Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 9 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

अपडेट 71 थे डिस्टेंस

चावला साहब कुछ देर दीप्ति के साथ खेलता रहा और किचन से सान्वी उनको देख रहे थे, उनके चेहरे में बार बार देख कर अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रहे थे के उंनका मूड कैसे बच्चे के साथ खेलते वक़्त बिल्कुल नार्मल है और उस से बात भी नहीं कर रहे है.

अब सान्वी तो संजना की तरह नटखट या चुलबुली तो नहीं थी के वो उनके पास जाकर बचकानी हरकत करके पूछती के किआ हुआ क्यों वैसा बेहवे कर रहे हैं वो, सान्वी में मातुरित्य थी, वो बुसस दूर रहकर सब समझने की कोशिस में लगी थी.

खैर कैसे भी करके दिन गुज़र गया रात आयी तो खाने का वक़्त आया तो चावला साहब अपने कार लेकर निकले…. सान्वी दौड़ती हुई गेराज के तरफ जा hi रही थी मगर वो निकल गए कार के साथ. अब सान्वी परेशान हुई के किआ इस वक़्त वो संजना के घर जा रहे हैं, किआ वो फिर रात भर घर पर नहीं रहेंगे? उनको फ़ोन करना चाहा सान्वी ने मगर नहीं किया क्यूंकि वो बात भी नहीं कर रहे हैं उस से और इतने सारे कॉल्स और मेस्सगेस को रिप्लाई तक नहीं किया. तो वो दीप्ति को खाना खिलाने लगी वेट करते हुए.

अस्सल में चावला साहब को भूक लगे थे और वो रेस्टोरेंट गए खाने के लिए मगर कुछ नहीं बताया सान्वी को और उसका पकाया, बनाया, हुआ नहीं खाने के लिए बाहर खाने को गए!

सान्वी उधर घर के सब काम करके अब वाशिंग मशीन में अपने कपडे डालने गए धोने के लिए जो अगले सुबह को वो ड्राई करने के लिए टांगती है…. जब अपना ब्लाउज लिया मशीन में डालने के लिए तो उस पर एक सफ़ेद दाग जैसा देखा, और दीप्ति पर चिल्लाई यह कहते हुए, “दीप्ति यह तुमने आइस क्रीम गिराया था नाह इस पर? कई बार कहा है तुमको आइस क्रीम खाओ तो कहीं मत घूमना करो एक जगह बैठ कर खाओ, तुमको मैं ने आइस क्रीम दिया था नाह तो यह मेरे ब्लाउज पर गिराया तुमने! और पता नहीं कहाँ कहाँ आइस क्रीम गिराया होगा इस लड़की ने सब साफ़ करना पड़ेगा अब….” दीप्ति दांग रहकर अपनी मां को देख रही थी, वो खुद नहीं समझ पा रही थी उस्सकी मां उस पर क्यों चिल्ला रही है. सान्वी को पता नहीं चला के उसस्के ससुर का वीर्य था उसस्के ब्लाउज के ऊपर.

रात के करीब 10 बजे चावला साहब वापस आये. सान्वी को अच्छा लगा जब उनके कार की हेडलाइट्स गेराज में आते हुए देखा. सान्वी उस वक़्त दीप्ति को सुलाकर टीवी देख रही थी निचे लाउन्ज में.

जब चावला साहब अंदर दाखिल हुए, तो सान्वी ने देखा को वो पिए हुए नहीं है, नार्मल चल रहे हैं तो कहा, “मैं खाना लगाती हूँ आप ाजाईये. चावला साहब ने बिना उस्सको देखे अपने कमरे के तरफ जाते हुए बोल्ड आवाज़ में कहा, “मैं ने खा लिया है.” और वो अपने कमरे में चले गए.

चावला साहब अपने कमरे को अंदर से लॉक करके संजना से चाट करने लगे. उधर सान्वी ने टीवी ऑफ किया और ऊपर अपने कमरे में चली गयी. बीएड पर बैठ कर रोने लगी. वो सोच रही थी के चावला साहब वैसा क्यों बेहवे कर रहे हैं, जब से वापस आये हैं सिर्फ एहि बात किये उन्हों ने “मैं ने खा लिया है” बस इतना hi बात किया संवी से….

सान्वी ने सोचा था के वापस आते hi वो उनके गले से लग कर कहेगी, “मैं ने आप को बहोत मिस किया, घर सुना सुना लग रहा था आप के बिना, सुबह को मैं किचन से आप की कमरे के दरवाज़े को बार बार देख रही थी लग रहा था के अब खुलेगा और आप बाहर निकलोगे, आप फिर कभी ऐसे दूर मत जाना रातों को….” सान्वी ने यह सब कहने को सोचा था उन् से, मगर कैसे करती वो तो उसस्के तरफ देखता भी नहीं था.

सान्वी याद करने की कोशिश में लगी हुई थी के किआ खता हुई उस से के चावला साहब उस से उस तरह से रूठा हुआ है, मगर उस्सको वो सुबह वाली बात नहीं याद आरही थी गेराज में जब उस्सने चावला साहब से कहा था के उस्सको वो सब अच्छा नहीं लगता, मगर जब उस्सने अपनी निघ्त्य निकला पेहेन्ने के लिए तब उस्सको याद आया के चावला साहब ने उस्सको निघ्त्य में देखना चाहा था…. और उस्सने इंकार किया था अपने निघ्त्य से गाउन उतारने को…..

अब अपने कमरे में थी तो बिना गाउन के निघ्त्य में अपने बीएड पर लेते हुए उन् बातों को सोच रही थी. सान्वी ने खुद से कहा, “किआ मैं अभी इसी वक़्त उनके सामने इस निघ्त्य में जॉन तो वो खुश होंगे? मुझको इस तरह देखना चाहते थे वो, किआ तब मुझसे बात करेंगे? मुझको गले से लगाएंगे? किआ करूँ मैं जॉन उनके पास ऐसे इस निघ्त्य में? कितने पतले स्ट्रैप्स हैं ब्रा भी नहीं है, सब दिख रहे हैं! मैं कैसे उनके सामने ऐसे जॉन? मुझे बहोत शर्म आएगी उनके सामने ऐसे जाते हुए! वो भी नाह पता नहीं कैसे कैसे बातें करते हैं मुझसे…. शायद मुझसे इसी लिए खफा है क्यूंकि मैं ने उनकी ख्वाहिश को पूरी नहीं की hai….to किआ अगर मैं उनकी यह ख्वाहिश पूरी करुँगी तो वो बात करेंगे मुझसे नार्मल की तरह? किआ मैं जॉन उनके सामने ऐसे hi? विवान तो 1 बजे को वापस आएगा, उस्सको नहीं पता चलेगा… नहीं नहीं मैं ऐसे नहीं जा सकती उनके सामने मुझको बहोत शर्म आएगी…. रहने दो देखती हूँ कब तक ऐसे रूठे रहते हैं, अगर उनको बात नहीं करनी तो ठीक है मैं भी बात नहीं करुँगी, देखती हूँ कब तक मुझसे ऐसे रूठे हुए रहते हैं हाँ!!!”

अगले सुभान को 5 बजे सान्वी किचन में थी वही अपनी निघ्त्य में और ऊपर गाउन में थी… टीथ ब्रश के बाद चाय बना रही थी और ब्रेकफास्ट. और बार बार चावला साहब के कमरे के दरवाज़े के तरफ देख रही थी के अब वो उठेगा और टेरेस पर एक्सरसाइज करने जाएगा क्यूंकि हर सुबह का यह रूटीन था उंनका….

और थोड़ा सा 6 बजने से पहले चावला साहब निकले, वाशरूम से वापस गए टेरेस पर बिना सान्वी के तरफ देखे…. मगर सान्वी उन्ही को देखते जा रही थी और चावला साहब को पता था के वो उसी को देख रही है….. कुछ देर बाद हर रोज़ की तरह सान्वी ने उनके लिए चाय लेकर टेरेस पर उनको देने गयी….. और थोड़ा सा मुस्कुराते हुए उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “चाय” चावला साहब ने टेबल के तरफ इशारा करते हुए दिखाया वहां रखने को, तो सान्वी ने मुस्कुराते हुए उनके चेहरे में देखते हुए कुछ चिररहते हुए अंदाज़ में कहा, “ज़ुबान काट गयी है किआ? बोल नहीं सकते आप के वहां रख दो? बड़े आये इशारे करने वाले, बड़ा ग़ुस्सा पाल रहे हैं मेरे लिए; पालो पालो देखती हूँ कब तक आप मुझसे बात किये बिना रह सकते हो चलो मैं भी नहीं करुँगी बात आप से अब कटती सुना आप ने कटती!!”

और वो उनके चाय टेबल पर रख कर चली गयी किचन में… अब चावला साहब सोचने लगे ‘अरे वह कमाल की औरत है यह, चलो मत करो बात मुझे कोई तकलीफ नहीं है, अपने पति के लिए रखो यह अदाएं मुझ पर मत आज़माओ यह सब…..’ मगर चावला साहब फिर भी छुप छुप कर सान्वी को झांक रहे थे किचन के तरफ… और उधर से सान्वी भी उनके तरफ देखते हुए अपने किचन के कामों को किये जा रही थी, कई बार एक दूसरे के नज़र टकराये देखते हुए मगर तुरंत दोनों एक तरफ देखने लगे जैसे के किसी और चीज़ को देख रहे थे…..

अब कुछ देर बाद जब चावला साहब ने चाय पी लिया तो कप को टेबल पर दो तीन बार टकराया यह इशारा करने को सान्वी को के कप वापस लेजाए चाय पी लिया है… सान्वी नहीं जा रही थी कप लेने तो चावला साहब ने और एकांत बार कप को टेबल पर ठोका, तब संवी ने किचन से आवाज़ दी, “हाँ हाँ सुन लिया आती हूँ कप उठाने को!”

और सान्वी ने टेरेस पर जाते वक़्त जान बुझ कर अपने काँधे पर से अपने गाउन को थोड़ा सा साररका दिया जिस से उस्सकी निघ्त्य की स्ट्राप दिखने लगे और गयी कप लेने के लिए…. और वो टेबल जिस पर कप रखा हुआ था वो एक छोटा सा राउंड टेबल था जो टेरेस पर अक्सर पाया जाता है और सान्वी को झुक कर कप को उठाना था….

वो वहां पहुंची, झुकी कप लेने के लिए और एक नज़र से चावला साहब को देख रही थी और झुक कर कुछ लम्हे झुकी रही जान बुझ कर और उस्सको पता था के चावला साहब की नज़रें उस्सकी छाती और काँधे पर थे, चावला साहब सच में उस्सकी निघ्त्य के अंदर लटके उस्सकी गोआल गोआल बूब्स और निघ्त्य के स्ट्रैप्स को hi देख रहे थे तो सान्वी ने सर ऊपर उठाते हुए उनके तरफ देख कर कहा, “अब खुश? देख लिया जो देखना था दिल खुश हुआ आप का?” तुरंत चावला साहब दूसरे तरफ देखते हुए जैसे अपने बाहों को स्ट्रेच कर रहे थे एक्सरसाइज करते हुए सान्वी से अपने निगाहों को चुराया… और सान्वी मुस्कुराते हुए अपने गाउन को वापस निघ्त्य पर करके किचन के तरफ चल दिए…….

और सान्वी वापस किचन में जाकर उनके तरफ देखते हुए खुद से कहा, “कब तक रूठे रहोगे आप? अगर मैं चहुँ तो एक पल में आप को अपने क़दमों में झुका लुंगी, और आप एक बचे की तरह मुझ में समां जाओगे साहब…. मगर नहीं देखती हूँ आप कब तक मुझसे ऐसे रूठे हुए रह सकते हो, बुसस अभी गाउन उतार लूँ तो आप पिघल जाओगे, एक सेकंड की बात है!!”

तो बे कॉन्टिनोएड…………….. (2795 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 72 चावला गोज तो ऑफिस

दस बजे जब विवान उठा तो चावला साहब ने उस से पूछा किसी एक नई प्रोजेक्ट जो फिलहाल चल रहा था कंपनी में, बाप बेटे ने कुछ देर उस बारे में बातें किये और डिस्कशन चली.

