिल्कुल विरोध नहीं करती थी. कभी तो चावला साहब मुठी से बूब को बिल्कुल hi दबा देता के सान्वी की आह निकल जाते…..

अब यह क्यों सान्वी विरोध नहीं करती थी शायद उस वक़्त को याद करके जिस वक़्त वो लेबर पैन में थी और सिर्फ ससुर अकेला था उस्सकी हेल्प करने के लिए उस वक़्त और ससुर ने उस्का हद से ज़्यादा hi केयर किया था जीन दिनों वो हॉस्पिटल में मैटरनिटी वार्ड में थी बची को पैदा करके. या तो फिर वो मोहित होती गयी अपने ससुर पर क्यूंकि दिन भर अकेले सिर्फ एक hi आदमी था जो उसस्के करीब रहता था पुरे दिन. जब खाना पकती थी तो बची दादा के पास रहती थी, कपडे धोती सान्वी तो भी बची दादा के पास, कोई भी घर के काम करती तो बची को अपने ससुर के साथ चोररटी थी… तो मतलब कुछ भी हो घर में सिर्फ एक ससुर hi थे जिस्सके पास सान्वी को जाना पड़ता था. दोनों के रिश्ते दिन बा दिन इतने मज़बूत होते गए गोया के दोनों हस्बैंड वाइफ हों!

अब कभी मॉल भी जाती सान्वी तो ससुर hi उस्सको लेजाते, बची को पार्क में घुमाने लेजाते तो ससुर के साथ hi जाते…. और पब्लिक में तो बिल्कुल हस्बैंड वाइफ की तरह एक साथ चलते, बची को हाथ बदल बदल कर लेते, पार्क में घूमते तो सान्वी उनके बाज़ू को पकड़ के chalti…jo लोग उनको जानते थे उनको पता था यह ससुर और बहु हैं मगर जो लोग नहीं जानते थे समझते थे हस्बैंड वाइफ हैं दोनों. अब चावला साहब तो बिल्कुल अधेड़ नहीं लगते थे, हैंडसम थे, स्ट्रांग थे, अच्छी बॉडी थी और बहोत एक्टिव भी थे तो बिल्कुल अपना आगे नहीं देते थे वो हर कोई ुन्नो 15 साल कम के समझते थे.

तो दोनों की करीबी इतना बढ़ी के एक दूसरे से बिल्कुल नहीं झिकझकते थे सटने को, या सान्वी की किसी भी जिस्म का हिस्सा उंनसे सत् जाते तो सान्वी बिल्कुल नहीं घबराती या नहीं शर्माती बिल्कुल भी, और चावला साहब तो जान बुझ कर सान्वी के जिस्म को कभी भी छू लेता था और कभी छूने के बाद एक ेंख मारता था सान्वी को. उन् दोनों के बीच का रिश्ता ऐसा था के किसी को समझ में नहीं अत था के रिश्ता है किआ और कैसा है… जिस्मानी तालुकात बिल्कुल भी नहीं हुए थे कभी भी, मगर जिस्म का छुवन बहोत हुए थे…..

इसी लिए विवान सान्वी से कहता था के उस्का बाप उस्सकी पत्नी का पति है, क्यूंकि वह दोनों एकदम हस्बैंड वाइफ जैसे hi थे मगर सेक्स के बिना…. हाँ चावला साहब बिल्कुल नहीं झिझकते थे सांवि के जाँघों को छूने को जब वो निघ्त्य में होती थी, और सान्वी बिल्कुल नहीं शर्माती थी उनके सामने निघ्त्य में जाने से…. चाहे सान्वी के जांघें दिखे या फुल क्लीवेज सान्वी बिल्कुल नहीं घबराती थी उनके पास या सामने जाने से… एक ट्रस्ट के जैसा था? या सान्वी को इंतज़ार रहता था के कब ससुर उस्सको अपने आग़ोश में लें? और चावला साहब को किआ डर था के अगर वो ज़्यादा करीब गए तो सान्वी शोरर मचाएगी या विवान से केहड़ेगी या अपने इज़त का ख्याल था, या फिर वो रिश्ते को बदनाम नहीं करना चाहते थे?

यह तो यह दोनों hi जाने के मैं में किआ था और चाहते किआ थे दोनों. क्यूंकि जिस तरह से सान्वी कभी कभी उंनसे हुग करते थे अपने निघ्त्य में कोई बहु तो वैसे नहीं करती, जिस तरह सुबह सुबह अपने निघ्त्य में बिना ब्रा के ऊपर एक गाउन डालकर सान्वी उनको चाय सर्वे करती है इतने दिनों से उनका तो कुछ और भी मतलब हो सकता है! किआ सान्वी इंदिरेक्ट्ली अपने ससुर को रिझाती थी? किआ चावला साहब का दिल आगया था सान्वी पर मगर कह नहीं पाटा था?

अगर सान्वी रिझाती थी उनको इतने दिनों से तो क्यों कल रात को उनके बाहों से बीएड पर से निकल गयी? किआ सोचा सान्वी ने उस वक़्त? किआ संजना का ख्याल ने सान्वी को नाराज़ किया या जलन हुई उस्सको?

और रही बात चावला साहब की तो किआ इतने दिनों से वो परहेज़ कर रहे थे मगर अब क्यूंकि संजना से सम्भोग कर चूका तो उसस्के लिए अब सान्वी को भी भोगने का मैं कर रहा है? इतने दिनों से वो सान्वी को बहु मान रहा था मगर अब क्यूंकि संजना से सेक्स करने लगे तो अब सोच रहे हैं के सान्वी से क्यों नहीं? किआ चावला साहब के मैं में ऐसे ख्याल आरहे हैं या कल रात ज़्यादा नशे में होने के कारण hi वैसा किया था उस्सने? इन् सब बातों का खुलासा धीरे धीरे अगले उपदटेस के दौरान सब पता तो चल hi जाएगा मगर फिलहाल चलिए देखते हैं अगले सुबह को जब सान्वी उंनसे मिलती है तो किआ बात चीत होती है.

मामूल की तरह सान्वी सुबह 5 बजे उठ गयी थी और किचन में बिजी थी, और हमेशा की तरह अपने निघ्त्य में hi थी गाउन के साथ जो अंदर वाली महीन निघ्त्य को कवर करते हैं, ब्रा नहीं पहनती निघ्त्य के अंदर कभी. और चावला साहब भी तो हमेशा 5 / 5.30 तक उठ जाते हैं मगर कल की नशा की वजह से आज नहीं उठे थे. तो सान्वी उनके कमरे के दरवाज़े पर नज़रें जमाई हुई थी के कब उठेंगे वो.

6 बजे चावला साहब अपने कमरे से निकले. सान्वी जल्दी से उनके पास गयी एक कप गरम चाय के साथ और मुस्कुराते हुए पूछा, “हम्म तगड़ा नींद आयी आप को लगता है कल रात को नाह?”

चावला साहब ने एक अगराई लेते हुए कहा, “हाँ सरदर्द कर रहा है!”

तो सान्वी ने कहा, “तब तो चाय नहीं निम्बू पानी चाहिए आप को, बना दूँ किआ? कल आप ने ज़्यादा पी लिए थे है नाह?”

चावला साहब ने कहा, “okay बना दो फिर”

और दोनों किचन में एक साथ गए, सामने सान्वी चल रही थी उसस्के पीछे चावला साहब गए, पीछे से चावला साहब सान्वी की चाल और कमर की लचक देख रहे थे.

निम्बू पानी बनाते वक़्त सान्वी ने कहा, “किआ आप को याद है कल रात आप ने किआ किया था?” यह उस्सने मुस्कुराते हुए और हँस्ते हुए कहा. और चावला साहब सान्वी के अदाओं को देखते हुए थोड़ा करीब होकर धीरे से उसस्के कान के पास कहा, “सब कुछ याद है मुझे!”

तब संजना ने वैसे hi मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छा सब याद है तो बोलिये किआ किया था आप ने?” तो चावला साहब ने उस्सको पीछे से जकरा अपने बाहों को उसस्के पथ पर दबाते हुए और उस्का आगे का निचे वाला हिस्सा सान्वी के नितम्बों पर दबा!” वैसे सान्वी को उस तरह बाहों में भरने की आदत थी चावला साहब को, मगर कल रात वाली बात कभी नहीं हुई थी…. तो जब उस तरह से चावला साहब ने सान्वी को जकरा और उसस्के नितंबों पर दबाया तो सान्वी ने कुछ विरोध नहीं किया सिर्फ मुस्कुराकर कहा, “चाह जी तो आप को सब याद है मतलब आप नशे में नहीं कर रहे थे वो सब हम्म्म?”

और चावला साहब उस्सको वैसे जाकर हुए hi उसस्के गर्दन पर पीछे अपने नाक रगड़ते हुए उस्सको सुंघा और कहा, “इतनी खूबसूरत बहु को बाहों में लेकर कोई भूल सकता है किआ?”

तब सान्वी ने कहा, “बुसस बुसस हटिये. चोररये वह लोग उठने वाले हैं अब!” मगर चावला साहब उस्सको वैसे hi जाकर हुए hi बोलै, “बुसस एहि कहती हो हर बार जैसे तुमको बाहों में भरता हूँ के वो आजाएगा, वो उठ जाएगा, यह हो जाएगा… तो कब नहीं चौररने को बोलोगी तुम हम्म्म? कितनी अछि महक रही हो!” यह कहकर उसस्के गर्दन को चुम्मा उन्हों ने और सान्वी थोड़ी झुक गयी जिस से चावला साहब का तन्ना हुआ लुंड उसस्के नितम्बों पर डब्बा और सान्वी ने फील किया जैसे कल रात को किया था, मगर नाह विरोध किया, नाह मन किया नाह बाहों से निकलने की कोशिश किये, क्यों? किआ वो चाहती थी के कुछ उस से ज़्यादा हो? हर बार ऐसा होता था मगर इस से आगे कुछ नहीं बुसस ऐसे hi रुक जाया करते थे दोनों….. तो कब आगे बढ़ेंगे?.... बाद में देखते हैं…

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 
अपडेट 51 चावला साहब बैक तो संजना

तो उस सुबह को तो कुछ नहीं हुआ हमेशा की तरह सान्वी और चावला साहब के बीच. और उनको तो संजना के यहाँ जाना था अब हर रोज़ ड्राइविंग सीखने के बहाने.

