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चावला साहब कुछ देर दीप्ति के साथ खेलता रहा और किचन से सान्वी उनको देख रहे थे, उनके चेहरे में बार बार देख कर अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रहे थे के उंनका मूड कैसे बच्चे के साथ खेलते वक़्त बिल्कुल नार्मल है और उस से बात भी नहीं कर रहे है.
अब सान्वी तो संजना की तरह नटखट या चुलबुली तो नहीं थी के वो उनके पास जाकर बचकानी हरकत करके पूछती के किआ हुआ क्यों वैसा बेहवे कर रहे हैं वो, सान्वी में मातुरित्य थी, वो बुसस दूर रहकर सब समझने की कोशिस में लगी थी.
खैर कैसे भी करके दिन गुज़र गया रात आयी तो खाने का वक़्त आया तो चावला साहब अपने कार लेकर निकले…. सान्वी दौड़ती हुई गेराज के तरफ जा hi रही थी मगर वो निकल गए कार के साथ. अब सान्वी परेशान हुई के किआ इस वक़्त वो संजना के घर जा रहे हैं, किआ वो फिर रात भर घर पर नहीं रहेंगे? उनको फ़ोन करना चाहा सान्वी ने मगर नहीं किया क्यूंकि वो बात भी नहीं कर रहे हैं उस से और इतने सारे कॉल्स और मेस्सगेस को रिप्लाई तक नहीं किया. तो वो दीप्ति को खाना खिलाने लगी वेट करते हुए.
अस्सल में चावला साहब को भूक लगे थे और वो रेस्टोरेंट गए खाने के लिए मगर कुछ नहीं बताया सान्वी को और उसका पकाया, बनाया, हुआ नहीं खाने के लिए बाहर खाने को गए!
सान्वी उधर घर के सब काम करके अब वाशिंग मशीन में अपने कपडे डालने गए धोने के लिए जो अगले सुबह को वो ड्राई करने के लिए टांगती है…. जब अपना ब्लाउज लिया मशीन में डालने के लिए तो उस पर एक सफ़ेद दाग जैसा देखा, और दीप्ति पर चिल्लाई यह कहते हुए, “दीप्ति यह तुमने आइस क्रीम गिराया था नाह इस पर? कई बार कहा है तुमको आइस क्रीम खाओ तो कहीं मत घूमना करो एक जगह बैठ कर खाओ, तुमको मैं ने आइस क्रीम दिया था नाह तो यह मेरे ब्लाउज पर गिराया तुमने! और पता नहीं कहाँ कहाँ आइस क्रीम गिराया होगा इस लड़की ने सब साफ़ करना पड़ेगा अब….” दीप्ति दांग रहकर अपनी मां को देख रही थी, वो खुद नहीं समझ पा रही थी उस्सकी मां उस पर क्यों चिल्ला रही है. सान्वी को पता नहीं चला के उसस्के ससुर का वीर्य था उसस्के ब्लाउज के ऊपर.
रात के करीब 10 बजे चावला साहब वापस आये. सान्वी को अच्छा लगा जब उनके कार की हेडलाइट्स गेराज में आते हुए देखा. सान्वी उस वक़्त दीप्ति को सुलाकर टीवी देख रही थी निचे लाउन्ज में.
जब चावला साहब अंदर दाखिल हुए, तो सान्वी ने देखा को वो पिए हुए नहीं है, नार्मल चल रहे हैं तो कहा, “मैं खाना लगाती हूँ आप ाजाईये. चावला साहब ने बिना उस्सको देखे अपने कमरे के तरफ जाते हुए बोल्ड आवाज़ में कहा, “मैं ने खा लिया है.” और वो अपने कमरे में चले गए.
चावला साहब अपने कमरे को अंदर से लॉक करके संजना से चाट करने लगे. उधर सान्वी ने टीवी ऑफ किया और ऊपर अपने कमरे में चली गयी. बीएड पर बैठ कर रोने लगी. वो सोच रही थी के चावला साहब वैसा क्यों बेहवे कर रहे हैं, जब से वापस आये हैं सिर्फ एहि बात किये उन्हों ने “मैं ने खा लिया है” बस इतना hi बात किया संवी से….