सान्वी देख रही थी के चावला साहब जो बिल्कुल भी ऑफिस के मामले में दखल नहीं देता था आज अचानक क्यों इतना कुछ बोल रहा है विवान से. वो तो अपने कंप्यूटर से ऑफिस सभी काम करते थे, ऑर्डर्स भी देते डील्स भी फिना करवाते और पैसे भी ंत्रणसफेर काटे थे. बाकी सब विवान और आरव सँभालते थे… तो सान्वी के समाज में बात नहीं आयी…. और जब विवान ऑफिस के लिए निकल रहे थे तो चावला साहब ने उस से कहा, “मेरा ऑफिस साफ़ करवाना आज मैं ऑफिस ारः हूँ त्तघोडी देर में!” विवान ने कहा, “okay पापा”

सान्वी बहोत hi हैरान हुए… पिछले 5 सालों में सिर्फ एक बार चावला साहब ऑफिस गए थे वो भी एन्ड ऑफ़ ईयर पार्टी के लिए बाकी के 4 साल उसस्के लिए भी नहीं गए थे और आज अपने ऑफिस में जा रहे थे, अजीब बात थी.

करीब 11 बजे चावला साहब अपने कमरे से निकले सूट में…. बहोत hi फ्रेश और हैंडसम लग रहे थे और संवी उनको देखते रह गए. वो अपने दो जवान बेटों से बहुत ज़्यादा हैंडसम थे. और बहोत वेल ड्रेस्ड थे. घर में रहते तो या तो एक जॉगिंग वाले ट्रैकसूट में रहते थे या एक शार्ट और टीशर्ट में, और कसुआलय बहार जाते तो अक्सर जीन और टीशर्ट में रहते. उनके सभी जीन्स उसे या इटली से एते थे. रायज़ादा थे तो सब आसानी से हासिल हो जाते थे इनको. इनके जीन्स और टीशर्ट बेस्ट रेड और बेस्ट क्वालिटी के होते थे हमेशा. उम्र तो ननकी दीखता hi नहीं था तो बेटों के बीच खड़े होते तो तीन भाई दीखते थे.

सान्वी को बहोत मैं किया उनको ज़ोर से हुग करने को मगर किआ करती लाचार थी. बात नहीं कर रहे थे चावला साहब उस से. अगर सब नार्मल होते हमेशा की तरह तो पता नहीं कितने देर उनके बाहों में रहती सान्वी उनको घर से निकलने से पहले. सान्वी उनको देखते देखते फील किया के उस्सकी ेंखने भर आये, इतने प्यार भरी नज़रों स देख रही थी उनको, दिल में उमंगें लिए. चावला साहब अपने शर्ट की बाज़ू की लास्ट बटन ठीक करते हुए कमरे से निकलते हुए चलकर गेराज के तरफ जाते हुए दिखाई दिए और सान्वी लाउन्ज की एक काउच के पास कड़ी उनको निहार रहे थे. चावला साहब ने उसस्के तरफ देखा भी नहीं क्यूंकि उस्सको पता hi नहीं था के सान्वी उस तरफ है वो सोच रहे थे के सान्वी ऊपर अपने कमरे में गयी हुई है इस लिए वो उस तरफ देखते हुए निकले थे. सान्वी को पता था के वो उस्सको ऊपर उसस्के कमरे के तरफ देख रहे हैं, सान्वी का मैं किया के उनको आवाज़ देकर रोकें मगर नहीं दिया आवाज़ उनको जाने दिया. और जब उनके कार गेराज से बाहर निकले तो सान्वी ने लम्बी सांस लेते हुए आहिस्ते कहा, “ड्राइव सेफ, रीच सेफ एंड बे बैक होम सेफ साहब!” और अपनी ेंखों को एक टिश्यू से पोंचो सान्वी ने. दोबारा एक लम्बी सांस लिया और ऊपर अपन कमरे के तरफ चल दिए.

चावला साहब ऑफिस नहीं गए. पहले उस छोटे शहर में गए जहाँ एक टैक्सी ड्राइवर ने उंनकेकर ड्राइव करके संजना के यहाँ लगाया था. वहां पहुँच कर टैक्सी स्टैंड पर गए और ड्राइवर लोगों से पूछा उन् में से किश ने उनको और उनके कार को लगाया था, तो उन् सब में से एक ने उस ड्राइवर को बुलाया. उस दरिएर ने कार और चावला साहब दोनों को पहचान लिया और कहा, “जी साहब आप तो बिल्कुल टल्ली हो गए थे तो मैं ने आप को चोर्रा था.”

चावला साहब ने पूछा, “किता हुआ था फारे तुम्हारा?” ड्राइवर ने कहा, “साहब 1,500 लिया था मैं ने.” किश ने पेमेंट किया था तुमको?” पूछा चावला साहब ने. तो ड्राइवर ने कहा, “साहब जब हम जा रहे थे तो उस लड़की के बाप ने कहा था मैं ने सुना था के उसस्के पास घर पर तो सिर्फ 500 रूपए है, तो लड़की ने कहा था के उसस्के पास जमा किया हुआ 2000 है. तो वहां पहुँचने पर उसी लड़की ने मुझे 1500 घर से ला कर दिए थे साहब.” चावला साहब ने उस ड्राइवर को और एक हज़ार रूपए दिए. और एटीएम से कॅश निकला और संजना कैग हर को गए.

संजना उनको उस सूट में देख कर पागल हो गयी. उंनसे लिपट कर कहने लगी, “मैं आप के बेटे से नहीं आप से hi शादी करुँगी. मेरा मांगनी आरव से तोड़वा दीजिये नाह!” चावला साहब ने उस्सकी बातों को मज़ाक समझकर अनसुना कर दिया. मगर संजना कहती गयी उसी बात को उनको चूमते हुए और उनके तारीफ़ करते हुए. चावला साहब ने संजना को 10 हज़ार रूपए दिए. संजना ने पूछा किश लिए हैं वो पैसे तो चावला साहब ने कहा, “रख लो तुमको काम आएगा फिर किसी को कार समेत टैक्सी ड्राइवर से घर वापस लाना पर जाये तो?”

संजना ने हँस्ते हुए कहा “तो आप ने पता लग आलिया? मगर इतने नहीं सिर्फ 1500 दिए थे” चावला साहब ने उस्सको पैसे को रखने को कहा गिफ्ट समझ कर. और साथ में कुछ पेर्फुमेस ख़रीदे थे जो संजना को दिया और एक बोतल व्हिस्की दिया आनंद के लिए. संजना को किश किया कुछ देर तक और कहा के उस्सको ऑफिस जाना है तो वो वापस जा रहे हैं.

संजना ने कहा, “कल भी आप चले गए थे, मैं अकेली ड्राइविंग के लिए गयी आज भी आप जा रहे हो, तो मुझे वहां चोरर दीजिये जाने का वक़्त हो गया है….. वैसे मैं ने आप को देख कर सोचा के आज नहीं जाउंगी, पूरा दिन आप के साथ बिताउंगी, मगर आप तो जा रहे हो!!”

चावला साहब को अफ़सोस हुआ संजना के लिए और उस्सको प्रॉमिस किया के कल पक्का सुबह 9.30 को यहाँ आजाएगा और दिन भर उसस्के साथ रहेगा.

और संजना को चावला साहब ने ड्राइविंग स्कूल तक चोर्रा. जाते वक़्त

संजना उंनसे सत् कर बैठी और उनको किश करते हुए गए शहर तक. फिर ड्राइविंग स्कूल के पास रुक कर एक दूसरे को दोनों ने कुछ देर तक किश किये. संजना को उंनसे जुड़ा होने को मैं नहीं कर रहा था, मगर चावला साहब को जाना था तो वो चले गए संजना को वहीँ चोरर कर.

ऑफिस में कुछ ख़ास नहीं हुआ, अपने ऑफिस के लोगों से मिले. सब लोग बहोत खुश थे उनको देख कर और सब उन् से मिलने आये. किसी की बेटी की शादी होने वाली तह तो कुछ ज़्यादा पैसों की ज़रूरत थी, किसी का घर का मरमत हो रहा था तो पैसों की ज़रुरत थी, किसी की माँ का ऑपरेशन था तो किसी के पत्नी को बच्चा होने वाला था…. सब ने अपने अपने दुकड़े सुनाये चवा साहब को और फिऑन्सé मैनेजर से कहकर सब को जितना चाहिए था उनको उतना पैसा दिलवाया चावला साहब ने फ्री में.

शाम 6.30 को चावला साहब की कार एते हुए दिखाई दिए और सान्वी नाहोत खुश हुई उनको वापस आते देख कर. उस्सने दिन में विवान को कॉल करके पूछा था जिस वक़्त चावला साहब पैसा बाँट रहे थे तो विवान ने का था के तेरा ससुर पैसा बाँट रहा है वर्कर्स को!!”

जैसे hi चावला साहब देहलीज़ पर पहुंचे तो सान्वी ने झट से उनके सामने आकर उनके दोनों गैलन पर ज़ोर से किश किया और हँस्ते हुए कहा, “आप बहाय hi ज़्यादा हैंडसम लग रहे हो इस लिए किश किया!” और हंससने लगे… दीप्ति ने देखा तो कहा, “मां मैं भी दादा को किसी दूंगी मुझे उठावो ऊपर!!” चावला साहब अंदर जाने hi वाले थे के दीप्ति को देखा फिर सान्वी को तो सान्वी ने एक ेंख मारते हुए कहा, “क्यों जी मां ने किश कर लिया बेटी को भी करना है निभाओ अब!!”

चावला साहब झुक कर दीप्ति को गॉड में उठाया और उस्सको किश किया तो दीप्ति ने कहा, “नहीं आप नहीं मैं आप को किसी कालूँगी क्यों की आप बूत सम लग रहे हो!!!” बच्ची को हैंडसम बोलना नहीं आया सम कहा सब कुछ सान्वी ने कहा बची ने रिपीट किया…. उस्सको सुनकर चावला साहब ज़ोर से हँसे और सान्वी भी हंस पारी…..

तो बे कॉन्टिनोएड……………….
 
अपडेट 73 सान्वी ट्राइंग तो रेकन्सीलियते

शाम को सूरज ढलने के बाद चावला साहब लाउन्ज में बैठे टीवी देख रहे थे दीप्ति को गॉड में लिए, तो सान्वी किचन से उनको देखते हुए कहा, “आप के लिए ड्रिंक बना दूँ किआ? – और डिनर यहीं करेंगे या बाहर जाओगे खाना खाने आज भी?”

चावला साहब बिना उस्सको जवाब दिए दीप्ति को कौंच पर बिठा कर गया खुद अपने ड्रिंक बनाना और व्हिस्की का गिलास लेकर फ्रिज के पास गया आइस कुबेस लेने जो संवी के करीब थे, और जब चावला साहब आइस कुबेस पैक से निकाल रहे थे तो सान्वी उनके बिल्कुल करीब कड़ी हुई थी तो उस्सने कहा, “लाओ मैं निकल देती हूँ, ऐसे नहीं नई ठहरये नाह मैं निकालती हूँ नाह!!” मगर चावला साहब ने पैक को एक तरफ करके खुद अपने आइस कुबेस निकाले और गिलास लेकर वापस चले गए लाउन्ज में. जिस दौरान आइस कुबेस निकल रहे थे एकांत बार सान्वी की बाहें उनके बाहों से रगड़े और सान्वी जान बुझ कर अपने बाहों को उनके बाहों से सत्ता रही थी, मगर चावला साहब ने ऐसा बेहवे किया जैसे उस्सने कुछ फील hi नहीं किया.

सान्वी किचन से उनको अपने होंठों को डेंटन में दबाये हुए देखती जा रही थी थोड़ा सा मुस्कुराते हुए और बड़बड़ायी, “बड़ा ग़ुस्सा दिखा रहे हैं, मुझसे बात नहीं करते, मुझको इग्नोर कर रहे हैं जैसे मैं यहाँ हूँ hi नहीं करो करो साहब देखती हूँ कब तक यह खेल चलता है” और अपना मुंह बनाते हुए सान्वी ने अपने जीब को बाहर निकालते हुए उनके तरफ देखते हुए उनको चिढ़ाया हालां के चावला साहब उस्सको नहीं देख रहे थे.