तो वो करीब 10 बजे घर से निकल गए और सान्वी से साफ़ कहा के संजना को ड्राइविंग सीखाने जा रहे हैं आटोमेटिक कार लेकर. एक रात पहले भी बता दिया था इस बात को. सान्वी को पसंद नहीं था उंनका वहां इतना ज़्यादा जाना तो कहा के किसी ड्राइविंग स्कूल में उस्का भर्ती करा दें मगर चावला साहब को तो मौका चाहिए थे संजना के साथ रहने का तो क्यों किसी ड्राइविंग स्कूल में भर्ती करवाता वो संजना को. तो वो चले गए. दो घंटा का रास्ता था तो ज़ाहिर है बारह बजे वहां पहुंचे.

चावला साहब को हैरानी हुई के संजना बाहर चौकठ पर नहीं थी. उस्सकी कार के आने की आवाज़ से तो संजना को जल्दी से बाहर आजाना चाहिए थे मगर वो घर के अंदर hi रही तो चावला साहब चलते हुए घर की मैं दूर तक गए और ओपन करना चाहा तो अंदर से दूर लॉक था. चावला साहब का मैं खांका के कहाँ गयी होगी इस वक़्त दिन में संजना. क्यों घर पर नहीं है? या अंदर है तो क्यों नहीं आयी दवा खोलने को? कुछ देर बाद दरवाज़े को खटखटाया, एक बार, दो बार तीसरे बार नॉक करने के बाद भी नहीं खुला तो चावला साहब के समाज में नहं ारः था के अब किआ करें, फ़ोन करने के इलावा कोई रास्ता था hi नहीं…. कॉल किया संजना को तो रिंगटोन तो बजह रहे थे मगर उठा नहीं रही थी वो……

कुछ देर बाद चावला साहब ने मैसेज भेजा, “ी ऍम हेरे ात योर डोरस्टेप, क्नॉकिंग, वेयर अरे यू? अरे यू इनसाइड और नॉट ात होम?” करीब 10 मिनट्स तक वेट किया कोई जवाब नहीं आया तो चावला साहब वापस कार के तरफ जाने लगे, उदास और परेशान के उस्सको आने से पहले संजना से फ़ोन पर बात कर लेना चाहिए था…. मगर जैसे hi कार की दूर खोलने जा रहे थे तो संजना ने दरवाज़ा खोलते हुए उनको फुकरा, “hello जी वापस जाने भी लगे?!”

चावला साहब उस्सकी आवाज़ सुनके इतना खुश हुआ जैसे प्यासे को पानी मिल गया, उसस्के चेहरे पर रौनक आगया और जल्दी से संजना के पास जाकर उस्सको बाहों में बी हारते हुए कहा, “कहाँ थी तुम? क्यों नाह रिप्लाई कर रही और नाह दरवाज़ा खोल रही थी मुझ पर किआ बीत रहा था पता भी है तुमको?!”

संजना ने भी उनको बाहों में भर लिया था और हँस्ते हुए कहा, “कमाल है मैं ने तो सोचा मुझे बाहों में लेते hi आप कहोगे के बाथरूम से निकल रही हो, फ्रेश हो वाओ अब मैं तुमको गन्दा करूँगा! Hihihihihihihi”tab जाकर चावला साहब ने उस्सकी भीगे हुए गेसू देखे और सुंगा और अपना जीब चलाया संजना के गर्दन पर. और संजना ने कहा, “चलो चलो अंदर चलो अभी अगर किसी ने देख लिया तो हम गए काम से!” और दोनों अंदर गए वैसे hi एक दूसरे को जाकर हुए.

अंदर जाकर चावला साहब सोफे पर नहीं एक चेयर पर बैठा जान बुझ कर, वो इस लिए के उस्सको संजना को गॉड में हॉर्स राइडिंग के जैसे लेना था….. वो बैठे चेयर पर और संजना के दोनों टांगों को फैला कर दोनों तरफ करके उस्सको अपने गॉड में बिठाया, और उस से संजना की छोटी स्कर्ट ऊपर जुई और सीधे उस्सकी पंतय चावला साहब के पंत पर ठीक उसस्के लिंग के ऊपर दबे हुए पाए गए. दोनों एक दूसरे के जीब चूस रहे थे और उस दौरान चावला साहब अपने लिंग को और भी दबा रहा था संजना के पंतय पर ठीक उसस्के योनि पर, और उनके दोनों हाथ संजना के मुलायम नितम्बों को मसलते जा रहे थे और संजना के चूचियां उनके छाती पर कसके दबे हुए थे, दोनों जिस्म एक दूसरे से एक जुड़वे की तरह जुड़े हुए थे चेयर पर बैठे हुए.

अचानक चावला साहब चहूंके एक आवाज़ सुनकर जो पीछे वाले बग़ीचे से सुनाई दिए जैसे कोई वहां से भाग रहा था….. संजना भी हैरान नज़रों से पीछे के तरफ दक्खने लगी तो चावला साहब ने पूछा, “तेरा पापा घर पर है किआ? काम पर नहीं गया वो?” संजना ने कहा, “बिल्कुल घर पर नहीं है वो तो सुबह hi काम पर चले गए.” तो चावला साहब ने संजना को गॉड से उतरा और उसस्के चेहरे में देखते हुए पीछे के दरवाज़े के तरफ बढ़ते हुए पूछा, “तो यह आवाज़ किसी थी? कौन है उधर?” संजना ने अपने दोनों काँधे को ऊपर करते हुए पता नहीं का इशारा किया अब भी हैरानी से देखते हुए उस तरफ.

चावला साहब ने पीछे का दरवाज़ा खोला और बाहर चरों तरफ देखा मगर कुछ भी नज़र नहीं आया तो वापस संजना को देख कर कहा, “तुम बाथरूम में थी नाह मेरे आने से पहले?” संजना ने कहा “हाँ” तब चावला साहब ने कहा, “और तुम्हारे बाथरूम की पीछे वाले खिड़की सीधे पीछे वाले बग़ीचे को फेस करता है, तो कोई भी तुमको नहाते हुए देख सकता है उधर से वहां के पैरों पर चढ़ कर, कोई ज़रूर था वहां अभी अब भाग गया होगा!!”

संजना ने कहा, “तो कैसे अंदर बग़ीचे में दाखिल होगा कोई? कोई रास्ता hi नहीं है वहां अंदर जाने की सिर्फ घर से होकर पीछे जा सकता है कोई. पीछे कितना ऊंचा वाल है कैसे कोई इतने ऊंचे दीवार को चढ़ सकता है? तो चावला साहब ने कहा तुझ जैसी लड़की को नंगा देखने के लिए कोई कुछ भी कर सकता है, दीवार के उस पार से सीधी लगाकर चढ़ सकता है…. सोचो अगर किसी ने तुम्हारा वीडियो बना कर इंटरनेट पर पोस्ट किया तो?!! संजना ने ेल लम्बी सांस लेते हुए कहा, तो बाथरूम वाली खाकी को बंद करना पड़ेगा अब!” चावला साहब ने कहा “हाँ बिल्कुल hi बंद कभी नहीं खोलने के लिए…. थेरो, मैं बाहर जाता हूँ और एक पेयर पर चढ़कर तुमको देखता हूँ तुम जाओ बाथरूम में देखते हैं किआ और कितना दीखता है….”

संजना गयी बाथरूम के अंदर. ऊपर एक छोटा था इम्पोसट था खुला हुआ, और संजना उस्सको देख रही थी तो चावला साहब दिखे उस्सको एक पेयर के ऊपर और दोनों ने बात किये. चावला साहब ने कहा, “देखा! मैं तुमको पूरा देख सकता हों यहाँ से, थेरो एक वीडियो क्लिप भी लेता हूँ… घूमों अब, एक राउंड मारो, हाँ अब ऊपर देखो, ान मेरे तरफ देखो…. एक तंग ऊपर उठाओ, अब अपनी बाहों को खोलो, ब्लाउज निकालो नाह और ब्रा भी!!”

संजना रुक गयी और कहा, “ोफो अब आप किआ करने लगे? नै मैं नहीं निकलूंगी!!” चावला साहब ने ज़िद किये, “अरे निकालो नाह मैं देखना चाहता हूँ क्लिप में कितनी रिकॉर्ड हो सकती हो….” तो संजना ने ब्लाउज और ब्रा निकाले और चावला साहब उस्सको रिकॉर्ड करते गए उस्सकी बूब्स आर्मपिट, पथ सब जितना हो सक उस्सने वीडियो क्लिप बना लिए संजना की और वापस अंदर आये और संजना को दिखाया और कहा, अभी तो तुम नहीं नाहा रही थी अब सोचो नहाते हुए किसी ने रिकॉर्ड किया तो तुमको सर से पाऊँ तक पूरा रिकॉर्ड कर सकते हैं!! चलो मैं उस इम्पोसट को बंद कर देता हूँ. कभी भी मत खोलना उसे okay?!”

तो बेकटिनोएड…………………
 
अपडेट 52 Sanjana’s चार्मिंग वेज़

लंच टाइम हो गया था और संजना ने खाना पडोसने के लिए टेबल पर आर्डर किया और चावला साहब को बैठने को कहा. तो चावला साहब ने कहा, “मैं आटोमेटिक कार लेकर आया हूँ तुमको ड्राइविंग सीखाने लेजाना है पता है तुम्हें?” संजना ने कहा खाना खान ेके बाद चैलेंज. तो चावला साहबने कहा, “फिर कब करेंगे?” तो संजना ने हँस्ते हुए नहीं समझने का बहाना करते हुए पूछा, “किआ कब करेंगे?” तो चावला साहब ने कहा, “तुमको नहीं पता किआ करना है?” संजना ने कहा, “हाँ पता ै ड्राइविंग करनी है!” तो चावला साहब ने संजना को जकरा उसस्के पीछे से और अपने लुंड को उसस्के गांड पर रगड़ते हुए ज़ोर से दबा कर छोटे छोटे ढाका देते हुए कहा, “नाटक कर रही हो मेरे साथ? यह करना है यह, कब करेंगे यह? कब घुसूंगा तेरे गणरायी में यह!!” और संजना ने और भू झुक कर उनको और पोजीशन दे दिया ज़्यादा रगड़ने के लिए और कहा, “पता है पता है मैं तो बुसस आप की टांग खिंचाई कर रही थी…… हम्म्म खाना खाने के बाद करेंगे okay?!”