सान्वी ने सोचा था के वापस आते hi वो उनके गले से लग कर कहेगी, “मैं ने आप को बहोत मिस किया, घर सुना सुना लग रहा था आप के बिना, सुबह को मैं किचन से आप की कमरे के दरवाज़े को बार बार देख रही थी लग रहा था के अब खुलेगा और आप बाहर निकलोगे, आप फिर कभी ऐसे दूर मत जाना रातों को….” सान्वी ने यह सब कहने को सोचा था उन् से, मगर कैसे करती वो तो उसस्के तरफ देखता भी नहीं था.
सान्वी याद करने की कोशिश में लगी हुई थी के किआ खता हुई उस से के चावला साहब उस से उस तरह से रूठा हुआ है, मगर उस्सको वो सुबह वाली बात नहीं याद आरही थी गेराज में जब उस्सने चावला साहब से कहा था के उस्सको वो सब अच्छा नहीं लगता, मगर जब उस्सने अपनी निघ्त्य निकला पेहेन्ने के लिए तब उस्सको याद आया के चावला साहब ने उस्सको निघ्त्य में देखना चाहा था…. और उस्सने इंकार किया था अपने निघ्त्य से गाउन उतारने को…..
अब अपने कमरे में थी तो बिना गाउन के निघ्त्य में अपने बीएड पर लेते हुए उन् बातों को सोच रही थी. सान्वी ने खुद से कहा, “किआ मैं अभी इसी वक़्त उनके सामने इस निघ्त्य में जॉन तो वो खुश होंगे? मुझको इस तरह देखना चाहते थे वो, किआ तब मुझसे बात करेंगे? मुझको गले से लगाएंगे? किआ करूँ मैं जॉन उनके पास ऐसे इस निघ्त्य में? कितने पतले स्ट्रैप्स हैं ब्रा भी नहीं है, सब दिख रहे हैं! मैं कैसे उनके सामने ऐसे जॉन? मुझे बहोत शर्म आएगी उनके सामने ऐसे जाते हुए! वो भी नाह पता नहीं कैसे कैसे बातें करते हैं मुझसे…. शायद मुझसे इसी लिए खफा है क्यूंकि मैं ने उनकी ख्वाहिश को पूरी नहीं की hai….to किआ अगर मैं उनकी यह ख्वाहिश पूरी करुँगी तो वो बात करेंगे मुझसे नार्मल की तरह? किआ मैं जॉन उनके सामने ऐसे hi? विवान तो 1 बजे को वापस आएगा, उस्सको नहीं पता चलेगा… नहीं नहीं मैं ऐसे नहीं जा सकती उनके सामने मुझको बहोत शर्म आएगी…. रहने दो देखती हूँ कब तक ऐसे रूठे रहते हैं, अगर उनको बात नहीं करनी तो ठीक है मैं भी बात नहीं करुँगी, देखती हूँ कब तक मुझसे ऐसे रूठे हुए रहते हैं हाँ!!!”
अगले सुभान को 5 बजे सान्वी किचन में थी वही अपनी निघ्त्य में और ऊपर गाउन में थी… टीथ ब्रश के बाद चाय बना रही थी और ब्रेकफास्ट. और बार बार चावला साहब के कमरे के दरवाज़े के तरफ देख रही थी के अब वो उठेगा और टेरेस पर एक्सरसाइज करने जाएगा क्यूंकि हर सुबह का यह रूटीन था उंनका….