उस वक़्त सान्वी आता सां रही थी रोटी बनाना के लिए और उसस्के बाल चेहरे पर आरहे थे तो आता वाली हाथ से चेहरे से बालों को हटाया तो उसस्के चेहरे पर थोड़ा आता लग गए और बालों में भी, साडी पहनी हुई थी और कमर में पल्लू को बंधे हुए थे, जिस से उस्सकी गोरी कमर काफी ज़्यादा दिख रहे थे और पीठ ब्लाउज के बैकलेस होने से वो भी ज़्यादा hi नज़र आरहे थे, तो सान्वी ने सोचा के इतने देर मेरे पास खड़े रहे तो उन्हों ने मेरे तरफ देखा तो होगा, किआ उनको अब कुछ नहीं दीखता किआ?’ और सान्वी ने उनको लुभाने को सोचा और गयी लाउन्ज में कड़ी कड़ी टीवी पर जो देख रहे थे उस पर एक नज़र देखने के बहाने. और उनके पास खड़ा हो गयी यह पूछते हुए, “कौन सा प्रोग्राम चल रहा है मैं ने एक बहोत अच्छी धुन सुना अभी आप ने चैनल चेंज किया किआ?” चावला साहब ने एक सिप लेते हुए उस्सको एक बार तिरछी नज़र से देखा, जिस जगह चावला साहब बैठे थे, तो उनके सर ठीक संजना के कमर तक रीच होते थे क्यूंकि वो तो कड़ी थी और जनाब बैठर हुए थे, और सान्वी अपने नज़रों को निचे करते उनके नज़रों को देख रहे थे के वो उस्सकी कमर को देखते हैं के नहीं.

जब सान्वी ने देखा के उनकी नज़रें सिर्फ टीवी पर गड़े हुए हैं तो उस्सने फिर पूछा, “आप ने बताया नहीं खाना घर पर खाना है या बाहर जाओगे आप?” तो चावला साहब ने फिर से उस्सको सर उठाकर तीची नज़रों से देखा एक बार और जवाब दीप्ति को दिया, “गद्य किआ मैं पीने के बाद ड्राइव करके बाहर जाता हूँ कभी?” दीप्ति ने कहा “पता नहीं!” और सान्वी वापस जाते हुए ज़ोर से कहती गयी, “सीधे मुंह जवाब नहीं दे सकते थे किआ? दीप्ति को जवाब देती है हँ!” और जब सान्वी वापस चल कर किचन के तरफ जा रही तजि तब चावला साहब उसस्के मटकते पिछवाड़े को देख रहे थे और अचानक सान्वी मुड़कर पीछे देखा तो तुरंत चावला साहब टीवी पर नज़र कर लिया, और सान्वी ने कहा, “छोर्री छोर्री क्यों देखते हो सामने से देखो जो देखना है!”

चावला साहब को हंसी आयी और दीप्ति को गॉड में उठाकर किसी किया और कहा, “एक और पेग बनानी है बेबी अभी अत हूँ”… और वो गए किचन के तरफ दुबारा आइस कुबेस लेने, तो उनके वहां पहुँचने से पहले सान्वी ने आइस कुबेस निकाल कर एक बाउल में दाल दिए और जब चावला साहब वहां पहुंचे तो उनको दिया उनके चेहरे में देखते और मुस्कुराते हुए, चावला साहब ने ले लिया मगर बिना सान्वी के चेहरे में देखे!

चावला साहब वापस पीते हुए काउच पर जाकर बैठ गए. और सान्वी ने रोटी बनाते हुए बार बार उनके तरफ देखती रही और एक बार ज़ोर से दीप्ति को कहा, “दीप्ति वैसे उस काउच पर मत खड़ा हो गिर्र जाओगे मुंह के बल!” तो तुरंत चावला साहब ने दीप्ति को बिठाया, क्यूंकि सच में बच्ची गिर सकती थी जिस तरह से कड़ी हुई थी. और सान्वी खुद फिर से बड़बड़ायी, “खुद पी रहे हैं और बचा संभालने बैठे हैं!” तो सान्वी ने सोचा उनको एक झटका देते हैं…. सान्वी ने रोटी बना लिए तो हाथ धोकर गयी दीप्ति को उठाने गयी वहां से और कहा, “चल तू अपनी गेम खेल पीने वालों के साथ रहेगी तो मुंह तोड़ लेगी अपना तू, चल ऊपर कमरे में!” ऐसा लगा के अपनी बची को उन् से चीन कर लेजा रही है….. चावला साहब ने कुछ नहीं कहा अपनी व्हिस्की को सिप करते रहे. जब सान्वी स्तैर चढ़ रही थी दीप्ति को लेकर तो चावला साहब ने आवाज़ थोड़ा ऊंचा करके कहा, “दीप्ति मत आना मेरे पास नाह बाद में नाह कल, उधर hi रहना मैं अकेला ठीक हूँ कोई ज़रुरत नहीं किसी की मुझे!” उल्टा झटका सान्वी को लगा अब उनके बात सुनकर और कहा के ये तो पास उल्टा पद गया वो तो कुछ और hi सोच बैठे!! हाय राम अब किआ होगा वो दीप्ति को भी अपने पास नहीं आने देगा तो? ोफो यह मैं ने किआ कर दिया?! उनको नशा होने लगा है और हर बात का उल्टा hi मतलब निकालेंगे, मुझे दीप्ति को नहीं लेना चाहिए था!!”

सान्वी कुछ देर अपने कमरे में बैठे सोचती रही फिर दीप्ति को वापस लाउन्ज में लेकर गयी और उस्सको वहीँ चावला साहब के पास काउच पर बिठाते हुए कहा, “नहीं मान रही कहती है के दादा के पास hi खेलूंगी, लीजिये सम्भालिए अपनी चाहती पोती को!!” मगर चावला साहब उठ खड़े हुए और अपने बोतल और गिलास लेकर अपने कमरे में चले गए.

सान्वी दीप्ति को गॉड में लिए उनके पीछे तेज़ क़दमों से गए और उनके कमरे में जाते hi कहा, “बची को क्यों बीच में पीस रहे हो आप? आप की लड़ाई मुझे से है तो इस में इस मासूम का किआ कुसूर? मुझसे ग़लती हुई के मैं ने इस्को वहां से उठाया लीजिये राखए इस्को अपने पास मुझे और काम है किचन में समझे आप!” यह कहकर सान्वी रो पड़ी!”

तब चावला साहब ने दीप्ति को अपने पास रहने दिया और सान्वी तोते ुए उनके कमरे से निकल गयी, और किचन में जाकर और ज़्यादा रोने लगी. और कहती गयी, “मुझ पर ज़ुलम कर रहे हैं, सितम कर रहे हैं, कीजिये कीजिये मैं सेह लुंगी और कितना सितम करोगे आप, मुझ में सहने की ताक़त है!! मैं भी आप की hi बहु हूँ दिखा दूंगी आप को!!”

कोई आधे घंटा के बाद सान्वी ने देखा चावला साहब कमरे से निकले और फिर किचन में आये आइस क्यूब लेने क्यूंकि जो बाउल में थे वो पिघल गए थे, तो उंनसे पूछा, “दीप्ति किआ कर रही है उस्सको अकेले क्यों चोर्रा आप ने?” यह कह कर सान्वी उनके कमरे में गयी और देखा के सान्वी सो गयी है उनके बीएड पर, तब तक चावला साहब वापस आ रहे थे आइस क्यूब के साथ तो संवी ने उंनसे कहा, “क्यों सोने दिया इससे? िस्सने अभी कुछ खाया नहीं है!” चावला साहब ने कड़क आवाज़ में गंभीरता से कहा, “तुम्हारे चेहरे पर आता है साफ़ करो और किआ वो नहीं उठेगी? उस्सको उठाया नहीं जा सकता किआ? कौन सी बड़ी बात हो गयी अगर सो गयी है तो?”

जीतनेय गंभीरता से चावला साहब ने बात किया उतने hi कोमलता से मुस्कुराते हुए सान्वी ने कहा, “किधर लगा है आता आप hi साफ़ कर दीजिये नाह!” और अपने चेहरे को उनके के छाती से सकता दिया. मगर चावला साहब एक तरफ होकर अपने बीएड पर जाकर बैठ गए व्हिस्की सिप करते हुए. तो सान्वी उनके पास जाकर बैठी और उसी कोमलता से कहा, “क्यों बहोत नाराज़गी है जी? मैं ने ऐसा किआ कर दिया के आप मुझसे इतना नाराज़ हो हम्म?” और फिर अपनी आवाज़ को और धीमी करके संवी ने ज़रा फुसफुसाते हुए उनके कान में कहा, आज रात को निघ्त्य में आऊं आप के पास तो वापस बात करोगी मुझसे पहले की तरह हम्म बोलिये आवुन अपनी निघ्त्य में आप के पास? आज विवान रात को 1.30 को आएगा फुल टाइम है बोलिये नाह जी! लगता है आप ने मुझको बरसों से गल्ले नहीं लगाया एक हुग दीजिये नाह मुझे!” और अपने बाहों को सान्वी ने चावला साहब के काँधे पर डाला…….

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 
अपडेट 74 सान्वी गोज माध

तो सान्वी उनके पास जाकर बैठी और उसी कोमलता से कहा, “क्यों बहोत नाराज़गी है जी? मैं ने ऐसा किआ कर दिया के आप मुझसे इतना नाराज़ हो हम्म?” और फिर अपनी आवाज़ को और धीमी करके संवी ने ज़रा फुसफुसाते हुए उनके कान में कहा, आज रात को निघ्त्य में आऊं आप के पास तो वापस बात करोगे मुझसे पहले की तरह हम्म बोलिये आवुन अपनी निघ्त्य में आप के पास? आज विवान रात को 1.30 को आएगा फुल टाइम है बोलिये नाह जी! लगता है आप ने मुझको बरसों से गल्ले नहीं लगाया एक हुग दीजिये नाह मुझे!” और अपने बाहों को सान्वी ने चावला साहब के काँधे पर डाला…….

अब आगे……

चावला साहब समझ गए के सान्वी उस्सको सडके कर रही है और सोचा - “अच्छा तो अब यह मुझको रिझा रही है और समझती है के अब निघ्त्य में आएगी मेरे सामने तो मैं पिघल जाऊंगा, जब मैं वो सब करना चाहता था, इतने मिन्नतें किये थे उस्सको अपनी निघ्त्य में देखने के लिए तब बड़ी सटी सावित्री बन रही थी अब थोड़ा सा बात करना किआ बांध कर दिया तो अपना रूप दिखाने लगी, चल मैं तुझे सबक सिखाता हूँ रे औरत!!”

और बिना कोई जवाब दिए चावला साहब बीएड से उठे और अपना व्हिशक्य का गिलास हाथ में लिए लाउन्ज में चले गए सान्वी को वहीँ बीएड पर चोरर कर!

संवी ने बिल्कुल, बिल्कुल भी नहीं सोचा था के वो वैसा करेगा, उस्सने तो सोचा था के इतनी कोमलता से बात करने से और अपनी कपडे उतारने वाले बात से चावला साहब उस्सको बाहों में भर लेगा, मगर सब उल्टा हुआ…. सान्वी ने अपने आप को निचे गिररते हुए फील किया. खुद को निचा महसूस किया जिस वक़्त चावला साहब बिना उस्सको देखे, सारे बातों को सुनने पर भी वहां से निकल गए. सान्वी को गहरा ठेस पहुंचा और वो वहां से दीप्ति को उठाकर ऊपर अपने कमरे में चली गयी और बीएड पर बैठ कर खूब रोई. बार बार सोच रही थी के कितने प्यार से उन् के कानों में बात किये थे सान्वी ने, ऐसे प्राइवेट बातें तो किसी अपनों से hi करते हैं, एक औरत होकर ऐसे बातें किसी अपने से बड़े से करने के बावजूद चावला साहब ने उसस्के बातों को अनसुना किया और वहां से निकल गए यह सान्वी हज़म नहीं कर पा रही थी.