तो वो चली गयी किचन में खाना निकालने के लिए और चावला साहब टेबल के पास चेयर पैट बैठकर उस वीडियो को देखने लगे जो उस्सने बाथरूम में संजना की लिए थे…… वो देख रहे थे के जब उन्हों ने संजना को ब्लाउज उतारने को कहा तो किश ऐडा से वो अपने ब्रा को उतार रही थी कैमरा में देखते हुए…. जब संजना अपनी ब्रा की स्ट्राप को आहिस्ते आहिस्ते आराम से अपने काँधे से निकाल रही थी तो उसस्के पतली पतली उँगलियाँ उस स्ट्राप के निचे से होकर एक ऐडा से उसस्के खूबसूरत काँधे से सरकते हुए उस्सकी गोरी बाज़ू पर लटके हुए थे और उसकी क्लीवेज धीरे धीरे थोड़ा से थोड़ा और और थोड़ा ज़्यादा नज़र आने लगे… और उस में संजना की नज़रें कुछ इस तरह से कैमरा में देख रहे थे के बयान करना मुश्किल है के वो नज़रें किआ कह रहे थे. बोल रहे थे उस्सकी ेंखें, बहोत सेक्सी, सेन्सुयस और इंविटिंग थे संजना की नज़रें. चावला साहब ने क्लिप को स्लो मोशन करके देखा और दीवाना होने लगा…. उस्सको लगा एक फिल्मी हीरोइन को देख रहा है और सोचने लगा के संजना को छोड़ते वक़्त उस्सकी फिल्म उतारना चाहिए उस्सको!! संजना की हर एक ऐडा रिकॉर्ड करने लायक था, उस्सकी नज़रों का झुकना, फिर ऊपर देखना, उस्सकी होंठों का हिलना, बोलते वक़्त उसस्के जबड़े का हिलना, उसस्के हाथों का इस्तेमाल करना, उस्सकी आवाज़, उस्सकी नज़ाकत सब रिकॉर्ड करने लायक थे, वो एक ऐसी हसीना है जिस्सको हज़ार बार रिकॉर्ड करो तो हज़ार शादी मिलेगा, हज़ार ऐडा मिलेगा, हज़ार तरह की नज़ाकत मिलेगी… संजना थी hi कुछ ऐसी के उसस्के बारे में लिखना, बताना नामुमकिन है. वो ऐसी चीज़ है के राजा हो या प्रेजिडेंट या प्राइम मिनिस्टर, कोई भी संजना का दीवाना हो सकता था. करोड़ पति अपने सारे माल ो दौलत निछावर कर डेट ीक संजना के लिए, किसी देश की हुक्मरान अपने देश को चोरर डेट ीक संजना के लिए, कोई राजा अपने सिंघासन को चोरर डेट ीक संजना के लिए वो ऐसी चीज़ थी. उस्सकी एक मुस्कान, उस्सकी एक हलकी सी सिसक, उस्सकी एक छोटी सी आह किसी भी इंसान या पहलवान को छोटा बना देता!! संजना को मालिक ने ऐसा बनाया है के वो कोई भी हो उसस्के बिना जीना दुश्वार होता अगर एक बार संजना के साथ रह लिया तो.

चावला साहब सोचने लगा के अगर खुदा न खास्ता कभी ऐसा हुआ के संजना से अलग होना पारा तो वो मर्डर जाएगा. बीमार हो जाएगा पागल हो जाएगा. चावला साहब को कुछ भी करने को मंज़ूर था संजना को अपने पास रखने के लिए, अपने घर में लाने के लिए और अपने आग़ोश में लेने के लिए. दीवानगी के हद तक चाहने लगे थे वो संजना को और उस्सको खोना गवारा नहीं था उनको. हाँ इतना चाहता था संजना को, के उस्सको मंज़ूर था के चाहे उस्का बाप, उसस्के खुद का बीटा या कोई और भी अगर संजना के साथ सम्भोग करे तो वो मंज़ूर था मगर संजना को खोना मंज़ूर नहीं था उनको. कैसा दीवानापन था, कैसा मुहबत था यह वही जाने….. और दिख तो यह रहा था के संजना भी उंनसे उतनी hi मुहबत करती है, मगर किआ सच में संजना उनको उतना hi चाहती थी या संजना बुसस उनके घर तक पहुंचे के लिए, उनके िफ़ेस्टीले को अपनाने के लिए और उनके दौलत की ेश भरी ज़िन्दगी में जाने के लिए उन् से मुहबत करती थी? अब चावला साहब ऐसा सोचने भी लगे थे. किआ उनके घर में प्रवेश करने के कुछ साल बाद भी संजना उनको वैसे hi प्रेम करती रहेगी या नयी ज़िन्दगी पाने के बाद वो चावला साहब को धित्कारेंगी और सिर्फ और सिर्फ आरव को hi अपनाएगी? चावला साहब किआ करेगा अगर वैसा हुआ तो? यह सब सोच कर चावला साहब कुछ परेशान दिखने लगे थे.

और संजना दोनों हाथों में प्लेट्स लेते हुए उनके पास आयी और टेबल पर प्लेट्स को रख कर वापस किचन में गयी दूसरे चीज़ें लेन के लिए. जब दोबारा वापस आयी तो देखा के चावला साहब उस्सकी वीडियो बना रहे हैं तो कहा, “यह किआ आप फिरसे मुझको रिकॉर्ड कर रहे हो क्यों?” चावला साहब ने शूट करते हुए कहा, “जिस तरह से तुम यह दोनों प्लेट हाथ में लिए हुए चल रही थी वो बहोत दिलकश्त था, वही रिकॉर्ड कर रहा हूँ…. मेरे ज़माने में यह सब नहीं था और अक्सर मैं सोचता हूँ के मेरे ज़माने में ऐसे कैमरा होता मोबाइल में तो आरव की माँ की कितने सारे वीडियोस बनाया होता मैं ने! आज सब सौवेनीर्स होते मेरे पास उनके!... इसी लिए तुम्हारे वीडियो बना रहा हूँ के कुछ साल बाद भी यह निशानी रहे मेरे पास किश तरह से तुमने आज मुझे खाना सर्वे किया था…..”

चावला साहब तो संजना की हर नज़ाकत को रिकॉर्ड कर रहे थे, जिस तरह इ संजना चल रही थी उसकी हर एक लचक में एक ऐडा था, एक नज़ाकत थी, एक कशिश थी… यह रिकॉर्ड उस नियत किया जा रहा था जिस में ेरोटिकिसम दिखे, जिस में सेंसुअलिटी दिखे, स्लो मोशन में देखा जाए तो पुरे सेंसुअलिटी थी संजना की हर ऐडा में चाहे वो कुछ भी कर रही हो… बिना सेक्स के, बिना किश के, बिना किसी भी सेक्स से एसोसिएटेड चीज़ के संजना में बहोत सेंसुअलिटी थे…. और सिर्फ इन् चीज़ों से hi एक आदमी संजना का जीवन भर के लिए दीवाना बन सकता था…. मगर वो नज़र होना चाहिए जो चावला साहब के पास थे. जैसे एक जोहरी पत्थर में से भी हीरा को पहचान लेता है, उसी तरह चावला साहब संजना के हर ऐडा में से एक एक नायाब हीरा तराश रहा था….. उनके लिए अब संजना hi खुद एक नायाब हीरा बन चुकी थी जो वो किसी भी कीमत में कहना नहीं चाहते थे.

तो बे कॉन्टिनोएड………………..
 
अपडेट 53 Sanjana’s फर्स्ट ड्राइविंग लेसन फाइल्स

दोनों ने एक साथ लंच लिए और ड्राइविंग के लिए निकले. गाओं के रास्ते कच्चे थे तो चावला साहब संजना को थोड़ा दूर अच्छे रोड पर लगाए ड्राइविंग के लिए. गाओं के रास्ते से निकलते वक़्त जब कार रघु के शॉप के करीब से गुज़र रहे थे तो कोई तीन चार लोग खड़े कार के अंदर झांक रहे थे. अब क्यूंकि गली कच्चा था तो बहोत आहिस्ता ड्राइव करना पद रहा था चावला साहब को और उसस्के लेफ्ट में संजना बैठी थी तो रघु का शॉप भी लेफ्ट में hi था तो उन् में से एकांत लोगों ने संजना को कार में देख कर उस्सको वेव किया तो संजना ने भी उन् लोगों से मुस्कुराते हुए वेव किया. ऑफ़ कोर्स, चावला साहब ने पूछा, “कौन हैं यह लोग?” संजना ने कहा, “हमारे गाओं के लोग हैं यहाँ सब एक दूसरे को जानते पहचानते हैं” जब उन् लोगों से आगे निकल गए तो चावला साहब ने उन् लोगों को अपने रियर मिरर में देखा काफी देर तक तो वह लोग कार को देखते जा रहे थे जब तक नज़र आये और इशारे से कार की तरफ मतलब संजना के तरफ इशारे करते हुए बातें कर रहे थे. चावला साहब ने सोचा पता नहीं किआ बातें कर रहे हैं तो संजना से कहा,

“यह लोग पता नहीं कैसे लोग हैं और तुमको मेरे साथ कार में देखा तो किआ किआ बातें बनाएंगे”

संजना ने जवाब दिया, रघु है वो और उसस्के कुछ साथी, यहाँ पापा पिने जाते हैं, याद है उस दिन जब आप आये थे तो कुछ लोग बाइसिकल पर जा रहे थे मैं बाहर कड़ी थी तो? वही सब हैं!” (आप सबको याद होगा संजना ने उन् लोगों से कहा था जाओ वार्ना पत्थर से मारूंगी तुम लोगों को)

चावला साहब ने कहा, “ओह तो उसी के पास तुम्हारे पापा पिने जाता है, हम्म अब समझा, तो तुमने उस्सको वेव किया बल्कि सभी ने तुमको वेव किया मतलब तुम उन् लोगों से खुल मिलके बातें करते हो?”