और थोड़ा सा 6 बजने से पहले चावला साहब निकले, वाशरूम से वापस गए टेरेस पर बिना सान्वी के तरफ देखे…. मगर सान्वी उन्ही को देखते जा रही थी और चावला साहब को पता था के वो उसी को देख रही है….. कुछ देर बाद हर रोज़ की तरह सान्वी ने उनके लिए चाय लेकर टेरेस पर उनको देने गयी….. और थोड़ा सा मुस्कुराते हुए उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “चाय” चावला साहब ने टेबल के तरफ इशारा करते हुए दिखाया वहां रखने को, तो सान्वी ने मुस्कुराते हुए उनके चेहरे में देखते हुए कुछ चिररहते हुए अंदाज़ में कहा, “ज़ुबान काट गयी है किआ? बोल नहीं सकते आप के वहां रख दो? बड़े आये इशारे करने वाले, बड़ा ग़ुस्सा पाल रहे हैं मेरे लिए; पालो पालो देखती हूँ कब तक आप मुझसे बात किये बिना रह सकते हो चलो मैं भी नहीं करुँगी बात आप से अब कटती सुना आप ने कटती!!”
और वो उनके चाय टेबल पर रख कर चली गयी किचन में… अब चावला साहब सोचने लगे ‘अरे वह कमाल की औरत है यह, चलो मत करो बात मुझे कोई तकलीफ नहीं है, अपने पति के लिए रखो यह अदाएं मुझ पर मत आज़माओ यह सब…..’ मगर चावला साहब फिर भी छुप छुप कर सान्वी को झांक रहे थे किचन के तरफ… और उधर से सान्वी भी उनके तरफ देखते हुए अपने किचन के कामों को किये जा रही थी, कई बार एक दूसरे के नज़र टकराये देखते हुए मगर तुरंत दोनों एक तरफ देखने लगे जैसे के किसी और चीज़ को देख रहे थे…..
अब कुछ देर बाद जब चावला साहब ने चाय पी लिया तो कप को टेबल पर दो तीन बार टकराया यह इशारा करने को सान्वी को के कप वापस लेजाए चाय पी लिया है… सान्वी नहीं जा रही थी कप लेने तो चावला साहब ने और एकांत बार कप को टेबल पर ठोका, तब संवी ने किचन से आवाज़ दी, “हाँ हाँ सुन लिया आती हूँ कप उठाने को!”
और सान्वी ने टेरेस पर जाते वक़्त जान बुझ कर अपने काँधे पर से अपने गाउन को थोड़ा सा साररका दिया जिस से उस्सकी निघ्त्य की स्ट्राप दिखने लगे और गयी कप लेने के लिए…. और वो टेबल जिस पर कप रखा हुआ था वो एक छोटा सा राउंड टेबल था जो टेरेस पर अक्सर पाया जाता है और सान्वी को झुक कर कप को उठाना था….
वो वहां पहुंची, झुकी कप लेने के लिए और एक नज़र से चावला साहब को देख रही थी और झुक कर कुछ लम्हे झुकी रही जान बुझ कर और उस्सको पता था के चावला साहब की नज़रें उस्सकी छाती और काँधे पर थे, चावला साहब सच में उस्सकी निघ्त्य के अंदर लटके उस्सकी गोआल गोआल बूब्स और निघ्त्य के स्ट्रैप्स को hi देख रहे थे तो सान्वी ने सर ऊपर उठाते हुए उनके तरफ देख कर कहा, “अब खुश? देख लिया जो देखना था दिल खुश हुआ आप का?” तुरंत चावला साहब दूसरे तरफ देखते हुए जैसे अपने बाहों को स्ट्रेच कर रहे थे एक्सरसाइज करते हुए सान्वी से अपने निगाहों को चुराया… और सान्वी मुस्कुराते हुए अपने गाउन को वापस निघ्त्य पर करके किचन के तरफ चल दिए…….
और सान्वी वापस किचन में जाकर उनके तरफ देखते हुए खुद से कहा, “कब तक रूठे रहोगे आप? अगर मैं चहुँ तो एक पल में आप को अपने क़दमों में झुका लुंगी, और आप एक बचे की तरह मुझ में समां जाओगे साहब…. मगर नहीं देखती हूँ आप कब तक मुझसे ऐसे रूठे हुए रह सकते हो, बुसस अभी गाउन उतार लूँ तो आप पिघल जाओगे, एक सेकंड की बात है!!”