उस्सको ग़ुस्सा आने लगा और तुरंत उसी वक़्त उस्सने अपनी निघ्त्य पहनी, ब्रा के बिना और अपने बालों को खोला और निचे उत्तरी स्तैर से चावला साहब के तरफ बढ़ते हुए और उनके सामने लाउन्ज में टीवी के सामने खड़े होकर ग़ुस्से में कहा, “क्यों? अब नहीं देखना मुझको ऐसे, मेरी नंगी बदन देखना चाहते थे नाह आप? मुझको पकड़ते थे, मेरे जिस्म पर अपना हाथ फरते रहते थे और आज मुझको ऐसे ठुकराया के जैसे मैं एक बिगरी हुई फर्नीचर हूँ? अब मैं चाहती हूँ के आप मुझको नंगी देखे, देखिये निघ्त्य उतार रही हूँ आप के सामने, यह लीजिये मुझको नंगी देखिये, यह हैं मेरे बूब्स, पंतय बी उतारूं या आप उतारोगे?”

सान्वी ने अपनी निघ्त्य उतार दिए और सिर्फ अपनी पंतय में कड़ी थी लाउन्ज में चावला साहब के सामने….. बहोत ग़ुस्से में थी, हांफ रही थी और चावला साहब के चेहरे में देख रही थी एक भूकी शेरनी की तरह….

चावला साहब बिल्कुल कूल, नार्मल उस्सको देखता रहा, सान्वी के दोनों बूब्स नंगे उनके ेंखों के सामने थे, सान्वी के हांफने से बूब्स ऊपर निचे हो रहे थे, सान्वी का चेहरा लाल था, ेंखें भी कुछ लाल हो गए थे ग़ुस्से से….. और सान्वी सोच रही थी के अब तो चावला साहब उस्सको अपनी बाहों में भरने ज़रूर आएगा और सॉरी कहेगा सान्वी को…

मगर ऐसा कुछ नाह हुआ, जितना गंभीरता थोड़ी देर पहले चावला साहब ने दिखाया था उल्टा अब उतना hi कूल थे और आराम से खड़े हुए अपने व्हिस्की सिप करते हुए अपने कमरे में जाने लगे तो सान्वी ने चिल्ला कर कहा, “अगर आप अपने कमरे के अंदर गए तो मैं यहीं बैठी रहूंगी ऐसे HI नंगी विवान के वापस आने TAK!!SUNA आप ने?”

चावला साहब ने एक बार मुड़कर उस्सको देखा, और अपने कमरे का दरवाज़ा ज़ोर से बांध किया और अंदर से लॉक लगा दिया!”

सान्वी आग बबूला हो रही थी…. उस्सने बहोत सारे सामन को तोड़ फॉर किया लाउन्ज में कई व्हिस्की की बोतलों को कुचल डाला फर्श पर, प्लेट्स भी तोड़ डाले …. अंदर चावला साहब सब सुन रहे थे के सान्वी पगला गयी है और सब कुछ तोड़ रही है, फिर भी वो कमरे से नहीं निकले….. सान्वी उनके दरवाज़े तक गए ज़ोर ज़ोर से घूंसे मारे उनके दरवाज़े पर और चिल्लाते हुए कहा “दरवाज़ा खोलिये, कोलिये दरवाज़ा वार्ना मैं कुछ कर बैठूंगी… सुना आप ने…..” चावला साहब दरवाज़ा नहीं खोल रहे थे तो संवी ग़ुस्से से रोने लगी और रट हुए वैसे hi चिलाती जा रही थी और ज़ोर से कहा, “ संजना के साथ किआ करते हो आप पता है मुझे.. जब से वो आयी आप के ज़िन्दगी में मुझको दूर किया आप ने, आप के छाती पर उस्सकी की हुई निशाँ देखि है मैं ने जब आप नशे में सोये हुए थे.. किआ है उस में जो मुझ में नहीं है??.... अगर आप ने दरवाज़ा नहीं खोला तो मैं घर को आग लगा दूंगी, मैं सच कह रही हूँ मैं घर को आग लगा दूंगी सुन्ना आप ने?!! खोलिये दरवाज़ा!!”

चावला साहब फिर भी नहीं हिल्ले…… और वैसे hi बिना निघ्त्य के सिर्फ अपनी पंतय में सान्वी ऊपर गयी अपने कमरे में, दीप्ति नींद में थी, सान्वी ने उन् सभी कपड़ों को निकला, जो पिछले 5 सालों में चावला साहब ने उसस्के लिए ख़रीदे थे, बहोत महंगे कपडे, सलवार, जीन्स, टॉप्स, सरियाँ सब एकता किया सान्वी ने और कुछ गहने भी, सब लेकर सान्वी निचे आयी और सबको चावला साहब के दरवाज़े के पास रखा, और फिर से चिल्ला कर कहा, आप नहीं निकलोगे नाह? नहीं सुन रहे हो आप तो अपने नाक को खोलकर सूंघना किआ स्मेल आरही है…..

सान्वी ने एक व्हिस्की का नया बोतल खोला और सारे व्हिस्की को उन् कपड़ों पर डाला, सब को भिगो दिया व्हिस्की से और लाइटर से उन् में आग भड़का दिया, सब में आग लग गए और जलने लगे…… और वहां से सान्वी चल कर गयी लाउन्ज से अपनी निघ्त्य लिया और पहना, और आहिस्ते आहिस्ते रट हुए स्टैर्स चढ़ने लगी अपने कमरे के तरफ जाते हुए……

चावला साहब के कमरे में कुछ धुंए दाखिल हुए और जलने की भूः आयी तो चावला साहब झपट के दरवाज़े को खोले तो देखा के उसस्के कमरे से बाहर निकलना मुश्किल था, सान्वी सीढ़ियों पर कड़ी देख रही थी और ज़ोर से हंससने लगी जब देखा के चावला साहब बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, चावला साहब वहां से सीढ़ियों पर सान्वी को देख पा रहे थे और ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा, “पागल हो गयी हो तुम? यह किआ किया तुमने? सारे घर में आग फेल जाएगा, जल्दी से पानी लाओ, सान्वी पानी लाओ और आग बुझाओ जल्दी! मैं नहीं निकल पाउँगा बहोत आग है!!!”

तो बे कॉन्टिनोएड…………….
 
अपडेट 75 थे फायर…..

सान्वी अब रोने लगी थी मगर जैसे चिपक गयी थी स्टैर्स पर बिल्कुल नहीं हिल रही थी, फिर बैठ गयी वहीँ सीढ़ियों पर ज़ोर से चिल्लाकर रट हुए. चावला साहब ने देखा के वो नहीं हिलने वाली वहां से तो अपने कमरे से एक कुर्सी से उन् कपड़ों को पुश किया और दौड़ते हुए किचन से बाल्टी में पानी भर कर आग को बुझाने गए…. तीन चार बार वैसा करने से आज बुझी…..

सान्वी वहीँ स्टैर्स पर बैठी सब देख रहे थे. चावला साहब उसस्के पास गए उसस्के बाहों को थाम कर उस्सको खड़ा किया और ज़ोर से दो थपड मारा उसस्के दोनों गालों पर जिस से सान्वी के गालों पर निशाँ हो गए और वो फुट फुट कर रोने लगी चावला साहब को अपने बाहों में भरके. चावला साहब बहोत ग़ुस्से में थे अब, और सान्वी का ग़ुस्सा शांत हो गया सब मंज़र देखने के बाद, वो बुसस रोटी जा रही थी. चावला साहब ने उस्सको गले से नहीं लगाया सिर्फ सान्वी ने चावला साहब को थमा था अपने बाहों में और रो रही थी… पुरे घर में जलने की बादभु फेल गए थे, घुटन सी होने लगी थी सांस लेना मुश्किल हो रहा था, तो चावला साहब ने सान्वी को ज़ोर से झिगझोररा और उस्सको अपने कमरे में जाने को कहा और दरवाज़ा बिल्कुल बंद रखने को कहा, और सभी दरवाज़े और उस तरफ के खिड़कियों को खोलने को कहा… और खुद चावला साहब ने मैं दरवाज़ा खोला और सभी खिरखियों को भी…. जाते जाते संवी ने रट हुए कहा, “सब कपडे जो आप ने मुझे दिए थे वही थे, उन् में गहने भी हैं सब जल गए नाह? अच्छा हुआ आप की दी हुई चीज़ अब नहीं चाहिए मुझे सब ले ली जिए वापस; नहीं चाहिए आप की चीज़ें मुझे, नहीं चाहिए, नहीं चाहिए……”

चवला साहब ने सब जले हुए चीज़ों को उठाया, एक ों किया, पंखों को भी ों किया चारों तरफ मगर बादभु वैसे hi थे हालां के सब धुवां ग़ायब हो गए थे…. चावला साहब के दरवाज़े के पास वाला ऊपर चाट के तरफ सब कला हो गया था, उसस्के दरवाज़े एल्युमीनियम के थे तो वो सलामत थे उस्सको कुछ नहीं हुआ था सिर्फ कला हो गया था जिस्सको साफ़ करने के बाद ठीक हो जाएगा…. मगर घर में चारों तरफ ुढे हुए राख और जले हुए कपडे पड़े हुए थे…..

चावला साहब अब सोचने लगा के विवान आया तो अब किआ कहा जाएगा उस्सको…. यह बादभु छुपाना तो नामुमकिन था, उस्सने सोचा के पता नहीं सान्वी किआ बताएगी विवान को अब, एक एक्सीडेंट कहकर विवान को बोलना चाहिए, संवी को भी वही बात विवान को कहना चाहिए….. तो चावला साहब को सान्वी से वापस बात करना पड़ेगा उन्हों ने सोचा….

तो वो गए ऊपर सान्वी के दरवाज़े के पास और खटखटाया उसस्के कमरे का दरवाज़ा…. सान्वी वैसे hi उसी निघ्त्य में बीएड पर बैठी हुई थी और अंदर से कहा, “खुला है आप अंदर आ सकते हो मेरा दरवाज़ा कभी लॉक नहीं होता किआ यह भी नहीं पता आप को?”

चावला साहब ने दरवाज़े को खोलकर गंभीरता से कहा, “चिल्ला क्यों रही हो? बची सोई हुई है नाह? बाहर आओ काम है निचे! और कपडे पेहेन कर औ इस निघ्त्य में नहीं, जल्दी करो!”

यह कहकर वो निचे चले गए और सारे जले हुए कपड़ों के टुकड़े उठाकर एक बड़ा सा प्लास्टिक वाला डंपिंग बैग में दाल रहे थे. कुछ देर बाद सान्वी निचे आयी कपडे पेहेन कर और खड़े होकर सभी जले हुए कपड़ों को देख कर रट हुए कहा, “कितना प्यार था मुझे इन् सब कपड़ों से, कितने प्यार से संभाल राखी थी मैं सबको क्यूंकि आप का दिया हुआ था, सब जल गए, सब के सब जल गए एक भी नहीं है जो ठीक है?” और चावला साहब से बैग चीन कर उस्में देखने लगी के कहीं कोई बचा हुआ सही कपडा तो नहीं उन् में… तो चावला साहब ने कहा, “अब क्यों पचता रही हो? जब आग लगाया तब नहीं सोचा था? जल्दी सब साफ़ करो मैं इन् सबको बैग में भर कर बाहर दूर फेंकने जा रहा हूँ, विवान को नहीं पता चलना चाहिए के आग तुमने लगाई थी, कहना होगा के एक्सिडेंटली आग लग गयी, कपड़ों का ज़िक्र बिल्कुल भी मत करना….”

सान्वी निचे ज़मीन पर बैठ कर रोने लगी और पूछा, “तो किआ कहेंगे विवान को के आग कैसे लगा? कहाँ लगा? यह देखिये आप के दरवाज़े के पास कितना कला हो गया है, पूरा घर बादभु से भरा हुआ है, किआ कहना होगा विवान को? बताईये एक hi बात बोलना होगा दोनों को!!”

चावला साहब ने कहा, “उस्सको अभी आने में वक़्त है, मैं यह सब फेंक का राटा हूँ तब सोचेंगे के किआ बताना है उस्सको, तब तक तुम पानी से यह सब साफ़ करो जल्दी, जहाँ जहाँ राख फैले हैं सब साफ़ करो मैं अभी आया!!”