संजना ने कहा, “अरे साहब यहाँ हर कोई हर किसी से खुल के बातें करते हैं, और मैं इतने दिनों कॉलेज गयी तो यहीं से तो गुज़ारके जाती थी नाह? तो सब से बातें तो होती रहती है और कभी कुछ खरीदना हो तो यहीं तो आना पड़ता है नाह? तो सब जानते हैं मुझे…. आप ने उन् औरतों को नहीं देखा जो थोड़ा पहले रास्ते पर जा रहे थे सब जानते हैं मुझे, सब लोग एक दूसरे को जानते हैं यह छोटा सा गाओं है साहब हर कोई एक दूसरे को जानते हैं और सब एक दूसरे से बात करते हैं!”

चावला साहब संजना को अछि तरह से सुन रहे थे और सब सुनने के बाद उन्हों ने अपने गर्दन हाँ में हिलाया. कुछ दूर अस्फाल्टेड रोड पर जाकर चावला साहब ने कहा, “अब तुम्हारी पहली ड्राइविंग लेसन स्टार्ट होती है इधर आओ, बैठो मेरे जगह पर मैं सब समझाता हूँ.”

चावला साहब ने संजना को स्ट्रीरिंग व्हील के पीछे बैठाया ड्राइविंग सीट पर और पहले सभी बटन्स का इस्तेमाल बताया एक एक करके और दिमाग़ में याद रखने को कहा. तो संजना ने कहा एक कलम और कागज़ चाहिए जो चावला साहब ने ग्लोव बॉक्स से निकला और उस्सको दिया तो संजना ने सब लिखे एक पेपर पर जैसे स्कूल की ट्यूशन ले रही थी. सब नोट किया के फ्लैशर, ब्रेक, गियर आटोमेटिक वाले का इस्तेमाल, एक्सेलरेटर, वाइपर, बैक वाइपर, एक, रेडियो, प्लेयर ेट्स सब कुछ नोट किया और अपने हिसाब से सबको एक एक टिक करते हुए लिखा के किसको कब और कैसे उसे करते हैं.

तब चावला साहब से सिखाया के कैसे स्टार्ट करते हैं कार को. संजना के ढूंढ रही थी स्टार्ट करने के लिए तो चावला साहब ने कहा,

“यह मॉडर्न टेक वाले कार है यह एक बटन प्रेस करने से स्टार्ट होता है सिर्फ ब्रेक पर पेयर दबाने से और बटन प्रेस करने से.”

संजना को हैरत हुई क्यूंकि उस्सने ऐसा कार कभी नहीं देखा था. वो हमेशा से यह जानती थी के कार की एक के होती है जिस्सको घुमाने से स्टार्ट होता है कार.

तो कार स्टार्ट किया और संजना स्टीयरिंग व्हील पाकर के आगे देखते हुए आहिस्ते आहिस्ते एक्सेलरेटर पर पेयर दबाते हुए कार को आगे चलने लगी. मगर उस ने एक्सेलरेटर को ज़्यादा दबा दिया और अचानक से कार तेज़ी से आगे चली गयी और उस से संभालना मुश्किल हुआ तो चावला साहब चिलाय, “ब्रेक ब्रेक लगाओ….” अब संजना को किआ पता था के ब्रेक कौन सा है…… कार आगे जा रही थी तो चावला साहब ने खुद स्टीयरिंग व्हील को पकडे और खुद अपने पेयर को संजना के तंग के आगे करके ब्रेक दबाया!! संजना डर गयी और उसस्के पसीने छूठ गए!!

चावला साहब हंससने लगे और कहा के वो खुद बैठेगा उस सीट पर और संजना को अपने गॉड पर बिठाकर ड्राइविंग सिखाएगा!

तो अब दोनों एक hi सीट पर बैठे. चावला साहब ने सीट को थोड़ा पीछे किया और बैठ गए और संजना को भी बिठाया अपने ऊपर और कहने की ज़रूरत नहीं के संजना के नितम्बों को अपने लिंग के ऊपर फील करते हुए चावला साहब का किआ हाल हो रहे थे! संजना की जिस्म की खुशभु, उस्सकी पीठ चावला साहब के सीने पर दबे हुए थे, उसस्के बाल उनके ठीक नाक पर थे जिस्सको चावला साहब सूंघ रहे थे अब ड्राइविंग सिखाये या संजना को प्यार करें चावला साहब पागल हो गया और कार को एक सुनसान जगह पर रोका. कार रोक कर वो संजना के बूब्स को दबाते हुए उसस्के मुंह को अपने तरफ करके किश करने लगे. संजना अच्छी तरह से रेस्पोंद करने लगी और दोनों एक दूसरे में खोने लगे.

संजना उनके लिंग को अपने निचे मोटा होते हुए फील करने लगी और गरम हो गयी तो खुद अपने आप hi संजना ने उनके ज़िप खोले और हाथ में लिंग को पाकर के सहलाने लगी किश जारी रखते हुए, और चावला साहब का हाथ संजना के ड्रेस के निचे उस्सकी पंतय पर ठीक योनि के ऊपर ऊँगली रगड़ने लगे किश करते हुए hi. दोनों के ेंखें बांध थे और एक मोटरसाइकिल की आने की आवाज़ सुनाई दिए तो झट से संजना ने किश को रोकते हुए कहा, कोई आ रहा है रुकिए मुझे उस सीट पर जाने दीजिये किसी ने हमें इस पोजीशन में देखा तो क़यामत आजाएगी!!”

संजना दूर सीट पर चली गयी अपने बाल को सवारते हुए और रास्ते पर देख रहे थे दोनों एक मोटरसाइकिल आते हुए….. मोटरसाइकिल वाला तेज़ रफ़्तार से ारः था मगर कार के पास आते hi स्लो हुआ और रुक कर पूछा, “किआ हुआ साहब ब्रेकडाउन हो गया किआ?” तब तक उस आदमी की नज़र संजना पर पड़ी और कहा, “अरे संजना तुम? कौन है यह साहब और तुम किआ कर रही हो कार में?”

इस से पहले के संजना जवाब देती चावला साहब ने कहा, “मैं इस्सके होने वाला ससुर हूँ और ड्राइविंग सीखने के लिए हम इधर आये हैं!” तो आदमी ने कहा, “ाचा ाचा हाँ पिछले हफ्ते इस्सकी मागणी हुई सुना था मैं ने तो आप हो? आप को लगता है कहीं देखा है…..!” चावला साहब को ग़ुस्सा ारः था और उस से कहा, “जिस घर में यह रहती है मैं उस्का मालिक हूँ जो मैं ने इस्सके बाप को दिया था सालों पहले अब समझे मैं कौन हूँ!”

तो आदमी ने झुक कर कहा, “अरे तो वो आप हो अरे साहब मुझे किआ पता मेरे पिता जी आप को जानते हैं और उनके ज़ुबानी आप के बारे में सुना है, प्रणाम साहब मैं चलता हूँ.” और वो अपने फटफटिया के शोर में गम हुआ वहां से!

तो बे कॉन्टिनोएड………….
 
अपडेट 54 डीडेड तो जो तो ड्राइविंग स्कूल


चावला साहब ने तुरंत संजना से कहा, “तुमको मैं नहीं सीखा पाउँगा ड्राइविंग, मुझसे नहीं होगा मैं सिर्फ तुमको छूवूँगा और प्यार करना चाहूंगा तो कभी नहीं सीख पाओगी तुम! तुमको एक ड्राइविंग स्कूल में hi जाना पड़ेगा. यहाँ के पास में जो छोटा सा शहर हैं वहां तो होगा नाह ड्राइविंग स्कूल चलो मैं तुमको वहां लेचलता हूँ फीस सब भर दूंगा और तुम वहां से सीख लेना जल्दी सीख जाओगी कोई दो महीनों में लाइसेंस मिल जाएगी तुम्हें.”

तो कोई 20 किलोमीटर्स उस गाओं के दूरी पर एक छोटा सा शहर था जहाँ संजना के पापा काम करते थे वहीँ गए चावला साहब ड्राइव करते हुए और ड्राइविंग स्कूल के बारे में पूछ ताज करके पहुंचे एक जगह जहाँ कोई सीखता था ड्राइविंग. एक hi था उस शहर में सीखने वाला. और देख कर बिल्कुल नहीं लगता था के ड्राइविंग स्कूल है…. एक छोटा सा घर था उसस्के सामने एक कार थी और वो भी पुराणी गियर वाले आटोमेटिक नहीं.

उस आदमी से बात हुई और संजना से मिलवाया चावला साहब ने और कहा केक उस्सको ड्राइविंग सीखनी है. तो उस आदमी ने कहा हाँ ठीक है बहोत सारे महिलाओं को सिखाया है उस्सने. सब बात तय हुई, चावला साहब ने उस्सको एडवांस पेमेंट किया और कहा के कल से संजना आएगी सीखने. टाइम सब डीडे हुआ और वापस चावला साहब संजना को घर लेजाने लगे ड्राइव करते हुए. हर बार चावला साहब संजना को देख रहे थे उसस्के बूब्स और जांघों पर बार बार उसस्के नज़र जा रहे थे जो संजना ने अच्ची तरह से देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “आगे देखिये एक्सीडेंट मत कर लेना मुझको देखते हुए, घर चल कर आराम से देखना मुझे!”

चावला साहब ने एक हाथ संजना के जांघ को सहलाते हुए कहा, “तुम पर से नज़रें हट्टे तब नाह? तुमको देखे बिना रहा hi नहीं जा रहा… कुछ देर पहले तुम मेरे गॉड में थी यहाँ बैठी हुई कितना मज़ा ारः था मुझे साला उस मोटरसाइकिल वाले ने सब मज़ा खिड़किडा कर दिया कौन था वो अब?”

संजना ने कहा, “वो मुखिया चाचा का भतीजा है, शराबी है वो भी रघु के यहाँ पीटा रहता है पापा का साथी है!” तो चावला साहब ने कहा, “साला शराबी है और मोटरसाइकिल भी है? काम किआ करता है वो?”

संजना ने हँस्ते हुए कहा, “जानवर पालता और चराता है, खेत हैं उसस्के पूर्वजों के!”

तो चावला साहब ने कहा, “ओह तभी शराबी है बैठे बैठे पैसा मिलता है सेल को!!”