तो बे कॉन्टिनोएड…………….. (2795 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
चावला साहब कुछ देर दीप्ति के साथ खेलता रहा और किचन से सान्वी उनको देख रहे थे, उनके चेहरे में बार बार देख कर अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रहे थे के उंनका मूड कैसे बच्चे के साथ खेलते वक़्त बिल्कुल नार्मल है और उस से बात भी नहीं कर रहे है.
अब सान्वी तो संजना की तरह नटखट या चुलबुली तो नहीं थी के वो उनके पास जाकर बचकानी हरकत करके पूछती के किआ हुआ क्यों वैसा बेहवे कर रहे हैं वो, सान्वी में मातुरित्य थी, वो बुसस दूर रहकर सब समझने की कोशिस में लगी थी.
खैर कैसे भी करके दिन गुज़र गया रात आयी तो खाने का वक़्त आया तो चावला साहब अपने कार लेकर निकले…. सान्वी दौड़ती हुई गेराज के तरफ जा hi रही थी मगर वो निकल गए कार के साथ. अब सान्वी परेशान हुई के किआ इस वक़्त वो संजना के घर जा रहे हैं, किआ वो फिर रात भर घर पर नहीं रहेंगे? उनको फ़ोन करना चाहा सान्वी ने मगर नहीं किया क्यूंकि वो बात भी नहीं कर रहे हैं उस से और इतने सारे कॉल्स और मेस्सगेस को रिप्लाई तक नहीं किया. तो वो दीप्ति को खाना खिलाने लगी वेट करते हुए.
अस्सल में चावला साहब को भूक लगे थे और वो रेस्टोरेंट गए खाने के लिए मगर कुछ नहीं बताया सान्वी को और उसका पकाया, बनाया, हुआ नहीं खाने के लिए बाहर खाने को गए!
सान्वी उधर घर के सब काम करके अब वाशिंग मशीन में अपने कपडे डालने गए धोने के लिए जो अगले सुबह को वो ड्राई करने के लिए टांगती है…. जब अपना ब्लाउज लिया मशीन में डालने के लिए तो उस पर एक सफ़ेद दाग जैसा देखा, और दीप्ति पर चिल्लाई यह कहते हुए, “दीप्ति यह तुमने आइस क्रीम गिराया था नाह इस पर? कई बार कहा है तुमको आइस क्रीम खाओ तो कहीं मत घूमना करो एक जगह बैठ कर खाओ, तुमको मैं ने आइस क्रीम दिया था नाह तो यह मेरे ब्लाउज पर गिराया तुमने! और पता नहीं कहाँ कहाँ आइस क्रीम गिराया होगा इस लड़की ने सब साफ़ करना पड़ेगा अब….” दीप्ति दांग रहकर अपनी मां को देख रही थी, वो खुद नहीं समझ पा रही थी उस्सकी मां उस पर क्यों चिल्ला रही है. सान्वी को पता नहीं चला के उसस्के ससुर का वीर्य था उसस्के ब्लाउज के ऊपर.
रात के करीब 10 बजे चावला साहब वापस आये. सान्वी को अच्छा लगा जब उनके कार की हेडलाइट्स गेराज में आते हुए देखा. सान्वी उस वक़्त दीप्ति को सुलाकर टीवी देख रही थी निचे लाउन्ज में.
जब चावला साहब अंदर दाखिल हुए, तो सान्वी ने देखा को वो पिए हुए नहीं है, नार्मल चल रहे हैं तो कहा, “मैं खाना लगाती हूँ आप ाजाईये. चावला साहब ने बिना उस्सको देखे अपने कमरे के तरफ जाते हुए बोल्ड आवाज़ में कहा, “मैं ने खा लिया है.” और वो अपने कमरे में चले गए.
चावला साहब अपने कमरे को अंदर से लॉक करके संजना से चाट करने लगे. उधर सान्वी ने टीवी ऑफ किया और ऊपर अपने कमरे में चली गयी. बीएड पर बैठ कर रोने लगी. वो सोच रही थी के चावला साहब वैसा क्यों बेहवे कर रहे हैं, जब से वापस आये हैं सिर्फ एहि बात किये उन्हों ने “मैं ने खा लिया है” बस इतना hi बात किया संवी से….