चावला साहब ने सभी जले हुए कपड़ों को बैग में अच्ची तरह से बांध करके अपने कार में डाला और चले गए कहीं दूर फेंके को. इधर सान्वी लग गयी सब साफ़ करने में. सभी खिड़कियां खुले हुए थे और शुक्र है के बाहर काफी तेज़ हवा था जिस से बादभु बाहर निकल रहे थे…

चावला साहब कोई 15 मिनट में वापस आये. आते hi कहा के पूरा घर जला हुआ महक रहा है, विवान को सब पता चल जाएगा… ठहरो मैं स्टोर से पेंट लता हूँ, बी चांस पेंट वाले डिब्बे वाइट पेंट बचे हैं और घर का कलर वाइट है तो मैं सबसे पहले मेरे कमरे के दरवाज़े के पास पेंट करता हूँ तुम वहां एक भीगे हुए कपडे से साफ़ करो पहले मैं वहां पेंट करूँगा, ताके विवान को पता नाह चले के आग वह लगी थी, कहेंगे के आग किचन में लगी थी, किचन यहाँ से बिल्कुल करीब hi है…..” तो सान्वी ने पूछा, “मेरे गहने किधर हैं? वो तो नहीं जलते नाह आग में?”

चावला साहब ने ग़ुस्से में कहा, “क्यों? तुमको तो मेरे दी हुई चीज़ नहीं चाहिए नाह? तो अब क्यों गहने चाहिए?”

सान्वी ने ेंसू भरे ेंखों से, कुसूरवार नज़रों से कहा, “बताईये नाह? किआ आप ने संभल के रखा नाह? वापस दीजिये मुझे, बहोत प्यारे थे सब मुझे!!” तो चावला साहब ने अपने कमरे से उन् गहनों को लाकर उस्सको दे दिया. सब काळा हो गए थे. चावला साहब ने तब कहा, “नहीं वापस दो तुम इस्को अपने पास अभी नहीं रख सकते, तुम्हारे कमरे में इस्सकी बादभु अभी नहीं जाना चाहिए, तुम्हारे कमरे में बिल्कुल धुआं और बादभु नहीं पहुंचे हैं, इससे मेरे hi पास रहने दो फिलहाल कल साफ़ करके वापस ले लेना.”

और रात के 1 बजे तक सब कुछ दोनों ने मिलकर साफ़ किया और चावला साहब ने अपने कमरे के पास सब पेंट किया और बिल्कुल नहीं दिख रहा था के वहां आग लगी हुई थी, पेंट की खुशभु भी आने लगे थे धुंए के साथ मिक्स….

और सब साफ़ होने के बाद सान्वी को चावला साहब ने समझाया के विवान को यह बताना है के ओवन के पास जो कपडे गरम बर्तनों को पकड़ने के लिए होते हैं वो पड़े हुए थे और उन् में आग लगने से चरों तरफ आग फेल गए किचन में hi जिस को हमने साफ़ किया और कई जगह पर पेंट किया मैं ने….. और जले हुए कपडे और कागज़ों को मैं ने फेंक दिया….

सान्वी ने चावला साहब को फिर से बाहों में ज़ोर से जकरते हुए उनके गालों पर किश किया और माफ़ी मांगी अपने उस पागलपन के लिए. चावला साहब ने उस्सको नहीं थामा, वो तब भी ग़ुस्से में थे, तब सान्वी ने रट हुए कहा, “मुझको एक हुग तो कीजिये नाह कब से तड़प रही हूँ आप के एक हुग के लिए, प्लीज मुझको अपने बाहों में भरए नाह जी?” क्यों इतना तारपा रहे हो मुझे जी? इस छाती पर मेरा हक़ था आप ने संजना को दे दिया यह हक़ मुझसे पहले जी? मेरा किआ कुसूसर है जी? मत रुलाओ मुझे ऐसे? चलो मैं हार गयी, मैं टूट चुकी हूँ मुझसे और बर्दाश्त नहीं होता मुझे ऐसे मत तड़पाओ आप, मैं पागल हो जाउंगी सच में… मुझको अपने बाहों में ज़ोर से जाकर लो नाह पलेआयआयएसस्स्स्सीीी!”

वो इतनी ज़ोर से बिलात बिलात कर एक छोटी बची की तरह रोने लगी उनको बाहों में जाकर हुए के चावला साहब से देखा नाह गया और उस्सने सान्वी को ज़ोर से अपने बाहों में भर लिया. और सान्वी और ज़्यादा ज़ोर से रट हुए उन् का शुक्रिया ऐडा किया और अपने सर को उनके छाती पर दबाते हुए वहां उनको चूमने लगी. और चावला साहब ने भी सान्वी के माथे को चुम्मा और फिर उसस्के गाल को चुम्मा फिर हलके से उसस्के होंठों से होंठों को लगाया और सान्वी ने अपने मुंह को खोल दिया और अपने जीब निकल कर चावला साहब के होंठ पर फेर्रा तो चावला साहब ने भी मुंह खोला और सान्वी ने अपने जीब को उनके मुंह में डाला और चावला साहब ने ज़्यादा ज़ोर से सान्वी को अपने बाहों में भरते हुए उस्सको किश करने लगा…… पांच सैलून में ये उन् दोनों का पहला किक्स था.

तो बे कॉन्टिनोएड……. (2580 वॉर्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 76 थे रेकन्सीलिएशन

और चावला साहब ने भी सान्वी के माथे को चुम्मा और फिर उसस्के गाल को चुम्मा फिर हलके से उसस्के होंठों से होंठों को लगाया और सान्वी ने अपने मुंह को खोल दिया और अपने जीब निकल कर चावला साहब के होंठ पर फेर्रा तो चावला साहब ने भी मुंह खोला और सान्वी ने अपने जीब को उनके मुंह में डाला और चावला साहब ने ज़्यादा ज़ोर से सान्वी को अपने बाहों में भरते हुए उस्सको किश करने लगा…… पांच सैलून में ये उन् दोनों का पहला किक्स था.

अब आगे……..

कहते हैं के दिल जब किसी से जुड़ जाता है, प्यार दिल से होता है तो जिस्म की ज़रूरत नहीं पड़ती. कुछ ऐसा hi हाल हुआ था यहाँ. नंगी होकर भी जब सान्वी चावला साहब के सामने आये फिर भी कुछ नहीं हुआ, चावला साहब खुद इतने दिनों से सान्वी को निघ्त्य में देखना चाहते थे और जब वो उनके सामने वैसे गयी तो कुछ नाह हुआ, और अभी सिर्फ भावनाओं में डूब कर, चार ेंसू बहा कर, थोड़ा बिलात कर सान्वी चावला साहब के बाहों में थी और 5 सालों में दोनों ने पहले किश का आनंद लिया.

लगाओ तो दोनों में पिछले 5 सालों से hi था, अपनापन, प्यार, खिंचाव एक दूसरे के तरफ, सब पहले से hi था. मगर दोनों शायद इतने दिनों से ज़्यादा आगे बढ़ने के लिए झिजक रहे थे या एक रेस्पेक्ट भी था दोनों के बीच रिश्ते वाला. रिश्ता रेस्पेक्ट वाला hi था, एक बड़ा पिता के सामान था तो एक प्यारी बेटी की तरह थी. जिस दौरान दीप्ति पैदा हुई थी और चावला साहब ने सब कुछ किया था डिलीवरी के लिए और जिस तरह से उन्हों ने सान्वी का ख्याल रखा था तभी से सान्वी उंनसे मुहबत करने लगी थी, मगर कहती कैसे? ससुर थे उसस्के, बड़े थे, वो खुद एक बेटी की तरह देख रहा था सान्वी को इस लिए सान्वी कभी भी अपने प्यार का इज़हार नहीं कर पाए थे चावला साहब को.

अगर कर दिया होता तो शायद आज संजना नहीं होती चावला साहब की ज़िन्दगी में. उन् दिनों को जब दीप्ति बेबी थी और चावला साहब हर छोटी से छोटी चीज़ों का ख्याल रख रहे थे सान्वी के लिए दिन और रात भर सान्वी के दिल में उमंगें ने घर किया था. सान्वी कभी कभी बीएड पर लेते चावला साहब को निहार रहे थे, उनको सब उसस्के छोटे छोटे कामों को करते हुए देख रही थी उनको निहारते हुए. बहोत प्यार करने लगी थी तभी उन् से और उस्का दिल करता था के उछाल कर चावला साहब के सीने से लग कर अपने प्यार का इज़हार करें, मगर एक डर सी लगी रहती थी उस्सको, के कहीं /चावला साहब ब्यूरेन ा मान ले और तब सान्वी सिर्फ 9 महीनों से उस घर में आयी हुई थी, चावला साहब को इतना नहीं पहचानती थी तब जितना अब पहचानती है.

धीरे धीरे जब दीप्ति बड़ी होती गयी तब वैसे वैसे सान्वी का प्यार बढ़ता गया चावला साहब के लिए. दिल hi दिल में चाहती गयी उनको. और जीन दिनों चावला साहब दीप्ति को दूध पिटे देख रहे सान्वी के साथ, और सान्वी की बूब्स देखते थे उन् दिनों सान्वी को लगता था के अब चावला साहब उनको उस तरह से छुवेगा जिस से दोनों का मिलाप होगा, मगर चावला साहब उस से आगे कभी नहीं बढे थे. तो सान्वी को खौफ्फ़ रहता था के पता नहीं चावला साहब ऐसे hi नैचुरली बची और माँ का दूध पिलाना नेचुरल तौर पर देख रहे थे या उनके दिल में भी कुछ अरमान जागे थे सान्वी के लिए, ये सान्वी नहीं तय कर पाए थे उन् दिनों को, इस लिए कभी कदम आगे बहिन बधाई थी उस्सने चावला साहब के तरफ.

सान्वी का पति, विवान काम में इतना उलझे रहते थे, रात रात भर ऑफिस में रहते थे के सान्वी को लगता था के चावला साहब उस्का रियल पति है क्यों के वो तक़रीबन 24 घंटों उसस्के साथ होते थे और हमेशा नरमी और प्यार से पेश एते थे. सान्वी को धीरे धीरे आदत हो गयी थी विवान की उस दूरी से. उस्सने अपने आप को उस तरह से सेट कर लिया था के विवान बहोत बिजी आदमी है इस लिए उसस्के काम में उस्सको सपोर्ट करने लगी थी चाहे वो कितना भी लेट वापस ना आये…..

फिर कोई देर साल बाद जब पहली बार विवान ने बातों बातों में सान्वी से कहा था के मेरा बाप जैसे तुम्हारा दूसरा पति है इस घर में और आरव तीसरा……. उस दिन से सान्वी ने अपने दिल में इस बात को बिठा लिया थे के चावला साहब उस्का दूसरा पति hi है!! उंनका ऐसा ख्याल रखने लगी थी जैसे क ीक पत्नी अपने पति का रखती है सेक्स को चोरर कर. उन् दिनों जब रात को विवान सान्वी से सम्भोग करते थे तो ख्यालों में सान्वी चावला साहब को सोचते थे, वो चावला साहब को दिमाग़ में रख कर विवान से सम्भोग करती थी… फिर धीरे धीरे वो आदत बन चुकी थी, के जब भी विवान उसस्के साथ प्यार करता तो सान्वी चावला साहब को सोचे बिना विवान से संतुष्ट नहीं होती थी.

यह सब कुछ सान्वी ने दिल के अंदर रखा था. मगर जिस दिन आरव की मांगनी हुई और सान्वी ने चावला साहब और संजना के नज़रों में प्यार देखा तो उस्सको खतरा नज़र आया. सान्वी को तभी लग गया के उस से पहले सांजना बाज़ी मार जाएगी. जलन भी हुई थी. डर भी लगा था के चावला साहब हाथ से निकल जाएगा.

इसी लिए जब भी चावला साहब घर से दूर रहते तो सान्वी का मैं सिर्फ यह कहता के वो संजना के साथ है…. और जिस रात को सच में चावला साहब संजना कैग हर रुके थे तो सान्वी इधर पागल hi हो गयी थी क्यूंकि चावला साहब ने मोबाइल ऑफ कर रखे थे, और सान्वी के दिमाग़ में एहि चल रहा था के संजना चावला साहब के साथ रात भर ेश कर रही होगी जबकि संवी अभी तक उस इंतज़ार में थी के कब चावला साहब उस्सको अपने बीएड पर लेयताये!!!