संजना ने कहा, “जीन दिनों मैं कॉलेज जाती थी तो अपने मोटरसाइकिल पर मेरा पीछा करता था, जब तक बस नहीं अत मुझसे गप्पे लड़ता था, फ़्लर्ट करता था, उस से जानवरों की भहु आती है हीहीहीहीहीही!”

चावला साहब ने संजना के चेरे में गहराई से देखा और कहा, “अच्छा और कितने फ़्लर्ट करने वाले थे तुम्हारे कॉलेज के दिनों में? बता मुझे!”

संजना ने दांतों में अपने होंठों को दबाते हुए और शरारती अंदाज़ में कहा, “क्यों आप को जलन हो रही है किआ जी? हम्म्म?”

तो चावला साहब ने उस्सकी जांघ को ज़ोर से दबाते हुए कहा, “बताई नाह और कितनों ने फ़्लर्ट किया तेरे साथ उन् दिनों?”

तब संजना ने कहा, “अरे साहब हर कॉलेज जाने वाली लड़की को हर कोई चेररता रहता है, उन् दिनों मैं अकेली थी यहाँ से कॉलेज जाने वाली तो सभी चेररते और फ़्लर्ट करते थे, गाओं के सभी लड़के, लड़के किआ बड़े आदमी भी…..!”

चावला साहब बड़े इंटरेस्टेड हुए सब जान्ने के लिए और कहा, “सब एक एक करके बता मुझे मैं जानना चाहता हूँ सब के सब!!”

तो संजना ने हँस्ते हुए कहा, “आप को बड़ा मज़ा अत है नाह जब मैं अपने बारे में किसी और आदमी के साथ वाला बात बताता हूँ तो? आप एन्जॉय करते हो जलन नहीं होती आप को नाह?”

चावला साहब ने कहा, “मैं ने उन् दिनों तुमको नहीं देखा था नाह, तू इतनी खूबसूरत है, सोच रहा हूँ कॉलेज की यूनिफार्म में तू किसी लगती होगी, और कितनों ने तुमको पाना चाहा होगा, और पता नहीं तुम किआ किआ छुपा भी रही हो, कोई तो हुआ होगा या कई हुए होंगे नाह? बता नाह!”

संजना ने फिर हीहीहीही करते हुए कहा, “आप तो जानते हो उससे सबसे बड़ा फ़्लर्ट करने वाला मेरे साथ!”

चावला साहब बोलै, “कौन तेरा पापा? नहीं उसस्के इलावा, जिस्सको तेरा पापा भी नहीं जानते बता बता उन् सब के बारे में!”

संजना ने हँस्ते हुए कहा, “अरे किआ साहब सैकड़ों लड़के चेररते थे और किआ!”

और तब तक घर के करीब आ चुके थे तो चावला शबा ने कहा, “मुझे तुझको आज कार में hi लेने को मैं कर रहा था मगर अब घर तक आ hi गए तो चल अंदर hi करते हैं…. बड़ा मैं कर रहा है ाहः चल मेरी जान चल मज़ा करते हैं अब!”

कार से निकलते hi चावला साहब ने संजना को गॉड में लेते हुए घर के अंदर गए और जाते hi सीधे उस्सको बीएड पर पटका. संजना लेट गयी अपने ऊँगली को दांतों में दबाये चावला साहब को हँस्ते हुए देखते….. अपने पैरों को मोड़ा उस्सने मगर चावला साहब ने उसस्के टांगों को खिंचा और स्कर्ट को ऊपर उठाते हुए अपने जीब फरने लगे उसस्के जाँघों पर, और संजना की आह निकली…..

फिर चावला साहब ने जल्दी जल्दी अपने सभी कपडे ूतात्रे और संजना के दोनों जाघों के बीच अपना सर डाला और उस्सकी पैंटी को चुम्मन शुरू किया और पंतय के ऊपर hi चाटने लगा फिर देखा के पंतय की वो हिस्सा गिला है जहाँ उस्सकी योनि है तो ऊपर सर उठाकर संजना के चेहरे में देखते हुए कहा, “तू तो गीली हो गयी मतलब तुमको भी मैं कर रहा है है नाह बेबी?”

संजना ने अब भी दांतों में ऊँगली लिए हुए उनके चेहरे में मुस्कुराते हुए देख रही थी और कहा, “कैसे गीली नहीं हूँगी आप ने किआ किया था कार में मेरे साथ?”

तो चावला साहब ने कहा, “ओह यह बात है तो फिर करते हैं और गिला तुझको अब,” और उन्हों ने अपने डेंटन से संजना की पंतय को निकालना शुरू किया, उस्सकी कमर को चाटते हुए हलके हलके पंतय को निचे करते गए चावला साहब और जाँघों तक पंतय आयी तो हाथ से खिंच निकाल फेंका ज़मीन पर पंतय को और संजना के दोनों टांगों को फैला कर अपने जीब चलाने लगे उस्सकी गीली छूट पर….. संजना कसमसाने लगी, जिस्म को ऐंठने लगी बिस्तर पर और उस्का चेहरा देखने लायक था तो चावला साहब को रिकॉर्ड करना याद आया जब उस्सने नज़रें उठाकर संजना के चेहरे में उस्सकी एक्सप्रेशन को देखा तो….. फिर वो रुके अपने पंत के जेब से अपना मोबाइल निकला और वापस आया संजना पर कैमरा किये हुए… संजना ने मन नहीं किया बल्कि मुस्कराते हुए कैमरा में देखती gayi…aur चावला साहब ने कैमरा को उस्सकी योनि पर किया तब संजना ने अपने जाघों को बांध करते हुए कहा, “वहां क्यों शूट कर रहे हो आप…. मुझको शूट करो नाह!”

चावला साहब ने कहा, “बेबी एक पोर्न मूवी की शूट करने जा रहा हूँ अपनी पोर्न, चलो कॉर्परट करो नाह, समझलो के तुम एक पोर्न मूवी में काम कर रही हो, मैं hi डायरेक्टर और एक्टर okay?!!”

संजना ने हँस्ते हुए कहा, “चाह और इस मूवी को देखने वाले ऑडियंस कौन होंगे?”

चावला साहब ने कहा एक hi है देखने वाला वो मैं खुद और तुम भी, तो दो हुए ऑडियंस!”

संजना ने कहा, “नै मैं नहीं देखती यह सब गन्दी movies…aap देखो!”

तो चावला साहब ने शूट किया उस्सकी जाँघों को फैलाकर दोबारा, उस्सकी जाँघों को शूट करते हुए उस्सकी योनि पर गए और खुद अपने जीब को शूट किया संजना की योनि को चाटते हुए फिर कैमरा को उसस्के चेहरे पर किया उस्सकी उन् एक्सप्रेसशनस को कैद करने के लिए…. संजना के एक्सप्रेशन एक नाज़ुक, कोमल लड़की की थी जिस्सको जैसे पहली बार कोई उसस्के बदन के उन् हिस्सों को छह रहे हैं… उस्सकी एक्सप्रेशंस लाजवाब थे, बिल्कुल ऐसा लगता था के कोई एक मासूम को यह सब करने पर मजबूर कर रहा है….

और चावला साहब ने एक एक करके संजना के सभी कपडे उतारे उस्सको शूट करते हुए, उस्का पूरा नंगी जिस्म को शूट किया एक एक अंग को रिकॉर्ड किया कभी ज़ूम करते हुए तो कभी नार्मल मोड पर, संजना को उस तरह बीएड पर लेते हुए मुंह में अपनी उँगलियाँ चबाते हुए, कभी मुस्कुराते तो कभी नशीले ेंखों से कैमरा में देखते हुए रिकॉर्ड किया चावला साहब ने और जब उस पर चढ़ गए छोड़ने के लिए तो मोबाइल खुद संजना को दिया और कहा अब तुम मुझको तुम्हें छोड़ते हुए रिकॉर्ड करो और कैमरा को अपने जिस्म पर भी शूट करो, अपने बूब्स के ऊपर और अपने पथ से लेकर यहाँ मेरे लुंड तक शूट करती जाओ, मेरे लुंड का आना जाना शूट करो अपने अंदर बेबी…..”

उस्सने अपने लुंड को संजना के अंदर डाला और पूछा, “अब तो जलन नहीं हो रहा नाह बेबी?” तो संजना ने पॉज बटन दबाया और कहा, “शहहह बात मत करो नाह सब रिकॉर्ड हो रहा है आप की awaaz,..nahin अब जलन नहीं है पापा ने कल रात को किया हम्म्म्म”

चावला साहब यह सुनकर ज़्यादा एक्साइट हुआ और जमके ढाका देने लगा उस्सकी छूट के अंदर, और संजना उनके चेहरे में देख रही थी और सोच रही थी के जब भी अपने पापा के बारे में कहती है तो चावला साहब ज़्यादा जोश में एते हैं और बहोत एक्साइट होते हैं…. संजना ने शूट करना कंटिन्यू किया और जब चावला साहब झड़ने वाले थे तो उस्सने संजना ने वापस मोबाइल लिया और खुद अपने लुंड से वीर्य निकलते हुए रिकॉर्ड किया जो पिचकारी से संजना के जिस्म पर गिर्री, चावला साहब ने अपने वीर्य को संजना के बूब्स पर और पथ पर कतरों में रिकॉर्ड किया और अपने लुंड को संजना के मुंह के पास लगाया जो उस्सने अपने हाथों में लेकर चुस्सना शुरू किया और चावला साहब ने सब रिकॉर्ड किया जब तक के संजना ने लुंड को अपने मुंह से नहीं निकला….. संजना नज़रें उठाकर कैमरा में भी देख रही थी चूस्ते हुए और उस्सकी धीमी धीमी आवाज़ भी रिकॉर्ड हुई जिस दम चावला साहब ढके दे रहे थे………..