सान्वी ने सोचा था के वापस आते hi वो उनके गले से लग कर कहेगी, “मैं ने आप को बहोत मिस किया, घर सुना सुना लग रहा था आप के बिना, सुबह को मैं किचन से आप की कमरे के दरवाज़े को बार बार देख रही थी लग रहा था के अब खुलेगा और आप बाहर निकलोगे, आप फिर कभी ऐसे दूर मत जाना रातों को….” सान्वी ने यह सब कहने को सोचा था उन् से, मगर कैसे करती वो तो उसस्के तरफ देखता भी नहीं था.
सान्वी याद करने की कोशिश में लगी हुई थी के किआ खता हुई उस से के चावला साहब उस से उस तरह से रूठा हुआ है, मगर उस्सको वो सुबह वाली बात नहीं याद आरही थी गेराज में जब उस्सने चावला साहब से कहा था के उस्सको वो सब अच्छा नहीं लगता, मगर जब उस्सने अपनी निघ्त्य निकला पेहेन्ने के लिए तब उस्सको याद आया के चावला साहब ने उस्सको निघ्त्य में देखना चाहा था…. और उस्सने इंकार किया था अपने निघ्त्य से गाउन उतारने को…..
अब अपने कमरे में थी तो बिना गाउन के निघ्त्य में अपने बीएड पर लेते हुए उन् बातों को सोच रही थी. सान्वी ने खुद से कहा, “किआ मैं अभी इसी वक़्त उनके सामने इस निघ्त्य में जॉन तो वो खुश होंगे? मुझको इस तरह देखना चाहते थे वो, किआ तब मुझसे बात करेंगे? मुझको गले से लगाएंगे? किआ करूँ मैं जॉन उनके पास ऐसे इस निघ्त्य में? कितने पतले स्ट्रैप्स हैं ब्रा भी नहीं है, सब दिख रहे हैं! मैं कैसे उनके सामने ऐसे जॉन? मुझे बहोत शर्म आएगी उनके सामने ऐसे जाते हुए! वो भी नाह पता नहीं कैसे कैसे बातें करते हैं मुझसे…. शायद मुझसे इसी लिए खफा है क्यूंकि मैं ने उनकी ख्वाहिश को पूरी नहीं की hai….to किआ अगर मैं उनकी यह ख्वाहिश पूरी करुँगी तो वो बात करेंगे मुझसे नार्मल की तरह? किआ मैं जॉन उनके सामने ऐसे hi? विवान तो 1 बजे को वापस आएगा, उस्सको नहीं पता चलेगा… नहीं नहीं मैं ऐसे नहीं जा सकती उनके सामने मुझको बहोत शर्म आएगी…. रहने दो देखती हूँ कब तक ऐसे रूठे रहते हैं, अगर उनको बात नहीं करनी तो ठीक है मैं भी बात नहीं करुँगी, देखती हूँ कब तक मुझसे ऐसे रूठे हुए रहते हैं हाँ!!!”
अगले सुभान को 5 बजे सान्वी किचन में थी वही अपनी निघ्त्य में और ऊपर गाउन में थी… टीथ ब्रश के बाद चाय बना रही थी और ब्रेकफास्ट. और बार बार चावला साहब के कमरे के दरवाज़े के तरफ देख रही थी के अब वो उठेगा और टेरेस पर एक्सरसाइज करने जाएगा क्यूंकि हर सुबह का यह रूटीन था उंनका….