और जिस रात को संवी ने चावला साहब के छाती पर लोवेबिट्स देखि थी उस्सको पक्का यकीन तो हो गया थे के संजना ने सब किया है चावला साहब के साथ और यकीन हो गया था के संजना चावला साहब के साथ सोती है तभी से सान्वी टूट चुकी थी और उस सुबह को जिस दिन गेराज में चावला साहब से कहा था के वो वैसी नहीं है उसी वक़्त संजना उन् से कहना चाहती थी के किआ वो संजना के साथ सोते हैं तो उस के साथ क्यों नहीं….. मगर सान्वी नहीं कह पायी, खुद को चावला साहब के नज़रों में गिरना नहीं चाहती थी मगर दिल से चाहती थी के चावला साहब उसस्के जिस्म को छुए, प्यार करे अपने आग़ोश में लें…

ेल वजह एहि था के हर सुबह निघ्त्य से रहती थी उनके सामने उनको रिझाने के लिए, उनको अपने तरफ आकर्षित करने के लिए….. 5 साल लगे सान्वी को चावला साहब को अपने तरफ खींचने को और उस संजना ने कुछ hi पल में उनको ले लिया….. यह संजना से सेहेन नहीं हुई इस लिए वो अपना मानसिक संतुलन खो बैठी थी इस रात को!!

हर सुबह को जब चावला साहब सान्वी को किचन में उस निघ्त्य में जकरते थे सान्वी मैं hi मैं बेहद खुश होती थी मगर उनको पुश करने की बुसस नाटक किया करती थी उनको और भी अपने करीब लेन के लिए मगर वो फ़ैल हुई उस में. सान्वी ने जब पता लगा लिया के संजना और वो सेक्सुअल रिलेशनशिप में है तो खुद को कोसा सान्वी ने. खुद से कहा के क्यों चावला साहब को इतने दिनों से मन कर रही थी जब वो उस्सको जकार्ता, गर्दन पर किश करता बाँहों में भरता …. तभी उस्सको अपने आप को चावला साहब के हवाले कर देना चाहिए था और संजना कभी भी नहीं आते उनके ज़िन्दगी में… यह सब सोचती रहती था सान्वी अक्सर…..

तो बे कॉन्टिनोएड इन नेक्स्ट पोस्ट………..
 
अपडेट 77 मिलने की तड़प

अब उस पहली किश के बाद सान्वी उनके बाहों में रहे कुछ देर सिसकते हुए, किश भी कर रही तो उसस्के ेंसू बह रहे थे… चावला साहब ने उसस्के गालों को सहलाया बड़े प्यार और कोमलता से. उसस्के गालों से लेगर गर्दन के चरों तरफ चुम्बन दिए सान्वी को. फिर उसस्के हाथों को चूमा और उसस्के पतली पतली उँगलियों को चूमा और मुंह में लेकर चुस्सने लगा, एक एक करके सान्वी के दोनों हाथों के सभी उँगलियों को चूसा हौले साहब ने. सान्वी को जैसे सेहरा में पानी मिल गए थे उस वक़्त. चावला साहब को जाकर हुए hi किश के बाद सान्वी ने कहा, “आइये, चलिए मेरे कमरे में मेरे बीएड पर…” तब चावला साहब ने मुस्कुराते हुए कहा, “डाइवोर्स लेनी है किआ तुमको विवान से? टाइम देखो 1.30 होने वाला है वो घर के करीब आगया होगा!” तो सान्वी को परेशानी हुई क्यूंकि वो आज अभी इसी वक़्त चावला साहब के साथ सोना चाहती थी, तो कुछ चेहरे पे सिकंजह लेट हुए संजना ने कहा, “ओह no!!! नाह!!! अब मैं किआ करूँ….. उसस्के सोने के बाद आप के कमरे में आउंगी okay? चावला साहब ने हैरान होकर सान्वी के चेहरे में देखते हुए कहा, “इतनी बेताबी? अरे फुल मौका मिलेगा हमें… कल hi सही हम्म?” और चावला साहब ने उस्सको फिर बाँहों में भरके और किश किया फिर जल्दी से कहा, “देखो कार के हेडलाइट्स, वो आगया चलो किचन में दोनों उस्सको बताएंगे के किआ हुआ, कैसे हुआ, उस्सको यह समझना चाहिए के हम अभी तक सब साफ़ कर रहे हैं एक किसी काम में लग जाओ मैंभी कुछ करता हूँ…..”

और विवान अंदर आया तो हैरान नाक पर हाथ दबा के पूछा किआ हुआ और दोनों ने उस्सको बताया की आग लग गए थे किचन के टॉवल में और दोनों अपने अपने कमरे में थे बादभु से बाहर आये तो आग भड़क चुके थे वग़ैरा वग़ैरा…..

खर उसस्के बाद अपने अपने कमरे में चले गए सब. और अब चावला साहब अपने कमरे में, सान्वी को सोच कर उस्सकी जिस्म को सोचकर उस्का बिल्कुल खड़ा हो गया था और उस्सको भी बड़ा मैं कर रहा था उसी वक़्त सान्वी के साथ सम्भोग करने को…. उस्सने पहले कभी ऐसा नहीं सोचा था यह सब शुरू हुआ संजना से सेक्स करने के बाद. इस से पहले कुछ फ़्लर्ट टाइप चलता था कभी कभार सान्वी के साथ मगर बिस्तर तक जाने को कभी भी नहीं सोचा था चावला साहब ने. सिर्फ संजना से सेक्स के बाद उस्सने सान्वी को सेक्स किन ाज़ार से देखना शुरू किया था.

उधर सान्वी नहीं सो प् रही थी क्यूंकि वो भीं सिर्फ चावला साहब को और उस किश को सोच रही थी, उस किश का स्वाद अब भी उसस्के मुंह में मौजूद था ऐसा लग रहा था सान्वी को. चावला साहब ने किश तरह से उस्सको जाकर हुए थे; किश तरह से उसस्के सभी उँगलियों को चूसा था उन्हों ने यह सब सोच सोच कर पागल हो रही थी सान्वी…… एक शावर के बाद विवान के साथ बीएड पर लेती हुई थी मगर उस्सको नींद नहीं आरही थी. चावला साहब ने भी शावर लिया था सोने से पहले सुबह के 2 बजे….. और 3 बज चुके थे नहीं सोये थे और सान्वी भी जाग रही थी. विवान तो घोड़े बेचकर सोया हुआ था, उसस्के खर्राटे निचे किचन में सुनाई दे रहे थे.

चावला साहब अपने कमरे से बाहर निकले, सिर्फ एक शार्ट में थे, ऊपर टीशर्ट भी नहीं थे, नंगे छाती थे, किचन में गए, और ऊपर सान्वी के कमरे के तरफ देखने लगे यह सोचते के किआ वो सो गयी होगी. सान्वी तो करवट पे करवट बदलती जा रही थी. उसस्के dil-o-dimaagh में सिर्फ चावला साहब बसे हुए थे, मगर उस्सको यह पता नहीं था के उस वक़्त चावला साहब के भी दिल ो दिमाग़ में उस्सने घर कर दिया था. क्यूंकि विवान ज़ोरों से खर्राटे ले रहे थे सान्वी उस्सको बार बार हिल्ला रहे थे ताके वो शोर करना रोके.

चावला साहब ने विवान के खड़ाऊँ को निचे किचन में सुना. अब उस्सको पता नहीं था के सान्वी नींद में है या सो गयी है…. एक चेयर खिंच कर डाइनिंग टेबल के पास बैठ गए चावला साहब ऊपर सान्वी के कमरे के तरफ देखते हुए. किचन के लाइट्स ों कर दिए….

सान्वी खुद अपने बीएड से उठी और उस्सको एक घुटन सा फील होने लगा था नींद नाह आने की वजा से, तो उस्सने सोचा के बाहर चलके थोड़ा हवा खाते हैं. अपनी एक दूसरी निघ्त्य में थी जो बराबर उसस्के सभी दूसरे निघटिएस के तरह hi थे, महीन कपडा, पतली पतली स्ट्रैप्स और पीठ तो आधा से ज़्यादा दीखते थे उस निघ्त्य में, ब्रा नहीं पहनी थी तो उसस्के बूब्स और निप्पल साफ़ नज़र आते थे nightypar….nipples तो जैसे दो पॉइंटेड ऑब्जेक्ट्स दिख रहे थे सान्वी के छाती पर. निघ्त्य निचे जाँघों के बहोत ऊपर थे जिस में उस्सकी जांघें 70% से भी ज़्यादा दिखाई दे रहे थे. सान्वी की जांघें बेहद खूबसूरत थे, बिल्कुल संजना के जाँघों के तरह…. और चावला साहब को जांघें बेहद पसंद थे जो सान्वी के ड्रेसेस में दीखते hi नहीं थे कभी, वो तो हमेशा साडी में या जीन्स में रहती थिग हर में, छोटी ड्रेस कभी भी नहीं पहनती थी शादी के बाद. उस रोज़ याद होगा सबको जब सान्वी के पेयर में चोट लगी थी और चावला साहब ने ांतिपाईन वाला स्प्रे लगाया था तो संजना के निघ्त्य से गाउन कैसे ररक गए थे और सान्वी के जांघें कितना दिख रहे थे और चावला साहब के नज़रें उन् पर थे जो सान्वी ने अच्छी तरह से देखा था…..

सान्वी अपने कमरे से आहिस्ते से निकली, और बहोत आहिस्ते से दरवाज़ा को बांध किया बिना किसी शोर के और अपने पैरों के टिप पर चलते हुए नंगे पाऊँ सीढ़ियां उतरने जा रही थी के देखा चावला साहब बैठे हुए हैं किचन में अकेले!!! और चावला साहब उसी को देख रहे थे…. और चेयर से खड़े हो गए ऊपर सान्वी को देखते हुए…. सान्वी के कदम रुक गए, उस्सकी दिल के धड़कन बहोत तेज़ हुए, फिर दौड़े हुए सान्वी ने सीढ़ियां उतरे और सीधे चावला साहब के बाहों में समां गयी हांफते हुए… और सान्वी के ेंखों से ेंसू टपक गए…. क्यों? यह उस्सको बी समझ में नहीं आया. चावला साहब ने सान्वी के चेहरे को अपने दोनों हाथों में लिया और ऊपर अपने तरफ उठाया देखने को…. और उसस्के ेंसुओं को अपने जीब से छाता…. कद में चावला साहब ऊंचे थे, तो सान्वी का सर उनके छाती के थोड़ा ऊपर तक आते थे, मगर सान्वी संजना से थोड़ा सा ज़्यादा ऊंची थी कद में.

तो जब चावला साहब ने उसस्के चेहरे को अपने दोनों हाथों में लिया हुआ था, उस्सको हलके हलके किश किया दोनों गैलन पर जहाँ थपड मारे थे और पूछा, “बहोत दर्द हुआ था हम्म ी ऍम सॉरी स्वीटहार्ट” और सान्वी ने उनको बहोत hi ज़ोर से अपने बाहों में जाकर लिया और उनके छाती को चूमने लगी. दांत भी काटे और चूसा भी और जैसे संजना से कम्पटीशन थी तो चावला साहब के छाती को चुस्सने लगी लव बिट्स के निशाँ बनाना के लिए, चावला साहब के बाहों को ऊपर उठाया और उनके आर्मपिट के निचे चाटने लगवि सान्वी और जैसे उसस्के लाड टपकने लगे थे खुद सान्वी ने अपना हाथ चावला साहब के शार्ट के अंदर डाला, और उनके बॉक्सर में उनके लिंग को अपने हाथ से फील करते हुए अपने जीब को चावला साहब बी के मुंह पर फेर्रा फिर उनके होंठों को छाता सान्वी ने और चावला साहब ने मुंह खोला तो सान्वी ने अपने जीब को उनके मुंह के अंदर दाल दिया और चावला साहब उसस्के जीब को चुस्सने लगे.