तो बे कॉन्टिनोएड…………….. (2995 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 55 चावला साहब क़ुएस्तिओन्स हेर

कुछ देर बाद चावला साहब सोच में डूबे संजना के चेहरे में देख रहे थे करने के बाद, वो अब भी पुरे नंगे थे और बीएड पर संजना के तंग पर अपने तंग रखे हुए उस्सकी बूब्स को सहलाते हुए उस्सको देख रहे थे. संजना भी उनके ेंखों में देखते हुए उनको प्यार कर रहे थे, कभी छाती पर चुके तो कभी उनके गालों को चूमते हुए. उस्सकी ड्रेस ऊपर उठी हुई थी, बिना पंतय के थी और बूब्स भी बाहर थे फिर भी ड्रेस तब भी उस पर थे. तो संजना उठ बहती और अपने पंतय पहनी, ड्रेस बदन पर ठीक किया और चावला साहब के कपडे दिए पहने को.

चावला साहब कपडे पेहेनते हुए संजना से कहा, “यहीं बैठो कुछ देर मेरे साथ बीएड पर कुछ बातें करते हैं, वैसे तुमसे मैं नहीं भरा है अब तक.” अंजना ने मुस्कुराते हुए अपनी बचपने वाली आवाज़ में कहा, “क्यों कपडे पेहेन लिया मैं ने फिर उतरूं किआ?” तो चावला साहब ने कहा नहीं कुछ और बातें करनी है वैसे अगर कपडे उतारत्ने का नौबत आया तो वो खुद उतर लेगा उसस्के कपडे.

तो दोनों वहीँ बीएड पर बैठे एक दूसरे को बाहों में लिए. और चावला साहब ने कहा,

“तो बताओ तुम्हारे पापा को कैसे तुमने बताया के मैं ने तुम्हारी विर्जिनिटी लिया और उस्का किआ रिएक्शन था?”

संजना ने कहा, “याद है एक दिन हम दोनों बिना कपडे के थे और आप ने कहा था के अगर मेरे पापा ने आप को मेरे साथ वैसे देख लिया तो पता नहीं किआ करेगा तो मैं ने आप से उस दिन कहा था के हो सकता है के वो कुछ भी नाह कहे? याद है आप को?”

चावला साहब ने कहा हाँ अभी कुछ दिनों पहले hi की तो बात है तो बिल्कुल याद है उससे. तो संजना ने फिर कहा,

“मुझे पता था के वो कुछ नहीं कहेगा क्यूंकि उस्सको भी जो मौका मिल गया उस चीज़ को पाने की जिस्का उस्सने 5 साल वेट किया नाह?!”

चावला साहब: “फिर भी बताओ तो कैसे तुमने उस्सको सब बताया?”

संजना: “अरे साहब आसान था नाह, मैं ने उस्सको कहा के मैं उस्सको एक बहोत बड़ा सरप्राइज दूंगी कल रात को. उस्सको ज़्यादा पीने से मन किया और जब हम बीएड पर गए तो मैं ने उस्सको कहा के वो अब आगे एन्जॉय कर सकते हैं, उस्का इंतज़ार अब ख़तम हुआ!”

चावला साहब: “हाँ बाबा मगर उस्सको झटका तो लगा होगा नाह के जिस चीज़ को उस्सने संभाल कर 5 सालों तक रखा उस्सको तुमने किश को दे दिया?”

संजना ने कहा, “नहीं झटका नहीं लगा उस्सको क्यूंकि उस्सको पता था के हमारे बीच कुछ तो चल रहा है, मैं ने आप से कहा था नाह के उस्सको सब पता था के हम किआ करते हैं हमको उस्सने कमरे के अंदर सुना था. तो ध्यान से सुनिए आप – मैं ने एक बात नोट किया है के जब मैं आप से अपने पापा के बारे में कहती हूँ किश तरह से उसस्के साथ सेक्स में इन्वॉल्व हूँ तो आपको कुछ होता है, आप बहोत ज़्यादा उत्तेजित होते हो है नाह? है के नहीं बताइये मुझे!”

चावला साहब ने कहा, “हाँ सच है एक बाप और बेटी के ऐसे रिश्ते से कौन उत्तेजित नहीं होगा भला?”

तब संजना ने कहा, “एक्साक्ट्ली उसी तरह पापा भी आप को और मुझको सुनके बहोत उत्तेजित होते हैं और ज़बरदस्त काढ़ा रहता है उस्का मोटा शैतान और मेरे साथ बहोत देर तक करता है. तो जब मैं ने उस्सको कहा सरप्राइज वही है के वो मेरे साथ अब आगे कर सकता है तो उसी ने पूछा के किआ आप ने मेरी विर्जिनिटी ले लिया? तो मैं ने कहा हाँ मैं ने खुद दे दिया ताके वो भी मेर साथ आगे कर सके! और वो बहोत उत्तेजित हुआ आप की तरह यह सुनकर के आप ने मेरे साथ वो किये तो वैसे hi उस्सने भी मजे से किया मेरे साथ – एक बात बोलूं आप को, मैं खुद पापा को वो ख़ुशी देना चाहती थी सालों से, आप ने वो करके मुझपर और उस पर एक एहसान किया अपने पापा को उतना खुश देख कर और वो ख़ुशी देकर मुझे बेहद ख़ुशी हुई. और वो आप के बदौलत. थैंक यू वैरी मच. मऊआअह” और संजना ने यह सब कहकर चावला साहब को ज़ोर से चुम्बन दिए चारों तरफ उनके चेहरे पर.

चावला साहब ने संजना को चेररते हुए कहा, “हाँ अभी थैंक कर रही हो मगर उस रात को कितना रो रही थी, तरप रही थी जलन हो रही है ये हो रहा है वो हो रहा है, ठंडा चिल्ड पानी से धोना है!! हम्म याद है? और पापा से मज़े के करवा ली!! हाँ!!”

संजना मुठी से उनके छाती पर मारते हुए हंससने लगी और फिर उनको चुम्मा और ज़ोर से बाहों में लिया चावला साहब को.

दोनों बिल्कुल लवर्स लग रहे थे वैसे बीएड पर एक दूसरे को बाहों में लिए लेते हुए.

और चावला साहब ने संजना के सर के बालों में अपने उँगलियों को फरते हुए पूछा, “तुम्हारे पापा इस वक़्त अपने काम में सोच रहा होगा के मैं आया हुआ हूँ और हम दोनों एन्जॉय कर रहे हैं नाह?”

संजना: “हम्म्म मैं ने उस्सको कह दिया के आप मुझको ड्राइविंग सीखने को आओगे.”

चावला: “मतलब उस्सको पता है के हम दोनों हर रोज़ एन्जॉय करेंगे बीएड पर या कार में?”

संजना: “हीहीहीहीही हाँ पता होने दो उस्सको ऑब्जेक्शन नहीं है”

चावला: “अरे हाँ तो उस्सने नहीं पूछा के आरव को किआ बताओगी अपने विर्जिनिटी के बारे में और नहीं बोलै के शादी आरव से करोगी तो मेरे घर में मैं तुम्हारे साथ एन्जॉय करूँगा?!!”

संजना: “वो समझदार है नाह वो सब समझ गया होगा, वैसे उसस्के पास भी मैं आउंगी अपनी कार ड्राइव करके हफ्ते में दो बार हाँ केहड़ेटी हूँ और मुझको शादी के बाद एक कार ज़रूर देना आप ताके मैं अपने पापा से मिलने आ सकूँ okay?”

चावला: “अरे बेबी कार पड़े हुए हैं हमारे यहाँ कोई भी कार ले लेना !”

संजना ने एक नखरें वाली आवाज़ में मुंह बनाते हुए कहा “नहीं मुझे एक नई वाला चाहिए जो सिर्फ मेरी होगी और कोई उस्सको नहीं चलाएगा सिर्फ मैं! आप नहीं डोज तो आरव से वही गिफ्ट मांगूंगी शादी के बाद.”

चावला: “उस से क्यों मांगोगी मैं खुद शादी के दिन जिस दिन हमारे घर में होगी कार द्वार पर तुम्हारे सामने होगा, मगर पहले ड्राइविंग तो सीखलो, लाइसेंस तो पा लो!”

और चावला साहब ने अब वो बात कहा जिस को वो मैं में सोच रहा था कुछ दिनों से, उस्सने संजना को जैसे बहलाते फुसलाते हुए कहा, “सुनों किआ मैं तुमको अपने पापा के सात करते हुए देख सकता हूँ? मेरा मैं है के मैं तुमको उसस्के सात देखूं!”

संजना ने हीहीहीहीहीही करते हुए ज़ोर से कहा, “आप पागल हो किआ? वो कैसे मुमकिन है? पापा को पता नहीं चलेगा? वो आप को नहीं देखेगा किआ?”

चावला साहब ने संजना के जिस्म पर अपने हाथ फरते हुए कहा, “नहीं मैं छुप जाऊंगा उस्सको तोडा ज़्यादा पीला देना, मुझको तुम कहीं छुपा देना और जब तुम उसस्के साथ बीएड पर जाओ तो दरवाज़ा मत बांध करना मैं देखूंगा….”

तो बे कॉन्टिनोएड……………….
 
अपडेट 56 थे प्लान

संजना को यह एक खेल जैसा लगने लगा के चावला साहब छुप छुप कर उस्सको अपने पापा के साथ सेक्स करते हुए देखेगा. तो संजना ने कहा, “okay आप प्लान बनाओ कैसे किआ करना होगा, रात होगी और आप की कार कहाँ होगा जो पापा आने के बाद नहीं देखेगा, और आप कैसे घर के अंदर आओगे वग़ैरा वग़ैरा.

तो जल्दी से चावला साहब ने प्लान बनाया और सब कुछ समझाया संजना को. प्लान यह था के वो पहाड़ियों के तरफ कार लेकर चला जाएगा शाम को आनंद के वापस आने के टाइम और जब आनंद पीकर वापस घर आएगा तो संजना चावला साहब को फ़ोन करके बुलाएगा, अपने पापा को बीएड के अंदर वेट करने को बोलेगी के टॉयलेट जा रही है तब दरवाज़ा खोलेगी और चावला साहब अंदर आएगा.

संजना राज़ी हुई क्यूंकि उस्सको यह एक मज़ेदार खेल जैसा लग रहा था.

और आधा घंटा आनंद के वापस आने से पहले चावला साहब कार लेकर चले गए पहाड़ियों पर.