और थोड़ा सा 6 बजने से पहले चावला साहब निकले, वाशरूम से वापस गए टेरेस पर बिना सान्वी के तरफ देखे…. मगर सान्वी उन्ही को देखते जा रही थी और चावला साहब को पता था के वो उसी को देख रही है….. कुछ देर बाद हर रोज़ की तरह सान्वी ने उनके लिए चाय लेकर टेरेस पर उनको देने गयी….. और थोड़ा सा मुस्कुराते हुए उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “चाय” चावला साहब ने टेबल के तरफ इशारा करते हुए दिखाया वहां रखने को, तो सान्वी ने मुस्कुराते हुए उनके चेहरे में देखते हुए कुछ चिररहते हुए अंदाज़ में कहा, “ज़ुबान काट गयी है किआ? बोल नहीं सकते आप के वहां रख दो? बड़े आये इशारे करने वाले, बड़ा ग़ुस्सा पाल रहे हैं मेरे लिए; पालो पालो देखती हूँ कब तक आप मुझसे बात किये बिना रह सकते हो चलो मैं भी नहीं करुँगी बात आप से अब कटती सुना आप ने कटती!!”
और वो उनके चाय टेबल पर रख कर चली गयी किचन में… अब चावला साहब सोचने लगे ‘अरे वह कमाल की औरत है यह, चलो मत करो बात मुझे कोई तकलीफ नहीं है, अपने पति के लिए रखो यह अदाएं मुझ पर मत आज़माओ यह सब…..’ मगर चावला साहब फिर भी छुप छुप कर सान्वी को झांक रहे थे किचन के तरफ… और उधर से सान्वी भी उनके तरफ देखते हुए अपने किचन के कामों को किये जा रही थी, कई बार एक दूसरे के नज़र टकराये देखते हुए मगर तुरंत दोनों एक तरफ देखने लगे जैसे के किसी और चीज़ को देख रहे थे…..
अब कुछ देर बाद जब चावला साहब ने चाय पी लिया तो कप को टेबल पर दो तीन बार टकराया यह इशारा करने को सान्वी को के कप वापस लेजाए चाय पी लिया है… सान्वी नहीं जा रही थी कप लेने तो चावला साहब ने और एकांत बार कप को टेबल पर ठोका, तब संवी ने किचन से आवाज़ दी, “हाँ हाँ सुन लिया आती हूँ कप उठाने को!”
और सान्वी ने टेरेस पर जाते वक़्त जान बुझ कर अपने काँधे पर से अपने गाउन को थोड़ा सा साररका दिया जिस से उस्सकी निघ्त्य की स्ट्राप दिखने लगे और गयी कप लेने के लिए…. और वो टेबल जिस पर कप रखा हुआ था वो एक छोटा सा राउंड टेबल था जो टेरेस पर अक्सर पाया जाता है और सान्वी को झुक कर कप को उठाना था….
वो वहां पहुंची, झुकी कप लेने के लिए और एक नज़र से चावला साहब को देख रही थी और झुक कर कुछ लम्हे झुकी रही जान बुझ कर और उस्सको पता था के चावला साहब की नज़रें उस्सकी छाती और काँधे पर थे, चावला साहब सच में उस्सकी निघ्त्य के अंदर लटके उस्सकी गोआल गोआल बूब्स और निघ्त्य के स्ट्रैप्स को hi देख रहे थे तो सान्वी ने सर ऊपर उठाते हुए उनके तरफ देख कर कहा, “अब खुश? देख लिया जो देखना था दिल खुश हुआ आप का?” तुरंत चावला साहब दूसरे तरफ देखते हुए जैसे अपने बाहों को स्ट्रेच कर रहे थे एक्सरसाइज करते हुए सान्वी से अपने निगाहों को चुराया… और सान्वी मुस्कुराते हुए अपने गाउन को वापस निघ्त्य पर करके किचन के तरफ चल दिए…….
और सान्वी वापस किचन में जाकर उनके तरफ देखते हुए खुद से कहा, “कब तक रूठे रहोगे आप? अगर मैं चहुँ तो एक पल में आप को अपने क़दमों में झुका लुंगी, और आप एक बचे की तरह मुझ में समां जाओगे साहब…. मगर नहीं देखती हूँ आप कब तक मुझसे ऐसे रूठे हुए रह सकते हो, बुसस अभी गाउन उतार लूँ तो आप पिघल जाओगे, एक सेकंड की बात है!!”
तो बे कॉन्टिनोएड…………….. (2795 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)