जिस वक़्त सान्वी स्टैर्स से निचे उतर रही थी, चावला साहब निचे से उसस्के जाँघों को निहार रहे थे और क्यूंकि संवी ने दौड़ते हुए उत्तरी थी तो उस्सकी निघ्त्य और ज़्यादा ऊपर उठे थे जिस मेंचवला साहब को सान्वी की पंतय भी दिख गए थे तभी….

और अब अपने बाँहों में सान्वी को लेकर चावला साहब उस्सकी चूचियों को अपने छाती पर कुचलते हुए महसूस कर रहे थे और किश किये जा रहे थे सान्वी को… फिर कुछ लम्हे बाद, चावला साहब ने सान्वी को अपने गॉड में उठाया और उस्सको लेकर अपने कमरे के तरफ जाने लगे…. वो नज़ारा देखने लायक था, सान्वी उनके गॉड में, सान्वी के लम्बे खुले बाल किश तरह से लटके हुए थे और उस्का एक हाथ भी, और टांगों के तरफ वो छोटी सी निघ्त्य ऊपर थे और सान्वी की पंतय और नितम्बों के नज़ारे से किचन में रौनक आगयी थी…. जाने से पहले सान्वी ने खुद किचन का लाइट ऑफ किया उन् के गॉड से hi और जब चावला साहब के दरवाज़े तक आये तो खुद सान्वी ने hi दरवाज़े को खोला क्यूंकि चावला साहब ने तो उस्सको उठाया हुआ था.

चावला साहब ने सान्वी को बीएड पर प्यार से, आराम से बिठाया. सान्वी का दिल ख़ुशी से मचल रहा था, तब चावला साहब गए अपने दरवाज़े को लॉक करने, तब तक सान्वी ने अपनी नज़रों को निचे झुकाते हुए खुद के बूब्स और जाँघों को देख रहे थे और जब चावला साहब पास आये तो कहा, “किआ हुआ? खुद अपने बदन को निहार रही हो? यह तो मेरा काम है मुझको करने ये काम!” संवी मुस्कुरायी और कहा, “निहार नहीं रही हूँ, देख रही हूँ के आप को किआ किआ देखने को मिल रहा है!”

चावला साहब ने कहा, “तरप गया था यह सब देखने के लिए, 5 सालों में जो नहीं देखा वो तुमने आज सरे कपडे उतार के दिखा दिया लाउन्ज में कुछ देर पहले….” तब सान्वी ने कहा, 2हाँ तब क्यों वापस कमरे में चले गए थे? तब ऐसे प्यार क्यों नहीं किया था?” तो चावला साहब ने कहा, “प्यार, प्यार से किया जाता है ग़ुस्से से नहीं, तुम ग़ुस्से में थी और ग़ुस्से को प्यार, प्यार नहीं कर सकता, प्यार चिल्ला कर नहीं किया जाता, तुम चिल्ला रही थी, प्यार होश में रहकर किया जाता है और तुम होश में नहीं थी, अगर उस वक़्त तुमसे प्यार करता तो प्यार की तौहीन होती! और मैं नहीं चाहता था के प्यार का तौहीन हो इसी लिए अपने कमरे में चला गया था!”

सान्वी ने उनको चूमते हुए कहा, “बाप रे इतनी बड़ी बड़ी बातें, आप प्यार के बहोत तारीफ़ कर रहे हो जी?!” – चावला साहब ने मुस्कुराते हुए कहा, “चलो तुमको प्यार करता हूँ….. अब इस निघ्त्य को मैं उतरूंगा, निचे वाला भी अपने हाथों से उतरूंगा तब मज़ा आएगा, यह तुम्हारा काम नहीं मेरा काम है स्वीटहार्ट!”

सान्वी की हंसी छूती और कहा, “हम्म अच्छा जी इसी लिए? हम्म्म आप को औरतों के कपडे उतारना पसंद है हाँ संजना के भी आप hi उतारते होंगे फिर हम्म?”

चावला साहब ज़मीन पर खड़े थे और सान्वी बीएड पर बैठी हुई थी और चावला साहब ने उस्सकी निघ्त्य निचे से ऊपर उठाते हुए निकालने लगे थे तो सावी ने खुद अपने दोनों बाहों को ऊपर किया निघ्त्य को आसानी से निकलने के लिए, और चावला साहब के नज़रें मोठे मोठे खुले जब सान्वी के बूब्स उनके नज़रों के सामने आये – वो हिस्सा जो ब्रा में रहते हैं और जहाँ ब्रा के स्ट्रैप्स होये हैं, थोड़ा ज़्यादा सफ़ेद रंग के मार्क्स किये हुए थे, बूब उन् जगाओं पर ज़्यादा सफेदी रंग के थे और बहुत मुलायम दिख रहे थे… सान्वी के बबबस ज़्यादा लटके नहीं थे, फिरल गोआल, निप्पल खड़ा हुआ जैसे चावला साहब को दो ेंखें देख रहे थे….. सान्वी ने खुद नज़रें न ीचे करके अपने निप्पल्स को देखा जब देखा के चावला साहब वहां देख रहे हैं…

तब चावला साहब घुटनों के बल संवी के सामने गए और सान्वी को खड़े होने को कहा, संवी कड़ी हुई तो चावला साहब ने उस्सकी पंतय को अपने दोनों हाथों से कमर पर इलास्टिक पाकर के निचे करना चूरू किया, हौले हौले, धीरे धीरे उतर रहे थे उस्सकी पंतय को आहिस्ते शीते पंतय के निचे के उन् हिस्से को देखते हुए. सब कुछ बिल्कुल आराम से वक़्त लेते हुए कर रहे थे…. सान्वी उनको बहोत प्यार भाड़े नज़रों से उनके चेहरे में देखे जा रही थी और फिर उसस्के ेंखें भर आयी….. जब पंतय निचे पाऊँ के पास पहुंचे तो सान्वी ने उनके सर पर एक हाथ रख के एक तंग उठाया पंतय को बाहर निकलने के लिकए फिर दूसरा पाऊँ उठाया और पंतय को चावला साहब ने ज़मीन पर रखा और झट से सान्वी के कमर के दोनों तरफ अपने बाहों को करके सान्वी को जकरा और अपने मुंह को उस्सकी सीधे योनि पर किया वहां चाटते हुए जिस से सान्वी सिकुड़ गयी और ज़ोर से उनके सर के बालों को अपने मुठी में जकरा….

सान्वी कड़ी रही उनके बाहों में कमार से जाकर और उनके मुंह को अपने योनि पर फील करते हुए सान्वी गहरी ठंडी सांसें लेने लगी थोड़ा तड़पती धीमी आवाज़ करते हुए….. चावला साहब ने जब संवी की योनि की पंखुरियों के बीच अपना जीब लगाया तो पाया के सान्वी बुरी तरह भीगी हुई थी, सान्वी बेहाल होने लगी और धीमिक तड़पती आवाज़ में भुनभुनाई, “मैं लेटती हूँ जी, काढ़ा नहीं रह पाऊँगी ऐसे….”

और सान्वी ने खुद को बिस्तर पर पीठ के बल कर दिया और दोनों टांगों को ऊपर उठाके फैला दिया अपने चावला साहब के लिए….., चावला साहब बीएड पर चढ़े और घुटनों के बल hi बीएड पर सान्वी के दोनों फैले हुए टांगों के बीच अपना सर डाला और चुस्सना जारी किया….. काफी देर तक चावला साहब उसी पोजीशन में रहे सान्वी की योनि को चाटते चूस्ते हुए….. सान्वी पागल हो रही थी, बहोत खुश बजी थी मगर बहोत तड़पती जा रही थी धीमी धीमी आवाज़ में…. और फिर सान्वी ने चेहरा थोड़ा ऊपर करते हुए चावला साहब से उसी तड़पती आवाज़ में कहा “मैं भी तो आप के लिए कुछ कर सकती हूँ नाह जी? आप अपने सामान इधर तो की जिए नाह!!”

तो चावला साहब ने अपने टांगों के सान्वी के चेहरे के तरफ किया, तो सान्वी ने उनके शार्ट उतारे, उनके बॉक्सर निकालने जा रह ेथ उस के अंदर उनके मोठे, लम्बे लिंग का फॉर्म देखा, बॉक्सर के ऊपर hi अपने हाथ से सहलाया बड़े प्यार से, वैसे hi चूमा उस्सको और धीरे से बॉक्सर को निकला और तन्ना हुआ चावला साहब का मोटा औज़ार बाहर आया, जिस्सको सान्वी ने बड़े प्यार से हाथ में लिया, सहलाया और अपने जीब चलाने लगी उसस्के पुरे लम्बाई पर, फिर जीब को गोआल गोआल घुमाया ऊपरी हिस्से और चढ़ पर तो पाया के साहब ने भी प्रेकम चोरर दिए हैं जिस्सको सान्वी ने ख़ुशी से छाता और लुंड को मुंह में लेके चुस्सने लगी, तो चावला साहब ने उस्सकी योनि को चूस्ते हुए hi घुर्राटे हुए तड़पड़े आवाज़ किये……

सान्वी ने मुंह में लुंड को आधा से ज़्यादा लिया हुआ था और अपने उँगलियों से उनके बॉल सेहला रही थी और कभी कभी लुंड को चोरर के बॉल पर अपना जीब चला रही थी, और कई बार उनके अंडे को चूस रही थी जिस से चावला साहब से सेहेन नहीं हो रहा था जैसे थोड़ा दर्द और थोड़ा ख़ुशी हो रहे थे उनको… सान्वी वो सब करते हुए चावला साहब के चेहरे को भी एकांत बार देख रहे थे उनके एक्सप्रेशन को देखने के लिए……

और कुछ देर बाद चावला साहब नार्मल मिशनरी पोजीशन पर aaye…donon को एक दूसरे को अपने अंदर महसूस करने की जल्दी थी, जैसे बरसों का इंतज़ार को आज ख़तम करना था.. चावला साहब सान्वी के ऊपर चढ़े, तो सान्वी ने कहा,

“आप को अपने अंदर लेने के लिए बेकरार हूँ जी, आइये मेरे गहराई में समां जाइये नाह स्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्ह आआआहहहहह स्स्स्सस्छ्हस्स्स्स”

चावला साहब से रोका न गया उन्हों ने देर नाह करते हुए अपने लुंड को सान्वी के छूट के अंदर घुसाया जो फिसलते हुए सीधे अंदर घुस गया और संजना की आवाज़ ज़ोर से चीख बांके निकली तो चावला साहब ने अपने हाथ को उसस्के मुंह पर रखा उसस्के बूब्स को चूस्ते हुए और कहा, “सशह्ह्ह्हह्ह विवान को जगाना है किआ?”

और चावला साहब ढके देने लग ीक से बढ़कए एक, फ़ास्ट रैपिड ढके जबकि सान्वी बीएड पर इधर से उधर रेंगती गयी हांफते और सिसकारियों को चोररटे हुए…. दबे आवाज़ में सान्वी बहोत तड़प रही थी ख़ुशी के मार भी तड़प रही थी…. ऐसा लगता था पहली बार कोई उसस्के अंदर घुस रहा था…. लगता था क ीक नयी नवेली दुल्हन सुहाड़ग रात की रात को किसी को अपने अंदर ले रही थी…..

ढकों के रफ़्तार को बढ़ाते हुए चावला साहब ने सान्वी के मुंह को अपने मुंह में ले लिया दोनों एक दूसरे के जीब भी चूस रहे थे, बहोत हांफ भी रहे थे और एक दूसरे को अपने जिस्म का एक हिस्सा जैसे समझ रहे थे….. दोनों के दिल के धड़कनें बढ़ रहे थे और इस बार चावला साहब की आवाज़ निकली जब उस्सने झट से अपने मोठे लुंड को सान्वी के योनि से बाहर निकला अपने वीर्य को उसस्के के ऊपर चोररटे हुए…. ठीक एक सेकंड पहले hi सान्वी झाड़ चुकी चावला साहब को ज़ोर से बाहों में जाकर के उसस्के कांडों पर अपने दांत गाड़ते हुए और वहां चूस्ते हुए….. जब चावला साहब का वीर्य सान्वी के बूब्स पर चटके, तो उस्सने अपने उँगलियों को उस पर रगड़ा और अपने जीब तक लगाई और पूछा, “मैं इस्को चख सकती हूँ किआ?” चावला साहब ने कहा बिल्कुल चखो बल्कि अभी तो और है, यह लो अब इस्को पूरी तरह से चाट के साफ़ करो…..” उस्सने अपने लुंड को सान्वी के मुंह तक किया और सान्वी ने ख़ुशी से उनके लुंड को अपने मुंह में लेकर चुस्सने लगी और बाकी के वीर्य को सान्वी ने अपने गले के अंदर उतार दिया…. और लुंड को प्यार करते रहे काफी देर तक उस्सको चूमते चाटते हुए……

और सान्वी ने पूछा, “किआ संजना भी ऐसे hi करती ै जी?”