आनंद घर आया, नहाया और रघु के यहाँ पीने को गया. संजना ने कॉल करके तब तक चावला साहब से बात किये के पापा पीने गए हैं जब घर आएगा तो फिरसे उस्सको कॉल करेगी, उनको यह भी कहा के वो अपने पापा को व्हिस्की भी पिलाएगी थोड़ा सा ताके उस्सको खबर नहीं चले के कोई और घर में है. चावला ने कहा okay

जब आनंद वापस आया ड्रिंक के साथ तो संजना ने अपने पापा के लिए ड्रिंक्स बनाये और कहा के वो व्हिस्की पीयेगी थोड़ा सा और आनंद को भी दो पेग पिने को दिया. थर्रा और व्हिशक्य मिक्स पी कर आनंद को जल्दी चढ़ गया और संजना को बाहों में भरके किश करने लगा उस्सकी जिस्म पर चारों तरफ हाथ फरते हुए. संजना ने ड्रेस चेंज कर लिया था और अपने पापा के लिए एक और भी छोटी सी ड्रेस पहनी थी बिना ब्रा के जिस में उस्सकी निप्पल ड्रेस के ऊपर पॉइंटेड दिख रहे थे और आनंद ड्रेस के ऊपर से hi निप्पल को चूस रहा था ड्रेस के कपडे समेत.

फिर कुछ hi देर बाद संजना अपने पापा को बैडरूम में लगायी और लेता कर कहा के टॉयलेट से होकर आती है. फिर चावला साहब को कॉल किया आने के लिए और कह दिया के दरवाज़ा अनलॉक है वो अंदर आ सकते हैं. चावला साहब ने कहा के व्हिस्की की बोतल को मेज़ पर रख देना वो भी एक दो घूंट पियेगा. तो संजना ने उन् के लिए व्हिस्की का बोतल मेज़ पर रख दिए और वेट करने लगी उनको. बुसस 5 मिनट्स में वो आगये और कार को थोड़ा दूर hi रखा और संजना के यहाँ आगये. आते hi उस्सने संजना को बाहों में भरके किश किया फिर घुटनों के बल जाके उस्सकी छोटी ड्रेस को उठके उस्सकी जाघों को छाता और चूमा, संजना ने कहा, “ससष्ठ शोर मत की जिए पापा जागे हुए हैं और होशियारी से देखना कहीं वो आप को नहीं देख ले….”

तो चवला साहब ने संजना से कहा, “तुम उस्सको इस तरह से संभालना के वो उस तरफ देखे और सिर्फ तुम दरवाज़े के तरफ देखो ताके तुम मुझको देख सको वो नहीं.” दोनों फुसफुसाते हुए बात कर रहे थे के आनंद की आवाज़ आयी, “संजूउउउउ!! औ मेरी गद्य किधर हो तुम!! पापा वेट कर रहा है अपनी चिकनी चमेली को!! अजा अजा तेरी चिकनी बदन को देखूं ज़रा, पंतय उतरूं अपने गद्य ki…..sanjuuuuuuu!!”

संजना चावला साहब के चेहरे में देखते हुए हंसी और कहा, “सुना आप ने मेरी पंतय उतरेगा मेरा पापा आप देखना मेरे पापा को मेरा पंतय उतारते हुए हीहीहीहीही”

चावला साहब बहोत hi उतावले और एक्ससिटेड हो रहे थे और व्हिस्की के बोतल से hi पिया थोड़ा सा कुछ घूंट और अपने मोबाइल ों करके कैमरा मोड में करके संजना के कमरे के तरफ बढे और उसस्के सामने संजना गयी अंदर.

चावला साहब दरवाज़े के पास खड़े होकर सिर्फ अपने सरको थोड़ा सा झुका के कमरे के अंदर देखा तो संजना अपने पापा के पंत उतार रही थी दरवाज़े के तरफ देखते हुए के चावला साहब नज़र आए उस्सको. आनंद बीएड पर लेता हुआ था, चावला साहब ने मोबाइल से शूट करना शुरू किया संजना को आनंद के पंत उतारते हुए.

आनंद नशे में था और कहा, “आज तेरा चावला साहब आया था नाह? खूब ेश किया उस्सने तेरे साथ? हम्म बता पापा को!”

तो संजना ने चावला साहब के तरफ देखते हुए मुस्कुरायी और इशारे से यह कहने की कोशिश किये के देखो आप के बारे में बात कर रहा है!

फिर अपने पापा से कहा, “हाँ पापा वो आये थे, हम ड्राइविंग के लिए गए थे, मगर फाइनली ड्राइविंग स्कूल में भर्ती किया शहर में.”

तो आनंद ने सर उठाया बीएड से संजना को देखते हुए, और झट से चावला साहब एक कदम पीछे हट गया.

आनंद ने पूछा “तू हमारे शहर गयी थी? कितने बजे? मेरे फैक्ट्री में क्यों नहीं आयी मुझसे मिलने को?”

संजना ने तब तक उसस्के पंत उतार दिए थे और अब कमीज़ निकाल रही थी और उस्सको फिर लेता दिए यह कहकर, “पापा अब मैं चावला जी से कैसे कहती आप के फैक्ट्री आने को? एक तो वो मेरा हेल्प पहले से hi कर रहे हैं अब ऊपर से आप से मिलने को आती किआ ठीक लगता?”

और आनंद ने कहा, “हम्म यह भी ठीक है, अच्छा अब मेरा अंडरवियर तो निकाल नाह बेबी!” वो लेता हुआ था बीएड पर और संजना ने उस्का अंडरवियर निकलना शुरू किया दरवाज़े के तरफ देखते हुए के चावला साहब देख रहे हैं के नहीं, और चावला साहब ने सब रिकॉर्ड किया और आनंद का खड़ा हुआ लुंड भी शूट किया चावला साहब ने….. उस दृष्ट को देखते खुद चावला साहब का तन के खड़ा हो गया tha…tab उस्सने कैमरा को संजना के चेहरे पर किया और वो झुक कर अपने पापा के लुंड को अपने हाथ में लेकर सेहलायी फिर झुक कर चूमा और जीब फेर्रा फिर आहिस्ते से अपने मुंह में ले लिया चुस्सने को.

और आनंद ने इत्मीनान से मज़ा लेते हुए पूछा, “तो किआ आज तेरा चावला साहब ने नहीं लिया तुझे? आज तुम ने उस्का लुंड को ऐसे मुंह में नहीं लिया किआ?”

संजना ने चूस्ते हुए hi बात किये, “हाँ पापा लिया नाह, आने के बाद किया उन्हों ने मेरे साथ!”

चावला साहब एक हाथ से अपने लुंड को संभाल रहे थे और एक हाथ से संजना और उसस्के पापा को शूट कर रहे थे.

आनंद ने कहा, “बहोत किस्मत वाला है तेरा चावला साहब रे तुझको प् आलिया उस्सने और तुझको मुझसे दूर लेकर चला जाएगा, तेरा तो ेश hi ेश है दो दो मर्दो के साथ रहेगी तू और मैं यहाँ बिल्कुल अकेला हो जाऊंगा, कहाँ से मिलेगी मुझे अब मेरी संजना धत तेरी की मेरी किस्मत साली फूटी हुई है!”

संजना ने चुस्सना रोका और एक बार दरवाज़े के तरफ देखा फिर अपने पापा के मुंह को चूमते हुए कहा, “आप क्यों फ़िक्र कर रहे हो? मैं हफ्ते में दो बार आप से खुद मिलने आउंगी तो कैसे दूर हुई आप से भला हम्म्म? फ़िक्र नहीं करना है आप को. आप मेर प्यारे पापा हो और मैं आप को कभी नहीं छोड़ूंगी हम्म्म्म”

आनंद ने कहा, “हाँ तब तो दो नहीं तीन मर्दों को खुश करेगी तू मेरी गद्य, पता है तू है hi इतना इस्पेशल के तुझको सब चीज़ ज़्यादा hi मिलता है हाँ! दौलत भी मिलेगी, मर्द भी, प्यार भी, सेक्स भी हर चीज़ तुझको ज़्यादा hi मिलेगी तू डेसेर्वे करती है क्यूंकि तू बहोत hi इस्पेशल है तू करोड़ों में एक ऐसी है मेरी गद्य!”

संजना ने फिर खुद अपने कपडे उतारे और पंतय निचे फेंका, चावला साहब शूट करते जा रहा था और देखा के संजना ने ब्रा नहीं पहनी थी, जब पंतय निकली तो चावला साहब के तरफ देख कर मुस्कुरायी, और अपने टांगों को दोनों तरफ करके अपने पा के लिंग को अपने हाथ से लेकर अपने अंदर डाला और उस पर बैठकर खुद ऊपर निचे उठक बैठक करने लगी अपने पापा के लुंड अपने अंदर लेते hue….chawla साहब सब रिकॉर्ड करते गया और उसस्के दिल के धड़कनें तेज़ होते गए क्यूंकि उस्सको फील हो रहा था के वो एक चोरर की तरह उस घर में ग़ुस्से हुए है और एक छोर्री कर रहा है, उस्का गाला सुख गया, और ेंखों के सामने अचानक अँधेरा सा छाने लगा और वो जल्दी से बाहर निकला हवा खाने को…… उस्सको चक्कर सा महसूस हुआ, सिक फील हुआ उलटी जैसे आयी और उस्सने वापस घर जाने को डीडे किया और बिना संजना को बताये वहां से वापस चला गया.

संजना समझ रही थी के वो वहीँ दरवाज़े के कोने में से उस्सको देख रहे हैं, वो अपने पापा के साथ मज़े से सेक्स करती गयी और झड़ने लगी तो धीमी आवाज़ में कहाणररते हुए तड़पती आवाज़ में दरवाज़े के पास देखा फिर अपने पापा पर लेट गयी हांफते हुए……

कुछ देर बाद संजना अपने कमरे से कपडे पेहेन कर निकली चावला साहब से बात करने के लिए तो देखा वो कहीं भी नहीं है…. बाहर देखा के मैं दूर लॉक नहीं है तो समझ गयी के चावला साहब बाहर हैं मगर वो बाहर भी नहीं दिखे तो उनको कॉल किया संजना ने………….

तो बे कॉन्टिनोएड…………………
 
अपडेट 57 चावला बैक होम


चावला साहब काफी दूर निकल गए थे ड्राइव करते हुए और उस्का फ़ोन बजा तो कार पार्क करके कॉल अटेंड किया.