चावला साहब ने कहा, “एक्साक्ट्ली ऐसा hi करती है और मैं नहीं चाहती हूँ के तुम उस से जलो, क्यूंकि आज उसी के कारण मैं तुम्हारे तरफ बढ़ा हूँ… अगर संजना से यह सब नहीं करती तो तुम्हारे तरफ मेरा ऐसा कोई भी इरादा नहीं था उसस्के साथ करने के बाद hi सोचा के अगर उस्सको ले लिया तो तुमको भी तो ले सकता हूँ तभी से तुमसे झपटा झपटी करने लगा था समझी तुम?”

सान्वी ने कहा, “मुझे सब पता है जी, मुझे तभी मालूम हो गया था जिस दिन संजना से मिलने के बाद दूसरे दिन आप ने मुझे पीछे से पकड़ा था और गर्दन पर किश किया था और जीब फेर्रा था, इस से पहले आप ने वैसा कभी भी नहीं किया था, हाँ मैं जानती हूँ संजना का शुक्र गुज़र होना चाहिए मुझे के उस के बदौलत मुझे आप मिले. उस से कभी नहीं जलूँगी बल्कि उस्का एहसान मानूंगी अब से मैं.”

तब चावला साहब ने सान्वी को ज़ोर से बाँहों में भर के और प्यार करने लगे उस्सको चरों तरफ चूमते हुए…..

तो बे कॉन्टिनोएड…………….. (4410 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट नॉट येत रिटेन हेरे, जैसे के मैं ने पहले कहा था वीकेंड्स में मुझ बहोत कम समाये मिलता है लिखे को, क्यूंकि ज़्यादा टाइम फॅमिली के साथ गुज़ारता हूँ, तो मुझे अफ़सोस है डिअर रीडर्स, प्लीज माफ़ करना

िफ़ पॉसिबल टुमारो ी विल तरय तो व्रिठे एंड पोस्ट बूत ी दो नॉट प्रॉमिस, िफ़ ी विल गेट तो जो आउट विथ फॅमिली मेंबर्स थान थे अपडेट विल के ों मंडे ओनली.

सॉरी गाइस

विश यू आल ा ग्रेट वीकेंड.
 
तुंहारा स्वागत है मेरे थ्रेड पर भाई ये जान कर ख़ुशी हुई क मेरे इस कहानी क लिए तुमने स्फोरम ज्वाइन किया.

मगर ऐसी कोई बात नहीं भाई क खुद को मनहूस कहो यार

तुमने कहा क तुम जनुअरी से मेरे कहानियों को पढ़ रहे हो तो भाई किआ लास्ट वीकेंड को नहीं देखा क तब भी मैं ने अपडेट नहीं दिया था?

सॉरी यार. कल कोशिश करूँगा अपडेट करने को. :हुग:
 
अपडेट 78 चावला गेट्स वरीड अबाउट थे डे संजना विल बे इन थे हाउस

सेक्सुअल एनकाउंटर के बाद दोनों एक दूसरे को बाँहों में जाकर लेते रहे कुछ देर तक बीएड पर यूँही. सुबह के 4 बज गए और सान्वी का उठने का टाइम करीब हो रहे थे तो चावला साहब ने उस से कहा, “जाओ एक घंटे तक सो सकती हो, 5 बजे तो किचन में रहती हो तुम!”

सान्वी बोली, “एहि मुझे बेहद पसंद है, आप मुझको बहोत अच्छी तरह से जानती हो, कब जागती हूँ, कब काम करती हूँ, कब नहाती हूँ, कौन कौन सी ड्रेस पहनती हूँ, कब किआ करती हूँ आप को सब का पता है मेरे बारे में जो मेरे पति खुद नहीं जानते, तो असली पति तो आप hi हुए मेरे हम्म?” चावला साहब खामोश रहे कुछ सोचते हुए तो सान्वी ने थोड़ा नाहकरे वाली ऐडा से कहा, “नहीं मैं नहीं जाती ऊपर अब, विवान तो गहरे नींद में होगा और अगर मुझको बीएड पर नहीं देखा तो वो एहि सोचेगा के मैं किचन में चली गयी हूँ, चलो पांच बजे तक आप के साथ hi सोती हूँ, आप जगा देना अगर नींद लग गयी तो okay?”

चावला साहब ने उसस्के माथे को चूमते हुए कहा, “और अगर मुझको भी नींद लग गयी तो? हम 10 बजे तक यूँही नींद में रह गए और विवान उठेगा, और तुमको किचन में नहीं पाकर मेरे दरवाज़े को खोला और देखेगा के उस्सकी पत्नी नंगी उसस्के बाप से लिपटी बीएड पर सो रहे हैं तब किआ होगा स्वीटहार्ट?”

सान्वी थोड़ा ज़ोर से हँस्ते हुए कहा, “ोफो ऐसा कुछ बी नहीं होने वाला बुसस अलार्म लगादो 5 बजे के लिए अपने मोबाइल पर नाह सो सिंपल!” तो चावला साहब ने कहा okay और उठकर गया पहले किचन में लाइट ों करने, और अपने दरवाज़े को लॉक करके अलार्म लगाया 5.15 के लिए और वापस सान्वी को नंगी अपने बाहों में भरके दोनों चादर ओढ़के सो गए एक दूसरे को बाहों में जाकर.

सान्वी कोई 15 मिनट तक चावला साहब के छाती पर अपना जीब फर्टी रही, चुस्ती रही उनको करेस करते हुए और चावला साहब को नींद लग गए फिर सान्वी भी सो गयी. और नींद गहरे था दोनों के…..

5.15 पर अलार्म ने जगाया दोनों को और जल्दी से सान्वी उठी अपने कपडे पेहेन्ने के लिए तो चावला साहब ने उस्सको फिर जाकर के बीएड पर पटका और उस पर चढ़ गया और एक बार फिर से छोड़ा सान्वी को, खूब मज़े से किया इस बार भी और सान्वी झड़ते हुए तड़पती हुई कहांरने लगी और आखिर में चावला साहब ने अपने वीर्य को चोर्रा उसस्के पथ और बॉब्स के ऊपर….

सान्वी उनको किश करके जल्दी से अपनी निघ्त्य में निकली और कहा, “मेरे निघ्त्य की गाउन तो ऊपर कमरे में है…. उस्सको लेकर वापस किचन में आती हूँ आप और थोड़ा सो जाइए.

और सान्वी वापस अपने कमरे में गयी, निघ्त्य लिया और देखा के विवान तो गेंरे नींद मैं है, उस्सको पता भी नहीं चला के सान्वी रात भर बीएड पर नहीं थी!! तो संवी ने सोचा अब ऐसे बहोत साड़ी रातों को वो चावला साहब के साथ रात गुज़ार पाएगी. ये सोचकर वो बहोत खुश हुई और उसस्के जिस्म में एक और अजीब लेहेर दौड़ी सिर्फ इतना सोचते हुए.

वो अपने काम में बिजी हो गयी टिया और ब्रेकफास्ट बनाते हुए और बार बार चावला साहब के कमरे के तराव देखती जा रही थी मगर उस्सको पता था के आज तो चावला साहब बहोत रिलैक्स होकर आराम से देर तक सोएंगे तो उस्सको सोने दिया…..

दिन के 10 बजे चावला साहब उठे तो देखा संजा ा के बहोत सारे मेस्सगेस और मॉस्कल्स हैं. अब चावला साहब के लिए एक प्रॉब्लम हो गयी. अभी दो बार संवी के साथ सेक्स किया तो अब संजना को किआ वो खुश कर पाएगा या नहीं वो इस सोच से अब परेशां होगये थे…. सोच रहा था के दो दिन संजना के साथ नहीं किया तह और उस्सको सेक्स का इंतज़ार था चावला साहब के साथ….. यह अब चावला साहब के लिए एक दुविधा बन गए.

उस्सने सोचा अब तो टाईमटेबल के हिसाब से करना पड़ेगा सेक्स… अगर रात में सान्वी से किया तो दिन के लिए संजना के लिए बचाना चाहिए और अगर दिन में सान्वी से किया तब संजना के लिए रात की एनर्जी बचाना पड़ेगा उनको. मगर किआ 24 हॉर्स में हर रोज़ दो बार कर पाएंगे इस सोच में वो उलझे हुए थे… संजना बहोत हॉट और सेक्सी थी और अपने अदाओं और नखरों से जल्द hi चावला साहब को खड़ा कर देती थी तो उस्सने सोचा के संजना के साथ शायद ज़्यादा आसान होगा करने को… हालां के अभी दो बार कर चुके थे और 5 घंटे की नींद पूरी हुई तो जब तक संजना के घर पहुंचेंगे तब तक तो कोई 8 घंटा हो जाएगा लास्ट सेक्स किये हुए तो उस्सको यकीन था के संजना को भी खुश कर पाएंगे वो.

मगर अब सान्वी उनको जाने देता तब नाह जाता संजना के यहाँ? 10.30 बजे जब चावला साहब तैयार हो रहे थे जब सान्वी उंनसे लिपट गयी और नखरें करने लगी के कल उन् दोनों का सुहाग रात हुआ तो उस्का हक़ बनता है के वो उनको घर पर hi रोकें और उनके साथ और सेक्स करे और दिन भर उन से प्यार करे.

चावला साहब समझते समझते थक गए के वहां संजना उस्का वेट कर रही होगी, कल नहीं गए थे, ड्राइविंग स्कूल लेजाना है उस्सको वो भी उस्सको मिस कर रही होगी मगर सान्वी चाहती थी के वो उसस्के साथ पूरा दिन गुज़ारे. चावला साहब सोचने लगे अगर अभी ऐसा है तो संजना का इस घर में आने के बाद किआ मंज़र होगा.

सान्वी ने चावला साहब से कहा के संजना को मैसेज या कॉल करके बता दे के उनकी तबियत ठीक नहीं है इस लिए वो आज नहीं आ पाएंगे. मगर चावला साहब खुद संजना से मिलना चाहता था. क्यूंकि संजना के साथ रहना, वक़्त गुज़ारना एक अलग बात थी. उस्का प्यार और प्यार करने का तरीका अलग था, संजना की भोलेपन और चुलबुली ऐडा बहोत मिस कर रहे थे चावला साहब. संजना की मीठी आवाज़, उस्सकी बोलने की ऐडा, उस्सकी बेहद जान लेवा मुस्कराहट उस्सकी हंसी सब चावला साहब को बहोत hi पसंद था. अगर संजना और सान्वी में चूसे करना होता तो चावला साहब बहोत ऊंचे नंबर से संजना को चूसे करते. तो उस वक़्त चावला साहब बड़े दुविधा में पद गए थे के कैसे उस सिचुएशन को संभाले.

उस्सने बुसस सान्वी से इतना कहा के वो उसस्के साथ दिन के बारह बजे तक रहेगा उसस्के बाद वो चला जाएगा संजना के पास. और तब भी सान्वी ने कुछ कहा तो चावला साहब ने कहा, “कल hi तुमसे से बात हुई थी नाह के तुम संजना से नहीं जलेगी, और अभी hi शुरू हो गए?” पर सान्वी ने अपने सफाई में कहा, “मैं सिर्फ आज के लिए कह रही हूँ सिर्फ आज के दिन चाहती हूँ के आप मेरे साथ रहो क्यूंकि कल हमारा बिल्कुल एक सुहाग रात की तरह मेल हुआ है बुसस इसी कारण….”

तो बे कॉन्टिनोएड…………
 
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