“हाँ बेबी, मैं वापस घर जा रहा हूँ तुम्मो बताने का मौका hi नहीं मिला, सॉरी.”

संजना: “मगर क्यों? अचानक और ऐसे क्यों चले गए आप?”

चावला साहब: “बुसस एक चाकर सा आया था घर के अंदर और दम जैसे घुटने लगा था अचानक… शायद मेरा ब्लड प्रेशर बढ़ गया था, बाहर निकला हवा खाने को तो चक्कर सा आया और उलटी जैसे होने को आया मगर हुआ नहीं….”

संजना फिकरमंद होते हुए पूछा, “कितने दूर पहुंचे हो आप? कितने देर पहले निकले? आप ड्राइव कर पाओगे इतने दूर तक? वहीँ रुकिएगा मैं किसी को लेकर आती हूँ आप के पास!”

चावला साहब: “अरे नहीं फ़िक्र करने की बात नहीं अभी ठीक फील कर रहा हूँ, मैं ने कुछ खाया भी नहीं नाह? ऊपर से व्हिस्की पी लिया था बोतल से बिना आइस कुबेस के बिना खाना काये उस चक्कर का वजा और उलटी का संभावना वो ड्रिंक भी हो सकता है, ी ऍम फाइन मैं ठीक से घर पहुँच जाऊंगा यू don’t वोर्री स्वीटहार्ट.”

संजना: “कैसे वोर्री नाह करूँ? आप अभी अभी यहाँ थे और ठीक थे अब अचानक आप की तबियत बिगड़ गयी, मुझे बहोत फ़िक्र हो रही है मैं आप के पास होना चाहती हूँ! किआ करोगे अगर ड्राइविंग करते हुए आगे वैसा hi फील हुआ तो फिरसे? नहीं आप ड्राइव मत करो नाह मैं किसी के साथ आती हूँ नाह वहां जहाँ रुके हो आप वहीँ रुको प्लीज!”

अरे रात हो चुकी है इस वक़्त किस्सके साथ होगी? मैं 60 कंस से ज़्यादा दूर निकल चूका हूँ और सान्वी ने भी फ़ोन किया तो मैं ने उस से कहा के घर ारः हूँ, रहने दो तुम; कल मिलते हैं नाह! जाओ अपने पापा के पास एन्जॉय करो तुम!”

संजना: “पापा का हो गया, मैं अभी फ्री हूँ और अकेली बाहर से बात कर रही हूँ आप से…. वैसे आप ने कहाँ तक मुझको कमरे के अंदर देखा? मैं ने आप को लास्ट देखा था जब पापा ने शुरू भी नहीं किया था…. बताइए!”

चावला साहब: “इतनी जल्दी कर लिया आनंद ने? पता होता तो वहीँ रुकता, मगर अब देर हो चुकी है, मैं ने तुमको उसस्के ऊपर चढ़ते हुए देखा, जब तुम उठक बैठक करने लगे थे उसस्के ऊपर वहां तक देखा तभी मुझको लगा के मैं चोरर हूँ तुम्हारे घर में और अचानक एक घुटन से महसूस हुई तो बाहर निकला तुरंत तभी!”

संजना: “ओह तो आप ने वो सब देखा बाद में कुछ नहीं देखा, मतलब आप बहोत पहले निकल गए थे, चलो कोई बात नहीं जाइए आप और घर पहुँचते hi मुझको कॉल करना okay? मैं वेट करुँगी आप के कॉल का ठीक है जी?”

चावला साहब: “ok बेबी ज़रूर कॉल करूँगा, जैसे कार को गेराज में करूँ तुमको फ़ोन करूँगा उसस्के बाद तुम फ़ोन मत करना क्यूंकि सान्वी मेरे आस पास रहेगी, और मैं मोबाइल को साइलेंट पर कर दूंगा ठीक है?”

संजना: “ok ठीक है आप सान्वी से कहना का आप को किआ हुआ, कैसा फील हुआ, वो ज़रूर आप का ख्याल रखेगी. Ok bye ड्राइव सेफ एंड रीच सेफ. लव यू मुउउउउआअह!”

चावला साहब: “लव यू तू स्वीटहार्ट, bye. मऊआअह.”

और चावला साहब धीरे धीरे ड्राइव करते हुए सही सलामत घर पहुंचे और कार को गेराज में करते hi संजना को कॉल करके बता दिया के वो घर आ गए हैं, फिर घर के अंदर गए.

रात के 8.30 हो चुके थे और सान्वी अपनी निघ्त्य में थी ऊपर गाउन थी निघ्त्य पर और वो चावला साहब का इंतज़ार कर रही थी दीप्ति को सुलाने के बाद. बुसस कुछ देर पहले उस्सने भी चावला साहब को फ़ोन करके पूछा था के वो कब वापस आरहे हैं तो चावला साहब ने कहा था के बुसस रास्ते में hi हैं तो सान्वी उसी का वेट कर रही थी.

सान्वी लोगे के अंदर से hi उनको देख रही थी जब वो गेराज से निकल कर लोगे के मैं दूर तक आरहे थे और उनके चलने के ढंग से सान्वी को दिख गया के वो ठीक नहीं लग रहे हैं, कुछ थके हुए और बीमार दिख रहे थे. सान्वी पिछले 5 सालों में उनके हर रंग से वाकिफ थी. तो जैसे चावला साहब अंदर दाखिल हुए सान्वी उनके करीब गयी और पहला सवाल जो किया वो यह था, “आप ठीक तो हो? बीमार दिख रहे हो? किआ हुआ आप को?” यह पूछकर सान्वी ने अपने हाथ को उनके कमर पर किया और जैसे उस्सको सहारा देते हुए घर के अंदर लेगये और काउच पर बिठाया उनके चेहरे में देखते हुए. चावला साहब थोड़ा हांफ रहे थे हलके से. सान्वी ने उनके बैठने के बाद उनके चेहरे में देखते हुए फिर से पूछा, “किआ हुआ बताओ तो आप?”

तो चावला साहब ने सान्वी के काँधे पर अपना हाथ थपथपाते हुए कहा, “अरे कुछ ख़ास नहीं बुसस थोड़ा सा चाकर आगया था कुछ देर पहले और दम घुटने लगा था. अभी ठीक हूँ! शायद मेरा ब्लड प्रेशर हाई हो गया था मगर अब नार्मल हो गया होगा इसी लिए अब ठीक लग रहा है.”

सान्वी ने कहा, “मगर आप को तो हाई B.P नहीं है, तो अचानक कैसे हो सकता है? आप बैठिये मैं चेक करती हूँ. इलेक्ट्रॉनिक बप चेक करने वाला मशीन और डायबिटीज चेक करने वाला एपरेटस भी थे चावला साहब के यहाँ तो सान्वी गयी वो लेने चेक करने को.

सान्वी जब एपरेटस लेकर आयी और चावला साहब के कमीज़ की बाहें को ऊपर उठाया निचे ज़मीन पर बैठ कर तो उस्सकी गाउन जांघ पर सरक गयी और उस्सकी खूबसूरत सफ़ेद जांघ दिखने लगे और चावला साहब की नज़र वहां पड़े…. बहोत खूब सूरत दिख रही थी सान्वी और इतनी अच्छी खुशभू लगाई थी के चावला साहब को उस्सको सूंघने में बहोत अच्छा लग रहा था.

सान्वी जिस वक़्त उसस्के बाज़ू पर एपरेटस की रेपर बांध रही थी तो उस्सने नोट किया के चावला साहब की नज़र उस्सकी जांघ पर थे और वो बुसस मुस्कुरायी अपना काम करते हुए उस को टाइम नहीं था अपने गाउन को ठीक करने को, और जब मशीन को पंप करने लगी तब अपने गाउन को ठीक किया सान्वी ने उनके चेहरे में देखते हुए.

मशीन ने काम पूरा किया तो रिजल्ट आया के 8.8 थे उनके ब्लड प्रेशर और सान्वी ने कहा, “आप की बप हाई नहीं बल्कि लौ हुई है!!” किआ खाया पिया था आप ने संजना के यहाँ?

चावला साहब ने बताया के सिर्फ लंच किया था बारह बजे उसस्के बाद बिल्कुल कुछ भी नहीं खाया बल्कि आनंद के साथ दो पेग लिया ड्राइव करने से पहले”

तो सान्वी उन् पर चिलायी, डांटा उनको यह कहते हुए, “आप बच्चे हो? दिमाग़ नहीं आप के पास? बिना कुछ खाये ड्रिंक लिया वो भी बारह बजे से कुछ भी दाना मुंह में नहीं डाला और इतने दूर ड्राइव किया, किआ कर रहे हो आप? चाय पानी, बिस्कुट कुछ नहीं दिया संजना ने आप को आफ्टर लंच? जूस भी नहीं पिया आप ने? एक पेप्सी या कोका कोला hi पी लिए होते आप ने तो यह सब नहीं होता!! अब चलए हाथ मुंह धो लीजिये और जल्दी से खाना खाइए बप अपने आप नार्मल हो जाएगा!”

चावला साहब एक बचे की तरह दांत खाने के बाद संजना का हाथ पाकर के उस्सको खिंचा और वो उन् के गॉड में गिर बैठी, तो चावला साहब ने बड़े प्यार से उसस्के गाल पर हाथ फरते हुए कहा, “हाँ मेरी माँ हाँ चलता हूँ खाने को, तू है तो मुझे किआ फ़िक्र करना है.” और सान्वी के गाल पर किश किया चावला साहब ने फिर उसस्के गर्दन को सूंघते हुए कहा, “कौन सा परफ्यूम लगाया है तुमने बहोत अच्छी खुशभू आरही है ह्म्मम्म्म्म” और उन्हों ने सान्वी के गर्दन को चुम्मा, फिर उसस्के गले को और उन् का एक हाथ सान्वी के घुटने से आहिस्ते आहिस्ते ऊपर उस्सकी जांघ तक गयी तो सान्वी उठ कड़ी हुई यह कहते, “बुसस बुसस आप की दुलार, चलिए खाना पड़ोसती हूँ, तब तक आप फ्रेश हो जाईये मैं ने टॉवल रख दिया है बाथरूम में एक क्विक शावर ले लीजिये आप.”

तो बे कीटुएड…………….
 
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